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State Consumer Disputes Redressal Commission

U. P. Rajya Vidhut Parishad vs Avdhesh Kumar on 14 March, 2019

  	 Cause Title/Judgement-Entry 	    	       STATE CONSUMER DISPUTES REDRESSAL COMMISSION, UP  C-1 Vikrant Khand 1 (Near Shaheed Path), Gomti Nagar Lucknow-226010             Revision Petition No. R/2013/177  ( Date of Filing : 18 Dec 2013 )  (Arisen out of Order Dated  in Case No.  of District State Commission)             1. U. P. Rajya Vidhut Parishad  a ...........Appellant(s)   Versus      1. Avdhesh Kumar  a ...........Respondent(s)       	    BEFORE:      HON'BLE MR. Udai Shanker Awasthi PRESIDING MEMBER    HON'BLE MR. Gobardhan Yadav MEMBER          For the Petitioner:  For the Respondent:    Dated : 14 Mar 2019    	     Final Order / Judgement    

 मौखिक

 

 राज्‍य उपभोक्‍ता विवाद प्रतितोष आयोग, उ0प्र0, लखनऊ।

 

 

 

 पुनरीक्षण संख्‍या-177/2013

 

 

 

(जिला मंच, चंदौली द्वारा प्रकीर्ण वाद संख्‍या-01/2013 में पारित प्रश्‍नगत आदेश दिनांक 06.12.2013 के विरूद्ध)

 

            

 

उत्‍तर प्रदेश राज्‍य विद्युत परिषद द्वारा एग्‍जीक्‍यूटिव इंजीनियर इलेक्ट्रिसिटी डिपार्टमेंट, चंदौली।

 

                                            पुनरीक्षणकर्ता/विपक्षी

 

 

 

बनाम

 

 

 

अवधेश कुमार पुत्र मंगरू राम, निवासी-रौतपुर, पोस्‍ट भोजपुर, तहसील सकलदिहा, जिला चंदौली।

 

        प्रत्‍यर्थी/परिवादी

 

समक्ष:- 

 

1.

मा0 श्री उदय शंकर अवस्‍थी, पीठासीन सदस्‍य।

2. मा0 श्री गोवर्द्धन यादव, सदस्‍य।

 

पुनरीक्षणकर्ता की ओर से उपस्थित : कोई नहीं।

प्रत्‍यर्थी की ओर से उपस्थित       : श्री आलोक कुमार सिंह, विद्वान अधिवक्‍ता।

 

दिनांक : 14.03.2019

 

 

 

 मा0 श्री उदय शंकर अवस्‍थी ,  पीठासीन सदस्‍य  द्वारा उदघोषित

 

 निर्णय

 

प्रस्‍तुत पुनरीक्षण, जिला मंच, चंदौली द्वारा प्रकीर्ण वाद संख्‍या-01/2013 में पारित प्रश्‍नगत आदेश दिनांक 06.12.2013 के विरूद्ध योजित की गयी है।

हमने प्रत्‍यर्थी के विद्वान अधिवक्‍ता श्री आलोक कुमार सिंह के तर्क सुने तथा पत्रावली का अवलोकन किया।

पुनरीक्षण के आधारों में पुनरीक्षणकर्ता द्वारा यह अभिकथित किया गया है कि निष्‍पादन वाद संख्‍या-31/2010 पक्षकारों की सहमति से पूर्ण संतुष्टि पर आदेश दिनांक 02.01.2013 द्वारा निस्‍तारित किया गया तथा पत्रावली दाखिल दफ्तर की गयी। निष्‍पादन वाद निस्‍तारित हो जाने के बाद प्रत्‍यर्थी/परिवादी द्वारा एक प्रकीर्ण प्रार्थना पत्र संख्‍या-01/2013 प्रस्‍तुत किया गया, जिसके द्वारा उपरोक्‍त निष्‍पादन वाद में पारित आदेश दिनांक 02.01.2013 को वापस लेने की प्रार्थना की गयी। इस प्रकीर्ण वाद की सूचना प्राप्‍त होने पर पुनरीक्षणकर्ता/विपक्षी  द्वारा  जिला मंच के समक्ष उत्‍तर प्रस्‍तुत किया गया तथा यह सूचित -2- किया गया कि निष्‍पादन वाद संख्‍या-31/2010 पक्षकारों की सहमति से निस्‍तारित किया जा चुका है। इसके बावजूद जिला मंच ने पुनरीक्षणकर्ता की आपत्‍ति‍ को अस्‍वीकार करते हुए प्रकीर्ण वाद संख्‍या-01/2013 में पारित आदेश दिनांक 06.12.2013 द्वारा वसूली वारण्‍ट जारी किये जाने तथा धारा-27 के अन्‍तर्गत पुनरीक्षणकर्ता को दण्डित किये जाने के सन्‍दर्भ में कारण बताओ नोटिस जारी किये जाने हेतु आदेश पारित किया गया।

प्रत्‍यर्थी के विद्वान अधिवक्‍ता द्वारा यह तर्क प्रस्‍तुत किया गया कि आदेश दिनांक 02.01.2013 प्रत्‍यर्थी/परिवादी के साथ तथा जिला मंच के साथ धोखा करके प्राप्‍त किया गया है, अत: धोखे से प्राप्‍त किया गया आदेश शून्‍य माना जायेगा। ऐसी परिस्थिति में जिला मंच द्वारा पारित आदेश दिनांक 06.12.2013 त्रुटिपूर्ण नहीं माना जा सकता है।

उल्‍लेखनीय है कि जिला मंच द्वारा पारित आदेश दिनांक 02.01.2013 में उभय पक्ष की उपस्थिति दर्शित की गयी है तथा यह आदेश पक्षकारों की सहमति से पारित किया जाना विदित होता है साथ ही आदेश दिनांक 06.12.2013 में जिला मंच द्वारा ऐसा कोई तथ्‍य उल्लिखित नहीं किया गया है कि पूर्व पारित आदेश दिनांक 02.01.2013 जिला मंच के साथ धोखा करके प्राप्‍त किया गया है। ऐसी परिस्थिति में मात्र प्रत्‍यर्थी के कथन के आधार पर यह स्‍वत: प्रमाणित नहीं माना जा सकता है कि आदेश दिनांक 02.01.2013 प्रत्‍यर्थी के साथ धोखा करके प्राप्‍त किया गया है।

उपभोक्‍ता संरक्षण अधिनियम के अन्‍तर्गत उपभोक्‍ता मंच को पूर्व पारित आदेश के पुनरावलोकन का अधिकार प्राप्‍त नहीं है। ऐसी परिस्थिति में जिला मंच द्वारा पारित आदेश दिनांक 06.12.2013 विधिक रूप से त्रुटिपूर्ण होने के कारण अपास्‍त किये जाने योग्‍य है। तदनुसार पुनरीक्षण स्‍वीकार किये जाने योग्‍य है।

आदेश       प्रस्‍तुत पुनरीक्षण स्‍वीकार की जाती है। जिला मंच, चंदौली द्वारा प्रकीर्ण वाद संख्‍या-01/2013 में पारित प्रश्‍नगत आदेश दिनांक 06.12.2013 अपास्‍त किया जाता है।

      इस पुनरीक्षण का व्‍यय-भार उभय पक्ष अपना-अपना स्‍वयं वहन करेंगे।


 

      उभय पक्ष को इस निर्णय की प्रमाणित प्रति नियमानुसार उपलब्‍ध करायी जाय                                

 

 

 

(उदय शंकर अवस्‍थी)                    (गोवर्द्धन यादव)

 

              पीठासीन सदस्‍य                             सदस्‍य

 

लक्ष्‍मन, आशु0, कोर्ट-2             [HON'BLE MR. Udai Shanker Awasthi]  PRESIDING MEMBER 
     [HON'BLE MR. Gobardhan Yadav]  MEMBER