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Lok Sabha Debates

Situation Arising Out Of The Deaths Of Farmers In Police Firing In Mathura And ... on 17 August, 2010

> Title: Situation arising out of the deaths of farmers in police firing in Mathura and Aligarh, U.P. agitating against land acquisition for Yamuna Expressway.

 

अध्यक्ष महोदया : हम मुलायम सिंह यादव जी को बोलने का अवसर दे देते हैं। आप लोग बैठ जाइए।

…( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदया : मुलायम सिंह यादव जी अगर बोलना चाहते हैं तो हम उनको बोलने देते हैं।

…( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदया : आप लोगों को भी बोलने का अवसर देंगे। आप लोग बैठ जाइए।

…( व्यवधान)

 

श्री मुलायम सिंह यादव (मैनपुरी):अध्यक्ष महोदया, पहले रपट लिखी जाए। ...( व्यवधान) इतने किसानों की हत्या हुई है और रपट लिखी नहीं गयी है। ...( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदया : आप लोग अब बैठ जाइए, मुलायम सिंह यादव जी बोल रहे हैं।

…( व्यवधान)

श्री मुलायम सिंह यादव : कोई नहीं जाएगा वापस, पहले रपट लिखी जाए। हमारी मांग है रपट तो लिखी जाए।...( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदया : पहले आप सभी लोग वापस जाइए।

…( व्यवधान)

श्री मुलायम सिंह यादव : नहीं, पहले रपट लिखवाई जाए। ...( व्यवधान) आप रपट लिखवाइए।...( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदया : आप लोग अपने स्थान पर वापस जाइए।

…( व्यवधान)

श्री मुलायम सिंह यादव : पहले रपट लिखी जाए।...( व्यवधान)

संसदीय कार्य मंत्री और जल संसाधन मंत्री (श्री पवन कुमार बंसल):  रपट तो यहां नहीं लिखी जा सकती है।...( व्यवधान) यहां आप बोल सकते हैं।...( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदया : आप लोग वापस जाइए। मुलायम सिंह यादव जी को हम बोलने दे रहे हैं।

…( व्यवधान)

श्री मुलायम सिंह यादव : बहस तो चालू हो जाएगी, पहले आप रपट लिखवाइए।...( व्यवधान) बहस क्या करना है, पहले रपट लिखी जाए।...( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदया : आप लोग वापस जाइए। मुलायम सिंह यादव जी बोल रहे हैं।

…( व्यवधान)

 

11.03 hrs. At this stage, Shri Shailender Kumar, Shri Arjun Ram Meghwal and some other hon. Members went back to their seats   …( व्यवधान)

श्री मुलायम सिंह यादव : अध्यक्ष महोदया, मैं सदन का समय बर्बाद नहीं करना चाहता हूं। पूरे सदन के माननीय सदस्यों को, सभी मंत्रियों को मैं कहना चाहता हूं कि हमारा कोई इरादा सदन का समय बर्बाद करने का नहीं है। हम चाहते हैं कि समय का सदुपयोग हो, लेकिन सवाल यह है कि इतनी गंभीर घटना हो गयी और अभी तक उसकी रिपोर्ट नहीं लिखी गयी है। आखिर रपट अभी तक क्यों नहीं लिखी गयी? चार हत्याएं हुई, कई लोग गंभीर रूप से घायल हैं, उनकी लूटपाट भी की गयी। अगर उसकी रिपोर्ट नहीं लिखी गयी, तो इसका क्या मतलब है। पूरा सदन एक था। सत्तापक्ष, उनकी सरकार को छोड़कर पूरा सदन एक था, यह नहीं कि समाजवादी हों, बीजेपी हो, लालू जी हों या शरद यादव जी हों। कांग्रेस के लोग भी थे, पूरा सदन एक था। एक होने के बाद भी सदन की भावना नहीं मानी जा रही है, रपट नहीं लिखी जा रही है। इतनी सी बात, रपट नहीं लिखी जा रही है। रपट लिखने के बाद...( व्यवधान)

श्री दारा सिंह चौहान (घोसी): रपट किसी ने लिखाई ही नहीं।...( व्यवधान)

श्री मुलायम सिंह यादव : अभी दस बजे तक रपट नहीं लिखी गयी थी। ...( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदया : दारा सिंह चौहान जी, आप भी बोलेंगे। आपको भी बोलने का मौका देंगे।

…( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदया : आप लोग बैठ जाइए। दारा सिंह चौहान जी भी बोंलेंगे।

…( व्यवधान)

श्री मुलायम सिंह यादव : ... * अध्यक्ष महोदया : दारा सिंह जी को बोलने का मौका देंगे। आप लोग बैठ जाइए।

…( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदया: आप बैठ जाएं, ऐसे तो कोई नहीं बोल पाएगा।

...( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदया: हम उन्हें भी बुलाएंगे, आप बैठ जाएं।

...( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदया: श्री राजनाथ सिंह जी की ही बात रिकार्ड में जाएगी।

...( व्यवधान)* अध्यक्ष महोदया: दारा सिंह जी, आप बैठ जाएं, आपको भी हम बोलने का मौका देंगे।

 

श्री राजनाथ सिंह (गाजियाबाद): मैडम स्पीकर, आपने इतने संवेदनशील मुद्दे पर मुझे अपनी बात रखने का अवसर दिया है, मैं उसके लिए आपका आभारी हूं। आज इस संसद में मैं अपने विचार रखने के लिए खड़ा हुआ हूं, तो मैं बहुत ही भारी मन, बोझिल मन से कहना चाहता हूं। उत्तर प्रदेश के कई जिलों में किसानों की जमीन जबरन एक्वायर की जा रही है। कभी-कभी उसी गांव के किसानों में फूट पैदा करने के लिए उन्हें विशेष प्रलोभन दिए जाते हैं। ठेकेदारों की तरफ से उन्हें विशेष रूप से पैसा मुहैया कराया जाता है ताकि वे इस बात के लिए हस्ताक्षर कर दें कि नहीं मैं लैंड एक्वीजिशन के लिए सहमत हूं।...( व्यवधान)

           मैं अलीगढ़ और मथुरा में जो कुछ हुआ है उसके बारे में कहना चाहता हूं। 14 अगस्त को जब सारा देश आजादी का जश्न मनाने की तैयारी कर रहा था, तो हमारे अलीगढ़ और मथुरा के निरीह किसानों पर गोलियां चलाई जा रही थीं...( व्यवधान) उन पर लाठियां बरसाई जा रही थीं और आंसू गैस छोड़ी जा रही थी। वहां के किसानों की बहुत ही छोटी सी मांग थी कि हमारे पड़ोस के जनपद गौतमबुद्ध नगर के किसानों को जिस रेट पर मुआवजा दिया गया है, उसी रेट पर हमें भी मुआवजा मुहैया कराया जाए। बस इतनी ही बात थी। मैं यह भी कहना चाहता हूं कि वहां जो किसान यूनियन के नेता हैं, आंदोलन का संचालन कर रहे थे, उसे उठाकर बिहाइंड बार कर दिया। यहां पर कांग्रेस लैड यूपीए सरकार है, पिछले दो वर्षों से लैंड एक्वीजिशन एमेंडमेंट बिल के सम्बन्ध में, उसने कुछ नहीं किया है।

श्री पवन कुमार बंसल: जब बिल पास हो रहा था, तो आप लोगों ने उसका विरोध किया था।...( व्यवधान) पोलिटिक्स मत कीजिए, आपने तब उसका विरोध किया था।...( व्यवधान)

श्री राजनाथ सिंह : लैंड एक्वीजिशन बिल यहां लाया जाना चाहिए और बिना किसानों की कंसेंट के एक इंच भी जमीन किसी भी सूरत में एक्वायर नहीं की जानी चाहिए। उपजाऊ जमीन का एक्वीजिशन किसी भी सूरत में नहीं होना चाहिए। फूड सिक्योरिटी की क्राइसेज़ इस समय देश में वैसे ही इतनी तेजी से गम्भीर होती जा रही है। मैं कल स्वयं मौके पर गया था। हमारे कई नेता गए थे। शिवपाल यादव जी गए थे, अजित सिंह जी गए थे, जयंत चौधरी जी गए थे। कई सांसद भी वहां पर गए थे। वहां पर उन लोगों ने देखा कि वहां के किसानों में कैसा आक्रोश है। अभी दस मिनट पहले हमारी बात हुई है। वहां के किसानों  ने कहा कि हमारे नेता रामबाबू कठेरिया के ऊपर प्रैशर बिल्डअप किया जा रहा है, समझौता करो और उन्हें धमकी भी दी जा रही है। लेकिन वहां लोग अब भी धरने पर बैठे हुए हैं, उनके नेता अभी तक वहां नहीं पहुंचे हैं। इसलिए हमारी मांग है कि किसानों के नेता रामबाबू कठेरिया की तुंत रिहाई की जाए, ताकि वह धरने में शरीक हो सकें।

अध्यक्ष महोदया: अब आप बैठ जाएं और श्री दारा सिंह जी को बोलने दें।

...( व्यवधान)

 

श्री दारा सिंह चौहान : अध्यक्ष महोदया, मैं जो बात कहना चाहता हूं, ये लोग सुनना नहीं चाहते।...( व्यवधान) सबसे पहले मैं जो किसान मरे हैं, उनके प्रति संवेदना प्रकट करता हूं। मैं किसानों को बधाई देना चाहता हूं कि जो लोग कल से भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व में, अगुवाई में किसानों के हितैषी होने का दावा कर रहे थे, ये सारे लोग जब वहां धरने पर गए, तो किसानों ने इन लोगों की हूटिंग की और इन्हें भगाने का काम किया।

...( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदया: अब इनकी भी बात सुन लें।

श्री दारा सिंह चौहान : सरकार और किसानों के बीच समझौता हो गया है। उन्हें 571 रुपए प्रति वर्ग मीटर का मुआवजा दे रहे हैं, इस कंडिशन के साथ कि किसी के साथ कोई जबर्दस्ती नहीं होगी और अगर किसान अपनी जमीन देना चाहे तो दे, अगर नहीं देना चाहे तो उस पर कोई दबाव नहीं है।

जितने लोग मरे हैं, उनके बारे में सारी विधिक कार्रवाई पूरी कर ली गयी है। जितने मृतक हुए, उन्हें 10 लाख रुपये और घायलों को 2 लाख रुपये दिया गया है। मैं चैलेंज के साथ कहना चाहता हूं कि जितना सर्कल रेट हमारे उत्तर प्रदेश में मिल रहा है, उतना किसी भी प्रदेश सरकार ने देने का काम नहीं किया है। ...( व्यवधान) मैं इन्हें याद दिलाना चाहता हूं कि यह वही नोएडा है, वही दादरी है, जहां औने-पौने दाम में, जहां 5-6 एकड़ जमीन की जरुरत थी कई हजार एकड़ जमीन किसानों की लूट ली गयी। उत्तराखंड में जो गोली चली, ...( व्यवधान) वहां कितने लोग मारे गये थे, कहां थे वे नेता लोग, जो किसानों की बात करते हैं। रायबरेली  में जो फैक्ट्री है, उसकी चर्चा मैं विस्तार से कराना चाहता हूं, उस पर चर्चा होनी चाहिए। ...( व्यवधान) हां, जैसा मैंने कहा कि रपट लिखी गयी है। उत्तर प्रदेश सरकार ने सारी विधिक कार्रवाई पूरी की है। किसी के साथ कोई नाइंसाफी नहीं हुई है। तकलीफ यह हो रही है कि जब किसानों के साथ समझौता हो गया, तो इनके पास कोई इश्यू नहीं है। ...( व्यवधान) खिसियानी बिल्ली खम्भा नोचे वाली हालत हो रही है।...( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदया : आपको भी बुलाएंगे, आप बैठ जाइये। शरद जी, संक्षेप में बोलिये।

...( व्यवधान)

MADAM SPEAKER: Let him speak.

… (Interruptions)

MADAM SPEAKER: Nothing, except what Shri Sharad Yadav says, will go on record.

(Interruptions) …*   श्री शरद यादव (मधेपुरा):अध्यक्ष महोदया जी, मथुरा से लेकर, अलीगढ़ तक जो घटना हुई वह शर्मनाक इसलिए है कि भारत में उस दिन आजादी का जश्न था। लेकिन पूरे इलाके में, किसान के घर से लेकर मैदान तक गोली और लाठी चलती रहीं। एक तरफ माननीय प्राइम-मिनिस्टर साहब का भाषण चल रहा था और दूसरी तरफ लाठी और गोली का तांडव मचा हुआ था। ...( व्यवधान) यह केवल एक इलाके की समस्या नहीं है, पूरे देश में आपने एसईजेड के नाम से, इस देश की जमीन, दिल्ली से लेकर चंडीगढ, दिल्ली से जयपुर, दिल्ली से मथुरा-आगरा तक, जितने राष्ट्रीय राजमार्ग हैं, उनके आस-पास की पांच-पांच किलोमीटर की जमीन, जो देश की सबसे ज्यादा उपजाऊ जमीन है, देश की जरखेज़ जमीन है, लगातार कम हो रही है। माननीय कृषि मंत्री जी का भी बयान आया था कि लगातार उपजाऊ जमीन कम हो रही है। जो हाईवे बना रहा है, उसका बयान मैंने पढ़ा कि जमीन सरकार एक्वायर करके उसे देगी। सरकार लेगी 520 रुपये वर्गफुट के हिसाब से और वह 20 हजार, 30 हजार, 40 हजार वर्गफुट के हिसाब से उस जमीन को बेचेगा। इस बारे में जो बिल था वह क्यों रुका? एसईजेड के मामले में हमने देशभर में आंदोलन किया था। पंजाब और हरियाणा की सरकार ने एक रास्ता बनाया है और अगर कहीं ठीक मुआवजा मिल रहा है तो वह पहले पंजाब और फिर हरियाणा में मिल रहा है।...( व्यवधान) मेरा कहना है कि वहां एफआईआर नहीं लिखी गयी है, ऐसी खबर दी गयी है, यह बहुत गंभीर बात है। ...( व्यवधान) अगर लिखी गयी है तो ठीक है।।

मैं आपसे निवेदन करूंगा कि सरकार को तत्काल इस विषय पर बयान देना चाहिए। यह केवल उत्तर प्रदेश का मामला नहीं है, यह केवल हरियाणा का मामला नहीं है। देश की खाद्य सुरक्षा का सबसे बड़ा इलाका, गंगा-यमुना का मैदान, पंजाब मतलब पंज-आब, आब का अर्थ नदी होता है, यह केवल पंजाब का मामला नहीं है, मैं यह नहीं कह रहा कि मैं जो कुछ कह रहा हूं वह सब ठीक है। मैं इतना कहना चाहता हूं कि यह गंभीर मामला है। भविष्य में देश को इसे भुगतना पड़ेगा। दिल्ली क्या बस गई, इसने दोआब के मैदान को तबाही और बर्बादी की कगार पर ला कर खड़ा कर दिया है। नोएडा में सर्कल रेट है। किसान कह रहे हैं कि हमें ठीक मुआवजा दिया जाए। किसान के हाथ में सीधे हक दिया जाए। यह कानून बनाइए कि कोई किसान की जमीन नहीं ले सकता है। कानून में प्रावधान किया जाए कि जिस तरह से आदिवासियों की जमीन नहीं ली जा सकती है, उसी प्रकार इनकी जमीन भी नहीं ली जा सकती है। आज किसानों का बहुत बुरा हाल है। इस बारे में सरकार को बयान देना चाहिए, इसके बाद ही इस समस्या का कोई हल निकल सकता है।

          इन्हीं बातों के साथ मैं अपनी बात समाप्त करता हूं।

 

SHRI H.D. DEVEGOWDA (HASSAN): Hon. Speaker, I would like to associate my feelings with my colleagues who have just now spoken on the incidents of Mathura and Agra happened on  14th August, 2010.  It is a brutal killing by the officers concerned.  First, they should be arrested.  In my humble opinion, the officers who have brutally killed the innocent farmers, they must be arrested first.  It is a criminal action on the part of the officers.  This is my honest opinion. There is a procedure for resorting to open fire in such cases.  I do not want to go into details about all these things.  Day before yesterday, the Supreme Court has also given a verdict in regard to acquiring land of the farmers for a pittance and allowing the so called project promoters to loot.  They have very severely criticized the action of the Government.  The amendment Bill which was moved in this House and on which recommendations were also given by the Committee, why has it not been placed in the present Session?  It lapsed in the UPA-I regime. 

SHRI SHARAD YADAV (MADHEPURA):  What is going on in Karnataka?

SHRI H.D. DEVEGOWDA: Brother, I am not going into individual cases.  This problem does not confine to Mathura or Agra.  I know what is going on in the entire country.  I do not want to take the names of individuals.  The issue pertains to Rs.65 crore of the poor farmers.  They are not landlords but they are land losers.  Today, we have to give them this designation.  Why do you call them landlords?  Today, nobody is bothered.  Everybody in the House wants to sympathize with the farmers.  The problems like food security and all these things, you can discuss at a later stage.  This matter must be discussed threadbare in this House immediately.  There is no question of allotment of time.  I beg of you.  We are prepared to sit even on Raksha Bandhan.  I am not bothered about it.  Even we can sit on 28th , 29th, and 30th, to discuss this issue.  I have never opened my lips from day one.  Only for two days I had gone to Bangalore as I was having some family problem. I have been watching the entire Session.   Five days were wasted on one issue.  That matter could have been solved by the Opposition Party and the Government.  Where was the need for wasting those five days?  Nobody made an attempt to solve it.  I am sorry to use this word.  The Speaker can only function on the basis of the advice given by both the sides.  I beg of you.  Both the sides should cooperate to deliberate on this issue on the floor of the House.  You can discuss and debate.  You condemn them in whatever manner you want.  I am not coming in the way.  The only thing is that we have not come here to waste our time. Sincerely and with folded hands, I would request you to allow this matter to be discussed.  Today, you are going to take up the mining issue.  Let it go on today.  You decide about this issue in the Business Advisory Committee. You could take the views of the Government also.  But this matter should be discussed.

Under no circumstances we are going to conclude this Session till the matter is discussed. The Government should come forward to give an assurance in this regard.

 

श्री जगदम्बिका पाल : अध्यक्ष महोदया, यह किसानों से जुड़ा हुआ प्रश्न है। यह सवाल केवल सत्ता पक्ष या प्रतिपक्ष का नहीं है। किसी भी पक्ष में बैठे हुए लोग हों, सभी को इस बात का एहसास है कि किसानों की जमीन उनकी जिंदगी है, जमीन उनकी जान है और अगर किसान की जमीन जिससे उसके परिवार की जीविका चलती है, जिससे उसकी बेटी की शादी होती है और जिससे उसके बेटे की पढ़ाई की फीस आती है, जिस क्रॉप से उसके बूढ़े बाप का इलाज होता है, अगर उसकी जमीन जाती है तो किसान की जिंदगी जाती है। सवाल यह नहीं है। आज किसी भी भूमि अधिग्रहण करने की कार्यवाही, कोई भी सरकार हो, किन परिस्थितियों में करना जायज हो सकता है? क्या जब कोई थर्मल पॉवर प्लांट लगा रहे हों, कोई इरीगेशन का प्लांट लगा रहे हों, कोई ऐसा काम जनहित में जिससे प्रदेश और देश की जनता को फायदा हो या किसी जमीन को अधिग्रहीत करके कोड़ियों के भाव में बिल्डर्स को दिया जाए, निजी कोलोनाइजर्स को दिया जाए, निजी टाउनशिप वाले को बनाने के लिए दिया जाए और उससे बात की जा रही है कि हमने 570 स्क्वायर फीट मुआवजा दे दिया। लेकिन क्या प्रतिबंध लगाया गया कि 570 स्क्वायर फीट पर उसको जमीन दी जा रही है और जब वह बिल्ड-अप करके बेचेगा तो सरकार का उस पर कोई नियंत्रण नहीं होगा। फिर वह चाहे 20,000 रुपया स्क्वायर फीट पर अपना फ्लैट बेचे। लेकिन उस पर कोई नियंत्रण नहीं होगा। तो क्या यह लूट की छूट दी जाए कि निजी क्षेत्र के बिल्डर्स, कोलोनाइजर्स इनके लिए टाउनशिप बनाने वाले लोगों को इस तरह की छूट दी जाए और राज्य सरकार उसमें पाप की भागीदार बने कि उनके लिए जमीन अधिग्रहीत करके दे। मैं समझता हूं कि किसी भी डैमोक्रेटिक कंट्री में जहां 80 प्रतिशत किसान रहते हों, उनकी उपजाऊ जमीन को राज्य सरकार...( व्यवधान) मैं कोई आलोचना नहीं कर रहा हूं।...( व्यवधान) मैंने तो किसी का नाम भी नहीं लिया। ...( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदया : आपकी बात हो गयी। अब आप बैठ जाइए। कृपया समाप्त करिए। संक्षेप में बोलिए। लंबा बोलने से नहीं होगा।

…( व्यवधान)

श्री जगदम्बिका पाल : अध्यक्ष महोदया, मैंने तो अभी नाम भी नहीं लिया।...( व्यवधान) किसी सरकार का नाम नहीं लिया। दारा सिंह चौहान का नाम नहीं लिया। बहन जी, मायावती जी का नाम नहीं लिया।...( व्यवधान) जो मैं कहना चाहता हूं, जब-जब उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी की सरकार आती है, तब तब किसानों पर गोलियां चलती हैं।...( व्यवधान) चाहे किसानों ने जब गन्ना मूल्य मांगा, तो इस बहुजन समाज पार्टी की सरकार ने गोलियां चलाईं।...( व्यवधान) क्या कारण है कि आज नोएडा का भाव...( व्यवधान)  20 दिन से आंदोलन चल रहा था। ...( व्यवधान)

MADAM SPEAKER: Nothing will go on record except what is being said by Shri Jayant Chowdhury. 

(Interruptions) …*   श्री जयंत चौधरी (मथुरा):अध्यक्ष महोदया, 15 अगस्त को...( व्यवधान)

श्री मुलायम सिंह यादव : अध्यक्ष महोदया, हम भी कुछ कहना चाहते हैं।...( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदया : आप बोल चुके हैं। अब इनको बोलने दीजिए। मुलायम सिंह जी, कृपया आप बैठ जाइए।

…( व्यवधान)

MADAM SPEAKER: Nothing will go on record.

(Interruptions) …* श्री जयंत चौधरी : अध्यक्ष महोदया, 15 अगस्त को पूरे देश का हरेक व्यक्ति, हर बच्चा लालकिले की तरफ देखता है और सुनना चाहता है कि देश के प्रधान मंत्री की ओर से उनके लिए क्या संदेश है। बहुत दुख की बात है।...( व्यवधान)

MADAM SPEAKER: Nothing will go on record.

(Interruptions) … * अध्यक्ष महोदया : जयंत चौधरी जी, बोलिए। मुलायम सिंह जी, आप बैठ जाइए। औरों को भी मौका दीजिए। उनका निर्वाचन क्षेत्र है। उनको बोलने दीजिए। अब आप बैठिए।

…( व्यवधान)

श्री जयंत चौधरी : अध्यक्ष महोदया, कल सदन में जो हुआ, उससे यह स्पष्ट हो जाता है कि सदन का हरेक सदस्य और हम सबको यहां अगर किसी ने चुनकर भेजा है तो गांवों में रह रहे किसान, नौजवान गरीब मजदूरों ने भेजा है। हमारी उनके प्रति एक जिम्मेदारी बनती है। मैं सदन को अवगत कराना चाहता हूं कि क्या कारण थे, मैं नहीं जानता। प्रदेश सरकार नहीं चाहती थी कि मैं वहां जाऊं। मैं एक जनप्रतिनिधि हूं। प्रदेश सरकार नहीं चाहती थी कि मैं वहां पहुंचू। शायद वह नहीं चाहती थी कि हमारे दल के या विभिन्न दलों के लोग जो कल 15 अगस्त को सुबह वहां पहुंचे हैं, प्रदेश सरकार नहीं चाहती थी कि हम वहां जाएं और लोगों की बात सुन पाएं।...( व्यवधान)  मेरे घर पर डी.एम.  की ओर से एक फैक्स आय़ा कि आपका अलीगढ़ में प्रवेश वर्जित है क्योंकि आप किसानों को प्रोत्साहित करेंगे। कैसे टैम्पो में छुप-छुपकर 50 कि.मी. गाड़ी बदल-बदलकर मैं वहां पहुंचा हूं और वहां जो मैंने स्थिति देखी है, जो तनावपूर्ण वहां माहौल है। सभी सदस्यों ने अपनी-अपनी बातें रखी हैं। मैं सहमत हूं, जो देवेगौडा जी कह रहे थे, उनकी बात से भी मैं सहमत हूं। हम सबकी करोड़ों बहनें रहती हैं, किसान की बेटियां रहती हैं।

वे हमसे अपेक्षा रखती हैं। अगर हमें रक्षा बंधन का त्यौहार मनाना है तो हम उस दिन भूमि अधिग्रहण पर क्यों नहीं चर्चा करें। यह बहुत विशाल चर्चा का विषय है। मैं आपको कुछ बातें कहना चाहता हूं कि सरकार भी एक कानून लाना चाहती है। महामहिम राष्ट्रपति जी ने अभिभाषण में सरकार की प्रतिबद्धता को व्यक्त किया है। इसमें देरी नहीं होनी चाहिए। सरकार जो भी कानून  लाए, उसमें पब्लिक परपज़ यानी सार्वजनिक इस्तेमाल को विस्तार और विकसित रूप से लोगों के बीच में रखा जाए। फॉर मोर वन रेसिंग ट्रैक, बड़ी इमारतें सार्वजनिक इस्तेमाल नहीं है। पावर प्लांट, रक्षा मंत्रालय या सचिवालय के लिए जमीन चाहिए तो देश का किसान जमीन देने के लिए तैयार है। वह अपनी जमीन लाखों बार देगा। लेकिन वहां हो क्या रहा है? एक बिचौलिए की तरह, एक रियल एस्टेट दलाल की तरह विभिन्न सरकारें आती हैं, पूंजीपति जमीन चाहता है और उन्हें जमीन खरीदकर दे देती हैं। इसमें किसान की सहमति नहीं बन पाती है, यह दुर्भाग्यपूर्ण बात है।

          कल प्रदेश सरकार के नुमांइदे कह रहे थे कि वहां पुलिस ने फायरिंग नहीं की और आज वे कह रहे हैं कि सहमति से होगा। मुख्यमंत्री मायावती जी ने पिछले वर्ष कहा था और मैंने खुद सुना था। पिछली बार जब इस तरह की घटना हुई थी तब भी उन्होंने कहा था कि हम बिना किसान की सहमति के एक इंच भी जमीन एक्वायर नहीं करेंगे। मैं इसके बावजूद बताना चाहता हूं कि वहां के अधिकारी दबाव डालते हैं, वे पूंजीपति, जो जमीन लेना चाहते हैं, वे दबाव डालते हैं। एक किसान जिसके पास दो बीघा भी जमीन नहीं है, वे इस भार और दबाव को सह नहीं सकता, टूट जाता है और करार कर देता है। हम उसकी पीड़ा और मजबूरी को कब तक नहीं समझेंगे? यह बहुत महत्वपूर्ण विषय है। इस सदन में राम बाबू कटीरिया के बारे में बात हुई है। मैं बताना चाहता हूं और आप टेलीविजन खोल कर देख सकते हैं। उनके भाई का अभी भी बयान आ रहा है, वे अभी भी अस्पताल में हैं। उनके भाई का बयान आ रहा है कि हमें डर है कि शायद उन्होंने किसी दबाव में आकर इस बात को कहा है। वहां आदरणीय राजनाथ जी गए थे, श्री शिवपाल जी गए थे, सब पार्टी के लोग वहां पहुंचे थे। वहां हम सबने जाकर कहा कि जो पंचायत का फैसला होगा, जो किसान के भाव होंगे, हम उनका आदर करेंगे। लेकिन बंद कमरे में फैसला क्यों किया गया?

          सभी पार्टी के लोग यहां मौजूद हैं, मैं अपील करता हूं कि इस सदन के माध्यम से हम सब संकल्प करें कि हम भूमि अधिग्रहण के मसले पर चर्चा करें। हम राष्ट्रीय स्तर पर भूमि अधिग्रहण के मामले पर सहमति बनाएं। केंद्र सरकार को नया कानून पेश करना चाहिए। मैं प्रदेश सरकार की आलोचना नहीं कर रहा हूं, जो हुआ है उसे दुनिया ने देखा है कि क्या हो चुका है। यह घटना जिन अधिकारियों के रहते हुए हुई, आप उनके खिलाफ क्या कार्रवाई करना चाहते हैं, इसका जवाब जनता के बीच में जाकर देना होगा।

श्री लालू प्रसाद (सारण):अध्यक्ष महोदया, मैं कुछ कहना चाहता हूं।...( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदया : आप शांत हो जाइए।

…( व्यवधान)

 

SHRI SUDIP BANDYOPADHYAY (KOLKATA UTTAR): Madam Speaker, the same incident which has happened in Uttar Pradesh occurred in Nandigram and Singur of West Bengal also. Fourteen women and children were brutally killed by police firing and bullets hit into their chests. Trinamool Congress, as such, is totally opposed to the idea of forceful occupancy of the land of the farmers.  During the time of selling, there should be a mutual understanding in fixing up the price between the ones who are eager to own the land and the ones who hold the land and job guarantee has to be given to the family of the farmers and the same should be included in the sale deeds also.

          Madam, Kumari Mamata Banerjee went in for a hunger strike for 26 days long in the city of Kolkata and it was most unfortunate at the time when the killings of Nandigram were going on, Parliament did not get awakened by this level. But now, it is good enough that we are standing to protect the interests of the farmers at least.

          The British Act of 1894 is still operating in our country so far as land acquisition is concerned.  Why should we still depend on the British rules which were enacted in 1894?  The Land Acquisition Act which is still enforced by the Government has to be changed and amended immediately.

          We propose that a new Act has to be enacted for the farmers, by the farmers and of the farmers.  As Shri Sharad Yadav has just now said, SEZs have actually not contributed any positive result in the country.  But the Government is capturing and occupying lands by killing the interests of farmers and some times by killing the farmers themselves through bullets. Even the hon. Commerce Minister would admit that the position of SEZs in West Bengal is the worst in the whole of India. 

We stand by the farmers. The Land Acquisition Act has to be taken up for modification.  This is the cardinal policy of the Trinamool Congress.

 

श्री बसुदेव आचार्य (बांकुरा):अध्यक्ष महोदया, 14 तारीख को मथुरा में और 15 अगस्त को भी देश की आजादी के दिन जो घटना घटी, यह बहुत शर्मनाक घटना है। ...( व्यवधान) नंदीग्राम में एक इंच भी जमीन नहीं दी गई। आप क्या नंदीग्राम की बात बोल रहे हैं। वहां एक इंच जमीन भी नहीं दी गई।  

अध्यक्ष महोदया : कृपया बसुदेव आचार्य जी, चेयर को एड्रैस कीजिए।

श्री बसुदेव आचार्य : उसकी चर्चा हम लोगों ने यहां की है।

अध्यक्ष महोदया : आप मुझे एड्रैस करिये और बोलिये।

श्री बसुदेव आचार्य: उसके बारे में इस सदन में हमने चर्चा की है। उत्तर प्रदेश में जो घटना घटी है, यह बहुत शर्मनाक घटना है। ...( व्यवधान) किसान लोग उचित मुआवजे की मांग कर रहे हैं। जो मुआवजा गौतम बुद्ध नगर में दिया जा रहा है, उसी मुआवजे की मांग मथुरा और अलीगढ़ के किसान कर रहे हैं। यह कोई गैरकानूनी मांग नहीं है। लेकिन इस मांग के करने पर मुआवजा तो बढ़ाया नहीं गया, बल्कि गोलियां चलाकर किसानों की हत्या की गई। ...( व्यवधान) आज हमारे देश में जिस तरह से ...( व्यवधान)

MADAM SPEAKER: Nothing will go on record.

(Interruptions) …* श्री बसुदेव आचार्य : आज हमारे देश में जिस तरह से किसानों की जमीन छीनी जा रही है...( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदया : कृपया बैठ जाइये, उन्हें बोल लेने दीजिए।

श्री बसुदेव आचार्य : सेज के नाम पर, स्पेशल इकोनोमिक जोन के नाम पर हजारों एकड़ जमीन...( व्यवधान) आप बैठिये, बिना बात खड़े हो रहे हैं और खड़े होकर क्या बोल रहे हैं ( व्यवधान)* अध्यक्ष महोदया : आप इधर बोलिये। बसुदेव आचार्य जी, आप यह क्या कर रहे हैं?

MADAM SPEAKER: Nothing will go on record.

(Interruptions) … * MADAM SPEAKER: Shri Basu Deb Acharia, you are a senior Member.  You address the Chair. 

… (Interruptions)

श्री बसुदेव आचार्य : एसईजेड के नाम पर हजारों एकड़, हजारों हेक्टेअर जमीन बीस हजार, तीस हजार एकड़ और हैक्टेअर जमीन किसानों से छीनी जा रही है। एक राज्य में नहीं, बल्कि सब राज्यों मे ऐसा हो रहा है। ...( व्यवधान) बंगाल में एसईजेड नहीं हो रहा है। बंगाल में कोई एसईजेड नहीं है। इन लोगों को पता ही नहीं है।

अध्यक्ष महोदया : आप अपनी बात समाप्त करिये।

श्री बसुदेव आचार्य : मैं यहा खड़े होकर बोल रहा हूं कि बंगाल में अभी तक कोई एसईजेड नहीं है।

MADAM SPEAKER: Dr. M. Thambidurai to speak.

… (Interruptions)

श्री बसुदेव आचार्य : सबसे पहले हमने मांग की कि हमारे देश का वर्ष 1894 का जो जमीन अधिग्रहण का कानून है, सरकार को इस कानून को पूरी तरह से बदलना चाहिए।...( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदया : अब आप अपना स्थान ग्रहण कर लीजिए। आप बैठ जाइये।

श्री बसुदेव आचार्य : सरकार कानून लाई और यह कानून स्टैंडिग कमेटी में गया।

MADAM SPEAKER: Nothing will go on record except what Dr. M. Thambidurai says.

(Interruptions) …* अध्यक्ष महोदया :  आप बैठ जाइये। बसुदेव जी, आप इतना ज्यादा मत बोलिये। डा. थम्बीदुरै बोलने के लिये खड़े हो गये हैं, उन्हे बोलने का अवसर दीजिये। Shri Basu Deb Acharia, you are such a senior Member.  Please take your seat.

… (Interruptions)

MADAM SPEAKER: Let us have order in the House.

… (Interruptions)

 

DR. M. THAMBIDURAI (KARUR):  Madam, the incident that took place in Aligarh is a very sad one.  As pointed out by all the other hon. Members, our Party also joins in that. We express our concern on this issue.

          Madam, in the name of development of infrastructural facilities, most of the State Governments are acquiring the lands forcefully from the farmers.  Now, there is a lot of competition among the States to attract the big business people.  They are forcefully acquiring the lands from these poor farmers at a cheaper price and because of that most of the farmers are losing their lands. They are also losing their livelihood.

          Madam, there is one concern. This incident is happening not only in U.P., West Bengal, Karnataka, Andhra Pradesh, but also in Tamil Nadu the same incident is taking place.  In the name of development of industries, they are acquiring a lot of lands and giving it to private people at a cheaper price.

          Madam, as everybody knows, Sriperumbudur is one of the important places. In the name of development of Greenfield Airport, they are acquiring thousands of acres of lands from the farmers forcefully. … (Interruptions) It is because of that the farmers are agitating. … (Interruptions)

SHRI T.K.S. ELANGOVAN (CHENNAI NORTH): What happened in Siruthavur when Panjami land was usurped for the sake of an individual? … (Interruptions)

DR. M. THAMBIDURAI : Madam, that is why, I am requesting you that this is a very important issue.  … (Interruptions) The House must take the concern on this very important issue. The Land Acquisition Policy must be discussed in the House immediately and there should be a proper legislation in this regard. … (Interruptions)

MADAM SPEAKER:   I have called Shri Nama Nageswara Rao.

 … (Interruptions)

MADAM SPEAKER: Nothing will go on record except what Shri Nama Nageswara Rao says.

(Interruptions) …*   श्री नामा नागेश्वर राव (खम्माम): अध्यक्ष महोदया, भारत देश में किसानों की लैंड को ग्रैब करने का कांम हर स्टेट में हो रहा है। अभी यू.पी. में अलीगढ़ में किसान को गोली मार दी गई है, इसके लिये पूरे देश के हर आदमी को सीरियसली सोचने की जरूरत है। भारत देश में किसानों के साथ बहुत बड़ा अन्याय हो रहा है। किसानों की जमीन को खींचकर उसे लेबर बनाया जा रहा है।  रिसैंटली आध्र प्रदेश में श्री काकुलम में भी तीन  आदमी को गोली मार दिया गया। जब से आध्र प्रदेश में गवर्नमेंट आयी है, जमीन खींचने के नाम पर गोली मारने का काम कुछ ज्यादा हो गया है। पिछले 6 साल में आध्र प्रदेश में किसानों का तीन लाख एकड़ जमीन  खींचकर 50 हजार किसानों को लेबर बना दिया है। अभी वे किसान लेबर का काम कर रहे हैं जिसके लिये पार्लियामेंट पूरा जिम्मेदार है। इसलिये हम लोगों की मांग है कि  यह बहुत ही महत्वपूर्ण मुद्दा है। किसान की जमीन पब्लिक इम्पार्टेंस के लिये ली जा सकती है लेकिन किसान की जमीन के साथ व्यापार नहीं करना चाहिये। किसान की लैंड पर ऐसा नहीं करना चाहिये। इसलिये इस ऑगस्ट हाऊस से रिक्वैस्ट है कि वह किसानों को पूरा संरक्षण दे...( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदया : अब आपकी बात हो गई। बैठ जाइये। श्री प्रबोध पाण्डा।

          नागेश्वरा राव जी, अब आप बैठ जाइये। प्रबोध पाण्डा जी, आप बोलिये, नागेश्वरा राव जी की बात रिकॉर्ड में नहीं जा रही है।

(Interruptions) …* MADAM SPEAKER: Please take your seat.   Thank you so much.

          Shri Prabodh Panda.

… (Interruptions)

MADAM SPEAKER: Nothing will go on record except what Shri Prabodh Panda says.

(Interruptions) … *     SHRI PRABODH PANDA (MIDNAPORE): Madam, the incident occurred on 14th and 15th of August in Mathura and Aligarh is a matter of deep concern.

I, on behalf of my Party,  strongly condemn these sorts of incidents. I am not taking it as an isolated case. I do not single out the case of Aligarh. The incidents might have happened in different places. They might have happened in West Bengal, in other places.… (Interruptions) They might have happened in Orissa, in Maharashtra. These sorts of incidents are condemnable.… (Interruptions) You did not hear me out. You have not heard me when I uttered the name of West Bengal. Even the case of Nandigram firing on the peasants is highly condemnable.… (Interruptions)

          Therefore, I urge upon the Government, through you, Madam, to immediately bring forward the Land Acquisition and Rehabilitation Bill. The old one enacted during the British Rule, the colonial legislation of 1894  is, still in force; it is still operating. So, it should be replaced by a new Bill. I do not know the reason behind the delay. In the UPA-I regime, the Draft Rehabilitation Bill has been prepared.… (Interruptions)

MADAM SPEAKER: Kindly taken your seat. Now, Shri Lalu Prasad to speak.

… (Interruptions)

SHRI PRABODH PANDA :  We have some reservations and we have given certain amendments. … (Interruptions)

          Finally,  I would say that all kinds of police atrocities and firing on the farmers  are highly condemnable.… (Interruptions)

  MADAM SPEAKER: Shri Panda, Kindly take your seat. Nothing will go on record except what Shri Lalu Prasad says (Interruptions) …*   श्री लालू प्रसाद (सारण):महोदया, आपका निर्देश था कि शांत रहिये और मैंने आपने निर्देश का अक्षरशः पालन किया है।

अध्यक्ष महोदया : आपका बहुत-बहुत धन्यवाद। अब आप बोलिये।

श्री लालू प्रसाद : जी, अब मैं बोल रहा हूं। माननीय मुलायम सिंह यादव जी ने सबसे पहले अलीगढ़ में आजादी का जश्न मनाते समय किसानों के ऊपर गोली चली और उसमें लोग मारे गये, इस सवाल को उठाया। सवाल स्पेसिफिक था। इस बात को मुलायम सिंह यादव जी ने उठाया और इसमें पूरे देश में बड़े-बड़े शहरों के इर्द-गिर्द हाउसिंग के लिए जो जमीन ली जा रही है, गुदड़ी के भाव में प्राइम लैंड ली जा रही है, हर चीज के नाम पर ली जा रही है, टाउनशिप के नाम पर ली जा रही है। मैं मंत्री था तब यह बात तय हो गयी थी, जिसे एसईजेड कहते हैं कि किसानों की जमीन इंडस्ट्री के लिए या किसी भी डेवलपमेंट के लिए उस जमीन को देंगे जो टेलैंड है, जो मरू भूमि है, जो अनडेवलप्ड इलाका है या जो भूमि बंजर है, जो कृषि योग्य नहीं है।...( व्यवधान) आप लोग हमारी बात सुनिये। किसी भी पार्टी को इसमें कोई आपत्ति न तब थी, न आज है और न कल रहेगी, लेकिन यह हो नहीं रहा है। यह भी तय हुआ था कि सरकार बीच में नहीं पड़ेगी। अगर कोई इंडस्ट्री लगाना चाहता है तो यह इंडस्ट्री वाले और किसान के कांसेप्ट से, रजामंदी से होगा।...( व्यवधान) अरे भाई हमारी बात सुनिये। क्या बात है?

अध्यक्ष महोदया : आप बोलिये। आप उधर मत देखिये, आप इधर देखकर बोलिये।

श्री लालू प्रसाद : हम तो अपना मन दूसरा सवाल उठाने के लिए बनाकर आये थे। उसे कल उठायेंगे। यह बात तभी तय हो गयी थी, जिस बिल की बात हम करते हैं कि सरकार बीच में नहीं आयेगी, लेकिन सरकार के मन में लालच है। सरकार की लार टपकती है कि जब किसान और इंडस्ट्री वाले, ये दोनों मिल जायेंगे तो मेरी क्या जरूरत है। इसमें सब जगह यह खेल हो रहा है। अकेले कोई उत्तर प्रदेश की सरकार या सुश्री मायावती ने हुक्म कर दिया कि गोली मार दो, मैं इसे नहीं मानता हूं। कहीं की भी सरकार हो, ऐसा नहीं है। अब यहां देखिये कि अगर तमिलनाडु का उदाहरण दें तो उनकी मुखालिफ पार्टी यहां बैठी हुई है। कोई इधर बैठा है, कोई उधर बैठा है। इस बात को गंभीरता से लेना चाहिए।...( व्यवधान) आप लोग हमारी बात सुनिये, हमें भी अपनी बात कहने का मौका दीजिये। हमारी पार्टी छोटी है। हम कम हो गये हैं तो इसका यह मतलब नहीं है कि हम आने वाले नहीं हैं। यह तो चलता रहता है।...( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदया : लालू जी, आप बोलिये और जल्दी अपनी बात समाप्त कीजिये।

श्री लालू प्रसाद : महोदया, मेरा सुझाव है कि मुलायम सिंह यादव जी ने जो सवाल उठाया।

आज क्या हुआ? आज हुआ कि जो मारे गए लोग हैं, पुलिस ने 302 का केस दर्ज नहीं किया है। यह किया जाना चाहिए था। यह निदेश यूपी सरकार को जाना चाहिए कि जितने लोगों ने गोली चलाई है, उन पर 302 के तहत मुकदमा दायर किया जाए, उन पर कार्यवाही हो और उन्हें जेल भेजा जाए। यह निदेश यूपी सरकार का जाना चाहिए।...( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदया : अब आप अपनी बात समाप्त कीजिए।

          श्री अनंत गीते।

श्री लालू प्रसाद : महोदया, मेरी बात सुन लीजिए। हम एक मिनट में समाप्त कर देंगे।

          महोदया, जो बिल है, सरकार उसे लाए ताकि क्लियर हो जाए। सरकारी प्रपज़ के लिए रेलवे अथवा किसी अन्य विभाग को विकास के लिए जमीन की जरूरत है तो उसके अधिग्रहण की इजाजत हम लोग दे सकते हैं। सुश्री ममता बैनर्जी किसानों से इतनी भयभीत हो गई हैं और उन्होंने कह दिया है कि डेव्लपमेंट में हम किसानों की एक इंच जमीन नहीं लेंगे। इससे रेलवे का काम ठप्प हो गया है। आप क्लियर कट आइए और इसी सत्र में बिल लाइए। उस पर बैठकर बहस कीजिए। आप मुलायम सिंह जी की बात को सुन लीजिए। जितने लोग बोले हैं, सभी लोग बोले हैं, सभी ने यह कहा है कि किसानों के साथ न्याय किया जाए।...( व्यवधान)

 

श्री अनंत गंगाराम गीते (रायगढ़): अध्यक्ष महोदया, उत्तर प्रदेश में मथुरा और अलीगढ़ में किसानों पर लाठी और गोली चलाई गई, किसानों की हत्या हुई, इस घटना की मैं निंदा करता हूं। इस दुर्घटना की निंदा करते हुए, जो पूर्व प्रधानमंत्री देवेगौडा जी ने मांग की है, उससे मैं अपने को सम्बद्ध करता हूं। शरद जी, राजनाथ सिंह जी ने भी इस बात को कहा है कि पुलिस ने गोली चलाई है, इसकी जांच होनी चाहिए और पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही भी होनी चाहिए। लालू जी ने भी इस बात को कहा है कि धारा 302 के तहत उन पुलिस अधिकारियों पर कार्यवाही होनी चाहिए। जब एसईजेड के मामले में सदन में काफी चर्चा हुई और सारे सदन की एक राय थी कि किसी एक प्रोजेक्ट के लिए, किसी प्राइवेट प्रोजेक्ट के लिए सरकार भूमि अधिग्रहण न करे। यदि किसी को प्राइवेट प्रोजेक्ट लगाना भी है, तो वह किसानों से सीधा सम्पर्क करे और किसानों की मर्जी के अनुसार उचित मूल्य दे। इस उचित मूल्य पर यदि किसान किसी निजी प्रोजेक्ट के लिए जमीन देना चाहते हैं तो दें, लेकिन सरकार किसी भी निजी प्रोजेक्ट के लिए भूमि अधिग्रहण न करे, यह चर्चा यहां हुई थी।...( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदया : आप समाप्त कीजिए।

श्री अनंत गंगाराम गीते: महोदया, मैं समाप्त कर रहा हूं।

          महोदया, मेरी मांग है कि कोई भी राज्य सरकार, किसी भी प्राइवेट प्रोजेक्ट के लिए भूमि का अधिग्रहण न करे, जबरदस्ती अधिग्रहण न करे। मेरे क्षेत्र रायगढ़ में रिलायंस का एसईजेड़ आ रहा है। जिसके कारण वहां की जनता में असंतोष है। किसान और लोग उसका विरोध कर रहे हैं। आज भी आंदोलन चल रहा है और छिपे तौर पर रिलायंस के एसईजेड को लाने का प्रयास हो रहा है। लेकिन वहां का किसान कभी भी उसको स्वीकार नहीं करेगा। हमने उसका विरोध किया है और आगे भी उसका विरोध करेंगे।...( व्यवधान) इसलिए सरकार किसी भी एसईजेड के लिए भूमि अधिग्रहण न करे। किसानों से सीधा चर्चा करे और यदि प्राइवेट प्रोजेक्ट लगाना है तो किसानों की मर्जी से और किसानों को उचित मूल्य देकर, उनकी सहमति से होनी चाहिए।

यदि पुलिस कार्यवाही हो, चाहे वह किसी भी राज्य में हो तो उसकी जांच होनी चाहिए, यह मैं मांग करता हूं।...( व्यवधान)

MADAM SPEAKER: Nothing will go on record.

(Interruptions) …*   SHRI ARJUN CHARAN SETHI (BHADRAK): Madam Speaker, I associate with the sentiments expressed by the hon. Members from the Opposition that the interests of the farmers should be protected.  This is certainly very much important for all of us, as has been expressed by the hon. leaders of different Parties.  At the same time, we must also and the Government should also try to ascertain that land is very much limited.… (Interruptions)

          I do not know what the hon. Member is saying sitting there.  But I want to say that in the State of Orissa, rehabilitation and resettlement of farmers is one of the best in the country that the Government of Orissa has been adopting and is paying them. 

          Due to firing, some of the farmers have died. I also demand that that should be inquired into.  A Commission of Inquiry has been set up, as I read in the newspaper.  I do not know how far it is correct.  At the same time, as has been stated, the interests of the farmers should be protected.  Land is very much limited.  So the Government should ensure that enough land should be there for the production of the foodstuffs so that our growing population can be fed in future. Thank you, Madam.

MADAM SPEAKER: Thank you so much.  Now we will go to Q. No. 321, Shri Arjun Munda.

… (Interruptions)

SHRI YASHWANT SINHA (HAZARIBAGH): What about the Government’s response?  The Government must respond.… (Interruptions)

 

THE MINISTER OF FINANCE (SHRI PRANAB MUKHERJEE): Would you say anything?… (Interruptions)  If you say something, after that I will respond.… (Interruptions)

SHRI YASHWANT SINHA : I would like to inform the Leader of the House that a discussion has taken place for 55 minutes in this House suspending the Question Hour.  He unfortunately was not present.  Now, so many hon. Members have spoken, the Government must respond.

SHRI PRANAB MUKHERJEE: No, I thought that when you are getting up, you will say something.  That is why I sat down.… (Interruptions)

SHRI SANSUMA KHUNGGUR BWISWMUTHIARY (KOKRAJHAR): Madam Speaker, what about small parties representing here?… (Interruptions)

SHRI PRANAB MUKHERJEE: Madam Speaker, for my own business, in the beginning of the sitting, I had to be in that House.  But later on, I came and I heard Lalu ji when Lalu ji was speaking and after that some other hon. Members who were speaking. 

          In respect of the incidents of police firing in Uttar Pradesh, I am told that now the talks are going on.  There are two aspects, police firing, inquiry about the causes of the firing and others.  Naturally, we have to ascertain the facts from the State Government.  The Home Minister is in touch with them.  As and when he will get the information, and if it found necessary, we will be sharing it with you.  But we have understood that till late evening, talks were going on to have some sort of amicable settlement, and there is a possibility of arriving at a solution.  As and when we will get the confirmed news, we will share it with you. 

          But there is another important aspect where a number of Members have made their observations about the policies of the Government in respect of acquisition of the land for various public purposes. For that, this is much more important, and we shall have to ensure that the farmers are not disturbed, their interests are not jeopardized because they have to play the most positive role in respect of ensuring the food security.  Therefore, a comprehensive Bill has been formulated by a Group of Ministers under the Chairmanship of Mr. Sharad Pawar and we are expecting to bring the Bill as early as possible for the consideration of the hon. House.

 

Various aspects have been taken note of; and surely,  when the Bill is brought for discussion of the House, the  hon. Members would give their inputs. After their inputs, it would be given the final legislative form. Thank you, Madam.

MADAM SPEAKR: Thank you so much.

          Now, Question No. 321, Shri Arjun Munda.