State Consumer Disputes Redressal Commission
Rgp Mould Pvt Ltd vs Vishal Care on 8 September, 2015
Cause Title/Judgement-Entry STATE CONSUMER DISPUTES REDRESSAL COMMISSION, UP C-1 Vikrant Khand 1 (Near Shaheed Path), Gomti Nagar Lucknow-226010 Complaint Case No. C/2014/30 1. RGP Mould Pvt Ltd a ...........Complainant(s) Versus 1. Vishal Care a ............Opp.Party(s) BEFORE: HON'BLE MR. Jitendra Nath Sinha PRESIDING MEMBER HON'BLE MR. Alok Kumar Bose MEMBER HON'BLE MR. Ram Charan Chaudhary MEMBER HON'BLE MR. Jugul Kishor MEMBER HON'BLE MRS. Smt Balkumari MEMBER HON'BLE MR. Raj Kamal Gupta MEMBER HON'BLE MR. Sanjay Kumar MEMBER For the Complainant: For the Opp. Party: ORDER राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, उ0प्र0, लखनऊ। (सुरक्षित) परिवाद संख्या : 30/2014 1- RGP Moulds Private Ltd., a Company registered and incorporated under the Companies Act, 1956, having its registered office at Plot No. C-6, Road No.17, Udyog Kunj, UPSIDC Industrial Area, Site V, Panki, Kanpur-208022, Uttar Pradesh, through its Director, Raghunath Prasad Gupta, aged 61 year. 2- Rohit Gupta, aged 36 year, Director, RGP Moulds Private Limited, R/o House No. 9/71, Arya Nagar, Opp. Bena Jhabar Telephoe Exchange, Kanpur-208002, Kanpur Nagar, Uttar Pradesh. .................Complainants Versus 1 Vishal Cars, (Authorised Dealer Skoda Auto) Showroom 14/75, Civil Lines, Kanpur- 208001, Uttar Pradesh, through its Principal Officer. 2 The Chairman & Managing Director, Skoda Auto India Private Limited, a company duly incorporated and having its sales Office & Plant at A-1/1, M.I.D.C., Five Star Industrial Area, Shendra, Aurangabad- 431201, Maharashtra. 3 The Manager Customer Care Skoda Auto India Private Limited, A-1/1, M.I.D.C., a company duly incorporated and having its Sales Office & Plant five Star Industrial Area, Shendra, Aurangabad-431201, Maharashtra. .......... Respondents.
समक्ष :-
मा0 श्री जितेन्द्र नाथ सिन्हा, पीठासीन सदस्य मा0 श्री संजय कुमार, सदस्य परिवादी के अधिवक्ता : सुश्री शशि मिश्रा विपक्षी के अधिवक्ता : श्री सईद अख्तर एवं श्री टी0एच0 नकवी दिनांक : 06-11-2015 मा0 श्री जे0एन0 सिन्हा, पीठासीन सदस्य द्वारा उदघोषित निर्णय वर्तमान परिवाद प्रश्नगत कम्पनी के निदेशक रघुनाथ प्रसास गुप्ता एवं रोहित गुप्ता, निदेशक उपरोक्त कम्पनी की ओर से विपक्षीगण के विरूद्ध इस अभिवचन के साथ प्रस्तुत किया गया कि परिवादी सं0-1 कम्पनी द्वारा परिवादी सं0-2 की आवश्यकता के दृष्टिगत उनके व्यक्तिगत प्रयोग हेतु प्रश्नगत माडल की प्रश्नगत कार क्रय करने हेतु विपक्षीगण से सम्पर्क किया गया और तत्पश्चात 05.7.2013 को प्रश्नगत कार विपक्षीगण से क्रय किया गया और वास्तविक कब्जा प्राप्त किया गया -2- एवं क्रय किये जाने के दूसरे दिन अर्थात दिनांक 06.7.2013 के दृष्टिगत कार सडक पर आई परिवादी को प्रश्नगत कार उपलब्ध कराते समय विपक्षीगण ने स्पष्ट रूप से यह बताया था कि प्रश्नगत कार हर प्रकार से ठीक है एवं दिनांक 09.7.2013 को प्रश्नगत कार का पंजीयन हुआ और प्रश्नगत कार का पंजीकरण सं0- यू0पी0 78 डीबी-5463 है और प्रश्नगत कार क्रय किये जाते समय प्रश्नगत कार के संदर्भ में बीमा भी हुआ था एवं प्रश्नगत कार क्रय करते समय परिवादी को सूचित किया गया था कि प्रश्नगत कार के संदर्भ में वारण्टी और गारण्टी भी है। परिवादी द्वारा प्रश्नगत कार को प्राप्त किया गया एवं प्राप्त करते समय मीटर रीडिंग शून्य नहीं थी, बल्कि 30 थी एवं प्रश्नगत कार प्राप्त करने के पश्चात परिवादी सं0-2 द्वारा अपने परिवार सहित कार का उपयोग किया गया। परिवादी द्वारा विपक्षी सं0-1 से सम्पर्क किया गया और विपक्षी सं0-1 के शोरूम में प्रश्नगत कार जॉचने के लिए दी गई, तो यह पाया गया कि प्रश्नगत कार का क्लच क्षतिग्रस्त हो गया था एवं विपक्षीगण द्वारा क्लच को बदल दिया गया, उसके पश्चात पुन: परिवादी सं0-2 द्वारा प्रश्नगत कार को शोरूम से प्राप्त किया गया और 02 किलो मीटर ही कार चली थी कि पुन: प्रश्नगत कार में कठिनाई उत्पन्न होने लगी, जिसके फलस्वरूप प्रश्नगत कार को विपक्षी सं0-1 की वर्कशॉप में लाया गया और तब से प्रश्नगत कार विपक्षी सं0-1 के वर्कशॉप में पड़ी है एवं विपक्षीगण द्वारा यह कहा जाता है कि प्रश्नगत कार पूर्ण रूपेण ठीक है और तत्पश्चात परिवादी सं0-2 द्वारा विपक्षीगण को पत्र द्वारा सूचित किया गया और यह कहा गया कि विपक्षीगण द्वारा जो कार विक्रय की गई, उसमें निर्माण सम्बन्धी त्रुटि है और परिवादी द्वारा विपक्षीगण से यह अनुरोध किया गया कि वह कार की कीमत परिवादी को वापस कर दे और इस संदर्भ में परिवादी द्वारा विपक्षीगण को दिनांक 12.11.2013 को पंजीकृत डाक के माध्यम से नोटिस भेजा गया, जिसका जवाब विपक्षीगण की ओर से दिनांक 20.12.2013 को पत्र के माध्यम से उत्तर भेजा गया, जिसमें इस आशय का उल्लेख किया गया कि परिवादी सं0-2 प्रश्नगतकार जिसकी मरम्मत की जा चुकी है, उसको शोरूम से प्राप्त कर ले। परिवादी विपक्षीगण के उक्त जवाब से संतुष्ट नहीं हुआ और पुन: उसके द्वारा यह कहा गया कि प्रश्नगत कार की बावत जो धनराशि उसने अदा की है, उसे -3- वापस कर दिया जाय और पैसा अदा नहीं किया गया। अत: वर्तमान परिवाद के माध्यम से परिवादी पक्ष द्वारा इस आशय का अनुतोष मॉगा गया कि विपक्षीगण को आदेशित कर दिया जाय कि कार की कीमत 21,00,000.00 क्रय किये जाने की तिथि से वास्तविक भुगतान तक 18 प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से ब्याज सहित अदा करें एवं रू0 25,00,000.00 तथा रू0 10,00,000.00 कुल रू0 35,00,000.00 क्षतिपूर्ति एवं रू0 1,00,000.00 वाद व्यय दिलाया जाय।
विपक्षीगण सं0-2 व 3 जो कि प्रश्नगत कार के निर्माता कम्पनी हैं की ओर से लिखित कथन प्रस्तुत किया गया और परिवाद का विरोध किया गया और प्रारम्भिक आपत्ति के रूप में यह अभिवचित किया गया परिवादी पक्ष उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के अधीन परिभाषित उपभोक्ता की श्रेणी में स्वीकार किये जाने योग्य नहीं है। परिवादी पक्ष उपभोक्ता नहीं है एवं प्रश्नगत वाहन के संदर्भ में मैकेनिकल इस्पैक्शन के अभाव में परिवाद पोषणीय नहीं है एवं प्रश्नगत वाहन के संदर्भ में विपक्षीगण की ओर से सर्विस की जा चुकी है और जौब इनवाइस दिनांक 24.8.2013 और दिनांक 20.12.2013 भी इस संदर्भ में स्पष्ट है एवं परिवादी पक्ष कार के बदले में दूसरी कार या फिर कार के संदर्भ में धनराशि प्राप्त करने का अधिकारी नहीं है एवं प्रश्नगत वाहन में कोई निर्माण सम्बन्धी त्रुटि नहीं पाई गई एवं परिवादी द्वारा भी ऐसा कोई प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया है, जिससे प्रश्नगत वाहन में कोई निर्माण सम्बन्धी त्रुटि है। विपक्षीगण द्वारा प्रस्तुत लिखित कथन में परिवाद के अभिवचनों का खण्डन किया गया एवं प्रश्नगत वाहन को परिवादी को विक्रय करने को स्वीकार किया गया है और स्पष्ट रूप से यह अभिवचित किया गया कि कार क्रय किये जाने के एक माह से अधिक समय बीतने के पश्चात अर्थात दिनांक 08.8.2013 को परिवादी द्वारा इस आशय की सूचना दी गई कि कार में कुछ महक आ रही है और चलने में कठिनाई है, जिसके फलस्वरूप विपक्षी सं0-1 अथोराइज डीलर द्वारा अपनी मिस्त्री को भेजा गया और उसके द्वारा यह पाया गया कि ग्रेर और क्लच में कठिनाई थी और क्लच बदल दिया गया और फिर दिनांक 10.9.2012 को पुन: परिवादी के घर पर ही प्रश्नगत वाहन था और पुन: कठिनाई की बात बताई गई और फिर क्लच व अन्य पार्टस् दिनांक 28.8.2013 बदले और उसके बाद क्लच के संदर्भ में विस्तार -4- से अभिवचन किया गया और यह कहा गया कि प्रश्नगत कार के संदर्भ में जो त्रुटि थी उसका निराकरण कर दिया गया है और परिवादी को पत्र के माध्यम से सूचित भी कर दिया गया, परन्तु वह प्रश्नगत वाहन को लेने के लिए वर्कशॉप नहीं आये एवं गलत तथ्यों के आधार पर परिवाद प्रस्तुत किया गया है और परिवाद खण्डित किये जाने योग्य है।
परिवादी की ओर परिवाद पत्र के समर्थन में साक्ष्य के रूप में निम्नलिखित अभिलेख दाखिल किये गये है:-
1 Photo Copy of Certificate of Incorporation 2 Minutes of the Meeting of the Board of Directors Dt. 08.6.2013 3 E-Mail Letter Date 01.10.2013 4 News Paper Cutting 5 Copy of paper Date 15.02.2014 एवं संलग्नक 01 ता 11 कागजात प्रश्नगत वाहन के संदर्भ में प्रस्तुत किये गये है तथा अपनी लिखित बहस के साथ परिवादी की ओर से प्रश्नगत वाहन के क्रय किये जाने सम्बन्धी प्रपत्रों की फोटो प्रतियॉ भी दाखिल की गई है, जिनमें रजिस्ट्रेशन प्रमाणपत्र, प्रश्नगत वाहन के क्रय किये जाने सम्बन्धी रसीद, परफार्मा रसीद, बीमा के कागजात आदि प्रपत्र प्रस्तुत किये गये।
विपक्षीगण की ओर से अपने तर्क के समर्थन में एवं साक्ष्य के रूप में प्रश्नगत वाहन से सम्बन्धित विस्तृत परीक्षण रिपोर्ट की प्रतिलिपियॉ दाखिल की गई है।
उभय पक्ष के विद्वान अधिवक्तागण के तर्को को विस्तार पूर्वक सुना गया तथा पत्रावली पर उपलब्ध अभिलेख का गम्भीरता से परिशीलन किया गया।
परिवादी के विद्वान अधिवक्ता द्वारा मुख्य रूप से यह तर्क प्रस्तुत किया गया है कि प्रश्नगत वाहन (कार) एक दिन भी नहीं चल सकी थी कि उसके क्लच परेशानी उत्पन्न हो गई और प्रश्नगत वाहन (कार) का क्लच त्रुटिपूर्ण था एवं प्रश्नगत वाहन (कार) से गन्दी महक आ रही थी और वाहन (कार) चलाते समय काफी धुआ भी निकल रहा था और ऐसा बार-बार हो रहा था। विपक्षी द्वारा प्रश्नगत वाहन (कार) की मरम्मत कराये जाने एवं वाहन का क्लच व पुर्जे बदले जाने के पश्चात भी प्रश्नगत वाहन (कार) चलाने में उक्त कमियॉ स्पष्ट थी एवं परिवादी सं0-2 जो प्रश्नगत वाहन (कार) के वाहन स्वामी है के लिए यह अपेक्षित नहीं था कि -5- वह अकसर प्रश्नगत वाहन (कार) की मरम्मत कराते रहते एवं परिवादी द्वारा प्रश्नगत वाहन (कार) को विपक्षी की वर्क शॉप पर छोड़ दिया गया और प्रश्नगत वाहन (कार) के स्थान पर नया वाहन उपलब्ध कराने अथवा प्रश्नगत वाहन (कार) की कीमत रू0 21,00,000.00 वापस किये जाने हेतु अनुरोध किया गया, परन्तु विपक्षीगण द्वारा परिवादी के अनुरोध को स्वीकार नहीं किया गया और प्रश्नगत वाहन (कार) की कीमत को अदा नहीं किया गया एवं प्रश्नगत वाहन (कार) के स्थान पर दूसरा वाहन उपलब्ध नहीं कराया गया और इस प्रकार विपक्षीगण द्वारा किया गया कृत्य सेवा की कमी की श्रेणी में आता है एवं परिवाद के माध्यम वसे यह भी अभिवचित किया गया कि प्रश्नगत वाहन (कार) के क्रय किये जाने की तिथि से दिनांक 16.3.2014 की अवधि के दौरान रू0 10,000.00 प्रतिदिन के हिसाब से 250 दिन के लिए रू0 25,00,000.00 परिवादीगण को विपक्षीगण से दिलाया जाय, क्योंकि परिवादी द्वारा घर से कार्यालय आने जाने में रूपया व्यय हुआ, अत: वाहन की कीमत और रू0 21,00,000.00 उक्त अवधि के दौरान 18 प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से ब्याज भी दिलाया जाय, अत: रू0 48,63,550.00 एवं रू0 1,00,000.00 वाद व्यय दिलाया जाय।
अपने तर्क को आगे बढाते हुए परिवादीगण के विद्वान अधिवक्ता द्वारा यह तर्क प्रस्तुत किया गया कि वर्तमान प्रकरण में विपक्षीगण की ओर से अपने विशेषज्ञों से जॉच कराने के पश्चात प्रश्नगत वाहन के साथ में यह घोषणा की गई थी कि वाहन "फ्री फ्राम आल डिफेक्टस" है एवं प्रश्नगत वाहन (कार) में क्लच से सम्बन्धित पुर्जे त्रुटि पूर्ण पाये गये और उसे अविवादित रूप से विपक्षीगण द्वारा बदल दिया गया था, ऐसी स्थिति में वाहनके त्रुटि पूर्ण होने के संदर्भ में विशेषज्ञ रिपोर्ट का विशेषज्ञ लेबोलैट्री से रिपोर्ट मंगाये जाने की आवश्यकता वर्तमान प्रकरण में नहीं है। अपने तर्क को आगे बढाते हुए परिवादीगण के विद्वान अधिवक्ता द्वारा यह कहा गया कि वर्तमान प्रकरण में परिवादी प्रश्नगत वाहन (कार) के बदले नई उसी मॉडल की कार प्राप्त करने का अधिकारी है और यदि उसी मॉडल की कार उपलब्ध न हो तो परिवादी प्रश्नगत वाहन (कार) की कीमत व क्षतिपूर्ति पाने का अधिकारी है।-6-
उपरोक्त तर्क के खण्डन में विपक्षीगण की ओर से यह तर्क प्रस्तुत किया गया कि परिवादी उपभोक्ता की श्रेणी में नहीं आता है एवं प्रश्नगत वाहन कम्पनी द्वारा क्रय किया गया है, अत: व्यवसायिक प्रयोग का होना स्वीकार किये जाने योग्य है और ऐसी स्थिति में परिवाद अपोषणीय है। यह भी तर्क प्रस्तुत किया गया कि मैकेनिकल इंस्पेकशन के अभाव में भी परिवाद अपोषणीय है एवं प्रश्नगत वाहन में कोई निर्माण सम्बन्धी त्रुटि का होना प्रमाणित नहीं है एवं प्रश्नगत वाहन को बदले जाने के संदर्भ में वारण्टी भी नहीं है और सामान रूप से प्रश्नगत वाहन डीलर के पास उसके गोदाम में रहता है और शोरूम में उसे लाया जाता है, जहॉ से वह विक्रय किया जाता है। ऐसी स्थिति में मीटर रीडिंग जो 30 किलो मीटर प्रदर्शित है, वह स्वाभाविक है और प्रश्नगत वाहन को देते समय शून्य मीटर रीडिंग नहीं होती है। स्पष्ट रूप से यह भी अभिवचित किया गया कि प्रश्नगत वाहन (कार) में अभिवचित त्रुटि की बावत दिनांक 08.8.2013 को विपक्षी को सूचित किया गया था और उस समय प्रश्नगत वाहन परिवादी के घर पर था एवं प्रश्नगत वाहन जॉच विपक्षी के कर्मचारी द्वारा परिवादी के घर पर ही की गई और यह पाया गया कि क्लच का ठीक प्रकार से प्रयोग न करने के कारण क्लच और पुर्जो में त्रुटि आई है और इस प्रकार उचित अनुमोदन प्राप्त करने के पश्चात क्लच एवं कुछ पुर्जो को बदल दिया गया, जिसके पश्चात परिवादी को पुन: वाहन उपलब्ध करा दिया गया एवं दिनांक 24.8.2013 के जाब कार्ड से स्थिति स्पष्ट हो जाती है एवं दिनांक 11.9.2013 को पुन: परिवादी के घर में प्रश्नगत वाहन (कार) की त्रुटि के संबंध में शिकायत प्राप्त हुई, तत्पश्चात विपक्षी सं0-1 के कर्मचारियों द्वारा प्रश्नगत वाहन को सर्विसिंग के लिए अपने स्थान पर लाया गया और वहॉ पर पुन: निम्नलिखित पुर्जे बदले गये:-
1) Wheel Bearing with Mounting , 2) W-Oem Master Cylinder, 3) W-Oem Slave Cylinder, 4) Wo W-Oem Clutch Plate, 5) W-Oem Flywheel, 6) W- Oem Release Bearing.
क्लच और पुर्जो के प्रयोग के बारे में विस्तार से उल्लेख किया गया एवं यह तर्क प्रस्तुत किया गया कि परिवादी द्वारा वास्तव में गलत तथ्यों के आधार पर परिवाद प्रस्तुत किया गया और अनुतोष की मॉग की गई, जो विधि अनुकूल नहीं है। विपक्षी के विद्वान अधिवक्ता द्वारा अपने तर्क को आगे बढाते हुए यह भी कहा गया कि प्रश्नगत वाहन का सर्विसिंग -7- डीलर मेसर्स विशाल कार, कानपुर द्वारा दिनांक 18.4.2015 को जॉच करायी गयी और टेस्ट ड्राईव भी की गई और यह पाया गया कि प्रश्नगत वाहन पूर्णत: सही हालत में है और इस संदर्भ में शपथपत्र भी प्रस्तुत किया गया है। यह तर्क भी प्रस्तुत किया गया है कि गुण-दोष के आधार पर भी प्रस्तुत परिवाद खण्डित किये जाने योग्य है। अपने तर्क को आगे बढाते हुए विपक्षीगण के विद्वान अधिवक्ता द्वारा पीठ का ध्यान Mahindra & Mahindra Ltd. Vs. B.G. Thakurdesai & Anr. II (1993) CPJ 225 (NC) Maruti Udyog Ltd. Vs. Susheel Kumar Gabgotra & Anr. (2006 All. C.J. 1158) एवं Hyundai Motor India Limited Vs. Surbhi Gupta & Ors. Rivision Petition No. 2854 of 2014 में मा0 राष्ट्रीय आयोग के निर्णय दिनांकित 01.5.2014 की ओर ध्यान आकर्षित किया गया और यह कहा गया कि प्रश्नगत वाहन के बदले जाने के संदर्भ में वारण्टी की कोई शर्त नहीं है एवं त्रुटि पूर्ण पुर्जो को वारण्टी अवधि के दौरान बदला जा सकता है एवं विपक्षी द्वारा त्रुटि पूर्ण पुर्जो को स्पष्ट रूप से बदल दिया गया है और प्रश्नगत वाहन पूर्ण रूपेण सही है एवं परिवादी द्वारा गलत अभिवचनों के आधार पर प्रश्नगत अनुतोष की याचना की गई है।
परिवादी की ओर से पीठ का ध्यान मा0 राष्ट्रीय आयोग द्वारा पुनरीक्षण सं0-3099/2005 Tractors and Farm Equipments Ltd. Vs. K.N. Mallappa की ओर आकर्षित कराया गया, जिसमें मा0 राष्ट्रीय आयोग द्वारा यह व्यवस्था दी गई है कि यदि प्रश्नगत वाहन (कार) को क्रय करने के पश्चात बार-बार मरम्मत के लिए गैराज में लाया जाता है, तो यह क्रेता की परेशानी को स्पष्ट करता है और मा0 राष्ट्रीय आयोग के समक्ष प्रस्तुत प्रकरण में प्रश्नगत वाहन को मरम्मत के लिए डीलर के यहॉ रखा दिया गया था और एक माह से अधिक का समय व्यतीत हो चुका था एवं डीलर/निर्माता कम्पनी के लिए यह अपेक्षित था कि वह प्रश्नगत वाहन को परिवादी की संतुष्टि में सही करवाता और परिवादी से कहता कि अपने वाहन को ले जाए, परन्तु डीलर/निर्माता कम्पनी द्वारा इस संदर्भ में कोई कार्यवाही नहीं की गई, ऐसी स्थिति में जिला मंच द्वारा वाहन को बदलकर दूसरा वाहन देना अथवा वाहन की कीमत की बावत अदायगी को सही पाया गया है।
-8-वर्तमान प्रकरण में परिवादी पक्ष द्वारा प्रश्नगत वाहन को क्रय किया जाना अविवादित है और वाहन को क्रय किये जाने के थोडे समय बाद से ही त्रुटि का होना पाया गया और इस त्रुटि का निराकरण भी विपक्षीगण की ओर से किया गया और कुछ पुर्जे भी बदले गये, यह तथ्य अविवादित है, परन्तु जो पुर्जे बदले गये एवं जो त्रुटि थी वह निर्माण सम्बन्धी त्रुटि थी, यह तथ्य वर्तमान प्रकरण में प्रमाणित नहीं है, इसके विपरीत विपक्षीगण की ओर से अपने इंजीनियर से जॉच कराकर स्पष्ट रूप से यह कहा गया कि प्रश्नगत वाहन में किसी प्रकार की त्रुटि नहीं है एवं परिवादी प्रश्नगत वाहन को ले जाना नहीं चाहता है और वह वास्तव में प्रश्नगत वाहन के स्थान पर नया वाहन अथवा वाहन का मूल्य ही प्राप्त करना चाहता है, जो वारण्टी की शर्तो के अनुसार सम्भव नहीं है। अत: उक्त वर्णित व्यवस्था का कोई लाभ वर्तमान मुकदमें के तथ्य को देखते हुए परिवादी को प्राप्त नहीं है।
परिवादी के विद्वान अधिवक्ता द्वारा पीठ का ध्यान Swaraj Mazda Ltd. Vs. P.K. Chakkappore and Anr. II(2005) CPJ 72 NC की ओर आकर्षित किया गया। उक्त प्रकरण में वाहन को बदल कर दूसरा वाहन एवं विकल्प में वाहन की कीमत अदा किये जाने हेतु आदेश पारित किया गया है, उक्त आदेश से क्षुब्ध होकर मा0 राष्ट्रीय आयोग के समक्ष अपील योजित की गई। मा0 राष्ट्रीय आयोग द्वारा अपील में इस आशय का आदेश पारित किया गया कि परिवादी चलता हुआ वाहन प्राप्त करने का अधिकारी है और इस संदर्भ में विपक्षी/बीमा कम्पनी को आदेशित किया गया कि वह स्वतंत्र इंजीनियर से वाहन के बारे में जॉच करा ले और वाहन के जो पुर्जे खराब है, उन्हें वह बदलवा दे एवं मरम्मत और पुर्जे बदलने के पश्चात वाहन को पनु: सक्षम विशेषज्ञ से जॉच कराकर परिवादी को उपलब्ध करा दे। वर्तमान प्रकरण में जैसा ऊपर बताया गया है कि वाहन में निर्माण सम्बन्धी त्रुटि का होना प्रमाणित नहीं है और विपक्षी द्वारा वाहन को दुरूस्त कर दिया गया है, ऐसी स्थिति में उपरोक्त वर्णित नजीर में प्रतिपादित व्यवस्था का कोई लाभ वर्तमान प्रकरण के तथ्य को देखते हुए परिवादी को उपलब्ध नहीं है।
-9-विपक्षीगण द्वारा इस बात पर भी विशेष बल दिया गया कि प्रश्नगत वाहन कम्पनी द्वारा क्रय किया गया था और व्यावसायिक प्रयोग के लिए क्रय किया गया था, अत: परिवादी उपभोक्ता की श्रेणी में नहीं आता है। इस संदर्भ में इतना ही कहना पर्याप्त है कि प्रश्नगत वाहन क्रय किया गया और वाहन का प्रयोग परिवादी सं0-2 द्वारा व्यक्तिगत रूप से किये जाने का भी अभिवचन है एवं सेवा की कमी का अभिवचन करते हुए परिवाद प्रस्तुत किया गया है, अत: विपक्षीगण का उपरोक्त वर्णित तर्क स्वीकार किये जाने योग्य नहीं है।
पीठ इस निष्कर्ष पर पहुंचती है कि प्रश्नगत वाहन में निर्माण सम्बन्धी त्रुटि होना प्रमाणित नहीं किया जा सका है एवं कोई विशेषज्ञ आख्या इस संदर्भ में नहीं है और जो त्रुटियॉ अभिवचित की गई हैं, उनका निराकरण विपक्षीगण की ओर से किया जा चुका है। वर्तमान प्रकरण में विपक्षीगण के कृत्य में सेवा की कमी का होना प्रमाणित नहीं है एवं परिवादी प्रश्नगत वाहन के स्थान पर नया वाहन अथवा वाहन का कथित मूल्य पाने का अधिकारी नहीं है। तद्नुसार प्रस्तुत परिवाद खण्डित किये जाने योग्य है।
आदेश प्रस्तुत परिवाद खण्डित किया जाता है।
वाद व्यय पक्षकार अपना-अपना स्वयं वहन करेंगे।
(जे0एन0 सिन्हा) (संजय कुमार) पीठासीन सदस्य सदस्य हरीश आशु., कोर्ट सं0-3 [HON'BLE MR. Jitendra Nath Sinha] PRESIDING MEMBER [HON'BLE MR. Alok Kumar Bose] MEMBER [HON'BLE MR. Ram Charan Chaudhary] MEMBER [HON'BLE MR. Jugul Kishor] MEMBER [HON'BLE MRS. Smt Balkumari] MEMBER [HON'BLE MR. Raj Kamal Gupta] MEMBER [HON'BLE MR. Sanjay Kumar] MEMBER