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Lok Sabha Debates

General Discussion On The Budget (Railways) 2004-2005 And Demands For Grants On ... on 7 July, 2004

14.20 hrs. RAILWAY BUDGET – GENERAL DISCUSSION AND DEMANDS FOR GRANTS ON ACCOUNT—RAILWAYS Title: General discussion on the Budget (Railways) 2004-2005 and Demands for Grants on account (Railways) – 2004-05.

MR. DEPUTY-SPEAKER: Now items 14 and 15 will be taken together. Time allotted by the Business Advisory Committee for both the items is only 10 hours, and I would request the hon. Members to be very brief in their speeches.

Motion moved:

"That the respective sums not exceeding the amounts shown in the fourth column of the Order Paper be granted to the President of India out of the Consolidated Fund of India, on Account, for or towards defraying the charges during the year ending the 31st day of March, 2005, in respect of the head of Demands shown in the second column thereof – Demand Nos. 1 to 16. "
 

श्री सुशील कुमार मोदी (भागलपुर):उपाध्यक्ष महोदय, मैं रेल बजट पर बोलने के लिए खड़ा हुआ हूं। कल रेल मंत्री जी ने लगभग दो घंटे का रेल बजट पढ़ा है। शायद वह अभी तक के संसदीय इतिहास का सबसे लम्बा रेल बजट रहा होगा। इतने लम्बे समय तक के लिए रेल बजट पढ़ा गया और मुझे लगता है कि शायद रेल मंत्री ने इतना ही समय रेल बजट बनाने में भी दिया। दो घंटे रेल बजट पढ़ने में और पूरा रेल बजट तैयार करने में रेल मंत्री जी की जो सहभागिता रही है, वह मात्र दो घंटे की रही है।...(व्यवधान) अगर रेल मंत्री ने इस पर अधिक समय दिया होता और अधिक मेहनत की होती तो शायद और बेहतरीन रेल बजट पेश किया जा सकता था। इस रेल बजट में न तो कोई रीजन है और न कोई द्ृष्टि है और न कोई पहल है। रेल मंत्री जी ने यह कहा है कि रेल को...(व्यवधान) उन्होंने कहा है कि रेल को दुनिया की सबसे बेहतरीन रेल सेवा में परिवर्तित करके दिखाएंगे। जिन लोगों ने बिहार को देश के सबसे निकृष्ट राज्य में परिवर्तित कर दिया। मुझे डर है कि कहीं वे लोग रेल को भी बिहार न बना दें। ...(व्यवधान) कल रेल मंत्री जी ने अपने भाषण में अनेक बार श्रीमती सोनिया गांधी जी का जिक्र किया और कहा कि उन्होंने उनसे प्रेरणा ग्रहण की है, इसलिए उनको धन्यवाद भी दिया। परंतु वास्तव में धन्यवाद तो श्री नीतीश कुमार जी को और श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी की सरकार के लोगों को देना चाहिए क्योंकि उन्होंने जो रेल बजट पेश किया,...(व्यवधान)

उपाध्यक्ष महोदय : मैं माननीय सदस्यों से रिक्वेस्ट करना चाहता हूं कि जो कोई भी माननीय सदस्य अपनी सीट से बोलता है तो अगर वह दूसरे मैम्बर को डिस्टर्ब करेगा तो वे लोग भी इनको डिस्टर्ब करेंगे।

श्री सुशील कुमार मोदी: उपाध्यक्ष महोदय, मैं पहली बार बोल रहा हूं। इसीलिए इनसे आग्रह कीजिए कि ये लोग मुझे डिस्टर्ब न करें।

उपाध्यक्ष महोदय : यह इनकी मेडन स्पीच है। इसलिए आप इनको बोलने दें।

श्री सुशील कुमार मोदी: मेरा अनुरोध है कि ये लोग शांत रहें, मुझे टोंके नहीं और हम कुछ भी बोलें, हमें शांत होकर सुनें। ...(व्यवधान) पिछले ६ वर्षों से मैं ...(व्यवधान)

श्री आलोक कुमार मेहता (समस्तीपुर): उपाध्यक्ष महोदय, बिहार को निकृष्ट राज्य कहा जा रहा है। ...(व्यवधान)

श्री सुशील कुमार मोदी: उपाध्यक्ष महोदय, मैं यह कह रहा हूं कि १५ वर्षों में देश के अंदर सबसे निचले पायदान पर आपने बिहार को पहुंचा दिया औऱ वे लोग कह रहे हैं कि हम रेल को दुनिया की सबसे सर्वश्रेष्ठ सेवा बनाएंगे। मुझे डर है कि कहीं पूरा रेल विभाग ही बिहार न बन जाए। मैं केवल यही आशंका व्यक्त करना चाहता हूं। पूर्व रेल मंत्री नीतीश कुमार जी ने जो काम किया था,...(व्यवधान)

श्री राम कृपाल यादव (पटना) : उपाध्यक्ष महोदय, बिहार को निकृष्ट राज्य बता रहे हैं।...(व्यवधान)

उपाध्यक्ष महोदय : आप जरा बैठ जाइए।

...( व्यवधान)

उपाध्यक्ष महोदय : इनकी बात रिकार्ड में नहीं जाएगी।

... (Interruptions)…… * श्री सुशील कुमार मोदी:उपाध्यक्ष महोदय, मुझे इस बात की प्रसन्नता है कि रेल मंत्री ने पिछले ६ वर्षों में एन.डी.ए. सरकार की भूरि-भूरि प्रशंसा की है और उन्होंने अपने भाषण के अंदर कहा कि ६ वर्षों में एन.डी.ए. की सरकार ने रेल के क्षेत्र में बहुत महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इसकी उन्होंने अपने भाषण में विस्तार से चर्चा की है। इसके लिए मैं रेल मंत्री को एन.डी.ए. की ओर से धन्यवाद देना चाहूंगा।

उपाध्यक्ष महोदय, रेल बजट का पूरे देश के अंदर इसलिए स्वागत किया जा रहा है, क्योंकि इसमें मालभाड़े और यात्री किराए में कोई वृद्धि नहीं की गई। वर्तमान रेल मंत्री के बजाय इसका श्रेय नीतीश कुमार जी को और अटल बिहारी जी की सरकार को मिलना चाहिए, क्योंकि पिछले छ: वर्षों में उनकी सरकार ने बेहतरीन प्रदर्शन किया, उसी प्रदर्शन का परिणाम है कि वर्तमान सरकार को डीजल और पेट्रोल के दाम में वृद्धि के बाद भी माल भाड़े और यात्री किराए में वृद्धि नहीं करनी पड़ी। इसका श्रेय अगर किसी को जाता है तो एनडीए की सरकार और नीतीश कुमार जी को जाता है।…( व्यवधान)

उपाध्यक्ष महदोय : पहले उनको बोलने तो दो।

श्री सुशील कुमार मोदी: उपाध्यक्ष महोदय, रेल मंत्री ने स्वयं स्वीकार किया है कि पिछले साल माल ढुलाई का लक्ष्य जो ५५० मलियन टन रखा था, वह लक्ष्य एक्सीड कर गया और ५५७.३९ मलियन टन माल ढुलाई का लक्ष्य हासिल किया गया, यानि यह भी इन्होंने एनडीए की सरकार की उपलब्धि को ही गिनाया।

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* Not Recorded     यह पिछले साल की तुलना में ३८.६५ मलियन टन ज्यादा था। इस साल ५८० मलियन टन का लक्ष्य रखा गया है। रेल मंत्री ने यह भी स्वीकार किया कि यात्री ट्रेफिक में तीन प्रतिशत की वृद्धि हुई है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि २००३-२००४ में रेलवे का जो संचालन व्यय है, उसमें ४९१ करोड़ रुपए की बचत हुई है। रेल मंत्री ने यह भी कहा कि आपरेटिंग रेशो ९४.१ प्रतिशत था, वह ९२.१. प्रतिशत रहने का अनुमान है। रेल मंत्री ने यह भी स्वीकार किया है कि पिछले पांच वर्षों में निरंतर रेल दुर्घटनाओं में कमी आई है। उन्होंने कहा कि जहां २००१-२००२ में ४७३ रेल दुर्घटनाएं हुई थीं, वहीं एनडीए के शासनकाल २००३-२००४ में घटकर ३२५ हो गईं। यह स्वयं रेल मंत्री ने स्वीकार किया है।

उपाध्यक्ष महदोय, रेल दुर्घटनाओं में कमी आई है, लेकिन ये लोग कहते थे कि नीतीश कुमार को लोहा नहीं सुहाता है, उनकी आलोचना करते थे। रेल की सुरक्षा और यात्रियों की सुरक्षा दो महत्वपूर्ण पहलू हैं। रेल की सुरक्षा के लिए रेल मंत्री ने अपने कमरे में भगवान विश्वकर्मा की तस्वीर लगा ली है और कहते हैं कि रेल को भगवान भरोसे छोड़ दिया है। अगर भगवान विश्वकर्मा ही रेल की सुरक्षा करेंगे तो आप किसलिए वहां पर बैठे हैं। इसलिए रेल सुरक्षा और रेल यात्री सुरक्षा दोनों को विश्वकर्मा भगवान के भरोसे इन्होंने छोड़ दिया है।…( व्यवधान) उपाध्यक्ष महोदय, मेरी मेडन स्पीच है। अगर ये लोग इस तरह बीच में टोकेंगे तो कल जब ये लोग बोलेंगे तो हम भी नहीं बोलने देंगे। हम लोग विपक्ष में हैं।

MR. DEPUTY-SPEAKER: No running commentary please.

श्री सुशील कुमार मोदी:एनडीए की सरकार ने १७,००० करोड़ रुपए का स्पेशल रेलवे सेफ्टी फंड क्रिएट किया था। उसके तहत काम चल रहा था कि कैसे पुराने पुलों की मरम्मत की जाए और नए पुलों का निर्माण किया जाए। लेकिन कल मैंने रेल मंत्री के बजट भाषण में रेल सुरक्षा के बारे में कोई नई बात नहीं सुनी। इनके रेल मंत्री बनते ही एक रेल दुर्घटना हुई। उसका कारण जो भी हो, रेल दुर्घटनाएं आगे भी हो सकती हैं, लेकिन उसके लिए जो कड़े कदम उठाने चाहिए और प्रयास करने चाहिए, वे सब इस रेल बजट में नहीं दिखाई पड़ते हैं।

दूसरा महत्वपूर्ण विषय रेल यात्रियों की सुरक्षा का है। विशेषकर मैं जिस राज्य से आता हूं वहां के लोगों ने रात को रेल में यात्रा करना कम कर दिया है। मेरे संसदीय क्षेत्र भागलपुर से फरक्का एक्सप्रेस गाड़ी चलती है, मैंने दिन में यात्रा करना शुरू कर दिया है, क्योंकि रात में यात्रा करने का मतलब है कि यात्री लूट लिया जाएगा।

उपाध्यक्ष महोदय, पता नहीं यह संयोग है या दुर्भाग्य कि जिस दिन इस सरकार ने शपथ ग्रहण की, तब से लेकर अब तक यानि एक-डेढ़ महीने में बिहार में २४ रेल डकैती की घटनाएं हो चुकी हैं। कल रेल बजट पेश हुआ, परसों पूर्वा एक्सप्रेस के अंदर डेयरी-भसवां रोड के बीच में लोगों को लूट लिया गया और छ: यात्री घायल हो गए। ९ जून को एसी कोच में लोगों को लूटकर हत्या की गयी। तीन जून को दून एक्सप्रेस में एक यात्री की गोली मारकर हत्या की गयी। इसी तरह से २७ मई को बीएसएफ के एक इंस्पेक्टर की गोली मारकर हत्या की गयी। क्या इसी तरह से आप रेल यात्रियों की सुरक्षा करेंगे। माननीय नीतीश कुमार जी ने सभी दलों के सहयोग से आरपीएफ में संशोधन करवाया। एक जुलाई से आरपीएफ रेल सुरक्षा का इंतजाम करने जा रही है। लेकिन अगर स्थानीय सरकार उनसे सहयोग नहीं करेगी तो कैसे चलेगा?

उपाध्यक्ष जी, बिहार की माननीय मुख्य मंत्री महोदया ने कह दिया कि ट्रेन डकैतियों को रोका नहीं जा सकता है। अगर किसी राज्य की मुख्यमंत्री यह कहती हैं तो बिहार के लोगों को डकैतियों से कैसे सुरक्षा मिलेगी, वे ट्रेन में कैसे यात्रा करेंगे। उपाध्यक्ष जी, यह मामला बहुत गंभीर है और विशेषकर बिहार और अगल-बगल के राज्यों में जो ट्रेन-डकैतियां हो रही हैं उनको रोका जाना चाहिए। उपाध्यक्ष जी, आरपीएफ के अंदर आठ हजार नयी बहाली करने का सरकार ने निर्णय किया है लेकिन यह कोई नया निर्णय नहीं है, यह पहले की सरकार का निर्णय है। आज इसमें २४ हजार लोगों को बहाल करने की आवश्यकता है। अगर एक-एक ट्रेन में ६-६ लोग भी आप रखें तो भी २४ हजार लोगों को बहाल करने की आवश्यकता पड़ेगी। मुझे बहुत दु:ख होता है कि आरपीएफ में बहाली का तरीका बदल दिया गया है। बदलने से पहले बहाली रेलवे रिक्रुटमेंट बोर्ड के माध्यम से होती थी। उससे पहले डिपार्टमेंटल बहाली होती थी। माननीय नीतीश कुमार जी ने जब देखा कि वहां पर बहुत भ्रष्टाचार होता है तो उन्होंने आरआरबी के द्वारा नियुक्तियां शुरु करवाईं। अब भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने के लिए आरआरबी से नियुक्तियां करने के अधिकार को छीनकर डिपार्टमेंटल कमेटी के द्वारा किया जा रहा है ताकि राजनैतिक लोगों की चटि्ठयों के आधार पर बहाली होती रहे। मैं मांग करता हूं कि आरपीएफ की बहाली को आरआरबी के द्वारा ही किया जाना चाहिए। यात्रियों की सुरक्षा और रेल की सुरक्षा से लोगों का ध्यान बंटाने के लिए सारी बहस को कुल्हड़, खादी, सत्तू और मट्ठा के ईर्द-गिर्द समेट दिया गया है। पूरे देश की जनता चर्चा कर रही है कि कुल्हड़ हो या न हो, खादी हो या न हो, सत्तू चलेगा या नहीं चलेगा, मट्ठा हो या न हो। मैं कुल्हड़ और खादी के विरोध में नहीं हूं बल्कि मैं तो इनके समर्थन में हूं। यह कोई इस सरकार की देन नहीं है। सन् १९७७ में जब माननीय जार्ज साहब रेल मंत्री बने थे तब कुल्हड़ का प्रयोग किया गया था…( व्यवधान)कांग्रेस के लोग बताएं कि उन्होंने कुल्हड़ के प्रयोग को क्यों बंद करवाया…( व्यवधान)उपाध्यक्ष जी, कुल्हड़, सत्तू, खादी, मट्ठा उपयोग में लाना स्वागत योग्य कदम है लेकिन क्या इन्हीं कदमों से रेल का विकास होगा। आज सारी बातों को इन्हीं के ईर्द-गिर्द लाकर खड़ा कर दिया गया है। कुल्हड़ को पार्लियामेंट के सेंट्रल हॉल में हरेक टेबल पर उलटा करके दिखाने के लिए रख दिया गया है। चार दिन पहले में मुम्बई से पटना गया था। मुझे तो एक भी स्टेशन पर कुल्हड़ में चाय बेचता कोई नहीं मिला।

श्री रघुनाथ झा (बेतिया): आप किस-किस स्टेशन पर रुके थे।

उपाध्यक्ष महोदय : रघुनाथ जी, मेरी बात आप सुन लीजिए। अगर आप बीच में बोलेंगे तो ये भी आपके बोलने पर डिस्टर्ब करेंगे। इससे क्या फायदा होगा। इसलिए आप बीच में न बोलें। ये जो बीच में बोल रहे हैं इसे निकाल दिया जाए।

...( व्यवधान)...* श्री सुशील कुमार मोदी:कुल्हड़ का प्रयोग ईमानदारी के साथ होना चाहिए। मैं जिस राज्य से आता हूं वहां भी सरकार से जुड़े लोगों ने चरवाहा विश्वविद्यालय शुरु किया था और यूनेस्को से पुरस्कार भी लिया था। लेकिन आज बिहार में एक भी चरवाहा विश्वविद्यालय नहीं चल रहा है। जो हाल चरवाहा विद्यालय का हुआ है, वही हाल इसका भी न हो जाए। क्या रेल के अन्दर इस तरह कुल्लड़, खादी प्रारम्भ कर पायेंगे।…( व्यवधान)खादी का प्रयोग होना चाहिए। हम इसका स्वागत करते हैं, लेकिन जिन लोगों ने बिहार के अन्दर बुनकरों को बर्बाद कर दिया…( व्यवधान)

मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) भुवन चन्द्र खंडूडी (गढ़वाल) : यह बात करने का क्या तरीका है। सदन में कोई सभ्यता है या नहीं। उनकी बारी जब आएगी, तब वे बोलें।…( व्यवधान)

श्री राम कृपाल यादव:फालतू बोलेंगे, तो कैसे बोलने देंगे।

श्री शिवराज सिंह चौहान (वदिशा): फालतू बात आप कर रहे हैं। …( व्यवधान)सदन की गरिमा को नीचा करने की कोशिश हो रही है। …( व्यवधान)

उपाध्यक्ष महोदय : आप बैठ जाइए।

..( व्यवधान)

। ग़्द्ृ ङड्ढहद्ृद्धड्डड्ढड्ड         श्री सुशील कुमार मोदी : महोदय, बिहार के अन्दर लोगों का ३० करोड़ का बकाया है और वहां सारी खादी संस्थायें मृतप्राय हो गई हैं। बिहार एक ऐसा अकेला राज्य है, जहां खादी पर सब्सिडी खत्म कर दी गई है। वे लोग खादी की बात कह रहे हैं। यह केवल सुरक्षा से ध्यान बांटने के लिए किया जा रहा है। यह मैं कह चुका हूं कि हम खादी का स्वागत करते हैं …( व्यवधान)

उपाध्यक्ष महोदय : आप रेल बजट पर ही अपनी बात कहें।

...( व्यवधान)

उपाध्यक्ष महोदय : श्री यादव, आप बैठिए।

...( व्यवधान)

श्री सुशील कुमार मोदी: महोदय, मट्ठा तो पहले भी ट्रेन में परोसा गया था, यह कोई नई बात उन्होंने नहीं की है। मैं उम्मीद में था कि सत्तू की घोषणा की जाएगी, लेकिन पता नहीं प्रधान मंत्री जी के दबाव में या किसी अन्य कारण, सत्तू की घोषणा वापिस ले ली गई। मैं चाहूंगा कि सत्तू का प्रयोग और प्लेट्स के स्थान पर पत्तल में खाना परोसा जाए। इससे लाखों लोगों को रोजगार मिलेगा। मैं माननीय रेल मंत्री जी के सुझाव देना चाहूंगा कि पत्तल के प्रयोग को प्रारम्भ किया जाए, लेकिन ईमानदारी से किया जाए। कहीं इसका हाल भी चरवाहा विद्यालय की तरह न हो जाए और उन हरिजन बच्चों की तरह से न हो जाए, जिन के सिर में आपने साबुन लगाने का काम किया और बाद में उन बच्चों को भूल गए। वही हाल कहीं कुल्लहड़, सत्तू और मट्ठा का भी न हो जाए।

महोदय, रेल मंत्री जी ने अपने भाषण में कहा है कि वे फल-सब्जी रैफ्रिजरेटेड वैन यानि वातानुकूलित वैन में पूरे देश में भेजने का काम करेंगे। मैं आपके माध्यम से सदन को बताना चाहता हूं कि २० जून को माननीय रेल मंत्री जी ने पटना से दिल्ली के लिए रैफ्रिजरेटेड वैन को रवाना किया। उस वैन में १८ टन सामान लादना था, लेकिन सात या साढ़े सात टन माल ही लादा गया। ऐसी स्थिति में परवल १५ रुपए के बजाए ३५ रुपए किलो ही बिकता रहा। श्री बवनराम इन्हीं के आदमी हैं, उसको ७०० केजी का भुगतान नहीं किया गया। इसके बाद फिर २७ जून तक कोई रैक दिल्ली के लिए नहीं आई और सब्जियां कूड़े के भाव बिकती रहीं। यही वजह रही कि ४ जुलाई तक कोई बुकिंग नहीं थी। …( व्यवधान)

इन घटनाओं से …( व्यवधान)

रेल मंत्री (श्री लालू प्रसाद) : àÉcÉänªÉ, .... …( व्यवधान)

श्री सुशील कुमार मोदी:महोदय, इनके ऊपर भ्रष्टाचार के गम्भीर आरोप है और एनडीए ने फैसला किया है कि लालू प्रसाद जी को बोलने नहीं देंगे …( व्यवधान)

उपाध्यक्ष महोदय : मैं सदन में खड़ा हूं ।

...( व्यवधान)

श्री राम कृपाल यादव: यह क्या हो रहा है। …( व्यवधान)

श्री सुशील कुमार मोदी:आज तक परवल का भुगतान नहीं हुआ। दक्षिण भारत का भी यही हाल है। …( व्यवधान)

उपाध्यक्ष महोदय: मैं आप सब से यह रिकवैस्ट करना चाहता हूं कि कोई भी ऑनरेबल मैम्बर जब स्पीच करता है तो उसे पेशंस से सुनने की कृपा करें। अगर कोई इस तरफ से बोलता है और दूसरी तरफ से रनिंग कमैंट्री होती है तो वह अच्छी बात नहीं है।

…( व्यवधान)

MR. DEPUTY-SPEAKER: I will not allow running commentary. There should be no running commentary.

… (Interruptions)

SHRI BRAJA KISHORE TRIPATHY (PURI): Unparliamentary words should be expunged from the proceedings. … (Interruptions)

उपाध्यक्ष महोदय: मैंने उसे एक्सपंज करने के लिए कह दिया है।

…( व्यवधान)

श्री सुशील कुमार मोदी:उपाध्यक्ष महोदय, सरकार ने नई बुक स्टॉल पॉलिसी घोषित की है। …( व्यवधान)

श्री राम कृपाल यादव:…( व्यवधान) * … उपाध्यक्ष महोदय: राम कृपाल जी, आप जिस लैंग्वेज को यूज कर रहे हैं, वह यूज नहीं करनी चाहिए।

…( व्यवधान)

उपाध्यक्ष महोदय: उन्होंने जो बोला है, उसे एक्सपंज कर दिया जाएगा।

…( व्यवधान)

MR. DEPUTY-SPEAKER: Whatever unparliamentary words Shri Ram Kripal Yadav has said will be expunged.

… (Interruptions)

श्री लाल मुनी चौबे (बक्सर) : उपाध्यक्ष महोदय, यदि ऐसा ही चलेगा तो यह बोल नहीं पाएंगे और इनका बोलना नामुमकिन हो जाएगा। …( व्यवधान)आपने कहा कि कोई रनिंग कमैंट्री नहीं होनी चाहिए लेकिन आपके कहने के बावजूद यह आपकी बात सुन नहीं रहे हैं।…( व्यवधान)

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* Expunged as ordered by the Chair श्री शिवराज सिंह चौहान: उपाध्यक्ष महोदय, क्या संसद में ऐसी भाषा का प्रयोग होगा?…( व्यवधान)

उपाध्यक्ष महोदय: अनपार्लियामैंट्री शब्द रिकॉर्ड में नहीं जाएंगे।

…( व्यवधान)

श्री शिवराज सिंह चौहान:उपाध्यक्ष महोदय, यह असंसदीय भाषा का प्रयोग कर रहे हैं। …( व्यवधान)

उपाध्यक्ष महोदय: मेरी रिकवैस्ट यह है कि आप सब ऑनरेबल मैम्बर्स हैं और जिम्मेदार हैं। आप यहां चुन कर आए हैं। आपको इस वक्त पूरी दुनिया वाच कर रही है। इसलिए ऐसा जुलूस निकालने की कोशिश मत करिए। जब कोई माननीय सदस्य इस तरफ से बोलता है तो दूसरी तऱफ से रनिंग कमैंट्री करने की जरूरत नहीं है। आपको भी बोलने का समय मिलेगा। आप उस समय जो कहना है कह दीजिए। I will not allow any unparliamentary language.

… (Interruptions)

श्री रघुनाथ झा : क्या यह अनपार्लियामैंट्री लैंग्वेज यूज करने के लिए संसद में आए हैं? …( व्यवधान)

उपाध्यक्ष महोदय: मैं अनपार्लियामैंटरी लैंग्वेज न इनको और न आपको यूज करने दूंगा।

…( व्यवधान)

MR. DEPUTY-SPEAKER: There should be no running commentary either from this side or from that side.

… (Interruptions)

MR. DEPUTY-SPEAKER: There should be no running commentary at all.

… (Interruptions)

उपाध्यक्ष महोदय: यदि इधर से कोई माननीय सदस्य बोलेगा लेकिन उधर से कोई रनिंग कमैंट्री करेगा तो मैं इधर वालों का साथ दूंगा।

                           

श्री सुशील कुमार मोदी:उपाध्यक्ष महोदय, माननीय रेल मंत्री जी ने नई बुक स्टाल पौलिसी की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि ए.एच.व्हीलर अंग्रेज थे जो अभी तक इस देश में बुक स्टाल चला रहे हैं। शायद उन्हें यह मालूम नहीं कि नाम ए.व्हीलर अंग्रेज का है लेकिन वे इलाहाबद के रहने वाले बंगाली हैं जो बुक स्टाल पिछले ७० साल से चला रहे हैं। मैं एच.व्हीलर के पक्ष में नहीं हूं। मैं माननीय रेल मंत्री जी को बताना चाहूंगा कि रेलवे के १५० साल पूरे होने पर एच.व्हीलर को शुभकामना संदेश भेजा गया जिसमें लिखा था :

"I hope the company will make available reading materials in the interiors."श्री नरसिंह राव, पूर्व प्रधान मंत्री जी ने श्रीमती सोनिया गांधी की उपस्थिति में एच. व्हीलर कीRajiv Gandhi – tributes and memories नाम की एक पुस्तक का विमोचन भी किया गया है। माननीय रेल मंत्री जी ने देश के रेलवे स्टेशन पर नई बुक स्टाल पौलिसी लागू की है, उसका हम स्वागत करते हैं लेकिन देश के ८ हजार रेलवे स्टेशनों में से केवल ३७० स्टेशनों पर एच.व्हीलर के बुक स्टाल चलते हैं। अगर आप चाहते हैं तो उन्हें हटाइये लेकिन मंत्री जी के बयान से ऐसा लगता है कि उनके लिये सब से बड़ी समस्या बुक स्टाल की है और रेल एवं यात्रियों की सुरक्षा का कोई मतलब नहीं है।
उपाध्यक्ष जी, माननीय रेल मंत्री जी ने रेल के १० लाख मीटि्रक टन स्क्रैप के डिस्पोज़ल किये जाने का जिक्र किया है। उसकी पृष्ठभूमि क्या है? गोरखपुर से लेकर बरौनी तक स्क्रैप ही स्क्रैप है। उसकी नीलामी के वक्त माफिया द्वारा लूट होती है। यह लॉ एंड ऑर्डर का विषय है जिसे राज्य सरकार नियंत्रित करने का प्रयास क्यों नहीं करती? स्क्रैप की बिक्री में धांधली होती है लेकिन स्क्रेप…( व्यवधान)
श्री रघुनाथ झा : उपाध्यक्ष जी, मेरा व्यवस्था का प्रश्न है। घोटाला करने वाले तत्वों को यह काम देने के लिये इनकी सरकार…( व्यवधान)
MR. DEPUTY-SPEAKER : This is not a point of order. आपका किस रूल के अंडर व्यवस्था का प्रश्न है?
श्री रघुनाथ झा : उपाध्यक्ष जी, मेरे कहने का मतलब(Interruptions) … * MR. DEPUTY-SPEAKER : Please sit down. आपकी बात रिकार्ड में नहीं जायेगी।
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* Not Recorded     श्री सुशील कुमार मोदी:उपाध्यक्ष महोदय, स्क्रैप की नीलामी बंद कीजिये, हमें कोई आपत्ति नही है लेकिन उसका मूल कारण दूसरा है कि जिन राज्यो में स्क्रैप की नीलामी होती है, वहां लॉ एंड ऑर्डर की हालत इतनी खराब है कि स्क्रैप की बिक्री नहीं हो पाती है।
उपाध्यक्ष महोदय, मुझे इस बात का दुख है कि कल माननीय रेल मंत्री जी ने विकलागों के बारे में जिन अभद्र शब्दों का प्रयोग किया, उससे सभी मूक और बधिर लोग दुखी हैं। आपने आज अखबारो में पढ़ा होगा कि मूक और बधिर संस्थाओं का बयान आया है कि रेल मंत्री जी को उनसे क्षमा-याचना करनी चाहिये। उन लोगों के लिये उपयुक्त शब्दों का प्रयोग किया जाना चाहिये। ट्रेनों के अंदर जो विकलांग चढ़ते हैं, उनके लिये रैम्प की व्यवस्था होनी चाहिये। ऐसी रेल बोगियां होनी चाहिये जिसमें वे ठीक से बैठ सकें और बोगी में इधर-उधर जा सकें। उपाध्यक्ष महोदय, पिछली सरकार के रेल मंत्री जी ने राष्ट्रीय रेल विकास योजना की घोषणा की थी और १५ हजार करोड़ रुपये की लागत से ५ वर्षों में स्वर्णिम चतुर्भुज तथा रेल-कनेक्टिविटी और चार मेगा बिजेज का जिक्र किया था। मुझे पता नहीं किस प्रकार इनके पदाधिकारी भूल गये और उनका कहीं जिक्र नहीं है। राष्ट्रीय रेल विकास योजना का माननीय रेल मंत्री जी के बजट में कहीं जिक्र नहीं है।
उपाध्यक्ष जी, एन.टी.पी.सी. की भागीदारी से नबी नगर में ७ हजार मेगावाट का एक बिजली का प्लांट लगाये जाने का प्रस्ताव इंटैरिम रेल बजट में पेश किया गया था, जिसका सर्वे भी पूरा हो गया है और जिसके लिये स्टेट पौल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की अनुमति की आवश्यकता थी। मुझे नहीं मालूम कि नबी नगर के थर्मल पॉवर प्लांट को काटकर छपरा में पहिये के कारखाना लगाये जाने की घोषणा कर दी गई है जब कि बंगलौर में जो पहिये बनाने का कारखाना है, वह पहले ही से घाटे में चल रहा है। इस रेल बजट के अंदर सर्वे को बजट का हिस्सा बनाया गया है जब कि एन.डी.ए. सरकार के समय उसने अपने बजट में सर्वे का जिक्र नहीं किया था। इसका कारण यह है कि १९४७ से लेकर आज तक जितने सर्वेक्षण किये गये हैं, उन पर एक लाख ५० हजार करोड़ रुपये खर्च किये गये हैं। लेकिन अब एक नई परम्परा शुरु की गई है कि इस बजट भाषण में पांच पेज भर दिये गये और जनता को लुभाने के लिये कहा गया है कि अमुक क्षेत्र में सर्वे होने जा रहा है।
उपाध्यक्ष महोदय, रेल बजट भाषण में विलेज ऑन व्हील का जिक्र किया गया है, जिसका हम स्वागत करते हैं लेकिन मैं जानना चाहूंगा कि सैंकड़ो तीर्थ यात्री बनारस या इलाहाबाद में कैसे ठहर पायेंगे और वे रेलवे स्टेशन से तीर्थ स्थल तक कैसे जायेंगे? मैं चाहता हूं कि इन यात्रियों के लिये भी कोई पैकेज होना चाहिये । रेलवे ऑन व्हील में गरीब लोगों के लिये पैकेज होना चाहिये, उनके रहने, खाने-पीने की व्यवस्था, रेल यात्रियों की सुरक्षा होती तो और ज्यादा अच्छा होता। मेरे कहने का तात्पर्य यह है कि यात्रियों को जितना लाभ मिलना चाहिये था, उतना लाभ मिल नहीं पायेगा।
उपाध्यक्ष महोदय, ४३ हजार करोड़ रुपये की लगभग २३० परियोजनाएं लम्बित हैं, पूरे रेल बजट में आपने कहीं नहीं बताया कि ४३ हजार करोड़ रूपया कहां से आयेगा। मैं रेल यात्रा बढ़ाये जाने और फ्रेट न बढ़ाये जाने का पक्षधर हूं, लेकिन आखिर यह पैसा कहां से आयेगा, इसका आपने कोई प्रावधान नहीं किया, इसका कोई जिक्र नहीं किया।…( व्यवधान)
उपाध्यक्ष महोदय : आप रनिंग कमेन्ट्री क्यों कर रहे हैं, मैं एक बार नहीं, दस बार आपको कह चुका हूं।
श्री सुशील कुमार मोदी: उपाध्यक्ष महोदय, पूर्व रेल मंत्री, नीतीश कुमार जी ने जिन नई रेल गाड़ियों की घोषणा की थी, इसमें केवल उन्हीं को दोहरा दिया गया है, इसमें अधिकांश वही घोषणाएं हैं, जो एन.डी.ए. की पिछली सरकार ने की थीं। १८ जोड़े सम्पूर्ण क्रांति एक्सप्रैस की जो श्री नीतीश कुमार जी ने घोषणा की थी, उन्हीं को इसमें भी दोहरा दिया गया है। लेकिन आपने यह नहीं बताया कि ये कब प्रारम्भ होंगी और सप्ताह में कितने दिन चलेंगी, इसका जिक्र इसमें कहीं नहीं है। मैं कहना चाहूंगा कि रेल मंत्री जी को और गंभीर होने की आवश्यकता है, अगर वह गंभीर नहीं होंगें तो जिस तरह से रेल की दुव्र्यवस्था विशेषकर बिहार में दिखाई पड़ती है। आप श्री नीतीश कुमार जी का अनुसरण करते हुए जो अनरिजव्र्ड जनसम्पर्क एक्सप्रैस की आप गरीबों के लिए बातें करते हैं और पूरे देश में पचासों रेलगाड़ियां चलाते हैं, कहते हैं कि न सैकिंड ए.सी. होगा और न फस्र्ट ए.सी. होगा, केवल अनरिजव्र्ड कम्पार्टमैन्ट होंगे। हजारों मजदूर कमाने के लिए बाहर जाते हैं, उनके लिए रेलगाड़ियां कहां हैं। आपने केवल दो रेलगाडियों की घोषणा की है। अगर आप गरीबों के हितैषी होते तो उन लोगों के लिए आप नई-नई घोषणाएं करते।
उपाध्य़क्ष महोदय, रेल बजट से हम लोगों को घोर निराशा हुई है। हम लोग उम्मीद लगाए बैठे थे कि नई सरकार बनी है, बड़ी-बड़ी घोषणाएं होंगी, लेकिन पूरे रेल बजट में कोई ऐसी घोषणा नहीं है, जो स्वागत योग्य हो। इसलिए मैं अपने भाषण के माध्यम से इस रेल बजट का विरोध करता हूं।
       
चौधरी विजेन्द्र सिंह (अलीगढ़) :उपाध्यक्ष महोदय, मैं आपका आभारी हूं कि आपने मुझे रेल बजट जैसे महत्वपूर्ण विषय पर बोलने का मौका दिया। मुझे खेद है कि सदन नियम और कानून से चलता है, यह भावनाओं और कटुता से नहीं चलता है। मैं एक सम्मानित विधान सभा का सदस्य था, तब मैं सुना करता था कि यह दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण सदन है। लेकिन जब मैंने यहां आकर देखा तो मान्यवर मैं व्यवस्था चाहता हूं। महोदय, रेल विभाग वह विभाग है जो सार्वजनिक जीवन में जनता से कहीं न कहीं, किसी न किसी रूप में जुड़ा हुआ है। रेल मंत्री जी ने रेल विभाग का जो बजट पेश किया है, पूरे देश में आम जनता ने इसकी सराहना की है, क्योंकि यह पहला बजट है जिसमें आम जनता के किराये भाड़े में और माल भाड़े में वृद्धि नहीं की गई है।
उपाध्यक्ष महोदय, अभी माननीय सदस्य मोदी जी बोल रहे थे, कल दो घंटे माननीय लालू जी का भाषण हुआ। तीन बार एन.डी.ए. की सरकार के कार्यकाल में जो नये-नये निर्णय लिये गये थे और जितने गड्ढे इनके द्वारा खोदे गये थे, उस तमाम कार्यकाल पर दो घंटे में वर्तमान सरकार के कामन मनिमम कार्यक्रम के अनुसार माननीय रेल मंत्री जी ने अपनी सोच, सरकार की नीति, सरकार के कार्यक्रम, सरकार की जनता के प्रति जवाबदेही को अपने बजट भाषण में जिस तरह से प्रदर्शित किया है, इसका पूरे देश में आम जनता ने स्वागत किया है। मैं सोनिया जी, प्रधान मंत्री जी और लालू जी को बधाई देना चाहता हूं, जो इंसान जिस माहौल में पैदा होता है, वह इंसान उसके दुख-दर्द और आवाज को पहचानता है, ग्रामीण अंचल की कोख से बेटे के रूप में पैदा होने के बाद लालू जी का यह पहला बजट है, जिसमें आम व्यक्ति के जीवन से जुड़े हुए मुद्दों को नये-नये रूप में लिया गया है। मैं माननीय रेल मंत्री जी को बधाई देना चाहता हूं कि माल भाड़े, निजी माल भाड़े में वृद्धि नहीं हो रही थी और लोग अपना माल भाड़े के ट्रकों में लेकर जाते थे, उसमें उन्होंने दस परसेन्ट की छूट दी है, जिसके कारण रेलवे की आय और माल भाड़े में वृद्धि होगी। तकनीकी कर्मचारियों और रेल कर्मचारियों के लिए नि:शुल्क यात्रा की घोषणा, मूक, विकलांग, वृद्ध आदि इन तमाम लोगों के लिए नि:शुल्क यात्रा की घोषणा हुई है, यह एक ऐतिहासिक घोषणा नहीं है तो क्या है। मैं बताना चाहता हूं कि यह देश बेरोजगारों के कारण पतन के कगार पर है। स्वयं निवर्तमान सरकार के प्रधान मंत्री ने कबूल किया था कि हम रोजगार के साधन नौजवानों को नहीं दे पाये।
महोदय, उसी का एक मुख्य कारण है कि देश में तमाम बेरोजगार युवक पैसे के अभाव में इंटरव्यू के लिए नहीं जा पाते हैं, बहुत से नवयुवक साधन नहीं जुटा पाते हैं। पहली बार किसी सरकार के रेल मंत्री ने बजट में यह घोषणा की है कि जो लोग साक्षात्कार के लिए रेल से जाएंगे, उनसे रेल किराया नहीं लिया जाएगा और उन्हें निशुल्क भेजा जाएगा।
मान्यवर, किसी भी सरकार और किसी भी विभाग के बजट से यह दिखाई देता है कि उस सरकार की सोच क्या है। रेल में खादी का प्रयोग, कुल्हड़ों का प्रयोग और पेय के रूप में रेलवे स्टेशनों पर मठे को उपलब्ध कराने की घोषणाएं स्वागत योग्य हैं। ये तमाम चीजें इस बात को इंगित करती हैं कि जब कुम्हारी उद्योग को बढ़ावा मिलेगा, तो इससे देश के लाखों और करोड़ों लोगों को गांवों में रोजगार मिलेगा। इससे उनके जीवन में उत्थान आएगा और उनकी आय का साधन बनेगा।
मान्यवर, इसी के साथ, रेल बजट में गांधीवादी विचारधारा को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है। गांधी जी, जो देश के पिता कहे जाते हैं और उनके द्वारा खादी को बढ़ावा देने की जो बात कही गई, उसने हमारे देश की आजादी में बहुत बड़ी भूमिका निभाई। रेल मंत्री जी ने रेलों में खादी के प्रयोग को बढ़ावा देने की घोषणा कर के उनके आदर्शों, नीतियों और सिद्धान्तों को बढ़ावा देने का बहुत बड़ा काम किया है। आज हम गांधी जी के आदर्शों को भूलते जा रहे हैं। ऐसे में गांधी जी के आदर्शों को अपनाने की घोषणा कर के उन्होंने गांधी जी की नीति और सिद्धान्तों को बढ़ाने का काम किया है। उनकी घोषणा से निश्चित रूप से गांधी जी के आदर्शों को बढ़ावा मिलेगा। रेलों में खादी के प्रयोग से जो बुनकर खादी हाथ से बुनते थे और अब बेरोजगार हो गए हैं, जिनके आय के साधन समाप्त हो गए हैं, उन्हें रोजी-रोटी मिलेगी। रेल मंत्री का खादी के प्रयोग का निर्णय ऐतिहासिक निर्णय साबित होगा।
मान्यवर, माननीय रेल मंत्री जी ने देश के जम्मू कश्मीर से लेकर कन्या कुमारी तक आने वाले सभी राज्यों और ऐतिहासिक स्थलों को जोड़ने का काम किया है। किसी हिस्से को नहीं छोड़ा है। उन्होंने अपने भाषण में यही कोशिश की है कि देश के हर मुद्दे, छोटी से छोटी बात को, छोटे से छोटे अंशों को भी इसमें किसी न किसी रूप में लिया जाए।
मान्यवर, मैं सिर्फ यही कहना चाहूंगा कि अलीगढ़ इस देश का एक ऐतिहासिक स्थल है। अलीगढ़ में मुस्लिम विश्वविद्यालय है। वहां देश और विदेशों से तमाम स्टूडेंट पढ़ने आते हैं। वह रेल के मुख्य मार्ग पर स्थित है। वहां बहुत सारी इस तरह की समस्याएं हैं जिन्हें दूर किया जाना लाजमी है। वहां दसियों ऐसी रेलगाड़ियां हैं, जो नहीं रुकती हैं। इसलिए मैं चाहूंगा कि जो बिन्दु रेल बजट में जुड़ने से रह गए हों, उन्हें बाद में जोड़ने का कष्ट करें। ८-१० ट्रेनें इस तरह की हैं जो अलीगढ़ में नहीं रुकती हैं। मैं चाहूंगा कि उन्हें वहां रोकने की घोषणा करने की कृपा करें। इन प्रमुख ट्रेनों में हैं- लिच्छवी एक्सप्रैस, सद्क्रांति, संपूर्ण क्रांति, शिव गंगा, गोरखधाम एक्सप्रैस, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एक्सप्रैस एवं पुरुषोत्तम एक्सप्रैस हैं जिन्हें वहां रोके जाने की घोषणा करना आवश्यक है।
मान्यवर, अलीगढ़ चूंकि कृष्ण की जन्मभूमि मथुरा के निकट है, लेकिन इतने लम्बे अरसे के बाद भी, आज तक कोई भी सीधा रेल मार्ग ऐसा नहीं है जो मथुरा को अलीगढ़ से जोड़ता हो। इसका सर्वेक्षण हो चुका है, लेकिन कल जो रेल बजट प्रस्तुत हुआ, उसके सर्वेक्षणों में इसका नाम नहीं था। इसलिए मैं आपके माध्यम से पुन: माननीय रेल मंत्री जी का ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं कि इसे सर्वेक्षण की योजनाओं में डालने की भी घोषणा की जाए।
मान्यवर, अलीगढ़ में जनता का विशेष घनत्व है और वैसे भी बढ़ते हुए जनता के दबाव और विभाग की तकनीकी कार्य-योजना और इतने दबावों के बावजूद माननीय रेल मंत्री जी ने यात्री किराए में कोई बढ़ोत्तरी नहीं की और मालभाड़े में छूट की घोषणा की है। यह इस को सिद्ध करता है कि इस सरकार और रेल मंत्री की मानसिकता क्या है। रेल बजट इस बात को व्यक्त करता है कि सरकार और रेल मंत्री की सोच जनता के साथ है, न कि किसी राजनीतिक द्वेष या भावना से प्रेरित।
मान्यवर, इन्हीं शब्दों के साथ मैं कहना चाहूंगा कि अलीगढ़ में रेलवे के दो ओवरब्रिज बनाया जाना जरूरी है। एक तो रेलवे क्रॉसिंग फाटक पर है, जहां कई ट्रैजडी हो चुकी हैं और दसियों लोग मर चुके हैं। इसलिए इसे बनाना, रेलवे की कार्य-योजना में शामिल किया जाए। दूसरा, अलीगढ़ में एक भव्य तीर्थस्थल है भूमिया, जहां लाखों की संख्या में लोग दर्शनों हेतु आते हैं, लेकिन वहां ओवरब्रिज के अभाव में अनेक दुर्घटनाएं हो चुकी हैं जिनमें दसियों लोग मारे जा चुके हैं। मेरा निवेदन है कि इसे भी रेलवे के ओवरब्रिज बनाने की कार्य योजना में शामिल किया जाए जिससे जनता का भला हो सके।
माननीय उपाध्यक्ष महोदय, रेल विभाग काफी महत्वपूर्ण विभाग है। सामाजिक और लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी भी बजट का विश्लेषण देश की जनता करती है। मैं विश्वास के साथ कहना चाहता हूं कि कल जब से रेल बजट प्रस्तुत किया गया है तब से अब तक आम जनता में इसकी प्रशंसा और सराहना हो रही है जिसे देख और सुनकर लगता है कि यह पहला ऐसा रेल बजट होगा जो सबसे अधिक जनता के अनुकूल रहेगा। आज के समय, महोदय, हर विभाग और मंत्रालय तरक्की कर रहा है। आज स्थिति यह है कि हर विभाग और मंत्रालय अपने साधनों को बढ़ाने, उसका उत्थान करने में जुटा है, कहीं किसी विभाग में नई कार्य-योजनाएं लाई जा रही हैं, कहीं नए टैक्स लगाए जा रहे हैं।

15.00 hrs. पहली बार ऐसा बजट आया है जिसमें कि अतिआधुनिक कार्य-योजना के लिए, इतनी बड़ी जनता का दबाव होते हुए भी, क्षेत्र का विकास करते हुए १,५०७ किलोमीटर लम्बी लाईन बिछाने का ऐलान किया गया है। इसके बावजूद भी किसी तरह की किराया वृद्धि नहीं की गई है। यह माननीय मंत्री जी और सरकार की कार्य-योजना का ही रूप है। इसके लिए मैं पुन:माननीय मंत्री जी, सोनिया जी और प्रधानमंत्री जी को बधाई देना चाहूंगा कि जो यह कार्य-योजना है, निश्चय ही यह एक धुरंधर कदम साबित होगा, जनता के बीच में इसकी सराहना होगी तथा इससे आम जनता को लाभ पहुंचेगा।

महोदय, मैं अपने वक्तव्य को माननीय रेल मंत्री जी के बजट से सम्बद्ध करता हूं और समर्थन करता हूं। इन्हीं शब्दों के साथ मैं पुन: मंत्री जी को बधाई देते हुए अपनी बात समाप्त करता हूं।

SHRI BASU DEB ACHARIA (BANKURA): Mr. Deputy-Speaker, Sir, I rise to support the Railway Budget presented by the Railway Minister Shri Laloo Prasad Yadav.

For the first time, certain innovative steps have been taken to address the problems being faced by the Indian Railways. This has been indicated by the Railway Minister in his speech. In para 117, what he has stated is:

"It will be my endeavour to lessen the burden on the economically weaker sections of the society who are dependent upon the Railways for providing them a relatively inexpensive mode of transport from one end of the country to the other."

 Sir, the aim, the purpose and the endeavour reflects what is there in the Common Minimum Programme. The Railways is not only for the Railways; unless it reaches out to the people -- the poorer sections of our society -- the social responsibility of the Railways cannot be discharged. For the first time, an attempt has been made to discharge this social responsibility of the Railways. For the first time, the Railway Minister has taken care of the common people, the poorer sections and, that is why, neither the fare nor the freight charges has been increased.

Sir, there are thousands and thousands of people who are connected with the Railways, in the sense that though they do not travel by the Railways, they do contribute to the Railways. In the past, I have not seen anybody who had ever thought of those people like the porters, vendors and thousands and thousands of workers who are engaged in the construction of railway lines or in civil work. He has proposed for the social security for these people, who are mostly exploited. While proposing to do something for these people, he has forgotten about 45,000 hawkers. We had a meeting when he was in Kolkata last month. He, then, instructed the General Managers of the Eastern and South-Eastern Railways not to harass the hawkers.

They are hawkers selling their wares in trains for several years. It is by selling their wares to the passengers and by catering to the needs of the passengers that they earn something with which they maintain their lives. However, in spite of clear instructions from the Railway Minister to the General Managers of both the Railways, harassment of hawkers has not yet stopped. The Railway Minister instructed that some system should be evolved like issuing identity cards, or levying some licence fee, etc. The Minister said that pending this evolution of a system, there should not be any harassment to the hawkers.

I would urge upon the Minister to take it up immediately with the General Mangers who failed to comply with the specific instructions given by the Railway Minister. As the Railway Minister has announced something should be done for social security of the unorganised workers, these 45000 hawkers should not be subjected to the harassment of the Railway Police and the railway authorities.

The Railway Minister spoke about the welfare of the railway employees. There is a system of permanent negotiating machinery in the Railways. I met the Minister only a few days back. In 1980-81, there was a strike by loco running staff during which hundreds of workers were dismissed from the service. They went to the court and all of them were reinstated except 13. Out of those 13, one had already died. The Railway Minister also instructed the Member (Staff) to see that these 12 railway workers – who were dismissed from service and in respect of whom the Calcutta High Court ordered reinstatement – be reinstated. In spite of that, these 12 workers are yet to be reinstated. Most of them would have retired from service by this time. I would request the Railway Minister to see that these 12 workers are reinstated and they get their pensionary benefits as ordered by the court.

We know that Railways is not in a sound financial condition. The Railway Minister is trying to adopt innovative methods. I congratulate him that he has made a proposal for better utilisation of the existing wagon fleet. He has announced a new system called ‘Engine on Load’. This scheme will definitely help the Railways to increase its capacity. This is with regard to the engine during loading and unloading operations. The problem with the freight traffic is that the turn around time is too much.

Sir, because of that there is a shortage of availability of wagons. Sometimes, we receive the complaints from the power plants that they are not getting rakes. But if the system is materialised, I hope, to some extent, the problem of availability of wagons and rakes can be resolved.

There is one more problem which the Railways is facing. We have 63,000 kilometres of railway track now. Our achievement during these 57 years of Independence is only 10,000 kilometres. Fifty-three thousand kilometres of track were constructed before Independence. The capacity which we have today is also not being properly utilised. The average speed of our freight train is only 27 kilometres per hour whereas in the case of a passenger train, it is 52 kilometres per hour. So, if we can increase the speed of our freight trains as well as passenger trains by 10 kilometres, I am sure, the Indian Railways will be able to increase its capacity whereby the carrying capacity of the Indian Railways – freight as well as passenger -- can be increased. So, if we can increase our carrying capacity, the earning of the Railways will also be increased.

Sir, what is the financial situation in the Railways today? The working group has prepared a report. During the Ninth Five Year Plan, the internal resources of the Railways were to the tune of Rs. 14,000 and odd crore. But the market borrowing was 34 per cent. The internal resources were to the tune of 35 per cent whereas its market borrowing was 34 per cent, and the budgetary support during the Ninth Five Year Plan was also about 35 per cent. So, if the market borrowing goes to 34 per cent, in future, the Indian Railways will be in a debt trap. In order to resolve this situation what should the Indian Railways do? It should increase its internal resources. In the past, we have seen, the Railway Ministers used to resort to increase the fare and freights in order to increase the internal resources. But it is for the first time that some attempt has been made to increase the internal resources by reducing its expenditure.

Sir, last year, the operating ratio was 92.6 per cent. In the past, the operating ratio went up to 96 per cent. If you spend 96 paisa, you will earn only Rupee one. Today, the Railways is spending 92 paisa to earn Rupee one.

So, this operating ratio should be further reduced. The operating ratio recommended by the Railway Reforms Committee is that this should not be more than 90 per cent so that the Railways can have surplus funds, to be able to spend for the Railways’ own projects. For the last several years, we have been demanding that the Central Government should invest on development of Railways. Today, the Government of India is spending Rs.56,000 crore for the construction of national highways or roads. How much does the Government of India spend on the expansion of the Railway network?

Railways are not only meant for Railways’ purposes. Unless there is a railway connection, unless a railway line is constructed, unless a railway service is provided in an area, there cannot be any industrial and economic development. Industrial and economic development is related to the development of Railways. So, the responsibility for the development of Railways or the expansion of the Railway network is not the sole responsibility of the Ministry of Railways. It should also be the responsibility of the Government of India.

Hundreds of years back, a line has been constructed. Railways had to pay dividend for that line also. So, the Central Government should invest on the expansion of railway network. The Railway Minister has stated that there are certain backward areas. One of the objects of expansion of railway network is social obligation. Economically that line may be non-remunerative, but that line may be socially desirable. If we connect those areas where people have not seen the Railways or where people have not got the opportunity to travel by the Railways, it would be helpful.

I know that the hon. Minister is updating the survey. I do not know how long this updating of survey will take place and thereafter, again another updating may also take place. But some priority should be given to certain areas which are deprived of railway service. People living in certain isolated areas are the tribal people. If we connect those areas which are backward economically and industrially and where there is poverty and unemployment, the railway network can help develop that area industrially as well as economically. While sanctioning a project this should be kept in mind, that a project may not be remunerative, but that project should be sanctioned because it is socially desirable. I hope that the present Railway Minister will definitely keep this in mind, when he gets the report of the survey of those projects and he will clear those projects too.

Another problem is this. I have not seen anywhere, any measures or any steps for the redressal of this problem. We have projected certain targets. During the Ninth Five Year Plan, what I have seen is that we have never achieved whatever we had projected. I do not know why those projections are made, when we cannot even achieve 50 per cent of the projection. I am talking about acquisition of rolling stock.

In the 9th Five Year Plan during the tenure of previous Government what was the target for the new lines? The target was 819 kms. What did the Government achieve? The achievement was only 662 kms. Gauge conversion is very important. We have multi-gauge system in which we have narrow gauge, broad gauge and meter gauge. Project unigauge was announced in the nineties according to which we would have only one system of gauge, that is broadgauge and we would not have metergauge or narrowgauge. What was the target for gauge conversion? The target was 3710 kms. and we could achieve only 2103 kms.

Doubling of lines is very important. Why is it necessary? It is necessary because when a single line is constructed, say 25-30 or 50 years back, there was only one pair of train. Today, we have reached the saturation point by having about 110-115 types of trains. Without constructing new lines, if a single line is converted to double line by spending less amount, we can increase the capacity.

Previous Railway Minister produced three White Papers. One White Paper on pending projects, another on safety problem and a third one on general problems of railways. Moreover, National Transport Committee in 1980 recommended long back, 24 years back, that we should have a multi model transport system and that all the ports and airports should be connected with the Railways.

Rail Vikas Nigam was created for Golden Quadrilateral because Howrah-Delhi-Mumbai-Chennai-Howrah route is over saturated. In order to increase the capacity double lines should be converted to triple lines and alternate route should be created. In the objects of Rail Vikas Nigam it was also stated that all the ports should be connected with the Railways. Haldia is connected with the railway line. It is single line for the last 25-30 years, that is since when the railway line was laid in that area. Haldia port has developed its capacity. Doubling of Panskura-Haldia was sanctioned long back but in this Railway Budget only a small portion of 10 kms. has been proposed to be completed and for that only Rs.10 crore has been sanctioned. These are the strategic lines. For the strategic lines sufficient funds should be provided so that the entire stretch can be converted to double lines.

Sir, this problem has not been addressed properly in the Railway Budget. We have a number of pending projects. When the White Paper was submitted to this House, we were told by the previous Railway Minister that his priority would be to complete all the pending projects and for that Rs.38,000 crore will be required. I do not know what he did after announcing this to materialise his promise. I did not find anything in his Interim Budget. During the year 2002-03, he announced that a special fund of Rs.20,000 crore would be created. We do not know from where the money would be generated for this special fund for completing all the viable – the word `viable’ was added – projects. It was stated that all the viable projects would be completed in a time-bound manner. I do not find anything about this in the Budget. I think the hon. Railway Minister did not find time to study as to how much fund will be required to complete these projects. I hope he will definitely touch this vital point in his next Budget or in the Supplementary Demands.

As he has stated, I do not feel that there is any problem of availability of wheel and axle. Today, we are in a position to manufacture the entire requirement of Indian Railways. The Railways has its own wheel and axle plant and the main item of production of Durgapore Steel Plant of Steel Authority of India is wheel and axle. Previously, we used to import locomotive wheels. Today it is manufactured at Durgapore Steel Plant. I do not know whether there is a need for a new wheel and axle plant for the future requirement. Maybe, after 10 years, we will need more steel and axle plants. For that, a new plant is proposed to be set up.

प्रो. राम गोपाल यादव (सम्भल) : वह तो छपरा में बनने जा रहा है।

श्री बसुदेव आचार्य : छपरा भी हमारी जगह है। I did my Intermediate from there.

हमारा भी कनेक्शन छपरा में है।

उपाध्यक्ष महोदय : आप चेयर को एड्रेस करें।

… (Interruptions)

SHRI BASU DEB ACHARIA : Sir, I am not making it Bihar Assembly… (Interruptions)

MR. DEPUTY-SPEAKER: Please conclude now. Your Party has only 42 minutes and you have taken 30 minutes.

SHRI BASU DEB ACHARIA : Sir, I will take another 10 minutes. We know the time would be extended. Even earlier we used to sit late. दस घंटे समय निर्धारित किया जाता है, लेकिन २० घंटे तक चर्चा होती है। रघुवंश जी उस वक्त उधर बैठते थे। उनकी पार्टी को पांच मिनट का समय मिलता था, लेकिन वह २० मिनट तक बोलते थे।

Sir, the hon. Railway Minister has come up with an innovative idea in his Budget and that is of introducing kullhad in place of synthetic glasses and usage of khadi and handloom in the Railways. I congratulate him for this. It is because the handloom workers are in great crisis. Thousands of handloom weavers have burnt their looms. This attempt of the Railway Minister to help the people of the weaker sections of the society is praiseworthy.

Sir, there are certain measures which relate directly to the efficiency of the Railway operations. One of them is Railway Signalling System. Today there are about 4000 token-less signalling system. How could one expect to increase the speed with such a signalling system? How much time would it take to replace the entire token-less signalling system with a modern signalling system? Sufficient funds should be provided for this.

15.32 hrs (Shri Balasaheb V.K.Patil in the Chair) Similar is the case with Tract Circuiting. Safety in the Railways is a problem. Incidence of railway accidents are gradually decreasing and if we compare our position with that of the developed countries like Japan, then we would find that our position is not bad. If railway safety is not a problem, then how come our previous Railway Minister felt the necessity of producing a voluminous White Paper on this? When an accident of the Rajdhani Express took place near Gaya a few years back, I went there. The Khanna Committee recommended that the railway bridges that were more than 100 years old should be inspected by an Expert Committee. This recommendation was made six months before that accident took place. Enough care was not taken to implement this recommendation. Around 22,000 km tracks today are over-aged and 30 per cent of the passenger coaches in the Indian Railways are still over-aged. We need funds to replace them. That is why, there has been a small increase in the DRF.

   

Sir, the Railway Reforms Committee in 1982 recommended that depreciation should not be less than Rs. 2500 crore. At that time it should not have been less than Rs. 5000 crore. The hon. Railway Minister has increased it from Rs. 1900 crore, in the Interim Budget, to Rs. 2200 crore now. More funds are required to replace the entire backlog of over-aged tracks.

Sir, I was mentioning about the Ninth Five Year Plan. I was on the specific subject of electrification projects. Those have almost reached their targets. But on the question of acquisition of electric loco and diesel loco coaches, the Railways are lagging behind. For electric loco, the target was 851, achievement is 676; for diesel loco, the target was 785, whereas the achievement is 647.

As far as wagons, the four wheeler units, are concerned, the target was 1,36,000 units, but the achievement is only 1,04,316. The target for the Tenth Five Year Plan has also been fixed. The problem really is with the supply of wagons, by the manufacturing units of both private as well as public. The problem faced by the wagon manufacturer is this. They used to get certain items as free supply from the Railways. It has been stopped three or four years back.

Earlier, there used to be an umbrella organisation called Wagon India. The Railways used to give orders to Wagon India and Wagon India used to distribute orders among the private as well as public sector units. That system was abolished long back, in 1996, when Shri Ram Vilas Paswan was the Railway Minister. This is a problem of not only the public sector, this is the problem of private sector also. Private sector units are also not in a position to supply the entire order for the wagons. This is happening even in the State to which the present Railway Minister belongs to. It is happening in Muzzafarpur and Mukamma. I know about Muzzafarpur unit. I went there twice. Muzzafarpur unit could not produce even a single wagon. But the Mukamma unit was helped by Shri Nitish Kumar. It is because the unit is in his constituency, the Barh constituency. He used to help.

श्री लालू प्रसाद : स्टील अथोरिटी आफ इंडिया।

श्री बसुदेव आचार्य : स्टील अथारिटी नहीं, भारत हैवी उद्योग निगम, लोहा देता है। पहले रेलवे बोगी का नीचे का हिस्सा देता था। आप सब जानते हैं। …( व्यवधान)इस बारे में आपसे मीटिंग हुई है। हम चाहते हैं कि इस बारे में हमारा कंक्रीट प्रपोजल है, मोकामा, मुजफ्फरपुर और बर्नपुर, ये तीनों अच्छे यूनिट्स हैं, जो सबसे ज्यादा वैगन सफ्लाई करते थे। …( व्यवधान)आपको मालूम नहीं है, श्री प्रभुनाथ सिंह जी, आप खबर नहीं रखते हैं। मैं जब स्टैंडिंग कमेटी का चेयरमैन था, उस समय हम जमालपुर में स्थिति देखने के लिए गए थे। उस समय लोगों ने कहा कि आज तक हमारा दुख कोई भी देखने के लिए आया है। इस बारे में हमने खत लिखा था, बाहर से ट्रेन इम्पोर्ट करने के मामले में कि इसकी सीबीआई इन्क्वायरी कराई जाए। आप इस बारे में पता कर लीजिए।…( व्यवधान) 800 करोड़ रुपए की बात है और हमने इसकी जांच की मांग की थी। आपको सब मालूम है।

श्री लालू प्रसाद : सब मालूम हो जाएगा।

श्री बसुदेव आचार्य : आप उसकी जांच करवाइए। My suggestion is that these three units should be made captive units of Indian Railways. मोकामा, मुजफ्फरपुर और बर्नपुर - तीनों अच्छे यूनिट हैं, इनसे रेलवे की समस्या हल हो जाएगी। समस्तीपुर में भी बनते हैं, They are also manufacturing wagons. That suggestion was made by me when I was the Chairman, Standing Committee on Railways. I recommended it and they started producing or manufacturing wagons. He has made an announcement regarding Jamalpur. There are a number of good and big workshops in Indian Railways. These workshops can produce wagons. They can produce coaches.इस ओर मंत्री जी ध्यान दें। उन्होंने सिक्योरिटी में ८०० पदों को भरने की बात कही है। Security is the problem. It is really a problem.

There are certain dacoity-prone areas in our country.जहां यह होता है, इसे कैसे बंद किया जाए? It can be done with a joint force of the State Government and the Central Government, that is, RPF, GRP and State Police. RPF’s only responsibility was the protection of railway property. Now, in addition to protection of railway property, RPF has been entrusted with the protection of railway passengers also.…( व्यवधान)

योगी आदित्यनाथ (गोरखपुर) : यूपी में प्राबलम नहीं है। बिहार में प्रॉबलम है।

श्री बसुदेव आचार्य : प्राबलम यूपी में भी है। आप केवल बिहार के बारे में क्यों बोल रहे हैं? प्राबलम कहां नहीं है? केवल बिहार के बारे में क्यों कहते हैं? वह गोरखपुर से शुरु होती है। क्या पूर्वी यूपी में प्राबलम नहीं है? हम गोरखपुर के खाद कारखाने को खोलने के लिए बहुत लड़े हैं। आप जितनी बार इस बारे में बोले, उससे ज्यादा हमने उस खाद के कारखाने को चलाने की मांग की है। आज सिक्योरिटी का भी सवाल है। एक ज्यौंट फोर्स होनी चाहिए। आपने अभी आरपीएफ और इंडियन रेलवे एक्ट में परिवर्तन किया है। इसके अन्तर्गत आरपीएफ की क्षमता को बढ़ाया है। पहले ऐसा नहीं था। इसका असर जरूर पड़ेगा लेकिन एक ज्यौंट फोर्स होनी जरूरी है। अभी सेफ्टी से ज्यादा सिक्योरिटी का सवाल सामने आ गया है। …( व्यवधान)अभी टेलीविजन वाले मुझ से कह रहे थे कि मंत्री जी ने कमरे में विश्वकर्मा का फोटो रख दिया है। अब वही सब कुछ करेंगे। मैंने उनसे कहा कि मैं नहीं जानता कि मंत्री जी ने यह बात कहां कही है। मैंने कहा कि मंत्री जी को वहां से काम करने के लिए इनसिपरेशन मिलता है इसलिए उन्होंने फोटो रखा है।

Sir, he has announced introduction of 15 new trains, but he has forgotten about the State of West Bengal. पश्चिम बंगाल में नई ट्रेन चलाने के बारे में कहा गया था लेकिन एक भी नई ट्रेन नहीं चलायी जा रही है। मैंने आपको कहा था कि हमें मुम्बई के लिए ट्रेन दो और चाहें तो हफ्ते में एक दिन के लिए दे दो। हम मुम्बई रोज नहीं जाते हैं। आप बांकुरा के बारे में जानते हैं। वह मेरा निर्वाचन क्षेत्र है। Bankura Terra Kota horse is the symbol of handicrafts of India.

श्री लालू प्रसाद: गाड़ी चालू करने का सिलसिला शुरु हुआ है। आगे और देखिए।

श्री बसुदेव आचार्य: इसे १५ से १६ कर दो। एक बढ़ा दो। नीतीश कुमार जी ने २००३-२००४ के बजट में ५६ नई गाड़ियां चलाने की घोषणा की थी।

श्री प्रभुनाथ सिंह (महाराजगंज, बिहार) वे डेटवाइज घोषित हुई थीं।

श्री बसुदेव आचार्य : उन्होंने आपको बताया होगा। वे डेढ़ साल बाद एनाउन्स हुई लेकिन अभी भी चालू नहीं हुई। आपको पता नहीं है। इसका संसद में एनाउंसमैंट नहीं हुआ। उन्होंने वह डेट अपनी डायरी में लिखी होगी और आपको बता दिया, हमें बताया नहीं। Introduction of 56 new trains were announced by the former Railway Minister within a year, but only 26 trains were introduced.आप नई गाड़ियों की संख्या १६ कर दीजिए। एक बढ़ा दीजिए और रिप्लाई के समय इसकी घोषणा कर दीजिए। हावड़ा से मुम्बई वाया बांकुरा, पुरुलिया और टाटानगर होते हुए इसे चलाइए। पुरुलिया बिहार के साथ है। मैं बिहार में पैदा हुआ हं। बिहार उस समय मानभूम जिले में था। मैंने अपनी पढ़ाई इंटरमीडिएट से लेकर पोस्ट ग्रैजुएट तक बिहार में की है। हमारा बिहार के साथ सम्पर्क है। इसलिए कम से कम एक ट्रेन वहां के लिए एनाउंस कर दीजिए।

आपने ऑनरेबल मैम्बर्स से सुझाव मांगे थे। मैम्बर्स ने आपको जो चिट्ठी लिखी, वे बहुत ज्यादा हो गईं। आपने सभी मैम्बर्स को चिट्ठी लिखी थी। सब ने सोचा कि हम सुझाव भेंजेंगे तो सब बजट में आ जाएंगे। हमारे पास चिट्ठी की कॉपी है जिसे हमारी पार्टी ने भेजी है। आपने कोलकाता के लिये ४२ करोड़ रुपया दिया है लेकिन शायद कुछ ऐसे प्रोजैक्ट्स हैं जिनमें पिछले साल का ऐलोकेशन है। मैं उम्मीद करता था कि जब पिछले साल ऐलोकेशन १० करोड़ रुपये था तो इस साल १२-१३ करोड़ रुपया होगा लेकिन वह १० करोड़ रुपये से ५ करोड़ रुपये हो गया। इससे मन में थोड़ा दुख होता है। आप दो करोड़ रुपये बढ़एं नहीं तो १० करोड़ रुपये तो रखिये। हमारे पास लिस्ट है जिसमें बंगाल के प्रोजैक्ट्स के लिये ऐलोकेशन दिया हुआ है। उनमें शायद थोड़ा ऐलोकेशन किया है। ८ करोड़ रुपया हमारे क्षेत्र के लिये भेजा गया है और जो बांकुरा-दामोदर क्षेत्र में दिया गया है। जहां तक कुमारी ममता बनर्जी के समय की बात है, वह घोषणा केवल पेपर पर थी। जैसे हमारे क्षेत्र सुन्दरबन इलाके में रेल लाइन के लिये बहुत समय से कोशिश हो रही है लेकिन अभी तक वह काम नहीं हुआ है। पांसकुरा में आजाद हिन्द फौज के नाम से एक ट्रेन चालू किये जाने की घोषणा की गई थी। वह चली लेकिन दो साल के बाद बंद हो गई। हम चाहते थे कि यदि एक्सप्रैस ट्रेन नहीं हो तो लोकल पैसेंजर ट्रेन ही चला दीजिये। Shalimar Coaching Terminal was sanctioned by Late Scindiaji. He had the dream and plan to have 12 platforms exclusively for the South-Eastern Railway. You will be surprised to know that after 15 years only two platforms have been constructed. Today, only one train starts from that station and that too goes to my constituency. रेल मंत्री जी, हमने एक अरण्य एक्सप्रेस ट्रेन के बारे में कहा था, आप लिख लीजिये।

श्री लालू प्रसाद : हमारे स्टेट मनिस्टर और अफसर लिख रहे हैं।

श्री बसुदेव आचार्य : यदि आप लिखते तो तसल्ली रहती।

श्री लालू प्रसाद : बताइये।

   

श्री बसुदेव आचार्य : अरण्य एक्सप्रेस शालीमार से खुलती है। आद्रा डिवीजन उसका हैड क्वार्टर है, वहीं हम रहते हैं। आप इसे हवड़ा से चालू कर दीजिये।

MR. CHAIRMAN : Kindly conclude now.

श्री बसुदेव आचार्य : अभी हम राज्य में आये हैं, उसके बाद क्षेत्र में आयेंगे। There is one problem being faced by the passengers of long distance EMU-MEMU passengers.टायलेट के बारे में आपने अखबारों में देखा होगा कि गांव में कोई मैदान में नहीं जायेगा, कहीं नहीं जायेगा। जिस प्रकार प्लेन में किया गया है, ऐसा सिस्टम ट्रेन में कर दीजिये। आर.डी.एस.ओ. इस सिस्टम को कर सकता है। If you are forcing a passenger to travel in an EMU-MEMU train for more than six hours without toilets, what will happen to him? From Asansol to Tata Nagar, it takes about four to four-and-a-half hours. From Adra to Howrah, there is an MEMU train but there is no toilet in that train. It takes about five hours thirty minutes to reach Howrah from Adra. It starts early morning at 4.30 and reaches Howrah at 10.30 a.m .बिना टॉयलेट के कैसे ट्रैवल करेंगे। हमने एक इंसीडैन्ट का यहां जिक्र किया था। ट्रेन स्टेशन पर खड़ी थी, एक लड़की संभाल नहीं सकी, वह स्टेशन पर उतरी, इतने में ट्रेन चल पड़ी। जब वह चढ़ने लगी तो उसके पिता जी ट्रेन के अंदर थे, उन्होंने उसके हाथ पकड़ा, लेकिन वह लड़की ट्रेन के नीचे चली गई और उसकी मौत हो गई। अब आप आये हैं, आपने इन्नोवेटिव स्टैप लिया है, इसके लिए हम आपको बधाई देते हैं। यह भी एक इन्नोवेटिव स्टैप होगा।

You go to UK. You will find two types of MEMUs in British Railways, namely, one is long distance and the other is short distance. Short distance MEMUs/EMUs do not have toilets. But, if you are going to travel for more than two hours, there will be toilet.

आप ऐसा कीजिए कि यहां पर जो शॉर्ट डिस्टैन्स ई.एम.यू., मेमू और लांग डिस्टैन्स ट्रेन्स हैं, उनमें टॉयलेट प्रोवाइड कराइये। For long distance trains, you should provide toilet. How can lady passengers travel for more than five hours without toilet? आप इस पर जल्दी से जल्दी इंस्ट्रक्शंस दीजिए, इसका डिजाइन आर.डी.एस.ओ. और आई.सी.एफ. पेराम्बूर मैन्युफैक्चर करेंगे।

श्री लालू प्रसाद : तब तक ट्रेडीशनल ट्रेन चलवा देते हैं।

श्री बसुदेव आचार्य : वह आप जरूर करेंगे, हम जानते हैं। लेकिन कन्वैन्शनल रेक करवा दीजिए। आप लिख लीजिए रानी शिरोमणि फस्र्ट पैसेन्जर उसका नाम है। आप उसे कम से कम कन्वैन्शनल रेक करवा दीजिए। इसमें आपका नाम रहेगा कि रेल मंत्री श्री लालू प्रसाद जी ने ऐसा काम किया है, उन्होंने मेमू में टॉयलेट की सब व्यवस्था की है। Sir, there is a local train from Sodhpur to Sealdah running during office hours. आपने मुम्बई के बारे में जिक्र किया, लेकिन सियालदाह और हावड़ा के बारे में भूल गये। हावड़ा का आपने नाम ही नहीं लिया। खाली पार्सल के वास्ते ढाई करोड़ रुपये रख दिये, बेकार खर्च करके क्या करेंगे, क्या फैसलिटी डेवलप करेंगे। लेकिन हावड़ा स्टेशन की रियल प्रॉब्लम है,I studied it when I was Chairman of the Standing Committee. A plan was prepared for Rs. 30 crore. Sir, it has its disbursal problem. Last time, when I spoke on Railway Budget, I suggested short-term and long-term solutions. Short-term solution is this. Railways have abundant land, abundant goods shed in Hawrah, which is not being utilised for storing goods. That land can be utilised. You can have four or five platforms, and those platforms should be exclusively meant for the South-Eastern Railway.

हावड़ा ईस्टर्न रेलवे के अंडर है और हम लोगों की ट्रेन साउथ ईस्टर्न रेलवे है, उसके साथ कभी-कभी सौतेला व्यवहार स्टैप मदरली ट्रीटमैन्ट हो जाता है। चार नये प्लेटफार्म जो अबेन्डंड गुडशैड्स हावड़ा में हैं, उन्हें आप एक साल के अंदर कर सकते हैं। आपने बहुत काम किया है, क्या आप हावड़ा के लिए इतना काम नहीं कर सकते हैं। हमारे मुख्य मंत्री जी ने आपको १०-१५ दिन पहले चिट्ठी लिखी थी क another terminal should be set up in Majiirhat.

How many coaching terminals has your city, Mumbai got?

MR. CHAIRMAN : Please conclude now.

SHRI BASU DEB ACHARIA : Delhi has five terminals whereas Kolkata today has only two terminals, namely, Sealdah and Howrah. Chitpur has been proposed. I do not know how much fund you have provided.

Sir, last year, Railway Minister announced to have another terminal at Paddapukur and Shalimar. I do not know how much fund he has provided to develop Paddapukur and Shalimar as coaching terminals. In addition to having Paddapukur, Shalimar and Howrah as coaching terminals, our Chief Minister has written to you to set up a coaching terminal at Mayherhat. He has sent a copy of that letter to me. I have forwarded that letter to you. A coaching terminal at Mayherhat will facilitate South-Eastern Railway trains to go directly to Kolkata.

अब आप सर्कुलर को कंप्लीट कर रहे हैं, सर्कुलर रेल से एयरपोर्ट तक जोड़ रहे हैं। हमारा न्यू टाउन जो मजेरहाट है, उसे भी रेल लाइन से कनैक्ट कर रहे हैं। उसका सर्वे हो गया है, एस्टिमेट हो गया है और रिपोर्ट भी आ गई है साउथ ईस्टर्न रेलवे से। इसके ऊपर आप देखिये।Sir, I will not take much time.

MR. CHAIRMAN : You have taken more than an hour. Kindly conclude now.

SHRI BASU DEB ACHARIA : Sir, I am concluding now.

मैं कनक्लूड कर रहा हूँ। मैंने मज़दूरों के बारे में जो कहा है, हमारे जो कंस्ट्रक्शन वर्कर्स हैं, अनऑर्गेनाइज़्ड सैक्टर में, उनके लिए सोशल सिक्यूरिटी का प्रावधान किया गया है, लेकिन उन्होंने कोलकाता में बताया था कि वे जब रेल के काम से एक स्टेशन से दूसरे स्टेशन तक जाएंगे तो उनको पकड़ा जा सकता है। इसके लिए कुछ पास का बंदोबस्त होना चाहिए। आपने भी कहा था कि इसके लिए कुछ होना चाहिए। इसलिए इनके लिए कुछ कीजिएगा। हॉकर्स का जो हैरैसमैंट होता है, उसे रुकवाइए।Sir, there are thousands of apprentices. Orders have been issued by the Railway Board to engage them as substitute Kalashi but most of the General Managers are not complying with the Orders of the Railway Board and are sitting on the file. तीन-चार साल रेलवे में ट्रेनिंग लेकर बैठे हैं, स्किल्ड हैं। जब ऑर्डर गया है तो उसका क्रियान्वयन होना चाहिए, उनका एंगेजमैंट हो यह देखना चाहिए।

रेलवे में जो होम्योपैथिक डाक्टर्स हैं, Why is the Railway hostile to Homeopathic and Ayurvedic doctors? आप तो आयुर्वेद में विश्वास करते हैं लेकिन आपको पता नहीं है कि कुल १४२ डाक्टर हैं होम्योपैथिक और आयुर्वेदिक के, उनको २५०० से ३००० रुपये तक तनख्वाह मिलती है। एलोपैथिक डाक्टर्स को १५००० रुपये से २५००० रुपये तक तनख्वाह मिलती है। यह डिसक्रमिनेशन क्यों है? यह भी इनोवेटिव होगा, जैसे खादी को आपने बढ़ावा दिया है, इसी प्रकार आयुर्वेद और होम्योपैथी के जो डाक्टर्स हैं, Why will they get only Rs. 2,500 or Rs. 3,500? Why should their pay-scale be not commensurate with the Allopathic doctors? स्टेट गवर्नमैंट, सीजीएचएस में सब जगह ऐसा है, लेकिन रेलवे में हम देखते हैं कि उनको २५०० रुपये से ३००० रुपये तक तनख्वाह मिलती है।

सभापति महोदय : आप सुझाव लिखकर मंत्री जी को भेज दीजिए।

श्री लालू प्रसाद : वे पार्ट टाइम डाक्टर्स होंगे। दूसरी जगह भी कमाते होंगे।

श्री बसुदेव आचार्य : नहीं, कुछ नहीं कमाते हैं। हम सबको लेकर आपके पास आएंगे।

इन्हीं शब्दों के साथ हम रेल मंत्री जी द्वारा प्रस्तुत बजट का समर्थन करते हैं। एक नया कदम उठाया गया है, आम जनता के बारे में सोचा है लेकिन हमारी जो मांग हैं, हम कहेंगे कि केरल का भी थोड़ा डिप्राइवेशन हुआ है। …( व्यवधान)

SHRI BIKRAM KESHARI DEO (KALAHANDI): Mr. Chairman, Sir, I will request the hon. Member to mention about Orissa also.

श्री बसुदेव आचार्य : उड़ीसा का भी हुआ है।

SHRI BIKRAM KESHARI DEO (KALAHANDI): All the trains in Orissa have stopped. The whole State of Orissa is paralyzed. There is no railway movement because the Railway Minister has neglected Orissa totally. … (Interruptions)

श्री बसुदेव आचार्य : उड़ीसा के बारे में भी मंत्री जी सोचेंगे। इन्हीं शब्दों के साथ मैं आपको धन्यवाद देता हूँ। Sir, I thank you very much for giving so much of time to speak.

श्री बिक्रम केशरी देव : उड़ीसा बहुत पिछड़ा हुआ है। उसके लिए पैसा नहीं दिया गया है। Therefore, I request the Railway Minister to make a statement so that the rail in Orissa starts moving. The rail in Orissa should start moving. Mr. Railway Minister, you please give a favourable statement. … (Interruptions)

MR. CHAIRMAN: Now, Shri Ramji Lal Suman.

श्री रामजीलाल सुमन (फ़िरोज़ाबाद) : सभापति जी, कल श्री लालू प्रसाद जी ने रेल बजट प्रस्तुत किया। मैं समाजवादी पार्टी की ओर से …( व्यवधान)फिर लालू जी कहते हैं कि हमारी तारीफ़ नहीं करते। हम आपकी तारीफ करना चाहते हैं मगर आप सुन नहीं रहे हैं। श्री लालू प्रसाद जी ने कल जो रेल बजट प्रस्तुत किया, हम समाजवादी पार्टी की ओर से उन्हें धन्यवाद देते हैं।

16.00 hrs. महोदय, माननीय लालू प्रसाद यादव जी ने कल जो रेल बजट प्रस्तुत किया, उससे आम जनता को यह अहसास हुआ कि यह बजट उनकी भावनाओं के अनुकूल है।

थोड़ी देर पहले यहां भारतीय जनता पार्टी की ओर से श्री सुशील कुमार मोदी तकरीर कर रहे थे। मैंने उनकी तकरीर को गौर से सुना और तकरीर करने के बाद वे फौरन चले भी गए। मैं आंकड़ों में नहीं जाना चाहता हूं। मैं लालू जी से भी निवेदन करूंगा कि सवाल आंकड़ों का नहीं है, सवाल यह है कि पहले उस पक्ष के लोग सरकार में थे और अब एक नई सरकार बनी है। हम राजनीतिक लोग हैं। हम लोग क्या कहते हैं, इससे ज्यादा महत्वपूर्ण प्रतक्रिया आम आदमी की होती है और मैं समझता हूं कि जो आम आदमी अहसास करता है, उसकी जो भावना होती है, वह सियासी लोगों से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण होती है। इसलिए नया राज बनने के बाद, इस सरकार के आचरण में एक तुलनात्मक फर्क दिखाई देना चाहिए। यही निवेदन मैं करना चाहता हूं।

महोदय, किस तरह का बजट राम विलास पासवान जी ने पेश किया, वह क्या बजट था, नीतीश कुमार जी ने जो बजट प्रस्तुत किया, वह क्या था और कल जो रेल बजट लालू जी ने प्रस्तुत किया, वह क्या था, यह महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि महत्वपूर्ण सवाल यह है कि रेल में सफर करने वाले आम आदमी को नई सरकार बनने के बाद जो अहसास होना चाहिए, वह अहसास उसमें है या नहीं। आज आम आदमी सोचता है कि नई सरकार आने के बाद, रेलों में यात्रा करने में वह सुरक्षित है कि नहीं, नई सरकार आने के बाद रेलों में उसकी सुरक्षा का ध्यान रखा गया है या नहीं, असली बिन्दु और सवाल यही है।

हमारे सामने हालांकि कुछ व्यक्तिगत परेशानियां हैं। अभी हमारे कुछ मित्र कह रहे थे कि समय बढ़ना चाहिए, नई सरकार बन रही है, यह अच्छी बात है, लेकिन मैं जब नए मंत्रियों को देखता हूं, तो मुझे बहुत दुख होता है। लालू जी आपने बहुत अच्छा काम किया, लेकिन आपने डा. रघुवंश प्रसाद सिंह जी को मंत्री बनाकर अच्छा काम नहीं किया। उनकी उपयोगिता वहां की बजाय हमारे लिए यहां ज्यादा थी।

मैं ज्यादा विस्तार में नहीं जाना चाहूंगा। मुझे मालूम है कि हमारी पार्टी के तमाम नए सदस्य आए हैं और उन सब की इच्छा है कि रेल बजट पर बोला जाए। इसलिए मैं उनके हक को नहीं मारना चाहता।

कल जब रेल बजट प्रस्तुत किया गया था, तो लालू जी ने कहा कि बजट का आर्थिक आधार मजबूत है, लेकिन मैं एक बात बड़ी विनम्रता के साथ उनसे निवेदन करना चाहूंगा कि रेलवे को आत्म-निर्भर बनाए जाने के लिए बहुत सार्थक प्रयासों की आवश्यकता है और अगर वे सार्थक प्रयास नहीं हुए, तो मैं नहीं समझता कि कोई अच्छे परिणाम आने वाले हैं।

यहां हमारे बहुत से राजनीतिक मित्र बैठे हैं। मेरी उनसे प्रार्थना है कि इसमें कोई बुरा मानने की जरूरत नहीं है और न मैं व्यक्तिगत आलोचना करना चाहता हूं, लेकिन मैं यह अवश्य कहना चाहता हूं कि २२ मई को जब यह सरकार बनी और लालू जी मंत्री बने, तब से २५ जून तक अकेले बिहार में रेलवे में लूट और डकैती की सात घटनाएं हुईं। घटनाएं आठ हुईं, सात हुईं या पांच हुईं, यह महत्वपूर्ण नहीं है, लेकिन समाचारपत्रों में जब इस प्रकार की घटनाएं छपती हैं, तो आम यात्री के मन में यह भय पैदा होता है कि वह सुरक्षित नहीं है। इसलिए मेरा आपसे आग्रह है कि रेलवे में सफर करने वाले हर आदमी को, वह चाहे किसी भी सूबे का हो, देश के किसी भी हिस्से का बाशिंदा हो, यह अहसास होना चाहिए कि जब वह रेल में सफर करेगा, तो वह सुरक्षित रहेगा, उसे कोई खतरा नहीं होगा। मेरा निवेदन है कि इस पर ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है। सभी लोग जानते हैं कि ये सभी घटनाएं बिहार में हुईं और वहां आपकी धर्मपत्नी मुख्य मंत्री हैं। उन्होंने रेलों में लूटपाट और डकैती की घटनाओं को रोकने में असमर्थता व्यक्त की है। मेरा आपसे आग्रह है कि रेलवे में लूटपाट और डकैती की जो घटनाएं होती हैं और समाचारपत्रों में जब इस आशय के समाचार छपते हैं, तो उससे आम आदमी भयभीत होता है। वह समझता है कि मैं सुरक्षित नहीं हूं, लिहाज़ा इस ओर ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है। आपने यात्रियों की सुविधा के लिए २०१५ करोड़ रुपए आबंटित किए जाने की बात की और कहा कि ८००० रेलवे स्टेशन्स पर रेलवे यार्ड, सफाई, कैंटीन, रख-रखाव आदि तमाम चीजों का आपने जिक्र किया है। मैं यह मानता हूं कि रेलवे स्टेशनों की संख्या की द्ृष्टि से जो धन का आबंटन हुआ है, धन का आबंटन उस मात्रा में उचित नहीं है। काफी कम है ।

16.06 hrs. (Shri Girdhar Gamang in the Chair) आपने जो बजट प्रस्तुत किया, मंत्री जी, जो सबसे अधिक चिन्ता का विषय है, मैं चाहूंगा कि आप उस तरफ ध्यान दें। इसमें कहा गया है कि कुल मिला कर, यातायात से, किराए और भाड़े से रेलवे को ४५,००० करोड़ रुपए की आय होगी। आपको जो दौलत मिलने वाली है, आपका जो खर्च होने वाला है वह ४१,००० करोड़ रुपए संचालन व्यय है और ११,००० करोड़ रुपए योजना व्यय है। कुल मिला कर, मेरा कहने का मतलब है कि रेलवे को ४५ हजार करोड़ रुपए की आय होगी और खर्च ५२,००० करोड़ रुपए का होगा। इसका सीधा मतलब यह हुआ कि अब रेलवे का काम घाटे में चलेगा। इस बीच के अंतर को पूरा करने के लिए आपको बाजार में जाना पड़ेगा, कर्ज लेना पड़ेगा और उसका उदाहरण हमारे सामने है। उधार लेकर काम चलाने की जो प्रवृत्ति है, उसका परिणाम आपके सामने है। इस देश को चलाने के लिए भी हम लोग कर्ज लेते रहे है और उसका परिणाम यह है कि जो हमारे ऊपर कर्ज है, उसकी किश्त और ब्याज की अदायगी हेतु राजस्व का ८० फीसदी धन हमें देना पड़ता है। इसलिए मेरी आपसे प्रार्थना है कि जब तक रेलवे के आर्थिक संसाधनों को आप नहीं बढ़ाएंगे, रेलवे को आत्मनिर्भर नहीं बनाएंगे तब तक रेलवे का काम व्यवस्थित रूप से नहीं चल सकता। आज रेलवे को लाभकारी बनाए जाने की आवश्यकता है और इसकी कार्य-कुशलता को बढ़ा कर हमें बचत करनी होगी।

कल आपका जो भाषण हुआ, उसमें आपने कहा कि ३३,००० करोड़ रुपए खर्च करने के बाद सौ करोड़ रुपए का लाभ होगा। यह जो लाभ होने वाली राशि है, वह नहीं के बराबर है। इसलिए मेरा सुझाव है कि कोई आपको ऐसा तंत्र विकसित करना चाहिए जो इन संभावनाओं का रेलवे में पता लगाए कि रेलवे की आय कहां-कहां से बढ़ सकती है। वे कौन से माध्यम हैं, जहां से रेलवे का मुनाफा हो सकता है। मुझे माफ करें, जब तक आप ऐसा तंत्र विकसित नहीं करेंगे तब तक रेलवे को व्यवस्थित रूप से नहीं चलाया जा सकता।

मैं उदाहरण के तौर पर आपसे कहना चाहता हूं कि तमाम अलाभकारी मार्ग हैं, जिन्हें लाभकारी बनाए जाने की आवश्यकता है और वह अलाभकारी मार्ग अगर लाभकारी बन जाएं तो उससे २०० करोड़ रुपए प्रतिवर्ष रेलवे को मिलेंगे। इस विषय पर आप जरा अपने विशेषज्ञों से बात करिए, दूसरे लोगों से जानकारी हासिल करिए, कोई ग्रुप एवं समूह गठित करिए, कुछ लोगों को लगाइए - इस पर ध्यान देने की आवश्यकता है। कुछ चीजों में विरोधाभास भी है - एक तरफ आपने सत्ता में केन्द्रीकरण की बात की और दूसरी तरफ विकेन्द्रीकरण की बात की है। रीज़नल मैनेजर से सामान खरीदने की ताकत आपने वापस ले ली है।भर्ती का काम, जो रेलवे रिक्रूटमेंट बोर्ड करता था, अब वह काम स्थानीय आफिसर करेंगे। जरा इसको भी देखने की जरूरत है। इन दोनों चीजों में परस्पर विरोधाभास है। कुल मिलाकर कल आपने जो रेल बजट पेश किया, उसके चलते मैं कह सकता हूं कि आपकी नीयत तो ठीक है ही…( व्यवधान) आप क्यों कह रहे हैं, आप तो रोज तारीफ करेंगे, आप तो लालू जी की पार्टी के आदमी हैं। थोड़ा हमें भी कुछ कहने दो। आप अपनी पार्टी के लोगों को समझाइये।

श्री लालू प्रसाद : ये आज हैं, कल नहीं थे।

श्री रामजीलाल सुमन : आप हमें बोलने दीजिए।

मैं आपसे यही निवेदन कर रहा हूं कि कुल मिलाकर जैसा मैंने आपसे पहले कहा कि तमाम जो अलाभकारी मार्ग हैं, ये लाभकारी कैसे बनें, इस पर निश्चित रूप से विचार करने की आवश्यकता है और दूसरा मैं आपसे निवेदन करना चाहता हूं कि ये जो नई घोषणाएं हुई हैं, यह अलग बात है। पुरानी लम्बित परियोजनाएं हैं, आखिर ये भी कभी पूरी होंगी कि नहीं होंगी?पुराने मंत्रियों ने जो घोषणाएं की हैं, वे तमाम परियोजनाएं भी आप देखिये। मुझे माफ करना, यह सवाल कोई रेलवे का ही नहीं है। पंडित जवाहर लाल नेहरू के जमाने से पहली पंचवर्षीय योजना में जो सिंचाई की परियोजनाएं स्वीकृत हुई थीं, अब दसवीं परियोजना आ गई, लेकिन वे सिंचाई की परियोजनाएं आज तक पूरी नहीं हुईं। आप क्या घोषणा कर रहे हैं, क्या भाषण दे रहे हैं, किन योजनाओं का ऐलान कर रहे हैं, यह महत्वपूर्ण नहीं है। जिन योजनाओं का आपने ऐलान किया है, वह समयबद्ध पूरी हो रही हैं कि नहीं हो रही हैं, यह भी बहुत महत्वपूर्ण है। इसलिए आपसे विनम्र आग्रह है कि जो योजनाएं लम्बित हैं, जिन पर काम करने की जरूरत है, उन पर भी प्राथमिकता के आधार पर आपको काम कराये जाने की जरूरत है।

हमारे मित्र चन्द्रपाल जी झांसी के एम.पी. हैं। इनका कहना है कि भोपाल से लखनऊ तक जो ट्रेन सप्ताह में दो दिन चलती है, वह प्रतदिन चलनी चाहिए। झांसी से कानपुर तक के लिए दोहरी लाइन होनी चाहिए। आगरा को अभी आपने मंडल बना दिया है। पिछली सरकार ने आगरा में जो माडई जगह है, उस माडई जगह से लेकर इटावा तक, जहां प्रमुख तीर्थस्थल बटेश्वर है, जहां अटल बिहारी वाजपेयी जी पैदा हुए थे, वह रेलवे लाइन स्वीकृत की। उसका शिलान्यास अटल जी ने किया था, लेकिन जिस गति से वहां काम चल रहा है, मैं नहीं समझता कि १० साल में भी वह रेलवे लाइन बिछ पाएगी। उस रेलवे लाइन को बिछाने के लिए धन आबंटित करने का कोई जिक्र आपने अपने बजट में नहीं किया है।

श्री लालू प्रसाद : पहले उसमें कितना धन दिया हुआ था?

श्री रामजीलाल सुमन : हम दफ्तर में बैठकर आपसे बात कर लेंगे और आपको बता देंगे। पहले धन दिया है, आपको हम बता देंगे।

श्री लालू प्रसाद : अब काम क्यों रुका?

श्री रामजीलाल सुमन : आपको बता देंगे कि काम क्यों रुका। कुल मिलाकर उस पर भी तेजी से काम करने की आवश्यकता है। जैसा मैंने आपसे पहले निवेदन किया कि कुछ काम आपने ठीक किये हैं, प्रयास आपका अच्छा है। जैसा कि मैंने पहले आपसे कहा कि हम आपको बधाई देते हैं कि रेलवे में आपने खादी का प्रचलन शुरू किया है। खादी का सम्बन्ध हमारे स्वाधीनता संग्राम से रहा है और खादी सिर्फ कपड़ा ही नहीं है, इससे बुनकरों को काम मिलेगा। जो मिट्टी के बरतन बनाने वाले लोग हैं, उनको काम मिलेगा। कमजोर वर्ग के लोग जिनका तृतीय और चतुर्थ श्रेणी में आरक्षण नहीं था, उनके आरक्षण को पूरा करने का जो आपने फैसला किया, उसके लिए हम आपको धन्यवाद देते हैं। शहीदों की विधवाओं को दूसरे दर्जे की यात्रा में ७५ प्रतिशत पैसे की जो छूट दी है, उसके लिए आपको धन्यवाद। कुलियों का भी आपने ख्याल रखा है। कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि रेल बजट ठीक है।

अंत में मेरी आपसे प्रार्थना है कि रेल बजट प्रस्तुत करने के बाद रेलवे के आर्थिक संसाधन कैसे बढ़ें, रेलवे आत्मनिर्भर कैसे बने, रेलवे की आय कैसे बढ़े और पूरे हिन्दुस्तान में यह संदेश कैसे जाये कि अन्य मंत्रियों की तुलना में श्री लालू प्रसाद यादव बेहतर रेल मंत्री हैं, इसके लिए आपको अधिक प्रयास करने की आवश्यकता है।

मैं समझता हूं कि यहां जो भाषण होगा, तर्क प्रस्तुत होंगे, उऩमें कुछ लोग आलोचना करेंगे और कुछ लोग तारीफ करेंगे लेकिन इसका ज्यादा मतलब नहीं है। इससे ज्यादा मतलब आपकी कार्य प्रणाली का होगा। इससे ज्यादा मतलब आपके काम करने के तौर-तरीके का होगा। नयी सरकार बनने के बाद हिन्दुस्तान के आम आदमी ने कहा कि श्री लालू प्रसाद यादव की गाड़ी और लोगों से बेहतर चल रही है तो मैं समझता हूं कि निश्चित रूप से यह अच्छा बजट होगा।

श्री रघुनाथ झा (बेतिया):सभापति महोदय, वर्ष २००४-०५ का बजट जो माननीय रेल मंत्री श्री लालू प्रसाद यादव जी ने प्रस्तुत किया है, उसके समर्थन में मैं खड़ा हूं। मैं ही नहीं बल्कि देश की ८१ परसेंट से अधिक जनसंख्या ने इस बजट को सराहने का काम किया है। कुछ लोग ऐसे जरूर हैं जो अच्छे से अच्छे काम को नकारेंगे। इसमें कोई दो बात नहीं है। हमारे मित्र श्री सुशील मोदी यहां से चले गये हैं। हमारी समझ में यह बजट हिन्दुस्तान के आम आदमी को राहत देने वाला, गरीबोन्मुखी, गांवोन्मुखी और बेरोजगारी मिटाने वाला बजट है।

पिछले २० वर्षों में यह पहला बजट है जिसमें न माल भाड़ा बढ़ाया गया है और न किराया बढ़ाने का काम हुआ है। इस बजट की भूरि-भूरि प्रशंसा सारे देश के लोगों ने की है। इसके लिए हम माननीय रेल मंत्री जी की सूझ-बूझ और बेरोजगारों के प्रति उनके ध्यान के प्रति कायल हैं कि उन्होंने ऐसे महत्वपूर्ण कदम उठाने का कार्य किया है। बुक स्टाल्स के एकाधिकार का जो काम चला हुआ था, उसे बदलकर, बेरोजगारों को, सैनिकों की विधवाओं को, रेलकर्मियों की विधवाओं को, अति पिछड़े वर्ग या दलितों को, २५ परसेंट आरक्षण देने का काम शायद श्री सुशील मोदी को नहीं भाया क्योंकि ये लोग पूंजीपतियों के रखवाले हैं, पूंजीपतियों के मददगार हैं। स्वाभाविक रूप से उनके मन में इसके लिए कसक हो सकती है कि आज उस एकाधिकार को तोड़ा जा रहा है और गरीबों को उस पर बैठाया जा रहा है, गरीबों की मदद करने का काम किया जा रहा है। उनकी इस आपत्ति को न सिर्फ सदन खारिज करेगा बल्कि सारे देश के लोग इसे नकारने का काम करेंगे।

हमारे मित्र श्री रामजी लाल सुमन बतला रहे थे, वे ठीक कह रहे थे कि रेलवे में आर्थिक संसाधन बढ़ाने की आवश्यकता है, उसे सुद्ृढ़ करने की आवश्यकता है। यही कारण है कि हमारे नेता ने जो स्क्रैप पहले गाजर भाव में बेचा जा रहा था और जिस पर बड़े-बड़े जमींदारों का असर था, पांच हजार करोड़ रुपये से अधिक का ठेका इन लोगों को मिलता था, ऐसे लोग ही इस काम को करते थे, अब उसकी रीसाइक्िंलग करके फिर से लोहा बनाकर, उसका इस्तेमाल करके, उस पैसे को बचाकर, जिस पैसे से बाहर से सामान मंगाया जाता था, उसे रेलवे में जोड़ने का काम रेल मंत्री जी कर रहे हैं। यह स्वागतयोग्य कदम है। इसके लिए हम इनको बधाई देते हैं।

महोदय, हम उस निर्वाचन क्षेत्र से आते हैं जहां से राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने सत्य, अहिंसा, खादी ग्रामोद्योग और लघु उद्योग की शुरुआत की थी। बरसों भीतीहरना एवं विन्दावन गांधी आश्रम में रहकर जिस चरखे से राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और कस्तूरबा गांधी सूत कातने का काम किया करते थे, वही चरखा आज भी उक्त गांधी आश्रम में मौजूद है। हम श्री सुशील मोदी से कहेंगे कि वे भीतीहरना गांधी आश्रम में जाकर उस चरखे को देखें। इन्हें उसका क्या दर्द होगा। सैंकड़ों लूम चलाने वाले यही लोग भागलपुर दंगे में थे। इन लोगों ने उनके लूम को जलाने का काम किया। जो बुनकर थे, गांव के लोग थे, उनको जला कर रोजी रोटी छीनने का काम किया। श्री लालू प्रसाद ने इस बजट में उन लोगों को अपने पैरों पर खड़ा करने का काम किया, खादी को जीवित करने का काम किया जो सराहनीय है। इसके लिए हम इनको बधाई देते हैं।

महोदय, जब आपके स्थान पर उपाध्यक्ष महोदय बैठे थे, मैंने उस समय भी टोका था। राजधानी से आने वाले व्यक्ति को क्या पता लगता है क्योंकि पांच घंटे बाद उनका दूसरा स्टॉपेज आता है। उनको कुल्हड़ कहां मिलेगा। कुल्हड़ तो देश के सभी स्टेशनों, रेस्तराओं एवं ट्रेनों में मिल रहा है। जहां कैबिनेट की मीटिंग में चांदी की तश्तरी में चाय परसी जाती थी, वहां अब कुल्हड़ में परसी जाती है। इसे भी आलोचना का विषय बनाया जा रहा है। लाखों गरीब कुम्हार जो अति पिछड़े लोग हैं, इससे उनको रोजगार मिलने का काम हुआ है। इस बात से इनकी नाराजगी स्वाभाविक है।…( व्यवधान)प्रभुनाथ सिंह जी, आप शान्त रहिए। हम आपके विषय पर बाद में आएंगे।…( व्यवधान) श्री लालू प्रसाद ने अपने बजट में समाज के कमजोर वर्ग के लोगों, रेलवे के कमजोर वर्ग के लोगों, कुली, पोर्टर्स, वैंडर्स और उनकी पत्नियों को रेल यात्रा में सुविधा देने का काम किया है। उनको किराए में सहायता देने का काम किया है। इसके लिए हम इनको बधाई देते हैं। घोषणाएं पहले भी की गई थीं कि अगर कोई बेरोजगार युवक परीक्षा देने अपने घर से बाहर जाएगा तो प्रमाण पत्र दिखाने पर उसे सेकंड क्लास की टिकट में राहत दी जाएगी, लेकिन आज तक कहीं उसे कोई राहत नहीं मिली। हम रेल मंत्री जी से आग्रह करेंगे कि आपने जो घोषणा की है, उसका इम्प्लीमैंटेशन होना चाहिए। जो हजारों गरीब युवक शहर से बाहर इंटरव्यू देने जाते थे, हमारे यहां उनका क्या हुआ। बड़ी ईमानदारी की चर्चा होती रही और बात होती रही। पहले जो फोर्थ ग्रेड का एम्प्लाई था, जो स्लीपर बिछाता था, दूसरा काम करता था, उसकी जीएम के लेवल पर बहाली होती थी, डीआरएम के लैवल पर बहाली होती थी, उसकी बहाली अब ऊपर से होने लगी। बिहार के लोगों को तमिलनाडु में बहाल किया गया।

सभापति महोदय, आप उड़ीसा से आते हैं। हमारे यहां के लड़कों को असम से मार-मारकर भगाया गया, महाराष्ट्र से मार-मारकर भगाया गया और बड़ी चालाकी से वहां अपने लोगों को बहाल करवा दिया गया। उनकी ट्रांसफर बिहार में करा दी गई और ईमानदारी का ढिंढोरा पीटकर यश लेने का काम किया गया कि हम बहुत ईमानदार हैं। ऐसी ईमानदारी के खिलाफ मैंने खुद प्रधान मंत्री जी को जांच कराने के लिए लखित में दिया था। मुझे दुख के साथ कहना पड़ता है कि श्री अटल बिहारी वाजपेयी ने उसकी जांच कराने का काम नहीं किया। जहां एक ओर हम माननीय रेल मंत्री जी के बजट की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हैं, वहीं कहना चाहते हैं कि हमारा बिहार सर्वाधिक पिछड़ा इलाका है और रेलवे में हमारा हक मारा जाता रहा है। पिछले रेल मंत्री द्वारा घोषित जो कार्यक्रम हैं और आपने जो घोषणा की है, उनका इम्प्लीमैंटेशन तेजी से होना चाहिए। उस काम को पूरा करना चाहिए।…( व्यवधान)अब हम नवीनगर पर आते हैं। अभी तो हमने नवीनगर पर शुरू भी नहीं किया है। हम आपसे आग्रह करना चाहेंगे कि जमालपुर रेल कारखाना जो देश का गौरव था। कल आपने घोषणा की, इसके लिए हम आपका स्वागत करते हैं। इसे और बढ़ाइए और इसके आधुनिकीकरण का काम शुरु करवाइए। इसी तरह से बिहार के मुजफ्फरपुर एवं मोकामा में कारखाना है, उसे पुनर्जीवित करने का काम किया जाए। यहां नीतीश जी नहीं हैं, प्रभुनाथ जी हैं। जितने भी पुराने ए.सी. के डिब्बे थे, वे सब हमारे यहां बिहार में लगा दिये गये। ए.सी. के जितने भी पुराने और गंदे दिखने वाले तथा महकने वाले डिब्बे थे, वे सब बिहार को दे दिये गये और जितने भी बढि़या-बढि़या डिब्बे थे, वे सब कलकत्ता, मुम्बई में दिये गये और बिहार को सीधा नैगलेक्ट करने का काम किया गया। हम चाहते हैं कि इस काम को भी किया जाए। ...(व्यवधान)

छपरा, हाजीपुर, मुजफ्फरपुर, नरकटिया-गंज, बेतिया, मोतिहारी, मुजफ्फरपुर जो उत्तर बिहार का लाइफ लाइन है, उसमे सिन्गल लाइन से काम नहीं चलने का है। उसे दोहरीकरण करावें । गोरखपुर-लखनऊ लाइन को दोहरी लाइन में बदलने का काम कीजिए। आप हमारी बात नोट नहीं कर रहे हैं। हमारी बात को भी रेल मंत्री जी कृपा करके नोट कर लीजिए। सब लोग अपनी बात नोट करा ले जाते हैं। हमारी बात भी नोट करिए। इसलिए इसको सिन्गल लाइन से बड़ी लाइन में करिए, यह हमारे बिहार की लाइफ लाइन है।

श्री राम कृपाल यादव: हुजूर, इस काम को कृपा करके किया जाए।

श्री रघुनाथ झा : जब तक यह नहीं होगा तब तक हमारा काम नहीं होगा। हमारे यहां गंगा ब्रिज मुंगेर में बन रहा है। निर्मली-भवटियाही रेल पथ कम-ब्रिज का निर्माण कार्य तत्कालीन प्रधानमंत्री ने करवाया। नरकटियागंज-जयनगर रेलवे लाइन का आमान परिवर्तन का काम दस वर्षों से चल रहा है। उधर दरभंगा से लेकर बडी लाइन से आप देश के किसी हिस्से में जा सकते हैं और बीच में मिसिंग लाइन दरभंगा से रक्सौल छूटा हुआ है। इस ६०-७० कि.मी. मिसिंग लाइन को बड़ी लाइन में करवा दीजिए तो देश के किसी भी हिस्से में जाया जा सकता है। सीतामढ़ी-मुजफ्फरपुर नई रेल लाईन दस वर्षों से बन रही है। मिट्टी का काम लगभग बहुत हो गया। फुल पुलिया बाकी है। इसलिए हम आपसे आग्रह करेंगे कि इस पर विशेष ध्यान दीजिए। हमारे यहां नेशनल हाईवे उधर से बंद है। २५० कि.मी. तय करके सीतामढ़ी और शिवहर के लोगों को आना पड़ता है। हम आपको बधाई देना चाहते हैं कि आपने मोतिहारी से शिवहर होते हुए सीतामढ़ी तक नई रेलवे लाईन का सर्वे कराने का काम किया है लेकिन उसको व्यावहारिक रूप दिया जाए औऱ जल्द से जल्द उस काम को कराने का काम किया जाए। उसी तरह से सकरी-निर्मली रेलवे लाईन का आमान परिवर्तन किया जाए। हाजीपुर-वैशाली-सुगौली-गया-अरेराज, ग्रामीण विकास मंत्री आपके पीछे बैठे हैं और बात करने में व्यस्त हैं। अरे प्रधान मंत्री जी को ले जाकर शिलान्यास कराइए और रेल लाईन को आगे बढ़ाने के लिए काम शुरू होना चाहिए। उसी तरह से कप्तानगंज-थावे-सिवान-गोपालगंज होते हुए प्रभुनाथ सिंह जी के क्षेत्र छपरा होते हुए छोटी लाइन को बड़ी लाइन में बदलने का काम शुरू हुआ और यदि पैसे की कमी है तो पैसा देकर उस काम को पूरा करने का काम किया जाए। जितने भी बिहार में आर.ओ.बी. हैं, बिहार के ३५ आर.ओ.बी. हैं जो नेशनल हाईवे पर हैं और उसके कारण ही घंटों आप जब छपरा जाते हैं तो आपको आठ फाटक क्रॉस करने पड़ते हैं। पटना से आठ फाटक क्रॉस करने पड़ते हैं। हम लोग पचास कि.मी. अधिक होकर जाते हैं। उसी तरह से जितने भी बिहार में आरोबी हैं, उन सबको बनाने का आदेश आपने दिया है। हम चाहते हैं कि उस काम को किया जाए। उसी तरह से झंझारपुर रेलवे पुल जो स्वर्गीय ललितनारायण मिश्रा जी के टाइम में कमला नदी पर रेलवे पुल पर ट्रैफिक घेरकर रोड ब्रिज बनाया गया।

आर.ओ.बी. के अभाव में काम नहीं है इसलिए मैं चाहूंगा कि उस काम को कराने का आप कष्ट करें। आपने चौकीदार रहित सभी समपारों को चौकीदार सहित और फाटक सहित बनाने की बात कही है, जोकि स्वागतयोग्य है। इसमें मैं निवेदन करना चाहता हूं कि सुगौली रक्सौल सेक्शन में शीतलपुर एवम् धर्मीनिया में चौकीदार सहित फाटक का निर्माण शीघ्र किया जाए। वहां पर कुछ दिन पहले २६ लोग मारे गए थे, क्योंकि वहां फाटक या चौकीदार नहीं था। मैं आपके चेम्बर में गया था और आपसे इस बारे में बात की थी। आपने रेलवे बोर्ड के चेयरमैन को आदेश दिया था। इसलिए मैं समझता हूं कि शीतलपुर एवम् धर्मीनिया में चौकीदार सहित फाटक होना चाहिए।

मैं एक निवेदन और माननीय रेल मंत्री से करना चाहता हूं। रक्सौल, सुगौली, बेतिया रेलवे स्टेशंस का आधुनिकीकरण किया जाए। सुगौली स्टेशन में कम्प्यूट्रीकृत आरक्षण केन्द्र की स्थापना शीघ्र की जाए। हमारे क्षेत्र में बेतिया और रक्सौल नेपाल की सीमा पर हैं, वहां फुटओवर ब्रिज प्लेटफार्म पर उतरता है। इस कारण बाहर से लोगों को काफी दिक्कत होती है। उसका विस्तार करने की जरूरत है। अन्य स्थान पर फुटओवर ब्रिज बनाया जाए।

हम आपके रेल बजट के लिए आपकी भूरि-भूरि प्रशंसा करते हैं और आपको बधाई देते हैं कि यह बजट गरीबों के हक में है। इसलिए पूरे सदन को सर्वसम्मति से इसे पास करना चाहिए।

मैं अंत में एक बात और कहना चाहता हूं। नवीनगर बिहार में मेगा थर्मल पावर स्टेशन की आधारशिला रख दी गई और पावर रेलवे को सप्लाई करनी थी। लेकिन उसकी कोई औपचारिकता पूरी नहीं की गई। न तो केबिनेट से मंजूरी ली गई, न वधिवत स्वीकृति ली गई और घोषणा कर दी गई तथा शिलान्यास कर दिया गया। इसी तरह से अन्य जगहों पर भी शिलान्यास कर दिए गए और बिहार के लोगों की आंखों में धूल झोंकने का काम किया गया। इसलिए मेरा रेल मंत्री जी से निवेदन है कि बिहार की इन सब योजनाओं को व्यावहारिक रूप देकर एक समय सीमा में पूरा किया जाए।

श्री राजेश वर्मा (सीतापुर):सभापति महोदय, मैं बहुजन समाज पार्टी की ओर से माननीय रेल मंत्री द्वारा प्रस्तुत रेल बजट का समर्थन करने के लिए खड़ा हुआ हूं। रेल बजट समाज के प्रत्येक वर्ग की सुविधाओं को ध्यान में रख कर तैयार किया गया है। प्रतिवर्ष जब रेल बजट का समय आता है तो जनमानस में एक भावना व्याप्त होती है कि आज रेल बजट संसद में पेश किया जाएगा, निश्चित रूप से कुछ न कुछ माल भाड़े में और यात्री किराए में वृद्धि होगी। लेकिन इस बार रेल मंत्री जी ने पूरे समाज को ध्यान में रख कर रेल बजट पेश किया, तो उसमें न माल भाड़े में वृद्धि की गई और न ही यात्री किराए में कोई वृद्धि की गई। इसकी भूरि-भूरि प्रशंसा पूरे देश में हुई। मैं भी अपने दल की तरफ से इस अच्छे रेल बजट की प्रशंसा करता हूं।

सभापति महोदय, रेल बजट में कुछ ऐसे खास प्रावधान किए गए हैं जो निश्चित रूप से सम्मान योग्य हैं। जैसे बेरोजगार युवकों को साक्षात्कार के लिए जाने-आने में रियायत दी गई है। इससे हमारे बेरोजगार युवकों का मनोबल बढ़ा है और उनको रोजगार की खोज में सुविधा होगी। यह जो रियायत मंत्री जी ने उनको उपलब्ध कराई है, मैं उसके लिए उनको हार्दिक धन्यवाद देना चाहूंगा। रेलवे स्टेशंस पर बुक स्टाल्स के लिए अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़े वर्ग, अल्पसंख्यक वर्ग, युद्ध में मारे गए जवानों की विधवाओं, विकलांगों और रेल कर्मचारियों की विधवाओं के लिए जो २५ प्रतिशत का आरक्षण किया है, इससे समाज के कमजोर वर्गों को थोड़ा बहुत रोजगार मिलने में सहायता मिलेगी।

मैं रेल मंत्री जी को एक और चीज के लिए धन्यवाद देना चाहता हूं। मंत्री जी ने जो सर्विसेज में बैकलाग था, अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़े वर्ग के लोगों का, उसको पूरा करने के लिए इस रेल बजट में प्रावधान किया है। उसको पूरा करने के लिए इस बजट में जो प्रावधान किया गया है, उसके लिए हम अपनी पार्टी की तरफ से उनको बहुत-बहुत धन्यवाद देते हैं। उन्होंने अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़े वर्ग का बैकलॉग पूरा करने में योगदान दिया है उसके लिए भी हम उनको धन्यवाद देते हैं।

दूसरा, मूक-बधिर व्यक्ति के साथ सहचर को साथ चलने की जो सुविधा मुहैया करायी है और जिसको किराये में ५० प्रतिशत की छूट देने की घोषणा की है, उससे भी मूक-बधिर व्यक्तियों को यात्रा करने में सुविधा होगी। यह हमारे समाज के ऐसे वर्ग हैं जो अपने को उपेक्षित महसूस करते हैं। इससे उनको मदद मिलेगी।

तीसरा, माननीय मंत्री जी ने रेलवे स्क्रेप में माफियगिरी को समाप्त करने का जो प्रयास किया है और इस स्क्रेप को रिसाइकलिंग करके जो विदेशों से पहिया आयात होता था उसे अपने देश में बनाकर विदेशी मुद्रा बचाने में मदद मिलेगी और देश में ही स्क्रेप को रिसाइकलिंग करके पहिये का निर्माण हो सकेगा।

चौथा, पर्यावरण अनुकूल टॉयलेट प्रणाली का बजट में प्रावधान किया जाना। ग्रामीण मंत्रालय द्वारा घोषित नीति के अनुसार सवारी डिब्बों में पर्यावरण अनुकूल टॉयलेट डिस्चार्ज प्रणाली का विकास किया जाने का प्रावधान आपने इस बजट में किया है। मेरी विनती है कि इसमें सैम्पल के तौर पर कुछ बड़े स्टेशनों को ले लिया जाए, जिन पर इस प्रणाली की ट्रेनें आयें जिससे लोगों को लगे कि तत्काल इसकी व्यवस्था हो रही है और इस-इस नम्बर के प्लेटफार्म साफ-सुथरे नजर आ रहे हैं।

अब मैं अपने संसदीय क्षेत्र की कुछ समस्याओं की ओर आपका ध्यान दिलाना चाहूंगा। उत्तर प्रदेश में मेरा सीतापुर संसदीय क्षेत्र है। वहां आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए लखनऊ, बरेली वाया सीतापुर, लखीमपुर, पीलीभीत मार्ग जो मीटरगेज है उसको ब्रॉडगेज में परिवर्तित कराने का प्रयास मैं पिछले तीन वर्षों से करता आ रहा हूं। माननीय मंत्री जी ने इस बजट में मीटर गेज को ब्रॉडगेज में परिवर्तित करने का प्रावधान किया है। मैं अपने क्षेत्र के लोगों की तरफ से माननीय मंत्री जी को धन्यवाद देना चाहूंगा। इसके साथ ही बरेली, सीतापुर वाया बुरवल, गौंडा बड़ी रेल लाइनें हमारे क्षेत्र से निकलती हैं। इन लाइनों पर ज्यादातर मालगाड़ियां ही जाती हैं। केवल दो पैसेंजर और एक्सप्रेस गाड़ियां हैं जो हमारे संसदीय क्षेत्र सीतापुर होकर निकलती हैं। इनके ऊपर कोई नयी रेलगाड़ी चलाई जाए जिससे सीतापुर के लोगों को रेल सुविधा का लाभ मिल सके। मालगाड़ियां जाने की वजह से हमारे संसदीय क्षेत्र सीतापुर में जाम लगा रहता है। इसलिए वहां पर एक ऊपरगामी पुल बनाया जाए जिससे वहां के नागरिकों को इसकी सुविधा मिल सके और उन्हें कष्ट न हो।

दूसरी बात, सीतापुर से बहराइच मार्ग के ऊपर नई रेल लाइन का सर्वे हो चुका है, लेकिन यह प्रस्ताव ठन्डे बस्ते में पड़ा हुआ है। मेरा आपसे निवेदन है कि कृपया उस प्रस्ताव को देख लें। इस लाइन की बहुत आवश्यकता है। बहराइच जिला नेपाल बार्डर पर है, यदि इस लाइन को जोड़ देंगे, तो अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लोगों को सुविधा होगी और उन्हें भी रेल सेवा मुहैया हो सकेगी।

अंत में, मैं रेल मंत्री जी को अच्छा बजट प्रस्तुत करने के लिए पुन: ह्ृदय से धन्यवाद देता हूं और आशा करता हूं कि भविष्य के लिए उन्होंने जो भी घोषणायें की हैं, उनको समयबद्ध पूरा करने के लिए कदम उठायेंगे।

श्री लालू प्रसाद : गांव के गरीब लोगों के लिए भारत दर्शन भी होगा।

श्री राजेश वर्मा : अंत में, मैं आपको धन्यवाद देते हुए, अपनी बात समाप्त करता हूं।

       

श्री अनंत गुढ़े (अमरावती):माननीय सभापति जी, नई सरकार का पहला बजट लोक लुभावना है। बाहर लोगों में इस बजट की बहुत तारीफ हो रही है, लेकिन मुझे ऐसा लगता है कि आगे आने वाले विधान सभा के चुनावों को ध्यान में रखते हुए यह बजट प्रस्तुत किया गया है। बजट को पढ़ने से लगता है कि हम कहीं ख्वाब तो नहीं देख रहे हैं ? मैं शिवसेना पार्टी की ओर से अपने विचार प्रस्तुत कर रहा हूं और मेरी पार्टी के अन्य माननीय सदस्य भी अपनी बात कहेंगे, इसलिए मैं संक्षेप में अपनी बात रखने का प्रयास करूंगा।

महोदय, वास्तव में देखा जाए, तो रेल में यात्रा करने वाले यात्रियों की नजर रेल सुविधाओं पर होती है। हम जब भी स्टेशन्स पर जाते हैं, तो भारतीय रेल की स्थिति सामने नजर आती है। माननीय रेल मंत्री जी ने अपने बजट में मार्च, २००५ तक सारे स्टेशनों पर न्यूनतम अनिवार्य यात्री सुविधायें पूरी करने का वायदा किया है। पिछले तीन वर्षों में ५२२ करोड़ रुपए इस मद में वभिन्न स्टेशनों पर खर्च किए हैं और इस साल भी हमारे प्रदेश में २१५ करोड़ रुपए खर्च करने का प्रस्ताव है। इतना रूपया खर्च करने के बाद भी हम स्टेशनों पर सुविधाओं का अभाव दिखाई देता है। मैं महाराष्ट्र से आता हूं। मुम्बई सैन्ट्रल टर्मिनस, लोकमान्य टर्मिनस, भुसावल, नागपुर और बान्द्रा स्टेशनों पर सुधार के लिए २५२ करोड़ रुपए पिछले तीन सालों में खर्च किए गए। इन स्टेशनों पर देश के कौने-कौने से यात्री आते हैं। नागपुर तो ऐसा स्टेशन है, जहां से सारी गाड़ियां टर्न होकर जाती हैं। मुम्बई सैन्ट्रल टर्मिनस, लोकमान्य टर्मिनस पर लाखों यात्री रोज आते जाते है, लेकिन वहां न उनको पीने का पानी मिलता है, न टायलैट की सुविधा है, न स्टेशन पर बैठने की कोई व्यवस्था है। यदि किसी यात्री को चक्कर आ जाता है या बीमार हो जाता है, तो उनके लिए वहां बैठने की कोई व्यवस्था नहीं है। सीएसटी का प्लेटफार्म बड़ा है। वहां पूरी गाड़ी खड़ी हो जाती है लेकिन वहां कोई सुविधा नहीं है। बिसलेरी वाटर के सिवा पीने को पानी नहीं मिलता । मुझे यह बात समझ में नहीं आती कि हमने २५२ करोड़ रुपए कैसे इस काम पर खर्च किए? हमने कई बार स्टैडिंग कमेटी के साथ कई रेलवे स्टेशनों का दौरा किया। पैटिशन कमेटी जिस के पिछली लोक सभा में बसुदेव आचार्य चेयरमैन थे, मैं भी उस कमेटी का मैम्बर था। हमें कई स्टेशनों पर शिकायतें सुनने को मिली। हमने मुम्बई की सभी लोकल ट्रेनों की हालत देखी। यदि चर्चगेट से बोरीवोली जाना है तो १५ मिनट में बोरीवली पहुंच जाते हैं लेकिन यदि बोरीवली में टिकट लेना है तो वहां आधा घंटा खड़ा रहना पड़ता है। टिकट की चार खिड़कियां में से दो खिड़कियां बंद रहती हैं। ऐसे में आप कैसे यात्री सुविधाओं की बात करते हैं? आज देश भर में ८ हजार कर्मचारियों की कमी है। गाड़ियों के आने-जाने की सूचना स्टेशनों पर मिलती नहीं है। गाड़ी लेट चलने पर जब हम पूछते हैं तो कहा जाता है कि कर्मचारी नहीं हैं इसलिए इसका घोषणा नहीं करते। स्टेशन पर फोन करते हैं तो कोई फोन नहीं उठाता है। पूछने पर पता चलता है कि कर्मचारी नहीं हैं। स्टेशनों में साफ सफाई नहीं होती है। पूछने पर कहा जाता है कि कर्मचारियों की कमी है। मैं नहीं जानता कि आठ हजार कर्मचारियों की क्यों कमी है? मैं मंत्री जी से जानना चाहता हूं कि आठ हजार कर्मचारियों की कमी को दूर करने के लिए वह क्या कदम उठा रहे हैं? अगर यात्रियों को सुविधाएं देनी हैं तो सबसे पहले कर्मचारियों की नियुक्ति करना बहुत जरूरी है। वह कर्मचारियों की नियुक्ति कैसे करने वाले हैं? पिछले साल रेलवे बोर्ड ने कहा कि यह काम एक साल तक चलता है। मई २००३ में जिस छात्र ने इंटरव्यू दिया था उसका आज तक नतीजा नहीं निकाला गया है।

श्री लालू प्रसाद: आप शांति से नहीं रहते हैं।

श्री अनंत गुढ़े : हम शांति से रहते हैं। अगर मुम्बई में नियुक्ति होनी है तो स्थानीय लोगों को ही नियुक्त करना चाहिए, यही हम चाहते हैं।

आज भी कई गाड़ियां ऐसी हैं जो सौ साल पुरानी हैं। वे दौड़ती चली जा रही हैं। कुर्ला-हावड़ा ८०२९, ८०३० जो हावड़ा से कोलकाता और कुर्ला से हावड़ा चलती है, वह पहले सीएसटी तक चलती थी, वह पुरानी गाड़ी है। सीएसटी-कोलकाता २०८९, २८१० सौ साल पुरानी गाड़ी है। उसकी हालत खराब है। उस गाड़ी के बाथरूम सड़ते हैं। जब गाड़ी किसी स्टेशन पर रुकती है तो यात्री बाथरूम करने के लिए प्लेटफार्म पर बने यूरेनिल्स में जाते हैं। वे बोगियों में बने यूरेनिल्स में नहीं जाते हैं। कुछ गाडियों की हालत तो इतनी बुरी है कि आदमी सोचने लगता है कि उसमें बैठकर जाना ठीक है या पैदल जाना अच्छा है। गोंदिया-पुणें-कोल्हापुर १०४०डाउन गाड़ी ऐसी ही है। आज ट्रेनों में सफाई नहीं होती, मरम्मत नहीं होती, सीटें टूटी हुई हैं। हम कहां सुख-सुविधा देने की बात कर रहे हैं जबकि रख-रखाव ही नहीं है। अगर यात्रियों को रेलो में सुख-सुविधा नहीं मिली तो जिस आम बजट की बात लोग कर रहे हैं कि किराया-भाड़ा नहीं बढ़ाया गया है, उससे खुश नहीं होंगे।

सभापति महोदय, नई दिल्ली से तमिलनाडु एक्सप्रेस, ए.पी.एक्सप्रैस चलती हैं। इन ट्रेनों की हालत भी कुछ वैसी ही है। इनकी बोगियां पुरानी हो गई हैं। मैं रेल मंत्री जी से दरखास्त करूंगा कि ५०-१०० साल पुरानी रेलगाड़ियों की बोगियां बदलना जरूरी है। उनकी अच्छी तरह से मरम्मत किये जाने की आवश्यकता है ताकि यात्रियों को अच्छी सुविधा मिल सके।

सभापति जी, रेल मंत्री जी ने अपने भाषण में कई नई रेलगाड़ियां चलाये जाने की घोषणा की है। हर रेल मंत्री अपने रेल बजट में इसकी घोषणा करता है। हमारा दुर्भाग्य है कि महाराष्ट्र से कोई रेल मंत्री नहीं हुआ जबकि बिहार से कई हुये हैं। हमारे विदर्भ क्षेत्र से लोगों की कई सालों से मांग रही है कि अमरावती-नरखेड तक रेल लाइन बिछायी जाये। १९०५ में इसका सर्वेक्षण हुआ था और १९९५ में इसकी आधारशिला रखी गई। १९९६ में जब मैं पहली बार सासंद बना, इसके लिये मैंने प्रयास किया, तब काम शुरु हुआ है। चूंकि यातायात के लिये कोई मार्ग नहीं था, इसलिये अमरावती-नरखेड रेल मार्ग की मांग की गई है। इससे १०० किलोमीटर की दूरी कम हो जाती है और इससे लोगों को अच्छी सुविधा मिल सकती है लेकिन मुझे समझ में नहीं आता कि माननीय रेल मंत्री जी ने निर्णय लेकर अमरावती-नरखेड पूरा न करके अमरावती-चन्दुरबाजार तक क्यों किया? यह १३८ किलोमीटर का मार्ग है, उसे पूरा करना चाहिये था। अगर यह पूरा नहीं होता तो, जो उद्देश्य है, वह कचरे की टोकरी में डाल दिया गया लगता है। मुझे आशा है कि अपने उत्तर में रेल मंत्री जी इस बात को स्पष्ट करेंगे कि इसे केवल चन्दुरबाजार तक क्यों किया गया है?

सभापति महोदय, विदर्भ क्षेत्र के लोगों की कुछ नई रेल लाइन बिछाने की माग रही है। रेल मंत्री जी ने अपने बजट भाषण में कहा है कि तीर्थ स्थानों को रेलों से जोड़ने का काम किया जायेगा। हमारे महाराष्ट्र में सैगांव से तिरुपति के लिये अनेक यात्री जाते हैं और अकोला-सैगांव तथा गजानन महाराज का जो महाराष्ट्र का बड़ा मंदिर है, कर्नाटक और आन्ध्रा प्रदेश से तीर्थ यात्री शिरडी गांव आते हैं लेकिन कोई सीधी ट्रेन नहीं होने के कारण यात्रियों को तकलीफ होती है। बड़ी मात्रा में यात्रियों को तिरुपति जाने के लिये रेनीगुंटा उतरना पड़ता है। मेरा आपसे निवेदन है कि सैगांव से तिरुपति सीधी रेल सेवा चलाई जाये।

सभापति महोदय, महाराष्ट्र में नागपुर के बाद अमरावती बड़ा शहर है। जहां से हजारों सरकारी कर्मचारी यात्रा करते हैं। इसके अलावा नॉन गवर्नमेंट सर्वेंट भी दैनिक यात्री हैं। कई लोग बिजनैस के लिये भी आते हैं मैं आदरणीय मंत्री जी से विनती करता हूं कि इस बारे में भी सोचने की जरूरत है।

सभापति महोदय, मैं आखिरी बात कहकर अपनी बात समाप्त करता हूं। भुसावल डिवीजन के सारे स्टेशनों पर कर्मचारियों की भारी मात्रा में कमी है, कर्मचारियों की इस कमी को आप जल्दी पूरा करें, यह विनती करके मैं अपना वक्तव्य समाप्त करता हूं।

   

SHRI S.P.Y. REDDY (NANDYAL): Sir, I rise to participate in the discussion on the Railway Budget, 2004-05. I am glad that despite several limitations, the hon. Railway Minister has presented a soft Budget without taking recourse to hike in passenger and freight fares. It is really a customer-friendly Budget. The hon. Minister has proposed to provide free travel facilities to unemployed youth who are coming to appear for interviews and also proposed to extend concessions to widows of defence personnel killed in action and to deaf and dumb persons. The hon. Minister has taken good care to protect the interests of the needy people and thereby has served a noble cause. Even after making such concessions, he has been able to present an improvement in the operating ratio at 92.6 per cent. After meeting the Railway dividend of Rs. 3500 crore and meeting the deferred dividend liability of Rs. 300 crore payable to the general revenue, the hon. Minister has shown a surplus of Rs. 873 crore in his Budget. This shows a reasonably satisfactory performance in the Railway revenues. The hon. Minister has done well in improving the catering system in the Railways and also cleanliness in the Railway stations and on trains and also for introducing environment-friendly toilet systems. Thus, on the whole, the Budget would have a good impact on the public in general.

Sir, having said that, I would like to refer to some of the chronic problems in the Indian Railways. During the past some years, some of the major railway accidents took place and the Administration, unfortunately was unresponsive to the sufferings of the people who met with accidents. Every time an accident took place, the Government was ready with an explanation, convincing or otherwise. Sometimes the blame was on systemic failure and at other times the blame was on sabotage, poor signalling system, unmanned railway crossing or over-aged rolling stock. The reports of the various Committees and agencies set up to inquire into the cause of the accidents to fix responsibilities continued to gather dust without being examined and implemented. None of the recommendations of the Rakesh Mohan Committee or Justice Khanna Committee has so far been implemented. The result is that the work of track renewal, technical upgradation, acquisition of new rolling stock and updating of outmoded signalling system has not been attended to. Each of these has been a contributory factor for the railway accidents at one time or the other. I expect that the hon. Railway Minister would make a serious effort to implement some of the recommendations on a large scale in order to make railway journey more safe.

Sir, taking into account the constraint of time, I would like, in brief, to make some suggestions for improving the efficiency of the Railways. The first and the foremost suggestion is that the Railway Administration should draw up a scheme so that more and more goods and persons could be transported from one part of the country to the other through the railway network instead of through the road network. For example, a lorry with a load of ten tonnes consumes 400 litres of diesel to travel from Hyderabad to Delhi, whereas a train with a similar load consumes 40 litres of diesel to cover the same distance. The nation could save precious diesel and in that process a lot of foreign exchange. Again, the wear and tear in case of the Railways is less and so also are accidents. Even time taken for a train to travel from Hyderabad to Delhi, if the track is doubled, would be much less than that of a lorry.

17.00 hrs. Then the number of accidents would be less. There are so many advantages. Unfortunately, the previous Government gave preference to road transport and spent huge amounts of money on four way lanes, six way lanes and so on. I think it is a grave mistake committed by the NDA.

In order to attract freight from road transport to rail, one should double the track. Doubling of the track should be taken up as an urgent measure and on a war footing. Last year, we have done 300 kilometres of it. Shri Lalu Prasad should at least do 10,000 kilometres of doubling every year. If you want funds, I will give you ideas.

Coming to electrification, I need not travel by air from Hyderabad to Delhi spending about Rs. 8000. If I can travel by Rajdhani Express in 12 hours time, I would happily and comfortably sleep in the train spending Rs. 2000. The Railways earn money and I save money by that. Doubling of the track should be done as an urgent measure and it should be done on a war footing. Electrification of railway track should be done.

I have one more suggestion to make to the hon. Railway Minister. You would have seen military trucks being moved on the trains. Why not the loaded lorry also be moved on the train? You are only putting a railway siding at the railway station, to enable the lorry to come and sit on the goods wagan . The goods trains carries to the destination. There lorry gets it down the train goes to the unloading point, unloads the goods and picks any other goods to new point. After the loory getting loaded with new goods to the new destination it will again go to the nearest railway station for onward journey. Tremendous traffic can be generated by this way and the Railways can make not Rs. 800 crore but Rs. 80,000 crores of profit. I am telling you this point. Yes, we need money for this. You may issue Railway bonds. I would be your Advisor. Please issue Railway bonds. The public is eager to finance the Railways. Definitely, you will be the major earner to the exchequer. In your tenure of five years - I bless you that you will be here for five years – you should make the Indian Railways the biggest earner to the exchequer.

Thank you Mr. Railway Minister for listening to me. I thank the Chair for giving me an opportunity to make my maiden speech as I am a first time Member.

SHRI TATHAGATA SATPATHY (DHENKANAL): Sir, long time ago, we used to hear a joke which said:

"जब तक रहेगा समोसे में आलू, तब तक रहेगा बिहार में लालू। "

अब उड़ीसा के लोग कल से कह रहे हैं :-

" मान्यवर रेल मंत्री जी लालू, पकड़ाए हैं उड़ीसा को भालू। "

पहले मंत्री जी को हम नमस्कार करते हैं। टीवी चैनल्स कह रहे हैं जैनेरस लालू।

So, we are sure that Laluji coming from the eastern part of the country, and the honourable Chairman also coming from the Eastern part of the country, will not do anything that would affect the Eastern part. The States of Orissa, Bengal, Bihar, Jharkhand and Chhatisgarh which have been consistently neglected by the Central Government of the Congress Party will not continue to feel so. The time has come when the people of these States should feel comfortable thinking that there is somebody who is looking after their interests. It is said that there are three ways in life. They are the good way, the bad way and the railway. Shri Lalu Prasad has chosen the railway. So, we have nothing to say about it. We can only do nepathya kolahala, that is, sit at the back and clap.

Shri Lalu Prasad has read out his Budget speech in Hindi. But the deletion of two ‘oo’s from his name – I do not know whether the credit should go to vaastu or not – has deleted the woes from the hearts and minds of the people of his constituency and his State. But Orissa has been burdened with more woes. Let the Minister prosper. We will be happy about it. We have no problems. But let him look after Orissa also as part of this country which is not evident in the present Budget which the hon. Minister has presented to this House. He has, in his Budget, given a lot of importance to passenger security. I, as Editor of one of the Oriya newspapers, have written many editorials about this. This issue concerns all of us in this House. Passenger security, till date, has been the least important subject for the Indian Railways.

There is a lot of improvement in today’s modern vehicles. If we see an automobile or an aircraft, you will see there are constant developments. In an automobile, you have what they call air bags. If there is an impact, the driver gets an air bag in front of his face. There are passenger cages. If there is an impact and even if the vehicle is crashed, the passengers are saved because they are inside a cage. Similarly, in aircraft you have seats, linen and chadhars which are fire retardant. So, if there is a fire in an aircraft, quite often you will see the airhostess lifts a pillow or lifts a seat and puts it on the fire and the fire dies out. But unfortunately, the Indian Railways have not consulted any foreign agency or they have not bothered to have an R&D Department which will update the coaches. Today we might have a few more air-conditioned coaches than normal, but then the quality of the coaches is exactly the same that we saw, may be thirty or forty or fifty years ago.

So, if the Minister is genuinely interested in passenger security, he should look into these basic things. It should not be difficult for him. In the Budget it is mentioned that in 2003-04, all accidents, big and small, put together were something like 325 in number. So, 325 mishaps per year average to about one accident per day.

1707 hrs. (Mr. Deputy-Speaker in the Chair) In that situation the Railway Ministry, the Railway Board and the authorities can easily do a survey, can easily do a study and find out what can be done to safeguard the passengers. Nothing has been mentioned in the Budget.

So, it seems the Budget is a haphazard one and a lifeless one without the hon. Minister putting his heart into it. It has been prepared by the bureaucrats and he has read it out. So, the idea of passenger security in coaches that do not tolerate impact seems improbable.

We are also happy that the hon. Minister has tried to make the Railways more environment friendly. He has tried to cut out plastics, thermocol and such items. Whenever we come by trains from Orissa to Delhi, on both sides what we see is all dirty, filled with plastic and thermocol. So, it is a good thing. But we have to see what the former Minister, Shrimati Maneka Gandhi mentioned about this. She has a point. She said that when you use the earth from the surface you are damaging the soil. Moreover, the earthern pots are not bio-degradable. That is a debatable point. I am not so knowledgeable about this. That should also be studied. It is a point that should not be neglected.

We all are aware that in the development of the Railways, pensions are a big drain on the resources. In reality, to modernise the Railways and to bring about a change, we have to do something about it, thereby making an impact on the passenger and freight traffic. Something has to be done by which the Railways can unburden their pension weight and thereby improve their performance by investing more money which is saved from this sector into development of tracks, coaches, engines and the general traction system. These are a few points that I wish to suggest to the Minister.

Sir, we are happy – I have mentioned happiness thrice already and this is the fourth time – that in his speech the hon. Minister has specifically mentioned Orissa, Punjab and West Bengal as States which, he feels, have been neglected in the past. It is a good thing that he takes cognisance of this fact and he is concerned about it. We welcome his concern, but I will not defocus. Let me focus on Orissa specifically. If you see Orissa, it is a mineral-rich State and surprisingly, - it is a fact which can be verified by anybody - the freight originating from Orissa gives the Indian Railways an annual income of Rs. 3,500 crore. This figure has been consistently growing for the past seven years. During the year 2003-04, it was Rs. 3,500 crore. It is not a small sum. No other State only in the sector of freight traffic originating from it gives the Indian Railways Rs. 3,500 crore as far as my knowledge goes.

So, Orissa’s contribution to the Railway kitty is massive. But in comparison, when you see the investment in Orissa, it is really pitiable that we are badly neglected. For example, let us take the density of railway route length per thousand square kilometres. In the State of West Bengal, it works out to 43.10 km. per thousand square kilometres. In the State of Bihar, it is 30.40 km. The all India figure is 19.11 km. The State of Punjab is below the all India figure and Orissa is below Punjab. In Orissa it is only 15.03 km. So, your density of railway route length per thousand square kilometres is so low that you are not able to reach people.

MR. DEPUTY-SPEAKER: Please conclude soon.

SHRI TATHAGATA SATPATHY : Sir, I am representing BJD. You are representing a great party which fights for the country. You cannot cut me short. Please give me more time.

MR. DEPUTY-SPEAKER: We have got one more Member to speak from your party.

SHRI TATHAGATA SATPATHY : Sir, I represent so many Members. I am the only speaker from my party and I am speaking for the entire State of Orissa.

MR. DEPUTY-SPEAKER: All right. You may continue.

SHRI TATHAGATA SATPATHY : Sir, thank you for your kindness. I am grateful.

The NDA Government did start some very outstanding projects in Orissa, but the support that was to come would have taken a little more time which the NDA Government did not get. But prior to the NDA Government, if you see consistently, Orissa, for a very prolonged time, has had to face utter neglect and discrimination by consecutive Central Governments specifically in the field of railways and this has damaged us so much that till date we are not able to raise our head and equate ourselves with the rest of the country.

Sir, we were offered the East Coast Railway. Earlier, we had the South Eastern Railway which was headquartered at Kolkata and it used to look after Orissa and areas right from Kolkata to Visakhapatnam. Then the East Coast Railway was formed and it was headquartered at Bhubaneswar. But the East Coast Railway has not received any support from the Union Government for the past so many years due to which the development has not been up to the mark. This year, we have got Rs. 8 crore, but this amount is pittance when you are trying to set up an independent railway zonal system. So, I would request the hon. Minister to specifically look into the East Coast Railway and build it up so that Bhubaneswar also becomes an economically independent railway headquarter which can support the Indian Railways on a larger scale.

Let me come down to a few specific trains, which need much attention. There is an 82-kms. long Haridaspur-Paradip line which was sanctioned in 1996-97. Paradip is an economic centre. It is a port and development in Paradip will not be limited only to Paradip town but it will affect the complete hinterland which will cover most of the coastal districts of Orissa right up to the central part of Orissa, which I represent - my constituency Dhenkenal - which is banked in the middle of Orissa. This line was sanctioned in 1996-97. It has only received a few lakhs of rupees each year, by which the line has not developed.

Similarly, we have a train which is called the Inter-City Train, which is from Sambalpur to Bhubaneswar. The hon. Minister has extended it up to Puri. The capital of the State is Bhubaneswar. Sambalpur is an important city of Western Orissa. So, the connection between the two cities is the prime target of an Inter-city Express and extending it up to Puri is a technically very wrong thing, which I vehemently oppose and I hope the hon. Minister would reconsider it. Khurda-Bolangir was supposed to be a new line and we expected, at least, Rs.100 crore to be sanctioned this year to be spent there. I would also like to bring to the notice of the hon. Minister that money in the past has been given to the Railways in Orissa for development, but what is happening. Suppose a project gets Rs.15 crore, they only spend Rs.5 crore or Rs.6 crore and at the end of the year Rs.9 crore to Rs.10 crore are reverted back to the Central kitty. Again, the next year another Rs.10 crore is given, which again decreases, and thereby no development is taking place.

उपाध्यक्ष महोदय : आप जरा जल्दी खत्म कर दीजिए। आप वाइण्ड अप करिये।

SHRI TATHAGATA SATPATHY : Sir, I will quickly read it out because you are not giving me time. The extension of Sambalpur-Bhubaneswar Inter-city Express should not be done up to Puri. It should stop at Bhubaneswar. There is a need to connect Puri to Panaji, which could be named Vaishali Express. It would attract tourists from Goa to Orissa. We need a train from Puri to Jaipur in Rajasthan via Sambalpur, which would help traffic from North India. A major part of Southern Orissa, namely the districts of Ganjam, Gajapathy, Rayagada, Koraput, Nowrangpur, Malkangiri, Boudh and Kondaman, and Srikakulum district of Andhra Pradesh do not have a straight train connection to Delhi. There are five Members representing these areas. I would request the hon. Minister of Railways to have a train which should emanate from Behrampur to New Delhi.

East Coast Railway has sent in a suggestion to start Hirakud Express from Behrampur. Now, it is from Bhubanewsar to Hazrat Nizamuddin, but it could start from Behrampur. It would connect Behrampur, that is, Southern Orissa to New Delhi. Similarly, the Prasanti Maidan Express, which is presently plying between Vaizag and Bangalore, could be extended up to Bhubaneswar or to Cuttack and that would connect Behrampur and Southern parts of Orissa again to South India in a large way. One train Puri-Jaipur, Rajasthan via Sambalpur, which could be twice a week and one Express train from Behrampur to Tatanagar.

MR. DEPUTY-SPEAKER: Please conclude now. It is not possible for me to give you more time.

SHRI TATHAGATA SATPATHY : On Rourkela, Raiganj, Paradip, Sambalpur, New Delhi line we need a train through Sambalpur. The Ministry has given us three Rajdhanis starting from Bhubaneswar to Delhi thrice a week. Now these trains come through Kharakpur, but what I would suggest is that there are three more trains which should come through Dhenkenal, Angul, Sambalpur and Delhi starting from Bhubaneswar, that would make six Rajdhanis per week and they would cover different parts of Orissa.

Tapaswini Express starts from Bhubaneswar to Sambalpur and it has been extended up to Hatia. I would suggest that it does not exceed the boundaries of Orissa. Tapaswini Express, which earlier used to ply between Bhubaneswar and Sambalpur, should stop at Rourkela and should not go beyond Rourkela.

           

श्री प्रभुनाथ सिंह (महाराजगंज, बिहार) : उपाध्यक्ष महोदय, कल रेल मंत्री द्वारा जो रेल बजट प्रस्तुत किया गया है, मैं उसी पर अपने विचार व्यक्त करना चाहता हूं। रेल बजट पर देश में मश्रित प्रतक्रिया हुई है इसलिए हम भी मश्रित बातें ही बोलना चाहते हैं। देश की भावना को मैं यहां पर रखना चाहता हूं। हालांकि लालू जी को हम उस बात के लिए बधाई देते हैं कि कम से कम, हमको लगता है कि जिंदगी में पहली बार वे डेढ़-पौने दो घंटे तक लखित भाषण पढ़े होंगे। ऐसा इनको जिंदगी में पहली बार करने का मौका मिला होगा। यह इनके लिए इतिहास का विषय बना होगा। …( व्यवधान)

श्री थावरचन्द गेहलोत (शाजापुर):यह इनकी मजबूरी भी है। …( व्यवधान)

श्री प्रभुनाथ सिंह : हां, मजबूरी भी है। हालांकि देश के लोग आपको लखित भाषण पढ़ते नहीं सुनना चाहते थे। वे चाहते थे कि आपका बोलने का जो स्टाइल है, उस स्टाइल में आप बोलिये।…( व्यवधान)

श्री लालू प्रसाद : रिप्लाई में वही होगा।…( व्यवधान)

श्री प्रभुनाथ सिंह : आप बीच-बीच में कभी-कभी उस शैली में बोल रहे थे। हम आपको सुन रहे थे। …( व्यवधान)

श्री लालू प्रसाद : आप लोग तो यहां नहीं थे। …( व्यवधान)

श्री प्रभुनाथ सिंह : हमने आपके भाषण का एक-एक शब्द सुना है। टी.वी. पर बैठकर हम आपका भाषण सुन रहे थे। उस भाषण में …( व्यवधान)

MR. DEPUTY-SPEAKER: Shri Prabhunath Singh, please address the Chair.

श्री लालू प्रसाद : ये सब हमारे पड़ोसी हैं। …( व्यवधान)

श्री प्रभुनाथ सिंह : ये मंत्री भी हैं, पड़ोसी भी हैं और एम,पी. भी हैं। इसलिए बीच में इधर से उधर थोड़ा बहुत तो चलेगा।…( व्यवधान)

उपाध्यक्ष महोदय : इससे गड़बड़ हो जायेगी। अब क्या करें?

...( व्यवधान)

श्री प्रभुनाथ सिंह : जब लालू जी अपने लहजे में भाषण दे रहे थे तब उन्होंने उस क्रम में कहा था कि सदन में जब सदस्यों को आना चाहिए तो सोनिया जी को नमस्कार करके आना चाहिए और जब जाना चाहिए तब नमस्कार करके जाना चाहिए।…( व्यवधान)आप सुनिये।…( व्यवधान)आप बैचेन क्यों हो जाते हैं। …( व्यवधान)मैं बताना चाहता हूं कि लालू जी की ऐसा कहने के पीछे नीयत यह थी कि सोनिया जी त्याग की मूर्ति हैं। उस त्याग की मूर्ति को बिना नमस्कार किये हुए इस देश का अपमान हो जायेगा। लेकिन ऐसी त्याग की मूर्ति को, हमको लगता है कि पहली बार इस देश में ऐसी घटना घटी है, जब यहां कोई सरकार गठबंधन की बनी हो और उस गठबंधन की सरकार की अध्यक्ष होने के नाते सरकार की सभी सुविधाएं उन्हें प्राप्त की जायें। इतना ही नहीं, जिस आसन पर सोनिया जी बैठी हैं, वे सरकार का आसन है, सरकारी बैंच है। …( व्यवधान)जोकैबिनेट रैंक के बराबर होने का मतलब है। …( व्यवधान)

उपाध्यक्ष महोदय : प्रभुनाथ सिंह जी, आप रेल बजट पर बोलने की कोशिश कीजिए।

...( व्यवधान)

ग्रामीण विकास मंत्रालय में राज्य मंत्री तथा संसदीय कार्य मंत्रालय में राज्य मंत्री (श्रीमती सूर्यकान्ता पाटील) : उपाध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्या यहां पर उपस्थित नहीं हैं। …( व्यवधान)

श्री प्रभुनाथ सिंह : आपसे ज्यादा हमें बोलना आता है। आप सुनने का काम कीजिए । …( व्यवधान)

श्रीमती सूर्यकान्ता पाटील : उपाध्यक्ष महोदय, यह ठीक बात नहीं है।…( व्यवधान)

उपाध्यक्ष महोदय : प्रभुनाथ सिंह जी, आप रेल बजट पर बोलिये।

...( व्यवधान)

श्री प्रभुनाथ सिंह : उपाध्यक्ष महोदय, सदन में जो चर्चा हुई है, उस चर्चा पर मैं बोल रहा हूं। मैं कोई नयी बात नहीं कह रहा हूं।…( व्यवधान)

श्रीमती सूर्यकान्ता पाटील : उपाध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्या यहां उपस्थित नहीं हैं इसलिए उनका नाम नहीं आना चाहिए। …( व्यवधान)

उपाध्यक्ष महोदय : मैंने उनको पहले कह दिया है।

...( व्यवधान)

श्री राजीव रंजन सिंह """"""""ललन"""""""" ( बेगूसराय) : क्या यह कल रेल बजट का विषय था? …( व्यवधान)

रेल बजट भाषण में जब उसकी चर्चा हो तो यहां उसकी चर्चा होगी। …( व्यवधान)वह रेल बजट का पार्ट था। …( व्यवधान)जब वह रेल बजट का पार्ट है तो उस पर चर्चा होगी।…( व्यवधान)

श्री पी.एस. गढ़वी : उन्होंने क्या गलत कहा है ?…( व्यवधान)

MR. DEPUTY-SPEAKER: No running commentary, please. प्रभुनाथ सिंह जी, आप बजट पर बोलिये।

...( व्यवधान)

उपाध्यक्ष महोदय : मैंने माननीय सदस्य से कह दिया है कि वह बजट पर बोलें।

...( व्यवधान)

श्री प्रभुनाथ सिंह : यह रेल बजट क्या है ? रेल बजट को देखने से लगता है कि रेल बजट घाटे का सौदा हो चुका है। हम एक बात पूछना चाहते हैं कि कोई भी संस्था हो, उनमें रेल इस देश की बहुत बड़ी व्यावसायिक संस्था है, इस देश की मुख्य चीज है जिससे देश का गांव-गांव जुड़ा हुआ है। जब रेल बजट आता है तो गांव के लोग इस उम्मीद से रेल बजट को देखते हैं कि हमारे राज्य को क्या मिला, प्रदेश को क्या मिला, सबको क्या मिला।रेल बजट में ८० प्रतिशत पेज इससे पहले के अंतरिम बजट की कार्बन कॉपी हैं। हम यह महसूस नहीं करते हैं कि इतने मोटे भानुमति के पिटारे को तैयार करने की जरूरत थी। रेल बजट में ऐसी नई बातें लाई जाती हैं जो देश की जनता को बताई जाएं, देश की जनता को दी जाएं और देश की जनता उन पर अपनी प्रतक्रिया दे सके कि हमें क्या मिला। एक बात जरूर है कि इन्होंने माल भाड़ा और यात्री किराया भाड़ा नहीं बढ़ाया। इसके लिए हम इनको बधाई देते हैं कि इससे मध्यम वर्ग के लोगों को खुशी हुई है। लेकिन जहां भाड़ा नहीं बढ़ने की खुशी है, वहीं यदि रेल इस देश में घाटे का सौदा बन जाएगा तो कल इसका क्या होगा, इस पर गंभीरता से चिंतन करने की जरूरत पड़ेगी।…( व्यवधान) देवेन्द्र जी, इस पर हम बधाई देते हैं। हमने कहा है कि मश्रित प्रतक्रिया है तो मश्रित बात बोलेंगे। लेकिन आप सुनते नहीं हैं, बेचैन हो जाते हैं।…( व्यवधान)

रेल देश की मुख्य परिवहन व्यवस्था है। माल ढुलाई से लेकर यात्री को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने, जिसमें इस समय रेल में दो महत्वपूर्ण विषय सामने आ रहे हैं - एक सुरक्षा और दूसरा संरक्षा। माननीय रेल मंत्री जी का जो बजट आया है, उसमें उन्होंने दिया है कि २००१-२००२ के बाद रेल दुर्घटनाओं में कमी आई है। उन्होंने कहा है कि २००१-२००२ में जहां ४१४ था, वहीं २००२-२००३ में ३५१ हुआ और २००३-२००४ में ३२५ हुआ। यह २००३-२००४ का वह हिस्सा है जो नई सरकार बनने से पहले का है। लेकिन जब से नई सरकार बनी है यानी २२ मई, २००४ को नई सरकार बनी, २२ मई, २००४ के बाद रेल में क्या दुर्घटनाएं घटीं, जरा एक नजर उसे देखेंगे। २३ मई - जालंधर में अर्बन एस्टेट के निकट सुभाना गांव रोड के रेलवे क्रासिंग पर ट्रेन व वैन में टक्कर। २५ मई - धनबाद-फिरोजपुर किसान एक्सप्रैस मुगलसराय से वाराणसी के मध्य बगैर वैक्यूम ब्रेक के इंजन द्वारा चलाई गई और दुर्घटनाग्रस्त होते-होते बची। २७ मई - पटना के निकट फरक्का एक्सप्रैस में सशस्त्र लुटेरों ने यात्रियों को लूटा तथा एक पुलिस सब-इंस्पैक्टर की गोली मारकर हत्या कर दी। २९ मई - सम्भलपुर (उड़ीसा) में एक टीटी ने राऊरकेला-सम्भलपुर डीएमयू में एक यात्री को चलती गाड़ी से धक्का देकर नीचे गिरा दिया। ३१ मई - पूर्व मध्य रेलवे में सोननगर-बरवाडीह क्षेत्र में सशस्त्र लुटेरों ने पटना-पलामू एक्सप्रैस के यात्रियों को मार-पीटकर लाखों रुपये लूटे। ३ जून - जमुई (बिहार) के झांझा स्टेशन के निकट केबिन मैन से मिलीभगत कर सशस्त्र लुटेरों ने पटना-पुरी एक्सप्रैस के यात्रियों से १ लाख रुपये से अधिक लूटे। ७ जून - कैथल से दिल्ली गेहूं लेकर आ रही मालगाड़ी के १५ डिब्बे घरौंडा स्टेशन के पास पटरी से उतरे। इसके कारण दिल्ली-अम्बाला मार्ग पर कई घंटे गाड़िय़ां विलम्ब से चल रही हैं। इसी दिन मथुरा-भिवानी यात्री गाड़ी के एक डिब्बे में शार्ट सर्किट के कारण धुआं निकलने से अनेक यात्री चलती गाड़ी से कूद पड़े। ९ जून - हावड़ा-दानापुर एक्सप्रैस में सफर कर रहे दो व्यक्तियों की एक एयर कंडीशन्ड स्लीपर में हत्यारों ने गोली मारकर हत्या कर दी। ११ जून - नई दिल्ली आ रही केरल एक्सप्रैस की ब्रेकयान में आग लगने से लाखों का नुकसान। इसी दिन बरेली के पास सियालदाह एक्सप्रैस से दो यात्री नीचे फेंके गए। एक घायल व दूसरे का पता नहीं। यानी घटनाक्रम।

जब श्री नीतिश कुमार रेल मंत्री बने थे तो लालू जी कहा करते थे कि श्री नीतीश कुमार को लोहा नहीं धारता। इसलिए इन्होंने विश्वकर्मा की मूर्ति लगाकर पूजा की कि विश्वकर्मा इनपर कृपा करें। जो लोहे का व्यापार करता है, वह विश्वकर्मा की पूजा करता है। लालू जी, हमको लगता है कि आप विश्वकर्मा की पूजा ठीक से नहीं कर रहे हैं। अगर ठीक से पूजा करते तो रेल की जो घटनाएं घट रही हैं, उनमें कमी आती। हम चाहेंगे कि अगर आप ठीक से पूजा नहीं करते हैं तो ठीक से कीजिए ताकि लोहा आपको धारे। हम लोगों की शुभकामनाएं हैं। कम से कम इन घटनाओं में कमी आए। देश की जनता इन घटनाओं के कारण काफी चिन्तित है।…( व्यवधान)

श्री लालू प्रसाद : आपका सहयोग रहेगा तो सब ठीक हो जाएगा।ह्ल( व्यवधान)

श्री प्रभुनाथ सिंह : हम आपको बताना चाहते हैं कि जो घटनाएं घटीं, रेल में अनेक तरह की समस्याएं होती हैं जिनके कारण घटनाएं होती हैं। कई बार जब रेल की घटनाओं की जांच हुई है तो कहा गया कि मानव भूल के चलते घटनाएं घटती हैं।

       

लेकिन मानव भूल में जो जिम्मेदारियां तय की जाती हैं, वे जिम्मेदारियां चिन्हित करने में काफी नाइंसाफी की जाती है। जो छोटे कर्मचारी हैं, उनको दंडित किया जाता है और जो बड़े जिम्मेदार लोग होते हैं, उनको उसमें पुरस्कृत किया जाता है। हम आपसे निवेदन करना चाहते हैं कि जिम्मेदारी तय करने के समय यह चिन्हित किया जाए कि कौन लोग जिम्मेदार हैं। छोटे कर्मचारियों को दंडित करके और बड़े लोगों को पुरस्कृत करके कभी भी ऐसी घटनाओं पर अंकुश नहीं लगाया जा सकता।

जहां तक सुरक्षा की बात है, इन घटनाओं की चर्चा हमने की है और ये लोग कहते हैं कि वधि व्यवस्था का सवाल राज्य सरकार का होता है। होता भी है। लेकिन राज्य सरकार और केन्द्र सरकार दोनों मिलकर इन व्यवस्थाओं को देखती हैं। बिहार के मुख्य मंत्री का एक बयान आया। उसमें कहा गया कि रेल में डकैती रोकना सरकार से संभव नहीं है। जहां तक अगर मुझे ठीक से स्मरण है, हमने पढ़ा था। हम कहना चाहते हैं कि जब राज्य सरकार यह कह रही है कि अगर इस राज्य में ट्रेन में डकैती होना या किसी तरह का अपराध होना राज्य सरकार से रोकना संभव नहीं है तो हम माननीय रेल मंत्री जी से निवेदन करेंगे कि आपने पल्ला झाड़ दिया। आप रेल मंत्री हैं। आप यात्रियों की सुरक्षा करने के लिए कौन सी अलग से व्यवस्था करने जा रहे हैं, इस पर आपने रेल बजट में चर्चा नहीं की है। आप तय कीजिए कि जो यात्री ट्रेन में चलते हैं, उनकी सुरक्षा के लिए आप कौन सी कार्रवाई करेंगे, कौन सी व्यवस्था करेंगे ?

श्री लालू प्रसाद : आप सुझाव दे दीजिए कि क्या किया जाए।

श्री प्रभुनाथ सिंह : हम तो यह कहेंगे कि आप अपने आरपीएफ के लोगों को ...(व्यवधान) आप सलाह मांगते हैं तो हम तो सलाह-सुझाव दे दें लेकिन आप हमारी सलाह मानिएगा न, तब न। रघुवंश बाबू कान में कह देंगे, मान लीजिए उनकी बात तो मान लेंगे और नहीं कहेंगे तो नहीं मानेंगे।

श्री लालू प्रसाद : सुझाव देना भी आपका दायित्व है। यह हम आपको बता रहे हैं।

श्री प्रभुनाथ सिंह : हम बताना चाहते हैं कि लैवल क्रॉसिंग के चलते भी कई घटनाएं घटती हैं। १२८० घटनाएं ऐसी हुई हैं जहां चौकीदार लैवल क्रॉसिंग पर नहीं थे। उन चौकीदारों की नियुक्ति के संबंध में आपने कहा है कि संवेदनशील स्थानों को प्राथमिकता दी जाएगी। हम जानना चाहते हैं कि संवेदनशील स्थानों की पहचान का फॉर्मूला क्या होगा ?हमने पढ़ा है और उसमें कोई फॉर्मूला नहीं बताया है। फॉर्मूला नहीं बताया, इसका मतलब इतना ही होगा कि जिन लैवल क्रॉसिंग पर एक्सीडेंट हो जाएंगे और दस-बीस लोग मर जाएंगे, उनको संवेदनशील मानिएगा नहीं तो फॉर्मूला क्या है, आप अपने जवाब में बताइएगा, हम सुनना चाहेंगे। लेकिन हम कहेंगे कि जहां चौकीदार नहीं हैं, हर जगह चौकीदार की नियुक्ति की जाए और बहुत सी ऐसी जगह हैं जहां लैवल क्रॉसिंग नहीं बनी हैं, तो सर्वेक्षण कराकर जहां लैवल क्रॉसिंग नहीं हैं, वहां लैवल क्रॉसिंग बनाने का काम किया जाए। आपने बजट में कहा है कि एक्सल काउंटर ब्लॉक ट्रेन में लगा रहे हैं जो चेतावनी देगा और कारीगर यदि चला गया है और यदि कोई खतरे की बात होगी तो यह सिस्टम ड्राईवर को पहले से सूचना दे देगा। उसमें यह भी बात है कि ड्राईवर यदि सही समय पर कदम नहीं उठा सका तो गाड़ी में अपने आप ब्रेक लग जाएंगे और यह काम २००४-०५ में पूरा भी हो जाएगा। अगर यह काम सन् २००४-०५ में पूरा हो जाता है तो लालू जी, हम लोग आपको बधाई देंगे। जो कार्य चल रहा है और अभी तक पूरा नहीं हुआ है और आप लगे हुए हैं कि इसे पूरा किया जाए तो आप पूरा करवाइए। हम चाहेंगे कि इसे पूरा किया जाए नहीं तो ऐसा न हो जाए कि आपका बजट भानुमती का पिटारा और आपका बजट का भाषण सिर्फ घोषणा के रूप में ही रह जाए।

श्री लालू प्रसाद : आप स्टैप्स के बारे में बोलिए न।

उपाध्यक्ष महोदय : आपका समय समाप्त हो रहा है।

श्री प्रभुनाथ सिंह : ऐसा मत कीजिए। हम उसी पर आ रहे हैं। दस-पन्द्रह मिनट में समाप्त कर देंगे। सुनिए, हम बताना चाहेंगे कि आग लगने से बचने के लिए...(व्यवधान)

उपाध्यक्ष महोदय : येआपकी स्टेट के हैं।

श्री प्रभुनाथ सिंह : स्टेट के नहीं, बगल के हैं। ...(व्यवधान) आग लगने की घटना ट्रेन में होती हैं। उसमें लिखा गया है कि विस्फोटक एवं ज्वलनशील पदार्थों को गाड़ी में ले जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

लेकिन यह तो पहले से ही हर गाड़ी पर लिखा होता है और हरे स्टेशन पर लिखा होता है। उसके बाद भी इस तरह का सामान जाता है। इसमें सबसे बड़ी भूमिका वहां की पुलिस की होती है। उसकी मिलीभगत से यह सामान गाड़ी से जाता है। आप जब उनको प्रशिक्षण दिलाते हैं तो नैतिकता का भी प्रशिक्षण उनको दिलाना चाहिए। आप कानून बनाते हैं, उस पर अमल भी होना चाहिए।

आप रेलवे सर्विस बोर्ड को भंग करके पुरानी पद्धति अपनाने जा रहे हैं, मुझे इसमें कोई आपत्ति नहीं है। लेकिन मैं आपको आगाह करना चाहता हूं कि पहले भी बिहार से कई रेल मंत्री हुए हैं। मैं किसी पर दोषारोपण नहीं करना चाहता, लेकिन जब नियुक्ति होती थी तो दिल्ली में बड़े-बड़े होटलों में बैठकर दो लाख रूपए, चार लाख रुपए लेकर नियुक्ति पत्र दिए जाते थे। इसलिए उस पद्धति में भी गड़बड़ी की सम्भावना बढ़ेगी। आपको यह देखना चाहिए। अगर आप इसको नियंत्रित नहीं कर सकेंगे तो आप भी बदनामी से बच नहीं पाएंगे। इसलिए अभी जो नियुक्ति की प्रक्रिया है, वही रहने दें और जो लोग ऐसा करते हैं उनको करने दें, क्योंकि हमारा ऐसा मानना है कि गड़बड़ी नहीं रोकी जा सकती। अब मैं स्क्रैप वाले मुद्दे पर आता हूं। उसके लिए आपने अच्छा काम किया है, मैं आपको इसके लिए बधाई देता हूं।

श्री लालू प्रसाद : ठेके वाली बात भी है।

श्री प्रभुनाथ सिंह : कल रेल बजट पेश करते हुए आंखें मोड़-मोड़ कर जब आप अपने अंदाज में बोल रहे थे कि हमने स्क्रैप को बाहर बेचने का काम बंद कर दिया है, इससे ए.के. ४७ वालों को रोकने का काम हमने किया है। लेकिन मेरा ऐसा मानना है कि यह ए.के. ४७ वाला सिस्टम इतनी आसानी से रुकने वाला नहीं है। होता यह है कि कोई अच्छा ठेकेदार अगर काम करने के लिए आता है तो उसको मोबाइल से फोन किया जाता है कि आप अगर इस टेंडर में भाग लोगे तो आपके बेटे का अपहरण कर लिया जाएगा। इस तरह की घटनाएं ज्यादातर बिहार और उत्तर प्रदेश में होती हैं। अगर ऐसे लोगों पर नियंत्रण नहीं कर पाए तो हम कहते हैं कि आप चाहे जिस तरह का कानून बना लें, अमल में मजबूती नहीं हुई तो हम और आप इसको रोक नहीं पाएंगे।

मैं अंत में एक-दो बात कहकर अपनी बात समाप्त करूंगा। लालू जी आपने अपने रेल बजट में खानपान में सुधार करने की घोषणा की है। आपने मट्ठा और लस्सी का उपयोग करने की बात भी कही है। यह बड़ी अच्छी बात है। लेकिन हमें इसमें एक चिंता है। मैं किसी पर आक्षेप नहीं कर रहा हूं, लेकिन मैं कहना चाहता हूं कि दूध और दही का ज्यादातर काम यादव जाति के लोग करते हैं। आपने कहा है कि सहकारिता से दूध लेंगे, दही लेंगे। मेरा मानना है कि आप उन यादव जाति के लोगों के साथ ऐसा करके अन्याय करेंगे, जो इसका उत्पादन करते हैं। आप उनके द्वारा बनाया हुआ मट्ठा, दही का उपयोग रेलवे में करें। सहकारिता का दूध तो सारे देश में बिक रहा है और उसकी कमी भी है। इसलिए उसकी जगह जो लोग गांवों में भैंसों और गायों से दूध निकाल कर दही इत्यादि बनाते हैं, उसका उपयोग रेलवे में करें, तो हम समझेंगे कि आप उनके साथ भी न्याय कर रहे हैं। इसी तरह से आपने मिट्टी के बर्तन की बात कही है कि रेलवे में कुल्हड़ का उपयोग किया जाएगा। मैं टी.वी. में "आजतक"समाचार चैनल में देख रहा था कि गुजरात में मशीनों द्वारा मिट्टी के कुल्हड़ बनाए जा रहे हैं। लगता है कि आपके यहां उसकी सारी आपूर्ति वहीं से होती है। आपको चाहिए कि कुम्हार के द्वारा हाथ से बनाए गए बर्तन की आपूर्ति रेलवे में हो। जब आप अपना जवाब दें तो बताएं कि कितने गांव के कुम्हारों से रेलवे अधिकारियों ने ये कुल्हड़ लेकर आपूर्ति की है, अगर नहीं की है तो यह उन लोगों के साथ अन्याय होगा।

उपाध्यक्ष जी, हम एक दिन विक्रमशिला एक्सप्रेस से जा रहे थे। रास्ते पर हमने चाय ली तो जिस रफ्तार से वह कुल्हड़ में चाय डाल रहा था उसी रफ्तार से वह हमारे कपड़ों के ऊपर गिर रही थी। हमने कहा कि क्या कर रहे हो। उसने कहा कि लालू मार्का है, नीतीश मार्का चाहिए तो प्लास्टिक के ग्लास में दे देता हूं। रेलगाड़ी में अब लालू मार्का और नीतीश मार्का चल रहा है। लेकिन यह सब यात्रियों की सुविधा के हिसाब से होना चाहिए न कि लालू मार्का या नीतीश मार्का के हिसाब से होना चाहिए।

दूसरी बात यह है कि जो किताब वाला अधिकार है वह अंग्रेजों के जमाने से बना हुआ है। हमने माननीय नीतीश कुमार जी से भी इसे करने का आग्रह किया था लेकिन वे नहीं कर सके थे। अनुसूचित जाति, जनजाति, सैनिकों, पिछड़े वर्गों, गरीबी की रेखा से नीचे रहने वालों को जो आपने २५ प्रतिशत आरक्षण दिया है उसे चाहे आप ३० प्रतिशत कर दीजिए लेकिन किस वर्ग को कितना मिलेगा इसे चिन्हित कर दीजिए। नहीं तो यह योजना भी हाइजैक हो जाएगी। यह हमारा आपको सुझाव है कि आप प्रतिशत निश्चित कर दीजिए ताकि यह योजना हाइजैक होने से बच सके। आप निश्चित कर दीजिए कि अल्पसंख्यकों को कितना मिलेगा।

तीसरी बात, सब्जी-फल वगैरह की बात जो बात है तो गरीबों को फायदा जिससे पहुंचे वह कदम आप उठाएं। डीआरएम वगैरह भी घूमते रहते हैं लेकिन लोग कहते हैं कि हम सब्जी ट्रेन से नहीं ले जाएंगे। आप उसके लिए पुख्ता इंतजाम करवाइये।

चौथी बात, नौकरी के लिए इंटरव्यू के समय जो आपने सैकिंड क्लॉस की टिकट की सुविधा दी है उसका गलत उपयोग नहीं होना चाहिए। नहीं तो जो लोग पहले ही टिकट नहीं लेते हैं उनके लिए आपकी घोषणा गलती पर मुहर का काम करेगी। इसलिए इस बात के पुख्ता इंतजाम किये जाने चाहिए कि केवल वे लोग ही इस सुविधा का लाभ उठा सके जो इंटरव्यू के लिए जा रहे हों। इतना कहकर हम लालू जी आपको धन्यवाद देते हैं तथा साथ ही माननीय उपाध्यक्ष महोदय जी को भी धन्यवाद देते हैं कि उन्होंने हमें बोलने के लिए समय दिया।

MR. DEPUTY-SPEAKER: Shri Khagen Das has requested to lay his speech on the Table of the House. I have permitted him to lay his speech.

*SHRI KHAGEN DAS (TRIPURA-WEST) : Sir, while participating in the discussion on Railway Budget for the year 2004-2005 at the outset I would like to draw the attention of the hon’ble Railway Minister that I have come from a region which is most backward in respect of communication even after 56 years of Independence.

While making observation, I appreciate the bold announcement of the Railway Minister with regard to forward looking steps like modernisation, e-procurement, transparency in disposal of Scraps and other things and enhancing safety, amenities etc. But the Railway Budget has not assessed key issues like structural reforms and financial management of its resources. Further, I hope the promises made by the Minister will be implemented in due course.

Coming to the North-Eastern Region and Tripura in particular, announcement of the Minister in the budget, certain specific demands of Tripura have been duly addressed.

The people of Tripura and the State Government have been demanding completion of Railway line for Kumarghat to Agartala in a time-bound manner. The progress of the work is slow and the work needs to be expedited. I understand that about 85% of the formation work in this sector is complete barring the tunnels. The Minister of the earlier Government openly announced in December 2002 that the construction of tunnelling work (which is a critical one) between Manu-Agartala would be completed within 37 months. But it is unfortunate that the progress is not upto the mark. Special care should be taken to start the work in full swing so that it can be completed within the scheduled time.

Work of ballasting and procurement of other materials like concrete sleepers and track materials should be commenced immediately. All such materials are to be brought from outside the State by road only. The road remains intermitantly closed during the monsoon. So action may be taken immediately to commence such works so that the Project is completed in time. Railway Minister’s announcement to make a specific time-frame for completion of the work is highly appreciated.

There has been a long standing demand from the State Govt. as well as the people of the State of Tripura for further extension of Railway line from Agartala to Subroom – which will bring in economic development of the region. This line will also have international importance as the Belonia Station of Bangladesh is less than two kilometres from the proposed Indian Belonia Station.

Similarly, ‘Dhun’ Railway Station of Bangladesh will be less than 15 kms. from our proposed Subroom Railway Station. The entire North-East Region can be accessed to Chittgong Port which is only 75 kms. from Subroom through Subroom and Belonia. This will have a tremendous impact on the economy of the region.

The hon’ble Minister announced in his budget that the survey work relating to Agartala Subroom Railway line will be updated. I strongly urge that the work should be expedited. I also request the Railway Minister to lay the foundation stone of the Project during this financial year.

The other Project relating to connect Agartala with Bangladesh at Akhaura (12 kms. only) may also be followed up by the Ministry of External Affairs. The Preliminary engineering cum traffic survey of the 5.4 km. on the Indian side has been completed. This is an important Project for increasing trade and commerce between the two sides. Other than this, the people of the State and lower Assam region are now required to move through circuitous route via North Bengal to go to Kolkata, the gateway of Eastern India or other places of the country taking at least 48 hours times. Once these lines are made through the distance between Agartala and Kolkata can be covered within less than 12 hours. I request the Railway Minister to take up this issue with his counterpart in Bangladesh through the Ministry of External Affairs.

There has also been a long demand for introduction of a pair of well maintained express trains between Manu and Lumding. At present, the express train which is in operation regularly makes abnormal delay and in the way the passengers are being suffered a lot for availing of connecting train from Lumding.

Passenger amenities are also seriously lacking in this train. The seats of the train are damaged, windows are broken, toilets are without any light and water. I request the Minister to direct the N.F. Railway authorities to immediately remove all the problems faced by the passengers.

Another important issue I want to raise is that, Tripura being situated at the furthest corner of N-E region and all the essential commodities and construction materials which are to be brought from outside the State, is facing serious shortage of wagons for transportation of all these materials. The Members of Parliament as well as the State Government have brought it to the notice of the Railway Minister but without any result. It is also demanded to provide better quality of rolling stocks for goods trains. I request the Railway Minister to personally intervene in the matter to sort out the problems.

I hope that the United Progressive Alliance Government will fulfil its commitments in regard to completion of Projects and programmes announced in the budget to meet the needs and aspirations of the people of the State.

With these words I conclude.

           

श्री सदाशिवराव दादोबा मंडलिक (कोल्हापुर) :उपाध्यक्ष जी, वर्ष २००४-२००५ का यूपीए गवर्नमेंट का पहला रेल बजट कल पेश किया गया। समाज के सभी वर्गों के लिए एक बैलेंस रेल बजट पेश करने के लिए मैं रेल मंत्री माननीय लालू प्रसाद जी को बधाई देता हूं।

इस रेल बजट में एक तरफ नई रेल लाइनें, सर्वेक्षण के साथ-साथ स्टेशनों का आधुनिकीकरण करने को प्राथमिकता देना, इलैक्टि्रफिकेशन, सुरक्षा के बारे में उपाय करना, स्वच्छता-सुविधा का ध्यान रखना, बेरोजगार युवकों को नौकरी के लिए यात्रा करते समय टिकटों में रियायत देना, शहीद जवानों की विधवाओं को योग्य रियायत देना, मूक-बधिरों के साथ गंभीर रुपसे पीड़ित हिमोफिलीया रोगियों को राहत देना - यह सब इस रेल बजट का एक मानवीय रूप है।

मेरे ख्याल से परवाना कुलियों को पत्नी के साथ प्रवास के लिए दी गई रियायत सिर्फ युपीए बजट में हो सकती है। एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि हमारे रेल मंत्री जी ने सर्वप्रथम सभी राजकीय पक्षों के सासंदों से अनुरोध करके उनसे सुझाव मांगे हैं। यह एक बहुत ही बेहतरीन तरीका है, राष्ट्रहित में विचारों को और मांगों को बजट में समाविष्ट करने का। इस बारे में पहली सरकार का अनुभव अच्छा नहीं रहा। महोदय, कोल्हापुर स्टेशन का नामकरण करने के लिए मैंने अथक प्रयास किये, लेकिन हर बार राजनीतिक रंग देकर नकारने की कोशिश की गई और अंत में जब राजर्षि छत्रपति शाहु महाराज के नाम से स्टेशन का नामकरण पूर्व उपपंतप्रधान जी द्वारा सम्पन्न होना था, तो सर्वपक्षीय लोग प्रतनधियों को सभा में बुलाना तो दूर, हमें उस सभा से जानबूझकर दूर रखा गया।

महोदय, मैं सदन का अधिक समय नहीं लेना चाहता हूं, लेकिन मेरा यह मानना है कि आजतक बजट में महाराष्ट्र की रेल योजनाओं को, प्रस्तावों को पूरी तरह से न्याय नहीं मिला है। वे योजनायें उपेक्षित रही हैं। महाराष्ट्र के मुख्य मंत्री जी द्वारा प्रस्तावित योजनाओं पर प्रधानता से विचार होगा, ऐसा मुझे विश्वास है। मैं पिछले छ: सालों से कोल्हापुर के सांसद के नाते कोल्हापुर स्टेशन के आधुनिकीकरण की बात उठाता रहा हूं। मुझे आशा है, उन पर प्रधानता से विचार किया जाएगा औरआर्थिक सुविधा उपलब्ध करा कर वे काम पूरे किए जायेंगे। रेल मंत्री जी ने पुणे-मिरज-कोल्हापुर लाइन को डबलिंग करने के लिए आपने घोषणा की है। उसके लिए मैं सभी लोगों की तरङ से आपका अभिनन्दन करता हूं। पिछले कई सालों से यह मांग अधूरी थी, इसे पर्याप्त आर्थिक सुविधा उपलब्ध कराकर शीघ्र गति प्रदान करेंगे। महाराष्ट्र का यह सबसे आखिरी स्टेशन है, मुझे आशा है कि यातायात की सुविधा उपलब्ध होगी। मेरी एक महत्वपूर्ण मांग न्यू-ट्रैक द्वारा कोल्हापुर को कोंकण रेलवे से जोड़ने की है। इस लाइऩ का भी सर्वेक्षण पूरा हो गया है, इस लाइन को जोड़ने से मुम्बई-कन्याकुमारी के लिए एक बाईपास वरदान साबित होगा। इस प्रस्ताव पर गम्भीरता से विचार कर शीघ्र कार्यवाही होनी चाहिए।

श्रीमन्, कोल्हापुर का सांसद होने के नाते पिछले छ: सालों से मेरी जो मांगे हैं, उनको मैं आपके माध्यम से रेल मंत्री जी के समक्ष प्रस्तुत करना चाहता हूं - महालक्ष्मी एक्सप्रैस में रिजर्वेशन केलिए ज्यादा बर्थ उपलब्ध कराना । महालक्ष्मी एक्सप्रैस की टाइंमिग जनहित के पक्ष में बदलना । महालक्ष्मी एक्सप्रैस केIstऔर 2nd AC औरII-TierACके एक-एक कोच जोड़ना। अहिंसा एक्सप्रैस कोल्हापुर से पुणे-सूरत-रोजकोट के लिए शुरु करना। कोल्हापुर-मुम्बई के दरमियान यात्रियों की बढ़ती संख्या को नजर में रखते हुए एक और नई रेलगाड़ी शुरु करना ।इन मांगों पर गौर करके पूरा करने से हजारों यात्रियों को राहत मिलेगी - यही मैं आपसे निवेदन करना चाहता हूं।

अंत में, इस बजट में खादी और कुल्लहड़ के साथ आपने जो माड्रनाइजेशन के वविध मुद्दों पर जोर दिया है, मुझे उम्मीद है कि भविष्य में भारतीय रेल का नक्शा एक सही ढंग से बदल देंगे और मेरी सभी मांगों पर जल्द कार्यवाही करके उन्हें पूरा करेंगे, इस विश्वास के साथ मैं अपनी बात समाप्त करता हूं।

योगी आदित्यनाथ (गोरखपुर) : उपाध्यक्ष महोदय, माननीय रेल मंत्री जी ने वर्ष २००४-२००५ का रेल बजट कल सदन में प्रस्तुत किया है। भारतीय रेल एक प्रबन्धन के अधीन पूरे विश्व में यातायात के क्षेत्र में सबसे बड़ी परिवहन व्यवस्था है, जिस पर हम सब को गर्व है। पूरे भारत की एकता और एकात्मकता का आधार है। हमने सामाजिक समरसता के एक आदर्श के साथ-साथ पर्यावरण व्यवस्था के लिए भी एक उत्तम साधन के रूप में रेल को स्वीकार किया है। अगर कहा जाए कि भारतीय रेल भारतीय जीवन की लाइफ लाइन है तो इसमें कोई अतिशयोक्ति नहीं है। महोदय, जहां हमने भारतीय रेल को भारतीय जीवन की लाइफ लाइन कहा है, वहीं साथ-साथ माननीय रेल मंत्री ने जो कल रेल बजट प्रस्तुत किया है, उसमें क्षेत्रीय असंतुलन के साथ-साथ राजनीतिक संकीर्णता भी देखने को मिली है। इसलिए मैं यहां माननीय रेल मंत्री द्वारा प्रस्तुत रेल बजट का विरोध करने के लिए खड़ा हुआ हूं।

देश में दो बजट प्रस्तुत होते हैं। उसमें एक सामान्य बजट होता है और उससे पहले सदन में रेल मंत्री द्वारा रेल बजट प्रस्तुत किया जाता है। भारतीय रेल के प्रति एक विश्वास ने ही उसे जीवन और राष्ट्र की रीढ़ के रूप में स्वीकार किया था लेकिन साथ-साथ इस व्यवस्था को देने वाले देश के उन महापुरुषों ने इस बात का आभास अवश्य किया होगा कि रेल की इस लाइन को सम्पूर्ण राष्ट्र में व्यवस्थित तरीके से इस तरह फैलाएंगे जिससे संतुलित विकास पूरे राष्ट्र का हो सके लेकिन दुर्भाग्य से आजादी के बाद से ऐसा नहीं हो पाया। जिस प्रदेश या क्षेत्र के रेल मंत्री होते थे उस क्षेत्र विशेष तक वे योजनाएं लागू हुई और अन्य क्षेत्रों को छोड़ दिया गया। १९९८ में पहली बार माननीय अटल जी के नेतृत्व में केन्द्र में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की सरकार बनी थी। उस समय भी हम लोग प्रथम बजट के अवसर पर यहां उपस्थित थे। उस समय भी ये बातें सामने आई थीं कि जो असंतुलित विकास पूरे देश में केवल रेलवे के क्षेत्र में नहीं अन्य क्षेत्रों में भी हुआ है, उसे दूर करने के लिए क्या किया जाए। उस समय एक द्ृढं इच्छा शक्ति की आवश्यकता थी। हमने निर्णय लिया कि एक यूनिफार्म पॉलिसी पूरे राष्ट्र के लिए तय की जाए। हमने स्वर्णिम चतुर्भुज योजनाएं पूरे देश के लिए लागू कीं। ईस्ट-वैस्ट तथा नॉर्थ - साउथ कॉरीडोर का एक संकल्प लिया गया। पैसा कहां से आएगा? एक सतसंकल्प था। उसके कारण पूरे देश में इसका कार्य प्रारम्भ हुआ। ५६ हजार करोड़ रुपए एकत्र हुआ और कार्य भी प्रारम्भ हुआ। विकास के पथ से भारतीय रेल जो भटक चुकी थी जिस का निजीकरण करने की मांग जोर-शोर से हो रही थी, एक द्ृढ इच्छा शक्ति के कारण तत्कालीन रेल मंत्री ने माननीय प्रधान मंत्री के निर्देश पर जो कार्य प्रारम्भ किया, वह विश्वास का प्रतीक बनी थी लेकिन मुझे लगता है कि जो राजनीतिक घोषणाएं वर्तमान में हो रही हैं, ये निश्चित ही रेल को उसके विकास के पथ से पुन:एक बार भटका देंगी और इसके निजीकरण की मांग जो १९९८ से पहले बड़े जोर-शोर से चल रही थी, वह एक बार पुन: प्रारंभ हो जाएगी। कभी हमें लगता है कि हम लोग राजनीतिक स्वार्थों के लिए राष्ट्रीय हित और समाज हित को कब तक तिलांजलि देते रहेंगे। हम भूल जाते हैं कि सामाजिक व्यवस्था जिस के माध्यम से रेल को जिस सामाजिक प्रतिबद्धताओं से जोड़ना चाहते हैं, वह अगर इसी प्रकार से जारी रहा तो निश्चित ही रेल अपने पथ से स्वयं भटक जाएगी और सामाजिक प्रतिबद्धताएं भी स्वयं अपने मार्ग से हट जाएंगी। इसलिए रेल मंत्री द्वारा प्रस्तुत बजट दिशाहीन है। क्या वह राष्ट्र और रेल मंत्रालय को नई दिशा दे पाएंगा? मुझे इसमें बहुत संदेह है और मुझे ऐसा लगता है कि कहीं भारतीय रेल की स्थिति उसी प्रकार से न हो जैसे माननीय लालू जी ने बिहार में मुख्यमंत्री के रूप में आते ही चरवाहा विश्वविद्यालय की घोषणा की थी और उसका परिणाम भी देखा । मुझे इसमें संदेह है कि कहीं न कहीं चरवाहा विश्वविद्यालय का सूत्र रेल पर भी चरितार्थ होकर दिशाहीन होकर भटक न जाये।

उपाध्यक्ष महोदय, मैं उत्तर प्रदेश के जिस क्षेत्र से आता हूं, वह देश का सब से घनी आबादी वाला क्षेत्र है। आजादी के बाद उस क्षेत्र की घोर उपेक्षा हुई है और इस क्षेत्र में आजादी के बाद विकास का कार्य नहीं हुआ है। यह भारत और नेपाल का सीमावर्त्ती क्षेत्र है। एक तरफ बिहार और दूसरी तरफ नेपाल आता है। प्रतिवर्ष इस क्षेत्र में बाढ़ आती है और विकास के बारे में आज तक नहीं सोचा गया। पिछली एन.डी.ए. की सरकार को छोड़ दिया जाय़ तो किसी सरकार ने इस क्षेत्र की ओर ध्यान नहीं दिया। दुर्भाग्य से इस बार का रेल बजट भी इसी प्रकार देखने को मिला है। गोरखपुर पूर्वोत्तर रेलवे का मुख्यालय है लेकिन इस रेल बजट में गोरखपुर और पूर्वोत्तर रेलवे के लिये कोई सुविधा नहीं दी गई है। यह देखकर मन क्षुब्ध होता है। बार-बार संकीर्ण राजनीति और स्वार्थ के तहत निर्णय लिये जा रहे हैं। इसे देखकर आदमी विवश हो जाता है कि वास्तव में राजनैतिक विवशता, राजनैतिक संकीर्णता देश और समाज को कहां ले जायेगी? ऐसे बहुत से कार्य हैं जो होने चाहिये थे लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अगर पूर्वी उत्तर प्रदेश का विकास नहीं होगा तो माननीय रेल मंत्री बिहार का विकास कैसे कर पायेंगे क्योकि बिहार के लिये जो भी रेल लाईन है, वह पूर्वी उत्तर प्रदेश से होकर जाती है। माननीय रेल मंत्री जी ने न जाने किन कारणों से इसकी उपेक्षा की है और विकास का कोई भी कार्य नहीं हुआ है। इसमें सब से पहले लखनऊ-गोरखपुर विद्युतीकरण का प्रस्ताव हम लोगों ने दिया था। लखनऊ से गोरखपुर जाने के लिये अभी ५-६ घंटे लगते हैं । यदि इस लाइन का विद्युतीकरण हो जाता है तो राजस्व में १७ प्रतिशत की बचत होने के साथ साथ समय की भी बचत होगी। लेकिन दुर्भाग्य से अन्य क्षेत्रों से प्रस्ताव दिये गये हैं, इस क्षेत्र की उपेक्षा की गई है।

गोरखपुर-गोंडा लूप रेल लाईन के आमान परिवर्तन के लिये माननीय. नीतीश कुमार ने शिलान्यास भी किया था। यह रेल लाइन गोरखपुर-गोंडा लूप लाईन नौतनवां होते हुये जाती है। यह भारत-नेपाल सीमावर्त्ती क्षेत्र होकर रेल लाईन जाती है। नेपाल में वर्तमान में माओवादी हिंसा से हम लोग परचित हैं। हमारे देश के ११ प्रान्त ऐसे हैं जो नक्सली हिंसा से प्रभावित हैं। सब से पहले इस लाईन के आमान परिवर्तन का कार्य हम तीव्रगति से प्रारम्भ करेंगे, इस बारे में रेल मंत्री जी ने इस बजट में कोई प्रावधान नहीं किया है। …( व्यवधान)

MR. DEPUTY-SPEAKER: Shri Yogi Aditya Nath, please wait for a minute. If the hon. Members of the House agree, then I will extend the time of the House till Shri Yogi Aditya Nath finishes his speech.

SHRI BIKRAM KESHARI DEO : Yes, Sir. Let the time of the House be extended till his speech is over.

SHRI HARIN PATHAK (AHMEDABAD): Sir, let him continue and conclude his speech today itself.

SEVERAL HON. MEMBERS : Yes, Sir. Let him continue.

MR. DEPUTY-SPEAKER: The rest of the speeches will be delivered tomorrow.

योगी आदित्यनाथ:उपाध्यक्ष जी, गोरखपुर-गोंडा के बीच में दोहरीकरण के बारे में एक प्रस्ताव दिया गया था। वर्ष १९९६ में डोमिनगढ़ में एक भीषण एक्सीडेंट हुआ था जिसमें सैंकड़ों लोग मारे गये ते। तब से निरंतर इस तरह की मांग की जाती रही है कि इस लाइन का दोहरीकरण किया जाये। पिछली सरकार ने गोरखपुर से सहजनवा के बीच १५ किलोमीटर मार्ग के दोहरीकरण का कार्य स्वीकृत किया गया था और ६ किलोमीटर के लिये धन भी उपलब्ध कराया गया था लेकिन इस मार्ग के बारे में इस बजट में कोई प्रावधान नहीं किया गया है।

18.00 hrs. उपाध्यक्ष महोदय, गोरखपुर में पूर्वोत्तर रेलवे का मुख्यालय है। मुख्यालय के एक भाग को पहले ही हाजीपुर में एक अन्य मुख्यालय बनाकर स्थानान्तरित कर दिया गया है तथा उपमहाप्रबंधक का जो पद गोरखपुर में था, उसे समाप्त कर दिया गया है। मैं माननीय रेल मंत्री जी से अनुरोध करूंगा कि उपमहाप्रबंधक के पद को पुन: गोरखपुर में सृजित करने की व्यवस्था की जाए। पिछली सरकार ने गोरखपुर से दिल्ली के लिए एक नई ट्रेन गोरखधाम एक्सप्रैस दी थी। सप्ताह में तीन दिन यह ट्रेन चलती है। इसमें यातायात के लोड के देखते हुए मैंने माननीय रेल मंत्री जी से अनुरोध किया था कि सप्ताह में इसकी आवर्ती बढ़ा दी जाए और इसे सातों दिन के लिए कर दिया जाए। लेकिन बजट प्रस्ताव में कहीं भी इसकी चर्चा नहीं की गई है। गोरखपुर से श्री रामजन्म भूमि अयोध्या के लिए और अयोध्या से नई दिल्ली के लिए नई एक्सप्रैस ट्रेन की मांग की गई थी। दिल्ली से फैजाबाद के लिए की है, लेकिन फैजाबाद से गोरखपुर तक जिसकी मांग स्थानीय स्तर पर और पूरे देश से की गई थी, इस मांग का कोई उल्लेख इस बजट प्रस्ताव में नहीं हुआ है। गोरखपुर से इलाहाबाद के बीच वाया अयोध्या, सुल्तानपुर होते हुए एक इंटरसिटी चलाने की मांग पिछली सरकार के समय में हुई थी और तत्कालीन माननीय रेल मंत्री ने इसे स्वीकार भी किया था। लेकिन इस रेल बजट में उसका कहीं कोई प्रावधान नहीं है। गोरखपुर के दक्षिण में बांसगांव होते हुए दोहरीघाट तक रेल लाइन की मांग वर्षों से होती आई है। इसका सर्वे भी वर्ष १९९६-९७ में हुआ था, लेकिन सर्वे के बाद कार्य की स्वीकृति और अन्य कार्य आगे नहीं बढ़ पाया है। मैं माननीय रेल मंत्री से अनुरोध करूंगा कि गोरखपुर से दक्षिण बांसगांव होते हुए दोहरीघाट तक रेल लाइन बिछाने का कार्य प्रारम्भ हो और साथ ही साथ जनपद महाराजगंज के आनंदनगर से महाराजगंज जिला मुख्यालय होते हुए घुघली रेलवे स्टेशन पर नई रेल लाइन का कार्य प्रारम्भ हो।

उपाध्यक्ष महोदय, इसके साथ ही पिछली बार माननीय रेल मंत्री ने एक बात की घोषणा की थी कि जो संसद सदस्य रेलवे समपार फाटक पर जिन पर कोई कर्मचारी नहीं है, उन पर चौकीदार नियुक्त करने के लिए या जहां पर लैवल क्रासिंग नहीं बने हैं, वहां लैवल क्रासिंग बनाने के लिए सांसद नधि से धन देगा, वहां पर सासंद के प्रस्ताव पर एक लैवल क्रासिंग जो मानवविहीन है, उसे मानवयुक्त करने के लिए सांसद से आठ से दस लाख रुपये लिये जायेंगे और उन पैसों से लैवल क्रासिंग को मानवयुक्त करने की व्यवस्था की जायेगी। मैंने अपने संसदीय निर्वाचन क्षेत्र में जो लैवल क्रासिंग मानवयुक्त नहीं था, उसे मानवयुक्त करने के लिए धन की व्यवस्था की थी। लेकिन रेल मंत्रालय ने और रेलवे ने उसमें कोई रुचि नहीं ली। माननीय रेल मंत्री कहते हैं कि १२०० से अधिक ऐसे लैवल क्रासिंग है जहां चौकीदार नहीं हैं और यदा-कदा वहां पर दुर्घटनाएं भी होती रहती हैं। चूंकि रेलवे के सामने आज सबसे बड़ी चुनौती सुरक्षा और संरक्षा के क्षेत्र में हैं। जो लैवल क्रासिंग मानवयुक्त नहीं हैं, उन्हें मानवयुक्त करने के लिए सांसद विकास नधि के पैसे का आगे उपयोग हो सकता हो। मैं माननीय रेल मंत्री से अनुरोध करूंगा कि उसमें रियायत देते हुए माननीय संसद सदस्य सांसद विकास नधि के पैसे का भी उसमें उपयोग हो और साथ ही साथ उनके प्रस्ताव को प्राथमिकता के आधार पर उन कार्यों को अगर सम्पन्न किया जा सके तो मैं समझता हूं कि रेलवे के उन कार्यों को आगे बढ़ाने में और रेलवे के संसाधनों को आगे बढ़ाने में भी काफी मदद मिलेगी और सुरक्षा और संरक्षा के क्षेत्र में माननीय संसद सदस्यों का योगदान भी हो पायेगा।

उपाध्यक्ष महोदय, इसके साथ ही एक अन्य कार्य रेलवे की फालतू भूमि के वाणिज्यिक उपयोग से संबंधित था, पिछली बार भी रेलवे मंत्रालय के बजट में इस बात का प्रावधान था, तब माननीय रेल मंत्री ने घोषणा की थी, तमाम लोगों के लिए माननीय रेल मंत्री जी ने घोषणा की हैं। रेलवे स्टेशन के बाहर पटरी पर जो लोग कार्य करते हैं जैसे ठेला लगाते हैं, खोमचा लगाते हैं, मोची का कार्य करते हैं, उनके लिए कोई व्यवस्था नहीं की गई है। रेलवे स्टेशन के बाहर जो फालतू भूमि है, अगर वहां पर वाणिज्यिक उपयोग के लिए शॉपिंग काम्पलैक्स बनाने की व्यवस्था रेल मंत्रालय द्वारा हो जाए तो मैं समझता हूं कि उस भूमि का बेहतर उपयोग हो पायेगा। इससे उसका सौन्दर्यीकरण भी हो जायेगा और तमाम ऐसे लोगों को रोजगार भी मिल जायेगा जो लोग रोजगार की तलाश में इधर-उधर भटकते हैं, जिनके पास अपना कोई साधन नहीं होता है, उन्हें उपयोगी दुकानें मिलेंगी और वे रेलवे को किराया भी देंगे।

इस प्रकार की व्यवस्था अगर कर सकें तो मैं समझता हूँ कि वाणिज्यिक उपयोग के लिए रेलवे की फालतू पड़ी ज़मीन का उपयोग हो पाएगा।

इसके साथ ही मेरे केवल दो प्रस्ताव हैं। एक गोरखपुर कलकत्ता के बीच में नई ट्रेन चलाई जाए जो बिहार होते हुए जाएगी तो बिहार के लोग भी उससे लाभ उठाएंगे। अन्य बातों के साथ मैं अनुरोध करना चाहता हूँ कि खिलाड़ियों के बारे में माननीय रेल मंत्री जी ने कोई घोषणा नहीं की है। खिलाड़ियों में तीसरे और चौथे दर्जे में नौकरियों के संबंध में राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ियों को नियुक्त करने के संबंध में भी मैं निवेदन करना चाहता हूँ और एक अन्य जो महत्वपूर्ण मुद्दा है वह यह है कि सुरक्षा के संबंध में सबसे बड़ी चिन्ता वर्तमान में जो आई है, वह बिहार से आई है। यदा-कदा सुनने में आया और जब मैं कोलकाता गया था तो उत्तर प्रदेश और इधर के काफी लोग मुझसे मिले थे। सबकी यही चिन्ता थी कि जिस प्रकार से घटनाएं बिहार में हो रही हैं, कैसे हम सुरक्षित यात्रा कर पाएंगे। मैं माननीय रेल मंत्री जी से अनुरोध करूँगा कि बिहार में आपकी ही सरकार है और आपकी धर्मपत्नी वहां पर मुख्य मंत्री के रूप में हैं। इसलिए दो व्यवस्थाएं आप करा दें। एक सुरक्षा की व्यवस्था और दूसरा बिहार में जो बिना टिकट चलने की प्रवृत्ति चली है, इस पर रोक लगा सकें तो आपकी अति कृपा रेल यात्रियों पर होगी और मंत्रालय पर होगी। …( व्यवधान)

श्री राम कृपाल यादव : बिहार में बिना टिकट यात्रा की बात करते हैं, और ये लोग क्या टिकट लेकर चलते हैं?…( व्यवधान)

MR. DEPUTY-SPEAKER: Shri Ram Kripal Yadav, please. Let him finish his speech.

योगी आदित्यनाथ : इन्हीं शब्दों के साथ मैं एक बार पुन: माननीय रेल मंत्री जी द्वारा जो रेल बजट प्रस्तुत किया गया है, उसका विरोध करता हूँ और माननीय रेल मंत्री जी से अनुरोध करूँगा कि जिस प्रकार की व्यवस्था रेल मंत्रालय के अधीन चलाना चाहते हैं, उससे रेल विकास के पथ पर चलकर राष्ट्र की जीवनरेखा को मज़बूती प्रदान नहीं करेगी, अपितु बिहार के चरवाहा विश्वविद्यालय की पुनरावृत्ति करेगी। इससे आप खास तौर से इस मंत्रालय को बचाएं।

इन्हीं शब्दों के साथ आपने मुझे बोलने के लिए समय दिया, उसके लिए धन्यवाद।

MR. DEPUTY-SPEAKER: The House stands adjourned to meet again tomorrow at 1100 a.m. 18.07 hrs. The Lok Sabha then adjourned till Eleven of the Clock on Thursday, July 8, 2004/Asadha 17,1926 (Saka).

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