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State Consumer Disputes Redressal Commission

U P P C L vs Balram on 27 January, 2016

  	 Cause Title/Judgement-Entry 	    	       STATE CONSUMER DISPUTES REDRESSAL COMMISSION, UP  C-1 Vikrant Khand 1 (Near Shaheed Path), Gomti Nagar Lucknow-226010             First Appeal No. A/2002/806  (Arisen out of Order Dated  in Case No.  of District State Commission)             1. U P P C L  a ...........Appellant(s)   Versus      1. Balram  a ...........Respondent(s)       	    BEFORE:      HON'BLE MR. Ram Charan Chaudhary PRESIDING MEMBER    HON'BLE MR. Raj Kamal Gupta MEMBER          For the Appellant:  For the Respondent:     	    ORDER   

 राज्‍य उपभोक्‍ता विवाद प्रतितोष आयोग, उ0प्र0, लखनऊ

 

 अपील संख्‍या- 806/2002

 

(सुरक्षित)

 

(जिला उपभोक्‍ता फोरम, बॉंदा द्वारा परिवाद संख्‍या 229/1997 में पारित आदेश दिनांक 17.08.2001 के विरूद्ध)

 

1.

Executive Engineer, Electricity Distribution Division, U.P.  Power      Corporation Limited, Banda.

2. Sub Divisional  Officer,  Electricity  Distribution  Division  Sub                         Division, U.P. Power Corporation Limited, Atarra, District Banda.

3. Chairman,  U.P.  State  Electricity  Board   now   U.P.   Power                                Corporation Limited, Lucknow.

4. Tehsildar, Nareni, Distt. Banda.

                         ....................अपीलार्थीगण/विपक्षीगण बनाम Balram son of Fallu, resident of village Motiyari, Pargana and Tehsil Nareni, District Banda.                            ................प्रत्‍यर्थी/परिवादी समक्ष:-

1. माननीय श्री राम चरन चौधरी, पीठासीन सदस्‍य।
2. माननीय श्री राज कमल गुप्‍ता, सदस्‍य।

अपीलार्थी की ओर से उपस्थित : श्री इसार हुसैन,                                                                                   विद्वान अधिवक्‍ता।

प्रत्‍यर्थी की ओर से उपस्थित  : कोई नहीं।

दिनांक: 02.02.2016 माननीय श्री राम चरन चौधरी , पीठासीन सदस्‍य द्वारा उदघोषित निर्णय यह अपील जिला उपभोक्‍ता फोरम, बॉंदा द्वारा परिवाद संख्‍या 229/1997 में पारित आदेश दिनांक 17.08.2001 के विरूद्ध प्रस्‍तुत की गयी है। प्रश्‍नगत आदेश निम्‍नवत् है :-

'' परिवादी का परिवाद विपक्षीगण के विरूद्ध स्‍वीकार किया जाता है और दिनांक 9.10.95 के पश्‍चात के जारी किये गये विद्युत बिलों को निरस्‍त किया जाता है। विपक्षी P.D करे फीस लेकर विपक्षीगण परिवादी से वसूल की गयी ज्‍यादा राशि 9085/-रू0 तथा वाद व्‍यय 1000/-रू0 2 माह के अन्‍दर अदा करे। यदि  उक्‍त  राशि   -2- विपक्षी अदा नहीं करता तो वह 9085/-रू0 पर 12% वार्षिक ब्‍याज दि0 6.2.97 से अदायगी की तिथि तक अदा करेगा। '' संक्षेप में केस के तथ्‍य इस प्रकार हैं कि परिवादी       दिनांक 16.4.89 से विद्युत विभाग का उपभोक्‍ता है और आटा चक्‍की के लिए कनेक्‍शन सं0 5024/2456 लिए हुआ था, जिस पर      15 हार्सपावर का मोटर लगा हुआ था। दिनांक 25.3.94 से 20.10.95 की अवधि में परिवादी का आपसी घरेलू बटवारा होने के कारण उसके द्वारा बिजली के बिलों का भुगतान नहीं हो सका और दिनांक 09.10.95 को विद्युत संबंध विच्‍छेदित कर दिया गया। परिवादी ने विपक्षी को दिनांक 23.1.96 को इस आशय का प्रार्थना पत्र दिया कि अगस्‍त, 95 में उसका विद्युत संबंध विच्‍छेदित कर दिया गया है और बिल लगातार गलत तरीके से भेजे जा रहे हैं। परिवादी ने विपक्षी संख्‍या-2 के निर्देशानुसार दिनांक 23.1.96 को 14000/-रू0 जमा कर दिया। विपक्षी द्वारा दिनांक 20.1.96 से 20.9.97 तक आई0डी0एफ0 दिखाकर फर्जी बिल भेजे जाते रहे तथा  दिनांक 20.6.97 से 20.7.97 तक मीटर रीडिंग 9600 यूनिट दिखायी गयी और 28,736/-रू0 की मांग की गयी। परिवादी बिल संशोधन के लिए विपक्षी के पास गया, परन्‍तु उसकी बात नहीं सुनी गयी। परिवादी ने दिनांक 20.10.95 के बिल पर अंकित धनराशि  रू0 34,664.30 पैसे के आधार पर दिनांक 06.2.97 को 29750/-रू0 जमा कर दिए। इस प्रकार परिवादी द्वारा कुल 43,750/-रू0      की धनराशि जमा की गयी,  जबकि  दिनांक 20.10.97  तक  मात्र         -3- रू0 34,664.30 पैसे का बिल आया था। विपक्षी द्वारा परिवादी से 9085/-रू0 की धनराशि अधिक जमा करा ली गयी और परिवादी को परेशान करने के लिए वसूलयाबी नोटिस भेजी गयी, जिससे क्षुब्‍ध होकर परिवादी द्वारा जिला मंच के समक्ष परिवाद योजित करते हुए वांछित अनुतोष की मांग की गयी।
जिला मंच के समक्ष विपक्षी द्वारा लिखित कथन दाखिल किया गया। विपक्षी के अनुसार परिवादी का संयोजन 8/95 में नहीं काटा गया, बल्कि अक्‍टूबर 95 में बकाया होने के कारण काटा गया था तथा परिवादी द्वारा दिनांक 23.1.96 को 14,000/-रू0 जमा करने के उपरान्‍त दिनांक 24.10.96 को विद्युत संयोजन जोड़ दिया गया था। 10/95 से 01/96 तक विद्युत उपभोग न करने के कारण एन0आर0 के बिल प्रेषित किए गए तथा संयोजन काटने जोड़ने की फीस के लिए परिवादी से 200/-रू0 चार्ज कर लिए गए तथा बिल संयोजन जोड़ने के बाद से लगातार भेजे जा रहे हैं। विपक्षी के अनुसार परिवादी ने उपखण्‍ड अधिकारी को पत्र बिल संशोधित हेतु दिनांक 19.12.97 को प्रस्‍तुत किया था, परन्‍तु मूल प्रति अपने पास रखे रहे, इसलिए दिनांक 19.12.97 से पूर्व विपक्षी कार्यालय द्वारा कोई कार्यवाही नहीं की गयी। विपक्षी द्वारा अपने लिखित      कथन में परिवादी द्वारा दिनांक 06.7.97 को 29750/-रू0 तथा     दिनांक 23.1.96 को 14,000/-रू0 जमा करना स्‍वीकार किया गया। विपक्षी के अनुसार परिवादी पर 9/97 तक 75813/-रू0 शेष था। विपक्षी के अनुसार दिनांक 23.1.96 के बाद से विद्युत संबंध  जोड़ने   -4- के बाद बिलों का लगातार उपभोग हो रहा है, इसलिए वसूली प्रमाण पत्र वापस होने का प्रश्‍न नहीं उठता है और विद्युत बिल परिषदीय नियमों के अनुसार संधोधित हो चुके हैं।
पीठ द्वारा अपीलार्थी के विद्वान अधिवक्‍ता श्री इसार हुसैन को सुना गया और अभिलेख का अवलोकन किया गया। प्रत्‍यर्थी की ओर से कोई उपस्थित नहीं आया।
अभिलेख से यह स्‍पष्‍ट होता है कि प्रत्‍यर्थी/परिवादी द्वारा अपीलार्थी/विपक्षी विद्युत विभाग को बकाया विद्युत बिल का भुगतान कर दिया गया था और उसने कभी भी विपक्षी के यहॉं विद्युत संबंध जोड़ने का कोई प्रार्थना पत्र नहीं दिया और न ही परिवादी द्वारा विद्युत संबंध जोड़ने के लिए कोई राशि विपक्षी के यहॉं जमा की गयी। अत: केस के तथ्‍यों एवं परिस्थितियों के दृष्टिगत जिला मंच का आदेश विधिसम्‍मत है और उसमें हस्‍तक्षेप की आवश्‍यकता नहीं है। तदनुसार अपील खारिज किए जाने योग्‍य है।
आदेश      अपील खारिज की जाती है।
   
        (राम चरन चौधरी)             (राज कमल गुप्‍ता)                               

 

         पीठासीन सदस्‍य                सदस्‍य          

 

जितेन्‍द्र आशु0

 

कोर्ट नं०-4             [HON'BLE MR. Ram Charan Chaudhary]  PRESIDING MEMBER 
     [HON'BLE MR. Raj Kamal Gupta]  MEMBER