Lok Sabha Debates
Discussion On Interim Budget (Railways) 2004-05; Demnds For Grants On Account ... on 14 July, 2004
nt> 12.46 hrs. RAILWAY BUDGET, 2004-2005 – GENERAL DISCUSSION AND DEMANDS FOR GRANTS ON ACCOUNT-RAILWAYS –2004-2005 Contd.
Title: Discussion on Interim Budget (Railways) 2004-05; Demnds for Grants on Account (Railways) 2004-05.
रेल मंत्री (श्री लालू प्रसाद):अध्यक्ष महोदय, मैं सबसे पहले उन सभी माननीय सदस्यों का …( व्यवधान)
12.46 ¼ hrs. At this stage, Shri Shivraj Singh Chauhan and some Other Hon’ble Members left the House.
...( व्यवधान)
MR. SPEAKER: Discussion is over. Please cooperate. I have called the hon. Minister to reply on the Railway Budget.
… (Interruptions)
श्री गिरधारी लाल भार्गव(जयपुर):माननीय रेल मंत्री जी का कथन रेलवे के डिब्बे में सफर, रेलवे में सेफ्टी फण्ड बनाये जाने का व कुल्हड़ चालू कराने का मैं अभिवादन करता हूं।
रेलवे लाईन, जो कालोनियों के मध्य है, वहां सुरक्षा की व्यवस्था अधिक की जाये। प्रत्येक रेलवे गेट पर फाटक खोलने और बंद करने के लिए आदमी रखा जाये, प्रत्येक स्टेशन पर पीने के लिए जल और निवृत्त होने वाले स्थान की पर्याप्त सफाई हो। जयपुर रेलवे स्टेशन पर न्यूज सुनने के लिए, जो टी.वी. सेट लगाये हैं, उन्हें पुन: चालू किया जाये।
जयपुर में उत्तर पश्चिम रेलवे के एक नये जोन कार्यालय का उद्घाटन किया है। इसमें कोटा डिवीजन को भी शामिल किया जाये, इससे लोगों को बड़ी सुविधा होगी।
गाड़ी सं०४८६०/४८५९ इंटरसिटी एक्सप्रेस जोधपुर-जयपुर-दिल्ली गाड़ी सराय रोहिल्ला स्टेशन तक जाती है, जिससे दिल्ली जाने वाले यात्रियों को बहुत परेशानी होती है। इसलिए इस गाड़ी को पुरानी दिल्ली स्टेशन तक ले जाया जाये। इसके साथ ही जयपुर व राजस्थान की जनता की मांग के अनुरूप एक ऐसी गाड़ी चलाने की जरूरत है, जो अजमेर-जयपुर से रात को चलकर सुबह हरिद्वार पहुंचे तथा हरिद्वार से शाम को चलकर रात्रिकालीन सेवा के रूप में सुबह जयपुर-अजमेर पहुंचे। इससे पुष्कर-हरिद्वार का सीधा संबंध हो सकेगा। राजस्थान की जनता जिस कार्य से हरिद्वार जाती है, उसकी भावनाओं की भी पूर्ति होगी।
जयपुर-अजमेर के मध्य ई एम यू (दैनिक यात्री ट्रेन)चलाने की आवश्यकता है। पहले जयपुर वान्दा एक्सप्रेस जयपुर से सुबह ७.०० बजे चलकर ९.४० बजे अजमेर पहुंचती थी, अब यह गाड़ी २४ कोच की हो गयी है एवं इसका प्रस्थान समय जयपुर से ४.५० कर दिया है। अब यह गाड़ी अजमेर ११.१५ पर पहुंचती है। इस कारण दैनिक यात्रियों को अजमेर में अपने कार्यालय में समय से पहुंचने में बहुत परेशानी हो रही है। आपसे निवेदन है कि जयपुर अजमेर के मध्य एक नयी ई एम यू गाड़ी चलायें, जो जयपुर से सुबह ०.७०० बजे चलकर अजमेर ०९.४० तक पहुंचे। इससे दैनिक यात्रियों को बहुत सुविधा होगी एवं रेलवे की आय भी बढ़ेगी।
इस क्षेत्र के रेल यात्रियों की भारी मांग के अनुसार कुछ गाड़ियों को निम्निलखित स्टेशनों पर रोकने की जरूरत है।
गाड़ी का नाम स्टेशन जहां ठहराव की जरूरत है। २९१६/२९५ दिल्ली अहमदाबाद सुपरफास्ट आश्रम एक्सप्रेस ९२६५/९२६६ औखा देहरादून एक्सप्रेस(साप्ताहिक) ४८६०/४८४९ जोधपुर-दिल्ली, इंटरसिटी एक्सप्रेस ४८५३/४८५४, ४८६३/४८६४ जोधपुर-बनारस, मरूधर एक्सप्रेस २४६२/२४६१ जोधपुर-दिल्ली, सुपरफास्ट गण्डोर एक्सप्रेस ९७६९/२४६१ जयपुर-पटना मीनाक्षी एक्सप्रेस ४३१२/४३११ न्युभुज - बरेली एक्सप्रेस(वांच विकली) ९२६६/९२६५ औखा-देहरादून ४३१२/४३११ न्यू भुज - बरेली एक्सप्रेस (साप्ताहिक) २४६६/२४६५ जोधपुर-सवाईं माधोपुर इंटरसिटी, इस गाड़ी को जयपुर-सवाईं माधोपुर के मध्य सवारी गाड़ी के रूप में चलाया जाये।
२९१६/२९१५ दिल्ली-अहमदाबाद, आश्रम एक्सप्रेस(सुपरफास्ट) किशनगढ बस्सी बस्सी बस्सी बस्सी नरेना खैरवल खैरवल दौसा दुर्गापुरा, सागानेर, ईसरदा चौथ का वरवाडा फुलेरा आश्रम एक्सप्रेस दिल्ली से जयपुर को यात्रा करने के लिए सिटिंग आरक्षण की व्यवस्था की जाये, जिससे दिल्ली से जयपुर के मध्य यात्री अपनी यात्रा सुगमता से कर सकें। इस तरह की व्यवस्था गाड़ी संख्या २४९४, जो जयपुर-दिल्ली के मध्य चलती है, में उपलब्ध है। जयपुर से दिल्ली की ओर यात्रा करने वाले यात्रियों को स्लीपर कोच में सिटिंग आरक्षण उपलब्ध कराया जाये। इससे रेलवे को आय भी होगी और यात्रियों को सुविधा भी होगी।
जयपुर-चण्डीगढ़ के मध्य जयपुर जबलपुर व जयपुर से पुरी के मध्य नयी गाड़ी चलायी जाये। पुरी निजामुद्दीन गाड़ी नं० ८४७६/८४७७ कलिंगा उत्कल एक्सप्रेस है। इस रूट पर ८४०७/८४०८ एक गाड़ी और है। अत: गाड़ी नं० ८४७६/८४७७ को वाया मथुरा अलवर जयपुर करवाने से यह चिर प्रतीक्षित मांग पूरी हो सकेगी।
गाड़ी नं० २८०१/२८०२ नयी दिल्ली-पुरी पुरूषोत्तम एक्सप्रेस पुरी से चलकर नयी दिल्ली ४.४० प्रात: पहुंचती है। अगर इसको शताब्दी एक्सप्रेस रूट से जयपुर लाकर जयपुर से दिल्ली होते हुए रवाना कर सकते हैं, क्योंकि यह गाड़ी रात में २२.३५ मिनट पर नयी दिल्ली से रवाना होती है। अत: इस गाड़ी को जयपुर तक बढ़ाने से जयपुर तक आकर वापिस जा सकती है।
*Speech was laid on the Table.
* श्री संतोष गंगवार(बरेली):माननीय अध्यक्ष जी, वर्तमान रेल बजट का विरोध करते हुए मैं यह कहना चाहूंगा कि रेल मंत्री ने केवल एक राज्य का ही बजट प्रस्तुत किया है, वह भी आगामी चुनाव ( विधानसभा)को ध्यान में रखते हुए। मैं रेल मंत्री को धन्यवाद देना चाहूंगा कि विगत सरकार द्वारा प्रस्तुत किए गए किसी भी रेल बजट की उन्होंने आलोचना नहीं की और तत्कालीन रेल मंत्री द्वारा सुझाए गए कार्यों को आगे बढ़ाने का काम किया है। आमान परिवर्तन, सुरक्षा एवं अन्य संबंधित समस्याओं पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए तथा प्रत्येक कार्य में पारदर्शिता बनायी जानी चाहिए। यह दुर्भाग्य की बात है कि रेल मंत्री ने लोकप्रियता हासिल करने के लिए सस्ती प्रक्रिया अपनायी है। रेल विभाग में कार्यरत कर्मचारियों की संख्या में निरन्तर कमी हो रही है और ऐसा लग रहा है कि भविष्य में भी इस संख्या में कमी होगी। मैं चाहूंगा कि रेल मंत्री इस ओर ध्यान दें तथा कर्मचारियों की संख्या में कटौती न करें बल्कि इनकी संख्या बढ़ायें। रेल मंत्री को इस संबंध में प्रभावी कदम उठाने चाहिए। जैसा मैंने पहले कहा कि वर्तमान रेल बजट में कई प्रमुख राज्यों की अनदेखी की गयी है। हमारे राज्य उत्तर प्रदेश की ओर ध्यान नहीं दिया गया, जबकि सारी रेलगाडिया, जो बिहार जाती हैं, वह उत्तर प्रदेश से ही होकर गुजरती हैं। मैं चाहूंगा कि रेल मंत्री इस ओर विशेष ध्यान दें तथा उत्तर प्रदेश के साथ सौतेला व्यवहार न करें। मैं आग्रह करना चाहूंगा कि रेलगाड़ियों में सुविधायें व्यवस्थित हों तथा सवारी गाड़ी व जनता एक्सप्रेस की गाड़ियों में प्रारंभिक सुविधायें ठीक प्रकार से मिलें। इस संबंध में यह बात भा ध्यान देने योग्य है कि दैनिक यात्रियों एवं कम दूरी के यात्रियों के लिए चेयर कार कोच की व्यवस्था की जाये। मैं एक और समस्या की ओर ध्यान दिलाना चाहूंगा कि उत्तर रेलवे की बिहार से गुजरने वाली सभी ट्रेनों में बहुत से लोग छत पर बैठकर यात्रा करते हैं, जो किसी भी रूप में उचित नहीं है। इस कारण दुर्घटनाओं की ज्यादा संभावनाएं बन जाती हैं। मैं रेल मंत्री से आग्रह करना चाहूंगा कि इस ओर विशेष ध्यान दें तथा डिब्बों की छत पर यात्रा को अपराध की श्रेणी में लाया जाये और इसे प्रभावी ढंग से लागू किया जाये।
मैं इस संबंध में अधिक न बोलते हुए अपने निर्वाचन क्षेत्र की कुछ महत्वपूर्ण समस्याओं की ओर आपका ध्यान आकर्षित करना चाहूंगा तथा उम्मीद करता हूं कि इस ओर आप विशेष ध्यान देकर उपयुक्त कार्यवाही करेंगे।
रेल मंत्री द्वारा अपने निर्वाचन क्षेत्र में एक रेल कारखाने की घोषणा की गयी है, मैं इसका स्वागत करता हूं। परन्तु बरेली, जो रेल कारखाने हेतु सर्वाधिक उपयुक्त स्थान है, उस पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। २० साल पहले रेल कोच फैक्ट्री की स्थापना हेतु यह स्थान ( बरेली ) सर्वाधिक उपयुक्त स्थान माना गया था, परन्तु राजनीतक कारणों से कोच फैक्ट्री दूसरे स्थान पर लगायी गयी। बरेली में वर्तमान में पूर्वोत्तर रेल का डिब्बा सुधार व क्रेन निर्माण का कारखाना है जो काम न होने की स्थिति में बंद होने की कगार पर है। मेरा आग्रह है कि इस ओर मंत्री जी विशेष ध्यान दें तथा बरेली के जनहित को ध्यान में रखते हुए रेल कारखाने की संभावनाओं पर विचार कर प्रभावी कार्यवाही करें।
अपने क्षेत्र की कुछ प्रमुख समस्याएं निम्न प्रकार से हैं, जिन पर शीघ्र कार्यवाही की आवश्यकता है। नयी दिल्ली-मुरादाबाद मार्ग पर दोहरीकरण का काम बहुत धीमी गति से चल रहा है। इस दोहरीकरण कार्य में तेजी लायी जाये तथा इसे एक समय सीमा में पूरा किया जाये। कछला घाट पुल ( पूर्वोत्तर रेलवे) काफी पुराना हो चुका है तथा काफी जर्जर हालत में हे, इससे हमेशा गंभीर दुर्घटना का खतरा बना रहता है। रेल व सड़क दोनों का यातायात में इस्तेमाल होने वाले इस पुल का शीघ्र जीर्णोद्वार किया जाये। बरेली-नवाबगंज - पीलीभीत तथा बरेली - बदायूं - आगरा फोर्ट के आमान परिवर्तन की मांग काफी समय से लंबित है, इस काम को वरीयता क्रम पर लिया जाये। बरेली के कुछ क्षेत्रों पर उपरिगामी की आवश्यकता है, जो निम्नलखित हैं द्भ राष्ट्रीय राजमार्ग २४ पर मीरगंज - मिलक(रामपुर)के मध्य नगरिया सादात रेल स्टेशन के निकट राष्ट्रीय राजमार्ग २४ पर फतेहगंज पश्चिमी(बरेली)भिटौरा रेल स्टेशन के निकट कटघर (शमशान भूमि के रास्ते पर) पूर्वोत्तर रेल, बरेली महानगर हार्टमैन कालेज रेल क्रॉसिंग पर(पूर्वोत्तर रेल, बरेली महानगर ) इज्जतनगर स्टेशन के निकट केन्द्रीय कारागार के सामने(पूर्वोत्तर रेल, बरेली महानगर) बरेली को दक्षिण के राज्यों से जोड़ने हेतु सुविधाजनक ट्रेन चलायी जाये। नयी दिल्ली - बरेली - गुवाहाटी राजधानी एक्सप्रेस को दो दिन के स्थान पर चार दिन चलाया जाये। बरेली - कानपुर के मध्य सीधी ट्रेन नहीं है। जनहित को ध्यान में रखते हुए इस संबंध में आवश्कय कार्यवाही की जाये। बरेली महानगर के मध्य राजेन्द्र नगर व कुतुबखाने पर आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए सिटी बुकिंग एजेंसी की स्थापना की जानी चाहिए। बरेली स्थित रेल हायर सेकेन्ड्री स्कूल को आवश्यकता के अनुरूप इंटर कॉलेज में परिवर्तित किया जाये।बरेली जंक्शन रेलवे स्टेशन पर कुछ समस्याओं के समाधान व सुविधाओं हेतु पूर्व में कई बार कहा जा चुका है। मेरा माननीय रेल मंत्री से आग्रह है कि उपरोक्त बिन्दुओं पर विशेष विचार कर उपयुक्त तथा प्रभाव कार्रवाई की जाये।
* Speech was laid on the Table.
* श्री बची सिंह रावत बचदा(अल्मोड़ा):माननीय अध्यक्ष जी, मैं रेल मंत्री जी के द्वारा प्रस्तुत रेल बजट का विरोध करता हूं। रेल मंत्री जी द्वारा यात्री सुरक्षा के उपायों की कोई व्यवस्था न होने से अत्यंत निराशा हुयी है।
रेलयात्रियों को कुल्हड़ में चाय देने का निर्णय तुगलकी मानसिकता का प्रतीक है, यह ठीक है कि इससे कुछ कुम्हारों को अतरिक्त काम मिलेगा, लेकिन दूसरी ओर इसके द्वारा चिकनी उपजाऊ मिटटी का उपयोग होने से उपजाऊ भूमि नष्ट होगी और कुल्हड़ पुन: मिटटी में परिवर्तित नहीं होगा। अत: यह भी पर्यावरण के अनुकूल नहीं होगा।
कुल्हड़ों में चाय के साथ अवशेष मिटटी भी यात्रियों के शरीर में जाने से स्वास्थ्य हानि की भी संभावना है। इस बजट में उत्तरांचल प्रदेश के लिय कोई भी रेलगाड़ी या कार्य को स्वीकृति नहीं दी गयी है। जिस सम्पर्क क्रांति एक्सप्रेस, दिल्ली-काठगोदाम, की बात कही गयी है वह पूर्ववर्ती राजग सरकार द्वारा स्वीकृत की गयी है।
मैं रेल बजट पर चर्चा के दौरान उत्तरांचल हेतु निम्न गाड़ियों व रेलवे लाइन आदि की मांग रेल मंत्री जी से करता हूं।
सर्वप्रथम काठगोदाम से वाया अम्बाला जम्मू तवी के लिये एक नयी एक्सप्रैस गाड़ी चलायी जाये। इसकी मांग व्यापारियों व कुमाऊं क्षेत्र के सिख तीर्थयात्रियों व सीमा पर तैनात सैनिकों द्वारा लम्बे अरसे से की जा रही है। आशा है, इसे स्वीकृति दी जायेगी।
इसके अतरिक्त काठगोदाम से मुम्बई व अहमदाबाद के लिय भी दैनिक एक्सप्रेस गाड़ी चलायी जाये। टनकपुर-काठगोदाम-रामनगर-कोटद्वार-हरिद्वार-देहरादून के लिये रेल लाइन को जोड़कर एक नयी रेलगाड़ी प्रतदिन चलायी जाये क्योंकि यह इसे कुमाऊं व गढ़वाल मंडल के साथ साथ प्रदेश की राजधानी से भी जोड़ेगी।
पूर्व से मांग रही है कि टनकपुर से चम्पावत व बागेश्वर तक रेलगाडी चलायी जाये व साथ ही रामनगर से चौखुटिया तक नयी रेल लाइन बनाकर रेल सेवा प्रांरभ की जाये। इस हेतु लंबे समय से मांग की जाती रही है। ब्रटिश काल में इन दोनों रेलमार्गो का सर्वे भी किया गया था।
अत: मैं मांग करता हूं कि इन रेल मार्गो - टनकपुर, चम्पावत - बागेश्वर व रामनगर चौखुटिया रेल लाइन का इसी साल में सर्वे कराया जाये व स्वीकृति प्रदान की जाये।
उपरोक्त के साथ ही मैं पूर्व में रानीखेत के लिये स्वीकृत पी.आर.एस (कम्प्यूटरीकृत आरक्षण सेवा ) को शीघ्र प्रारंभ करने की मांग करता हूं।
मैं इसके अलावा अपने संसदीय क्षेत्र व निकटवर्ती क्षेत्रों, जिसमें गंगोलीहाट, बेरीनाग, डीडीहाट, चौखुटिया, भकियासेन, सल्ट, धारचूला, मुन्एयारी के साथ साथ टनकपुर में कम्प्यूटरीकृत आरक्षण की स्वीकृति करने की मांग करता हूं। आशा है इन्हें रेल मंत्री जी स्वीकृति प्रदान करेंगे।
इसी के साथ अपना भाषण समाप्त करता हूं।
* Speech was laid on the Table MR. SPEAKER: Laluji, one minute please.
Shri Sarbananda Sonowal. I am not appreciating your method. By creating disturbance you cannot get advantage. Since you are a new Member, I am allowing you. Do not learn this tactic from others.
SHRI SARBANANDA SONOWAL (DIBRUGARH): Yes, Sir. At the time of preparing the Railway Budget, Shri Lalu Prasad has forgotten the North-Eastern part of India, that is the most disturbing point for us. That is the reason why we want to put forth some points so that the Minister could add them in the Railway Budget.
Firstly, there should be a North-East Railway Zone for the entire North-Eastern States, including Sikkim. Secondly, there is no double track broad gauge railway line. That is why we want double track broad gauge railway lines. Thirdly, we want a double track broad gauge line from Rangiya to Musekongselek. Fourthly, more money should be given to the rail-cum-road bridge at Bogibeel. In this Budget, little money has been earmarked.
Fifthly, Rajdhani service to Dibrugarh should be run on a daily basis. Sixthly, Railway started its work in Dibrugarh in 1846 immediately after Thane (Maharashtra). Hence Dibrugarh should be declared as a Railways Heritage Centre. Seventhly, construction of rail-cum-road bridge should be constructed at Sadiya. Eighthly, construction of Rangiya Rail Division should be expedited. Ninthly, construction of railway over-bridges at the railway crossings in Shantipara (Dibrugarh), Changchari (Kamrup) and Thekeraguri (Nagoan) should be constructed.
MR. SPEAKER: How many points you have?
SHRI SARBANANDA SONOWAL : Only two or three points, Sir. There is an urgent requirement of introducing inter-city railways service to cater to the genuine needs of the people of the region. Special concession on railway fares to those patients who come out for medical treatment in other parts of the country.
MR. SPEAKER: You send other points to the Minister by letter.
SHRI SARBANANDA SONOWAL : Hundred per cent job reservation in Grade `C’ and Grade `D’ posts of Railway services should be made.
MR. SPEAKER: Thank you for your kind cooperation.
* श्री के.सी. सिंह बाबा ( नैनीताल):अध्यक्ष महोदय, मैं आपको धन्यवाद देता हूं कि आपने मुझे रेल बजट पर बोलने की इजाजत दी। सर्वप्रथम, मैं संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार के इस रेल बजट का स्वागत करते हुए रेल बजट का समर्थन करता हूं। माननीय मंत्री महोदय ने न रेल यात्री भाड़े में वृद्धि और न माल भाड़े में वृद्धि की है। रेल बजट में भारत की गरीब जनता का पूरा ख्याल रखा है। खादी को प्रोत्साहन दिया जा रहा है जो कि अभी भुखमरी के कगार पर थे। मैं सरकार से अनुरोध करना चाहूंगा कि हथकरघा को प्रोत्साहित करने के लिए कोई अन्य सरकारी नीति भी बननी चाहिए जिससे कि हमारे हथकरघा से जुडे लोगों का भविष्य सुरक्षित रहे तथा उन्हें आर्थिक तंगी से न गुजरना पड़े। शहीदों की विधवाओं को रियायत, मूक बधिर व्यक्ति के सहयात्री को ५० प्रतिशत रियायत की व्यवस्था की गयी है। इसमें मानवता और मानवीय आधार को देखा गया है। इसलिए इस बजट का हमें सहर्ष समर्थन करना चाहिए। इस देश के गरीब लोगों के अनुसार, गरीब लोगों की भावनाओं के अनुसार यह रेलवे बजट है। इसके लिए मंत्री महोदय जी की प्रशंसा हम सब को करनी चाहिए। जब कभी गरीब के बारे में चर्चा की जाती है, तो हम सबको उसका स्वागत करना चाहिए, इसमें किसी बात का किसी को भी ऐतराज नहीं होना चाहिए।
मंत्री महोदय ने बजट में नये कारखानों की बात कही है। कारखाने लगने से लोगों को रोजगार मिलेगा। रेल के कल पुर्जे देश में ही बनेंगे इससे नयी तकनीक का विकास होगा। रेलवे के द्वारा हमेशा नयी नयी रेलगाड़ियां चलायी जाती हैं। इस बार भी १८ नयी रेलगाडियां चलाने की बात मंत्री जी ने अपने रेल बजट भाषण में कही है। कुलियों को पत्नी सहित एक रेलवे स्टेशन से दूसरे रेलवे स्टेशन तक यात्रा करने की छूट दी गयी है, जो कि एक सराहनीय कदम है।
आरक्षित रिक्तियों को भरने के लिए विशेष भर्ती अभियान का भी उल्लेख किया है। मंत्री महोदय का यह कदम अत्यधिक सराहनीय है।
रेल गाड़ी को दुर्घटना से कैसे रोका जाये, इसका भी प्रावधान किया गया है। अध्यक्ष जी, मैं देश के उत्तरांचल प्रदेश के नैनीताल संसदीय क्षेत्र का प्रतनधि हूं। मेरे संसदीय क्षेत्र में रेल संबंधी कई महत्वपूर्ण सुधारों की आवश्यकता है। माननीय मुख्यमंत्री श्री नारायण दत्त तिवारी जी ने भी माननीय रेल मंत्री महोदय को उत्तरांचल के रेलवे संबंधी समस्याओं से अवगत कराया था तथा मैंने भी अपने पत्रों के माध्यम से उत्तरांचल के रेलवे की समस्याओं से अवगत कराया था। निवेदन है कि समस्याओं का जल्द से जल्द समाधान करने की कृपा करेंगे।
अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री महोदय से अनुरोध करता हूं कि उत्तरांचल प्रदेश के सभी रलवे संबंधी समस्याओं को जल्द से जल्द दूर करने का आदेश दें। अध्यक्ष महोदय, मैं एक बार फिर आपको धन्यवाद देता हूं और रेल बजट का समर्थन के साथ मंत्री महोदय को गरीब लोगों के हित में रेल बजट के लिये आभार प्रकट करता हूं।
* Speech was laid on the Table.
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* Shri T.K. HAMZA (MANJERI) : Sir, I would like to bring to the notice of Shri Laluji, Hon’ble Minister for Railways regarding the new introduction of a railway Nilambur-Nangangudi-Mysore.
It is connecting three States. If it is done, the cash crops produced in Waywad District can be brought to Cochin easily. Tourism can be promoted. .South-North distance, 386 kms will be saved. The existing distance from Kerala to New Delhi is 2753 kms whereas the proposed route via Mysore is 2367 kms. Thus 386 kms is saved. New survey may be conducted.
* Speech was laid on the Table.
* SHRI SUKHDEV SINGH DHINDSA (SANGRUR) : Hon’ble Speaker, Sir, I rise to inform the House through you, Sir, the appalling conditions of Railways in Punjab and blatant disregard of the border State while making the Railway Budget. Hon’ble, Sir, there is no new proposals for new lines in Punjab the State has been completely ignored while making provisions for new projects in Punjab.
Hon’ble Sir, even the progress of work on the projects sanctioned by the previous Governments is very slow and it is likely that they may not be completed in time now. Contrary to the large demands of new trains from all parts of the State and ignoring all feasibility studies to earn revenue from Punjab which is the gateway to Jammu and Kashmir and Himachal Pradesh as well, not even a single train has been given to Punjab. Hon’ble Sir, on Delhi-Amritsar sector also no new train has been added.
Hon’ble Sir, like other parts of India, railways is also the lifeline of Punjab State and no new project has been provisioned for the State in this Railway Budget.
Hon’ble Sir, people of Punjab State are awful and horrifying. People travelling from a Ludhiana-Amritsar region have started switching to other modes of transport. There have been a number of accidents causing many lives.
From my party together with our partners, we will personally meet the Hon’ble Railway Minister and would write to him to start new trains from Punjab, to make provisions for a number of overbridges and to sanction new line and superprojects for the State.
* Speech was laid on the Table.
* श्री तुकाराम गणपतराव रेंगे पाटील(परभनी ): माननीय अध्यक्ष जी, हाथी के दांत दिखाने के ओर होते है और खाने के ओर होते हैं उसी तरह से यह रेल बजट दिखावे में कुछ और परन्तु परिणाम कुछ और आयेगा। लालू जी जब रेल मंत्री बने तो उन्होंने सभी सांसदों को उनके क्षेत्रों में लंबित परियोजना का ब्यौरा भेजा था और एक पत्र मुझे भी प्राप्त हुआ था, जिसका हमने धन्यवाद देते हुए अपने क्षेत्र की समस्याओं से अवगत कराया था परन्तु बजट देखने के बाद ऐसा लगता है कि सांसदों के पत्रों पर कोई कार्यवाही नहीं हुयी है। यह तो उनका दिल बहलाने के लिए पत्र लिखे गये हैं।
मराठावाडा क्षेत्र में अकोला पूर्णा गेज कनर्वजन का कार्य चल रहा है, जिसको पूरा करने के लिए २०५८३ करोड की जरूरत है, परन्तु सरकार केवल २० करोड आबंटित किये हैं, अगर इस काम के लिए यह धनराशि २० करोड से बढ़ोत्तरी करके १०० करोड आबंटित कर दिया जाये तो मराठावाड आपका आभारी रहेगा अन्यथा हम असंतुष्ट रहेंगे।
सिकन्दराबाद-मुदखेड पर रेल खंड पर जो रेल कन्वेरजेसन का काम चल रहा है, उसके ४६.२५ करोड की जरूरत है, परन्तु २५ करोड ही दिया गया है, जिससे यह काम अपने निर्धारित समय में पूरा नहीं होगा। यह रेल कन्वेरेजेसन काम जल्द लोकहित में जल्द पूरा करना चाहिए इसके लिए २०.२५ करोड रूपये और आबंटित कर दिया जाता तो यह कार्य को जल्द पूरा किया जाता। अगर यह कार्य किया जाये तो काचीगुडा मनमाड मुम्बई पर आने वाले आन्ध्राा प्रदेश के लोगों को आने जाने में कम दूरी तय करनी पड़ेगी।
सरकार को बगैर पैसे का काम भी बताना चाहता हूं, जिसमें रेलवे को फायदा होगा ही और जनता को फायदा होगा। अहमदाबाद बीड पर ली नयी रेलवे लाइन बनाये जाने की अत्यंत जरूरत है, जिसमें पर ३५३.०८ करोड की जरूरत है परन्तु आबंटन हुआ है केवल २० करोड का। यह रेलवे लाइन को वाया सोनपेठ होकर बनाया जाता तो इस रेलवे लाइन की लागत कम पड़ती है परन्तु प्रस्तावित रेलवे लाइन पर बहुत ही पुल बांधना पड़ता है एवं उन पररेलवे लाइन बनाने में काफी लागत होने की आशंका है एवं इसकी दूरी भी कम हो सकती है। सोनपेठ मेरे संसदीय क्षेत्र का तहसील मुख्यालय है और कृषि उत्पादन का मुख्य केन्द्र है और यहां की कपास को निर्यात भी किया जाता है अगर सोनपेठ से यह रेलवे लाइन होकर जाती तो यहां के किसानों को बहुत ही लाभ और इस पिछड़े क्षेत्र को विकास का अवसर मिल सकता है और रेलवे को ज्यादा राजस्व भी मिल सकता है।
नांदेड रेल मंडल वर्तमान समय में साउथ सैंट्रल रेलवे सिकन्दराबाद अंतर्गत है, जिसके कारण यहां के लोगों को सिकन्दराबाद आने जाने में बहुत ही दिक्कत होती है और रेलवे के अधिकारियों को भी अगर इसको मध्य रेलवे के अंतर्गत कर दिया जाये तो बहुत सी दिक्कतों को दूर किया जा सकता है एवं इस रेल मंडल कार्य करन में आसानी होगी । इस कार्य के लिए केवल सरकार को ऑर्डर ही करना है।
इस बजट का मैं विरोध करता हूं।
*Speech was laid on the Table.
* श्री अनिरूद्ध प्रसाद उर्फ साधु यादव(गोपालगंज ): अध्यक्ष महोदय, रेल बजट २००४-००५ एक ऐतिहासिक बजट है, जिसका मैं समथर्न करता हूं।
आजादी के बाद पहली बार देश के पिछड़े क्षेत्रों का महत्व दिया गया है। माननीय रेल मंत्री ने रेल में कुल्हड़, खादी, लस्सी एवं मठ्ठा का प्रयोग प्रारंभ कर देश के करोड़ों पिछड़े बेरोजगारों को रोजगार प्राप्त कराने का अवसर प्रदान किया है।
खादी को बढ़ावा देकर महात्मा गांधी के सपनों को साकार करने का एक कारगर प्रयास किया गया है। केन्द्रीय सेवाओं में भर्ती के लिए परीक्षा में सम्मिलित होने वाले बेरोजगारों को मुफ्त यात्रा की सुविधा प्रदान कर ऐतिहासिक काम किया है। पैसे के अभाव में बहुत से बेरोजगार, गरीब शक्षित युवक दूर-दराज परीक्षा में सम्मिलित होने से वंचित होते थे, जिन्हें अवसर प्रदान किया गया है।
यह तो सर्ववदित है कि रेल के इतिहास में पहली बार यात्री किराया में किसी प्रकार की वृद्धि नहीं की गयी है। रेल से जुड़े सबसे कमजोर एवं आज तक उपेक्षित रहे कुलियों के लिए विश्रामालय निर्माण की घोषणा के साथ साथ उन्हें पत्नी के साथ फ्री पास की सुविधा प्रदान कर सामाजिक न्याय किया गया है।
परियोजना से संबंधित कुछ सुझाव यहां प्रस्तुत कर रहा हूं। कप्तानगंज - थावे - सिवान - छपरा का अमान परिवर्तन का कार्य शीघ्र पूरा किया जाये। राजापटटी स्टेशन से लेकर जलालपुर स्टेशन तक सभी स्टेशन भवन का विकास एवं सौन्दर्यीकरण। हथुआ एवं दिधवा दुबौली रेलवे स्टेशन आरक्षण केन्द्र का कम्प्यूटरीकरण। थावे जंक्शन से सेलारकला - फुलवरिया - बथुआ - जमुनहा पंचदेवरी - भागपट्टी समऊर होते हुए देवरिया सदर तक नयी रेल परियोजना तथा भागीपट्टी से कटेया - विजयीपुर होते हुए देवरिया सदर मिलाया जाये। मशरख स्टेशन के बदले दिधवादुबौली स्टेशन को जंक्शन घोषित किया जाये। महाराजगंज को मशरख के जोड़ने के स्थान पर उसे दिघवादुबौली तक जोड़ा जाये। गोपालगंज जिलान्तर्गत सिपाया में १२०० एकड़ बंजर पड़ी भूमि पर मेरा सुझाव है कि रेलवे का कोई भी कारखाना खोला जाये, जिससे हजारों हजार बेरोजगारों को रोजगार मिल सके तथा गोपालगंज जिले की बेरोजगारी को दूर करने में सहायक हो सके। रतन सराय - सासामुसा - सिपाया - दिघवादुबौली - नेचुआ जलालपुर - को छपरा मेन लाइन से जोड़ा जाये। छपरा से थावे को बड़ी लाइन से जोड़ा जाये तथा थावे भवानी एक्सप्रेस के नाम से लम्बी गाड़ी उस रास्ते में खोला जाये। बिहार राज्य के पटना से खुलने वाली राजधानी, सम्पूर्णे क्रांति एक्सप्रेस में आम तथा मजदूर वर्ग के लोगों के लिए वातानुकूलित डिब्बा में सफर करना असंभव बात है, मेरा सुझाव है कि उक्त गाड़ियों में कम से कम दो थ्री क्लास/जनरल वातानुकूलित डिब्बा जोड़ा जाये ताकि साधारण तथा मजदूर वर्ग के लोग अति महत्वपूर्ण व्यक्तियों(वी.आइ.पी ) के साथ सफर करते हुए एक ही समय में दिल्ली पहुंच कर अपने को गौरवान्वित महसूस कर सकें। गोहाटी-दिल्ली राजधानी को सप्ताह में एक दिन हाजीपुर - सिवान - गोरखपुर के रास्ते चलाया जाये। गोपालगंज रेलवे क्षेत्र की लाइन का विद्युतिकरण किया जाये।इसके लिए मैं माननीय रेल मंत्री जी को कोटी कोटी धन्यवाद देता हूं।
* Speech was laid on the Table.
* SHRIMATI MANORAMA MADHAVRAJ (UDUPI) : On a dispassionate analysis. I find the Railway Budget-2004 presented last week, is a mere statement of mundane announcements, devoid of any vision or agenda to improve the railway services and to consolidate the progress achieved during the NDA regime.
There is no will or determination, reflected in the Budget to �oarding �oarding� revenue to fund the ongoing projects. Probably no fare hikes for passengers or raise in freight tariff were attempted for fear of incurring the wrath of masses, more so when crucial assembly elections in Maharashtra in October and later elsewhere are to take place. Thus the Budget has turned out to be populist as it seems the Hon’ble Railway Minister is adept in playing to the gallery.
Though there has been a recent spurt in accidents, the latest being the derailment of Matsyagandha Express on Konkan route, there is no specific measure announced for intensifying the track patrolling, equipping the gang-staff with latest walkie talkier and improvement in �oarding� system etc. further the safety of the passengers on board especially women are not taken note of, since it is observed that many incidences of thefts and burglary on running trains have been reported with women suffering most. Additional deployment of security men in Ladies Coaches both on long-distance trains and locals carrying daily commuters in Mumbai and other metro cities.
The entire rail stretch in my constituency falls under Konkan Railways. Long distance trains including Rajdhani destined for Kerala pass through Dakshin Kannada coast and compared to facilities offered to �oarding� from Kerala who are north-bound and vice versa on these trains in terms of quota of berths under reservation, the passengers from Kankanady, Udupi and Kundapura need to be provided with more reservation quota on all important trains including Rajdhani. It is further suggested that a new bi-weekly express between Kandanady and Delhi via Konkan route be started to easy and comfortable travel of passengers �oarding from these stations. Passenger amenities in Udupi, Kundapura etc. in terms of more platforms, waiting sheds, rest rooms and ample parking space should also be provided considering the growth in traffic volume, since Dakshinar Kannada attracts a large number of tourists and pilgrims from all over the country.
The people of my constituency have contributed a lot in the construction of Konkan route track both in terms of land required to lay the track and also providing labour. As a pre-condition for land acquisition, each family whose land-holdings were acquired by KRC, was assured of employment for one able bodied member of the family in Konkan Railways and also vending rights in stations on the route through allotment of railway stalls. There are many such families, whose land holdings were acquired by KRC, still waiting to be offered employment for its member nominees. I would request the Government to honour the pledge made to these families, by evolving a timeframe to provide employment to such persons in KRC.
Manglore-Hassan metre gauge link was dismantled almost a decade ago for gauge conversion to broad gauge. The people in the area who had availed the facility of metre gauge link between Mangalore-Hassan for long, stand deprived of any transportation link for more than a decade. In the interest of all-round development of this area, it is imperative that the rest of the link – from Subramanya to Hassan be taken up through provision of adequate funds in the current Railway Budget.
A part of the Central Road Fund is supposed to be spent on building under-cover bridges on road/rail inter-sections. There are many such intersections in Konkan route that need to be provided with such under-bridge/over bridge facility. I request you to prevail upon the Government to ensure that these suggestions are taken note of.
* Speech was laid on the Table.
रेल मंत्री (श्री लालू प्रसाद) : अध्यक्ष महोदय, मैं सबसे पहले उन सभी माननीय सदस्यों का आभार प्रकट करना चाहता हूं, जिन्होंने रेल बजट २००४-०५ पर हुई मैराथन चर्चा में भाग लिया और अपने बहुमूल्य विचारों से मुझे और सदन को अवगत कराया।
इस रेल बजट चर्चा में कई माननीय सदस्यों ने अपने विचार प्रकट किए और कुछ माननीय सदस्यों ने अपने लखित वक्तव्य सभा पटल पर रखे। मुझे प्रसन्नता है कि अधिकतर सदस्यों ने रेल बजट की सराहना की और एनडीए व बीजेपी के लोगों ने भी सराहना की मेरा नाम लेकर । लेकिन मुझे इस बात का अफसोस है कि पता नहीं क्यों मैं जब-जब बोलने के लिए खड़ा होता हूं यह अपनी पीठ दिखाते हैं।
श्री बसुदेव आचार्य (बांकुरा) : बिना टिकट से आए हैं।
श्री लालू प्रसाद: जो पीठ दिखाते हैं, उनके ऊपर हमारी संस्कृति ने और देवी-देवताओं ने हथियार चलाने की मनाही की थी। देवी-देवताओं और ग्रंथों के कथनानुसार जो सामने खड़े होते हैं, हमें उनके सीने को भेदने की आज्ञा है। पता नहीं वे आंख से आंख क्यों नहीं मिलाते हैं? चूंकि मैं रेल मंत्री हो गया हूं इसलिए मैं अनुशासित भी हो गया हूं। वे मेरी बहुत सारी बातों को जरूर कहीं न कहीं लुक-छुप कर सुन रहे होंगे। चुप-चुप खड़े हैं जरूर कोई बात है। अंगद जी से रावण की पहली मुलाकात है।
मैं आदरणीय ममता जी को धन्यवाद देता हूं। आज वह यहां शरीक हैं और मेरी रेल बजट से संबंधित बातों को सुन रही हैं। मैं उनको विशेष रूप से धन्यवाद देता हूं।
कुमारी ममता बैनर्जी (कलकत्ता दक्षिण): मैं रेल बजट का जवाब सुन रही हूं।
श्री लालू प्रसाद: वह मेरी बहन भी हैं इसलिए मैं उनको धन्यवाद देता हूं। हमारे जो पुरखे थे - राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, पंडित जवाहरलाल नेहरू, आचार्य नरेन्द्र देव जी, विनोबा भावे आदि ने हमें जो राह दिखायी, हम उनके रास्ते को भूलते गए। भारत की समस्त जनता चाहे वह भिन्न-भिन्न धर्मावलम्बी क्यों न हो, मिल कर रहती है। अपने देश की यह खूबसूरती है कि यहां अलग बोली, अलग भाषा को बोलने वाले लोग रहते हैं। यहां अलग-अलग रीजन्स हैं और यहां अलग-अलग तरह के त्योहार मनाए जाते हैं। यही भारत की खूबसूरती है। माननीय सोनिया जी के मार्गदर्शन में यह सरकार चल रही हैं। पता नहीं क्यों जब हम सोनिया गांधी जी का नाम लेते हैं तो इनको जलपुत्ती हो जाती है? हमें इसका आगे जरूर इंतजाम करना पड़ेगा। हम एलर्जी की दवा जरूर रखेंगे। सत्ता से बेदखल होने पर इनमें बेचैनी क्यों है? इनकी बेचैनी यह है कि इन्होंने सोचा भी नहीं था कि इनको ऐसे दुर्दिन देखने पड़ेंगे। मैं मंत्री बनने या कोई पद मिलने पर ऐसी बात नहीं कह रहा हूं। सोनिया जी ने सत्ता की ऊंचाइयों तक पहुंचने के बाद त्याग किया। दुनिया के इतिहास में शायद कोई सोनिया जी की तरह का मिले जिस को देश की जनता ने सत्ता के शिखर तक पहुंचाने का काम किया लेकिन वहां पहुंचने के बाद उन्होंने त्याग करने का काम किया। ऐसी मिसाल शायद कहीं देखने को नहीं मिलती है। इसलिए मैं कहता हूं कि एनडीए के लोगों को, भाजपा के लोगों को और सत्ता के भूखे लोगों को सोनिया जी से सीखना चाहिए, समझना चाहिए। इसलिए मैंने कहा कि जब आप यहां प्रवेश करो तो चाहे खुले रूप से नहीं लेकिन मन ही मन उन्हें जरूर प्रणाम करो और जाते हुए भी नमन करो। यह चीज उनसे सीखनी और समझनी चाहिए। रेल डिरेल हो जाती हैं लेकिन सत्ता से हटने के बाद बहुत सारे नेता डीरेल हो गए हैं। रांची की बात होती है तो कराची की बात कहते हैं। मनमोहन सिंह जी के नेतृत्व में रेल बजट देश की जनता के सामने संसद के माध्यम से पेश किया गया है। यह ऐसा आइना है जिसमें मैं साक्षात देखता हू कि क्या लक्षण हैं। मैं पूरे हिन्दुस्तान में घूमता हूं और पाता हूं कि तमाम धर्मो में विश्वास रखने वाले लोग, सभी जातियां, तबके और सभी तरह के लोग इस दर्पण में अपनी शक्ल देखते हैं। सब के चेहरे अंदर हैं। अगर वे चेहरे नहीं हैं तो मैं वायदा करता हूं कि ऐसे लोगों के चेहरों को हमारी सरकार और रेल अपनी शक्ति तथा कुव्वत के आधार पर इन सब चीजों को समाहित करेगी।
अध्यक्ष महोदय, विश्व में भारतीय रेल का तीसरा स्थान है। यह हमारा संकल्प और हमारी वचनबद्धता है कि हमारे प्रधान मंत्री जी, प्री-पोल अलाइंस की चेयरमैन श्रीमती सोनिया गांधी तथा फाइनेंस मनिस्टर ने कॉमन मनिमम प्रोग्राम का कार्यक्रम लिया है, उसे इंपलीमेंट कराने, उसे देखने तथा सभी मंत्रियों की राय लेना जरूरी है। हम पेपर में पढ़ते थे कि आर.एस.एस. के सम्मेलन में सेना के जनरल को ब्रीफ करने के लिये आर.एस.एस. कैम्प में बुलाया गया। ये लोग दोहरी बात करते है। इस देश में दोहरापन नहीं चलने दिया जायेगा और देश की जनता ने चलने नहीं दिया। माइनौरटीज को सताकर, उन्हें गाली देकर, अपमानित करके हिन्दुस्तान में कोई ऐसी पार्टी नहीं या ऐसी शक्ति नहीं जो कभी सत्ता में आयेगी। यदि आ भी गई तो दुबारा आने वाली नहीं है। सभी पार्टियों के माननीय सदस्यों ने मेरी हिम्मत बंधायी है कि इस देश का अभिजात्य वर्ग, हमारा जो चेहरा बनाता है, मैं जानता हूं कि १३-१४ साल से अपमानित किया जाता रहा है। मैं इसे अच्छी तरह से जानता हूं कि जिन वर्गों या तबकों से हम लोग आते हैं, हमारे बाप-दादाओं के साथ इस तरह का दुव्र्यवहार होता रहा है। अध्यक्ष महोदय, हमें जोकर, नौटंकिया, ड्रामाबाज कहा जाता है…( व्यवधान)
MR. SPEAKER: People have given verdict in your favour. People have elected you.
श्री लालू प्रसाद : अध्यक्ष महोदय, मैं उन सारी बातों पर आ रहा हूं। इस देश की जनता और खासतौर पर बिहार की जनता ने इनकी चतुराई और चालाकी को विफल किया है। यह चर्चा की जाती रही है कि लालू फस्र्ट ए..सी. का भाड़ा बढ़ा देगा, यह करेगा, वह करेगा लेकिन जैसा माननीय सदस्य ने कहा कि जब बड़ी-बड़ी मिलें और टैक्नौलौजी आई तो गांव के कारखाने बैठ गये। मेरे पास बंगला अखबार ‘ आजतक’है जिसमें दिखाया गया है कि एक नौजवान निराशा से बैठा हुआ है…( व्यवधान)
MR. SPEAKER: You need not show it. It is not permissible.
श्री लालू प्रसाद : अगर परमिज़ीबल नहीं है तो वापस कर लेते हैं। अध्यक्ष महोदय, चूंकि मैं नियम और कायदे से बंधा हुआ हूं और जैसा मैंने कहा कि मंत्री होने के बाद मैं अनुशासित हो गया हूं इसलिये जहां वायलेशन हो, आप करेक्ट कर दें।
अध्यक्ष महोदय : आप बजट पर रिप्लाई दीजिये।
श्री लालू प्रसाद : अध्यक्ष महोदय, यू.पी.ए. की सरकार ने गरीबों के लिये किया है कि वे कुल्हड़ बनायें। श्री प्रभुनाथ सिंह जी कह रहे थे कि यादव लोग‘out of job’ है, इसलिये गाय-भैंस रखना बंद कर रहे हैं जिससे वे मट्ठा, लस्सी और दूध से बनी हुई चीजें बनाते थे। हम लोग दही खाते हैं लेकिन जिन्होंने असली दही नहीं खाई, वे नकली को दही मान लेते हैं।
13.00 hrs. यह जो सप्रेटा है, उसी सप्रेटा में हमारे बंगाल से आने वाले माननीय बंधुओं को उसे रेडिश करके मीठी दही बोलते हैं, उसमें चीनी डालकर वे सप्रेटा देते हैं। इसलिए हमारी रेल, हमारी सरकार हिन्दुस्तान की जनता को जो हमारे कंज्यूमर्स हैं, कैरियर हैं, हमारे अतथि हैं, हमारी लक्ष्मी हैं, इन्हें हम सप्रेटा दही नहीं देना चाहते। हम इन्हें बढि़या दूध का बना मठ्ठा, लस्सी, दही देना चाहते हैं। यह नहीं है कि मैं यह किसी खास जाति या बिरादरी के लिए कर रहा हूं। जो कोऑपरेटिव हैं, जो लोग हमारे साथी नहीं हैं, विश्व हिन्दू परिषद, बजरंग दल, आर.एस.एस. ने इस देश में चाहे पंजाब की महान जनता हो, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बंगाल या साउथ की महान जनता हो, एग्रीकल्चर में पशुपालन अब हिन्दुस्तान की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। गाय और दुधारू गाय ले जाने वाले लोगों को, भैंस ले जाने वाले लोगों को कलकत्ता, हरियाणा आदि राज्यों में चारों तरफ विश्व हिन्दू परिषद ने ऐसा काला-कानून बनाया था और उसके तहत रेलवे को पशु ले जाने की मनाही कर दी थी। गाजियाबाद के एम.पी. गोयल जी यहां बैठे हुए हैं। गाजियाबाद में जब पंजाब के किसानों की गाय, भैंस जाती थीं या सोनपुर मेले में कलकत्ता में पशु जाते थे, तो बहुत परेशानी होती थी। हिन्दुस्तान के लोगों को सबको नौकरियां नहीं दी जा सकती। लेकिन लाखों-करोड़ों लोग दूध के व्यापार में तिजारत में लगे थे, जो रेलवे से पशु ढोते थे, इन लोगों ने कानून-नियम बनाकर कहा कि ये लोग पशु कटवाने के लिए ले जा रहे हैं। जो पशुपालक हैं वह बैल, गाय, भैंस कटवाने के लिए ले जा रहे हैं। जो पशुपालन करने वाले लोग हैं, ये लोग गाय-भैंस नहीं काटते। लेकिन उनकी सारी गायें, भैंसें गाजियाबाद में इनके शासन में लूट ली गई।
अध्यक्ष महोदय, बेरोजगारी की बात हमने इसलिए की, ज्यों ही हम रेल मंत्री बने, हमने उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री, माननीय मुलायम सिंह यादव जी से बात की कि आपके पहले यह कानून बना था और पर्यावरण विभाग से भी हमने बात की। मुझे खुशी है कि जो पशुओं की लदाई, गाय-बछिया की लदाई जिसमें लाखों लोग इस काम में लगे थे, पर्यावरण विभाग ने जो कड़ी शर्त लगा रखी थी, वह विदड्रा कर ली और हमने फैसला लिया है कि लोग अपने पशुओं को रेलवे से जहां ले जाना चाहते हैं, ले जा सकते हैं। इससे हमारा परिवार इतना उठेगा। यह हमारी वचनबद्धता है, हम लोगों को काम देना चाहते हैं। सिर्फ कुल्हड़ ही नहीं, खादी ही नहीं, बल्कि जो हमारे बुनकर हैं, वीवर्स हैं, ओ तांत चलाने वालों, कपड़ा बनाना सीखो। इनके कारखाने बैठ गये थे। खादी और चरखा के बारे में बापू ने कहा था कि खादी आजादी की वर्दी है। यही करोड़ों यूनिफार्म आजादी की लड़ाई में हमारी वर्दी थी। जब अमरीका, इंग्लैंड में कपड़ा बनता था, वहां इनके कारखाने थे और वहां भारत की ईस्ट इंडिया कंपनी का बाजार था। दुनिया भर के मजदूरों ने वहां जो हुआ है, माननीय बसुदेव जी जानते होंगे, मैं इतिहास में जाना नहीं चाहता।
MR. SPEAKER: All have supported you.
SHRI LALU PRASAD: Thank you, Sir. इससे करोड़ों लोगों को काम मिला और मिलने जा रहा है। साउथ और केरल के जो लोग सुपारी के पेड़ से जो ट्रे बना रहे हैं, इसे भी हम इनक्लूड करेंगे। रेलवे में जहां भी जरूरत है, उसके अनुसार हम काम करने जा रहे हैं।
अध्यक्ष महोदय, सर्वप्रथम रेलवे की पिछले वर्ष की पहली तिमाही की अवधि की तुलना में ८.२२ मलियन टन ज्यादा लदान किया। लोग बोलते हैं कि पैसा कहां से लाओगे। हम कहते हैं कि पैसे की कमी नहीं होने दी जायेगी। हमने प्रधान मंत्री जी तथा फाइनैन्स मनिस्टर साहब से जितनी हमारी कमाई है और जो हमारी बचत है, उसमें हम रेलवे को दुनिया की नम्बर एक रेल बनाना चाहते हैं। इसमें पैसे की कोई कमी नहीं है। कमी थी खाली नीयत की। पैसा हम लेते हैं, पैसा हम लगाते हैं। इसलिए हमने रेल का लोड जो ट्रक पर चला गया था, हम उसको रोड से उठाकर फिर रेल पर लाना चाहते हैं। कोंकण रेलवे के लिए हमारे यहां डिब्बे नहीं बन पा रहे थे। चक्का आएगा विदेश से, देश का पैसा जाएगा विदेश में, व्हील आएगा विदेश से, क्रेन आएगी विदेश से, फिर हमारी क्या अर्थव्यवस्था है? हम इंपोर्ट कर रहे हैं और विगत साल में हमने कुछ एक्सपोर्ट नहीं किया। हमारे देश में रेलवे में जितने भी कल-कारखाने हैं, हर राज्य में हैं, लेकिन मृतप्राय हैं। हमारे कारीगर, हमारे मैकेनिक, हिन्दुस्तान की जनता और हिन्दुस्तान के लोग ऐसे हुनर वाले लोग हैं कि गाड़ी भी अगर खराब हो जाए, अगर गाड़ी का साइलैन्सर टूट जाता है तो रस्सी से बाँधकर काम चला लेते हैं। हमारा देश जुगाड़ी देश है, यहां जुगाड़ करने वाले लोग है। पर आज हम भी फैशन की ओर चले जा रहे हैं। हम मॉडर्न होते जा रहे हैं। बापू को सूट पहनने का शौक नहीं था, क्या पैन्ट-शर्ट पहनने का शौक नहीं था। क्या उनके पास पैसा नहीं था? लेकिन राष्ट्रपिता महात्मा गांधी धोती में रहते थे - आधी धोती दान में और आधी धोती अपने शरीर पर। वह धोती भी जब फट जाती थी तो हमारी बुढि़या मैया सब फटे कपड़े को काटकर गूदड़ बनाती थी। जब गूदड़ बनता था और कोई गैस्ट आता था तो गैस्ट के लिए वह बिछाया जाता था और अनाज भी सुखाया जाता था। वह गूदड़ भी अगर फट जाए तो हमारी मैया काट-काट कर घर लीपने का पोतन बनाती थी। आज क्या हालत है? कोई फंक्शन में लोग जाते हैं, किसी महिला को देखते हैं, एक महिला से दूसरी महिला चिढ़ती है और सोचती है कि उसके पास इतने गहने हैं, हमारे पास नहीं हैं।
MR. SPEAKER: But you also want female passengers.
श्री लालू प्रसाद : कैसे पैसा बचेगा? कैसे हालत ठीक होगी देश की? रेल क्या मामूली चीज़ है?
मीडिया के सदस्यों ने भी चूँकि चंद मीडिया में भी ये लोग प्रवेश कर गए थे। धन्यवाद है, प्रवेश कर गए थे, लेकिन हमारी महान जनता मीडिया से भी परहेज़ करती है। १०-१५ दिन के बाद जाता है, हमारी जनता के बीच। मीडिया बहुत अच्छा भी है, प्रगतिशील लोग भी हैं, हमारे पास पैसे की कमी भी नहीं है। कई माननीय सदस्यों ने कहा कि हमारे राज्य को लालू ने नैगलैक्ट किया। केरल, उड़ीसा, तमिलनाडु, आंध्रा प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, असम, बंगाल, कर्नाटक और जो सैवन सिस्टर स्टेट्स हैं, बजट सत्र के बाद में सारे राज्यों में खुद जाऊंगा और सारे संसद सदस्यों के साथ बैठूँगा और अपने पदाधिकारियों के साथ रिव्यू करूँगा। जो ऑन गोइंग प्रोजैस्ट्स हैं, उनके लिए ४६ हजार करोड़ रुपये चाहिए। यह हमारी वजह से देर नहीं हो रही है। कहीं दे दिया ५ लाख, कहीं दे दिया २ लाख, कहीं कुछ और दे दिया। यह तो ऊंट के मुंह में जीरे वाली बात है और लोग कहते हैं कि यहां दो, वहां दो।
एक आंकड़ा मैं पढ़कर सुनाना चाहता हूँ।
अध्यक्ष महोदय, फिर भी हमने व्यवस्था की है। जो पैसा रेल बजट पास करके आप देंगे, उसका क्या इंतजाम किया है, उसका विवरण मैं बताना चाहता हूं। आंध्रा प्रदेश में वर्ष २००३-०४ में २७४.९२ करोड़ रुपए खर्च हुए। इस वर्ष २००४-०५ में २९०.० करोड़ का प्रावधान है। असम यानी पूर्वोत्तर राज्यों में ३१५ करोड़ रुपए गत वर्ष खर्च हुए और इस वर्ष भी ३१५ करोड़ खर्च करने का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा वहां और भी इंतजाम है। बिहार में २६४ करोड़ खर्चे हुए और इस वर्ष कुल परिव्यय २८९ करोड़ रुपए का है, लेकिन लोग बोलते हैं कि हम सब कुछ बिहार ले जा रहे हैं। हम केवल बिहार के नहीं हैं। हम यूनियन मनिस्टर हैं। आप पैसा दीजिएगा, आप यहां से पास कर के हमें पैसा दीजिए, हम उसका रेलवे में अच्छा उपयोग करेगें। यह जो विवरण मेरे हाथ में है, इसमें हर राज्य के बारे में पिछले वर्ष हुए खर्च एवं इस वर्ष किए जा रहे प्रावधान का लेखा-जोखा है। मैं इसे सदन की टेबल पर ले- कर देता हूं। मैं आगे बताना चाहता हूं …( व्यवधान)
श्री अवतार सिंह भडाना (फरीदाबाद) : अध्यक्ष महोदय, हरियाणा की ओर रेल मंत्री जी ने ध्यान नहीं दिया है। हरियाणा को कोई लाभ नहीं हुआ है।…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : भडाना जी, आप बैठिए। रेल मंत्री जी ने आश्वासन दिया है कि वे हर राज्य में जाएंगे। वे हरियाणा भी जाएंगे।
...( व्यवधान)
श्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा (रोहतक) : अध्यक्ष महोदय, हरियाणा की तरफ कोई ध्यान नहीं दिया गया है. …( व्यवधान)
MR. SPEAKER: He will visit the place and discuss with you.
… (Interruptions)
SHRI BHUPINDER SINGH HOODA : Sir, in the last ten years, not a single railway line has been laid in Haryana… (Interruptions)
MR. SPEAKER: We are running against time. He has to go to the other House.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: Mr. Minister, please do not refer to the States.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: If you are disturbing your own Minister, then I do not know how we can function here.
श्री लालू प्रसाद : अध्यक्ष महोदय, हरियाणा में कितना व्यय पिछले वर्ष हुआ और कितना इस वर्ष प्रस्तावित है मैं बता देता हूं। हरियाणा में वर्ष २००३-०४ में परिव्यय २३.३३ करोड़ रुपए था और इस वर्ष २००४-०५ में प्रस्तावित परिव्यय ४१.५६ करोड़ रुपए है, यानी पिछले वर्ष से दुगना इस वर्ष व्यय होना है।…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : लालू जी, एक-एक राज्य के बारे में मत बताइए।
श्री अवतार सिंह भडाना : अध्यक्ष महोदय, हरियाणा में ऐसी अनेक जगह अभी तक हैं जहां रेल पहुंचना तो दूर की बात है, लोगों ने रेल देखी तक नहीं है। …( व्यवधान)
श्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा : अध्यक्ष महोदय, पंजाब हमें पानी नहीं दे रहा है। रेल मंत्री जी हमें रेल नहीं दे रहे हैं। ऐसा चलेगा, तो हमारे प्रदेश का विकास कैसे होगा। …ह्ल( व्यवधान)
श्री जय प्रकाश (हिसार) : अध्यक्ष महोदय, हरियाणा रेलों के मामले में बहुत पीछे जा रहा है। हरियाणा का विकास रेलों के विकास से सीधा जुड़ा हुआ है। मेरा निवेदन है कि हरियाणा के लिए और धन दिया जाए। …( व्यवधान)
श्री लालू प्रसाद : आप बैठिए। हम आपको पैसा देंगे। अभी तो जो रेल बजट सदन में पारित करने के लिए है। उसे पास करिए। हम पैसे का इंतजाम कर रहे हैं।
अध्यक्ष महोदय : लालू जी, हर स्टेट के पैसे का विवरण मत पढि़ए। यदि ऐसा करेंगे, तो हर स्टेट का एम.पी. अपने स्टेट के बारे में पूछेगा। …( व्यवधान)
कुमारी ममता बैनर्जी : अध्यक्ष महोदय, यदि आपकी अनुमति हो, तो मैं माननीय रेल मंत्री जी से एक बात पूछना चाहती हूं।
अध्यक्ष महोदय : यदि रेल मंत्री जी यील्ड करें, तो मुझे कोई ऑब्जैक्शन नहीं है।
कुमारी ममता बैनर्जी : आपने हर स्टेट का हिसाब दिया, लेकिन मैं एक बात इनवैस्टीगेशन करने के लिए कहना चाहती हूं कि जो फिगर्स हर स्टेट के लिए हैं, उनकी आप जांच कराएं कि किस स्टेट पर उससे कितना ज्यादा या कम खर्च हुआ है।
श्री लालू प्रसाद : अध्यक्ष महोदय, इन फिगर्स के बारे में मैं जांच कराऊंगा। मैं बताना चाहता हूं कि सबसे पहले मैंने सभी सांसदों को इस बारे में चिट्ठी लिखी और सुझाव मांगे कि जहां रेलें नहीं हैं और जहां-जहां नई रेलें बनानी हैं, उनके बारे में सुझाव दें। माननीय सदस्यों की ओर से जो सूचियां मिलीं, उन सभी जगहों के लिए मैंने सर्वेक्षण करने के आदेश दे दिए, फिर चाहे वह किसी राज्य की कोई रेल लाइन हो।
अध्यक्ष महोदय, अब मैं रोड ओवर ब्रिज यानी आर.ओ.बी. को बारे में बताना चाहता हूं। आर.ओ.बी. के बारे में एक नियम है कि ५० प्रतिशत स्टेट गवर्नमेंट देती है और ५० परसेंट रेलवे देती है। मैं सभी मुख्य मंत्रियों को बुला रहा हूं। उन्हें चटि्ठयां भी लिख रहा हूं कि आपको कौन-कौन सी आर.ओ.बी. की जरूरत है उनके बारे में बताएं क्योंकि इस हैड में हमारा पैसा खर्च नहीं हो पा रहा है। मेरा सभी प्रदेशों के माननीय सांसदों से निवेदन है कि वे इस संबंध में अपने-अपने प्रदेश के मुख्य मंत्रियों से प्रस्ताव भिजवाएं कि उन्हें कौन-कौन से आर.ओ.बी. चाहिए। मैं समय सीमा के अंदर उन आर.ओ.बीज. का निर्माण करा दूंगा। …( व्यवधान)
MR. SPEAKER: You have given an assurance on it.
…( व्यवधान)श्री लालू प्रसाद : ये लोग भाषण करते हैं कि उड़ीसा में कुछ नहीं दिया। उड़ीसा राज्य में १९ रेल परियोजनाएं चल रही हैं, जिसमें नयी रेल लाईन की छ:, आमान परिवर्तन की दो, दोहरीकरण की नौ और विद्युतीकरण की दो परियोजनाएं हैं। इन परियोजनाओं को २,७८८ करोड़ रुपए की आवश्यकता है। इसके पूर्ण होने से १,१२५ किलोमीटर ब्रोडगेज़ लाईन जुटेगी। पिछले वर्ष इन परियोजनाओं के लिए उड़ीसा को २७९.१७ करोड़ रुपए आबंटित किए गए थे और व्यय लगभग २७५.६७ करोड़ रुपए हुए हैं। वर्ष २००४-०५ में उड़ीसा राज्य की परियोजना हेतु ३१७.३३ करोड़ रुपए आबंटित किए गए हैं, हमने ज्यादा पैसा आबंटित किया है।…( व्यवधान)
मोहम्मद सलीम (कलकत्ता-उत्तर पूर्व) : गलत प्रचार हुआ है।…( व्यवधान)
श्री लालू प्रसाद : हां, गलत प्रचार हुआ है, चूंकि ये लोग एनडीए के साथ हैं।…( व्यवधान)वे जानते हैं।…( व्यवधान)इन्हें हर बात में उल्टा नजर आता है।…( व्यवधान)परियोजनाओं का ब्यौरा संलग्न है। यह उड़ीसा का है।…( व्यवधान)
श्री हेमलाल मुर्मू (राजमहल) : झारखंड का बोलिए।…( व्यवधान)
श्री लालू प्रसाद : उसे हमने ले कर दिया है, आप उसमें पढ़ लीजिए।…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय, इस समय रेलवे की चालू परियोजनाओं को पूरा करने के लिए ४६,००० करोड़ रुपए की जरूरत है, इसके लिए फंडिंग की व्यवस्था की जा रही है। आप लोग जो रिमोट एरिया के बारे में बोल रहे हैं, उसके लिए हम पैसे का प्रबंध कर रहे हैं, यह करके, प्रपोज़ल तैयार करके, प्लानिंग कमीशन और टीसी से, ये सारी प्रक्रिया होती है। ऐसा नहीं है कि कोई चिट्ठी दी और हमने आर्डर कर दिया। इसकी प्रक्रिया का पालन करके हम जल्दी ही रिमोट एरिया में, जहां लोगों ने रेल नहीं देखी, वहां इंतजाम करेंगे॥ महोदय, आंध्रा प्रदेश और केरल के माननीय सदस्यों का एक दल मुझे मिला। उन्होंने परियोजनाओं, नये प्रस्ताव, नयी गाड़ी चलाने के लिए, धन आबंटन की मांग पर विचार करने के लिए केरल के लोगो ने निवेदन किया है। परियोजनाओं को, प्रोजेक्ट को शीघ्र पूरा करने संबंधी माननीय सदस्यों की भावना से मैं सहमत हूं। मैं आश्वासन देता हूं कि इस वर्ष के दौरान संसाधन की उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए और जरूरत पड़ी तो बढ़ाते हुए केरल के लिए परियोजनाओं को अधिक धन की मांग पर मैं उचित ध्यान दूंगा और सबसे पहले मैं वहीं आऊंगा।…( व्यवधान)
SHRI M.M PALLAM RAJU (KAKINADA): Sir, I would like to ask on an important point..… (Interruptions)
MR. SPEAKER: No important point. Unless the Minister yields, I cannot allow you.
… (Interruptions)
श्री लालू प्रसाद यादव:आप बाद में पूछिए, तब मैं आपकी बात का जवाब दूंगा। …( व्यवधान)कोट्टयम, एलेप्पी के रास्ते एर्णाकुलम-कायनकुलम के शेष दोहरीकरण के अद्यतन सर्वेक्षण को केरल में टेक-अप किया जा रहा है। आंध्रा प्रदेश में कुडुप्पा-बंगलौर, नाड़ीकुड़ी-श्रीकलाहस्ती, मछलीपट्टनम-रेपल्ली, विष्णुपुरम-जग्गयापेट, रायदुर्ग-तुमकुर के लिए नई रेल लाइन का सर्वेक्षण का मेरे बजट भाषण में पहले ही उल्लेख कर दिया गया है। महबूबनगर, गड़वाल, कुरनूल के रास्ते सिकंदराबाद-द्रोणाचलम का दोहरीकरण और कृष्णा केनाल-कुंटूर-तेनाली के दोहरीकरण और विद्युतीकरण का सर्वेक्षण का कार्य भी टेक-अप किया जा रहा है। जहां तक अजीमगंज-जियागंज लाइन के घाट तकक रेस्टोरेशन का सवाल है, मेरी रक्षा मंत्री जी से बात हुई है। इस परियोजना पर सहमति लेने के उद्देश्य से योजना आयोग को एप्रोच की जा रही है, सहमति मिलने के तुरंत बाद कार्यवाही की जाएगी।
बिहटा से औरंगाबाद वाया पाली का हम सर्वेक्षण कराएंगे। माननीय श्री बसुदेव आचार्य, श्री सत्पथी, श्री लक्ष्मी नारायण पांडे, श्री रामजी लाल सुमन आदि ने कुछ नई गाड़ियां चलाने, फेरा बढ़ाने या गाड़ियों के कुछ अधिक स्टेशनों पर ठहराव आदि की मांग की है। जहां तक अधिक रेल गाड़ियां चलाने की बात है, साल-दर-साल नई-नई गाड़ियां प्रारंभ की जाती हैं। पोपुलर डिमांड के कारण मैंने १५-२० गाड़ियां चलाने का प्रावधान अपने बजट में किया है। कई गाड़ियों का विस्तार, फेरा भी बढ़ाया है, परन्तु इसकी भी कुछ सीमा होती है। प्रत्येक नई गाड़ी को चलाने की क्षमता के विस्तार की भी आवश्यकता होती है। गाड़ियों के कुछ और प्रस्ताव के बारे में भी मैं बताना चाहूंगा। हावड़ा-मुंबई के बीच बांकुरा, आगरा, पुरूलिया होते हुए एक साप्ताहिक गाड़ी चलाने का भी प्रस्ताव है । केरल राज्य के लिए मैंगलोर और त्रिवेन्द्रम के बीच चलने वाली ६६०३-६६०४ मावेली एक्सप्रैस को, जो सप्ताह में एक बाच के बजाय सप्ताह में दो बार चलाने का प्रस्ताव है। परीक्षण के दौरान एक नई गाड़ी कानपुर से छत्तीसगढ़ के लिए अगले चार महीनों के बाद चलाने का प्रस्ताव है।…( व्यवधान)
श्री भाल चन्द्र यादव (खलीलाबाद) : लखनऊ से देवरिया बरौनी के बीच में भी गाड़ी चलाइये।
श्री लालू प्रसाद : आपका सुझाव ठीक है। अब आप सुनिये। हम आश्वस्त करना चाहते हैं कि उत्तर प्रदेश के जौनपुर आजमगढ़ से दिल्ली के बीच ६ महीने के अन्दर वहां के लोगों के लिए नई गाड़ी चलाने का हमारा इरादा है।…( व्यवधान)
कुंवर मानवेन्द्र सिंह (मथुरा) : हमने मथुरा से गाड़ी चलाने का प्रस्ताव दिया था, वहां कोई गाड़ी नहीं चल रही।…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : ये हर प्रस्ताव का कैसे जवाब देंगे।
श्री लालू प्रसाद : आपके प्रस्ताव पर भी हमारी सहमति है, हम रेल चलाकर छोड़ेंगे। यहां जो छूट गया तो रेल भवन में नहीं छूटेगा। यहां बजट पास कराना है, इसलिए यह बोलना पड़ता है। बंगलौर भी और सब देख लेंगे। हमारा लदान अन्तरिम बजट की तुलना में…( व्यवधान)
श्री राम कृपाल यादव (पटना) : बिहार के लिए तो कुछ किया ही नहीं, हमने पटना के लिए रेल चलाने का निवेदन किया था।…( व्यवधान)
श्री लालू प्रसाद : आपकी विक्रमशिला चला दी। आपने प्रत्येक दिन राजधानी चलाने को कहा था, उसका परीक्षण हो रहा है। मैं बताना चाहता हूं कि अन्तरिम बजट की तुलना में ७ मलियन टन लदान हमने बढ़ाया है।…( व्यवधान)
MR. SPEAKER: Shri Pallam Raju, you cannot have a running commentary like this. Please sit down. Unless the hon. Minister yields, I cannot allow you to speak.
श्री लालू प्रसाद : सिस्टम को अभी बसुदेव आचार्य जी ने क्षमता को बढ़ाने की, यात्री व मालगाड़ियों की स्पीड को बढ़ाने की, स्वर्णिम चतुर्भुज, गोल्डन क्वाड्रीलेटरल के विकर्णों का शुद्धिकरण, उसकी क्षमता बढ़ाने का सुझाव दिया है। जैसा मैंने बजट भाषण में उल्लेख किया है, दसवीं योजना की शेष अवधि के दौरान लक्षित यातायात को ढोने और कोर सैक्टर की मांग पूरी करने के लिए रेल मंत्रालय ट्रैक बढ़ाने सम्बन्धित चिन्हित ६२ कार्यों को पूरा करने का निश्चय किया है।
माननीय प्रभुनाथ सिंह जी, रामजीलाल सुमन जी और लक्ष्मीनारायण पांडेय जी व अन्य सांसदों ने रेल संरक्षा और सुरक्षा की स्थिति पर अपनी चिन्ता व्यक्त की है। मैं बताना चाहूंगा कि रेल संरक्षा, सुरक्षा मैं समझता हूं कि इस सरकार की द्ृष्टि में प्रथम है। रेलवे में विगत में भी संरक्षा की द्ृष्टि से भी कई महत्वपूर्ण कदम उठाये गये हैं, जिनके कारण गाड़ी दुर्घटनाओं में काफी कमी आई है। मैं सदन को आश्वस्त करना चाहूंगा कि इन उपायों से न केवल कोई कमी आयेगी, बल्कि संरक्षा और सुद्ृढ़ करने के लिए उत्तरोत्तर और उपाय किए जाएंगे।
जहां तक सुरक्षा का सवाल है, हालांकि रेल पर कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी मूलत: राज्य सरकार का विषय रहा है। हाल ही में आर.पी.एफ. को भी इस विषय में सरकार की ओर से कुछ अधिकार दिये गये हैं। आर.पी.एफ. को मजबूत करने के लिए चालू वित्त वर्ष में न केवल अतरिक्त पदों को भरा जायेगा, बल्कि आवश्यकता के हिसाब से नये पदों का भी सृजन किया जा रहा है। रेल सुरक्षा बल के कर्मियों की कमी को त्वरित ढंग से पूरा करने के लिए मैंने उनकी भर्ती रेल बोर्ड के बजाय सुरक्षा विभाग द्वारा सीधी किये जाने का फैसला किया है। कुछ सदस्यों द्वारा व्यक्त आशंका कि सीधी भर्ती से भ्रष्टाचार बढ़ सकता है, मैं कहूंगा कि ऐसा नहीं होगा। स्टेटवाइज जितनी भी अर्धबल की बहाली होती है, स्टेट पुलिस की बहाली होती है, वहीं से बहाली होती है, न कि कमीशन से बहाली होती है। सिपाही की बहाली कमीशन करेगा, यह बहाली सारे देश में हर जगह होगी। ऐसा नहीं है कि इसमें भ्रष्टाचार को जन्म देने दिया जायेगा। आर.पी.एफ. का दस्ता डिब्बों में चलेगा।
जहां तक रेल ठेकों आदि से सम्बन्धित इण्टर गेंग दुश्मनी का सवाल है, जिसके कारण भी कुछ घटनाएं हुई हैं। चलती ट्रेन में मर्डर कम हुए हैं, लेकिन कैम्पस में ज्यादा हुए हैं । इसमें भी हम डीप में गये हैं। जो रेलवे स्क्रैप है, ठेका है, पट्टा है, उसमें हमने अपनी नीतियां बदली हैं। इससे रेलवे के कैम्पस में जो अपराध होते थे, मैं सदन को आश्वस्त करना चाहता हूं कि ऐसे अपराधी तत्वों के खिलाफ, माफिया गिरोहों के खिलाफ इस नयी सरकार में, श्री लालू प्रसाद यादव उनका मुकाबला करने के लिए तैयार है। हम इस देश में ऐसा नहीं होने देंगे। उन पर कड़ाई की जायेगी।
कुछ सदस्यों ने रेलवे स्क्रैप में भ्रष्टाचार, चोरी करने और माफिया गिरोहों की तरफ हमारा ध्यान आकर्षित किया है। इस बारे में हमने अभी बताया है। श्री राम जी लाल सुमन तथा कतिपय अन्य सदस्यों ने शंका व्यक्त की कि यात्री सुविधाओं के लिए आवंटित २१५ करोड़ रुपये अपर्याप्त है। मैं बताना चाहूंगा कि यात्री सुविधाओं के लिए धनराशि का आवंटन जोनल रेलवे द्वारा किया गया है। मांगों, कार्यों की प्रगति, धनराशि की उपलब्धतता के आधार पर यह किया जाता है। तीन वर्ष में इन कार्यों के लिए १७८ करोड़ रुपये, १७५ करोड़ रुपये और १६९ करोड़ रुपये खर्च किये गये। अब २१५ करोड़ रुपये की आवंटित धनराशि पर्याप्त है।
मेरा प्रयास होगा कि यात्रियों की सुविधा में वजिबल सुधार दिखाई दे। २१५ करोड़ रुपये की राशि यात्री सुविधा योजना मद के अन्तर्गत खर्च की जायेगी। इसके अलावा यात्री सुविधाओं से संबंधित कुछ कार्यों जैसे टीआरएस, यूटीएस, आदि पर भी रेल धन खर्च करती है जो अन्य योजना मदों में शामिल है। हालांकि मैंने माननीय सदस्यों द्वारा उठाये गये मुद्दों को अपने उत्तर में शामिल करने का प्रयास किया है। हो सकता है कि कुछ नगण्य मुद्दे छूट हो गये हों। जहां तक सदस्यों द्वारा उठाये गये स्पेसीफिक मुद्दों का संबंध है, उन्हें पत्र द्वारा स्थिति से अवगत कराया जायेगा। अभी रेलवे की जो लेखानुदान पारित होनी है, तत्पश्चात् रेल बजट की स्थायी समति द्वारा गहन समीक्षा होगी जिसके बाद अनुदान मांगों की स्थायी समति की रिपोर्ट के संदर्भ में विस्तार से चर्चा होगी।
श्रीमती महबूबा मुफ्ती ने कहा था कि जम्मू-कश्मीर की रेल योजना में राशि की कमी की गयी है। ऐसी बात नहीं है। मैं महबूबा जी को यह बताना चाहता हूं कि जम्मू-कश्मीर के लिए जो पैसा दिया गया है, वह प्रयुक्त है। उसमें कहीं भी धन की कमी नहीं की गयी है और न ही धन की कमी होने दी जायेगी।
मैं सभी सदस्यों से आग्रह करना चाहूंगा…( व्यवधान)
चौधरी लाल सिंह (उधमपुर) : उधमपुर में ट्रेन कब चलेगी ?…( व्यवधान)
श्री लालू प्रसाद : हम डेट फिक्स कर रहे हैं। पहले बजट तो पास होने दीजिए।…( व्यवधान)
जम्मू-कश्मीर प्रौजेक्ट नयी लाइन, २९० कि.मी. लम्बाई, किश्त ५५० करोड़ रुपये, ५५०० करोड़ रुपये की राशि इस योजना के अन्तर्गत स्वीकृत है। इस वर्ष १ हजार २०० करोड़ रुपये की मांग रखी गयी है जिसमें ३०० करोड़ रुपये स्वीकृत हो चुके हैं। यह आश्वासन दिया गया है कि जितना खर्च किया जा सकता है, उतने धन का प्रावधान किया जायेगा। जम्मू-कश्मीर में रेलवे द्वारा इस वर्ष १ हजार २०० करोड़ रुपये खर्च करने की योजना है। अभी तक ३१.३.०४ तक १ हजार २७९ करोड़ रुपये खर्च किये जा चुके हैं। इसलिए जम्मू-कश्मीर का जो प्रौजेक्ट है, उसे मेनधारा में जोड़ना है। Jammu and Kashmir is part and parcel of our country.इसलिए इसमें टॉप प्रॉयरिटी है। उस काम को हम समय सीमा के अंदर पूरा करेंगे। इसके साथ-साथ वहां सुरक्षा को भी देखना है।
अध्यक्ष महोदय, गुजरात के गोधरा कांड के बारे में मैं कहना चाहूंगा। इस देश में ही नहीं दुनिया में आज तक पता नहीं लगा कि हमारे देश के ५९ नागरिक जो ट्रेन में मरे थे, उस बारे में पता नहीं लगा कि आखिर वहां क्या हुआ था ? मुझे अचरज है, अफसोस है, इस बात का दुख है कि रेल प्रशासन, एनडीए सरकार के रेल मंत्री और रेल राज्य मंत्री, रेलवे का कोई भी वरिष्ठ पदाधिकारी इतने बड़े हादसे को देखने नहीं गए। यह बात करते हैं, यह बहस करते हैं, देश की सुरक्षा की बात करते हैं, सोनिया जी की तरफ उंगली उठाते हैं। दाल में काला लगता है। वहां कोई नहीं गया। अध्यक्ष महोदय, मैं आपकी अनुमति से बताना चाहता हूं कि रेलवे ने जांच करवाने की कोई आवश्यकता नहीं समझी। कोई जांच नही हुई।…( व्यवधान)मामूली-मामूली घटनाओं में जांच की जाती है। भारत का संविधान सर्वोपरि है। जांच कराना मैनडेटरी है लेकिन जांच नहीं हुई। वहां क्या किया गया। आठ महीने बाद रेलवे संरक्षा आयुक्त ने चिट्ठी लिख दी कि अब मैं जांच नहीं कर सकता। इन्क्वायरी कमीशन बैठ गया है । जांच करने की स्थिति भी नहीं है। केन्द्र सरकार का कोई मंत्री, खासकर रेल मंत्री, वहां नहीं गया। मैं जिम्मेदारी के साथ कहना चाहता हूं, देश को बताना चाहता हूं कि देश से इनको यह दर्द है। पता नहीं क्या बात थी, दाल में क्या काला था। मुझे अफसोस के साथ कहना पड़ता है कि कहीं न कहीं यह बड़ा खेल था जो मेरे मन में था। गुजरात सरकार ने लॉ एंड आर्डर की बात करके एकतरफा कंडीशन तय कर ली। परिस्थितियां, घटनाक्रमों, गोधरा स्टेशन, रेलवे के निकट २७.०२.२००२ को साबरमती एक्सप्रैस के कुछ सवारी डिब्बों मे, देखिए इनका टम्र्स ऑफ रैफरैंस क्या तय करता है, आग लगाई गई। क्या बात है, क्या हुआ, क्या नहीं हुआ, पता नहीं लेकिन यह तय कर लिया गया कि किसी ने आग लगाई थी। उन्होंने उस पर ज्यूडीशियल इन्क्वारी बिठा दी। स्टेट गवर्नमैंट ने जांच करवाई। हम बोलें, वे बोलें, परीक्षण कोई न कोई चीज होती है। २७.०२.२००२ को पश्चिम रेलवे के गोधरा स्टेशन के निकट ९१६६ मुज़फ्फरपुर-अहमदाबाद साबरमती एक्सप्रैस गाड़ी में आग लगने की घटना के कारण ५९ लोगों की जान गई, २४ लोग घायल हुए, रेल परिसम्पत्तियों को भी भारी नुकसान पहुंचा। घटना के ढाई साल बाद भी दुर्घटना के कारणों का पता नहीं लग सका है। रेलवे अधनियम १९८९ की धारा ११४ के अंतर्गत रेलवे संरक्षा आयोग द्वारा न ही वैधानिक जांच नहीं की गई और न ही धारा ११५ के अंतर्गत विभागीय जांच हुई। कोई जांच नहीं हुई। मुझे सदन को सूचित करते हुए अफसोस हो रहा है कि गोधरा में दिनांक २७.०२.२००२ को साबरमती एक्सप्रैस के एस-६ कोच में जो आग लगने की घटना हुई, एनडीए सरकार के तत्कालीन रेल मंत्री ने उसे आग लगने की घटना करार दिया। उस मानवीय त्रासदी के बाद न तो तत्कालीन माननीय रेल मंत्री और न ही रेल राज्य मंत्री ने घटनास्थल का दौरा किया। कोई कुछ बोलता है, कोई कुछ बोलता है। गुजरात में दंगा हुआ, हजारों लोगों का कत्ल हुआ, देश और दुनिया में हमारा सिर शर्म से झुक गया। आज तक पता नहीं लगा। उन्होंने जो जांच कराई, हमने रिपोर्ट मंगाई थी। एफ.एस.एल. की रिपोर्ट जो हमने मंगाई थी, मैं आपकी अनुमति से पढ़कर सुनाना चाहता हूं। "लगाई गई आग" एफ.एस.एल. की रिपोर्ट क्या बोलती है? यह अंग्रेजी में है, मैं आपके सामने पढ़कर बताना चाहता हूं :-
"Forensic Science Laboratory, State of Gujarat, Spot Investigation Report No.2 regarding CR No.9/2002, Godhra Railway Police Station.
A team of forensic experts had visited the place of offence on 3/5/2002 in which along with the undersigned Shri A.N. Joshi, Scientific Officer, Ahmedabad was included. In order to recreate the real picture of how the offence was committed on the day of incident, one coach of the train was kept on the same spot. With the help of different types of containers experimental demonstrations were also carried out by using liquids inside the said coach. On the basis of which the following conclusions were made.
१. It was found that the height of the window of the coach was around seven feet from the ground at the place. Under this circumstance, it was not possible to throw any inflammable fluid inside from outside the coach from any bucket or carboy, because by doing this, most of the fluid was getting thrown out side…"माने जो संस्था थी, डिमाँस्ट्रेशन में वह लौट जाती थी। यह जो एक्सपेरीमेंट किया।…( व्यवधान)हम तो समझ गए, आप लोग सब समझ गए ?…( व्यवधान)
"…At the place of the incident, there was one heap of grit of three feet height at a distance of around 14 feet in the southern side of the coach. Water was thrown on the windows of the coach with the help of bucket standing on the top of the said heap, in that case only about 10 per cent to 15 per cent of the water went inside and the rest of the quantity was spilled outside itself. Thus if the inflammable fluid is thrown from outside then bottom side of the coach would have burnt. But after examination of the coach and the track, no effect was found of the fire on bottom side below he windows of the coach. By taking into consideration this fact and…"
हिन्दी में भी बाद में बता देंगे।
"…also the burning pattern of the outer side of the coach, a conclusion can be drawn that no inflammable fluid had been thrown inside from outside of the coach…"2. There also appears to be no possibility that any inflammable liquid was thrown through the door of the bogie.
3. By standing in the passage between the compartment of the bogey and the northern side door of the eastern side of the bogie, water was poured towards the western side from a container with a wide mouth like a bucket; in that case most part of the bogie was covered with 60 litres of water. By pouring the water in this manner, the water went only towards the West and no part of it came out of the door nor did it go towards the latrine side. On the basis of the above experimental demonstration such a conclusion can be drawn that 60 litres of inflammable liquid was poured towards the western side by using a wide mouthed container by standing on the passage between the northern side door of the eastern side of the S-6 coach and the compartment of seat No. 72 and the coach was set on fire immediately thereafter. If the period after the train had started from Godhra Railway Station, intensity of fire; the degree of burn of the objects that were inside the bogie etc. are taken into account, it can also be concluded that a large quantity (around 60 litres) of highly inflammable fluid was used to set the aforesaid fire and that the fire had spread very rapidly. मि. एस. दहिया, असिस्टेंट डायरेक्टर के दस्तखत हैं। Note : the sketch of the coach and the sketch of the spot are included in the Report."Spot investigation Report No. 1 regarding CR No. 9/2/2002., Godhra Railway Police Station.
"The forensic experts had visited the place of offence on 1/5/2002 in the team of the experts along with the undersigned, the other experts were Shri A.R. Vaghela, Scientific Officer, Vadodara, Shri Yogesh Patel, Scientific Officer (Mobile), Panchmahal and Shri S.L. Desai, Photographer, Surat. The experts have made detailed investigation of the burnt down S-6 coach of the Sabarmati Express train. The said coach was kept in the yard of the Godhra Railway Station. The observations made on the basis of the formations learnt by the detailed examination of the coach are as under.
1. A large number of marks were observed on the outer part of the southern side of the burnt out S-6 coach which were due to stones. Apart from this, a large number of stones were found scattered inside the coach and similarly glass pieces were also seen. It was found that the said glass pieces were of the windows. From these observations it is possible to say that there was large-scale stone pelting on the coach from outside and the glasses of the southern side were primarily broken due to the stone throwing and the glasses of the northern side were broken due to heat of the fire.
2. From the condition of the colour on the door of the coach, the burning pattern, condition of the hand lock, the marks of the melting Aluminium strips of the frame of the window etc. it can be established that both the east-west doors of the northern side of the coach and similarly the eastern door of the sourthern side thus a total of three doors were opened at the time of the incident of fire and the door in the west direction of the southern side was closed. जब आग लगी तो रिस्क्यू करने के लिए पुलिस गई। उस समय खोला गया। यह इसका मतलब है।
3. Out of the windows in the southern side, one rod of one of the windows was found to be broken due to heat. As the height of the lower part of the window was more than 7 ft. from the ground, it negates the possibility of force on the rod from window side. Further it was not found that any instrument was used to bend the rod. Thus, it becomes clear that the rod was attempted to be broken by the use of force from inside of the coach. It appears that the other rods had become loose due to the melting of joints due to heat. …"
आग भीतर ही लगी।
"4. By observing the burning pattern inside the coach, its degree, the depth and the eligatering pattern on the floor, it appears that the fire had spread inside the coach very rapidly. Further by observing the intensity of the eligatering pattern on the floor, it appears that the fire has started from the eastern side of the coach and thereafter spread towards western side rapidly. Further, it appears that the intensity and proportion of the burning of the objects inside the coach was very high, up to around 80 per cent part of the east to west side whereas in the 20 per cent part, the intensity of burning was less in comparison with 80 per cent part.
5. No sign was observed of the use of any corrosive fluid like acid in the said fire.
6. By observing the condition of the frames of the windows of the coach it appears that all the windows of the coach were closed during the time of the fire."
महोदय, यह दस्तखत हैं। यह जो टम्र्स एंड कंडीशन्स स्टेट गवर्नमेंट ने बनाये, जब यह रिपोर्ट आई उसके बाद बना है। टम्र्स एंड कंडीशन्स को नहीं बदला। इसलिए हमने फैसला लिया है कि हम हाई-पावर विभागीय जांच बैठाएंगे, जिससे दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा कि यह आग शार्ट-सर्किट से लगी या प्लान्ड योजना के तहत लगाई गयी। डब्बा तो कारसेवकों से भरा हुआ था। इसकी भी जांच कराएंगे कि कितने टिकट लेकर गये, कितने बेटिकट लेकर गये। इसलिए विभागीय हाई-पावर जांच बिठाने का हमने फैसला किया है और तीन महीने के अंदर हमने रिपोर्ट मांगी है। जिन अधिकारियों ने लापरवाही बरती है उनके लिए भी हमने तय किया है कि उनके ऊपर भी जिम्मेदारी हम निर्धारित करेंगे ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके। वहां क्या हुआ था, कैसे करोड़ों रुपये की सम्पत्ति तबाह हो गयी और लाखों भाई-बहन मारे गये। …( व्यवधान)
MD. SALIM : Sir, in the light of this disclosure, a high-powered inquiry should be set up. … (Interruptions) I demand from the Union Government a firm action against the Gujarat Government also for this kind of criminal offence … (Interruptions)
THE MINISTER OF STATE OF THE MINISTRY OF SCIENCE & TECHNOLOGY AND MINISTER OF STATE OF THE DEPARTMENT OF OCEAN DEVELOPMENT (SHRI KAPIL SIBAL): Sir, I request the hon. Railway Minister to yield for a minute. … (Interruptions)
SHRI LALU PRASAD: Yes, I am yielding.
SHRI KAPIL SIBAL: Mr. Speaker, Sir, this Report is dated 17th of May, 2002. It means that almost three months after the tragedy took place, this Report was with the Government, with the Railway Minister. Yet, this was kept under wraps till 2004. … (Interruptions)
MR. SPEAKER: Mr. Minister, conclusion can be drawn. You need not point it out. He has mentioned the date.
SHRI KAPIL SIBAL: My only point is that this could not have been done without the connivance of the State Government, without the connivance of the Chief Minister, without the connivance of the Central Government, without the connivance of Shri Atal Bihari Vajpayee and without the connivance of the Home Minister. … (Interruptions) All these matters must be investigated and all these people must be brought to book … (Interruptions)
MR. SPEAKER: It is for the Government to do. You are in the Government.
SHRI KAPIL SIBAL: I am only mentioning that. … (Interruptions)
श्री रामदास बंडु आठवले (पंढरपुर) : नरेन्द्र मोदी को हटाना चाहिए…( व्यवधान)गुजरात सरकार को बर्खास्त करना चाहिए।
श्री लालू प्रसाद : महोदय, मैं हाउस को आश्वस्त करना चाहता हूं कि हम किसी भी आदमी के दबाव में आकर मामले को दबने नहीं देंगे। हम देश और दुनिया को बताना चाहते हैं कि इसके लिए जिम्मेदार कौन-कौन लोग थे, क्यों रेलवे डमी बनकर बैठा रहा । ये लोग चेहरा दिखाने लायक नहीं हैं, इसलिए भागते हैं। इनको मालूम है, मैं जब से रेल मंत्री बना हूं, तब से ही गोधरा की बात कह रहा था। इसलिए अपनी लाज को बचाने के लिए, लालू को डिमोरलाइज करने के लिए लालू को दागी मंत्री बोलते हैं।…( व्यवधान)
महोदय, रेल बजट को देश भर में व्यापक समर्थन मिला है।
DR. ARUN KUMAR SARMA (LAKHIMPUR): Sir, no new train was introduced in the reply.
MR. SPEAKER: He has said he will go there, and you meet him.
श्री लालू प्रसाद : महोदय, मैं माननीय सदस्यों को आमन्त्रित करता हूं, आपको मैं आमन्त्रित करता हूं, आपकी सभी कठिनाइयां व्यक्तिगत नहीं है, आपके क्षेत्र की जनता की हैं। मैं आपकी तकलीफ जानता हूं, सोनियाजी भी आपकी तकलीफ को जानती हैं और श्री मनमोहन सिंह जी भी जानते हैं। हम पैसों का इन्तजाम करेंगे। जैसे धड़ा-धड़ा रेल चलती है, वैसे ही धड़ा-धड़ा पैसा देकर आपके काम को करेंगे।
इसमें कोई चिन्ता की बात नहीं है। This is not the last. Morning saw the day.
महोदय, हमारे साथी, कुवंर मानवेन्द्र सिंह मथुरा से निर्वाचित हुए हैं। हम लोग तो वहीं से निकले हैं और हमारा पूरा खानदान वहीं से है।
कुंवर मानवेन्द्र सिंह : मंत्री जी, मथुरा के बारे में विशेष रूप से ध्यान दीजिए।
श्री लालू प्रसाद : मथुरा हमारा गुरुद्वारा है। मैं मानवेन्द्र जी को निश्चित रूप से आश्वस्त करना चाहता हूं और यह भी कहना चाहता हूं, जैसा आपने भी कहा है, कि ये अधर्मी लोग धर्म को नहीं मानते हैं।
यह विभाग हमारा नहीं हैं, हम लोग तो नमित मात्र हैं। मंत्रालय में विश्वकर्माजी का फोटो नहीं था। हमने कहा, आप अपना विभाग संभालिए, एक्सीडेंट मत होने दीजिए, नहीं तो बदनामी आपकी होगी। हमको बोलिए, हमको क्या-क्या करना है। वे हमको बतलाते रहते हैं।
महोदय, रामपुर के एक माइनोरिटी के बन्धु को मैं धन्यवाद देता हूं, रामपुर के अल्पसंख्यकों द्वारा गढ़ा गया राधा-कृष्ण का चित्र हमको गिफ्ट दिया है। वह भी हमने विश्वकर्माजी के चित्र के पास रख दिया है और कह दिया कि आप लोग जानें, आपका काम जानें। रोज एक पियन अगरबत्ती जला देता है और हम जाकर उनको प्रणाम करते हैं। बताइए, कहीं एक्सीडेंट हो रहा है। लेकिन हमको एप्रीहैंशन है, …( व्यवधान)
.……..* MR. SPEAKER: It is not necessary. यह शब्द हटा दीजिए।
श्री लालू प्रसाद : महोदय, हम आपको धन्यवाद देते हैं और सदन से अनुरोध करते हैं कि लेखानुदानों की मांगों को अपनी स्वीकृति प्रदान करे।
* Expunged as ordered by the Chair MR. SPEAKER: I shall now put the Demands for Grants on Account (Railways) for 2004-2005 to vote.
"That the respective sums not exceeding the amounts shown in the fourth column of the Order Paper be granted to the President of India out of the Consolidated Fund of India, on Account, for or towards defraying the charges during the year ending the 31st day of March, 2005, in respect of the heads of Demands entered in the second column thereof against Demand Nos. 1 to 16. "
The motion was adopted.
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