Lok Sabha Debates
Shri Ramji Lal Suman Called The Attention Of Minister Of Agriculture To The ... on 11 March, 2003
nt> १२.०९ ण्द्ध.
Title: Shri Ramji Lal Suman called the attention of Minister of Agriculture to the situation arising out of non-payment of remunerative price to potato growers particularly in Uttar Pradesh and steps taken by the Government.
श्री रामजीलाल सुमन (फिरोजाबाद): महोदय, मैं कृषि मंत्री जी का ध्यान अविलंबनीय लोक महत्व के निम्नलखित विषय की ओर दिलाता हूँ और प्रार्थना करता हूँ कि वह इस संबंध में वक्तव्य दें :
" आलू उत्पादकों को विशेषकर उत्तर प्रदेश में, लाभकारी मूल्य न दिए जाने के कारण उत्पन्न स्थिति तथा सरकार द्वारा इस संबंध में उठाए गए कदम। "
कृषि मंत्री (श्री अजित सिंह) : माननीय अध्यक्ष जी, जो सदस्य आगरा से आते हैं, उन्होंने चिन्ता ज़ाहिर की है कि आलू के उत्पादकों की कुछ समस्या है। केन्द्र सरकार की मार्केट इंटरवैन्शन की एक स्कीम है ।
MR. SPEAKER: Mr. Minister, you have to read the statement.
SHRI AJIT SINGH: Sir, the Ministry of Agriculture implements Market Intervention Scheme (MIS) for procurement of agriculture and horticulture produce, which are not covered under the Price Support Scheme, on the request of a State Government. As per approved guidelines, the Central Government and the State Government concerned bear losses, if any, on the basis of 50:50 subject to 25 per cent of the total procurement value of a commodity. The basic object of the MIS is to protect the interest of farmers in order to avoid distress sale of their produce in case of prices falling below the economic level in the situation of glut in the market due to bumper crop. Minimum Intervention Price (MIP) is determined on the basis of cost of production of a commodity.
The Government of Uttar Pradesh reported an estimated production of potato 102.00 lakh MT during 2002-2003 as compared to 95.70 lakh MT in the previous year and almost 84.00 lakh MT in 2000-2001. The rate of fair average quality potato was reported to be ruling between Rs. 138 and Rs. 239 per quintal against the cost of production of Rs. 190 per quintal. In view of the prevailing low prices of potato, which was even lower than the cost of production, the Government of Uttar Pradesh requested the Ministry of Agriculture to consider the procurement of potato under MIS during the current season. I took a meeting on 5.2.2003 with the State Government at Lucknow for implementation of MIS for procurement of potato in Uttar Pradesh. It was decided in the meeting to procure one lakh MT of potato in Uttar Pradesh. It was also decided that 50,000 MT potato would be procured by the NAFED and 50,000 MT would be procured by the State designated agencies.
The State Government sent a proposal on 7.2.2003 for implementing MIS. A meeting was held here in the Ministry of Agriculture on 11.2.2003 with the State Government officers. The State Government reported cost of production of fair average quality potato at Rs. 190 per quintal. After considering the proposal of the State Government, the Central Government sanctioned MIS for potato in Uttar Pradesh for a quantity of one lakh MT at MIP of Rs. 190 per quintal for a period from 22.2.2003 to 15.4.2003. Out of one lakh MT, NAFED was to procure 50,000 MT while 50,000 MT were to be procured by the designated agencies of the State Government. NAFED and State agencies have opened centres in 24 districts for procurement of potato in Uttar Pradesh under MIS. The procurement operations have commenced from 22.2.2003.
It has been reported that the ruling prices of fair average quality potato in the market have since improved and at present range between Rs. 200 and Rs. 240 per quintal. Since the price of fair average quality potato is ruling above the MIP, i.e., Rs. 190 per quintal, farmers are not coming forward to offer their produce for procurement under the Scheme. Therefore, no procurement has been made so far though the procuring agencies are ready to procure produce brought to them.
It has been experienced that the announcement of implementation of MIS has been helpful to stabilise the market price of potato and thereby ensuring remunerative price to the farmers.
No request from any other State Government has come so far for starting procurement of potato under MIS.
श्री रामजीलाल सुमन : अध्यक्ष महोदय, माननीय कृषि मंत्री जी, चौ. चरण सिंह जी के पुत्र हैं, इसलिए मैं उनसे अपेक्षा करता था कि वे किसी और सवाल पर गम्भीर हों या न हों, लेकिन किसानों के सवाल पर जरूर गम्भीर होंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
महोदय, मेरा ध्यानाकर्णष प्रस्ताव आलू के संबंध में था और मैं उनसे यह अपेक्षा करता था कि वे आलू किसानों की सब दिक्कतों को समझते हैं, इसलिए निश्चितरूप से वे उनके साथ इंसाफ करेंगे, न्याय करेंगे। अभी दो-तीन वर्षों से ऐसा दौर गुजरा है कि आलू किसान अपने आलू लेकर जयपुर या मुम्बई की मंडियों में गया और वहां उसके आलू की जो कीमत थी, वह इतनी कम थी की तमाम किसान अपने आलूओं को मंडियों में ही छोड़कर भाग आए, वहां से चले आए, उन्हें पूरा मूल्य नहीं मिला। आज किसान अत्यधिक परेशान है - एक तो सिंचाई की समुचित व्यवस्था नहीं है, उसे उन्नत किस्म के बीज उपलब्ध नहीं होते, बिजली का गंभीर संकट है, जलस्तर नीचे चला गया है और सिंचाई की समुचित व्यवस्था नहीं है। आज आलू किसान अत्यधिक गंभीर संकट से गुजर रहा है। कृषि मंत्री जी के मुताबिक इस बार जो आलू की पैदावर होने की संभावना है,…( व्यवधान)
कुमारी उमा भारती (भोपाल) :कालिंग अटेंशन में इतना लम्बा नहीं बोलना चाहिए।…( व्यवधान)
श्री रामजीलाल सुमन : अध्यक्ष महोदय, यह बात ठीक नहीं है। This is not the proper way. … (Interruptions) अगर ये इस तरह बोलेंगी तो मैं बैठ जाता हूं।…( व्यवधान) Sir, this is not the way. … (Interruptions)
कुमारी उमा भारती: आप लम्बा भाषण मत दीजिए।…( व्यवधान)
SHRI SOMNATH CHATTERJEE (BOLPUR): Sir, this is not proper. … (Interruptions)
MR. SPEAKER: Let me explain.
… (Interruptions)
SHRI SOMNATH CHATTERJEE : Sir, you have stated that after this, you will allow them. Even from the Treasury Benches, continuous interruption is going on. … (Interruptions)
कुमारी उमा भारती: सोमनाथ जी, आप बीच में क्यों बोलते हैं।…( व्यवधान)
श्री सोमनाथ चटर्जी : उमा जी, आपको इतना गुस्सा शोभा नहीं देता।…( व्यवधान)
श्री रामजीलाल सुमन : अध्यक्ष महोदय, मैं निवेदन कर रहा था,…( व्यवधान)
MR. SPEAKER: It should be a brief statement.
श्री रामजीलाल सुमन : अध्यक्ष महोदय, मैं निवेदन कर रहा था कि कृषि मंत्री जी के मुताबिक इस बार १०२ लाख टन आलू उत्तर प्रदेश में पैदा होने की संभावना है। उत्तर प्रदेश के बाद सबसे अधिक आलू पश्चिम बंगाल में पैदा होता है और इस बार यहां आलू की पैदावार ज्यादा हुई। मंत्री जी ने अभी जो बयान दिया, उन्होंने जो अधिकारियों के साथ बैठक की, उसमें यह निर्णय लया गया कि उ.प्र. से एक लाख मीटि्रक टन आलू की खरीद की जाएगी और यह भी निर्णय लिया गया कि आलू की खरीद नेफेड और राज्य सरकार की एजेंसियों द्वारा की जाएगी। मैं नहीं जानता कि नेफेड कहां आलू खरीद रहा है और कितने खरीद केन्द्र बने हैं। नेफेड ने कहीं खरीद केन्द्र नहीं बनाएं। अभी अजित सिंह जी कह रहे थे कि मैं खोल कर आया हूं।…( व्यवधान)
श्री अजित सिंह : जी हां, मैं खोल कर आया हूं।
श्री रामजीलाल सुमन : इलाहाबाद में आप खरीद केन्द्र खोल कर आए हैं, यह बिलकुल सही बात है। मंत्री जी स्वीकार करते हैं कि आलू उत्पादन की लागत दाम दो रुपए १२ पैसे प्रति क्िंवटल के लगभग है । मंत्री जी, मैं आपकी जानकारी के लिए बताना चाहता हूं कि इलाहाबाद में आप जो केन्द्र खोल कर आए हैं, वहां आलू की बिक्री १९० रुपए प्रति क्िंवटल हो रही है और वहां भी किसान को पूरा भाव नहीं मिल रहा है। इसलिए पूरे प्रदेश में सरकार का जो वायदा था कि आलू खरीदने के लिए नेफेड द्वारा केन्द्र खोले जाएंगे, वहां नहीं खोले गए। आप किन केन्द्रों को खोलने की बात कर रहे हैं। आपने कबूल किया है कि २१२ रुपए प्रति क्िंवटल लागत आई है और वहां भी किसान को १९० रुपए प्रति क्िंवटल के हिसाब से आलू का भाव मिल रहा है। जो सबसे प्रमुख समस्या है, उसकी तरफ मैं आपका ध्यान दिलाना चाहूंगा। मंत्री जी हम अंतरराष्ट्रीय स्पर्धा से बाहर क्यों हैं, हमारी गुणवत्ता में क्या कमी है? क्या उसे जानने की हमने कभी कोशिश की। मैं समझता हूं कि उसमें सुधार की आवश्यकता है। किसान को सिंचाई के लिए बिजली, पानी और खाद अगर ठीक से नहीं मिलेगा तो वह कैसे खेती करेगा। यह सवाल आलू पैदा करने वाले किसान तक सीमित नहीं है, खेतिहर मजदूर तक उसका संबंध है। गांवों में लोगों को रोजगार मिलता है। यातायात और भाड़े का सवाल है। तमाम सवाल आलू पैदा करने वाली चीजों से जुड़े हुए हैं। इस सरकार को तत्काल आलू का समर्थन मूल्य घोषित करना चाहिए। अजित सिंह जी का बयान है कि सरकार २० फरवरी से आलू खरीदना शुरू कर देगी।
आप एक बार मेहरबानी करके यह पता कर लें कि २० फरवरी से नाफेड द्वारा आलू खरीदने की जो बात आपने कही थी, पूरे उत्तर प्रदेश में कितने केन्द्र स्थापित हो गये हैं? आप आलू का समर्थन मूल्य घोषित करने पर भी विचार करें। आपके उत्तर प्रदेश के एक वजीर फरमाते हैं, जो इन्हीं के चेले कोकब हमीद हैं, कि आलू का समर्थन मूल्य ३५० रुपये प्रति क्िंवटल होना चाहिए।…( व्यवधान) मैं खत्म कर रहा हूं।
पिछले दिनों एक डैलीगेशन विदेश गया, उ.प्र. के कृषि उत्पादन आयुक्त भी उसमें गये थे, उनका बयान छपा है उत्तर प्रदेश का आलू खाड़ी देशों की ओर चला। मैं सिर्फ २-३ सवाल पूछना चाहता हूं-एक तो हम अपने आलू की गुणवत्ता सुधारने के लिए क्या कर रहे हैं? दूसरे मैं चाहता हूं कि आलू का समर्थन मूल्य घोषित होना चाहिए और वह समर्थन मूल्य कम से कम ४०० रुपये प्रति क्िंवटल हो। आपने एक कृषि निर्यात जोन भी बनाया था। वह जो जोन बनाया, उस पर कितना रुपया खर्च हुआ?…( व्यवधान)
श्री शिवराज सिंह चौहान (वदिशा): आप पूरा भाषण आलू की गुणवत्ता पर आज ही करेंगे क्या, आप सीधी बात करें।…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : मैंने आपको इजाजत दी है, आप प्रश्न पूछिये।
श्री रामजीलाल सुमन : इस बारे में चौहान जी मुझे बताएंगे। मैं आपसे बाद में ज्ञानार्जन कर लूंगा। अध्यक्ष महोदय, मैं इनके अनुभवों का लाभ बाद में उठा लूंगा।
एक तो सबसे बड़ा सवाल यह है कि जो आलू निर्यात जोन बनाया गया, उस आलू निर्यात जोन की उपयोगिता क्या रही, उस पर कितना रुपया खर्च हुआ और कितने किसान उससे लाभान्वित हुए? मेरी जो जानकारी है, उसके मुताबिक सिर्फ ५५ किसान लाभान्वित हुए हैं और वे भी सिर्फ ७-८ परिवारों के हैं। मैं आपकी मार्फत यह भी निवेदन करना चाहूंगा कि दुबई में राज्य सरकार का जो प्रतनधिमंडल गया था, उसने कहा कि दुबई में आलू को खरीद होगी और वहां से खाड़ी देशों में आलू की खपत होगी, आलू का निर्यात होगा तो खाड़ी देशों में आलू का कितना निर्यात होने वाला है? इस सिलसिले में माननीय मंत्री जी से मैं जानना चाहूंगा कि १९६३ से पहले सरकार द्वारा जो किसानों को दी जाने वाली छूट थी, वह सहकारी समतियों को मिलती थी। स्वर्गीय चौधरी चरण सिंह जी के प्रयासों से उन्होंने इसे सीधे किसानों को देने का काम शुरू किया। मैं कृषि मंत्री जी से जानना चाहूंगा कि आलू को संरक्षण देने के लिए, आलू किसान को तबाही से बचाने के लिए, आलू किसान जो पैदा करता है, उसकी जो उत्पादन लागत बढ़ गई है, उसके चलते आलू किसानों की हालत कैसे सुधरे, उनको समर्थन मूल्य कैसे मिले, दुनिया के दूसरे देशों में आलू की खपत कैसे हो, खाड़ी के देशों में आलू कैसे जाये, इन सवालों का आप विस्तार के साथ जवाब दें?
SHRI ANIL BASU (ARAMBAGH): Sir, I have given notice and I may be permitted to speak on this issue.
MR. SPEAKER: So far as ‘Calling Attention Notice’ is concerned, only the Member who has given the notice is allowed to speak and nobody else.
SHRI ANIL BASU : Sir, I have given notice on this.
MR. SPEAKER: Your notice will be taken up during ‘Zero Hour’.
SHRI RUPCHAND PAL (HOOGLY): Sir, since he has given the notice, you may please permit him.
MR. SPEAKER: If I permit him, then I will have to permit one hundred more Members.
SHRI RUPCHAND PAL : Hundred Members would not ask for permission, and only one Member is asking permission to speak on this issue.
MR. SPEAKER: ‘Hundred persons’ does not literally mean ‘hundred’ Members; it means ‘many’ Members.
श्री अजित सिंह : माननीय अध्यक्ष जी, जब फरवरी में हमने कहा कि आलू का दाम १३८ रुपये से लेकर २३८ रुपये प्रति क्िंवटल था तो प्रदेश सरकार ने कहा कि इसमें मार्केट इण्टरवेंशन स्कीम चलाने की जरूरत है। जैसा मैंने कहा था कि २४ डिस्टि्रक्ट्स में परचेज सैण्टर खोलने का प्रदेश सरकार ने निर्णय लिया। जहां तक मेरी जानकारी है, कम से कम एक सैण्टर इलाहाबाद में खोला गया। प्रदेश सरकार ने कहा कि इसकी जो प्रोडक्शन लागत है, वह १९० रुपये प्रति क्िंवटल है। इसमें आपकी राय अलग हो सकती है, लेकिन प्रदेश सरकार ने जो हमें कहा…( व्यवधान)
श्री रामजीलाल सुमन : कृषि मंत्री महोदय, हमने तो आपकी राय बताई, आपका जो बयान अखबारों में छपा है कि २१२ रुपये प्रति क्िंवटल तो कृषि मंत्री के हिसाब से लागत खर्चा है, राज्य सरकार ने कह दिया कि १९० रुपये प्रति क्िंवटल लागत है तो राज्य सरकार और आपके वचन में ही फर्क है।
श्री अजित सिंह : माननीय अध्यक्ष महोदय, प्रदेश सरकार ने कहा कि एवरेज फेयर क्वालिटी आलू की उत्पादन लागत १९० रुपये प्रति क्िंवटल है, इसलिए हमने १९० रुपये उसका दाम तय किया। २४ डिस्टि्रक्ट्स में यह खोलने की जरूरत थी। मैं माननीय सदस्यों को बताना चाहूंगा कि उसके बाद दाम बढ़े हैं। मेरे पास फरवरी की २५ तारीख और मार्च की ७ तारीख के दाम हैं जो कि मंडी में आलू के दिये गये। २५ फरवरी को आगरा मंडी में २१० रुपये, कानपुर मंडी में २२० रुपये से लेकर २४५ रुपये, इलाहाबाद मंडी में २०० रुपये से लेकर २१० रुपये, गोरखपुर मंडी में २१० रुपये से लेकर २२० रुपये और फैजाबाद मंडी में २१० रुपये से लेकर २२० रुपये तक दाम दिये गये। कोई आदमी आलू बेचने के लिए उन क्रय केन्द्रों में नहीं आ रहा है लेकिन क्रय केन्द्र खोलने का मकसद यही था कि किसान को एक ऑप्शन रहे कि कम से कम उसे लागत मूल्य मिल जाये। हमेशा मार्केट इन्टरवेंशन स्कीम से यही होता है कि बाजार में दाम बढ़ जाता है। जहां तक एक्सपोर्ट करने का सवाल है, प्रदेश सरकार का एक डेलीगेशन विदेश गया था। मुझे मालूम नहीं कि उनकी रिपोर्ट आयी है या नहीं लेकिन नेफेड ने एक्सपोर्ट करने का थोड़ा आर्डर प्रोक्योर किया है। प्रदेश सरकार आलू को दूसरे प्रदेशों में ले जाने और इसे एक्सपोर्ट करने के लिए ट्रांसपोर्ट सबसिड़ी भी दे रही है।
जहां तक क्वालिटी का सवाल है, शिमला में पोटेटो रिसर्च इंस्टीटयूट है। उसने आलू की नई क्वालिटी का बीज निकाला है जिसमें शुगर की क्वांटिटी कम हुई है। अब आलू को बाहर एक्सपोर्ट करने या आलू को प्रोसैस करना आसान हो गया है। आलू के लिए चार एक्सपोर्ट जोन्स भी खोले गये हैं। एक जोन आगरा में है जो कि पिछले साल खुला है। उसमें अभी समय लगेगा। अब उस एक्सपोर्ट जोन्स से कितने किसान लाभान्वित हुए हैं, उसमें प्रौसेसर भी होते हैं, किसान की ट्रेनिंग का भी इंतजाम होता है तथा पेस्टीसाइड वगैरह कैसे इस्तेमाल होता है, यह सब कुछ होता है। प्रदेश सरकार जमीन दे चुकी है। यह कार्यवाही चल रही है।
आज ही अपीडा की तरफ से एक कांफ्रेंस बुलाई गयी थी जिसमें विदेशों के बहुत से आलू खरीदने वाले संगठन आये हुए थे। आलू की क्वालिटी देश में इम्प्रूव हो रही है।आपने अभी स्टोरेज की बात की। पिछले साल उत्तर प्रदेश में स्टोरेज में पर क्िंवटल ८२ रुपये का दाम था लेकिन इस साल सब जगह ८१ रुपये पर क्िंवटल का दाम है। पिछले कुछ वर्षों में जिस प्रकार से स्टोरेज की क्षमता बढ़ी है, उस हिसाब से एसोसियेशन ने बात करके आलू के स्टोरेज की कॉस्ट अपने आप कम कर दी है। उन्होंने एक रुपये घटाने का काम किया है। आलू की क्वालिटी बढ़ाने की हम कोशिश कर रहे हैं। यह सही है कि हम जितना बीज पैदा कर रहे हैं, वह सब किसानों तक नहीं पहुंच पा रहा है।
लेकिन हमारा विश्वास है कि एक्सपोर्ट जोन के द्वारा क्वालिटी इम्प्रूव करने पर हमारा आलू का निर्यात भी बढ़ेगा। जिस तरह उत्पादन बढ़ रहा है, हम डायवर्सीफिकेशन चाहते हैं, उसमें आलू महत्वपूर्ण प्रोडयूस है जिसकी तरफ सरकार का पूरा ध्यान है। …( व्यवधान)
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…( व्यवधान)
डॉ.रामकृष्ण कुसमरिया (दमोह) : अध्यक्ष महोदय, मध्य प्रदेश में निर्वाचन आयोग ने मध्य प्रदेश सरकार के अधिकारियों को सस्पेंड करने के निर्देश दिये हैं। …( व्यवधान)मध्य प्रदेश की मतदाता सूचियों में भारी मात्रा में धांधली की गई है। …( व्यवधान)
MR. SPEAKER: Please, understand what I am going to speak. There have been certain practices established in this House. I do not want to go beyond the practices. The practice has been that when the Speaker stands, the others have to sit down. That is the first practice.
The practice in the House is quite clear. I had said that I would give opportunity during ‘Zero Hour’ to those Members who had given notices for Adjournment Motions. Those notices had not been allowed by me.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: Please! Everybody should listen to this so that the matters become clear. Thereafter the Members are at liberty to do what they want to.
SHRI ANIL BASU (ARAMBAGH): On Calling Attention, Sir.
MR. SPEAKER: Please listen to me. The rule on Calling Attention is quite different. I will send you the book of rules so that you will find what the rules are.
As regards the Adjournment Motions the rule is that after the notices of Adjournment Motions are disposed of and they are not admitted, then we go to ‘Zero Hour’.
कुमारी उमा भारती (भोपाल) :यह रूटीन मैटर नहीं है। लोकतंत्र की हत्या हो रही है। इस देश के लिए यह सबसे महत्वपूर्ण सवाल है। …( व्यवधान)
MR. SPEAKER: Everybody’s matter is important. Please allow me to complete.
कुमारी उमा भारती: आप हमें सबसे पहले डिसकशन का आदेश दे दीजिए।…( व्यवधान)
MR. SPEAKER: I am not allowing anybody to speak. When I am addressing the House Umaji, you must allow me to address the House. Or, should I sit down?
… (Interruptions)
कुमारी उमा भारती: मैं माफी मांगती हूं।…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : माफी मांगने का प्रश्न नहीं है।
...( व्यवधान)
कुमारी उमा भारती: आप इस पर सबसे पहले डिसकशन का आदेश दे दीजिए।…( व्यवधान)
MR. SPEAKER: Therefore, those who had raised the Adjournment Motion may be allowed to speak for two minutes each. Thereafter, we will go to the Zero Hour.
When we go to other notices of Zero Hour, I will give you the first priority to speak.
श्री शिवराज सिंह चौहान: अध्यक्ष महोदय, यह मामला मध्य प्रदेश का है। वहां अभूतपूर्व संवैधानिक संकट पैदा हो गया है। चुनाव आयोग नहीं मान रहा, मुख्य मंत्री नहीं मान रहे, राज्य सरकार नहीं मान रही है।…( व्यवधान)
कुमारी उमा भारती : यह बहुत महत्वपूर्ण मामला है।…( व्यवधान)
MR. SPEAKER: I am going to give you the first priority when I come to Zero Hour.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: Now, Shri Basu Deb Acharia.
… (Interruptions)
SHRI PRIYA RANJAN DASMUNSI (RAIGANJ): Sir, everyday they behave like this… (Interruptions)
MR. SPEAKER: One Member from your side may speak.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: I have made up my mind.
… (Interruptions)
अध्यक्ष महोदय : आप इस नियम में कोई भी बदलाव करना चाहते हैं तो मैं तैयार हूं। आप नियम समति के पास आइए, नियम में बदलाव करें, मैं तैयार हूं।
श्री शिवराज सिंह चौहान: अघ्यक्ष महोदय, यह महत्वपूर्ण मामला है।…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : मैंने नियम पर बोलने को कहा है, विषय पर नहीं। मैंने जो नियम बताया है, उसके बारे में आपको क्या कहना है, वह कहिए।
…( व्यवधान)अध्यक्ष महोदय : रघुवंश प्रसाद जी, मुझे इनको सुनने दें।
…( व्यवधान)श्री शिवराज सिंह चौहान: अघ्यक्ष महोदय, निर्वाचन आयोग ने मध्य प्रदेश की सरकार से यह कहा है क…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : विषय के बारे में मैंने कहा है कि ऐडजर्नमैंट मोशन पर जो नहीं हैं, मैं उनको चांस देने वाला हूं, उस समय मैं आपको फस्र्ट चांस दूंगा। आप और क्या चाहते हैं।
श्री शिवराज सिंह चौहान: मध्य प्रदेश में अभूतपूर्व संवैधानिक संकट पैदा हो रहा है।…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : अगर आप नियम के अंतर्गत बोलना चाहते हैं, तो मैं ऐलाऊ करूंगा।
…( व्यवधान)MR. SPEAKER: Please talk as per rules. Take the Rule Book and talk to me.
… (Interruptions)
अध्यक्ष महोदय : श्री बसुदेव आचार्य जी, आप दो मिनट में बोलिए। मैं आपको आज जरूर इजाजत देने वाला हूं। मैं समझता हूं कि आपका मैटर महत्वपूर्ण है, मैं आपको जरूर मौका दूंगा। यदि आप चाहते हैं तो दूसरा भी कोई रास्ता है, डिवाइस है, जिस डिवाइस से मैं आपको और भी मौका दे सकता हूं। लेकिन थोड़ा कोआपरेट कीजिए। आप जानते हैं कि आपकी और मेरी चर्चा भी हुई है।
…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : मैं दोनों पक्ष को सुनुंगा।
…( व्यवधान)MR. SPEAKER: Now, Shri Basu Deb Acharia.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: Hon. Members, please cooperate with the Chair.
… (Interruptions)
SHRI BASU DEB ACHARIA (BANKURA): Sir, there is a serious situation in five districts of West Bengal because of erosion… (Interruptions)
MR. SPEAKER: Shri Basu Deb Acharia, this subject has already been discussed in the House.