State Consumer Disputes Redressal Commission
Prakash Nautiyal vs M/S Daewoo Motors India on 19 December, 2023
Cause Title/Judgement-Entry STATE CONSUMER DISPUTES REDRESSAL COMMISSION, UP C-1 Vikrant Khand 1 (Near Shaheed Path), Gomti Nagar Lucknow-226010 First Appeal No. A/2005/172 ( Date of Filing : 02 Feb 2005 ) (Arisen out of Order Dated in Case No. of District State Commission) 1. Prakash Nautiyal a ...........Appellant(s) Versus 1. M/S Daewoo Motors India a ...........Respondent(s) BEFORE: HON'BLE MR. SUSHIL KUMAR PRESIDING MEMBER HON'BLE MRS. SUDHA UPADHYAY MEMBER PRESENT: Dated : 19 Dec 2023 Final Order / Judgement (मौखिक) राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग , उ0प्र0 , लखनऊ अपील संख्या-706/2005 दि जनरल मैनेजर, सोसायटी आटोमोटिव्स नियर गुंजन टाकीज, जी.टी. रोड, कानपुर बनाम प्रकाश नौटियाल निवासी 118/1, शास्त्री नगर, कानपुर तथा एक अन्य एवं अपील संख्या-172/2005 प्रकाश नौटियाल निवासी 118/1, शास्त्री नगर, कानपुर। बनाम दि जनरल मैनेजर, मैसर्स देवू मोटर्स इण्डिया सर्विस एण्ड सेल्स लिमिटेड तथा एक अन्य समक्ष:- 1.
माननीय श्री सुशील कुमार, सदस्य।
2. माननीय श्रीमती सुधा उपाध्याय, सदस्य।
परिवादी की ओर से उपस्थित : श्री सत्येन्द्र कुमार सिंह, विद्वान अधिवक्ता। विपक्षी सं0-1 की ओर से उपस्थित : कोई नहीं। विपक्षी सं0-2 की ओर से उपिस्थत : श्री टी.एच.नकवी, विद्वान अधिवक्ता। दिनांक : 19.12.2023 माननीय श्री सुशील कुमार , सदस्य द्वारा उदघोषित निर्णय
1. परिवाद संख्या-836/2002, प्रकाश नौटियाल बनाम दि जनरल मैनेजर, मै0 देवू मोटर्स इंडिया सवर्सि एण्ड सेल्स लि0 तथा -2- एक अन्य में विद्वान जिला आयोग, कानपुर नगर द्वारा पारित निर्णय/आदेश दिनांक 31.1.2004 के विरूद्ध अपील संख्या-706/2005, विपक्षी सं0-2, की ओर से प्रस्तुत की गई है, जबकि अपील संख्या-172/2005 स्वंय परिवादी की ओर से इस अनुरोध के साथ प्रस्तुत की गई है कि वाहन के परिवर्तन या मूल्य की अदायगी का आदेश पारित किया जाए।
2. परिवाद पत्र के अवलोकन से जाहिर होता है कि परिवादी द्वारा यह उल्लेख किया गया है कि वाहन क्रय करने के पश्चात से वाहन ने उचित रूप से कार्य नहीं किया और परिवादी द्वारा अनेक बार लिखित शिकायत फैक्स पर की गयी बाद में सूचित किया गया कि कानपुर स्थित सोसायटी मोटर्स में अपने वाहन को दिखाए, परन्तु सोसायटी मोटर्स द्वारा भी कमियों को दूर नहीं किया गया, इसलिए उपभोक्ता परिवाद प्रस्तुत किया गया।
3. विद्वान जिला आयोग द्वारा परिवाद को स्वीकार करते हुए आदेश पारित किया गया कि विपक्षीगण द्वारा वाहन की मरम्मत के लिए क्षतिपूर्ति की राशि अंकन 15,000/-रू0 अदा करें।
4. उपरोक्त आदेश में विपक्षीगण अंकित किया गया है, जबकि परिवादी ने स्वंय विपक्षी सं0-1 यानी देवू मोटर्स इण्डिया सर्विस एण्ड सेल्स लि0 से क्षतिपूर्ति की मांग की थी, इसलिए अपीलार्थी/विपक्षी सं0-2 के विरूद्ध क्षतिपूर्ति का आदेश देना अनुचित है, क्योंकि अपीलार्थी/विपक्षी सं0-2 द्वारा परिवादी के प्रति किसी प्रकार की सेवा में कमी नहीं की गई है। दोनों के मध्य सेवाप्रदाता एवं सेवाग्राह्यता के संबंध स्थापित नहीं है, केवल देवू मोटर्स इण्डिया -3- सर्विस एण्ड सेल्स लि0 के सुझाव पर वाहन को विपक्षी सं0-2 के गैराज में ले जाया गया, जहां पर वांछित संसाधन/उपकरण न मिलने के कारण मरम्मत नहीं की जा सकी। अत: विपक्षी सं0-2 की ओर से प्रस्तुत अपील सं0-706/2005 स्वीकार होने योग्य है।
5. अब अपील सं0-172/2005 पर विचार किया जाता है। अपीलार्थी/परिवादी का तर्क है कि वाहन का स्टेयरिंग प्रारम्भ से ही खराब था। गाड़ी स्टेयरिंग खराब होने के कारण चलाने की स्थिति में नहीं है और पूर्णतया बंद हो चुकी है, परन्तु परिवाद पत्र में कहीं पर भी यह उल्लेख नहीं है कि स्टेयरिंग पूर्णतया बंद हो चुकी है और वाहन चलाने की स्थिति में नहीं है। परिवादी ने यह एक वाक्यांश प्रयुक्त किया है, जिसका अर्थ यह है कि वाहन ने कभी भी उचित रूप से कार्य नहीं किया। उचित रूप से कार्य न करना तथा वाहन का पूर्ण रूप से प्रयोज्य न होना दो अलग-अलग स्थिति हैं। विद्वान जिला आयोग के निर्णय/आदेश से जाहिर होता है कि परिवादी द्वारा यह तथ्य स्थापित नहीं किया गया कि वाहन में निर्माण संबंधी त्रुटि है, इसलिए वाहन को बदलना या वाहन की कीमत को अदा करने का आदेश नहीं दिया जा सकता। अत: यह अपील सं0-172/2005 निरस्त होने योग्य है।
आदेश
6. अपील संख्या-706/2005 स्वीकार की जाती है। विद्वान जिला आयोग द्वारा पारित निर्णय/आदेश 31.1.2004 इस प्रकार परिवर्तित किया जाता है कि क्षतिपूर्ति की राशि की देयता विपक्षी सं0-1 पर होगी न कि विपक्षी सं0-2/अपीलार्थी पर।
-4-प्रस्तुत अपील में अपीलार्थी द्वारा यदि कोई धनराशि जमा की गई हो तो उक्त जमा धनराशि अर्जित ब्याज सहित अपीलार्थी को यथाशीघ्र विधि के अनुसार वापस की जाए।
अपील संख्या-172/2005 निरस्त की जाती है।
प्रस्तुत अपील में अपीलार्थी द्वारा यदि कोई धनराशि जमा की गई हो तो उक्त जमा धनराशि अर्जित ब्याज सहित संबंधित जिला आयोग को यथाशीघ्र विधि के अनुसार निस्ताररण हेतु प्रेषित की जाए।
इस निर्णय/आदेश की मूल प्रति अपील संख्या-706/2005 में रखी जाए एवं इसकी एक सत्य प्रति संबंधित अपील में भी रखी जाए।
आशुलिपिक से अपेक्षा की जाती है कि वह इस निर्णय एवं आदेश को आयोग की वेबसाइट पर नियमानुसार यथाशीघ्र अपलोड कर दे।
(सुधा उपाध्याय) (सुशील कुमार( सदस्य सदस्य लक्ष्मन, आशु0, कोर्ट-3 [HON'BLE MR. SUSHIL KUMAR] PRESIDING MEMBER [HON'BLE MRS. SUDHA UPADHYAY] MEMBER