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Lok Sabha Debates

Need To Install A Statue Of Swami Dayanand Saraswati In The Parliament House ... on 5 August, 2016

Sixteenth Loksabha an> Title: Need to install a statue of Swami Dayanand Saraswati in the Parliament House Complex.

डॉ. सत्यपाल सिंह (बागपत) : अध्यक्ष महोदया, मुझे बोलने के लिए समय देने पर मैं आभार व्यक्त करता हूं।...(व्यवधान)

       महोदया, मैं जिस निवेदन को आपके माध्यम से भारत सरकार के समक्ष रख रहा हूं, उस को इस सम्मानित सदन के 150 से अधिक माननीय सदस्यों ने अपनी स्वीकृति दी है।...(व्यवधान) इसके लिए मैं सभी का हार्दिक आभार व्यक्त करता हूं।...(व्यवधान)

          महोदया, आधुनिक भारत को सबसे पहले राष्ट्रीयता का पाठ पढ़ाने वाले, विदेशी साम्राज्य के विरुद्ध स्वराज का मंत्र देने वाले, जातिवाद के जहर को खत्म करने, धर्म के नाम पर फैले हुए पाखंड, अंधविश्वास व कुरीतियों पर कुठाराघात करने वाले, पिछड़ों एवं अछूतों को गले लगाकर उन्हें आर्य बनाने वाले, बालिकाओं की शिक्षा को भी अनिवार्य बताने वाले, विधवाओं के पुनर्विवाह की वकालत करने वाले एवं वेद विद्या के पुनुर्द्धारक, वेद शास्त्रों की शिक्षा स्त्री-पुरुष, ऊंच-नीच सभी जाति और मजहबों के लिए है- इस घोषणा को वेद प्रतिपादित करने वाले गुजरात की टंकारा की धरती को अपने जन्म से हमेशा के लिए श्रद्धेय एवं ऐतिहासिक बनाने वाले महर्षि दयानन्द सरस्वती का नाम इस देश के इतिहास में अप्रतिम है।...(व्यवधान)

          आधुनिक भारत के इतिहास में वह पहले समाज सुधारक थे, जिन्होंने ऋषियों की आर्य परम्परा को पुनर्जीवित किया।...(व्यवधान) अपने नाम से किसी भी सप्रदाय को न चलाकर उन्होंने समाज सुधार व विश्व कल्याण के लिए आर्य समाज की स्थापना की।...(व्यवधान) विश्व में आर्य समाज ही केवल मात्र एक ऐसी संस्था है, जिसका उद्देश्य संसार का उपकार करना है अर्थात् शारीरिक, आत्मिक व सामाजिक उन्नति करना है।...(व्यवधान)

          महर्षि दयानन्द के महान शिष्यों में स्वामी श्रद्धानंद, महादेव गोविन्द रानाडे, महात्मा ज्योतिबा फूले, पण्डित गुरूदत्त, महात्मा हंसराज, लाला लाजपत राय, पण्डित लेखराम, योगी अरविन्दो घोष, पण्डित नरेन्द्र, स्वामी स्वतंत्रतानन्द, पण्डित राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्लाह खान, सरदार भगत सिंह, डॉ. राजेन्द्र प्रसाद प्रभृति हजारों आर्य समाजियों ने इस देश की आजादी के आंदोलन में बढ-च़ढ़कर भाग लिया। ...(व्यवधान)

          महोदया, मैं आपके माध्यम से भारत सरकार से अनुरोध करता हूं कि भारत रत्न, जो इस देश का सर्वोच्च पुरस्कार है, उससे उन्हें विभूषित किया जाए। यह भावना केवल मेरी नहीं है, बल्कि सम्मानित सदन के डेढ़ सौ से ज्यादा माननीय सदस्यों की भी यही भावना है।

          इसी के साथ मैं यह भी निवेदन करूंगा कि भारत सरकार सभी राज्य सरकारों को ऐसा दिशा-निर्देश दे कि देश के प्रमुख नगरों में इनकी भव्य मूर्तियां लगाई जाए तथा इस सदन के अंदर भी इनकी भव्य मूर्तियां लगाई जाएं। यही मेरा आपसे नम्र निवेदन है। धन्यवाद।

माननीय अध्यक्ष

 
 श्री भर्तृहरि महताब,    श्री आलोक संजर,   डा. किरीट पी.सोलंकी,   श्री भैरों प्रसाद मिश्र,   श्री अजय मिश्रा टेनी,   कुंवर पुष्पेन्द्र सिंह चन्देल,   डा.मनोज राजौरिया एवं   डा.वीरेन्द्र कुमार,   श्री चंद्रकांत खैरे,   श्री शरद त्रिपाठी,   श्री राजेन्द्र अग्रवाल तथा    श्री जगदम्बिका पाल को डा. सत्यपाल सिंह द्वारा उठाए गए विषय के साथ संबद्ध करने की अनुमति प्रदान की जाती है।