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Lok Sabha Debates

Regarding Situation Arising Of Alleged Suicide By A Farmer In Delhi And Agrarian ... on 23 April, 2015

Sixteenth Loksabha an> Title : Regarding situation arising of alleged suicide by a farmer in Delhi and agrarian crisis prevailing in the country.

 

श्री मल्लिकार्जुन खड़गे: मैडम, सभी मेंबर्स ने इसके बारे में नोटिस दिया है और सभी का कंसर्न है कि यह जो दुखद घटना यहां हुई, राजधानी में हुई है, चाहे इधर के मेंबर्स हों या उधर के मेंबर्स हों, सभी इससे बहुत दुखी हैं। ऐसी घटना एक रैली में होती है, किसान रैली में होती है।...(व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष : खड़गे जी, आप मेरी एक बात सुनिए। अगर आप पूरा बोलेंगे तो मैं जो बोलना चाहती हूं, वह रह जाएगा।

…( व्यवधान)

श्री मल्लिकार्जुन खड़गे: मैडम, ये सभी मेंबर्स इसलिए एडजर्नमेंट मोशन लाए हैं और क्वेश्चन ऑवर सस्पेंड करने के लिए कह रहे हैं, क्योंकि यह बहुत ही महत्वपूर्ण मुद्दा है। यह सारे देश के किसानों की समस्या है और अगर हम ऐसी समस्याओं को क्वेश्चन ऑवर सस्पेंड करके डिसकस नहीं करेंगे तो फिर कौन से विषय के लिए क्वेश्चन ऑवर सस्पेंड करते हैं। यह सदन इसीलिए है कि जनता की समस्याओं को हल करना, उनको समझना और सरकार द्वारा उनके हल के लिए उपाय ढूंढना और कुछ कार्यक्रम बनाना। आज इस क्वेश्चन ऑवर को सस्पेंड कीजिए। यहां पर एक किसान राजस्थान से आकर पेड़ पर चढ़कर बैठता है, पुलिस उसको देखती रहती है।...(व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष : अब आप फिर पूरा वर्णन करेंगे।

…( व्यवधान)

श्री मल्लिकार्जुन खड़गे : पुलिस उसको देखती रहती है। उस किसान की आत्महत्या मंच पर बैठे हुए लोग भी देखते रहे। सभी लोग देखते रहे।...(व्यवधान) यह जो सुसाइड हुई, इससे यह दिखता है कि सरकार इसको नोटिस में नहीं लेना चाहती है।...(व्यवधान) किसान की समस्या के बारे में...(व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष : आप यह गलत बात मत कहिए।

…( व्यवधान)

HON. SPEAKER: I am sorry. No allegation can be made. This is a sensitive issue.

… (Interruptions)

SHRI MALLIKARJUN KHARGE :  I want a detailed discussion now only. The hon. Prime Minister should come and he should reply. We are not going to listen.… (Interruptions)

HON. SPEAKER: I will allow all of you. Let him say.

… (Interruptions)

HON. SPEAKER:  This is not the way. I will allow you.

… (Interruptions)

HON. SPEKAER: Please wait for a minute. This is not the way. I am going to  allow you.

… (Interruptions)

माननीय अध्यक्ष : यह गलत बात हो रही है। मैं सबको एलाऊ करने वाली हूं। आप लोग बैठिए।

…( व्यवधान)

 

THE MINISTER OF URBAN DEVELOPMENT, MINISTER OF HOUSING AND URBAN POVERTY ALLEVIATION AND MINISTER OF PARLIAMENTARY AFFAIRS (SHRI M. VENKAIAH NAIDU):  I am accepting it. … (Interruptions) I agree.

HON. SPEAKER:  I am going to allow you. If you want to say, you can say something.

… (Interruptions)

SHRI M. VENKAIAH NAIDU: My submission to the House is this. The issue raised by Shri Kharge is very important, serious and it is an urgent issue. The Government has no problem at all with regard to taking up the discussion on this important issue. My only plea is this.… (Interruptions) सुनिए भाई। ...(व्यवधान)Shri Rajesh, you are an educated person. Let her decide.… (Interruptions) I do not say that. Why are you getting agitated?… (Interruptions)

SHRI MALLIKARJUN KHARGE : When you say “educated person”, does it mean an uneducated man has no sense? He is more sensible.

माननीय अध्यक्ष : हर शब्द को मत पकड़िए खड़गे जी।

…( व्यवधान)

SHRI M. VENKAIAH NAIDU    : The word “sense” is not used by me. When I said “educated”, it is about the rules. It is a very important issue. We are discussing a serious issue. Let us not detract from that.          यह गंभीर मामला है।...(व्यवधान) कुछ दिन पहले इस सदन में...(व्यवधान) मैं आपकी मदद कर रहा हूं, मैं आपका सुझाव स्वीकार कर रहा हूं, आपको प्राब्लम क्या है?...(व्यवधान) कुछ दिन पहले इस सदन में, कृषि क्षेत्र में जो गंभीर संकट आया था, उसके बारे में विस्तार से चर्चा हुई है। ...(व्यवधान) फिर भी जो कल राजधानी में हुआ, वह एक गम्भीर मामला है। इसलिए आप डिसाइड करें कि कब चर्चा करानी है। मैं गृह मंत्री जी को भी सूचित कर दूंगा। चर्चा के बाद सरकार जवाब देगी कि वह क्या कर रही है और क्या करना चाहती है। पहले गृह मंत्री जी वक्तव्य दें, फिर चर्चा हो या पहले चर्चा हो, फिर वह जवाब दें, यह आप तय करें। हम यह कहना चाहते हैं कि सरकार तैयार है, लेकिन मेरी सभी से विनती है कि इसका कोई राजनीतिकरण नहीं करना चाहिए। यह एक गम्भीर मामला है, पूरा देश हमारी ओर देख रहा है।...(व्यवधान)

   

माननीय अध्यक्ष: कृपया पहले मेरी बात सुन लें। इस तरह से नहीं होता है। मैं अपनी रूलिंग दे चुकी हूं। यह बहुत गम्भीर मामला है। मेरी अपनी सहानुभूति है, मैं खुद इस बारे में चिंतित हूं। मैं सभी को एलाऊ करूंगी। इधर से भी कुछ सदस्य बोलना चाहेंगे।

...(व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष: खड़गे जी, कृपया मेरी बात समझें।

...(व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष: आप क्यों शोर कर रहे हैं, पहले मेरी बात तो सुन लें। मुझे एक बात समझ में नहीं आती कि जब मैं आप सबसे सहमत हूं, मैं स्वयं दुखी हूं और मैंने स्वयं टी.वी. पर देखा है। हम सभी यानि जो भी प्रजातांत्रिक व्यवस्था के स्तम्भ माने जाते हैं, वे सभी कहीं न कहीं एक प्रकार से दोषी भी हो सकते हैं। जो भी घटना हुई है, वह कोई अच्छी नहीं है, मैं भी इसे मानती हूं। मैंने सुबह भी कहा था, जब कुछ लोग मेरे पास आए थे। कुछ इधर के लोगों ने भी नोटिस दिया है और उधर के भी कुछ सदस्यों ने नोटिस दिया है। मैंने कहा कि सभी लोग अपने-अपने विचार व्यक्त करें और कल की घटना पर चर्चा के बाद जो भी अच्छा विचार उभर कर आएगा, तो वह बहुत अच्छा होगा। मैं चाहूंगी कि जो भी इस पर अपनी बात कहना चाहेगा, मैं उसे मौका दूंगी। लेकिन मेरा इतना ही कहना है कि अभी संसदीय कार्य मंत्री जी ने कहा कि गृह मंत्री जी भी आ जाएंगे, इसलिए 12 बजे, जिन्होंने इस पर नोटिस दिया है, सबको बोलने का मौका दिया जाएगा। यह ऐसा विषय है कि अगर हम वास्तव में कोई गम्भीर बात कहना चाहें या सुझाव देना चाहें कि इस प्रकार की घटना दोबारा न हो तो अच्छा रहेगा। मैं चाहूंगी कि 12 बजे इस विषय को लिया जाए और मैं सबको कहने का मौका दूंगी। तब गृह मंत्री जी भी आ जाएंगे, वे सबकी बात सुनेंगे और सरकार इस पर रिस्पाँस भी करे, मैं इसके लिए भी तैयार हूं। मैं सबको डिटेल में अपनी बात कहने का मौका दूंगी। अगर किसी पार्टी के दो सांसद हैं तो उन्हें भी इस पर अपनी बात कहने का मौका मिलेगा और 12 बजे मैं सबको मौका दूंगी। जैसे सौगत राय जी का नाम है, लेकिन उनकी पार्टी से कोई और भी बोलना चाहे, तो मैं सबको एलाऊ करूंगी।

...(व्यवधान)

 श्री मल्लिकार्जुन खड़गे : सरकार भी और आप भी इस बात को कबूल कर रहे हैं कि यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है...(व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष: आप बैठ जाएं, क्योंकि आपका अलग विषय है। रोज-रोज ऐसा नहीं होता है। अब वह घटना तो घटित हो गई है।

...(व्यवधान)

श्री मल्लिकार्जुन खड़गे : जब इतना महत्वपूर्ण विषय है तो प्रश्न काल स्थगित करने में क्या हर्ज है...(व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष: हम भी चिंतित हैं, सब चिंतित हैं।

...(व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष: प्रश्न संख्या 421। श्री भगवंत खुबा।

...(व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष: आपके पीछे से माननीय सदस्य प्रश्न पूछ रहे हैं और आप डिस्टर्ब कर रहे हैं। उन्हें प्रश्न पूछने दें।

… (Interruptions)

11.15 hrs At this stage, Shri Ravneet Singh and some other hon. Members came and stood  on the floor near the Table.

… (Interruptions)

HON. SPEAKER: I will allow all of you at 12 O’Clock.

… (Interruptions)

श्री मल्लिकार्जुन खड़गे : फिर एडजर्नमेंट मोशन का मतलब क्या हुआ?...(व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष :  इसका मतलब यह है कि आप इस विषय को सीरियसली नहीं लेना चाहते हैं। क्या आप इस पर राजनीति करना चाहते हैं? What is this?

… (Interruptions)

   

HON. SPEAKER: Now, ‘Zero Hour’. जैसा कि आप सबकी इच्छा है, मैं अलाऊ कर रही हूँ। साधारणतः प्रमुख पार्टियों से एक-एक सदस्य बोलें तो अच्छा रहेगा। मेरा कहना है कि सब अपनी मर्यादा का ख्याल रखें, इसमें पॉलिटिसाइज़ेशन न करें। मैं इसी विषय पर आ रही हूँ, कल की हुई आत्महत्या के लिए ही कह रही हूँ।

…( व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष : मैं चाहूंगी की इसके पीछे सबके चिंता के जो भाव हैं, उसी के अनुसार वक्तत्वय एक-दो मिनट का रहे।

          श्री दीपेन्द्र सिंह हुड्डा जी।

…( व्यवधान)

 माननीय अध्यक्ष : आप बैठ जाइए। जब आपको बोलने का मौका मिलेगा तब आप बोलिएगा।

…( व्यवधान)

SHRI P. KARUNAKARAN (KASARGOD): Madam, we will also be allowed to speak on this issue. I have also given a notice.

HON. SPEAKER: I will allow you also. हर पार्टी से एक-एक सदस्य बोलें तो अच्छा रहेगा। I think the name of Shri Rajesh is also there from your party.

 

श्री दीपेन्द्र सिंह हुड्डा (रोहतक) : महोदया, एक बहुत ही महत्वपूर्ण विषय को लेकर आज पूरा सदन चिन्तित है, हम उस पर विचार कर रहे हैं, उस पर मंथन हो रहा है। देश की राजधानी दिल्ली के दिल में इस तरह की दुर्घटना हुई और सबका दिल दहलाने वाली यह दुर्घटना कल हुई, जिसमें एक किसान कठोरतम कदम उठाने की तरफ बढ़ा। बहुत से प्रश्न उठ रहे हैं और उठेंगे भी, संवेदनशीलता का प्रश्न उठेगा, मानवीयता का प्रश्न उठेगा, आत्मीयता के प्रश्न उठेंगे। इसके दो पहलू हैं, जिनकी तरफ मैं सदन का ध्यान आकर्षित करना चाहता हूँ। पहले तो मैं घटनाक्रम का जिक्र करूँगा, कल जब यह हुआ, मैं मानता हूँ कि जिस तरीके का घटनाक्रम हुआ, इसके दृश्य टीवी के माध्यम से, आज अखबारों में प्रकाशित चित्रों के माध्यम से देश के सामने आए। मैं समझता हूँ कि ये आत्मा को झंझोड़ने वाले दृश्य सामने आए हैं। बहुत लोगों को आत्ममंथन करना पड़ेगा। इस घटनाक्रम की तरफ जैसे-जैसे किसान बढ़ा, तो क्यों किसी ने उसको नहीं रोका, क्यों इस दुर्घटना को होने से बचाया नहीं गया, बहुत लोगों को इसका आत्ममंथन करना पड़ेगा। जो पुलिसकर्मी वहाँ थे, मैं समझता हूँ कि उनकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। गृहमंत्री जी ने इस पर वक्तव्य भी दिया है और हम सरकार से कार्रवाई के बारे में भी जानना चाहेंगे। पुलिसकर्मी क्यों आगे नहीं आए? जो नेता वहाँ मौजूद थे, वे क्यों कार्यवाही करते रहे और भाषण देते रहे, उनको भी आत्ममंथन करना पड़ेगा। मैं राजनीतिक दायरे से इस मुद्दे को नहीं देखना चाहता, मगर जिन्होंने अपना भाषण जारी रखा या बाद में भाषण दिया या उसके बाद इस प्रकार की असंवेदनशील बातें कही गईं, मैं किसी दल की बात नहीं कर रहा हूँ, उन लोगों को भी आत्ममंथन करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि क्या मुख्यमंत्री पेड़ पर बचाने के लिए चढ़ेंगे, यह कहा गया कि यह कोई साजिश है। क्या किसी की आत्महत्या साजिश हो सकती है? उनको भी आत्ममंथन करना पड़ेगा। मीडिया को भी मैं कहना चाहता हूँ, मीडिया के भी दृश्य दिखाए गए, दृश्य चल रहे थे यानी कि मीडिया भी देख रहा था। मैं समझता हूँ कि हम लोग नेता बाद मे हैं, मीडिया का काम हम बाद में करते हैं, पुलिस कर्मचारी के रूप में जो हमारा काम है, जो रोजगार है वह बाद में है, सबसे पहले हम मानव हैं। सबसे पहले हमारा दायित्व उसको बचाने का बनता है, हर व्यक्ति को जो वहाँ पर उस समय मौजूद थे, आज उन्हें यह आत्ममंथन करना पड़ेगा और सभी लोगों को आत्ममंथन करना पड़ेगा। एक दृश्य मैंने देखा कि जब वे फंदा ले रहे थे तो उस समय कुछ लोग ताली बजाकर नारे लगा रहे थे, वे किसी पार्टी के, दल के नारे लगा रहे थे। इस तरह के दृश्य बच्चों ने भी देखे। मुझे इस बात की चिंता है कि हम किस तरफ बढ़ रहे हैं। मैं समझता हूँ कि हमारे पूरे समाज को इस पर आत्ममंथन करने पर मजबूर होना पड़ेगा। चाहे वह मीडिया की बात हो, जब उन्होंने सुसाइड नोट फेंका, तो जो मेरी जानकारी में आया, बहुत से मीडियाजन उसकी तरफ भागे कि कौन उसे पहले लेगा। मैं समझता हूँ कि यह भी एक आत्ममंथन, चिन्तन का विषय है कि कैसा अमानवीय दृश्य हमने पूरी दुनिया को दिया। हमें इसके बारे में सोचना पड़ेगा। इसमें भी कोई दो राय नहीं है कि कार्रवाई भी होनी चाहिए, अबेटमेंट का एक केस दर्ज हुआ है, कार्रवाई होनी चाहिए।

          इसका दूसरा पहलू है किसानों की समस्या। बार-बार हमने इस सदन में किसानों की समस्या की तरफ इस सरकार का ध्यान आकर्षित किया। पिछले 6 महीने से खास तौर से जब पहले रबी की फसल का भाव पिटा था, उसके बाद खरीफ के समय यूरिया की दिक्कत आई थी, बिजली, पानी का संकट आया था और उस समय भाव की बात आई थी और अब बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से एक परिस्थिति पैदा हुई है। मैं समझता हूँ कि कुदरत की यह मार किसी राष्ट्रीय आपदा से कम नहीं है। सरकार को हमने बार-बार कहा कि इस पर कार्रवाई कीजिए, इसे रोकने का काम कीजिए, किसान को जरूरत है, किसान के जख्मों पर मरहम लगाने की आवश्यकता है। आप मरहम लगाइये, इन घटनाक्रमों को रोकिए। जब हमने राज्य सभा में माँग उठाई और बताया कि इस प्रकार से आत्महत्याएं हो रही हैं, उस समय कृषि मंत्री जी ने राज्य सभा में जवाब दिया कि ये सारी घटनाएं कृषि क्षेत्र से जुड़ी हुई नहीं हैं। मैं समझता हूँ कि उसको भी संवेदनशीलता से देखने की आवश्यकता है। उन्होंने ऐसा जवाब क्यों दिया, मैं उसमें जाना नहीं चाहता हूँ। आज मैं राजनीतिक दायरे में इस चर्चा को नहीं रखना चाहता हूँ, मगर हम चाहते हैं कि जो हमारी माँगें हैं, जो आज किसान दिक्कत में है, तीन बातें खास तौर पर हैं, मुआवजे की बात, गेहूँ पर 25 से 30 हजार प्रति एकड़ मुआवजा सरकार तुरन्त घोषित करे।  प्रति क्विंटल पर कम से कम 300 रुपये बोनस घोषित करे और खास तौर पर राहुल जी ने जो अपनी बात में परसों यहाँ कहा, कर्ज़ा माफी का समय भी आ गया है और कर्ज़ा माफी की तरफ भी सरकार देखे। हमारे समय में भी हुआ था। इससे बड़ी प्रकृति की मार सौ साल में किसान पर हमारे देश में नहीं पड़ी। हम सरकार से आग्रह करना चाहते हैं कि सरकार कर्ज़ा माफी की तरफ सोचे।

          अंत में मैं अपने दल की ओर से भी यह मांग रखना चाहता हूँ। यह कई मंत्रालयों से जुड़ी हुई बात है। यह गृह मंत्रालय से जुड़ी हुई बात है और कल के घटनाक्रम पर जो कार्रवाई बनेगी, वह गृह मंत्रालय की जिम्मेदारी है। यह कृषि मंत्रालय से संबंधित बात है क्योंकि जो एग्रेरियन क्राइसेज़ है, वह कृषि मंत्रालय का फर्ज़ बनता है और वित्त मंत्रालय से जुड़ी हुई बात है क्योंकि अगर कर्ज़ा माफी की तरफ सरकार बढ़ेगी तो वह दायित्व वित्त मंत्रालय का बनता है। मेरी अपने दल की तरफ से मांग है कि प्रधान मंत्री जी को स्वयं आकर इस बात का जवाब देना चाहिए और पूरी सरकार की बात सदन में रखनी चाहिए, ऐसी हमारी मांग सरकार से आपके माध्यम से है।

   

डॉ. किरीट सोमैया : माननीय अध्यक्ष महोदया, सबसे पहले मैं सदन की ओर से कहना चाहता हूँ कि अभी गजेन्द्र सिंह का अंतिम संस्कार होने जा रहा है। इस अंतिम संस्कार में हम सहभागी नहीं हो सकते हैं लेकिन आज पूरा देश देख रहा है। आज इस समय सबसे पहले मैं उस परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करता हूँ और साथ में हम संवेदनशील बनें यह प्रार्थना करता हूँ।

          मुझे याद है कल रात को टीवी देखते समय मैं जब मुम्बई में अपने बेटे के साथ बात कर रहा था तो पहला सवाल उसने किया कि क्या वापस संसद में कल ..., फिर उसने जो शब्द बोला, उसे मैं दोहराना नहीं चाहता हूँ। यह संसद की हमारी जो प्रतिमा बाहर है, उसके प्रति हमें सोचना चाहिए। क्या हम वापस संसद  में इसी विषय को लेकर राजनीति शुरू कर देंगे? क्या यह एक दिन की समस्या है, एक महीने की समस्या है, दस महीने की समस्या है? देश 1947 में आज़ाद हुआ और आज 68 साल के बाद वास्तव में मैं कहूँगा कि गजेन्द्र सिंह ने आत्महत्या की है, लेकिन एक अर्थ में वह बलिदान है। ...(व्यवधान)

SHRI MALLIKARJUN KHARGE : What is this, Madam?   … (Interruptions)

SHRI K.C. VENUGOPAL: One should not politicize the issue… (Interruptions)

माननीय अध्यक्ष : खड़गे जी, ऐसा नहीं होता है। आपने भी सभी मंत्रालयों को ज़िम्मेदारी दी है। आपने भी केन्द्र सरकार पर ज़िम्मेदारी डाली है। आप बैठिये। थोड़ा सा सुन लो।

…( व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष : किरीट जी, क्रिटिसाइज़ नहीं करें।

…( व्यवधान)

डॉ. किरीट सोमैया: मैं आपके द्वारा ध्यान आकर्षित करना चाहता हूँ कि इस विषय पर हमें संवेदनशील बनना पड़ेगा। वास्तव में गजेन्द्र ने तो बलिदान दिया है। आज 68 साल के पश्चात् भी एक किसान को किसी एक पार्टी की रैली में आना पड़ता है, दिल्ली में उस झाड़ के ऊपर चढ़ना पड़ता है और सबके सामने, भले ही वह भावावेश में आया होगा, आवेग में आया होगा, जो भी हो, लेकिन समस्या तो सही है। अब मैं यह कहूँ कि वह झाड़ पर चढ़ता रहा और आप देखते रहे, यह क्या समस्या का हल है? मैं यह कहूँ कि आप देख रहे थे तो आप में कौन कौन देख रहा था? वास्तव में पूरा हिन्दुस्तान, संसद और सब नेता देख रहे थे।

          इसलिए सबसे पहला मुद्दा मैं यह कहना चाहता हूँ कि जो किसानी की मूल समस्या है, उस समस्या की चर्चा हम करें। 10 महीने में नरेन्द्र मोदी सरकार आ गई और यह परिस्थिति पैदा हो गई, यह भी कोई कहना चाहे तो कह सकते हैं। वहीं देश के नौजवान विद्यार्थी आज कह रहे हैं कि वापस राजनीति शुरू हो जाएगी। वास्तव में गजेन्द्र ने जो बलिदान दिया है, उसके ऊपर हम एक होकर जो मूल समस्या है, उस पर विचार करें, फिर वह 15 दिन की हो, 15 महीने की हो, 55 वर्ष की हो, किसके कारण हुआ, वह छोड़ो, लेकिन आगे की सोचें। मैं मानता हूँ कि उस किसान को कर्ज़ मुक्ति देनी चाहिए, लेकिन हम उसको स्वयं के पैर पर खड़ा रहना भी तो सिखाएँ, उस दृष्टि से हम सोचें। अब क्लाइमेट चेन्ज की समस्या भी है, लेकिन कैसे हम उसके सामने यह बात लेकर जाएँ और इसलिए इस विषय में मैं अंत में यही कहूँगा कि आज पूरा देश लाचार होकर देख रहा है। एक गजेन्द्र वहाँ चढ़ रहा है और सब लाचार हैं। कोईपत्रकारलाचार है,पोलीटीशिय़नलाचार है,किरीट सोमैय्यालाचार है,मुख्यमंत्रीलाचार है,लेकिन देश लाचार नहीं हो सकता, संसद् लाचारी से देख नहीं सकती। मैं  आपके माध्यम से यही कहूंगा कि क्षुब्ध तो पूरी जनता है, लेकिन आइये, हम साथ में मिलकर गजेन्द्र का बलिदान व्यर्थ न हो, उस प्रकार से इस विषय के मूल में जाकर कायम स्वरूप में किसान को अपने पैरों पर खड़ा करें।

          यही प्रार्थना करके मैं गजेन्द्र के पूरे परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करता हूं। 

HON. SPEAKER:

 
Shri Dushyant Singh,   Shri Suresh Angadi,   Shri Pralhad Joshi,   Shri Shivkumar Udasi are permitted to associate with the matter raised by Shri Kirit Somaiah.
 
DR. P. VENUGOPAL (TIRUVALLUR): Hon. Speaker Madam, this is very important issue. It is unfortunate that a farmer, apparently to show his anguish, has committed suicide in the National Capital in the vicinity of our Parliament.
          We express our deep sympathy to the family of the deceased. Hence, we urge upon the Union Government to go for any further move taking along with it all the stakeholders.
          With this, I conclude.
 
PROF. SAUGATA ROY (DUM DUM): Madam, on behalf of myself and my party, I express deep anguish and sorrow at the suicide of a farmer Gajendra Singh Rathore from Jhamarwara village in Dausa district of Rajasthan.  The suicide for a change took place in full view of television cameras while a rally by the Aam Aadmi Party was going on.  In the suicide note or the note that fell from his pocket, it was revealed that he had lost his crops.  His father had turned him out from the house and he did not know how to feed his three children which was driving him to desperation. 
          Now, here two points emerge from this.  One is the immediacy of the matter that how unsympathetic and unreactive our polity and society has become that he climbed a tree at 12.25 p.m.  He hanged himself only at 1.50 p.m. There were people, there were policemen.  Nobody took any step to bring him down or to persuade him to come down.  While the media was busy filming what he was trying to do.  This is the tragedy of the highest order that I can think about.  The Home Minister is here.  He has said that he will inquire into the matter.  But I think for a change, he should order a judicial inquiry as to why nobody acted while this drama was played out in full.  This is number one.
          Secondly, I do not want to make a political point but it is unfortunate that the Aam Aadmi Party was holding a rally and the rally went on and speeches went on while this man was committing suicide.  I think it is an example of utterly callous attitude.  I have nothing to say.  I would not make a political comment.
          Farmers’ suicide is nothing new in this country.  Every year, according to the data supplied by the Agriculture Ministry, on an average 12,000 people over the last few years are committing suicide.  Farmers are committing suicide and of them the maximum are from Maharashtra.  Now, this man was distressed because his crops have been destroyed.  In this House, we have discussed the agrarian crisis.  But may I mention that in February and March, many States like Gujarat, Punjab, Himachal Pradesh, Haryana, Maharashtra, Bihar, Uttar Pradesh, Madhya Pradesh, Rajasthan, Jammu & Kashmir and West Bengal were hit by hailstorm followed by untimely excessive rainfall.    
          Now, this has caused a great distress to the farmers. You will be surprised to know that in four days, 17 farmers’ death took place in Bareilly alone, and 30 farmers were dead in several North-Indian States. This hides a deep malaise in our system that when a calamity takes place, the Government appoints a team headed by an Additional Secretary. That team goes to the place, finds out the truth and in their bureaucratic style, they submit the report. This man and many farmers at the rally were complaining yesterday that they had not received any compensation for their loss of crops. Now, shall we be bound by bureaucratic rules and practices while people die and commit suicide? I would like a categorical statement from the Government today as to when they are going to give full compensation to the farmers who have been hit by crop loss in the States.
          Madam, what happened yesterday should not happen again. As Kirit Somaiya Ji was saying, the country cannot be a spectator to such suicides taking place. I saw a tweet by the Prime Minister. I would have been very happy if the Prime Minister, instead of saying it on Twitter, came to the House and expressed his anguish because this is Lok Sabha, the House of the People and the Prime Minister is the Head of the House, Leader of the House and Head of the Government. He should have expressed the concern of the Government to the situation developing in the country where the deep-seated agrarian crisis is enveloping the farmers in various States.
          I am very happy that I have given a notice for Adjournment Motion. Notices for Adjournment Motions are normally given by the Opposition Parties to criticise the Government, to censure the Government. You have converted it to an all-Party discussion. I have no objection to that. If ruling Party Members also speak and express their anguish, maybe, their expression would goad the Government to act where no action has been taken. Let there be a judicial inquiry and let the Prime Minister come out with a statement. Even if the Home Minister makes a statement, I have no objection. At least, his policemen under the Delhi Police were responsible for not preventing the suicide yesterday. But we have to take a holistic view of this situation of the most horrific incident that took place in full view of the public eye and television cameras.
I thank you very much for allowing me to speak.
 
SHRI M.B. RAJESH (PALAKKAD): Madam, my leader too wants to speak. So, I will conclude in two minutes.
          Madam, I thank you very much for allowing me. This is not an isolated incident. Actually, the data of the National Crime Records Bureau has revealed that a farmer commits suicide in every 30 minutes. I do not believe that this is an apolitical issue. If this is not a political issue, then what is the political issue? This has been happening in the last 25 years and this is the direct result of neo-liberal policies pursued by various successive Governments in the last 25 years.
          Madam, I do not want to take much of the time since my leader also wants to speak. The suicide note is a charge-sheet against the neo-liberal policies pursued by successive Governments, including this Government. And, this is not merely a suicide. It is a homicide and the culpability lies on the Government.
          I agree with Prof. Saugata Roy. What was the response of the Prime Minister? The Prime Minister has expressed his shock in a tweet. I would like to request the hon. Prime Minister to come out of the Twitter and see the ground reality. This is not an isolated incident. The same thing has happened in my State of Kerala. A farmer, who suffered a massive loss due to price crash of rubber, travelled 500 kilometres from the northern end of Kerala, from Shreemathi Teacher’s constituency, to the place of State Finance Minister and committed suicide. In a 200 page note book he had narrated his whole disastrous experience. This is happening throughout the country. The neo liberal policies are responsible for this. Instead of expressing shock and instead of paying homage to the farmer, we should seriously think about reversing these policies. Only that would be the justice to the farmer, who committed suicide. With these words, I conclude.
HON. SPEAKER:
 
S/Shri P.K Biju,   Joice George. 
 
Sankar Prasad Datta and   Shrimati P.K. Shreemathi Teacher are permitted to associate with the issue raised by Shri M.B. Rajesh.
 
SHRI BHARTRUHARI MAHTAB (CUTTACK): Madam, I stand here and share the anguish of all my fellow colleagues of this House today relating to the tragic incident that occurred in the afternoon yesterday in Delhi.
          Media plays a role, no doubt, but the camera has no life of its own. The person, who operates the camera, has a life. The newspaper itself becomes lively because of the written words that are printed in the newspaper. This reminds me of an incident some time in 1990 when agitation started in Delhi and a photograph was flashed of an incident occurred in Delhi. A young student of Delhi University burnt himself to death protesting against the Mandal Commission recommendations for reservation. That still photograph brought anguish whoever saw that picture in the newspapers. Nobody thought about what was logical or illogical for that reservation. But everybody said, “Was it necessary”? Was it necessary for a young boy to burn himself in front of so many people? How can the society become so callous, unsympathetic and unresponsive? Again that thing has happened in Delhi yesterday.
          A person has travelled from Rajasthan to participate in a rally, whichever party was organizing it, climbed up a tree, declared and flung the cloth around his neck and committed suicide. That again reminds me of those incidents some 300 years ago that happened in our society when young widows who were put on pyre and we all celebrated, the Indian society celebrated as if that was the tradition this Indian society should celebrate. Today, are we witnessing the same incidents, incident after incident, when farmers are putting themselves to death? Most of us are concerned how the Government should behave. We should be more concerned how the society should behave. That is a point of anguish.
          In many States when these things are happening, should not we say that suicide is a dastardly act? No matter we have sympathy with the person, who has passed away, who has done away with his life. But, here is a case, I think, we should also vociferously and steadfastly say that suicide is a dastardly act and is a cowardly act. Society has a responsibility to say this. At the same time, I express my anguish and also sympathy for the family, for those young children, who he has left behind. With these words, I conclude.
HON. SPEAKER: S/Shri Shivkumar Udasi and   Rabindra Kumar Jena are permitted to associate with the issue raised by Shri Bhartruhari Mahtab.
 
श्री अरविंद सावंत (मुम्बई दक्षिण) : लोक सभा अध्यक्षा जी, कल इस देश ने अपनी आंखों से एक  दुर्भाग्यपूर्ण घटना देखी है। हमारे महाराष्ट्र में बहुत किसानों ने आत्महत्या की है जिससे ऐसा लगता है कि लोगों के दिल पत्थर जैसे हो गये हैं।  वे घटनाएं ऐसी थीं कि आत्महत्या होने के बाद में हमें पता चला कि किसान ने खेत में जाकर आत्महत्या की, किसान ने घर में चुप-चाप आत्महत्या कर ली तो लेकिन उनका पता नहीं चला, वे बातें अलग थीं। कल की घटना को सारी दुनिया ने अपनी आंखों के सामने घटते हुए देखा है और वैसी स्थिति में रैली चलती रही। हम पुलिस की आलोचना कर सकते हैं और किसी की भी आलोचना कर सकते हैं लेकिन जनता संवेदनहीन बन रही है, यह सबसे बड़ी कन्सर्न की बात है। इतना सब कुछ होते हुए भी किसी के मन में यह विचार नहीं आया कि जाकर उसे बचाया जाय। लोग नीचे से चिल्ला रहे थे, एक-दो आदमी पेड़ पर चढ़े, पुलिस उसे देख रही थी, वहां रैली चल रही थी, भाषण चल हो रहे थे। क्या कोई स्टोरी बनायी जा रही थी कि देखों भाई ! आदमी कैसे मरता है। उस स्वर्गीय गजेन्द्र सिंह का गुनाह क्या था? किसानों की बात इस सदन में बारबार उठायी जा रही है, उससे सबसे ज्यादा सदमा महाराष्ट्र को पहुंचा है। 5,700 से ज्यादा किसानों ने आत्महत्या की है। हमनें पूर्ववर्ती सरकार के समय एक बड़ा आंदोलन चलाया था, हमने कर्ज माफी की बात की, सरकार ने कर्ज माफ कर दी लेकिन फिर दोबारा किसान उन्हीं परेशानियों का सामना कर रहे हैं। A series of problems is there.
           अब क्लाइमैट चेन्ज की बात आ रही है, यह तो बहुत ही गंभीर चिन्ता की बात है। जब हम लोगों से बात करते हैं तो पता चलता है कि कल किसी के द्वारा क्लाइमैट के बारे में भविष्यवाणी की गई कि अगले वर्ष अच्छी बारिश होगी, जून में अच्छी बारिश होगी, जुलाई में जून से ज्यादा बारिश होगी, अगस्त में थोड़ी कम बारिश होगी, उसके बाद फिर कहा गया कि यह सब होगा लेकिन फिर ओले गिरेंगे, बेमौसम बारिश होगी। आने वाले समय के बारे में भी कोई अच्छा नहीं बता रहा है। हम सबको मिल कर इस विषय पर बहुत गंभीर विचार करना होगा। स्वर्गीय गजेन्द्र सिंह राजस्थान के एक किसान थे, उनके तीन बच्चे हैं, उनकी सारी खेती मर गयी है, वे किसकी रैली में आये थे, मैंने पहले सुना है कि वे किसी पार्टी से चुनाव भी लड़े थे। वे पेड़ पर चढ़ते हैं, गले में फांस डाल रहे हैं, लोग यह देखते हैं, लेकिन किसी को भी कुछ नहीं होता है, यही तो हम लोगों में संवेदनहीनता देख रहे हैं कि जब महिलाओं के साथ बलात्कार हो रहे हैं, लोगों के सामने हत्यायें हो रही हैं, दुनिया उन्हें देख रही है लेकिन किसी की यह हिम्मत नहीं होती है कि हत्या करने वाले का हाथ पकड़ें। इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना से हम बहुत व्यथित हैं। हम किसी की आलोचना नहीं करना चाहते हैं। मैं सिर्फ इतना ही कहना चाहता हूं कि जो कुछ हो रहा है, उसके बारे में अपने दिल से पूछो की क्या वह सही हो रहा है? अगर वह सही नहीं है तो उसमें मेरा कर्तव्य क्या बनता है? अगर मैंने उस समय अपना कर्तव्य निभाया होता तो क्या उसकी जान बचती? वहां जो बैठे हुए लोग हैं उसके बारे में वे भी सोचें और हम यहां भी सोचें। मुझे लगता है कि आगे इस घटना से और हिम्मत बढ़ेगी, जैसा उन्होंने कहा है कि dastardly action, cowardly action. It is okay.  मरने वाला यह नहीं सोचता है, वह बहुत पढ़ा-लिखा नहीं है। वह अपनी रोजी-रोटी के बारे में सोचता है। वह सोचता है कि अगर मैं आज अपने बच्चों को खिला नहीं सकता हूं तो मेरी जिन्दगी किस काम की है। जिस वक्त उसे किसी के आधार की आवश्यकता है, वह आधार उसे नहीं मिलता है तो "आधार कार्ड" से उसे क्या होगा, वह कार्ड है लेकिन आधार नहीं है। यह चीज नहीं होनी चाहिए।
          मैं चाहता हूं कि सरकार अपनी तरफ से कदम उठाये, जैसा उन्होंने कहा कि जुडिशयल इंक्वारी करें। आप जुडिशयल इंक्वायरी कर सकते हैं, उससे क्या होगा? उससे किसी के ऊपर इल्ज़ाम लगेगा लेकिन किसानों की आत्महत्यायें नहीं रुकेंगी। उनके परिवार का दुःख दूर नहीं होगा। मैं अपनी पार्टी एवं सभी के तरफ से उनके परिवार के दुःख में सहयोगी हूं। हम सब आत्म चिन्तन और आत्म परीक्षण करें और आगे के लिए कदम उठायें। मैं इतना कह कर उनके प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करता हूं। 
   
श्री मुलायम सिंह यादव (आज़मगढ़) : अध्यक्ष महोदया, कल की जो घटना घटी है, वह गंभीर समस्या है और यह देश और हम सब के लिए गंभीर संकेत है। यह सवाल केवल सरकार का नहीं है बल्कि हम सब लोगों का है। हम एक ही बात कहना चाहते हैं कि हमने कभी नहीं सोचा था कि उत्तर प्रदेश में भी किसान आत्महत्या करेंगे। पहली बार तो विवाद दूसरा था, वह पारिवारिक मामला था, मीडिया में प्रचार कर दिया गया लेकिन इस बार तीन किसानों ने पहली बार उत्तर प्रदेश में आत्महत्या की है। वहां बहुत सुविधायें दी गयी हैं। सिंचाई मुफ्त कर दी गयी है। वहां की सरकार ने साढ़े सोलह सौ करोड़ रुपये जो किसानों का कर्ज था, माफ कर दिया है। यह कानून भी लागू कर दिया है कि किसान पर कर्जा चाहे सरकारी हो या गैर-सराकारी, उसकी जमीन कभी नीलाम नहीं हो सकती। यह सब किया है।...(व्यवधान) क्या हम गलत बोल रहे हैं? अगर हम गलत बोल रहे हैं तो बता दीजिए।...(व्यवधान) हिन्दुस्तान में किसानों की इतनी मदद कोई नहीं कर पाया जितनी आज उत्तर प्रदेश में हो चुकी है। किसानों के साढ़े सौलह सौ करोड़ रुपये माफ कर दिए, सिंचाई माफ कर दी।...(व्यवधान) आप क्या बात करते हैं? एक नहीं, हम दस गिनवा देंगे। यहां माननीय गृह मंत्री जी बैठे हैं। यह सब स्वीकार करेंगे और सबने स्वीकार किया है।...(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष :  मुलायम सिंह जी।
…( व्यवधान)
श्री मुलायम सिंह यादव : आप इन्हें रोकिए। इन्होंने कोई काम तो नहीं किया है।...(व्यवधान) हम चाहते हैं कि सरकार और विपक्ष की तरफ से सब मिलकर ऐसा करें जिससे किसान आत्महत्या न करें।  देश की समृद्धि, चाहे प्रधान मंत्री जी दुनिया में घूमते रहें, सबसे कर्जा लेते रहें, सबसे मदद लें, लेकिन एक काम कर दें कि केवल किसानों को सम्पन्न बना दें, फिर आपको दुनिया में कहीं भी कर्जा लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी। अगर देश को कोई समृद्ध कर सकता है तो वह किसान है। आप पूरा इतिहास पढ़िए। अमरीका को किसने समृद्ध किया, सबसे ज्यादा सम्पन्न किसने किया - किसानों ने किया, क्योंकि वहां की सरकार ने किसानों को बाकायदा सुविधा दी। उसका पूरा अनाज खरीद लिया। अगर अनाज ज्यादा हो गया, रखने की जगह नहीं मिली तो अमरीका ने पूरा अनाज समुद्र में फिकवा दिया, लेकिन किसानों को घाटा नहीं होने दिया।...(व्यवधान) अगर अमरीका आगे निकला तो किसानों को प्राथमिकता देकर निकला था। आज हम कहना चाहते हैं, यहां गृह मंत्री जी, आडवाणी साहब बैठे हैं, अगर देश को आगे बढ़ाना है, सम्पन्न करना है तो वह केवल किसान कर सकता है। उसे प्राथमिकता दीजिए। आप कई बार किसानों के बारे में बोल चुके हैं। हम भी बोल चुके हैं। मैं पूरे सदन में कह रहा हूं कि किसानों को आगे बढ़ाएंगे तो दुनिया में कहीं से कर्जा नहीं लेना पड़ेगा, अकेला किसान ही देश को सम्पन्न बना सकता है। मैंने उदाहरण दे दिया है। पूरा इतिहास पढ़िए। अमरीका को किसानों ने आगे बढ़ाया।
          कल दुर्भाग्यपूर्ण घटना हुई। यह हम सब लोगों के लिए भी बहुत शर्म की बात है। तीन किसानों ने आत्महत्या की। जहां ओले पड़े थे, हमने वहां के किसानों को तत्काल 15 हजार रुपये से 18 हजार रुपये तक मुआवजा दिया।...(व्यवधान) कहीं-कहीं 18 हजार रुपये दिए हैं, गलत क्यों बोलेंगे।...(व्यवधान) आप अनावश्यक बात करते हैं, पोलीटिकल करते हैं। आप बताइए, अगर कोई रह गया हो तो हम उसे पैसा भिजवा देंगे।...(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष :  मुलायम सिंह जी, प्लीज़, अब हो गया।
…( व्यवधान)
श्री मुलायम सिंह यादव : 15 हजार रुपये से लेकर 18 हजार रुपये तक दिए हैं। अगर कोई रह गया हो तो हम दिलवा देंगे, आप लिखकर दीजिए।...(व्यवधान) महोदया, आप इन्हें रोकिए।...(व्यवधान) यह क्या बात हुई।...(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष :  मुलायम सिंह जी, आप अपनी बात कम्प्लीट कीजिए।
…( व्यवधान)
श्री मुलायम सिंह यादव : आप हमें दबा नहीं सकते। आप मेरा स्वभाव जानते हैं। सब खड़े हो जाएं फिर भी नहीं दबा सकते।...(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : मुलायम सिंह जी, प्लीज़ बैठिए।
…( व्यवधान)
श्री मुलायम सिंह यादव : यह आपकी जिम्मेदारी है, इन्हें चुप कराइए।...(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष :  आप गुस्सा मत कीजिए।
…( व्यवधान)
श्री मुलायम सिंह यादव : हम कभी किसी को डिस्टर्ब नहीं करते। हम इतना ही कहेंगे कि हमने किया है तो आपको बुरा क्यों लग रहा है। कोई भी खड़ा होकर कह दे कि नहीं किया। ...(व्यवधान) अगर इन सदस्यों का कोई रह गया होगा तो हम उसे पैसे दिलवा देंगे।...(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष :  मुलायम जी, आप इतना सब आज मत बोलिए, केवल संवेदना प्रकट कीजिए।
…( व्यवधान)
श्री मुलायम सिंह यादव : मेरी आपसे प्रार्थना है कि सरकार की तरफ से निर्देश दिया जाए, यहां घोषणा कर दीजिए। फिर चाहे कहीं का भी बजट काट दीजिए, कोई चिन्ता नहीं है, उससे कोई फर्क नहीं पड़ता। बजट में कटौती करके पूरी सुविधा किसानों को दीजिए। यदि आप किसानों को सुविधा देंगे तो आपको पूरी दुनिया में घूमने की जरूरत नहीं है और न ही कर्ज लेने की जरूरत है। जब तक किसानों को लाभकारी मूल्य नहीं मिलेगा, तब तक किसान संपन्न नहीं होगा। सारे उद्योग धंघे तो लाभकारी हैं। आप किसानों को भी लाभकारी मूल्य दीजिए ...(व्यवधान)।लागत मूल्यसे डेढ़गुना मूल्यपर किसानोंके उत्पादको बिकवाइएया उसकामूल्य सरकारदे। यदिकिसान संपन्नहोगा तोआपको दुनियामें किसीसे कर्जलेने कीजरूरत नहींपड़ेगी।
 
*SHRI M. MURALI MOHAN (RAJAHMUNDRY):  Yesterday one farmer committed suicide in the capital city of this country.  This is very painful incident.  As Parliament Session is in progress, we are discussing about this farmer’s suicide.  But we should know how many farmers are committing suicide every day in our country.  We should know the reasons for these suicides.
          Sometimes there is excess rain fall and sometimes inadequate rain fall. Crop failure is another reason. Farmers do not get remunerative prices for their crops, and as a result they are not in a position to repay their debts.  Ridden by burden of interest on their debts, farmers are compelled to commit suicides.
          We all claim that farmers are backbone of our country, but we should introspect, what we are doing to ensure welfare of farmers. I plead to all intellectuals, to get recommendations of Dr.Swaminathan and save farmers. On behalf of Telugu Desam Party and all of us, I pay tribute to all farmers who committed suicides.
                         
_________________________________________________________________ *English translation of the speech originally delivered in Telugu.  
 
SHRI MEKAPATI RAJA MOHAN REDDY (NELLORE): Madam Speaker, it is a very unfortunate and sad news to hear that another farmer by name Shri Gajendra Singh has committed suicide. We express our condolences to the bereaved family. It is a great irony that the farming community that toils day and night in the fields, which includes their family members like wife and children, and supplies food to the rest of community do not themselves have food to eat. It is a great irony. It is now high time for the Government as well as all other political parties to think over it, that is, how to solve this agrarian crisis. I feel deeply hurt and I express my deepest condolences to the bereaved family.
 
डॉ. अरुण कुमार (जहानाबाद) : महोदया, कल की घटना निश्चित तौर से झकझोरने वाली घटना है, जो लोग वहां खड़े थे, चाहे वह मीडिया के लोग हों, चाहे दर्शक हों, चाहे प्रशासन के लोग हों, चाहे प्रदर्शनकारी हों, या जिम्मेदार जनप्रतिनिधि हों, इन सबकी उपस्थिति में ऐसा दृश्य उपस्थित हुआ। यह घटना संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है। इस घटना से साबित हो रहा है कि समाज पूरी तरह से यंत्रीकरण की ओर बढ़ गया है। जो लोग वहां उपस्थित थे, जो इस दृश्य के साक्षी थे, उन पर इस घटना की जिम्मेदारी फिक्स की जानी चाहिए। देश और दुनिया में लोग इस दृश्य को देखकर हतप्रभ हैं। आज किसानों में आत्महत्या का सिलसिला चल पड़ा है।
उसमें मैं महसूस करता हूं कि पिछले 25-30 वर्षों में खेत, खलिहान और गांव बाजारवाद के शिकार हुए हैं।  आज किसान बीज से लेकर छोटे-छोटे सवालों पर बाजार के शोषण का शिकार है। हमारी पारम्परिक खेती में जितना आत्मविश्वास था, जितनी हमारी परम्पराएं थीं, उन सबने हमें इतना आत्मबल  दिया था कि हम किसी भी आपदा से लड़ने का सामर्थ्य रखते थे। आज हम निश्चित तौर से बाजारवाद के शिकार हुए हैं। इस पर सिर्फ स्वामीनाथन रिपोर्ट ही नहीं, बल्कि गांव, खेत, खलिहानों में हमारी जो परम्पराएं रही हैं और हमारी संस्कृति का मूल केन्द्र रहा है, उन सब विचारों को जोड़कर हमें एक ऐसी समावेशी नीति निर्धारित करनी चाहिए, जिससे गांव मजबूत हो। तभी राष्ट्र मजबूत होगा किसान मजबूत होगा।
          इन्हीं शब्दों के साथ मैं कहना चाहता हूं कि कल जो घटना घटी है, उस पर हम अपनी और अपनी पार्टी की ओर से संवेदना दर्ज करते हैं।
 
श्री तारिक अनवर (कटिहार):   अध्यक्ष महोदया, सबसे पहले हम आपको धन्यवाद देते हैं, क्योंकि आज  हम एक बहुत गंभीर विषय पर चर्चा कर रहे हैं। आपने भी इसकी गंभीरता को महसूस किया और प्रश्न काल को स्थगित किया, जिससे हम सब लोग अपनी भावना यहां रखने की कोशिश कर रहे हैं। ...(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष :   प्रश्न काल स्थगित नहीं हुआ।
…( व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष :  ठीक है, आप आगे बोलिये। वैसे प्रश्न काल स्थगित नहीं हुआ।
…( व्यवधान)
श्री तारिक अनवर :  अगर नहीं हुआ तो होना चाहिए था। हमने तो आपकी तारीफ करनी थी। ...(व्यवधान) अगर ऐसे गंभीर मुद्दे पर भी प्रश्न काल स्थगित नहीं होगा, तो कब होगा? ...(व्यवधान)
          अध्यक्ष महोदया, किसानों द्वारा आत्महत्या करना एक आम घटना बनकर रह गयी है। केन्द्र सरकार हो या राज्य सरकार हो, सभी अपनी जिम्मेदारी से अपना दामन बचाने की कोशिश करते हैं। परन्तु कल गजेन्द्र सिंह की मौत ने पूरे देश को बहुत दुखी किया और हम सबको मजबूर किया कि  हम आज उस पर चर्चा करें। यहां तक कि प्रधान मंत्री जी ने भी इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उसमें उन्होंने कहा है कि किसान खुद को अकेला न समझें। उनका बेहतर भविष्य बनाने के लिए हम सब साथ हैं। प्रधान मंत्री जी के इस बयान पर किसान कैसे विश्वास कर सकता है? आज किसान अपने आपको अकेला और असहाय महसूस कर रहा है, क्योंकि जिस परिस्थिति में कल गजेन्द्र सिंह ने आत्महत्या की, वह पूरे समाज और देश को चौंकाने के लिए काफी है। उसकी पीड़ा कोई भी सुनने के लिए तैयार नहीं है। दिल्ली देश की राजधानी है। यहां प्रधान मंत्री रहते हैं, गृह मंत्री रहते हैं और उनका पूरा मंत्रिमंडल रहता है। यहां प्रशासन है, पुलिस है। वहां हजारों की तादाद में लोग मौजूद थे और  उनकी उपस्थिति में उस किसान ने अपनी जान दे दी। सब लोग मूक दर्शक बनकर खड़े रहे और देखते रहे। हम सबके लिए यह बहुत ही शर्मनाक वाक्या है। केन्द्र सरकार राज्य सरकार को और राज्य सरकार केन्द्र सरकार को दोषी ठहराने में लगी हुई है। ऐसी घटना दोबारा न घटे, उस पर हमें चिंतन करने की आवश्यकता है, उसके लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है। अगर ऐसा नहीं किया गया, तो देश में किसानों द्वारा आत्महत्या करने की घटनाएं इसी प्रकार होती रहेंगी और हम सिर्फ औपचारिकता बरतते रहेंगे। एक प्रस्ताव पास कर देंगे, दुख प्रकट कर देंगे और फिर यह सिलसिला जारी रहेगा।
          अध्यक्ष महोदया, कल की जो रैली थी, जिसका आयोजन आप पार्टी द्वारा हुआ था, वह मुख्य रूप से भूमि अधिग्रहण के विरोध में थी। इससे साबित होता है कि गजेन्द्र वहां आए और आत्महत्या की, वह भूमि अधिग्रहण के खिलाफ थी।...(व्यवधान)भूमि अधिग्रहणके खिलाफआए। ...(व्यवधान)यह सच्चाईहै। ...(व्यवधान)
          माननीय अध्यक्ष जी, जो खबरें अखबारों और मीडिया में आई हैं उसके अनुसार कल की रैली भूमि अधिग्रहण के खिलाफ थी।...(व्यवधान)जो किसानआया था,जिसने आत्महत्याकी, वहभूमि अधिग्रहणके खिलाफआया था।...(व्यवधान)यह सहीहै।...(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष :तारिक जी, अपनी बात पूरी करें।
…( व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : आप सब बैठिए।
…( व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : यह कोई ऐसा विषय नहीं है कि शोर करें। तारिक जी, आप एक मिनट में अपनी बात कम्पलीट करें।
…( व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष :  प्लीज, सब लोग लंबा भाषण न दें। अगर सुझाव देना चाहते हैं तो दें।
…( व्यवधान)
श्री तारिक अनवर : माननीय अध्यक्ष जी, इस मौके पर मोदी सरकार को मेरी सलाह है कि अगर हम सबको सही मायने में उस किसान को श्रद्धांजलि अर्पित करनी है तो भूमि अधिग्रहण अध्यादेश फौरन वापस लेना चाहिए।...(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष :तारिक जी, क्या आपकी बात पूरी हो गई? What is it?
श्री तारिक अनवर : माननीय अध्यक्ष जी, किसान पहले से ही परेशान हैं। न्यूनतम मूल्य को लेकर कर्ज के बोझ से परेशान हैं। प्राकृतिक प्रकोप से परेशान है। इस परेशानी में सरकार द्वारा भूमि अधिग्रहण का बिल लाना उसके ज़ख्मों पर नमक छिड़कना है। मेरा मोदी सरकार से अनुरोध है कि घटना को देखते हुए सरकार भूमि अधिग्रहण अध्यादेश फौरन वापस ले। यही मेरी सलाह है।
माननीय अध्यक्ष : श्री भगवंत मान।
        आप सब लोग समय का ध्यान रखें। हम केवल एक मिनट संवेदना व्यक्त करने के लिए दे रहे हैं।
…( व्यवधान)
 
श्री भगवंत मान (संगरूर): माननीय अध्यक्ष जी, बहुत गंभीर विषय पर बात हो रही है, मंथन हो रहा है।...(व्यवधान)
श्री राम चरित्र निषाद (मछलीशहर):आप पार्टी को बोलने का अधिकार नहीं है।...(व्यवधान)
श्री भगवंत मान: हमें लोकतांत्रिक तरीके से बोलने का मौका मिला है।...(व्यवधान) हम चुनकर आए हैं।...(व्यवधान)इस परराजनीतिमत करो।...(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : आप बैठ जाइए।
…( व्यवधान)
श्री राम चरित्र निषाद : इनको बोलने का अधिकार नहीं है।...(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : क्या हो रहा है? ऐसे नहीं होता है। I have allowed him.
… (Interruptions)
श्री भगवंत मान : इस बात पर राजनीति मत करो। हजारों किसान मर रहे हैं।...(व्यवधान)
मुझे अध्यक्ष महोदय जी ने अलाऊ किया है। ...(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : प्लीज, आप बैठिए।
…( व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : मैंने अलाऊ किया है।
…( व्यवधान)
श्री भगवंत मान : ये राजनीति कर रहे हैं। हजारों किसान मरे हैं। वह सिस्टम से दुखी था।...(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : क्या हो रहा है? मैंने इनका नाम लिया है। Who are you to object?
… (Interruptions)
श्री भगवंत मान :  ये हमारी आवाज कैसे बंद कर सकते हैं?  ...(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : प्लीज,आप अपनी बात कहिए।
…( व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : यह विषय ऐसा नहीं है कि आपस में इस तरह से बोलें।
…( व्यवधान)
श्री भगवंत मान :माननीय अध्यक्ष जी, यह बहुत दुखद घटना है। इस पर राजनीति नहीं करनी चाहिए। राजनीति से ऊपर उठकर, पार्टी लैवल से ऊपर उठकर इस विषय पर बात करनी चाहिए। ...(व्यवधान) गजेन्द्र का आत्महत्या करना बहुत दुखद है और देश के लिए शर्मनाक है। वह सिस्टम से दुखी था। उसकी जेब से जो लैटर मिला है, उसने में चिट्ठी लिखा है - मेरी फसल बर्बाद हो गई, मेरे पिताजी ने घर से निकाल दिया, मेरे तीन बच्चे हैं, मैं कैसे उनका पालन पो­षण करूंगा? इस वि­ाय पर राजनीति से ऊपर उठकर बात करनी चाहिए। हर आधे घंटे बाद किसान आत्महत्या कर रहा है। इस पर हमें सिर जोड़कर बैठना चाहिए, सिर्फ चर्चा से बात नहीं बनेगी।...(व्यवधान)
          मेरा कल माननीय कृ­िष मंत्री जी से विचार हो रहा था कि कई राज्य सरकारें गलत आंकड़े देती हैं, किसान की आत्महत्या को छुपा लेती हैं। देश को आजादी  मिले लगभग 70 साल हो गए हैं लेकिन अभी तक हमने किसान को उसकी किस्मत पर छोड़ रखा है। सभी सरकारों को, चाहे किसी भी पार्टी की सरकार हो, चाहे राज्य सरकार हो या केंद्र सरकार हो, इस विषय पर मिल बैठकर योजनाएं बनानी चाहिए क्योंकि देश का पेट पालने वाला किसान खुद भूखे पेट सोने को मजबूर हो रहा है। मैं गजेन्द्र के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करता हूं। भवि­ष्य में इस तरह की घटना न हो, इस वि­षय पर चर्चा करके, नीतियां लागू करनी चाहिए। सिर्फ रेडियो पर मन की बात करके यह समस्या हल होने वाली नहीं है।...(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : यह गलत बात है। इसे निकाल दीजिए।
…( व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : हर चीज में इस तरह से बोलना उचित नहीं है।
…( व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : कल भी मैंने कहा था। अभी संवेदना व्यक्त करने में भी क्या आप इस तरह से बात करेंगे?  आप बैठिए। मैंने कहा है न। ऐसा मत करिए।
…( व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : यह निकाल देना। यह इसमें नहीं जाएगा। हर समय इस प्रकार की टिप्पणी नहीं करिए। यह बात मैंने कल भी कही थी। कहां की बात कहां पहुंचा देते हो?
…( व्यवधान)
श्री प्रेम सिंह चन्दूमाजरा (आनंदपुर साहिब) : माननीय अध्यक्ष जी, कल की जो घटना हुई है, गजेन्द्र सिंह की...(व्यवधान)
 
माननीय अध्यक्ष : मैंनेबिल्कुल सही बोला है। मैं उनको कंट्रोल कर रही हूं। चंदूमाजरा जी, आप बोलिए।
…( व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : हुड्डा जी, आपको क्या तकलीफ है ? उनको बोलने दीजिए।
…( व्यवधान)
श्री प्रेम सिंह चन्दूमाजरा  : माननीय अध्यक्ष जी, यह मामला बहुत ही संवेदनशील है। यह हमारे लिए भी एक चुनौती है और देश के लिए भी एक संकेत है। ...(व्यवधान)इस घटना पर जहां मैं शिरोमणि अकाली दल की ओर से दुख प्रकट करता हूं, वहां मुझे आश्चर्य भी है।...(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : प्यार से बोला हुआ भी रिकार्ड में नहीं जाएगा।
…( व्यवधान)
श्री प्रेम सिंह चन्दूमाजरा : मैडम, हमारी सहानुभूति तो उस परिवार के साथ है ही लेकिन मुझे आश्चर्य इस बात का है कि जब वह आत्महत्या कर रहा था तब ये लोग सामने देख रहे थे।...(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : क्या बात है? यह बार बार क्या हो रहा है?
…( व्यवधान)
श्री मल्लिकार्जुन खड़गे: क्योंकि यह पार्लियामेंट्री डैमोक्रेसी है।...(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : हां है।
…( व्यवधान)
श्री मल्लिकार्जुन खड़गे  : मैडम, पार्लियामेंट्री डैमोक्रेसी में अगर अनपार्लियामेंट्री वर्ड होता है या कांट्रेरी टू ऑवर रूल्स होता है तो आप एक्सपंज कीजिए।...(व्यवधान)मन की बात बोलने से Is it contrary to our rules? Is it unparliamentary? This is unfair.… (Interruptions)
माननीय अध्यक्ष : खडगे जी, मैं जो बोल रही हूं, उसको आप भी समझिए कि मैंने क्यों एक्सपंज किया है। मेरी भी भावना सुनिए। मैं बोल रही हूं कि मैंने क्यों एक्सपंज बोला। शुरु से ही मैंने कहा है और इसके पहले भी कहा था कि कोई भी विषय हो, हम प्रधान मंत्री की तरफ मोड़ देते हैं।
…( व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : मेरा इतना ही कहना था। आप सब बैठिए। वह बात अलग है।
…( व्यवधान)
श्री मल्लिकार्जुन खड़गे : मैडम, देश तो वे चलाते हैं। उनकी बात चलती है। ...(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : आलोचना करें। मैं आलोचना को मना नहीं कर रही हूं। आलोचना तो रोज करें। आज के इस विषय पर मैंने कहा क्योंकि यह संवेदनशील विषय पर बोल रहे हैं, इसलिए मैंने कहा कि इस पर यह राजनीति, आलोचना मत करें। बात केवल इतनी है। आप बाकी बातें बोलिए। सुझाव दे दीजिए। चंदूमाजरा जी, आप बोलिए।
…( व्यवधान)
श्री प्रेम सिंह चन्दूमाजरा:मैडम, मैं संवेदनशील इसलिए कह रहा हूं क्योंकि जो लोग यह कहते हैं कि इसमें राजनीति नहीं करनी चाहिए। वे खुद इसमें राजनीति करते हैं।...(व्यवधान)मुझे आश्चर्य इस बात का है कि हजारों लोग देख रहे थे। ...(व्यवधान)हजारों लोग देख रहे थे कि इन लोगों ने भाषण को तो तरजीह दी लेकिन आत्महत्या करने वाले किसान को बचाने की कोई कोशिश नहीं की।...(व्यवधान)मैं यह कहना चाहता हूं ...(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : इसमें कोई प्वाइंट ऑफ ऑर्डर नहीं है।
…( व्यवधान)
HON. SPEAKER: No point of order in zero hour.
… (Interruptions)
श्री प्रेम सिंह चन्दूमाजरा: मैडम, कल वाली घटना केवल दिल्ली में ही नहीं हुई।...(व्यवधान)देश भर में ऐसी घटनाएं होती हैं। हमें इनको गंभीरता से लेना चाहिए।...(व्यवधान)भविष्य में ऐसी बातें न हों तो उनको रोकने के लिए कोई उपाय करने चाहिए...(व्यवधान)
HON. SPEAKER: No point of order in zero hour.
… (Interruptions)
श्री प्रेम सिंह चन्दूमाजरा :  मैडम,जब कोई किसान आत्महत्या करने के रास्ते पर जाता है, उसके पीछे एक इतिहास होता है।...(व्यवधान)उसके पीछे भावनाएं जुड़ी होती हैं। जब अंग्रेज यहां से भागे थे, भगत सिंह जो फांसी तक गये।...(व्यवधान)उसके पीछे एक इतिहास था। ...(व्यवधान)उनके चाचा जी ने एक कविता लिखी थी:
“पगड़ी संभाल जट्टा, पगड़ी संभाल ओये।
लूट लिया माल तेरा, लूट लिया माल ओये।”     13.00 hrs. ...(व्यवधान) पिछले साठ-सत्तर वर्षों से जिन्होंने किसान को कंगाल किया, बरबाद किया, तबाह किया, इनकी नीतियों के कारण आज यह स्थिति पैदा हुई है।...(व्यवधान)

HON. SPEAKER: I am saying it again. I will see.  मैं देख लूंगी, आप लोग बैठ जाएं।

… (Interruptions)

श्री प्रेम सिंह चन्दूमाजरा:मैं चाहता हूं कि इस घटना को चुनौती के तौर पर सरकार को लेना चाहिए कि कैसे किसान को खुदकुशी करने से बचाया जा सकता है, खेती को कैसे लाभकारी बनाया जा सकता है।...(व्यवधान) मैं समझता हूं कि खेती को लाभकारी बनाना सबसे जरूरी है। माननीय गृह मंत्री जी जब कृषि मंत्री थे, तब इन्होंने बहुत अच्छी नीति बनाई थी। आज भी वैसी ही नीति लाने की जरूरत है। कुछ माननीय सदस्य किसानों के कर्जा माफ करने की बात कह रहे हैं। इन्होंने खेती की जमीन के आधार पर नहीं, किसान के नुकसान के आधार पर नहीं बल्कि अपने समय में अपने कुछ लोगों का कर्जा माफ कर दिया था।...(व्यवधान)मैं चाहता हूं कि आज हर किसान का कर्जा माफ हो।...(व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष : चन्दूमाजरा जी, आप अपनी बात समाप्त कीजिए।

…( व्यवधान)

श्री प्रेम सिंह चन्दूमाजरा : खेती को लाभकारी बनाने के लिए सिंचाई की पर्याप्त व्यवस्था करना भी जरूरी है। आज जमीन का पानी बहुत नीचे चला गया है। इसके लिए कोई नई पालिसी लानी चाहिए।...(व्यवधान)एम.एस.पी. देने के लिए डॉ. स्वामीनाथन की जो रिपोर्ट है, उसे लागू करना चाहिए। प्राकृतिक आपदा के कारण किसानों का जो नुकसान होता है, उसके लिए काप्रिहेंसिव क्रॉप इंश्योरेंस स्कीम बनानी चाहिए, ताकि भविष्य में कोई भी किसान आत्महत्या करने पर मजबूर न हो और खेती लाभकारी बन सके।...(व्यवधान) पहले हमारा देश सोने की चिड़िया होता था, जब खेती पर निर्भर लोग स्वयं अनाज को बेचते थे लेकिन आज खेती को उद्योग बना दिया है। चार-चार सौ परसेंट के करीब फर्टीलाइजर का मुनाफा हो रहा है, पांच-पांच सौ परसेंट पैस्टीसाइड्स का मुनाफा हो रहा है। किसानों के लिए पचास परसेंट की अनुशंसा की बात स्वामीनाथन रिपोर्ट में कही गई है, लेकिन उसे नहीं माना जा रहा है।...(व्यवधान)

          मैं आपके माध्यम से सरकार को कहना चाहता हूं कि कल की घटना को चुनौती के तौर पर लेना चाहिए। मैं एक बार फिर किसान गजेन्द्र सिंह के परिवार के साथ सहानुभूति व्यक्त करता हूं और अपनी पार्टी शिरोमणि आकाली दल की तरफ से सरकार से कहना चाहता हूं कि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों, इसके लिए शीघ्र उपाय किए जाने की आवश्यकता है।...(व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष : आप लोग मेरी बात सुनिए। मैं पूरी प्रोसिडिंग्स देखूंगी, रेफरेंस टू कंटेक्स्ट भी देखूंगी और उसके अनुसार कार्रवाई करूंगी।

…( व्यवधान)

 

माननीय अध्यक्ष : शून्यकाल में प्वायंट आफ आर्डर नहीं होता है। आप मेरी बात सुनिए। मैं पूरा रेफरेंस देखूंगी और उसके अनुसार कार्रवाई करूंगी।

…( व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष : प्वायंट आफ आर्डर नहीं होता है। वह मेरी बात है मैं देख लूंगी, आपसे चर्चा कर लूंगी। अगर रेफरेंस ठीक हुआ तो रखूंगी। पहले मैं देखूंगी, उसके बाद निर्णय करूंगी।

…( व्यवधान)

HON. SPEAKER: Please sit down.

… (Interruptions)

माननीय अध्यक्ष : मैं फिर कह रही हूं कि अगर ठीक है तो प्रोसीडिंग्स में रहेगा, अगर ठीक नहीं है तो प्रोसीडिंग्स में नहीं रहेगा। आप स्पीकर को कुछ नहीं कह सकते हैं।

          राजीव सातव जी।

श्री राजीव सातव (हिंगोली) : अध्यक्षा जी, मैं बोलना चाहता हूं लेकिन हाउस आर्डर में नहीं है।...(व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष : आप अपनी पार्टी के लोगों से कहिए।

…( व्यवधान)

श्री राजीव सातव : महोदया, आम आदमी पार्टी के सदस्य भी हैं।...(व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष : भगवंत जी, आपने अपनी बात कह दी है। आप अपनी जगह पर तो जाइए।

…( व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष : मैं आप सभी को कह रही हूं कि अपनी सीट पर चले जाइए। I am saying it again. I will see. यह कोई तरीका नहीं है।

… (Interruptions)

PROF. SAUGATA ROY : Madam, I want to raise a point of order. … (Interruptions)

SHRI K.C. VENUGOPAL: You please give your ruling. … (Interruptions)

माननीय अध्यक्ष : सौगत राय जी, आप जो बात उठाना चाहते हैं वह मुझे मालूम है। मैंने इतना ही कहा है कि जिस तरह से बात कही गई, मैं रेफरेंस टू कांटेक्स्ट देखूंगी और फिर कार्रवाई करूंगी। मैं यह नहीं बोल रही हूं कि प्रधानमंत्री जी का नाम नहीं लेना चाहिए। आप नाम ले सकते हैं।

…( व्यवधान)

PROF. SAUGATA ROY: Madam, I am just trying to help you. … (Interruptions)

HON. SPEAKER: What are you saying?

PROF. SAUGATA ROY: Madam, I am on a point of order.… (Interruptions)

माननीय अध्यक्ष  : एक तो अभी शून्यकाल चल रहा है। शून्यकाल में प्वाइंट ऑफ ऑर्डर नहीं होता है।

…( व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष  : यह कोई ताली बजाने की बात नहीं है। एक सीरियस विषय पर चर्चा हो रही है।

          मैंने इतना ही कहा था कि बार-बार कुछ ऐसे रेफरेंस देते हैं, इसलिए मैंने कहा था कि यह नहीं जाएगा। यदि आपको ऑब्जेक्शन है, तो I will again see to it. जो रेफरेंस टू कंटेक्स्ट में उन्होंने बात की, यदि वह ठीक है, तो उसे रहने देंगे, यदि वह गलत है क्योंकि मैंने शुरू में कहा था कि यह विषय ऐसा है कि इस पर बहुत सीरियसली  सोचें, फिर मैं देखूँगी।

…( व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष  :  कुछमेरा अधिकार भी तो है।

…( व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष  : इस पर मैं बाद में चर्चा करूँगी, अभी नहीं।

…( व्यवधान)

PROF. SAUGATA ROY: Madam, I want to help you.… (Interruptions)

माननीय अध्यक्ष  : इस पर अभी चर्चा नहीं हो सकती है। आप मुझे लिखित में दीजिएगा, उस पर मैं सोचूँगी।

…( व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष  : मैंने कहा है कि I will see to it.

…( व्यवधान)

PROF. SAUGATA ROY: Madam, I am referring to the Rules of Procedure.  Please allow me to speak.

 माननीय अध्यक्ष  : नहीं, इस विषय पर चर्चा नहीं होती।

…( व्यवधान)

   

 माननीय अध्यक्ष  : No.  जब मैंने कहा है कि  on your request I will see it again.

…( व्यवधान)

 माननीय अध्यक्ष  : उसके बाद इस पर कोई चर्चा नहीं होगी।

…( व्यवधान)

SHRI SUDIP BANDYOPADHYAY (KOLKATA UTTAR): Madam, he is referring to the Rules of Procedure.  It is different from the point of order.… (Interruptions)

माननीय अध्यक्ष  : ये क्या बोल रहे हैं?

                     Yes, Sh. Saugata Roy Ji.

…( व्यवधान)

PROF. SAUGATA ROY : Madam, I am reading it.  कृपया इसे सुन लीजिए। … (Interruptions)

 माननीय अध्यक्ष  :  आप लोग ये क्या कर रहे हैं? ऐसा नहीं होता है।

…( व्यवधान)

PROF. SAUGATA ROY: Madam, I am supporting you.… (Interruptions)

HON. SPEAKER: There is no point of order.

… (Interruptions)

PROF. SAUGATA ROY : Please allow me to speak for a minute.… (Interruptions) The House should run according to the rules.… (Interruptions)

SHRI SUDIP BANDYOPADHYAY : Madam, he is on a point of procedure.… (Interruptions)

 माननीय अध्यक्ष  : आप सब लोग बैठिए। श्री सौगत राय जी, बैठिए। सब लोग बैठ जाइए।

…( व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष  : एक बात आप सब लोग सुन लें, मैंने जो कहा है कि ‘यह रिकॉर्ड में नहीं जाएगा’ , क्या इस पर आपको ऑब्जेक्शन है?

…( व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष  : मैं आप सबकी भावना समझ गयी हूँ। इसलिए मैं आप सबको आश्वासन दे रही हूँ कि हो सकता है कि यदि मैंने कुछ बोला हो, जो ठीक नहीं हो, इसलिए मैंने यही कहा कि  again I will look into it.  I will go through,   इनका जितना भाषण है, I will go through it.  यदि ऐसा वास्तव में लगता है, जो आप कह रहे हैं कि इसके रहने में कोई आपत्ति नहीं है, तो I will think about it. जब मैं रि-थिंक करने की बात कह रही हूँ, तो आप सबको चुप रहना चाहिए।

…( व्यवधान)

 HON. SPEAKER: Now, not a single point to be raised now.

…( व्यवधान)

PROF. SAUGATA ROY: ....* (Interruptions) Please allow me to speak.  I am on a point of procedure.… (Interruptions)

माननीय अध्यक्ष  : अभी कुछ नहीं कहिए। अच्छी बात भी हो, तो भी अभी मत बोलिए।

…( व्यवधान)

श्री राजीव सातव : अध्यक्ष जी, एक बहुत ही संवेदनशील विषय पर हम बात कर रहे हैं। कल हमारे किसान भाई गजेन्द्र जी ने संसद से सौ मीटर की दूरी पर आत्महत्या की। मैं उस क्षेत्र से आता हूँ, जहां सबसे ज्यादा आत्महत्यायें होती है। मैं यवतमाल जिले से आता हूँ, जो देश में सबसे ज्यादा आत्महत्या वाला जिला है। जब सदन इस बात की चर्चा कर रहा है कि हर रोज गजेन्द्र जैसे पचासों किसान इस देश में आत्महत्या कर रहे हैं, महाराष्ट्र में 15 किसान आत्महत्या करते हैं। इसलिए राजनीति वाला एंगल, जैसा आपने कहा है, नहीं आना चाहिए, हम उसमें नहीं लाएंगे। देश के गृहमंत्री जी यहां बैठे हैं, मेरा उनसे आग्रह है कि आप किसी कांस्टेबल पर, किसी एसआई या किसी इंसपेक्टर पर कार्रवाई करना है तो जरूर कीजिए, लेकिन दिल्ली के पुलिस कमिश्नर के ऊपर भी कार्रवाई होनी चाहिए क्योंकि वह उसका हेड है और पूरे देश के लिए मैसेज जाना चाहिए कि पुलिस को संवेदनशील होना चाहिए। मंत्री जी, आपके जवाब में यह बात आए।

          जब कृषि के बारे में चर्चा चल रही थी, तब मैं कृषि मंत्री जी के सामने एक बात रखी थी। हमने पिछले चार-छः महीने में अपने क्षेत्र की उमरखेड़ तहसील में आत्महत्या कम करने के लिए कुछ प्रयास किए हैं और उनमें सफलता मिली है। हमने वलसाड की डेयरी के साथ टाई-अप किया। आज हम दूध के लिए 50 रुपये, 60 रुपये, 70 रुपये के भाव दे रहे हैं। मेरा आपके माध्यम से सरकार से विनती है कि संसद में क्या करना चाहिए, लोगों को क्या करना चाहिए, उस पर चर्चा हो, लेकिन कृषि पूरक उद्योगों जब तक सरकार बढ़ावा नहीं देगी, तब तक आत्महत्या का यह सत्र नहीं रुकेगा।

          अध्यक्ष जी, अंतिम बात मैं यह कहना चाहता हूं कि आज हम यहां गजेन्द्र को श्रद्धा-सुमन अर्पित कर रहे हैं, हर शनिवार-रविवार को जब हम अपने क्षेत्र में जाते हैं, वहां ऐसे दो-चार-पांच गजेन्द्र को श्रद्धा-सुमन अर्पित करने के लिए हमें उनके घर जाना पड़ता है। इसलिए किसान की ऋणमाफी हो और आत्महत्या करने वाले किसान के घर की तरफ भी हमें ध्यान देना होगा क्योंकि एक लाख रुपये या दो लाख रुपये से उनका आगे जीवन बसने वाला नहीं है। इसलिए किसान की ऋण माफी हो और आगे किसान आत्महत्या न करे, इसके लिए सरकार द्वारा कृषि से रिलेटेड उद्योगों को बढ़ावा देने की जरूरत है। इतना ही मैं आपके माध्यम से सरकार से कहना चाहता हूं।

PROF. SAUGATA ROY: Madam, please allow me to speak for a minute… (Interruptions)

HON. SPEAKER: Saugata Roy ji, I am not allowing you. मैं आपकी किसी बात को एलाऊ नहीं कर रही हूं।

… (Interruptions)

माननीय अध्यक्ष : श्री जय प्रकाश नारायण यादव जी, आप बोलिए।

 

श्री जय प्रकाश नारायण यादव (बाँका) : अध्यक्ष महोदया, देश को हिलाने वाली जो बड़ी घटना घटी है, उसके लिए मैं संवेदना व्यक्त करता हूं। आज यह कोई राजनीतिक मुद्दा नहीं है, लेकिन इससे राष्ट्र शर्मसार हुआ है। दुनिया में हमारी प्रतिष्ठा पर उंगलियां उठी हैं और जब उंगलियां उठी हैं, तब हम अपनी बात कहेंगे, उसका नतीजा निकालने का काम मिल-जुलकर करना है, सरकार को भी करना है। ज्यादा जिम्मेवारी सरकार की है। हम माउण्ट एवरेस्ट पर चढ़ते हैं, पताका फहराते हैं, वीरता चक्र लेते हैं, आज हमारे देश की राजधानी, जो हमारे देश की नाक है, वहां पर किसान आत्महत्या करता है, देश के लिए इससे बढ़कर और कोई शर्म की बात नहीं हो सकती है। इसलिए देश की आवाम, देश का गरीब, सभी लोग ऐसे वक्त में जहां संवेदना व्यक्त करते हैं, वहीं फांसी लगाकर जिस किसान ने आत्महत्या की है, वह घटना बड़ी ही दुखद है। एक तरफ प्राकृतिक आपदा है और दूसरी तरफ मौत हुई है। आज मधेपुरा से लेकर सहरसा, सुपौल से लेकर उत्तराखण्ड तक, चारों तरफ मौसम का मिजाज बदला है और बिहार के सात जिलों में आज बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है, जिसे माननीय गृहमंत्री जी एवं सभी माननीय सदस्य जानते हैं। वहां की स्थिति बद से बदतर हो गयी है। हम जय जवान, जय किसान का नारा लगाते हैं,  लेकिन आज किसान आत्महत्या कर रहे हैं। जब आदरणीय तारिक साहब बोल रहे थे, दुख नहीं होना चाहिए, अगर कहीं घाव हुआ है तो उस पर विचार करना चाहिए, अगर डाक्टर हैं तो इलाज कीजिए। लेकिन ऐसा इलाज न करें कि किसान बेबस हो जाए। भूमि अधिग्रहण जैसा काला कानून जरूर आ रहा है, उससे भी किसान मर्माहत हुए हैं और आत्महत्या करने को मजबूर हो रहे हैं।...(व्यवधान) यह सही है और इसमें कोई दो राय नहीं हैं। इसलिए हमें सोचना चाहिए और आत्ममंथन करना चाहिए। तब ही हमारा देश श्रेष्ठ भारत बन सकेगा और तब ही अच्छे दिन आएंगे। अभी तो अच्छे दिनों के लक्षण दिखाई नहीं दे रहे हैं, क्योंकि किसान आज भी आत्महत्या कर रहे हैं। मैं मृतक के परिवार के प्रति पुनः अपनी संवेदना व्यक्त करता हूं। हमारे देश में ऐसा कहा जाता है कि किसान राष्ट्र का निर्माता है, लेकिन फिर भी उसके द्वारा आत्महत्या की जाती है तो यह हम सबके लिए दुखदाई बात है। मैं पुनः इस घटना के प्रति शोक व्यक्त करता हूं और मृतक के परिवार के प्रति संवेदना प्रकट करता हूं।

 

श्री हरीश मीना (दौसा) : अध्यक्ष महोदया, मैं आपका आभारी हूं कि आपने मुझे इस संवेदनशील मुद्दे पर बोलने का मौका दिया। महोदया, जिस व्यक्ति ने कल दिल्ली में आत्महत्या की है वह मेरे निर्वाचन क्षेत्र का निवासी था। उसका नाम गजेन्द्र सिंह पुत्र बने सिंह था। वह जिला दौसा, बसवा तहसील और गांव नांगलजाम्हरवाड़ा का रहने वाला था। जो यह घटना हुई, उस पर पूरे सदन ने अपनी संवेदना प्रकट की है, क्योंकि जो हुआ वह बहुत दुखद हुआ। कल जो घटना घटी, मैं उसमें कोई राजनीतिक बात नहीं कहना चाहूंगा, क्योंकि मैं दुर्घटना की राजनीति में विश्वास नहीं करता हूं। जो हुआ, दुखद हुआ और मेरी उस पर संवेदना है। एक बुजुर्ग बाप का बेटा मर गया, वह बेसहारा हो गया। एक पत्नी का पति मर गया, उसका सुहाग उजड़ गया और वह विधवा हो गई। इसी तरह छोटे-छोटे बच्चों का बाप मर गया और वे अनाथ हो गए। हमें ऐसे बच्चों के भविष्य की चिंता करनी चाहिए। क्या ऐसे कारण रहे, इस पर विचार करना चाहिए न कि इस पर राजनीति करनी चाहिए। राजनीति इस पर होनी चाहिए कि क्यों हमारे नौजवान अपनी जान लेने को मजबूर हो जाते हैं। मैं यह नहीं पूछना चाहता कि वह किस पार्टी की रैली में आया था, किस पार्टी का पदाधिकारी था, वह पार्टी जाने और उसकी रैली जाने। मैं यह जरूर कहना चाहता हूं कि हमारे देश का नौजवान दिल्ली में आकर ऐसी कौन सी परिस्थितियां थीं, जिनके कारण उसे आत्महत्या करनी पड़ी। मैं पूरे सदन से आग्रह करता हूं कि इस घटना की एक उच्च स्तरीय जांच कराएं कि ऐसी कौन सी मजबूरियां थी, जिनके कारण उसे आत्महत्या करनी पड़ी। इसमें तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। कुछ लोग कह रहे हैं कि इस कारण हुआ, कुछ कह रहे हैं कि उस कारण से हुआ और मीडिया अपनी कहानी बता रहा है, लेकिन जो भी हुआ वह दुखद हुआ। मैं चाहता हूं और सदन से आग्रह करता हूं कि हम ऐसे कदम उठाएं अपने राजनैतिक मतभेद भुलाकर ताकि भविष्य में कोई दूसरा गजेन्द्र सिंह न बने और हम पूरे देश के लिए काम आएं। जय हिंद- जय भारत।

माननीय अध्यक्ष

 
श्री पी.पी. चौधरी एवम्   श्री भैरों प्रसाद मिश्र को श्री हरीश मीणा द्वारा उठाए गए विषय के साथ संबद्ध करने की अनुमति प्रदान की जाती है।
   
श्री कौशलेन्द्र कुमार (नालंदा) : अध्यक्ष महोदया, बहुत ही गम्भीर विषय पर चर्चा हो रही है। मैं दो-तीन मिनट में अपनी बात कहना चाहूंगा। गजेन्द्र सिंह राठौड़ की मृत्यु हुई, यह बहुत दुखद बात है। मैं उनके परिवार के प्रति संवेदना प्रकट करता हूं। उन्होंने कल दिल्ली में आत्महत्या की, उस पर हम तमाम लोगों द्वारा मंथन करने की जरूरत है कि आखिर किसान परिवार में क्या परेशानियां हैं। हम सब लोग किसान परिवारों से आते हैं। आज किसान की क्या हालत है, उसे चाहे बेटी की शादी करनी हो या बेटे की पढ़ाई की व्यवस्था करनी हो, ऐसी कई अन्य परेशानियों का सामना उसे करना पड़ता है और फिर मजबूरी में उसे आत्महत्या करने जैसा रास्ता अख्तियार करना पड़ता है। किसान आज बहुत लाचार है और बेबस है। हम यह नहीं कहेंगे कि किस सरकार ने उसे ऐसा किया, लेकिन हमें इस पर चिंतन करने की जरूरत है कि आखिर किसान क्यों आत्महत्या कर रहे हैं, क्योंकि आत्महत्या करना बहुत शर्मनाक बात होती है। मैं कहना चाहता हूं सरकार से कि किसानों का जो बोझ है, उसे हल्का करने के लिए हम तमाम लोगों को प्रयासरत रहना चाहिए। बिहार में कल रात बड़े पैमाने पर चक्रवात तूफान आया, जिसके कारण वहां कई लोग मारे गए।
माननीय अध्यक्ष: आपने इसके लिए अलग से नोटिस दिया है, इसे बाद में देखेंगे। अभी आपने अपनी बात कह दी है इसलिए आप बैठ जाएं।
श्री कौशलेन्द्र कुमार : मैं उनके प्रति संवेदना प्रकट करता हूं और अपनी बात समाप्त करता हूं।
HON. SPEAKER: Shri E.Ahamed, you may conclude within a minute.
SHRI E. AHAMED (MALAPPURAM): Hon. Speaker, you have given me a minute’s time to conclude. I will respond to that and it will be one minute. I would like to say that this is a very sensitive issue where the Members representing different parties and coming from different parts of the country should also make their contributions.Therefore,  hon. Speaker should be kind enough to especially small parties as big parties have taken a lot of time.   That is why, I request you, Madam, to be a little kind towards me.  I will take only a few minutes but I cannot say how many minutes I will take.
          We have been discussing agrarian problem in this House for many hours.  It shows that the discussion did not inspire our agricultural people or kisans who are working in agricultural sector.  They do not have any confidence at all which has resulted in this death.  We cannot just shut our eyes to reality.  Why will we not be able to do something for them?  They have no confidence on not only the Government but even on the Parliament also. I am ashamed to say so because they are still looking for help.   Who will give them help and what help have we given them?  I would like to ask the hon. Home Minister as to whether this suicide has occurred in any rural area.  It is not so.  It has occurred in the capital city of Delhi and in the eyes of many people.  Many people have been witness to it. I would like to know what our very efficient police forces in Delhi were doing.  Were they just onlookers or were they trying to dissuade him?  It is my right as a Member of Parliament to know as to how it happened in front of our police officers who are law enforcing officers.  Did they enforce the law allowing him to kill himself? 
          Therefore, it is a very serious matter for our democratic India and for this Government to see whether an individual will be allowed to kill himself in the eyes of the law enforcement officers.
          Secondly, what was the grievance of that man who killed himself?  The authority has to give him support.   What support could we give?  I am very proud to say as a member of the UPA Government which ruled this country for 12 years that, during that time, we have given Rs. 8 lakh crore as credit to our agriculturists.  Would the present NDA Government give some such amount?  You may be just discussing on how you will get all the advices from foreign countries like America.   What is the position here?  Just tell us.  What did you do for the farmers?  We should know about it and  you should tell  us.  You are going to America and all over the world.  I am very happy on it but what did you bring for farmers? 
           Madam, Rs. 72,000 crore have been waived off during the period of our Government.  Have you decided to consider as to how much you will do for them?   Did you apply your mind to see that the Minimum Support Price is increased?  Madam, I will not take much of your valuable time.
HON. SPEAKER:  You have already taken much time.  You have taken the time of the House and not mine.
SHRI E. AHAMED : Madam, you are very kind and good.  But for you, how will we able to express our sentiments? 
          Madam, whatever has happened should not happen again.  This is not only a blow to the Government but to the nation as a whole.  It is a blow to our Parliament as well because Parliament has discussed this matter several times.  Parliament is the supreme body.   I am sorry over the death of the farmer.  I convey all my condolences to the bereaved family.  My good wishes to the Government to help the poor farmers of the country.
माननीय अध्यक्ष : सभी माननीय सदस्यों की बात आ गयी है। आप सभी सहयोग कीजिए।
…( व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : आपकी पार्टी के दो लोग बोल चुके हैं। ऐसा नहीं होता है।
…( व्यवधान)
 माननीय अध्यक्ष : यह सही नहीं है। आपकी पार्टी के दो लोगों को अलाऊ किया, उसके बाद राजीव जी को अलाऊ किया। This is not the way.
… (Interruptions)
माननीय अध्यक्ष : दूसरा विषय भी चर्चा के लिए लेना है।
…( व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : आप सभी लोग अपना नाम लिख कर के लिख सकते हैं कि हम सभी लोगों की इसमें संवेदना है। हमने केवल संवेदना प्रकट करने के लिए इस विषय पर चर्चा की थी जो हो गयी है।
…( व्यवधान)
 
गृह मंत्री (श्री राजनाथ सिंह) : अध्यक्ष महोदया, इस सदन के कई सम्मानित सदस्यों ने अपने विचार व्यक्त किये हैं, मैं यहां उन सारे सदस्यों के नाम का उल्लेख करना चाहूंगा - श्री दीपेन्द्र हुड्डा, श्री किरीट सोमैया, श्री वेणुगोपाल, श्री सौगत राय, श्री एम.राजेश, श्री भर्तृहरि महताब, श्री अरविन्द सावंत, श्री मुलायम सिंह यादव, श्री मुरली मोहन जी, श्री एम.राजमोहन रेड्डी, श्री अरुण कुमार, श्री तारिक अनवर, श्री भगवंत सिंह मान, श्री प्रेम सिंह चन्दूमाजरा, श्री राजेश, श्री जय प्रकाश यादव, श्री हरिश्चंद्र मीणा, श्री कौशलेन्द्र और श्री ई.अहमद साहब जैसे कई सम्मानित सदस्यों ने यहां अपने विचार व्यक्त किये हैं और सबने कल जो घटना हुई है, उस पर दुख व्यक्त किया है तथा उस घटना को बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण बतलाया है। जितने भी सम्मानित सदस्यों ने अपने विचार व्यक्त किये हैं, उन्होंने गजेन्द्र सिंह के परिवार के प्रति भी अपनी संवेदना व्यक्त की है। मैं भी अपनी तरफ से, माननीय प्रधान मंत्री जी की तरफ से तथा पूरी भारत सरकार की तरफ से भी इस परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करता हूं। घटना बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है, बहुत ही शर्मनाक है। मैं उन सम्मानित सदस्यों के प्रति भी आभार व्यक्त करना चाहता हूं, जिन्होंने अपनी यह इच्छा व्यक्त की है कि ऐसे मामलों को किसी भी सूरत में पोलिटिसाइज नहीं किया जाना चाहिए, अधिकांश सम्मानित सदस्यों ने यही कहा है। मैं भी इस मामले को पोलिटिसाइज करना नहीं चाहता हूं। मैं चाहता हूं कि जो घटना घटित हुई है, उस संबंध में पहले मैं सदन के समक्ष जानकारी रख दूं और उसके बाद जिन सम्मानित सदस्यों ने जो कुछ भी कहा है, उस पर बहुत ही संक्षेप में अपने विचार व्यक्त करने की कोशिश करूंगा।
          अध्यक्ष महोदया, कल 22 अप्रैल, 2015 को आम आदमी पार्टी द्वारा जंतर-मंतर नई दिल्ली में आयोजित एक प्रदर्शन रैली के दौरान राजस्थान से आये एक व्यक्ति श्री गजेन्द्र सिंह की मृत्यु हुई। निश्चित रूप से यह घटना बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। दिल्ली पुलिस द्वारा दी गई सूचना के अनुसार दौसा, राजस्थान के निवासी श्री गजेन्द्र सिंह रैली स्थल पर अपने हाथ में एक झाड़ू लेकर पेड़ पर चढ़ गये तथा उन्होंने कपड़े का एक सिरा अपने गले में तथा दूसरा सिरा पेड़ की डाल से बांध दिया। पुलिसकर्मियों ने तत्काल इस घटना की जानकारी नियंत्रण कक्ष को दी तथा एक लम्बी सीढ़ीयुक्त फायर ब्रिगेड वाहन को बुलाया, ताकि पेड़ की ऊंची डाली पर बैठे इस व्यक्ति को बचाया जा सके। पुलिस ने नीचे मौजूद लोगों से भी ताली बजाने और नारेबाजी रोकने का बार-बार अनुरोध किया, जिससे उस व्यक्ति श्री गजेन्द्र सिंह को उत्तेजित होने से रोका जा सके। ऐसे मामलो में वह व्यक्ति जो इस तरह का एक्सट्रीम एक्ट, अतिवादी क्रिया करने की कोशिश करता है, उसे बहुत ही चतुराई से बातचीत करके इंगेज रखा जाता है, उसे व्यस्त किया जाता है। जबकि इसके विपरीत इस मामले में भीड़ ने ताली बजाने और शोर मचाने का सिलसिला जारी रखा। किन कारणों से मृत्यु की दुर्घटना घटी है, इसकी जांच की जा रही है। उस दौरान रैली में शामिल हुए लोग पेड़ पर चढ़ गये तथा उसे खोल दिया, जो एक सिरा कपड़े का बंधा हुआ था, उसे खोल दिया। इस प्रक्रिया में वह व्यक्ति नीचे गिर पड़ा, उसे एक पुलिस वाहन में राम मनोहर लोहिया हास्पिटल ले जाया गया, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया। जैसा मैंने पहले कहा था कि यह घटना बहुत ही दुखद है, हृदय विदारक है और दुर्भाग्यपूर्ण है। भारतीय दंड संहिता की धारा 306, 186, 34 के अंतर्गत संसद मार्ग पुलिस थाना में एक एफ.आई.आर. संख्या 95/2015 दर्ज की गई है। इस मामले को अपराध शाखा, क्राइम ब्रांच को अग्रिम जांच हेतु स्थानांतरित किया जा चुका है। मैंने पुलिस आयुक्त, दिल्ली को इस मामले की पूरी समयबद्ध जांच करने का निर्देश दिया है।
          अंत में मैं पुनः श्री गजेन्द्र सिंह, जिनकी मृत्यु हुई है, उसके परिवार के प्रति अपनी और अपनी सरकार की तरफ से संवेदना व्यक्त  करना चाहता हूं।  कुछ माननीय सदस्यों द्वारा जो विचार व्यक्त किए गए हैं, मैं यहां पर उनकी चर्चा करना चाहूंगा। श्री दीपेंद्र हुड्डा जी ने कहा कि जब यूपीए की सरकार थी, उस समय बहुत सारे कदम उठाए गए। मैं यह मानता हूँ कि कोई भी सरकार हो, कोई सरकार यह दावा नहीं करेगी कि हमारी सरकार एंटी फार्मर है। सारी सरकारें यही दावा करती हैं कि हम प्रो फार्मर हैं और श्री मुलायम सिंह यादव ने भी जो बात कही है कि यह केवल सरकारी पक्ष की ही जिम्मेदारी नहीं बनती है, बल्कि सरकार और विपक्ष दोनों को मिल बैठ कर इस समस्या के समाधान के संबंध में विचार करना चाहिए, ताकि किसानों को इस बदहाली के हालात से उबारा जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि जब तक इस हिंदुस्तान का किसान धनवान नहीं होगा, तब तक हमारा यह हिंदुस्तान भी किसी भी सूरत में धनवान नहीं हो सकता है।
          अध्यक्ष महोदया, देखा जाए तो सन् 1950-51 से ले कर आज तक, 1950-51 में, पूरे सदन को इस बात की जानकारी थी कि उस दौरान एग्रीकल्चर का कंट्रिब्यूशन पूरे जीडीपी में 55 पर्सेंट हुआ करता था। आज जबकि 58 पर्सेंट पॉप्युलेशन पूरी तरह से कृषि पर आधारित है, अब उसका कंट्रिब्यूशन केवल 14 पर्सेंट रह गया है। मैं चाहूंगा कि इस संबंध में भी हमको विचार करना चाहिए कि इतनी बड़ी पॉप्युलेशन, 58 पर्सेंट का कंट्रिब्यूशन जीडीपी में मात्र 14 पर्सेंट क्यों रह गया है, अथवा वह लगातार क्यों घटता जा रहा है? 58 पर्सेंट पॉप्युलेशन की टोटल नैशनल इनकम में अर्निंग, कांट्रिब्यूशन केवल 14 पर्सेंट रह गया है। सन् 1950-51 से लेकर हालात अब भी ऐसे बने हुए हैं कि 60 पर्सेंट पॉप्युलेशन को फूड सिक्योरिटी के ऊपर निर्भर रहना पड़ रहा है। ...(व्यवधान) मैं यह नहीं कह रहा हूँ कि आप एंटी-फार्मर हैं और हम प्रो-फार्मर होने का दावा कर रहे हैं, मैं ऐसा नहीं कह रहा हूँ। जैसा कि आप दावा कर रहे हैं कि आपने भी किसानों की हालत को सुधारने के लिए, गांवों के हालात को सुधारने के लिए प्रयत्न किए हैं। मुलायम सिंह जी ने भी कहा कि उत्तर प्रदेश में भी इस संकट की घड़ी में किसानों को क्या राहत दी गई है, उन्हें कौन-कौन सी सुविधाएं मुहौया कराई गई हैं, इसकी भी चर्चा की, लेकिन इस हकीकत को उन्होंने स्वीकार किया कि सब कुछ किए जाने के बावजूद भी उत्तर प्रदेश में लगातार आत्महत्याओं की घटनाएं हो रही हैं। यह मुलायम सिंह जी ने स्वयं स्वीकार किया है। ये सारे विषय सदन के सामने मैं इसलिए रख रहा हूँ कि हम सबको इस पर गंभीरतापूर्वक विचार करने की आवश्यकता है। क्या कारण है कि लगातार 65-66 वर्षो से हम यह प्रयत्न कर रहे हैं कि किसानों की हालत सुधरनी चाहिए, गांवों की हालत सुधरनी चाहिए। फिर भी आज भी इस देश की 60 फीसदी से अधिक आबादी को खाद्य सुरक्षा के ऊपर निर्भर रहना पड़ रहा है।
          जहां तक फूड सिक्योरिटी का प्रश्न है, महोदया, मैं सदन को आश्वस्त करना चाहता हूँ और संभवतः सदन को इस बात की जानकारी भी होगी कि डब्ल्यूटीए में इस बार हमारी सरकार ने कितने प्रभावी तरीके से अपने पक्ष को प्रस्तुत किया था और दो टूक शब्दों में कह दिया था कि हम खाद्य सुरक्षा के सवाल पर किसी भी प्रकार का समझौता करने को तैयार नहीं हैं। यह प्रयत्न जो हमारी सरकार के द्वारा हुआ है, हमारी समझ में यह बात नहीं आती है कि हम किसको प्रो-फार्मर कहें और किसको एंटी-फार्मर कहें। इसलिए मैं यह निवेदन करना चाहता हूँ कि अब यह आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला, कम से कम किसानों के संबंध में और गांवों के संबंध में, जब भी चर्चा होती है, यह सिलसिला अब बंद होना चाहिए। पक्ष को और प्रतिपक्ष को बैठ कर इस पर गंभीरतापूर्वक विचार करना चाहिए कि क्या फरदर एक्शन प्लान सरकार का भी होना चाहिए, इस पर विपक्ष के द्वारा भी अथवा देश के अन्य वर्गों से, भागों से जो भी सुझाव प्राप्त होंगे, हमारी सरकार उनका स्वागत करेगी।
          महोदया, यह भी एक विडंबना है कि जो दुनिया के जाने-माने देश हैं, उनमें आज भी हमारे देश भारत की प्रोडक्टिविटी सबसे कम है, जबकि आजादी हासिल किए हुए इतने वर्ष हो गए, इतने वर्षों से पॉपुलर गवर्नमेंट देश की जनता इस देश को दे रही है, फिर भी हम नहीं कर पाए।...(व्यवधान) लेकिन हाल-फिलहाल हमारी सरकार ने कुछ कदम उठाए हैं।...(व्यवधान) मैं उस पर भी बोलूँगा। स्वाइल हेल्थ कार्ड हमारी सरकार ने जारी किए हैं और हम लोगों ने एक योजना बना रखी है कि प्रोडक्टिविटी कम हुई है, हम चाहते हैं कि किसान "पर ड्रॉप मोर क्रॉप" सिस्टम को एडॉप्ट करे। किसान के खेत की प्रोडक्टिविटी बढ़ाने के लिए एक-एक बूंद पानी का उपयोग होना चाहिए। यह हमारी कोशिश है। हमने स्वाइल हेल्थ कार्ड जारी किया है।...(व्यवधान)
          सदन को इस बात की भी जानकारी है कि 24 बाई 7...(व्यवधान) अभी 9-10 महीने हुए हैं।...(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष :  मंत्री जी, आप इधर सम्बोधित कीजिए। प्लीज, बैठ जाइए। ऐसा नहीं होता है।
…( व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : आप बोलिए। यह तो ऐसे ही चलेगा।
…( व्यवधान)
श्री राजनाथ सिंह : क्षमा कीजिएगा, मैंने आपको एंटी फार्मर नहीं कहा है।...(व्यवधान) हमारी एप्रोच पूरी तरह से पॉजिटिव है।...(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : किसी को कुछ नहीं कहा है।
…( व्यवधान)
श्री तारिक अनवर : पुलिस कर्मियों के खिलाफ क्या कार्रवाई हुई?...(व्यवधान)
श्री राजनाथ सिंह : मैं एक्शन की बात ही कर रहा हूँ।...(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : आप बैठ जाइए।
…( व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : आप बैठिए।
…( व्यवधान)
श्री वीरेन्द्र सिंह (भदोही) : महोदया, ऐसे सदन नहीं चलेगा।...(व्यवधान)सब लोग अपने समान अधिकार लेकर आए हैं।...(व्यवधान) सब लोगों की बात सुनी जानी चाहिए।...(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : वीरेन्द्र जी, आप अपनी सीट पर जाइए।
…( व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : आप बैठिए।
…( व्यवधान)
श्री राजनाथ सिंह : महोदया, मैंने अपने स्टेटमेंट में स्पष्ट कर दिया है कि पुलिस का क्या रोल रहा है और ...(व्यवधान) यदि कोई सदन का सम्मानित सदस्य कोई क्लेरिफिकेशन चाहेगा, तो मैं क्लेरिफिकेशन देने के लिए भी तैयार हूँ। ...(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : मंत्री जी,बैठे-बैठे कोई कुछ कहे तो आपको उस पर ध्यान नहीं देना है।
श्री राजनाथ सिंह : आप एक बार मेरी बात तो सुन लीजिए, जैसे धैर्यपूर्वक मैंने आप सबकी बात सुनी है, वैसे ही आप भी तो मेरी बात सुन लीजिए। उसके बाद किसी क्लेरिफिकेशन की आवश्यकता होगी तो वह क्लेरिफिकेशन देने को भी मैं तैयार हूँ।...(व्यवधान)
          महोदया, मैंने बताया कि हमारी गवर्नमेंट ने एक स्वाइल हेल्थ कार्ड भी जारी किया है, ताकि सभी किसान अपने खेत की स्वाइल की जाँच करा सकें।...(व्यवधान) इसके अतिरिक्त हम अपनी उस योजना को भी क्रियान्वित करना चाहते हैं, ताकि इस देश के गाँवों को भी 24 बाई 7 बिजली की सुविधा मुहैया हो सके। फीडर को अलग करने के लिए हमने ग्राम ज्योति योजना भी प्रारंभ की है। हम लोगों ने गाँव के हालात को सुधारने के लिए कहा है कि इफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट होना चाहिए, रोड कनेक्टिविटी बढ़नी चाहिए। ये सारे फैसले हमारी सरकार ने हाल-फिलहाल 9-10 महीनों के अन्दर ही किए हैं। इतना ही नहीं, मैं जानता हूँ कि केवल खेती की आमदनी के माध्यम से किसानों की माली हालत नहीं सुधारी जा सकती है। यह आवश्यक है कि यदि हम किसानों की माली हालत को सुधारना चाहते हैं, उनकी आर्थिक स्थिति को सुधारना चाहते हैं तो यही एक रास्ता है कि उनके जो बेरोजगार बच्चे हैं, उन बच्चों के पास भी कोई न कोई ऐसा स्किल होना चाहिए, उनके अन्दर स्किल डेवलप किया जाना चाहिए ताकि उनके हाथों को रोजगार मिल सके।...(व्यवधान) इसलिए स्किल डेवलपमेंट का सिलसिला भी हमारी सरकार ने तेजी से प्रारम्भ किया है। हॉस्पिटल्स, स्कूल्स की सुविधा सभी ग्राम पंचायतों में सभी गाँवों तक मिल सके, यह हमारी कोशिश है। 
          दीपेन्द्र जी ने यह जानना चाहा है कि कर्ज़ माफी के बारे में हम क्या सोच रहे हैं। उन्होंने दावा किया है कि जब इनकी सरकार थी तो उस समय इन्होंने किसानों का कर्ज़ माफ किया था। अध्यक्ष महोदया, पहली बात तो मैं यह कहना चाहता हूँ कि कर्ज़ कब माफ हुआ था - चुनावी वर्ष में माफ हुआ था, प्राकृतिक आपदा के कारण माफ नहीं हुआ। ...(व्यवधान) क्षमा करिए, रुकिये। ...(व्यवधान)
          अध्यक्ष महोदया, मैं यहाँ पर सीएजी की रिपोर्ट का हवाला भी देना चाहता हूँ। C&AG carried out Performance Audit to assess whether the Debt Waiver and Relief Scheme was implemented in accordance with the relevant guidelines and objectives. The Audit carried out from April, 2011 to March, 2012 covered 25 States involving field audit of a total of 90,576 farmers’ accounts in 715 branches of banks in 92 districts. … (Interruptions)
श्री मल्लिकार्जुन खड़गे : अब क्या करना है वह नहीं बोल रहे हैं। ...(व्यवधान) आप चुनावी भाषण दे रहे हैं।  ...(व्यवधान)
श्री राजनाथ सिंह : यह चुनावी भाषण नहीं है। ...(व्यवधान) क्षमा कीजिएगा। ...(व्यवधान) यदि यह सुनना चाहते हैं कि क्या किया, ...(व्यवधान)
HON. SPEAKER: He is not yielding. मैं क्या करूँ?
…( व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : राजनाथ जी, आप अपनी बात कहें। Do you want to yield?
…( व्यवधान)
श्री राजनाथ सिंह : अध्यक्ष महोदया, यदि कोई हमें सीएजी रिपोर्ट पढ़ने की इजाज़त नहीं देना चाहते हैं, लेकिन मैं कहना चाहता हूँ कि किस प्रकार का स्कैम इस मामले में हुआ है, उसको भी पूरी तरह से उजागर किया है। यहाँ मैं केवल इतना ही उल्लेख करके अपनी बात समाप्त करना चाहता हूँ।...(व्यवधान) मैं सदन को इस बात की जानकारी भी देना चाहता हूँ कि पहले  किसानों की फसल का यदि 50 परसेंट लॉस होता था, तब कंपनसेशन किसानों को दिया जाता था। लेकिन अब पहली बार हमारी सरकार ने, हमारे प्रधान मंत्री ने एसडीआरएफ और एनडीआरएफ के नॉर्म्स को कम करके उसमें सुधार किया है। पहले जो 50 परसेंट लास पर कंपनसेशन मिला करता था, उसको घटाकर  33 परसेंट करने का काम हमने किया है ताकि देश के अधिकतम किसानों को इस कंपनसेशन का लाभ मिल सके। इतना ही नहीं, पहले जितना कंपनसेशन किसानों को मिलता था, उसे बढ़ाकर हमारी सरकार ने डेढ़ गुना करने का काम किया है। मैं देश के किसानों को अपनी सरकार की तरफ से आश्वस्त करना चाहता हूँ कि ऐसी संकट की घड़ी में हमारी भारत सरकार पूरी तरह से हिन्दुस्तान के किसानों के साथ खड़ी है, लेकिन मैं राज्य सरकारों से भी अपील करना चाहता हूँ कि ऐसी संकट की घड़ी में फौरी तौर पर जितनी भी राहत मुहैया कराई जा सकती है, हमारी सरकार वह राहत मुहैया कराने के लिए तैयार है, मैं यह भी सदन को अपनी तरफ से आश्वस्त करना चाहता हूँ। ...(व्यवधान) इसके अतिरिक्त मैं सदन को यह भी आश्वस्त करता हूँ कि पूरी जाँच ...(व्यवधान)
श्री मल्लिकार्जुन खड़गे : हमने जो क्लैरिफिकेशन पूछना है, वह इनके कनक्लूड करने से पहले पूछना चाहते हैं। ...(व्यवधान)
श्री राजनाथ सिंह : मेरे कनक्लूड करने के बाद आप पूछ लीजिए। ...(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : इनके बाद मैं आपको पूछने का मौका दूँगी।
…( व्यवधान)
श्री राजनाथ सिंह: यदि अध्यक्ष महोदया की इजाजत होगी तो मैं निश्चित रूप से उसका जवाब आपको देना चाहूंगा। एक सम्मानित सदस्य ने यह कहा है कि पुलिस पर क्या कार्रवाई की गई। मैंने इस बात की जानकारी दे दी है कि पुलिस ने किस प्रकार की भूमिका वहां पर निर्वाह की है। कई सम्मानित सदस्यों ने कहा है कि मिल-जुल कर इस समस्या का समाधान निकाला जाना चाहिए। हम उनकी बात से पूरी तरह से सहमत हैं और विपक्ष का हम हर प्रकार का सहयोग चाहेंगे, ताकि इस देश में किसानों की जो बदहाली है, उस बदहाली से इस देश के किसानों को निजात दिलाई जा सके और गांवों और किसानों, दोनों के हालात में एक बदलाव लाया जा सके, हमारी सरकार की यह कोशिश होगी।
          इतना ही कहते हुए सभी सम्मानित सदस्यों का बहुत-बहुत धन्यवाद। ...(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : इसमें सब के प्रश्न नहीं होते। खड़गे जी, आपको कुछ पूछना है? खड़गे जी, आप कुछ क्लैरीफिकेशन लेंगे?
श्री मल्लिकार्जुन खड़गे : क्लैरीफिकेशन आपने बोला तो मैं पूछ रहा हूं। प्राइम मिनिस्टर का भाषण होने के बाद अगर आप क्लैरीफिकेशंस की इजाजत देते हैं तो I am ready.
श्री धर्मेन्द्र यादव: अध्यक्षा जी, मेरा नोटिस है।...(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : आप बैठ जाइये।
…( व्यवधान)
HON. SPEAKER: I am allowing him only, not you.
… (Interruptions)…* माननीय अध्यक्ष : धर्मेन्द्र जी, बैठिये।
…( व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : धर्मेन्द्र जी आप पहले अपनी सीट पर जाइये। आप बैठिये।
 
श्री मल्लिकार्जुन खड़गे: माननीय गृह मंत्री जी ने अभी बहुत तफसील के साथ इस घटना के बारे में बताया। मेरे सिर्फ दो-तीन क्लैरीफिकेशंस हैं। इसमें यह है कि एक तो वहां के जो बैठे हुए लोग थे, जब गजेन्द्र सिंह पेड़ के ऊपर चढ़ रहे थे तो चन्द लोग तालियां बजा रहे थे, देख रहे थे, हंस रहे थे, उसको एन्करेज कर रहे थे, ऐसा आपने कहा। दूसरी चीज़, वहां पर मंच पर बैठे हुए लोगों ने भी उसको प्रोटैक्शन नहीं दिया। तीसरी चीज़, पुलिस भी वहां मौजूद थी, अगर तालियां बजाने वाले लोग अलग थे, तो वहां आपकी भी बहुत सारी फौज उसको कंट्रोल करने के लिए थी। जब वे पेड़ पर चढ़ रहे थे, जब मीडिया में इतना आया है, आप देखते हैं, पूरा टी.वी. में भी आया है, रस्सी बांधने का आया है, फिर उसके बाद उसका हाथ पकड़ कर नीचे आने का आया है, गिरने का आया है, यह सब होने तक आपकी पुलिस क्या कर रही थी? पुलिस क्या सो रही थी? क्या पुलिस यह चाहती थी कि वह आत्महत्या कर ले, उसके बाद में वे कहते हैं...(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : खड़गे जी, प्रश्न पूछिये।
SHRI MALLIKARJUN KHARGE: We want enough time.  I will take only three minutes. पुलिस क्या कर रही थी? पुलिस आपके कंट्रोल में है और यहां के, दिल्ली के मुख्यमंत्री यह कहते हैं कि पुलिस मेरे कंट्रोल में नहीं है, पूरा लॉ एण्ड ऑर्डर सैण्ट्रल गवर्नमेंट के कंट्रोल में है तो मैं पूछना चाहता हूं कि आपका रोल क्या रहा, आपके कमिश्नर का रोल क्या रहा और उसको बचाने के लिए आपने क्या कोशिश की-एक बात? दूसरी चीज़, यह जो विचार है, आपने तीन-चार विषयों के बारे में कहा, चाहे वह लोन वेव करने का हो, चाहे लॉ एण्ड ऑर्डर का हो और दूसरी चीज़, बजट में इसके लिए प्रावधान करने के लिए ज्यादा से ज्यादा पैसा देने के लिए आपने कहा, लेकिन जब हमने 72 हजार करोड़ रुपये का लोन वेव किया तो वह पोलिटिक्स थी, इलैक्शन के लिए किया गया, ऐसा आपने कहा। यह आपका स्टेटमेंट हो सकता है, लेकिन सारे देश के किसान इस वेवर से खुश थे और उन्होंने सम्पूर्ण रूप से इसको स्वीकार किया। ...(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : आपको भाषण पर भाषण तो नहीं करना है।
… (Interruptions)
माननीय अध्यक्ष : खड़गे जी, भाषण पर भाषण नहीं देना है। अब हो गया।
…( व्यवधान)
श्री मल्लिकार्जुन खड़गे : दूसरी चीज़, मैं आपके ध्यान में यह लाना चाहता हूं और पूछना चाहता हूं कि क्या आप इसके लिए कोई एक्स-ग्रेशिया एमाउंट देने वाले हैं, जिसकी घोषणा आप ने नहीं की? क्या आप एडवांस असिस्टेंस देंगे, क्योंकि गवर्नमेंट ऑफ इंडिया नैचुरल कैलेमिटी के लिए हमेशा एडवांस असिस्टेंस देती है। जब एकाध लेटर या मामूली कोई मैमोरैन्डम आता है तो बिना टीम को भेजे, उसकी इंक्वायरी होने से पहले एक इंस्टॉलमेंट इम्मीडेटली हर स्टेट को जाता है। आपने कितने स्टेट्स को यह पैसा दिया है, यह आपने नहीं बताया है।
          तीसरी चीज़, जो क्राइटेरिया पहले से फिक्स किया गया है, हमारी सरकार ने किया होगा, हमसे पहले वे किए होंगे, फिर आपकी भी एनडीए की गवर्नमेंट थी, आप ने किया होगा, तो आज आपने क्या क्राइटेरिया फिक्स किया है और कितना मुआवज़ा इन-एडवांस दिया है? मैं यह पूछ रहा हूं। इसे कल देंगे, परसों देंगे, यह तो आगे की बात है। लेकिन, इस वक्त जब मरीज़ मर रहा है तो उसको आप क्या औषधि दे रहे हैं? किसान मर रहा है, उसे क्या रिलीफ दे रहे हैं? यह क्वैश्चन है।
          मेरा कहना यह है कि प्राइम मिनिस्टर यहां आए हैं, यह हमारी क़िस्मत है।...(व्यवधान)
          मैडम, आप इस सदन में सर्वश्रेष्ठ हैं। प्राइम मिनिस्टर भी आपके तहत हैं और हम भी आपके तहत हैं। इस हाउस में आपसे ऊपर प्राइम मिनिस्टर भी नहीं हैं। देश के लिए वे प्राइम मिनिस्टर हैं, मगर इस हाउस में आप ही सुप्रीम हैं।...(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : आप बोलिए न कि आप क्या चाहते हैं?
श्री मल्लिकार्जुन खड़गे : मैं यह चाहता हूं कि प्राइम मिनिस्टर इस घटना की ज्यूडिशियल इंक्वायरी कराएं, क्योंकि इसके लिए चीफ मिनिस्टर ने एक बात कही है। आप ने भी इसे माना है। इसलिए इसकी ज्युडिशयल इंक्वायरी कराएं। अगर आप अपने पुलिस से इंक्वायरी कराएंगे तो फिर वह एकतरफा इंक्वायरी होगी और उसमें सत्यता बाहर नहीं आएगी। पुलिस तो दोषी है।...(व्यवधान)अगर दोषी ही इंक्वायरी करेंगे तो सही बात नहीं निकलेगी। इसलिए मैं आपके माध्यम से प्राइम मिनिस्टर से अपील करता हूं कि ज्यूडिशियल इंक्वायरी कराएं और आप एक स्पष्ट संदेश दीजिए कि ऐसी चीज़ें आगे नहीं घटने वाली हैं तथा इतना रिलीफ हम दे रहे हैं, इतना पैसा हम दे रहे हैं और हर स्टेट को भेज रहे हैं। साथ ही, हम कर्ज़ भी माफ कर देंगे, क्योंकि ये तीनों विषयों पर वे ही बोल सकते हैं।
          मैं उनसे विनती करता हूं कि ये जितने भी किसानों से संबंधित विषय हैं, चाहे कर्ज़ माफी का हो, एम.एस.पी. का हो, या रिलीफ हो, इन सारी चीज़ों के बारे में वे कहें। मैं आपके माध्यम से उनसे यह आशा करता हूं।...(व्यवधान)
श्री धर्मेन्द्र यादव: माननीय अध्यक्ष जी, मैं आपसे यह कहना चाहता हूं।...(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : नहीं, आपका कोई विषय नहीं है। आप बैठ जाइए।
…( व्यवधान)
HON. SPEAKER: Nothing will go on record except what the hon. Home Minister is saying.
… (Interruptions)…* श्री राजनाथ सिंह : अध्यक्ष महोदया, लोक सभा में कांग्रेस दल के नेता श्री खड़गे जी ने हम से जिस क्लैरिफिकेशन की अपेक्षा की है, मैं बहुत ही संक्षेप में उसकी यहां चर्चा करना चाहता हूं।...(व्यवधान) उन्होंने जो पहला क्लैरिफिकेशन हम से चाहा है कि ठीक उस समय जब लोग तालियां बजा रहे थे, नारे लग रहे थे तो उस समय आपकी पुलिस क्या कर रही थी?...(व्यवधान)
HON. SPEAKER: Dharmendra ji, please do not do this.
… (Interruptions)
श्री राजनाथ सिंह : अध्यक्ष महोदया, घटना के संबंध में जानकारी देते समय ही मैं इसका उल्लेख कर चुका हूं कि ज्यों ही पुलिस ने देखा कि ऐसा हो रहा है, तो उसने तुरंत कंट्रोल रूम को टेलीफोन किया और कहा कि फायर ब्रिगेड को जल्दी-से-जल्दी घटना स्थल पर पहुंचना चाहिए। जो ऊंची सीढ़ियां होती हैं, जिससे ऊपर चढ़ कर यदि किसी को रेस्क्यू करने की आवश्यकता होती है तो उसे रेस्क्यू किया जा सके, उसको भी अपने साथ लाने की भी बात कही।...(व्यवधान) इस बीच जो लोग तालियां बजा रहे थे, नारेबाजी कर रहे थे और उस गजेन्द्र सिंह को प्रोत्साहित करने की कोशिश कर रहे थे, उन्हें भी समझाने-बुझाने की कोशिश यहां की पुलिस ने बराबर की है।...(व्यवधान)
श्री कौशलेन्द्र कुमार:महोदया, ये गलत बोल रहे हैं।...(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : यह उचित नहीं है। आप बैठिए।
…( व्यवधान)
HON. SPEAKER: Nothing will go on record except what the hon. Home Minister is saying.
… (Interruptions)…* श्री राजनाथ सिंह : अध्यक्ष महोदया, आम आदमी पार्टी के ही एक सांसद ने कल जो यह घटना हुई, उसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि अच्छा रहा होता कि इस रैली को हमारी पार्टी ने निरस्त कर दिया होता। इस बात को स्वयं उन्होंने स्वीकार किया। ...(व्यवधान) कर्ज माफी के संबंध में जो कुछ भी मैंने कहा है, वह तथ्यों पर आधारित है। कब कर्ज माफ किया गया, कर्ज के मामले को लेकर क्या स्कैम्स हुए हैं, क्या घोटाले हुए हैं, सी.ए.जी. की रिपोर्ट में यह पूरी तरह से स्पष्ट है, उसका भी मैंने उल्लेख किया। ...(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : आप आगे की बात बोलिए।
…( व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : आप पूरी बात तो सुनिए।
…( व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : राजनाथ जी, आप बोलते जाइए, वे समझते जाएंगे। आप कंप्लीट करिए।
…( व्यवधान)
श्री राजनाथ सिंह : अध्यक्ष महोदया, हमने तुरंत राज्य सरकारों से अपील की है कि फौरी तौर पर जितनी अधिकतम सहायता हो सके, ओले अथवा तूफान और वर्षा के कारण जो किसान पीड़ित हैं, उनको फौरी तौर पर राहत मुहैय्या कराई जाए। मैंने अपनी तरफ से उन राज्य सरकारों से अनुरोध किया है कि आप इसे तुरन्त उपलब्ध कराइए। एस.डी.आर.एफ. की जो अगली किश्त है, स्टेट डिजास्टर रेस्पांस फंड की, उसका भी प्रयोग करने की इजाजत भारत सरकार द्वारा आपको मिल जाएगी। किसानों को सहायता पहुंचाने का एक तरीका होता है। राज्य सरकारें अपनी तरफ से जो भी सहायता राशि अधिकतम हो सकती है, वे किसानों को मुहैय्या कराती हैं। उसके बाद वे भारत सरकार को लिखती हैं और भारत सरकार एफबीआरएफ से फिर उसको रीअंबर्स अपनी तरफ से करती हैं, एक ऐसी व्यवस्था है।  जहां तक राज्यों के पास धन का प्रश्न है, मैं समझता हूं कि सदन के सभी सम्मानित सदस्यों को इस बात की जानकारी है कि शायद स्वतंत्र भारत के इतिहास में पहली बार यह हुआ है कि हमारी सरकार ने पहले टोटल रेवेन्यू का जो 32 परसेंट राज्यों को शेयर मिला करता था, उसको बढ़ाकर 42 परसेंट कर दिया। ...(व्यवधान) पहली किश्त सारी राज्य सरकारों को रिलीज भी की जा चुकी है।…( व्यवधान)        अध्यक्ष महोदया, मैं पुनः आश्वस्त करना चाहता हूं।...(व्यवधान) प्रधानमंत्री जी भी यहां उपस्थित हैं। ...(व्यवधान) संकट की घड़ी से इस देश के किसानों को उबारने के लिए जिस भी प्रकार की सहायता की आवश्यकता होगी, हमारी भारत सरकार हिंदुस्तान के किसानों के साथ पूरी तरह से मजबूती के साथ खड़ी है। ...(व्यवधान) मैं देश के किसानों को भी आश्वस्त करना चाहता हूं। ...(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : माननीय प्रधान मंत्री जी।
 
प्रधान मंत्री (श्री नरेन्द्र मोदी) : आदरणीय अध्यक्ष महोदया, कई वर्षों से किसानों की आत्महत्या समग्र देश के लिए चिंता का विषय रहा है। समय-समय पर हर सरकार से जो भी संभव हुआ, मदद करती रही हैं। कल की घटना के कारण पूरे देश में जो पीड़ा है, उसकी अभिव्यक्ति सदन के सभी माननीय सदस्यों ने की है। मैं भी इस पीड़ा में सहभागी होता हूं। यह हम सबका संकल्प रहे और हम सब मिलकर इस समस्या का समाधान ढूंढे। समस्या बहुत पुरानी है, समस्या बड़ी व्यापक है और उसे उस रूप में लेना पड़ेगा। जो भी अच्छे सुझाव होंगे, उसे लेकर चलने के लिए सरकार तैयार है। किसान की जिंदगी से बड़ी कोई चीज नहीं होती है, इंसान की जिंदगी से बड़ी कोई चीज नहीं होती है। राजनाथ जी ने सरकार की तरफ से जो जानकारी देनी थी, वह आपको दी है। मैं इस सदन की पीड़ा से अपने आपको जोड़ता हूं। हम सब, दल कोई भी हो, लेकिन देश बहुत बड़ा होता है।  
14.00 hrs. समस्या पुरानी है, गहरी है। हम सबको सोचना होगा कि हम कहां गलत रहे, वह कौन-सी गलत रास्ते पर चल पड़े, वह कौन-सी कमियां रहीं, पहले क्या कमियां रहीं, पिछले 10 महीनों में क्या कमियां रहीं? यह सब का दायित्व है। हमें किसानों की इस समस्या का समाधान का रास्ता खोजना है। मैं इस विषय में खुले मन से कहता हूं कि आपके पास जो भी सुझाव आयें, आप जरूर बताइए। हम इसके लिए कोई न कोई रास्ता निकालने का प्रयास करेंगे। हम किसान को असहाय नहीं छोड़ सकते हैं। हमें उनके साथ उनके दुःख में सहभागी होना है और उनके भविष्य के लिए भी सहभागी होना है। आज की चर्चा से यह संकल्प उभर कर आये, सामूहिक संकल्प उभर कर आये कि हम सब मिलकर किसानों को मरने नहीं देंगे। मैं इतनी प्रार्थना इस सदन से करता हूं।