Lok Sabha Debates
Statement Regarding Issue Of Assault On Shri Devendra Prasad Yadav, Mp. on 10 December, 2002
NT> Title: Statement regarding issue of Assault on Shri Devendra Prasad Yadav, MP.
उप प्रधान मंत्रा तथा गृह मंत्रालय के प्रभारी (श्री लालकृष्ण आडवाणी) : माननीय अध्यक्ष महोदय, आज प्रात:काल जब श्री देवेन्द्र प्रसाद यादव जी ने कल की घटना के संदर्भ में जो कुछ उन्होंने देखा, अनुभव किया, उसका वर्णन किया, मैं उसी समय बीच में आया था। लेकिन जितना मैंने सुना, उसके कारण मुझे बहुत अफसोस और दुख हुआ और उसी के आधार पर मैंने सरकार की ओर से खेद प्रकट किया। जो दो-तीन बातों की मांग की गई कि कुछ लोगों को गिरफ्तार किया गया है और जिस समय चर्चा चल रही थी तो उस समय प्रात:काल में तीन लोगों को उनके घरों से जाकर गिरफ्तार किया गया और बाद में यहां आकर किसी और माननीय सदस्य ने बताया कि जब यह बहस चल रही है तो पांच और लोगों को गिरफ्तार किया गया है। सदन के सब पक्षों की ओर से और हमारे दो पूर्व प्रधान मंत्रियों की ओर से इस पर क्षोभ प्रकट किया गया कि ऐसी बात राजधानी में हो जाए और वह भी तब जब कि वे किसान शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने के लिए आये हों, तो इस पर कार्रवाई होनी चाहिए।
मैंने उसी समय, सरकार की ओर से खेद प्रकट किया और साथ-साथ यह भी निर्देश दिया कि जिन आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया है, ऐसा बताया गया है, उन्हें तुरन्त छोड़ा जाए। मैं इस सम्बन्ध में बता सकता हूं कि उन्हें फॉर्मली गिरफ्तार नहीं गिया गया है, लेकिन उन्हें ले जाया गया उनके बयान लेने के लिए और बयान लेने के बाद उन्हें रिहा कर दिया गया है, उन्हें छोड़ दिया गया है।
आपने उस समय मुझे आदेश दिया, चूंकि यह भी मांग भी हुई कि न केवल जांच की जाए, वरन् उन अधिकारियों को सस्पेंड किया जाए जो इसके लिए जिम्मेदार हैं और चूंकि मैंने आपसे कहा था कि मैं किसी को सस्पेंड करूं, उससे पहले उनसे पूछताछ करूंगा। मुझे आपने यह आदेश भी दिया था कि आप जो भी जांच तुरन्त कर सकें वह करें और उसके आधार पर कार्रवाई करें। मैंने आपको वचन दिया था कि मैं यह करूंगा और शाम को सदन उठने से पहले, मैं सदन को अवगत कराऊंगा कि मैं किस नतीजे पर पहुंचा हूं।
महोदय, मैं बताना चाहूंगा कि मैंने जो दिल्ली पुलिस के लिए तीन प्रमुख अधिकारी हैं, जो इसका दायित्व संभालते हैं, जिनमें प्रमुख एक प्रकार से माननीय उपराज्यपाल, लैफ्टीनैंट गवर्नर, दूसरे जो डायरैक्टली पुलिस को डील करते हैं कमिश्नर आफ पुलिस और तीसरे गृह मंत्रालय के अधीन चूंकि वह आता है, इसलिए गृह सचिव, इन तीनों अधिकारियों को बुलाकर उनसे विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने अपनी तरफ से जानकारी दी थी, वे जो स्पॉट पर होंगे, नैचुरली उनमें से जो दोषी होंगे, उनसे डायरैक्टली पूछा जाएगा। जितनी मैं जानकारी कर सका, जितनी पूछताछ मैं इन अधिकारियों से कर सका, उसके आधार पर मैं प्राइमा-फेसी किसी के खिलाफ कार्रवाई करूं, ऐसा मुझे नहीं लगता।
महोदय, लेकिन मैं आपसे निवेदन करूंगा कि आपने जो समति बनाई है, उस समति को ही निर्देश दें कि बाद में जाकर वह अपनी रिपोर्ट जब देगी, तब देती रहेगी, लेकिन आरम्भ में ही अगर वह समति अन्तरिम रिपोर्ट एक-दो दिन में देना चाहे, जिसके आधार पर, प्रात:काल जो मांग की गई और जिसके संदर्भ में, मैं बयान दे रहा हूं, तो वह दी जा सकती है। मुझे जो जानकारी मिली है, उसके आधार पर मैं किसी को सस्पेंड कर दूं, यह मुझे अन्याय लगता है और ऐसा कर के मैं अपने साथ न्याय नहीं कर सकूंगा।…( व्यवधान)
श्री तरित बरण तोपदार (बैरकपुर) :इसका मतलब स्पीकर साहब, गृह मंत्री जी ने पुलिस द्वारा श्री देवेन्द्र यादव जी की जो पिटाई की गई है वह प्राइमा-फेसी सही है, यह कैसे हो सकता है ?…( व्यवधान)
श्री रामजीलाल सुमन (फिरोजाबाद): अध्यक्ष महोदय, इसका मतलब यह हुआ कि पुलिस ने जो किया वह ठीक किया।…( व्यवधान)
SHRI AJOY CHAKRABORTY (BASIRHAT): Sir, he is justifying the action. … (Interruptions)
MR. SPEAKER: Let the Minister complete his statement.
… (Interruptions)
SHRI TARIT BARAN TOPDAR : According to the statement of the Minister, pitai of Shri Devendra Prasad Yadav is justified prima facie. … (Interruptions)
अध्यक्ष महोदय : पहले मंत्री जी का स्टेटमेंट पूरा होने दीजिए। कृपया बैठिए।
श्री लाल कृष्ण आडवाणी: अध्यक्ष महोदय, मुझे कुछ और तथ्य नहीं जोड़ने हैं। मैंने बहुत संक्षेप में अपनी बात कही है। मैंने बिना जाने हुए भी, सरकार की ओर से खेद प्रकट किया, लेकिन चूंकि मैं देख रहा था कि उनको चोट लगी है, अगर वे कहते कि फलां ने आज्ञा दी, फलां ने लोगों पर हमला किया है, तो मैं शायद उनसे भी पूछताछ करवा सकता था, लेकिन ऐसा उन्होंने नहीं बताया। जितनी जानकारी मुझे मिली, उसके आधार पर मैं किसी अधिकारी को पिन-पाइंट कर के, किसी के खिलाफ कार्रवाई करूं, यह मेरे दायित्व में नहीं आता है और ऐसा करना मेरे लिए संभव नहीं है। अलबत्ता जो समति आपने बनाई है, वह यदि कोई अन्तरिम रिपोर्ट दे, तो वह दे सकती है। मैं इतना ही कहना चाहता हूं।…( व्यवधान)
श्री रामजीलाल सुमन : अध्यक्ष महोदय, इसका मतलब यह है कि पुलिस ने जो किया वह ठीक किया।…( व्यवधान)
श्री रघुनाथ झा (गोपालगंज): अध्यक्ष महोदय, प्रथम द्ृष्टया उन्होंने ऐसी कोई बात नहीं पाई, इसका क्या मतलब है।…( व्यवधान)
श्री तरित बरण तोपदार: अध्यक्ष महोदय, इसका मतलब यह हुआ कि श्री देवेन्द्र प्रसाद यादव ने कुछ ऐसा कार्य किया होगा, जिससे पुलिस को उनकी पिटाई करनी पड़ी और इस प्रकार से उनकी पिटाई जस्टीफाइड है ?…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : श्री प्रभुनाथ जी, आप बैठिये। मैं सबसे पहले यादव जी को बोलने की अनुमति देता हूं।
...( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : आप बैठिये। यादव जी बोल रहे हैं, उनको आप सुनिये।
...( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : यादव जी, मैं आपको अपने विचार रखने के लिए इजाजत दे रहा हूं लेकिन गृह मंत्री जी ने जो बात कही है कि कमेटी यदि सोचती है कि यह बहुत इम्पोर्टैंट मसला है और इस पर तुरंत एक्शन होना चाहिए तो उसके लिए एक ही रास्ता है, कमेटी आज ही कान्सटीटयूट हुई है, कल वह मीट कर सकती है और निर्णय दे सकती है कि इस-इस आफिसर के खिलाफ कार्रवाई करनी है। उस संबंध में वह कमेटी को बोल सकते हैं।
...( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : मंत्री जी ने जो कहा है, मैं उसे बोल रहा हूं। मंत्री जी ने यह कहा है कि in one day, the Committee can meet, discuss and fix up prima facie responsibility against an officer so that action against that particular officer can be taken.
… (Interruptions)
श्री रामजीलाल सुमन : अध्यक्ष महोदय, गृह मंत्री जी के बयान का सीधा मतलब यह है कि पुलिस ने जो कुछ किया, वह ठीक किया।…( व्यवधान)
SHRI TARIT BARAN TOPDAR : The Home Minister is unable to fix up that responsibility! … (Interruptions)
SHRI ANIL BASU (ARAMBAGH): Forty-two hours after the specific incident, the Deputy Prime Minister has failed to fix up responsibility.
श्री देवेन्द्र प्रसाद यादव (झंझारपुर) : अध्यक्ष महोदय, यह घटना कल ९ दिसम्बर को संसद मार्ग के जन्तर मन्तर नामक स्थान पर १२ बजकर ५० मिनट पर घटी है। मैं माननीय मंत्री जी का बहुत आदर करता हूं। सबसे पहले मैं उनका आभार व्यक्त करता हूं कि उन्होंने सदन के फस्र्ट ऑवर में सरकार की तरफ से इस पर खेद व्यक्त किया है। …( व्यवधान)माननीय गृह मंत्री को जो पुलिस ने जानकारी दी है, मुझे लगता है कि वह न केवल गलत है बल्कि निराधार और कॉन्काक्टेड है। मेरी जानकारी दर्ज की जाये क्योंकि यह सदन है। मैं यहां जो कुछ बोलूंगा, उसके लिए मैं साक्ष्य देने को तैयार हूं। हमारे पास प्राइवेट कैसेट है। माननीय गृह मंत्री जी को पुलिस कैसेट दिखाया गया है। मैं निवेदन करता हूं कि कैसेट मशीन में लगा हुआ है। वहां जो कुछ हुआ है, वह सब उसमें है। मैं जानता था कि ये लोग क्या कर रहे हैं ? तीन लोगों को आवास से पकड़ा गया, क्योंकि गृहमंत्री जी केटेगौरिकली बोले हैं, इसलिए मैं तथ्यों को सामने रख देना चाहता हूं। तीन लोगों को सुबह ८ बजकर ४० मिनट पर पकड़ा गया और उनको पकड़ते समय कहा गया कि आप लोगों को हिंद केसरी जी, जो कि पूर्व मंत्री हैं, वे घायल हैं, उनका आपको समाचार पूछना है इसलिए आपको बुलाया है। वे आपकी वेट कर रहे हैं। उनको इस गलतफहमी से धोखा देकर लेकर जाकर पुलिस थाने में बंद कर दिया गया। इसके बाद जब मैं बीच मैं गया तो मुझे जानकारी मिली कि पांच आदमियों को और ले जाया गया है। वे छह आदमी को ले गये थे लेकिन उन्होंने एक को कहा कि यह शरीफ लगता है इसलिए इसे छोड़ दो। यह लड़का कम उम्र का है यानी २३ साल का है। यह ठीक नहीं लगता इसलिए इसे छोड़ दो। जो किसान है यानी जो थोड़ा सा लीडर टाइप का है, वह पोलटिकल आदमी हो सकता है, उसको ले जाकर बंद करके कहते हैं कि तुम यहां दस्तखत करो कि तुमने शीशे की गाड़ी को तोड़ा या पुलिस पर रोड़े फेंके थे। हम तुम्हे कागज देते हैं, तुम उस पर दस्तखत कर दो तो हम तुम्हें छोड़ देंगे। तुम माफीनामा मांग लो तो अभी तुम्हे छोड़ दिया जायेगा नहीं तो तुम्हें तिहाड़ जेल जाना होगा। इनमें से श्री देव नारायण गुरू मेहता, जोगी लाल चौपाल और कुसुम लाल मंडल थोड़ा सा सीनसेयर थे। वे १९७४ से डिवोटेड कार्य करते रहे हैं। उन लोगों ने कहा कि तिहाड़ क्या, जब बाढ़ और सुखाड़ से हर वर्ष ५०० लोग डूब रहे हैं और उसी मांग को लेकर वे दिल्ली आये थे, जो चाहे जेल में ले जाओ, हम कागज पर गलत दस्तखत नहीं करेंगे। उन्होंने कोई सिग्नेचर नहीं किया। उनको थाने में बंद करके भूखे प्यासे रखा गया। जब आपका आदेश यहां से गया तब उनसे कहा गया कि हम तुम्हें छोड़ रहे हैं। जब हम यहां से गये थे, तब हमें यह पता लगा।
मैं माननीय गृह मंत्री जी से कुछ नहीं कहना चाहता। उनको जो जानकारी दी गयी है कि प्रथम द्ृष्टया जो साक्ष्य जांच के दरम्यान या पुलिस वालों से बात करके सामने आये, उनका यह कहना है कि तुरंत कोई कार्रवाई करने की आवश्यकता नहीं है।…( व्यवधान)
श्री लालकृष्ण आडवाणी : मैं एक बार फिर से कहूं। मुझे कहा गया था कि कोई अधिकारी इसमें दोषी दिखे तो उसे सस्पैंड करने की मांग हो रही है। मैंने कहा कि जो कुछ मैंने पूछताछ की, उसके आधार पर किसी अधिकारी को दोषी पाना मेरे लिए संभव नहीं था।…( व्यवधान)मैं यह नहीं कहता, अगर ज्यादती न होती तो सरकार क्यों खेद प्रकट करती, ज्यादती कहीं जरूर हुई है लेकिन ज्यादती अमुक अधिकारी ने की, इस नतीजे पर मैं नहीं पहुंच सका। इसी आधार पर मैंने आपसे निवेदन किया कि अगर आप उस कमेटी को यह भी कहें कि एक इंटरिम रिपोर्ट तुरंत दे दे तो संभव है कि कुछ हो सके।…( व्यवधान)
श्री देवेन्द्र प्रसाद यादव: किसी भी घटना में कॉज़ ऑफ अकरैंस, टाइम ऑफ अकरैंस और प्लेस ऑफ अकरैंस - तीनों बिन्दू सी.आर.पी.सी. के तहत बेसिक प्रिंसिपल हैं। मैं गृह मंत्री जी से नम्र निवेदन करता हूं कि क्या प्लेस ऑफ अकरैंस जंतर-मंतर नहीं था, क्या टाइम ऑफ अकरैंस १२.५० बजे नहीं था? लाठी, वाटर कैनन चल रहे थे, अश्रू गैस चल रहे थे, आकाश फायर हो रहा था, सब एक ही समय में हो रहा था, वह इसमें कैद है, उसे देखा जा सकता है, इसमें मुझे कुछ नहीं कहना। इन तीनों बिन्दुओं पर प्राइमा-फेसी, भारत सरकार के होम मनिस्टर, आपने ठीक कहा कि अभी तक मैं उस निकर्ष पर नहीं पहुंचा हूं। आपको निष्कर्ष पर पहुंचने में कितने घंटे लगेंगे, और कितना समय चाहिए। इन्वैस्टीगेशन आप नहीं करेंगे, इन्वैस्टीगेशन वही करेगा जिस पर मेरा आरोप है। श्री मनोज लाल, जो नई दिल्ली के डी.सी.पी. हैं, क्या उनसे आपने यह पूछा? मैंने हाउस में जो तथ्य दिया है, वह प्रोसीडिंग में दर्ज है कि आपने देवेन्द्र प्रसाद यादव को सोए हुए, पानी कैनन से क्षत-विक्षत हालत में उठाकर कहा कि अब आप माइक पर बोलिए नहीं तो बहुत खराब स्थिति हो सकती है, आप मना कीजिए। जब मॉब वॉयलैंट हो गया, पुलिस ने पहले रोडे चलाए जो महिला को लगा, जिसके नाम का मैंने जिक्र किया। जब एम.एल.ए. और हमारे कार्यकर्ता को लथपथ देखा, पैर में ब्लीडिंग होने लगी तो गुस्से में जरूर लोगों ने कहा हो लेकिन रोढ़ा नहीं था। रोडा पुलिस के पास कोने में रखा हुआ था, जो मैंने अपनी आंख से देखा। इसकी भी जांच हो कि रोडे कैसे आए, वह तो बीच रोड है, जंतर-मंतर पर बिल्कुल चौड़ी सड़क है, उसमें रोडे कहां से आए। जो रोडा फेका वही उलटकर आ गया। जब मॉब वॉयलैंट हो गई, उन्होंने देखा कि काफी संख्या में लोग हैं तो हमको कहा कि आप पुलिस माइक पर बोलिए। क्या डी.सी.पी. श्री मनोज लाल से यह पूछा गया कि देवेन्द्र प्रसाद यादव शांति बहाली के लिए कितनी दूरी तक गए जबकि उनके पैर में चोट था, हाथ में काफी चोट था, इसके बाद भी मदद की या नहीं? वॉयलैंस नहीं हो, हिंसा नहीं हो, इसके लिए उस हालत में भी हमने कोई कसर बाकी नहीं रखी। उसके बाद श्री देवेगौड़ा वहां पहुंच गए थे। उन्होंने खुद अपनी आंखों से देखा। भारत के भूतपूर्व प्रधान मंत्री आई विटनस हैं, माननीय सदस्य डा. रघुवंश प्रसाद आई विटनस हैं, माननीय सदस्य रघुनाथ झा जी आई विटनस हैं, राजो सिंह जी आई विटनस हैं। सभी साक्ष्य यहां मौजूद हैं फिर किस बात की जांच होगी। टाइम ऑफ अकरैंस, प्लेस ऑफ अकरैंस और कॉज ऑफ अकरैंस - किसानों का प्रदर्शन शांतिपूर्ण था। अब हमको कुछ नहीं कहना, आप जो निर्णय दीजिए, आपने कमेटी बनाने का निर्णय दिया है लेकिन एक प्वाइंट ऑफ इन्फार्मेशन अर्ज करना चाहता हूं। दिसम्बर १९७० में श्री कौशिक के केस में क्वैश्चन ऑफ प्रविलेज का मामला था। श्री कौशिक के, जो महाराष्ट्र से मैम्बर ऑफ पार्लियामैंट थे, प्रविलेज के मामले में स्पीकर साहब ने स्पष्ट कन्टैम्प्ट दिया है ----
"The House, in a sense, functions as the High Court of Parliament. It is, therefore, profoundly important that particularly on such occasions we should be judicious and should maintain solemnity, dignity and authority of the House. I need hardly emphasise that Sarvasree K.Padmanabhan, IPS and Shri M.P.Chaubey, the police officer who assaulted the hon. Member of Parliament, are being examined at the Bar of the House."
कृपा करके एट दि बार ऑफ दि हाउस आई.पी.एस. मनोज लाल को यहां बुलाया जाये और साक्ष्य लिया जाये, यह १९७० का प्रिसीडेंस है।…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : आप बैठिये। आपको सीरियसली चर्चा चाहिए या नहीं? ऐसा कैसे होगा कि आप बार-बार बोलने के लिए खड़े हो जाएं।
प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री तथा सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय में राज्य मंत्री (श्री विजय गोयल) : माननीय उप-प्रधानमंत्री जी के वक्तव्य के बाद मुझे केवल एक छोटा सा व्यक्तिगत स्पष्टीकरण देना है। सवेरे जब सदन के अन्दर यह मामला उठा था तो माननीय सदस्य श्री रामजीलाल सुमन ने मेरा नाम लेकर यह कहा था कि उन्होंने प्रधानमंत्री जी के प्रभारी मंत्री जी को इसकी लखित रूप से सूचना दी थी कि किसानों का एक प्रतनधिमंडल इस विषय में मिलना चाहता है। मैं सिर्फ यह कहना चाहता हूं कि हमें इस प्रकार से कोई सूचना नहीं दी गई, हमें इस तरह का कोई वक्तव्य नहीं मिला…( व्यवधान) एक मिनट।…( व्यवधान)
कुंवर अखिलेश सिंह (महाराजगंज, उ.प्र.) : आप प्रधानमंत्री जी से सम्बद्ध हैं, आपको इसकी जानकारी होनी चाहिए।…( व्यवधान)
श्री रामजीलाल सुमन : आप क्या बात करते हैं कि आपको प्रतनधिमंडल की सूचना नहीं मिली।…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : कृपया बैठिये। आप बोल सकते हैं। कृपया बैठ जाइये। रामजीलाल सुमन जी, जब मैं आपको मौका दूंगा, आप जरूर बोलेंगे।
श्री रामजीलाल सुमन : यह गलतबयानी हो रही है, देवेन्द्र यादव जी को हाउस ने सुना है।…( व्यवधान)
श्री विजय गोयल : देवेन्द्र जी, मुझे अपनी बात पूरी तो करने दीजिए।…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : विजय गोयल जी, आप बात पूरी करिये।
कुंवर अखिलेश सिंह: आप प्रधानमंत्री कार्यालय से सम्बद्ध मंत्री हैं और देश की राजधानी में इतना बड़ा प्रदर्शन हो रहा है, आपको उसकी जानकारी नहीं है?…( व्यवधान)
श्री विजय गोयल : जानकारी होना एक बात है।…( व्यवधान)
श्री रामजीलाल सुमन : आपका तो काम ही यह है कि आपको प्रधानमंत्री को सूचना देनी है।…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : उन्होंने आपको बता दिया कि उन्हें जानकारी नहीं थी।
श्री विजय गोयल : मैं तो कभी-कभी बोलने के लिए खड़ा होता हूं। मुझे बात तो पूरी करने दीजिए। मुझे भी अपनी बात कहने का अधिकार है। अध्यक्ष महोदय, जहां तक अखिलेश जी…( व्यवधान) मुझे बात तो पूरी करने दीजिए।…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : कृपया उनका स्टेटमेंट पूरा हो जाने दीजिए।
श्री विजय गोयल : हमने भी बहुत लाठियां खाई हैं, हम भी जेलों के अन्दर रहे हैं, इमरजेंसी के अन्दर रहे हैं, आप यह मत समझिये कि हम यहां आकर ऐसे ही बैठ गये हैं। आप मुझे बात तो पूरी करने दीजिए। …( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : अखिलेश जी, अपनी जगह पर जाइये।
...( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : आपके बारे में उन्होंने कहा नहीं है। कृपया बैठिये। ये रामजीलाल सुमन जी के निवेदन के बारे में कह रहे हैं, आप कैसे बात कह रहे हो। रामजीलाल सुमन जी, मैं आपको मौका दूंगा, तब आप बोलना। मैं आपको मौका देने वाला हूं।
श्री विजय गोयल : मुझे अपनी बात तो रखने दीजिए। आप किसी को अपनी बात ही नहीं रखने देंगे? हमने भी बहुत लाठियां खाई हैं, हम आपका दर्द समझ सकते हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि आप जोर-जोर से चिल्लाकर हमारी बात को कहने से रोकें, समाप्त कर दें। …( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : आप मुझे तो सुनिये। आप बैठिये।
श्री विजय गोयल : अध्यक्ष महोदय, मेरी पूरी सहानुभूति है, मैं सिर्फ यह कहना चाहता हूं कि रामजीलाल सुमन जी ने सीधे-सीधे यह कह दिया कि मेरे उन्होंने दस्तखत करा लिये, मुझे उन्होंने दे दिया। जहां तक अखिलेश जी कहते हैं कि आपको जानकारी होनी चाहिए, वह बात तो ठीक है, किन्तु आप यहां आकर यह कहें कि हमने इनको लखित में दे दिया, हमने आपसे टाइम मांगा था, हमने शिष्टमण्डल से नहीं मिलवाया, प्रधानमंत्री जी आज तक जितने शिष्टमण्डल आये हैं, हमारे पहले प्रधानमंत्री होंगे, जो सबसे ज्यादा सब लोगों से मिलते हैं। इसलिए मेरी हाथ जोड़कर प्रार्थना है कि आप इस तरह का आरोप मत लगाइये। हमारी सहानुभूति आपके साथ है।…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : मैं जब आपको मौका दूंगा, तब आप बोलना। आप बैठिये।
श्री प्रभुनाथ सिंह (महाराजगंज, बिहार) : अध्यक्ष जी, यह मामला कल भी रघुनाथ झा जी ने उठाया था और आज भी यह चर्चा चली। आदरणीय गृहमंत्री जी ने इसका उत्तर भी दिया था। एक बिन्दु पर उप-प्रधानमंत्री जी की जानकारी हासिल करके आगे की कार्रवाई के सम्बन्ध में बयान देना था, जिसमें यह है कि अब तक की जांच से हम ऐसा महसूस नहीं करते हैं कि तत्काल कोई कार्रवाई की जा सके।…( व्यवधान)
श्री लालकृष्ण आडवाणी: मैंने ऐसा कभी भी नहीं कहा। मैं कह रहा हूं कि जितनी जानकारी की है, जितनी पूछताछ की है, उसके आधार पर मैं किसी अधिकारी विशेष को दोषी मानकर उसके सस्पेंशन का आर्डर दूं, इस स्थिति में मैं नहीं हूं। इसीलिए मैंने कहा कि जो जांच समति बैठी है, वह अंतरिम रिपोर्ट भी तुरंत दे दे, तो मैं कार्रवाई करने को तैयार हूं। मैं किसी को दोषी नहीं है, ऐसा मैं नहीं कह रहा हूं।
श्री प्रभुनाथ सिंह : अध्यक्ष जी, हमारे सामने दो प्रश्न खड़े हैं। अभी ताजा सवाल विजय गोयल जी ने खड़ा किया है। देवेन्द्र जी का कहना है कि हमने लखित उनके हाथ में दे दिया था।
श्री विजय गोयल : वह कहते हैं कि हाथ से लिखा हुआ था, रामजी लाल सुमन कुछ और कहते हैं।…( व्यवधान)वह कहते हैं कि टाइप्ड था।…( व्यवधान) मेरे दस्तखत किए हुए हैं।…( व्यवधान) वे कहते हैं कि हाथ से लिखा हुआ है, आप कहते हैं कि टाइप किया हुआ है…( व्यवधान) इसके अंदर लिखा हुआ है।…( व्यवधान)
श्री प्रभुनाथ सिंह : अध्यक्ष जी, तीसरा सवाल सामने खड़ा है कि देवेन्द्र जी ने कहा कि हमने विजय गोयल जी के हाथ में दिया है। उन्होंने कहा कि हमें कोई कागज नहीं मिला था। ये तीन सवाल सामने खड़े हैं। हम गृह मंत्री जी से निवेदन करेंगे कि इन्होंने कहा कि पुलिस उनको उठाकर ले आई बयान लेने के लिए, क्या ऐसा कहीं होता है, सी.आर.पी.सी. और आई.पी.सी. में ऐसा आदेश होता है कि किसी को उठाकर ले आए थाने में कि बयान होगा। पुलिस को बयान लेना था, तो जहां व्यक्ति मिला वहां नहीं लिया जा सकता था। कोई व्यक्ति गवाही था, उसको थाने में उठाकर बंद कर दिया, हवालात में डाला गया और उसके बाद कहा जा रहा है कि बयान लेने के लिए लाए थे। गृह मंत्री जी आपको पुलिस अधिकारी गुमराह कर रहे हैं। आप क्यों उनकी बातों पर इतना यकीन करते हैं। आप क्यों नहीं अपने सहयोगियों की बात पर विश्वास करते। आप क्यों नहीं देश के भूतपूर्व प्रधान मंत्री आदरणीय देवेगौड़ा, जो घटना स्थल पर गए थे, उनकी बात पर विश्वास करते। यह दो टके की नौकरी करने वाला पुलिस अधिकारी कहता है कि कहीं कुछ नहीं है। क्या हो रहा है, इस समय इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में, आप सब कुछ जानते हैं। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में लाठी को काटकर दिखा दिया। आप उस पर यकीन करते हैं। यह है कैसेट, यह हमने नहीं बनवाई। स्पीकर साहब को हमने दी थी। संयोग से स्पीकर साहब देख नहीं पाए, क्योंकि इसके लिए बड़ी मशीन की जरूरत थी और वह उपलब्ध नहीं हो सकी। लाठी चलाने की बात उसमें साफ दिख रही है। इतिहास रोज नहीं बनता। डाक्टरों की यह रिपोर्ट है कि हड्डी टूटी हुई है। पानी के फव्वारे से क्या हड़डी टूटती है?किसी के नाक से और किसी की आंख से खून गिर रहा है। इनका जो अंगरक्षक है, दिल्ली पुलिस का है, उसके दोनों हाथों में प्लास्टर चढ़ा हुआ है। हम एक बात जानना चाहते हैं क्या डाक्टर ने देवेन्द्र जी के प्रभाव में आकर गलत प्रतिवेदन दिया?
श्री रघुनाथ झा : वहां पुलिस का अफसर मौजूद था।
श्री प्रभुनाथ सिंह : अगर गलत प्रतिवेदन दिया तो क्या गृह मंत्री जी सदन को बताएंगे और उस डाक्टर को जेल में बंद करवाएंगे? अगर उस डाक्टर ने सही प्रतिवेदन दिया है, चोट लगी है, खून निकला है, हड्डी टूटी है, तो क्या करेंगे। इसके बाद भी आप कहते हैं कि पता नहीं चल सका। जिस समय यह हुआ, उस समय डयूटी पर वहां कोई न कोई इंचार्ज होगा। बिना आदेश के पुलिस लाठी नहीं चलाती। आप सबसे कमजोर पुलिस के सिपाही को ढूंढ़ रहे हैं कि पता चल जाए किस ने मारा, उसको सस्पेंड कर दें। जिसने आदेश दिया, वह मनोज लाल कौन है, जो गिरी हुई अवस्था में टांगकर माइक से बुलवाता है। आप कहते हैं कि पता नहीं चलता, प्रथम द्ृष्टया इससे नहीं बनता है कि देवेन्द्र जी ने बयान दिया। प्रथम द्ृष्टया नहीं बनता है कि उनके जख्म के निशान अभी भी मौजूद हैं। प्रथम द्ृष्टया इसलिए नहीं बनता कि देवेगौड़ा जी ने कहा। प्रथम द्ृष्टया इसलिए नहीं बनता कि रघुवंश जी ने कहा। प्रथम द्ृष्टया इसलिए नहीं बनता कि रघुनाथ झा जी ने कहा। आप प्रथम द्ृष्टया कहां तलाशेंगे। अगर देवेन्द्र जी मर गए होते, तो आप भी उप प्रधान मंत्री, कंडोलेंस करते और कंडोलेंस के बाद सदन की कार्यवाही समाप्त हो जाती। गृह मंत्री जी इतिहास बनाइए। इसी तरह की घटना एक माननीय सदस्य के साथ घटी थी। यह मेडिकल रिपोर्ट है, के.एम. कौशिक के साथ, जो आपके ही राज्य के चंद्रपुरा का निवासी था।
इसी सदन ने कटघरा बनाकर उनको बुलाया गया और उनके दोनों आईपीएस के बिल्ले नुचवा दिये गए थे, उनको डिसमिस किया गया था, सस्पेंड नही किया था। आज उप प्रधान मंत्री जी को सस्पेंड करने की कहीं कोई जगह दिखाई नहीं देती है।
अध्यक्ष महोदय, हम निवेदन करेंगे कि आप सांसदों के संरक्षक हैं और आज आप देश के भी संरक्षक हैं। फिर एक बार हम उप प्रधान मंत्री जी से निवेदन करेंगे कि मनोज लाल जो वहां का इंचार्ज था और जिसके आदेश पर लाठी चली, देवेन्द्र यादव की गिरी हुई अवस्था में टांगकर जिसने माइक से बुलाया, उस मनोज लाल को आप निलम्बित कर दीजिए, यह हमारा निवेदन है और हम कहते हैं कि पूरा सदन का निवेदन है।…( व्यवधान)हम आपके माध्यम से गृह मंत्री जी को कहना चाहते हैं और यह मत समझिए कि हम बहक कर बोल रहे हैं लेकिन अगर सांसदों की भावनाओं का आदर नहीं कीजिएगा, हमारी भावना का आदर नहीं कीजिएगा तो हम कह रहे हैं कि हम सरकार के सदस्य होते हुए भी हम कल पूरे दिन के लिए हाउस का बहिष्कार करेंगे। हम यह बताते हैं कि यह हमारी भावना है और हमें विश्वास है कि गृह मंत्री जी सदन की भावनाओं का आदर करेंगे और यह घोषणा करेंगे कि उनको निलम्बित किया जाए।
श्री रामजीलाल सुमन : अध्यक्ष महोदय, सुबह उप प्रधान मंत्री और गृह मंत्री का जो इस सदन में आचरण था, उससे लगता था कि शाम के समय जब उनका बयान होगा तो वह बयान काफी सार्थक होगा लेकिन इस बीच में जानकारी करने के बाद उन्होंने सदन को जो जानकारी दी, बयान दिया, उससे हमें काफी निराशा हुई। श्री विजय गोयल तकनीकी कारणों से लोक सभा को चलाना चाहते हैं। आप प्रधान मंत्री कार्यालय मे राज्य मंत्री हैं। आपका काम को-आर्डिनेशन का है, सम्पर्क करने का है। महत्वपूर्ण सवाल यह नहीं है कि इत्तला रामजी लाल सुमन ने दी या देवेन्द्र यादव ने दी। बिहार औऱ पश्चिमी उत्तर प्रदेश से जो लोग आए थे, उनकी समस्याओं के बारे में आपको जानकारी थी। देवेन्द्र यादव जो उनका नेतृत्व कर रहे थे, उनका लखित प्रार्थना-पत्र आपके पास था।…( व्यवधान)
श्री देवेन्द्र प्रसाद यादव: हाथ में दिया था।…( व्यवधान)
श्री रामजीलाल सुमन : हाथ में दिया था। इस मामले को तकनीकी कारणों की बात में मत ले जाइए। महत्वपूर्ण सवाल यह है कि प्रधान मंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री रहने के कारण आपको अपने धर्म का निर्वाह करना चाहिए था,…( व्यवधान)महत्वपूर्ण सवाल यह नहीं है कि जानकारी आपको किस से मिली?जानकारी रामजी लाल सुमन ने दी या देवेन्द्र यादव ने दी। जंतर-मंतर पर जो किसानों का प्रदर्शन होने वाला था, किसानों की परेशानी थी कि उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान हो, उस सिलसिले में आपको जानकारी थी और प्रधान मंत्री जी से बात कराकर उस समस्या का हल निकालने के लिए आपको अपने स्तर से जो प्रयास करना चाहिए था, उसमें आपने कंजूसी बरती।
मैं बड़ी विनम्रता के साथ कहना चाहूंगा कि अब तक जो बहस हुई है, उसका सार यही है कि यह बात तय होनी है कि जैसे कि गृह मंत्री ने कहा कि उन्होंने पुलिस आयुक्त, गृह सचिव और लेफ्टिनेंट गवर्नर को बुलाकर बात की और और उसी जानकारी के आधार पर सदन में बयान दिया है। यहां यह तय होना है कि देवेन्द्र यादव का कथन सत्य है या उन आला अफसरों का जिनसे इन्होंने जानकारी हासिल की है, उनकी बात सत्य है। इतनी सी बात तय होनी है। सुबह से देवेन्द्र यादव जी इस हाउस को अपनी व्यथा बता रहे हैं। इस हाउस की प्रतिष्ठा और गरिमा का सवाल है। मैं बड़ी विनम्रता से कहना चाहूंगा, विजय गोयल जी, आज आप लोग सरकार में हैं। आप कभी प्रतिपक्ष में भी रहे हैं। जयप्रकाश जी के आंदोलन में हम सब लोगों ने साथ-साथ काम किया है। अगर गलत परम्पराएं पड़ेंगी तो राजनीति करने वालों के लिए राजनीति करना मुश्किल हो जाएगा। असल और बुनियादी सवाल यही है। आज आप सरकार में बैठे हुए हैं। कल इधर बैठना पड़ेगा और फिर यही व्यवहार जब आपके साथ होगा तो मैं समझता हूं कि आप उन सब चीजों को नहीं समझ सकते कि क्या स्थिति बन सकती है। मेरा कहना यह है, जैसा कि प्रभुनाथ सिंह जी ने कहा, मनोज लाल के बारे में बार-बार देवेन्द्र यादव कहते हैं और मैं समझता हूं कि जब तक इसमें आपकी तरफ से सार्थक कार्यवाही नहीं होगी जिससे उस अधिकारी के दिमाग पर इतना मनोवैज्ञानिक असर हो कि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए बहुत आवश्यक है कि आप सख्त कार्रवाई करें।
मेरी आपसे यह प्रार्थना है कि जो कमेटी बनाई गई है, उस कमेटी को आप टाइम बाउन्ड कर दीजिए कि इस सदन के अन्दर पांच दिन, सात दिन या दस दिन में कमेटी अपनी सिफारिशें आपको दे दे। किसानों के सवाल पर गृह मंत्री जी का जो कुछ भी व्यवहार है और सरकार का भी किसानों के सवाल पर जो कुछ भी व्यवहार है, मैं समझता हूं कि उसको किसी भी कीमत पर न्यायसंगत नहीं कहा जा सकता है। आपसे संरक्षण की आवश्यकता है। आपसे मदद की आवश्यकता है। अगर संसद सदस्यों की प्रतिष्ठा और गरिमा की रक्षा आप नहीं करेंगे, तो कौन करेगा। मुझे यही निवेदन करना है। …( व्यवधान)
श्री धर्म राज सिंह पटेल: महोदय, मैं व्यवस्था का प्रश्न उठा रहा हूं।
अध्यक्ष महोदय : आप कौन से नियम के अंतर्गत उठा रहे हैं?
श्री धर्म राज सिंह पटेल: आप कृपया सुन लें। श्री विजय कुमार गोयल जी ने अभी सदन में कहा है - सदन की कार्यवाही में आ गया है - कि हमको कोई भी पत्र देवेन्द्र यादव जी ने नहीं दिया है। लेकिन अभी उन्होंने एक्सैप्ट किया है कि पत्र मिला है। मैं स्पष्टीकरण चाहूंगा, अगर उनको पत्र नहीं मिला है, जैसा उन्होंने पहले कहा, तो उन्होंने इस सदन को गुमराह किया है। …( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : इस विषय को ज्यादा महत्व न दें, दूसरा विषय ज्यादा महत्वपूर्ण है।
डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह (वैशाली): महोदय, कल जीरो आवर में श्री रघुनाथ झा और हमने इस सदन में सवाल उठाया था कि किसानों का प्रदर्शन हो रहा है - बाढ़ और सुखाड़ की समस्या के बारे में। हम लोग जब वहां पर पहुंचे, तो हमने अपनी आंखों से देखा कि सब लोगों को पीठ और पैर पर चोटें लगी हुईं थीं तथा वे वहां पड़े हुए थे। पानी का फव्वारा और आंसू गैस भी चला था। वहां हजारों लोग थे। उसके बाद फिर हम लोगों ने सदन में आकर श्री रघुनाथ झा और हमने अपने भाषण में सवाल उठाया था। लेकिन आज जीरो आवर में २४ घन्टे के बाद गृह मंत्री जी को अवगत नहीं था कि क्या कैसे हुआ है, तब तक कोई रिपोर्ट या जांच-पड़ताल उन्होंने नहीं की। दिल्ली के अन्दर, दिल्ली भारत की राजधानी है, दिल्ली की छाती पर यहां जन्तर-मन्तर में यह घटना हुई और गृह मंत्रीजी को २४ घन्टे में कोई जानकारी नहीं थी। ऐसा उनके बयान से लगा। इसके अलावा उन्होंने उसी समय कहा कि कोई पर्ची मिली है कि लाठी नहीं चली। ऐसा अन्धेर, ऐसा जुल्म, ऐसा असत्य और कन्फ्यूजन वाले बयान की गृह मंत्री जी से अपेक्षा नहीं की जाती है। अस्पताल में लोग भरती हैं। दर्जनों लोग घायल हुए हैं। माननीय सदस्य के हाथ में पट्टी बन्धी हुई है। श्री हिन्द केसरी यादव जी बहोश हुए हैं। सदन में गलत बयानी हो, आफिसरों को बचाने का प्रयास हो, यह बर्दाश्त की चीज नहीं है। आज जो इन्होंने बयान दिया है कि आला आफिसरों से पूछकर, उनकी बात बोल रहे हैं। सदन में चर्चा चल रही है और इतने जिम्मेदार लोग तथा भूतपूर्व प्रधानमंत्री बयान दे रहे हैं, बता रहे हैं, उन पर कोई भरोसा नहीं है और आला आफिसरों के बयान को बोल रहे हैं। वह बयान यहां कह रहे हैं। हम लोग पत्र मंत्री हो हाथ में दे देते हैं, बाई पोस्ट भेज देते हैं या कर्मचारी की मारफत भेज देते हैं, लेकिन रिसीविंग साइन नहीं लेते हैं। माननीय सदस्य ने कहा है कि हाथ में हमने दिया है…( व्यवधान)
श्री विजय गोयल : वे माननीय सदस्य हैं, तो मैं भी माननीय सदस्य हूं। आप मेरी बात भी सुनिए।…( व्यवधान)अभी तक श्री रामजीलाल सुमन कहते थे कि उन्होंने दिया है। अब कहते हैं कि उन्होंने नहीं दिया है, देवेन्द्र यादव जी ने दिया है। …( व्यवधान)
श्री रामजीलाल सुमन : प्रोसीडिंग्स दिखाइए। …( व्यवधान)
श्री विजय गोयल : प्रोसीडिंग में है - "हमने प्रधान मंत्री जी के प्रभारी मंत्री जी को हाथ से लिखकर यह सूचना दी कि आप शिष्ट मंडल से मिलने के लिए, जो बिहार से किसान आ रहे हैं इतनी संख्या में, बाढ़ सुखाड़ के स्थाई समाधान के लिए, समय दें। जितने भी आप आदमी चाहेंगे, उतने ही शिष्ट मंडल में मिलेंगे। माननीय विजय गोयल के हाथ में मैंने तीन तारीख को लिखकर दस्तखत करा लिया था।" लाइए, दस्तखत दिखाइए? …( व्यवधान)
श्री रामजीलाल सुमन : इसका क्या मतलब है ? …( व्यवधान)
श्री विजय गोयल : इसका मतलब यह है कि आप तिल का ताड़ बना रहे हैं। हम चुप बैठे हैं। आपने कह दिया कि पत्र दे दिया, हम उसे भी मान लें…( व्यवधान)मुद्दे पर आपकी हमारी सहमति नहीं है…( व्यवधान)हमने पचास साल लाठियां खाईं हैं। आपने तो अभी खाईं होंगी। हम तो पचास साल से खा रहे थे। मैंने सिर्फ इतना स्पष्टीकरण दिया है कि मुझे यह जानकारी में नहीं लाया गया है। इससे ज्यादा मुझे कुछ नहीं कहना है।
MR. SPEAKER: There is nothing before the House. Please sit down.
… (Interruptions)
डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह :अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्य ने बड़ी जिम्मेदारी से कहा कि हमने अपने हाथ से विजय गोयल जी को दिया और यह कह रहे हैं कि हमें नहीं दिया।…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : अब आप समाप्त कीजिए।
डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह (वैशाली): अध्यक्ष महोदय, गृह मंत्री और राज्य मंत्री के बयान से सदन इस निष्कर्ष पर पहुंच रहा है कि इनके राज में, इस सदन और सदस्य की गरिमा नहीं बचने वाली है। इस सरकार पर हम लोगों का भरोसा नहीं है, लेकिन आसन पर भरोसा है।
सदन के सदस्य की गरिमा की रक्षा की जाए, यही हमारी आपसे प्रार्थना है। इस सरकार के गृह मंत्री के हाथ में देश सुरक्षित नहीं है, अगर इस तरह के गृह मंत्री हों और इस तरह के प्रधानमंत्री जी के राज्य मंत्री हों। महोदय, इसलिए मेरी आपसे पुन:प्रार्थना है कि आप सदन के सदस्यों की और सदन की गरिमा की रक्षा करें, यही हमारी आपसे गुहार है।
SHRI H.D. DEVE GOWDA (KANAKPURA): Sir, with your kind permission I would like to add a little more to what Shri Prabhunath Singh has said. He tried to convince the hon. Deputy Prime Minister and this House also about taking action against the officers concerned. There is nothing more to add.
Hon. Deputy Prime Minister has enquired about the incident with the Lt. Governor who was not there; the Police Commissioner who was not there; and the Home Secretary, who also was not there. Sir, you also functioned in various capacities as the Chief Minister of a State and as a Central Minister too. You know how the police machinery try to cover up their misdeeds.
My question is this. Why was a person who was staying in the house of the hon. Member taken to the police custody, was slapped and was made to sign a statement which is ultimately to cover up their high-handedness and atrocity that has been committed against the peaceful agitators? If I was not there, I would not have pleaded for the suspension of any officer. Members of Parliament are not above the law. If we have done anything wrong, we must accept our mistake and the law has to be enforced on us also like on any other person who commits such acts of crime.
If the hon. Member Shri Devendra Prasad Yadav was not there at the spot, things would have been uncontrollable, I must honestly tell you. I may tell the hon. Deputy Prime Minister that he tried his best with folded hands because the mob was so furious against the high-handedness of the policemen that he was crying. I was a witness. I do not want to add anything like whether the hon. Member belongs to the Ruling ally or to the Opposition. We should not look at this issue on the lines of political alliances. It is a matter concerning the dignity of the Members of the House. If we have committed any such mistake, let the law be enforced on us.
These three high dignitaries with whom you have tried to enquire the matter were not present there. But they have tried to cover up the misdeeds and the high-handedness of the police officers who are involved in this. I was a witness. Otherwise, I would not have raised this issue. Nor am I trying to add fuel to the fire. This is not my concern. We do not want that this Government face destability.
I only request you not to protect those officers. How can the Committee which has been constituted by the hon. Speaker with the consensus of the House come to a fair conclusion if the Deputy Prime Minister and Home Minister, after his preliminary inquiry, discloses that he was not able to conclude any wrongdoing on the part of the officers concerned?
Can this Committee call the Home Secretary? Can this Committee call the Police Commissioner? Or can the Committee call me to give evidence before the Committee? When I have given evidence here, is it not sufficient for the Deputy Prime Minister? I am an eye witness. If the evidence of people who were not there on the spot is going to be taken by the hon. Deputy Prime Minister as gospel truth, then what for are we here? Why should we raise this issue on the floor of the House? For God’s sake, please do not try to protect the officers. We have all suffered in jail under your leadership. Let me honestly confess this point. This is the dignity and honour of the House as also of the hon. Member. I was an eye witness. I do not want to be provocated from any quarter. I am honestly telling you that he tried his best to control the mob with all his suffering. You must compliment him for that. Blood was oozing out. I had seen it with my own eyes. What more do you want? If you want me to go before the Committee to give evidence, I will not go. Why should I go there? I have taken oath under the Constitution before entering the House, and if my words are not going to be believed, then whose words are you going to believe? Do you want to believe the words of the Lt. Governor who was not there? Do you want to believe the words of the Police Commissioner who was not there? Do you want to believe the words of the Home Secretary who was not there?
Sir, you are an elderly person and the Deputy Prime Minister. Please do not protect any officer, whatever may be his rank and status. Do not try to protect any officer. Save the honour of this august House and the honour of the Members of this House. I appeal to you not to spare the officers. Thank you very much MR. SPEAKER: Hon. Members, we have discussed this issue for an hour now. Even when the House started, we discussed it for a very long time.
I would like to make one thing clear. The honour and respect of the hon. Member will definitely be safeguarded and his interest will be looked into. The Committee is appointed and a request has been made that a specific time should be fixed for the submission of the Report of the Committee. I would like to announce that the Committee must submit its Report to the House in the next fifteen days or before the end of the Session.
कुंवर अखिलेश सिंह: सर, इसी हफ्ते यह रिपोर्ट आनी चाहिए।
MR. SPEAKER: In the meantime, the Committee can give an Interim Report. The hon. Home Minister has already said that if the Interim Report comes within the next 24 hours, he is prepared to take action on the Interim Report. It is, therefore, necessary that the Committee starts working immediately, submit the Report immediately and if they can fix up the responsibility for suspension of a particular officer, the hon. Home Minister will immediately take action.
With this, I would like to mention to the House that I understand the responsibility of a Speaker and it is the responsibility of the Speaker to take this matter very seriously. The best procedure would have been referring the matter to the Privileges Committee. An illustration was quoted by Shri D. P. Yadav of Shri Kaushik which I have gone through. The decision of the Privileges Committee would have been more effective. But since the Committee has been appointed now, I would request the Committee to meet immediately and take action in the matter.
In the meantime, if the Home Minister wants to say something more, I have no objection. Otherwise, the House stands adjourned to meet again tomorrow at 11 a.m. 18.59 hrs. The Lok Sabha then adjourned till Eleven of the Clock on Wednesday, December 11, 2002/Agrahayana 20, 1924 (Saka).
_______________