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State Consumer Disputes Redressal Commission

Ayodhya Faizabad Development ... vs Smt. Geeta Verma on 1 March, 2024

  	 Cause Title/Judgement-Entry 	    	       STATE CONSUMER DISPUTES REDRESSAL COMMISSION, UP  C-1 Vikrant Khand 1 (Near Shaheed Path), Gomti Nagar Lucknow-226010             First Appeal No. A/1461/2019  ( Date of Filing : 23 Dec 2019 )  (Arisen out of Order Dated 22/11/2019 in Case No. C/202/2017 of District Faizabad)             1. Ayodhya Faizabad Development Authority  Through Vice Chairman Parikrikmamarg Distt. Faizabad ...........Appellant(s)   Versus      1. Smt. Geeta Verma  W/O Sri haripal Verma R/O Village Chatriwa Post Pora motinagar Distt. Faizabad ...........Respondent(s)       	    BEFORE:      HON'BLE MR. JUSTICE ASHOK KUMAR PRESIDENT            PRESENT:      Dated : 01 Mar 2024    	     Final Order / Judgement    
   

सुरक्षित  राज्‍य उपभोक्‍ता विवाद प्रतितोष आयोग, उ0प्र0, लखनऊ।


 

 अपील संख्‍या- 1461 सन 2019

 

अयोध्‍या विकास प्राधिकरण                     ........अपीलार्थी

 

बनाम

 

 

 

गीता वर्मा पत्‍नी श्री हरिपाल वर्मा निवासी ग्राम छतिरवा पोस्‍ट पोरा मोतीनगर जिला फैजाबाद।                     .......प्रत्‍यर्थी

 

 

 

 समक्ष

 

मा० न्यायमूर्ति श्री अशोक कुमार अध्‍यक्ष ।

 

मा0 सदस्‍य श्री विकास सक्‍सेना ।

 

 

 

अपीलार्थी की ओर से उपस्थित विद्वान अधिवक्ता - श्री आशीष चतुर्वेदी।

 

प्रत्‍यर्थी की ओर से विद्वान अधिवक्ता     -      श्री इसार हुसैन।

 

 

 

दिनांक -    .03.2024

 

 

 

 माननीय श्री विकास सक्‍सेना , सदस्‍य द्वारा उद्घोषित

 

 निर्णय

 

प्रस्‍तुत अपील जिला उपभोक्ता आयोग फैजाबाद द्वारा परिवाद संख्या 202 सन 2017 में पारित प्रश्नगत निर्णय एवं आदेश दिनांक 22.11.2019 के विरुद योजित की गयी है।

विद्वान जिला उपभोक्‍ता फोरम द्वारा परिवाद को अंशत: स्‍वीकार किया गया है। इससे व्‍यथित होकर अपील में मुख्‍य रूप से यह आधार लिया गया है कि प्रश्‍नगत निर्णय एवं आदेश 22.11.2019 न्‍याय की दृष्टि से अवैध है । उ0प्र0 सहकारी विकास एवं योजना अधिनियम 1973 के अन्‍तर्गत अनेकों शासनादेश जारी किए गए है जिनमें प्‍लाटों की नीलामी की व्‍यवस्‍था की गयी थी। विद्वान जिला फोरम इस तथ्‍य को अपने संज्ञान में लेने में असफल रहा कि परिवादिनी नीलामी में अधि‍कतम बोली लगाने वाली बोलीकर्ता थी उसके द्वारा न तो सामान क्रय किया गया था और न ही कोई सेवा ली गयी है। इसलिए यह विवाद उपभोक्‍ता संरक्षण अधिनियम की परिधि मे नहीं है। परिवादिनी ने नीलामी की बोली लगाने के पश्‍चात आवश्‍यक धनराशि जमा नही की जिसके कारण उसकी नीलामी एवं आवंटन रद्द कर दिया गया। आवंटन निरस्‍त होने के उपरांत परिवादिनी का कोई अधिकार पुन: धनराशि जमा करके प्‍लाट लेने का नहीं रह जाता है । विद्वान जिला फोरम ने परिवादिनी का प्‍लाट कैंसिल होने के उपरांत पुन: प्‍लाट दिए जाने का निर्णय पारित किया है जो किसी प्रकार से उचित नहीं कहा जा सकता है। परिवादिनी का प्‍लाट निरस्‍तीकरण नियमानुसार हुआ है इसलिए प्रश्‍नगत निर्णय मनमाना एवं पक्षपातपूर्ण है । विद्वान जिला फोरम का यह निर्णय भी गलत है कि आवंटन अथवा नीलामी प्रक्रिया में विकास प्राधिकरण को धनराशि प्रेषित किए जाने का साधन नहीं था और वास्‍तव में इसके पूर्व परिवादिनी ने चालान के माध्‍यम से धनराशि जमा की थी। आवंटन दिनांक 14.10.2016 में धनराशि जमा करने की समयावधि   दी गयी थी जिसको बढाए जाने का परिवादिनी ने कोई प्रार्थना नहीं की अत: यह नहीं माना जा सकता कि विकास प्राधिकरण ने अपील में गलत प्रकार से परिवादिनी के पक्ष में आवंटन निरस्‍त किया है। अत: परिवादी को दिया गया अनुतोष उचित नहीं है। प्रश्‍नगत निर्णय अपास्‍त किए जाने योग्‍य है ।

 

संक्षेप में परिवादिनी का कथन है कि परिवादिनी ने अयोध्‍या फैजाबाद विकास प्राधिकरण फैजाबाद की सम्पत्ति एल०ई०जी० मूखण्ड संख्या कौशलपुरी योजना फेस 1 के आवंटन हेतु 19.250/- रुपया जमा कर पंजीकरण कराया जिसके उपरांत अधिकतम बोली लगाने के आधार पर उक्त सम्‍पत्ति प्रार्थिनी को दिनाक 03-10-2016 को धनराशि 1560000/- में आवंटित की गयी। आवंटन की सूचना विभाग द्वारा दिनाक 15-10-2016 को रजिस्टर्ड डाक द्वारा परिवादिनी के पते पर भेजी गयी जो काफी समय उपरांत परिवादिनी को प्राप्त हुई । उक्त नोटिस के माध्यम से विपक्षी संख्या-3 द्वारा परिवादिनी को दिनांक 14-11-2016 तक आवंटन धनराशि 2.70.750/- रुपया जमा करने का निर्देश दिया गया। भारत सरकार द्वारा दिनांक 08-11-2016 को नोटबन्दी जैसा ऐतिहासिक फैसला कर बैंको में वित्तीय अन्तरण पर रोक लगा दी गयी जिस कारण परितादिनी आवंटित धनराशि जमा नहीं कर सकी । दिनांक 03-03-2017 को विपक्षी संख्या-3 द्वारा प्रार्थी के आवंटन निरस्त करने की सूचना जरिए नोटिस दी गयी तथा नोटिस में यह भी अंकित किया गया कि परिवादिनी को बार-बार सूचना दी गई जो एकदम गलत एवं निराधार है। विपक्षी संख्या-3 द्वारा रद्द किया गया आवंटन दिनांकित 02-03-2017 अवैध एवं नियम विरुद्ध है । परिवादिनी को दिनांक 14-10-2016 के उपरांत किसी भी प्रकार की कोई नोटिस नहीं प्राप्त हुई और न ही किसी प्रकार की कोई नोटिस की सूचना डाकिए द्वारा परिवादिनी को दी गई। बैंकों द्वारा लगाए गए सभी वित्तीय प्रतिबन्धों को हटने के उपरांत दिनांक 27-03-2017 को परिवादिनी ने आवंटन धनराशि जमा करने हेतु प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया जिस पर आज तक कोई कार्यवाही नहीं की गयी और न ही उक्त प्रार्थना पत्र के संबंध में कोई सूचना दी गई ।

हमने उभय पक्ष के विद्वान अधिवक्‍तागण के तर्क विस्‍तार से सुने तथा पत्रावली का सम्‍यक अवलोकन किया ।

 

परिवादिनी द्वारा अपने परिवाद में कथन किया गया है कि परिवादिनी श्रीमती गीता वर्मा को प्रश्‍नगत प्‍लाट आवंटित हुआ था और नीलामी में परिवादिनी को 370750.00 रू0 जमा करने का निर्देश दिया गया था जो नोटबंदी के कारण परिवादिनी जमा नहीं कर सकी थी । विद्वान जिला फोरम का यह निष्‍कर्ष आया है कि आवंटन पत्र में परिवादिनी को चालान द्वारा धनराशि जमा करने का निर्देश दिया गया इसमें चेक व ड्राफ्ट के माध्‍यम से धनराशि जमा करने का कोई विकल्‍प नहीं था जैसा कि आवंटन पत्र दिनांकित 14.11.2016 के अवलोकन से स्‍पष्‍ट होता है।

इस सम्‍बन्‍ध में आवंटन पत्र दिनांक 14.11.2016 मे स्‍पष्‍ट है कि    अत: आप दिनांक 14.11.2016 तक वांछित धनराशि पी0एन0बी0 सिविल लाइन्‍य बैक आफ बडौदा नियांवाएक्सिस बैंक सिविल लाइन्‍स फैजाबाद एवं आईडीबीआई शाखा सिविल लाइन्‍स फैजाबाद में उपलब्‍ध चालान के पृष्‍ठ पर भाग अंकितमद संख्‍या का उल्‍लेखकरते हुए अवशेष धनराशि 37750.00 रू0 जमा कर चालान की एक छाया प्रति कार्यालय को उपलब्‍ध कराना सुनिश्चित करें ।

इस प्रकार परिवादिनी को चालान के माध्‍यम से धनराशि जमा करने का निर्देश दिया गया। परिवादिनी का कथन है कि नोटबंदी घोषित होने के कारण वह यह धनराशि निर्धारित समय में नहीं कर सकी।  विद्वान जिला फोरम का भी यह निष्‍कर्ष है कि इस आवंटन पत्र में चेक अथवा ड्राफ्ट के माध्‍यम से धनराशि जमा करने का कोई विकल्‍प नहीं था और इसी आधार पर परिवाद आज्ञप्ति किया गया है किंतु यह तर्क उचित नहीं प्रतीत हाता है कि चालान से धनराशि जमा करने का तात्‍पर्य यह नहीं है कि चालान के साथ केवल कैश में ही धनराशि जमा की जा सकती है। चालान केवल प्रोफार्मा है जिसके साथ चेक अथवा ड्राफ्ट जमा किया जा सकता है अत: यह  निष्‍कर्ष उचित नहीं है कि परिवादिनी केवल कैश के माध्‍यम से धनराशि जमा करने के लिए बाध्‍य थी। नोटबंदी के कारण वह धनराशि जमा नहीं कर पाई ।

विपक्षी/अपीलार्थी का यह तर्क उचित है कि परिवादिनी द्वारा नोटबंदी का आधार लेते हुए भुगतान की समय सीमा बढाए जाने की भी कोई प्रार्थना विकास प्राधिकरण से नहीं की गयी थी जिस कारण उचित प्रकार से परिवादिनी का आवंटन निरस्‍त किया गया।  नियमों के अन्‍तर्गत शर्त संख्‍या 6.3 में निम्‍न लिखित प्रकार से स्‍पष्‍ट रूप से दिया गया है कि आवंटन पत्र निर्गत होने के पश्‍चात निर्धारित तिथि तक आवंटित धनराशि का भुगतान न किए जाने की दशा में आवंटन निरस्‍त करने पर विचार करते हुए जमा धरोहर धनराशि जब्‍त कर ली जाएगी जो निम्‍नलिखित प्रकार से है :-

सम्‍पत्ति का आवटन लाटरी/नीलामी द्वारा किया जाएगा। सफल बोलीदाता को अधिकतम बोली की धनराशि का 25 प्रतिशत धनराशि आवंटन पत्र निगत होने के एक माह के अन्‍दर जमा करनाहोगा जिसमें धरोहर धनराशि सम्मिलित होगी।
शेष धनराशि व्‍यवसायिक सम्‍पत्ति हेतु 2 से 5 वर्ष की  त्रैमासिक किश्‍तोंमें नियमानुसार (ब्‍याज सहित) जमा करना होगा एवं आवासीय भवनों हेतु किश्‍त 10 वर्ष की नियमानुसार ब्‍याज सहित देय होगी ।
आवंटन पत्र निगत होने के पश्‍चात निर्धारित तिथि तक वांछित धनराशि का भुगतान न किए जाने की दशा में आवंटन निरस्‍त करनेपर विचार करे हुए जमा धरोहर धनराशि जब्‍त कर ली जाएगी ।
इस प्रकार आवंटन की शर्तो में उल्लिखित किया गया है कि आवंटन पत्र निर्गत होने के उपरांत अवशेष किश्‍तों के सम्‍बन्‍ध में सूचित किया जाएगा। यदि निर्धारित समय में धनराशि जमा नहीं की गयी तो आवंटन स्‍वत: निरस्‍त समझा जाएगा ।
     इसके उपरांत परिवादिनी को सम्‍बोधित पत्र दिनांक 07.12.2016 प्रेषित किए जाने का साक्ष्‍य अभिलेख पर है जिसकी प्रतियां प्रस्‍तर 4 व 5 के रूप में अपील के साथ संलग्‍न है जिसके अवलोकन से स्‍पष्‍ट होता है कि परिवादिनी को बार बार सूचना दी गयी कि वह धनराशि जमा करे किंतु धनराशि जमा नहीं की गयी जिसके कारण आवंटन निरस्‍त कर दिया गया । आवंटन निरस्‍त होने के उपरांत श्रीमती नीलम पाण्‍डेय को आवंटन कर दिया गया जिससे स्‍पष्‍ट होता है कि परिवादिनी का आवंटन पूर्णत: निरस्‍त हो गया है । किसी अन्‍य को आवंटन होने तथा परिवादिनी का आवंटन निरस्‍त होने के उपरांत परिवादिनी का कोई अधिकार आवंटन पुनर्जीवित का नहीं रह जाता है अत: यह माना जा सकता है कि परिवादिनी पुन: आवंटन प्राप्‍त करने की अधिकारिणी नहीं है। जिला फोरम का प्रश्‍नगत निर्णय उचित नहीं है। परिवादिनी आवंटित सम्‍पत्ति को पुन: प्राप्‍त करने की अधिकारिणी नहीं है अत: प्रश्‍नगत निर्णय अपास्‍त किए जाने योग्‍य है।
आदेश        प्रस्‍तुत अपील स्‍वीकार की जाती है तथा जिला आयोग फैजाबाद द्वारा पारित प्रश्नगत निर्णय एवं आदेश दिनांक 22.11.2019 अपास्‍त किया जाता है।
उभयपक्ष अपना-अपना वाद व्‍यय स्‍वयं वहन करेंगे।
आशुलिपिक से अपेक्षा की जाती है कि वह इस निर्णय/आदेश को आयोग की वेबसाइट पर नियमानुसार यथाशीघ्र अपलोड कर दें।
           
(न्‍यायमूर्ति अशोक कुमार)                   (विकास सक्‍सेना)

 

अध्‍यक्ष                                 सदस्‍य

 

  सुबोल श्रीवास्‍तव

 

 (पी0ए0(कोर्ट नं0-1)

 

              [HON'BLE MR. JUSTICE ASHOK KUMAR]  PRESIDENT