Lok Sabha Debates
Regarding Need To Enact A Legislation To Safeguard  The Constitutional ... on 9 August, 2012
> Title: Regarding need to enact a legislation to safeguard the constitutional provision of reservation for Scheduled Castes/Scheduled Tribes in the country.
श्री दारा सिंह चौहान (घोसी):अध्यक्ष महोदया, पूरे देश में एससी, एसटी के प्रमोशन के आरक्षण को ले कर आक्रोश व्यक्त किया जा रहा है।...( व्यवधान) सरकार ने एक बार भी इसका संज्ञान नहीं लिया है।...( व्यवधान)
श्री शैलेन्द्र कुमार (कौशाम्बी):महोदया, यह बहुत गंभीर मामला है।...( व्यवधान)
श्री दारा सिंह चौहान: इसके लिए सर्वदलीय कमेटी बनाने की जरूरत है।...( व्यवधान) केवल यू पी में ही नहीं, पूरे देश में एससीएसटी के प्रमोशन के आरक्षण को लेकर आक्रोश व्यक्त किया जा रहा है।...( व्यवधान) यह बहुत गंभीर मामला है।...( व्यवधान)
11.05 hrs At this stage Shri Shailendra Kumar, Dr. Rattan Singh Ajnala and some other hon. Members came and stood on the floor near the Table.
अध्यक्ष महोदया : अभी सभी वापस जाइए। आप सब अपने अपने स्थानों पर वापस जाइए।
…( व्यवधान)
MADAM SPEAKER: Please go back to your seats.
… (Interruptions)
11.06 hrs At this stage Shri Shailendra Kumar, Dr. Rattan Singh Ajnala and some other hon. Members went back to their seats.
अध्यक्ष महोदया : हरसिमरत जी, आपका नोटिस मिला है। यह गंभीर विषय है। आप अगर इसे शून्य प्रहर में उठा लेंगी तो हम इस पर आपको बोलने का अवसर देंगे। आप इस मामले को शून्य प्रहर में उठा लीजिए।
…( व्यवधान)
MADAM SPEAKER: Shri Wakchaure, please keep it down.
… (Interruptions)
अध्यक्ष महोदया : शैलेन्द्र कुमार जी, आप बैठिए।
…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : आप बैठिए। बोलने दीजिए। आपने एडजर्नमेंट मोशन दिया है। हम एडजर्नमेंट मोशन स्वीकार नहीं कर सकते क्योंकि कल ही एडजर्नमेंट मोशन हो चुका है और चूंकि यह बहुत ही गंभीर विषय है, इसलिए अगर आप मुझे नियम 193 के अधीन नोटिस देंगे तो हम इस पर चर्चा करवा देंगे। अब प्रश्नकाल चलने दीजिए।
…( व्यवधान)
श्री शैलेन्द्र कुमार: अध्यक्ष महोदया, कृपया हमारी बात सुन ली जाए।...( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : जब चर्चा होगी तब आप बोल लीजिएगा।
…( व्यवधान)
श्री शैलेन्द्र कुमार: अध्यक्ष महोदया, हमने नोटिस दिया है।...( व्यवधान)
श्री दारा सिंह चौहान: अध्यक्ष महोदया, हमने भी नोटिस दिया है।...( व्यवधान) हमारी दो मिनट बात सुन ली जाए। हमने नोटिस दिया है।...( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : मुझे मालूम है कि आपने नोटिस दिया है। नोटिस तो आपने दिया है लेकिन हमने कहा है कि हम इसे स्वीकार नहीं कर सकते।
…( व्यवधान)
श्री शैलेन्द्र कुमार: अध्यक्ष महोदया, हमारे जो संविधान के निर्माता थे जिन्होंने संविधान की रचना की, उसमें संवैधानिक रूप से हमारे अनुसूचित जाति के तथा अनुसूचित जनजाति के लोग जो शैक्षणिक, सामाजिक और आर्थिक तौर से कमजोर थे, उनके लिए रिजर्वेशन का प्रावधान किया गया।...( व्यवधान) इसमें आपसे यह भी मांग करेंगे कि समय समय पर कोर्ट से लेकर सरकारी महकमे में अधिकारियों का हमेशा तुषाराघात हुआ है। प्रमोशन में रिजर्वेशन को खत्म किया गया है। ...( व्यवधान) आज यह साजिश हो रही है कि अनुसूचित जाति औऱ अनुसूचित जनजाति के आरक्षण को बिल्कुल समाप्त कर दिया जाए। चूंकि यह गंभीर मामला है, इसलिए हम आपसे चाहते हैं कि इसको सरकार संज्ञान में ले और इस पर चर्चा हो तथा इस पर सरकार की तरफ से जवाब आना चाहिए।...( व्यवधान) यह हम आपसे मांग करना चाहेंगे। यह बड़ा गंभीर मामला है। यह पूरी साजिश है। ...( व्यवधान) इसमें सभी वर्ग के लोग हैं। इसमें हम लोगों ने सरकार से माननीय प्रधान मंत्री जी से भी निवेदन किया था। हम लोग उनसे मिले थे लेकिन आज तक कोई ठोस परिणाम, कोई जवाब सरकार की तरफ से नहीं मिला।...( व्यवधान) हम चाहते हैं कि सरकार की तरफ से इस पर जवाब आए और किसी प्रकार से जो प्रमोशन में रिजर्वेशन समाप्त किया गया है, वह न हो। लोगों को रिवर्ट किया जा रहा है। इसे लेकर लोगो में, सरकारी कर्मचारियों, अधिकारियों के अंदर आतंक का वातावरण है। चूंकि यह मामला बड़ा गंभीर है। ...( व्यवधान) इसलिए हम चाहते हैं कि सरकार इसे गंभीरता से ले। आज हम चाहते हैं कि इस पर चर्चा कराई जाए। अगर असम में हिंसा हुई है तो यह पूरे देश की समस्या है।...( व्यवधान)
MADAM SPEAKER: Shri Wakchaure, please keep it down.
… (Interruptions)
श्री शैलेन्द्र कुमार : अध्यक्ष जी, यह केवल एक प्रांत की समस्या नहीं है। यह पूरे देश की समस्या है। हम चाहेंगे कि इस पर आज ही चर्चा कराई जाए।...( व्यवधान) अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लोगों का रिजर्वेशन समाप्त करने की साजिश रची जा रही है। हम आपसे चाहते हैं कि आज ही इस पर चर्चा होनी चाहिए। यह केवल एक राज्य का मामला नहीं है, यह पूरे देश का मामला है। हम चाहते हैं कि इस पर आज ही चर्चा कराई जाए। इसलिए दलगत राजनीति से ऊपर उठकर सभी दलों के लोगों ने इसका विरोध किया है। हम चाहते हैं कि इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए आप इस पर आज ही चर्चा करायें और इस पर सरकार की तरफ से कोई जवाब आना चाहिए कि इस मामले में क्या हो रहा है।...( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : पुनिया जी, आप बोलिये, लेकिन एक मिनट से ज्यादा नहीं बोलना है।
...( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : कृपया आप बैठ जाइये और माननीय सदस्यों को भी सुन लीजिए। आप क्यों बोल रहे हैं, आप बैठ जाइये।
श्री पन्ना लाल पुनिया (बाराबंकी):अध्यक्ष महोदया, मैं आपका बहुत आभारी हूं कि आपने मुझे इस गंभीर मामले पर बोलने का मौका दिया। यह सही बात है कि पूरा समाज, पूरा देश...( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : आपको भी बोलने का मौका मिलेगा, अभी आप बैठ जाइये। ऐसे अनुशासन में रहकर सब लोग बात कर लेंगे। आप बैठ जाइये, अभी वह बोल रहे हैं।
…( व्यवधान)
MADAM SPEAKER: Nothing will go on record except what Shri Punia is saying (Interruptions)* … MADAM SPEAKER: Dara Singhji, please sit down.
… (Interruptions)
MADAM SPEAKER: Only what Shri Punia is saying will go on record. Nothing else will go on record.
(Interruptions)* MADAM SPEAKER: Nothing will go on record except what Shri Punia is saying.
(Interruptions)* MADAM SPEAKER: Dara Singhji, please sit down.
… (Interruptions)
MADAM SPEAKER: Only what Shri Punia is saying will go on record. Nothing else will go on record.
(Interruptions) * श्री पन्ना लाल पुनिया: महोदया, पदोन्नति में आरक्षण अत्यंत महत्वपूर्ण है, पूरा समाज, पूरा देश इससे प्रभावित है और मैं आपको यह अवश्य बता देना चाहता हूं कि सारे राजनीतिक दल, उनके सारे सांसद चाहे राज्य सभा के हों, चाहे लोक सभा के हों, सारे इस बात से सहमत हैं, सभी राजनीतिक दल इससे सहमत हैं कि यह संविधान संशोधन होना चाहिए। संविधान ने इसी पार्लियामैन्ट में संविधान में संशोधन द्वारा हमें अधिकार दिये हैं। उन अधिकारों का हनन अगर पांच आदमी वहां बैठकर करने लगें तो उसका इलाज अगर हो सकता है तो वह लोक सभा के माध्यम से हो सकता है। पहले भी जब-जब हमारे अधिकारों पर हमला हुआ, इस सदन के माध्यम से हमें न्याय मिला। इसलिए आज हम रिक्वैस्ट करना चाहते हैं कि संविधान संशोधन हो और पदोन्नति में आरक्षण हमें उपलब्ध हो। आज आरक्षण का कानून नहीं है, कानून के लिए 2004 से मांग हो रही है। कहा जा रहा है कि अब आ रहा है, अब आ रहा है और आठ साल निकल चुके हैं। इसलिए संविधान संशोधन हो, पदोन्नति में आरक्षण हो और रिजर्वेशन एक्ट बनाया जाए। मैं समझता हूं कि इस मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग हुई थी। सरकार ने भी कहा कि सर्वदलीय बैठक बुलाई जायेगी। लेकिन उसकी तिथि निर्धारित नहीं हो रही है। कम से कम तिथि निर्धारित करके सरकार घोषणा करे कि इसी सत्र में संविधान संशोधन पास कराया जायेगा।...( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : अब आप बोलिये।
श्री दारा सिंह चौहान: सरकार की तरफ से हमें आश्वासन मिलना चाहिए कि सरकार इस पर क्या करने जा रही है, सरकार संविधान संशोधन के लिए क्या करने जा रही है। आज पूरे हिंदुस्तान में गुस्सा है, इसलिए सरकार को इस पर अपना पक्ष रखना चाहिए।...( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : अब आप बैठ जाइये। बंसल जी, आप बोलिये।
…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : डा.डोम, आप बैठ जाइये।
…( व्यवधान)
MADAM SPEAKER: Dr. Dome, please take your seat.
… (Interruptions)
MADAM SPEAKER: Nothing will go on record.
(Interruptions) * MADAM SPEAKER: Yes, now, Mr. Minister.
THE MINISTER OF PARLIAMENTARY AFFAIRS AND MINISTER OF WATER RESOURCES (SHRI PAWAN KUMAR BANSAL): Madam, some of the hon. Members have raised the point… (Interruptions)
DR. RAM CHANDRA DOME (BOLPUR): The Government should come out with the amendment.… (Interruptions)
MADAM SPEAKEAR: Hon. Member, please sit down. Let the hon. Minister respond.
SHRI PAWAN KUMAR BANSAL: Madam, this matter is important and from time to time, as everybody knows, the Government has been proactive in assuring and ensuring the rightful place of the dalits in the country. There is no dispute about it.
The point has arisen because of the judgment of the Supreme Court; and, therefore, the matter has to be processed and proceeded with that way. There was a talk of calling an all Party meeting. From the Government I can again say that I would bring this matter to the notice of the concerned Minister also.
Madam, the meeting could not be held because of the events in the last month and a half. There were other things, which engaged the attention of the hon. Members; and perhaps many could not have been present here also. But I only would like to stand up again and say that the Government attaches utmost importance to this matter.
You yourself have said that you are prepared for a discussion under Rule 193; and we are okay with that... (Interruptions)
श्री दारा सिंह चौहान : सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपना क्या पक्ष रखा है, आप सुप्रीम कोर्ट में क्यों नहीं जा रहे हैं। यहां नियम 193 के तहत डिस्कशन करके इस मामले को लटकाना चाहते हैं।
SHRI PAWAN KUMAR BANSAL: It is not a matter that you go to the Supreme Court again about. मैडम, यह कहना वाजिब नहीं है कि सुप्रीम कोर्ट में क्यों नहीं जाते। कोर्ट में जो फैसला हो जाता है उस पर एकदम सुप्रीम कोर्ट में नहीं जाया जाता, उसके लिए मैं आपको यही कह रहा हूं कि मैं आपके साथ मुत्तफिक हूं। There, I do not differ with what the hon. Members are saying. I do not differ with what they are saying but then the response has to be worked out. The response has to be one which is a solid one and is not challenged later. The response has to be one which stands the test of time. … (Interruptions)
श्री दारा सिंह चौहान: संविधान में संशोधन किया जाए। ...( व्यवधान) अगर संविधान में संशोधन नहीं होगा तो हम बार-बार इसी तरीके से विरोध करेंगे। ...( व्यवधान)
श्री पवन कुमार बंसल: मैं यही कह रहा हूँ। ...( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : ठीक है, आपने अपनी बात कह ली है। अब आप बैठ जाइए।
…( व्यवधान)
श्री पवन कुमार बंसल: मैडम, यह एकदम जल्दबाज़ी में नहीं किया जा सकता है। ...( व्यवधान) जल्दबाज़ी में नहीं होता है। ...( व्यवधान) जो रिस्पांस होगा ...( व्यवधान) वह कंसिडर्ड रिस्पांस होना बनता है। ...( व्यवधान) और रिस्पांस वह है जो समय का टेस्ट पूरा कर सके। इसके लिए सरकार की जिम्मेदारी उसके हिसाब से बढ़ जाती है। सिर्फ एकदम जल्दबाज़ी में फ़ैसला नहीं लिया जाता है। ...( व्यवधान)
श्री दारा सिंह चौहान: जल्दबाज़ी नहीं है। ...( व्यवधान)
MADAM SPEAKER: All this will not go on record. Nothing else will go on the record.
(Interruptions) * श्री पवन कुमार बंसल: यह एक लॉन्गलास्टिंग फ़ैसले के लिए होना है।...( व्यवधान) मैं सिर्फ यही कहना चाहता हूँ कि सरकार इसके बारे में गंभीर है। ...( व्यवधान) सरकार इस इश्यू को संजीदगी के साथ लेगी। ...( व्यवधान)