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Lok Sabha Debates

Request To Increase The Government Advertisements In The Urdu Newspapers And ... on 19 December, 2000

Title: Request to increase the Government advertisements in the Urdu newspapers and also start Urdu langague TV Channel on Doordarshan.

श्री जी.एम.बनातवाला (पोन्नानी) :जनाब स्पीकर साहब, इन्फॉर्मेंशन एंड ब्रोडकास्िंटग मनिस्ट्री उर्दू के साथ इंसाफ नहीं कर रही है। डी.ए.वी.पी. की जानिब से उर्दू अखबारात को दिये जाने वाले सरकारी इश्तहारात मे बराबर कमी होती चली जा रही है। १९९८-९९ में डी.ए.वी.पी. के कुल इश्तहारात में उर्दू का ---------------------------------------------------------------------------------------------------

* Not Recorded.

       

हिस्सा ३.६६ परसेंट या फीसदी था। पिछले साल १९९९-२००० में यह हिस्सा गठकर २.९४ प्रतिशत या फीसदी रह गया। कुछ विजारतों ने पहले यह वायदा किया था कि उर्दू इश्तहारात के लिए तो वह कोटा भी मुकर्रर करेंगे। लेकिन इस पर कोई अमल नहीं किया। सविल एविएशन मनिस्ट्री ने विजारते शहरी हवाबाजी ने ऐलान किया था कि उर्दू के लिए १० फीसदी कोटा मुकर्रर होगा। इस पर भी किसी किस्म का अमल नहीं किया गया है। एक तरफ तो यह है कि मुख्तलिफ रियासती हुकूमतें हैं जैसे उत्तर प्रदेश गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान और मुख्तलिफ दूसरी रियासती हुकूमतें हैं, वो भी उर्दू इश्तिहारात का उर्दू अखबारात जराइद और मैगजीन का जो दिया जाता है, उसमें कमी करती चली जा रही है। सर, उर्दू अखबारात का मुस्तकबिल खतरे में है। मैं एक और बात की तरफ तवज्जह दिलाऊं कि हमारी सरकार के जानिब से दो उर्दू मैगजीन निकलती हैं - एक योजना और दूसरा उर्दू वीकली समाचार। इतलाह यह है कि इन्फोर्मेशन एंड ब्रोडकास्िंटग मनिस्ट्री की तरफ से उन्हें भी बंद किया जा रहा है। यह हरगिज न हो। आखिर उर्दू वालों को मुलाजिमत के बारे में, रोजगार के बारे में जो सरकारी काम-काज और योजना के बारे इत्तिलात मिलती हैं, उससे उन्हें क्यों महरूम किया जाए।

सर, आखिरी बात कहकर मैं इस अहम् मजमून को मुकम्मिल करूं और वह यह है कि दूरदर्शन के ११ चैनल्स…( व्यवधान )

MR. SPEAKER: Shri Jaipal Reddy, there are other hon. Members who want to speak. Sometimes even senior Members are not allowing the junior Members to speak.

… (Interruptions)

MR. SPEAKER: I am having 53 notices. I do not know how to accommodate them.

… (Interruptions)

SHRI S. JAIPAL REDDY (MIRYALGUDA): Sir, this is an important issue.

MR. SPEAKER: Do you mean to say that others are not important issues?

SHRI S. JAIPAL REDDY : I only want to associate myself with Shri G.M. Banatwalla.

श्री जी.एम.बनातवाला:दूरदर्शन के ११ चैनल्स मुख्तलिफ लैंग्वेज के हैं, लेकिन उर्दू का एक भी नहीं चैनल नहीं है और जब यह सवाल किया जाता है तो हमें कहा जाता है कि उनके पास सरमाया नहीं है, उनके पास फंड नहीं है। लिहाजा यह जरूरी है कि उर्दू का भी एक चैनल जारी किया जाए।

उर्दू का भी एक चैनल शुरू किया जाए।…( व्यवधान )

MR. SPEAKER: There are other Members who have given notices to raise matters. This is not a debate. This is ‘Zero Hour’.

… (Interruptions)

SHRI G.M. BANATWALLA : It is there in my notice. … (Interruptions)

MR. SPEAKER: All right. But how much time do you want to take to raise this? This is ‘Zero Hour’.

… (Interruptions)

SHRI G.M. BANATWALLA : But please look at the time that others have taken. … (Interruptions) जब हम यहां उर्दू का इंसाफ मांगने के लिए खड़े हुए हैं तो वक्त तक नहीं मिल रहा है। यह तो बहुत ज्यादा जुल्म होगा। लेकिन मैं ज़ोर से कहना चाहूंगा कि उर्दू के साथ इनफॉर्मेशन ब्रॉडकास्िंटग मनिस्ट्री पूरे-पूरे तौर पर इंसाफ करे।…( व्यवधान )

MR. SPEAKER: You are a senior Member of the House. You know the procedure very well.

… (Interruptions)

SHRI S. JAIPAL REDDY : Sir, I have the privilege of being the Minister of Information and Broadcasting. I am very happy that Dr. Murli Manohar Joshi is ready to respond to this issue. I made a commitment. This declining trend in the matter of advertisement for Urdu journalism is very bad. You must do something to roll it back. … (Interruptions)

SHRI SUDIP BANDYOPADHYAY : Sir, I associate myself with what Shri Banatwalla said. … (Interruptions)

SHRI RUPCHAND PAL : Sir, I also associate myself with that issue. … (Interruptions)

MR. SPEAKER: All right. Shri Sudip Bandyopadhyay and Shri Rupchand Pal can associate themselves with that.

… (Interruptions)

SHRI VARKALA RADHAKRISHNAN (CHIRAYINKIL): Sir, Malayalam is also neglected. … (Interruptions)

MR. SPEAKER: It is with regard to Urdu and not with regard to Malayalam.

… (Interruptions)

मानव संसाधन विकास मंत्री, विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री तथा महासागर विकास मंत्री (डॉ.मुरली मनोहर जोशी):अध्यक्ष महोदय, सम्मानित सदस्यों ने उर्दू के संबंध में अपनी चिन्ताएं प्रकट की हैं।

…( व्यवधान )

SHRI VARKALA RADHAKRISHNAN : All the languages will have the same right under the Constitution. … (Interruptions)

MR. SPEAKER: Shri Radhakrishnan, what happened to you today? Please take your seat.

… (Interruptions)

डॉ. मुरली मनोहर जोशी : उर्दू भाषा के तौर पर उसके विकास और उसकी प्रगति की जिम्मेदारी हमारे शिक्षा विभाग के पास है और मैं आपको बताना चाहता हूं कि बराबर हर साल हमने उर्दू शिक्षा के लिए और उर्दू की प्रगति के लिए जो काउंसिल है, उसके बजट में निरंतर वृद्धि की है और आज चार-पांच गुना वृद्धि हम पिछले दो सालों में कर चुके हैं। आपको यह जानकर प्रसन्नता होगी कि हमने उर्दू में खताती के लिए कंप्यूटर एजुकेशन ट्रेनिंग सेन्टर्स चलाए हैं जिनकी संख्या देश में ५४ है। इसके जरिये उर्दू में काम करने वाले लड़के-लड़कियों के लिए काफी मात्रा में रोज़गार के साधन सुलभ हुए हैं। ६००० से अधिक लड़के और लड़कियों ने इन कंप्यूटर्स से पिछले साल तक शिक्षा ग्रहण की थी और इस साल हम २५ की संख्या बढ़ाएंगे और धीरे-धीरे १०० सेन्टर्स तक करने जा रहे हैं। आपको जानकर खुशी होगी कि उर्दू में कंप्यूटर खताती और डिज़ाइनिंग के प्रोग्राम की वजह से बहुत से बच्चे जिनकी भाषा उर्दू नहीं थी, उन्होंने उर्दू सीखी। अभी जब उनका हमने दीक्षांत किया था, सर्टफिकेट लेने के लिए वे आए थे तो हमने देखा और अच्छा लगा कि बहुत बड़ी संख्या में ऐसे बच्चे थे जिनकी भाषा उर्दू नहीं थी, उर्दू उन्होंने पढ़ी नहीं थी, लेकिन उस कंप्यूटर से चूंकि रोज़गार के साधन सुलभ होते हैं, उन्होंने वह भाषा सीखी। इसके अलावा हमने मदरसों में कंप्यूटर्स और साइन्स टीचर्स के लिए स्कीम में पैसा भी बढ़ाया है। ८५० से अधिक मदरसों में साइन्स टीचर्स और कंप्यूटर्स दिये हैं और जो भी मदरसा इस मामले में आगे आता है, हम उसकी मदद करते हैं साइन्स टीचर्स और कंप्यूटर्स देने के लिए।

जहां तक ऐडवर्टाइज़मेंट का सवाल है, मैं आपकी चिन्ता को डी.ए.वी.पी. के मंत्री के सामने रखूंगा।…( व्यवधान )

श्री जी.एम.बनातवाला:मैगज़ीन बंद कर दी है।

डॉ. मुरली मनोहर जोशी : जी हां, मुझे मालूम है। उन दोनों बातों के बारे में मैं उनको बताऊंगा लेकिन बार-बार यह कहने की कोशिश की जाती है कि जैसे इस सरकार ने उर्दू के लिए कुछ किया नहीं। मैं बहुत विनम्रता से सम्मानित सदस्यों से कहना चाहता हूं कि पिछले २०-२५ सालों में उर्दू के लिए जो हुआ और पिछले ढाई सालों में जो हुआ, उसकी तुलना आप करेंगे तो पता लगेगा कि हमने उर्दू भाषा की प्रगति के लिए कितना काम किया है। हमने यह भी कहा है कि उर्दू का साहित्य जो बहुत अच्छे लेखकों, कवियों और अदीबों का है, उसको देवनागरी में छापा जाए। वह स्कीम भी हम लागू कर रहे हैं जिससे उसका बाज़ार बने और लोगों को पता चले कि उर्दू में कितना अच्छा साहित्य है और लोग उसको पढ़ें।

हमने यह भी कहा है कि उर्दू में इनफॉरमेशन टैक्नोलॉजी के लिए सॉफ्टवेयर बनाने का इंतज़ाम किया जाए और हमारी सरकार की तरफ से इनफॉर्मेशन टैक्नोलॉजी डिपार्टमेंट के अंतर्गत सी-डैक पुणे से हमने कहा है और भारत की सभी भाषाओं में इनफॉर्मेशन टैक्नोलॉजी के सॉफ्टवेयर बनाने का काम वे कर रहे हैं।

अध्यक्ष महोदय, इसलिए कहीं पर मैं किसी के यह कहने की कोई जरूरत नहीं समझता कि सरकार ने उर्दू के साथ भेदभाव किया है । सरकार उर्दू को भारत की एक भाषा मानती है और उसी हिसाब से उसकी तरक्की के लिए काम कर रही है।

श्री जी.एम.बनातवाला: मिस्टर स्पीकर सर, मनिस्टर साहब से जितनी बातें मैंने पूछी उनका उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया है।…( व्यवधान )

श्री रामजीलाल सुमन (फिरोजाबाद):अध्यक्ष महोदय, मेरा बहुत महत्वपूर्ण मामला है।…( व्यवधान )

अध्यक्ष महोदय : आपको बोलने के लिए समय दूंगा।