Lok Sabha Debates
Regarding Attacks On North-Indian Students During Railway Examinations In ... on 20 October, 2008
> Title: Regarding attacks on North-Indian Students during Railway examinations in Maharashtra.
श्री देवेन्द्र प्रसाद यादव (झंझारपुर) : अध्यक्ष महोदय, अत्यंत संवेदनशील और राष्ट्रीय महत्व के विषय की तरफ मैं सरकार का ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं। कल दिनांक 19 अक्टूबर को न केवल दुखद बल्कि दुर्भाग्यपूर्ण घटना घटित हुई। उत्तर भारतीय रेलवे भर्ती के परीक्षार्थियों पर जिस तरह से महाराष्ट्र नव निर्माण सेना और शिव सेना द्वारा, ये दोनों सेना हैं, जानलेवा हिंसक हमला किया गया, वह हमारे लिए बहुत ही शर्मनाक है। क्षेत्रवाद और भाषावाद के नाम पर उत्तर भारतीयों पर लगातार यह पांचवी बार हमला है। एक बार नहीं, पिछली फरवरी से लगातार यह हिंसक हमला हो रहा है। लाखों लोगों का जानमाल असुरक्षित है। इस प्रकार की आतंकवादी घटना कट्टरपंथी संगठनों द्वारा मुम्बई में, महाराष्ट्र में की जा रही है।[r10] आज इस घटना से उत्तर-भारत के लाखों लोगों के मन में असुरक्षा का भाव पैदा हो गया है। यह देश की एकता और अखंडता पर न केवल चोट है बल्कि भारतीय संविधान को धत्ता बताने वाला कृत्य किया गया है, । यह देश को टुकड़े-टुकड़े और बंटवारा करने वाला संविधान विरोधी आचरण किया गया है। इसके बावजूद भी महाराष्ट्र के मुख्य मंत्री चुप्पी साधे हुए हैं। महाराष्ट्र के मुख्य मंत्री ने बयान दिया है ...( व्यवधान) मैं इस बात पर किसी से कोई समझौता नहीं करूंगा। यह देश की राष्ट्रीय एकता और अखंडता को महफूज रखने का सवाल है। ...( व्यवधान) कल महाराष्ट्र के मुख्य मंत्री ने इस घटना पर गैर-जिम्मेदाराना बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि मुझे सूचना नहीं है, मैं चुनौती के रूप में कहना चाहता हूं कि रेलवे के आरपीएफ के डीजी ने स्पष्ट रूप से 17 तारीख को सभी डिवीजन में सूचना दी है, जहां-जहां रेलवे भर्ती की परीक्षा आयोजित हुई थी। शोलापुर डिवीजन में कहा है, मैं आपकी अनुमति से उसकी केवल एक ऑपरेटिव लाइन उद्धृत करना चाहूंगा।...( व्यवधान) क्योंकि आपकी अनुमति के बिना कुछ भी उद्धृत नहीं किया जा सकता।
MR. SPEAKER: Thank you very much.
...( व्यवधान)
श्री देवेन्द्र प्रसाद यादव : अध्यक्ष महोदय, मैं नियम जानता हूं। CP, Sholapur has also been requested for deploying local police. यह आरपीएफ का डीजी 17 अक्तूबर को रिटन में भेज रहा है। मुख्य मंत्री जी का बयान आया है कि मुझे सूचना नहीं है। नागपुर डिवीजन में भी यही बात हुई है। CP, Nagpur has also been requested for deploying local police. मुंबई डिवीजन में और जहां-जहां परीक्षा थी, वहां भी कहा है - CP, Navi Mumbai, Thane, has also been asked for making necessary arrangements. लोकल पुलिस के लिए कहा गया है। इसके बाद भी महाराष्ट्र की सरकार… * MR. SPEAKER: I will look into it. Now, Shri Ramji Lal Suman may speak.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: These words will not go on record.
… (Interruptions)
श्री देवेन्द्र प्रसाद यादव (झंझारपुर) : हमने मुख्य मंत्री का नाम नहीं लिया है।...( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय, मैं आपसे निवेदन करना चाहता हूं कि केन्द्र सरकार इस मामले में तुंत हस्तक्षेप करे। सिचुएशन ऐसी निर्माण हो गई है, जो गुंडागर्दी से महाराष्ट्र में संवैधानिक ब्रेक डाउन है, इसके लिए हम सब केन्द्र सरकार से मांग करते हैं कि संविधान की धारा 355 के तहत लॉ एंड आर्डर को अपने हाथ में लें और लोगों को सुरक्षित करें। उत्तर-भारत के लाखों लोग बरसों से जो वहां रह रहे हैं, जिन्होंने महाराष्ट्र की आर्थिक दशा में सुधार किया है, उन लोगों पर जानलेवा हमला हो रहा है।
अध्यक्ष महोदय, मैं दूसरी मांग यह करना चाहता हूं, मुझे पता नहीं है ये बता रहे हैं कि शिवसेना के कम लोग थे। ये लोग कम हों या ज्यादा हों। यह जो नवनिर्माण सेना गुंडागर्दी कर रहे हैं।...( व्यवधान) एमएनएस गुंडागर्दी कर रहा है।...( व्यवधान)
MR. SPEAKER: It is enough, Shri Yadav. I have called Shri Suman to speak.
… (Interruptions)
श्री देवेन्द्र प्रसाद यादव : नवनिर्माण सेना के नेता और कार्यकर्त्ता तथा शिवसेना को, जितने नेता इसमें दोषी हैं, कार्यकर्त्ता हैं,...( व्यवधान) उन्हें मीसा के तहत राष्ट्रीय कानून में लाकर गिरफ्तार किया जाना चाहिए। ...( व्यवधान) शिवसेना और (Interruptions) …* MR. SPEAKER: That name will be deleted.
...( व्यवधान)
श्री देवेन्द्र प्रसाद यादव : शिवसेना और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना को प्रतिबंधित किया जाए।...( व्यवधान) बैन लगाया जाए। ...( व्यवधान) अगर इन दोषी लोगों को गिरफ्तार नहीं किया गया तो विरोध में राष्ट्रव्यापी * Not recorded.
आंदोलन होगा। भारतीय संविधान की रक्षा के लिए राष्ट्रीय एकता और अखंडता को बनाए रखने के लिए..( व्यवधान) ये आतंकवाद फैला रहे हैं।...( व्यवधान) ये जो एक तरफ आतंकवादी राष्ट्रविरोधी हैं और दूसरी तरफ क्षेत्र एवं भाषा के नाम पर आतंक फैलाया जा रहा है। ...( व्यवधान) सरकार लोगों के जानमाल की सुरक्षा की गारंटी दे, नहीं तो लोग आंदोलन करेंगे।...( व्यवधान)[s11] श्री रामजीलाल सुमन : अरे बोलने दो, भाई। …( व्यवधान)मुझे बोलने दो, भाई।
MR. SPEAKER: Nothing else except the speech of Shri Ramjilal Suman will go on record.
(Interruptions) … (Not recorded) श्री रामजीलाल सुमन : रामकृपाल जी, एक मिनट मेरी बात सुनिये।
अध्यक्ष महोदय, हाऊस व्यवस्थित करिये।...( व्यवधान)
MR. SPEAKER: Shri Syed Shahnawaz Hussain will be called.
… (Interruptions)
श्री रामजीलाल सुमन : अध्यक्ष महोदय, कल ठाणे, महाराष्ट्र में 13 स्थानों पर रेलवे की परीक्षा होनी थी, जिसमें बड़ी संख्या में उत्तर भारत के छात्र शामिल हुए थे...( व्यवधान)
MR. SPEAKER: Do not take the name of any individual. Do not criticise the State Government.
… (Interruptions)
श्री रामजीलाल सुमन : जिनमें बिहार और उत्तर प्रदेश के छात्रों की संख्या ज्यादा थी। पूरे देश के लोग उसमें शामिल हुए थे। महाराष्ट्र की जो तथाकथित नवनिर्माण सेना है, इसके जो अध्यक्ष हैं, … * ये आज से नहीं, एक लम्बे समय से हरकत कर रहे हैं। फरवरी, 2003 में भी जब इस प्रकार की परीक्षा हुई थी, तब भी उत्तर भारत के लड़कों के साथ मारपीट की गई थी, उनको डराया गया था, धमकाया गया था। अब ये कह रहे हैं कि अभी तो यह शुरूआत है, छठ के अवसर पर हम अपनी ताकत को और ज्यादा दिखाएंगे। मेरी समझ में नहीं आता कि कभी महाराष्ट्र में और कभी असम में उत्तर भारतीयों के साथ इस प्रकार की हरकतें की जाती हैं। उनको मारा जाता है, उनके साथ मारपीट की जाती है। यह देश एक है और इस प्रकार की घटनाओं को देशतोड़क घटना कहा जा सकता है। मेरा आरोप है कि महाराष्ट्र की सरकार को * Not recorded.
इसे जिस तरह से डील करना चाहिए, जिस तरह से समस्या को देखना चाहिए, महाराष्ट्र की सरकार इस समस्या से लड़ाई में उदार है।...( व्यवधान) मेरा आरोप है...( व्यवधान)
MR. SPEAKER: This is not the State Assembly. Do not do it. You can refer to the role of Central Government.
… (Interruptions)
श्री रामजीलाल सुमन : अध्यक्ष महोदय, हम चाहते हैं, मेरी मांग है कि …* की इस पार्टी पर बैन लगाया जाये और तत्काल उनको गिरफ्तार किया जाये, जिससे भविष्य में इनकी हिम्मत इस प्रकार की घटनाओं को करने की न हो। यह बहुत गम्भीर मामला है और महाराष्ट्र सरकार को इसमें कठोर कार्रवाई करनी चाहिए।
श्री देवेन्द्र प्रसाद यादव (झंझारपुर):यह इतना गम्भीर मामला है कि सरकार को इस पर रैस्पोंड करना चाहिए। ...( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : आप बोल चुके हैं।I have called Shri Syed Shahnawaz Hussain.
… (Interruptions)
अध्यक्ष महोदय : जाइये, बैठिये।
…( व्यवधान)
MR. SPEAKER: Hon. Members, your leader has made his submissions. ठीक है।
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: I have called him. I have called Shri Ramjilal Suman. I will call Shri Rajiv Ranjan Singh ‘Lalan’.
… (Interruptions)
श्री सैयद शाहनवाज हुसैन (भागलपुर):अध्यक्ष महोदय, देवेन्द्र जी ने और सुमन जी ने जो विषय उठाया, मैं भी उसी विषय को उठाने के लिए यहां पर खड़ा हुआ हूं।
16.25 hrs. (Shri Varkala Radhakrishnan in the Chair) सभापति महोदय, दुर्भाग्य की बात यह है कि आज केन्द्र में भी यू.पी.ए. की सरकार है और * Not recorded.
महाराष्ट्र में भी यू.पी.ए. की सरकार है, कांग्रेस और एन.सी.पी. की गवर्नमेंट है।...( व्यवधान) हमारे घटक नहीं हैं। बिहार पर भी जब ये बोल रहे थे, बिहार के विषय पर भी बिहार के सांसद टोक रहे हैं। मैं बिहार के लोगों का दर्द यहां रख रहा हूं। उसमें आप साथ दीजिए। हम लोगों ने भी साथ दिया है। यहां पर हमारे दल की बात नहीं है। हम सब बिहारी हैं, इसलिए इस विषय को उठाने दीजिए।...( व्यवधान)
आज से यह हमला नहीं हो रहा है, जब से महाराष्ट्र के अन्दर कांग्रेस-एन.सी.पी. की सरकार है और केन्द्र में भी सरकार उन्हीं की है। आज रेलवे की परीक्षा हुई, उसको पूरी सुरक्षा दी जानी चाहिए थी। रेल मंत्री भी यू.पी.ए. सरकार के हैं और देश के गृह मंत्री भी यू.पी.ए. की सरकार के हैं। वहां पर महाराष्ट्र के अन्दर मुख्यमंत्री भी यू.पी.ए. के हैं। हम आपके माध्यम से यह जानना चाहते हैं कि बाहर के लोगों के साथ जिस तरह जुल्म-ज्यादती हुई, जिस तरह जो उत्तर भारत के लोग हैं, जिनके साथ महाराष्ट्र के अन्दर एक व्यक्ति अनर्गल अलाप करके अपनी पब्लिसिटी चाहते हुए, जिस तरह से अन्याय कर रहा है,[R12] यह देश की एकता और अखंडता पर खतरा बनेगा। मैं आपके जरिए यह कहना चाहता हूं कि अगर यूपीए सरकार के एक घटक दल आरजेडी ने मांग की है कि धारा 355 वहां पर लागू की जाए, तो क्या यह सरकार धारा 355 का नोटिस देगी या नहीं देगी? क्योंकि रूलिंग पार्टी के लोगों ने यह मांग की है, उनको 355 के तहत ...( व्यवधान)
MR. CHAIRMAN : Please conclude. You can only mention the subject. No, it cannot be allowed.
… (Interruptions)
श्री सैयद शाहनवाज़ हुसैन : अभी मैंने शुरू भी नहीं किया है, सभापति जी, आप कांक्ल्यूड कह रहे हैं। ...( व्यवधान) अभी तो हल्ला हो रहा था, जब आप आए। ...( व्यवधान)
MR. CHAIRMAN: Please conclude. You have made your point. Please conclude.
… (Interruptions)
श्री सैयद शाहनवाज़ हुसैन : महोदय, इसलिए मैं अनुरोध करना चाहता हूं कि इस देश के अंदर आजादी के बाद किसी को भी यह अधिकार है, आज भारत के लोग अमेरिका में जाकर काम कर सकते हैं, यूरोप में काम कर सकते हैं, पूरे गल्फ रीजन में काम कर सकते हैं। सभापति जी, आपके केरल के बहुत बड़ी तादाद में लोग बहरीन में रहते हैं, वहां की आबादी से ज्यादा केरल के लोग वहां रहते हैं, यहां के लोग पूरी दुनिया में रहते हैं। क्या इस देश में भी बिहार और उत्तर प्रदेश के लोगों को या इस देश के लोगों को कहीं पर किसी नेता के परमिट की जरूरत होनी चाहिए? कांग्रेस सरकार की नरमी की वजह से आज राज ठाकरे का मनोबल बढ़ा है। अगर उनका मनोबल बढ़ा है, तो देश के गृहमंत्री शिवराज पाटिल जी को इसका जवाब देना होगा कि राज ठाकरे को तुंत गिरफ्तार क्यों नहीं किया?
सभापति जी, मैं आपके माध्यम से यह कहना चाहता हूं कि यूपीए के लोग यह विषय उठा रहे हैं, लेकिन तुमने ही दर्द दिया है, तुम ही दवा देना। यह सरकार भी आपकी है और मामला भी आप ही उठा रहे हैं। इसलिए यहां सरकार की तरफ वक्तव्य आना चाहिए, क्योंकि एकमात्र कैबिनेट मंत्री यहां लालू प्रसाद जी बैठे हैं। मैं चाहूंगा कि जब मैंने यह विषय उठाया, तो वे ऑन बिहाफ आफ गवर्नमेंट इस पर रिस्पांड करें कि इनकी सरकार महाराष्ट्र सरकार के खिलाफ क्या कार्रवाई कर रही है? वहां की सरकार को बरखास्त करना चाहिए, क्योंकि इस सरकार के रहते वहां बिहार, उत्तर प्रदेश और उत्तर भारतीय लोगों की जान सुरक्षित नहीं है। यही मैं आपसे अनुरोध करना चाहता हूं। सरकार को तुंत रिस्पांड करना चाहिए। जब-जब यह विषय उठता है, हम लोग उठाते हैं, लेकिन इसका कोई जवाब नहीं आता है, लीपापोती होती है। इसीलिए मैं आपके माध्यम से कहना चाहता हूं कि इस विषय को सरकार गंभीरता से ले।
श्री राजीव रंजन सिंह 'ललन' : सभापति महोदय, देवेन्द्र प्रसाद जी ने बहुत महत्वपूर्ण सवाल की ओर सदन का ध्यान आकृष्ट किया है। लेकिन देवेन्द्र जी ने सवाल को उठाते-उठाते उसको डीरेल्ड कर दिया है।
MR. CHAIRMAN: Please conclude. You have made your point. Please speak on the point because a lot of Members have given notices on this subject.
… (Interruptions)
SHRI RAJIV RANJAN SINGH ‘LALAN’ (BEGUSARAI): Sir, I am speaking on the same point. … (Interruptions)
MR. CHAIRMAN: Please come to the point and then speak.
… (Interruptions)
श्री राजीव रंजन सिंह 'ललन' : लेकिन उसको उन्होंने उसको डीरेल्ड कर दिया है। हमारे देश की यही खूबी है कि यहां अनेकता में एकता है। कई भाषा के लोग, कई संस्कृति के लोग, कई जाति के लोग यहां रहते हैं, यहां अनेकता में एकता है। कई भाषा के लोग, कई संस्कृति के लोग, कई जाति-समुदाय के लोग इस देश में रहते हैं और आपसी भाईचारा और सौहार्द इनमें कायम रहता है। लेकिन महाराष्ट्र में पिछले एक साल से जो हो रहा है, एक मानसिक दीवालिया और मानसिक रूप से बीमार व्यक्तित्व वहां पूरे देश की एकता और अखंडता के लिए खतरा पैदा कर रहा है। महाराष्ट्र की राज्य सरकार की जिम्मेदारी है, कानून व्यवस्था संभालना राज्य सरकार की जिम्मेदारी होती है। एक साल से वहां ये घटनाएं हो रही हैं। क्यों नहीं एक मानसिक दीवालिया व्यक्ति को आज तक महाराष्ट्र सरकार नियंत्रित नहीं कर पायी? एक साल से केंद्र की सरकार यहां बैठकर क्या कर रही है? दोनों जगह कांग्रेस पार्टी की सरकार है। कहीं ऐसा तो नहीं कि इस पूरे मामले में कांग्रेस पार्टी का चुनावी खेल चल रहा हो और वहां सरकार अस्थिरता पैदा करना चाहती है। क्या केंद्र की सरकार और राज्य सरकार दोनों मिलकर फिर से कहीं महाराष्ट्र में आतंकवादी गतिविधि को बढ़ावा तो नही दे रही हैं? आज यह सवाल देश के सामने है। आज उत्तर भारतीय लोगों के सामने यह सवाल खड़ा है, इसलिए आज जरूरी है, अगर केन्द्र सरकार में साहस है, तो कल धारा 355 का नोटिस दे और वह व्यक्ति जो संगीन में और सुरक्षा के घेरे में बैठा रहता है और बाहर तमाशा करा रहा है, गुंडागर्दी करा रहा है, उसको नियंत्रित करे, तो हम लोग समझेंगे कि केंद्र की सरकार उत्तर भारतीय लोगों के प्रति गंभीर है, नहीं तो, यह संदेश जाएगा कि केंद्र की सरकार और कांग्रेस पार्टी की सरकार का इसमें हाथ है।[p13] मोहम्मद सलीम (कलकत्ता - उत्तर पूर्व) : सभापति महोदय, यह बहुत गंभीर मामला है और पिछले एक साल से कई बार ऐसे मुद्दे आए। कल जो बात हुई, रेल की भर्ती की परीक्षा में हमारे नौजवान परीक्षार्थी बनकर जाएंगे। सरकारी कानून का बंदोबस्त है। अगर महाराष्ट्र में भाषा के नाम पर, प्रांतीयता के नाम पर, उत्तर भारत खासकर बिहार और उत्तर प्रदेश से जो लोग गए या महाराष्ट्र में दूसरी भाषा के दूसरे क्षेत्र से आए हुए लोग वहां परीक्षा देने जाते हैं। रेल भारतीय संस्था है। हम बोलते हैं कि रेल सबको जोड़ती है। हमारा देश एक संघीय ढांचा है। उस ढांचे को कमजोर करने के लिए भाषा के नाम पर, प्रांतीयता के नाम पर ऐसे तत्व काम कर रहे हैं। कल ठाणे में जो हुआ, वह बहुत ही घिनौना काम हुआ। हमने टेलीविजन में देखा था। लोग फार्म फिल-अप करके, एडमिट कार्ड लेकर परीक्षा देने गए लेकिन वहां उन्हें सुरक्षा नहीं दी गई, बल्कि कुछ ऐसे तत्व थे जिन्होंने वहां जाकर हमला किया। वहां लोगों को इस तरह खदेड़ा जा रहा था जैसे जंगली जानवरों पर हमले हो रहे हैं। यह हमारे देश की एकता और अखंडता के लिए बहुत गलत संदेश है। नई पीढ़ी के नौजवानों को हम क्या संदेश देना चाह रहे हैं। हम जानते हैं कि महाराष्ट्र में सरकार की कमजोरी है। हम संसद में विधान सभा की बात नहीं करना चाहते, लेकिन केन्द्र सरकार और वहां की राज्य सरकार ऐसे अनासिर से निपटने से डरते हैं, उनके घुटने कांपते हैं।...( व्यवधान) मैंने यहां पिछली बार भी कहा था।...( व्यवधान) जो व्यक्ति श्री राज ठाकरे और जो एमएलएज इस हमले को खुलेआम डिफैंड कर रहे हैं, उस बारे में हम देखें कि वहां सरकार, पुलिस कमिश्नर, पुलिस अफसर उन्हें सुरक्षा देने के बारे में पूछें कि आप आराम से हैं, कोई परेशानी तो नहीं है, पिछली बार यह पूछा। उन्हें अरैस्ट नहीं किया। आज संसद यह बात कर रही है। लालू जी रेल मंत्री हैं। मैं उनसे भी कहता हूं। यूपीए सरकार यह कहकर आई थी कि अगर भाषा के नाम पर, धर्म के नाम पर, जात-पात के नाम पर, प्रांतीयता के नाम पर कोई भी हमले होंगे, उन्हें हम बरदाश्त नहीं करेंगे। आप अपने गृह मंत्री जी को क्यों नहीं बोलते, प्रधान मंत्री जी को क्यों नहीं बोलते, यूपीए की चेयरपर्सन को क्यों नहीं बोलते? वहां यूपीए के ही दो घटक सरकार चला रहे हैं। रेल भारतीय संस्था है।...( व्यवधान) उस पर सब भाषा, सब प्रांत, सब क्षेत्र के लोगों का अधिकार है। ग्रुप डी में खास तौर से इम्प्लॉयमैंट एक्सचेंज से भर्ती की जाता है। यदि हम श्री राज ठाकरे के इस घिनौने काम को नकारते हैं तो रेल मंत्री को भी यह देखना पड़ेगा कि रेल चलाने के नाम पर, रेल में भर्ती के नाम पर ऐसा कोई कदम नहीं उठायेंगे कि ऐसी प्रांतीयता और भाषा के नाम पर, जो देश को तोड़ना चाहते हैं, उन्हें मौका मिल जाए, ऐसा भी नहीं होना चाहिए। यूपीए सरकार से हम दर्खास्त करेंगे, वरना आप अपनी चुनावी राजनीति करेंगे और देश कमजोर होगा, हम उसके विरोधी हैं।
श्री अनंत गंगाराम गीते (रत्नागिरि): सभापति जी, रेल भर्ती के मामले में जो परीक्षार्थी ठाणे, नई मुम्बई में गए थे, उन पर घिनौना हमला या मार-पीट हुई, मैं उसकी निन्दा करता हूं। किसी भी ऐसी हरकत का कोई समर्थन नहीं कर सकता। लेकिन जो सारी रेल भर्ती को लेकर घटनाएं हो रही हैं, उसकी जड़ में भी जाने की आवश्यकता है। आज महाराष्ट्र में भी 42 लाख शिक्षित बेरोजगार लोग हैं।...( व्यवधान) आप सुन लीजिए।...( व्यवधान) आप इसका सौल्यूशन चाहते हैं या इस पर सिर्फ विवाद करना चाहते हैं।...( व्यवधान)
सभापति जी, हमें विवाद करना है या इसका सौल्यूशन निकालना है।...( व्यवधान) यदि इस मसले को हल करना है तो हमें उस संदर्भ में सोचना भी चाहिए।...( व्यवधान)
श्री सीताराम सिंह (शिवहर) :पूरे देश के लोग रेल की परीक्षाओं में बैठते हैं, किसी को मनाही नहीं है।...( व्यवधान)
MR. CHAIRMAN: You please address the Chair.
… (Interruptions)
श्री अनंत गंगाराम गीते : सभापति जी, ये क्या तरीका है? ...( व्यवधान) आप बोलने भी नहीं देंगे?...( व्यवधान)
MR. CHAIRMAN: You please address the Chair.
… (Interruptions)
श्री अनंत गंगाराम गीते : सभापति जी, क्या ये बोलने भी नहीं देंगे?...( व्यवधान)
MR. CHAIRMAN: You need not look at them. You please address the Chair.
रेल मंत्री (श्री लालू प्रसाद) : गीते जी, आप ईमानदारी से बोलिए।...( व्यवधान)
श्री अनंत गंगाराम गीते : मैं यहां कोई गलत बात बिल्कुल नहीं कहूंगा। मुझे न ही आपको उकसाना है।...( व्यवधान)
श्री राजीव रंजन सिंह 'ललन' (बेगूसराय) : इनका कहने का मतलब है कि आप आरआरबी का ऑफिस वहां से उठा लीजिए।...( व्यवधान)[N14] श्री अनंत गंगाराम गीते : सभापति महोदय, आज बेरोजगारी की समस्या पूरे देश में है। महाराष्ट्र में भी 42 लाख शिक्षित बेरोजगार हैं। ...( व्यवधान) लालू जी, आप सुन लीजिए। हमारे जितने भी नैशनलाइज्ड बैंक्स हैं, इंश्योरेंस कम्पनीज हैं, वे भी राष्ट्रीय स्तर की हैं। जब उनकी भर्ती होती है, तो इस प्रकार का विवाद आज तक न कभी मुम्बई में हुआ है और न ही कहीं और हुआ है। यह भर्ती बैंकों में भी होती है और इंश्योरेंस कम्पनीज में भी होती है। रेलवे भर्ती बोर्ड ने जो तरीका अपनाया है, उसके कारण यह विवाद हो रहा है। ...( व्यवधान) आप समझ लीजिए। मैं जो कह रहा हूं, उसकी आप जांच करवाइये। यदि यह गलत है ...( व्यवधान)
श्री लालू प्रसाद : क्या तरीका होना चाहिए?
श्री अनंत गंगाराम गीते (रत्नागिरि): मैं आपको बता रहा हूं, आप समझ लीजिए।...( व्यवधान)
जैसे अभी सारे नैशनलाइज्ड बैंकों में ऑल ओवर इंडिया से भर्ती होती है, लेकिन आपने कभी सुना है कि मुम्बई में हमला हुआ, किसी की मार-पीट हुई। इंश्योरेंस कम्पनियों में भी नैशनल लैवल पर रिक्रूमटमैंट होती है। आपने कभी ऐसा सुना है। ...( व्यवधान)
MR. CHAIRMAN : Nothing will go on record except what Shri Anant Gangaram Geete says.
(Interruptions)* … श्री अनंत गंगाराम गीते : सभापति जी, जो गलत काम है, उसकी निन्दा हमने भी की है। अब भी हम उसकी निंदा करते हैं। हम उसका कोई समर्थन नहीं कर रहे हैं, लेकिन आप वास्तविकता को स्वीकार करेंगे या नहीं? ...( व्यवधान) मैं आपको बता रहा हूं। ...( व्यवधान) मैं वही सॉल्यूशन आपको दे रहा हूं। रेलवे भर्ती बोर्ड का जो तरीका है ...( व्यवधान) आप लोग नहीं बोलने देंगे, तो हम खामोश बैठेंगे। आप सॉल्यूशन निकालिए। ...( व्यवधान) आप सॉल्यूशन निकालिए, हम बैठ जाते हैं। ...( व्यवधान) वहां भर्ती हो जाने * Not recorded.
दीजिए। ...( व्यवधान) आप सॉल्यूशन निकालो। ...( व्यवधान) मुझे नहीं बोलना, आप भर्ती करिए। आप धमकाकर भर्ती करेंगे। ...( व्यवधान) सदन में यह हालत है। ...( व्यवधान) लालू जी, इस संसद में यदि यह हालत है और इस प्रकार से धमका कर भर्ती करवाना चाहते हैं, तो आप भर्ती करिए। ...( व्यवधान) क्या आप हमें बोलने नहीं देंगे? ...( व्यवधान)
MR. CHAIRMAN: Nothing will go on record except what Shri Anant Gangaram Geete says.
(Interruptions)* … श्री अनंत गंगाराम गीते : मैं दो मिनट में अपनी बात खत्म कर रहा हूं। रेलवे भर्ती बोर्ड का जो तरीका उन्होंने अपनाया है, वह बहुत गलत है। आपने रीजनल बोर्ड्स बनाये थे। जहां तक इंश्योरेंस कम्पनियों और बैंकों का मामला है, वहां पर त्रिभाषी सूत्र अपनाया गया है। यदि भर्ती होती है, तो अंग्रेजी अखबारों में भी उसका इश्तिहार आता है। हिन्दी के अखबार में भी इश्तिहार आता है और रीजनल लेंग्वेज के जितने भी अखबार हैं, उनमें भी इश्तिहार आता है। लेकिन रेलवे भर्ती बोर्ड का रीजनल लेंग्वेज के अखबारों में कभी इश्तिहार आता ही नहीं है। ...( व्यवधान) सभापति जी, आप सुन लीजिए। रीजनल लेंग्वेज में कहीं भी इश्तिहार नहीं है। हम आपको प्रूव करके दिखायेंगे।
दूसरी बात यह है कि जब इस प्रकार की रिक्रूटमैंट होती है ...( व्यवधान) यह रीजनल रिक्रूटमैंट बोर्ड्स किसलिए बनाये गये हैं? आपने रीजनवाइज बोर्ड्स इसलिए बनाये हैं कि उस रीजन में रहने वाले जो बेरोजगार हैं, उनको अवसर मिले। ये रीजनल रिक्रूटमैंट बोर्ड्स क्यों बनाये गये हैं? आपने इनको किसलिए बनाया है? ...( व्यवधान)मैं कुछ नहीं बोलना चाहता हूं। आपने ये रीजनल बोर्ड्स क्यों बनाए हुए हैं? उनको बर्खास्त कीजिए। मैं एक उदाहरण देना चाहता हूं। कुछ दिन पहले एसिस्टेंट मोटरमैन की रिक्रूटमेंट हुई।
श्री विजय कृष्ण (बाढ़):हम आपको विज्ञापन दिखाएंगे।
श्री अनंत गंगाराम गीते : जब एसिस्टेंट मोटरमैन की रिक्रूटमेंट हुई, एक पोस्ट के लिए रिक्रूटमेंट हुई। सारे देश में उनके लिए जो क्वेश्चन पेपर रखा गया, वह पूरे देश में एक जैसा होना चाहिए था, लेकिन उसके लिए रीजनवाइज अलग-अलग पेपर दिए गए। आप इसकी जांच कीजिए। उसमें ए, बी, सी, डी और ई ग्रेड्स बनाए गए। मोटर एसिस्टेंट की एक पोस्ट के लिए इस तरह से ग्रेडीफिकेशन किया गया। यह क्या * Not recorded.
है? मोटरमैन तो एक ही होगा जो मुंबई में ट्रेन चलाएगा, वही पटना से चलाएगा, वहा इलाहाबाद से चलाएगा। यह भर्ती करने का कौन सा तरीका है? आप यह क्या कर रहे हैं?
श्री लालू प्रसाद : इसके लिए आप उनको मारेंगे?
श्री अनंत गंगाराम गीते : आपने इस तरह से ग्रेडेशन करने की जो नीति बनाई है, वह गलत है।
श्री लालू प्रसाद : इसीलिए आपने उनको पीटा है।
श्री अनंत गंगाराम गीते : आपकी इस ग्रेडेशन की नीति के कारण रीजनल लोगों को इसका लाभ नहीं मिल पाता है। आप रिक्रूटमेंट का सिस्टम बदलिए, बैंक्स और इंश्योरेंस कंपनीज की तरह रिक्रूटमेंट के तरीके अपनाइए। आपको इसके बारे में मेरे उड़ीसा के माननीय सदस्य बताएंगे जो मेरे बाद बोलेंगे। हम संविधान के खिलाफ नहीं हैं। जो भी कैण्डीडेट्स हैं, वे एग्जाम दे सकते हैं, लेकिन उसके बारे में अखबारों में इश्तिहार देना चाहिए, रीजनल लैंग्वेज में इश्तिहार रेलवे रिक्रूटमेंट बोर्ड्स द्वारा दिए जाने चाहिए। अगर इसका इस तरह से सोल्यूशन किया जाता है, तो इस पर इस सदन में चर्चा करने की आवश्यकता नहीं है।
श्री राजेश वर्मा (सीतापुर) : सभापति जी, कल महाराष्ट्र में रेलवे स्टेशन पर जो घटना हुई, परीक्षार्थियों के ऊपर जो हमला हुआ है, वह बहुत ही शर्मनाक है, पूरे देश ने उस पर बहुत विरोध जताया है। यहां कोई दल नहीं है, यहां कोई भाषावाद, कोई जातिवाद या कोई क्षेत्रवाद की बात नहीं है। जो घटना महाराष्ट्र में रेलवे स्टेशन पर निरीह छात्रों के साथ हुई, जिस तरह से उन पर बर्बरतापूर्वक लाठीचार्ज किया गया और हमला हुआ है, वह बहुत निन्दनीय है। हमारे संविधान में यह व्यवस्था है कि इस देश में पैदा होने वाले हर व्यक्ति को इस देश के किसी भी कोने में रहने का अधिकार है, पढ़ने-लिखने का अधिकार है, परीक्षा देने का अधिकार है, व्यवसाय और नौकरी करने का अधिकार है। क्षेत्रवाद और भाषावाद के नाम पर जिस तरीके से महाराष्ट्र में निरीह छात्रों पर हमले हुए, वह निन्दनीय है। मैं इस सदन से पूछना चाहता हूं, महाराष्ट्र की सरकार से पूछना चाहता हूं कि जिन उत्तर भारतीयों पर यह हमला हुआ है, क्या उन उत्तर भारतीयों के हाथों से महाराष्ट्र की सड़कों का निर्माण नहीं हुआ है? उन उत्तर भारतीयों के हाथों से वहां पर मिल और कारखाने नहीं बनाए गए हैं? क्या उन्हीं हाथों ने वहां पर बड़ी-बड़ी इमारतें नहीं बनाई हैं जिनमें महाराष्ट्र के लोग चलते हैं और रहते हैं? लेकिन जब वे लोग वहां पर एग्जामिनेशन देने जाते हैं, इन्टरव्यु देने जाते हैं तो उन पर इस तरह से हमला किया जाता है, यह बहुत ही शर्मनाक घटना है। हमारी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी इसका प्रबल विरोध करती है। हमारे साथी श्री गीते जी कह रहे थे कि रेलवे भर्ती बोर्ड की परीक्षा को लेकर यह हमला हुआ है। मैं पूछना चाहता हूं कि रेलवे भर्ती बोर्ड को लेकर निरीह छात्रों पर इस तरह से छात्रों पर लाठियां चलाई जाएंगी? यह कौन सा तरीका है? यदि आपको लगता है कि परीक्षा का यह तरीका गलत है तो आपको इसके बारे में डिबेट करना चाहिए, आपको उसके बारे में चर्चा करनी चाहिए, लिखा-पढ़ी करनी चाहिए, लेकिन उसके लिए उत्तर भारतीयों पर अगर लाठी चलाई जाएगी, तो यह गलत है। इससे उत्तर भारतीय लोगों में भय व्याप्त हो गया है। मैं सदन से यह पूछना चाहता हूं कि क्या उत्तर प्रदेश में निर्मित हुई चीज क्या महाराष्ट्र के लोगों के काम नहीं आएगी? बिहार या उत्तर प्रदेश में निर्मित हुई चीज का उपयोग महाराष्ट्र में किया जाता है, इसी तरह से महाराष्ट्र में निर्मित हुई चीजों का उपयोग उत्तर प्रदेश, बिहार एवं देश के अन्य सभी प्रदेश करते हैं। मुजफ्फरपुर, बिहार में जो लीची उत्पन्न होती है, वह महाराष्ट्र के लोगों को बहुत अच्छी लगती है। [R15] लेकिन उत्तर भारतीय जो पैदा करते हैं और उनका उत्पाद वहां जाता है, उन्हीं पर लाठियां चलाई जाएं तो यह शोभा नहीं देता है। सभापति महोदय, मैं अपनी बात खत्म कर रहा हूं। मैं यह कहना चाहता हूं कि यह जो घटना घटी है, शर्मनाक है। अनंत गीते जी ने अभी जो कहा और रेलवे भर्ती बोर्ड में उन्हें जो अनियमितता नजर आती है, तो इस बात को लेकर उत्तर भारत के निरीह छात्रों पर लाठियां चलाना कतई न्यायोचित नहीं है। महाराष्ट्र में कांग्रेस पार्टी की सरकार है और केन्द्र में भी कांग्रेस पार्टी के नेतृत्व में यूपीए सरकार है। लेकिन वह कानों में रूईं डालकर बैठी हुई है। इनकी तरफ से न तो इस घटना पर कोई स्टेटमेंट आया है और न ही इसकी निंदा की गई है। देवेन्द्र प्रसाद जी ने जो धारा लगाने की मांग की है, मैं उसका समर्थन करता हूं कि उसका इस्तेमाल करके वहां की सरकार को सीज़ करना चाहिए। इन्हीं शब्दों के साथ मैं पुनः इस घटना की निंदा करता हूं और अपनी बात समाप्त करता हूं।
MR. CHAIRMAN : Shri Tathagata Satpathy. Try to avoid repetition.
SHRI TATHAGATA SATPATHY (DHENKANAL): I will be short.
Chairman, Sir, thank you for giving me this opportunity. No one can condone violence, and the incidents in Bombay were definitely sad. Everybody here in this House will be united in opposing it.
But, Sir, this House is not meant just to make allegations. We, as representatives of the people, are supposed to find solutions to problems that arise in any part of this country. Whether it is the extreme end in the East in a State called Assam or in the extreme end of the West in a State called Maharashtra, why are we seeing this kind of a violence? Where lies the seed? It is easy to make allegations. It is easy to get united as North Indians, South Indians, Biharis, Marathis, Oriyas but when will we start thinking as Indians? It is time that we understand that the heart is burning and there is irritation in the minds of people. Why is this happening especially in the case of the Railways? It is not only in Maharashtra, it is all over the country. The Regional Recruitment Boards do not represent the people of the region. People from other States are coming in particularly of certain States. I do not wish to name anybody. I am an Indian first and then I may be of some State. I am ashamed to admit this that it is happening over and over again all over the country and in every Regional Recruitment Board of the railways. People from a particular zone are overpowering.
Take the example of the Zonal Railway Users' Consultative Committees. Take the data. All over this country you have ZRUCCs. How many ZRUCCs have actually sat, taught, discussed and have found solutions to problems of the users of that zone. The meetings are not being held. Why are the meetings not being held? In the State of Orissa, we have a ZRUCC. Members from another neighbouring State; they are no more neighbouring because another new State has come in between; but a large group of member from the erstwhile neighbouring State are dominating our ZRUCC. Our hon. MPs of various parties including Congress, BJD, BJP have preferred to walk out of the meeting but they have not allowed it to be conducted. This is a very serious matter.
I support Anant Geete ji in this thing that in regional dailies there are never any advertisements about what is happening in the Railways. They avoid the regional dailies; whereas in certain areas of the country, in a certain pocket of this country, regional dailies are given the advertisements.
You will be surprised to know that in Allahabad, 3000 applicants appeared for an examination; 1500 were taken in; the rest 1000 were sent to Bombay to appear for exams there. This is creating a heartburn that is going deep into the psyche of this nation. It is time this House rises above being a Bihari, being a UPite, being an Oriya, or being a Tamilian. We have to think as Indians. It is a matter of shame for all of us. We pose to be great leaders but it is a shame for all of us to behave like this.
Lastly, I would like that as a political person let us not denigrate Mr. Raj Thackeray or his MNS organisation because we do not know what his future is.[r16] Let us talk with respect towards everybody because he also represents a certain group of people. Let us not disrespect anybody but let us set our own house in order. I would request the hon. Railway Minister – he is a broad-minded person –Lalu ji not to derail the Railways but to put it back on the rails so that people even in Orissa do not feel slighted, do not feel neglected because this sort of a situation may arise there also, and the people there will be forced and no political leader can control it. This is a warning. Let us accept this warning and let us set our house in order before we make allegations against MNS or against Mr. Raj Thackeray.
SHRI BRAHMANANDA PANDA : Sir, I support the hon. Member, Shri Tathagata Satpathy.
MR. CHAIRMAN : Dr. Prasanna Kumar Patasani is allowed to associate on this issue.
Now, Shri Gurudas Dasgupta.
SHRI GURUDAS DASGUPTA (PANSKURA): Mr. Chairman, Sir, something is fundamentally wrong in the place where this incident has taken place. It is not an issue whether advertisements were published in different newspapers or not. That is not the issue. It is also not the issue, whether the Railway Board did not publish the advertisement in the regional newspapers.
Basically the question is that the people who had gone there to beat the examinees were not hurt; they were never the applicants. They were not the applicants and they were not hurt. They had gone deliberately with an intention of beating up the examinees, who had come from a particular zone of India. I do not say ‘North India and Maharashtra’; I do not say ‘Bombay and Bihar’; I do not say ‘Thackeray and Lalu’; I do not say that. I am only saying that the group of people who had indulged in hooliganism had deliberately gone there to stop the examination to ensure that the people from other parts of India are not able to get the job. It is the clear question. Let us not find the pretext to justify the situation. This is the clear question and this is the simple question.
Secondly, Sir, what is being raised is dangerous for the country. Slogan – job for the son of the soil – is being raised surreptitiously. What does it mean? Does it mean Bengal for Bengalis, Maratha for Marathis, UP for the people who live in UP? If this is going to be allowed, India is going to split, India is going to be divided. Either today or tomorrow there will be a two-India – North India and South India – and there will be no Indian nation as a whole.
Somebody is playing fire. Who are they? Who is this Thackeray? What business he had to send his people there? He is playing on chauvinism to win the election. It is a game of chauvinism. It is a game of dirty politics. I am constrained to say Lalu babu, please tell your friends. You are very friendly with the Congress Party. The Congress Government there is feeling shy to face the slogan of chauvinism. They are playing soft. They are not hard on the dirty politicians. What prevents them from arresting that man? It is because they are afraid of facing the chauvinism, the Marathi chauvinism. If they would like to fight this chauvinism, then they may not win the election. Everything is being done with the intention of getting the sympathy of the people of a particular State, a particular region and a particular language.
Sir, I appeal to the people of Maharashtra to fight against this menace. They should fight against this menace. Parliament cannot fight them. The people of Mahrashtra should fight this menace of Thackeray. … (Interruptions)
।श्री मोहन रावले (मुम्बई दक्षिण-मध्य): सभापति महोदय, थर्ड और फोर्थ कैटेगरी के बारे में हाउस ने पारित किया है कि लोकल इम्पलॉयमैन्ट एक्सचेंज से कॉल मंगानी चाहिए। मुम्बई में मराठी हैं, बंगाल में बंगाली हैं, गुजरात में गुजराती हैं और उड़ीसा में उड़िया लोग हैं। उन्हें वहीं प्रायोरिटी मिलेगी। इससे नेशनल इंटीग्रेशन कायम रह सकती है। एक्चुअली यह कानून 1959 में हाउस ने पारित किया है। ...( व्यवधान)
MR. CHAIRMAN: No discussion between you two. It is not permissible. There can be no discussion between you two. Shri Dasgupta, you please address the Chair.
17.03 hrs. श्री राम कृपाल यादव (पटना) : सभापति महोदय, जवाब का क्या हुआ? सरकार से जवाब तो दिलाइए। ...( व्यवधान)
MR. CHAIRMAN: It is over.
… (Interruptions)
श्री लालू प्रसाद : आप लोग बैठिये, हम जवाब दे रहे हैं। ...( व्यवधान)
MR. CHAIRMAN: The hon. Minister is responding. Please take your seats.
… (Interruptions)
SHRI KHARABELA SWAIN (BALASORE): Sir, this is not the method. You should also allow us to speak.… (Interruptions)
श्री लालू प्रसाद : ऐसा नहीं करिये। आप बैठिये। ...( व्यवधान)
श्री देवेन्द्र प्रसाद यादव (झंझारपुर) : सदन में ऐसे नहीं चलेगा। इतने महत्वपूर्ण विषय पर सरकार चुप है।...( व्यवधान)
श्री लालू प्रसाद : कल जवाब होगा। थोड़ा हम भी बोल लेते हैं। ...( व्यवधान)
MR. CHAIRMAN: Mr. Minister, just a minute. Let us hear Mr. Kharabela Swain also.
SHRI LALU PRASAD: Okay, Sir.
SHRI KHARABELA SWAIN : Sir, I also very strongly condemn the assault made on the people, who had gone there for the Railway Recruitment Board Test in Mumbai. I also agree that the country does not belong to any singular person; nobody can drive away other people.
But, Sir, I have also got another point to make. You please take the example of my State, Orissa. I belong to East-Coast Railways. It is within the confines of Orissa[r17] .
There is a Khurda Road Division. We find a miracle for the last four years that out of all Class-IV employees, those Group-D employees, who have been appointed there in the last four years, 70 per cent belongs only to Bihar. … (Interruptions) Now, in Orissa, Oriyas can get into IAS. Oriyas can get into first class category jobs. The Oriyas can get into everything but they cannot get into Group-D.… (Interruptions)
The second point I would make is this. Take the example of East Coast Railway’s Zonal Railway Consultative Committee. In the Zonal Railway Consultative Committee, there are some members who are nominated by the hon. Railway Minister. He has nominated 75 members to the Zonal Railway Consultative Committee of the East Coast Railway. They are all from Bihar. They are all from North Bihar. They belong to only on religion. … (Interruptions)
I will also mention to Mr. Gurudas Dasgupta. My area comes under South Eastern Railway. The hon. Railway Minister has nominated 150 members to the Zonal Railway Consultative Committee of South Eastern Railway, and I will tell you, Mr. Dasgupta that not a single Bengali is in that Committee. Let him go through the list.
MR. CHAIRMAN : Yes, please conclude.
SHRI KHARABELA SWAIN: They all belong to one caste and one religion and they are all from Bihar. This is what the Railway Minister has done. … (Interruptions)
MR. CHAIRMAN: Mr. Ramchandra Paswan, please.
SHRI KHARABELA SWAIN : What he has done? He has taken one railway factory to his constituency, another factory to his wife’s constituency, and the third one to the UPA Chairperson’s constituency. … (Interruptions) We are nowhere. Shall we be eligible to get any rail factory any time in life? … (Interruptions) People say that now-a-days jobs are being given in the Railways by taking land from them. … (Interruptions)
MR. CHAIRMAN: Please go to your seat. Let the Minister reply. I will give him time.
… (Interruptions)
SHRI KHARABELA SWAIN: Even now the Ministers in the Government are becoming Ministers by giving land in this country. … (Interruptions)
17.07 hrs (At this stage, Shri Ram Kripal Yadav and some other hon. Members came and stoodon the floor near the Table.) … (Interruptions)
MR. CHAIRMAN: If you do not go, I have no other way but to adjourn the House. If you want me to adjourn the House, then I will adjourn it.
… (Interruptions)
SHRI KHARABELA SWAIN (BALASORE): It is because of this only. … (Interruptions) This is happening and nothing else. I strongly object to what is being done by the Railways. … (Interruptions)
MR. CHAIRMAN: Please go to your seats. If you do not go, I have no other way but to adjourn the House.
The House stands adjourned to meet tomorrow, the 21st October, 2008 at 11 a.m. 17.08 hrs. The Lok Sabha then adjourned till Eleven of the Clock on[r18] Tuesday, October 21, 2008/Asvina 29, 1930 (Saka).
SHRI GURUDAS DASGUPTA (PANSKURA): Please listen to me. … (Interruptions)
MR. CHAIRMAN: Now, Shri C. Kuppusami. You can speak now.
… (Interruptions)
MR. CHAIRMAN: Shri C. Kuppusami, you can speak now.
… (Interruptions)[H19] MR. CHAIRMAN : Mr. Kuppusami, you may speak now.
… (Interruptions)
SHRI C. KUPPUSAMI (MADRAS NORTH): Mr. Chairman, Sir...
… (Interruptions)
MR. CHAIRMAN: Nothing will go on record except the submission of Mr. Kuppusami (Interruptions)* … श्री मोहन रावले (मुम्बई दक्षिण-मध्य): इसी सदन ने थर्ड और फोर्थ कैटेगरी के संबंध में कानून पारित किया है ...( व्यवधान)
SHRI KHARABELA SWAIN (BALASORE): Sir, I have also given a notice to speak.
MR. CHAIRMAN: If your name is there in the list, I will call you.
… (Interruptions)
MR. CHAIRMAN: Hon. Member, please be seated.
* Not recorded.