Lok Sabha Debates
Atrocities On Dalit Students By Police In Bihar. on 4 August, 2016
Sixteenth Loksabha an> Title: Atrocities on dalit students by police in Bihar.
SHRI CHIRAG PASWAN (JAMUI): Thank you so much, Deputy Speaker, Sir. It is a burning issue concerning the students of my State. I request you to give me two minutes extra.
ये दावे किए जाते हैं और बिहार सरकार खुद को जे.पी., (लोकनायक जयप्रकाश नारायण) के सिद्धान्तों पर चलने वाली सरकार बताती है। लेकिन जिन जेपी ने छात्र शक्ति के बल पर सम्पूर्ण क्रान्ति का आह्वान किया था, कल हमारे प्रदेश बिहार में उन्हीं की मूर्ति के नीचे कई दलित छात्रों को दौड़ा-दौड़ाकर घंटों तक पीटा गया। दर्जनों ऐसे छात्र हैं जो अभी भी पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती हैं। उनमें से दो-तीन छात्र अभी भी गंभीर अवस्था में हैं। जाहिर है कि यह सदन भी जानना चाहेगा कि आखिर पुलिस की ऐसी बर्बरता के पीछे वजह क्या थी। मैं आपको बताना चाहता हूं कि इस जघन्य पुलिस कृत्य के शिकार छात्र सिर्फ छात्रवृत्ति को लेकर, अपने अधिकारों को लेकर, अपने हक को लेकर आन्दोलन करना चाह रहे थे, विधान सभा तक जाकर मार्च करना चाह रहे थे। उनकी मांगें क्या थीं, मैं यह भी बताना चाहता हूं, ताकि आप खुद तय कर लीजिए कि क्या उसके बाद ऐसे जुल्म उनके ऊपर करने की जरूरत थी या नहीं।
बिहार की दलित विरोधी महा-गठबंधन सरकार ने हाल ही में दलित छात्रों को मिलने वाली छात्रवृत्ति को सीमित कर दिया है, उसमें कटौती कर दी है। जैसे पहले अगर दूसरे कॉलेज में कोई छात्र जाता था तो उसकी कॉलेज फीस जितनी होती थी, उसी के अनुसार उसे स्कॉलरशिप मिलती थी। अब उसे लिमिट कर दिया गया है। अब भले ही दूसरे कॉलेज, दूसरे प्रदेश में अगर उस कोर्स की फीस 25 हजार रुपये, 28 हजार रुपये या 30 हजार रुपये है और बिहार सरकार ने तय कर लिया कि उसकी फीस महज 15 हजार रुपये होनी चाहिए तो बाकी की 10 हजार रुपये, 12 हजार रुपये या 15 हजार रुपये की रकम छात्रों को अपनी पॉकेट से देनी पड़ती है।
हमारे प्रदेश में दलित, महा-दलित समुदाय से आने वाले छात्र ऐसे सक्षम परिवारों से नहीं आते कि वे फीस अपनी जेब से दे सकें, इसीलिए काफी छात्र ऐसे हैं जो मजबूरन वापिस आ रहे हैं। बिहार से गए हुए बहुत से ऐसे छात्र मेरे सम्पर्क में हैं। कोई मुझे चेन्नई, कर्नाटक, पुणे, पंजाब से फोन करता है कि हम वापिस आने को मजबूर हैं, क्योंकि फीस नहीं भर पा रहे हैं। जब इन चीजों को लेकर हमारे छात्र बिहार में आन्दोलन करते हैं तो उनके ऊपर लाठियां चलाई जाती हैं।
मैं यहां बैठे अपने तमाम साथी सांसदों से आग्रह करना चाहूंगा कि वे एक बार बिहार के अम्बेडकर छात्रावास में जाकर देख लें कि वहां की क्या हालत है। आपको जानकर हैरानी होगी कि वहां की दीवारों की हालत इतनी जर्जर है कि कभी भी कोई भी अप्रिय घटना घट सकती है। वहां पीने का साफ पानी मुहैया नहीं होता, अधिकांश छात्रावासों में उचित शौचालयों की व्यवस्था नहीं है। वहां घंटों तक बिजली नहीं आती। एक-एक कमरे में 15-20 छात्र जबरन रहने को मजबूर हैं।...(व्यवधान) महोदय, मुझे एक मिनट और बोलने का समय दे दीजिए, क्योंकि यह छात्रों से जुड़ा हुआ मामला है।
डा. बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर ने भी शिक्षा के महत्व को पहचाना था और शिक्षा को अपना हथियार बनाने को कहा था। आज उन्हीं की राह पर चलने वालों को क्या-क्या कठिनाइयां आ रही हैं, पटना में बुधवार को हुई घटना इस बात का उदाहरण है। हमारे प्रदेश में जो सत्ता में विराजमान हैं, वे दलितों को आगे नहीं पढ़ने देना चाहते, यह उनकी नीयत और इस कार्रवाई से साफ जाहिर है।
मैं आपके माध्यम से यह मांग करता हूं और आह्वान भी करता हूं कि भले ही हमारी राह में कितनी भी कठिनाइयां आएं, हमारा यह दृढ़ संकल्प है कि दलित समाज की शिक्षा और सशक्तीकरण के इस ताने-बाने को हम टूटने नहीं देंगे।
हम आपके माध्यम से मांग करते हैं कि जो घटना हुई है, उसकी सीबीआई से जांच करवाई जाए और जितने भी लोग दोााळ हैं, जिन्होंने लाठियां चलाईं और लाठी चलाने के निर्देश दिए, सबके ऊपर सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए। धन्यवाद।
HON. DEPUTY SPEAKER:
Shri Sharad Tripathi, Shri Chandra Prakash Joshi, Shri Sudheer Gupta, Shri Rodmal Nagar, Shri Bhairon Prasad Mishra, Shri Ashwini Kumar Choubey and Kunwar Pushpendra Singh Chandel are permitted to associate with the issue raised by Shri Chirag Paswan.
श्री राजेश रंजन (मधेपुरा) : उपाध्यक्ष महोदय, जो मामला उठा है, कल छात्रों पर ही नहीं, बल्कि बाबासाहेब अम्बेडकर जी की मूर्ति को भी पैरों तले रौंदा गया, वह फोटो है। लड़के-लड़कियों दोनों पर लाठी चार्ज हुआ। स्थिति यह नहीं है, बल्कि वहां एक तानाशाह सरकार है, जो समाज विरोधी, गरीब विरोधी और बिहार की दस करोड़ जनता विरोधी है। उसने लगातार दस सालों से शराब परोसी। वे एक काला कानून लाए हैं कि जिसके घर में शराब मिलेगी, उसके मां-बाप को जेल भेज देंगे, उसके परिवार को जेल भेज देंगे। वे जिस तरह का कानून लाए हैं, दुनिया के इतिहास में हिटलर और चंगेज खां का भी ऐसा शासन नहीं होगा।
मैं भारत सरकार से आग्रह करता हूं कि ऐसे काले कानून में आप इंटरवीन कीजिए। मां-बाप को जेल भेजने की प्रवृत्ति धारा 302 में नहीं है। बिना सर्च वारंट के पदाधिकारी जाकर किसी का डॉपलर टैस्ट करेंगे और उसे जेल भेज देंगे। मैं आग्रह करता हूं कि खगड़िया में पुलिस स्टेशन में दारू पीकर चार दलितों की मौत हो गई। पटना में छात्रों पर लाठीचार्ज हुआ और खगड़िया में चार दलित मरे हैं। बिहार सरकार का जो काला कानून है, मैं भारत सरकार से आग्रह करता हूं कि इसकी सीबीआई इनक्वायरी की जाए और पीआईएल फाइल की जाए। नीतीश कुमार प्रधानमंत्री बनने के लिए संविधान के मूल अभिव्यक्ति पर चोट न करें।
HON. DEPUTY-SPEAKER: Shri Sharad Tripathi is permitted to associate with the issue raised by Shri Rajesh Ranjan.