State Consumer Disputes Redressal Commission
Smt. Revti Devi vs L I C on 14 September, 2017
Cause Title/Judgement-Entry STATE CONSUMER DISPUTES REDRESSAL COMMISSION, UP C-1 Vikrant Khand 1 (Near Shaheed Path), Gomti Nagar Lucknow-226010 First Appeal No. A/2010/260 (Arisen out of Order Dated in Case No. of District State Commission) 1. Smt. Revti Devi Bareli ...........Appellant(s) Versus 1. L I C Bareli ...........Respondent(s) BEFORE: HON'BLE MR. Ram Charan Chaudhary PRESIDING MEMBER HON'BLE MR. Gobardhan Yadav MEMBER For the Appellant: For the Respondent: Dated : 14 Sep 2017 Final Order / Judgement
राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, उ0प्र0, लखनऊ।
(सुरक्षित) अपील संख्या:-260/2010 (जिला उपभोक्ता फोरम, प्रथम बरेली द्धारा परिवाद सं0-19/2009 में पारित निर्णय/आदेश दिनांक 27.01.2010 के विरूद्ध) 1- श्रीमती रेवती देवी पत्नी स्व0 श्री झम्मन लाल, ग्राम मनहेरा डाकघर भोजीपुरा जनपद बरेली।
2- महेन्द्र पाल पुत्र स्व0 झम्मन लाल 3- प्रेमपाल पुत्र स्व0 झम्मन लाल 4- नरेश कुमार पुत्र स्व0 झम्मन लाल, समस्त निवासीगण ग्राम मनहेरा डाकघर भोजीपुरा जनपद बरेली।
........... अपीलार्थी/परिवादीगण बनाम भारतीय जीवन बीमा निगम मण्डल कार्यालय दीनदयाल पुरम थाना प्रेमनगर बरेली द्वारा वरिष्ठ मण्डल प्रबन्धक।
............ प्रत्यर्थी/विपक्षी समक्ष :-
मा0 श्री रामचरन चौधरी, पीठासीन सदस्य मा0 श्री गोवर्द्धन यादव, सदस्य अपीलार्थी के अधिवक्ता : श्री ओ0पी0 दुबेल प्रत्यर्थी के अधिवक्ता : श्री अरविन्द तिलहरी दिनांक : 11-10-2017 मा0 श्री रामचरन चौधरी, पीठासीन सदस्य द्वारा उदघोषित निर्णय मौजूदा अपील जिला उपभोक्ता फोरम, प्रथम बरेली द्धारा परिवाद सं0-19/2009 में पारित निर्णय/आदेश दिनांक 27.01.2010 के विरूद्ध योजित की गई है, उक्त निर्णय के द्वारा परिवादिनी का परिवाद निरस्त किया गया है।
संक्षेप में केस के तथ्य इस प्रकार है कि परिवादिनी के पति श्री झम्मन लाल द्वारा बीमा पालिसी सं0-222789026 दिनांक 03.03.2007 को ली गयी थी, जिसमें परिवादिनी नामित थी। परिवादिनी के पति झम्मन लाल की दिनांक 20.5.2008 को अभियुक्त हरचन्दा ने गोली मारकर गॉव में हत्या कर -2- दी थी, जिसके कारण अपराध सं0-269 सन् 2008, धारा-302 भारतीय दण्ड संहिता, थाना भोजीपुरा बरेली में अभियुक्त हरचन्दा के विरूद्ध पंजीकृत हुआ। परिवादिनी ने तदुपरांत बीमा दावा प्रस्तुत किया परन्तु प्रतिवादी द्वारा दिनांक 20.10.2008 को परिवादिनी का बीमा दावा यह कहकर नकार दिया कि बीमाधारक फेफडे के कैंसर व अस्थमा से प्रस्ताव पत्र दिनांक 28.02.2007 के पूर्व से पीडित था जिसको बीमाधारक ने छिपाया है, जो गलत था क्योंकि कोई तथ्य बीमाधारक ने प्रस्ताव पत्र भरते समय नहीं छिपाया और न ही वह कथित बीमारी से पीडित था, अत: प्रतिवादी द्वारा दावा नकार करके सेवा में त्रुटि की गयी है, जिसके फलस्वरूप परिवादिनी द्वारा प्रतिवादी से बीमित धनराशि मय ब्याज तथा क्षतिपूर्ति का अनुतोष दिलाये जाने हेतु जिला उपभोक्ता फोरम के समक्ष परिवाद प्रस्तुत किया गया है।
प्रतिवादी की ओर से जिला उपभोक्ता फोरम के समक्ष अपना प्रतिवाद पत्र प्रस्तुत कर यह कथन किया गया है कि बीमाधारक अस्थमा एवं फेफडे के कैंसर रोग से पालिसी लेने के पूर्व से ही पीडित था और उसने धोखा देकर बिना बनाए संबंधित पालिसी ली है, जिसके कारण बीमा दावा नकार करके प्रतिवादी द्वारा अपनी सेवा में कोई त्रुटि कारित नहीं की गयी है। यह भी कहने का प्रयत्न किया गया है कि बीमाधारक चिकित्सीय अवकाश पर दिनांक 10.6.2004 से दिनांक 24.6.2004 एवं 19.4.2006 से 14.5.2006 तक था एवं 90 दिन एस0आर0एम0एस0 भोजी पुरा अस्पताल में भी उक्त रोग से ग्रसित होने के कारण भर्ती था, जिसे छिपाया गया है, अत: वाद सव्यय निरस्त किए जाने योग्य है।
इस सम्बन्ध में जिला उपभोक्ता फोरम के प्रश्नगत निर्णय/आदेश दिनांकित 27.01.2010 तथा आधार अपील का अवलोकन किया गया एवं अपीलार्थी की ओर से विद्वान अधिवक्ता श्री ओ0पी0 दुबेल तथा प्रत्यर्थी की ओर से विद्वान अधिवक्ता श्री अरविन्द तिलहरी की बहस सुनी तथा पत्रावली पर उपलब्ध अभिलेखों एवं लिखित बहस का भी अवलोकन किया गया है।
आधार अपील में यह कहा गया है कि मृतक बीमाधारक ने बीमा पालिसी सं0-222789026 दिनांक 20.10.2007 से 20.3.2017 तक के लिए प्राप्त की बीमा राशि अंकन 50,000.00 रू0 व दुर्घटना लाभ 50,000.00 रू0 -3- निश्चित था। दिनांक 20.5.2008 को बीमाधारक झम्मन लाल और उसके गॉव के ही हरचन्द के तमंचे से गोली मारकर हत्या कर दी जबकि मृतक से अभियुक्त हरचन्द ने तम्बाकू खाने के लिए मॉगी, परन्तु मृतक झम्मन लाल ने तम्बाकू देने से मना कर दिया, इसी पर हरचन्द ने फेंट से तमंचा निकाल कर झम्मन लाल को गोली मारकर हत्या कर दी और बीमा कम्पनी ने बीमा इस आधार पर खारिज कर दिया कि मृतक झम्मन लाल ने बीमारी को छिपाकर पालिसी ली थी। आधार अपील में मा0 राष्ट्रीय आयोग की नजीर Maya Devi Vs. Life Insurance Corporation of India. III (2008) CPJ 120 (NC) का सम्बल लिया गया है। आधार अपील में यह भी कहा गया है कि अपील स्वीकार करते हुए प्रश्नगत निर्णय/आदेश दिनांक 27.01.2010 को निरस्त किया जाय और बीमा कम्पनी को निर्देशित किया जाय कि वह रू0 1,00,000.00 का भुगतान ब्याज के साथ करें।
इस सम्बन्ध में अपीलार्थी की ओर से मा0 राष्ट्रीय आयोग की नजीर Maya Devi Vs. Life Insurance Corporation of India. III (2008) CPJ 120 (NC) की ओर पीठ का ध्यान आकर्षित कराया गया है, जिसके पैरा सं0-8 में यह उल्लेख किया गया है:-
"Further, it is to be stated that the insurance company has not repudiated the claim on the ground that the death of the assured was due to murder, but solely on the ground that before taking the insurance policy, the insured, who was a Grade-IV employee in Nav Bharat College in Ghaziabad, suppressed the fact that he had taken some leave on medical ground. The so-called leave on medical ground has no connection with the murder of the assured."
इस सम्बन्ध में प्रत्यर्थी बीमा कम्पनी की ओर से प्रस्तुत मा0 राष्ट्रीय आयोग की नजीर Ram Lal Aggarwalla Vs. Bajaj Allianz Life Insurance Co. Ltd. & Anr. III (2013) CPJ 203 (NC) एवं Life Insurance Corporation of India Vs. Veena & Ors. II (2014) CPJ 95 (NC) का अवलोकन किया गया, उपरोक्त वर्णित नजीरों में प्रतिपादित सिद्धांत को दृष्टिगत रखते हुए हम यह पाते हैं कि मौजूदा केस के तथ्य उपरोक्त नजीर वाले केस से थोड़ा भिन्न है और इस केस में लागू नहीं होते है।
-4-उपरोक्त केस के सम्पूर्ण तथ्यों व परिस्थितियों को देखते हुए हम यह पाते हैं कि मौजूदा केस में परिवादिनी बीमा पालिसी की धनराशि 50,000.00 रू0 व दुर्घटना हित लाभ के 50,000.00 रू0 कुल 1,00,000.00 रू0 प्राप्त करने की हकदार है और उक्त धनराशि पर परिवाद दायर करने की तिथि से 06 प्रतिशत का ब्याज भी पाने की हकदार है। तद्नुसार अपीलार्थी की अपील स्वीकार किए जाने योग्य है।
आदेश अपीलार्थी की अपील स्वीकार की जाती है जिला उपभोक्ता फोरम, प्रथम बरेली द्धारा परिवाद सं0-19/2009 में पारित निर्णय/आदेश दिनांक 27.01.2010 को निरस्त किया जाता है तथा प्रत्यर्थी/प्रतिवादी बीमा कम्पनी को आदेशित किया जाता है वह बीमा पालिसी की धनराशि 50,000.00 रू0 व दुर्घटना हित लाभ के 50,000.00 रू0 कुल 1,00,000.00 रू0 अपीलार्थी/परिवादिनी को अदा करें उक्त धनराशि पर परिवाद दायर करने की तिथि से 06 प्रतिशत का ब्याज भी अपीलार्थी/परिवादिनी, प्रत्यर्थी/प्रतिवादी बीमा कम्पनी से पाने की हकदार है।
उभय पक्ष अपीलीय व्यय भार स्वयं वहन करेगें।
(रामचरन चौधरी) (गोवर्धन यादव) पीठासीन सदस्य सदस्य हरीश आशु., कोर्ट सं0-4 [HON'BLE MR. Ram Charan Chaudhary] PRESIDING MEMBER [HON'BLE MR. Gobardhan Yadav] MEMBER