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Lok Sabha Debates

Need To Accord Approval To The Proposal Of Inter-Linking Of River Projects In ... on 2 August, 2016

Sixteenth Loksabha an> Title:    Need to accord approval to the proposal of inter-linking of river projects in Bihar and also provide adequate funds for the purpose.

   

श्री कौशलेन्द्र कुमार (नालंदा) ः मैं अपने संसदीय क्षेत्र नालंदा से जुड़े एक महत्वपूर्ण विषय की ओर सरकार का ध्यान आकृष्ट करना चाहता हॅं। केन्द्र सरकार की महत्वाकांक्षी रीवर-लिंक योजना के अंतर्गत बिहार सरकार ने 8 योजनाओं को चिन्हित कर उसका प्रारूप एवं डी.पी.आर. केंद्र सरकार को सौंप दिया है। इन आठों योजनाओं को राज्य के हितों को ध्यान में रखते हुए बनाया गया है। इनमें से सकरी और नाटा नदी को जोड़ने की भी योजना केंद्र सरकार के पास लंबित है। इन दोनों नदियों को जोड़ने से मेरे संसदीय क्षेत्र नालंदा क साथ-साथ शेखपुरा और नवादा जिले की लाखों एकड़ भूमि के पटवन और सिंचाई की सुविधा हो जायेगी जिससे किसानों की पैदावार काफी बढ़ेगी। बरसात के समय अधिक पानी की निकासी भी होगी एवं आसपास के इलाकों में जमीन के नीचे का लेबल भी मैनटेन होता रहेगा, जो कि पीने के पानी की समस्या को भी नहीं होने देगा। इसके अतिरिव्त अन्य परियोजनायें जैसे कोहरा और चन्द्रावत नदी को जोड़ना, बूढ़ी गंडक और गंडक नदी को जोड़ना बागमती और बूढ़ी गंडक को जोड़ना, बूढ़ी गंडक को नून नदी के द्वारा गंगा नदी को जोड़ना, कोशी और गंगा नदी को जोड़ना, कोशी, अधवार और बागमती को जोड़ना, कोशी और मेची नदी को जोड़ना एवं घनरजय जलाशय और फुलवरिया जलाशय को जोड़ना। बिहार सरकार ने इन सभी परियोजनाओं की विस्तृत रिपोर्ट क साथ डी.पी.आर. केंद्र सरकार को सौंप दिया है। अब केंद्र सरकार की जिम्मेदारी है कि राज्य की इन अति महत्वपूर्ण रीवर-लिंकिंग परियोजनाओं को जल्द से जल्द स्वीकृति दे और पूर्ण फंडिंग के साथ कार्य प्रारंभ करने की व्यवस्था करे। साथ ही एक और महत्वपूर्ण विषय को केंद्र सरकार के संज्ञान में लाना चाहता हॅं इनमें से अधिकतर नदियों का उद्गम नेपाल है। जहां से बरसात क समय अधिक पानी छोड़े जाने के कारण पूरे उत्तर बिहार की समतल भूमि बाढ़ की चपेट में आ जाती है जिससे करोड़ों रूपये की आर्थिक क्षति के अलावा जान-माल का भारी नुकसान होता है। केन्द्र सरकार इसके लिए भी नेपाल सरकार से विचार-विमर्श कर दीर्घकालिक निदान करे।

          अतः मैं केंद्र सरकार से निवेदन करता हूं कि बिहार की नदी-लिंक योजनाओं को गंगा बाढ़ नियंत्रण बोर्ड (जी.एफ.सी.बी.) के माध्यम से अविलंब स्वीकृति प्रदान कर पूर्णतः फंडिंग की व्यवस्था करे जिससे राज्य के किसानों के हित का कार्यक्रम प्रारंभ हो सके।