Lok Sabha Debates
Regarding Reported Ban Of Bhagvad Gita In Russia And The Need To Protect The ... on 19 December, 2011
> Title: Regarding reported ban of Bhagvad Gita in Russia and the need to protect the religious rights of Hindus in Russia.
SHRI BHARTRUHARI MAHTAB (CUTTACK): Madam, I draw the attention of this House and also of the Government through you to a matter relating to a very curious case that is going on in Russian Federation in the State of Siberia. The Bhagavad Gita, one of the holiest Hindu scriptures, is facing a legal ban and the prospect of being branded as extremist literature across Russia. A court in Siberia’s Tomsk city is set to deliver its verdict today in a case filed by State Prosecutor. Though this case has been going on since last June seeking a ban on a Russian translation of Bhagavad-Gita As It Is written by Bhaktivedanta Swami Prabhu Pada, the founder of the International Society of Krishna Consciousness. It also wants the Hindu religious text banned in Russia and declared as literature spreading social discord. In view of the case, Indians settled in Russia and the followers of ISKCON religious movement have appealed to the Government of India including the Prime Minister to resolve the issue. I would urge upon the Government to intervene in the matter immediately, lest the religious freedom of Hindus living there is compromised. The religious rights of the Hindus in Russia should be protected. Curiously, the State Prosecutor had referred the scripture to Tomsk State University for an expert examination. This university is not qualified as it lacks Indologists who study history, culture, language and literature of the Indian subcontinent. As this case is inspired by religious bias and intolerance from a majority religious group in Russia, I would like to urge upon the Government to impress upon their Russian counterpart so that their right to practice their religion and belief is upheld. Gita does not preach hatred. Indian Embassy in Moscow should intervene through diplomatic channels immediately.
… (Interruptions)
MADAM SPEAKER: Shri Harin Pathak, Shri Shivkumar Udasi, Shri Devji M. Patel, Shri A.T. Nana Patil, Shri Prahlad Joshi, Shri Arjun Ram Meghwal, Shri Anant Kumar Hegde, Shri Prem Das Rai, Dr. Kirit Premjibhai Solanki, Shri Virendra Kumar, Shrimati Deepa Dasmunsi, Dr. Jyoti Mirdha, Dr. Kruparani Killi, Shri Anandrao Adsul, and Shri Chandrakant Khaire are allowed to associate themselves with the issue.
डॉ. मुरली मनोहर जोशी (वाराणसी): यह बहुत गंभीर प्रश्न है। ...( व्यवधान) गीता एक सार्वभौम ग्रंथ है जो मानव प्रेम के लिए है। ...( व्यवधान)
श्री हुक्मदेव नारायण यादव (मधुबनी):सरकार को इस पर नोटिस लेना चाहिए। ...( व्यवधान) इस पर सरकार को उत्तर देना चाहिए। ...( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : टेबल पर अपना नाम भेज दीजिए।
…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : आप सभी लोग जो इससे अपने आपको संबद्ध कर रहे हैं, अपना नाम भेज दीजिए।
…( व्यवधान)
MADAM SPEAKER: Nothing else will go on record now.
(Interruptions) …* अध्यक्ष महोदया : श्री वीरेन्द्र कश्यप, बोलिए।
…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : ठीक है, सबने अपनी राय जाहिर कर दी।
…( व्यवधान)
डॉ. मुरली मनोहर जोशी : माननीय प्रधानमंत्री जी अभी रूस की यात्रा से लौटे हैं। ...( व्यवधान)
हम उनसे निवेदन करेंगे कि उन्होंने वहां क्या यह प्रश्न उठाया, यह बताएं। ...( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : ठीक है।
…( व्यवधान)
श्री लालू प्रसाद (सारण):यह गीता और भगवान कृष्ण की मर्यादा को ध्वस्त कर रहा है। ...( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : ठीक है, अभी इस पर नोटिस दे दीजिए। इस तरह कैसे चर्चा होगी?
…( व्यवधान)
श्री लालू प्रसाद : यह मुद्दा भगवान कृष्ण का है, गीता का है। ...( व्यवधान) इस पर हमारा एतराज़ है। ...( व्यवधान)
डॉ. मुरली मनोहर जोशी : प्रधानमंत्री जी को स्वयं इस मामले में हस्तक्षेप करना चाहिए।
श्री लालू प्रसाद : गीता के खिलाफ रूस में जो व्यवहार किया गया है, भारत सरकार की तरफ से गीता को मिटाने वाले लोगों के खिलाफ़ तत्काल एक विरोध पत्र जाना चाहिए। ...( व्यवधान)
डॉ. मुरली मनोहर जोशी : बिल्कुल इसका विरोध होना चाहिए। ...( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : ठीक है।
… (Interruptions)
श्री मुलायम सिंह यादव (मैनपुरी): सभापति जी, आपका बहुत-बहुत धन्यवाद जो आपने गीता पर बोलने का अवसर दिया। गीता एक ऐसा ग्रंथ है जो सारे विश्व में स्वीकार्य है...( व्यवधान)
सभापति महोदय: केवल मुलायम सिंह जी की ही बात रिकार्ड में जाएगी।
...( व्यवधान)* सभापति महोदय: आप सब बैठ जाएं। मुलायम सिंह जी, आप बोलिए।
श्री मुलायम सिंह यादव : मुझे गीता पर कहने दीजिए, फिर मैं आपका साथ दूंगा।...( व्यवधान)
सभापति महोदय: केवल मुलायम सिंह जी की ही बात रिकार्ड में जाएगी। मुलायम सिंह जी आप बोलिए, नहीं तो मैं आगे की कार्यवाही शुरू कराऊंगा।
...( व्यवधान)
श्री मुलायम सिंह यादव : सभापति जी, गीता एक ऐसा ग्रंथ है जिसे सारे विश्व ने स्वीकार किया है और विश्व की तमाम भाषाओं में इसका अनुवाद हो चुका है। भगवान कृष्ण ने समाज के हर क्षेत्र के बारे में बोला है। मानव-जीवन कैसा हो और समाज के अंदर रहकर किस प्रकार के काम किये जाएं जिससे समाज अच्छा बने। गीता में जीवन में ईमानदारी और पवित्रता के बारे में है, धर्म के बारे में और कर्म के बारे में है। उन्होंने जिस धर्म के बारे में कहा है वह सभी को स्वीकार्य है। इस तरह से कृष्ण भगवान ने जो कुछ कहा है उसी का सार गीता में है। गीता को न केवल सारी दुनिया ने स्वीकार किया है बल्कि अपनी-अपनी भाषाओं में उसका अनुवाद भी किया है। आपने मुझे इस पर बोलने दिया, इसकी मुझे बहुत खुशी है।
महात्मा गांधी जी ने गीता को अच्छी तरह से पढ़ा था और उसे पूरा पढ़ने के बाद भी रोज दुबारा से पढ़ते रहते थे, चाहे दिन में 10 पेज ही पढ़ें या 15 पेज पढ़ें। गांधी जी के बहुत सारे भाषण और बयान उसी पर आधारित थे। गीता के महत्व को उन्होंने समझा था और उनकी इच्छा रही थी कि गीता के सार के अनुसार हम देश को बनाएं।
सरकार ने गीता एवं इसके महत्व एवं प्रभाव को गंभीरता से नहीं लिया है और इस बात को सभी दल मानेंगे। गीता को देश की जनता के बीच कैसे और प्रभावी रूप से प्रचारित-प्रसारित किया जाए, इस ओर सरकार ने न कोई ध्यान दिया है और न कोई कदम उठाया है। सरकार गीता की उपेक्षा न करे क्योंकि गीता की उपेक्षा हो रही है। इससे समाज में अच्छा संदेश नहीं जाएगा। संसदीय कार्य मंत्री जी से मेरा अनुरोध है कि गीता के प्रचार-प्रसार के बारे में सरकार कोई ऐसा कदम उठाए, जिससे गीता की पढ़ाई प्राइमरी स्कूल से लेकर विश्वविद्यालय तक में मुमकिन हो सके।
साइबेरिया के एक वकील ने जो कुछ वहां कहा है उसकी निंदा पूरे सदन को करनी चाहिए। मेरी अपील है कि पूरा सदन उसकी निंदा करे। उस टिप्पणी पर पूरा सदन यहां उसकी निंदा करे।
सभापति जी, आप यहां से ऐसा कुछ निर्देशित करें जिससे गीता के पढ़ने की रुचि प्राइमरी स्कूल से लेकर विश्वविद्यालय तक के विद्यार्थियों में हो जाए। अगर विद्यार्थियों द्वारा गीता को पढ़ना शुरु हो जाएगा तो महात्मा गांधी जी को सपना पूरा होगा और भगवान कृष्ण के गीता के सार का मर्म भी लोगों को समझ में आयेगा और पूरे समाज में सुधार आयेगा।
सभापति जी, आपने और मैंने साथ-साथ काम भी किया है और जो आप कहते हैं वह करते भी हैं, इसलिए आपकी चेयर की तरफ से भी कोई निर्देश इस संबंध में आना चाहिए। इन्हीं शब्दों के साथ मैं आपका आभार व्यक्त करता हूं। धन्यवाद।
श्री लालू प्रसाद (सारण): महोदय, गीता भगवान कृष्ण से संबंधित है और दुनिया ने स्वीकार किया कि देवताओं के महान देवता भोले बाबा ने कृष्ण जी को ऊंचा स्थान दिया और कृष्ण जी ने भी शंकर बाबा को ऊंचा स्थान दिया। गीता का अपमान करना, भगवान कृष्ण का अपमान करना है। साइबेरिया में जो हुआ है, यह प्रचारित किया जा रहा है कि गीता का उपदेश हैटरेड पैदा कर रहा है और इससे टैरेरिज्म फैलने की बात कही गई है, यह बहुत बड़ी साजिश भगवान कृष्ण के खिलाफ की जा रही है। " हे यादव, हे माधव " हमारे जितने भी ग्रंथ लिखे हुए हैं, आप जानते हैं कि कृष्ण के विषय में लिखे गए हैं। दुनिया में खासकर साइबेरिया में अपमानित करने का काम हुआ है, इसे पूरे भारतवर्ष में और दुनिया में गीता तथा कृष्ण भगवान को जानने वालों ने निंदा की है। यह पूरा ग्रंथ उपदेश से भरा है। राजनीति करने वाले लोग गीता को आधार बनाकर राजनीति करते हैं। दुनिया में जहां भी महापुरुष हुए हैं, रूस जहां साम्यवाद है, लेनिन जी को हम मानते हैं, कालमार्क्स को मानते हैं, अगर इस प्रकार की परम्परा शुरू हुई और इस प्रकार की प्रवृत्ति पनपती है, तो निश्चित रूप से जितने कृष्ण भक्त हैं, उनके मन में गुस्सा और क्रोध होगा। संसद चल रही है और सरकार चुप बैठी है तथा एक शब्द भी सरकार की तरफ से नहीं कहा गया है। हम पूरे सदन की तरफ से इसकी निंदा करते हैं, वहीं सरकार से हमारी अपेक्षा है कि वहां जो हुआ है, उसमें हस्तक्षेप करे और साइबेरिया को खबरदार करे।...( व्यवधान)
सभापति महोदय : आपने अपनी भावना व्यक्त कर दी है। आप बैठ जाएं।
श्री हुक्मदेव नारायण यादव।
…( व्यवधान)
श्री लालू प्रसाद : यह बर्दाश्त करने की बात नहीं है। अपमान का बदला हम लेंगे, भगवान अपमान का बदला लेंगे और इन्हें भी सज़ा देंगे, अगर ये हस्तक्षेप नहीं करते हैं। सरकार हस्तक्षेप करे और सदन की तरफ से वहां की सरकार से प्रोटेस्ट प्रकट करे। अपने देश के प्रधानमंत्री वहां गए थे, हाल ही में मास्को, रूस गए थे, पता नहीं कि उनके पास यह बात पहुंची है या नहीं पहुंची है। हम लोग इतना ही चाहते हैं कि भगवान कृष्ण का अपमान हम बर्दाश्त नहीं कर सकते हैं और इसलिए हम आग्रह करते हैं कि " बोल श्री कृष्ण भगवान की जय। "
श्री हरिन पाठक (अहमदाबाद पूर्व): महोदय, मैं अपने को श्री लालू जी की बात से सम्बद्ध करता हूं।
श्री हुक्मदेव नारायण यादव (मधुबनी):सभापति महोदय, यह विषय हमारे इतिहास और अतीत के साथ जुड़ा हुआ है। अतीत और इतिहास को हमें समझना चाहिए। मैं केवल दो-चार उदाहरण दे कर अपनी बात समाप्त करूंगा। "जब इतिहास को लिखने में, समझने में कोई गलती हो जाती है, तो उसके कितने भयंकर परिणाम होते हैं। मैं बताना चाहता हूं कि आखिर इतिहास क्या है? यह अतीत का बोध है, जो कुछ पहले हो चुका है, उसे किस ढंग से समझते हैं - अधूरा, पूरा, गलत, सही। इतिहास है अतीत का बोध। अतीत का बोध भविष्य और वर्तमान का निर्माता भी हुआ करता है। अगर गलत समझते हैं , तो गलत ढंग से वर्तमान और भविष्य बनता है, खास तौर से मैं एक छोटी-सी मिसाल दे कर बताना चाहता हूं।"" लोकसभा वादविवाद 26 मार्च, 1966, डॉ. राम मनोहर लोहिया ने संसद में इसी तरह से रखा था। क्योंकि यूनेस्को द्वारा दुनिया का इतिहास लिखा गया था। उसमें एक विद्वान ने लिखा था कि कविता का उद्गम चीन से हुआ था। उसी पर डॉ. लोहिया ने संसद में बहस छेड़ी थी सर्वपल्ली डॉ. राधा कृष्णन उस समिति में सदस्य थे। मैं फिर कहना चाहता हूं कि इतिहास की गलती को हम सदन में फिर से न दोहराए।
गीता किसी धर्म की नहीं है। जब हम बैठते हैं और ज्ञान के बारे में कहते हैं तो एक ही श्लोक से सम्पूर्ण विषय प्रकट हो जाता है ज्योतिषामपि तज्ज्योतिस्तमसः परमुच्यते।
ज्ञानं ज्ञेयं ज्ञनगम्यं हृदि सर्वस्य विष्ठितम्।
जो ज्ञानम ज्ञेयम ज्ञान गमयम है, न वह किसी धर्म का है, न किसी एक संस्कृति का है, न किसी एक जात का है, न किसी समाज का है जो समग्र रूप से व्यक्तिधर्म, मानवधर्म, समाजधर्म, राष्ट्रधर्म, सम्पूर्ण धर्म की व्याख्या युद्धभूमि में हुई है। ये भारत की ही परंपरा है कि युद्धभूमि में भी धर्म को काव्य में गाया गया है, दर्शन को गीत में गाया गया था। अगर उस गीता को कोई कह दे कि वह सांप्रदायिक है, कट्टरपंथी है, किसी धर्म विशेष का है तो वह गीता का ही अपमान नहीं है बल्कि मानवता का अपमान है, सम्पूर्ण सृष्टि का अपमान है, सम्पूर्ण जाति का अपमान है। ये कृष्ण का अपमान है, जिन्हें हम 16 कला पूर्ण, परब्रहम परमेश्वर के रूप में मानते हैं। मैं अंतिम प्रार्थना करूंगा कि पश्चिम द्वारिका है और पूर्व कामरूप है। कृष्ण की यात्रा द्वारिका से कामरूप तक जाती है अर्थात कृष्ण ने भारत की पश्चिमी सीमा का निर्धारण द्वारिका में किया था और पूर्वी सीमा का निर्धारण कामरूप में किया था। जिसने पूर्व और पश्चिम के भारत के भूगोल, इतिहास, सभ्यता, संस्कृति, लोकमान्यता, लोकभाषा, लोकभूषा, लोकभोजन, लोकभवन, लोकसंस्कृति और लोककला की आधारशिला रखी थी, उसकी गीता को अगर कोई कह दे कि यह सांप्रदायिक है तो हम कभी मानने के लिए तैयार नहीं होंगे। यह सम्पूर्ण भारत का नहीं, मानवता का अपमान है। इसलिए हम सदन से केवल एक लाइन में यह प्रस्ताव पास करें कि गीता के संबंध में रूस में जो हुआ है, हम उसकी निंदा करते हैं और हम गीता का पूर्ण रूप से सम्मान करते हैं। इस पर सरकार का वक्तव्य आना चाहिए।
श्री शरद यादव (मधेपुरा):माननीय सभापति जी, यहां सभी साथियों ने जो कुछ कहा है, मैं उससे अपने आपको संबद्ध करता हूं। मैं सरकार से कहना चाहता हूं कि यह सवाल करोड़ों लोगों की भावनाओं से जुड़ा हुआ है। मैं उसे दोहराने की जरूरत नहीं महसूस करता हूं कि जो सब साथियों ने कहा है। मैं इतना मानता हूं कि सरकार को इस पर कारगर पहल करके इस सवाल को हल करना चाहिए।
इसी निवेदन के साथ मेरी आपके माध्यम से सरकार से आपसे विनती है कि सरकार इस पर जरूर पहल करेगी। यह देश भर के लोगों की इच्छा है। इसे सरकार समझेगी और इस पर पहल करके बेतुके फैसले को बदलवाने का काम करेगी।
श्री अरुण कुमार वुंडावल्ली (राजामुन्दरी):यद्रुच्छा लाभ संतुष्टो द्वंदातीतो विमत्सरः समस्सिद्धा वसिद्धो च कृत्वापि न निबध्यते।
माननीय सभापति महोदय, रोज टीवी पर यही बोलते हैं। मैं समझता हूं कि भगवद गीता को समझना आसान नहीं है, मुश्किल है। मेरे ख्याल से रूस वाले समझे नहीं होंगे। महात्मा गांधी जी ने कहा था - मैं रोज गीता पढ़ता हूं और रोज मुझे नई बात मिलती है। मैंने भी थोड़ी बहुत गीता पढ़ी है, मुझे सबसे अच्छा श्लोक यही लगा जो मैंने अभी बोला है -यद्रुच्छा लाभ संतुष्टो द्वंदातीतो विमत्सरः समस्सिद्धा वसिद्धो च कृत्वापि न निबध्यते।
इसका अर्थ है कि अगर काम करने में कुछ फायदा मिले तो एक्सीडेंटल समझो, यद्रुच्या। लेकिन फायदे के लिए कोई काम मत करो। काम करना ही तुम्हारा कर्म है इसलिए तो जी रहो हो, तुम तुम्हारा काम करते जाओ। यह समझना आसान नहीं है क्योंकि फायदा नहीं होगा तो काम ही नहीं होगा। इसे समझने में शंकराचार्य जी से लेकर राधाकृष्णन जी ने व्याख्या लिखी है, किताब लिखी है। अगर एक किताब पढ़ो तो एक सार समझ में आता है और अगर दूसरी पढ़े तो दूसरा सार समझ में आता है। भगवद गीता का सार भारतीय ही समझ सकते हैं, बाहर वाले नहीं समझ सकते हैं। इसका सार हम में छुपा हुआ है। भले ही इस देश में इतनी पावर्टी हो, इतनी डिफिकल्टीज हों, आपस में लड़ाई-झगड़े हों, परंतु फिर भी जब मांग होती है तो सारा देश एक होकर खड़ा हो जाता है।
सभापति महोदय : इसीलिए कहा गया है - गीता, सुगीता, कर्तव्या किमये शास्त्र विस्तरे।
श्री अरुण कुमार वुंडावल्ली : मगर मैं एक बात बोलना चाहता हूं कि मैं छोटा हूं, सब मेरे से बहुत सीनियर और बुजुर्ग लोग हैं। गीता में एक श्लोक इस प्रकार है - यदय आचरति श्रेष्ठ तद्र देवेतरो जना:, स यत प्रमां कुरते लोकस्तदनुवर्तते। कृष्ण अर्जुन से कहते हैं - तुम मानो या न मानो, इसे छोड़ दो, मगर जो श्रेष्ठ होता है, Who is on the top position, whatever he does, is followed and imitated by ordinary people. जो उच्च स्थान में रहते हैं, वे न चाहते हुए भी कुछ ऐसा काम करते हैं, क्योंकि वे मॉडल हैं, लोग उन्हें देखते रहेंगे। इसलिए मैं इस संसद से प्रार्थना करता हूं कि रोज हम जो करते हैं, उसे छोड़ दें, क्योंकि हमको इमिटेट करने वाली सारी दुनिया, पूरा भारत देखता रहता है कि हमारी 125 करोड़ की आबादी द्वारा चुने हुए 550 लोग यहां लोक सभा में क्या कर रहे हैं। मैं सबसे विनती करूंगा कि रूल बुक में प्रोटैस्ट दिखाने की जो रीति है, आप उस रीति में जाएं...( व्यवधान) यह भी गीता में हैं, इसलिए मैं बोल रहा हूं। मेरे से पहले जो वरिष्ठ माननीय सदस्य बोले हैं, मैं उनसे सहमत हूं। यह भारत की संसद से नहीं, बल्कि पूरी इंसानियत की ओर से जाना है। रूस में जो गीता के खिलाफ बोले हैं, उन्हें यह आवाज पहुंचानी है कि पहले गीता पढ़ो,गीता में क्या है, उसे सीखने की कोशिश करो।
सभापति महोदय : उसे समझो।
श्री अरुण कुमार वुंडावल्ली : फिर उस पर कमैन्ट करने के लायक बनो। आप कमैन्ट तो कर सकते हो, मगर समझे बिना मत करो। यह आवाज यहां से जानी चाहिए।
डॉ. प्रसन्न कुमार पाटसाणी (भुवनेश्वर):महोदय, आप तो संत हैं, you are also a knowledgeable seer. मेरी आपसे विनती है, यह गीता में है - “निर्माण मोहा जितसंग दोषा, आद्यवांतो नित्या विनिवृत कामा:, द्वंदियर विमुक्ता सुखं दुखं संगेयर, गछंति मूढ़ा तत्व पदम वैयं।” क्या हम सब मूढ़ हैं? रुस में जो हुआ, वह क्यों हुआ, क्या वह प्रधान मंत्री जी के जाने के पहले हुआ? वहां एक इस्कान का मंदिर भी तोड़ दिया गया है। गांव-गांव में गीता पर बहस करने के कारण लोगों को बहुत पनिशमैन्ट दिया गया है। मैं समझता हूं कि उन्हें रिप्लाई मिलना चाहिए।
“संसंखा चक्रश्या किरीट कुंडलम, सपितवस्त्रं सरसिर रुहेक्षणं सहारवष्स्थल कौस्तुभात्यं, नमामि विष्णु सिरसा चतुर्भुजं। जो त्रेता युग में राम हैं, वह द्वापर में कृष्ण हैं, वह कलियुग में जगन्नाथ हैं। इस बारे में आपको कुछ न कुछ करना पड़ेगा और उन्हें उस पर अमल करना पड़ेगा। मंत्री जी का उत्तर सुनकर हम बैठ जायेंगे।
संसदीय कार्य मंत्री तथा जल संसाधन मंत्री (श्री पवन कुमार बंसल): महोदय, हमारे जीवन में भागवत गीता की अहमियत के प्रति माननीय सदस्यों ने यहां जो विचार प्रकट किये हैं, उनकी हम कद्र करते हैं। जो साइबेरिया, रशिया में भागवत गीता के खिलाफ जानकारी में आया है कि कोई कानूनन कार्रवाई हुई है। उसकी जानकारी हाउस को विस्तारपूर्वक देने के लिए माननीय श्री एस.एम.कृष्णा जी कल एक वक्तव्य दे देंगे। लेकिन मैं इतना जरूर कहना चाहता हूं कि आपने जिस गंभीरता का जिक्र किया है, उसमें किसी के मन में कोई मतभेद नहीं है, सभी के विचार एक ही हैं। ऐसा एक विषय एक और देश के प्रति पहले भी उठा था। आपमें से बहुत लोगों को शायद मालूम नहीं है। उस वक्त मैंने ही श्री एस.एम.कृष्णा जी को पत्र लिखा था। वह भी एक ऐसी ही बात थी और उस पर उन्होंने कार्रवाई की थी और उस देश ने उस वक्त उस पर एकदम ठीक कदम उठा लिये थे।
हमें विश्वास है कि सारी बात की तफ्तीश करके और उसकी पूरी जानकारी लेकर वह कल यहां अपना वक्तव्य दे देंगे।
MADAM SPEAKER: Please go back to your seats. Why have you come here?
… (Interruptions)
MADAM SPEAKER: Go back to your seats. You cannot raise an issue, standing on the aisle. Go back.
… (Interruptions)
MADAM SPEAKER: Hon. Members, please go back. Nothing is going on the record.
(Interruptions) … * अध्यक्ष महोदया: वीरेन्द्र कश्यप जी, आप बोलिए।
…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया: आप बैठ जाइए।
…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया: आप यहां से क्यों बोल रहे हैं, अपनी सीट पर जाकर बोलिए।
…( व्यवधान)
MADAM SPEAKER: Nothing will go on record.
(Interruptions) … * अध्यक्ष महोदया: आप बैठ जाइए। आप अपनी सीट पर जाकर बोलिए।
…( व्यवधान)
MADAM SPEAKER: Nothing else will go on record.
(Interruptions) … * श्री वीरेन्द्र कश्यप (शिमला): अध्यक्ष महोदया, मुझे यहां से बोलने की इजाजत दीजिए।...( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया: आप तुंत अपनी सीट पर जाइए, समय नष्ट नहीं करिए।
…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया: आप यहां क्यों खड़े हैं? यह जसवंत सिंह जी की सीट है, आप अपनी सीट पर जाइए।
…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया: ये क्या हो रहा है?
श्री वीरेन्द्र कश्यप: अध्यक्ष महोदया, मैं आपका बहुत आभार व्यक्त करता हूं,...( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया: अभी आप बैठ जाइए। आपको भी बुला लेंगे, अभी वीरेन्द्र कश्यप जी को बोलने दीजिए।
…( व्यवधान)
श्री वीरेन्द्र कश्यप : अध्यक्ष महोदया, आपने आज मुझे हिमालय राज्यों से संबंधित कृषकों के ऋणों से संबंधित मामले को उठाने का मौका दिया, इसके लिए मैं आपका आभार व्यक्त करता हूं। मैं आपके ध्यान में यह लाना चाहता हूं कि हमारे यहां जितने भी पहाड़ी क्षेत्र हैं,...( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया: आप बैठ जाइए।
…( व्यवधान)
श्री वीरेन्द्र कश्यप : हमारे जितने भी पहाड़ी राज्य हैं, विशेषकर हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के जो राज्य हैं, वहां पर जो कृषक हैं,...( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया: मैं अभी आपको बुला लेती हूं, वीरेन्द्र कश्यप जी की बात पूरी होने दीजिए।
…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया: अभी आप बैठ जाइए।
…( व्यवधान)
MADAM SPEAKER: Your own Party’s Member is speaking.
… (Interruptions)
श्री वीरेन्द्र कश्यप : अध्यक्ष महोदया, मैं आपके माध्यम से कृषकों के ऋण के बारे में सरकार से आग्रह करना चाहता हूं,...( व्यवधान)
MADAM SPEAKER: The House stands adjourned to meet again at 2 p.m. 12.18 hrs The Lok Sabha then adjourned till Fourteen of the Clock.
14.00 hrs The Lok Sabha re-assembled at Fourteen of the Clock.
(Mr. Deputy-Speaker in the Chair) MR. DEPUTY-SPEAKER: The House shall now take up Item No.18.
… (Interruptions)
14.01 hrs. At this stage Shri Shailendra Kumar and some other hon. Members came and stood on the floor near the Table.
उपाध्यक्ष महोदय: कुछ भी रिकार्ड में नहीं जायेगा, आप लोग बैठ जाइये।
(Interruptions) …* उपाध्यक्ष महोदय : आप पहले वहां जाइये, उसके बाद बात करेंगे।
(Interruptions)
उपाध्यक्ष महोदय: जाइये, वहां बैठिये। आप बैठिये तो सही।