State Consumer Disputes Redressal Commission
Vidhut Vitran Khand vs Nirmal Alagh on 19 September, 2023
Cause Title/Judgement-Entry STATE CONSUMER DISPUTES REDRESSAL COMMISSION, UP C-1 Vikrant Khand 1 (Near Shaheed Path), Gomti Nagar Lucknow-226010 First Appeal No. A/2009/1637 ( Date of Filing : 22 Sep 2009 ) (Arisen out of Order Dated in Case No. of District ) 1. Vidhut Vitran Khand a ...........Appellant(s) Versus 1. Nirmal Alagh a ...........Respondent(s) BEFORE: HON'BLE MR. JUSTICE ASHOK KUMAR PRESIDENT PRESENT: Dated : 19 Sep 2023 Final Order / Judgement
राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, उ0प्र0, लखनऊ।
(मौखिक) अपील संख्या:-1637/2009 दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लि0 द्वारा अधिशासी अभियंता बनाम श्रीमती निर्मल अलग पत्नी श्री अमृत अलग समक्ष :-
मा0 न्यायमूर्ति श्री अशोक कुमार, अध्यक्ष अपीलार्थी के अधिवक्ता : श्री इसार हुसैन प्रत्यर्थी के अधिवक्ता : कोई नहीं।
दिनांक :- 19.9.2023 मा0 न्यायमूर्ति श्री अशोक कुमार , अध्यक्ष द्वारा उदघोषित निर्णय प्रस्तुत अपील, अपीलार्थी/विपक्षी विद्युत विभाग द्वारा इस आयोग के सम्मुख धारा-15 उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986 के अन्तर्गत जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, दि्वतीय आगरा द्वारा परिवाद सं0-268/2007 में पारित निर्णय/आदेश दिनांक 17.8.2009 के विरूद्ध योजित की गई है।
संक्षेप में वाद के तथ्य इस प्रकार है कि प्रत्यर्थी/परिवादिनी को चार किलो वॉट का विद्युत कनेक्शन घरेलू उपयोग हेतु प्राप्त हुआ था एवं अपीलार्थी/विपक्षीगण द्वारा बिजली उपभोग को रिकार्ड करने के लिए प्रत्यर्थी/परिवादिनी के यहॉ इलेक्ट्रॉनिक मीटर लगाया तथा मीटर रीडिंग रिकॉर्ड की गई। प्रत्यर्थी/परिवादिनी लगातार बिल का भुगतान करती रही है। प्रत्यर्थी/परिवादिनी द्वारा अंतिम भुगतान दिनांक 27.11.2000 को किया गया, जो दिनांक 08.8.2000 से 14.11.2000 तक का था। इसके बाद कोई बिल नहीं भेजा गया तथा कोई भी डिमाण्ड नहीं की गई। दिनांक 04.10.2006 को प्रत्यर्थी/परिवादिनी का मीटर दोबारा बदला गया। दिसम्बर, 2007 के तीसरे सप्ताह में प्रत्यर्थी/परिवादिनी को एक बिल दिनांक 09.3.2007 से दिनांक 24.12.2007 तक का रूपया -2- 1,09,297 का दिया गया उक्त बिल पर प्रत्यर्थी/परिवादिनी द्वारा अपना रिप्रजेंटेशन दिनांक 26.12.2007 को किया गया, जिसमें उसने स्पष्ट रूप से इस बात को कहा कि प्रत्यर्थी/परिवादिनी उक्त धनराशि देने के लिए जिम्मेदार नहीं है, क्योंकि मामला समय बाधित हो गया है। प्रत्यर्थी/परिवादिनी को इस संदर्भ में प्रताडित किया गया और परेशान किया जा रहा है। प्रत्यर्थी/परिवादिनी द्वारा जब रिप्रजेंटेशन दिया गया तो उसे धमकाया गया कि उसको धनराशि के रियलाइजेशन के लिए गिरफ्तार भी किया जा सकता है। तब प्रत्यर्थी/परिवादिनी द्वारा मैनेजिंग डायरेक्टर श्री कृपाल सिंह के यहॉ रिप्रजेंटेशन किया गया, परन्तु कोई सुनवाई नहीं हुई अत्एव क्षुब्ध होकर परिवाद जिला उपभोक्ता आयोग के सम्मुख प्रस्तुत किया गया।
अपीलार्थी/विपक्षीगण की ओर से जिला उपभोक्ता आयोग के सम्मुख अपना प्रतिवाद पत्र प्रस्तुत कर परिवाद पत्र के कथनों का खण्डन किया तथा यह कथन किया गया कि प्रत्यर्थी/परिवादिनी द्वारा लम्बे समय से कोई भी बिजली उपभोग का भुगतान नहीं किया गया एवं गलत तथ्यों के आधार पर दावा प्रस्तुत किया गया है। प्रत्यर्थी/परिवादिनी बिजली उपभोग की धनराशि देने के लिए बाध्य है।
विद्वान जिला उपभोक्ता आयोग ने उभय पक्ष के अभिकथन एवं उपलब्ध साक्ष्य पर विस्तार से विचार करने के उपरांत परिवाद को स्वीकार करते हुए निम्न आदेश पारित किया है:-
"परिवाद स्वीकार किया जाता है। दिनांक 09.3.2007 से दिनांक 24.12.2007 तक की 1,09,297.00 रू0 की डिमाण्ड बिल निरस्त किया जाता है। विपक्षी को परिवादिनी का कनेक्शन काटने से भी रोका जाता है। विपक्षी को निर्देशित किया जाता है कि वह मीटर सिलिंग प्रमाण पत्र दिनांकित 04.10.2006 से अपटूडेट बिल मीटर रीडिंग के अनुसार -3- बनाकर परिवादिनी को दे जिसमें परिवादिनी द्वारा जमा की गई धनराशि जो कि 2007 में जमा की गई है, समायोजित किया जाए। इसके साथ ही 04.10.2006 से पूर्व के दो वर्ष के बिल परिवादिनी से मिनीमम चार्ज का भुगतान किया जावे। विपक्षी बिल ब्याजरहित बनाकर इस निर्णय के पैंतालीस दिन के अन्दर देगा तथा इसी दौरान 2,000.00 रू0 वाद व्यय का भी अदा करेगा।
यदि विपक्षी 2,000.00 रू0 की धनराशि उक्त पैंतालीस दिन के समय में नहीं देता तो परिवादिनी परिवाद व्यय की धनराशि पर निर्णय के दिनांक से भुगतान के दिनांक तक 09 प्रतिशत ब्याज भी पाएगी।'' जिला उपभोक्ता आयोग के प्रश्नगत निर्णय/आदेश से क्षुब्ध होकर अपीलार्थी/विपक्षी विद्युत विभाग की ओर से प्रस्तुत अपील योजित की गई है।
प्रस्तुत अपील विगत 14 वर्षों से लम्बित है एवं पूर्व में अनेकों तिथियों पर अधिवक्तागण की अनुपस्थिति के कारण स्थगित की जाती रही है अत्एव मेरे द्वारा अपीलार्थी की ओर से उपस्थित विद्वान अधिवक्ता को सुना गया तथा प्रश्नगत निर्णय/आदेश व पत्रावली पर उपलब्ध समस्त प्रपत्रों का अवलोकन किया गया। प्रत्यर्थी के अधिवक्ता अनुपस्थित है।
मेरे द्वारा अपीलार्थी के विद्वान अधिवक्ता के कथनों को सुना गया तथा विद्वान जिला उपभोक्ता आयोग द्वारा पारित प्रश्नगत निर्णय/आदेश एवं पत्रावली पर उपलब्ध समस्त अभिलेखों के परिशीलनोंपरांत यह पाया गया कि विद्वान जिला उपभोक्ता आयोग द्वारा पारित निर्णय/आदेश विधि सम्मत है, परन्तु जहॉ तक विद्वान जिला उपभोक्ता आयोग द्वारा अपने प्रश्नगत आदेश में अपीलार्थी/विपक्षी के विरूद्ध वाद व्यय के मद में रू0 2,000.00 (दो हजार रू0) की देयता -4- निर्धारित की गई है, वह वाद के सम्पूर्ण तथ्यों एवं परिस्थितियों तथा अपीलार्थी के विद्वान अधिवक्ता के कथन को दृष्टिगत रखते हुए अनुचित प्रतीत हो रही है, तद्नुसार उसे समाप्त किया जाना उचित पाया जाता है अत्एव प्रस्तुत अपील आंशिक रूप से स्वीकार की जाती है। निर्णय/आदेश का शेष भाग यथावत कायम रहेगा।
अपीलार्थी को आदेशित किया जाता है कि वह उपरोक्त आदेश का अनुपालन 45 दिन की अवधि में किया जाना सुनिश्चित करें। अंतरिम आदेश यदि कोई पारित हो, तो उसे समाप्त किया जाता है।
प्रस्तुत अपील को योजित करते समय यदि कोई धनराशि अपीलार्थी द्वारा जमा की गयी हो, तो उक्त जमा धनराशि मय अर्जित ब्याज सहित सम्बन्धित जिला उपभोक्ता आयोग को यथाशीघ्र विधि के अनुसार निस्तारण हेतु प्रेषित की जाए।
आशुलिपिक/वैयक्तिक सहायक से अपेक्षा की जाती है कि वह इस निर्णय/आदेश को आयोग की वेबसाइट पर नियमानुसार यथाशीघ्र अपलोड कर दें।
(न्यायमूर्ति अशोक कुमार) अध्यक्ष हरीश सिंह वैयक्तिक सहायक ग्रेड-2., कोर्ट नं0-1 [HON'BLE MR. JUSTICE ASHOK KUMAR] PRESIDENT