Lok Sabha Debates
Need To Regulate The Telescopic Fare For Frieght And Structure It On The Lines Of ... on 3 May, 2016
Sixteenth Loksabha an> Title: Need to regulate the telescopic fare for frieght and structure it on the lines of passenger fare.
श्रीमती जयश्रीबेन पटेल (मेहसाणा) : माननीय अध्यक्ष जी, जैसा कि रेलवे के वर्तमान किराए स्ट्रक्चर के अनुसार जब अंतर बढ़ता है तब रेलवे का किराया बढ़ता है। इस कारण कोयले का लेंडेड कास्ट गुजरात के अंदरुनी हिस्से में आने वाले विभिन्न मथकों की कीमत बहुत ज्यादा पड़ती है। उदाहरण के तौर पर एसीसीएल कोरबा सिक्का टीएएस का रेलवे नूर भाड़ा 3,150 मेट्रिक टन होता है जबकि आयातित कोल परिवहन खर्च इंडोनेशिया से पश्चिम समुद्र सीमा तक 725 रुपए प्रति मेट्रिक टन यानी 12 यूएस डॉलर तथा आस्ट्रेलिया से भारतीय समुद्री सीमा तक 1000 रुपए प्रति मेट्रिक टन होता है। वाऩ में मानसून के तीन महीने की बात करें तो भारतीय रेल द्वारा बिजी सीजन सरचार्ज वसूला जाता है। रेलवे द्वारा समांतर रेलवे वेगन परिवहन की क्षमता निर्धारित की जाती है जिसके अंडर लोडिंग और ओवर लोडिंग के लिए भारी दंड वसूल किया जाता है। गुजरात के अंदरुनी बीज उत्पादन मथकों के लिए कोयले परिवहन का रेलवे नूर किराया ज्यादा होने के कारण उनकी फ्यूल युनिट उत्पादन कास्ट के मुताबिक 65 प्रतिशत तक बढ़ जाती है। परिणामस्वरूप जीएसईसीएल विद्युत उत्पादन केंद्र अपने आप मेरिट आर्डर से बाहर निकल जाते हैं। कई बार तो इसके कारण आबंटित कोयले का पूर्ण रूप से उपयोग भी नहीं हो पाता है। ऐसे संयोग में कोल इंडिया द्वारा कम कोयला लेने के लिए दंड वसूला जाता है। इसके तहत गुजरात सरकार ने रेलवे नूर भाड़ा में अनिवार्य सुनियोजन करने की आवश्यकता के बारे में बार-बार विनती की है।
मेरी मांग है और सरकार से विनती भी है कि रेलवे द्वारा चार्ज किए जाने वाले मुसाफिर भाड़े के मुताबिक टेलीस्कोपिक नूर भाड़ा की नीति लाएं।
माननीय अध्यक्ष: श्री ए.टी. नाना पाटिल, श्री देवजी एम. पटेल, कुँवर पष्षपेन्द्र सिंह चन्देल, श्री सी.पी. जोशी, श्री रोडमल नागर और श्री सुधीर गुप्ता को श्रीमती जयश्रीबेन पटेल द्वारा उठाए गए विाय के साथ संबद्ध करने की अनुमति प्रदान की जाती है।