Lok Sabha Debates
Regarding Providing Better Sewage Facilities And Other Basic Amenities To The ... on 26 February, 2016
Sixteenth Loksabha an> Title: Regarding providing better sewage facilities and other basic amenities to the people living in Delhi.
श्री रमेश बिधूड़ी (दक्षिण दिल्ली) : महोदय, आपने मुझे दिल्ली की एक बड़ी सेंसेटिव समस्या पर बोलने का मौका दिया, इसके लिए मैं आपको धन्यवाद देता हूं। दिल्ली के अंदर गंदगी का ढेर लग रहा है। यह एनसीआर है, राष्ट्रीय राजधानी है। राज्य की जो सरकार है, वह राजनीति के अलावा कुछ कर नहीं रही है। दिल्ली की 1,600 अनाधिकृत कालोनियाँ हैं। उनके अन्दर आज से एक-डेढ़ साल पहले कुछ प्लान बने थे, जो सीवर डालने के थे। उसको अब समाप्त करके जल बोर्ड ने कुछ दिनों पहले ही, मुख्यमंत्री साहब ने सीवेज मास्टर प्लान, 2031 का मसौदा तैयार किया है, जो देखने में केजरीवाल जी द्वारा डॉयरेक्ट किया हुआ ट्रायल जैसा ही लगता है। प्रपोजल में दिल्ली की बेसिक सीवर समस्या को दरकिनार करते हुए आँखों पर पट्टी बाँधकर कुछ ही प्लान किया है। पूरे मास्टर प्लान में केजरीवाल सरकार के हिसाब से नए सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट, एसटीपी लगाना ही समस्या का निवारण है, जबकि दिल्ली का पुराना अनुभव है कि सिर्फ नए एसटीपी इस समस्या का निवारण नहीं है। दिल्ली में अभी 34 एसटीपी हैं, जो 21 लोकेशन पर हैं, जो अभी बस 57 प्रतिशत कैपेसिटी पर काम कर रहे हैं। यह मास्टर प्लान इस बात पर कुछ नहीं बताता कि मौजूदा एसटीपीज पूरी कैपेसिटी पर कैसे ऑपरेट होंगे?
दूसरी खामी यह है कि इस मास्टर प्लान में 75 नए एसटीपीज 38 लोकेशन पर शुरू करने का प्लान है, जो कि बस हवा-हवाई लगते हैं। दिल्ली राज्य में जो एसटीपी अभी मौजूद हैं, उन्हें पिछली सरकारों द्वारा ऐसी जगह लगाया गया, जहाँ उनकी जरूरत थी ही नहीं।
महोदय, दिल्ली में जगह की बहुत कमी है। ऐसे में दिल्ली जल बोर्ड का यह प्लान बचकाना प्रतीत होता है। दिल्ली में सीवेज की समस्या बहुत सी स्वास्थ्य समस्याओं की जड़ भी है। मीडिया रिपोर्ट बताती है कि सीवेज की समस्या से ग्रस्त स्थानों पर कॉलरा जैसी अन्य बीमारियाँ, डेंगू जैसी बीमारियां हमेशा फैलती हैं।
दिल्ली देश की राजधानी है और इस कारण हमारा दायित्व भी इसके लिए ज्यादा हो जाता है मगर आज देश की राजधानी के विकास को केजरीवाल जी द्वारा ट्रायल समझकर खिलवाड़ किया जा रहा है। पिछले दिनों केजरीवाल साहब ने अखबारों में विज्ञापन देकर पैसा बर्बाद किया है, क्योंकि केन्द्र से 3,200 करोड़ रूपए लेना था कि वैंकेया नायडू जी ऐप्स के माध्यम से दिल्ली की सफाई करेंगे। एमसीडी का फोर्थ फाइनेंस कमीशन का जो पैसा था, वह सरकार ने एमसीडी को दिया ही नहीं। दिल्ली में हड़तालें हुईं। दिल्ली एनसीआर है और अगर केजरीवाल साहब के भरोसे, वे केवल राजनीति कर रहे हैं, दिल्ली की दो करोड़ जनता को छोड़ा जाएगा तो दुनिया में दिल्ली का मैसेज गलत जाएगा। इसलिए केन्द्र को इंटरफेयरेंस करते हुए अगर राज्य सरकार सही तरीके से एमसीडी को फोर्थ पे कमीशन का पैसा न दे और सीवेज सिस्टम के पुराने प्लान को न करे तो केन्द्र सरकार को इंटरफेयरेंस करना चाहिए, क्योंकि दिल्ली देश की राजधानी है।
आपके माध्यम से मैं कहना चाहता हूं कि केन्द्र सरकार को केवल उसको राज्य के आधार पर नहीं छोड़ना चाहिए। दिल्ली की जनता से जो भूल हुई है, उसके लिए वे आकर अपने आपको कहते हैं कि हमसे गलती हुई है, तो उन्हें पीने का पानी और सीवर की व्यवस्था की जाए। संगम विहार, प्रहलादपुर, मीठापुर, रंगपुरी, पालम ऐसी कालोनियां हैं, जहां तीन-तीन फुट पानी भरा हुआ है। मैं आपको फोटो लाकर दिखा सकता हूं। वहां उस गंदे पानी के निकासी की व्यवस्था नहीं है। इसलिए केंद्र सरकार को, केंद्र का दिल्ली के अंदर हस्तक्षेप है, वह नौटंकी करके कह देता है कि केन्द्र मुझे काम नहीं करने देता है। केन्द्र कदम वापस खींच लेता है, वह काम करे। उनको एक साल मिल गया। अब सरकार को चाहिए कि वह हस्तक्षेप करके दिल्ली की जनता को उस गंदगी से निजात दिलाये। आपने मुझे शून्य काल में बोलने का मौका दिया, इसके आपको बहुत-बहुत धन्यवाद।
HON. CHAIRPERSON : S/ Shri Maheish Girri, Bhairon Prasad Mishra and Kunwar Pushpendra Singh Chandel are permitted to associate with the issue raised by Shri Ramesh Bidhuri.