Lok Sabha Debates
Discussion Regarding Atrocities Against Dalits In Haryana And Other Parts Of The ... on 20 December, 2002
28 16.03 hrs. Title: Discussion regarding atrocities against dalits in Haryana and other parts of the country. (concluded) श्री रामजीलाल सुमन (फिरोजाबाद):सभापति महोदय, १५ अक्टूबर को हरियाणा के झज्जर में पांच दलितों की हत्या हुई थी। वह सवाल हमने तथा श्री रामविलास पासवान जी ने उठाया था। ९ दिसम्बर, २००२ को गृह मंत्री जी ने बयान दिया था। आज उस बयान पर ही चर्चा होनी थी। मेरी सदन के तमाम माननीय सदस्यों से बात हुई है। आज सदन का अंतिम दिन है। यह बहुत गंभीर मामला है। झज्जर ही अकेला सवाल नहीं है, पूरे देश में दलितों पर अत्याचार हो रहे हैं। अनुसूचित जाति एवं जनजाति आयोग की रिपोर्ट तक डिस्कस नहीं हुई है। उत्तर प्रदेश में जंगल राज है और सबसे ज्यादा अत्याचार उत्तर प्रदेश में हो रहे हैं। अनुसूचित जाति एवं जनजाति आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक सबसे ज्यादा अत्याचार उत्तर प्रदेश में हो रहे हैं। यह बहुत गंभीर मामला है और हम चाहते हैं कि अगले सत्र में इस पर गंभीरता के साथ चर्चा हो। संसदीय कार्य मंत्री यहां बैठे हैं, वह हमें एश्योरेंस दे दें कि दलितों के सवाल पर दो दिन व्यापक चर्चा होगी।…( व्यवधान)
श्री रामदास आठवले (पंढरपुर) : दलितों के सवाल पर दो दिन की चर्चा होनी चाहिए।… (Interruptions)
SHRI PRIYA RANJAN DASMUNSI (RAIGANJ): Sir, we have no objection if it is discussed in the next Session for two days. We want an assurance from the Government that it will be taken up in the next Session.… (Interruptions)
SHRI HANNAN MOLLAH (ULUBERIA): At the beginning of this Session, on the first day, we had given the notices. … (Interruptions)
MR. CHAIRMAN: Do you want that this discussion under Rule 193 should be taken up in the next Session?
… (Interruptions)
MR. CHAIRMAN: I am not able to hear anything. Let the Mover, Shri Ramji Lal Suman, speak on this. Let me know what is happening.
… (Interruptions)
MR. CHAIRMAN: The hon. Members want the discussion under Rule 193 to be taken up in the next Session. What has the Parliamentary Affairs Minister to say about it? The hon. Members want this discussion to be taken up in the next Session.
… (Interruptions)
MR.CHAIRMAN : Mr. Minister, they want a discussion under Rule 193 on this in the next Session.
… (Interruptions)
MR.CHAIRMAN: Let him start the discussion and then let the discussion remain inconclusive.
… (Interruptions)
श्री राम विलास पासवान (हाजीपुर) : सभापति जी, यह दुर्भाग्य की बात है, हमने उस दिन भी कहा, मैं सरकार के ऊपर कोई आक्षेप नहीं करना चाहता हूं क्योंकि इस सदन में हम लोग १९७७ से हैं, यानी पिछले २५ सालों से हर सैशन में किसी न किसी रूप में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति की समस्याओं के संबंध में चर्चा हो जाया करती थी, लेकिन काफी समय से अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजातियों की समस्याओं के बारे में चर्चा तो छोड़ दीजिए एस.सी.एस.टी.कमीशन की रिपोर्ट पर भी चर्चा नहीं हो रही है।
महोदय, अभी जो जवाब सरकार की तरफ से आया है उसके मुताबिक अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजातियों पर अत्याचार की घटनाओं में वृद्धि हुई है जबकि मंत्री महोदय ने अपने बयान में कहा है कि वृद्धि नहीं हुई, लेकिन स्वयं सरकार ने एक प्रश्न के उत्तर में स्वीकार किया है कि इस प्रकार की घटनाओं में वृद्धि हुई है।
महोदय, मैंने, दोनों पक्षों के लोगों से बात की है, सब लोगों से बात की है और सभी ने चाहा है कि एस.सी.एस.टी. कमीशन की रिपोर्ट पर चर्चा हो, लेकिन दुर्भाग्य से बिजनैस एडवाइजरी कमेटी में यह मामला लटक जाता है। मैं अध्यक्ष महोदय को धन्यवाद देना चाहता हूं कि उन्होंने लीडर्स की एक बैठक बुलाई और उसमें यह तय हुआ था कि आज क्वश्चन आवर के बाद इसको २ बजे प्रारम्भ किया जाएगा, लेकिन २ बजे के बजाय अब ४ बज गए हैं और आज सत्र का अन्तिम दिन है, ‘वन्दे मातरम् भी करना है’ । ऐसी परिस्थिति में और हर माननीय सदस्य की, हर पक्ष के सदस्य की, जो इसमें भाग लेना चाहते हैं, उन सबकी राय यह है कि इसे आज न लिया जाए क्योंकि यह सिर्फ हरियाणा का मामला नहीं है, यह केवल उत्तर प्रदेश का मामला नहीं है यह पूरे देश का मामला है, इसलिए इस पर विस्तार पूर्वक चर्चा करने की आवश्यकता है।
यह प्रस्ताव श्री रामजी लाल सुमन और मेरे नाम से आया है। हम लोगों की आपस में बातचीत हुई है और मेरे नाम से यह प्रस्ताव आया है। हमने सभी पक्षों के लोगों से बात की है, सभी लीडर्स से बात की है। श्री रामदास आठवले जी से भी बात की है और चूंकि इस सत्र का आज यह अंतिम दिन है और अब इस पर गंभीर और गहन चर्चा करने का माननीय सदस्यों का मूड नहीं है। इसलिए इस परिस्थिति में चूंकि इस विषय पर गम्भीरता से चर्चा होनी चाहिए और अब नहीं हो सकेगी, इसलिए मैं यह मांग करता हूं कि पार्लियामेंट्री अफेयर्स मनिस्टर साहब को यदि कोई आपत्ति नही हो, तो हम यह आग्रह करना चाहते हैं कि इस मामले को अगले सत्र के प्रथम दिन बहस के लिए रखा जाए। इसे बिना बिजनैस एडवाइजरी कमेटी में समय निर्धारित हेतु ले जाए बिना बहस के लिए रखा जाए। क्योंकि बिजनैस एडवाइजरी कमेटी में अगर यह जाएगा तो यह मामला पिछड़ जाएगा और अगले सत्र के अंतिम दिन पर चला जाएगा। इसलिए मैं प्रार्थना करता हूं कि इस विषय को बहस के लिए आज नहीं लिया जाए, इसे अगले सत्र के प्रथम दिन के लिए स्थानांतरित कर दिया जाए और बहस नियम १९३ के अंदर न होकर इस पर पूरी डेढ़ या दो दिन की बहस होनी चाहिए क्योंकि यह विषय केवल हरियाणा या किसी एक प्रदेश से जुड़ा हुआ नहीं है बल्कि व्यापक रूप से पूरे देश को प्रभावित कर रहा है। इसलिए यदि यह आज न लिया जाकर अगले सत्र के प्रथम दिन लिया जाता है, तो हमें कोई आपत्ति नहीं होगी और आज आप दूसरा बिजनैस ले सकते हैं।…( व्यवधान)
डॉ. सुशील कुमार इन्दौरा (सिरसा) : सभापति महोदय, मेरा आपके माध्यम से निवेदन है कि यदि दलितों के मामले पर चर्चा कराते हैं, तो यह पूरे देश के परिप्रेक्ष्य में होनी चाहिए न कि केवल हरियाणा के। क्योंकि यह जो नियम १९३ में चर्चा आई है यह केवल हरियाणा के झज्झर में जो घटना घटी, उससे संबंधित है। अब हरियाणा में सुख-शान्ति है और कहीं इस प्रकार की चर्चा कराने से वहां की सुख-शान्ति भंग न हो जाए। इसलिए मेरा निवेदन है कि केवल हरियाणा में दलितों की अवस्था के बारे में चर्चा न होकर पूरे देश के दलितों की जो स्थिति है, उसके ऊपर चर्चा होनी चाहिए। मेरा यही निवेदन है कि इस चर्चा को हरियाणा से न जोड़ा जाए। अब वहां ला-एंड-आर्डर की अच्छी स्थिति है। कहीं ऐसा न हो कि इस चर्चा के कारण स्थिति खराब हो जाए।
सरदार बूटा सिंह (जालौर):सभापति महोदय, हमने प्राइवेट मैम्बर्स बिजनैस को सिर्फ इसीलिए पोस्टपोंड किया ताकि आप दलितों के विषय पर चर्चा करा सकें। मैं अध्यक्ष महोदय का आभार व्यक्त करना चाहता हूं कि उन्होंने इसके ऊपर चर्चा रखने का समय दिया, लेकिन चिन्ता का विषय यह है कि सत्र के अंतिम दिन और अंतिम समय में इसे रखा गया है, जो न्यायसंगत नहीं है। यह इतना महत्वपूर्ण विषय है कि पूरे देश की एक-तिहाई आबादी इससे संबंधित है। इसलिए हमें इसे इतना लाइटली नहीं लेना चाहिए।
मैंने इस संबंध में अपने साथियों से भी बात की है। हम आपसे प्रार्थना करना चाहते हैं कि जिस वक्त १९८९ में एट्रोसिटीज एक्ट बना था जिसे श्री राजीव गांधी ने बनाया था, उस वक्त इससे अच्छे हालात थे। आज हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं। आज देश में दलितों में, आदिवासियों में यह भावना पैदा हो गई है कि दिल्ली में कोई सरकार नहीं है जो उनको बचा सके। आप १९८९ का एक्ट पढ़कर देखिये। श्री राजीव गांधी ने उसमें प्रावधान किया है कि हर प्रदेश में सीनियर मोस्ट आई.पी.एस. आफिसर को इंचार्ज बनाया जाये और भारत सरकार उसका संचालन करे। यह सैंट्रल एक्ट है मगर दुख की बात है कि आज हमने माननीय मंत्री जी का जो स्टेटमैंट पढ़ा, उसमें उन्होंने अपने हाथ धो लिये और यह कहा कि यह स्टेट सब्जैक्ट है इसलिए हम कुछ नहीं कर सकते।…( व्यवधान)
कुंवर अखिलेश सिंह (महाराजगंज, उ.प्र.) : बूटा सिंह जी, यह एक्ट जनता दल की सरकार ने बनाया था। …( व्यवधान)
सरदार बूटा सिंह :उसमें इम्प्रूवमैंट हुआ था, अमेंडमैंट हुआ था। …( व्यवधान)मेरा यही आग्रह है कि अगले सत्र में इस पर चर्चा के लिए दो दिन रखे जायें ताकि दो दिन में उत्तर प्रदेश में दलितों के साथ जो सामूहिक अत्याचार हो रहे हैं …( व्यवधान)उत्तर प्रदेश में भयंकर अत्याचार हो रहे हैं, वहां की मायावती सरकार करा रही है, उसके ऊपर पूरी चर्चा हो सके। इसके लिए हमें दो दिन मिलने चाहिए। …( व्यवधान)माननीय संसदीय कार्य मंत्री ने इसे मान लिया है कि वे अगले सत्र में इस पर दो दिन चर्चा के लिए देंगे लेकिन यह उनका वायदा नहीं होना चाहिए बल्कि उनका कमिटमैंट होना चाहिए। धन्यवाद।
श्री शीशराम सिंह रवि (बिजनौर): वहां एक दलित बहन को मुख्यमंत्री बना दिया है तो आपके पेट में दर्द हो रहा है। …( व्यवधान)
सरदार बूटा सिंह :उत्तर प्रदेश में क्यादलितों को रोटी मिल गयी, दलितों का जीवन सुरक्षित हो गया ? …( व्यवधान)
श्री रामदास आठवले (पंढरपुर) : सभापति महोदय, जो प्रस्ताव यहां रखा गया है, उसके बारे में हमें सरकार से आश्वासन चाहिए। …( व्यवधान)इस पर दो दिन चर्चा होनी चाहिए।…( व्यवधान)
संसदीय कार्य मंत्री तथा संचार और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री (श्री प्रमोद महाजन) : सभापति महोदय, मैं सभी सदस्यों की भावनाओं से पूर्ण सहमत हूं कि दलितों पर अत्याचार और उसकी रिपोर्ट पर चर्चा करने के लिए यह कोई उचित समय नहीं है। मैं यह इस सत्र की द्ृष्टि से कह रहा हूं। अच्छा होता हम इस पर पहले चर्चा कर लेते, लेकिन उन कारणों में मैं जाना नहीं चाहता हूं। इतना अच्छा सत्र हुआ है, मैं उस चर्चा में नहीं जाना चाहता लेकिन निश्चित रूप से प्रवीण राष्ट्रपाल जी को याद होगा कि दिसम्बर के पहले सप्ताह में जब उन्होंने यह विषय उठाया था तब मैंने कहा था कि एस.सी./एस.टीज. की समस्याओं की चर्चा बरसों में, मुझे दो-चार वर्ष से याद नहीं है जब हमने इस पर विस्तार से चर्चा की हो और यह समाज का इतना बड़ा हिस्सा है कि उनके विषयों पर, उनके प्रश्नों पर चर्चा जरूर होनी चाहिए।
इसलिए मैं सबसे सहमत हूं कि आज सवा चार बजे हम चर्चा करें तो वह सार्थक चर्चा नहीं होगी क्योंकि उसमें सारे सदस्य भाग नहीं ले सकेंगे। अगले सत्र में मुझे बाद में न कहा जाये क्योंकि अगला सत्र बजट सत्र है, उसमें राष्ट्रपति का भाषण होता है। उस सत्र में पहला काम राष्ट्रपति के भाषण पर आभार प्रस्ताव का होता है। उसके बाद जो पहली चर्चा सदन में होगी, वह दलितों के विषयों पर सर्वसाधारण चर्चा होगी तथा उसमें कोई समय सीमा नहीं होगी। जब तक सदन यह न कहे कि हमारी चर्चा समाप्त हुई तब तक उत्तर नहीं दिया जायेगा यानी मंत्री जी उत्तर के लिए खड़े नहीं होंगे।
मैं पुन: आश्वस्त करता हूं कि हमारी ओर से इसमें कोई आपत्ति नहीं है। राष्ट्रपति के भाषण पर आभार का प्रस्ताव पारित होने के बाद क्योंकि राष्ट्रपति के सम्मान में हमें यह काम सबसे पहले करना होता है, उसके बाद जो पहली चर्चा होगी, उसमें हमे कोई आपत्ति नहीं है कि वह दलितों के विषय पर हो। मैं इस बात से भी सहमत हूं कि एक आध प्रांत या एक आध घटना से उसे न जोड़ते हुए, वह स्वाभाविक रूप से जरा बड़े फ्रेम वर्क में चर्चा हो। इसलिए वह चर्चा हम कर सकते हैं। अगर सदन की सहमति हो तो हम एजेंडे में आगे बढ़ें।
MR. CHAIRMAN : We will take up the matter in the next Session, after consulting the Business Advisory Committee.
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