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Lok Sabha Debates

Discussion On The Motion To Consider The Wakf (Amendment) Bill, 2010 (Bill ... on 7 May, 2010

> Title: Discussion on the motion to consider the Wakf (Amendment) Bill, 2010 (Bill Passed).

MADAM SPEAKER: Now, the House will take up Item No.24.

THE MINISTER OF STATE OF THE MINISTRY OF CORPORATE AFFAIRS AND MINISTER OF STATE OF THE MINISTRY OF MINORITY AFFAIRS (SHRI SALMAN KHURSHEED): Madam Speaker, I beg to move*:

“That the Bill to amend the Wakf Act, 1995 be taken into consideration.” (Interruptions)           Madam, the inadequacies in the existing Wakf Act are being addressed. The Joint Parliamentary Committee has made several reports. On the basis of those reports, greater strength in the Central Wakf Council is being given.… (Interruptions)          With these words, I commend the Bill for the consideration of the House.   MADAM SPEAKER: Motion Moved:
“That the bill to amend the Wakf Act, 1995, be taken into consideration.”   MADAM SPEAKER: Now we shall take up Item no. 24. Shri Shahnawaz Hussainji.
 
 श्री सैयद शाहनवाज़ हुसैन (भागलपुर):मैं आपको धन्यवाद करता हूँ कि अभी पिछड़े लोगों को जनगणना में शामिल किया जाए, इसके लिए बधाई का कार्यक्रम चला। हम भी सरकार को इसके लिए बधाई देते हैं। अब मैं सरकार से चाहता हूँ कि ज़रा अल्पसंख्यकों की फिक्र भी कीजिए।  वक्फ़ संशोधन विधेयक 2010 पर बोलने के लिए मैं खड़ा हुआ हूँ।
          इस देश में वक्फ़ की बड़ी जायदाद है और जिन लोगों के पास दौलत होती है, वे अपनी कम्युनिटी के गरीब लोगों के लिए, यतीम बच्चों के लिए, जिनके माँ-बाप नहीं हैं, जो बेसहारा लोग हैं, उनके लिए ज़मीन वक्फ़ करते हैं। आज इस देश में करीब पाँच लाख एकड़ ज़मीन वक्फ़ है 28 स्टेट्स और सात यूनियन टैरिटरीज़ में। वक्फ़ दो तरह के होते हैं। एक तो वक्फ़ किया जाता है, एक औलाद के लिए भी वक्फ़ किया जाता है। लेकिन मुझे बहुत दुख से कहना पड़ता है कि आज़ादी के बाद जब इस देश का बँटवारा हुआ, लेकिन इस देश के बँटवारे के बाद वक्फ़ की जायदाद की लूट मची। मुझे बहुत दुख है कि इसकी जॉइंट पार्लियामैंट्री कमेटी जब बनी, उसके बाद ही यह बिल यहाँ पर आया। उससे पहले वक्फ़ एक्ट 1954 का था। उसके बाद 1995 में स्टेट वक्फ़ बोर्ड कांस्टीटय़ूट करने के लिए एक बिल बना। जेपीसी ने इस पर बड़ी मेहनत की। मैं भी उस समिति का सदस्य था। उस नाते उसमें जिन लोगों ने भी कंट्रीब्यूट किया, वह बहुत ईमानदारी से किया और वह एक आई-ओपनर था। आज इस देश में चर्चा होती है कि मुल्क का बँटवारा हुआ, जिन लोगों को पाकिस्तान जाना था, वे चले गए, लेकिन जो यहाँ रह गए, उनका इस मुल्क पर पूरा हक है और देखना चाहिए कि उनकी जायदाद को कोई और नहीं लूट रहा है। हम चाहेंगे कि आज का दिन जब ऐतिहासिक है तो ट्रैज़री बैंच से आज यह भी अनाऊंस हो जाए कि जो जायदाद गरीब लोगों के लिए वक्फ़ की गई, अगर गवर्नमैंट का उस पर कब्ज़ा है तो सरकार कम से कम यह एश्योरेन्स दे दे कि उस कब्ज़े को हटाने का काम करेंगे।
          आज संसद के इस सत्र का आखिरी दिन है। आप इस बिल को देर से लाए हैं लेकिन दुरुस्त लाए हैं। मैं यह मानता हूँ कि आज जो करीब पाँच लाख एकड़ ज़मीन है, उसमें 50 प्रतिशत इल्लीगल ऑक्यूपेशन बाय गवर्नमैंट है जिसमें बड़ी-बड़ी एजेन्सीज़ ग्रीनलैन्ड के नाम पर ज़मीन ले लेती हैं। मैं डीडीए का मैम्बर हूँ। मैंने उसकी फाइल मंगाकर देखी है। पहले किसी ज़मीन को वे ग्रीनलैन्ड घोषित करते हैं और बाद में फिर उसका यूज़ चेन्ज करके काम करते हैं। बहुत सी ऐसी जायदाद है, जिस पर गवर्नमैंट का कब्ज़ा है। उस पर ध्यान देना चाहिए। मैं आपके ज़रिये यह ज़रूर चाहता हूँ कि इस पर बहुत बार मीटिंग हुई है, बहुत चर्चा हुई है। श्रीमती इंदिरा गांधी जी जब प्रधान मंत्री थीं तो उन्होंने सभी स्टेट्स के चीफ मिनिस्टर्स को एक पत्र लिखा था। मुझे यह कहते हुए दुख हो रहा है, मैं कोई कटाक्ष करने के लिए खड़ा नहीं हुआ हूँ, मैं अक़लियत का दर्द रख रहा हूँ और मैं बहुत दुख के साथ कहना चाहता हूँ कि प्राइम मिनिस्टर की चिट्ठी पर उनकी सरकारों ने भी कोई काम नहीं किया। मंत्री जी अपने जवाब में बता सकते हैं कि वह चिट्ठी जो उन्होंने लिखी, उसके बाद उस पर क्या काम हुआ। आज वक्फ़ की जो लैन्ड है, वह जो गवर्नमैंट के कब्ज़े में है। जयपुर में एक बिल्डिंग एक बैंक के पास है जिसका वे 400 रुपये महीना दे रहे हैं। यहाँ बहुत सी जायदाद ऐसी है जिसकी मैं मिसाल दूँ तो बहुत लंबी लिस्ट है। मुझे कम समय में बोलना है इसलिए मैं सिर्फ इंपॉर्टैन्ट पॉइंट्स को टच करते हुए आपका ध्यान इस ओर खींचना चाहता हूँ।
          मैं यह जरूर चाहता हूं कि वक्फ के अंदर जो जायदाद है, ज्यादातर मुकदमें कोर्ट में चल रहे हैं और उन मुकदमों में वक्फ बोर्ड गवर्नमेंट से लड़ रही है, यानी दोनों तरफ हैं - एक तरफ वक्फ बोर्ड और एक तरफ गवर्नमेंट है। ऐसे मुकदमों की तादाद, मंत्री जी जब जवाब देने के लिए खड़े होंगे तो उन्हें इस पर जवाब देना चाहिए कि इस देश में कितने मुकदमें भारत की सरकार वक्फ बोर्ड के सामने लड़ रही है। वक्फ बोर्ड को आपने कोई अधिकार नहीं दिया है, वे कोई काम नहीं कर सकते। आज जरूरत है, कोई बहुत लम्बी-चौड़ी तकरीर की जरूरत नहीं है, एक एश्योरेंस मिले कि जो गवर्नमेंट ने कब्रिस्तान और दरगाह पर कब्जा किया, मैडम, मैं बड़ी जिम्मेदारी के साथ बोल रहा हूं। मेरे पास वह लिस्ट भी है, क्या उसे गवर्नमेंट मुक्त करने का इरादा रखती है? कई बार कोई ऐसी जमीन होती है, जो वक्फ की जमीन है, नेशनल इंटरस्ट में आपको उसे एक्वायर करना पड़ा है। सुप्रीम कोर्ट की जो रूलिंग आई है, आंध्र प्रदेश के केस में जो हुआ है, उसमें सुप्रीम कोर्ट ने कहा, उनकी रूलिंग में है - “Wakf is always Wakf.” यानी ये वक्फ की वेल्यूएशन बदल नहीं सकते। उसका लैंड यूस आप चेंज नहीं कर सकते, क्योंकि वह गरीबों एवं यतीमों के लिए है। उसे चेंज करना आपके अधिकार में नहीं है। ...( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया:  आप बैठ जाइए।
…( व्यवधान)
MADAM SPEAKER: Nothing else will go on record.
(Interruptions) …* श्री सैयद शाहनवाज़ हुसैन (भागलपुर):ये कांग्रेस के ऐसे खिलाड़ी हैं, जो हिट विकेट हो जाते हैं। ...( व्यवधान) आप गुजरात बोले तो मैं महाराष्ट्र पर आ जाऊंगा। आपको पूरी लिस्ट गिना दूंगा। आप खुद ही अपनी पार्टी को डॉक में खड़ा करते हैं। मैं आपको लिस्ट भी गिना देता हूं।...( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया: आप चेयर को सम्बोधित करके बोलिए।
                                                  ...( व्यवधान)
श्री सैयद शाहनवाज़ हुसैन : मैं यहां अकलियतों का दर्द रखने के लिए खड़ा हुआ हूं, क्योंकि जब हमारे बैकवर्ड क्लास के लोगों का दर्द सुना गया और यह गवर्नमेंट अकलियत के वोट की बात करती है तो जरूर हम चाहेंगे कि आज प्रधान मंत्री जी इस पर हमें भी कोई तोहफा दे दें। हम इसके लिए खड़े हुए हैं, हम कोई सियासत नहीं कर रहे। ...( व्यवधान) आप माइनोरिटी का मामला तो सुन लीजिए।...( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया: आपसी बातचीत बंद करिए, हमें सम्बोधित करिए।
…( व्यवधान)
श्री सैयद शाहनवाज़ हुसैन : मेरे पास स्टेट वाइस लिस्ट है, लेकिन मैं लिस्ट को छोड़ देता हूं। मेरी आपसे यही गुजारिश है कि जो वक्फ की लैंड है, इस पर गवर्नमेंट का कब्जा खत्म होना चाहिए। दूसरा मेरा कहना यह है कि उस वक्त प्राइम मिनिस्टर, श्रीमती इंदिरा गांधी जी ने जो चिट्ठी लिखी थी, क्या उस पर गवर्नमेंट अमल करेगी? क्या माइनोरिटी अफेयर्स मिनिस्टर, श्री सलमान साहब के पास उस चिट्ठी के बारे में जानकारी है और उस चिट्ठी का महत्व सरकार अभी समझती है या उस चिट्ठी को आप दरकिनार करेंगे, इसके बारे में भी मैं इनसे जवाब चाहूंगा? जे.पी.सी. ने जो रिकमेंड किया, इस बिल को यहां लाते वक्त उसमें बहुत सी बातें आपने छोड़ दी हैं कि माइनोरिटीस के डेवलपमेंट के लिए जो सोश्यो इकोनोमिक एजुकेशन अपलिफ्टमेंट के लिए जे.पी.सी. ने कहा था कि ऐसा इंस्टीटय़ूशन आपको बनाना चाहिए। जे.पी.सी. का रिकमेंडेशन हमारे पास है। आपको इसके लिए कुछ काम करना चाहिए। यह जो सवाल है कि वक्फ की जायदाद में बहुत से ऐसे हैं, जैसे मस्ज़िद बन गई और उस मस्ज़िद में किसी इमाम साहब का हुज़रा बना। माइनोरिटी के जो एम.पीज़ हैं, उन्हें पता है कि यह जरूरी भी है। ऐसी कई वक्फ़ की जायदाद है कि वहां पर पूरा घर बन जाता है, यानी मस्ज़िद छोटी सी और मस्ज़िद में इमाम के रहने की जगह के नाम पर पूरे इलाके पर कब्जा और उसका कमर्शियल यूस भी। कई जगह पर उस पर होर्डिंग लगा कर लाखों रुपया इनडिविजुअल्स के पास जा रहा है, जो कि यतीमों के पास जाना चाहिए। जिनके माता-पिता नहीं हैं, जो गरीब बच्चे हैं, उन पर खर्च किया जाना चाहिए, वह काम भी नहीं हुआ है।
          अध्यक्ष महोदया, मैं आपके जरिए यह अनुरोध करना चाहता हूं कि सरकार ऐसे लोगों को, जो ऐसे अनऑथोराइज़्ड कब्जे हैं, वे खुद अकलियत के लोगों ने किए। मैडम, मैंने आज तय किया है कि मैं बिना विवाद के बोलूंगा, इसलिए मैं इस पर किसी का नाम लेना नहीं चाहता।  
           अध्यक्ष महोदया, मैं दिल्ली वक्फ बोर्ड का मैम्बर रहा हूं। 1993 में दिल्ली में बी.जे.पी. की सरकार थी, तब मेरी उम्र और कम थी। मुझे हमारी सरकार ने दिल्ली वक्फ बोर्ड का मैम्बर बनाया था। यह बात आज से 15-16 साल पुरानी है। मैं उस समय पांच साल तक दिल्ली वक्फ बोर्ड का मैम्बर था। मैं खुद एक मस्जिद देखने गया। पहाड़गंज के मैन बाजार में एक मस्जिद है। उसके बाहर तो कलीमा लिखा हुआ है। वक्फ बोर्ड ने सोचा कि अगर मुस्लिम मुसाफिर स्टेशन पर उतरेंगे, तो रात में कहां जाएंगे, इसलिए इस मस्जिद में रात में रुकने की इजाजत उनको दे दी। उसकी जगह अब पूरी मस्जिद में गैस्ट हाउस चल रहा है। मैं चाहूंगा कि मंत्री जी उसकी जानकारी ले लें, यदि वे चाहेंगे, तो मैं उनके साथ चल सकता हूं और दिखा सकता हूं।
          महोदया, लेडी हार्डिंग कॉलेज में एक मस्जिद है, जो कूड़ादान बनी हुई है। मैं मजहब पर चलने वाला आदमी हूं। मैं समझता हूं कि हर मस्जिद हमारे लिए इम्पौर्टेंट है, फिर चाहे वह बिहार में हो, हैदराबाद में हो या दिल्ली में। हर मस्जिद का अपना महत्व है, लेकिन आज जिन पर सियासत नहीं चमकती हो, क्या उन मस्जिदों को भी आप आजाद कराएंगे? ...( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : रामकिशुन जी आप बैठ जाइए।
श्री सैयद शाहनवाज़ हुसैन :  अभी मामला अदालत में है। फैसला आने दीजिए।
अध्यक्ष महोदया :आप मुझे संबोधित कर के बोलिए। देखिए, आज समय कम है। अतिम दिन है। जरा संक्षेप में ही बोलिए।
श्री सैयद शाहनवाज़ हुसैन : अध्यक्ष महोदया, अक्लीयत का मामला है। इस पर हम थोड़ा बोलेंगे। हमारी लीडर हमें मीटिंग में समझता हैं कि बिना बात के मत टोकिए। अब ये हमें टोक रहे हैं और बोलने में व्यवधान पैदा कर रहे हैं। ...( व्यवधान) आप उन्हें डांटती भी नहीं हैं और हमें कह रही है कि हम संक्षेप में बोलें। ...( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया :  आप बैठ जाइए।
श्री सैयद शाहनवाज़ हुसैन :  अध्यक्ष महोदया, हम आपके जरिए अनुरोध करना चाहते हैं कि इस एक्ट में इस बात का प्रावधान होना चाहिए कि जो ताकत आपने डी.डी.ए. को दी है, यानी उसकी जमीन पर यदि कोई कब्जा करता है, तो डी.डी.ए. को यह पॉवर है कि वह उसे हासिल कर सकता है। इसी प्रकार से एम.सी.डी. को सरकार ने यह ताकत दी है कि यदि किसी ने उसकी जमीन पर कब्जा कर रखा है, तो वह अपनी जमीन को हासिल कर सकता है। इसमें आपने इस बात का जिक्र नहीं किया है कि वक्फ बोर्ड को भी इतनी ताकत देंगे, ताकि वह अपनी जमीन को हासिल कर सके या नाजायज कब्जे से उसे मुक्त करा सके। कई स्टेट हैं, जिन्होंने वक्फ बोर्डों को यह हक दिया है कि वे उनकी जमीनों पर हुए नाजायज कब्जों को हटवा सकें और अपनी जमीन को हासिल कर सकें। जैसे कर्नाटक और तामिलनाडु हैं। कर्नाटक में हमारी ही पार्टी का शासन है। वहां उसने वक्फ बोर्ड को ये दांत दिए हैं, यह शक्ति दी है कि वह नाजायज कब्जों से अपनी जमीन को मुक्त करा सके। यदि कोई डी.डी.ए. की जमीन पर कब्जा करे, तो डी.डी.ए. उस जमीन को हासिल कर सकता है। क्या यह सरकार कर्नाटक सरकार की तरह के अधिकार अन्य सरकारों को देने का काम करेगी, ताकि वहां के वक्फ बोर्ड अपनी जमीन और जायदादों पर से नाजायज कब्जों को समाप्त कर सकें ?
          अध्यक्ष महोदया, मेरा आपके जरिए अनुरोध है कि वक्फ के मामलात पर बहुत चर्चा होनी थी और मैं बड़ी तैयारी भी कर के आया था, लेकिन मैं आपका इशारा समझता हूं। मैं बहुत डिसीप्लिंड एम.पी. हूं और आपकी आंखों से डरता हूं। आप जब इधर देखती हैं, तो मैं समझ जाता हूं कि आप मुझे अपनी बात समाप्त करने का इशारा कर रही हैं। आप हमें कई बार बोलने की इजाजत भी देती हैं। इसलिए मैं सदन का समय बर्बाद नहीं करना चाहता हूं, लेकिन मैंने जो भी बात कही है, वह सियासत से ऊपर उठकर कही है और अक्लीयतों के हित में कही है।
          महोदया, हम यह नहीं चाहते कि हम पर यह इल्जाम लगे कि सारा फंड मायनॉरिटी को दिया जा रहा है, हम पर यह इल्जाम लगे कि कोई स्पैशल पैकेज दे रहे हैं, कोई सच्चर कमेटी की रिपोर्ट ला रहे हैं या किसी और मामले में मायनॉरिटीज को कोई और सहूलियत दे रहे हैं। आजादी के 60 के बाद भी हमारी कौम पिछड़ी है, गरीब है और नौकरियों में नहीं है। हम चाहते हैं कि हम पर कोई अहसान मत कीजिए, बल्कि हमारी वक्फ की जमीनों पर गवर्नमेंट ने जो कब्जा किया हुआ है, सिर्फ उसे मुक्त कर दीजिए। हमारी भारतीय जनता पार्टी के चुनावी मैनीफेस्टो में भी था कि यदि हम सरकार में आएंगे, तो नाजायज कब्जों को हटवाएंगे और रहमान खान कमेटी की रिपोर्ट को लागू करेंगे। श्री रहमान खान भी आपके हैं। इसलिए मेरा आपसे अनुरोध है कि आप हम पर कुछ अहसान मत कीजिए, हमारी वक्फ की जायदाद हमें लौटा दीजिए। हम अपनी तकदीर अपने हाथ से लिख लेंगे, लेकिन आप हमारी जायदाद लौटाने का काम कीजिए और इस बारे में गवर्नमेंट यहां एश्योरेंस दे। हम यही चाहते हैं।
                                                                                                             
श्री मोहम्मद असरारुल हक़ (किशनगंज):स्पीकर महोदया, मैं आपका शुक्रिया अदा करता हूं कि आपने मुझे वक्फ अमेंडमेंड बिल पर बहस में हिस्सा लेने का अवसर दिया। मैं इस बिल के समर्थन में बोलने के लिए खड़ा हुआ हूं, जिसे माइनेरिटी अफेयर्स के मिनिस्टर मोहतरम सलमान खुर्शीद साहब ने पेश किया है।  इसमें कई अच्छी तरमीमात लायी गयी हैं।  जैसे सैक्शन 52 में वक्फ की जायदादों पर नाजायज कब्जा या उसको खरीदने पर दो साल की सजा तजवीज की गयी है।  इसी तरह वक्फ जायदादों को बेचने या गिफ्ट देने के वक्फ बोर्ड के इख्तियार को खत्म कर दिया गया है।  इसी तरह वक्फ जायदादों की सर्वे की मुद्दत बीस साल से कम करके दस साल कर दी गयी है, लेकिन वर्ष 1995 के इस एक्ट को इफेक्टिव बनाने के लिए मजीद अमेंडमेंट लाने की जरूरत है, जिसका मैं आगे जिक्र करूंगा।
          महोदया, आजादी के बाद वर्ष 1953 में औकाफ की सुरक्षा और उसकी देखरेख के लिए पार्लियामेंट में काजमी बिल पेश हुआ।  उस पर आवामी राय जानने के लिए एक सिलेक्ट कमेटी तशकील दी गयी, जिसकी सिफारिशात की रोशनी में वक्फ कानून, 1954 को पार्लियामेंट ने तदवीन की।  इस एक्ट की बाजदफात और बाज फिक्रों की अदालतों की जानिब से एक्ट की मंशा के खिलाफ तशरिहात और फैसलों के असरात को जायल करने के लिए तरमीमात का मुतालवा होता रहा और चंद मुतालवात को कबूल करते हुए वर्ष 1959, 1964 और 1969 में तरमीमात की गयी, लेकिन इस एक्ट पर ऐतराजात होते रहे।  वर्ष 1954 के मरकजी कानून के बावजूद मगरिबी बंगाल में वक्फ एक्ट, 1934, यूपी में यूपी मुस्लिम वक्फ, 1936 और उसके बाद मुस्लिम वक्फ एक्ट 1960 नाफिजूलअमल रहे।  गुजरात में कच्छ और महाराष्ट्र में मराठवाड़ा के इलाकों में वक्फ एक्ट, 1954 नाफिज किया गया और दोनों रियासतों के बाकी इलाकों में मुंबई पब्लिक टूरिस्ट एक्ट, 1950 का नाफिज किया जाता रहा।
          मुल्क की सबसे बड़ी देशी रियासत मुमलिकत आसिफिया निजाम हैदराबाद में 1349 फसली के दसतूरूल अमल के तहत हुकूमत ने हिंदू-मुस्लिम औकाफ के इंतजाम और निगेहदाश्त को अपने हाथ में रखा और उसके लिए महकमे उमूरे मजहबी कायम किया।  यह कानून रियासते हैदराबाद में जनवरी, 1955 तक नाफिजूलअमल रहा।  महोदया, औकाफ के तहफ्फुज में इन कवानीन के तहत कायम बोर्ड्स की नाकामी पर मुसलसल तवज्जो दिलाने के बाद, मरकजी हुकूमत ने वर्ष 1970 में वजारते कानून इंसाफे कंपनी उमूर के तहत वक्फ इंक्वायरी कमेटी कायम की।  जिसने वर्ष 1973 में एक आरजी रिपोर्ट और वर्ष 1976 में आखिरी रिपोर्ट एक नए कानून के मसोदे के साथ पेश की।  इन रिपोर्टों और सिफारिशी मसाविदा के जायजे के लिए मुख्तलिफ कमेटियां तशकील दी गयीं। आखिर वर्ष 1994 में एक नए कानून का बिल पार्लियामेंट में पेश हुआ और वक्फ एक्ट 1995 की शक्ल में मंजूर हुआ और उसको सारे मुल्क में नाफिजूलअमल करा दिया गया। हुकूमते हिंद ने 27 दिसंबर, 1995 को जम्मू-कश्मीर के सिवाय सारे मुल्क में यकूम जनवरी, 1996 से इस कानून के निफाज का ऐलान किया।  अलबत्ता इस कानून इतलाक दरगाह हजरत ख्वाजा साहब, अजमेर पर नहीं किया गया, जिसके लिए इलाहदा 1955 का कानून मौजूद है।  
          महोदया, वक्फ एक्ट, 1954 में जब तब्दीली की जरूरत महसूस हुयी तो वर्ष 1994 में इसमें भारी तब्दीलियां की गयीं।  यह तरमीमात वर्ष 1976 में वक्फ इंक्वायरी कमीशन की एक रिपोर्ट की रोशनी में की गयी थी।  उस मौके पर उस वक्त की वजीरेआजम मोहतरमा इंदिरा गांधी ने सरकारी महकमात को हिदायत देते हुए खत लिखा था कि औकाफ से अपने कासिबाना कब्जा का हटायें या फिर उनको प्रामियम देकर, मार्केट रेट पर किराये पर लें।  
          महोदया, वर्ष 1996 में एक मुकम्मल नए कानून को वक्फ एक्ट, 1995 के नाम से नाफिज किया गया।  इस सिलसिले में आखिरी कोशिश ज्वाइंट पार्लियामेंट्री कमेटी आन वक्फ, 1996-2006 शक्ल में की गयी।  इस कमेटी की सरबराही मोहतरम के. रहमान साहब ने की थी।  इस कमेटी ने जहां हिंदुस्तान भर में हजारों करोड़ रूपए की मालियत की वक्फ जायदादों की हिफाजत के मुताल्लिक सिफारिशात पेश कीं, उसने सिफारिशात को अमलीजामा पहनाने की भी सरगर्मी दिखायी। यह रिपोर्ट हिंदुस्तानी औकाफ पर एक जामे दस्तावेज है।  इसमें वक्फ बोर्डों में बदनजमी, बदउनवानी और उसके जिम्मेदार तमाम बड़े फैक्टर्स, जैसे मुअस्सिर कवानीन की कमी, मरकजी व सूबाई हुकूमतों की अदम दिलचस्पी, सरकारी इदारों का वक्त इमलात में बेजा तसरूफ, वक्फ सर्वे की कमी, जैसे निकात का मुहासबा किया गया।  सबसे अहम मसला नाजायज कब्जों को हटाना और कासिबाना कब्जों से वागुजार कराना है, इसको कमेटी ने अपनी सिफारिशात में खास अहमियत दी है। एक तवील सफर तय करने के बाद, अब वक्फ 1995 के ताल्लुक से कई गोशो से किए गए ऐतराजात के पेशेनजर आज पार्लियामेंट में वक्फ तरमीमी बिल पर बहस हो रही है, तो हमें चाहिए कि हम इस एक्ट को मजीद इफेक्टिव बनाने के लिए ज्वाइंट पार्लियामेंट्री कमेटी की सिफारिशात को जरूर सामने रखें।     
          मुल्क की मुखतलिफ रियासतों में मजमुई तौर पर बहुत सी वक्फ जायदादें हैं। सच्चर कमेटी की रिपोर्ट के मुताबिक हिन्दुस्तान में रजिस्टर्ड मुस्लिम औकाफ 4 लाख 90 हजार से ज्यादा हैं जिनकी मालियत 6 हजार करोड़ रुपये है और यह मालियत 1954 की कीमत के लिहाज़ से हैं। मौजूदा कीमत का तखमीना एक लाख 20 करोड़ है। वक्फ जायदाद का कुल रकबा 5 लाख 72 हजार 52 एकड़ है। अगर वक्फ की जमीनों से मुअस्सिर अंदाज से आमदनी की सूरत पैदा की जाए, तो सच्चर कमेटी की रिपोर्ट के मुताबिक उसकी सालाना आमदनी 12 हजार करोड़ रुपये हो सकती है जिससे मुस्लिम फिरका की तालीमी इक्तसाज़ी और समाजी पसमांदगी को दूर करने में बड़ी मदद मिल सकती है। हैरत की बात है कि इस वक्त यह आमदनी सिर्फ 163 करोड़ रुपये के करीब है। जाहिर है कि इस रकम से खुद औकाफ के इंतज़ामी इखराजात और उसकी अमले की तनख्वाहों का ही इंतजाम नहीं हो पाता। महोदया, वक्फ की बहुत सी जायदादों पर जहां आम लोगों ने कब्जा कर रखा है, उनसे कहीं ज्यादा निजी कम्पनी और सरकारों के पास महाकमात के तसरुफ में भी वक्फ की बहुत सी जायदादें हैं। न सिर्फ मुल्क की तकसीम की वजह से औकाफ की जायदादों पर गाईबाना कब्जे हुए बल्कि मुखतलिफ वुज़ुहात की बिनाह पर इस तरह के कब्जे हुए हैं।...( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : माननीय सदस्य, अब आप समाप्त कीजिए।
…( व्यवधान)
श्री मोहम्मद असरारुल हक़ : मैं केवल दो मिनट की इजाजत मांगता हूं।...( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : हमारे पास समय बहुत कम है।
श्री मोहम्मद असरारुल हक़ : 1960 में इंटर स्टेट कौफ्रैंस का इफतिताह करते हुए उस समय के मरकज़ी वज़ीर ने यह कहा था कि वक्फ का सबसे मुश्किल और पेचीदा मसला जायदाद और औकाफ पर गाईबाना कब्जा है। आज पचास साल के बाद भी यह संगीन मसला इसी तरह मौजूद है। इसलिए मेरा मुतालबा यह है कि आज इस बिल की अहमियत बढ़ गई है। अगर हम इस वक्त वक्फ एक्ट, 1955 के अमैंडमैंट के लिए यहां जमा हुए हैं तो हमें कई तरमीमात लाने चाहिए। पहली बात यह है कि वक्फ बोर्डों को खुसुसी इख्तियारात दिए जाने चाहिए। दूसरा, सच्चर कमेटी की सिफारिश के मुताबिक बोर्डों के इंतजामात के लिए इंडियन वक्फ सर्विस शुरू की जाए और यूपीएससी के जरिए उसके इम्तियानात मुनकिद कराए जाएं। वे मुकदमे जिनकी समात नहीं हो रही है, उनके तसफिया के लिए स्पैशल वक्फ तशकील किए जाएं। इसी तरह वक्फ इमलात जो किराए पर हैं, उनका किराया मौजूदा रेट के मुताबिक वक्फ बोर्ड को दिया जाए। इस तरह के तरमीमात लाकर इस वक्फ को मुअस्सिर बनाया जाता है।
          आखिर में एक बात कहना चाहूंगा कि मेरे बहुत ही अज़ीज शाहनवाज साहब ने अभी अपनी तकरीर के अंदर जो दो बातें कही हैं, मैं उन्हें याद दिलाना चाहता हूं कि आजादी के बाद से लेकर अब तक हमारी सरकार ने वक्फ जायदादों को बेहतर बनाने के लिए हर मौके पर कोशिश की। कानून लाए, उसमें अमैंडमैंट किया और जब भी जरूरत पड़ी, उसकी इसलाहात का इंतजाम किया।...( व्यवधान) शायद आपको याद हो कि जब यहां पर जनता सरकार आई थी, उस जमाने में जो वक्फ मंत्री बनाए गए थे, उन्होंने यह ऐलान किया था कि वक्फ जायदाद से हुकुमत का कोई ताल्लुक नहीं है। यह इतनी खतरनाक बात थी कि गोया वक्फ जायदाद के इंतजाम करने की आपके यहां कोई शक्ल नहीं है।...( व्यवधान) हमने इस पर कौफ्रैंस की थी। इसलिए 1995 में यह एक्ट आया और अब जाकर अमैंडमैंट हो रहा है। इस सिलसिले में आपकी सरकार ने कुछ नहीं किया। जो कुछ हुआ, इसके लिए हम डा. मनमोहन सिंह जी, सोनिया जी और राहुल जी को मुबारकबाद देते हैं।
                                                                                         
डॉ. मोनाज़िर हसन (बेगूसराय):अध्यक्ष महोदया, मैं आपके प्रति दिल की गहराई से आभार प्रकट करता हूं।...( व्यवधान)
श्री मुलायम सिंह यादव : हमने करके दिखाया है।...( व्यवधान) बाउंड्री बनाने के अलावा और कोई रास्ता नहीं है।...( व्यवधान) हमने बाउंड्री बनवाई।...( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : आप बैठ जाइए।
 …( व्यवधान)
MADAM SPEAKER:  Nothing will go in record.
(Interruptions) …* अध्यक्ष महोदया :  आप उन्हें बोलने दीजिए। समय बहुत कम है।
…( व्यवधान)
डॉ. मोनाज़िर हसन :आप बोलते रहते हैं लेकिन कभी-कभी हमें भी बोलने दिया कीजिए।...( व्यवधान) अध्यक्ष महोदया, मैं दिल की गहराइयों से आपका शुक्रिया अदा करता हूं कि वक्फ जैसे महत्वपूर्ण मसले पर आपने मुझे बोलने का मौका दिया। सैन्सस और जनगणना के मामले में दो दिन गरमागरम बहस रही। मैं यूपीए की चेयरपर्सन श्रीमती सोनिया गांधी और इस सरकार का इस बात को लेकर भी शुक्रिया अदा करता हूं कि उन्होंने सैन्सस के मामले में  एक इंसाफ पसन्द रवैया अपनाने का काम किया।
 सेंसस जाति की बुनियाद पर हो, इस बात को मानकर इस हुकूमत ने यह सबूत दिया कि वह जम्हूरियत के मुनाफिक नहीं है। आज वक्फ के मामले पर बहस हो रही थी। हम लोगों को पता नहीं था कि पार्लियामैंट में आज वक्फ अमेंडमैंट बिल आयेगा। भाई शाहनवाज हुसैन साहब बोल रहे थे, तो मैंने अपने संसदीय दल के नेता आदरणीय राम सुन्दर दास जी से कहा कि हम लोगों को इसकी जानकारी नहीं थी? बहरहाल वक्फ अकलियतों के लिए, मुसलमानों के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण मसला रहा है और जब भी अकलियतों की फलां और बहबूद की बात आती है, तो उसमें वक्फ जली हरफों के बारे में विचार किया जाता है। आज वक्फ की बहुत सारी जायदाद के बारे में निशानदेही करने का काम भाई शाहनवाज हुसैन साहब ने किया चाहे वह डीडीए की जमीन हो, काब्रिस्तान की जमीन हो या रेलवे के हवाले हो, इन सारी जमीनों पर सरकारी कब्जे हैं। मैं इस बात को मानता हूं कि वक्फ को चलाने वाले हैं, जो उसके मुहाफिज़ हैं, उन लोगों ने भी इसके साथ बहुत वफा करने का काम नहीं किया। ...( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया :  अब आप अपनी बात समाप्त कीजिए।
…( व्यवधान)
डॉ. मोनाज़िर हसन :   अध्यक्ष महोदया, मैं एक मिनट में अपनी बात खत्म करना चाहूंगा। ...( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया :  देखिये, समय बहुत कम है और कुछ लोग अभी इस पर बोलने वाले हैं। इसलिए आप अपनी बात समाप्त कीजिए।
…( व्यवधान)
डॉ. मोनाज़िर हसन :मैं सिर्फ एक बात कहूंगा कि वक्फ बोर्ड सरकारी कब्जे से जमीन को मुक्त कराने का काम करे और जिन रियासतों में वक्फ बोर्ड का कयाम अभी तक अमल में नहीं आ सका है, वहां वक्फ बोर्ड का गठन करने का काम करे।
          इन्हीं बातों के साथ एक बार फिर मैं आपके प्रति शुक्रिया अदा करता हूं।
                                                                                                   
श्री शैलेन्द्र कुमार (कौशाम्बी): माननीय अध्यक्ष महोदया, आपने वक्फ संशोधन विधेयक, 2010 पर बोलने का अवसर दिया, इसके लिए मैं आपका आभारी हूं।  मंत्री जी वर्ष 1995 के अधिनियम का संशोधन लेकर हमारे बीच आये हैं। मैं आदरणीय माननीय मुलायम सिंह जी का शुक्रिया अदा करना चाहूंगा कि जब वे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे, उस वक्त पूरे वक्फ बोर्ड की जो भी प्रापर्टी थी, उसका सर्वे कराकर, उसका नाप-जोड़ कराकर बाउंड्री बनाने की एक शुरुआत की थी। आज केवल इसी बात से हल निकलेगा कि पूरे हिन्दुस्तान का जो सर्वे हो रहा है, आज वक्फ बोर्ड की 70 से 80  फीसदी जमीन पर बहुत असरदार और ताकतवर लोगों ने कब्जा कर रखा है, लगभग पांच लाख एकड़ जमीन पर हम तभी निजात पा सकते हैं और जो गरीब मजलूम हैं, जो मुस्लिम अकलियत के बच्चे हैं, उनके लिए आपने जो इमदाद की और स्कूल की शुरूआत की, उससे उनको फायदा मिल पायेगा। खासकर आपने इस संशोधन में जिक्र किया है कि प्रबंध समिति और केन्द्रीय वक्फ परिषद मजबूत होगा, तो यह बड़ी अच्छी बात है। उसमें महिलाओं, पेशेवर और विशेषज्ञ को वक्फ परिषद का प्रतिनिधित्व देने की जो बात कही है, वह बहुत अच्छी  बात है। वक्फ बोर्ड की जितनी भी जमीनें हैं, उनको कम्प्यूटरीकृत करके उन आंकड़ों को कम्प्यूटर पर लाने के लिए कहा है, यह बहुत अच्छी बात है। ...( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : ठीक है। आपका बहुत-बहुत धन्यवाद। अब आप अपनी बात समाप्त कीजिए।
…( व्यवधान)
श्री शैलेन्द्र कुमार :  इन्हीं शब्दों के साथ मैं अंत में कहना चाहूंगा। ...( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : आप बैठिये। आपकी बात हो गयी है।  हमें इसे समाप्त करना है। हमारे पास समय नहीं है।
…( व्यवधान)
                                       
अध्यक्ष महोदया : सैदुल हक जी, आप बोलिये।
SK. SAIDUL HAQUE (BARDHMAN-DURGAPUR): Madam, I thank you for giving me the opportunity to speak. To face the challenge of development deficit, the Sachar Committee has made a number of recommendations.  One such recommendation is proper development of the Wakf properties.  Chapter Eleven has been fully devoted to that and there it has recommended for amendment and so also the Joint Parliamentary Committee.  So, I welcome some amendments which will bring new life to the Wakf States and it was long pending, particularly, the survey, formation of State Wakfs and inclusion of women. 
Some amendments might curtail the power of States.  It would have been better if the States could have been consulted before giving it a final shape. Now, the need of the time is that before its enactment, the hon. Prime Minister should convene a meeting of all the Chief Ministers and State Ministers in charge of Wakf to discuss all the issues related to it. 
          Now let me say a few words about a few clauses.  In clause 5 which wants to amend Section 3 of the Act, it is said that ‘Muttawali’ be the citizen of India.  West Bengal Government has its own law in this regard.  But here I would request to insert “Not only Citizen of India, but also a permanent resident of India’.
My next point is about clause 6 which seeks to amend Section 4 and this is about Survey of Wakf properties. In the case the spirit of the JPC Report should be kept in mind and survey of all the Wakf properties situated in the State, registered or unregistered, should be done. The State of West Bengal has already done it.
          Clause 10 which seeks to amend Section 8 says that the cost of survey should be entirely borne by the State Governments. But my suggestion is that there should be some financial support to the States by the Central Government. The Sachar Committee and also the JPC on Wakf have talked about Central assistance to this effect. How can the survey be completed without Central Assistance and how can computerisation be done?
          Clause 9 which seeks to amend Section 7 deals with the powers of the Wakf Tribunal. Here my request to the hon. Minister is that a person should first approach the Tribunal before appealing to the High Court, otherwise a number of cases will arise.
          Madam, I have objection to clause 11 because the proposed amendment empowers the Central Wakf Council to issue directions to State Wakf Boards in matters of survey, maintenance, records, encroachments, irregularity or violations of provisions. This is bound to hamper the State jurisdiction and federal structure of the country. What is the purpose of establishment of Central Wakf Council? As per the Act, it is to advise the Central Government, the State Governments and the State Wakf Board. If that be so how can it issue directions directly to State Boards without consultations with or intimation to the State Governments?
MADAM SPEAKER: I think, now you should conclude.
SK. SAIDUL HAQUE : Madam, I am a new Member, please allow me two minutes.
MADAM SPEAKER : You have made all your points. You please take your seat.
          Shri Prabodh Panda.
SK. SAIDUL HAQUE : Madam, please allow me two more minutes.
          Clause 15 to amend Section 20 talks about introduction of a new provision as 20A seeks removal of Chairperson of State Board by vote of No Confidence.
MADAM SPEAKER : I am sorry. I am giving two minutes to each Member. You cannot take `two more minutes’.
          Shri Prabodh Panda.
SK. SAIDUL HAQUE : I propose that there should be a process of removal through secret ballot paper instead of raising hands to maintain secrecy of voting.
               
SHRI PRABODH PANDA (MIDNAPORE): Madam, thank you very much. I stand to support this Bill as this Bill seeks to improve upon the earlier Act. It seeks to address the inadequacies in data of Wakf properties, encroachment and development of Wakf properties and prohibit the sale of Wakf properties and all such things. But having said so, I would like to know from the hon. Minister, which he may clarify in course of his reply, if the property is not transferable, then why is there a provision for lease? Moreover, there is a provision even for enhancement of period for the lease from 3 years to 30 years? I think, this sort of properties should not be transferred in any form.
          Another point is about encroachment.  This issue has already been discussed and addressed as well. But what sort of punishment is going to be meted out to the encroachers? Nothing has been mentioned about it in the Bill. So, all these things should be made clear so that henceforth encroachment of such properties do not take place.
          Madam, with these words, I support the Bill.
           
SHRI ARJUN CHARAN SETHI (BHADRAK): Madam, I would be very brief in my submission. I would like raise only very pointed issues on the Bill that is being discussed now and which is will be, I suppose, passed unanimously by the House. Many hon. Members have raised the issue of encroachment of Wakf Board properties at different places. I was on the Members of the JPC and had the opportunity to visit different parts of the country as a part of the Committee and what we found is that the Chairman of the Wakf Board was the most important person who not only have himself encroached upon the property of the Wakf Board but also has given sanction for encroachment of the property of the Wakf Board to big business people. In that case, what should the course of action of the Government? I would here like to refer to one particular instance. I do not remember the name of the place but it was in Mumbai. The then Chairman of the Wakf Board gave away a precious piece of land to one particular businessman who had constructed a hotel in that piece of land. 
In this way, Chairmen in different places have, in their own capacities, sanctioned things which are not permissible under law.  I request the hon. Minister to please respond as to what course of action will be taken against these people.  I also request him to take immediate action against such people.
                                                                                                     
श्री लालू प्रसाद : मैडम, सरकार ने जो यह संशोधन विधेयक पेश किया है, सरकार की इस पहल का हम स्वागत और समर्थन करते हैं, क्योंकि यह एक अच्छी पहल है। शाहनवाज हुसैन जी और अन्य माननीय सदस्यों ने अपनी बातों को यहां रखा है। मैं उनकी बातों का समर्थन करता हूं और कहना चाहता हूं कि सरकार को कड़ा कानून बनाना चाहिए। आप देखिए सारी जमीनें हड़प ली गई हैं, चाहे सरकारी हों या गैर सरकारी। वक्फ बोर्ड में जो काम करने वाले लोग हैं, उनके द्वारा सारी प्राइम लैंड को बेच दिया गया है। पटना में ही डाक बंगले की जितनी प्रापर्टी थी, सब पर अपार्टमेंट्स बना दिए गए हैं। इस तरह काफी लूट-खसोट हुई है। हम यह संशोधन विधेयक तो पास कर रहे हैं, लेकिन मैं चाहता हूं कि भविष्य में आप और भी कड़ा कानून इस सम्बन्ध में बनाए और इसे संवैधानिक अधिकार प्रदान करें। इसे कॉग्नीजेबल ऑफेन्स घोषित किया जाए कि जो बेचेगा और खरीदेगा, वह दोषी करार दिया जाएगा। इसे आप गैर जमानती जब तक नहीं बनाएंगे, तब तक ऐसे ही लूट का धंधा चलता रहेगा। इसलिए इसे कड़ाई से इम्प्लीमेंट किया जाए और जिन राज्यों में यह नहीं है, वहां इसका गठन किया जाए।
          खुर्शीद जी अच्छे इन्सान हैं, नेक इन्सान हैं, हमें उम्मीद है कि यह बढ़िया काम करेंगे। जितना दिखने यह गोरे लगते हैं, उतना ही इनका दिल भी साफ होगा, ऐसी हमें इनसे उम्मीद है। मैं इस बिल का समर्थन करते हुए अपनी बात समाप्त करता हूं।
                                                                                                             
श्री शरीफ़ुद्दीन शारिक : मैडम स्पीकर, जो वक्फ कानून में तरमीम मंत्री महोदय लाए हैं, हम इसका समर्थन करते हैं। यहां शिकायत हुई कि सरकारी महकमों के तहत भी उन्होंने नाजायज तौर पर कब्जा किया है। मैं अपने खसूसन मुसलमान मेम्बर्स से अर्ज करूंगा - कि इस घर को आग लग गई घर के चिराग से। यहां मस्जिदों में इमामों ने पोल्ट्री फार्म खोले हुए हैं। मैंने खुद नजदीक से देखा है। बाहर लिखा है 'प्रेजिडेंट आल इंडिया यूनियन',  यह किसने इलेक्शन किया, कहां से यह आल इंडिया यूनियन आ गई। साल में वे एक बार वहां तम्बू वगैरह लगाकर किसी मंत्री को ले जाते हैं। मंत्री जी भी समझते हैं कि शायद इससे मुझे मुसलमानों का वोट मिल जाएगा। उतनी देर मुर्गियों को बंद रखते हैं, जब तक मिनिस्टर साहब भाषण देते हैं और वापस चले जाते हैं। लिहाजा मुसलमान लोगों ने खुद भी तबाही मचाई है इसलिए मैं गुज़ारिश करूंगा कि इसके लिए आप सख्त कानून बनाएं, उनके हाथों में हथकड़ियां पहनाएं और जो उन्होंने कब्जे किए हैं, जो जमीनें बेचीं, जिन जमीनों की खरीद-फरोख्त की है, उसके लिए सख्त कानून बनाएं। उनके द्वारा खरीद-फरोख्त किए गए मामलों को आप गलत करार दें।
          मैं पंजाब को मुबारकबाद देता हूं कि वहां पर हाल ही में लोगों ने अपनी मस्जिद मुसलमानों के हवाले कर दी। लिहाजा ऐसे ही सब लोगों को करना चाहिए और सख्त कानून बनने से ही बात नहीं बनेगी, कानून पर अमल करने से बात बनती है।
   
श्री बदरुद्दीन अजमल (धुबरी): अध्यक्ष महोदया, हम इस बिल के सपोर्ट के लिए खड़े हुए हैं। मुझे बस इतना ही कहना है कि                      आशियां को लहू की जरूरत पड़ी, सबसे पहले हमारी ही गर्दन कटी।
                    फिर भी कहते हैं हमसे ये अहले वतन कि ये चमन है हमारा, तुम्हारा नहीं।
 
ये जो जमीन की बात है, सलमान खुर्शीद साहब हमारे भाई हैं। यह बहुत नाजुक मसला है, इसलिए इस पर अच्छा वक्त मिलना चाहिए था, लेकिन हमें मालूम है कि इस समय समय कम है। मैं सबसे पहले प्राइम मिनिस्टर साहब को, मैडम सोनिया गांधी जी को और दूसरे सारे मिनिस्टर्स को धन्यवाद देता हूं। इस सदन में पहले ओबीसी और दलित वर्ग के लोगों पर चर्चा हुई थी। मैं समझता हूं कि यह तारीखे फैसला है, हम भी दिल से सरकार को मुबारकबाद देते हैं। हमें उम्मीद थी कि इस बिल के लिए थोड़ा ज्यादा वक्त मिलेगा। मैं शाहनवाज भाई की बातों की ताईद करता हूं और मैं 100 प्रतिशत उनसे सहमत हूं कि उन्होंने अच्छी बातें कहीं।
 मौलाना साहब ने पूरा डाक्युमेंट पेश किया और दूसरे लोगों ने भी बातें कही हैं। बस इसके ऊपर अमल हो जाए और जो गवर्नमेंट का एनक्रोचमेंट है, सच्चर कमेटी की बातों को इम्प्लीमेंट कर दीजिए तो यह मसला हल हो जाएगा।
SHRI HAMDULLAH SAYEED (LAKSHADWEEP): Hon. Speaker, I thank you for giving me an opportunity to speak on the Wakf (Amendment) Bill, 2010.
          When we talk about the wakf property, first and the foremost thing that we have to take into account is the properties which have been illegally occupied.  We need stringent laws and their strict implementation.  The wakf properties are not being used for the purpose for which they are meant.  So, by making stringent laws and by implementing these laws strictly, I feel the wakf properties can be used for the right purpose, for the purpose for which they are meant.
          The second suggestion that I have is with regard to the income that is generated from wakf properties.  It should be ensured that the income that is generated should reach the intended beneficiaries. 
          I take this opportunity to congratulate our hon. Prime Minister, Dr. Manmohan Singh; hon. Chairperson of the UPA, Shrimati Sonia Gandhi; and the hon. Minister concerned, Shri Salman Khursheed. 
          Some of our senior colleagues have said that the UPA Government does not show sensitivity towards minorities.  But I reject that.  I say that this amendment itself is a proof that the UPA Government is sensitive towards minorities.  The UPA Government understands the problems of minorities, recognises the problems of minorities and finds solutions for those problems. 
           
अध्यक्ष महोदया : श्री विजय बहादुर सिंह। आप अपने को इससे सम्बद्ध कर लीजिए, हमारे पास समय बहुत कम है। आप एक वाक्य बोलिये और अपने को इससे सम्बद्ध कर लीजिए।  
 
श्री विजय बहादुर सिंह (हमीरपुर):  मैडम, वकील जब बिना फीस के बोलता है तो इर्रेलिवेंट बोलता है। ...( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : देखिये, समय बहुत कम है, इसलिए हम आपसे निवेदन कर रहे हैं। ठीक है आप जल्दी से बोलिये।
 श्री विजय बहादुर सिंह :  माननीय मंत्री जी एक एडवोकेट हैं, इसलिए मैं उनका ध्यान आकर्षित कराना चाहता हूं। आपने सेक्शन (4) में लिखा है कि   ”the directive will be issued by the Council, suo motu.   यह इल्लिगल होगा।  इसमें होना चाहिए कि  ”the directive will be issued by the Council after hearing the parties”. Otherwise, it will lack the natural justice.  पालकीवाला  ने एक किताब लिखी है  “constitution deface and defile. ”  उसमें एक मुकदमा फाइल हुआ, जंगल के टाइगर के ऊपर।
अध्यक्ष महोदया : कहानी मत सुनाइये। आप जल्दी से बोल लीजिए।
 श्री विजय बहादुर सिंह :   मैडम, यह इसमें फिट हो रहा है, आप एक मिनट दीजिए   and you will appreciate.
अध्यक्ष महोदया : आप इसे समाप्त कीजिए और बैठ जाइये।
श्री विजय बहादुर सिंह : मेरी बात सुनिये।
MADAM SPEAKER: Please sit down.
… (Interruptions)
SHRI VIJAY BAHADUR SINGH : I will sit down.  I have no love for my voice. … (Interruptions)
MADAM SPEAKER: Please take your seat.  You have made your point.  The Minister has understood what you want to say. 
… (Interruptions)
MADAM SPEAKER: Shri E.T. Mohammed Basheer to speak. Shri Basheer, you just associate yourself with this.
… (Interruptions)
 
SHRI E.T. MOHAMMED BASHEER (PONNANI): Hon. Speaker, this is a much-awaited legislation.  If you go through the Sachar Committee, this Bill and the JPC Report, you will be convinced that the UPA Government is committed to have these kinds of things and they are fulfilling the promises.  I have a copy of a letter send by Shrimati Gandhi to the Chief Ministers of various States. 
It is incorporated from the Sachar Committee.  I feel that this may be a tribute to Shrimati Gandhi in that way.
          Madam, in a nutshell, this Bill serves the following purpose:
1.    Ensuring better administration of wakf properties.
2.    Scientific and judicial composition of Central Wakf Council and State Wakf Board.
3.    Formation of a National/State Wakf Development Corporation.
4.    Effective utilization of wakf property for the betterment and development without adversely affecting the will of auqaf.
5.    Prevention of encroachment on wakf properties.
6.    Empowerment of the Wakf Council and Board to get properties liberalised from encroachers.
7.    Formation of a Wakf Tribunal with full-time Presiding Officer.
8.    Time-bound survey of wakf properties and make the statistics on wakf properties readily available and updated time to time.
9.    Making Central Wakf Council and State Wakf Board more accountable.
10.Making the evacuation process of wakf properties from encroachers easier.

Madam, with these few words, I conclude.

   MADAM SPEAKER: Hon. Minister.

… (Interruptions)

MADAM SPEAKER: Nothing else will go on record except what the hon. Minister says.

(Interruptions) …*     कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय के राज्य मंत्री और अल्पसंख्यक मामले मंत्रालय के राज्य मंत्री (श्री सलमान खुर्शीद): मैं सदन का अभारी हूं कि जिस माहौल में दोनों तरफ से अच्छे काम में शिरकत की कोशिश हुई है, इसके लिए मैं सभी को मुबारकबाद देता हूं। मैं खास तौर पर शाहनवाज हुसैन जी को मुबारकबाद देता हूं कि उन्होंने पेशकश की है कि आज हमारे ऊपर, हुकूमत के ऊपर जो जिम्मेदारी है,  वह हुकूमत पूरी करेगी, लेकिन बिरादरी की, आवाम की भी एक जिम्मेदारी है। हमारी कौम की एक जिम्मेदारी है कि हमारे पास कौम की जो अमानत है, उसे हम सही ढंग से इस्तेमाल में लाएं। इसके लिए आपको और हमको, दोनों तरफ से मिलकर कोशिश करनी होगी। ऐसा नहीं होना चाहिए कि हम करें, तो आप शिकायत करें और अगर आप करें, तो हम शिकायत करें।

          वक्त कम है, लेकिन अभी शेर की अभी बात हुई थी, इसलिए मैं भी इतना कह दूं कि बहुत दिन से हम लोग इस कोशिश में थे कि हम तरमीम करके वक्फ एक्ट में वे सारी चीजें ले आएं, जिसकी तमन्ना आप लोगों को और जिसकी शिकायत कुछ लोगों को थी। इसके लिए मैं बस इतना ही कहूंगा कि " आह को चाहिए एक उम्र, असर होने तक और कौन जीता है तेरी ज़ुल्फ के सर होने तक।" लेकिन आज ऐसा लग रहा है कि आप सभी लोगों की हिमायत और आपकी कोशिश से हम वहां पहुंचे हैं, जहां पिछले दस साल से पहुंचने की हम लोगों की कोशिश थी। हमारी कोशिश रही है कि जिन बातों की ज्वायंट पार्लियामेंटरी कमेटी ने निशानदेही की है, उन्हीं पर हम आगे बढ़ें। हमारी सभी राज्य सरकारों से इसमें मुतालबा किया था और बहुत अच्छे सुझाव हमें राज्य सरकारों से मिले भी हैं। कुछ बातें हैं, जिन्हें शायद पूरी तरह से एक्ट को न समझने की वजह से इतने कम वक्त में आपने कुछ बातें दर्ज कराई हैं।

          मैं बहुत जल्द दो-तीन चीजें कहना चाहता हूं। इस एक्ट का मकसद है कि हम ख्वातीन को जेंडर जस्टिस के तहत बोर्ड्स तथा सैंट्रल वक्फ बोर्ड में आने का मौका दें। हमने यह भी कोशिश की है कि वक्फ फंड में से जो भी यतीम बच्चे हैं या जो भी ख्वातीन हैं, जिनकी देखभाल करने वाला कोई नहीं है, उन्हें भी वक्फ फंड से हम लोग मदद कर सकें। इसका यही मकसद है और उम्मीद है कि हम इस मकसद को पूरा कर सकेंगे। मैं आपसे इतना जरूर कहना चाहता हूं, सबकी मैंने तारीफ की है और सभी को शुक्रिया कहा है, लेकिन मेरा फर्ज है कि वजीरे-आज़म साहब को और श्रीमती सोनिया गांधी को मैं इस मौके पर शुक्रिया अदा करूं, क्योंकि जो तहरीक इंदिरा जी के वक्त से शुरू हुई थी, जिसका जिक्र बहुत लोगों ने किया, बशीर जी ने भी किया कि खत लिखा गया था और आपने पूछा कि उस खत का क्या हुआ। खत लिखा गया था इस नीयत से कि जहां मुमकिन हो कानून से पाबंद रहते हुए, वहां या तो हुकूमत के पास जहां कब्ज़ा है, वक्फ की ज़मीन पर, वे उसे वापिस कर दें और अगर यह मुमकिन न हो, तो यह वक्फ की ज़मीन के कम से कम सही दाम या सही किराया जरूर वक्फ बोर्ड को देते रहें। वक्फ को ट्रंसफर करने की इजाजत अब बिलकुल नहीं होगी। वक्फ ज़मीन को या तो गिफ्ट करने की या सेल करने की इजाजत बिलकुल नहीं होगी, यह हमने इसमें एक नई तरमीम की है।

          इससे बढ़कर बात यह है कि नेशनल इंट्रस्ट में आवाम के काम के लिए अगर कोई जमीन ली जाती है, एक्वायर की जाती है तो वहां वक्फ होने के बावजूद एक्वायर किया जा सकता है। लेकिन हमने जरूर कहा है कि उसका मार्किट प्राइस मिलना चाहिए और जो पैसा मिले उसे फिर किसी और वक्फ की जायदाद फौरी तौर पर डाल चाहिए ताकि वक्फ का जो मकसद है, वह मकसद चलता रहे।

          एक बात यह भी उठाई गई कि बहुत जगह हुकूमत और वक्फ बोर्ड के बीच में केसिस हैं। यह बात सही है, कई जगह केसिस हैं। लेकिन ज्यादातर हुकूमत को सिर्फ रिस्पांडिड इसलिए बनाया जाता है कि रेवेन्यू रिकॉर्ड हुकूमत के मातहत रखे जाते हैं। रेवेन्यू रिकॉर्ड और वक्फ सर्वे के रिकॉर्ड में कई जगह टकराव होता है। इसलिए हमने ट्रिब्यूनल को और मजबूत करते हुए तीन लोगों का ट्रिब्यूनल बनाकर यह तय किया है कि ट्रिब्यूलन हर ऐसे मसले पर फैसला करेगा। पहले यह माना जाता था कि मुतव्वली या जो लोग वक्फ का फायदा उठा सकते हैं, सिर्फ उन तक ही यह महदूद है लेकिन अब यह तय किया गया है कि किसी को सर्वे के फैसले से शिकायत है, ग्रिविएन्स है, तो वह ट्रिब्यूनल के सामने जा सकता है। यह जाहिर है कि ट्रिब्यूनल के बाद हाई कोर्ट मौजूद है, हाई कोर्ट के सामने भी जा सकते हैं।

          शाहनवाज साहब ने एक बात यह भी उठाई कि जो लोग पसमांदा अक्लियत के लोग हैं, उनकी बहबुदगी और उनको आगे बढ़ाने के लिए कुछ नहीं कहा है। इसकी वजह यह है कि हमने एनएमजीएफसी को वीक स्ट्रक्चर करने की बात कही है। जिसका काम चल रहा है उसमें वक्फ डेवलपमेंट एजेंसी बनाने की बात कही है, जिनके पास सारे वसाइल होंगे, जिनके पास सरमाया होगा जिससे वक्फ को डेवलप किया जा सकता है। यह एक्ट सिर्फ वक्फ बोर्ड की मैनेजमेंट और वक्फ की मुत्तहत और सुपरविजन के लिए  बनाया है और इसे बहुत मजबूत किया गया है। लेकिन वक्फ को और तेजी से डेवलप किया जा सके, इसके लिए माइनोरिटी डेवलपमेंट फाइनेंस कॉरपोरेशन में रखा है। यह हुकूमत मुसलमानों की हमदर्द ही नहीं है बल्कि हिन्दुस्तान के हर मजलूम की हमदर्द है, हर मजहब के लोगों की हमदर्द है। जहां मसाजिद गलत इस्तेमाल में हैं, मैं आपसे गुजारिश करूंगा कि हम सबका फर्ज है हर मजहब के लोगों और उनकी बिरादरी के बीच में से लीडरशिप ऐसी निकलनी चाहिए जो कहें कि हम अपनी गलतियों पर पशेमां हैं और हम अपनी गलतियों को ठीक करेंगे। जब आप इतनी कोशिश कर रहे हैं तो हम भी ठीक करेंगे।

          माननीय मुलायम सिंह जी कह रहे थे कि आपके जमाने में बहुत सी औकाफ की जायदाद थी जिसकी निशानदेही हुई और  उसके बाद आपने उसके लिए पैसा भी दिया। अगर यह मुमकिन होगा तो बहुत से वक्फ ऐसे हैं जिनके पास अपनी इमदाद है, पैसे हैं, वे खुद खर्च कर सकते हैं। जहां ऐसा मुमकिन नहीं है, उनका मौलाना आजाद एजुकेशनल फाउंडेशन से पैसा मिल सकता है, वक्फ काउंसिल से पैसा मिल सकता है। यकीनन मैं समझता हूं जैसे ही और काम करने का मौका मिलेगा, हम और चीजें भी डालेंगे। जो लोग काबिज हैं उन पर सख्त कानून लागू होना चाहिए, यह लालू जी आपने कहा। इसमें सैक्शन 52(ए) में साफ कहा है कि जो लोग गलत काम कर रहे हैं, जो वक्फ के गलत कब्जे में हैं, उनके लिए एक खास तौर पर दो साल की सजा रखी गई है।

श्री लालू प्रसाद : डीड कैंसल कराई है।

कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय के राज्य मंत्री और अल्पसंख्यक मामले मंत्रालय के राज्य मंत्री (श्री सलमान खुर्शीद):वर्ड एब इनिशियो है, इसलिए कोई सवाल पैदा ही पैदा नहीं होता कि कोई गलत डीड लिखकर दे दे और गलत डीड की बुनियाद पर जायदाद को हड़प सके। जिसने भी गलत काम किया हो या हड़पा हो या मदद की हो, उस पर पूरा शिकंजा कसा जाएगा और इसके लिए दो साल की सजा है। जो अफसर गलत काम करेंगे, उन पर 15,000 जुर्माना रखा गया है। शाहनवाज साहब ने कर्नाटक की बात कही कि वहां आसानी से वक्फ की जमीन ली जा सकती है। दो एक्ट हैं - पब्लिक प्रीमिसस एक्ट और रेंट कंट्रोल एक्ट। ये दानों स्टेट लैवल के एक्ट हैं। हम इसमें दखल नहीं दे सकते लेकिन हमने सब स्टेट्स को लिखा है कि वक्फ जमीन और जायदाद पर रेंट कंट्रोल एक्ट और पब्लिक प्रिमिसिस एक्ट लागू करें ताकि जमीन को वापिस लेने में या मुकदमा तय करने में जो देर लगती है, उससे हम लोग बच सकें। हमारा इरादा किसी पर एहसान करने का नही है। हमारा इरादा इतना है कि जो हमारा फर्ज है उसकी हम अदायगी करें। हमारा फर्ज सबके लिए है, आपके लिए भी है और उनके लिए भी है। हम इस फर्ज की अदायगी करें, एहसान नहीं। यह अच्छी बात है।

          अगर वक्फ की जायदाद से कम्युनिटी में खुद एक ऐसा एहसास पैदा हो कि हम अपनी मदद खुद कर सकते हैं और किसी के सामने हाथ फैलाने की जरूरत नहीं है तो वह अच्छी बात है। मैं यह कहता हूं कि बहुत सारे वक्फ ऐसे भी हैं, जो सिर्फ मुसलमान बच्चों की मदद और मुसलमान यतीमों की मदद नहीं करते बल्कि गैर मुस्लिम लोगों की भी मदद करते हैं और यह मानकर करते हैं कि इंसान चाहे जो भी हो, जो भी मजलूम हो, उसकी मदद करना अल्लाह ताला ने हमें बताया है कि यह एक अच्छी बात है। इसलिए मैं समझता हूं कि कुव्वत अगर होगी, वक्फ वाकिफ जो मुतवल्ली हैं उनके पास या वक्फ बोर्ड के पास तो ज्यादा से ज्यादा लोगों को फायदा कर पायेंगे।

          यह सही है कि श्री मोहम्मद असरारूल हक साहब ने कहा कि हमने वक्फ बोर्ड्स के लिए क्या किया है या वक्फ काडर बनाने में क्या किया है? हमारा यह मानना था कि हम स्टेट्स में ज्यादा दखलअंदाजी न करें, जिस बात की शिकायत अभी हमारे एक साथी को थी कि स्टेट्स में दखलअंदाजी नहीं करनी चाहिए। इसलिए वक्फ का कोई काडर नहीं बनाया गया है, स्टेट्स पर छोड़ा गया है। लेकिन वक्फ बोर्ड और वक्फ काउंसिल को हमने मजबूत किया है और इसीलिए अभी विजय बहादुर जी कह रहे थे कि आप वक्फ बोर्ड को डायरेक्शन देंगे। लेकिन वक्फ बोर्ड को अगर कोई शिकायत है तो उसके एडजुडिकेशन के लिए सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज को रखा गया है कि उसकी ट्रिब्युनल में वह अपनी शिकायत दर्ज कर सकते हैं और वहां पर वह लाकर फैसला कर सकते हैं।

          महोदया, हमने वक्फ बोर्ड के कंप्यूटराइजेशन के लिए पैसा देने की पेशकश की है। वह काम चल रहा है। बहुत जल्द जब सारे रिकार्ड्स कंप्यूटर पर आ जायें,गे तब आज जिस किस्म से वे रिकार्ड्स बदल दिये जाते हैं और उसके तहत जमीन का कब्जा बदल जाता है, वह भी नहीं होगा और वक्त बोर्ड्स और मजबूत हो जायेंगे।

          श्री पांडा जी ने तीन और तीस साल की बात कही। मैं यह समझता हूं कि वह शायद यह समझें कि एक तरफ हम वक्फ प्रोपर्टी को नॉन-ट्रंसफरेबल कर रहे हैं और दूसरी तरफ तीन साल से तीस साल लीज को क्यों बढ़ा रहे हैं? लीज में कोई टाइटल ट्रंसफर नहीं होता, सिर्फ किसी को इस्तेमाल करने का हक मिलता है। हमको यह बताया गया है कि हर स्टेट्स से कि अगर कोई स्कूल तीन साल के लिए बनाता है तो उन्हें स्टेट गवर्नमैन्ट्स से नो-ऑब्जैक्शन सर्टिफिकेट नहीं मिलता है। कम से कम 25 से 30 साल की मोहलत उन्हें चाहिए होती है। इस वजह से सिर्फ अस्पताल और स्कूल बनाने के लिए हमने तीस साल की मोहलत लीज के लिए दी है कि कम से कम बच्चों के लिए स्कूल बनाये जा सकें।

          इसके अलावा हमारे बहुत सारे अजीज दोस्तों ने बहुत सारी बातें यहां रखी हैं। मैं यह मानता हूं कि आप भी यह मानते हैं कि हमने एक सही दिशा में, सही जानिब चलने की एक कोशिश की है। अभी तक जो कमजोरी और कमी वक्फ एक्ट में देखी गई थी, उसे हम इसके तहत दूर कर पायेंगे और आने वाले वक्त में आप देखेंगे कि वक्फ बोर्ड का निजाम और जो सैंट्रल वक्फ काउंसिल है, उसके निजाम में बहुत बेहतरी होगी।

           With these words I request the House to pass this Bill.

श्री मुलायम सिंह यादव (मैनपुरी):अध्यक्ष महोदया, मैं एक मिनट बोलना चाहता हूं।

अध्यक्ष महोदया : आप इस तरह से मत करिये। अब उनका रिप्लाई हो चुका है। मुलायम सिंह जी, आप कृपया अपना स्थान ग्रहण करिये।

…( व्यवधान)

   

MADAM SPEAKER: The question is:

“That the Bill to amend the Wakf Act, 1995, be taken into consideration.”   The motion was adopted.
  MADAM SPEAKER: The House will now take up clause-by-clause consideration of the Bill.           The question is:
“That clauses 2 to 49 stand part of the Bill.” The motion was adopted.
Clauses 2 to 49 were added to the Bill.
Clause 1, the Enacting Formula and the Long Title were added to the Bill.
 
MADAM SPEAKER: The Minister may now move that the Bill be passed.
SHRI SALMAN KHURSHEED: Madam, I beg to move:
“That the Bill be passed.”   MADAM SPEAKER: The question is:
“That the Bill be passed.” The motion was adopted.