Lok Sabha Debates
Further Discussion On Union Budget For The Year 2021-22. on 13 February, 2021
Seventeenth Loksabha > Title: Further discussion on Union Budget for the year 2021-22.
माननीयअध्यक्ष : श्री अधीर रंजन चौधरी ।
SHRI ADHIR RANJAN CHOWDHURY (BAHARAMPUR): Sir, I would like to flag the attention of the Hon. Finance Minister in relating to my district Murshidabad which is recognised as one of the aspirational districts in the country and is waiting for your generosity.
You will be astonished to note that Murshidabad district has been victim of severe erosion years after years. Geographical expression of my district Murshidabad has been drastically sometimes beyond to the recognition. State Government is always arguing that the Central Government is not providing the requisite funds, so they cannot do the work.
So, Madam, I shall be drawing your attention on this issue because without having your support, the erosion problem cannot be solved. It should be treated as a national issue.
Secondly, I am hailing from the same district which has been recognised as the largest jute producing district in the country. You are certainly aware that the entire world now is pleading for wiping out synthetic fibre. Jute could be the fibre of the future. For its golden lustre, it is always regarded as a golden fibre.
So, in the 7 textile parks that you have proposed in the Budget, at least one of the 7 textile parks should be set up in my district. Jute farmers are being deprived from having their legitimate due. Thank You. … (Interruptions)
HON. SPEAKER: No ‘Zero Hour’ .… (Interruptions)
HON. SPEAKER: No Adjournment Motion.
*श्री अशोक महादेवराव नेते (गड़चिरोली-चिमुर): माननीय प्रधानमंत्री आदरणीय मोदी जी एवं आदरणीया निर्मला सीतारमण जी, माननीय वित्त मंत्री का मैं हृदय से धन्यवाद करना चाहूंगा,क्योंकि यह बजट लीक से हटकर लाया गया है, जिसमें लोक-लुभावन घोषणाओं के स्थान पर बजट को कृषि एवं किसानों,गरीब एवं मध्यम वर्गीय लोगों परकेन्द्रित किया गया है ।
माननीय वित्त मंत्री ने इस बजट में प्रवासी मजदूरों के लिए एक पोर्टल बनाए जाने का भी प्रावधान किया गया है,जिसमें प्रवासी मजदूरों से जुड़ा डाटा होगा तथा उनके लिए देशभर में एक देश-एक राशन योजना शुरू करने की व्यवस्था भी की गई है । यह खुशी की बात है कि लेह में केंद्रीय विश्वविद्यालय बनाए जाने और अनुसूचित जाति के 4 करोड़ विद्यार्थियों को 35 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है ।
इसमें कोई संदेह नहीं है कि काफी मुश्किल समय में यह बजट पेश किया गया है तथा इसमें मूलतः आधारभूत संरचना पर जोर दिया गया है, जिससे देश की अर्थव्यवस्था और अधिक मजबूत होगी ।
यह प्रसन्नता की बात है कि सरकार ने किसानों की आय को दोगुना करने का लक्ष्य रखा है । शहरी, ग्रामीण स्वच्छता के लिए बजट में प्रावधान किए गए हैं और स्वच्छ हवा के लिए भी सरकार ने इसमें प्रावधान किया है तथा रेलवे के लिए राष्ट्रीय रेल योजना 2030 तैयार करने का प्रावधान रखा गया है और बीमा क्षेत्र में 74 फीसदी तक एफडीआई को मंजूरी दी गई है ।
देशवासियों ने इस बजट को लेकर बहुत सारी उम्मीदें जताई थीं, जिन्हें सरकार ने पूरा किया है । यह बजट भारत की वृद्धि पर केंद्रित है और विकास दर में तेजी लाने के लिए पूर्णतः अनुकूल है । यह बजट 'आत्मनिर्भर भारत'के लिए है, इससे अर्थव्यवस्था मजबूत होगी ।
इस बजट में कॉपर और स्टील में ड्यूटी को घटाया गया है तथा सोने-चांदी की कस्टम ड्यूटी को भी घटाया गया है ।
माननीय वित्त मंत्री जी ने नेशनल एजुकेशन पॉलिसी को तहे दिल से स्वीकार किया है और बजट में 100 नए सैनिक स्कूल स्थापित किए जाने का प्रावधान किया है और अनुसूचित जाति के 4 करोड़ विद्यार्थियों के लिए 35 हजार करोड़ रुपये का ऐलान किया गया है तथा आदिवासी इलाकों में एकलव्य स्कूल खोले जाने का लक्ष्य रखा गया है ।
यह प्रसन्नता की बात है कि माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के केन्द्रीय नेतृत्व में देश में गेहूं उगाने वाले किसानों की संख्या दोगुनी हुई है तथा लागत से डेढ़ गुना ज्यादा देने का प्रयास किया गया है और इसके लिए किसानों को 75 हजार करोड़ से ज्यादा दिए गए हैं ।
यह भी प्रसन्नता की बात है कि यूपीए सरकार से करीब तीन गुना ज्यादा राशि मोदी सरकार ने किसानों के खातों में पहुंचाई है और दाल, गेंहू,धान समेत अन्य फसलों की एमएसपी बढ़ाई गई है ।
माननीय वित्त मंत्री जी ने इस बजट में जम्मू-कश्मीर में भी गैस पाइपलाइन योजना की शुरुआत की है तथा उज्ज्वला योजना के तहत एक करोड़ और लाभार्थियों को जोड़ने का प्रावधान किया है । अभी तक 8 करोड़ लोगों को यह मदद दी गई है और साथ ही 100 नए शहर, सिटी गैस वितरण में जोड़े जाने का प्रावधान किया गया है ।
यह भी प्रसन्नता की बात है कि भारत के पास कोविड की दो वैक्सीन उपलब्ध हैं । सौ से अधिक देशों को उसकी सुविधा मुहैया कराई गई है । हमारे लोकप्रिय आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने हमारे वैज्ञानिकों को इसके लिए धन्यवाद दिया है और इस अभियान की शुरूआत की है ।
आत्मनिर्भर पैकेज से ढांचागत सुधारों को गति मिली है । कोरोना काल में पांच मिनी बजट पेश किए गए और आठ करोड़ लोगों को मुफ्त गैस, 80 करोड़ लोगों को मुफ्त अनाज दिया गया ।
यह किसी से छिपा नहीं है कि कृषि कर्ज प्रवाह में साल-दर-साल वृद्धि हुई है तथा जो भी लक्ष्य रखे गए,ऋण वितरण उससे अधिक ही रहा है । उदाहरण के लिए 2017-18 में किसानों को 11-68 करोड़ रुपये का कर्ज दिया गया जबकि लक्ष्य 10 लाख करोड़ रुपये का ही था । इससे विदित होता है कि हमारे ऋषितुल्य प्रधानमंत्री आदरणीय श्री नरेन्द्र मोदी जी किसानों के प्रति कितने अधिक सजग हैं और उनके लिए अनेक कल्याणकारी कदम उठा रहे हैं ।
माननीय वित्त मंत्री जी ने इस बजट में 3 लाख करोड़ रुपये से अधिक लागत की स्कीम लॉन्च की है और बिजली से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर जोर दिया है ।
माननीय वित्त मंत्री जी ने इस बजट में देश में 7 टेक्स्टाइल पार्क बनाए जाने का प्रावधान किया है, ताकि इस क्षेत्र में भारत एक्सपोर्ट करने वाला देश बन सके ।
यह प्रसन्नता की बात है कि माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के केन्द्रीय नेतृत्व में आत्मनिर्भर भारत पैकेज कई योजनाओं को कोरोना काल में देश के सामने लाया गया ताकि अर्थव्यवस्था की रफ्तार को आगे बढ़ाया जा सके और आत्मनिर्भर भारत पैकेज में कुल कई लाख करोड़ रुपये की मदद जारी की गई, जो सभी पांच मिनी बजट के समान थी ।
यह प्रसन्नता की बात है कि देश के 75 साल से ज्यादा वरिष्ठ नागरिकों को आई0टी0आर0 भरने की आवश्यकता नहीं होगी तथा 75 साल के ऊपर के पेंशनधारियों को टैक्स में छूट का प्रावधान भी होगा ।
यह भी प्रसन्नता की बात है कि सरकार ने देश में डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए 500 करोड़ रुपये का आवंटन किया है तथा अगली जनगणना की प्रक्रिया डिजिटल में होगी,जिसके लिए 3760 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है और चाय बगान श्रमिकों को एक हजार करोड़ रुपये रखे गए हैं ।
मुझे इस बात की अत्यधिक प्रसन्नता है कि हमारी सरकार देश के कमजोर, दुबले लोगों के कल्याणार्थ अनेक कल्याणकारी योजनायें तत्परता के साथ कियान्वित कर रही है और माननीय प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में देश चहुमुखी विकास की ओर अग्रसर हो रहा है । नीति आयोग के सोशल जस्टिस एवं एम्पावरमेंट डिपार्टमेंट डिवीजन ने दिनांक 25-01-2019 में आदिवासी लोगों के तेजी से सामाजिक एवं आर्थिक विकास के लिए जनजातीय उप-योजना को प्रभावी तरीके से कियान्वित किए जाने हेतु मंत्रालयों एवं विभागों को निर्देश जारी किए हैं,लेकिन, अभी भी इस दिशा में प्रभावी कदम उठाए जाने की आवश्यकता है, ताकि देश में व्याप्त नक्सलवाद की समस्या को पूरी तरह से समाप्त किया जा सके ।
इस संदर्भ में, मैं विगत लोक सभा में मेरे द्वारा पूछे गए तारांकित प्रश्न संख्या 38, दिनांक 24-6-2019 की ओर आकर्षित करना चाहूंगा,जिसमें मैंने केन्द्रीय मंत्रालयों और राज्य सरकारों को जनजातीय उप-योजना तैयार करने तथा जनसंख्या के प्रतिशत के अनुपात में निधि का आवंटन सुनिश्चित करने तथा निधि के अन्यत्र उपयोग को रोकने के साथ-साथ आवश्यकता के अनुरूप इसके उपयोग के लिए कोई दिशा-निर्देश जारी किए जाने से संबंधित जानकारी चाही थी ।
यह विदित ही है कि जनजातीय उप-योजना आदिवासी लोगों के तेजी से सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए एक रणनीति है । यह एक राज्य / संघ राज्य क्षेत्र की वार्षिक योजना का एक हिस्सा है । जनजातीय उप योजना के तहत प्रदान की गई धनराशि प्रत्येक राज्य / संघ शासित प्रदेशों की जनसंख्या के अनुपात में कम से कम होनी चाहिए । TSP कोष में अनुच्छेद 275 (i) के अंतर्गत भारत की संचित निधि से राशि आवंटित की जाती है । यह एक केन्द्रीय क्षेत्र की योजना है, जिसके अंतर्गत राज्यों को 100% वित्तीय सहायता जनजातीय मामलों के मंत्रालय द्वारा प्रदान की जाती है । इसका उद्देश्य अनुसूचित जनजातियों की शोषण से सुरक्षा सहित सामाजिक-आर्थिक विकास संकेतकों के संदर्भ में, उनके व जनसामान्य के बीच के अंतर को समाप्त करना है । यह राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों की समग्र योजना से उत्पन्न होने वाले लाभ के अतिरिक्त भी लाभ प्रदान करता है ।
यह भी अवगत कराना चाहूंगा कि संसद की पब्लिक एकाउंट्स कमिटी ने 18 दिसंबर, 2017 को 'जनजाति उप-योजना'पर अपनी रिपोर्ट सौंपी । जनजाति उप-योजना (टीएसपी) का उद्देश्य सामाजिक-आर्थिक विकास के संकेतकों के मामलों में अनुसूचित जनजातियों (एसटीज़) और सामान्य जनसंख्या के बीच के अंतर को एक निश्चित समय अवधि में कम करना है । कमिटी ने तीन मंत्रालयों में टीएसपी के कार्यान्वयन पर विचार किया :-
(i) मानव संसाधन विकास,
(ii) स्वास्थ्य और परिवार कल्याण,और
(iii) आयुष ।
इस कमिटी ने टीएसपी के कार्यान्वयन में कई विसंगतियों पर टिप्पणियां की जिनमें निम्नलिखित शामिल हैं :
(i) फंड्स जारी करने के विशिष्ट नियमों को न अपनाना,
(ii) कमजोर कार्यक्रम प्रबंधन,
(iii) निगरानी प्रणाली की कमी, और
(iv) सूचना प्रदान करने वाले कार्यक्रमों को लागू न करना ।
इस संदर्भ में कमिटी के मुख्य निष्कर्ष और सुझाव निम्नलिखित हैं :-
1. वितीय प्रबंधन: कमेटी ने कहा कि टीएसपी फंड्स को राज्य, जिला या ब्लॉक स्तर पर अलग-अलग मदों में नहीं रखा जाता । यह नहीं बताया जाता कि प्रत्येक स्तर पर कितना फंड दिया गया है । जबकि टीएसपी के अंतर्गत फंड्स को अलग एकाउंट में रखा जाना चाहिए ताकि उनके उचित उपयोग के लिए प्रशासनिक व्यवस्था और निगरानी की जा सके । कमेटी ने सुझाव दिया कि प्रत्येक स्तर पर फंड्स को अलग-अलग मदों में रखा जाए और इसका कड़ाई से अनुपालन हो । कमिटी ने कहा कि यह फंड्स को जारी करने के लिए अनिवार्य किया जाना चाहिए । कमेटी ने यह सुझाव भी दिया कि निगरानी प्रणालियों, फंड्स के उपयोग और योजनाओं के कार्यान्वयन को ट्रैक करने के लिए अधिक सक्रिय प्रयास किए जाने चाहिए ।
2. टीएसपी फंड के लिए नॉन-लैप्सेबल पूल: कमेटी ने गौर किया कि वर्तमान में वित्तीय वर्ष के अंत में फंड्स को टीएसपी फंड के नॉन-लैप्सेबल पूल में ट्रांसफर नहीं किया गया जिसे बाद में इस्तेमाल किया जा सके । कमेटी ने निम्नलिखित सुझाव दिए: (i)आबंटित किए गए टीएसपी फंड्स का निश्चित वित्तीय वर्ष में अधिकतम उपयोग किया जाए,और (ii) उन फंड्स को पूल करने के लिए नॉन-लैप्सेबल फंड बनाया जाए जिनका उपयोग उस वितीय वर्ष में नहीं किया गया हो ।
3. निरीक्षण के लिए सेंट्रल नोडल इकाई: कमिटी ने कहा कि जनजातीय कार्य मंत्रालय ने निरीक्षण प्रणाली का विवरण देने वाले दिशानिर्देश तैयार नहीं किए हैं । टीएसपी का मुख्य उद्देश्य यह है कि राज्यों में अनुसूचित जनजातियों के विकास (उनकी जनसंख्या के अनुपात में)के लिए फंड्स के निर्धारण के जरिए केंद्रीय मंत्रालयों के परिव्यय को चैनलाइज किया जाए । कमेटी ने तर्क दिया कि फंड फ्लो उचित है अथवा नहीं, यह देखने के लिए एक केंद्रीय इकाई का गठन किया जाना चाहिए । उसने सुझाव दिया कि इसके लिए जनजातीय कार्य मंत्रालय को केंद्रीय नोडल इकाई बनानी चाहिए जोकि एक ऑनलाइन निरीक्षण प्रणाली के जरिए टीएसपी के बेहतर समन्वय और प्रभावशाली कार्यान्वयन को आसान बनाए ।
सदन के ध्यान में, मैं यह तथ्य भी लाना चाहूंगा कि आज देश नक्सलवाद से बुरी तरह प्रभावित हो रहा है । इसका एक प्रमुख कारण इन क्षेत्रों का अविकसित होना ही है । यदि आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों का सर्वांगीण विकास करके वहां के लोगों को राष्ट्र की मुख्यधारा से जोड़ने का सतत प्रयास किया जाए तो नक्सलवाद की समस्या से काफी हद तक निपटा जा सकता है ।
यह विदित ही है कि महाराष्ट्र राज्य का गड़चिरोली-चिमूर जनजातीय संसदीय क्षेत्र नक्सलवाद से बुरी तरह प्रभावित है । इस क्षेत्र में मैगनीज, लोह, अभ्रक (मायक) हीरा इत्यादि खनिज पदार्थ प्रचूर मात्रा में उपलब्ध है । यहां पर खनिज आधारित और अन्य छोटे-बड़े उद्योग स्थापित करके गरीब आदिवासी लोगों को रोजगार मुहैया कराया जा सकता है । ऐसा करने से आदिवासी युवकों को न केवल रोजगार उपलब्ध होगा,बल्कि इस क्षेत्र का विकास भी होगा और वे राष्ट्र की मुख्यधारा से जुड़ सकेंगे ।
अतः नक्सलवाद से बुरी तरह प्रभावित अति दुर्गम, पिछड़े आदिवासी एवं उद्योग रहित गड़चिरोली-चिमूर क्षेत्र के लिए टैक्स होलिडे पैकेज घोषित करके केन्द्रीय स्तर से छोटे-बड़े उद्योग स्थापित कर उसी प्रकार से केन्द्रीय करों में छूट प्रदान करें, जैसे कि उत्तराखण्ड,हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों के विकास हेतु टैक्स होलिडे पैकेज के अन्तर्गत दी गयी है, ताकि इस क्षेत्र के गरीब आदिवासी युवकों को रोजगार मुहैया हो सके और नक्सलवाद की समस्या से निजात मिलकर वे देश की मुख्यधारा में शामिल हो सकें ।
साथ ही तारांकित प्रश्न संख्या 38, दिनांक 24-6-2019 के संदर्भ में यह भी निवेदन है कि संसद की पब्लिक एकाउंट्स कमेटी ने 18 दिसंबर, 2017 को 'जनजाति उप-योजना'पर अपनी जो रिपोर्ट सौंपी है, उसमें उल्लिखित सभी सिफारिशों के कार्यान्वयन हेतु समुचित निर्देश प्रदान करने की कृपा करें ताकि देश के जनजाति समाज के लोग राष्ट्र की मुख्यधारा से जुड़कर देश में विकास में अपना सहयोग प्रदान कर सके ।
मेरा संसदीय क्षेत्र गड़चिरोली-चिमुर एक बहुत ही पिछड़ा हुआ आदिवासी बाहुल्य दुर्गम क्षेत्र के अन्तर्गत आता है । इस क्षेत्र के निम्नांकित महत्वपूर्ण विषय हैं, जिनके निदान हेतु इस बजट में प्रावधान किए जाने की आवश्यकता है :-
1. गड़चिरोली-चिमुर संसदीय क्षेत्र लगभग 700 किमी० लम्बे क्षेत्र में देश का सबसे बड़ा आदिवासी संसदीय क्षेत्र है । यह क्षेत्र अत्यधिक पिछड़ा और घना आदिवासी बाहुल्य नक्सल प्रभावित क्षेत्र है । इस आदवासी क्षेत्र में आदिवासी लोगों के साथ-साथ बंगाली समाज के लगभग एक लाख से अधिक लोग वर्ष 1962 से पुनर्वास के तौर पर बहुत ही सद्भाव के साथ कई पीढ़ियों से रह रहे हैं । इनमें ओ०बी०सी० के लोगों की संख्या भी काफी अधिक है ।
गैर आदिवासी इन सभी लोगों का जीवन-यापन जनजातीय लोगों की भांति ही है | ये सभी सामाजिक, आर्थिक एवं शैक्षणिक दृष्टि से बहुत ही पिछड़े हुए हैं । सरकार ने बंगाली समाज के जीवन स्तर में सुधार हेतु मकान आदि की सुविधाएं उपलब्ध करायी हैं,लेकिन आदिवासी क्षेत्र में रहने वाले गैर आदिवासी लोग, जो विगत काफी लम्बे अर्से से कब्जाई गई भूमि पर खेती करके अपना जीवन-यापन कर रहे हैं, को भूमि आवंटन के स्थाई पट्टे के नियमों की कड़ाई के चलते नहीं मिल पाए हैं, जिस कारण वे सीचंन इत्यादि जैसी शासकीय सुविधाओं से वंचित हैं ।
मेरे आदिवासी संसदीय क्षेत्र में रहने वाले बंगाली और ओ०बी०सी० के गरीब गैर आदिवासी लोगों द्वारा विगत काफी समय से यह मांग की जा रही है कि जिस प्रकार से आदिवासी क्षेत्रों में निवास करने वाले आदिवासी लोगों द्वारा जिस भूमि पर खेती की जा रही थी, उस भूमि के पट्टे सरकार ने उनके नाम कर दिए हैं । उसी प्रकार से बंगाली और ओ०बी०सी० के गैर आदिवासी लोग, जिनका रहन-सहन जनजातीय लोगों की भांति ही है, को भी उनके द्वारा की जा रही खेती के भूमि के पट्टे को उनके नाम किए जाने संबंधी नियमों में शिथिलता देकर पट्टे कर दिए जाएं तो उनको सींचन इत्यादि जैसी शासकीय सुविधाएं मिलने पर उनके जीवन स्तर में भी सुधार आ सकेगा ।
अतः देश के आदिवासी क्षेत्रों विशेषतः गड़चिरोली-चिमुर आदिवासी संसदीय क्षेत्र में निवास करने वाले बंगाली एवं ओ०बी०सी० के लोगों को उनके द्वारा कब्जाई गई भूमि के पट्टे आवंटन करने संबंधी नियमों में शिथिलता प्रदान करके आदिवासियों की भांति उनको भी भूमि के पट्टे दिलाये जाने की आवश्यकता है ।
2. महाराष्ट्र राज्य के विशेषतः विदर्भ क्षेत्र में गड़चिरौली,चन्द्रपुर,गोंदिया और भण्डारा जिले के किसान इस समय भारी संकट से गुजर रहे हैं । विदर्भ क्षेत्र में महाराष्ट्र राज्य का गड़चिरोली संसदीय क्षेत्र भी आता है, जो आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र होने के साथ-साथ अत्यधिक दुर्गम और अविकसित क्षेत्र है । मेरे संसदीय क्षेत्र गड़चिरोली सहित आसपास के निकटवर्ती जिलों में भारी वर्षा के कारण धान उत्पादक किसान प्रभावित हो रहे हैं तथा अधिक वर्षा के कारण धान की खेती बेकार हो जाने की वजह से वे काफी चिंतित है ।
मेरे संसदीय क्षेत्र के गरीब आदिवासी किसान एक तरफ भारी वर्षा की मार से गुजर रहे हैं तथा दूसरी ओर सूखे की स्थिति में भी उनकी फसल बेकार हो जाती है । इसलिए, ऐसी स्थिति में आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र के किसानों की मदद किए जाने की तत्काल परम आवश्यकता है ताकि वे आर्थिक संकट से उबर सके । यह तभी संभव है जबकि केन्द्र सरकार इन किसानों के लिए आर्थिक अनुदान उपलब्ध कराए ।
अतः महाराष्ट्र राज्य के विशेषतः गड़चिरोली आदिवासी अति पिछड़े क्षेत्र के धान प्रभावित किसानों को आर्थिक मुआवजा उपलब्ध कराए जाने हेतु अंतरिम बजट में अलग से प्रावधान किए जाने की आवश्यकता है ।
3. महाराष्ट्र राज्य के गड़चिरोली-चिमुर संसदीय क्षेत्र के अन्तर्गत तालुका चामोर्शी में मार्कडा देवस्थान एक बहुत बड़ा धार्मिक स्थल है तथा यह काशी देवस्थान के नाम से भी प्रसिद्ध है । इस धार्मिक स्थल का बड़ा महत्व है तथा इस मंदिर के निकट से पवित्र वेणगंगा गुजरती है । वेणगंगा नदी के किनारे स्थित पवित्र मार्कडा (देव) में भगवान शंकरजी का हेमाडपंती मंदिर है, जो मार्कडेय ऋषि की तपस्या से पावन है । इस स्थल को विदर्भ का काशी भी कहा जाता है । यहां पर महाराष्ट्र राज्य के ही नहीं बल्कि देश के अन्य क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का आना होता है तथा महाशिवरात्रि पर्व पर यहां आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या लगभग 15-20 लाख के आसपास होती है । इस धार्मिक स्थल का महत्व पुराणों में भी वर्णित है, लेकिन श्रद्धालुओं के लिए यहां पर जरूरी मूलभूत सुविधाओं का भारी अभाव है ।
मेरे गड़चिरोली-चिमुर संसदीय क्षेत्र के अन्तर्गत ही कछाड़गढ़, तालुका सालेकसा, जिला गोंदिया में लिंगोजंगो,जो आदिवासियों के देवता हैं,उनकी एक प्रमुख एवं अति प्राचीन गुफा व मन्दिर है । यह देश के आदिवासियों का एक बहुत बड़ा धार्मिक स्थल है तथा पर्वतीय क्षेत्र में स्थित है । यहां पर महाराष्ट्र राज्य के ही नहीं बल्कि देश के विभिन्न राज्यों छत्तीसगढ़,मध्य प्रदेश,झारखण्ड, उड़ीसा सहित अन्य आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों से आदिवासी श्रद्धालुओं का एक बहुत बड़ी संख्या में आना होता है तथा प्रत्येक वर्ष फरवरी माह में विशेष उत्सव के दौरान प्राचीन गुफा व मन्दिर के दर्शन करने वाले आदिवासी श्रद्धालुओं की संख्या लगभग 40-50 हजार तक पहुंच जाती है इसी प्रकार चन्द्रपुर जिले की चिमूर तहसील में रामदेगी पवित्र तीर्थ स्थल है । यहां पर भगवान राम का मंदिर है । यहां पर पौष (जनवरी) महीने में यात्रा हाती है तथा आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में भक्तगण धार्मिक यात्रा में आते हैं, किन्तु उक्त सभी पावन स्थलों पर जन-सुविधाओं एवं पक्के रास्तों के अभाव में श्रद्धालुओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है ।
अतः उपरोक्त सभी धार्मिक स्थल, जो जनजातीय बाहुल्य क्षेत्र में स्थित है,के महत्व को देखते हुए इनको केन्द्रीय पर्यटन की सूची में शामिल करते हुए इन सभी को पर्यटन के रूप में विकसित करने और इनका सौन्दर्यकरण करने के साथ-साथ वहां पर मार्गों की मरम्मत, मजबूतीकरण कॉकेटिकरन करने, शौचालयों,धर्मशालाओं का निर्माण, आदिवासयों के कला-गुणों को विकसित किए जाने हेतु सांस्कृतिक भवनों का निर्माण,पेयजल आदि की सुविधा उपलब्ध कराए जाने हेतु अंतरिम बजट में धन का प्रावधान करने की कृपा की जाए ।
4. महाराष्ट्र राज्य का गड़चिरोली-चिमूर जनजातीय बाहुल्य क्षेत्र है और इस समय नक्सलवाद से बुरी तरह प्रभावित है । यह क्षेत्र शैक्षणिक दृष्टि से अत्यधिक पिछड़ा हुआ क्षेत्र है । यहां पर राज्य व केन्द्र स्तर के कार्यालय भी है । यदि गड़चिरौली में केन्द्रीय विद्यालय की स्थापना कर दी जाती है तो सरकारी कर्मचारियों के बच्चों के साथ-साथ स्थानीय गरीब बच्चों को भी शिक्षा प्राप्त हो सकेगी और इस क्षेत्र के बच्चे अच्छी शिक्षा प्राप्त करके राष्ट्र की मुख्यधारा से जुड़ सकेंगे ।
अतः महाराष्ट्र राज्य के गड़चिरोली-चिमूर जनजातीय संसदीय क्षेत्र, जो नक्सलवाद से अति प्रभावित क्षेत्र है और अति पिछड़ा हुआ भी है, वहां गड़चिरौली में वरीयता के आधार पर केन्द्रीय विद्यालय की स्थापना किए जाने का प्रावधान किया जाए ।
5. गड़चिरोली-चिमूर क्षेत्र इस समय नक्सलवाद से बुरी तरह प्रभावित है । यहां पर कौशल विकास आधारित रोजगार एवं प्रशिक्षण कार्यकम शुरूआत किए जाने की आवश्यकता है, ताकि वहां के युवकों को रोजगार के साधन उपलब्ध कराकर उन्हें राष्ट्र की मुख्य धारा से जोड़ा जा सके । देश के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में भी इस कार्यकम को कियान्वित किए जाने की आज की समय की जरूरत है ।
अतः गड़चिरोली-चिमूर जनजातीय संसदीय क्षेत्र, जो नक्सलवाद से अति प्रभावित क्षेत्र है और अति पिछड़ा हुआ भी है, वहां के युवकों के लिए वरीयता के आधार पर कौशल विकास आधारित रोजगार एवं प्रशिक्षण कार्यकम को क्रियान्वित किए जाने हेतु गड़चिरोली जिले में कौशल विकास केन्द्र की स्थापना किए जाने हेतु आवश्यक कदम उठाए जाने की आवश्यकता है, जिससे नक्सलवाद से प्रभावित क्षेत्रों के युवकों को रोजगार के साधन उपलब्ध होकर वे भी राष्ट्र की मुख्य धारा से जुड़ सके ।
6. देश के जनजातिय बाहुल्य क्षेत्रों में जनजातिय लोगों को जीविकापार्जन के लिए कृषि उपज हेतु वन भूमि का आवंटन किया गया है, लेकिन उनके लिए भूमि के सिंचन हेतु जल की कोई सुविधा प्रदान नहीं की जा रही है, जिस कारण जल के अभाव में आदिवासी लोग अपनी भूमि को कृषि उपज के लिए उपयोग में न लाकर बेकारी की स्थिति में है । जब तक आदिवासी लोगों को आवंटित की गई भूमि के सिंचन हेतु जल की व्यवस्था नहीं कराई जाती है, तब तक वह भूमि उनके किसी उपयोग की नहीं है ।
आज देश नक्सलवाद से बुरी तरह प्रभावित हो रहा है । इसका एक प्रमुख कारण इन क्षेत्रों का अविकसित होना ही है । यदि आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों का सर्वांगीण विकास करके वहां के लोगों को राष्ट्र की मुख्यधारा से जोड़ने का सतत प्रयास किया जाए तो नक्सलवाद की समस्या से काफी हद तक निपटा जा सकता है ।
अतः देश के जनजातीय क्षेत्रों में विशेषकर महाराष्ट्र राज्य के आदिवासी गड़चिरोली-चिमूर संसदीय क्षेत्र में आवंटित की गई भूमि के लिए केन्द्रीय स्तर पर एक कार्यकम तैयार करके धन का आवंटन कर भूमि सिंचन हेतु पानी उपलब्ध करवाया जाए, जिससे नक्सलवाद से प्रभावित लोग केन्द्रीय योजना से लाभान्वित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा से जुड़ सके ।
7. महाराष्ट्र सरकार ने नक्सलवाद से बुरी तरह प्रभावित गड़चिरौली आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र की वड़सा-गड़चिरौली एवं नागपुर-नागभीड़ रेलवे लाईन से संबंधित प्रकल्पों के शीघ्र कार्यान्वयन हेतु केन्द्र सरकार को प्रस्ताव प्रेषित किया है । महाराष्ट्र सरकार ने नक्सलवाद से प्रभावित इन रेलवे लाईनों के निर्माण कार्य में व्यय होने वाली राशि का 50 प्रतिशत हिस्सा केन्द्रीय गृह मंत्रालय, 25 प्रतिशत हिस्सा रेल मंत्रालय एवं 25 प्रतिशत हिस्सा स्वयं वहन किए जाने की पहल की है ।
आदिवासी एवं नक्सलवादी क्षेत्र में स्थित वडसा- गड़चिरौली रलेवे लाईन को वर्ष 2011-12 में स्वीकृत किया गया था, जिसकी दूरी 49.5 कि0मी0 है । रेलवे बोर्ड द्वारा इसका संशोधित प्राक्कलन स्वीकृत कर दिया गया है तथा फाइनल लोकेशन सर्वे एवं भू-तकनीकी सर्वे भी पूरा किया जा चुका है । इसी क्षेत्र में स्थित नागपुर-नागभीड़ के आमान परिवर्तन (Gauge Conversion) की दूरी 106 कि0मी0 है, जिसको 2012-13 के बजट भाषण में स्वीकृत किया गया था । इसका भी संशोधित प्राक्कलन विद्युतीकरण के साथ तैयार है । इसके लिए अब तक बजटीय आवंटन का प्रावधान नहीं किया गया है ।
आज देश नक्सलवाद से बुरी तरह प्रभावित हो रहा है । इसका एक प्रमुख कारण इन क्षेत्रों का अविकसित होना ही है । यदि आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों का सर्वांगीण विकास करके वहां के लोगों को राष्ट्र की मुख्यधारा से जोड़ने का सतत प्रयास किया जाए तो नक्सलवाद की समस्या से काफी हद तक निपटा जा सकता है ।
अतः नक्सलवाद से बुरी तरह प्रभावित क्षेत्र की उपर्युक्त दोनों रेलवे लाईनों के निर्माण के कार्य,जो बहुत ही धीमी गति से चल रहा है,को तीव्र गति से पूरा किए जाने हेतु अंतरिम बजट में धन के आवंटन की व्यवस्था की जाए, ताकि इस क्षेत्र का विकास हो सके और इस क्षेत्र को नक्सलवाद की समस्या से निजात मिलकर वहां के युवक देश की मुख्यधारा से जुड़ सकें ।
8. गड़चिरोली-चिमूर जनजातीय क्षेत्र में मैगनीज, लोह, अभ्रक (मायक) हीरा इत्यादि खनिज पदार्थ प्रचूर मात्रा में उपलब्ध है । यहां पर खनिज आधारित और अन्य छोटे-बड़े उद्योग स्थापित करके गरीब आदिवासी लोगों को रोजगार मुहैया कराया जा है । ऐसा करने से आदिवासी युवकों को न केवल रोजगार उपलब्ध होगा,बल्कि इस क्षेत्र का विकास भी होगा और वे राष्ट्र की मुख्यधारा से जुड़ सकेंगे ।
9. महाराष्ट्र राज्य का गड़चिरोली-चिमुर क्षेत्र नक्सलवाद से बुरी तरह प्रभावित अत्यधिक पिछड़ा हुआ अविकसित आदिवासी बाहुल्य इलाका है । इस क्षेत्र के युवक राष्ट्रीय मुख्यधारा से टूटकर और समाज विघटक संगठनों से जुड़कर विकास में बाधा साबित हो रहे हैं । यहां का किसान, व्यापारी, शिक्षित, अशिक्षित, गरीब, अमीर सभी भ्रमित हैं और अपने आपको असुरक्षित महसूस कर रहे हैं । नक्सलवाद से बुरी तरह प्रभावित इस आदिवासी बाहुल्य का विकास करके एवं बेरोजगार युवकों को रोजगार उपलब्ध करवाकर उक्त समस्या का काफी हद तक समाधान हो सकता है ।
इस क्षेत्र को नागपुर, जगदलपुर,भिलाई, राजनांदगांव,चंद्रपुर, हैदराबाद, गोंदिया इत्यादि स्थानों से आवागमन और व्यापार की दृष्टि से जोड़ना अति आवश्यक है,जिससे यहां के जन-जीवन के सांस्कृतिक और सामाजिक स्तर में बढ़ोत्तरी होगी । यह कार्य बहुत ही धीमी गति से चल रहा है, जिसको तीव्र गति से पूरा किए जाने की आवश्यकता है ।
अतः नक्सलवाद से बुरी तरह प्रभावित आदिवासी बाहुल्य गड़चिरोली-चिमुर क्षेत्र के विकास के लिए (1) नागपुर-नागभीड़- ब्रह्मपुरी-गड़चिरोली राजमार्ग को राष्ट्रीय उच्च मार्ग नं0 7 से जोड़ने (2) गड़चिरोली-चामोर्शी-आलापल्ली-सिरोंचा राजमार्ग को राष्ट्रीय उच्च मार्ग नं0 16 से जोड़ने (3) गोंदिया-गोरगांव कोहमारा राजमार्ग को राष्ट्रीय उच्च मार्ग नं0 6 से जोड़ने तथा (4) गड़चिरोली-मूल-चन्द्रपुर राजमार्ग को राष्ट्रीय उच्च में परिवर्तित किए जाने हेतु अंतरिम बजट में विशेष प्रावधान किए जाए ।
10. केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने जम्मू-कश्मीर के आतंकवाद प्रभावित क्षेत्रों में कौशल विकास आधारित रोजगार एवं प्रशिक्षण कार्यकम की शुरूआत की है,ताकि वहां के युवकों को रोजगार के साधन उपलब्ध कराकर उन्हें राष्ट्र की मुख्य धारा से जोड़ा जा सके । देश के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में भी इस कार्यकम को कियान्वित किए जाने की आज की समय की जरूरत है ।
अतः देश के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों विशेषतः महाराष्ट्र राज्य के गड़चिरोली-चिमूर जनजातीय संसदीय क्षेत्र, जो नक्सलवाद से अति प्रभावित क्षेत्र है और अति पिछड़ा हुआ भी है । वहां के युवकों के लिए वरीयता के आधार पर कौशल विकास आधारित रोजगार एवं प्रशिक्षण कार्यकम को कियान्वित किए जाने हेतु अंतरिम बजट में विशेष प्रावधान किए जाने की आवश्यकता है, जिससे नक्सलवाद से प्रभावित क्षेत्रों के युवकों को रोजगार के साधन उपलब्ध होकर वे भी राष्ट्र की मुख्य धारा से जुड़ सकें ।
11. महाराष्ट्र राज्य के नक्सल प्रभावित तथा जनजातीय पिछड़े संसदीय क्षेत्र गड़चिरोली जिले के आदिवासी किसान कारवाफा, चेन्ना, तुलतुली, दर्पनगुड्रा, उपसा जल सिंचन योजनाओं के बंद होने के परिणामस्वरूप कृषि उपज सुचारू रूप से नहीं कर पा रहे हैं । यह क्षेत्र अति पिछड़ा हुआ है और यहां के गरीब आदिवासी किसान पूरी तरह से खेती पर ही आश्रित हैं, लेकिन वे अपनी खेती को पानी के अभाव में सिंचित न कर पाने की वजह से बेकारी की स्थिति में है । अतः आदिवासी गड़चिरोली-चिमूर संसदीय क्षेत्र में केन्द्रीय स्तर पर एक कार्यकम तैयार करके भूमि सिंचन हेतु पानी उपलब्ध करवाया जाने हेतु अंतरिम बजट में धन का आवंटन किया जाए ।
12. जिला गड़चिरौली में वड़सा एवं जिला गोंदिया में आमगांव महत्वपूर्ण रेलवे स्टेशन हैं । लेकिन, रेल लाईन पर ओवर ब्रिज न होने के कारण यातायात काफी समय तक अवरूद्ध रहता है । इन स्टेशनों से महत्वपूर्ण रेलगाड़ियां होकर गुजरती हैं । यहां के लोगों की विगत काफी समय से रेल लाईन पर ओवर ब्रिज बनाए जाने की मांग की जा रही है । अतः वड़साएवं आमगांव रेलवे लाईन पर वरीयता के आधार पर ओवर ब्रिज बनाए जाने हेतु अंतरिम बजट में धन का प्रावधान किया जाए ।
13. देश में विशेषकर अनुसूचित जातियों एवं जनजातियों के ऐसे लोगों की संख्या बहुत अधिक है, जिनके पास रहने के लिए अथवा अपनी जीविका चलाने के लिए खेतीबाड़ी हेतु एक इंच भी भूमि नहीं है । लेकिन दूसरी ओर देश में लगभग आठ करोड़ एकड़ भूमि सरप्लस है । यदि फोरेस्ट कंजर्वेशन एक्ट में आवश्यक संशोधन करके इस अतिरिक्त भूमि को भूमिहीन लोगों में वितरित कर दिया जाये तो इससे न केवल अतिरिक्त भूमि का समुचित उपयोग किया जा सकेगा, बल्कि देश के गरीब अनुसूचित जाति व जनजाति के भूमिहीन लोगों को अपना सिर छिपाने के लिए भी स्थान मिल सकेगा और वे खेतीबाड़ी के जरिए अपना जीवन निर्वाह कर राष्ट्र की मुख्यधारा से जुड़कर देश के उत्थान में अपना सहयोग प्रदान कर सकेंगे ।
अतः फोरेस्ट कंजर्वेशन एक्ट में जरूरी संशोधन करके अतिरिक्त भूमि को देश के गरीब एवं दलित आदिवासी समुदाय के भूमिहीन लोगों में भूमि आवंटित किए जाने हेतु आवश्यक कदम उठाए जाएं ।
14. गड़चिरोली जिले की तालुका धानोरा में कारवापा और तालुका मूलचेरा में चन्ना लघु सिंचाई प्रोजेक्ट केन्द्र सरकार के पास वन संरक्षण अधिनियम के अधीन क्लियरेंस न मिलने के कारण स्वीकृति हेतु लंबित है, जिसकी वजह से गड़चिरोली जिले का आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र, जो पूरी तरह से खेती पर ही आश्रित है, में आदिवासी किसान अपनी खेती को पानी के अभाव में सिंचित न कर पाने की वजह से बेकारी की स्थिति में है । अतः कारवापा व चन्ना लघु सिंचाई परियोजनाओं को पर्यावरणीय स्वीकृति शीघ्र प्रदान करके नक्सलवाद से प्रभावित क्षेत्रों को भूमि सिंचन हेतु पानी उपलब्ध करवाए जाने हेतु अंतरिम बजट में धन का आवंटन किया जाए ।
15. देश की आजादी के छह दशकों में भी जनजातीय क्षेत्रों में पक्की सड़क, क्षेत्रीय रेल मार्गों का नेटवर्क, उच्च शिक्षा के केन्द्र और रोजगार की व्यवस्था नहीं है । आदिवासी अपनी जातीय भाषा और संस्कृति को बरकार रखना चाहते हैं । यातायात के साधनों का अभाव होने के कारण आदिवासी आपस में पारंपरिक और सांस्कृतिक संपर्क करने से वंचित रहते हैं और आसानी से आपस में भेंट-मुलाकात नहीं कर पाते । वहां रोजगार न होने के कारण उनके पास विस्थापन के अलावा और कोई विकल्प नहीं बचा है । इन क्षेत्रों में ज्यादातर कंपनियों में पर बाहर के लोग ही विराजमान हैं । इसी प्रकार उद्योगों व खनिज पदार्थो से पूरे देश को लाभ हो रहा है, लेकिन इन क्षेत्रों के निवासियों को उतना लाभ नहीं मिल रहा है, जितना कि मिलना चाहिए ।
देश के विभिन्न राज्यों में जनजातियों की जनसंख्या बहुत अधिक है । रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत अनेक रेजिमेंट हैं, लेकिन जनजातियों के लिए अलग से रेजिमेंट नहीं है । जनजातीय युवकों को नक्सली गुटों में प्रवेश करने से रोकने के लिए रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत एक नए रेजिमेंट "बिरसा मुंडा रेजिमेंट" का गठन किया जाना चाहिए । इससे आदिवासी नवयुवकों को न केवल रोजगार मिलेगा,बल्कि उनमें आत्म गौरव का भी बोध होगा तथा वे अपने सकारात्मक मार्ग से नहीं भटकेंगे ।
अतः नक्सलवाद को समाप्त करने के लिए जनजातिय लोगों के लिए विकास के विकल्प और सम्मानजनक जीवन प्रदान करने हेतु आवश्यक प्रावधान किए जाने की आवश्यकता है ।
16. केन्द्र सरकार ने देश के निर्बल वर्ग के छात्रों को अच्छी शिक्षा प्रदान किए जाने के लिए नवोदय विद्यालय की स्थापना की है । चूंकि, इन विद्यालयों में 12वीं कक्षा तक ही शिक्षा प्रदान किए जाने की सुविधा है, इसलिए ऐसे छात्र, जो निर्धन परिवार से हैं, वे 12वीं कक्षा के पश्चात धनाभाव के कारण उच्च शिक्षा से वंचित रह जाते हैं । विशेषकर देश के अनुसूचित जाति व जनजातिय बाहुल्य क्षेत्रों में स्थित नवोदय विद्यालय से 12वीं की कक्षा उत्तीर्ण करने वाले अनुसूचित जाति/जनजाति जाति के छात्रों को उच्च शिक्षा/तकनीकी शिक्षा प्रदान किए जाने हेतु एक कार्यकम बनाए जाने की आवश्यकता है, ताकि वे उच्च शिक्षा/तकनीकी शिक्षा से वंचित न रह सके ।
आज देश नक्सलवाद से बुरी तरह प्रभावित हो रहा है । इसका एक प्रमुख कारण जनजातिय क्षेत्रों का अविकसित होना और जनजातिय छात्रों में उच्च शिक्षा/तकनीकी शिक्षा का अभाव है । यदि आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में इस समुदाय के छात्रों के लिए उच्च शिक्षा/तकनीकी शिक्षा की सुविधा प्रदान करके इन युवकों को राष्ट्र की मुख्यधारा से जोड़ने का सतत प्रयास किया जाए तो नक्सलवाद की समस्या से काफी हद तक निपटा जा सकता है ।
अतः देश के आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में इस समुदाय के छात्रों के लिए उच्च शिक्षा/तकनीकी शिक्षा हेतु एक कार्यक्रम शीघ्र बनाकर धन का आवंटन किया जाए ।
17. महाराष्ट्र राज्य के चन्द्रपुर, नागपुर, भण्डारा इत्यादि क्षेत्रों की भूमि को सिंचित किए जाने के उद्देश्य से विदर्भ क्षेत्र के अन्तर्गत भंडारा जिले में गोसीखुर्द सिंचाई परियोजना वर्ष 1981 में प्रारम्भ की गई थी । इस परियोजना का निर्माण कार्य बहुत ही धीमी गति से होने के कारण अब तक पूर्ण नहीं हो सका है, जिसके परिणामस्वरूप क्षेत्र का विकास अवरूद्ध होना स्वाभाविक है । जिस समय यह परियोजना प्रारम्भ की गई थी, उस समय इसकी अनुमानित लागत 372.22 करोड़ रू. थी, जो आज 15.21 गुना बढ़कर 5659.10 करोड़ रुपये हो गई है । परियोजना का निर्माण कार्य समय पर पूरा न होने का एक प्रमुख कारण इस परियोजना के लिए आवंटित धनराशि को दूसरे कार्यो में व्यय करना है ।
गड़चिरोली चिमुर एक आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र है । इस क्षेत्र के चन्द्रपुर जिले के तीन विधान सभा क्षेत्र जो अति पिछड़े हुए हैं और खेती पर ही आश्रित हैं, को भी गोसीखुर्द परियोजना से जल प्राप्त होना था । परियोजना का कार्य समय पर पूरा न होने के कारण किसान अपनी भूमि को पानी के अभाव में सिंचित नहीं कर पा रहे हैं । अतः इस परियोजना को शीघ्र पूरा किये जाने हेतु अंतरिम बजट में धन का आवंटन किया जाए ।
18. गड़चिरोली चिमुर जिले की तालुका आरमोरी की कोसरी लघु सिंचाई प्रकल्प, डॉगरगांव-ठाणेगांव ऊपरी सिंचाई योजना, कुरखेड़ा तालुका की ये गलखेड़ा लघु सिंचाई प्रकल्प, चामोर्शी तालुका की हल्दीपुरानी ऊपरी सिंचाई योजना, तळोधी (मोकासा) ऊपरी सिंचाई योजना, पिपरी रीठ लघु सिंचाई प्रकल्प, गणपुर उपसा सिंचन योजना, कढोली ऊपरी सिंचाई योजना, अनखोड़ा ऊपरी सिंचाई योजना, पोहार नाला प्रकल्प, गड़चिरोली तालुका की कोटगल ऊपरी सिंचाई योजना, कोटगल बॅरेज, अहेरी तालुका की महागांव गर्रा ऊपरी सिंचाई योजना, देवलमारी ऊपरी सिंचाई योजना, सिरोंचा तालुका की रेंगुंठा ऊपरी सिंचाई योजना, धानोरा तालुका की पुलखल लघु सिंचाई योजना केन्द्र सरकार के पास वन संरक्षण अधिनियम के अधीन क्लियरेंस न मिलने के कारण स्वीकृति हेतु लंबित है, जिसकी वजह से गड़चिरोली जिले का आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र, जो पूरी तरह से खेती पर ही आश्रित में आदिवासी किसान अपनी खेती को पानी के अभाव में सिंचित न कर पाने की वजह से बेकारी की स्थिति में है ।
19. गड़चिरोली-चिमुर लगभग कई सौ कि0मी0 लम्बे क्षेत्र में देश का सबसे बड़ा आदिवासी संसदीय क्षेत्र है और इसकी सीमाएं छत्तीसगढ़, म0प्र0, तेलांगना और आंध्र-प्रदेश राज्यों के साथ लगती हैं । यह क्षेत्र देश का अत्यधिक पिछड़ा और घना आदिवासी बाहुल्य नक्सल प्रभावित दुर्गम, उद्योग विहीन अविकसित क्षेत्र है । गड़चिरोली जिले में 12 तहसीलें हैं तथा यह जिला उत्तर-दक्षिण 480 कि0मी0 सुदूर क्षेत्र में विस्तृत है । देश के अत्यन्त पिछड़े जिलो में होने की वजह से गड़चिरोली जिले को केन्द्र सरकार ने आकांक्षित जिले में शामिल किया गया है ।
गड़चिरोली जिले की 80 प्रतिशत हिस्सा वन भू-भाग में आता है तथा यहां के आदिवासी किसान अशिक्षित एवं गरीब है तथा इनकी आजीविका का एक मात्र साधन कृषि है । इस जिले के दक्षिण में स्थित 6 तहसीलों के कृषि विकास हेतु विगत कई वर्षो से चामोर्शी,जो क्षेत्र की सबसे बड़ी कृषि उपज बाजार समिति है, में एक अतिरिक्त कृषि विज्ञान केन्द्र स्वीकृत किए जाने का प्रस्ताव केन्द्र सरकार के विचाराधीन है ।
अतः गड़चिरोली आदिवासी क्षेत्र, जो कई सौ कि०मी० के फैलाव में है, की चामोर्शी तहसील में एक और कृषि विज्ञान केन्द्र स्थापित किया,जिससे इस क्षेत्र के आदिवासी गरीब कृषकों को लाभ मिल सके ।
20. गड़चिरोली-चिमुर क्षेत्र के गरीब आदिवासी लोगों के लिए चिकित्सा सुविधा का भारी अभाव है । इसलिए, ऐसी स्थिति में आदिवासी बाहुल्य इस क्षेत्र के गरीब लोगों के लिए एक मेडिकल कॉलिज स्थापित किए जाने की परम आवश्यकता है ।
केन्द्र सरकार ने राजधानी दिल्ली में स्थापित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान चिकित्सा संस्थान (ए0आई0आई०एम०एस०)की तर्ज पर देश के प्रत्येक राज्य में एक उच्च स्तरीय चिकित्सालय की स्थापना किए जाने का विचार किया है ।
अतः महाराष्ट्र राज्य का गड़चिरोली संसदीय क्षेत्र, जो आदिवासी बाहुल्य अति पिछड़ा हुआ दुर्गम क्षेत्र है, के गरीब आदिवासी लोगों को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराए जाने के लिए एक मेडिकल कॉलिज की स्थापना किए जाने हेतु राज्य सरकार को निर्देशित किया जाए ।
21. नीति आयोग ने देश के 28 राज्यों में 117 जिलों की पहचान आकांक्षी जिलों के रूप में की है,जिसमें नक्सलवाद से पूरी तरह प्रभावित महाराष्ट्र राज्य का आदिवासी बाहुल्य जिला गड़चिरोली भी शामिल है । सरकार द्वारा इन जिलों का शीघ्र और प्रभावी रूपांतरण किए जाने के साथ-साथ इस कार्यक्रम में इस बात पर भी जोर दिया जा रहा है कि विकसित हो रही अर्थव्यवस्था में लोग अपनी भागीदारी कर सकने में पूरी तरह से सक्षम हो । इस कार्यकम के अन्तर्गत जिन क्षेत्रों पर अधिक बल दिया जा रहा है, उनमें स्वास्थ्य और पोषण, शिक्षा,कृषि तथा जल संसाधन, वित्तीय समावेशन और कौशल विकास तथा बुनियादी अवसंरचना शामिल है ।
नक्सलवाद से बुरी तरह प्रभावित आदिवासी बाहुल्य जिला गड़चिरोली, जिसको आकांक्षी जिले के रूप में शामिल किया गया है, में सरकार के इस कार्यकम को प्रभावी तरीके क्रियान्वित नहीं किया जा रहा है,जिसके परिणामस्वरूप इस नक्सलवादी आदिवासी बाहुल्य जिले में विकास संबंधी कार्य पूरी तरह से अवरूद्ध है तथा यह पिछड़ा हुआ जिला सरकारी की नीति के अनुरूप विकास की ओर अग्रसर नहीं हो रहा है एवं इस जिले में नक्सलवाद की गंभीर समस्या भी ज्यों कि त्यों बरकरार है ।
यदि गडचिरोली आकांक्षी जिले में सरकार के उपरोक्त कार्यकमों का गंभीरता एवं पूर्ण निष्ठा के साथ संचालन किया जाए तो निश्चित रूप से यह आकांक्षी जिला विकास की ओर अग्रसर होगा और यहां पर नक्सलवाद की समस्या का भी निराकरण हो जायेगा ।
अतः आकांक्षी जिले के रूप में गड़चिरोली में केन्द्रीय योजनाओं को प्रभावी तरीके से लागू किया जाए ।
22. गड़चिरोली संसदीय जनजातीय क्षेत्र के अन्तर्गत गोंदिया जिले में देवरी-आमगांव विधान सभा क्षेत्र में गोंदिया से आमगांव-सालेकसा-डोंगरगड होते हुए दुर्ग तक डेमो (शटल)रेलगाड़ी और दोपहर में 12 बजे के बाद दो नई रेलगाड़ियां चलाये जाने की मांग विगत काफी समय से की जा रही है, लेकिन अब तक इसको स्वीकार नहीं किया गया है, जिस कारण स्थानीय लोगों को काफी परेशानी हो रही है और उनमें क्षोभ भी व्याप्त है । मैं इस संबंध में पत्राचार के साथ-साथ सदन में भी निवेदन कर चुका हूं ।
अतः जनजातीय बाहुल्य क्षेत्र को विशेष वरीयता देते हुए गोंदिया से आमगांव-सालेकसा-डोंगरगड होते हुए दुर्ग तक डेमो (शटल) रेलगाड़ी और दोपहर में 12 बजे के बाद दो नई रेलगाड़ियां चलाये जाने हेतु शीघ्र स्वीकृति प्रदान की जाए,ताकि आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र की गरीब जनता को आवागमन में सुविधा हो सके ।
23. गड़चिरोली संसदीय क्षेत्र के गोंदिया जिले में देवरी-आमगांव विधान सभा क्षेत्र के धानोली में स्थित लगभग डेढ़ कि0मी0 मार्ग के निर्माण हेतु राज्य सरकार को सहमति प्रदान किए जाने के बारे में रेलवे के अधिकारियों की राज्य सरकार के अधिकारियों और जन-प्रतिनिधियों के साथ कई बार वार्ता हो चुकी है और मैं भी इस बारे में सदन में निवेदन कर चुका हूं । लेकिन, रेलवे की ओर से राज्य सरकार को इस बारे में अब तक सहमति प्रदान नहीं की गयी है, जिसकी वजह से इस मार्ग के निर्माण कार्य में अनावश्यक विलम्ब हो रहा है । रेलवे की ओर से इस बारे में सहमति मिलने पर राज्य सरकार इस मार्ग का निर्माण कराने के लिए तैयार है, जिससे क्षेत्र के लोगों का आवागमन का लगभग 25 किलोमीटर का फेरा कम हो जाएगा ।
इसलिए, धानोली में स्थित उपरोक्त डेढ़ कि0मी0के निर्माण के बारे में राज्य सरकार को सहमति प्रदान की जाए,ताकि राज्य सरकार इस मार्ग का निर्माण कराकर लोगों के आवागमन की दूरी को कम कर सके ।
24. गड़चिरोली क्षेत्र में वर्षभर बहने वाली वैनगंगा नदी पर वड़सा-कुरूड के निकट बैरेज और इसकी उप-नदियों में सिंचाई के लिए बंथारों (बांध)की स्थापना करके इस क्षेत्र के किसानों को समृद्ध बनाया जा सकता है ।
अतः नक्सलवाद से बुरी तरह प्रभावित महाराष्ट्र राज्य के आदिवासी बाहुल्य संसदीय क्षेत्र गड़चिरोली-चिमूर में वर्षभर बहने वाली वैनगंगा नदी पर वड़सा-कुरूड के निकट बैरेज और इसकी उप-नदियों में सिंचाई के लिए बंथारों (बांध) की स्थापना किए जाने हेतु आवश्यक पहल की जाए ।
25. इस क्षेत्र में स्थित गड़चिरोली-वड़सा रेलवे लाईन को ब्रॉडगेज में परिवर्तित किए जाने की स्वीकृति प्रदान की गयी है, लेकिन इसके लिए भू-संपादन एवं निर्माण हेतु धन का आवंटन अब तक नहीं किया गया है, जिस कारण इसके निर्माण में अनावश्यक विलम्ब दो रहा है ।
दूसरे, इस क्षेत्र के विकास हेतु गड़चिरोली-आष्टी-आलापल्ली-सिरोंचा- मंचेरियाल-आदिलाबाद और नागभीड-कम्पा-टम्पा –चिमूर-वरौरा नई रेलवे लाईन के सर्वेक्षण हेतु भी धन का आवंटन किए जाने की जरूरत है ।
अतः नक्सलवाद से बुरी तरह प्रभावित गड़चिरोली-वड़सा रेलवे लाईन को ब्रॉडगेज में परिवर्तित किए जाने के लिए भू-संपादन और निर्माण हेतु धन का शीघ्र आवंटन किए जाने के साथ-साथ उक्त दोनों नई रेलवे लाईनों के सर्वेक्षण हेतु भी धन का आवंटन किया जाए ।
26. गड़चिरोली संसदीय क्षेत्र के गरीब आदिवासी किसानों के उत्थान के लिए सोलर कृषि पम्प एवं पैक हाऊस तथा उनके लिए किसान सम्मान योजना में और अधिक निधि का आवंटन किए जाने की जरूरत है ।
अतः आदिवासी बाहुल्य संसदीय क्षेत्र गड़चिरोली में किसानों के उत्थान के लिए सोलर कृषि पम्प एवं पैक हाऊस की तथा किसान सम्मान योजना में और अधिक धन का आवंटन किया जाए ।
27. इस क्षेत्र के स्वयं सहायता समूह एवं छोटे उद्यमियों के लिए सूक्ष्म,लघु व मध्यम उद्योगों के संचालन के लिए सबसिडी का प्रावधान किए जाने और इस क्षेत्र में अहेरी, गड़चिरोली एवं वड़सा में कौशल विकास केन्द्रों की स्थापना किए जाने तथा प्रत्येक गांव में शुद्ध पेयजल संयंत्र स्थापित किए जाने हेतु धन का आवंटन किया जाए ।
28. केन्द्र सरकार ने गड़चिरोली के लिए एक केन्द्रीय विद्यालय की स्वीकृति प्रदान की है,लेकिन अब तक इसके लिए धन का आवंटन नहीं हुआ है, जिसका कारण केन्द्रीय विद्यालय की स्थापना होने में अनावश्यक विलम्ब हो रहा है । इस क्षेत्र में गरीब छात्रों के लिए छात्रावासों का भी भारी अभाव है ।
अतः गड़चिरोली में स्वीकृत किए गए केन्द्रीय विद्यालय की स्थापना हेतु एवं इस क्षेत्र के अनुसूचित जाति,जन जाति, अन्य पिछड़ा वर्ग व गरीब परिवार के छात्रों के लिए छात्रावासों की क्षमता बढ़ाए जाने हेतु धन का आवंटन किया जाए ।
29. गड़चिरोली-चिमूर में अनुसूचित जाति, जनजाति,पिछड़ा वर्ग एवं गरीब लोगों की काफी संख्या है । इन लोगों के पास रहने के लिए अपने मकान नहीं है । अतः इन आवास विहीन परिवारों के लिए आवासों की संख्या बढ़ाए जाने तथा नैसर्गिक आपदा के दौरान क्षतिग्रस्त घरों के निर्माण के लिए विशेष प्रावधान संबंधी बी0पी0एल0 की शर्त को शिथिल किए जाने की आवश्यकता है ।
अतः गड़चिरोली में उक्त वर्ग के आवास विहीन लोगों के लिए आवासों की संख्या बढ़ाए जाने के साथ-साथ नैसर्गिक आपदा के दौरान क्षतिग्रस्त घरों के निर्माण हेतु विशेष प्रावधान संबंधी बी0पी0एल0 की शर्त को शिथिल किए जाने हेतु आवश्यक पहल की जाए ।
30. इस क्षेत्र के तीर्थस्थलों एवं पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए मार्कडा (देव), तहसील चामोर्शी, हेमाडपंती मंदिर, कचारगड़ तहसील सालकेसा,रामदेगी, तहसील चिमूर,घोडाजरी गौमुख,जिला चंद्रपुर एवं चपराड़ा,टिपागढ़, बिनागुंडा,अरततोंडी, वैरागड़, जिला गड़चिरोली के धार्मिक स्थलों का जीर्णोद्धार करने, श्रद्धालुओं के लिए धर्मशाला,सड़क, पेयजल,शौचालय, स्नानागृह,शेड्स आदि का निर्माण किए जाने की आवश्यकता है ।
अतः गड़चिरोली के आदिवासी एवं दुर्गम क्षेत्र में तीर्थस्थलों एवं पर्यटन को बढ़ावा दिए जाने हेतु उक्त धार्मिक स्थलों के विकास एवं वहां आने वाले श्रद्धालुओं तथा पर्यटकों को जरूरी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराए जाने हेतु धन का आवंटन करने का कष्ट करें ।
31. मेरा संसदीय क्षेत्र गड़चिरोली-चिमुर के अन्तर्गत गड़चिरोली जिले में केवल एक मात्र ही रेलवे स्टेशन वड़सा में है । यहां के लोगों का वड़सा स्थित रेलवे स्टेशन से ही रेलगाड़ियों में आवागमन होता है, लेकिन वड़सा रेलवे स्टेशन पर सभी रेलगाड़ियों के ठहराव न होने की वजह से क्षेत्र के लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है । विगत काफी समय से क्षेत्र के लोगों द्वारा वड़सा रेलवे स्टेशन पर सभी रेलगाड़ियों के ठहराव दिए जाने की मांग की जा रही है, लेकिन अब तक उनकी मांग को स्वीकार नहीं किया गया है । अतःनक्सलवाद से बुरी तरह प्रभावित क्षेत्र गड़चिरोली जिले के वड़सा स्थित रेलवे स्टेशन पर सभी रेलगाड़ियों के ठहराव की व्यवस्था की जाए ।
32. केन्द्र सरकार की आयुष्मान भारत योजना/प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना,देश की एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य योजना है, इसको पूरे देश में १ अप्रैल,२०१८ को लागू किया गया है । इस योजना का प्रमुख उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को स्वास्थ्य सेवा मुहैया कराना है । यह हमारे लिए गौरव की बात है कि इसके अन्तर्गत आने वाले परिवार के हर सदस्य को 5 लाख तक की कैश रहित स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध करायी जा रही है, जिसमें10 करोड़ बीपीएल धारक परिवार (लगभग 50 करोड़ लोग) इस योजना का प्रत्यक्ष लाभ उठा रहे हैं ।
इस योजना के लिए यह मानक निर्धारित किया गया है कि जिनके नाम वर्ष 2011 की जनसंख्या सूची में शामिल होंगे, केवल वही सदस्य इस योजना का लाभ उठा सकते हैं । इस संदर्भ में, निवेदन करना है कि देश में विशेषतः आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र गड़चिरोली-चिमूर में ऐसे गरीब लोगों की संख्या काफी अधिक है, जिनके नाम वर्ष 2011 की जनसंख्या सूची में शामिल नहीं है ।
अतः जिन गरीब लोगों के नाम वर्ष 2011 की जनसंख्या सूची में शामिल करने से छूट गए हैं और उनके पास आवास/नागरिकता के अन्य दस्तावेज मौजूद है, उनको भी आयुष्मान भारत योजना का लाभ सुनिश्चित किए जाने हेतु समुचित कार्यवाही की जाए ।
33. यह प्रसन्नता की बात है कि केन्द्र सरकार ने कोरोना संकट में देश के आदिवासियों को अपने पैरों पर खड़ा करने के लिए पीएम वन-धन योजना में व्यापकता लाते हुए इसका दायरा बढ़ाने हेतु योजना बनाई है तथा यह भी प्रसन्नता की बात है कि वन-धन योजना, जिससे फिलहाल 18 हजार स्वयं सहायता समूह जुड़े हुए हैं, उसे बढ़ाकर 50 हजार स्वयं सहायता समूह करने का निर्णय लिया गया है । फिलहाल देश के 1205 केन्द्रों के जरिए साढ़े तीन लाख आदिवासी लाभान्वित हो रहे हैं और यह उम्मीद की जा रही है कि आने वाले दिनों में इस योजना से 10 लाख आदिवासी लाभान्वित होंगे ।
34. यह वास्तविकता है कि वन धन योजना के माध्यम से आदिवासियों द्वारा संग्रहित वनोपज की अच्छी कीमत मिलती है तथा इन केन्द्रों के माध्यम से आदिवासियों का जब योगदान बढ़ेगा तो इससे उनकी आय के साधन व स्रोत भी बढ़ेंगे ।
अतः इस संबंध में मेरा अनुरोध है कि देश के अति पिछड़े,दुर्गम आदिवासी बाहुल्य संसदीय क्षेत्र गड़चिरोली में अधिक संख्या में वन धन केन्द्र स्थापित किए जाने हेतु आवश्यक कदम उठाए जाएं, ताकि नक्सलवाद से प्रभावित इस क्षेत्र के विकास में मदद मिल सके और यहां के गरीब आदिवासी देश की मुख्यधारा से जुड़ सकें ।
मेरा सरकार से निवेदन है कि गड़चिरोली आदिवासी जिले की उपर्युक्त सभी विकास संबंधी परियोजनाओं को शीघ्र स्वीकृति प्रदान की जाए और नक्सलवाद से प्रभावित क्षेत्रों को भूमि सिंचन हेतु पानी उपलब्ध करवाने हेतु समुचित कदम उठाए जाएं ।
अंत में, मैं प्रस्तुत बजट का पूरजोर समर्थन करते हुए सरकार को धन्यवाद देता हूं और साथ ही यह भी विनम्र विनती करता हूं कि मेरे संसदीय क्षेत्र से संबंधित उपरोक्त सभी मुद्दों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए उनके निराकरण हेतु बजट में धन का आवंटन हेतु समुचित कदम उठाने की कृपा करेंगे धन्यवाद ।
*SHRI M. K. RAGHAVAN (KOZHIKODE): The first impression of this budget is that it allows the private sectors taking over the public establishments. Disinvestment of institutions like LIC, public sector banks, IDBI being fully divested, closure of old power plants and using their land for alternative uses, privatizing major ports and developing five new smart cities under PPP mode are all indicative of privatizing the nation. The government is to raise Rs.1.75 trillion by selling state assets, including in Life Insurance Corp. of India. The administration will borrow about Rs.12 trillion to meet the shortfall. The nation's financial sector faces increasing pressure from an expected record level of bad loans, escalating border tensions with China and widespread anger from farmers, whose protests against market reforms are un-attended. What Nehru visualized and did to strengthen the nation is defeated by such PPP actions and selling public establishments. This also clearly indicates that the Govt is collecting money to run its business by selling its valuable assets.
Measures to boost consumer confidence is totally neglected and thereby defeating the much-needed impetus to the economy. The Mahatma Gandhi National Rural Employment Guarantee Scheme (MGNREGS), one of the biggest employers during the epidemic sees a decrease of Rs.9,502 crore (13.4 per cent) from the revised estimate of 2020-21 from Rs.73,000 crore. The focus on youth and technology is underwritten.
The Fiscal Responsibility and Budget Management (FRBM) Act, 2003 requires the central government to progressively reduce its outstanding debt. But here the Govt has miserably failed.
The budget does not show any comfort for the ever-increasing hike on petrol and diesel which highly affects the economy of the country. Similarly, the government has miserably failed to showcase the loss of employment generation during and after the pandemic.
To restore the confidence of retail depositor's in banking industry, an effective implementation framework should be in place. The infusion of multiple thousand crores into the public transport system in the country and government's dedication to investments into construction of metro lines and in improving public bus service, specifically in the Tier 2 cities has the potential to give boost to the much-needed employment generation. Cali cut is a Tier 2 city with lot of developments and energy. It boasts of being an Educational and IT Hub. Therefore, the city should have a Metro connectivity.
Focus on rail and road infrastructure especially, economic and logistic corridors will enhance competitiveness of Indian agriculture by lowering the cost of transportation and better connectivity between production and consumption markets, not only domestic but also global. Similarly, the proposed Beypore road connectivity under Bharatmala Pariyojana; a Grade Separator preferably a Flyover at Eranhipalam junction to overcome the frequent traffic blockages, Kozhikode, under CRF; the ever dragging 6-laning of Calicut By-pass of NH 66 and the much-needed Wynad By-Pass on NH 766 needs special emphasis for early completion.
There are around 15 lakh bank employees in the country. Pension was introduced in the banks in 1995. However, it was never revised. They need an updation on their pension, which even the Hon. Finance Minister had agreed too, during a Media interview.
The budget has again disappointed the MSME sector which is directly linked to the rural economy as a whole. Only Rs.15700 crore has been allotted when government has been over empathising this sector. The failed to appreciate that 40% of the overall exports and 30% of the country's GDP comes from this sector. The reduction of custom duty for this sector is only token.
Some of the long pending proposals that Calicut is vying for its development are:-
• Establishment of Kerala's AIIMS at Kozhikode for which the state government has already earmarked sufficient land at Kinaloor, Kozhikode.
• Commencement of work for World Class station of Calicut Railway Station • Establishment of KVS at Ulleyeri, Calicut.
• Better rail connectivity between Calicut and Bangalore with a day train; Calicut with Mangalore, Ernakulam and Coimbatore by MEMU service • Development of Beypore port.
The following issues which are directly linked to my constituency also need the immediate attention of the government:-
• The submission of the Report on Air tragedy at Calicut Airport • Immediate compensation to the victims • Allowing Wide bodied aircrafts for operation • There is a large civilian population at West Hill, Kozhikode which comes under Defence Establishment Kannur. It is listed as No.10 of Part A of annexure and requires NOC for construction/maintenance in 10 m only. But the Military authorities at West Hill has imposed a ban on construction within 100m & NOC for construction within 500m. This needs to be re-considered as the civil population are facing various stigmas and problems.
While placing the above, I oppose the Bill.
*SHRI LAVU SRIKRISHNA DEVARAYALU (NARASARAOPET): Journalist Shankkar Aiyar's book "Accidental India" traces India's economic history through seven game changing reforms; from bank nationalisation in 1969 to liberalisation in 1991, and from Green Revolution in sixties to software revolution of nineties.
Aiyar points out that game changing reforms in India have arrived during times of crisis and not in stability. This Budget comes in the context of a once-in-a-century crisis.
From the content of this Budget, there are two paths on which our economy can travel on now:
Option 1 is the path of the United States during the decade of Roaring Twenties which came after the devastation of World War I. During this decade, America invested in heavily on infrastructure and built highways and cities which boosted economic prosperity. This prompted President John F Kennedy to say, "American roads are not good because America is rich. America is rich because American roads are good”. Our enterprising Minister of Road Transport and Highways, Nitin Gadkari ji has this quote in his office.
Option 2 is the path of Russia after the collapse of the Soviet Union in 1989. As state owned enterprises were privatized, they were acquired by oligarchs. These few business owners today control all aspects of the Russian economy which has one of the highest levels of inequality. The Central Government must avoid this path as it privatizes PSUs to reach the 1.75 lakh disinvestment target.
For the welfare of lakhs of PSU employees, Government needs to be aware of hostile takeovers by private investors who want to acquire sick PSUs at cheap valuations. I am confident that Union Government, under the leadership of PM Modi and Finance Minister Sitharaman ji, will take care of the PSU employees.
As the Central Government privatizes PSUs to fund infrastructure, it needs to ensure that we aim for Roaring Twenties of America and not Russian oligarchy.
The Economic Survey and Hon. Finance Minister have mentioned V-shaped growth many times. Under the leadership of CM Y.S. Jaganmohan Reddy, Andhra Pradesh has actually achieved a Super V-shaped growth. Andhra Pradesh is the only State in South India where both State GDP and tax revenues have grown positively for Q2 and Q3 of FY2021.
Andhra Pradesh has been able to achieve this by focusing on putting cash in the hands of the people, especially rural poor, which has fired up consumer demand. Visionary schemes like Amma Vodi gives mothers Rs.15,000 to send their child to school. Rythu Bharosa gives every farmer Rs 13,500. YSR Cheyutha where SC/ST/OBC/minority women receive Rs 18,750 per year. These three schemes put Rs 12,000 crore in the hands of the Andhra people.
Effective implementation of MGNREGA controlled rural unemployment. Andhra Pradesh stood first in timely payments and second in work generation. The approach of YSR Government in Andhra Pradesh has shown that in a crisis, a responsible Government steps in as a safety net for the people.
I have a few suggestions for this Budget as well:
First, regarding the big growth driver for the next year-infrastructure. The intent to spend is appreciable but the capacity for execution needs focus. Ministry of Statistics reported that in 2020 out of 1670 big projects that it tracks, 536 (30per cent) had time overrun and 442 (25per cent) had cost overruns. The total impact of cost overruns being Rs 4.34 lakh crore which is 2.5 times the disinvestment target for FY 2021-22.
Andhra Pradesh has also seen many infrastructure projects committed in the Andhra Pradesh Reorganization Act, 2014 being delayed. Polavaram Irrigation Project, Vishakhapatnam - Chennai Industrial Corridor, Steel plant in YSR Kadapa district, Vishakhapatnam metro, Vijayawada metro have been repeatedly delayed.
The multiplier effect of hiked infrastructure spending will not kick in unless the execution capacity of big infrastructural projects is improved. Spending is only one side of the infrastructure development coin; swift execution is the other. The Central Government should also focus on execution.
Second, the Budget estimates of 14per cent nominal growth for FY 2021-22 are encouraging. However, we need to avert a K-shaped recovery. Based on recent data, economists and global financial bodies like the World Bank have pointed out that where bigger and wealthier firms are recovering at a faster rate, smaller firms, MSMEs, are not able to recover as fast. MSMEs are the backbone of our economy and vital for reviving employment growth. We need to support their recovery. MSMEs have to pay GST when they raise an invoice, regardless of whether the payment has been received. Payments, especially from Government and PSUs, often get delayed and this causes working capital shortages. Hon. Minister of MSME himself estimated that in 2020, pending payment to MSMEs is around Rs 5 lakh crore.
The Government should focus on removing these working capital shortages by mandating 45-day payments from PSUs and making GST payable only when a payment is made.
Third, budgetary allocation for MGNREGS has grown only by 1.4per cent over the expenditure of FY 2019-20. If we consider inflation, that is, if we look at real growth then we find that the allocation has actually reduced since FY 2019-20. MGNREGS allocations need to increase and the scheme should focus on creating rural assets as well as generating rural employment with the aim of achieving rural self-sufficiency. Convergence with animal husbandry and agricultural activities should be explored at the grassroot level.
Fourth, India has made commendable progress in literacy, enrolment and child vaccinations in the past three decades. Continued school and Anganwadi lockdowns and interruptions in mid-day meals and child vaccinations threaten to reverse this progress. Further, decline in household incomes will only compound the problem in the coming year.
Today, the Government needs to step up to secure the health and education needs of our children. However, allocation for Samagra Shiksha Abhiyan has reduced, Rs 7,000 crore from BE for FY 2020-21. This is even lower than the actual expenditure in FY 2019-20.
Similarly, the allocation for the Ministry of Women and Child Development, which includes schemes like Umbrella ICDS for Anganwadis, POSHAN Abhiyan, has reduced by Rs 6,000 crore compared to BE of FY 2020-21. NFHS-5 results have shown decline in child nutrition in some states. COVID-19 threatens an invisible education and health crisis for children in the future if corrective action is not taken today.
Fifth, the Merchandise Exports Incentive Scheme was started to make Indian exports competitive by offsetting infrastructural inefficiencies. Incentive payments to exporters have been delayed since April 2020. I urge the Commerce Ministry to make the payments at the earliest for effective implementation of the MEIS scheme.
Sixth, the Production Linked Incentive for textiles has been announced with an outlay of more than Rs.10,000 crore over 5 years. It includes manmade fibre and technical textiles but leaves out cotton textiles.
India is the world's biggest cotton producer and I represent AP’s cotton belt. Cotton textile sector has been distressed even before the COVID-19 pandemic and the PLI scheme should be extended to cotton textiles sector.
Lastly, some predatory digital lending services have used this crisis to push easy access, extremely high interest loans on vulnerable sections. They are often based out of China but have an Indian NBFC partner. These digital lending services use unethical and illegal practices for loan repayment and data collection. The Finance Ministry & RBI should regulate them in a light but right manner which protects consumers and fosters innovation.
Nobel laureate economist, Milton Freidman had said "A crisis can produce real change”. Similarly, to recover from the health and economic crisis we need reforms. These reforms will be successful only with widespread public participation where every citizen places their trust in the Government. This widespread trust among citizens in these reforms will come about only after careful consensus building. The continued presence of lakhs of farmers at the borders of Delhi signals that! consensus for the agricultural reforms was not built among them. The Union Government has repeatedly spoken about their intent to reform. This Budget contains the content of reforms. As the Government moves on to implementation, I would urge them to show the intent of building the consensus for these reforms.
*श्रीदेवजीपटेल (जालौर) : आदरणीय प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के गतिशील नेतृत्व में हमारी वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण जी ने एक ऐसा विलक्षण बजट 2021-22 प्रस्तुत किया है, जो विश्व पटल पर उभरते 'आत्मनिर्भर भारत' की परिकल्पना को आने वाले समय में साकार करने में पूरी तरह सक्षम है । बजट में समाज के सभी वर्गों का ध्यान रखा गया है । इसमें गांव,गरीब, किसान,महिला, युवा,बुजुर्ग, कारोबारी सभी शामिल हैं । हमारी सरकार के इस बजट में सभी क्षेत्रों के बुनियादी ढांचे के विकास पर ज्यादा ध्यान दिया गया है । जैसे स्वास्यलि,शिक्षा, रेलवे,सड़क, परिवहन,भंडारण आदि । मुझे पूर्ण विश्वास है कि इस बजट से हमारी अर्थव्यस्वस्था जो रफ्तार पिछले साल कोविड 19 की बीमारी के कारण हुए लॉकडाउन के दौरान थोड़ी धीमी पड़ गई थी,वह दोबारा तेजी पकड़ेगी तथा 5 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था बनने का हमारा लक्ष्य शीघ्रातिशीघ्र हासिल कर लेगी । बजट से सड़क,बिजली, पानी सहित हर क्षेत्र में सुधार होगा । यह कहना अतिश्योक्ति न होगा कि यह बजट पूर्ण रूप से आम जनता को समर्पित है ।
बजट में विशेष रूप से किसानों का ज्यादा ध्यान रखा गया है । इस बजट में किसानों को कई सौगातें दी गई हैं । किसानों के लिए 75,000करोड रुपयों के बजट का प्रावधान किया गया है, जिससे कृषि क्षेत्र में बड़े पैमाने पर विकास कार्य हो सके । बजट में स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने की हमारी सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए किसान की आय को दोगुना करने का लक्ष्य बनाया गया है तथा इस दिशा में आगे बढ़ते हुए किसानों को उनकी उपज की लागत से डेढ़ गुना MSP देने का प्रावधान बजट में सरकार ने रखा है । वहीं किसानों की आय किस प्रकार से दोगुनी की जाए, इसको लेकर भी बजट में रणनीति बनाई गई है । एमएसपी में वृद्धि की गई है । बजट में किए गए प्रावधानों से न केवल मंडियां आधुनिक होंगी, अपितु उनमें प्रतिद्वन्द्विता भी बढ़ेगी जिससे किसानों को उनकी उपज का अधिकाधिक मूल्य मिलना सुनिश्चित होगा ।
मुझे आशा ही नहीं अपितु पूर्ण विश्वास है कि इस आम बजट से आत्मनिर्भर भारत की मुहिम रंग लाएगी और हमारा भारत देश आपके कुशल नेतृत्व में विश्व गुरू बनकर उभरेगा ।
मैं अपने संसदीय क्षेत्र जालौर सिरोही क्षेत्र की कतिपय समस्याओं की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं ।
रेलवे -
(1) जालौर के लोगों को ब्रॉडगेज आमन परिवर्तन के करीब दस साल बीत जाने के बाद भी जालौर से दिल्ली व जयपुर के लिए सीधी रेल सेवा नहीं है । जबकि इस खंड पर संचालित गाड़ियों का बीकानेर जोधपुर बाड़मेर तक ही संचालन किया जा रहा है । जालौर के नागरिकों को जयपुर का 400 किलोमीटर का सफर तय करने के लिए रेल परिवर्तन करके जाना पडता है जिसमें लगभग 9 घंटे का समय लग जाता है । सांचौर, रानीवाडा, भीनमाल, जालौर के लोगों के लिए दिल्ली (लगभग 800 किलोमीटर) तक का सफर प्राइवेट बसों मे करना पडता है । इन बसों का सफर काफी महंगा और बहुत ही कष्टदायक होता है,विशेषकर बच्चों और महिलाओं के लिए । यहाँ के नागरिकों की समस्याओं को देखते हुए गांधीधाम से दिल्ली वाया जालौर (समदडी-भीलडी) ट्रेन प्रारंभ करने की आवश्यकता है ।
(2) मेरे संसदीय क्षेत्र स्थित सिरोही जिला केन्द्र आजादी के 70 वर्षों के बाद भी रेलवे नेटवर्क से नहीं जुड़ पाया है । सिरोहीवासियों को आज तक रेलवे नेटवर्क से जुड़ने का इंतजार है । सिरोही जिला केन्द्र को मारवाड़, बागरा और पिण्डवारा के मार्ग से रेलवे नेटवर्क से जोडा जाए । जिससे इस रेलवे मार्ग से सभी प्रमुख जैन तीर्थ 72 जैनालय सुधामाता मंदिर जिरावल, पावापुरी, जसवंतपुरा अभ्यारण्य, भैंरोगढ़ आदि जुड़ जाएगा । जालौर सिरोही के प्रमुख रिको औद्योगिक क्षेत्र मंडार रेवदर स्वरूपगंज के साथ-साथ सिरोही जिला केन्द्र जहाँ वर्तमान में रेल सम्पर्क नहीं है, यह रूट इन प्रमुख क्षेत्रों को कवर करेगा । इससे यहाँ की जनता को काफी सुविधा होगी तथा साथ ही साथ रेलवे की आय में अत्यधिक वृद्वि होने की संभावना है । सिरोही में रेलवे स्टेशन होने से जिले में पर्यटन एवं औद्योगिकरण के साथ-साथ रोजगार के नए अवसर भी उपलब्ध होंगे । अतः सिरोही जिला केन्द्र को मारवाड़, बागरा, पिंडवाडा से उदयपुर तक रेल लाइन से जोड़ने की आवश्यकता है ।
(3) मेरे संसदीय क्षेत्र जालौर सिरोही के लगभग सात लाख लोग दक्षिण भारत के विभिन्न शहारों में रहते हैं । इसके अलावा बाडमेर,जैसलमेर, पाली, जोधपुर जिला के लाखों लोग निवास करते हैं तथा अपने व्यवसाय के सिलसिले मे बेंगलुरू, चेन्नई, दावनगिरि, कोयम्बटुर, हुबली, ईरोड, हैदराबाद आना-जाना रहता है । परन्तु इन प्रवासियों के लिए सीधी रेल सेवा नहीं होने से अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है । अहमदाबाद से दक्षिण की ओर चलने वाली सभी ट्रेनों का टिकट काउंटर खुलते ही बुक हो जाता है । इस क्षेत्र को दक्षिण से जोड़ने से रेलवे के राजस्व मे भारी वृद्धि होगी तथा नागरिकों को काफी सुविधा हो जाएगी । इसलिए वर्तमान में जालौर एवं पालनपुर को सीधी रेल सेवा से जोड़ा जाए ।
क) बेंगलुरु से जोधपुर वाया समदडी भीलडी ।
ख) हैदराबाद से जोधपुर वाया समदडी भीलडी ।
ग) कोयम्बटुर से जोधपुर वाया समदडी भीलडी ।
घ) चेन्नइ से जोधपुर वाया समदडी भीलडी सडक ।
(1) रोहिट-आहोर-जालौर-भीनमाल-करडा-सांचौर का रास्ता करीब 250 किलोमीटर लंबा है । यह मार्ग जोधपुर, पाली, जयपुर, अजमेर, ब्यावर एवं दिल्ली को सीधा पश्चिम क्षेत्र से जोड़ता है । यह सड़क मार्ग जिले के सभी उपखंड क्षेत्र को जालौर जिला मुख्यालय एवं जोधपुर संभाग से जोड़ता है । यह मार्ग प्राचीन धार्मिक स्थल होने के साथ-साथ अंतर्राष्ट्रीय पाक सीमा से जुड़ने वाला मुख्य राजमार्ग है । इस सड़क मार्ग को राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण के लिए घोषणा की जा चुकी है । इस मार्ग का निमार्ण जल्द से जल्द करवाने की आवश्यकता है ।
(2) गुजरात स्थित डीसा से घानेरा राष्ट्रीय राज्यमार्ग (168A) घोषित किया गया है । गुजरात स्थित झेरडा से सिरोही राज्यमार्ग वाया मंडार रेवदर होते हुए, यह मार्ग राष्ट्रीय राजमार्ग (NH 62) से मिल जाता है । दोनों तरफ से यह सड़क राष्ट्रीय राजमार्ग से मिलने के कारण भारी वाहनों का आवागमन बढ़ता जा रहा है । इस मार्ग पर मंडार और रेवदर दो घनी आबादी वाले शहर हैं । इन शहरों के पास दिन में ट्रैफिक जाम हो जाना अब आम बात हो गई है । जिससे आम नागरिकों को, स्कूल जाने वाले छात्रों और व्यापारियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है । अतः झेरडा से सिरोही मार्ग (वाया रेवदर और मंडार में बाईपास निमार्ण) को राष्ट्रीय राज्यमार्ग घोषित करके इसके निमार्ण करने की आवश्यकता है मेडिकल कॉलेज -
वर्ष 2011 की जनगणना अनुसार जिले की कुल जनसंख्या लगभग 18.3 लाख है । जिले में 2001-2011 के दशक में जनसंख्या में कुल वृद्वि 26.31रही है । जिले में शहरी आबादी कम है, जबकि ग्रामीण आबादी 92.41है । ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं का नितांत अभाव है । अतः जालौर जिला केन्द्र पर मेडिकल कॉलेज खोलने की आवश्कता है ।
उडान योजना -
सिरोही जिला में माउंट आबु और शक्ति पीठ अम्बा जी माता मंदिर दो विश्व स्तरीय प्रसिद्व पर्यटन स्थल हैं । ब्रह्माकुमारी समाज का अंतर्राष्ट्रीय मुख्यालय माउंट आबु है । माउंट आबू में केन्द्रिय रिज़र्व पुलिस बल का (C.R.P.F) ऑफिसर ट्रेनिग सेंटर है । सेना की दृष्टि से भी यह स्थान महत्वपूर्ण है । यहाँ प्रत्येक वर्ष लाखो की संख्या में विदेशी पर्यटक आते हैं । इन पर्यटक को हवाई सफर के लिए 228किलोमीटर दूर जोधपुर या231 किलोमीटर दूर अहमदाबाद जाना पड़ता है । अत: उडान योजना के अंतर्गत सिरोही स्थित मानपुर हवाई पट्टी से वायु सेवा प्रारंभ करने की आवश्यकता है ।
पेयजल -
मेरा संसदीय क्षेत्र जालौर सिरोही जिला के रेतीले क्षेत्रों में वार्षिक का लगभग 12प्रतिशत एवं चट्टानी क्षेत्रों में 7 प्रतिशत जल ही भूमि में जाता है, जिससे लगभग 403 मिलियन घनमीटर भूजल जमा होता है । लेकिन इसके विपरित 908मिलियन घनमीटर भूजल का दोहन कर रहे हैं । जिले में अधिकांश पेयजल योजनाएँ एवं सिंचाई कार्य भूजल पर आधारित है । सबसे अधिक पानी लगभग 95 प्रतिशत कृषि में, 5 प्रतिशत पेयजल में एवं अन्य उपयोग में खर्च होता है । जिले में वर्ष 1995 में भूजल दोहन 123 प्रतिशत था, जो वर्तमान में बढ़कर 225प्रतिशत हो गया है अर्थात् कुल वार्षिक पुनर्भरण की तुलना में 33 मिलियन घनमीटर भूजल अधिक निकाला जा रहा है । 1984 में औसत 13 मीटर गहराई पर पानी उपलब्ध था, जो अब 30 मीटर से भी अधिक हो गया है । नलकूप एवं कूएं सूख गए हैं एवं सूख रहे हैं । इससे गाँव में सिंचाई के साथ-साथ पेयजल का भी संकट पैदा हो गया है । यहां के निवासी विगत तीन दशकों से पानी की कमी के संकट से जूझ रहे हैं । इस क्षेत्र के अधिकांश गांवों में टैंकरों के माध्यम से पेयजल की आपूर्ति की जाती है । गिरते भूजल स्तर की समस्या दिन प्रतिदिन बिगड़ती जा रही है । यह क्षेत्र अतिदोहित श्रेणी में वर्गीकृत है । अतः दोनों जिला जालौर सिरोही को अटल भूजल योजना से जोड़ने की आवश्यकता है ।
शिक्षा -
(1) सिरोही जिला साक्षरता एवं शिक्षा के क्षेत्र में अत्यंत पिछडा हुआ है । आंकड़ों के अनुसार सिरोही की 10 लाख 36हजार 346 आबादी में से लगभग 5लाख 34 हजार 364 लोगों ने कभी भी औपचारिक या अनौपचारिक शिक्षा ग्रहण नहीं की है । ग्रामीण क्षेत्र में 57.28 और शहरी क्षेत्र में 28.94 प्रतिशत लोग कभी शैक्षणिक संस्थान में नही गए हैं । आश्चर्य यह है कि कुल अशिक्षित आबादी में से अधिक संख्या महिलाओं की हैं तथा 2012की जनगणना के अनुसार जिले में महिलाओं की साक्षरता दर मात्र 37 प्रतिशत है । सिरोही जिला नीति आयोग के आकांक्षी जिला कार्यक्रम के अंतर्गत चयनित है । सिरोही जिला केन्द्र पर केन्द्रिय विद्यालय स्थापित करने की आवश्यकता है ।
(2) जालौर जिला साक्षरता एवं शिक्षा के क्षेत्र में पिछडा हुआ है तथा जिले की साक्षरता दर 2011 की जनगणना के अनुसार 55.58प्रतिशत है, जिससे पुरुषो एवं महिलाओं की साक्षरता दर क्रमशः 71.83तथा 38.73 है । राजस्थान में यह जिला सबसे कम साक्षरता वाला जिला है तथा साक्षरता में लैंगिक अंतर (gender gap) भी सबसे अधिक है । पंचायती राज मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा इसे पिछड़े जिले के रूप में चिन्हित किया गया है तथा यह जिला बी.आर.जी.एफ. योजना में भी शामिल है । यहां अनुसूचित जाति कुल जनसंख्या का 18.6 प्रतिशत तथा अ.ज.जा. 9 प्रतिशत है । जिले का भौगोलिक विस्तार बहुत बड़ा है । वर्तमान जवाहर नवोदय विद्यालय जसवंतपुरा जो जिला मुख्यालय से 112 किलोमीटर की दूरी पर है । वर्ष 1987में स्थापना के बाद निःशुल्क एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध करवा रहा है एवं एक और नवोदय विद्यालय जिला मुख्यालय के समीप स्वीकृत किए जाने की आवश्यकता है, ताकि और अधिक संख्या में बच्चों को गुणवतापूर्ण शिक्षा दी जा सके ।
यह नया विद्यालय जालौर,सायला, आहोर एवं भीनमाल पंचायत समिति क्षेत्र के छात्रों के प्रवेश के लिए तथा वर्तमान में संचालित जवाहर नवोदय विद्यालय जसंवतपुरा, रानीवाडा, सांचोर एवं चितलवाना पंचायत समिति के छात्रों के प्रवेश के लिए होगा ।
कृषि विज्ञान केन्द्र – जालौर जिला का क्षेत्रफल काफी बड़ा है तथा यहाँ मानव शक्ति भी पर्याप्त है । साथ ही स्त्री-पुरुष अनुपात भी राज्य की तुलना में ठीक है । जिले में लोगों की आय का प्रमुख साधन कृषि है । 2012-17 पंचवर्षीय योजना के अंतर्गत जालौर जिला में एक अतिरिक्त कृषि विज्ञान केन्द्र स्वीकृत किया गया है । इस कृषि विज्ञान केन्द्र को जल्द से जल्द प्रारंभ करने की आवश्यकता है ।
इन शब्दों के साथ मैं हमारी सरकार के बजट 2021-22 का पुनः समर्थन करता हूं तथा धन्यवाद करता हूं कि मुझे इस महत्वपूर्ण प्रस्ताव पर अपने विचार रखने का अवसर मिला ।
*श्रीअक्षयवरलाल (बहराइच):मुझे माननीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत वर्ष 2021-22 के आम बजट पर समर्थन हेतु अवसर प्रदान करने के लिए बहुत-बहुत आभार ।
यह बजट अंत्योदय पर आधारित “सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास" को ध्यान में रखकर गाँव, गरीब किसान के विकास हेतु यह बजट लोक कल्याण हेतु है । बजट में कोई नया कर नहीं लगाया गया । कृषि को बढ़ावा देने के लिए कृषि बजट में बढ़ोत्तरी कर किसानों की आय दुगुनी करने का कार्य किया गया है । सभी अनाजों के एमएसपी में वृद्धि की गई है । नवीन मण्डियों की स्थापना मत्स्य पालन एवं दुग्ध उत्पादन के लिए बजट में धन का आवंटन किया गया है । युवाओं को रोजगार देने के लिए कौशल योजना,स्टार्ट-अप,मुद्रा लोन में अधिक धन का आवंटन किया गया है । अनुसूचित जनजाति के बच्चों को पढ़ने हेतु 750 एकलव्य मॉडल नवीन विद्यालय की स्थापना तथा अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा हेतु पर्याप्त मात्रा में धनराशि का आवंटन किया गया है । ग्रामीण महिलाओं के लिए ग्रामीण आजीविका मिशन योजना के तहत विशेष धनराशि की व्यवस्था की गई है । कोरोना एवं स्वास्थ्य विभाग के लिए पिछले बजट से 137 प्रतिशत की वृद्धि की गई है ।
जनपद-बहराइच (उ०प्र०) का नाम अकाँक्षी जिलों में है । मेरी सरकार से निम्नलिखति मांगें हैं-
1. लोकसभा क्षेत्र–बहराइच के ब्लॉक एवं तहसील-मिहिंपुरवा में चीनी मिल एवं नये उद्योग की स्थापना कराई जाये ।
2. लोकसभा क्षेत्र बहराइच में केन्द्रिय विद्यालय नहीं है,वहां केन्द्रिय विद्यालय की स्थापना करायी जाये ।
3. लोकसभा क्षेत्र–बहराइच के ब्लॉक एवं तहसील-मिहिंपुरवा के ग्राम पंचायत बोझिया में नवनिर्मित एकलव्य मॉडल विद्यालय का भवन विगत 7 वर्षों से बना खड़ा है, उसमें अध्ययन कार्य प्रारम्भ कराया जाये ।
4. कृषि क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए कृषि विश्वविद्यालय की स्थापना करायी जाये । युवाओं को रोजगार देने के लिए तकनीकी विद्यालय की स्थापना करायी जाये ।
5. बढ़ती हुई मरीजों की संख्या को देखते हुए मेडिकल कॉलेज से सम्बद्ध नये चिकित्सालय का निर्माण कराना अति आवश्यक है ।
6. जनपद-बलरामपुर, जनपद-गोण्डा से बहराइच आने वाले मार्ग जहाँ पर मिलते हैं, दो नाका से बहराइच-लखनऊ मार्ग को रिंग रोड बनाकर जोड़ा जाये । नेपाल–भारत की सीमा पर बन रही सीमा सड़क को रुपैडिहा (बहराइच) के पास मोड़ न देकर सीधा बनवाया जाये ।
7. जरवल रेलवे स्टेशन से बहराइच रेलवे स्टेशन, दूरी 65 किलो मीटर नई बड़ी रेलवे लाइन बनाकर जोड़ा जाये ।
8. उ0प्र0में गोंड (Gond) अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति को जाति प्रमाण पत्र एवं संवैधानिक सुविधायें सुगमतापूर्वक दिलाई जाये ।
*SHRI KULDEEP RAI SHARMA (ANDAMAN AND NICOBAR ISLANDS): I would like to express my views on this General Budget for the year 2020-21. The Government announced substantial investments in the development of modern fishing harbours and fish hand landing centres. To start with, 5 major fishing harbours – Kochi, Chennai, Visakhapatnam, Paradip, and Petuaghat – will be developed as hubs of economic activity and a Central University for Leh.
I then eagerly waited for the Demand for Grants document with a hope that the Government might have taken my suggestion during a Zero Hour intervention in December 2019 when I had spoken on how important Andaman will be for creating a 5 trillion-dollar economy and had asked for allocating 10000 crores for Andaman and Nicobar Islands.
Again, I was disappointed to see that Andaman and Nicobar Islands received only Rs.5164 crore in 2020-21 budget and Revised Estimates has come down to Rs.4824 crore. There has been an under spending of 219 crore in capital expenditure in this financial year. However, in the present budget, Andaman and Nicobar Islands were provided only Rs.5317 crore which is a meagre increase of Rs.153 crore for a population of 5 lakh which is entirely dependent on the Union Budget for its funds.
I would also like to point out that how some major works have received a decrease in allocation under Demand No.49 concerning Andaman and Nicobar Islands.
Name Budget 2021 Budget 2020 Power 540 546 Roads and Bridges 187 175 Tourism 9.89 11 Though I thank the Government that in certain heads it has increased the allocation like Agriculture and Allied activities from Rs.20 crore to Rs.30 crore. Water supply and sanitation from Rs.62 crore to Rs.108 crore. Port and Light Houses from Rs.106 to 116 crore. But the problem still remains about the quantum of allocations which is still very less with regard to the actual requirement for development of Andaman and Nicobar Island which is not only significant in terms of tourism but also for strategic purposes and if given a proper grant and help from the Union Government in achieving the goal of a 5 trillion-dollar economy.
The unprecedented potential of Andaman and Nicobar Islands can only happen if the Central Government focusses on how development can happen in Andaman and Nicobar Islands. I would also like to raise some very crucial issues and demands concerning my constituency:
1. Increasing the budget of Andaman and Nicobar Islands from Rs.5300 crore to Rs.10000 crore.
2. Need to tackle unemployment in Andaman and Nicobar Islands and to provide unemployment allowance.
3. To fill up all the vacant Government jobs which is in thousands by stopping online recruitment and provide jobs to the islanders.
4. Early implementation of Flat Bay water supply project and Rutland project in Andaman and Nicobar Islands.
5. Regularise all the daily rated mazdoors working in different departments under the Andaman and Nicobar Administration.
6. Promotion of fisheries in Andaman and Nicobar Islands by providing incentives and investment for developing processing infrastructure.
7. Now with the necessary infrastructure (OFC) in place, I would request to make Andaman and Nicobar Islands an Information Technology hub with the development of Business Process Outsourcing/Call Centres/Software Park under schemes like Digital India, Promotion of IT/ITeS industries. Andaman and Nicobar Islands will be conducive for fast pace development as an IT hub due to its strategic location and proximity to several south east Asian countries like Indonesia, Singapore, Malaysia, Thailand, Myanmar etc. Such a step will be a big boost to employment generation and holistic development of Andaman and Nicobar Islands.
8. In addition to this, I would also request you to kindly provide a second OFC line from Diglipur to Digha in West Bengal. Since Andaman and Nicobar Islands are situated in a Seismic Zone and we have suffered the brunt of a devastating tsunami in 2004, it is important to have a second line of connectivity to ensure that complete disruption does not happen in the event of a natural disaster. This move will also create confidence in private investors to come forward and invest in IT infrastructure in Andaman and Nicobar Islands.
9. Need to promote tourism through Marine, Adventure, Culinary, Eco, World War II Tourism and Cultural Tourism along with establishment of Freedom Struggle Tourism at various places in Andaman and Nicobar Islands.
10. To promote tourism and to generate employment at different Islands, a Snake Park to be made at Kadamtala, a Crocodile Park at Bakuntala and world’s largest aquarium at Mayabunder.
11. Need to have Shipbuilding/ Ship Repairing yard in Andaman and Nicobar Islands to generate employment.
12. Providing subsidy on air travel to residents of Andaman and Nicobar Islands.
13. Andaman and Nicobar Administration to purchase 2 (two) numbers of Planes namely Andaman Airways and Nicobar Airways for cheap, fast and easy transportation of the islanders to other parts of the country from the Islands.
14. To start International flights from the Islands to South East countries like Singapore, Malaysia, Thailand etc. to promote tourism and trade.
15. Need to establish a Legislative Assembly for Andaman and Nicobar Islands on the lines of Delhi and Puducherry.
16. Need for establishing a Central university in Andaman and Nicobar Islands instead of Deemed University.
17. Establishing a separate commission for women for Andaman and Nicobar Islands.
18. Increasing the salary and honorarium of Anganwadi and ASHA workers in the country, particularly in Andaman and Nicobar Island.
19. Need to increase the pension of old age widows and Divyang person from Rs.2500 to Rs.5000 per month to fulfil their basic needs.
20. To give land to all the landless persons such as Bengali, Tamil, Telugu, Ranchi, UP, Bihari, Punjabi and other communities who played a very vital role in development of Andaman and Nicobar Islands.
21. To give land to all the persons of extended families of pre-1942 settlers.
22. To regularise all the left-out cases of pre-1961.
23. Need for Resettlement and Rehabilitation of Katchan Tamil settlers.
24. Need to provide adequate compensation and land for victims of 2004 Tsunami in Andaman and Nicobar Islands.
25. Construction of Bridge from Chatham Island to Bambooflat.
26. Need to create sports infrastructure relating to Football, Cricket, cycling, rowing, swimming and athletics along with a sports academy in Andaman and Nicobar Islands.
27. Give MSP in areca nut and Paddy.
28. Government to give 90 per cent transport subsidy for transportation of handicraft items and Agriculture produce.
29. Need to create one trauma Centre and all super specialist Medical facilities to be provided at G.B. Pant Hospital for better medical infrastructure. And to start post-graduation Institute for MBBS graduates who wish to pursue higher education in the field of medicine and surgery. And also provide Ultra Sound Machine in all Primary Health Centres at Andaman and Nicobar Islands.
30. Out of 100 Sainik Schools proposed in the budget, one Sainik School to allotted to Andaman and Nicobar Islands.
31. To open cultural Academy.
32. Need to stop the privatisation of Electricity Department of Andaman and Nicobar Islands I request the Government to kindly consider these requests and constitute a committee which will analyse the potential of Andaman and Nicobar and propose an investment plan to boost the economy.
*श्री जसवंतसिंह सुमनभाई भाभोर (दाहोद):भारत आज टॉप फाइव इकोनॉमीज का हिस्सा है । मैं मैं अपने वित्त मंत्री जी को बहुत बहुत धन्यवाद देना चाहता हु । जब पूरी दनिया ने कह दिया था कि भारत की " अर्थव्यवस्था खराब हो जाएगी जाएगी, उस समय भी बजट आने वाले समय में डबज डिजिट इकोनॉमी का बात करता है । साथ ही,प्रधानमंत्री जी को भी धन्यवाद देना चाहता हूँ की उन्होंने इतने मुश्किल समय पर निर्णय लेकर लाइफ और लाइवलिहूड के बीच में चिंता की । जब लाइफ बचेगी तो लाडवलिहूड खुद से बच जाएगा । बजट में बच्चों का,बुजुर्गों का,महिलाओं का और लगभग सभी वर्गों का ख्याल रखा गया है । इस बजट में बहत अच्छे प्रावधान किये गए हैं । छोटी बड़ी सभी बातों को ध्यान में रख कर ये ऐतिहासिक बजट तैयार किया गया है ।
देश में ऐसे बहुत से लोग हैं जिनका अपना घर नहीं है और इसी सपने को साकार करने के लिए माननीय वित्त मंत्री ने अफोर्डेबल हाउसिंग पर ब्याज छूट की समय सीमा एक साल बढ़ाने का ऐलान किया । बजट में बुजुर्गों का भी पूर्ण रूप से ख्याल रखा गया है इसमें 75 साल से ज्यादा उम्र के वरिष्ठ नागरिक जिनकी पेंशन और जमा से आमदनी है, उनको आईटीआर फाइलिंग से छूट मिलेगी, इसका लाभ बुजुर्गों को अवश्य मिलेगा । जो लोग सार्वजानिक बस सेवाओं का उपयोग करते हैं उनके लिए सार्वजनिक बस परिवहन सेवाओं की वृद्धि का प्रावधान रखा गया है और इसके लिए 18,000 करोड़ रूपये की लागत पर एक नई योजना लॉन्च करने का प्रस्ताव रखा गया है ।
बजट में आयकर दाताओं के इनकम टैक्स स्लैब में किसी भी तरह का बदलाव नहीं किया गया है । इससे उन पर किसी प्रकार का अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा । बजट में वित्त वर्ष 2022 में राजकोषीय घाटा जीडीपी का 6.8 फीसदी रहने का अनुमान जताया है, जो कि2021 में 9.5फीसदी रह सकता है । यह अपने आप में सराहनीय है । इस बजट में सोने-चांदी पर कस्टम ड्यूटी घटाने का ऐलान किया इससे खरीददारों को लाभ मिलेगा । इसके अतिरिक्त एफएएफटीए पर ड्यूटी घटकर 5 फीसदी की गई । स्टील प्रोडक्ट पर कस्टम ड्यूटी घटाकर 7.5फीसदी की गई । माननीय वित्त मंत्री जी ने कॉपर पर ड्यूटी घटाकर 2.5 फीसदी करने का ऐलान किया । इसके अतिरिक्त माननीय मंत्री जी ने ऐलान किया कि जीएसटी 4साल पराना हो चुका है जीएसटी प्रक्रिया को और आसान बनाया जाएगा । साथ ही इससे जुड़े पुराने 400नियमों की समीक्षा करने की भी बात की । बजट में ये भी ऐलान किया कि पीएफ देर से जमा करने पर कोई डिडक्शन नहीं होगा ।
मंत्री जी ने ऐलान किया कि स्टार्टअप निवेश पर कैपिटल गेन छूट 1 साल के लिए बढ़ा दिया गया है । इससे स्टार्टअप बिजनस करने वाले एक बड़े वर्ग को लाभ मिलना ।
वित्त मंत्री ने बताया कि वित्त वर्ष 2022 में राजकोषीय घाटा जीडीपी का 6.8 फासदी रहने का अनुमान है । असम, बंगाल में टी वर्कर्स के लिए 1000 करोड़ रुपये का एलान किया, यह अपने आप में वर्कर्स में उत्साह लाने वाली घोषणा है| अब तक जनसंख्या की गणना में बहुत समय बर्बाद होता था क्योंकि यह मैन्युअल होती थी परन्तु इस बजट में यह घोषणा की गयी है की जनसंख्या की गणना डिजिटली होगी । यह देश की पहली डिजिटल जनगणना होगी । वित्त मंत्री जी ने एलान किया कि 750 एकलव्य रेजिडेंशियल स्कूल आदिवासी इलाकों में बनेंगे । 15 हजार से अधिक स्कूलों में गुणवत्ता में सुधार किया जाएगा । अनुसूचित जाति के लिए स्कॉलरशिप स्कीम लाई जाएगी इससे जनजातीय छात्रों को इसका भरपूर लाभ मिलेगा । देश में रिसर्च के काम में तेजी आये, इसके लिए नेशनल रिसर्च फाउंडेशन पर 50,000 करोड़ रुपये खर्च किये जाएंगे । वित्त मंत्री जी ने डिजिटल पेमेंट को प्रमोट करने के लिए इन्सेंटिव स्कीम का एलान किया । डिजिटल पेमेंट पर 1500 करोड़ रुपये का इन्सेंटिव देंगे ।
बजट में यह भी ऐलान किया कि 100 नए सैनिक स्कूल स्थापित किए जाएंगे । यह स्कूल एनजीओ,प्राइवेट स्कूल,राज्यों के साथ मिलकर खोले जाएंगे । इससे सैनिक स्कूल के छात्रों को इसका अतिरिक्त लाभ मिलेगा । बजट में लघु उद्योगों का भी किस प्रकार उत्थान हो, इसका पूरा ख्याल रखा गया है । इसी क्रम में वित्त मंत्री जी ने एमएसएमई सैक्टर के लिए 15700करोड़ का ऐलान किया है ।
हम सब ने देखा की कोरोना महामारी में किस प्रकार मोदी जी की सरकार ने प्रवासी मजदूरों का ख्याल रखा । इसी क्रम में बजट में यह ऐलान किया कि बचे हुए राज्यों में वन नेशन वन राशन कार्ड योजना लागू होगी । इसी क्रम में मजदूरों के लिए और भी घोषणा की गयी जिसके अंतर्गत प्रवासी व असंगठित श्रमिकों के लिए पोर्टल लॉन्च होगा । यह श्रमिकों के हेल्थ, हाउसिंग, स्किल्स आदि के लिए होगा । हर कैटेगरी के श्रमिकों के लिए मिनिमम वेज कोड लागू होगा ।
मजदूरों के साथ साथ यदि हम किसानों की बात करें को वित्त मंत्री जी ने कहा कि सरकार किसानों के हितों के लिए कार्यरत है । सभी कमोडिटी के लिए किसानों को डेढ़ गुना एमएसपी दी जाएगी । इसके अतिरिक्त एपीएमसी को एग्री इंफ्रा फंड के दायरे में लाया जाएगा तथा ई-नाम से 1000 और मंडियों को जोड़ा जाएगा । ऑपरेशन ग्रीन स्कीम में टमाटर,प्याज और आलू के अलावा 22पेरिशेबल क्रॉप्स को शामिल किया जाएगा । साथ ही वित्त वर्ष2022 के लिए फार्म क्रेडिट लक्ष्य 16.5लाख करोड़ रुपये रखा गया ।
वित्त मंत्री जी ने बजट 2021 में भारतीय रेलवे के लिए 1.1लाख करोड़ रुपये का एलान किया गया है,यह बजट रेलवे को निश्चित तौर पर नई गति प्रदान करने में सहायक होगा । साथ ही बजट में छोटी कंपनियों के लिए पेडअप कैपिटल की लिमिट बढ़ाने का एलान किया, इससे छोटे व्यवसायियों को अतिरिक्त लाभ मिलेगा । वित्त मंत्री जी ने बीमा क्षेत्र में एफडीआई लिमिट 49 फीसदी से बढ़ाकर 74फीसदी करने का ऐलान किया, साथ ही यह भी कहा की इंश्योरेंस एक्ट 1938 में संशोधन होगा ।
बजट में हाइड्रोजन एनर्जी मिशन 2021-22 का ऐलान किया गया । वित्त मंत्री ने ऐलान किया कि पावर सेक्टर के लिए305984 करोड़ रुपये की स्कीम लाई जाएगी इस प्रावधान से ऊर्जा के क्षेत्र में व्यापक कार्य किये जा सकेंगे ।
देश में सड़कों के विकास का कार्य निरंतर चल रहा है इस क्रम में माननीय वित्त मंत्री जी ने कहा कि भारत माला प्रोजेक्ट के तहत 13 हजार किमी से अधिक की सड़कें अवार्ड की गई हैं । 3800 किमी का निर्माण अब तक हो चका है । मार्च 2022तक 8500 किमी सड़कों का अवार्ड हो जाएगा । इसका लाभ देश के जनमानस को अवश्य मिलेगा ।
गांव के साथ साथ शहरों का विकास भी और तेज गति से हो, इसका भी ख्याल बजट में पूर्ण रूप से रखा गया है । इसी के अंतर्गत अर्बन स्वच्छ भारत मिशन के लिए 141678 करोड़ रुपये अगले 5 साल में खर्च करने का प्रावधान रखा गया है । पीएलआई के अलावा मेगा इन्वेस्टमेंट टेक्सटाइल पार्क स्कीम लॉन्च होगी । इससे जॉब के मौके बनेंगे और 3 साल में 7 टेक्सटाइल पार्क बनाए जाएंगे ।
हम सभी यह जानते हैं के मोदी जी की सरकार ने देश के हर व्यक्ति के स्वास्थ्य के लिए चिंतित रहती है । इसी क्रम में वित्त मंत्री जी ने स्वास्थ्य 94 हजार करोड़ रुपये से बढ़ाकर 2.38 लाख करोड़ रुपये करने का एलान किया है । इसका लाभ भारत के नागरिकों को अवश्य मिलेगा । कोरोना महामारी से लड़ने के लिए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वैक्सीनेशन के लिए 35,000करोड रुपये का एलान किया । बजट में 17 नए हेल्थ इमरजेंसी सेंटर खोलने का एलान किया । वित्त मंत्री जी ने 64,180 करोड़ रुपये हेल्थ स्कीम का एलान किया । इसके अतिरिक्त सभी राज्यों का हेल्थ डेटा बेस तैयार करेंगे,साथ ही आरएंडी और इनोवेशन पर फोकस किया जाएगा शहर के लोगों को किस प्रकार साफ़ पीने का पानी मिले, इसके लिए वित्त मंत्री जी अर्बन जल जीवन के लिए सरकार ने 2.87 लाख करोड़ का एलान किया ।
पुराने वाहनों से प्रदूषण तो फैलता ही है साथ पर्यावरण को भी हानि पहुंचती है । इसी के लिए वित्त मंत्री जी ने आटो सेक्टर के लिए वॉलेंटरी स्क्रैपिंग पॉलिसी का ऐलान किया है ।
कोरोना काल में सरकार ने आत्मनिर्भर पैकेज जीडीपी का 13 फीसदी दिया । कोरोना काल में आरबीआई ने 27 लाख करोड़ के पैकेज का एलान किया । यहाँ यह कहना उचित ही होगा की लॉकडाउन न करते तो ज्यादा जानें जाती । इसी काल में सरकार ने किसानों के खाते में पैसा भेजा । 80करोड लोगों को मुफ्त राशन बांटा गया । कोराना काल में इससे निपटने के लिए5 मिनी बजट पेश किए गए ।
कोरोना संकट की वजह से बजट खास है, देश को आत्मनिर्भर बनाने वाला बजट है । बहुत कठिन परिस्थितियों में यह बजट आया है,इसलिए मैं वित्त मंत्री जी को धन्यवाद देता हूँ जिन्होंने इतना अच्छा बजट पेश किया है जिसका लाभ पूरे देश वासियों को मिलेगा ।
*श्रीमती अन्नपुर्णा देवी (कोडरमा): यह विषय बजट का है । अदना से आला तक से जुड़ा हुआ । बजट एक गृहस्थ भी बनाता है, एक गृहणी भी, एक व्यापारी भी, उद्योगपति भी, संस्था भी और सरकार भी । बजट चाहे जिसका हो, जैसा हो - केवल आमदनी के स्रोतों और निर्धारित खर्चों पर निर्भर नहीं होता । भीतरी-बाहरी कई परिस्थितियां- कई शक्तियां उस पर असर डालती हैं । इस लिहाज़ से इस सदी की सबसे बड़ी आपदा - सबसे बड़े संकट के दौरान देश का बजट पेश करना और उस बजट में मौजूदा प्रतिकूल परिस्थितियों से निपटते हुए भविष्य के लिए उम्मीद पैदा करना आसान काम नहीं । इसलिए सबसे पहले, जिन्होंने ये दुर्लभ साहस और पराक्रम दिखाया है - देश के माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी और वित्त मंत्री वीरांगना बहन श्रीमती निर्मला सीतारमण जी का मैं अभिनन्दन करना चाहती हैं । अभिनन्दन महान कवि गोपाल दास "नीरज" की इन पंक्तियों से :
"श्रम के जल से ही राह सदा सिंचती है, गति की मशीन आँधी में ही हँसती है, शूलों से ही श्रृंगार पथिक का होता, मंजिल की माँग लहू से ही सजती है, पग में गति आती है छाले छिलने से, तुम पग पग पर जलती चट्टान धरो ।
मैं तूफानों में चलने का आदी हूँ तुम मत मेरी मंजिल आसान करो॥"
इस बजट के मूल्यांकन में इसकी मूल भावना को दो बिंदुओं में समझना चाहिए । पहला यह कि महीनों तक लॉकडाउन के कारण ठप आर्थिक गतिविधियों के बावजूद यह बजट चुनौतियों से उबर कर आगे बढ़ने की मजबूत इच्छाशक्ति वाले सशक्त भारत की तस्वीर प्रस्तुत करता है । दूसरा यह कि बजट में भविष्य के आत्मनिर्भर भारत की आकांक्षा रखने वाले देश की संकल्पशक्ति नजर आती है । यह बजट आम आदमी की आय और क्रयशक्ति बढ़ानेवाला, आकांक्षी भारत की समस्त आकांक्षायें पूरी करनेवाला, देश के संसाधनों पर जिनका वास्तविक अधिकार है उनके लिए विकास की बाध्यता पैदा करनेवाला और एक केयरिंग सोसायटी का निर्माण करनेवाला बजट है ।
बजट में पीपीपी मोड पर खासा जोर दिया गया है । एक सोच है कि विकास प्रक्रिया में खर्च के प्रबंधन और पूंजी जुटाने के काम में निजी क्षेत्र की भागीदारी सुनिश्चित की जाय । अबतक ये माना जाता था कि ये सब केवल सरकार की जिम्मेवारी है, अब जबकि निजी क्षेत्र के लिए दरवाजे खोले गए हैं, तो तय है कि अब निजी क्षेत्र की उदयमिता का लाभ विकास प्रक्रिया को मिलेगा,रफ़्तार बढ़ेगी ।
प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में महामारी के दौरान देशव्यापी टेस्टिंग नेटवर्क, पीपीई किट उत्पादन में भारत की कार्यशैली ने विकसित देशों को भी चकित किया । स्वास्थ्य बजट में 137%की ऐतिहासिक बढ़ोतरी करते हुए उसे 2.38लाख करोड़ रुपये किया गया है । बजट में प्रस्तावित आत्मनिर्भर स्वस्थ भारत योजना से लगभग75 हजार गांवों के वेलनेस सेंटर्स को मदद मिलेगी । नये लैब-नए संस्थान खुलने से स्वास्थ्य व्यवस्था में व्यापक बदलाव होंगे । बजट में कोरोना वैक्सीनेशन के लिए 35हजार करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है । भारत कोरोना टीके के निर्माण और उत्पादन में अग्रणी बना है । वसुधैव कुटुंबकम की भावना के साथ मोदी जी दुनिया के तमाम देशो में टीका पहुंचा कर भारत को वैश्विक पटल पर सम्मान दिला रहे हैं । × अब सवाल उनका जो इन तमाम कल्याणकारी योजनाओं के लिए धन उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं, यानि हमारे टैक्स पेयर्स । टैक्स पेयर्स चार्टर लाकर हमारी सरकार ने क्रांतिकारी कदम उठाया है । देश को सबसे ज्यादा रोजगार और राजस्व देनेवाला लघु उद्यम जो सबसे ज्यादा रिस्क लेता है, पिछले कई दशकों से डिप्रेसन में रहा है । लेकिन अब, जबकि हमारी यात्रा शुरू हो गयी है आत्मनिर्भर भारत की तो वर्तमान और भविष्य की जरूरतों के हिसाब से देखें तो हमारे छोटे-मझोले उद्यमी इस अभियान में सबसे बड़ी भूमिका निभायेंगे| एमएसएमई बड़े उद्योगों की तुलना में कम पूंजी लागत में बड़े रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं । ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों के औद्योगीकरण में मदद करते हैं । एमएसएमई सहायक इकाइयों के रूप में बड़े उद्योगों के पूरक हैं और यह क्षेत्र देश के सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए काफी योगदान देता है ।
ये देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में लगभग 29 फीसदी का योगदान करते हैं । एमएसएमई सेक्टर देश में रोजगार का सबसे बड़ा जरिया है । इनसे 11 करोड़ लोगों को रोजगार मिला है । देश के कुल निर्यात में इनकी भागीदारी लगभग 50 प्रतिशत की है । लेकिन ज्यादा नहीं छः-सात साल पीछे जायें तो हम क्या पाते हैं? क्या हालत थी इन छोटे -मंझोले उदयमों की?
गालिब की इन पंक्तियों से समझें : -
"उन के देखे से जो आ जाती है मुंह पर रौनक वो समझते हैं कि बीमार का हाल अच्छा है ।” लेकिन अब नहीं, “मॉर्निंग शोज द डे",अब देश के लघु उद्यमी देश की सरकार की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहे हैं । उनकी उम्मीद को भी ग़ालिब की जुबानी ही समझिये:
"देखिए पाते हैं उश्शाक़ बुतों से क्या फैज़ इक बरहमन ने कहा है कि ये साल अच्छा है ।"
अब सरकार ने आत्मनिर्भर भारत के मिशन मेंMSMEs की भूमिका को बढ़ाने के लिए अनेक कदम उठाए गए हैं । MSMEs की परिभाषा में बदलाव हो,निवेश की सीमा बढ़ाना हो या फिर सरकारी खरीद में वरीयता,अब लघु और कुटीर उद्योगों को विकास के लिए ज़रूरी प्रोत्साहन मिला है । तीन लाख करोड़ रुपए की इमरजेंसी क्रेडिट गारंटी योजना,मुश्किल में फंसे MSMEs के लिए 20 हजार करोड़ की विशेष योजना और Fund of Funds जैसे प्रयासों ने लाखों लघु उद्यमियों को लाभ पहुंचाया है । GeM (जेम) पोर्टल से देश के दूर दराज वाले क्षेत्रों के MSMEs को सरकारी खरीद में पारदर्शिता के साथ-साथ अधिक भागीदारी भी मिल रही है ।
बड़ी बात ये है कि उद्यमशीलता महिलाओं में कम है, ऐसा इस सरकार ने नहीं माना, बराबरी के ही नहीं,बराबरी से कुछ कदम आगे बढ़ने का हौसला दिया । आत्मनिर्भर भारत में महिला उद्यमियों की विशेष भूमिका है । सरकार ने महिलाओं को स्वरोजगार के नए अवसर देने के लिए कई कदम उठाए हैं । मुद्रा योजना के तहत अब तक 25 करोड़ से ज्यादा ऋण दिए जा चुके हैं, जिसमें से लगभग 70 प्रतिशत ऋण महिला उदयमियों को मिले हैं ।
• दीनदयाल अंत्योदय योजना -राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत देश में आज 7 करोड़ से अधिक महिला उद्यमी करीब 66 लाख स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हुई हैं । बैंकों के माध्यम से इन महिला समूहों को पिछले 6 वर्षों में 3 लाख 40 हजार करोड़ रुपए का ऋण दिया गया है ।
• कोरोना की मार से जब पूरी दुनिया कराह रही थी, देश के छोटे-मंझोले उद्यमी भी तकलीफ में थे तो सरकार मरहम लेकर मुस्तैद थी । मुश्किल में फंसे दो लाख MSMEs के लिए 20,000 करोड़ सबॉर्डिनेट डेट का प्रावधान किया गया । इसके अलावा सरकार सूक्ष्म और लघु उद्यमों (CGTMSE) के लिए क्रेडिट गारंटी ट्रस्ट के तहत4,000 करोड़ रुपये की मदद लेकर खड़ी हो गयी ।
• सरकार ने घोषणा की कि वह 10,000 करोड़ रुपये के कोष के साथ एक फंड ऑफ फंड की स्थापना करेगी जिससे एमएसएमई को इक्विटी फंडिंग में मदद मिलेगी । सरकार ने ऐलान कर दिया कि इस सेक्टर के लिए3 लाख करोड़ रुपये तक के लोन की गारंटी सरकार देगी ।
• एमएसएमई को सरकारी खरीद में 25 प्रतिशत का आरक्षण और सरकारी कंपनियों से 45 दिन के भीतर भुगतान की सुरक्षा सुविधा केवल सूक्ष्म और लघु उद्योगों को ही मिलती है । मध्यम श्रेणी के उद्योग को बैंकों से एमएसएमई के लिए बिना गारंटी का ऋण प्राप्त करने की सुविधा दी गयी है ।
• फेसलेस टैक्स असेसमेंट और अपील की सुविधा देने के साथ ही सरकार ने देश में उद्यमशीलता को प्रोत्साहित करने के लिए कंपनी अधिनियम के अनेक प्रावधानों को गैर-आपराधिक बना दिया है । उदयोगों को ज़रूरी सुविधाएं मिल सकें इसके लिए औद्योगिक क्षेत्रों का, GIS तकनीक पर आधारित डेटाबेस तैयार किया गया है । इस डेटाबेस में देशभर की लगभग5 लाख हेक्टेयर औद्योगिक भूमि से जुड़ी जानकारी उपलब्ध है ।
• भारत सरकार तैयार बैठी है,राज्य सरकारें सहयोग करें तो बड़ा चमत्कार हो सकता है । भारत सरकार उद्यमियों के लिए ऐसे औद्योगिक क्षेत्रों का निर्माण करना चाहती है, जहां “प्लग एंड प्ले" के सिदधांत पर उदयमियों को जगह मिले । सबकुछ रेडी, आईये और निर्माण-कारोबार शुरू कीजिये । इस सदन में बैठे माननीय सदस्यों को ध्यान होगा कि कॉल सेंटर्स और बीपीओज की शुरुआत देश के कुछ बड़े शहरों में इसी फार्मूले के तहत हुई थी ।
हमारा देश युवाओं का है, जहां हर दिमाग एक नए आविष्कार की तैयारी में है । लेकिन हमने पिछले सात दशक उन आविष्कारी दिमागों पर अपनी परानपंथी सोच लादे रखी । अब हमारी सरकार ने फलसफा बदला है, हम मानते हैं "बच्चों के नन्हें हाथों को चांद सितारे छूने दो चार किताबें पढ़कर ये भी, हम जैसे हो जायेंगे ।"
हमारी सरकार ने देश के बच्चों को चांद सितारे छूने की आज़ादी दी है । आज एक बच्चे का स्टार्ट अप देखते -देखते मिलेनियर बिजनेस बन जा रहा है । इसीलिये, बजट में स्टार्टअप को प्रमोशन मिलने से देश के युवाओं में नई ऊर्जा का संचार होगा । सरकार ने स्टार्ट-अप को प्रोत्साहन देते हुए उन्हें 31मार्च2022 तक टैक्स जमा करने से राहत दी है । ये फैसले अर्थव्यवस्था की गति बढ़ाएंगे, युवाओं को रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराएंगे ।
बीते वर्ष में गेहूं एवं दाल और चालू वर्ष में धान की खरीद में वृद्धि यह दिखाती है कि केंद्र में किसानों के हित में काम करने वाली सरकार बैठी है । पहले जो किसान यूरिया के लिए पुलिस की लाठियां खाते थे,आज सम्मान निधि की राशि सीधे उनके खातों में पहुंचती है । सरकार ने कृषि ऋण के लिए बढ़ोतरी करते हए 16.5लाख करोड़ रुपये का प्रविधान किया है । रूरल इंफ्रास्ट्रक्चर फंड को 30से 40 हजार करोड़ रुपये करने, लघु सिंचाई परियोजनाओं के लिए 10हजार करोड़ रुपये, 1000 ई-नाम' के जरिये किसानों को वैश्विक बाजार से जोड़ने और स्वामित्व योजना जैसे अनेक प्रयास किसानों की आय दोगनी करने के लिए किए गए हैं ।
मैं पूछना चाहूंगी कि कृषि क्षेत्र में कृषक की उद्यमिता को हम क्यों नहीं मौक़ा देते, क्यों हम उन्हें उद्यमी नहीं मानें,क्यों नहीं उन्हें भी ऊंची उडान का मौक़ा दें, हम खेती को एक कारोबार मानने से परहेज क्यों करते हैं? मैं झारखण्ड से आती हैं,इसलिए लाजिमी तौर पर झारखण्ड की चर्चा करूंगी । आजकल MSPकी गारंटी पर बड़ा जोर है, लेकिन अभीMSP की व्यवस्था तो है. खरीद का काम राज्य की सरकार को करना है । फिर हमारे झारखण्ड में क्यों किसान चाहकर भी MSP पर अनाज नहीं बेच पा रहा, क्यों तय MSP से आधे दाम पर बिचौलियों को बेचने को मजबूर है? झारखण्ड की पिछली सरकार ने मुख्यमंत्री आशीर्वाद योजना शुरू की थी, राज्य के हर किसान को प्रति एकड़5000 के हिसाब से 25000 सालाना तक आर्थिक मदद देने की व्यवस्था थी, क्यों बंद कर दी गयी? दशकों से एकफसली खेती हो रही है वहां - धान छोड़कर कुछ नहीं । अब बदलाव आया है - युवा प्रगतिशील किसान फूल, स्ट्रॉबेरी, पपीते, सहजन, सब्जियां उगा रहे हैं । जोतें छोटी हैं तो सामूहिक खेती कर रहे हैं, एफपीओ बनाकर खेती को डाईवर्सीफाई कर रहे हैं, भारत सरकार की किसान रेल और उड़ान योजना उनकी उपज को देश के बड़े शहरों से लेकर विदेशी बाज़ारों तक पहुंचा रही है ।
ये हमारी ताकत है लेकिन सपोर्ट भी तो चाहिए? जाहिर है, कल को बड़ी कम्पनियां इनके साथ कारोबार करना चाहेंगी । लेकिन ये सब देखकर अभी से कुछ लोगों के पेट में दर्द शुरू हो गया है । क्यों भाई, कुछ ख़ास क्षेत्र ही कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग के मजे लेंगे? हमारे झारखण्ड के किसानों ने क्या कसूर किया है?
बजट में सबके लिए कुछ न कुछ है । उज्ज्वला योजना में आठ करोड़ महिलाओं तक मुफ्त रसोई गैस पहुंचाने के बाद अब एक करोड़ अन्य लाभार्थियों तक पहंचने का लक्ष्य है । बजट में 75 वर्ष से अधिक आय के वरिष्ठ नागरिकों को टैक्स रिटर्न भरने से छूट का निर्णय सरकार के मानवतावादी नजरिये का प्रतीक है । मत्स्य उद्योग से जुड़े लोगों के हित में पांच नए बंदरगाह बनाने और प्रवासी मजदूरों के डाटा को एकीकृत करने का प्रस्ताव है, जिससे वे एक देश-एक राशन कार्ड का लाभ उठा सकें । मध्यम वर्ग के हित में सस्ते घर के लिए कर्ज में छूट की अवधि एक साल और बढ़ाई गई है । मोदी जी ने गरीबों को आवास,शौचालय, बिजली,रसोई गैस, शुद्ध जल, खाद्य सुरक्षा इत्यादि सुविधाएं देने का जो संकल्प लिया है, उसे यह बजट सिद्धि तक ले जाने में सहायक होगा ।
आधारभूत संरचना के विकास के लिए भी ठोस कदम उठाए हैं । परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के 1.18 लाख करोड़ रुपये के बजट से राजमार्गों के विस्तार को नई गति मिलेगी । रेलवे को अगले एक दशक की जरूरतों के अनरूप तैयार करने के लिए रिकार्ड 1.10 लाख करोड़ रुपये का बजट दिया गया है । इसके साथ जलमार्गों,बंदरगाहों के विकास हेतु पूंजी निवेश और पीपीपी मॉडल के जरिये अनेक कदम उठाए गए हैं । आर्थिक विकास को गति देने के लिए पूंजीगत व्यय में 34.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है । यह पिछले वर्ष के 4.21 लाख करोड़ से बढ़कर 5.54 लाख करोड़ रुपये हो गया है ।
कुछ लोग औद्योगिक घरानों के एग्जिस्टेंस पर प्रश्न उठाते हैं । लेकिन इनका महत्व क्या है, केवल एक उदाहरण दूंगी|बंगाल के लोगों ने सिंगूर से एक उद्योगपति को भगाया,गुजरात ने अपनाया । आज स्थिति क्या है? लॉकडाउन के दौरान उजागर हुआ कि वही बंगाल जहां पहले बिहार,ओड़िसा, झारखण्ड,इत्यादि के लोग काम पाते थे, उसी बंगाल के मजदूर आज गुजरात और महाराष्ट्र में कंस्ट्रक्शन वर्कर के तौर पर काम कर रहे हैं । अपनी-अपनी सोच है, लेकिन उस सोच का हमारे देश की जनता पर - हमारे प्रदेश की जनता पर, हमारे देश की तरक्की पर - हमारे प्रदेश की तरक्की पर क्या असर पड़ता है,हमारे फैसले हमारे लोगों के भविष्य को कितना और कैसे प्रभावित करेंगे, ये भी देखना होगा । मैं बदलाव की एक और शक्ल दिखाना चाहती हूं । हवाई यात्रा सुविधा में जो विस्तार हुआ, किसने किया? एयर इंडिया ने नहीं किया,निजी क्षेत्र ने किया । लेकिन,हमारे यहां के कुछ लोगों का दिमागी दिवालियापन देखिये - कुछ लोग आज भी चाइना के निजी क्षेत्र की प्रशंसा करते हैं, उनकी उपलब्धियों का गुणगान करते हैं,लेकिन अपने निजी क्षेत्र की उपलब्धियों की बात हो तो कहेंगे - लूट लिया । इस संकीर्ण भावना से हमें बाहर निकलना होगा । वेल्थ क्रियेटर का समाज में सम्मान भी होना चाहिए । मुझे खुशी है कि बार-बार,जब भी मौका मिलता है हमारे प्रधानमंत्री जी, हमारी वित्त मंत्री जी ने खुलेआम उनके साथ अपनी प्रतिबद्धता दिखाई है ।
इसी सदन में,माननीय प्रधानमंत्री जी ने कुछ लोगों के लिए एक संज्ञा दी - परजीवी - आन्दोलनजीवी| इनका कुछ नहीं हो सकता, हर मामले में नकारात्मक पक्ष देखने की बीमारी है इन्हें । अब स्टॉक मार्केट को ही ले लीजिये । अप्रत्याशित तेजी दिखी - sensex 50 हजार के पार ये एक अप्रत्याशित घटना नहीं है । मैं जानती हूं कि स्टॉक मार्केट आर्थिक व्यवस्था की कम्प्लीट पिक्चर नहीं देता, मैं ये भी जानती हूं कि स्टॉक मार्केट में बहुत बड़े-बड़े इकोनॉमिस्ट नहीं होते, लेकिन वहां ऐसे लोग होते हैं जो देश के भविष्य की गतिविधियों पर पैनी नजर रखते हैं और उसके हिसाब से अपने निर्णय लेते हैं । जो आदमी अपना पैसा लगाता है, अपना स्टेक लगाता है, अपनी आमदनी लगाता है, उसका दांव सही फैसले पर लगेगा,गलत फैसले पर नहीं, इतना तो तय है ।
कुल मिलाकर,नए दशक में लाया गया यह पहला बजट आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को पूरा करने की बुनियाद रखने वाला है । बजट देश के हर नागरिक,हर क्षेत्र, हर समुदाय की आकांक्षाओं को पंख देकर नई उड़ान भरने के लिए प्रेरित करने वाला है । यह 'आत्मनिर्भर भारत' के विकास की बुनियाद रखने वाला बजट है ।
आदरणीय नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में, ये सरकार एक नए भारत, एक आत्मनिर्भर भारत, दुनिया की फैक्ट्री भारत, विश्वगुरु भारत की रचना के यज का आवाहन कर चुकी है । विघ्न-बाधाएं भी आयेंगी,समर्थन के सुर भी होंगे । जिनकी जैसी भूमिका होगी, इतिहास उन्हें उसी रूप में याद करेगा । मैं तो यही चाहूंगा कि इस सदन में बैठे हर एक माननीय सदस्य को हमारी भावी पीढ़ी आत्मनिर्भर भारत का शिल्पकार माने ।
जय हिन्द,जय जवान - जय किसान -जय विज्ञान ।
*DR. SUBHASH RAMRAO BHAMRE (DHULE): I support this Budget. I congratulate the Finance minister Shrimati Nirmala Sitharaman and MOS Finance Shri Anurag Thakur for presenting excellent Budget on the backdrop of COVID-19 pandemic. Last one year was difficult year because of COVID-19 lockdown. Timely action taken by the Prime Minister has saved this nation but due to lockdown, economy has definitely suffered. But agriculture and MSME are two strong pillars of Indian economy, which was aptly supported by the hon. Prime Minister by giving handsome package to these two sectors. There were apprehensions about Budget. But I congratulate the hon. Prime Minister and Finance Minister for giving good amount for Health and Agriculture.
Rs. 2,23,846 crore outlay for Health and Well-being in Budget Estimate 2021-22 as against Rs. 94452 crore in Budget Estimate 2022-21 which is an increase of 137 per cent. The focus is on strengthening on three areas- preventive, curative and wellbeing.
- Rs. 35,000 crore for COVID-19 vaccines
- Made in India Pneumococcal vaccine to be rolled out across the country to avert 50,000 child deaths annually.
- Rs. 64,180 crore outlay over six years for PM Atma-Nirbhar Swasth Bharat Yojana
- Mission Poshan 2.0 to be launched
- Universal coverage for water supply
- Rs. 2,87,000 crore for Jal Jeevan Mission (Urban)
- Rs. 2.86 crore for tap connection
- Rs. 1,41,678 crore for Urban Swachh Bharat Mission 2.0
This is the Budget for Atma-Nirbhar Bharat and I support it.
*श्री तीरथ सिंह रावत (गढ़वाल):यह बजट मा. प्रधानमंत्री जी के आत्मनिर्भर भारत के निर्माण को मजबूती प्रदान करने वाला बजट है जिसमें देश के किसान, जवान,महिलाओं, बुजुर्गों,मध्यवर्ग एवं गरीब सहित हर वर्ग का समावेश है एवं उनका कल्याण निहित है । यह सभी वर्गों को ध्यान में रखकर भारतीय अर्थव्यवस्था को गति देने वाला बजट है । पिछले एक वर्ष से जिस प्रकार हम कोरोना महामारी से जूझ रहे हैं देश में अर्थव्यवस्था को संभाले रखना एक चुनौती थी लेकिन इस समय भी हमारी अर्थव्यवस्था स्थिर एवं गतिशील रही, जिस प्रकार कोरोना के समय से ही हम आम्मनिर्भता की ओर बढ़ रहे हैं हमने देश के अन्दर ही अपने टैस्ट किट, लैबों एवं मास्कों को तैयार किया उसी आत्मबल का परिणाम है कि आज हम दुनिया को कोरोना वैक्सीन की आपूर्ति करने की पंक्ति में हैं । मान्यवर यह बजट ऐसे समय मे हम लाये हैं जहां पूरे देश में एक वर्ष अर्थव्यवस्था को गति देने वाले सभी आयाम बन्द पडे थे ।
देश के अन्दर नागरिकों का एक बहुत बड़ा वर्ग घरों में कैद हो गया था चाहे उद्योग-धन्धे हों या छोटा व्यापारी सब्जी विक्रेता हो या फल विक्रेता दूधिया हो, या ट्रक ड्राईवर किसान, परिवहन सामान्य रूप से वायरस के संक्रमण के भय से रूक गए थे । देश की अर्थव्यवस्था थम गई थी लेकिन देश के कर्तव्यनिष्ठ नागरिकों की दृढ इच्छा शक्ति ने उन दिनों में भी बुनियादी जरूरतों को पूरा करने में अपना समर्थन दिया ।
मैं प्रधानमंत्री जी का भी आभार व्यक्त करता हूँ, आपकी दूरदर्शिता से जो गरीब कल्याण योजना इस समय देश में चलाई गई उसका परिणाम था कि कोई भी व्यक्ति भूखा नहीं रहा । आज जिस प्रकार स्वास्थ्य के क्षेत्र में अवसंरचना व निवेश पर्याप्त रूप से बढ़ाया गया है उससे स्वास्थ्य क्षेत्र में निवारक उपचारात्मक सुधारात्मक कल्याण निहित है । आपने इस बजट में जिस प्रकार एक नई केन्द्रीय प्रायोजित योजना पीएम आत्मनिर्भर स्वस्थ भारत योजना 64,180 करोड़ परिव्यय के के साथ अगले 6 वर्षों के लिए जो प्रावधान रखा है, वह स्वास्थ्य के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होगा । इस योजना के तहत ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में जो वेलनेस सैण्टर केन्द्रों एवं जिलों में एकीकृत लोक स्वास्थ्य प्रयोगशालाएं3,382 विकासखण्डों में लोक स्वास्थ्य ईकाईयां, 602 जिलों में क्रिटिकल केयर हॉस्पिटल स्थापित होंगे उससे स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक अभूतपूर्व परिवर्तन होगा । कपड़ा उद्योग को वैश्विक प्रतिस्पर्धी बनाने एवं इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निवेश से अगले 3वर्षों में 7 टेक्सटाइल पार्क स्थापित होंगे उससे रोजगार सृजन में वृद्धि होगी । सडक राजमार्ग अवसंरचना के तहत भारत माला परियोजना से जिस प्रकार रोडों का जाल बिछ रहा है, इस बजट से इसको गति मिलेगी, जिसका लाभ उत्तराखण्ड में बन रहे ऑलवेदर रोड चारधाम परियोजना एवं भारत माला प्रोजेक्ट को भी मिलेगा । सरकार ने रेलवे के अवसंरचना विकास के लिए दूरगामी नीति बनाकर 2030 तक के लिए एक राष्ट्रीय रेल योजना बनाई । वह रेलवे के आधारभूत विकास के लिए कारगर साबित होगा । इसका ज्वलन्त उदाहरण आजादी के बाद पहली बार पहाड़ों में ट्रेन को चढ़ाना है इससे पहले अंग्रेजों द्वारा यह कार्य किया गया जो आज मा0 प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के प्रयासों से सफल होते हुए दिख रहा है । ऋषिकेश से कर्णप्रयाग एवं चारधाम रेल परियोजना है, जिसका कार्य युद्वस्तर पर हो रहा है ।
हमारी सरकार किसानों के कल्याण के लिए प्रतिबद्व एवं कटिबद्ध है । सरकार ने एमएसपी की व्यवस्था में मूलभूत परिवर्तन कर कृषि उपज की कीमतों में वृद्धि हो सके जिससे किसानों की आय में बढ़ोतरी हो, इस ओर उचित कदम उठाया है । आज एमएसपी पर पहले से ज्यादा खरीद हुई है, गेहूं एवं धान उत्पादन करने वाले किसानों की संख्या में वृद्धि हुई है । इसी प्रकार दलहन एवं कपास के उत्पादन वाले किसानों की आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है । सरकार ने इस वित्तीय वर्ष में किसान ऋण को बढाकर 16.5 लाख करोड़ कर के कृषि के साथ- साथ पशुपालन मत्स्य पालन एवं डेयरी विकास के क्षेत्र में भी किसानों को ऋण देने की योजना बनाई है, जिससे सीमान्त किसानों के जीवन स्तर में सुधार होगा । सरकार ने नाबार्ड के अन्तर्गत 500 सौ करोड रू0 से माइक्रो इरीगेशन फंड स्थापित किया है उससे किसानों के उत्पादन में वृद्धि के साथ आय को दुगना करने एवं अधिक किसान कल्याण के लिए अभूतपूर्व कार्य होगा ।
इस बजट में अनुसूचित जाति एवं जन जाति की महिलाओं के उत्थान के लिए स्टैण्डअप योजना के अन्तर्गत मार्जिन मनी की आवश्यकता को 25 प्रतिशत से कम कर 15 प्रतिशत किया गया है और इसे जिस प्रकार कृषि से सम्बन्धित कार्यों के लिए जोडा है वह निश्चित ही इनके जीवन स्तर को सुधारने का प्रयास है । देश में नई शिक्षा नीति का स्वागत हो रहा है । शिक्षा में गुणवत्ता की दृष्टि से सुधार एवं शिक्षा के विस्तार के लिए 100 नए सैनिक स्कूलों की स्थापना से शिक्षा क्षेत्र में क्रान्तिकारी बदलाव सम्भव है । हमारी सरकार ने सभी क्षेत्रों में दीर्घकालिक एवं आधारभूत विकास के लिए बजट का प्रावधान करके न्यूनतम सरकार और अधिकतम शासन के स्तम्भ को मजबूत करते हुए देश में सुधार एवं विकास की दीर्घकालिक योजनाओं की रूपरेखा तैयार की है । मैं बजट का पूर्ण समर्थन करता हूँ । धन्यवाद ।
*श्री राजू बिष्ट (दार्जिलिंग): मैं Budgetका समर्थन करता हूँ । वास्तव में यह किसी सरकार नहीं, बल्कि देश का Budget है । वर्ष 2012 के बाद भारत का हर नागरिक भारत सरकार केBudget में अपने आप को पाता है ।उदाहरण के लिए, Jan में Darjeeling के Mirikभ्रमण पर था । माननीय मंत्री श्री प्रह्लाद पटेल जी महिलाओं के घर गये । वह एक जन संपर्क अभियान में सरकार के कामों को लेकर गए । वहाँ एक महिला बताती है:
1. घर – PMAY से मिला,
2. Gas - Ujjwala योजना से मिला,
3. चावल और दाल –मोदी जी का,
4. Toilet – स्वस्थ भारत का,
5. सड़क – PMGSY से बना,
6. Covid - 500 रुपये हर महीना मिले और
7. काम – MGNREGA से मिला ।
इसीलिए मैं कहता हूँ कि यह देश का Budget है । इस Budget में गाँव, गरीब, किसान, महिला, युवा, बुजुर्ग, चायबगान, कारोबारी सभी को समाहित किया गया है । जब पूरी दुनिया Covidके कारण वैश्विक मंदी से परेशान है, तब केंद्र सरकार ने हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में देश के लिए एक सकारात्मक बजट पेश किया है । इस Budgetकी खास बात यह है कि यह महामारी के दौर में आया है । इस बजट में भी सरकार ने स्वास्थ्य, कृषि, पर्यावरण संरक्षण, Infrastructure, Road & Highways, Railway & Public Transportation को बढ़ावा देने के लिए और बुनियादी ढांचे के विस्तार पर जोर दिया है । इस बजट में स्वास्थ्य व्यवस्था के विकास के लिए 137% की वृद्धि करते हुए 2.23 लाख करोड़ रुपये सरकार ने आवंटित किये हैं । इस शानदार पहल से न सिर्फ मौजूदा महामारी से निपटने में मदद मिलेगी,बल्कि आने वाली विपदाओं से भी निपटा जा सकेगा । इस योजना से Block Level से लेकर District Hospitals में भी ICU जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी । इसका व्यापक लाभ पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों को अधिक होगा, जहाँ आज भी स्वास्थ्य व्यवस्था दयनीय स्थिति में है ।
पश्चिम बंगाल में स्वास्थ्य व्यवस्था की मौजूदा स्थिति यह है:-
· Over 9 Cr. Population - Bed 90,000 - Less than 1 bed for 1000 people · Per Capita Rs.988 - All India Rs.1482
यह Budget आत्मनिर्भर भारत, Vocal for Local, Make in India के माध्यम से भारत को विश्व में नई ऊंचाई तक ले जाएगा । इस दिशा में देश कितना तैयार है, यह हमने कोरोना काल में देखा कि छोटे से Maskसे लेकर PPE KIT और Ventilator से लेकर Vaccine तक बनाने में हम दुनिया में अव्वल बन गए हैं । उदाहरण;
· कोविड के दौरान हम 0 PPE Kit - आज 2nd Largest Producer of PPE Kit in the World · पूरे भारत में आजादी से वर्ष 2020 तक - Only 16000 Ventilators · पिछले 1 साल में 36000 से ज्यादाMade in India Ventilators हमारी सरकार ने बाँटे हैं । · हर दिन 8 लाख से ज्यादा N-95 Mask Produce हो रहे हैं । यह चरितार्थ करता है: कोशिश कर, हल निकलेगा आज नहीं तो, कल निकलेगा । अर्जुन के तीर सा सध जा, मरूस्थल से भी जल निकलेगा । मेहनत कर पौधों को पानी दे, बंजर जमीन से भी फल निकलेगा । जल जीवन मिशन के लिए अगले पांच वर्ष में 2.87 लाख करोड़ खर्च किये जाएंगे । · चेरापुंजी के बाद 2nd Highest Rainfall in Darjeeling · Drinking Water Crisis - 15 Lakh People Deprive
यह योजना Darjeelingजैसे कई क्षेत्रों को लाभ देगी । बजट में हमारे क्षेत्र और राज्य पर विशेष ध्यान देने के लिए धन्यवाद करता हूँ । चाय बागान मजदूरों की दुर्दशा के बारे में बताते हुए, हमारे युवा कवि Sakal Dewan Ji की दो पंक्तियाँ याद आती है:-
आफ्नो खुन पसिनाले सिँचेको भूमि आफ्नो भन्न नपाउन् कस्तो यो विडम्बना?
न्यूनतम रोज भन्दा कममा गरिदै छ मजदुरी बनदुवा मजदुर झै छिन् मेरी आमा आफ्नै सहुलियतको पनि तिर छीन सब्सिडी कति सहन्छिन उनी पिडा अथाह अर्थ खुद के खून पसीने से सींची हुई भूमि को खुद का न कह पाना ये कैसी विडम्बना?
न्यूनतम मजदूरी से भी कम पैसे पे करती हैं काम बन्धुवा मजदूर सी जीवन व्यतीत करती हैं मेरी माँ अपनी सहुलियतों के लिए खुद ही भुगतान करती हैं सब्सिडी सहती है पीड़ा अथाह! Rs.1000 crore का Special Financial Package चाय बागान श्रमिकों के लिए हमारे सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है । महिलाओं और बच्चों के भविष्य में बदलाव आएगा । नए Labour Code के माध्यम से Min. Wages लागू होंगे । PLA Act 1951 खत्म हुआ । साथ ही Kolkata से Siliguriतक highway Corridor के लिए 25000 करोड़ रुपये आवंटित करने से यहाँ की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी । यह Corridor पश्चिम बंगाल ही नहीं, बल्कि पूरे East India और North East India के विकास मार्ग के रुप में पहचाना जायेगा । Kharagpurको Eastern Coast और Western Coast से जोड़ते हुए 2 और Dedicated Railway Freight Corridor बनाया जाएगा । Petua Ghaat पूर्वी Midnapur Fishing Harbor का announcement कर हमारी सरकार ने बंगाल के विकास के लिए जो कदम उठाए हैं, उसके लिए मैं आभारी हूँ ।
मॉ, माटी, मानुष सरकार की बात West Bengal Criticism · West Bengal Facing Financial Crisis · Total debt 4.5 Lcr. · Govt. Failed to attract MoU in 10 Years · Global Summit 15 LCr. Commitment · Only 14500 Cr. Invested · FDI During 2011 only 1% of Total in India · FDI During 2021 only 1% of total in India · Direct Benefit Transfer Rank – 36th (Last) · Economy Rank during Independence – Top, Today 15th · Cut Money, Corruption, Syndicate राज और · Chit Fund घोटालों से जनता त्रस्त है । · Ayushman Bharat V/s स्वास्थ्य साथी । · Last Rank in Swachh Bharat Survey Constituency Demands 1. Tourism Industry Special Financial Support 2. Buddhist Circuit - Darj, KPG, Sikkim, Bodhgaya 3. Cinchona Garden - 26000 Acre, bring under AYUSH Ministry & make Medicinal hub of India 4. Siliguri Smart City
5. Coronation Bridge alternative - Darjeeling, Jalpaiguri, Doors & North East – 100 Yrs./ राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है ।
6. Developing Sports Infrastructure & International Stadium
7. AIIMS in North Bengal
8. Darjeeling and Kalimpong District Hospital to Medical College
9. Bagdogra Airport Expansion Plan
10. Cold Storage Chain in Phansidewa
11. Tea Garden - Planters at 2012 से Subsidy Pending है ।
12. Nepali Language DD News Channel
13. Most Important Peace - Permanent Political Solution एक समय था जब दार्जिलिंग का नाम विश्व पटल पर गूंजता था । Darjeeling पूरे देश का गर्व था । दार्जिलिंग देश में सबसे पहले वर्ष 1897 में बिजली से जगमगाया । यहाँ के लिए चलने वाली Toy Train को UNESCOने World Heritage का दर्जा दिया । चाहे चाय बागानों की खूबसूरती की बात हो,प्राकृतिक सौन्दर्य ऐसा की हर कोई दार्जीलिंग देखना चाहता था । कला,संस्कृति और साहित्य के क्षेत्र में भी आगे । एक समय में दार्जीलिंग Education Hub हुआ करता था । सुदूर नेपाल, भूटान, बांग्लादेश, बर्मा आदि क्षेत्रों से लोग पढने के लिए आते थे । बिल्कुल एक सपने की नगरी जैसा, दार्जीलिंग का वर्णन करते हुए एक पुराने गीत में कहा गया था-
दार्जीलिंग शहर बत्तिको लहर ईंन्द्रासन जस्तो छ लेकिन पता नहीं किसकी नज़र लगी, Darjeeling की अनदेखी होनी शुरू हुई और आजादी के बाद Darjeeling पिछड़ता गया । अब हालत यह हो गया है - आप स्वयं सोचिये की पिछले 15सालों से पंचायत के चुनाव नहीं हुए हैं, लोकतंत्र में इससे बड़ा दुर्भाग्य और क्या होगा । Panchayat नहीं होंने के कारण1600 Cr जनता तक नहीं पहुँचा । चाय और सिंकोना के बगान बंद होते गये । रोजगार ख़त्म होते गए । Tourism दिन पर दिन कम होता चला गया । Education का स्तर दिन पर दिन गिरता जा रहा है । ना अच्छी सड़कें हैं, ना ही पर्याप्त स्वास्थ्य सेवायें और न पीने का साफ़ पानी है । खेलों के क्षेत्र में शानदार खिलाड़ी देने वाला यह क्षेत्र खेलों की बेसिक सुविधाओं की कमी से जूझ रहा है । इसका कारण राज्य सरकार का दार्जीलिंग के प्रति सौतेला व्यवहार है । गोरखा लैंड का आन्दोलन भी बड़ा कारण बना, जिसे अब तक की सरकारों ने कभी भी गंभीरता से समाधान की ओर ले जाने की कोशिश नहीं की । Peace और Stabilityकी कमी ने इस क्षेत्र को विकास के मामले में बहुत पीछे धकेल दिया । वर्ष 2019 के Manifestoमें BJP ने स्थाई राजनीतिक समाधान की बात की थी । पार्टी और सरकार ने असंभव को भी संभव कर दिखाया है । चाहे धारा 370 हो, राम मंदिर हो या फिर कश्मीर का मुद्दा भारत के संविधान में हर समस्या का समाधान है । अब समय आ गया है कि इस क्षेत्र के लिए राजनैतिक समाधान तुरंत होना आवश्यक है और समाधान ऐसा हो कि Darjeeling, Terai & Dooars की जनता की अपेक्षा को पूरा किया जा सकें ।
*श्री सुनील कुमार सिंह (चतरा): मुझे आम बजट 2021-22 पर हो रही चर्चा में अपने विचार रखने का अवसर देने के लिए धन्यवाद ।01 फरवरी 2021 सोमवार को वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण जी द्वारा पेश किया गया केन्द्रीय बजट 2021-22 इस नए दशक का पहला बजट है । अप्रत्याशित कोविड संकट के मद्देनजर एक डिजिटल बजट भी है । आत्मनिर्भर भारत का विजन प्रस्तुत करने वाला यह बजट दरअसल 130 करोड भारतीयों की एकात्मकता की स्पष्ट अभिव्यक्ति है, जिन्हें अपनी क्षमता और कौशल पर पूर्ण भरोसा है । बजट प्रस्तावों से राष्ट्र का किसानों की आय दोगुनी करने, मजबूत अवसंरचना, स्वस्थ भारत, सुशासन, युवाओं के लिए अवसर, सभी के लिए शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, समावेशी विकास,इत्यादि का संकल्प और मजबूत होगा । वर्ष 2021-22 के बजट प्रस्तान इन 6 स्तंभों पर आधारित हैं-
1. स्वास्थ्य एवं कल्याण
2. भौतिक एवं वित्तीय पूजी और अवसरचना
3. आकांक्षी भारत के लिए समावेशी विकास
4. मानव पूंजी में नवजीवन का संचार करना
5. नवाचार और अनुसंधान व विकास
6. न्यूनतम सरकार और अधिकतम शासन वर्ष 2020-21 के बजट अनुमान में स्वास्थ्य एवं कल्याण के लिए बजट परिव्यय 2,23,846 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है । जो वर्ष 2020-21में 94,452 करोड़ रुपये था जिसमें 137प्रतिशत वृद्धि किया गया है । बजट में कोविड-19 का टीका बनाने के लिए 35,000 करोड़ रूपये दिये गये हैं । इस राशि से कोविड-19 के टीके का निर्माण में मदद मिलेगी । कोरोना महामारी में विश्व के कई देश भारत से उम्मीद लगाये हुये हैं उन्हें सहायता प्राप्त होगी । भारत के वैज्ञानिक कोरोना महामारी की वैक्सीन ज्यादा से ज्यादा निर्मित करने में लगे हुए हैं । केन्द्र सरकार ने इस राशि से बहुत बड़ी राहत प्रदान की है ।
बजट में मेड इन इंडिया न्यूमोकोकल वैक्सीन जो वर्तमान में केवल पांच राज्यों नही मिल रही थी, अब पूरे देश में उपलब्ध होगी । इससे झारखण्ड में चतरा, लातेहार एवं पलामू जिलों में भी बच्चों की होने वाली मौतों में कमी आयेगी ।
बजट में स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए एक बहुत महत्वपूर्ण योजना –प्रधानमंत्री आत्मनिर्भर स्वस्थ भारत योजना लाई गई है जिसमें आगामी 6वर्ष में 64,180 करोड़ रूपये व्यय किए जाएंगे, जो राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अलावा अतिरिक्त राशि होगी । इस राशि से भारत में स्वास्थ्य के क्षेत्र में आत्मनिर्भर होने की ठोस नींव का निर्माण होगा ।
मैं यहां पर झारखण्ड के लिए मुख्य रूप से मेरे लोक सभा क्षेत्र के लिए स्वास्थ्य से संबंधित मांग बजट में आपके माध्यम से सरकार से करना चाहूंगा । चतरा, लातेहार, पलामू से हेपेटाइटिस से संबंधित रोगों में हो रही वृद्धि चिन्ताजनक और गंभीर है । यहां स्थिति भयावह इसलिए होती जा रही है कि इन क्षेत्रों में जिला मुख्यालय पर भी इन रोगों से प्रतिरक्षण हेतु उचित स्वास्थ्य संरचना मौजूद नहीं है । इन क्षेत्रों में मातृत्व और शिशु से संबंधित सुविधाओं का घोर अभाव है । सुरक्षित प्रसव,टीकाकारण महिला रोग इत्यादि के निदान हेतू आवश्यक संरचना के दिशा में काम करने की आवश्यकता है । राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन एवं राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत चलने वाली विभिन्न योजनाएं धरातल पर कहीं नजर नहीं आती है । इसलिए प्रधानमंत्री आत्मनिर्भर स्वस्थ भारत योजना के तहत झारखण्ड इन बीमारियों के लिए स्थाई निदान करने के उपाय किये जायें ।
झारखंड मलेरिया से प्रभावित राज्य है । यहां मलेरिया से मरने वालो की संख्या प्रतिवर्ष बढ़ती जा रही है । अत:मंत्रालय को इसके निषेध के लिए प्रभावी एवं ठोस कदम उठाना चाहिए । झारखंड में मलेरिया उन्मूलन के लिए पहले की तुलना में अधिक राशि का प्रावधान होना चाहिए ।
मैं एक और महत्वपूर्ण मांग माननीय वित्त मंत्री जी से करना चाहता हूँ कि भारत सरकार द्वारा केन्द्र प्रायोजित योजनान्तर्गत देश के आंकाक्षी जिलों में पूर्व से कार्यरत जिला/ रेफरल अस्पताल को नए मेडिकल कॉलेज की स्थापना की योजना प्रस्तावित है । मेरे लोक सभा क्षेत्र चतरा में 3 जिले हैं, जिनका क्षेत्रफल लगभग 8500 वर्ग किमी हैं । यह पूर्वोत्तर भारत का सबसे बड़ा संसदीय क्षेत्र है । इस क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं का अत्यन्त अभाव है । आपके ध्यान में लाना है कि लातेहार एवं चतरा जिला में मेडिकल कॉलेज के लिए भूमि चिन्हित कर लिया गया है । अतः मेरा सरकार से आग्रह है कि झारखण्ड राज्य के चतरा एवं लातेहार जिलों में मेडिकल कॉलेज की स्थापना करने के लिए राशि उपलब्ध कराई जाए ।
बजट में मिशन पोषण2.0 का शुभारंभ करने की घोषणा की गई है, जिसके तहत एक सुदृढ कार्यनीति बनाई जायेगी, जिसमें चतरा, लातेहार एवं पलामू सहित देश के 112 आकांक्षी जिलों में पोषणगत परिणामों में सुधार लाया जायेगा ।
बजट में जल जीवन मिशन (शहरी) लांच करने की घोषणा की गई है, इसके लिए 2,87,000 करोड़ रूपये का परिव्यय की व्यवस्था की गई है । इस योजना से सभी 4378 शहरी स्थानीय निकायों में सर्व सुलभ जल आपूर्ति की योजना है । 2.86 करोड परिवारों को नल का कनेक्शन दिया जायेगा । मेरा सुझाव है कि इस योजना में देश के आंकाक्षी जिलों को जिसमें झारखण्ड के चतरा एवं लातेहार शहर भी आते हैं, प्रथम चरण में शामिल किया जाए क्योंकि शुद्ध पेयजल के अभाव में इन जिलों में कई बीमारियां फैल रही है । साथ ही गर्मीयों के दिनों में पेयजल का भी गहरा संकट होता है ।
बजट में शहरी स्वच्छ भारत मिशन 2.0 के तहत आगामी पांच वर्ष में 1,41,678 करोड़ रूपये का कुल वित्तीय आवंटन किया गया है । मेरा मानना है कि बड़े शहरों में अधिकतर घरों में शौचालय बने हुये होते हैं । इसलिए इस योजना के तहत छोटे शहर को प्राथमिकता देना चाहिए । जैसे चतरा, लातेहार एवं पलामू जैसे पिछड़े जिलों के शहरों में शौचालयों की ज्यादा आवश्यकता है । अतः इस योजना के प्रथम चरण में छोडे शहरों को शामिल करना चाहिए ।
बजट में राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन के तहत 1.10 लाख करोड रूपये दिये गये हैं, परिसम्पतियों के निर्माण पर जोर दिया गया है । इसके तहत केन्द्रीय वेयरहाउसिंग निगम एवं नैफेड जैसे सीपीएसई की वेयरहाउस का निर्माण किया जायेगा । इस योजना के तहत चतरा एवं लातेहार में एक-एक वेयरहाउस का निर्माण किया जाए । साथ ही इस योजना के तहत खेल स्टेडियम निर्माण का भी प्रावधान किया गया है । मेरी मांग है कि लातेहार जिला में एक खेल स्टेडियम का निर्माण किया जाए ।
बजट में सड़क एवं राजमार्ग मंत्रालय के 1,81,101 लाख करोड़ रूपये का अबतक का सर्वाधिक आवंटन है । एक महत्वपूर्ण विषय सरकार के ध्यान में लाना है । रेल मंत्रालय और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के बीच समझौता के अनुसार सभी रेल फाटकों को रोड ओवर / रोड अंडर ब्रिज से बदलने का कार्य भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकारण को करना है । लातेहार जिला के चन्दवा प्रखण्ड के टोरी जंक्शन में आर.ओ.बी. निर्माण के लिए स्वीकति एवं एवं राशि मिली हुई है । चंदवा के बाजार का बचाव करते हये इसका विकल्प तलाश किया जाए । इसके लिए बाईपास का निर्माण, या रेलवे अण्डर पास का निर्माण भी किया जा सकता है । अतः लातेहार जिला में टोरी स्टेशन के निकट टोरी-चतरा, डोभी पथ पर रेल ओवरब्रिज (ROB) का निर्माण कार्य शीघ्र पूरा किया जाए ।
बजट में रेलवे के लिए 1.10.055 करोड रूपये की राशि प्रदान की गई है । भारत के लिए राष्ट्रीय रेल योजना 2030 बनाने की घोषणा की गई है । मेरा सुझाव है कि भारतीय रेलवे का अस्तित्व आजादी से पहले से है । परन्तु आज भी कई जिले रेलवे से अछूते हैं । इसलिए यह आवश्यक है कि देश के सभी जिलों को रेलवे के माध्यम से आपस में जोड़ा जाए ।
मैं अपने संसदीय क्षेत्र की रेलवे की कुछ पुरानी लम्बित मांगो की ओर ध्यान दिलाना चाहता हूँ । वर्ष 2007-08 के बजट में चतरा-गया रेल लाइन निर्माण के सर्वे की स्वीकृति दी गई थी । इस पर कार्य अग्रिम कार्यवाही करने के लिए रेल मंत्री जी से आग्रह है । चतरा लोक सभा क्षेत्र में आजादी से पूर्व बरवाडीह- चिरीमिरी रेलवे लाईन परियोजना प्रस्तावित थी, जिसमें चिरीमिरी से अम्बिकापुर तक रेलवे लाईन बन चुकी है । बरवाडीह से अम्बिकापुर तक रेलवे लाईन का निर्माण लम्बित है । इस परियोजना के लिए आजादी से पूर्व मे ही भूमि अधिग्रहीत की जा चुकी है । अधूरा निर्माण कार्य भी हुआ है । यह परियोजना झारखंड के पलामू संभाग को छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग से जोड़ता है । जनजातीय बहुल सरगुजा एवं झारखंड का क्षेत्र सीधे मुंबई, हावड़ा से जुडता है और अन्य मार्गो की अपेक्षा इस मार्ग से मुंबई - कोलकाता की दूरी 400 किलोमीटर कम हो जायेगी । अतः इस योजना के महत्व को ध्यान में रखकर राष्ट्रीय हित में शीघ्रातिशीघ्र पूर्ण करने की आवश्यकता है ।
कोरोना के कारण हुए लॉकडाउन से पहले चल रही रेल गाडियों में कुछ गाडियों को पुनः चलाया गया है, लेकिन इन गाडियों के कई स्टेशनों पर ठहराव बन्द कर दिया गया है । मेरा आग्रह है कि सभी रेलगाडियों का पुनः संचालन तथा पूर्ववत स्टेशनों पर ठहराव की व्यवस्था की जाए, जैसे मैं कुछ गाडियों के बारे मे बताना चाहता हूँ कि शक्तिपुंज स्पेशल ट्रेन (01447/01448) का बरवाडीह, लातेहार और छिपादोहर पर पुनः ठहराव चालू करें । गाडी संख्या 08311/08312 सम्बलपुर-मडुआडीह-सम्बलपुर द्वि-साप्ताहिक त्यौहार विशेष एक्सप्रेस बरवाडीह, छिपादोहर एवं लातेहार पर ठहराव किया जाए । रांची-दिल्ली गरीब रथ गाड़ी का बरवाडीह स्टेशन पर ठहराव किया जाना चाहिए । रांची से टोरी के बीच संचालित सवारी गाड़ी का परिचालन बालूमाथ तक किया जाए । ज्ञातव्य रहे कि 09 मार्च2018 को टोरी से बालूमाथ रेलवे लाईन के उद्घाटन करते हुए माननीय रेल राज्य मंत्री श्री मनोज सिन्हा जी ने बालूमाथ तक सवारी गाडी शीघ्र चालू करने की घोषणा की थी । स्थानीय नागरिक रेल राज्य मंत्री की घोषणा से उम्मीद कर रहे हैं कि बालूमाथ तक सवारी गाडी चालू होगी, परन्तु अभी तक रेल राज्य मंत्री की घोषणा की पालना नहीं हुई है । अतः टोरी से बालूमाथ तक सवारी गाड़ी चलाने तथा बाद में शिवपुर तक इस गाडी को चलाने की कार्रवाई की जाए । रांची से टोरी के बीच संचालित सवारी गाड़ी के दिन में दो फेरे किए जाएं । रांची - टोरी– बालूमाथ- शिवपुर - रांची के बीच सुबह और शाम दोनों तरफ से दिन में गाड़ी चलने से दिहाड़ी मजदूरों और दैनिक कार्य के लिए आमजन को इसका लाभ मिलेगा । राजधानी एक्सप्रेस को सप्ताह में कम से कम दो बार लोहरदगा - टोरी रूट से चलाया जाना चाहिए इससे रांची से दिल्ली की दूरी करीब 80-90 किमी. कम हो जाएगी । दिल्ली पहुंचने में कम समय लगेगा, रेलवे को फायदा होगा । लोहरदगा, टोरी एवं आसपास के क्षेत्रों की जनता को राजधानी एक्सप्रेस की सुविधा मिलेगी और खर्च कम होगा ।
बजट में उज्ज्वला योजना के विस्तार करने की घोषणा की गई है । इस योजना के तहत 1 करोड़ और लाभार्थियों को शामिल किया जायेगा । इससे महिलाओं को काफी लाभ होने वाला है ।
बजट में अगले तीन वर्ष में 100 अन्य जिलों को सिटी गैस डिस्ट्रीब्यशन नेटवर्क से जोड़ने का काम किया जायेगा । मेरे लोक सभा क्षेत्र का चतरा जिला भी सिटी गैस डिस्ट्रीब्यशन नेटवर्क की योजना में शामिल है, परन्तु इसकी गति बहुत धीमी है । अतः इस कार्य में तेजी लाने की आवश्यकता है ।
वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार किसानों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है । सुनिश्चित कीमत उपलब्ध कराने के लिए एमएसपी व्यवस्था में व्यापक बदलाव हआ है, जो सभी कमोडिटीज के लिए लागत की तुलना में कम से कम डेढ़ गुना हो गया है । खरीद एक निश्चित गति से निरंतर बढ़ रही है । इसके परिणाम स्वरूप किसानों को भुगतान में भी बढ़ोतरी हुई है ।
इस साल की शुरुआत में, माननीय प्रधानमंत्री ने स्वामित्व योजना की पेशकश की थी । इसके अंतर्गत, गांवों में संपत्ति के मालिकों को बड़ी संख्या में अधिकार दिए जा रहे हैं । अभी तक, 1,241 गांवों के लगभग 1.80 लाख संपत्ति मालिकों को कार्ड उपलब्ध करा दिए गए हैं और वित्त मंत्री ने वित्त वर्ष 21-22 के दौरान इसके दायरे में सभी राज्यों और संघ शासित क्षेत्रों को शामिल किए जाने का प्रस्ताव किया है । इस योजना से झारखण्ड में मुख्यत: चतरा, लातेहार एवं पलामू सहित देश के सभी जिलों में अपनी संपति का स्वामित्व कार्ड देने का काम पहले पहले शुरू किया जाने की आवश्यकता है ।
कृषि और सहायक उत्पादों में मूल्य संवर्धन व उनके निर्यात को प्रोत्साहन देने के लिए की गई एक अहम घोषणा के तहत, अब 'ऑपरेशन ग्रीन योजना' के दायरे में अब जल्दी सड़ने वाले उत्पाद शामिल 22 हो जाएंगे । वर्तमान में यह योजना टमाटर, प्याज और आलू पर लागू है ।
बजट में सरकार ने एक राष्ट्र, एक राशन कार्ड योजना शुरू की है । उसके बाद में लाभार्थी देश में कहीं भी अपना राशन का दावा कर सकते हैं । प्रवासी मजदूरों को इस योजना का विशेष रूप से लाभ होगा क्योंकि वे अपने परिवार से दूर रह रहे हैं और जहां वह हैं वहां अपने हिस्से का राशन ले सकते हैं जबकि उनका परिवार अपने मूल स्थान पर अपना बाकी राशन ले सकता है । एक राष्ट्र, एक राशन कार्ड योजना 32 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू है और 69 करोड़ लाभार्थियों तक पहुंच रही है । यह संख्या इस योजना के तहत शामिल लाभार्थियों की कुल संख्या की 86 प्रतिशत है । बाकी चार राज्य और केंद्र शासित प्रदेश अगले कुछ महीनों में इससे जुड़ जाएंगे ।
सरकार ने चार श्रम कोड लागू करने से 20 साल पहले शुरू हुई प्रक्रिया को समाप्त करने का प्रस्ताव किया है । वैश्विक रूप से पहली बार सामाजिक सुरक्षा के लाभ वंचित और मंच कामगारों तक पहुंचेंगे । न्यूनतम वेतन सभी श्रेणी के कामगारों पर लागू होंगे और वह सभी कर्मचारी राज्य बीमा निगम के तहत आएंगे । महिलाओं को सभी श्रेणियों में तथा उचित सुरक्षा के साथ रात की शिफ्ट में भी काम करने की अनुमति दी जाएगी ।
मेरी सरकार से मांग है कि चतरा लोक सभा क्षेत्र में कई कोयला खनन औद्योगिक इकाईयां संचालित हैं । इन इकाईयों में हजारों मजदूर काम करते हैं । साथ ही कोयला मजदूरों के अलावा बीड़ी कामगार, वन उत्पादों के क्षेत्र में काम करने वाले मजदूर भी काफी हैं । मजदूरों के लिए चिकित्सा सुविधाओं की कमी को दूर करने के लिए कर्मचारी राज्य बीमा निगम द्वारा एक अस्पताल खोला जाए ।
कमजोर वर्गों के लिए किए गए उपायों के अनुपालन में वित्त मंत्री ने अनुसूचित जाति, जनजाति और महिलाओं के लिए स्टैंड अप इंडिया योजना के तहत नकदी प्रवाह सहायता को आगे बढ़ाने की घोषणा की है । वित्त मंत्री ने मार्जिन मनी की जरूरत 25 प्रतिशत से घटाकर 15 प्रतिशत करने और कृषि से संबंधित गतिविधियों के लिए ऋणों को भी शामिल करने का प्रस्ताव किया गया । इसके अलावा एमएसएमई क्षेत्र की सहायता के लिए अनेक उपाय किए गए हैं । सरकार ने इस बजट में इसे क्षेत्र के लिए 15,700 करोड़ रुपए उपलब्ध कराए हैं, जो इस वर्ष के बजट अनुमान से दोगुने से भी अधिक है । घोषणा की कि 100 नए सैनिक स्कूल स्थापित किए जाएंगे । चतरा लोक सभा में भी सैनिक स्कूल स्थापित करने के लिए प्रयास किया जा रहा है ।
मैं बताना चाहता हूँ कि लातेहार जिले के बरवाडीह में केन्द्रीय विद्यालय खोलने के आवश्यक मानदडों को पूरा करते हुये एक प्रस्ताव मण्डल रेल प्रबंधक, धनबाद ने केन्द्रीय विद्यालय संगठन को पत्र दिनांक 25.05.2019 को भेजा गया था । मेरी मांग है कि लातेहार जिला के बरवाडीह प्रखण्ड में केन्द्रीय विद्यालय खोलने की घोषणा कर राशि आंवटित किया जाए ।
सरकार ने जनजातीय क्षेत्रों में 750 एकलव्य मॉडल आवासीय स्कूल स्थापित करने का लक्ष्य निर्धारित किया है । ऐसे प्रत्येक स्कूल की लागत20 करोड़ से बढ़ाकर 38 करोड़ तथा पहाड़ी और कठिन क्षेत्रों में 48 करोड़ रुपए करने का भी प्रस्ताव किया गया है । एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय (ईएमआरएस) जो पहले से स्वीकृति है उनमें से Non Functional EMRS की संख्या अकेले झारखण्ड राज्य में 16 है । मेरे लोक सभा क्षेत्र के जिला चतरा एवं पलामू में वर्ष 2014-15 तथा जिला लातेहार में वर्ष 2016-17 में ईएमआरएस की मंजूरी प्रदान की गई थी । स्वीकृत तीनों ईएमआरएस में से अभी तक एक भी विधिवत स्थापित होकर चालू नहीं हुई हैं । अतः मेरा सरकार से आग्रह है कि पूर्व से स्वीकृतिEMRS को पहले पूरा किया जाए तथा जनजातीय जनसंख्या के आधार पर नये EMRS की स्थापना करें जिसमें चतरा लोक सभा के प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में एक-एक EMRS बनाया जायें । इसी प्रकार अनुसूचित जनजातियों के कल्याण के लिए पोस्ट मैट्रिक छात्रवृति योजना के तहत केंद्रीय सहायता बढ़ाई गई थी और 2025-26 तक छ: वर्षों के लिए कुल 35,219 करोड़ रुपए का आवंटन किया गया है । इससे अनुसूचित जाति के 4 करोड़ छात्रों को लाभ मिलेगा ।
वित्त मंत्री ने आयकर रिटर्न को भरने में वरिष्ठ नागरिकों को राहत देते हुए आयकर प्रक्रियाओं के समय सीमा में कमी, विवाद समाधान समिति के गठन की घोषणा, फेसलैस आईटीएटी, एनआरआई को छूट, लेखा परीक्षा छूट की सीमा में वृद्धि और लाभांश आय के लिए भी राहत प्रदान की है । उन्होंने देश में बुनियादी ढांचे में विदेशी निवेश को आकर्षित करने, सस्ते और किराए के आवासों के लिए राहत, आईएफएससी के लिए कर प्रोत्साहन, छोटे चैरिटेबिल ट्रस्टों को राहत और स्टार्ट-अप्स के लिए प्रोत्साहन जैसे कदमों की भी घोषणा की ।
महामारी के बाद, दुनिया एक नये रूप में उभरती हुई नज़र आती है और भारत इसमें एक अग्रणी भूमिका निभाएगा । उन्होंने कहा कि इस परिदृश्य में हमारी कर प्रणाली को पारदर्शी, कुशल होना होगा और देश में निवेश और रोज़गार को प्रोत्साहन देना चाहिए ।
शैक्षणिक संस्थान और अस्पताल चलाने वाले छोटे चैरिटेबल न्यासों पर आयकर का भार कम करने के लिए बजट में राहत की घोषणा की गई है । इसके तहत एक करोड़ रुपये से लेकर 5 करोड़ रुपये तक की वार्षिक लेखा प्रविष्टियों पर राहत की सीमा बढ़ाने का प्रावधान किया गया है ।
झारखंड में माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के समक्ष दिनांक 28 जून2015 को भारत सरकार और नेशनल मिनरल डेवलमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (एनएमडीसीएल) के मध्य नए इस्पात संयंत्र की स्थापना के लिए समझौता हुआ था ।
एनएमडीसीएल, हैदराबाद एवं मेकॉन द्वारा चतरा जिले के ऊँटा (लक्षणपुर गांव) में स्थल का चयन स्टील प्लांट के लिए कर लिया गया है । प्रस्तावित स्थल का निरीक्षण, वस्तुस्थिति रिपोर्ट, भूमि स्थानान्तरण की प्रक्रिया, राज्य सरकार से प्रस्ताव आदि हो चुका है । मेरा अनुरोध है कि सरकार द्वारा चतरा में स्टील प्लांट की प्रक्रिया को गति प्रदान की जाए ।
अन्त में कहना है कि यह बजट आत्मनिर्भर भारत निर्माण का बजट है । इस बजट में अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करने, किसानों की आय दो गुना करने, युवाओं के लिए नए अवसर पैदा करने वाला, आधुनिकता व नये सुधारों को बढ़ावा देने वाला, आत्मविश्वास से भरने वाला केन्द्रीय बजट प्रस्तुत करने के लिए माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी एवं वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण जी एवं वित्त राज्य मंत्री श्री अनुराग ठाकुर जी का धन्यवाद देता हूँ ।
*श्रीसुखबीरसिंह जौनापुरिया (टोंक-सवाई माधोपुर):यह बजट ऐसी परिस्थितियों में तैयार किया गया है जो कि पूर्व में कभी नही थी । देश का हर नागरिक इस बात को सोचने के लिए मजबूर हो गया कि इस महामारी से बचेगें तो ही कुछ जिदगी के बारे में सोचेगें इन सबको देखते हुए माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने देश के 130 करोड भारतीयों को हिम्मत और होंसला दिया और इस वेशिक महामारी से उबारकर देश के अन्दर दो - दो वेक्सीन तैयार करके पूरे विश्व में यह साबित कर दिया की भारत आज विश्व की अग्रणी पक्ति में खड़ा है और इस एक साल के अन्दर विकास की गति को फिर से पटरी पर ला खड़ा किया जिससे की आज बाजार मे जैसे कि मकान की ब्रिकी हो या स्कुटर,कार, मोटर साइकिल ट्रैक्टर इत्यादि की रिकार्ड तोड़ ब्रिकी हो रही है और इसके साथ देश के शेयर बाजार में उछाल देखने को मिला और रिकॉर्ड तोड़ जीएसटी का जमा होना एवं किसान की फसल का सरकारी दामों पर ज्यादा से ज्यादा खरीद होना यह दर्शता है कि विश्व में भारत देश अग्रणी पक्तिं में खड़ा है । माननीय मोदी जी के लोकडाउन का निर्णय देश के लिए काफी लाभकारी सिद्ध हुआ लोकडाउन से पहले दिल्ली में प्रदुषण बहुत ज्यादा रहता था और दिल्लीवासी का दिल्ली में रहना भी मुशिकिल था और नदियों में पानी भी काफी खराब रहता था परन्तु लोकडाउन में दिल्ली का प्रदुषण भी खत्म हो गया और सभी नदियों का जल भी काफी साफ और स्वच्छ हो गया माननीय प्रधानमंत्री के नेतृत्व में सरकार ने हमारे समाज के सबसे अधिक संवेदनशील वर्गो निर्धनों में निर्धनतम, दलितों, जनजातियों, वृदधजनों, प्रवासी कामगारों और अपने बच्चों को सहारा देने के लिए अपने संसाधनों में से मुश्किल से रास्ता निकला पीएमजीकेवाई, तीन एएनबी पैकज और बाद में की गई घोषणांए अपने आप में पांच मिनी बजट के समान थी ।
1. 17788 ग्रामीण और 11024 शहरी स्वास्थय और वैलनेस केन्द्रो के लिए समर्थन देश के सभी 602 जिलों 12 केन्द्रीय संस्थानो में क्रिटिकल केयर हॉस्पिटल ब्लाक स्थापित करना ।
2. स्वच्छ भारत मिशन 2.0 को 2021-26से 5 वर्ष की अवधि में 141678 करोड रूपए के कुल वितीय आवंटन से कार्यान्वित किया जाएगा ।
3. वायु प्रदूषण की विकराल होती समस्या का समाधान करने के लिए इस बजट में 1 मिलियन से अधिक जनसंख्या वाले 42 शहरी केन्द्रो के लिए 2217 करोड रूपए की राशि का प्रस्ताव इस बजट में है ।
4. देश में पहले 11 किलोमीटर प्रतिदिन के हिसाब से सड़क बनती थी,परन्तु मोदी सरकार के आने के बाद अब प्रतिदिन 29 किलोमीटर के हिसाब से बन रही है और इसके लिए वर्ष 2021-22 मे 3.3लाख करोड रूपये की लागत से 13000किलोमीटर से अधिक लम्बाई की सड़को का भारत माला परियोजना के अंतर्गत 5.35 करोड रूपये का ठेका पहले ही दे दिया गया है जिसका 3800किलोमीटर भाग निर्मित हो गया है ।
5. भारतीय रेलवे ने भारत के लिए एक राष्ट्रीय रेल योजना 2030तैयार की है । इस योजना को 2030 तक भविष्य के लिए तैयार रेलवे तंत्र सृजित करना है ।
6. उज्ज्वला योजना के अर्न्तगत 8 करोड़ परिवारों को इसका लाभ मिला और इसमे 1करोड और लोगों को शामिल किया जाएगा ।
7. अगले 3 वर्षों में 100 और अधिक जिलो को सिटी गैस डिस्टीब्यूशन नेटर्वक से जोडा जाएगा ।
8. भारतीय सौर उर्जा निगम में 100 करोड़ रूपये और भारतीय नवीकरणीय उर्जा विकास एजेंसी में 1500 करोड रूपये की अतिरिक्त राशि लगाने का प्रस्ताव है ।
9. जल जीवन मिशन के तहत अब तक 3 करोड़ परिवारों को पाइप वाटर सप्लाई से जोडा जा चुका है ।
10. प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत देश में 1.5करोड गरीब को 5लाख रूपए तक मुफ्त इलाज मिल रहा है नागरिक संशोधन कानून संसद द्वारा पास किया जा चुका है ।
11. वर्ल्ड टूरिज्म इंडेक्स की रैकिग में भारत 65वे से34 रेकिग पर आ गया हैं ।
12. हर गरीब का घर रौशन हो इसके लिए 2.5 करोड़ से अधिक बिजली कनेक्शन निशुल्क दिए गए और गरीब एवं मध्यम वर्ग का बिजली बिल कम हो इसके लिए 36 करोड़ से ज्यादा सस्ते एलईडी बल्ब वितरित किए गए ।
13. गरीब के हक का राशन कोई दुसरा न ले जाए इसके लिए 90 प्रतिशत राशन कार्ड को आधार कार्ड से जोड़ा जा चुका है और एक देश एक राशन कार्ड योजना को लागु करना ।
14. स्वच्छ भारत मिशन के तहत 10 करोड़ से ज्यादा शौचालय बनाए गए, जिसमे मां-बहनों को खुले में शौच से निजात मिली ।
15. वर्ष 2013 -14 में किसानों को गेहूं का कुल 33874 करोड रूपये का भुगतान किया गया था और 2019-20 में यह राशि 62802 करोड़ रूपये थी और वर्ष 2020-21 में 43.36 लाख पहुंच गई है । इसी प्रकार धान में 2013-14में 63928 करोड रूपये का भुगतान किया गया था और 2020-21 में 1.54 करोड हो गई है ।
16. गैर सरकारी संगठनों और राज्यो के साथ भागीदारी में 100 नए सैनिक स्कूल स्थापित किए जाएंगे । मेरी सरकार से मांग है कि मेरे संसदीय क्षेत्र में भी एक सैनिक स्कूल खोलने का कष्ट करें
17. भारत की जनगणना के लिए37678 करोड रूपये आवटित किए गए है और यह जनगणा पहली बार डिजीटल जनगणा के माध्यम से होगी जो कि अपने आप में एक अदभुत कार्य है ।
18. पहली बार देश में सिनियर सिटिजन को पूरा मान सम्मान दिया गया है । 75 साल या उससे अधिक आयु के पेंशन भोगियों को आयकर भरने की अपेक्षा से मुक्त करा दिया । देय कर की राशि को भुगतानकर्ता बैंक द्वारा कटौती कर ली जाए ।
19. शिक्षा संस्थानों और अस्पतालों को चलाने वाले छोटे-मोटे चेरीटेबल ट्रस्टों पर अनुपालन के बोझ को कम करने के लिए यह प्रस्ताव किया जा रहा है कि अनुमोदन आदि जैसे विभिन प्रकार के अनुपालन को लागु न करने के लिए इन ट्रस्टों की वार्षिक वर्तमान के 1 करोड रूपये से बढ़ाकर5 करोड कर दिया जाए ।
20. टीडीएस के दायरे को बढाने के लिए एक वर्ष में 50 लाख से अधिक की खरीद लेनदेन पर 0.5 प्रतिशत का टीडीएस उगाही जाने का प्रस्ताव है कर अनुपालने के बोझ को कम करने के लिए यह भी प्रस्ताव है कि कटौती का उत्तदयित्व केवल उन व्यक्तियों पर होना चाहिए जिनका पण्यवर्त 10 करोड रूपए से अधिक है ।
*श्री कपिल मोरेश्वर पाटील(भिवंडी):वित्तमंत्री मा. श्रीमती निर्मला सीतारमण जी ने कोविड 19 की वजह से अप्रत्याशित रूप से बढी हई अर्थिक चुनौतियों के बीच एक अभूतपूर्व बजट पेश किया । यह आत्मनिर्भर भारत तथा न्यू इंडिया का श्रेष्ठ भारत का श्रेष्ठ बजट है इस बजट में दीर्घ कालिक प्रभाव वाले कई सुधारों की घोषणा कर भारतीय अर्थव्यवस्था को उर्जावान बनाया है, यह बजट छह स्तंभों पर आधारित है । पहला स्वास्थ और कल्याण, दूसरा भौतिक-वित्तीय पूंजी,तीसरा - समावेशी विकास, चौथा - मानव पूंजी का संचार करना,पाचवां – नवाचार एवं अनुसंधान और छठा - न्यूनतम सरकार और अधिकतम शासन इस सरकार की यह कोशिश है कि हमारी अर्थव्यवस्था की रीढ अन्नदाता किसानों की आमदनी बढे और लागत से उपर मूल्य किसानों को मुनाफा मिले ।
कोरोना महामारी से देश को बचाने के लिए बड़े वित्तीय प्रविधान के साथ अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के अवसरों में बड़ी वृध्दि के प्रयास किए गए है । वही वोकल फॉर लोकल के तहत घरेलू उद्योगों को प्रोत्साहन दिया गया है, साथ ही मेक इन इंडिया और निर्यात वृध्दि के लिए नई रेखाएं खींची गई है । इससे जहां आर्थिक सुस्ती का मुकाबला किया जा सकेगा, महिलाओं, युवाओं, वरिष्ठ नागरिकों और उद्योग एवं सर्विस सेक्टर की मुश्किलों को कम करने मे बहुत बड़ी मदद इस बजट के प्रावधान में की गई है ।
इस बजट में खेती और किसानों पर विशेष रूप से ध्यान केंद्रित किया है । किसानों के सरल कर्ज के लिए 16.5लाख करोड रू.का प्रविधन किया है । फसल के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से डेढ गुना ज्यादा कीमत निर्धारित की है । ऐसे नए उद्यमों तथा कृषि बाजारों को प्रोत्साहन दिया है,जिनसे कृषि उत्पादों को अच्छी कीमत दिलाने में मदद मिलेगी । ग्रामीण क्षेत्र में बुनियादी ढांचे को बढाने को कई उपाय किए गए हे । इसके अलावा कृषि एंव संबध्द क्षेत्रों के विकास के माध्यम से बेरोजगारी और गरीबी को दूर करने वाले कामों को भी प्रोत्साहन दिया गया है ।
छोटे उद्योग की परिभाषा बदली गई है । कोरोना काल के दौरान प्रभावित एमएसएमई को फिर से खड़ा करने के लिए भी नया रास्ता निकाला गया है । एमएसएमई सेक्टर को तकनीकी विकास और नवाचार संबंधी लाभ देन क लए नई व्यवस्था बनाई गई है । सरकार ने इसके लिए उसे वित्तीय सहायता दन का मा प्रावधान किया है । इसमें दोराय नही सरकार की तरफ से तकनीक और वित्त की सुविधा प्राप्त होने से एमएसएमई सेक्टर को नया रंगरूप मिलेगा ।
बजट में कोविड19 के कारण देश के पर्यटन और होटल सहित जो विभिन्न उद्योग-कारोबार बुरी तरह प्रभावित हुए है, उन्हे पुनर्जीवित करने के लिए बडी धनराशि दी गई है । स्वास्थ्य सेवाओं के लिए आवंटन बढाकर 2.38 लाख करोड रूपये किया गया है । नई शिक्षा प्रणाली, कौशल विकास, शासकीय स्कूलों की गुणवत्ता, सार्वजनिक परिवहन जैसे अहम क्षेत्रों के साथ-साथ रोजगार वृध्दि के लिए टेक्सटाईल सेक्टर,मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर और बुनियादी ढांचा क्षेत्र के लिए भी आवंटन किया गया है । बीमा सेक्टर में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की सीमा 49फीसदी से बढाकर 74 फीसदी करने का प्रस्ताव है । आयुष्मान भारत योजना का दायरा बढाया गया है । शोध एवं नवाचार, निर्यात विकास फंड तथा फार्मा उद्योग को भी विशेष रूप से प्रोत्साहन दिया गया है । इसके अलाव जीएसटी को आसान बनाने की बात कही गई है ।
देश में महंगाई पर नियंत्रण और मांग का निर्माण करने की रणनीति पेश की गई है । शेयर बाजार में जोखिमों को कम करने के उपयुक्त प्रावधान भी किए गए हैं । बजट में शेयर बजार को और अधिक लाभप्रद बनाने के प्रविधान भी सुनिश्चित किए गए है । सिक्योरिटी मार्केट के लिए उठाया गया कदम लाभप्रद साबित होगा । जिससे देश एक अलग ही उंचाई पर पहुंचेगा ।
जिस तरह मेक इन इंडिया को प्रोत्साहन देने के लिए कुछ ऑटो पार्ट्स एवं इलेक्ट्रानिक वस्तुओं एवं मोबाइल उपकरणों पर कस्टम डयूटी बढाई गई है, वह भी लाभकारी सिध्द होगी । बजट में किए गए इन प्रविधानों के कारण आगामी वित वर्ष में देश के बुनियादी ढांचे को मजबूती मिलेगी और डिजीटल अर्थव्यवस्था में गति आएगी । इसकी वजह से बड़ी संख्या में रोजगार के नए मौके पैदा होंगे । इससे देश में प्रतिभाशाली नई पीढी का विकास होगा और शोध कार्य की गुणवत्ता बढेगी ।
स्टार्टअप, रिसर्च एंड डेवलपमेंट, आउटसोर्सिंग और कारोबार संबंधी अनुकूलताओं का संचार होगा । इससे देश में मध्यम वर्ग का भी दायरा बढ़ेगा । - ये सब एफडीआई की आवक का भी कारण बनेंगे । आयकरदाताओ में 75 साल से ज्यादा उम्र के वरिष्ठ नागरिकों की आयकर और टैक्स रिटर्न फाइल करने से छूट देकर आयकरदातों को कुछ राहत देने कि कोशिश कि है । कुल मिलकर हमारे देश के प्रधानमंत्री माननीय नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में मा.वित्तमंत्री जी ने पहले कभी नही देखा गया अभूतपूर्व प्रोत्साहनों का बजट पेश किया है । इससे देश में निवेश बढेगा,रोजगार बढेंगे और देश कोविड-19की आर्थिक सुस्ती से निपटने की डगर पर आगे बढकर विकास दर बढाते हुए दिखाई देगा ।
हमारे आदरणीय प्रधामंत्रीजी का विजन आत्मनिर्भर भारत और न्यू इंडिया की ओर बढता है,उन्होने हमें प्रेरणा दी है हम सबको उत्साहित किया है । हमे एक नई सोच से नई उर्जा से एक नये विश्वास से न्यू इंडिया बनाना है, तो उसके लिए हमे एक नई इकोनामी तैयार करनी पडेगी,जिसके लिए यह बजट जन-जन का बजट कहला रहा है । मीडिया में भी कई अर्थशास्त्रियों ने इस बजट की तारीफ कि है और कहा है इस बजट से भारत की अर्थव्यवस्था पूरे जोर पकडेगी जिससे न्यू इंडिया का काम और अधिक आसान हो जायेगा ।
इस बजट से हर वर्ग के लिए हर विषय पर सबका हल है, सबका समाधान है, चाहे वह किसान हो, चाहे युवा हो, महिलाये हो, शोषित वंचित आदिवासी, जवान और किसान एवं विज्ञान यह जन-जन का बजट है । इसके लिए मैं माननीय वित मंत्री जी को धन्यवाद देता हूं । उन्होंने हमारी मातृभूमि का पूरा ध्यान रखकर एक अदभूत बजट प्रस्तुत किया है ।
वोकल फॉर लोकल और आत्मनिर्भर भारत के माध्यम से मेक इन इंडिया नीति का लाभ मिलना शुरू हो चुका है अब भारत विश्वस्तरीय सामानों का निर्माण कर रहा है,जिससे इन छोटे उद्योगों को गति मिलेगी और देश की प्रगति में मदद मिलेगी और जल्द ही हमारा देश वैश्विक नेता के रूप में उभरकर आएगा ।
इस आम बजट 2021-22 में एक ऐसे आधुनिक भारत के निर्माण का स्वप्न झलकता है जो दुनिया में विकसित हो रही नवीनतम तकनीक को हर स्तर पर अपनाने में सक्षम हो, शिक्षा का आधुनिकीकरण और नई शिक्षा नीति वर्तमान सरकार का प्रमुख लक्ष्य है । विज्ञान और तकनीक के विकास के लिए विश्वस्तरीय शोध, अनुसंधान और कौशल आधारित शैक्षणिक संस्थान खोलने,तथा बढावा देने का प्रयास किया गया है,जिससे सामाजिक आर्थिक बदलाव का नया रास्ता खुलेगा ।
मा. वित्तमंत्री जी के इस बजट से बड़ा उद्योगपति हो या छोटा व्यापारी हो, मिडल क्लास हो, किसान हो या फिर गांव या शहर का गरीब सभी इस बजट से खुश है, अर्थात मुझे यह कहने में गर्व महसूस हो रहा है कि यह बजट भारत भूमि का सबसे पहला अभूतपूर्व एवं ऐतिहासिक बजट है ।
धन्यवाद! जय हिंद, जय भारत जय महाराष्ट्र ।
मेरे लोकसभा क्षेत्र की महत्वपूर्ण मांगे तथा सुझाव
1. भिवंडी टेक्सटाईल की नगरी है,यहा का कपड़ा व्यापार मंदी के चपेट में आकर धीरे-धीरे दम तोड़ रहा है, अगर भिवंडी में टेक्सटाईल पार्क बनाया जाए तो इससे भिवंडी और आसपास के कपडा व्यापार केंद्रो को एक नवसंजीवनी प्रदान होगी, अंतः भिवंडी परिसर में टेक्सटाईल पार्क बनाने की कृपा करे ।
2. टेक्सटाईल व्यवसाय में यार्न का बहुत महत्व है, लेकिन यार्न के भाव तथा याने का मार्केट मुंबई या आसपास किसी भी शहर में न होने के कारण यार्न की खरीद और यार्न की कीमतों पर नियंत्रण नही किया जा रहा है,मेरी आपसे विनती है कि भिवंडी में यार्न डेपो/यान मार्केट शुरू करने की कृपा करे ।
3. भिवंडी शहर में एक छोर पे कपडा व्यापार बसा है तो दूसरी ओर एशिया का सबसे बडा गोडाउन हब भिवंडी में बना है, इस कारण यहा रोजाना छोटी मोटी दुर्घनाएं होती रहती है, मेरी आपके माध्यमे यह मांग है कि यहां के कामगारों के संरक्षण व अच्छे भविष्य हेतु यहा एक सर्वसेवानरूप कामगार हॉस्पिटल बनाने की कृपा करे । ।
4. मेरा भिवंडी लोकसभा क्षेत्र बहुत ही व्यापक व विस्तृत है, जिसमे अल्पसंख्यक, आदिम आदिवासी, किसान और सभी स्तर के लोक निवासी है । परंतु मेरे लोकसक्षा क्षेत्र में ग्रामीणों के विकास हेतु कोई अच्छा शिक्षा का केंद्र नही है, अगर देश में बनने वाले100 मिलेटरी स्कूलों में से एक मिलेटरी स्कूल मेरे क्षेत्र में बनाया जाए तो इससे मेरे क्षेत्र के गरीब आदिवासी, किसान बंधुओं को शिक्षा मिलेगी और उनका विकास होगा ।
5. मेरे लोकसभा क्षेत्र में अल्पसंख्यक नागरिक बहुत ही बडी संख्या में है,इसमे ग्रामीण और शहरी दोनो क्षेत्रों मे अल्पसंख्यक समुदाय बिखरा हुआ है । इनकी जनसंख्या के मुताबिक यहां की महिलाओं को आवश्यक आरोग्य सेवा सुविधाएं उपलब्ध नही हो रही है, इस कारण मेरी आपसे विनती है कि भिवंडी में विशषकर महिलाओं के लिए एक महिला अस्पताल सर्वसेवों के साथ बनाने की कृपा करे ।
6. 2015 के केंद्रीय बजट में मंजूर हुए नई मुरबाड रेल लाईन का काम आज तक प्रलंबित है, इस नई रेल लाईन का कार्य जल्द से जल्द शुरू करने हेतु उचित सहकार्य करे ।
7. 2011 मे मंजूर हुई तीसरी लाईन कल्याण से कसारा और कल्याण से कर्जत इस काम को 2016 में शुरू किया गया है, परंतु आज तक इस लाईनों के लिए जमीन अधिग्रहण के ही कार्य पूरे नही किये गये है, जिस कारण यह काम आजतक लंबित है, यह काम लंबित होने से इसको लगने वाली लागत राशि भी दिनबदिन बढ रही है,आपसे मेरी विनती है कि, इस काम को तेजी से पूरा कर यहो के नागरिकों की यातायात की समस्या दूर करने की कृपा करें ।
8. 2016 में मान्यता प्राप्त कल्याण-आसनगांव व कल्याण-बदलापुर चौथी लाईन के कार्य आज तक चालू नही किए गये है,जिस कारण यह काम पिछले कई सालों से प्रलंबित है, काम लंबित होने से इस काम की लागत राशि में भी बढत आ रही है,जिस कारण सरकार भी नुकसान हो रहा है, मेरी आपसे विनती है कि, इस काम को तेजी से पूरा कर यहां के नागरिकों की यातायात की समस्या दूर करने की कृपा करें ।
9. 2015-16 के बजट में मान्यता प्राप्त कळवा ऐरोली एलोव्हेटेड मार्ग के काम को तेजी दे व यह काम जल्द से जल्द पूरा करने हेतु विशेष ध्यान दे कर यह काम पूरा करे ।
10. भिवंडी रोड पार्सल टर्मिनल बनाया गया है और यहा पे रेकॉर्ड ब्रेक माल का सप्लाई किया जा रहा है, परंतु उसके मुताबिक इस पार्सल टर्मिनल पर सेवाएं उपलब्ध नही है, जिस कारण लोडर को सामान आपने सिर पर उठाकर या कच्चे रास्तो पर गाड़िया खडी रखकर मालगाडी में डालना पड राह है । कम समय में ही भिवंडी रोड पार्सल टर्मिनल ने अच्छा सप्लाय किया है । परंतु अपूर्ण सेवाओ से यहा से माल भेजने वाले व्यापारियों को नुकसान तथा हमाल/कुलियों को जादा पैसा देना पड़ रहा है । आपसे नम्र विनती है कि भिवंडी रोड पार्सल टर्मिनल पे पत्राशेड, प्लॅटफार्म व अन्य आवश्यक सुविधाएं प्रदान करने हेतु विशेष निधी का प्रावधान कर, इस स्थानक का विकास करे ।
11. मुंबई-अहमदाबाद और मुंबई-आगरा इन नेशनल हाइवे को जोड़ने वाले मार्ग नेशनल हाइवे घोषित करने की कृपा करे ।
*श्री रामशिरोमणि वर्मा (श्रावस्ती):मुझे बजट पर हो रही चर्चा में अपने विचार रखने का मौका देने के लिए बहुत-बहुत आभार । मैं साथ ही हमारी पार्टी की मुखिया बहन कुमारी मायावती जी का भी आभारी हूँ कि मुझे इस योग्य समझा और विश्वास जताया कि गरीब,मजलूम, दलित पिछड़ों की आवाज इस सदन में रख सकूँ ।
देश में बढ़ती हुई बेरोजगारी, बढ़ती आर्थिक मंदी और महंगाई की तरफ ध्यान आकृष्ट करना चाहूँगा । माननीय वित्त मंत्री जी द्वारा अपने बजटीय भाषण में मध्यम वर्ग, निम्न वर्ग खास कर नौकरी पेशा, अस्थाई कर्मचारियों एवं मजदूरों,महिलाओं, अनुसूचित जाति/जनजाति और पिछड़े समाज से आने वाले छात्र/छात्राओं के लिए किसी भी प्रकार का जिक्र नहीं किया गया है ।
जैसा कि विदित है कि अपने देश में 70-80 प्रतिशत लोग कृषि व कृषि व्यापार से परोक्ष व अपरोक्ष रूप में जुड़े हुए है । जब कोरोना काल में सभी देशों की अर्थव्यवस्था डूब रही थी, तब हमारे देश की अर्थव्यवस्था में कृषि क्षेत्र के योगदान ने ही जीडीपी को बनाये रखा था । इसके बावजूद भी ये अन्नदाता किसान लगभग 2 महीने से दिल्ली की विभिन्न सीमाओं पर कड़क सर्दी,बरसात और सर्द हवाओं की परवाह किये बगैर अपने हक के लिए दिन-रात लड़ाई लड़ रहे हैं ।
मुझे भी खेद है कि कुछ असमाजिक तत्वों द्वारा गणतंत्र दिवस के दिन किसानों की आड़ में लाल किले पर हिंसा और तिरंगे का अपमान किया । इसको गंभीरता से लिया जाना चाहिए और निष्पक्ष रूप से इसकी माननीय सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश द्वारा जांच करायी जानी चाहिए । जो लोग भी इस कृत्य के लिए दोषी हैं, उनको कड़ी से कड़ी सजा दी जानी चाहिए, लेकिन इस कृत्य की आड़ में निर्दोष किसान व किसान नेताओं को नहीं फंसाया जाना चाहिए । साथ ही सरकार से बहन कुमारी मायावती जी द्वारा लगातार की जा रही मांग का पुरजोर समर्थन करते हुए चाहूँगा कि सरकार किसानों के हितों को ध्यान रखकर तीनों विवादास्पद कृषि कानूनों को वापस ले । बजट में इनके हितों की अनदेखी की गई है । समस्त देश में कृषि कार्यों में लगने वाले इनपुट्स जैसे डीजल, कीटनाशक दवा व केमिकल फर्टिलाइजर्स,बीज इत्यादि वस्तुओं के दाम दिन-प्रतिदिन बढ़ते ही जा रहे हैं । इन परिस्थितियों में लागत अधिक और आमद कम हो रहा है ।
मैं श्रावस्ती जनपद उत्तर प्रदेश से निर्वाचित होकर आया हूँ । यहाँ पर उच्च शिक्षा हेतु किसी भी प्रकार का संस्थान नहीं है । श्रावस्ती और बलरामपुर जनपद नितान्त पिछड़े जनपदों की श्रेणी में आता है । इस जनपद के विकास हेतु बजट में किसी भी प्रकार का कोई प्रावधान नहीं है ।
अतः मैं चाहूंगा कि श्रावस्ती व बलरामपुर जनपद हेतु इसके पिछड़ेपन को दूर करने के लिए स्पेशल फण्ड केन्द्र सरकार बजट के माध्यम से दे ताकि समुचित विकास हो सके । इसी कड़ी में मैं सरकार का ध्यान देश में दलित छात्रों की छात्रवृत्ति न दिये जाने से उत्पन्न गंभीर स्थिति के तरफ भी दिलाना चाहूँगा ।
पूरे देश में दशमोत्तर कक्षाओं के बाद अनुसूचित जाति के छात्रों को छात्रवृत्ति मिलती रही है, दलितों के हितों के लिए काम करने का ढिढोरा पीटने वाली सरकार,जिसने वर्ष 2018 से ही बन्द कर रखा है । इसके पूर्व में शत-प्रतिशत छात्रवृत्ति के लिए फण्ड केन्द्र सरकार जारी करती थी । अब राज्यों का हिस्सा भी तय कर दिया है, जो 40:60 रेसियो का है । देश के सभी राज्यों ने अपनी आर्थिक समस्या से केन्द्र सरकार को बार-बार अवगत कराया है,लेकिन आज तक केन्द्र सरकार वर्ष 2018 से दलित प्रेम के चलते कोई फैसला नहीं ले सकी है, जिससे इनके कथनी और करनी में अंतर पाया जाता है ।
मैं सरकार से अनुरोध करना चाहूँगा कि पूर्व में मिल रही दलित छात्रों की दशमोत्तर कक्षाओं की छात्रवृत्ति का शत-प्रतिशत इंतजाम केन्द्र सरकार राज्यों को करें ताकि ये सभी छात्र अपनी शिक्षा सुचारू रूप से पा सकें और वित्त मंत्री जी से चाहूँगा कि हमारे लोक सभा क्षेत्र श्रावस्ती में एक सैनिक स्कूल देने की कृपा करें ।
*श्री अजय टम्टा (अल्मोड़ा): देश के यशस्वी माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में माननीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण जी व वित्त राज्यमंत्री श्री अनुराग ठाकुर जी ने पहला डिजिटल केन्द्रीय बजट पेश किया है । इस कठिन कोरोना काल के समय में बजट को पेश करना और सभी वर्गों का ध्यान रखते हुए,यह बजट असाधारण परिस्थितियों के बीच पेश किया गया । इस बजट में आत्मनिर्भरता की दृष्टि भी है और चौतरफा विकास की दृष्टि भी है । इस बजट के केन्द्र बिन्दु गांव और किसान हैं । यह बजट आत्मनिर्भरता के उस रास्ते को लेकर आगे बढ़ा है,साथ ही दुनिया में एक नया आत्मविश्वास भरने वाला बजट है । इस बजट में गांव, गरीब,किसान, महिला,युवा, बुजुर्ग,कारोबारी सभी शामिल हैं । इस बजट में बुनियादी संरचनओं का विकास,सड़क परिवहन,रक्षा से सुरक्षा सहित भारत के अर्थ शक्ति बनने का सुदृढ़ आधार है । यह सभी का बजट है, सभी के लिए बजट है ।
कोविड-19महामारी के दौरान प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना में 2.7 लाख करोड़ रुपए के प्रावधान से 80 करोड़ लोगों को मुफ्त अनाज, 8 करोड़ परिवारों को मुफ्त रसोई गैस, 40 करोड़ से अधिक किसानों,महिलाओं, बुजुर्गों और जरुरतमंदों को सीधे धनराशि का अन्तरण । एक देश,एक राशन कार्ड,कोविड-19 के खिलाफ भारत के नागरिकों के साथ-साथ 100 से भी अधिक देशों के नागरिकों को चिकित्सीय सुरक्षा मुहैया कराने में कारगर साबित होगी ।
उज्ज्वला योजना में 8 करोड़ महिलाएं लाभांवित हुई । बजट में इसका विस्तार करते हुए 1 करोड़ नए लाभार्थी महिलाओं को जोड़ने का प्रावधान सराहनीय है । 75 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के वरिष्ठ नागरिकों को टैक्स रिटर्न भरने में छूट दिया जाना सराहनीय है ।
अगर हम किसानों की बात करें, तो देश में पहली बार किसानों की आय को बढ़ाने की चिंता माननीय प्रधानमंत्री मोदी जी ने की है । पीएम किसान सम्मान निधि के माध्यम से देश के किसानों के खाते में हर साल 6 हजार रुपए पहुंचाने का काम किया है । किसानों की आय को दुगुना करने के लक्ष्य पर बढ़ते हुए उपज की लागत से डेढ़ गुना एमएसपी देने का प्रावधान बजट में किया, ग्रामीण विकास की निधि को 30 हजार करोड़ से बढ़ाकर 40 हजार करोड़ रुपए किया गया है । इसी तरह से प्रधानमंत्री सड़क योजना के माध्यम से प्रत्येक गांवों को जोड़ने के लक्ष्य के साथ प्रत्येक विद्यालयों तक मोटर मार्ग की सुविधा देना माननीय मोदी जी का लक्ष्य है ।
वैश्विक महामारी कोविड-19के संकट का सामना करते हुए स्वास्थ्य बजट को पिछले वर्ष की तुलना में 137 फीसदी बढ़ोतरी करना । वैक्सीन के लिए 35 हजार करोड़ रुपए खर्च करने का प्रावधान, 602 जिलों में क्रिटिकल केयर अस्पताल ब्लॉकों का निर्माण, सहित बजट में आत्मनिर्भर स्वस्थ भारत योजना का ऐलान किया गया है । सुरक्षा पर सजग सरकार द्वारा बजट में रक्षा क्षेत्र के लिए पिछले वर्ष की तुलना में बजट में बढ़ोतरी कर सेना एवं देश का मनोबल बढ़ाने का कार्य किया है ।
शिक्षा के क्षेत्र में हायर एजुकेशन काउंसिल का गठन । 100 नए सैनिक स्कूल,जनजाति क्षेत्रों 750 एकलव्य मॉडल स्कूल व 15 हजार नए स्कूलों को आदर्श स्कूल बनवाने,लेह में केन्द्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना करना सहित शिक्षा के क्षेत्र में अनेक कार्यों का प्रावधान हुआ है । मेरा माननीय वित्त मंत्री जी से विशेष आग्रह रहेगा कि उत्तराखण्ड में स्थापित केन्द्रीय विश्वविद्यालय की एक शाखा मेरे संसदीय क्षेत्र में भी प्रारम्भ हो सके एवं मेरा संसदीय क्षेत्र सैनिक बाहुल्य होने के कारण वहां एक सैनिक स्कूल,संसदीय क्षेत्र के जनजाति बाहुल्य क्षेत्र धारचूला,मुनस्यारी में एक एकलव्य मॉडल आवासी स्कूल खोले जाने हेतु मेरा आपसे निवेदन है ।
सड़क परिवहन और राजमार्ग के लिए अब तक की सर्वाधिक धनराशि आवंटन भारतमाला परियोजना को 2022 तक पूर्ण करना,दिल्ली देहरादून आर्थिक गलियारा 210 किलोमीटर की स्वीकृति से सड़क एवं राजमार्ग की मेरे राज्य की जनता को काफी लाभ मिलेगा । पूर्व में मेरे क्षेत्र को बाराहमासी सड़क देने एवं भारतमाला के तहत उत्तराखण्ड और मेरे संसदीय क्षेत्र को काफी लाभ पहुंचा है । इस बजट के माध्यम से मेरा आग्रह है कि मेरे संसदीय क्षेत्र के दो मोटर मार्ग 1. खैरना-रानीखेत,मोटर मार्ग 2. लक्ष्मणझूला-दुगड्डा-नैनीडांडा-मोहान-रानीखेत मोटर मार्ग जिसको कि पूर्व में राष्ट्रीय राजमार्ग के रूप में सैद्धांतिक स्वीकृति मिल चुकी है, विधिवत स्वीकृति हेतु मेरा आग्रह है ।
हर घर जल, जल-जीवन मिशन ग्रामीण के पश्चात जल-जीवन मिशन शहरी के तहत 2 करोड़ 86 लाख परिवारों को कनेक्शन देने का बजट में प्रावधान कर पेयजल से वंचित आमजनों को बड़ी राहत का कार्य किया गया है । एक निवेदन करना चाहूंगा कि मेरे संसदीय क्षेत्र के अल्मोड़ा में पेयजल का जनसंख्या के अनुपात स्वरूप जलस्तर काफी कम है । इस हेतु पिण्डर नदी से कोसी नदी में पेयजल लिफ्ट योजना को मंजूरी दिलाए जाने हेतु मेरा निवेदन है ।
भारत सरकार के द्वारा भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए किए जा रहे प्रयासों को देश की समस्त जनता वास्तविक रूप में सीधे-सीधे लाभ प्राप्त होते देख रही है और देश निर्माण में सक्रिय भागीदारी कर रही है ।
मैं पुन: देश के यशस्वी माननीय प्रधानमंत्री जी और माननीय वित्त मंत्री जी, माननीय वित्त राज्य मंत्री जी को कोविड-19 महामारी में विपरीत परिस्थितियां होने के बावजूद अभूतपूर्व और ऐतिहासिक डिजिटल बजट प्रस्तुत करने के लिए उत्तराखण्ड और अपनी संसदीय क्षेत्र की जनता की ओर आभार और धन्यवाद करता हूँ ।
8*श्री अशोक कुमार रावत (मिश्रिख):हमारे देश के माननीय प्रधान मंत्री आदरणीय श्री नरेन्द्र मोदी जी और वित्त मंत्री आदरणीया निर्मला सीतारमण जी का मैं हृदय से धन्यवाद करना चाहता हूं, जिसमें लोक-लुभावन घोषणाओं के स्थान पर बजट को कृषि एवं किसानों गरीब एवं मध्यम वर्गीय लोगों पर केन्द्रित किया गया है तथा समाज के गरीब तबकों का भी विशेष ध्यान रखा गया है ।
यह प्रसन्नता की बात है कि सरकार ने इस बजट में किसानों की आय को दोगुना करने का लक्ष्य रखा है । शहरी,ग्रामीण स्वच्छता के लिए बजट में प्रावधान किए गए हैं और स्वच्छ हवा के लिए भी सरकार ने इसमें प्रावधान किया है तथा रेलवे के लिए राष्ट्रीय रेल योजना 2030 तैयार करने का प्रावधान रखा गया है और बीमा क्षेत्र में 74 फीसदी तक एफडीआई को मंजूरी दी गई है ।
माननीय वित्त मंत्री जी ने इस बजट में प्रवासी मजदूरों के लिए एक पोर्टल बनाए जाने का भी प्रावधान किया गया है, जिसमें प्रवासी मजदूरों से जुड़ा डाटा होगा तथा उनके लिए देशभर में एक देश-एक राशन योजना शुरू करने की व्यवस्था भी की गई है । यह खुशी की बात है कि लेह में केन्द्रीय विश्वविद्यालय बनाए जाने और अनुसूचित जाति के 4 करोड़ विद्यार्थियों के लिए 35 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया ।
इसमें कोई संदेह नहीं है कि काफी मुश्किल समय में यह बजट पेश किया गया है तथा इसमें मूलतः आधारभूत संरचना पर जोर दिया गया है, जिससे देश की अर्थव्यवस्था और अधिक मजबूत होगी ।
देशवासियों ने इस बजट को लेकर बहुत सारी उम्मीदें जताई थीं, जिन्हें माननीय प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के केन्द्रीय नेतृत्व में माननीय वित्त मंत्री महोदया ने पूरा किया है । वास्तव में यह बजट भारत की वृद्धि पर केंद्रित है और विकास दर में तेजी लाने के लिए पूर्णतः अनुकूल है । यह बजट 'आत्मनिर्भर भारत' के लिए है, इससे अर्थव्यवस्था मजबूत होगी ।
इस बजट में कॉपर और स्टील में ड्यूटी को घटाया गया है तथा सोने-चांदी की कस्टम ड्यूटी को भी घटाया गया ।
देश के वरिष्ठ नागरिकों के लिए यह प्रसन्नता की बात है कि देश के 75 साल से ज्यादा वरिष्ठ नागरिकों को आई0टी0आर0 भरने की आवश्यकता नहीं होगी तथा75 साल के ऊपर के पेंशनधारियों को टैक्स में छूट का प्रावधान भी होगा ।
यह भी प्रसन्नता की बात है कि सरकार ने देश में डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए 500 करोड़ रुपये का आवंटन किया है तथा अगली जनगणना की प्रक्रिया डिजिटल में होगी, जिसके लिए 3760 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है और चाय बगान श्रमिकों को एक हजार करोड़ रुपये रखे गए हैं ।
माननीय वित्त मंत्री जी ने नेशनल एजुकेशन पॉलिसी को तहे दिल से स्वीकार किया है और बजट में 100 नए सैनिक स्कूल स्थापित किए जाने का प्रावधान किया है और अनुसूचित जाति के 4 करोड़ विद्यार्थियों के लिए 35 हजार करोड़ रुपये का ऐलान किया गया है तथा आदिवासी क्षेत्रों में एकलव्य स्कूल खोले जाने का लक्ष्य रखा गया है ।
यह भी प्रसन्नता की बात है कि माननीय प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के केन्द्रीय नेतृत्व में देश में गेहूं उगाने वाले किसानों की संख्या दोगुनी हुई है तथा लागत से डेढ़ गुना ज्यादा देने का प्रयास किया गया है और इसके लिए किसानों को 75 हजार करोड़ से ज्यादा दिए गए हैं ।
यह भी प्रसन्नता की बात है कि यूपीए सरकार से करीब तीन गुना राशि मोदी सरकार ने किसानों के खातों में पहुंचाई है और दाल, गेंहू,धान समेत अन्य फसलों की एमएसपी बढ़ाई गई माननीय वित्त मंत्री जी ने इस बजट में जम्मू कश्मीर में भी गैस पाइपलाइन योजना की शुरूआत की है तथा उज्ज्वला योजना के तहत एक करोड़ और लाभार्थियों को जोड़ने का प्रावधान किया है, जो अभी तक 8 करोड़ लोगों को ही यह मदद दी गई है और साथ ही 100 नए शहर सिटी गैस वितरण में जोड़े जाने का प्रावधान किया गया है ।
माननीय वित्त मंत्री जी ने इस बजट में 3 लाख करोड़ रुपये से अधिक लागत की स्कीम लॉन्च की है और बिजली से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर जोर दिया है ।
माननीय वित्त मंत्री जी ने इस बजट में देश में 7 टेक्स्टाइल पार्क बनाए जाने का प्रावधान किया है, ताकि इस क्षेत्र में भारत एक्सपोर्ट करने वाला देश बन सके ।
यह भी प्रसन्नता की बात है कि माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के केन्द्रीय नेतृत्व में आत्मनिर्भर भारत पैकेज कई योजनाओं को कोरोना काल में देश के सामने लाया गया ताकि अर्थव्यवस्था की रफ्तार को आगे बढ़ाया जा सके और आत्मनिर्भर भारत पैकेज में कुल कई लाख करोड़ रुपये की मदद जारी की गई, जो सभी पांच मिनी बजट के समान थी ।
यह भी प्रसन्नता की बात है कि भारत के पास कोविड की दो वैक्सीन उपलब्ध है । सौ और उससे अधिक देशों को उसकी सुविधा मुहैया कराई गई है । हमारे लोकप्रिय आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने हमारे वैज्ञानिकों को इसके लिए धन्यवाद दिया है और इस अभियान की शुरूआत की है, जिससे आत्मनिर्भर पैकेज से ढांचागत सुधारों को गति मिली है । कोरोना काल में पांच मिनी बजट पेश किए गए और आठ करोड़ लोगों क मुफ्त गैस, 80 करोड़ लोगों को मुफ्त अनाज दिया गया ।
यह किसी से छिपा नहीं है कि कृषि कर्ज प्रवाह में साल-दर-साल वृद्धि हुई है तथा जो भी लक्ष्य रखे गए, ऋण वितरण उससे अधिक ही रहा है । उदाहरण के लिए 2017-18 में किसानों को 11-68 करोड़ रुपये का कर्ज दिया गया जबकि लक्ष्य 10 लाख करोड़ रुपये का ही था । इससे विदित होता है कि हमारे ऋषितुल्य प्रधानमंत्री आदरणीय श्री नरेन्द्र मोदी जी किसानों के प्रति कितने अधिक सजग है और उनके लिए अनेक कल्याणकारी कदम उठा रहे हैं ।
मैं माननीय वित्त मंत्री जी द्वारा प्रस्तुत वित्त बजट का हृदय से पुरजोर समर्थन करते हुए सदन का ध्यान अपने संसदीय क्षेत्र मिश्रिख, जनपद सीतापुर की प्रमुख समस्याओं की ओर आकर्षित करते हुए निवेदन करना चाहूंगा कि :
1. मेरे संसदीय क्षेत्र मिश्रिख का एक हिस्सा कानपुर नगर जनपद के अन्तर्गत भी आता है तथा कानपुर एक बहुत बड़ा औद्योगिक क्षेत्र है । यहां के आम नागरिकों को ही नहीं बल्कि व्यापारियों को भी अपने व्यापार के सिलसिले में देश के विभिन्न शहरों में आना जाना पड़ता है । लेकिन, कानपुर (चकेरी) हवाई अड्डा देश के प्रमुख नगरों से नहीं जुड़ा है और यहां के दूसरे शहरों के लिए फ्लाई भी बहुत कम है तथा यह हवाई अड्डा डिफेंस के अंतर्गत आता है, जिस कारण कानपुर और इसके निकटवर्ती जनपदों के नागरिक हवाई सुविधा से वंचित है । इस हवाई अड्डे के विकास हेतु 168 करोड़ रू0 स्वीकृत किए गए हैं, लेकिन अब तक इस राशि को विकास के लिए व्यय नहीं किया गया है, जिस कारण इस हवाई अड्डे का विकास संबंधी कार्य अवरूद्ध है ।
अतः कानपुर (चकेरी) हवाई अड्डा, जिसके विकास के लिए धनराशि स्वीकृत कर दी गयी है, के विकास संबंधी कार्य को प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र पूर्ण करके यहां से देश के प्रमुख नगरों के लिए फ्लाईट प्रारम्भ किए जाने हेतु आवश्यक कदम उठाए जाएं ।
2. मेरा संसदीय क्षेत्र मिश्रिख, जनपद सीतापुर (उ. प्र. ( अनुसूचित बाहुल्य क्षेत्र है और काफी पिछड़ा हुआ है । इस क्षेत्र की संडीला तहसील में कताई की मिल थी, जो पिछले काफी समय से बंद पड़ी हुई है । इस मिल के अभी तक चालू न होने के कारण श्रमिक बेकार हो गए हैं और उनकी जीविका का सहारा छूट गया है । उनके परिवार अत्यन्त ही दयनीय स्थिति में है तथा भूखमरी के कगार पर पहुंच गए हैं । मेरे क्षेत्र के लोगों द्वारा इस कताई मिल को पुनः चालू करवाये जाने हेतु विगत कई वर्षों से मांग की जा रही है, लेकिन अब तक इसको स्वीकार नहीं किया गया है ।
अतः निवेदन यह है कि मिश्रिख संसदीय क्षेत्र के अन्तर्गत संडीला में बंद पड़ी कताई मिल को पुनः चालू कराये जाने हेतु विशेष आर्थिक सहायता प्रदान कर उक्त बंद पड़ी मिल को चालू कराने का प्रयत्न किया जाए, जिससे स्थानीय श्रमिकों को रोजगार मिल सके ।
3. मेरे संसदीय क्षेत्र मिश्रिख (उ. प्र.) के अन्तर्गत तीन जनपद - सीतापुर, हरदोई एवं कानपुर नगर आते हैं । इन तीनों जनपदों में अनेक पर्यटक व धार्मिक स्थान है, जिनका वेद और पुराणों में भी उल्लेख है । इनको केन्द्र की प्रसाद योजना के अन्तर्गत विकसित किए जाने की जरूरत है । अतः मिश्रिख संसदीय क्षेत्र के अन्तर्गत आने वाले निम्नलिखित धार्मिक एवं पर्यटन महत्व के स्थलों को केन्द्र की प्रसाद योजना के अन्तर्गत स्वीकृति प्रदान की जाए ।
(1) नैमिषारण्य एवं दधीच कुंड (मिश्रिख, जनपद सीतापुर) )2) सिद्धनाथ बाबा आश्रम,( ग्राम लालपुर खाले,ब्लॉक भरावन,जनपद हरदोई) )3) हत्याहरण (कोथावां ब्लॉक,विधान सभा क्षेत्र बालामऊ, जनपद हरदोई) (4) सुनासीनाथ भगवान शंकर मंदिर (गंगा नदी के किनारे, मल्लावां, जनपद हरदोई) (5) भूतेश्वर खेरेश्वर मंदिर, अश्वत्थामा मंदिर(शिवराजपुर, बिल्हौर विधान सभा, जनपद कानपुर नगर) (6) बंदीमाता मंदिर (चौबेपुर ग्राम, बिल्हौर विधान सभा, जनपद कानपुर नगर)
4. मिश्रिख संसदीय क्षेत्र एक अनुसूचित जाति बाहुल्य ग्रामीण क्षेत्र है, जिसमें तीन जनपद सीतापुर, हरदोई एवं कानपुर नगर के पिछड़े क्षेत्र आते हैं । इनमें किसानों की बहुसंख्या है । मेरे संसदीय क्षेत्र में तीन जिलों की जो विधान सभाएं आती हैं, उनमें किसी में भी कृषि विज्ञान केन्द्र नहीं है । मेरे क्षेत्र के पिछड़े किसानों को कृषि से संबंधित जानकारी देने के लिए क्षेत्र में कृषि विज्ञान केन्द्र की स्थापना किए जाने की अत्यन्त आवश्यकता है । कृषि विज्ञान केन्द्र की स्थापना किए जाने से क्षेत्र के किसानों की आय में वृद्धि का स्रोत बनेगा । अतः मिश्रिख संसदीय क्षेत्र के अन्तर्गत आने वाले तीनों जनपदों में जो विधान सभाएं आती हैं, उनमें प्रत्येक जिले के अन्तर्गत एक-एक कृषि विज्ञान केन्द्र की स्थापना की जाए ।
5. मिश्रिख संसदीय क्षेत्र में फल और सब्जियों की खेती बड़े पैमाने पर होती है । अतः यहां पर हॉर्टिकल्चर गवर्नमेंट कॉलेज की स्थापना किए जाने से निकटवर्ती जिलों को लाभ मिलेगा । अतः मिश्रिख के अन्तर्गत एक हार्टिकल्चर गवर्नमेंट कालेज की स्थापना की जाए ।
6. मिश्रिख संसदीय क्षेत्र पूरी तरह से आधुनिक कृषि एवं सिंचाई की तकनीकियों से अनभिज्ञ है । मेरे क्षेत्र में ऐसा कोई केन्द्र या इंस्टीट्यूट नहीं है, जो स्थानीय कृषकों को इससे संबंधित जानकारी प्रदान कर सके । मेरे क्षेत्र में कृषि के अलावा जीवन-यापन के दूसरे साधन बहुत ही कम है, जिस कारण क्षेत्र में कृषि पॉलिटेक्नीकल कॉलिज स्थापित किए जाने से कृषकों का हित होगा । अतः मेरा मिश्रिख संसदीय क्षेत्र के लिए कृषि पॉलिटेक्नीक कॉलिज की स्थापना की जाए ।
7. मिश्रिख संसदीय क्षेत्र में अल्पसंख्यकों की काफी अधिक संख्या है । ये लोग गरीब है और बेरोजगार है । इनको रोजगार सुलभ कराने के लिए तकनीकी प्रशिक्षण केन्द की स्थापना किए जाने की आवश्यकता है, जिससे उनका विकास एवं उत्थान हो सके । अतः मिश्रिख संसदीय क्षेत्र के अन्तर्गत आने वाले तीनों जिलों के अल्पसंख्यक बाहुल्य क्षेत्रों में युवाओं के रोजगार हेतु ब्यूटीपार्लर, सिलाई, इलैक्ट्रिशियन, व्हीकल मैकेनिक के प्रशिक्षण हेतु तकनीकी प्रशिक्षण केन्द्र जनपदवार अलग-अलग स्थापित किए जाए ।
8. मिश्रिख संसदीय क्षेत्र में सभी समुदाय के गरीब लोग बड़ी संख्या में है, जो अशिक्षित एवं बेरोजगार है । इसलिए क्षेत्र के ग्रामीण अंचलों में गरीब युवाओं को रोजगार सुलभ कराए जाने हेतु कौशल विकास केन्द्र स्थापित किए जाने की आवश्यकता है । अतः मिश्रिख संसदीय क्षेत्र के अन्तर्गत आने वाले तीनों जनपदों के पिछड़े एवं ग्रामीण अंचलों में कौशल विकास केन्द्र जनपदवार अलग-अलग स्थापित किए जाएं, ताकि गरीब युवाओं को रोजगार सुलभ हो सके और क्षेत्र का भी विकास हो सके ।
9. मिश्रिख संसदीय क्षेत्र के अन्तर्गत ग्राम पहाड़पुर, ब्लॉक भरावन, तहसील सण्डीला, जनपद हरदोई में दलित वर्ग से जुड़े पासी समाज के एक महान व्यक्ति, जो मदारी पासी के नाम से विख्यात है, की समाधि है । ये आजादी के एका आन्दोलन के दौरान एक महान स्वतत्रंता सेनानी के रूप में प्रसिद्ध रहे हैं और आजादी के एका आन्दोलन में अपनी एक बहुत बड़ी भूमिका अदा की है । यह पासी समाज के लिए ही नहीं बल्कि दलित वर्ग के सभी समुदायों के लिए एक अति गर्व की बात है । अतः मदारी पासी,जिन्होंने दलित और शोषित समाज में साहस, स्वाभिमान, स्वावलम्बन सहअस्तित्व की सुरक्षा के प्रति ललक और जागरूकता पैदा की और साधरण जनता में भाईचारा, देश भक्ति, कर्तव्यनिष्ठा और मानव कल्याणकारी भावना को बढ़ाने का साहसपूर्ण कार्य किया, उनकी जन्म स्थली को विकसित करते हुए वहां उनकी प्रतिमा स्थापित की जाए और उनकी स्मृति में एक डाक टिकट भी जारी किया जाए ।
10. मिश्रिख संसदीय क्षेत्र के अन्तर्गत डुड़वा जमौली, ब्लॉक शिवराजपुर, बिल्हौर, जिला कानपुर नगर में विगत कई वर्षों पूर्व एनटीपीसी के प्लांट लगाए जाने हेतु स्वीकृति प्रदान की गयी थी । लेकिन, अभी तक इस प्लांट का निर्माण कार्य पूरा नहीं हुआ है और निर्माण कार्य बहुत ही शिथिलता के साथ चल रहा है, जिस कारण इसकी निर्माण लागत में अनावश्यक रूप से वृद्धि हो रही है । अतः एनटीपीसी के सोलर प्लांट का निर्माण कार्य तीव्रता से कराकर इसकी शीघ्र स्थापना की जाए ।
11. मिश्रिख संसदीय क्षेत्र के के अन्तर्गत बालामऊ स्टेशन को पूर्व में आदर्श स्टेशन के रूप में चयनित किया जा चुका है । यहां पर रेलवे व केन्द्र सरकार के कार्यालयों एवं बैंकों के कर्मचारियों की काफी संख्या है । लेकिन केन्द्रीय विद्यालय न होने के कारण बेहतर शिक्षा का अभाव है । अतः रेलवे व केन्द्र सरकार के कर्मचारियों के बच्चों को बेहतर शिक्षा प्रदान किए जाने के लिए बालामऊ में रेलवे की भूमि पर केन्द्रीय विद्यालय स्थापित किया जाए ।
12. मिश्रिख संसदीय क्षेत्र के अन्तर्गत हरदोई जिले में रूइया गढ़ी आज भी अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ लड़ी गई जंग की वीरता की गाथा की याद दिलाती है । 1857 की कांति संजोए हुए रूइया दुर्ग न केवल हरदोई जनपद बल्कि पूरे देश के लिए फक्र और गर्व की गाथा है । राजा नरपति सिंह ने अंग्रेजी हुकुमत के खिलाफ 1857 में बिगुल बजाते हुए अंग्रेजों पर काल बनकर तलवार भांजी थीं और आजादी की जंग की वीर गाथा लिखी थी । 1857 की कांति के दौरान अंग्रेजी शासन काल के हरदोई जिले के तत्कालीन डिप्टी कमिश्नर डब्ल्यू०सी० चैपर भी राजा नरपति सिंह के भय से जनपद को छोड़कर भाग गए थे ।
वर्ष2000 के दशक में राजा नरपत सिंह की याद में राजा नरपति सिंह रूईया किला स्मारक, माधोगंज स्मारक निर्माण के साथ ही उनकी मूर्ति की स्थापना की गयी है, उनकी वीर गाथा और स्मृति की याद दिलाती हैं । हमारी सरकार स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ मनाने जा रही है । अतः देश की स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर राजा नरपति सिंह की वीरगाथा एवं याद में उनकी स्मारक को पर्यटन के तौर पर विकसित करते हुए इसको केन्द्रीय पर्यटन की सूची में शामिल किए जाने हेतु समुचित कदम उठाएं ।
13. मिश्रिख संसदीय क्षेत्र के अन्तर्गत बिल्हौर विधान सभा क्षेत्र में गंगा नदी के किनारे चौबेपुर में कुल देवी बंदीमाता मंदिर है जहां कानपुर नगर सहित निकटवर्ती उन्नाव और हरदोई जिले के काफी लोग दर्शनार्थ पूजन एवं मुंडन हेतु आते हैं । क्षेत्र में बंदीमाता मंदिर की ऐतिहासिक महत्ता है तथा यहां पर गंगा माता की आरती भी की जाती है । इस पावन आरती में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं । लेकिन, यहां आने वाले लोगों के लिए जन-सुविधाओं का भारी अभाव है । अतः बिल्हौर विधान सभा क्षेत्र में गंगा नदी के किनारे चौबेपुर में स्थित बंदीमाता मंदिर का केन्द्रीय निधि से सौन्दर्यकरण कराए जाने के साथ साथ वहां आने वाले लोगों के लिए जरूरी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराए जाने हेतु आवश्यक कार्यवाही की जाए ।
14. मिश्रिख संसदीय क्षेत्र के अन्तर्गत बिल्हौर विधान सभा क्षेत्र में गंगा नदी के एक प्रमुख घाट नानामऊ में है, जहां इसके निकटवर्ती क्षेत्र के अलावा उन्नाव, हरदोई एवं कन्नौज इत्यादि से लोग आते हैं । नानामऊ को नारायण क्षेत्र के नाम से भी जाना जाता है । यह मां गंगा का पावन तट एवं धार्मिक स्थल है । इसलिए इसको भगवान नारायण का क्षेत्र भी कहा गया है । नानामऊ घाट पर प्रति वर्ष कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर एक विशाल मेले का आयोजन भी होता है, जहां लाखों की संख्या में श्रद्धालु मां गंगा के स्नान करके आशीर्वाद प्राप्त करके पुण्य के भागी बनते हैं । यहां पर क्षेत्र के लोग अंत्येष्टि किया हेतु भी आते हैं । क्षेत्र में नानामऊ में स्थित घाट की ऐतिहासिक महत्ता है । लेकिन, यहां आने वाले लोगों के लिए जन-सुविधाओं का भारी अभाव है । अतः बिल्हौर तहसील के नानामऊ में स्थित घाट का केन्द्रीय निधि से सौन्दर्यकरण कराए जाने के साथ-साथ वहां आने वाले लोगों के लिए जरूरी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराए जाने हेतु आवश्यक कार्यवाही की जाए ।
15. मिश्रिख संसदीय क्षेत्र आध्यात्मिक दृष्टि से एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है । इस संसदीय क्षेत्र के जनपद कानपुर नगर के बिल्हौर विधान सभा क्षेत्र में शिवराजपुर नगर पंचायत से कुछ ही दूरी पर पावन गंगा नदी बह रही है, जहां खेरेश्वर अति प्राचीन मंदिर है । महाभारत के समय भीम ने अश्वत्थामा को रथ सहित यहीं पर फेंका था तथा इसी स्थल पर खेरेश्वर मंदिर की स्थापना की गयी है, जहां क्षेत्रीय लोग अश्वत्थामा पूजन हेतु आते हैं और यहां पर गंगा के किनारे मेले का भी आयोजन होता है, जिसमें दूर दूर से लोग शामिल होते हैं ।
क्षेत्र में प्राचीन खेरेश्वर मंदिर की अत्यधिक महत्ता है । अतः इस मंदिर का जीर्णोद्धार एवं सौन्दर्यकरण कराए जाने के साथ- साथ वहां आने वाले श्रद्धालुओं हेतु जरूरी मूलभूत सुविधाएं प्रदत्त कराए जाने नितांत आवश्यकता है । अत:केन्द्रीय निधि से प्राचीन वाल्मीकि मंदिर का जीर्णोद्धार एवं सौन्दर्यकरण कराए जाने के साथ-साथ वहा पर जरूरी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराए जाने हेतु आवश्यक कार्यवाही की जाए ।
16. इस क्षेत्र के जनपद कानपुर नगर के बिल्हौर विधान सभा क्षेत्र में शिवराजपुर नगर पंचायत से कुछ ही दूरी पर पावन गंगा नदी बह रही है, जहां ग्राम रूद्रपुर बहल में आदि कवि वाल्मीकि की जन्मस्थली और वहीं पर उनका विख्यात प्राचीन मंदिर भी है, जिसका उल्लेख वेद-पुराणों में वर्णित है ।
क्षेत्र में उपरोक्त वाल्मीकि मंदिर की अति महत्ता है तथा यहां पर एक बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का आवागमन होता है । इस मंदिर का जीर्णोद्धार एवं सौन्दर्यकरण कराए जाने के साथसाथ वहां आने वाले श्रद्धालुओं हेतु जरूरी मूलभूत सुविधाएं प्रदत्त कराए जाने की नितांत आवश्यकता है । अतः केन्द्रीय निधि से प्राचीन वाल्मीकि मंदिर का जीर्णोद्धार एवं सौन्दर्यकरण कराए जाने के साथसाथ वहां पर जरूरी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराए जाने हेतु आवश्यक कार्यवाही की जाए ।
17. मिश्रिख संसदीय क्षेत्र के अन्तर्गत मल्लावां-बिलग्राम विधान सभा क्षेत्र गंगा नदी से बाढ़ प्रभावित इलाका है । यहां पर प्रत्येक वर्ष गंगा नदी से बाढ़ आने पर कटरी-परसौला-छिबरामऊ सहित काफी गांवों की न केवल फसल बरबाद हो जाती है, बल्कि उनके मकान भी बुरी तरह से क्षतिग्रस्त होकर वे आवास विहीन हो जाते हैं । ऐसी स्थिति में कृषि उपज बरबाद होने पर जहां उनकी जीविका का सहारा समाप्त हो जाता है, वहीं वे बेघर भी हो जाते हैं । अतः उपरोक्त क्षेत्र में प्रति वर्ष आने वाली बाढ़ से बचाए जाने के लिए एक बांध मेंहदीघाट से होते हुए राजघाट सड़िया पुल तक केन्द्रीय आवंटन से बनाए जाने हेतु आवश्यक कदम उठाए और जब तक बांध का निर्माण नहीं होता,उस स्थिति में गंगा नदी के कटान को रोकने के लिए छोटी छोटी ठोकर बनवाई जाए ।
18. मिश्रिख संसदीय क्षेत्र में नैमिषारण्य एक बहुत ही प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है । इस क्षेत्र में दधीच कुंड, पाण्डव किला,हनुमानगढ़ी, सुदर्शन चक (चक कुंड), मां ललिता देवी मन्दिर (शक्ति पीठ) इत्यादि महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल हैं, जो हरदोई और सीतापुर जनपदों के अन्तर्गत आते हैं । यहां पर देश के ही नहीं बल्कि विश्व के अन्य देशों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का आना जाना लगा रहता है । इन धार्मिक स्थलों का महत्व पुराणों में भी वर्णित है तथा 84 कोसी परिक्रमा, जो इन धार्मिक स्थलों से हरदोई और सीतापुर जनपदों से होकर गुजरती है, वह पथ कहीं छोटा है तो कहीं जीर्णशीर्ण स्थिति में है तथा मार्ग में विद्युत आदि की भी सुविधा नहीं है, जिस कारण श्रद्धालुओं को परिक्रमा के दौरान काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है । अतः 84 कोसी धार्मिक महत्ता का सम्मान करते हुए यह 84 कोसी परिकमा हरदोई एवं सीतापुर जनपदों के जिस-जिस मार्ग से होकर गुजरती है,उस पूरे पथ को 5 मीटर चौड़ा बनाते हुए पूरे पथ पर फलदार वृक्ष लगाने, विद्युतीकरण किए जाने और इस मार्ग का सौन्दर्यकरण किए जाने हेतु आवश्यक कार्यवाही की जाए ।
19. मिश्रिख संसदीय क्षेत्र के अन्तर्गत कानपुर नगर में पैकेज संख्या यूपी 158, (सड़क का नाम – एमआरएल -02 लखनऊ इटावा से विषधन वाया कुरेह) के निर्माण की स्थिति अत्यन्त ही दयनीय है । इस सड़क के निर्माण में गुणवत्ता के अनुरूप सामग्री नहीं लगाई जा रही है और न ही निर्धारित किए गए मानकों का अनुपालन किया जा रहा है । इस प्रकार से इस मार्ग के निर्माण में घटिया स्तर की सामग्री उपयोग में लाकर सरकारी धन की बरबादी की जा रही है, जो अत्यधिक चिंता का विषय है । अतः इस मार्ग के निर्माण में लायी जा रही सामग्री की गुणवत्ता और इस संबंध में निर्धारित किए गए मानकों की जांच केन्द्रीय मंत्रालय स्तर पर एक उच्च स्तरीय तकनीकी निगरानी समिति गठित करके करवाई जाए,ताकि सड़क का निर्माण गुणवत्ता एवं मानकों के अनुरूप होकर सरकारी धन की बरबादी बच सके ।
20. मिश्रिख संसदीय क्षेत्र के अन्तर्गत हरदोई जनपद में पैकेज संख्या यूपी 33153, (सड़क का नाम - एल030 कोथावां माल रोड से बहेरवा) के निर्माण कार्य हेतु स्वीकृति प्रदान की गई है । लेकिन, इस मार्ग के निर्माण हेतु केन्द्रीय धन का आवंटन न होने की वजह से मार्ग का निर्माण कार्य अब तक प्रारम्भ नहीं हुआ है । अतः इस स्वीकृत मार्ग के निर्माण हेतु केन्द्रीय धन का शीघ्र आवंटन किया जाए,ताकि सड़क का निर्माण कार्य प्रारम्भ हो सके ।
21. मेरे संसदीय क्षेत्र मिश्रिख (उ. प्र.) के अन्तर्गत जनपद हरदोई में संडीला रेलवे स्टेशन से सटे तीन समपारों यानी 247. 248 और 249का यातायात घनत्व एक लाख से अधिक वाहन इकाई (टीवीयू) से अधिक है और ये सभी एलसी को रेल ओवर ब्रिज (आरओबी) से प्रतिस्थापित करने के लिए योग्य है, से संबंधित प्रकरण को मैं प्रश्न एवं नियम 377के अधीन सदन में उठा चुका हूं ।
इस संबंध में रेल मंत्रालय द्वारा मुझे जानकारी भिजवाई गई थी कि राज्य सरकार से लागत भागीदारी और समपार बंद करने के लिए आवश्यक सहमति के साथ इन स्थानों पर आरओबी के निर्माण के लिए औपचारिक प्रस्ताव प्रस्तुत करने के लिए सम्पर्क किया गया है और मुख्य सचिव स्तर पर क्षेत्रीय रेलवे द्वारा नियमित रूप से सम्पर्क करने के बावजूद राज्य सरकार से कोई प्रतिकिया प्राप्त नहीं हुई है,जिस कारण रेलवे राज्य सरकार की सहमति के बिना कोई भी कार्रवाई करने की स्थिति में नहीं है ।
इस संबंध में अवगत कराना है कि सण्डीला रेलवे स्टेशन पर उपरिगामी सेतु के निर्माण हेतु राज्य सरकार द्वारा समस्त औपचारिकताएं पूर्ण करते हुए प्रमुख सचिव, लोक निर्माण विभाग, अनुभाग-11, उ0प्र0 शासन, लखनऊ ने दिनांक 15 दिसम्बर, 2020 महाप्रबन्धक,उ०रे०, नई दिल्ली को पत्र लिखकर अनुरोध किया है कि उक्त रेल उपरिगामी सेतु को रेलवे वर्क्स कार्यक्रम में सम्मिलित कराने हेतु आवश्यक कार्यवाही करते हुए रेल उपरिगामी सेतु के निर्माण हेतु रेलवे की सहमति एवं लागत में सहभागिता के संबंध में राज्य सरकार को अवगत कराया जाए ।
अतः अनुरोध है कि अब जबकि राज्य सरकार द्वारा उक्त रेल उपरिगामी सेतु के निर्माण हेतु समस्त औपचारिकताएं पूर्ण की जा चुकी है,इसलिए अब इसके निर्माण में और अधिक विलम्ब न करते हुए उक्त रेल उपरिगामी सेतु को रेलवे वर्क्स कार्यकम में सम्मिलित कराए जाने हेतु आवश्यक निर्देश प्रदान करके रेलवे की सहमति एवं लागत में सहभागिता के संबंध में राज्य सरकार को अवगत कराते हुए निर्माण संबंधी कार्य को शीघ्र कराए जाने हेतु समुचित कदम उठाए जाए ।
22. मिश्रिख संसदीय क्षेत्र के अन्तर्गत नैमिषारण्य एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है । यहां के धार्मिक स्थलों का महत्व पुराणों में भी वर्णित है । नैमिषारण्य में देश के ही नहीं बल्कि विश्व के अन्य देशों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का आनाजाना लगा रहता है । अतः नैमिषारण्य की उपरोक्त धार्मिक महत्ता को दृष्टिगत रखते हुए नैमिषारण्य रेलवे स्टेशन का सौन्दर्यकरण कराया जाए ।
23. मिश्रिख संसदीय क्षेत्र के अन्तर्गत सण्डीला एक प्रमुख रेलवे स्टेशन है । इस रेलवे स्टेशन से क्षेत्र की अनेकों महत्वपूर्ण रेलगाड़ियों का आवागमन होता है तथा नैमिषारण्य, जो कि एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है, के श्रद्धालुओं भी इसी रेलवे स्टेशन से होकर गुजरते हैं । सण्डीला एक औद्योगिक क्षेत्र भी है| मेरे क्षेत्र की जनता द्वारा इस रेलवे स्टेशन के सौन्दर्यकरण कराए जाने की मांग विगत काफी समय से की जा रही है । अतः सण्डीला रेलवे स्टेशन के सौन्दर्यकरण हेतु आवश्यक कार्यवाही की जाए ।
24. मिश्रिख संसदीय क्षेत्र के अन्तर्गत विगत20-25 वर्षों से कानपुर से बालामऊ होते हुए सीतापुर तक दो पैसेंजर रेलगाड़ी चल रही है, जो आज की तारीख में यात्रियों को देखते हुए नगण्य है और इन दो पैसेंजर रेलगाड़ियों के आवागमन में क्षेत्र में कोई विकास भी नहीं दिखायी दे रहा है । अतःयात्रियों की बढ़ती हुई संख्या को देखते हुए कानपुर से बालामऊ होते हुए सीतापुर तक इन पैसेंजर रेलगाड़ियों के अलावा दो और डी०एम०यू० रेलगाड़ी चलायी जाए, जिससे यात्रियों को आवागमन में सुविधा हो सके ।
25. मिश्रिख संसदीय क्षेत्र के अन्तर्गत नैमिषारण्य एक बहुत ही प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है । इस क्षेत्र में दधीच कुंड सहित आदिकाल के अनेक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल हैं । प्रत्येक माह अमावस्या के दिन लाखों श्रद्धालु यहां आकर इस कुंड में स्नान करते हैं तथा होली पर्व से एक माह पूर्व एक बहुत बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां आकर 84 कोस की परिक्रमा करते हैं और फिर कुंड में स्नान करते हैं तत्पश्चात होलिका दहन करते हैं । इस कुंड की एक प्रमुख विशेषता यह भी है कि चारों धाम की यात्रा के करने बाद जब तक यहां आकर 84 कोस की परिक्रमा करके कुंड में स्नान नहीं कर लिया जाता, तब तक यात्रा को पूरा नहीं माना जाता है । यहां पर आदिकाल के प्रमुख देवी देवताओं के मंदिर भी हैं । ऐसी मान्यता है कि भगवान राम जब रावण का वध करके यहां आये तो कुण्ड में स्नान कर रावण वध से मुक्त हुए । अतः दधीच कुंड की धार्मिक महत्ता को ध्यान में रखते हुए इस कुंड के सौन्दर्यकरण एवं श्रद्धालुओं के लिए जरूरी मूलभूत सुविधाएं सुलभ कराए जाने हेतु आवश्यक कार्यवाही की जाए ।
26. मिश्रिख संसदीय क्षेत्र के अन्तर्गत बिल्हौर एवं कछोना नगरपालिका / नगर पंचायत है । इन क्षेत्रों से निकलने वाली रेलवे लाइन क्रासिंग पर भारी यातायात होने के कारण कई कई घंटों तक ट्रैफिक अवरूद्ध रहता है, जिस कारण लोगों को बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ता है । यहां के लोगों की पिछले काफी समय से रेलवे कासिंग पर ओवर ब्रिज अथवा अंडर पास बनाए जाने की मांग की जा रही है, लेकिन अभी तक उनकी मांग को स्वीकार नहीं किया गया है, जिस कारण उनमें भारी रोष व्याप्त है । विगत 14वीं एवं 15वीं लोक सभा के कार्यकाल के दौरान भी अपने संसदीय क्षेत्र के उपरोक्त बिल्हौर एवं कछोना में रेलवे कॉसिंग पर ओवर ब्रिज / अंडरपास बनाए जाने हेतु लोक सभा के विभिन्न नियमों के अंतर्गत सरकार से मांग की गई थी, लेकिन उस समय की सरकार ने मेरे क्षेत्र की इस प्रमुख समस्या के निराकरण हेतु कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाए । अतः पुनः अनुरोध है कि उक्त स्थलों पर आरओबी / अंडरपास के निर्माण हेतु शीघ्र कार्यवाही की जाए ।
27. मिश्रिख संसदीय क्षेत्र के अन्तर्गत बालामऊ विधान सभा क्षेत्र में हत्यारण एक प्रमुख धार्मिक स्थल है । ऐसी मान्यता है कि भगवान राम जब रावण का वध करके यहां आये तो स्नान कर रावण वध से मुक्त हुए । यहां पर देश के दूरदराज क्षेत्रों से ही नहीं बल्कि विदेश से भी एक बड़ी तादाद में श्रद्धालुओं का आना जाना लगा रहता है । हत्यारण धार्मिक स्थल का महत्व पुराणों में वर्णित है । भादो के महीने में प्रत्येक रविार को यहां पर मेले का भी आयोजन होता है । लेकिन, श्रद्धालुओं के लिए यहां पर जरूरी मूलभूत सुविधाओं का भारी अभाव है ।
अतः हत्याहरण कुण्ड के धार्मिक महत्व को देखते हुए इस क्षेत्र को केन्द्रीय पर्यटन की सूची में शामिल करते हुए इसे पर्यटन के रूप में विकसित कर वहां का सौन्दर्यकरण किए जाने के साथ-साथ जरूरी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराए जाने हेतु समुचित कदम उठाए जाए ।
28. मिश्रिख संसदीय क्षेत्र के अन्तर्गत तीनों जनपदों में प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के अन्तर्गत बनने वाले सड़कों का निर्माण कार्य मानक/गुणवत्ता के अनुरूप नहीं करवाया जा रहा है । सड़क निर्माण में डस्ट के स्थान पर मिट्टी उपयोग में लायी जा रही है तथा पत्थर का साईज भी मानक के अनुरूप नहीं है तथा स्थानीय अधिकारियों द्वारा सड़क निर्माण कार्य में गंभीर कोताही बरतकर सड़क निर्माण कार्य में घटिया स्तर की सामग्री अथवा मानक के अनुरूप सामग्री प्रयोग में नहीं लायी जा रही है । इस प्रकार अधिकारियों की मिलीभगत एवं निविदा में उनकी संलिप्तता के परिणामस्वरूप सरकारी राशि का भारी दुरूपयोग हो रहा है , जो उचित नहीं है । अतः संसदीय क्षेत्र मिश्रिख के अन्तर्गत आने वाले सीतापुर, हरदोई एवं कानपुर नगर जनपदों में प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के अन्तर्गत बनने वाले सड़कों को मानक / गुणवत्ता के अनुरूप बनवाए जाने एवं इनकी निविदा में अधिकारियों की संलिप्ता की जांच केन्द्रीय स्तर पर एक उच्च तकनीकी समिति गठित करके करवाए जाने एवं प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के अन्तर्गत बनने वाले सड़कों का शिलान्यास / लोकार्पण अविलंब करवाए जाने हेतु आवश्यक कार्यवाही की जाए ।
29. मिश्रिख संसदीय क्षेत्र के अन्तर्गत कानपुर नगर की बिल्हौर विधान सभा क्षेत्र के अन्तर्गत काकूपुर और छत्रपुर उत्तर गंगा के निकट बसे हुए हैं । ये दोनों गांव बिलकुल पास ही पास है । दोनों गांवों के बीच खेड़ेश्वर महादेव का प्रसिद्ध मंदिर है । यहां शिवरात्रि व सावन के महीने में बहुत बड़े मेले का आयोजन किया जाता है तथा इससे कुछ ही दूर पश्चिम की ओर अश्वत्थामा का मंदिर भी है । वहीं पास में ही दूधेश्वर महादेव की एक प्राचीन प्रतिमा खुले स्थान में एक चबूतरे पर स्थापित है । यह भी उल्लेख करना है कि काकूपुर के अनेक पुराने मंदिरों के भग्नावेश हैं और पत्थर की चौखटों के खंड टीलों एवं अन्य स्थानों में फैले हुए मिलते हैं । इनमें से कई तो बौद्धकालीन हैं,जो खंडित रूप में भी पूर्व सौंदर्य का परिचय देते हैं । काकूपुर के पास और श्री खेड़ेश्वर महादेव के मंदिर से डेढ़ मील की दूरी पर सरैयां घाट है, जो प्राचीन काल से एक पवित्र तीर्थ स्थल के रूप में विख्यात रहा है । यहां अनेक छोटेबड़े पर्वो में एक बड़ी संख्या में तीर्थ यात्री गंगा स्नान हेतु आते हैं । अतः इन स्थलों की धार्मिक महत्ता को दृष्टिगत रखते हुए इनको संरक्षित और विकसित करने तथा यहां आने वाले श्रद्धालुओं को जरूरी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराए जाने हेतु धन का आवंटन किया जाए ।
30. माननीय उच्चतम न्यायालय की मंशा रही है कि न्यायपालिका का विकेन्द्रीकरण करके जनमानस को सुलभ एवं त्वरित न्याय नजदीकतम उपलब्ध हो । माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश से देश के विभिन्न राज्यों की अनेक तहसीलों में मुंसिफ न्यायालयों की स्थापना हो भी चुकी है ।
लेकिन, मेरे संसदीय क्षेत्र मिश्रिख (उ0प्र0) के अन्तर्गत तहसील बिल्हौर, जो एक अति प्राचीन एवं बड़ी तहसील है और जो जिलाधिकारी,कानपुर नगर के अधीन है, इसमें लगभग 409राजस्व ग्राम एवं नगर पंचायत तथा एक नगरपालिका परिसर व 4 थाना है । मुख्यालय तहसील बिल्हौर की दूरी जनपद मुख्यालय कानपुर नगर से लगभग 60 कि0मी0 तथा जनपद मुख्यालय कानपुर देहात से लगभग 110 कि0मी0 तक तहसील सुदूर सीमा जनपद मुख्यालय कानपुर नगर से75 कि0मी0और जनपद मुख्यालय कानपुर देहात से 125 कि0मी0की दूरी पर स्थित है तथा जनपद मुख्यालय कानपुर देहात जाने हेतु सुलभ यातायात साधनों की अत्यधिक कमी है, जिस कारण वादकारियों को अपने घर से 6से 8 घण्टे का समय लगता है । इस प्रकार अत्यधिक दूरी एवं यातायात साधनों की किल्लतों की वजह से गरीब वादकारी अपेक्षित न्याय पाने में असमर्थ रहते हैं, जो कि न्याय के नैसर्गिक सिद्धांतों एवं सभ्य समाज तथा उच्चतम न्यायालय की मंशा के भी विपरीत है । तहसील मुख्यालय परिसर बिल्हौर में न्यायालय की स्थापना हेतु पर्याप्त एवं उचित स्थल उपलब्ध है और उच्चतम न्यायालय के आदेश के आलोक में बिल्हौर तहसील के आसपास नई एवं क्षेत्रफल में अपेक्षाकृत छोटी तहसीलों में सिविल न्यायालय (मुंसिफ न्यायालय)की स्थापना भी हो चुकी अतः उच्चतम न्यायालय के आदेश के आलोक में तहसील मुख्यालय बिल्हौर, जनपद कानपुर नगर (उ0प्र0)में अपेक्षित सस्ता एवं सुलभ न्याय उपलब्ध कराने की दृष्टि से मुंसिफ न्यायालय की स्थापना करके इसको पुनः कानपुर नगर के न्यायिक क्षेत्र से ही सम्बद्ध किए जाने हेतु आवश्यक कार्यवाही की जाए ।
31. हमारा देश किसानों का देश है तथा हमारे देश की 70 प्रतिशत आबादी खेती पर ही निर्भर है । गांव वासियों का आज भी मुख्य कार्य खेती करना है । लेकिन, आज हमारे देश में विशेषतः उ0प्र0 में गन्ना कृषकों की स्थिति अत्यन्त ही दयनीय एवं सोचनीय बनी हुयी है । उन्हें गन्ने का लाभकारी मूल्य नहीं मिल पा रहा है । यह सत्य है कि हमारे देश के किसानों को कृषि पारिस्थितिकी की कमी का सामना करना पड़ता है, जिसमें आदानों की उच्च लागत,सिंचाई की अपर्याप्तता, के डिट समस्यायें, अपर्याप्त जानकारी, प्रशिक्षण की कमी, पर्यावरण प्रदूषण, पानी और छोटी जोत की कमी,तकनीकी कृषि पारिस्थितिकी इत्यादि समस्यायें शामिल हैं । लेकिन, इन समस्याओं के अतिरिक्त एक ऐसी गंभीर समस्या भी गन्ना कृषकों के समक्ष उत्पन्न हो रही है, जो अति दुष्कर है । अतः देश के गन्ना किसानों विशेषकर उ0प्र0 राज्य के जनपद सीतापुर में रामगढ़ और जवाहरपुर में स्थित चीनी मिलों द्वारा गन्ना किसानों को सीधे गन्ना खरीद पर्ची की उपलब्धता सुनिश्चित करवाकर उन्हें आर्थिक शोषण से मुक्त किए जाने हेतु आवश्यक कार्यवाही की जाए ।
32. मिश्रिख संसदीय क्षेत्र के अन्तर्गत नैमिषारण्य एक बहुत ही प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है । इस क्षेत्र में दधीच कुंड, पाण्डव किला,हनुमानगढ़ी, सुदर्शन चक (चक कुंड), मां ललिता देवी मन्दिर (शक्ति पीठ)जैसे अन्य बहुत से धार्मिक स्थल हैं । प्रत्येक माह अमावस्या के दिन लाखों श्रद्धालु यहां आकर चक कुंड में स्नान करते हैं । होली पर्व से एक-दो दिन पूर्व भी श्रद्धालु यहां आकर 84 कोस की परिकमा करते हैं और फिर चक कुंड में स्नान करते हैं तत्पश्चात होलिका दहन करते हैं । इस पवित्र धाम की एक प्रमुख विशेषता यह भी है कि चारों धाम की यात्रा के करने बाद जब तक यहां आकर 84 कोस की परिकमा करके चक कुंड में स्नान नहीं कर लिया जाता, तब तक यात्रा को पूरा नहीं माना जाता है । यहां पर देश के ही नहीं बल्कि विश्व के अन्य देशों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है । इन धार्मिक स्थलों का महत्व पुराणों में भी वर्णित है । नीमसार और मिश्रिख रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों के लिए मूलभूत सुविधाओं का भारी अभाव है । विश्व प्रसिद्ध नैमिषारण्य के धार्मिक महत्व को दृष्टिगत रखते हुए नीमसार और मिश्रिख रेलवे स्टेशन को सौन्दर्यकरण किया जाए और यहां पर पेयजल, शौचालय, विश्रामालय इत्यादि की सुविधा उपलब्ध करवायी जाये और आबिदा एक्सप्रेस का नीमसार रेलवे स्टेशन पर ठहराव दिया जाये ।
33. मिश्रिख संसदीय क्षेत्र के अन्तर्गत ही अरवल एक महत्वपूर्ण रेलवे स्टेशन है, क्योंकि इस स्टेशन के पास ही मकनपुर में मदारशाह की विश्व प्रसिद्ध मजार है । यहां पर देश के ही नहीं बल्कि विश्व के अन्य देशों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है । यह विश्व प्रसिद्ध मजार है और 596 वर्ष पुरानी है । यहां पर प्रतिदिन कई हजार लोग देश-विदेश से दर्शनार्थ आते हैं । यहां पर मई माह में उर्स लगता है, जिसमें कई लाख लोग सम्मिलित होते हैं तथा जनवरी-फरवरी के महीने में एक माह के लिए मेला लगता है । अरवल रेलवे स्टेशन, जो मकरनपुर के पास में ही है, यात्रियों/ श्रद्धालुओं के लिए जरूरी मूलभूत सुविधाओं का भारी अभाव है । विश्व प्रसिद्ध मदारशाह की दरगाह को दृष्टिगत रखते हुए अरवल रेलवे स्टेशन का सौन्दर्यकरण करते हुए यहां पर पेयजल, शौचालय, विश्रामालय इत्यादि की सुविधा उपलब्ध करवायी जाये ।
34. मिश्रिख संसदीय क्षेत्र के अन्तर्गत चौबेपुर, शिवराजपुर, बिल्हौर, अरौल स्टेशनों पर यात्रियों के लिए जरूरी सुविधाओं का भारी अभाव है । इन रेलवे स्टेशनों का सौन्दर्यकरण करते हुए वहां पर पेयजल, विद्युत, प्रतीक्षालय आदि की समुचित व्यवस्था करवायी जाये ।
35. मिश्रिख संसदीय क्षेत्र के अन्तर्गत मल्लावां, माधौगंज रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म काफी नीचे हैं, जिसकी वजह से यात्रियों को काफी परेशानी होती है । अतः प्लेटफॉर्म को ऊंचा करते हुए सीमेंट की शेड डालवायी जाये और अरौल-मकनपुर रेलवे स्टेशन पर कालिन्दी एक्सप्रेस (14723-14724) एवं पवन एक्सप्रेस (15037-15038) का ठहराव दिया जाये ।
36. मिश्रिख संसदीय क्षेत्र के अन्तर्गत सीतापुर-लखनऊ छोटी रेलवे लाईन है । इसको ब्रॉडगेज में परिवर्तित किए जाने की विगत काफी समय से मांग की जा रही है, लेकिन अब तक इस प्रकरण में कोई विशेष प्रगति नहीं हुयी है । इस छोटी रेल लाईन को ब्रॉडगेज लाईन में शीघ्र परिवर्तित किए जाने हेतु आवश्यक कार्यवाही की जाए तथा जम्मू तवी से कानपुर सेन्ट्रल रेलगाड़ी नं0 12470 (जम्मू तवी एक्सप्रेस) का मल्लावां रेलवे स्टेशन पर ठहराव दिया जाये और सीतापुर-बालामऊ पैसन्जर रेलगाड़ी नं0 54335-54336 में वर्तमान में केवल 7 कोच लगे हैं । यात्रियों की संख्या को देखते हुए यह कोच बहुत कम है । अतः इस पैसेन्जर रेलगाड़ी में कम से कम 3 रेलवे कोच और बढ़ाए जाएं ।
37. मिश्रिख संसदीय क्षेत्र के अन्तर्गत आध्यात्मिक दृष्टि से एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है । इस संसदीय क्षेत्र के जनपद कानपुर नगर के बिल्हौर विधान सभा क्षेत्र में शिवराजपुर नगर पंचायत से कुछ ही दूरी पर पावन गंगा नदी बह रही है, जहां बाबा भूतेश्वर सहित 20 अति प्राचीन मंदिर हैं । यहां पर नवरात्रों के दौरान अष्टमी के शुभ अवसर पर भगवान शंकर का श्रृंगार किया जाता है, जिसमें एक बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन करते हैं । यहां से कुछेक कि0मी0 की दूरी पर खेरेश्वर और अश्वत्थामा के भी अति प्राचीन मंदिर है । यहां पर भी दूर-दराज क्षेत्रों से बड़ी तादाद में श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है । इन धार्मिक स्थलों का महत्व पुराणों में भी वर्णित है । लेकिन, श्रद्धालुओं के लिए यहां पर जरूरी मूलभूत सुविधाओं का भारी अभाव है । अतः बाबा भूतेश्वर, खेरेश्वर एवं अश्वत्थामा मंदिरों के धार्मिक महत्व को देखते हुए गंगा घाट सहित इस पूरे क्षेत्र को केन्द्रीय पर्यटन की सूची में शामिल करते हुए इसे पर्यटन के रूप में विकसित कर वहां का सौन्दर्यकरण किए जाने के साथ-साथ जरूरी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराए जाने हेतु समुचित कदम उठाए जाए ।
38. मिश्रिख संसदीय क्षेत्र के अन्तर्गत सण्डीला, जो जनपद हरदोई में आता है, एक औद्योगिक क्षेत्र है । यदि सण्डीला को विशेष आर्थिक जोन में शामिल कर लिया जाए तो इस पिछड़े हुए अनुसूचित जाति बाहुल्य क्षेत्र का विकास तीव्र गति से हो सकता है । सरकार की भी नीति रही है कि पिछड़े क्षेत्रों का चहुमुखी विकास किया जाए । अतः सण्डीला औद्योगिक क्षेत्र को विशेष आर्थिक जोन में शामिल किए जाने हेतु आवश्यक कार्यवाही की जाए, ताकि अनुसूचित जाति बाहुल्य क्षेत्र का विकास हो सके ।
39. मिश्रिख संसदीय क्षेत्र के अन्तर्गत मल्लावां-बिल्हौर विधान सभा क्षेत्रों को जोड़ने के लिए गंगा नदी पर पुल न होने के परिणामस्वरूप लोगों को दूसरे जनपद उन्नाव के बांगरमऊ क्षेत्र, जो 35 कि0मी0 दूर है, से होकर गुजरना पड़ता है । इसमें उनको लगभग एक घंटा लगता है । इसमें समय भी लगता है तथा पेट्रोल भी अधिक व्यय होता है । मुझे भी संसदीय क्षेत्र के भ्रमण के दौरान बिल्हौर विधान सभा क्षेत्र पहुंचने में काफी असुविधा का सामना करना पड़ता है, जिस कारण संसदीय दायित्व के निर्वहन में काफी बाधा उत्पन्न होती है ।
मल्लावां तथा बिल्हौर विधान सभा क्षेत्रों को गंगा नदी पर पुल बनाकर आपसे में जोड़ने की मांग विगत काफी समय से स्थानीय लोग कर रहे हैं, लेकिन अभी तक उनकी मांग को स्वीकार नहीं किया गया है । यदि वहां सर्वे करवाकर एक निर्दिष्ट स्थान पर गंदी नदी पर एक पुल बनाया दिया जाता है तो इससे स्थानीय लोगों को काफी लाभ पहुंचेगा तथा उनके समय की बरबादी भी बचेगी ।
अतः ऐसी स्थिति में मल्लावां और बिल्हौर विधान सभा क्षेत्रों को आपस में जोड़ने हेतु गंगा नदी पर पुल बनाये जाने हेतु सर्वे करवाकर शीघ्र ही पुल का निर्माण करवाए जाने हेतु आवश्यक कार्यवाही की जाए ।
40. मिश्रिख संसदीय क्षेत्र के अन्तर्गत हरदोई जनपद की सण्डीला तहसील में अनेक देवी-देवताओं के मंदिर हैं तथा यहां पर आदिकाल कुण्ड व हत्याहरण कुण्ड भी है । ऐसी मान्यता है कि भगवान राम जब रावण का वध करके यहां आये तो कुण्ड में स्नान कर रावण वध से मुक्त हुए । यहां पर 84 कोसी परिकमा भी होती है । नैमिषारण्य में प्रसिद्ध दधीच कुण्ड के साथ-साथ पाण्डव किला, हनुमानगढ़ी, सुदर्शन चक (चक कुंड), मां ललिता देवी मन्दिर (शक्ति पीठ)जैसे अन्य बहुत से धार्मिक स्थल हैं । प्रत्येक माह अमावस्य के दिन लाखों श्रद्धालु यहां आकर चक कुंड में स्नान करते हैं । होली पर्व से एक-दो दिन पूर्व भी श्रद्धालु यहां आकर 84 कोस की परिकमा करते हैं और फिर चक कुंड में स्नान करते हैं तत्पश्चात होलिका दहन करते हैं । इस पवित्र धाम की एक प्रमुख विशेषता यह भी है कि चारों धाम की यात्रा के करने बाद जब तक यहां आकर 84 कोस की परिकमा करके चक कुंड में स्नान नहीं कर लिया जाता, तब तक यात्रा को पूरा नहीं माना जाता है ।
अतः क्षेत्र में स्थित इनधार्मिक स्थलों में दूर-दराज क्षेत्रों से बड़ी तादाद में श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है । इन धार्मिक स्थलों का महत्व पुराणों में भी वर्णित है । लेकिन,श्रद्धालुओं के लिए यहां पर जरूरी मूलभूत सुविधाओं का भारी अभाव है । अतः आदिकाल कुण्ड, हत्याहरण कुण्ड व दधीच कुण्ड सहित अन्य देवी-देवताओं के धार्मिक महत्व को देखते हुए इस क्षेत्र को केन्द्रीय पर्यटन की सूची में शामिल करते हुए इसे पर्यटन के रूप में विकसित कर वहां का सौन्दर्यकरण किए जाने के साथ-साथ जरूरी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराए जाने हेतु आवश्यक कार्यवाही की जाए ।
41. मिश्रिख संसदीय क्षेत्र के अन्तर्गत मल्लावां-बिलग्राम विधान सभा क्षेत्र गंगा नदी से बाढ़ प्रभावित इलाका है । यहां पर प्रत्येक वर्ष गंगा नदी से बाढ़ आने पर कटरी-परसौला-छिबरामऊ सहित काफी गांवों की न केवल फसल बरबाद हो जाती है, बल्कि उनके मकान भी बुरी तरह से क्षतिग्रस्त होकर वे आवास विहीन हो जाते हैं । ऐसी स्थिति में कृषि उपज बरबाद होने पर जहां उनकी जीविका का सहारा समाप्त हो जाता है, वहीं वे बेघर भी हो जाते हैं । अतः गंगा नदी से बाढ़ प्रभावित ग्रामों का उच्चीकरण कराने, पानी का फैलाव रोकने, आवासहीन ग्रामीणों को आवास की व्यवस्था कराए जाने तथा प्रति वर्ष आने वाली बाढ़ से बचाए जाने हेतु एक बांध मेंहदीघाट से होते हुए राजघाट सड़िया पुल तक केन्द्रीय आवंटन से बनाए जाने हेतु आवश्यक कदम उठाए और प्रतिवर्ष बाढ़ से प्रभावित होने वाले व्यक्तियों के लिए राहत और पुनर्वास की व्यवस्था की जाए ।
42. मिश्रिख संसदीय क्षेत्र के अन्तर्गत कानपुर नगर के निकटवर्ती मिश्रिख संसदीय क्षेत्र के अन्तर्गत विधान सभा क्षेत्र बिल्हौर तथा निकटवर्ती क्षेत्र कानपुर नगर व जाजमऊ में बड़ी संख्या में कल-कारखाने स्थापित हैं । उनमें प्रदूषण रहित संयंत्र न होने के परिणामस्वरूप आसपास में भारी प्रदूषण फैल रहा है । विश्व के सर्वाधिक प्रदूषित शहरों की सूची में कानपुर, जो मेरे संसदीय क्षेत्र मिश्रिख से सटा हुआ है, का 109वां स्थान है । देश में प्रदूषित शहरों की सूची में कानपुर तथा इसके निकटवर्ती क्षेत्र का कौन सा स्थान होगा, इसका सहज अनुमान लगाया जा सकता है ।
इस क्षेत्र में कई कारखाने तो ऐसे हैं, जिनके पास से गुजरने पर काफी दुर्गध होने के कारण घुटन महसूस होती है । ऐसी स्थिति में वहां लोगों को भारी परेशानी हो रही है । मेरे क्षेत्र के लोगों को प्रदूषित वायु सांस के माध्यम से शरीर के अन्दर जाने के कारण तरह-तरह की - अस्थमा,फेफड़े और हृदय रोग, सांस की एलर्जी जैसी गंभीर बीमारियां हो रही हैं । यह छिपा नहीं है कि आंतरिक वायु प्रदूषण से देश में काफी लोग प्रभावित होते हैं । मेरा संसदीय क्षेत्र भी इससे बचा नहीं है । इस क्षेत्र में कारखानों के प्रदूषित पानी से फसलों पर भी विपरीत प्रभाव पड़ रहा है । अतः सण्डीला और बिल्हौर विधान सभा क्षेत्रों के साथ-साथ कानपुर नगर और जाजमऊ को प्रदूषण रहित बनाये जाने हेतु आवश्यक कदम उठाए ।
43. मिश्रिख संसदीय क्षेत्र के अन्तर्गत कानपुर-बिल्हौरकन्नौज-एटा-बेवर-अलीगढ़-बुलन्दशहर-गाजियाबाद-दिल्ली मार्ग, जो शेरशाह सूरी द्वारा बनवाया गया था, होकर गुजरता है | यह देश का एक महत्वपूर्ण व ऐतिहासिक जी0टी0 मार्ग है । इस मार्ग से दिल्ली जुड़ा होने के कारण यातायात का भारी दबाव बना रहता है । पिछले काफी समय से इस मार्ग को चार लेन का बनाये जाने की मांग की जा रही है, लेकिन अभी तक इस मार्ग को चार लेन में परिवर्तित नहीं किया गया है । जिस कारण यहां आये दिन गंभीर सड़क दुर्घटनाएं होती रहती है, जिसमें काफी लोगों की मृत्यु हो जाती हैं और बड़ी संख्या में लोग गंभीर रूप से घायल भी हो जाते हैं । मिश्रिख संसदीय क्षेत्र से गुजरने वाले इस मार्ग की कानपुर-बिल्हौर की स्थिति बहुत ही खराब है । बरसात के दिनों में वहां जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं, उसकी मरम्मत भी नहीं की जा रही है । इस मार्ग के रख-रखाव से सम्बन्धित अभियंताओं से सम्पर्क करने पर गड्ढ़े की मरम्मत का कार्य नहीं किया जा रहा है । सम्बन्धित अभियंता रख-रखाव के लिए आयी केन्द्रीय राशि का दुरूपयोग कर रहे हैं और जिस कार्य के लिए उसका आवंटन किया गया है, उसके लिए व्यय न करके सरकारी धन की धांधली कर रहे हैं ।
अतः कानपुर-बिल्हौर-कन्नौज-एटा-बेवर-अलीगढ़बुलन्दशहर-गाजियाबाद-दिल्ली मार्ग पर एक प्रत्येक निश्चित दूरी के पश्चात समुचित चिकित्सा सेवा उपलब्ध कराये जाने के साथ-साथ बिल्हौर के निकट एक ट्रामा सेन्टर की स्थापना किए जाने और साथ ही इस मार्ग का जीर्णोद्धार करते हुए इसको चार लेन का बनाये जाने और बरसात की मौसम में जो बड़े-बड़े गड्ढ़े बन जाते हैं, उसकी समय पर मरम्मत किए जाने हेतु समुचित कदम उठाए जाए ।
44. मिश्रिख संसदीय क्षेत्र के अन्तर्गत आने वाले ग्रामीण अंचलों में विद्युत की बहुत ही दयनीय स्थिति है । इन ग्रामीण अंचलों में कई-कई दिनों तक बिजली गायब रहती है तथा गर्मी की मौसम में तो स्थिति और भी खराब हो जाती है, जिस कारण विद्युत के अभाव में ग्रामीणों, किसानों एवं अन्य जन सामान्य को भारी कठिनाई का सामना करना पड़ता है । अतः मिश्रिख संसदीय क्षेत्र में विद्युत की भारी किल्लत को ध्यान में रखते हुए इस क्षेत्र में एक और एन0टी0पी0सी0 का विद्युत संयंत्र स्थापित किए जाने हेतु कारगर कदम उठाए जाए ।
45. मिश्रिख संसदीय क्षेत्र के अन्तर्गत ग्रामीण अंचलों में पीने के पानी का भारी अभाव है । यहां पर लोग स्वच्छ पानी के अभाव में संदूषित पानी को पीने के लिए मजबूर हैं, जिसके परिणामस्वरूप वे तरह-तरह की बीमारियों से ग्रस्त हो रहे हैं ।
मिश्रिख संसदीय क्षेत्र एक बहुत ही पिछड़ा हुआ क्षेत्र है । हालांकि प्रशासन की ओर से इण्डिया मार्का हैण्ड पम्प मिश्रिख संसदीय क्षेत्र के अन्तर्गत लगाने का प्रावधान किया गया है,लेकिन क्षेत्र में पानी की भारी किल्लत को देखते हुए इनकी संख्या बिलकुल नगण्य है । अतः मिश्रिख संसदीय क्षेत्र के अन्तर्गत पीने के पानी की भारी किल्लत को ध्यान में रखते हुए वहां पर केन्द्रीय धनराशि से उत्तम गुणवत्ता के इण्डिया मार्का हैंड पम्प लगवाये जाने हेतु कारगर कदम उठाए जाए ।
46. मेरे संसदीय क्षेत्र मिश्रिख (उ0प्र0) के अन्तर्गत आने वाले तीन जनपद सीतापुर, हरदोई एवं कानपुर नगर में राईस मिलर्स की भारतीय खाद्य निगम के जिला एवं क्षेत्रीय स्तर के अधिकारियों के साथ मिलीभगत से चावल के स्टोर के लिए जो मानक निर्धारित किए गए हैं, उन मानकों को दरकिनार करते हुए घटिया गुणवत्ता का चावल गोदाम में स्टोरेज किया जा रहा है, जिससे सरकार की छवि धूमिल हो रही है । इस संबंध में,मेरे द्वारा भारतीय खाद्य निगम के वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र भी लिखा है, लेकिन अब तक उस पर कोई कार्यवाही नहीं हुई है ।
अतः मेरे संसदीय क्षेत्र मिश्रिख (उ0प्र0)के अन्तर्गत आने वाले तीनों जनपद सीतापुर,हरदोई एवं कानपुर नगर में भारतीय खाद्य निगम के अधिकारियों द्वारा की जा रही अनियमित्ताओं की जांच केन्द्रीय स्तर पर एक उच्च स्तरीय तकनीकी समिति गठित करके जांच करवाकर दोषी अधिकारियों के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही सुनिश्चित की जाए, जिससे हमारी सरकार की छवि पर कोई आंच न आए ।
47. मेरे संसदीय क्षेत्र मिश्रिख (उ0प्र0) के अन्तर्गत डुडवा जमौली, ब्लॉक शिवराजपुर, बिल्हौर, जिला कानपुर नगर में एनटीपीसी द्वारा स्थापित किए जा रहे सोलर प्लांट के संबंध में जानकारी दी गई है कि निचली गंगा नहर के लाइनिंग का कार्य एनटीपीसी के प्रस्तावित तापीय परियोजना के जल मांग को पूरा करने के लिए कार्यदेश उ0प्र0 सिंचाई विभाग को जारी किया गया था एवं उ0प्र0 सिंचाई विभाग द्वारा कार्य अप्रैल, 2014 में प्रारम्भ किया गया । लेकिन, प्रस्तावित तापीय परियोजना के मंजूरी नहीं मिल पाने के कारण इस कार्य को एनटीपीसी द्वारा मई, 2016 में कार्य पूरा होने के पहले ही रूकवा दिया गया एवं इस कार्य को डिपॉजिट वर्क के आधार पर अवार्ड किया गया तथा इस कार्य के गुणवत्ता मापदंड एवं सत्यापन का कार्य पूर्णतया उ0प्र0 सिंचाई विभाग के मानकों के अनुसार उ0प्र0 सिंचाई विभाग द्वारा ही किया गया है ।
लेकिन, केन्द्रीय स्तर पर शिकायत करने के पश्चात भी राज्य सरकार के सिंचाई विभाग द्वारा 108 करोड़ रू0 की केन्द्रीय राशि के कथित दुरूपयोग की जांच एनटीपीसी के अधिकारियों ने आज तक नहीं करवाई है ।
अतः मेरा अनुरोध है कि इस परियोजना में कथित अनियमित्ताओं की जांच केन्द्रीय मंत्रालय में एक उच्च स्तरीय तकनीकी समिति गठित करके से करवाई जाए, ताकि इस घोटाले में शामिल एनटीपीसी और राज्य सरकार के सिंचाई विभाग के अधिकारियों की संलिप्ता उजागर होकर उनके विरूद्ध विभागीय कार्यवाही सुनिश्चित की जा सके ।
48. मेरे संसदीय क्षेत्र मिश्रिख (उ0प्र0) में बालामऊ रेलवे स्टेशन पर ओवर ब्रिज न होने के कारण यातायात अवरुद्ध होता है, जिससे लोगों का काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है तथा यहां पर बुकिंग विंडो जो मुख्य शहर से विपरीत दिशा में स्थित है, वहां पर यात्रियों को टिकट के लिए लेवल कॉसिंग पार करने के बाद करीब आधा कि0मी0 चलकर स्टेशन के दूसरी ओर जाना पड़ता है तो यात्रीगण तब टिकट खरीद पाते हैं और जब कभी जल्दी में कोई यात्री सीधे स्टेशन में घुसकर टिकट खरीदने जाता है तो उसको टिकट निरीक्षक पकड़कर तंग करते हैं और अवैध वसूली भी करते हैं तथा कभी-कभी जल्दी में यात्री बिना टिकट यात्रा करने को भी मजबूर होते हैं,जिससे रेलवे को हानि भी होती हैं ।
इस संबंध में, यह भी अवगत कराना है कि स्टेशन के दूसरी ओर मुख्य शहर की तरफ का हिस्सा खुला पड़ा है,जो काफी गंदा रहता है और शहर के लोगों के लिए बीमारी का कारण भी बनता है । यदि मुख्य शहर की ओर एक प्लेटफॉर्म बनाकर इस पर एक बुकिंग विंडो स्थानांतरित कर दी जाए तो यहां के लोगों की सभी समस्याओं का सामधान हो जाएगा तथा यात्रियों को टिकट लेने में भी कठिनाई नहीं होगी और रेलवे को ज्यादा राजस्व प्राप्त होने के साथ-साथ शहर को भी स्वच्छ रखने में सहायक होगा ।
अतः मेरा अनुरोध है कि बालामऊ रेलवे स्टेशन पर ओवर ब्रिज तथा इस स्टेशन के मुख्य शहर की ओर एक प्लेटफॉर्म बनवाए जाने हेतु निर्देश प्रदान करके उस ओर बुकिंग विंडो स्थानांरित करने की कृपा करें ताकि क्षेत्र की जनता इससे लाभान्वित हो सके और स्वच्छ भारत मिशन के अन्तर्गत शहर की स्वच्छता भी बनी रहे ।
49. मेरे संसदीय क्षेत्र मिश्रिख, जनपद सीतापुर (उ0प्र0) के अन्तर्गत डुड़वा जमौली, ब्लॉक शिवराजपुर, बिल्हौर, जिला कानपुर नगर में एनटीपीसी द्वारा स्थापित किए जा रहे सोलर प्लांट की ओर आकर्षित करते हुए अवगत कराना चाहूंगा कि जिस कम्पनी (विकम सोलर)को यह कार्य सौंपा गया है, उसका कार्य संतोषजनक तरीके से नहीं चल रहा है तथा निर्माण सामग्री भी गुणवत्ता के अनुरूप उपयोग में नहीं जायी जा रही है एवं लाईनिंग के कार्य में मौरंग की जगह डस्ट को उपयोग में लाया जा रहा है और केबिल के नीचे बालू भरने की जगह बालू व मिट्टी का इस्तेमाल किया जा रहा है एवं निचली गंगा नहर प्रखण्ड कानपुर में 241 कि0मी0 नहर की लाइनिंग के कार्य में 100 करोड़ से अधिक राशि व्यय करने के बाद लाइनिंग की आज स्थिति जीर्णशीर्ण है ।
मेरे संसदीय क्षेत्र में स्थापित की जा रही उपरोक्त परियोजना में कथित अनियमित्ताओं जांच केन्द्रीय मंत्रालय में एक उच्च स्तरीय तकनकी समिति गठित करके से करवाए जाने हेतु अनुरोध भी किया गया है । लेकिन, इस संबंध में अब तक कोई कार्यवाही नहीं हुई है, जिसके परिणामस्वरूप सरकारी धन का दुरूपयोग जारी है ।
अतः मेरा अनुरोध है कि मेरे संसदीय क्षेत्र में स्थापित की जा रही उक्त परियोजना में कथित अनियमित्ताओं की जांच केन्द्रीय मंत्रालय स्तर पर एक उच्च स्तरीय तकनीकी समिति गठित करके करवाए जाने हेतु निर्देश प्रदान किए जाएं और यह भी सुनिश्चित करेंगे कि मेरे संसदीय क्षेत्र की उक्त परियोजनाओं को समय पर पूरा किया जाए ।
50. राष्ट्रीय राजमार्ग सं0 24 के सीतापुर-अटरिया और राष्ट्रीय राजमार्ग सं0 27 के कानपुर-लखनऊ पर स्थित टोल गेट पर कई-कई घंटों तक यातायात अवरूद्ध रहता है तथा इन टोल गेट पर एम्बुलेंस, फायर ब्रिग्रेड, पुलिस इत्यादि वाहनों के लिए आपातकाल में निकलने हेतु अलग से कोई लेन न होने की वजह से ये वाहन भी यातायात में कई-कई घंटों तक अवरूद्ध रहते हैं । अतः इन वाहनों के लिए आपातकालीन स्थिति में टोल गेट पर अलग से लेन बनवायी जाए ।
राष्ट्रीय राजमार्ग सं0 24 पर खैराबाद के आगे सिर्फ 10 कि0मी0 ही सड़क बनी है और इसके आगे बाकि कार्य अधूरा पड़ा हुआ है । लेकिन,लखनऊ से खैराबाद दो टोल देकर टोल वसूली विगत 8-9 वषों से की जा रही है तथा इन दोनों टोल के बीच में अभी तक फ्लाई ओवर भी नहीं बने हैं,जिसकी वजह से कस्बों में अक्सर जाम की समस्या बनी रहती है । अतः अधूरे मार्ग का निर्माण एवं जाम की समस्या के निजात के लिए फ्लाई ओवर का निर्माण करवाया जाए ।
उपरोक्त राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल कम्पनी के जो फास्ट टेग सेंसर/सिस्टम हैं,उसकी गुणवत्ता सही न होने की वजह से स्केन करने में काफी अधिक समय लगता है तथा यहां कार्यरत स्टॉफ भी प्रशिक्षित नहीं है ।
राष्ट्रीय राजमार्ग सं0 24 पर टोल कम्पनी के द्वारा डिवाईडरों पर पौधों की उचित देखभाल भी नहीं की जा रही है, जिसकी वजह से एक मार्ग से दूसरे मार्ग पर वाहनों की लाईट लगती है और दुर्घटना होने की संभावना बनी रहती है । इस मार्ग पर लखनऊ से सीतापुर तक कई जगहों पर सड़क हल्की-हल्की धंसी हुई हैं तथा मार्ग पर सफेद पट्टी और दिशा निर्देश इत्यादि का न केवल अभाव है, बल्कि सफेद पट्टी पर रंगाई-पुताई की भी उचित व्यवस्था नहीं है, जिस कारण दुर्घटना की समस्या बनी रहती है ।
मेरा अनुरोध है कि उपर्युक्त समस्याओं के निराकरण हेतु समुचित कार्यवाही की जाए ।
51. मुझे लखनऊ से अपने संसदीय क्षेत्र में भ्रमण के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग सं0 24 एवं राष्ट्रीय राजमार्ग सं0 27 के कानपुर-लखनऊ से होकर गुजरना पड़ता है । लेकिन, इन मार्गों में अत्यधिक खामियां हैं, जिनका तुरन्त निदान कराए जाने की आवश्यकता है ।
इस संबंध में, अवगत कराना है कि लखनऊ-सीतापुर-बरेली-दिल्ली (राष्ट्रीय राजमार्ग 24) पर इंटौजा टोल (लखनऊ) व खैराबाद टोल (सीतापुर)पर हमेशा यातायात अवरूद्ध रहता है और फास्ट टैग वाली लाइन में भी 5-10 मिनट से अधिक का समय लगता है तथा आकस्मिक सेवाओं जैसे - एंबुलेंस,पुलिस वाहन आदि जरूरी वाहनों के लिए भी अलग से लेन की कोई व्यवस्था नहीं है, जिस कारण एंबुलेंस भी काफी समय तक जाम में फंस जाती है । यह भी अवगत कराना है कि लखनऊ-सीतापुर मार्ग पर कई जगहों पर गड्ढे बने हुए हैं, जिनसे दुर्घटना की स्थिति हर समय बनी रहती है तथा इस मार्ग पर साइड में वृक्षों की समुचित देखरेख न होने से लाईट वाहनों के ऊपर पड़ती है, जिससे अक्सर दुर्घटनाएं होती रहती हैं ।
इंटौजा टोल गेट के पास मुख्य राष्ट्रीय राजमार्ग पर टोल मैनेजर की कथित मिलीभगत से सब्जी मण्डी आयोजित की जाती है,जिस कारण सुबह 5 से 10 बजे तक यातायात न केवल पूरी तरह से अवरूद्ध हो जाता है, बल्कि दुर्घटना की स्थिति बनी रहती है ।
इंटौजा टोल पर लगे सेंसर की गुणवत्ता अत्यधिक खराब है,जिसकी वजह सेंस करने में काफी अधिक समय लगता है तथा यहां स्थित टोल मैनेजर व अन्य कार्यरत कर्मचारियों की कार्यशैली व भाषाशैली भी अभद्र है और इनका व्यवहार वाहन चालकों के प्रति संतोषजनक नहीं है । ये वाहन वालों के साथ अभद्रता से पेश आते हैं ।
अतः उक्त मार्गों से संबंधित निम्नांकित समस्याओं का अविलम्ब समाधान कराए जाने हेतु समुचित कार्यवाही की जाए :
(1) राष्ट्रीय राजमार्ग सं0 24 के सीतापुर-अटरिया और राष्ट्रीय राजमार्ग सं0 27 के कानपुर-लखनऊ पर स्थित टोल गेट पर कई-कई घंटों तक यातायात अवरूद्ध रहता है तथा इन टोल गेट पर एम्बुलेंस,फायर ब्रिग्रेड,पुलिस इत्यादि वाहनों के लिए आपातकाल में निकलने हेतु अलग से कोई लेन न होने की वजह से ये वाहन भी यातायात में कई-कई घंटों तक अवरूद्ध रहते हैं । अतः इन वाहनों के लिए आपातकालीन स्थिति में टोल गेट पर अलग से लेन बनवायी जाए और टोल गेट पर यातायात की अवरूद्ध होने की समस्या से निजात हेतु उचित उपाए किए जाएं ।
(2) राष्ट्रीय राजमार्ग सं0 24 पर खैराबाद के आगे सिर्फ 10 कि0मी0 ही सड़क बनी है और इसके आगे बाकि कार्य अधूरा पड़ा हुआ है । लेकिन,लखनऊ से खैराबाद दो टोल देकर टोल वसूली विगत 8-9 वषों से की जा रही है तथा इन दोनों टोल के बीच में अभी तक फ्लाई ओवर भी नहीं बने हैं,जिसकी वजह से कस्बों में अक्सर जाम की समस्या बनी रहती है । अतः अधूरे मार्ग का निर्माण एवं जाम की समस्या के निजात के लिए फलाई आवर का निर्माण करवाया जाए ।
(3) इन राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल कम्पनी के जो फास्ट टेग सेंसर/सिस्टम हैं,उसकी गुणवत्ता सही न होने की वजह से स्केन करने में काफी अधिक समय लगता है तथा यहां कार्यरत स्टॉफ भी प्रशिक्षित नहीं है । इस वजह से भी यातायात अवरूद्ध रहता है । अतः इसमें भी सुधार किए जाने की आवश्यकता है,ताकि अनावश्यक रूप से यातायात अवरूद्ध न हो ।
(4) राष्ट्रीय राजमार्ग सं0 24 पर टोल कम्पनी के द्वारा डिवाईडरों पर पौधों की उचित देखभाल भी नहीं की जा रही है, जिसकी वजह से एक मार्ग से दूसरे मार्ग पर वाहनों की लाईट लगती है और दुर्घटना होने की संभावना बनी रहती है । अतः डिवाईडरों पर पौधों की उचित देखभाल की व्यवस्था की जाए ।
(5) राष्ट्रीय राजमार्ग सं0 24 पर लखनऊ से सीतापुर तक कई जगहों पर सड़क हल्की-हल्की धंसी हुई हैं तथा मार्ग पर सफेद पट्टी और दिशा निर्देश इत्यादि का न केवल अभाव है, बल्कि सफेद पट्टी पर रंगाई-पुताई की भी उचित व्यवस्था नहीं है, जिस कारण दुर्घटना की समस्या बनी रहती है । अतः इनका भी निराकरण करवाया जाए ।
52. मेरे संसदीय क्षेत्र मिश्रिख (उ0प्र0) के जनपद हरदोई में सण्डीला औद्योगिक क्षेत्र में स्थित कई कम्पनियों के संचालकों द्वारा श्रम कानूनों का घोर उल्लंघन करके श्रमिकों का मानसिक शोषण एवं उत्पीड़न किया जा रहा है तथा उनकी काम की पाली से अधिक कार्य लेकर न्यूनतम भत्ता दिया जा रहा है । इन कम्पनियों में कार्यरत स्थायी एवं ठेकेदारी पर कार्यरत श्रमिकों को श्रम कानूनों के अनुरूप ई0एस0आई0, पी0एफ0, सामाजिक सुरक्षा सहित अन्य सुविधाएं भी नहीं दी जारी है तथा न ही विशेषतः ठेका श्रमिकों के पी0एफ0 की राशि उनके एकाउंट में समय पर ट्रांसफर की जाती है । मेरे द्वारा श्रमिको के शोषण को रोकने हेते पत्र भी लिखे गए हैं । लेकिन, अभी भी श्रमिकों का शोषण यथावत जारी है ।
अतः मेरे संसदीय क्षेत्र के अन्तर्गत सण्डीला (जनपद हरदोई)औद्योगिक क्षेत्र में स्थित कम्पनियों में कार्यरत श्रमिकों के श्रम उत्पीड़न की उच्च स्तरीय जांच कराकर उनके श्रम उत्पीड़न को रोकने हेतु समुचित कार्यवाही की जाए ।
53. मेरे संसदीय क्षेत्र मिश्रिख (उ0प्र0) के अन्तर्गत सण्डीला के लड्डू की मिठास पूरे देश में विख्यात है तथा हरदोई से सटी संडीला तहसील का नाम इन मीठे और खास तरह के लड्डुओं ने खूब रोशन किया है । इन लड्डुओं की इतनी मांग रही है कि देश में नहीं बल्कि विदेश तक में यहां के लड्डू भेजे जाते रहे हैं ।
यहां यह उल्लेख करना भी उचित होगा कि हिन्दी की फिल्म 'पीकू'में विश्व प्रसिद्ध अभिनेता अमिताभ बच्चन और इरफान खान तथा दीपिका पाडुकोण और हिन्दी फिल्म "हम साथ-साथ हैं" में सलमान खान और सैफ अली खान ने भी सण्डीला की संस्कृति के रूप में इस ऐतिहासिक लड्डू का जिक किया है । मेरे संसदीय क्षेत्र के अन्तर्गत मल्लावां में भी बेसन का लढा दूर-दूर तक प्रसिद्ध रहा है । लेकिन,आज यह बेसन का लढा विलुप्त होने की स्थिति में पहुंच रहा है,जिसको बढ़ावा दिए जाने की आवश्यकता है ।
यह हम सभी देशवासियों के लिए प्रसन्नता की बात है कि माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने 30 दिसम्बर, 2019 में"मन की बात' कार्यकम में देश की आजादी के 75वें वर्ष के पूरा होने तक आगामी तीन वर्षों के लिए स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने का आह्वान किया है तथा लोगों को भी स्थानीय उत्पादों को ही खरीदने के लिए प्रेरित किया है ।
लेकिन, आज यह हमारा दुर्भाग्य है कि वर्तमान में सण्डीला के लड्डू की ऐतिहासिक संस्कृति और लोकप्रियता विलुप्त होकर काजू की बर्फी जैसी दूसरी मिठाइयों की ओर बढ़ रही है,जिसका प्रभाव सण्डीला के इस स्वदेशी उत्पाद पर पड़ रहा है ।
अतः इस संबंध में अनुरोध है कि हमारे लोकप्रिय माननीय प्रधानमंत्री जी की स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने की नीति को ध्यान में रखते हुए सण्डीला में लुप्त हो रहे विश्व प्रसिद्ध लड्डुओं और मल्लावां के बेसन के लट्ठा के उत्पाद को बढ़ावा दिए जाने के लिए एक योजना बनाकर सण्डीला, जो एक औद्योगिक क्षेत्र भी है,में फूड प्रोसेसिंग यूनिट की स्थापना किए जाने हेतु समुचित निर्देश प्रदान किए जाए,जिससे इस स्वदेशी उत्पाद को संरक्षण मिल सके और विश्व में भी इसका निर्यात सुलभ हो सके ।
54. यह प्रसन्नता की बात है कि माननीय प्रधानमंत्री श्रद्धेय नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में खाद्य एवं प्रसंस्कण उद्योग मंत्रालय मेगा फूड पार्क स्कीम के अन्तर्गत किसानों, प्रसंस्करणकर्ताओं तथा खुदरा विकेताओं को एक साथ लाते हुए कृषि उत्पादन को बाजार से जोड़ने के लिए एक तंत्र उपलब्ध करा रहा है, ताकि किसानों की आय में वृद्धि के साथ-साथ पिछड़े ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर सृजित किए जा सके ।
इस संबंध में, अवगत कराना है कि मेरा संसदीय क्षेत्र मिश्रिख (उ0प्र0) एक अनुसूचित जाति बाहुल्य क्षेत्र है, जिसमें सीतापुर, हरदोई और कानपुर नगर जनपदों के पिछड़े हुए क्षेत्र आते हैं । इस क्षेत्र में फल और सब्जियों की खेती की बहुतायत है तथा आम, अमरूद इत्यादि फलों के साथ सब्जियों की भी काफी उपज होती है, लेकिन क्षेत्र के किसानों को उनके उत्पाद का उचित लाभ नहीं मिल पाता है ।
अतः अनुरोध है कि केन्द्रीय योजना के अन्तर्गत मेरे संसदीय क्षेत्र में सण्डीला, जो एक औद्योगिक क्षेत्र भी है,में मेगा पार्क फूड की स्थापना किए जाने के साथ-साथ फूड प्रोसेसिंग यूनिट की भी स्थापना किए जाने हेतु समुचित कार्यवाही की जाए ।
55. हमारा देश नदियों का देश है तथा इन जल निकायों के आसपास अनेक दर्शनीय एवं धार्मिक स्थल है । वर्तमान में देश में वाटर स्पोर्टस का केज न केवल निरंतर बढ़ता जा रहा है, बल्कि पर्यटन क्षेत्र में काफी लोकप्रिय भी हो रहा है ।
इस संबंध में, अवगत कराना है कि मेरे संसदीय क्षेत्र मिश्रिख (उ0प्र0) के अन्तर्गत ग्राम चौबेपुर,जनपद कानपुर नगर में गंगा नदी के किनारे कुल देवी बंदीमाता मंदिर है, जहां निकटवर्ती जनपदों से नहीं बल्कि दूसरे क्षेत्रों से भी लोग दर्शनार्थ आते हैं । इस क्षेत्र में बंदीमाता मंदिर की ऐतिहासिक महत्ता है तथा यहां पर गंगा माता की पावन आरती भी की जाती है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं । केन्द्रीय स्तर से इस स्थल को पर्यटनीय दृष्टि से बढ़ावा दिए जाने की आवश्यकता है ।
अतः अनुरोध है कि उपरोक्त स्थल, जो गंगा एवं गोमती नदी के बीच गंगा नदी के किनारे स्थित है, में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए वहां पर केन्द्रीय स्तर पर वाटर स्पोर्टस की स्थापना किए जाने हेतु समुचित कार्यवाही की जाए ।
56. मेरे संसदीय क्षेत्र में विशेषकर मिश्रिख, सण्डीला एवं बालामऊ विधान सभा क्षेत्रों में दिनांक 13-3-2020 में प्राकृतिक आपदा के कहर से कई लोगों की मृत्यु हो गयी तथा इस वर्ष मार्च के महीने में दूसरी बार बरसात और आंधी के बीच भारी ओलावृष्टि हुई । इस प्राकृतिक आपदा से मेरे संसदीय क्षेत्र के किसानों को पशुधन एवं फसल की भारी क्षति हुई है तथा उनकी आम की फसल भी पूरी तरह से नष्ट हो गई है और सरसों तथा गेहूं की फसल जो तैयार हो चुकी थी और जिसको वे अपने घर पर लाने की तैयारी में थे, वह भी पूरी तरह से नष्ट हो गयी है और साथ ही ईट के भट्टों की कच्ची ईंट भी पूरी तरह से बरबाद हो गई है । ऐसी स्थिति में मेरे संसदीय क्षेत्र के किसान एवं ग्रामीण भारी आर्थिक संकट में पहुंच गए हैं ।
मेरे संसदीय क्षेत्र के बिल्हौर विधान सभा के ब्लॉक ककवन और बिल्हौर में भी 10 जून, 2020 में भारी ओलावृष्टि होने से हजारों किसान प्रभावित हुए हैं और उनकी पूरी फसल बुरी तरह से नष्ट हो गई है । लेकिन,राज्य सरकार और केन्द्र सरकार के हिस्से की ओर से मुआवजा राशि मेरे क्षेत्र के किसानों को आज तक प्राप्त नहीं हुई है, जिस कारण प्राकृतिक आपदा से प्रभावित मेरे क्षेत्र के किसानों की स्थिति अत्यन्त चिंताजनक बनी हुई है ।
अतः अनुरोध है कि एक उच्च स्तरीय टीम मेरे संसदीय क्षेत्र में भेजकर प्राकृतिक आपदा से हुई क्षति का आकलन कराकर प्रभावित किसानों एवं ग्रामीणों को केन्द्र एवं राज्य सरकार तथा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अन्तर्गत दी जाने वाली राशि का भुगतान अविलम्ब कराए जाने हेतु समुचित कार्यवाही की जाए एवं प्रभावित किसानों को राज्य एवं केन्द्रीय अनुदान आज तक किन कारणों से नहीं मिला है,इसके लिए भी जिम्मेवारी सुनिश्चित करते हुए संबंधित अधिकारियों के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही सुनिश्चित की जाए ।
57. यह प्रसन्नता की बात है कि केन्द्र सरकार ने स्वदेश दर्शन योजना के तहत देशभर में टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए सांस्कृतिक विविधता के संरक्षण पर ध्यान देते हुए "रामायण सर्किट' के विकास के लिए तेजी से कार्य प्रारम्भ किया है और "रामायण सर्किट" यानी भगवान श्री राम से जुड़े प्रमुख स्थलों को एक साथ जोडने की योजना बनायी है, जिसमें देश के कई राज्यों के 115 स्थानों को चुना गया है, जहां से श्रीराम गुजरे थे ।
उ0प्र0 राज्य के मिश्रिख संसदीय क्षेत्र में बालामऊ विधान सभा क्षेत्र में स्थित हत्याहरण एक प्रमुख धार्मिक स्थल यहां स्थित हत्याहरण कुण्ड श्री भगवान राम से गहरा ताल्लुक रखता है । ऐसी मान्यता है कि भगवान राम जब रावण का वध करके यहां आये तो स्नान कर रावण वध से मुक्त हुए । यहां पर देश के दूर-दराज क्षेत्रों से ही नहीं बल्कि विदेश से भी एक बड़ी तादाद में श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है । हत्यारण धार्मिक स्थल का महत्व पुराणों में भी वर्णित है । भादो के महीने में प्रत्येक रविवार को यहां पर मेले का भी आयोजन होता है ।
अतः अनुरोध है कि जिस प्रकार से राज्य के अयोध्या, श्रृंगवेरकर,चित्रकूट, नंदीग्राम एवं देश के दूसरे राज्यों के अन्य स्थल,जो भगवान श्री राम से जुड़े हुए हैं, का "रामायण सर्किट"योजना में चयन किया गया है, उसी प्रकार से हत्याहरण धार्मिक स्थल को भी इस योजना में शामिल किए जाने हेतु सकारात्मक कार्यवाही की जाए ।
अंत में, मैं माननीय वित्त मंत्री जी द्वारा सदन में प्रस्तुत वित्त बजट का पुरजोर समर्थन करता हूं और यह भी निवेदन करता हूं कि मेरा संसदीय क्षेत्र,जो अनुसूचित बाहुल्य एक अति पिछड़ा हुआ क्षेत्र है, के सर्वांगीण विकास हेतु उपरोक्त सभी बिन्दुओं पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए केन्द्रीय बजट में धन का आवंटन करने की कृपा की जाए ।
*KUMARI SHOBHA KARANDLAJE (UDUPI CHIKMAGALUR): I am thankful for giving me the opportunity to present my views on the Budget. I stand here to support the Budget.
During the challenging times of COVID-Pandemic the FM had presented five mini-budgets in the form of packages in 2020. This Budget is unprecedented in many ways and it will strengthen the sankalp of 'Atmanirbhar Bharat'.
At a time when almost all economies in the world have suffered huge losses India has given much focus on revival as well as growth of economy which is a positive approach. To sum up, the FM has presented a futuristic budget which will go a long way in making an AtmaNirbhar Bharat. This budget is good for small businesses. No Tax Audit, No TDS on Dividends. More convenience, than monetary gains.
The Government's focus on extending and improving transport (road, railway, metro) infrastructure with nearly 217 projects worth over Rs 1 lakh crore to be completed under National Infrastructure Pipeline will enable travellers to explore hidden gems and therefore bolster the domestic tourism and hospitality industries.
The lack of immediate support in the Budget has disappointed the tourism and hospitality sector, which is reeling from huge losses due to the coronavirus crisis, though measures to strengthen infrastructure may help the beleaguered segment. While infrastructure measures announced in the Budget may boost tourism over the long-term, the opportunity for immediate support has regretfully been missed out.
Additionally, keeping up with the changing times, an overall focus on technology with interventions like incentivizing and promoting digital payments will fast track India's transition into a digitally-enabled economy.
Additionally, a full-throttle vaccination programme augmented by the Rs 34,000 crore funding will bring the long-awaited cheer to the sector. People will start flying with confidence for leisure like during Pre-COVID times after being significantly emboldened by inoculation against the virus.
The budget has allocated Rs 1,088.03 crore for the development of tourism infrastructure. With the coronavirus crisis restricting not just foreign tourist footfalls into the country but also keeping domestic tourists at bay, the budget has focused on pushing funds for promotion and publicity to help woo tourists back.
Bankers have hailed focus on spending, Rs. 20,000 crore capital infusion for PSBs. The banking industry has welcomed the Rs. 20,000 crore provision for PSBs recapitalization for the financial year 2021-22.
The budget rightly strikes a reasonable balance between addressing the key pillars of health and well being, inclusive development, human capital, innovation and R&D, apart from laying the path for a robust economy by providing a major infrastructure boost.
The array of measures announced are in line with people as well as market expectations and will go a long way to bring the nation back on track by boosting spending on infrastructure and rural development while fighting the pandemic through health-focused measures. Focus on Infrastructure and increase in FDI in Insurance sector will boost these two sectors which can be big employment providers.
A substantial increase announced in the expenditure on healthcare and infrastructure will help boost economic growth, including the MSME sector and generate employment. Overall, it was a growth-centric Budget aimed at securing India's long-term economic interest.
It is encouraging to see the FM target policy reforms and boost capital infusion into the infrastructure, SME, and start-up sectors recognizing them as engines of growth in the post-pandemic revival. The thrust on digital payments, e-resolution of tax-related disputes and the first virtual census also underline the Government's focus and continued thrust on digital infrastructure.
The FM said health was her first pillar, and her announcements to develop primary, secondary, and tertiary healthcare systems, greatly gladdened my heart. This ground-breaking focus on health which will provide access to medical care for all in our country, fuel job creation, and boost economic momentum. The 137 percent increase in the healthcare budget from last year is notable. Further, an infusion of Rs. 35,000 crore for vaccine development and distribution, ensuring preventive health and frontline health and allied workers' skills building along with surveillance on infections, reinforces Government's assurance on public health programmes. The thrust and focus to health in India's Budget announcement is a testimony to the country's commitment to not just fight back the COVID-19 pandemic, but to build a stronger and resilient health system. India has been demonstrating this. India has not only proactively and belligerently dealt with the pandemic, it has and continues to support countries in the South-East Asia Region and beyond providing essential medical supplies and now vaccines, to protect the vulnerable populations against the pandemic. Pandemic was an unprecedented medical crisis and it underlined the importance of building resilient healthcare infrastructure.
The Textile industry has welcomed allowing women to work on nightshifts with adequate protection. The textile industry has also welcomed the announcement on textile and apparel parks. I appreciate the thrust given to the textile sector by proposing the Seven mega integrated textile region and apparel parks (MITRA). With the concept of the parks with a plug-and-play model, the textile and apparel sector, particularly the small and medium enterprises, can build competitiveness in manufacturing. The budget focuses on transition to alternative sources of energy and providing support to ailing power distribution companies. There has been no major announcement with respect to solar energy except a nominal increase in custom duty for solar inverters and lanterns to boost Make in India Mission.
The Government has decided to extend social security benefits to gig and platform workers for the first time. Minimum wages will apply to all categories of workers, and they will all be covered by the Employees State Insurance Corporation. At the same time, compliance burden on employers will be reduced with single registration and licensing, and online returns.
Preparing the budget this year against the backdrop of the Corona pandemic was definitely a very complex task. But, under the guidance of our Hon'ble P.M., F.M. has presented an all encompassing budget which opens the path towards fulfilling the Prime Minister's pledge for an Aaatmanirbhar Bharat, a $5 trillion economy and doubling the income of farmers. This budget is agriculture sector friendly. To provide adequate credit to farmers, the Government has enhanced the agricultural credit target to Rs. 16.5 lakh crore rupees in next fiscal with focus on ensuring increased credit flows to animal husbandry, dairy, and fisheries.
Government has also enhanced the allocation to the Rural Infrastructure Development Fund from Rs. 30,000 to Rs. 40,000 crore. It has enlarged the scope of Operation Green Scheme to include 22 perishable products besides tomatoes, onions, and potatoes. Government has also decided to integrate 1,000 more mandis with e-NAM to ensure transparency and competitiveness in the agricultural market.
The Agriculture Infrastructure Fund will be made available to APMCs for augmenting their infrastructure facilities. Funds to improve the infrastructure in APMCs, doubling the grants for micro irrigation and value addition programme for 22 crops will help farmers in a great way. The procurement of paddy crop at Minimum Support Prices has been doubled for the year, which has benefited 1.5 crore farmers of the country. Strengthening and continuation of minimum support price (MSP) to farmers has been emphasized.
Our Government is continuously giving thrust on creation of National Highways and Rural roads under Pradhan Mantri Gram Sadak Yojana. Along with the construction of roads, Rs. 1,00,800 crore has been provided for capital investment. I also welcome the proposal of tax holiday for construction of affordable houses which will benefit the middle class.
Major cities of Karnataka will be the beneficiaries of the Jal Jeevan Mission (Urban) that envisages universal water supply through 2.4 crore household tap connections in 4,378 urban local bodies. The scheme will also include liquid waste management in 500 cities identified for Atal Mission for Rejuvenation and Urban Transformation (AMRUT). Twenty-seven cities, including Mangaluru, Bengaluru, Dharwad, Mysuru, Belagavi and Tumakuru, have been identified as AMRUT cities and about 70 lakh people, especially those living in urban slums, are expected to benefit from the programme.
Karnataka's biggest takeaway from the Budget was in the form of urban mobility. FM has announced funding for Namma Metro Phase 2 (A) and 2 (B) projects. With the Central allocation for the Namma Metro project, the speed rail network in the state capital will be stretched by 58.19 km. Karnataka will also stand to gain from the Bengaluru-Chennai Expressway under flagship projects schemes. The 278-km expressway's construction will begin in 2021-22, as per the budget document. Karnataka's plea to declare Upper Krishna Phase III Irrigation Scheme and Yettinahole Drinking Water Scheme as National projects have not been considered. The request was high on Karnataka's Budget wish list. I request the Government to kindly give due consideration to fund these two important projects. Despite being one of the highest tax contributors to the Central coffers, Karnataka has seen a significant amount of revenue loss because of tax devolution. Karnataka needs capital to fund its schemes and it has raised the issue of revenue losses with the Centre.
The total grants to South Western Railway in the budget for 2021-22 has increased by Rs. 536 crore, which is 20% more compared to the grants allocated in the previous budget. South Western Railway received a record Rs. 3,244 crore grants which is the highest so far for the railway zone established in 2003. The focus is on completing the ongoing projects rather than taking up new ones. As more grants have been allocated for the Zone, they will be able to expedite the works and complete a few of them within the next financial year.
The Budget has sanctioned funds for the doubling of key railway lines in Karnataka. The Hubli-Chikjajur track doubling project has been allocated Rs. 171 crore. The Hospet-Hubali-Londa-Vasco section doubling work has received Rs. 225 crore and Arasikere- Tumkur doubling project has been allocated Rs. 202 crore. Rs. 50 crore sanctioned for the Belagavi-Dharwad via Kittur new line as a good amount in the first year of the project. The Budget has also sanctioned funds for some ongoing key new line projects in Karnataka: 10 crore for the Shivamogga-ShikaripurRanebennur and Rs. 128 crore for Tumkur-Chitradurga-Davangere. The Budget grant for some of the important ongoing works (Electfication) in Karnataka Kadur-Chikmagalur (Rs. 25 crore), Birur-Talaguppa (Rs. 25 crore), Mysore-Hassan-Mangalore (Rs. 60 crore), Chikkabanavara-Hassan (Rs. 30 crore), Chikkabanavara-Hubli (Rs. 75 crore) and Chikjajur - Bellary (Rs. 70 crore). Two major alternative railway lines, which pass through several major parts of UDUPI and Dakshina Kannada districts, have remained as proposals for decades : 1) Padubidri-Karkala-Ujire-DharmasthalaNettana and Nandikur-Karkala-Bajagoli-Ujire-Charmadi. The Preliminary Technical and Traffic Survey and the Engineering cum Traffic Survey for about 120 Kms. between Padubidri, Karkala, Dharmasthana and Nettana was done for the new routes. However, no proposals for construction have come to the fore.
The demand for railway lines has been made as the Threetaluks of Karkala, Moodbidri and Belthangady do not have railway connectivity. The construction of the railway line would also benefit pilgrims travelling to Dharmasthala. Moreover, if the project is implemented, the journey from Kundapur and Udupi to Bengaluru, as an alternative railway line, will reduce the travel time between them by Four hours. I urge and wish if the Hon'ble FM to give due consideration to the demands from the Coastal districts of Karnataka, including my Parliamentary Constituency, Udupi.
The Budget has also allocated funds for two stretches of track doubling in the Mangaluru region. The work on the 19-km stretch of the railway line between Kankanadi and Panambur in Mangaluru will be completed by May, 2021. The Budget has identified a 1.5-km stretch of the railway line between Mangaluru Central railway station and Netravathibridge as the high-utilisation network. Track doubling work on this route will be completed by the end of February,2021. The Budget has also made provision for a new 24-coach pit line at Mangaluru Central railway station in lieu of the existing 18-coach pit line.
Thank you very much.
*डॉ. श्रीकांत एकनाथ शिंदे (कल्याण) : आज केंद्रीय बजट पर हो रही चर्चा में अपनी पार्टी शिव सेना की तरफ से अपनी बात रख रहा हूं और इस बजट के दस्तावेज़ का अध्ययन करते हुए मुझे एक शेर याद आया मिर्जा गालिब साहब का है:
हम को मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन, दिल को खुश रखने को 'गालिब' ये खयाल अच्छा है.
इसी प्रकार ये बजट है जो इस सदी की सबसे बड़ी महामारी कोरोना के समय आया है जब आज हम स्तर पर चुनौतियां झेल रहे है. बेरोज़गारी कोरोना के आने के पहले से ही 45 वर्षों में सबसे ज्यादा थी और कोरोना के समय हमने ह्रदय विदारक चित्र देखा जब लाखों मज़दूर कितनी कठिनाइयों से नंगे पाँव, गर्मी में अपने परिवार के साथ हज़ारों किलोमीटर पैदल चले. आज चीन हमे लाल आँखें दिखा रहा, मैं उन वीर जवानों को श्रद्धांजलि देता हूँ जिन्होंने देश की रक्षा में अपने प्राण न्योछावर किये । लेकिन इस बजट को देख के मुझे दुःख इस बात का होता है की जब स्थिति इतनी गंभीर है और हमारे सेना बलों का upgradation और modernization इतना आवश्यक है तब भी रक्षा मंत्रालय का बजट Demand No. 20 जो Capital Outlay on Defence Services का Revised Estimate 1. 34 लाख करोड़ था जिसमे बहुत ही मामूली बढ़ोतरी करके 1.35 लाख करोड़ किया गया है और पूरे बजट भाषण में कही भी रक्षा से सम्बंधित कोई भी घोषणा नहीं हुई है.मैं रक्षा समिति का सदस्य भी हूँ और पिछले दो वर्षों से मैं सुनता आ रहा हूँ की जितने बजट के मांगे हमारे सेना करती है उसका आधा भी उन्हें नहीं मिलता.सरकार हर जगह ये बताती है की हमारी अर्थव्यवस्था विश्व की सबसेfastest growing है और टैक्स collectionके रिकॉर्ड बन रहे लेकिन फिर भी बजट नहीं बढ़ाया जा रहा. इसकी क्या वजह है मैं सरकार से जानना चाहूंगा की आपnational security की इतनी बात करते है और सेना को वंचित रख रहे. आज हालत ऐसी है की हमारे पास सिर्फ 1 aircraft carrier है और नया खरीदने के लिएnavy के chiefने भी मांग की है लेकिन फिर भी उसपे कोई करवाई नहीं हुई.
ये किस प्रकार की देशभक्ति और राष्ट्रवाद है की आप एक तरफ हर साल कोई नया cessले आ रहे है,इस वर्ष आम आदमी को टैक्स में भी कोई राहत नहीं, पेट्रोल और डीजल पर excise लगा कर आप अपने revenue बढ़ा रहे लेकिन सेना को देने के लिए आपके पास पैसे नहीं है. आप berative federalism की बात करते है और दूसरी तरफ राज्यों को GST की बकाया राशि नहीं देते । मेरे राज्य महाराष्ट्र में 25000 करोड़' लंबित है जिससे कितने विकास कार्यों पर अवरोध उत्पन्न हो रहा. मेरा निवेदन है की इस राशि का भुगतान जितनी जल्दी हो सके किया जाए ।
मैं भाजपा के सदस्यों का भाषण सुन रहा था, वो निरंतर WHOऔर UN दवारा केंद्र सरकार की तारीफ की बात कर रहे थे और वही आर्थिक सर्वेक्षण में chief economic advisor ने सबके सामने कहा की Maharashtra has under-performed the most in restricting the spread of cases and in saving lives . हमारे नेता मान्यनीय उद्धव जी ठाकरे सरकार के कोरोना प्रबन्धन की प्रशंसा भी WHO ने की तो फिर सरकार राजनीतिक कारणों से आर्थिक सर्वेक्षण का इस्तेमाल क्यों कर रही? क्या WHO को भी अब रिहाणा की तरहForeign Direct Intruder , जैसा प्रधामंत्री जी ने कहा, घोषित कर देंगे?
एक नया शब्द भी हमने सूना जो अरविन्द सावंत जी ने भी कल बोला की आंदोलन जीवी लोगों से सावधान रहे. महोदय, आंदोलन और वो भी शांतिपूर्ण तरीके से करना हमारा मौलिक अधिकार है जो संविधान में दिया हुआ है. आज देश के विभिन्न जगहों से आये किसान आंदोलन कर रहे है कितने किसानों की मौत भी हो गयी और अगर बजट के बात करूं तो इस साल कृषि बजट में भी कटौती की गयी है. Department of Agriculture, Cooperation and Farmers' welfare का बजट 1.34लाख करोड़ से घटा के 1. 23 लाख करोड़ कर दिया गया. आप किसानों के हित की बात करते है और फिर इस प्रकार के कदम लिए जाते है.हम सबको पता है जब कोरोना महामारी अपने चरम पर थी तो हमारे healthcare workers के अलावा सिर्फ किसान ही थे जो अपने काम पे लगे थे जिसका परिणाम था की भुखमरी के स्थिति उत्पन्न नहीं हुई इतने बड़े महामारी में, सरकार ने PM KISAN योजना में दस हज़ार करोड़ की कटौती कर दी.
कोरोना के समय में हमारे लिए सबसे बड़ी सीख थी की हमारी स्वास्थ और HEALTHCARE services को कैसे improve किया जाए. बजट भाषण के दौरान वित्त मंत्री जी ने बताया कीand Wellbeing is '2,23,846 crores in BE 2021-22 as against this year's BE of '94,452 crores an Increase of 137 percentage लेकिन इस सरकार का विरोधाभास ये है की ऐसे आंकडे बता के news channel तो खुश होंगे लेकिन जब स्वास्थ्य मंत्रालय की बात करे तो revised estimate 78866 करोड़ था और इस साल बजट को कम करके 71270 कर दिया गया है । यह किस तरह की well being है?
वित्त मंत्री जी ने घोषणा की , PM AtmaNirbhar Swasth Bharat Yojana, will be launched with an outlay of about '64,180 crores over 6 years. This will develop capacities of primary, secondary, and tertiary care Health Systems, strengthen existing national institutions, and create new institutions, to cater to detection and cure of new and emerging diseases.
मैं इस घोषणा और इस योजना के aim का स्वागत करता हूँ लेकिन मैं कुछ आंकड़े और तथ्य भी आप सबके समक्ष रखना चाहूंगा,पिछले वर्ष के बजट में viability gap funding के माध्यम से PPP mode से अस्पताल बनाने की बात की गयी थी. आज एक साल से ऊपर हो गया, क्या एक भी अस्पताल बनाया गया है?जो medical college कोdistrict hospital से attach करने की बात की गयी थी उसका क्या हुआ?यह सब सिर्फ मुंगेरी लाल के हसीन सपने बन गए है और वास्तविकता कुछ नहीं है.
अब अगर हम बात करे railwaysकी जो मेरे लोक सभा क्षेत्र की लाइफ लाइन है तो उसके बजट में भी मामूली कटौती की गयी है और 1. 11 लाख करोड़ के revised estimates से कम करके 1. 10करोड़ किया गया है. मेरे संसदीय क्षेत्र में कितने महत्वपूर्ण railwayके projects अभी भी लंबित है अगर मैं सबसे महत्वपूर्ण परियोजना जो Mumbai Urban Transport Project की बात करूँ तो इस बजट में इसकी बढ़ोतरी 550 से650 करोड़ हुई है जिसके लिए मैं सरकार का धन्यवाद करता हूँ. मेरा निवेदन रहेगा की इसके अंतर्गत सभी परियोजनाओं का कार्यान्वन एक निर्धारित समय में हो जिससे traffic congestion कम हो.
आज देश के सामने सबसे बड़ा मुद्दा बेरोज़गारी का है. India's unemployment rate (UER) for the month of November 2020 stood at 6.51% according to the Centre for Monitoring Indian Economy (CMIE) data. While the urban unemployment rate stood at 7.07%, rural UER was 6.26%. महोदय हम सबको पता है की सबसे ज़्यादा job creation सरकार करती है जिसम PSU का बहुत बड़ा योगदान है. सरकार ने इस वर्ष भी disinvestment की बात की और अब इस सूचा में LIC भी शामिल है.जिस तरह से सरकार इन ASSETS को बेच रही है और PRIVATIZATIONकी तरफ हम बढ रहे है. हमनेBSNL और MTNL के हालत देखी है और मेरा सरकार से निवेदन है कि हमें अपने PSU को और बढ़ावा देना होगा ।
*DR. KALANIDHI VEERASWAMY (CHENNAI NORTH): Forty-seven hon. Members have expressed their views on the Union Budget. It is natural that some would praise it to the sky and others term it as the worst depending on which side of the aisle they are sitting. I would like to be pragmatic and highlight the situation on the ground arising out of this pandemic of Covid-19 as I have seen it as a doctor. Sir, a couple with a combined earning of Rs. 1,20,000 with three children, all of whom were studying in private schools, has shifted their children to government schools as they both have lost their jobs. This is not an isolated case. It is prevalent all over the country.
This is realised even more when we hear the cries of the MSMEs who have sought help from all quarters. It is an undeniable fact that unemployment has touched unseen heights. I wish that the Government does well for the sake of these people and addresses the pleas of the MSMEs.
It is appreciable that the Govt has increased spending on infrastructure like roadways, railways and health. That the government is patting itself on its shoulders is surprising as this has been an established norm for millennia. Most temples and water projects have been developed under kings during famine. Even developed nations have built their infrastructure during recession for the past few hundred years. The logic for this is cheaper employment and helping the people is a double benefit where unemployment is addressed and nation building is done.
While the infrastructure is welcome, in my constituency, in the guise of development, an illegal project for expansion of Adani-owned Kattupally Port is planned. This involves several thousand hectares of private and Government-owned land and a reclaimed land from sea will be donated for private growth at public expense. This project is illegal on three counts. One, it violates the CRZ rules as the erosion in this area is very high. Two, eco-sensitive area of Pulicart lake is less than 10 km and this project is in violation. Three, the wetlands are being converted to industrial land in violation of rules regarding the preservation of wetlands. This project will cause waterbodies and rivers to be dried up leading to water shortage in an area where we are already suffering huge water losses and it will also lead to flooding. We have thwarted the public hearing which was kept 20 km away to prevent participation of local people. I hope the Government will abandon this decision to save itself from condemnation of the people at present and in future.
In the same breath, it is sad to note that no mention is made for allocation to National Waterways which will help the nation with cheap transport for goods. NW-4 which will benefit my constituency has not been initiated.
I have spoken in this august house regarding MPLADS and I reiterate that it should be provided for as it is the people’s money and will especially help the people in the post-Covid economic ravage which every constituency is experiencing.
The privatisation of all public assets is scary. Sir, this is the asset of future generations. It is akin to a family selling the family jewels. I request for aborting this plan. Sir, the hon. Prime Minister is talking of Atma Nirbhar, change it to ‘Think in India’.
*DR. HEENA VIJAYKUMAR GAVIT (NANDURBAR): I support the Budget and congratulate the Finance Minister for the pathbreaking budget during the Pandemic year.
The economic experts sitting in the Opposition benches are arguing that the economy is in a freefall. However, to their ignorance, the numbers tell a different story.
The economy is on the path of revival and our Economic Survey 2021 predicted a `V’ shape recovery-recession flowed by a strong recovery. The Survey projects the real economy to grow at 11 per cent in 2021-22. Two more reports, RBI’s Financial Stability and National Statistical Office, first advance estimate a V-shape recovery.
The optimism of the Indian economy is also echoed in the reports of the International Monetary Fund and World Bank. The IMF in its latest World Economic Outlook Report highlighted that despite global pandemic, the Indian economy will reboot and grow at 11.5 per cent in 2021-22. We will once again become the fastest-growing major economy of the world.
I want to reiterate that the fundamentals of the Indian economy remain strong. Just look at the numbers – consumer price inflation declined from a peak of 9.3 per cent in 2013-14 to 5 per cent in 2020; the current account deficit has significantly declined from a peak of 5 per cent in 2012; India now runs a surplus in its current account at 2.4 per cent of GDP; foreign exchange reserves have reached an all-time high of $590 billion; and India has improved its ranking significantly in World Bank’s Ease of Doing Business Index from above 150 in 2014 to 63 in 2020.
The Union Budget is presented at the time of the global Pandemic. Like many other countries, we have also been hit hard by the economic impact of the Pandemic. But despite the Pandemic, Madam Finance Minister has presented a very transparent Budget.
Let me highlight my area of work. The health and wellness are an important pillar of this Budget. Investment on health infrastructure has increased substantially. The total Budget outlay for healthcare is INR 2.23 lakh crore, which is an increase of 137 per cent. The new PM Atmanirbhar Swasth Bharat Yojana with an outlay of INR 64,180 crore is truly pathbreaking. This is to build capacities in primary, secondary and tertiary care. An additional INR 5,000 crore has been allocated for COVID-19 vaccines.
The Finance Minister had maintained a delicate balance between fiscal discipline and boosting growth by increasing the capital expenditure to 5.5 lakh crore, an increase of 35 per cent. Increased capital expenditure will ensure crowing in of private investments. Commitment to augment countries national infra projects by enhancing capital expenditure to 7,4000 projects. A big thrust is given on monetising assets to achieve the targes of National Infrastructure Pipeline. Seven new National Textile Parks and reforms on customs duty on textile produce are being carried out. All these will help boost growth and generate employment.
We have come clean on our fiscal numbers by incorporating the off-budget deficit numbers into the budget itself for the sake of honest macro-economic stability. An unprecedented event in India’s economic history.
Schemes for the welfare of people are National Education Mission has witnessed an increase of 21 per cent. National Health Mission budget increased by four per cent; the National Rural Drinking Water Mission has seen an exponential increase in the allocation in 2021-22 at Rs.50,100 crore. This is an increase of Rs.49,000 crore ( 346 per cent ) from the revised estimate of 2020-21. Allocation to the PMGSY has increased by nine per cent over the RE of 2020-21 to Rs.15,000 crore. In 2019-20, allocation to the scheme has been cut by Rs.4,930 (26 per cent) from the budgeted stage to the revised stage.
I will conclude by quoting economist Mr. John Maynard Keynes. Keynes, in his seminal work, “The General Theory of Employment, Interest and Money” argued that animal spirits – emotions of confidence, pessimism, hope, etc. play a critical role in driving investors’ confidence. My Government in the past six years have initiated key reforms like Labour Codes, Farm Reform Laws, GST, Insolvency and Bankruptcy Code, Real Estate Regulation Act, Reduction in Corporate Tax and Monetary Policy Committee to revive the animal spirits of the economy.
The success of Government in reviving the optimism is reflected in the investor confidence. The FDI is at the all-time high of $ 72 billion. Over the last few years, Government has initiated comprehensive measures of recognising NPAs and resolving the stressed assets through Bankruptcy Code, recapitalisaiton of public sector banks and reforming the banking sector via mergers of public sector banks. In this Budget, we have moved a step further on resolving the NPAs problem. The soon to be established Development Finance Institution and Asset Reconstruction Company will permanently resolve the stressed asset crisis of the banks.
I will end by saying that the worst is over, and the Budget is a step in the right direction to put us back on the path of high economic growth trajectory.
*SHRI RAHUL KASWAN (CHURU): Thanks to hon. Prime Minister, Shri Narendra Modi ji and hon. Finance Minister, Shrimati Nirmala Sitaraman ji, for introducing such a great Budget. This Budget lays the foundation stone for hon. Pradhanmantri ji's vision to make India a $5 trillion economy with the essence of 'Atmanirbhar Bharat' even after such a great pandemic situation.
India has emerged as a world leader in every manner just because of the leadership of our beloved Pradhanmantri, Shri Narendra Modi Ji. Concentration on increasing basic infrastructure to provide facilitation to inbound investment and also to the local investors as well. India is moving ahead with great pace after the low we have seen because of COVID situation. Developing status of India is increasingly creating interest in foreign investors to come and setup their companies here, and we have seen the huge ‘V-shape’ recovery in economy.
IMF has projected that India will recover with the highest growth in the world. Make-in-India and ease of doing business are the major opportunity for India, which help in increasing investment. We have great potential, but we only need positive approach and a vision of the Government, which can take it further and achieve such goals.
Under the aegis of hon. Prime Minister our country is moving forward in this because of our positive thoughts and vision for development.
माननीय मंत्री महोदय जी ने अपने अभिभाषण में सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास के तर्ज पर कार्य करते हए, और माननीय श्यामा प्रसाद मुखर्जी के अन्योदय के विचार को मूर्त रूप देने का कार्य किया है । माननीय प्रधानमत्री जी के नेतृत्व में देश में दृढ़ इच्छाशक्ति दिखाते हुए कोरोना संकट मे पार पाने का कार्य किया है । जिसकी तारीफ आज पूरे विश्व में हो रही है । कोरोना संकट के समय भारत सरकार द्वारा देश की अर्थव्यवस्था को बढावा दिए जाने हेतु 27 लाख करोडो आन्मनिर्भर पैकेज की घोषणा की जिसकी वजह से आज से फिर से अर्थव्यवस्था को बढ़ते हुए देख रहा है । प्रधानमत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने देश को इस मंकट के समय संबल देने के लिए प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत दश के 80 करोड नागरिको को अनाज उपलब्ध करवाने का कार्य किया है, जिस पर 2.76 लाख की राशि खर्च की गई ।
माननीय मंत्री महोदया,देश के कोरोना वारियर्स दारा किये गए त्याग और समर्पण का धन्यवाद देते हुए कहा कि देश सेवा में इनके द्वारा जो त्याग की भावना दिखाई गई है, उसके लिए देश उनका आभारी है । देश में इस मंकट के समय कोरोना वारियर्स के द्वारा किया गया कार्य सराहनीय रहा है । भारत सरकार द्वारा देश के कोरोना वारियर्स के इस त्याग को ध्यान में रखते हुए सबसे पहले इन्हें ही कोरोना वैक्सीन देने का कार्य किया है । माननीय मंत्री जी, द्वारा इस वर्ष में बजट की घोषणा का ध्येय मुख्य रूप से स्वास्थ्य,इंफ्रास्ट्रक्चर सुविधाओं को बढ़ावा देने के साथ-साथ ह्यूमन कैपिटल और इनोवेशन पर कार्य करना है । भारत सरकार को मैं बहुत बहुत धन्यवाद देता हूँ की आपने देश में स्वास्थ्य क्षेत्र में देश का सर्वाधिक बजट जारी करते हुए देश के स्वास्थ्य सुविधाओं को बढ़ाने हेतु प्रावधान किया है । माननीय प्रधानमंत्री जी के निर्देशानुसार इस बार देश के स्वास्थ्य बजट में 300% की वृद्धि की गई है,जो कि अपने आप में एतिहासिक है । देश के नागरिकों को स्वच्छ जल की आपूर्ति किये जाने के उद्देश्य से भारत सरकार द्वारा हर घर नल योजना पर जल शक्ति मंत्रालय द्वारा कार्य किया जा रहा है । भारत सरकार द्वारा इस कार्य हेतु 2.87 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया हैं । इससे पूर्व भी जल शक्ति मंत्रालय द्वारा राजस्थान राज्य हेतु 5500 करोड रूपये की राशि जारी की गई है । मेरा लोकसभा क्षेत्र चुरू थार का प्रवेश द्वार माना जाता है । मैदानी इलाकों में सबसे ज्यादा ठण्ड और सबसे ज्यादा गर्मी हमारे ही क्षेत्र में होती हैं । मेरा लोकसभा क्षेत्र हमेशा से ही पानी की कमी की वजह से जूझता रहा है । भारत सरकार द्वारा पूर्व में भी केंद्रीय अंशदान के माध्यम से चुरू लोकसभा क्षेत्र में पाइपलाइन के माध्यम से पानी पहुचाने हेतु 2 योजनाओं पर कार्य किया गया है । जल जीवन मिशन के तहत भी मेरे चूरू लोकसभा क्षेत्र में कार्य प्रारंभ हो चुका है । मेरा सरकार से अनुरोध है कि मेरे लोकसभा क्षेत्र की भौगोलिक और वातावरण की स्थिति को देखते हुए प्रथम वरीयता देते हुए जल्द से जल्द इस योजना का क्रियान्वन किया जाए । साथ ही अटल भूजल मिशन के तहत भी भारत सरकार द्वारा चुरू जिले का चयन किया गया है । भारत सरकार की यह एक महत्वाकांक्षी योजना है । इसके लिए भी मेरा सरकार से अनुरोध है कि इस योजना में भी चुरू जिले को प्रथम वरीयता दी जाए । सरकार का प्रयास है कि आमजन के जीवन को और सुलभ करने के लिए रेलवे और राजमार्गों में अधिक से अधिक निवेश कर आधारभूत संरचना के विकास पर अधिकाधिक कार्य किया जाए । इसी क्रम में पिछले छ: वर्षों में मेरे लोक सभा क्षेत्र में अनेकों कार्य भी हुए हैं । रेलवे देश की लाइफलाइन मानी जाती है । यह आमजन की सवारी का सबसे सरल और सुगम माध्यम है । भारत सरकार द्वारा हर संभव प्रयास किया जा रहा है कि देश के विभिन्न क्षेत्र जो अभी भी रेल सेवा से वंचित है उन्हें भी जोड़ा जाए । मेरे लोक सभा क्षेत्र में आमजन द्वार पिछले समय से सीकर,यनोख, सादुलपुर,तारानगर, सरदारशहर, लालगढ़, सरदारशहर,हनुमानगढ़ आदि मागों पर रेल सेवा प्रारम्भ किए जाने की मांग रही है । रेल मंत्रालय द्वारा इन मार्गों पर सर्वे भी कराए गए हैं, लेकिन हर बार नेगेटिव सर्वे रिपोर्ट बताकर इन मार्गों पर रेल सेवा का कार्य नहीं शुरू हो सका है । मेरा सरकार से अनुरोध है कि ऐसे वचित स्थानों के लिए रेलवे की प्रक्रिया में बदलाव कर इन स्थानों को रेल सेवा में जोडा जाए । रेलवे स्टेशन के आधुनिकीकरण के तहत भी बजट का आवंटन किया जाए और catagory B C श्रेणी के स्टेशनों पर भी आधुनिक सुविधा उपलब्ध करवाई जाए । मेरे लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाला सुजानगढ़ स्टेशन एक बहुत ही महत्वपूर्ण स्टेशन हैं, देश भर मे यात्री सालासर बालाजी के दर्शन करने हेतु यहाँ आते हैं । मालासर धार्मिक आस्था का एक बहुत ही मुख्य केंद्र हैं और हर वर्ष लाखों की तादाद में यात्री यहाँ पहुँचते हैं । सुजानगढ़ स्टेशन काफी पुराना है व स्टेशन काफी नीचा भी हो गया है । मेरा सरकार से अनुरोध है कि सालासर बालाजी जैसे महत्वपूर्ण स्थान को देखते हुए सुजानगढ़ स्टेशन का पूर्ण निर्माण फिर से करते हुए इसे आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किया जाए । इसके माथ साथ मेरे लोकसभा क्षेत्र पडिहारा, छापर और नोहर स्टेशन भी क्षेत्र के महत्वपूर्ण स्टेशन हैं, लेकिन इनकी ऊचाई अभी भी मीटरगेज के अनुसार ही छोटी है, अत नवीनीकरण कार्यक्रम के तहत इन स्टेशन को लेते हुए इनकी ऊचाई उठाने का कार्य किया जाए । पिछले काफी समय से मेर लोकसभा क्षेत्र के नागरिकों द्वारा माग की जा रही है की category B व C श्रेणी के स्टेशन पर भी रेल कोच डिस्प्ले सिस्टम लगाया जाए । मेरा सरकार से अनुरोध है की मेरे लोकसभा क्षेत्र के चुरू, सादुलपुर,रतनगढ़, सुजानगढ़,नोहर व भादरा में रेल कोच डिस्प्ले सिस्टम लगाया जाए । इसके साथ साथ भारत सरकार द्वारा मानव सहित रेल फाटकों को हटाकर वहां पर RUB का निर्माण करवाए जाने का प्रावधान किया गया है । मेरे लोकसभा क्षेत्र में आमजन द्वारा काफी RUB बनाये जाने हेतु मांग की जा रही है । राज्य सरकार द्वारा इस पर कोई कार्यवाही नहीं की जा रही है अतः मेरा सरकार से अनुरोध है कि मेरे लोकसभा क्षेत्र में RUB का निर्माण करवाया जाए । रेवाडी,सादुलपुर खंड पर km no. 199/5-6 (गुगलवा,बेवड, भेन्सली), 204/6-7 (भोजाण-सरदारपुरा), 229/ 4-5 (लम्बोर-गगोर), एनएच 52 जयपुरिया पट्टा, 257/4-5 (सिरसला हाल्ट स्टेशन), 302/1-2 (मोलीसर छोटा, सुरतपुरा,सेहला), 340/ 7-8 (राजलदेसर-रतनगढ़) सादुलपुर हनुमानगढ़ खंड पर 68/7-8 (नरहडीया मोहल्ला,सादुलपुर), 166/4-5 (पहाडसर-ढढाल), 154/4-5 (ढीरगारला), 115/1-2 (भादरा स्टेशन)हिसार सादुलपुर खंड पर 58/7-8 (NH 52-लुटाना पूर्ण) आदि स्थानों पर RUB निर्माण करवाया जाए ।
राष्ट्रीय राजमार्गों के मामले में भारत सरकार द्वारा माननीय प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में पिछले वर्षों में बहुत ही बेहतरीन कार्य किया है । और इसी प्रकार आगे आने वाले समय में भी कार्य पूरा किया जाएगा । भारत सरकार द्वारा इस वर्ष में राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण हेतु 1.18 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया है जो कि आज तक का सबसे अधिक योगदान भारत सरकार द्वारा किया गया है । सड़क परिवहन मंत्रालय की सबसे महत्वाकांक्षी योजना में से एक भारतमाला सड़क परियोजना का कार्य भी अगले वर्ष तक पूरा हो जाएगा जिससे देश को मालवाहन के लिए एक डेटिकटेट मार्ग मिलेगा । मेरे लोकसभा क्षेत्र में 2 राष्ट्रीय राजमागों का कार्य पूर्ण हो चुका है और 3 राजमागों का कार्य प्रक्रियाधीन है । इन तीना मे मे सबसे महत्वपूर्ण मार्ग है सिरसा से चुरू वाया नोहर साहवा, तारानगर है, जिनकी घोषणा पर माननीय प्रधान मंत्री जब मेरे गृह जिले चुरू आये थे, तब की थी । यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण मार्ग है और पंजाब से सीधे अहमदाबाद और मुम्बई को जोड़ने का सीधा मार्ग होगा । राजस्थान राज्य सरकार के पास भी इस मार्ग हेतु भूमि हस्तातरण किया जाना प्रस्तावित है, जो कार्य अभी तक नहीं हो सका है । मेरा इस मामले में सरकार से अनुरोध है कि इस सड़क मार्ग हेतु जल्द से जल्द राशि जारी कर इसका कार्य शुरु करवाया जाये ताकि क्षेत्र के आमजन को इसमें फायदा मिले । इसके साथ-साथ अन्य दो राजमार्ग नाथूसरी से रिंग्स वाया भादरा, सिधमुख,सादुलपुर, झुंझुंनु, उदयपुरवाटी व लोहानी से श्री डूंगरगढ़ का कार्य भी जल्द से जल्द करवाया जाए ।
भारत देश कृषि प्रधान देश है । भारत की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा कृषि क्षेत्र पर निर्भर है । माननीय प्रधानमंत्री जी ने देश के किसानों को आत्मनिर्भर करने के लिए 2022 तक सभी किसानों की आय दोगुनी करने का वादा किया था । उत्पादों की MSP में वृद्धि कर सरकार ने इसकी शुरुआत की है । साथ ही किसान सम्मान निधि में भी देश के सभी किसानो को शामिल कर व राशि को 10000 रुपये प्रतिवर्ष कर इस ओर प्रभावी कदम उठाये है । पिछले काफी समय से देश में आवारा पशुओं की समस्या बढ़ती जा रही है,जिसकी वजह से किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है । मेरा सरकार से अनुरोध है की आवारा पशुओं की रोकथाम के लिए सरकार द्वारा जल्द से जल्द प्रभावी नीति बनाई जाए और देश के किसानों को इस से छुटकारा दिलवाया जाए । देश को किसानों को प्रधानमंत्री सिंचाई योजना के तहत सिंचाई का पानी उपलब्ध करवाने का प्रावधान किया गया है । मेरे लोक सभा क्षेत्र में जहां नहर के माध्यम से पानी जा रहा है वहां डिग्गी निर्माण के कार्य करवाए जाए ताकि किसान पानी संचित कर बाद में काम में ले सके । किसानों को विद्युत कनेक्शन और सौलर कनेक्शन भी जल्द से जल्द सुनिश्चितता की जाए ।
मैं सबसे पहले हमारे माननीय प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी और वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण जी का बहुत-बहुत धन्यवाद करता हूँ, जिनके नेतृत्व और विजन से देश आने वाले समय में 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है । यह माननीय प्रधान मंत्री जी की क्षमता और दृढ़ निश्चिय ही है, जिसकी वजह से आज भारत इस आँकड़े को छूने का विचार कर रहा है ।
यह बजट देश को नए प्रगति पथ पर ले जाने वाला है । मैं मुख्य रूप से मेरे लोक सभा क्षेत्र चुरू और राजस्थान के परिप्रेक्ष्य को ध्यान में रखते हुए माननीय मंत्री महोदया से निवेदन करूंगा कि इन मांगो को शामिल कर बजट आवंटन किया जाए ।
*डॉ. मनोज राजोरिया (करौली- धौलपुर):देश के प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र भाई मोदी जी के नेतृत्व में माननीय वित्त मंत्री महोदया द्वारा दिनांक 01.02.2021 को प्रस्तुत किया गया बजट कोविड-19के उपरांत लॉकडाउन आदि के कारण उत्पन्न विपरीत परिस्थितियों को देखते हुए एक नवीन भारत-आत्मनिर्भर भारत का बजट है । इस बजट से ही भारत नए दशक में विश्व पटल पर आत्मनिर्भर भारत के रूप में स्थापित हो पायेगा । इस बजट में गांव,गरीब, किसान,महिला, युवा,बुजुर्ग, व्यापारी/कारोबारी समाज के सभी वर्गों का ध्यान रखा गया है ।
उक्त बजट पूर्णतः सबका साथ - सबका विकास की सोच को पूर्ण करता प्रतीत होता है । इस बजट पर कोरोना से उत्पन्न परिस्थितियों का प्रभाव स्पष्ट दिखाई देता है । कोरोना के समय केन्द्र सरकार द्वारा किया गया लॉक डाउन का निर्णय एक सही निर्णय था जिसकी वजह से देश विश्व के अन्य देशों की तुलना में कम प्रभावित हुआ । प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र भाई मोदी जी के नेतृत्व में बेहतरीन प्रशासनिक निर्णयों की बदौलत ही भारत आज विश्व को कोविड-19की वैक्सीन निर्यात करने की स्थिति में आया है ।
कृषि सुधार एवं किसान कल्याण को प्राथमिकताः मोदी सरकार किसानों के कल्याण के लिए प्रथम दिन से ही संकल्पित है । देश के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी नेतृत्व में केन्द्र सरकार द्वारा किसानों के कल्याण के सतत प्रयास किये जा रहे हैं । प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि इस क्रम में एक बेहतरीन कदम है । इससे छोटे किसान जिनके पास बहुत कम भूमि है, को वर्ष भर में 6000/- रूपये की सीधे आर्थिक मदद मिलने से अपने कृषि संबंधी कार्यों में सहयोग प्राप्त होता है । मोदी जी के दृष्टिकोण को देखते हुए ही इस मंत्रालय का नाम कृषि मंत्रालय से कृषि एवं कृषक कल्याण मंत्रालय रखा गया है । कुछ लोग अपने राजनैतिक लाभ के लिए किसानों में नवीन कृषि कानूनों के प्रति भय अथवा डर का माहौल पैदा करने में लगे हुए हैं । उन्हें डराया जा रहा है कि नवीन कृषि कानूनों से किसानों की जमीन छिन जायेगी जो कि सरासर गलत है ।
जैसा कि देश के माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र भाई मोदी जी एवं माननीय कृषि मंत्री श्री नरेन्द्र सिंह तोमर जी व केन्द्र सरकार के अन्य मंत्रियों द्वारा संसद में अपने वक्तव्यों में बार बार स्पष्ट किया गया है कि इन नवीन कृषि कानूनों का उद्देश्य किसान के लिए बाजार को खोलना है, ना कि मण्डियों को बन्द करना । मण्डियों को सुदृढ करने के क्रम में 1000 मण्डियों को ऑनलाईन किया जा चुका है । इसी प्रकार इस बजट में 1000 मण्डियों को ई-बाजार के माध्यम से जोड़ने का प्रावधान रखा गया है ।
गत बजट में किसानों को अपनी फसल अन्यत्र ले जाकर बेचने के लिए आरंभ की गयी किसान रेल सेवा भी एक अच्छी पहल है । जो कि समय के साथ और अधिक लाभकारी साबित होगी ।
केन्द्र सरकार द्वारा किसानों की आय को दोगुना करने के अपने लक्ष्य की ओर कदम बढाते हुए एम.एस.पी. को लागत का डेढ गुना करना एक बेहतरीन प्रयास है ।
इसी क्रम में माईक्रो इरिगेशन के बजट में दोगुने की बढोतरी कर इसे 10 हजार करोड रखा जाना एक बेहतरीन कदम है । इससे किसानों को बूंद - बूंद सिंचाई जैसी नवीन तकनीकों तक पहुँचने में सुविधा होगी ।
मजबूत स्वास्थ्य संरचना :-
इस बजट में केन्द्र सरकार ने पिछले बजट की तुलना में 137 फीसदी की बढोतरी करते हुए 94 हजार करोड से बढाकर 2.38 लाख करोड का प्रावधान किया है, जो कि ऐतिहासिक है ।
राशि 64,810 करोड रूपये से प्रधानमंत्री आत्मनिर्भर स्वस्थ भारत योजना आरंभ करना बजट में प्रस्तावित किया गया है, जो कि आमजन के स्वास्थ्य से जुडी एक अहम घोषणा है । कोरोना जैसी वैश्विक महामारी ने न सिर्फ भारत बल्कि पूरी दुनिया को काफी बुरी तरह से प्रभावित किया है । इस महामारी के चलते हमने अपनों को खोया है । लोक सभा एवं राज्य सभा के हमारे साथी हमसे बिछुड गये । कोरोना (कोविड-19)के लिए वैक्सीन हेतु 35 हजार करोड रूपये खर्च करने का प्रावधान इस बजट में किया गया है । जो वर्तमान समय की स्वास्थ्य संबंधी सबसे महती घोषणा है ।
मेरे संसदीय क्षेत्र के दोनों जिले 112 आकांक्षी जिलों में सम्मिलित हैं । इस बजट में मिशन पोषण 2.0 की घोषणा की गयी है । जिसके तहत इन सभी आकांक्षी जिलों में पोषण के बेहतरीन परिणाम हेतु रणनीति बनाई जाएगी ।
विकसित आधारभूत अवसंरचनाः केन्द्र सरकार ने देश में मजबूत आधारभूत अवसंरचनात्मक ढांचे के विकास हेतु इस बजट में 1 लाख 18 हजार करोड रूपये का प्रावधान सड़क परिवहन और राजमार्ग के लिए किया गया है । इससे सडक ढांचे के विस्तार की गति और तेज होगी तथा रोजगार के अवसर पैदा होंगे । बजट में सार्वजनिक परिवहन को और जनसुलभ बनाने, विभिन्न शहरों में मेट्रो के विस्तार कार्य को आगे बढाने, 20 हजार नयी बसें शुरू करने का प्रावधान किया, जो कि सभी मैट्रो शहरों हेतु एक महत्वपूर्ण निर्णय है । देश की रेलवे प्रणाली को आधुनिक रूप से विकसित करने के दृष्टिकोण के साथ इस बजट में 1.10 लाख करोड रूपये का प्रावधान किया गया है ।
भारतीय रेल वर्ष 2023 तक शत प्रतिशत ब्रॉडगेज इलेक्ट्रिफिकेशन के लक्ष्य को प्राप्त करने हेतु तेजी से कार्य कर रही है ।
देश को आत्मनिर्भर भारत के रूप में स्थापित करने के उद्देश्य से अवसंरचना सेक्टर का सिरमौर बनाने हेतु अगले 05 वर्षों में 1.97 लाख करोड रूपये व्यय करने का लक्ष्य एक अति महत्वपूर्ण निर्णय है ।
इसी प्रकार प्रत्येक घर को नल के माध्यम से स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने हेतु जल जीवन मिशन (शहरी)के तहत अगले 05 वर्ष में 2.87लाख करोड रूपये व्यय करने और स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) 2.0 के तहत अगले 05 वर्ष में 1,41,678 करोड रूपये व्यय किया जाना प्रस्तावित है । इन निर्णयों से भारत का आधारभूत ढाँचा विकसित होगा और भारत को आत्मनिर्भर भारत बनाने में सहायक होगा ।
गरीब कल्याण और महिला सशक्तिकरणः देश की महिलाओं को चूल्हे के धुंए से मुक्ति दिलाने हेतु आरंभ की गयी उज्ज्वला योजना के तहत अभी तक 08 करोड महिलाएं लाभान्वित हुयी हैं । इस बजट में इस लाभ को देखते हुए इस योजना से 01 करोड नवीन लाभार्थी महिलाओं को जोडने का प्रस्ताव किया गया है । इसी प्रकार कोरोना महामारी के चलते लॉकडाउन के समय में भारत में अपने घर से दूर अन्य राज्यों में फसे मजदूरों को राशन सामग्री हेतु काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा । इस समस्या को देखते हुए भविष्य के दृष्टिकोण से केन्द्र सरकार द्वारा ‘एक देश एक राशन कार्ड’का निर्णय एक अत्यन्त महत्वपूर्ण निर्णय है । इस योजना को 32 राज्यों में लागू किया जाएगा, जिससे कहीं का भी निवासी व्यक्ति किसी भी राज्य में उसे मिलने वाले राशन को प्राप्त कर सकेगा । अतः मैं देश के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी और माननीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण जी को आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के इस बजट हेतु आभार प्रकट करता हूँ ।
HON. SPEAKER: Hon. Finance Minister Shrimati Nirmala Sitharaman.
THE MINISTER OF FINANCE AND MINISTER OF CORPORATE AFFAIRS (SHRIMATI NIRMALA SITHARAMAN): Thank you very much, Mr. Speaker, Sir.
As I begin, I thank all the 77 hon. Members who have really taken a keen interest on the Budget and its contents and have spoken very much in detail. At a time, post-pandemic, after the contraction of the economy, the Government, consulting a lot of experts, has come up with a Budget which has a blend of stimulus related efforts; also, the hon. Prime Minister, even during the pandemic, has not lost the opportunity to continue with reforms. So, in that way, this Budget, coming as it does post-pandemic, has actually set the pace for India to become Atmanirbhar. The pandemic is, probably, reviving in some countries as the second wave is coming. After the pandemic, we had a very positive approach spearheaded, from the front, by the Prime Minister himself. So, we have had a kind of retraction in the pandemic and it can be seen from the fact that the death rate is the lowest in the world, active cases have come down, and, in a way, I can state, with a bit of a hesitation because the pandemic is unpredictable, that we have actually managed to bend the curve. As a result, the revival of the economy looks a lot more sustainable and this Budget, therefore, gives the necessary impetus.
Now, very many Members have spoken on the contents of the Budget and, therefore, the debate was a lot more meaningful. I will certainly give answers to some of the points raised by the Members and also reflect on some other thoughts which have come from various Members.
But before I get into the specific issues raised and before I reply to the specific issues, what I want to highlight is, as I said at the beginning, we have focussed on stimulus plus reforms. An opportunity has been taken out of the challenging situation of the pandemic to continue with reforms. This did not deter the Government from taking up reforms which are going to be necessary for sustaining a long-term growth for this country. As a result, very many steps were taken and announced even during the Atmanirbhar package. In this Budget, we have kept the pace up and announced measures which are for reforms; they are not just one-off, not just every now and then, but they are reforms riveted in a policy. Therefore, this is going to give us a neat background; a lay out was spread before the Parliament for people to know that these are not subjective, kneejerk reforms. Every now and then the Opposition has questioned them. But these reforms are going to lay a path for India to be one of the top economies of the world in the coming decade and further.
So, that is the kind of an approach, which is a courageous approach of a Government which believes that the people of India have mandated it to do such an exercise.
I was very encouraged to see several of our MPs – many of them very young, probably the first time entrants -- speaking with such fervour about the kind of reforms, which the Prime Minister is spearheading; and that gives hope for this economy and for democracy because India’s 2/3rd population is the youth of this country, who hold the hope for this future. The hope is that we have to service, attend and facilitate, and this Budget is drafted the way in which it is drafted.
Therefore, the policy, particularly the disinvestment in the PSE policy, does not allow for any kind of elementary or rudimentary approach to it. After all, since 1991, the opening up the economy and the justifiable claims that many of us – irrespective of the Government – have made that poverty reduction in real terms is happening since the time public enterprises and also private enterprises have all given an opportunity for India to revive its economy from the notorious licence quota raj. That is why, I reiterate this fact that this Budget draws on the experience of the hon. Prime Minister when he was the Chief Minister of Gujarat seeing so many revivals happening at a time when the licence quota raj was going away post 1991. Then, based on that experience and commitment to reform, which is sustaining commitment to reform, which is blended into this Budget, therefore, it is based on the policy.
Hon. Speaker, Sir, I draw your attention to the fact that in the economic history of India, it is important to trace this route. Since 1948 when with great adoration we adopted socialist policies, with great adoration we nationalised institutions, and with great adoration we had a kind of blend of India, hybrid socialism plus certain kind of licence quota raj, all of which started denigrating Indian businesses, all of which made business absolutely difficult to perform, and it constricted our enterprises, particularly the small and medium ones. Too many questions, too many licences and too many regulations ended stifling these businesses. Therefore, you may look at the trajectory of India’s economic history post-Independence from 1948. I am not going to elaborate as to why I have picked up these years. You know it. Hon. Members know it. It was started in 1948, 1955, 1969; and it peaked in 1975. All of these were strongly socialist, not truly the kind of socialism which the western nations or even Russia spoke about, but the hybrid kind of a socialism, ending the Indian entrepreneurs’ capacity to take this economy along; and it is that, which the same party, between 1948 and 1975, which happily took upon itself the 1991 reforms. I concede, it was under duress. There was a shift from the socialism to complete opening up of the economy. Till today, they take the credit; I have no problem. Till today, they would like to harp on: “Oh, in 1991, it is we, who opened up the economy; it is we, who have given you a free market approach, and it is we, who are the reformist.’ The very same party, from 1948, which constricted the Indian economy, in 1991 says: “We have opened up and given reforms.’ They repeatedly ask us, ask the Prime Minister: “Where is your reform credential? What have you done in reforms?’ The same party, then says: “You have not got that commitment; you do not know what economics is; you do not know how to manage economy, and therefore, you are not the people to do reforms. It is us, we can do it.” There is no apology from them. They say: “We started from socialism to communalism to complete licence quota raj and then, of course, opening up of the Indian economy and, therefore, we are everything. We are socialists at one point in time and we are communists at another point in time; the license quota and crony capitalism at another time; and finally, even opening up of the Indian economy, it is us.” No, Sir, I would like to put it, now, before this House that since Jan Sangh days, BJP has consistently believed in India, respecting Indian entrepreneurial skills, Indian managerial skills, Indian trade skills, Indian business skills and Indian youth. We did not borrow something from somewhere and give a hybrid. …(Interruptions) At one point in time, because they were close to Russia, they did one thing, which is, a very-command controlled regime, the centralised planning regime and, then, they suddenly think: “Oh my God! Even China is moving in that route of supporting capitalism, therefore, we will also have to do it’. No, Sir. Our belief in India, our belief in Indian businesses and our belief in Indian economic strength has been consistent from Jan Sangh to BJP to, now, BJP, also going in a steady line of believe in Indian enterprises, given them the maximum freedom and given them the respect that they so deserve.…(Interruptions Oh, sorry, I thought, the Finance Ministers talk on economy and economics.…(Interruptions)
माननीयअध्यक्ष: माननीय मंत्री जी, आप उनको जवाब मत दीजिए ।
…(व्यवधान)
माननीयअध्यक्ष: माननीय सदस्य, प्लीज़ बैठकर मत बोलिए ।
…(व्यवधान)
SHRIMATI NIRMALA SITHARAMAN: The Finance Ministers talk on economy,Sir, the policies which govern economy also is, in fact, primary matters for the Finance Ministers.…(Interruptions)
PROF. SOUGATA RAY (DUM DUM): She is talking about Jan Sangh, Sir. …(Interruptions) Is this relevant? …(Interruptions)
SHRIMATI NIRMALA SITHARAMAN: It is absolutely relevant because it is a precursor to BJP and ideologically consistent with us. …(Interruptions) Did you have any doubt?…(Interruptions)Thank you. …(Interruptions)
Sir, therefore, respecting wealth creators, respecting tax payers and respecting honest citizens is something which we consistently follow and that is why, in responding to the President’s Address, the hon. Prime Minister spoke about small farmers, respecting wealth-creators and unless wealth-creators create wealth, there is nothing which is going to be with the Government to distribute to the poor and migrant labourers. Unless the wealth-creators give the taxes and generate that kind of a lubrication in the economy, you are not going to have any money to distribute, Sir. Therefore, let us understand, consistently talking and also facilitating economy is a primary responsibility of any responsible Government. That is what we are doing now.
Sir, specific questions which were raised by several Members on health for instance or on defence, I will very quickly respond without taking specific hon. Member’s name but once I cover the topic, I am sure, it addresses many of the Members. On agriculture for instance, there was this question, ‘why did you reduce the budget by about Rs. 10,000 crore? Are you not going to take care of kisan?’ Sir, that is absolutely misread. The data given in the Budget on that account has been misread and I will tell you, why. It is because benefits worth Rs. 1.15 lakh crore have been transferred to the bank accounts of 10.75 crore farmers since the inception of this particular scheme of Pradhan Mantri Kisan Samman Yojana. In 2019-20 and also in the BE of 2020-21, both, I am comparing BE to BE, 2019-20 BE to 2020-21 BE, the allocation of Rs. 75,000 crore was made under this Scheme. Of course, in the RE of 2020-21, the allocation has been rationalised.
When I say “rationalised”, you may understand it as “reduction”. I will tell you why you may understand it as “reduction”. …(Interruptions) There is nothing to heckle, Sir. …(Interruptions) I will tell you why you may understand it as “reduction”. It became Rs. 65,000 crore, and one of the main reasons for that is this. The allocation to PM Kisan Scheme has been this much because our estimate was that about 69 lakh estimated farmers from West Bengal have not received as per our allocation because the list had not come to us. When we included those 69 lakh farmers into the account and made the provision of Rs. 75000 crore, it could not be utilised. Therefore, in RE, it came down to Rs. 65,000 crore. …(Interruptions) These were the 69 lakh farmers, for whom we made the provision in the BE, for whom the money was waiting but because the list of those farmers did not come to us, we were not able to pay them, and to that extent, the amount had to be said that we have not utilised it. That is not cutting down on the allocation. It is clearly saying that the State for which we made the provision did not use it. Therefore, Sir, there is a reduction, and we are not hiding why the reduction is. But it is important to highlight that a State shows that its farmers should not be given the money which the hon. Prime Minister is giving for the whole country. So, shedding crocodile tears for farmers does not help. The money is lying there. …(Interruptions)
Next, Sir, there were questions about health that have we actually reduced the allocation to health. Also, it was said that we are bringing in water and sanitation; we are bringing in nutrition, and therefore, really, we have not paid attention to health. That is not true. Bringing in water and sanitation is not just a figment of our imagination but even the WHO has said that water and sanitation contribute to health. If there is no management of sanitation efforts – bringing in toilets and other things are also in that scheme of things, and if you do not have good drinking water, Nal se Jal is for that purpose – you are going to have health related problems. That is why, even in the Budget Speech, I very clearly said that we are taking a holistic approach to health. It is addressing preventive health; it is addressing curative health; and it is also addressing well-being. Otherwise, you are not going to get a holistic health-related governance. …(Interruptions)
The WHO mentions, and I quote:
“Safe drinking-water, sanitation and hygiene are crucial to human health and well-being. Safe and sufficient WASH plays a key-role in preventing numerous neglected tropical diseases. Diarrhoeal deaths as a result of inadequate WASH were reduced by half during the Millennium Development Goal Period (1990-2015) with the significant progress on water and sanitation provision playing a key role.” A globally recognised approach to good health is to take care of water and sanitation. Therefore, we have not done experimenting with something; it is a comprehensive logical approach that we have taken. Having said this, I will firmly establish that in spite of bringing in water and sanitation, and poshan, the allocations to the core health has not come down. On the contrary, it has gone up. I will tell you how it has gone up. Health and Family Welfare in the BE of 2020-21, the year that we are nearing finish, had Rs. 65,012 crore. In this coming year, for which the Budget has been presented, that is, 2021-22, Rs. 71,269 crore has been allocated, and it marks 9.67 per cent growth. There is no reduction there.
The Ministry of AYUSH, in the year 2020-21, the year that we are finishing now, had a provision of Rs. 2,122 crore which has gone up to Rs. 2,970 crore, which is a 40 per cent increase.
Dr. Harsh Vardhan is here next to me. Health research has been provided Rs.2,100 crore in this year which is coming to a close whereas it is now provisioned in the BE, for the coming year, Rs.2,663 crore which marks 26.8 per cent growth. So, on three core headings, which are normally referred to as health, we have only increased it. Therefore, there is no shortage in the allocation. On the contrary, there is an increase in allocation. …(Interruptions) I will speak about it.
Then, there is a question that there is no mention about the allocation to the Defence. Why are we hiding the details about Defence? No, not at all. When it comes to Defence as a word, no mention is absolutely right. …(Interruptions) Professor, you are a Professor. I would expect you to go into the details. …(Interruptions) I think the hon. Member, Mahua Moitra has a lot to say. Even during the debate, she has said it. She is welcome to say it, Sir, with your permission. But I think it will be good if she can hear me out first.
Coming to the Defence expenditure, as a matter of interest, I would like to take up the amount allocated during, let us say, 2013-14. It was Rs.1,16,931 crore in 2013-14, the last year of UPA. The Defence expenditure being so huge, unless we pare it down into three compartments, you are not going to get a true picture. It is not a convenient compartment but it is a recognised compartment. All the three of them are so. One is under revenue, the other is capital and the third goes to pensions. Mananiya Rajnath Ji is here. I will read out the figures to say what is the allocation now taking care of all the three requirements, and compare it with 2013-14. Under revenue, the allocation was Rs.1,16,931 crore in 2013-14, under capital, it was Rs.86,741 crore under the UPA period of 2013-14 and under pensions, it was Rs.44,500 crore. What is it now in the year that is ending? It is Rs.2,09,319 crore under revenue. Under capital, the allocation is Rs.1,13,734 crore as opposed to Rs.86,000 in 2013-14. What is it for the pensions? It is Rs.1,33, 825 crore as opposed to Rs.44,500 crore.
One thing I readily point out much before enthusiastic hon. Members from the Opposition would get up and say, ‘Oh, oh, from last year to this year, it has come down.’ Yes, it has come down on the account of pensions because last year, the year that is ending -- we had given the figure -- the growth was about 19.4 per cent and the amount till now is Rs.1,33,825 crore whereas now it is Rs.1,15,850 crore. So, there is a reduction of 13.4 per cent in pensions and just under that head, there is a reduction. Why has it happened so?
A couple of years ago, after the introduction of OROP, there were a lot of pending questions, issues and queries which were raised. All of which were accumulating as arrears. At one time we cleared it last year, which, therefore, accounted for a higher allocation. This year, now that we have resolved, rationalised and stabilised, naturally that one-time payment, which was made, will not be repeated and that is clearly laid out and we are not even hiding it. We have no pretention to say, oh, no, it has come down. We are not waffling on that. This is the fact. …(Interruptions) I am sorry. I mentioned that. …(Interruptions) Yes, I will tell you from last year to this year. Last year, it was Rs.1,13,734 crore under capital head and this year it is Rs.1,35,061 crore marking 18.8 per cent increase between last year and this year on capital head. …(Interruptions)
Sir, on the questions of employment related matters, that is, MGNREGA, which is normally quoted saying that we have not been sincere about, I will certainly take this opportunity to read out some numbers, if you please allow me that kind of a time.
It is often said, “Oh, you opposed MGNREGA; we were the ones who brought it in and we have great claims to MGNREGA”. Yes, you may have given birth to it. No questions, Madam. You have given birth to MGNREGA, you can take the credit for it. But equally take the credit for having mismanaged MGNREGA, take the credit for C&AG paragraphs on MGNREGA, take the credit for having given MGNREGA to ghost workers, take the credit for MGNREGA going to non-existing workers.....(Interruptions). Take the credit for that also. ....(Interruptions) So, Congress Party, I am sorry to take the name of a party on a debate during Budget, gives birth to all these very good schemes. No doubt, they are very good schemes. But it lacks the will to use them properly and lacks the will to use them openly and transparently. The moment it was given birth, it misused them to favour cronies. ....(Interruptions) “हम दो, हमारे दो” इसके लिए काम आता है । ....(Interruptions)
Sir, I am reading the figures with regard to MGNREGA. ....(Interruptions) Hon. Member, Kodikunnil Suresh ji, I am reading the figures. ....(Interruptions) Please hear the numbers. ....(Interruptions)
Then, do not ask us the questions on MGNREGA, ask the State Governments. You asked us the questions, I am giving you the reply. ....(Interruptions)
SHRI KODIKUNNIL SURESH (MAVELIKKARA): Do not mention the name of Congress. ....(Interruptions)
SHRIMATI NIRMALA SITHARAMAN: Of course, I will mention Congress because you take the credit for it. ....(Interruptions) Anyway, I do not want to lose my time to give a proper answer. ....(Interruptions)
Sir, there are two tendencies. Again, I will take the name of the Congress Party. One, they give birth to such schemes and then, used it for their cronies. Each time you can see the hypocrisy in the way the figures come out. I would explain the tendency through MGNREGA. What is the tendency? We will have a scheme. We will announce huge BEs for it, that is, allocate big amounts through budgeted estimates, but actually, would not utilize it. Each year would end up with the actuals being far lesser than the original allotted amount. That means, either they do not care for it or they give it to their cronies and forget the actual workers. यही होताहै । बीई से आरई का डाटा मैं दे देतीहूं, जिससे आपको पता लगेगा कि ‘मनरेगा’ के ऊपर आपके प्यार का ऐक्चुली क्या नतीजा निकलता है । ....(Interruptions) That pyar (love) does not translate into activity. ....(Interruptions)
In 2009-10, BE was Rs.39,100 crore. Actual utilization was Rs.33,000 crore only. God knows why they put in Rs.6000 crore! Then, Rs.40,100 crore came to being Rs.35,000 crore. In 2011-12, BE was Rs.40,000 crore and only Rs.29,000 crore were used. The rest remained unutilized. ....(Interruptions)
Sir, next year, out of Rs.33,000 crore, utilization was only Rs.30,000 crore. In 2013-14, out of Rs.33,000 crore, funds utilized were only Rs.32,000 crore. In 2014-15, the last year before us coming, out of Rs.34,000 crore, only Rs.32,000 crore were used.
But, later on, from 2015-16 – pleases see the utilization level – when BE was Rs.34,699 crore, Rs.37,000 crore were utilized. In 2016-17, allocated BE was Rs.38,500 crore, Rs.48,214 crore were utilized. ....(Interruptions) In 2017-18, BE was Rs.48,000 crore and the utilization was Rs.55,000 crore. In 2018-19, allocated BE was Rs.55,000 crore and funds utilized were Rs.61,815 crore. In 2019-20, Rs. 60,000 crore were allocated while Rs. 71,686 crore were utilised which means that for a demand-based programme, we also keep giving.
Sir, 2008-09 was a distress because of global financial crisis. Even then, your utilisation was less which means you will talk about crisis when it comes to others, but not for yourselves. In 2020-21, the year of the pandemic, Rs. 61,500 crore were allocated because Budget was presented in February, much before the Corona crisis. Although we had given only Rs. 61,500 crore in the Budget, as the year went - Corona crisis, pandemic, lockdown and then, after the lockdown, migrant workers going back to their villages – we have increased that to Rs. 1,11,500 crore because that support had to be given in the villages. At the end of the year, it may well be that it will be utilised only to the extent of Rs. 90,000 crore, but it is still far higher than ever utilised under the MGNREGA. Therefore, for the forthcoming year, we have given Rs. 73,000 crore and are fully willing that through the Supplementary Demands for Grants, which happen at least two times if not three times, we are going to give more and more, if necessary, so that the migrant workers, who have not returned to their jobs in the cities or anywhere else and who choose to remain there, can still be continued giving support. …(Interruptions)
HON. SPEAKER: No. SHRIMATI NIRMALA SITHARAMAN: Sir, there were lot of questions saying we have not given adequate support to the MSMEs, which is a bit of a surprise for me. I think, even during the lockdown, the announcements which were made were made clearly saying that we are addressing the distress which the MSMEs will face in two different ways. One, by suspending some of the clauses of the IBC, we made sure that no one from the MSMEs will be pulled to the courts or for resolution or for failure to pay their due debts and so on. Therefore, that was one way. That ensured that nobody was going to be drawn to the court or nobody was going to be declared insolvent. Similarly, we also kept extending dates of due payments or any kind of compliance that they have to do. So, we extended the deadline till 31st March of this year on many scores so that they are not burdened with having to pay taxes, having to file their returns or having even two plain compliance papers to be filed. So, we have given them relief on the compliance side of things.
Equally, we have given relief from the point of view of giving some money so that they can have additional working capital, extended term loans and so on without being asked for any new additional security. This, if I only say for a minute, approach that we took will tell you how clearly the intent was to help everybody. Banks were instructed to send SMSes, to call on the phone, to send e-mails, to go to the house or the office of the MSME, if they are available post-lockdown was lifted, but before that through an SMS, saying that we are willing to give you loan; please come and take it without additional security. The instruction given to the banks was that they will not deny it unless the person himself or the company itself says that ‘I do not want it.’. So, it was given to everybody. The choice to say ‘no’ was with the borrower and not with the bank. So, not one company or not one MSME - even if it is a one single-person MSME, a nano-unit - was ignored.
Also, let me underline the fact that when we kept saying MSME, MSME, we did not exclude others who did not strictly come under the category of MSME. Anyone who had an account in the bank could go and say give me loan under this Emergency Credit Guarantee Liquidity Support Scheme, and they were included.
There were questions raised and it was said: oh no but tourism sector; oh no but some other sector; we are not called MSME, but will you not give us? We kept issuing a lot of clarifications calling and saying no, we may have used the word MSME but this is available for anyone who has got a bank account. A lot of companies did not have that money because during the lockdown they could not operate but when they opened, they had to buy raw materials, they had to pay workers, they had to pay electricity bills. For all that, working capital was increased. It was given without a question.
Here, I would like to mention because hon. Members also observed about the functioning of public sector banks. I will say that having amalgamated a lot of these banks, in spite of the amalgamation related work still going on, banks very clearly exposed their staff, and I am grateful, even during the lockdown, to Pradhan Mantri Garib Kalyan Yojana. They went and gave all the cash credit which were made during the initial months through the Bank MITRAS.
Similarly, in the Emergency Credit Guarantee, they extended it to all the companies which wanted the help. So, Emergency Credit Guarantee was one of the things which was extended to MSME. Also, we had a Subordinate Debt Scheme through which companies which were already in distress – not just viable companies getting Emergency Credit Guarantee – were given under the Subordinate Debt Scheme a kind of assistance wherein the individual promoter could borrow. He put it into the company as his equity and thereby lift the company’s stature, get more assistance from the bank, and run the business.
So, when we extended these schemes, they were not some schemes being produced mindlessly. A lot of mind application happened. At the level of the Prime Minister, a lot of inputs were coming. Leaders of businesses were meeting him. Even during the lockdown through our webinars, continuously inputs were gathered, and from the PMO they were sent to us. We worked on it and every scheme was tailormade for a situation such as the pandemic.
I am proud to say every Department of the Government of India spent hours on end planning to give it to the people who are affected in the pandemic. Therefore, the approach that Government of India has taken to address the pandemic situation may be completely different but has served India better than the way in which some of us were being advised: oh, copy this country; oh, look at them; they have given 20 per cent of their GDP; give it now. We applied our mind to make sure all the advises were taken on board but designed something which our own industries were telling us that if you do it like this, it will help us. Therefore, we gave it to them, and did not blindly copy as was advocated by many people.
Sir, Pradhan Mantri Svanidhi Yojana is for those who are constantly accusing us of dealing with cronies. Svanidhi does not go to cronies. …* get land in States which are governed by some parties, like Rajasthan once upon a time, Haryana once upon a time. I can give you the details.
The Minister Shri Arjun Ram Meghwal has been repeatedly saying the kind of allegations which are coming for the lands taken away at throwaway prices from farmers. They gave farmers pittance and took away the lands. That is …* operating. ‘Hum do humare do’ is that. We are two people taking care of the party and there are two other people who have to be taken care of. The …* will take care of that. We do not do that. Svanidhi is tailored. PM Svanidhi Yojana is tailored for those small traders who are there in the streets, who are selling their little wares and making their families happy with whatever they earn from there. Rs. 10,000 is given to them as working capital for one year tenure. They take Rs. 10,000, and do some business and return that. If necessary, they can take once more.
That is given to 50 lakh street vendors. They are not cronies. They are not anybody’s cronies. Leave alone our cronies, they are not even your cronies. They are the people who think of the Prime Minister who is working for the poor dalits, backwards, and the poor. They are the people who benefit out of the Svanidhi. They are the people who also benefit out of MUDRA. They are also the people who benefit out of PM’s stand-up capital, which is being given at the district level for Scheduled Castes, Scheduled Tribes and also for women. There, we do not do any work for …*. We do not do work for any cronies. We work for the common citizen who believes in the Prime Minister.
Mr. Speaker, Sir, I would like to repeat some of those specific steps that the Government has taken even during the pandemic. I will just recall once, the number of people benefited out of them. Then, you yourself will tell me where are the cronies. They are very much hiding probably in the shadow of the party which has been rejected by the people. The shadows have invited the cronies to even set up a port in Kerala. Hon. Member, Dr. Shashi Tharoor is present here, who belongs to that State, which under his party’s rule invited one of those cronies, who they remember every now and then, to even develop a port. They invited the crony. There was no open tender, and there was no global tender. The crony was invited then. But now they have the temerity to call us crony capitalists! You have the temerity to call us crony capitalists! Remember, you invited one of them, who you repeatedly call a crony, but requested that crony to develop a port in your State. That happened because no …* is living in Kerala. …* lives here. …(Interruptions) Please have the patience to hear who are our cronies. Our cronies are the common janta of this country.
Under PM Awas Yojana, more than 1.67 crore houses have been completed. Do cronies have these Awas Yojana houses? They are the common people of our country who get the Awas Yojana houses. How many houses were electrified under the Sowbhagya Scheme? Since October 2017, 2.67 crore houses have been electrified. They are not the houses belonging to any crony capitalist. Household toilets were constructed. Nearly 11 crore toilets were constructed. Now, it is more than that. Are they crony capitalists? Do they need it? The one who needs it gets it. …(Interruptions)
Hon. Speaker, Sir, the leader of the largest opposition party has still some courage to get up and speak on PM-CARES. I thought the MoS Finance, during the last Session, pointedly told them what is PM-CARES, who audits it, where does that money goes, etc. as opposed to the way in which the PM National Relief Fund was giving money for family trust. It has been already explained. Maybe I will send you the video clip which is going on in social media. Adhir ji, you will learn a lot of things from it. Were you not present? I think that it was the Session in which you called him Himachal ka …* . That was the Session when it happened. I would like to remind you that. That was the Session in which you called my MoS, who is the hon. Member of this House for five times now, Himachal ka …* and he got up to tell you what actually was the PM National Relief Fund. So, that debate is over, done with, and dusted. You can go and remind yourself through the social media. …(Interruptions) Do not worry. I will send you that clip. Have a look at it and then come back.
Under the PM Gram Sadak Yojana, more than 2,11,000 kms of roads have been built since 2014-15. The benefits of Gram Sadak Yojana do not go to the private gated communities of …* and crony capitalists. Whose life lines are these? …(Interruptions)
प्रो. सौगत राय : सर, मैडम क्रोनी-क्रोनी बोलती जा रही हैं …(व्यवधान)
श्रीमतीनिर्मलासीतारमण : हम नहीं बोल रहे हैं…(व्यवधान)
Sir, Professor is a very alert Member of the House. When other Members speak, he catches every word and says, “Hey, but this one”, “Hey, but that one”. But you noticed one thing, Sir? एक्चुअली क्रोनी कैपिटलिज्म का एलिगेशन डालने वाले कांग्रेस से कोई यह बात करता है, Professor never gets up. He shivers. Must not talk in front of Congress! All the courage is only on us. …(Interruptions) All the courage is only on us. …(Interruptions)
SUSHRI MAHUA MOITRA (KRISHNANAGAR): What …* is this? …(Interruptions)
SHRIMATI NIRMALA SITHARAMAN: Madam, nobody talks …* …(Interruptions) Don’t you say that. …(Interruptions) Oh! Insulting! …(Interruptions)
Sir, the number of farmers registered under e-NAM …(Interruptions) The number of farmers registered under e-NAM is 1,00,69,000. The number of digital transactions happening in the UPI is …(Interruptions) Absolutely, continuously calling the Prime Minister all abuses. Very unfortunate. …(Interruptions)
Sir, the number of farmers registered under PM Fasal Bima Yojana is nine crores. From farmers, you take away their land for cheap, but we do not do that. We send Rs. 6000 to their account. Through Direct Benefit Transfers, nine crore farmers are benefited. They are no …* …(Interruptions). Loans sanctioned under Mudra Yojana go to 27 crore people who are really running small businesses. So, MSME or small businesses have all been absolutely taken care of by this Government. So, much before really anyone comes up with questions or false allegations, of late, false narratives are the ones which are being propagated rather than coming to the House and talking in details about what is being offered in the Budget or any other programme.
Sir, there are two or three specific questions and after that, I will come to the conclusion. Member Supriya Sule Ji had asked this question and I partly sort of got up to reply her on what is that 41 and 42 per cent allocation in the Finance Commission. I think roughly that has been explained as to what is 42 percent and why it has come down to 41 per cent. It has not actually come down; it is the due appropriate share for the States. But the question she had then asked and which I chose to answer during the reply was what happens to this modernization fund for defence and internal security. That is a proposition which is not even before me. While the Finance Commission’s comment on a non-lapsable fund for defence is something in principle we have agreed to, but the modalities and other things will have to be worked out talking with the Defence Minister and the entire Defence team. So, this particular thing has been mentioned in the Action Taken Report submitted to the Parliament, but the modalities will be worked out and we will see to it in the due course.
I think it was Shri N.K. Premachandran who questioned about discrepancy. I want to tell him which he saw as a discrepancy in the numbers in the Budget Speech about Aatmanirbhar package, estimated at 27.1 lakh crore vis-à-vis Rs. 29.86 lakh crore announced by the Government, there is no discrepancy. I want to let the hon. Member know about it. Within 48 hours of declaring the lockdown, Pradhan Mantri Garib Kalyan Yojana was announced with an estimated value of Rs. 2.7 lakh crore and that was announced for free food grains, free cooking gas, direct cash transfer to the farmers, for the women, for the elderly citizens and so on. I had mentioned this in para 4 of my Speech. But later the Government announced three Aatmanirbhar packages with the total financial impact of about Rs. 27.1 lakh crore including the financial impact of measures taken by the RBI. The combined financial impact of Garib Kalyan Yojana and Aatmanirbhar package is Rs. 29.87 crore. Therefore, there is no discrepancy. I want to let the Member know about it.
The Member, Shri Premachandran, also asked as to how do you see that this Budget would increase demand in the country. This was the question that he legitimately asked. I would like to point out that the course we have taken for giving stimulus to the economy through spending on developmental activity; through spending on infrastructure; and improving the CAPEX of the Government has resulted in the increase in capital outlay from Rs. 4.12 lakh crore in the current year, which is nearing end, to Rs. 5.54 lakh crore in the new BE 2021-2022, which is a substantial increase and when money is spent on capital expenditure, all of us would agree, the multiplier effect will immediately create jobs and that creation of jobs will also have an impact on the core industry demands because there will be need for more cement, steel, etc. and that demand will also generate more and more jobs. So, it will have both direct and indirect impact on the economy immediately and also be sustained in the medium and long term. …(Interruptions)
There was another question that the Member, Shri Premachandran, asked that how can we justify that in 2019-2020 -- there was no COVID, of course, there was no COVID -- the Budget Estimate of fiscal deficit was 3.3 per cent of the GDP whereas in the Revised Estimate for that very year it has been shown as 4.6 per cent. I would definitely like to answer that question because I am sure that it is a matter of interest for a lot of Members. In August, 2020, the Government has placed a Statement of Deviation on the fiscal deficit as per the provisions of Section 7 (3) (b) of the FRBM Act in the Parliament. Hon. Member, I draw your attention to this Statement, which outlines the reasons for deviation of 0.8 per cent from the revised target of fiscal deficit of 3.8 per cent of GDP for the year 2019-2020. The deviation was necessitated on account of structural reforms both on the supply and on the demand side. Therefore, that was brought in.
One important aspect, Sir. Some Members have questioned whether allocations for Minority Affairs and whether allocations for SC and ST have been reduced. No, they have not been reduced. The total allocation for Minority Affairs is Rs. 4,811 crore in the BE of 2021-2022, which is an 8.6 per cent increase for that Ministry higher than even the actual expenditure. Therefore, that has not been reduced.
On the SC / STs, the overall allocation provided for the welfare of SCs have shown an increase from Rs. 83,257 crore in 2020-2021 compared to Rs. 1,26,259 crore in this BE presented as Budget now for 2021-2022. The overall allocation provided for the welfare of STs have also shown an increase from Rs. 53,653 crore in the BE of 2020-2021 to Rs. 79,942 crore in the BE of 2021-2022.
Sir, I think I have addressed most of what Members had asked. However, there is one issue on which I want to draw the attention of the Members.
SHRI ADHIR RANJAN CHOWDHURY (BAHARAMPUR): Madam, what about the rate of employment?
SHRIMATI NIRMALA SITHARAMAN: I have given a lot of information on employment, Opposition Leader.
PROF. SOUGATA RAY: What about cash transfer?
SHRI DAYANIDHI MARAN (CHENNAI CENTRAL): Can you reduce the excise on gas, diesel and petrol? …(Interruptions)
SHRIMATI NIRMALA SITHARAMAN: Sir, I will come to one issue on which I certainly want to draw the attention of this House. There is a culture in this House since when the Parliament was established and all of us have been swearing by the Constitution.
We have been functioning effectively to make India a strong democracy. But it was such a disappointment for me; I was here that day to hear the former President of the Opposition party, stand up and say,`I will only speak on the farmers' issue, then, I will go quiet’. Hon. Speaker, Sir, because there was a lot of demand, and you, gently reminded saying, there is this Budget discussion now, and that we should discuss the Budget. …(Interruptions) I concede that. No worries. What am I doing? I would like to ask you, what am I doing? I am talking about the Budget. I am replying to the Members who stood up and spoke on the Budget debate; I am replying to each one on their issues. Each Member stood up and spoke about the issues which they thought were significant. …(Interruptions) Please listen. Please don’t unnecessarily read my mind in advance. …(Interruptions)
Hon. Speaker, Sir, the attempt here is to reply to each Member for the various issues that they have raised, and I shall reply for the issues raised, and even justifying now. I agree, Oh farm issues! Definitely are relevant for the Budget. Even the hon. Member, who is not present here, I am not taking his name but I also want to address the issues raised by him that day. Farm issues will have to be spoken about because they are also part of the budgetary discussion. …(Interruptions) Don’t worry. I am answering. …(Interruptions) Please hear. …(Interruptions) You don’t want me to answer the issues raised by your hon. Leader. I am answering. …(Interruptions) Don’t worry, I am answering that. …(Interruptions) You don’t mind. …(Interruptions) Sir, if you have heard the hon. Member, Shri Suresh says, I should take the name. If you give me the permission, hon. Speaker, Sir, in the absence of that Member, I will take his name. …(Interruptions) Alright, Sir. …(Interruptions) And the Member had said, `Farm Bills are also part of the Budget. I am laying the foundation, and therefore, I am speaking about it’. Therefore, I would respond, Sir. I am sure, you will help me. Since Shri Kodikunnil Suresh has given me permission, and you, I suppose, wouldn’t mind me, Shri Rahul Gandhi stood up, and spoke … …(Interruptions)
माननीय अध्यक्ष: मंत्री जी, आप बोलिए ।
…(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष: माननीय मंत्री जी, एक मिनट । माननीय मंत्री जी किसी का नाम ले रही हैं, अगर वह सदन के सदस्य हैं तो मंत्री जी उनका नाम ले सकती हैं । इसमें क्या दिक्कत है?
…(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष: वह सदन का सदस्य है, इसलिए नाम ले सकती हैं । यह उपस्थित या अनुपस्थित का सवाल नहीं है । माननीय सदस्य का नाम ले सकती हैं । वह सभी सदस्यों का नाम ले रही हैं, जिन्होंने बजट पर चर्चा की है ।
…(व्यवधान)
SHRIMATI NIRMALA SITHARAMAN: When the foundation was being laid for the speech on the Budget, which never happened, on the matters raised during that laying of the foundation, there are some things which I want to ask. I will also state my expectation when he stood up to lay the foundation. My expectations were that he will explain why the Congress Party has taken a U-turn in its position. In the 2019 election manifesto, they said very similar things that we have done in the farm Acts. …(Interruptions)
SHRI ADHIR RANJAN CHOWDHURY: Madam, again, you are distorting. …(Interruptions)
SHRIMATI NIRMALA SITHARAMAN: Sir, please allow me to give a response. This kind of disruption is unwarranted.…(Interruptions)
माननीय अध्यक्ष: प्लीज,माननीय सदस्य बैठ जाइए ।
SHRIMATI NIRMALA SITHARAMAN: Have I said anything unparliamentary for this disruption? We expected that he would stand up. This is number one, I have ten such things to say. दस विषयों के ऊपर मैं अपने एक्सपेक्टेशन आपके सामने रखना चाहती हूं ।, जिसके ऊपर कभी न कभी कांग्रेस पार्टी की तरफ से जवाब देना ही पड़ेगा । वह बजट स्पीच पर खड़े होकर फाउन्डेशन ले कर रहे थे, वे बजट स्पीच नहीं हुई थी । फर्स्ट इश्यू में मेरा एक्सपेक्टेशन था कि बजट पर चर्चा करने से पहले फार्म लॉस के ऊपर ये बातें बोलेंगे, कुछ स्पष्टीकरण देंगे कि कांग्रेस पार्टी ने क्यों यू टर्न लिया, पहले इसका समर्थन देते थे, अभी क्यों स्टैंड बदला?
सेकंड, फार्मर्स के ऊपर इतना ध्यान देने वाली कांग्रेस फार्म लोन वेवर्स के बारे में बहुत सारे स्टेट्स में इलेक्शन जीतने के लिए वायदा करते थे कि हमें वोट दे दो, फार्म लोन दे रहे हैं । जनता ने भरोसा रखकर वोट दिया,मगर मध्य प्रदेश में इसका इम्पिलेमेन्टेशन नहीं हुआ, फार्मर्स आज तक लोन मांग रहे हैं, हमारा लोन वेवर्स क्यों नहीं हुआ? वोट मांगा और वोट ले लिया, सरकार बनाने का बहाना किया, अभी सत्ता उनके हाथ में नहीं है । फार्म लोन के बारे में गुमराह करके किसानों को बैकस्टैब करके चले गए, राजस्थान में फार्म लोन नहीं हो रहा है,आज भी कम्पलेंट्स है ।
मेरा एक्सपेक्टेशन था । …(व्यवधान) कर्ज माफी राजस्थान में नहीं हुई,मध्य प्रदेश में नहीं हुई,छत्तीसगढ़ में भी कर्ज माफी नहीं हुई । मेरी एक्सपेक्टेशन यही था कि जब वरिष्ठ नेता भाषण देने से पहले फाउन्डेशन ले कर रहे थे, कम से कम यह मानेंगे कि कर्ज माफी क्यों नहीं हुई, उस पर बयान देंगे,लेकिन बयान नहीं दिया ।
तीसरा, मैंने सोचा, वह बजट भाषण देने से पहले फाउन्डेशन ले कर रहे हैं, उस समय कम से कम यह बात बोलेंगे कि मैंने पंजाब सीएम को आदेश दे दिया,जो काला कानून है और जिसके द्वारा किसान के जेल जाने का प्रोविजन है,पांच लाख रुपये के फाइन का प्रोविजन है, दोनों प्रोविजन्स को हटाने के लिए मैं पंजाब के चीफ मिनिस्टर को आदेश देकर आई हूं । इस बारे में पार्लियामेंट में वह खुलासा करेंगे, इस बारे में मैंने एक्सपेक्टेशन रखा, लेकिन वह भी नहीं हुआ ।
चौथा, राहुल गांधी जी उस दिन बजट के ऊपर नहीं,बल्कि फार्म लॉस के ऊपर बात कर रहे थे । उस समय मैंने यह भी एक्सपेक्ट किया, कम से कम यह बात बोलेंगे कि किसान के पराली के विषय में उनको बहुत ही दुख-दर्द है । पंजाब में कांग्रेस सरकार द्वारा कुछ राहत दिलाएंगे, जिससे पराली का प्रॉबल्म नहीं रहेगी और उनको वह राहत दिलाएंगे,वह इसकी भी घोषणा करेंगे । ये भी मैंने एक्सपेक्ट किया, मगर वह भी नहीं हुआ । मैंने यह भी एक्सपेक्ट किया कि जो तीन कानून हैं, उसमें कम से कम एक खंड निकालेंगे कि देखो इस क्लॅाज की वजह से नुकसान होने वाला है,इसलिए हम समर्थन नहीं करेंगे । इधर वोटिंग में भाग लिया और समर्थन दिया, फिर मन बदल दिया । इन तीन कानूनों में से एक भी पाइंट दिखाएंगे ।
This is against the farmer. मैंने सोचा, मैंने एक्स्पेक्ट किया कि वह कम से वह बात फाउंडेशन ले करने के समय बोलेंगे, लेकिन वह भी नहीं हुआ । पांचवां प्वाइंट हो गया ।…(व्यवधान)
अब मैं सिक्स्थ प्वाइंट पर आ रही हूं । मैंने यह भी एक्स्पेक्ट किया, महामहिम राष्ट्रपति जी के अभिभाषण पर माननीय प्रधानमंत्री जी का जवाब था,उसमें उन्होंने बहुत सारी बातें छोटे किसान पर बोलीं । मैंने सोचा कि उन विषयों में, छोटे किसानों से, हम दो हमारे दो के लिए किसानों से जमीन हड़पते गए । मैंने सोचा कि वे खड़े होकर यह बात बोलेंगे कि प्रधान मंत्री जी, आपने तो स्मॉल फार्मर्स पर इतना अच्छा बोल दिया, प्लीज़ फार्मर्स की जमीन वापस कर दो, हमने तो सस्ते में उनसे ले ली,यह किसानों की जमीन है, हम राजनीति में हैं,हमें खड़े होना है, राजनीति में हमारे परिवार और हमने खड़े होना है, आप जमीन वापस कर दो जी । इधर हक करके बोल सकते थे, हम दो, हमारे दो में …* को आदेश करके आई हूं कि जमीन वापस करो,लेकिन नहीं कहा । वह भी नहीं हुआ । मेरी सिक्स्थ एक्स्पेक्टेशन नहीं हुई ।…(व्यवधान)
मेरी सातवीं एक्सपेक्टेशन है । प्रधान मंत्री जी ने डॉ. मनमोहन सिंह जी की क्योटेशन पढ़ी, उनकी तरफ से भी ऐसे प्रावधान किसानों के लिए किए गए थे, यह भी बोले । मैंने उस दिन, फाउंडेशन ले करने के समय सोचा, बजट इम्पोर्टेंट नहीं है, किसान कानून इम्पोर्टेंट है, वे कम से कम बोलें । क्यों डॉ. मनमोहन सिंह जी की स्टेटमेंट को कांग्रेस अभी भूल रही है? इसकी याद प्रधान मंत्री जी ने दिलाई । मैंने सोचा कि कम से कम वे मानेंगे । हां, डॉ. मनमोहन सिंह जी ने ऐसी बात की है, I have to respect. We will respect now. We will not dishonour Dr. Manmohan Singh. यह कहेंगे,ऐसी मैंने एक्स्पेक्टेशन रखी,लेकिन वह भी नहीं हुआ । …(व्यवधान) That was the seventh.
मेरी आठवीं एक्सपेक्टेशन थी । …(व्यवधान) क्योंकि किसान कानून बजट का भाग हो सकता है, इसलिए बजट की चर्चा के समय बहुत से मैम्बर्स ने यह प्रश्न उठाया । मुझे याद है और मैंने सुना । क्या एपीएमसी देश भर में यह कानून आने के बाद बंद हुआ है? कहीं बंद नहीं हुआ । मैं एक्स्पेक्टेशन के साथ प्रश्न भी पूछ रही हूं, to prove even if one APMC mandi was shut. Not one was shut. But you are standing up and speaking here. ऊपर से बजट में प्रावधान किया गया है । Rs.30,000 crore which will be collected through the Agricultural Development Infrastructure Cess will actually be going to the States so that APMC infrastructure can be improved. हम ऊपर से स्टेट्स को एपीएमसी का स्ट्रक्चर बढ़ाने के लिए फंड भी दे रहे हैं । यह भी नहीं बोला,लेकिन फाउंडेशन ले करते रहे और वापस चले गए बिना बजट पर चर्चा किए हुए । …(व्यवधान)
नौवां प्वाइंट, यह मेरी एक्सपेक्टेशन थी लेकिन अब मेरा प्रश्न है । Why does he choose to insult Constitutional authorities? Why does he choose to insult Constitutional authorities? क्योंकि उस दिन इधर सम्माननीय स्पीकर साहब की इन्सल्ट हुई,उनका बड़प्पन है, आप लोगों ने मुझे चुनकर बिठाया है,इसलिए House should run as per the rules of this House. ऐसे करके बात छोड़ दी ।…(व्यवधान) मगर इधर इन्सल्ट, इससे पहले डॉ. मनमोहन जी की इन्सल्ट इस कानून के ऊपर । …(व्यवधान) डॉ. मनमोहन जी जब विदेश में प्रधान मंत्री के नाते गए थे,उस समय उनके द्वारा पास किए गए ऑर्डिनेंस को फाड़कर कूड़े में फेंका । …(व्यवधान) Why does he choose to insult? …(व्यवधान)
महामहिम राष्ट्रपति जी के अभिभाषण के बाद हाउस में चर्चा होती है, खत्म होने के बाद उसी विषय पर चर्चा करना और उसी विषय को बहाने के साथ बोलते रहना, continuously insulting Constitutionally elected authorities. महामहिम राष्ट्रपति हों या माननीय प्रधान मंत्री हों, तब के प्रधान मंत्री हों या अब के प्रधान मंत्री हों, कन्टीनुअसली इन्सल्टिंग । …(व्यवधान)
दसवां प्वाइंट, कन्टीनुअसली फेक नरेटिव्स करते रहे । …(व्यवधान) अरे, कोविड आ गया, पूरा भारत नुकसान में चला जाएगा । …(व्यवधान) अरे,इतने सारे लोग मर जाएंगे । मेरे पास पूरी क्योटेशन्स हैं, समय-समय पर वरिष्ठ नेता बोलते रहे ।…(व्यवधान) मेरे पास पूरी क्योटेशन्स हैं । I do not want to waste the time of the House on quotations. But the Saaransh is this. I will constantly say things which will demean India, which will show India in poor light, and constantly that will be my rebel-like look to insult India, build fake narratives; nothing will go well for India. यही कहते रहे, कहते रहे । हमारे खिलाफ Kind of mischief- I am using a lighter word – करने वाले देश के साथ, पार्टी की ओर से, सरकार से एमओयू नहीं ।…(व्यवधान) सरकार से सरकार एमओयू नहीं, पार्टी टू पार्टी एमओयू करके, जब देश के बॉर्डर पर कुछ क्राइसिस होता है, तब हमसे बात न करते हुए, हम को छोड़ो, सरकार से बात न करते हुए, उनके दूतावास से बात करते हैं कि बॉर्डर में क्या हो रहा है? …(व्यवधान) ऐसा करने वाले और कभी भारत देश का भरोसा न करते हुए बाकी सबका भरोसा करने वाले और Joining the ‘breaking India’ fringe group. …(व्यवधान)पार्टी के एक वरिष्ठ, सीनियर नेता का फ्रिंज ग्रुप के साथ बार-बार पोलिटिक्स करना और भयंकर एब्यूज़, total unacceptable terminology for Constitutionally elected heads का उपयोग करते रहना । सुप्रीम कोर्ट द्वारा कटाक्ष होने के बाद एपोलोजाइज करना और दोबारा वही साइकल में, एब्यूज़ करो, एपोलोजाइज करो, एब्यूज़ करो, एपोलोजाइज करो, इसी रास्ते पर चलना, डिस्ट्रिक्टिव पॉलिसी करना ।…(व्यवधान) I am very scared to think he is probably becoming doomsday man for India. …(व्यवधान)
हमारे लिए दु:ख की बात है कि पॉर्लियामेंट में स्ट्रांगली पोजीशन लेकर सरकार को कटघरे में रखकर प्रश्न पूछने का रोल करने वाली अपोजिशन आज डूम्सडे मैन के नेतृत्व में …(व्यवधान)और डूम्सडे मैन जो रिपीटिडली एब्यूज़ करता है, …(व्यवधान) मैं यह बात भी बोल रही हूं ।…(व्यवधान)You cannot have this objection. You are bound to answer. …(Interruptions) Sir, let them have the strength to accept this. In Parliament, debate on Budget happens traditionally. …(Interruptions) Budget debate happens every year. In free India’s history, discussion on We won’t discuss Budget करने वाले अपोजिशन लीडर क्या रोल प्ले करना चाहते हैं? कौन सा रोल प्ले करना चाहते हैं? I want to aso ask of you, Budget happens every year. …(Interruptions)
चौधरी जी, आप ज़रा सुनिए…(व्यवधान) राज्य सभा में पार्टी के वरिष्ठ नेता बजट पर चर्चा करते हैं और प्रश्न पूछने के बाद जवाब सुनते हैं ।
वह जवाब चाहे पसंद हो,नापंसद हो,एक्सेप्टेबल हो या न हो, उसके बाद वे एक पोजिशन लेते हैं । वह इधर क्यों नहीं हुआ?उसी पार्टी का राज्य सभा में एक पोजिशन और इधर दूसरा पोजिशन है । यह क्या तरीका है? With these 10 questions …(Interruptions) We will tell you about everything that you want. …(Interruptions) कांग्रेस पार्टी के दो विषय में कहना चाहती हूं । Please sit down, Chowdhury ji. …(Interruptions) मैं दो टेंडेंसी के बारे में बताकर अपनी बात खत्म कर रही हूं । मुझे दो टेंडेंसी स्पष्ट दिखाई दे रही हैं । एक फेक नरेटिव्स की टेंडेंसी है ।
हमने मनरेगा क्रिएट किया, हमने ये किया है, लेकिन,आप ही उसको आगे बढ़ाने का मन नहीं बना पाए । आप उसको आगे बढ़ाने में एफिशिएंट नहीं हैं । एलोकेशन है, लेकिन यूटिलाइजेशन कम है । इसी प्रकार,हर स्कीम में अपने लिए कुछ देखने की आदत भी एक टेंडेंसी है । उसमें क्रोनी कैपिटलिज्म है । ये कहते हैं कि हमने बैंक को नेशनलाइज्ड किया है । लेकिन,पूरे बैंक का उपयोग फोन बैंकिंग द्वारा करके एनपीए छोड़ कर चले गए । यह है उनकी टेंडेंसी । This is one tendency to create institutions, misuse them, use it for our own. ‘हम दो, हमारे दो’ and at the end of the day, keep accusing others. That is one tendency. The second tendency is this, हमें पार्लियामेंट में जो-जो कहना है, वह कहेंगे । हम आपके ऊपर बहुत सारे एलिगेशन्स डालेंगे, आपके ऊपर एब्यूसिव लैंग्वेज भी यूज करेंगे,लेकिन जब आप सिस्टम के तहत खड़े होकर प्वाइंट बाई प्वाइंट जवाब देने के खड़े होते हैं, मगर सुनने को तैयार नहीं है, जैसे अभी हो रहा है । कभी भी डिस्टर्ब करो,चिल्लाते रहो या तो वाक आउट करो । बजट डिबेट में भी वही हुआ । इसलिए,हमें कांग्रेस पार्टी की इस दो टेंडेंसी को पहचानना चाहिए । इससे स्पष्ट होता है कि उनका belief in democratic, elected Parliamentary system is completely खत्म । धन्यवाद ।
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