State Consumer Disputes Redressal Commission
U P Avas Vikas Parishad vs Jagdev Singh on 20 October, 2022
Cause Title/Judgement-Entry STATE CONSUMER DISPUTES REDRESSAL COMMISSION, UP C-1 Vikrant Khand 1 (Near Shaheed Path), Gomti Nagar Lucknow-226010 First Appeal No. A/2011/1381 ( Date of Filing : 27 Jul 2011 ) (Arisen out of Order Dated in Case No. of District State Commission) 1. U P Avas Vikas Parishad a ...........Appellant(s) Versus 1. Jagdev Singh a ...........Respondent(s) BEFORE: HON'BLE MR. SUSHIL KUMAR PRESIDING MEMBER HON'BLE MR. Vikas Saxena JUDICIAL MEMBER PRESENT: Dated : 20 Oct 2022 Final Order / Judgement राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग , उ0प्र0, लखनऊ (मौखिक) अपील सं0- 1381/ 2011 1.
सम्पत्ति प्रबंध अधिकारी, उ0प्र0 आवास एवं विकास परिषद आफिस काम्पलेक्स, इन्दिरा नगर, लखनऊ।
2. उ0प्र0 आवास एवं विकास परिषद 104 महात्मा गांधी मार्ग लखनऊ द्वारा कमिश्नर।
......अपीलार्थीगण बनाम श्री जगदेव सिंह पुत्र श्री कन्हैया लाल, निवासी मकान नं0- एस/628 सत्यप्रेमी नगर शहर नवाबगंज, जिला बाराबंकी।
.........प्रत्यर्थी समक्ष:-
माननीय श्री सुशील कुमार, सदस्य।
माननीय श्री विकास सक्सेना, सदस्य।
अपीलार्थीगण की ओर से उपस्थित : श्री मनोज मोहन के सहयोगी अधिवक्ता श्री संजय कुमार कुंतल।
प्रत्यर्थी की ओर से उपस्थित : श्री अश्वनी कुमार पाण्डेय, विद्वान अधिवक्ता। दिनांक:- 20.10.2022 माननीय श्री विकास सक्सेना , सदस्य द्वारा उद्घोषित निर्णय
1. परिवाद सं0- 97/2004 जगदेव सिंह बनाम सम्पत्ति प्रबंध अधिकारी व एक अन्य में जिला उपभोक्ता आयोग, बाराबंकी द्वारा पारित निर्णय एवं आदेश दि0 08.04.2011 के विरुद्ध यह अपील राज्य आयोग के समक्ष प्रस्तुत की गई है।
2. प्रश्नगत निर्णय एवं आदेश को इन आधारों पर चुनौती दी गई है कि प्रत्यर्थी/परिवादी को आवंटन के लिए कोई भूखण्ड उपलब्ध नहीं है। इसलिए भूखण्ड आवंटन पर विचार करना विधि विरुद्ध है।
3. अपील विलम्ब से प्रस्तुत की गई है, परन्तु अपीलार्थीगण द्वारा अपील प्रस्तुत करने में हुए विलम्ब को माफ करने हेतु विलम्ब माफी प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया गया है जो शपथ पत्र से समर्थित है। अपील प्रस्तुत करने में हुए विलम्ब का पर्याप्त कारण दर्शित किया गया है। अत: विलम्ब माफी प्रार्थना पत्र स्वीकार किया जाता है और अपील प्रस्तुत करने में हुए विलम्ब को क्षमा किया जाता है।
4. अपील सुनवाई हेतु अंगीकृत की जाती है।
5. अपीलार्थीगण के विद्वान अधिवक्ता श्री मनोज मोहन के सहयोगी अधिवक्ता श्री संजय कुमार कुंतल और प्रत्यर्थी के विद्वान अधिवक्ता श्री अश्वनी कुमार पाण्डेय को सुना गया। प्रश्नगत निर्णय व आदेश तथा पत्रावली पर उपलब्ध अभिलेखों का सम्यक परिशीलन किया गया।
6. अपीलार्थीगण के विद्वान अधिवक्ता का मुख्य तर्क यह है कि प्रत्यर्थी/परिवादी को भवन आवंटित कर दिया गया है कोई भूखण्ड आवंटन उपलब्ध नहीं है जब कि प्रत्यर्थी/परिवादी के विद्वान अधिवक्ता यह तर्क है कि केवल भूखण्ड की आवश्यकता है। उनके द्वारा कभी भवन की मांग नहीं की गई न ही भूखण्ड के स्थान पर भवन उपलब्ध कराया गया है। चूँकि प्रत्यर्थी/परिवादी द्वारा भवन के लिए आवेदन प्रस्तुत नहीं किया गया। भूखण्ड के लिए पंजीकरण कराया गया। भूखण्ड के स्थान पर भवन आवंटित किया जाना था तब उपभोक्ता की सहमति लिखित में प्राप्त करना था जो नहीं किया गया। अत: निश्चित रूप से अपीलार्थीगण/विपक्षीगण द्वारा अपने उपभोक्ता के प्रति सेवा में कमी की गई है। इसलिए विद्वान जिला उपभोक्ता आयोग द्वारा पारित प्रश्नगत निर्णय एवं आदेश में कोई अवैधानिकता नहीं है। तदनुसार अपील खारिज होने योग्य है।
आदेश
7. अपील खारिज की जाती है। विद्वान जिला उपभोक्ता आयोग द्वारा पारित प्रश्नगत निर्णय एवं आदेश की पुष्टि की जाती है।
अपील में उभयपक्ष अपना-अपना व्यय स्वयं वहन करेंगे।
अपील में धारा 15 उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के अंतर्गत अपीलार्थीगण द्वारा जमा धनराशि अर्जित ब्याज सहित इस निर्णय एवं आदेश के अनुसार जिला उपभोक्ता आयोग को निस्तारण हेतु प्रेषित की जाए।
आशुलिपिक से अपेक्षा की जाती है कि वह इस निर्णय/आदेश को आयोग की वेबसाइट पर नियमानुसार यथाशीघ्र अपलोड कर दें।
(विकास सक्सेना) (सुशील कुमार) सदस्य सदस्य शेर सिंह, आशु0, कोर्ट नं0- 3 [HON'BLE MR. SUSHIL KUMAR] PRESIDING MEMBER [HON'BLE MR. Vikas Saxena] JUDICIAL MEMBER