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Lok Sabha Debates

Further Discussion On The Resolution Regarding Special Status To State Of Bihar ... on 26 August, 2011

> Title: Further discussion on the resolution regarding special status to state of Bihar moved by Dr. Bhola Singh on the 21st August, 2010.

   

MR. CHAIRMAN :  Now the House will take up Item No. 13 –   Shrimati Putul Kumari to continue.

 

श्रीमती पुतुल कुमारी (बांका):सभापति महोदय, बिहार पर चल रही इस चर्चा को आगे बढ़ाने का मुझे फिर से मौका मिला है।

          जैसा कि मैं पिछली बार कह रही थी कि हमें इस चर्चा में भाग लेते हुए खुशी भी है और दुख भी है कि आजादी के 6 दशक के बाद भी हम इस चर्चा को कर रहे हैं, क्योंकि हमारा एक राज्य इतना पिछड़ा है कि कभी हम उसके लिए आर्थिक सहायता मांगते हैं, कभी इसको विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग करते हैं। ऐसा देश भारतवर्ष, जो विकासशील होने का दावा कर रहा है, जिसके पास विदेशी मुद्रा का इतना बड़ा भंडार है, फिर भी कुछ एक प्रान्त इतने पिछड़े हुए हैं, जिसके लिए बार-बार हमारी आवाज इस महापंचायत में उठती है।        

          बिहार की इस बेबसी, लाचारी के पीछे के कारणों को बताने के पहले मैं थोड़ी सी बातें इसके गौरवपूर्ण इतिहास और गौरवपूर्ण अतीत की कहना चाहती हूं, कुछ परतें खोलना चाहती हूं। आज हम जिस लोकतांत्रिक व्यवस्था की बात करते हैं, जिस लोकतांत्रिक व्यवस्था के तहत हम यहां पर आये हैं, जनप्रतिनिधि के रूप में बनकर आये हैं, उस लोकतांत्रिक व्यवस्था की बात...( व्यवधान)

MR. CHAIRMAN: Please maintain silence in the House.

श्रीमती पुतुल कुमारी :सदियों पहले भारत में बिहार के लिच्छवी राजवंश ने इस गौरवपूर्ण व्यवस्था की शुरूआत की थी। बिहार में इस लोकतांत्रिक व्यवस्था की शुरूआत सदियों पहले वैशाली राज्य में हो गई थी। बिहार में ही वह अंग देश है, जहां कि अंगिका बोली जाती है। हमारे शाहनवाज़ भाई वहां से आते हैं, जो महावीर दानी कर्ण की भूमि कही जाती है, जिन्होंने यह जानते हुए भी कि उनके दरवाजे पर खड़े हुए याचक स्वयं भगवान हैं और कवच और कुंडल अगर वे दे देंगे तो वे मृत्यु को प्राप्त होंगे। यह जानते हुए भी महावीर दानी कर्ण ने कवच और कुंडल दान में दे दिये थे, बिहार की ऐसी भूमि है। बिहार में ही मिथिला प्रान्त है, जहां मंडन मिश्र जैसे ज्ञानी रहा करते थे। उनकी विद्वता की चर्चा सुनकर उनसे शास्त्रार्थ करने के लिए शंकराचार्य आये। आदि शंकराचार्य ने गांव में घुसते ही पूछा कि मंडन मिश्र का घर कहां है। गांव के लोगों ने बताया कि आप सीधे चले जाइये, उस द्वार पर, जहां पर तोता बैठकर वेदों का पाठ कर रहा है जहां वह आत्मा और परमात्मा की प्राचीनता की गाथा कर रहा है, वही घर मंडन मिश्र का घर है।  बिहार गौतम बुद्ध और महावीर जैन की तपोभूमि है।  यहां से सत्य और अहिंसा का प्रचार-प्रसार पूरे विश्व में किया गया। यहां विक्रमशिला और नालंदा विश्वविद्यालय जैसे महाविद्यालय हैं, जो आज भी शिक्षा के जगत में एक मॉडल का रूप बन सकते हैं।

          महोदय, अब मैं आधुनिक भारत के स्वतंत्रता संग्राम में बिहार की भूमिका के बारे में बताना चाहती हूं। ...( व्यवधान)

सभापति महोदय :  पुतुल जी, आप बिहार की महिमा का बखान कर रही हैं, तो लोगों को ध्यान से सुनना चाहिए।  आप आगे आकर अपनी बात कहिए।

श्रीमती पुतुल कुमारी :  महोदय, भारत के स्वतंत्रता संग्राम के समय में महात्मा गांधी अफ्रीका से पढ़कर लौटे।  उन्होंने अपने महागुरू के पास जाकर कहा कि मैं स्वतंत्रता संग्राम की इस लड़ाई में हिस्सा लेना चाहता हूं।  उनके गुरू गोखले ने कहा कि अभी-अभी बाहर से पढ़कर आए हो, जाकर पूरा भारतवर्ष घूमो, लेकिन एक रात से ज्यादा कहीं मत रूकना, एक साल के बाद मुझसे मिलना और बताना कि तुम्हारा निर्णय क्या है?  महात्मा गांधी एक साल के बाद गुरू गोखले से मिले और उन्होंने उनसे कहा।  ..( व्यवधान)

सभापति महोदय : कृपया शांत रहे।  पुतुल जी बहुत अच्छी-अच्छी बातें कर रही हैं।  मैं सदन से आग्रह करूंगा कि तन्मयता के साथ इनकी बात को सुनें।

श्रीमती पुतुल कुमारी :महोदय, यह बहुत संवेदनशील मुद्दा है।  मैं चाहती हूं कि सभी लोग इसे पूरे ध्यान से सुनें।  आज बिहार जैसी दीन-हीन दशा में है, बिहार हमेशा से वैसा नहीं था। बिहार के गौरवमय अतीत के बारे में आपको बताना चाहती हूं।  एक साल के बाद महात्मा गांधी गोखले जी के पास गए और उन्होंने उनसे कहा कि मेरा इरादा दृढ़ है।  मैं स्वतंत्रता संग्राम की लड़ाई का हिस्सा बनना चाहता हूं और मैंने तय किया है कि इस आंदोलन की शुरूआत बिहार से करूंगा, क्योंकि वहां की मिट्टी में मुझे ऊर्जा दिखाई देती है।  

          महानुभाव, बिहार की मिट्टी ऊर्जावान है, राजनीतिक स्रोत से ओतप्रोत है।  वहां तरह-तरह के खनिज पदार्थ भी हैं, नाना प्रकार के खनिज, जैसे कोयला, अभ्रक और बॉक्साइट से भरा हुआ है।  विश्व प्रसिद्ध रेशम, टसर, मधुबनी पेंटिंग, जो मिथिला की मुख्य पेंटिंग हैं, जिसके बारे में हम बात कर रहे थे कि विश्व के कोने-कोने में मधुबनी पेंटिंग की सराहना की जाती है, ये सब चीजें वहां बनती हैं।  बिहार की धरती को राइस बेल्ट कहा जाता है।  वहां तरह-तरह के सुगंधित और अच्छे चावल भी होते हैं।  धन-धान्य से भरी हुयी यह धरती है।  यहां मेहनतकश और ईमानदार लोग हैं, तो फिर ऐसा क्यों हुआ कि बिहार पीछे रह गया?  आज हम बिहार के लिए कभी विशेष पैकेज की मांग करते हैं, कभी विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग करते हैं, ऐसा क्यों हुआ?  बिहार के विकास की कहानी को जानने के लिए हम पीछे चलते हैं।  वक्त ने करवट बदली और समय के साथ  बिहार का वक्त भी बदल गया।  बिहार के धन-धान्य को लोगों ने इस्तेमाल किया।  हमारी यहां की खदानों से कोयला निकला, दूसरे राज्यों में पटरियां बिछीं, तो वहां कोयला गया।  हमारे खनिज पदार्थ दूसरे राज्यों में गए, लेकिन उनकी फैक्ट्रियां हमारे यहां नहीं लगीं।  हमारे खनिज पदार्थों और कोयले का लाभ हमें नहीं मिला।  दूसरे प्रदेशों में फैक्ट्रियां लगीं और उनकी अर्थव्यवस्था मजबूत हुयी।  दूसरे राज्य आगे बढ़े और वहां कल-कारखाने लगे, बड़े-बड़े कारखाने लगे, चिमनियां धुआं उगलती रहीं और उन्हीं कारखानों में हमारे मजदूर, हमारे भाई-बेटे जाकर काम करते रहे, मजदूरी करते रहे।  इससे उन प्रदेशों की अर्थव्यवस्था मजबूत हो गयी। विकास की राह में वे बहुत आगे चले गए और बिहार पीछे होता गया।  विकास की राह में बिहार शून्य पर आ गया।  

          महोदय, आप जानते हैं कि रेखागणित का नियम है - दो रेखाएं समानांतर रहती हैं लेकिन यदि एक रेखा को लंबी कर दें तो दूसरी रेख अपने-आप छोटी हो जाती है। बिहार के साथ यही बात हुआ है। किसी ने बिहार को पिछड़ा नहीं किया। समय के साथ दूसरे राज्यों ने तरक्की की लेकिन बिहार में तरक्की की गुंजाइश नहीं हो पाई। बिहार का दोहन होता रहा। बिहार के खनिज-संपदा का दोहन होता रहा। हमारे राज्य के नवयुवक बाहर जा कर काम करते रहे। उनकी अर्थव्यवस्था में अपनी शक्ति लगाते रहे। इस तरह हमारा बिहार राज्य छोटा हो गया। हमारे भाई-बच्चे घर, परिवार को छोड़कर नार्थ ईस्ट की सड़कों पर, जहां बीएसएफ की सड़कें बनती हैं वहां पर, कश्मीर की दुरूह वादियों में जा कर काम करते रहें। किन्तु जहां-कहीं भी आपराधिक घटना हुई, वहां पहला शिकार बिहारी बने। जहां-कहीं भी दुघर्टना हुई उनका सेहरा उनके माथे पर मढ़ दिया गया। जब कभी भी कोई आपराधिक घटना होती है तो उसका सेहरा उन पर मढ़ दिया जाता है। कहीं गंदगी होती है तो उसका कारण बिहार और यूपी के लोग बनते हैं। कहीं कोई हिंसा होती है, कहीं कोई बम फूटता है, मैं नाम लेना उचित नहीं समझती हूं, लेकिन अभी मुंबई में जब सीरियल बम बलास्ट हुए उस समय वहां के नेता ने कहा था कि बिहारी लोग जब से यहां आए हैं तब से इस तरह की घटनाएं ज्यादा हुई हैं। हमें क्या पता है कि जो सब्जी की टोकरी को वे माथे पर रख कर बेचते हैं उन टोकरियों में सब्जी है या बम है। इस तरह का दुर्व्यवहार हम लोगों के साथ होता रहा। सारी जिम्मेदारी हम बिहारियों के ऊपर मढ़ दी गई। बिहार में आज 16 नदियां हैं। यह धन-धान्य से भरपूर है। ज्यादातर नदियां बाहर से आती हैं। बाहर से आती हुई कोसी नदी बिहार का अभिशाप बन जाती है। कभी बिहार का कुछ भाग सूखे से ग्रस्त हो जाता है, पानी के बिना धरती फट जाती है और किसान बेहाल हो जाता है। कभी कोसी नदी में इतना पानी आ जाता है कि वहां बाढ़ आ जाती है। 300 हेक्टेयर जमीन और 5 जिले इस चपेट में आ जाते हैं। प्रकृति की विभीषिका के अलावा वहां के लोगों ने बंटवारे का भी दर्द भोगा है। बड़ी साजिश के तहत बिहार के टुकड़े किए गए। झारखंड बना दिया गया। बिहार का खजाना और बिहार का कारखाना दोनों को ही बांट दिया गया। बिहार जब बंटा तो उसमें 9 प्रतिशत जनसंख्या पूरे हिन्दुस्तान की जनसंख्या का...( व्यवधान)

सभापति महोदय :   आप याद रखिएगा कि आप के पति झारखंड से राज्यसभा के सदस्य थे।

श्रीमती पुतुल कुमारी :  जी महोदय, मुझे अच्छी तरह से याद है और मैं जानती हूं कि झारखंड भी अपना ही राज्य है। मैं यहां आ कर यह कहती हूं कि यहां हम बिहार, झारखंड बंगाल नहीं होते हैं बल्कि हम भारतवर्ष होते हैं। मैं केवल तथ्य की बात बता रही थी। बिहार से खजाना और कारखाना दोनों ही चला गया। झारखंड का निर्माण हुआ तो 85 प्रतिशत खनिज संपदा और वन संपदा झारखंड के हिस्से में चली गई। इससे आप सब विदित होंगे बाकी का हिस्सा बिहार में रहा। आबादी का 75 प्रतिशत हिस्सा बिहार में रह गया यानी बिहार में केवल आदमी रह गए और खनिज संपदा और वन संपदा झारखंड में चले गए।

सभापति महोदय :   आप ह्यूमन को रिर्सोस नहीं मानती हैं?

श्री शैलेन्द्र कुमार (कौशाम्बी):  महोदय, खाली हाथ आदमी मजदूरी करता है। बिहारी वही काम जंगलों में एवं दुर्गम जगहों पर जा कर करते रहे और अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ते रहे। आज इसी अस्तित्व की लड़ाई के लिए, इसी बिहारी अस्मिता की लड़ाई के लिए, स्वाभिमान के लिए हम लोग खड़े हैं। बिहार के अर्बन एरिया में 100 में से 75 लड़के बेरोजगार हैं। ग्रामीण जगहों में इसका अंदाजा नहीं लगाया जा सकता है। वहां मजदूरी कम होने की वजह से, वहां के लोग बाहर जाते हैं जहां उन्हें अधिक मजदूरी मिलती है। इसलिए बिहार का माइग्रेशन रेट भी बहुत ज्यादा है।

           मैं अब फॉरेन डॉयरेक्ट इनवेस्टमेंट की बात करता हूं। पटना में अप्रैल 2000 से 2011 तक सिर्फ 27 करोड़ रूपये पटना ऑफिस को मिले हैं जब कि मुंबई ऑफिस को दो लाख चार हजार आठ सौ बत्तीस  करोड़ रूपये मिले हैं।    आप देख लीजिए कि कितना बड़ा फर्क है। हम केन्द्र से भी मांग कर रहे हैं। हमारे साथ हर तरफ से अच्छा व्यवहार नहीं हुआ, तभी हम आज इस कगार पर खड़े हैं। बिहार आज उजड़े चमन की तरह है जहां विकास के फूल नहीं हैं, सुगन्ध नहीं है। इसे लोगों ने तरह-तरह से लूट लिया। इसकी व्यवस्था का दोहन किया और उसके बदले में कुछ नहीं दिया।

          मैं संभावनाओं के बारे में भी थोड़ी बात करना चाहती हूं कि बिहार में क्या-क्या हो सकता है। जैसे मैंने बताया, हमारे यहां नदियां हैं। पानी की प्रचुर मात्रा है। बिहार में फिशरीज़ का काम बहुत  अच्छा हो सकता है, लेकिन मार्किटिंग की सुविधा और इफ्रास्ट्रक्चर नहीं होने के कारण हम उस काम को आगे नहीं बढ़ा सकते। लाइव स्टॉक, पशुधन हमारे पास बहुतायत में है। उसमें हर तरह की नस्लें हैं। लेकिन पूरे बिहार में एक ही मीट प्रोसैसिंग यूनिट है। बिहार की मिट्टी बहुत अच्छी है। उसे एलुवियल सॉयल कहते हैं। वह सबसे उर्वरक मिट्टी होती है, लेकिन संसाधनों के अभाव में हम उसका उपयोग नहीं कर पा रहे हैं।

          आज बिहार विकास की दौड़ में पीछे रह गया है। यह संधीय व्यवस्था के लिए एक खतरे की बात है और एक चेतावनी भी है, क्योंकि अगर पेट भूखा होता है, गरीबी होती है, गुरबत होती है तो व्यक्ति गलत रास्ते इख्तियार कर लेता है। उसे बरगलाना आसान हो जाता है। जैसे आपने बताया कि जनसंख्या का नौ प्रतिशत भाग बिहार में है। अगर इतने सारे नौजवान गरीबी से तंग आकर दिशा भ्रमित हो जाएं, गलत रास्ता इख्तियार कर लें, हाथ में हथियार उठा लें, तो आने वाले समय में  यह संघीय व्यवस्था के लिए बहुत बड़ी चुनौती हो जाएगी।

          दूसरा, बिहारी अस्मिता का सवाल है, मान-सम्मान का सवाल है। बिहार को आत्मनिर्भर बनाने का सवाल है।  इसलिए मैं आपके माध्यम से कहना चाहता हूं कि केन्द्र सरकार इस ओर ध्यान दे, संवेदनशील होकर सोचे। अगर शरीर का एक हिस्सा भी बीमार हो जाता है तो शरीर स्वस्थ नहीं रह सकता। इसी तरह संघीय ढांचा तब तक उन्नत नहीं हो सकता जब तक बिहार उन्नत नहीं होगा।

          इन्हीं बातों के साथ मैं आपको धन्यवाद देत्ता हूं कि आपने मुझे बोलने का मौका दिया।

                                                                                         

श्री हुक्मदेव नारायण यादव (मधुबनी): सभापति महोदय, कभी समय था जब श्री इंदरसिंह नामधारी  संयुक्त झारखंड-बिहार के  भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष हुआ करते थे। आज वह भले ही बंट गया हो, लेकिन फिर भी जिसके ह्रदय में बिहार की मिट्टी की ममता है, वह झारखंड और बिहार को कभी अलग दृष्टि से नहीं देखेगा। हम मानते हैं कि झारखंड हमसे अलग हुआ है। वह हमारा छोटा भाई है। इसलिए हम जब भी सोचेंगे तो यह सोचेंगे कि अगर बड़े भाई की थाली में एक रोटी आए तो छोटे भाई की थाली में भी एक रोटी अवश्य आए। हम जब भी बिहार को विशेष दर्जा देने की मांग करते हैं, तो केवल बिहार के लिए नहीं करते बल्कि सम्पूर्ण भारत में अगर कोई इलाका आर्थिक, भोगौलिक, सामाजिक, बौद्धिक, सांस्कृतिक और शैक्षणिक दृष्टिकोण से पिछड़ा हुआ है, तो उस इलाके को विशेष दर्जा देकर सशक्त भारत का निर्माण करना चाहिए, जिसे विशेष दर्जा कहते है। जैसे हमने आरक्षण दिया था, तो पिछड़े, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति को आरक्षण क्यों दिया? इसलिए कि वे कमज़ोर, निर्बल और निर्धन हैं। उन्हें विशेष भोजन देंगे तब वे सबल, सशक्त बनेंगे और समाज की बराबरी में आ सकेंगे। इसीलिए हिन्दुस्तान का जो भी इलाका पिछड़ा हुआ है, वह सम्मुनत, सशक्त बने तभी भारत सशक्त बन सकता है।  हम वर्ष 2021 के भारत की कल्पना करते हैं। जब सम्पूर्ण भारत सशक्त होगा, तभी विश्व में भारत सशक्त हो सकता है। अगर एक अंग बहुत ही बलशाली हो और दूसरे अंग में लकवा मारा हुआ हो, तो वह कभी भी लकवामार शरीर लेकर युद्ध भूमि में सफल नहीं हो सकता। अभी पुतुल जी अतीत के इतिहास को कह रही थीं। हमारा इतिहस, अतीत बड़ा ही उज्ज्वल था। वह इतना उज्ज्वल था कि जगतगुरू शंकराचार्य जब अपने  अद्वैतवाद के विजय का पताका फहराते हुए गये और मिथलांचल के मंडन मिश्र जी के दरवाजे पर पहुंचे, तो हुआ यह कि, दोनों बराबर के विद्वान थे, जब शास्त्रार्थ करेंगे, तो बीच में पंच कौन बनेगा? उस समय स्वयं शंकराचार्य जी ने कहा कि मंडन मिश्र जी की पत्नी भारती पंच बनेगी और हम शास्त्रार्थ करेंगे। हमारी भारती, मंडन मिश्र जी की पत्नी ने निर्णय दिया था कि इस शास्त्रार्थ में शंकराचार्य जी विजयी हुए और मंडन मिश्र जी, यानी मेरे पति पराजित हुए। उस समय शंकराचार्य जी ने कहा कि मेरा मत मान लो, तो भारती ने कहा कि मैं अर्धांगिनी हूं, पंच की हैसियत से निर्णय दिया है, लेकिन  आपने मेरे पति को पराजित किया है। अर्धांगिनी होने के नाते जब आप मुझे पराजित  कर देंगे तब आप विजेता होंगे, इसलिए अब हमारा आपका शास्त्रार्थ हो जाये। कितनी दूरी तक हमारा यह अतीत उज्ज्वल था। पहले सुग्गा भी मंडन मिश्र जी के दरवाजे पर संस्कृत का श्लोक और वेद का मंत्र पढ़ता था। दादा को हाथी था, लेकिन आज हम उस हाथी का सिक्कड़ लेकर घूम रहे हैं कि मेरे दादा को हाथी था, तो इसे कौन मानेगा? आज हम दिल्ली, मुम्बई और बड़े शहरों में रिक्शा, ठेला, मोटर चलाने का काम कर रहे हैं, फुटपाथ पर सो रहे हैं, रात में जाड़े में ठठुर रहे हैं और भूखे पेट हैं, लेकिन फिर भी हमारा अतीत पहले का उज्ज्वल था, लेकिन मेरा राजनीतिक अतीत बहुत ही धुंधला हो गया था। वह इसलिए धुंधला हुआ, क्योंकि जातिवाद के रोग ने बिहार को ऐसा ग्रसित किया कि वहां अगर कुर्सी पर जाति वाले पटना में बैठ गये, तो उनकी मूर्ति की वह रात-दिन भजन करते थे कि ‘तेरी मूर्ति को नहलायेंगे, तुझे ही खूब खिलायेंगे, तेरे बच्चे बढ़ते जायेंगे और मेरे बच्चे की लाश पर चढ़कर तुम राज करते चले जाना।’ यह जो जाति की सड़ांध से बिहार ग्रसित हुआ, आज सौभाग्य है कि बिहार का काया-कल्प हो रहा है। बिहार उस जातियता की दलदल से निकलकर एक नये बिहार का निर्माण कर रहा है। हम समग्र समाज को जोड़ रहे हैं। लेकिन अब हमारी आवश्यकता बढ़ी है, अभी पुतुल जी कह रही थीं कि हमारे यहां नदियां हैं। वे नदियां बाढ़ के कारण अभिशाप हैं। आप हमें सड़क बना देते हैं।

          सभापति जी, आप वहां खूब घूमे हुए हैं। आपने वह बिहार देखा है क्योंकि आप चप्पे-चप्पे में घूमते थे। जब हम सड़कें बना देते हैं, तो उस समय बड़ी अच्छी बनती हैं --

                              चमचम सड़कें बनती हैं, उस पर गाड़ी फिसलती  है,                               एक बार नेपाल में वर्षा होती है, बाढ़ ऊपर से आती है,                               सारी सड़कें बह जाती हैं, मेरा तो सब कुछ बह जाता है।

सभापति महोदय :   आप तो आशु कवि लगते हैं।

…( व्यवधान)

श्री हुक्मदेव नारायण यादव :   घर भी बह जाता है, छप्पर भी बह जाता है और तन के कपड़े भी बह जाते हैं। घर के अंदर चौकी पर चौकी रख देते हैं और उसी पर हमारे बच्चे और हम दो-तीन महीने तक रात गुजारते हैं। उस बाढ़ के कारण हम बर्बाद हो रहे हैं। किसी राज्य सरकार की क्षमता है, जो उस बाढ़ को रोक दे। वह बाढ़ तब रुकेगी जब भारत नेपाल का समझौता होगा। जब कोसी, कमला अंधवारा में नूनथर, सीसापानी, वराह  क्षेत्र में डैम बनेगा और पानी को रोका जायेगा, तब बिहार की काया-कल्प होगा।  बिहार की सभी नदियों को जोड़ दिया जायेगा, जिसके बारे में अटल बिहारी वाजपेयी जी ने सपना देखा था कि पूर्व से पश्चिम तक सभी नदियों को जोड़ दो। हमारी नदियों में जब बाढ़ आती है, तो कुछ नदियों में बाढ़ आती है और कुछ नदियां सूखी रहती हैं। जब गंगा नीचे रहती है, तो कोसी ऊपर है और जब कोसी मे उफान है, तो गंगा नीचे आती है। अगर सारी नदियों को जोड़ देंगे, तो विज्ञान कहता है कि Water  fixes  its own level.

MR. CHAIRMAN: It is six feet.

श्री हुक्मदेव नारायण यादव :   आप शुद्ध कर दीजिए। आपका बहुत-बहुत धन्यवाद। जल अपने स्तर को सामान्यतः प्राप्त करना चाहता है, तब हमारे यहां वह रुक जायेगा, सड़कें नहीं टूटेंगी, खेती नहीं बर्बाद होगी? आपने पुतुल जी को ठीक कहा। पंजाब में नीचे धरती वाले खान-खदान नहीं हैं, माइन्स मिनरल्स नहीं हैं।  हरियाणा में नहीं है, लेकिन पंजाब और हरियाणा अपनी कृषि के बल पर आज भारत के सबसे अग्रणी, एक नंबर और दो नंबर पर आने वाले राज्य हैं, हर क्षेत्र में आगे हैं। ऐसा क्यों हैं? इसका एक रहस्य है। पंजाब के पास अगर भाखड़ा-नंगल बांध नहीं होता, तो वहां बिजली नहीं होती,  भाखड़ा-नंगल न होता, तो उनके खेतों में नहरों से पानी नहीं जाता। आज भाखड़ा-नांगल बांध पंजाब में है और उसी तरह से अगर एक भाखड़ा-नांगल बिहार में हमें दे दीजिए, तो मैं आधे हिन्दुस्तान को खिला सकता हूं, इतना मुझमें पुरूषार्थ है, इतनी हमारी धरती में उर्वराशक्ति है, इतना हम करके दिखा सकते हैं। हम अपने हाथ से पंजाब की खेती में हरियाली ला सकते हैं, हरियाणा की खेती में हरियाली ला सकते हैं, मुंबई हो, दिल्ली हो, गगनचुंबी अट्टालिका है, उसमें रहने वाले लोग आते हैं, हसी-मजाक करते हैं और उन महलों का निर्माण करने वाले हम बिहारी उसकी छाया में ही सो जाते हैं और अपनी रात गंवाते हैं, फिर भी कभी-कभी किसी प्रदेश के लोग उठते हैं, हम पर जूते-लात चलाते हैं कि बिहारी सभी बाहर चले जाओ। पसीना हम बहाते हैं, महलों का निर्माण करते हैं, तेरे बच्चों को खुशहाल बनाते हैं, हम ठेला ठेलते हैं और तुम हवागाड़ी पर चलते हो, फिर भी हमें कहते हो कि तुम बाहर जाओ, लेकिन एक बात याद रखे दुनिया वालों जिस दिन सारे हिन्दुस्तान के महानगरों से बिहारी अपना बोरिया-बिस्तर बांधकर अपने घर बिहार वापस चले जाएंगे, उस दिन महानगरों की सारी रौनक खत्म हो जाएगी, इनकी सुंदरता मिट जाएगी और हमारा बिहार सुंदर हो जाएगा। अभी बिहार सरकार इस दिशा में काम कर रही है। हम उस दिशा में बढ़ रहे हैं। ...( व्यवधान)

MR. CHAIRMAN: Hon. Members, the extended time for the discussion on this Resolution is over. I have a list of six more speakers who wish to participate in the discussion on this Resolution. If the House agrees, then the time for discussion on this Resolution may be extended by one hour.

SEVERAL HON. MEMBERS : Yes, Sir.

MR. CHAIRMAN: Yes, you can continue your speech.

श्री हुक्मदेव नारायण यादव : महोदय, मैं सभी माननीय सदस्यों  को बिहार के गांव, के गरीब और किसान की तरफ से आभार प्रकट करता हूं। पिछली बार जब बोल रहे थे, तो उधर से अधीर चौधरी जी ने संविधान संशोधन पर कहा था।  जब सदन में सभी दलों के लोग उठते हैं और बिहार को विशेष दर्जा देने की मांग करते हैं, तो मैं सम्पूर्ण सदन के सभी सदस्यों के प्रति बिहार की ओर से आभार प्रकट करता हूं, उनका अभिनंदन करता हूं, धन्यवाद करता हूं।...( व्यवधान) यह प्राइवेट डिसकशन है और संजय निरुपम जी हमारे साथ हैं। इसलिए आपसे मेरी विनम्र प्रार्थना है, वह भी हमारे यहां से गए हुए हैं। यह हमारे लिए गर्व की बात है कि संजय निरुपम जी हमारी कोख से पैदा हुए हैं, लेकिन मुंबई जाकर नेता बनते हैं, तो इस तरह हमारी कोख की कम कीमत है क्या।...( व्यवधान) इसलिए मैं प्रार्थना कर रहा हूं कि क्षेत्रीय विषमता के अंत के लिए व्यापक योजना बनाइए। बंजर, पथरीली, कंकरीली, जंगली जमीन है, वहां उद्योग लगाइए। दिल्ली और एनसीआर बनाते हैं, चारों तरफ लोगों को उजाड़ते हैं और यहां पर गगनचुंबी अट्टालिकाएं बनाते हैं। अगर झारखण्ड में, छत्तीसगढ़ में, मध्य प्रदेश में, उड़ीसा में, पश्चिम बंगाल में, बिहार में, असम में बंजर, पथरीली जगहों पर कारखाने-उद्योग लगें, तो सड़कें बनेंगी, बिजली जाएगी, स्कूल बनेंगे, अस्पताल खुलेंगे। सिब्बल जी कह रहे थे कि अगर पिछड़े एरिया में इंजीनियरिंग कॉलेज बना देंगे, तो वहां कोई जाने के लिए तैयार नहीं होगा। क्या बात करते हैं आप, हिन्दुस्तान को आपने क्या बनाया है? गरीबी के महासागर में अमीरी के कुछ टापू बनाए हैं, उस के ऊपर सुख-सागर लगाए हो, उसमें कुछ लोगों को नहलाते हो, अगर उस बंजर, पथरीली, कंकरीली जमीन पर, पिछड़े इलाके में उद्योग लगेंगे, तो उनके लिए सड़कें बनेंगी, वहां बिजली जाएगी, वहां पानी की सप्लाई होगी, वहां रेजिडेंशियल क्वार्टर्स बनेंगे, वहां लोग रहने जाएंगे, तो वहां स्कूल बनेंगे। जहां सेंट्रल सर्विसेज के लोग जाते हैं, वहां आप सेंट्रल स्कूल भी बनाते हैं। अगर उस जगह पर सेंटर की ओर से कारखाने खुलेंगे, केंद्रीय कारखाने खुलेंगे, तो वहां सेंट्रल स्कूल बनेगा, लेकिन आप ऐसा नहीं करना चाहते हैं। इसलिए नहीं चाहते हैं कि हिन्दुस्तान के बड़े लोग हमारे यहां उद्योग लगाएं, पैसा कमाएंगे और उनका हेड क्वार्टर कलकत्ता में, हेड क्वार्टर हो मुंबई में, हेड क्वार्टर हो दिल्ली में, मेहनत करें हम, पसीन बहाएं हम, रुपया लगाएं हम।

 

16.00 hrs.   लेकिन हैड क्वार्टर क्यों लगेगा बाहर, हमारा हैड क्वार्टर हमारे प्रदेश में ही होना चाहिए बम्बई या अन्य जगह नहीं,...( व्यवधान) मुम्बई कह देता हूं, अब तो आप खुश हुए...( व्यवधान)

सभापति महोदय : हुक्मदेव जी, आपकी बगल में तीन-तीन शिव सैनिक बैठे हुए हैं।

श्री हुक्मदेव नारायण यादव : मुझे मालूम है।

सभापति महोदय: अब आप अपनी बात समाप्त करें।

श्री हुक्मदेव नारायण यादव : बस दो मिनट और लूंगा। जब मैंने जन्म लिया, जवान हुआ, बड़ा हुआ, तब तक तो बम्बई ही कहते थे। अब कहा जा रहा है मुम्बई, तो अब यह बूढ़ा क्या रटेगा, जवानी में जो रटा हुआ है, वह एकदम से तो जाएगा नहीं इसलिए मुझे माफ करना। लेकिन अब मैं मुम्बई कहता हूं।

          उन मुख्यालयों को हमारे यहां बिहार में लाया जाना चाहिए। हमारे यहां सब कुछ है। पवार जी बैठे हुए हैं। अगर वह चाहें तो बिहार का कायाकल्प कर सकते हैं। बिहार में किसान है, नदी है, पानी है, कई जगह तो बीस फीट पर ही पानी है। अगर हमारे प्रदेश में सिंचाई का और पानी का प्रबंध हो जाए तो हमारे हाथों में इतनी ताकत है कि हम नए बिहार का निर्माण कर सकते हैं। लेकिन इसके लिए अरबों रुपया चाहिए और हमारे पास कोई टकसाल तो है नहीं। अगर केन्द्र सरकार नीतीश कुमार जी और सुशील मोदी को यह पावर दे दे कि आप अपने यहां टकसाल लगाकर रुपया छाप सकते हो, तो हम पटना में टकसाल लगाकर रुपया छाप लेंगे। लेकिन टकसाल है आपके हाथ में इसलिए मैं हाथ जोड़कर आपसे कहता हूं कि जब राज्य सरकारें, गरीब, निर्बल, निर्धन पिछड़े, अनुसूचति जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के लोग किसी के आगे हाथ जोड़कर खड़े रहेंगे, तब तक वहां का कायाकल्प नहीं हो सकता। हमें अधिकार दो, हमें निर्माण करने का अवसर दो। अगर यह नहीं दोगे तो फिर कहीं न कहीं विद्रोह की ज्वाला फूटेगी और फिर लोग नारा लगाएंगे, जैसे पहले कहा करते थे - सिंहासन खाली करो कि जनता आती है। ऐसी नौबत न आए इसलिए इस पर केन्द्र सरकार को गौर करना चाहिए और बिहार की समस्या को समझकर राज्य सरकार की बातों को मानना चाहिए।

          सभापति जी, आपने मुझे बोलने का अवसर दिया, उसके लिए बहुत-बहुत धन्यवाद।

 

कृषि मंत्री तथा खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री (श्री शरद पवार): हुक्मदेव जी, हम आपकी सब बातें मानते हैं, लेकिन लालू जी को वहीं रखिए।

श्री हुक्मदेव नारायण यादव : हम तो वहीं रखना चाहते थे, लेकिन आपने उन्हें अपने मंत्रिमंडल में स्थान दिया तो अब महासागर को छोड़कर कौन तालाब में जाना चाहेगा इसलिए कृपया उन्हें यहीं रखिए।

   

श्री कौशलेन्द्र कुमार (नालंदा):सभापति महोदय, मैं आपका आभार व्यक्त करना चाहता हूं कि आपने मुझे बिहार के मुद्दे पर हो रही चर्चा में अपनी बात कहने का अवसर प्रदान करके मुझे प्रतिष्ठा दी। बिहार के बारे में विस्तार से सदन में चर्चा हो रही है। आप भी वाकिफ हैं, क्योंकि आप भी पहले बिहार में ही थे। इसलिए मैं कम शब्दों में ही अपनी बात रखना चाहूंगा।

          बिहार का जब बंटवारा हुआ और झारखंड नया राज्य बना, उस समय से बिहार विकास के रास्ते से भटक चुका था। चाहे किसी की भी सरकार हो, बिहार में एक तरफ सूखाड़ और दूसरी तरफ बाढ़ हमेशा कहर बरपाती है। पूरा बिहार आज बर्बादी के कगार पर है। लगातार वहां की सड़कों का हाल बेहाल हो गया था।   बिजली की स्थिति काफी दयनीय हो गयी है। जितने भी माननीय संसद सदस्यों ने बिहार की स्थिति पर अपने विचार रखे हैं, मैं उनसे अलग नहीं हूं।  मैं अपने को उनसे सम्बद्ध करता हूं तथा चाहता हूं कि बिहार के विशेष आर्थिक सहायता दी जाए। बिहार के प्रति केन्द्र सरकार का रवैया अलग किस्म का रहा है। मैं जब से 15वीं लोक सभा में आया हूं, चाहे प्रधान मंत्री सड़क योजना हो, राजीव गांधी विद्युतीकरण परियोजना हो, सब बंद है। एनएच की सड़क जो भारत सरकार की होती है, 1000 करोड़ रुपया उसका बकाया है, जो भारत सरकार बिहार को नहीं दे पायी है। मैं समझता हूं कि बिहार में जो विकास हो रहा है वह अपने संसाधनों से हो रहा है, आज बिहार का स्टेट हाई-वे एनएच से अच्छा है। मैं जब अपने क्षेत्र में जाता है तो दनियामा तक एनएच से जाता हूं और हिलता हुआ जाता हूं लेकिन दनियामा के बाद जैसे ही स्टेट हाई-वे पर चढ़ता हूं तो वहां की सड़के काफी अच्छी हैं। इसलिए मैं आपके माध्यम से सरकार से मांग करता हूं कि आप जो बिहार के साथ भेदभाव कर रहे हैं इसे समाप्त करना चाहिए। बिहार की जनता की जो परेशानी है, लाचारी है, बेबसी है, उसे देखते हुए केन्द्र सरकार का व्यवहार बिहार के साथ अच्छा होना चाहिए। केन्द्र सरकार बिहार के साथ भेदभाव अभी भी कर रही है।

          महोदय, बिहार के नेता और मुखिया माननीय नीतीश जी ने दलों की सीमा से ऊपर उठकर, सवा करोड़ हस्ताक्षर बिहार के लोगों के कराकर माननीय प्रधान मंत्री जी के हाथ में सौंपे हैं। मैं आपके माध्यम से माननीय प्रधान मंत्री जी से कहूंगा कि बिहार को विशेष राज्य का दर्जा आप दीजिए और देखिये कि बिहार किस तरह से तरक्की की राह पर चलता है। जब तक बिहार तरक्की नहीं करेगा, तब तक यह देश तरक्की नहीं करेगा।

          महोदय, बिहार के बारे में जो मैं कहूंगा, निश्चित रूप से आपके माध्यम से ही कहूंगा। मैं कहना चाहता हूं कि तीन साल पहले बिहार में जो बाढ़ आई थी, वहां प्रधान मंत्री जी गये थे, आपदा घोषित की गयी थी लेकिन उसके प्रबंधन का कोई उपाय नहीं हुआ और वहां फिर से बाढ़ आ गयी है। इस तरह से बिहार बाढ़, सुखाड़ की चपेट में सांस ले रहा है। मैं भारत सरकार से मांग करता हूं कि बिहार को विशेष पैकेज या विशेष राज्य का दर्जा दिया जाए। बिहार के तमाम सांसद माननीय प्रधान मंत्री जी से मिले थे और बोले थे कि 17 चीनी मिलें बिहार में प्रस्तावित हैं लेकिन माननीय प्रधान मंत्री जी ने कोई जवाब नहीं दिया।

 

16.09 hrs. (Dr. Girija Vyas in the Chair)   आज बिहार में नये उद्योग धंधे नहीं लग रहे हैं। वहां पर बेरोजगारी बढ़ रही है और वहां के युवक दूसरे प्रदेशों में जाकर कमाने-खाने में लग गये हैं। अगर वहां शुगर मिल चालू होता तो वहां लोगों को रोजगार मिलता, वहां अगर सड़क बनती तो वहां के बेरोजगारों के लिए रोजगार निकलता, वहां बिजली का काम होता तो वहां के युवकों को उसमें रोजगार मिलता।

          महोदय, बिहार के साथ जो भेदभाव हुआ है, उसे मिटाकर उसे विशेष राज्य का दर्जा दें या एक पैकेज दें, जिससे बिहार विकसित हो। बिहार विकसित होगा तो यह देश भी विकसित होगा। इतनी बात कहकर मैं अपनी बात को समाप्त करता हूं।

                                                                                           

श्री संजय निरुपम (मुम्बई उत्तर):  सभापति महोदया, मैं महाराष्ट्र से सांसद हूं और महाराष्ट्र के अलग-अलग विषयों पर सदन में बोलता हूं और इस बात का मुझे बड़ा फ़क्र है, लेकिन मैं मूलतः बिहार का रहने वाला हूं, बिहार मेरी जन्मभूमि है। इसलिए जब बिहार के विकास के संदर्भ में माननीय सदस्या पुतुल कुमारी के तरफ से संकल्प प्रस्तुत किया गया...( व्यवधान) श्री भोला सिंह, पुतुल कुमारी और सभी का मिलाजुल जो संकल्प है, उस प्रस्ताव पर बोलने का मैं अपना लोभ संवरण नहीं कर पाया। यह बात सही है कि बिहार का विकास होना चाहिए। बिहार विकास की गति में बहुत पीछे छूट गया है। वह बिहार जिसका स्वर्णिम इतिहास रहा है, वह बिहार जिसके अतीत को आज भी लोग गीत की तरह गाते हैं, वह बिहार जहां हिन्दुस्तान के पांच धर्मों में से तीन के प्रवर्तक पैदा हुए, वह बिहार जहां गौतम बुद्ध को महाबौद्ध प्राप्त हुआ, वह बिहार जहां भगवान महावीर का जन्म हुआ, वह बिहार जहां सिक्ख धर्म के संस्थापक गुरू गोविंद सिंह का जन्म हुआ। ऐसे बिहार की ताज़ा स्थिति देखने के बाद निश्चित रूप से खुशी नहीं होती है, बहुत दुख होता है। विशेषकर पिछले 15-20 वर्षों की बिहार की स्थिति पर हम ध्यान दें तो निश्चित तौर पर स्थतियां बहुत बिगड़ी हैं  और उसका नतीज़ा यह निकला कि बड़े पैमाने पर बिहार से पलायन भी हुआ। बड़े पैमाने पर पलायन हुआ और पूरे हिन्दुस्तान के कोने-कोने में लोग गए। हिन्दुस्तान के अलग-अलग शहरों और राज्यों में गए। मुम्बई, कलकत्ता और दिल्ली तो हम सब जानते हैं, मैं अभी हाल के दिनों में मुझे मौका मिला, गुजरात के मुंद्रा पोर्ट पर जाने का। मुंद्रा कच्छ का स्लीपिंग विलैज की तरह है, जहां हिन्दुस्तान का पहला प्राइवेट पोर्ट है। उस पोर्ट में लगभग 15 हजार लैबर काम करती है। 15 हजार में से 14900 बिहार के मज़दूर हैं। एक मजबूरी के तहत और उस मजबूरी को मैं इसलिए शेयर करता हूं, क्योंकि मैं भी एक मजबूरी के तहत अपना गांव छोड़कर, अपना प्रदेश छोड़कर पलायन करके, पहले दिल्ली आया और फिर मुम्बई गया। मुझे छोड़कर जाते समय तो दुख था, लेकिन आज कोई दुख नहीं है। मुम्बई ने हमें गले लगाया, हमें मान-सम्मान दिया।...( व्यवधान) जिस समय संजय निरुपम अपनी यात्रा वृतांत रखेंगे, तो सबसे बड़ा पड़ाव शिवसेना होगी, आप लोग यह बात याद रखें। मैं इस बात को नकार के यहां खड़ा नहीं हूं, बल्कि इस बात को स्वीकार करके मैं यहां खड़ा हूं। आज मुद्दा यह है कि जो प्रस्ताव है, वह बिहार के विकास के संदर्भ में है। बिहार को स्पेशल स्टेटस मिलना चाहिए, ऐसा प्रस्ताव है। विशेष दर्जे वाली बात पर मुझे बहुत ज्यादा विश्वास नहीं है, क्योंकि यह अब एक नारा बन गया है और नारे लोगों की भावनाओं को तो भड़का सकते हैं, भावनाओं को जगा सकते हैं, लेकिन कोई ठोस परिणाम या नतीजा नहीं दे सकते हैं। मैं आग्रह करूंगा कि बिहार का विकास होना चाहिए और बिहार के विकास में केंद्र सरकार का बड़ा योगदान होना चाहिए। हिंदुस्तान के जितने भी सैंट्रल गवर्नमेंट के फ्लैगशिप प्रोग्राम्स हैं, जैसे महाराष्ट्र, गुजरात या अन्य राज्यों में लागू हैं, उसी प्रकार से बिहार में भी लागू हैं। मैं कहना चाहता हूं कि न सिर्फ फ्लैगशिप प्रोग्राम बल्कि बिहार के लिए विशेष पैकेज के तौर पर प्रतिवर्ष दो हजार करोड़ रुपए दिए जा रहे हैं। पिछले तीन वर्षों में बिहार में विकास की अलग-अलग योजनाओं को लागू करने के लिए 10400 करोड़ रुपए दिए गए हैं। मुझे लगता है कि बिहार की जनता की तरफ से जो मांग हो रही है, उस मांग का समर्थन और सम्मान करते हुए इस प्रकार का कदम केंद्र सरकार की तरफ से उठाया गया है। मैं यह बात स्पेशल पैकेज प्रोग्राम के लिए बोल रहा हूं। सैंट्रल गवर्नमेंट की जो अलग-अलग स्कीम्स हैं, जिन्हें हम सैंट्रली स्पोर्स्ड स्कीम्स कहते हैं, उन स्कीम्स के लिए बिहार को तीस हजार करोड़ रुपया पिछले वर्ष सरकार की तरफ से दिए गए। इस साल अब तक छह हजार करोड़ रुपए दिए जा चुके हैं। इससे पहले साल में 12 हजार करोड़ रुपया दिया गया था। अगर आप पिछले चार-पांच वर्षों में देखें तो साठ हजार करोड़ रुपए केंद्र सरकार की तरफ से  बिहार सरकार को विकास योजनाओं को लागू करने के लिए दिए गए हैं। इसके लिए मैं यूपीए सरकार को बहुत-बहुत धन्यवाद दूंगा और केंद्र सरकार का अभिनन्दन करूंगा, क्योंकि बिहार के इस दुख को कहीं न कहीं केंद्र सरकार ने सुना और उसके हिसाब से कार्यवाही करके यह कदम उठाया है। इस समय बिहार आज से बीस साल पहले वाला बिहार नहीं है। बिहार आज बदल रहा है। बिहार में नई सत्ता आई है, नई सरकार बनी है। बहुत उम्मीद के साथ बिहार की जनता ने नीतीश कुमार जी को मौका दिया है। वहां के लोगों की उनसे बहुत उम्मीदें हैं। चुनाव के समय बिहार में जितने भी ओपीनियन पोल थे, जितने भी सर्वे हुए थे, उन सभी को बिहार की जनता ने गलत साबित कर दिया। इतनी बड़ी ताकत नीतीश जी को दी गई और उनसे जनता को उम्मीद है कि बिहार की स्थिति को बदलने में वे अपना सर्वस्व लगा दें। हमारी तरफ से, केंद्र सरकार की तरफ से और पूरे देश में किसी भी व्यक्ति को कोई एतराज नहीं होगा, बिहार का औद्योगिक वातावरण बदलना चाहिए।...( व्यवधान)

सभापति महोदया :  आप लोग आपस में चर्चा मत कीजिए।

…( व्यवधान)

 सभापति महोदया : उनको बात करने दीजिए। बिहार के लिए ही वह बात कर रहे हैं। संजय निरुपम जी की बात के अलावा कोई बात रिकार्ड में नहीं जाएगी।

...( व्यवधान)* सभापति महोदया : कौशलेन्द्र कुमार जी, आप पहले बोल चुके हैं। आप बैठिए।

…( व्यवधान)

सभापति महोदया : संजय निरुपम जी, आप चेयर को संबोधन करके बोलिए।

श्री संजय निरुपम : आपके दुख-दर्द को बांटते हुए उसका समर्थन करने के लिए मैं खड़ा हुआ हूं। सन् 2000 में बिहार का विभाजन हुआ। विभाजन के बाद झारखंड करके नया प्रदेश बना। वह अपना हिस्सा था। किसी को इस बात पर एतराज नहीं है लेकिन दुर्भाग्यवश जितनी खनिज सम्पदा थी, वह झारखंड में चली गई और बिहार के हिस्से में कोसी नदी की बाढ़ और नेक्सेलाइट्स की समस्या ही बची। एक भी खनिज सम्पदा नहीं बची। यदि हम उद्योग-धंधे की बात करें तो बिहार में उद्योग-धंधे के नाम पर जो चीनी मिलें थीं या फिर सासाराम की तरफ जो रोहतास इंडस्ट्री थी, वे सारी बंद पड़ी थीं। मुझे बहुत अच्छे ढंग से याद है और जो शरद जी ने कहा कि लालू जी को वहीं रहने दो, ठीक है। लेकिन जब लालू जी रेल मंत्री थे, मुझे याद है क्योंकि मैं रोहतास का रहने वाला हूं और मैं इस विषय में थोड़ी सी रुचि लेता था। बंद रोहतास इंडस्ट्री की एम्पलाईज यूनियन के लोगों ने लालू जी को एप्रोच किया कि इस इंडस्ट्री को रिवाइव करने के लिए आप मदद करिए। पिछले 20 वर्षों से यह आंदोलन चल रहा है। जब मैं कॉलेज में पढ़ता था, उस जमाने से आंदोलन चल रहा है। तब लालू जी ने मेरे ख्याल से 120 करोड़ रुपये रेलवे की तरफ से देने की घोषणा की थी और उस रोहतास इंडस्ट्री को रिवाइव करने की घोषणा की थी। आज भी रोहतास इंडस्ट्री के लोग बिहार के जो सांसद हैं, उनके पास कभी कभी आते होंगे, वे मेरे पास भी आ जाते हैं। कहने का मतलब यह है कि अभी तक वह बात आगे नहीं बढ़ी। अब जो समय आया है, बिहार के औद्योगीकरण के ऊपर ध्यान दिया जाना चाहिए। बिहार में नये उद्योग-धंधे लगाने की बात होनी चाहिए क्योंकि वातावरण ठीक हो रहा है। लॉ एंड ऑर्डर जो सबसे बड़ी समस्या बिहार की रही है, और मैं खुशी के साथ कह रहा हूं कि नीतीश कुमार जी के प्रशासन में लॉ एंड ऑर्डर नियंत्रण में आ गया। अच्छा वातावरण हुआ है। इस बात से इंकार नहीं कर सकते।...( व्यवधान) नीतीश जी जब मुम्बई जाते हैं तो वहां के बड़े-बड़े कॉरपोरेट सैक्टर के साथ मीटिंग लेते हैं और उनको आमंत्रित करते हैं कि आप आइए और बिहार में पूंजी निवेश करिए। देशी-विदेशी निवेश बिहार में बढ़ना चाहिए। अब मैं बहुत दुख के साथ एक बात कह रहा हूं कि पिछले 5-6 वर्षों से नीतीश जी सत्ता में हैं। लेकिन एक भी नया उद्योग नहीं आया।...( व्यवधान)

श्रीमती मीना सिंह (आरा):कहां से आता?...( व्यवधान)

श्री संजय निरुपम : क्या आप सिर्फ तारीफ सुनेंगी? थोड़ी-बहुत आलोचना सुनने के लिए भी तैयार रहिए।...( व्यवधान) बिहार की एक बहुत बड़ी समस्या बिजली की है। ...( व्यवधान)

सभापति महोदया : आप पहले बोल चुके हैं। बैठ जाइए।

…( व्यवधान)

श्री संजय निरुपम : मैं बहुत दुख के साथ कहना चाहूंगा कि पिछले 5-6 वर्षों में एक भी मेगावॉट का कैपेसिटी एडिशन बिहार में नहीं हो पाया। इस दिशा में ध्यान देना चाहिए। सड़कें बन रही हैं, सड़कें चमचमा रही हैं।...( व्यवधान)  पिछले दिनों मुझे बिहार घूमने का बहुत मौका मिला। ...( व्यवधान) केन्द्र सरकार की तरफ से जो बड़ी-बड़ी परियोजनाएं अलग-अलग प्रदेशों में जाती हैं, उसमें कोई भेदभाव नहीं होता। एक जमाने में बोकारो भी वहीं था, जमशेदपुर का टाटा भी वहीं था, लेकिन  बीच के दिनों में माहौल ठीक नहीं था जिसकी वजह से औद्योगिक गति थोड़ी धीमी हुई।  मैं इसलिए नीतिश जी की तारीफ कर रहा हूं क्योंकि अब वातावरण ठीक हुआ है और अब कहीं न कहीं उद्योग-धंधों के विकास पर ध्यान देना चाहिए। विशेषकर उत्तर बिहार की चीनी मिलें बंद पड़ी हैं, उन तमाम चीनी मिलों में से मात्र दो मिलों को रिवाइव करने का प्रपोजल पेट्रोलियम मिनिस्ट्री की तरफ से आया। राज्य सरकार को इस दिशा में थोड़ा सा आगे बढ़ना चाहिए। मैं बार-बार नीतिश जी की तारीफ बहुत खुशी से कर रहा हूं लेकिन पिछले कुछ महीनों में जो चीजें निकलकर आ रही हैं, उससे बहुत अच्छा नहीं हो रहा है। भूमि आबंटन का जो खेल बिहार में हुआ उससे और कुछ नहीं होगा लेकिन नीतिश जी से जो उम्मीद बनी है वह खत्म हो जाएगी। इस बात का ख्याल रखना पड़ेगा कि बिहार के इंडस्ट्रलाइजेशन के नाम पर...( व्यवधान)

सभापति महोदया : निरुपम जी की बात के अलावा और किसी की बात रिकॉर्ड नहीं होगी।

...( व्यवधान)* श्री संजय निरुपम : सभापति महोदया, लैंड अलाटमेंट का प्रकरण निकलकर आया उससे नीतिश जी के प्रति लोगों की जो उम्मीद थी, वह कम होती है। बिहार के इंडस्ट्रलाइजेशन का जो नया प्रोग्राम आया, बहुत अच्छा है और मैं इसका स्वागत करता हूं। इंडस्ट्रलाइजेशन के नाम पर जैसे-तैसे किसानों की जमीन छीनेंगे और उसके बाद गोली चलाएंगे, माइनोरिटीज़ लोगों पर गोली चलाकर हत्या करेंगे, इससे और कुछ नहीं होगा, नीतिश जी से जो उम्मीद थी वह कम होने लगेगी। ...( व्यवधान)

सभापति महोदया : आप बैठिए। निरुपम जी समाप्त कीजिए।

…( व्यवधान)

श्री संजय निरुपम : महोदया, मैं तो इतनी तारीफ कर रहा हूं। ...( व्यवधान)

सभापति महोदया : वे प्रशंसा नहीं करना चाहते हैं। निरुपम जी के अलावा किसी की बात रिकॉर्ड में नहीं जाएगी।

...( व्यवधान)* श्री संजय निरुपम : मैं केवल दो बातें और कहना चाहता हूं। ...( व्यवधान) आप थोड़ा सा धीरज रखिए। मैं केवल दो बातें कहकर अपनी बात खत्म करूंगा।...( व्यवधान)

सभापति महोदया : आप बैठ जाएं।

...( व्यवधान)

श्री संजय निरुपम : महोदया, बिहार से जो नदियां आ रही हैं। ...( व्यवधान) आप थोड़ा धीरज रखिए, जब आपका वक्त आएगा तो बोलिएगा।...( व्यवधान)

सभापति महोदया : निरुपम जी, अब आप समाप्त करें।

…( व्यवधान)

श्री संजय निरुपम : महोदया, नेपाल से जो नदियां बिहार की तरफ आती हैं, उन नदियों से बाढ़ को रोकने के लिए बाढ़ के पानी का प्रबंधन करने का प्रस्ताव है।...( व्यवधान)

सभापति महोदया : कृपया आप बैठ जाइए। आप अपनी बात लगातार कहते जा रहे हैं।

…( व्यवधान)

श्री संजय निरुपम : महोदया, आदरणीय केंद्रीय मंत्री जी यहां बैठे हैं, मेरा सुझाव है कि नेपाल से जो नदियां बिहार की तरफ आती हैं, हर बाढ़ में हाहाकार लेकर आती हैं जिसके कारण बिहार हर बारिश में तबाह हो जाता है। इस स्थिति में एक प्रस्ताव एक अरसे से लंबित पड़ा हुआ है कि नदियों के बाढ़ के पानी के प्रबंधन के लिए बिहार की विशेष तौर पर मदद की जाए ताकि बाढ़ के पानी का उपयोग कृषि के हित में सिंचाई के माध्यम से हो सके। मैं केंद्र सरकार से निवेदन करूंगा कि बिहार सरकार से बात करके एक लांग टर्म प्रोग्राम बनाकर नदियों के पानी से विनाश न हो बल्कि विकास हो, इस प्रकार की व्यवस्था करें। इसके साथ हमारे तमाम साथियों ने बिहार के विकास का जो प्रस्ताव रखा है, मैं इसका समर्थन करता हूं। मैं अपनी इच्छा जाहिर करता हूं कि बिहार का सर्वांगीण विकास हो ताकि पूरे देश में बिहारी मजदूर जो इधर-उधर नौकरी और रोजी रोटी की तलाश में जाते हैं, वे अपमानित होने के बजाय अपने गांव में रहें, फलेफूलें और बिहार के विकास में अपना योगदान दें।

                                                                                      

सभापति महोदया : आप सबको खुश होना चाहिए कि माननीय सदस्य अभी तक बिहार को नहीं भूले हैं।

डॉ. मोनाज़िर हसन (बेगूसराय):सभापति महोदया, मैं आपके प्रति आभार प्रकट करता हूं। आदरणीय भोला बाबू, पुतुल कुमारी और अन्य सांसद बिहार के बारे में प्रस्ताव लाए हैं और इस पर चर्चा हो रही है, मैं इन सबका शुक्रिया अदा करता हूं। आज यहां बिहार की बदहाली पर इंसाफ दिलाने के लिए बहस हो रही है।

आप एक बात देख रहे होंगे कि जब भी बिहार का मामला आता है तो बिहार और झारखंड के सभी सांसद सजग हो जाते हैं। पिछले दिनों डा.रंजन प्रसाद यादव जी द्वारा भी एक प्राइवेट बिल के माध्यम से बिहार की समस्याओं को उजागर करने का काम किया था और उन्होंने सदन से अनुरोध किया था कि केन्द्र सरकार के द्वारा जो 90 हजार करोड़ रुपये की धनराशि बिहार को विकास की अन्य योजनाओं के लिए दी जाती है,  केन्द्र सरकार वह 90 हजार करोड़ रुपये एकमुश्त दे और 30 हजार करोड़ रुपये सालाना दे, ताकि बिहार अपने पैरों पर मजबूती के साथ खड़ा हो सके।

          सभापति महोदया, वर्ष 2000 में बिहार का बंटवारा हुआ और बिहार से झारखंड अलग हो गया और जब झारखंड अलग हो रहा था तो केन्द्र सरकार ने ये वायदे किये थे कि हम बिहार को विशेष पैकेज देने का काम करेंगे। लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि केन्द्र सरकार अपने वायदों को वफा नहीं कर सकी। आज बिहार में कल-कारखानों के नाम पर बहुत कम असैट्स रह गई है। बंटवारे के पहले हमारे यहां जो माइन्स, मिनरल्स, कल-कारखाने और यहां तक कि खिलाड़ी थे...( व्यवधान)

चौधरी लाल सिंह (उधमपुर):इनसे पूछना कि अलग किसने किया था...( व्यवधान)

सभापति महोदया :  आपकी बात रिकार्ड में नहीं जायेगी।

...( व्यवधान)* डॉ. मोनाज़िर हसन :वह भारत सरकार की ही देन थी। बिहार के साथ आप लोगों ने वह सलूक किया है कि हिंदुस्तान की तारीख में आज बिहार का एक मंत्री भी कैबिनेट में नहीं रखा है। इससे ज्यादा शर्म की बात और क्या हो सकती है...( व्यवधान) मैं नहीं जानता हूं, मैं यूपीए में नहीं हूं। अब चूंकि यूपीए में नहीं हूं तो आप ही के कोई लोग मंत्री बन सकते हैं। लेकिन बिहार के साथ इससे बड़ी नाइंसाफी और नहीं हो सकती है कि जहां बिहार के लोग अपनी बातों और फरियादों को रख सकें, वहां आपने बिहार का एक मंत्री भी नहीं रखा है। इससे बड़ा दुर्भाग्य और क्या हो सकता है।

          महोदया, बिहार पर लगातार चर्चाओं का सिलसिला जारी है। आज बहुत सारी परियोजनाएं चल रही हैं। आज पूरे देश के अंदर करप्शन पर लगातार चर्चा चल रही है। अण्णा हजारे जी धरने और आमरण अनशन पर बैठे हुए हैं। आज पूरे देश में करप्शन एक विषय बन गया है। श्री संजय निरूपम जी बिहार के हैं, वह अभी अपनी बात यहां रख रहे थे। लेकिन उसमें जहां बिहार का दर्द झलक रहा था, वहां उनकी राजनीति भी दिखाई दे रही थी। किस तरह से वह दुर्भावना से प्रेरित होकर हाउस में राजनीति कर रहे थे और बिहार के साथ जो पक्षपात किया गया, उसे उजागर करने में कंजूसी कर रहे थे। आज भ्रष्टाचार की गंगोत्री में देश डूबा नजर आ रहा है। लेकिन इसकी आवाज कहां से उठी, यह हम सदन को बताना चाहते हैं। आज अण्णा हजारे जी जिन मुद्दों को लेकर जन लोकपाल बिल या जो भी बिल सदन में विचार के लिए प्रस्तुत करवाना चाहते हैं, उस पर मुझे यह कहना है कि हमारे बिहार के मुख्य मंत्री, श्री नीतीश कुमार जी ने पहले से ही इन सब चीजों को लोकायुक्त के माध्यम से समायोजित करने का काम किया है। बिहार में डी.जी. लैवल के अफसर और डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट लैवल के अफसर भ्रष्टाचार के आरोप में जेल में भेजे गये हैं और उनकी सम्पत्ति की कुर्की की गई और सिर्फ कुर्की ही नहीं की गई, बल्कि उसमें बिहार सरकार ने स्कूल खुलवाने का काम भी किया है। इसलिए बिहार को आप जो पैसा देंगे, ऐसा नहीं है कि उसमें 10-15 परसैन्ट ही पैसा खर्च होगा। आप वहां के लिए जो पैसा देंगे, आज की तारीख में बिहार में किसी को लूट की छूट नहीं दी जा रही है। बिहार में लूटने वाला बेउर जेल या अन्य किसी जेल मे जायेगा, वही उसकी जगह है। बिहार में खजाने की जो लूट होनी थी, वह हो चुकी है, लेकिन अब वहां लूट नहीं हो सकती है।

इसलिए बिहार को जो, तरक्की के रास्ते पर अग्रसर है, उसको अपने पैरों पर खड़ा करने लिए विशेष राज्य की जो मांग हो रही है, और उसके लिए सैंकड़ो-हजारों की संख्या में लोग यहां पर आए थे, उन्हें प्रधानमंत्री जी ने समय देकर वायदा किया था कि इस मुद्दे को नैशनल डेवलपमेंट काउंसिल में रखने का प्रयास करूंगा। वह बात तो ठीक है लेकिन पास होने के पहले हम आग्रह करेंगे कि आदरणीय भोला सिंह जी ने प्राइवेट मैम्बर्स बिल के माध्यम से जो प्रस्ताव रखने का काम किया है, सदन उस पर गंभीरता से विचार करे।

          महोदय, मैं बेगूसराय से आता हूँ। बिहार के अंदर बेगूसराय एक ऐसा जिला है, जहां के लोग मेहनती एंव मजबूत इच्छाशक्ति वाले हैं। वहां कल-कारखाने के नाम पर आज भी आईओसीएल है। वहां पर फर्टीलाइज़र का कारखाना हुआ करता था। वहां पर थर्मल पॉवर हुआ करता था। जब राम विलास पासवान जी मंत्री थे तो उन्होंने उसके जीर्णोद्धार का वायदा किया था। लेकिन आज भी वह बीमार ही पड़ा हुआ है। थर्मल पॉवर भी बीमार पड़ा हुआ है। महोदय, मैं चाहूंगा कि सरकार उस पर त्वरित गति से कार्यवाही करे। वहां पर गढ़हरा और बरौनी के अंदर 2200 एकड़ जमीन है, वह शरारती तत्वों और मवालियों का अड्डा बना हुआ है। जब ममता बनर्जी रेलमंत्री थीं तो मैंने उनसे रेल कारखाना बनवाने का आग्रह किया था। आपने छपरा, नालंदा और मधेपुरा में इसे बनाने का काम किया और यह 2200 एकड़ जमीन जो रेलवे की है, जो कि शरारती तत्वों और मवालियों का अड्डा बना हुआ है, उसमें आप कारखाना और मैडिकल कॉलेज खुलवाने का काम करें। ममता जी ने वायदा किया था कि मैं अगले वित्तीय वर्ष में वहां मैडिकल कॉलेज खुलवाने का काम करूंगी। मैं आपके माध्यम से सरकार से आग्रह करूंगा कि गढ़हरा और बेगूसराय के अंदर सिक फैक्ट्रियों को चालू किया जाए।

          आज पूरा बिहार बाढ़ में डूबा हुआ है। पिछली बार भी बाढ़ की स्थिति आई थी। प्रधानमंत्री जी ने भी कहा था कि बिहार के अंदर यह बाढ़ नहीं कयामत है, यह प्रलय की स्थिति दिखाई दे रही है। लेकिन केंद्र सरकार ने उस वक्त भी एक पैसे की सहायता और सहयोग देने का काम नहीं किया था। आज फिर बिहार बाढ़ से डूबा हुआ है। मैं चाहूंगा कि केंद्र सरकार अपने पर्यवेक्षकों को भेज कर वहां का सर्वे कराए। हमारे बेगूसराय में बाढ़ के कारण 40-45 पंचायतें बाढ़ में डूबी हुई हैं। लोग गाछों और सड़कों पर अपना बसेरा कर रहे हैं। बिहार सरकार अपने सीमित संसाधनों द्वारा लोगों को त्वरित राहत पहुंचाने का काम कर रही है। लेकिन वह कम पड़ रही है। जब तक केंद्र सरकार उस पर अपना ध्यान नहीं देगी तब तक हम समझते हैं कि वहां के गरीबों और बाढ़ पीड़ितों की मदद करने में बिहार सरकार सक्षम नहीं हो पाएगी।

          महोदय, बिहार शिक्षा के क्षेत्र में कभी दुनिया को ज्ञान देने का काम करता था। दुनिया भर के लोग वहां पर ज्ञान प्राप्त करने के लिए आते थे। ज्ञान प्राप्त कराने वाले नालंदा विश्वविद्यालय जैसे विश्वविद्यालय खण्डहर बन गए हैं। नीतीश कुमार जी के नेतृत्व में नालंदा विश्वविद्यालय को पुनर्जीवित करने का काम किया गया। जिस नालंदा विश्वविद्यालय में दुनिया भर के लोग ज्ञान प्राप्त करने के लिए आया करते थे, डॉ. अब्दुल कलाम जी उसके विज़िटर हैं। आज बच्चों को साइकिल दी जा रही है। हुनर के कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। अस्पतालों के अंदर मरीजों की भीड़ लगी हुई है। लगातार बिहार के अंदर सड़कों का जाल बिछा हुआ है। जिस इच्छाशक्ति को हम प्राप्त करना चाहते हैं, उस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए हम केंद्र सरकार से आग्रह करेगे कि आदरणीय भोला बाबू ने जो प्रस्ताव रखा है, आदरणीय रंजन यादव जी ने प्राइवेट बिल के माध्यम से केंद्र सरकार और सदन का ध्यान आकर्षित करने का काम किया है, उसको पास करने की कृपा की जाए।

 

श्री अर्जुन राम मेघवाल (बीकानेर): सभापति महोदया, आपने मुझे बोलने का समय दिया, इसके लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद। डॉ. भोला सिंह जी ने प्रस्ताव रखा है कि बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दिया जाना चाहिए। इन्होंने केंद्र सरकार से 1 लाख 79,000 करोड़ रूपये अपने प्रस्ताव में मांगे हैं। इस प्रस्ताव में जो पैसे की राशि मांगी गयी है, इनके प्रस्ताव में दो-तीन तथ्यों पर ज्यादा महत्व दिया गया है, जिसमें फिशरीज है, पशुधन है और बैंकों का जो सी.डी. रेश्यो है, क्रेडिट एंड डिपॉजिट रेश्यो उसमें सुधार की बात ये कह रहे हैं।

          महोदया, मैं बहुत इतिहास में जाना नहीं चाहता हूं, लेकिन यह स्पष्ट है कि बिहार शिक्षा का हब रहा है, बिहार संस्कृति का हब रहा है। 15 नवम्बर 2000 को जब बिहार का बंटवारा हुआ तो उसके बाद खनिज सम्पदा बिहार से झारखंड में चली गयी। उसके पहले भी बिहार को स्पेशल स्टेट्स दर्जा देने की बात हो रही थी, लेकिन बंटवारे के बाद से यह मांग ज्यादा जोर पकड़ने लग गयी। बिहार की पर-कैपिटा इनकम 11,000 है और देश की औसत पर-कैपिटा इनकम 45,000 है। अभी मुंबई की बात आ रही थी, महाराष्ट्र की पर-कैपिटा इनकम 80,000 है। बिहार कई मामलों में पिछड़ा हुआ है। मैं बिल्कुल टू-द-प्वाइंट आना चाह रहा हूं। मैं कुछ छोटी-छोटी बातें कहना चाह रहा हूं कि बिहार कैसेसमृद्ध हो सकता है। जो वर्तमान परिस्थितियां हैं, उन्हें हमें देखना पड़ेगा। एक तो नदियों के मामले में इश्यू आया, हुक्मदेव नारायण यादव जी ने कहा कि बिहार की नदियां जुड़ जायें तो बिहार का विकास हो सकता है। अगर यह प्रस्ताव केंद्र सरकार नेशनल लेवल पर लागू नहीं कर सकती तो जो छोटी-छोटी नदियां हैं, जो इन्टरनल नदियां हैं, जिनसे बिहार सुखाड़ और बाढ़ दोनों परिस्थितियों में प्रभावित हो रहा है, इसे दूर करने के लिए बिहार की नदियों को जोड़ने का प्रस्ताव लिया जा सकता है। यह भी डॉ. भोला सिंह जी के प्रस्ताव में है। मैं एक बहुत ही नायाब सजेशन अपनी तरफ से देना चाहता हूं। बिहार में बहुत रेलवे लाईन्स हैं।

          महोदया, रेलवे लाईन के किनारे-किनारे जमीन खाली रहती है और रेलवे लाईन के किनारे-किनारे जैट्रोफा उगाया जा सकता है। बिहार की जलवायू, बिहार की भौगोलिक परिस्थिति, बिहार का तापमान जैट्रोफा के लिए सबसे ज्यादा उपयुक्त है। इधर रेलवे लैंडबैंक बनाने की बात कर रही है, बिहार में और सब जगह रेलवे लाईन्स के किनारे-किनारे अतिक्रमण हो रहे हैं। अगर वहां जैट्रोफा उगा दिया जाये या जैट्रोफा के लिए सेंट्रल गवर्नमेंट कोई बड़ा प्रोजेक्ट मंजूर कर दे तो बिहार में जितनी रेलवे लाईन्स हैं, उनके किनारे-किनारे जैट्रोफा उगाया जा सकता है। जैट्रोफा से जो बायो-डीजल निकलेगा, उससे बिहार की इनकम बढ़ेगी और उससे बिहार की पर-कैपिटा इनकम भी बढ़ेगी। मैं आपके माध्यम से केंद्र सरकार से यह अनुरोध करना चाहता हूं।

          महोदया, पशुधन उद्योग के लिए भी डॉ. भोला बाबू ने अपने प्रस्ताव में बात कही है। मंत्री जी यहां बैठे हैं, मैं कहना चाहूंगा कि पशुधन उद्योग में एक इन्कम टैक्स लगता है। कोई एनिमल हसबेंड्री का काम करे, भेड़-बकरी पालने का काम करे तो उसके लिए इन्कम टैक्स नहीं लगता है, लेकिन अगर कोई पशुधन उद्योग लगायेगा तो उस पर इन्कम टैक्स डिपार्टमेंट इन्कम टैक्स लेता है। यह काम तो केंद्र सरकार कर ही सकती है कि अगर बिहार में पशुधन का उद्योग लगाने के लिए मुंबई से कोई उद्योगपति आता है, राजस्थान से कोई उद्योगपति जाता है तो उसे इन्कम टैक्स की छूट तो केंद्र सरकार दे ही सकती है। यह तो स्पेशल स्टेट्स में लिया ही जा सकता है। भोला बाबू के जो छोटे-छोटे सकारात्मक प्रस्ताव हैं, अगर उन्हें भारत सरकार मान ले तो बिहार का भला हो सकता है। मैं थोड़ा इतिहास में भी जाना चाह रहा हूं, अंग्रेजों के समय में बंगाल, बिहार और उड़ीसा की दीवानगी मिलने पर एक अंग्रेज अफसर ने यहां राष्ट्रपति भवन में एक बहुत बड़ा जश्न मनाया था। यह मैंने कभी इतिहास की पुस्तक में पढ़ा था। वह जश्न उसने क्यों मनाया, वह जश्न उसने इसलिए मनाया कि कभी बिहार राइस के मामले में, अन्न के उत्पादन के मामले में एक अग्रणी क्षेत्र रहा था।    अंग्रेज़ों को लगा कि हमें दीवानगी मिल गई है इसलिए हम आर्थिक दृष्टि से बहुत सक्षम हो जाएँगे। वह बिहार, जिसको प्राप्त करने के बाद अंग्रेज़ों ने जश्न मनाया, वह बिहार अन्न के क्षेत्र में भी परेशान है। यह जो एग्रोबेस्ड और एग्रीकल्चर के क्षेत्र में डैवलपमैंट होना चाहिए, वह तो कम से कम स्पेशल पैकेज के माध्यम से बिहार को दिया जा सकता है जिससे बिहार अन्न उत्पादन के क्षेत्र में अग्रणी बनकर एग्रीकल्चर की जो ग्रोथ रेट है, जिसको हमेशा कहते हैं कि हम चार परसेंट प्राप्त कर लेंगे और वह एक और दो परसेंट के बीच में रहती है, कम से कम वह तो चार परसेंट पहुंच जाए। मेरा आपके माध्यम से यह दूसरा अनुरोध है ताकि बाढ़ और सुखाड़ से बिहार को निजात मिले।

          सभापति जी, मैं राजस्थान से आता हूँ। यह स्पेशल स्टेटस की मांग क्यों उठी? अभी संजय निरुपम जी कह रहे थे कि यह मांग ठीक नहीं है। यह मांग इसलिए उठी कि रीजनल इम्बैलैन्स है। कोई क्षेत्र ज्यादा विकसित हो गया और कोई क्षेत्र कम विकसित रह गया। अभी एक प्राइवेट मैम्बर्स बिल और आ रहा है। हमारे राजस्थान के साथी हरीश चौधरी उसको ला रहे हैं कि रेगिस्तानी इलाकों के जो 16 जिले हैं, वे भी पर कैपिटा इनकम में पीछे जा रहे हैं, इसलिए यह स्पेशल स्टेटस की मांग हर क्षेत्र से आएगी, जब तक आप रीजनल इम्बैलैन्स दूर नहीं करेंगे, तब तक ऐसी मांगें उठती रहेंगी और इस मांग में भी क्या खराबी है? जब आपने 11 राज्यों को स्पेशल स्टेट्स का दर्जा दे रखा है तो बिहार को क्यों नहीं दिया जा सकता? यह हमारी समझ से परे है। अभी योजना आयोग ने भी बिहार की तारीफ की है कि बिहार करवट ले रहा है। बिहार की प्रगति की तारीफ योजना आयोग ने ही नहीं, प्रधान मंत्री जी ने भी की है। अभी इसी पर एक बात आई थी। हमारे साथी लाल सिंह जी यहाँ बैठे हैं। वे कह रहे थे कि बिहार के नेताओं का दोष  है कि बिहार ज्यादा तरक्की नहीं कर पाया। मेरा यह कहना है कि बिहार के लोग समग्र दृष्टिकोण से सोचते हैं चाहे वह बाबू जगजीवन राम जी रहे हों, चाहे डॉ. राजेन्द्र प्रसाद रहे हों। उन्होंने इस देश की भलाई के लिए सोचा, केवल बिहार के लिए नहीं सोचा। इसलिए उन नेताओं की तारीफ करनी पड़ेगी। एक विषय यहाँ यह भी आया था कि बिहार के लोग आई.ए.एस. अधिकारी बहुत हैं। यह तो टैलेन्ट है बिहार में इसलिए आई.ए.एस. और आई.पी.एस. ज्यादा हैं, इसके लिए बिहार की आलोचना नहीं करनी चाहिए।

          मैं आपके माध्यम से कहना चाहता हूँ कि डॉ. भोला सिंह जी ने जो प्रस्ताव रखा है, एक स्पेशल राज्य का दर्जा बिहार के लिए मंज़ूर किया जाए। आपने मुझे बोलने का अवसर दिया, इसके लिए बहुत-बहुत धन्यवाद ।

                                                                                                   

श्री उमाशंकर सिंह (महाराजगंज):माननीय सभापति जी, मैं आपका आभारी हूँ कि आपने मुझे बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दिये जाने के संबंध में बोलने का मौका दिया।  

          महोदया, बिहार का अतीत रहा है। बिहार में ही गणतंत्र की जननी वैशाली है जहाँ बुद्ध, महावीर, अशोक और चंद्रगुप्त जैसे लोग पैदा हुए। माननीय शरद पवार जी से मैं कहना चाहता हूँ कि पाँच मिनट बैठ जाइए, मुझे पाँच मिनट से ज्यादा समय नहीं मिलेगा। उस बिहार के बारे में चर्चा हो रही है जो पिछड़ेपन की ओर जा रहा है। बिहार में बाढ़, सुखाड़ और साथ ही साथ जलजमाव भी इतना है कि जिसके चलते मेरे समय से 1985 के बाद से बाढ़ नियंत्रण आयोग के प्रतिवेदन के आधार पर जितनी प्रतिशत कृषि लायक खेती थी, उससे आज 25 प्रतिशत कम ज़मीन खेती लायक रह गई है। अगर 65 थी, तो 40 हो गई है। इसके बावजूद भी वहाँ के किसानों में यह समर्थ है कि वे उपजाते हैं। वहाँ उर्वरा ज़मीन है, सिंचाईयुक्त नदियाँ हैं, लेकिन जब बाढ़ से जलजमाव की बात होती है तो मैं कहना चाहता हूँ कि नेपाल सरकार से बात कर उन नदियों पर बैराज बनाया जाए, बैराज में पानी रोककर बिजली का उत्पादन किया जाए। बिजली का उत्पादन भी हो, सिंचाई भी हो और उसको बाढ़  से भी बचाया जाए तो बिहार का कल्याण हो सकता है।

          बिहार ऐसी जगह है कि अंग्रेज़ों को देश से भगाने के लिए पूज्य पिता बापू ने बिहार की भूमि चम्पारण को चुना - उन अंग्रेज़ों को भगाने के लिए जिनके पास तोप, बंदूक और दुनिया की सारी ताकतें थीं, जिनके राज्य में कभी सूर्यास्त नहीं होता था, उनको भगाने के लिए बिहार की भूमि को बापू ने चुना। उन्होंने उस  मिट्टी के लाल को पहचाना कि बिहार में इच्छाशक्ति है। वहीं से डॉ. राजेन्द्र प्रसाद, वहीं से मौलाना मज़हरुल हक, बृजकिशोर नारायण, जयप्रकाश नारायण जैसे लोग हुआ करते थे जिन लोगों का नाम स्वर्णाक्षरों में लिखा जाता है।   जंगे-आज़ादी की लड़ाई में जिन लोगों का नाम लिखा जाएगा तो पहली पंक्ति में बिहार के लोगों का नाम लिखा जाएगा। उस बिहार की स्थिति आज बदतर हो गई है। निश्चित रूप से बिहार में अगर जल-जमाव, बाढ़ और सुखाड़ पर नियंत्रण किया जाए और सिंचाई की सुविधा हो जाए तो निश्चित रूप से बिहार का विकास होगा। बिहार में कोई उद्योगधंधे नहीं हैं, न पहले थे। श्री शरद पवार बैठे हैं, इन्होंने भी मोतिहारी में चीनी मिल का शिलान्यास किया था। हम लोगों को लगा था कि कम से कम एक तो चलेगी। बिहार में 35-36 चीनी मिलें बंद हैं। बिहार के मजदूरो में इतनी ताकत और सामर्थ्य है कि अपनी बीवी, बाल-बच्चों और बूढ़े मां-बाप को छोड़कर दूसरे राज्यों के निर्माण में योगदान करते हैं। वे पलायन इसलिए करते हैं, क्योंकि उन्हें रोज़गार नहीं मिलता है, इसलिए बाहर जाते हैं। मैं इनसे आग्रह करता हूं कि जो चीनी मिल चलाने का इन्होंने आग्रह किया था, कम से कम वह तो चलाएं। कोई चीनी मिल नहीं चली है। न राज्य सरकार और न ही केन्द्र सरकार ने चलायी है। जब वर्ष 2000 में बिहार और झारखण्ड बंटा था, मैं उस समय विधान सभा में समता पार्टी विधायक दल का नेता था। झारखंड राज्य बनने के बाद एक सर्वदलीय कमेटी का गठन हुआ था कि बिहार झारखंड राज्य बनने के बाद कंगाल हो गया है, इसलिए क्योंकि सारी खान-खनिज पदार्थों का भंडार, सारे कल-कारखाने, चाहें सिंदरी हो, चाहे टाटा हो, चाहे बोकारो हो, जो भी बड़े-बड़े कल-कारखाने थे, वे सभी झारखंड में चले गए। वर्ष 2000 से 2005 तक राष्ट्रीय जनता दल की सरकार बिहार में थी और राबड़ी देवी मुख्यमंत्री थीं। डॉ. भोला सिंह जो 1079 करोड़ रुपए का जो प्रस्ताव लाए हैं, उस समय एक सर्वदलीय कमेटी बनी थी, जिसके संयोजक उस समय के रेल मंत्री और अभी के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी थे और उस समय श्री अटल बिहार वाजपेयी जी प्रधानमंत्री थे। सभी दल के लोगों ने स्पेशल पैकेज की मांग की। कई बार बैठकें हुईं। नेपाल से बात करने की बात हुई। नेपाल से केंद्र सरकार बात कर सकती है। राज्य सरकार सीधे नेपाल सरकार से बात करके नदियों की बाढ़ रोके और बांध बनाए। उस समय नीतीश कुमार जी केंद्र सरकार में मंत्री थे और सर्वदलीय कमेटी के संयोजक भी थे। उन्होंने स्पेशल पैकेज इसलिए नहीं दिलवाया, क्योंकि कहीं बिहार राज्य को लाभ न मिल जाए, क्योंकि उस समय बिहार की मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को इसका लाभ न मिल जाए।

          मैं मांग करता हूं कि बिहार में रहने के नाते हमारा यह फर्ज बनता है कि बिहार के विकास के लिए डॉ. भोला सिंह जो प्रस्ताव लाए हैं, उसे स्वीकार किया जाए। शरद पवार जी आप मजबूत मंत्री हैं, आप चाहेंगे, तो निश्चित रूप से बिहार को विशेष पैकेज मिलेगा।

 

16.49 hrs. (Dr. M. Thambidurai in the Chair) SHRI S. SEMMALAI (SALEM): Mr. Chairman Sir, I thank you for giving me this opportunity to speak on the Resolution moved by Dr. Bhola Singh seeking special status to the State of Bihar.

          This is a genuine demand because the present system is like that.  So, the system should be changed.  The goals of democracy and sustainable socio-economic development can best be achieved through extensive decentralization of power. The concept of strong Centre and weak State has resulted in inadequate devolution of resources, heavy dependence of the State on the Centre for finance thus increasing the debt of the State.

          As we all know, article 275 of the Constitution provides for granting aid to the States in need of assistance.  Similarly, article 282 of the Constitution provides for grant by the Centre to the States for public purposes.  The Finance Commission fixes Grant-in-Aid under article 275. But the grants given by the Centre under article 282 is not governed by any guideline.  This is the issue on which every State has difference of opinion with the Centre. 

The Centre arbitrarily distributes the grants to the States. This amounts to a political decision rather than a rational conclusion.  Hon. Members will agree with me that this style of giving grants to the State by the Centre for public purposes needs to be resolved.  The Finance Commission which is appointed after every five years, does not have the mandate to look into the issue.

I would like to make a suggestion for the consideration of the Government.  The suggestion is, the scope of the Finance Commission should be enlarged to reduce interference of the Centre in the financial management of the States and also in framing guidelines to extend grants under article 282 of the Constitution. I hope hon. Members will also share my views in this regard. 

Let us come to the question of the Centre interfering in the powers of the States. Though law and order is a State subject, the Centre has not hesitated in interfering in this field through the establishment of Central Reserve Police Force, Border Security Force, Industrial Security Force, etc. Some time back, ‘education’ was in the State List.  But, by an amendment to the Constitution, the Centre has transferred ‘education’ to the Concurrent List.  By such processes, the powers of the Centre have become strong and the States’ powers have been eroded, making the States politically and economically weak.

A few days back, my revered leader and hon. Chief Minister of Tamil Nadu has presented a Memorandum to the hon. Prime Minister seeking financial assistance for various welfare and development programmes to the tune of Rs. 2,52,500  crore. Till date the Centre has not responded to the State’s demand.  My hon. leader has also requested the Centre to allot 1000 mw additional power from the Central pool to meet the emergency need. I regret to say that even on this crucial issue the Centre is keeping silent. The State Government’s expectation that the Centre will come to its rescue has been belied. The image of the Centre is seriously getting eroded in the minds of the people, not only in the State of Bihar but also in other States like Tamil Nadu.  I would request the Centre to take note of this fact and act judiciously. 

Let me say a few words on the Centrally Sponsored Schemes.  These schemes cover the State subjects.  The pity is that the Centre determines the schemes and then asks the State Governments to implement them. The needs and aspirations of the States are well-known to the State Governments only. I would appeal to the Centre to take the States into confidence and consult the State Governments before formulating the schemes and in the process of execution of the schemes. 

          There is also the other point which I would like to point out here. The divisible pool of Central resources should be increased to the States. I would also appeal to the Centre to allow the States to have a share in the non-divisible taxes, like the corporate tax, customs duty, and surcharge on income tax. 

I would request the hon. Minister of Finance to include this aspect in the terms of reference of the ensuing Finance Commission.

          If I remember correctly, there are now only 11 States which are enjoying special status.  The request of Bihar is justifiable and the Centre will not hesitate to accept the demand put forth by our hon. Member, Dr. Bhola Singh and accord special status which would help in accelerating the pace of economic development of Bihar.  In the same way, the Centre should also turn its eyes towards Tamil Nadu and extend the helping hand to make the State great and strong under the dynamic leadership of hon. Chief Minister of Tamil Nadu, Dr. Puratchi Thalaivi, J. Jayalalithaa.

          Sir, with these few words, I conclude my speech.

 

MR. CHAIRMAN :  Thank you very much. Now, there are two more speakers who want to speak on this Resolution.  If the House agrees, we can extend the time for this Resolution by half-an-hour. The Minister’s reply is also there. 

SEVERAL HON. MEMBERS: Yes, Sir.

MR. CHAIRMAN: So, I would request Shri Maheswar Hazari to speak. Please be brief. 

श्री महेश्वर हज़ारी (समस्तीपुर): सभापति महोदय, मैं इस सीट से बोलने की अनुमति चाहता हूं।

MR. CHAIRMAN: Yes, you can speak. There is no problem.

श्री महेश्वर हज़ारी : आदरणीय सभापति महोदय, बिहार राज्य कभी बाढ़ एवं कभी सूखा से हमेशा ग्रसित रहता है। मैं आपके माध्यम से भारत सरकार से आग्रह करना चाहता हूं कि सौतेलेपन का व्यवहार छोड़ कर बिहार के ऊपर एक सरसरी निगाह डाल कर देखा जाए कि बिहार क्यों पिछड़ा हुआ है।

          सभापति महोदय, मैं आपके माध्यम से सदन में सबसे पहले यह कहना चाहता हूं, चूंकि बिजली के क्षेत्र में हमारा बिहार सबसे पीछे है। जब से वहां आदरणीय नेता श्री नीतीश कुमार जी की सरकार बनी, तब से वहां के समाज और वहां की जनता में यह विश्वास पैदा हुआ कि बिहार का विकास इनके नेतृत्व में होगा, बिहार में शांति व्यवस्था कायम होगी, बिहार का भविष्य उज्जवल होगा और बिहार का सम्मान पूरे देश में बढ़ेगा।

          सभापति महोदय, मैं आपके माध्यम से भारत सरकार से अपील करना चाहता हूं, विशेष आग्रह करना चाहता हूं, चूंकि बिहार बहुत पिछड़ा हुआ क्षेत्र है। जब से झारखंड़ अलग हुआ, तब से हमारे यहां जो खनिज पदार्थ थे, वे सभी झारखंड में चले गए, जिसके कारण हम लोगों के यहां सिर्फ नदियां रह गईं। नेपाल से जो नदी आती है, यदि उस नदी के पानी का, वहां हम लोग अगर हाई डेम बना करके बिजली का उत्पादन करें तो हम बिहार में बिजली के क्षेत्र में आत्मनिर्भर हो जाएंगे और वहां उसी पानी से कृषि के क्षेत्र में भी फायदा लेंगे। वहां का किसान भी उत्पादन बढ़ाने में आगे रहेगा, चूंकि बिहार का जो व्यक्तित्व है, वहां के जो लोग हैं, वे बहुत ही मेहनतकश इंसान हैं। पूरे देश में बिहार के लोग जाकर खेती-बाड़ी, मकान बनाने का काम और मजदूरी करने का काम किया करते हैं, पूरे भारत को संभालने का काम करते हैं। यदि बिहार में इस तरह से हो जाए तो मैं समझता हूं कि बिहार के लोगों को अपने यहां रहने का मौका मिलेगा और बिहार का विकास करने में उन लोगों का हाथ बढ़ेगा।

          सभापति महोदय, मैं आपके माध्यम से सदन में बीपीएल सूची की बात करना चाहता हूं। हमारे यहां से बिहार सरकार ने बीपीएल की एक करोड़ 40 लाख की सूची बना कर भेजी, लेकिन यहां से सिर्फ 65 लाख रुपए दिए गए। आप बताइए कि बिहार में 65 लाख रुपए में क्या होगा। वह इतना बड़ा क्षेत्र है, वहां पर बहुत से लोग रहते हैं, वहां के लिए मात्र 65 लाख रुपए ही दिए गए।

          सभापति महोदय, मैं आपके माध्यम से भारत सरकार से आग्रह करना चाहता हूं कि बिहार सरकार के द्वारा जो बीपीएल सूची की लिस्ट आई है, उन्हें यहां से एक करोड़ 40 लाख रुपए दिए जाएं और जल्द से जल्द उसे स्वीकृत किया जाए। बिहार में हमारे यहां जो आदरणीय नेता नीतीश कुमार जी और सुशील कुमार मोदी जी की सरकार है, उन्होंने पूरे बिहार में घूम-घूम करके हस्ताक्षर अभियान चलाने का काम किया कि बिहार को विशेष पैकेज और विशेष राज्य का दर्जा दिया जाए। मैं सबसे पहले बिहार के विशेष दर्जे के लिए जो संकल्प लाया गया है, उसके लिए मैं भोला बाबू, पुतुल जी और अन्य सदस्यों को धन्यवाद देना चाहता हूं कि उन्होंने इस संकल्प को लाने का काम किया। इसके साथ ही मैं यह भी आग्रह करना चाहता हूं कि वहां जो हाई डेम बनेगा, उससे भी बिजली का उत्पादन होगा। वहां पर बहुत सी शुगर मिलें थीं।      

 17.00 hrs.   वे शुगर मिलें करीब-करीब 80 परसेंट बन्द हो गई हैं। अगर भारत सरकार चाहेगी तो वे शुगर मिल्स चालू हो जाएंगी तो वहां का किसान, जो ईख उत्पादन करता है, ईख उत्पादन करने के बाद वह मिल में जायेगी और वहां शुगर उत्पादन होगा।

          साथ ही मैं आग्रह करना चाहता हूं कि वित्तीय प्रबन्धन, जो स्टेट के अनुसार पूरे भारत में किया जाता है, कम से कम बिहार में, जो गरीब स्टेट है, उसी के अनुसार वित्तीय प्रबन्धन भारत सरकार करे और विशेष राज्य का दर्जा बिहार को देने का काम करे।

          मैं इन्हीं चन्द शब्दों के साथ आपका बहुत-बहुत धन्यवाद करता हूं।

                                                                                                             

श्री राजेन्द्र अग्रवाल (मेरठ):सभापति जी, मैं आपका बहुत आभारी हूं कि आपने मुझे इस संकल्प पर बोलने का अवसर प्रदान किया। मैं यद्यपि मूलतः उत्तर प्रदेश का रहने वाला हूं, परन्तु सामाजिक कार्यकर्ता होने के नाते पांच वर्ष मुझे बिहार में रहने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है और बिहार को जानने का सौभाग्य भी मिला है। नःसंदेह मैं बिहार से बहुत प्यार करता हूं और पूरे देश से बहुत प्यार करता हूं। इस कारण से जो विषय विभिन्न पक्षों से, विभिन्न कोणों से यहां पर आया है, मैं सबसे पहले तो उससे स्वयं को सम्बद्ध करता हूं।

          कहीं भी उद्यमशीलता को यदि सफल बनाना है तो श्रम और पूंजी दोनों का संयोग होना बहुत आवश्यक है। बिहार के पास पुरुषार्थ है, लेकिन बिहार के पास पूंजी का अभाव है। बिहार का यह पुरुषार्थ पूरे देश में दिखाई देता है, चाहे वह श्रम से सम्बन्धित पुरुषार्थ हो या बौद्धिक पुरुषार्थ हो। इस संकल्प के माध्यम से जो बात भोला बाबू के द्वारा कही गई है और सदन के सभी माननीय सदस्यों के द्वारा कही गई है, उसके अनुरूप बिहार को समुचित पूंजी प्रदान की जाये, ताकि उसका पुरुषार्थ यशस्वी हो और अपनी परम्परा के अनुरूप बिहार देश के अन्दर अपना स्थान बना सके और आर्थिक दृष्टि से, सामाजिक दृष्टि से और अपने पुराने गौरव को प्राप्त कर सके। ...(व्यवधान)

          अभी देवकीनन्दन से यशोदानन्दन बने, हमारे एक माननीय सांसद बिजली का कुछ जिक्र कर रहे थे। अनेक बार मैंने भी इस बात को सदन में सुना है कि कोल कनैक्टिविटी की मांग बराबर बिहार की सरकार करती रही है। मैं समझता हूं कि विद्युत के उत्पादन की व्यवस्था हो जायेगी, अगर कोल कनैक्टिविटी उसको दी जाये।

          अन्त में विषय को बहुत लम्बा न करते हुए, देश की आजादी की शुरूआत महात्मा गांधी ने बिहार से की, चम्पारन से की। बिहार का दर्द उन्होंने समझा और बिहार के दर्द के माध्यम से पूरे देश का दर्द उन्होंने समझा। मैं इस सदन से और सरकार से आपके माध्यम से यह निवेदन करना चाहता हूं कि बिहार के दर्द को वह राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में देखे, जिस दृष्टि से महात्मा गांधी ने चम्पारण में देखा था और बिहार के विकास के लिए जो प्रार्थना भोला बाबू के द्वारा की गई है, जो प्रस्ताव किया गया है, उसको स्वीकार किया जाये और एक विशेष पैकेज के अन्दर उसको सहायता दी जाये।

          बहुत-बहुत धन्यवाद कि आपने मुझे बोलने का अवसर दिया।

                                                                                                   

MR. CHAIRMAN : Shri Jagdambika Pal. You also follow the time-limit like the other Members. Please be very brief. I give three minutes to you.

SHRI JAGDAMBIKA PAL (DOMARIYAGANJ):  Sir, I take only whatever time you are giving.

MR. CHAIRMAN:  I give you three minutes.

 

SHRI JAGDAMBIKA PAL : सभापति महोदय, मैं आपका बहुत आभारी हूं कि माननीय भोला सिंह जी के द्वारा जो एक महत्वपूर्ण विषय की तरफ उन्होंने ध्यान आकृष्ट किया है, उस पर आपने मुझे भी बोलने का अवसर दिया है।

       इसमें कोई दो मत नहीं हो सकते हैं कि जंगे आजादी में बिहार और उत्तर प्रदेश का योगदान आज भी स्वर्णाक्षरों में लिखा है। गंगा और गोमती के बीच में जो भी लड़ाई लड़ी गई, जैसा अभी माननीय राजेन्द्र अग्रवाल जी ने चम्पारण का जिक्र किया तो वह चाहे काकोरी कांड हो, चाहे चौरीचौरा कांड हो, चाहे चम्पारण हो, सारी ब्रितानिया हुकूमत के खिलाफ लड़ाई लड़ने में योगदान उस बिहार की भी धरती के लोगों का रहा है और उत्तर प्रदेश के लोगों का भी रहा है। स्वाभाविक है कि अगर कहीं क्षेत्रीय असंतुलन होता है, रीजनल इम्बेलेंस होता है, जिसके कारण लोग पलायन करते हैं या जिस तरह से जिक्र हमारा सदन कर रहा है कि आज भी वहां के पुरुषार्थ में कोई कमी नहीं है, लेकिन उस पुरुषार्थ का पलायन होकर सूरत हो, अहमदाबाद हो, मुम्बई हो, दिल्ली हो, कोलकाता हो, उन जगहों पर आज वहां की अर्थव्यवस्था में, वहां के विकास में एक महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।  यहां चाहे दिल्ली के कॉमन वेल्थ गेम्स हों, उसको भी बनाने में बिहार और उत्तर प्रदेश के लोगों का, वहां के मजदूरों का बहुत बड़ा योगदान है।  मैं समझता हूं कि किसी भी राज्य को केवल एक स्पेशल स्टैटस दे देने से ही उस राज्य का विकास नहीं हो सकता है।  राज्य के विकास के लिए निश्चित तौर से एक शार्ट टर्म प्लानिंग और एक लांग टर्म प्लानिंग करनी पड़ेगी।  इसमें राज्य सरकार का भी एक दायित्व होगा कि हम उस दायित्व को निभायेंगे।  केंद्र सरकार से जो अपेक्षायें हों, केंद्र सरकार से जो भी वित्तीय संसाधन दे रहे हों, चाहे वह विकास के लिए हो, चाहे भारत निर्माण की योजनाओं के लिए हो, ...( व्यवधान) चाहे वह वहां के दूसरे विकास कार्यक्रमों के लिए हो, उसके लिए निश्चित तौर से इस चीज को देखना होगा।  मैं समझता हूं कि बिहार के पिछड़ेपन के कारण या बिहार आज भी अगर बीमारू राज्य माना जा रहा है तो उसके लिए सदन को गंभीरता से चिंता करनी पड़ेगी कि आज बिहार में विकास न होने या पिछड़ेपन का कारण क्या है?  मैं समझता हूं कि बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश को आप अलग नहीं कर सकते हैं।  आज दोनों की परिस्थितियां ऐसी ही हैं।  इसका सबसे बड़ा कारण फ्लड है।  वह फ्लड इसलिए है कि पूरे बिहार से लेकर उत्तर प्रदेश तक, हम नेपाल के फुट-हिल्स पर हैं।  चाहे नेपाल की जलकुंडी हो, करनाली हो, वहां की सारी नदियों का पानी हों, जिस तरह से बिहार की कोसी नदी में बाढ़ एक नियत बन गयी है या उत्तर प्रदेश में घाघरा हो, राप्ती हो या गंगा हो, वहां भी उसी तरह की बाढ़ की नियत बन गयी है।  उन परिस्थितियों में आज क्या हो रहा है?  अगर बिहार में पिछले वर्ष बाढ़ आयी, तो वहां रिलीफ के लिए भारत सरकार ने एक हजार करोड़ रुपए दिए और जब एक हजार करोड़ रुपए से अधिक की डिमांड आयी, तो आपको याद होगा, इसी सदन में कहा गया कि एक हजार करोड़ रुपए जो हमने फ्ल्ड रिलीफ वर्क के लिए दिया था, उसका यूटिलाइजेशन सार्टिफिकेट नहीं आया।  स्वाभाविक है कि ...( व्यवधान) इसके लिए एक हजार करोड़ रुपया गया।  अच्छा चलिए, इसको भी न मानिए।  क्या आप यह भी नहीं मानेंगे कि वर्ष 2010-11 में भारत सरकार ने बीस हजार करोड़ रुपए दिए और वर्ष 2011-12 में भी 6 हजार करोड़ रुपए केंद्र सरकार से योजनाओं के लिए जा चुके हैं।  स्पेशल पैकेज के लिए यहां से गया है, आप जवाब दे दीजिए। ...( व्यवधान)  उनको हर साल 2 हजार करोड़ रुपए मिल रहे हैं। ...( व्यवधान)  माननीय मंत्री जी अपने उत्तर भाषण में जरूर बता देंगे कि आपने बिहार को कितना दिया है, लेकिन मैं जानता हूं कि आज उस स्पेशल प्लान में हर साल बिहार को अगर दो हजार करोड़ रुपए मिल रहे हैं या दस हजार चार सौ करोड़ रुपए जो स्पेशल पैकेज में आज तक सैंक्शन हुए, निश्चित तौर से कम से कम इस बात के लिए तो धन्यवाद देना चाहिए कि भारत सरकार के द्वारा विभिन्न योजनाओं में जो हमने आज तक 32 हजार करोड़ दिए ...( व्यवधान)

श्री कौशलेन्द्र कुमार : वह हमारा अधिकार है। ...( व्यवधान)

श्री जगदम्बिका पाल : आप सुन लीजिए। ...( व्यवधान) मैं कौशलेन्द्र जी को धन्यवाद दूंगा कि उन्होंने स्वीकार किया कि हमें मिला है।  बिल्कुल आपका अधिकार है, मैं यह नहीं कह रहा हूं कि आपका अधिकार नहीं है।  अगर आपके अधिकार के ...( व्यवधान) लेकिन आज हम जो दे रहे हैं, वहां पॉवर प्लांट बनाने के लिए ...( व्यवधान)

 

MR. CHAIRMAN : Please take your seat. Hon. Minister will reply now.

… (Interruptions)

MR. CHAIRMAN: Nothing will go on record.

(Interruptions) … * MR. CHAIRMAN: Hon. Minister will start his reply.

… (Interruptions)

MR. CHAIRMAN: Please take your seat.

… (Interruptions)

MR. CHAIRMAN: Nothing will go on record.

(Interruptions) …* योजना मंत्रालय में राज्य मंत्री, विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय में राज्य मंत्री तथा पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय में राज्य मंत्री (श्री अश्विनी कुमार) : माननीय सभापति जी, पिछले कई घंटों में हमने बिहार को विशेष श्रेणी का दर्जा देने के प्रस्ताव को, जिसे भोला बाबू इस सदन में लाए हैं, एक विस्तृत चर्चा सुनी।  इस संबंध में बहुत भावनात्मक विचार व्यक्त किए गए और बहुत दलीलें दी गयीं।  मैं उन भावनाओं के साथ अपने आपको जोड़ता हूं और दोहराना चाहता हूं कि देश का समग्र विकास तब तक नहीं हो सकता है, जब तक हमारे देश के सारे राज्यों का विकास पूरी तरह से न हो जाए।  जो खास बात इस चर्चा में सामने आयी, वह है बिहार का गौरवमयी इतिहास।  एक ऐसा इतिहास जो केवल बिहार को ही गौरवान्वित नहीं करता है, बल्कि सारे राष्ट्र को गौरवान्वित करता है।    हम जब कॉलेज में पढ़ा करते थे तो देश की आजादी के बारे में जिन योद्धाओं ने, देश के महापुरूषों ने  योगदान दिए थे उनमें बड़े नाम आते थे - जैसे सर्वश्री जयप्रकाश नारायण जी, बाबू जगजीवन राम जी, राजेन्द्र प्रसाद जी और ऐसे अनेकों नाम आते थे। जब कभी संस्कृति की चर्चा होती थी तो रामधारी दिनकर जी का नाम जिनकी पंक्तियां मुझे बहुत प्रिय है। मैं अपनी तकरीर में उनका कई बार इस्तेमाल भी करता हूं।

                              समर शेष है नहीं पाप का भागी केवल व्याध                               जो तटस्थ है समय लिखेगा उनका भी उसका अपराध।  

          जब नालंदा की बात आती है तो बिहार की बात आती है। जब ज्ञान की बात आती है तो तक्षशिला और वैशाली की बात आती है। मैं किन-किन का नाम लूं, किन-किन का जिक्र करूं - गौतम बुद्ध, सम्राट अशोक, शिवपुजन सिंह जी और अमर विर कुँअर सिंह जी का नाम जब आता है तो बिहार का नाम आता है। जब इनका नाम आता है तो देश अपने आप को गौरवान्वित महसूस करता है। जहां तक भावनाओं का सवाल है, जहां तक विचारों का सवाल है किसी किस्म का मतभेद नहीं है। बिहार का समग्र विकास हो। इसका जल्द विकास हो। ऐसा विकास हो जिससे देश आगे बढ़े, जिससे एक सामाजिक न्याय की प्रक्रिया आगे बढ़े। इन किसी भी मुद्दों पर किसी भी तरह से मुझे और कुछ नहीं कहना है जो आप ने कहा उन सभी धारणाओं, विचारों और भावनाओं के साथ मैं अपने-आप को जोड़ता हूं।

          सभापति जी, मैं आपकी आज्ञा से जो दो-चार जो तथ्य हैं उन्हें सदन में रखना चाहूंगा। बिहार के प्रति जितनी संवेदना, जितनी उदारता इस सरकार ने दिखाई है उसका प्रमाण कुछ आंकड़ों से देना चाहूंगा। वर्ष 2003-04 में स्पेशल प्लान के तहत, जो सिर्फ बिहार के लिए बनाया गया था, एक हजार करोड़ रूपये सलाना की राशि मंजूर की गई जिस राशि को बढ़ाकर वर्ष 2008-09 में दो हजार करोड़ रूपये सलाना कर दिया गया है। जैसा कि जगदम्बिका पाल जी ने  और दूसरे माननीय सदस्यों ने उसका जिक्र किया। वर्ष 2010-11 में बीस हजार करोड़ रूपये की राशि जो विभिन्न सेंट्रल स्पॉन्सर स्कीम्स हैं उसके तहत बिहार को प्रदान की गई। उससे पहले बारह हजार करोड़ रूपये वर्ष 2009-10 में दिया गया। बारह हजार करोड़ रूपये की रकम को बढ़ाकर बीस हजार करोड़ रूपये हमारी सरकार ने मंजूर कर दी। इस प्रकार आठ हजारा करोड़ रूपये का बढ़ावा एक साल के अंदर हमारी सरकार ने दिया। इसके अलावा 13वीं फाइनैंस कमीशन के मापदंडों के मुताबिक बिहार को आज कहीं ज्यादा अतिरिक्त राशि अपने विकास के लिए मिल रही है जो पहले नहीं मिलती थी।

          सभापति जी, जहां तक बिहार के विशेष श्रेणी के दर्जे का सवाल है इसके मुतल्लिक  पिछले दिनों नीतिश कुमार जी प्रधानमंत्री जी से  मिले थे। उन्होंने विशेष प्रार्थना की थी। एमपीज ने एक मेमोरैंडम दिया। इसके पहले वर्ष 2009-10 में भी इसकी मांगे आती रहीं और इसके मुतल्लिक आए दिन सदन में चर्चा होती है, सवाल पूछे जाते हैं। बिहार उन्नति करे, देश का प्रगतिशील प्रदेश बने और जल्द उन्नति करे। इसमें कोई दो राय नहीं है जैसा मैंने कहा। मगर उसका माध्यम क्या है? क्या केवल विशेष श्रेणी के दर्जे से ही इस उद्देश्य की प्राप्ति हो सकती है। मैं ऐसा नहीं मानता हूं। हमने जो स्पेशल प्लान बनाया है उसका मुख्य उद्देश्य यह है कि बिहार का समग्र विकास हो। पिछले दिन, मैंने एक सवाल के जवाब में बताया था कि दिल्ली की बनिस्बत पिछले तीन-चार सालों में बिहार का विकास बढ़ा है, लेकिन एक निचले और छोटे बेस से विकास हो रहा है इसलिए अभी और बहुत कुछ करना है। कोसी की बाढ़ का प्रभाव उससे जो संपत्ति एवं खेती का नुकसान होता है उसके बारे में हमें पूरी जानकारी है, उसके बारे में पूरा एहसास है।   इसलिए बिहार सरकार खास हालातों से जूझने के लिए जो-जो योजना केन्द्र सरकार को देती है, करीब-करीब सभी मानी जाती हैं। मैं उनका विवरण अभी आपको दूंगा। हमने चार-पांच मापदंड रखे हैं और नेशनल डैवलपमैंट काउंसिल के मापदंड हैं। चाहे जनसंख्या का जमावड़ा हो चाहे पहाड़ी इलाकों की बात हो, इन दो-तीन मापदंडों पर आज के मापदंड पर बिहार को स्पैशल श्रेणी का दर्जा नहीं दिया जा सकता,  ऐसी प्लानिंग कमीशन की भावना है। उड़ीसा, गोवा, राजस्थान के मुताल्लिक भी समय-समय पर डिमांड्स आई हैं। उनके मुताल्लिक इन्हीं मापदंडों को सामने रखते हुए जो उचित फैसला समझा गया, वह किया गया। मगर इस फैसले के बावजूद इस बात से कभी भी इंकार नहीं किया गया कि बिहार एक बड़ा प्रदेश है और एक ऐसा प्रदेश है जो जब तक पूरी तरह से विकसित नहीं होता, देश का पूरी तरह से आर्थिक विकास नहीं हो सकता। हमने जो आंकड़े देखे हैं, हम जिस तरह की विकास दर चाहते हैं 9 प्रतिशत, 8.5 प्रतिशत, 9.5 प्रतिशत, जो बारहवीं पंचवर्षीय योजना में हमारे उद्देश्य हैं, वह तब तक नहीं हो सकता जब तक बिहार का विकास नहीं होता। हम इस बात को स्वीकारते हैं। मगर मापदंडों को बदलने का इख्तियार नेशनल डैवलपमैंट काउंसिल को है। मेरा यह मानना है कि जब तक उन मापदंडों में कोई सुधार न हो या  उनमें कोई अमैंडमैंट न हो, तब तक स्पैशल प्लान के तहत जो दो हजार करोड़ रुपये की राशि मिलती है या जो सैंट्रल स्पॉन्सर्स स्कीम हैं या तेहरवीं फाइनैंस कमीशन की रिकमैंडेशन्स के तहत एक अतिरिक्त राशि का बिहार के लिए जो प्रावधान है, मैं समझता हूं कि बिहार की जो मुख्य चुनौतियां हैं, हम उन्हें झेलने में कामयाबी हासिल करेंगे और की भी हैं तभी विकास हुआ है। मैं इस बात से सहमत हूं कि हमें अभी और बहुत कुछ करना है।

          मैं पिछले दिनों बिहार गया था। ईस्टर्न स्टेट्स की प्लानिंग कमीशन की मीटिंग बिहार में रखी गई थी। नीतीश बाबू से व्यापक विचार-विमर्श किया गया और हर पहलू जो प्रदेश सरकार रखना चाहती थी, पूरे प्लानिंग कमीशन के सामने वे विचार रखे गए। मेरी अपनी भावना है कि जब नीतीश बाबू यहां आए थे, तब भी और उससे पहले भी उनसे जितनी भी बातचीत हुई, करीब-करीब सब लोग यह समझते हैं कि जो कुछ संविधान के दायरे में, नेशनल डैवलपमैंट काउंसिल के मापदंडों के दायरे में किया जा सकता है, वह किया गया है।

          मैं आपको दो-तीन बातें और बताना चाहता हूं। कुछ खास प्रोजैक्ट जिनका सीधा ताल्लुक बिहार के  एक बहुत जल्द होने वाले विकास के साथ है, जैसे स्टेट हाइवेज़, प्रधान मंत्री सड़क रोजगार योजना, नेशनल हैल्थ मिशन की बात, इंटग्रेटेड वाटरशैड डैवलपमैंट प्रोग्राम, मनरेगा की बात, जितनी भी सैंट्रली स्पॉन्सर्ड स्कीम्स हैं, हम चाहते हैं कि उनकी इम्प्लीमैंटेशन बिहार के लिए और भी कारगर बने ताकि जो चीज़ हम विशेष श्रेणी न देने के कारण नहीं कर सकते, वह इन परियोजनाओं के माध्यम से कर सकें। लक्ष्य भी वही है और उद्देश्य भी वही है। किसी किस्म का इखतलाख नहीं है। सभापति महोदय, मैं आपके माध्यम से माननीय सदस्य को बहुत फक्र से यह बात कहना चाहता हूं कि यूपीए सरकार डैवलपमैंट के मसले पर कभी भी किसी प्रदेश के साथ इरादतन भेदभाव नहीं करती। हमारा इससे कोई सरोकार नहीं है कि किस प्रदेश में कौन सी सरकार है। हम समझते हैं कि नीतीश जी की सरकार ने कुछ बहुत महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं और हम अपनी मर्यादाओं में रहकर, मापदंडों की मर्यादाओं में रहकर बिहार के लिए जो अधिक से अधिक कर सकेंगे, वह करेंगे। यह ऐसा राज्य है, ऐसी भूमि है, इसका ऐसा गौरवमयी इतिहास है कि हम सब लोग अपने आपको बिहार के विकास के साथ जोड़कर गौरवान्वित मानते हैं।

          भोला बाबू, आप यह प्रस्ताव लाए हैं। मैं सरकार की ओर से आपका धन्यवाद करना चाहता हूं। मुझे भी जिन बहुत सी चीजों का ज्ञान नहीं था, मैंने चर्चा सुनी और उससे ज्ञान हासिल किया। लेकिन मैं आपको कुछ आंकड़े बताना चाहता हूं। वर्ष 2003-04 जब हमने स्पैशल प्लान शुरू किया, तब हम बिहार के लिए एक हजार करोड़ रुपये सालाना देते थे, जिसे वर्ष 2010 से बढ़ाकर दो हजार करोड़ रुपये कर दिए गए हैं। अब तक स्पैशल प्लान के तहत 10,468 करोड़ रुपये बिहार को जा चुके हैं।

 इसके अतिरिक्त जो स्पेशल स्कीम्स हैं, सैंट्रली स्पोंसर्ड स्कीम्स, सैंट्रल असिस्टैंस टू स्टेट प्लान है, उसके तहत वर्ष 2009 में 12206.15 करोड़ रुपये बिहार को गये। इन्हीं के तहत वर्ष 2010-11 में 2096 करोड़ 34 लाख रुपये बिहार को गये और अब तक वर्ष 2011-12 में 6123 करोड़ रुपये गये। इस तरह राशि का कोई अभाव नहीं है और जिन प्रौजेक्ट्स के लिए राशि गयी है, वे बहुत अहम हैं। उन प्रौजेक्ट्स को हमने प्रदेश सरकार के साथ बैठकर मंजूरी दी है। उनकी इम्प्लीमैंटेशन की मौनीटरिंग कुछ हद तक प्लानिंग कमीशन भी करता है, मगर अंततः यह जिम्मेदारी प्रदेश सरकार की है। इनमें बहुत महत्वपूर्ण विकास के जो कार्य हुए हैं या होने हैं, उनमें स्टेट हाईवेज, रेल कम रोड ब्रिज, सब ट्रंसमिशन सिस्टम, जो बिजली आपूर्ति करने के लिए है और माडर्नाइजेशन जो बरौनी, मुजफ्फरपुर थर्मल पावर स्टेशन का है, बिहार के ग्राउंड वाटर इरीगेशन की स्कीम्स हैं, उनके मुताल्लिक है। जो ईस्टर्न गंधक कनाल और इंटेग्रेटिड वाटरशेड डेवलपमैंट प्रोग्राम है, उसके मुताल्लिक है। इसके अलावा जो फॉरेस्ट मैनेजमैंट है, उसके मुताल्लिक है। ये सारी परियोजनाएं जो प्रदेश सरकार ने  हमें भेजीं, हमने उन्हें स्वीकृति दी है। उनके लिए उचित राशि भी आवंटित की है। मेरा यह मानना है कि इन सभी चीजों को देखते हुए, इन सभी आंकड़ों को देखते हुए, परियोजनाओं को देखते हुए और इस बात को मद्देनजर रखते हुए कि आपकी भावनाओं से सरकार सहमत है कि बिहार का विकास हो, मैं मानता हूं कि इस प्रस्ताव को प्रैस करने की आवश्यकता नहीं है। केन्द्र सरकार पूरी उदारता और खुले दिल के साथ बिहार के विकास में जितना भी अधिक से अधिक योगदान दे सकती है, वह देगी, ताकि बिहार की जो गौरवमयी गाथा है, वह आगे भी चलती रहे और आने वाली हमारी जो पीढ़ियां हैं, वे बिहार को एक बहुत प्रगतिशील प्रदेश के रूप में देख सकें।

          इन्हीं शब्दों के साथ, मैं सभी माननीय सदस्यों का, जिन्होंने चर्चा की, धन्यवाद करता हूं और जो कुछ करना होगा, वह हम करेंगे। मैं चाहूंगा कि आप यह प्रस्ताव वापस ले लें।

                                                                                         

डॉ. भोला सिंह (नवादा):  सभापति महोदय, माननीय मंत्री जी ने बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने के विवाद पर, बहस पर, विमर्श पर अपने जो उद्गार प्रकट किये हैं, उसके लिए मैं उन्हें धन्यवाद देता हूं।

          सभापति महोदय, बिहार वह मां है, जो पूरे राष्ट्र को खिलाकर, उसकी अस्मिता की रक्षा करके, स्वयं फटे-चिटे चिथड़ों में लिपटी हुई है और इसके लिए बिहार को गौरव है। हम केन्द्र सरकार के दरवाजे पर कोई याचना करने के लिए नहीं आये हैं, कोई प्रार्थना करने नहीं आये हैं। मैं कोई रुपये की थैली मांगने नहीं आया हूं। आप हमें क्या देंगे? बिहार ने सम्पूर्ण राष्ट्र को दिया है और  यह सम्पूर्ण राष्ट्र की आत्मा का दीप है। इसने सम्पूर्ण भारत को गौरव के आसन पर बिठाया था। चन्द्रगुप्त मौर्य के जमाने में भारत का इतिहास, इंदिरा जी को छोड़कर, विफलता और डिफीट का रहा है। बिहार ने चन्द्रगुप्त मौर्य के जमाने में विजयी सिकंदर के सेनापति को हराकर उसकी बेटी के साथ शादी करके बिहार की सीमा, जो भारत की सीमा हुई, हिन्दुकुश पर्वत तक बढ़ायी। हम शरीर नहीं हैं, हम आत्मा के दीप हैं।

          सभापति महोदय, माननीय मंत्री जी ने आंकड़ों का जो जाल बिछाया है, उसको मैं जानता हूं। क्या मैं यह जान सकता हूं कि केन्द्र सरकार ने बिहार को जो कुछ दिया है, फाइनेंस कमीशन, जो सम्पूर्ण देश के राज्यों की आवश्यकता, उनके पिछड़ेपन आदि सब कुछ देखकर आवंटित करता है, वह आपकी दया से नहीं प्राप्त हुआ है, वह हमारा अधिकार है, हमारा संवैधानिक अधिकार है। आपने कोई दया करके हमें नहीं दिया है।...( व्यवधान)

MR. CHAIRMAN : Please wind up.

डॉ. भोला सिंह : सभापति महोदय, मुझको अपनी बात कहने दीजिए। मैं कोई ऐसी बात नहीं कह रहा हूं। बिहार विडंबनाओं का राज्य है। एक तरफ 46 प्रतिशत लोग गरीबी रेखा के नीचे हैं, दूसरी तरफ बिहार अपना पेट काटकर, पीड़ा सहकर प्रतिवर्ष राष्ट्रीयकृत बैंकों में 58,000 से लेकर 60,000 करोड़ रुपये जमा करता है और बिहार को मिलता है सिर्फ 28,000 करोड़ रुपये, 31,000 करोड़ रुपये। इसका मतलब है कि हमने अपने पेट को काटकर, बचा-बचाकर जो पैसे जमा किए हैं, हमारे पैसे से महाराष्ट्र को बैंक से 92 प्रतिशत लोन मिलता है, राजस्थान को मिलता है 88 प्रतिशत, गुजरात को मिलता है 92 प्रतिशत और हमको मिलता है सिर्फ 27 प्रतिशत। हमसे आप आबाद हैं, हमसे आप बहार में आए हैं, हम मज़ार के रूप में उपस्थित हो रहे हैं। इसलिए हम कोई दया मांगने के लिए नहीं आए हैं।

          सभापति महोदय, मैं माननीय मंत्री जी से कहना चाहता हूं कि बिहार संभावनाओं का राज्य है, समस्याओं का नहीं। ...( व्यवधान)

MR. CHAIRMAN: Your allotted time is over. You have to wind up. 

डॉ. भोला सिंह : यह मैं जानता हूं। मैं पांच मिनट में अपनी बात समाप्त कर दूंगा।

          सभापति महोदय, इस बहस में 20 माननीय सदस्यों ने भाग लिया। इस पर बोलते हुए उत्तर प्रदेश के शैलेन्द्र जी ने बिहार को स्पेशल दर्जा मिले, इसकी अपने स्तर से व्याख्या की, समर्थन किया। मंगनीलाल मंडल जी ने अपने अनुभव से बिहार को स्पेशल दर्जा दिए जाने के लिए तथ्यों को प्रस्तुत किया। किशनगंज के हमारे माननीय सदस्य ने बिहार की गौरव-गरिमा के बारे में, उसकी संस्कृति के बारे में तथ्यों को पुरःस्थापित किया। श्री सतपाल महराज ने बिहार के आध्यात्मिक चरित्र को पुरःस्थापित करते हुए कहा कि बिहार को स्पेशल राज्य का दर्जा मिलना चाहिए। श्री शाहनवाज हुसैन ने और डा. रघुवंश प्रसाद सिंह जी ने बिहार के समुचित विकास के लिए विशेष राज्य का दर्जा देने के लिए आंकड़े प्रस्तुत किए हैं। श्री सुशील कुमार सिंह और श्रीमती पुतुल कुमारी जी ने बिहार की गौरव-गरिमा के बारे में सारे तथ्यों को रखा है।...( व्यवधान)

MR. CHAIRMAN: Please come to the point. There are many other Bills and Resolutions that we have to take up. 

डॉ. भोला सिंह : मैं समाप्त कर रहा हूं सभापति महोदय। मैं जानता हूं कि आपको समय की पीड़ा है, हमें आत्मा की पीड़ा है।...( व्यवधान)

MR. CHAIRMAN: Please do not quote names. There is no time for all that. 

डॉ. भोला सिंह : मैं समाप्त करने वाला हूं।  श्री संजय निरुपम जी, जो हमारी कोख से महाराष्ट्र गए हैं।...( व्यवधान)

MR. CHAIRMAN: Please do not quote names. There is no time for all that. 

डॉ. भोला सिंह : श्री मेघवाल जी ने, जो राजस्थान के बीकानेर से आए हैं, उन्होंने बिहार को स्पेशल दर्जा देने की मांग की है।  

          सभापति महोदय, श्री मुनव्वर हुसैन जी ने, श्री महेश्वर हजारी जी ने, श्री राजेन्द्र अग्रवाल जी ने और अन्य तमाम माननीय सदस्यों ने बिहार को स्पेशनल दर्जा देने के लिए आवाज़ उठाई है। श्री जगदम्बिका पाल जी, जिनका स्वर्णिम इतिहास रहा है और उस स्वर्णिम इतिहास को लेकर वह यहां उपस्थित हैं, उन्होंने भी बिहार के बारे में कहा।

          मैं आपसे यही कहना चाहता हूं कि बिहार आप पैकेज दें या न दें, हम नहीं कहते, लेकिन जो आपने असम के साथ, मणिपुर, मेघालय, उत्तराखंड, हिमाचल के साथ और अन्य राज्यों के कुछ हिस्सों के साथ किया, अगर बिहार के साथ ऐसा नहीं हुआ तो, बिहार का पूर्वी हिस्सा क्षेत्रीय असंतुलन का और पिछड़ेपन का शिकार हो जाएगा। तब एक आवाज़, एक हुंकार वहां से उठेगी, जो समस्त देश की सीमाओं की ओर जा सकती है। बिहार की जो संवैधानिक जिम्मेदारी है, जैसा तत्कालीन राष्ट्रपति श्री एपीजे अब्दुल कलाम जी ने बिहार के बारे में कहा था कि 2015 तक यह प्रदेश विकसित राज्य बने और इस सम्बन्ध में उन्होंने बिहार के मुख्य मंत्री जी के सामने यह प्रस्ताव रखा था। मुख्य मंत्री जी ने उस प्रस्ताव को स्वीकार करते हुए बिहार को 2015 तक विकसित राज्य बनाने की बात कही थी। मंत्री जी ने बिहार के बारे म जो भावनाएं व्यक्त की हैं, वह ममता आपके हृदय में है। सूरज से धरती बनती है, लेकिन बिहार की धरती की कोख से सूरज निकलता है, दिनकर है।  हम सदन में सिर्फ इतना ही आश्वासन आपसे चाहते हैं कि बिहार को विशेष दर्जा देने के मामले में तमाम तथ्यों को देखेंगे और बिहार के मुख्य मंत्री जी के साथ विचार-विमर्श करके, साथ ही दूसरे राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ भी बात करके बिहार को विकास के रास्ते पर ले जाने का काम करेंगे। बिहार की तरक्की भारत की तरक्की है, बिहार की अस्मिता भारत की अस्मिता है और बिहार का विकास भारत का विकास है। इसलिए इस चीज को ध्यान में रखते हुए आप आश्वासन दें  और हम उस आश्वासन के आलोक में आपकी बात को मानेंगे।

श्री अश्विनी कुमार : सभापति जी, मैं भोला सिंह जी को और पूरे सदन को जरूर यह आश्वस्त करना चाहूंगा कि मैंने पहले भी कहा है और फिर दोहरा रहा हूं कि जहां तक बिहार के विकास का सवाल है, यह विकास जल्द से जल्द हो, तीव्र गति से हो, समग्र हो और सामाजिक न्याय को आगे बढ़ाएं। इस बात की हमने हमेशा कोशिश की है। मैं आज भी कह रहा हूं कि सरकार के साथ बीतचीत करके, अपनी मर्यादाओं के बीच रहते हुए जो कुछ हो सकेगा, हम जरूर करेंगे। मैं माननीय सदस्य से उनका संकल्प वापस लेने की अपील करता हूं।

डॉ. भोला सिंह : सभापति महोदय, मैं प्रस्ताव वापस लेता हूं।

MR. CHAIRMAN : Is it the pleasure of the House that the Resolution moved by Dr. Bhola Singh be withdrawn?

 

The Resolution was, by leave, withdrawn.