State Consumer Disputes Redressal Commission
I C I C I Lombard G I C vs Dayanand on 14 September, 2017
Cause Title/Judgement-Entry STATE CONSUMER DISPUTES REDRESSAL COMMISSION, UP C-1 Vikrant Khand 1 (Near Shaheed Path), Gomti Nagar Lucknow-226010 First Appeal No. A/2011/1181 (Arisen out of Order Dated in Case No. of District State Commission) 1. I C I C I Lombard G I C a ...........Appellant(s) Versus 1. Dayanand a ...........Respondent(s) BEFORE: HON'BLE MR. Ram Charan Chaudhary PRESIDING MEMBER HON'BLE MR. Gobardhan Yadav MEMBER For the Appellant: For the Respondent: Dated : 14 Sep 2017 Final Order / Judgement
राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, उ0प्र0, लखनऊ।
(सुरक्षित) अपील संख्या :1181/2011 (जिला उपभोक्ता फोरम, गाजियाबाद द्धारा परिवाद सं0-22/2010 में पारित निर्णय/आदेश दिनांक 24.3.2011 के विरूद्ध) ICICI Lombard General Insurance Company Ltd., Registred Office, ICICI Bank Tower, Bandra Kala Complex, Mumbai presently through Area Manager, ICICI Lombard General Insurance Co. Ltd., Fourth Floor, Eldico Corporate Chamber 1, Vibhuti Khand, Gomti Nagar, Lucknow.
........... Appellant/ Opp. Party Versus Dayanand, S/o Babu Ram, R/o 461/13, K.H. Kothi, Sadaq Ali, District Ghagiabad, Uttar Pradesh.
............ Respondent/ Complainant समक्ष :-
मा0 श्री रामचरन चौधरी, पीठासीन सदस्य मा0 श्री गोवर्द्धन यादव, सदस्य अपीलार्थी के अधिवक्ता : श्री बिजेन्द्र चौधरी प्रत्यर्थी के अधिवक्ता : श्री प्रतुल श्रीवास्तव दिनांक : 31-10-2017 मा0 श्री रामचरन चौधरी, पीठासीन सदस्य द्वारा उदघोषित निर्णय मौजूदा अपील जिला उपभोक्ता फोरम, गाजियाबाद द्धारा परिवाद सं0-22/2010 में पारित निर्णय/आदेश दिनांक 24.3.2011 के विरूद्ध योजित की गई है, जिसमें जिला उपभोक्ता फोरम द्वारा निम्न आदेश पारित किया गया है:-
"विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह परिवादी को बीमित धनराशि 192500.00 रूपये मय 09, प्रतिशत (नौ प्रतिशत) ब्याज सहित अदा करे। ब्याज की धनराशि 16.11.2009 से वास्तविक अदायगी तक देय होगी। परिवादी को 2000.00 रूपये (दो हजार रूपये) बतौर वाद व्यय भी दिया जाए।"-2-
संक्षेप में केस के तथ्य इस प्रकार है कि परिवादी वाहन संख्या यू0पी0 11 टी.0470 का पंजीकृत स्वामी है एवं प्रश्नगत वाहन दिनांक 23.8.2008 से 22.8.2009 तक के लिए आल रिस्क इंश्योरेंस प्रतिवादी से कराया था। दिनांक 02.7.2009 को परिवादी का ड्राइवर अनिल कुमार क्लीनर के साथ न्यू कुंज बिहारी ट्रान्सपोर्ट कम्पनी सहारनपुर से सब्जी लादकर सब्जी स्वामी ओमी ओर गन्जा को सब्जी के साथ डाले में बैठाकर मेरठ के लिए चला यह दोनों सब्जी मालिक थे और यह मुफ्त के यात्री नहीं थे। रात 11.30 बजे इस गाडी का एक्सीडेंट हो गया एवं गाडी पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई और ड्राइवर की दौरान एक्सीडेंट मृत्यु हो गई, जिसकी एफ0आई0आर0 की गई। परिवादी ने घटना की सूचना तुरन्त बीमा कम्पनी को दी, जिस पर उसने सर्वेयर अभिषेक भारद्धाज को मौके पर मुआयना करने के लिए नियुक्त किया, जिसने मौके पर सर्वे किया और गाडी खींचकर रफीक मोटर्स, गाजियाबाद पर खडी की गई। रफीक मोटर्स ने गाडी ठीक करने के लिए 2,88,460.00 का स्टीमेट बनाकर दिया। परिवादी ने यह स्टीमेट और कागजात संलग्न करके प्रतिवादी से क्लेम मॉग, इस पर प्रतिवादी के सर्वेयर ने रफीक मोटर्स पर दिनांक 04.8.2009 को फिर से सर्वे किया और टोटल लास की रिपोर्ट दिया, प्रतिवादी ने कोई क्लेम नहीं दिया, उल्टे क्लेम देने के लिए इंश्योर्ड वैल्यू का दस प्रतिशत राशि रिश्वत के रूप में मॉगा, परिवादी ने रिश्वत नहीं दिया तब 10.10.2009 को 30 प्रतिशत का क्लेम पास करके चेक परिवादी को भेज दिया, जिसे लेने से परिवादी ने इंकार कर दिया। प्रतिवादी बीमा कम्पनी ने कहा कि दुर्घटना के समय बीमित वाहन में बैठने की स्वीकृति क्षमता से अधिक लोग यात्रा कर रहे थे, अन्त में परिवादी का क्लेम नो क्लेम कर दिया गया, अत: परिवादी द्वारा प्रतिवादी से बीमित धनराशि मय ब्याज तथा अन्य क्षतिपूर्ति का अनुतोष दिलाये जाने हेतु जिला उपभोक्ता फोरम के समक्ष परिवाद प्रस्तुत किया है।
प्रतिवादी की ओर से जिला उपभोक्ता फोरम के समक्ष अपना प्रतिवाद पत्र प्रस्तुत कर परिवाद का विरोध किया गया है और यह कथन किया गया -3- है कि क्लेम इस आधार पर खारिज किया गया कि सर्वेयर ने इस आशय की रिपोर्ट दी कि घटना के समय गाड़ी में यात्रा के लिए अनुमन्य सीट से ज्यादा लोग यात्रा कर रहे थे।
इस सम्बन्ध में जिला उपभोक्ता फोरम के प्रश्नगत निर्णय/आदेश दिनांकित 24.3.2011 तथा आधार अपील का अवलोकन किया गया एवं अपीलार्थी की ओर से विद्वान अधिवक्ता श्री बिजेन्द्र चौधरी तथा प्रत्यर्थी की ओर से विद्वान अधिवक्ता श्री प्रतुल श्रीवास्तव की बहस सुनी तथा पत्रावली पर उपलब्ध अभिलेखों एवं लिखित बहस का भी अवलोकन किया गया है।
मौजूदा केस में अपील के साथ संलग्न कागज सं0-28 है कि बीमा द्वारा दावे को अस्वीकार किया गया है और जिसमें यह कहा गया है कि सर्वेयर द्वारा वाहन का निरीक्षण दिनांक 04.8.2009 को किया था और अभिलेखों की विधिवत जॉच के बाद यह पाया कि दुर्घटना के समय जितने लोग यात्रा कर रहे थे, वह वाहन की अधीकृत क्षमता से अधिक थे और इस सम्बन्ध में जिला उपभोक्ता फोरम द्वारा दोनों पक्ष के साक्ष्यों की विवेचना की है और अपने निर्णय में यह कहा है कि परिवादी की ओर से परिवाद पत्र की धारा-2 में यह लिखा गया है कि ओमी और गन्जा उस सब्जी के मालिक थे, जो इस वाहन द्वारा ले जाई जा रही थी इसे शपथ पत्र द्वारा पुष्ट किया गया है। प्रतिवादी ने अपने वादोत्तर की धारा-2 में स्पष्ट रूप से लिखा कि परिवाद पत्र की धारा-2 का कथन स्वीकार किया जाता है इस प्रकार जब प्रतिवाद पत्र की धारा-2 का कथन स्वीकार कर लिया है तब इसमें आगे कोई अन्यथा बहस करने की गुन्जाइस नहीं रह जाती है तथा परिवादी का यह कथन सिद्ध होता है कि उपरोक्त दोनों व्यक्ति वास्तव में पैसिन्जर के रूप में यात्रा नहीं कर रहे थे, बल्कि सब्जी मालिक की हैसियत से बैठे थे और जिला उपभोक्ता फोरम ने यह पाया है कि प्रतिवादी के प्रतिवाद पत्र की धारा-2 के आधार पर सिद्ध होता है कि जो दो व्यक्ति यात्रा कर रहे थे वह पैसिन्जर नहीं थे, बल्कि सब्जी मालिक थे।
-4-सर्वेयर रिपोर्ट कागज सं0-23 लगायत 27 है जो कि सर्वेयर विवेक शर्मा द्वारा दी गई है, जिसमें कुल चार व्यक्ति ड्राइवर, हैलपर को शामिल करते हुए बैठे थे, जिनमें एक ड्राइवर, एक हैलपर तथा दो अन्य व्यक्ति यात्रा कर रहे थे और ड्राइवर की मृत्यु हो गई थी तथा वाहन बुरी तरीके से क्षतिग्रस्त हो गया था एवं प्रथम सूचना रिपोर्ट अंकित करायी गयी थी और यह भी कहा गया है कि दिनांक 02.7.2009 को ड्राइवर अनिल, हैलपर के साथ लौट रहा था और दो सब्जी बेचने वाले बैठे थे और ट्राला से उसकी भिड़ंत हो गई और वाहन क्षतिग्रस्त हो गया तथा ड्राइवर की मौके पर मृत्यु हो गई और वाहन का बीमा 1,92,501.00 रू0 के संबंध में था, जैसा कि बीमा कम्पनी के कागज सं0-16 संलग्नक-2 से स्पष्ट है और इस सम्बन्ध में जिला उपभोक्ता फोरम ने 1,92,500.00 रू0 09 प्रतिशत ब्याज के साथ दिलाया है।
केस के तथ्यों व परिस्थितियों को देखते हुए हम यह पाते हैं कि जिला उपभोक्ता फोरम द्वारा जो निर्णय/आदेश पारित किया गया है, वह सारे साक्ष्यों व अभिलेखों का विस्तृत वर्णत करते हुए पारित किया गया है और जो कि विधि सम्मत और तर्क पूर्ण है, जिसमें किसी प्रकार के हस्तक्षेप की कोई गुनजाइश नहीं है। तद्नुसार अपीलार्थी की अपील खारिज किए जाने योग्य है।
आदेश अपीलार्थी की अपील खारिज की जाती है।
उभय पक्ष अपीलीय व्यय भार स्वयं वहन करेगें।
(रामचरन चौधरी) (गोवर्द्धन यादव) पीठासीन सदस्य सदस्य हरीश आशु., कोर्ट सं0-4 [HON'BLE MR. Ram Charan Chaudhary] PRESIDING MEMBER [HON'BLE MR. Gobardhan Yadav] MEMBER