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Lok Sabha Debates

Further Discussion On The Demand For Grant No. 84 Under The Control Of The Ministry ... on 16 March, 2021

Seventeenth Loksabha > Title: Further discussion on the Demand for Grant No. 84 under the control of the Ministry of Railways (Discussion concluded and Demand voted in full) *श्री सुनील कुमार सिंह (चतरा): मैं वर्ष 2021-22 के लिए रेल मंत्रालय के नियंत्रणाधीन अनुदानों की मांगो पर अपनी बात रखना चाहता हूँ । रेलवे के पास वर्ष 2021-22 में2,15,058 करोड़ रूपये का अब तक का सर्वाधिक योजनागत पूंजी व्यय है, जिसमें आम बजट में आवंटित किए गए आंतरिक स्रोत से 7,500 करोड रूपये, अतिरिक्त बजट संबंधी संसाधनों से 1,00,258 करोड रूपये और पूंजीगत व्यय आवंटन से 1,07,100 करोड़ रूपये शामिल है।

पिछले वित्त वर्ष के दौरान कोविड-19 के कारण रेलवे के सामने कई अभूतपूर्व चुनौतियां आईं । कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए कोरोना काल में यात्री सेवाओं को बंद करना पडा । परन्तु विपरीत परिस्थितियों के बावजूद भारतीय रेलवे ने राष्ट्रीय स्तर पर जरूरी उत्पादों और सेवाओं की सप्लाई को चालू रखा और लाखों प्रवासियों को उनके गंतव्य तक भी पहुंचाया । अब पुनः यात्री सेवाओं के लिए विशेष ट्रेने चालू कर दी गई है।

किसान रेल का चालू किया जाना माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की दूरदर्श‍िता और किसानों के प्रति गहरे लगाव का परिचायक है । किसान रेल से दूध, मांस और मछली सहित खराब होने वाले और कृषि उत्पाद का वहन करके बेहतर बाजार अवसर उपलब्ध हो रहे है । रेलवे ने अब तक तेरह रूटों में किसान रेल सेवा परिचालित किया है । जनवरी2021 तक34,000 टन से अधिक माल का वहन किसान रेल ने कुल 120 दौरा में किया है।

भारतीय रेलवे ने भारत-2030 के लिए एक राष्ट्रीय रेल योजना (NRP) तैयार की है । यह भविष्य में रेलवे की जरूरतों को पूरा करने के लिए होगा । जिसके तहत रेलवे में वर्ष 2030 तक बुनियादी ढांचे का निर्माण किया जाएगा, जो वर्ष 2050 तक रेलवे संबंधी सभी जरूरतों और मांगो को पूरा करने में सक्षम होगा।

भारतीय रेलवे के उच्च घनत्व नेटवर्क और अत्यधिक उपयोग होने वाले मार्गों पर स्वेदश में विकसित स्वचालित ट्रेन सुरक्षा के प्रावधान किए गए है । इस प्रणाली से रेल दुर्घटनाओं में कमी आई है।

अब मैं मेरे संसदीय क्षेत्र चतरा की रेलवे संबंधित मांगों को माननीय रेल मंत्री जी ध्यान में लाना चाहता हूँ।

 चतरा- गया रेल लाइन परियोजना:- चतरा से गया रेलवे लाईन प्रोजेक्ट का अंतिम सर्वेक्षण पूरा हो गया है । चतरा जिले में 37.672 एकड़ भूमि के लिए भूमि अधिग्रहण का कार्य भी लगभग हो चुका है । 2007-08 के बजट में चतरा -गया रेल लाइन निर्माण के सर्वे की स्वीकृति दी गई थी । यहां रेलवे लाइन बिछाने की मांग काफी पुरानी है । इस परियोजना को गति देने की आवश्यकता हैं।

चतरा - शिवपुर- टोरी रेल लाइन परियोजना:- मैं आपके माध्यम से रेल मंत्री जी का ध्यान आकर्षित करना चाहता हूँ कि चतरा से शिवपुर जोड़कर शिवपुर- चतरा एक मिसिंग लिंक को पूरा किया जा सकता हैं और यह कोयला ढुलाई के लिए बहुत उपयोगी साबित होगी । चतरा- शिवपुर लाईन को कोल इंडिया के सहयोग से बनाया जा सकता हैं । अतः इस दिशा में आवश्यक कदम उठायें जाये।

चतरा- टोरी नई रेल लाइन सर्वेक्षण के लिए इस बजट में बहुत कम राशि दी गई है । इसके लिए बजट का आवंटन बढाया जाना अत्यंत आवश्यक है । अतः मेरा आपके माध्यम से रेल मंत्री जी से अनुरोध है कि चतरा - टोरी रेल लाइन परियोजना को गति देने के लिए पर्याप्त बजट का आंवटन करें।

मेरे द्वारा उल्लेखित योजना के पूर्ण होने पर टोरी -शिवपुर–चतरा– गया लाईन का परिचालन होगा । यह परियोजना देश के आर्थिक उन्नति के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण सिद्ध होगी । इस परियोजना से जहां खनिज संपदा का परिवहन अत्यन्त तीव्र गति से हो पायेगा, वहीं आवागमन की दृष्टि से अत्यंत पिछड़े हुये क्षेत्र की भी उन्नति होगी । साथ ही उग्रवाद से प्रभावित इस क्षेत्र में शांति स्थापित करने की संभावना प्रबल हो सकेगी । अतः इसके लिए पर्याप्त राशि का आंवटन कर कार्य को पूर्ण करवाने की कृपा करें।

बरवाडीह-चिरमिरी(अम्बिकापुर) रेल लाइन परियोजना: चतरा लोक सभा क्षेत्र में आजादी से पूर्व बरवाडीह – चिरीमिरी रेलवे लाईन परियोजना प्रस्तावित थीं । जिसमें चिरीमिरी से अम्बिकापुर तक रेलवे लाईन बन चुकी है । बरवाडीह से अम्बिकापुर तक रेलवे लाईन का निर्माण लम्बित है । इस परियोजना के लिए आजादी से पूर्व ही भूमि अधिग्रहीत की जा चुकी है । अधूरा निर्माण कार्य भी हुआ है । यह परियोजना झारखंड के पलामू संभाग को छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग से जोड़ता है । जनजातीय बहुल सरगुजा एवं झारखंड का क्षेत्र सीधे मुंबई, हावड़ा से जुडता है । इस रेलमार्ग से अन्य मार्गों की अपेक्षा मुंबई से कोलकाता की दूरी 400 किलोमीटर कम हो जायेगी । तत्कालीन रेल राज्य मंत्री ने दिनांक 10 फरवरी2017 को मुझे पत्र भेजकर बताया है कि रेल मंत्रालय ने कोल इंडिया लिमिटेड से परियोजना को विकसित करने का अनुरोध किया था । मेरी आपके माध्यम से रेल मंत्री जी से मांग है कि कोल इण्डिया के साथ इस परियोजना के लिए प्रयास करना चाहिए । इस रेल लाईन को पूर्ण करने के लिए मैं रेल मंत्री जी से आग्रह करता हूँ कि पर्याप्त बजट और नियमित निगरानी की व्यवस्था करें।

 

गया -डाल्टेनगंज रेल लाईन परियोजना:- गया से डाल्टेनगंज तक प्रस्तावित रेल लाईन परियोजना जो वाया शेरघाटी, ईमामगंज, डूमरिया, चक मनातू होकर जायेगी का कार्य अत्यन्त धीमे गति से चल रहा हैं । यह रेल परियोजना वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्र में प्रस्तावित हैं । इस योजना के पूर्ण होने से जहां उग्रवाद पर लगाम लगेगा वहीं आवागमन की दृष्टि से एक बहुत बड़ी आबादी को लाभ होगा । अतः इस योजना को शीघ्र पूरा करने की दृष्टि से बजटीय प्रावधान बढाने के साथ साथ अन्य कदम उठाने चाहिए ।

आदर्श/ मॉडल स्टेशन :- लातेहार, बरवाडीह, टोरी, चन्दवा, बालूमाथ, महुआमिलान एवं छिपादोहर रेलवे स्टेशनों पर मॉडल स्टेशन बनाने की दिशा में शीघ्र कार्य करें तथा अविलंब यात्री सुविधाएं उपलब्ध करवाने की व्यवस्था कराएं।

रेल ओवरब्रिज(ROB) का निर्माण : लातेहार जिला के चन्दवा प्रखण्ड के टोरी स्टेशन के निकट टोरी-चतरा, डोभी पथ पर रेल ओवरब्रिज(ROB) का निर्माण के लिए स्वीकृति एवं एवं राशि मिली हुई है । इसमें विलम्ब के कारण जनता में बहुत आक्रोश है और कई बार उग्र प्रदर्शन हो चुका हैं । यह बहुत व्यस्त मार्ग है । इसके निर्माण को शीघ्र करवाने की आवश्यकता हैं । परन्तु यहाँ यह ध्यान रखना  होगा कि प्रस्तावित आर.ओ.बी. से शहर को नुकसान न हो और उसका मूल स्वरूप बना रहे । वर्तमान रेलवे फाटक के समीप रेल अंडरपास छोटे वाहनों के उपयोग के लिए खोला जाए । लातेहार स्टेशन के निकट लातेहार - सरयू पथ पर भी रेलवे ओवरब्रिज (ROB) का निर्माण तथा बरवाडीह जक्शन के निकट तथा छिपादोहर रेलवे स्टेशन पर तथा महुआमिलान स्टेशन पर रेलवे ओवर ब्रिज(ROB) का निर्माण किया जायें । बरवाडीह जंक्शन स्टेशन पर फुट ओवरब्रिज (FOB) का निर्माण सुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत आवश्यक है।

ज्ञातव्य रहे कि नेतरहाट, बेतला अभ्यारण को भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय ने स्वदेश दर्शन में शामिल किया है, जिससे यहां बहुत पर्यटक आना चाहते है । नेतरहाट पूर्वी भारत का एक हिल स्टेशन है । माननीय मंत्री जी से आग्रह है कि रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों को एक बार नेतरहाट अवश्य भेजें और नेतरहाट में एक रेलवे हॉली डे हॉम का निर्माण का प्रस्ताव तैयार किया जाये।

कोरोना के कारण हुए लॉकडॉउन से पहले चल रही रेल गाडियों में कुछ गाडियों को पुनः चलाया गया है, लेकिन इन गाड़ियों के कई स्टेशनों पर ठहराव बन्द कर दिया गया है । मेरा आग्रह है कि सभी रेलगाडियों का पुनः संचालन तथा पूर्ववत स्टेशनों पर ठहराव की व्यवस्था की जाये।

       जैसे मैं कुछ गाडियों के बारें में बताना चाहता हूँ कि शक्तिपुंज स्पेशल ट्रेन (01447/01448) तथा गाड़ी संख्या08311/08312 सम्बलपुर-मडुआडीह- सम्बलपुर द्वि-साप्ताहिक त्यौहार विशेष एक्सप्रेस का बरवाडीह, लातेहार और छिपादोहर पर पुनः ठहराव चालू करें।

रांची दिल्ली गरीबरथ गाड़ी का बरवाडीह स्टेशन पर ठहराव किया जाना चाहिए । रांची से टोरी के बीच संचालित सवारी गाडी का परिचालन बालूमाथ होते हुए शिवपुर तक किया जायें।

दिनांक 09 मार्च2017 को टोरी से बालूमाथ रेलवे लाईन के उद्घाटन के समय माननीय रेल राज्य मंत्री श्री मनोज सिन्हा जी ने बालूमाथ तक सवारी गाडी शीघ्र चालू करने की घोषणा की थी । स्थानीय नागरिक रेल राज्य मंत्री की घोषणा से उम्मीद कर रहे है कि बालूमाथ तक सवारी गाड़ी चालू होगी, परन्तु अभी तक रेल राज्य मंत्री की घोषणा की पालना नहीं हुई हैं । अतः टोरी से बालूमाथ होते हुए शिवपुर तक सवारी गाडी को चलाने की कार्यवाही की जायें।

राजधानी एक्सप्रेस को सप्ताह में कम से कम दो बार लोहरदगा – टोरी रूट से चलाया जाना चाहिए इससे रांची से दिल्ली की दूरी करीब 80-90 किमी. कम हो जाएगी । दिल्ली पहुंचने में कम समय लगेगा, रेलवे को फायदा होगा । लोहरदगा, टोरी, लातेहार एवं चतरा जिले के क्षेत्रों की जनता को राजधानी एक्सप्रेस की सुविधा मिलेगी और खर्चा कम होगा।

मैं माननीय  रेल मंत्री जी से आग्रह करना चाहता है कि गढ़वा रोड से रांची वाया बरवाडीह - लातेहार- टोरी– लोहरदंगा के बीच एक नई ट्रेन चालू की जाये । इसके अलावा श साहत अन्य भागों से देश के पश्चिमी और दक्षिणी हिस्सों में आवागमन की सुविधा का कम टेनों का परिचालन हो रहा हैं । इसलिए देश के पश्चिमी एवं दक्षिणी शहरा के लिए नई ट्रेने चालू की जाये।

चतरा संसदीय क्षेत्र एक ऐसा क्षेत्र है जहां आजादी पर्व की घोषित बरवाडीह-चिरिमीरी रेलवे लाईन आज तक लम्बित हैं  । रेलवे नेटवर्क की पर्याप्त सुविधा के अभाव में इस क्षेत्र का विकास अचार बाधित रहा है । माननीय प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने चतरा लोक सभा क्षेत्र के चतरा, लातहार एव पलामू जिलों को देश के 115 महत्वपूर्ण आकांक्षी जिलों में शामिल किया है । इस दृष्टि से इस क्षेत्र के विकास के लिए उपरोक्त रेल परियोजना को शीघ्र पूरा किया जाना चाहिए।

वर्तमान में झारखण्ड राज्य में रेलवे के मण्डल कार्यालय कमशः धनबाद, चक्रधरपुर, रांची मण्डल हैं । इसके अतिरिक्त आद्रा, मुगलसराय, आसनसोल, मालदा और हावडा मंडल के अधीन भी झारखण्ड राज्य का बहुत बड़ा क्षेत्र आता है । ये सभी लगभग45 प्रतिशत रेलवे के रेवेन्यू में अपनी भागीदारी करते हैं । इसलिए मेरी रेल मंत्री जी से मांग है कि झारखण्ड राज्य में रेलवे का जोनल कार्यालय स्थापित किया जायें । आद्रा मण्डल में सम्मिलित बोकारो को अलग किया जाये और बोकारो को धनबाद या रांची रेल मण्डल के साथ जोड़ा जायें अथवा अलग से बोकारो रेल डिवीजन का निर्माण किया जायें।

इसी के साथ मैं रेलवे की अनुदानों की मांगों का समर्थन करता हूँ । सधन्यवाद।

 

*DR. SANJAY JAISWAL (PASCHIM CHAMPARAN): I would like to express my views on an important topic such as the Railway Budget 2021.

• Railways are the lifeline of our nation and has helped immensely in providing essential transport services across the country during the coronavirus lockdown.

• The budget has the highest ever capital expenditure target in the history of Independent India worth Rs.5.54 lakh crore.

• A record sum of Rs.1,10,055 crore is allocated for Railways out of which Rs.1,07,100 crore is for capital expenditure only.

• The capital expenditure is projected at Rs.2,15,058 crore, an annual increase of 21 per cent over 2019-20.

• For the first time since 2015-16. the budgetary support from the Central Government will be higher than the borrowings.

• Railways' revenue for 2021-22 is estimated at Rs.2,17.460 crore which is an annual increase of 12% over 2019-20. The total revenue from traffic for 2021-22 is estimated to be Rs.2,17,110 crore, an annual increase of 12% over 2019-20.

• The special attention on reforms, freight and passenger traffic, capital formation and creating infrastructure has put a bet on increased growth.

• In 2021-22, revenue from both freight and passenger traffic is expected to grow at an annual rate of 10% over 2019-20.

• The total revenue expenditure by Railways for 2021-22 is projected to be Rs.2,10,899 crore, an annual increase of 10% over 2019-20.

• The Railways' Operating Ratio in 2021-22 is estimated to be 96.2%. This is better than the operating ratio of 98.4% in 2019-20.

• The Ministry of Railways has prepared the National Rail Plan 2030 for creating a 'future ready' Railway system by 2030. It will also augment its infrastructure during the 2021-51 period.

• The draft National Rail Plan envisages an additional capital expenditure worth Rs.5.8 lakh crore during the 2021-26 period.

• The draft National Rail Plan estimates that on average. funds available with Indian Railways for capital expenditure over the next five years will be: (i) about Rs.60.000 crore per annum as gross budgetary support, (ii) about Rs.7,000 crore per annum from internal resources, and a maximum of Rs.1,30,000 crore per annum from extra budgetary resources.

• This plan will have positive spill over effects that combines growth, equity and inclusiveness truly reflecting the stepping stone for our economy.

• My constituency West Champaran is located near the India-Nepal border. Every year, numerous tourists from India and Nepal visit New Delhi via Raxaul. The Indian border town of Raxaul has emerged as one of the busiest towns for heavy transportation due to high trade volume. Hence, I request our hon. Railway Minister to propose a Rajdhani express or Pashupatinath Superfast Express from Nev. Delhi to Raxaul so that it would be convenient for number of passengers.

• Bihar has always been a land of historic importance, starting from Champaran Satyagraha of 1917. The visiting of tourists signifies its importance: to instil a sense of pride among Indians, and for boosting tourism, I also request honourable Railway Minister to construct a 60-meter-long India flag near the Raxaul Railway area and at Bettiah Railway Station.

• Such huge capital expenditure target will further enhance India into a new era of inclusive growth and prosperity and connecting further the lives of the people with the help of Indian railways.

• It has addressed the most pressing developmental challenges by bridging the gap between impactful projects and innovation. The national transporter which is the railways would monetise the dedicated freight corridors after commissioning.

• The Committee on Restructuring Railways (2015) had recommended that Railways should rationalise its manpower. and make the organisation more business-oriented amenable to private participation while retaining an optimal level of functional specialisation.

• On the same lines, the Government has undertaken Railways steps to enhance private participation in the operation of passenger train services. For instance, proposals have been invited for private participation in the operation of passenger train services over 109 origin-destination pairs of routes through the introduction of 151 trains.

• To boost the tourism sector, coaches with enhanced facilities will be provided on the tourist lines to provide better experience to passengers.

• The Aatmanirbhar Bharat ka Railway budget enables to bring down the logistic costs of the industry. In the same direction. the Western and Eastern Dedicated Freight Corridor (DFC) will be commissioned by 2022.

• Indian Railways operates not just for passengers and freight but also for social institutions like hospitals, schools, to name a few. Indian Railways has brought regional connectivity bringing in regional development.

• The government has shown us that the way forward is in accelerated and effective implementation of state-sponsored development programmed and schemes and will continue to do so.

                                                                                                         

*श्री श्रीरंग आप्पा बारणे (मावल): आज के समय में रेलवे आम आदमी के यातायात का सुगम साधन है । बड़े शहरो में लोग एक स्थान से दूसरे स्थान जाने के लिए मेट्रो रेल और उपनगरीय यात्रा के लिए लोकल रेल गाड़ियों से यात्रा करते हैं।

आज सदन में रेल बजट की अनुदानों की मांगो वर्ष2021-22 के लिए चर्चा हो रही है । हमेशा से हर सरकार का यही प्रयास रहा है कि रेलवे को और रेल यात्रा को यातायात और अन्य कार्यो हेतु अधिक सुचारू और सुगम बनाया जाय, और यात्रियों को सुविधाओं हेतु विशेष ध्यान दिया जाय।

बजट वर्ष2021-22 के साथ वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण जी ने1 फरवरी2021 को रेलवे बजट का भी प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया था । हम सभी जानते हैं कि रेल मंत्रालय भारतीय रेलवे के प्रशासन और रेलवे बोर्ड के माध्यम से नीति निर्माण का प्रबंधन करता है । और भारतीय रेलवे केंद्र सरकार का एक वाणिज्यिक उपक्रम भी है । इसके साथ ही साथ हमारी भारतीय रेलवे हमारे राष्ट्र की अवसंरचनात्मक क्षमताओं के लिए महत्वपूर्ण है।

रेलवे के खर्चों और व्यय के माध्यम से रेलवे द्वारा वित्त पोषण किया जाता है इसके साथ ही साथ इसके आंतरिक संसाधन जैसे माल और यात्री राजस्व, रेलवे भूमि के पट्टे पर देना, केंद्र सरकार से बजटीय समर्थन अन्य तरह के उधार शामिल होते हैं और इसमें संस्थागत वित्तपोषण, सार्वजनिक-निजी भागीदारी और विदेशी प्रत्यक्ष निवेश भी है।

रेलवे के कामकाजी खर्च जैसे वेतन, स्टाफ सुविधाएं, पेंशन, परिसंपत्ति रख-रखाव रेलवे के आंतरिक संसाधनों के माध्यम से मिलते हैं । जबकि पूंजीगत व्यय जैसे वैगनों की खरीद, स्टेशन पुनर्विकास को अतिरिक्त बजटीय संसाधनों, केंद्र सरकार से बजटीय सहायता और आंतरिक संसाधनों के माध्यम से वित्त पोषित किया जाता है।

अगर हम रेलवे के राजस्व की बात करते हैं तो 2021-22 के लिए रेलवे का राजस्व2,17,460 करोड़ रुपये अनुमानित है, जो कि वित्त वर्ष 2019-20 में 12% की वार्षिक वृद्धि है, जबकि, 2021-22 के लिए ट्रैफिक से कुल राजस्व 2,17,110 करोड़ रुपये होने का अनुमान है । 2019-20 में12% की वार्षिक वृद्धि होने का अनुमान है इसके साथ ही साथ 2021-22 में, माल ढुलाई और यात्री यातायात दोनों से राजस्व 2019-20 से अधिक 10% की वार्षिक दर से बढ़ने की उम्मीद है । 2020-21 में, माल और यात्री यातायात से राजस्व क्रमशः16% और बजट अनुमान से75% कम होने का अनुमान है।

अगर हम रेलवे के व्यय की बात करते हैं तो 2021-22 के लिए रेलवे द्वारा कुल राजस्व व्यय 2,10,899 करोड़ रुपये का अनुमान है । वित्त वर्ष 2021-22 में रेलवे का ऑपरेटिंग अनुपात 96.2% होने का अनुमान है।

बजट 2021-22 में रेलवे से अनेक घोषणाएँ और प्रस्ताव किये गए थे बुनियादी ढाँचे के विकास के लिए राष्ट्रीय रेल योजना 2030 तैयार की गई है । योजना के तहत, समर्पित फ्रेट कॉरिडोर परियोजनाएं शुरू की जाएंगी और इसमें अनेक कोरिडोर बनाये जाएंगे । रेलवे के आंतरिक राजस्व का 90% से अधिक माल और यात्री ट्रेनों को चलाने के मूल व्यवसाय से आता है । जबकि 2020-21 में, बजट में अनुमानित 1% की वृद्धि के मुकाबले, पिछले वर्ष की तुलना में यात्री यातायात की मात्रा में87% की गिरावट का अनुमान है।

देश भर में लॉकडाउन मार्च-अप्रैल 2020 के शुरुआती चरण के दौरान, रेलवे की यात्री सेवाओं को पूरी तरह से निलंबित कर दिया गया था । जबकि बंद के दौरान माल दुलाई का कार्य जारी रहा और अब यह अनुमान लगाया जा रहा है कि माल यातायात की मात्रा पिछले वर्ष (2019-20) की तुलना में 7% कम होने का अनुमान है । नतीजतन, 2020-21 में, रेलवे का अपना राजस्व बजट अनुमान से35% कम होने का अनुमान है।

देश भर में लॉकडाउन होने के बाद सभी तरह के यात्री रेल गाड़ियों को बंद कर दिया गया था । लेकिन, अब विशेष ट्रेनों की व्यवस्था के साथ कुछ हद तक सेवाएं फिर से शुरू हो गई हैं, हालांकि, अभी तक सभी तरह की रेल गाड़ियों को पुनः शुरू नहीं किया गया है जबकि यह रेल गाड़ियों को पुनः शुरू किये जाने की आवश्यकता है।

पूना से मुंबई के बीच करीबन 135 किलोमीटर का अंतर हैं । मुंबई देश की आर्थिक राजधानी के नाम से भी जानी जाती है । इसी के चलते देश भर के युवा लाखो की संख्या में मुंबई शहर में नौकरी और व्यवसाय हेतु आवागमन करते हैं । उनमें से बहुत से नौकरीपेशा और व्यवसाय करने वाले कई सारे लोग ठाणे, पनवेल और नई मुंबई में रहते हैं । जबकि पूना से मुंबई हर रोज यात्रा करने वालो की संख्या भी काफी होती है, पूना से मुंबई तक कई सारी ट्रेनें चलती हैं । लेकिन, अगर यात्रियों की संख्या देखी जाय तो यह ट्रेन कम पड़ती हैं और आज के समय में पूना भी एक बिज़नस हब बन रहा है । यहाँ पर अनेक औद्योगिक क्षेत्र हैं । मेरी सरकार से मांग है कि पूना में भी रेल रूट को मुंबई के तर्ज पर विकसित किया जाय और इन औद्योगिक क्षेत्रों के बीच लोकल ट्रेन चलाने हेतु कार्य किया जाय।

मेरे संसदीय क्षेत्र मावल के अंतर्गत खालापुर तालुका के अंतर्गत चौक रेलवे स्टेशन आता है और इन स्टेशन से लगभग एक लाख यात्री प्रतिदिन मुंबई तथा बाकि जगहों के लिए ट्रेन से आवागमन करते हैं जबकि पूना से मुंबई के बीच गाड़ी संख्या 11010/11009 (सिंहगढ़ एक्सप्रेस) और गाड़ी संख्या 12126/12125 (प्रगति एक्सप्रेस) रोजाना चलती है और इन दोनों गाड़ियों का खालापुर तालुका के अंतर्गत आने वाले स्टेशन पर ठहराव नही होने के कारण स्थानीय यात्रिओं को अनेक परेशानियों का सामना करना पड़ता है । जबकि इसके लिए लम्बे समय से मांग की जाती रही है । अतः मेरा निवेदन है कि इन रेलगाड़ियों को चौक स्टेशन पर ठहराव दिए जाने हेतु उचित कदम उठाये जायं । महोदय, मेरे संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत करजत से पनवेल तक रेल सेवा शुरू करने के घोषणा बजट में3 वर्ष पूर्व में की गई थी और जबकि यह क्षेत्र मध्य रेलवे के अंतर्गत आता है और आज के समय में मुंबई में करीब होने से यहाँ से लाखों संख्या में यात्री करजत, पनवेल से मुंबई तक यात्रा करते हैं इसमें ज्यादातर यात्रा करने वाले, नौकरीपेशा कर्मचारी, व्यापारी, स्थानीय नागरिक और छात्र हैं । लेकिन 3 वर्ष पूर्व घोषणा होने के बाद भी इस क्षेत्र में जमीन अधिग्रहण का कार्य बहुत ही धीमी गति से होने के कारण यहाँ पर आज तक इस कार्य में कोई ज्यादा प्रगति नही हुई है  और तीन वर्ष बीत जाने के बाद भी काम की गति में कोई बढ़ोत्तरी नहीं हुई है । अगर यह कार्य जल्दी होता है तो करजत से पनवेल तक रेल सेवा शुरू के साथ ही साथ रेल यात्रिओं को यात्रा करने में सुविधा के साथ ही साथ रेलवे विभाग को भी अच्छी आमदनी प्राप्त हो जाएगी।

 वतर्मान में पुणे-लोनावला उपनगरीय रेल सेवा अस्तित्व में है और आज लगभग एक से सवा लाख स्थानीय यात्री नियमित रूप से इस उपनगरीय रेल सेवा का इस्तेमाल करते है । और आज पुणे लोनावाना के बीच चलने वाली रेल गाड़ियाँ 2 ट्रैक पर चलती हैं, जबकि बजट 2010 में तीसरे और चौथे ट्रैक बनाने के लिए रेलवे द्वारा मंजूरी भी प्रदान की गई थी (64 किलोमीटर, प्रारंभिक परियोजना लागत4.253 करोड़ रुपए के साथ)  । रेलवे के इस तीसरे और चौथे ट्रैक के निर्माण हेतु सर्वे भी किया जा चुका है जबकि इस ट्रैक के निर्माण हेतु रेल विभाग के पास जमीन भी है । लेकिन, आज इतने वर्ष से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी अभी तक इस पर काम शुरू नहीं हुआ है । और मैंने स्वयं कई बार इस कार्य को शीघ्र किये जाने हेतु सम्बंधित अधिकारियों से बैठक की है लेकिन यह कार्य अभी भी उचित गति से नहीं हो रहा है अतः मेरी मांग पुणे-लोनावाला के तीसरे और चौथे ट्रैक का कार्य अतिशीघ्र शुरू करने करने हेतु उचित कार्रवाई की जाय।

सरकार ने देश में "रेलनीति" के तहत रेलवे स्टेशनों पर अनेक जरूरतमंद व्यक्तियों को फ्रेस जूस /फल स्टाल आवंटित किये हैं ताकि वे अपने बच्चों को उचित शिक्षा, अच्छा रहन-सहन दे सकें । वर्तमान में इनकी आय नहीं के बराबर रह गई है और इनको अपने परिवार के भरण-पोषण में काफी कठिनाई हो रही है । अत: इन बूथों पर रेलनीर, बिस्किट, चाकलेट सहित अन्य चीजें बेचने की अनुमति दिए जाने की आवश्यकता थी और इसी को देखते हुए रेलवे ने इन स्टाल को जूस फल के अतिरिक्त अन्य सामान बेचने की मंजूरी दी है । लेकिन उत्तर रेलवे ने इस हेतु अभी तक अपने छोटे वेंडरो को यह मंजूरी नहीं दी है, जबकि देश के अन्य रेलवे जोन में यह निति लागू हो चुकी है अतः मेरा माननीय मंत्री जी से आग्रह है कि इस विषय पर गहनता से विचार कर उत्तर रेलवे को भी उसके रेलवे स्टेशनों पर फ्रेस जूस /फल विक्रेताओं को स्टालों पर पर रेलनीर, बिस्किट, चाकलेट इत्यादी चीजें बेचने की अनुमति प्रदान किये जाने हेतु निर्देशित कर इन छोटे वेंडरों की समस्या का निदान करें, जिससे ये लोग अपने परिवार की अच्छी तरह से देखभाल एवं आवश्यकताओं को पूरा कर सके।                                                               

 

*SHRI NITESH GANGA DEB (SAMBALPUR): I would like to express my views on Demands for Grants on Railways for the year 2021-22. The allocation of fund for development of railway projects for the State of Odisha during the Financial year 2021-22 is about Rs. 6995.58 crore. This current allocation is about 26 per cent more than the previous year’s allocation.

          The allocation of fund for railway projects are like-

          (a)     Khurda road Bolangir new railway line - Rs. 1000 crore   

          (b)     Brundamal-Jharsuguda overbridge  - Rs. 20 crore   

          (c)     Rourkela-Jharsuguda 3rd line            - Rs. 230 crore   

          (d)     Sambalpur – Talchar doubling line   - Rs. 173.52 crore   

          (e)     Sambalpur – Titlagarh doubling line - Rs. 200 crore   

          (f)      Jharsuguda – Champa 3rd line          - Rs. 30 crore   

          (g)     Jharsuguda – Bilaspur 4th line          - Rs. 432 crore   

          (h)     IB railway flyover                               - Rs. 46.52 crore   

    

          The Deogarh district of my Parliamentary Constituency has not been found a place in railway map till date, after 73 years of Independence. The Talcher-Bimalagarh (154 km) new railway line goes through Deogarh district and links many villages once this project will be completed. The proposed cost of this project is about Rs. 1928 crore. Only 20 km of this project is completed with estimated cost Rs. 839 crore. The work fro km 20 to km 43.50 i.e. Sunakhani station has started but the progress is very slow indeed. The Government of Odisha has to expedite the land acquisition and handing over the remaining 916 acres of land. This delay necessitated increasing the cost of this railway project. Though Rs. 140 crore was allocated in last year’s budget, but a very small amount of Rs. 10 crore has been allocated in the current year’s budget.

          I urge hon. Railway Minister through you to at least allocate Rs. 500 crore in supplementary Budget and Ministry of Railways may take programmatic approach to complete this Talcher-Bimalagarh railway project for the socio-economic development of my Parliamentary Constituency Sambalpur in the State of Odisha.

 

*श्री संजय सेठ (राँची) : देश की आजादी के बाद यह पहला बजट है, जिसमें रेलवे के इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर दिया गया है । वरना पुरानी रेल पटरियों पर रेल दौड़ती रही, बोझ बढ़ता गया, दुर्घटनाएं होती रहीं और जनता को लोकलुभावन वादे मिलते रहे ।

रेलवे के लिए लाया गया यह बजट रेलवे को नई गति प्रदान करेगा और भारतीय रेल भी दुनिया के विकसित देशों की रेलों की तरह तेज रफ्तार से दौड़ सकेगी । यह रफ्तार न सिर्फ रेलवे का होगा बल्कि देश के विकास की रफ्तार होगी । इस बजट के लिए मैं माननीय प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के कुशल मार्गदर्शन, माननीय रेल मंत्री श्री पीयूष गोयल जी की कुशल कार्यशैली और श्रीमती निर्मला सीतारमण जी की सोच को सैल्यूट करता हूँ । रेल राज्यमंत्री रहे सुरेश अंगाड़ी जी आज हमारे बीच नहीं हैं, मैं उनको नमन करते हुए, रेलवे के प्रति किए गए उनके कार्यों की सराहना करता हूं।

रेलवे ने नए बजट में विकास की जो रेखा खींची है, जो ब्लूप्रिंट तैयार किया है, वह आने वाले भविष्य के लिए सुखद यात्रा कराने वाला है । इस बजट में किसानों के लिए किसान रेल का प्रावधान है, पर्यटन के लिए विस्ताडोम ट्रेन का प्रावधान है । आज से पहले रेल का मतलब सिर्फ पैसेंजर ट्रेन और माल ढोने की गाड़ी समझी जाती थी । अब हमने रेलवे को नया विस्तार दिया है । निश्चित रूप से इसके लिए वर्तमान की सरकार धन्यवाद की पात्र है।

इस बजट को लेकर मैं अपने क्षेत्र की भी कुछ चर्चा करना चाहता हूं । मुझे यह कहते हुए गर्व है कि पूरे भारत में सबसे अधिक राजस्व झारखंड ने दिया है । उसमें चक्रधरपुर रेल मंडल दूसरे स्थान पर है । महोदय, मैं आग्रह करना चाहता हूं अपने क्षेत्र में रेलवे से जुड़ी सुविधाओं के विस्तार के लिए । झारखंड और विशेष रूप से रांची लोकसभा क्षेत्र में सब्जी और फलों की व्यापक खेती होती है । रांची से एक किसान रेल की आवश्यकता है, जो विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों को जोड़ते हुए दूसरे राज्यों के लिए चलाई जाए । इससे ग्रामीण क्षेत्रों में सब्जी और फल की खेती कर रहे किसानों की फसल को देशव्यापी पहचान भी मिलेगी और उनकी कमाई में इजाफा भी होगा । वही विस्ताडोम ट्रेन झारखंड के पर्यटन को नई गति प्रदान करेगा और झारखंड के पर्यटन को देशव्यापी पहचान भी मिलेगी । रांची के आस-पास ही महज30 किलोमीटर के दायरे में ऐसे कई झरने, पहाड़, नदियां, ऐतिहासिक स्थल, मंदिर हैं, जिनके लिए यदि विस्ताडोम ट्रेन चलाई जाती है तो निश्चित रूप से पर्यटन नई गति पकड़ेगा । स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा । लोग एक दूसरे की संस्कृति से परिचित हो सकेंगे । मैं आग्रह करता हूं माननीय रेल मंत्री जी से कि मेरे लोक सभा क्षेत्र में छह कोच वाली विस्ताडोम ट्रेन चलाई जाए।

हम सबके प्रेरणास्रोत राष्ट्रपुरुष श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी  जी ने रांची लोहरदगा टोरी जो कि 700 करोड़ रुपये की लागत का प्रोजेक्ट है, रेल लाइन का शिलान्यास किया था । वह रेलवे लाइन का काम भी वर्तमान की नरेंद्र मोदी जी की सरकार में पूरा हुआ है । मेरा आग्रह है कि रांची से नई दिल्ली चलने वाली ट्रेन को उस रेल लाइन पर चलाया जाए । इससे न सिर्फ यात्रियों और रेलवे का 3 घंटे का समय बचेगा, बल्कि संसाधन भी बचेंगे और रेलवे को रेलवे के यात्रियों को एक नया रूट मिलेगा।

माननीय रेल मंत्री जी से मेरा एक और आग्रह है कि रांची में आईआरसीटीसी का कार्यालय खोला जाए । वर्तमान समय में आईआरसीटीसी का कार्यालय कोलकाता में है और कोलकाता से रांची का संचालन संभव नहीं हो पाता है । कोलकाता में बैठे एक ग्रुप जनरल मैनेजर के जिम्मे 7 राज्य का काम है । ऐसे में बड़ा क्षेत्र होने के कारण काम सीधे-सीधे प्रभावित होता है । मेरा आग्रह है कि रांची में आईआरसीटीसी का कार्यालय खोलकर वहां कार्य की नई संभावनाओं को संभव बनाया जाए ताकि स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन हो, क्षेत्र का विकास हो।

 

मेरा एक और आग्रह माननीय रेल मंत्री जी से है कि झारखंड की राजधानी रांची में रेलवे का जोन बनाया जाए । सबसे अधिक राजस्व देने के बावजूद झारखंड में रेलवे का जोन नहीं होना हम सब के लिए कष्टकारक होता है । रेलवे का जोन नहीं होने के कारण कई कामकाज प्रभावित होते हैं और जोनल कार्यालय से झारखंड के लोगों का सीधा संवाद नहीं हो पाता है । यदि झारखंड की राजधानी रांची में रेलवे जोन खोला जाता है, तो झारखंड की सवा तीन करोड़ जनता केंद्र सरकार के प्रति कृतज्ञ रहेगी और इसका सीधा लाभ राज्य की जनता को मिलेगा । रेलवे को भी मिलेगा । वर्तमान समय में हमारा रेलवे जोन या तो हाजीपुर है या तो कोलकाता है और यह दोनों ही क्षेत्र आम लोगों की पहुंच से बहुत दूर हैं । यदि रांची में जोनल कार्यालय खुलता है तो रेलवे को भी कामकाज करने में आसानी होगी । आम जनता को भी सहूलियत होगी और राज्य के विकास को भी नई गति प्रदान होगी।

झारखंड में कई ऐसी खदानें हैं, जहां से कोयले का खनन हुआ और अब वह बंद पड़ी हैं । इन खदानों में प्रचुर मात्रा में पानी भरा पड़ा है और पानी की क्वॉलिटी इतनी अच्छी है कि सामान्य रूप से भी हम लोग उस पानी का उपयोग करते हैं । रेलवे रांची में एक प्लांट लगाकर इस पानी के उपयोग की योजना बना सकता है । उसका उपयोग रेल नीर बनाने व रेलवे की अन्य जरूरतों को पूरा करने के लिए किया जा सकता है । इस पर दीर्घकालिक योजना बनाकर काम करने की आवश्यकता है, ताकि आने वाले समय में जल संकट से हमें मुक्ति मिल सके और हम हमारे ही पास पड़े जल का उपयोग कर सकें।

मेरा आग्रह है माननीय रेल मंत्री जी से कि झारखंड की जनता और झारखंड के राजस्व को देखते हुए वहां रेल संसाधनों का विकास किया जाए । इसका ब्लूप्रिंट तैयार किया जाए।

*SHRIMATI RAKSHA NIKHIL KHADSE (RAVER): I would like to express my views on an important issue of infrastructure the life line of the country, Demands of Grants related to Railways.

I take the opportunity to Congratulate the hon. Finance Minister Shrimati Nirmala Sitharaman ji for the general Budget 2021-22, the one of its kind when not only the country but whole world is heavily gasping in Covid pandemic concerns, but this Proactive and Futuristic Vision Budget presented under the dynamic and visionary Prime Minister of our country Respected Shri Narendra Ji Modi still showing progressive Indian economy and marching towards Aatmnirbhar Bharat. And I also take the opportunity to congratulate the Railway Minister Shri Piyush Ji Goyal in presenting railways budget at the moment when the country's lifeline is in  wheezing state still showed patience and seamless efforts and putting back it on track to function and extend the best means of logistic in passenger as well as material handling like the daily needs including perishable vegetables and fruits.

Rather we must be thankful to the Railway Minister Shri Piyush Ji Goyal for their devotion towards country's growth, working under the Covid adverse circumstances and keeping our promises for Safety First Policy and continuous efforts and updating the applicability of the high technology developed in house to further strengthening and providing the indigenously developed automatic train protection system to eliminates train collision due to human error.

Railway authority has proposed to set up POH workshop for LHB Coaches on Central Railway through Indian Railways Projects Sanctions and Management (IRPSM). I request through this hon. House to the hon. Railway Minister Shri Piyush Ji Goyal to establish this POH workshop for LHB Coaches at Bhusawal. As at Bhusawal the Railway’s own land is available where the project work can be immediately started so that there will not be any delay in project implementations.  The proposal has already been forwarded to the Railway Board by the zonal authority at Central Railway, Mumbai for their consideration and shifting the project from Nagpur to Bhusawal in Central Railway.

In my Raver Constituency under Central Railway Bhusawal Division in Maharashtra State Pachora-Jamner NG line presently in working condition and preferred by the local communities started since long by British Government in the year 1918.  It is very old and ancient and requires immediate attention for getting conversion from NG to Board gauge with extension up to Malkapur (Bodwad). This conversion and extension up to Malkapur (Bodwad) has been sanctioned but the project work is moving very slow.   I request hon. Minister to sanction the branch connection at Pahur railway station while conversion of the Pachora-Jamner to directly connect the world-famous Ajanta caves through Railway and this heavily observing tourist place can further develop after getting direct train approach. Also, this conversion with a small portion additional branch extension up to Ajanta will be adding to the tourism development in this region. The survey for all work of this branch extension up to Ajanta Caves has completed. If the conversion of this railway is not viable, you may propose to develop this route by keeping it as the narrow-gauge route with extension branch connection to Ajanta Caves and upgrade this as a “Heritage Ajanta Line”. And also you may provide additional new locomotive. To boost tourism sector, you may propose for the Vista-dome Coach.  If the railway authority is proposing this Pachora-Jamner as a Heritage providing extension up to Ajanta Caves, then some Vista-Dome Coaches can boost this tourist location also along with the other tourist locations across the country.

As the Gauge conversion for the Pachora-Jamner Narrow Gauge has been proposed and provided in last budget, I request the hon. Railway Minister to propose a survey for Bhusawal to Aurangabad rail connectivity which will be joining this conversion at Jamner thereby the joining distance remaining will be around 100 Kms. only. Also, this Bhusawal-Aurangabad rail connectivity is a shorter route and this will provide the well connectivity of Marathwada region of Maharashtra State with other parts of the country. Also, as Railway authority has already started the process of Aurangabad-Ahmednagar new rail network for which survey has been carried out, which will establish a new shorter route and also reduce the burden on heavily congested route for central railway approaching to Mumbai and will also reduce the congestion of the single line track from Manmad-Daund connecting Delhi to the southern part of Maharashtra and South India including Goa. This new rail connectivity established for Bhusawal-Auranagbad joining Jamner and Pahur station directly will make the access of Mumbai via Pune to Aurangabad joining Bhusawal to further connect this track to Delhi and Kolkata route station and will bring Ajanta caves (world famous tourist place) on the main track from Mumbai, Pune and connecting major metro stations as it is connecting on the main Central line.

I and the citizen of my Constituency are thankful to the hon. Railway Minister Shri Piyush Ji Goyal for starting a train which is suggested to run as the premium train, special Rajdhani Express (02221/02222) from Central Mumbai to Delhi via Bhusawal operating daily. I request the hon. Railway Minister to grant the permission for this Rajdhani Express with providing a stoppage at Bhusawal as the staff joining at Jalgaon has all the way to travel from Bhusawal to Jalgaon and vice versa thereby incurring cost for the Railways so also more of the travellers of this train are from the belt of Banana growing farmers and for them joining the train at Bhusawal is preferable and cost saving on many issues.

There is a long-standing demand of the people of my constituency for having separate train from Bhusawal to Mumbai, as lot of trains are moving in the direction towards Central Mumbai but all are long distance trains and getting reservations is a big issue. I request the hon. Railway Minister to operate a special train from Bhusawal to Mumbai. Similarly, many private buses are running from Jalgaon/Bhusawal to Pune.  Hence I also request through this House for providing a train from Bhusawal to Pune via Manmad. As there is no fast and superfast premium train operating on the route from Mumbai/Pune to Bhusawal like Shatabdi, I request the hon. Railway Minister to sanction at least one premium train on this route from Bhusawal going towards Mumbai/Pune.

I welcome the move of the hon. Railway Minister towards monetisation of the assets for generation of the non-revenue earnings of railways by utilising the surplus land which is not immediately required for any expansion of railways. such lands are to be given on Built Operate and Transfer basis to create new models by constructing restaurants, hotels and commercial complexes to earn and make use of such land which is lying idle since long with Railways. There are many lands in Bhusawal Division which can generate the amount to Railways without any investments. I have forwarded the proposal for consideration of such land from Bhusawal Division which has been certified by the concerned authority for surplus lands can be immediately converted for the asset monetisation and can be given for long term lease rent.

I once again Congratulate the hon. Railway Minister who is working hard under the vision and guidance of respected Prime Minister Shri Narendra Modi Ji and the Finance Minister Shrimati Nirmala Sitharaman Ji and colleague Minister of State for Finance Shri Anurag Ji Thakur for providing highest ever Budgetary support which is more than last year to the tune of 53 per cent.  This higher capital budget will help in completion of the priority projects and will lead to increased transportation capacity, faster transits and reduced logistic costs. This will give the major boost to various sectors like manufacturing, logistics, travel and tourism etc. thereby resulting in employment generation. The indigenously developed Train Collision Avoidance Systems (TCAS) which will help Railway Organisation achieving the goal of ‘ZERO Accidents’, strengthening the Railway network and infrastructure with enhancing Railways carrying capacity both for goods as well as passenger trains with Safety First Policy, enhancing women safety and proposing all railway stations to be developed with multi-storied commercial buildings on PPP mode thereby fetching more revenue generation for Railways and utilisation of land. I support the Demands on Grants for Railways and once again forward my sincere thanks to respected Speaker Sir for the opportunity given to express my views for the Demands on Grants for Railways.

*श्री राकेश सिंह (जबलपुर) : आज मैं  रेल बजट पर अपना पक्ष रखना चाहता हूं  । रेल बजट एवं उसके अनुदानों की मांगों पर कुछ कहने के पूर्व मैं कोरोना काल में भारतीय रेल के सराहनीय कार्यों के लिए माननीय प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी, रेल मंत्री श्री पीयूष गोयल जी, रेलवे के समस्त अधिकारियों एवं रेलकर्मियों के प्रति भी आभार व्यक्त करता हूं, जिन्होंने कोरोना की वैश्विक महामारी के दौरान लाखों की संख्या में प्रवासी मजदूरों एवं जरूरतमंद लोगों को उनके घरों तक निःशुल्क पहुंचाने की व्यवस्था की गई । अध्यक्ष जी, कोरोना काल में भारतीय रेल ने लगातार आवश्यक यात्री गाड़ियों के साथ ही मालगाड़ी के माध्यम से खाने-पीने की चीजों का निर्वाध रूप से पूरे देश में सप्लाई की जाती रही है, जिससे खाद्य सामग्री की मांगों को पूरी की जाती रहें।

माननीय मोदी जी के नेतृत्व में वर्ष 2014 में केंद्र में सरकार बनने के बाद से लगातार हमारी सरकार के द्वारा रेल इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास पर अभूतपूर्व कार्य किये गए हैं । चाहे वह आमान परिवर्तन का कार्य हो, रेल मार्ग के दोहरीकरण का कार्य हो, विद्युतीकरण का कार्य हो, समपार फाटक हो, ट्रेन में सुधार की बात हो, यात्री सुविधाओं में बढोत्तरी हो, सभी कार्यों में सरकार ने अभूतपूर्व और ऐतिहासिक विकास कार्य कर यह साबित किया है कि यदि काम करने की इच्छा शक्ति हो तो कुछ भी नामुमकिन नहीं हैं।

पूर्ववर्ती सरकारों ने भारतीय रेल को हमेशा बड़े वोट बैंक के रूप में उपयोग किया है । जैसे ही चुनाव नजदीक हो, ऐसी घोषणाएं की गईं जिनको पूरा करने में न सरकार की दिलचस्पी रही और न ही उसकी उपयोगिता समझी गई । देश भर की प्रमुख परियोजनाएं घोषणाओं के बावजूद बरस-दर-बरस लटकती और भटकती रहीं, किन्तु केंद्र में मोदी जी के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद न केवल नई घोषणाएं हुईं बल्कि कांग्रेस और यूपीए सरकार के कार्यकाल के दौरान घोषित हुई परियोजनाओं को भी प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने का भी बीड़ा सरकार द्वारा उठाया गया है।

पिछले6 वर्षों के कार्यकाल में माननीय मोदी जी के नेतृत्व में हमारी सरकार के द्वारा रेल के नेटवर्क और परिसंपत्तियों में किए विकास के कारण भारतीय रेल अमेरिका, चीन, रूस के बाद विश्व का चौथा सबसे बड़ा रेल नेटवर्क बनकर विश्व पटल पर अपनी पहचान बना चुका है । इस वर्ष के रेल बजट में भारतीय रेल को 1 लाख 7 हजार करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया गया है, जो पिछले वर्ष के रेल बजट की तुलना में 53% अधिक है । बजट में प्रावधान की गई पूंजी के माध्यम से जम्मू और कश्मीर, उत्तराखंड और पूर्वोत्तर राज्यों में राष्ट्रीय परियोजनाओं, कोयला परियोजनाओं, पत्तन संपर्क परियोजनाओं, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर और अन्य महत्वपूर्ण प्रवाह क्षमता संवर्धन परियोजनाओं को समय-सीमा में पूरा करने में सहायता मिलेगी।

मैं  माननीय रेल मंत्री जी से अपने संसदीय क्षेत्र से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण मांगों को प्रकाश में लाना चाहता हूँ और आग्रह करूँगा कि निम्नलिखित मांगों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किए जाने में सहयोग प्रदान करें।

मेरा संसदीय क्षेत्र जबलपुर भारतीय रेल की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण और उपयोगी है । पश्चिम मध्य रेल का मुख्यालय जबलपुर में है । साथ ही जबलपुर पमरे का रेल मंडल भी है । जोनल मुख्यालय होने के बावजूद भी जबलपुर पूर्ववर्ती सरकारों के उदासीन रवैये और राजनैतिक भेद-भाव के कारण दूसरे जोनल मुख्यालय की अपेक्षा कुछ पीछे रह गई थी, किन्तु केंद्र में एनडीए की सरकार बनने के बाद विकास कार्यों में निश्चित रूप से गति मिली है और वर्षों पुरानी परियोजनाएं भी पूरी हो चुकी हैं और शेष परियोजनाओं पर विकास कार्य किए जा रहे हैं।

जबलपुर-गोंदिया आमान परिवर्तन का कार्य मात्र6 वर्षों में हमारी सरकार के द्वारा पूरा की गई है । पिछले दिनों माननीय रेल मंत्री जी के द्वारा उक्त रेल खंड के पूरा होने के बाद तीसरी ट्रेन जबलपुर-चांदाफोर्ट एक्सप्रेस ट्रेन के नियमित संचालन को हरी झंडी दी गई है । आपके माध्यम से मैं माननीय रेल मंत्री जी से आग्रह करूँगा कि उक्त रेल खंड पर मेरे संसदीय क्षेत्रान्तर्गत ग्वारीघाट रेलवे स्टेशन पर ट्रेनों के ठहराव की लगातार मांग की जा रही है । इस सम्बन्ध में मेरे द्वारा महाप्रबंधक, दक्षिण पूर्व मध्य रेल बिलासपुर एवं मंडल रेल प्रबंधक नागपुर को भी उक्त रेल खंड पर चलने वाली सभी ट्रेनों का ठहराव ग्वारीघाट में देने के सम्बन्ध में लिखित सुझाव भी दे चूका हूँ । अतः आपसे आग्रह है कि इस सम्बन्ध में यथाशीघ्र आवश्यक कार्यवाही निर्देशित करने का कष्ट करें।

जबलपुर-गोंदिया रेल खंड के पूरा होने उपरांत बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों द्वारा जबलपुर से नागपुर के लिए ओवरनाइट ट्रेनों की मांग की जा रही है । मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी को बताना चाहूँगा कि जबलपुर एवं आस-पास से व्यापार और उपचार हेतु बड़ी संख्या में प्रतिदिन स्थानीय लोगों का नागपुर आना-जाना होता है । वर्तमान में जबलपुर से नागपुर के लिए वाया इटारसी, बैतूल ट्रेन है, किन्तु इस रूट पर यात्रियों को नागपुर पहुंचने में अधिक समय लगता है । अतः आपके माध्यम से रेल मंत्री जी आग्रह करूँगा कि जबलपुर से नागपुर के लिए एक पृथक और नियमित ओवरनाइट ट्रेन चलाए जाने पर विचार किया जाना आवश्यक है।

जबलपुर रेलवे स्टेशन के रीडेवलेपमेंट का कार्य प्रगति पर है, जिसमें अन्तर्राष्ट्रीय स्तर की सुविधाओं से स्टेशन को लैस करने की तैयारी की जा रही है । जबलपुर रेलवे स्टेशन शहर के मध्य में स्थित है और आस-पास में कोई प्रमुख स्टेशन नहीं होने के कारण जबलपुर में गाड़ियों का अत्यधिक दवाब बना रहता है । मैंने पूर्व में भी रेल मंत्री एवं पश्चिम मध्य रेल के अधिकारियों को जबलपुर के नजदीक स्थित अधारताल रेलवे स्टेशन को विकसित करने हेतु सुझाव दे चुका हूं । अतः मैं  रेल मंत्री जी को आग्रह करूँगा कि बजट में अधारताल रेलवे स्टेशन के विकास के सम्बन्ध में भी विचार किया जाना आवश्यक है।

 

जबलपुर स्थित मदन महल रेलवे स्टेशन को मेरी मांग पर टर्मिनल एवं कोचिंग कॉम्प्लेक्स के रूप में विकसित किए जाने का कार्य प्रगति पर है, किन्तु कार्य की गति काफी धीमी है । अतः आपके माध्यम से रेल मंत्री जी से आग्रह करूँगा कि इस परियोजना को समय-सीमा में पूरा किये जाने हेतु निर्देशित करने का कष्ट करें।

जबलपुर में जबलपुर-गोंदिया आमान परिवर्तन के कार्य पूरा हो जाने के बाद हाउबाग में रेलवे की भूमि पर टाटा कैंसर इंस्टिट्यूट और पमरे के अधीनस्थ केंद्रीय विद्यालय खोलने की मेरी मांग पर पश्चिम मध्य रेल द्वारा प्रस्ताव बनाकर रेल बोर्ड को भेजा गया है । अतः मेरा आपके माध्यम से माननीय रेल मंत्री जी से आग्रह है कि उक्त दोनों प्रस्तावों को यथाशीघ्र स्वीकृति प्रदान करने का कष्ट करें, ताकि इन दोनों परियोजनाओं पर निर्माण कार्य शुरू किया जा सके।

जबलपुर सम्पूर्ण महाकौशल का मुख्यालय है । कोरोना की वैश्विक महामारी के दौरान यात्री गाड़ियों को स्थगित किया गया था । अनलॉक के दौरान धीरे-धीरे कुछ यात्री गाड़ियां शुरू की जा रही हैं, किन्तु जबलपुर से प्रमुख शहरों के पूर्व में चल रही ट्रेनों को पुन: शुरू करने की मांग की जा रही है । अतः आपके माध्यम से माननीय रेल मंत्री जी से आग्रह करूँगा कि शेष सभी नियमित एवं विशेष ट्रेन जो पूर्व में संचालित की जा रही थीं, उन्हें पुन: नियमित शुरू करने हेतु निर्देशित करने का कष्ट करें । इसके साथ ही जिन ट्रेनों को शुरू किया गया हैं, उनमें अधिकतर ट्रेनों के ठहराव को छोटे स्टेशन से समाप्त कर दिया गया है, जिससे स्थानीय लोगों द्वारा पुन: बहाल किये जाने की मांग की जा रही है।

माननीय प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के मार्गदर्शन और रेल मंत्री श्री पीयूष गोयल जी नेतृत्व में भारतीय रेल देश भर के प्रमुख डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के परियोजनाओं पर फोकस कर रहा है । मैं आपके माध्यम से माननीय रेल मंत्री जी को बताना चाहूँगा कि मेरी मांग पर माननीय सड़क परिवहन और राष्ट्रीय राजमार्ग मंत्री श्री नितिन गडकरी जी के द्वारा जबलपुर को प्रदेश का सबसे लम्बा रिंग रोड के प्रस्ताव को स्वीकृत किया गया है, जिसमें मुख्य रूप से वृहद् लॉजिस्टिक पार्क का भी प्रावधान किया गया है । रेलवे की दृष्टि से भी फ्रेट कॉरिडोर के लिए जबलपुर बहुत महत्वपूर्ण है । अतः रेल मंत्री जी से आग्रह करूँगा कि प्रस्तावित फ्रेट कॉरिडोर में जबलपुर को भी शामिल करें, ताकि क्षेत्र के विकास के साथ ही इस क्षेत्र में व्यवसाय और रोजगार के संसाधनों में बढ़ोत्तरी हो सके।

मैं सरकार से आग्रह करूँगा कि उक्त मांगों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किए जाने हेतु सहयोग प्रदान करने का कष्ट करें । इसके साथ ही पुन: मैं इस रेल बजट का समर्थन करता हूं । मुझे इतने महत्वपूर्ण विषय पर अपने विचार व्‍यक्‍त करने का मौका देने के  लिए पुन: आभार ।

   

*DR. SUBHASH RAMRAO BHAMRE (DHULE): I  support  the Demands for Grants under the control of the Ministry of Railways.

          I would like to bring to the notice of the hon. Railway Minister that I come from North Maharashtra, which is a backward region and which is not connected with the main railway line. This is the main reason that it could not develop into an industrial area. There has been a long-standing demand of the people of my constituency for the construction of Manmad – Indore new railway line. The said railway line was already sanctioned. The same has been mentioned in the Pink Book (2016). The Ministry of Railways, Ministry of Shipping, Government of Maharashtra, and Government of Madhya Pradesh entered into an MoU. After that, it was decided to start this project on PPP model and the responsibility was given to JNPT. The SPV was formed. The JNPT has an equity of 55 per cent. The Government of Maharashtra and the Government of Madhya Pradesh have an equity of 15 per cent respectively. It was then decided that JNPT will be the lead agency. But unfortunately, the Ministry of Shipping is giving a cold shoulder to this project.

          I earnestly request the hon. Railway Minister to look into this matter and kindly expedite the work of Manmad – Indore railway line. I also earnestly request the hon. Minister of Shipping to honour the MoU which was signed by the Ministry of Railways, Ministry of Shipping, Government of Maharashtra, and Government of Madhya Pradesh.

          If this is implemented, the area will be developed into an industrialised area and it will also help in the generation of employment.

 

*SHRIMATI  POONAMBEN MAADAM (JAMNAGAR): I would like to express my views on such an important issue, an important Ministry. This year has been a” Year of Grit and Victories” for Indian Railways. Faced with daunting and unprecedented COVID related challenges, under the guidance and vision of PM, Indian Railways has not only been able to keep national supply chain running and move millions of people back home in most adverse circumstances but has also been able to usher in an unprecedented growth in development of infrastructure, innovation, capacity expansion of network, freight diversification and transparency matters. 

          Railways has used COVID challenge as an opportunity to lay the foundation for future development and the next level of travelling experience for passengers. In line with the hon. Prime Minister’s mantra, “Reform, Perform and Transform”, and his advice that “it is better to set a stiff target and seek to achieve it rather than drifting forward without aim”, Ministry of Railways has worked towards ushering in transformational changes across in all the area of its operations and management.

          A National Rail Plan (NRP) 2030 has been developed with a view to develop infrastructure by 2030 to cater to the traffic requirements up to 2050. Based on the NRP, a Vision 2024 document has been prepared to develop infrastructure by 2024 to enhance modal share of Railways in freight transportation to more than 40 per cent and to cater to the traffic requirements up to 2030.

          An innovative financing has been devised to fund these priority projects. Indian Railway Finance Corporation (IRFC) is mobilizing resources with sufficient moratorium period and projects are being targeted to be completed well before expiry of moratorium period. These priority projects are being planned in such a way that they will provide enough return to service the debt. The draft plan has been put in public domain and is now being circulated amongst various States for comments. MOR aims to finalise the plan at the earliest.

          In the past, Railway projects were suffering from huge time and cost overrun on account of thin spread of resources over a large number of projects and execution of projects prior to completion of pre-requisite activities like land acquisition and other clearances. The capital expenditure in Railways has been vastly scaled up after 2014 (almost double the previous level) to address the accumulated backlog of infrastructure deficiency in the Railways. Along with stepped up fund allocation, super-critical and critical projects have been identified and prioritized.

          These measures along with introduction of E-work contract management system, E-Shramik Kalyan portal and a single Central Payment System (in collaboration with State Bank of India) have vastly improved transparency in decision-making. This has resulted in accelerated the pace of project execution (as measured in terms of commissioning of broad-gauge lines or electrified kilometres per annum).

          The COVID-19 Pandemic and related lockdown had put both their lives and livelihoods of millions of migrants on hold. A great many number of them urgently wanted to get back to their homes and villages. Taking notice of this need, the Ministry of Home Affairs ordered the Ministry of Railways to arrange an emergency unique train service in coordination with individual State Governments. The first Shramik Special Train was flagged off on 1 May, 2020.

          During the COVID-19 pandemic lockdown period, Indian Railways men rose to the challenge and once again demonstrated that they can perform under adverse and crisis situations. Indian Railways took advantage of the opportunity of availability of traffic blocks due to reduced train operations during lockdown period and completed over 350 critical and long-pending major bridge and track works. These works had a significant bearing on safety and operational efficiency. Some of these works were pending for several years as sufficient traffic blocks could not be made available under normal working conditions due to high density of traffic.

          Electrification has been accorded high priority as a part of the national goal to transform India into a green nation. 66% of track length has been electrified by November, 2020. Railways aim to complete electrification of its entire broad-gauge network by 2023.

          Railways has embraced a “Freight on Priority” policy by pushing for an aggressive customer-centric approach to expand the freight carried not only from the traditional segments but also by attracting new customers to its fold.

          Business Development Units (BDUs) have been set up at Railway Board, Zonal Railway and Divisional levels. Multi-disciplinary teams from BDUs have been reaching out to customers to attract new business by providing compelling value-for-money logistics solutions. The BDUs have scored several early successes by attracting new business from customers who had never used rail in the past. Time-tabled parcel services have been launched to provide reliable services to courier services, e-commerce companies. For the first time, ever since April, 2019, there has been no passenger fatality in train accidents.

          Safety of the passengers and safe upkeep of railway assets is the topmost priority of the Indian Railways. With the constant focus on safety consequential train accidents have progressively reduced to an all-time low of 55 in 2019-20. For the first time, ever since April 2019, there has been no passenger fatality in train accidents.

          I am thankful for giving importance to my State and my constituency in railway projects such as Humsafar train from Mumbai to Jamnagar, Duranto Express to Jamnagar and doubling of train lines. Passenger amenities in stations have improved a lot.

 

          I have a few demands that I humbly submit for consideration of the hon. Railway Minister. Morning train from Porbandar to Rajkot via Vasjaliya – Jetalsar is a necessity. Rajkot being the business centre for Saurashtra, many passengers travel to the city and return to their places. Similarly, a new train may be started between Okha and Delhi and between Porbandar to Haridwar via Vasjaliya – Jetalsar.

          Frequency of Okha – Dehradun and Okha – Varanasi trains may be increased from weekly to twice a week. This will help a lot of people in this segment. Many long-distance trains are terminated at Hapa railway station which causes inconvenience to passengers travelling to and from Jamnagar. I had taken a meeting in this regard but despite that only one train Hapa – Tirunelveli was extended up to Jamnagar. My request is that the remaining trains Hapa – Katra, Hapa – Madgaon, Hapa – Bilaspur and Hapa – Surat intercity may be extended from Hapa to Jamnagar.

          As regards track doubling, work permit has been granted till Rajkot that needs to be extended to Okha. Due to COVID-19 many local trains have been cancelled which is affecting not only daily local passengers but vendors as well. My request is not to cancel the local trains like Bandra – Jamnagar Janta Express, Somnath – Okha local, Okha – Viramgaam local, Okha – Bhavnagar local, Rajkot -Porbandar local and Ahmedabad – Okha local.

          I have a few more demands. Bandra – Jamnagar Humsafar Express may be extended up to Okha and Hapa – Bilaspur – Hapa Express may also be extended up to Okha. Similarly, Rajkot – Rewa – Rajkot train which is terminating in Rajkot may be extended up to Okha. Hon. Railway Minister may kindly positively consider my requests.

          With these words, I conclude. I whole-heartedly support the Demands.

          Thank you.

*श्री अजय टम्टा (अल्मोड़ा): मैं  वर्ष2021 रेल बजट की अनुदान मांगों पर अपने विचार व्‍यक्‍त करना चाहता हूं  । मा. अध्यक्ष जी पिछले वर्ष वैश्विक महामारी कोविड-19 के कारण पूरे देश में रेलवे का प्रचालन बन्द हो गया था, उस कारण रेलवे को काफी अधिक आर्थिक नुकसान एन भी सहना पड़ा, वहीं दूसरी ओर देश के यशस्वीमाननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के आह्वान पर पूरा देश एकजुट हुआ ।

रेलवे विभाग ने भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका देश को दी, लॉकडाउन के कारण देश के विभिन्न प्रांतों से वहां रोजी-रोटी की तलाश में गये जनों को अपने मूल घरों को जाने का संकट खड़ा हो गया था । देश के यशस्वी प्रधानमंत्री जी के आह्वान पर अपने यशस्वी  रेल मंत्री जी द्वारा "श्रमिक स्पेशल ट्रेन" पूरे देश को चलवायी गयी, जिससे सभी यात्री बिना शुल्क अपने-अपने घरों को वापस आये । ट्रेनों में उन्हें भोजन और पानी की भी व्यवस्था प्रदान की गयी । मेरे राज्य उत्तराखण्ड के भी कई हजार जन उक्त सेवा का लाभ लेकर अपने घर वापस आये और उनके द्वारा प्रधानमंत्री जी और मा० रेलमंत्री जी का आभार व्यक्त किया गया ।

जहां एक ओर पूरा विश्व कोविड-19 महामारी से जूझ रहा था, वहीं दूसरी ओर कोविड-19 के नियमों का पालन करते हुए धीरे-धीरे लॉकडाउन भी समाप्त होने प्रारम्भ हुए, उस दौरान रेलवे ने कई महत्वपूर्ण ट्रेकों पर सुधारीकरण के कार्य भी किये गये, इन कार्यों के सम्पन्न होने हेतु भी रेल मंत्री जी के प्रति आभार व्यक्त करता हूं ।

देश की वित्त मंत्री श्रीमती सीता निर्मला रमण जी द्वारा अपने बजट भाषण में रेलवे को 1.10.055 करोड़ रुपये का प्रावधान किया और रेल विभाग द्वारा पूरे देश में 46 हजार किलोमीटर रेल लाइनों को विद्युतीकरण करने का कार्य होगा, नई रेल लाइनों का निर्माण होगा, देश में विकसित नई रेल कोचों का निर्माण होगा और रेलवे स्टेशन भी विश्वस्तरीय बनेंगे, हवाई अड्डों की तर्ज पर रेलवे स्टेशन होंगे, इसका उदाहरण मेरे राज्य केऋषिकेश में बना नया रेलवे स्टेशन होगा।

मैं बधाई दूंगा रेल मंत्री जी को, कि अपना देश रेलवे के प्रचालन में 'जीरो कार्बन' वाला देश होगा, क्योंकि लगभग पूरे देश में ट्रेनों का संचालन में विद्युतीकरण का प्रयोग होगा ।

मेरे राज्य उत्तराखण्ड में कई दशकों से चल रही मांग कि पर्वतीय क्षेत्र में भी ट्रेनों का संचालन हो आजादी के पश्चात, वर्तमान में जब देश में यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने जब देश की कमान थामी तो विश्व प्रसिद्ध चार धाम परियोजना पर ट्रेन चले उस पर कार्य प्रारम्भ हुआ है और तेजी से कार्य चल रहा है । चार धाम की यात्रा करने आने वाले यात्रियों हेतु जल्द रेल उपलब्ध होगी।

मैं अपने संसदीय क्षेत्र हेतु रेल मंत्री श्री पीयूष गोयल जी से आग्रह करुंगाकि मेरे संसदीय क्षेत्रके एकमात्र रेलवे स्टेशन टनकपुर, जिसका ब्रॉड गेज में आमान परिवर्तन का कार्य अपनी सरकार के कार्यकाल2017 में हुआ, देश की आजादी के पश्चात22.02.2018 को पहली ट्रेन का संचालन प्रारम्भ हुआ और देश के विभिन्न क्षेत्रों को पांच ट्रेनें आनी शुरु हुई । मेरा आग्रह है कि मेरा संसदीय क्षेत्र जो कि सामरिक, धार्मिक एवं पर्यटन की दृष्टि में विश्व विख्यात हैं । अभी मेरे आग्रह पर रेल मंत्री जी द्वारा 26.02.2021 को टनकपुर से विश्व विख्यात धार्मिक स्थान पूर्णागिरि के नाम से विशेष जन शताब्दी ट्रेन का संचालन किया गया उसमें स्वयं रेल मंत्री जी वर्चुवल उपस्थित थे । मेरा आग्रह है कि उक्त ट्रेन का समय संचालन परिवर्तित किया जाए क्योंकि उक्त स्टेशन से बसों का संचालन भी होता है, बसें7 या 7.30 घण्टों में टनकपुर से दिल्ली पहुंचती है पर पूर्णागिरी जन शताब्दी ट्रेन12 से 13 घण्टों में पहुंच रही है । मेरा आग्रह है कि उक्त ट्रेन का ट्रेक टनकपुर, बनवसा, खटीमा, पीलीभीत, बरेली, रामपुर, मुरादाबाद, गाजियाबाद, दिल्ली से उक्त ट्रेन भी7 घण्टे लेगी ।

 

*SHRI ANNASAHEB SHANKAR JOLLE (CHIKKODI):        I would like to express my views on the Demand for grants for 2021-22 for the Ministry of Railways.

          At the outset, let me congratulate hon. Finance Minister for presenting first Digital Budget in the backdrop of unprecedented COVID-19 crisis.

          Indian Railways has a crucial role in the economic growth and development of our country.  Be it carrying agriculture produce to distant places, aiding growth of industries and connecting major ports, Railways have significantly helped in bridging the distance between the different places and regions of our country.  As a relatively cheap mode of transport, it has been a preferred mode of travel and one of the instruments in national integration.

          With over 67,850 route kilometres, Indian Railways is the third largest network in the world.  During the year 2019-20, Indian Railways carried 1.2 billion tonnes of freight and 8.1 billion passengers – making it the world’s largest passenger carrier and fourth largest freight carrier.  It has adopted technological changes including development of specific indigenous systems in signalling to avert train collision and to enable real time management of trains, in keeping with the Atmanirbhar Bharat Mission and by maintaining cleanliness standards under Swachh Bharat Abhiyan.

          In the wake of the COVID-19, operation of all passenger trains stopped due to lockdown. The operating losses to the Railways across all zones amount to decline by Rs. 36,9903.82 crores in comparison to last year. It may, however, be noted that to ensure that the supply of essential commodities throughout the country is not disrupted.  Indian Railways introduced parcel special train services during COVID times. Shramik specials were organized in a mission mode to move migrant workers, pilgrims and students stranded in various States during the lockdown. Starting from 1st May to 31st August 2020, 4621 Shramik Specials have been operated as per demands of State Governments.

          It is a known fact that infrastructure development pertaining to railways in our country has been a regular and a continuous move since independence.  Keeping in view the need of creation of new lines, expansion of traffic facilities and doubling of railways lines etc. in the Union Budget 2021-22, Railways has highest ever total plan capex of Rs. 2,15,058 crore.  This works out to 53 per cent higher than the budget estimates of 2020-21 (upto December, 2020).

          The Government is very committed to modernize the rail sector to achieve Atma Nirbharata. Various dedicated freight corridors have been planned and are being implemented to integrate India, improve logistical efficiency and help farmers and entrepreneurs to move goods quickly. One of the long pending railway lines in my Constituency also needs to be commissioned and completed soon. The Shedbal-Vijaypura Railway line gives not just connectivity to both the districts of Belagavi and Vijayapura but also helps in transport of Agri commodities like fruits, vegetables and other farm produce thus empowering most of the families in that area.

          This line from Shedbal to Vijaypura of 112 kilometres was surveyed in 2011 and never saw the light of the day till now.  It is my sincere request to hon. Railway Minister Shri Goyal Ji  to kindly consider this at the earliest and help my people and region to integrate with the India and larger world through Railways.

                                                                                               

*श्री रवि किशन (गोरखपुर): मैं 2021- 22  के रेल बजट पर अपने विचार रखता हूं  । भारतीय रेल का कायापलट माननीय प्रधानमंत्री जी के दिशा निर्देश में हो रहा है । इसमें कोई संदेह नहीं है जिस प्रकार हमारा देश हर क्षेत्र में नई ऊंचाइयां छू रहा है, उसी प्रकार रेलवे जहां एक ओर 67,850 किलोमीटर के लाइन के साथ विश्व का सबसे बड़ा रेल नेटवर्क बन गया है । वही 2019 20 मैं 8.1 बिलियन यात्रियों का आवागमन कराकर विश्व का सबसे बड़ा यात्री वाहक बन गया है । माननीय प्रधानमंत्री जी के आत्मनिर्भर भारत के आहवान एवं प्रयासों को रेलवे ने बहुत ही अच्छे तरह से लागू किया है । परिणाम स्वरूप आज रेलवे में लाइनें बिछाने से लेकर यात्री डब्बे बहुत ही अधिक मात्रा में स्वदेशी इस्तेमाल हो रहे हैं । पूरे विश्व के साथ-साथ भारत में भी कोरोना महामारी का सामना किया और इस दौरान रेलवे का योगदान मैं जीवन भर नहीं भूल सकता हूं । रेलवे ने जिस तरह राज्य सरकारों के अनुरोध पर त्वरित कार्रवाई करते हुए दूसरे जगह पर फंसे यात्रियों और खासकर मजदूरों को अपने गंतव्य स्थान पर पहुंचाने का काम किया । ये बहुत प्रशंसनीय हैं  । मैं इन कार्यों को मुंबई एवं गोरखपुर से स्वयं समन्वय कर रहा था इसलिए मैंने इसे बहुत नजदीक से देखा है । इसके अलावा भारतीय रेल ने सभी आवश्यक मानकों पर पिछले 6 वर्षों में अभूतपूर्व प्रगति किया है और मुझे पूरी उम्मीद है कि वित्त मंत्री के द्वारा प्रस्तुत यह रेल बजट इस दिशा को और तीव्रता प्रदान करेगा । सबसे महत्वपूर्ण कदम मैंने रेल दुर्घटनाओं को कम करने में पाया है, जहां 2017 में 104 रेल दुर्घटनाएं हुई थी वहीं 2020 में यह 55 पर आ गई है हम इसी रफ्तार से सुधार करते रहे तो अगले 5 वर्ष में रेल दुर्घटनाएं नगण्य हो जाएगी । इसी तरह स्वच्छता के मानक पर भी स्वच्छ भारत अभियान को अपनाकर रेलवे ने बहुत सफलता प्राप्त की है । पर्याप्त अवसंरचना विकास में संयम लगता है और जिस तरह से सन 2050 तक पर आयोजित माल यातायात सभी संबंधी मांग को ध्यान में रखकर राष्ट्रीय रेल योजना के तहत 2030 तक और संरचना को विकसित किया जा रहा है । यह भारतीय रेल के विकास में एक क्रांतिकारी कदम है  ।

मैं प्रधानमंत्री जी द्वारा की गई पहल नया भारत नई रेल का भी स्वागत करता हूं । इस पहल से देश में पीपीपी मॉडल से कुछ मांगों पर आधुनिक ट्रेनों को चलाने की रेलवे का जो प्रयास है, इससे यात्री सेवा में व्यापक सुधार होगा  । वित्त मंत्री जी का मैं आभार प्रकट करता हूं, जिन्होंने कोविड19 को महामारी और सभी सरकारी खर्चों में कटौती के बावजूद केंद्रीय बजट 2021 22 में रेलवे को मिलने वाले बजटीय संसाधन में 53% की वृद्धि हुई है और पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 37,050 करोड़ अधिक मिले हैं । सरकार का यह प्रयास निश्चय ही रेल में हो रहे संख्यात्मक कार्यों को और गति प्रदान करेगा Eastern freight corridor western freight corridor तथा हाई स्पीड रेल कॉरिडोर के प्रोजेक्ट अपने समय पर पूर्ण हो सके और देश की जनता को अत्यधिक सुविधाएं मिल सकें । इन परिस्थिति में भी भारतीय रेल का पूंजीगत निवेश पिछले वर्ष के मुकाबले 33% अधिक है । 54,016 करोड़ रुपए अधिक होकर अपने रिकॉर्ड स्तर पर 2,15,058 करोड़ रुपए है । मुझे पूरी उम्मीद है और विश्वास है कि इतने बड़े पूंजीगत निवेश से भारतीय रेल देश के अर्थव्यवस्था को पुनः स्थापित करने में इंजन का काम करेगा ।

रेल मंत्री जी को मेरा एक सुझाव है कि जिस तरह हम रेल के पूरे बिजली करण के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं ताकि विद्युत की खपत न्यूनतम किया जा सके उसी प्रकार हमें रेलवे में एक प्रयास करना चाहिए कि इसे अधिकतम सौर ऊर्जा के उत्पादन का केंद्र बनाया जाए जैसा की विदित है, भारत में सबसे अधिक भू संपत्ति वाली सरकारी संस्था रेलवे है । इसके पास पूरे देश में हर एक कोने कोने तक अपना भवन है अगर इन भवनों का इस्तेमाल हम सौर ऊर्जा के उत्पाद में करें तो मुझे विश्वास है कि जहां एक और रेलवे के खर्च में भी बड़ी कटौती आएगी वही देश में सौर ऊर्जा के उत्पादन में भी बड़ी बढ़ोतरी होगी । मैं इसके अतिरिक्त माननीय रेल मंत्री जी का ध्यान अपने क्षेत्र के संभावित कुछ प्रमुख समस्याओं की ओर दिलाना चाहता हूं । गोरखपुर कैन्ट रेलवे स्टेशन के पास रक्षा मंत्रालय की भूमि है जिसका हस्तांतरण रेल विभाग को होना जनहित में आवश्यक है ।

1.गोरखपुर से दिल्ली तक वन्दे भारत ट्रेन की आवश्यकता है।

2. गोरखपुर से पुरी तक नई रेल गाड़ी चलाने की आवश्यकता है ।

3.गोरखपुर से देहरादून चलाने वाली सप्ताहिक ट्रेन को प्रतिदिन चलाया जाए ।

4. गोरखपुर रेलवे स्टेशन पर यहां के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी व शहीदों की प्रतिमा लगाई जाए जिसमें यहां आने वाले यात्रियों को इन सेनानियों व शहीदों के जीवन से प्रेरणा मिल सके ।

5. गोरखपुर स्टेशन से गोरखपुर छावनी स्टेशन को रेल लाइन के साथ सड़क मार्गों से जोड़ा जाए ।

6. गोरखपुर से मुंबई तक गरीब रथ ट्रेन चलाने की आवश्यकता है ।

7. गोरखपुर से पनिहवा तक रेल खंड का दोहरीकरण व विद्युतीकरण किया जाए ।

 

रेल मंत्री; वाणिज्य और उद्योग मंत्री; तथा उपभोक्तामामले, खाद्य और सार्वजनिकवितरण मंत्री  (श्री पीयूष गोयल) : अध्यक्ष जी, धन्यवाद । सबसे पहले तो मैं सभी सम्माननीय सांसदों का धन्यवाद करना चाहूंगा, जिन्होंने कल देर शाम तक बड़े उत्साह के साथ, बड़ी गहराई में रेलवे की वर्किंग के बारे में, रेलवे के कामकाज में क्या अच्छा हो रहा है, क्या सुधार हो सकता है, क्या लोगों की एक्सपेक्टेशंस हैं, डिमाण्ड्स हैं, उसके बारे में बड़े विस्तार से कल चर्चा हुई । यह भी ध्यान में आता है कि उसमें हरेक माननीय सांसद के क्षेत्र के साथ रेलवे का कितना संबंध पड़ता है और यह भी ध्यान में आता है कि कई सांसद रेलवे के काम में बहुत रुचि लेते हैं । मैं सभी माननीय सांसदों को आश्वस्त करना चाहूंगा कि जो-जो विषय आपने कल उठाए और कल लगभग 53 माननीय सांसदों ने अपने-अपने विषय उठाए थे ।

माननीय अध्यक्ष जी, आपको और आपके माध्यम से सभी माननीय सांसदों को जानकार खुशी होगी कि कल देर रात तक हमारे सभी अधिकारियों, मुझे लगता है कि रात भर ही बैठे होंगे, क्योंकि सुबह तो मैं रिव्यू कर रहा था, 53 एमपीज़ ने जो-जो पॉइंट्स उठाए, वे सब क्रमश: नोट किए थे । इसमें हरेक का जवाब सामने है ।

माननीय अध्यक्ष : बहुत अच्छा, यही अपेक्षा थी।

श्री पीयूष गोयल : माननीय अध्यक्ष जी, धन्यवाद । दो बजे के बाद अगर कोई एक-एक विषय का भी जवाब चाहे तो वह मेरे कमरे में आ जाए । मैं दो बजे के बाद एक-एक माननीय सांसद का जवाब दे पाऊंगा । वैसे तो पिछली बार वर्ष 2018 में डिमाण्ड्स फॉर ग्राण्ट्स के ऊपर चर्चा दोनों सदनों में हुई थी, तब 174 माननीय सांसदों ने लोक सभा में चर्चा की थी । उसमें से 100 हाउस में और बाकी ने अपने रिटिन स्पीचेस ले की थीं । राज्य सभा में 30 माननीय सांसदों ने अपनी बात रखी थी । मुझे आप सबके साथ शेयर करते हुए खुशी है कि सभी 204 माननीय सांसदों को उनके विषयों का जवाब गया और यथासम्भव जो-जो काम हो सकता था, हमने वह करने की पूरी कोशिश की । मेरा लगातार सांसदों के साथ सम्पर्क बना रहता है ।

मैं इस संसद की गरिमा समझता हूं । माननीय सांसद इतनी मेहनत करते हैं, इतनी तैयारी करके आते हैं, विभाग की समस्याओं को हम सबके समक्ष रखते हैं तो मैं इस संसद की गरिमा को बढ़ाने हेतु और आप सबके सम्मान हेतु प्रयत्न कर रहा हूं कि भारतीय रेल वास्तव में भारत के भविष्य के लिए एक इंजन फोर ग्रोथ, उसमें अर्थव्यवस्था हो, यात्रियों की सुविधा हो, हर विषय में एक ऐसा डिपार्टमेंट, एक ऐसी मिनिस्ट्री बने, जो संवेदनशीलता के साथ आप सबकी मांगों को भी सुने, देश की जरूरतों की पहचान करे । यात्रियों की अपेक्षाएं हैं कि सुरक्षित, सुगम यात्रा मिले और इसमें उद्योग जगत की भी अपेक्षाएं हैं कि उनका मालगाड़ी के माध्यम से जल्दी सामान पहुंचे, अर्थव्यवस्था को बल मिले । इन सभी चीजों को ध्यान में रखते हुए हमने रेलवे के बारे में एक अलग सोच के साथ, एक अलग दृष्टिकोण के साथ गत 7 वर्षों में माननीय प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के मार्गदर्शन में, उनकी अगुआई में, उनकी दूरदृष्टि की सोच को ध्यान में रखते हुए काम करने का प्रयत्न किया । इसमें समाज के हर वर्ग को, चाहे वह किसान हो, गरीब हो, उद्योग हो, एमएसएमई सेक्टर हो, हर सेक्टर को हम सुविधा पहुंचा सकें और रेलवे सभी के जीवन में एक प्रकार से नई उमंग के साथ पेश आ सके, नए उत्साह के साथ रेलवे के प्रति सबकी सोच, सबके देखने का दृश्य बने । वैसे पहले जिस प्रकार से काम चलता था, मैं उसके बारे में ज्यादा नहीं कहना चाहूंगा, लेकिन कई माननीय सांसदों ने कहा कि हमारा प्रोजेक्ट पहले से चल रहा है, उस बजट में सैंक्शन हुआ, अभी तक काम नहीं हुआ, माननीय सदस्य तकलीफ समझेंगे और मैं आपके माध्यम से उसकी थोड़ी जानकारी देना चाहूंगा ।तकलीफ वहीं पर थी कि किस प्रकार से रेलवे का काम करना, काम करने का ढंग और उसके हिसाब से कैसे रेलवे में परेशानियां बढ़ी, कैसे रेलवे में काम की स्पीड भी कम हुई और काम जिस प्रकार से होना चाहिए था, वह नहीं हो पाया । समस्या थी कि पैसा, निवेश बहुत कम रहता था, अलग-अलग रेल मंत्री अपना बजट पेश करते थे और बजट में जो कहा और जो निवेश मेन बजट में उपलब्ध हुआ, इन दोनों के बीच कोई तालमेल ही नहीं था  । यानी लोगों की अपेक्षाएं थीं कि वे एनाउंस हो जाएं, लेकिन वास्तिवकता थी कि न जमीन हाथ में है, न अप्रूवल्स हैं, कोई वाइल्ड लाइफ के थ्रू प्रोजेक्ट जा रहा है, पैसा कम है और आहिस्ते-आहिस्ते करके यह स्थिति हो गई कि घोषणाओं के ऊपर घोषणाएं होती गईं । मैं थोड़ी जानकारी आपको दूंगा तो आपको हैरानी होगी कि किस प्रकार से घोषणाएं होती थीं, किस प्रकार से लोगों को गुमराह किया जाता था ।

अध्यक्ष जी, अगर हम निवेश को देखें, तो वर्ष 2004 से 2009 के बीच कुल निवेश लगभग 5 वर्षों में लगभग सवा लाख करोड़ रुपए हुआ, यानी कैपीटल एक्सेपेंडिचर और सेफ्टी के अलग-अलग कामों में हर वर्ष औसतन 25 हजार करोड़ रुपए निवेश हुआ । वर्ष 2009 से वर्ष 2014 के बीच उसे बढ़ा कर दो लाख, 30 हजार करोड़ रुपए कर दिया गया, जो औसतन हर वर्ष 45 हजार करोड़ रुपए होता है । यानी 25 हजार करोड़ रुपए से बढ़ा कर औसतन 45 हजार करोड़ रुपए निवेश होता था ।

मुझे आप सभी को यह बताते हुए खुशी होती है और शायद यह इसलिए भी संभव हुआ है कि माननीय प्रधान मंत्री जी, जिन्होंने अपना बचपन एक रेलवे स्टेशन पर बिताया है, उन्होंने एक रेलवे स्टेशन पर अनुभव लिया  है कि किस प्रकार रेल हर व्यक्ति के जीवन को छूती है । वह कितना महत्वपूर्ण काम करती है  । प्रधान मंत्री जी ने लगातार रेलवे पर विशेष ध्यान देते हुए वर्ष 2014 से वर्ष 2019 के बीच लगभग पांच लाख करोड़ रुपए, यानी रेलवे ने हर वर्ष औसतन एक लाख करोड़ रुपए, दोगुना निवेश किया । आगे की कहानी और भी दिलचस्प है । वर्ष 2019-20 में इसको बढ़ा कर लगभग डेढ़ लाख करोड़ रुपए कर दिया गया और हाल में अब जो बजट हम सब के समक्ष है, जिसकी चर्चा के लिए हम आज एकत्रित हुए हैं, बजट, 2021-22 में दो लाख, 15 हजार करोड़ रुपए का निवेश भारतीय रेल को देने का ऐतिहासिक काम माननीय प्रधान मंत्री जी के नेतृत्व में किया गया है । माननीय निर्मला सीतारमण जी ने हमें रेलवे में निवेश के लिए दो लाख, 15 हजार करोड़ रुपए उपलब्ध कराए हैं । उसी के कारण आगे के लिए हम एक बहुत सोची-समझी रणनीति के तहत किस प्रकार से काम को तेज गति दी जाए उस पर विचार किया है और रेलवे को फ्यूचर रेडी बनाने के लिए, भविष्य के लिए देश को तैयार करने के लिए रेलवे अपनी आहुति दे, उसके लिए एक नेशनल रेल प्लान-2030 तैयार किया गया है । लगभग दो-ढाई वर्षों तक देश के कोने-कोने तक, चप्पे-चप्पे में जो प्रोजेक्ट्स चल रहे हैं, उनको देखा, क्या आवश्यकताएं हैं, उनको देखा, कहां जमीन मिल सकती है, कहां जमीन नहीं मिल सकती है, क्या स्थिति है, उन सबको देख कर एक प्लान बनाया और इस प्लान के हेतु जो काम तेज गति से होने चाहिए, जिसकी बहुत अति आवश्यकता है, उनको सुपरक्रिटिकल प्रोजेक्ट्स बनाया । हम ने लगभग 58 प्रोजेक्ट्स को सुपरक्रिटिकल  श्रेणी में रखा है और 68 प्रोजेक्ट्स को क्रिटिकल प्रोजेक्ट्स सेकेण्ड फेज में रखा है । उनके लिए मापदंड क्या था, क्या हमारे पास पूरी तरह से जमीन उपलब्ध है,  क्या राज्य सरकार सहयोग दे रही है, सभी क्लियरैंसेज अप्रूवल्स हैं या नहीं हैं । कई प्रोजेक्ट्स 70-80 प्रतिशत खत्म हो गए, लेकिन पैसे के अभाव में कई वर्षों तक लटके रहते थे, हम ने उनको प्राथामिकता दी । हम ने कुछ जरूरतों को ध्यान में रखा कि पोर्ट्स से कनेक्टिविटी, कोयले से कनेक्टिविटी, आखिर आज देश में 24 घंटे बिजली मिलती है, देश के कोने-कोने में आज बिजली की कमी नहीं है, तो वहां कोयला पहुंचना भी अति आवश्यक है । कोयले के रूट्स हों, पोर्ट्स से कनेक्टिविटी हो । हम ने स्टील इंडस्ट्री में बहुत प्रगति की है, तो स्टील इंडस्ट्री की रेक्वायरमेंट आयरन ओर और कोयला है, हम ने उसको प्राथमिकता दी है ।

          किसानों को प्राथमिकता दी गई कि उनकी उपज कहां जानी आवश्यक है । किसानों के लिए कोई रूट है, तो उसे प्राथमिकता दी गई । अलग-अलग प्रकार से बड़ी सोची-समझी रणनीति से, बजाय कि जो पैसा उपलब्ध है, उसे पांच सौ प्रोजेक्ट्स में बांट दो, हमने कोशिश की कि उसे प्रोजेक्टवाइज़ जो चीजें जल्द से जल्द खत्म हो सकें, जनता और उद्योग की सेवा में आ सकें, उसके लिए ज्यादा पैसा दिया गया । इसके साथ ही यह एक दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है कि हमारे कई मित्र बोलते हैं कि आप कॉर्पेटाइज्ड कर रहे हैं, आप डिस्इंवेस्टमेंट कर रहे हैं । यह आरोप लगता है कि प्राइवेटाइज्ड कर रहे हैं । मैं यह स्पष्ट कर दूं कि भारतीय रेल कभी प्राइवेटाइज्ड नहीं होगी । भारतीय रेल भारत की संपत्ति है और यह भारत की ही रहेगी । भारत के लोगों की ही रहेगी । लेकिन रोड भी भारत की संपत्ति है, तो क्या कोई यह कहता है कि इस पर सिर्फ सरकारी गाड़ियां ही चलेंगी, ऐसा तो कोई नहीं कहता है । रोड एक सुविधा बनी है । रोड पर जितनी ज्यादा गाड़ियां चलेंगी, देश का हित उतना ही ज्यादा है । आपकी भी गाड़ी चले, सरकारी गाड़ी भी चले, बस भी चले, निजी क्षेत्र की बस चले, ट्रक चले, जितनी गाड़ियां चलेंगी, देश की उतनी ही ज्यादा आर्थिक प्रगति होगी । इससे लोगों को सुविधा मिलेंगी ।

          रेलवे लाइन लग गई, तो क्या यह कोशिश नहीं होनी चाहिए कि हमारे यात्रियों को अच्छी सुविधाएँ मिलें । अच्छी स्पीड की फ्रेट ट्रेन्स चलें और अगर उसमें कोई निजी निवेश आता है, तो मैं समझता हूं कि उसका स्वागत होना चाहिए । माननीय गिल साहब ने जब डिबेट शुरू की, तो उन्होंने अमृतसर स्टेशन का जिक्र किया । आज देश में करीब 8,000 स्टेशंस हैं । हमने देखा है कि रेलवे 168 वर्ष पुरानी है । आज से 8 या 10 वर्ष पहले रेलवे स्टेशंस किस हालत में थे, आप लोग याद कीजिए । आज रेलवे के पास जितनी सुविधाएं थीं, उसके हिसाब से हमने काफी सुधार की कोशिश की हैं । रेलवे स्टेशंस पर एलइडी लाइट्स लगाई गई हैं, वहां पर एयरपोर्ट की तरह ही लाइटिंग की व्यवस्था हो गई है । वेटिंग रूम्स अच्छे बन गए हैं, और उनकी  संख्या बढ़ाई गई हैं । एस्केलेटर्स और लिफ्ट्स तो अभूतपूर्व लगे हैं । आज हर स्टेशन पर टॉयलेट बन गए हैं, कोई स्टेशन बिना टॉयलेट के नहीं है । मैं समझता हूं कि हर एक में महिलाओं के लिए अलग टॉयलेट्स बने हैं । हम दिव्यांगों के लिए भी टॉयलेट्स की संख्या बढ़ाने की कोशिश में लगे हुए हैं । अगर हमें अतिआधुनिक स्टेशन बनाने हैं, जो विश्वस्तरीय हों, तो आप सोचिए कि कितने लाखों करोड़ रुपये खर्च होंगे? हमने अमृतसर के लिए एक प्लान बनाया है, 230 करोड़ रुपये के निवेश से अमृतसर रेलवे स्टेशन को अतिआधुनिक विश्वस्तरीय रेलवे स्टेशन बनाने की योजना है । जब कोई व्यक्ति गोल्डेन टेम्पल जाएगा, तो उसे गर्व होगा कि मैं अमृतसर रेलवे स्टेशन पर उतरा हूं । हमने ऐसा स्टेशन तय किया है । इसका आरएफपी भी बन गया है और इसे जल्द ही इश्यू किया जाएगा । हमने लगभग 50 स्टेशनों के बड़े अच्छे और मॉडर्न डिजाइन्स तैयार किए हैं । नई दिल्ली रेलवे स्टेशन को लगभग 5,000 करोड़ रुपये के निवेश से एक बहुत ही अच्छा रेलवे स्टेशन, जहां नई लाइने आ सकें, वहां अंदर- बाहर जाने में ज्यादा समय न लगे,  नए फ्लाईओवर सिस्टम से सीधा बाहर हाइवेज़ से कनेक्ट हो जाने की व्यवस्था की जा रही है । एक बड़े रूप में रेलवे का विस्तार हो, रेलवे स्टेशंस का सौंदर्यीकरण हो । मैं समझता हूं कि अगर उसमें निजी निवेश भी आए, तो यह देशहित में है, यात्री हित में है ।

अगर हमें नए डीएफसी, डेडीकेटेड फ्रेट कॉरीडोर बनाने हैं, जैसा कि माननीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण जी ने अपने बजट भाषण में बताया है कि हमने नए डीएफसी का डीपीआर बनाने का काम शुरू किया है । ईस्टर्न डेडीकेटेड फ्रेट कॉरीडोर और वेस्टर्न डेडीकेटेड फ्रेट कॉरीडोर बन रही हैं । इन दोनों को सरकार बना रही है । इसका काम आज से 15 वर्ष पहले शुरू हुआ था । यह वर्ष 2005-2006 में शुरू हुआ था और यह वर्ष 2008 में अप्रूव हुआ था । इसमें वर्ष 2014 तक मात्र 10,000 करोड़ रुपये निवेश हुए थे, मात्र 10,000 करोड़ रुपये । हमने वर्ष 2014 से 2019 के बीच 40,000 करोड़ रुपये निवेश कर दिए हैं । अगर निवेश नहीं होगा, तो प्रगति कैसे होगी? जहां तक मुझे ध्यान है, तो इस वर्ष शायद 14,000 करोड़ रुपये या 16,000 करोड़ रुपये डीएफसी में निवेश करने के लिए एक ही वर्ष में मंजूरी मिली है । मुझे उम्मीद है कि अगले वर्ष, अभी कोर्ट में एक-दो छोटी समस्याएं जमीन के संबंध में चल रही हैं । मुम्बई के पास जेएनपीटी पोर्ट पर हमें महाराष्ट्र सरकार की मदद चाहिए, जिससे 3,200 लोगों का पुनर्वास किया जा सके । हमने दोनों के लिए पैसे भर दिए हैं।

अगर वह मदद मिल जाए, तो जब भारत आज़ादी के 75 वर्ष मनाएगा, तब ईस्टर्न और वेस्टर्न फ्रेट कॉरिडोर चालू हो जाएंगे, जो वर्षों से लटके पड़े हैं । क्या एक-एक डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर को बनने में 17 वर्ष लगने चाहिए? उसके बदले अगर सरकार जमीन अधिग्रहण कर ले, सरकार जमीन लेकर बिड-आउट कर दे, तो निजी क्षेत्र अपनी एफिशिएंसी भी लाएगा, निजी क्षेत्र अपना निवेश भी लाएगा, उसको जल्द-से-जल्द पूरा करेगा, सेवाएं देगा । वे सेवाएं किनको मिलेंगी? वह भारत के उद्योगों को मिलेंगी, लोगों को नयी नौकरियाँ मिलेंगी । भारत के उद्योगों को गति मिलेगी, तो भारत का जीडीपी जल्द-जल्द 5 – 10 ट्रिलियन तक पहुंचेगा । यदि हमें आगे चलकर एक विश्वस्तरीय ताकत बननी है, तो लॉजिस्टिक्स कॉस्ट पर भी नियंत्रण करना जरूरी है । इन सब में, मैं समझता हूँ, जब सरकार और निजी क्षेत्र मिलकर काम करेंगे, तभी जाकर हम देश का उज्ज्वल भविष्य बनाने में सफल होंगे । इस दृष्टिकोण से, हमने बहुत सोच-समझकर विभिन्न प्रोजेक्ट्स को वर्ष 2030 तक टेक-अप करने का एक नेशनल रेल प्लान बनाया है । कोशिश यह है कि फ्रेट लोडिंग को वर्ष 2024-25 तक 70-80 प्रतिशत बढ़ा दें, जिससे लोगों के सामानों को रेलवे के द्वारा दूर-दूर तक पहुंचाने में सुविधा हो । चाहे वह किसान हो, उद्योग हो या वह कोई पार्सल ही क्यों न हो ।

          जब कोई पहली बार एमपी बनकर आएगा और आप अपने शहर से कुछ फर्नीचर दिल्ली लाना चाहें, तो आप उनको पार्सल में डाल दें, वह सस्ती दर पर दिल्ली पहुंच जाएगा । यह मुझे इसलिए याद है कि जब मैं एमपी बना और मैंने घर का फर्नीचर और अन्य सामान ट्रक से भेजा था, तो वह बहुत महंगा पड़ा था । लेकिन रेलवे में वही काम एक-तिहाई पैसे में हो सकता है ।

          इसी तरह से, हम जितना विस्तार करेंगे, तभी जाकर देश का भविष्य भी उज्ज्वल होगा, एक तरह से रेलवे देश के सुनहरे भविष्य का साधन बनेगी ।

          महोदय, मैं प्रमुख पाँच विषयों पर चर्चा करना चाहूंगा । हमने कोविड के समय में आपदा को कैसे अवसर में बदला । दूसरा, गत् एक वर्ष में माल गाड़ियों में कैसे सुधार हुआ है । तीसरा, निवेश है, जिसका थोड़ा जिक्र मैंने पहले किया । हम निवेश को कैसे समझदारी से करके देश को आगे लेकर जा रहे हैं । चौथा, आधुनिक टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके एक अच्छा भविष्य, एक नई सुबह देश के लिए तैयार हो, यह देश को मिले और पाँचवाँ, ट्रांसपेरेंसी लेवल को और कैसे इनक्रीज किया जाए । उसमें जो महत्वपूर्ण काम हो रहा है, वह है रेलवे का पूरा पुनर्गठन । रेलवे का सिस्टम सालों-साल से चलता आ रहा है, आठों सर्विसेज में एक-दूसरे के अंतर्विरोध के कारण समस्याएं पैदा होती हैं, उनके कारण कई काम डिले होते हैं । उसे हम एक एफिशिएंट ऑर्गेनाइजेशन के रूप में परिवर्तन करने की कोशिश कर रहे हैं ।

          महोदय, वर्ष 2020 की कहानी रेलवे के साहस, सेवा, समर्पण और सशक्तिकरण की है । रेलवे 168 साल पुरानी संस्था है । बहुत-सी आपदाएं आईं । रेलवे ने स्पेनिश फ्लू तक देखा है । एक जमाने में तो यह कहा जाता था कि स्पेनिश फ्लू मुम्बई पोर्ट में आने के बाद पूरे देश में फैला, तो यह पूरे देश में रेलवे के माध्यम से फैला था । लेकिन इस बार माननीय प्रधानमंत्री जी की सोच इतनी करेक्ट थी, इतनी परफेक्ट थी कि उन्होंने समय पर लॉकडाउन किया । कई लोग आलोचना करते हैं कि उस समय तो सिर्फ ढाई सौ या पाँच सौ लोग ही पीड़ित थे । आपने क्यों लॉकडाउन किया? आप कल्पना कीजिए, अगर वह लॉकडाउन नहीं किया गया होता, तो रेलगाड़ियाँ दिन-रात चलतीं और वह कैसे इस महामारी को देश के कोने-कोने तक पहुंचा देती और अगर रेलगाड़ियाँ बन्द नहीं की जातीं, तो आज देश के छ: लाख गांवों तक कोविड पहुंच गया होता । इसलिए रेलगाड़ियों को समझदारी से बन्द किया गया । जब जरूरत पड़ी, तो हमारे प्रवासी मजदूरों को उनके घर पहुंचाने के लिए लगभग 4,600 श्रमिक स्पेशल ट्रेन्स चलाकर लगभग 60 लाख से अधिक श्रमिकों को उनके घरों तक पहुंचाया गया।

          आपको जानकर आश्चर्य होगा कि श्रमिकों के लिए उन ट्रेनों के हर डिब्बे में आरपीएफ के हमारे जवान दिन-रात रहते थे । लगभग दो करोड़ मील्स, भोजन मुफ्त में रेलवे ने श्रमिक स्पेशल ट्रेनों में दिया, 2 करोड़ 16 लाख पानी की बोतलें दीं, जिससे श्रमिक स्पेशल ट्रेनों के माध्यम से सुरक्षित और सुगम तरीके से हमारे भाई-बहन घर पहुंच पाए ।

वास्तव में एक प्रकार से जो वस्तुएं हमको अति-आवश्यक लगती हैं, क्योंकि अगर बिजली नहीं होती, तो आप सोचिए कि लॉकडाउन में बिजली नहीं होती, तो घरों में बैठना कितना मुश्किल होता । लॉकडाउन में बिना बिजली, बिना टीवी के क्या होता । देश भर के कोने-कोने में कोविड काल में कोयला पहुंचा, देश के कोने-कोने तक फूडग्रेन्स पहुंचे, अनाज पहुंचा । देश के कोने-कोने तक दवाइयां पहुंचीं । देश के कोने-कोने तक फर्टिलाइज़र पहुंचा । आखिर यह सब अगर नहीं पहुंचता, तो क्या संभव होता कि लोग महीनों घर में बैठ पाते? आपने कहीं से भी अनाज की कमी की बात नहीं सुनी ।

माननीय प्रधान मंत्री जी ने प्रधान मंत्री गरीब कल्याण योजना से हर व्यक्ति तक अनाज पहुंचाया, जिसका साधन भारतीय रेल बनी । भारतीय रेल ने अनाज पहुंचाया, बिजली घरों तक कोयला पहुंचाया और सबसे आवश्यक बात है कि आखिर आज कोविड के बावजूद किसानों की फसल अच्छी हुई है, क्योंकि एक ही सैक्टर है, जिसमें ग्रोथ है । इस देश में फूडग्रेन्स प्रोडक्शन में 3.5 परसेंट की ग्रोथ है । अगर फर्टिलाइज़र नहीं पहुंचता, तो क्या संभव होता? हर किसान की चिंता करते हुए प्रधान मंत्री जी ने कहा कि यह सब सुनिश्चित करो, कहीं से भी कम्पलेन्ट न आए ।

एक ज़माना था, जब खाद्य-फर्टिलाइज़र्स की कमी के कारण गोलियां चलती थीं, हाईवेज़ ब्लॉक होते थे । सात सालों में कभी यह दृश्य नहीं हुआ और कोविड के समय कहीं भी फर्टिलाइज़र्स की कमी नहीं हुई और आज किसानों ने इतना अच्छा उत्पादन कर के देश को सुरक्षित बनाया है, देश की शान बढ़ाई है । कोविड की लड़ाई में रेलवे के अधिकारियों और कर्मचारियों के परिवारों को डर नहीं था, ऐसा नहीं था । आप सोचिए कि पूरे मार्च, अप्रैल और मई में कोविड के बावजूद ट्रेन्स चलीं, अफसर ड्यूटी पर रहे, कर्मचारी ट्रैक्स मेंटेन करते रहे, लोको-पायलेट्स ट्रेन्स चलाते रहे, आरपीएफ के जवान ट्रेनों में रहे । क्या उनके परिवारों को कोविड से डर नहीं लगता था? क्या उनके परिवार वाले उनसे नहीं बोलते थे कि आप क्यों बाहर जा रहे हैं, प्रधान मंत्री जी   ने तो लॉकडाउन अनाउंस किया है । मुझे आज रेलवे के पूरे परिवार पर बहुत गर्व है । कोविड के समय एक भी व्यक्ति, एक भी कर्मचारी ने यह नहीं कहा कि मैं काम पर नहीं आऊंगा, मैं ड्यूटी पर नहीं आऊंगा । उन्होंने कोविड की बिना चिंता किए हुए चौबीसों घंटे ड्यूटी की । …(व्यवधान) मैं समझता हूं कि इस पर तो विपक्ष भी कम से कम रेलवे में काम कर रहे लोगों को तालियां बजाकर या सीट थपथपा कर दाद दे सकता है कि कैसे कोविड के बावजूद वे लोग दिन-रात एक कर के देश की सेवा में लगे रहे । …(व्यवधान)

हमने इस बीच अपने कई मित्र और परिवार के लोगों को खोया । मैंने अपने खुद के एमओएस माननीय श्री सुरेश अंगड़ी जी को खोया है । वे बहुत सहज और शालीन व्यक्ति थे, उनका स्वाभाव बहुत अच्छा था । वे सबके साथ मिल-जुलकर काम करते थे । मैं आज उन सभी को श्रद्धांजलि देता हूं, जिन्होंने रेलवे में काम करते हुए, देश की सेवा करते हुए, अपने-अपने जीवन को गंवाया है । कई सारे किस्से हैं, जो आपने पेपर्स-टीवी में पढ़े-देखे होंगे । एक बच्चे के लिए दूध लेकर आरपीएफ कांस्टेबल ट्रेन के पीछे भाग रहा है, क्योंकि उस बच्चे की मां ने रेलवे हैल्पलाइन पर फोन किया था कि ट्रेन में दूध नहीं मिल रहा है और ट्रेन स्टेशन से निकल गई है । वह जवान भागकर बच्चे के लिए दूध पहुंचा रहा है । …(व्यवधान) कहीं से यह खबर आई कि एक दिव्यांग बच्चे के लिए कैमल-मिल्क चाहिए था । किसी रेलवे के कर्मचारी ने यह बात पढ़ी और पता लगाया कि कैमल मिल्क कहां से मिलेगा । राजस्थान से दूध लेकर ओडिशा या पूर्वी भारत के हिस्से में पहुंचाया । इस दौरान अलग-अलग किस्से हमने सुने । मैं समझता हूं कि पूरा देश रेलवे परिवार का कृतज्ञ रहेगा, जिसने इस महामारी के बावजूद देश की सेवा की ।

          किसी माननीय सदस्य ने दुर्भाग्यपूर्ण टिप्पणी की थी कि रेलवे ने जो कोविड केयर सैंटर्स बनाए हैं, वे क्यों बनाए हैं या अच्छे नहीं हैं या सेवा में नहीं हैं । जब महामारी शुरू हुई तब विश्व में जिस तरह से डर का माहौल था, जिस प्रकार से हमारी सुविधाओं में कमी थी, उस समय आप सोचिए कि कितनी सोची-समझी रणनीति के तहत ऐसा किया गया कि यदि कोविड महामारी तेजी से फैलती है और हमारे अस्पताल ओवरवैलम्ड हो जाते हैं, यानी उनकी कैपेसिटी कम पड़ती है और नए पेशेंट एडमिट नहीं कर पाते हैं, ऐसी परिस्थिति में कोविड पेशेंट को कहां रखेंगे? यदि उसे घर में रखेंगे, तो पूरे मोहल्ले में बीमारी फैल सकती है । यह माननीय प्रधान मंत्री जी की दूरदृष्टता थी, आगे के लिए सोच थी कि अगर कोविड महामारी बढ़ जाती है और हमें आइसोलेशन सैंटर्स चाहिए तथा सरकारी व्यवस्थाएं कम पड़ें, तो उस समय जब रेलवे की पैसेंजर ट्रेनें बंद थीं, तब क्या उन ट्रेन्स को आइसोलेशन कोचेज में कंवर्ट कर सकते हैं । कोविड का कोई इलाज नहीं है । जो दवाई खाते थे, वे बुखार कम करने के लिए खाते थे जैसे फैबीफ्लू, हाईड्रोक्सीक्लोरोक्वीन आदि, लेकिन इस बीमारी का कोई इलाज नहीं है । इस बीमारी का एक ही हल था कि उस व्यक्ति को आइसोलेट किया जाए और उसके खाने-पीने का ध्यान रखा जाए । आइसोलेशन के लिए 5601 कोचेज को कोविड केयर सैंटर्स में कंवर्ट किया गया और 80 हजार बैड्स तैयार किए गए । आप देखिए कि इसके पीछे सोच क्या थी । यह बात हमें दिल्ली, मुम्बई में बैठकर ध्यान नहीं आती है लेकिन श्रावस्ती में यदि कोविड फैल जाए, तो वहां उतनी सुविधाएं नहीं होंगी लेकिन एकदम रेलवे कोविड केयर सैंटर को श्रावस्ती तक ले जा सकता था, जिससे वहां के लोगों को भी सुविधा मिल जाए । ये सैंटर्स कई जगह इस्तेमाल हुए, उत्तर प्रदेश में इस्तेमाल हुए । मैं समझता हूं कि टिप्पणी करते समय हमें एक बार जरूर सोचना चाहिए । यह एक प्रकार से सेवा करने की कोशिश ही की गई थी । इसकी इतनी जरूरत नहीं पड़ी, क्योंकि देश में माननीय प्रधान मंत्री जी ने जिस प्रकार से नेतृत्व करके इसका ध्यान रखा कि यह बीमारी ज्यादा न फैले, उसकी वजह से इस सेवा की इतनी जरूरत नहीं पड़ी, लेकिन यह एक बैकअप था, सुरक्षा थी कि कोविड केयर सैंटर आइसोलेशन वार्ड के रूप में देश के पास उपलब्ध है ।

          अध्यक्ष जी, कोविड के समय हमने कई ऐसे प्रोजेक्ट्स को पूरा किया, जो वर्षों से बन नहीं पा रहे थे । कई ऐसे प्रोजेक्ट्स थे, जिन्हें पूरा करने के लिए आपको दो-तीन दिन तक ट्रैफिक ब्लॉक करना था यानी सभी रेलवे लाइन्स वहां बंद करनी पड़तीं । आपको जानकर खुशी होगी कि कोविड महामारी के समय लगभग 350 ऐसे प्रोजेक्ट्स पूरे किए गए, जो शायद कभी पूरे हो नहीं पाते । उदाहरण के लिए मैं पश्चिम बंगाल की बात बताना चाहता हूं । कोलकाता में 15 रेलवे लाइनों को क्रास करता हुआ एक टाला नाम का आरओबी था । आप कल्पना कीजिए कि 15 रेलवे लाइनों को एक साथ बंद करके उस आरओबी को डिस्मेंटल करना क्या संभव है, लेकिन कोविड के समय हमने उस आरओबी को डिस्मेंटल किया और यह अति आवश्यक था क्योंकि वह आरओबी बहुत बुरे हाल में डैमेज था । मैं मुम्बई से आता हूं । बारिश की वजह से और समुद्र नजदीक होने के कारण वहां कई स्टील गार्डर्स खराब हो जाते हैं, क्रोड हो जाते हैं । माहिम में एक मीठी  ब्रिज है, एक मद्रास गुंटूर सैक्शन है, जहां बड़े रूप में कोरोजन हो गया था । ऐसे सभी लम्बित कामों को हमने कोविड के दौरान पूरा करके रेलवे को सुरक्षित बनाया।

रेलवे के काम को और अच्छा किया और आज देश भर में लगभग 350 प्रोजेक्ट्स ऐसे हैं जो हमें किसी तरह से छूते  हैं । इन सब सुरक्षा के कामों को बल और निवेश देने के कारण मुझे खुशी है कि पिछले दो सालों में वर्ष 2019 से 2021 तक एक भी पैसेंजर की मृत्यु रेलवे के एक्सिडेंट के कारण नहीं हुई । आखिरी मृत्यु मार्च, 2019 में हुई थी । यह एक दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति थी, लेकिन अब सेफ्टी पर इतना जोर दिया जा रहा है कि इन दो सालों में एक भी पैसेंजर की मृत्यु रेलवे एक्सिडेंड से नहीं हुई । इस हेतु कई काम किए गए हैं । मैं एक आंकड़ा ठीक करना चाहता हूं । जो सुपर क्रिटिकल प्रोजेक्ट्स थे, वे 58 थे और क्रिटिकल प्रोजेक्ट्स 68 थे, जिनको मैंने शुरू में नैशनल रेल प्लान के संबंध में बताया था । आपको जानकर खुशी होगी कि जो 58 सुपर क्रिटिकल प्रोजेक्ट्स हैं, उनको तेज गति देकर अभी तक उनमें से हम 25 को पूरा कर पाए हैं और 31 इस वर्ष के अंत तक पूरे हो जाएंगे । सिर्फ दो रह जाएंगे, जो अगले वर्ष पूरे हो जाएंगे । इसी प्रकार से 68 क्रिटिकल प्रोजेक्ट्स में से 3 पूरे हो चुके हैं । आने वाले 3 सालों के अंदर इन सब प्रोजेक्ट्स को पूरा करके पोर्ट कनेक्टिविटी, कोल कनेक्टिविटी, टूरिज्म आदि चीजों के लिए इन प्रोजेक्ट्स का लाभ हम सब ले पाएंगे ।

          माननीय अध्यक्ष महोदय, लगभग 80 प्रतिशत मेल एक्सप्रेस ट्रेनें शुरू हो चुकी हैं । 91 परसेंट सब-अर्बन ट्रेनें शुरू हो चुकी हैं । पैसेंजर्स ट्रेनें आहिस्ता-आहिस्ता शुरू हो रही हैं । आपमें से कई माननीय सांसदों ने उस बारे में भी जिक्र किया । मैं उन सबका संज्ञान लेकर जहां-जहां डिमांड्स हैं, उनको जरूर पूरा करने का काम करूंगा । आपको खुशी होगी कि आज तक 43 रूट्स पर 377 किसान रेलें अभी तक चल चुकी हैं और लगभग सवा लाख टन, किसानों की उपज, जिनमें साधारणत: फल, सब्जियां होती हैं, इस प्रकार की चीजें इन ट्रेनों से जाती हैं । बहन भारती पवार जी ने कल मुझसे पूछा कि नासिक से और डिमांड है, पर किसी ने उनको भ्रमित कर दिया कि एक ही ट्रेन मिलेगी । बहन जी, ऐसा नहीं है । जितनी ट्रेनें किसानों को चाहिए, जहां डिमांड हो, यह सरकार भारतीय रेल मंत्रालय के माध्यम से उनको उपलब्ध कराएगी । माननीय श्री कृष्णादेवरायालू, जो आंध्र प्रदेश से हैं, उन्होंने कहा कि टरमरिक, चिली और स्पाइसेज को किसान रेल में लेकर नहीं जाया जाता । वह इसलिए क्योंकि क्वांटिटी बहुत छोटी होती है । किसान रेल बड़े-बड़े डिब्बे वाली ट्रेन है । इन छोटी चीजों को हम पार्सल में लेकर जाते हैं । पार्सल के माध्यम से टरमरिक, स्पाइसेज रेगुलरली जा रहे हैं । अगर ज्यादा क्वांटिटी हो तो हम उसे किसान रेल में लेकर जा सकते हैं, पर साधारणत: इन चीजों में बड़ी क्वांटिटी नहीं होती हैं ।

          माननीय अध्यक्ष महोदय, मिनिस्ट्री ऑफ फूड प्रॉसेसिंग ने शुरू में टमाटर, प्याज और आलू, तीनों पर 50 प्रतिशत किराए में भी छूट दी थी और अब उसको बढ़ाकर सभी फल और सब्जियों, जो किसान रेल से जाती हैं, उन पर 50 प्रतिशत की छूट किराए में दे दी गई है । माननीय स्पीकर साहब कल मुझे एक मजेदार बात बता रहे थे कि फूलों के ऊपर बहुत ज्यादा खर्चा होता था । हमने उसको नियंत्रण में करके पार्लियामेंट का लगभग करोड़, डेढ़ करोड़ रुपया बचाया है । हमने फूलों को किसान रेल से भेजने का काम शुरू किया । पिछली 9 मार्च को लातूर और उस्मानाबाद से साढ़े छ: सौ किलो फूल पहली बार किसान रेल के माध्यम से कुर्डुवाडी स्टेशन से आदर्श नगर, दिल्ली लाया गया । उसके कई सारे न्यूज-पेपर्स आर्टिकल्स भी मेरे पास हैं । फूल अगर देश भर में आने लगेंगे तो सस्ते भी हो जाएंगे और भारत के अच्छे फूल देश के कोने-कोने में लोग इस्तेमाल भी कर पाएंगे ।  

          महोदय, मालगाड़ी के काम में एक अद्भुत इतिहास रचा गया है । कोविड की महामारी से पहले मालगाड़ियाँ लगभग 22, 23 अधिक से अधिक 24 किलोमीटर प्रति घंटा की एवरेज स्पीड पर सामान लेकर जाती थीं यानी मुंबई पोर्ट पर किसी ने सामान डाला तो गुवाहाटी पहुँचते-पहुँचते एक हफ्ता लगता था । हमने उस स्पीड को, कोविड का लाभ लेते हुए कि कोविड के समय बाकी ट्रेन्स कम हैं तो बहुत प्लानिंग करके, स्पीड बढ़ाने के ऊपर एक-एक पहलू के ऊपर ध्यान देकर, आज मुझे आप सबको बताते हुए खुशी है कि आज जो फ्रेट की स्पीड है, वह लगभग डबल हो गई है । 45 किलोमीटर प्रति घंटा फ्रेट की स्पीड हो गई है यानी गुवाहाटी अब सामान 2.5 दिन में पहुँच जाता है । इससे देश की अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी, बल मिलेगा । कोविड के बाद आगे भी ये ट्रेन्स इसी रफ्तार पर चलेंगी । जैसे-जैसे नई ट्रेन्स आ रही हैं, हम फ्रेट के अलग पाथ बना रहे हैं और उस पाथ के हिसाब से अब फ्रेट ट्रेन्स डबल स्पीड पर सामान का आवागमन करेंगी, जिससे एमएसएमई सेक्टर हो, अलग-अलग उद्योग के सेक्टर्स को कम खर्च पर अपना सामान पहुँचाने की सुविधा मिलेगी । देश कम्पेटिटिव होगा । देश कम्पेटिटिव होगा तो नया निवेश आएगा, लोगों को नई नौकरियाँ मिलेंगी । उल्टे पहले एक जमाना था कि किसी को कुछ फ्रेट भेजना है, कुछ सामान भेजना है तो उसे रेलवे के पीछे घूमना पड़ता था, भागादौड़ी करनी पड़ती थी । कई बार हमारे पास माननीय सांसदों के फोन आते थे कि हमारे इलाके में फ्रेट ट्रेन्स की कमी है, कोयले के लिए ट्रेन नहीं मिल रही है । मुख्यमंत्री कहते थे कि कोयला पहुँचाओ । आज स्पीड डबल होने से यह स्थिति है कि हमारे पास इतनी कैपेसिटी उपलब्ध है कि हमें बाहर जाना पड़ रहा है, हमें उद्योग के पास जाना पड़ रहा है । हमें राज्य सरकारों के पास जाना पड़ रहा है । ‘बिजनेस डेवलपमेंट यूनिट’ हर डिविजन में रेलवे ने खोले हैं । आज ‘कस्टमर इज किंग’ को सामने रखते हुए हम कस्टमर के पास जाते हैं । कोई फोन कर दे कि मेरे पास सामान है तो तुरन्त हमारे अधिकारी दौड़ते हैं कि हम कैसे उस सामान को रेलवे से ट्रांसपोर्ट करें।

महोदय, इसी के फलस्वरूप, मैं आपके माध्यम से सभी माननीय सांसदों को और पूरे देश को अवगत कराना चाहूँगा कि सितम्बर से लेकर फरवरी तक हर महीने, गौर कीजिए कि सितम्बर से फरवरी तक हर महीने, 6 महीने हो चुके हैं, जितनी फ्रेट लोडिंग भारतीय रेल में हुई है और कोविड की महामारी खत्म नहीं हुई है, उसके बावजूद जो फ्रेट लोडिंग इन 6 महीनों में हर महीने हुई है,   वह भारतीय रेल के इतिहास में सबसे अधिक है । अधिकतम फ्रेट लोडिंग इन 6 महीनों में हुई है । इसमें हमने फ्रेट डिस्काउन्ट्स भी दिए, नया ट्रैफिक अट्रैक्ट किया । पिछले महीने जनवरी में तो 119.80 मिलियन मीट्रिक टन्स भारत के रेलवे के इतिहास में सबसे अधिक एक महीने में लोडिंग पिछले महीने, दो महीने पहले जनवरी में की गई । इस सबका लाभ देश को आगे कई वर्षों तक मिलता रहेगा । इससे लॉजिस्टिक्स कॉस्ट भी कम होगी । इससे हमारी कम्पेटिटिवनेस, हमारे एमएसएमई सेक्टर को बल मिलेगा, हमारे एक्सपोर्ट को बल मिलेगा और आगे चलकर यह देश सही मायने में एक विश्वस्तरीय अर्थव्यवस्था बन पायेगा ।

महोदय, कई माननीय सांसदों ने शायद टीवी पर, ट्विटर पर या सोशल मीडिया पर देखा होगा । अब हम फ्रेट ट्रेन्स एक के बाद एक नहीं चलाते हैं । हम कई बार तो 5-5 ट्रेनें एक साथ जोड़कर चलाते हैं, जिन्हें हम अनाकोंडा ट्रेन बोलते हैं । वह नाम पता नहीं कहाँ से आया, किसने तय किया, मुझे तो पता नहीं । किसी अधिकारी या किसी नए यंग ऑफिसर के माइंड में आया, उसने अनाकोंडा बोल दिया और आज कई बार 3 ट्रेनें, 4 ट्रेनें, 5-5 तक ट्रेनें एक साथ जोड़कर हम चलाते हैं । इससे फ्रेट भी जल्दी पहुँचता है । इससे स्पीड ज्यादा हो जाती है, 5 इंजन चलते हैं । वह ट्रेन कहीं भी स्टॉप नहीं करती है और तेज रफ्तार से अपने गंतव्य स्थान तक सामान को ले जाती है ।

12.49 hrs                           (Shri P.V. Midhun Reddy in the Chair)           आज के दिन नई-नई चीजों को भी रेलवे ने सेवा देने का काम शुरू किया है । ऑटोमोबाइल्स हो, सीमेंट हो, अलग-अलग चीजें अभी रेलवे के थ्रू जानी शुरू हो गई हैं।

मुझे विश्वास है कि अगर फ्रेट रेलवे से बढ़ता है, देश और कम्पीटेटिव होता है, देश में और निवेश आता है, उसका लाभ मैं समझता हूं कि पूरे देश में, हर एक सांसद के क्षेत्र में मिल पाएगा । यह मेरा अटूट विश्वास है । मैंने डीएफसी के बारे में जिक्र किया था । डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर वास्तव में अच्छी कल्पना थी, पर बड़ी धीमी गति से चल रही थी । प्रधान मंत्री मोदी जी के आने के बाद उसको निवेश भी दिया गया, गति सुधारी गई । यहां तक कि उन्होंने मुझे आदेश दिया कि यह देश के लिए इतना महत्वपूर्ण है, इसको हर हफ्ते मॉनीटर करना चाहिए । मैं स्वयं अपने लेवल पर हर हफ्ते डीएफसी को मॉनीटर करता हूं । मुझे विश्वास है, जैसा मैंने कहा कि अभी तक करीब 650 किलोमीटर शुरू हो चुका है । माननीय प्रधान मंत्री जी ने 29 दिसंबर, 2020 और 07 जनवरी, 2021 को दोनों फ्रेट कॉरीडोर्स में एक-एक सैक्शन को देश को समर्पित किया था । मार्च-अप्रैल तक 450 किलोमीटर और पूरे तरीके से खत्म हो जाएगा और अगले वर्ष तक हम दोनों को पूरा इम्प्लिमेंट करने में सफल होंगे । तीन और डीएफसी कॉरीडोर्स, जैसे मैंने बताया कि तीनों डीपीआर का काम शुरू हो गया है । वास्तव में ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर भी पश्चिम बंगाल जाता है, जो दानकुनी तक जाएगा । दो और फ्रेट कॉरिडोर्स, एक ईस्ट कॉस्ट डीएफसी जो खड़कपुर तक जाएगा और एक ईस्ट-वेस्ट डीएफसी, जो खड़कपुर होते हुए दानकुनी तक जाएगा । हम एक तरीके से जाल बनाने की कोशिश कर रहे हैं कि कैसे डीएफसीज़ का एक जाल बन जाए और देश के कोने-कोने तक सुविधा पहुंचे । थोड़ा अनफॉर्च्युनेट है कि पश्चिम बंगाल के माननीय सदस्य आज हमारे बीच नहीं हैं । मुझे विश्वास है कि इससे पश्चिम बंगाल के आने वाले भविष्य में वहां की अर्थव्यवस्था को भी और बल मिलेगा, और ज्यादा तेज गति से वहां पर उद्योग आएंगे तथा विकास होगा।

          सभापति महोदय, माननीय सांसदों ने अलग-अलग विषय उठाएं । मैंने कहा कि मैं हरेक का जवाब रेडी करके लाया हूं और इंडिविजुअली दे सकता हूं । मुझे विश्वास है कि अगर मैं माननीय सांसदों को जानकारियां दूं तो वे खुश होंगे । केरल के हमारे माननीय मोहम्मद बशीर साहब ने कुछ विषय उठाएं । अब आपको जानकार खुशी होगी कि केरल में 2009 से 2014 के बीच जो पैसा निवेश होता था, 2021-22 के बजट में वह लगभग ढाई गुना कर दिया गया है । लेकिन हमारी सबसे बड़ी समस्या है और वह भी मैं अपने साथ लेकर आया हूं कि केरल में एक भी प्रोजेक्ट पर काम नहीं कर पा रहा हूं, क्योंकि जमीन ही उपलब्ध नहीं होती है । एक सरकार आए या दूसरी सरकार आए, दोनों डिमांड करती है कि नई लाइन शुरू हो, नई लाइन स्वीकृत हो । क्या हम भी पूर्व के रेल मंत्रियों की तरह सिर्फ घोषणाएँ करें, फायदा क्या है? अगर एक भी प्रोजेक्ट में लाइन न मिलने के कारण मैं काम नहीं कर पाऊँ और मेरे पास, शशि थरूर जी आप इस पर गौर करिए, मेरे पास 9 प्रोजेक्ट्स की डिटेल्स हैं, 458 किलोमीटर पर काम होना है । आप सुनकर हैरान होंगे कि सिर्फ 8 किलोमीटर का काम खत्म हो चुका है, ओनली 8 किलोमीटर्स । अब ऐसे में क्या बताया जाए कि तेज गति से काम क्यों नहीं हो पा रहा है? लेकिन उसी के सामने आप मध्य प्रदेश का दृश्य देखिए । मध्य प्रदेश में 2009 से 2014 के बीच जो निवेश होता था, उसके बनिस्पत आपको जानकार हैरानी होगी कि इस बजट में 12 गुना निवेश दिया गया है।

12.54 hrs                         (Hon. Speaker in the Chair) यानी  2021-22 में 7700 करोड़ रुपये मध्य प्रदेश से गुजरने वाली लाइनों के ऊपर निवेश होगा । वह क्यों सम्भव है, क्योंकि वहां जब हम फोन करते हैं तो तुरंत कार्रवाई करके जमीन उपलब्ध कराई जाती है । उसके ऊपर हम रेल लाइनें लगा सकें । जो स्टेट गवर्नमेंट की शेयरिंग फॉर्मूले के काम हैं, उसमें उनका पैसा आ जाता है । आंध्र प्रदेश के मेरे साथी ने श्री मांगुटा श्रीनिवासुलू रेड्डी और श्री लावू श्रीकृष्णा देवरायालू ने मेरी तारीफ भी की, जिसके लिए मैं आपका धन्यवाद करता हूं।    

मैं आपसे अनुरोध भी करता हॅूं कि आंध्र प्रदेश मे हम चाहते हैं कि जल्द से जल्द प्रोजेक्ट्स बढ़ें, लेकिन उसके लिए आपका सहयोग लगेगा, जमीन लगेगी, जो आपका शेयर है, ज्वांइट वेंचर प्रोजेक्ट्स में, वह शेयर आप उपलब्ध कराइए । सर, आज के दिन लगभग 1200 करोड़ रुपये आंध्र प्रदेश से आने बाकी हैं, मुझे वह दिलवा दीजिए, और तेज़ गति से वहां पर काम शुरू हो जाएगा । मैं हर प्रदेश की बात बता रहा हॅूं । तमिलनाडु ले लीजिए, तमिलनाडु में जो सन् 2009 से 2014 के बीच जो निवेश होता था, उसको अभी लगभग साढ़े तीन गुना, वर्ष 2021-22 के बजट में किया गया है । असम में जो 2009-14 के बीच होता था, उसको भी सवा तीन गुना बना दिया गया है, 2021-22 में । उत्तराखण्ड, देव भूमि है, उत्तराखण्ड के माननीय सांसद कल नहीं बोले, लेकिन उत्तराखण्ड में जो 2009-14 के बीच पैसा दिया जाता था, उसको बढ़ा कर, आप सुन कर हैरान हो जाएंगे कि 23 गुना कर दिया गया है । यह कोशिश भी हो रही है कि उत्तराखण्ड के सब प्रोजेक्ट्स तेज़ गति से और चार धाम की यात्रा तक, जो कल्पना है कि चार धाम की यात्रा भी रेलवे के सुगम सफर से हो सके, उसकी तरफ हम तेज गति से आगे काम करना चाहते हैं।

          ऋषिकेश-कर्णप्रयाग  की जो नई लाइन है, 125 किलोमीटर की, उसको नैशनल प्रोजेक्ट घोषित किया गया है । इस बजट में 4200 करोड़ रुपये दिए गए हैं । एक बार कर्णप्रयाग पहुंच जाएं, उसके बाद चारधाम की यात्रा की लाइनों के ऊपर भी आगे चल कर काम शुरू हो पाएगा।

          पश्चिम बंगाल में भी जितना निवेश चाहिए, उतना देने के लिए तत्पर हैं । लेकिन पश्चिम बंगाल की गाथा मैं सुनाऊं तो शायद अध्यक्ष जी, मुझे शायद कल सुबह तक भाषण देना पड़ेगा । पश्चिम बंगाल में हर प्रोजेक्ट में लाल अंक लगे हुए हैं । किसी भी प्रोजेक्ट में कोऑपरेशन नहीं है । देश का सबसे पुराना प्रोजेक्ट जो चल रहा है, सन् 1974-75 में एक प्रोजेक्ट अप्रूव हुआ  जो कि हावड़ा-आमता-बरगछिया-चम्पादकना-तारकेश्वर-आमता-बागनान  । सन् 74-75 में, इमरजेंसी के भी पहले यह प्रोजेक्ट अप्रूव हुआ था । आज 45 साल बाद भी, उस प्रोजेक्ट का कोई अता पता नहीं है । 110 किलोमीटर से मात्र 42 किलोमीटर हम कर पाए हैं । बाकी के लिए जमीन नहीं है । इनफैक्ट जमीन के लिए हमने पैसे दिए थे, वर्षों पहले । पैसे देने के बावजूद, ज़मीन नहीं मिली, अब हम पीछे पड़े हैं, पैसे वापस लेने के लिए, वे भी नहीं मिल रहे हैं । हर प्रोजेक्ट की यही कहानी है । अच्छा! मजे़दार बात यह है कि जब मैं आज के लिए तैयारी कर रहा था तो मैंने देखा ‍कि वर्ष 2009-10, 2010-11 और 2011-12 में इतने सारे प्रोजेक्ट्स अनाउंस हुए थे । मैं मुंबई से आता हॅूं । मैंने मुंबई के कोई ये सब प्रोजेक्ट्स अनाउंस नहीं किए । हमने तो पूरे देश की चिंता की । लेकिन वर्ष 2009-10 और 2010-11 इतने सारे प्रोजेक्ट्स – नई लाइन के सात प्रोजेक्ट्स, गेज कनवर्जन के प्रोजेक्ट्स उस समय में अनाउंस नहीं किए, लेकिन डब्लिंग के लगभग आठ-दस प्रोजेक्ट्स, सब अनाउंस किए गए, लेकिन उसके लिए हमारे को सहयोग नहीं मिला । जहां रेलवे के पास जमीन है, वहां डब्लिंग तो हम तेज़ गति से कर रहे हैं, लेकिन बाकी जगहों पर काम नहीं कर पा रहे हैं । मैं समझता हॅूं कि सभी माननीय सांसद इस बात को समझ लें कि राज्य सरकार सपोर्ट करें, जमीन समय पर मिल जाए तो जैसे वडोदरा  से केवड़िया का अभी हमने एक प्रोजेक्ट लगाया था, वडोदरा  से केवड़िया कनेक्ट किया, जिससे देश के हर कोने से लोग सरदार पटेल जी की स्टेचू ऑफ यूनिटी पर जा सकते हैं, उनको श्रद्धांजलि दे सकते हैं, वहां पर बहुत सारी सुविधाएं बनाई गई हैं । अब वह प्रोजेक्ट इतनी तेज़ गति से हुआ, स्टार्ट टू फिनिश दो सवा दो साल में पूरा प्रोजेक्ट लग गया।   

13.00 hrs इसका मतलब कि प्रोजेक्ट एप्रूवल, डिजाइनिंग, सर्वे, लैंड लेना और इम्प्लीमेंट करना, स्टेशंस बनाना, सब इतनी तेज गति से हो पाया क्योंकि राज्य सरकार ने सपोर्ट किया, जमीन दिलाई, ओवरहेड वायर्स हटाए । जहां पर हमें कुछ जरूरत पड़ी, मदद की जरूरत पड़ी, वे तुरन्त मदद करने के लिए आते थे । मैं समझता हूं कि राज्य सरकार और रेलवे के बीच के फासले को अगर हम ब्रिज कर सकें तो रेलवे तेज गति से काम कर सकता है और देश के कोने-कोने को जोड़ सकता है।

          माननीय फारुख साहब ने जिक्र किया था कि श्रीनगर की जो ट्रेन है, उसे बढ़ाया जाए । मैंने उसके लिए आदेश दे दिया है । उस ट्रेन को जल्द ही बढ़ाया जाएगा।

          माननीय हसनैस मसूदी साहब ने जिक्र किया कि जम्मू-कश्मीर को पर्याप्त निवेश नहीं मिलता है । मैं तो यह बात सुनकर हैरान हूं । जम्मू-कश्मीर का ऊधमपुर-श्रीनगर-बारामूला लाइन का जो पूरा प्रोजेक्ट है, यह बड़ी चैलेंजिंग लाइन थी । गत वर्षों में इस पर जितनी तेज गति से काम हुआ है, वह देखने लायक है । मैं आपको आमंत्रित करता हूं । आप आकर चेनाब ब्रिज के प्रोजेक्ट के काम को देखिए । यह विश्व का सबसे ऊँचा ब्रिज है । यह रिवर बेड लेवल से 359 मीटर ऊँचा है, यानी आइफल टावर से भी 30 मीटर ऊँचा है । इसमें जो काम चल रहा है, वह वास्तव में देखने लायक है । इस लाइन को लगाने के लिए तो 200 किलोमीटर की स्पेशल रोड बनानी पड़ी । वह इतना मुश्किल और इन-एक्सेसिबल टेरेन था । कई सारे पी.आई.एल. हुए । कितने समय तक प्रोजेक्ट लम्बित रहा क्योंकि कोर्ट का स्टे था । उस सब को पार करते हुए अब उस प्रोजेक्ट में तेज गति से काम चल रहा है । इस बार भी उसमें जितने पैसे चाहिए, पूरा निवेश किया गया है । अगर उसमें और पैसे लगेंगे तो और मिल जाएंगे । लेकिन, हमारी इच्छा है कि वर्ष 2022 के अन्त तक या मार्च, 2023 तक, चूंकि यहां की टेरेन काफी अनसर्टेन है, हिमालय की जो टेरेन है, वह काफी अनसर्टेन होने के कारण उसमें थोड़ी-बहुत अचानक से सरप्राइजेज आ जाती हैं । लेकिन, अगले दो-ढाई  वर्षों में इस पूरे प्रोजेक्ट को पूरा करके कश्मीर से कन्याकुमारी पूरी एक कड़ी से जुड़ जाएगा । यह बताते हुए मुझे बहुत आनन्द हो रहा है।…(व्यवधान)

DR. FAROOQ ABDULLAH (SRINAGAR): Sir, I have a Point of Order.

यह बहुत अच्छी बात है । मैं आपसे गुजारिश करता हूं और मैं आपसे पहले भी गुजारिश कर चुका हूं कि आज बनिहाल से बारामूला के बीच जो रेल चल रही है, मेहरबानी करके उसकी फ्रीक्वेंसी को बढ़ाइए ।

 

श्री पीयूष गोयल: सर, मैंने उसे बढ़ाने के लिए आदेश दे दिया है । आपको यह भी जानकर खुशी होगी कि वहां एक विस्टाडोम भी पहुंच गया है । इसका एक्सपेरिमेंट सक्सेसफुल हो जाएगा । विस्टाडोम का मतलब है कि चारों तरफ काँच होगा, जिससे सफर के समय आप पूरी वादियां देख सकें, बर्फ गिरने का आनन्द ले सकें । वह भी वहां पहुंच गया है । उसके एप्रूवल्स की प्रक्रिया चल रही है । वहां की परिस्थितियों को देखते हुए सिक्योरिटी क्लियरेंस ली जा रही है । अगर यह वहां सफल हो जाता है तो उसे वहां और बढ़ाएंगे ।

          आज देश में अलग-अलग रूट्स पर 35 विस्टाडोम्स पर्यटन के लिए चल रहे हैं । आगे चलकर हम पर्यटन को बल देने के लिए 100 और विस्टाडोम्स बनाने जा रहे हैं।

          बिहार के कई माननीय सांसदों ने अपनी बात रखी है । राम कृपाल यादव जी ने तो शुरू ही किया था । दिलेश्वर कामैत जी, सुशील कुमार सिंह जी, श्रीमती वीणा देवी जी, जनार्दन सिंह जी, प्रदीप कुमार, बहन रमा देवी जी, बहन कविता सिंह जी, सबने कई सारे विषय रखे । सबका जवाब उपलब्ध है । आपको यह जानकर खुशी होगी कि इस वर्ष 5,000 करोड़ रुपये से अधिक निवेश बिहार को मिला है, जो पिछली बार की तुलना में साढ़े चार गुना ज्यादा है।

          उत्तर प्रदेश के भी कई माननीय सांसदों ने कई सारे विषय रखे । माननीय लल्लू सिंह जी, माननीयशफीकुर्रहमान बर्क जी, बहन अनुप्रिया पटेल जी, राम शिरोमणि वर्मा जी, श्याम सिंह यादव जी, अनुराग शर्मा जी ने अपनी बात रखी । मैं आपसे कहना चाहता हूं कि माननीय प्रधान मंत्री जी को आपने ही चुनकर भेजा है।

अगर मैं आपको वहाँ के बजट के बारे में बताऊँ तो आपको यह सुनकर आश्चर्य होगा कि वर्ष 2009-14 के बीच प्रतिवर्ष उत्तर प्रदेश से होती हुई रेल व्यवस्थाओं में जो निवेश होता था, उसको 11 गुना कर दिया गया यानी 1045 प्रतिशत  वृद्धि की गई । आप इसकी कल्पना कीजिए । जहाँ पर हमें सपोर्ट मिलता है, स्टेट गवर्नमेंट सामने से आकर सपोर्ट करें ताकि हम उसको आगे बढ़ा सकें।

 

          आरओबी की बात कई माननीय सदस्यों ने रखी है । हमारे पंजाब के भी माननीय सदस्यों ने इस विषय को उठाया था । माननीय जसबीर सिंह गिल जी, डॉ. अमर सिंह और श्री गुरजीत सिंह औजला जी ने आरओबी की बात उठाई है । आज लगभग 20,000 मैन लेवल क्रॉसिंग है, इसलिए स्वाभाविक रूप से उसको प्रायोरटाइज करना पड़ता है । जहाँ-जहाँ पर स्टेट गवर्नमेंट सामने आती है और 50 प्रतिशत शेयर करती है तो हम वहाँ आरओबी बनाते हैं । जहाँ आरयूबी की संभावना हो, जहाँ उसकी जरुरत हो, उसको रेलवे बनाती है । आपने जो भी विषय रखा है, उस पर मैं गंभीरता से विचार करूँगा और जहाँ-जहाँ संभव हो, उसको आगे एक्सैप्ट करूँगा।…(व्यवधान) मैं उस प्वाइंट पर आ रहा हूँ।

          माननीय अध्यक्ष जी, मैं तीन विशेष ब्रिजेज का जरूर उल्लेख करूँगा । मैंने चिनाब ब्रिज के बारे में बताया है । तमिलनाडु में एक पम्बन ब्रिज है । यह देश का पहला वर्टिकल लिफ्ट ब्रिज इस साल के अंत तक दिसम्बर 2021 तक बनेगा । यह ब्रिज रामसेतु को कनेक्ट करेगा । जिस वर्ष मैं पैदा हुआ था उस वर्ष यह पम्बन ब्रिज और इसके आगे लाइन के ऊपर समस्या शुरू हुई थी । आगे की लाइन बंद कर दी गई । पम्बन ब्रिज कई वर्षों से बहुत धीमी गति से ट्रेन ले पाता था । इस ब्रिज को हम डिसमेंटल करके भारत का फर्स्ट वर्टिकल लिफ्ट ब्रिज बनाने जा रहे हैं ।

          आज सब जानते हैं कि असम में ब्रह्मपुत्र नदी के ऊपर बोगीबील ब्रिज रेल-कम-रोड ब्रिज का माननीय प्रधानमंत्री जी ने हाल ही में उद्घाटन किया था । इससे अरूणाचल प्रदेश और असम के लोगों को एक बहुत बढ़िया सौगात मिली है । आप सब जानते हैं कि बिहार में कोशी नदी का ब्रिज अटल जी के समय से लंबित था, जिसको हमने पूरा किया और अब उस रूट पर भी गाड़ियाँ चलनी शुरू होगी ।

          अध्यक्ष जी, ब्रिज की सुरक्षा की बड़ी चिंता रहती थी । अभी तक 815 ब्रिजेज, आरओबीज तथा एफओबीज की स्थिति चिंताजनक थी । हमने इनका आईआईटी तथा एनआईटी के माध्यम से पूरा ऑडिट कराया है । इसमें हम पारदर्शिता इस हद तक ले गए कि अब हमने हर प्रमुख ब्रिज या आरओबी की पूरी डिटेल या तो ब्रिज के नजदीक या नजदीक के रेलवे स्टेशन पर एक बोर्ड लगा दिया है । इससे सामान्य व्यक्ति भी देख सकता है कि मैं जिस ब्रिज पर जाता हूँ या मेरे आसपास जो ब्रिज है, उसका लास्ट ऑडिट कब हुआ, लास्ट रिपेयर कब हुआ, सेफ है या नहीं है, इसमें पारदर्शिता से सामान्य व्यक्ति को उसकी जानकारी मिलेगी । इसको हमने सुनिश्चित किया है । हमारी हर संभव कोशिश चालू है कि यात्रियों और उद्योगों के लिए कैसे रेल यात्रा को सुगम बनाए और अच्छा करें।

          अध्यक्ष जी, दो वंदे भारत ट्रेन शुरू हो गई हैं, एक ट्रेन दिल्ली से वाराणसी जाती है और दूसरी ट्रेन वैष्णो देवी जाती है । दोनों बहुत ही प्रमुख स्थल हैं । आप एक जगह जाकर माता वैष्णो देवी   का दर्शन कीजिए । आप दूसरे वंदे भारत ट्रेन से काशी जाकर बाबा विश्वनाथ का दर्शन कीजिए । जिस प्रकार से काशी विश्वनाथ की रीहैबिलिटेशन की एक योजना चल रही है । काशी विश्वनाथ का एक प्रकार से पुनर्गठन का काम चल रहा है । वहाँ इतना लाजवाब काम हो रहा है, मैं समझता हूँ कि हरेक माननीय सांसद चाहेगा कि वह काशी विश्वनाथ में जाकर दर्शन करें और उनको आशीर्वाद ले । वह यात्रा आप जरूर वंदे भारत ट्रेन से कीजिए।

हमने   44 और वंदे भारत ट्रेन का काम शुरू कर दिया है । उसकी बोगी का आर्डर दे दिया है । आपको शायद याद होगा, प्रधान मंत्री जी ने कहा था कि एक समय आएगा, जब छोटी-मोटी सुविधायें नहीं, हर माननीय सांसद चाहेगा कि वंदे भारत मेरे एरिया में आए । उसी को आगे बढ़ाते हुए, आज 44 वंदे भारत ट्रेन पर हम काम कर रहे हैं । हम उम्मीद करेंगे और उसके रूट्स ऐसे डिजाइन करेंगे कि देश के कोने-कोने तक यह छुये । भारत में बनी हुई वंदे भारत, भारत के इंजीनियर्स और कामगारों द्वारा बनाई गई वंदे भारत, हमारे भारत की फैक्ट्रियों में बनी हुई वंदे भारत देश में क्रांति लाएगी, सभी यात्रियों को सुगम यात्रा देगी, यह हमारी कोशिश है ।   

          आपको एक जानकारी जरूर देना चाहूंगा, क्योंकि पिछली बार जो हमारी डिमांड्स फॉर ग्रांट्स, 2018 में चर्चा हुई थी, यह उसके बाद की एचीवमेंट है । सभी माननीय सांसद जानते हैं कि अनमैन्ड लेवल क्रॉसिंग्स कितनी हानिकारक थीं । इसकी सबको चिंता रहती थी । रेलवे ने ठान लिया कि हम पूरा ब्रॉड गेज सिस्टम, जो मेन नेटवर्क है, इसको अनमैन्ड लेवल क्रॉसिंग से पूरी तरीके से मुक्त कर देंगे । आपको जानकर खुशी होगी कि जनवरी, 2019, आज से 2 साल पहले भारतीय रेल ने ब्रॉड गेज में पूरी तरीके से अनमैन्ड लेवल क्रॉसिंग को खत्म कर दिया । कोई अनमैन्ड लेवल क्रॉसिंग ब्रॉड गेज में नहीं है । कहां 700-800 यूएमसी, यूएमएलसी कनवर्ट होते थे, लेकिन अगर रेलवे की व्यवस्था में एक बार कुछ काम करने को ठान लें, तो कुछ भी कर सकते हैं । अप्रैल, 2018 से जनवरी, 2019 यानी मात्र 10 महीने में 3,479, लगभग साढ़े 3 हजार अनमैन्ड लेवल क्रॉसिंग को 10 महीने में खत्म कर दिया गया या मैन्ड लेवल क्रॉसिंग बना दिया गया या उधर आरओबी, आरयूबी का काम किया गया । हम सेफ्टी की कोशिश में लगातार लगे हुए हैं ।

          सफाई, प्रधान मंत्री मोदी जी ने जिस प्रकार से देश को सुंदर और स्वच्छ बनाने के काम का बीड़ा उठाया और वास्तव में मैं समझता हूं कि अगर 15 अगस्त, 2014 को यह स्वच्छता का काम हाथ में देश ने नहीं लिया होता, तो शायद कोविड की महामारी को हम इतना रोक नहीं पाते । इस स्वच्छता के कारण हाईजीन के कारण भी हम कोविड को सफलतापूर्वक संभाल पाये, देश को संभाल पाए । आज हर ट्रेन में बॉयो-टॉयलेट लगा है, जिससे मल ट्रैक के ऊपर नहीं गिरता है ।

          अध्यक्ष महोदय, मैं खुद हैरान हो गया, जब मैंने रिपोर्ट देखी । एक रिपोर्ट इसके ऊपर बनाई गई कि 4 हजार टन मल रोज रेलवे ट्रैक पर गिरता था । आप इसके बारे में सोचिए । कभी-कभी हमें ध्यान नहीं आता है, आपको रेलवे स्टेशन पर कभी स्मेल नहीं आएगी, आपको ट्रेन में स्मेल नहीं आएगी । आप ट्रैक्स देखिए कि ये कितने साफ हैं । कोई कॉलोनी हो, कोई लोग रहते हों, उसके आस-पास कोई कचरा रेलवे ट्रैक पर डाल दे, तो उसकी भी सफाई करने की हम कोशिश करते हैं । पूरे रेलवे सिस्टम को स्वच्छ बनाना, साफ-सुथरा रखना, इसके लिए दिन और रात रेलवे ने काम किया है।

कई माननीय सांसद वेट लिस्ट की समस्या रेज़ करते थे । वेट लिस्ट कोई हर ट्रेन में नहीं होती थी । कुछ रूट्स पर साधारणत: हर बार वेट लिस्ट होती थी और हम डंडे बड़े खाते थे इस वेट लिस्ट के पीछे, तो हमने भी इसका एक रास्ता निकाला है । जिस-जिस रूट पर हम देखते हैं कि  वेट लिस्ट बहुत बढ़ जाती है तो जो अभी गाड़ी चल रही है, उसी के आगे या पीछे एक स्पेशल ट्रेन चला देते हैं । उसको क्लोन ट्रेन बोलते हैं । अगर समझिए कि मुंबई से गोरखपुर बहुत डिमांड है, लगातार वेट लिस्ट है, तो जो अभी की ट्रेन है, उसके 10 मिनट के आगे-पीछे हम एक और ट्रेन चला देते हैं । उसके स्टॉपेजेज़ कम रखते हैं, क्योंकि अधिकांश लोगों को तो गोरखपुर या उसके आसपास ही जाना है । कम स्टॉपेज से स्पीड बढ़ जाती है, जल्दी से लोग पहुंच जाते हैं । आपको जानकर खुशी होगी कि साधारणत: वेट लिस्ट थोड़ी कम हुई है, थोड़ा कोविड की भी इसमें वजह है ।

जहां-जहां वेटलिस्ट टिकट देखते हैं, वहां एक क्लोन ट्रेन शुरू कर देते हैं । हम कोशिश कर रहे हैं कि वेटलिस्ट नियंत्रण में रहे, जीरो तो कभी नहीं होगी और होनी भी नहीं चाहिए । अगर जीरो हो जाएगी तो मेरे लिए लॉस है यानी सीटें खाली जा रही हैं । जहां-जहां वेटलिस्ट बहुत बढ़ जाती हैं, वहां क्लोन ट्रेन देकर वेट-लिस्ट फ्री करते हैं । वास्तव में आपको जानकर आश्चर्य होगा, अभी तक तीस क्लोन ट्रेनें चला रहे हैं और रेलवे को उसका बहुत अच्छा अनुभव हुआ है ।

          कई माननीय सदस्यों ने बुलेट ट्रेन और हाई स्पीड ट्रेन विषय को उठाया । पहली बुलेट ट्रेन के लिए स्टेट सपोर्ट न मिलने के कारण डिले हो रहा है । मैंने कई बार सदन में भी कहा है कि अगर महाराष्ट्र थोड़ा सा सहयोग कर दें और बांद्रा-कुर्ला में टर्मिनल के लिए जमीन उपलब्ध करा दे तो एक विश्वस्तरीय जापानीज टेक्नोलॉजी की हाई स्पीड बुलेट ट्रेन भारत में आएगी । यह देश की शान बनेगी, उससे सीख कर हम देश के कोने-कोने में हाई स्पीड ट्रेन नेटवर्क बना पाएंगे।

आज गुजरात में लगभग 95 प्रतिशत जमीन अधिग्रहण हो गया है । दमन और द्वीव में भी जमीन अधिग्रहण हो गया है । महाराष्ट्र में 24 प्रतिशत ही जमीन मिली है और स्टार्टिंग पाइंट की जमीन नहीं मिल पा रही है ।

मैं सभी माननीय सांसदों से दरख्वास्त करूंगा, हमने अपने लेवल पर और गवर्नमेंट के लेवल पर इसकी चर्चा की है । अगर हमें वहां जमीन जल्दी मिल जाए और टर्मिनल फेसिलिटी मिल जाए तो हम इस प्रोजेक्ट को महाराष्ट्र में गति दे सकेंगे ।

          फिलहाल गुजरात सेक्शन का काम बहुत दुख के साथ उस सेक्शन पर काम शुरू कर दिया है,  कोई यह आलोचना न करे कि गुजरात होने के कारण काम शुरू किया है बल्कि जमीन उपलब्ध होने के कारण शुरू किया है । महाराष्ट्र जमीन उपलब्ध करा दे तो जल्द से जल्द वहां भी काम शुरू कर सकेंगे । सभी माननीय सांसद जानते हैं कि जहां सपोर्ट मिलेगा, वही नई ट्रेन लगा पाएंगे, नई ट्रैक लगा पाएंगे ।

          एक माननीय सांसद ने प्रश्नकाल में नागपुर-मुंबई हाईस्पीड ट्रेन के बारे में पूछा । हम अभी मुंबई-अहमदाबाद ही नहीं कर पा रहे हैं तो नागपुर-मुंबई में जमीन कहां से मिलेगी । फिर भी, हमने देश भर में अलग-अलग रूट आइडेंटिफाई किए हैं, उसका डीपीआर बन रहा है । उसको निजी इन्वेस्टमेंट के साथ पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप जिसमें राज्य सरकार जमीन दे, रेल टेक्नोलॉजी का सपोर्ट दे और निजी निवेश देश भर में जहां-जहां डिमांड है, उसको सपोर्ट दे । एक डिमांड दिल्ली से बनारस के लिए आई है, एक हाई-स्पीड ट्रेन पूर्वांचल एक्सप्रेस की भी आई है।

माननीय मुख्यमंत्री जी ने आश्वस्त किया है कि वह जमीन और राइट ऑफ वे दिलाएंगे । हम उसका डीपीआर बनाने में लगे हैं, ऐसे सात-आठ प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है । मेरा सभी से अनुरोध है कि राज्य सरकार इसमें सहयोग दे ।

          गांधीनगर में एक स्टेशन री-डेवलपमेंट को अंतर्राष्ट्रीय स्तर का स्टेशन और उसके ऊपर होटल, जो महात्मा मंदिर को सर्व कर सके, जहां अंतर्राष्ट्रीय स्तर की एग्जिबिशन और कन्वेन्शन होते हैं । मैं समझता हूं कि उसका काम पूरा हो गया है, अगले महीने माननीय प्रधानमंत्री जी के कर कमलों द्वारा इसे देश को समर्पित कर पाएंगे ।

भोपाल में हबीबगंज में भी नया स्टेशन का काम लगभग पूरा हो गया है । अयोध्या और गोमतीनगर जैसे देश भर में कई जगहों पर ऐसे ही काम चल रहे हैं । हम तेज गति से स्टेशन रि-डेवलपमेंट पर बल देने वाले हैं । यह मैं आप सभी को आश्वस्त करना चाहता हूं । आप सभी को जानकर  खुशी होगी कि लगभग छह हजार स्टेशनों पर वाई-फाई की सुविधा देश भर में उपलब्ध है । क्या कभी किसी ने कल्पना की थी? 5961 स्टेशनों पर वाई-फाई की सुविधा उपलब्ध है । उसको मॉनिटर किया जाता है, पहला आधा घंटा मुफ्त होता है । मैं एक बार रायपुर गया था । छत्तीसगढ़ के माननीय दीपक भाई और अरुण साहू जी ने भी भाग लिया । अपनी आदत के कारण अचानक रात में स्टेशन इंसपेक्ट करने चला गया । मैं हैरान हो गया कि वहां लगभग पांच - छह सौ बच्चे स्टेशन पर पढ़ाई कर रहे थे ।  मैंने जाकर उनसे बात की तो बोले कि यहां वाईफाई हाई स्पीड है इसलिए यहां आकर पढ़ाई कर रहे हैं । मैं समझता हूं कि बहुत सी ऐसी चीजें जनता से जुड़ी हैं जो जनता को लाभ देती हैं और हमने इसके लिए काम किया है।

          महोदय, जसबीर सिंह गिल जी, अमर सिंह जी और गुरजीत सिंह जी ने गुरु नानक देव जी की 550वीं जयंती के बारे में जिक्र किया था । सुल्‍तानपुर लोदी रेलवे स्टेशन को हमने अपग्रेड किया है । आपको अभी कुछ और सजैस्ट करना है तो मेरे द्वार 24 घंटे खुले हैं । हम चाहते हैं पंजाब में थोड़ा और समर्थन मिल जाए, नए रूट्स के लिए थोड़ी जमीन मिल जाए, थोड़ा और सहयोग मिल जाए तो हम बहुत से प्रोजेक्ट पंजाब में करेंगे । अमृतसर स्टेशन का आरएफपी अभी निकलने ही वाला है । अब हम पंजाब का बजट एलोकेशन देखते हैं, मैं इसलिए जिक्र कर रहा हूं कि किसी को कोई गलतफहमी न हो कि किसकी सरकार किस राज्य में काम करती है, उसके हिसाब से प्रधान मंत्री जी कोई भेदभाव करते हैं । जिस दिन मैं मंत्री बना, उस दिन माननीय प्रधान मंत्री जी का स्पष्ट आदेश था कि अब चुनाव खत्म और उन्होंने यह बात सार्वजनिक रूप से भी कही है कि अब यह सरकार देश के 135 करोड़ लोगों की सरकार है । यह सरकार हर व्यक्ति की चिंता करेगी, हर राज्‍य की चिंता करेगी । गिल साहब, पंजाब में वर्ष 2009 से 2014 के बीच सालाना 225 करोड़ रुपये का निवेश अलग-अलग रेलवे प्रोजेक्ट्स में होता था । आपको जानकर खुशी होगी कि हम वर्ष 2021-22 के बजट में 2262 करोड़ रुपये यानी दस गुना निवेश पंजाब में करने जा रहे हैं । यही स्थिति हर प्रदेश की है । छत्तीसगढ़ का आंकड़ा भी ऐसा ही है । मेरा मानना है कि हमें जिस प्रदेश ने सहयोग दिया है यह सरकार 24 घंटे उसके लिए तत्पर रहेगी । मेरे पास छत्तीसगढ़ के भी आंकड़े हैं, मैं यह इसलिए लाया क्योंकि आप बहुत उत्तेजित हो रहे थे कि छत्तीसगढ़ में काम नहीं हो रहा है । बहन तो लगभग जवाब देना चाह रही थी, मैंने उनको रोका और कहा कि रेल मंत्री को जवाब देने दो ।

वर्ष 2009-14 के बीच छत्तीसगढ़ में 311 करोड़ रुपये चलते हुए प्रोजेक्ट्स में सालाना निवेश होता था । आप वर्ष 2021-22 के प्रोजेक्ट में अंदाजा लगाइए । छत्तीसगढ़ में हमारी राज्य सरकार नहीं है, पंजाब में हमारी राज्य सरकार नहीं है । पंजाब में तो हमारे किसान भाई-बहनो को हमारे खिलाफ भ्रमित कर दिया गया है । एकदम बेबुनियाद गलतफहमियों के आधार पर किसानों को भ्रमित करने का काम किया गया, लेकिन फिर भी हमने कभी भेदभाव नहीं किया । छत्तीसगढ़ में 311 करोड़ रुपये का निवेश वर्ष 2009 से 2014 में हुआ था और इस वर्ष 3650 करोड़ रुपये यानी करीब 12 गुना निवेश होने जा रहा है।

          आपको जानकारी देकर मुझे बहुत आनंद आता है कि वर्ष 2014 में पूरे देश में भारतीय रेल में मात्र 2467 एलएचबी कोच थे यानी स्विस और जर्मनी टेक्नोलॉजी से बने डिजाइन हैं, जो भारत में लगभग 50 वर्ष पहले आए थे । एलएचबी कोचेस भारतीय रेल कई वर्ष पहले बना सकती थी, लेकिन सिर्फ 2500 एलएचबी कोचेस थे, ये ज्यादा सुरक्षा देते हैं । आपने ट्रेन में देखा होगा, पुराना आईसीएफ डिजाइन यानी इंटीग्रेटेड कोच फैक्ट्री जो ब्रिटिश छोड़ गए थे और एक जर्मन स्विस डिजाइन एलएचबी है । अब तो वंदे भारत भारत का डिजाइन है, देश आगे तेज गति से बढ़ेगा।

एलएचबी कोच हम बना सकते थे, लेकिन बनाया नहीं  । वर्ष 2014 में एलएचबी कोच की संख्या 2500 थी, लेकिन आज के दिन 22500 एलएचबी कोचेज देश में सेवा दे रही है । इससे सुरक्षा और सुविधा बढ़ी है । अब ट्रेन ट्रेवेल में जर्क्स नहीं आते हैं । अब ट्रेन ट्रेवल स्मूथ हो गया है । ट्रेन की स्पीड बढ़ गई है और मेंटेनेंस टाइम भी कम हो गया है । इसके कारण अब ज्यादा ट्रेनें चल पा रही हैं । जनवरी, 2018 से हमने पुराने डिजाइन की आईसीएफ कोचेज को बनाना ही बंद कर दिया । उसको पूरी तरह से इतिहास के पन्नों में डाल दिया । अब जो भी कोच बनती है, वह एलएचबी बनती है । इससे आप सभी का सफर सुगम और सुरक्षित होगा ।

          इसी प्रकार, देश में विद्युतीकरण कार्य को तेज गति देकर देश में पर्यावरण को सुधारने, डीजल-पेट्रोल पर खर्च कम करने, स्पीड बढाने, साथ ही साथ फॉरेन एक्सचेंज बचाने, क्योंकि क्रूड आयॅल को आयात करना पड़ता है, के प्रयास किये जा रहे हैं । एक होलिस्टिक और कांप्रीहेंसिव सोच के साथ पूरी भारतीय रेल को दिसम्बर, 2023 तक विद्युतीकरण करने का काम तेज गति से चल रहा है । आपको जानकर खुशी होगी कि पिछले दिनों वर्ष 2014 के पहले सलाना 650 किलो मीटर विद्युतीकरण होता था । इस वर्ष 5500 से 6000 किलोमीटर विद्युतीकरण होने जा रहा है । पिछले वर्ष करीब 4000 किलो मीटर तक विद्युतीकरण का काम हुआ था । कोविड आ जाने के कारण अंत तक हमें कई सारे प्रोजेक्ट्स पर अप्रूवल नहीं मिले थे । विद्युतीकरण पर जो निवेश है वह कैसे बढ़ा? पहले वर्ष 2004 से वर्ष 2009 के बीच हर वर्ष 350 करोड़ विद्युतीकरण पर खर्च होता था । वर्ष 2009 से वर्ष 2014 के बीच 900 करोड़ तथा वर्ष 2014 से वर्ष 2019 के बीच 3300 करोड़ प्रतिवर्ष खर्च हुआ । इस वर्ष के बजट में विद्युतीकरण के लिए 7500 करोड़ का प्रावधान किया गया है । यानी, वर्ष 2009 से वर्ष 2014 की तुलना में लगभग दस गुना ज्यादा है । जब विद्युतीकरण होगा, तो उसका लाभ हमारे देश को होगा, पर्यावरण को होगा, विदेशी मुद्रा बचेगी और सफर सुगम होगा । मेरा मानना है कि ये सब चीजें आज देश की जनता देख रही है । देश की जनता देख रही है कि रेलवे के माध्यम से कैसे नई टेक्नोलॉजी आज हमारी सेवा में आ रही है । कैसे आईआरसीटीसी वेबसाइट को और सरल कर दिया गया । अब फ्रेट बुकिंग पूरी तरह से ऑनलाइन है । मैंने मजाक में एक दिन कहा था कि अब किसी को पार्सल बुक करने या मालगाड़ी में सामान बुक करने के लिए स्टेशन नहीं आना पड़ेगा, फिर मेरे अधिकारी ने मुझसे कहा कि सर, समान देने तो आना ही पड़ेगा । आपको मात्र सामान देने के लिए आना पड़ेगा, बाकी, बुकिंग, पेमेंट या उससे संबंधित जानकारी सब चीजें टेक्नोलॉजी के सहारे आपको ऑनलाइन मिल जाएंगी । आज आपको जानकर खुशी होगी कि हर ट्रेन जो रेलवे में चलती है, चाहे पैसेंजर ट्रेन हो या फ्रेट ट्रेन हो, इस वक्त जैसे मैं यहां खड़ा बोल रहा हूं, इस वक्त वह ट्रेन कहां है, वह आप रेलव सिस्टम के माध्यम से देख सकते हैं । आज इस वक्त कोलकता जाने वाली राजधानी ट्रेन अगर ट्रैक पर है, तो इस समय वह कहां है, वह आप देख सकते हैं । पंक्च्युएलिटी पर विशेष मॉनिटरिंग होती है । मेरे फोन में रोज सुबह हर मेल एक्सप्रेस ट्रेन की रिपोर्ट आती है । किस समय वह शुरू हुई, किस समय पहुंची, जो नहीं पहुंची, उसका हर ट्रेन का कारण, अगर, फॉग को छोड़ दें, क्योंकि कुछ दिनों तक फॉग रहा, तो साधारणत: आज के दिन 95 प्रतिशत ट्रेनें या तो समय से पहले पहुंचती हैं या समय पर पहुंचती हैं । कुछ माननीय सांसद तो कम्प्लेंट कर रहे थे कि समय से पहले पहुंचती है, तो नींद खराब कर देती है ।

          मैं एक बात स्वीकार करना चाहूंगा कि कैसे मैं भी एक गलत रास्ते पर चल रहा था और प्रधान मंत्री जी ने मुझे सही रास्ता दिखाया । जब मैं नया-नया रेल मंत्री बना था, तो मैं बड़ा आकर्षित हुआ कि विदेश में, खास तौर से यूरोप में सिग्नलिंग सिस्टम बहुत अच्छा है । उससे सुरक्षा बढ़ेगी, हमारा पूरा सिस्टम और अच्छा हो जाएगा । भारतीय रेल में तो अभी तक कई जगहों पर बाबा आदम के जमाने का सिग्नलिंग सिस्टम है । मैंने पूरा प्लान वगैरह बनाया कि यूरोपियन सिस्टम को भारत में लाया जाए । लेकिन माननीय प्रधान मंत्री मोदी जी ने मेरा हाथ पकड़ा और कहा कि हमें आत्मनिर्भर भारत बनाना है । हम विदेशी टेक्नोलॉजी पर निर्भर नहीं होंगे । उन्होंने जिस प्रकार से मेरा हौसला बढ़ाया, आज रेलवे के इंजीनियर्स, हमारे निजी क्षेत्र की तीन कंपनियां और रेलवे की आरडीएसओ और इंजीनियर्स मिलकर भारत का अपना खुद का सिग्नलिंग सिस्टम डेवलेप कर रहे हैं, जिससे भारत का सिस्टम भारत के रेल को आत्मनिर्भर बनाएगा । वह भारतीय रेल को सुरक्षित बनाएगा । फिर हम पूरी दुनिया में जाकर अपना रेलवे सिग्नलिंग सिस्टम बेचने की क्षमता रखेंगे।

          वैसे तो कई सारे अवॉर्ड्स मिले, कई सारे और काम हुए हैं । रेलवे स्टेशनों को सोलराइज़ किया गया है । हमने आज हजार रेलवे स्टेशनों के ऊपर सोलर एनर्जी प्लांट्स लगा दिए हैं । करीब-करीब रेलवे की 400 बिल्डिंग्स पर सोलर एनर्जी प्लांट्स लगा दिए हैं । ऐसे करते-करते हमारा यह प्लान है कि पूरे देश भर में रेलवे के पास कई सारी जमीनें पड़ी हुई हैं, वैसे तो उन जमीनों को सुरक्षित रखना भी बड़ा मुश्किल है । लोग उस पर एन्क्रोचमेंट कर देते हैं । हमने एक प्लान बनाया है कि वर्ष 2023 तक विद्युतीकरण हो जाएगा । वर्ष 2030 तक भारत विश्व का पहला इतना बड़ा रेलवे होगा, जो शत-प्रतिशत विद्युतीकरण कर लेगा । अमेरिका, चाइना किसी ने नहीं किया है । भारत सबसे पहला ऐसा रेलवे होगा । ऐसे ही वर्ष 2030 तक भारत विश्व का पहला रेलवे होगा, जो शत-प्रतिशत नवीकरणीय ऊर्जा से अपनी रेल व्यवस्था चलाएगा, जिसको‘नेट जीरो रेलवे’ कहते हैं । हमारी वजह से पर्यावरण को नुकसान नहीं होने देंगे । यह हमारी प्रतिबद्धता है, यह हमारा संकल्प है ।

मैंने थोड़ा-बहुत जिक्र किया है कि पहले के जमाने में रेलवे एक बड़े ही डिपार्टमेंटल काम के रूप में चलती थी । यानी अगर बजट में एक आरओबी भी स्वीकृत हुआ है, तो साल, डेढ़ साल या दो साल तक उसका डिजाइन बन रहा है । आपस में कभी सिविल वालों ने कोई डिजाइन बनाया है, उसको इलेक्ट्रिकल वालों ने अपोज़ किया । इलेक्ट्रिकल ने परिवर्तन किया, तो सिग्नलिंग के पास प्रॉब्लम हो गई । पूरे समय रेलवे में एक इंटर डिपार्टमेंटल प्रॉब्लम्स देखने को मिलती थी और यह व्यवस्था 70 साल पुरानी थी । जो भारत का रेलवे है, जब पाकिस्तान से अलग हुआ, तो सन् 1951 में रेलवे बोर्ड बना और जोनल रेलवेज़ बने थे । आस्ते-आस्ते कई सारी सर्विसेज़ आईं । ट्रैफिक सर्विस, सिग्नलिंग सिर्विस, इलेक्टिकल और मैकेनिकल सर्विस । रेलवे को उसका लाभ हुआ । उन्होंने बहुत अच्छा काम किया । रेलवे का डेवलेपमेंट हुआ । लेकिन अगर हमें विश्व स्तरीय रेलवे बनानी है, तो यह जरूरी था कि रेलवे को एकजुट होकर काम करना पड़ेगा । एक साथ, एक सोच, एक रेलवे काम करेगी।

मुझे आप सभी को बताते हुए खुशी हो रही है कि अब पूरे रेलवे बोर्ड का भी और पूरी रेल व्यवस्था की एक रीवैम्पिंग की एक्सर्साइज़ चल रही है, जिससे रेलवे में एक सर्विस होगी, इंडियन रेलवे मैनेजमेंट सर्विस (आईआरएमएस) । पूरा रेलवे विभाग एक साथ सोचेगा, एक जैसा सोचेगा, एक ही दृष्टिकोण रखेगा कि कैसे देश की सेवा करें, कैसे देश के यात्रियों की सेवा करें ।

 

माननीय प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी जी का जो सपना है कि भारतीय रेल देश के विकास का इंजन बने । भारत के उज्ज्वल भविष्य का एक देश बने । एक छोटा सिपाही, एक गिलहरी की तरह उसमें अपना योगदान दे । उस कमिटमेंट को, उस काम को पूरा करने के लिए हम सब अति उत्साहित हैं और उस उत्साह के साथ रेलवे को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए संकल्पित हैं, ऐसे विश्वास के साथ हम आगे बढ़ रहे हैं । आपके स्वयं के जो इश्यूज़ हैं, मेरे आफिस में आपको उन सभी के जवाब मिल जाएंगे । इसलिए मैंने बड़ी सोच के साथ अपनी बात को रखा है । आपको मेरे आफिस से हर विषय की ऊपर जानकारी मिल जाएगी या मैं आपको पत्र के माध्यम से बता दूंगा । आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।

श्री गजानन कीर्तिकर (मुम्बई उत्तर पश्चिम): माननीय मंत्री जी स्वयं मुम्बई उपनगरीय रेल का दर्द जानते हैं । वहां पर डेली60 से 70 लाख प्रवासी यातायात करते हैं । वहां की समस्या बहुत कठिन है । वहां डेढ़ करोड़ की आबादी है । फ्लोटिंग आबादी एक करोड़ की है । मैं मंत्री जी से उसके लिए प्रार्थना करता हूँ कि उसका भी आप जिक्र करें ।

श्री गुरजीत सिंह औजला (अमृतसर): स्पीकर साहब, मैं आपके माध्यम से रेलवे मंत्री जी का धन्यवाद करना चाहता हूँ कि उन्होंने अमृतसर को इंटरनेशनल रेलवे स्टेशन बनाने की घोषणा की है । इसकी वर्ष 2019 में पहली मीटिंग हुई थी । उसमें जब डीपीआर बनी थी तो कुछ त्रुटियां थीं, लेकिन उसके बाद आज इन्होंने घोषणा की है तो मैं माननीय मंत्री जी से यही पूछना चाहता हूँ कि यह काम कब तक पूरा होगा? मैं आरओबी और अंडरपास बनवाने के लिए भी धन्यवाद देना चाहता हूँ । माननीय मंत्री जी, आप जो अंतर्राष्ट्रीय रेलवे स्टेशन बना रहे हैं, उसका काम कब तक पूरा होगा?

डॉ. अमर सिंह (फतेहगढ़ साहिब): सर, मैं रेलवे मिनिस्टर साहब से यह कहना चाहता हूँ कि बहुत सारी धार्मिक ट्रेन्स की शुरूआत होना एक बधाई वाली बात है । मैंने भी हमारी दो रिलीजियस ट्रेन्स सचखंड एक्सप्रेस और हेमकुंटसाहिब एक्सप्रेस मेंशन की थी । साहब, उनका जो डायवर्जन हुआ है, उसको आप रेस्टोर कर दीजिए, क्योंकि हमारे लोगों को वह अच्छा नहीं लग रहा है ।  

 

श्री नामा नागेश्वर राव (खम्माम): सर, मंत्री साहब ने काफी कुछ क्लेरिफिकेशन दिया है । ये पूरे देश में रेलवे लाइन को किस तरह से आगे ले जा रहे हैं, यह बहुत अच्छी बात है । हमारी एक रिक्वेस्ट है । जब आंध्रा और तेलंगाना स्टेट डिवाइड हो गए थे, बिल पास हुआ था, वह एक्ट बन गया था और दोनों स्टेट्स डिवाइड हो गए थे । उस एक्ट में काजीपेट कोच फैक्ट्री के बारे में क्लियर कट था । मैंने उसके बारे में आपसे रिक्वेस्ट भी की थी । हम आपके रिप्लाई का वेट कर रहे थे । हमारे और भी पॉइंट्स हैं, लेकिन हम उनको नहीं उठाना चाहते हैं, लेकिन आप हमें काजीपेट कोच फैक्ट्री, जो एक्ट में है, उसे जरूर दे दें ।

श्री प्रदीप कुमारचौधरी (कैराना): माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा विषय यह था कि मेरा क्षेत्र बाढ़ग्रस्त   क्षेत्र पड़ता है और वहां पर जो अंडरपास बनाए गए हैं या बनाए जा रहे हैं, उन्हें रोका जाए । मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से आग्रह करना चाहता हूँ कि वहां पर जितने भी अंडरपास बनाने का काम किया जा रहा है, उन अंडरपासों का काम रोककर वहां पर आरओबी पुल बनाया जाए।

 

श्री अनुभव मोहंती (केन्द्रपाड़ा): सर, कल आपने हमको इस विषय पर बोलने के लिए मौका दिया था । आज माननीय मंत्री जी ने भी बहुत अच्छा जवाब रखा है । मैं उनको धन्यवाद भी देना चाहूंगा कि वे हर सदस्य के सवालों का जवाब अपने ऑफिस में लिखित रूप में देने वाले हैं, पर अच्छा होता है कि हमने उड़ीसा की जो डिमाण्ड रखी थी, अगर उसका मंत्री जी सदन में थोड़ा सा जिक्र करते तो बड़ी मेहरबानी होती।

DR. SHASHI THAROOR (THIRUVANANTHAPURAM): Thank you, Mr. Speaker. Thank you, Mr. Minister, for your general response on Kerala, which is understood, but we had requested earlier to the Minister specifically for religious tourism a train, the Velankanni Express through Trivandrum. Secondly, as regards the Nemom Coaching Terminal, the only problem is that the Union Budget is not giving money to fund the Detailed Project Report for a project which had been approved many years ago. I would urge the Minister to expedite this issue. Thank you, Mr. Speaker.

श्री राजीवरंजन सिंह ‘ललन’ (मुंगेर): अध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी ने बहुत विस्तार से जवाब दिया है । हम सिर्फ एक स्पष्टीकरण चाहते हैं और माननीय मंत्री जी भी इससे अवगत हैं । जब नीति आयोग की बैठक हुई थी या उसके पहले भी प्रधान मंत्री जी के साथ बिहार के मुख्य मंत्री जी की किसी उद्घाटन समारोह में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग मीटिंग हो रही थी । उसमें बिहार के मुख्य मंत्री जी ने इस बात को उठाया था । बिहार के जमालपुर में एक बहुत पुराना डीजल लोकोमोटिव शेड है, उसमें सैकड़ों बीघा एकड़ जमीन उपलब्ध है । आज उसको धीरे-धीरे वाइंडअप किया जा रहा है । हम माननीय मंत्री जी से यह आग्रह करेंगे कि उस डीजल लोकोमोटिव शेड को आप इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव शेड में परिवर्तित कीजिए ताकि आपकी वहां पर जो आधारभूत संरचना है, उसका प्रॉपर उपयोग हो सके।

श्री हनुमान बेनीवाल (नागौर): मंत्री महोदय ने राजस्थान का नाम ही नहीं लिया । राजस्थान ने आपको 25 एमपी दिए हैं । …(व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष: डॉ. सत्यपाल सिंह जी।

श्री हनुमान बेनीवाल: सर, एक मिनट समय दीजिए।…(व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष: आप तो बोल चुके हैं।

श्री हनुमान बेनीवाल: सर, मेरी मांग है कि फलौदी-नागौर और मेड़ता-पुष्कर और सीकर-नोखा रेललाइनों को स्वीकृति प्रदान की जाए।…(व्यवधान)

डॉ. सत्यपाल सिंह (बागपत): सर, मैं माननीय मंत्री जी का ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं कि आप ही के विभाग में आदरणीय सिन्हा जी जब रेलवे राज्य मंत्री थे, तो उन्होंने 25 दिसम्बर, 2016 को दिल्ली से लेकर सहारनपुर तक की रेलवे लाइन को डबल करने के लिए भूमिपूजन किया था, लेकिन उसका काम बन्द कर दिया गया है । यह काम पूरा कराया जाना चाहिए।…(व्यवधान)

डॉ. शफीकुर्रहमान बर्क (सम्भल): सर, मेरी सिर्फ एक गुज़ारिश है कि सम्भल रेलवे से बिल्कुल कटा हुआ है, हमें वाया गजरौला दिल्ली से जोड़ दिया जाए और हम प्रयागराज से वाया चंदौसी जुड़ जाएंगे, जो सम्भल की ही एक तहसील है । अगर हमें इन दो जगहों से जोड़ दिया जाए । सम्भल तिज़ारत की एक बहुत बड़ी मण्डी है । …(व्यवधान)

श्री दीपक बैज (बस्तर): अध्यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी से फिर से निवेदन कर रहा हूं कि बस्तर में जो पांच ट्रेन्स बन्द थीं, उनमें से एक ट्रेन इन्होंने चलवाई है । इसके लिए मैंने इनको कल धन्यवाद भी दिया था । जो चार ट्रेन्स बन्द हैं, कृपया उनको भी चला दें, यही निवेदन मैं माननीय मंत्री जी से करता हूं।

श्री जसबीरसिंह गिल (खडूर साहिब): सर, मैं आपके माध्यम से रेल मंत्री जी को धन्यवाद देना चाहता हूं कि उन्होंने230 करोड़ रुपये अमृतसर रेलवे स्टेशन के लिए दिए हैं । सबसे बड़ी बात, जो मेरे नहीं, लगभग सारे पंजाब के लोगों के दिमाग में एक बात थी, जिसे इन्होंने निकालने की कोशिश की कि हम पंजाब के साथ भेदभाव नहीं करेंगे । यह सबसे जरूरी बात थी ।

        मैं आपके माध्यम से गुज़ारिश करता हूं कि …(व्यवधान)

श्री सुशीलकुमार सिंह (औरंगाबाद):  मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से बेहटा-औरंगाबाद रेल लाइन का निर्माण कार्य प्रारम्भ कराने और रफीगंज स्टेशन से पश्चिम में एक आरओबी या आरयूबी बनाने के लिए निवेदन करूंगा।

श्री गणेश सिंह (सतना):  सर, मंत्री जी ने मध्य प्रदेश में जो प्रोजेक्ट्स चल रहे हैं, उनकी प्रशंसा की है, इसके लिए मैं उनको धन्यवाद देता हूं । ललितपुर-सिंगरौली रेल लाइन, जिसके बारे में कल रीती पाठक जी ने अपने भाषण में बोला था, उसका जिक्र माननीय मंत्री जी ने नहीं किया है, मैं चाहूंगा कि उसमें जो समस्याएं हैं, उनको दूर कराया जाए । मैहर में बहुत वेजिटेबल्स होती हैं, वहां पर किसान रेल का स्टॉपेज किया जाए।

 

श्री सुनील कुमार सिंह (चतरा): माननीय अध्यक्ष जी, मैं आपके माध्यम से माननीय रेल मंत्री जी का ध्यान झारखण्ड की ओर आकर्षित करना चाहूंगा, क्योंकि अगर झारखण्ड की परियोजनाओं के बारे में भी माननीय मंत्री जी जानकारी देते तो अच्छा होता।

श्रीमती दर्शनाविक्रम जरदोश (सूरत): सर, हमारे यहां नए रेलवे स्टेशन के टेंडर का कोई उल्लेख नहीं हुआ है । मैं माननीय मंत्री जी को धन्यवाद दूंगी कि कल जो डिमाण्ड आई थी, उसमें उन्होंने दूरंतो ट्रेन की शुरुआत करवा दी है।

श्रीमती रीती पाठक (सीधी): अध्यक्ष महोदय, वर्ष 2014 में माननीय प्रधानमंत्री जी ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए मध्य प्रदेश के सभी अधिकारियों के साथ व्यक्तिगत समीक्षा बैठक की थी कि वर्ष 2022 तक हमारी ललितपुर-सिंगरौली रेलवे लाइन कम्प्लीट हो जाएगी । मैं मंत्री जी से आग्रह करना चाहती हूं कि इसकी लागत लगातार बढ़ती जा रही है, इसलिए इसमें विशेष  रुचि लेने की कृपा करें।

श्री राजवीर सिंह (राजू भैय्या) (एटा): माननीय रेल मंत्री जी ने जो कुछ कहा है, वह बहुत सराहनीय है और पूरा देश, पक्ष और विपक्ष भी उसकी सराहना कर रहे हैं । माननीय मंत्री जी से मेरी एक छोटी सी मांग है । मैं वर्ष 2014 से अब तक मेरी एक ही मांग रही है, अगर माननीय मंत्री जी, एटा से कासगंज की रेलवे लाइन कैसे भी करके पूरी करवा दें तो आपकी बड़ी मेहरबानी होगी ।

सुश्री सुनीता दुग्गल (सिरसा): अध्यक्ष महोदय, पक्ष और विपक्ष जिस मुक्त कंठ से रेल मंत्री जी की प्रशंसा कर रहे हैं, उसके लिए मैं मंत्री जी को बधाई देना चाहती हूं । मैं कहना चाहती हूं कि नांदेड़ साहब, हम 550वां साल मना रहे हैं, तो नांदेड़ साहब का नरवाना में स्टॉपेज हो जाए । …(व्यवधान) इसके साथ ही अगर आप सिरसा में किसान रेल का स्टॉपेज करा देंगे तो अच्छा होगा । धन्यवाद।

श्री संतोषपान्डेय (राजनंदगाँव): अध्यक्ष महोदय, हमारे यहां राजधानी रायपुर से राजिम में एक छोटी रेल चलती थी, वह रेल भी बन्द हो गई, उसकी पटरियां भी उखाड़ ली गईं । मेरा केवल इतना ही निवेदन है कि बमलेश्वरी-डोंगरगढ़ में डोंगरगढ़ के लिए टॉय ट्रेन के लिए उसे दे दें । माननीय मंत्री जी ने आश्वासन भी दिया था । आपकी बड़ी कृपा होगी।

 

श्री अजय मिश्र टेनी (खीरी): अध्यक्ष जी, मैं आपके माध्यम से मंत्री जी से अनुरोध करना चाहता हूं कि मेरे लखीमपुर लोक सभा क्षेत्र में गोला-शाहजहांपुर से होते हुए फर्रुखाबाद तक नई रेल लाइन बनने का प्रोजेक्ट पहले प्रारम्भ हुआ था, उस पर बातचीत हुई थी, उसे बनाने की कृपा करें ।

श्री रामशिरोमणि वर्मा (श्रावस्ती) : माननीय अध्यक्ष जी, हमारे लोक सभा क्षेत्र श्रावस्ती में बहराइच, खलीलाबाद वाया भिनगा, श्रावस्ती, बलरामपुर, उतरौला, डुमरियागंज, मेहंधावल इत्यादि ये बहुत पुराने प्रोजेक्ट्स हैं । इसके बारे में माननीय मंत्री जी ने क्या किया है?

SHRIMATI CHINTA ANURADHA (AMALAPURAM): I come from Amalapuram of Andhra Pradesh where we do not have a railway line till today. As ours is a newly bifurcated State, we are lacking funds. I would request the hon. Minister to put special interest on this project.

श्री जनार्दन सिंह सीग्रीवाल (महाराजगंज) : अध्यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी का ध्यान आकृष्ट करना चाहता हूं कि डिब्रूगढ़ राजधानी, जो पटना से होकर डेली जाती है, उसको छपरा से बलिया होकर या सिवान गोरखपुर होकर डेली चलाने का काम करें । इससे बहुत सांसदों और अन्य यात्रियों को आने–जाने में सुविधा होगी ।  

श्री जगदम्बिका पाल (डुमरियागंज) : माननीय मंत्री जी ने समग्र विकास के लिए काम किया है । नेपाल का गेटवे ऑफ इण्डिया बढ़नी है, जहां पर आपने एक वाशिंग पिट दिया है । उसको दो साल से ऊपर हो गए हैं, लेकिन वह कम्प्लीट नहीं हुआ है । एक मल्टीफंक्शनल परपज हॉल बनवाया है, उसको इनॉगरेट करा दीजिए।

श्री संगम लाल गुप्ता (प्रतापगढ़) : माननीय अध्यक्ष जी, मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से प्रतापगढ़ लोक सभा में जो चौक घण्टाघर के पास जेल रोड क्रॉसिंग है, वहां अण्डरपास है, जिसकी तीन लाख टीओबी है । मैं माननीय मंत्री जी से मांग करता हूं कि तीन लाख टीओबी होते हुए तीन-तीन, चार-चार घण्टे जाम रहता है, वह अण्डरपास बनवाया जाए।

श्री तापिरगाव (अरुणाचल पूर्व) : ऑनरेबल स्पीकर सर, ऑनरेबल रेलवे मिनिस्टर अरुणाचल प्रदेश कहां है, यह जानते या नहीं जानते हैं, मैं यह पूछना चाहता हूं।

DR. G. RANJITH REDDY (CHEVELLA): Sir, in Tandur of Telangana, one RUB is closed. वहां लोग चार किलोमीटर एनिमल ग्रेजिंग के लिए ले जाते हैं । If it can be reopened, we will be thankful to you.

श्री गिरीश चन्द्र (नगीना) : सर, माननीय अध्यक्ष जी, मेरी मांग है कि नगीना से दिल्ली के लिए एक ट्रेन चलवाई जाए ।

माननीय अध्यक्ष : हमारे पास रिकॉर्ड है । हम उनको बनाकर दे देंगे।

श्री सुभाष चन्द्र बहेड़िया (भीलवाड़ा) : माननीय अध्यक्ष महोदय, आज से आठ साल पहले गुलाबपुरा में एक रेल मेमू कोच कारखाने का शिलान्यास हुआ था, उसकी क्या स्थिति है? अगर मेमू कोच का नहीं बनता है तो दूसरा कोई कारखाना हो । वहां पर सारी फैसिलिटी है तो कारखाना लगाया जाए ।

 

श्री सुधीर गुप्ता (मन्दसौर) : यह अवसर तो बधाई और धन्यवाद देने का है, क्योंकि पूरे देश में रेलवे में एक क्रांति हुई है । मेरे अपने संसदीय क्षेत्र में तो लगभग 45 अण्डर ब्रिज, ओवर ब्रिज बनाए हैं, इसलिए बधाई दूंगा । हमारी एक मांग है कि नीमच-रतलाम, जो दोहरीकरण …(व्यवधान)

श्री बिद्युत बरन महतो (जमशेदपुर) : अध्यक्ष महोदय, झारखण्ड राज्य लगभग 40 प्रतिशत रेवेन्यू देता है, लेकिन झारखण्ड के बारे में कोई जिक्र नहीं किया गया है । माननीय मंत्री जी से आग्रह करते हैं कि झारखण्ड के बारे में कुछ बोलें ।

श्रीमती रमादेवी (शिवहर) : माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं यह जानना चाहती हूं कि मैं जिस जगह से सांसद हूं, वहां अभी तक रेल नहीं है, वह जिला रेल के बिना अधूरा है । शिवहर जिला, जहां से मैं सांसद हूं, वहां पर लोग रेल लाइन देखने के लिए तरस रहे हैं । मैं मंत्री महोदय से आग्रह करती हूं कि वहां रेल लाइन बनवाने का काम करें ।

डॉ. एस. टी. हसन (मुरादाबाद) : सर, मैं पार्लियामेंट में तीसरी बार डिमाण्ड कर रहा हूं ‍कि मुरादाबाद ब्रास सिटी से मुंबई की डायरेक्ट ट्रेन चलाई जाए । मुझे यह जवाब मिला कि वहां बहुत रश है, लेकिन वह दूसरे कासगंज के रूट से जा सकती है । मेरी रिक्वेस्ट है कि यह बहुत इम्पोर्टेंट ट्रेन है । यह मुरादाबाद की पुरानी डिमाण्ड है ।     

श्री सी.पी. जोशी (चित्तौड़गढ़) : अध्यक्ष महोदय, धन्यवाद । चित्तौड़गढ़ संसदीय क्षेत्र में प्रतापगढ जिला टीएसपी में है । मंदसौर से प्रतापगढ़ और प्रतापगढ़ से बांसवाड़ा सर्वे तो आपने दे दिया, अगर वहां नई रेलवे लाइन आ जाएगी तो आदिवासी क्षेत्र में लोगों को एक बहुत बड़ा लाभ मिलेगा ।

डॉ. संघमित्रा मौर्य (बदायूं) : अध्यक्ष महोदय, धन्यवाद । मैं आपके माध्यम से पहले तो माननीय मंत्री जी को धन्यवाद देना चाहूंगी कि उन्होंने 11 गुना बजट दिया । मैं मंत्री जी का ध्यान अपने लोक सभा क्षेत्र बंदायू की ओर आकृष्ट करना चाहूंगी कि यहां आज तक कोई भी ट्रेन दिल्ली और लखनऊ को नहीं जोड़ रही है । वहां पर रेलवे ट्रेक भी है, स्टेशन भी है । सिर्फ समय का थोड़ा सा परिवर्तन करके, यदि बरेली के बजाय बदायूं से ट्रेन चला दी जाए तो बदायूं की जनता भी दिल्ली और लखनऊ आसानी से जा सकेगी । मैं यही निवेदन करना चाहूंगी कि बदायूं की जनता को भी रेल से जोड़ने का कष्ट किया जाए।

श्रीमती जसकौर मीना (दौसा) : अध्यक्ष जी, धन्यवाद । दौसा-गंगापुर रेलवे लाइन का बीस साल बाद बहुत तेजी से काम शुरू कर दिया है । मैं चाहती हूं कि गंगापुर से धौलपुर जोड़कर, करौली, कैला देवी और आज लोक सभा में लाल पत्थर लग रहा है, इन सब की कद्र कर, राम मन्दिर में भी यह पत्थर लग रहा है तो इसका विस्तार किया जाए ।

श्री परबतभाईसवाभाई पटेल (बनासकांठा): अध्यक्ष महोदय, मैं जिस क्षेत्र से चुनकर आता हूं, वह बनासकांठा क्षेत्र में लाखणी, थराद, वाव और सुईगांव तहसील जो रेल सेवा से वचित है । वहां पर नई रेल सुविधा शुरू की जाए । मेरी मांग हैकि धानेरा से बीकानेर-दादर भगत की कोठी-बांद्रा एक्सप्रेस जो धनेरा से पहले बंद थी, मेरे निर्वाचन क्षेत्र धनेरा के ठहराव को फिर से शुरू किया जाए।

कुँवर पुष्पेन्द्रसिंह चन्देल (हमीरपुर): माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी से मेरी कई बार बात हुई है । हमारे महोबा से चरखारी, राठ उरई होते हुए, रेलवे लाइन वर्ष2002 के बजट में ली गई थी । माननीय मंत्री जी से इसके लिए कई बार बात हुई है, मैं इसके लिए माननीय मंत्री जी से आग्रह करता हूं । मैं रेलवे के लिए दो मांग करता आ रहा हूं । मैंने यह मांग पिछली बार भी की थी । एक महोबा से कबरई, मौदहा, हमीरपुर होते हुए, राजधानी को जोड़ने वाली, लखनऊ जाने वाली ट्रेन की आवश्यकता है ।

श्री भोला सिंह (बुलंदशहर): अध्यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी से आग्रह करना चाहूंगा कि मेरे लोक सभा क्षेत्र बुलंदशहर में बरेली-मुंबई-दादर एक ट्रेन चलती थी, उसका वहां स्टॉपेज था, लेकिन कोरोना के कारण वह बंद हो गया है । मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से आग्रह करना चाहता हूं कि उसको पुन: शुरू करा दिया जाए ।

डॉ. मोहम्मद जावेद (किशनगंज): अध्यक्ष महोदय, किशनगंज से पटना के बीच में शताब्दी ट्रेन चलाई जाए।

SHRIMATI SUMALATHA AMBAREESH (MANDYA): Sir, the Hejjala-Chamarajanagar rail line in Karnataka which was proposed in the Railway Budget about two and a half decades ago is yet to see the light of the day. Since it is the hon. Minister’s party which is governing both at the Centre and the State, I am sure cooperation would not be a problem here. I would urge him to consider this as it would benefit four Districts and be of great benefit to the residents of this area.

 

डॉ. ढालसिंह बिसेन (बालाघाट): अध्यक्ष महोदय, मेरी केवल एक ही मांग है कि मेरे बालाघाट के कटंगी तिरोड़ी मार्ग में जब जमीन का अधिग्रहण हो गया है, वहां पर लगभग डेढ़ सौ ऐसे बच्चे हैं, जिनको नौकरी दी जानी थी, लेकिन अधिग्रहण के पांच साल हो गए हैं, लेकिन उनको नौकरी नहीं मिली है । उनको नौकरी देने का कष्ट करें ।

श्री भागीरथ चौधरी (अजमेर): अध्यक्ष महोदय, राष्ट्र रचयिता जगत पिता ब्रह्मा जी के मंदिर पुष्कर से मेड़ता तक रेलवे लाइन, जो वर्ष 2014 में स्वीकृत हो चुकी है । मैं मंत्री जी से निवेदन करना चाहूंगा कि उसको स्वीकृत कराएं, ताकि वह पश्चिम राजस्थान से जुड़ जाए।

श्री आर. के. सिंह पटेल (बांदा): अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से आग्रह करना चाहता हूं कि झांसी से बांदा, मानिकपुर, प्रयागराज के लिए जो रेलवे लाइन गई है, वहां जो अंडरब्रिजेज बनाए गए हैं, वहां पर बरसात में पानी भर जाता है, वहां पर आवागमन बाधित हो जाता है, उसको ठीक करने का काम करें । यह माननीय मंत्री जी से मेरा निवेदन है ।

श्री अरूण साव (बिलासपुर): अध्यक्ष महोदय, बिलासपुर, पेंड्रा रोड, लोकल ट्रेन बंद है । वहां के लोगों को आने-जाने में दिक्कत हो रही है । मैं माननीय मंत्री जी से आग्रह करूंगा कि उसे शीघ्र प्रारंभ कराएं ।

श्रीमती रक्षा निखिल खाडसे: अध्यक्ष महोदय, किसान रेल एंड वीपीयू रैक कॉमर्शियल रेट पर चलने से फल और कृषि उत्पादन देश के हर क्षेत्र में पहुंच रहे हैं, तो इसे आगे भी बढ़ाया जाए, क्योंकि इसकी परमिशन सिर्फ मार्च तक ही थी।

कुंवर दानिश अली (अमरोहा): मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी को बधाई देना चाहता हूं कि आज जो रेलवे के आंकड़े प्रस्तुत किए गए हैं, वे वाकई ऐतिहासिक हैं । अगर ये आंकड़े सच्चे हैं, तो देश रेल के मामले में वाकई बहुत आगे बढ़ेगा । मेरी मांग है कि दिल्ली तक एक एक्सप्रेस ट्रेन का स्टॉपेज और मुरादाबाद से मुंबई वाया अमरोहा एक ट्रेन चलाई जाए।

DR. BEESETTI VENKATA SATYAVATHI (ANAKAPALLE): Sir, my request to the hon. Minister is for a regular train from Visakhapatnam to Varanasi and for stoppage of Ratnachal Express at Elamanchili railway station.

श्री कोथा प्रभाकर रेड्डी (मेडक):  अभी तक हम ने हैदराबाद से दिल्ली तक के लिए मंत्री जी से भाषण सुना है, लेकिन मगर साउथ इंडिया से नॉर्थ इंडिया के लिए स्पीड ट्रेन और बुलेट ट्रेन नहीं है । सभी ट्रेन्स गुजरात, अहमदाबाद, दिल्ली, के लिए है । साउथ इंडिया से नॉर्थ इंडिया के लिए हाई स्पीट ट्रेन और बुलेट ट्रेन चलाना बहुत जरूरी है, इसके ऊपर ध्यान दिया जाना चाहिए ।

श्री बालक नाथ (अलवर): अध्यक्ष महोदय, माननीय रेलवे मंत्री जी यहां विराजमान हैं । मैं सबसे पहले आपे से निवेदन करना चाहूंगा कि कोरोना के समय पर बहुत सारी ट्रेन्स अस्थाई रूप से रद्द कर दी गई थीं, उनको पुन: संचालित किया जाए । हमारे पास सभी इलाकों से लोगों के आवेदन आते हैं कि इन ट्रेनों को पुन: संचालित किया जाए । अलवर एक बहुत ऐतिहासिक शहर है ।

श्री रामप्रीतमंडल (झंझारपुर): मैं माननीय मंत्री जी को धन्यवाद देना चाहता हूं, उन्होंने पूरे हिन्दुस्तान का ख्याल रखा है । मैं झंझारपुर से आता हूं । झंझारपुर, लौकहा जो नेपाल बॉर्डर पर अवस्थित है । मेरा माननीय मंत्री जी से यह निवेदन है कि वहां पर करीब 10 वर्षों से काम बंद पड़ा हुआ है, उसे फिर से शुरू करने की कृपा की जाए । धन्यवाद । …(व्यवधान)

श्री बालक नाथ: महोदय, मैं निवेदन करना चाहूंगा कि अलवर से राजधानी ट्रेन गुजरती है, …(व्यवधान) जो कि जयपुर जाती है । राजधानी का स्टॉपेज अलवर में किया जाना चाहिए, क्योंकि अलवर बहुत ही पौराणिक शहर है और यह एक बहुत बड़ा इंडस्ट्रियल एरिया है । बड़े-बड़े उद्योगपति रोज अलवर आते-जाते हैं । कृपया राजधानी का स्टॉपेज अलवर में जरूर करें।

श्री कमलेश पासवान (बांसगाँव): माननीय मंत्री जी मेरा आपसे निवेदन है और उम्मीद है कि आप ध्यान भी देंगे । पिछले बजट में आपने सहजनवां से दोहरीघाट के लिए नए रेल लाइन के लिए प्रोजेक्ट  में स्वीकृति दी थी । मैंने उसके लिए माननीय प्रधान मंत्री जी और आपको भी बधाई दी थी । उस पर धन का आवंटन मात्र 1,000 करोड़ रुपये हुआ है । आपसे सादर आग्रह है, क्योंकि यह पूरे पेपर में…(व्यवधान) आया है । माननीय मंत्री जी आप कृपया इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने की कृपा करें । आपका धन्यवाद।

श्री राहुल कस्वां (चुरू): अध्यक्ष महोदय, मैं मंत्री जी से यह पूछना चाहता हूं कि पिछले कई सालों में रेल और लैंड के सर्वेज़ हुए हैं । हमारे चुरू में सीकर और नोखां का सर्वे चार बार हो चुका है । राजगढ़,  तारा नगर, गजसिंहपुर का सर्वे हो चुका है । सरदार सिंह हनुमानगढ़ का भी सर्वे हो चुका है । इनकी रिपोर्ट्स हमेशा निगेटिव ही आती है, जिससे वहां पर लाइन नहीं बिछती है ।

आपसे यह निवेदन है कि कम से कम तहसील हेडक्वार्टर्स को जोड़ने का काम किया जाए । राजस्थान एक बहुत बड़ा प्रदेश है । यहां आज का रेलवे का विस्तार उस लेवल तक नहीं हुआ है । 15 वर्षों में एक किलोमीटर तक की सिंगल रेलवे लाइन भी नहीं बिछाई गई है । मैं माननीय मंत्री जी से यह निवेदन करता हूं कि तहसीलों को जोड़ा जाए।

श्री रोड़मल नागर (राजगढ़): महोदय, कोटा से भोपाल को जोड़ने वाली रामगजमंडी भोपाल, आदरणीय प्रधान मंत्री जी के फास्टट्रैक में है । वर्ष 2022 उसकी आखिरी तारीख है, लेकिन काम बहुत धीमी गति से चल रहा है । कृपया मंत्री जी उसके लिए अधिक बजट दें ।

श्री भगवंत खुबा (बीदर): अध्यक्ष महोदय, आपका धन्यवाद । …(व्यवधान) मैं माननीय मंत्री जी को धन्यवाद देता हूं कि वर्ष 2019 में बीदर और नांदेड रेल लाइन की स्वीकृति दी गई । मैं माननीय मंत्री जी से यह आग्रह करता हूं कि इसके निर्माण का कार्य जल्द से जल्द प्रारंभ किया जाए।

SHRI MARGANI BHARAT (RAJAHMUNDRY): Hon. Speaker Sir, we are having a proposal for South Coastal Zone in the State Reorganization Act, and the same is pending with the Railway Minister. The second line from Vijayawada to Visakhapatnam is also pending. For both Telangana and Andhra Pradesh, the Kovvur-Bhadrachalam rail line is also pending. These three proposals may be considered.

SHRI LAVU SRIKRISHNA DEVARAYALU (NARASARAOPET): Hon. Speaker Sir, it is good to see that the hon. Railway Minister is speeding up the freight trains by almost 100 per cent. But the problem is that traders and exporters are facing a lot of problem in onloading and offloading because of the issue of last-mile connectivity and non-availability of containers. If the hon. Railway Minister, in consultation with CONCOR, comes to a creative solution, transportation costs will be reduced.

श्रीमती वीणादेवी (वैशाली): मैं माननीय मंत्री जी से यह निवेदन करना चाहती हूं कि जल्द से जल्द वैशाली से सुगौली तक एक ट्रेन चलाने की कृपा करें।

श्री विजय कुमारदुबे (कुशीनगर): माननीय अध्यक्ष महोदय, देश के सभी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे, रेल सुविधा से जुड़े हुए हैं । वर्ष 2017 से डीपीआर बनकर तैयार है, लेकिन आज तक प्रोजेक्ट शुरू नहीं हुआ है । गोरखपुर से कुशीनगर परियोजना, जो कि अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे को जोड़ता है । मेरा माननीय मंत्री जी से यह निवेदन है कि इस प्रोजेक्ट को भी आगे बढ़ाएं।

श्री रवि किशन (गोरखपुर): अध्यक्ष महोदय, आपका धन्यवाद, जो आपने मुझे बोलने का मौका दिया है । मैं रेल मंत्री जी को दिल से धन्यवाद देता हूं । ये जो सारी उपलब्धियां हुई हैं, हर तरीके से एक्सीडेंट्स की संख्या कम हुई हैं, उन्होंने हमारे एक निवेदन पर गोरखपुर से हमसफर एक्सप्रेस शुरू करवाया है, मैं उन्हें और अपनी सरकार को गोरखपुर और जौनपुर के सभी लोगों की तरफ से दिल से धन्यवाद देता हूं ।

मेरी दो-तीन मांगे हैं, जो मैं तुरंत रखना चाहता हूं । गोरखपुर से दिल्ली तक वंदे मातरम् ट्रेन चलाए जाने की आवश्यकता है । गोरखपुर से एक नई ट्रेन चल जाए, तो हर-हर महादेव हो जाए । गोरखपुर से देहरादून के लिए सप्ताहिक ट्रेन, यह एक बड़ी डिमांड है, क्योंकि इस वक्त गोरखपुर बहुत ही तरक्की की तरफ है । गोरखपुर से मुम्बई के लिए एक गरीब रथ ट्रेन चल जाए, तो बहुत ही अच्छा होगा । धन्यवाद।

श्री राजीव प्रताप रूडी (सारण): माननीय अध्यक्ष महोदय, मेमू शेड के लिए ईसीआर ने एक प्रस्ताव भेजा है । उत्तर बिहार में मेट्रो रेल परियोजना की स्थापना के लिए जमीन का अभाव था । छपरा स्थित सोनपुर के निकट पहलेजा घाट में रेलवे की सरकारी जमीन है, वहाँ पर निर्माण के लिए भारत सरकार में प्रस्ताव आया हुआ है ।

          मैं माननीय रेल मंत्री जी से कहना चाहूंगा कि ईसीआर के द्वारा भेजे गए प्रस्ताव को पूरा करें।

SHRI PRATHAP SIMHA (MYSORE): Hon. Speaker, Sir, I would like to thank the hon. Railway Minister, Piyush Goyal ji for sanctioning a satellite railway station for Mysuru.  But the State Government will give the land for free and bear 50 per cent of the cost only for construction of the new broad-gauge line and not for constructing a satellite railway station.  So, I would request the hon. Railway Minister to give the money for acquiring it.

श्री कृष्णपालसिंहयादव (गुना): माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरे लोक सभा क्षेत्र गुना में चन्देरी एक प्रसिद्ध नगरी है । वहाँ के लिए रेलवे लाइन की मांग पिछले कई वर्षों से चली आ रही है । मैं भी पिछले दो साल से इसकी मांग कर रहा हूँ । अगर चन्देरी को ललितपुर होते हुए पिपरई तक रेलवे लाइन से जोड़ दिया जाए, तो अति कृपा होगी।

श्री दुलालचन्द्र गोस्वामी (कटिहार): माननीय अध्यक्ष महोदय, कटिहार रेल डिविज़न से कटिहार-कुमेदपुर, कटिहार से मुकरिया और कटिहार से जोगबनी रेल लाइन का दोहरीकरण किया जाए।

डॉ. आलोक कुमार सुमन (गोपालगंज): माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं रेल मंत्री जी से आग्रह करना चाहूंगा कि मेरे संसदीय क्षेत्र गोपालगंज के तहत थावे जंक्शन पर वाशिंग पिट बनाई जाए ताकि वहाँ से दिल्ली एवं अन्य महानगरों के लिए ट्रेन्स चलाई जा सके।

श्री अर्जुन लालमीणा (उदयपुर): माननीय अध्यक्ष महोदय, उदयपुर से अहमदाबाद के ब्रॉडगेज़ का काम लगभग 80 परसेंट हो चुका है । अहमदाबाद से डूंगरपुर तक का सीआरएस हो चुका है, वहाँ पर नई रेलगाड़ी चलाई जाए । मेरा मंत्री महोदय से यह निवेदन है।

श्री रामकृपाल यादव (पाटलिपुत्र): माननीय अध्यक्ष जी, मैं एक सेकेण्ड में अपनी बात समाप्त कर दूंगा।

माननीय अध्यक्ष: मैं एक सेकेण्ड से ज्यादा समय आपको दूंगा भी नहीं।

श्री राम कृपालयादव: मैं उससे ज्यादा बोलूंगा ही नहीं।

माननीय अध्यक्ष: आप उससे ज्यादा बोलेंगे, तो भी मैं समय नहीं दूंगा।

श्री रामकृपाल यादव : माननीय अध्यक्ष जी, मैं माननीय रेल मंत्री जी से आग्रह करूँगा कि वह चार सांसदों का इलाका है । बिहटा-औरंगाबाद रेल लाइन आप कब तक बना पाएंगे । मेरा यही निवेदन है।

श्री गोपालजी ठाकुर (दरभंगा): माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं माननीय रेल मंत्री जी को बधाई देना चाहता हूँ । सन्1934 ईस्वी में मिथिला दो भागों में था । लगभग 87 वर्ष बाद उन्होंने कोसी पर रेल महासेतु बनाकर मिथिलावासियों को सौंपा है । इसका शिलान्यास श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी के द्वारा किया गया था । इसलिए मैं माननीय मंत्री जी से आग्रह करना चाहूंगा कि उस सेतु का नामकरण अटल सेतु के नाम से किया जाए ।

        दरभंगा के लिए 10 आरओबी के काम पेंडिंग पड़े हैं, उनका काम भी प्रारम्भ करवाया जाए ।

श्री रामुलु पोथुगन्ती (नगरकुरनूल): थैंक यू सर । तेलंगाना स्टेट में गद्वाल और माचेरला रेलवे लाइन के लिए पिछले40 वर्षों से कोशिश की जा रही है । मैं रेल मंत्री जी से रिक्वेस्ट करता हूँ कि वे इस रेल लाइन को सैंक्शन करें । हमारे एरिया में अभी तक लोगों ने रेल नहीं देखी है ।

 

श्री पशुपति नाथ सिंह (धनबाद): माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं माननीय रेल मंत्री जी को बधाई देता हूँ कि उन्होंने रेलवे के क्षेत्र में पूरे देश में बहुमूल्य परिवर्तन किया है ।

धनबाद रेल मंडल ने देश में सबसे अधिक लगभग 13 हजार करोड़ रुपए कमाकर दिये हैं । वहाँ ट्रेन सुविधाओं में तो वृद्धि हुई है, स्टेशन का नवीकरण आदि सारे काम हुए हैं, लेकिन मैं मंत्री जी से आग्रह करूँगा कि समीक्षा करके वहाँ के लिए ट्रेन्स की मांग की पूर्ति करें ।

श्री सुदर्शन भगत (लोहरदगा): महोदय, लोहरदगा से पूर्वा रेलवे लाइन के लिए माननीय मंत्री जी से आग्रह करूंगा कि नई परियोजना को लिया जाए।

श्री विजयकुमार (गया): अध्यक्ष जी, आपके द्वारा माननीय मंत्री जी से आग्रह करना चाहता हूं कि गया, बोधगया, शेरघाटी होते हुए चतरा तक रेलवे लाइन को बिछाया जाए, क्योंकि यह उग्रवाद प्रभावित क्षेत्र है।

श्री विष्णु दयाल राम (पलामू): अध्यक्ष जी, वर्ष 1940 से इस विषय पर चर्चा होती आ रही है लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है । बरवाडीह से चिरिमरी और अम्बिकापुर होते हुए रेल लाइन को बिछाना है । इससे रेलवे को भी फायदा है । सीआईएल और होम मिनिस्ट्री से रेलवे पैसा ले सकता है । गया और शेरघाटी तक लाइन बिछानी है।

श्रीमती रंजीता कोली (भरतपुर): महोदय, फाटक संख्या-219, वयाना में 400 मीटर रास्ता है, जहां अंडरपास बनाया जा रहा है । वहां 15 गांव जोड़े जाते हैं, यदि वह रास्ता खोल दिया जाए तो मेरे क्षेत्र के 15 गांवों को सुविधा मिलेगी।

डॉ. (प्रो.) महेन्द्र मुंजपरा (सुरेन्द्रनगर): मेरे सूर्यनगर नगर पालिका के एरिया में पुरानी पटरी वाली मीटर गेज लाइन है, उस पर अतिक्रमण हो गया है । उस अतिक्रमण को हटाकर उस जमीन को नगरपालिका को दे दें, तो हमारा रास्ता चौड़ा हो जाएगा और एक अतिरिक्त रास्ता मिल जाएगा । इसके अलावा एरिया के पाटरी ताल्लुका में करीब 30 सालों से कोई पैसेंजर ट्रेन नहीं दी गई है । वहां तीन तीर्थ स्थान और एक इंडियन सैंचुरी आई है । वहां पैसेंजर ट्रेन रेगुलर बेसिस पर चलाई जाए, तो काफी लोगों को फायदा हो सकता है ।

माननीय अध्यक्ष: सभी माननीय सदस्यों को पर्याप्त समय और पर्याप्त अवसर दे दिया है । क्या अभी भी कोई माननीय सदस्य बोलना चाहता है? अब मैं माननीय मंत्री जी से आग्रह करूंगा कि  आप सभी सदस्यों के जवाब दे दीजिए।

…( व्यवधान)

श्री पीयूष गोयल: अध्यक्ष महोदय, आपका बहुत-बहुत धन्यवाद । …(व्यवधान) वास्तव में आपने खुद इतिहास रच दिया है, जितना पार्टिसिपेशन पहले भी और अभी भी मेंबर्स का हुआ है, इससे मुझे काफी जानकारियां मिली हैं । मैं हर मेंबर को व्यक्तिगत पत्र के द्वारा जवाब अवश्य दूंगा । …(व्यवधान) मुझे कई जवाब मुंहजबानी याद हैं, लेकिन मुझे लगता है कि समय का अभाव है, अगले विषय पर डिबेट शुरू होनी है ।…(व्यवधान) सभी माननीय सदस्यों और माननीय अध्यक्ष जी, आपका बहुत-बहुत धन्यवाद । …(व्यवधान) आप सबने जिस प्रकार डिमांड फॉर ग्रांट की इस डिबेट में अपना योगदान दिया, पार्टिसिपेट किया, इसके लिए आप सबका तहेदिल से धन्यवाद । …(व्यवधान)

          मैं अब आप सबसे दरख्वास्त करता हूं कि आप डिमांड फॉर ग्रांट्स की वर्ष 2021-22 के लिए जो मिनिस्ट्री ऑफ रेलवेज़ की डिमांड नंबर – 84 है, उसे आप कृपया कर के अनुमोदन दें, उसे अप्रूव करें ।…(व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष: अब मैं रेल मंत्रालय से संबंधित अनुदान की मांग सभा के मतदान के लिए रखता हूं ।

…( व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष: माननीय सदस्य, प्लीज़ आप बैठ जाइए।

…( व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष: प्रश्न यह है:

“कि अनुदानों की मांगों की सूची के स्तम्भ 2 में रेल मंत्रालय से संबंधित मांग संख्या 84 के सामने दर्शाए गए मांग शीर्ष के संबंध में 31 मार्च, 2022 को समाप्त होने वाले वर्ष में संदाय के दौरान होने वाले खर्चों की अदायगी करने हेतु अनुदानों की मांगों की सूची के स्तम्भ 3 में दर्शायी गयी राजस्व लेखा तथा पूंजी लेखा संबंधी राशियों से अनधिक संबंधित राशियां भारत की संचित निधि में से राष्ट्रपति को दी जाएं।”   Demand for Grants for 2021-22 in respect of Ministry of Railways voted by the Lok Sabha _________________________________________________________ No. and Name of Demand              Amount of Demand for Grant submitted                                                          to the vote of the House ______________________________________________________________                                                   Revenue (Rs.)                Capital(Rs.) _____________________________________________________________ 84   Ministry of Railways                 275986,65,00,000        304836,88,00,000     प्रस्ताव स्वीकृत हुआ ।