State Consumer Disputes Redressal Commission
Panni Lal vs L I C on 30 October, 2015
Cause Title/Judgement-Entry STATE CONSUMER DISPUTES REDRESSAL COMMISSION, UP C-1 Vikrant Khand 1 (Near Shaheed Path), Gomti Nagar Lucknow-226010 First Appeal No. A/2003/893 (Arisen out of Order Dated in Case No. of District State Commission) 1. Panni Lal a ...........Appellant(s) Versus 1. L I C a ...........Respondent(s) BEFORE: HON'BLE MR. Sanjay Kumar PRESIDING MEMBER For the Appellant: For the Respondent: ORDER
(राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, उ0 प्र0 लखनऊ) सुरक्षित अपील संख्या 893/2003 (जिला मंच झांसी द्वारा परिवाद सं0 331/2001 में पारित निर्णय/आदेश दिनांकित 28/12/2002 के विरूद्ध) पन्नी लाल उर्फ पन्ना पुत्र स्व0 श्री सुम्मेर- निवासी मकान नं0- 547, कपूर टेकरी खुशीपुरा- जिला झांसी।
...अपीलार्थी/परिवादी बनाम भारतीय जीवन बीमा निगम, कार्यालय बुन्देलखण्ड डिग्री कालेज के पास, सिविल लाइन्स, जिला झांसी द्वारा शाखा प्रबंधक ।
.........प्रत्यर्थी/विपक्षी समक्ष:
1. मा0 श्री जितेन्द्र नाथ सिन्हा, पीठासीन सदस्य ।
2. मा0 श्री संजय कुमार, सदस्य।
अपीलार्थी की ओर से उपस्थित : विद्वान अधिवक्ता श्री आर0के0 गुप्ता। प्रत्यर्थी की ओर से उपस्थित : विद्वान अधिवक्ता श्री वी0एस0 विसारिया। दिनांक 21/11/2015 मा0 श्री संजय कुमार, सदस्य द्वारा उदघोषित । निर्णय
परिवाद सं0 331/2001 पन्नी लाल बनाम एलआईसी में जिला मंच झांसी द्वारा दिनांक 28/12/2002 को निर्णय पारित करते हुए परिवाद खारिज कर दिया, जिससे क्षुब्ध होकर प्रस्तुत अपील परिवादी/अपीलार्थी द्वारा प्रस्तुत किया गया है।
परिवाद पत्र का अभिवचन संक्षेप में इस प्रकार है कि परिवादी का पुत्र महेन्द्र कुमार ने दिनांक 05/07/99 को जीवन बीमा पालिसी सं0- 230474877, टेबुल नंबर- 111-15, मु0 50,000/ रूपये की बीमा धनराशि हेतु विपक्षी से प्राप्त की थी। जीवन बीमा पालिसी जारी होने के समय उसकी आयु, जन्मतिथि 25/06/76 के अनुसार 23 वर्ष की थी। दुर्भाग्यवश परिवादी के पुत्र की मृत्यु दिनांक 06/07/99 को सायंकाल 05 बजे सड़क दुर्घटना में हुई। पोस्टमार्टम में भी उसकी उम्र 23 वर्ष अंकित की गई और परिवादी ने जीवन बीमा पालिसी के अंतर्गत नामिनी होने के आधार पर पालिसी के अंतर्गत देय बीमा क्लेम का दावा प्रस्तुत किया तथा औपचारिकताओं को पूरा करते हुए क्लेम संबंधी प्रपत्र निष्पादित करके प्रस्तुत किये। विपक्षी द्वारा पत्र दिनांकित 10/11/2000 के द्वारा परिवादी का बीमा क्लेम बीमा प्रस्ताव में अभिकथित आयु को गलत बताते हुए निरस्त कर दिया। विपक्षी ने परिवादी के क्लेम का भुगतान नहीं किया।
2विपक्षी/प्रत्यर्थी द्वारा जिला मंच के समक्ष उपस्थित होकर अपना प्रतिवाद पत्र प्रस्तुत करते हुए यह अभिवचन किया कि बीमा धारक श्री महेन्द्र कुमार ने वास्तविक तथ्यों को छिपाकर बीमा पालिसी प्राप्त की थी। बीमा धारक ने बीमा प्रस्ताव में अपनी उम्र तथा शैक्षिक योग्यता के तथ्यों को जानबूझकर छिपाया तथा अपनी सही आयु प्रस्ताव प्रपत्र में घोषित नहीं किया है। बीमा धारक ने अपनी अपनी आयु के समर्थन में कूटरचित प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया। बीमा धारक के द्वारा धोखाघड़ी करके बीमा पालिसी प्राप्त करने के आधार परिवादी का बीमा क्लेम निरस्त कर दिया गया। जिसकी सूचना पत्र दिनांकित 10/11/2000 के द्वारा परिवादी को दी गई। विपक्षी ने इस आशय का भी अभिवचन किया कि फोरम को सुनवाई का क्षेत्राधिकार उपलब्ध नहीं है।
अपीलार्थी के विद्वान अधिवक्ता श्री आर0के0 गुप्ता उपस्थित हैं। प्रत्यर्थी की ओर से कोई विद्वान अधिवक्ता श्री वी0एस0 विसारिया उपस्थित हैं। उभय पक्ष के विद्वान अधिवक्तागण की बहस को विस्तार से सुना गया एवं प्रश्नगत निर्णय एवं उपलब्ध अभिलेखों का गंभीरता से परिशीलन किया गया।
अपीलार्थी के विद्वान अधिवक्ता ने तर्क दिया कि अपीलार्थी ने विपक्षी/प्रत्यर्थी से पालिसी लिया था। जिसमें प्रत्यर्थी/विपक्षी के चिकित्सा द्वारा बीमा धारक की आयु 23 वर्ष निर्धारित किया था। बीमा धारक की मृत्यु दुर्घना में हो गई। जिसका पोस्टमार्टम कराया गया था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट द्वारा बीमा धारक (मृतक) की आयु लगभग 23 वर्ष बताई गई है जो पोस्टमार्टम रिपोर्ट द्वारा साबित है परन्तु बीमा कंपनी द्वारा बीमा दावा निरस्त कर दिया गया। जिला फोरम ने सभी तथ्यों एवं परिस्थितियों पर बिना गंभीरता से विचार किये निर्णय दिया है जो सही एवं उचित नहीं है।
प्रत्यर्थी के विद्वान अधिवक्ता ने अपीलार्थी के विद्वान अधिवक्ता के तर्कों का खण्डन करते हुए कहा कि अपीलार्थी द्वारा बीमा प्रस्ताव भरते समय गलत आयु बताई गई है तथा आयु के संबंध में जो प्रमाण पत्र दिया गया है वह फर्जी है। इस प्रकार अपीलार्थी/परिवादी ने बीमा प्रस्ताव भरते समय सही तथ्य को छिपाकर पालिसी लिया है। अपीलार्थी/परिवादी द्वारा प्रस्तुत प्रमाण पत्र की जांच की गई वह फर्जी पाया गया। विद्यालय के प्रधानाध्यक द्वारा यह कहा गया कि संबंधित प्रमाण पत्र विद्यालय द्वारा जारी नहीं किया गया है तथा प्रमाण पत्र पर मेरे हस्ताक्षर नहीं हैं। प्रधानाध्यक द्वारा हस्ताक्षर हिन्दी में ही किये जाते हैं, अंग्रेजी में कभी भी 3 नहीं किये जाते हैं। प्रस्तुत प्रमाण पत्र छात्र रजिस्टर के क्रम सं0 20 पर प्रवेश सं0 06 पर महेन्द्र कुमार पुत्र श्री पन्ना लाल का नाम अंकित नहीं है बल्कि किसी अन्य व्यक्ति का नाम अंकित है। ऐसी स्थिति में प्रत्यर्थी/विपक्षी द्वारा बीमा दावा सही निरस्त किया गया है। जिला फोरम का आदेश सही एवं उचित है। अपीलार्थी की अपील खण्डित होने योग्य है।
आधार अपील एवं संपूर्ण पत्रावली का परिशीलन किया जिससे यह प्रतीत होता है कि बीमा धारक पालिसी लेने के 06 दिन के बाद दुर्घटना हुआ तथा दुर्घटना के उपरान्त उसकी मृत्यु हो गई। बीमा पालिसी लगभग दो वर्ष चलने के पूर्व ही बीमा धारक की मृत्यु हो गई। ऐसी स्थित में इन्श्योरेन्स एक्ट की धारा 45 का लाभ पाने का अधिकारी नहीं है तथा बीमा प्रस्ताव भरते समय आयु की घोषणा गलत अंकित कराई गई है तथा आयु के संबंध में जो प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया गया है। वह फर्जी है। ऐसी स्थिति में आयु के संबंध में किया गया कथन पूर्ण रूप से असत्य है। प्रधानाध्यक द्वारा जारी प्रमाण पत्र को फर्जी बताया गया है तथा उस पर किये गये हस्ताक्षर से इन्कार किया गया है। जिला फोरम ने सभी तथ्यों एवं परिस्थितियों पर सम्यक विचार करते हुए निर्णय/आदेश दिया है जो विधि अनुकूल है। जिला फोरम के आदेश में कोई त्रुटि नहीं है। अपीलार्थी के विद्वान अधिवक्ता का तर्क है कि आयु बीमा कंपनी एवं पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार आयु 23 है तथा प्रस्ताव भरते समय आयु 23 है जो सत्य है। यह तर्क स्वीकार करने योग्य नहीं है क्योंकि बीमा धारक प्रस्ताव भरते समय गलत कथन किया है तथा साक्ष्य के रूप में आयु के संबंध में जो प्रमाण पत्र दिया है वह भी गलत है। ऐसी स्थिति में यह कहा नहीं जा सकता है कि प्रस्ताव भरते समय की आयु तथा पोस्टमार्टम को ही सत्य मान लिया जाय। बीमा धारक द्वारा दिया गया साक्ष्य के रूप में प्रमाण पत्र यदि गलत है तो उसका कथन भी गलत ही माना जायेगा। बीमा धारक द्वारा बीमा प्रस्ताव भरते समय सही तथ्य को छिपाया जाना साबित है। अपीलार्थी के अपील में बल नहीं पाया जाता है। अपील खण्डित किये जाने योग्य है।
आदेश प्रस्तुत अपील खण्डित की जाती है।
(जितेन्द्र नाथ सिन्हा) (संजय कुमार) पीठा0 सदस्य सदस्य सुभाष आशु0 कोर्ट नं0 3 [HON'BLE MR. Sanjay Kumar] PRESIDING MEMBER