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Lok Sabha Debates

Discussion Regarding Construction Of Taj Heritage Corridor. on 23 July, 2003

/font>15.20 hrs. DISCUSSION UNDER RULE 193 CONSTRUCTION OF TAJ HERITAGE CORRIDOR Title: Discussion regarding construction of Taj Heritage Corridor.

MR. DEPUTY-SPEAKER: The House shall now take up Discussion under Rule 193. The permissible time is two hours.

SHRI RASHID ALVI (AMROHA): Sir, I am on a point of order.

MR. DEPUTY-SPEAKER: What is your point of order? Please quote the rule.

SHRI RASHID ALVI : Sir, before I quote the rule I would like to say that today morning the hon. Speaker has set a precedent by rejecting the Adjournment Motion under this very plea that the case is pending in the court.

As far as the matter regarding Taj Heritage Corridor is concerned, the Supreme Court has ordered the CBI to investigate the matter and submit its report within two months. It may be discussed only after two months when the CBI submits its report to the Supreme Court. How can you discuss it? As far as rules are concerned, there are many rules like 175 and 352(i) under which we cannot discuss this.

श्री राज बब्बर (आगरा) : उपाध्यक्ष महोदय, हमारे साथी कह रहे हैं कि ताज हैरिटेज कॉरिडोर का मामला कोर्ट में है, इसलिये रूल के अनुसार इस पर बहस नहीं हो सकती। यह केवल...( व्यवधान)

श्री मुलायम सिंह यादव (सम्भल) : उपाध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्य श्री अलवी द्वारा सदन को गुमराह किया जा रहा ह। मैं आपको बताना चाहता हूं कि ताज हैरिटेज कॉरिडोर के लिये एक महती योजना बनाई गई थी जिसके लिये ५-६ सौ करोड़ रुपये रखे गये थे। उसके बाद १७५ करोड़ रुपये की योजना बनी…( व्यवधान)

SHRI RASHID ALVI : The matter cannot be discussed before you decide whether the case is pending in the court or not.

MR. DEPUTY-SPEAKER: I will give my ruling. Let me hear him also.

श्री मुलायम सिंह यादव :उपाध्यक्ष जी, इनका कहना कि मामला न्यायालय में है, ऐसा नहीं है। जब य़ह मामला समाचार-पत्रों में आया, मुख्य मंत्री जी ने कई तरह के बयान दिये। २ जून, २००३ को पर्यटन मंत्री श्री जगमोहन आगरा गये। उन्होंने देखने के बाद इस योजना पर घोर आपत्ति प्रकट की और नाराज़गी भी ज़ाहिर की। जब समाचार-पत्रों में सवाल उठा तो समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पार्टी के लोगों की एक कमेटी आगरा गई। वहां जाने पर मालूम हुआ कि मिट्टी और बालू डालने का ७० लख रुपया प्रतदिन का खर्चा दिखाया गया है। फिर कहा गया कि नीचे ईंटें है, बालू है और यमुना का पानी है, इसलिये ताजमहल गिर जायेगा। जब इस तरह के सवाल उठने लगे, और मुख्यमंत्री फंसने लगी तो जल्दी जल्दी उन्होंने उ० प्र० के प्रमुख वनसचिव श्री आर.के. शर्मा को निलम्बित कर दिया।

उपाध्यक्ष महोदय : मुलायम सिंह जी, मैरिट पर यह नहीं आना चाहिये।

श्री मुलायम सिंह यादव : उपाध्यक्ष जी, अभी कह रहे हैं कि कोर्ट में मामला है, कहां है? जब कोर्ट में एक पी.आई.एल. डाली गई तो कहा गया कि इसकी जांच होनी चाहिये।

उपाध्यक्ष महोदय : उन्होंने विवशता प्रकट की है।

श्री मुलायम सिंह यादव : उपाध्यक्ष जी, कोर्ट का आदेश हुआ है लेकिन कोर्ट में कोई मुकदमा नहीं है । माननीय सदस्य कानून जानने वाले हैं, पढ़े-लिखे हैं और बहुत जानकर हैं। इसके बावजूद सदन को गुमराह कर रहे हैं कि मामला न्यायालय में है। हां, न्यायालय ने सी.बी.आई. द्वारा जांच के आदेश दिये हैं। अगर आप मुझे पूरा मौका देंगे तो सारी बात हम आपको बता देंगे। मुख्य मंत्री को इन सब बातों की जानकारी है।

उपाध्यक्ष महोदय : मुलायम सिंह जी, यदि आप दो मिनट बैठे तो मैं अपनी रूलिंग दे दूंगा। This matter had come before the Business Advisory Committee. The Committee, in its wisdom, allowed this discussion. I think even your Party Member was also present.

The Committee recommended discussion regarding construction of Taj Heritage Corridor.

… (Interruptions)

SHRI RASHID ALVI : It was not at the knowledge of the BAC at that time. That is why I am bringing this fact to your notice now… (Interruptions)

Shri Mulayam Singh Yadav himself has admitted that a PIL is pending in the Supreme Court… (Interruptions)

श्री मुलायम सिंह यादव :पी.आई.एल. पैन्िंडग नहीं है, सी.बी.आई. द्वारा जांच के आदेश दिये गए हैं।

श्री राशिद अलवी : मुलायम सिंह जी, तभी तो पैंन्िंडग है।…( व्यवधान)

श्री रामजीलाल सुमन (फिरोजाबाद):उपाध्यक्ष महोदय, अगर आपकी आज्ञा हो तो मैं शुरू करूं। आपने मुझे शुरू करने की इजाजत दी है।

उपाध्यक्ष महोदय : हां, आप डिस्कशन शुरू कीजिए। मैंने आपको शुरू करने की इजाजत दी है।

श्री रामजीलाल सुमन (फिरोजाबाद):उपाध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से माननीय अध्यक्ष जी का और कल जो कार्य मंत्रणा समति की बैठक हुई थी, जिसमें विषय की गंभीरता को देखते हुए यह निश्चय हुआ कि आज ताज हेरिटेज कॉरिडोर पर यहां सार्थक चर्चा हो, उसके लिए आपका, माननीय अध्यक्ष जी और पूरे सदन का आभार प्रकट करता हूं। यह बहुत गंभीर सवाल है। १७५ करोड़ रुपये की परियोजना ताजमहल के पर्यावरण और संरक्षण के नाम पर बनी उसे कोई मंजूरी नहीं मिली, १७ करोड़ रुपये खर्च भी हो गये और जहां ताज के संरक्षण और पर्यावरण की बात हुई, वहीं विशेषज्ञों ने यह माना कि हेरिटेज कॉरिडोर के नाम पर जो कुछ हो रहा है, उसमें ताजमहल की सुरक्षा को खतरा है।

जैसा माननीय सदस्य ने अभी आपत्ति जाहिर की, मैं माननीय उच्चतम न्यायलय का भी आभार प्रकट करता हूं कि विषय की गंभीरता को देखते हुए उन्होंने सी.बी.आई. जांच के आदेश दिये। एक जनहित याचिका श्री एम.सी.मेहता द्वारा माननीय उच्चतम न्यायालय में दायर की गई थी और १६ जुलाई, २००३ को माननीय उच्चतम न्यायालय ने उत्तर प्रदेश सरकार को और अन्य पक्ष को सुनने के बाद यह सुनिश्चित किया कि इस काम में गड़बड़ी है, लिहाजा इसकी केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो से जांच कराई जाए। मुझे यह कहने में बहुत कष्ट है कि उत्तर प्रदेश सरकार ने वहां भी अड़ंगा लगाने की कोशिश की। उत्तर प्रदेश सरकार के अधिवक्ता ने जो अपना पक्ष माननीय उच्च न्यायालय में रखा, उसमें कहा गया कि नियंत्रक एवं महालेखानिरीक्षक की रिपोर्ट आने का इंतजार करिये, उस पर कोई जल्दबाजी करने की आवश्यकता नहीं है। ऐसा विनम्र आग्रह माननीय उच्चतम न्यायालय से किया गया था। मैं आपकी मार्फत निवेदन करना चाहूंगा कि ४ अगस्त, २००२ को उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव की अध्यक्षता में ताज हेरिटेज कॉरिडोर के संबंध में आगरा में एक बैठक हुई थी, जिसमें इस परियोजना निर्माण को अंतिम रूप दिया गया और जैसा मैंने पहले आपसे निवेदन किया कि सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि उत्तर प्रदेश की मुख्य मंत्री बराबर यह रट लगाती रहीं कि इस योजना के संबंध में मुझे कोई जानकारी नहीं है, मुझे तथ्यों का पता नहीं है। जो उत्तर प्रदेश के पर्यावरण सचिव थे, उन्हें दोषी मानते हुए निलम्बित कर दिया गया। महोदय, मैं किसी की पैरवी नहीं करना चाहता, लेकिन उत्तर प्रदेश में जो दुर्गति आई.ए.एस. और आई.पी.एस. अफसरों की हो रही है, ऐसी आजाद हिंदुस्तान के संसदीय जनतंत्र में किसी राज्य में नहीं हुई।…( व्यवधान)

श्री अशोक कुमार सिंह चन्देल (हमीरपुर, उ.प्र.) : आप मूल विषय पर बोलिये।…( व्यवधान)

श्री रामजीलाल सुमन : आप मुझे बोलने दीजिए, वरना आप खुद नहीं बोल पायेंगे, यह मैं आपको बता रहा हूं। मैं मूल विषय पर ही बोल रहा हूं, आप क्या बात कर रहे हैं।…( व्यवधान)उपाध्यक्ष महोदय, आप हाउस को व्यवस्थित करिये। आप हमें मत सिखाइये, हम आपको सिखायेंगे।

उपाध्यक्ष महोदय : सुमन जी, आप चेयर को एड्रैस कीजिए, अगर कुछ ऑब्जैक्शनेबल होगा, उसे हम देखेंगे।

श्री रामजीलाल सुमन : उत्तर प्रदेश के पर्यावरण सचिव को यह कहकर बर्खास्त कर दिया गया कि यह इनकी जिम्मेदारी है। समाजवादी पार्टी शुरू से इस राय की थी कि ताज हेरिटेज कॉरिडोर के नाम पर बड़े पैमाने पर धांधली हुई है और एक विश्वसनीय संस्था से इसकी जांच होनी चाहिए।

उपाध्यक्ष महोदय, सबसे महत्वपूर्ण बात यही है। मैं और बातों की तरफ बाद में जाना चाहूँगा। मैं एक निवेदन आपसे विनम्रता के साथ कर दूँ कि उत्तर प्रदेश की मुख्य मंत्री ने कहा कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है लेकिन कल उन्होंने जो बयान दिया, जो आज प्रमुखता के साथ सभी समाचार-पत्रों में छपा है जिसकी प्रति मेरे पास है। उसमें आया है कि Mayawati signed the Taj file.उत्तर प्रदेश की मुख्य मंत्री ने उस फाइल पर हस्ताक्षर किये जिससे यह साबित हो गया कि पूरा खेल उत्तर प्रदेश की मुख्य मंत्री की देख-रेख में हो रहा था। जगमोहन जी यहां बैठे हैं, वे पर्यटन और संस्कृति मंत्री हैं। मैं उनका बड़ा सम्मान करता हूँ। उन्हें दोनों प्रकार के अनुभव हैं - एक आला अफसर के रूप में वे रहे हैं, वे उपराज्यपाल रहे हैं, एक वरिष्ठ अधिकारी के रूप में और फिर राज्यपाल के रूप में और आज नेता और मंत्री के रूप में हैं।

कल राज्य सभा में जगमोहन जी से अतारांकित प्रश्न संख्या २५४ लाला लाजपत राय जी द्वारा पूछा गया कि क्या पर्यटन और संस्कृति मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे कि क्या यह सच है कि ताज हैरिटेज कॉरिडोर का निर्माण कार्य बिना आवश्यक स्वीकृति के शुरू हुआ था? जगमोहन जी का जवाब मेरे हाथ में है जिसमें यह लिखा है कि पर्यावरण तथा वन मंत्रालय द्वारा दी गई सूचना के अनुसार उत्तर प्रदेश सरकार ने उक्त मंत्रालय के सम्यक अनुमोदन के बिना यमुना नदी में खुदाई कार्य शुरू किया था।

उपाध्यक्ष महोदय, भारत सरकार को विश्वास में नहीं लिया गया। भारत सरकार का पर्यावरण मंत्रालय, पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग और जल आयोग, जिनकी स्वीकृति और अनुमति आवश्यक थी, उनमें से किसी विभाग को विश्वास में लिये बिना ही हैरिटेज कॉरिडोर का काम शुरू हो गया। इससे ज्यादा गंभीर सवाल और क्या हो सकता है? इसलिए मैं कहना चाहता हूँ कि इसमें किसी बहस की आवश्यकता नहीं है। यह केस बनता है कि उत्तर प्रदेश की मुख्य मंत्री को तत्काल बर्खास्त किया जाए क्योंकि पर्याप्त साक्ष्य है कि उन्होंने लोगों को अंधेरे में रखा, जान-बूझकर गुमराह किया और उन्हीं की देख-रेख में यह अवैध कार्य हो रहा है। …( व्यवधान)उपाध्यक्ष महोदय, इनको व्यवस्थित कर दें।

मैं निवेदन करना चाहता हूँ कि जहां तक ताजमहल और लालकिले का सवाल है - ये दोनों विश्व धरोहर हैं। …( व्यवधान)

उपाध्यक्ष महोदय : आपको भी मौका मिलेगा। जब आप बोलेंगे तो वे भी ऐसा कर सकते हैं।

श्री रामजीलाल सुमन : उपाध्यक्ष महोदय, ताजमहल और लालकिला विश्व धरोहर हैं और उत्तर प्रदेश की सरकार और भारत सरकार इसके संरक्षण और सुरक्षा के लिए क्या करती है, वह एक अलग सवाल है, लेकिन यूनैस्को के जो दिशा-निर्देश होते हैं, उऩके अनुसार इनके पर्यावरण एवं संरक्षण का काम किया जाता है। सबसे अधिक तकलीफ़देह बात यह है कि जब जगमोहन जी २२ जून को आगरा गए और वहां जाकर स्थल का निरीक्षण किया, तो जगमोहन जी ने कहा कि सभी कायदे-कानूनों को तोड़कर आखिर यह काम कैसे हो रहा है?This is not the statement of Ramji Lal Suman or of Shri Mulayam Singh Yadav or of the Samajwadi Party. जबजगमोहन जी ने पर्सनली वज़िट किया और भारत के संस्कृति मंत्री ने वहां जाकर कहा कि इस विषय की कोई जानकारी मुझे नहीं थी। तीन महीने पहले उन्हें इस विषय की जानकारी हुई। उन्होंने आगरा विकास प्राधिकरण से पूछा कि क्या आपसे इसका कोई नक्शा स्वीकार कराया गया था? वहां के अध्यक्ष ने कहा - नहीं। कॉरिडोर स्थल का जो गलियारा है, वह सौ मीटर से भी कम है जबकि कम से कम यह ३०० मीटर होना चाहिए था। किसी कायदे-कानून का कोई काम नहीं । जगमोहन जी ने बताया कि तीन महीने पहले मुझे जब इसकी जानकारी हुई तब पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के एक अधिकारी ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी कि उनको बिना सूचना दिये यह काम हो रहा है। जहां तक कोर्ट का सवाल है, कोर्ट ने सिर्फ यह कहा था कि बालू के बांध खड़े किये जाएं।

महोदय, इस प्रकार से कोर्ट के आदेशों की धज्जियां उड़ाई गईं। जहां तक उत्तर प्रदेश सरकार और भारत सरकार का सवाल है, वहीं माननीय उच्चतम न्यायालय की ओर से दिसम्बर, १९९६ से समय-समय पर ताजमहल और उसके निकट जो विश्व प्रसिद्ध प्राचीन इमारतें हैं, उनकी संरक्षा और सुरक्षा के लिए निर्देश मिलते रहे। इन स्मारकों की गतवधियों पर निगाह रखने के लिए उच्चतम न्यायालय ने श्री कृष्ण महाजन, जो स्थानीय अधिवक्ता हैं, उनकी अध्यक्षता में एक समति गठित कर दी।

उपाध्यक्ष महोदय, ७५ एकड़ जमीन है। इसमें क्या होने वाला था, उस जमीन को नया रूप देकर व्यावसायिक प्रतिष्ठान, अप्पू घर आदि ये सब चीजें ताजमहल के निकट बनने वाली थीं। जब ये चीजें बनेंगी, तो यमुना के प्रवाह का क्या होगा, उसका ताजमहल पर क्या असर पड़ेगा, विशेषज्ञों की राय क्या होगी, किन-किन महकमों से उसकी अनुमति लेनी आवश्यक है, इन सब चीजों का कोई ध्यान नहीं रखा गया। उच्चतम न्यायालय द्वारा जिन श्री कृष्ण महाजन की अध्यक्षता में समति गठित की गई, उन्होंने उच्च न्यायालय को अपनी रिपोर्ट दी। उन्होंने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि यमुना की तलहैटी को वाणिज्यक उपयोग में लाने का काम बड़े पैमाने पर किया जा रहा है और अफसोस की बात है कि इस संबंध में कोई सर्वेक्षण नहीं कराया गया है कि इसका ताजमहल पर क्या असर होगा।

उपाध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से निवेदन करना चाहता हूं कि ताज हैरिटेज कौरीडोर प्रोजैक्ट का काम नैशनल कंस्ट्रक्शन प्रोजैक्ट कंपनी कर रही है। उसने एक साइनबोर्ड निर्माण स्थल पर लगा दिया कि यह सब काम उच्चतम न्यायालय के आदेश से हो रहा हैं, जबकि उच्चतम न्यायालय ने कोई आदेश नहीं दिया। इस प्रकार से एक फर्जी हैरिटेज कारीडोर का काम चल रहा है। श्री कृष्ण महाजन ने २५ मार्च को माननीय उच्च न्यायालय को अपनी रिपोर्ट प्रेषित की जिसमें लिखा कि राज्य सरकार ने ताजमहल के निकट यमुना नदी का प्रवाह रोकने और आसपास की भूमि को नया स्वरूप देने का काम किया है। ७५ एकड़ भूमि में अप्पूघर बनाने और वाणिज्यिक प्रयोग किए जाने का प्रस्ताव था। उच्चतम न्यायालय ने १ मई, २००३ को यथा-स्थिति बनाए रखने का आदेश दे दिया, लेकिन माननीय उच्च न्यायालय के आदेशों का उल्लंघन करते हुए, यह काम बराबर चलता रहा और १७५ करोड़ रुपए की इस परियोजना में से १७ करोड़ रुपए बिना मंजूरी के खर्च कर दिए गए। यह अत्यन्त गम्भीर सवाल है।

उपाध्यक्ष महोदय, जैसा मैंने अभी आपके समक्ष जिक्र किया कि जिस कंपनी को इसका ठेका दिया गया, राष्ट्रीय परियोजना निर्माण निगम, उसने भी यह काम नहीं किया और एक निजी कंपनी इश्वाक कन्सट्रक्शन को इसका ठेका दे दिया और कंस्ट्रक्शन कंपनी के नाम की जगह एन.पी.सी.सी. का प्रयोग किया गया, यानी काम निजी कंपनी से लिया गया और बोर्ड सरकारी कंपनी के नाम का लगाया गया। इसमें जैसा मैंने पहले कहा, जो सबसे ज्यादा चिन्ताजनक है कि केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और पर्यावरण विशेषज्ञों द्वारा मना करने के बावजूद भी कि यदि योजना चालू रही, तो इससे न केवल ताजमहल को खतरा होगा अपितु यमुना के प्रवाह की दिशा भी बदल जाएगी।

जब उच्चतम न्यायालय के सामने यह मामला उठा, तो उच्चतम न्यायालय ने कहा कि १४ सदस्यों की विशेषज्ञ समति की रिपोर्ट को देखकर लगता है कि यह जल्दीबाजी में बिना किसी अध्ययन और सर्वेक्षण के, सभी कायदे-कानूनों को ताक पर रख कर शुरू की गई योजना है।

उपाध्यक्ष महोदय, जगमोहन जी ने जब वहां निरीक्षण किया, तो उन्होंने २२ जून को आगरा में ही मौके पर कहा कि सेंट्रल पावर रिसर्च स्टेशन, खड़गवासला, जो इसका अध्ययन कर रिपोर्ट देने में सक्षम संस्था है, क्या उससे नहीं पूछा गया, स्थानीय अधिकारियों ने कहा कि हमें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। यह क्या हो रहा है ? उन्होंने कहा कि हमसे अनुमति नहीं ली गई। माननीय उच्चतम न्यायालय ने यह जांच सीबीआई को सौंप दी और सीबीआई ने राज्य सरकार से तथ्यों की जानकारी हासिल की। उधर राज्य सरकार ने पूरे तथ्यों की जानकारी के नाम पर उत्तर प्रदेश के जो प्रमुख सचिव, वित्त नवीन चंद वाजपेयी हैं, उनकी अध्यक्षता में जांच कमेटी गठित कर दी। जब सीबीआई ने दस्तावेज मांगे तो वाजपेयी जी ने जो रिपोर्ट प्रस्तुत की थी, उसमें उस रिपोर्ट का कोई हवाला नहीं था, जिस पर सुप्रीम कोर्ट और सीबीआई ने नाराजगी व्यक्त की कि वह रिपोर्ट हमें दिखाई नहीं दी।

उपाध्यक्ष महोदय, नवीन चंद वाजपेयी जी ने जो जांच की है वह रिपोर्ट सार्वजनिक होनी चाहिए, जान-बूझ कर तथ्यों पर पर्दा डालने का काम किया गया है। उत्तर प्रदेश सरकार की नीयत में अगर खोट न होता तो वह उच्चतम न्यायालय का सहयोग करती कि इसकी किसी विश्वसनीय संस्था से जांच होनी चाहिए। उत्तर प्रदेश सरकार में अगर खोट नहीं होता तो वाजपेयी जी ने जो जांच की थी और जो दस्तावेज सीबीआई को प्रस्तुत किए थे तो वाजपेयी जी की रिपोर्ट वाला दस्तावेज भी प्रस्तुत किया जाना था, लेकिन जानबूझ कर अपने गुनाहों पर पर्दा डालने के लिए ये सब काम किया गया।

महोदय, आज सीबीआई की जांच प्रणाली पर यहां चर्चा हुई थी, मैं उसके विस्तार में नहीं जाना चाहता, लेकिन मैं एक बात जरूर कहना चाहूंगा कि सीबीआई के बारे में हम राजनीतिक लोगों को बहुत भरोसा था। हम संसद के अंदर और बाहर किसी भी संवेदनशील सवाल पर एक ही मांग करते थे कि इस मामले में सीबीआई जांच हो। मैं उच्चतम न्यायालय का अत्यधिक आभार प्रकट करता हूं कि बहुत अच्छी नीयत से माननीय न्यायाधीशों ने आदेश दिए कि इस मामले की जांच सीबीआई से होनी चाहिए। यह गंभीर मामला है, इसलिए मैं आपके मार्फत निवेदन करना चाहूंगा कि इंक्वायरी कमीशन एक्ट के तहत सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज से इसकी जांच होनी चाहिए, जिससे दूध का दूध और पानी का पानी हो जाए। मैं सीबीआई जांच के बारे में थोड़ा-बहुत जानता हूं। आज यह परिस्थिति बन गई है कि उत्तर प्रदेश में लूट के अलावा दूसरा कोई काम नहीं हो रहा है। यहां जगमोहन जी बैठे हैं, आज यह फैसला होना है, कि उत्तर प्रदेश की मुख्य मंत्री ने कह दिया कि हमारे आदेश से यह योजना स्वीकृत हुई है, उनका बयान सभी अखबारों में छपा है। कल जगमोहन जी द्वारा राज्यसभा में एक सवाल का जवाब दिया गया है। उन्होंने कहा है कि भारत सरकार ने इस प्रस्ताव को कोई अनुमति नहीं दी। इनकी अनुमति के बिना कैसे यह काम हो रहा था। पर्यावरण मंत्रालय, संस्कृति मंत्रालय, जल संसाधन मंत्रालय, मूल रूप से योजना की स्वीकृति के लिए जिन विभागों से औपचारिकता पूरी होनी चाहिए थी, उनमें से किसी विभाग को विश्वास में नहीं लिया गया, इसलिए यह गंभीर मामला है।

उपाध्यक्ष महोदय, जैसे मैंने पहले आपसे कहा था कि इससे गंभीर मामला कोई दूसरा नहीं हो सकता। बार-बार कहा जाता है कि हमें कोई जानकारी नहीं है, हमारे किसी फाइल पर हस्ताक्षर नहीं हैं। उत्तर प्रदेश का वित्त मंत्रालय मुख्य मंत्री के पास है। लालू यादव के भी हस्ताक्षर नहीं थे, लेकिन चार-चार बार चारा घोटाले में उन्हें जेल जाना पड़ा। जब लालू जी जेल जा सकते हैं तो किसी दूसरे प्रदेश के मुख्य मंत्री क्यों नहीं जेल जा सकते। आपके आशीर्वाद से मुझे भी भारत सरकार में मंत्री रहने का सौभाग्य प्राप्त हुआ, मंत्री जी जो बोल देते हैं, वही आदेश होता है। चीफ मनिस्टर कोई लखित आदेश करता है, मुख्य मंत्री ने जो बोल दिया वही आदेश होता है। ताज हैरिटेज कोरीडोर जौ कुछ हुआ है वह उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री की देख-रेख में हुआ है और उन्होंने खुद स्वीकार किया है कि मेरे हस्ताक्षर से, मेरी जानकारी में योजना को स्वीकृति प्रदान की है। १७५ करोड़ रुपए की परियोजना और १७ करोड़ रुपए पानी में बह गए, उसका कोई हिसाब नहीं। सभी नियमों को ताक में रख कर यह जो काम किया गया है, इसकी जितनी निन्दा की जाए उतनी कम है। भारत सरकार से मैं विनम्र आग्रह करना चाहूंगा कि उत्तर प्रदेश की मुख्य मंत्री को बर्खास्त करना चाहिए, यही मुझे निवेदन करना है।

श्री श्रीप्रकाश जायसवाल (कानपुर) : उपाध्यक्ष महोदय, धन्यवाद। आपने एक ऐसे महत्वपूर्ण विषय पर मुझे बोलने का अवसर प्रदान किया, क्योंकि मैं भी उत्तर प्रदेश का निवासी हूं और उत्तर प्रदेश के एक महत्वपूर्ण शहर से चुन कर आता हूं।

यह योजना उत्तर प्रदेश के एक ऐतिहासिक शहर की योजना है, जो कि आज के समय में औद्योगिक शहर भी बन चुका है, जिस शहर में दुनिया की एक ऐसी नायाब इमारत स्थित है, जो कि शायद दुनिया के ऐतिहासिक स्थलों में सर्वश्रेष्ठ श्रेणी के स्थलों में से एक होगी। दुनिया के कोने-कोने से पर्यटक और यात्री इसे देखने आते हैं। जो लोग भारत दर्शन करने आते हैं, भारत घूमने के लिए आते हैं, शायद ही कोई ऐसी यात्री होता होगा, जो ताजमहल के अवलोकन के बगैर भारत से वापस जाता होगा।

मैं सबसे पहले बधाई अपने देश के प्रिण्ट मीडिया और इलैक्ट्रानिक मीडिया को देना चाहूंगा। जिस तरह से प्रिण्ट मीडिया और इलैक्ट्रानिक मीडिया ने इतनी बड़ी दुर्घटना को, इतनी बड़ी कमी को उजागर करने का काम किया है, यह इस बात का सूचक है कि हमारे देश में जितनी तेजी के साथ जागरुकता हमारे प्रिण्ट मीडिया और इलैक्ट्रानिक मीडिया के क्षेत्र में आई है, अगर यह जागरुकता ऐसे ही निरन्तर बढ़ती चली गई तो शायद हम राजनीतिज्ञ, हमारे देश का ब्यूरोक्रेट और हमारे देश के जिम्मेदार लोगों को जगाने का काम भी केवल हमारे देश का मीडिया ही कर पायेगा, इस बात को उन्होंने इस काण्ड से सिद्ध किया है। जब प्रिण्ट मीडिया और इलैक्ट्रानिक मीडिया ने लगातार २-३ दिन तक अखबारों के माध्यम से और टी.वी. के माध्यम से इतने बड़े काण्ड को उजागर किया तो हमारे देश के पर्यटन मंत्री श्री जगमोहन जी इस बात की जांच करने के लिए आगरा गये कि वास्तव में वहां पर क्या हो रहा है।

मैं माननीय पर्यटन मंत्री जी का बयान ही पढ़ देता हूं। उन्होंने कहा है कि‘हेरिटेज कोरीडोर के नाम से ताजमहल कि पिछवाड़े हो रहा निर्माण केवल ताज के लिए ही नहीं, बल्कि आगरा किले के लिए भी खतरा बन चुका है, जबकि कानून के अनुसार पुरातत्व स्थल से ३०० मीटर की परधि तक कोई निर्माण कार्य नहीं हो सकता।’ पर्यटन मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि आगरा किले के पर्यावरण के साथ भी किसी तरह की छेड़छाड़ नहीं करने दी जायेगी। माननीय मंत्री जी ने आगे कहा कि‘ताजमहल की तरह आगरा किला भी विश्व विरासत स्थल है। पर्यटन मंत्रालय ऐसे किसी भी कदम की अनुमति नहीं देता है जिससे इन विश्व विरासत स्थलों को क्षति पहुंचे। उन्होंने कहा कि ताज के पिछवाड़े हेरिटेज कोरीडोर की प्रोजैक्ट रिपोर्ट तकनीकी पहलुओं पर विचार किए बिना हड़बड़ी में तैयार की गई थी। बड़े पैमाने पर मिट्टी भराव के कारण यमुना का प्रवाह बदलने से ताजमहल की नींव पर क्या असर पड़ेगा, इसका गहराई से अध्ययन नहीं किया गया। इंडिया इंस्टीटयूट फॉर टेक्नोलोजी, रुड़की की रिपोर्ट भी ताज की सुरक्षा के अनुकूल नहीं पाई गई। यहां स्थिति इतनी बिगड़ चुकी थी कि भारतीय पुरातत्व विभाग के आगरा स्थित अधिकारियों को बाध्य होकर पुलिस में रिपोर्ट लिखानी पड़ी।’ इस सम्बन्ध में मैं केवल २-३ बातें ही कहना चाहता हूं। एक पैमाना बना हुआ है कि किसी भी ऐसे ऐतिहासिक स्थल से ३०० मीटर इस तरफ किसी भी तरह का कोई निर्माण नहीं किया जा सकता है। उत्तर प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव की अध्यक्षता में जब आगरा में मीटिंग हुई थी, तब उत्तर प्रदेश शासन के तमाम सचिव उसमें सम्मिलित हुए थे, तमाम अधिकारी वहां पर उस मीटिंग में उपस्थित थे फिर भी कैसे इस योजना को अंतिम स्वरूप प्रदान किया गया, कैसे इस योजना को स्वीकृति प्रदान की गई जबकि ३०० मीटर के इस तरफ कहीं भी किसी एतिहासिक स्थल के कोई निर्माण कार्य हो ही नहीं सकता।

श्री मुलायम सिंह यादव : हमारा भी क्षेत्र पड़ता है।…( व्यवधान)

श्री श्रीप्रकाश जायसवाल:जी हां, आपका क्षेत्र भी इस तरफ पड़ता होगा। इस मामले में उत्तर प्रदेश सरकार ने अपने एक सचिव से जांच करवाई थी और जांच रिपोर्ट जिस तरह की आई, उसी से इस मामले में शंका होती है कि कहीं न कहीं दाल में काला जरूर है। उस जांच रिपोर्ट को उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के सामने प्रस्तुत कर दिया। उस जांच रिपोर्ट को देखकर सुप्रीम कोर्ट को यह समझ में आ गया कि इस मामले में कोई बड़े स्तर पर हेराफेरी हो रही है जिसके कारण ऐसी योजना को स्वीकृति प्रदान की गई, ऐसी योजना को अंतिम स्वरूप प्रदान किया गया। जिस योजना के माध्यम से अगर यह योजना क्रियान्वित हो जाती और जिस तेजी के साथ निर्माण कार्य शुरू हो रहा था, ४-६ महीने के अंदर यह पूरी की पूरी योजना क्रियान्वित हो जाती और हिन्दुस्तान की वह इमारत जिसकी वजह से आज भी हिन्दुस्तान पहचाना जाता है, उस इमारत की दशा ८-१० वर्षों के अंदर ऐसी हो जाती कि कोई देखने जाने का साहस नहीं कर पाता। कितना बड़ा दुर्भाग्य उत्तर प्रदेश सरकार के द्वारा प्रस्तुत किया गया। मैं बहुत ज्यादा गहराई में नहीं जाना चाहता कि उत्तर प्रदेश में क्या हो रहा है। किस तरीके से वहां कानून और व्यवस्था की स्थिति की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। किस तरीके से उत्तर प्रदेश के अधिकारी पूरी तरह कानून की अवमानना करके अपनी मनमानी कर रहे हैं और हमारी उत्तर प्रदेश की मुख्य मंत्री हेलीकॉप्टर से एक-एक डिवीजन का दौरा करती हैं और वहां जाकर ४-४, ६-६ अधिकारी को सस्पेंड कर दिया जाता है। मैं इसका जिक्र इसलिए कर रहा हूं कि कोई अधिकारी आज की तारीख में सस्पेंड किया जाता है और ७२ घंटे के अंदर आधे से ज्यादा अधिकारी का सस्पेंशन रिवोक कर दिया जाता है।…( व्यवधान)

श्री मुलायम सिंह यादव :२४ घंटे में हो जाता है।…( व्यवधान)

श्री श्रीप्रकाश जायसवाल:२४ घंटे में हो जाता है, ४८ घंटे में हो जाता है, ७२ घंटे में हो जाता है। अगर कोई अधिकारी आज दोषी है तो ४८ घंटे और ७२ घंटे के अंदर वह कैसे निर्दोष हो सकता है?…( व्यवधान)

श्री अशोक कुमार सिंह चन्देल : किसी अधिकारी का नाम पता हो तो वह भी बता दीजिए।…( व्यवधान)

श्री श्रीप्रकाश जायसवाल:मैं जरूर बता दूंगा लेकिन यहां पर…( व्यवधान)

श्री अशोक कुमार सिंह चन्देल : उपाध्यक्ष जी, यहां पर उत्तर प्रदेश की खराब स्थिति पर चर्चा करा रहे हैं या ताजमहल पर चर्चा करा रहे हैं?…( व्यवधान)

श्री रामजीलाल सुमन : उपाध्यक्ष जी, ये आपको निर्देशित कर रहे हैं।…( व्यवधान)

श्री अशोक कुमार सिंह चन्देल : वह कौन अधिकारी है जिसे २४ घंटे में बहाल कर दिया गया है। इस तरह से अनर्गल आरोप लगाये जा रहे हैं और यह मात्र उत्तर प्रदेश सरकार को बदनाम करने की साजिश है।…( व्यवधान)

उपाध्यक्ष महोदय : जायसवाल जी, आप विषय पर बोलिए।

श्री श्रीप्रकाश जायसवाल: उपाध्यक्ष जी, जब किसी बड़ी असावधानी की ओर इंगित किया जाता है तो उस प्रदेश सरकार द्वारा किस तरीके से कार्य का संचालन हो रहा है, उस बारे में कुछ न कुछ उल्लेख करना जरूरी हो जाता है। हमारे प्रदेश में हर तरीके की असावधानियां और हर तरह की लापरवाहियां हो रही हैं और जिसका परिणाम यह निकल रहा है कि हमारे प्रदेश का चाहे किसान हो या मजदूर हो या व्यापारी हो या साधारण व्यक्ति हो, हर व्यक्ति त्राहि-त्राहि कर रहा है। मैं केवल इसलिए इसका जिक्र करना चाहता हूं कि इतना सब कुछ होने के बाद भी हमारे प्रदेश की जो एतिहासिक धरोहर हैं, उनको भी नहीं छोड़ने का मन बना है कि कम से कम उन ऐतिहासिक इमारतों को तो छोड़ दिया जाना चाहिए जिनकी वजह से आज उत्तर प्रदेश और हिन्दुस्तान पूरी दुनिया में अपना स्थान रखता है। मैं इसीलिए इन चीजों का जिक्र कर रहा था।

   

माननीय उपाध्यक्ष महोदय, यह सौभाग्य की बात है कि सुप्रीम कोर्ट को कुछ दाल में काला नजर आया और उसने सी.बी.आई. से जांच के आदेश दे दिए। हमारे देश में सी.बी.आई. एक ऐसी एजेंसी है, जिस पर हम अभी तक करीब-करीब पूरा विश्वास करते हैं।

श्री मनसूर अली खां (सहारनपुर): सुबह तो कुछ और कह रहे थे।

श्री श्रीप्रकाश जायसवाल: मैं उसका भी जिक्र करूंगा। अभी जो श्री रामजी लाल सुमन ने सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस से जांच की मांग की है, यह इस बात का संकेत है कि हमारे देश में कहीं न कहीं सी.बी.आई. की विश्वसनीयता पर भी अंगुली उठने लगी है। उसके पीछे केन्द्रीय सरकार के आचरण का प्रश्न है। केन्द्रीय सरकार ने इस तरह का आचरण किया है अयोध्या के केस में, जिस तरह से उसने सी.बी.आई. को कठपुतली बनाकर प्रस्तुत किया और अपने दो मंत्रियों को बचाने का काम किया, इससे सी.बी.आई. की विश्वसनीयता भी खतरे में पड़ गई है। मैं यह मांग तो नहीं करता हूं कि सुप्रीम कोर्ट के किसी न्यायाधीश से जांच कराई जाए, लेकिन इतना जरूर कहना चाहता हूं कि यह मामला को कोई साधारण मामला नहीं है, साधारण पर्यावरण का मामला भी नहीं है। अगर यह योजना कार्यान्वित हो जाती तो हमारे देश का बहुत बड़ा नुकसान होता। हमारे देश की ऐसी धरोहर का नुकसान होता कि हिन्दुस्तान का कोई भी जिम्मेदार व्यक्ति इस योजना के कार्यान्वयन के बाद अपना सिर शर्म से झुका देता।

उपाध्यक्ष महोदय, मैं एक बात कहकर अपनी बात समाप्त करूंगा। समय रहते इतनी भारी जो यह अनियमितता उजागर हुई है, जिस तरीके से १७५ करोड़ रुपए की इस योजना को स्वीकृति प्रदान की गई, यहां मंत्री जी, जगमोहन जी, बैठे हुए हैं, इन्होंने अपनी कार्य क्षमता के माध्यम से देश में खूब धाक जमाई है, इनको भी आधी स्वीकारोक्ति नहीं करनी चाहिए थी। जिस तरह से इन्होंने खुलेआम इस बात को स्वीकार किया है कि इस तरह की योजना को कार्यान्वित करने का अधिकार केन्द्र सरकार और राज्य सरकार किसी को नहीं है, किसी को भी ऐतिहासिक धरोहर को नष्ट करने का अधिकार नहीं है, उसी तरह से इनको यह भी स्वीकार करना चाहिए कि उत्तर प्रदेश की सरकार ने इस तरह की योजना को कार्यान्वित करके हमारे देश का सिर शर्म से नीचा किया है। यह भी इनको स्वीकार करना चाहिए। अगर इस तरह की स्वीकारोक्ति जगमोहन जी करते तो शायद केन्द्र सरकार आज कठघरे में न खड़ी होती, क्योंकि इस मामले में केन्द्र और राज्य सरकारें दोनों ही कठघरे में खड़ी हुई हैं। केन्द्रीय सरकार ने ही सबसे पहले इस तरह का मशविरा दिया था, हालांकि जो योजना कही गई थी, मशविरा दिया गया था, उससे अलग हटकर इस योजना को कार्यान्वित किया जा रहा था। लेकिन मेरी समझ में नहीं आता है कि केन्द्रीय सरकार ने उस योजना को भी किस तरीके से स्वीकार किया। जब केन्द्र सरकार कहती है कि ३०० मीटर के अंदर किसी भी तरीके का कोई भी निर्माण नहीं होना चाहिए, चाहे बालू-रेत डालने की योजना हो या कंकड़-कंक्रीट डालने की योजना हो, कैसे इसकी स्वीकृति प्रदान की गई, इससे भी केन्द्रीय सरकार पर प्रश्न चिन्ह लगता है।

मैं इतनी ही मांग करता हूं कि सी.बी.आई. की जांच पर किसी तरीके का प्रभाव न पड़े, यह सुनिश्चित कराना भारत की संसद का काम है। जिस तरीके से अयोध्या के मामले में सी.बी.आई. से रिपोर्ट लिखाई गई है, आज यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि वह इस मामले में भी, जिसमें सीधे-सीधे उत्तर प्रदेश सरकार कठघरे में खड़ी नजर आ रही है, न्यायिक जांच पूरी करेगी और पूरी जांच रिपोर्ट को अक्षरश:, जिस तरह से जांच में तथ्य सामने आ रहे हैं, उनको प्रस्तुत करेगी या नहीं, इस बात को लेकर आज देश और प्रदेश के पर्यावरणविद और जिम्मेदार लोगों के सामने एक प्रश्न चिन्ह लगा हुआ है। मैं आपके माध्यम से मांग करता हूं कि जैसे सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है, उसके आदेश के तहत सी.बी.आई. जांच करके दूध का दूध और पानी का पानी करे।

16.00 hrs. अगर जांच के बाद उत्तर प्रदेश सरकार कटघरे में खड़ी होती है, उत्तर प्रदेश सरकार के ऊपर आंच आती है, तो जो भी कड़ी से कड़ी कार्रवाई केन्द्र सरकार कर सके, उसे उत्तर प्रदेश सरकार के खिलाफ करनी चाहिए।

   

SHRI HANNAN MOLLAH (ULUBERIA): Mr. Deputy-Speaker, Sir, I thank Shri Ramji Lal Suman, who has raised this important topic for discussion. As we are all aware, the Taj is one of the glorious monuments of our country. It is one of the Seven Wonders of the World. All over the world, India is also known by the Taj, which represents our culture, heritage and past glory. Now, an attempt has been started in this country to wipe out the mixed culture and glorious heritage. It is a heritage building because it represents India. On any tourist Map of India that is displayed abroad, the Taj is printed so that it could distinguish that it is India.

In any civilised country, it is a bounden duty of the Govts and the people to protect its heritage with proper honour and care. The Archaeological Survey of India, the Department of Environment and other concerned departments are all responsible for protection of such buildings and our heritage.

Regarding the present controversy, it is very unfortunate that the people in power misuse their powers. Just for their narrow interests, they try to take such decisions which go against the national interests and the national heritage. As has already been pointed out by the hon. Members who spoke earlier, the cost of the Taj Corridor Project is estimated to be about Rs. 175 crore. This project is meant to link up other historical monuments with the Taj with some beautification and construction of roads. At the same time, the construction of some shopping complex, hotels and market places is also intended to be taken up in the area at the background of the Taj. The Taj looks very beautiful at the bend of the river, that is, at the backdrop of the Yamuna. Now, they want to replace that backdrop of the Yamuna with a shopping complex. We know, the baniyas have taken over our ruling class. Now, they are taking over everything. So, this concept is there. But the aesthetic concept, the beautification concept and environmental consciousness have all been given a go-by because of this project. That is one aspect.

The other aspect is that all the Central laws have been violated. There is the Protection of Monuments Act. Other Acts like Environment Act are also there. All such laws have been violated.

Any such project needs additional care and clearance from various departments of the Central Government. But that clearance was not taken. As has been given in the report, the committee headed by the Chief Secretary had cleared the project, money had been sanctioned and even the money had been spent. After some time when the attention of the media was drawn, it exposed the matter before the nation.

Sir, there are so many points in this case. The first thing is the absence of the clearance as one of the major faults and major charge against the State Government. The second thing is that there is a proposal of reclamation of Yamuna River behind the Taj and that has been mentioned also. If that is reclaimed then the water may outflow and the Mahtab Bagh will be flooded. That is another challenge that it will destroy the Mahtab Bagh. Thirdly, this obstruction of natural flow of Yamuna also will cause damage to the Taj itself. The Archaeological Survey of India have opined that it should not be constructed in that fashion and that it will be a criminal offence to this world heritage and because of that the ASI has lodged a complaint against the construction work.

On the one hand there is a callousness of the State Government and on the other hand there is a belated response of the Central Government to this issue. The Taj is one of the oldest heritages of this country and it is the responsibility of the Central Government. The Archaeological Survey of India is there and the Ministry of Environment also is there to protect such heritages of our country. They claim that they came to know late about this. How can such thing happen that the Central Government, which is responsible for the protection of these monuments, is not aware of such a huge project? The State Government has taken up this project and started implementing it without the knowledge of the Central Government.

Fourthly, it is the question of the conduct of the Chief Minister. The Chief Minister had declared that she was not aware of the project. But today, all the newspapers have published that the documents submitted to the CBI state that after the clearance from the State Ministries, the Chief Secretary and other officials, the file was sent to the Chief Minister and the Chief Minister cleared it. All these things are very clear. Now, when they are caught, they are giving various pleas to save their skins. The Central Government says that it came to know late and the State Government is saying this way or that way.

Sir, I think, it is a very serious matter and if we are sincere to protect our heritage and such other historical monuments, we should be much more serious and we have to check such misuse of power. I do not know whether another aspect of corruption may be there or not. Whatever the Government decides and ultimately when we go for an inquiry, we will find interesting facts. It has already been mentioned how the contractors were hired and were accorded work. All these things are not done in a fair manner. It is always the case that such type of corruption is related to such matters. In that situation, I think, it is a very serious matter and it should be stopped.

The hon. Minister is here, so the Central Government should ensure that in no way any damage to the Taj is caused and the Government should also ensure that it will protect the Taj, one of the oldest heritages, to the fullest extent.

That should be ensured.

Secondly, I come to the CBI Inquiry. We hope that CBI will not be influenced because of this unholy alliance there. The Government and all these people are joining hands in Uttar Pradesh. They are fighting in Punjab. They are doing this thing in one State. So, this is a political game. So, CBI should not be used as an instrument. It should be allowed to go, properly inquire, unearth the truth, and find out the culprits behind all these things.

So, Sir, I demand that inquiry should be completed properly in time without any hindrances. The Central Government should ensure that Taj is protected. All this information placed in this House should be taken care of so that criminal negligence and violation by Central and State Government should not be condoned.

With these words, I conclude.

श्री राशिद अलवी (अमरोहा):उपाध्यक्ष महोदय, ताजमहल दुनिया के सैवन वनडर्स में से है और पूरी दुनिया के लोग जब हिन्दुस्तान आते हैं, आगरा जाते हैं तो वहां ताजमहल देखने का काम करते हैं। दुनिया के बहुत सारे हैडस ऑफ दी स्टेटस आगरा आते हैं। ताज उनके लिए बड़ा अट्रैक्शन है और उत्तर प्रदेश सरकार को इस बात का पूरा अहसास है। जिस मामले को यहां उठाया गया, मुझे अफसोस के साथ कहना पड़ता है कि उसकी पूरी मालूमात नहीं थी। बगैर मालूमात के इस मामले को यहां उठाया गया और ताज कॉरिडोर के पर्दे के पीछे इस इशू को उठा कर यहां तक कहा गया कि आईपीएस ऑफिसर परेशान है, ससपैंशन हो रहे हैं, २४ घंटे के अन्दर रीइनस्टेट हो रहे हैं। जुबान कुछ और कह रही है और तकलीफ कहीं और पर है। ताज कॉरिडोर का मसला उठाया जा रहा है लेकिन दर्द कहीं और है। उस दर्द का इजहार कैसे किया जाए, उसके लिए ताज कॉरिडोर का मामला लोक सभा में लाया गया।

पिछले एक साल से उत्तर प्रदेश की सरकार जिस तरह चल रही है, वह हिन्दुस्तान के अन्दर एक मिसाल है। लोक सभा में कितनी बार सुनते हैं कि ब्यूरोक्रेसी देश को चलाने का काम करती है, इस प्रदेश को चलाने का काम करती है लेकिन मैं पूरी ईमानदारी के साथ कहना चाहता हूं कि उत्तर प्रदेश में ब्यूरोक्रेसी उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री से घबराती है। हिन्दुस्तान में पहली बार मुख्यमंत्री ने कमीश्नरी में जाकर ऑन दी सपॉट मुआयना किया और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की। मुझे नहीं मालूम कानपुर में क्या हुआ? लेकिन कानपुर में यदि कोई अधिकारी जिम्मेदार होगा तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

देश में सारे राजनीतिक दलों की कहीं न कहीं सरकार रही है - चाहे कांग्रेस हो या दूसरे राजनीतिक दल हों। देश में सब ने सत्ता भोगी है। किस ने किस तरीके का राज किया है, मैं उस पर बहस नहीं करना चाहता और इस पर बहस करके नेताओं को शर्मिन्दा नहीं करना चाहता लेकिन उत्तर प्रदेश में जिस तरह एक दलित की बेटी सरकार चला रही है, वह इतिहास में हमेशा याद रखा जाएगा। जहां तक ताज कॉरिडोर का मामला है, सुप्रीम कोर्ट में यह केस पैडिंग है। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस श्री एम.बी. शाह और जस्टिस लक्ष्मण ने कहा कि :

"Some action is required to be taken in this matter against whom we do not know. "

 सी.एम. के बारे में नहीं कहा जिसके लिये यहां कहा गया कि उन्हें डिसमिस करना चाहिये। तमाम इंक्वायरी के बाद, तमाम बहस-मुबाहिस के बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अभी नहीं कह सकते कि इसके लिये जिम्मेदार कौन है। सुप्रीम कोर्ट ने आगे कहा -

"The Bench considering all the aspects as well as the allegations made by so and so, it appears that a detailed inquiry is necessary to be carried out by the CBI. The Bench, therefore, directed the CBI Director to see that the inquiry with regard to the allegations and irregularities committed by the officials concerned was conducted at the earliest and report to the court within two months. "

 सी.बी.आई. इंक्वायरी कर रही है और दो महीने के अंदर अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट के सामने पेश कर देगी जिससेदूध का दूध और पानी का पानी सामने आ जायेगा। मैं नहीं समझ पा रहा कि जब दो महीने के अंदर सी.बी.आई. की रिपोर्ट आने वाली है, फिर भी लोक सभा के अंदर इस मामले पर बहस हो रही है। बेहतर होता कि इस मामले में दो महीने के बाद, जब सी.बी.आई. की रिपोर्ट आ जाती, इस मामले पर बहस होती। तब सी.बी.आई. तय कर देती कि इस सब के लिये कौन जिम्मेदार है।

उपाध्यक्ष महोदय, मामला केवल इतना ही नहीं है। एम.बी.बी. में ५ सदस्य होते हैं जिसमें चार सदस्य सैंट्रल गवर्नमेंट के हैं - एनवायर्नमेंट सैक्रेट्री, पावर सैक्रेट्री, पौल्यूशन बोर्ड का चेयरमैन और अरबन डेवलेपमेंट का सैक्रेट्री। इसके अलावा उत्तर प्रदेश सरकार का चीफ सैक्रेट्री इस कमेटी का चेयरमैन है। इसकी एक मीटिंग १२.१०.२००२ को हुई जिसमें यह तय किया गया कि इस कॉरिडोर को बनना चाहिये। कॉरिडोर को बनाने के लिये यह तय हुआ कि टैक्नीकल फज़बलिटी रिपोर्ट और डी.पी.आर. इस काम को करने से पहले इन दोनों की तैयारी होनी चाहिये कि कैसा ब्लूप्रिंट होगा, कैसे उसे बनाया जायेगा, कहां नहीं बनाया जायेगा। एम.बी.बी. की सिर्फ एक ही मीटिंग हुई है, दूसरी मीटिंग अभी तक नहीं हुई है। इसके अलावा और कोई बात पहली मीटिंग में तय नहीं की गई। इस काम के लिये ब्लूप्रिंट और नक्शा बनाने के लिये जो थोड़ा बहुत पैसा खर्च हो सकता है, उसके लिये २-४ लाख रुपया निकाला जा सकता है। इसके अलावा जब उत्तर प्रदेश सरकार ने, इस कमेटी ने, फाइनेंस मनिस्ट्री ने या चीफ सैक्रेट्री ने किसी प्रकार से पैसे की अप्रूवल नहीं दी फिर एनवायर्नमेंट सेक्रेट्री ने कैसे १७ करोड़ रुपया अप्रूव करके निकाल लिया और उसका इस्तेमाल किया। मुख्य मंत्री जी को जब इस बात का पता चला कि इस तरीके से धांधली हो रही है, इस तरीके से पैसे की बर्बादी हो रही है, उन्होंने २१ जून को इंक्वायरी सैट अप करने के लिए ऑर्डर कर दिया। सुप्रीम कोर्ट में मामला बाद में आया।The work on the Taj heritage corridor was stopped on Saturday after the Chief Minister, Kumari Mayawati ordered an investigation into the matter. The SP and the Additional District Magistrate drove to this site. अथौरिटीज को आगरा भेजा गया। तब तक न सुप्रीम कोर्ट था और न बीच में कोई दूसरा था अगर कहीं कोई गड़बड़ होती तो मुख्यमंत्री इंक्वायरी सैट अप न करती और प्रिंसीपल सेक्रेट्री(फाइनेंस) को यह जिम्मेदारी दे दी। इससे ज्यादा सफाई और ट्रांसपीरेंसी और क्या हो सकती है? उत्तर प्रदेश में हमारा जितना कनसर्न है, उतना ही मुख्यमंत्री जी का है। जो रुपया निकाला गया है या जिन लोगों ने रुपया निकाला है और जिन लोगों ने साजिश करके यह रुपया निकाला है, उसके लिये एन.पी.सी.सी. के चेयरमैन श्री बाली और एनवायर्नमेंट सेक्रेट्री श्री आर.के. शर्मा जिम्मेदार हैं जिनके खिलाफ मुख्य मंत्री जी ने कार्यवाही की है।

श्री रामजीलाल सुमन : उपाध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से विनम्र आग्रह करना चाहता हूं कि मुख्य मंत्री कन्फैस कर रही है कि मेरे आदेश से सब कुछ हुआ है…( व्यवधान)

MR. DEPUTY-SPEAKER: Nothing will go on record.

(Interruptions) …* श्री राशिद अलवी : मैं सुबह से कह रहा हूं कि टाइम्स ऑफ इंडिया की यह खबर है। मैं समाजवादी पार्टी को चैलेंज करता हूं, मुलायम सिंह जी यहां बैठे हैं कि अगर मायावती जी के दस्तखत उस फाइल में हुए, आप और सब को छोड़ दीजिए, मैं लोक सभा की मैम्बरशिप से इस्तीफा देने के लिए तैयार हूं।…( व्यवधान)

श्री राज बब्बर : उपाध्यक्ष महोदय, मैं कहना चाहता हूं कि यह मुलायम सिंह जी को चैलेंज कर रहे हैं तो मैं उत्तर प्रदेश सरकार का वह लैटर देने के लिए तैयार हूं जिस लैटर में १७ करोड़ रुपये…( व्यवधान)

श्री राशिद अलवी : मैं चैलेंज कर रहा हूं कि अगर मायावती जी के साइन इस कागज पर हुए…( व्यवधान)यह कह रहे हैं, क्या यह समाजवादी पार्टी के एम.पी. नहीं हैं, यही तो कह रहे हैं कि साइन किये, मैं और किसे चैलेंज करूंगा।

श्री मुलायम सिंह यादव : यह क्या है।

   

* Not Recorded उपाध्यक्ष महोदय : यह क्या एक्सचेंज हो रहा है।

श्री राशिद अलवी : मुख्य मंत्री के साइन कहां हैं।…( व्यवधान)

MR. DEPUTY-SPEAKER: What is going on here?

… (Interruptions)

MR. DEPUTY-SPEAKER: What is this? उन्हें जो भी कहना है, अगर कुछ अनपार्लियामैन्ट्री होगा तो मैं डिसअलाऊ करूंगा। इसके बाद मुलायम सिंह जी आपका ही चान्स आ रहा है। उसके बाद उनका भी चांस आयेगा। मैं दोनों को चान्स दे दूंगा।

श्री मुलायम सिंह यादव : धन्यवाद।

उपाध्यक्ष महोदय : अभी इन्हें जो बोलना है, वह बोलने दीजिए।

श्री मुलायम सिंह यादव : वह चैलेंज कर रहे हैं तो मैंने दस्तखत दिखा दिये।

उपाध्यक्ष महोदय : आप अपने भाषण में इसे उठाइये।

श्री राशिद अलवी : जो चिट्ठी मुलायम सिंह जी यहां दिखा रहे हैं वह मि. बालू की चिट्ठी मायावती जी के नाम है। मैं दूसरी बात कह रहा हूं कि अगर उस फाइल में मायावती जी ने अप्रूव किया है तो मैं राज बब्बर जी और मुलायम सिंह जी से कह रहा हूं कि अगर आप …( व्यवधान)

श्री मुलायम सिंह यादव :सी.बी.आई. बतायेगी।

श्री राशिद अलवी : सी.बी.आई. बाद में बतायेगी। लेकिन आप कह रहे हैं कि साइन हैं। आपके पास वह कागज मौजूद है। राज बब्बर जी कागज दिखा रहे हैं, जिस पर अप्रूवल है तो मैं चैलेंज कर रहा हूं कि आपके पास अगर वह कागज है, जिस पर अप्रूवल है तो मैं अभी इस्तीफा दे दूंगा। मैं हाउस से निकल कर नहीं जाऊंगा। लेकिन वह दस्तखत नहीं हैं।

MR. DEPUTY-SPEAKER: I do not want anyone of you to resign from here now.

SHRI RAMESH CHENNITHALA (MAVELIKARA): There is only one year left. Why is he resigning? Why are you resigning?

MR. DEPUTY-SPEAKER: That is what I am telling him.

… (Interruptions)

MR. DEPUTY-SPEAKER: Shri Rashid Alvi, you have already said whatever you wanted to say. Now you conclude. Let me call them also to speak.

श्री राशिद अलवी : मेरी यही कहना है कि इस मामले में जितना कंसर्न हाउस को है, जितना कंसर्न दूसरे एम.पीज. को है, उससे ज्यादा कंसर्न उत्तर प्रदेश सरकार को हैं। चूंकि उत्तर प्रदेश के अंदर बी.एस.पी. की सरकार है और बी.एस.पी. की सरकार के अंदर ऐसा मुमकिन नहीं है। इसलिए आर.के.शर्मा के खिलाफ कार्रवाई की गई और उन्हें फौरन सस्पैंड किया गया। सी.बी.आई. की इंक्वायरी को हमने वैलकम किया है और हम आपके जरिये हाउस में यह भी कहना चाहते हैं कि सी.बी.आई. के साथ-साथ किसी और तरीके की इंक्वायरी अगर सैट अप करना चाहते हैं तो हम उस इंक्वायरी का भी वैलकम करने के लिए तैयार हैं। चूंकि जो सच्चाई है वह सबके सामने आ जायेगी। सुप्रीम कोर्ट के ऑर्डर को मैं आपके सामने कोट कर रहा हूं, जिसमें कहा गया है यह नहीं कहा जा सकता कि इसके लिए कौन जिम्मेदार है। अगर किसी के पास वह कागज मौजूद है, जिसमें मुख्य मंत्री का अप्रूवल है तो मैं राज बब्बर जी से कहूंगा कि वह उसे सुप्रीम कोर्ट में पेश करें, सी.बी.आई. को पेश करें, ताकि कानूनी कार्यवाही हो। हिन्दुस्तान में कोई आदमी कानून से ऊपर नहीं है। अगर आपके पास कोई डाकूमैन्ट मौजूद है तो आप इस बात से परेशान मत होइये। मैं चैलेंज कर रहा हूं कि यह सुप्रीम कोर्ट के अंदर पैन्िंडग है, सी.बी.आई. इंक्वायरी कर रही है, आप कागज जमा करा दीजिए, सी.बी.आई. अपना काम करेगी। लेकिन मुझे पूरा यकीन है कि ऐसा कागज किसी के पास मौजूद नहीं है।

मैं बहुत अदब से आपसे कहना चाहता हूँ कि इस मामले में जो सच है उसे सीबीआई तय करेगी और यहां पर इस मामले पर नियम १९३ के तहत बहस होने की कोई गुंजाइश नहीं थी। लेकिन आपने बहस कराई तो उसमें सब लोगों को मौका मिला कि बिना कुछ जाने कि सच क्या है, इस पर बहस हो रही है। लेकिन आज से दो महीने बाद जब सीबीआई का फैसला आएगा तो दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। आपका बहुत बहुत धन्यवाद।

श्री राज बब्बर (आगरा) : माननीय उपाध्यक्ष महोदय, ताज हैरिटेज कॉरिडोर को लेकर अंतर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय जगत में चिन्ता प्रकट की जा रही है। यहां पर पर्यावरण मंत्रालय और पर्यटन मंत्रालय, दोनों के मंत्री महोदय बैठे हैं।

मेरे ख्याल से देश में ही नहीं, दुनिया में आज एक सवाल है और मैं राशिद अलवी जी की बात को पूरी तरह से मानता हूँ कि इस हैरिटेज के परदे के पीछे क्या है, वह पूरी तरह से किसी को भी नहीं मालूम कि यह हैरिटेज कॉरिडोर क्या है, इसका रूप क्या है, यह हैरिटेज कॉरिडोर का नाम कहां से आया है, यह शीर्षक और टाइटल किसने दिया, किसने बनाया, इस बारे में बहुत ज़रूरी है कि देश को पता चले। यह सच है कि हमारे आदरणीय साथी रामजीलाल सुमन जी ने इसका जो राजनैतिक आस्पैक्ट और इसका जो ऐस्थैटिक आस्पैक्ट है और ब्यूटी आस्पैक्ट बताया और कुछ सवाल चैलेन्ज के रूप में हमारे भाई राशिद जी ने भी कहे। मैं किसी तरह के चैलेन्ज के रूप में नहीं कहना चाहता लेकिन एक बात ज़रूर कहना चाहता हूँ कि इस विषय को केवल ब्यूटी, ऐस्थैटिक और पोलटिकल आस्पैक्ट की नज़र से ही न देखा जाए। ये आस्पैक्ट बहुत बड़े हैं। इसलिए बड़े हैं कि इसमें हमारी जग-हँसाई सारी दुनिया में हो रही है। उसमें एक आस्पैक्ट और भी है और वह है हयूमन आस्पैक्ट - जिस आस्पैक्ट की वजह से आज ये दोनों मंत्रालय उत्तर प्रदेश के साथ या केन्द्र सरकार उत्तर प्रदेश के साथ मिलकर आई है इस ताज हैरिटेज कॉरिडोर के अंतर्गत - वह क्या है? आदरणीय साथी ने एम.सी.मेहता वर्सेज़ गवर्नमेंट ऑफ इंडिया के मामले में जो एक रिट पैटीशन फाइल हुई थी, उसके बारे में बताया तथा पर्यावरण से होने वाले नुकसान के बारे में, उससे ताजमहल को क्या नुकसान होगा, उसके बारे में बताया। लेकिन एक रिट पैटीशन और थी - डी.के.जोशी वर्सैज़ स्टेट गवर्नमेंट ऑफ उत्तर प्रदेश् -ा जिसमें मसला था डिं्रकिंग वाटर का, सीवर सिस्टम का, ड्रेनेज का, जिसकी वजह से उत्तर प्रदेश सरकार और केन्द्र सरकार दोनों को सम्मिलित किया गया। जस्टिस कुलदीप सिंह ने सर्वोच्च न्यायालय में १९९८ में नेशनल एनवायर्नमेंटल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीटयूट (नीरी) को मान्यता दी कि जो रिपोर्ट वे देंगे, उसको कार्यान्वित करना होगा। उसमें उत्तर प्रदेश सरकार और केन्द्र सरकार दोनों को कहा गया आप ५०:५० प्रतिशत के भागीदार होंगे और ये सुविधाएं आगरा की जनता को आप दिलवाएं। बदकिस्मती यह है कि १९९८ से लेकर आज तक ४६० करोड़ रुपया आगरा में जा चुका है और बंटर-बांट के तरीके से वहां बंट रहा है। वहां पर वही अधिकारी जाते हैं जो अधिकारी शासक और प्रशासक को चढ़ावा चढ़ाने के लिए राज़ी होते हैं। जब उनकी मर्ज़ी होती है तो उनका ट्रांसफर कर दिया जाता है और जब मर्ज़ी होती है तो रख लिया जाता है। सबसे विश्वसनीय अधिकारी ही वहां पर जाया करते हैं।

मैं कहता हूँ कि बड़ा अच्छा हुआ दूध में उबाल आया और १७ करोड़ का यह मसला सामने आया हैरिटेज कॉरिडोर का, जिसके बारे में मैं चाहूँगा कि मंत्रिगण बताएं कि ताज हैरिटेज कॉरिडोर है क्या।

महोदय, क्या केवल एक अंग्रेजी अखबार की तस्वीर को मान्यता दी जाती है, जिसके केवल २ जून, २००३ के अंक में छपता है, उसके ऊपर हंगामा हो जाता है ? राष्ट्र भाषा और राष्ट्र प्रेम की बात करने वाले लोग और सरकार ने क्या पहली जनवरी, २००३ से इस बारे में आगरा से छप रहे हिन्दी समाचार पत्रों की ओर ध्यान नहीं दिया, राष्ट्रीय स्तर के हिन्दी अखबारों में इस संबंध में छपे समाचारों की ओर इस सरकार ने कोई ध्यान नहीं दिया। इस बारे में समाचार उसी दिन से छप रहे हैं जब से वहां ट्रैक्टर खड़े होने शुरू हुए। चार तारीख को आगरा से हिन्दी समाचार पत्र में समाचार छपा जिस दिन वहां हजारों ट्रैक्टर खड़े हो गए। चूंकि समाचार हिन्दी में था इसलिए राष्ट्र भाषा प्रेमी सरकार और उसके लोग राष्ट्र भाषा में छपे समाचार को नहीं समझ पाए। इन्हें केवल आंग्ल भाषा समझ में आती है।

महोदय, आगरा की जनता के मुंह से निवाले के रूप में केवल १७ करोड़ नहीं बल्कि ४६० करोड़ रुपए छीने गए हैं और अभी तक उसका कोई हिसाब नहीं है। मैं माननीय जगमोहन जी और बालू साहब के प्रति आभार प्रकट करता हूं जब मैं इनसे मिला और मैंने बताया कि आगरा की जनता को पानी से वंचित रखा जा रहा है, तो इन्होंने चार और छ: साल से रुकी हुई योजनाओं को तत्काल स्वीकृति दिलाने में मदद की। जगमोहन जी का भी मैं शुक्रिया अदा करता हूं इन्होंने भी इस इश्यू को उठाया। जब वर्ष २००० में समाजवादी पार्टी के हम तीन सांसद खाली मटके लेकर प्रधान मंत्री के घर गए और उन्हें आगरा में पानी की कठिनाई के बारे में अवगत कराया तो कुछ नहीं हुआ, उल्टे हमारे खिलाफ अभी तक उच्च न्यायालय में मामले चल रहे हैं और हम पेशियां भुगत रहे हैं, लेकिन आगरा को पानी नहीं मिला।

महोदय, ये १७ करोड़ रुपए, जो उत्तर प्रदेश सरकार ने जनता के व्यय किए, उसके लिए कौन जिम्मेदार है। आपने कहा कि मैं क्या जानूं कि सरकारें कैसे चलती हैं, ठीक है, मैं नहीं जानता कि सरकारें कैसे चलती हैं, लेकिन मैं सरकार चलाने वालों के पीछे जरूर बैठता हूं। आप मेरी इस बात से सहमत होंगे कि ५ करोड़ रुपए से ऊपर की धनराशि की जब स्वीकृति देनी होती है, तो कैबिनेट की एप्रूवल लेनी पड़ती है। मेरे आगरा के लोगों के पीने के पानी का पैसा छीना गया, सफाई का पैसा छीना गया। इस पेपर में लिखा है कि वर्ष २००३ में आगरा के लिए जलापूर्ति एवं सफाई शीर्ष में से ताजमहल हेरिटेज कोरिडोर क्षेत्र में व्यय करने हेतु योजनागत व्यय में से धनराशि निर्गत किए जाने की प्रार्थना की गई है, यानी इन्फ्रास्ट्रकचरल डैवलपमेंट के लिए आगरा के लोगों के पीने के पानी एवं सफाई के लिए व्यय किए जाने वाले धन में से यह धन व्यय किया गया है। इस पत्र में जिक्र है यह पत्र मेरे हाथ में है। ४ अगस्त, २००२ को राज्यपाल को लिखा गया और दिनांक १२ अक्तूबर, २००२ को मुख्य सचिव को लिखा गया, जिनका इस पत्र में जिक्र किया गया है। उसके बाद धनराशि अवमुक्त करने के लिए राज्यपाल से निवेदन किया गया क्योंकि धनराशि अवमुक्त करने की अनुमति राज्यपाल देते हैं।

महोदय, मुझे समझ में ऩहीं आ रहा है कि कौन सी गीली बोरी इसके ऊपर डालने की कोशिश की जा रही है। सवाल केवल १७ करोड़ रुपए का नहीं है। इसका तो हिसाब कर दिया जाएगा। जिस प्रकार से दूध में उबाल आता है और कुछ दूध पतीले से निकल कर नीचे गिर जाता है, उसे साफ कर दिया जाता है, उसी प्रकार इन १७ करोड़ रुपयों का तो हिसाब दे दिया जाएगा। सी.बी.आई. बता देगी कि किस शीर्ष में यह व्यय किया गया। आर.के.शर्मा को निकाल दिया गया, डी.एस. बग्गा को भी निकाल दिया जाएगा, सवाल यह नहीं है, सवाल यह है कि इसका सारा का सारा मिशन बोर्ड को मालूम था, वे जानते थे कि क्या होने जा रहा है। यह केवल दो या पांच लाख रुपए के व्यय का सवाल नहीं है, बल्कि पूरे १७ करोड़ रुपए के व्यय का सवाल है। इसमें यदि जिम्मेदारी निश्चित की जाएगी, तो केवल पर्यावरण सचिव की नहीं, बल्कि वित्त सचिव भी फंसेंगे और यदि वित्त सचिव फंसेंगे, तो वे अकेले नहीं बल्कि वित्त मंत्री की अनुमति से ऐसा करने की बात कहेंगे और जब वित्त मंत्री भी इसमें बीच में आएंगे, तो केवल जब वित्त मंत्री ही नहीं आएंगे बल्कि पूरे मंत्रिमंडल की जिम्मेदारी निर्धारित की जाएगी।

महोदय, जिस तरह से हंगामा होना था, वह शुरू हो गया। एक अंग्रेजी अखबार ने छाप दिया और आपने उसका नोटिस ले लिया। यह अत्यन्त चिन्ता का विषय है कि काफी समय से स्थानीय हिन्दी अखबारों में यह छपता रहा, लेकिन सरकार ने उसका कोई नोटिस नहीं लिया। खैर यह उत्तर प्रदेश के हकूक में है कि वह ऐसे कार्य करे, अपने विकास के कार्य करे। मैं आपके ध्यान में लाना चाहता हूं कि ताज टि्रपेजियम जोन का कमिश्नर पहले आगरा में हुआ करता था, लेकिन जैसे ही यह हंगामा शुरू हुआ, कमिश्नर को वाइस चेयरमैन बना दिया गया और जो पर्यावरण सचिव हैं, उन्हें चेयरमैन बना दिया गया, क्या यह साजिश नहीं थी ?

मैं ये सब इन सारे बड़े लोगों पर छोड़ता हूं। मैं यह भी कहता हूं कि राजनीति भी आप संभालिए, मुझे एसथेटिक पर भी यकीन है और इस बात पर भरपूर भरोसा है। जहां तक जगमोहन जी का सवाल है, एसथेटिक का सवाल है, कर्तव्य परायणता का सवाल है इसमें कहीं कोई चूक नहीं हो सकती है। यह जरूरी नहीं है कि हम किसी विरोधी पार्टी के हैं तो मैं उनके बारे में किसी ऐसी भाषा में बात कहूं, लेकिन एक क्रेडबिल्टी और एकाउंटेबिल्टी है। उनके बारे में मैं खुल कर कहने को तैयार हूं। श्री बालू के बारे में मैं खुल कर कहने को तैयार हूं, जब मानवीय प्रश्न आए तो उन्होंने हमेशा मदद की है। मैं पिछले दो साल से मांग कर रहा हूं। उत्तर प्रदेश के टीटीजैड से कहा, मैंने बार-बार एनवायरमेंट कमेटी की मीटिंग में कहा कि जो टीटीजैड के अंतर्गत पैसा जा रहा है उसकी पारदर्शिता होनी चाहिए, लेकिन आज तक पारदर्शिता नहीं है।

महोदय, अगर मैं आपको आंकड़े दूंगा तो आपकी समझ में आएगा कि यहां किस तरह घपले हुए हैं। सी.बी. पालीवाल जी ने एफिडेविड दिया तो एफिडेविड देने की नीरी की रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने केवल जल संस्थान, जल सुविधा को देने के लिए उन लोगों ने जो पैसे की मांग की थी वह २८३ करोड़ रुपए थे। ये रुपए नौ मई, १९९६ को मांगे गए थे। उसका किस तरह से इन्होंने हिसाब लगाया कि सिवरेज ट्रीटमेंट प्लान के लिए ५४ करोड़ रुपए, डायवर्शन ऑफ ड्रेन्स के लिए मांगे गए। यह पैसा १९९६ में मिला और ५४ करोड़ रुपए नहीं बल्कि ७४ करोड़ रुपए आज तक खर्च हो चुके हैं। अफसोस की बात यह है कि उस वक्त बीओडी करीब ६.६ करोड़ रुपए था और अब १९.३ करोड़ रुपए है, यह उस वक्त की बात है। दूसरा, modernisation, expansion of flush water works and strengthening of distribution system के लिए बदकिस्मती से ३१ करोड़ रुपए उस वक्त मांगे थे, उसमें से ७२ करोड़ रुपए अब तक दिए जा चुके हैं, लेकिन पीने के पानी की व्यवस्था ६० प्रतिशत लोगों के पास आगरा में आज तक नहीं है और जो ४० प्रतिशत लोग पी भी रहे हैं वे कीड़ों से युक्त पानी पी रहे हैं। आप देखिए कि किस तरह से पैसे का दुरुपयोग हुआ है और कहां हुआ है। उन्होंने Construction of Agra barrage along with linking water works के लिए डेढ़ सौ करोड़ रुपए मांगे। यह रुपया बैराज को नहीं दिया गया। बैराज के अंदर १५ करोड़ रुपए खर्च हुए, जिसके बारे में कोई हिसाब नहीं कि ये कहां खर्च हुए, न बैराज की शुरूआत है। ड्रेनेज सिस्टम की इम्प्रुवमेंट में २० करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं। जगमोहन जी कह रहे थे कि आगरा में कम से कम सबसे पहले गंदगी साफ होगी। वहां १५ मिनट वर्षा आती है तो इतना पानी हो जाता है कि गाड़िया अंदर घुस जाती हैं। मैं यह सिर्फ इसलिए कह रहा हूं कि पैसा कहां गया। आज आगरा में १५०० मीटि्रक टन कूड़ा रोज निकलता है।…( व्यवधान)आज जो दूध का उबाल आ गया है उसे साफ करने की कोशिश मत कीजिए। इसके पीछे पूरा का पूरा दूध सड़ गया है, उसमें बदबू आनी शुरू हो गई है। आज मौका मिला है इसलिए आज अगर हेरिटेज कोरीडोर के बारे में बात हो रही है तो मैं जरूर बोलना चाहता हूं, क्योंकि हम तो कहते-कहते थक गए, पर्यावरण मंत्रालय भी इस बात को कहता रहा, राज बब्बर को इसकी डिटेल्स दी जाएं, लेकिन अभी तक नहीं दी गईं। मैं दो साल से कहता आ रहा हूं, अब जब मौका मिला है तो कहने दीजिए क्योंकि यह पैसा केन्द्र का है, उत्तर प्रदेश सरकार का है। आपने कहा कि मुख्य मंत्री जी को मालूम नहीं है, आप हमारे मुंह से कहलवाना चाहते हैं कि हम कुछ कहें, आप गलत बयान कर रहे हैं, हम कभी व्यक्तिगत बात करने की कोशिश नहीं करते हैं। आगरा की बात नहीं बल्कि सारी दुनिया के हेरिटेज की है, आप उसमें सब को उलझा रहे हैं, जब आप उलझ रहे हैं तो हम इसे बिलकुल स्पष्ट रूप में कह रहे हैं कि मंत्री जी को यह साबित करना पड़ेगा, वे कैसे कह सकते हैं कि वे गलत नहीं हैं। आप क्या चाहते हैं, मुझे आप बताना चाहते हैं कि १७ करोड़ रुपए प्रदेश में कोई भी अधिकारी दे सकता है, मेरे ख्याल से इस देश की यह हालत ह।ै आगरा में लोगों का रोजगार छीना गया है।

आज वहां लोगों के पास रोजगार नहीं है। आपने पर्यावरण के नाम पर, आगरा के ताजमहल के नाम पर यह सब किया है। आज आगरा के अन्दर सेमीनार होते हैं तो लोग कहते हैं कि आगरा के लिए ताज अभिशाप है या वरदान है। मुझे जब एक सेमीनार में बुलाया गया तो मैंने कहा कि हां, आज की स्थिति में लगता है कि अधिकारियों के लिए, शासकों के लिए और प्रशासकों के लिए वरदान है और आगरा की जनता के लिए यह अभिशाप बनकर रह गया है। हर रोजगार को आप आगरा से छीनने की कोशिश कर रहे हैं। आज इण्डस्ट्रीज वहां बन्द हो रही हैं। आयरन फाउण्ड्री बन्द हो रही हैं, चलिये ठीक है, बन्द हो रही हैं, लेकिन ऊपर से एक से एक बढ़कर चीजें हो रही हैं।

आप पूछेंगे कि इसका इससे कोई लेना-देना नहीं है, इसे इससे क्यों जोड़ा जा रहा है। आज एक्सप्रैस हाईवे आ रहा है तो क्यों आ रहा है। एक बहुत बड़ा कारपोरेट ग्रुप है, जो मुख्यमंत्री के आसपास बैठता है। एक अखबार में छपा, मुझे बड़ा अजीब लगता है, वैसे कहावत ही है, लेकिन छपा है तो मैं उसे पढ़कर सुना देता हूं। एक अखबार ने छापा कि माननीय मुख्यमंत्री महोदया अमेरिका जाने से पहले, एक पांच सितारा होटल है, जिनको आजकल बड़ी जमीनें दी जा रही हैं, उस होटल में बैठकर दावत ले रही थीं तो एक अमेरिकन वहां पर आ गया। उसने कहा कि"I want to purchase Taj Mahal." तो अधिकारी ने कहा कि नहीं-नहीं,it is not possible. आप इसे क्यों खरीदना चाहते हैं तो मुख्यमंत्री जी ने सुन लिया और उन्होंने कहा कि ये क्या कहते हैं तो उन्होंने कहा कि ताजमहल खरीदना चाहते हैं तो पूछा कि यस-यस, इनसे पूछो क्या कहते हैं। Yes, everything has a price, शायद दिमाग में यह बात आईthat everything has a price. That is the reason when they came back, they have found out how to create 74 acres of land. उसके पीछे क्या है, ७५ एकड़ जमीन को सिर्फ तैयार किया गया कि एक-एक फुट की कीमत क्या होगी और उस कीमत पर उसे बेचा जा सके। मैं चाहूंगा कि केन्द्र सरकार इस बात को बताये, क्योंकि जिम्मेदारी केन्द्र सरकार की है, क्योंकि केन्द्र के मंत्रालय इससे जुड़े हुए हैं कि यह हेरिटेज कोरीडोर क्या है?

मैं वापस हेरिटेज कोरीडोर की तरफ आता हूं, क्योंकि जहां तक कोरीडोर का मामला है, कोरीडोर के पीछे जो संस्थाएं हैं, कोरीडोर के पीछे जो एक मानसिकता थी, कोरीडोर के पीछे सर्वोच्च न्यायालय की जो एक मानवीय पीड़ा थी, जिसके लिए ये चीजें हुईं और जिसके लिए सर्वोच्च न्यायालय बीच में आया। सर्वोच्च न्यायालय आगरा के लोगों का भला करने के लिए, आगरा की जनता के लिए हर तरह की सुविधा मुहैया कराने के लिए तैयार था। उसकी वजह से किस तरह से लोगों ने वहां भ्रष्टाचार कर करके आज १७ करोड़ की जगह ३० करोड़ का बिल बनाया हुआ है, ५-६ करोड़ से ऊपर का काम नहीं हुआ है, वहां पर पत्थर डले हैं और रेती तक के पैसे नहीं दिये गये। जो रेती वहीं से निकालकर वहीं डाली गई है, उस रेती के जो पैसे देने चाहिए थे, उन बिलों का पेमेण्ट अभी तक नहीं हुआ है। पांच करोड़ रुपये से ऊपर का खर्चा नहीं हुआ, १७ करोड़ रुपये ले रखे हैं और ३० करोड़ रुपये से ऊपर का बकाया बाकी है। ये चीजें सिर्फ इस के लिए न रखी जायें कि हम किसी पार्टी के लिए कह रहे हैं, जो पार्टी जिम्मेदार है, जो सरकार जिम्मेदार है, जो नेता जिम्मेदार है, जो मुख्यमंत्री जिम्मेदार है, उसे गर्व से नहीं, बल्कि शर्म से कहना चाहिए कि हमने देश के साथ गलत किया है, हमने देश की धरोहर को खत्म किया है।

बस, अपनी इसी बात से मैं अपनी बात को समाप्त करता हूं और आपका बहुत-बहुत आभार प्रकट करता हूं।

DR. M.V.V.S. MURTHI (VISAKHAPATNAM): Mr. Deputy-Speaker, Sir, Taj Mahal is India’s pride. It is one of the Seven Wonders of the World.

SHRI PRIYA RANJAN DASMUNSI : The eighth wonder is there, NDA! … (Interruptions)

DR. M.V.V.S. MURTHI : Anything that we do, we will be spoiling the ecology around Taj Mahal. The tourist world over have one ambition of their lives and it is to see Taj Mahal once. That is how we are attracting them. We are not attracting people elsewhere from all over the world. We are not attracting them for the heritage corridor, not for the hotels and not for other things that we build around Taj Mahal. We should keep it in mind that under any circumstances, the Taj Mahal should appear as it was before. If that is the case, we should not think of building anything around it. I am not going to say about Rs. 175 crore or Rs. 17 crore wasted. It is too small an amount. It does not matter. But at least for future, let us all resolve that we will protect our heritage that is Taj Mahal. That is the pride of India.

So, the construction going on should be stopped. We have already polluted the river Yamuna. The natural look of the river has already gone. In the moonlight, you can only see the black water flowing in the river. There is no good water. The water is polluted. All the sewage water is going into that river.

We should provide clean surroundings. Let us keep the surroundings clean, and also keep them as natural as they appeared before. The Central Government should provide money for good transport, for good living, and also for pure drinking water which is a scarcity there. There should not be anything around the river, and it should be as natural as it was before. If you keep it like this, then the people would like it, and people would come to see it from all over the world. By doing so, we would be protecting the image of our country. By doing so, we would not fight as what to build and what not to build around it.

Please, let us all resolve -- no politics in it -- that the Taj should be protected, and nothing should be constructed around it.

Thank you Mr. Deputy-Speaker Sir. With these words I take leave of you.

           

डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह (वैशाली): उपाध्यक्ष महोदय, अभी जैसा मूर्ति जी ने कहा कि ताजमहल देश का गौरव है, दुनिया की धरोहर है। हम लोग कोर्ट की आलोचना करते हैं कि कोर्ट में ज्यूडशियरी एक्टिविज्म आ गया है और यह सवाल बार-बार उठता है कि जो काम हमारी सरकार और पार्लियामैंट का है, उससे बढ़ -चढ़कर कोर्ट काम करने लगा है। लेकिन कभी-कभी हम देखते हैं कि कोर्ट बहुत वाजिब काम या वाजिब फैसला करता है। इससे पहले हमको याद है कि पर्यावरण के चलते, प्रदूषण के चलते ताजमहल पर खतरे की संभावना थी, तब कोर्ट ने उस खतरे को आंक कर बार-बार चेतावनी दी और कार्रवाई करने के लिए कहा कि वहां इकोलॉजी और पर्यावरण दुरस्त रहे जिससे हमारी धरोहर खराब न हो। अब वायुमंडल में खराबी होने से भी ताजमहल में खराबी के लक्षण नजर आने लगते हैं। इसके साथ-साथ नदी और कटाव के चलते भी उसमें खतरा पैदा हो सकता है। …( व्यवधान)कुछ लोगों को विचार प्रदूषण है। यह वायु प्रदूषण तो है ही लेकिन सबसे ज्यादा विचार प्रदूषण है जिसके चलते देश में खराबी और गिरावट है। इसलिए कोर्ट वायु प्रदूषण आदि सब प्रदूषणों को रोकने के लिए धमकाता है, डराता है और कार्रवाई करता है। मैं यह सवाल उठाना चाहता हूं कि जिनके विचार प्रदूषित हो गये हैं, उनके बारे में क्या उपाय है ?

अब हमारी संस्कृति क्या है, धरोहर क्या है और उसकी कैसे सुरक्षा होगी, इसके बारे में लोगों को कुछ ज्ञान नहीं है। देश की क्या संस्कृति है, इसकी भी समझ लोगों में नहीं है। …( व्यवधान)ये लोग बाबरी मस्जिद को ढहाए हैं। ये ताजमहल को भी छोड़ने वाले नहीं हैं, ऐसा हमको लगता है। ये लोग इतिहास की संस्कृति के दुश्मन हैं। अब जो वृतांत हमने सुना, उस संबंध में मैं कहना चाहता हूं कि सुप्रीम कोर्ट ने सी.बी.आई. को डायरेक्शन दिया कि पी.आई.एल. में हैरिटेज कॉरिडोर क्या है, उसकी जांच करो, कार्रवाई करो और दो महीने में बताओ। उसे कालबद्ध कर दिया। मैं पूछना चाहता हूं कि भारत सरकार अभी तक कहां थी? हम सुनते हैं कि पर्यटन और संस्कृति मंत्री, माता वैष्णो देवी आदि जगहों पर बड़ा भारी काम करा रहे हैं लेकिन वे इसमें कैसे फेल हो गये?वे कहां थे जब कोर्ट को यह कहने का मौका मिला कि हैरिटेज कॉरिडोर के नाम पर वहां हेराफेरी और गड़बड़ हो रही है।

इसलिए हम इनसे सवाल पूछना चाहते हैं और हमने यही सुना था कि जब कोर्ट ने कड़ाई से एक्शन लिया तब जाकर इन्होंने देखभाल की।

१६.५० hrs. (Mr. Speaker in the Chair) सुनते हैं कि अब ये भी कड़ाई कर रहे हैं। यह कैसे कड़ाई करेंगे, इनकी तो मेली सरकार है। सुनते हैं कि यूपी सरकार की तरफ से हेराफेरी हुई है और उसकी सीबीआई जांच कर रही है। कोई अफसर भी पकड़ा गया है, जिसकी मुअत्तली हुई है। ताज कॉरीडोर के नाम से हमें लगता था कि हैरीटेज कॉरीडोर से उसकी सुरक्षा और बढि़या चीज बनने की बात है।

आगरा से माननीय सदस्य श्री राज बब्बर जीतकर आए हैं। वह अभी तक यही कह रहे हैं कि हमें हैरीटेज कॉरीडोर समझ नहीं आता। इतना बड़ा प्रोजैक्ट है, लोग योजना बना रहे हैं, उसको जानना चाहिए। हैरीटेज कॉरीडोर नाम से लोग समझेंगे कि कोई बहुत अच्छा काम हो रहा है, यह ताज महल की सुरक्षा, शोभा, अगल-बगल की जनता और पर्यटन के विकास के लिए है, लेकिन उसके अंदर हेराफेरी और घोटाला होगा। ताज महल के जरिए भी हेराफेरी होगी तो हमारी संस्कृति और विश्व धरोहर का क्या होगा, उसकी सुरक्षा कैसे हो सकती है। इसलिए यह बहुत अहम सवाल है और इस पर सरकार को आगे आना चाहिए। कोर्ट ने अपना एक्शन लिया, सीबीआई को जांच करने को दे दी कि सीबीआई दो महीने में रिपोर्ट दे। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री का क्या कहना है, हैरीटेज कॉरीडोर क्या चीज है, यह हमें बताएं। ताज महल विश्व की धरोहर है, हिन्दुस्तान का गौरव है, संस्कृति का प्रतीक है, उसे दुनिया के लोग देखने के लिए आते हैं और देखने के बाद अपने देश में जाकर उसकी सुंदरता, कला और इतिहास का वर्णन करते हैं। हमारी पुरानी धरोहर और अमर कृति के बचाव के लिए और उस जगह पर्यटन के विकास के लिए, कहा जाता है कि वहां पीने के पानी का संकट है, गंदगी का बोलबाला है। इस पर कोई मास्टर प्लान हो, इकोलॉजी डिस्टर्ब न हो और उस इमारत पर किसी प्रकार से प्रदूषण या अन्य चीजों से खराबी नही आए, इसे सर्वोच्च प्राथमिकता देकर, किसी भी कीमत पर उस धरोहर की रक्षा की जानी चाहिए, उसके बहाने हैरीटेज कॉरीडोर के नाम पर हेराफेरी, उलटफेर और घोटाले की गुंजाइश नहीं होने देनी चाहिए। इस सरकार को आगे आकर बोलना चाहिए। हमको संदेह है, इनकी मिली सरकार है, न्याय में उलटफेर, एक-दूसरे की गलती को छुपाना, दबाना और राज्य में बने रहने का हिसाब होगा तो हमको शंका है कि इस तरह हमारी संस्कृति और धरोहर को नहीं बचाया जा सकता। इसलिए सरकार स्पष्ट करे कि सुप्रीम कोर्ट ने अपना काम किया लेकिन ये क्या कर रहे हैं, ये कहां थे। हमने कोर्ट की वर्डिक्ट पढ़ी है। हमको इसमें हेराफेरी की शंका और गुंजाइश है। इसलिए इसे प्राइमा-फेसी मामला मानकर सीबीआई को जांच दी गई है। इन सब बातों को सरकार स्पष्ट करे, नहीं तो हमको शंका है कि इसमें गड़बड़ी हो सकती है।

अध्यक्ष महोदय, आपने नियम १९३ के अंतर्गत इस विषय पर बहस की स्वीकृति देकर बड़ा भारी काम किया है। इससे देश और दुनिया की धरोहर की सुरक्षा में एक कदम होगा और सहय़ोग होगा। इन्हीं शब्दों के साथ मैं अपनी बात समाप्त करता हूं।

SHRI KHARABELA SWAIN (BALASORE): Sir, just about a month back, I had been to Agra with my family members. When I went to Agra Fort, I found there that the distance from Taj Mahal to Agra Fort had been cleared. When I enquired about it from members of the area, they said that the Government is going to build a road, and they are going to develop a garden.

I found that they were going in for large-scale tree plantation in that area. I was very happy to think that shade-giving trees would surround the whole area. Later on I came to know that in addition to the tree plantation, a road and a shopping mall were also going to be constructed. I was very surprised to know that.

Taj Mahal is a world heritage site, like Hampi in Karnataka and Konark in Orissa. UNESCO has declared these sites as world heritage sites. Some years ago, the Government came to know that the State Government of Karnataka was constructing a footbridge inside Hampi. I do no believe that such a huge project in the vicinity of Taj Mahal could have been conceived, funded and executed within such a short period. It must have been conceived a long time back. I just want to know what is the necessity of doing all these things. A world heritage site has to be surrounded by very authentic surroundings. That is a very important thing. There should be rivers - just like hundreds of years back - there should be trees, there should be open land and green fields available everywhere. If you construct high-rise buildings around a world heritage site, it will lose its authenticity.

For example, many years back in Bhubaneswar, it was possible to see the Lingaraj temple or Radharani temple from a very long distance. We were able to pay our obeisance to the deities by making pranam and namaskar from a distance because we were able to see the temples from a long distance. Nowadays, we find high-rise buildings being coming up around them every year. The Archaeological Survey of India and the State Government have closed their eyes to these developments.

Hon. Minister of Tourism is present here. He had been to Orissa some months back. He found the approaches to Lingaraj temple and Konark temple totally encroached upon by small shopkeepers. They dump their garbage all over the place there. Which tourist from a foreign country will like to visit these places if they are untidy and unclean? Actually, we are exhibiting poverty over there. When foreigners come to visit those places and see how poor we are, he would carry a different set of memories of India with him. Any tourist who visits such places in India is pursued by a horde of beggars.

I congratulate the hon. Minister of Tourism for the courage he has shown. In the last one year, he has executed the work of renovating Lal Quila and many other places. I am really proud of him. He wants that many tourists from foreign countries should visit India. One foreign tourist who visits India provides livelihood to six to seven people. There are many countries in the world which are surviving on tourism only. I had been to China and I was surprised to find that they have been able to attract millions and millions of foreign tourists, specifically the non-resident Chinese.

I congratulate the hon. Minister of Tourism for ensuring that this Taj Heritage project is stopped. It should not be permitted under any circumstances. If UNESCO unlists Taj Mahal, Konark, Hampi, and other world heritage sites in India, who would visit India? Why should they visit India? They do not come here to see buildings. Buildings are there everywhere in the world. They come to India to see these heritage sites. So, they should be protected.

In other areas like in the State of Orissa, we require a lot of help from the hon. Minister.

17.00 hrs. In my area, there are beautiful beaches. In Chandipur, which is in my constituency, we are having National Test Range.

MR. SPEAKER: Please conclude now.

SHRI KHARABELA SWAIN : I will take only one minute. In that area, there is a natural phenomenon of sea receding back two times a day for three kilometres.

I will appeal to him to extend us financial help so that we will be able to show him that Udaipur, Talasari and Chandipur are the best beaches.

With these words, I thank you very much.

________________ 17.16 hrs. DISCUSSION UNDER RULE 193 CONSTRUCTION OF TAJ HERITAGE CORRIDOR – contd.

श्री मुलायम सिंह यादव (सम्भल):अध्यक्ष महोदय, हम यह चर्चा करवाने के लिए आपको धन्यवाद देते हैं। ताजमहल में जो निर्माण कार्य शुरु हुआ, उसे लेकर पूरे देश में चिन्ता व्यक्त की गई। समाचार पत्रों और पत्रिकाओं के माध्यम से सब ने यह स्वीकार किया कि ताजमहल के अस्तित्व को बहुत बड़ा खतरा हो गया है। मैं इस बात को दोहराना नहीं चाहता कि यह देश की सबसे सुविख्यात धरोहर है। विश्व से जितने भी मेहमान भारत आते हैं, ताजमहल देखने जरूर जाते हैं। एक समय ऐसा था जब दुनिया ताजमहल के नाम ही से भारत को जाना जाता था। हैरिटेज कोरिडोर क्या है, यह क्यों बन रहा था और इसका क्या उद्देश्य था, मैं यह समझ नहीं पा रहा हूं। मुझे इतिहास की थोडी बहुत जानकारी है। मुगल काल में किसी बादशाह ने एतमाद्दौला, लालकिला और रामबाग के लिए कोई सड़क बनाने का विचार ही नहीं किया। आखिर क्यों नहीं किया? अगर वहां सड़क हो जाएगी, रास्ता हो जाएगा तो ताजमहल की सारी सुन्दरता खत्म हो जाएगी पर्यावरण को भी खतरा होगा। जैसा उधर से एक माननीय सदस्य ने मंदिर का उदाहरण दिया और कहा कि दूर से उसके दर्शन होते थे। १७५ करोड़ रुपए की योजना चालू हो गई। मुझे खुशी है और मैं माननीय मंत्री जगमोहन जी को धन्यवाद देता हूं। उन्होंने जैसे ही इसकी जानकारी प्राप्त की, उसे लेकर नाराजगी जाहिर की। जब यह खबर सभी समाचार पत्रों में छपी तो उनके विभाग के एक अधिकारी ने तत्काल कहा कि हैरिटेज कॉरिडोर के निर्माण से माननीय मंत्री जी बहुत नाराज हैं। तत्काल २ जून २००३ को पुरातत्व विभाग के महानिदेशक ने जिलाधिकारी आगरा को एक पत्र लिखा जिस में कहा कि मंत्री जी नाराज हो रहे हैं इसलिए हैरिटेज कॉरिडोर का निर्माण तुरन्त रोका जाए। यह कैसे सम्भव हो सकता है कि २ जून २००३ को माननीय मंत्री जी ने नाराजगी जाहिर की और काम रुकवा दिया गया। सदन के अन्दर आज इसे लेकर आशंकाएं हो रही हैं लेकिन उच्चतम न्यायालय को पहले ही हो गईं। एक तरफ केन्द्रीय मंत्री के अधीनस्थ पुरातत्व विभाग भी है, उन्हें जानकारी नहीं थी और निर्माण कार्य शुरु हो गया। मैं इन सब बातों को दोहराना नहीं चाहता लेकिन एक बात मंत्री जी से जरूर पूछना चाहूंगा कि जो बातें सदन में हुई क्या उनके बारे में वह हमें आश्वस्त करेंगे? क्या इस योजना को बनाने के लिए केन्द्र के संबंधित विभागों ने औपचारिक स्वीकृति दी थी? यदि नहीं तो क्या यह निर्माण कार्य कैसे जारी रहा? अगर आपकी स्वीकृति के बिना कार्य शुरु किया गया तो क्या उसके लिए उत्तर प्रदेश सरकार दोषी नहीं थी। उ० प्र० की मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें इसकी कोई जानकारी नहीं थी तथा २२ जून को कहा कि दो दिन पहले मुझे कुछ जानकारी हुई लेकिन अभी पूरी जानकारी नहीं है लेकिन जब समाचार पत्रों ने चिट्ठी उजागर कर दी और परसों पत्रकार सम्मेलन करके माननीय कल्याण सिंह जी ने एक पत्र जारी कर दिया कि पूरी योजना बनाने में माननीय मुख्यमंत्री रुचि ले रही थीं, पत्र केन्द्र सरकार को लिखा और धन मांगा जा रहा था, संबंधित पत्र जारी कर दिया।

उसके बाद जब सी.बी.आई. पहुंची, सुप्रीम कोर्ट ने जांच का आदेश दिया, उस संबंध में सारे कागजात मेरे पास हैं। हम किसी को चैलेंज नहीं करते लेकिन यदि हमें कोई चैलेंज करता है तो हम स्वीकार कर लेते है। माननीय सदस्य को ऐसी भाषा इस्तेमाल नहीं करनी चाहिये थी। हमने भी सरकार चलाई हैं और जानते हैं कि मुख्य मंत्री के अधिकारी कहां दस्तखत करते हैं और कौन चीफ मनिस्टर के बिहाफ पर काम करता है? मैं इन बातों को सदन में कहने की जरूरत नहीं समझता लेकिन जब जांच होगी तो वास्तविकता अपने आप सामने आ जायेगा।

अध्यक्ष महोदय, जहां तक १७ करोड़ रुपये का मामला है, वह एडवांस में ठेकेदार को दे दिया गया। एक सरकारी कम्पनी को ठेका दिया गया था जिसने एक प्राइवेट ठेकेदार को काम दे दिया और वे आगे छोटे-छोटे ठेकेदार ढूंढकर काम देते रहे। सरकार में उच्च पद पर बैठे हुए अधिकारी जानते हैं। बाकायदा इस बात का प्रमाण सामने आ जायेगा और जब सी.बी.आई. प्राइवेट ठेकेदारों को पकड़ेगी तो वे ठेकेदार स्वीकार करेंगे कि हमने ठेका लिया। मैं माननीय मंत्री जी से कहूंगा कि सरकारी कम्पनी मानव संसाधन विकास मंत्रालय के अधीन है। माननीय मंत्री जी को पता होना चाहिये और जब वे इस बात का जवाब दें तो स्पष्ट करें । माननीय मंत्री जी ने शुरु-शुरु में बहुत तेज़ी दिखाई और ताजमहल को बचा लिया। अगर यह योजना चलती रहती तो ५-१० साल के अंदर न केवल ताजमहल का सौन्दर्य ही खत्म हो जाता बल्कि वह गिर जाता। यमुना स्वयं एक नहर हो जाती, उसका फासला ( WATERWAY)कम हो जाता और जब बाढ़ आती तो टक्कर मारकर ताजमहल को गिरा देती। पुरातत्व विभाग में इस बात की चर्चा है कि ताजमहल क्या लकड़ी पर बना हुआ है या कंक्रीट पर बना हुआ है, हम नहीं बता सकते लेकिन मंत्री जी इस बारे में स्पष्ट बतायें। ताजमहल यमुना के यू टर्न पर बना हुआ है कोरीडोर के निर्माण से रास्ता सकरा होने के कारण पानी ते गति से आयेगा और ताजमहल को क्षतिग्रस्त करेगा । लेकिन माननीय मंत्री जी ने ताजमहल बचा दिया, उसके लिये उन्हें बहुत बहुत धन्यवाद। वे समझ गये कि सारा पैसा बर्बाद हो जायेगा और ताजमहल गिर जायेगा। इससे दो काम हुये - एक १७५ करोड़ रुपया बर्बाद होने जा रहा था, उसमें से केवल १५-२० करोड़ रुपये खर्चे होते, बाकी पैसा कुछ अधिकारियो की जेबों में जाता। क्या मुख्य मंत्री को पता नहीं चला कि १७ करोड़ रुपया ठेकेदार को एडवांस में दे दिया गया। वह पैसे तो लेते ही, साथ में काम का पेमेंट फिर लेते रहते और एक रुपया भी खर्च नहीं करत और उस सरकारी पैसे से ठेकेदारी करते। ये सब बातें सी.बी.आई. की जांच में आ जायेंगी। श्री राज बब्बर भले ही सरकार में नहीं रहे हों लेकिन उन्हें पता है कि ५ करोड़ रुपये से ऊपर का धन देने से पूर्व तो कैबिनेट की स्वीकृति अनिवार्य है।

अध्यक्ष महोदय, सरकार आपने भी चलाई है, हमने भी चलाई है। अगर कोई रुपया स्वीकृत होगा तो वित्त मंत्री के बिना नहीं हो सकता। वित्त मंत्रालय मुख्य मंत्री के पास है। आपको सब पता है कि जो भी पैसा जायेगा, वित्त मंत्रालय से जायेगा। चाहे किसी विभाग के लिये पैसा जाये, अंतिम निर्णय वही लेगा।

मंत्री महोदय आपने सदा नियमानुसार कार्य किया है। लेकिन मैं एक बात बताना चाहता हूं कि बाद में आपको क्या हो गया। एक बात से मुझे बड़ी निराशा हुई कि आपने एक अधिकारी को बिना जांच के सर्टफिकेट दे दिया कि इसकी कोई गलती नहीं है। अब अगर सी.बी.आई. ने उसकी गलती स्वीकार कर ली तब आपके बयान का क्या होगा। आप इतने अनुभवी हैं, जिस तरह से आप पुरातत्व विभाग को बढ़ावा दे रहे हैं, वह प्रंशसनीय है। यह सही है कि माननीय सदस्य जो बोल रहे हैं, वह सच बोल रहे हैं कि आप पुरातत्व विभाग को बड़ी गंभीरता से देख रहे हैं। दूसरे और कामों में हमारे और आपके मतभेद रहे हैं, जम्मू-कश्मीर में मतभेद रहे हैं। लेकिन आप वहां एक बड़ा अच्छा करके आये हैं, आपने वैष्णो देवी का रास्ता बनवाया। आज हमें मौका मिल गया है, इसलिए हम उसके लिए आपको बधाई देते हैं कि वैष्णो देवी के लिए आपने एक अच्छा रास्ता बनवाया। आपने वहां अच्छा इंतजाम कर दिया है जो आगे बढ़ रहा है। इसलिए पुरातत्व विभाग में आपने जो दिलचस्पी ली है, उससे किसी तरह से आपने ताजमहल को बचा लिया है। यह आपने एक ऐतिहासिक काम किया है।

दूसरी बात हम आपसे पूछना चाहते हैं कि क्या इस कार्य को कराने से पूर्व पुरातत्व विभाग की स्वीकृति अनिवार्य है ? यदि स्वीकृति अनिवार्य है और अगर स्वीकृति नहीं ली गई है तो आपको खुलकर सी.बी.आई. की मदद करनी चाहिए। ताजमहल दुनिया के सात आश्चर्यों में से एक है। हम जानते हैं जैसे पेरिस मैं ऐफिल टावर है। वहां उससे फ्रांस को बहुत बडा राजस्व प्राप्त होता है । इसी तरह से अमरीका में जो वल्र्ड ट्रेड सैन्टर गिरा, उसे हमने पूरे दिन देखा और देखा कि आखिर किस तरह से दिमाग से पैसा कमाया जाता है। ७५० रुपये देखने के लगते हैं। हम डालर का हिसाब रुपये में लगाते थे, उसी में सारी दुनिया भर के दफ्तर और दफ्तरों के साथ-साथ करोड़ों डालर की कमाई होती थी। पर्यटन की द्ृष्टि से आगरा को कितना फायदा हो रहा है और दूसरी तरफ आपने कितने बड़े खतरे से आगरा को बचा लिया। महोदय, अगर आगरा में कहीं हेरीटेज कोरीडोर शॉपिंग काम्पलैक्स बन जाता तो आगरा के व्यापारियों का करोड़ों रुपये का सामान दुकानों में रखा रह जाता और आगरा का पूरा व्यापार ही ठप हो जाता। जो पर्यटक, जो विदेशी आगरा आते वे ताजमहल देखकर वहीं शॉपिंग कॉम्पलैक्स से सामान खरीद कर चले जाते। आगरा के व्यापारियों ने जो सामान अपने यहां रखा है, उसका क्या होता, आगरा का पूरा का पूरा व्यापार बर्बाद हो जाता। व्यापारियों को पता ही नहीं था। जो व्यापारी पहले कहते थे कि अच्छा काम हो रहा है, अच्छा विकास हो रहा है। हमारी कमेटी वहां देखने के लिए गई तो कहने लगे कि आप क्यों रोक रहे हैं, इतना अच्छा विकास हो रहा है। लेकिन यह सच नहीं था। वहां जो पर्यटक, देशी या विदेशी जायेगा, यदि वहां काम्पलैक्स बना होगा तो ताजमहल देखकर वहीं से सामान खरीदकर चला जायेगा, आगरा शहर में कोई नहीं झांकेगा। बब्बर जी, कहां चले गये, आपके आगरा शहर को कोई पूछने वाला नहीं था, वहां के व्यापारियों की रोजी-रोटी छीनना और ताजमहल का सौन्दर्य नष्ट कर देना और अन्तत: गिरवा देने का प्रयास, यह सब वहां हुआ। महोदय, इस महत्वपूर्ण सवाल पर आपने चर्चा स्वीकार कर ली, इसलिए सबको जानने का मौका मिल गया कि आगरा में क्या-क्या हो रहा है, उत्तर प्रदेश में क्या-क्या हो रहा है।

अध्यक्ष महोदय, आपको जानकर आश्चर्य होगा एक दिन में लगभग ७० लाख रुपये बालू को एक स्थान से दूसरे स्थान पर रखने के लिये भुगतान किये गये। एक छोटी सी जगह पर कार्य करने में ७० लाख रुपये बालू को उठाकर रखने के लिए दिये गये। …( व्यवधान) वह बालू समझते हैं। रेता को इधर से उधर रखने के लिए एक दिन में सात लाख रुपये का पेमेन्ट किया गया है। वहां १८ दिन काम दिखाया गया है और १८ दिनों में छ: दिन की छुट्टी और १२ दिन में १२ करोड़ रुपये गायब हो गये और इधर पूरे १७ करोड़ रुपये गायब हो गये और ठेकेदार ने एक रुपया भी नहीं लगाया। अगर वहां ढाई-तीन करोड़ रुपये का काम मान भी लिया जाए तो वहां ढाई-तीन करोड़ रुपये का काम हुआ…( व्यवधान)

श्रीमती मार्ग्रेट आल्वा (कनारा) : उनके लिए वह इलैक्शन फंड हो गया।

श्री राशिद अलवी : आपसे सीख-सीखकर कर रहे हैं।…( व्यवधान)

श्री मुलायम सिंह यादव :इन्होंने जितना कमाया होगा ५० साल में, उतना छ: महीने में ले लिया। पूरा सदन इस मानसिकता का होगा तो उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री से सीखेगा। इनसे क्या सीखेंगे, ये बहुत पीछे रह जाएंगे। ४४ साल राज किया तब आरोप लगे हैं। यह तो छ: महीने में ही पूरी की पूरी व्यवस्था को बरबाद कर दिया।

हमारी आपसे एक प्रार्थना है। हमने जो कहा, उन बातों को दोहराएंगे नहीं। तीन बातें आप बताएं कि क्या इस कार्य की औपचारिक स्वीकृति ली गई? दूसरा पर्यावरण मंत्रालय ने क्या लिखा। जो तकनीकी जांच होती है, वह सब की गयी ? क्या टैन्डर के माध्यम से ठेकेदारी दी गई ? यदि मनमाने ढंग से ही दे दी गई तो आप सीबीआई की खुलकर मदद कीजिए। ताजमहल को तो आपने बचा लिया। अगर सीबीआई की जांच निष्पक्ष हो गई और जिम्मेदार लोगों को सज़ा दे दी गई तो पर्यटन की द्ृष्टि से आप देश का बहुत कल्याण करेंगे। हम कभी किसी की तारीफ नहीं करते हैं। हम कहते हैं कि हम आरती उतारने नहीं आए हैं लेकिन आज आपकी तारीफ कर रहे हैं। वास्तव में इन्होंने बचा लिया। अगर इन्होंने बयान नहीं दिया होता यह विश्वविख्यात धरोहर नष्ट होने के कगार पर होती । जब आपने देखा और आपका जब बयान आया, तब इसकी गंभीरता को समझा गया । हम तो गंभीर ही थे क्योंकि हमारे पड़ोस का मामला है। आगरा जिले में हमारा एक पोलिंग स्टेशन पड़ता है जहां से हम विधान सभा का चुनाव लड़ते रहे। आगरा हमसे भी संबंधित है। …( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय : मुलायम सिंह जी, अब समाप्त कीजिए।

श्री मुलायम सिंह यादव : लेकिन सीबीआई की आप जरूर मदद करें, ये सारे तथ्य दें। हमें ऐसा लगता है कि आपका दबाव पड़ेगा। यह कुर्सी अमर नहीं है। अगर आप कुछ कर जाएंगे तो अमर रहेंगे। वैष्णो देवी में आपने कुछ काम किया तो सब आपको याद करते हैं कि अच्छा काम किया। हम भी वैष्णो देवी पर गए हैं। इमरजेन्सी के पहले हम इन बातों को नहीं मानते थे लेकिन मेरा दिमाग बदल गया जब कांग्रेस सरकार ने हमें जेल में डाल दिया।

श्री प्रियरंजन दासमुंशी (रायगंज) : इसका मतलब यह है कि इनका जेल जाना ठीक था।

श्री मुलायम सिंह यादव : जेल में जाने से दो ही काम होते हैं। या तो अच्छा सीखकर आते हैं या दुर्गुण लेकर आते हैं।

अध्यक्ष महोदय : कभी कभी ठीक होता है, बार बार नहीं।

श्री मुलायम सिंह यादव :लंबे समय के लिए भेज दिया इसलिए सोचना पड़ा। लोग जेल में मिलने आते थे और कहते थे कि रूस की तरह पता नहीं दस साल जेल में रहे। हमारी तो सुनवाई भी नहीं होगी। हम तो हँसते रहते थे लेकिन वे दुखी हो जाते थे। परन्तु दो माह में ही छूट गये और मंत्री भी बन गये । इसलिए मैंने कहा कि कोई चमत्कार है जिसके कारण दस साल के स्थान पर दो माह में ही छूट गये और हम भी पूरी तरह आस्तिक हो गए, वरना हम नास्तिक थे शुरू में।

श्री प्रियरंजन दासमुंशी (रायगंज) : अच्छा काम किया कांग्रेस ने।

श्री मुलायम सिंह यादव : हमारे लिए तो अच्छा काम किया और आपके लिए अच्छा नहीं हुआ। तभी से आपके लिए उत्तर प्रदेश में ऐसा हो गया कि उस एक घटना की वजह से १४ वर्ष से आप सरकार में भी नहीं आ पा रहे हैं। हमारे कम्युनिस्ट भाई भी आपातकाल का समर्थन कर बरबाद हो गए । यह सही है। रेल का पहिया पटरी से उतर जाता है तो फिर पटरी पर आ जाता है लेकिन राजनीति की गाड़ी का पहिया अगर उतर जाता है तो पटरी पर नहीं आता है। आप अगर अपने विवेक से काम लेंगे और उधर माननीय नेता अपनी बुद्धि से काम लेंगे तो ठीक है। ये सब बातें अपनें स्वार्थ में करते हैं आपके स्वार्थ या हित की बात नही करेगें । पहला स्वार्थ उनका अपनी पार्टी का होगा, यह इनकी मानसिकता है। इसलिए हम आपको सावधान करना चाहते हैं कि आप जो परेशान हैं और १३-१४ साल से उत्तर प्रदेश में सत्ता में नहीं आ पा रहे हैं, वरना सबसे मज़बूत कांग्रेस पार्टी उत्तर प्रदेश में थी। उत्तर प्रदेश की वजह से आप यहां बैठते थे। इसलिए में नेता विपक्ष से कहूंगा कि सोच समझकर अपने विवेक से फैसला लीजिए। जगमोहन जी ऐसे हमारे मंत्री हैं, इऩकी हम तारीफ करते रहेंगे, ये मंत्री रहें या न रहें। इसलिए हमने कहा कि पद अमर नहीं है।

महोदय, ये आजकल हम पर हमला कर देते हैं, पता नहीं इन्हें क्या हो गया है। ये समझते हैं कि हमेशा सत्ता इनके हाथ में रहनी है। मैं बताना चाहता हूं कि चाहे कोई कितनी ही कोशिश कर ले, कभी हमेशा सत्ता किसी एक आदमी या पार्टी के हाथ में नहीं रहती। न हम हमेशा सत्ता में रहे, न इन्हें रहना है। मैं इन्हें समझा रहा हूं।

महोदय, जगमोहन जी पर बड़ी जिम्मेदारी आ गई है। पद कभी अमर नहीं रहता। आपके काम अमर रहेंगे। मंत्री तो जाने कितने भूतपूर्व मंत्री हो गए और कितने घूम रहे हैं। अब बहुत सारे मंत्री भूत बन गए हैं। हम भी भूत हो गए हैं। कोई भूतपूर्व मुख्य मंत्री कहता है और कोई भूतपूर्व रक्षा मंत्री कहता है। लेकिन मैं इतना ही कहना चाहता हूं कि जगमोहन जी आपने दुनिया के जो सातवें आश्चर्य को बचाने का काम किया है, वह अपने आप में तारीफ करने योग्य है। इसके साथ-साथ मेरा अनुरोध है कि आप इसकी जांच भी सही तथा जल्दी कराइए और इसे बचाइए।

मैं जानता हूं कि आपके ऊपर दबाव आएगा। जिनको सजा मिलनी चाहिए, उनको बचाने की कोशिश की जाएगी। हमें पता है कि इसमें आपको फंसाने की कोशिश होगी। यदि आप दोषियों को बचाने के मामले में फंस गए, तो फिर हम आपकी धज्जियां उड़ा देंगे, फिर आप यह मत कहना कि आप तो हमारी तारीफ कर रहे थे, अब हमें बुरा बता रहे हैं। मैं पहले ही आपको चेता रहा हूं।

बालू साहब, आपने तो अच्छा किया, आप तो बच गए। मेरे पास आपकी चिट्ठी है। इसमें आपने लिखा है कि मैं मामले को दिखवा रहा हूं, लेकिन कहीं अगर आपने परमीशन दे दी होती, तो आप तो फंस जाते। आप बच गए।

अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से कहूंगा कि सरकार सी.बी.आई. की पूरी मदद करे। हमें सी.बी.आई. पर कोई अविश्वास नहीं है, लेकिन कुछ काम आपने ऐसे किए हैं, जिनसे इन संस्थाओं पर अंगुली उठती है और अगर सत्ता में बैठे लोग सी.बी.आई. और न्यायापालिका जैसी संस्थाओं को अपने लाभ के लिए इस प्रकार से बर्बाद करेंगे, तो लोकतंत्र को खतरा पैदा हो जाएगा।

मैं आपसे निवेदन करना चाहता हूं कि जब तक जांच के मामले में आप तत्काल कदम नहीं उठाएंगे, तब तक यह जांच बेकार रहेगी क्योंकि अगर ज्यादा पानी बरस गया, तो मिट्टी बह जाएगी और अगर बाढ़ आ गई, तो ठेकेदार कह देगा कि मैंने तो काम पूरा कर दिया, बाढ़ में मिट्टी बह गई, मैं क्या करूं। इसलिए जांच को जल्दी करिए क्योंकि अभी तो सब सुबूत मिल जाएंगे।

अध्यक्ष महोदय, दूसरी बात मैं यह कहना चाहता हूं कि यूनेस्को ने आपको सब बता दिया है, उसने ताज हैरिटेज कारीडोर के निर्माण पर आपत्ति की है, लेकिन आपके पुरातत्व विभाग के अधिकारी की आपत्ति के बावजूद काम नहीं रुका, यह कैसे हुआ?इस सब की तमाम जिम्मेदारी मुख्य मंत्री की है, मुख्य मंत्री इससे कैसे बच सकती हैं ? तमाम विभागों के कम से कम डेढ़ दर्जन विभागाध्यक्ष, सब मिल कर, वन विभाग के डी.एफ.ओ. और सभी विभागों के अधिकारी, रोजाना काम छोड़कर आगरा बैठे रहे, फिर भी यह होता रहा । इसलिए आपको देखना पड़ेगा कि यूनेस्को के कहने के बावजूद यह निर्माण कैसे किया गया क्योंकि इससे ताजमहल के अस्तित्व का प्रश्न जुडा हुआ है ।

इस काम में पूरे सचिवालय में अनियमितताएं हुई हैं क्योंकि चीफ सैक्रेट्री की अध्यक्षता में बैठक हुई। कई मंत्रालयो के सचिव भी सम्भिलित हुए उसमें क्या-क्या फैसले लिए गए, इस बारे में मेरे पास सब तथ्य हैं, मैं सब बता सकता हूं, लेकिन समयाभाव के कारण मैं नहीं बता पा रहा हूँ। आप जानते हैं कि कुछ अधिकारी ऐसे हैं जिनके हस्ताक्षर, मुख्य मंत्री के हस्ताक्षर माने जाते हैं।

MR. SPEAKER: Hon. Minister, Shri T.R. Baalu will intervene.

श्री मुलायम सिंह यादव :इसलिए मैं आपसे कहना चाहता हूं कि अनियमितताएं हुई हैं। इस काम के न तो टेंडर हुए न पर्यावरण विभाग तथा पुरातत्व विभाग से अनुमति ली गई और उसके बावजूद १७५ करोड़ रुपए की योजना पर काम प्रारम्भ कर दिया गया।

इस पर भी आप ध्यान दीजिए क्योंकि एक रुपया भी इसमें नहीं लगा और एडवांस १७ करोड़ रुपए कैसे दे दिए। ठेकेदार पहले काम करता है, उसके बाद वह बिल देता है और बिल देने के बाद उसका पेमेंट होता है। इन्होंने १७ करोड़ रुपए पहले ही एडवांस दे दिए ।

अध्यक्ष महोदय, इसमें तीन बातें हैं - पहली यह कि आप आगरा के व्यापारियों को बचाइए। वहां अगर हेरिटेज कोरीडोर बन जाए तो आगरा के व्यापारी बर्बाद हो जाएंगे, उनका एक-एक, दो-दो करोड़ रुपए का सामान ऐसे ही पड़ा रहेगा । मुगलकाल में बादशाहों ने एत्मादुदौला, रामबाग और लालकिला के मध्य सडक का निर्माण इसलिये नही कराया था कि इससे ताज का सौन्दर्य प्रभावित होता । आप सीबीआई जांच तो कराएंगे ही, साथ ही आपने काफी रुपए की स्वीकृति दी है, उसे ताज के सौन्दर्यकरण में लगाया जाये । आपने ताजमहल को सुन्दर बनाने के लिए कई सौ करोड़ रुपए की स्वीकृति दी है, आप उस धन की मोनिटरिंग के लए अपना कोई ऐसा विशेषज्ञ रखिए, जो यह देखे कि यह रुपया खर्च कैसे हो रहा है। इसे बहुत गंभीरता से देखिए।…( व्यवधान)अगर नहीं देखेंगे तो ये सारा पैसा बर्बाद हो जाएगा।…( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय : मुलायम सिंह जी, अब आप समाप्त कीजिए।

…( व्यवधान)श्री मुलायम सिंह यादव :आपकी आज्ञा मानते हुए मैं यहीं अपनी बात समाप्त करता हूं, बाकी सारे मामले को हम लिख कर दे देंगे, आप उसे देख लें।

MR. SPEAKER: Now, Shri T.R. Baalu will intervene. The final reply will be given by Shri Jag Mohan.

THE MINISTER OF ENVIRONMENT AND FORESTS (SHRI T.R. BAALU): Mr. Speaker, Sir, first of all, let me record my deepest gratitude as you have allowed the discussion on two sub judice matters today. Definitely, your name will go down in the history of this Parliament.… (Interruptions)

MR. SPEAKER: But this should not affect the court matter. Taking this restriction into account, you can speak.

… (Interruptions)

SHRI T.R. BAALU: You were in the teaching profession. During my school days, my teacher used to teach me Shakespeare’s Hamlet. For teaching it, the particular teacher took the whole period to discuss and explain about "to be or not to be". But here I do not know the position. If I cross the Lakshman Rekha , I will be caught hold of by the Opposition. If I am within the Lakshman Rekha, people will find fault with me saying that this fellow has done something wrong.… (Interruptions)

MR. SPEAKER: The best way is to become the Speaker! … (Interruptions)

SHRI T.R. BAALU: Yes. To be frank with you, today, the hon. leader of the Samajwadi Party Shri Mulayam singh, as also Shri Ramji Lal Suman, Shri Sriprakash Jaiswal, Shri Hannan Mollah, Shri Rashid Alvi, Shri Raj Babbar, Shri Murthy, Dr. Raghuvansh Prasad Singh, Shri Kharabela Swain and the other hon. Members who have particiated in the debate have shown keen interest in not indulging in mudslinging against each other or against each party. Cutting across party lines, they have shown keen interest in the upkeep, maintenance and the stability of the Taj Mahal. I really appreciate their attitude in not indulging in mudslinging against each other, not for the sake of politicising it. They have kept up the high esteem. Really, I once again appreciate the hon Members who have participated in this unique debate.

What is meant by the Taj Heritage Corridor? As far as the Environment Ministry is concerned, as far as the Central Pollution Control Board is concerned, our advice to the particular package was to have pathways, to inter-connect Taj, the Agra Fort, the Etmad-ud-Daula, Channi-ka-Roza, Ram Bagh and Mehtab Bagh; to have a passage, to have a green belt, to provide chairs and benches; to construct small public conveniences for the public, for having the landscaping and the fountain.

It was not for reclamation and it was not for having a shopping complex over there. I do not think the Government of India should be held responsible for any construction activity that took place in that particular area. Neither the Environment Ministry nor the Water Resources Ministry, nor the Ministry of Tourism has got any say as far as work is concerned that has been carried out without the permission of the Government of India or without the sanction of the Government of India or without the environmental clearance of the Government of India.

In 1996, the Supreme Court of India advised the Planning Commission to sanction as much money as possible as far as the environment protection of Taj is concerned. Taking a cue of this order, the Planning Commission, in its wisdom had sanctioned Rs.600 crore. A Centrally-sponsored scheme was introduced for which Rs.300 crore was given by the UP Government, and Rs.300 crore was given by the Union Government, that is, by the Ministry of Environment & Forests. Ten schemes were envisaged at that time which include Power supply to Agra, power supply to rural areas, water supply, construction of Gokhul Barrage, solid waste management, storm water drainage, construction of sewerage, Agra Barrage, widening of roads, improvement of city roads, etc. Out of them, some four projects have been completed which include power supply for Agra, storm water drainage, Gokhul Barrage and Agra By-Pass widening. After some time, on 13.2.2001 six schemes were approved by the Expenditure Finance Committee of our Ministry for Rs.220 crore. During the course of construction activities, my Secretary and Special Secretary went for inspection on 1.5.2001. They found that construction of the two barrages is not on priority. So, they wanted to reprioritize them. At that time, the Central Pollution Control Board, with the consent of the UP Government, in their meeting, decided to depute the Central Pollution Control Board to reprioritize the work. At that time, the Central Pollution Control Board had advised the UP Government to go for a Taj heritage corridor. But that does not mean to go in for reclamation work or construction activities.

SHRIMATI MARGARET ALVA : So, the idea went from you.

SHRI T.R. BAALU : What is wrong in that? But if your interpretation is that we are going in for construction or anything, I am not responsible for that. Environment protection was there. I never sanctioned; I never gave any funds. ‘Corridor’ means a ‘Corridor’. It is not for construction of shopping complex; it is not for reclamation work.

SHRI SHIVRAJ V. PATIL (LATUR): You agreed to that plan. But instead of looking into that, what were you doing?

SHRI T.R. BAALU : Sir, it was only suggested not sanctioned. There was no DPR, no parting of funds.

श्री रामजीलाल सुमन (फिरोजाबाद):अध्यक्ष महोदय, पर्यावरण मंत्री जी स्पष्ट करें कि इस योजना के सम्बन्ध में क्या पर्यावरण मंत्रालय से कोई मंजूरी नहीं ली गई। मैं समझता हूं कि उनका जो कहना है, उनका कहना यही है। आप यह साफ-साफ एडमिट करें कि इस मामले में आपसे कोई मंजूरी नहीं ली गई।…( व्यवधान)

SHRI T.R. BAALU : There was no sanction and there was no DPR. No funds were given. I can say it more than hundred times.

SHRI SHIVRAJ V. PATIL : Our objection is to the Government saying ‘yes’ to a project like this without looking into it. It is a world heritage; it is the seventh wonder of the world. They did not look into it and just said ‘ yes go ahead’.

SHRI T.R. BAALU : The hon. Deputy Leader of Opposition may know what is meant by proposal, what is meant by sanction, and what is meant by DPR.

SHRI SHIVRAJ V. PATIL : You, yourself. are saying that you have said ‘ yes’ to it.

SHRIMATI MARGARET ALVA : You said that you have accepted the proposal.

SHRI T.R. BAALU : We have envisaged it. We have suggested, not accepted. There is not even a scrap of paper that has been routed from the UP Government to the Central Government.

श्री मुलायम सिंह यादव :अध्यक्ष महोदय, गलियारा शब्द इन्होंने कहा है।…( व्यवधान)

SHRI T.R. BAALU: Sir, they were in power for many years. I do not know how my dear friend, Shri Shivraj Patil can say this. … (Interruptions)

SHRIMATI MARGARET ALVA : Mr. Speaker, Sir, how can he propose something without a map, without a drawing?

SHRI T.R. BAALU: Sir, she had been a Minister. First of all, she should know what is meant by a ‘proposal’ or ‘suggestion’.

श्री मुलायम सिंह यादव :बालू साहब, आपने कहा कि वहां कुछ गलियारा बन जायेगा, अगर गलियारा बन गया तो ताजमहल का सौन्दर्यीकरण ही खत्म हो जायेगा। अगर गलियारा का सुझाव आपने दिया है तो आप कई और सुझाव दे देंगे। अगर वे भी देना चाहते हैं तो बता दीजिए। अगर गलियारे की स्वीकृति दे दी तो ताजमहल सब बर्बाद हो जायेगा। मुगल काल के किसी बादशाह ने गलियारे की स्वीकृति नहीं दी। …( व्यवधान)

SHRI T.R. BAALU: The corridor is not meant for construction of a shopping complex.

MR. SPEAKER: Mr. Minister, I think you are exactly on the right line. You can explain it.

श्री मुलायम सिंह यादव :अध्यक्ष महोदय, मुगल काल के पुराने बादशाहों से लेकर एत्मादुद्दौला तक ने किसी गलियारे की कोई स्वीकृति नहीं दी। …( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय : मुलायम सिंह जी, मंत्री जी ने जो कहा, कॉरिडोर का मतलब उनकी द्ृष्टि में दूसरा था। उसके बाहर जाकर काम हुआ। एन.ओ.सी. मिलने के बगैर काम हुआ, ऐसी उनकी कम्पलेंट है। अभी भी यदि मंत्री जी की एन.ओ.सी. नहीं मिलेगी तो काम आगे नहीं बढ़ सकेगा।…( व्यवधान)

श्री रामजीलाल सुमन : अध्यक्ष महोदय, जो काम अब तक हुआ है, उसके लिए क्या एन.ओ.सी. ली गई है। …( व्यवधान)उस पर यह क्या करने वाले हैं। …( व्यवधान)

MR. SPEAKER: That is what the Environment Ministry has not permitted.

श्रीमती मार्ग्रेट आल्वा:अध्यक्ष महोदय, वहां काम शुरू हो चुका है। मंत्री जी गये थे ऐसा पेपर में आया है। यह सब कुछ हुआ था या नहीं ? …( व्यवधान)

MR. SPEAKER: I think the Minister is on the right path. He can explain.

श्री मुलायम सिंह यादव :अगर आप गलियारे की बात कहते हो और आप गलियारा बनाना चाहते हैं तो ताजमहल का सारा सौन्दर्यीकरण खत्म हो जायेगा।…( व्यवधान)क्या आपने गलियारे की स्वीकृति दी, सुझाव दिया ? …( व्यवधान)

SHRI T.R. BAALU: If the suggestion is taken as preparation or sending of a plan for any scheme, I am not responsible for it. The suggestion for construction of a corridor was meant for providing a small pathway. It was not meant for any construction.

श्री मुलायम सिंह यादव :अगर रास्ता बनवा दिया तो ताजमहल का सौन्दर्यीकरण खत्म हो जायेगा। यही तो असली मुद्दा है। वहां कोई रास्ता नहीं बनेगा।…( व्यवधान)मुगल काल के किसी भी बादशाह ने ऐसा नहीं किया। मैंने हिस्ट्री पढ़ी है। मैं हिस्ट्री का विद्यार्थी हूं। मुगल काल के बादशाह एत्मादुद्दौला ने राम बाग से लेकर लाल किले तक कोई रास्ता बनाने की इजाजत नहीं दी और न ही बना है। …( व्यवधान)

SHRI T.R. BAALU: What we had meant was for construction of only a small pedestrian pathway to interconnect all the monuments around it. That is all. … (Interruptions) We have not received any proposal. … (Interruptions)

श्री मुलायम सिंह यादव :वही गलत हो जायेगा। अगर उन रास्तों पर निकलना शुरू हो गया तो प्रदूषण के माध्यम से ताजमहल का सौन्दर्यीकरण खत्म हो जायेगा।…( व्यवधान)

SHRI T.R. BAALU: Sir, the matter is before the Supreme Court.

श्री मुलायम सिंह यादव :.यहां पुरातत्व विभाग के मंत्री बैठे हुए हैं। …( व्यवधान)

यह आपसे संबंधित मामला है।…( व्यवधान)

MR. SPEAKER: This is going into the merits of it. Mr. Minister, you can explain the position.

SHRI T.R. BAALU: Sir, providing of a small pathway and providing of a green belt is not to mar the elevation of anything and I do not think it will have any effect on this monument. However, the matter is before the Supreme Court. Let it decide the matter. If we are going wrong, let them punish and if anybody else is responsible for this, let him be punished. … (Interruptions)

SHRIMATI MARGARET ALVA : Mr. Speaker, Sir, will the hon. Minister explain whether it was supposed to be a surface pathway or an underground pathway?

श्री मुलायम सिंह यादव :सजा देने का सवाल नहीं है। मैं कहना चाहता हूं कि आप इसे गंभीरता से लीजिए। अगर रास्ता बनाने की इजाजत दे दी गई तो सारा मामला खत्म हो जायेगा।…( व्यवधान)

SHRI T.R. BAALU: Sir, it was a suggestion made by the Central Pollution Control Board to see that a small pathway is constructed to connect all the monuments there and it was not meant for constructing any shopping complex and to go in for reclamation work there. The problem is, the hydraulic data should have been collected by technical persons to assess the force of water and the pressure on the banks. This data should have been taken into account before going in for any construction, but this has not been taken care of. As far as the Environment Ministry is concerned, we are not in the know of what is going on there with regard to reclamation work, construction of a shopping complex etc. That is all I want to submit.

SHRI PRAVIN RASHTRAPAL (PATAN): Mr. Speaker, Sir, I would like to ask only one question to the hon. Minister. If the corridor was to be constructed on the riverbed of River Yamuna, then this is definitely as risky as a building being constructed. He is admitting that the suggestion for the corridor went from the Central Government. So, this is very serious. … (Interruptions)

MR. SPEAKER: The hon. Minister for Tourism is going to give the final reply. Please take your seat.

… (Interruptions)

SHRIMATI MARGARET ALVA : Mr. Speaker, Sir, I want to ask a specific question to the hon. Minister.

He has said: "All these data should have been collected." Who is supposed to collect these data? May I ask the Minister?

SHRI T.R. BAALU: Mr. Speaker, Sir, if you want to allow a full-fledged discussion, I am ready for it.

SHRIMATI MARGARET ALVA: No, no.… (Interruptions)

MR. SPEAKER: You can reply to her question.

… (Interruptions)

SHRI T.R. BAALU: I do not want to reply, Sir. … (Interruptions) I do not want to reply to Shrimati Margaret Alva.… (Interruptions)

SHRIMATI MARGARET ALVA : Sir, it is a discussion. When it does not suit him, he does not answer. … (Interruptions) I want to know who is supposed to collect the data. Is it the Tourism Ministry or the Ministry of Environment and Forests? He is refusing to answer that. … (Interruptions)

MR. SPEAKER: I will ask the Minister to write to you only.

SHRIMATI MARGARET ALVA : Why should he write to me? Let him reply to the question.

MR. SPEAKER: He does not have that information now.

SHRIMATI MARGARET ALVA : Sir, why does he not reply in the House? … (Interruptions)

MR. SPEAKER: Now, Shri Suresh Ramrao Yadav.

SHRIMATI MARGARET ALVA : I want a clarification. Whose responsibility is this?

श्री मुलायम सिंह यादव :अध्यक्ष महोदय, हमने जो सुझाव दिए हैं, वे पुरातत्व विभाग से संबंधित हैं। हमने प्रार्थना की थी। मंत्री जी बैठे हैं, वे भी अपने विचार रखें।…( व्यवधान)

MR. SPEAKER: So, he will reply.

… (Interruptions)

MR. SPEAKER: I will request the Minister of Tourism and Culture to see if he could reply to this question. Now Shri Suresh Ramrao Jadhav will speak.

श्री सुरेश रामराव जाधव (परभनी) : अध्यक्ष महोदय, नियम १९३ के अंतर्गत हमारे सहयोगी श्री रामजी लाल सुमन द्वारा उठाए गए विषय ताज हैरीटेज कॉरीडोर के बारे में सदन में जो चर्चा हो रही है, उसे मैं बहुत देर से सुन रहा हूं। मैं आपके माध्यम से केन्द्र सरकार और सभी संबंधित सरकारों को अवगत कराना चाहता हूं कि पहले इस सदन, इस सदन के हर सदस्य और सौ करोड़ की आबादी वाले हिन्दुस्तान के निवासियों को, ताज हैरीटेज कॉरीडोर का मामला क्या है, इसके बारे में बताना चाहिए। इस सदन में ओरली या लखित रूप में मंत्रालय को सबको अवगत कराना चाहिए। इस मामले की आड़ में हम ताज हैरीटेज कॉरीडोर कम और यूपी की राजनीति ज्यादा सुन रहे हैं। अभी वहां मायावती जी की सरकार है, पहले मुलायम सिंह जी की सरकार थी। एक-दूसरे के ऊपर दोषारोपण किया जा रहा है।…( व्यवधान)

श्री मुलायम सिंह यादव :कौन कर रहा है?

श्री सुरेश रामराव जाधव: मैंने सबका भाषण सुना है।…( व्यवधान)मैं आपके माध्यम से सदन को यही सूचित करना चाहता हूं कि एक-दूसरे के ऊपर दोषारोपण करने से यह मामला तय नहीं होगा। ताज हैरीटेज कॉरीडोर का मामला ऐसा है, ताज महल हमारे हिन्दुस्तान की विरासत है, ताज महल हमारे हिन्दुस्तान का गौरव है, ताज महल दुनिया में सबसे अच्छा है, उसके साथ खिलवाड़ करने का अधिकार हमने किसी को नहीं दिया। यह सौ करोड़ की जनता का सवाल है, हमारे देशवासियों की अस्मिता का सवाल है।

18.00 hrs. मैं बहुत देर से यह मामला सुन रहा हूं। १७२ करोड़ रुपये की यह परियोजना है। अभी रुलिंग गवर्नमेंट का कहना है कि हमें कुछ मालूम नहीं था। एनडीए के मंत्रिमंडल में अच्छे निर्णय लेने वाले मंत्री श्री जगमोहन जी हैं। वह इंडिपेंडेंट मंत्री हैं। मैं उनको बधाई देना चाहता हूं कि वह जब शहरी विकास मंत्री थे तो आपने अच्छे निर्णय लिये लेकिन आपको हटाया गया। एनडीए के मंत्रिमंडल में अच्छे निर्णय लेने वाले मंत्री श्री जगमोहन जी ने एक स्टेटमेंट अखबार में दिया और उन्होंने कहा कि मेरे मंत्रालय को इस बारे में अंधेरे में रखा गया। अगर यह स्टेटमेंट कि गवर्नमेंट को मालूम नहीं था और हमारे पर्यटन मंत्रालय को अगर अंधेरे में रखा गया और हमारे बालू साहब का अभी-अभी बयान मैंने सुना है। बालू साहब ने कहा कि हमने तो एनओसी भी नहीं दिया था लेकिन १७२ करोड़ रुपये की यह परियोजना है। स्टेट गवर्नमेंट यह बोलती है कि हमें मालूम नहीं है। पर्यावरण मंत्रालय के मंत्री बोलते हैं कि एनओसी नहीं दिया था और जगमोहन जी बोलते हैं कि उनके मंत्रालय को इस बारे में अंधेरे में रखा गया तो अगर यह स्थिति ताजमहल के बारे में है और उस ताजमहल के गौरव, संस्कृति के साथ खिलवाड़ किया जाए फिर चाहे स्टेट गवर्नमेंट हो या केन्द्र सरकार हो, किसी को भी हमने यह अधिकार नहीं दिया। एक-दूसरे के ऊपर दोषारोपण करने से इसकी संस्कृति, गौरव और सभ्यता को बचाया नहीं जा सकता। ठीक है कि हमारे लोक तंत्र को बचाने के लिए ज्यूडशियरी काम कर रही है। मैं इस संबंध में उत्तर प्रदेश के राजनीतिज्ञों को सुन रहा था।…( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय : अब आप समाप्त कीजिए।

श्री सुरेश रामराव जाधव: सर, हमारे जैसे जूनियर लोगों को थोड़ा और मौका दिया जाए तो अच्छा रहेगा।…( व्यवधान)मैं आंकड़े में नहीं जाना चाहता।…( व्यवधान)मैं आपके माध्यम से इतना बताना चाहता हूं कि ताजमहल सारी दुनिया के अजूबों में से एक है। भारत में जो भी पर्यटक यात्रा के लिए आते हैं, वे ताजमहल देखे बिना नहीं जाते हैं।…( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय : मैं हर सदस्य को पांच-पांच मिनट देता हूं। पांच मिनट में बात पूरी करनी है। मैं सदन का समय ६.३० बजे तक बढ़ा रहा हूं। पांच-पांच मिनट में आपको बात पूरी करनी है।

श्री सुरेश रामराव जाधव: मुझे अभी पांच मिनट दीजिए।

अध्यक्ष महोदय : आपके पांच मिनट हो गए।

…( व्यवधान)

श्री सुरेश रामराव जाधव: अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट में लम्बित है।…( व्यवधान)

श्री मुलायम सिंह यादव :आधा घंटा आपने बढ़ा दिया, अच्छा रहा। अब मंत्री जी का जवाब कल आ जाएगा।…( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय : मुलायम सिंह जी, आज ही जवाब पूरा करेंगे। कल दूसरा बिजनैस है इसलिए मंत्री जी का जवाब आज ही है।

…( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय : श्री अशोक कुमार सिंह चन्देल बोलेंगे।

श्री सुरेश रामराव जाधव: अध्यक्ष जी, मैं दो मिनट में अपनी बात पूरी कर रहा हूं। मैंने सब नेताओं का भाषण सुना। अगर ऐसी योजनाओं में करप्ट धन की बू आती है तो करप्शन की तो हद होनी चाहिए।…( व्यवधान)

श्री अशोक कुमार सिंह चन्देल (हमीरपुर, उ.प्र.) : अध्यक्ष महोदय, मैं इस संबंध में कहना चाहता हूं क…( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय : चन्देल जी, जरा वह अपनी बात पूरी कर लें।

श्री सुरेश रामराव जाधव: अध्यक्ष जी, यह मामला हाइ-कोर्ट में परिलम्बित है इसलिए किसने पारदर्शिता से काम किया, किसने पारदर्शिता से काम नहीं किया, वह तो कोर्ट तय करेगा लेकिन मैं आपके माध्यम से सचेत करना चाहता हूं कि ताजमहल जो हमारी विरासत है, संस्कृति है, सभ्यता है, उसको बचाने के लिए ताजमहल की छवि के ऊपर आंच नहीं आनी चाहिए।

उसकी सुंदरता कायम रखने के लिए जो भी परियोजना हो, उसको कारगर ढंग से लागू किया जाना चाहिए, इसमें कोई करप्शन नहीं होना चाहिए, नहीं तो, हमारा गौरव, हमारी सभ्यता और हमारी संस्कृति में करप्शन माना जाएगा। ताजमहल की सुंदरता को कायम रखा जाए, अच्छा बनाकर रखें, उसको प्रदूषित नहीं करना चाहिए। यही कहकर मैं अपनी बात समाप्त करता हूं।

       

श्री अशोक कुमार सिंह चंदेल (हमीरपुर, उ.प्र.) : अध्यक्ष महोदय, आपने मुझे बोलने का समय दिया, उसके लिए मैं आपका आभारी हूं। यह जो ताज हैरिटेज कॉरिडोर का मामला है, माननीय उच्चतम न्यायालय में एक रिट सविल संख्या १३३८१/८४ एम.सी. मेहता बनाम यूनियन आफ इंडिया तथा अन्य के परिप्रेक्ष्य में ४.९.१९९६ को सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर वहां की सुरक्षा, वहां की प्रदूषण की व्यवस्था और पर्यावरण की व्यवस्था तथा पर्यटन विकास की द्ृष्टि से उसे बनाने के लिए निर्देश निर्गत किए गए थे। उसमें केन्द्र सरकार और राज्य सरकार दोनों पर चर्चा हुई। यह योजना योजना आयोग द्वारा ६०० करोड़ रुपए की स्वीकृत हुई थी। आज जिन मुद्दों पर बहस हो रही है मैं बताना चाहता हूं कि मिशन मैनेजमेन्ट बोर्ड कमेटी, जिसका अध्यक्ष उत्तर प्रदेश का मुख्य सचिव होता है और केन्द्र सरकार के सभी विभागों के विभागाध्यक्ष, सचिव और निदेशक स्तर के लोग उसके सदस्य होते हैं। यह सारी योजना बनाई गई और पीपीआर जो प्राथमिक रिपोर्ट बनी, वह १७५ करोड़ रुपए की बनाई गई। उस पर पुन: मुख्य सचिव की अध्यक्षता में १२ अगस्त २००२ को बैठक हुई और उसमें तय हुआ कि डीपीआर बनाई जाएगी और फिजीबल रिपोर्ट तैयार की जाए। जब तक ये दोनों चीजें तैयार नहीं हो जातीं और केन्द्र की सी.सी.ई.आर. द्वारा स्वीकृति नहीं मिलती है, तब तक निर्माण कार्य नहीं कराया जाएगा। दिनांक १२ अगसेत २००२ के बाद मिशन मैनेजमेन्ट बोर्ड की बैठक नही हुई । उसके बावजूद उ०प्र० के पर्यावरण सचिव श्री आर.के. शर्मा ने सरकार को मुगालते में, धोखे में रखकर अपने स्तर पर एमपीसीसी से सम्पर्क करके एमपीसीसी और प्रमुख पर्यावरण सचिव, आर. के. शर्मा उत्तर प्रदेश से मिलकर इसमें से पूरे १७ करोड़ रुपए निकाल लिए। यह किसी की जानकारी में नहीं रहा। जब उसकी जानकारी हुई, और मुख्यमंत्री के संज्ञान में लाया गया कि इस संदर्भ में न तो कोई टैंडर निकाला और न ही कोई नविदा आमंत्रित की गई और न ही कोई वित्तीय स्वीकृति ला गई है तो मुख्यमंत्री ने जांच कराकर कार्यवाही सुनिश्चित कर दी जैसे यहां सब लोग आरोप लगा रहे हैं कि वहां मार्केट वगैरह बन रहा था, तो ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं था। वहां मौके पर जाकर इस बात का निरीक्षण कर लिया गया है और ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला था। इसके बावजूद जब माननीय जगमोहन का पत्र १९ तारीख को आया तो २० तारीख को काम बंद कर दिया गया। जबकि सुप्रीम कोर्ट का १.५.२००३ का आदेश था कि कार्य और निर्माण कार्य जारी रखा जाए। लेकिन केन्द्र सरकार का निर्देश होने के कारण उसकी अनुपालना की गई और केन्द्रीय मंत्री की बात को प्रदेश की सरकार ने तवज्जोह दी। अब सवाल यह नहीं है कि १७ करोड़ रुपए निकाले गए। प्रमुख सचिव पर्यावरण आर. के. शर्मा ने उसके खिलाफ कार्रवाई की और उस अधिकारी को निलम्बित कर दिया गया। मामला सुप्रीम कोर्ट के अंदर चल रहा है। उसमें सी.बी.आई. जांच कर रही है और उसे दो माह का समय दिया गया है। दो माह में सी.बी.आई. जांच करके जो भी अपनी रिपोर्ट देगी, जिसे भी दोषी मानेगी, वह हमें शिरोधार्य होगा। लेकिन जिस तरीके से इस बात को लेकर राजनीति के नाम पर सस्ती राजनीति की जा रही है, यह अशोभनीय और गलत है। यह सीधे-सीधे एक मुद्दा है। पहले भी हम सदन में देखते आए हैं कि हमारी बहुमत की सरकार को हटाया जाये, इस बात पर सदन का समय बर्बाद करते आ रहे है फिर भी ये लोग अपना बहुमत सिद्ध नहीं कर पाए। अब ये लोग चिल्ला रहे हैं कि उत्तर प्रदेश की मुख्य मंत्री दोषी हैं, उनको बर्खास्त किया जाए। ऐसा कोई मामला नहीं है। सी.बी.आई. दो माह में जो भी आदेश देगी, सरकार उसका अनुपालन करेगी। अगर हम दोषी होंगे तो हम उसे स्वीकार करेंगे। लेकिन विपक्ष के मंसूबे सफल नही होने देगें । इन्हें पूरे प्रकरण का जानकारी तक नही है और बिना वजह शोर मचा रहे है ।

अध्यक्ष महोदय : मैं सभी को चांस नहीं दे सकता। केवल पासवान जी को दो मिनट का समय दे रहा हूं। उनके बाद श्री शिवराज पाटिल बोलेंगे।

श्री राम विलास पासवान (हाजीपुर) : अध्यक्ष महोदय, मैं बोलने वाला नहीं था, लेकिन हमने मंत्री जी का वक्तव्य सुना। हम जैसे लोग यहां सुनने और समझने के लिए बैठे हुए थे कि मामला क्या है। हम समझ ही नहीं पा रहे हैं कि आखिर क्या मामला है। इसलिए मुझे बोलने की जरूरत पड़ी। मैं कोई भाषण देने के लिए नहीं खड़ा हुआ हूं। केवल तीन-चार पाइंट्स कहूंगा और चाहूंगा कि जगमोहन जी जब उत्तर दें तो उनका भी जवाब देने की कृपा करें। एक पाइंट तो यह है कि ताज हैरिटेज कॉरिडोर का मामला क्या है, कहां से इसकी शुरूआत हुई?हम अभी तक नहीं समझ पा रहे हैं कि कॉरिडोर का हिन्दी में मतलब क्या होता है, शायद गलियारे से होगा। यह विवाद का मुद्दा कोई राजनीतिक मुद्दा नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने जो कहा है, वह ठीक है कि ताज का सौंदर्यीकरण हो और यह और सुंदर बने। यह मुद्दा तब बना जब जगमोहन जी जो पर्यटन और पुरातत्व तथा सांस्कृतिक मंत्री हैं, उन्होंने कहा कि वहां जो कुछ हो रहा है, वह हमारी स्वीकृति से नहीं हो रहा है। यह तब मुद्दा बना और अखबारों की हैडलाइन बना। फिर पर्यावरण मंत्री जी ने कहा कि हमसे एनओसी नहीं ली गई, जल संसाधन मंत्री जी ने कहा कि हमसे भी एनओसी नहीं ली गई। इन तीनों विभागों से एनओसी नहीं ली गई। कल तक सी.एम. कहती थीं कि हमारी कोई गलती नहीं है। आज सी.एम. ने कहा स्वीकार कर लिया कि हां हमारी जानकारी में है। इन सारी चीजों को देखते हुए कहीं न कहीं मामला केन्द्र सरकार और राज्य सरकार के बीच का है।

हम लोग इस बात को समझ नहीं पा रहे हैं और लोगों के मन में इस बात की शंका है कि इसका क्या मकसद हो सकता है? ताज महल को बचाना क्या इसका मकसद है, लेकिन इससे तो उसे खतरा हो गया है। दूसरा, पैसे का खेल हो रहा है और इसलिए करप्शन का मुद्दा इसमें जुड़ गया है। सारे खेल में करप्शन का मुद्दा जुड़ गया है। इसका नाम चाहे हैरिटेज रखिये या कॉरीडोर रखिये, लेकिन जो भी पैसा दिया जा रहा है उसका मकसद केवल यह है कि ताज के नाम पर पैसा लो और अपने हित के लिए लगाओ। मैं भी मंत्री रहा हूं इसलिए मैं कुछ बातें समझ रहा हूं। इसलिए मैं कहना चाहता हूं कि मंत्री जी जब अपना जवाब दें तो इसका खुलासा जरूर करें कि कौन दोषी है? ठीक है, सी.बी.आई. इसकी जांच कर रही है। मंत्री जी ने ही इस मामले को खोला है, इसलिए जब वह अपना जवाब दें तो बताएं कि दोषी कौन है, राज्य सरकार या केन्द्र सरकार। दोनों में से एक तो दोषी है ही।

माननीय सदस्य मुलायम सिंह यादव ने बताया कि पैसा यमुना के पानी में जा रहा है और ताज के ऊपर खतरा उत्पन्न हो रहा है। इसलिए राज्य सरकार को अपनी जिम्मेदारी से भागना नहीं चाहिए। कुछ सदस्य राज्य सरकार की यहां बैठकर वकालत कर रहे हैं लेकिन मेरा कहना यह है कि या तो राज्य सरकार दोषी है या केन्द्र के तीनों संबंधित मंत्री दोषी हैं। कौन दोषी है, इस बात का खुलासा होना चाहिए?

SHRI SHIVRAJ V. PATIL (LATUR): Mr. Speaker, Sir, I seek your permission to make only three points. The first point relates to the allegation of corruption in this matter. The second point relates to Taj Mahal as such. The third point relates to the other monuments in the country.

Now, we have heard the statement made by the hon. Minister. We are not making any allegation against the hon. Minister. But from his statement, what is coming out is that some officer in his Ministry has given the permission. Now, we have heard the statement made by the hon. Member of Parliament and that was the statement on behalf of the Government in UP. What has come out of that is that something has gone wrong somewhere. Whatever the Supreme Court decides will be binding on them and certainly it will be binding on everybody. On behalf of the Government, it is said that action would be taken. Now, we leave it to the Supreme Court to decide who is involved in this and let action be taken. Certainly, it is a matter in which very careful investigation is required and I hope that careful investigation would be done.

The second most important point is that Taj Mahal is a very important heritage, and national and international monument. We should not deal with the issues relating to Taj Mahal in a very light manner. How much of thinking might have gone in to build Taj Mahal? If you are going to repair Taj Mahal, if you are going to deal with the tracks, roads, entries and approaches to Taj Mahal, and if those things are going to affect the monument itself, it is going to be disastrous and dangerous. So, we expect the Government to look into these matters. Please do not treat these matters in a light manner. Some suggestion is given by this Government and some suggestion is given by that Government. They are trying to do something around Taj Mahal which is going to affect Taj Mahal itself ultimately. This should not be done.

We do not take pleasure in charging the Government but at least it has come out that you have not dealt with this matter in a very serious manner. This is a matter in which certainly a serious consideration should have gone in.

I have seen other monuments – Ellora and Ajanta. It is one of the most important monuments. When one goes there and looks at these monuments, one feels very sorry. They are going to collapse. Some of the caves are going to collapse. There are so many monuments in our country which cannot be easily built. We may spend thousands of rupees and yet it would not be possible for us to have the monuments of this nature. If we have inherited them, is it not our duty, the duty of the Union Government, the duty of the State Government, and the duty of the people of the whole country as such to see that those monuments are protected?

Enough funds are not provided for protecting these monuments. It would be necessary to provide enough funds. If the Minister comes before this House asking for more money to protect these monuments, certainly we, who are sitting on this side, will support that proposal.

Sir, I do not have to say anything more than this.

MR. SPEAKER: Shri Mann, I give you only one minute.

SARDAR SIMRANJIT SINGH MANN (SANGRUR): Mr. Speaker, if I have understood the debate correctly, what the Minister of Environment and Forests has said is that his Ministry did provide a passage to Taj Mahal from the other monuments. Then he had said that he did not give it in writing. What comes to my mind is that he gave an idea to the Uttar Pradesh Government to build large buildings and I am suspicious of that fact. Was it a wider conspiracy, just like the Babri Masjid, to destroy another Muslim monument? This must be investigated.

MR. SPEAKER: It was not like that.

SARDAR SIMRANJIT SINGH MANN : It must be one of the points of the probe of the CBI whether there was a conspiracy to indirectly destroy a Muslim monument.

THE MINISTER OF TOURISM AND CULTURE (SHRI JAG MOHAN): I thank the hon. Members for throwing light on various points relating to this case. I would be very, very brief.

I would like to make it absolutely clear that we would not allow any harm to be done to Taj Mahal in any case. The Government is fully determined to preserve, protect and even improve the conditions around Taj Mahal and even within Taj Mahal.

SHRIMATI MARGARET ALVA : You woke up too late.

SHRI JAG MOHAN: I will explain the point. Therefore, the first point which should be understood is whatever has happened may be one point. The other is the total declaration of the Government that we are committed to preserve and protect Taj Mahal in every way. It would not be put to even the slightest damage or to any risk at all. The UNESCO has certain principles. We are committed to them. I have discussed with the Director-General of the UNESCO. They have publicly congratulated us for taking effective action in the matter and that is on the record.

The other thing which you must understand is that our respect at the international level is so high that even in spite of this controversy about Taj Mahal, we were able to get Bhimbetka in Madhya Pradesh as an additional world heritage site last month. That shows how much respect the international community has for what we are doing to preserve our heritage.

The second point is about the inquiry, the CBI and the Supreme Court. Shri Mulayam Singh Yadav wanted me to tell him whether we will support the CBI. The CBI is there to discover the truth. It is the duty of all of us to help in discovering that truth. So, it goes without saying that whether it is the Ministry of Environment or any other Ministry which comes under the Government, we will give full co-operation to the CBI. We are all following the directions of the Supreme Court. The CBI will only give the report to the Supreme Court. Anyway, it is not going to decide. It is the Supreme Court which is going to decide who is at fault and who is not at fault.

The third point which I would like to make clear is about the corridor. Much has been said about the corridor. That is some sort of a romantic terminology evolved by somebody in the Central Pollution Control Boards Division. Shri Baalu is quite right when he said that at the most there were some suggestions that there should be a passage. But it required a detailed examination of all aspects of the matter, namely what will be its effect on the river flow, what will be its effect on the environment, whether it will improve the conditions around it or it will mar and what will be the impact on the civic pattern of the city as a whole, which is a matter connected with the Department of Urban Development. All these things had to be looked into before any work had to be started or anything had to be done.

Shri Rashid Alvi has himself said that what was approved earlier was only in principle and for making a study. Therefore, the question of the Central Government’s approval does not arise because the money that was given was for making a study.

SHRIMATI MARGARET ALVA : What about the sanction of Rs.18 crore? … (Interruptions)

SHRI JAG MOHAN: That is a matter which the CBI would investigate and find out. … (Interruptions) I will answer all your questions. Let me complete my reply.

SHRI A.C. JOS (TRICHUR): Who sanctioned Rs.18 crore and for what purpose? … (Interruptions)

SHRI JAG MOHAN: If you have clearly heard Shri T.R. Baalu, his Ministry, which is the nodal Ministry for environmental projects, has not sanctioned it. My Ministry is not the nodal Ministry and I heard of it when there were press reports that this was being done and so we have taken action. So far as the Central Government is concerned, it has not sanctioned any amount. I make it absolutely clear.

I can also tell you that if the project is beyond a particular cost, it has to be approved by the Cabinet Committee on Economic Affairs, of which I am a Member. Shri Baalu is also probably a Member of that Committee of the Cabinet. If it is a Centrally-sponsored project, it should have been sanctioned by the Central Government through the Economic Affairs Cabinet Committee. Then, a regular sanction would have been issued by the Ministry of Environment, which was dealing with this case. After that, the UP Government could have spent the money out of its own Plan allocations to the extent of 50 per cent and another 50 per cent had to come gradually from the Ministry of Environment on approved projects and on approved items. That should be absolutely clear. Let it be investigated by the CBI who has done it and let the Supreme Court be told who has done it.

The last point was about our heritage. This Government is fully committed, as I said, to improve the conditions so far as our heritage is concerned. I do not want to say anything to pat on my own back but I can tell you I am prepared to show to the entire House what has been done during the last year. At least one great hub on culture, tourism and clean civic life, which is in fact a pace-setter, a centre of excellence is being created in every State. In Tamil Nadu, if you go to Mahabalipuram, you will find the change. If you go to Hampi in Karnataka, you will find the change. If you go to Kurukshetra in Haryana, you will find the change. If you come to Delhi, you will find changes in Humayun’s Tomb and Red Fort. If you go to Kumbalgarh and Chhittorgarh in Rajasthan, you will find dramatic changes. These have all appeared in the newspapers. Therefore, I say, this Government is fully committed on improving our national heritage.

Our respect in the international arena has also gone up. India is now a Member of the World Heritage Sites Committee at the international level. I would like to invite your attention to what has been done in Ajanta. The DG of UNESCO himself has said that he has heard so much about the improvement that he wanted to go to these sites. He had no time and therefore I have asked him to come and see all these places in October. So, we can conclude this discussion on the assurance that no harm would be done to the Taj, the Agra Fort or Fatehpur Sikri or any other monument in Agra or anywhere else in the country. We will fully protect them; we will preserve them; and we will improve them.

I would explain to you, apart from this project of environment, the Ministry of Tourism and Culture itself has sanctioned Rs.14 crore for improvement, restoration and conservation of Taj wherever any damage has happened. Over the last few years, the state police have been thrown out of that place. In Red Fort, the Army is being taken out. We have provided Rs.8 crore for Fatehpur Sikri and Rs.5 crore for Agra Fort. Such a big investment is being made for a single city in respect of three monuments. Therefore, hon. Members should understand that with improvements in Agra Fort, the Taj and Fatehpur Sikri, we are going to change the environment of Agra.

We are there to improve the city. I have discussed with all the civic officials. We want to improve the city in every respect. I have also discussed this matter with Shri Raj Babbar, the distinguished Member from Agra. I assure you that it will be fully protected and after the Supreme Court order is available, we will take action accordingly. … (Interruptions)

SHRIMATI MARGARET ALVA : Sir, I have just one question. … (Interruptions)

MR. SPEAKER: There is no practice of asking these questions.

… (Interruptions)

श्री रवि प्रकाश वर्मा (खीरी) : माननीय मंत्री जी और उत्तर प्रदेश सरकार की जानकारी में होते हुये भी निर्माण कार्य रुका नहीं।

SHRIMATI MARGARET ALVA : Sir, you told me that you would allow me to ask one question. … (Interruptions) I am asking a very simple question. It is a general question and it is not connected to this issue only. Wherever there are heritage sites like the ones mentioned, which have been selected now, does the Government have any guideline that the State Governments shall not meddle with them or construct in or around them without a clearance from the Ministry of Tourism? In my State there was a problem in Hampi about a bridge coming, which was mentioned. It may be necessary for the Government to come up with some kind of either a guideline or a legislation from Parliament prohibiting State Governments -- whether Uttar Pradesh or anybody else --from meddling with these sites. What is the guideline? … (Interruptions)

MR. SPEAKER: He has understood the question.

… (Interruptions)

SHRI JAG MOHAN: This is an excellent question. I fully agree with her that a large number of our monuments are being defaced and wrong type of construction is coming up in almost all the sites. I have made it clear to all the State Governments that if there is any illegal construction around these monuments, we will not give them any financial aid. I have made it absolutely clear.

Secondly, all those monuments, which are not centrally protected, we are going to protect them. We are issuing a number of notifications to protect them under the Central notification and after they come within the Central notification, nothing can come within 100 metres or 200 metres of these monuments unless the permission is taken from the Central Government. So, therefore, it is absolutely clear. In fact, I would like to seek the full cooperation of the House to ensure that these illegal constructions and encroachments around these monuments do not take place. I have earned some sort of notoriety for doing that and clearing up the site. When I said, culture, tourism and clean civic life, that life is a very important component of our programme and around all these areas, we will try to clean them.

Sir, my distinguished friend from Orissa mentioned a point in this regard. We have made it absolutely clear to all the State Governments that unless they clear those illegal people, we will not give them any financial aid for any project.

So far as Banaras is concerned, we are also making a lot of improvements in Banaras. As he has mentioned, if there is a Centrally protected monument, I will ensure that nothing is done to that. If it is under the State Government, then I will take up the matter with them.

SHRI RAVI PRAKASH VERMA : The construction is still going on. … (Interruptions)

MR. SPEAKER: I am permitting the last question.

… (Interruptions)

SHRI JAG MOHAN: Which monument are you talking about?

SHRI RAVI PRAKASH VERMA : I am talking about Darbhanga Palace. … (Interruptions)

SHRI JAG MOHAN: It is not a centrally protected monument..… (Interruptions)

SHRI RAVI PRAKASH VERMA : Sir, it is a monument. … (Interruptions)

MR. SPEAKER: I have permitted Shri K.A. Sangtam to put the last question.

… (Interruptions)

SHRI K.A. SANGTAM (NAGALAND): A concept of having a five-star hotel near the Taj Mahal was shown on Star TV, 24X7 programme. If these sorts of plans are there anywhere near the places of national heritage, it should be discouraged. The very fact that this natural beauty and aesthetic value that goes with the heritage itself is the attraction to the tourists. This should be maintained with natural beauty surrounding it and not allowing any artificial construction coming up to spoil the view of these places of heritage. We must bring in necessary Bills in this regard so that in future under the pretext of beautifying these places, they make a lot of money and this should be avoided.

SHRI JAG MOHAN: There is already a law for protecting these things. There is an ancient site and preservation of Monuments Act. I have said in this case, being a world heritage site, we are committed to uphold all the principles, which UNESCO has laid down for these types of monuments.

So, we are fully committed to ensure that no construction comes in that area and nothing will be done which will even affect the ambience of these monuments. Thank you.