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Lok Sabha Debates

Regarding Passing Of A Resolution By The Jammu And Kashmir Legislative Assembly ... on 25 July, 2000

Title: Regarding passing of a resolution by the Jammu and Kashmir Legislative Assembly endorsing the recommendations of the State Autonomy Committee.

MR. SPEAKER: Now, the House will take up `Zero Hour’. I now call Shri Madhavrao Scindia.

SHRI BASU DEB ACHARIA (BANKURA): Sir, I have given a notice of an Adjournment Motion. … (Interruptions)

SHRI SUDIP BANDYOPADHYAY (CALCUTTA NORTH WEST): Sir, West Bengal is under a great threat. … (Interruptions)

MR. SPEAKER: I have called Shri Madhavrao Scindia.

… (Interruptions)

SHRI MADHAVRAO SCINDIA (GUNA): Sir, I have given notice. … (Interruptions)

MR. SPEAKER: Hon. Members, I will call all of you one-by-one. Please take your seats.

… (Interruptions)

SHRI BASU DEB ACHARIA : I have given notice.

MR. SPEAKER: I have more than thirty notices with me. I will call all of you.

… (Interruptions)

MR. SPEAKER: Hon. Members, please take your seats.

SHRI MADHAVRAO SCINDIA : Sir, I have given notice both under rule 184 and 193 on a matter of far-reaching importance. … (Interruptions)

MR. SPEAKER: Nothing should go on record except what Shri Scindia says.

(Interruptions) … * Not recorded SHRI MADHAVRAO SCINDIA : The Jammu and Kashmir Assembly has passed a Resolution endorsing the recommendations of the State Autonomy Committee.

अध्यक्ष महोदय: इसके बाद आपको भी बुलाऊंगा।

…( व्यवधान)

MR. SPEAKER: Hon. Members, I am appealing to all of you. Please sit down.

… (Interruptions)

SHRI MADHAVRAO SCINDIA : I would like to repeat what I have said. … (Interruptions) The hon. Speaker has called me. Why do you not allow me to speak?

MR. SPEAKER: I will call all of you one-by-one.

… (Interruptions)

प्रो- रासा सिंह रावत (अजमेर) : अध्यक्ष महोदय, राजस्थान में कमजोर वर्ग की महिला के साथ बलात्कार हुआ... (व्यवधान)

श्री माधवराव सिंधिया : आपको अपनी बारी मिल जाएगी।

MR. SPEAKER: Nothing should go on record now except what Shri Madhavrao Scindia says.

(Interruptions) … * अध्यक्ष महोदय: श्री बंद्योपाध्याय जी, मैं आपको बोलने के लिए बुलाऊंगा। आप बैठ जाएं।

SHRI MADHAVRAO SCINDIA : Mr. Speaker, Sir, I have given notice under both rules 184 and 193 on a matter of very far-reaching importance to the country.

The Jammu and Kashmir Assembly has endorsed and asked the Union Government to implement the recommendations of the J&K State Autonomy Committee Report. I do not have to emphasise what wide ramifications this whole issue has. I would request you that my notice under rule 184 or my notice under rule 193 should be accepted. There should be a discussion on this issue so that the whole mater could be discussed threadbare as it concerns the future well being of our country, its sovereignty and its territorial integrity.

* Not recorded SHRI BASU DEB ACHARIA : Sir, I have given a notice to move an adjournment motion, to discuss the decision of the Central Government … (Interruptions)

श्री मुलायम सिंह यादव (सम्भल): अध्यक्ष महोदय, हमने भी ऑटोनमी पर नोटिस दिया है।

अध्यक्ष महोदय  :     मुलायम सिंह जी, क्या आपने  इसी सब्जैक्ट पर नोटिस दिया है? 

श्री मुलायम सिंह यादव :  जी हां, इसी पर दिया है। 

MR. SPEAKER: Shri Basu Deb Acharia, you can make your submission later on. 

Now, Shri Mulayam Singh Yadav. 

  

श्री मुलायम सिंह यादव : अध्यक्ष महोदय, कश्मीर की स्वायत्तता के सवाल को लेकर आज सम्पूर्ण देश में एक चिन्ता का विषय इसलिये बन गया है कि सरकार ने अपनी तरफ से न कोई पहल की है और न ही इस समस्या के बारे में गम्भीरता से विचार किया है। जो समाचार-पत्रों के माध्यम से जानकारी मिली है, उसके अनुसार जम्मू कश्मीर विधानसभा में प्रस्ताव पेश होने के पहले वहां के मुख्यमंत्री प्रधानमंत्री जी और गृह मंत्री जी मिले हैं लेकिन लगता है कि उस बात को गम्भीरता से नहीं लिया गया है और यह असेम्बली में पास हो गया। जब यह प्रस्ताव असेम्बली में पास हो गया तो प्रधानमंत्री जी की तत्काल प्रतक्रिया आई कि यह संविधान के तहत है, संविधाऩ के पर्दे में आता है। गृह मंत्री जी ने कहा कि हम संसद में इस पर विचार कर सकते हैं। उसके बाद मंत्रिमंडल ने तत्काल फैसला किया। हम जानते हैं कि वह क्यों किया गया। वह इसलिये किया गया कि चारों तरफ से सब दल एक हो गये कि इसमें केवल कश्मीर की स्वायत्तता का सवाल नहीं, वह केवल कश्मीर तक ही सीमित नहीं रहेगा और देश के कई सूबों ने यह प्रतक्रिया ज़ाहिर की कि हम भी स्वायत्तता चाहते हैं।

अब सवाल इस बात का है कि जहां तक कश्मीर की जनता की भावनायें हैं, उस बारे में हम १९९६-९७ में बोल चुके हैं कि उनको वे सब सुविधायें मिलें। सारी सीमा पर जो गोली-बारी होती है, उसके चलते वहां निरक्षरता, बेरोज़गारी है, इसलिये वहां आवागमन की सुविधा मिलनी चाहिये, हम लोग इस पक्ष में हैं।

अध्यक्ष महोदय, हम सरकार से तीन बातें जानना चाहते हैं कि इस मामले को कौन देख रहा है - प्रधानमंत्री जी या गृह मंत्री जी या रक्षा मंत्री या श्री जगमोहन जी देख रहे हैं क्योंकि उनके अलग-अलग बयानों से ऐसा आभास हो रहा है। उसके साथ साथ यह सवाल भी उठता है कि जो हुर्रियत के लोग छोड़े गये हैं, वे पूरी तरह से पाकिस्तान के समर्थक हैं जब कि डा. फारुख चाहे स्वायत्तता के बारे में कितना भी सवाल उठाते रहें लेकिन कम से कम वे हिन्दुस्तान की बात करते हैं। मैं यह जानना चाहता हूं कि जो हुर्रियत के लोग छोड़े गये हैं, क्या इस मामले में मुख्यमंत्री को विश्वास में लिया गया था? हमें ऐसा लगता है कि इस मामले में मुख्यमंत्री जी से कोई बातचीत नहीं हुई । उन्होने जो बयान दिया और कहा कि अगर सरकार बात करे तो रास्ता निकल सकता है। मैं यह जानना चाहता हूं कि जो स्वायत्तता का प्रस्ताव पास हुआ है, सरकार उससे कितनी सहमत अथवा असहमत है? सरकार की तरफ से कोई उत्तर न आने पर हम कांग्रेस के मित्रों से यह जानना चाहते हैं कि स्वायत्तता समति का चेयरमैन कौन था? चेयरमैन कांग्रेस के नेता थे।

श्री माधवराव सिन्धिया : उन्होंने त्याग-पत्र दे दिया है।

श्री मुलायम सिंह यादव : लेकिन उन्होंने त्याग-पत्र बाद में दिया है।

श्री माधवराव सिन्धिया : मुलायम सिंह जी, आप क्या बात कर रहे हैं?

श्री मुलायम सिंह यादव : जब आपसे पार्लियामेंट के लिये सौदा हो गया और राज्य़ सभा के लिये उधर हो गया और इधर पार्लियामेंट की टिकट का फैसला हो गया, तब क्यों नहीं बात करेंगें?

श्री माधवराव सिंधिया : अध्यक्ष महोदय, मैं निवेदन करूंगा कि यह बुनियादी मुद्दों पर बात करें।

श्री मुलायम सिंह यादव : हम बुनियादी मुद्दों पर ही हैं। आपको ऐतराज क्यों है। जब चर्चा करेंगे तो सच्चाई सबके सामने आयेगी। नेशनल कांफ्रेन्स में जो मंत्री हैं, जिन्होंने इस्तीफा दे दिया, उन मंत्री के बेटे ने सबसे ज्यादा समर्थन स्वायत्तता का किया है। यह कैसे छिपाया जा सकता है। हम उतना संकेत इसलिए करना चाहते हैं …( व्यवधान) आप भी सफाई दीजिए, आपको सफाई देनी पड़ेगी। आप कांग्रेस पार्टी के नेता हैं, आप बहस में सफाई दीजिए। इसलिए आज जो सत्ता का सवाल है। कश्मीर की जनता की समस्याओं का समाधान निकले, उनके लिए ज्यादा सुविधाएं दी जाएं। लेकिन सवाल यह है कि आखिर यह सवाल क्यों उठा? १९५३ के पहले की मांग क्यों उठी। बीच में बिल्कुल शांति हो गई थी। संयुक्त मोर्चा की भी सरकार थी, उस समय यह सवाल क्यों नहीं आया, आखिर अभी यह सवाल क्यों आया?

श्री सत्यव्रत चतुर्वेदी (खजुराहो) : माननीय अध्यक्ष महोदय, जीरो ऑवर के कुछ लेड डाउन रूल्स हैं जिन पर बहस होती है…( व्यवधान) इन्होंने जीरो ऑवर में अपनी बात उठाई, आगे बहस करने के लिए एक मुद्दा उठाया है, हमने भी रिक्वेस्ट की है…( व्यवधान) सब लोग उस पर विस्तार से अपनी बात कहें, हमें कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन अभी इसका क्या महत्व है…( व्यवधान)

श्री मुलायम सिंह यादव : तभी तो स्वीकार किया जायेगा कि इसका महत्व क्या है।

श्री सत्यव्रत चतुर्वेदी : सर, अगर यह इस तरह से कंट्रोवर्शियल बातें उठायेंगे तो हमें उसका जवाब देना पड़ेगा।

SHRI RAMESH CHENNITHALA (MAVELIKARA): You should allow everybody to speak on this.… (Interruptions)

MR. SPEAKER: There are other Members also who have given notices to raise important issues.

… (Interruptions)

श्री मुलायम सिंह यादव : आखिर इसका महत्व क्या है।…( व्यवधान) इसलिए हमें यह समझ में आता है कि इसमें परेशानी सरकार को होनी चाहिए। लेकिन कांग्रेसी मित्रों को परेशानी क्यों है?

…( व्यवधान)

MR. SPEAKER: Shri Mulayam Singh, 37 Members have given notices to raise matters in `Zero Hour’.

… (Interruptions)

श्री मुलायम सिंह यादव : आप सफाई क्यों दे रहे हैं। आपको क्या परेशानी है, परेशानी सरकार को होनी चाहिए।

श्री सत्यव्रत चतुर्वेदी : हमें परेशानी बिल्कुल नहीं है। अगर आप इस पर पूरी बहस करवाना चाहते हैं तो अभी करवा लें…( व्यवधान)

श्री मुलायम सिंह यादव : अब गृह मंत्री जी ने खंडन किया है। लेकिन यह महत्वपूर्ण सवाल क्यों है। गृह मंत्री जी ने यह खंडन किया है कि हमने तीन टुकड़ों में बंटवारे की बात नहीं कही। लेकिन साथ में यह भी कहा कि संघ परिवार चाहता है। संघ परिवार से जो अखबार में आया कि संघ परिवार से आपका रिश्ता है, संघ परिवार से रिश्ता प्रधान मंत्री जी का भी है। आप कह चुके हैं कि मुझे फख्र है कि १४ साल की उम्र से आप लगातार संघ परिवार में है। इसलिए आपको क्या परेशानी है, आप परेशान क्यों है?

…( व्यवधान)

MR. SPEAKER: Shri Mulayam Singh, you should be very brief in `Zero Hour’.

श्री मुलायम सिंह यादव : इन्हें क्या ऐतराज है। इन्हें क्या परेशानी है?

श्री माधवराव सिंधिया : सर, इतना लम्बा बोलने की क्या जरूरत है। अगर आप इजाजत दें तो हम भी बोलेंगे।

अध्यक्ष महोदय : यह जीरो ऑवर सबमिशन है डिबेट नहीं है।

श्री मुलायम सिंह यादव : आप शुरू करिये, कौन रोकता है, आपको नहीं रुकना चाहिए, आप शुरू कर दीजिए। इसके बाद घंटों बोलिये, मुझे ऐतराज नहीं है। लेकिन आपको ऐतराज क्यों है। आर.एस.एस. से आपको क्यों परेशानी हो रही है। मैं आर.एस.एस. पर बोल रहा हूं।

श्री माधवराव सिंधिया : पार्लियामेंट की परम्परा के अनुसार हम कार्य करना चाहते हैं। जो स्पीकर साहब इजाजत दे रहे हैं वह जीरो ऑवर की इजाजत होती है, उस पर बहस नहीं होती है।

अध्यक्ष महोदय : दूसरे लोग भी बोलना चाहते हैं, अब आप समाप्त कीजिए।

श्री मुलायम सिंह यादव : इसलिए हम जानना चाहते हैं कि संघ परिवार से आपका क्या रिश्ता है। माननीय मुरली मनोहर जोशी जी का है, कैबिनेट का भी है, आपका भी है। आप छुपाते नहीं है। पटवा साहब कह रहे हैं कि हमारा भी है। हम कह रहे हैं कि सबका है। लेकिन आप इस देश से खिलवाड़ मत कीजिए। आप शुरूआत से कर रहे हैं कहीं सूबों का बंटवारा, कहीं स्वायत्तता का सवाल। जो सवाल कहीं नहीं थे, उन सवालों को उठाया गया है और इसलिए उठाया गया है कि सरकार की गलत नीतियों के कारण मंत्रिमंडल में एकता नहीं है और इसीलिये यह सवाल उठाया गया है। इस सवाल को सामने रखकर आज देश में ऐसी बहस छिड़ी है कि आज देश की एकता को बहुत बड़ा खतरा है।

इसलिए मैं मांग करता हं कि इस पर नियम १९३ या नियम १८४ के तहत चर्चा कराई जाए।

SHRI SOMNATH CHATTERJEE (BOLPUR): Mr. Speaker, Sir, an important issue has been raised which is agitating the country. We shall make our submissions because every political party has its views on this. The question of autonomy is not restricted to Jammu and Kashmir alone. Different shades of autonomy and different concepts of autonomy are being put forward. There have been demands for a long time for this. The Sarkaria Commission has given its report. Of course, the BJP have been changing this stand from time to time because they happen to be in the Government now.… (Interruptions)

DR. VIJAY KUMAR MALHOTRA (SOUTH DELHI): Sir, is BJP being discussed here?… (Interruptions)

MR. SPEAKER: It is an important subject. The leaders are making some submissions. Please take your seat.

SHRI SOMNATH CHATTERJEE : Sir, in matters like this concerning the country as a whole, what we find is that the Opposition and Parliament are being ignored totally and repeatedly. We find the Central Cabinet immediately responding to the autonomy resolution without consulting anybody and then dragging its feet after rejecting it outright. After that, they called the Chief Minister of Jammu and Kashmir to have talks with the Prime Minister himself. What sort of policy and what sort of attitude is this of the Government? They are doing it just because there is some trouble in the NDA and there is some murmuring by some of the NDA partners in different States including our good friend, Shri Vaiko’s temporary friend, Shri Karunanidhi and also by Akali Chief Minister. I would call दिखावा चल रहा है, तमाशा चल रहा है by calling the Chief Minister one by one. But nothing is discussed in Parliament on this important issue. The Opposition is not consulted. Is it a matter for the Government alone when they are speaking in different voices? Therefore, it is a very serious matter which should be discussed as early as possible so that every political party can give its views and the Government can consult Parliament and they cannot ignore Parliament.

MR. SPEAKER: Today, we have Business Advisory Committee meeting at 3 o’clock.

SHRI K. YERRANNAIDU (SRIKAKULAM): Mr. Speaker, Sir, I do not want to go into the merits and de-merits of this case. It should be discussed in Parliament. There is a lot of demand from the States. They are also interested in autonomy. So, my party is also interested in this.

SHRI VAIKO (SIVAKASI): Sir, I support that this issue should be discussed in the House… (Interruptions)

MR. SPEAKER: This is not a debate. We are not discussing this subject.

SHRI ALI MOHD. NAIK (ANANTNAG): Sir, you have allowed others. Please allow me to speak.

MR. SPEAKER: I have not allowed all the leaders. Please understand.

श्री अली मोहम्मद नायक : यह हमारे साथ ज़ुल्म है। मेरी पार्टी की तरफ से मुझे बोलने का मौका मिलना चाहिए। …( व्यवधान)

MR. SPEAKER: Please understand. Everybody wants to discuss this matter in the House.

SHRI ALI MOHD. NAIK : Sir, this matter should be discussed. Sir, when you have allowed others, I should also be allowed to speak.

MR. SPEAKER: You can speak at the time of discussion on this subject. You have not given notice.

गृह मंत्री (श्री लाल कृष्ण आडवाणी) : अध्यक्ष महोदय, माननीय माधव राव जी ने जो सीमित सवाल उठाया कि जम्मू-कश्मीर की विधान सभा ने जो प्रस्ताव पारित किया, वह एक महत्वपूर्ण मुद्दा है और उस पर बहस होनी चाहिए। संसदीय कार्य मंत्री ने मुझे अबी बताया कि कल पहले दिन ही जब नेता इकट्ठे हुए थे तो सरकार की ओर से कहा गया था कि हम इस विषय पर चर्चा के लिए पूरी तरह से तैयार हैं, जिस रूप में आप स्वीकार करेंगे, हम उस पर पूरी बहस चाहेंगे, लेकिन इसी दौरान मेरे मित्र मुलायम सिंह जी ने कुछ ऐसे सवाल उठाए हैं जिसमें मुझे लगता है कि मैं न कहूं तो उसके कारण गलतफहमी हो सकती है। एक बात यह कि यह जो प्रस्ताव था, वह बहुत विस्तृत प्रस्ताव है क्योंकि रिपोर्ट बहुत लंबी है।

लेकिन, उसके दो प्रमुख हिस्से हैं और उनमें से एक हिस्सा यह है कि हमारे अधिकार बढ़ने चाहिए, कोई उसको स्वायत्तता कहता है, कोई कहता है कि केन्द्र के पास इतने अधिकार न हो कर राज्य के पास इतने अधिकार होने चाहिए, लेकिन उसका जो दूसरा प्रमुख हिस्सा है वह यह है कि जम्मू-कश्मीर की सांवैधानिक स्थिति १९५३ के पूर्व की होनी चाहिए और यह जो थ्रस्ट था, उस पर भारत सरकार को लगा कि हमारी प्रक्रिया में विलम्ब नहीं होना चाहिए, उसके बारे में हम अपनी बात तुरन्त कह दें, यह आवश्यक होगा और उन्होंने अपनी बात तुरन्त कह दी।

मुझे याद है, मैं बाहर से आया था, मुझ से इस प्रस्ताव के बारे में जब पूछा गया, तो मैंने कहा कि गृह मंत्री के नाते मैं इस पर टिप्पणी नहीं करूंगा, क्योंकि यह विधान सभा का प्रस्ताव है और मैं चाहूंगा कि इस पर पूरी की पूरी सरकार, मंत्रिमंडल के रूप में टिप्पणी करे और वह उन्होंने की, लेकिन टिप्पणी करते हुए हमने इस बात पर बल दिया कि जब यह सरकार १९९९ में बनी थी, तब जो मैनीफैस्टो हमने देश को दिया था, तब हमने कहा था कि केन्द्र के पास बहुत अधिकार हैं, जिनमें से बहुत सारे अधिकार राज्यों को दिए जाएं, तो लोकतंत्र अधिक स्वस्थ होगा और हम इस दिशा में बढ़ने लगेंगे। हमने इंटर स्टेट कौंसिल में सरकारिया कमीशन की रिपोर्ट के आधार पर इस दिशा में कई कदम उठाए हैं और उठाते रहेंगे। हमने उस बात को दोहराते हुए प्रदेश सरकार को भी कनवे किया कि जहां तक आपके अधिकार बढ़ाने का सवाल है, हम उसके बारे में चर्चा करने को तैयार हैं। बाकी प्रदेशों से भी करते हैं, तो आपसे क्यों नहीं। इसलिए इसमें कोई कंट्राडिक्शन नहीं है।

दूसरी बात यह है कि जिस अखबार में यह खबर छपी, उसकी सबसे ज्यादा तीखे शब्दों में कंट्राडिक्शन अगर किसी ने की, तो डॉ. फारुख अब्दुल्ला ने की, जिसमें उन्होंने कहा कि ये सारी बातें जो केन्द्र सरकार के जिम्मे मढ़ी जा रही हैं या गृह मंत्री जी के जिम्मे मढ़ी जा रही हैं, ये सरासर गलत हैं। गृह मंत्री ने अनेकों बार इस बात को साफ किया है कि मजहब के नाम पर देश का एक बार विभाजन १९४७ में हो गया। अब हम दूसरा बंटवारा मजहब के नाम पर देश का तो क्या किसी प्रदेश का भी नहीं होने देंगे।

…( व्यवधान)