Lok Sabha Debates
Valedictory References Made On The Conclusion Of The Second Part If The Ninth ... on 17 May, 2002
१८.५५ hrs. Title: Valedictory references made on the conclusion of the second part if the Ninth Session (i.e. Budget Session) of the Thirteenth Lok Sabha.
अध्यक्ष महोदय : माननीय सदस्यगण, तेरहवीं लोक सभा का नौवां सत्र, जो २५ फरवरी, २००२ को आरंभ हुआ था, आज समाप्त होने जा रहा है। इस सत्र के दौरान कुल चालीस बैठकें हुईं और दौ सौ उन्नीस घंटों से अधिक समय तक चलीं।
२३ मार्च, २००२ से १४ अप्रैल, २००२ तक सभा का सत्रावकाश रहा, ताकि विभागों से संबद्ध स्थायी समतियां केन्द्रीय मंत्रालयों तथा विभागों की अनुदानों की मांगों पर विचार कर सकें और सभा में अपने प्रतिवेदन प्रस्तुत कर सकें। लोक सभा की स्थायी समतियों ने इस सत्र के दौरान चौहत्तर प्रतिवेदन प्रस्तुत किए।
बजट सत्र के दौरान, सभा में कई महत्वपूर्ण वित्तीय, विधायी तथा अन्य कार्य किए गए।
१६ मार्च, २००२ को सभा में बारह घंटों से अधिक समय तक चली बहस के बाद राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पारित किया गया।
केन्द्र सरकार का सामान्य बजट तथा रेल बजट और उत्तरप्रदेश का बजट, जहां उस समय राष्ट्रपति शासन था, समस्त सभा के पूर्ण सहयोग से पारित किए गए। यहां तक कि इन बजटों पर सामान्य चर्चा करने के लिए सभा की बैठकें देर रात तक भी चलीं।
सत्र के दौरान सभा ने ३८ विधेयक पारित किए। इनमें एक महत्वपूर्ण विधेयक आतंकवाद निवारण विधेयक, २००२ भी शामिल था जो आतंकवाद निवारण (द्वितीय अध्यादेश), २००१ के स्थान पर लाया गया था और जिसे १८ मार्च, २००२ को लोक सभा द्वारा पारित कर दिया गया था लेकिन २१ मार्च, २००२ को राज्य सभा द्वारा अस्वीकृत कर दिया गया। स्वतंत्र भारत के इतिहास में तीसरी बार माननीय राष्ट्रपति ने दोनों सदनों के बीच विधेयक पर मतभेद दूर करने हेतु संयुक्त बैठक बुलायी। २६ मार्च, २००२ को हुई दोनों सदनों की संयुक्त बैठक में आतंकवाद निवारण विधेयक, २००२ पारित किया गया।
सभा ने नियम १९३ के अधीन अविलम्बनीय लोक महत्व के चार मामलों पर व्यापक और सार्थक चर्चा की। ये चर्चाएं इन विषयों पर थीं ; गोधरा नरसंहार और गुजरात में बाद में हुई हिंसक घटनाएं। उच्चतम न्यायालय के फैसले के कारण अयोध्या की वर्तमान स्थिति के संबंध में १४ मार्च, २००२ को प्रधान मंत्री द्वारा दिया गया वक्तव्य। बिहार राज्य के लिए वित्तीय पैकेज और १४ मई, २००२ को जम्मू में कालूचक स्थित सेना शविर तथा बस यात्रियों पर आतंकवादी हमला।इन चर्चाओं में सदस्यों ने बड़ी संख्या में भाग लिया।
ध्यानाकर्षण के माध्यम से चार मामले उठाए गए थे जिन के उत्तर में संबंधित मंत्रियों ने वक्तव्य दिए। इनके अतरिक्त अन्य वभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर मंत्रियों ने १६ वक्तव्य दिए।
जहां तक गैर सरकारी सदस्यों के कार्य का संबंध है,, गैर सरकारी सदस्यों के कुल ३९ विधेयक पुर:स्थापित किए गए। एक गैर सरकारी सदस्य विधेयक तथा गैर सरकारी सदस्यों के दो संकल्पों पर चर्चा हुई और उन्हें पेश करने वाले सदस्यों द्वारा सभा की अनुमति से वापस ले लिया गया।
माननीय सदस्यों ने नियम ३७७ के अधीन ३१४ मामले उठाए। इसके अतरिक्त शून्य काल के दौरान सदस्यों ने अविलम्बनीय लोक महत्व के १७१ मामले उठाए।
इस अवसर पर मैं माननीय सदस्यों विशेष कर सदन के नेता, विपक्ष की नेता और सभी दलों के नेताओं, मुख्य सचेतकों और सचेतकों को सभा की कार्यवाही को सुचारू ढंग से पूरा करने हेतु मुझे, उपाध्यक्ष महोदय और सभापति तालिका के मेरे सहयोगियों को दिए गए सहयोग के लिए धन्यवाद देता हूं।
मैं सभा के संचालन में अमूल्य सहयोग के लिए लोक सभा सचिवालय के अधिकारियों एवं कर्मचारियों तथा अन्य सहयोगी एजेंसियों की सराहना करता हूं और उनको धन्यवाद देता हूं। मैं मीडिया का भी उनके सहयोग के लिए धन्यवाद करता हूं।
अपनी बात समाप्त करने से पहले मैं इस अवसर पर एक बार फिर इस सभा के सभी माननीय सदस्यों का धन्यवाद करना चाहूंगा कि उन्होंने विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के अध्यक्ष के गरिमामय पद पर मुझे निर्वाचित करके मुझ में अपना विश्वास व्यक्त किया। पुन: मैं इस सभा के संचालन में उनके द्वारा दिए गए पूर्ण सहयोग के लिए भी उनके प्रति आभार व्यक्त करता हूं।
19.00 hrs. माननीय सदस्यो, मेरा गंभीर प्रयास रहेगा कि इस सम्मानित सभा की कार्यवाही का संचालन व्यवस्थित ढंग से चले। इस प्रयोजन हेतु मेरी प्राथमिकतायें इस प्रकार होंगी:
आप सब के सहयोग से सभा में अनुशासन और शालीनता सुनिश्चित करना ; सभा में मामले उठाने और चर्चा में भाग लेने के लिये सभी माननीय सदस्यों को यथासंभव समान अवसर प्रदान करना ; और राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय महत्व के मामले सुगमतापूर्वक उठाए जाने हेतु ‘शून्यकाल’को वनियमित करना। इऩ उद्देश्यों की प्राप्ति के लिये मेरा नेताओं और माननीय सदस्यों के साथ आवधिक बैठकें करने का प्रस्ताव है।
माननीय सदस्यों, मैने देखा है कि प्रश्न काल का उपयोग उतने विवेकपूर्ण ढंग से नहीं किया जाता है जितना कि होना चाहिये और बहुत से तारांकित प्रश्न अनुत्तरित रह जाते हैं। सत्र के दौरान सभा में उत्तरित तारांकित प्रश्नों का औसत प्रतिशत, जैसा कि मैंने पहले भी कहा है, लगभग नौ प्रतिशत है जो बहुत उत्साहवर्द्धक आंकड़ा नहीं है। मैं सदस्यो से अनुरोध करूंगा कि वे भविष्य में सटीक अनुपूरक प्रश्न पूछें और प्रत्येक प्रश्न के संबंध में पूछे जाने वाले अनुपूरक प्रश्नों की संख्या को सीमित रखें। मैं सभी माननीय सदस्यों से सहयोग का अनुरोध करता हूं।
अन्त में , मैं पूरे सदन की ओर से अपने पूर्ववर्ती सम्मानित श्री जी. एम. सी. बालयोगी, जिनका ३ मार्च, २००२ को एक दुखद दुर्घटना में निधन हो गया, के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।
माननीय सदस्य अब ‘वन्दे मातरम्’के लिये खड़े हो जाएं।
_________ 19.02 hrs. NATIONAL SONG The National Song was played.
अध्यक्ष महोदय : अब सभा अनिश्चित काल के लिये स्थगित होती है।
19.03 hrs. तत्पश्चात् लोक सभा अनिश्चित काल के लिए स्थगित हुई।
______ (n4/1840/hng-tkd) "…that he wanted an end to the 50 year old quarrel with India. His military Chief, General Pervez Musharraf seem to be in a different mould. He was said to be a hardliner on Kashmir, a man, some feared, was determined to humble India once and for all. "
यह उनकी रिपोर्ट है और उनका एसैसमेंट है।
DR. NITISH SENGUPTA (CONTAI): When you had all the information why did you have to recognise Pervez Musharraf as President and give him international respectability? … (Interruptions)
SHRI L.K. ADVANI: Well, let me tell you. पाकिस्तान ने १९४७ से युद्ध करने की शुरुआत की और १९४७ में पहले पहल ट्राइबल के माध्यम से युद्ध शुरु किया और कहा कि हम कबाइलियों को भेज रहे हैं। जब वे श्रीनगर से थोड़ी दूरी पर ही थे, तो भारत की सेनाओं ने उनको खदेड़ना शुरु किया। लेकिन भारत की १९४७ से यह नीति रही है कि हम पाकिस्तान के साथ मित्रता करना चाहते हैं। मित्रता और सौहार्द करने की नीति तब से रही है। अलबत्ता यह हो सकता है, जब हमारी सरकार आई, तब उन्हें लगता होगा कि शायद .ये मित्रता नहीं करना चाहेंगे। लेकिन वाजपेयी जी ने दो बार प्रयत्न किया। एक बार लाहौर बस यात्रा की, लेकिन लाहौर बस यात्रा के बाद कारगिल मिला। कारगिल मिलने के बाद, बावजूद इसके कि १९९९ में जब वाजपेयी जी देश की जनता से समर्थन से और जनादेश प्राप्त करके इलैक्ट हुए, तो उसके अगले ही दिन पाकिस्तान में इलैक्टेड प्रधान मंत्री को हटाने के लिए कूप हो गया और परवेज़ मुशर्रफ आ गए। थोड़े दिनों के बाद, बात और आगे बढ़ी. फिर विचार-विमर्श करके सरकार ने कहा कि इनको बुलाकर बात करते हैं। उनको आगरा बुलाया गया, लेकिन कोई परिवर्तन न ला पाए। उनका आबसैशन यह है कि कश्मीर उनको मिलना चाहिए और मैं कश्मीर के बारे में अनकम्प्रोमाइज्ड हूं और मैं यह प्रमाणित करके दिखाऊंगा और पाकिस्तान की जनता के बीच स्थान प्राप्त करूंगा। बाकी मेरी कमजोरियां होगीं, लेकिन इसके आधार पर मैं आगे बढ़ सकता हूं। यह उनका संकल्प रहा। …( व्यवधान)
श्री ब्रहमानन्द मंडल (मुंगेर):हम लोगों का क्या संकल्प होगा, यह बताइए।…( व्यवधान)
श्री लाल कृष्ण आडवाणी:उन्होंने प्रोक्सीवार की नीति शुरू की। शुरु-शुरू में उन्होंने यह सोचा था कि जम्मू-कश्मीर में इतना असंतोष है, उस असंतोष को बढ़ाकर हम वहां के लोगों को यहां लाकर शक्षित करेंगे, ट्रेनिंग देंगे और उनके माध्यम से, जम्मू-कश्मीर की जनता के माध्यम से हम वहां पर आतंकवाद बढ़ायेंगे। पिछले साल कारगिल युद्ध के बाद डॉन अयाज़ अमीर ने एक लेख लिखा था । उसमें उन्होंने लिखा- "Kashmir and the power of illusion" in which Ayaz Amir Corner wrote:
"as long as the Kashmir insurgency was largely a home grown affair."
अर्थात्, वहीं के लोग इन्सरजैंट होकर, यहां आकर ट्रेनिंग लेकर, फिर वापिस जाकर हत्या करते थे और आतंकवाद फैलाते थे।The advantage was ours and the odium was India’s. But then in a replay of Afghanistanतालिबान के संदर्भ में जो कुछ भी अफगानिस्तान में किया, हम उसे जम्मू-कश्मीर में करना चाहेंगे।
Then, in a replay of Afghanistan, we had to bring the Kashmiri resistance under the wings of the ISI, which meant that the Pakistan based Jehadi organisations, began overshadowing the Kashmiri element.
इसके बाद जेहाद के बारे में उन्होंने लिखा है -
"The stark truth is that Jehad has no future in Kashmir. This is a harsh thing to say, given the blood-spill and the sacrifices rendered, but, unfortunately, all too true. A continuation of the insurgency can bleed India, but it cannot secure the liberation of the State… "
(o4/1845/sb-pb) This much should be clear from the history of the last 53 years. What the Pakistan army has failed to secure in full-fledged battle, the Jehadis cannot hope to achieve with their hit-and-run tactics."
यह आर्टीकल वहां के एक इंटल्लेक्चुअल लेखक का है। डॉन वहां का एक प्रसिद्ध अखबार है, उसमें लिखा हुआ है, मैं इस चीज का उल्लेख केवल इसलिए कर रहा हूं क्योकिं आज पाकिस्तान में भी इस बात का अहसास है कि वह इस ढंग से जम्मू-कश्मीर प्राप्त नहीं कर सकता। इस सदन में या उस सदन के जम्मू-कश्मीर के एक माननीय सदस्य ने ठीक कहा। आज वहां जितने लोग आते हैं, उनमें से प्राय: ७५-८० प्रतिशत फॉरेन मरसिनरीज़ हैं। ऐसा क्यों है -, इसमें मैं एक चीज कह सकता हूं वे फिदाइन मनियां हैं। वे कट्टरवाद पैदा करके करते हैं। आज की परिस्थिति के बारे में मैं कुछ शब्द कहना चाहता हूं। आज की परिस्थिति वहां ऐसी है कि जिसे हमें ख्याल में रखना पड़ेगा। हमारी जानकारी में है कि कुछ समय पहले, जितनी सारी एलईटी, जैश-ए-मोहम्मद है, उन्होंने कहा कि आप कम से कम अपने दफ्तर हटा दीजिए, बोर्ड वगैरह हटा दीजिए, अपना नाम बदल दीजिए। आप अपना काम करते रहिए, जरा बिखर जाइए। For some time you have to lie low.
धीरे-धीरे करके वह समय भी बीता और आज हमारी जानकारी में है कि -
"The training camps and establishments of various militanttamzeems, including Lashkar-e-Toiba, Jaish-e-Mohammad, Al Badrand Hizbul Mujahideen, continue to function freely as before, the only difference being that their sign boards have been defaced and posters on the walls removed. Open processions, slogan shouting, call forJehad, collection of funds have been discontinued in order to mislead the outside world. "
ट्रेनिंग कैम्स फिर से शुरू हो गए और हमें कम से कम ७०-७५ ट्रेनिंग कैम्स की जानकारी है। इतना ही नहीं, अफगानिस्तान के परिवर्तन के बाद तीन-चार हजार तालिबान,TheAl Qaida cadres, mostly Arabs, have shifted from various parts of Afghanistan to Pakistan. About 2,000 of them have settled in tents in Pakistan-occupied Kashmir.
महोदय, ये तथ्य हैं, जिनके बारे में जितनी जानकारी मेरे पास है, वे सारे इनपुट्स मिला कर सब बातों पर विचार करके, बात करके हमें निर्णय करना होगा।…( व्यवधान)
श्री रामजीलाल सुमन (फिरोजाबाद):महोदय, मैं बड़ी विनम्रता के साथ निवेदन करना चाहता हूं कि जो आज पूरे दिन आतंकवाद के खिलाफ बहस हुई है, उसका लब्बोलबाब यह है कि आतंकवाद के खिलाफ पूरा देश आपके साथ एकजुट है। सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि जो हालात बने हैं, उसमें पाकिस्तान कॉम्प्रोमाइस नहीं करना चाहता। आडवाणी जी, आपके पास जो जानकारी है, वह ठीक है। कुल मिलाकर देश की जनता यह चाहती है कि आतंकवाद से लड़ने के लिए आप अंत में क्या करना चाहते हैं, यह बताएं तो ज्यादा अच्छा है। इस जानकारी को आप अपने पास रखिए। देश सिर्फ यह जानना चाहता है कि आप क्या कर रहे हैं।…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : अभी मंत्री जी जवाब दे रहे हैं, उनकी बात खत्म होने दीजिए।
श्री मोहन रावले (मुम्बई दक्षिण मध्य) : महोदय, वहां कितने लोग मर रहे हैं।
श्री लाल कृष्ण आडवाणी: मैंने सभी भाषण नहीं सुने हैं।
श्री सत्यव्रत चतुर्वेदी (खजुराहो): अध्यक्ष महोदय, सभी पक्षों ने सरकार का पूरी बहस में समर्थन किया है। बहस के दौरान कुछ ऐसे महत्वपूर्ण प्रश्न किए गए थे, जो इन सारी घटनाओं पर प्रकाश डालेंगे। आपने अभी जिन तथ्यों की जानकारी दी है, मैं उनका स्वागत करता हूं, लेकिन कारगिल कमेटी की रिपोर्ट तीन साल से हमारे पास पड़ी है।…( व्यवधान)जो सिफारिशें लागू करनी थी, उनका क्या हुआ। इसकी जानकारी आ जाए। हम आगे क्या करने जा रहे हैं, हम किस प्रभावी तरीके से कैसे इस पर नियंत्रण करने जा रहे हैं।
।
(p4/1850/har/krr) इसके बारे में सरकार की क्या सोच है, क्या नीति है? कश्मीर के बारे में क्या नीति है?
श्री लाल कृष्ण आडवाणी: माननीय चतुर्वेदी जी, मैं आपसे ऐसी अपेक्षा नहीं करता था। इस तरफ से कुछ सदस्यों पर मुझे आश्चर्य नहीं हुआ लेकिन जो लोग सरकार में रहे हैं उनको तो इस बात की पूरी जानकारी है कि इस प्रकार की घोषणाएं संसद में सरकार की ओर से नहीं की जाती हैं।
श्री सत्यव्रत चतुर्वेदी (खजुराहो): हम कोईक्लासिफाइड जानकारी नहीं चाह रहे हैं।
श्री लाल कृष्ण आडवाणी: मैं आपकी बात समझ गया। मैं इतना ही कह सकता हूं कि इस सवाल की जितनी गंभीरता है उसका अहसास सरकार को है तथा सभी पार्टियां पूरा समर्थन देने को तैयार हैं, सारा देश समर्थन देने को तैयार है। मैंने कुछ तथ्य और इनपुट्स आपको दिये हैं जिन पर प्रधान मंत्री और उनके सहयोगियों तथा प्रमुख सैनिक अधिकारियों के साथ इंटर-एक्शन करके सही निर्णय लिया जाएगा। जो भी निर्णय लिया जाएगा, निश्चित रूप से उसकी जानकारी आपको मिल जाएगी। किस प्रकार से मिलेगी, यह मैं नहीं कह सकता हूं। हो सकता है माननीय प्रधान मंत्री जी जो यहां नहीं बोले हैं उनको आवश्यक लगे कि हम टेलीविजन के माध्यम से देश को संबोधित करें। लेकिन मुझे विश्वास है कि जो भी निर्णय होने वाला होगा, उससे पूर्व भी माननीय प्रधान मंत्री जी विपक्ष के लोगों को बुला करके उनसे सलाह-मशविरा करेंगे - इस प्रकार का एक मत बना है और हम उस दिशा में आगे बढ़ेंगे।
SHRIMATI MARGARET ALVA (CANARA): Hon. Minister, do you agree with what the Chief of Army Staff said today that the time for talk is over and the time for action has come? … (Interruptions) Do you support that statement of the Chief of Army Staff? He said that the time for talk is over and time for action has come. What has the hon. Minister of Defence to say on this? … (Interruptions)
SHRI L.K. ADVANI: What the Chief of Army Staff has said has been reported in the Press today. … (Interruptions)
SHRIMATI MARGARET ALVA (CANARA): What is the Government’s reaction?
SHRI L.K. ADVANI: He has also said that the decision has to be taken by the nation, by the country which means Parliament advising the Government and the Government will certainly do its duty in this regard. Thank you.
MR. SPEAKER: Hon. Members, I propose to move the following Resolution.
"This House strongly condemns the most dastardly attack at Kaluchak, Jammu on 14th May, 2002 by terrorists belonging to Lashker-e-Toiba and Jaish-e-Mohammad from across Pakistan and conveys its heart-felt sympathies to the bereaved families.
We have consistently tried to build friendly relations with Pakistan through the mechanisms provided by the Simla Agreement and the Lahore Declaration, to solve all existing problems. But to our great disappointment, our efforts did not meet with the desired response from Pakistan.
It is essential that the leaders of the World community take note of the continuing acts of terrorism encouraged by Pakistan so that united and effective action can be taken against the same.
The House now resolves to fight against such senseless acts of terrorism which are against humanity as a whole, in a united and determined manner and declares this Nation’s commitment to see an end to this menace."
If the House agrees, I declare that the Resolution is unanimously adopted.
SEVERAL HON. MEMBERS: Yes.
The Resolution was adopted unanimously.
MR. SPEAKER: The next item on the agenda is a Bill by hon. Minister Shri Shanta Kumar. If the House wants, I can take it up now.
SHRI SHIVRAJ V. PATIL (LATUR): No, sir.
SHRI K. YERRANNAIDU (SRIKAKULAM): Sir, we will take it up later in the Monsoon session.
MR. SPEAKER: If the hon. Minister of Parliamentary Affairs agrees, we can do it like that.
SHRI K. YERRANNAIDU (SRIKAKULAM): Sir, we passed this unanimous Resolution on the floor of the House. … (Interruptions)
THE MINISTER OF COMMUNICATIONS AND INFORMATION TECHNOLOGY AND MINISTER OF PARLIAMENTARY AFFAIRS (SHRI PRAMOD MAHAJAN): This is the last day of the Session. I request the hon. Members to kindly stay for‘Vande Mataram’.
अध्यक्ष महोदय : मैं सभी सांसदों से विनती करता हूं कि विदाई उल्लेख होने के बाद वंदे-मातरम होगा तथा वंदे-मातरम होने के बाद हाउस एडजोर्न होगा। वंदे-मातरम थोड़ी देर में होने वाला है।
बजेअध्यक्ष महोदय : माननीय सदस्यगण, तेरहवीं लोक सभा का नौवां सत्र, जो २५ फरवरी, २००२ को आरंभ हुआ था, आज समाप्त होने जा रहा है। इस सत्र के दौरान कुल चालीस बैठकें हुईं और दौ सौ उन्नीस घंटों से अधिक समय तक चलीं।
(q4/1855/am-san) २३ मार्च, २००२ से १४ अप्रैल, २००२ तक सभा का सत्रावकाश रहा, ताकि विभागों से संबद्ध स्थायी समतियां केन्द्रीय मंत्रालयों तथा विभागों की अनुदानों की मांगों पर विचार कर सकें और सभा में अपने प्रतिवेदन प्रस्तुत कर सकें। लोक सभा की स्थायी समतियों ने इस सत्र के दौरान चौहत्तर प्रतिवेदन प्रस्तुत किए।
बजट सत्र के दौरान, सभा में कई महत्वपूर्ण वित्तीय, विधायी तथा अन्य कार्य किए गए।
१६ मार्च, २००२ को सभा में बारह घंटों से अधिक समय तक चली बहस के बाद राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पारित किया गया।
केन्द्र सरकार का सामान्य बजट तथा रेल बजट और उत्तरप्रदेश का बजट, जहां उस समय राष्ट्रपति शासन था, समस्त सभा के पूर्ण सहयोग से पारित किए गए। यहां तक कि इन बजटों पर सामान्य चर्चा करने के लिए सभा की बैठकें देर रात तक भी चलीं।
सत्र के दौरान सभा ने ३८ विधेयक पारित किए। इनमें एक महत्वपूर्ण विधेयक आतंकवाद निवारण विधेयक, २००२ भी शामिल था जो आतंकवाद निवारण (द्वितीय अध्यादेश), २००१ के स्थान पर लाया गया था और जिसे १८ मार्च, २००२ को लोक सभा द्वारा पारित कर दिया गया था लेकिन २१ मार्च, २००२ को राज्य सभा द्वारा अस्वीकृत कर दिया गया। स्वतंत्र भारत के इतिहास में तीसरी बार माननीय राष्ट्रपति ने दोनों सदनों के बीच विधेयक पर मतभेद दूर करने हेतु संयुक्त बैठक बुलायी। २६ मार्च, २००२ को हुई दोनों सदनों की संयुक्त बैठक में आतंकवाद निवारण विधेयक, २००२ पारित किया गया।
सभा ने नियम १९३ के अधीन अविलम्बनीय लोक महत्व के चार मामलों पर व्यापक और सार्थक चर्चा की। ये चर्चाएं इन विषयों पर थीं ; गोधरा नरसंहार और गुजरात में बाद में हुई हिंसक घटनाएं। उच्चतम न्यायालय के फैसले के कारण अयोध्या की वर्तमान स्थिति के संबंध में १४ मार्च, २००२ को प्रधान मंत्री द्वारा दिया गया वक्तव्य। बिहार राज्य के लिए वित्तीय पैकेज और १४ मई, २००२ को जम्मू में कालूचक स्थित सेना शविर तथा बस यात्रियों पर आतंकवादी हमला।इन चर्चाओं में सदस्यों ने बड़ी संख्या में भाग लिया।
ध्यानाकर्षण के माध्यम से चार मामले उठाए गए थे जिन के उत्तर में संबंधित मंत्रियों ने वक्तव्य दिए। इनके अतरिक्त अन्य वभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर मंत्रियों ने १६ वक्तव्य दिए।
जहां तक गैर सरकारी सदस्यों के कार्य का संबंध है,, गैर सरकारी सदस्यों के कुल ३९ विधेयक पुर:स्थापित किए गए। एक गैर सरकारी सदस्य विधेयक तथा गैर सरकारी सदस्यों के दो संकल्पों पर चर्चा हुई और उन्हें पेश करने वाले सदस्यों द्वारा सभा की अनुमति से वापस ले लिया गया।
माननीय सदस्यों ने नियम ३७७ के अधीन ३१४ मामले उठाए। इसके अतरिक्त शून्य काल के दौरान सदस्यों ने अविलम्बनीय लोक महत्व के १७१ मामले उठाए।
इस अवसर पर मैं माननीय सदस्यों विशेष कर सदन के नेता, विपक्ष की नेता और सभी दलों के नेताओं, मुख्य सचेतकों और सचेतकों को सभा की कार्यवाही को सुचारू ढंग से पूरा करने हेतु मुझे, उपाध्यक्ष महोदय और सभापति तालिका के मेरे सहयोगियों को दिए गए सहयोग के लिए धन्यवाद देता हूं।
मैं सभा के संचालन में अमूल्य सहयोग के लिए लोक सभा सचिवालय के अधिकारियों एवं कर्मचारियों तथा अन्य सहयोगी एजेंसियों की सराहना करता हूं और उनको धन्यवाद देता हूं। मैं मीडिया का भी उनके सहयोग के लिए धन्यवाद करता हूं।
अपनी बात समाप्त करने से पहले मैं इस अवसर पर एक बार फिर इस सभा के सभी माननीय सदस्यों का धन्यवाद करना चाहूंगा कि उन्होंने विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के अध्यक्ष के गरिमामय पद पर मुझे निर्वाचित करके मुझ में अपना विश्वास व्यक्त किया। पुन: मैं इस सभा के संचालन में उनके द्वारा दिए गए पूर्ण सहयोग के लिए भी उनके प्रति आभार व्यक्त करता हूं।
(r4/1900/skb-sh) माननीय सदस्यो, मेरा गंभीर प्रयास रहेगा कि इस सम्मानित सभा की कार्यवाही का संचालन व्यवस्थित ढंग से चले। इस प्रयोजन हेतु मेरी प्राथमिकतायें इस प्रकार होंगी:
आप सब के सहयोग से सभा में अनुशासन और शालीनता सुनिश्चित करना ; सभा में मामले उठाने और चर्चा में भाग लेने के लिये सभी माननीय सदस्यों को यथासंभव समान अवसर प्रदान करना ; और राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय महत्व के मामले सुगमतापूर्वक उठाए जाने हेतु ‘शून्यकाल’को वनियमित करना। इऩ उद्देश्यों की प्राप्ति के लिये मेरा नेताओं और माननीय सदस्यों के साथ आवधिक बैठकें करने का प्रस्ताव है।
माननीय सदस्यों, मैने देखा है कि प्रश्न काल का उपयोग उतने विवेकपूर्ण ढंग से नहीं किया जाता है जितना कि होना चाहिये और बहुत से तारांकित प्रश्न अनुत्तरित रह जाते हैं। सत्र के दौरान सभा में उत्तरित तारांकित प्रश्नों का औसत प्रतिशत, जैसा कि मैंने पहले भी कहा है, लगभग नौ प्रतिशत है जो बहुत उत्साहवर्द्धक आंकड़ा नहीं है। मैं सदस्यो से अनुरोध करूंगा कि वे भविष्य में सटीक अनुपूरक प्रश्न पूछें और प्रत्येक प्रश्न के संबंध में पूछे जाने वाले अनुपूरक प्रश्नों की संख्या को सीमीत रखें। मैं सभी माननीय सदस्यों से सहयोग का अनुरोध करता हूं।
अन्त में , मैं पूरे सदन की ओर से अपने पूर्ववर्ती सम्मानित श्री जी. एम. सी. बालयोगी, जिनका ३ मार्च, २००२ को एक दुखद दुर्घटना में निधन हो गया, के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।
माननीय सदस्य अब ‘वन्दे मातरम्’के लिये खड़े हो जाएं।
The National Song was played.
अध्यक्ष महोदय : अब सभा अनिश्चित काल के लिये स्थगित होती है।
१९०३ बजे तत्पश्चात् लोक सभा अनिश्चित काल के लिए स्थगित हुई।