State Consumer Disputes Redressal Commission
Adhishashi Abhiyanta Uppcl vs Smt. Dropadi Devi on 7 May, 2024
Cause Title/Judgement-Entry STATE CONSUMER DISPUTES REDRESSAL COMMISSION, UP C-1 Vikrant Khand 1 (Near Shaheed Path), Gomti Nagar Lucknow-226010 First Appeal No. A/81/2022 ( Date of Filing : 09 Feb 2022 ) (Arisen out of Order Dated 09/12/2021 in Case No. C/2021/41 of District Hathras) 1. Adhishashi Abhiyanta UPPCL Vidyut Vitran Khand-III Sasni Hathras ...........Appellant(s) Versus 1. Smt. Dropadi Devi W/o Sri Khagendra Singh R/o Vill. Bijahari Agra Road Sasni Dist. Hathras ...........Respondent(s) First Appeal No. A/82/2022 ( Date of Filing : 09 Feb 2022 ) (Arisen out of Order Dated 09/12/2021 in Case No. C/2021/34 of District Hathras) 1. Adhishashi Abhiyanta UPPCL Vidyut Vitran Khand-III Sasni Hathras ...........Appellant(s) Versus 1. Smt. Alka Rani W/o Sri Vinay Kumar R/o Vill. Bijahari Agra Road Sasni Dist. Hathras ...........Respondent(s) First Appeal No. A/101/2022 ( Date of Filing : 16 Feb 2022 ) (Arisen out of Order Dated 09/12/2021 in Case No. C/2021/30 of District Hathras) 1. Adhishashi Abhiyanta UPPCL dhishashi Abhiyanta UPPCL Vidyut Vitran Khand- III Sasni Hathras ...........Appellant(s) Versus 1. Smt. Sonam Devi Smt. Sonam Devi W/o Sri Ajeet Kumar R/o Village Bijahari Agra Road, Sasni District Hathras ...........Respondent(s) First Appeal No. A/102/2022 ( Date of Filing : 16 Feb 2022 ) (Arisen out of Order Dated 09/12/2021 in Case No. C/2021/35 of District Hathras) 1. Adhishashi Abhiyanta UPPCL Adhishashi Abhiyanta UPPCL Vidyut Vitran Khand- III Sasni Hathrass ...........Appellant(s) Versus 1. Smt. Himanshu Devi Smt. Himanshu Devi W/o Sri Virendra Pratap Singh R/o Village Bijahari Agra Road, Sasni District Hathras ...........Respondent(s) First Appeal No. A/103/2022 ( Date of Filing : 16 Feb 2022 ) (Arisen out of Order Dated 09/12/2021 in Case No. C/2021/31 of District Hathras) 1. Adhishashi Abhiyanta UPPCL Adhishashi Abhiyanta UPPCL Vidyut Vitran Khand- III Sasni Hathrass ...........Appellant(s) Versus 1. Smt. Malti Devi Smt. Malti Devi W/o Sri Mukesh Kumar R/o Village Bijahari Agra Road, Sasni District Hathras ...........Respondent(s) First Appeal No. A/104/2022 ( Date of Filing : 16 Feb 2022 ) (Arisen out of Order Dated 09/12/2022 in Case No. C/2021/32 of District Hathras) 1. Adhishashi Abhiyanta UPPCL dhishashi Abhiyanta UPPCL Vidyut Vitran Khand- III Sasni Hathras ...........Appellant(s) Versus 1. Deepak Jain Deepak Jain S/o Sri Ram Babu Jain R/o Village Bijahari Agra Road, Sasni District Hathras ...........Respondent(s) First Appeal No. A/105/2022 ( Date of Filing : 16 Feb 2022 ) (Arisen out of Order Dated 09/12/2021 in Case No. C/2021/33 of District Hathras) 1. Adhishashi Abhiyanta UPPCL Adhishashi Abhiyanta UPPCL Vidyut Vitran Khand- III Sasni Hathrass ...........Appellant(s) Versus 1. Smt. Kamlesh Upadhyaya Smt.Kamlesh Upadhyaya W/o Sri Sushil Upadhyaya R/o Village Bijahari Agra Road, Sasni District Hathras ...........Respondent(s) BEFORE: HON'BLE MR. JUSTICE ASHOK KUMAR PRESIDENT PRESENT: Dated : 07 May 2024 Final Order / Judgement
राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, उ0प्र0, लखनऊ।
(सुरक्षित) अपील संख्या:-81/2022 1- अधिशासी अभियंता/निर्धारित प्राधिकारी, यू0पी0पी0सी0एल0, विद्युत वितरण खण्ड-।।।, सासनी, हाथरस।
2- यू0पी0 खण्ड अधिकारी, यू0पी0पी0सी0एल0, विद्युत वितरण खण्ड-।।।, सासनी, हाथरस।
बनाम श्रीमती द्रोपदी देवी पत्नी श्री खगेन्द्र सिंह, निवासी ग्राम बिजाहरी, आगरा रोड, सासनी, जिला हाथरस।
समक्ष :-
मा0 न्यायमूर्ति श्री अशोक कुमार, अध्यक्ष अपीलार्थीगण के अधिवक्ता : श्री दीपक मेहरोत्रा प्रत्यर्थी के अधिवक्ता : कोई नहीं।
दिनांक :-15.5.2024 मा0 न्यायमूर्ति श्री अशोक कुमार , अध्यक्ष द्वारा उदघोषित निर्णय प्रस्तुत अपील, अपीलार्थी/ विद्युत विभाग की ओर से इस आयोग के सम्मुख धारा-41 उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के अन्तर्गत जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, हाथरस द्वारा परिवाद सं0-41/2021 में पारित निर्णय/आदेश दिनांक 09.12.2021 के विरूद्ध योजित की गई है।
संक्षेप में वाद के तथ्य इस प्रकार है कि प्रत्यर्थी/परिवादिनी द्वारा दिनांक 07.4.2011 को गाटा सं. 263/1 स्थित ग्राम बिजहारी, तहसील सासनी, जिला हाथरस में से 127.180 वर्ग मीटर का प्लॉट खरीदा था और उस पर मकान बनाकर विधिवत अपीलार्थी/विपक्षी के विभाग से विद्युत संयोजन सं0 118823 स्वीकृत कराया था। जिसका आईडी नं0 721701672134 है। यह संयोजन अपीलार्थी/विपक्षीगण के अधीनस्थ तत्कालीन अवर अभियन्ता एवं लाइनमैन द्वारा भौतिक सर्वेक्षण करने के उपरान्त ग्रामीण क्षेत्र के विद्युत सयोजन के रूप में -2- प्रदान किया गया था। प्रत्यर्थी/परिवादिनी द्वारा तभी से निरन्तर निर्विवाद रूप से विद्युत आपूर्ति का उपभोग किया जा रहा है और नियमित विद्युत बिलों का भुगतान भी जा रहा है। प्रत्यर्थी/परिवादिनी एवं अपीलार्थी/विपक्षीगण के मध्य उपभोक्ता एवं सेवा प्रदाता का सम्बन्ध विद्यमान है।
प्रत्यर्थी/परिवादिनी के अनुसार अपीलार्थी/विपक्षी द्वारा पत्र सं0 1315 दिनांकित 19.07.2021 के द्वारा सूचित किया कि प्रत्यर्थी/परिवादिनी ने तथ्यों को छुपाकर विद्युत घरेलू संयोजन स्वर्णधाम अविद्युतीकृत कालोनी आगरा रोड, सासनी, हाथरस में प्राप्त कर लिया है और चेक करने पर वह नियम विरूद्ध विद्युत का प्रयोग करते पायी गयी। यह भी सूचित किया कि पत्र सं0 85 पीपीएसडी / 2018 दिनांकित 27.3.2018 क अनुसार प्लॉट की रजिस्ट्री में वर्णित क्षेत्रफल के अनुसार 35.00 रू0 वर्गफीट के हिसाब से एक सप्ताह के अंदर खंड कार्यालय सासनी में जमा करना है।
प्रत्यर्थी/परिवादिनी के अनुसार नोटिस में वर्णित तथ्य असत्य एवं निराधार व काल्पनिक हैं। नोटिस का जवाब प्रत्यर्थी/परिवादिनी की ओर से दिनांक 29.7.2021 को दिया गया था। नोटिस दिनांक 30.7.2021 के द्वारा प्रत्यर्थी/परिवादिनी से 54,798.00 रू0 की बसूली की मांग की गयी है, जो पूर्णतः अवैध है। प्रत्यर्थी/परिवादिनी का मकान ग्राम पंचायत बिजाहरी की भूमि में स्थित है, जो टाउन एरिया सासनी (हाथरस) की सीमा के अंतर्गत नहीं आता है। इस ग्राम पंचायत की भूमि में स्थित अन्य कालोनियों के निवासियों को भी विद्युत संयोजन ग्रामीण क्षेत्र के अनुसार ही स्वीकृत किये गये हैं। दिनांक 23.7.2021 को बिना किसी विधिक अधिकार के अपीलार्थी/विपक्षीगण ने प्रत्यर्थी/परिवादिनी के विद्युत संयोजन को -3- विच्छेदित कर दिया है अत्एव क्षुब्ध होकर प्रत्यर्थी/परिवादिनी द्वारा जिला उपभोक्ता आयोग के सम्मुख परिवाद विपक्षीगण द्वारा जारी डिमाण्ड नोटिसों को निरस्त किये जाने व अन्य अनुतोष प्रदान किये जाने की प्रार्थना के साथ प्रस्तुत किया गया।
अपीलार्थी/विपक्षीगण की ओर से जिला उपभोक्ता आयोग के सम्मुख प्रतिवाद पत्र प्रस्तुत कर यह कथन किया गया है कि प्रत्यर्थी/परिवादिनी ने यह संयोजन तथ्यों को छुपाकर ग्राम बिजाहरी के पते पर प्राप्त कर लिया है। नोटिस व डिमाण्ड नोटिस देने के कथन को स्वीकार किया तथा अन्य कथनों को अस्वीकार किया। यह भी कथन किया गया कि श्री मनोज कुमार वर्मा पुत्र स्व. श्री विजय कुमार वर्मा (कालोनी विकासकर्ता, स्वर्णधाम कालोनी) द्वारा सही तथ्यों को छुपाकर सीधे भू-स्वामी से परिवादी व अन्य लोगों को प्लाट की रजिस्ट्री करायी गयी है। विकासकर्ता ने कालोनी का विद्युतीकरण नहीं कराया है। विकासकर्ता द्वारा पूर्व संयोजित संयोजन आई सं0 781708758854 स्वीकृत भार 05 किलोवाट एलएमवी 2 जो श्री विजयकुमार वर्मा पुत्र हरीशंकर के नाम स्वीकृत है, का प्रयोग श्री मनोज कुमार द्वारा किया जा रहा है।
यह भी कथन किया गया कि दिनांक 16.07.2021 को विभागीय अधिकारियों द्वारा चेक किया गया तो चैकिंग में यह पाया कि संयोजन पर स्थापित मीटर से आउट गोइंग केबिल से कुछ दूरी पर लगे पोल एवं बिल्डिंग के ऊपर लकडी का बोर्ड लगाकर जकशन बनाकर कालोनी में निर्मित लगभग 35 मकानों में लम्बी-लम्बी केबिल जोडकर कालोनी का विद्युतीकरण किये बिना विद्युत का प्रयोग किया जा रहा था। इसमें प्रत्यर्थी/परिवादिनी की भी केबिल जुड़ी हुई थी। यह कार्य विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा-126 के अंतर्गत -4- दण्डनीय अपराध है। विभाग द्वारा प्रत्यर्थी/परिवादिनी का कथित संयोजन कभी नहीं काटा गया है। बल्कि कालोनी विकासकर्ता द्वारा अनधिकृत रूप से डाली गयी केबिल में शॉर्टसर्किट हो जाने के कारण आग लगने से विद्युत आपूर्ति बाधित हो गयी है। यह कार्य कालोनी विकासकर्ता द्वारा नियम विरूद्ध किया गया है। स्वर्णधाम कालोनी आगरा रोड, सासनी, हाथरस को टाउन विद्युत आपूर्ति से विकासकर्ता द्वारा अवैध रूप जोड़ा गया था, इसलिए संशोधित बिल भेजा गया है।
विद्वान जिला उपभोक्ता आयोग द्वारा उभय पक्ष के अभिकथनों एवं उपलब्ध साक्ष्य पर विस्तार से विचार करने के उपरांत परिवाद को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए निम्न आदेश पारित किया है:-
"परिवादी का वाद विरूद्ध विपक्षीगण आंशिक रूप स्वीकार किया जाता है। विपक्षी विभाग द्वारा दिनांक 10.09.21 से पूर्व की शहरी क्षेत्र की दर से की गयी समस्त बकाया की मॉग तथा इसके लिए भेजे समस्त नोटिसों को निरस्त किया जाता है। इस तिथि (अर्थात् 10.09.21) के उपरान्त विपक्षी विद्युत विभाग परिवादी से शहरी क्षेत्र की विद्युत दर से मीटर रीडिंग के आधार पर परिवादी से अपने विद्युत देयों को प्राप्त करने का अधिकारी रहेगा।
परिवाद की प्रकृति को दृष्टिगत रखते हुए पक्षकार अपना-अपना वाद-व्यय स्वयं वहन करेंगे।'' जिला उपभोक्ता आयोग के प्रश्नगत निर्णय/आदेश से क्षुब्ध होकर अपीलार्थी/विपक्षीगण की ओर से प्रस्तुत अपील योजित की गई है।
अपीलार्थी के विद्वान अधिवक्ता द्वारा कथन किया गया कि जिला उपभोक्ता आयोग द्वारा पारित निर्णय/आदेश पूर्णत: तथ्य और विधि के विरूद्ध है।-5-
यह भी कथन किया गया कि प्रत्यर्थी द्वारा अनुचित लाभ प्राप्त करने के उद्देश्य से गलत एवं असत्य कथनों के आधार पर परिवाद प्रस्तुत किया गया है।
यह भी कथन किया गया कि जिला उपभोक्ता आयोग द्वारा पारित निर्णय/आदेश दिनांकित 09.12.2021 क्षेत्राधिकार से परे है। यह भी कथन किया गया कि जिला उपभोक्ता आयोग को बिजली विभाग को किसी भी अवधि के लिए विशेष दर/टैरिफ पर बिजली बिल वसूलने का निर्देश देने का अधिकार क्षेत्र नहीं है।
यह भी कथन किया गया कि बिजली विभाग एक सरकारी उपक्रम है, जो भारत के संविधान में वर्णित राज्य की श्रेणी/परिभाषा के अंतर्गत आता है। यह किसी भी उपभोक्ताओं से नियमों के विरुद्ध या टैरिफ दरों से परे कोई पैसा नहीं वसूल नहीं करता, इसलिए टैरिफ की दर से संबंधित शिकायत उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के दायरे से बाहर है।
यह भी कथन किया गया कि जिस कॉलोनी में शिकायतकर्ता निवास कर रही है, वह अविद्युतीकृत कॉलोनी है। इसके विद्युतीकरण का कार्य उचित प्रक्रिया का पालन करने के बाद शुरू किया गया है। विद्युतीकरण की लागत का बड़ा हिस्सा यूपीपीसीएल द्वारा वहन किया जाता है, जबकि लागत का छोटा हिस्सा विद्युतीकरण परियोजना के तहत कॉलोनी के विभिन्न उपभोक्ताओं/निवासियों से लिया जाता है। यूपीपीसीएल की इस राज्यव्यापी नीति के अनुसार, संबंधित क्षेत्र के निवासियों से भूमि क्षेत्र का 35.00 रुपये प्रति वर्ग फीट लिया जा रहा है और इसलिए अपीलार्थीगण ने इस राशि के भुगतान के लिए प्रत्यर्थी को नोटिस जारी किया है।-6-
अपीलार्थी के अधिवक्ता द्वारा न्यायालय का ध्यान अपील पत्रावली के पृष्ठ सं0-46 की ओर आकर्षित कराया गया, जिसके सम्बन्ध में कथन किया गया कि इस नोटिस/पत्र के द्वारा उपभोक्ताओं से 35 घरों में विद्युतीकरण हेतु जो खर्च आयेगा उसकी मॉग की गई है और उक्त विद्युतीकरण के संबंध में पृष्ठ सं0-41 की ओर न्यायालय का ध्यान आकर्षित कराते हुए यह कथन किया गया कि उक्त प्रपत्र में विद्युतीकरण विभाग द्वारा कैसे प्राप्त किया जावेगा, के संबंध में स्पष्ट किया गया है।
यह एक मात्र प्रासंगिक बात यह है कि प्रत्यर्थी की आपूर्ति की प्रकृति क्या है। यदि प्रत्यर्थी का घर ग्रामीण क्षेत्र में स्थित है, लेकिन शहरी अनुसूची के अनुसार शहरी फीडर के माध्यम से उसके घर तक आपूर्ति उपलब्ध है, तो उसे शहरी विद्युत आपूर्ति/शहरी अधिग्रहीत जिला उपभोक्ता आयोग द्वारा लागू दरों के अनुसार बिल दिया जाना चाहिए।
यह भी कथन किया गया कि शिकायतकर्ता का कनेक्शन स्वर्णधाम कॉलोनी में स्थित है, जो कि शहरी क्षेत्र अर्थात आगरा रोड से सटा हुआ है और उसे शहरी फीडर से भी आपूर्ति मिल रही है और पूरे क्षेत्र में शहरी आपूर्ति प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है जिसका प्रत्यर्थी द्वारा भी आनंद लिया जा रहा है अत: प्रत्यर्थी शहरी टैरिफ पर बिजली बिलों के भुगतान हेतु उत्तरदायी है।
यह भी कथन किया गया कि विद्वान जिला आयोग द्वारा दिनांक 10.9.2021 से पूर्व की सम्पूर्ण अवधि के लिए शहरी टैरिफ की दर से बिलों के भुगतान से प्रत्यर्थी को छूट देने में गंभीर विधिक त्रुटि की है तथा ऐसा करने के लिए जिला उपभोक्ता आयोग द्वारा कोई ठोस कारण नहीं दर्शाया गया है।-7-
यह भी कथन किया गया कि शिकायतकर्ता द्वारा ग्रामीण टैरिफ की दर से विद्युत शुल्क का भुगतान करने के उद्देश्य से ही अपना पता ग्राम बिजाहरी, सासनी, हाथरस गलत बताते हुए विद्युत कनेक्शन प्राप्त किया था जबकि उसका कनेक्शन/मकान स्वर्ण धाम कालोनी में स्थित है, जो कि ग्राम बिजाहरी की भूमि पर स्थित है और आगरा रोड, सासनी में शहरी क्षेत्र से सटा हुआ है।
यह भी कथन किया गया कि चूंकि सम्पूर्ण स्वर्णधाम कालोनी में विद्युतीकरण नहीं हुआ था, इसलिए कनेक्शन स्वीकृत होने के पश्चात् प्रत्यर्थी ने अपने घर से कालोनी के विकासकर्ता के 5 के.वी. कनेक्शन तक 300-400 मीटर लम्बी केबल बिछाकर विद्युत का उपभोग आरम्भ कर दिया। यह कृत्य अपीलार्थीगण के कुछ कर्मचारियों की सहायता व मिलीभगत व सॉठगॉठ से हो सकता है।
यह भी कथन किया गया कि चूंकि कॉलोनी के डेवलपर ने शहरी सासनी फीडर से 05 केवी कनेक्शन प्राप्त कर लिया था, इसलिए उसने प्रत्यर्थी सहित कॉलोनी के निवासियों को 300-400 मीटर की अवैध केबल बिछाकर इस 05 केवी कनेक्शन से अपना कनेक्शन जोड़ने की अनुमति दे दी, जो कि अनुचित है।
यह भी कथन किया गया कि मौके पर मीटर की रीडिंग चेक की, जिसमें 75942 केडब्लूएच एवं 77204 केडब्लूएच मीटर रीडिंग अंकित की गई और उक्त के सम्बन्ध में राजस्व निर्धारण रू0 30,78,935.00 का विद्युत प्रयोगकर्ता श्री विजय कुमार वर्मा पुत्र श्री हरिशंकर वर्मा के विरूद्ध जारी किया गया।
यह भी कथन किया गया कि दिनांक 23.7.2021 को अचानक शॉर्ट सर्किट के कारण बिछायी गई केबिल फट गई, जिससे आपूर्ति बाधित हो गई एवं तत्पश्चात दिनांक 23.7.2021 को आपूर्ति बंद -8- होने के बाद परिवादी द्वारा जिला उपभोक्ता आयोग के समक्ष मामला दायर कर बकाये भुगतान के लिए प्राप्त नोटिस को चुनौती दी है।
यह भी कथन किया गया कि शहरी अनुसूची/शहरी फीडर के अनुसार आपूर्ति की प्रकृति दिनांक 10.9.2021 से पहले समान थी और दिनांक 10.9.2021 के बाद भी समान थी इसलिए बिजली शुल्क दिनांक 10.9.2021 से पहले और 10.9.2021 के बाद भी समान होनी चाहिए।
अपीलार्थी के विद्वान अधिवक्ता द्वारा अपील को स्वीकार कर जिला उपभोक्ता आयोग द्वारा पारित निर्णय/आदेश को अपास्त किये जाने की प्रार्थना की गई।
मेरे द्वारा अपीलार्थी के विद्वान अधिवक्ता श्री दीपक मेहरोत्रा को विस्तार पूर्वक सुना गया तथा प्रश्नगत निर्णय/आदेश व पत्रावली पर उपलब्ध समस्त प्रपत्रों का अवलोकन किया गया। प्रत्यर्थी की ओर से कोई उपस्थित नहीं है।
प्रस्तुत मामले में यह तथ्य उल्लेखनीय है कि विद्युत विभाग के अवर अभियन्ता व लाइनमैन द्वारा मौके का भौतिक सर्वेक्षण करने के उपरान्त ही ग्रामीण क्षेत्र का विद्युत संयोजन प्रत्यर्थी को दिया गया होगा एवं प्रत्यर्थी का विद्युत संयोजन स्वर्णधाम कालोनी आगरा रोड, हाथरस का भाग नहीं है वह टाउन एरिया की सीमा में नहीं आता है और इस ग्राम पंचायत की भूमि में स्थित अन्य कालोनियों के निवासियों को भी विद्युत संयोजन ग्रामीण क्षेत्र के अनुसार ही स्वीकृत किये गये है, इसलिए प्रत्यर्थी, अपीलार्थीगण द्वारा डिमाण्ड नोटिस के माध्यम से मांगी गयी धनराशि रू0 54,798.00 देने के लिए बाध्य नहीं है तथा उपरोक्त धनराशि की मॉग अवैध रूप से -9- प्रत्यर्थी से की जा रही थी। अत्एव क्षुब्ध होकर परिवाद प्रस्तुत किया गया है।
प्रस्तुत प्रकरण में यह तथ्य स्पष्ट है कि स्वर्णधाम कालोनी के विकासकर्ता श्री मनोज कुमार के ट्रांसफार्मर से ही अवैध रूप से केबिल डालकर प्रत्यर्थी तथा अन्य को विद्युत की आपूर्ति की जा रही थी और चैकिंग करने पर उनके विरूद्ध विद्युत चोरी का अपराध पाया गया है।
यहॉ यह तथ्य भी उल्लेखनीय है कि उपरोक्त कालोनी के विकासकर्ता श्री मनोज कुमार द्वारा 05 किलोवाट का विद्युत संयोजन स्वीकृत कराकर प्रत्यर्थी सहित 35 आवासों को विद्युत सप्लाई दी जा रही थी, तो इस अवधि में उपभोग की गई विद्युत की देयता हेतु मनोज कुमार को उत्तरदायी ठहराया जाना चाहिए, न कि प्रत्यर्थी को। ऐसी स्थिति में अपीलार्थी द्वारा प्रत्यर्थी से इस अवधि की शहरी क्षेत्र की दर से विद्युत बिलों की बसूली को न्यायोचित नहीं ठहराया जा सकता है। इस कार्य के लिए मनोज कुमार को दण्डित किया जाना चाहिए। उपरोक्त उल्लिखित तथ्यों से अपीलार्थी विद्युत विभाग का यह कथन तो सिद्ध होता है कि प्रत्यर्थी अपने आवास पर शहरी क्षेत्र को दी जाने वाली विद्युत आपूर्ति का प्रयोग कर रहा है, किन्तु इसके लिए आरम्भ से ही प्रत्यर्थी उत्तरदायी नहीं है।
यह तथ्य भी उल्लेखनीय है कि प्रत्यर्थी ने विद्युत संयोजन के संबंध में सभी औपचारिकताएं पूर्ण करने के पश्चात प्राप्त किया था एवं यदि विभाग के किसी कर्मचारियों की गलती से अथवा अवैधानिक कत्य से उसे ग्रामीण क्षेत्र के अनुसार विद्युत देय के लिए संयोजन जारी किया गया है, तब भी प्रत्यर्थी द्वारा लम्बे समय तक अपीलार्थी की मांग के अनुरूप विद्युत देयों का भुगतान किया गया है -10- तब उस स्थिति में सम्पूर्ण अवधि के लिए प्रत्यर्थी को दोषी ठहराया जाना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है।
सम्पूर्ण तथ्य एवं परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए मेरे विचार से प्रत्यर्थी को दिनांक 10.09.2021 (जिस दिन आयोग के आदेश के बाद उसका संयोजन पुनः संयोजित हुआ है) से पूर्व शहरी क्षेत्र के अनुसार विद्युत देय की बसूली किया जाना न्यायसंगत नहीं ठहराया जा सकता है। परन्तु दिनांक 10.9.2021 के पश्चात प्रत्यर्थी शहरी क्षेत्र के अनुसार विद्युत देयों के भुगतान के लिए उत्तरदायी है। यदि विद्युत विभाग को कोई आर्थिक हानि पहुंची है तो वे उसकी भरपाई अपने विभाग के दोषी विभागीय कर्मियों से करने के लिए स्वतंत्र है।
दौरान बहस प्रस्तुत प्रकरण से सम्बन्धित कुछ तथ्यों पर अपीलार्थी के विद्वान अधिवक्ता को सुनने के उपरांत न्यायालय द्वारा यह पाया गया कि अपीलार्थी विद्युत विभाग के अवर अभियंता श्री हरी सिंह एवं श्री देवकी नन्दन द्वारा योजना के विकासकर्ता/बिल्डर श्री विजय कुमार वर्मा के साथ प्रथम दृष्टया सांठ-गॉठ व मिलीभगत कर अवैध रूप से विकासकर्ता/बिल्डर द्वारा विकसित "स्वर्णधाम कालोनी" के लगभग 35 आवासियों के भवनों में अवैध रूप से लम्बी-लम्बी केबिल का प्रयोग कर विद्युत सप्लाई प्राप्त करायी गई जबकि विकासकर्ता/बिल्डर द्वारा मात्र 05 किलोवाट विद्युत संयोजन हेतु विभाग से अनुमति प्राप्त की गई थी।
अपीलार्थी बिजली विभाग के अधिकारीगण/कर्मचारीगण की दूषित मानसिकता व कार्य प्रणाली के सम्बन्ध में ऊपर उल्लिखित विवरण स्वमेव बहुत कुछ उल्लेख करता है। वर्तमान प्रकरण में जो विद्युत विभाग को क्षति का अनुमान अपील की बहस दौरान -11- अपीलार्थी के विद्वान अधिवक्ता के कथनानुसार हुआ है उसकी अनुमानित लागत लगभग 35,00,000.00 रूपये (पैतीस लाख रू0) पायी जाती है।
प्रथम दृष्टया अपीलार्थी विद्युत विभाग के अधिकारीगण/कर्मचारीगण की अवैधानिक दोषपूर्ण कार्य प्रणाली एवं क्रिया-कलाप से यह परिलक्षित होता है कि अपीलार्थी विद्युत विभाग के अधिकारीगण/कर्मचारीगण की बिना सहमति अथवा स्वीकृति के भारी मात्रा में विद्युत उपभोग असम्भव था जबकि प्रश्नगत प्रकरण में निर्विवादित रूप से विद्युत का अविधिक/अवैधानिक उपयोग विकासकर्ता/बिल्डर श्री विजय कुमार वर्मा व अपीलार्थी विद्युत विभाग के अधिकारीगण/कर्मचारीगण की मिलीभगत से स्पष्ट रूप से जागृत होता है।
तद्नुसार यह न्यायालय इस निर्णय/आदेश की एक प्रति द्वारा अपीलार्थी के अधिवक्ता एवं अपीलार्थी सं0-1, अधिशासी अभियंता/निर्धारित प्राधिकारी, यू0पी0पी0सी0एल0, विद्युत वितरण खण्ड-।।।, सासनी, हाथरस के माध्यम से, प्रबन्ध निदेशक, उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशनल लिमिटेड लखनऊ को निर्णय की तिथि से 02 सप्ताह की अवधि में प्रेषित/प्राप्त कराये जाने हेतु आदेशित करती है। तद्नुसार विधिनुसार कार्यवाही हेतु समुचित प्रकरण को दृष्टिगत रखते हुए प्रबन्ध निदेशक, उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन लिमिटेड, लखनऊ द्वारा विधिक कार्यवाही अपेक्षित है।
यहॉ यह तथ्य भी अपीलार्थी की ओर से स्पष्ट नहीं किया जा सका कि विद्युत संयोजन किस तिथि को स्थापित किया गया था। मकान/रहायशी भवन एक अचल सम्पत्ति है और अचल सम्पत्ति पर विद्युत आपूर्ति तब तक स्थापित नहीं की जा सकती जब तक कि -12- विद्युत विभाग के नामित/अधिकृत कर्मचारीगण/अधिकारीगण द्वारा उसे स्थापित न किया जावे, परन्तु इस अपील में विद्युत विभाग के मीटर रीडर इत्यदि से मिलीभगत व सॉठगॉठ करके, विभाग को न सिर्फ राजस्व की भारी क्षति पहुंचाई गई है वरन जनता की बहुमूल्य धनराशि का दुरूपयोग भी किया गया है। जिससे विभाग की छवि धूमिल हुई है।
मेरे द्वारा विद्वान जिला उपभोक्ता आयोग द्वारा पारित प्रश्नगत निर्णय/आदेश एवं पत्रावली पर उपलब्ध समस्त अभिलेखों के परिशीलनोंपरांत यह पाया गया कि विद्वान जिला उपभोक्ता आयोग द्वारा अपने प्रश्नगत निर्णय में जो निष्कर्ष अंकित किया गया है वह सम्पूर्ण साक्ष्य की विवेचना के उपरांत अंकित किया गया है जिसमें किसी प्रकार के हस्तक्षेप की आवश्यकता अपीलीय स्तर पर किया जाना उचित प्रतीत नहीं होता है, तद्नुसार प्रस्तुत अपील निरस्त की जाती है।
अंतरिम आदेश यदि कोई पारित हो, तो उसे समाप्त किया जाता है।
प्रस्तुत अपील को योजित करते समय यदि कोई धनराशि अपीलार्थी द्वारा जमा की गयी हो, तो उक्त जमा धनराशि मय अर्जित ब्याज सहित सम्बन्धित जिला उपभोक्ता आयोग को यथाशीघ्र विधि के अनुसार निस्तारण हेतु प्रेषित की जाए।
आशुलिपिक/वैयक्तिक सहायक से अपेक्षा की जाती है कि वह इस निर्णय/आदेश को आयोग की वेबसाइट पर नियमानुसार यथाशीघ्र अपलोड कर दें।
(न्यायमूर्ति अशोक कुमार) अध्यक्ष हरीश सिंह, वैयक्तिक सहायक ग्रेड-2.,कोर्ट नं0-1 [HON'BLE MR. JUSTICE ASHOK KUMAR] PRESIDENT