Lok Sabha Debates
Regarding Shared Parenting Law In India. on 19 March, 2021
Seventeenth Loksabha > Title: Regarding shared parenting law in India.
श्री अनुभव मोहंती (केन्द्रपाड़ा): सभापति महोदय, बदकिस्मती से मुझे अब तक पिता बनने का अवसर नहीं मिला है, पर मैं आज जिस गंभीर विषय पर बात करने जा रहा हूं वह हमारे देश के बच्चों के बारे में है, इसलिए मैं आपसे हाथ जोड़ कर विनती करता हूं कि मुझे बोलने के लिए थोड़ा ज्यादा वक्त दें । यह बहुत गहरा और गंभीर विषय है, जिसे हम पैरेंटल एलीयनेशन कहते हैं ।
सर, देश में डिवोर्स के केसेज जितनी तादाद में बढ़ते जा रहे हैं, उतनी ही तादाद में चाइल्ड कस्टडी की केसेज भी बढ़ते जा रही हैं । हमारे देश में 408 से ज्यादा कोर्ट्स हैं, जिनमें ये केसेज लगातार चल रही हैं और आज तक हम किसी भी सही नतीजा पर नहीं पहुंच पाए हैं । पिछले साल माननीय हाई कोर्ट, कर्नाटक ने एक अच्छी रिपोर्ट दी थी, जिसमें उन्होंने कहा था कि shared parenting is good for children’s future. पर अभी तक देश की किसी भी कोर्ट ने इस पर अमल नहीं किया है । माननीय सुप्रीम कोर्ट ने भी इसके ऊपर दो-दो जजमेंट्स दिए है । एक डिवीजन बेंच ने और एक थ्री बेंच ने जजमेंट दिया है, जिसमें जस्टिस डी.वाई चन्द्रचूड़ जी थे । जब 22 मई, 2015 में लॉ मिनिस्टर सदानंद गौड़ा जी थे, तब लॉ कमीशंस रिपोर्ट, 257 एक रिपोर्ट दी थी, for reforms in guardianship and custody of child. मैं आपको बताना चाहता हूं कि जब डिवोर्स की बात आती है, जब आपस में पति-पत्नी लड़ने लगते हैं, उस वक्त जब बच्चे की कस्टडी की बात आती है, तब कई तरह के फेक एलिगेशंस लगाए जाते हैं, जिसमें बच्चों को भी शामिल किया जाता है और उनमें से एक एलिगेशन ऐसा होता है, जिसे हम सेक्सुअल एब्यूज कहते हैं । सेक्सुअल एब्यूज एक ऐसा एलिगेशन है, जो फेक हो और उस पर जब इन्वेस्टिगेशन का ऑर्डर दिया जाता है । That order in itself is a shame. लोगों को बहुत सामाजिक दुविधाओं का सामना करना पड़ता है । बच्चे-पिता या बच्चे-मां, इन लोगों के बीच में बहुत गैप क्रिएट हो जाता है, जिंदगी भर के लिए एक स्टिग्मा रहता है, साइकोलॉजिक स्टिग्मा, सोशल स्टिग्मा, इमोशनल स्टिग्मा ।…(व्यवधान)
HON. CHAIRPERSON: What is your demand?