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Lok Sabha Debates

Discussion On The Motion Of Thanks On The President''S Address To Both Housees Of ... on 5 June, 2009

11.04 hrs.   Title: Discussion on the Motion of Thanks on the President's Address to both Housees of Parliament assembled together on o4.06.2009 moved by Dr. (Ms) Girija Vyas and seconded by Shri P.C. Chacko (Not concluded).

MADAM SPEAKER: The House will now take up Motion of Thanks on the President’s Address. Dr. Girija Vyas to move the motion.

SHRI BASUDEB ACHARIA (BANKURA): Madam,  I have given a notice for adjournment.  There was a devastating cyclone ‘Aila’ in the State of West Bengal… (Interruptions)

MADAM SPEAKER: I have looked into your notice. It does not merit to be considered as an Adjournment Motion.  So, I am disallowing it.  You can raise this issue while speaking on the Motion of Thanks on the President’s Address.

… (Interruptions)

अध्यक्ष महोदया:  आचार्य जी, इस इश्यू को हम शाम को लेंगे।

(…व्यवधान) SHRIMATI JAYAPRADA (RAMPUR): Madam, please help us… (Interruptions)

SHRI BASUDEB ACHARIA : Madam, the magnitude of the cyclone is such… (Interruptions)

MADAM SPEAKER: Mr. Acharia, I will allow you in the evening.

डॉ. गिरिजा व्यास (चित्तौड़गढ़): अध्यक्ष महोदया, मैं प्रस्ताव पेश करती हूं:-

            “कि राष्ट्रपति की सेवा में निम्नलिखित शब्दों में समावेदन प्रस्तुत किया जाए:
            ‘कि इस सत्र में समवेत लोक सभा के सदस्य राष्ट्रपति के उस अभिभाषण के लिए, जो उन्होने 4      जून, 2009 को एकसाथ समवेत संसद की दोनों सभाओं के समक्ष देने की कृपा की है, उनके            अत्यंत आभारी हैं’।”               माननीय अध्यक्ष महोदया, मैं आपका स्वागत करना चाहती हूं। एक नयी दिशा, एक नयी दशा, एक नयी बयार, एक नया प्रयोग, एक नयी परम्परा की पुरौधा बनने वाली पहली महिला, हमारी लोक सभा की अध्यक्ष का मैं सभी की तरफ से स्वागत करना चाहती हूं।[MSOffice1]                महोदया, हम लोग फिर चुनाव के बाद यहां इकट्ठा हुए हैं और राष्ट्रपति जी ने कृपा करके दोनों सदनों के बीच अपने मंतव्य और अपनी सरकार के मंतव्य को रखा है। उनका धन्यवाद ज्ञापित करने के लिए हम यहां आए हैं। इससे पहले कि मैं कुछ बोलूं, मैं सदन के समक्ष एक शेर रखना चाहती हूं:
            वक्त की राह में हमने जलाएं हैं जो चिराग, उन उजालों में कई दौर गुजर जाएंगे।
एक नहीं कई दौर - और इसका साक्षी है कि यूपीए सरकार, जिसके ऐसे कार्यों के द्वारा जनता ने उन्हे फिर चुनकर भेजा है। ऐसी परिवर्तन की बयार लेकर आई यूपीए की सरकार कि फिर जनता ने उन्हें चुना है। अगले पांच वर्ष के लिए ही नहीं, बल्कि जैसा मैंने पहले कहा, उन कार्यों के प्रकाश में आने वाले कई वषों तक कांग्रेस-लेड यूपीए की सरकार इस देश की सेवा करती रहेगी।  मैं 15वीं लोक सभा में कांग्रेस-लेड यूपीए की सरकार को बधाई देती हूं। मैं सोचती हूं कि यह बधाई मैं पहले किसको दूं, माननीय प्रधानमंत्री श्री मनमोहन सिंह जी को, जिनके कुशल नेतृत्व में पांच सालों तक आम आदमी की तस्वीर और आम आदमी के प्रत्यय को लेकर विकास के कार्यों की ऐसी गंगा बहाई गई या श्रीमती सोनिया गांधी जी, को जिन्होंने संवेदना के साथ आम आदमी को सहारा दिया या राहुल गांधी जी को धन्यवाद दूं, जिन्होंने युवाओं को एक नई दिशा दी या कार्यकर्ताओं को, जिन्होंने असीम उत्साह के साथ अपनी इस पार्टी के लिए कार्य किया जिसने केवल बलिदान सीखा है और बलिदान के साथ आगे बढ़ना चाहती है या फिर मैं सबसे पहले उस जनता-जनार्दन को धन्यवाद दूं जो परिवर्तन की बयार को समझते हैं, जो कांग्रेस की अस्मिता को समझते हैं, जो प्रजातंत्र के अर्थ को समझते हैं। सबसे बड़ी बात, सबसे परिपक्व लोकतंत्र अगर कहीं का है, जिसे बार-बार कहा जाता है कि यह आधे पढ़े-लिखे या अनपढ़ लोगों का प्रजातंत्र है, वह परिदृश्य हमने बार-बार देखा है। यह वही देश है जो इतना साहस कर सकता है कि जिन इंदिरा जी ने इस देश को बनाने में अपना योगदान दिया, प्रजातंत्र के इस मान ने उनको हराया, लेकिन 19 महीने बाद ही केवल कांग्रेस में, इंदिरा जी में विश्वास करके इस देश, इस जनता ने उनको पुनः स्थापित किया, वर्षों के लिए, ताकि यह देश वापस समाजवाद और लोकतंत्र की रक्षा करते हुए आम आदमी और आम गरीब की सेवा में लग सके।
            महोदया, यह इलेक्शन भारतीय जनता पार्टी के सो-कॉल्ड उसूलों को करारा जवाब था। मैं यहां पर सो-कॉल्ड शब्द का प्रयोग करना उचित समझती हूँ, जिनमें उन्होंने पिछली बार "इंडिया शाइनिंग " का नारा देकर लोगों को भ्रमित करने की कोशिश की और इस बार प्राइम मिनिस्टर इन वेटिंग के नाम पर लोगों को भ्रमित करने की कोशिश की, जनता को भ्रमित किया। कांग्रेस और यूपीए के हर कार्य को भरमाने के लिए उनके पास जो एक छिपाया हुआ या छद्म मुद्दा रहता है, जिसे वह हर इलेक्शन के समय अपने पिटारे को खोलकर सामने लेकर आते हैं, वह मुद्दा है श्रीराम जन्मभूमि या धर्म का मुद्दा, लेकिन इस बार इस बात को लेकर उन्होंने अति की। एक व्यक्ति जो इस सदन के सदस्य नहीं हैं, उनके बारे में कुछ नहीं कहना चाहती हूं, मैं सदन की गरिमा को बनाए रखना चाहती हूं और एक व्यक्ति जो इस सदन के सदस्य हैं, लेकिन इस समय सदन में उपस्थित नहीं हैं, मैं उनके बारे में भी ज्यादा नहीं कहना चाहती हूं, लेकिन जिन शब्दों का प्रयोग गुजरात से उठकर आया और जिन शब्दों का एक युवा साथी ने उत्तर प्रदेश में किया, मैं सोचती हूं कि गंभीरता के साथ इस सदन को सोचना चाहिए कि आज हम किस दशा और किस दिशा में कुछ लोगों के कारण जा रहे हैं।  यही वजह रही कि जनता-जनार्दन ने फिर से एनडीए की सरकार को भारतीय जनता पार्टी के कारनामों के कारण, या फिर मैं कहूं कि पूरी तरह से एनडीए की सरकार को नकारा है, करारा जवाब दिया है।
            यहां पर आदरणीया राष्ट्रपति जी का मंतव्य पहले स्तर पर देश की सेकुलरिज्म और देश की आंतरिक सुरक्षा को बनाए रखने का है। उन्होंने जो दस प्वाइंट्स दिए हैं, मैं सोचती हूं कि आने वाले समय के हिसाब से उन सभी को परख कर दिया है। मैं सुषमा जी के वक्तव्य को पढ़ रही थी। उसे पढ़कर अच्छा भी लगा क्योंकि भारतीय जनता पार्टी के पास और कुछ नहीं है। इसमें उन्होंने कहा है कि जो हमने किया है, उसी को एजेंडा मानकर राष्ट्रपति जी ने अपना अभिभाषण दिया है। [R2]  लेकिन मैं यह निवेदन करना चाहती हूं कि यह कांग्रेस का वर्षों का, सदियों का, जब से हम लोगों ने यहां पर आकर देश की सेवा की है, जब से हमने कुर्बानियां देकर आजादी लाने का प्रयास किया है, तब से आम आदमी हमारे जेहन में है। आम आदमी के साथ-साथ देश की उन्नति भी हमारे जेहन में है। इसलिए हम क्या एजेंडा चुराएंगे। हमारे ही कुछ एजेंडे को आपने चुराया था, लेकिन अफसोस की बात है कि उस एजेंडे की आप आपूर्ति नहीं कर पाए, केवल 'इंडिया शाइनिंग' के नारे के साथ ही आपने अपने काम की इतिश्री कर दी। मैं सोचती हूं कि वह इतिश्री हमेशा के लिए हो गई है। इस देश ने बता दिया कि बहुत दिनों तक साप्रदायिक ताकतें मुंह नहीं उठा सकेंगी, क्योंकि यह देश सबका देश है।
            आज जब आप इस चेयर पर बैठी हैं, तो मुझे याद आता है कि पूना में कांग्रेस के अधिवेशन के तुंत बाद जब पत्रकारों ने गांधी जी से पूछा था कि आजादी का क्या मायना होगा, तो गांधी जी ने कहा था कि आजादी का अर्थ होगा कि पंक्ति में खड़े सब व्यक्तियों को एक जैसा अधिकार मिले। हम धर्म के नाम पर, जाति के नाम पर, सप्रदाय के नाम पर या लिंग के नाम पर विभेद नहीं करेंगे। महिलाएं तो बहुत पीछे थीं। लेकिन आज हमारे देश में राष्ट्रपति के पद पर एक महिला आसीन हैं, वह गांधी जी के सपनों के कारण ही बैठी हैं। इसलिए मैं यूपीए सरकार को भी धन्यवाद देना चाहती हूं कि अनेक ऐसे फैसले उसने किए हैं, जिनका जिक्र भले ही अभी राष्ट्रपति जी के अभिभाषण में न हो, लेकिन उन फैसलों से हमारा हौसला बढ़ा है कि हम कहां तक पहुंचे हैं।
            लड़ाई लड़नी है, अभी भी लोकतंत्र की लड़ाई लड़नी है और प्रजातंत्र में नीचे तक हमें लड़ाई लड़नी है। राहुल गांधी जी ने यहां से कहा था, उनके पिता जी ने वर्षों पहले जो बात कही थी, उसे दोहराया था कि यहां से जो एक रुपया जनता के कल्याण के लिए दिया जाता है, नीचे तक जाते-जाते उसमें से सिर्फ दस पैसे का ही इस्तेमाल होता है और पूरा पैसा परकोलेट नहीं हो पाता। उसे चैलेंज के रूप में यूपीए सरकार ने पिछली बार लिया था, इस बार भी लिया और फिर लेकर हम उस कमी को दूर करने का प्रयास करेंगे। लेकिन देश की धर्म निरपेक्षता का क्या होगा, गांधी जी ने फिर कहा था कि मुझे चिंता विकास की इतनी नहीं है, विकास थोड़े दिन रुक सकता है, लेकिन हम धर्म निरपेक्षता को नहीं रोक सकते, हम साप्रदायिक सद्भाव को नहीं रोक सकते। अनेक बार किए गए उनके अनशन इस बात के साक्षी हैं कि उन्होंने हमेशा हिन्दू और मुसलमानों को अपनी दो बाजुं समझा। जब उन्हें अलग होते देखा तो उस पीड़ा का दर्द हम समझ सकते हैं। हम कैसे भूल सकते हैं आजादी की उस रात को, जिस रात को एक तरफ पाकिस्तान जश्न मना रहा था और दूसरी तरफ हिन्दुस्तान जश्न मना रहा था। उस वक्त भी वे अनशन पर थे, क्योंकि उनके दो बाजू कटकर एक इधर और दूसरा उधर गिर गया था। लेकिन साप्रदायिकता का जहर फैलाने का कार्य कुछ लोगों ने, कुछ पार्टियों ने और समाज के कंटकों ने किया था, जो आज भी धर्म निरपेक्षता को तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। मैं सोचती हूं कि इस सरकार का पहला दायित्व यह है कि हम साप्रदायिक सद्भाव को बनाए रखें। इस सम्बन्ध में जो बिल आने वाला है, उसका मैं स्वागत करती हूं, जिसका जिक्र राष्ट्रपति जी के अभिभाषण में किया गया है।
            कभी-कभी लगता है कि जैसे कुछ लोगों ने हिन्दुत्व को परिभाषित करने का फैसला कर लिया है या उन लोगों ने डेजिग्नेट कर लिया है कि हम हिन्दुत्व को परिभाषित करेंगे। मैं इस बात से इनकार करती हूं कि यदि उन लोगों की हिन्दुत्व की परिभाषा मान ली गई तो हमारा देश जो सदियों से चलता रहा है, जैसा अलामा इकबाल ने कहा था - कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी- उसे झुठला दिया जाएगा। इस देश में हमारा धर्म, हमारी संस्कृति इसलिए कायम रही, क्योंकि लोग चलते रहे, हम कूप मंडूक नहीं रहे, हम कुएं के पानी की तरह स्थिर नहीं रहे, बल्कि अनवरत रूप से चले। इसलिए देश काल के अनुरूप धर्म की परिभाषा परिवर्तित हुई है। यहां पर तो आपात धर्म जैसे धर्म की भी व्याख्या की गई। फिर आज वक्त है, जिसका जिक्र राष्ट्रपति के अभिभाषण में सरकार की नई दशा और दिशा के रूप में किया गया है।
            मैं सदन के सदस्यों से निवेदन करना चाहती हूं कि हमारी तरफ आज विश्व भर की निगाहें लगी हैं कि हम कुछ करके दिखाएं। इस बारे में कुछ प्रयास पिछले कुछ वर्षों से किए भी गए हैं। हम लोग इतना संकुचित हो गए हैं कि यदि अपने आपको खुरचें तो उसके नीचे से हम लोग हिन्दू, मुसलमान, सिख-ईसाई निकलेंगे। लेकिन हमें अपने उत्तरदायित्व को समझना चाहिए। इसलिए मैंने कहा कि धर्म की परिभाषा को फिर से हमें देखना होगा और राष्ट्र धर्म के रूप में हमें देखना होगा। मुझे वाल्मीकि की रामायण की एक बात याद आती है, जब लक्ष्मण ने राम से पूछा था कि आपने सीता को वनवास क्यों दिया, यह अलग बात है कि इस तथ्य से, एक महिला होने के नाते शायद मैं पूरी तरह से गले के नीचे नहीं उतार पाऊं, लेकिन उस वक्त राम ने प्रशासक के रूप में कहा था कि मेरे लिए राष्ट्र धर्म ही धर्म है। उनकी इस बात को हम लोग एप्रिशिएट कर सकते हैं। सदियों पहले राम द्वारा राष्ट्र धर्म को धर्म के रूप में परिभाषित करने की कोशिश वाल्मीकि द्वारा की गई तो मैं सोचती हूं कि आज इस बात की जरूरत क्यों नहीं है।[R3]                           इसलिए इस वक्त हम इसे बदलने की कोशिश करें। मुझे मालूम है और आप सब ने देखा कि चुनाव के दौरान हिंदुत्व के नाम पर किस प्रकार की बयानबाजी हुई, लेकिन सच्चा हिंदुस्तानी वह है जो किसी मंदिर के सामने से गुजरे तो प्रणाम करे, मस्जिद के सामने से गुजरे तो उसका सिर सज़दे में अपने आप झुक जाए, गुरुद्वारे के शबद की आवाज उसे झुकने पर मजबूर कर दे, गिरजाघर के घंटे की आवाज उसे नमन् करने की प्रेरणा दे। यह इशारा आने वाले एक्ट की दिशा की ओर संकेत कर रहा है, तथा आने वाला समय बहुत दिनों तक इन साप्रदायिक ताकतों और वक्तव्यों पर चलने वाला नहीं है। इस चुनाव ने हमें दिखा दिया कि लोग विकास चाहते हैं, समरसता चाहते हैं, एकता चाहते हैं। पांचों उंगलियां अलग-अलग तरह की हैं लेकिन इन पांचों उंगलियों को हम एकसाथ रख सकें, इस बात का दायित्व हम लोगों ने हमेशा लिया है और इसी ओर हमने हमेशा कोशिश की है। इसलिए अलामा इकबाल की बात सच है कि “ कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी” ।    
            महोदया, यह चुनाव कांग्रेस ने बहुत सी जगह अकेले लड़ा। अकेले लड़ने का अर्थ और मायना भी था और एक बात थी कि अपने पैदा किये गये सूरज की दुआएं मांगो, धूप मांगों और कईयों पर हमने भरोसा किया। हम अपने पैरों पर खड़े हुए और चाहे बात किसी भी वजह से टूटी हो, कुछ लोग गये भी, लेकिन उसके बावजूद कांग्रेस अपने पैरों पर खड़ी हुई। उत्तर प्रदेश और अन्य स्थानों का निर्णय इस बात का संकेत है कि लोगों को कांग्रेस पर विश्वास है और यह विश्वास कल भी कायम रहेगा।
            इतिहास का नया अध्याय राष्ट्रपति महोदया के अभिभाषण के साथ शुरू होता है। मुझे इस बात में कोई संदेह नहीं कि हम लोग जिस दौर से गुजर रहे हैं उसमें आंतरिक सुरक्षा बहुत बड़ी चुनौती के रूप में है।  मैंने माननीय आडवाणी जी के भाषण के कुछ अंशों को पढ़ा और निश्चित तौर पर मैं उन अंशों के साथ अपने आपको संलिप्त करती हूं। लेकिन मैं एक बात निवेदन करना चाहती हूं कि लोगों का विश्वास जो सैकूलरिज्म और सुरक्षा की तरफ है, जिसके लिए लोगों ने कांग्रेस को वोट दिया तथा लोगों का विश्वास इस बात को लेकर भी है कि समवेत रूप में हम लोगों ने प्रयास किये तो हम लोग अपनी आंतरिक सुरक्षा को बचाकर रखेंगे। कांग्रेस वह कांग्रेस है जो एकता को बनाकर, एकता को संजोकर रखती है।
I quote:
“The Indian National Congress says  what it means and  means what it says. The Indian National Congress promises what it can do and will do what it promises. The Indian National Congress is committed to ensuring  that the Government functions in the interest of the people for whom it exists and for whom it  works. The Indian National Congress has always believed that the correct approach to governance  is to address the  daily concern of the people and solve their problems.”               एक विश्वास के साथ प्राइम-मिनिस्टर माननीय मनमोहन सिंह जी और सोनिया जी के निर्देश में  एकता के साथ आगे बढ़कर हम सैकूलरिज्म की रक्षा कर सकें। साथ ही हम लोग आंतरिक और बाह्य सुरक्षा के लिए पूरी तरह से आच्छादित रहे। मैं इतना ही कह सकती हूं कि हमारा मंतव्य केवल यह है कि लोग जब-जब त्रिशूल बांटेंगे, हम अपने उसूल बांटेंगे, वो सजाते रहें दुकान कांटों की, हम तो बस्ती में फूल बांटेंगे। इस बात का प्रयास कांग्रेस ने हमेशा ही किया है। मैं बात आंतरिक सुरक्षा की कर रही थी। इंटरनल सिक्योरिटी के प्रति जैसा राष्ट्रपति जी ने भी अपने अभिभाषण में कहा कि सरकार पूरी तरह से चौकन्नी है। एक तरफ टैरेरिस्ट मूवमेंट है, दूसरी तरफ उल्फा है, तीसरी तरफ नक्सलाइट्स हैं और ऐसे इलाकों में जहां से निकलकर आना बहुत मुश्किल हो और उसके अतिरिक्त हिंटरलैंड में स्केरी सिचुएशन है। लेकिन जीतने की ताकत यूपीए की सरकार में थी और वह ताकत अभी भी है। इसीलिए एक ऐसी मल्टी-प्राँग्ड स्ट्रेटजी तैयार की गयी है जिसमें चाहे मैगा-सिटीज की पॉलिसी हो, चाहे डैजर्ट पॉलिसी हो, चाहे कोस्टल सिक्योरिटी की पॉलिसी हो, उन पर सरकार का पूरा ध्यान गया है। [r4]    [r5]              महोदया, दूसरे स्तर पर बौर्डर फेंसिग और फ्लड लाइटिंग की पूरी व्यवस्था करके उसे रोकने का प्रयास किया गया है। 13 इन्टरमिडिएट चेकपोस्ट्स बनाए गए हैं, जो बंगलादेश, पाकिस्तान, नेपाल और म्यांमार देशों से लगी हमारी सीमा की रक्षा करेंगे। 13 इमिग्रेशन चेकपोस्ट्स लगाए गए हैं, जिन पर विशिष्ट सुरक्षा के संसाधन लगाए गए हैं। 359 बौर्डर ब्लाक्स सुनिश्चित किए हैं, जो 90 डिस्ट्रिक्ट्स और 17 राज्यों को कवर करेंगे। इनमें सबसे बड़ी बात सोशल सिक्योरिटी वहां के रिहायशी लोगों को दी है कि किस तरह से वे अपने एग्रीकल्चर, सोशल स्टेट्स, इंफ्रास्ट्रक्चर और बौर्डर की रक्षा कर सकें।
            महोदया, मैं आपके माध्यम से निवेदन करना चाहूंगी कि जब पिछले वर्ष हम असम, नागालैंड आदि के दौरे पर थे, उन इंटीरियर स्थानों पर महिलाओं के साथ आज भी जो बुरी तरह से बर्ताव किया जा रहा है, मैं सोचती हूं कि सरकार उस तरफ विशेष ध्यान देगी। मैं आपके माध्यम से सरकार से निवेदन करना चाहूंगी कि खासकर महिलाओं की सिक्योरिटी का विशेष ध्यान इन इलाकों में जरूर रखा जाए। हम सभी जानते हैं कि जब तक पुलिस फोर्स का आधुनिकीकरण नहीं होगा, तब तक इस समस्या से मुक्ति पाना मुश्किल है। इसी कारण केंद्र सरकार ने उनके लिए सुनिश्चित योजना तैयार की है। 76 डिस्ट्रिक्ट्स चुने गए हैं, जिन जगहों पर नक्सलाइट्स कार्यवाही होती है, वहां दो करोड़ रुपए प्रति माह 5 साल तक दिए जाएंगे, ताकि वे अपनी फोर्स का पूरी तरह से आधुनिकीकरण कर सकें। पैरामिलिटरी फोर्स, अगमेन्टेशन या स्टेशंस और दूसरी फोर्सिस चाहे वह आईआर हो आदि की व्यवस्था केंद्र सरकार करती है। सरकार इस बात के लिए प्रतिबद्ध है और सरकार ने इस बात को जाना और पहचाना है, जिसके लिए मैं केंद्र सरकार को धन्यवाद भी देना चाहती हूं कि जब तक राज्य सरकार और केंद्र सरकार के बीच में आपसी तालमेल नहीं होगा, तब तक समस्या का पूरी तरह से निदान नहीं हो सकता है क्योंकि कई बार यह बात सामने आती है कि केंद्र द्वारा कही गई बात के लिए राज्य सरकार कह देती है कि हमें इस बात का पता नहीं था। आपसी तालमेल और तालमेल के अलावा इंक्लूडिंग शेयरिंग आफ इंफोर्मेशन एंड इंटेलिजेंस, जो शामिल करने का प्रयास हमारी मिनिस्टरी ने किया है, उसके लिए भी मैं धन्यवाद देना चाहती हूं, लेकिन इसका प्रयोग पूरी तरह से हो, इस बात की चेष्टा हमें जरूर करनी चाहिए।
            सरकार ने एनएसजी के रीजनल हब्स को बनाने का निर्णय लिया है और चेन्नई, हैदराबाद, कोलकाता और मुम्बई में इसकी शुरूआत की। अन्य स्थानों पर भी इसकी शुरूआत होनी चाहिए।
            महोदया, अनलॉफुल एक्टिविटीज़ प्रिवेंशन एक्ट बनकर जो तैयार हुआ और जिसने काप्रिहेंसिव डेफिनीशन आफ टेरिस्ट्स और उसके साथ-साथ जहां से पैसा आता है, न्यूक्लियर आदि, उसकी व्याख्या विस्तृत रूप से की गई है, उसे रिफ्लैक्ट करने की जो कोशिश की गई है, मैं समझती हूं कि उसका बहुत बड़ा फायदा निश्चित रूप से मिला है और मिलेगा। एक बात और मैं कहना चाहती हूं कि मोडिफाइड बेल प्रोविजन की भी हम लोगों को तारीफ करनी चाहिए, क्योंकि पहले जो चीजें इसमें नहीं थीं उन्हें इसमें संजो करके रखा गया है। जब इस एक्ट के लिए हम आगे बढ़े, तो केवल आलोचना के लिए ही आलोचना न करें, यह एक्ट निश्चित तौर पर सारी गतिविधियों को कम्बैट करने के लिए कारगर साबित होगा।
            महोदया, दूसरा प्रयास नेशनल इंवेस्टीगेशन एजेंसी एक्ट, 2008 के जरिए हुआ है, उसके डायरेक्टर जनरल भी बन चुके हैं। हमें विश्वास होना चाहिए कि हम इसके लिए प्रतिबद्ध हैं। इन बातों के लिए बाइलेटरल इंटरनेशनल स्तर पर जो बात हो रही है, भारत सरकार उसके लिए भी प्रतिबद्ध है। बायलेटरल टॉक और मल्टीलेटरल टॉक जारी है। रिजनल ग्रुप्स के साथ वार्ता जारी है। सबसे बड़ी बात यूनाइटेड नेशनंस, जो टेरेरिज्म या इस तरह की एक्टिविटीज़ को कम्बेक्ट करना चाहता है, उसमें भारत पूरी तरह से उनके साथ है।
            महोदया, मैं राष्ट्रपति महोदया के अभिभाषण की संवेदना को समझने की कोशिश करती हूं, जिसमें उन्होंने कहा था कि हमारी प्रत्येक की भागीदारी इसमें होनी चाहिए, लेकिन मैं समझती हूं कि यदि हम अपने आंतरिक मन को टटोलें और प्रत्यक्षदर्शी के तौर पर देंखे, तो विदित होगा कि इन सारी एक्टिविटीज़ के पीछे बहुत से लोगों की, जो हमारे देश के भी हैं, उन लोगों की कहीं मंशा तो छिपी नहीं है। केवल पालिटिकल गेन करने के लिए तो हम उनका प्रयोग नहीं कर रहे हैं, इसलिए मैं कहती हूं कि " न इधर-उधर की तू बात कर, यह बता कि काफिला क्यों लुटा, मुझे रहजनों की फिकर नहीं, तेरी रहबरी का सवाल है।" यह एक बहुत बड़ा सवाल है, जो हम अपने आप से पूछें।[r6]   हम यह पूछें कि क्या देश को केवल वोट के लिए बांट कर रख देंगे, क्या नक्सैलाइट्स इसलिए पैदा होते रहेंगे, क्या आंतकवाद इस तरह आता रहेगा, क्या एक दूसरे पर कीचड़ उछाल कर और क्या अपनी परिभाषाओं को परिवर्तित करके, अपने सांस्कृतिक मूल्यों को भी समाप्त करने की कोशिश करेंगे? भारत की जनता चाहती है कि वह आज इससे मुक्त हो। वे ऐसी स्वतंत्रता के माहौल में सांस लें जहां कोई भय न हो। यही वायदा यूपीए की सरकार का है, जिस ओर संकेत राष्ट्रपति जी ने अपने अभिभाषण में किया है।
            महोदया, पिछली यूपीए सरकार को और आगे शुरू करने वाले कार्यक्रमों के लिए भी इस सरकार को बधाई दी जानी चाहिए। राष्ट्रपति जी ने इसका अपने अभिभाषण में जिक्र किया है। पिछली बार भी एक परिवर्तन आया था। इंडिया शाइनिंग में कुछ परिवर्तन नहीं हुआ लेकिन मैं यहां मनमोहन सिंह जी की बात को कोट करना चाहती हूं। उन्होंने कहा कि  “….. A change in the manner in which this country is run, a change in the national priority and a change in the process and focus of the Government …..”               यह परिवर्तन आम आदमी को एक माध्यम बनाने से आया। इन पांच सालों में जहां ग्रोथ रेट 7 और 8 परसेंट से नीचे कभी नहीं गिरी, जहां पर यूनिवर्सल ऐक्सेस टू क्वालिटी बेसिक एजुकेशन और हैल्थ का दायित्व रहा, जहां गेनफुल एम्पलॉयमेंट और प्रोमोटिंग इनवैस्टमेंट हां, जहां हरेक फैमिली को हंड्रेड डेज का रोजगार और मीनिमम वेजिस देने का वायदा ही नहीं किया गया बल्कि उसे कानून का रूप दिया, जहां पर एग्रीकल्चरल रूरल डेवलपमेंट और इनफ्रास्ट्रक्चर को महत्व देकर आगे विकास की ओर बढ़ने की कोशिश की गई, जहां एक्सीलरेशन, फिसकल, कनसॉलिडेशन और रिफॉर्म्स की न केवल बात की बल्कि हम उसकी तरफ आगे बढ़े, जहां एफिशिएंट फिसकल रेवोल्यूशन लाया गया, मैं सोचती हूं कि यह बहुत बड़ी देन है। मैं यूपीए सरकार को धन्यवाद देना चाहती हूं कि उसने पिछले पांच वर्षों में, तीन वर्षों तक 9 परसेंट से नीचे आर्थिक विकास दर को नहीं गिरने दिया और ऐसे कठिन समय में 7.4 परसेंट विकास दर को रखना बहुत बड़ी उपलब्धि है। लोगों के रहन-सहन को ऊंचा उठाने  की दृष्टि से काफी प्रयास किया गया और  इसलिए इस पीरियड में पर-कैपिटा इनकम 7.4 परसेंट पर-एनम की दृष्टि से बढ़ी। उससे लोगों के लिविंग स्टैडर्ड में काफी फर्क पड़ा है। यह अपने आप में बहुत बड़ी उपलब्धि है और गांधी जी व नेहरू जी के सपनों को साकार करने तथा इन्दिरा जी के गरीबी मिटाओ नारे को मूर्त रूप देने का प्रयास किया गया है। इसमें राजीव जी के सपने की भी पूर्ति होती है।
            महोदया, मैं आपसे निवेदन करना चाहती हूं कि इस पीरियड में फिसकल डेफिसिट जो 2003-04 में 4.5  था, वह कम होकर 2.7 पर आ गया और 2007-08 में जो रेवेन्यू डेफिसिट 3.6 था, वह 1.2 पर आ गया। दिशा सुनिश्चित, दशा सुनिश्चित करके विकास की गति आगे बढ़ी लेकिन अचानक-अचानक विश्व में जैसे बमबार आया हो, तूफान उठा हो, अमेरिका और यूरोपियन कंट्रीज में एक स्लो-डाउन आया, उसका निश्चित तौर पर कुप्रभाव भारत में भी पड़ा लेकिन मै सरकार को धन्यवाद देना चाहूंगी, मैं विशेष तौर पर माननीय सोनिया जी को धन्यवाद देना चाहूंगी जिन्होंने दूर दृष्टि के साथ इसे देखा और नरेगा जैसी योजना लेकर यूपीए की सरकार आई। मनमोहन जी, जो अर्थविद हैं और मैं चिदम्बरम  जी को भी धन्यवाद देने से नहीं बचना चाहती जिन्होंने एक अच्छे अर्थविद का परिचय देते हुए देश को इस स्लो डाउन से बचाया। निश्चित तौर पर यह स्लो-डाउन है। इस ओर राष्ट्रपति  जी ने इशारा किया कि विकास की गति जो पिछले पांच सालों में रही, वह कुछ दिनों के लिए ढीली हो गई। हम गरीबों के प्रति प्रतिबद्ध हैं, हम आम आदमी को रोटी देने के लिए प्रतिबद्ध हैं, हम ईमानदारी के साथ उन लोगों को रोजगार देने के लिए प्रतिबद्ध हैं, हम लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए प्रतिबद्ध हैं, हम एग्रीकल्चरल ग्रोथ को उतना बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि पिछले सालों में जिस तरह से ग्रोथ बढ़ी है, चाहे वह एक्सपोर्ट ग्रोथ हो, जो 26.4 तक पहुंची और फॉरेन ट्रेड जो 23.7 से 35.5 तक पहुंचा, वह अपने आप में उपलब्धि थी।
            महोदया, देश इस बात को जानता है और कांग्रेस पार्टी विशेष तौर पर इसे जानती है क्योंकि वह गरीबों की पार्टी है, किसानों की पार्टी है और आम आदमी की पार्टी है। सरकार  द्वारा लाख कोशिश करने के बाद हमें इस दौर से गुजरना ही है।
            इसके लिए एक करैक्ट एप्रोच की जरूरत है, एक व्यावहारिक एप्रोच की जरूरत है और इसीलिए सरकार ने जो कुछ निर्णय लिये, वे अपने आप में बहुत महत्वपूर्ण हैं। तुंत प्रभाव से जिस तरह से टैक्सेज की निर्णय लिया गया, मैं समझती हूं कि यह एक बहुत बड़ी उपलब्धि है। इसी के साथ मैं कहना चाहती हूं कि नेहरू जी का सपना जो खासकर पब्लिक सैक्टर के लिए था, उसने हमें बचाया। इंदिरा गांधी जी का सपना ओनरशिप ऑफ बैंक का जो पूरा हुआ था, उसने हमें बचाया और राजीव गांधी जी का जो प्राइवेट सैक्टर को लेकर सपना था, उसने हमें बचाया। लेकिन सबसे व्यावहारिक बात है कि नरेगा में छठे पे कमीशन ने और हम लोगों की अपनी व्यवस्थाओं ने हमें बचाया। मैं यहां एक बात का निवेदन करना चाहती हूं और एनडीए के हमारे साथियों को एक बात याद दिलाना चाहती हूं कि बार-बार इस बात को लेकर कि आर्थिक स्थिति कमज़ोर है, मैं अपने कम्युनिस्ट साथियों को भी याद दिलाना चाहती हूं जो कहते हैं कि मंदी के दौर में जैसे कुछ काम ही नहीं करें, लेकिन एनडीए की सरकार की लाख कोशिश के बावजूद भी उनकी विकास दर 5.1 प्रतिशत के ऊपर नहीं पहुंची थी जबकि तीन लगातार वर्षों तक 9 प्रतिशत से ऊपर विकास दर यूपीए की सरकार के समय में पहुंची थी जो अपने आप में एक बहुत बड़ी उपलब्धि है।
            महोदया, हमारे पास लिक्विडिटी है, हमारे पास पर्चेजिंग पॉवर है और हमारे पास विल है जो सबसे बड़ा संकल्प है क्योंकि हम संकल्पित हैं और केवल तूफान को देखकर हम डरकर भाग नहीं जाते, बल्कि तूफान के कुछ देर तक रुकने का इंतजार करके हम लोग एक नयी दिशा और एक नये संकल्प के साथ फिर आगे बढ़ने की कोशिश करते हैं। आज जिस तरह से राष्ट्रपति जी ने इशारा किया कि टैक्सटाइल और अन्य जो हमारे संसाधन हैं, उनको और आरबीआई की जो इंटरेस्ट रेट्स हैं, उनको नये तरीके से हम देखने का प्रयास करें। बहुत कठिन समय से यूपीए की सरकार गुजरी है। मैं यहां याद दिलाना चाहती हूं कि जो क्रूड ऑयल था, उसकी कीमत और जब यूपीए की सरकार आई, उस समय उसकी कीमत में कितना बड़ा अंतर था, उसके बावजूद भी हमारी सरकार ने एक तरह से महंगाई को रोककर रखा है। मैं समझती हूं कि उस महंगाई का जिक्र बार-बार करना और वह भी तब इस मंदी के दौर में जब सम्पूर्ण विश्व गुजर रहा हो, उसका जिक्र बार-बार करना हमारे साथ और इस देश के साथ अन्याय करना होगा। आज हम नये सिरे से नयी स्थिति के साथ आगे बढ़ेंगे और मुझे विश्वास है कि हमारे प्रधान मंत्री जी की दृष्टि, वित्त मंत्री जी की दृष्टि और सोनिया गांधी जी की जो संवेदनात्मक सोच है, वह निश्चित तौर पर एक नयी दिशा देगी। मैं सोनिया गांधी जी को यहां कोट करना चाहती हूं:
“To be equitable, economic growth has to be sustainable. To be sustainable, economic growth has in turn to be all-inclusive. All-inclusive is no longer the greatest good of the greatest number. It is actually Sarvodaya or the rise of all.”    इसका अर्थ है कि ग्रोथ फास्टर हो, इंक्रीजिंग हो,  इसका प्रयास निश्चित तौर पर सरकार करेगी। ऐसा जिक्र राष्ट्रपति जी ने अपने अभिभाषण में निश्चित तौर पर कर दिया।  गांव, गरीब और किसान कांग्रेस का पाथेय रहा है और पाथेय रहेगा। यूपीए की सरकार ने 300 प्रतिशत वृद्धि करके इस बात को दिखाया कि किसान को आगे बढ़ाना है। मैं केवल इस बात को यहां कहना चाहती हूं कि किसान को पूरी तरह से राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के जरिये या उनको अधिक लोन आदि देने के जरिये जिस तरह से कोशिश की गई, किसानों को जिस तरह से 65 हजार करोड़ रुपये के कर्जे से मुक्ति दिलाई गई और तीन गुना और कर्ज का जो उन पर दायित्व सौंपा गया, मिनिमम सपोर्ट प्राइस जिस तरह से बढ़ाई गई, राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के लिए 25 हजार करोड़ रुपये का जो निवेश किया गया और आगे भी जिस तरह से उसकी नयी दिशा खोजी गई है, देश के फूड सिक्योरिटी मिशन की स्थापना और इस पर एक्ट आना इस बात को दर्शाता है कि हम लोगों को भूखा नहीं सोने देंगे। मैं अपने साथियों से कहना चाहती हूं जो विशेषकर वेस्ट बंगाल से आते है कि दृष्टि सबकी एक है कि भूखा कोई नहीं सोए। हम लोग भी जानते हैं कि “भुभुक्षता किम् न करोति पापम्” और भूखे सोये हुए को कांग्रेस कैसे बर्दाश्त कर सकती है, जिस कांग्रेस का सपना आजादी के पहले से ही उन गरीब व्यक्तियों की तरफ था जिनकी तरफ कोई देखना भी नहीं चाहता था, उस दौरान चाहे किसी भी तरह की प्रोडक्शन हो, उसमें उनके प्रोक्योरमेंट को बढ़ाया गया है, फर्टिलाइजर सब्सिडी एक लाख करोड़ तक प्रोवाइड की गई है और जहां तक मेजर प्रोडक्शन का सवाल है, उसमें वृद्धि हुई है। यह इस बात का संकेत है कि अन्नदाता स्कीम चलेगी और फूड सिक्योरिटी मिशन के माध्यम से हम आगे बढ़ेंगे। [r7]      जहां व्हीट केवल 68 मिलियन टन्स था, वह बढ़कर 78 टन्स हुआ। राइस 83 टन्स से बढ़कर 96 टन्स हुआ। कॉटन 164 टन्स से बढ़कर 258 टन्स हुई । सोयाबीन  68 लाख टन्स से बढ़कर 99 लाख टन्स हुआ और आगे भी प्रोडक्शन बढ़ता जा रहा है, बफर स्टॉक हमारे सामने है।
            मुझे पता नहीं, राहुल जी सदन में मौजूद हैं या नहीं, लेकिन उन्होंने यहीं से कहा था -
 “Freedom from poverty is not a matter of charity or love; it is a right.”   इस बात को कांग्रेस पुराने जमाने से लेकर अब तक कभी नहीं भूली। सबसे बड़ी बात जो वन टाइम सैटलमैन्ट का जिक्र इसमें है, इसलिए नेशनल फूड सिक्युरिटी की तरफ बढ़ता हुआ हमारा मिशन जो अब एक्ट के रूप में सामने आयेगा, फिर पी.डी.एस. के माध्यम से बिलो पावर्टी लाइन के लोगों तक पहुंचेगा और अंत्योदय अन्न योजना के माध्यम से ए.पी.एल. कैटेगरी तक पहुंचेगा।
            अध्यक्ष महोदया, रूरल डैवलपमैन्ट आधार है और इसलिए रुरल डैवलपमैन्ट में मैं सिर्फ ‘नरेगा’ का जिक्र करना चाहूंगी। मैं इसका जिक्र करने से पहले एक बात निवेदन कर दूं कि गांवों में जिस तरह से प्रजातंत्र और यूपीए की सरकार के अर्थ पहुंचे हैं. मैं केवल तीन उदाहरण सदन के समक्ष देना चाहती हूं - प्रथम प्रधान मंत्री इन वेटिंग। मैं एक सभा में थी, बेगू के पास श्री जसवंत सिंह का पुराना इलाका है, वहां एक व्यक्ति आया। उसने कहा कि मैं अब बीजेपी में नहीं रहूंगा। क्योंकि मैं जब भी स्टेशन पर गया हूं, वेटिंग लिस्ट में मेरा नम्बर नहीं आया और यह नम्बर कभी नहीं आयेगा। मैं उनके साथ चलना चाहता हूं, जो बैठे हैं और सत्ता में रहेंगे और उसने उसी वक्त कांग्रेस को ज्वाइन किया था।
            माननीय प्रधानमंत्री जी, जब आपके लिए मांग की गई, मैं उस इलाके के थोड़ा नीचे गई, वहां पर यह था कि प्रधान मंत्री जी को आना चाहिए। वहां गांव की मांग थी कि मैडम एक काम कर देना, एटोमिक इनर्जी यहां तक पहुंचा देना, ताकि हम छोटे किसान आगे बढ़ सकें। आपकी इनर्जी का कन्सैप्ट वहां तक पहुंचा। ‘नरेगा’ का कन्सैप्ट पहुंचने तक, एक तीसरी बात मैं कहना चाहती हूं कि जिस तरह से चीनी की कीमत इस इलैक्शन के दौरान बढ़ाई गई, जिस तरह से वातावरण को दूषित करने की कोशिश कुछ लोगों के द्वारा की गई, आज मैं यहां पर निश्चित तौर पर इस बात का दोषारोपण करना चाहती हूं कि इस नरेगा ने जहां तीन करोड़ हाउसहोल्ड बैनिफिट दिये हैं, सौ दिन का रोजगार दिया है और सौ दिन के रोजगार में इस स्कीम में 3.4 करोड़ लोगों को जॉब प्रोवाइड किया है, जिसमें 49 परसैन्ट महिलाएं हैं, 30 परसैन्ट शेडय़ूल्ड कास्ट्स हैं और 25 परसैन्ट शेडय़ूल्ड ट्राइब्स के लोग हैं, जिसका टोटल एक्सपैंडीचर 41,700 करोड़ रुपये अभी तक पहुंच चुका हो, जहां 26 लाख वर्क्स चल रहे हों, जिसके कारण रिडक्शन इन माइग्रेशन हुआ हो, जो मिनिमम वेजिज अब सौ दिन तक पहुंचा हो, उसकी एक बानगी मैं यहां पेश करना चाहूंगी। भारतीय जनता पार्टी के नेतागण मुझे माफ करें, लेकिन यदि अफवाहें फैलाने की कहीं ट्रेनिंग लेनी हो, वह ट्रेनिंग आप लोगों से लेनी चाहिए। अफवाह फैलाने की दृष्टि से दो-चार बीजेपी के लोगों को हर मीटिंग में इधर-उधर बैठा दिया जाता था। आप सब लोग जानते हैं और इस बात के साक्षी हैं कि उनमें से एक उठकर कह देता था कि चीनी के भाव का क्या होगा, चीनी के भाव का क्या होगा?
            मैं एक उदाहरण देना चाहती हूं। एक महिला जो नरेगा के काम से लौटी थी, उसने अपनी टोकरी एक तरफ रखी, मुझे एक तरफ हटाया, माइक पर आई और उसने हमारी भाषा में कहा, मैं उसी भाषा का प्रयोग करके फिर से ट्रंसलेट करूंगी। उसने कहा - ऐ बाई सुन, तू कोई रोज चारों पहर, चौबीसों घंटा शक्करेच फांका लगा री है कईं, नरेगा में सौ रुपये मिल रहे हैं, थोड़ी और मेहनत से काम कर, सौ रुपये कमाई रही है, दो-चार रुपये बढ़ गया, चिंता मत कर, वह भी कम हो जायेगा। उसके कहने का अर्थ था, क्या 24 घंटे तक तुम चीनी के फंके लगाते हो, यह उसने पूछा और कहा कि मैं आधा किलो चीनी एक सप्ताह में खरीदती हूं। फिर उसने कहा कि वातावरण खराब करने की जरूरत क्या है। इस ‘नरेगा’ ने अब आपके सौ रुपये कर दिये हैं, उन सौ रुपये को कमाकर यदि दो रुपये बढ़ोतरी के दे देती है, तो उसमें क्या फर्क पड़ता है। पास खड़े हुए एक टीचर के पिता ने सिक्स्थ पे कमीशन के बारे में कहा कि हां, अब मेरा बेटा दस हजार रुपये कमाता है। यदि छोटी-मोटी महंगाई जो विश्व भर में हो रही है, उसका फर्क पड़ता है तो उससे लड़ने की ताकत भी हमें यूपीए की सरकार ने दी है। इसके लिए मैडम, मैं आपसे लेकर प्रधान मंत्री जी तक सभी  को धन्यवाद देना चाहती हूं। 
            भारत निर्माण पर चुटकियां लेते हुए अखबार के कुछ वाकये मुझे आज भी याद हैं कि अब क्या भारत निर्माण होगा[BS8] ?
            विपक्ष की तरफ से कुछ उंगलियां उठी थीं, कुछ बातें कही गई थीं, कुछ स्टेटमेंट्स आए थे, मुझे याद है, लेकिन भारत निर्माण एक नीड़ के निर्माण की तरह है। नीड़ का निर्माण हरिवंशराय बच्चन जी की कविता का अंश है। जो लोग यू.पी. से आये हैं, वे सब समझते हैं। नीड़ के निर्माण की तरह स्थिर करने की दृष्टि से कांग्रेस की सोच है। हम अंतर्दृष्टि और पूरी सोच के साथ आगे बढ़ते हैं। हम कहां तक आगे बढ़े हैं, आगे बढ़कर पीछे मुडकर देखते हैं कि हम कहां तक बढ़े हैं? भारत निर्माण के लिये एक निश्चित योजना बनाकर  उसे विकसित करना है। इस योजना में इरिगेशन, रूरल रोड्स, वाटर सफ्लाई, हाऊंसिंग, रूरल इलैक्ट्रीफिकेशन और रूरल टेलीफोन है। इरिगेशन से लेकर टैलीकॉम तक देहात क्यों वंचित रहे, यह विभिन्नता क्यों? शहर का आदमी सब सुविधायें भोगे लेकिन गांव वाले वंचित रहें, उनके पास  इरिगेशन नहीं है। इसलिये हम इस तरफ बढ़ें। महामहिम राष्ट्रपति जी ने कहा है कि यह दूसरे चरण में कारगर सिद्ध होगी। हमें निश्चित तौर पर इस पर विश्वास है।
            आज युवा देश की रीढ़ की हड्डी है। युवाओं के लिये रोज़गार की कोई कमी  नहीं है, यह बात कह दी गई है। प्रधानमंत्री जी की एम्पलायमेंट जनरेशन प्रोग्राम नाम की योजना है जिसमें 37.30 लाख एडीशनल एम्पलायमेंट का जिक किया गया है। मैं इस ओर इशारा करना चाहूंगी कि प्राइवेट कम्पनियों में नौकरियों पर रोक लगाकर कर्मचारियों को निकाल रहे हैं। मेरा आपके माध्यम से सरकार से निवेदन है कि महिलाओं और युवाओं को न निकालें।
            अध्यक्ष महोदया, आप हमारे सामने बैठी हैं, आदरणीया सोनिया जी हैं, मेरे सामने सुषमा जी बैठी हैं और अन्य बहनें बैठी हैं। जब औरतों का जिक्र करने का सवाल आता है तो मैं सोचती हूं कि यह बात कहूं। पिछले पांच वर्षों में उजालों और उपलब्धियों के बीच में, राष्ट्रपति के बनने से लेकर अंतरिक्ष तक पहुंचने, हमारी पासिंग आउट परेड का नेतृत्व करने वाली, जिस तरह महिला आयोग बनाकर दिया. है, डोमैस्टिक वायलेंस बिल बनाकर दिया है, उसके साथ इनहैरिटैंट प्रापर्टी राईट बिल तथा रेप के संबंध में कानून बनाया गया है, हमें कुछ कांस्टीटय़ूशनल राइट्स मिले हैं, समय समय पर पार्लियामेंट में स्पेशल लॉज़ लेकर आये हैं। जहां तक कांस्टीटय़ुशन के आर्टिकल्स 14,15,15(3),16, 16(1), 39, 42, 51ए, 51(2) की बात की जाये तो महिलाओं को ये प्रोटेक्ट करते हैं। इसके अलावा स्पेशल एक्ट्स- इम्मौरल ट्रेफिक एक्ट, डॉवरी प्रोहीबीशन एक्ट, इंडिसैंट प्रोहीबीशन आफ वुमैन एक्ट, सती प्रीवेंशन एक्ट, प्रोहीबीशन ऑफ वुमैन फ्राम डोमैस्टिक वायलेंस एक्ट बने हैं। इंडियन पीनल कोड है, आईसीपीआर है, सुप्रीम कोर्ट के कुछ जजमेंट्स हैं जिन्हें कानून के रूप में लाये हैं। मैंने एक शेर कहा है, - " जाने क्यूं हम वहीं खड़े हैं, तेज़ कदम तो हम भी चलें" और दोनों बाजू काटकर चलते जा रहे हैं। आज मैंटली रिटारटेड महिलाओं के लिये कोई कानून नहीं है। जो रेप विकटिम्स हैं, उनके रिहैब्लिटेशन के लिये स्कीम दी है लेकिन कानून नहीं बनाया है । मैं आपके माध्यम से सरकार से निवेदन करूंगी कि आप इंटरवीन करें और इसे जल्द से जल्द पास करायें। आज सरेआम तीन साल से लेकर अस्सी साल की औरत रेप का शिकार होती है। आज कहीं सुबह और कहीं शाम को  शादी के बाद उसे घर से बाहर निकाल दिया जाता है। इसलिये कांग्रेस की यूपीए सरकार ने पिछली बार इस कानून की आधारशिला रखी। महिला आयोग से कहा गया कि कानून का प्रारूप बनाकर या संशोधित करके भेजे। पीएनडीटी एक्ट से लेकर सब ऐसे कानूनों के बारे में सरकार की सोच है और उस सोच को कानून में लाना है। इन सब के लिये पांच बातें जरूरी हैं। एक- कानून का कड़ा होना, दो- प्रशासन का संवेदनशील होना, तीन- जागरूकता के कार्यक्रम बनाना, चार- सिविल सोसायटी की भूमिका, पांच- मीडिया की भूमिका। इन पांचों बातों को संयुक्त रूप से लागू करना होगा।
            अध्यक्ष महोदया, महामहिम राष्ट्रपति जी ने अपने अभिभाषण के अंत में कहा है  कि दस साल की योजनाओं में एक नया भारत देंखें और स्वप्न देखें। हमें स्वप्न देखना है, उसे पूरा करना है। चाहे शहरी रिन्युअल हो, चाहे आर्थिक सुधार हों। मेरा निवेदन है कि सोशल ऑडिटिंग और जैंडर ऑडिटिंग बहुत जरूरी है। हमने श्री चिदम्बरम जी से मिलकर निवेदन किया था कि जैंडर डिबेटिंग हो लेकिन जब तक जैंडर ऑडिटिंग नहीं होगी, तब तक कुछ नहीं हो पायेगा। इसी प्रकार सोशल ऑडिटिंग की आवश्यकता है। राष्ट्रपति जी ने मॉनिटरिंग का जिक्र किया है । मेरा निवेदन है कि यह राज्यों के लिये होनी चाहिये। जिस प्रकार राज्य सरकारें केन्द्र सरकार के द्वारा भेजे गये पैसे का दुरुपयोग करती है, उसका उदाहरण न केवल राजस्थान बल्कि सारे राज्य हैं, इसके लिये वे और विशेषकर जो राज्य कांग्रेस शासित नहीं हैं,[s9]              उन राज्यों की विशेष मॉनीटरिंग करना आवश्यक है। ...( व्यवधान) मैं इस सदन के प्रति अपनी बहुत-बहुत ...( व्यवधान) क्योंकि कांग्रेस प्रशासन चलाना जानती है, क्योंकि कांग्रेस शासन करना जानती है, क्योंकि कांग्रेस जो कहती है वह करती है, क्योंकि कांग्रेस जानती है कि हम जनता तक कैसे पहुँचें। आप लोग केवल वोट लेकर आ जाते हैं। इसलिए कांग्रेस में जो फर्क है, उसको समझने की कोशिश कीजिए और साथ दीजिए यूपीए सरकार का। महामहिम ने कल कहा था कि साथ दीजिए ताकि हम ऐसे सुंदर भारत का निर्माण कर सकें जिसमें समरसता हो, समन्वय हो, सांप्रदायिक सद्भाव हो, प्रगति हो और विकास हो।  एक शेर के साथ मैं अपनी बात समाप्त करूँगी -
              “ये चिराग जैसे लमहे कहीं रायगा न जाएं, (कहीं खत्म न हो जाएँ)   कोई ख्वाब देख डालो कोई इंकलाब लाओ।”   SHRI P.C. CHACKO (THRISSUR): Madam Speaker, I second and support the motion moved by Dr. Girija Vyas, expressing the gratitude of this august House to the hon. President of India for Her Excellency’s speech to the Members of both the Houses of Parliament assembled together, on the 4th June.
            Madam, the speech of the hon. President of India is the best compliment to the unflinching faith of the common man of India in the democratic process, and also to the strong resolve of Her Government to change the life of the aam aadmi.
            The multifarious programmes that are announced in Her speech, which are going to be implemented in the next 100 days and also in the next 365 days, are going to transform the face of the rural India. Indeed it is our bounden duty of this newly elected Parliament and the Government that represent this Parliament to fulfil the aspirations of over a billion people, that is almost one-sixth of humanity.
            We are here today because we had a Government which functioned and a Government which performed. I know that before the results of the election were announced, there was a propaganda that India was going to face another crisis and that nobody is going to have a majority. Many were dreaming that they could become the Prime Minister by default. But today, we have to salute the common sense of the common man of India, who beyond anybody’s expectations, voted for a strong Government and voted for a working Government for the next five years.
            The media was full of news that the Congress was going to meet its end and the UPA was going to be routed; this kind of propaganda was defeated by the common man. Today we are, with confidence, looking at the world; we are introducing programmes by which we can raise the standard of the poor in this country. What we need is an India where our children can have a better life than what we had.
            While discussing about the programmes, it is worthwhile to go back into the history, a little bit reverse, and see what happened during the last five years. In 2004, the 14th General Elections produced a hung Parliament. Nobody had a majority; and the world was looking down upon India, saying that democracy is going to be finished and nobody was going to have a strong Government in the country. It was the statesmanship and the farsightedness of Shrimati Sonia Gandhi and the UPA leaders that led UPA to victory and formed the Government in this country. The Prophets of Doom were giving a forecast that this is not going to last. [p10]  But today the history will testify that Dr. Manmohan Singh’s Government in the last five years was one of the most effective and the most functional Government in the history of this country.  Many programmes were implemented which have taken our country to greater heights.
            Today, the world is facing an economic crisis. What is the position of our economy and our country?  Even during this worst period, our country has attained seven per cent growth rate which is second only to China.  In the last five years, the average rate of growth of this country was 8.5 per cent. This is a fact and nobody can dispute that.  I would like to remind the hon. Members of the Opposition that during the “India Shining” days also India’s growth rate was only 5.8 per cent but during the last five years, India could achieve an 8.5 per cent growth rate and that is the reason why there is a strong Government and working majority today.  Without any pressure from any side, this Government can implement the programmes.  That kind of a situation has emerged.  When the Government came out with its programmes, a lot of pressures were there and a lot of challenges were there before the Government.  But today, the people of this country have found an answer to all these kinds of uncertainties.  To end this uncertainty, the people have given a clear-cut mandate.
            While going into the programmes implemented by the previous UPA Government, we could come to the conclusion why people of India have voted for the UPA in this election.  In the last five years, the programmes implemented by the UPA Government have no parallel in the recent history.  Major achievements of the UPA Government were claimed by many.  In fact, we had a Common Minimum Programme in the past.  We were having some friends supporting from outside and we were having Parties within the Government. But we believe the basics of the Common Minimum Programme were there in the Congress manifesto in the beginning. Of course, we had discussed it with all the Parties and we had drawn up a Common Minimum Programme.  But the major achievements of the Government produced positive results in the country.  The Right to Information Act was passed by the last Government.  The common man who elects the Government  is the super-power in this country. But under the Official Secrets Act, the common man was not allowed to have the information. Now there is a legal provision called the Right to Information Act passed by this august House.  As per that law, every citizen in this country is entitled to get all the information regarding the decision taken process in the country.
            Like that, the National Rural Employment Guarantee Act was passed by the UPA Government.  Today, we see its affects in the villages.  There is 100 days guaranteed employment and there is 100 days assured wages whether one is male or female.  There is no discrimination.  On this major Scheme, hundreds and thousands of crores of rupees are being spent. The hon. President has made a very categorical statement in her speech that this is going to be a widespread programme and would spread throughout the country and that the National Rural Employment Guarantee Act is going to be widened.  It is going to be implemented throughout the country.  The commitment of this Government is that whatever be the expenditure on account of that, this Government is going to implement it in its full measure.
            About the Bharat Nirman project, Dr. Girija Vyas has explained it and I am not going into the details.  Mahatmaji had said that India lives in its villages.  The development of the rural India as far as infrastructural field is concerned, is well taken care of by the Bharat Nirman project.  The National Rural Health Mission is for the poor people of this country.  Their health standard is being taken care of.  Today, 90 per cent of the programmes which are being implemented by the State Governments are programmes either under the Rural Employment Guarantee Programme or under the National Rural Health Mission.  The Sarva Siksha Abhiyan was introduced by the UPA Government.  Even for the text books of the primary schools which are being printed throughout the country, money is going from Sarva Siksha Abhiyan.[R11]  Funds are provided by the UPA Government through the Sarva Siksha Abhiyan for primary education and facilities are being created throughout the country. If you go through the previous budget, you may find that there is a five fold increase in the provision of funds for this kind of programmes.   When you analyse the major strength of our growth rate, you may find that the investment in agriculture has been increased by four-fold. Today, the investment in agriculture and investment in education mean that we are guaranteeing growth rate in this country.
Jawaharlal Nehru National Urban Renewal Mission is transforming the face of the urban cities of India.   An amount of Rs. 50,000 crore is going to be spent for the urban development projects.  A unique scheme is being drawn out under this project. Madam, to add to that, this Government is envisaging and the President of India has made it very clear that we want a slum-free India.  Indira Awas Yojana is being implemented more effectively in this country. In addition to this, Rajiv Awas Yojna is going to be implemented to rebuild the slums and provide better accommodation for the slum dwellers in this country. 
Very prestigious and immediate steps are being taken by the Government regarding the immediate challenges that we are facing.  Today, terrorism is a threat to this country. How are we going to face terrorism? This is the question we asked this Government. Madam, we have no doubt about it and we have made it very clear that internal security and zero tolerance towards terrorism is the policy of this country.  I have heard criticism  especially from the side of the BJP that this Government is not having a strong will to face terrorism.  I have highest regard and respect to our former External Affairs Minister, Shri Jaswant Singh who is present here. But I remember the days when India’s Foreign Minister was destined to travel with a terrorist to Kandahar and surrender to the threats of a foreign power.   But today, what we find is that our country is targeted by many people and we know that our national leaders were martyrs to this evil of terrorism. What happened in last November in  Mumbai? What is the resolve that the Government of India has shown in tackling terrorism?  This Government has decided with all its might in command that we are going to face terrorism. It is not in words but in deeds we have shown it very clearly in the last November attack in Mumbai. 
The Communal Harmony Bill was passed by the last Lok Sabha. We are going to implement it in full measure. Communal harmony is our greatest target.  We have given clear cut ideas for strengthening and modernising the Armed Forces. 
For the last many years, there has been a demand that one-rank-one-pension scheme should be implemented and the hon. President in her speech has made it very clear that, at the Cabinet Secretary’s level, the matter is receiving highest attention of the Government of India and it is our resolve that we are going to do justice to this demand. 
We are today a power in the IT field.  How we can make use of our capacity, knowledge and our reach in the IT sector for the improvement of the common man? Today, a unique identity card is going to be provided for every citizen of this country. It is such an elaborate scheme and this Government has decided to implement it in a time-bound manner.
Natural  calamities have to be tackled.  Today, Shri Basudeb Acharia was trying to raise an issue in this House.  I think he has missed out the beginning paragraphs of the speech of the hon. President. While starting her speech, the hon. President has expressed her deepest sympathies to the cyclone victims of West Bengal.   Madam, it is not only sympathies but she also has very clearly said that the Government will extend all possible succour to the cyclone affec[U12] ted people of West Bengal.
            Madam, may I bring to the notice of this House that there were Press Reports even yesterday …… (Interruptions)
MADAM SPEAKER: Shri Chacko, I have to request you to stop for a little while. You can resume later.  Hon. Prime Minister will introduce his Council of Ministers.
… (Interruptions)
 

12.02 hrs. MOTION OF THANKS ON THE PRESIDENT’S ADDRESS – Contd.

 

  MADAM SPEAKER: Shri P. C. Chacko, please continue your speech.

 

 SHRI P.C. CHACKO (THRISSUR): Madam, even yesterday’s newspapers reported that in the relief camps in West Bengal where the cyclonic-affected people were housed, not even drinking water, food and medicines are available.  I do not know what is happening there. But the proclamation of the Central Government and the Rashtrapatiji’s speech has promised a big relief to the people. Our sympathises go to the bereaved families of West Bengal. … (Interruptions)

DR. RAM CHANDRA DOME (BOLPUR): We appreciate that. What we demand is that the Government should declare it as a national calamity.  … (Interruptions)

SHRI P. C. CHACKO : It is true.  But at least you try to provide drinking water in the camps. It is the responsibility of the Government. … (Interruptions)

MADAM SPEAKER: Nothing will be recorded except what Shri Chacko says.

(Interruptions) … * SHRI P.C. CHACKO : Shri Basu Deb Acharia, you are a senior Leader. You can advise your colleagues in a situation like this. … (Interruptions)

MADAM SPEAKER: Shri Chacko, please address the Chair.

SHRI P.C. CHACKO : I wish Achariaji, a senior leader of the CPI (M) advises his colleagues there to provide at least the drinking water. … (Interruptions)

MADAM SPEAKER: Nothing will go on record except what Shri Chacko says (Interruptions) … *       * Not recorded   SHRI P.C. CHACKO : If what I have said provoked Shri Achariaji, I am sorry.   But these are facts and facts cannot be suppressed.

            Madam, hundred days’ programme is clearly mentioned in our Rashtrapatiji’s speech and Dr. Girija Vyas has aptly explained it. I would like to reiterate only one point here.  It cannot be over-emphasized about the early passage of the Women Reservation Bill in the Parliament in the next 100 days.  Madam, we have witnessed in this House as to how many times at the time of introduction of this Bill, this Bill was seized from the hon. Minister and it was being thrown away in the well of this House.  We have seen it a number of times. The whole country was watching with great tension and great anxiety as to what was happening in this House.  Today, we are happy that the wisdom of the people of this country will prevail and without any hindrance and without anybody’s threat, this House is in a position to pass the Bill.

            Madam, 51 per cent of the population is women. If anybody thinks that they can be suppressed and they can be kept at this level always, this country is not going to accept it.  The UPA and the Congress has a declared policy.  Women’s rights will be given back to them.  We are extremely happy and grateful to hon. Rashtrapatiji that it is mentioned in the Address.     

            We cannot but remember late Shri Rajiv Gandhi sitting throughout the night in this House and passed the 73rd and 74th (Amendments) Bills giving 33 per cent reservation to women.[a13]  I do not want to mention anybody’s name. But some of the so-called progressive parties also did not support Shri Rajiv Gandhi’s Bill at that time. But Shri Rajiv Gandhi’s determination prevailed and that Bill was passed. Today, 40 per cent elected representatives in this country are women in the Panchayati Raj System. This Government has decided that 50 per cent representation would be given to the women in the Panchayati Raj System. At least, with all the political differences, I wish all the parties in this House join to support this move of 50 per cent reservation in the Panchayati Raj System. We have declared it unambiguously that the Sixteenth General Election in this country would be held with this new legislation passed and 33 per cent of women’s representation would be there.

            Madam, fortunately, in this House, we have the maximum women’s representation with 59 Members out of the 543 Members. But, for the next Lok Sabha election, if we are able to witness this Lok Sabha, we can feel happy that this Government is going to give 33 per cent representation to the women. I would fervently request all those who had reservations that our sisters deserve this and we should not stand in the way of this Government’s resolve to pass this Bill. Like that,  a number of programmes for women’s upliftment are there like their share in the Central Government services, the National Mission for Empowerment of Women for the implementation of  women-centric programmes. These kinds of programmes are there for us to implement.             This is a pro-poor programme. This Government’s thrust is on pro-poor measures.

We have been very badly criticised since 1991. I remember that in 1991 when I came to this House for the first time as a Member, Shri Narasimha Rao was sitting where Dr. Manmohan Singh is sitting now. At that time, Dr. Manmohan Singh was piloting a Bill. In 1991, India was in a debt trap. Nobody was prepared to give us a small loan – whether it was the World Bank or the Asian Development Bank. I repeat nobody was prepared to give a small loan. No country was coming to our rescue. We built brick by brick this country, a country which was in a shambles. Today, think of the position  where we are. We do not need anybody’s support. We do not want any World Bank Loan or anybody’s assistance. We can stand on our own legs. The reforms which have been implemented since 1991 to this day are consistently being opposed. We can understand if anybody is opposing it ideologically. Why should one not think of the necessity, the needs of this country? Those   who have reservations about the policies should think of them.

            Madam, I want to remind this House of one thing. When this House dispersed last time, there were more than 60 Members in the Left Front. Today, they have come back. They are keeping their flags high; their ideological position uncompromised. They have the right to criticise everybody in the world. But they have come back with 24 Members to the House after this election! Why is this happening? Should we not realise what the people of this country want?

            Madam, our foreign policy was attacked like anything especially from the place where I am coming. They criticised that we surrendered the foreign policy.… (Interruptions) India is pursuing a foreign policy not dictated by anybody. It is the legacy of Pandit Jawaharlal Nehru; it is his heritage. We have not compromised with it. It does not mean that we should fight with every country in the world. All the Super Powers in the world today are our friends. Not only the Super Powers but all the countries in the world are our friends. We have no enemies. That is what Gandhiji taught us. We have no enemies in the world. We have only friends. Somebody does not want India to progress. We signed the Nuclear Agreement with America. What was the reaction? Those who supported this Government from outside, those who were with us for four-and-a-half years chose that opportunity. They decided that we were going with America  and hence they withdrew the support given to us. But the Government did not fall. The people re-elected that Government with a resounding victory. What does it mean? Are they ready to correct their mistakes? Today, we have entered into an agreement not only with America but we have a Nuclear Agreement  with Russia, we have a Nuclear Agreement with Germany and we have a Nuclear Agreement with France also. We have more friends in the world today. Friends, do you want India to be isolated in the comity of nations in the world? In the world, if somebody wants India to be isolated, India to be without friends, if that is anybody’s dream, he should realize that the people of this country have given a befitting reply for that. I wish, at least, they rethink of it. India will not compromise its interests. Our foreign policy will not be compromised. My dear friends, please understand this. … (Interruptions)

MADAM SPEAKER:  All the interruptions will not go on record. Please do not disturb the House.

(Interruptions) … * MADAM SPEAKER: Shri Chacko, please address the Chair.

SHRI P.C. CHACKO : I can understand their anxiety. Those who could not even do justice to the freedom movement of this country, if they feel that they have done some mistakes – mistakes can happen to any party, mistakes can happen to anybody – my only wish is that they correct themselves. The people of this country are giving them an opportunity. If they do not open their eyes and see the reality, it is their mistake.

            Madam, India is prospering now. God willing, if we see the future of this country after 10 years, it will be totally different and better. About 70 per cent of the Members of this House are youngsters. So the majority of the Members of this House will see the future after 10 years as to what is going to happen in this country. There will be an India free from hunger, an India free from unemployment and India free from all the problems that we are facing today. That is the pace with which we are progressing now. If anybody is trying to obstruct that, the people will not forgive them. The people of this country are with this Government. This Government, with a strong determination and will, will implement all the programmes announced by the President.

            There are various flagship programmes which have been implemented over the last five years. More provision is going to be made for these programmes in the Budget which we are going to have within the next few weeks. So all the flagship programmes will continue. In addition to that, the new programmes announced by the President are going to be part of this progress. Not recorded             Madam, we have just completed the greatest exercise of our democracy, that is elections to the House of the People. The President has said that this is a festival of democracy. About 70 crore people of this country have participated in this democratic process. This is the largest functional democracy in the world with one billion people. Should they fail? Can we allow them to fail? The history will not forgive those who are standing in the way of progress and those who are trying to throw a spanner in the machine. This cannot be allowed. So, this Government, with all its determination and all its ongoing programmes and the new programmes that have been announced by the President, will see to it that India marches ahead from what it is today to greater heights.

            I would like to say that it is our bounden duty to pass this Motion of Thanks unanimously. I do not know what will be the stand that is going to be taken by various parties here. We have political differences. The BJP always thinks about a narrow communal nationalism, but we are liberal nationalists. So we have differences. The Communists think that they are always right, but the people told them that they are always wrong.

            We have a situation where we all have to come together on certain basic things and that is about the development programmes that are going to be implemented for the welfare of the people of this country. If anybody can convince us that any of the programmes announced by the President is wrong, we are ready to admit with folded hands. Otherwise, they should also admit their mistake.

            This is a new era which has just started. After the last five years, it is continuity for the next five years. That is what the common man of this country has decided. When all the psephologists, astrologists and political pundits were forecasting doom for the Congress and the UPA, the people of this country brought back the Congress and the UPA. That is the wisdom of the common man. It is much bigger than the calculations and predictions made by the political pundits.

So, the programmes announced by the hon. President will take India to greater heights. They are for our future; they are for our children and so let us not quarrel on small technicalities and try to stop these programmes. This is the beginning of this Lok Sabha and I wish that all the parties, with all their participation, come together to pass this Motion of Thanks unanimously so that we rise to the expectations of the common man of this country who have given a resounding victory to the UPA and the Congress. They have given a mandate for a stable Government for the next five years, assuring the progress of one billion people of this country.

                                                    

MADAM SPEAKER: Motion moved :

“That an Address be presented to the President in the following terms :-
 
‘That the Members of the Lok Sabha assembled in this Session are deeply grateful to the President for the Address which she has been pleased to deliver to both Houses of Parliament assembled together on June 4, 2009’.”   Hon. Members whose amendments to the Motion of Thanks have been circulated, may, if they desire to move their amendments, send slips to the Table within 15 minutes indicating the serial numbers of the amendments they would like to move. Those amendments only will be treated as moved.
            A list showing the serial numbers of amendments treated as moved will be put up on the Notice Board shortly thereafter. In case any Member finds any discrepancy in the list, he may kindly bring it to the notice of the Officer at the Table immediately.[NB14]  DR. MURLI MANOHAR JOSHI (VARANASI) : Madam, there are a large number of amendments given by many of us and if you give only 15 minutes for the hon. Members to press and move, I think it will not be a proper time as it is too short a period.  आप इस बारे में कुछ कहिये।.. (...व्यवधान) अध्यक्ष महोदया : यह नियम के अनुसार है और वह 15 मिनट है।
 (...व्यवधान) श्री लाल कृष्ण आडवाणी ( गांधीनगर): माननीय अध्यक्ष महोदया, महामहिम राष्ट्रपति जी के अभिभाषण पर अभी जो धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत हुआ है, मैं उसका समर्थन करने के लिए खड़ा हुआ हूं। श्री चाको  ने अपने भाषण के अंतिम वाक्य में कहा कि " मैं आशा करता हूं कि यह धन्यवाद प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित होगा। " यह इस सदन की परम्परा है कि अभिभाषण पर अगर कुछ कहना भी है, तो भी धन्यवाद प्रस्ताव का समर्थन करते हुए संशोधन दिया जाता है कि मुझे खेद है कि उसमें इस बात का उल्लेख नहीं है। लेकिन धन्यवाद प्रस्ताव का पूरा सदन हमेशा समर्थन करता है और वह सर्वसम्मति से ही पारित होता है।
             अध्यक्ष महोदया, आज इस लोक सभा की  यह पहली बहस है, जिसी आप अध्यक्षता कर रही हैं। एक प्रकार से संसदीय इतिहास में भी एक अनूठी घटना घटी कि पहली बार एक महिला सदन की अध्यक्षा बनीं और एक ही प्रकार से महिला सशक्तीकरण तथा सामाजिक सशक्तीकरण , दोनों एक साथ ही हो गये। मैंने जैसे परसों कहा  कि मैं भूल नहीं पाता हूं कि मुझे आपके स्वर्गीय पिताजी के साथ मंत्रिमंडल में भी काम करने का अवसर मिला ।  उनकी अद्भुत प्रशासनिक क्षमता से हम सभी प्रभावित थे। वे निर्णय करने में देर नहीं लगाते थे। देश, समाज और राष्ट्र के हित में जो भी उचित लगता था, वे  उस बारे में शीघ्र निर्णय करते थे।
            पन्द्रहवीं लोक सभा का यह पहला अधिवेशन है। इस अवसर पर मैं अपना पहला भाषण करते हुए डॉ. मनमोहन सिंहजी को बधाई देना चाहूंगा कि इस चुनाव में  वे देश के प्रधान मंत्री के रूप में उभरे  हैं। सदन के नेता श्री प्रणब मुखर्जी, यूपीए की अध्यक्षा श्रीमती सोनिया गांधी समेत सभी को मैं बहुत-बहुत बधाई देता हूं कि उन्हें वर्ष 2009 के चुनाव में जनादेश मिला है । वर्ष 2004 से भी बड़ा जनादेश मिला है। भले ही वैसा न मिला हो, जिस कारण कई लोगों ने बड़ी आशाएं प्रकट कीं कि यह होगा, वह होगा। हमें कभी भूलना नहीं चाहिए कि शायद सबसे बड़ा जनादेश यदि किसी को मिला, तो वर्ष 1984 में श्री राजीव गांधी जी को मिला। उन्हें सबसे बड़ा जनादेश मिला।[MSOffice15]              मुझे स्मरण नहीं है कि कभी चार सौ से अधिक सांसद पंडित नेहरू या इंदिराजी के साथ भी रहे हों, जितने राजीवजी के साथ थे, लेकिन बावजूद इसके अगले ही चुनाव में परिणाम बिल्कुल दूसरे हो गए। वह चुनाव एक प्रकार से हर सरकार को चेतावनी देता है कि कि जनता पूरे समय आपके कार्यों पर नजर रखती है और इतनी बड़ी संख्या में जीतने के बाद भी अगला परिणाम दूसरा भी हो सकता है। हिंन्दुस्तान में ऐसा लगातार होता रहा है, मैं केवल वर्ष 1984 और वर्ष 1989 की बात नहीं कर रहा हूं।
            मैं यह हमेशा मानता हूं कि हिंन्दुस्तान ने सारी दुनिया में संसदीय लोकतंत्र को सफल बनाने का  एक अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया है । जब हमने वर्ष 1950 में इसे अपनाया था तो उन दिनों के विश्लेषणकर्ता तथा विद्वानों  खासकर पश्चिम के इस प्रकार से आशंका प्रकट करते थे कि इन्होंने संसदीय लोकतंत्र अपनाया है,  लेकिन संसदीय लोकतंत्र की सफलता के लिए जो मूलभूत परिस्थितियां किसी देश में होनी चाहिए, वह तो यहां नहीं हैं। यहां पर लोग शिक्षित नहीं है, पढ़े-लिखे नहीं हैं। लोग मजाक करते थे कि यहां पर लाखों लोग अंगूठा छाप  हैं जिनको कुछ नहीं आता है। लोग यह भी कहते थे कि प्रैक्टिकली पूरे हिंन्दुस्तान में, बाकी सब पार्टियां छोटी-छोटी हैं। इसमें कोई संदेह नहीं है कि वर्षों तक यहां इस संसद में, लोकसभा में कोई रिकग्नाईज्ड अपोजिशन पार्टी नहीं बन पाई क्योंकि रिकग्नाईज्ड अपोजिशन पार्टी के लिए 54 सदस्य होने चाहिए, कम से कम कोरम चाहिए जो नहीं बन पाया। यह सब कुछ होते हुए भी जिस प्रकार से 60 साल तक भारत ने संसदीय लोकतंत्र को संचालित किया है, उससे सारी दुनिया में हमारी साख बनी है और मैं मानता हूं कि वर्ष 2009 के चुनाव उस साख में और वृद्धि करते हैं।
            हमारा लोकतंत्र केवल इसीलिए उल्लेखनीय नहीं है कि यह दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, इतनी बड़ी संख्या में वोटर्स यहां पर हैं, अपितु इसलिए भी उल्लेखनीय है कि यह एक सजीव लोकतंत्र भी है, जहां पर जनता सोच-विचार कर अपना निर्णय करती है। मैं इस अवसर का उपयोग इन चुनाव परिणामों के विश्लेषण के लिए नहीं करूंगा। यह  अवसर नहीं है। इस संबंध में मैंने केवल एक वाक्य कहा था कि जनता का यह जो निर्णय है, यह जो जनादेश है, it is a mandate for stability and it is a mandate for bi-polarity.  मैं इसका विश्लेषण कर सकता हूं लेकिन मैं केवल स्टेबिलिटी की बात कहना चाहूंगा। जैसी स्टेबिलिटी राजीवजी की सरकार को मिली थी, यह वैसी स्टेबिलिटी नहीं है, लेकिन फिर भी स्टेबिलिटी मिली है। दिशा स्टेबिलिटी की है। यह दिशा आगे बढ़े, यह मैं चाहूंगा। 
            मैं मानता हूं कि हिंन्दुस्तान में जो गठबंधन बनते हैं, उनके प्रति लोगों के मन में आशंका होती है कि क्या यह गठबंधन स्थिर रहेगा, यह टिक पाएगा? इसीलिए जहां पर गठबंधन टिकाऊ दिखते हैं, वहां पर आम मतदाता उसे वोट देता है ; और अगर टिकाऊ नहीं दिखते हैं तो फिर उसकी प्रवृत्ति किसी एक मजबूत पार्टी को वोट देने की होती है । मुझसे कभी-कभी लोग पूछते हैं कि आपकी पार्टी के पूरे इतिहास में आप  पार्टी की कौन सी  सबसे प्रमुख उपलब्धि मानेंगे; तो मैं कहता हूं कि हमारी पार्टी की सबसे बड़ी उपलब्धि मैं यह मानता हूं कि वर्ष 1950 में भारत का संविधान बना, वर्ष 1951 में मेरी पार्टी बनी, वर्ष 1952 में पहला चुनाव हुआ और उस चुनाव में हमारी पार्टी को केवल तीन सीटें मिलीं। [R16]              भारतीय जनसंघ को डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नेतृत्व में केवल तीन सीटें मिलीं। फिर भी उन्होंने काँश्यसली पहली-पहली लोक सभा में एक नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट बनाया, जिसमें अनेक पार्टियां थीं। वह गठबंधन का पहला-पहला प्रयास था। उसमें उन्होंने शब्द प्रयोग किया था- नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट। बाद में जब कई दलों के सहयोग से वाजपेयीजी की कॉलीएशन गवर्नमेंट बनी, तब हमने " फ्रंट " के बजाए  " एलायंस  " शब्द का प्रयोग किया और हमने कहा कि नेशनल डेमोक्रेटिक एलायंस। आम जनता देखती है कि क्या ये टिके रहते हैं या नहीं, ये स्थिर रहते हैं या नहीं। मैं मार्क्सवादियों की चाहे जितनी आलोचना करता रहूं, लेकिन मैं कहता हूं कि उनका लेफ्ट फ्रंट एक पूरा टिकाऊ गठबंधन है। वह ठीक प्रकार से स्थिरता से चलता है, मैं इसे मानता हूं। लेकिन मैं उनसे शिकायत करता हूं कि उन्होंने जिस समय सन् 2004 में कांग्रेस पार्टी का समर्थन किया, तब इस कारण नहीं किया कि वे कोई हमेशा उनसे टिके रहना चाहते थे। वे उनकी नीतियों को, उनके निर्णयों को प्रभावित करना चाहते थे और साथ-साथ उनका अगर कोई उद्देश्य था तो वह एक नकारात्मक उद्देश्य था कि प्रमुख विरोधी बीजेपी को बाहर रखने के लिए हम कांग्रेस पार्टी को समर्थन देते हैं, तो अच्छी बात है। लेकिन इन्होंने पहले कभी ऐसे समर्थन नहीं दिया, सिर्फ 2004 में दिया। इसीलिए मैंने तब भी  आपको और आपके मित्रों को कहा था कि एक बार आपकी सहयोगी पार्टी सीपीआई ने पहले यही प्रयोग किया था, उसका परिणाम उसे कितना भुगतना पड़ा, वह आपको यानी सीपीआई (एम) को अब भुगतना पड़ा है। लेकिन यह तो एक नकारात्मक कारण था, अन्यथा आप उसी समय कह देते कि आपने अगर अमेरिका से मित्रता की, तो हम उसके बिल्कुल खिलाफ होंगे। आप डॉ. मनमोहन सिंहजी को उसी समय यह कह देते।
श्री बसुदेव आचार्य (बांकुरा): हमने तो उसी समय कह दिया था। हमने कॉमन मिनीमम प्रोग्राम का समर्थन किया था, और यह बात उसमें नहीं थी।
श्री लाल कृष्ण आडवाणी : आपने जो कुछ कहा, वह सबको पता है। देश ने उसके आधार पर निर्णय किया है। लेकिन हां, स्थिरता का महत्व है। इसीलिए मैं ट्रेज़री बैंचेज़ पर बैठे हुए मंत्रियों को कहूंगा, Stability is not for itself.  Stability is for good performance; Stability is for good governance; Stability is for development; and Stability is also for security. मैंने तीन शब्द वही प्रयोग किए हैं, जो हम अपने पूरे अभियान में करते रहे थे। It is Good Governance, Development and Security.  These are the three things. इसकी कोई हमारी मोनोपली नहीं है, हमारा कोई यह कॉपीराइट नहीं है। But these are touchstones which make the voters judge whether we have made this Government a stable Government.  Are they discharging their duty accordingly?  So, they will be watching it closely.
            मैं आज के अवसर पर शुरू में इतना ही कहूंगा कि हम विपक्ष में हैं। हमारी संख्या में पहले से कमी हुई है। पिछली बार हमारी स्ट्रैंथ 138 थी, इस बार 116 है। लेकिन मैं कहना चाहता हूं कि 116 भी कोई कम स्ट्रैंथ नहीं है, अच्छी-खासी है। यह ठीक है कि आप 200 के ऊपर हो गए, लेकिन क्लियर मेजोरिटी नहीं मिली। पहले की कांग्रेस की सरकारों को जितनी क्लियर मेजोरिटी मिलती थी, राजीवजी को  जितनी मिली थी, वह स्थिति नहीं है। इसीलि मैं निवेदन करूंगा, Let this election and this 15th Parliament be a new beginning of Government-Opposition relations. … (Interruptions) सरकार और विपक्ष के बीच सम्बन्धों की एक नई शुरूआत हो, वह नई शुरूआत होगी तो उसका परिणाम संसद की कार्यवाही पर भी निश्चित रूप से होगा। जितने संकेत मुझे अभी मिले हैं, मैं मानता हूं कि शायद नई शुरूआत होगी, जरूर होगी।
SHRI GURUDAS DASGUPTA (GHATAL): Do you mean only with the BJP? … (Interruptions)
SHRI L.K. ADVANI : I mean the ‘Opposition’. I am talking of Government-Opposition relations. … (Interruptions)
SHRI GURUDAS DASGUPTA : Not bi-polar but it should be multi-polar. … (Interruptions)
MADAM SPEAKER:  Shri Gurudas ji, please sit down.
SHRI L.K. ADVANI : It is a multiple democracy, multi-party democracy. [H17]  But the poles are two.  I would say… (Interruptions)  Just as in West Bengal, there are two poles – the Marxists and the Congress.  We are not there.  But   on the national  level, the two poles admitted by everyone are the Congress and the BJP.
SHRI GURUDAS DASGUPTA :  That is your interpretation… (Interruptions)
MADAM SPEAKER:  Mr. Dasgupta, please.  You can speak, when your turn comes.
… (Interruptions)
श्री लालकृष्ण आडवाणी  मान लो, आप तो किसी समय मानते ही नहीं थे।
SHRI BASUDEB ACHARIA :  Mr. Advani, the election results are against  the bipolar system… (Interruptions)
MADAM SPEAKER: Mr. Basudeb Acharia, you can speak when your turn comes.
… (Interruptions)
SHRI L.K. ADVANI : I  do not propose to have a lecture today on the growth and development of the Indian democracy.… (Interruptions)
I have seen the evolution.
            I do not know, हमारे प्रणबजी हो सकते हैं। मैं एक ऐसा सदस्य हूं जिसने 1952 के चुनाव में एक कैम्पेनर के नाते भाग लिया। सन् 1952 से लेकर सन् 2009 तक के चुनाव में सक्रिय रूप से भाग लिया है। इसलिए जो हमारे लोकतंत्र का इवोल्यूशन हुआ है, इस सिस्टम का, उसे मैंने प्रत्यक्ष रूप से देखा है। इसलिए जैसा मैने कहा कि डा. मुखर्जी ने जब नेशनल डेमोक्रैटिक फ्रंट बनाया, तो पहले हमें समझ में नहीं आया कि तीन लोगों की पार्टी हमारी तो फ्रंट काहे के लिए बनाते हैं, जिसमें गणतंत्र फ्रंट उड़ीसा का जोड़ा, जिसमें अकाली दल पंजाब का जोड़ा और आगे बढ़कर अकाली दल के साथ सबसे पहले समझौता करके एक कोलिएशन गवर्नमेंट जस्टिस गुरनाम सिंह की बनाई थी।              All these processes I have known.
 डा. लोहिया, जयप्रकाश नारायण, डा. मुखर्जी, दीनदयाल उपाध्याय, ये सब के सब उन महापुरुषों में  थे जिन्होंनें इस बात को नोट किया कि दुनिया के सारे लोग कहते हैं कि इस देश में एक ही पार्टी छाई रही तो फिर लोकतंत्र विकसित नहीं होगा। इसीलिए सिस्टमैटिकली हमने अप्रोच अपनाई कि किस प्रकार से यह जो कांग्रेस पार्टी की हैजीमनी है, मौनोपली ऑफ रूल है, उसे कैसे तोड़ा जाए। अंततः उसे तोड़ने में सफल हुए, इसीलिए बाईपोलर पॉलिटी बनी। सन् 1984 वाला समय आया, जब हम केवल दो सीटें ही पूरे हिंदुस्तान में प्राप्त कर सके। लेकिन सन् 1998 आते-आते हम सदन की सबसे बड़ी पार्टी बन गये और अपनी सरकार बनाकर हमने 6 साल तक देश पर राज किया - यह भी सच्ची बात है। मैं केवल एक बात कहना चाहूंगा कि  Let the Government do its duty.  The Opposition -- my party and the NDA – will do our duty together. मैं आपको कहता हूं कि together we can certainly see to it.  जो भी हमारी एम्बीशन्स हैं, आपकी हमारी और देश की जनता की भी हैं कि यह शताब्दी जो अभी बहुत लम्बी है, अभी तो वर्ष 2009 ही है, that this century becomes  India’s century.  It should be our common goal and we shall achieve it.  It is quite possible without any difficulty.
            Having expressed  my broad approach to the whole issue of the President’s Address, I would like to deal with some of the issues, particularly security as security  has been a major consideration with us.  अभी-अभी एक घटना घटी, जिस घटना के बारे में धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत करने वाली माननीया गिरजा व्यासजी ने कहा कि “मैंने आडवाणी जी का भाषण पढ़ा और उस भाषण से मैं सहमत हूं”। मुझे लगा कि मुम्बई कि 26-11-2008 की घटना कोई साधारण घटना नहीं थी, कोई साधारण आतंकवादी हमला नहीं था।[r18]              महोदया, पिछले कई सालों से आतंकवादी हमले लगातार होते रहे हैं। मुम्बई की  26/11 घटना-आतंकी  हमले को  देश की जनता ने तीन दिन तक लगातार टीवी पर देखा, तो एक धारणा बनी कि यह कोई एक घटना मात्र नहीं है। यह कोई अकेला हमला नहीं है। This is an invasion of the country. This is a kind of a war that we are witnessing. कम से कम टेलीविजन से यह आभास मिला। हम लगातार यह कहते हैं कि तीन-तीन युद्धों में पराजित होने के बाद पाकिस्तान ने अपनी रणनीति बदल कर इस प्रोक्सी वार की रणनीति अपनाई। Terrorism is nothing else but a proxy war which Pakistan is waging against us after having been worsted in three major wars. इसके बाद जनरल जिया ने तय किया कि अब इसके बाद सीधा युद्ध नहीं करना है, बल्कि अप्रत्यक्ष युद्ध आतंकवाद के माध्यम से करना है, मैं मानता हूं कि 26/11 की घटना ने यह अहसास एक प्रकार से सारी दुनिया को भी करा दिया।
            हमें इस बात का नोटिस लेना चाहिए कि 26/11 की घटना का मास्टर माइंड हाफिज़ था। जिस मास्टर माइंड को हमारे प्रयत्न से  यू एन सिक्योरिटी काउंसिल ने भी अपने रेज्युलूशन 1267 में कहा कि हाफिज़ का अलकायदा से संबंध है, तालिबान से संबंध है। हाफिज़ सईद को पाकिस्तान ने अंतर्राष्ट्रीय दबाव में आ कर गिरफ्तार भी किया, लेकिन अचानक कोर्ट ने उसे छोड़ दिया और कहा कि टेक्निकल ग्राउंड्स पर, जो गवाही दी गई है, एविडेंस किया गया है, वह एडिक्वेट नहीं है। पाकिस्तान सरकार कहेगी कि यह कोर्ट का फैसला है। पाकिस्तान सरकार यह कह कर बचने की कोशिश करेगी। पाकिस्तान की कोर्ट्स का क्या हाल है, वहां क्या-क्या होता है, उस बारे में मैं यहां टिप्पणी नहीं करूंगा ।  लेकिन मैं चाहूंगा कि हिंदुस्तान को इस बात का पूरा भरोसा होना चाहिए कि हमारे पास जितना एविडेंस था, वह हमने प्रस्तुत किया है। पाकिस्तान सरकार के पास तो किसी प्रकार का एविडेंस नहीं था। हमारे एविडेंस के आधार पर यू एन सिक्योरिटी काउंसिल ने हाफिज़ के खिलाफ एक्शन लिया, लेकिन पाकिस्तान ने जिस प्रकार से अपना केस कोर्ट में प्रस्तुत किया, उसके कारण हाफिज़ रिहा हो गया। लश्करे तोयबा का रिलिजस पालिटिकल फ्रंट जमात उद दावा है। गृह मंत्री चिदम्बरमजी सदन में उपस्थित हैं, मैं मांग करता हूं कि हाफिज़ के संदर्भ में, 26/11 की घटना के संदर्भ में, हमने जो एविडेंस पाकिस्तान सरकार को दिए हैं, उन एविडेंस को सदन के साथ शेयर करें। देश को भी पता लगे कि हमने पाकिस्तान को क्या-क्या एविडेंस दिए हैं, जिसके आधार पर वह कोर्ट में गए। मुझे विश्वास है कि देश को इससे संतोष होगा। हम उनके ऊपर दबाव बढ़ाते रहें, अंतर्राष्ट्रीय विश्व के लोग भी उन पर दबाव डालते रहें कि उस पर कार्यवाही हो, तभी इस बारे में हमें सफलता मिलेगी।
            महोदया, मैं जानना चाहूंगा कि जिस 26/11 की घटना के दौरान जिंदा पकड़े गए एकमात्र व्यक्ति कसाब को, जिसे पुलिस कांस्टेबल के साहस तथा उसके बलिदान के कारण पकड़ सके, उस कसाब के केस में क्या प्रगति हुई है? मैं चाहूंगा कि इस केस में विलम्ब नहीं होना चाहिए। जल्दी से जल्दी कार्यवाही की जानी चाहिए। मैंने जो बात पहले कही, उसके लिए मैं एक पाकिस्तानी पत्रकार याहिद हुसैन जो लेखक भी हैं। की बात को कोट करना चाहूंगा, उन्होंने   ‘फ्रंट लाइन पाकिस्तान    पुस्तक लिखी है, जिसमें उन्होंने कहा है कि लश्कर-ए-तोयबा और आई एस आई के संबंध बिल्कुल अटूट हैं।[r19]              प्रणवजी ने कहा कि हमने यह सफलता पायी है कि पाकिस्तान को यह स्वीकार करना पडा कि जो लोग आए थे वे पाकिस्तानी थे लेकिन उन्हें नॉन स्टेट एक्टर्स कहते थे। वह कहते थे कि स्टेट का कोई संबंध नहीं है, लश्कर-ए-तोएबा के होंगे, जो टैरारिस्ट ऑर्गेनाइजेशन्स हैं. वे उनके साथ जुड़े होंगे लेकिन राज्य का कोई संबंध नहीं है। मैं नहीं मानता हूं कि इतना बड़ा कांड हो, इतना भयंकर कांड हो, इतना नियोजित कांड हो और उसमें वे समुद्र के रास्ते से आएं, इसके बावजूद पाकिस्तान की सरकार में किसी को पता न हो, आई एस आई ने ही इस प्लान किया होगा, ऐसी हमें आशंका है और खास तौर पर पाकिस्तान के याहिद हुसैन की पुस्तक पढ़ने के बाद तो लगा कि निश्चित रूप से उन्होंने किया होगा लेकिन मैं जानना चाहूंगा, मुझे विश्वास है कि गृह मंत्रीजी इसका जवाब दे सकेंगे क्योंकि इस घटना के बाद महाराष्ट्र की सरकार ने जांच करने के लिए आर.डी. प्रधान की  एक टू मैम्बर कमेटी बनायी। आर.डी. प्रधान कमेटी ने जिस प्रकार महाराष्ट्र सरकार को कहा कि उनका कोई दोष नहीं है। उन्हें बरी कर दिया और कहा कि  अगर किसी का दोष है तो वह सैंट्रल गवर्नमेंट का है। पहली बार ऐसा हुआ होगा कि इतने बड़े कांड के लिए राज्य सरकार की कोई कमेटी बने और वह यह कहे कि राज्य सरकार का कोई दोष नहीं है। इसमें अगर कोई विफलता हुई है तो केन्द्र सरकार की हुई है।  
            इतना ही नहीं, Shri Chidambaram, I do not know whether you know, but I have seen a news item in The Times of India dated 28.05.2009 under the caption “Centre to blame for 26/11 lapse : Panel”.  It says :
“During his visit to Mumbai after the terror attack, Union Home Minister P.C. Chidambaram apologized to the citizens of the State, this itself indicated lapses from the Union Government.”   Now, I will not agree with what he has said, but if he has said this, it is very serious. Here is a situation where - I do not know if he is here or not – the Chief Minister of Maharashtra had to resign. The Deputy Chief Minister of Maharashtra, who was also the Home Minister, had to resign.
THE MINISTER OF HOME AFFAIRS (SHRI P. CHIDAMBARAM): I think, both of them took moral responsibility, unlike in some previous cases where nobody took moral responsibility.
SHRI L.K. ADVANI : Right, I understand … (Interruptions) as if in the last five years anyone took moral responsibility for the numerous incidents that happened, for the Mumbai tragedy that happened! Please do not speak in that way. 
            I would only say that here is a situation where a formal Committee is set up by the Maharashtra Government and this is what it says.  Furthermore, not only that, it says formally:
“The panel was approached by many of the non-official persons, but we decided not to meet any of these people. The report does not include version of the non-officials, but is based on the enquiry conducted of over 50 police officers….. ”   Then, Shrimati Vinita Kamte, wife of Ashok Kamte, the police officer who was killed, has said, ‘I had sought permission from the Pradhan Committee to give my evidence. I was not permitted and it has now given a clean chit to the Mumbai Police and Government.’ Not only that she wanted to depose before the Committee but was not allowed to do so, she has also alleged that certain portions of the call records of the Police Control Room of November 26th were deleted.
            Therefore, I come to my fourth demand which I had made earlier also, after the incident when I spoke in the House. I had said that after 9/11 in America, a Commission of Inquiry was set up and that Commission of Inquiry gave a voluminous report as to what happened and how it happened.[SS20]  Most of the recommendations of that Commission of Inquiry were implemented. I would not say that there has been no terrorist incident in America only because of the implementation of those recommendations. But I would once again demand this, particularly, after the Pradhan Committee’s Report and the allegations it has made against the Central Government. We know this much that the Central Government including the Prime Minister; including the then Home Minister; and including the National Security Advisor had indicated that the next terrorist attack may be from the sea. They had said it in the Parliament, and they had said it publicly. It is all the more reason that the country and the Parliament must know as to what went wrong where. How did it happen that despite these apprehensions of the Government nothing happened, and necessary steps were not taken?
A Commission of Inquiry is not against anyone. But a Commission of Inquiry is in order to find out the truth and take action for the future so that such events do not recur, and from that point of view also अभी तक हमने नहीं किया होगा। आज यह अवसर है जब पहली-पहली हमारी सभा हो रही है और चिदम्बरमजी स्वयं कहें कि मैं इस बात से सहमत हूं और प्रधान मंत्री जी को रिकमेंड करें कि एक कमीशन ऑफ इंक्वायरी बिठाइए जो इस बात की पूरी जांच करे और   जो आर.डी. प्रधान कमेटी की रिपोर्ट है, पैनल की रिपोर्ट है उसको भी देखे आखिर गृह मंत्रीजी को इस्तीफा देना पड़ा।  वहां के मुख्य मंत्री ने इस्तीफा दिया, उनके सहयोगी ने इस्तीफा दिया। मेरी यह चौथी डिमांड है कि यह होना चाहिए।    
मैं सुरक्षा की बात कर रहा हूं तो मैं जरूर इस बात का उल्लेख करूंगा और मुझे इस बात की खुशी है कि सुरक्षा में लगे हुए सैनिकों की  बहुत दिनों से " वन रैंक वन पेंशन "  की जो मांग रही है, उसका उल्लेख इस राष्ट्रपति के अभिभाषण में है । मैं उम्मीद करता हूं कि जून के महीने तक संबंधित कमेटी की यह रिपोर्ट आ जाएगी और उसमें उनकी इस मांग को स्वीकार किया जाएगा हालांकि इसमें इस मांग को स्वीकार करने की बात नहीं है। शायद आपके इस बार के घोषणा-पत्र में भी नहीं थी लेकिन अच्छा होगा कि इस मांग को स्वीकार किया जाए और इसे आगे बढ़ाया जाए।
            अब मैं विकास के मुद्दों के बारे में जिक्र करना चाहूंगा जिनका इसमें उल्लेख किया गया है। राष्ट्रपति के अभिभाषण में बहुत अच्छी बात कही गई है:
“While male literacy went up to over 75 percent in the last census and is expected to be higher now, female literacy was only 54 percent in 2001.”   फिर उन्होंने कहा है कि -
“My Government will recast the National Literacy Mission as a National Mission for Female Literacy to make every woman literate in the next five years.”   मैं इस घोषणा का स्वागत करता हूं। बहुत उचित है क्योंकि गांधीजी हमेशा कहा करते थे कि एक लड़के को शिक्षित करने का मतलब होगा कि देश में शिक्षितों की संख्या में एक और बढ़ाना  लेकिन एक लड़की को शिक्षित करने का मतलब है कि देश में शिक्षितों का एक परिवार बढ़ाना  इसीलिए मैं इस घोषणा का स्वागत करता हूं। इस मामले में कई प्रदेशों में भी अपने-अपने ढंग से कार्रवाई हो रही है। मैं उन प्रदेशों को भी जानता हूं कि जहां मेरे सहयोगी यह कार्य कर रहे हैं। यह काम ऐसा है कि जिसमें केन्द्र और राज्य सरकारें मिलकर काम आगे बढ़ाएं। विकास के कार्यों में क्रेडिट किसको मिलता है, इस चक्कर में ज्यादा न पड़ें। अच्छी बात है कि अगर हमारी सरकार कोई काम करती है या केन्द्र की सरकार करती है- यदि केन्द्र की सरकार करती है तो केन्द्र को क्रेडिट मिलेगा। प्रदेश की सरकार करती है तो प्रदेश को क्रेडिट मिलेगा। लेकिन क्रेडिट किसको मिलेगा, इसके आधार पर कोई फैसला नहीं होना चाहए। मेरा अनुरोध है कि अच्छे काम होने चाहिए। [r21]              मैंने जब मध्य प्रदेश सरकार की लाडली लक्ष्मी योजना देखी तो मुझे लगा कि लिटरेसी की बात हीं काफी नहीं है लड़की स्कूल में भर्ती तो हो जाती है, लेकिन लगातार उसके बाद ड्रॉप आउट होते जाते हैं। उस ड्रॉप आउट के दोष को रोकने के लिए उन्होंने लाडली लक्ष्मी योजना बनाई, जिसका उद्देश्य था कि जिस-जिस घर में लड़की का जन्म हुआ, उसे जन्म से लेकर जब तक वह बारहवीं पास नहीं करती, आगे नहीं पढ़ती, तब तक उन्हें पीरियोडकली सहायता मिलती रहे। लेकिन जब वह बारहवीं पास कर लेती है तो उन्हें एक लाख बीस हजार रुपये मिलते हैं। इस योजना का वहां बहुत अच्छा परिणाम हुआ है। मैं चाहूंगा कि सारे देश में सरकार इसे लागू करे। यह बहुत अच्छा होगा। कुछ और प्रदेशों ने भी इस दिशा में काम किया है।
            इसमें कोई संदेह नहीं है, मुझे भी बहुत खुशी हुई, स्वाभाविक रूप से जब से अध्यक्ष महोदया आप आई हैं सब महिलाएं तब से बहुत प्रसन्न हैं। जब हम अध्यक्ष महोदया से उनके कक्ष में जाकर मिले थे, तभी यही बात सबसे आगे आई थी कि अब देखिये वूमैन्स रिजर्वेशन बिल पास हो जायेगा। मुझे कभी-कभी लगता है कि इतने साल लग गये, यह बिल बहुत पहले इंट्रोडय़ूस किया गया था, लेकिन इतने साल इसलिए लग गये कि शायद राष्ट्रपति भी महिला हो जाएं और स्पीकर भी महिला हो जाएं, तब इसे पास करेंगे। इसलिए इतनी प्रतीक्षा की। मैं फिर से अपनी पार्टी का स्टैंड दोहराना चाहूंगा कि आप जब भी इस बिल को लायेंगे, हमारी ओर से बिल पर पूरा समर्थन होगा। मुझे खुशी होती है कि मेरी अपनी पार्टी में यह लागू है । इस संबंध में सरकार कब करती है, क्या करती है यह पता नहीं मगर हमने अपनी पार्टी में इसे अपने ढंग से जहां तक ऑफिस बियरर्स हैं, पार्टी की हमारी यूनिट्स हैं, कमेटियां आदि हैं, उनमें सबमें लागू कर दिया है।
            यहां शिक्षा की बात हो रही थी। मैं शिक्षा संदर्भ में इस बात को दोहराना चाहूंगा कि एक समय था कि लिटरेसी का अर्थ था - क ख ग घ और ड. का ज्ञान देना, ए, बी, सी, डी, से लड़के और लड़कियों को परिचित कराना। आज शिक्षित करने का लिटरेट करने का अर्थ समझना चाहिए। It has to be not only a familiarity with the alphabets, but also literacy has to mean IT literacy, has to mean computer literacy. कंप्यूटर से भी एक-एक बालक और बालिका को स्कूल के समय परिचित कराना। वैसे तो हम जानते हैं कि हमारे अपने परिवारों में बच्चे जानते हैं, हम बहुत बार नहीं जानते हैं, नहीं समझते हैं, लेकिन वे समझते हैं। यह होता है, यह अच्छी बात है, क्योंकि लिटरेसी का अर्थ वही हो गया और फोर्मली सर्व शिक्षा अभियान में उसे इंट्रोडय़ूस करना चाहिए। सर्व शिक्षा अभियान के माध्यम से हम गांवों में उसे जितनी अधिक मात्रा में पहुंचा सकें, उतना हमें लाभ होगा। वैसे तो सर्व शिक्षा अभियान का भी इसमें उल्लेख है। इसमें इस बात का संकोच नहीं हुआ है कि सर्व शिक्षा अभियान हमारे डा.जोशी ने शुरू किया था, एन.डी.ए. की सरकार ने शुरू किया था। लेकिन उसका इसमें उल्लेख है और मैं इसका स्वागत करता हूं साथ ही मैं यह सुझाव देता हूं कि इंफोर्मेशन टैक्नोलोजी का कितना उपयोग कहां-कहां हो सकता है, न केवल ई.गवर्नेन्स के लिए, न केवल हैल्थ केयर के लिए, न केवल सुरक्षा के लिए अपितु जहां-जहां भी आई.टी. का उपयोग हो सकता है, उसे करने की योजनाएं बननी चाहिए। हमने अपनी तरफ से, पार्टी की तरफ से आई.टी,.िवजन का एक डाक्यूमेंट जरूर बनाया है, उसका जितना उपयोग होगा, वह होगा।
            हां उसमें खास तौर पर बहुत समय से जो मेरे मन में बात थी, उसे आपने इस अभिभाषण में कहा है कि एक यूनीक आइडेंटिटी कार्ड देंगे, लेकिन उसकी व्याख्या इसमें नहीं की गई है, यूनीक क्या होगा। मैं चाहूंगा कि भले ही वह यूनीक हो, अच्छा है, लेकिन यह मल्टीपरपज जरूर होना चाहिए। We should not have to carry separate cards for everything. हर चीज के लिए अलग कार्ड, राशन के लिए अलग कार्ड, वोटिंग के लिए अलग कार्ड और पैन कार्ड आदि नहीं होने चाहिए। एक ही कार्ड होना चाहिए, जो यूनीक हो  और मल्टीपरपज हो, यह मेरा आग्रह रहेगा[BS22] ।
            खासकर सुरक्षा की दृष्टि से यह आइडैंटिटी कार्ड बहुत लाभकारी है। दुनिया के अधिकांश बड़े बड़े देशों में है। पहले-पहले कभी कभी बाकी देशों को देखकर मेरे मन में चिन्ता आती थी कि जिस देश में 100 करोड़ से अधिक लोग रहते हों, वहां हर आदमी के लिये आइडैंटिटी कार्ड कम्पलसरी करना कितना कठिन है और उसे बनाने में कितनी कठिनाई होगी? लोगों को भी कठिनाई होगी। इसलिये, तब से लेकर जब अभी इनफॉरमेशन टैक्नालाजी का आविष्कार हुआ है, कम्प्यूटर का निर्माण हुआ है  तब से लेकर अब तक यह चिन्ता मिट गई है। लोग कहते हैं कि विज्ञान के क्षेत्र में सब से पहले दो इनवैन्शन हुय़े - पहला व्हील का और दूसरा इलैक्ट्रिसिटी का लेकिन मैं मानता हूं कि हिस्ट्री का तीसरा सब से बड़ा इनवैन्शन इंटरनेट का है। इसलिये देश को प्रगति की ओर बढ़ाने में उसका पूरा उपयोग होना चाहिये। केवल मात्र अंग्रेजी में नहीं बल्कि सभी भारतीय भाषाओं में इसका विकास होना चाहिये।   Internet-based education. सब लैवल पर होनी  चाहिये।
            डा. गिरिजा व्यास ने बहुत ही भावुक होकर कहा कि कांग्रेस सरकार कैसे बर्दाश्त करेगी कि कोई व्यक्ति रात में भूखा सोये? यह बहुत अच्छी बात है, भाव बहुत अच्छा है। लेकिन मैं यूनिसैफ की एक रिपोर्ट पढ़कर चिन्तित हुआ जिसमें कहा गया कि The number of hungry in India increased from 209.5 million in 2005-06 to 230 million by the end of 2007-08. उसके लिये मैं किसी को दोष नहीं देता हूं लेकिन मैं यह जरूर कहूंगा कि यह चिन्ता का विषय है। इस चिन्ता के विषय को सारे हिन्दुस्तान को, केन्द्र सरकार को और सारी प्रदेश सरकारों को ग्रहण करना चाहिये। सब को मिलकर इस बात का जल्द से जल्द निश्चित रूप से प्रबंध करना चाहिये कि हिन्दुस्तान में एक भी बच्चा या व्यक्ति  रात में भूखा न सोये।
            अध्यक्ष महोदया, मुझे याद है कि पहली बार जब मैंने चुनाव के दौरान स्विस बैंकों में पड़ी हुयी भारत की पूंजी की बात की थी तो मेरी कैसी आलोचना हुई थी। एक सज्जन, जो यहां नहीं हैं, ने मुझे पत्र लिखा जिसमें मुझे कहा गया कि आप झूठे हो, असत्य कह रहे हो। मैंने वह सहन कर लिया लेकिन ग्रहण भी कर लिया। फिर मैंने कहा कि  It is not a question of dimension of the loot. लेकिन यहां की सम्पति ले जाकर विदेशों में जमा करा दी गई है क्योंकि उस पर टैक्स नहीं देना चाहता था, टैक्स इवेजन के कारण वह पैसा वहां ले गया । वह चोरी का पैसा था, भ्रष्टाचार से कमाया हुआ पैसा था ।  अब लूट कितनी है,यह डाइमैंशन का इश्यू है लेकिन फैक्ट यह है कि यह निर्विवाद है। मुझे इस बात की खुशी है कि सरकार ने इस निर्विवाद सत्य को स्वीकार किया है और सुप्रीम कोर्ट में एफिडेविट दिया है और 'हां ' कहा है कि सरकार वह पैसा वापस लाने के लिये कदम उठा रही है...( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : प्लीज सिट डाउन। रिकॉर्ड में नहीं जायेगा।
श्री लाल कृष्ण आडवाणी :  सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दिये एफिडेविट में इस बात को स्वीकार किया है। एक व्यक्ति जो पुणे में हवाला का काम करता है, उससे आई टी डिपार्टमेंट द्वारा 78 हजार करोड़ रुपया लेना बाकी है।[s23] 

13.00 hrs. [b24]  मुझे खुशी हुई कि इस इश्यू को कई पार्टियों ने समर्थन दिया। सीपीएम ने भी समर्थन दिया और जेडीयू ने भी समर्थन दिया। इतना ही नहीं, पोलिटिकल पार्टीज़ ही नहीं बल्कि कई सारे धार्मिक नेता जिनकी बहुत फॉलोइंग है - सब लोग जानते हैं कि स्वामी रामदेवजी जब योगासन करवाते हैं तो स्वामी रामदेवजी के कार्यक्रम में कितने हज़ारों लोग आते हैं और वे जब भी प्रवचन करते थे, इस स्विस बैंक में जमा भारतीय पूँजी का उल्लेख करना नहीं चूकते थे, हमेशा उल्लेख करते थे। मुझे अगर इस सरकार से थोड़ी शिकायत है तो इतनी है कि इसमें उल्लेख तो है कि हम इसके बारे में कार्रवाई करेंगे। ...( व्यवधान) है, मैंने तो सुना कल। उन्होंने कहा -

 “My Government is fully seized of the issue of illegal money of Indian citizens outside the country in secret bank accounts; it will vigourously pursue all necessary steps in coordination with the countries concerned.”   मैं इसका स्वागत करता हूँ, लेकिन मैं स्मरण कराना चाहूँगा कि पत्रकारों से बात करते हुए प्रधान मंत्री ने कहा वह मैंने टाइम्स ऑफ इंडिया के 25 अप्रैल के इश्यू में  पढ़ा कि He would include the matter of bringing back the black-money salted away in tax Heavens abroad, in his 100-day action plan. 100 दिन की जो उनकी कार्य योजना है, उसमें इस विषय को जोड़ेंगे और सौ दिनों की जो योजना इसमें पढ़ी, मैं कल सुनता रहा, तो उसमें जब मैंने नहीं देखा तो मैं थोड़ा चकित हुआ। मैंने कहा प्रधान मंत्री ने स्वयं इस बारे में कहा लेकिन सौ दिन वाली इस योजना में उसका उल्लेख नहीं हुआ। हो सकता है कि इनको कुछ कठिनाइयाँ लगती हों, मैं नहीं जानता सरकार में रहती हैं, लेकिन इसका क्लैरिफिकेशन होना चाहिए किWhat do you propose to do? How do you propose to do it? How vigourously are you going to pursue this matter? I regard it as important. Having been responded to by the Prime Minister himself, so far as the country is concerned and having made a formal affidavit even in the Supreme Court, I am sure that this question would be addressed.

           इसी संदर्भ में मैं एक और उल्लेख करूँगा कि इसमें बहुत सारी बातें हैं, लेकिन भ्रष्टाचार शब्द का कोई उल्लेख नहीं है टैररिज़्म है । टैररिज़्म के खिलाफ़ ज़ीरो टॉलरैन्स की बात भी चाकोजी ने कही। बहुत अच्छी कही। I wish that this zero tolerance approach had been adopted in respect of corruption also. वह जो गवर्नैन्स के संबंध में आपने बातें कही हैं सुधार की, उसमें करप्शन का ज़रूर उल्लेख होता और उस संदर्भ में भी जो रिकार्ड मेजॉरिटी मिली कांग्रेस गवर्नमैंट को राजीव जी के नेतृत्व में, वह रिकार्ड मेजारिटी क्यों चली गई उसका कारण भी एक करप्शन का ही इश्यू था जो बोफोर्स का कांड था, जिसके कारण वह सरकार चली गई और आपके तब के मंत्रिमंडल के एक सहयोगी भी आपसे अलग होकर आपके विरोधी हो गए।

             फॉरैन पॉलिसी की कुछ बातों का मैं ज़िक्र करूँगा । वह यह है कि आस्ट्रेलिया के संबंध में सारा देश चिन्तित है। बहुत चिन्तित है कि आस्ट्रेलिया में इस प्रकार की स्थिति क्यों पैदा हो रही है कि भारतीयों के प्रति इस प्रकार के अत्याचार और आक्रमण लगातार होते रहे और उस दिन टेलीविज़न पर मैं देख रहा था एक प्रदर्शन हो रहा था जिसमें पुलिस उनके साथ किस प्रकार व्यवहार कर रही थी, लड़कियाँ थीं, महिलाएँ थीं जो वहां पढ़ती थीं, उनको किस प्रकार से उठा उठाकर उनके साथ व्यवहार हो रहा था, वह बहुत चिन्ताजनक था। इसीलिए देश में इसके बारे में बहुत चिन्ता है। आपने अपनी चिन्ता जताई है उनको। उन्होंने भी जवाब दिया है। लेकिन मुझे लगता है कि किसी न किसी को वहां जाना चाहिए। आप एक डैलिगेशन यहां से भेज दें, पार्लियामैंट का एक डैलिगेशन चला जाए और वहां जाकर वहाँ पर बात करके आए तो अच्छा होगा। वे वहाँ की स्थिति भी समझकर आएंगे। उससे देश की चिन्ता निश्चित रूप से प्रकट होगी।

            नेबरहुड का ज़िक्र किया गया है। नेबरहुड में पिछले दिनों में स्थिति खराब ही होती गई है। ठीक है कि नई सरकार आई है नेपाल में।[b25]  माधव जी,  जो नेपाल के नये प्रधान मंत्री बने हैं, मैं उनको बधाई देता हूं। मैंने व्यक्तिगत रूप से भी उनको बधाई दी है। मैं आशा करता हूं कि एक नया अध्याय शुरु होगा, जिस अध्याय में भारत और नेपाल के जो परम्परागत संबंध रहे हैं, उनके आधार पर ही हम आगे बढ़ेंगे। विगत दिनों में ऐसा सोचा गया था कि जैसे मानो चीन का प्रभाव बढ़ रहा है, वह स्थिति चिन्ताजनक थी।

            मैं आशा करता हूं कि अब जो नयी सरकार आएगी, उसमें यह स्थिति बदलेगी। मुझे शिकायत है कि बंगलादेश के बारे में और वहां से लगातार हो रहे इल्लिगल इमीग्रेशन के बारे में अभिभाषण में कोई उल्लेख नहीं है। वर्षों से हम इसके प्रति आंखें मूंद करके बैठे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने  आई एम डी टी एक्ट के विषय को लेकर इस सरकार की भर्त्सना की है,, उन्होंने यहां तक कह दिया - You are in a way collaborating with foreign aggression. उसके बाद भी कोई कदम नहीं उठाए गए। वैसे तो वहां नयी सरकार आई है और इस सरकार की हमारे साथ अधिक मित्रता है। चीन के साथ सामान्य संबंध बनाने की प्रक्रिया चलती रहनी चाहिए, लेकिन इस प्रक्रिया को चलाते हुए ऐसा एहसास कभी नहीं देना चाहिए कि we are bending backwards to satisfy them. पिछले दिनों जब यह खबर आई कि चीन पाकिस्तान के न्यूक्लियर प्रोग्राम को और असीस्टेंस दे रहा है। यह एक ऐसा अवसर था कि जब भारत में चिन्ता पैदा होती थी। जिस प्रकार से लगातार चीन के लोग अरुणाचल के बारे में बोलते रहे हैं, वे सारी की सारी चीजें ऐसी हैं कि जिनके बारे में हमें चुप नहीं बैठना चाहिए। हमें  हर मामले में  सही प्रतिक्रिया देनी चाहिए और मजबूती दिखानी चाहिए। विदेश के मामले में मुझे इतना ही कहना है।

            मैं एक बार फिर से डॉ. मनमोहन सिंहजी, प्रणब मुखर्जीजी और श्रीमती सोनिया गांधीजी को बधाई देकर यही कहूंगा कि देश देखेगा कि , आपकी सरकार ने जो विश्वास लोगों को दिया है, उस विश्वास के अनरूप आप कैसे कार्य करते हैं। देश और संसद भी इन सारे कामों को मोनिटर करती रहेगी। मैं एक बार पुन: इस धन्यवाद प्रस्ताव का समर्थन करता हूं।                                                         

 

MADAM SPEAKER: The House stands adjourned to meet again at 14.10 p.m. 13.07 hrs. The Lok Sabha then adjourned for Lunch till Ten Minutes past Fourteen of the Clock.

   

14.12 hrs. The Lok Sabha re-assembled after Lunch at Twelve Minutes past Fourteen of the Clock.

 

(Shri Basudeb Acharia in the Chair)   MOTION OF THANKS ON THE PRESIDENT’S ADDRESS – Contd.

MR. CHAIRMAN : The House may now continue the discussion on the Motion of Thanks on the President’s Address.

 

            Shri Sharad Yadav.

श्री शरद यादव (मधेपुरा)  :  सभापति जी, मैं राष्ट्रपति जी के अभिभाषण के हक में बोलने के लिए खड़ा हुआ हूं। मैं उनके अभिभाषण का अपनी सारी बातों के साथ जरूर समर्थन करता हूं। राष्ट्रपति जी ने अपने अभिभाषण में पूरे देश की आर्थिक गैर-बराबरी या सामाजिक विषमता को लक्ष्य कर के सभी चीजों को स्पर्श करते हुए जिक्र किया है। यह राष्ट्रपति जी का अभिभाषण नहीं है, बल्कि वास्तव में यह सरकार की नीतियों को बताने वाला भाषण है।

            महोदय, मैं पांचवीं लोक सभा में आया था और अब यह 15वीं लोक सभा है। प्रत्येक सरकार, हर वर्ष अपनी नीतियों का बखान करते हुए राष्ट्रपति जी के मुख से अभिभाषण कराती है। यह वाजिब भी है, लेकिन मैं अपनी बात को शुरू करने से पहले एक बहुत पुरानी बात कहना चाहता हूं। जब भारत में अन्तरिम सरकार बन गई, तब महात्मा गांधी जी ने 1943 में, उस समय की जो अंतरिम स[RPM26] रकार थी,उसको देख करके उन्होंने अपने लिखित वक्तव्य में कहा- याद रखना, आजादी करीब है, वह लखनऊ में, अहमदाबाद में, दिल्ली में आएगी। सरकारें बहुत जोर से यह जरूर कहेंगी कि हमने यह कर दिया, हमने वह कर दिया। मैं अर्थशास्त्री नहीं हूं, लेकिन मेरी व्यावहारिकता किसी भी अर्थशास्त्री से कम नहीं है। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद भी जब सरकार आएगी, तो उस सरकार के कहने पर मत जाना, इस देश के किसी हिस्से में एक किलोमीटर चल लेना, हिन्दुस्तान का सबसे लाचार, बेबस और बनिहार मिल जायेगा, बनिहार का मतलब डेली वेजिज़ होता है, अगर उसकी जिंदगी में कोई फर्क न आया हो तो उसी दिन से, उसी क्षण के बाद वह सरकार चाहे दिल्ली में हो, अहमदाबाद में हो, लखनऊ में हो, उन्होंने तीन सरकारों का जिक्र किया था, उसका कोई मतलब नहीं है।

            62 वर्ष हो गये, मैं यह नहीं कह रहा कि यह सरकार सारी लाचारी, बेबसी और गुरबत के लिए जिम्मेदार है। हम भी सरकार में रहे, हमारे भी 5-5 प्राइम मिनिस्टर रहे, लेकिन 11 महीने, 8 महीने, 9 महीने रहे। एन.डी.ए. की सरकार भी रही। अब 2004 और 2009 में भी यू.पी.ए. की सरकार है। लेकिन मैं यह निवेदन करूं कि चूंकि इस दुनिया में जीत प्रभावित करती है, लेकिन इस देश में वह गजब प्रभावित करती है। आप जीत के बाद किसी चीज की किसी तरह की बहस नहीं कर सकते। ऐसा जीत का उन्माद कहीं नहीं होता। जीत की खुशी होनी चाहिए, लेकिन वह उन्माद में बदल जाये, तो वह कौम, वह देश पीछे हो जाता है, वह आगे नहीं बढ़ता है।

            मैं मानता हूं कि आपको बहुमत मिला है, उसकी जरूरत है। पहले जितने सदस्य जीते थे, उससे बढ़कर अब 206 हो गये, लेकिन ऐसा लग रहा है, जैसे कोई दो तिहाई बहुमत आपको मिल गया है और आपमें से बहुत से साथी हैं, जब आडवाणी जी बोल रहे थे तो चिदम्बरम जी जिस ताव में खड़े हुए, याद रखना, जो सरकार में है, वह तो सामर्थ्यवान और पुरुषार्थी है, सब कुछ उसके पास है, वह जब गुस्सा होता है तो जरूर उसका अहंकार झलकता है। पावर में, सत्ता में कोई अहंकार चल जाये तो वह भी आप 206 हैं, 272 की सरकार नहीं चलती है, आपको उसके लिए 80 और चाहिए। वे 80 जो हैं, वे सब के सब कांग्रेस पार्टी से कोई अलग नहीं हैं। मेरी पार्टी भी हो, चाहे बी.जे.पी. हो, वामपंथियों को छोड़कर इस देश में कोई राज में हिस्सेदारी किए बगैर रहता नहीं है। पिछली बार तो आपको 62 लोगों का, बगैर ताकत की हिस्सेदारी किए, अंत्री, मंत्री और संत्री के बगैर 62 लोगों का समर्थन था। इस समय तो 80 आदमियों की आपको बाहर से जरूरत है और जो बाहरी लोग हैं, उन्होंने हमारे साथ भी काम किया है, वर्षों हमारे साथ काम किया है। आप भी उनको जानते हैं, लेकिन हम भी उनको बहुत जानते हैं। जो आपके 80 आदमी हैं, वे सब बाहर से हैं, इसलिए आपका जो बहुमत है, जैसा आपने महसूस कर लिया, क्योंकि आप सोच रहे थे और 140 अखबार वाले कह रहे थे।[R27]  कोई ऐसा नहीं कह रहा था। कांग्रेस पार्टी को इतनी सीटें मिलेंगी और यह दो सौ सीटों को पार कर जाएगी, इसे हम भी नहीं मानते थे। इसका मतलब यह नहीं है, क्योंकि यह 540 सदस्यों का सदन है।   

            गिरिजा व्यास जी सदन में नहीं हैं और चाको जी, जो केरल के हमारे पुराने मित्र हैं, उन्होंने अपनी सामर्थ्य और पुरूषार्थ से पूरी तरीके से अपनी बात रखी। गिरिजा जी तो शेरो-शायरी कर रही थीं।  जो सरकार के हक में हो सकता है, वह सब तर्क दिए, लेकिन बात यह है कि ट्रंसलेशन से आविष्कार नहीं होते हैं। हिंदुस्तान के जिस सदन में मैं खड़ा हूं, इसमें एक चीज भी हमने आविष्कार करके नहीं दी। यहां की मल्टिपल वाइस, जो बिजली जल रही है, जो आर.सी. सी. है, इस सदन में जब हम आए हैं, तो इन चीजों को किसी न किसी ने आविष्कार करके दिया।  इस देश में आविष्कार हजार-दो हजार वर्ष से मृत्यु प्राप्त कर गया। सौ-डेढ़ सौ साल से तो यह ट्रंसलेशन में चल रहा है।     

            मित्रो, मैं खुद इंजीनियर हूं, यदि भाषा का बंधन नहीं होता तो मैं इस सदन में नहीं होता।  मैं किसी लेबोरेटरी में खड़े होकर कोई दूसरा काम कर रहा होता।  लेकिन मुझे उस काम को करने में बाधा पड़ी।  मैं गांव के एक स्कूल से आया था, इसलिए अंग्रेजी भाषा को समझने में मुझे परेशानी आयी। कोई भी भाषा बुरी नहीं होती, लेकिन भाषा का ज्ञान अलग है और आविष्कार अलग है, मेंशन अलग है।  हम मुट्ठी भर लोगों के दुनिया में आगे बढ़ने से इतना प्रसन्न हैं कि आजू-बाजू देखना भी हमें गवारा नहीं है।

            चुनाव के जरिए मापदंड होते हैं, लेकिन इसमें संपूर्ण तरह से मापदंड नहीं हो सकता है। मैं ही हिंदुस्तान की पार्लियामेंट में पिछले दस बार से हूं, कभी इधर से तो कभी उधर से।  मैं नहीं कहता कि इस देश में जब हमारी सरकार बनी तो जिन समस्याओं के बारे में मैं कह रहा हूं, उसने उसका निदान कर दिया।  हम अपने एहसास और अपनी ईमानदारी से भी प्रयास न करें, उसे महसूस न करें, इसलिए कभी-कभी तो हमारे मन में भी यह बात आती है कि इस सदन में रहने का कोई मतलब और अर्थ नहीं है। हमारे लिए तो सुकून हो सकता है, लेकिन इस देश में जो पसीना बहाता है और दौलत बनाता है, उसकी जिंदगी साठ वर्ष में बद से बद्तर हो गयी है, वह कभी बदली नहीं।  मैं यह नहीं कह रहा हूं कि आपकी सरकार इसके लिए जिम्मेदार है। 

            मित्रों, मैं इस सदन में निराशा प्रकट करने के लिए खड़ा हूं। कभी-कभी निराशा का भी जो कर्तव्य होता है, उसको ध्यान में रखा जाता है, सच खड़ा रखा जाता है।  यह अजब-गजब देश है, यहां हजारों वर्ष से सच और ईमान ऊपर नहीं आ पाता। अभी एक महीने पहले चुनाव हुए। हम सभी ने जाति को देखकर टिकट दिया, हमने भी दिया। हम इसे मान तो रहे हैं, लेकिन ये इस बात को 60 वर्ष से मानने को तैयार नहीं।  हमारा भारतीय समाज खंड-खंड है।  जो बहुसंख्यक समाज है, उसमें कोई चमड़ी का रिश्ता नहीं है, वह खंड-खंड है।  इस सदन से बाहर निकलेंगे तो हम जातियों की बात चाटेंगे, सदन के भीतर आएंगे, तो पाखंड करेंगे। [p28]   हम टिकट बांटेंगे, जाति को देखकर बांटेंगे और यह कोई बुरी बात नहीं है। जाति हकीकत है, वह अपनी तरह काम करती है। मैं हिन्दुस्तान की लोक सभा में तीन बार जीतकर आया हूं। कोई छोटी जाति का आदमी जीत जाएगा? इंदिरा जी जीतीं, अटल जी जीते। कोई छोटा आदमी लुहार, बढ़ई या कुम्हार कभी जीत जाएगा। हम संख्या में हिन्दुस्तान के पचास फीसदी लोगों को देख नहीं सकते।

            इस दस्तावेज में सामाजिक विषमता जो सबसे बड़ी बीमारी है, जिससे हजारों वर्षों से ज्ञान, तरक्की डैड कर गई है, आप ट्रंसलेशन में देश चला रहे हैं। अंग्रेजी बहुत अच्छी बोलने से, मैं जब ओथ देख रहा था तो हैरान था यानी अमरीका और युरोप के असैंट के साथ किसका असैंट मिल रहा है, इसका कम्पीटिशन चला हुआ था। भाषा जाननी चाहिए। श्री जयपाल रेड्डी अंग्रेजी भाषा जानते हैं। लेकिन भारतीय भाषाओं के 90-95 फीसदी नौजवान, चाहे वे तेलगु के हैं, चाहे तमिल के हैं, चाहे बंगाली हैं, चाहे मराठी हैं, चाहे हिन्दुस्तानी हैं, साठ वर्षों में उनके रोजगार का दायरा घटता गया है। वे मुट्ठीभर लोगों की सुख-सुविधा से धकेले जाते रहे हैं, अलग किए जाते रहे हैं। इस दस्तावेज में उनका कोई जिक्र नहीं है। बेकारी, बेरोजगारी को घटाएंगे, कैसे घटाएंगे। आपने पांच वर्षों में कहां घटाई? यदि आप सही है तो आपकी सरकार द्वारा अर्जुन सेन गुप्ता कमेटी बनी थी। सभापति महोदय, आप जानते हैं, श्री अर्जुन सेन गुप्ता आपके सूबे के हैं। आपका प्लानिंग कमीशन है। वह कहता है कि गरीबी 23 फीसदी है, 24 फीसदी कहता है। श्री अर्जुन सेन गुप्ता कहते हैं कि 78 प्रतिशत लोग, 80 में से 2 कम, 20 रुपये रोज की उन पर लिमिट लगाई गई है, कई लोग तो 9 रुपये रोज वाले हैं, कई 12 रुपये रोज वाले हैं। यह गरीबी, 62 वर्षों की आजादी, आपके लिए ही नहीं, हमारे लिए भी, यह आजादी किसके लिए है। जो हिंदुस्तान का अल्पसंख्यक समाज है, आप स्कूल बढ़ा रहे हैं, शिक्षा बढ़ा रहे हैं। इस देश में दस तरह की शिक्षा है। मेरे पास वक्त नहीं है। एक शिक्षा वह है, जो मैंने गांव में प्राप्त की। वहां तख्ती भी नहीं थी, पट्टी भी नहीं थी। मैं नदी पार करके जाता था। मेरे बेटे और बेटी एक किलोमीटर की दूरी पर स्कूल जाते हैं। मेरा और उसका मुकाबला करवा लें। मैं नहीं सोचता कि जो इनवायरमैंट है, वही प्रिविलेज है। वे बहुत बड़े-बड़े लोग हैं। आजकल कहते हैं कि जनरेशन चेंज हो गई है। अरे मित्रों, गमलों में कभी खेती नहीं होती। हिन्दुस्तान और दुनिया के लोगों का पेट भरने के लिए वसुंधरा में खेती होती है, गमलों में कोई खेती नहीं होती। आप इस देश की जनरेशन चेंज कर रहे हैं, गमलों में खेती कर रहे हैं।  ठीक है, चुनाव जीत जाते हैं तो इस देश में बहस बैन हो जाती है। एक बार नहीं होती, कई बार होती है। लेकिन मैं आपसे विनती करूं कि बेकारी और बेरोजगारी भाषा का सवाल है। मैं राष्ट्रपति जी को धन्यवाद देता हूं। महाराष्ट्र का व्यक्ति जब हिन्दुस्तानी बोलता है तो बहुत मीठी बोलता है। लेकिन हमारे यहां सब चीज टोकनिज़्म है। टोकनिज़्म की हिन्दी मुझे समझ में नहीं आ रही है। टोटका कहेंगे या क्या कहेंगे। टोकनिज़्म की हिन्दी क्या होगी? टोकनिज़्म का करैक्ट अर्थ टोटका हो सकता है। गांवों में टोटका करते हैं कि इलाज तो होगा नहीं, टोटका कर दें। यह टोटका है, टोटका कर रहे हैं। कई बार सरकार में रहने वाला व्यक्ति भाषा जानता नहीं है लेकिन फिर भी वह बुद-बुद करके भाषा बदलता है क्योंकि वह बेचारा जानता है कि इससे अपना कैरियर बनता है और कांग्रेस में यह कुछ ज्यादा ही हो गया है। भारतीय जनता पार्टी में भी बहुत बड़ी बीमारी घुसी हुई है।[NB29]                          मैंने कहा कि ट्रंसलेशन से कोई आविष्कार नहीं होता।  आपने हजारों वर्षों में कोई आविष्कार किया हो, तो एकाध का आप नाम बताइये। हमारे बाप-दादा जब अपनी भाषा में सोचते थे, तो उन्होंने न्यूमेरिकल ग्रुप खोजा, जीरो खोजा। इस दुनिया में हमारा पुरखा वह शानदार आदमी है जिसने विज्ञान की नींव को सबसे पहले रखा। लेकिन आज हम कहां खड़े हैं, किस तरह खड़े हैं? आपने इस अभिभाषण में कई चीजों का उल्लेख किया है। मैं विरोधी दल के नेता आडवाणी जी को बहुत बधाई दूंगा, क्योंकि उन्होंने पहले जो बात कही, वह सहमति के दायरे में थी। हम सहमत तभी होते हैं जब टोटेलिटी भी ठीक होगी। उसका कारण है कि अगर मैं  कहीं सहमत हो जाऊं, तो आपका हाथ इतना लम्बा है कि आप उसी को रगड़ते रहेंगे। आडवाणी जी की सब बातों  के बारे में, मैं नहीं कह रहा, लेकिन उन्होंने अपने वक्तव्य में एक बात कही, जो हमारे देश में बहुत गहरी बीमारी है, उन्होंने उसका जिक्र किया। भारत में जो दो नम्बर के लोग हैं चाहे वे ब्यूरोक्रेट्स हों, कार्पोरेट्स हों या सदन में बैठे हुए राजनीतिक लोग हों,  उन सबका दो नम्बर का पैसा बाहर जमा है। हो सकता है कि हमारे आंकड़े ठीक न हों, आडवाणी जी के आंकड़े ठीक न हों और हमारे पास आंकड़ा ठीक होना भी ठीक नहीं है, क्योंकि हम ओपोजिशन में हैं, विरोध में हैं। हमारी तो सीमित क्षमता है जबकि हाथ तो आपके लम्बे हैं। इस बात को एक साल आठ महीने हो गये। पहले कानून था, आप कहते हैं एनडीए की सरकार के जमाने में आपने इऩ एकाउंट्स को क्यों नहीं खोला? आपके जमाने में स्विटजरलैंड में स्विस बैंक का सीक्रेसी एक्ट था। हमारे जमाने में  कहा जाता था कि उनको फांसी लगाओ। फांसी नहीं, जो चाहो वह करो। लेकिन आपके जमाने में वह एक्ट था।

            सभापति महोदय, इस देश में गेहूं को घुन के साथ पीसा जा रहा है यानी सबको पीसा जा रहा है। राजनीतिक लोगों के बारे में जिस तरह से प्रचार-दुप्रचार चला हुआ है क्योंकि उनके बारे में प्रचार भी है और दुप्रचार भी है कि राजनीति में सब खराब लोग आ गये हैं। इसमें कोई आदमी अच्छा नहीं होता। यह  इस देश के बाजार की ताकत बढ़ने के बाद ऐसा हो रहा है। यही सदन है, मैं पांचवी लोक सभा में आया था। मैंने यहां ऐसे-ऐसे शानदार लोग देखे हैं। जब मधु लिमये जी चलते थे, तो पार्लियामैंट चलती थी। जब वामपंथी लोगों की तरफ से श्री ज्योतिर्मय बसु बोलते थे, अटल जी बोलते थे, श्याम नंदन मिश्रा बोलते थे, मधु दंडवते बोलते थे, हिन्दुस्तान की राजनीति  में जितनी त्याग और तपस्या है, उतनी दूसरी किसी लाइन में नहीं है। मैं इसलिए नहीं कह रहा हूं कि मैं राजनीतिक आदमी हूं, लेकिन पूरे देश भर में एक प्रचार है कि राजनीति में ऐसे लोग हैं। यह पूरा खेल बाजार का है।  यह बाजार आज नहीं आया है, बल्कि हजारों वर्षो से बाजार है। बाजार कोई बुरी चीज नहीं है, लेकिन बाजार ऐसी चीज हो जाये जिससे सब तरह की चीजों का इलाज हो जाये, ओढ़ने-बिछाने, खाने पीने से लेकर बेकारी और बेरोजगारी को दूर करने की चीज हो जाये, तो बात बिगड़ जायेगी जो बिगड़ गयी है। गेहूं के साथ घुन पिस रहा है। आज दो साल पूरे होने जा रहे हैं जब स्विस बैंक में एक खुलासा हुआ है। वह खुलासा क्या है? आपको वक्तव्य में पहले सौ दिन में सबसे पहले यही चीज देनी चाहिए। वहां जो लिस्ट है, उसे आप निकालिए। उस लिस्ट में जिन लोगों का नाम है, उनको आप घोषित करो, जिससे दूध का दूध और पानी का पानी हो जाये। कौन साहूकार है और कौन लुटेरे हैं, किसने इस देश  को  तबाह और बर्बाद किया है, उनका पता लग जाये। आप बाद में पैसा लाइये, लेकिन अभी तो यह काम आप कर [MSOffice30] ही सकते हैं।[MSOffice31]              यह काम किसी कमीशन से नहीं हो सकता है।  हिंदुस्तान की सबसे बड़ी बीमारी है लूट। हमारे यहां कहावत है कि मन चंगा तो कठौती में गंगा। इस कहावत में सच्चाई है।  रिक्शेवाले का मन प्रसन्न नहीं होता, जो गिट्टी-मिट्टी तोड़ता है उसका मन खुश नहीं होगा। घर चंगा तो कठौती में गंगा है इस कहावत का मतलब। यह बहुत सीधी बात है।  मैं कहना चाहता हूं कि 100 दिनों में बड़ा काम आप करेंगे, भ्रष्टाचार और लूट मची है जितने काम आपने बनाए हैं। हमारी सरकार में हमने कहा था 23,000 करोड़ रूपए से गरीबी रेखा से नीचे वालों को अनाज देंगे, गरीबी रेखा से नीचे, बीपीएल लोगों को। लेकिन मैं अपने इलाकों से जानता हूं कि लूट होती है। हम अनाज वहां नहीं दे पा रहे हैं, वह ब्लैक होता है। आपका मिट्टी का तेल जो गरीबी की झोली में जाता है, वह भी नहीं दे सके इमानदारी से। क्यों नहीं दे सके? जो गरीब है उसका नाम बीपीएल में नहीं आता है और जो बीपीएल में नहीं हैं, उनके बहुत से लोगों के नाम आ जाते हैं। मैं फूड मिनिस्टर रहा हूं, मुझे मालूम है। एनडीए की सरकार में हमने चार बार बैठक की। आपकी पार्टी के लोग इसके लिए मेरे पास कई बार आए, कांग्रेस पार्टी में बहुत ऐसे लोग हैं जो गरीबों के बारे में, देश की हकीकत के बारे में सोचते हैं। मैं गरीबी और देश के बारे में बात कह रहा हूं। 80-85 फीसदी लोगों से देश बनता है और देश बनता है इसलिए कि हम दुनिया भर में देखकर अपनी पीठ न थपथपा लें कि हमारा बहुत कमाल है, हमने ये कर दिया, हमने वह कर दिया। सब नकल की है आपने। जो विज्ञान है उसमें कोई खोज नहीं की आपने। नकल करना कोई बुरी चीज नहीं है। चीन और  जापान ने पूरी खोज नहीं की है, नकल पर आगे बढ़ हैं, लेकिन अपनी भाषा के बल पर। हमारे बाजू में चीन है, हम सब तरफ देखते हैं, लेकिन उसकी तरफ नहीं देखते हैं।

सभापति महोदय : आपकी पार्टी से एक अन्य माननीय सदस्य को अभी बोलना है।

श्री शरद यादव : महोदय, मेरे पास अभी समय है।

            महोदय, हम चीन की तरफ नहीं देखते हैं कि हम लोहा कितना पैदा कर रहे हैं और वे कितना कर रहे हैं। अभी हमने न्युक्लियर डील की, चीन ने न्युक्लियर डील नहीं की। उसका पावर जेनरेशन 8,40,000 मेगावाट है और आपका पिछले 60-62 साल बाद पावर जेनरेशन 1,47,402 मेगावाट है।  कहां हैं आप?

            आप हमेशा टोकनिज्म पर जोर देते हैं। टोकनिज्म के बारे में कहा गया कि महिला आ गयी। महिला रिजर्वेशन पर बहुत लोग बोले हैं। मैं अंत में अपनी बात को समाप्त करते हुए कहना चाहता हूं कि इसी देश में हम दुर्गा बनाते हैं, सीता बनाते हैं, काली बनाते हैं, सावित्री बनाते हैं, कौन कहता है महिला रिजर्वेशन, हम कहते हैं सौ फीसदी करो। लेकिन क्या इसे भारत की हकीकत को छोड़ कर करेंगे और कहेंगे कि सभी लोग सहमत हो जाओ? इस देश में चाहे ब्युरोक्रेसी हो, चाहे मीडिया हो, चाहे सरकारें हों, सिर्फ सदन में थोड़ा बहुत चेहरा बदला है। गरीबों के हाथ में वोट आया है तो यहां हर तरह का इंसान, हर बिरादरी का मामूली आदमी यहां आ जाता है। आप 183 सीटें कर रहे हैं, आप दिल्ली से रिजर्वेशन से कर रहे हैं। मैं आपसे कहूं कि सीता से लेकर इस देश में कितनी नारियां है जिनके बारे में दिन भर महिलाओं को बताया जाता है। हिंदुस्तान की मां गुलाम है जाति व्यवस्था के कारण। हिंदुस्तान की मां आजाद हो सकती है, हिंदुस्तान की सभी बीमारियां मिट सकती हैं, तोड़ो जाति को, हम सारे रिजर्वेशन वापस करेंगे।  जाति तोड़ो, जाति बंधन करके मुट्ठी भर लोग इस देश को हजारों वर्ष से चला रहे हैं। इस लोकतंत्र में हम लोग यहां कुछ संख्या में आ गए। आपके दिल में दर्द है, हो सकता है आपके मन में न हो, लेकिन यह महिला रिजर्वेशन इस देश में आप शूद्रों और अति शूद्रों की संख्या घटाने के लिए लाए हैं। शरद यादव के बोलने में दिक्कत है। इनकी मीडिया और इनकी मेहनत, इनकी ओर से कोई आंदोलन होता, धरती से कोई आंदोलन होता जैसा जयप्रकाश का आंदोलन था।[R32]              कोई धरती से आंदोलन होता, जय प्रकाश जी जैसा आंदोलन होता, वैसा कोई दूसरा धरती से जुड़ा आंदोलन होता, तो आप जरूर करते। लेकिन बिना आंदोलन के कुछ महिलाएं इकट्ठी हो जाएंगी और कहेंगी कि महिलाओं को आरक्षण चाहिए। हमारे पास संख्या भले न हो, लेकिन मैं कहना चाहता हूं कि जैसे सुकरात उसूलों के लिए लड़ते लड़ते  जहर खाकर मर गया, मैं भी उसूलों के लिए लड़ते लड़ते मरने को तैयार हूं । सच्चाई यह है कि इस देश में दब-कुचली 80-90 प्रतिशत महिलाओं का गला काटकर ये महिला आरक्षण लाना चाहते हैं। इसलिए मैं आपसे विनती करूंगा कि इस देश में सावित्री और सीता तो प्रतीक नारी हैं, लेकिन इस देश की सबसे तेजस्वनी महिला द्रौपदी का कोई नाम नहीं लेता। मैं कहना चाहता हूं कि जो यह जाति व्यवस्था है और जो यौनावस्था का कांसेप्ट है, उसके चलते उसे गुलाम बनाकर रखा गया है। इसलिए जाति तोड़ो, महिलाओं का आरक्षण अपने आप सामने आ जाएगा। द्रौपदी जैसी तेजस्वनी महिला ने किसी अन्याय के सामने सिर नहीं झुकाया, किसी बाधा या किसी जगह समझौता नहीं किया, फिर भी वह प्रतीक नारी नहीं है। उसमें 99 गुण थे, सिर्फ वह पतिव्रता नहीं थी, उसके पांच पति थे। सिर्फ हिन्दुस्तान की औरत को पतिव्रता के साथ वफादार होना चाहिए, ठीक बात है, लेकिन यह वफादारी हिन्दुस्तान की आधी मां और आधी औरत को गुलाम बना दे, उसे पूरी तरह ज़जीरों में जकड़ दे, तो उसे तोड़े बिना महिलाओं के आरक्षण से उनकी आजादी हो जाएगी, यह वास्तविकता नहीं है। केवल किसी महिला को अध्यक्ष या राष्ट्रपति बनाने से ही काम नहीं चलेगा, यह टोटका है। हम इससे कभी सहमत होने वाले नहीं हैं। हिन्दुस्तान की औरत तो कैद है शूद्रों की, कैद है ज्यादा पतियों की, ज्यादा शराब पीने वाले पतियों की, उनके द्वारा सताई जाती है इसलिए पहले इसे लिबरेट करना चाहिए। हम कामन सिविल कोड की बात करते हैं, क्यों नहीं हम मुस्लिम औरतों को मौका देते। इससे बड़ा मौका और क्या होगा कि हम उन्हें अवसर दें।

            सभापति जी, जब इस विषय पर बहस होगी, तब हम अपनी बात कहेंगे। मैं अभी इतना ही कहना चाहता हूं नारायण स्वामी जी कि आपने जो इसमें लिखा है, वह भजन है, उससे स्वर्ग जाएंगे या नर्क जाएंगे, यह पता नहीं चलता। लेकिन मैं इतना कहना चाहता हूं कि सिर्फ भजन से देश नहीं बनता, सार्थक तरीके से और साफ आचरण करने से देश बनता है। गांधी जी बुत नहीं हैं, अम्बेडकर जी बुत नहीं हैं, उनके विचारों को मार कर हम हिन्दुस्तान को आगे बढ़ा पाएंगे, यह सम्भव नहीं लगता। हमने उन्हें मार दिया है, उन्हें गिरा दिया है, उन पर मिट्टी डाल रहे हैं। हम गांधी जी, लोहिया जी, जय प्रकाश जी, चरण सिंह जी और कबीर के विचारों को नहीं अपना रहे हैं। मैं तो यह कहना चाहता हूं कि कबीर से बड़ा आदमी दुनिया में और कोई नहीं है। सभापति जी, आप जिस पार्टी से वास्ता रखते हैं, वह मार्क्सवाद को समझाने के लिए पूरा दास केपिटल का पोथा लिखती है, तब कहीं मार्क्सवाद समझा सकती है। लेकिन कबीर जी ने सिर्फ एक वाक्य में ही यह कह दिया है-

                        साईं इतना दीजिए जा में कुटुम्ब समाए                          न मैं भूखा सोऊं, न साधु भूखा जाए।

 

यही बात दास केपिटल में कही गई है। इसलिए इन लोगों के विचारों को हम यदि भजन और उन्हें बुत बनाकर रखेंगे, देश नहीं बन सकता। उनके विचारों को जमीन पर उतारना है तो सबको सच्चा आचरण करना पड़ेगा।

            मैं सरकार से यही विनती करूंगा कि आपको मौका मिला है, तो आप इससे ऐसी छेड़खानी न करें, जिससे अधूरी बात ही हो पाए और जो आपको खा जाए। यह सरकार आपके लिए शेर की सवारी है, सम्भल कर चलें। हम तो विरोध में हैं और विरोध में हैं तो पूरी तरह से विरोध में हैं।

            मैं इन्हीं शब्दों के साथ राष्ट्रपति जी के अभिभाषण का समर्थन करता हूं। उन्होंने इस बार हिन्दी में भाषण दिया। पिछली बार अंग्रेजी में दिया था। मैं उनसे कहूंगा कि आप अच्छी हिन्दी बोलती है इसलिए हिन्दी बोलें तो ज्यादा अच्छा रहेगा। इसी के साथ मैं उनको धन्यवाद देते हुए अपनी बात समाप्त करता हूं।

SHRI  B. MAHTAB (CUTTACK): Thank you, Mr. Chairman, Sir, for allowing me to participate in this discussion relating to the Vote of Thanks on the President’s Address.

            Hon. President’s Address  to both the Houses of Parliament quite understandably reiterates the UPA Government’s commitment to the pursuit of the same set of objectives, policies and programmes pursued since 2004.  After all, every Government that gets re-elected, a rare phenomenon in Indian politics  in recent decades,  believes that electoral success is due to its performance. 

            Hon. President has laid down  an agenda for 100 days and the next five years.  It is an impressive wish list.  If half of its ambitious charter is fulfilled, it will definitely change the Indian society.  The test, therefore, will lie, of course, in its implementation.  The welfare programmes will be expanded.  But it necessitates a Budget that can only come from the surpluses generated by high growth.

            There were many plans and programmes, which were not translated into work  during 2004 to 2008, be it in the finance sector or the National Knowledge Commission.   Again, all these find mention in the President’s Address. Again, the Government has focussed on areas such as urbanisation and administrative reforms including improvement in delivery of public  services.

            Hon. President has laid  stress on institutionalising  transparency  and public accountability.  There would be independent Evaluation Office. There would be Annual Reports  to the people on education, health, employment, environment and infrastructure.  These are proposals, which everybody would welcome.  Perhaps, the Government realises  where its real stumbling block is.   Recently, a Hong Kong based consultancy  has placed India among 12 countries in terms of quality of bureaucracy.

The Government is one of the target areas that has been listed in the President’s Address.   But the plans outlined are suitably very vague.  Unless  the hon. Prime Minister overcomes his hesitation in carrying out  deep reforms in the bureaucracy, nothing much can be expected.

A lot has been said to strengthen existing schemes  for the poor  by creating a new Food Security  Scheme that would guarantee  every poor family 25 kilogram of rice or wheat per month at Rs. 3 per kilogram.  The cost, some says,  may exceed Rs. 50,000 crore per annum. But what is the delivery mechanism?  Within 100 days, 25 specific measures are going to be taken, and one of it is to have target identification cards, that would substitute and replace the Below Poverty Line cards list. But what mechanism does the Government have in place today to complete it within 100 days?   One job card is there for the NREGA. The proposed Food Security Act would also  create another new card. How many cards the poor would have? These goals are not bad by themselves. But there would be two subsequent problems.  First, how will a deficit ridden Government  fund them? Second, how will  a corrupt and rank-sitting lower bureaucracy implement them?

Hon. President has mentioned 25 things that the UPA Government   would do in its first 100 days.  Not one has anything to do with economic reforms.  Most reforms  that now need to be done, require hard legislative work and working with the States. Past few years have seen  India rid itself of its many ancient cobwebs. 

I am reminded of two letters, which have been written by our Chief Minister, Mr. Navin Patnaik relating to the floods situation that arose in 2008.[r33]  … (Interruptions)

सभापति महोदय  : लालू जी, आप क्या बोल रहे हैं?

श्री लालू प्रसाद (सारन) : महोदय, हम लोग बैठ कर बोल रहे हैं।

सभापति महोदय : आप शांत बैठ कर माननीय सदस्य का भाषण सुनिए।

SHRI B. MAHTAB : Sir, a time will come when senior Members from Bihar also will be talking about Kosi river and its devastation. I am mentioning about the devastation that was caused by river Subarnarekha and also by the Mahanadi system in the year 2008 during the month of July and also in September.

            Attentions were drawn of the Government by no less than the Chief Minister of Orissa. The then Union Home Minister rushed to Orissa, made certain commitments before the media and also before the public. Subsequently, by coming back to Delhi, it was followed by a letter confirming that an amount of Rs. 500 crore will be provided to the flood-affected victims of the State of Orissa. But, I am constrained to say, it really pains us, it really hurts us that on 27th April, 2009 – on 23rd April, 2009 the second phase of voting was completed in Orissa – a letter was written by the Union Home Ministry. On 27th April, 2009 a letter has gone from this Government and I quote : “The amount eligible for release from NCCF has been calculated as NIL for the instant calamity.”             It was in June and September, 2008 that Orissa faced serious floods in river Subarnarekha and subsequently in the Mahanadi system. On 23rd September, the hon. Union Home Minister announced a financial assistance amounting to Rs. 500 crore for Orissa. This was subsequently confirmed by his letter on 29th September, 2008. But, in reality an amount of only Rs. 98 crore was released from NCCF. … (Interruptions) On 27th April, 2009 the Ministry of Home Affairs has sent a letter and has calculated the release from NCCF as NIL for the instant calamity.

            Further, to add salt to the injury, another amount of Rs. 80.899 crore is sought to be recovered from Orissa Government against the release made from NCCF which includes Rs. 25 crore released from NCCF during the flood of 2006.

            Mr. Chairman, Sir, in 2006 the hon. Prime Minister had visited Orissa after the State of Orissa faced devastating floods. There, the hon. Prime Minister had announced Rs. 500 crore and we received Rs. 25 crore and on 27th April, 2009 the Government is asking us to pay back Rs. 80 crore which was spent in 2006. This is the Government. … (Interruptions)

श्री शरद यादव  : सभापति महोदय, इसी तरह का पत्र ज्यों का त्यों बिहार सरकार के पास गया है। कोसी नदी को इन्होंने कहा कि यह विप्लव है और माननीय सदस्य जैसा लैटर पढ़ रहे हैं, इसी तरह का पत्र बिहार सरकार के पास गया है। पुनर्निर्माण के लिए 14800 करोड़ रुपए के बारे में बोलने का काम भी इन्होंने किया है। यह जिम्मेदारी आपकी है। उड़ीसा के बारे में श्री महताब जी जो बोल रहे हैं, वह ज्यों का त्यों बिहार के साथ हुआ है।[r34]   SHRI B. MAHTAB : This is indeed not only appalling, but this also makes a cruel joke of the announcement made by the Union Home Minister and the Prime Minister of this country, which was subsequently confirmed by written letters. On November 19, 2008, Orissa Government had submitted a memorandum.

            As you are aware, Mr. Chairman Sir – this House is also aware – Orissa has been repeatedly devastated by natural calamities, be it flood, be it cyclone or be it drought. But what is the response of the Union Government? This is how you respond to a State which finds itself in the comity of this federal structure! This is how the Government has to respond! This is how the Government has to uplift a backward State! It was in the early nineties – you are a witness, Mr. Chairman Sir – that a large section of Southern Orissa, which is very well known as a KBK district and which had been subsequently converted into 10 districts and which has geographical area quite similar to that of the State of Kerala, had a Special Plan for ten to twelve years. The idea was that the absorbing capacity of that area should increase. In 2006-07, when the Plan was coming to a close, we had pleaded frantically before the Prime Minister, before the previous Government, to allow this programme to continue for at least another Plan period and we were told that money does not grow on trees. Of course, money does not grow on trees, but for that drought-ridden area of KBK, when the Central Government did not come to our rescue, rescue of the poor, where migrations still take place, where some irrigation project has come up, absorbing capacity was slowly built up. Orissa Government was forced to, from the paltry sum of its revenue which Orissa Government had generated within the last five to six years, start a programme. A Special Programme was done by the State Government, by Shri Naveen Patnaik as Biju KBK Yojana.

            You thrust upon us, upon different States a number of programmes. Now also certain programmes will be thrust upon us, as has been indicated, but what is the absorbing capacity of the respective States? That is why, Orissa has been demanding to grant it Special Category Status. What is the Special Category Status? It is that whatever programme you are going to implement, especially pro-poor programme, the Centre will provide 90 per cent of the fund and 10 per cent will be provided by the State. Certain specific programmes are being implemented in different districts of this country, but Orissa being a backward State requires special attention.

14.59 hrs. (Shri P.C. Chacko in the Chair)             I am reminded, while making my deliberations here, about hon. President’s announcement that this Government is going to provide 25 kilograms of rice or wheat at Rs. 3 per kilogram in a month. Orissa has been doing it since last August at Rs. 2 per kilogram for 25 kilograms per month. … (Interruptions) Many States are doing it. Tamil Nadu is doing it. Andhra Pradesh is doing it. Chhattisgarh is doing it. But Orissa has been doing it since last August. My point here is that success of this programme can only happen if we follow what we have done in Orissa. In Orissa, four specific dates have been specified, giving duration of ten days in-between – 11th, 12th, 20th and 21st of every month.[SS35]  15.00 hrs. [r36]  So, the capacity of the poor will be there to purchase rise or wheat. The family may not be in a position to purchase 25 kgs of it in one go. Therefore, they should be allowed to purchase it either in two lots or three lots or four lots. However, it has to be ensured that rice or wheat should be available in those shops. Shri Naveen Patnaik’s Government has ensured that within these four days the food grains will be available, and whoever higher or mightier he may be, if there is some discrepancy somewhere, then stringent action is to be taken. I do not see any mention in the speech of the hon. President about the mechanism -- which will be the carrier to provide this to the poor -- being in place or is going to be rejuvenated.

            As regards the money aspect, we have to depend on the respective State Government. If we have a world view of the Public Distribution System (PDS) in different parts of this world be it Brazil, African countries or even in South Asia, then we find that our PDS is the largest distribution mechanism, but it is the worst and corrupt mechanism. Jammu and Kashmir has a different system.

MR. CHAIRMAN  : Mr. Mahtab, please conclude your speech.

SHRI B. MAHTAB  : Several States have different systems. I would insist on calling the Food Ministers and having a uniform mechanism and a proper monetary system, which can actually deliver this.

            Today, I am reminded of the UNICEF Report, which has, in a way, compelled all elected representatives and elected Governments to think in this line. The UNICEF Report clearly says that the impact of global economic crisis has added 20 million Indians into the battle for hunger for each night. Today, the number of hungry in India has increased from 209.5 million in 2004-2006 to 230 million by the end of 2007-2008. This is a Report titled ‘Impact of Economic Crisis on Women and Children in South Asia’.

            I would conclude my speech by saying this. There is a need to use the crisis as an opportunity. Spend more for the poor; spend more in those States that are backward; and spend more for the large sections of population of this country who have elected us. Many of us are millionaires or crorepatis or even more than that and comparatively rich, but we represent the poor masses who have belief in democracy and who have belief in this Republic.

            With these words, I conclude.                                                         

MR. CHAIRMAN : Thank you, Mr. Mahtab.

            All the hon. Members are requested to please confine to their time limit. The next speaker is Dr. M. Thambidurai.

DR. M. THAMBIDURAI (KARUR) : Respected Chairman, it is a proud privilege and great honour for me to participate in the discussion on the Motion of Thanks on the President’s Address that she delivered to both the Houses of Parliament on 04 June, 2009.

            At the outset, I would like to place on record my sincere thanks to my Leader, the General Secretary of my Party, namely, Puratchi Thalaivi Amma for reposing faith in me, and making me the AIADMK candidate for the Karur Parliamentary Constituency.[r37]              I would also like to thank the people of Karur constituency in particular, and the State of Tamil Nadu in general, for giving me this opportunity to represent their interests in the highest people’s forum of the country.

            I have the following reservations on the Address that the hon. President had delivered. Some of these issues have found an oblique reference in Her Address and many of them did not even find a mention. I would like to pick up the issues one after the other.

            India is the largest democracy in the world. Understandably, conducting an election here is an extremely difficult task. It is the expectation of the people that the electoral process is transparent and it is ‘seen and perceived’ to be free and fair. In this context, I regret to say that at least as far as Tamil Nadu was concerned, the just concluded Lok Sabha elections were neither free nor fair.

            The AIADMK General Secretary, Puratchi Thalaivi Jayalalithaa, hon. Amma, had expressed reservations about these EVM machines several times in the past. During the recent parliamentary elections, we strongly believe that there had been large-scale tampering of voting machines.

            Several advanced countries have tried out EVMs and then reverted back to paper ballots after finding them unreliable. Does the voter have any means to find out to whom his vote has actually gone? No. After a person casts his vote, there is a beep sound and a red light glows next to the symbol of the candidate for whom he had voted. But has the vote actually gone to the person he voted for? There is no means of knowing it. Contrary to this, in a paper ballot, one knows exactly whom one had voted for, by stamping his choice.

           Unless such transparency is ensured, EVMs cannot be considered infallible. On behalf of the AIADMK, I urge all parties that are genuinely concerned about democracy to analyze the Indian voting machine to ensure that there are no misgivings in anybody’s mind. It is not right for this House to sit back complacently, while democracy is being murdered outside.

            A large number of names of genuine voters were found to have been deleted from the electoral rolls. Many people who came to vote carrying valid Voters Identity Cards were simply told that their names were not there in the voters’ list.  If large chunks of genuine voters are deprived of their basic right to vote, then we could safely say that democracy is being murdered. If something is not done on this issue, then the world’s largest democracy would be looked upon as a joke.

            The House will be shocked to know that a few days before the Lok Sabha elections, that is, on 8.5.2009, my residence at Karur was raided by the officials of the Police Department of the State Government and the Revenue officials. My house was raided during my absence from night 9 o’clock till 3 o’clock next day morning. Perhaps, I am the only candidate in the whole of India to have undergone such a trauma before the elections. They could not find anything at my residence, but the State Government created terror and threatened me with such hurdles during electioneering, but it could not succeed at least in my constituency. The administration gave me a receipt which is a proof of having raided my residence and found nothing. This shows the State Government’s ulterior motives.

            My Party wants to see that there is good democracy in the country. One family cannot control the whole arena. Our Party strongly feels that there should be an end to the ‘family rule’. See what is happening in Tamil Nadu. Perarignar Anna transformed the DMK Party into a family, and in direct contrast, the present Chief Minister of Tamil Nadu is converting his family into the Party. … (Interruptions)

SHRI ADHI SANKAR (KALLAKURICHI): Sir, he should speak on the President’s Address, but he is not speaking on the President’s Address. … (Interruptions)

DR. M. THAMBIDURAI : His younger son is the Deputy Chief Minister of Tamil Nadu, the elder son is a Cabinet Minister at the Centre, his grandson is again a Cabinet Minister at the Centre, and his daughter is an MP in the Rajya Sabha. … (Interruptions)

MR. CHAIRMAN : Hon. Members, please take your seats.

… (Interruptions)

SHRI ADHI SANKAR : Sir, he is not at all speaking on the relevant points of the President’s Address. … (Interruptions)

MR. CHAIRMAN: Why do you not take your seats?

… (Interruptions)

MR. CHAIRMAN: Dr. Thambidurai, you are a senior Member of this House. So far, the Chair did not want to interfere with what the hon. Members were speaking about. Whatever you have said so far has nothing to do with the President’s Address. Please come back to the subject. Otherwise, I will have to give a ruling.[r38]  In your case I am not giving a ruling; I am not expunging what you have said. But please do not continue with what you are saying. You have to come back to the subject.

DR. M. THAMBIDURAI :  Sir, in the morning, the Leader of Opposition Shri Advani referred to corruption not being mentioned in the entire President’s Address. Utmost and immediate steps are required to eradicate corruption that is expanding in leaps and bounds in the Indian economy. This was also stated by the C&AG in his reports which squarely blamed the Government for tardy implementation of several programmes. Drastic and immediate steps are required to bring back Indian money lying unproductively in international tax havens. We should review unwanted legislations. We should review the practice of issuing Participatory Notes. We need to come down heavily on tax evaders, black-marketeers, hoarders and speculators. The issue of fake currency is to be tackled on a war-footing.

            On the 3G spectrum issue the country wants the new Government to address the different aspects involved in the auctioning process. Though mobile penetration saw tremendous increase with galloping tele-density, allocation of spectrum is shrouded in mystery. The Government has to come clean on this. Initially the Government was anticipating a revenue of Rs.30,000 crore to Rs.40,000 crore. But later on it fell down to Rs.20,000 crore. It has created a lot of controversy and the Government was accused of malpractice. Now that the same Minister is back in charge of that Ministry, the country is at a loss to understand how the Prime Minister is going to handle the situation. Allocation of 2G spectrum by Telecom Minister is considered as the mother of all scandals. Without taking Cabinet approval, the Minister allotted spectrum on first-come-first-served basis to real estate companies like Swan and Unitech. … (Interruptions)

SHRI ADHI SANKAR : Mr. Chairman, Sir, these things are not allowed in the discussion on President’s Address.

MR. CHAIRMAN : Be patient please! Speak when your turn comes. Please do not interfere like this.

SHRI ADHI SANKAR : Sir, you cannot allow this.

MR. CHAIRMAN: You cannot decide that. You take your seat. You cannot decide that the Chair will give a ruling. I have already told him.

DR. M. THAMBIDURAI :  The country lost revenue of nearly Rs.1 lakh crore in this shabby deal. The Chief Vigilance Commissioner has already confirmed these irregularities.

            On May 29th, the Delhi High Court observed that the spectrum allocation was done on the lines of ‘sale of cinema tickets’. The Minister misled the Parliament on an earlier occasion also. In view of all these shabby irregularities, the Prime Minister should intervene and cancel these 2G licences.

            I fail to understand why the President’s Address did not mention a word about the crude oil, petrol, etc. The prices of petrol and kerosene affect the common man severely and that is the main cause of rise in price of vegetables and other essential commodities. Though the price of crude oil has come down in the international market, there is no corresponding reduction in its price nationally. The Government has conveniently omitted referring to that.

            India has been witnessing in the past decade, more so now due to recession, growth in employment. The alarming fact is that more than 55 million people have been pushed below the poverty line now. So, there is a need to fill up six lakh vacancies in defence and Central services. There is also need to regularise five lakh casual workers in the Central services. There is again a need to regularise three lakh extra-departmental workers in the postal services.

            Frequent power cuts lead to closure of many industries, which also leads to unemployment. Though the President’s Address mentions about addition of 13,000 MW each year, it is not sufficient. Each State requires as much as that for itself. There is also no proposal to provide employment to the educated unemployed. There is no mention in the President’s Address of tackling this problem. Unemployment leads to frustration among the youth. As you know, a frustrated youth takes to violence and other forms of crimes. There has to be a concrete and coordinated effort between the Centre and the States. The Government has to pay attention to this problem.

            The biggest problem confronting India today is terrorism. We had repeated incidents of terrorism targeting hapless public which had claimed several thousand innocent lives. At a time when developed countries like the USA and the UK enacted stringent anti-terrorism laws to tackle the problem of terrorism in their own countries, the Indian Government chose to repeal even the existing law thereby opening the country to repeated terrorist attacks from inside the country and outside.

            The 26th November Mumbai attacks had claimed 164 lives and brought international focus to the problem of terrorism in India. The lack of political will in bringing terrorists to book is apparent from the fact that in the last five years, though nearly 20 major incidents of terror strikes have taken place in India claiming over thousand lives and injuring several others, there has not been a single conviction in a terror trial.[KMR39]              We demand a stringent anti-terrorism law with adequate safeguards.

We also demand that there may be a chip-embedded National Citizen Identity Cards for all citizens. Commando units may be set up in every State to handle terrorism-related activities.

We also need to modernize the police force and the armed forces. There is an urgent need to increase the Defence Budget to 3.5 per cent of GDP from the present level of 2.5 per cent. We need to take better care of the police and armed forces personnel so that it becomes an attractive destination for the talented youth in this country. The existing vacancies in the Services should be filled up expeditiously.

The power-cuts have affected farming operations. Farmers are burdened by the absence of subsidies, high cost of labour, non-availability of fertilizers, poor procurement prices, bad irrigation facilities and a host of other problems. What the farming community needs at this juncture is not just loan-waivers that benefit a few rich farmers but a comprehensive rehabilitation package addressing all their problems. If this is not done urgently, then agriculture will become a totally unviable proposition, and, more and more farmers will move to other occupations. India will have to start importing even those agricultural products in which we had surplus once. On behalf of the AIADMK Party General Secretary, J. Jayalalithaa, hon. Amma, we earnestly request that all existing farm loans including those with the non-nationalized commercial banks should be waived off.

Farmers’ Commission should be set up to fix remunerative procurement price. I demand that the procurement price of sugarcane must be fixed at Rs.2000 per tonne and that the procurement price of paddy must also be raised adequately.

            Karur is famous for its textile industries, but it was affected because of many factors, mainly due to frequent power cuts.

MR. CHAIRMAN : Please conclude. Your time is over.

DR. M. THAMBIDURAI : Many shifts in those industries are shut down, leading to widespread unemployment in Karur and adjoining areas. The export of textiles was affected. There was a circulation of money, in this industry, to the tune of Rs. 3,000 crore, which has come down to Rs.1000 crore.

The gifting away of Kachchatheevu to Sri Lanka under the agreement of 26th June 1974 was not only flawed under constitutional law, but also created myriad problems for Indian fishermen operating from the Rameswaram coast. Secession of Katchatheevu was unconstitutional.  In Berubari case of 1960, the Supreme Court decided that an agreement involving the ceding of a part of the territory of India in favour of a foreign State can be effected only through an Amendment to the Constitution of India which has to be ratified by Parliament. Indian Government should rescind the agreement with Sri Lanka.  Even the General Secretary of our party had insisted for this.

On the Inter-State River Water disputes, I want to say these things. Mullaperiyar dam controversy is far from seeing the end of the tunnel. We need to raise the reservoir level, which will benefit Theni, Madurai, Sivaganga, Ramanathapuram and Dindigul districts.

            I will say a word about Palar river water and conclude.

MR. CHAIRMAN : Please conclude. I am calling the next speaker, Shri Arjun Meghwal.

DR. M. THAMBIDURAI : I will just finish in a minute.

MR. CHAIRMAN : Please take your seat. You have taken more time.

DR. M. THAMBIDURAI : I will conclude by saying only one more point.

            This House is well aware of the feelings in Tamil Nadu about the plight of the Tamil people in Sri Lanka. Every day, we get alarming information from the Media, about the plight of nearly 3.5 lakh Tamil people confined to camps in Sri Lanka.

MR. CHAIRMAN : Please conclude.

DR. M. THAMBIDURAI : I will deal with this issue only and conclude.

MR. CHAIRMAN : Okay.

DR. M. THAMBIDURAI :  UN Secretary General Ban Ki Moon’s visit to the war ravaged regions of the Island has revealed some startling facts.

MR. CHAIRMAN : Please take your seat. You cannot do like this. You cannot go on like this.

DR. M. THAMBIDURAI : After touring the area, Ban Ki Moon was moved to the extent of saying that the trapped civilians must have undergone the most inhumane suffering.

            What is required now is a huge relief operation. The Indian Government should step in before an entire race is wiped out by starvation, disease and deprivation.

MR. CHAIRMAN : No. You cannot go on like this. Will you please take your seat?

DR. M. THAMBIDURAI : We demand that an amount of Rs.10,000 crore may be provided for rehabilitation and relief work of the Tamils in Sri Lanka. The Sinhalese and the Sri Lankan Tamils must live in peace; both should get equal rights and equal status. 

MR. CHAIRMAN :  Will you please take your seat? Nothing will go on record.

(Interruptions) … * MR. CHAIRMAN : Whatever Dr. Thambidurai says will not go on record.

(Interruptions) … * MR. CHAIRMAN : You may please take your seat. Shri Meghwal may start his speech.

 

… (Interruptions)

MR. CHAIRMAN: Senior Members are behaving in a very unbecoming fashion.  Dr. Thambidurai, you are a very senior Member.

* Not recorded श्री अर्जुन राम मेघवाल (बीकानेर)  :  माननीय सभापति जी, महामहिम राष्ट्रपति जी के अभिभाषण के पक्ष में धन्यवाद प्रस्ताव आया है  उस पर मैं भी अपना पक्ष रख रहा हूं। जो विषय महामहिम राष्ट्रपति जी ने अपने अभिभाषण में टच किए हैं, उनमें कुछ ऐसे विषय हैं, जिन पर सरकार का ध्यान नहीं गया है। मैं उन विषयों पर भी ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं। अभिभाषण में महिलाओं के लिए रिजर्वेशन बिल की बात कही गई है। हम इसका समर्थन करते हैं लेकिन अभिभाषण में कन्या भ्रूण हत्या रोकने के लिए कुछ नहीं कहा गया है, जबकि कन्या भ्रूण हत्या, देश में एक महत्वपूर्ण विषय बनता जा रहा है। लिंग-भेद बढ़ता जा रहा है। कुछ ऐसे स्टेट हैं, जहां लिंग-भेद अनुपात बिगड़ता जा रहा है और यह चिन्ता का विषय बनता जा रहा है। इस विषय पर मैं सदन का ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं।

            महोदय, जो मेगा हाइवे बन रहे हैं, जिन्हें नैशनल हाइवे अथौरिटी ऑफ इंडिया द्वारा बनाया जा रहा है। इस अथौरिटी द्वारा सड़कें बनाकर देश के विकास के लिए एक बड़ा काम किया जा रहा है, लेकिन जो एकसीडेंटल डैथ्स हो रही हैं, उनमें जो मुआवजा दिया जाना चाहिए, वह बहुत उचित नहीं है। स्टेट्स में कई स्थानों पर ‘मुख्य मंत्री सहायता कोष’ के नाम से राशि दी जाती है और सेंटर से भी ‘प्रधान मंत्री राहत कोष’ के नाम से राशि दी जाती है, लेकिन हमारे ध्यान में कई ऐसे परिवार आए हैं, जिनमें यदि एक आदमी की डैथ हो जाती है और उसमें दूसरा कोई कमाने वाला नहीं होता है, तो पूरा परिवार बर्बाद हो जाता है।   ‘हिट एंड रन’ एक स्कीम है जिसके तहत इंश्योरेंस कंपनी की ओर से कुछ मुआवजा मिल जाता है। जब किसी केस में यह पता है कि इसने एक्सीडेंट किया है, उसमें भी कोई विशेष सहायता राशि नहीं मिलती है और वह परिवार बर्बाद हो जाता है। इसके लिए भी कोई एक स्कीम बननी चाहिए।  

            महोदय, इसके साथ-साथ मैं कहना चाहता हूं कि जैसे शहरों की आबादी बढ़ी है, लेकिन नैशनल लैवल पर कोई ट्रैफिक पोलिसी नहीं है। इसलिए मैं चाहता हूं कि नैशनल लैवल पर एक ट्रैफिक नीति बननी चाहिए। देश में जो छोटे-छोटे शहर हैं, वहां भी जाम लगता है। वहां ट्रैफिक कंट्रोल का कोई सिस्टम नहीं है। जगह-जगह ट्रैफिक जाम हो जाता है, फिर चाहे छोटे शहर हों या बड़े। दिल्ली और मुम्बई आदि बड़े शहरों में तो ट्रैफिक जाम ही रहता है। मैं जिस क्षेत्र से आता हूं, वहां बीकानेर जैसी जगह में भी ट्रैफिक जाम रहता है। लोग ट्रैफिक में फंस जाते हैं। मेरा अनुरोध है कि नैशनल लैवल पर एक ट्रैफिक प्लान की पॉलिसी बनाई जानी चाहिए। किसी प्रौफेशनल ग्रुप से बड़े और छोटे शहरों का अध्ययन कराया जाए और कैटेगराईजेशन हो जाए कि 10 लाख से ऊपर वाले नगरों, 20 लाख से ज्यादा आबादी वाले शहरों और 50 लाख आबादी से ज्यादा के शहरों के लिए इस-इस प्रकार के ट्रैफिक प्लान होंगे। इस प्रकार का नैशनल लैवल पर ट्रैफिक प्लान तैयार होना चाहिए।

            महोदय, मैं राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना पर भी एक बहुत महत्वपूर्ण बता कहना चाहता हूं। यह सही है कि यह स्कीम बहुत अच्छी है, लेकिन इस में मैं कुछ संशोधनों हेतु सुझाव देना चाहता हूं। मैं इस स्कीम के इम्प्लीमेंटेशन पार्ट की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित कराना चाहता हूं। इस स्कीम के माध्यम से देश में एक परिवर्तन का दौर चल रहा है। मैंने अपने क्षेत्र में भी कई जगह देखा कि जो मेजरमेंट लेने का तरीका है, वह डिसप्ले नहीं होता है। वर्क-साइट अरेंजमेंट है, वह भी प्रॉपरली इम्पलीमेंट नहीं होते हैं। जो श्रमिक  ‘नरेगा’ में लगा हुआ है, उसे पता नहीं है कि मुझे कितनी मजदूरी मिलने वाली है।

            [RPM40] यह बात सही है। अभी सुबह डॉ. गिरिजा व्याज जी ने नरेगा का जिक्र किया, चीनी का भी जिक्र किया।  कुछ लोगों को हो सकता है, सौ रुपये मिलते हों, लेकिन मैंने मेरे क्षेत्र में चुनाव के बाद कुछ नरेगा के कार्यों का एज़ ए एम.पी. निरीक्षण किया। मैंने पाया कि कई जगह नौ रुपये मिल रहे हैं, कई जगह 12 रुपये मिल रहे हैं, कई जगह 15 रुपये मिल रहे हैं तो कार्य करके अगर नरेगा श्रमिक को 12-15 रुपये मिलेंगे तो कैसे काम चलने वाला है। जब मैंने पूछा कि ऐसा क्यों हो रहा है तो उन्होंने बताया कि  जो नाप लेने वाला है, एडहाक जे.ईएन. लगा हुआ है, वह जब काम चलता है, तब नाप नहीं लेता है और वह कभी रात को, कभी सुबह जल्दी नाप लेने आता है। अगर श्रमिकों के सामने नाप लेने की व्यवस्था की जाये तो श्रमिकों को भी पता चलेगा कि हमने कितने मेजरमेंट का काम किया, उसका क्या नाप हुआ है या नहीं हुआ है, एक तो मेजरमेंट का बोर्ड मुझे नजर नहीं आया, डिस्प्ले भी नहीं हुआ, इसलिए इसका प्रोपर इम्प्लीमेंटेशन होना चाहिए। मुझे वर्क साइट अरेंजमेंट में भी कई कमियां नजर आईं।

            मैं अपनी बात थोड़ी लम्बी कर रहा हूं। नरेगा श्रमिकों को त्रिपाल दिया है, आपमें से बहुत से लोगों ने देखा होगा कि वर्क साइट पर त्रिपाल एवेलेबल नहीं है।  पांच वर्ष से कम उम्र के पांच बच्चे एक जगह थे, वहां पालना मिलना चाहिए, लेकिन वहां पालना नहीं मिला। दवाई मिलनी चाहिए, दवाई भी नहीं मिली। मैंने पूछा कि दवाई की क्या स्थिति है तो बताया कि आज तक भी कोई ए.एन.एम. नहीं आई । The scheme is good but the implementation part of the scheme is weak. So, I request the Government कि इसका जो इम्प्लीमेंटेशन पार्ट है, उसके बारे में भी गवर्नमेंट विचार करे। जितने भी वर्क साइट अरेंजमेंट्स हैं, चाहे वह त्रिपाल का हो या दरी का हो, प्रोपर वाटर फैसिलिटी एवेलेबल कराने का हो, चाहे मैडीसिन एवेलेबल कराने का हो, चाहे पालना एवेलेबल कराने का हो, वर्क साइट पर उपलब्ध रहने चाहिए । उसमें कई बार यह भी पाया गया है कि जो बोर्ड्स हैं, वे भी नहीं हैं। यह भी पता नहीं है कि यह काम किसका चल रहा है, कितनी राशि का चल रहा है। यह कब खत्म होगा, यह भी पता नहीं है। सभी माननीय सदस्य भी इसमें एग्री करेंगे कि नरेगा के प्लान को लेकर इसमें  बड़ा लैकूना है  एक बार कोई प्लान बन गया, सरपंच ने भी हड़बड़ी में पालन बना लिया, लेकिन जब उसमें संशोधन की बात आती है तो कहते हैं कि इसमें कुछ संशोधन नहीं कर सकते। अगर 2009-2010 का प्लान बना, अगर आपको इसमें कहीं माइनर एमेंडमेंट करना हो तो भी नहीं कर सकते । मेरा इसमें सुझाव है कि  जैसे वेट एंड मेजरमेंट एक्ट में भी पांच परसेंट प्लस माइनस की एडमिसिबिलिटी होती है, स्कीम में  वैसे नरेगा भी कम से कम पांच परसेंट अगर कोई प्लान में कोई आइटम छूट गया हो तो संशोधन का अधिकार होना चाहिए ।  ग्राम पंचायत में  प्लान तैयार होता है, उसके बाद वह पंचायत समिति में आता है, उसके बाद वह जिला परिषद में आता है और  जिला परिषद की बैठक में वह पास हो जाता है। उसके बाद बहुत महत्वपूर्ण चीज़ छूट जाती है। ग्राम पंचायत में संशोधन का प्रस्ताव आता है, लेकिन वे कहते हैं कि नहीं, अब इसमें कुछ नहीं कर सकते, चाहे पांच लाख का काम छूट गया, चाहे 10 लाख रुपये का बहुत महत्वपूर्ण काम छूट गया, उसमें आप एमेंडमेंट नहीं कर सकते तो मेरी यह रिक्वैस्ट है कि इस स्कीम में इस तरह का एक एमेंडमेंट होना चाहिए।  अगर एम.पी. भी कहे तो उसमें आप वह एमेंडमेंट नहीं कर सकते। वह प्लान अगर एक बार एप्रूव हो गया तो हो गया। आप चाहे स्टेट लेविल की बॉडी को अधिकार दे दें, सैण्ट्रल लेविल की बॉडी को अधिकार दे दें, कहीं न कहीं तो उसमें एक ऐसा प्रावधान होना चाहिए, जिससे उस प्लान में एक बार एप्रूव होने के बाद भी 5-10 परसेंट राशि तक का उसमें संशोधन करने का अधिकार होना चाहिए। यह एक सजेशन मैं नरेगा के बारे में देना चाहता हूं।...( व्यवधान)

चौधरी लाल सिंह (ऊधमपुर): आप खुद नरेगा के चेयरमैन हो।...( व्यवधान)

MR. CHAIRMAN :  No interruptions please. This is not the time for interruption. This is not the way to speak.

Shri Meghwal, please address the Chair.

श्री अर्जुन राम मेघवाल : मैं अपना सजेशन दे रहा हूं कि नरेगा में ये कुछ कमियां हैं कि एक बार प्लान एप्रूव होने के बाद उसमें संशोधन का अधिकार नहीं है। किसी भी कमेटी को नहीं है।[R41]  [p42]   जिला लेवल की कमेटी को अधिकार नहीं है और स्टेट लेवल की कमेटी को भी नहीं है।  आर. डी. मिनिस्ट्री में माननीय मंत्री जी की अध्यक्षता में सेंट्रल लेवल पर एक मानिटरिंग कमेटी बनी है, उसको भी अधिकार नहीं है। मैं कहना चाहता हूं कि जब सदस्य, सरपंच और कोई सोशल वर्कर ऐसा कोई प्रस्ताव लाता है कि यह काम नरेगा में एडमिसिबल है, इसको इसमें जोड़ा जाए, तब ऐसी स्थिति में वहां यह बात आती है कि स्कीम में इसका प्रावधान ही नहीं है, आप अमेंडमेंट तो कर ही नहीं सकते।  इसलिए मैं सुझाव देना चाहता हूं कि अगर ऐसा अमेंडमेंट हो जाए, चाहे पांच से दस प्रतिशत तक की सर्टेन लिमिट इसके लिए तय हो जाए।  यह एक अच्छा संशोधन होगा, जिससे आप इस स्कीम को ढंग से इंप्लीमेंट कर सकते हैं।  मैं कांक्रेटिव सजेशन नहीं दे रहा हूं।  मैं स्कीम की बुराई नहीं कर रहा हूं, लेकिन स्कीम में कुछ जो खामियां हैं, उनको दूर करने के लिए अपने सुझाव दे रहा हूं। 

            महोदय, एपीएल-बीपीएल और केरोसिन तेल की बात आयी। यह बात सही है, इसकी समीक्षा होनी चाहिए। शरद यादव जी चले गए। किरोसिन तेल का डिस्ट्रीब्यूशन सही नहीं है।  मेरे हिसाब से इसमें काफी गड़बड़ है और इसकी समीक्षा होनी चाहिए कि पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम में किरोसिन तेल आखिर कहां जाता है? यह बात किसी मंच से आए या न आए, लेकिन चूंकि मैं इससे जुड़ा हुआ था और मैंने यह देखा।  हो सकता है कि कुछ लोग इसका विरोध करें कि यह सिस्टम में होना चाहिए, लेकिन वाकई किरोसिन तेल प्रापरली नहीं बंटता है। इसमें सुधार की गुंजाइश है।  वह सुधार कैसे हो?  इसके लिए चाहे कोई पार्लियामेंट्री कमेटी बनायी जाए। किरोसिन तेल पर इतना पैसा जा रहा है, लेकिन किरोसिन तेल जिनको मिलना चाहिए, उनको नहीं मिलता है, इसलिए इस पर भी विचार करने की जरूरत है।

            महोदय, अभिभाषण के संबंध में मैं कहना चाहता हूं कि वायदा व्यापार के मुद्दे पर इसमें चर्चा नहीं है।  यह भारतीय कृषि व्यवस्था में अनोखी सी चीज हो रही है।  जिन जिंसों के दाम बढ़ रहे हैं, उसमें वायदा व्यापार का महत्वपूर्ण रोल है, इसलिए इस मुद्दे पर भी सदन में विचार होना चाहिए।  अगर हमें लगता है कि एक्सचेंज कमोडिटीज ठीक है, तो उसको कंटीन्यू करें और अगर ऐसा लगता है कि इससे भारतीय व्यापारियों एवं किसानों को बहुत निराशा हो रही है, तो इसमें मानिटरिंग करके, इसमें अमेंडमेंट किए जाने चाहिए। 

            महोदय, मैं इस मौके पर एक बात और नरेगा में संशोधन के बारे में कहना चाहूंगा।  बीपीएल के लोगों के लिए इसमें वाटर टैंक बनाने का प्रावधान है।  मैं चाहता हूं कि हमारे जैसे डेजर्ट प्रदेश में एपीएल के लोग भी गरीब हैं, अगर नरेगा में बीपीएल के साथ-साथ एपील के लोगों को भी वाटर टैंक बनाने की छूट दे दी जाए, तो इस स्कीम का इंप्लीमेंटेशन बेहतर हो सकता है।

            मैं इस अवसर पर इतना कहते हुए अपनी बात को समाप्त करता हूं और राष्ट्रपति जी के अभिभाषण पर प्रस्तुत प्रस्ताव का उक्त संशोधनों के साथ समर्थन करता हूं। 

 

SHRI ADHIR RANJAN CHOWDHURY (BERHAMPORE, WEST BENGAL): Mr. Chairman, Sir, I rise to support the Motion of Thanks on the President’s Address.  Right at this moment, I feel exalted in participating in this discussion.  It is a galactic moment for me.  As we observed yesterday, the Address was delivered by a woman of our country.  The exalted Chair of Lok Sabha to which we are addressing all our speeches is also occupied by a woman.  Furthermore, the brain child behind all the landmark legislation brought by the UPA Government is Madam Sonia Gandhi who also happened to be a woman.[143]                  Sir, next to God, we are all indebted to women for our lives and then for making our lives worth having. Throughout the history, we find that all the great changes have been brought about by women at the beginning. 

            Sir, the Presidential Address is a harbinger of women empowerment and poor people’s entitlement.  The Presidential Address is a precursor of social revolution in our country.  Sir, I found in our UPA Chairperson, Madam Shrimati Sonia Gandhi, the spirit and virtue of legendary figure Bhagini Nivedita, whose heart always bleeds for the sordid plight of destitutes, for the vulnerable and the unprivileged sections of our society.  She created a precedent by refusing to assume the berth of Prime Minister.  She simply nodded in the negative when the people of our country were desperately seeking her for that berth. But, at that time, still I remember that who, I think, would be the Leader of the Opposition, has pronounced for tonsuring her head out of envy.  But the quiet and composed lady, our beloved leader, Shrimati Sonia Gandhi, renounced by the call of her inner voice. This is the distinction.

            Sir, here Shri L.K. Advani, while deliberating on the Motion of Thanks, was narrating the vision of our India. What we have observed before the election?  We have observed before the election that a vitriolic campaign was engineered by the Leader of Opposition by depicting the man like Dr. Manmohan Singh as a weak Prime Minster of India.  Who is weak and who is strong? What is the distinction between weak and strong?  We need to analyse it.  It is ludicrous to note that before election, Shri L.K.Advani, visited one gymnasium and he lifted the iron bar to prove his mettle that he can become the Prime Minister.….… (Interruptions)

MR. CHAIRMAN :  Please take your seat.  Why do you interfere like this?  Let the Member speak. It is his time.

… (Interruptions)

 

SHRI ADHIR RANJAN CHOWDHURY:    Sir, I just quote a few lines from a great thinker that the exhibition of real strength is never grotesque.

            Distortion is the agony of weakness.  It is the dislocated mind whose movements are spasmodic. It has been proved that the hot pursuit and zero-tolerance Prime Ministerial aspirant was sunk in the hour of trial.  In the hour of trial, it has been proved that the people of our country have elected Dr. Manmohan Singh as a competent person to run the country.  This is the distinction.

            Sir, it is the moral fortitude.[a44]  It is the moral fortitude, it is due to the moral rectitude of a quiet man like Dr. Manmohan Singh that India has been able to retrieve itself from the isolation of the world. Without signing the Indo-US Nuclear Deal, we would have not been able to get rid of ourselves from the nuclear apartheid that we had been facing for the last three-and-a-half decades. It has heralded a new era for our country. Actually, Sir, this time, we had observed that there was a mushrooming of Prime Ministerial aspirants in India which we have never seen earlier. However, all their hopes have been dashed and the people, by their prudent mandate, have given us this opportunity to run the great country that is India.

 

            The salient features of the President’s Address are an inclusive society and an inclusive economy. This Government, since its inception in 2004, has been continuing its endeavour to the direction of the poor and the vulnerable sections of our society. We are not the preachers of Shining India rather we are the preachers of the Shining Bharat. Here, Members from the Opposition are simply picking up the gloomy side of our economy, the seamy side of our country. They have every right to do it. But, in our Constitution, powers have been separated. In our Constitution, duties and responsibilities have been clearly demarcated. Here, we are confusing between the Union List, the State List and the Concurrent List. There lies the main problem. Being Indians,  we should be proud that we have been able to launch the Chandrayaan by virtue of our scientists and the technologists. It was built indigenously. We should be proud of knowing it that it is the constant endeavour of our scientists and the technologists that we have been selected in a club of a few countries which possess the intermediate range ballistic missiles. We have successfully test-fired it in the year 2008. We should be proud that India is such a country that it has been enlisted in the club of five by possessing the K-15 submarine-launched ballistic missile. We have been able to unleash the nterceptor to kill the hostile missiles. For what? It is to defend our country, to defend our sovereignty and to defend the freedom that we have acquired by the sweat and blood, by the sacrifice of the freedom fighters of our country.

            In the President’s Address, ten broad areas of priorities have been earmarked for the next five years. Special emphasis has been laid on internal security.

            Shri Advani was telling that we should constitute one Commission of enquiry. मैं उनसे पूछना चाहता हूं कि जब पार्लियामैंट पर अटैक हुआ, मेरी यह सोच है कि पार्लियामैंट पर जो अटैक हुआ था, वह मुम्बई अटैक से कम गंभीर नहीं है।

अगर उस दिन पार्लियामेंट के अंदर वे टेररिस्ट घुस जाते तो हिंदुस्तान की क्या हालत होती, वह हम लोग महसूस कर सकते हैं। उस दिन पार्लियामेंट सिक्योरिटी में लगी वाच एंड वार्ड की एक महिला ने, जिसके पास हथियार नहीं थे , ने पार्लियामेंट की गरिमा बचाने के लिए अपनी जान गंवाई थी।  उस दिन एनडीए सरकार ने कोई इनक्वायरी कमीशन क्यों नहीं बनाया? हम लोगों ने नेशनल इनवेस्टीगेशन एजेंसी बनाई है, मैक बनाई है जिससे हमारी इंटरनल सिक्योरिटी मजबूत हो। हम लोग जानते हैं कि जब पार्लियामेंट पर अटैक हुआ था, उस समय एक नारा उठाया गया था कि अब आर-पार की लड़ाई होगी। क्या आर-पार की लड़ाई हुई? करोड़ों रूपए खर्च किए, लाखों सेनानी तैनात किए, फिर क्या हुआ। कुछ नहीं हुआ। आप लोग गरजते हैं, बरसते नहीं हैं, यही आप लोगों की सबसे बड़ी खामी है।

श्री राकेश सिंह (जबलपुर): लेकिन अभी तक फांसी नहीं दी गयी।

श्री अधीर रंजन चौधरी :  माइन्स हटाने के दौरान 750 लोग मारे गए थे, तब आप लोगों ने क्या किया?

            Sir, I would like to express my gratitude to the UPA Government as they are going to introduce a legislation for giving right to food. This is also a historic legislation like NREGA. I would also propose to this Government that in tandem with the right to food, the right to work, Government sould consider the right to health. If it is considered, then, I think, most of the people of our country will get benefit.

            Sir, our Government is pressing hard to harness the talent of our country. Educational loan to the tune of Rs. 26,000 crore have been disbursed to 16 lakh students of our country because, without knowledge India cannot prosper further. Now, this Government should make further endeavour to harness our demographic resources because it is a golden opportunity for us. If we invest more and more in the educational sector and the skill development sector, then the coming generation will have a great opportunity because we are enjoying the demographic dividend in the world.

            Sir, the President's Address has laid stress on small and medium scale enterprises. As we know, crores of unemployed youth of our country could eke out their livelihood if small and medium sector is revived and is given more teeth. Therefore, small and medium sector industries can play a very contributory role in the economic development of our country.

            This Government has put in place three major instruments. First of all, an amount of Rs. 25,000 crore has been earmarked for the Rashtriya Krishi Vikas Yojana. The second is the National Food Security Mission and the third is the National Horticulture Mission. All these instruments are very much in the direction to make further growth in our agriculture.

            Sir, this Government again is putting emphasis for the universalisation of secondary education. Not only that, for higher education also the Government is taking special care and therefore the Government is stressing for excellence, inclusion and expansion.[R45]              [r46] Sir, another thrust area should be rural water supply.  I come from the State of West Bengal.  Water of eight districts of the State of West Bengal has been contaminated by arsenic.  We are simply sitting on arsenic bomb, but there is no infrastructure which can deliver any remedy to the arsenic affected people of our State of West Bengal. I know that other States are also suffering from contamination of water with arsenic, fluoride, etc.             Sir, the State Government of West Bengal has become financially bankrupt so they cannot provide the requisite sum which has to be put as a matching grant.  All the funds which have been flowing from the national exchequer are lying idle in the State of West Bengal.  Therefore, I would request the UPA Government to vigorously monitor the implementation of such schemes so that the funds meant for drinking water and for other public welfare measures should be used in an optimal way.

            Sir, I must thank this Government for ushering in a new hope for the minority people of our country.  The Government has already declared a 15 point programme for the minority community of our country in pursuance of the recommendations of the Sachar Committee.  I hail from the district of Murshidabad which has been recognised as the highest minority dominated district in the country.  It is a totally backward district.  The entire border is porous.  We do not have any infrastructure.  We do not have any industry.  Erosion has become a perennial problem.  The geography of Murshidabad district has been altered by the severe erosion which is continuing there for years together.  Therefore, the Government should think over the erosion problem, the flood problem, and the arsenic problem of my district in particular and the State of West Bengal in general.

            Sir, now I would indulge in deflecting into other aspects.  We are all aware that the frequent piracy off the coast of Somalia and the Mumbai attacks which were through the Indian Ocean clearly indicate that the world’s third largest water body Indian Ocean is becoming vulnerable day by day.  About 50 per cent of the world container traffic passes through Indian Ocean. The Ocean stretches to the seven time zones from Sahara to Indonesia.  It serves as a network of trade alongside the web of drug smuggling, piracy and terrorist activities.  Therefore, I think, it is a challenge to our country in the 21st Century to secure Indian Ocean as a region of peace and tranquillity.

            Sir, there are two immense bays, Arabian Sea and Bay of Bengal and on top of it situated are two of the least stable countries, one is Pakistan and the other is Myanmar.[r47]              We are all aware that we are dependent upon oil.  Sir, 33 per cent of our energy needs come from oil; and 65 per cent oil is imported through the Indian Ocean.  The principal oil shipping lanes are Gulf of Aden, Gulf of Oman; and the commercial choke points are Bab el-Mandab Strait, Hormuz Strait, and Malacca Strait.  It is a matter of great concern that our neighbour China, which is also an emerging power in Asia, is adopting a ‘String of Pearls’ strategy.  It means that along the northern seaboard of Indian Ocean, they are developing ports, surveillance centres, listening points along the coast of Indian Ocean countries.  We are facing a ‘Hormuz dilemma’ because it is the lifeline of our trade, of our commerce.  Strait of Hormuz, is close to the shores of the Makran coast of Pakistan where China has been building up a deep seaport in the Gwadar area.  Naturally, in the coming years, it is our duty to secure the Indian Ocean region. 

            Sir, I know that time is going to be shortened.  I would like to invite your attention to the grim situation prevailing in West Bengal.  You have also referred to the cyclone storm Aila.  The cyclone storm Aila has devastated a great swathe of West Bengal taking a toll of 80 people, and already more than 53 lakh people have been rendered homeless; they are living simply under the open sky. The State Government of West Bengal is totally indifferent, is totally appearing lackadaisical to the plight of those poor victims. 

            You know that Sunderbans is recognised as a biosphere reserve in the world.  Now, the map of Sunderbans has been totally altered.  There is no map at present of Sunderbans.   The lifeline of Sunderbans area was the embankment.  Sir, 400 kilometre stretch of embankment in the Sunderbans area has been washed away.  Villages there are situated lower than the tide level of the river.  Now there is no embankment.  The entire area got inundated.  All the sweet water lakes have been inundated; ponds have been inundated; and the stagnant saline water has created a greater problem for the villagers, for the agriculturists, for the farmers of that area.  All the farmlands have been inundated by saline water. It will take years together to restore the farming capacity of that land.

            The State Government has not been able to provide the minimum relief materials to those cyclone-affected, flood-affected victims of that area.  Epidemic has already been started there because in the entire area, the carcasses of cattle are floating.  All the fishes are dead. Naturally, there is shortage of drinking water.  Naturally, shortage of medicines will aggravate the situation.[RP48]    16.00 hrs.             The Government is totally apathetic.  The Government is totally indifferent to the plight of those victims.  Even the fume and the rage of the local people have gone to the that extent that one MLA belonging to the CPI(M) party had been beaten black and blue by the local people of that area.

            After the storm ‘Aila’ struck the coast, the BSF and Army jawans were deployed. But without any rhyme or reason, the State Government relieved the BSF  and Army jawans.  What is the intention of this Government?    The Central Government on its own  capacity cannot provide relief.  But when the BSF and Army jawans  were deployed there to provide succour to the victims, the State Government of West Bengal relieved those jawans!  That is why I would request the Government to take very special measures for the rescue and rehabilitation of those flood victims because without rehabilitation, there is no sense of any relief.

            Mr. Chairman, Sir, you would be surprised to note that  already tigers from the Sunderbans areas have been straying in the  local villages.  Even crocodiles are swimming through the local villages.  Snakes  are coming to the villages through flood water. The situation is very grim there. We know  that the State Government is effete to deal with the situation.  They do not have honest intention also.  They do not have any resources. They do not have any  compassion to flood-affected people.  Now, they are busy in resorting to violence only to suppress, to throttle the democratic aspirations of the people of West Bengal because in the last elections, the Communists  in West Bengal have bitten the dust.  Therefore, now, after biting  the dust, they are trying to resort to violence.  Violence has already started there. 

            Sir, the State Government of West Bengal is in league with  the CPI(M)  party cadres, who are launching violence afresh. Only day before yesterday,  three to four Trinamool Congress workers were lynched.  Their houses were put to arson by the CPI(M) goons, who are in cahoots with the local police administration and who are perpetrating the reign  of violence only to retaliate to the poor people, poor villagers, who this time exercised their franchise in favour of the Opposition parties there, namely, the Congress and the Trinamool Congress.

            सभापति महोदय, पहले ये लोग हम लोगों के साथ थे। इन लोगों ने सोचा कि ये जो कहते जाएंगे, वह हम मानते जाएंगे। इन लोगों का सोचना था कि खिलौने की तरह जब चाहे यूपीए सरकार को नचाएंगे। जब चाहे यूपीए सरकार में टूट पैदा कर देंगे, लेकिन हुआ यह कि कम्यूनिस्ट पार्टी को बंगाल में धूल चाटनी पड़ी । बंगाल की आम जनता ने इन लोगों को शिक्षा दे दी कि बंगाल की आम जनता को टेकन-फार-ग्रांटेड मत करो।

MR. CHAIRMAN : Now, please conclude your speech.

SHRI ADHIR RANJAN CHOWDHURY :  Sir, I am on  my last point.

            महोदय, मुझे एक बात कहनी है कि जिंदगी में कितने दोस्त आए, कितने दोस्त बिखर गए। कोई आया दो दिन के लिए, कोई दो कदम चलते सांस भरने लगा, पर जिंदगी का दूसरा नाम दरिया है। वो तो बस बहता रहेगा, चाहे रास्ते में फूल गिरें या पत्थर। याद रखना कि कांग्रेस पार्टी एक जीता जागता दरिया है, वो तो बस बहते रहेगा और कोई सोचे कि कोई दरिया के पास जाए और उसे खिलौने की तरह नचाएं, तो यह उनकी गलती होगी। Nobody should take the Congress party for granted. This is the message of the last verdict of our country.

            With these few words, I support the Motion of Thanks on the President’s Address.

                                                                                                           

श्री मनोहर तिरकी (अलीपुरद्वार):  आदरणीय सभापति महोदय, आपने एक नए सासंद के तौर पर मुझे बोलने का मौका दिया जिस के लिए धन्यवाद देना चाहूंगा। जितने निर्वाचित सदस्यगण हैं, मैं उनको अपनी पार्टी आरएसपी की तरफ से  अभिवादन और अभिनन्दन देना चाहता हूं। माननीय राष्ट्रपति जी के अभिभाषण में देश के विकास, वैदेशिक नीति, शिक्षा नीति और हर क्षेत्र के पुनर्विकास करने का उल्लेख है। राष्ट्रपति जी का अभिभाषण सरकार की नीतियों का उल्लेख करता है। मैं बहुत खुश होकर कहना चाहता हूं कि अभिभाषण में नए-नए तरीके से  देश के विकास के लिए, लोगों को खुश रखने के लिए, यहां की बेकारी और गरीबी दूर करने के लिए, आदिवासियों की उन्नति के लिए और दूसरे कई क्षेत्रों के विकास करने का जिक्र किया गया है। आजादी के बाद से अधिकतर समय कांग्रेस की सरकार सत्ता में थी। मुझे अफसोस है कि इसके बाद भी देश में गरीबी, बेकारी और अशिक्षा है। किस नीति के कारण हमारा देश पिछड़ा है? कुछ लोग बहुत धनी है लेकिन अधिकतर लोग गरीब हैं। इस असमानता के कारण देश का विकास नहीं हो रहा है जिससे असंतोष बढ़ रहा है और वे कहीं संगठित रूप से, कही असंगठित रूप से विदेशी चक्र में आकर देश में अशांति फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। हमें देश के विकास की तरफ ध्यान देना चाहिए। देश की जनता चाहे वह छोटी जात की है या बड़ी की है, चाहे किसी जात की है, हमें उसकी तरफ ध्यान देना चाहिए।

16.07 hrs. (Dr. Girija Vyas in the Chair)             मैं जिस क्षेत्र से आया हूं, उसके एक तरफ भूटान है, बंगलादेश है, नेपाल है और दूसरी तरफ असम प्रदेश भी है। मैं जहां से चुनकर आया हूं, उसके बारे में अनुरोध करूंगा जिस का जिक्र कई सदस्यों ने भी किया है कि वहां जो भयंकर चक्रवात आया था, उसमें कई घर बरबाद हो गए थे। ऐसा नहीं है कि राज्य सरकार इस क्षेत्र में काम नहीं कर रही है लेकिन उसकी सामर्थ्य कम है। इसलिए हम चाहते हैं कि केन्द्र सरकार आगे आए और मर्यादापूर्ण होकर उनकी सहायता करे क्योंकि हमारे पास जो उपलब्धता है, जो सामान है, वह कम है। इसलिए हम चाहते हैं कि केन्द्र सरकार एक टीम भेजे जो उसका निरीक्षण और सर्वेक्षण करके जल्द से जल्द सहायता करे। यह एक प्राकृतिक आपदा है। यह मनुष्य द्वारा बनाया हुआ नहीं है। माननीय सदस्य अधीर बाबू ने कहा कि पार्टियां ठीक से काम नहीं कर रही हैं। मैं उन्हें कहना चाहता हूं कि वहां ठीक से काम हो रहा है क्योंकि इसके पहले भी चक्रवात आया था, संकट आया था जिस में हमने मिल-जुल कर काम किया था। वहां की जनता ने वामपंथियों को 32 साल से सत्ता में रखा है क्योंकि हम उनके साथ रह कर काम करते हैं। कुछ गलतियां होती हैं लेकिन यह मुसीबत का समय है इसलिए राजनीतिक दृष्टि से नहीं पॉलिटिकल माइलेज के लिए नहीं, हम मिल कर लोगों की सहायता करें। केन्द्र सरकार और राज्य सरकार मिल कर लोगों की सहायता करे।

            मैंने पहले भी बताया कि मैं सीमांत इलाके से चुन कर आया हूं। भूटान एक सीमांत देश है। हम उनकी पैसे से मदद करते हैं। वहां का विकास हो रहा है लेकिन हम हर साल बाढ़ और भूमि कटाव से परेशान होते हैं। यहां जितनी नदियां निकलती हैं, वे भूटान से होकर निकलती हैं। भूटान गैर कानूनी ढंग से खनन कर रहा है और फॉरेस्ट काट रहा है जिससे हमारे यहां पानी भर जाता है और सब कुछ बरबाद हो जाता है। इंडो-भूटान रिवर कमीशन बना था। मेरा अनुरोध है कि उसमें ज्यादा पैसा आवंटित किया जाए और कटाव को रोकने के लिए काम किया जाए।

            राष्ट्रपति जी का अभिभाषण बहुत अच्छा है। देश को चाय उद्योग से बहुत विदेशी मुद्रा प्राप्त होती है। असम, पश्चिम बंगाल, आध्र प्रदेश, केरल में चाय बनती है। चाय बागानों में करोड़ों मजदूर काम करते हैं लेकिन आदिवासी मजदूर ज्यादा हैं। उनका रहन-सहन बहुत खराब है। चाय बागानों के मालिक बहुत धनी हैं। आर्थिक उदारीकरण का प्रभाव शहरों में अच्छा पड़ा है।

उदारीकरण का प्रभाव दूसरी जगह, शहरों में भले ही अच्छा होगा, लेकिन गांवों में, देहात में इससे नुकसान हुआ है। कल-कारखाने बंद हो गये हैं। उदारीकरण से चाय बागानों में नुकसान होने लगा, लोगों को पगार नहीं मिल रही है। 34 चाय बागान पूरे देश में बंद हैं। मैं पश्चिम बंगाल में रहता हूं। वहां 13 चाय बागान पिछले 5-7 साल से बंद हैं। सरकार इस संबंध में बहुत कोशिश कर चुकी है। यह टी-एक्ट के अंदर पड़ता है। जब जयराम रमेश जी मंत्री थे, तब वह दिल्ली से वहां गये थे। उन्होंने उनके लिए पैकेज की घोषणा की थी, उन्होंने रुग्ण चाय बागान दोबारा खोलने की बात कही थी। मैं सरकार से आग्रह करूंगा कि जो बंद चाय-बागान हैं, इनको दोबारा खोला जाए,  टी-बोर्ड की देखरेख ठीक से की जाए और जो बंद चाय-बागान हैं, उनकी रुग्णता को दूर किया जाए। चाय-बागान के मालिक सरकार से, टी-बोर्ड से पैसे ले लेते हैं लेकिन वहां खर्चा नहीं देते, दूसरी तरफ डाल देते हैं। उनको जो इनकी देखरेख करनी चाहिए, वे ठीक से नहीं करते हैं। इसलिए इन चाय-बागानों की तरफ सरकार द्वारा ध्यान दिया जाना चाहिए ताकि वास्तव में इनका सही तरह से विकास हो सके और देश की आर्थिक-व्यवस्था में भी सुधार हो सके।

            हमारे देश में बहुत विदेशी आते हैं। हमारे देश में पर्यटन सौन्दर्य बहुत है लेकिन उसका ठीक से विकास किया जाना चाहिए। पूरे देश में वहां के सौन्दर्य का प्रचार-प्रसार ठीक से नहीं किया जाता। इसलिए मैं केन्द्र सरकार से अनुरोध करूंगा कि इस सुन्दर क्षेत्र को, जिसमें जंगल हैं, पहाड़ हैं, नदियां हैं, चाय-बागान हैं और जो प्राकृतिक सौन्दर्य से भरा हुआ है तथा जो दार्जीलिंग है जो प्राकृतिक सौन्दर्य से भरा हुआ है और आसाम की बैल्ट तक है, वहां तक आने-जाने की उचित व्यवस्था की जाए। इसलिए आर्थिक विकास की दृष्टि से इस क्षेत्र की तरफ ज्यादा ध्यान दिया जाना चाहिए। उस क्षेत्र में जाने के लिए उचित रूप से रेल व सड़क यातायात की उचित सुविधाओं की व्यवस्था की जाए। चूंकि मैं राज्य में सड़क विभाग में मंत्री भी था, इसलिए मैं देख रहा था कि वहां जितना नेशनल हाइवे में पैसा लगना चाहिए, उतना पैसा वहां नहीं दिया जाता। जो पश्चिम बंगाल से होकर आसाम इत्यादि सब राज्यों में रास्ते जाते हैं, उनमें धन-आबंटन कम होता है। हर साल बाढ़ के कारण राष्ट्रीय राजमार्ग के लिए जितना रुपया मिलना चाहिए था, वहां उतना पैसा नहीं मिलता था जिसके चलते पूरे भूटान, उसके बाद नेपाल आसाम इत्यादि जितने राज्य हैं, सबमें उसके कारण नुकसान होता था। रास्ते टूट जाते थे। पैसा नहीं मिलने के कारण वे सब बन नहीं पाते थे। आसाम की तरफ जो सिंगल रेल लाइन जाती है, मैं सरकार से अनुरोध करता हूं कि इसे डबल लाइन किया जाए जिससे ज्यादा गाड़ियां चलें। बड़े दुख की बात है और आप सब लोग देखते हैं कि पूर्वांचल उग्रवाद से भरा हुआ है। आज वहां दिल्ली के आदमी हैं, गुवाहाटी के हैं और सिलीगुडी के भी हैं, लेकिन मैं कहना चाहता हूं कि सम-विकास होना चाहिए। सम-विकास का यदि रास्ता नहीं होगा तो देश का वास्तव में विकास नहीं हो सकता। जैसे दिल्ली में हम लोग देखते हैं, उसी तरह से ग्रामीण क्षेत्र में एक छोटा सा रास्ता बनाने से लाखों लोगों का भला हो सकता है। राज्य सरकार के पास पैसे कम होते हैं। इसलिए केन्द्रीय सरकार को इस संबंध में सामने आना चाहिए जिससे कि सम-विकास हो। यानी सभी क्षेत्रों में बराबर विकास हो क्योंकि सम-विकास से लोगों को रोजगार मिलेगा और रोजगार मिलने से लोग गलत रास्ते पर, उग्रवाद के रास्ते पर नहीं जाएंगे। भूटान एक सीमान्त देश है। यहां के जंगलात में वे लोग बम फोड़ते हैं और उसके बाद भाग जाते हैं। यह जो सीमान्त इलाका है और भौगोलिक कारण से यहां केन्द्रीय सरकार का जो बॉर्डर एरिया डैवलपमेंट प्रोजेक्ट हुआ करता है, तो उस क्षेत्र में उनको पैसा नहीं मिलता है। मैं डी.एम. से पूछा करता था कि यहां इतना पैसा क्यों नहीं मिलता है, तो वे कहते थे कि इन क्षेत्रों में पैसा कम आता है। यह एक विकासशील क्षेत्र है। इस क्षेत्र में बिल्कुल आदिवासी लोग रहते हैं। इस क्षेत्र में, इस सीमान्त इलाके में इन लोगों को कोई बिजली की व्यवस्था नहीं है, इनके लिए कोई सड़क की व्यवस्था नहीं है, वहां काम कोई नहीं हो सकता। इसलिए केन्द्र सरकार की यह जिम्मेदारी बनती है कि बॉर्डर एरिया डवलपमेंट प्रोजेक्ट को वहां राज्य में, जिले में चालू किया जाए जिससे वहां के लोगों में, वहां उन क्षेत्रों के भी लोगों में खुशहाली का मौका आए। हमारे राज्य में सब जगह लोग कृषि पर निर्भर करते हैं। जो खेती करने वाले लोग हैं, जो खेती करते हैं, वे ठीक से खेती नहीं कर पाते हैं क्योंकि फर्टिलाइजर का भाव, डीजल का भाव बहुत ज्यादा है। खेती करने के लिए उचित रूप से सिंचाई की व्यवस्था नहीं है। वहां जैसे हम लोग उत्तर बंगाल में रहते हैं, बंगाल के उत्तरी साइड में हर साल बाढ़ का प्रकोप रहता है। इस कारण से वहां काफी नुकसान होता है। हमारे यहां एक बहुत बड़ा प्रोजेक्ट पड़ा हुआ है, एक बहुत बड़ी नदी [r49] है।

तीस्ता नदी पर प्रोजैक्ट बना है, तीस्ता का डैम बना है, बैराज बना है। मैं समझता हूं कि केन्द्र सरकार को उसका अधिग्रहण करना चाहिए। वहां सिक्किम और भूटान से तीस्ता नदी आती है, उसमें प्रोजैक्ट बन रहा है। आज बीस साल हो गये हैं, लेकिन राज्य सरकार उस पर खर्चा नहीं कर पा रही है, उसके पास पैसा नहीं है। यहां बार-बार आवाज उठ रही है कि तीस्ता प्रोजैक्ट को राष्ट्रीय स्तर पर मर्यादा दी जाए। इससे वहां हर साल लाखों एकड़ खेती की सिंचाई की व्यवस्था हो सकती है। 

            माननीय सभापति महोदया, मैं निवेदन करूंगा कि आप लोग दिल्ली में बहुत पुराने हैं। लेकिन आपके राज्य में बिल्कुल सूखा है, वहां बालू बहुत है। लेकिन हमारे यहां बहुत हरियाली हैं, वहां चाय के बागान हैं, खेती है, सुंदर जंगल और पहाड़ हैं, लेकिन हम उनका इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं। वहां नदियों का पानी बहता चला जा रहा है। वहां जंगल है, प्राकृतिक सौन्दर्य है, हाथी घोड़े हैं और अन्य बहुत से जंगली जानवर हैं। इसके लिए वहां एक योजना बनानी चाहिए। आपने महामहिम राष्ट्रपति जी के अभिभाषण में देखा कि आदिवासियों के विकास के लिए भी काम किया जायेगा। जो बी.पी.एल. में होंगे, उन आदिवासियों को 65 वर्ष की उम्र होने के बाद पेंशन देने की बात कही गई है। यह बहुत खुशी की बात है। मैं खुद भी आदिवासी हूं और आप जानती हैं कि आदिवासियों की औसत उम्र 60-65 वर्ष से ज्यादा नहीं होती है। 65 वर्ष तक आदिवासी मर जाते हैं। इसलिए इस योजना का सदुपयोग किया जाए और जो आदिवासी गरीब लोग हैं, जिनके लिए पेंशन की व्यवस्था करने की बात कही गई है, उसे साठ वर्ष से शुरू करने की व्यवस्था की जाए। मैं आदिवासियों के बारे में जानता हूं, चूंकि मैं उस माहौल में रहता हूं। इसलिए मेरा आपके माध्यम से केन्द्र सरकार से निवेदन है कि आदिवासियों को बीपीएल के साथ-साथ साठ वर्ष की उम्र से उन्हें पेंशन देने की व्यवस्था की जाए।

            मैं निवेदन करना चाहता हूं कि जैसे रेलवे में केन्द्र सरकार की व्यवस्था है कि उन्हें जो पैसा मिलता है, उससे शिक्षा व्यवस्था के लिए आप केन्द्रीय विद्यालय बनाते हैं। जहां सैनिक स्थल होते हैं, वहां केन्द्रीय विद्यालय बनाये जाते हैं। मैं कहना चाहता हूं कि चाय बागानों का ज्यादा से ज्यादा पैसा केन्द्र सरकार को मिलता है, वहां से कस्टम डय़ूटी तथा जो विदेशी मुद्रा आती है, वह भारत सरकार के पास जाती है। इस क्षेत्र में आदिवासी ज्यादा रहते हैं। वहां मल्टी भाषा के लोग रहते हैं। हमारे पूर्वज रांची, झारखंड से चले गये। अभी हम लोग वहां सौ,दो सौ सालों से रह रहे हैं। अब हम लोग बंगाली हो गये। अभी हम लोग बंगाल में खुशी से रहते हैं। ऐसे ही वहां हर क्षेत्र के लोग रहते हैं। इसलिए वहां मिक्स्ड भाषा है। वहां बंगाली और हिंदी भाषा में मुश्किल आती है। इसलिए मैं केन्द्र सरकार से विनती करूंगा कि वहां केन्द्रीय विद्यालय खोला जाए, जैसे सैनिक क्षेत्रों में किया जाता है, इससे वहां हर भाषा में पढ़ाई-लिखाई करने का मौका मिल सकता है।

            सभापति महोदया, अभी मुझे और भी बहुत सारी बातें कहनी थीं। लेकिन दूसरे माननीय सदस्यों ने वे बातें कह दीं हैं। मैं आपका आभारी हूं, चूंकि मैं पहली बार यहां चुनकर आया हूं, इसलिए पूरी तैयारी भी नहीं कर सका। लेकिन आपने मुझे बोलने का मौका दिया, आप मुझे इसी तरह से दूसरी बार भी मौका दें। मैंने आपके माध्यम से केन्द्र सरकार से जो-जो अपील की हैं, केन्द्र सरकार उनकी तरफ ध्यान दे, ताकि उस क्षेत्र को कुछ मिले और उस क्षेत्र का विकास हो सके। इन्हीं शब्दों के साथ मैं आपको धन्यवाद देते हुए अपना वक्तव्य समाप्त करता हूं।

   

सभापति महोदया : मैं भी आपको धन्यवाद देती हूं, चूंकि आपने बहुत सही समय लेकर पूरी बात कही है।

श्री इन्दर सिंह नामधारी (चतरा):   मैडम चेयरपर्सन, मैं आपके प्रति आभार व्यक्त करता हूं कि आपने मुझे राष्ट्रपति जी के अभिभाषण पर कुछ सुझाव देने का मौका दिया है। कल हमने महामहिम राष्ट्रपति जी  का अभिभाषण सुना और आज आपने रूलिंग पार्टी की तरफ से वोट ऑफ थैंक्स का मोशन यहां प्रस्तुत किया। मैं उन विचारों से सहमत हूं, जो महामहिम राष्ट्रपति जी ने अपने अभिभाषण में रखे हैं, लेकिन मैंने कुछ संशोधन इसलिए दिये हैं, क्योंकि नीतियां चाहे कितनी भी सुन्दर क्यों न हों, जब तक उनके कार्यान्वयन में आई हुई खामियों को हम दूर नहीं करेंगे, तब तक वे नीतियां कभी भी सफल नहीं हो सकतीं।  आप महसूस करेंगी कि मोर एक बहुत सुन्दर पक्षी है, उसके पंख बहुत सुन्दर हैं, जब वह अपने पंखों को देखता है तो बहुत खुश होता है, लेकिन जब वह अपने पैरों को देखता है तो मोर सोचता है कि काश मेरे पैर भी वैसे ही होते, जैसे सुन्दर मेरे पंख हैं। यहां बहुत सुन्दर नीतियां बनती हैं, लेकिन जब वे कार्यान्वयन के धरातल पर जाती हैं, जब मोर अपने पैरों को देखता है, उन नीतियों में इतनी खामियां हैं कि आज गरीब तक उन नीतियों का लाभ नहीं पहुंच रहा है[BS50] ।

हिन्दुस्तान के एक बहुत अच्छे कवि श्री दुष्यंत जी हैं जिन्होंने लिखा है :

            यहां तक आते-आते सूख जाती हैं सभी नदिया,              हमें मालूम है पानी कहां ठहरा हुआ होगा?
 
            सभापति महोदया, आप भी साहित्यिक प्राणी हैं, आप जान सकती हैं। नदी में पानी रहता है लेकिन मैं जिस सुदूर क्षेत्र से जीतकर आया हूं, चतरा उसका नाम है जो जंगलों से घिरा हुआ है। आपने उस स्थान की यात्रा की है या नहीं, लेकिन यह रांची से 150 किलोमीटर दूर है। पूरा जंगलों से घिरा हुआ है, भारी उग्रवादी इलाका है। उसमें लगातार घूमने के बाद मैंने यह महसूस किया है कि यहां तक आते-आते सूख जाती हैं नदियां, हमें मालूम है पानी कहां ठहरा हुआ होगा? नदियों का पानी वहां तक जाते सूख जाता है, रास्ते में लोग रोक लेते हैं।
            सभापति महोदया, आपने अपने भाषण में इस बात का उल्लेख किया था कि स्व. राजीव जी ने कहा था कि यहां से एक रुपया भेजा जाता है तो वहां तक पहुंचता है सिर्फ 15 पैसा। उनके पुत्र श्री राहुल गांधी ने भी कहा है कि वहां तक 10 पैसे ही पहुंचता है। आखिर, बीच में 90 पैसे कहां जाता है?  यहां तक आते-आते सूख जाती हैं नदिया, हमें मालूम है कहां ठहरा हुआ पानी होगा? इस ठहरे हुये पानी को कैसे मंजिल तक पहुंचाया जाये? इसलिये मैं राष्ट्रपति जी के अभिभाषण में यह जोड़ना चाहता हूं कि उन नीतियों की खामियों को दूर करने की कोशिश की जाये। देश में प्रजातात्रिक पद्धति लागू हुये 60 साल हो गये हैं, क्या उसका फल इस देश के लोग प्राप्त कर सके हैं?
            उगा सूर्य कैसा, कहो मुक्ति का, उजाला करोड़ों घरों तक न पहुंचा,             मन्दिरों के शिखऱों पर , मगर देवता के पदों तक न पहुंचा।
 
मंदिरों के कंगूरों तक तो रोशनी पहुंची लेकिन मन्दिरों के भीतर देवता के पैरों तक नहीं पहुंच पाया।
            मिला बांटने को जो अमृत सबको,             गला चंद लोगों का तर कर रहे हैं।
 
            आजादी का अमृत सब के लिये मिला था ताकि इसे सब के हलक में उतारा जाये लेकिन यह चंद लोगों का गला तर कर रहा है। यही कारण है कि देश की सर्वोच्च पंचायत में लगातार यह आवाज उठ रही है कि विदेशों में भारत के लोगों का जो पैसा जमा है, उसे देश में वापस लाया जाये। आखिर वह पैसा कैसे वहां गया? उसके कई कारण क्यों न हों लेकिन वह पैसा भारत की धरती पर वापस लाये जाये और उसका लाभ गरीब लोगों को दिया जाये या जो दशकों से इस सुख से वंचित है, उनके लिये खर्च किया जाये।
            सभापति महोदया, मैं इस विषय की ओर आपका ध्यान इसलिये आकर्षित कर रहा हूं क्योंकि मैं खुद भुक्तभोगी हूं। मेरे क्षेत्र में रेल लाईन नाम की कोई चीज नहीं है। अगर आवागमन नहीं होगा तो उग्रवाद बढ़ेगा, आतंकवाद बढ़ेगा। यही वहां की नियति है। वहां नदियां हैं लेकिन बांध नहीं बना सकते हैं क्योंकि जंगली इलाका है। वन विभाग कई अड़चनें लगाता है कि जब तक दुगनी जमीन नहीं देंगे, आप बांध नहीं बना सकते हैं। मैं आपके माध्यम से यह बात माननीया यूपीए चेयरपर्सन से कहना चाहता हूं जो यहां बैठी हुई हैं। सुप्रीम कोर्ट जंगलों के लिये कड़ाई करती है कि जंगल की जमीन बचायी जाये लेकिन क्या कोई ऐसा तरीका निकाला जा सकता है जिससे सांप भी मर जाये और लाठी भी न टूटे। वन विभाग की जमीन पर डैम बनवा दिया जाये। आखिर उस पानी से वन विभाग के पौधे भी सिंचित होंगे। आज इस विषय पर बहस चलाने की जरूरत है क्योंकि जो उपेक्षित इलाके हैं, वे पिछड़े रह जायंगे और जो आगे बढ़ रहे हैं, वे और आगे बढ़ जायेंगे। इन उपेक्षित और पिछड़े इलाकों को न्याय नहीं मिल पायेगा। इसलिये माननीय राष्ट्रपति जी के अभिभाषण में मैं इस बात को जोड़ने के लिए निवेदन कर रहा हूं। उन नदियों को परखा जाये जिनके चलते उपेक्षित और पिछड़े लोगों तक  उसका लाभ नहीं पहुंच पाता है। यह हकीकत है कि भ्रष्टाचार हमारे देश को कैंसर की तरह खा रहा है।[s51]  हम इससे मुंह नहीं मोड़ सकते। राज चाहे किसी का भी रहा हो, लेकिन भ्रष्टाचार को कभी रूल आउट नहीं किया जा सकता। भ्रष्टाचार की स्थिति यह है, जैसा बिहार के एक बहुत बड़े कवि विद्यापति जी ने कहा था- “तातर सैकत वारि बिन्दु सम सुत निक रमनी सवादे।” अगर आप बहुत गरम बालू पर चंद बूंदे पानी की डाल दें तो पता भी नहीं चलेगा कि पानी कहां गया। गरम बालू के जो कण हैं, वे उस बूंद को तुंत खींच लेते हैं। वैसे ही इस देश में जो भ्रष्टाचार है, उसकी गरम बालू पर अगर चंद बूंदे विकास की योजनाओं की जाती हैं तो पता ही नहीं चलता कि वे योजनाएं कहां गईं। इतने दिन बीत जाने के बाद भी हमारा देश आगे नहीं बढ़ सका। गरीब अभी तक न्याय नहीं पा सके हैं। इसलिए मैं चाहता हूं कि सरकार उन नीतियों पर, जहां भ्रष्टाचार घुन की तरह लगा हुआ है, उसे कैसे दूर किया जाए, इस तरफ ध्यान दिया जाए।
            मैडम, आप राजस्थान की रहने वाली हैं, मैं नहीं जानता कि वहां भ्रष्टाचार का क्या आलम है, लेकिन मैं झारखंड के बारे में कह सकता हूं कि सरकारी योजनाओं को जैसे लूटा जाता है। 35 से 40 परसैंट तक बीच में बिचौलिए और पदाधिकारी खा जाते हैं। “उम्रे दराज मांग कर लाए थे चार दिन, दो आरजू में कट गए, दो इंतजार में।” योजनाएं आती हैं, लेकिन उन पैसों की कैसे बंदरबांट होती है, अगर इसका नग्न स्वरूप देखना चाहें तो आप झारखंड में जाकर देख सकते हैं। ऐसे हालात में कैसे वह इलाका आगे बढ़ेगा। झारखंड का निर्माण एक नये राज्य के उदय के लिए किया गया था। मैं उन लोगों में से हूं , जिन्होंने इसके निर्माण के लिए आंदोलन किया, लेकिन झारखंड बनने के बाद यह महसूस हुआ कि यह अपनी मंजिल से काफी दूर चला गया है। इसलिए इस इलाके को पटरी पर लाने के लिए मैं निश्चित रूप से सरकार से मांग करूंगा कि एक विशेष पैकेज झारखंड को दिया जाए और जो भ्रष्टाचार का आलम है, उसे दूर करने की कोशिश की जाए।
            मैडम, राष्ट्रपति जी के अभिभाषण में बहुत स्पष्ट रूप से कहा गया, इलैक्शन कमीशन की पीठ ठोकी गई, थपथपाई गई, मैं भी मानता हूं कि हिन्दुस्तान का जो लोकतंत्र है, वह दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, लेकिन कहीं ऐसा न हो कि यह बीमारी दिनोंदिन बढ़ती जाए और यह फोड़ा कैंसर बन जाए। इसके पहले हमें जाग जाना चाहिए। आज भी चुनाव में जो खामियां हैं, उनकी तरफ सरकार का ध्यान जाना चाहिए। चुनाव आयोग के बारे में मैं कभी-कभी कहता हूं, जैसे फोरेस्ट विभाग के नाके होते हैं तो वहां से ट्रक के ट्रक अवैध लकड़ी के गुज़र जाते हैं, लेकिन गरीब महिलाएं अगर दतवन लेकर जाती हों तो उन्हें पकड़ लिया जाता है। आज भारत के चुनाव आयोग को इतना डेप्थ में जाने वाला होना चाहिए, किसी ने झंडा, पताका, बैनर लगा दिया, उस पर कोड ऑफ कंडक्ट के हनन का केस हो जाता है, लेकिन पैसा पानी की तरह बहाया जाता है, इस पर कभी चुनाव आयोग का ध्यान नहीं जाता। जातीयता का नंगा नाच किया जाता है। अभी शरद यादव जी ठीक कह रहे थे कि अब पार्टियां टिकट देने के पहले पूछती हैं कि आपकी जात क्या है। तब हमारे जैसे लोग कहां जाएंगे। कबीर जी ने कहा था - “जात न पूछो साधु की, पूछ लीजिए ज्ञान, मोल करो तलवार का, पड़ा रहने दो म्यान।” म्यान की क्या कीमत करते हो, अगर कीमत करनी है तो तलवार की करो। लेकिन आज तलवार की कीमत कोई नहीं करता, आज म्यान की कीमत होती है। जिस क्षेत्र में जिस जाति का बाहुल्य है, उसे कहा जाता है कि तुम्हीं यहां के फिट केंडीडेट हो,  चाहे वह चोर या डकैत ही क्यों न हो।
            मैडम, मैं आपसे आग्रह करना चाहता हूं कि चुनाव आयोग का ध्यान इस तरफ जाना चाहिए। मैं जिस क्षेत्र से जीता हूं, बगल के क्षेत्र में जहां मेरा विधानसभा का क्षेत्र पड़ता है, मैं कहना नहीं चाहता, क्योंकि जब कोई चुन कर चला आया, वह माननीय सांसद है, लेकिन एक ऐसा व्यक्ति जीता जिसे हाईकोर्ट भी इज़ाजत नहीं दे रहा है, वह सदन में आकर ओथ भी ले ले - हमारा लोकतंत्र किधर जा रहा है, आज इस पर सोचने की जरूरत है। इसलिए मैं चुनाव आयोग से आग्रह करना चाहता हूं कि इन छोटी-छोटी बातों की तरफ देखने की बजाए यह देखे कि जातीयता के इस जहर को कैसे खत्म किया जा सकता है। पैसे के दुरुपयोग को कैसे कम किया जा सकता है।[S52]                वहां हिंसा को कैसे खत्म किया जा सकता है। मैं जिस चुनाव क्षेत्र से जीतकर आया हूं, वहां से उग्रवादियों का एक कमांडर खड़ा था। वहां यह आलम था कि जहां आम जनता वोट डालने के लिए आती थी, वहां एक बैनर लगा दिया जाता था कि वोट का बहिष्कार करो। जो पहला बटन दबाएगा उसका अंगूठा काट लिया जाएगा। आम गरीब जनता तो चली जाती थी, लेकिन जो जनता हम जैसे लोगों को वोट देने आती थी, उनके जाने के बाद बैठकर ईवीएम (इलैक्ट्रिक वोटिंग मशीन) पर वोट छाप दिए जाते थे और कई सौ बूथों पर इस प्रकार छपाई की गई। मैं कहना चाहता हूं कि क्या चुनाव आयोग ने कभी इस पर ध्यान दिया है?
सभापति महोदया  : नामधारी जी, समाप्त करें। जल्दी समाप्त करने की कोशिश करें।
श्री इन्दर सिंह नाधारी :  महोदया, मैं जल्दी भावुक हो जाता हूं, क्योंकि जो अपने इलाके से त्रस्त है, अगर वह इस सर्वोच्च सदन में अपने भाव प्रकट नहीं करेगा, तो उसकी कुंठा कहां समाप्त होगी? जब आप बोल रही थीं, तो आपके दिल में भी वे अरमान थे। इसलिए मुझे उम्मीद है कि आप मेरे दिल के अरमानों को भी समझेंगी।
सभापति महोदया: आप तो विधान सभा में माननीय स्पीकर रह चुके हैं। इसलिए आपको तो बोलने के बहुत मौके मिलेंगे। 
श्री इन्दर सिंह नामधारी   : महोदया, मैं कहना चाहता हूं कि आज चुनाव आयोग को इस तरफ ध्यान देने की जरूरत है, क्योंकि अगर यह बीमारी बढ़ती चली गई, तो देश के लिए बहुत घातक होगी। इसके साथ ही मैं कहना चाहता हूं कि राष्ट्रपति जी के अभिभाषण में कहा गया है कि हम उग्रवाद को सख्ती से समाप्त करेंगे, लेकिन मैं आपको यह सूचना देना चाहता हूं कि झारखंड के पिछड़ेपन का एक मुख्य कारण यह भी है कि वहां पर अफसरों का भ्रष्टाचार, बिचौलियों का भ्रष्टाचार तो है ही, लेकिन इनके अतिरिक्त उग्रवादियों को एक लेवी देनी पड़ती है, नहीं तो आप सरकार की ओर से वर्क-ऑर्डर लेकर जाएंगे, उसकी कोई कीमत नहीं है, जब तक वे ऑर्डर नहीं देते हैं, जिसे जंगल की सरकार कहा जाता है, आप ठेका ले लें, आपके नाम पर टेंडर हो गया, लेकिन बिना उनकी अनुमति के आप काम शुरू नहीं कर सकते हैं। जब तक उन्हें पत्रम्-पुष्पम् भेंट न कर दिया जाए, तब तक काम शुरू नहीं किया जा सकता है। इसलिए मैं आग्रह पूर्वक कहना चाहता हूं कि जिस इलाके का मैं प्रतिनिधि हूं, वहां की जो समस्याएं हैं, उनकी ओर विशेष रूप से ध्यान दिया जाए।
            महोदया, रेल मंत्री, सदन में नहीं हैं, लेकिन यू.पी.ए. की चेयरपर्सन सदन में उपस्थित हैं। मैं उनसे आग्रह करना चाहता हूं कि वह चुनाव में उस इलाके में गई होंगी, वह तो वोट मांगने का एक समय होता है, लेकिन बिना चुनाव के भी वह वहां जाएं और देखें कि किन परिस्थितियों में वह इलाका है। आज जरूरत है सरकार को वहां की समस्याओं पर ध्यान देने की। यह देखने की जरूरत है कि रेलवे की लाइन वहां कैसे जाए, वहां नदी पर डैम कैसे बने, गरीबों को रोजगार कैसे मिले। वहां पर ‘नरेगा’ भी मजाक बनकर रह गया है। अभी महोदया, आपने भी अपने भाषण में नरेगा के बहुत गुणगान गाए, लेकिन वहां कहते हैं कि जो नरेगा करेगा, वह मरेगा। इसका कारण क्या है?  वहां मजदूरों को मजदूरी नहीं मिलती। उनके खाते छः-छः महीने तक नहीं खुलते। जो काम नहीं करते, उन्हें मजदूरी मिल जाती है। जो काम करने वाले हैं, उनके पास जॉब का कार्ड नहीं है। आखिर ये विसंगतियां कब और कैसे दूर होंगी? इनके लिए कोई ऐसी एजेंसी हो, जो इन सब चीजों को चैक करे। अगर यह अच्छा कानून बना है, तो यह गरीबों तक पहुंचे, इसका लाभ गरीबों को हो, इसकी कोशिश की जानी चाहिए।
             महोदया, मैं जो बात बोलता हूं, वह आंखों की देखी बोलता हूं। मैं सुनी-सुनाई बातें नहीं करता हूं। जो मैंने अपनी आंखों से देखा है, मैं उसी का वर्णन कर रहा हूं। इसलिए मैं, आपके माध्यम से, सरकार से आग्रह करूंगा कि उन इलाकों की तरफ ज्यादा ध्यान दें, जो पिछड़ चुके हैं, क्योंकि आरक्षण भी इसीलिए दिया जाता है कि अगर कोई पिछड़ा हुआ है, तो उसे एक लाइन पर लाकर, तब उसकी दौड़ शुरू की जाए। चूंकि मेरा इलाका पिछड़ा हुआ है इसलिए उसकी तरफ विशेष ध्यान दिया जाए, ताकि वहां के लोग भी कह सकें कि हम भारत के अंग हैं। नहीं, तो ये विसंगतियां देश की एकता को तोड़ देंगी।
             महोदया, चूंकि आप एक कवि हृदय हैं, इसलिए मैं अपनी बात को समाप्त करने से पहले दिनकर जी की कुछ पंक्तियां सुनाना चाहता हूं-
             “ कि कुछ समझ नहीं पड़ता कि रहस्य यह क्या है                  जाने भारत में बहती कौन हवा है                  गमलों में हैं जो उगे, उनमें सुरम्य और सुगंध है                  धरती के पेड़ दीन दुर्बल हैं                  जब तक है यह वैषम्य, समाज सड़ेगा                  किस तरह यह देश एक होकर रहेगा। ”               इसलिए आज जरूरत है कि इस देश की एकता को कैसे बचाया जाए। देश की एकता को बचाने की जरूरत है। [RPM53]  उसके लिए यह भी जरूरत है कि जो सरकार सत्तासीन है, वह देखे कि जो पिछड़े हुए लोग हैं, जो धरती के पेड़ हैं, वे कहीं सूख तो नहीं रहे हैं और गमलों में उगे हुए लोग पुष्पित और पल्लवित तो नहीं हो रहे हैं। जब तक यह व्यवस्था नहीं होगी, तब तक इस देश में समरसता नहीं आ सकेगी।
            इन्हीं शब्दों के साथ धन्यवाद।
                                                                                                                       
डा0 मिर्जा महबूब बेग (अनन्तनाग): मैडम चेयरपर्सन, मैं आपका शुक्रगुजार हूं कि आपने मुझे बोलने का मौका दिया। पहली बार मुझे मुल्क के सबसे बड़े एवान में बात करने का मौका मिला है।      
            मैं उस स्टेट से हूं, जिस स्टेट के बारे में मुझे लगता है कि गलतफहमियां बहुत हैं। मैं 1983 से पब्लिक लाइफ में हूं, मेरे वालिद भी थे। मैं जम्मू-कश्मीर नेशनल कांफ्रेंस से ताल्लुक रखता हूं। कश्मीर के सबसे बड़े टालैस्ट लीडर जो थे, मेरे वालिद, मेरे पिताजी भी उनके साथ थे और मैं इस मुल्क के सबसे बड़े मुअज्जिज़ एवान में, अपनी मेडन स्पीच में अपनी रियासत के बारे में कुछ बातें बताना चाहता हूं। जैसी मेरी बहुत से साथियों ने यहां बातें की, ऑनरेबिल प्रेसीडेंट ने जो जोइंट सैशन को एड्रैस दिया, उस पर आपने जो वोट ऑफ थैंक्स का मोशन लाया, मैं उसके हक में बोलने के लिए खड़ा हुआ हूं, मगर मैं कुछ बातें जरूर कहूंगा।
            हम 20 साल से उस मिलीटेंसी का शिकार हैं, जिस मिलीटेंसी की बातें पूरे देश ने सुनीं और जिस मिलीटेंसी की बातें अभी मुझसे पहले मेरे झारखंड के साथी ने कहीं। शायद धरती पर, मैं देश की बात नहीं, धरती की बात करूंगा, कश्मीर वाहिद एक ऐसी जगह है, जिसकी पूरी दुनिया ने चर्चा सुनी और पूरा देश बहुत फLा के साथ कहता है कि यह पूरे देश का ताज है, रियासते जम्मू-कश्मीर और कश्मीर, जहां से मैं ताल्लुक रखता हूं।
            जैसे मैंने नेशनल कांफ्रेंस के सबसे बड़े टालैस्ट लीडर शेख अब्दुल्ला की बात की, मैं इस एवान में याद दिलाना चाहूंगा कि मैं उस रियासत से ताल्लुक रखता हूं, जब पूरे देश में मजहब के नाम पर खून की होली खेली जा रही थी तो उस वक्त फादर ऑफ द नेशन, महात्मा गांधी जी को रोशनी की किरण नज़र आई थी, मैं उसी कश्मीर से ताल्लुक रखता हूं और उसका फLा मेरी पार्टी जम्मू-कश्मीर नेशनल कांफ्रेंस को है। हमने टू नेशन थ्योरी को रिजैक्ट किया। हमारे लीडर शेख अब्दुल्ला ने टू नेशन थ्योरी को न सिर्फ रिजैक्ट किया, बल्कि जिन्ना को वहां से भगा दिया और हिन्दू, मुस्लिम, सिख इत्तेहाद का नारा दिया। कश्मीर शायद पूरे मुल्क में वाहिद जगह थी, जहां पर हिन्दू मुस्लिम के झगड़े नहीं हुए। हमने रिश्ता जोड़ा था, एक सियासी रिश्ता, बाजाब्ता शायद रियासते जम्मू-कश्मीर वाहिद रियासत है, मैं अपने मुअज्जिज़ साथियों को बताना चाहता हूं, this is the only State which became a part of this great country.  We sorted out our relationship with rest of the country.  It is not true about other States of the country, जिसका ख्वाब कश्मीरियों ने देखा था।  We have signed a Document - Document of Accession - and we are proud that we became a part of this nation.  That was a secular and democratic country. वह जो बन्दूक थी, वह खामोश होगी, मगर मैं आपको बताना चाहता हूं कि इसके पोलिटिकल इम्प्लीकेशंस हैं, कश्मीर का जो पोलिटिकल इश्यू है, उसे पोलिटिकली एड्रैस करना है। जहां तक मेरी पार्टी का ताल्लुक है, We have taken care of militancy and we are proud of our Army.[R54]  [p55]              जहां तक मेरी पार्टी का ताल्लुक है, At the time of accession, when we became a part of this country, we were a fully autonomous State in the entire country.  We acceded and we gave three subjects to the Union and, for the rest of it, we were fully autonomous and we are enjoying a special status within this Union.  But unfortunately, वह सिंगल हैंडेडली इरोड हुआ है, वन साइडेड इरोजन उसमें हुआ है। जहां तक हमारी सोच है, हम समझते हैं कि रेस्टोरेशन, we are not asking for something new, we are not asking for moons, we are asking, जब हम इस देश का हिस्सा बने, जो स्पेशल स्टैटस हमें हासिल था, जिसको आटोनॉमी बोलते हैं, वह हमें रेस्टोर करें। यह जरूरी है वहां की एलिनेशन को एड्रेस करने के लिए, वहां की पालिटिकल अलाहिदगी को एड्रेस करने के लिए। बहुत से फार्मूले इसके लिए आए।  हमें लगता है कि अगर कोई वायबल प्रैक्टिकेबल सोल्यूशन कश्मीर ईश्यू का है, तो वह रेस्टोरेशन आफ फुल्ली आटोनामस पोजीशन है। 
            बहुत से फार्मूले आए, बहुत सी बातें हुयीं, हम चाहेंगे कि जिसे प्राइम मिनिस्टर, डा. मनमोहन सिंह जी ने शुरू की थी, सोनिया जी ने शुरू की थी, वह डायलॉग प्रासेस, क्योंकि जितनी रिलेशनशिप इन दो कंट्रीज के दरम्यान ठीक रहे, उतना जम्मू-कश्मीर रियासत ठीक होगा। बदकिस्मती से जितनी सूरत-ए-हाल पाकिस्तान और हमारे देश के दरम्यान बिगड़ती है, उसका सबसे ज्यादा और खराब असर रियासते जम्मू कश्मीर पर पड़ता है।  यहां मैं इकानामिक्स की बात करता, मगर जब तक पालिटिकल स्टेबिलिटी नहीं आएगी, क्योंकि हम फक्र के साथ कह सकते थे कि हमने टू-नेशन थ्योरी रिजेक्ट की।  जब कम्युनल रायट्स होते हैं, यहां मेरा सिर फक्र से ऊंचा होता है कि हमारी प्रेसीडेंट ने जो गवर्नमेंट की तरफ से हमको एड्रेस किया, उसमें यह बहुत अच्छी बात कही थी कि कम्युनल रायट्स को रोकने की जरूरत है।  जब कम्युनल राइट्स वहां होते हैं, तो हमें प्राब्लम्स हो जाती हैं।
            अटल जी यहां होते, तो मुझे बड़ा शौक था कि मैं उनसे बात कहूं और वे मेरी बात सुनें। अगर आप इस देश के एक ही सैक्शन को अपने साथ चलायेंगे, क्योंकि इसमें एक बिलियन लोग रहते हैं, हमें सभी एक बिलियन लोगों को अपने साथ चलाना है।  अगर कोई भी पालिटिकल पार्टी सिर्फ एक सैक्शन को अपने साथ चलाए, एक रिलीजन को अपने साथ चलाये, एक रीजन को अपने साथ चलाये, एक ही जुबान बोलने वालों को अपने साथ चलाये, तो वह पूरे देश का भला नहीं कर सकते हैं।  हमने पूरे देश को, एक बिलियन लोगों को, जिसमें हिंदू, मुसलमान, सिख, ईसाई और किसी भी जुबान के बोलने वाले हों, हम समझते हैं कि पूरे देश में कांग्रेस पार्टी है, जो ऐसा कर रही है। हमारा मानना है कि यही एक पार्टी और यही एक एलायंस है जो पूरे देश को इकट्ठा रख सकती है।  अगर हमने इसके टुकड़े किए, अगर हमने किसी रिलीजन और रीजन की बात की, तो मुझे यह कहने में कोई दिक्कत नहीं आती है कि वह देश का भला नहीं चाहते।  आडवाणी जी एक्सटर्नल एग्रेसन की बात कह रहे थे, कोई भी सिटीजन जो इस कंट्री का होगा, वह इसको बरदाश्त नहीं कर सकता। मगर इंटरनल एग्रेसन का हम क्या करें?  जब हम अपने ही सिटीजंस को मजहब के नाम पर मारने लगें, जब हमारे ही सिटीजंस यहां सेफ महसूस न कर सकें, जब हमारे ही सिटीजंस स्टेट गवर्नमेंट के पास जाएं, मैं गुजरात की बात कह रहा हूं, उनके पास जाएं और उनको इंसाफ न मिले। They are pushed to the wall. मुझे नहीं लगता है कि वह देश की कोई खिदमत है।  अगर देश की कोई खिदमत होगी, तो उसे कांग्रेस कर सकती है।  ...( व्यवधान)
सभापति महोदया : आपस में बात मत करिए, आपकी बात उन्होंने सुनी है।  उन्हें आप अपनी बात कहने दें। आडवाणी जी बोले थे, तो उन्होंने उनकी बात सुनी थी।
…( व्यवधान) 
डा0 मिर्जा महबूब बेग  : देश की खिदमत सैक्युलर फोर्सेस कर सकती हैं और देश की खिदमत यहां के वे लोग कर सकते हैं, जिन्होंने ये इम्तिहानात पास किए हैं।  वही इस देश को इकट्ठा रख सकते हैं और वही इस देश को चला सकते हैं। गांधी जी और नेहरू जी ने जो ख्वाब देखा था, उसको पूरा करने के लिए कांग्रेस जैसी पार्टी, यूपीए एलायंस जैसे सैक्युलर फोर्सेज में, जो हमारे फंडामेंटल्स हैं, जिसको हमारे सबसे बड़े कोर्ट सुप्रीम कोर्ट ने अपहेल्ड किया है कि सैक्युलरिज्म यहां की बुनियाद है और जो भी ताकतें उस बुनियाद को हिलायेंगी, वे इस देश को कमजोर करेंगी।  मेरी आपसे गुजारिश है कि पाकिस्तान के साथ जो डायलॉग हुआ है,   [p56]    [NB57] [158] No dialogue is deadlock. We are a secular, democratic country. We should not hold the dialogue process.  Pakistan can do it.  We should not do it.  We should continue and we should restart the dialogue process with Pakistan.  With whatever forces we have there, we have to engage ourselves with them so that a lasting and permanent peaces comes to this sub-continent and we can also be a part, जैसे बाकी देश तरक्की कर रहा है, क्योंकि पोलीटिकल इंस्टेबिलिटी है, क्योंकि पोलीटिकल अनसर्टेनटी है। इसलिए हमें अफसोस से कहना पड़ता है कि जो तरक्की पूरा देश कर रहा है, बदकिस्मती से पोलीटिकल अनसर्टेनटी की वजह से हम उस तरक्की के बराबर नहीं जा रहे हैं। वहां और भी कई बाते हैं।
            मैडम, जब 1990 में वहां मिलिटैंसी हुई, ऐबनार्मल सिचुएशन थी, ऐबनार्मल सरकमस्टांसेस थे, ऐबनार्मल सिचुएशन और सरकमस्टैंसेस को हैंडल करने के लिए हमें कुछ ऐबनार्मल लॉज़ ऐसे लाने पड़े ताकि आर्मी और सिक्युरिटी फोर्सेस को स्ट्रैन्थैन करें। मगर अब ऊपर वाले के कर्म से, कांग्रेस गवर्नमैंट की वजह से और भारत सरकार की वजह से हम बहुत हद तक उसे ऐड्रैस कर चुके हैं। इसलिए अब वक्त आ गया है कि वह जो पीस प्रोसैस थी, उसे इनीशिएट करें, रीस्टार्ट करें ताकि पोलीटिकल अनसर्टेनटी ऐड्रैस हो और जो कावानीन, जो लॉज़ उस वक्त उन्हें हैंडल करने के लिए दिए थे, अब चूंकि सिचुएशन ठीक होती जा रही है, तो वक्त आ गया है कि उन्हें रीकंसीडर करें।
            सभापति महोदया, मैं आपकी वसादत से पूरे ऐवान को बताना चाहता हूं कि उस वक्त के जो लॉज़ थे, अब सिचुएशन में बड़ा फर्क आ गया है। प्रधान मंत्री, डा. मनमोहन सिंह जी ने कुछ कमेटीज़ बनाई थीं। उन्होंने रिकमैंडेशन्स दिए थे और एक कमेटी के चेयरमैन हमारे नायाबी सदर डा. हामिद हैं। उन्होंने कुछ रिकमैंडेशन्स दिए हैं। मैं गुजारिश करूंगा कि वक्त आ गया है कि उन रिकमैंडेशन्स को, प्रधान मंत्री जी के कहने पर जो कमेटीज़ बनीं, उन्हें इम्प्लीमैंट करें ताकि कश्मीर भी पूरे देश की  तरह आगे चले और तरक्की का रास्ता अख्तियार करे।
            प्रैज़ीडैंट ने जो ऐड्रैस दिया, उसमें आम आदमी की बात थी। उसमें जो आम आदमी  भूखा था, उसे फूड देने की बात थी। उसे रोजगार देने की बात थी, उनके इम्प्लीमैंटेशन की बात थी।  मैं आपसे गुजारिश करूंगा कि इस ऐवान की बदौलत रियासते जम्मू कश्मीर के लोग, जिन्होंने हमें चुना है, इस चुनाव में रियासते जम्मू कश्मीर के हवाले से दो बहुत खूबसूरत बातें हुई हैं। वहां जो ऐक्सट्रीमिज़्म है, उन्हें रिजैक्ट किया गया है। जम्मू में कांग्रेस के कैंडीडेट कामयाब होकर आए हैं। उन्होंने वहां कम्युनल फोर्सेज़ को डिफीट किया और कश्मीर में सैपरेटिस्ट फोर्सेज़ को डिफीट किया है। एक सैपरेटिस्ट ने यू टर्न लाकर, हमारे साथी यहां बैठे हैं, उन्होंने उन्हें तीसरी जगह पर फेंक दिया है, उनकी जमानत तक ज़ब्त हुई है। इसलिए कश्मीर ने सैपरेटिज़्म को रिजैक्ट किया है, जम्मू ने कम्युनल फोर्सेज़ को रिजैक्ट किया है। हमारे पास एक ऐडवांटेजियस पोज़ीशन है जिसका फायदा उठाकर इस सिचुएशन को और बेहतर करने की जरूरत है, ताकि वहां जो कुछ फोर्सेज़ अमन नहीं चाहतीं और अनफार्चुनेटली आप जानते हैं कि जब ऐबनार्मल सरकमस्टांसेस होते हैं तो डिफरैंट सैक्शन्स ऑफ दी सोसाइटी में वैस्टेड इंटरेस्ट डैवलप होते हैं जो ऐबनार्मल सरकमस्टांसेस में थ्राइव करते हैं। अब वक्त आ गया है कि हम उनके डिज़ाइन्स को नाकाम बनाएं, कमज़ोर करें और कश्मीर को भी इस देश के साथ आगे चलाएं। पूरी कंट्री ने पूरी ताकत के साथ यूपीए के ऐलायंस को जो रिटर्न किया है, उसे उसके साथ मिलाने की जरूरत है ताकि कश्मीर भी पूरे देश के साथ आगे जाए और तरक्की करे।
                                                                                                                       
डा0 भोला सिंह (नवादा): सभापति महोदया, सदन में महामहिम राष्ट्रपति जी के अभिभाषण पर जो धन्यवाद का प्रस्ताव प्रस्थापित हुआ है, यह सभा उस पर विमर्श कर रही है। मैं बिहार के उस हिस्से से आया हूं जहां राजनीति का अपराधीकरण हुआ है और अपराध का राजनीतिकरण हुआ है। जहां धरती प्यासी है, मनुष्य की आत्मा प्यासी है। इस सदन में, मैं कुछ बातों को रखूं, उसके पहले मैं एक बात कहना चाहता हूं। चीन के सिटी मजिस्ट्रेट ने एक स्थान पर कहा, जब शिष्यों ने कन्फयूश्यिस से पूछा कि एक राज्य के लिए कितनी चीजों की आवश्यकता होती है, तो उन्होंने कहा कि एक राज्य के लिए तीन चीजों की आवश्यकता होती है--फोर्ट, फूड एंड फेथ। शिष्य ने फिर उनसे पूछा कि अगर तीन चीजों में से एक को हटाना पड़े, तो किस चीज को हटायेंगे और दो चीजें कौन सी रहेंगी?  उस समय कन्फ्यूश्यिस ने कहा कि फोर्ट को हटा देंगे, सेना को हटा देंगे। शिष्य ने फिर पूछा कि इन दो में से एक चीज और हटानी पड़े और एक चीज को रखना पड़े, तो किस चीज को हटा देंगे? कन्फ्यूश्यिस ने कहा कि फूड को हटा देंगे but without faith the State can not exist. बिना आस्था के, बिना फेथ के राज्य की कल्पना नहीं की जा सकती। जब राजनीति डूबती है, तो फेथ डूबने लगता है। जब राजनीति डूबती है, तो संस्कृति डूबने लगती है। जब राजनीति डूबती है, तो समाज डूबने लगता है। जब राजनीति डूबती है, तो व्यवस्था डूबने लगती है, इसलिए राजनीति की शुद्धता को बनाये रखना चाहिए। पंडित जवाहर लाल नेहरू के जमाने में, इंदिरा जी के जमाने में जब राजनीति मां थी, तो जहर पीती थी और अमृत उगलती थी। जब राजनीति व्यवसाय हो गयी, राजनीति व्यापार हो गयी, राजनीति भोग और विलास हो गयी, तो वह अमृत पीती है, जहर उगलती है।
            मैडम, राष्ट्रपति जी के अभिभाषण में, राजनीति को सिद्ध  को करने के लिए, राजनीति मां के आसन पर बैठे और उसकी संवेदना, जनजीवन की संवेदना बने, इस संबंध में कोई उल्लेख नहीं किया गया है। मैं बिहार के उस हिस्से से आया हूं, बिहार जो सर्वधर्म समभाव है, बिहार जो हिन्दुस्तान की राजनीति का एक आधार स्तम्भ रहा है, बिहार जिसने मोहनदास करमचंद गांधी को महात्मा के आसन पर बिठाया, वह बिहार पिछड़ गया है। बिहार विकास के क्षेत्र में इतना पिछड़ गया है कि इस देश के  तमाम राज्यों से नीचे वह लटका हुआ है। इसलिए हम इस सदन और आपके माध्यम से सरकार से  आग्रह करना चाहते हैं कि अगर इस देश का विकास करना है, सम्पूर्ण  रूप से विकास करना है, तो बिहार को विकास के साथ जोड़ना होगा।[MSOffice59]  बिहार को स्पेशल स्टेटस देना होगा, बिहार को स्पेशल राज्य का दर्जा देना होगा। बिहार का यह दुर्भाग्य है कि बिहार कई बार कटा है, उसके अंग-प्रत्यंग कटे हैं। उड़ीसा उसी से बना, झारखण्ड उसी से बना और अब जो बिहार बचा हुआ है, वह बाढ़ है, वह विनाश है, बालू है, सूखा है-यही बिहार है।  जब झारखण्ड बना, उस समय तत्कालीन सरकार के माध्यम से कहा गया कि बिहार को स्पेशल पैकेज देंगे और इसके लिए दो बार बिहार विधानसभा में प्रस्ताव पारित हुए कि 1,47,000 करोड़ रूपए स्पेशल पैकेज के रूप में दिए जाएं, लेकिन यह कदम आज तक नहीं उठाया गया। मैडम सोनिया जी यहां बैठी हैं। सोनिया जी के परिवार से मेरे गहरे ताल्लुक रहे हैं और सोनिया जी भारत बनने के लिए साधना कर रही हैं। साधना की उस उंचाई पर जाने के लिए पग-पग पर वह तैयार बैठी हुई हैं। मैं उनसे आपके माध्यम से आग्रह करना चाहता हूं कि उस बिहार का विकास करने के लिए आपको ध्यान देना होगा। मैं इसलिए कह रहा हूं कि बिहार में जो किसान हैं, मैं उनकी हालत के बारे में कहने से पूर्व, एक बात आपके सामने रखना चाहता हूं। जब महाभारत का युद्ध हुआ था, महाभारत में जब सब कुछ जल गया, कौरव मारे गए तो कौरवों की मां गान्धारी भूख से छटपटाने लगी। वह देखने लगी कि कहां पर खाने की चीजें हैं। उसने देखा कि एक पेड़ जला हुआ है, बेर का पेड़ है। गान्धारी उसको उछल कर तोड़ना चाहती है, मगर बेर के फल उसके हाथ में नहीं आते। अगल-बगल में पड़ी हुई हैं उसके बेटों की लाश। गान्धारी अपने बेटों की लाशें उठा-उठाकर टीला बनाती है और उस टीले पर खड़ी होकर गान्धारी बेर तोड़ने लगती है। कृष्ण कहते हैं, हे गान्धारी, मां होकर भी बेटों की लाश के टीले पर बैठकर यह क्या कर रही हो? गान्धारी ने कहा, हे वासुदेव, बुढ़ापा दुख का कारण है, गरीबी उससे ज्यादा दुख का कारण है, जवान बेटे का मरना उससे भी ज्यादा दुख का कारण है, पर भूख से मरना सबसे ज्यादा दुख का कारण है। मैं आत्महत्या नहीं करना चाहती हूं। मैं उससे बचना चाहती हूं। आज केंद्रीय सरकार ने पैडी का दाम 900 रूपए रखा, आपने उसका लाभप्रद मूल्य दिया। बिहार सरकार ने उस पर 50 रूपए बोनस दिए, लेकिन आपका जो भारतीय खाद्य निगम है उसके बारे में मैं क्या कहूं। इस निगम ने किसानों की जिन्दगी के  साथ जो खेल खेला है, उनके साथ जो क्रूर मजाक किया है, मैं कह सकता हूं कि किसानों का हजारों क्विंटल धान उनके खेतों और घरों में पड़ा हुआ है। जिन किसानों ने पुराना धान बेचा भी, उनको भी अभी तक उसका पैसा नहीं मिला है। भारतीय खाद्य निगम ने अब यह कदम उठाया है कि बिचौलिए के माध्यम से वे धान खरीदते हैं और किसानों को बाध्य होकर 600 रूपए में अपना धान बेचना पड़ता है। मैं बड़ी पीड़ा से, उनके संत्रास को समझते हुए, आपके सामने कहना चाहता हूं कि किसानों के पास कोई नकदी नहीं है।  बिहार में नकदी फसल नहीं हो पा रही है, जो कुछ है, उनका गेहूं और धान ही है। पिछले दिनों बिहार में भोजपुर में, जहां से सदन की अध्यक्षा श्रीमती मीरा कुमार जी आती है,[R60] 

17.00 hrs. वहां के किसानों ने हजारों क्विंटल धान को जला दिया है, क्योंकि उसे खरीदने वाला कोई नहीं था। उनकी बेटियों की शादी की उम्र निकल गई है, वे 30, 35 और कुछ तो 40 बरस की हो गई हैं, लेकिन उनके माथे पर सुहाग का सिन्दूर नहीं लगा है। जब किसी लड़की के लिए वर खोजा जाता है तो वह लड़की कहती है कि मां मैं अब शादी करके क्या करूंगी, मैं मां नहीं बन सकती, मेरा जीवन व्यर्थ है। इस तरह से भारतीय खाद्य निगम ने वहां के किसानों के साथ क्रूर मज़ाक किया है, उसके साथ ही उसने केन्द्र और प्रदेश सरकार की नीतियों का भी उल्लंघन किया है। मैं चाहता हूं कि यह सदन, सरकार और खासकर मैं सोनिया जी से आग्रह करूंगा कि वे सदन की एक कमेटी बनाएं जो बिहार में जाकर देखे कि किसानों के साथ क्या मज़ाक हुआ है और क्या हैवानियत का खेल खेला गया है।

            सभापति महोदया, मैं एक बात और सदन में आपके माध्यम से रखना चाहूंगा। बिहार का उत्तरी क्षेत्र साल भर से बाढ़ से तबाह रहा है। पिछले दिनों आपने देखा होगा कि कोसी के कुसबा बांध के टूट जाने से वहां के 40 लाख लोग बेघरबार हो गए और कई लापता हो गए। आज भी लाखों लोग आकाश के नीचे  बरसात में, गर्मी में जीने के लिए मजबूर हैं। यह सही बात है कि कोसी का जो संत्रास है, वह एक राष्ट्रीय विपदा है। बिहार में कोसी जनित बाढ़, गंगा की बाढ़ एक विपदा ही है। हमने सोचा था कि इससे निपटने के लिए केन्द्रीय सरकार निश्चित रूप से सहायता करने के लिए आगे आएगी। मुझे दुख के साथ कहना पड़ता है कि 40 लाख लोग अभी तक वहां बेघरबार हैं। उनकी जमीन में बालू भरी हुई है इसलिए वे खेती नहीं कर सकते। उनके बच्चे पढ़ नहीं पा रहे हैं और वे अनाथों की तरह जीवनयापन कर रहे हैं। इसलिए केन्द्र सरकार को राजनीतिक प्रतिबद्धता का भी ध्यान रखते हुए उनकी सहायता करनी चाहिए।

            कांग्रेस किसी पार्टी का नाम नहीं है। कांग्रेस को जिन लोगों ने भी पार्टी बनाने का कदम उठाया है, उन्होंने अच्छा काम नहीं किया। कांग्रेस एक आंदोलन है, कांग्रेस में गंगा की तरह समर्पण का भाव रहा है। उसमें हिमालय की ऊंचाई रही है। अगर उसे पार्टी बनाया जाता है तो यह देश का दुर्भाग्य होगा। कांग्रेस कई विचारधाराओं की संस्था है, मां है। अगर एक विचारधारा के रूप में उसे रखा जाएगा, तो इस देश का बड़ा नुकसान हो सकता है। इसलिए केन्द्र सरकार बिहार के मामले में कदम उठाए।

            बिहार में 1 करोड़ 81 लाख लोग बीपीएल सूची में हैं। लेकिन केन्द्रीय सरकार सिर्फ 65 लाख लोगों को ही बीपीएल सूची में मानती है। हमारे क्षेत्र में 1 करोड़ 23 लाख लोग गरीबी रेखा से नीचे रहते हैं। आप सिर्फ पूरे बिहार के 65 लाख गरीबी रेखा से नीचे रह रहे लोगों के लिए ही सहायता यहां से भेजते हैं, जबकि बिहार सरकार का कहना है कि बिहार में 1 करोड़ 81 लाख लोग बीपीएल में दर्ज हैं। इसलिए प्रदेश सरकार को बाकी गरीब लोगों के लिए अपने बजट में 965 करोड़ रुपए का प्रावधान करके उनके लिए खाने-पीने की व्यवस्था करनी पड़ती है। हम आपके माध्यम से कहना चाहते हैं कि बिहार में जो एपीएल की सूची में लोग हैं, उन्हें केरोसीन तेल नहीं मिलता। इसकी व्यवस्था आपने नहीं की है। इसलिए प्रदेश सरकार 464 करोड़ रुपए की व्यवस्था करके उन्हें केरोसीन तेल देने का प्रावधान करती है। यह बिहार सरकार को बाध्य होकर करना पड़ता है। इसलिए गरीबी रेखा से नीचे जो लोग हैं, उनके बारे में स्पष्ट नीति का निर्धारण यहां से होना चाहिए। जो बीपीएल सूची में दर्ज लोग हैं।

सभापति महोदया : अब आप अपने भाषण को समाप्त करें, क्योंकि अभी कई माननीय सदस्यों ने अपनी बात को कहना है।[R61]   डा. भोला सिंह   :  मैं समाप्त करने की ओर ही जा रहा हूं।

सभापति महोदया  :     बिहार पर किसी दिन विशेष चर्चा जरुर करें लेकिन आज राष्ट्रपति जी के अभिभाषण पर चर्चा के लिए धन्यवाद करें।

डा. भोला सिंह   :  मैं यह कहने जा रहा हूं कि बिहार को एक स्पेशल स्टेटस दें, उसकी गरीबी के निदान के लिए, अलग से व्यवस्था करें और यह बात हम आपके माध्यम से, सरकार से कहना चाहते हैं। मैं एक बात और कहकर अपनी बात समाप्त करना चाहता हूं। मैडम, जब कृष्ण की मीरा जो कृष्ण की दासी थी, वह जब नर्तन कर कृष्ण की आराधना करती थी तो एक युवक ने उससे कहा कि मैं तुझसे शादी करना चाहता हूं। मीरा ने कहा कि मुझसे शादी करना चाहते हो तो मेरी तीन शर्तें आपको माननी पड़ेंगी। मेरी पहली शर्त है कि मैं भरपेट खाऊंगी और तुझे भूखा रहना पड़ेगा। उसने कहा कि यह कैसे मंजूर हो सकता है? मीरा ने कहा कि मेरी दूसरी शर्त है कि मैं दिन-रात सोऊंगी और तुझे दिन-रात जागना पड़ेगा। युवक ने कहा कि यह कैसे मंजूर हो सकता है? मीरा ने कहा कि मेरी तीसरी शर्त है कि मैं पूरे तन कपड़ा पहनूंगी और तुझे नंगा रहना पड़ेगा, क्या यह शर्त मंजूर है। युवक ने कहा कि यह कैसे मंजूर हो सकता है। मीरा ने कहा कि हम उसकी दासी हैं, हमने उसकी आराधना की है जो खुद भूखा रहता है और हमें खिलाता है, जो हमेशा जगा रहता है और सबको सुलाता है और जो खुद कुछ नहीं पहनता और हम सबको पहनाता है। सरकार को भी इसी दृष्टिकोण का पालन करना चाहिए, उसे जागते रहना चाहिए, तभी देश शांति से सोएगा। उसे भूखा रहकर देश की सेवा करनी चाहिए, तभी सारे लोग संतुष्ट होंगे। आज राजनीति को मां के आसन पर बैठाने के लिए हमें कदम उठाने हैं। इन्हीं शब्दों के साथ मैं आपके माध्यम से कहना चाहता हूं कि     “ हो गयी है पीर पर्वत सी पिघलनी चाहिए,    इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए।         

   मेरे सीने में नहीं तेरे सीने में सही,    है कहीं आग, तो वह आग जलनी चाहिए।

                         मेरा काम हंगामा खड़ा करना नहीं,                         पर शर्त है कि यह जो सूरत है वह बदलनी चाहिए” । 

                 

इन्हीं शब्दों के साथ, जो माननीय राष्ट्रपति महोदया का अभिभाषण है, उस पर जो धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत हुआ है, मैं उसका समर्थन करते हुए अपनी बात को समाप्त करता हूं।

                                                                                                           

  17.09 hrs. (Shri Inder Singh Namdhari in the Chair) श्री जगदम्बिका पाल (डुमरियागंज)  :  मैं आपका बहुत आभारी हूं कि आपने मुझे महामहिम राष्ट्रपति के अभिभाषण पर प्रस्तुत धन्यवाद प्रस्ताव पर बोलने का मौका दिया है। सभापति महोदय, इतिहास का मूल्यांकन भविष्य में होता है। यह सदन भी 15वीं लोकसभा के इतिहास की इबारत लिख रहा है। तीन जून को इबारत लिखी, जिसके साक्ष्य केवल सदन के माननीय सदस्य ही नहीं हैं बल्कि सारी दुनिया है क्योंकि दुनिया के 34 मुल्कों में जहां महिला स्पीकर हो चुकी हैं, भारत भी अब उस श्रेणी में खड़ा हुआ है। केवल एक इतिहास का निर्माण ही नहीं हो रहा है, मैं समझता हूं कि आने वाले दिनों में, इस 15वीं लोकसभा में ऐसे कई इतिहास रचे जाएंगे, जिनका भविष्य में मूल्यांकन होगा।[r62]                महोदय, मैं समझता हूं कि यह पहली सरकार होगी, जिसने महात्मा गांधी जी की बात को माना है कि भारत गांवों में बसता है। भारत की आत्मा गांवों में बसती है। महामहिम राष्ट्रपति के भाषण में सरकार की नीतियां, कार्यक्रम, दिशाएं दिखाई देती हैं कि सारे कार्यक्रमों का लाभ अधिकांश गांव के लोगों को मिलेगा। मैं समझता हूं कि अगर अभिभाषण का सार लिया जाए, तो तीन बहुत महत्वपूर्ण बिंदु हैं चाहे गांव में रहने वाले तमाम ऐसे बच्चे, जिन्हें दो जून का भोजन नहीं मिलता है, ऐसे 15 करोड़ लोगों के लिए मध्याहन् भोजन की स्कूलों में व्यवस्था की गई है। सरकार ने 65 वर्ष के शत् प्रतिशत लोगों को, जो गरीबी रेखा से नीचे हैं, उन्हें पेंशन देने का काम किया है। अगर 40 वर्ष की कोई बहन विधवा होती है, तो उसे निश्चित तौर से पेंशन मिलेगी। यह इतिहास होगा कि पहली बार सरकार अपनी बुनियादी प्रतिबद्धताओं को सौ दिन के अंदर पूरा करने के लिए स्वयं को उत्तरदायी बना रही हैं। कई सदस्यों ने कहा है कि कदाचित सरकार की नीतियां, कार्यक्रम आदि सही हैं, लेकिन उनके क्रियान्वयन के बारे में अपनी चिंता व्यक्त की है। अगर महामहिम राष्ट्रपति का अभिभाषण पढ़ लिया जाए, तो जितनी शंकाएं हैं, वे निर्मूल हो जाएंगी। कदाचित यह पहली बार होगा कि सरकार की तरफ से योजनाओं के लिए जो पैसा दिया जा रहा है, जनता के प्रति जवाबदेही के लिए प्रमुख योजनाओं और कार्यक्रमों की मोनिटरिंग करने के लिए तथा सार्वजनिक रूप से इनकी स्थिति पर रिपोर्ट देने के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय स्तर पर एक कार्यनिष्पादन मोनिटरिंग यूनिट का गठन किया जाएगा। ऐसा पहली बार इतिहास में हो रहा है कि देश की उन्नति के लिए बनाई गई योजनाओं का मूल्यांकन प्रधानमंत्री कार्यालय से होगा। जब पिछली सरकार ने भारत निर्माण योजना शुरू की थी, चाहे गांव के लोगों के लिए स्वास्थ्य की बात हो, टेलीफोन की बात हो, सड़क की बात हो या गांवों के विकास की बात हो, सरकार के कार्यक्रमों की जो रिपोर्ट होती थी, वह शासकीय या प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा दी जाती थी। पहली बार है कि भारत निर्माण की रिपोर्ट समुचित रूप से उसका प्रकाशन अधिकारियों द्वारा नहीं, बल्कि भारत सरकार का मंत्री पूरे देश की जनता को बताएगा कि भारत निर्माण के लिए कौन-कौन सी परियोजनाएं बनाई जा रही हैं और उन योजनाओं को पूरा करने के लिए कितना पैसा दिया जा रहा है। लोगों की यह चिंता थी कि बहुत से कार्यक्रम चल रहे हैं, उनके कार्यान्वयन के लिए पहली बार महामहिम राष्ट्रपति के अभिभाषण में देखा होगा कि एक तरफ कार्यक्रमों का समावेश है, योजनाओं का समावेश है, वहीं दूसरी तरफ उन कार्यक्रमों की मोनिटरिंग के लिए ज्यादा से ज्यादा सेल बनाए गए हैं। चाहे राइट टू इंफोर्मेशन की बात हो चाहे सार्वजनिक डाटा की बात हो, यहां तक कि नरेगा के लिए, जिसके लिए कहा गया कि नरेगा कोई करेगा तो मरेगा, इसके लिए भी संवैधानिक रूप से जिला स्तर पर व्यवस्था करके नरेगा की अनियमितताओं को कम करने का प्रयास किया है। हम सरकार को धन्यवाद देंगे कि इन अनियमितताओं को दूर करने के लिए पहली बार लोकायुक्त की नियुक्ति जनपद स्तर पर होगी, जिससे निश्चित रूप से नरेगा के अंदर हो रहे भ्रष्टाचार में कमी होगी। पहली बार ऐसा हुआ है कि लोकसभा का चुनाव एंटी-इंकम्बेंसी नहीं हुआ है। यह पहला चुनाव है, जो सकारात्मक रूप से हुआ है। यह इसलिए हुआ है, क्योंकि सरकार की पिछले पांच साल की उपलब्धियां हैं। वह उपलब्धि कर्ज माफी की भी थी। जब बुंदेलखंड में किसान मर रहा था, हमारे राज्य की मुख्यमंत्री अपना जन्मदिन मना रही थीं। उस समय उनके दरवाजे पर राहुल गांधी जी और हम कांग्रेस जन खड़े थे। हमने कर्जे की माफी की बात कही थी, तब राज्य सरकार ने कहा था कि ब्याज भी माफ नहीं कर पाएंगे। हम राहुल जी को धन्यवाद देंगे कि कांग्रेस का डेलिगेशन आया। हम प्रधानमंत्री जी से मिले, सोनिया जी से मिले, क्योंकि कन्याकुमारी से कश्मीर तक देश का किसान कर्जे के कारण आत्महत्या करने पर मजबूर हो रहा था।[r63]  निश्चित तौर पर उस खेती को अलाभप्रद से लाभप्रद बनाने का काम इस कर्ज माफी योजना ने किया है जिस का असर चुनावों पर पड़ा है। 5 करोड़ किसानों का 72, 600 करोड़ रुपए का कर्ज माफ किया गया। आप कमजोर प्रधान मंत्री कहते हैं। जिस तरीके से सदन में कहा गया, उन्होंने विनम्रतापूर्वक कहा कि हमारा मूल्यांकन इस तरह नहीं होना चाहिए, हमारी परख हमारे काम से होनी चाहिए। इसीलिए मैं समझता हूं कि सदन में या सदन के बाहर हमारे प्रतिपक्ष के लोगों ने उनको इतना कमजोर नहीं कहा होता तो परिस्थिति दूसरी होती। मैं कांग्रेस की अध्यक्षा को धन्यवाद देना चाहूंगा कि उन्होंने जब चुनाव प्रारम्भ नहीं हुआ बल्कि जिस समय मैनिफैस्टो रिलीज किया उसी दिन कहा क्योंकि बहुत से लोगों ने सवाल उठाया कि कौन अगला भारत का प्रधान मंत्री होगा तो उसके जवाब में कहा कि अगर कांग्रेस सत्ता में आएगी तो फिर प्रधान मंत्री डा. मनमोहन सिंह होंगे और यह फैसला कुछ लोगों के कहने से नहीं होगा, देश की जनता का होगा, कश्मीर से कन्याकुमारी की जनता का होगा। पहली बार देश की जनता ने सकारात्मक रूप से इन नीतियों तथा कार्यक्रमों पर फैसला किया है।

            मान्यवर, ये लोग भूल जाते हैं। यह जब तक विपक्ष में थे तो नारा देते थे हर हाथ को काम, हर खेत को पानी लेकिन जब सत्ता में आए तो भूल गए  कि हर हाथ को काम देना है और हर खेत को पानी देना है। हम नारा नहीं देते हैं कि हर हाथ को काम देंगे। हमने कानून बना कर पूरे देश में नरेगा, ग्रामीण रोजगार योजना बनायी। यह इस बात का साक्षी है कि हमने कानून बनाया कि कोई 18 साल का व्यक्ति यदि अपने घर में, गांव में रोजगार की मांग करेगा तो उसे निश्चित रूप से 100 दिन का रोजगार 100 रुपए के हिसाब से दिया जाएगा। ये लोग भूल गए थे कि हर हाथ को काम, हर खेत को पानी देना है। इसलिए इनको जनता भी भूल गई। य़हां 6 वर्ष की बात हो रही थी और कहा गया कि हमने 6 वर्ष राज चलाया लेकिन यह साबित हो गया कि ये भगवान राम के पुजारी नहीं, व्यापारी हैं। जब चुनाव आते हैं तो उनका नाम लेते हैं। इनको स्वयं स्पष्ट तौर पर कहना चाहिए। भारतीय जनता पार्टी जब सत्ता में थी तो उन्होंने 6 बजट पेश किए थे। उस समय कृषि क्षेत्र में 2.1 परसेंट, उद्योग में 5.4 परसेंट की वृद्धि हुई थी, सकल घरेलू उत्पाद जिसे जीडीपी कहते हैं, 5.5 परसेंट की वृद्धि हुई थी। 1984 से 1989 तक राजीव गांधी जी की सरकार थी। उस समय जीडीपी 7 परसेंट था जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है। 1991-96 में भी कांग्रेस की सरकार थी और उस समय मनमोहन सिंह जी वित्त मंत्री थे। उस समय जीडीपी 7 परसेंट था। 2004 से 2008 में जीडीपी 8.5 परसेंट था, वह 9 परसेंट तक गया जो तीन साल तक रहा। आज पूरी दुनिया में हमारी इकॉनमी का अगर किसी के साथ मुकाबला है तो चाइना से है। आज ब्रिटेन की इकॉनमी भी माइन्स फोर परसेंट है। वहां मंदी का असर है चाहे यूरोप हो या दुनिया के दूसरे मूल्क हों। आप जानते हैं कि कृषि की विकास दर 1900 से 1950 तक केवल एक प्रतिशत थी, 1950 से 1980 तक 3.6 परसेंट थी और 2003 से 2008 में 8.5 परसेंट हुई है। हमने इस तरीके से विकास किया है। अप्रेल महीने में मुख्य रूप में जो 6 तेल ग्रुप की इंडस्ट्रीज होती हैं उनमें उद्योगों की विकास दर 4.3 परसेंट हुई जो पिछले साल अप्रेल में 2.3 परसेंट थी, मार्च में 2.7 परसेंट थी और उस कोर इंडस्ट्रीज में सीमेंट, तैयार स्टील, कोयला, ऊर्जा, पैट्रोलियम रिफाइनरी आती हैं। आज औद्योगिक उत्पाद के इंडैक्स में इन उद्योगों का 26 परसेंट हिस्सा है। सीमेंट सैक्टर की विकास दर पिछले साल के मुकाबले में 6.9 से बढ़ कर 11.7 परसेंट हुई है।      महोदय, हमने प्रगति की है। हम अपने कार्यक्रमों की उपलब्धियों को दिखाते हुए चुनाव जीत कर आए हैं। हम नारों द्वारा जीत कर नहीं आए हैं। चुनाव के पहले प्रतिपक्ष का क्या नारा था आतंकवाद का नारा था, महंगाई का नारा था। जब दोनों बार यूपीए सरकार ने पैट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में कमी की, डीजल के दामों में कमी की तो उसका पूरे देश पर प्रभाव पड़ा, महंगाई का नारा खत्म हो गया। हमने आतंकवाद का जिस तरह 26 नवम्बर को मुकाबला किया, आज 6 महीने हो गए हैं, मैं समझता हूं कि आज पाकिस्तान पूरी दुनिया में अलग-थलग पड़ा है। ऐसी परिस्थिति में न आतंकवाद और न ही महंगाई मुद्दा रह गया है। नया मुद्दा स्विस बैंकों से धन लाने का हो गया।

            पूरे देश की जनता ने महसूस किया कि यह कौन सा मुद्दा हो गया। ये 6 साल से सरकार में थे। तब यह मुद्दा नहीं था, उसके बाद भी यह कभी मुद्दा नहीं था। ठीक चुनाव में यह मुद्दा उठा। जनता ने महसूस कर लिया कि इस तरह से रोज मुद्दे बदलते हैं, जिस तरह से प्राइम मिनिस्टर वेटिंग रहते हैं, एक वुड-बी-प्राइम मिनिस्टर बना दिया गया, मानो दो-दो प्राइम मिनिस्टर कर दिये हों, पूरी पार्टी में मानो एक तरह से डिवीजन हो गया। लोगों ने सोचा कि यह इस बार के प्राइम मिनिस्टर हैं और वे अगली बार के प्राइम मिनिस्टर हैं। देश की जनता सारा मूल्यांकन करती है और मैं कहना चाहूंगा कि जिस तरीके का यह चुनाव हुआ है, वह निश्चित तौर से एक सकारात्मक चुनाव है। जिस समय नरेगा लागू हो रहा था, इसी सदन में लोग कह रहे थे, मुझे याद है कि वह 26 फरवरी का दिन था, 20 फरवरी 2006 को जब मधुसूदन मिस्त्री जी बोल रहे थे तो लोगों ने पूछा कि यह नरेगा लागू होगा तो कैसे पैसा आएगा? कहां कहां लागू होगा, इसकी क्या व्यवस्था होगी? जैसे आज भी यह सवाल उठाया गया लेकिन महामहिम राष्ट्रपति जी के अभिभाषण में बहुत से कार्यक्रम दिये गये हैं लेकिन इसके लिए बजट में खास व्यवस्था होगी। इसी तरह का सवाल उस दिन भी खड़ा हुआ था। जनपद में हर गांव में अगर कोई 18 साल का बालिग रोजगार की मांग करेगा, इसके लिए कहां से उसकी मजदूरी का या रोजगार का पैसा आएगा, लेकिन आपने देखा कि 200 जनपदों में पहले साल नरेगा लागू हुआ। हमारे जनपदों में नरेगा लागू नहीं हुआ था। जो यूपी में सब कमेटी की बैठक हुई थी, हमने उसमें राहुल जी से सवाल उठाया कि पूरे देश में नरेगा लागू होना चाहिए। कम से कम पहली बार ऐसी कोई रोजगार देने वाली सरकार हुई है कि अगर कोई रोजगार चाहता है, कोई नौकरी चाहता है तो उसे मुम्बई, दिल्ली और कलकत्ता नहीं जाना पड़ेगा। अपने गांव में ही उसे रोजगरा मिल सकता है। उन्होंने इस बात का आश्वासन दिया। प्रधान मंत्री से डेलीगेशन जाकर मिला और मैं बधाई देना चाहता हूं कि पूरे देश के आज सभी जनपदों में नरेगा लागू हुआ है। कम से कम अब कोई व्यक्ति जो रोजगार चाहता है, अगर वह लिखकर रोजगार मांगेगा तो यह शासन की बाध्यता है। इसके अलावा बेरोजगारी भत्ता भी उसे मिलेगा। इसलिए ऐसा नहीं कहा जा सकता कि नरेगा कैसे लागू होगा? नरेगा में अनियमितताएं हैं। वे राज्य सरकारें जिम्मेदार हैं। सीडीए, जीडीए जिम्मेदार हो सकती हैं लेकिन जिस तरीके से परिस्थतियां उत्पन्न होती हैं, वे हैं। मैं आज कहना चाहता हं कि जो हमारे महामहिम राष्ट्रपति जी के अभिभाषण में कुछ मुद्दे दिये गये हैं। आज जो हमारा देश खड़ा है, आज वैश्विक मंदी के दौर में भी आज भी अगर हम अपनी विकास दर को बनाये हुए हैं, जबकि पूरी दुनिया में इस वैश्विक मंदी का असर है, चाहे जापान हो, चाहे यूरोप हो, अमेरिका हो, तमाम बड़े-बड़े बैंक बंद हो रहे हैं, तमाम छटनी हो रही है, बेरोजगारी हो रही है, लेकिन आज भी मैं कहना चाहूंगा कि आज इस देश ने इस वैश्विक मंदी का जिस तरह से बखूबी मुकाबला किया है, वह आज भारत की ग्रोथ रेट बता रही है और भारत का विकास बता रहा है। यह मैं इसलिए कहना चाहता हूं कि जो मैंने कहा था कि यह सदन इतिहास बनाएगा। यह पहली बार है कि सौ दिन के अंदर वचनबद्धता को इस सरकार ने संकल्पित किया है। चाहे वह संसद में महिला आरक्षण विधेयक की बात हो, चाहे वह पंचायतों और शहरी स्थानीय निकायों में महिलाओं को पचास प्रतिशत देने की भागीदारी का सवाल हो या केन्द्र सरकार की नौकरियों में महिलाओं का प्रतिनिधित्व किस तरह से बढ़े, आप बात करते हैं, दुनिया के सामने आप कहते हैं कि हम एक आत्मनिर्भर और मजबूत मुल्क हैं। आज भी दुनिया के मुल्कों की तुलना में हम अपने यहां की महिलाओं को बराबरी का दर्जा न दें या अपने यहां की महिलाओं को कोई मौका न दें, आरक्षण न दें, तो यह ठीक नहीं होगा। इसलिए मैं समझता हूं कि यह सदन इतिहास बनाएगा कि जब महिलाओं को विधान सभाओं और लोक सभा में आरक्षण मिलेगा और यह पन्द्रहवीं लोक सभा इसी बात के लिए जानी जाएगी। सौ दिन के इन्होंने अपने संकल्प को दोहराया है, मैं इसके लिए भी सरकार को बधाई देता हूं।

            आज पंचायतों और शहरी व स्थानीय निकायों में पचास प्रतिशत हम दे रहे हैं। आज किस तरीके से दुनिया का जब हमको मुकाबला करना होगा तो इसमें बराबर की महिलाओं की सहभागिता होगी कि जितना हमारे पुरुष साथी इसमें करेंगे, तो आने वाले दिनों में उतना प्रतिशत महिलाओं का भी होगा। आज हर क्षेत्र में हमने उनके लिए किया है। मैं बहुत विस्तार में नहीं जाना चाहता हूं  लेकिन मैं समझता हूं कि हमारा केवल महिला सशक्तीकरण का नारा नहीं है, यह हमारे लिए राष्ट्रीय मिशन है। उस राष्ट्रीय मिशन को पूरा करने की दिशा में आपने स्वयं देखा। आप सबने स्वीकार किया, सारे सदन ने स्वीकार किया। मैं इस बात के लिए धन्यवाद देना चाहता हूं कि इस सदन ने यह स्वीकार किया कि कम से कम महिला स्पीकर बनाने का काम सबसे पहले कांग्रेस पार्टी ने किया है, यूपीए ने किया है। [r64]              इसे सभी दलों के नेताओं ने स्वीकार किया है। हमने महिला सशक्तीकरण का नारा नहीं दिया है, हम इस दिशा में एक बुनियादी प्रयास कर रहे हैं। चाहे महामहिम राष्ट्रपति जी का सवाल हो, चाहे स्पीकर का सवाल हो और मैं कहता हूं कि इस धन्यवाद प्रस्ताव को भी डा. गिरिजा व्यास ने प्रस्तुत किया है। मैं समझता हूं कि आने वाले दिनों में अब दुनिया की कोई ताकत महिलाओं के सशक्तीकरण को रोक नहीं सकती है, उसकी शक्ल कानून से ही बननी होगी और उस पर अमल-दरामद भी होगा, मैं यह जानता हूं।

            महोदय, पिछली सरकार में हमने गंगा को राष्ट्रीय नदी घोषित किया था। हमने उस गंगा को, जिसे भारतीय जनता पार्टी के लोग हिन्दू की बात, हिंदुत्व की बात और गंगा मैया की बात करते थे, लेकिन उस गंगा के प्रदूषण को रोकने के लिए मैं स्व. राजीव जी को धन्यवाद दूंगा, मैं उस समय भी उनके साथ था, जब उन्होंने गंगा एक्शन प्लान किया था और जब फिर पिछली सरकार बनी तो गंगा के प्रदूषण की यदि चिंता थी तो कांग्रेस और यूपीए की सरकार को थी। सवा छः साल भाजपा, एनडीए की सरकार थी। उन्हें चिंता नहीं थी कि किस तरह से कानपुर में गंगा में प्रदूषण हो रहा है, किस तरह से गंगोत्री से निकलने के बाद हरिद्वार से निकलती हुई कोलकाता के गंगासागर तक किस तरह से गंगा प्रदूषित होती है। जिस गंगा मैया के जल का हम आचमन करते हैं या हर पूजा में जो हमारी आस्था का विषय होती है। आज हमने राष्ट्रपति के अभिभाषण में इसका उल्लेख किया है। गंगा नदी को हमने केवल राष्ट्रीय नदी के रूप में घोषित नहीं किया है, बल्कि इसकी सफाई, इसके सौन्दर्यीकरण के लिए भी कहा है। मैं निश्चित रूप से समझता हूं कि यह काम ऐसा है जो आने वाले दिनों अपने आपमें एक इतिहास होगा। हम इस गंगा की सफाई करके रहेंगे।

            चाहे पिछड़ा क्षेत्र उन्नयन हो, चाहे हमारे सूचना के अधिकार के सोशल ऑडिट की बात हो, मैं केवल बिन्दुओं का उल्लेख कर रहा हूं, चाहे सार्वजनिक डाटा नीति तैयार करने की बात हो, प्रमुख कार्यक्रम और जनता के प्रति जवाबदेही बढ़ाने के लिए योजना आयोग द्वारा स्वतंत्र मूल्यांकन कार्यालय हो और इसी का परिणाम है कि भारत की विकास दर आज 8.6 औसत रही है। जैसा मैंने कहा कि केवल भारत और चाइना की तरह आज यह बात मैं समझता हूं कि वैश्विक मंदी से हम जिस बखूबी से निकले हैं, इसमें स्व. श्री जवाहर लाल नेहरू की आधारशिला है कि जब उन्होंने पंचवर्षीय योजनाएं लागू की थीं और पहली बार भिलाई, राउरकेला और भाखड़ा नांगल जैसे डैम पब्लिक सैक्टर्स की स्थापना की थी। आधारभूत ढांचे में उन्होंने भारी निवेश किया था और उसी पर स्व. श्रीमती इंदिरा जी ने फिर आधुनिक भारत के निर्माण की प्रक्रिया शुरू की थी, हरित क्रंति की थी, गरीबी हटाओ की बात की थी, कृषि उत्पादकता में आत्मनिर्भरता की बात की थी, किसानों को खुशहाल करने की बात थी, सपोर्ट प्राइस की बात थी।

            मैं आडवाणी जी को आज धन्यवाद दूंगा, उन्होंने कहा लिटरेसी मीन्स आई.टी., लिटरेसी मीन्स कंप्यूटर एजूकेशन। मैं कहता हूं कि जिस समय राजीव जी कंप्यूटर ला रहे थे, इन्हें याद होगा, पूरे देश मे विपक्ष ने इसकी आलोचना की थी। उन्होंने कहा था कि अगर कंप्यूटर आ जायेगा तो लाखों लोग बेरोजगार हो जायेंगे। आज मैं राजीव जी को श्रद्धांजलि दूंगा कि अगर शायद कंप्यूटर नहीं आया होता तो लाखों लोग वाकई बेरोजगार हो गये होते। आज अगर पूरी दुनिया में भारत की पहचान है तो इसी कंप्यूटर से है, इसी आउटसोर्सिंग से है। आज अमेरिका में भी हमारे लड़कों, नौजवानों और आई.टी. इंजीनियर्स  की कद्र है तो इसी इंफोर्मेशन टैक्नोलोजी और कंप्यूटर के क्षेत्र में हैं। तब समय रहते हुए राजीव जी ने इस क्षेत्र में जो कुछ किया था, उससे दुनिया के विकासशील देशों में भारत की पहचान बनी। आज जी-20 दुनिया के तमाम मुल्कों का कितना बड़ा मंच है। आज इस जी-20 में जब डा.मनमोहन सिंह जाते हैं तो आर्थिक उदारीकरण के बाद भारत की जो आर्थिक स्थिति बनी है, उसमें हम एक सक्रिय और सशक्त देश के रूप में हम मजबूती से खड़े हुए हैं। आज हमारी 1950 से पर कैपिटा इंकम तीन सौ परसैन्ट गुना बढ़ी है। इसके बावजूद हमने टैक्सेज नहीं बढ़ाये हैं, हमने टैक्सेज कम किये है। पिछली सरकार में भी हमने कस्टम पर टैक्स कम किया है. सैन्ट्रल एक्साइज पर टैक्स कम किया है और बहुत सी चीजों पर भी टैक्स कम किये हैं। मैं समझता हूं कि यह सब इसलिए किया गया, चूंकि इस सरकार का यह अभिप्राय है कि समाज का सबसे कमजोर वर्ग का प्राणी जो सुदूर अंचल में बैठा हुआ है, जिसकी आंखों में आंसू हैं, उसे पोंछने का काम यह सरकार कर रही है। कोई बेसहारा, विधवा औरत है, उसे सहारा देने काम यह सरकार कर रही है।  आज उत्तर प्रदेश में 18 लाख लोग हैं, जो गरीबी रेखा से नीचे हैं और जो पेंशन के लिए अनुमन्य हैं। लेकिन केन्द्र सरकार जो दो सौ रुपये देती है, वहां की सरकार उसमें सौ रुपये भी उन्हें नहीं दे रही है। उनकी प्राथमिकताएं क्या हैं, राज्य की राजधानी में पत्थरों का पार्क बनाना। इस तरीके से 11 हजार करोड़ रुपया आज केवल अम्बेडकर पार्क, कांशी राम स्मारक आदि तरह की चीजों पर खर्च हो रहा है। जब पूर्वांचल में बाढ़ आती है तो उस बाढ़ में भी मुख्य मंत्री नहीं जाती हैं, जब राहुल गांधी जी दौरा कर लेते हैं, उसके बाद मुख्य मंत्री जाती हैं, ताकि कहीं ऐसा न हो कि लोग आलोचना करें।[BS65]  आज जिस तरीके से प्री-मौनसून आया है, तार टूट गये हैं, खम्भे टूट गये हैं, पूरे पूर्वांचल की स्थिति खराब है। जन-धन की काफी क्षति हुई है । जैसे बंगाल में साईक्लोन आया, उसी तरह पूर्वांचल में आया लेकिन मुख्यमंत्री वहां नहीं गई। मैं कहना चाहता हूं कि चाहे बिहार की कोसी बाढ़ की बात हो, उडीसा में स्वर्णरेखा नदी की बात हो, इन सब का उद्गम स्थल नेपाल ही है। करनाली, जलगुड़ी नदियां नेपाल से निकलती हैं। आने वाले समय में भारत सरकार को नेपाल सरकार से बात करनी चाहिये।

            सभापति महोदय, उत्तर प्रदेश से उतरांचल अलग होने के बाद उत्तर प्रदेश में टूरिज्म की कोई स्थिति नहीं रह गई है। अगर कुछ हो सकता है तो बुद्ध सर्किट से हो सकता है। गौतम बुद्ध की जन्म स्थली सिद्धार्थ नगर में श्रावस्ती है, सारनाथ में टूरिस्ट क्षेत्र बढ़ाने के लिये बुद्ध सर्किट बनाया जा सकता है। इसके लिये नेशनल हाईवे, मीटर गेज को ब्रॉड गेज में परिवर्तित करने के लिये कार्य किया जा सकता है । जिस तरह बिहार में बौध गया में इंटरनैशनल एअरपोर्ट बना है, उसी प्रकार श्रावस्ती, सारनाथ में भी किया जा सकता है। दुनिया में 35 मुल्कों के लोग बौध धर्म को मानने वाले हैं, उन्हें यहां आने के लिये आकर्षित किया जा सकता है।

            सभापति जी, आज श्री शरद यादव जी बात कह रहे थे कि बिजली नहीं है। इसके अलावा अन्य कई माननीय सदस्यों ने भी इस बात को कहा है। 1989 में कांग्रेस सरकार जाने के बाद उत्तर प्रदेश में तीन बार भाजपा, दो-तीन बार सपा बनी और आज बसपा की सरकार है लेकिन एक मेगावाट बिजली का उत्पादन नहीं कर पायी हैं। अभी केन्द्र सरकार ने अपनी प्रतिबद्धता दोहरायी है कि हम 13 हजार मेगावाट बिजली का उत्पादन हर साल करेंगे। क्या राज्य सरकार केवल सरकार चलाने के लिये है? बिजली हम दें, इन्दिरा आवास के लिये पैसा हम दें, पेंशन हम दें, बाढ़ के लिये पैसा हम दें। अभी भोला सिह जी ने कहा कि हमें पैसा चाहिये। अगर हर काम के लिये केन्द्र सरकार पैसा देगी तो राज्य के संसाधन कहां जा रहे हैं? राज्य के संसाधन मूर्तियां लगाने के लिये हैं, राज्य सरकार को टैक्सों से जो पैसा आये, उसे पार्कों पर खर्च करे। विकास के कार्यो के लिये राज्यों को भी अपने संसाधनों का इस्तेमाल करना चाहिये लेकिन आज राज्य की प्राथमिकतायें बदल चुकी हैं। आज उनकी प्राथमिकतायें जनता नहीं है, खेत-खलिहान और किसान नहीं हैं। जब राहुल जी किसी दलित के घर पर रुकते हैं तो बहिन जी उनकी हंसी उड़ाती हैं। जब लगातार हंसी का जवाब नहीं मिला तो महसूस कर लिया होगा कि उत्तर प्रदेश की जनता ने क्या जवाब दिया है? वह प्रधान मंत्री बनने का सपना देख रही थी कि 70 सीटें लेकर आयेंगे लेकिन 20 पर ही रह गई। हमने 64 सीटों पर सहयोगी दलों के साथ चुनाव लड़ा और 21 सीटें जीती। हमने गठबंधन धर्म निभाया। अगर हमने 6 महीने पहले तैयारी की होती तो 21 सीटों के बजाय 40 सीटें जीतकर आते और बिहार में 15 सीटें जीतते। इसलिये आज डैमोक्रेसी का मास्टर जनता से बड़ा कोई नहीं है।

 “The woods are lovely, dark and deep. But I have promises to keep, and miles to go before I sleep.”                                                                                                                           SHRI HASSAN KHAN (LADAKH) : Sir, I stand to support the Motion of Thanks.

            प्रेजीडेंट अड्रेस ने रोड कनेक्टिविटी पर एम्फेसाइज़ किया है और इसी कनेक्टिविटी  पर मैं दो-चार अलफ़ाज सदन के सामने रखना चाहता हूं.

            Sir, I represent the Ladakh Constituency, which is the remotest region in the country and the State of Jammu and Kashmir. My region remains cut-off from the rest of the country for more than six months in a year.[r66]  My region has long borders with China as well as Pakistan. Drass, falling under my constituency, is the second coldest place in the world, and the highest battlefield in the world, Siachen, is also in my constituency.

            Since the area remains cut-off from the rest of the country for more than six months, the working season in the region is also affected -- it is not more than six months in a year. All the schemes and programmes initiated by the Centre or the State Government has to be completed within a span of only six summer months which hampers the flow, the speed of the programmes in the region.

            My submission is that the connectivity programme which the President has emphasised in Her Speech needs to be given importance in the remotest region of Ladakh which remains cut-off, as I have already said, for six months.

            A scheme or a programme is going on or is in the air, उस ज़माने से जब मोरारजी देसाई साहब प्रधानमंत्री थे और शेख मोहम्मद अब्दुल्ला रियासत के वज़ीरेआज़म थे। हमारे लद्दाख से पदमश्री श्री सनम मुर्मु, लद्दाख के मिनिस्टर और वर्क्स मिनिस्टर जम्मू-कश्मीर में थे। उस वक्त भी यह कहा गया था कि इस सेपरेशन को खत्म करने के लिए ओनल में टनल बनाने की जरूरत है। उस वक्त से लेकर आज तक इस चीज पर हमेशा बातें होती रही हैं। हमने सुना है कि पिछले साल यूपीए गवर्नमेंट ने इस सिलसिले में काफी काम किए हैं। खासकर सर्वे और फिज़िबिल्टी के बारे में अगर ऐसा किया जाए तो यह रीज़न भी मुल्क के बाकी हिस्सों के साथ सालभर जुड़ा रहेगा और इससे वहां के दूरदराज इलाकों में तरक्की के अवसर मिल सकेंगे।

Mr. Chairman, Sir, Ladakh region is bigger than Jammu, and Kashmir together in area, though it has the lowest density of population in the country; that too is a big problem for the development of the area.  जब उसका 58000 स्कवेयर किलोमीटर एरिया फैला हुआ है, वह छ: महीने पूरी दुनिया से कट जाता है तो उससे बहुत सी प्रोबल्मस वहां के रहने वाले लोगों को, जो चीन और पाकिस्तान के लम्बे बार्डरों पर रहने वाले लोगों को आती हैं। जहां हमारे मुल्क की बहादुर सेना आठ हजार से 18हजार फुट की बुलंदी पर सर्दी, गर्मी एवं बर्फ  में ग्लेशियर से उठती हुई हवाओं में डय़ूटी देते हैं तो इस लिहाज़ से कनेक्टिविटी के इस विषय की तरफ ध्यान दिलाना चाहता हूं। यह प्रोग्राम इतने समय से चल रहा है कि मुल्क से जोड़ने के लिए एक टनल की वहां जरूरत है, इस पर जोर दिया जाए। यूपीए की पांच साल की हुकूमत में हम उम्मीद करते हैं, पूरे लद्दाख के निवासियों को उम्मीद है कि आने वाले पांच साल में यूपीए गवर्नमेंट इस सिलसिले में काम करेगी। हमारे यहां जो सदियों पुरानी प्रोबलम चली आ रही है, उसका कोई समाधन निकालेंगे। यही चीज मैं सबसे पहले वहां की कनेक्टिविटी के लिए, मुल्क के साथ जोड़ने के लिए, तरक्की के लिए जरूरी समझता हूं। उस रीज़न में सिर्फ एक ही एयरपोर्ट लेह में है, दूसरा जो कारगिल में बना हुआ है, वहां पर कमर्शियल अभी वायबल नहीं है, उसे अपग्रेड करने की जरूरत है ताकि दूसरा डिस्ट्रिक्ट, जो एक-दूसरे के बीच में ढाई सौ से तीन सौ किलोमीटर की दूरी पर आता है, वहां भी कम से कम सर्दियों के महीनों में कमर्शियल सर्विसेज़ कश्मीर, दिल्ली या जम्मू से चला सकें, इसकी तरफ भी हम हुकूमत से गुज़ारिश करते हैं।[S67]                             इस चीज की तरफ भी ध्यान दिया जाए। वहां दूसरा एयरपोर्ट मौजूद है। इस वक्त भी वहां एयरपोर्ट बना हुआ है। वहां आर्मी के एयरक्राफ्ट उतरते हैं। मेरी गुजारिश है कि वहां कॉमर्श्यल सर्विसेस चलाने का बन्दोबस्त किया जाए। उस एयरपोर्ट को अपग्रेड किया जाए, ताकि बड़े जहाजों के उतरने के भी वहां बन्दोबस्त हो सकें। अगर ये चीजें की जाएं, तो दूरदराज इलाकों में भी तामीर और तरक्की के काम हो सकते हैं। सेंटर और स्टेट से जो स्कीमें बनती हैं, वहां उनका असर हो सकता है। इन्हीं बातों के साथ I strongly support the Address of the President and the Motion of Thanks. 

डॉ0 विनय कुमार पाण्डेय (श्रावस्ती)  :  माननीय पीठाधीश महोदय, आपने माननीया राष्ट्रपति जी के अभिभाषण पर डॉ. गिरिजा व्यास जी द्वारा रखे गए धन्यवाद प्रस्ताव पर बोलने का अवसर प्रदान किया, इसके लिए आभारी हूं।

            मान्यवर, भारत-नेपाल सीमा, महात्मा बुद्ध की तपोभूमि, जैन और सनातन तीर्थस्थली, देवी पाटन के जिस सीमान्त और पिछड़े हुए क्षेत्र श्रावस्ती का मैं उस सदन में प्रतिनिधित्व करता हूं। यह पर्यटन और तीर्थाटन की दृष्टि से विश्वविख्यात है। यही नहीं, श्रावस्ती के पूर्ववर्ती क्षेत्र बलरामपुर, जहां से माननीय अटल बिहारी वाजपेयी, माननीया सुभद्रा जोशी, माननीय नानाजी देशमुख और बैरिस्टर  हैदर हुसैन जैसी महान् विभूतियों को इस सदन में प्रतिनिधित्व का अवसर मिला है। मैं अपनी उस महान् जनता के प्रति कृतज्ञ हूं जिसने यू.पी.ए. की चेयरपर्सन, धैर्य और त्याग की प्रतिमूर्ति, माननीया सोनिया गांधी जी, यू.पी.ए. सरकार के प्रधान मंत्री, डॉ. मनमोहन सिंह जी की नीतियों में आस्था और विश्वास व्यक्त करते हुए, इस सदन में प्रतिनिधित्व करने का अवसर प्रदान किया है।          

            मान्यवर, समवेत् संसद की दोनों सभाओं में जो अभिभाषण माननीया राष्ट्रपति महोदया द्वारा दिया गया, उसमें भारत निर्माण को लेकर, जो समावेशी विकास की परिकल्पना की गई है, उससे सदन के सभी माननीय सदस्य सहमत होंगे , ऐसा प्रतीत हो रहा है और प्रतीत ही नहीं हो रहा है, बल्कि ऐसा मेरा विश्वास भी है। आज आतंकवाद की लड़ाई में आर्थिक मोर्चे की लड़ाई में, गरीबी उन्मूलन की लड़ाई में, हर आम भारतीय को निरोगता प्रदान करने की लड़ाई में यू.पी.ए. की सरकार ने जिस प्रतिबद्धता, धैर्य और दृढ़ता के साथ, पिछले पांच वर्षों में प्रगित की है, उसी के फलस्वरूप आज यह जनादेश जो प्राप्त हुआ है, यह स्व. राजीव गांधी जी के बाद पहली बार प्राप्त हुआ है और यह एक दृढ़ इच्छा-शक्ति वाली भारत सरकार की आवश्यकता, जो बहुमत से, पूरी दृढ़ता के साथ, भारत की उन्नति और विकास के लिए फैसले ले सके, यह जनादेश उसी का परिणाम है।

            मान्यवर, हमारे किसानों के जीवनस्तर को सुधारने के लिए, यू.पी.ए. की पिछली सरकार ने, माननीय यू.पी.ए. की चेयरपर्सन श्रीमती सोनिया गांधी जी और राहुल गांधी जी के कुशल नेतृत्व और निर्देशन में, जिस ढंग से किसानों की तरक्की की बात कही गई, किसानों की आर्थिक स्थिति और ग्रामों की अर्थव्यवस्था को सुधारने और सुदृढ़ करने की बात कही गई, किसानों की अर्थव्यवस्था को सुधारने और सुदृढ़ता प्रदान करने के लिए निर्णय लिए गए, निश्चित रूप से यह जनादेश उसके पक्ष में है। हिन्दुस्तान गांवों में बसता है, जब हम होश में आये और जब मैंने विद्यार्थी जीवन प्रारम्भ किया तो यही पढ़ाया गया कि हिन्दुस्तान किसानों का देश है और हिन्दुस्तान गांवों में बसता है। निश्चित तौर पर आज हमारी स्थिति वह नहीं है कि किसानों के अनाज के मूल्य को बढ़ाकर हम रोटी को महंगा करें, लेकिन किसानों की लागत को घटाकर किसानों को आर्थिक तरक्की देकर जीवन-यापन स्तर को समृद्धशाली बनाते हुए हम समावेशी भारत के विकास की परिकल्पना कर सकते हैं और निश्चित रूप से एक सुदृढ़ भारत की स्थापना कर सकते हैं, क्योंकि अगर किसान टूट गया तो हिन्दुस्तान की रीढ़ टूट जाएगी।

            मैं हिन्दुस्तान की उस महान जनता का आभारी हूं, जिसने यू.पी.ए. की नीतियों में आस्था व्यक्त करते हुए भ्रष्टाचार, आतंकवाद और गैर-कांग्रेसी सरकारों द्वारा परम्परागत रूप से हिन्दुस्तान को कमजोर करने की जो परम्परा सी बना ली थी, उसका करारा जवाब देकर यू.पी.ए. की सरकार को बहुमत ही नहीं, एक मजबूत सरकार दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ चलाने का जो जनमत दिया है, उसके लिए मैं आभारी हूं।

            मैं जिस क्षेत्र से आया हूं, अभी हमारे साथी आदरणीय पाल साहब ने कहा कि वह अन्तर्राष्ट्रीय महत्व का क्षेत्र है। वह बुद्धा सर्किट, जिसमें श्रावस्ती निहित है, जिसमें सिद्धार्थनगर निहित है, जिसमें कुशीनगर और सारनाथ निहित है, वह अन्तर्राष्ट्रीय पर्यटन का भी स्थल है और निश्चित रूप से उससे विदेशी निवेश और विदेशी मुद्रा की उचित और पर्याप्त रूप में आय होती है। मैं ध्यान आकृष्ट करना चाहूंगा कि बुद्धा-सर्किट को डैवलप करके और यहां जो रिजर्व फोरैस्ट है, उसको भी पूरे सुनियोजित तरीके से पर्यटन की दृष्टि से विकसित करके अच्छी आय के संसाधन वहां विदेशी मुद्रा एकत्र किए जाने के उपाय किये जा सकते हैं। इसमें गोरखपुर से फैजाबाद तक आने वाले उस एन.एच. को कुशीनगर से लेते हुए महाराजगंज, सिद्धार्थनगर, तुलसीपुर, श्रावस्ती से जोड़ते हुए और लखीमपुर, शाहजहांपुर, बाराबंकी और बहराइच आकर शाहजहांपुर, जो लखनऊ दिल्ली बरेली हाईवे है, यहां से लाकर एन.एच. का दर्जा दिए जाने की आवश्यकता है। उसे राज्य स्टेट हाईवे से निकालकर नेशनल हाईवे में परिवर्तित किया जाये। निश्चित रूप से वह हमारे पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण होगा। वहां अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे की जरूरत है। मान्यवर, मैं आपको सुन रहा था, उसी तरीके से श्रावस्ती मेरा जो जनपद है, उसमें एक सेंटीमीटर भी रेलवे लाइन नहीं है। आज वहां विकास की उम्मीद करना बगैर रेलवे लाइन के, बगैर ट्रंसपोर्टेशन के बहुत उचित प्रतीत नहीं होता है।

            निश्चित रूप से मैं माननीय आडवाणी जी को सुन रहा था, आज नेपाल भारत सीमा चीन की मंशा को देखते हुए शायद सबसे असुरक्षित सीमा है और वहां विशेष ध्यान देने की जरूरत है। शायद इसीलिए वहां सशस्त्र सीमा बल लगाया गया है। जब से सशस्त्र सीमा बल लगा है, माओवादियों का जो आतंक था, जो माओवादियों का खतरा था, उस पर निश्चित रूप से काबू पाया गया है। वहां इससे तस्करी पर भी काबू पाया गया है।[R68]    उन्हें और अधिकार प्रदान करने की आवश्यकता है।  उत्तर प्रदेश में जो सरकार चल रही है, जिसकी मैं आगे चर्चा करूंगा, निश्चित रूप से हमें वहां और विशेष ध्यान देने की जरूरत है, क्योंकि यहां हमारी सबसे बड़ी खुली सीमा है। नेपाल राष्ट्र में जो राजनैतिक अस्थिरता फैली, उसको देखते हुए आज शायद पाकिस्तान या अन्य किसी पड़ोसी राष्ट्र से ज्यादा खतरा हमें इस सीमा से महसूस करने की आवश्यकता महसूस हो रही है।  हम वहां के निवासी हैं, वहां के प्रतिनिधि हैं, इसलिए वहां की बात यहां रख रहे हैं।   

            मान्यवर, हमारे यहां शिक्षा के साधन पर्याप्त नहीं हैं। निश्चित रूप से टेक्निकल एजुकेशन और मैनेजमेंट एजुकेशन को लेकर अभी यह क्षेत्र अति पिछड़ा है। शिवालिक रेंज की तराई की यह बेल्ट, जहां राप्ती नदी और पहाड़ी नालों की बाढ़ की विभीषिका को झेलती है, वहीं तराई में ऐसा भी क्षेत्र है, जहां सिंचाई के साधन नहीं हैं, जहां ड्रिल बोरिंग के अलावा सिंचाई की कोई और सुविधा किसानों को उपलब्ध नहीं है।   मान्यवर, राप्ती नदी पर मथुरा, कोडरी और पिपरा पुलों की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए और वहां थारू जनजाति जो हमारे क्षेत्र में है, उसके लिए विशेष पैकेज की आवश्यकता की तरफ मैं आपके माध्यम से ध्यान आकृष्ट करना चाहूंगा, उनकी शिक्षा, स्वास्थ्य और स्वरोजगार की योजनाएं चलाने के लिए, जिससे उनका अपलिफ्टमेंट हो सके, यह अति आवश्यक है।  

            मान्यवर, गैर कांग्रेस शासित राज्यों में एक उत्तर प्रदेश राज्य भी है। आप अभी नरेगा की बात कह रहे थे। तीस प्रतिशत तक नरेगा की राशि की कमीशन के रूप में वसूली की बात हम लोगों के संज्ञान में उत्तर प्रदेश राज्य सरकार के द्वारा आती थी।  हम लोग टीवी में देखते हैं कि आतंकवादियों ने जजिया कर लगाया, हमारे यहां यू.पी. में जन्मदिनी कर चल रहा है। लोकतंत्र का विद्रूप चेहरा देखने को आज उत्तर प्रदेश में मिल रहा है।  वह उत्तर प्रदेश जो पूरे हिंदुस्तान को लीड करता था, उसने इस बार  21 लोगों को चुनकर विशेषकर बुद्धा सर्किट से होते हुए, यह साबित कर दिया है कि उन्हें नकार दिया गया। मैं बहुत देर से अपने प्रतिपक्ष के माननीय साथियों की बातों को सुन रहा हूं।  मैं साधुवाद देना चाहता हूं माननीय सोनिया जी के त्याग को, राहुल जी के धैर्य को, कि आज गोडसे की नीतियों पर चलने वाले लोग, गांधी की नीति की बात इस सदन में कहने लगे। कांग्रेस को यह बताने लगे कि कांग्रेस ही हिंदुस्तान की पूरे विश्व में परिचायक है, इसलिए मैं धन्यवाद देना चाहता हूं, आपके माध्यम से यूपीए चेयरपर्सन की त्याग, तपस्या और धैर्य को। 

 

            मान्यवर, निश्चित रूप से हिंदुस्तान में अब दोहरा चरित्र चलने वाला नहीं है।  यह हिंदुस्तान की जनता ने मान लिया है।  आने वाले दिनों में पूर्ण बहुमत की सरकार भी पांच साल के बाद हम पायेंगे। एंटी-इनकंबेंसी नहीं, बल्कि अब पोजीटव वोटों की बारी है। निश्चित रूप से अब वह दिन दूर नहीं जब 16वीं लोकसभा का चुनाव होगा, तो इस सदन में पूर्ण बहुमत की कांग्रेस की सरकार होगी। 

            मान्यवर, प्राक्सी वार की बात आडवाणी जी इस सदन में कह रहे थे, इसको बढ़ावा किसने दिया? पाक उच्च न्यायालय द्वारा लिए गए निर्णय पर  चिंता व्यक्त की जा रही थी। मैं आपके माध्यम से यह जानना चाहूंगा कि जब आपकी सरकार थी, तो आपने कंधार तक मेहमाननवाजी की। आपके केंद्रीय मंत्री द्वारा मेहमाननवाजी की गयी। अगर आतंकवाद का उस समय करारा जवाब दे दिया गया होता, तो निश्चित रूप से मुंबई हमला न हुआ होता और उनकी पार्लियामेंट के दरवाजे तक आने की हिम्मत न पड़ती, आतंकवाद को समूल नष्ट कर दिया गया होता। 

            मान्यवर, कांग्रेस और यूपीए सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति निश्चित रूप से आतंकवाद को समाप्त करेगी।  पूरे विश्व में आर्थिक संकट की इस लड़ाई में भारत भी जूझ रहा है, निश्चित रूप से आने वाले समय में पूरे विश्व में आर्थिक रूप से नंबर एक के पायदान पर हिंदस्तान खड़ा होगा। [p69]                 मान्यवर, मैं अपनी बातों को समाप्त करना चाहूंगा, लेकिन आदरणीय डॉ. गिरिजा व्यास जी ने माननीय राष्ट्रपति जी के अभिभाषण पर जो धन्यवाद प्रस्ताव रखा है, उस पर फिर से बल देते हुए यूपीए सरकार की मुखिया का ध्यान आकृष्ट करना चाहूंगा। मान्यवर, आपने अमृत की बात की थी,  मैं इन पंक्तियों के साथ अपनी बात समाप्त करना चाहूंगा कि ओ अमृत तो सब लेकर भागे, अब विष की तैयारी  है;

कौन हलाहल पान करेगा, हर कोई यही विचार रहा;

आज तुम्हें हिन्दुस्तान क्या, पूरा विश्व निहार रहा ।

 

 मैं यह बात इसलिए कहना चाहूंगा कि हिन्दुस्तान का दर्जा पूरे विश्व में सर्वोपरि रहा। जब राजनीति और राजनीतिज्ञ व्यंग्य का विषय बन गये हों, तो हिन्दुस्तान की जनता और राजनीति ने एक ऐतिहासिक करवट ली है। पन्द्रहवीं लोक सभा में यूपीए सरकार की दृढ़ता का ही नतीजा इस ऐतिहासिक सदन के रूप में है। निश्चित रुप से मैं धन्यवाद देना चाहूंगा कि जब हिन्दुस्तान की जनता का विश्वास और अपेक्षाएं एक ऐसे दौर में आकर खड़ी हो गयी थीं जहां राजनीति और राजनीतिज्ञ व्यंग्य का विषय बन गये हों, इलैक्ट्रानिक चैनलों पर देखा जाता रहा, जहां व्यंग्य के तरीके से उनका प्रस्तुतीकरण होने लगा हों, ऐसे दौर में माननीया सोनिया गांधी जी, माननीय राहुल गांधी जी ने एक आदर्श और शुद्ध भारतीय संस्कृति की परम्परा का निर्वाह करते हुए, त्याग और धैर्य का परिचय देते हुए पुन: हिन्दुस्तान के युवाओं और हिन्दुस्तान की जनता का विश्वास और अपेक्षाएं राजनीति और राजनीतिज्ञों में लाने का प्रयास किया। ...( व्यवधान)

सभापति महोदय :   मैं आपको धन्यवाद दे रहा हूं। अब आप बैठ जाइये।

…( व्यवधान)

श्री विनय कुमार पांडे  :  निश्चित रूप से आज हिन्दुस्तान के युवाओं को ...( व्यवधान)

सभापति महोदय :  पांडे जी, आपने विष और अमृत की बात की, आपने यह जरूर पढ़ा होगा--

                                    मान सहित विष खाइ के, शम्भु भये जगदीश।

                                    और बिना मान अमृत पीये, राहु कटायो सीस।।

 

श्री विनय कुमार पांडे  :  महोदय, आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।

                                                                                                           

श्री सज्जन सिंह वर्मा (देवास):  सभापति महोदय, मैं महामहिम राष्ट्रपति जी के अभिभाषण पर डॉ. गिरिजा व्यास द्वारा जो धन्यवाद प्रस्ताव लाया गया है, उसके समर्थन में बोलने के लिए खड़ा हुआ हूं। राष्ट्रपति जी के अभिभाषण में छठे बिन्दु पर शक्तिशाली शब्द का उपयोग निश्चित रूप से मन को बड़ा अच्छा लगा। उन्होंने कहा कि भारत की जनता ने यूपीए सरकार को एक बड़ा शक्तिशाली जनादेश इस चुनाव के माध्यम से दिया है। [NB70] बहुत सुन्दर शब्द का संयोजन है। माननीय सभापति जी, जब चुनाव हुआ...( व्यवधान)

 

सभापति महोदय :  वर्मा जी, आपका भाषण सोमवार को भी जारी रहेगा, क्योंकि हम आपका लम्बा भाषण सुनना चाहते हैं। इसलिए आप दो दिन आराम कर लें और सोमवार को फिर तैयार होकर आयें। अब सभा 8 जून, 2009 को पूर्वाहन्न 11.00 बजे पुनः समवेत होने के लिए स्थगित होती है ।

 

18.00 hrs The Lok Sabha then adjourned till Eleven of the Clock On Monday, June 8, 2009/Jyaistha 18, 1931 (Saka).

     

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