Legal Document View

Unlock Advanced Research with PRISMAI

- Know your Kanoon - Doc Gen Hub - Counter Argument - Case Predict AI - Talk with IK Doc - ...
Upgrade to Premium
[Cites 0, Cited by 0]

Lok Sabha Debates

Announcement Regarding Welcoming Of Parliamentary Delegation From The ... on 9 December, 2019

Seventeenth Loksabha > Title: Announcement regarding welcoming of Parliamentary delegation from thepeople's majlis of Maldives   माननीय अध्यक्ष : हमारे अतिथि आए हैं  ।एक मिनट बैठ जाइए ।

…( व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष : माननीय सदस्यगण, सबसे पहलेमुझे एक घोषणा करनी है ।

        मुझे अपनीओर से तथा सभा के माननीय सदस्यों की ओर से हमारे सम्मानित अतिथि के रूप में भारत के दौरेपर आए पीपल्स मजलिस ऑफ मालदीव के स्पीकर महामहिम श्री मोहम्मद नशीद और मालदीव के संसदीय शिष्टमंडल के सदस्यों का स्वागत करतेहुए अत्यंत प्रसन्नता हो रही है ।

          वेरविवार, 8 दिसम्बर, 2019 कोभारत आए और अब वे विशेष प्रकोष्ठ में बैठे हैं । दिल्ली के अतिरिक्त वे शनिवार, 14 दिसंबर, 2019 कोभारत से अपने अंतिम प्रस्थान के पहलेआगरा और गांधी नगर, गुजरात का भी दौरा करेंगे । हम अपने देश में उनके सुखद और मंगलमय प्रवास की कामना करते हैं । उनके माध्यम से हम पीपल्स मजलिस ऑफ मालदीव, वहां की सरकार और मालदीव के मित्रवत लोगों के प्रति अपनीशुभकामनाएं प्रेषित करते हैं ।

 

माननीय अध्यक्ष : एकमिनट  ।मैंने व्यवस्थाएँ यहां पर दे रखी हैं कि प्रश्न काल की समाप्ति के बाद मैं सब के विषय पर गौर करूँगा ।

…( व्यवधान)

डॉ. निशिकांत दुबे (गोड्डा): सर, टेक्नीकल मुद्दा है ।…(व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष : कोई टेक्नीकल मुद्दा नहीं है ।

…( व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष : आपबैठ जाइये । मैंने आपको इजाजत नहीं दी । मैंने किसी को इजाजत नहींदी   है । कोई भी बैठे-बैठे नहींबोलेगा ।

…( व्यवधान)

 

11.01 hrs ORAL ANSWERS TO QUESTIONS माननीय अध्यक्ष : क्वेश्चन नंबर 281- श्री गुमान सिंहदामोर ।

(Q. 281) श्री गुमान सिंह दामोर: अध्यक्ष महोदय, मैं आपकेमाध्यम से माननीय मंत्री को धन्यवाद देना चाहता हूं कि आपनेमेरे प्रश्न का बहुतअच्छा जवाब दिया, इसलिए मैं पुन: धन्यवाद देना चाहता हूं । मेरी दो-तीन छोटी-छोटी बातें हैं । मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से निवेदन करना चाहता हूँ कि मेरेलोक सभा क्षेत्र के झाबुआ और अलीराजपुर के जो मजदूर हैं, वेगुजरात में काम करने जाते हैं । उनकी सिलिकोसिस जैसी बीमारी से मृत्यु हो जाती है । उनकी सहायता न तो गुजरात सरकार करती है, न ही मध्य प्रदेश सरकार करती है । मेरा निवेदन है कि इस बारे में गम्भीरतापूर्वक चिंतन किया जाए । दूसरा, चूंकि वहां से जब वे मजदूरी करने जाते हैं तो उनकेबच्चों की शिक्षा पर भी विपरीत असर पड़ रहा है । उनकी शिक्षा और इन मजदूरों के स्वास्थ्य को लेकरक्या माननीय मंत्री जी बताएंगे?

श्री संतोष कुमार गंगवार : माननीय अध्यक्ष जी, जैसे माननीय सदस्य ने अपनी बात कही है, यह बात सही है कि हमारे देश के अंदर कोई भी ऐसा कानून नहीं है कि दूसरे राज्य में जाने के लिए किसी को रोकने का काम करे । देश के किसी भी हिस्से में जाकर कोई भी व्यक्ति काम कर सकता है । वहां पर अगर कोई असुविधा हो जाती है, कोई बीमारी हो जाती है, मैं आपके संज्ञान में लाना चाहता हूं कि अब श्रम कानूनों में हम संशोधन कर रहे हैं । जो बातें आप बता रहे हैं, वह समझ में आ रहा है । इसमें दूसरा जो कोड है,जो वास्तव में इस ओर ध्यान देता है, हम उसकी चिंता कर रहे हैं । कैसे इनकी चिंता को दुरुस्त किया जाए, उस हिसाब से काम हो रहा है । इसके बाद भी हमारी अब तक जो योजना चल रही है, उस योजना के तहत हम सहयोग कर रहे हैं । जो हमारे बीड़ी कामगार हैं, लौह इत्यादि खदानों में काम करने वाले कामगार हैं, सिने वर्कर्स हैं, उनके लिए भी ये सुविधाएँ हम देने का काम कर रहे हैं । जो ऐसी बात बताई गई है, हम स्वास्थ्य की चिंता कर रहे हैं । अगर कोई शिकायत मिलेगी तो हम उसे सही ढंग से करेंगे । हम इतना बता सकते हैं कि हमने जो व्यवस्था की है उसके तहत हमारा मंत्रालय विभिन्न अस्पतालों और औषधालयों के माध्यम से कैंसर का पूरा खर्च उठाता है । हम टीवी और अस्पताल बेड रिजर्वेशन के मामले में भी खर्च करते हैं । अगर माननीय सदस्य कोई स्पेसिफिक शिकायत बताएंगे तो उसके ऊपर भी कार्रवाई की जाएगी ।

SHRI KALYAN BANERJEE:  Sir, the answer given by the hon. Minister is really appreciable because it is truly within the spirit of the constitutional provisions and very correctly said.

          Since November 2016, industries have been collapsing and many labourers have been out of employment. In my constituency itself, at a place called Domjur, there were 50,000 workers engaged in the business of preparation of gold ornaments. They were working all over India, especially in Maharashtra, Kerala and Gujarat. They were working in those States. Now, by reason of demonetisation, these industries have collapsed. Out of 50,000 workers, 45,000 workers have gone out of employment and only 5,000  remain employed.

          Sir, through you, my very specific question is this. By reason of demonetisation, industries have collapsed, so many labourers have been out of employment and it has reached a record level of more than 40 per cent where now, 40 per cent of total labourers have lost their employment. What are the measures which the hon. Minister has taken to re-employ them and to put more labourers into employment?

श्री संतोष कुमार गंगवार: अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से बताना चाहूंगा कि ऐसा कोई कारण नहीं है कि रोजगार कम हो रहे हैं । रोजगार सृजन के लिए हमारी सरकार काम कर रही है । वर्ष 2016-17 से अब तक कई काम किए हैं जैसे पंडित दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना के अंतर्गत हमने नई योजना चलाई थी । …(व्यवधान)  इससे प्लेसमेंट भी मिल रहा है,लोगों को काम भी मिल रहा है । जैसा आपने बताया कि अनइम्पलायमेंट हो गया है तो हम इसकी भी जानकारी प्राप्त करेंगे और आपको देने का काम करेंगे । हमने जो विभिन्न योजनाएं चलाई हैं, उसके माध्यम से लोगों को काम मिल रहा है और काम दिखाई दे रहा है । मुद्रा योजना के अंतर्गत हमारा रिकार्ड बताता है कि हमने जो लक्ष्य रखा था उससे ज्यादा पैसा दिया है और लोग इस संदर्भ में काम कर रहे हैं और यह सभी की जानकारी में है । 

                                                                                       

(Q. 282) DR. THOL THIRUMAAVALAVAN: Hon. Speaker, Sir, the reply given by the hon. Minister is not a satisfactory one. It clearly says that there is no proposal under consideration for waiver of educational loans.

There are many cases in our country where the Government is waiving loans worth crores of rupees together, given to the industrialists, but the Government is not ready to consider the rural people who availed of the loan and are searching for employment. There are many cases where they have committed suicides, but in the reply, our hon. Minister says that there has been no such case where people have committed suicides. This is really an unconvincing one. So, I need a proper answer from the hon. Minister.

I would like to know from the hon. Minister whether there is any consideration to waive the loans for rural youths who are unemployed. This is a burning issue in our country. They are suffering a lot. So, kindly consider to waive the loans for the unemployed. Will the hon. Minister consider waiving of loans availed of by rural people?

श्री अनुराग सिंह ठाकुर: माननीय अध्यक्ष जी, वर्ष 2001 में मॉडल एजुकेशन लोन स्कीम शुरू की गई थी । इसका लाभ आज तक हजारों लाखों विद्यार्थियों को मिला है । इसके पीछे मंशा थी कि भारत में पढ़ने वाले, उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को दस लाख रुपये तक और विदेश जाकर पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों को बीस लाख रुपये तक का लोन उपलब्ध करवाया जाए । इसे पब्लिक सैक्टर बैंक्स ने इसी मंशा के साथ शुरू किया था कि अच्छी क्वालिफिकेशन हो, प्रोफेशनल कम्पीटेंसी हो,डैवलपमेंट आफ एन्टरप्रेन्योनर स्किल्स हो । इसमें कुल मिलाकर देखें तो लिब्ररल रिपेमेंट सिस्टम है, यानी जब शिक्षा पूरी होती है तो उसके बाद एक साल का मोरेटोरियम पीरियड मिलता है । इसके बाद 15 साल में पूरा लोन रीपे करना है । अगर आप अनएम्प्लाएड या अंडर एम्पलाएड हैं तब भी एक साल का एडीशनल मोरेटोरियम पीरियड मिलता है । अगर आप इन्क्यूबेशन के माध्यम से,यानी स्टार्टअप में शुरुआत करते हैं तो उसमें भी एक साल का मोरेटोरियम पीरियड मिलता है ।

          अगर मार्जन मनी, बाकी लोन्स में देखा जाए तो कहीं पर 20 से 30 परसेंट हाउसिंग लोन और दस परसेंट कार लोन में है तो यहां मार्जन मनी भी नहीं है । आप इसे वेव करने की बात कह रहे हैं,मुझे लगता है कि इस योजना के माध्यम से पूरे देश में लाखों विद्यार्थियों को लाभ मिला है । मैं आंकड़े देना चाहता हूं ।

माननीय अध्यक्ष: आप आंकड़े रहने दीजिए ।

DR. THOL THIRUMAAVALAVAN: Hon. Speaker, Sir, unemployment is a very serious issue. It has become a major crisis in our country. So, we have to consider giving employment to our people, especially to those who belong to rural areas.

          Now-a-days, it is very hard to get educational loan from banks. Even now we are fighting for this. No bank is ready to give educational loan.  So, will the Minister give directions to the bank authorities to give educational loan to the students, especially to those belonging to rural areas?

          I am requesting the Minister again and again to waive the educational loan at least of those who are not getting jobs.

श्री अनुराग सिंह ठाकुर: माननीय अध्यक्ष जी, विद्यालक्ष्मी पोर्टल पर इसकाप्रावधान है, विद्यार्थी लोन के लिए एप्लाई कर सकतेहैं । सभी पब्लिक सैक्टर बैंक्स और शेड्यूल कमर्शियल बैंक्स लोन उपलब्ध करवाते हैं । यहां तक कि चार लाख तक के लोन के लिए कोई गारंटी नहीं देनी पड़ती है, पेरेंट्स ज्वाइंट बारोअर्स होते हैं । साढ़े सात लाख रुपये तक के लोन के लिए थर्ड पार्टी गारंटी है । यहां तक कि इसमें प्रावधान भी है कि विद्यार्थी को वेवरकर दिया जाए । अगर कुल मिलाकर देखें, जैसा मैंने पहलेकहा कि नार्थ-ईस्टर्न रीजन में 25,639 विद्यार्थियों को 810करोड़ रुपये का लोन मिला है और साउथ इंडिया में 16 लाख 34हजार 164 विद्यार्थियों को 44,362 करोड़ रुपये का लोन मिला है । पढ़ाई के लिए लोन उपलब्ध करवाया जा रहा है, कहीं कोई कमी नहीं है । 

श्री गिरीश भालचन्द्र बापट : माननीय अध्यक्ष जी, सरकार की स्कीम अच्छी है । ऐसा पता चला है कि शिक्षा पूरी होने के बाद जॉब मिलने में कठिनाई आती है ।  सरकार ने एक साल की मोहलत दी है, अगर विद्यार्थी को जॉब न मिले तो उसके लिए एक साल की जगह दो साल की मोहलत देने की हमारी सरकार से विनती है । अगर सरकार यह मांग पूरी करती है तो विद्यार्थियों को फायदा होगा ।

श्री अनुराग सिंह ठाकुर: माननीय अध्यक्ष जी, मैं इतनाही कहना चाहता हूं और मैंने पहलेभी कहा था, शिक्षा पूरी करने के बाद एक साल का मोरेटोरियम पीरियड है । अगर कोई अनएम्पलाएड या अंडरएम्पलाएड है तो उसके लिए एक साल का और एडीशनल मोरेटोरियम पीरियड है, जोदो साल का बनताहै । इसके अलावा अगर कोई स्टार्ट्सअप्स में हैं तो मोरेटोरियम पीरियड की ऑप्शन उपलब्ध है और टेलीस्कोपिक अरेंजमेंट रिपेमेंट का भी प्रावधान है । अगर किसी की कमाईकम है या कम पैसा तनख्वाह के रूप में मिलता है तो छोटी किश्त दे सकतेहैं जो बाद में बड़ी किश्त बन जातीहै । मुझे लगता है कि अलग-अलग तरह के प्रावधान योजना के अंतर्गत हैं ताकि विद्यार्थियों को ज्यादा से ज्यादा लाभ मिल सके ।

श्री मनीष तिवारी: माननीय अध्यक्ष महोदय, यहजो शिक्षा ऋण है, इसका मूलभूत आधारयह है कि आप ऋण लो, शिक्षा प्राप्त करो, उसके बाद आपको रोजगार मिलेगा और उस रोजगार से जो कमाई होती है, उससे आप ऋण वापस करते हैं । जो सरकार द्वारा जवाबदिया गया है कि data linking education loan sanctioned by banks with securing of jobs is not centrally maintained. मेरा माननीय मंत्री जी से यह सवाल है कि आज जो बेरोजगारी की दर है,वह 45 साल में इतनी नहीं हुई,क्या सरकार…(व्यवधान) It is 45 year high …(Interruptions) Unemployment, today, is  45-year high …(Interruptions) That is a reality from which you cannot run away …(Interruptions)

माननीय अध्यक्ष : माननीय सदस्य, आप प्रश्न पूछिए ।

SHRI MANISH TEWARI: My question, Mr. Speaker, Sir, is that given the current economic slowdown, will the Government consider maintaining a Central data base where they have information that somebody. who has availed of an education loan. has got employment, whether it is self-employment or he is employed with somebody else? That is my question.

श्री अनुराग सिंह ठाकुर : माननीय अध्यक्ष जी, प्रश्न यहां पर यह है कि एजुकेशन लोन के रूप में जो वीकरसैक्शंस हैं और जो अच्छे पढ़नेवाले विद्यार्थी हैं, उनको किन योजनाओं के माध्यम से पैसा उपलब्ध करवाया जाता है । उसमें बड़े स्पष्ट तरीके से उत्तर में भी कहा गया कि सेन्ट्रल डेटा रखने का प्रावधान बैंकों का नहींहै । सरकार की अलग-अलग एजेंसियां निर्धारित रूप में अपना काम करती हैं । यहां पर उस योजना को और बेहतर कैसे किया जा सकताहै या जो इंटरेस्ट सब्सिडी जो एचआरडी मंत्रालय के द्वारा भी लगभग 3.5 हजार करोड़रु. काफंड क्रिएट करने के माध्यम से दी गई है, ताकि विद्यार्थियों को ज्यादा से ज्यादा लाभ मिल सके ताकि वे उच्चशिक्षा प्राप्त करें और उनकोरोजगार के अवसर मिलें । इसके अलावा मुद्रा योजना में लोन्स बाकियों को भी दिये जाते हैं । ऐसे प्रावधान भी हैं ।स्टार्ट-अप्स के लिए जो कदम मोदी सरकार ने उठाएहैं, शायद यही कारण है कि दुनिया भर के पहले पांच स्टार्ट-अप्स नेशन्स में भारत का नाम आया है जो आज के युवाओं के लिए नरेन्द्र मोदी जी की सरकार ने करकेदिखाया है ।

 

(Q. 283) श्री प्रदीप कुमार सिंह: माननीय अध्यक्ष महोदय, हमारी सरकार द्वारा बाढ़ में क्षतिग्रस्त विद्यालय भवनों का जितनी तेजी के साथ दोबारा पुनर्निर्माण कर शिक्षा व्यवस्था को पटरी पर लाया गया है, उसकी जितनी भी प्रशंसा की जाए, वह कम है । इसके लिए मैं माननीय मंत्री जी का भी धन्यवाद करता हूं ।

          बिहार राज्य का खासकर अररिया जिला जो अति पिछड़ा जिला है, प्रत्येक वर्ष बाढ़ त्रासदी के कारण बहुत से छात्र-छात्राएं दोबारा विद्यालय नहीं जा पाते हैं । अत: मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से पूछना चाहूंगा कि क्या सरकार ऐसे क्षेत्रों के बच्चों को कोई प्रोत्साहन सहायता राशि दे रही है या देने पर विचार कर रही है ताकि बाढ़ त्रासदी के बाद ऐसे क्षेत्र के बच्चे पुन:विद्यालय जा सकें?

श्री रमेश पोखरियाल निशंक : माननीय अध्यक्ष जी, यह विद्यालय भवनों की क्षति और मरम्मत का विषय है । जैसे अभी माननीय सदस्य ने कहा है कि हमारी सरकार लगातार यह कोशिश कर रही है और वैसे तो यह राज्यों का विषय है, लेकिन फिर भी भारत सरकार की समग्र शिक्षा के तहत हम लोग कोशिश करते हैं कि राज्यों को इस दिशा में पूरी मदद दी जाए । यदि पूरे देश के अंदर देखें जिसमें बिहार भी है कि लगभग 12641 कक्षा कक्ष ऐसे हैं, जो अतिरिक्त बनाने हैं, इसमें 784 करोड़ रुपये मरम्मत के लिए शासन से जारी किए गए हैं । यदि देखा जाए कि पिछले 2-3 सालों में 13425 करोड़ रुपये इसके लिए जारी हुए हैं । जहां तक माननीय सदस्य का जो अररिया जिला है, इसमें भी बहुत सारे विद्यालय भवन क्षतिग्रस्त हुए हैं और समग्र शिक्षा के तहत उन क्षतिग्रस्त कक्षों के लिए पर्याप्त धनराशि दी गई है ।

श्री प्रदीप कुमार सिंह:अध्यक्ष महोदय, मेरा दूसरा प्रश्न यह है कि क्या सरकार ने बाढ़ पीड़ित राज्यों का कोई सर्वे करावाया है या करवाने पर विचार कर रही है?

माननीय अध्यक्ष : बाढ़ का विषयभारत सरकार के गृह मंत्रालय के अंतर्गत आता है ।

…( व्यवधान)

श्री प्रदीप कुमार सिंह :बाढ़ का उस जिले तथा उस राज्य की साक्षरता दर पर होने वाले प्रतिकूल असर का मापदंड प्राप्त कर सके तथा उस राज्य की साक्षरता दर बढ़ाने पर आगे और काम किया जा सके । यदि हां, तो इसका ब्यौरा प्रदान करने की कृपा करें, अगर नहीं, तो इसके कारणों से अवगत कराने का कष्ट करें ।

डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक:श्रीमन् जहां तक बाढ़से प्रभावित क्षेत्रों का प्रश्न है, तोचूंकि यह विषय प्रदेश के पास होता है, फिर भी यह उन लोगों का विषय है तो यदि उनको जरूरत होगी कि किस-किस राज्य में कितनी क्षति हुई है और दूसरा उन्होंने साक्षरता को बढ़ाने के लिए कहा है । यह एक लगातार प्रक्रिया है, जिसमें भारत सरकार पूरी ताकत के साथ उस दिशा में जुटी हुई है और उसके अच्छे रिजल्ट भी हैं ।

श्री परबतभाई सवाभाईपटेल: आदरणीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपकेमाध्यम से माननीय मंत्री जी से पूछना चाहता हूं कि मेरेसंसदीय क्षेत्र बनासकांठा जिले में बाढ़ की वजह से जो रूम्स टूट गए हैं और जो रूम्स डैमेज हुए हैं, वैसे 1,765 वर्ग खंड बनाने की आवश्यकता है । उनमें से वर्ष2019-20 में 192वर्ग खंड सैंक्शन हुए हैं । आज भी 1,513 रूम्स बनने बाकी हैं ।

          मैं आपकेमाध्यम से माननीय मंत्री जी से पूछना चाहता हूं कि वैसेतो education is a state subject. पर, वेसभी बाढ़ की वजह से टूटे हुए हैं और वर्ष2015 सेवे सभी बनने बाकी हैं । वहां विद्यार्थी खुली जगह में बैठ रहे हैं, उनके लिए कोई खास पैकेज देकर हमारे वर्ग खंड पूरे करवाएंगे, जो 1513 रूम्स बनने बाकी हैं, वेआप कब तक पूराकरवाएंगे?

डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक:श्रीमन्, मैं आपकेमाध्यम से माननीय सदस्य और सदन को अवगत कराना चाहूंगा कि हम ने प्रारंभिक 3 लाख, 12 हजार स्कूलों के भवनों के निर्माण के लिए पैसा स्वीकृत किया है, 18 लाख, 88 हजार अतिरिक्त कक्षा कक्षों के निर्माण के लिए स्वीकृत किया है, 2 लाख, 45 हजार स्कूलों में पेय जल उपलब्ध कराया है, 4 लाख, 8 हजार स्कूलों में शौचालयों का निर्माण करावाया है, जबकि 5.29 लाख स्कूलों में बालिकाओं के लिए शौचालयों का निर्माण करवाया है ।

श्रीमन् स्कूलों में जो अतिरिक्त विद्युतीकरण से संबंधित है, 2 लाख, 28 हजार स्कूलों में यह भी किया गया है । जहां तक बनासकांठा का विषयहै, तोवर्ष 2015 में जो त्रासदी आई थी, उसमें 241 स्कूल्स क्षतिग्रस्त हुए थे, जिनमें 772कक्ष क्षतिग्रस्त हुए थे । आज की तारीख में इन 241स्कूल्स के 772कक्षा कक्ष निर्मित हो चुकेहैं । हां, वर्ष 2017 में फिर जो त्रासदी आई थी, उसमें बनासकांठा जिले में 484 स्कूलों के 1,800 कक्ष ध्वस्त हुए थे, जिनमें से अभी तक 121 स्कूलों के 567कक्षा कक्ष बन चुकेहैं ।

          श्रीमन्, मैं आपकेमाध्यम से माननीय सदस्य से आग्रह करनाचाहूंगा और सूचना भी देनाचाहूंगा कि कुल मिला कर अतिरिक्त कक्षा कक्षों की स्वीकृतियां हैं, उनको राज्य सरकार को समग्र शिक्षा के माध्यम से पर्याप्त धन राशिउल्लेखित की गई है । जहां तक गुजरात राज्य का विषय है, इसमें 2,889 करोड़ रुपये की धन राशि आबंटित की गई है । मैं समझता हूं कि आपकेजितने भी भवन हैं, जोयह चार्ट है, इसके तहत उसमें पूरी तरह से वह क्रियान्वित हो सकेगा ।

श्री भगवंत मान:माननीय स्पीकर साहब, मैं माननीय मंत्री जी से कहना चाहता हूँ कि अरविन्द केजरीवाल की सरकार में दिल्ली में शिक्षा में बहुत बड़ी क्रांति आई है । स्कूलों में स्वीमिंग पूल, एथलेटिक्स ट्रैक, हॉकी ग्राउंड, एस्ट्रो टर्फ आदि सुविधाएँ, जोआम तौर पर प्राइवेट स्कूलों में होती हैं, सरकार की ओर से देने का कोई प्रावधान है ताकिसरकारी स्कूलों में भी ये सुविधाएँ मिल सकें और यहाँसे भी बच्चे स्पोर्ट्स के क्षेत्र में ओलम्पिक और एशियन पोडियम पर जा सकें?

डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक : श्रीमन्, माननीय सांसद जी ने बहुत ही अच्छा सवालकिया है । देश के सभी राज्य प्राथमिकता के आधारपर खेल के मैदान सुनिश्चत करें और अनिवार्य रूप से एक घंटा शारीरिक शिक्षण कार्य करें । पिछले दिनों, माननीय प्रधान मंत्री जी की प्रेरणा से फिट इंडिया अभियान प्रारम्भ हुआ था, जिसमें एक साथ 10 करोड़ से भी अधिक छात्रों ने भाग लिया था । दिल्ली को भी सर्व शिक्षा अभियान के तहत 22 करोड़ 85लाख रुपये स्कूलों के उन्नयन के लिए दिए गए । मैं चाहूँगा कि माननीय सदस्य ने जो कहा, उसको दिल्ली सरकार को जरूर करना चाहिए ।

 

(Q. 284) श्री जुएल ओराम :मैं मंत्री जी को धन्यवाद देता हूँ कि उन्होंने बहुत ही बढ़िया रिप्लाई दिया है ।

माननीय अध्यक्ष: धन्यवाद, आगे बढ़ें?

श्री जुएल ओराम : मेरा फर्स्ट सप्लीमेंटरी क्वेश्चन यह है कि Annexure-II केअनुसार आपने103 प्रोजेक्ट्स सैंक्शन किए हैं । उनके लिए क्यूमुलेटिव धनराशि की व्यवस्था की गई है, जो75,769.9 करोड़ रुपये हैं ।अगर आप क्यूमुलेटिव एक्सपेंडिचर या डिसबर्समेंट देखेंगे, तोवह ऑलमोस्ट 50 परसेंट हो रहा है, जो  34,248.73 करोड़ रुपये हैं ।

        मैं आपसेजानना चाहता हूँ कि इतनीधनराशि अवेलेबल होने के बावजूद जो प्रोजेक्ट्स सैंक्शन किए गए हैं, उसके लिए राज्य सरकार पैसे ले रही है, तोइसमें यूटिलाइजेशन इतना कम क्यों आ रहा है? इसे इम्प्रूव करने के लिए मंत्रालय द्वारा क्या कदम उठाए जा रहे हैं?

श्री अनुराग सिंह ठाकुर:माननीय अध्यक्ष जी, माननीय सांसद महोदय ने एक महत्वपूर्ण प्रश्न किया है कि जब प्रोजेक्ट्स को पूराकरने के लिए धनराशि सैंक्शन की गई, तोयह क्यों हुआ?

        माननीय नरेन्द्र मोदी जी की सरकार में यह तय किया गया था कि जो लंबे समय से लंबित इरिगेशन की स्कीम्स हैं, उनको पूराकिया जाए । इसके तहत 99 प्रोजेक्ट्स को शॉर्ट लिस्ट कियागया था । उनके लिए पैसे का प्रावधान किया गया । शायद पिछले 70 वर्षों में जो योजनाएँ पूरी नहीं की गई थीं, उनको पूराकरने के लिए इस धनराशि का प्रावधान किया गया । यह श्रीनरेन्द्र मोदी जी की सरकार ने किया । हमारी ओर से कोई कमी नहीं है, नाबार्ड की ओर से कोई कमी नहीं है । लेकिन राज्य की सरकारों की जिम्मेवारी बनती है कि उन प्रोजेक्ट्स को पूराकरें, उनको पैसेदिए गए हैं । इसलिए यह उनकेऊपर निर्भर करता है कि वे कितनी जल्दी उन प्रोजेक्ट्स को पूराकरते हैं ।

माननीय अध्यक्ष: आपने तो धन्यवाद दे दिया, अबक्या सेकेण्ड सप्लीमेंटरी पूछेंगे?

श्री जुएल ओराम:सर, मेरा सेकेण्ड सप्लीमेंटरी इसलिए है, जैसे मैंने स्पेसिफिक ओडिशा के बारेमें पूछा था कि आठ प्रोजेक्ट्स के लिए 6,990.43 करोड़ रुपये सैंक्शन किए, जिसमें से 3,111.59 करोड़ रुपये ही ले पाए । वेआठ प्रोजेक्ट्स कौन-कौन से हैं? अगर इनके डिटेल्स अभी आपके पास नहीं हैं, तोआप बाद में दे दीजिएगा । लेकिन कितने-कितने पैसे डिसबर्समेंट हुए हैं, यहबताया जाए ।

          हाई लेवलमॉनिटरिंग के लिए राज्य के चीफ सेक्रेट्री को इसमें होनाचाहिए । इसकाप्रावधान कितने राज्यों ने कियाहै? यदि इसकीडिटेल नहीं है, तोआप मुझे बाद में लिखित में भिजवा दीजिए ।

श्री अनुराग सिंह ठाकुर:माननीय अध्यक्ष जी, यहविषय सिंचाई योजना से संबंधित है । यह देश के किसानों से संबंधित है, जिनको बार-बार मौसम की मार झेलनी पड़ती है । यदि बारिश न हो, तोसूखे की मार पड़ती है, यदि बारिश ज्यादा हो, तोबाढ़ की मार पड़ती है । इन्हीं सब से बचने के लिए इन योजनाओं को पूराकरने का प्रावधान किया गया था । आप देखें कि अगर 6,990 करोड़ रुपएसैंक्शन किए गए और ओडिशा की सरकार सिर्फ 3,111 करोड़ रुपएही यूज कर पाई, तोहम उनसे एक बार कहने का प्रयास करेंगे कि वे उसका जल्द-से-जल्द इस्तेमाल करें, ताकि उसकालाभ किसानों को मिलेऔर सिंचाई योजनाएँ पूरी हो सकें ।

SHRI BHATRUHARI MAHTAB: The RIDF provisioning is basically interconnected to Priority Sector Lending of respective banks. जो बैंक प्रॉयरिटी सेक्टर लैंडिंग सही ढंग से नहीं कर पाया, उसी के हिसाब से एक परसेंटेज आर.आई.डी.एफ. फण्डिंग के द्वारा रिस्पेक्टिव स्टेट्स को दिया जाता है । माननीय मंत्री जी ने जो लिस्ट यहां हाउस में पेश की है,इसमें सबसे ज्यादा ओड़िशा को मिले हैं । पिछले तीन सालों में नंबर ऑफ प्रोजेक्ट्स और सबसे ज्यादा पैसा भी ओड़िशा को मिला है ।

          मैं यह जानना चाहता हूं कि यह जो तथ्य हमारे सामने है, इस तथ्य से हमें पता चलता है कि प्रॉयरिटी सेक्टर लैंडिंग ओड़िशा में ज्यादा नहीं हो रहा है । प्रॉयरिटी सेक्टर लैण्डिंग में जो कमी आ रही है, इसको इम्प्रूव करने के लिए सरकार क्या व्यवस्था कर रही है?

THE MINISTER OF FINANCE AND MINISTER OF CORPORATE AFFAIRS (SHRIMATI NIRMALA SITHARAMAN): I just want to take this opportunity to say that the suggestion and the question which were raised by the hon. Member, Shri Jual Oram, do require a lot of consideration and have merit.

As regards little specification, which the hon. Member, Mahtab ji, said about Long-Term Irrigation Fund, both Centre and States’ share included, I would like to take this opportunity to take the suggestion which has been given here about the number of projects pertaining to Long-Term Irrigation Fund.

The suggestion that a high-level committee should consider reviewing it is a very well-taken point and I would like to place it before you and through you, Sir, to the House that I will certainly look into forming a high-level committee for reviewing it. The funds which have been allotted and the projects which have been benefited from it under the Long-Term Irrigation Fund will be better served if there is a high-level committee to monitor it. I shall come back to the House after forming a committee which can look into these projects.

श्री भर्तृहरि महताब: अध्यक्ष जी, मैंने आर.आई.डी.एफ. के बारे में पूछा था ।

माननीय अध्यक्ष: जब आपका नाम लॉटरी में खुल जाए तब आप डबल सप्लीमेंट्री पूछ लेना, लेकिन अभी तो सिंगल ही है ।

श्री भर्तृहरि महताब: सर, मेरा उत्तर नहीं आया है ।

SHRIMATI NIRMALA  SITHARAMAN: Sir, as regards Long-Term Irrigation Fund, which Shri Jual Oram ji spoke about, I would suggest that that could also be the case for many other things under the NABARD. I will be quite happy to form a high-level committee. We can review it along with the States and then come up with a reply before the House.

श्री विनायक भाउराव राऊत : अध्यक्ष महोदय, धन्यवाद  ।नाबार्ड के माध्यम से ग्रामीण इलाकों में इन्फ्रास्ट्रक्चर के काम करने की जो व्यवस्था है, उसके लिए नाबार्ड का सहयोग अत्यंत महत्वपूर्ण है । जैसा कि सभी जानते हैं कि ग्रामीण इलाकों के रास्ते हों या नदियों के ऊपर ब्रिजेज हों, नाबार्ड से आर्थिक सहायता जितनी ज्यादा मिलती है, उतने ही काम राज्यों के माध्यम से होते हैं ।

          मैं आपकेमाध्यम से मंत्री महोदय जी से पूछना चाहता हूं कि महाराष्ट्र के 325प्रोजेक्ट्स के लिए 2202.62 करोड़ रुपये की धनराशि सैंक्शन की थी, लेकिन दुर्भाग्य से 937.70 करोड़ रुपये की धनराशि का वितरण हुआ है । महाराष्ट्र जैसे राज्य को सारीनिधि जल्दी से जल्दी मिलने की आवश्यकता है । मैं मंत्री महोदय जी से जानना चाहता हूं कि नाबार्ड के अंतर्गत महाराष्ट्र के लिए जो धनराशि बची है, क्या उसे इस वित्तीय वर्ष में देने की व्यवस्था करेंगे?

श्री अनुराग सिंह ठाकुर : सर, निश्चित तौर पर किसी राज्य को भेदभाव के रूप में नहीं देखा जाता है । अगर माननीय सांसद पिछले दो साल का लेखा-जोखा देखेंगे तो उसमें इनको स्पष्ट तौर पर नजर आएगा कि वर्ष 2016-17 में 999 करोड़ रुपये में से लगभग 850 करोड़ रुपये दिए गए । वर्ष 2017-18 में 993 करोड़ रुपये में से आपने 904 करोड़ रुपये इस्तेमाल किए और 2018-19 में 2202 करोड़ रुपये में से 937 करोड़ रुपया आपको डिस्बर्स हुआ है । यह राज्य के ऊपर भी निर्भर करता है कि वह कितनी तेजी से वह पैसा खर्च करता है । मैं आशा करता हूं कि महाराष्ट्र को जो पैसा सैंक्शन हुआ है, आप उसको अच्छी तरह से खर्च करें । नाबार्ड की ओर से कोई कमी नहीं आएगी, क्योंकि राष्ट्र निर्माण में ग्रामीण विकास या ग्रामीण क्षेत्रों के विकास की बहुत आवश्यकता है । नाबार्ड की भूमिका एग्रीकल्चर और रूरल डेवलेपमेंट के क्षेत्र में ही है । उस दिशा में जहां हमने मात्र कुछ हजार करोड़ रुपयों से शुरू किया था,उसमें आज बढ़कर लगभग 3,44,142 करोड़ रुपये सैंक्शन हुए हैं । उसमें से 2,68,220 करोड़ रुपये डिस्बर्स भी कर दिए गए हैं ।

   

(Q. 285) SHRI N. REDDEPPA: Hon. Speaker, Sir, in our country, unemployment rate is increasing day by day. In the month of September, 2019, it was 7.2 per cent whereas in October 2019, it had increased to 8.5 per cent. It is the highest rate of unemployment ever recorded in this country.

          I would like to know from the hon. Minister, through you, Sir, the measures the Government of India has taken so far. What is the outcome of those measures? Is there any permanent action plan to improve the employment rate?

श्री संतोष कुमार गंगवार : महोदय, समय-समय पर विभिन्न आंकड़े आते रहते हैं, तोउसकी जानकारी के हिसाब से जो विवरण आता है, मैं उसकेबारे में कोई टिप्पणी नहीं करना चाहूंगा । हमारी सरकार रोजगार सृजन के लिए जो काम कर रही है, इसमें पिछले पांच वर्षों से लगातार प्रगति नज़र आ रही है । मैं आपके माध्यम से सभी का ध्यान दो-तीन बातों की ओर आकर्षित कराना चाहता हूं कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल विकास योजना के अंतर्गत हम लोगों ने वर्ष 2016-17 से जो ट्रेनिंग दी है, उसमें लोगों को प्लेसमेंट भी मिल रहा है । प्रधानमंत्री इम्प्लायी जेनरेशन प्रोग्राम के अंतर्गत 16,00,000 लोगोंको रोजगार मिला है । दीनदयाल उपाध्याय अंत्योदय योजना के अंतर्गत करीब 4,50,000 लोगोंको रोजगार मिला है । मुद्रा योजना तो एक ऐसी योजना है कि हमने इसमें जितना धन तय किया था, इसमें इक्कीस करोड़ से अधिकखातों में दस लाख करोड़ रुपये का लोन दिया गया है । इसमें 60 प्रतिशत से अधिकमहिलाएं हैं ।यह वास्तव में देश के अंदरअपने आप में एक रिकार्ड है ।

आदरणीय प्रधान मंत्री जी, जिस प्रकार से चिंता कर रहे हैं, वहसबकी समझ में आ रहा है । जब मनरेगा के माध्यम से लोगों को काम मिल रहा है, तोहम लगातार हर वर्षपैसों की संख्या को बढ़ा रहे हैं । वर्ष 2016-17 से अब तक हमने 891 करोड़ रुपये के दिनों के हिसाब से रोजगार दियाहै । यह वास्तव में इस बात का प्रदर्शन है कि हम इस ओर कितने चिंतित हैं और लोगों को रोजगार देने का काम कर रहे हैं ।

माननीय अध्यक्ष : माननीय सदस्य, क्या आप अपना दूसरा सप्लीमेंट्री प्रश्न पूछना चाहते हैं?

श्री एन. रेड्डप्प: महोदय, नहीं ।

माननीय अध्यक्ष : श्री दयाकर पसुनूरी – उपस्थित नहीं ।

…( व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष : श्री शशि थरूर जी, आपको आशा नहीं होगी कि प्रश्न पूछने का मौका मिलेगा ।

…( व्यवधान)

DR. SHASHI THAROOR: Thank you very much, Sir. I do want to ask this question.

माननीय अध्यक्ष : लेकिन यह आपकालास्ट प्रश्न है ।

DR. SHASHI THAROOR: Sir, the issue is this. Already, in our Government, we are in a situation where the Government and the PSUs have taken to the habit of hiring contract labour instead of filling regular vacancies in order to save money. Now, we are seeing a very disturbing trend in this happening with the employment exchanges. I am looking at the figures that the hon. Minister has given on Kerala. We have seen a dramatic drop from as many as 11,300 to 6,115, that is almost half, from one year to the next. What is the reason? The Kerala Government instead of hiring people through the employment exchanges where they have to pay a full salary – in Kerala which would be Rs.18,000 a month for a daily wage worker – it is taking them through the Women’s Collective – Kudumbashree, or the Ex-servicemen’s Association and paying them Rs.6,000 a month.

          My question to you, Sir, is this. I know that employment exchanges are run by the State Governments but do you not have a national obligation to have a policy whereby you encourage or require all States to hire people from the employment exchanges. We are talking about some of the most unfortunate sections of our society, people who are really dependent on daily wage labour. We used to have a few thousand every year, who are getting jobs like this from the employment exchanges, but now, they are not being hired, and I do not know if other States are going to catch on to this policy to save money. But I would urge the Central Government – it is a question of the viability of the entire concept of employment exchange – to adopt a national policy and send a directive to all States on this matter.

          Thank you, Mr. Speaker.

श्री संतोष कुमार गंगवार: सर, मैं माननीय सदस्य के सुझाव को सम्मान देताहॅूं और उनसे सहमत   हॅूं ।इसीलिए हमारे मंत्रालय के द्वारा नैशनल करियर सर्विस प्रोजैक्ट चलाया जा रहा है । इस प्रोजैक्ट के अंतर्गत एम्पलॉयमेंट एक्सचेंज, जोअभी आप राज्य सरकार के बारेमें बता रहे हैं, उसको मॉर्डनाइज करने की योजना है और एनसीएस के माध्यम से हम देश भर में लगभग 200 एम्पलॉयमेंट एक्सचेंजेस को मॉडलकरियर सैंटर्स के रूप में परिवर्तित कर रहे हैं । इन करियर सैंटर्स में रोज़गार पाने के बाद रजिस्टर्ड लोगों को एक उचित परामर्श भी दियाजाएगा और हम इस संदर्भ में मेले भी आयोजित कर रहे हैं । पर मैं इतना बताना चाहूंगा कि जो नौकरी पा जाताहै, वहसूचना नहीं देता है कि हमको नौकरी मिल गई है, इसलिए वह डी-रजिस्टर्ड भी नहींहोता है । परंतु आपने जो सुझाव दियाहै, हमउस पर विचार करेंगे और इसकेसंदर्भ में अवगत भी कराएंगे ।

माननीय अध्यक्ष : प्रश्न संख्या – 286           दादा, एकमिनट मैं एक बात कहना चाहता हॅूं । मेरी कोशिश सत्र में यह है कि सभी माननीय सदस्य – जोमूल प्रश्नकर्ता है वह और सप्लिमेंट्री प्रश्न करने वाला, उनको मिलाकर एक सत्र में कम से कम रोजाना 50 से 60 लोग क्रॉस क्वेश्वन पूछ लें, ताकि सदन में सभी माननीय सदस्यों का क्रमवाइज नंबर आ जाए ।नहीं तो क्या होता है कि वरिष्ठ व्यक्ति का नंबरतो तीन-तीन बार आ जाताहै और जो हमारा नया सदस्य है, उसको प्रश्न पूछने का मौका नहीं मिलता है । मैं माननीय वरिष्ठ सदस्यों से आग्रह करूंगा कि कुछ माननीय नए सदस्यों को भी इस बार सप्लिमेंट्री प्रश्न पूछने का मौकादें ।

 

(Q. 286) श्री राजेश वर्मा:अध्यक्ष जी, मैंने जो प्रश्न पूछेथे, काफी विस्तार से उनकाजवाब आया है । प्रथम प्रश्न के उत्तर में इस्पात विनिर्माण में शामिल सरकारी/निजी कंपनियों का राज्य/जिला-वार ब्यौरा जो हमनेमांगा था, उसका माननीय मंत्री जी ने विस्तार से हमकोजवाब दिया है । मैं उत्तर प्रदेश राज्य से आता हॅूं । उत्तर प्रदेश राज्य में जो लिस्ट हमारे पास उपलब्ध है –उसमें जिला फिरोजाबाद, गौतम बुद्ध नगर,गाजियाबाद, गोरखपुर, हमीरपुर, जौनपुर, झांसी, कानपुर देहात, कानपुर नगर, लखनऊ, मुजफ्फरनगर, रायबरेली  । …(व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष : राजेश जी, यहलिस्ट तो इनके पास भी है, आपप्रश्न पूछिए ।

श्री राजेश वर्मा:सर, इनजिलों में इस्पात के कारखानों का ब्यौरा दियागया है । माननीय अध्यक्ष जी, मैं आपके माध्यम से जानना चाहता हॅूंकि सन् 2009 में, लखीमपुर जनपद की एक मितौली जगह है, जहां पर तत्कालीन इस्पात मंत्री श्री जितिन प्रसाद जी ने चुनाव के दो महीने पहले एक इस्पात कारखाने का शिलान्यास किया था । उसको लगभग दस वर्षहो गए हैं । लेकिन अभी तक वहांपर कुछ ऐसी जानकारी या कोई गतिविधि नहीं है । मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से जानना चाहता हॅूं कि मितौली में कोई इस्पात कारखाना लगाने के लिए शिलान्यास हुआ था या केवल वह राजनीतिक लाभ के लिए ही शिलान्यास हुआ था । यह मैं जानना चाहता हॅूं ।

श्री धर्मेन्द्रप्रधान: अध्यक्ष जी, इसकी जानकारी हम संग्रह कर के आपके माध्यम से माननीय सदस्य को बताएंगे ।

श्री राजेश वर्मा : माननीय अध्यक्ष जी, मैं दूसरा प्रश्न यह पूछना चाहता हॅूं कि जो इस्पात कारखाने हैं, जोपीएसयूज़ हैं, जोअच्छे लाभ में हैं, देश की अच्छी सेवा कर रहे हैं, उनका प्रबंधन बढ़िया है, उनका वित्तीय प्रबंधन अच्छा है, उनकी मार्केटिंग अच्छी है, वेदेश की सेवा कर रहे हैं, लेकिन जो पीएसयूज़ घाटे में हैं, क्या ऐसे पीएसयूज़ के माध्यम से जो देश के हित में कार्य कर रहे हैं, जोलाभ अर्जित कर रहे हैं, देश की सेवाकर रहे हैं, ऐसा कुछ कुछ काम करेंगे कि उनकेप्रबंधन की व्यवस्था, उनकी वित्तीय व्यवस्था करने के लिए लाभ वाले पीएसयूज़ उनको सहयोग करें । ऐसी मैं आपसे जानकारी चाहता हॅूं ।

इस्पात मंत्रालय में राज्य मंत्री (श्री फग्गन सिंह कुलस्ते): अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्य ने बहुतअच्छा सुझाव दिया है । वैसे जितने हमारे उपक्रम हैं, मुझे यह कहते हुए प्रसन्नता है कि आपने पिछले पांच वर्षों का जो आंकड़ा पूछा है, तोसेल के अगर आप आंकड़े देखेंगे तो जो कुल कारोबारी हैं, वेअलग-अलग हैं, वर्षों के आधारपर इसमें दिया गया है और जो कुल खर्च हुआ है, जोलाभ-हानि अर्जित की है, उसमें लाभ-हानि अर्जित करने वाली हमारी जो पीएसयूज़ हैं, लगभग उसमें कुछ नुकसान हुआ है, पर इस समय हम फायदे में हैं । लगभग 2179, यहजो हमारा सन् 2018-19 काहै, इसमें अभी हम प्रॉफिट में हैं । यह बहुतअच्छा सुझाव है, इसके बारेमें जानकारी हम माननीय सदस्य को उपलब्ध करा देंगे ।

SHRI T. R. BAALU: Sir, I have to thank you for having allowed me to ask this question. It is not a difficult matter for the Minister. The Minister is very kind to do something to see that the Salem Steel Plant continues. …(Interruptions)

माननीय अध्यक्ष: माननीय मंत्री जी, बालू जी ने आपको एप्रिशिएट कर दिया ।

SHRI T. R. BAALU: I have to appreciate whatever he does. At the same time, the Salem Steel Plant is not just a plant. It is an embodiment of Tamil pride and culture; it is emotionally integrated with Tamil pride. That is why I request the Minister, through you, that he could kindly consider to have a discussion with all of us, all Tamil Members of Parliament so that he can understand the matter behind it. In fact, he is playing – I am not threatening – with a flame. Hereafter, I cannot just go and beg him for this. Years together, I am fighting for this.

          This Plant has been created by Dr. Kalaignar Karunanidhi, the then Chief Minister. Five thousand farmers have extended their land. It will be totally against the interest of the labourers as well as the local farmers who have extended their land for this purpose. Kindly see that somehow their interests are protected. …(Interruptions) He cannot run the industry. If it is a private enterprise, he cannot run the industry. I want the industry to develop but at the same time the Minister has to understand the background before taking any decision. He has not taken a decision. He has to consult us and the employees. He has to find out who has done the mistake. It is only the management that has done the mistake. He must understand that. He can just talk to the labourers as well as the farmers who have extended their land for this purpose.

SHRI DHARMENDRA PRADHAN: Hon. Speaker Sir, hon. Shri Baalu has raised this question and some other important Member of Tamil Nadu had raised this question in the last Session also. I can politely say, through you, that last time I have assured the House that if any progressive suggestion would come from the Tamil Nadu friends, the Government is open. They have given some suggestions; immediately I have considered and accepted their suggestions. In that way, the Plant has got some autonomy and it is running; but there is a greater question.

          I am open to suggestions and my dear friend the hon. Member from Tamil Nadu Shrimati Kanimozhi always comes to me with some innovative suggestions. I am always open to whoever comes from Tamil Nadu. I am open to discussion. What are the merits and demerits of this is an on-going discussion. I can assure him, I am open and the Government is open. The point is that there are a lot of examples in Tamil Nadu of successful entrepreneurs who belong to the private sector and who belong to the Government sector. The question before me at this juncture is how would the plant run profitably and professionally. That is the main challenge. I am open to any discussion with any friend from Tamil Nadu.

माननीय अध्यक्ष: प्रश्न संख्या 287.

श्रीमती अन्नपूर्णा देवी - उपस्थित नहीं ।

श्री पशुपति नाथ सिंह - उपस्थित नहीं ।

माननीय मंत्री जी ।

(Q. 287)   डॉ. निशिकांत दुबे: अध्यक्ष महोदय, धन्यवाद ।

महोदय, यहजो क्वैश्चन है और इसका जो उत्तर है, दोनों में विरोधाभास है । क्वैश्चन बड़ा स्पष्ट है । जो सी.एस.आर. फण्ड बना, उससे सबसेज्यादा प्रभावित राज्य झारखण्ड है । हमारे यहां इस देश के 40 से45 प्रतिशत माइन्स और मिनरल्स हैं, लेकिन वहां के लोकलएरिया का जो डेवलपमेंट है और जो प्रोजेक्ट्स वहां चलते हैं, उनके पैसेवहां के लोकल एरियाज में नहीं जाते हैं और इस पैसे को, जोमंत्री हैं, वेअपने यहां लेकर जाते हैं या फिर यह मुम्बई, दिल्ली जैसे बड़े शहरों में खर्च होते हैं ।

          स्पीकर सर, इसप्रश्न में मूल प्रश्न है कि कौन-से प्रोजेक्ट्स चल रहे हैं, कहां-कहां चल रहे हैं? हमारे झारखण्ड राज्य में जो प्रोजेक्ट्स नहीं चल रहे हैं और आप इसका हिसाब-किताब नहीं लेते हैं तो क्याआप इसका हिसाब-किताब लेने की कोई व्यवस्था करेंगे? हमारे जैसे जो प्रभावित राज्य हैं और ओडिशा या छत्तीसगढ़ जैसे राज्य हैं, उनके लिए सी.एस.आर. फण्ड्स की कैसेव्यवस्था होगी? वहां वे दो प्रतिशत सी.एस.आर. फण्ड्स कैसे खर्च होंगे, अगर इसकेबारे में आप बताएंगे तो कृपाहोगी ।

श्री अनुराग सिंह ठाकुर:माननीय अध्यक्ष जी, मैं दो बातों को बहुतस्पष्ट करनाचाहता हूं ।  यह बी.ओ.टी. ड्रिवन पॉलिसी है और हर कंपनी को प्रत्येक वर्ष अपने पिछले तीन साल के प्रॉफिट का दो परसेंट खर्च करना होता है । वह जिस कार्यक्षेत्र में है, वहां पर खर्च करे, यहउनकी प्राथमिकता रहनी चाहिए । उसके अलावा, अगर बाकीदेश भर में कहीं खर्च करना हो तो उनको वह ऑप्शन भी दी गई  है । शेड्यूल-7 केअंतर्गत एरियाज़ बताए गए हैं कि किन-किन प्रोजेक्ट्स पर पैसाखर्च किया जा सकताहै । मैं माननीय सांसद महोदय से कहनाचाहता हूं कि जहांदो प्रतिशत पैसा कंपनी खर्च करेगी ही करेगी, लेकिन हमारी सरकार ने माइंस एंड मिनरल वाले क्षेत्र में भी यह प्रावधान किया है कि डिस्ट्रिक्ट मिनरल फंड बनाने के लिए जो कदम उठाए गए हैं, अगर आप उन आंकड़ों को देखेंगे तो यह अपने आप में दिखेगा कि किस तरह से उस क्षेत्र में भी एक अच्छा काम हुआ है । अगर मैं माइंस एंड मिनरल फंड के कुल आंकड़े दूं, इसे हमारी सरकार ने वर्ष 2015 में बनाया । यह दी माइंस एंड मिनरल डेवलपमेंट रेगुलेशन एक्ट के अंतर्गत है । इसमें 10 परसेंट रॉयल्टी वर्ष 2015 केबाद जो माइंस दी गई, उनको देनापड़ेगा और जो वर्ष2015 सेपहले ग्रांट की गई, उनको 30परसेंट देना पड़ेगा । कुल मिलाकर 33,272 करोड़ रुपये डिस्ट्रिक्ट मिनरल फंड में इकट्ठा हुआ है । यह उन्हीं क्षेत्रों के खर्चके लिए इकट्ठा किया गया है । यह दो परसेंट के अलावा पैसाहै ।

श्री गौरव गोगोई:अध्यक्ष महोदय, विभिन्न ऐतिहासिक कारणों के लिए उत्तर पूर्वांचल में जिस प्रकार की इंडस्ट्रीज या कंपनीज़ होनीचाहिए, वहां पर नहीं हैं । शायद इसीलिए भारत सरकार ने भी विभिन्न समय पर उत्तर पूर्वांचल के लिए अलग फंड रखा है और अलग-अलग मिनिस्ट्री भी रखी है । माननीय मंत्री जी से मेरा निवेदन है कि जिस प्रकार से भारतसरकार उत्तर पूर्वांचल के लिए एक अलग फंड तथा स्कीम लेती है, क्या वह एक गाइडलाइन कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सबिलिटी के तहत कॉरपोरेट्स को देंगे? उनको अपनेसी.एस.आर. फंड से कुछ न कुछ नॉर्थ-ईस्ट में जरूर करना चाहिए ।

श्री अनुराग सिंह ठाकुर:माननीय अध्यक्ष जी, यहकेवल नॉर्थ-ईस्ट के लिए, बल्कि बाकी पहाड़ी राज्यों की समस्या है और ऐसे अन्य राज्यों की भी समस्या है, जहां पर इंडस्ट्री नहीं है और उनको सी.एस.आर. फंड कम मिल पाता है और वहां कम खर्चहोता है । जो एस्प्रिशन्ल डिस्ट्रिक्ट्रस हैं, वहां पर भी ज्यादा पैसा खर्च हो, ऐसी भी प्राथमिकता दी जातीहै । इसके अलावा, अभी कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सबिलिटी फंड को लेकरहमारे कॉरपोरेट अफेयर्स मंत्रालय ने अवार्ड्स किए थे  । हमने उन संस्थाओं को भी सम्मानित किया है, जिन्होंने नॉर्थ-ईस्ट के क्षेत्र में जाकर पैसा खर्च किया है, चाहे उनकेप्रोजेक्ट्स वहां पर थे या नहीं थे । उनको भी विशेष तौर पर सम्मानित किया गया है । आपको जानकर प्रसन्नता होगी कि एक पब्लिक सेक्टर एंटरप्राइजेज ने बहुतबड़ी तादाद में पैसा खर्च किया है, वहीं पर जो प्राइवेट कंपनीज हैं, उन्होंने भी आगे बढ़कर नॉर्थ-ईस्ट के कुछ राज्यों में अच्छा काम किया है । असम में भी और बाकी नॉर्थ-ईस्ट के राज्यों में भी पैसाखर्च हो, भविष्य में ऐसा भी प्रावधान हो । ऐसा सरकार की तरफ से तय नहींकिया जा सकता, क्योंकि यह बी.ओ.टी. ड्रिवन पॉलिसी है और कंपनीज को पैसाखर्च करना है । हमारा प्रयास रहेगा कि हम ऐसे लोगों को सम्मानित करें, जिन्होंने उत्तर पूर्वी राज्यों में भी जाकरपैसा खर्च किया और एग्जाम्पल सेट किया । भविष्य में और कंपनीज में वहां पर जाएंगी । ऐसा मेरा मानना है ।

       

(Q. 288) श्री भागीरथ चौधरी:अध्यक्ष महोदय, प्रधान मंत्री नरेन्द्र भाई मोदी जी ने एक बहुत ही ऐतिहासिक और विशेष तौर से गरीबों तथा वंचितों के लिए प्रधान मंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना एवं प्रधान मंत्री सुरक्षा बीमा योजना लागू की थी ।

        महोदय, माननीय मंत्री महोदय तथा सरकार से इतनाही निवेदन है कि प्रधान मंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना में 18 से 50 वर्ष की आयु है और प्रधान मंत्री सुरक्षा बीमा योजना में 19 से 70   है । मैं आपके माध्यम से मंत्री महोदय जी से पूछना चाहूंगा कि क्यावे प्रधान मंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना में भी 18 से 70 साल आयु करने का विचार रखे हैं? विशेष तौर से 50साल के बाद ही ज्यादा आवश्यकता पड़ती है । ऐसा मेरा निवेदन है ।

श्री अनुराग सिंह ठाकुर : माननीय अध्यक्ष जी, भारत भर में एक ऐसी योजना की शुरुआत हुई, हमकह सकते हैं कि जिसमें गरीबसे गरीब व्यक्ति को भी इंश्योरेंस के दायरे में लाया गया, यूनिवर्सल सोशल सिक्योरिटी सिस्टम में लाया गया । यह सोच किसी की थी, माननीय प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी जी की थी । यही कारण है कि मात्र 12 रुपये में 2 लाख रुपये का बीमाप्रधान मंत्री सुरक्षा बीमा योजना के अंतर्गत और 330 रुपये में प्रधान मंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना के अंतर्गत किया गया । अगर आप कुल आंकड़ा देखें, तो प्रधान मंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना में 5करोड़ 91 लाख लोगों को यह सुविधा मिली है, 1,35,212 लोगों के क्लेम्स मिले हैं और 2,704 करोड़ रुपये इनको दिए गए हैं । इनमें 1करोड़ 55 लाख महिलाएं हैं, जिनको प्रधान मंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना के अंतर्गत शामिल किया गया । अगर सुरक्षा बीमा योजना की बात करें, तो 15 करोड़ 47 लाख लोगों का बीमाहुआ, 32,176 लोगों को क्लेम्स मिले और 643 करोड़ रुपये का आबंटन या डिसबर्समेंट किया गया । इसमें भी लगभग 5 करोड़ 11 लाख महिलाएं थीं ।

जहां तक इनके प्रश्न की बात आती है कि क्या उसको 50 साल की उम्रसे ज्यादा किया जाएगा, तोमैं बताना चाहूंगा कि एक कमेटी का गठन माननीय वित्त मंत्री जी ने किया है, जोइसके अलग-अलग पहलुओं पर विचार कर रही है । जब कमेटी उस पर विचार करेगी, जबउसका निर्णय आएगा, तोउससे आपको अवगत करा दिया जाएगा ।

श्री भागीरथ चौधरी:अध्यक्ष महोदय, मेरा दूसरा प्रश्न है कि सरकार उक्त दोनों योजनाओं में क्या मेडिक्लेम बीमा को शामिल करनेका विचार रखती है? 31 मईको जो प्रीमियम कटौती होती है, अगर उसकेलिए 15 दिन पहलेसूचना हो जाए, तो उनको जानकारी हो जाएगी । मेराआपके माध्यम से मंत्री महोदय से आग्रह है ।

श्री अनुराग सिंह ठाकुर : माननीय अध्यक्ष जी, जबएक बार आप इसकेनेट में आते हैं, तोआप अपने बैंक या पोस्ट आफिसको कह देते हैं कि आपकोस्कीम से जुड़े रहना है, तोअगले वर्ष वह अपनेआप ही ऑटो डेबिट कर देतीहै । अगर कोई नहीं भी करवापाता है या वापसउसको उस स्कीम में जुड़ना है, तोउतना पैसा हर क्वार्टर के हिसाब से रखा गया है । दूसरे क्वार्टर में जुड़ेगा, तोकितना देना पड़ेगा, तीसरे क्वार्टर में जुड़ेगा तो कितना देनापड़ेगा और आखिरी क्वार्टर में आएगा, तोउसके लिए पैसा सुनिश्चित करके रखा है कि कितना पैसा उसको देना है । यह साराकुछ योजना में लिखा हुआ है । बैंक अपने आप ही इसमें ऑटो डेबिट कर देतेहैं, जबआप इस योजना से जुड़ेहुए हैं ।

   

(Q. 289) श्री चन्देश्वर प्रसाद: अध्यक्ष महोदय, 2014-15 में कच्चे इस्पात का उत्पादन 89 मिलियन टन था, जो वर्ष 2018-19 में बढ़कर 111 मिलियन टन हो गया । यह बहुत ही खुशी की बात है । मैं एक बात जानना चाहता हूं कि हमारे देश की स्टील उत्पादन करने वाली जो कंपनियां हैं, क्या वे आयातित स्टील वाली क्वालिटी और किस्म का उत्पादन करेंगी,जिससे कि आयात करना बंद किया जा सके?

श्री फग्गन सिंह कुलस्ते: अध्यक्ष जी, हमारे पास जो फिगर्स हैं और जो माननीय सदस्य ने बताया है, तोनिश्चित तौर से सरकार भी विचार कर रही है और धीरे-धीरे यह कम भी हो रहा है । जिन उपक्रमों के अंदरइसकी आवश्यकता है, उसआवश्यकता के आधारपर उसकी पूर्ति करने के लिए यह बहुत जरूरी हो गया है ।

माननीय अध्यक्ष : क्वैश्चन नंबर 290    ।   

श्री जगदम्बिका पाल जी       :       उपस्थित नहीं ।   

श्री सुधाकर तुकाराम श्रंगरे    :              उपस्थित नहीं ।   

    
  

    

(Q. 290)   

मानव संसाधन विकास मंत्री (श्री रमेशपोखरियालनिशंक):   

           (क) से (ग)   एक विवरणसभापटलपर रख दियागया है ।   

    
  

    

 (Q. 291)   

डॉ. संजय जायसवाल : अध्यक्ष महोदय, बहुत-बहुत धन्यवाद । पटना के फतुहा में बाढ़ आई थी और पूरा इंडस्ट्रियल एरियावर्ष 2016 में डूब गया था । जो उस इंडस्ट्रियल एरिया में थे, वेसब 20-25 वर्षों से रेग्युलर बैंक्स का पेमेंट कर रहे थे । बाढ़ आने की वजह से उनकी यह हालतहुई । मुझे यह समझ में नहीं  आता  कि  बैंक वाले  इंश्योरेंस  कंपनी  क्यों  खोलते  हैं? जैसे इंडियन बैंकहै, यूनिवर्सन सोम्पो जनरल इंश्योरेंस कंपनी है, उनलोगों को एक साजिश के तहत न इंश्योरेंस का पैसादिलाया गया और न ही बैंक ने उन लोगों को कोई रिलीफ दिया ।

मेरा माननीय मंत्री जी से यह प्रश्न होगा कि क्याजहां पर बाढ़ की प्रॉपर रिपोर्टिंग है कि उस स्थान पर बाढ़ आई थी, उनजगहों पर जो इंश्योरेंस कंपनियां पैसे नहीं दे रही हैं, उनपर कोई कार्रवाई होगी?  उन बैंकों से यह कहा जाएगा कि नहीं जो व्यवसायी बाढ़ से पहले तक रेग्यूलर पेमेंट कर रहे थे, उनको कुछ रिलीफ देने का प्रावधान माननीय मंत्री जी करेंगी या नहीं?आपके माध्यम से मेरा यही प्रश्न है । 

श्री अनुराग सिंह ठाकुर:माननीय अध्यक्ष जी, जहां तक नेचुरल डिजास्टर मैनेजमेंट पॉलिसी है, जहां भी नेचुरल डिजास्टर होता है, वहां के लिए स्टैंडर्ड ऑफ ऑपरेटिंग प्रोसिजर जनरल एंश्योरेंस कंपनीज ने बना रखे हैं । अगर मैं केरल फ्लड की बात करूं तो उसमें क्लेम्स का डिस्पोजल 98.2 परसेंट है,अगर आंध्र प्रदेश के तितली साइक्लोन  की बात करें तो 97.64 प्रतिशत है । आपने बिहार की बात की है, अगर वहां कोई कमी रही होगी तो उस पर भी ध्यान दिया जाएगा ताकि एंश्योरेंस कंपनी से कहा जाए कि डिसर्बसमेंट जल्दी हो । जहां तक बैंकों में एनपीए बाढ़ का कारण है । बैंक रूल्स के अंतर्गत काम करते हैं लेकिन जहां आपदा घोषित की जाती है वहां भी ऐसा कोई न कोई प्रावधान हो,ऐसा हम प्रयास करेंगे  ।