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Lok Sabha Debates

Need To Include Scheduled Castes, Scheduled Tribes And Backward Classes In The ... on 12 June, 1998

>Title: Need to include Scheduled Castes, Scheduled Tribes and Backward Classes in the Ninth Schedule of the Constitution to give protection and resolve the problems being faced by these communities. श्री लालू प्रसाद (मधेपुरा) : गुजरात के बारे में कल चर्चा हुई थी, होम मनिस्टर वहां गये हैं, उनको हाउस में स्टेटमैंट देना चाहिए था लेकिन वह हाउस से जा रहे हैं। वह स्पष्ट करें कि उन्होंने कया किया है, कया राहत दी है? ... (व्यवधान) संसदीय कार्य मंत्री तथा पर्यटन मंत्री (श्री मदन लाल खुराना): अध्यक्ष महोदय, लालू प्रसाद जी आडवाणी जी के बारे में किस तरह से बात कर रहे हैं ... (व्यवधान) आपको समर्थन करना चाहिए ... (व्यवधान) मेरी स्पीकर साहब से बात हो गई है। आपने एक बजे का आदेश दिया है, वे एक बजे गुजरात के बारे में अपना स्टेटमैंट देंगे। ... (व्यवधान) श्री अशोक प्रधान (खुर्जा) : आप इन्हें बतायें कि यह बिहार की विधान सभा नहीं है। ... (व्यवधान) यह कैसे बोल रहे हैं।

MR. SPEAKER: Order please.

... (Interruptions) श्री मदन लाल खुराना : किस भाषा में यह बोल रहे हैं ... (व्यवधान)

... (Interruptions)

SHRI HARIN PATHAK (AHMEDABAD): Sir, you have to expunge it from the records. ... (Interruptions)

MR. SPEAKER: I will expunge it. Please take your seat.

... (Interruptions) वित्त मंत्री (श्री यशवंत सिन्हा): मैं माननीय सदस्यों से आग्रह करूंगा कि अगर श्री लालू प्रसाद बिहार से आते हैं तो यशवंत सिंहा और अनेक लोग भी वहां से आते हैं। इसलिए आप बिहार को बदनाम मत कीजिए, एक व्यकित से पूरे राज्य को नहीं देखा जा सकता। ... (व्यवधान)

MR. SPEAKER: No, I will expunge it from the records.

... (Interruptions)

MR.SPEAKER: Lalooji, please take your seat.

... (Interruptions)

MR. SPEAKER: Shri Virendra Singhji, please take your seat.

... (Interruptions)

MR. SPEAKER: The House will take up `Zero Hour'.

... (Interruptions)

MR. SPEAKER: Hon. Members, I would request you to please understand that I have received 58 notices for `Zero Hour'. I want to accommodate all the Members. Please take your seats. श्री वीरेन्द्र सिंह (मिर्जापुर): सारे सदन के सदस्यों का विशेषाधिकार है, राज्य सरकार ने ... (व्यवधान) श्री नरेन्द्र बुडानिया (चुरू) : सर, लालू जी ने जो कहा है उसका जवाब देना चाहिए। श्री शैलेन्द्र कुमार (चैल) : अध्यक्ष महोदय, मैं एक बहुत महत्वपूर्ण मामला उठाना चाहता हूं। ... (व्यवधान)

... (Interruptions)

MR. SPEAKER: Nothing, other than what Shri Shailendra Singh is saying, would go on record.

(Interruptions)* श्री शैलेन्द्र कुमार : अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से शून्यकाल में एक महत्वपूर्ण प्रश्न उठाना चाहूंगा। यह बहुत ही गंभीर मामला है। उत्तर प्रदेश में २१ जातियों, जिनमें पिछड़े वर्ग आते हैं तथा २७ उपजातियां आती हैं जिनमें कुर्मी, कुम्हार, प्रजापति, पटेल, काक्षी, कुशवाहा, शाकय, केवट आदि बहुत सी जातियां है, इनको पिछड़े वर्ग से हटाकर सामान्य में कर दिया है। उत्तर प्रदेश सरकार को अभी तक इस बारे में कुछ पता नहीं है। शासन के जितने भी अधिकारी हैं उनमें खलबली मची हुई है। पूरे सदन की यह जिज्ञासा है, सभी माननीय सदस्यों से जुड़ा हुआ यह मामला है। १९९५ में उत्तर प्रदेश शासन ने पिछड़े वगर्ों को पिछड़ों में समायोजित किया था। इस तरह से सरकार उनको पिछड़े वगर्ों को मिलने वाली सुविधाओं से वंचित करना चाहती है। ... (व्यवधान)

MR. SPEAKER: There are 58 notices for the `Zero Hour'. Please take only two minutes.

... (Interruptions)

_____________________________________________________________________________ * Not recorded.

श्री शैलेन्द्र कुमार : उन्होंने अभी तक कोर्ट में अपील नहीं की है। तमाम जातियों में इससे बड़ा आक़ोश है। हिंदुस्तान के पूरे पिछड़े वर्ग का यह मामला है, इस पर चर्चा कराई जाए। यह बहुत ही गंभीर मामला है। मैं आपसे निवेदन करना चाहूं कि इसे गंभीरता से लेते हुए इस पर चर्चा कराई जाए। उत्तर प्रदेश सरकार पिछड़ा वर्ग विरोधी है। उन्होंने अभी तक कोर्ट में काउंटर फाइल नहीं किया है। ... (व्यवधान) MR. SPEAKER: Please complete now. What is this? Shri Shailendra Singh, please conclude now.

... (Interruptions)

MR. SPEAKER: Nothing will go on record.

(Interruptions)* MR. SPEAKER: Now, I have allowed Shri P. Shiv Shankar.

... (Interruptions)

MR. SPEAKER: I will allow you all. Please take your seats.

Shri Singh, please sit down now. I have already allowed you.

... (Interruptions)

MR. SPEAKER: Nothing will go on record.

(Interruptions) * SHRI P. SHIV SHANKER (TENALI): Mr. Speaker Sir, I rise with anguish to make a mention... (Interruptions) MR. SPEAKER: No cross talks, please.

... (Interruptions)

MR. SPEAKER: Order please.

... (Interruptions)

MR. SPEAKER: Shri Shailendra Kumar, Please take your seat.

... (Interruptions)

MR. SPEAKER: That is why, I allowed you. Please take your seat.

_____________________________________________________________________________ *Not recorded. श्री मुलायम सिंह यादव (सम्भल): अध्यक्ष महोदय, यह मामला शैलेन्द्र कुमार का नहीं है। यह पूरे देश का मामला है। ... (व्यवधान) डा. शफीकुर्रहमान बर्क (मुरादाबाद) : अध्यक्ष महोदय, मैं चाहूंगा कि इस विषय पर एक घंटे की बहस कराई जाए। उ.प्र. में पिछड़ी जातियों के साथ नाइंसाफी हो रही है। ... (व्यवधान)

"> श्री मुलायम सिंह यादव: अध्यक्ष महोदय, उत्तर प्रदेश हाइकोर्ट का मामला सही है। माननीय सदस्य ने कह दिया है कि हाइकोर्ट का फैसला है, लेकिन इसमें सच्चाई यह है कि दो साल से लगातार कोर्ट का मामला चल रहा था और कई ऐतराज हो रहे थे। उसके बाद भी सरकार ने किसी तरह की कोई पैरवी नहीं की। पैरवी न होने के कारण इतना बड़ा जजमेंट हो गया और इसमें सारे के सारे जितने भी बैकवर्ड और शेडयूल्ड कास्टस के लोग हैं, उनमें कुछ सफाई कर्मचारी भी हैं, वे लोग वंचित किए गए हैं और धीरे-धीरे उनको वंचित किए जाने का प्रयास किया जा रहा है। पूरे मंडल आयोग की जितनी भी सिफारिशें हैं उनको समाप्त किया जा रहा है और यह सच्चाई है कि जो दो साल का कार्यकाल बढ़ाया गया है और जो थोड़ी मंडल आयोग की सिफारिशें लागू हुईं, उनके ऊपर हल्ला कर के उनको खत्म करने का प्रयास किया है । उत्तर प्रदेश की सरकार ने लापरवाही की है और जानबूझकर पैरवी नहीं की है।
... (व्यवधान) "> श्री मदन लाल खुराना: अध्यक्ष महोदय, माननीय मुलायम सिंह जी उ.प्र. के भू.पू.मुख्य मंत्री हैं। वे जानते हैं, जब वे मुख्य मंत्री थे और जब हम यू.पी. के बारे में कुछ कहते थे, तो आप ही लोग हमें यहां बोलने से रोकते थे। आप भारत के डिफेंस मनिस्टर रहे हैं। मेरा कहना है कि आपने आग्रह किया कि हाइकोर्ट के इस फैसले के बारे में सरकार कार्रवाई करें, लेकिन यह कहना कि यू.पी. सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की इसलिए हार गए और ऐसा फैसला आ गया, ठीक नहीं है। यह ज्यादती है। यह एक तरफा है और इस तरह की बात सदन में नहीं होनी चाहिए। आप अपनी बात करें, आपकी बात को उत्तर प्रदेश सरकार तक पहुंचा दिया जाएगा, लेकिन यह कहना कि उत्तर प्रदेश की सरकार ने पैरवी नहीं की, यह ठीक नहीं है। मैं इसका प्रोटैस्ट करता हूं। ... (व्यवधान) श्री मुलायम सिंह यादव : अध्यक्ष महोदय, मेरा व्यवस्था का सवाल है। माननीय संसदीय कार्य मंत्री ने मेरा नाम लिया है और मेरे मुख्य मंत्रित्व काल के बारे में कहा है। मैं बताना चाहता हूं कि मेरे मुख्य मंत्रित्व काल में ही मंडल कमीशन की सिफारिशें उत्तर प्रदेश में लागू हुई थीं। संसदीय कार्य मंत्री होकर उन्हें ऐसे आरोप नहीं लगाने चाहिए। मेरे मुख्य मंत्रित्व काल में ही मंडल आयोग की सिफारिशें लागू की गई थीं और अनेक जातियों को छांट कर मंडल कमीशन में शामिल किया गया और उसके बाद अगर किसी ने ऐतराज किया है, तो उसका निराकरण किया गया है। मैं आपके सामने कहना चाहता हूं यह आरोप नहीं है, उत्तर प्रदेश की सरकार ने जानबूझ कर इस केस की पैरवी नहीं की।
... (व्यवधान)
MR. SPEAKER: You have already raised your point. Please take your seat.
... (Interruptions)
MR. SPEAKER: I have allowed Shri P. Shiv Shanker, I will allow you later. Please take your seat.
... (Interruptions)
MR. SPEAKER: It is the decision of the court. Please understand.
... (Interruptions)
MR. SPEAKER: Shri Shailendra Kumar, please take your seat.
... (Interruptions)
MR. SPEAKER: Please understand, it is a matter pertaining to court.
... (Interruptions)
MR. SPEAKER: Nothing will go on record.
(Interruptions)* MR. SPEAKER: It is the court decision.
... (Interruptions)
12.17 hrs (At this stage, Shri Shailendra Kumar and some other hon. Members came and stood on the floor near the Table.) MR. SPEAKER: Shri Shailendra Kumar, this is not good. I will take action against you. Every time you are disturbing the House. I will take action against you.
... (Interruptions)
__________________________________________________________________________ *Not recorded.
MR. SPEAKER: What is this? It is the court matter. Please take your seat.
Shri Shailendra Kumar, I will take action against you. Every time you are disturbing the House.
... (Interruptions)
MR. SPEAKER: Hon. Members, please go back to your seats.
... (Interruptions)
MR. SPEAKER: Nothing will go on record.
(Interruptions)* MR. SPEAKER: It is the court matter. How can you decide here? Please understand the procedure.
... (Interruptions)
MR. SPEAKER: I request Shri Mulayam Singh Yadav to ask his Members to go back to their seats.
... (Interruptions)
MR. SPEAKER: Shri Shailendra Kumar, please go to your seat. This is not good. There are other hon. Members who would like to raise their matters. Please go to your seat.
... (Interruptions)
MR. SPEAKER: Nothing will go on record.
(Interruptions) * MR. SPEAKER: The House stands adjourned to meet at 2.00 p.m. 12.20 hrs The Lok Sabha adjourned till Fourteen of the Clock.
_______ _____________________________________________________________________________ *Not recorded.
14.00 hrs The Lok Sabha re-assembled at Fourteen of the Clock.
(Mr. Speaker (in the Chair) MR. SPEAKER: Shri Yashwant Sinha.
... (Interruptions)
MR. SPEAKER: Shri Lalu Prasad, please understand.
... (Interruptions) संसदीय कार्य मंत्री तथा पर्यटन मंत्री (श्री मदन लाल खुराना): अध्यक्ष जी, मैं अपनी बात बताना चाहता हूं।
... (व्यवधान) यहां से जाने के बाद मेंने यू.पी. के चीफ मनिस्टर से बात की। उन्होंने ऐडवोकेट जनरल को फोन किया। ऐडवोकेट जनरल ने मुझे फोन किया।
... (व्यवधान) कल्याण सिंह जी ने कहा है, वे मेरठ में हैं कि जो जातियां आरक्षण की सूची में आती हैं, हमारी सरकार का मत है कि उनमें कोई भी बदल नहीं होनी चहिए। हाई कोर्ट का फैसला है, जब मैंने उनको बताया तो उन्होंने कहा कि हाई कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ हम सुप्रीम कोर्ट में स्पैशल लीव पिटीशन डालेंगे और अच्छे से अच्छा ऐडवोकेट एंगेज कर इस केस की पैरवी करेंगे।
... (व्यवधान) यह आधी बात है, पूरी बात सुन लीजिए।
... (व्यवधान) मुझे ऐडवोकेट जनरल रामेश्वर गोयल जी का भी फोन आया। उन्होंने कहा कि यह फाइनल आर्डर नहीं है, यह शो-कॉज़ नोटिस है, इंटरिम आर्डर है। इनका कहना है कि पैरवी नहीं की लेकिन उनका कहना है कि हमारे वकील श्री वर्मा, जो स्टैंडिंग काउंसिल हैं, पेश हुए। उसके बाद कोर्ट ये इंटरिम आर्डर दिए हैं। जब फाइनल फैसला होगा तो ऐडवोकेट जनरल श्री रामेश्वर खुद पेश होंगे। यह मुझे ऐडवोकेट जनरल ने बताया।
... (व्यवधान) इसलिए ऐसा कहना कि कोई पेश नहीं हुआ, ठीक नहीं है।
... (व्यवधान) श्री मुलायम सिंह यादव (सम्भल): अध्यक्ष महोदय, इसमें केवल तीन बातें हैं- एक, संसदीय कार्य मंत्री पहले हम पर आरोप लगाकर कह गए हैं कि आप मुख्य मंत्री थे। मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूं, जब हम मुख्य मंत्री थे तो हमारी सरकार ने ही मंडल आयोग की सिफारिशें लागू की थीं और जो जातियां आज हाई कोर्ट से आदेश लाई, चाहे अंतरिम आदेश हो चाहे स्थायी आदेश हो, उनका चयन हमारी सरकार ने किया था। केन्द्रीय सरकार द्वारा भी चयनित की गई थी और वहां के पिछड़ा आयोग ने भी चयन किया था। एक सैतवाल कौम है, सवाल यहीं से शुरु हुआ है। सैतवाल जाति को पिछड़ी जाति में लाने के लिए वहां के पिछड़े आयोग ने विचार किया। जब हम मुख्य मंत्री थे, मेरे सामने यह सवाल आया तो हमने स्वीकार किया। हमने कहा कि इस जाति को हम भी स्वीकार करते हैं। सैतवाल भी पिछड़ी जाति में आते हैं। उस सवाल को लेकर किसी ने जो भी रिट की हो कि सैतवाल राजपूत हैं, ये पिछड़ी जाति में नहीं आते, उसी के सहारे अन्य जातियां भी आ गईं। आप अगली कार्यवाही करेंगे, वह अलग चीज है, हमारा कहना यह नहीं है। अगली कार्यवाही तो आपको करनी ही होगी और यदि नहीं करनी होगी तो हम करेंगे। हम बढिया से बढ़िया वकील करेंगे। मंडल आयोग के लिए हमने मामूली लड़ाई नहीं लड़ी है, इसके लिए लोग शहीद हुए हैं, हत्याएं हुई हैं, जेलें भी काटी हैं। मंडल आयोग को इस तरह से खत्म करने का षडयंत्र है। पहले पैरवी कयों नहीं की, ऐडवोकेट जनरल साहब पहले खड़े कयों नहीं हुए। यह बताइए, जो काउंटर ऐफिडैविट है, उसका जवाब आपकी सरकार के माध्यम से दिया गया था या नहीं, यह कन्फयूज़न है। यदि दिया गया ऐडवोकेट जनरल खड़े हुए हैं तो अगला सवाल जो करना होगा, हम करेंगे। पहले यह बताइए कि कया समय पर काउंटर ऐफिडैविट फाइल किया गया था। इतने महत्वपूर्ण मामले में ऐडवोकेट जनरल पहले ऐपियर कयों नहीं हुए? अब हुए होंगे।
... (व्यवधान) इसलिए हमारा सीधा आरोप यह है कि वहां की सरकार ने जान-बूझकर एक षडयंत्र के तहत मामले की सही तरीके से पैरवी नहीं की। यदि अदालत के सामने सारे तथ्य लाए गए होते, तो सुप्रीम कोर्ट का पहले ही फैसला हो चुका है।
... (व्यवधान)
MR. SPEAKER: Shri Mulayam Singh Yadav, please be brief. We have to complete the Budget discussion today.
... (व्यवधान) श्री अशोक प्रधान (खुर्जा) : उत्तर प्रदेश की सरकार पर जो आरोप लगाया जा रहा है, यह बिल्कुल गलत है।
... (व्यवधान) भारतीय जनता पार्टी भी उतनी ही हमदर्द है, इसमें कोई दो राय नहीं है।
... (व्यवधान)
MR. SPEAKER: Please do not disturb. Please take your seat.
... (Interruptions)
MR. SPEAKER: Please take your seat. I will allow you also.
... (Interruptions)
MR. SPEAKER: Shri Ashok Pradhan, please take your seat.
... (Interruptions)
MR. SPEAKER: Shri Mulayam Singh Yadav, please conclude. श्री मुलायम सिंह यादव : मेरा कहना है कि यदि ये इन मुद्दों को लेकर पहले भी सुप्रीम कोर्ट में जा चुके हैं, हाई कोर्ट में भी इस विवाद का फैसला हो चुका है, यदि सरकार ने सारे तथ्यों, सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट की कई रूलिंग्स को सामने रखा होता तो यह फैसला नहीं होता। अब जहां तक अंतरिम आदेश का सवाल है, यह अंतरिम है। यदि आज से ही कुछ नौकरियों में डिसीजन लेना है, बहुत सी चयन समतियां हैं, पब्िलक सर्िवस कमीशन है, दरख्वास्त देने का सवाल है, हमारा कहना है कि पूरी तरह से आदेश हुआ है, यदि ऐसा मान लें, आज की तारीख में इन जातियों को नौकरीमें आरक्षण से संबंधित कोई आदेश होता है तो वह आज के आदेश के अनुसार होगा। आप अंतरिम आदेश को इतना हल्का-फुल्का कयों ले रहे हैं। इसलिए मेरा आरोप है कि इन पूरे तथ्यों को उत्तर प्रदेश की सरकार ने अदालत के सामने नहीं रखा है, इसके पीछे गहरा षडयंत्र है।
... (व्यवधान)
MR. SPEAKER: This is not a debate. Please take your seat.
... (Interruptions)
MR. SPEAKER: I will allow you. Please take your seat.
... (Interruptions)
SHRI KHARABELA SWAIN (BALASORE): Mr. Speaker, Sir, it is not the right of only the Samajwadi Party to raise this matter. I want to speak about Orissa and I also want to raise this matter. I should also be allowed. I have also given notice. You should allow me to speak. किसी को भी बोलने दें, यह नहीं होना चाहिए।
... (व्यवधान) ऐसा नहीं है कि इनकी बात ही चलती रहेगी और हमारी बात नहीं सुनी जाएगी। हमारे आदमी भी हैं, उनको भी बोलने का मौका दीजिए।
... (व्यवधान) सारा दिन ऐसा ही धंधा चलता रहता है। एक बात बोलेंगे और जीरो आवर खत्म कर देंगे।
... (व्यवधान) कहते हैं कि रूल के मुताबिक होगा, रूल कया है। ये जो बोलते हैं वही करते हैं।
... (व्यवधान) ">   ">श्री राम विलास पासवान (हाजीपुर) : अध्यक्ष जी, यह बहुत ही गम्भीर मामला है। इसको मैं उत्तर प्रदेश या किसी प्रदेश का विवाद नहीं बनाना चाहता हूं। शैडयूल्ट कास्टस, बैकवर्ड कलासेज़ या खासकर मंडल कमीशन, ये तमाम होम मनिस्ट्री के अन्तर्गत डील होते हैं और कल्याण मंत्रालय भी उसको देखता है। मैं समझता हूं कि होम मनिस्टर साहब इसको गम्भीरता से लेंगे, कयोंकि जो जजमेंट आया है, शैडयूल्ड कास्टस का मतलब होता है कि those castes which are in the Schedule of the Constitution. संविधान के शैडयूल में जिनका नाम दर्ज है, उसी तरह से वैकवर्ड कलासेज़ के सम्बन्ध में है। मंडल कमीशन के बाद वैकवर्ड कलासेज़ की लिस्ट बनाई गई और राज्य सरकार और केन्द्र सरकार में उस नाम को छापा गया। आज मामला इस बात का नहीं है कि उत्तर प्रदेश में कया हो रहा है, मामला यह है कि जब एक बार यह आदत हो जायेगी कि किसी कास्ट को आप निकाल सकते हैं तो वह सिलसिला जारी रहेगा और उसका कहीं अन्त होने वाला नहीं है। इसलिए पार्िलयामेंट सवर्ोच्च सत्ता है। इस पर विचार करने की बात है। इसमें जो २१ जातियों का नाम दिया गया है, इसमें आप देखें कि वे कौन हैं। मल्लाह, मल्लाह पश्िचम बंगाल में शैडयूल्ड कास्टस में हैं, बिहार में मल्लाह बैकवर्ड कलासेज़ में है, दिल्ली में शैडयूल्ड कास्टस में है और उत्तर प्रदेश में बैकवर्ड कलासेज़ में है। इसमें नाम कौन से हैं-कुर्मी, कुम्हार, प्रजापति, पटेल, काछी, कुशवाहा, शाकय, केवट, मल्लाह, मनिहार, लखेरा, कचेर, दर्जी, इदरीसी, तेली, तमोली, चिकवा, कुरैशी, चक, कस्साव, गद्दी, घोसी, भुर्जी, भड़भूजा, भूंज, काटू, अरखा, अर्कवंशीय, पटनवार, कुर्मी सेंधवार, चौरसिया बरई, छीपी, छीपा, हज्जाम, नाई, सलमानी, सविता, श्रीवास, हलवाई, मोदनवाल, मुराव, मौर्य, मुराई, नद्दाफ, धुनिया, मंसूरी, कन्डेर, रंगरेज, रंगवा, लोनिया, नोनिया, गोले ठाकुर, लोनिया चौहान, सोनार, स्वीपर जो अनुसूचित जाति की सूची में नहीं हैं और हलालकोर, ये सारी जातियां यदि बैकवर्ड कलासेज़ में नहीं आयेंगी तो कौन पिछड़ी जाति में है, कौन बैकवर्ड कलासेज़ में है?
... (व्यवधान) श्री राजेन्द्र अग्िनहोत्री (झांसी): यह मुलायम सिंह यादव को पिछड़ा बना रहे हैं। इनके लिए तो आप भी पिछड़े हैं। बैकवर्ड तो पिछड़े हैं ही।
... (व्यवधान) श्री राम विलास पासवान : हर चीज को मुलायम सिंह यादव से कनैकट मत कीजिए। ... (व्यवधान) श्री अजीत जोगी (रायगढ़): यह एक गम्भीर बात है और इसे गम्भीरता से सुनिये। यह फायदे और नुकसान की बात नहीं है। यह गम्भीर राष्ट्रीय प्रश्न है।
... (व्यवधान) श्री राम विलास पासवान : यह कोई पार्टी का मामला नहीं है, किसी सरकार का मामला नहीं है, उत्तर प्रदेश का मामला भी नहीं है, यह डिसीजन पूरे देश का जो संवैधानिक ढांचा है, उसके ऊपर इफैकट करने वाला है, उसको यह प्रभावित करेगा। मैं समझता हूं कि बहुत दिन से चर्चा चल रही है कि यह मामला चलेगा तो शैडयूल्ड कास्टस में भी चलेगा। फिर उन पर इकोनोमिक क़ाइटीरिया लागू करो, फिर यह करो, वह करो। इसलिए मैंने कहा कि पार्िलयामेंटरी मनिस्टर सिर्फ उत्तर प्रदेश से रिपोर्ट लेकर सदन में दे दें, यह मामला नहीं है। यह मामला पूरे देश का है, संवैधानिक ढांचे का है, इसलिए मैं होम मनिस्टर से चाहूंगा कि ग्ृाह मंत्री जी इसको गम्भीरतापूर्वक लें। हाई कोर्ट का जो जजमेंट है, उस जजमेंट के ऊपर मैं कुछ नहीं कहूंगा, लेकिन यदि कोई जजमेंट आता है तो उस जजमेंट की रैमेडी सिर्फ सुप्रीम कोर्ट नहीं है, बल्िक उस पर रोक की रैमेडी यह पार्िलयामेंट हाउस है और पार्िलयामेंट हाउस में यदि संविधान संशोधन करके शैडयूल्ड कास्टस और वैकवर्ड कलासेज़ की सूची को नाइंथ शैडयूल में यदि रखने की आवश्यकता पड़े तो आप नाइंथ शैडयूल में उसको डाल दीजिए, जिससे कि इस चेंज को भविष्य में कोई कोट न कर सके। इस तरह का प्रावधान आपको करना चाहिए। मैं समझता हूं कि इसमें सारा सदन एकमत होगा।
... (व्यवधान)
"> कुमारी ममता बनर्जी (कलकत्ता दक्षिण) : अध्यक्ष महोदय, यह मामला बहुत ही गम्भीर मामला है। यह खाली उत्तर प्रदेश की बात नहीं है, यह बात पूरे हिन्दुस्तान की है। मंडल कमीशन ने जिन १७७ कास्टस को रिकमेण्ड किया था, उसके बाद कमीशन तो हर स्टेट में बना है, लेकिन ... (व्यवधान)
MR. SPEAKER: What is this? You should have some patience. कुमारी ममता बनर्जी : लेकिन आज तक उसका काम पूरा नहीं हुआ है। जैसा हमें मालूम है, हमारी स्टेट में भी ऐसी बहुत सी जातियां हैं, लेकिन १७७ जातियों में से खाली ६९ हुई हैं, बाकी आज तक शामिल नहीं हुईं। इसका मतलब होता है कि जो शैडयूल्ड कास्टस, शैडयूल्ड ट्राइब्स और ओ.बी.सी. के लोग हैं, उनको नौकरी में भी मौका नहीं मिलता, उनको एजुकेशन में भी मौका नहीं मिलता है और गवर्नमेंट का एडवांटेज भी नहीं मिलता है। अगर गवर्नमेंट की पालिसी ऐसी है कि उसको मदद देनी है तो इसमें कोई स्टेट की बात नहीं होनी चाहिए, लेकिन इसमें गवर्नमेंट की एक यूनिफार्म पालिसी होनी चाहिए, जिसमें गवर्नमेंट पालिसी के मुताबिक पार्िलयामेंट में एक काम हो सके। किसी स्टेट में ऐसा न हो कि कास्ट के नाम पर हम टुकड़े हो जायें, लेकिन हमारे देश में कास्ट के नाम पर एकता बनी रहे, इसके लिए हम मनिस्ट्री का ध्यान इस तरफ दिलाना चाहते हैं, होम मनिस्ट्री भी है, पार्िलयामेंटरी अफेयर्स मनिस्ट्री भी है। यह स्टेट गवर्नमेंटस के ऊपर नहीं है, लेकिन सैण्ट्रल गवर्नमेंट को एक यूनीफार्म पालिसी बनानी चाहिए।
MR. SPEAKER: I will allow you. श्री अशोक प्रधान : माननीय अध्यक्ष जी, मैं आपके माध्यम से यह बात सदन को कहना चाहूंगा कि यह बात बिल्कुल ठीक है, लेकिन मैं सिर्फ यह कहना चाहूंगा कि जो बात माननीय मुलायम सिंह जी कह रहे हैं, उसको कहने का जो तरीका है, वह बिल्कुल ठीक नहीं है, कयोंकि उत्तर प्रदेश की सरकार को उन्होंने कोट किया ... (व्यवधान)
MR. SPEAKER: Shri Shailendra Kumar, please take your seat. This is not good. Please please take your seat. What is this? Please take your seat. You must know the procedure first.
... (व्यवधान) श्री अशोक प्रधान : इसको गम्भीरता से लें।
... (व्यवधान) श्री शैलेन्द्र कुमार : अब इस पर हम बोलेंगे।
... (व्यवधान) श्री अशोक प्रधान : उत्तर प्रदेश की सरकार गम्भीरता से ले रही है और जहां तक इस बात को लेने का सवाल है, पूरे एस.सी., एस.टी. और ओ.बी.सी. की हम भी मांग अपने ग्ृाह मंत्री जी से करेंगे कि वे भी इस बात को गम्भीरता से लेकर एक यूनीफार्म पालिसी बनायें और इसको बाकायदा उस ढंग से लिया जाये।
... (व्यवधान) अध्यक्ष महोदय : यह अच्छा नहीं है।
Shri Mohan Singh, I have allowed him. Please let him complete.
... (व्यवधान) श्री अशोक प्रधान : बल्िक इसको उस ढंग से लिया जाये और जहां तक प्रदेश की सरकार के ऊपर प्रश्नचिन्ह लगाने की बात है, वह बात ठीक नहीं है।
... (व्यवधान)
।०6"> श्री लालू प्रसाद : मेरी बात सुन तो लीजिए, मैं आपकी सहायता कर रहा हूं। महोदय, आरक्षण कोई भीख नहीं है। हमारे संविधान के निर्माताओं ने बहुत सोच समझकर, विचार करके यह संविधान और दर्पण दिया था, गरीबों का, बैकवर्ड कलास सिटीज़न ऑफ इंडिया, शैडयूल्ड कास्टस, शैडयूल्ड ट्राइब्स उसी में इन्कलूडेड हैं। उसी में मंडल कमीशन है, कोई नई खोज नहीं, मंडल कमीशन का जो जन्म हुआ, इसी संविधान से हुआ। पूरे देश में सभी माननीय सदस्य जानते हैं, माननीय सदस्यों को कोई यह बताने की जरूरत नहीं है, सभी ज्ञानी लोग यहां बैठे हुए हैं। सारे देश में इस मामले को लेकर कितनी शहादत लोगों ने दी, समाज विभकत हुआ, जो गरीब लोग हैं, पिछड़े वगर्ों के लोग हैं, वे कितने प्रताड़ित हुए। आज भी हम लोग इसके शिकार हैं। सुप्रीम कोर्ट ने हमेशा के लिए यह फैसला कर दिया कि हर राज्य और केन्द्र परमानेंट कमीशन बनाये और राज्यों की जातियों की सूची हर राज्य में वहां की कॉमन लिस्ट और दिल्ली की कॉमन लिस्ट दोनों जब मिल गये, दोनों का मुंह मिल गया, तब लोगों को यह सब आई.ए.एस. हो, आई.पी.एस. हो, सैण्ट्रल सर्िवसेज में हो, सिपाही हो, जहां भी हो या राज्यों में भी हो, उसमें फिर क़ीमीलेयर की बात भी आई, वह अलग बिन्दु है। यह हमेशा के लिए बात तय हो गई। मुलायम सिंह यादव जी उत्तर प्रदेश में, मेरे पहले जननायक कर्पूरी ठाकुर जी बिहार में और उस मंडल कमीशन को हम लोगों ने तेज और धारदार किया और सभी पोलटिकल पार्टी के लोगों ने इसे स्वीकार किया, भले अलग-अलग तौर तरीका रहा हो। कुछ जातियों के मन में अंदेशा हुआ कि हमारा नाम छूटा हुआ है, जो सुप्रीम कोर्ट ने हमेशा के लिए फैसला, व्यवस्था दे दी है कि हर राज्य परमानेंट कमीशन आप बहाल रखिये। दिल्ली में एकसकलूजन और इनकलूजन यह कमीशन करेगा और इसको राज्यों को मेंडेटरी मानना पड़ेगा कि कौन सी जाति छूटी हुई है। उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री, वहां के शासन और वहां के विद्वान अधिवकता जो हैं, मुझे बताया गया है कि यह मामला इलाहाबाद कोर्ट में आया, उन्हें काउंटर एफिडेविट देना चाहिए था। राज्य सरकार को सुप्रीम कोर्ट का हवाला देकर और बाकी सारी चीजों से कोर्ट को अवगत कराना चाहिए था। यह बहुत संवेदनशील मामला है। इस मामले को लेकर राज्य सरकार को और एटॉर्नी जनरल को गम्भीरता से देखना चाहिए था। यह मामला उत्तर प्रदेश तक ही सीमित नहीं है। जिन जातियों को वहां से हटाया गया है, कल वे जातियां दिल्ली से और पूरे देश से भी हट जाएंगी। इनको अवसर नहीं मिलेगा। इसलिए वहां की सरकार, वहां का वधि विभाग और वहां का इनका सेल बिल्कुल नोइंग्ली और इंटैंशली बैकवर्ड कलास को बचाने के लिए जितना सफल होना चाहिए था, वह सफलता नहीं मिली। इसमें यह सरकार विफल रही है। यह सरकार हमेशा से पिछड़ों की विरोधी रही है, गरीब और दलित विरोधी है। ऐसी सरकार को नहीं रहना चाहिए।
... (व्यवधान)
MR. SPEAKER: I will allow you.
... (Interruptions)
MR. SPEAKER: Please understand that the Leader of the Opposition is on his legs. Please take your seat.
... (Interruptions) श्री शैलेन्द्र कुमार : अध्यक्ष महोदय, मुझे भी बोलने का मौका दें।
MR. SPEAKER: Shri Shailendra Kumar, you are always disturbing the House. This is too much.
... (Interruptions)
*m07 ">SHRI SHARAD PAWAR (BARAMATI): Mr. Speaker, Sir, the issue which has been raised by Shri Ram Vilas Paswan is a very important and very serious issue. A particular decision is given by a particular High Court. I do not want to go in details about this whether it was properly argued or not or what was exactly the approach of the State Government? But now the decision is very much there. What we are observing is that these types of different decisions are given by different High Courts and they have taken different approach towards different backward communities. I know there are a number of decisions. For instance, there is a particular community in Maharashtra which is backward. The same community is getting advantage of being the Scheduled Caste community in a neighbouring State, the same community is getting advantage of being the Scheduled Tribe community in some other States. That is why, the time has come when we should take an overall approach towards this. I think, this is high time we took the assistance of Article 340. It says:
"The President may by order appoint a Commission consisting of such persons as he thinks fit to investigate the conditions of socially and educationally backward classes within the territory of India and the difficulties under which they labour and to make recommendations as to the steps that should be taken by the Union or any State to remove such dificulties and to improve their condition and as to the grants that should be made for the purpose by the Union or any State and the conditions subject to which such grants should be made, and the order appointing such Commission shall define the procedure to be followed by the Commission..."

I think, this is high time, the Government of India took this decision as early as possible, appoint a Committee to go in details about all these things and restore whatever facilities which they were getting...(Interruptions) SHRI RAM VILAS PASWAN : The Commission is already there. श्री मोहन सिंह (देवरिया): वहां सन १९७७ से लागू है। श्री शरद पवार : ये दो चीजें हैं। जो इसके पहले का है, वह रिस्टोर कर रहा है। जो एक स्टेट में अलग एप्रोच है, दूसरी स्टेट में अलग एप्रोच है, उसके लिए कमीशन ने जो पहले दिया है उसको रिस्टोर करने की आवश्यकता है। जो निर्णय हाई कोर्ट ने लिया है। श्री राम विलास पासवान : एकसकलूजन और इनकलूजन के लिए आलरेडी कमीशन है। होना यह चाहिए कि जो आरबिट्रेरी कास्ट को निकालने की साजिश हो रही है, उसके लिए कोई प्रावधान बनाया जाए, जिससे उसको निकाला न जा सके। SHRI SHARAD PAWAR : Mr. Speaker, Sir, my suggestion is, all these decisions and all these castes should be included in the Ninth Schedule of the Constitution. Unless and until we include it in the Ninth Schedule, I do not think we will be able to give protection to all these communities. Therefore, this decision be taken by the Welfare Ministry as early as possible so that it is possible to resolve the problem being faced by any community.

"> श्री हरिकेवल प्रसाद (सलेमपुर) : माननीय अध्यक्ष महोदय, सदन में माननीय सदस्यों ने जो बातें रखी हैं, वे मंडल कमीशन और इस केस से सम्बन्िधत हैं। लेकिन सवाल उत्तर प्रदेश में इन जातियों को बाहर किए जाने का है। उत्तर प्रदेश से मेरे कुछ मित्रों ने मुझे टेलीफोन करके बताया कि जो निर्णय इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बैंच ने दिया है, उस निर्णय से गांव-गांव में, शहर-शहर में चर्चा फैल गई है कि इस निर्णय ने पिछड़े वर्ग के लोगों में डिवीजन पैदा करने का प्रयास किया है। उसमें ५४ जातियां हैं, जिनकी सूची राम विलास पासवान जी पढ़ रहे थे। वे ऐसी जातियां हैं जिनको यादवों में मान लिया है। वहां पर यादव अलग हो गए, बाकी जो पिछड़ी जातियां हैं, वे अलग हो गईं। मैं आपके माध्यम से सदन में यह अनुरोध करना चाहूंगा कि सैथवार जाति ने महासम्मेलन करके कहा कि पिछड़ी जातियों की सूची में हमारा नाम है तो हमारा अपमान हो रहा है इसलिए हमें अगड़ी सूची में शामिल कर दिया जाए। ये लोग इसके लिए पिछड़ा वर्ग आयोग में चले गए। उसी वर्ग के कुछ लोगों ने वहां एतराज कर दिया। पिछड़ा वर्ग आयोग ने कहा कि यह सैथवार जाति पिछड़ा वर्ग में रहे। इस पर वे लोग उच्च न्यायालय में चले गए और याचिका दाखिल कर दी। मुझे अफसोस है कि यह याचिका जब दाखिल की गई तब मुलायम सिंह जी मुख्य मंत्री थे।
... (व्यवधान) मैं उसमें नहीं जाना चाहता।
... (व्यवधान)सवाल यह है कि जब से हमारी सरकार आई है तो इस सरकार ने हलफनामा दिया या नहीं दिया। हमारे मित्र खुराना जी, जो कि मंत्री हैं, इनका कर्ततव्य है कि कम से कम यह पूछते कि हमारी सरकार ने हलफनामा दिया है या नहीं दिया। जहां तक मुझे जानकारी है नहीं दिया गया। लोगों के मन में आशंका है कि आदरणीय मुलायम सिंह की साजिश के द्वारा पिछड़ा वर्ग के लोगों को इससे अलग कर दिया गया और यह फैसला कराया गया। यह उनका कहना है। मुझे प्रसन्नता है कि आदरणीय मुलायम सिंह, आदरणीय लालू प्रसाद और पासवान जी ने और अन्य लोगों ने उस अधिकार को दिलाने के लिए अपनी बात यहां रखी। मुझे पीड़ा हुई कि जो पिछड़ी जाति के लोग हैं, उनको बड़ी लड़ाई के बाद यह अधिकार मिला था, एक साजिश करके उनको इस अधिकार से वंचित किया जा रहा है, जो उनके लिए दुर्भाग्य की बात है। मैं सरकार से कहना चाहता हूं, आदरणीय आडवाणी जी से कहना चाहता हूं कि वह उत्तर प्रदेश की सरकार को निर्देश दें, कयोंकि उस निर्णय से जहां नियुकितयों पर रोक है, वहा प्रोन्नति पर भी रोक है।
... (व्यवधान)इसलिए मैं आडवाणी जी से अनुरोध करूंगा कि वे कुछ उपाय करके गरीबों के हितों की रक्षा करें।
MR. SPEAKER: Please conclude now.
... (Interruptions)
MR. SPEAKER: Please understand that I cannot allow all of you.
... (Interruptions)
MR. SPEAKER: Shri Shailendra Kumar, please take your seat.
Mayawatiji, please conclude now.
"> कुमारी मायावती (अकबरपुर): माननीय अध्यक्ष महोदय, बड़े खेद के साथ कहना पड़ता है कि उत्तर प्रदेश में बी.जे.पी. की सरकार है और बी.जे.पी. की सरकार की लापरवाही के कारण जो २१ जातियां पिछड़ा वर्ग में शामिल की गई थीं, उनको निकाल दिया गया है। मैं आपको यह अवगत कराना चाहती हूं कि ये जो २१ जातियां पिछड़ा वर्ग जातियों से निकाल दी गई हैं, इनमें से उत्तर प्रदेश की आधी से ज्यादा ऐसी जातियां हैं, जिनको मेरे शासनकाल में पिछड़ा वर्ग के आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक शामिल किया गया था। मैंने लापरवाही कयों कहा, कयोंकि अचानक यह मामला कोर्ट में चला गया था। इस मामले को ले जाने वाले कोर्ट में बीजेपी के लोग हैं और सरकार कि ओर से लापरवाही करने वाले भी बीजेपी के लोग हैं।
... (व्यवधान) श्री राजेन्द्र अग्िनहोत्री (झांसी): यह बात गलत है।
... (व्यवधान) कुमारी मायावती : मैं इसका एक सबसे बड़ा सबूत देना चाहती हूं कि पिछड़ी जातियों को पिछड़े वर्ग में से निकालने की साजिश कई दिन पहले से हो रही थी । आज से १५-१६ दिन पहले उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री ने शैडयुल्ड कास्टस के जो थानाध्यक्ष अधिकारी थे, हमारी सरकार ने २० परसेंट शैडयुल्ड कास्टस और शैस्युल्ड ट्राइब्स के लोगों को थानाध्यक्ष बनाया, २५ परसेंट पिछड़े वर्ग के लोगों को और ८ परसेंट मुस्िलम समाज के लोगों को बनाया। लेकिन जैसे ही भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनी, आज से १५ दिल पहले उनके आरक्षण के कोटे को खत्म कर दिया। १५ दिन के बात भारतीय जनता पार्टी की साजिश के तहत, लापरवाही के तहत पिछड़ी जातियों को पिछड़े वर्ग में से निकाला गया है । वे जवाब दे सकते थे, सरकार की ओर से रिप्लाई जा सकता था, लेकिन साजिश के तहत ताकि पिछड़ी जातियों को लाभ न मिल सके, उनको ... (व्यवधान)आप हकीकत सुनिए।
... (व्यवधान)
MR. SPEAKER: Madam, please complete. कुमारी मायावती : अध्यक्ष महोदय, मुझे लग रहा है ... (व्यवधान)उत्तर प्रदेश में जब BSP की सरकार थी, तब हमारी सरकार ने थाने के अध्यक्ष के मामले में २० प्रतिशत आरक्षण शैडयूल्ड कास्टस और शैडयूल्ड ट्राइब्स का कोटा मुकर्िरर किया, २५ प्रतिशत बैकवर्ड कलासेस और ८ परसेंट माइनोरिटीज का, लेकिन आज से १५-१६ दिन पहले उत्तर प्रदेश की सरकार ने उस आरक्षण के कोटे को खत्म कर दिया। पिछड़े वर्ग में जो २१ जातियां थी, जो मेरे शासनकाल में समय में शामिल की गई थीं, आज उनको भी साजिश के तहत पिछड़े वर्ग में से निकाल दिया गया। मुझे ऐसा लगता है कि संविधान की धारा ३४० के अनुसार ... (व्यवधान)जो मंडल कमीशन की रिपोर्ट आई है और मंडल कमीशन बनाने से पहले ... (व्यवधान)
MR. SPEAKER: Please understand that I am calling only the Leaders.
... (Interruptions) कुमारी मायावती : मेरा कहना है कि केन्द्र की सरकार इसको गम्भीरता से ले और गम्भीरता से लेकर, कयोंकि केन्द्र की जिम्मेदारी है, उसको ठीक करे । ... (व्यवधान)
MR. SPEAKER: Madam, please take your seat. कुमारी मायावती : यदि केन्द्रीय सरकार इसको गंभीरता से नहीं लेती है, तो हम समझेंगे ... (व्यवधान)भारतीय जनता पार्टी की मिली-भगत के तहत, जो आरक्षण पहले मिला हुआ है, वह उसको खत्म करना चाहती है। हमें लगता है कि पिछड़े वर्ग के आरक्षण को खत्म करने की साजिश चल रही है।
... (व्यवधान)अनुसूचित जाति और अनुसूचित MR. SPEAKER: Nothing will go on record except Shri Vaiko's speech.
(Interruptions)* MR. SPEAKER: Please take your seat.
">SHRI VAIKO (SIVAKASI): Mr. Speaker Sir, this is notan issue of party politics. The whole country is concerned about this issue. ...(Interruptions)
MR. SPEAKER: Hon. Members, please take your seats.
SHRI VAIKO : Thank you very much for calling me. I beg to state that I belong to a State which enjoys the status of pioneer in the sphere of social justice.
MR. SPEAKER: Nothing will go on record except Shri Vaiko's speech.
(Interruptions)* SHRI VAIKO (SIVAKASI): The first amendment to the constitution at the behest of Pandit Jawaharlal Nehru guaranteed the right of social justice to the backward class < _____________________________________________________________________________ * Not recorded.
Sir, I share the concern expressed by Shri Mulayam Singh Yadav, Shri Ram Vilas Paswan and Shri Sharad Pawar. If the castes and communities which have been enjoying the fruits of social justice are deprived of their basic privileges, that is a danger signal. I do not want to go into the merits of a confrontation with the Judiciary. But we should not fail to understand that the High Courts and the Supreme Court very often come in the way of awarding social justice.
This Government, led by Atal Bihari Vajpayee has committed in its National Agenda for Governance: `The interests of the Scheduled Castes, Scheduled Tribes and Backward Classes will be adequately safeguarded by appropriate legal, executive and societal efforts and by large scale education and empowerment. We will provide protection to existing percentages of reservation in educational institutions at the State level.' I agree with Shri Sharad Pawar that it should be restored to those castes and communities. But at the same time, some hon. Members have expressed the view that there should be a uniform policy. A state which has been enjoying the fruits should not be deprived. I agree with that but the State should be at a liberty to fix the quota of reservation. It may differ from one State to another. Therefore, it should not be misconstrued that a uniform policy should be there.
MR. SPEAKER: Shri Chacko, this is not a discussion. What is your submission?
... (Interruptions)
MR. SPEAKER: Sorry, it is Shri Vaiko and not Chacko. Shri Chacko sits on one side while Shri Vaiko sits on the other! ... (Interruptions)
SHRI P.C. CHACKO (IDUKKI): I hope, I will also get a chance because of this! SHRI VAIKO : As the Leader of the Opposition has stated, if it is provided in the Ninth Schedule, it will give enough protection. (Interruptions) A Bill was passed in the Legislative Assembly of Tamil Nadu and there is an enactment in the Constitution. There is a Constitution Amendment made by this Parliament. Even though it was included in the Ninth Schedule, the Supreme Court did not take it into cognizance. Therefore, it is high time that the Government of India took proper measures bringing suitable amendments to the Constitution to give protection to the existing percentages and at the same time put a full stop to the interference by the Judiciary.
SHRI SATYA PAL JAIN (CHANDIGARH): Sir, I may please be permitted to clarify the position. There is no judgement of the High Court.
MR. SPEAKER: I have allowed Shri Basu Deb Acharia to speak.
... (Interruptions)
MR. SPEAKER: If everybody wants to speak, it will be very difficult for me to run this House.
... (Interruptions)
SHRI SATYA PAL JAIN : Sir, I will not take more than one minute. (Interruptions)
MR. SPEAKER: The Leaders are discussing the general situation only.
"> श्री बसुदेव आचार्य (बांकुरा) : अध्यक्ष महोदय, यह जो आज सदन में सवाल उठाया है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट का अन्तरिम जजमेंट हो सकता है, फाइनल जजमेंट नहीं हो सकता है, लेकिन यह अन्तरिम जजमेंट भी ... श्री सत्य पाल जैन : जजमेंट नहीं है। श्री बसुदेव आचार्य : ठीक है जजमेंट नहीं है, आर्डर है।
SHRI SATYA PAL JAIN : There is no interim judgement. Kindly show the interim order. If there is an interim order, please read it out. (Interruptions) They are unnecessarily wasting the time of the House. श्री बसुदेव आचार्य : अन्तरिम आर्डर जो हुआ है।
... (व्यवधान)
SHRI SATYA PAL JAIN : Where is the order? Please read it out.
(Interruptions) श्री बसुदेव आचार्य : जिस जाति को आरक्षण का अधिकार था, उसको आरक्षण से वंचित किया जा रहा है।
... (व्यवधान) श्री लालू प्रसाद : अखबार ऐसे नहीं लिखेगा।
... (व्यवधान)
MR. SPEAKER: Please take your seats. श्री बसुदेव आचार्य : अध्यक्ष जी, यह जो अंतरिम आदेश हुआ है, यह आदेश कैसे हुआ?
... (व्यवधान)
MR. SPEAKER: Please take your seat. श्री बसुदेव आचार्य : यदि उत्तर प्रदेश सरकार सीरियस होती, तो इस तरह का आदेश हाईकोर्ट से नहीं आता।
... (व्यवधान) श्री राजेन्द्र अग्िनहोत्री : यह तो आदेश है ही नहीं।
... (व्यवधान)यह तो मुलायम सिंह के समय में मुकदमा तय हुआ था। अभी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने कहा है कि एक भी पिछड़ी जाति इस सुविधा से वंचित नहीं की जाएगी।
... (व्यवधान) श्री बसुदेव आचार्य : हम जानते हैं यह मंडल-कमंडल लोक सभा में एक बार नहीं बहुत बार इस पर चर्चा हुई है। हम लोगों की एक ही राय है कि इस बारे में हर स्टेट में यूनिफोर्िमटी नहीं हो सकती है।
... (व्यवधान) श्री राजेन्द्र अग्िनहोत्री : यह कया है, इसको आप पढ़िये। श्री बसुदेव आचार्य : आप तो आरक्षण विरोधी हैं। श्री राजेन्द्र अग्िनहोत्री : हम नहीं आप आरक्षण विरोधी हैं।
... (व्यवधान)
MR. SPEAKER: I have allowed only Shri Basu Deb Acharia. Shri Satya Pal Jain please take your seat. श्री बसुदेव आचार्य : उत्तर प्रदेश की सरकार आरक्षण-विरोधी सरकार है। उत्तर प्रदेश की सरकार सोशल-जस्िटस की विरोधी है। इसलिए इस तरह का आदेश उच्च न्यायालय से हुआ है।
... (व्यवधान)कुछ कठिनाइयां हैं और हमने भी ये सवाल उठाए हैं कि कैसे इसको प्रांतों में किया जाए। जैसे कि आपके छोटा नागपुर में जो ट्राइबल्स हैं और असम के चाय-बागानों में सौ साल पहले जो लोग गये थे उनको अभी तक ट्राइबल्स का रिकोग्िनशन नहीं मिला है। उनकी मांग है कि एक कम्प्रीहैंसिव लैजिसलेशन इस हाउस में आना चाहिए, जिससे भविष्य में इस तरह की कोई कठिनाई पैदा न हो, हम लोग निर्णय ले सकते हैं, यही हमारा सुझाव है।
MR. SPEAKER: The hon. Minister is on his legs. Hon. Members, please take your seats. श्री सुरेन्द्र सिंह (भिवानी): अध्यक्ष जी, इस सदन में यह जो चर्चा का विषय आया है।
... (व्यवधान) संसदीय कार्य मंत्री तथा पर्यटन मंत्री (श्री मदन लाल खुराना): अध्यक्ष जी, पहली बात तो यह कही गयी है कि हमारी तरफ से कोई गया ही नहीं ... (व्यवधान) अध्यक्ष जी, इसका जो पहला सैन्टेंस है कि श्री के.एन.गुप्ता, आर.पी.निगम और श्री एस.के.कालिया फॉर द पैटिशनर एंड श्री पी.सी.वर्मा, जो गवर्नमेंट की तरफ से पेश हुए उनको सुना गया। जो ऑपरेटिव पार्ट आर्डर का है कि शो-कॉज नोटिस दिया है कि कयों न इन जातियों को निकाल दिया जाए और उसके बाद वे जवाब दें, फिर बहस होगी।
Is this an interim order or a show cause notice? ... (Interruptions)
MR. SPEAKER: Hon. Members, please understand that the Finance Minister's reply is to be taken up. Discussion under Rule 193 on Maruti Udyog Ltd. is also there. Private Members' Business is to be transacted. I am not allowing any further discussion on this issue.
... (Interruptions)
MR. SPEAKER: Please understand. The Finance Minister will start his reply now. ... (Interruptions)
MR. SPEAKER: The Finance Minister is waiting for the last one hour.
... (Interruptions) श्री सुरेन्द्र सिंह : शिवशंकर जी, मैं एक मिनट बोलना चाहता हूं। श्री पी. शिव शंकर (तेनाली): मेरा दूसरा इश्यू है।
... (व्यवधान)
MR. SPEAKER: Okay, Shri Shiv Shanker.
... (Interruptions)
SHRI SATYA PAL JAIN : Sir, are we on the same issue? ... (Interruptions) Sir, please permit me to make a mention for a minute. ..(Interruptions)
MR. SPEAKER: No. I am not allowing anybody.
... (Interruptions)
SHRI SATYA PAL JAIN : Sir, what are we discussing now? ... (Interruptions)
MR. SPEAKER: I am not allowing anybody now. The Finance Minister's reply is more important. Please take your seat.
... (Interruptions)
MR. SPEAKER: Please take your seat.
... (Interruptions)
MR. SPEAKER: Nothing goes on record except what Shri Shiv Shanker says.
... (Interruptions) ... (Not recorded) MR. SPEAKER: Please take your seats. It is not done like this.
... (Interruptions)
MR. SPEAKER: I">am not allowing you, please take your seat. Shri Shiv Shanker.
____________________________________________________________________________ The Home Minister should clarify this. ... (Interruptions)
MR. SPEAKER: Would you like to respond to this, Mr. Minister?
"> ग्ृाह मंत्री (श्री लाल कृष्ण आडवाणी): अध्यक्ष जी, अभी जो चर्चा चल रही थी उसमें आधार यह था कि इलाहबाद की हाईकोर्ट ने निर्णय दिया है जिसके कारण कुछ जातियां जो पहले ओ.बी.सी. की लिस्ट में थीं वह अब ओ.बी.सी. की लिस्ट से हटा ली गयीं, इसलिए आप सब की चिंता सबकी समझ में आती थी। इसीलिए अध्यक्ष जी ने उसकी चर्चा भी होने दी और वह काफी देर चलती रही। जिस प्रकार से पासवान जी ने या शरद जी ने कहा, मुझे इतना ही कहना है कि सरकार का यह दृढ़-निश्चय है कि जो आज ओ.बी.सी. में है, किसी कोर्ट का आर्डर भी उसको अगर हटाए तो उसके निराकरण के लिए उचित कदम उठाने चाहिए। लेकिन जो सजेशन दिया गया और जो थोड़ा-बहुत पासवान जी की बात में भी आया, मैं समझता हूं कि अभी तक यह स्टैंड किसी का नहीं रहा है कि हिंदुस्तान भर में ओ.बी.सी. की लिस्ट में यूनिफोर्िमटी होनी चाहिए। शेडयूल्ड कास्ट और शेडयूल्ड ट्राइब की लिस्ट में यूनिफॉर्िमटी होनी चाहिए। वह सारे देश में एक जैसी होनी चाहिए। मेरे पास आज सुबह कुछ सांसद आए थे। उन्होंने बताया कि असम में एक ट्राइब्स जाति थी जो पहले ओ.बी.सी. में मानी जाती थी। उनकी मांग थी कि उसे शेडयूल्ड ट्राइब का दर्जा दिया जाए। वह उसे शेडयूल्ड ट्राइब का दर्जा देने वाले थे। वह ओ.बी.सी. से हट गए और शेडयूल्ड ट्राइब भी नहीं बने। यह जो स्िथति पैदा हुई है, वह दुर्भाग्यपूर्ण है। मेरा कहना है कि अलग-अलग राज्यों के अपने-अपने अधिकार हैं। यही बात वैको जी ने कही थी। ओ.बी.सी., शेडयूल्ड कास्ट और शेडयूल्ड ट्राइब के संदर्भ में सारे देश का जो कनसैंसस है, हमारी सरकार उसे बनाए रखने के लिए दृढ़ प्रतिज्ञ है। उसके लिए अगर कोई संसद में निर्णय करना होगा तो हम उसे भी करने को तैयार हैं। अगर किसी कोर्ट ने ऐसा कोई निर्णय किया है तो हम उससे ऊंची कोर्ट में जाकर उसे ठीक करने की कोशिश करेंगे।
...(interruptions)...Please bear with me. We now discovered that there is no decision of the Allahabad High Court. In a way, what we have been discussing is a matter which is before the Court. Someone has gone to the Court and so, the rule of sub judice would apply here. We should not discuss it. They have given show cause notice. श्री मोहन सिंह (देवरिया) : मैं केवल एक वाकय में अपनी बात पूछना चाहता हूं। ... (व्यवधान)
MR. SPEAKER: Order please.
... (Interruptions)
SHRI L.K. ADVANI: I am not yielding.
Just as we have been very particular in this House about the sphere of Parliament and we would not like the judiciary to interfere here, similarly we have always respected its sphere also. Whenever there is a matter which is under consideration before a court, we have never discussed it. In this particular case, I would like to convey to the UP Government the feelings that have been expressed here and ensure that, on their part, there is nothing remiss; there is no indifference and the matter is pursued vigorously to see that the present list of the OBCs is maintained....(interruptions) MR. SPEAKER: After the response of the hon. Home Minister, no clarification is required to be asked.
... (Interruptions)
MR. SPEAKER: Shri Shailendra Kumar, this is not good. Please take your seat. Sit down please. What is this?
... (Interruptions)
MR. SPEAKER: This will not go on record.
(Interruptions) * ">SHRI P. SHIV SHANKER : I never wanted to interfere on this issue but I would like to say one thing. The Mandal Commission has already prepared the list with reference to the Central Services and Central educational institutions. What the hon. Home Minister has said with reference to the States equally applies to the Centre vis-a-vis the list that has been prepared by the Mandal Commission. I hope he will maintain it.
SHRI L.K. ADVANI: I may inform the House, through you Mr. Speaker Sir, that this notice which has been issued, has been issued to the Attorney-General also so that the Government of India also has a right to appear in this case...(interruptions) SHRI P. SHIV SHANKER : I rise with anguish to speak about the partial, autocratic and discriminatory functioning of Doordarshan in the recent times.