Lok Sabha Debates
Regarding Us President'S Statement On The Issue Of Jammu & Kashmir. on 23 July, 2019
Seventeenth Loksabha > Title: Regarding US President's statement on the issue of Jammu & Kashmir.
श्री अधीर रंजन चौधरी (बहरामपुर): सर, हिन्दुस्तान की सरकार ने अमेरिका के राष्ट्रपति के सामने सिर झुका दिया । यह हम सभी के लिए शर्मिंदा होने की बात है…(व्यवधान) हम यह चाहते हैं कि प्रधान मंत्री जी सदन में आएं और अपना बयान पेश करें…(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष: माननीय सदस्य, प्लीज इन्हें बोलने दीजिए ।
…(व्यवधान)
श्री अधीर रंजन चौधरी : सर, यह एक गंभीर मुद्दा है । हिन्दुस्तान किसी के सामने सिर नहीं झुका सकता है…(व्यवधान) इस तरीके की कमजोरियां हिन्दुस्तान को और ज्यादा कमजोर करेंगी…(व्यवधान) हमारी मांग है कि नरेन्द्र मोदी जी यहां पर आएं और अपना बयान दें…(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष: माननीय सदस्य, आपके दल के नेता यह फैसला कर लें कि किसको बात रखनी है । आप पहले ही फैसला करके आएं कि किस सदस्य को बात रखनी है ।
…(व्यवधान)
श्री अधीर रंजन चौधरी : सर, यह बहुत चिंता का विषय है । हिन्दुस्तान इतना कमजोर नहीं है । हमारी फौजें कमजोर नहीं हैं…(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष: माननीय सदस्य, प्लीज बैठ जाइए । मुझे आपका नोटिस मिल चुका है । प्रश्न काल को व्यवस्थित तरीके से चलने दें । मैं प्रश्न काल के बाद आपको शून्य काल में व्यवस्था दूंगा ।
…(व्यवधान)
SHRI KODIKUNNIL SURESH (MAVELIKKARA): Hon. Speaker, Sir, this is a very serious matter. …(Interruptions)
THE MINISTER OF PARLIAMENTARY AFFAIRS, MINISTER OF COAL AND MINISTER OF MINES (SHRI PRALHAD JOSHI): Hon. Speaker, this is highly unfair to belittle the image of the country. If they have got a concern, let them raise it in a proper manner and External Affairs Minister will respond to it. But belittling the country and belittling the image of the country is highly condemnable.…(Interruptions) The entire world knows who had taken the issue to the UNO at that time …(Interruptions) Making statements like this is belittling the image of the country; it is highly unfair and uncalled for. …(Interruptions)
माननीय अध्यक्ष: पहले आप बाहर जाकर फैसला करके आइए कि किसको बोलना है । आपके दल में यही फैसला नहीं होता कि कौन बोलने वाला है ।
…(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष: माननीय मनीष जी, आप बैठ जाइए । संसदीय कार्य मंत्री जी आप बताएं कि क्या व्यवस्था है ।
…(व्यवधान)
SHRI PRALHAD JOSHI: Sir, if they have got any concern, let them raise it at 1200 hours. The External Affairs Minister is in the other House. He will respond at 1200 hours. …(Interruptions)
माननीय अध्यक्ष: माननीय सदस्यगण, प्लीज बैठे-बैठे मत बोलिए ।
…(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष: माननीय सदस्यगण, यह विषय इतना गंभीर है कि सदन में उठाते समय पहले आप सबको आपस में चर्चा करनी चाहिए । सदन में कई विषय ऐसे होते हैं, जिनमें राजनीति नहीं होनी चाहिए । देश हित में जो भी सवाल होगा, मैं आपको उसे सदन में उठाने की इजाजत दूंगा ।
…(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष: माननीय सदस्य, पहले आप मेरी बात सुन लें । कई विषय ऐसे हैं, जिन पर हमारी डिबेट से, चर्चा से कहीं न कहीं हमारे देश की स्थिति कमजोर न हो । माननीय सदस्य, मैंने आपको बोलने का मौका दिया । संसदीय कार्य मंत्री जी ने आपको व्यवस्था दे दी । अब सारगर्भित डिबेट करनी है या हल्ला करना है, पहले इस पर फैसला कर लें ।
…(व्यवधान)
श्री अधीर रंजन चौधरी : सर, देश की सुरक्षा के लिए हम भी चिन्तित हैं ।…(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष: आप बैठ जाएं ।
…(व्यवधान)
श्री अधीर रंजन चौधरी : सर, मनीष तिवारी जी को हमारी पार्टी की तरफ से बोलने के लिए दो मिनट का समय दे दीजिए ।…(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष: माननीय सदस्य, दो मिनट क्या, आप जितनी देर बोलना चाहें, बोलिए । प्रश्न काल समाप्त होने दीजिए । माननीय संसदीय कार्य मंत्री जी जब व्यवस्था दे चुके हैं, तो प्रश्न काल चलने दीजिए ।
…(व्यवधान)
श्री अधीर रंजन चौधरी : सर, हमारी यह मांग है कि पीएम साहब यहां आकर जवाब दें ।… (व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष: आप यह मांग मत करिए । कौन जवाब देगा, कौन जवाब नहीं देगा, यह फैसला सरकार को करना है । ठीक है । आप बैठ जाएं ।
…(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष: प्रश्न संख्या - 421 …(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष: माननीय सदस्य, मेरा आपसे फिर आग्रह है कि कई ऐसे विषय हैं, जिन पर सदन में बातचीत करने से पहले हमें दल से ऊपर उठकर, देश हित में बातचीत करनी चाहिए, उसके बाद हमें सदन के अंदर यह सवाल उठाना चाहिए । मैं कभी भी आपके किसी भी विषय पर मैंने सदन में व्यवस्था तोड़ते हुए भी आपको हमेशा मौका दिया है । यह सदन सबका है, आपका भी है, यह सदन हम सब देश हित में चला रहे हैं कि देश को हम उच्च स्तर पर ले जाएं, विश्व में उच्च स्तर पर ले जाएं । इसलिए माननीय सदस्यगण, अभी प्रश्न काल चलने दें, उसके बाद सारगर्भित डिबेट करेंगे ।
…(व्यवधान)
श्री अधीर रंजन चौधरी : सर, देश के लिए हमारी पार्टी के नेताओं ने जान गंवाई है ।…(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष: सबने जान गंवाई है ।
…(व्यवधान)
11.07hrs ORAL ANSWERS TO QUESTIONS HON. SPEAKER : Que. No. 421, Shri Prasun Banerjee.
(Q. 421) SHRI PRASUN BANERJEE : Hon. Speaker, Sir, are there any specific fields from where excellent persons are chosen for Padma Awards? If so, what are those fields?
श्री नित्यानन्द राय: अध्यक्ष महोदय, पहले की परम्परा और वर्तमान की उत्कृष्टता पर मैं एक लाइन में बताना चाहूंगा । माननीय सदस्य ने जो पूरक प्रश्न किया है, वह अच्छा है । माननीय प्रधान मंत्री जी ने पुरस्कार की प्रणाली में अभूतपूर्व परिवर्तन किया है । सामाजिक जीवन के, देश के विभिन्न क्षेत्रों में, विभिन्न कार्य क्षेत्रों में उत्कृष्टता दिखाने वाले लोगों को इस पुरस्कार से नवाजा जाता है । माननीय प्रधान मंत्री जी के दृढ़ एवं अडिग संकल्प के कारण पद्म पुरस्कार के चयन में पूर्वाग्रह एवं प्रभाव बिल्कुल नहीं दिखता है, जो पहले दिखता था । चयन उसी का होता है, जो तपस्या और त्याग की बदौलत, असाधारण कार्यों को भी निस्वार्थ भाव से, कठिनाइयों की चिन्ता किए हुए बिना, अपने को विभिन्न क्षेत्रों में समर्पित करके उदाहरण बनते हैं ।
महोदय, पुरस्कार विजेता सभी के लिए प्रेरणा के स्रोत होते हैं । उनके संघर्ष, समर्पण, दृढ़ता, निस्वार्थता और सेवा की कहानियां नए भारत की कहानी कहती हैं । अब इसकी पद्धति में, इसकी चयन प्रक्रिया में लोकतांत्रिक व्यवस्था प्रमुख है ।
मैं माननीय सदस्य को बताना चाहूंगा कि देश के विभिन्न क्षेत्रों से, जैसे मैं दो-चार राज्यों के नाम लेता हूं, जिनमें आपका राज्य पश्चिम बंगाल भी है । महोदय, उद्धब कुमार भराली जी असम के जमीनी अन्वेषक हैं, जो अनार डीसीडर सहित 100 से अधिक कृषि मशीनों का आविष्कार करने के लिए प्रसिद्ध हुए । उनको वर्ष 2019 में पद्म पुरस्कार दिया गया ।
महोदय, श्रीमती मुक्ताबेन पंकज, जो स्वराष्ट्र की दिव्यांग महिलाओं के कल्याण और सशक्तिकरण पर काम कर रही हैं, वे सी.यू.शाह प्रज्ञा चक्षु महिला सेवा कुंज की संस्थापिका भी हैं । दिव्यांग महिलाओं के क्षेत्र में अभूतपूर्व योगदान के लिए उनको भी वर्ष 2019 में पुरस्कार दिया गया था । श्रीमती राजकुमारी बिहार से आती हैं । वह बुजुर्ग महिला किसान हैं, जिन्हें अब पूरा देश ‘किसान चाची’ के नाम से जानने लगा है । उन्होंने स्वयं सहायता समूह का गठन किया और ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनने के लिए प्रेरित किया । जर्मन की एक महिला सुश्री इरीना ब्रुनिंग हैं, जो विदेश से हिन्दुस्तान आई हैं और ‘सुदेवी माता जी’ के रूप में विख्यात है । वे दो दशकों से मथुरा में बीमार और परित्याग की गई गायों की देखभाल करती हैं ।…(व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय, कच्छी रोगन कलाकार, श्री अब्दुल गफूर खत्री जी, लुप्तप्राय कला का प्रयोग करने वाले एक मात्र व्यक्ति हैं । वे परिवार की आठ पीढ़ियों से इन उत्कृष्ट कार्यों को कर रहे हैं। उनको भी यह पुरस्कार दिया गया है । ओडिशा से दैतारी नायक, आदिवासी किसान, अकेले बहुत बड़ा साहस दिखाया है । उन्होंने पीने और सिंचाई के पानी के लिए पहाड़ की धारा से पानी लाने के लिए कुदाल और सब्बल के साथ तीन किलोमीटर लंबी नहर की खुदाई की । उनका कार्य बहुत साहस भरा है । …(व्यवधान)
प्रो. सौगत राय: 272 लोगों के नाम हैं, आप कितने नाम बोलेंगे?
श्री नित्यानन्द राय : 272 लोगों के नाम लिए जाते हैं, हम कुछ उदाहरण दे रहे थे । आजाद भारत के इतिहास में पहली बार 10 किसानों को पद्म पुरस्कार दिया गया है ।
अध्यक्ष महोदय, चाहे वह कला, चिकित्सा, कृषि, विज्ञान, सांस्कृतिक प्रचार-प्रसार का क्षेत्र हो या अन्य सामाजिक सेवाओं का क्षेत्र हो, कोई क्षेत्र ऐसा नहीं है, जिसको अछूता छोड़ा गया है ।… (व्यवधान) अभी अठावले जी कह रहे हैं । …(व्यवधान) खेल-कूद के क्षेत्र को भी अछूता नहीं छोड़ा गया है । इसलिए पहले की प्रक्रिया और अब की प्रक्रिया में बहुत अंतर है । पहले पैरवी का प्रभाव होता था, नजदीकी लोगों को पुरस्कार मिलता था । अब जो साहसपूर्वक अपने जीवन को समर्पित कर समाज और देश के लिए अद्भूत काम करते हैं, उनको यह पुरस्कार दिया जाता है । …(व्यवधान)
SHRI PRASUN BANERJEE : My second supplementary is this. मंत्री जी, आपको एक बात अच्छी लगे, इसलिए मैंने प्रश्न पूछा था । हम स्पोर्ट्स मैन हैं । हमने देखा है कि भारत में बहुत अच्छे आदमी हैं, जिनको यह मिलना चाहिए था, उनको यह कभी नहीं मिला । लेकिन जिनको मिलना नहीं चाहिए था, उनको गवर्नमेंट की ओर से सपोर्ट मिला । आप अच्छे लोगों को ढूंढ़ कर यह दें ।
I want to know whether there is any fixed ceiling for giving the award in each category. If so, the details thereof and if not, how do you decide the cut off in number for a particular year?
श्री नित्यानन्द राय : अध्यक्ष महोदय, इसकी कोई सीमा नहीं है । इसके निर्धारण के लिए एक समिति बनी है । मैंने पहले ही कहा है कि हर क्षेत्र का ख्याल रखा जाता है । माननीय सांसद महोदय बोल रहे थे, तो उनको नामंकन करने का अधिकार है । अगर वह किसी का नामंकन ऑनलाइन करते हैं और कोई योग्य व्यक्ति आता है तो इसके लिए एक समिति बनी है ।
अगर समिति को लगेगा कि इनकी पात्रता सही है, तो जो नाम सुझाएंगे, उन्हें चिह्नित किया जा सकता है । लेकिन समिति ही तय करती है कि उनकी पात्रता सही हो ।
माननीय अध्यक्ष : अखिलेश यादव जी । माननीय सदस्य इस सदन में पहली बार बोलने जा रहे हैं।
श्री अखिलेश यादव : अध्यक्ष जी, मैं आपको धन्यवाद देता हूं । हालांकि मैं बुधवार की घटना पर बृहस्पतिवार को बोलना चाहता था, लेकिन मुझे मौका नहीं मिला ।
माननीय अध्यक्ष : आपने मुझे लिखकर नहीं दिया ।
श्री अखिलेश यादव : अध्यक्ष जी, माननीय मंत्री जी बहुत अच्छा बता रहे हैं कि देश में विभिन्न कला क्षेत्र में या किसी अन्य क्षेत्र में जो लोग अच्छा कार्य करते हैं, वे उन्हें सम्मान देने का काम करते हैं । मुझे इस बात की खुशी है कि उत्तर प्रदेश में बड़ी संख्या में पद्मश्री और इस तरह के अवार्ड से लोग सम्मानित हुए हैं । उत्तर प्रदेश में ‘यश भारती सम्मान’ प्राप्त करने वाले लोगों को सरकार की तरफ से सम्मान राशि दी जाती थी । इसी तरह पद्मश्री पुरस्कार प्राप्त करने वालों को भी सम्मान राशि सरकार की तरफ से दी जाती थी । अर्जुन अवार्ड प्राप्त करने वालों को सम्मान राशि दी जाती थी । फिल्फ "पंडित जी बताईन वियाह कब होई"के लिए वर्ष 2016 में 82 लाख नकद सहायता राशि दी ।
प्रो. सौगत राय : वे कौन-से सदस्य हैं?
श्री अखिलेश यादव : माननीय सांसद श्री रवि किशन जी हैं । …(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : माननीय सदस्य आपको अभी मंत्री नहीं बनाया है आप बैठ जाएं ।
…(व्यवधान)
श्री अखिलेश यादव : अध्यक्ष जी, मैं सवाल पूछना चाहता हूं कि जिन विभूतियों को आप सम्मान देते हैं, क्या उनके लिए सम्मान राशि की व्यवस्था भी पेंशन के रूप में की जाएगी? उत्तर प्रदेश में 20 हजार रुपये से लेकर 50 हजार रुपये प्रति महीना सम्मान राशि दी जाती थी, क्या भारत सरकार ऐसे लोगों को सम्मान राशि देने का काम करेगी?
श्री नित्यानन्द राय : अध्यक्ष जी, पद्म पुरस्कार लेने वाले जो लोग हैं, उनका पुरस्कार के द्वारा मान-सम्मान बढ़ाया जाता है । माननीय सदस्य ने जो पूछा है, उसके लिए अभी तक प्रावधान नहीं किया गया है । जब पद्म पुरस्कार दिया जाता है, तो पुरस्कार प्राप्त करने वालों को लगता है कि उनका जीवन धन्य हो गया ।
(Q. 422) श्री अच्युतानंद सामंत : अध्यक्ष जी, मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री जी से मैं पूछना चाहता हूं कि आपकी पशु और उनके कल्याण से संबंधित विषय में रुचि भी है और आप इस मंत्रालय को बहुत सुंदर रूप से चलाने में सक्षम भी हैं । मैंने आपसे इस मंत्रालय से संबंधित प्रश्न पूछा था और आपने जो उत्तर प्रस्तुत किया है, उससे मैं पूर्ण रूप से संतुष्ट नहीं हूं ।
मैं उनसे अधिक विस्तारपूर्वक जानकारी की अपेक्षा रखता हूं । मैं इस सिलसिले में माननीय अध्यक्ष महोदय के माध्यम से माननीय मंत्री जी से कहना चाहता हूं कि जैसे हम सभी को पता है कि भारत एक कृषि प्रधान देश है, जिसमें 70 प्रतिशत जनसंख्या कृषि कार्य तथा कृषि से संबंधित कार्य से जुड़ी है । मेरा मंत्री जी से प्रश्न है कि भारत में दूध देने वाली गायों की संख्या सर्वाधिक होने के बावजूद यहां असल दुग्ध उत्पादन विश्व के अन्य देशों से, यहां तक कि अमेरिका से भी 50 प्रतिशत कम है । मैं इस संबंध में जानना चाहता हूं कि क्या सरकार दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए कोई योजना चला रही है?
श्री गिरिराज सिंह : अध्यक्ष जी, माननीय सदस्य को मैं धन्यवाद देना चाहता हूं कि उन्होंने बहुत अच्छा प्रश्न किया है ।
भारत में डेयरी और दुग्ध व्यवसाय किसानों के लिए बहुत बड़ा अर्थ का साधन है । मैं एक आंकड़ा आपके सामने रखना चाहूंगा कि आज देश में गेहूं का आंकड़ा 1,65,000 करोड़ रुपये वर्ष 2017-18 के डेटा के मुताबिक है, तो वहीं धान 2,53,000 करोड़ रुपये का है । यदि गेहूं और धान दोनों को जोड़ देते हैं, तो भी दूध का आंकड़ा 6,14,000 करोड़ रुपये से ऊपर आता जो बहुत अधिक है । यह बात सही है । मैं माननीय सदस्य से कहना चाहता हूं कि जैसा आपने कहा है कि 1172 किलो है, जो विश्व के आंकड़े में आधा है । मैंने उत्तर में भी कहा है कि हमारा एवरेज दूध के उत्पादन का है । हमारे यहां 30 करोड़ जानवर हैं । इनमें इनडिजनेस 1.3 करोड़, नॉन डेस्क्रिप्ट 2.1 करोड़, एग्जॉटिक, क्रॉस ब्रीड और टोटल कैटल मिलाकर 5.1 करोड़ हैं । बफैलो 4.3 टोटल 9.4 करोड़ है । दस साल के कार्यकाल में दूध के उत्पादन में 40 मिलियन टन की बढ़ोतरी हुई है । हमने केवल पांच वर्षों में 50 मिलियन टन दूध की बढ़ोतरी की है । इसके लिए हमने गोकुल मिशन योजना चलाई । पूरे देश में दूध की समस्या थी । मैं आपको बताना चाहता हूं कि वर्ष 2013 में 388 लीटर दूध कैटल का था । वर्ष 2014 में 1446 लीटर था । यदि आज की तारीख में कैटल का दूध देखें तो 1600 लीटर से अधिक है । मैं कहना चाहता हूं कि भारत सरकार ने मोदी जी के नेतृत्व में जो पालिसी एडॉप्ट की है, पहले किसानों को सबसे बड़ा नुकसान तब होता था, जब मेल कॉफ हो जाते थे । अब हमने ऐसा किया है कि देश में हम केवल बछिया के सेक्स सीमेन का उपयोग करेंगे । 11 सैंटर्स पर हम 20 लाख डोजेज प्रतिवर्ष पैदा करेंगे ।
महोदय, हम कंजर्वेशन का भी काम कर रहे हैं और आने वाले दिनों में नई तकनीक से, नई तकनीक यानी एमब्रियो ट्रांसप्लांट के लिए भी हमने 30 स्थान चिह्नित किए हैं । आईवीएफ टेक्नोलॉजी का भी यूज कर रहे हैं । हम देश में ऐसा वातावरण बनाना चाहते हैं कि किसानों को जो सबसे ज्यादा असुविधा होती थी, उसे दूर कर रहे हैं और जो दूध के लिए मैंने कहा कि दस साल में 40 मिलियन और पांच साल में 50 मिलियन का आप आंकड़ा देंखे तो हम 6.7 परसेंट की रेश्यो से बढ़ रहे हैं, जबकि पहले 4 परसेंट की रेश्यो से बढ़ रहे थे । कई ऐसी योजनाओं को चालू कर रहे हैं । मैं माननीय सदस्य को बताना चाहता हूं कि देश में नस्ल सुधार की प्रक्रिया है, देश में 80 के दशक से लेकर अब तक 40 वर्षों में 30% एआई कवरेज हुआ । आने वाले दिनों में वर्ष 2025 तक हमने तय किया है कि इसे दोगुना करेंगे ।
श्री अच्युतानंद सामंत : अध्यक्ष जी, माननीय मंत्री जी ने विस्तार से उत्तर दिया है । मेरा प्रश्न है कि क्या सरकार पशुपालन द्वारा कराए जाने वाले पशु बीमा से संबंधित कोई योजना बना रही है? एक पशुपालक के लिए पशु ही उसके परिवार की तरह होता है । निजी कम्पनियों से बीमा करवाने पर ऊंची लागत देनी पड़ती है, जो एक गरीब पशुपालक के सामर्थ्य से बाहर होता है । क्या सरकार किसी ऐसी योजना पर विचार कर रही है, जिसमें निजी बीमा न करके सरकारी योजना का लाभ पशुपालक ले सके ।
श्री गिरिराज सिंह : महोदय, यह व्यवस्था पहले से बनी हुई है । देश में एक संघीय व्यवस्था है । हम राज्य सरकारों के साथ मिलकर इस काम को करते आ रहे हैं । योजना बनी हुई है । बीपीएल, एससी, एसटी के लिए प्रीमियम का 40 पर्सेंट सेन्ट्रल गवर्नमेंट, 30 पर्सेंट स्टेट गवर्नमेंट और 30 पर्सेंट बेनिफिशियरीज देते हैं । एपीएल के लिए 25-25 पर्सेंट केन्द्र और राज्य सरकारें और 50 पर्सेंट बेनिफिशियरीज देते हैं । इसी तरह से नॉर्थ-ईस्ट की योजना भी बनी हुई है, जिसमें 50 पर्सेंट सेन्ट्रल गवर्नमेंट, 30 पर्सेंट स्टेट गवर्नमेंट और 20 पर्सेंट बेनिफिशियरीज देते हैं । एपीएल के लिए 35 और 25 पर्सेंट केन्द्र और राज्य सरकारें तथा 40 पर्सेंट बेनिफिशियरीज देते हैं । जो डिफिकल्ट एरियाज़ हैं, उनमें 60 पर्सेंट सेन्ट्रल गवर्नमेंट और 30 पर्सेंट स्टेट गवर्नमेंट तथा 10 पर्सेंट बेनिफिशियरीज देते हैं । एपीएल के लिए 45 पर्सेंट सेन्ट्रल गवर्नमेंट, 25 पर्सेंट स्टेट गवर्नमेंट और 30 पर्सेंट बेनिफिशियरीज देते हैं ।
जितने भी जानवर हैं, उनमें सभी संसूचित हैं । चार सरकारी एजेंसीज हैं । हम उन्हीं से कराते हैं । यह डिमांड बेस्ड होता है । जो स्टेट जितना डिमांड करता है, उसी के अनुरूप यह किया जाता है । प्राइवेट एजेंसीज से कराने का इसमें कोई प्रावधान नहीं है ।
श्री रवि किशन : माननीय अध्यक्ष महोदय, आपने मुझे बोलने का मौका दिया, आपका बहुत-बहुत धन्यवाद ।
माननीय अखिलेश जी ने हमारा नाम लिया कि जब उत्तर प्रदेश में इनकी सरकार थी, तो मुझे यश भारती सम्मान के तहत 50 हजार रुपये की धनराशि मिलती थी । लेकिन मैं उनकी जानकारी के लिए बता दूँ कि मुझे ऐसा कोई सम्मान उनकी सरकार या सुश्री मायावती जी की सरकार ने नहीं दिया । पूरा देश जानता है कि मैं उत्तर प्रदेश से बिलांग करता हूँ और मुझे यह सम्मान मिलना था । लेकिन मुझे यश भारती सम्मान कभी नहीं दिया गया, न ही वहाँ से मुझे कोई 50 हजार रुपये की राशि मिली । यही मैं आपसे कहना चाहता था ।
माननीय अध्यक्ष: माननीय सदस्य, मैंने सप्लीमेंट्री क्वेश्चन पूछने के लिए आपका नाम पुकारा था ।
…(व्यवधान)
श्री रवि किशन : अध्यक्ष जी, मेरा सवाल था, लेकिन मुझे इस इल्जाम को साफ करना था । …(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष: आप कभी भी लिखकर दे दें, मैं आप दोनों की डिबेट करा दूँगा ।
श्री रवि किशन : महोदय जी, मेरा सवाल है ।…(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष: अब आपका समय नहीं है । प्लीज आप बैठ जाएं ।
…(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष: श्री शशि थरूर जी ।
श्री शशि थरूर जी भी ऑलराउंडर हैं । ये विदेश दौरा भी कर लेते हैं और गायों को भी देख लेते हैं ।
…(व्यवधान)
डॉ. शशि थरूर : सर, मेरी कांस्टिट्यूएंसी में डेयरी फार्म्स बहुत हैं । मैं डेयरी फार्मर्स के बारे में बोल रहा हूँ ।
माननीय अध्यक्ष: मैं आपको भी मौका दे दूँगा और बाद में कभी दोनों की एक डिबेट करा दूँगा ।
…(व्यवधान)
डॉ. शशि थरूर : सर, जैसा कि मैं कह रहा था कि मेरे क्षेत्र में भी डेयरी फार्मर्स हैं । The hon. Minister is correct, thanks to the White Revolution, the total yield has gone up, but our per lactation yield is amongst the lowest in the world. It is below 2,000 litres per lactation, whereas, a country like Israel has 11,000 litres per lactation. As you have mentioned, we have 17 per cent of the world’s cattle, but we only have two per cent of the world’s land. So, the challenge for our animals and livestock is the same that faces our people; food insecurity and malnutrition. We have 25 per cent deficit in dry fodder, 65 per cent in green fodder, and 60 per cent in feed concentrates. So, our cattle are not getting enough food. Despite that, our Government is exporting about 2 million tonnes, that is 20 lakh tonnes, of De Oiled Rice Bran (DORB) - which dairy farmers tell me is an essential food for their cows – and oil cakes in order to earn Rs.8,500 crore a year. These should be retained in our livestock system to keep feed prices in check.
DORB already costs Rs.11 per kg. It has been going up 40 per cent every half year. Given the scarcity of food in the animal food market, may I stress that this kind of situation is becoming unaffordable. Government’s policy in this sector is flawed because it is allowing exports of DORB and other farm residues like oil cake, and soya milk. What are our animals going to eat? These are actually exported to the global poultry industry or used in producing bio-fuel abroad. The Government is giving what our cattle need to the foreign countries, for them to feed their animals. This makes no sense as a policy. I would urge the hon. Minister to tell us this.
माननीय अध्यक्ष: माननीय सदस्य, प्रश्नकाल में इतनी डिबेट मत कराइए ।
डॉ. शशि थरूर: डिबेट की बात नहीं है सर ।
माननीय अध्यक्ष: आप जितना लम्बा प्रश्न पूछेंगे, उससे चार गुना लम्बा जबाव आएगा, ऐसे में तो प्रश्नकाल ही समाप्त हो जाएगा ।
DR. SHASHI THAROOR : There is a severe crisis. Will you negotiate with the hon. Minister of Commerce to come up with a better policy that prohibits the exports of essential livestock feed? Thank you, hon. Speaker.
श्री गिरिराज सिंह : महोदय, माननीय सदस्य ने डेयरी इंडस्ट्री का पूरा पिटारा रखा है । वे अनुभवी भी हैं । मैं भी कहूँगा कि आप जब चाहें, इस विषय पर बहस का समय रखें । मैं एक बात कहना चाहूँगा कि आप बार-बार इज़रायल और अमेरिका की चर्चा करते हैं, लेकिन हम दूसरे देशों की चर्चा नहीं करते हैं । हम खुद ही देखते हैं कि हम कहाँ-से-कहाँ ऊपर गये । आप देखें, हमारे पास 2.1 करोड़ नॉन-डिस्क्रिप्ट जानवर हैं, गाएँ हैं । टोटल जो 30 करोड़ पशु हैं, उनमें …(व्यवधान)
थरूर साहब, मैं आपके पहले प्रश्न का जवाब दे रहा हूँ, आप सुनने का सब्र रखें, मैं उसका भी जवाब दूँगा ।
जिस देश में 40 साल से अधिक के समय में नस्ल सुधार के लिए एआई टूल बना । आज तक देश में वह टूल मात्र 30 पर्सेंट ही रह पाया । हम उसमें 70 प्रतिशत तक कैसे पहुँचे, उसकी तैयारी कर रहे हैं ।
इनका दूसरा विषय न्यूट्रीशन और फौडर से संबंधित था । भारत सरकार की फौडर के लिए एक योजना है । हम किसानों तक सीड पहुँचाते हैं ।
तीसरे प्रश्न में इन्होंने आयात और निर्यात की बात की । वह दूसरे पक्ष से जुड़ा हुआ विषय है। मैं फौडर की चिन्ता करता हूँ और फौडर के लिए सतत प्रयासरत हूँ ।
श्री वीरेन्द्र सिंह : महोदय, दूध उत्पादन के बारे में जो विषय उठा है, तो दूध उत्पादन कहाँ कितनी मात्रा में होता है, विदेश में ज्यादा होता है, हमारे यहाँ पशुओं की संख्या ज्यादा है, लेकिन कम उत्पादन होता है, सवाल यह नहीं है । दूध की गुणवत्ता कैसी है, इस बात पर विचार करने का विषय है । हमारे देश में विभिन्न प्रकार की नस्लों की गाएँ हैं, जैसे गुजरात में गिर है, हरियाणा में साहिवाल है, गंगा के किनारे के क्षेत्रों में गंगातिरी है और भैंस में मूर्रा है । इनके दूध की गुणवत्ता ऐसी है कि दूध का उत्पादन करने वाले अन्य किसी भी देशों में वैसी नहीं होती है । इसके बारे में विश्व स्वास्थ संगठन ने रिपोर्ट दी है । मैं सोच सकता हूँ कि उत्पादन बढ़े, लेकिन इस बात को जानकार सदन को खुशी होगी कि भारत में उत्पादित दूध की जितनी गुणवत्ता होती है, उतनी किसी भी देश में उत्पादित दूध की नहीं होती है ।
इसलिए गुजरात की गिर, हरियाणा की साहिवाल, गंगा के किनारे क्षेत्र की गंगातिरी गाएँ और मुर्रा भैंसों के नस्ल की पशुओं को बढ़ाने की योजना पर सरकार विचार कर रही है, इस विषय पर बात होनी चाहिए, लेकिन कहाँ कितने दूध का उत्पादन हो रहा है, उस पर बात कर रहे हैं ।
माननीय अध्यक्ष: जब कोई प्रश्न ही नहीं है, तो आप जवाब क्या देंगे ।
…(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष: क्वेश्चन नम्बर 423.
(Q.423) DR. HEENA VIJAYKUMAR GAVIT : Hon. Speaker, Sir, I would like to thank the hon. Minister for giving a very elaborate answer.
Today, the focus of the Government is on doubling of farmers income by 2022; and the contribution of women farmers in achieving this goal is very crucial. The training programmes which are undertaken under this MKSP scheme for capacity building of women farmers, is very good. But I would like to mention some data here which was given in the reply of the hon. Minister on 2nd July, 2019. It says that as per Census 2011, the extent of women participation in agriculture, as cultivators, main and marginal, is 3.60 crore, and as women agricultural labourer, is 6.15 crore. Over 1.39 crore women have been trained in agriculture-related fields under various Central Government schemes in the last three years.
I am aware that it is a demand-driven scheme. But the training gap, which we are seeing here, that is, the number of women farmers and those being trained, is very big. Through you, I would like to know from the hon. Minister as to how the Government is planning to fill in this training gap to make women farmers 100 per cent skilfully-trained. Is there any plan to include this scheme under the MREGS? If not, what does the Govt plan to do? Thank you, Sir.
साध्वी निरंजन ज्योति : माननीय अध्यक्ष जी, मैं माननीय सदस्या हिना जी का सम्मान करती हूं, क्योंकि जब से यह सदन शुरू हुआ, वे किसी न किसी क्वेश्चन के द्वारा सदन का ध्यान देश हित में आकर्षित करती रहती हैं ।
माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं समझती हूं कि महिलाओं की कृषि के क्षेत्र में भागीदारी को हम महिला समूहों के माध्यम से बढ़ावा दे रहे हैं । मैं आपके माध्यम से सदन को अवगत कराना चाहती हूं कि महिलाओं के बिना खेती अधूरी है । हर क्षेत्र में महिलाएं आगे बढ़ रही हैं । कल आपने सूचित किया था, मैं आज गौरवान्वित हूं, कल भारत ने पूरे विश्व में जो इतिहास रिकॉर्ड किया, उसमें मेरे उत्तर प्रदेश की रितु ने भी उस ऐतिहासिक चंद्रयान को स्थापित करने में अपनी भागीदारी निभाई ।
अध्यक्ष जी, मैं समझती हूं कि महिलाओं से कोई क्षेत्र खाली नहीं है । पुरुष एक बार कृषि में पीछे रह सकता है, लेकिन महिलाएं आगे बढ़ रही हैं । हमारी माननीय सांसद महोदया ने एक आंकड़ा पूछा है । मैं समझती हूं कि आंकड़ों से ज़्यादा महिलाएं काम कर रही हैं । वर्ष 2011 में इस समूह का गठन हुआ था । उसके बाद से लगातार महिलाओं को जानकारी हो रही है और हर क्षेत्र में महिलाएं काम कर रही हैं ।
मैं फूड प्रोसेसिंग क्षेत्र मंत्रालय में रही हूं । उस क्षेत्र में भी महिलाओं ने बहुत बड़ी भागीदारी निभाई है । मैं समझती हूं कि महिला हर क्षेत्र में, जहां वे काम कर रही हैं, चाहे वे कृषि के क्षेत्र में काम कर रही हैं, आंकड़ों के आधार पर नहीं, ज़मीनी हकीकत पर महिलाएं आगे बढ़ रही हैं । मैं एक ही बात कह सकती हूं कि महिलाओं से कोई क्षेत्र खाली नहीं है ।
यदि तुम ठान लोतो तारे गगन केतोड़ सकती हो, यदि तुम ठान लोतो तूफान कापथ मोड़ सकती होऔर, यदि तुम ठान लोतो चंद्रयान में भीअपना नाम बढ़ा सकती हो ।
DR. HEENA VIJAYKUMAR GAVIT : Sir, I wanted to know from the Minister how they are going to fill in the training gap. It is because we see that there is a large number of women farmers but the number of those trained is very less.
My second supplementary is this: my constituency falls in a tribal area; there are more women involved in the farming activity, whether it is farm or non-farm activity. The Mahila Sashaktikaran Pariyojna is being implemented under the Maharashtra State Rural Livelihood Mission, named, UMED which is a part of this Mission. There are other organisations also in my district like Krishi Vigyan Kendra. There are some NGOs which are doing really good work in the field of agriculture training.
I would like to know from the hon. Minister whether the Government is also planning to include such other institutes or organisations for training and capacity building of the women farmers.
कृषि और किसान कल्याण मंत्री; ग्रामीण विकास मंत्री तथा पंचायती राज मंत्री (श्री नरेन्द्र सिंह तोमर) : माननीय अध्यक्ष महोदय, हिना जी का प्रश्न निश्चित रूप से बहुत ही अच्छा है, क्योंकि हम सब इस बात को जानते हैं कि हर क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी होनी चाहिए । कृषि क्षेत्र हम सबके लिए महत्वपूर्ण है, इसलिए स्वाभाविक रूप से उसमें भागीदारी और बढ़े, यह हमारी बहन की चिंता है ।
अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से माननीय सदस्या को बताना चाहता हूं कि दीन दयाल उपाध्याय राष्ट्रीय आजीविका मिशन के माध्यम से सरकार पूरे देश में महिलाओं को आजीविका उपलब्ध कराने का काम कर रही है । देश में अभी लगभग 54 लाख से अधिक स्व-सहायता समूह हैं, जिनसे हमारी पांच करोड़ से अधिक बहनें जुड़ी हुई हैं । इसी योजना का एक उप-घटक है - महिला किसान सशक्तीकरण परियोजना । इस परियोजना में सरकार लगातार चिंता से काम कर रही है और अभी तक 35 लाख से अधिक बहनें इससे जुड़ चुकी हैं और लाभान्वित हो चुकी हैं ।
महोदय, इस प्रकार की प्रक्रिया तीन वर्ष तक चलती है और इससे निश्चित रूप से समुदाय में जागृति होती है, महिलाओं में सक्षमता खड़ी होती है और एसएचजी भी क्षमतावान होते हैं । जो अनुभव इनकी दृष्टि से आया है, उस अनुभव के आधार पर राज्य आजीविका मिशनों ने केन्द्र सरकार के साथ मिलकर यह तय किया है कि अब आने वाले कल में हम 34 लाख बहनों को महिला किसान सशक्तीकरण परियोजना से जोड़ेंगे ।
जहां तक प्रशिक्षण का सवाल है, तो प्रशिक्षण एक निरन्तर प्रक्रिया है । जब एसएचजी को आरम्भ में एकजुट किया जाता है, तभी से प्रशिक्षण की प्रक्रिया प्रारम्भ होती है और प्रशिक्षण जब तक पूरा नहीं होता, तब तक एसएचजी का काम निश्चित रूप से आगे बढ़ता । मैं अपनी मान्यता और अनुभव के आधार पर यह कह सकता हूं कि इस पूरे प्रोजेक्ट की उपलब्धि का अगर कोई मुख्य प्राण है, तो वह प्रशिक्षण ही है । अत: प्रशिक्षण को और गति प्रदान की जाएगी ।
HON. SPEAKER: Shri Kuldeep Rai Sharma -- Not present.
SUSHRI S. JOTHIMANI : Hon. Speaker, thank you for giving me this opportunity. I would like to know from the hon. Minister, through you, whether the Ministry is intending to create any Special Farmers’ Group on the lines of Self-Help Group to support women farmers in the field of agriculture and milk production by providing financial assistance and training.
श्री नरेन्द्र सिंह तोमर: माननीय अध्यक्ष महोदय, मैंने यह संख्या आपको बताई कि 5 लाख 54 हजार के लगभग एसएचजीज़ पूरे देश में हैं । ये सिर्फ स्वसहायता समूह नहीं हैं । जैसे-जैसे इनकी क्षमता बढ़ती है, ठीक उसी प्रकार से हम लोग इनका कलस्टर बनाते हैं और कलस्टर को अलग से सहायता भी देते हैं, बैंक से भी लिंक कराते हैं । मुझे इस बात की प्रसन्नता है कि अभी तक अगर एसएचजी के बैंक का लिंक देखेंगे, तो लगभग 2.25 लाख करोड़ रुपया बैंक से एसएचजीज़ को ऋण मिला है । एसएचजीज़ ठीक प्रकार से काम कर रहे हैं और इनका एनपीए का प्रतिशत देखें तो वह 2.18 प्रतिशत है ।
माननीय अध्यक्ष : श्रीमती मीनाक्षी लेखी जी ।
श्रीमती मीनाक्षी लेखी : माननीय अध्यक्ष जी, मेरा माननीय मंत्री जी से प्रश्न है कि क्या स्किल ट्रेनिंग मंत्रालय के साथ आपका कोई टाई-अप है, जिसके माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों के अंदर स्किल डेवलपमेंट सैंटर्स, जो खास तौर पर कृषि को बढ़ाने के लिए किए जा रहे हों?
श्री नरेन्द्र सिंह तोमर: माननीय अध्यक्ष महोदय, स्वसहायता समूह एक अलग परियोजना है, जो एनआरएलएम के अंतर्गत हम लोग करते हैं । जहां तक स्किल डेवलपमेंट का सवाल है, तो आपके और सारे देश के ध्यान में है कि जब से श्री नरेन्द्र मोदी जी ने काम संभाला है, तब से उन्होंने स्किल डेवलपमेंट को एक अभियान के रूप में लिया और अलग से एक मिनिस्ट्री बनाई । स्किल डेवलपमेंट मिनिस्ट्री तो पूरे देश में, ग्रामीण क्षेत्र, शहरी क्षेत्र आदि सब जगह काम कर रही है । लेकिन इसके अलावा भी मैं अपने मंत्रालय की दृष्टि से बताता हूं कि इसी परियोजना के अंतर्गत स्किल डेवलपमेंट के लिए काम होता है और डीडीयूजीकेवाई एक उप घटक योजना है, इस योजना के अंतर्गत गत् 5 वर्षों में ग्रामीण क्षेत्र के नौजवानों ने 8 लाख की संख्या में प्रशिक्षण लिया और उनमें से लगभग 5 लाख को नौकरी मिल गई ।
महोदय, इसी प्रकार से एक दूसरा संस्थान है, जिसको बैंक और ग्रामीण विकास मंत्रालय दोनों मिलकर संचालित करते हैं - ग्रामीण रोजगार प्रशिक्षण संस्थान । आरएसईटीआई बैंकों के साथ मिलकर काम करते हैं और प्रति जिले में 1 करोड़ रुपये की सहायता ग्रामीण विकास मंत्रालय देता है । बैंक्स और बाकी प्रशिक्षक मिलकर उनको स्वरोजगार की ट्रेनिंग देते हैं और मुझे यह कहते हुए खुशी है कि आरएसईटीआई के माध्यम से भी 21 लाख बच्चों ने प्रशिक्षण लिया और लगभग 15 लाख बच्चे ऐसे हैं, जिन्होंने अपना स्वरोजगार स्थापित किया है ।
(Q. 424) माननीय अध्यक्ष : श्री कपिल पाटिल जी ।
श्री कपिल मोरेश्वर पाटील : अध्यक्ष महोदय, मेरे सवाल का जवाब माननीय मंत्री महोदय ने अच्छी तरह से दिया है, लेकिन मैं किसानों के हित में एक सवाल पूछना चाहूंगा । अभी फिलहाल केंद्रीय बजट में जीरो बजट कृषि की बात कही गई है और अभी तक कृषि क्षेत्र में किसान जो खेती करते थे, उनको जो उर्वरक सप्लाई होता था, वह उर्वरक सप्लाई करने वाली कंपनियों को डायरेक्ट सब्सिडी दी जाती थी । अगर हमें किसानों को जीरो बजट किसानी की तरफ आकर्षित करना है तो जीरो बजट किसानी जब किसान करेगा तो उसको उर्वरक की जरूरत नहीं पड़ेगी ।
मेरी आपके माध्यम से सरकार से मांग है कि अगर किसान उर्वरक नहीं डालता है तो उतनी ही मात्रा में उर्वरक कम लगेगा और जीरो बजट किसानी करने में उर्वरक की जरूरत नहीं होगी । इसलिए जो किसान जीरो बजट कृषि की तरफ जाता है, तो उर्वरक की सब्सिडी किसान के खाते में डायरेक्ट देने के बारे में क्या सरकार विचार कर रही है? अगर कर रही है तो उसका विवरण दें ।
SHRI D.V. SADANANDA GOWDA:Sir, practically, the main Question pertains to the gap between demand and supply. After hon. Prime Minister, Shri Narendra Modi, took charge of the Government, he has given much importance as far as farmers’ issues are concerned, specially with regard to the supply of fertilisers; and special initiatives are being taken right from neem coating to curtailing deviations for other areas. He wanted to see that farmers totally are directly benefitted from these things.
Now, fertilisers are given under DBT. Only after the fertilisers are given to the farmers, subsidies will be released. All such steps are taken.
Today, before giving answer to the hon. Member’s Supplementary, I would like to place on record that my Ministry has come up with a new dashboard. I can show the dashboard to all the hon. Members so that they can all see as to how much fertilisers are being produced. There are four dashboards which are being included in it. There is one dashboard for the Department of Fertilisers; then there is the State dashboard; there is the Collector Dashboard, the Company Dashboard and the Market Dashboard. In respect of each State, one can see the availability of urea, transport and other things. As there is no network inside the House, I am not able to show them. I just want to show that there are Dashboards.
As far as issues raised by the hon. Member are concerned, certainly zero farming is one of the areas of concern of this Government. Already we have linked it with Aadhaar and the Soil Health Card which have been launched in POS Version 3. Totally, the minimum usage of fertilisers is being aimed at by this Government. We are giving importance for production of other fertilisers also. We feel that, after getting the Soil Health Card, if the farmer comes to the conclusion to use minimum fertilisers day-by-day, then certainly, it will be of benefit to him.
We are going one step ahead in this regard. Currently, NITI Aayog is examining this issue. A Committee has been formed to work out the modalities on how to transfer the subsidy directly to the farmers. This is one of the areas of concern where the subsidy will be directly credited to the account of the farmer and he can make minimum use of fertilisers in future. Thus, day-by-day, there will be a reduction in the usage of fertilisers which is the aim of this Government.
श्री कपिल मोरेश्वर पाटील : अध्यक्ष महोदय, मेरा बहुत अच्छा सवाल था, लेकिन उसका जवाब बराबर नहीं मिला है । मेरा अनुरोध है कि सरकार को इस बारे में जरूर सोचना चाहिए क्योंकि किसानों के हित का यह सवाल है ।
महोदय, मेरा दूसरा प्रश्न है कि हमारे देश में यूरिया का उत्पादन कम था, इसलिए हमारे तत्कालीन मंत्री अनंत कुमार जी ने इसी सभा गृह में यह घोषणा की थी कि ईरान और भारत के बीच में जॉइंट वेंचर के तहत ईरान में उर्वरक का कारखाना खोला जाएगा । मेरे प्रश्न के जवाब में बताया गया है कि हमारे यहां उर्वरक का उत्पादन किसानों की मांग के हिसाब से हो रहा है । मैं सरकार से जानना चाहता हूं कि क्या हमारे देश में ईरान से उर्वरक आ रहा है? अगर आ रहा है तो हमारे देश में जो उर्वरक बन रहा है, क्या उसकी कीमत उससे ज्यादा है या उसी कीमत पर किसानों को उर्वरक दिया जा रहा है?
SHRI D.V. SADANANDA GOWDA: Practically, because of various issues pertaining to Iran, we have not taken up this issue further at this stage and there is no proposal also to take it forward but at the same time, the vision of the hon. Prime Minister is that fertilisers should be manufactured 100 per cent indigenously in our country. At present, nearly 75 per cent of the fertilisers are indigenously manufactured and we are importing about 25 per cent of urea and other fertilisers from other countries.
So, now, the Prime Minister has taken a view that five fertilizer factories, which were shut down earlier, should be revived – Gorakhpur, Sindri, Barauni, Ramgundam, and Talcher.
So, if we are able to complete the revival of these fertilizer factories, automatically, 12.7 lakh metric tonnes of production from each of these factories, will come out, and we will be self-sufficient in fertilizers. We need not depend upon any external agencies or other countries as far as fertilizers are concerned.
SHRI GAURAV GOGOI : Thank you, hon. Speaker Sir, for giving me this opportunity.
My question, through you, is related to the shortage of urea in North East. There is only one gas-based fertilizer plant in North-East, which is the Brahmaputra Valley Fertilizer Corporation Limited. Its production is not to the maximum because Unit – IV of the Corporation is not producing fertilizers. I had also apprised the Ministry in the previous Government about Unit – IV not being utilised. I want to know, what plans does the Government have to increase the production through Unit – IV of the Brahmaputra Valley Fertilizer Corporation Limited. Thank you.
SHRI D.V. SADANANDA GOWDA: Sir, as rightly said by my friend, practically, Unit – IV of the BVFCL is already at final stage. We hope, in the near future, it will come into operation. I want to visit it after completion of this Budget Session. I will also invite you. So, totally, we are going to get it operated as early as possible. Now, the work is in progress.
(Q. 425) श्री प्रवीन कुमार निषाद : माननीय अध्यक्ष जी, मुझे आपने बोलने का अवसर प्रदान किया, इसके लिए मैं आपको धन्यवाद देना चाहता हूं । मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से यह पूछना चाहता हूं कि संविधान आदेश, 1950 के तहत जितने भी प्रदेश थे, उन सभी प्रदेशों को सोशली, इकोनॉमिकली, एजुकेशनली, उनकी जनेरिक और ओरिज़न के आधार पर जातियां तय की गई थीं। उसके आधार पर किस जाति को पिछड़ी जाति में रखा जाएग और किस जाति को अनुसूचित जाति में रखा जाएगा, यह आदेश दिया गया था । Census of India Manual, 1961, Part – I for Uttar Pradesh, Appendix ‘F’ for Uttar Pradesh, Annexure 18 के तहत क्रमांक 24 पर चमार की उपजाति धुसिया, झुसिया और जाटव हैं, इनको आज तक अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र दिया जाता है । उसी एनेक्सचर 18 के क्रमांक 53 के अनुसार मझवार की उपजाति माझी, मुजाभी, राजभर, मल्लाह, केवट, गौड़, मझवार, कश्यप आदि को भी अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र मिलना चाहिए । दिल्ली में वर्ष 1993 से पहले इनको मल्लाह का सर्टिफिकेट मिलता था और ये अनुसूचित जातियों की सुविधाओं के हकदार थे । उत्तर प्रदेश में भी वर्ष 1992 से पहले इनको सुविधाएं दी जाती थीं ।
माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी से यह पूछना चाहता हूं कि वर्ष 1992 और 1993 से इन जातियों को अनुसूचित जातियों का हकदार मानकर ये सारी सुविधाएं प्रदान की जाती थीं । मैं उत्तर प्रदेश सरकार, माननीय योगी आदित्यनाथ जी और माननीय मोदी जी को धन्यवाद देना चाहता हूं कि फिर से इन जातियों के सामाजिक, राजनैतिक और आर्थिक स्तर को देखते हुए धारा 13 का प्रयोग करके इन जातियों को पिछड़ी जाति से निकालकर अनुसूचित जाति की सुविधा मुहैया कराने का कार्य किया गया है । लेकिन वर्तमान समय में इनको अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र नहीं मिल रहा है । उस आधार पर जो प्रवासी हैं और जो दिल्ली में आकर बस रहे हैं, उनको वर्तमान समय में अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र नहीं मिल रहा है और न ही उत्तर प्रदेश में दिया जा रहा है ।
श्री रतन लाल कटारिया : माननीय अध्यक्ष महोदय, किसी भी जाति को एससी या ओबीसी का दर्जा देने के लिए भारत के संविधान के आर्टिकल 341 के अंतर्गत एक सेन्ट्रल लिस्ट जो 08.09.1993 को जारी हुई थी, उसके अनुसार प्रदान किया जाता है । भारत के महामहिम राष्ट्रपति महोदय ही किसी भी जाति को भारत की संसद के द्वारा पारित किए जाने पर उस लिस्ट के अंदर सम्मिलित करते हैं ।
जहाँ तक दिल्ली का प्रश्न है, केवल उन्हीं शेड्यूल कास्ट्स और ओबीसीज़ के लोगों को यह सुविधा मिल सकती है, जो उस समय वहाँ के स्थायी निवासी हैं । अगर कोई माइग्रेट करके आया है तो सर्टिफिकेट जारी करने का प्रोविजन है, लेकिन वे सुविधाएँ जो एस.सीज़. या ओबीसीज़ को मिलती हैं, उन सुविधाओं को उसके अंदर सम्मिलित नहीं किया जा सकता ।
श्री प्रवीन कुमार निषाद : अध्यक्ष महोदय, मैं आपके जवाब से सहमत हूँ, लेकिन एक बात है कि पिछले सत्र में, वर्ष 2014-15 की सरकार में माननीय राम चरित्र निषाद जी इस सदन के साथी थे और वह अनुसूचित जाति के कोटे से मछलीशहर संसदीय सीट से जीत कर इस सदन में पहुँचे थे । मैं भी सेम जाति का हूँ- प्रवीण कुमार निषाद और मैं जनरल सीट से जीत कर आ रहा हूँ । यह जातियों की विभिन्नताएँ दूर होनी चाहिए । पूरे देश और प्रदेश में जिस प्रकार किसी वस्तु पर जी.एस.टी. एक बराबर लगता है, उसी तरह जातियों को भी उनका अधिकार एक बराबर पूरे देश और प्रदेश में मिलना चाहिए । यह मेरी माँग है ।
श्री रतन लाल कटारिया : अध्यक्ष जी, माननीय सदस्य ने जो सुझाव दिया है, इसके ऊपर विचार किया जाएगा ।
(Q. 426) श्री हेमन्त पाटिल : अध्यक्ष महोदय, सर्वप्रथम मैं आपको धन्यवाद देता हूँ कि हम जैसे नए आए हुए सदस्यों को आप काफी प्रोत्साहन दे रहे हैं । मैं हिंगोली आदिवासी क्षेत्र से आया हूँ । मेरे क्षेत्र में हल्दी, मौसम्बी, सोयाबीन की फसल बड़े पैमाने पर होती है । ह्यूमन डेफिशिएंसी इंडेक्स में मेरा क्षेत्र महाराष्ट्र में सबसे पिछड़ा क्षेत्र है । क्या इसके लिए कोल्ड स्टोरेज, इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए सरकार कुछ प्रावधान कर रही है?
मेरा दूसरा प्रश्न है कि कोल्ड स्टोरोज के लिए काफी मात्रा में इलेक्ट्रिसिटी लगती है । इलेक्ट्रिसिटी के जो रेट लगाए हुए हैं, वे कमर्शियल होते हैं । अपनी सरकार फार्मर प्रोड्यूसर कम्पनी को काफी प्रोत्साहन दे रही है । फार्मर प्रोड्यूसर कम्पनी के लिए जो इलेक्ट्रिसिटी की दर है, वह कमर्शियल न लगाते हुए क्या इसमें कुछ सब्सिडी दी जाएगी? घरेलू दर लगाई जाएगी क्या?
माननीय अध्यक्ष : प्रश्न 433 और 434, इन दोनों प्रश्नों को इस प्रश्न के साथ क्लब किया जाता है । एक-एक सवाल वे माननीय सदस्य भी पूछ लें । श्रीमती अन्नपूर्णा देवी, आप प्रश्न पूछ लीजिए ।
(Q. 433 & 434) श्रीमती अन्नपुर्णा देवी : माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं अपने क्षेत्र के बारे में माननीय मंत्री जी से यही पूछना चाहूँगी कि कोल्ड स्टोरेज की बात अभी माननीय सदस्य ने की है । मेरे यहाँ भी सब्जी का काफी उत्पादन होता है तो क्या आप किसानों के हित में सब्जी उत्पादन में कोल्ड स्टोरेज के साथ-साथ कुछ प्रोसेसिंग प्लांट्स को भी लगाने पर विचार करेंगी?
माननीय अध्यक्ष : श्री गिरधारी यादव, आप भी एक प्रश्न पूछ लें ।
श्री गिरिधारी यादव : माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से एक प्रश्न पूछना चाहता हूँ । उन्होंने जो उत्तर दिया है, उसमें कहा है कि मुझे भ्रष्टाचार की कोई शिकायत प्राप्त नहीं हुई है । यह बड़े आश्चर्य की बात है कि इतना बड़ा मंत्रालय है और इनको आज तक भ्रष्टाचार की कोई एक शिकायत प्राप्त नहीं हुई है, इसलिए लगता है कि यह भ्रामक उत्तर है ।
श्रीमती हरसिमरत कौर बादल : सर, मैं आखिरी वाले सवाल से शुरू करूँगी, ताकि मैं भूल न जाऊँ ।
माननीय अध्यक्ष : आप भी संक्षिप्त में उत्तर दे दीजिए । बारह बजने वाले हैं ।
श्रीमती हरसिमरत कौर बादल : मैं सदन को बताना चाहूँगी कि यह मोदी जी की सरकार है । यह भ्रष्टाचार वाली पुरानी सरकार नहीं है । बहुत कुछ इस सरकार ने बदला है । मुझे पता नहीं कि माननीय सांसद को आश्चर्य क्यों हो रहा है । इस सरकार ने पहले दिन ही आकर सबसे पहले जो कार्रवाई की, वह कालेधन के खिलाफ एस.आई.टी. ही नहीं बनाई, बल्कि मोदी जी ने कहा कि ‘न खाऊँगा, न खाने दूँगा और न ही खाने वाले को छोड़ूँगा ।’ यही कारण है कि पाँच सालों में एक भी मंत्री के ऊपर कोई दाग भ्रष्टाचार का नहीं लगा । …(व्यवधान)
12.00 hrs …(व्यवधान) पुरानी सरकार के समय में रोज नित नई भ्रष्टाचार से संबंधित चीजें सामने आती थीं।…(व्यवधान) इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं है ।…(व्यवधान) हमें इस बात का गुमान है कि हमने बेदाग सरकार चलाई है ।…(व्यवधान) जिसका हक बनता है, उसे हमने दिया है और कोई भ्रष्टाचार की बात हमारी सरकार में नहीं है ।…(व्यवधान)
…(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : आप एक मिनट ठहरिए । मैं व्यवस्था दे रहा हूँ ।
…(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : माननीय सदस्य, आपको मेरी बात पर अविश्वास क्यों होता है? मैं यहाँ सदन में जो व्यवस्था देता हूँ, मैंने अभी तक उसकी शत-प्रतिशत पालना की है ।
माननीय सदस्य, क्या मैंने उस व्यवस्था की पालना की है या नहीं की है?
श्री अधीर रंजन चौधरी (बहरामपुर): महोदय, बिल्कुल की है और इसीलिए हम बार-बार कह रहे हैं ।…(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : मैं बोल रहा हूँ । आप मुझे बोलने तो दीजिए । मैं आपको मौका दूँगा ।
…(व्यवधान)