Lok Sabha Debates
Further Discussion On The Motion Of Thanks On The President''S Address, Moved By ... on 9 February, 2021
Seventeenth Loksabha an> Title: Further discussion on the Motion of Thanks on the President's Address, moved by Smt. Locket Chatterjee and seconded by Dr. Virendra Kumar on 8th February 2021.
माननीय अध्यक्ष : श्रीरमेश बिधूड़ीजी ।
…(व्यवधान)
श्री रमेश बिधूड़ी (दक्षिण दिल्ली):धन्यवाद माननीयअध्यक्ष जी । आपने मुझेमहामहिम राष्ट्रपतिजी के अभिभाषणपर लॉकेट चटर्जीजी के द्वाराप्रस्तुत प्रस्तावके समर्थन मेंबोलने का मौकादिया है ।
SHRI N. K. PREMACHANDRAN (KOLLAM): Sir, please allow me.
माननीय अध्यक्ष : एन.के.प्रेमचन्द्रनजी, मैंआपको बोलने कामौका दूंगा ।
श्री रमेश बिधूड़ी : माननीयअध्यक्ष जी, महामहिमराष्ट्रपति जीका जो वक्तव्यहोता है, वहनिश्चित रूपसे सरकार कालेखा-जोखा, उसकारोडमैप और सरकारने कितने अच्छेउपलब्धि के कार्यकिये हैं, उनकाप्रस्तुतीकरणहोता है । राष्ट्रपतिजी के अभिभाषणको देखने केबाद निश्चितरूप से स्पष्टहोता है, जिसकोपूरी दुनियाने भी मानाहै कि कोविडके दौरान पूरीदुनिया में जोहाहाकार था, उसकोविड के दौरानपूरी दुनियाके हाहाकार केकारण भारत मेंभी हाहाकार मचगया था । हमारेदेश के लोकप्रियप्रधान मंत्रीमाननीय मोदीसाहब ने 24 मार्चको देश मेंलॉकडाउन लगाया, जिसकाकल कांग्रेसके एक बड़े वरिष्ठनेता हैं, जोयह कह रहे थेकि लॉकडाउन केबगैर भी चीजोंको काबू मेंकिया जा सकताथा । वे ये भूलरहे हैं कि130करोड़की आबादी वालेदेश में निश्चितरूप से न तोहमारे पास पीपीई-किटथी, न वेंटीलेटरथे, न हमारेपास किसी भीप्रकार का ऐसाकोई साजो-समानउस व्यवस्थाको कंट्रोल करनेके लिए था ।लॉकडाउन के दौरानमाननीय प्रधानमंत्री जी नेदेश के लोगोंको, उनकेमन से भय निकलेऔर देश के लोगोंमें विश्वासपैदा हो किभारतके लोग इस कोरोनासे लड़ सकतेहैं, ऐसीअपीलें भी देशवासियोंसेकी । हम सब लोगोंका सौभाग्य हैकि दैवी शक्तिके रूप मेंहमें देश केप्रधान मंत्रीमोदी साहब मिलेहैं । इस बातको लेकर मुझेकहने में कोईसंकोच नहीं होताहै । उसके लिएमैं उदाहरण देसकता हूं ।
वर्ष2014 मेंजब सरकार बनीतो माननीय प्रधानमंत्री जी नेकहा था कि यहगरीबों को समर्पितसरकार है । यहकहने के बाददेश में जन-धनखाते शुरू किएगए थे । गरीबपरिवार का बेटा, गरीबपरिवार की बेटीऔर उसकी माँबैंक की दहलीजपर नहीं चढ़पाती थी । इनलोगों ने 70 सालोंतक राज किया । एक परिवारने तो 55 सालोंतक राज किया, लेकिन, गरीबबैंक की दहलीजनहीं देख सकताथा । जन-धनखाते उन गरीबोंके खुले, जिनकेपास एक पैसाजेब में नहींथा । केवल आधारकार्ड के आधारपर उनके खातेखोले गए । पहलेसे ही माननीयप्रधान मंत्रीजी की दूरदृष्टि थी । हमारे देशमें खेलो इंडियाखेलो, फिटइंडिया, राष्ट्रीयपोषण अभियान, इसप्रकार की योगा, इसप्रकार की योजनाएं, जोवर्ष 2015 मेंमाननीय प्रधानमंत्री जी नेलागू की, इनसभी चीजों सेमनुष्य की इम्यूनिटीपावर और ताकतबढ़ती है । उसकेबढ़ने के कारणही हमारे देशके लोगों नेउस संघर्ष कोझेला । संघर्षको झेलते हुएउसी पीरियड में, एकमहीने में जबलॉकडाउन हुआथा, तब माननीयप्रधान मंत्रीजी ने लोगोंसे कहा कि उजियारेकी तरफ चलिए ।
अपने घरों की छत पर दीए जलाइए,चंद लोगों को छोड़कर जो क्रिटिसाइज़ करते हैं, देश के सवा सौ करोड़ लोगों ने माननीय प्रधान मंत्री जी के आग्रह पर दीप प्रज्वलित करके पूरे देश को अंधियारे से उजियारे की तरफ ले जाने का काम किया है । जिस देश में न पीपीई किट्स थीं, न ही वेंटिलेटर्स थे, न ही वैक्सीनेशन की व्यवस्था थी,वहां 2,200 लैब्स के अंदर, उसी दौरान दो महीने के अंदर वेंटिलेटर्स तैयार कराकर,उसी दौरान पीपीई किट्स तैयार कराकर और देश के लोगों को कोरोना वायरस से लड़ने के लिए उनको ताकत दी है । इसीलिए, मैं यह कहना चहता हूं कि उस दौरान जो गरीब लोग थे, उन गरीब लोगों को खाना कहां से मिले, बेचारे लेबर क्लास के लोग बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन के काम में मजदूरी करते थे । माननीय प्रधान मंत्री जी ने उन सभी के खातों में 500-500 रुपये प्रतिमाह के हिसाब से डाले हैं, ताकि उन लोगों की जीविका चलती रहे, यह व्यस्था की है । इसीलिए, मैं यह कहता हूं कि वह दैवीय शक्ति हैं । उनकी दूरदृष्टि थी । वरना इसी देश के एक प्रधान मंत्री ने कहा था कि दिल्ली से 100 रुपये चलते हैं, लेकिन गरीब के खाते में 15 रुपये पहुंचते हैं । यह 100 के 100 रुपये गरीब के खाते में पहुंचे,उनका जीवन-यापन सुचारू रूप से चलाने के लिए जनधन योजना के खातों में पैसे दिए गए हैं । ऐसे 20 करोड़ जनधन खाते थे । उन 20 करोड़ खातों में पैसा पहुंचाने का काम माननीय प्रधान मंत्री जी ने किया है ।
माननीय अध्यक्ष जी, मैं दूरदृष्टि की बात बताता हूं । जब मैंने योगा का जिक्र किया है, वह इसी का ही परिणाम है । मैं आपकी जानकारी में एक विषय लाना चाहता हूं कि हमारा देश हिन्दू संस्कृति,भारत की जो संस्कृति है – ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया’ । अर्थात् सभी सुखी रहें, सभी निरोगी रहें, यह भारत की संस्कृति है । पूरी दुनिया इसको फॉलो करती है । हमारे देश के माननीय प्रधान मंत्री जी ने सभी सुखी रहें, सभी निरोगी रहें और 150 देशों को वैक्सीन भेजकर उन लोगों को बीमारी से लड़ने के लिए बेफिक्र करने का काम किया है । केवल भारत में ही नहीं,बल्कि दुनिया भर के देशों में वैक्सीन भेजने का काम किया है । यह हमारा ही मंत्र है – ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ । हमारे माननीय प्रधान मंत्री जी पूरे विश्व को कुटुम्ब मानते हैं । लेकिन मेरे सामने बैठे हुए बंधुवर वे केवल एक परिवार को ही पूरा कुटुम्ब मानते हैं । उनकी सोच में यह अंतर है । इसीलिए ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की पद्धति को आगे बढ़ाते हुए माननीय प्रधान मंत्री जी ने वह साहसिक कार्य किया है । उसे पूरी दुनिया ने सराहा है, उन सभी के नाम मेरे पास है । मैं बाद में आपके समक्ष प्रस्तुत करूंगा ।
माननीय अध्यक्ष जी, कुछ लोगों की राजनीतिक ज़मीन खिसक गई है । कुछ लोगों के पास कुछ बचा नहीं है । वह किसानों के नाम से विलाप करते फिर रहे हैं । ऐसे लोग जो किसान आंदोलन के नाम से अपनी आजीविका और रोज़ी-रोटी चलाते हैं,उनका समर्थन करने के लिए उनके पीछे लगे हुए हैं । इन्हीं किसानों के लिए ये लोग लगातार 55 सालों तक चिल्लाते रहे कि हमारी मांगें मानी जानी चाहिए । श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी की सरकार थी ।
वर्ष 2004 फरवरी में स्वामीनाथन आयोग का गठन किया गया था । उस कमीशन का गठन करने के बाद, कमीशन ने जितने भी कृषि विशेषज्ञ थे,कृषि अनुसंधान थे, कृषि के संगठन थे, उन्होंने सबसे पूछताछ और तहकीकात करने के बाद सोचा कि किसानों की आमदनी किस प्रकार से डेढ़ से दो गुनी हो जाए, उन्होंने प्रयास करके रिपोर्ट तैयार की थी । उस रिपोर्ट को तैयार करने के बाद, जब वर्ष 2007 में इन लोगों की सरकार थी, जो आज किसानों के नाम से विलाप करते फिर रहे हैं । इनसे पूछिए कि उस स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट का क्या हुआ? इन्होंने वर्ष 2009 में स्वामीनाथन आयोग के साथ मीटिंग रखी थी । इन्होंने वर्ष 2010 में स्वामीनाथन आयोग के साथ मीटिंग रखी थी । वर्ष 2012 में स्वामीनाथ आयोग के साथ मीटिंग रखी, इन्होंने वर्ष 2013 में मीटिंग रखी और वर्ष 2014 में फरवरी माह में मीटिंग रखी । अरे, पांच-पांच बार मीटिंग करने के बाद स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट का क्या हुआ? उन सिफारिशों का क्या हुआ? मैं कांग्रेस पार्टी के लोगों से यह पूछना चाहता हूं । अगर आप लोग गरीब किसानों के इतने ही हितैषी थे, जो आज किसानों के नाम पर विलाप कर रहे हैं ।…(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष जी, जब से माननीय मोदी जी के नेतृत्व में बीजेपी की सरकार बनी है,मोदी जी की सरकार बनने के बाद उसी स्वामीनाथन आयोग की 201 सिफारिशें,स्वामीनाथन आयोग ने सभी कृषि अनुसंधानों से,सभी कृषि विशेषज्ञों से, सभी किसान संगठनों से जानकारी प्राप्त करने के बाद, उस कमेटी के अंदर जहां पर बिल का प्रारूप तैयार किया गया है और उस बिल के प्रारूप को तैयार करने के बाद, स्वामीनाथन आयोग की 200 सिफारिशों को एक्सेप्ट करते हुए यह बिल बनाकर कानून के रूप में पार्लियामेंट में आया है, ताकि किसानों की आमदनी दोगुनी हो जाए । उस स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट ने यह करने का काम किया था । मैं पिछली बार भी लोक सभा का मेंबर था, मैं दिल्ली में एमएलए हुआ करता था, तब एक ही बात होती थी कि अगर स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू हो जाए, तो किसानों की आमदनी दोगुनी हो जाएगी ।
आप तो स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू कर नहीं पाए । आप बिल लेकर नहीं आ पाए । मोदी साहब लेकर आ गए तो इनके पास अब कुछ बचा नहीं है इसलिए लोग किसानों के नाम का विलाप करते हुए घूम रहे हैं । माननीय प्रधान मंत्री जी ने कहा था कि वर्ष 2014 से लेकर वर्ष 2019 के बीच की सरकार द्वारा वर्ष 2021 तक किसानों की आय को डेढ़ गुना किया जाएगा तो यह केवल कहा नहीं गया, बल्कि माननीय प्रधान मंत्री जी ने करके दिखाया है । किसानों की आय डेढ़ गुना करके दिखाई है । मैं विस्तार से बता रहा हूँ,क्योंकि इनकी याददाश्त थोड़ी कमजोर हो सकती है । ये 50 से 60 साल तक सत्ता भोगते रहे, लेकिन इन्होंने उन लोगों की मांगों पर कभी ध्यान नहीं दिया । अगर उनकी मांगों पर ध्यान दिया है तो माननीय प्रधान मंत्री जी ने दिया है । वर्ष 2007 से वर्ष 2014 तक जब इनकी सरकार रही तो इनके डीएनए के मुताबिक ये जो वायदा करते थे, उसे केवल चुनाव के दौरान बोलते थे, कभी पूरा नहीं करते थे ।
सबसे पहले ‘फसल बीमा योजना’लाई गई । दो परसेंट,डेढ़ परसेंट की प्रीमियम के ऊपर फसल बीमा करने के बाद किसान को निश्चिंत कर दिया गया कि चाहे बाढ़ आ जाए, ओले पड़ जाए, सूखा पड़ जाए या कुछ भी हो जाए, लेकिन अगर किसान डेढ़ परसेंट के आधार पर अपनी फसल का बीमा करवाएगा तो निश्चिंत हो जाएगा । मोदी साहब की सरकार में देश के लोगों ने 17 हजार करोड़ रुपये के बदले में 90 हजार करोड़ रुपये का प्रीमियम ‘फसल बीमा योजना’से प्राप्त किया है । इसलिए किसानों को 17 हजार करोड़ रुपये के बदले में 90 हजार करोड़ रुपये का प्रीमियम दिया गया ।
‘नीम कोटेड यूरिया’,मैं इसलिए दोहरना चाहता हूँ, क्योंकि हर आदमी इस बात को दोहराता है । जब कुछ लोग मंदबुद्धि हो,किसी के समझ में न आए तो ऐसे स्टूडेंट्स को पढ़ाने के लिए बार-बार बताना पड़ता है । इसलिए लोगों को अचम्भा हो रहा होगा कि इन सब चीजों को बार-बार क्यों दोहराया जा रहा है? ‘सॉयल हेल्थ कार्ड’, 83 हजार करोड़ की खाद्य सब्सिडी,जिससे देश में उत्पादन बढ़ा । सर, वर्ष 2013-14 में धान का उत्पादन 2494 लाख मीट्रिक टन था और छ: साल के अन्दर वर्ष 2019-20में बढ़कर वह 3088 लाख मीट्रिक टन हो गया । गेहूँ 1395 लाख मीट्रिक टन था, 1518 लाख मीट्रिक टन वर्ष 2019 के इस टेन्योर में बढ़कर उसकी पैदावार हुई है । तिलहन की पैदावार 5.87 लाख मीट्रिक टन थी जो वर्ष 2014 से बढ़कर वर्ष 2019 में 48.38 लाख हो गई । सर, यह इनके लिए दोबारा सुनने वाली बात है । 5.87 लाख से 48.38 लाख मीट्रिक टन तिलहन की पैदावार इस देश में हुई जो इसी ‘नीम कोटेड यूरिया’से, इसी ‘सॉयल हेल्थ कार्ड’ से और किसानों की इसी बीमा योजना से हुई । इसी प्रकार दलहन 1.45 लाख मीट्रिक टन पैदा होता था । केवल 1.45 लाख मीट्रिक टन पैदा होता था और अब माननीय मोदी जी के नेतृत्व में 73.2 लाख मीट्रिक टन का उत्पादन हुआ है । उनकी इस तरह से आमदनी और जोत बढ़ी । वर्ष 2013-14 से लेकर वर्ष 2019-20 में 2357 लाख हेक्टेयर भूमि पर जोत बढ़ी है । रबी की बुवाई 2541 लाख हेक्टेयर से अधिक हुई और मात्र छ: वर्षों में देश में 31.6 मिलियन टन अनाज का उत्पादन बढ़ा ।
सर, ये जहाँ तक एमएसपी का रोना रोते हैं । एमएसपी के लिए इनसे किसने मना किया है? …(व्यवधान) सर,अभी तो बहुत पीछे हूँ । मैं आपसे माफी चाहता हूँ, मैं पार्टी से निवेदन करना चाहूँगा । सर, अभी तो अधीर रंजन जी को बताना पड़ेगा कि नेहरू जी का नाम क्यों नहीं लिया जाता है ।
माननीय अध्यक्ष : माननीय सदस्यगण, माननीय सदस्यों की एक लंबी सूची है । मैं भी चाहता हूँ कि देर रात्रि तक सदन चले, लेकिन मेरी यह भी अपेक्षा है कि जो माननीय सदस्य अपना वक्तव्य या भाषण देता है और सदन से बाहर चला जाता है, यह उचित बात नहीं है ।
…(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : मैं माननीय सदस्यों से आग्रह करूंगा और भविष्य में यह ध्यान रखूंगा कि जो माननीय सदस्य भाषण देकर चला जाता है, उसे अवसर नहीं मिलेगा ।
…(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : इससे सब सहमत है ।
…(व्यवधान)
श्री रमेश बिधूड़ी : हम 12बजे तक बैठने वाले ही हैं । सर,मैं जानकारी के लिए बताना चाहता हूँ कि वर्ष 2013-14 तक गेहूँ की एमएसपी 1400 रुपए प्रति क्विंटल थी । इसे वर्ष 2020-21 में बढ़ाकर 1975 रुपये प्रति क्विंटल किया गया । 500 रुपये बढ़ाने का काम किया गया । धान की 1310 रुपये थी, जो बढ़ाकर 1868 रुपये की गई । इसमें 43 परसेंट की बढ़ोतरी की गई । मसूर की 2950 रुपये थी जो बढ़ाकर 5100 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से की गई । सर, 2950 से 5100 बिल्कुल दोगुनी की गई । इसी प्रकार से उड़द की एमएसपी 4300 रुपये थी जो बढ़कर 6 हजार हुई । इसी प्रकार से मूंग की 4500 रुपये की एमएसपी हुआ करती थी, जो 60 परसेंट तक बढ़कर 7196 रुपये हुई ।
अरहर की एमएसपी 4300 रुपये थी, वह बढ़कर 6000 रुपये हो गई । सरसों की एमएसपी 3000 रुपये से बढ़ाकर 4650 रुपये की गई । मैं किसान सम्मान निधि के 6000 रुपये का जिक्र नहीं करूंगा । प्रधानमंत्री कुसुम योजना - किसान अन्नदाता के साथ ऊर्जावान भी बने, इसके लिए 20 लाख सोलर पम्प्स देने का लक्ष्य इस सरकार ने रखा है, जिसमें किसान को केवल दस प्रतिशत पैसा देना है । इसमें 60 प्रतिशत सरकार द्वारा सब्सिडी दी जाएगी, 30 प्रतिशत सरकार का योगदान है और मात्र दस प्रतिशत निवेश किसान द्वारा किया जाना है । एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर और किसानों के मामले को छोड़ देता हूं, क्योंकि अब तक इनकी समझ में आ गया होगा,लेकिन आगे मैं आपकी जानकारी में लाना चाहता हूं,कुछ चीजें और बतानी पड़ेंगी । जो किसानों से खरीद हुई, जो यह कहते हैं कि मार्केट में बिकेगा नहीं, पिछली सरकार ने तिलहन की खरीद 3.75 लाख मीट्रिक टन की थी, मोदी सरकार ने 56 लाख मीट्रिक टन तिलहन की खरीद की है । मैं इनको बता देना चाहता हूं कि हमारी सरकार द्वारा एमएसपी के आधार पर कितनी तिलहन की खरीदारी हुई है - कहां चार लाख मीट्रिक टन और कहां 56 लाख मीट्रिक टन । इसी प्रकार से पिछली सरकार ने तीन लाख 74 हजार रुपये के धान व गेहूं खरीदे थे और हमारी सरकार ने आठ लाख करोड़ रुपये के धान व गेहूं की खरीद की है । …(व्यवधान)
सर, अभी तो बहुत कुछ कहना है ।…(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष: माननीय सदस्य, अब आप समाप्त करें ।
श्री रमेश बिधूड़ी : सर, मैंइस मामले कोछोड़ देता हूं । …(व्यवधान) अब मैं इस कानून पर आता हूं, वही कानून जिसका आज ये लोग विलाप करते फिर रहे हैं । मेरे पास माननीय शरद पवार जी की यह चिट्ठी है,वे कृषि मंत्री हुआ करते थे । कृषि मंत्री के रूप में दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री …* और हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री …* साहब को उन्होंने एक चिट्ठी लिखी थी, वह चिट्ठी मैं जरूर पढ़ना चाहूंगा:
“The agriculture sector needs well-functioning markets to drive growth, employment and economic prosperity in rural area of the country. This requires huge investments in marketing infrastructure including cold chain. And for this, private sector participation is essential, for which an appropriate…” …(Interruptions)
सर, आप कह रहे हैं कि मुझे ज्यादा समय नहीं देंगे,लेकिन मुझे ऐसा कहना पड़ रहा है । यह …* साहब की चिट्ठी है, मैं इन सबको बाद में यहां टेबल करना चाहूंगा । इसी प्रकार से …* साहब की स्टेटमेंट है, इसी प्रकार से कांग्रेस पार्टी का यह मेनिफेस्टो है, जो इस पर विलाप कर रहे थे । इसी प्रकार से दिल्ली के अंदर एक विशेष प्राणी रहता है, पंजाब के चुनाव में यह उसका मेनिफेस्टो है । इसके मेनिफेस्टो में वह खुद कहता है कि हम ऐसी मार्केटिंग ओपन करेंगे ।
सर, अब मैं माननीय अधीर रंजन चौधरी जी की बात पर आना चाहता हूं । कल वे बड़े परेशान थे, बार-बार कह रहे थे कि किसान धरने पर बैठे हैं । सर,वहां पर वे लोग बैठे हैं, जो देश को दीमक की तरह चाट रहे हैं । वे किसान नहीं हैं । मैं पूछना चाहता हूं कि किसान संघर्ष समिति के अध्यक्ष कौन हैं?वे सीपीएम के नेता हैं । ऑल इंडिया किसान सभा के मुखिया कौन हैं? वे सीपीआई के नेता हैं । पंजाब किसान यूनियन के प्रमुख कौन हैं? वे सीपीआई से संबंध रखते हैं । ग्रीन पीस इंडिया के निदेशक की साथी रही, जिसे आन्दोलनजीवी कहा गया, वह कौन है, जिस पर भारत सरकार ने बैन लगाया था? …(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष: माननीय सदस्य,जो लोग इस सदन के सदस्य नहीं हैं, उनके नाम मत लीजिए ।
श्री रमेश बिधूड़ी : सर, मैंइसे भी टेबलपर रखना चाहूंगा ।
सर, येकहते हैं किवहां किसान बैठेहैं । हरियाणा-दिल्लीबॉर्डर पर, सिंघुबॉर्डर पर कुंडली, सिरसा, जटिकला, गनौली, जनौली, रोसोई, नांगल, सिंधु, सिंगौला, टीकरी, नरेला– इनगांवों में कोईनहीं बैठा है । ये हरियाणाके गांव हैं । वहां पर तीन-तीनमुख्यमंत्रियोंने पेड लोगोंको लाकर बैठादिया है । इसीप्रकार से, एककिसान गाजीपुरबॉर्डर पर बैठाहुआ है । उसकीअपनी स्टेटमेंटहै, हिन्दुस्तानअखबार में, किमैं इन कानूनोंसे खुश हूं । उसके बाद उनकोपता नहीं क्यामिला कि अबवे वहां परडेरा डालकर बैठेहैं । सर, यहहमारी भारतीयसंस्कृति है । जब माता सीताका हरण रावणने किया था, वहवेश बदलकर कियाथा, वरनायह रावण कीहैसियत नहींथी । इसी प्रकारसे द्रौपदी काचीर हरण हुआ, क्योंकिदुर्योधन नेशकुनी से चालचलवाई थी औरअब किसानों केसाथ …* सामनेबैठे हुए हैं, येचाल चलकर किसानोंको मिसगाइड करनेका प्रयास कररहे हैं ।
सर, मैंआपके सामने बतादेना चाहता हूं, अधीरबाबू बड़े परेशानथे कि आप नेहरूसाहब का नामनहीं लेते हैं, आपइंदिरा जी कानाम नहीं लेतेहैं । आप तोरोज पटेल जीका नाम लियाकरते थे और60 सालतक पटेल साहबका नाम लेतेरहे । जिस पटेलसाहब का कांग्रेसके 1942-43 केअधिवेशन में, जबकांग्रेस केअध्यक्ष अब्दुलसाहब होते थेऔर दूसरे विश्वयुद्ध के बादजब यह तय हुआकि हम यह देशछोड़कर जा रहेहैं, लेकिनहमारी आर्मीयहां पर राजकरेगी । यह तयहुआ था, इसबात को कांग्रेसने एक्सेप्टकर लिया । वीरसावरकर जी नेइसका विरोध कियाकि तुम्हारेरहने पर अगरआर्मी रूल करेगीतो हम इसे एक्सेप्टनहीं करेंगे, लेकिनउस टाइम यहतय हुआ कि कांग्रेसका जो भी अध्यक्षहोगा, वहीप्रधानमंत्रीबनेगा ।
सर, उससमय देश केअंदर कांग्रेसकी 15 कमेटियांथीं । गांधीजी ने 13 कमेटियोंसे प्रस्तावमंगवाए और 13 कमेटियोंने कहा कि सरदारपटेल को कांग्रेसका अध्यक्ष होनाचाहिए, तीनने कोई कमेंटनहीं दिया थाऔर उसके बादजबर्दस्ती, चूंकिदेश ताजा-ताजाआजाद हुआ था, गांधीसाहब को झुकनापड़ गया कि यह …*करेगा, कांग्रेसके लिए देशनहीं चला सकते । इसलिए पटेलसाहब को मनायागया, उनसेविदड्रॉ करायागया । अगर ऐसेप्रधानमंत्रीबनेंगे तो क्याउनका नाम लियाजाएगा?
इस देश पर बदतमीजी के कारण, बदमासी के कारण, ब्लैकमेलिंग के कारण शासन करना चाहेंगे । आपने अपने नेता को देखा था, यहां आकर हमारे प्रधान मंत्री जी से चिपट गए थे । इन लोगों को कुर्सी की बड़ी … * उठती है । अगर मैं वीर सावरकर जी की बात कहूं तो देश की आजादी के लिए 27 साल की उम्र में भारत कैसे आजाद हो, उन्होंने किताब लिखी । जो किताब लिखी गई,वह किताब देश में है । उनकी उम्र 27 साल की थी । वह हमेशा आजादी के लिए लड़ते रहे । दस साल तक सेल्युलर की जेल में रहे । ये तो देखने भी नहीं गए । इन लोगों ने उनकी नेम पटि्टका भी हटा दी । उन्हीं वीर सावरकर को,जिन्होंने विरोध किया था कि अगर अंग्रेज चले जाएंगे तो हम एक्सेप्ट नहीं करेंगे कि ये राज़ करेंगे । उन्हीं वीर सावरकर को, जिनको ये कहते हैं, 1942 के वर्धा के कांग्रेस के सम्मेलन में,जहां मिलिट्री रूल की बात हुई थी, यहां पर वीर सावरकर जी,जो सेल्युलर जेल में रहे, उस क्रांतिकारी को इंटरनेशनल अदालत के अंदर डबल आजीवन कारावास की सजा हुई थी कि यह देश के अंदर देश विरोधी और अंग्रेजों के विरोध में एक्टिविटीज करते हैं । वीर सावरकर जी के बारे में इस प्रकार की टिप्पणी करते हुए इनको … * आनी चाहिए ।
सर, मैं आपके सामने दो पंक्तियां कह कर अपनी वाणी को विराम दूंगा । मुझे उम्मीद नहीं थी कि मुझे थोड़े समय में निपटा दिया जाएगा । दुष्यंत जी की इमरजेंसी में कुछ पंक्तियां थीं । उन्होंने इमरजेंसी में कुछ पंक्तियां लिखी थी । जो ये बात करते हैं - तानाशाह,तानाशाह, तानाशाह । …*तानाशाह का रूप दिखा दिया कि वह अध्यक्ष कैसे बने थे । तानाशाह का रूप इमरजेंसी में पूरे देश ने देखा तो दुष्यंत जी ने लिखा था कि - हो गई है पीर पर्वत सी पिघलनी चाहिए । लेकिन मैं उसको थोड़ा अमेंड करना चाहता हूं:-
“हो गई थी पीर पर्वत सी पिघलनी चाहिए, इस हिमालय से अब कोई गंगा निकलनी चाहिए ।
जो दीवारें हिल रही थीं पर्दों की तरह, कोशिशों की उनकी नींव मजबूत जमनी चाहिए ।
हर शहर, हर सड़क, हर गली, हर गांव,हर नगर में,हाथ लहराते हुए,हर लाश चलनी चाहिए ।
सिर्फ हंगामा खड़ा करना इनकी फितरत है, मोदी जी की कोशिश है कि सूरत बदलनी चाहिए ।” सर, दुष्यंत जी की पंक्तियां यहां लागू होती हैं । मैं माफी चाहूंगा । आप मुझे जरूर टाइम देंगे,इनके पोतड़े खोलने के लिए, जो देश को गुमराह कर रहे हैं । आपने मुझे कम समय दिया, लेकिन बहुत-बहुत धन्यवाद ।
SHRI NAMA NAGESWARA RAO (KHAMMAM): Mr. Speaker, Sir, thank you for giving me this opportunity to speak on Motion of Thanks on the President’s Address.
ऑनरेबल स्पीकर सर, जब राष्ट्रपति जी का अभिभाषण होता है, उसमें गवर्नमेंट का डायरेक्शन होता है कि साल के अंदर क्या किया है और आने वाले टाइम में यह गवर्नमेंट क्या करेगी, उसको लेकर रोडमैप बनता है । उसी की बहुत सारी चीजें राष्ट्रपति जी के भाषण में रहती हैं । अगर राष्ट्रपति जी के भाषण में देखें तो पेज नंबर 1,2,3,4 में कोविड–19पेंडेमिक के बारे में उल्लेख किया है । कंट्री में और पूरी दुनिया में कोविड की वजह से पिछले एक साल से दिक्कत हुई है ।
16.50 hrs (Shri Rajendra Agrawal in the Chair) इस दिक्कत के समय में इस गवर्नमेंट ने क्या किया है, किस तरह से लोगों को बचाया है, इन सभी के बारे में उसमें उल्लेख किया गया है । पूरी दुनिया भारत देश की तरफ देख रही थी कि भारत अपने 130 करोड़ लोगों को कोरोना से बचाने के लिए क्या करेगा । हम एक साल में इस समस्या से बाहर निकलने की कोशिश कर रहे हैं । इस समस्या से बाहर निकलने का मुख्य कारण यह है कि कोरोना के फ्रंट रनर्स,डॉक्टर्स, हेल्थ वर्कर्स,स्टेट गवर्नमेंट एवं सेंट्रल गवर्नमेंट की सभी मशीनरीज ने मिल कर लोगों को अच्छी तरह से बचाया है । मुख्य रूप से हमारे माननीय प्रधान मंत्री जी और राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने लोगों के लिए काम किया है । हम उनके प्रति आभार व्यक्त करते हैं । हमारे माननीय प्रधान मंत्री जी ने सभी मुख्यमंत्रियों,सभी लीडर्स के साथ, वैक्सीन मैन्यूफैक्चरिंग फार्मा कंपनियों के साथ वार्ता की है । उन्होंने फार्मा कंपनी में विजिट किया है । आज हम पूरे गर्व के साथ पूरी दुनिया में सर उठा कर बोल सकते हैं कि मेड इन इंडिया वैक्सीन बन गई है । मेड इन इंडिया वैक्सीन,मेड इन हैदराबाद भी है । यह हमारे तेलंगाना के लिए भी बहुत गर्व की बात है । हमें गरीब लोगों को यह वैक्सीन फ्री में देना चाहिए, इसके लिए हम सभी को सहमति देनी चाहिए ।
माननीय राष्ट्रपति जी ने अभिभाषण के पेज नम्बर 5, 6, 7 और 8 में किसानों के बारे में जिक्र किया है । उन्होंने चार पेजों में किसानों के बारे में बात की है । हमारे देश में 80 प्रतिशत स्मॉल एंड मार्जिनल फार्मर्स हैं । उन सभी को सपोर्ट करने के लिए प्रधानमंत्री सम्मान निधि योजना लागू की गई है । उन्होंने उसमें यह भी उल्लेख किया है । यह बताया गया है कि केन्द्र सरकार ने किसानों को 1 लाख, 13 हजार करोड़ रुपए दिया है । मैं पूरे हाउस को यह बताना चाहता हूं कि किसानों को पैसा देने के कार्यक्रम के बारे में हमारे राज्य के माननीय चीफ मिनिस्टर के.सी.आर. साहब ने सोचा है । किसानों को बचाने के लिए हर साल एक-एक एकड़ जमीन के लिए 10 हजार रुपए देने की व्यवस्था 2018-19 से शुरू की गई है । अभी हमारे तेलंगाना में 60 लाख किसानों के लिए हर साल एक-एक एकड़ जमीन के लिए 10 हजार रुपए दिए जा रहे हैं । अभी तक हम लोगों ने किसानों के एकाउंट्स में 39 हजार करोड़ रुपए डाले हैं । यह हमारे लिए खुशी की बात है कि तेलंगाना की स्कीम को सेंट्रल गवर्नमेंट ने पूरे देश के किसानों के लिए लागू किया है । यह बहुत ही गर्व की बात है । इसी तरह से हमें किसानों को सपोर्ट करना चाहिए ।
माननीय राष्ट्रपति जी ने अभिभाषण के पेज नम्बर – 7, पैरा 23 में जो कहा है, मैं उसे कोट करना चाहता हूं :
“The mission for setting up 10,000 Farmer Producer Organisations by bringing together small farmers of the country is also an impactful step. This has ensured access of small farmers to better technology, additional credit, post-harvesting processing and marketing facilities and insurance coverage during natural calamities” उन्होंने यह बहुत अच्छी बात की है । हमारे राज्य के मुख्यमंत्री जी, के.सी.आर. साहब स्मॉल एंड मीडियम फार्मर्स को ध्यान में रख कर, तेलंगाना के सभी किसानों की मदद कर रहे हैं । पांच हजार एकड़ का एक कलस्टर बना कर, पांच हजार एकड़ में करीब 1500 से 2000 किसान होते हैं, हम लोगों ने किसानों के लिए किसान मंदिर बनाया है । हम किसान मंदिर इसलिए कह रहे हैं कि उस जगह से किसानों को जो चाहिए, वह सुविधा प्राप्त कर सकते हैं । हम लोग उनको डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से भी सपोर्ट करते हैं । चाहे सेन्ट्रल गवर्नमेंट का प्रोग्राम हो या राज्य सरकार का प्रोग्राम हो,उनको वहां जानकारी उपलब्ध कराई जाती है । किसानों के लिए फर्टिलाइजर्स,उनके प्रोडक्ट को सेल करने के लिए, वहां एग्रिकल्चर एक्सपर्ट्स् लाकर,हम लोगों ने उनके लिए रैतु वेदिकलू बना दिया है ।
मैं सरकार से माँग करता हूँ कि पूरे देश में राइट टू वेदिकल्लु बनना चाहिए । प्रत्येक पाँच हजार एकड़ भूमि के लिए एक-एक राइट टू वेदिकल्लु बनना चाहिए । इससे फार्मर्स को काफी सपोर्ट मिलेगा ।
इसी तरह से, हमारे स्टेट में फार्मर्स को 24 घंटे फ्री में बिजली दी जाती है । मैं तो यह कहना चाहता हूँ कि फार्मर्स को सपोर्ट करने के लिए 24 घंटे पॉवर भी देना चाहिए । 24 घंटे फ्री बिजली देने वाला एक ही स्टेट है-तेलंगाना । तेलंगाना स्टेट में जिस तरह से स्कीम्स दिए गए हैं, उसी तरह से हम लोग 24 घंटे पॉवर भी फार्मर्स को देने के लिए कह रहे हैं ।
अन्नदाताओं की बहुत-सी समस्याएँ भी हैं । इन समस्याओं का परिष्कार करने के लिए मैं माननीय प्रधानमंत्री जी से आग्रह करना चाहता हूँ । माननीय प्रधानमंत्री जी, आप अन्नदाताओं की समस्या का परिष्कार कराइए, उनको खत्म करवाइए ।
पेज नम्बर 9, पैरा 32 में बापू जी यानी महात्मा गांधी जी, फादर ऑफ द नेशन के बारे में, उनके सपने के बारे में माननीय राष्ट्रपति जी ने उल्लेख किया है । उन्होंने कहा था कि आदर्श ग्राम बनना चाहिए । आदर्श ग्राम जरूर बनना चाहिए । आदर्श ग्राम के रूप में विलेजेज का डेवलपमेंट होना चाहिए । अगर विलेजेज का डेवलपमेंट होगा,तभी कंट्री का भी डेवलपमेंट होगा ।
हमारे नेता केसीआर साहब ने, हमारे चीफ मिनिस्टर साहब ने ‘पल्ले प्रगति’कार्यक्रम के माध्यम से सभी विलेजेज के डेवलपमेंट का काम शुरू किया है । इस प्रोग्राम के बारे में सबको सुनना चाहिए । मैं आपके माध्यम से कहना चाहता हूँ कि कुछ टीम हमारे यहाँ आकर हमारे विलेजेज को देखें कि किस तरह से हम लोगों ने विलेजेज को डेवलप किया है । अभी स्वतंत्रता के 75 साल हो गए हैं, लेकिन अभी तक देश के विलेजेज के ऊपर कोई ध्यान नहीं दिया गया है । हमारे नेता ने कहा है कि यदि विलेजेज अच्छे होंगे, विलेजेज के लोग अच्छी तरह से रहें, तो एससी, एसटी,बीसी और फार्मर्स आदि सभी ठीक रहेंगे । इसलिए हम लोगों ने विलेजेज का डेवलपमेंट शुरू किया है ।…(व्यवधान)
मैं शवदाह स्थल के बारे में कहना चाहता हूँ, जिसे क्रिमेशन एरिया भी कहा जाता है । हम सभी लोग विलेजेज से आए हैं । मैं तो एक फार्मर का बेटा हूँ । हमने देखा है कि जब कोई गरीब मरता था, तो उसे सड़के के किनारे जलाया जाता था । ऐसा कंडिशन था । लेकिन अभी तेलंगाना के हरेक गाँव में शवदाह स्थल बनाए गए हैं । यह हरेक विलेज में बैकुण्ठधाम स्थल के नाम से बनाया गया है । …(व्यवधान) ये सब आपको सुनना चाहिए । …(व्यवधान)
हमारे हरेक गाँव में नर्सरी है । हमने हरेक गाँव के लिए एक-एक ट्रैक्टर, टैंकर और ट्रैक्टर के साथ एक-एक ट्रॉली भी दिया गया है । हमने हरेक विलेज के ग्राम पंचायत में एक-एक टैंकर दिया है । …(व्यवधान) आपको ये बातें नहीं करनी है । …(व्यवधान) इस तरह के कुछ स्कीम्स हैं, जो तेलंगाना में लाए गए हैं,उसी तरह से पूरे देश में ‘पल्ले प्रगति’ स्कीम को शुरू कीजिए । आप हमारे यहाँ आइए, हम आपको दिखाएंगे । जो लोग यहाँ बात कर रहे हैं, हम उन लोगों को भी दिखा देंगे कि हमने किस तरह से अपने विलेजेज को डेवलप किया है । यह मॉडल पूरे इंडिया में आना चाहिए । अगर यह मॉडल पूरे इंडिया में आया, तो हमारे बापू जी का जो सपना था,जिसे माननीय राष्ट्रपति जी ने अपने भाषण में मेंशन किया है,यह उससे मेल खाता है ।…(व्यवधान)
पेज नम्बर 10, पैरा 35 में माननीय राष्ट्रपति जी ने बाबा साहब अम्बेडकर जी का जिक्र किया है । इसमें उन्होंने कहा था कि हमें हरेक गाँव में ड्रिंकिंग वॉटर देना चाहिए, हरेक घर के लिए ड्रिंकिंग वॉटर देना चाहिए । ‘हर घर जल’ कार्यक्रम के नाम से यह देना चाहिए । यह बहुत खुशी की बात है । अभी तक गाँवों में पीने का पानी नहीं रहता था । इस स्कीम को किसी ने भी लाया हो,मगर हम लोग इस स्कीम की पूरी मदद कर रहे हैं । लेकिन इस हाउस को यह जानना चाहिए कि यह स्कीम तेलंगाना में सबसे पहले लाया गया है ।
17.00hrs हर एक विलेज में,हर एक गांव के लिए हम लोग फ्री-ड्रिंकिंग वॉटर दे रहे हैं । …(व्यवधान) आज के दिन पूरे इंडिया के लिए यह बहुत अच्छी बात है । …(व्यवधान)
माननीय सभापति : आपप्लीज़ बैठ जाइए ।
…(व्यवधान)
श्री नामा नागेश्वर राव : सेंट्रल गवर्नमेंट की रिपोर्ट के अनुसार तेलंगाना में 98.46 परसेंट हर घर को पानी मिल रहा है । …(व्यवधान) यह हमारी रिपोर्ट नहीं है, यह सेंट्रल गवर्नमेंट की रिपोर्ट है । इस रिपोर्ट को आप सबको देखना चाहिए । इसी तरह से फ्री-ड्रिंकिंग वॉटर की स्कीम बहुत अच्छी है, जिसका राष्ट्रपति अभिभाषण में उल्लेख किया गया है । …(व्यवधान)
सर, इसमें एक और चीज़ है । इसके पेज नंबर 24 में वुमेन्स के बारे में बात की गई है । यह बहुत खुशी की बात है । वुमेन रिज़र्वेशन बिल लाना चाहिए, इसके लिए भी वुमेन को दृष्टि में रखकर हमारी स्टेट में कल्याण लक्ष्मी,शादी मुबारक स्कीम्ज़ हैं ।…(व्यवधान) हमारे यहां किसी भी गरीब की बेटी की शादी होती है, तो उसे एक लाख रुपये दिए जाते हैं । एक-एक को एक लाख रुपये दिए जाते हैं । अभी तक 80 लाख लोगों को छ: हज़ार करोड़ रुपये दिए गए हैं । …(व्यवधान) मैं गवर्नमेंट से बोलना चाहता हूं कि कल्याण लक्ष्मी स्कीम की तरह ही पूरे देश की गरीब बेटियों के लिए भी आप कोई स्कीम लाइए ।
माननीय सभापति: अबआप अपनी बातसमाप्त कीजिए, प्लीज़ ।
…(व्यवधान)
श्री नामा नागेश्वर राव : सर, मैं अपनी बात एक मिनट में खत्म कर रहा हूं । इसी के साथ-साथ यह सब करने की वजह से हमारे तेलंगाना की पर-कैपिटा, अगर भारत की पर-कैपिटा 1 लाख 26 हजार रुपये है, तो हम लोगों की 2 लाख 5 हजार रुपये है,जो कि ऑलमोस्ट डबल है । …(व्यवधान)
इसी तरह मैं यह चाहता हूं कि किसानों के लिए पानी चाहिए,किसानों के लिए पावर चाहिए, किसानों की फसल को अच्छे रेट पर खरीदना चाहिए । …(व्यवधान) इसी के साथ-साथ मैं एक और बात बोलना चाहता हूं । …(व्यवधान) हमारे डिस्ट्रिक्ट में आईटीसी के लिए साहब ने भी एक लैटर लिखा है । वे लोग भी फार्मर्स हैं, करीब-करीब 12 हजार फार्मर्स की सुबबूल का उत्पादन नहीं खरीद रहे हैं । आईटीसी की फैक्ट्री के लिए हमने आपका लैटर भी मेंशन किया है । हम यहां पॉलिटिक्स नहीं खेलते हैं । …(व्यवधान) मैं फार्मर का बेटा हूं, फार्मर के लिए बात करता हूं । …(व्यवधान)
माननीय सभापति: नामासाहब, प्लीज़अब कन्क्लूडकीजिए । आपकासमय पूरा होगया है ।
…(व्यवधान)
श्री नामा नागेश्वर राव : संजय साहब ने जो लैटर लिखा था, उस लैटर को लेकर भी हमने वहां मीटिंग की है । इसके साथ-साथ मेरी एक ही रिक्वेस्ट है कि तेलंगाना में ट्राइब्ल यूनिवर्सिटीज़ का इश्यू है । …(व्यवधान) इसी तरह खम्माम में स्टील प्लांट, आईआईएम,आईएसएआर, रीजनल रिंग-रोड, रेलवे प्रोजेक्ट्स,न्यू एयरपोर्ट,पेंडिंग पेमेंट्स के इश्यूज़ हैं । एक और इश्यू नवोदय विद्यालय का है । पूरे देश के हर डिस्ट्रिक्ट में एक नवोदय विद्यालय दिया गया है । हमारे यहां 21 नवोदय विद्यालय दिए जाने हैं । …(व्यवधान)ये सारी सुविधाएं देने का कष्ट करें । हम लोग राष्ट्रपति जी के अभिभाषण को सपोर्ट करते हैं । …(व्यवधान)यह बहुत खुशी की बात है और इस पर बहुत इश्यूज़ भी उठे हैं । मुझे समय देने के लिए आपको धन्यवाद ।
डॉ. फारूख अब्दुल्ला (श्रीनगर): चेयरमैन साहब, मैं बहुत ही मशकूर हूं कि आपने मुझे वक्त दिया है । मैं यह भी गुज़ारिश करूंगा कि सदन ने जो तक़रीर की है, उसके जवाब में मैं खड़ा हूं । बहुत अच्छा हुआ कि जो कोरोना वायरस आया है,उसने सारी दुनिया को पकड़ रखा है और भारत भी उसके लपेटे में आया है । शुक्र यह है कि हमारा नंबर अमेरिका,बर्तानिया जैसे मुल्कों से कम है, मगर तब भी हमारे यहां बहुत मौतें हुई हैं ।
मैं आपसे यह कहना चाहता हूं कि हमारे मुल्क में अभी मेडिकल सर्विसेज़ इतनी अच्छी नहीं हैं कि हमारे विलेजेज़ में यह पता लगे कि कोई मरा किस तरह से है, मगर फिर भी वैक्सीन आ गई है, जिसके लिए मैं पूनावाला को मुबारक देता हूं, जिन्होंने यह नई वैक्सीन बनाई है । इस वैक्सीन को भारत में देना बहुत ज़रूरी है । अभी भी बहुत कम लोगों को यह वैक्सीन मिल रही है ।
हमें कोशिश करनी चाहिए कि ज्यादा से ज्यादा लोगों को यह वैक्सीन लगे ताकि लोग इस सख्त बीमारी से बच सकें । देश को कोरोना वायरस से और लॉकडाउन से जो नुकसान हुआ है, इस नुकसान को पूरा करना मरकज़ की जरूरत है । खासकर मेरी रियासत में टूरिज्म सैक्टर,इंडस्ट्री,दुकानदारों को जो नुकसान हुआ है, उसकी वजह से इतनी गरीबी फैल गई है कि मैं बयां नहीं कर सकता हूं । जो वायदे किए गए थे कि पचास हजार नौकरियां दी जाएंगी, किसी एक को भी नौकरी नहीं मिली है । हमारे यहां नेशनल हाईवेज का यह हाल है कि एक बारिश से सड़क गायब हो जाती है । हाल की घटना में देखिए कि पूरा पहाड़ नीचे आ गया और पुल बह गया । शुक्र है कि फौज ने वहां फौरन वैली ब्रिज लगाया, लेकिन उस सड़क की हालत बेहद खराब है । वहां अभी पार्लियामेंट्री डेलीगेशन भी गया था । उन्होंने भी लोगों से बात की और जनता ने उन्हें अपनी सारी तकलीफें बता दीं । इसी तरह से हवाई अड्डे की भी यही हालत है । हम पहाड़ों से घिरे हुए हैं और मौसम बहुत खराब रहता है, इसलिए एयरपोर्ट को बढ़ाने के लिए हमसे वायदा किया गया था । वहां कैट-1 है, लेकिन वहां हम कैट-2 का इंतजार कर रहे हैं, जिससे डिस्टेंस ऑफ लैंडिंग कम हो जाए । यही एक रास्ता हमारे लिए बाहर निकलने का है । जब हमारी सड़क द्वारा आवाजाही बंद हो जाती है,तो जहाज की टिकटें जो दो हजार रुपये की होती हैं, उनकी कीमत दस हजार, बारह हजार रुपये हो जाती हैं । यदि किसी गरीब को अपने मरीज का इलाज के लिए दिल्ली या चंडीगढ़ ले जाना होता है, तो उसे इलाज करवाना बहुत महंगा पड़ जाता है । सरकार की तरफ से रोक लगनी चाहिए कि अपनी तरफ से एयर लाइन्स जो किराया बढ़ाते हैं, उसे रोका जाए ।
हमारे यहां रेल शुरू हुई थी । मनमोहन सिंह जी ने उसका उद्घाटन किया था । वह रेल बारामूला से बनिहाल तक चलती है, लेकिन एक साल से वह ट्रेन बंद है । होम मिनिस्टर साहब सदन में थे,मैं उनके सामने यह बात करता कि इस रेल को शुरू करना बहुत जरूरी है क्योंकि इससे रोड पर ट्रैफिक में कमी आएगी और हमारे लोगों को आने-जाने में आसानी होगी । मैं कम्युनिकेशन मिनिस्टर साहब को मुबारकबाद देना चाहता हूं कि हमारे यहां 18 महीनों से 4जी नहीं था,लेकिन अब शुरू हो गया है । अल्लाह करे कि यह सेवा चलती रहे और बंद न हो । अभी डीडीसी के इलेक्शन बहुत साफ तरीके से हुए । कोई निंदा नहीं हुई, कोई नुकसान नहीं हुआ, लेकिन अब क्या हो रहा है? मुझे अफसोस के साथ कहना पड़ता है कि अब जब इलेक्शन हो गए हैं, लोगों को आपके डीडीसीज और पुलिस आफिसर्स,जिन्होंने उन्हें मतदान दिया है,उनके खिलाफ दूसरों की तरफ उन्हें भी कर रहे हैं । मैंने 1984 में खुद देखा है, जब हमारे लोगों को खरीदा गया और एक नई सरकार बनाई गई । वह सरकार दो साल ही चली और गिर गई । आज फिर वही हो रहा है । मेहरबानी करके यदि हम अपनी डेमोक्रेसी को जिंदा रखना चाहते हैं, तो जिन लोगों ने वोट दिया है और जिसके लिए दिया है, उसे संभालना चाहिए । यदि लोगों को उसके खिलाफ करेंगे,तो लोगों में सरकार के खिलाफ नाएतमादी हो जाएगी कि हमने इलेक्शन में वोट दिया,लेकिन उसके बाद दूसरी पार्टी वाले पैसों का बैग लेकर आ गए और उनके नेता को खरीद लिया । आप लॉ मिनिस्टर भी हैं, इसलिए कोई न कोई ऐसा कानून लाना चाहिए, जिससे कि किसी दल के लोग ऐसा न कर सकें कि लोगों ने आपको वोट दिया और हमने खरीद लिया । यह डेमोक्रेसी की बरबादी का एक रास्ता है, जिसे बंद करने की मैं गुजारिश करूंगा ।
इसके साथ-साथ मैं आपसे यह कहना चाहता हूं कि मैं कोई लड़ाई नहीं चाहता हूं । यह किसानों का मामला है । किसानों के मामले में मैं आपसे सिर्फ एक गुजारिश कर रहा हूं । यह कोई खुदाई किताब नहीं है,जिसमें हम तब्दीली नहीं कर सकते हैं । हमने कानून बनाया है । अगर किसान चाहते हैं कि इस कानून को रद किया जाए, तो इसमें क्या जाता है । आप उनसे बात करें । आप उनसे बात करके वह कानून लाएं,जिससे किसानों का भला हो । किसानों की समस्या को मैं खुद महसूस कर सकता हूं । जब मैं वजीर-ए-आला था तो हमारे यहां बहुत जबर्दस्त सूखा पड़ा और उस वक्त हिंदुस्तान के वजीर, जिनका मैं नाम नहीं लूंगा,वह जम्मू आए । हमने उनके लिए हेलीकॉप्टर मंगवाया और उनको उन सारे इलाकों में ले गए, जहां पर सूखा पड़ा था । जब उन्होंने दौरा किया तो उन्होंने कहा कि साहब, नुकसान तो बहुत जबर्दस्त है । मेरे ख्याल से हमें एक हजार करोड़ रुपया इसकी भरपाई के लिए देना चाहिए,लेकिन जब उन्होंने धनराशि दी तो आप सुनकर हैरान होंगे कि हमें सिर्फ 16 करोड़ रुपये मिले । मेरे पास डेवलपमेंट के लिए 37 करोड़ रुपये थे, लेकिन मैंने डेवलपमेंट बंद कर दिया । मैंने कहा कि अगर किसान मर गया तो हम लोग जिन्दा नहीं रह पाएंगे । किसानों को बीज, फर्टिलाइजर्स,इंस्ट्रूमेंट्स के अलावा और जो भी अन्य चीजें चाहिए थीं, वे सब मैंने सरकार की तरफ से उनको उपलब्ध कराईं,ताकि किसान उठें और हम बच सकें । आज आपसे भी मैं हाथ जोड़कर यह बात करता हूं कि Let us not stand on prestige. This is our nation. We belong to this nation. And if we belong to this nation, let us respect everybody in this nation. जब मैं देखता हूं कि हम लोग जवाहर लाल नेहरू, सरदार पटेल,इंदिरा गांधी,राजीव गांधी व अन्य लीडरों पर अंगुलियां उठाते हैं, तो मुझे बहुत बुरा लगता है और अफसोस होता है । कल जब आप ताकत में नहीं होंगे तो क्या हम फिर इन्हीं वजीर-ए-आजम के खिलाफ बातें करेंगे? It is not what Indian parampara is. जो गया,उसकी इज्जत कीजिए । वह तो अपनी मंजिल पर पहुंच गया है । वहां हम सभी को जवाब देना है । अत: मैं हाथ जोड़कर पार्लियामेंट्री मिनिस्टर जी से कहता हूं कि मेहरबानी करके यह परम्परा मत शुरू कीजिए । हम एक-दूसरे पर अंगुलियां उठाते हैं और अंगुलियां उठाकर एक दूसरे से बात करते हैं । It is not parliamentary. इसलिए उनकी इज्जत करिए और उन पर गर्व करिए,जो उन्होंने किया । मैं जानता हूं कि आप में से कई ऐसे होंगे जिन्होंने सरदार पटेल जी को कभी देखा ही नहीं है, गांधी जी को नहीं देखा है । मैंने सरदार पटेल जी को अपने पिता जी के साथ देखा है और गांधी जी को भी देखा है । गांधी जी कश्मीर आए तो मेरी मां और मेरी बहन के साथ उनकी तस्वीर है । एक तरफ मेरी मां हैं और दूसरी तरफ मेरी बहन है । मैंने इंदिरा गांधी के दिन भी देखे हैं । अपना डिसमिसल भी देखा है । अपने पिता जी को 20 साल जेल में भी देखा है,मगर मेरे पिता जी ने कभी जवाहर लाल जी के खिलाफ बात नहीं की है । वह जब 20 साल की जेल के बाद नेहरू जी से मिलने गए तो दोनों की आंखों में आंसू थे । वे अपने आंसुओं को रोक नहीं सके थे । Politically we might differ, मगर एक-दूसरे में इंसानियत तो होनी चाहिए । मैं मुसलमान हूं तो क्या हिंदुस्तानी मुसलमान नहीं हूं?आप अगर हिंदू हैं तो क्या आपको पैदा करने वाला भगवान एक नहीं है । भगवान और अल्लाह एक हैं । कोई फर्क नहीं है । जब आप फर्क करने लगेंगे तो आप देश को तोड़ देंगे । …(व्यवधान) इस देश को अगर एक रखना है तो हमें इकट्ठे होकर रहना होगा और यदि हमने कोई गलती की है तो आप हमें ठीक करेंगे और अगर आपने कोई गलती की है तो हम आपको ठीक करेंगे । अगर हमें हिंदुस्तान को बनाना है तो यही एक तरीका है । अगर नहीं बनाना है और तोड़ देना है तो जो मर्जी आए, वह करिए । मैं हाथ जोड़कर कहता हूं कि किसानों से बात करें । उनसे बात करके कोई हल निकालिए । 90 साल हो गए । आज सारी दुनिया में हमारी वाहवाही हो रही है । कहां हमारी डेमोक्रेसी थी, और आज सारे बोल रहे हैं कि आज क्या हो रहा है? वहां पर कीलें लगा रखी हैं । हमारे मेंबर्स वहां गए थे तो वे जा नहीं सके । आखिर क्या जाता, अगर हम उनसे जाकर बात करते । किसानों की जो समस्याएं हैं, हम उनको सुनते और कोशिश करते कि उनका हल निकाला जाए । हम यहां हल निकालने के लिए बैठे हैं,हम यहां आपके लिए मुश्किलें खड़ी करने के लिए नहीं बैठे हैं ।Take us as opposition, but opposition for guiding you. Tomorrow we may be on that side and you may be on this side, who knows! At that time, we will respect you more than you have respected us. We never considered you as enemies. You are a part of us. As a doctor, I tell you when a patient comes and takes a drop of blood, क्या वह उस खून की बोतल को देखकर पूछता है कि यह मुसलमान का खून है, ब्राह्मण का है या दलित का है?वह तो यह कहता है कि मुझे एक और बोतल लगाओ, मैं ठीक हो जाऊंगा । भगवान ने हम सबको एक जैसा बनाया है । फर्क है, ठीक है, आप मंदिर जाते हैं,मैं मस्जिद जाता हूँ, वे गुरुद्वारा जाते हैं, वे चर्च जाते हैं,इसलिए किसानों से बात करें ।
आखिरी बात, जो आपने 5 अगस्त को किया, आपने ऐसे ही कर दिया,हमसे पहले बात करते, हमसे पूछते कि भाई क्या ठीक होगा? नहीं पूछा, खुद ही कर दिया ।…(व्यवधान) हमारी पार्टी का एक है कि हमें धारा 370 खत्म करनी है, 35ए खत्म करना है, हमें देश को एक करना है । हम कब देश में नहीं थे? क्या आपने कभी देश के बारे में कहीं बात की? मैं वह हूँ जिसने यूनाइटेशन नेशन में हिंदुस्तान के बारे में बात की, जिसने जिनेवा में जाकर इस झंडे को गाड़े रखा, जिसकी बात आप करते हैं । मैं आस्ट्रिया गया,ह्यूमन राइट्स कमीशन में गया,मैं उनका नाम नहीं लूँगा, जब मैं वहाँ से बोलकर बाहर निकला तो वे हिंदुस्तान के बहुत बड़े नेता थे, वे मुझसे कहने लगे कि डॉ.साहब आप यह क्यों कहते हैं? आप क्यों नहीं हिंदुस्तान के ऊपर कीचड़ उछालते हैं? मैंने कहा कि यह अमेरिका जो इतना सब कालों के खिलाफ कर रहा है, क्या उन्होंने उनके बारे में कोई बात की है या जो जुल्म दूसरे कर रहे हैं दूसरों पर, वे कोई बात कर रहे हैं? क्या मैं अपने देश को यहाँ पर काला दिखाऊँ?यह देश हमारा है, मगर आपको हमारी भी इज्जत रखनी है । आपको हमें पहचानना है । हमने वह झंडा खड़ा कर रखा है,जब से आए हैं,मेरे मिनिस्टर मारे गए, मेरे लीडर मारे गए,मेरे वर्कर्स मारे गए, क्योंकि वे तिरंगा को थामे हुए थे । आज हमें पाकिस्तानी कहते हैं, खालिस्तानी कहते हैं, चीनी कहते हैं, मुझे अफसोस है । मैं आपसे कहना चाहता हूँ, याद रखिएगा,मरना मुझे यहाँ है और जीना मुझे यहाँ है और खड़े होकर जीना है । मैं झुकूँगा नहीं, मैं झुकने वाला नहीं हूँ । मेरा एक खुदा है, उसी के सामने मुझे जवाब देना है । इसलिए जो आपने किया है, उसकी तरफ देखिए, उसको समझिए और कश्मीर के लोगों को दिल से लगाइए । आपने उस रियासत को, जो ताज थी हिन्दुस्तान का,उसके टुकड़े किए ।
HON. CHAIRPERSON : Please conclude now.
…(व्यवधान)
डॉ. फारूख अब्दुल्ला :हम मुसलमानों को दिखाने के लिए,जिन्होंने जानें दी हैं इस मुल्क के लिए, इस वतन के लिए ।…(व्यवधान) जो इस वतन के लिए खड़े रहे ।…(व्यवधान) मैं आपसे कहता हूँ । …(व्यवधान) मैं आपसे कहता हूँ ।…(व्यवधान)
HON. CHAIRPERSON : Please conclude now.
…(व्यवधान)
डॉ. फारूख अब्दुल्ला :प्लीज, मैं आपसे सिर्फ एक गुजारिश करूँगा ।
माननीय सभापति : पाल साहब, बैठिए । दानिश अली जी,बैठिए । कृपया बैठ जाइए ।
…(व्यवधान)
माननीय सभापति : डॉ. साहब खुद सक्षम हैं, उन्हें किसी की मदद की जरूरत नहीं है । कृपया, बैठ जाइए ।
…(व्यवधान)
डॉ. फारूख अब्दुल्ला : मैं आपसे गुजारिश करता हूँ ।…(व्यवधान) मेहरबानी करके हमारे दुख को पहचानिए ।…(व्यवधान) हमारे दर्द को पहचानिए और उसका कोई हल कीजिए ।…(व्यवधान)
माननीय सभापति : कृपया, बैठ जाइए । डॉ.साहब, अब आप समाप्त कीजिए ।
…(व्यवधान)
माननीय सभापति : दानिश अली, जी आप बैठ जाइए । पाल साहब, बैठ जाइए ।
…(व्यवधान)
डॉ. फारूख अब्दुल्ला : मैं यहाँ लड़ाई नहीं कर सकता ।…(व्यवधान) मैं लड़ाई करने के लिए तैयार नहीं हूँ ।…(व्यवधान) मैं 85 साल का आदमी हूँ ।…(व्यवधान) मैंने इस देश को बनते हुए देखा है । …(व्यवधान) आप में से कई हैं, जिन्होंने इस देश को बनते हुए नहीं देखा ।…(व्यवधान) मैंने इस देश को बनते देखा है ।…(व्यवधान) हम अमेरिका से भीख माँगते थे ।…(व्यवधान) मंत्री जी, क्या यह सच नहीं है? …(व्यवधान) ट्रूमैन का वह 480 का प्रोग्राम याद है ।…(व्यवधान)
HON. CHAIRPERSON : Please conclude now.
…(व्यवधान)
डॉ. फारूख अब्दुल्ला : हमारे पास वह जहाज में सड़ी हुई आती थी ।…(व्यवधान)
आज दुनियाको अनाज खिलाताहै, सिर्फहमें नहीं, दुनियाको ।
HON. CHAIRPERSON : Now, please conclude, Doctor sahib.
डॉ. फारूख अब्दुल्ला :अगरहमने इस भारतको बनाना हैतो इकट्ठे बनानाहै । अकेले आपनहीं बना सकते । सब को साथचलाइए, सबके दिल के दर्दको समझिए ।…(व्यवधान) आप कहतेक्या हैं किराम सिर्फ आपकाहै, राम तोविश्व का रामहै । आप यादरखिए । अगर वहविश्व का रामहै तो हम सबका राम है ।मगर आप लोगबस राम पर बैठेहुए हैं, जिस तरह हममुसलमानों नेकुरान को सीनेसे लगा रखाहै और कहतेहैं कि यह कुरानसिर्फ हमाराहै । कुरान हमारानहीं है । कुरानसब के लिए है । बाइबिल सबके लिए है ।…(व्यवधान)
HON. CHAIRPERSON: Please conclude, Doctor sahib. It is a very good note to conclude.
डॉ. फारूख अब्दुल्ला :आपमेरी बात सुनलीजिए । मैंदो मिनट बोलनाचाहता हूं ।मुझे बस दोमिनट बोलने दीजिए । मैं आपसे गुजारिशकरूँगा कि सबको साथ चलाइए । सब को साथचला कर हम लोगइस दुनिया कोबना सकते हैंऔर विश्व कोदिखा सकते हैंकि हमारे पासक्या चिराग है । उस मुल्क के, उसरियासत के आपनेजो टुकड़े किएहैं, उनटुकड़ों को जोड़नेकी बात करें ।…(व्यवधान) आपनेहमें जो काटाहै, उसकोजोड़िए, थोड़ासा सिलिये ।मैं आपसे विनतीकरता हूं । आपकाऔर आप सभी मैम्बर्सका बहुत-बहुत शुक्रियाकि आपने मुझेबोलने का मौकादिया और मुझेसुनने की कोशिशकी । बहुत-बहुत शुक्रिया ।
*श्री राजेन्द्र धेड्या गावित (पालघर): मैं माननीयराष्ट्रपति केअभिभाषण के लिएधन्यवाद प्रस्तावपर अपने विचार व्यक्त करता हूँ ।
माननीयराष्ट्रपति जीके अभिभाषण केलिए मैं अपनेऔर अपनी पार्टीकी ओर से उनकोधन्यवाद देताहूं । माननीयराष्ट्रपति जीने न्यू इंडियाका जो चित्रप्रस्तुत कियाहै, वो हमसभी को प्रेरणादेगा । यह देशके 130 करोड़लोगों के विश्वासको बढ़ाएगा एवंलोगों की आकांक्षाओंको मजबूती देगा ।
माननीयराष्ट्रपति जीका अभिभाषण कईमायने में ऐतिहासिकहै । उन्होंनेअपने भाषण मेंदेश में इसबात पर जोरदिया कि भारतके लोकतंत्रमें हर किसीको मर्यादितऔर शांतिपूर्वकतरीके से अपनीबात को रखनेकी पूर्ण स्वतंत्रताहै । उन्होंनेसरकार द्वाराबनाए गए नयेकृषि कानूनोंके बारे मेंभी बताया, जोकि किसानों कीआय को दोगुनीकरने की दिशामें प्रयास है ।
हमआजादी के 75 सालपूरा करने वालेहैं, औरइस वजह से यहसमय और भी जरूरीहो जाता है । इस अभिभाषणमें यह साफहुआ है कि सरकारअपनी जिम्मेदारीगरीब, किसान, युवा, महिलाओं, वंचितवर्गों, अनुसूचितजनजातियों कीओर पूरा कररही है ।
कोविडके विकराल केबाद भी भारतन रुका और नही थमा है औरइसके लिए सरकारद्वारा कोविडसे बचाव, उसकेवैक्सीन के विकासऔर लोगों कीजिंदगी को बचानेके लिए की गईअनेक प्रयासोंके बारे मेंराष्ट्रपति जीने विस्तार सेबताया । साथही मैं महाराष्ट्रके मुख्यमंत्रीआदरणीय श्रीउद्धव साहब ठाकरेजी का भी धन्यवादकरता हूं, जिन्होंनेइस कठिन दौरमें भी अदम्यसाहस, जिम्मेदारीऔर साहनुभूतिका परिचय दिया । एक ओर पूरादेश इस महामारीकी चपेट मेंजा रहा था वहींमहाराष्ट्र अकेलेचाइना और इटलीको पीछे छोड़नेके लिए तेजगति से आगेबढ़ रहा था ।
मैंयह भी याद दिलानाचाहता हूं किहमारी स्मृतिमें यह पहलीबार और इतिहासमें यह तीसरीबार है कि जबदेश का बजटतब दिया गयाहै जिस वक्तदेश की अर्थव्यवस्थानीचे जा रहीहै । ऐसे समयमें जहां एकओर देश के इंफ्रास्ट्रक्चरको मजबूत करनाहै, वहींदेश में नौकरीके और नये मौकेभी बनाने हैं । देश के लोगोंके हाथ मेंपैसे अधिक हों, इसओर चिंता करनीहै ।
किसानबिल को मद्देनजररखते हुए सरकारको मत्स्य किसानयानी मछुआरेऔर उनके व्यवसायको सुरक्षितएवं सुदृढ़ बनानेकी ओर सरकारने विशेष एवंजल्द प्रावधानकरना इस क्षेत्रको बलिष्ठ एवंअग्रसर बनानेमें एक अहमकदम होगा । कहनेको महाराष्ट्रएक विकसित राज्यहै, परंतुइस राज्य मेंऐसे कई दुर्गमप्रदेश एवं क्षेत्रहैं जो बहुतही दुर्लक्षितएवं पिछड़े हैं । परिणावश 21वींशताब्दी मेंकई लाख लोगोंको न्यूनतम जीवनलक्षीजरूरतों से दशकोंसे वंचित रखागया है । इनमेंअधिकतम पिछड़ेवर्गों का हिस्साहै । पेयजल, रोजगार, सड़क, बिजली, प्राथमिकआरोग्य केंद्रऔर कृषि विज्ञानकेंद्र एवं जिलाऔद्योगिक केंद्रके माध्यम सेमूलभूत जरूरतोंको उपलब्ध कियाजाना ये उनलोगों के आत्मनिर्भरबनाने की ओरएक अहम कदमहोगा । खेतीके लिए बीज, पानी, खाद, पीक, बीमाऔर एमएसपी मुहैय्याकरवाना आत्यावश्यकहै । साथ-साथमछुआरों को लाइफजेकेट, फर्स्टऐड किट, डीजलसबसिडी, स्टॉर्मऔर बेड वैदरइंश्योरेंस औरएमएसपी इस क्षेत्रमें भी लागूकिया जाना भीबहुत जरूरी है । हमारे राज्यके इस दुर्गमक्षेत्र मेंकृषि से जुड़ेहुए अलग जोडव्यवसाय की जानकारीएवं चीजें एससीएससी और टीएसपीप्लांस से उपलब्धकराना जरूरीहै । इन प्लांसकी अधिकतम राशियात्रा एवं सेमिनारमें ही व्ययहोता है । साथ-साथइन सभी क्षेत्रमें शिक्षा कीभी सुविधा मुहैयाकराया जाए ।भारत सरकार नेखेती-किसानीसे जुड़े तीनकानूनों मेंसंशोधन कियाहै । खेती परजहां देश कीबहुत बड़ी जनसंख्यासीधे निर्भरहै, वहींयहां आय मेंहोती हुई कमीके कारण करोड़ोंलोगों को इससेदूर करना शुरूकर दिया है । हाल में हुएइस संशोधन सेदेश भर के कईकिसान संगठनसड़क पर हैं, उन्हेंडर है कि उनकीकमाई पहले सेकम हो जाएगी । उनके कुछ मूलभूतसवाल हैं, जिनकेजवाब से आगेका रास्ता कुछसाफ हो सकताहै ।
किसानों को डर है कि नए कानून आ जाने से मंडियों का अस्तित्व और जरूरत खत्म हो जाएगा । अगर बड़े स्तर पर कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग होती है तो फिर किसान के माल को खरीदने के लिए बने हुए मंडी का कोई अस्तित्व ही नहीं होगा, ऐसे में जो छोटे किसान हैं जो खुद ही फसल उपजाते हैं और फिर उसे मंडी में बेचते हैं तो वे कहां बेचेंगे । और प्राइवेट हाथ उस समय अगर छोटे स्तर पर खरीदने से मना कर देते हैं तो किसान का क्या होगा?
देश में करोड़ों ऐसे किसान हैं जो कि कम पढ़े लिखे हैं । नये नियम में कॉन्ट्रैक्ट करने में आसानी हो, इसके लिए पूंजीपति को तो नियम-कानून में छूट दी गयी है मगर,अगर किसान इतना पढ़-समझ न सके,तो उसे कागजी दांव-पेंच में फंसाकर किसान अपने फसल या साल भर के कमाई से हाथ धो सकता है । उनकी ऐसी हालत न हो,इसके लिए कानून में क्या व्यवस्था दी गई है, इस पर प्रकाश डालना आवश्यक है ।
नये कानून के अनुसार किसान के उत्पादन को स्टॉक करने की कोई सीमा नहीं है । जहां दुनिया भर की पूंजी कुछ लोगों के पास सीमित है, अगर पूंजी लगाकर कोई बड़े स्तर पर किसी अनाज का स्टॉक कर लेता है तो वो अपने मन-मुताबिक दाम पर उसे बेच सकता है । ऐसे में किसी खास संस्था या पूंजीपति के पास दाम का कंट्रोल न हो, इसके लिए सरकार को सोचने की जरूरत है ।
इन्हीं सुझावों के साथ मैं अपनी बात समाप्त करता हूं ।
*श्री राजू बिष्ट (दार्जिलिंग): मैं महामहिम श्री राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद जी को धन्यवाद करता हूं । उन्होंने सरकार की उपलब्धियों पर एक नई दृष्टि प्रदान की है । वर्ष 2020 में, मानवता को अब तक के सबसे बड़ा Disaster का सामना करना पड़ा है । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व, कार्यकुशलता से हमारी सरकार करोड़ों लोगों की जान बचाने में सफल रही है । यह केवल एक दूरदर्शी और कुशल नेतृत्व द्वारा ही सम्भव है । यह हमारी सरकार का श्रेय है कि पहले हम PPE Kit, N-95 Mask और Ventilator के Import पर पूरी तरह से निर्भर थे और आज हमारा देश इन सभी आवश्यक सामग्रियों का निर्माण खुद कर रहा है । आपदा में अवसर का इससे बेहतर उदाहरण और क्या हो सकता है । आज, भारत वैक्सीन उत्पादन और आपूर्ति के मामले में विश्व के लिए एक बड़ी आशा के रूप में उभरा है । केवल इतना ही नहीं हमने “वसुधैव कुटुम्बकम' की हमारी मान्यता के आधार पर हमारे पड़ोसी देशों भूटान, बांग्लादेश, नेपाल, श्रीलंका को भी Vaccineकी सहायता की हैं । यही कारण है कि संयुक्त राष्ट्र के महासचिव ने भारत की प्रशंसा करते हुए कहा, "भारत की वैक्सीन उत्पादन क्षमता आज दुनिया की सबसे अच्छी है । सर, COVID के बावजूद एवं Global recession के कारण,हमारे देश ने वर्ष 2020 में FDI में वृद्धि में 13% की वृद्धि दर्ज की । इस समय जब दुनिया भर मेंFDI 42% तक गिर गया तब पूरा विश्व भारत को सबसे भरोसेमंद निवेश स्थलों में देखा जाता है । यह हमारी सरकार द्वारा शुरू की गई व्यापार समर्थक नीतियों और सुधारों के कारण ही संभव हो पाया है । कोरोना काल में घरेलू स्तर पर, हमारी सरकार ने गरीब कल्याण योजना माध्यम से 80 करोड से अधिक लोगों को मफ्त में अतिरिक्त राशन प्रदान किया । श्रमिक ट्रेनों के माध्यम से करोडों प्रवासी श्रमिकों को विभिन्न स्थानों से उनके घरों तक पहुंचाया । गरीब कल्याण योजना के तहत, 50 Crore man days of employment generate की । मुख्यमंत्री ममता बनर्जी जी के अनुसार, पश्चिम बंगाल ने MNREGA कार्यों के तहत 1 करोडman days श्रम उत्पन्न किया - यह दर्शाता है कि, केन्द्र सरकार इस तरह के कठिन समय में हमारे श्रमिकों को रोजगार की गारंटी के लिए धन उपलब्ध कराने में कितनी प्रभावी रही है । हमारी सरकार ने गरीब महिलाओं के जन धन खाते में सीधे 31000करोड़ से अधिक का direct transfer किया । मुफ्त में 14 करोड़ से अधिक गैस सिलेंडर वितरित किए । इतना सब कुछ हुआ वह भी बिना किसी भ्रष्टाचार के । हमें पता है कि चुनौतियाँ भी हैं - लेकिन मोदी जी है तो सब संभव है । विशेष रूप से, मैं दार्जिलिंग पहाड़ियों, तराई और डूआर्स के लोगों की चुनौतियों के लिए सदन का ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं । सर पूरे बंगाल में विशेष करके North Bengal में सरकारी चिकित्या का बुरा हाल है । अतः मैं केन्द्र सरकार से निवेदन करता हूं कि मेरे क्षेत्र में एक AIIMSया AIIMS की तर्ज पर एक Hospital का निर्माण हो । दार्जिलिंग और कलिम्पोंग जिला अस्पतालों को मेडिकल कॉलेजों में अपग्रेड किया जाए । North Bengal में बन्द चाय बागान को Tea Board की मदद से शुरू किया जाए । चाय और सिनकोना बागान श्रमिकों के लिए ESICअस्पतालों का विस्तार किया जाएं । Tea Garden & Cincona में नई Labour Codes जल्द लागू हो । Darjeeling & Kalimpong मे FRA Act लागू हो । North Bengal के लोगों को Parja - Patta मिलें । DI Fund को समाप्त करें ।Tea Garden का Subsidy केन्द्र सरकार जल्द से जल्द भुगतान करके Plantersको सहायता करें । सिलीगुडी को स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित किया जाना । दार्जिलिंग-सिलीगुडी-कालिम्पोंग क्षेत्र में Sports Insfrastructure in National Sports Academy का विकास । Darjeeling, Siliguri, Sikkim छेत्र को Dooarsसे जोड़ने वाला ।coronation Bridge के विकल्प का निर्माण जल्द से जल्द शुरू हो । Darjeelingमें केंद्रीय विश्वविद्यालय । दार्जिलिंग, कालिम्पोंग और उत्तर दिनाजपुर में आयुष अस्पताल । Nepali language मेंdedicated Doordarshan Channel चालू की जाए । Rajbanshi, Koche, Meche, राभा, टोटो और गोरखाओं का सामाजिक और सांस्कृतिक संरक्षण । लोगों के लिए अधिक सुविधाएं प्रदान करने के लिए Bagdogra हवाई अड्डे का विकास जल्द हो । Illegal immigration को रोका जाए । महोदय,सदियों से गोरखाओं ने भारत माता की सेवा की है और देश की सम्मान की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान दिये है । आजादी के बाद एक भी साल ऐसा नहीं गया - जब किसी न किसी गोरखा सैनिक को हमारे राष्ट्रपति द्वारा उनकी बहादुरी के लिए सम्मानित नहीं किया गया हो । इस संसद भवन के परिसर में INAके शहीद Major Durga Malla प्रतिमा हमारे स्वतंत्रता संग्राम के दौरान गोरखों के योगदान का प्रमाण हैं । महोदय, गोरखाओं को देश भर में प्यार और सम्मान दिया जाता है । मगर कहीं न कहीं पिछले 72 सालों से गोरखाओ के प्रति एक सौतेला व्यवहार भी होता रहा है । उन्हें आज भी द्वितीय श्रेणी के नागरिक के रूप में देखा जाता है । चाहे Darjeeling hills, Terai, Dooars के गोरखा हों या Arunachal के Vijaynagar के गोरखा । चाहे Manipur, Assam या Nagaland के गोरखा हो या Himachal, Uttarakhand या Delhi, Mumbai के रहने वाले गोरखा हो । इससे गोरखाओं की जनसंख्या, संस्कृति, कला, भाषा पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता मै देख रहा हूँ । उनके अपने समस्याएं हैं जिनपर स्थानीय राज्यों की सरकारों का ध्यान दिया जाना अत्यंत आवश्यक है । जिस तरह कश्मीर के गोरखाओं को न्याय दिलाने के लिए केंद्र सरकार को हस्तछेप करना पड़ा था । उसी तरह से आज देश भर के गोरखाओं के समस्याओं को समझने और उनका हल ढूंढ़ने की जरुरत है । सर, अब इन भारत माँ के वीर गोर्खा समाज को न्याय दिलाने का वक्त आ गया है । इस संबंध में,मैं आपके माध्यम से माननीय गृह मंत्री जी से अनुरोध करता हूं कि Darjeeling hills, Terai, Dooars के लोगों की लंबित मांग जो बार बार Gorkhaland राज्य की रूप में उभर के आता है, उसका Permanent Political Solution जल्द से जल्द पूरी की जाए और स्थायी राजनैतिक समाधान के माध्यम से गोर्खा समाज की Identityके साथ -साथ भाषा,कला, साहित्य, संस्कृति तथा उनकी राजनैतिक भागीदारी के साथ-साथ Darjeeling, Terai & Dooars की जनता के सपनों को भी पूरा कर सके ।
जय हिन्द ।
*डॉ. भारतीबेन डी.श्याल (भावनगर):मैं महामहिम राष्ट्रपति जी के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का समर्थन करती हूँ । महामहिम जी ने अपने भाषण में सरकार की उपलब्धियों विशेषकर कोरोना काल की स्थिति तथा आत्मनिर्भता के बारे में बताया ।
जब पूरा विश्व महामारी के प्रकोप से जूझ रहा था तब उस भय के माहौल में भी भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र भाई मोदी की सूझ-बूझ, दूरदृष्टि के कारण हमें दूसरे देशों की तुलना में कम भय के माहौल में जीना पड़ा तथा विदेशों की अपेक्षाकृत भारत में स्थिति सामान्य रही । एक तरफ जहाँ दूसरे देश अपनी अर्थव्यवस्था की चिंता कर रहे थे भारत के प्रधानमंत्री जी ने सबका ध्यान रखते हए एक बड़े पैकेज से सबको राहत दी । लाकडाउन में कोई भूखा न सोए इसके लिए सरकार ने अपनी वचनबद्धता दिखाई । जो जहाँ है उसको वही खाना दिया गया । प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के माध्यम से 8 महीनों तक 80 करोड़ लोगों को 5 किलो प्रतिमाह अतिरिक्त अनाज वन नेशन-वन राशन कार्ड की सुविधा के साथ निःशुल्क दिया गया । भारत के नागरिकों में भी एकता का परिचय देखा गया सबने अपने मतभेद भूलाकर एक दूसरे की हरसंभव सहायता की और जैसा कि राष्ट्रपति जी ने अपने भाषण में भी कहा कि भारत जब-जब एकजुट हुआ है, तब-तब उसने असंभव से लगने वाले लक्ष्यों को प्राप्त किया है ।
सरकार ने प्रवासी श्रमिकों, कामगारों और अपने घर से दूर रहने वाले लोगों के लिए श्रमिक स्पेशल ट्रेनें चलवाईं । महामारी के कारण शहरों से वापस आए प्रवासियों को उनके ही गांवो में काम देने के लिए हमारी सरकार ने छः राज्यों में गरीब कल्याण रोजगार अभियान चलाया । सरकार ने रेहड़ी पटरी वालों और ठेला लगाने वाले भाईयों के लिए विशेष स्वनिधि योजना शुरू की । हर गरीब का धर रोशन हो, इसके लिए ढाई करोड़ से भी अधिक बिजली के निःशुल्क कनेक्शन दिए गए हैं ।
माननीय प्रधानमंत्री जी देश को आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ा रहे हैं । आत्मनिर्भरता में भारत ने कम समय में प्रयोगशालाए बनाई । पीपीई किट,सेनेटाईजर, मास्क बनाकर विश्व में अपना आत्मनिर्भरता का परिचय दे दिया है, और आज भारत दुनिया का दूसरा मोबाईल निर्माता देश बन गया है । हम आत्मनिर्भर हैं,इसका ज्ञान हमें कोरोना काल के दौरान देखने को मिला ।
हमारी सरकार ने पिछले 6 वर्षों में स्वास्थ्य, शिक्षा, खेल, महिलाओं के लिए योजनाएं इत्यादि में काफी कार्य किए हैं, जिसकी पूरे विश्व में सराहना हुई है । देश में स्वास्थ्य सेवाएं गरीबो को आसानी से मिल रही हैं । जन औषधि से प्रतिवर्ष 3600 करोड़ रूपये का लाभ नागरिकों को मिल रहा है । माननीय प्रधानमंत्री जी ने जबसे देश की सेवा का पदभार संभाला है तब से आयुर्वेद को बढ़ावा देने का भरपूर प्रयास किया है । पिछले वर्ष लोगों ने आयुर्वेद को बढ़-चढ़ कर अपनाया । आयुर्वेद उपचार ने ही भारत की स्थिति बिगड़ने नही दिया और हम सरकार के प्रयासों के कारण आज बहुत तीव्र गति से रिकवरी रेट सुधारने में कामयाब हो रहे हैं । माननीय प्रधानमंत्री जी ने स्वास्थ्य सुरक्षा योजना अन्तर्गत 22 एम्स की मंजूरी दी । पिछले 6 वर्षों में मेडिकल कॉलेजों की संख्या में बढ़ोतरी करते हुए 387 से 562 मेडिकल कॉलेज बनाएं और हमारी सरकार लगातार स्वास्थ्य सेवाओं के लिए कार्य कर रही है । कृषि के लिए उपलब्ध सिंचाई साधनों में व्यापक सुधार आ रहा है । किसानों को डेढ़ गुना एम.एस.पी देने का फैसला हमारी सरकार ने लिया ।
धारा370जैसे अभिशाप को हमने वर्षों से देखा है । इसको समाप्त करने का ऐतिहासिक और साहसिक निर्णय आदरणीय नरेन्द्र भाई मोदी और श्री अमित भाई ने लिया ।
सरकार महिलाओं की सुरक्षा, आत्मनिर्भरता तथा समान भागीदारी के लिए वचनबद्ध है, महिलाओं के जन-धन खातों में आर्थिक पैकेज की राशि सीधी पहुंचाई गई । सशस्त्र सेनाओं में महिलाओं ने अपनी अच्छी संख्या में उपस्थिति दर्ज करवाई है । देशभर में उज्ज्वला योजना की लाभार्थी गरीब महिलाओं को 14 करोड़ से अधिक मुफ्त गैस सिलेंडर भी मिले हैं ।
हमारी टेक्नोलोजी की बढ़ती गति और कोरोना काल में किए गए कार्यों की विदेशों में भी प्रसंशा हो रही है । सीमाओं पर हमने मजबूती दिखा कर पूरे विश्व में अपनी एक पहचान बनाई है, आज भारत विश्व के शक्तिशाली देशो की श्रेणी में खड़ा है ।
विकास चारों तरफ दिख रहा है, चाहे वह सड़क मार्ग के निर्माण का हो, या शिक्षा से संबंधित हो, महिलाओं से संबधित हो या किसानों के कल्याण से संबधित हो, हर क्षेत्र में समान विकास करने का काम हमारी सरकार ने किया है । मैं महामहिम राष्ट्रपति जी के अभिभाषण का समर्थन करती हूँ ।
धन्यवाद ।
*श्री देवजी पटेल (जालौर): मैं संसद के समक्ष दिनांक 29 जनवरी, 2021 को माननीय राष्ट्रपति जी द्वारा दिए गए अभिभाषण पर मेरी नौजवान साथी श्रीमती लॉकेट चटर्जी द्वारा प्रस्तुत किए गए धन्यवाद प्रस्ताव का समर्थन करता हूं ।
वर्ष 2020 भारत सहित पूरे विश्व के लिए चुनौती भरा रहा है । जहां एक ओर कोरोना जैसी वैश्विक महामारी थी, वहीं दूसरी ओर बाढ़, भूकम्प, टिड्डी दल का हमला, बर्ड फ्लू,सीमा पर चीन के साथ अप्रत्याशित तनाव जैसी चुनौतियां देश के सामने मुँह बाए खड़ी थी । परन्तु हमारी सरकार ने जिस तरह डट कर इन चुनौतियों का सामना किया, वह निश्चय ही अविश्वसनीय है । कोरोना काल में लॉकडाउन के कारण हमारे प्रवासी श्रमिकों, कामगारों तथा निर्धन समाज के सामने रोजी राटी का सकट पैदा हो गया था । परन्त हमारी सरकार ने प्रधान मंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत जिस तरह सभी को 8 महीने की अवधि तक आर्थिक सहायता पहंचाई तथा निःशुल्क अनाज की व्यवस्था की वह निश्चय ही सराहनीय है । हमारी सरकार ने इन चुनौतियों का सामना ही नहीं किया अपितु पूरे विश्व में अनेक देशों की इन चुनौतियों का सामना करने में आवश्यक दवाइयों की आपूर्ति कर सहायता भी की और अब कोरोना वैक्सीन की आपर्ति कर रहा है । कोरोना बीमारी को रोकने के लिए हमारे देश ने जिस तरह कई वैक्सीनों को सबसे कम कीमत पर तैयार किया तथा इस समय उनका बड़े पैमाने पर उत्पादन कर रहा है,इसकी सराहना पूरे विश्व में हो रही है । हाल ही में विश्व स्वास्थ्य संगठन तथा संयुक्त राष्ट्र के महासचिव द्वारा भारत के इन प्रयासों की सराहना इसके साक्ष्य हैं । आज भारत को पूरे विश्व में जिस सम्मान की नजर से देखा जा रहा है, वैसा कभी नहीं हुआ । मैं इस अवसर पर अपने देश के वैज्ञानिकों के प्रति अपना सम्मान प्रकट करता हूँ । यही नहीं हमारे चिकित्सा कर्मियों, पुलिस कर्मियों सहित सभी फ्रंटलाइन कर्मचारियों ने जिस तरह कोरोना बीमारी का डटकर सामना किया तथा यहां तक कि कई कर्मचारियों ने तो अपनी जान तक बलिदान कर दी,वह निश्चय ही सराहना तथा श्रद्धा के पात्र हैं ।
हमारी सरकार ने साथ ही साथ अर्थव्यवस्था को पुन: पटरी पर लाने के लिए भी कदम उठाए । अब तक के सबसे बड़े आर्थिक पैकेज की घोषणा की गई जिसमें समाज के सभी वर्गों का ध्यान रखा गया । मेरा पूर्ण विश्वास है कि सरकार के ये प्रयास शीघ्र ही फलीभूत होंगे और हमारा आत्मनिर्भर भारत अभियान सफल होकर सभी क्षेत्रों में हमारा देश आत्मनिर्भर हो जाएगा ।
मुझे कतिपय कथित किसान यूनियनों द्वारा किए जा रहे आंदोलन के जारी रहने से काफी वेदना हो रही है । हमारी सरकार ने किसानों के कल्याण के लिए विगत 7सालों में जितने अधिक कदम उठाए हैं,शायद ही उतने कदम हमारी आजादी के बाद के 73 सालों के दौरान कभी किसी सरकार द्वारा उठाए गए हों । इनमें कुछ का यहां उल्लेख कर रहा हूं । जैसे सॉयल हेल्थ कार्ड, प्रधान मंत्री फसल बीमा योजना, प्रधान मंत्री कृषि सिंचाई योजना, नेशनल एग्रीकल्चर मार्केट - ई नाम, नेशनल मिशन फॉर सस्टेनेबल एग्रीकल्चर, ग्रामीण भंडारण योजना, तथा विशेषकर प्रधान मंत्री किसान सम्मान योजना जिसके तहत हर किसान को प्रतिवर्ष 6000 रूपये की नकद आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है । हमारी सरकार ने विगत 7 सालों में विभिन्न फसलों के एम एस पी में जितनी अधिक वृद्धि की है, उतनी शायद ही कभी हुई हो । हमारी सरकार स्वामीनाथन आयोग की सभी सिफारिशों को लागू करने के लिए प्रतिबद्ध हैं तथा उन्हें लागू करने में पूरी ताकत से जुटी हुई है । परन्तु फिर भी कतिपय विदेशी ताकतों, राजनीतिक दलों के बहकाये में आकर हमारे किसान देश की अब तक की सबसे उत्तम सरकार के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं । समय आ गया है कि हमें आज इन ताकतों को पहचान कर उनसे डटकर मुकाबला करना होगा ।
मैं अपने संसदीय क्षेत्र जालोर सिरोही क्षेत्र की कतिपय समस्याओं की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं-
जालोर के लोगो को ब्रॉडगेज आमन परिवर्तन के करीब दस साल बीत जाने के बाद भी जालोर से दिल्ली व जयपुर के लिए सीधी रेल सेवा नहीं है । जबकि इस खंड पर संचालित गाडियों का बीकानेर जोधपुर बाडमेर तक ही संचालन किया जा रहा है । जालोर के नागरिकों को जयपुर का 400 कि0मी0 का सफर तय करने के लिए रेल परिवर्तन कर जाना पडता, जिसमें लगभग 9घंटे का समय लग जाता है । सांचौर रानीवाडा भीनमाल जालौर के लोगों के लिए दिल्ली (लगभग 800 कि0मी0) तक का सफर प्राइवेट बसों में करना पड़ता है । इन बसों का सफर काफी महंगा और बहुत ही कष्टदायक होता है विशेष कर बच्चों और महिलाओं के लिए । यहाँ के नागरिको की समस्याओं को देखते हुए गाँधीधाम से दिल्ली वाया जालोर (समदडी-भीलडी) ट्रेन प्रारंभ करने की आवश्यकता है ।
मेरे संसदीय क्षेत्र स्थित सिरोही जिला केन्द्र आजादी के 70 वर्षों के बाद भी रेलवे नेटवर्क से नहीं जुड पाया हैं । सिरोहीवासियों को आज तक रेलवे नेटवर्क से जुड़ने का इंतजार है । सिरोही जिला केन्द्र को मारवाड बागरा और पिण्डवारा के मार्ग से रेलवे नेटवर्क से जोड़ा जाए, जिससे इस रेलवे मार्ग से सभी प्रमुख जैन तीर्थ 72 जीनालय सुधामाता मंदिर जिरावल पावापुरी जसवंतपुरा अभयाराण्य भैरोंगढ आदि जुड जायेगा । जालोर सिरोही के प्रमुख रिको औद्योगिक क्षेत्र मंडार रेवदर स्वरूपगज के साथ-साथ सिरोही जिला केन्द्र जहाँ वर्तमान के रेल सम्पर्क नहीं है,यह रूट इन प्रमुख क्षेत्रों को कवर करेगा । इससे यहां की जनता को काफी सुविधा होगी तथा साथ ही साथ रेलवे के आय में अत्यधिक वृद्वि होने की सम्भावना हैं । सिरोही में रेलव स्टेशन होने से जिले में पर्यटन एवं औद्यौगिकीकरण के साथ-साथ रोजगार के नये अवसर भी उपलब्ध होंगे । अत:सिरोही जिला केन्द्र का मारवाड, बागरा पिंडवाडा से उदयपर तक रेल लाइन से जोडने की आवश्यकता है ।
मेरे संसदीय क्षेत्र जालोर सिरोही के लगभग सात लाख लोग दक्षिण भारत के विभिन्न शहारों में रहते हैं । इसके अलावा बाडमेर जैसलमेर पाली जोधपुर जिला के लाखों लोग निवास करते है तथा अपने व्यवसाय के सिलसिले मे बंगलुरू, चेन्नई, दावनगिरि, कोयम्बटुर, हुबली, ईरोड, हैदराबाद आना जाना रहता है । परन्तु इन प्रवासियों के लिए सीधी रेल सेवा नहीं होने से अनेक कठिनाईयों का सामना करना पड़ता है । अहमदाबाद से दक्षिण की ओर चलने वाली सभी ट्रेनों का टिकट काउंटर खुलते ही बुक हो जाता है । इस क्षेत्र को दक्षिण से जोड़ने से रेलवे के राजस्व में भारी वृद्धि होगी तथा नागरिको को काफी सुविधा हो जायेगी । इसलिए वर्तमान में जालौर एवं पालनपुर को सीधी रेल सेवा से जोड़ा जाए ।
क) बेंगलोरू से जोधपुर वाया समदडी भीलडी ख) हैदराबाद से जोधपुर वाया समदडी भीलडी ग) कोयम्बटुर से जोधपुर वाया समदडी भीलडी घ) चेन्नई से जोधपुर वाया समदडी भीलडी रोहिट-आहोर-जालोर-भीनमाल-करडा-सांचौर का रास्ता करीब 250किमी लंबा हैं । यह मार्ग जोधपुर, पाली, जयपुर, अजमेर, ब्यावर एवं दिल्ली को सीधा पश्चिम क्षेत्र से जोड़ता हैं, यह सड़क मार्ग जिले के सभी उपखंड क्षेत्र को जालोर जिला मुख्यालय एवं जोधपुर संभाग से जोड़ता हैं । यह मार्ग प्राचीन धार्मिक स्थल होने के साथ-साथ अंतर्राष्ट्रीय पाक सीमा से जुड़ने वाला मुख्य राजमार्ग हैं । इस सड़क मार्ग को राष्ट्रीय राजमार्ग में निर्माण के लिए घोषणा की जा चुकी है । इस मार्ग का निर्माण जल्द से जल्द करवाने की आवश्यकता है ।
गुजरात स्थित डीसा से घानेरा राष्ट्रीय राज्यमार्ग (168A) घोषित किया गया है । गुजरात स्थित झेरडा से सिरोही राजमार्ग वाया मंडार रेवदर होते हए यह मार्ग राष्ट्रीय राजमार्ग (NH 62) से मिल जाता है । दोनों तरफ से यह सडक राष्ट्रीय राजमार्ग से मिलने के कारण भारी वाहनों का आवागमन बढता जा रहा है । इस मार्ग पर मडार और रवदर दा घना आबादी वाले शहर हैं । इन शहरों के पास दिन मे ट्रैफिक जाम हो जाना अब आम बात हो गयी है । जिससे आम नागरिकों को, स्कूल जाने वाले छात्रों को और व्यापारियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है । अतः झेरडा से सिराहा माग (वाया रेवदर और मंडार में बाईपास निर्माण) को राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित करने और इसके निर्माण करने की आवश्यकता है ।
वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार जिले की कुल जनसंख्या लगभग18.3 लाख है । जिले में 2001-2011 के दशक में जनसंख्या में कुल वृद्वि 26.31 रही है । जिले में शहरी आबादी कम है जबकि ग्रामीण आबादी92.41 हैं । ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ सुविधओं का नितांत अभाव है । अतः जालोर जिला केन्द्र पर मेडिकल कॉलेज खोलने की आवश्कता है ।
सिरोही जिला में माउंट आबु और शक्ति पीठ अम्बा जी माता मंदिर दो विश्व स्तरीय प्रसिद्ध पर्यटन स्थल हैं । ब्रह्माकुमारी समाज का अंतर्राष्ट्रीय मुख्यालय माउंट आबु है । माउंट आबू में केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल का (C.R.P.F)आफिसर ट्रेनिग सेंटर है । सेना की दृष्टि से भी यह स्थान महत्वपूर्ण है । यहाँ प्रत्येक वर्ष लाखों की संख्या में विदेशी पर्यटक आते हैं । इन पर्यटकों को हवाई सफर के लिए 228 कि0मी0 दूर जोधपुर या 231 कि0मी0 दूर अहमदाबाद जाना पड़ता है । अतः उडान योजना के अंतर्गत सिरोही स्थित मानपुर हवाई पटटी से वायु सेवा प्रारंभ करने की आवश्यकता है ।
मेरा संसदीय क्षेत्र जालोर सिरोही जिला के रेतीले क्षेत्रों में वार्षिक का लगभग 12 प्रतिशत एवं चट्टानी क्षेत्रों में 7प्रतिशत जल ही भूमि में जाता है, जिससे लगभग 403मिलियन घनमीटर भूजल जमा होता है । लेकिन इसके विपरित 908 मिलियन घनमीटर भूजल का दोहन कर रहे हैं । जिले में अधिकांश पेयजल योजनाएँ एवं सिंचाई कार्य भूजल पर आधारित है । सबसे अधिक पानी लगभग 95 प्रतिशत कृषि में, 5 प्रतिशत पेयजल में एवं अन्य उपयोग में खर्च होता है । जिले में वर्ष 1995में भूजल दोहन 123 प्रतिशत था,जो वर्तमान में बढ़कर 225 प्रतिशत हो गया है अर्थात कुल वार्षिक पुनर्भरण की तलना में 33 मिलियन घनमीटर भूजल अधिक निकाला जा रहा है । 1984 में औसत 13मीटर गहराई पर पानी उपलब्ध था जो अब 30मीटर से भी अधिक हो गया है । नलकूप एवं कूआँ सूख गये हैं,एवं सूख रहे हैं । इससे गाँव में सिंचाई के साथ-साथ पेयजल का भी संकट पैदा हो गया है । यहां के निवासी विगत तीन दशकों से पानी की कमी के संकट से जुझ रहे हैं । इस क्षेत्र के अधिकांश गांवों में टेंकरों के माध्यम से पेयजल की आपूर्ति की जाती है । गिरते भूजल स्तर की समस्यां दिन प्रति दिन बिगडती जा रही है । यह क्षेत्र अतिदोहित श्रेणी में वर्गीकृत है । अतः दोनो जिला जालोर सिरोही को अटल भूजल योजन से जोडने की आवश्यकता है ।
धन्यवाद ।
*श्रीमती क्वीन ओझा (गौहाटी): मैंमाननीय राष्ट्रपतिजी के अभिभाषणपर अपने विचार व्यक्त करती हूँ ।
आजहम नव वर्ष2021 मेंप्रवेश कर चुकेहैं, साथही आजादी के75वेंवर्ष का भीप्रारम्भ होगया है । सर्वप्रथमराष्ट्र प्रेमसे ओतप्रोत स्वतंत्रसतासेनानी व कवि, असमकेसरी, अंबिकागिरिरायचौधरी जीकी कविता ओम तत्सत्भारत महत, एकवेतोनात, एकध्यानोत, एक साधेनात, एकआवेगोत, एकहोइ जा, एकहोइ जा ।
कविताके वर्णों काउच्चारण कर असमराज्य के प्रत्येकनागरिक का मानबढ़ाया है वदेश की महत्ता, अखंडताव राष्ट्र प्रेमकी चेतना कोराष्ट्रीय स्तरपर सम्मानितकिया है जिसकेलिए मैं समस्तअसमवासियों कीओर से आपकाआभार प्रकट करतीहूं ।
देशमें कोरोना कासंक्रमण कम हुआहै, परन्तुकोरोना से हमनेअपने देश केकुछ माननीय सांसदव विधायक सहितदेशवासियों नेअपने प्रियाजनोंको खोया है । देश चिकित्सकों, सहायकस्टाफ, पुलिसने अपनी सच्चीनिष्ठा के साथकोरोना काल मेंहमारी रक्षाकर कर्तव्योंका पालन कियाहै । वहीं भारतीयसीमा पर देशके वीर जवानोंने दुश्मन देशसे डट कर मुकाबलाकिया है । आपनेअपने भाषण मेंआदर्श ग्रामके बारे मेंजो उल्लेख कियाहै, मैंभी अपने संसदीयक्षेत्र मेंगोद लिए आदर्शग्राम में भारतसरकार की प्रत्येकयोजना को लानेका प्रयास कररही हूं ।
आर्थिकदृष्टिकोण – आजभारत 5 ट्रिलियनअर्थव्यवस्थाबनाने की दिशामें आगे बढ़रहा है । अन्तर्राष्ट्रीयमुद्रा कोष केअनुसार भारतविश्व की छठीसबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाहै । आज हमाराविदेशी मुद्राभण्डार बढ़कररिकार्ड 450 बिलियनडालर हो चुकाहै । यह सरकारगरीबों और किसानोंके हितों कीरक्षा करने वालीसरकार है । आजदेश में लगभग121 करोड़लोगों के पासआधार कार्ड हैंऔर लगभग 38 करोड़लोगों के लिएबैंकों में खातेखोले गये हैं । इनसॉल्वेंसीऔर बैंकरप्सीकानून द्वाराबैंकों और वित्तीयसंस्थानों सेलगभग 3.5 लाखकरोड़ रुपये रिकवरकिये जा चुकेहैं ।
प्रधानमंत्रीमुद्रा योजनाके माध्यम से5.5 करोड़से अधिक नएउद्यमियों नेऋण लिया औरलगभग 10 लाखकरोड़ रुपये सेअधिक का ऋणयोजना के अंतर्गतमंजूर किया जाचुका है । सरकारका गुड्स एंडसर्विसेज़ टैक्स(GST) कलेक्शननवंबर में लगातारदूसरे महीनेएक लाख करोड़से अधिक रहा, जोदर्शाता है किदेश की अर्थव्यवस्थाकोरोना काल मेंभी अपने उच्चस्तर पर रहीहै ।
उद्योगऔर वाणिज्य केसंबंध में – ईज़ऑफ डूईंग बिजनेसइन्डेक्स मेंभारत 2014 में 142वेंस्थान पर थाजो आज माननीयप्रधानमंत्रीश्री नरेन्द्रमोदी जी कीदेश के प्रतिलगन व सकारात्मकताके चलते 63वेंस्थान पर पहुंचाहै ।
भारतमें विश्व कातीसरा सबसे बड़ास्टार्ट अप इकोसिस्टमहै, स्टार्टअप इंडिया अभियानके तहत 27,000 स्टार्टअप को मान्यतादी गई है, जोएक रिकार्ड है । आज देश मेंपांच बड़े औद्योगिककोरीडोर विकसितकिये जा रहेहैं जिससे अर्थव्यवस्थासहित रोजगारका सृजन भीबढ़ेगा ।
आजदेश में इलेक्ट्रानिकउपकरणों के निर्माणने गति पकड़ली है । देशमें इलेक्ट्रॉनिकउपकरणों का मूल्यबढ़ गया है औरभारत विश्व मेंदूसरा सबसे बड़ामोबाइल निर्माणकर्ताका हब बन गयाहै ।
कृषिसे संबंधित – अध्यक्षमहोदय, हमारीसरकार गरीबों, मजदूरोंऔर किसानों कीसरकार है । आजकिसानों के हितोंकी रक्षा केलिए सरकार नेकृषि कानून बनायेऔर वर्षों सेबिचौलियों द्वाराकिये जा रहेकिसानों के शोषणका अंत भी हमारेयशस्वी प्रधानमंत्रीश्री नरेन्द्रमोदी जी द्वाराकिया गया है ।
माननीयप्रधानमंत्रीजी द्वारा प्रधानमंत्रीकिसान सम्माननिधि के माध्यमसे किसानों कोप्रति वर्ष 6,000 रुपयेदेना प्रारम्भकिया गया है । इस निधि केतहत आठ करोड़किसानों को लगभग43,000 करोड़रुपये दिये जाचुके हैं जोवास्तव में सरकारकी निष्पक्षसोच और किसानोंके प्रति सच्चीसंवेदनशीलताको दर्शाता है ।
आजरबी और खरीफकी फसलों केन्यूनतम समर्थनमूल्यों (एमएसपी) मेंनियमित रूप सेबढ़ोत्तरी कीजा रही है जिससेकिसानों को अपनीफसलों का पूर्णरूप से लागतके साथ लाभमिल सके । 400 नईकृषि मंडियोंको इलेक्ट्रानिकराष्ट्रीय कृषिबाजार (ई-नाम) सेजोड़ा गया हैजिससे इन मंडियोंमें पारदर्शिताव्यापक और प्रभावी बनाई जा सके ।
स्वास्थ्यके क्षेत्र में– आयुष्मानभारत योजना केअंतर्गत 27,000 सेअधिक हेल्थ औरवेलनेस केन्द्रखोले गए हैं । इसके अतिरिक्तप्रधानमंत्रीजन आरोग्य योजनाके अंतर्गत 1 करोड़4 लाखगरीबों का मुफ्तइलाज भी हमारीसरकार द्वाराकराया गया है ।
देशभर में गंभीररोगों की दवाएंसस्ते दामोंपर मिलें इसकेलिए 6,000 सेअधिक जन औषधिकेंद्र खोलेगए हैं जिससेगरीब परिवारोंको भी महंगीदवाएं कम दामोंपर उपलब्ध होसकें ।
मिशनइन्द्रधनुष केतहत 3 करोड़6 लाखबच्चों और 91 लाखगर्भवती महिलाओंको नि:शुल्कटीकाकरण की व्यवस्थाभी सरकार द्वाराकराई गई है ।
असमराज्य से संबंधित– वर्ष2014 मेंमाननीय प्रधानमंत्रीश्री नरेन्द्रमोदी जी केमजबूत नेतृत्वमें सरकार बननेके बाद से असमतथा पूर्वोत्तरराज्य प्रगतिकी ओर तेजीसे आगे बढ़ाहै । आजादी केबाद अधिकांशसमय ही यूपीएकी सरकार सत्तामें रह कर असमके प्रति सौतेलाव्यवहार करतीथी, परन्तुश्री मोदी जीके नेतृत्व मेंसरकार बनने केबाद से असमनए रूप से विकासव प्रगति कररहा है ।
असमवासियोंके अत्यंत प्रियगमछा को माननीयप्रधानमंत्रीमहोदय द्वाराविश्व स्तर परपहचान दिलाईगई । भारतवर्षके गौरव, असमियाके दिल के टुकड़ेसुधाकंठ डॉ. भूपेनहज़ारिका जीको वर्ष 2019 मेंसर्वोच्च सम्मान ‘भारतरत्न’ सेसम्मानित कियागया ।
राष्ट्रीयराजमार्ग क्षेत्रमें 2014-2015 सेअब तक भारतसरकार ने असमके लिए 4108.24 करोड़रुपये की मंजूरीदी । संपर्कव्यवस्था केमजबूतीकरण केलक्ष्य से डॉ. भूपेनहज़ारिका सेतु, बगीबिलपुल, सरायघाटपुल सहित कईपुलों का निर्माणकिया गया । इसकेमाध्यम से समयके अंतराल कोकम करने केसाथ-साथ सीमावर्तीबांग्लादेश, नेपाल, भूटानव म्यांमार आदिदेशों के साथजलमार्ग संपर्कऔर सुदृढ़ होगया है ।
लोकप्रियगोपीनाथ बरदुलोईअन्तर्राष्ट्रीयहवाई अड्डा केआधुनिकीकरण, कोकराझाड़में रूपसी हवाईअड्डा का रूपांतरकिया गया । औद्योगिकक्षेत्र मेंनए संयोजन केरूप में जोगीघोपामें 700 करोड़रूपये की लागतसे मल्टी मॉडललॉजिस्टिक पार्कके निर्माण कीप्रक्रिया जारीहै । प्रधानमंत्रीकृषक सम्माननिधि के जरिए31,17,160 हितधारकोंको लाभान्वितकिया जा चुकाहै ।
जोरहाट-माजुलीके बीच पुलव घुबड़ी-फुलबाड़ीपुल के लिएआवश्यक पहल, लगभग11,000 किलोमीटरग्रामीण सड़कोंका निर्माण कियाजा चुका है । असम तथा पूर्वोत्तरमहात्वाकांक्षीसंयोजन के तौरपर गुवाहाटीके चांगसारीमें 26 मई, 2017 कोमाननीय प्रधानमंत्रीश्री नरेन्द्रमोदी जी द्वारा ‘अखिलभारतीय आर्युविज्ञानप्रतिष्ठान’(एम्स) कीआधारशिला रखी । तेजी से निर्माणाधीनइस चिकित्साविज्ञान प्रतिष्ठानमें 12 जनवरी, 2021 सेप्रथम वर्ष कापाठ्यक्रम प्रारम्भहो जा चुका है ।
‘एक्टईस्ट’ पॉलिसीके जरिए ईस्टर्नएशियन कंट्रीके साथ संपर्कबनाने में कायमहुआ है । स्थायीशांति की स्थापनाके लक्ष्य से2020 वर्षके 27 जनवरीको भारत सरकार, असमसरकार, एनडीएफबीव एब्सू आदिके बीच शांतिसमझौते पर हस्ताक्षरहुए । आतंकवादीगतिविधियों सेजुड़े एनडीएफबीको हथियार डालकरशांति वार्तामें लाना भारतसरकार व असमसरकार की बड़ीकामयाबी है ।
असममें गैस औरतेल के बुनियादीढांचे के लिए40,000 करोड़रुपये निवेशकिए जा चुकेहैं । पूर्वोत्तरव पूर्व भारतके गैस सम्पर्कको मजबूत करनेके लिए पाइपलाइनका निर्माण कार्यतेजी से जारीहै ।
आयुष्मानभारत योजना केमाध्यम से राज्यकी 40 प्रतिशतजनता लाभान्वितहो चुकी है । 1.5 लाखव्यक्तियों नेनि:शुल्कचिकित्सा सेवाप्राप्त की । 35 लाखमहिलाओं को उज्ज्वलायोजना के तहतगैस कनेक्शनमिला है । पांचसाल पहले 50 प्रतिशतव्यक्तियों कोबिजली का कनेक्शनमिलने के विपरीतफिलहाल 100 फीसदीलोगों को यहसुविधा प्राप्तहुई । हाल हीमें डेढ़ सालमें ‘जलजीवन मिशन’ केतहत 2.5 लाखपरिवारों कोशुद्ध पेयजलप्राप्त हुआहै । मैं अपनेविचारों को यहींविराम देते हुएमाननीय राष्ट्रपतिजी के अभिभाषणका समर्थन करतीहूं व धन्यवादप्रकट करती हूं ।
*श्री सुधाकर तुकाराम श्रंगरे (लातूर): मैं संसद के समक्ष दिनांक 29 जनवरी, 2021 को माननीय राष्ट्रपति जी द्वारा दिए गए अभिभाषण पर मेरी नौजवान साथी श्रीमती लॉकेट चटर्जी द्वारा प्रस्तुत किए गए धन्यवाद् प्रस्ताव का समर्थन करता हूं ।
वर्ष 2020 भारत सहित पूरे विश्व के लिए चुनौती भरा रहा है । जहां एक ओर कोरोना जैसी वैश्विक महामारी थी, वहीं दूसरी ओर बाढ़, भूकम्प,टिड्डी दल का हमला, बर्ड फ्लू, सीमा पर चीन के साथ अप्रत्याशित तनाव जैसी चुनौतियां देश के सामने मुंह बाए खड़ी थीं । परन्तु हमारी सरकार ने जिस तरह डटकर इन चुनौतियों का सामना किया वह निश्चय ही अविश्वसनीय है । कोरोना काल में लोकडाउन के कारण हमारे प्रवासी श्रमिकों, कामगारों तथा निर्धन समाज के सामने रोजी रोटी का संकट पैदा हो गया था । परन्तु हमारी सरकार ने प्रधान मंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत जिस तरह सभी को 8 महीने की अवधि तक आर्थिक सहायता पहुंचाई तथा नि:शुल्क अनाज की व्यवस्था की वह निश्चय ही सराहनीय है । हमारी सरकार ने इन चुनौतियों का सामना ही नहीं किया अपितु पूरे विश्व में अनेक देशों की इन चुनौतियों का सामना करने में आवश्यक दवाईयों की आपूर्ति कर सहायता भी की । और अब कोरोना वैक्सीन की आपूर्ति कर रहा है ।
कोरोना बीमारी को रोकने के लिए हमारे देश ने जिस तरह कई वे वैक्सीनों को सबसे कम कीमत पर तैयार किया तथा इस समय उनका बड़े पैमाने पर उत्पादन कर रहा है इसकी सराहना पूरे विश्व में हो रही है । हाल ही में विश्व स्वास्थ्य संगठन तथा संयुक्त राष्ट्र के महासचिव द्वारा भारत के इन प्रयासों की सराहना इसके साक्ष्य हैं । आज भारत को पूरे विश्व में जिस सम्मान की नजर से देखा जा रहा है वैसा कभी नहीं हुआ । मैं इस अवसर पर अपने देश के वैज्ञानिकों के प्रति अपना सम्मान प्रकट करता हूं । यही नहीं हमारे चिकित्सा कर्मियों, पुलिस कर्मियों सहित सभी फ्रंटलाइन कर्मचारियों ने जिस तरह कोरोना बीमारी का डटकर सामना किया तथा यहां तक कि कई कर्मचारियों ने तो अपनी जान तक बलिदान कर दी, वह निश्चय ही सराहना तथा श्रद्धा के पात्र हैं ।
हमारी सरकार ने साथ ही साथ अर्थव्यवस्था को पुनः पटरी पर लाने के लिए भी कदम उठाए । अब तक के सबसे बड़े आर्थिक पैकेज की घोषणा की गई जिसमें समाज के सभी वर्गों का ध्यान रखा गया । मेरा पूर्ण विश्वास है कि सरकार के ये प्रयास शीघ्र ही फलीभूत होंगे और हमारा आत्मनिर्भर भारत अभियान सफल होकर सभी क्षेत्रों में हमारा देश आत्मनिर्भर हो जाएगा ।
मुझे कतिपय कथित किसान यूनियनों द्वारा किए जा रहे आंदोलन के जारी रहने से काफी वेदना हो रही है । हमारी सरकार ने किसानों के कल्याण के लिए विगत 6 सालों में जितने अधिक कदम उठाए हैं शायद ही उतने कदम हमारी आजादी के बाद के 73 सालों के दौरान कभी किसी सरकार द्वारा उठाए गए हों । इनमें कुछ का यहां उल्लेख कर रहा हूं । जैसे सॉयल हेल्थ कार्ड, प्रधान मंत्री फसल बीमा योजना, प्रधान मंत्री कृषि सिंचाई योजना,नेशनल एग्रीकल्चर मार्केट - ई नाम, नेशनल मिशन फॉर सस्टेनेबल एग्रीकल्चर, ग्रामीण भंडारण योजना,तथा विशेषकर प्रधानमंत्री किसान सम्मान योजना जिसके तहत हर किसान को प्रतिवर्ष 6000रूपयों की नकद आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है । हमारी सरकार ने विगत 6 सालों में विभिन्न फसलों के एमएसपी में जितनी अधिक वृद्धि की है उतनी शायद ही कभी हुई हो । हमारी सरकार ने स्वामीनाथन आयोग की सभी सिफारिशों को लागू करने के लिए प्रतिबद्ध हैं तथा उन्हें लागू करने में पूरी ताकत से जुटी हुई है । परन्तु फिर भी कतिपय विदेशी ताकतों, राजनीतिक दलों के बहकाये में आकर हमारे किसान देश की अब तक की सबसे उत्तम सरकार के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं । समय आ गया है कि हमें आज इन ताकतों को पहचान कर उनसे डटकर मुकाबला करना होगा ।
यहां मैं अपने लातूर क्षेत्र की कतिपय समस्याओं की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं । मेरा लातूर संसदीय क्षेत्र विगत कई दशकों से भयंकर सूखे का सामना कर रहा है । इसके कारण इस क्षेत्र में न केवल पेयजल संकट व्याप्त है अपितु सिंचाई के लिए भी पानी उपलब्ध नहीं है । पानी की संकट के कारण खेती ही नहीं अपितु सभी तरह के उद्योग भी यहां से पलायन कर चुके हैं । यहां कोई भी बड़ा उद्योग नहीं है तथा यह क्षेत्र औद्योगिक रूप से पूरी तरह पिछड़ा हुआ क्षेत्र है ।
इसे देखते हुए तथा इस क्षेत्र के आर्थिक विकास के लिए हमारी सरकार ने कुछ समय पहले यहां लातूर रेल कोच फैक्ट्री की स्थापना करने का निश्चय किया । सरकार के त्वरित प्रयासों से अब यह कोच फैक्ट्री पूरी तरह काम शुरू करने के लिए तैयार है तथा शीघ्र ही यहां रेल कोचों का उत्पादन शुरू हो जाएगा । इसके लिए मैं हमारी सरकार का तहेदिल से धन्यवाद् करता हूं ।
सरकार से मेरा अनुरोध है कि यथासंभव लातूर कोच फैक्ट्री में कच्चे माल की आपूर्ति स्थानीय स्रोतों से की जाए ताकि यहां आनुषगिक उद्योग लगे और इस क्षेत्र का औद्योगिक विकास के साथ ही साथ रोजगार के अवसर भी बढ़ें । यही नहीं मेरा सरकार यह भी अनुरोध है कि रेल कोच फैक्ट्री में की जाने वाली भर्ती में इस क्षेत्र के लोगों का विशेष ध्यान रखा जाएतथा कम से कम 70 प्रतिशत कर्मचारियों/कामगारों की भर्ती स्थानीय युवाओं में से की जाए ताकि इस क्षेत्र के युवाओं को बेरोजगारी के संकट से मुक्ति मिल सके । इसी के साथ लातूर रेलवे स्टेशन में पीटलाईन की घोषणा की थी और इस पीटलाईन का कार्य अप्रैल 2021 से शुरू करने की निर्णय लिया था पर इस बजट में इसके लिए कोई धनराशी नही दिया गया है । ऐसे मुझे जानकारी मिली है । मै माननीय रेल मंत्री जी से अनुराध करता हूँ कि इस पीटलाईन के लिए धनराशी का अवंटन करें.
जैसा कि मैंने पहले उल्लेख किया, लातूर क्षेत्र विगत कई दशकों से भयंकर सूखे का सामना कर रहा है । यहां न तो पीने के लिए और न ही सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध है । मेरा सरकार से अनुरोध है कि वह राष्ट्रीय जल जीवन मिशन के हर घर जल हर घर नल कार्यक्रम के तहत यहां के शहरी तथा ग्रामीण इलाकों में पेयजल आपूर्ति की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए ।
ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम के तहत लातूर के ग्रामीण क्षेत्रों में उज्जनी बांध से पाईप द्वारा सिंचाई तथा पेयजल आपूर्ति हेतु एक योजना शीघ्रातिशघ्र बनाकर कार्यान्वित करे ताकि यहां की आम जनता को पेयजल की समस्या से छुटकारा मिल सके तथा किसानों को अपने खेतों की सिंचाई करने के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध हो सके । जलशक्ति मंत्रालय द्वारा लागू की जाने वाली जल संरक्षण व प्रबंधन योजना के तहत यहां लातूर शहर तथा इसके ग्रामीण इलाकों में सिंचाई तथा पेयजल व्यवस्था को पुनर्जीवित किया जाए ।
यहां महत्वपूर्ण मंजरी नदी है परन्तु पर्यावरणीय दुर्दशा के कारण यह पूरी तरह सूख गई है । इसके संरक्षण एवं पुनर्जीवन की आवश्यकता है ताकि यहां की सिंचाई एवं पेयजल की समस्या से छुटकारा पाया जा सके । मेरा सरकार से अनुरोध है कि इसके संरक्षण एवं पुनर्जीवन हेतु तत्काल कदम उठाए जाएं ।
महोदय, हालांकि लातूर जिले को कई दलहनों, विशेषकर गुणवत्तापूर्ण तुअर की दल, तिलहनों के उत्पादन के लिए देशभर में जाना जाता है तथा इससे संबंधित प्रसंस्करण उद्योग भी यहां पर हैं । परन्तु 1993 के भूकंप की तबाही तथा विगत 10सालों के भयंकर सूखे के कारण यहां की अर्थव्यवस्था पूरी तरह ठप्प हो गई है तथा अनेक उद्योग तथा परिवार यहां से पलायन कर रहे हैं । अतः मेरा सरकार से अनुरोध है कि यहां की अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने हेतु तत्काल कदम उठाए जाएं ताकि यहां रोजगार के अवसर पैदा हों तथा लोगों का पलायन रूक सके ।
महोदय, लातूर जिले में पर्यटन एवं धार्मिक दृष्टि से अनेक महत्वपूर्ण स्थल हैं जहां पूरे देशभर से लाखों लोग आते हैं परन्तु आवश्यक पर्यटक सुविधाओं के अभाव में इनकी दशा बहुत अच्छी नहीं है । मुख्य स्थल इस प्रकार हैं:लातूर में पंचगंगा नदी के तट पर देवी महालक्ष्मी का मंदिर है जो भारत के प्रमुख; शक्तिपीठों में से एक है; लातूर शहर को छत्रपति साहू जी महाराज जी ने बसाया था; उदगीर का किला इतिहास एवं संस्कृति की धरोहर है; यहां सदाशिवराव भाऊके नेतृत्व में हैदराबाद के निजाम के साथ युद्ध हुआ था; लातूर से 20किलोमीटर दूर औसा में एक प्राचीन किला है जो जर्जर अवस्था में है; वीरनाथ महाराज का मंदिर यहां का मुख्य आकर्षण है; अहमदपुर तालुके में अक्कलकोट के गुरू स्वामी समर्थ महाराज की समाधि है; यहां माहुर की रेणुका देवी, महादेव, दत्ता और बालाजी मंदिर हैं; हेमदशली, निलंगा में 800साल पुराना प्राचीन शिव मंदिर है जो ज्यामितिय डिजाइन के लिए जाना जाता है; खरोसा में छठी शताब्दी की गुफाएं है जो प्राचीन मूर्ति एवं प्रस्तर कला की दृष्टि से महत्वपूर्ण है और शिरूर अनंतपाल में 11वी शताब्दी में बना शिव मंदिर है जो शिवलिंग तथामहिषासुर मर्दिनी की बेहद खूबसूरत प्रतिमाओं एवं प्रस्तर कला के लिए जानाजाता है ।
मेरा सरकार से अनुरोध है कि धार्मिक व पर्यटन की दृश्टि से महत्वपूर्ण उपरोक्त सभी स्थलों के ढांचागत विकास एवं वहां अंतराष्ट्रिय स्तर की पर्यटन सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए लातूर शहर को केन्द्र सरकार की 'अमृत योजना के तहत लाकर यहां का ढांचागत विकास किया जाए ताकि यहां का सर्वांगीण विकास होने के साथ साथ यहां के युवाओं को बेहतर रोजगार के अवसर भी मुहैया हो सकें ।
महोदय, 10 साल के भयंकर सूखे के कारण लातूर पूरी तरह एक पिछड़ा जिला बन गया है । मेरा सरकार से अनुरोध है कि लातूर को सरकार द्वारा चयनित पिछड़े जिलों तथा "आकांक्षा जिलों" की सूची में शामिल किया जाए तथा यहां के सर्वांगीण विकास हेतु आवश्यक कदम उठाए जाएं ।
महोदय, लातूर रोड से गुलबर्गा तक नई रेल लाइन बिछाने हेतु सर्वेक्षण कार्य पूरा हो चुका है । यह लाईन मेरे लातूर क्षेत्र ही नहीं अपितु पूरे महाराष्ट्र व कर्नाटक के लोगों के लिए महत्वपूर्ण है । मेरा सरकार से अनुरोध है कि अब इस नई लाइन के लिए भूमि अधिग्रहण तथा निर्माण के लिए आगे कार्यवाही की जाए तथा इसके लिए बजट में आवश्यक धनराशि का प्रावधान किया जाए ।
महोदय, रेलवे ने कुछ समय पहले यह भी निर्णय किया था कि कुरडुवाडी - लातूर - लातूर रोड रेलवे लाइन का हरीकरण तथा विद्युतीकरण किया जाए । यही नहीं इस लाइन को बोधन तक बढ़ाने का भी निर्णय हुआ था ताकि विभिन्न महत्वपूर्ण शहरों तक लातूर का रेल संपर्क हो सके । ऐसा प्रतीत होत है किइस दिशा में अभी तक कोई ठोस कार्य नहीं हुआ है । मेरा सरकार से अनुरोध है कि इस परियोजना पर भी शीघ्रातिशीघ्र कार्यान्वयन किया जाए ताकि यहां के निवासियों को रेल सुविधाओं में बढ़ोत्तरी की जा सके ।
इन शब्दों के साथ मैं राष्ट्रपति के अभिभाषण पर लाए गए धन्यवाद् प्रस्ताव का पुनः समर्थन करता हूं ।
*श्रीमती रीती पाठक (सीधी): ऐतिहासिकबजट सत्र केप्रथम दिवस दिनांक29 जनवरी, 2021कोमहामहिम राष्ट्रपतिमहोदय द्वाराहम सभी सांसदोंको संयुक्त सदनमें मार्गदर्शनप्राप्त हुआतथा हमारी सरकारके सभी कार्योंका विवरण भीबताया गया ।मैं महामहिमराष्ट्रपति महोदयके इस प्रगतिशीलअभिभाषण पर धन्यवादकरते हुए सदनमें अपनी बातरखना चाहती हूं । महामहिम राष्ट्रपतिमहोदय ने कहाकि हम भारतीयोंकी यही एकजुटता, यहीसाधना देश कोअनेक आपदाओंसे बाहर लाईहै ।
कोरोनाजैसी वैश्विकमहामारी के कालमें अत्यंत आवश्यकथा कि हम सबएकजुट होकर इससेबड़े लाभ तथाइससे निजात पासकें । इस देशके यशस्वी प्रधानमंत्री श्रीनरेन्द्र भाईमोदी जी केनेतृत्व और हमारेदेश के प्रत्येकनागरिक के एकजुटहोने का हीपरिणाम है किहम इस भीषणवैश्विक महामारीको मात देनेकी स्थिति मेंआए । इस आपदाने निश्चित रूपसे लोगों केजीवन छीनने केसाथ भारी मात्रामें आर्थिक क्षतिभी की है परंतुआज हम वैश्विकबनने में सफलहो पाए हैं । हमें गर्वहै । महामहिमने कहा कि मुझेसंतोष है किमेरी सरकार केसमय पर लिएगए सटीक निर्णयसे लाखों लाखदेशवासियों काजीवन बचा है । मैं गौरवान्वितहूं कि इस सरकारके नेतृत्व मेंमुझे भी कार्यकरने का अवसरप्राप्त हुआहै ।
प्रधानमंत्री गरीबकल्याण योजनाके माध्यम सेमाननीय प्रधानमंत्री श्रीनरेन्द्र मोदीजी के नेतृत्वमें आठ माहतक 80 करोड़लोगों को पांचकिलो प्रतिमाहअतिरिक्त अनाजनि:शुल्कप्रदान कियागया । यह गरीबकल्याण की दिशामें ऐतिहासिकव साहसिक कदमथा । प्रवासीश्रमिकों कोवन नेशन वनराशन कार्ड (ओएनओआरसी) कीसुविधा के साथही नि:शुल्कअनाज मुहैयाकराना और श्रमिकट्रेनें चलानाभी महत्वपूर्णपहल थी । इसकाजिक्र महामहिमद्वारा अपनेअभिभाषण मेंकिया गया ।
वैश्विकमहामारी के दौरानउज्ज्वला योजनाके अंतर्गत लाभार्थीबहनों को 14 करोड़गैस युक्त सिलेण्डरउपलब्ध करानाभी हमारी सरकारका महत्वपूर्णफैसला था । महामहिमने स्वास्थ्यसेवाओं की चर्चाकी । स्वास्थ्यके क्षेत्र मेंभी श्री नरेन्द्रभाई मोदी जीके नेतृत्व वालीहमारी सरकारमें अद्वितीयबदलाव किया हैतथा हर गांवमें स्वास्थ्यकी बेहतर व्यवस्थाके लिए कई ऐतिहासिकनिर्णय लिए । आयुष्मान भारतके माध्यम सेपांच लाख तकके प्रतिवर्षनि:शुल्कउपचार की व्यवस्थाहो या प्रधानमंत्र जन औषधियोजना के माध्यमसे बहुत सस्तीदर पर दवाइयांउपलब्ध करानेकी व्यवस्थाहो, अथवाप्रधान मंत्रीस्वास्थ्य सुरक्षायोजना के माध्यमसे 22 नएएम्स की स्वीकृतिकी बात हो ।
महामहिमराष्ट्रपति महोदयद्वारा आत्मनिर्भरभारत अभियानकी चर्चा कीगई । वास्तवमें आत्मनिर्भरभारत एक अभियानही नहीं अपितुप्रत्येक नागरिकके जीवनस्तरको व्यवस्थितकरने की दिशामें एक क्रांतिकारीमाध्यम भी है । यह मंत्रकि आत्मनिर्भरभारत का हमारालक्ष्य आत्मनिर्भरकृषि से औरसशक्त होगा । इसी सोच केसाथ हमने छ: वर्षोंमें बीज सेलेकर बाजार तकहर व्यवस्थामें सकारात्मकपरिवर्तन काप्रयास कियाहै जिसके फलस्वरूपभारतीय कृषिआधुनिक बने औरकृषि का विस्तारभी हो । अब कृषिके लिए उपलब्धसिंचाई के साधनोंमें भी व्यापकसुधार आ रहाहै । पर ड्रॉपमोर क्रॉप – मंत्रपर चलते हुएसरकार पुरानीसिंचाई परियोजनाओंको पूरा करनेके साथ ही सिंचाईके आधुनिक तरीकेकिसानों तक हमपहुंचा रहे हैं । आज देश मेंखाद्यान्न कीउपलब्धता कारिकॉर्ड स्तरपर है । प्रधानमंत्री किसानसम्मान निधिछोटे व सीमितकिसानों के लिएवरदान सिद्धहुई है । अबतक पीएम किसानसम्मान निधिके तहत 1 लाख13 हजारकरोड़ रुपये स्थानांतरितकिए जा चुकेहैं । फसल बीमायोजना भी हमारेकृषकों के लिएअत्यंत लाभकारीसिद्ध हुई है । देश के छोटेकिसानों को जोड़कर10,000 किसानउत्पादक संगठनोंअर्थात फार्मरप्रोड्यूस ऑर्गेनाइजेशनको स्थापित करनेका अभियान इसीभांति प्रभावशालीकदम है । व्यापकविमर्श के बादसंसद में तीनमहत्वपूर्ण कृषिसुधार विधेयकपारित किए जोकृषकों के हितमें हैं । तत्संबंधमें भी महामहिमने चर्चा की, इसहेतु मैं महामहिमराष्ट्रपति महोदयका धन्यवाद ज्ञापितकरती हूं ।
आदरणीयश्री नरेन्द्रभाई मोदी जीके नेतृत्व वालीकेंद्र सरकारकृषि को औरभी लाभकारी बनानेके लिए आधुनिककृषि इन्फ्रास्ट्रक्चरपर भी विशेषध्यान दे रहीहै । इस हेतुएक लाख करोड़रुपये के इन्फ्रास्ट्रक्चरफंड की शुरूआतकी गई है ।
प्रधानमंत्री जी कीसकारात्मक सोचका परिणाम हैकि आज महिलाओंको भारी मात्रामें स्वरोजगारके अवसर प्रदानकिए जा रहेहैं । दीनदयालअंत्योदय योजनाराष्ट्रीय ग्रामीणआजीविका मिशनके तहत देशमें आज सातकरोड़ से अधिकमहिला उद्यमीकरीब 66 लाखस्वयं सहायतासमूहों से जुड़ीहैं ।
देशके ग्रामीण क्षेत्रोंमें कार्यरतमहिलाओं के स्वास्थ्यको ध्यान मेंरखते हुए सरकारने एक रुपयेमें “सुविधा” (सैनेटरीनेपकिन) देनेकी योजना भीसंचालित की है । गर्भवती महिलाओंका मुफ्त स्वास्थ्यपरीक्षण हो, राष्ट्रीयपोषण अभियानहो, आर्थिकसहायता आदि व्यवस्थाएंकरके हम माताओंऔर नवजात शिशुओंकी सुरक्षा हेतुप्रयत्नशील हैं ।
केंद्रसरकार की ओरसे भी विभिन्नजनकल्याणकारीयोजनाओं के बारेमें महामहिमराष्ट्रपति महोदयने विस्तार सेबताया है, इसहेतु मैं महामहिमराष्ट्रपति जीको धन्यवाद ज्ञापितकरती हूं तथामुझे विश्वासहै कि ऐसे हीप्रेरणादायीमार्गदर्शन हमसबको प्राप्तहोता रहेगा ।
*SHRIMATI SUMALATHA AMBAREESH (MANDYA): I express my views on the Motion of Thanks to the address delivered to the joint session by His Excellency the President of India on January 29, 2021.
I support the Motion moved by Shrimati Locket Chatterjee Ji and seconded by Dr. Virendra Kumar Ji. The President’s Address to the joint session of Parliament marks the beginning of the Budget Session. The hon. President mentioned about the achievements of the previous years and also the aims and objectives of the Government for the future growth.
In para No. 25 of his Address he regretted violence and disrespect to tricolour on the Republic Day saying right to freedom of expression goes hand in hand with the constitutional duty to follow the rule of law. I would like to associate myself with the views of the hon. President. The Constitution which gives us the right to freedom of expression, the same Constitution teaches us that law and rule should be followed equally seriously. As a responsible Member of the House of the people and a citizen of this great country, I fully endorse this statement of him. I find that there is a sense of reality and confidence of development in the Address of the President of India. As we all are very much aware that the impact of COVID-19 pandemic is unimaginable, the entire world including almost all the sectors of the economy of our country were literally rocked and badly affected due to pandemic.
Under such circumstances, the hon. President has shown the right directions to the progress of the country and put spotlight on India’s self-confidence.
The President’s Address clearly mention that this unity and dedication of Indians has enabled the country to overcome multiple adversities. We all have also witnessed the unparalleled courage, endurance, discipline and spirit of service of our countrymen. I am proud to mention that this will infuse a new confidence in the hearts and minds of the people of the country.
I would also feel happy that through the President’s Address the Union Government sent a significant message to the people of the country by mentioning that it would respect the Supreme Court’s decision to suspend three farm reform laws and claimed that the laws have given new rights to the farmers.
In his Address, the hon. President talked about the Pradhan Mantri Garib Kalyan Yojana. 80 crore people were provided an additional five kg. free food grains per month for eight months. The implementation of Pradhan Mantri Awas Yojana is to ensure a pucca roof for every poor person by 2022. The Garib Kalyan Rozgar Abhiyan aims to provide employment to the returnee migrant labourers in their villages. There are other achivements like encouraging street vendors and hawkers under SVANidhi scheme, providing financial support to poor women to the tune of Rs. 31,000 crore which was directly transferred to the Jan Dhan accounts, distribution of more than 14 crore gas cylinders to poor women beneficiaries free of cost under the Ujjwala scheme.
All these are the achievements of our BJP Government under the leadership of the hon. Prime Minister Shri Narendra Modi Ji within a short span of six years. The President has rightly mentioned about the need of further expansion of infrastructure for connecting the settlements, schools, markets and hospital in rural areas under the third phase of Pradhan Mantri Gram Sadak Yojana.
As I am representing Mandya Lok Sabha constituency in the State of Karnataka, I know and feel the importance of the development of the rural infrastructure. There is a need for more and more roads and bridges in the villages. If we want to achieve the aim of self-reliant Adarsh Gram as dreamt by pujya Bapu Ji, this should be our priority and I am happy that it is highlighted in the President’s Address.
As a woman representative, I feel happy to say that there is a mention about the `Suvidha Scheme under which sanitary napkins are made available at a nominal cost of Re. 1. Under Rashtriya Poshan Abhiyaan, there is a lot more needs to be done in respect of health concerns of women in rural areas of the country. I hope the Government would pay adequate attention in this regard.
Hon. Speaker Sir, it is good to see that the President’s Address mentioned about the National Education Policy. For the first time, students have been given the freedom to opt for the subjects of their choice under the policy. At the same time, I would like to emphasize that the Government should accord priority to save the Indian languages by teaching to students at the primary level. It should be highlighted in the National Education Policy.
With these words, I once again support the Motion of Thanks on the President’s Address and conclude my speech.
*SHRI GAUTHAM SIGAMANI PON (KALLAKURICHI): I wish to draw the attention of the Government on a few key issues the hon. President of India observed in his Address in the Joint Session of the Parliament. The issues raised by the President are of vital importance, but the claims of the Government about able handling of the above is thoroughly unsustainable.
Sir, the twin critical issue of pandemic situation and economic slide down were very severe and needed Government's proactive actions. But how both were handled is for everyone to see. The Prime Minister himself led the misinformation campaign and became the cause for the terrible mishandling of the pandemic situation. The lockdown mess-up, which was absolutely because of the failure to assess the situation and seek professional advice led to great disastrous state of affairs. Millions of migrant laborers were left helpless and were driven to walk thousand kilometers foodless and waterless and a few hundreds were left to die enroute and that precisely is the proof of able handling by the Modi Government.
On the economic front, the bungling was much severe. When the nation came to a grinding halt and life was absolutely wrecked, there was no sign of relief package of any kind for the first few months except the paltry amount dolled-out, which was not sufficient to cover the basic requirement. Even when Finance Minister conducted a week long 'show' on media, the packages announced were nothing. The twenty-three lakh crore package was an eyewash and at best was a recommendation to approach the banks.
So, the claims made in the Presidential Address is nothing but falsehood. Even now the nation knows that the economic growth has fallen to -23.5 per cent and the recovery needs imaginative and sincere effort on the part of the Government. But this Government's attitude is nowhere near such effort. The Budget projection of -9.4 per cent slide down again looks like a manipulation of numbers.
The claim about tremendous research potency and capability of Indian pharmaceuticals rising up to meet vaccination needs is valid and appreciable. Of course, it is true that India is a global leader in vaccination manufacture. But see what has happened? The ICMR decision, personally handled by the Prime Minister, has messed up the vaccination process. The decision to accord approval to a vaccine under third-stage trial has spoiled the whole program. The decision has caused unnecessary scare among people and now the Government is working overtime to convince people. The Prime Minister's personal involvement always ends in wrong and hasty decisions and often costs the nation dearly.
Another important aspect of the Presidential Address is the tall claim about the proposal to open several medical colleges all over the country. At most times, these announcements remain on paper alone and the case of AllMS Institute in Madurai is a great example. The foundation stone for the said Institute was laid by the Prime Minister three years back and no fund was allocated and the project is yet to take off. The mention of AllMS, Madurai has become a laughing stock now in Tamil Nadu. Even where facilities have come up, the policy of conducting NEET examination is spoiling the chances of poor and needy backward classes and Scheduled Caste and Tribe people. It is known that this Government is against social justice and wants to erase the reservation / affirmative action program.
The enthusiasm shown by the BJP Government in bringing about 10 per cent quota for EWS and the haste at which it was implemented is a proof for the same. BJP wants to make this nation advantageous and comfortable to a section of the society already privileged and make the rest of the society live in servitude. Even in Post Graduate courses in medical education, the Central Quota curved out does not follow the reservation policy and even a court verdict is postponed with an intention to deny the OBCs their due share. This Government's decisions are strange and tricky. Latest decision has announced that separate entrance examination will be conducted for medical colleges of Central Universities. The merit policy of this Government is sanatanic and is dictated by RSS policies.
The Presidential Address about the three new farm laws is shameful. The laws brought in haste and which flouted the preceding norm of the Parliament has triggered an unending farmer's protest. Few million farmers from various States are in peaceful protest for several months now, which has drawn the attention of the world. Several rounds of talks have failed to bring about any resolution. The strange part is that the farmers want the entire Act to be repealed, but the Government is very firm on implementing it to benefit certain Corporates. The farm laws are in no way going to benefit the farmers. Hence, the farmers are not interested in reviewing the law clause by clause. The haste and impropriety shown by the Government has raised a genuine doubt in everybody's mind and the best way out is to repeal the unwarranted farm law.
*श्री दुलाल चन्द्र गोस्वामी (कटिहार): मैंमहामहिम राष्ट्रपतिजी के अभिभाषणके धन्यवाद प्रस्तावपर अपना समर्थनदेता हूं । हमसभी जानते हैंकि भारत नेवर्ष 2020 मेंकोरोना वायरसजैसी खतरनाकऔर जानलेवा घातकबीमारी का डटकरसामना किया । जिस तरीकेसे माननीय प्रधानमंत्री श्रीनरेन्द्र भाईमोदी जी केकुशल नेतृत्वमें इस महामारीसे निपटने केलिए रात-दिनदेश के 130करोड़नागरिकों कीचिंता की गईहै, यह एकसराहनीय कार्यहै । जिस तरहसे कामगारोंको शहरों सेअपने गांव मेंपहुंचाया गयाऔर उनके लिएभोजन की व्यवस्था, गैसकी नि:शुल्कव्यवस्था, खातोंमें नगद भेजनेकी व्यवस्थासरकार द्वाराकी गई, यहबहुत ही अद्वितीयरहा है ।
कोरोनाएक वैश्विक महामारीहै । इसमें विश्वके लगभग सभीबड़े देश चपेटमें आए हैं । प्रधान मंत्रीगरीब कल्याणयोजना के तहत80 करोड़लोगों को नि:शुल्कअनाज की व्यवस्थाकी गई । सरकारअब ‘वन नेशनवन कार्ड’ जैसीमहत्वाकांक्षीयोजना को धरातलपर ला रही है । इससे कामगारोंको अनाज लेनेमें देश केकिसी भी हिस्सेमें कोई कठिनाईनहीं होगी ।राज्य सरकारोंने भी इस कार्यमें बराबर कासहयोग किया, इसकीवजह से कोरोनाकाल में ‘सबकासाथ, सबकाविकास एवं सबकाविश्वास’ कानारा पूर्णत: लागूहोता है । सरकारने सभी नागरिकोंका जन-धनखाता खुलवानेका काम कियाथा और उसकालाभ कोरोना कालमें भी नागरिकोंके खाते मेंपैसा डालकर पूराकिया है । कुलमिलाकर इस विनाशकारीत्रासदी से निपटनेके लिए डाक्टर, नर्स, कर्मचारीएवं वैज्ञानिकोंने रात-दिनएक कर सफलतापूर्वककार्य किया है, जिसकाप्रतिफल है किआज इस महामारीसे निपटने हेतुवैक्सीन भी बनकरतैयारी हुई तथासभी को नि:शुल्कलगाने का कामकिया जा रहाहै । साथ हीसाथ मित्र देशोंको भी उपलब्धकराई जा रहीहै ।
शिक्षाएवं स्वास्थ्यके क्षेत्र मेंनरेन्द्र भाईमोदी की सरकारने जितना 6 वर्षमें कार्य कियाहै, यह भीएक ऐतिहासिककार्य हुआ है । छह वर्षोंमें 175 मेडिकलकालेज खोले गए, जिनमें50हजारसीट की बढ़ोतरीहुई है । साथही साथ राष्ट्रीयराजमार्ग औररेलवे लाइन केकार्य में भीविगत 6 वर्षोंमें आशातीत सफलतामिली है ।
मैंअंत में इतनाही कहना चाहूंगाकि मोदी जीऔर उनके नेतृत्वमें सरकार हमेशाअपने देशवासियोंका भला सोचतीहै चाहे वोकतार में बैठाआखिरी व्यक्तिही क्यों नहो और सरकार ‘सबकासाथ, सबकाविकास और सबकाविश्वास’ वालीअपनी नीति परआज भी कायमहै । मैं एकबार पुन: राष्ट्रपतिजी के अभिभाषणका समर्थन करताहूं ।
*SHRI BHARTRUHARI MAHTAB (CUTTACK): It is customary on behalfof Hon’ble President of India to address the Joint Session of Parliament on the first day of the season of each year. He propounds the policy of the Government and both Lok Sabha and Rajya Sabha expresses thanks to him for his address. It is interesting to look back into history.The Constitution gives the President the power to address either House on a Joint Sittingof the two Houses of Parliament. Article 87 provides two special occasions on which the President addresses a joint sitting.The first is to addressthe opening sessionof a new Legislative after a general election.The second is to addressthe first sittingof Parliament each year. A session of a new or continuing Legislature cannot begin withoutfulfilling this requirement.
TheUnited Kingdom has a historyof the Monarch addressing the Parliament goes back to the 16th century. In the United States, PresidentGeorge Washington addressedCongress for the first time in 1790. In India the practice of the President addressing Parliament after the Constitution came into force in 1950. President Rajendra Prasad addressed Members of Lok Sabha and Rajya Sabha for the first time on January 31, 1950.The President was required to address each session of Parliament and this continuedduring the Provisional Parliament in 1950, President Prasad gave an address before every session. There was no address by the GovernorGeneral to the Constituent Assembly from 1947 to 1950. The First Amendmentto the Constitution in 1951 changed the position and made President’s address once ayear.
As the policy of the Government is pronounced in his addressit gives scope for the Hon’ble Membersto express themselves on it. This year Hon’ble President broadly spoke on economyand finance, health and Covid-19,Agriculture and Food Distribution, Manufacturing and job creation.It is apoint to note that 38 crore poor persons have been able to open Bank accounts and implementation as 450 schemes has been linked to Direct Benefit Transfers to prevent leakages. Thereby Rs. 1.8 lakh crore have been saved through the use of Jan Dhan Accounts, Aadhaar and Mobile. Since 2014, more than 13 lakh crore rupees has been transferred to bank accountsof beneficiaries throughDirect Benefit Transfer (DBT), between April and August 2020, foreign direct investment of 36 billion dollars been made in India and India’s ranking in the Ease of Doing Business Index has improved.
India has faced the greatest challengein health sector.Covid-19 made us realize how poor is our health service. Yet in active co-operation of both State and Union Government, wehave managed the pandemic by developinga network of 2200 Labs, and manufacturing thousandsof ventilators, PPE kits, and test kits domestically. India is also conducting the world’s largest COVID-19 vaccination programme.Both vaccines under the programme have been produced domestically, there has been a rapid decline in new cases of COVID-19 and recoveries have increased.
How much the world has changed last year? Last year the Government had spoken of the march towards a 5-trillion Dollar economy. This year we are hoping to get back to the previous year’s level. A recession was inevitable and the Union Government decided to ensure short-term pain in order to make long-term gains. The stringent lockdown saved lives and controlled infections. It also gave the medicalinfrastructure, vital breathingspace to effectively brace for the pandemic and also become the world’s firstport of call for vaccines.
One of the most incisive and hard-hitting comments on the real import on the COVID-19 crisis came from none other than the United Nations Secretary General,Antonio Guterras. He saidCOVID-10 has been likened to an x-ray, revealing fracturesin the fragile skeleton of the societies we have built. It is exposing fallacies and falsehood everywhere. The lie that free marketscan deliver healthcare for all; the fiction that unpaid care work is not work. We are all not in the same boat. While we are all floating on the same sea, it’s clear that some are in super yachts, while others are clinging to the driftingdebris.’ Over the decades, India has faced mammoth challenges including wars and hunger. But the COVID-19 pandemic crisis,which resulted in a migrantcrisis, lockdowns and a serious contraction of the economy, and highlighted a crumbling health system, is an unprecedented test of the republic. This is the moment to use the "COVID X-ray" to recognizethe deep fissures caused bythe growing inequality in the country. Are we going to resolve a plan for post pandemic recovery that would be fundamentally different economic model for ensuringan equal, just and sustainable future for all?
History is littered with turning points that never were and fulcrums that failed to more earthProtest movements may not overpowergovernments and regimes,but they go a long way in undermining their legitimacy and support base. Not all great movements begin with clearly definedgoals. Whether it was the women's suffrage movement, India’s freedom movement,civil rights movement,JP movement, Arab Spring, they all began with powerfulbanding together againstthe powerful. Most protests in recent years have been spontaneous. This outburst of anger is its peacefulnature. It is "a pronounced shift in the global landscape of dissent." By all indications, the 21st Century appears to be an age of rage. We are witnessing extraordinary waves of protestsaround the world against wideninginequality and risingauthoritarianism. It is understandable why citizens are angry. But why are political leadersangrier than the citizens?
Farmers have been agitating at Delhi’s borders for past 75 days or more. After the Republic Day anarchy, it was assumed that the Kisan leaders would lose credibility and the movement would gradually peter out. But this has not happened. The agitation and the surrounding events and circumstances contain lessons and warnings for the law enforcement officers. Delhi Police should be applauded for displaying patienceand discipline under grave provocation. About 360 police personnelwere injured, including women officers who were attacked with swords and sticks. Yet theydid not lose their cool. One is reminded of the riots that took place in London and Birmingham in 2011, when the Police didn’t use force against the rioters on the spot, but later, on the basis of CCTV footage and video clippings identified and arrested them and got them convicted. The courts also disposed of the cases expeditiously and sentenced the law breakers to various terms of imprisonment. This should be the templatefor the Delhi Police.
Though many non-violent protests are aimed at the end of policy or a regime, a large majorityof them have the objectiveof bringing abouttransformative change and influencing governmental policies. Non-violent protest movements don’t alienate anyone. They keep the windows of opportunity open to conversion. This should be the way of ongoing farmers’ agitation. Negotiation should take place, though 11 rounds have already been done. A basic questionarises and that is, does a negotiation hold any meaning if one side has to win and other lost conclusively and completely?
I would like to draw the attention of the House regarding erosionof States’ powers. The 15th Finance Commission ChairmanShri N.K. Singh has asked to revisitthe Seventh Scheduleof the Constitution that dividesthe Legislative powers between the Unionand States. There has been a tendencyof the Union to expand the Concurrent List, at the cost of States' exclusive, legitimate powers. The division of functions enshrined under Seventh Scheduleof Constitution has got increasingly eroded over a period of time with the shifting of the subjects like forest and education from the State to the Concurrent List by the 42nd Amendment of the Constitution.
Hon’ble President has spoken about DBT and its benefit? I would like to draw the attentionof Hon’ble Members towards the steps this Government is taking in power sector. Despite the measures taken, this sector continues to flicker. Can the system of direct benefit transfer be used to ensure that the benefits go to those who need it the most?
Another important issue needs to be brought to light. Supreme Court of India has stayed the implementation of three farm laws. What is surprising is that the Court has not stated any legal or constitutional basis for the stay order. By doing this, has not the Court violated India’s functional and structural separation of powers? Let us not forget that this trend in the Court’saction goes beyond farm laws. It threatensthe foundation of the separation of powers betweenthe legislative, judiciary and executive. The Constitution providesstrong separation of power between judiciary and the legislature and the judiciary and the executive. The Constitution grants the judiciary the power to review executive action. Has not the Apex Court digressed from its boundary by staying alaw that has been passedby Parliament and approved by Presidentof India? SupremeCourt could have rejected it terming as unconstitutional and it is not legally tenable, but how can it put a stay?
I implore this House to ponder and take appropriate decision. Once this type of mistake is allowed, it will be termed as examplein later years. This should not happen.
The President’s address is one of the most Solemn occasions in the Parliamentary Calendar. The event is associated with the ceremonyand protocol. It has remainedso since 1950 and has developed into a custom. Of course, it is a different thing that the Opposition abstained itself from joining the Joint Session of Parliament to hear Hon’blePresident this year.
*SHRI D.M. KATHIR ANAND (VELLORE): I would like to bring to your kind notice that the Railway Gate (LC-81) connecting the Old Town and New Town is a big hurdle for the public, especially thousands of students and people going to work, hospital, colleges and schools situated in New Town, Vaniyambadi, in Vellore District of Tamil Nadu.
The total of population of Vaniyambadi metropolitcan region is 1,17,019 approximately. Vaniyambadi is a major town in the State of Tamil Nadu which is located about 200 km from Chennai. It is one of the hubs of leather exports in Tamil Nadu. Leather tannery is a major industry in the town. Vaniyambadi plays a major role in the field of leather industries which contributes several billion dollars to support the country’s GDP.
I would like to draw the attention to the long pending demand of a flyover bridge which needs to be constructed at Vaniyambadi. Sir, it is a major industrial town in the State of Tamil Nadu with the population of about 1,18,000. Vaniyambadi has 200 plus tanneries, many shoe and leather garment manufacturers, thousands of zari workers and a centre of trade, commerce and business. Thousands of students throng the educational institutions available in the town.
This Railway Crossing (LC-81) is the only access point for those entering the town from the national highway. As more than 120 trains cross the area in both directions, it resulted in the gate being closed frequently.
The Southern Railways a few years ago has proposed a road over bridge estimated at Rs. 16 crore. The tender was eventually finalised and the work was allotted to a private contractor with a promise of the facility becoming operational in eighteen months. However, the level crossing was closed for work on September 11, 2017 and a 20 feet trench was dug at the spot after which the work stopped completely. Years have passed and now the tender needs to be relooked or reproposed as the proposal which was delayed inordinately does not meet the expectations of the growing population. Now, a great shock is that the entire project is cancelled and dropped for the good.
It is very important and is the need of the hour. The long pending demand that a flyover bridge or a subway to be constructed across Vaniyambadi Railway Gate (LC-81) should be met immediately to avoid congestion of traffic and delay in public mobility.
*श्री रामचरण बोहरा (जयपुर): महामहिम राष्ट्रपति जी ने दोनों सदनो के सदस्यों को 29जनवरी, 2021 को अभिभाषण दिया था । उसका धन्यवाद प्रस्ताव माननीय सदस्य श्रीमति लॉकेट चटर्जी ने सदन के समक्ष विचारार्थ पेश किया है । उसका मैं पुरजोर समर्थन करता हूँ ।
मैं, माननीय प्रधानमंत्री जी का हृदय से धन्यवाद और प्रशंसा करता हूँ कि जिस तरह से उन्होंने इस विश्वव्यापी कोरोना नाम की महामारी का सूझबूझ, धैर्य और सहनशीलता से मुकाबला किया है । आज वह महामारी हमारे देश में मरणासन पर है । जबकि विश्व में अति विकसित और विकसित देश इस महामारी से अभी भी जूझ रहे हैं । उनकी स्वास्थ्य सेवाएं जो विश्व में प्रसिद्व हैं,को भी इस महामारी पर अकुंश लगाने में नाकामी सिद्ध हुई है । हमारा देश तो विकासशील देश है, यहां स्वास्थ्य सेवाएं विकसित देशों के मुकाबले सीमित हैं । लेकिन यह हर्ष की बात है कि हमने इस महामारी पर सीमित स्वास्थ्य सेवाएं होते हुए भी बड़ी सूझबूझ से मुकाबला किया और इस पर विजय प्राप्त की है । इन सभी मोर्चों पर देश एक साथ लड़ा और हर कसौटी पर खरा उतरा है । हम सभी देशवासियों के अहम साहस, संयम, अनुशासन और सेवाभाव के साक्षी बने हैं । हमने उन विशेषज्ञों और पंड़ितों को गलत साबित कर दिया,जो यह कह रहे थे कि भारत में यह महामारी अपना भयंकर रूप धारण करेगी और लाखों लोग इसमें समा जाएंगे और भारत इस पर अकुंश लगाने में असमर्थ रहेगा । यह सब हमारे माननीय प्रधानमंत्री जी की कार्य कुशलता,दूरदृष्टि,सूझबूझ, धैर्य और समय पर सही निर्णय लेने के कारण हुआ है । इसलिए वे बधाई के पात्र हैं ।
आज भारत एक नए सामर्थ्य के साथ दुनिया के सामने उभरकर आया है । आज देश में कोरोना के नए मरीजों की संख्या तेजी से घट रही है और संक्रमण से ठीक होने वालों की संख्या भी ज्यादा हो रही है ।
आज हमारे प्रधानमंत्री जी का विश्व में डंका बज रहा है । वह विश्व नेता के रूप में उभरकर आए हैं । आज विश्व के आधे से अधिक देश जिसमें विकसित देश भी शामिल हैं । हमारे प्रधानमंत्री जी की ओर आशा की दृष्टि से देख रहे हैं कि ये ही हमें इस महामारी से निजात दिला सकते हैं । आज भारत ने अपने पड़ोसियों और दूसरे देशों को मुफ्त में कोरोना वैक्सीन की सौगात दी है । ब्राजील जैसे विकसित देश ने फाइजर और मोडरेना द्वारा कोरोना वैक्सीन को छोड़कर हमारे देश में विकसित कोरोना वैक्सीन पर विश्वास किया है और माननीय प्रधानमंत्री जी ने उनकी आवश्यकता के अनुसार कोरोना वैक्सीन उपलब्ध करवाई है । आज विश्व स्वास्थ्य संगठन और दूसरे देशों के नेता माननीय प्रधानमंत्री जी की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए थक नहीं रहे हैं । हम और हमारे देशवासी धन्य हैं कि हमें मोदी जी के रूप में एक ऐसा नेता मिला है, जो हर परिस्थिति का डटकर मुकाबला करने के लिए सदैव तत्पर रहता है ।
यह बात किसी से छुपी नहीं है कि इस महामारी ने हमारे देश और विश्व की अर्थव्यवस्था को तहस-नहस कर दिया है । लाखों लोगों के रोजगार चले गए । कितने व्यवसाय बंद हो गए । छोटे कामगार इससे बुरी तरह प्रभावित हुए हैं,लाखों लोगों ने अपने सगे-संबंधियों को खो दिया । यहां भी माननीय प्रधानमंत्री जी ने सूझबूझ का परिचय दिया । अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए रिकार्ड आर्थिक पैकेज की घोषणा की गई है । छोटे कामगारों को 8 महीने तक मुफ्त में राशन वितरित किया, जिससे कि उनका जीवन-यापन आराम से हो सके । उद्योगों को वित्तीय सहायता प्रदान की जिससे हमारी अर्थव्यवस्था पटरी पर आ जाए । इस क्षेत्र में भी हमारी सरकार काफी सफल रही और अभी भी उचित कदम समय की मांग को देखते हुए उठाये जा रहे हैं और हमें आशा है कि आने वाले वित्त वर्ष में हम इस वित्तीय संकट पर काबू पा लेंगे और हमारी अर्थव्यस्था पहले की तरह ऊंचाइयों को छुएगी ।
जैसा कि आप जानते हैं कि चीन ने हमारे साथ धोखा करके हमारी सीमाओं पर अपनी गंदी नजर डाली है । उसका हमारी सशस्त्र सेनाओं ने मुंहतोड जवाब दिया है, जिसकी अपेक्षा चीन को नहीं थी । चीन ने सपने में भी नहीं सोचा था कि भारत इस तरह से प्रतिउत्तर देगा । यह सब हमारे माननीय प्रधानमंत्री जी की दूरदृष्टि का नतीजा है, उन्होंने हमारी सेनाओं को अति आधुनिक रक्षा साजो-समान उपलब्ध करवाया है । हम माननीय मोदी जी की प्रशंसा इस बात की भी करेगें कि जब उन्होंने कहा कि हम किसी से न आंख झुकाकर बात करेंगे और न ही आंख उठाकर बात करेंगे, बल्कि हम आंख में आंख डालकर बात करेंगे । हम उनकी इस बात की भी प्रशंसा करेंगे,जब उन्होंने कहा कि हम किसी को छेड़ेंगे नहीं और जो हमे छेड़ेगा,उसको छोड़ेंगे नहीं ।
हमारी सरकार का जोर आत्मनिर्भर भारत की ओर है । इस ओर अनेकों कदम उठाये गए हैं, जिनका परिणाम हमारे सामने आने लगा है । आज हम रक्षा क्षेत्र में निर्यात करने के लिए आगे बढ़ रहे हैं ।
किसानों को अधिक से अधिक लाभ देने हेतु और कृषि आधुनिक बने और कृषि का विस्तार भी हो, हमारी सरकार ने सकारात्मक परिवर्तन का प्रयास किया है । इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करते हुये लागत से डेढ़ गुना एमएसपी देने का निर्णय लिया है । आज सरकार न सिर्फ एमएसपी पर रिकार्ड मात्रा में खरीद कर रही है, बल्कि खरीद केन्द्रों की संख्या भी बढ़ा रही है ।
सरकार आज सिंचाई के आधुनिक तरीके किसानों तक पहुंचा रही है । जिससे कि जहां 2013-14 में 42 लाख हेक्टेयर जमीन में ही माइक्रो इरिगेशन की सुविधा थी, वह आज 56 लाख हेक्टेयर से ज्यादा अतिरिक्त जमीन को माइक्रो इरिगेशन से जोड़ा जा चुका है । इन सभी का परिणाम यह हुआ कि जहां 2008-09 देश में 234 मिलियन टन खाद्यान्न की पैदावार हुई थी । वहीं वर्ष 2019-20 में कृषि पैदावार बढ़कर 296 मिलियन टन तक पहुंच गई है । इसी अवधि में सब्जी और फलों का उत्पादन भी 215 मिलियन टन से बढ़कर 320 मिलियन टन तक पहुंच गया है ।
सरकार ने रेहड़ी-पटरी वालों तथा ठेला लगाने वाले लोगों के लिए विशेष स्वनिधि योजना की शुरुआत की है ।
हमारी सरकार ने शिक्षा क्षेत्र में भी काफी सुधार किए हैं । अभी तक हमारी शिक्षा प्रणाली ऐसी थी कि शिक्षा प्राप्त करके एक नौजवान केवल और केवल नौकरी की ओर अग्रसर होता था, क्योंकि उसको कोई व्यवसाय करने के लिए शिक्षित नहीं किया जाता था । नये सुधारों में शिक्षा को व्यवसाय से जोड़ा है, ताकि विद्यार्थी शिक्षा प्राप्त करके किसी भी व्यवसाय के लिए काबिल हो जाए यह एक सराहनीय कदम है । इससे देश में बेरोजगारी की समस्या पर काफी हद तक अंकुश लगाया जा सकेगा ।
हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री जी का मानना है कि हमें दूसरों पर निर्भरता को कम करते हुये स्वयं आत्मनिर्भर बनना होगा ।
भारतीय कृषि आधुनिक बने और कृषि का विस्तार हो, इसलिए हमारी सरकार ने स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करते हुए उन्हें लागत से डेढ़ गुना एमएसपी देने का फैसला भी किया गया है । आज सरकार न सिर्फ एमएसपी पर रिकार्ड मात्रा में खरीद कर रही है, बल्कि खरीद केन्द्रों की संख्या को भी बढ़ा रही है । कृषि सुधारों का सबसे बड़ा लाभ 10 करोड़ से अधिक छोटे किसानों को तुरन्त मिलना शुरू हो चुका है ।
सिंचाई की सुविधा में व्यापक सुधार आ रहा है, पर ड्रॉप मोर क्रॉप के मंत्र पर चलते हुए सरकार पुरानी सिंचाई परियोजनाओं को पूरा करने के साथ ही सिंचाई के आधुनिक तरीकों को किसानों तक पहुंचा रही है । वर्ष 2008-09 में जहां देश में 234 मिलियन टन खाद्यान्न की पैदावार हुई थी, वहीं वर्ष 2019-20 में बढ़कर 296 मिलियन टन तक पहुँच गई है । इसी अवधि में सब्जी और फलों का उत्पादन भी 215 मिलियन टन से बढ़कर 320 मिलियन टन तक पहुंच गया है ।
देश के सभी किसानों में से 80 प्रतिशत से ज्यादा छोटे किसान हैं और इनकी संख्या 10 करोड़ से ज्यादा है । ऐसे किसानों को मदद करने के लिए सरकार ने पीएम किसान सम्मान निधि के द्वारा उनके खातों में एक लाख तेरह हजार करोड़ से अधिक रुपये सीधे ट्रांसफर कर दिए हैं । प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत छोटे किसानों को पिछले 5 वर्षों में 17 हजार करोड़ रुपये प्रीमियम के एवज में लगभग 90 हजार करोड़ की राशि मुआवजे के तौर पर मिली है ।
देश के छोटे किसानों को साथ जोड़कर 10हजार किसान उत्पादक संगठनों को स्थापित करने का अभियान एक ऐसा ही प्रभावशाली कदम है । इनसे इन छोटे किसानों को समृद्व किसानों की तरह बेहतर तकनीक,ज्यादा ऋण,पोस्ट हार्वेस्टिंग प्रोसेसिंग एवं मार्केटिंग की सुविधाएं और प्राकृतिक आपदा के समय सुरक्षा मिलनी सुनिश्चित हुई है ।
व्यापक विमर्श के बाद संसद ने 7 महीने पूर्व तीन कृषि विधेयक पारित किए हैं । इन कृषि सुधारों का सबसे बड़ा लाभ भी 10 करोड़ से अधिक छोटे किसानों को तुरन्त मिलना शुरू हो गया है ।
मैं एक बात और कहना चाहता हूँ कि तीन नए कृषि कानून बनने से पहले, पुरानी व्यवस्थाओं के तहत जो अधिकार और सुविधाएं थीं,उनमें कोई कमी नहीं की गई है ।
देश भर में शुरू की गई किसान रेल देश के किसानों को नया बाजार उपलब्ध कराने में नया अध्याय लिख रही है । यह किसान रेल एक तरह से चलता फिरता कोल्ड स्टोरेज है । अब तक 100 से अधिक किसान रेलों का संचालन किया जा चुका है,जिनके माध्यम से 38 हजार टन से ज्यादा अनाज और फल-सब्जियां किसानों द्वारा भेजी गई है ।
देश का पशुपालन पिछले 5 वर्षों में सालाना 8.2 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है । डेयरी क्षेत्र में बुनियादी ढांचे की स्थापना और निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार ने 15 हजार करोड़ के पशुपालन अवसंरचना विकास कोष की स्थापना की गई है । इसके अलावा किसान क्रेडिट कार्ड की सुविधा भी किसानों को दी गई है । प्रधानमंत्री कुसुम योजना के तहत किसानों को 20 लाख सोलर पम्प दिए जा रहे हैं । सरकार द्वारा गन्ने के सीरे,मक्का, धान इत्यादि से एथेनाल के उत्पादन को भी बढ़ावा दे रही है । एथेनाल, देश के किसानों की आय को बढाने का एक बहुत बड़ा जरिया बनकर उभर रहा है ।
बाबासाहेब की प्रेरणा को साथ लेकर, सरकार जल जीवन मिशन की महत्वाकांक्षी योजना पर काम कर रही है, जिसके तहत हर घर जल पहुंचाने के साथ ही जल संरक्षण पर भी फोकस किया जा रहा है । इस अभियान के तहत अब तक 3 करोड़ से अधिक परिवारों को पाइप वाटर सप्लाई से जोड़ा गया है ।
आत्मनिर्भर भारत में महिला उद्यमियों की विशेष भूमिका है । भारत सरकार ने महिलाओं को स्वरोजगार के नए अवसर देने के लिए कई कदम उठाए हैं । मुद्रा योजना के तहत अब तक 25करोड़ से ज्यादा ऋण दिये जा चुके हैं, जिसमें से लगभग 70 प्रतिशत ऋण महिला उद्यमियों को मिले हैं । राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अन्तर्गत देश में आज 7 करोड़ से अधिक महिला उद्यमी करीब 66 लाख स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हुई हैं । बैंको के माध्यम से इन महिला समूहों को पिछले 6 वर्षों में 3 लाख 40 हजार करोड़ रुपये का ऋण दिया गया है ।
विषय तो बहुत हैं जिस पर हमारी सरकार ने समय-समय पर कदम उठाए हैं,जिनमें से कुछ के सुखद परिणाम आने लगे हैं और बाकी के परिणाम भविष्य में आएंगे । जिससे देश सशक्त और प्रभावशली होगा । मैं उनका संक्षेप में वर्णन करता हूँ । राष्ट्रीय शिक्षा नीति में पहली बार छात्रों को अपनी रुचि के हिसाब से विषय पढ़ने की आजादी दी गई है । ई-विद्या के अन्तर्गत स्कूली शिक्षा के लिए दीक्षा ऑनलाइन पोर्टल को वन नेशन, वन डिजिटल प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित किया है । आज 3 करोड़ 20 लाख से ज्यादा विद्यार्थियों को छात्रवृति योजनाओं का लाभ मिल रहा है । इसमें अनुसूचित जाति, पिछड़ा वर्ग, वनवासी एवं जनजातीय वर्ग और अल्पसंख्यक समुदाय के छात्र-छात्राएं शामिल हैं । इसी प्रकार जनजातिय युवाओं के लिए हर आदिवासी ब्लॉक तक एक लक्ष्य आवासीय मॉडल स्कूल के विस्तार का काम किया जा रहा है । अब तक इस प्रकार के 550 से ज्यादा स्कूल स्वीकृत किए जा चुके हैं । सबका साथ, सबका विकास,सबका विश्वास के मंत्र के साथ देश के हर क्षेत्र और हर वर्ग के विकास को प्राथमिकता दी जा रही है । जनधन खातों, आधार और मोबाइल की त्रिशक्ति ने लोगों को उनका अधिकार सुनिश्चित किया है । इसकी वजह से 1 लाख 80 हजार करोड़ रुपये गलत हाथों में जाने से बच गए है । राष्ट्रीय डिजिटल हेल्थ मिशन के जरिए चिकित्सा सेवाओं को डिजिटल बनाने की शुरुआत भी की गई है । इसे डिजिटल रिपोर्ट के साथ-साथ डिजिटल हेल्थ रिकार्ड जैसी सुविधाओं का लाभ मिल पाएगा ।
इन्हीं शब्दों के साथ मैं धन्यवाद प्रस्ताव का समर्थन करता हूँ ।
*SHRI K. NAVASKANI (RAMANATHAPURAM): The President's address just like every other measure of this Government is nothing more than an elaborate gimmick, lacking any sort of substance or acknowledgement of the ground reality.
The speech is full of lies on the farm laws. Never once acknowledging the ongoing protests, the Government claims extensive consultations were held before passing such laws in Parliament. The truth is that the rules of procedure of Rajya Sabha were illegally violated in order to push through the laws, without considering opposition demands for sending the bills to the Standing Committee for evaluation.
The entire speech has only one mention of minorities - in regard to the multiple scholarship schemes for students from minority communities. Again a lie, as the Annual Report of the Ministry of Minority Affairs shows how most of the schemes for minority welfare had much lower actual spending than their budgeted amounts. For some schemes like the Scheme for Leadership Development of Minority Women, the actual expenditure until December 2019 was less than 5% of the budget estimate.
The worsening condition of minorities across the nation, the highly condemnable 'love-jihad' laws being passed by BJP states, the increase in share of minorities in Indian jails, 19 per cent of jail inmates in the country are Muslims, the hounding of Muslim students and activists with false cases by BJP Governments, none of these find any mention even once in the speech.
The speech starts with a quote from Assamese poet Ambikagiri Raichaudhuri's poem and ends with one from Jyotirindranath Tagore, the brother of Rabindranath Tagore. Upcoming elections in Assam and West Bengal may have prompted this, but their hypocrisy stands exposed. While they quote the lines of Tagore and Raichaudhuri, the Hindutva ideology that the ruling party follows is completely against the spirit and ethos of these great poets. These legendary poets preached equality; they-preached dignity for all; they preached of an inclusive India. The ones quoting them now, only preach for a "Hindu Rashtra". Nothing could be more insulting towards these great men.
India is looking at its worst economic crisis ever. We have entered recession for the first time. Growth of GDP has been negative in first two quarters. Government's fiscal deficit is rising. Revenue collections are bound to be affected. Unemployment is at alarming levels. MPLAD funds are being cut. None of these points were mentioned anywhere in the President's address. In the middle of all this economic disaster, instead of putting money in the hands of the people, what is the urgent need to spend thousands of crores of rupees on such cosmetic measures like building a new Parliament, bullet train project etc.?
Most importantly, this Government is killing the very spirit of democratic deliberations and the founding ideals of our Parliamentary democracy. They are crushing the spirit of Parliament, and then spending crores on constructing a new building for it.
Lastly, the entire speech is completely silent about the future of minorities in India, given that every day the Government is taking one more step in ensuring that India becomes a Hindu Rashtra. It is silent about the insults to minority communities done by some news channels on a regular basis. It is silent on the cruelty of the Delhi police in crushing the CAA protests and now the farmers protests. Incidentally, both the protests were mass movements by minority communities across the country (Muslims and Sikhs). On both occasions, the administration tried to crush the protest and the protestors. That itself shows how much anti-minority the current administration is.
*SHRI P. C. GADDIGOUDAR (BAGALKOT): At the outset, I would like to express my gratitude for giving me this opportunity to submit my views on the Motion of Thanks on the President’s Address. As regards the Agriculture sector, the present government has passed the long pending three farm laws and allayed the fears of farmers. The new legislations provided new avenues without altering any past structures and marked the culmination of decades-old discussions on the need for reforms.
The Pradhan Mantri Kisan Samman Nidhi (PM-KISAN) was launched by this Government on 24th February 2019 wherein around 6500 projects like mega food parks, cold chain infrastructure, agro-processing clusters have been approved recently. In addition to this, Rs. 10,000 crores have also been approved for micro food processing industries under government’s ‘Atmanirbhar’ package.
Under the Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana, Rs. 90,000 crore has been paid as compensation to insured farmers in the last five years. Due to vigorous efforts undertaken by Government, we were able to achieve a record high food grains production- from 234 million tons in 2008-09 to 296 million tons in 2019-20.
It is noteworthy to mention here that during lockdown, for eight months, 80 crore people were provided with 5 kg free food grains per month under the Pradhan Mantri Garib Kalyan Yojana, in addition to entitlements under the National Food Security Act, 2013.
Further, the ‘One Nation, One Ration Card’ allowed migrant labourers and workers away from home to access entitlements across India.
Coming to Health Sector, we have managed the pandemic by developing a network of 2,200 labs, and manufacturing thousands of ventilators, Personal Protective Equipment (PPE) kits, and test kits domestically. India is also conducting the world’s largest COVID-19 vaccination programme. Both the vaccine- Covaxin and Covishield, have been manufactured locally and we have exported huge quantities abroad particularly to friendly countries as a ‘goodwill gesture’.
Under the Ayushman Bharat scheme, 1.5 crore poor people have received free treatment upto five lakh rupees and saved Rs. 30,000 crore. Under the Pradhan Mantri Bhartiya Janaushadhi Yojana, around 7,000 Janaushadhi Kendras have been set up in various parts of the country to provide the poor with affordable medicines. Since 2014, this government has increased the medical colleges from 387 to 562. Further, under the Pradhan Mantri Swasthya Suraksha Yojana, 22 new AIIMS have been sanctioned. Medical Council of India has been replaced with the National Medical Commission.
Sir, during the COVID-19 pandemic, Garib Kalyan Rojgar Abhiyan, which aims at creating livelihood opportunities for the returned migrants, was launched in six States and 50 crore man-days of employment was provided to returnee migrant labourers in their villages. Besides, the National Recruitment Agency has been set up to simplify and streamline recruitment process for jobs.
It is glad to note that under the Jal Jeevan Mission, three crore families have been connected with piped water supply.
As regards the banking sector, India’s prefacing of economic reforms with Aadhaar-enabled social safety net and direct income transfer to the poor will pay off by enabling growth with a massive expansion in employment. The social safety nets constructed to ensure the right to food and direct income transfers to farmers will protect incomes of the vulnerable even as competition increases productivity and growth. India’s ranking in the Ease of Doing Business Index has also improved considerably.
As regards defence sector, India is increasing its share in the exports of defence equipment. Several advanced weapons including quick reaction missiles, tanks, and indigenous rifles are being manufactured in India. Coming to our defence preparedness, our security forces had thwarted all Chinese attempts to alter the status quo and additional troops had been deployed on the border to safeguard national sovereignty. Our Government’s serious effort also resulted in major reductions in Naxal violence over the years.
To promote education of tribes, government has sanctioned 550 Ekalavya Model Residential Schools in every tribal dominated area.
Under the able leadership of our Prime Minister, the present government has turned the Covid crisis into an opportunity by unveiling the ‘Make in India Movement. Now, Aatmanirbhar Bharat has become a ‘mantra’ for the 130 crores of Indians today.
With these words, I support the motion.
*श्री गोपाल शेट्टी (मुम्बई उत्तर):मैं महामहिम राष्ट्रपति महोदय जी के अभिभाषण का हृदय से समर्थन करता हूं और बहुत-बहुत आभारी हूं,जिन्होंने संसद की संयुक्त बैठक को संबोधित किया है । मैं महामहिम राष्ट्रपति जी के अवलोकन का स्वागत करता हूँ । उन्होंने अपने अभिभाषण में उपस्थित सांसदों को सराहा और सभी चुनौतियों के बीच लोगों और देश के प्रति समर्पित हमारी कर्तव्य निष्ठा का प्रतीक माना है । मैं माननीय राष्ट्रपति जी के प्रति आभार व्यक्त करता हूं कि उन्होंने जनप्रतिनिधियों के रूप में हमारे ऊपर अपना विश्वास जताया है । हम इस विश्वास को आगे बढाते हुए जनता की सेवा और देश के विकास में अपना योगदान देने का भरसक प्रयास जारी रखेंगे । महामहिम राष्ट्रति महोदय ने अपने अभिभाषण के प्रारम्भ में उल्लेख किया है कि कोरोना वैश्विक महामारी के इस दौर में हो रहा संसद का यह संयुक्त सत्र बहुत महत्वपूर्ण है । नया वर्ष भी है,नया दशक भी है और इसी साल हम आजादी के 75वें वर्ष में भी प्रवेश करने वाले हैं । आज संसद के आप सभी सदस्य हर भारतवासी के इस संदेश और इस विश्वास के साथ यहां उपस्थित हैं कि चुनौती कितनी ही बड़ी क्यों न हो, न हम रुकेंगे और न भारत रुकेगा । केन्द्रीय नेतृत्व में माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की देश के प्रति निरंतर प्रगति उनकी दृढ़ता को दर्शाती है । महामहिम राष्ट्रपति जी ने अपने अभिभाषण में सरकार द्वारा कोरोना महामारी से लड़ने हेतु उठाए गए अथक प्रयासों का विस्तार से विवरण किया है । कोराना वायरस के कारण पिछला साल काफी चुनौतीपूर्ण रहा, लेकिन हमारे ऋषितुल्य प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र जी मोदी के नेतृत्व में सरकार की ओर से समय से उठाए गए कदमों से स्थिति में तीव्रता के साथ सुधार हुआ । यहां तक कि विश्व के विकसित देश जिनमें अमेरिका,ब्रिटेन, फांस, जापान इत्यादि देश शामिल हैं, वैश्विक महामारी कोराना से बुरी तरह जूझते रहे । हमारे देश ने इस महामारी पर न केवल तीव्रता से अंकुश पाया,बल्कि विश्व के अनेक प्रमुख देशों को इस महामारी के बचाव हेतु दवाइया भी उपलब्ध करवाई और आज भी अनेक देशों को इसके कुप्रभाव से बचाने हेतु वैक्सीन की आपूर्ति की जा रही है । यह हमारे माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के केन्द्रीय नेतृत्व में सफल कार्यक्षमता के कारण ही सम्भव हो पाया है । हमें अपने डॉक्टरों,नर्सों, पुलिस और अन्य स्वास्थ्य देखभाल कार्यकर्ताओं जैसे फ्रंट लाइन कोरोना योद्धाओं को विशेष धन्यवाद देना चाहिए, जो निस्वार्थ भाव से अपने जीवन के बारे में बिना सोचे अथक रूप से देश सेवा में लगे हुए हमारे वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं ने भी बिजली की त्वरित गति से काम किया है और कोविड टीके को महज लाक डाउन के उपरांत दस महीनों मे विकसित कर भारत को एक नई उपलब्धि प्रदान की है । भारत के लिए यह बहुत गर्व की बात है कि एक विकासशील देश के रूप में हमने कोरोना वैक्सीन की खोज में विकसित देशों को पीछे छोड़ दिया है । भारत आज विश्व राजनीति में एक चमकते सितारे की तरह है और हमारे वैज्ञानिकों की बदौलत कई देशों को कोरोना टीके की आपूर्ति कर रहा है । सभी भारतीयों के सामूहिक प्रयासों के कारण, भारत में दुनिया का सबसे बड़ा कोविड-19टीकाकरण कार्यक्रम शुरू हो गया है । यह सभी देशवासियों के लिए गर्व की बात है । महामहिम राष्ट्रपति महोदय का यह कथन भी स्वागत योग्य है कि हमारे ऋषितुल्य प्रधानमंत्री आदरणीय श्री नरेन्द्र मोदी जी के केन्द्रीय नेतृत्व में लिए गए सटीक फैसलों से लाखों देशवासियों का जीवन बचा है,जिसके परिणामस्वरूप आज देश में कोरोना के नए मरीजों की संख्या भी तेजी से घट रही है और जो संक्रमण से ठीक हो चुके हैं उनकी संख्या भी काफी अधिक है । महामहिम राष्ट्रपति महोदय का यह कथन कि सरकार के प्रयासों से आज देश की स्वास्थ्य सेवाएं गरीबों को आसानी से उपलब्ध हो रही हैं तथा बीमारियों पर होने वाला उनका खर्च कम हो रहा है । ‘आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना’के तहत देश में 1.5 करोड़ गरीबों को 5 लाख रुपए तक का मुफ्त इलाज मिला है । इससे इन गरीबों के 30 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च होने से बचे हैं तथा आज देश के 24 हजार से ज्यादा अस्पतालों में से किसी में भी ‘आयुष्मान योजना’ का लाभ लिया जा सकता है । इसी तरह ‘प्रधान मंत्री भारतीय जन-औषधि योजना’के तहत देश भर में बने सात हजार केंद्रों से गरीबों को बहुत सस्ती दर पर दवाइयां मिल रही हैं । इन केंद्रों में रोजाना लाखों मरीज दवाई खरीद रहे हैं । कीमत कम होने की वजह से मरीजों की सालाना लगभग 3600 करोड़ रुपए की बचत हो रही है । यह माननीय प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की केन्द्रीय उपलब्धियों को दर्शाता है । महामहिम राष्ट्रपति महोदय का यह कथन भी हमारे ऋषितुल्य प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की केन्द्रीय उपलब्धियों को दर्शाता है कि साल 2014 में देश में सिर्फ 387 मेडिकल कालेज थे, लेकिन आज देश में 562 मेडिकल कालेज हैं और बीते 6 वर्षों में अंडर ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट चिकित्सा शिक्षा में 50 हजार से ज्यादा सीटों की वृद्धि हुई है तथा ‘प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना’ के तहत सरकार ने 22 नए ‘एम्स' को भी मंजूरी दी है । महामहिम राष्ट्रपति महोदय का यह कथन कि आत्मनिर्भर भारत अभियान केवल भारत में निर्माण तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत के हर नागरिक का जीवन स्तर ऊपर उठाने तथा देश का आत्मविश्वास बढ़ाने का भी अभियान है । यह स्वागत योग्य है । मैं महामहिम राष्ट्रपति महोदय के इस कथन का हृदय से समर्थन करता हूं कि ‘आत्मनिर्भर भारत’का हमारा लक्ष्य आत्मनिर्भर कृषि से और सशक्त होगा और इसी सोच के साथ सरकार ने बीते 6 वर्षों में बीज से लेकर बाजार तक हर व्यवस्था में सकारात्मक परिवर्तन का प्रयास किया है, ताकि भारतीय कृषि आधुनिक भी बने और कृषि का विस्तार भी हो । महामहिम राष्ट्रपति महोदय के अभिभाषण में यह उल्लेख है कि केन्द्र सरकार की प्राथमिकताओं में ये छोटे और सीमांत किसान भी हैं । ऐसे किसानों के छोटे-छोटे खर्च में सहयोग करने के लिए ‘पीएम किसान सम्मान निधि’ के जरिए उनके खातों में लगभग एक लाख तेरह हजार करोड़ से अधिक रुपए सीधे ट्रांसफर किए जा चुके हैं । ‘प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना’का लाभ भी देश के छोटे किसानों को हुआ है । इस योजना के तहत पिछले 5 वर्षों में किसानों को 17 हजार करोड़ रुपए प्रीमियम के एवज में लगभग 90 हजार करोड़ रुपए की राशि मुआवजे के तौर पर मिली है, जो प्रशंसा की बात है । महामहिम राष्ट्रपति महोदय ने अभिभाषण में यह उल्लेख किया कि व्यापक विमर्श के बाद संसद में सात महीने पूर्व तीन महत्वपूर्ण कृषि सुधार, कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण)विधेयक, कृषि (सशक्तीकरण और संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा करार विधेयक,और आवश्यक वस्तु संशोधन विधेयक पारित किए हैं । इन कृषि सुधारों का सबसे बड़ा लाभ भी 10 करोड़ से अधिक छोटे किसानों को तुरंत मिलना शुरू हुआ । छोटे किसानों को होने वाले इन लाभों को समझते हुए ही अनेक राजनीतिक दलों ने समय-समय पर इन सुधारों को अपना भरपूर समर्थन दिया था । देश में अलग-अलग फोरम पर,देश के हर क्षेत्र में दो दशकों से जिन सुधारों की चर्चा चल रही थी और जो मांग हो रही थी, वह सदन में चर्चा के दौरान भी परिलक्षित हुई,यह देशवासियों के लिए खुशी की बात है ।
महामहिम राष्ट्रपति महोदय के अभिभाषण में यह उल्लेख है कि लोकतंत्र और संविधान की मर्यादा को सर्वोपरि रखने वाली केन्द्र सरकार, इन कानूनों के संदर्भ में पैदा किए गए भ्रम को दूर करने का निरंतर प्रयास कर रही है तथा केन्द्र सरकार ने लोकतंत्र में अभिव्यक्ति की आजादी और शांतिपूर्ण आंदोलनों का हमेशा सम्मान किया है,लेकिन पिछले दिनों तिरंगे का और गणतंत्र दिवस जैसे पवित्र दिन का अपमान बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है । जो संविधान हमें अभिव्यक्ति की आजादी का अधिकार देता है, वही संविधान हमें सिखाता है कि कानून और नियम का भी उतनी ही गंभीरता से पालन करना चाहिए । मैं महामहिम राष्ट्रति महोदय द्वारा अपने अभिभाषण में 26 जनवरी को देश की ऐतिहासिक प्राचीर लाल किले पर तिरंगे के अपमान की घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताने एवं उच्चतम न्यायालय द्वारा तीनों नए खेती कानूनों के अमल पर जो रोक लगाई हुई है तथा सरकार न्यायालय के फैसले का अनुपालन करेगी,का समर्थन करता हूं तथा उनके इस कथन का भी समर्थन करता हूं कि तीन नए कृषि कानून बनने से पहले पुरानी व्यवस्थाओं के तहत जो अधिकार थे तथा जो सुविधाएं थीं, उनमें कहीं कोई कमी नहीं की गई है । बल्कि इन कृषि सुधारों के जरिए सरकार ने किसानों को नई सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ-साथ नए अधिकार भी दिए हैं । महामहिम राष्ट्रपति महोदय का यह कथन कि कृषि को और लाभकारी बनाने के लिए केन्द्र सरकार आधुनिक कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी विशेष ध्यान दे रही है तथा इसके लिए एक लाख करोड़ रुपए के एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड की शुरुआत की गई है और देश भर में शुरू की गई किसान रेल,भारत के किसानों को नया बाजार उपलब्ध कराने में नया अध्याय लिख रही हैं एवं यह किसान रेल एक तरह से चलता फिरता कोल्ड स्टोरेज है एवं अब तक 100 से ज्यादा किसान रेलें चलाई जा चुकी हैं, जिनके माध्यम से 38 हजार टन से ज्यादा अनाज और फल-सब्जियां, एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र तक किसानों द्वारा भेजी गई हैं, यह केन्द्र सरकार की किसानों के प्रति जागरूकता और उपलब्धियों को दर्शाता है । महामहिम राष्ट्रपति महोदय का अभिभाषण में यह कथन स्वागत योग्य है कि किसानों की आय बढ़ाने के लिए केन्द्र सरकार ने पशुधन को आय के स्रोत के रूप में स्थापित करने पर भी विशेष जोर दिया है तथा इसी का परिणाम है कि देश का पशुधन पिछले 5 वर्षों में सालाना 8.2 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है । इसके साथ ही सरकार ने डेयरी क्षेत्र में बुनियादी ढांचे की स्थापना और निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए 15 हजार करोड़ रुपए के पशुपालन अवसंरचना विकास कोष की स्थापना भी की है । यह भी स्वागत योग्य है कि पशुपालन और मत्स्यपालन को भी सरकार ने कृषि क्षेत्र की तरह ही किसान क्रेडिट कार्ड की सुविधा दी है तथा देश में ‘प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना’के माध्यम से मछुआरों की आय को बढाने के लिए भी काम हो रहा है और इस क्षेत्र में अगले पांच सालों में लगभग बीस हजार करोड़ रुपए का निवेश करने की योजना है । महामहिम राष्ट्रपति महोदय का यह कथन कि हमारे गांवों को 21वीं सदी की जरूरतों और इंफ्रास्ट्रक्चर से जोड़ने के लिए सरकार ने ग्रामीण सड़क नेटवर्क के विस्तार में भी सराहनीय काम किया है और ‘प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना’के अंतर्गत देश के ग्रामीण क्षेत्रों में 6 लाख 42 हजार किलोमीटर सड़क का निर्माण पूरा कर लिया गया है एवं इस योजना के तीसरे चरण में ग्रामीण क्षेत्रों में बसावटों के साथ-साथ स्कूलों बाजारों और अस्पतालों आदि से जोड़ने वाले 1 लाख 25 हजार किलोमीटर रास्तों को भी अपग्रेड किया जाएगा । गांवों में सड़कों के साथ ही इंटरनेट की कनेक्टिविटी भी उतनी ही अहम है तथा हर गांव तक बिजली पहुंचाने के बाद सरकार देश के 6 लाख से अधिक गांवों को ऑप्टिकल फाइबर से जोड़ने के लिए अभियान चला रही है । यह स्वागत योग्य है । महामहिम राष्ट्रपति महोदय का यह कथन कि ‘दीनदयाल अंत्योदय योजना’राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत देश में आज 7 करोड से अधिक महिला उद्यमी करीब 66 लाख स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हुई हैं । बैंकों के माध्यम से इन महिला समूहों को पिछले 6 वर्षों में 3 लाख 40 हजार करोड़ रुपए का ऋण दिया गया है, यह भी स्वागत योग्य है । महामहिम राष्ट्रपति महोदय का यह कथन भी स्वागत योग्य है कि सरकार 'सबका साथ, सबका विकास,सबका विश्वास'मंत्र के साथ देश के हर क्षेत्र और हर वर्ग के विकास को प्राथमिकता दे रही है और दिव्यांगजनों की मुश्किलों को कम करने के लिए देशभर में हजारों इमारतों को, सार्वजनिक बसों और रेलवे को सुगम्य बनाया गया है और लगभग 700 वेबसाइटों को दिव्यांगजनों के अनुकूल तैयार किया गया है । इसी तरह ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को भी बेहतर सुविधाएं और समान अवसर देने के लिए अवसर प्रदान किए गए हैं और विमुक्त,घुमंतू और अर्ध घुमंतू समुदायों के लिए भी विकास एवं कल्याण बोर्ड की स्थापना की गई है ।
महामहिम राष्ट्रपति महोदय का यह कथन कि विकास की दौड़ में पीछे रह गए देश के 112 आकांक्षी जिलों में केन्द्र सरकार प्राथमिकता के आधार पर विकास योजनाओं को लागू कर रही है और इसका बहुत बड़ा लाभ आदिवासी भाई-बहनों को हो रहा है तथा आदिवासियों की आजीविका के प्रमुख साधन यानी वन-उपज की मार्केटिंग और वन-उपज आधारित छोटे उद्योगों की स्थापना का काम भी जारी है और ऐसी कोशिशों से लगभग 600 करोड़ रुपए की अतिरिक्त राशि जनजातीय परिवारों तक पहुंची है । सरकार द्वारा 46 वन-उपजों पर 90 प्रतिशत तक बढ़ाई गई है,यह स्वागत योग्य है । महामहिम राष्ट्रपति महोदय का यह कथन भी स्वागत योग्य है कि हमारी संसद,लोकतन्त्र में देशवासियों की बढ़ती हुई भागीदारी और नए भारत की आकांक्षाओं की पूर्ति का एक महत्वपूर्ण माध्यम है तथा पहले की सरकारों में तथा संसद के सदनों में यह बात उठती रही है कि संसद की यह इमारत, हमारी वर्तमान आवश्यकताओं को पूरा करने में अपर्याप्त सिद्ध हो रही है और संसद की नई इमारत को लेकर पहले की सरकारों ने भी प्रयास किए थे तथा यह सुखद संयोग है कि आजादी के 75वें वर्ष की तरफ बढ़ते हुए हमारे देश ने,संसद की नई इमारत का निर्माण शुरू कर दिया है और नए संसद भवन के बनने से अपने संसदीय दायित्वों को निभाने में हर सदस्य को अधिक सुविधा मिलेगी । महामहिम राष्ट्रपति महोदय का यह कथन भी स्वागत योग्य है कि सरकार की विकास नीति को जम्मू कश्मीर के लोगों ने भी भरपूर समर्थन दिया है और कुछ सप्ताह पहले ही, आजादी के बाद पहली बार जम्मू कश्मीर में जिला परिषद के चुनाव सफलता के साथ संपन्न हुए हैं । बड़ी संख्या में मतदाताओं की भागीदारी ने दर्शाया है कि जम्मू कश्मीर नए लोकतांत्रिक भविष्य की तरफ तेजी से आगे बढ़ चला है तथा प्रदेश के लोगों को नए अधिकार मिलने से उनका सशक्तीकरण हुआ है । ‘आयुष्मान भारत’ सेहत योजना लागू होने के बाद जम्मू कश्मीर के हर परिवार को 5 लाख रुपए तक के मुफ्त इलाज का लाभ मिलना तय हुआ है और जम्मू में सेंट्रल एड्मिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल की एक बेंच भी स्थापित की गई है तथा केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद, कुछ महीने पहले लद्दाख स्वायत्त पर्वतीय विकास परिषद के चुनाव की प्रक्रिया भी सफलता पूर्वक सम्पन्न हुई है और अब लद्दाख के लोग स्वयं अपने प्रदेश के विकास से जुड़े निर्णय और तेजी से ले रहे हैं । आर्टिकल 370 के प्रावधानों के हटने के बाद जम्मू-कश्मीर के लोगों को नए अधिकार मिले हैं । नागरिकता संशोधन कानून संसद द्वारा पास किया जा चुका है । चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ के पद का लाभ देश को मिलना शुरू हो चुका है । सशस्त्र सेनाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ रही है । उच्चतम न्यायालय के फैसले के उपरांत भव्य राम मंदिर का निर्माण शुरू हो चुका है । वर्ल्ड टूरिज्म इंडेक्स की रैकिंग में भारत 65वें से 34वीं रैकिंग पर आ गया है । जिस DBT को नजरअंदाज किया जा रहा था,उसी की मदद से पिछले 6 साल में 13 लाख करोड़ रुपए से अधिक धनराशि लाभार्थियों को ट्रांसफर की गई है । कभी हमारे यहां सिर्फ 2 मोबाइल फैक्ट्रियां थीं । आज भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल निर्माता देश है । आज मध्यम वर्ग के लाखों लोगों को Real Estate Regulation and Development Act ds rgr Real Estate Regulatory Authority, रेरा का लाभ मिल रहा है । इस दौरान सिर्फ नए कानून ही नहीं बने बल्कि 1500 से ज्यादा पुराने और अप्रासंगिक कानूनों को समाप्त किया जा चुका है । महामहिम राष्ट्रपति महोदय का यह कथन कि ऐसे अनेक निर्णय है, जो लगभग हर क्षेत्र में लिए गए हैं तथा सरकार ने दिखाया है कि नीयत साफ हो, इरादे बुलंद हो तो बदलाव लाया जा सकता है । इन वर्षों में मेरी सरकार ने जितने लोगों के जीवन को छुआ है, वह अभूतपूर्व है । माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के केन्द्रीय नेतृत्व में किए गए ये सभी कार्य स्वागत योग्य है । हर गरीब का घर रौशन हो, इसके लिए ढाई करोड़ से अधिक बिजली कनेक्शन निशुल्क दिए गए । गरीब और मध्यम वर्ग का बिजली बिल कम हो,इसके लिए 36 करोड़ से ज्यादा सस्ते बल्ब वितरित किए गए । दुर्घटना की स्थिति में गरीब परिवार को दर-दर न भटकना पड़े इसके लिए सिर्फ एक रुपए महीना के प्रीमियम पर 21 करोड़ से अधिक गरीबों को ‘प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना’से जोड़ा गया । गरीब की मृत्यु के बाद उसके परिवार के पास एक संबल रहे, इसलिए सिर्फ 90 पैसा प्रतिदिन के प्रीमियम पर लगभग साढ़े 9 करोड़ लोगों को ‘प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना’ से जोड़ा गया । गरीब का शिशु किसी गंभीर बीमारी से ग्रसित न हो इसलिए मेरी सरकार ने न सिर्फ टीकों की संख्या बढाई बल्कि टीकाकरण अभियान को देश के उन आदिवासी इलाकों में भी ले गई जो अब तक अछूते थे । ‘मिशन इंद्रधनुष’के तहत साढ़े 3 करोड़ से अधिक बच्चों का टीकाकरण किया गया । गरीब के हक का राशन कोई दूसरा न छीन ले,इसके लिए शत प्रतिशत राशन कार्ड को डिजिटल किया जा चुका है । 90 प्रतिशत राशन कार्डों को आधार से जोड़ा जा चुका है । रसोई के धुएं से गरीब बहन-बेटी की सेहत न खराब हो इसके लिए उज्ज्वला योजना के तहत 8 करोड़ से ज्यादा मुफ्त कनेक्शन दिए गए । गरीब बहन-बेटी की गरिमा बढे, उनकी परेशानी कम हो, इसके लिए ‘स्वच्छ भारत मिशन’ के तहत 10 करोड़ से ज्यादा शौचालय बनाए गए । घर में काम करने वाले भाई-बहन, गाडी चलाने वाले,जूता सिलने वाले,कपड़ा प्रेस करने वाले, खेतिहर मजदूर,ऐसे गरीब साथियों को भी पेंशन मिले,इसके लिए ‘प्रधानमंत्री श्रम योगी मान-धन योजना’ चलाई गई । गरीब को बैंकिंग व्यवस्था का लाभ मिले, इसके लिए 41 करोड़ से अधिक गरीबों के जनधन खाते खोले गए । इनमें से आधे से अधिक खाते हमारी गरीब बहनों और बेटियों के हैं । महामहिम राष्ट्रपति महोदय का यह कथन कि ये सिर्फ आंकड़े नहीं है, बिलकुल सही है । उनका यह कहना कि हर आंकडा,अपने आप में एक जीवनगाथा है और इस संसद के अनेक सदस्यों ने अपने जीवन का बहुत लंबा समय इन्हीं परिस्थितियों में गुजारा है,बिल्कुल सही है । महामहिम राष्ट्रपति जी ने अपने अभिभाषण में इस प्रकार से जहां विगत वर्षों के दौरान सरकार द्वारा देश के सर्वांगीण विकास हेतु किए गए कार्यों को उद्धरित किया है, वहीं सरकार के दूसरे कार्यकाल में कोविड जैसी वैश्विक महामारी से देश को किस प्रकार से संकट से उबारा जा रहा है, केन्द्रीय प्राथमिकताओं और इस दौरान उठाए गए महत्वपूर्ण कदमों का भी उल्लेख किया है, जिसमें हमारी लोकप्रिय सरकार की आत्मछवि का एक अंदाजा स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है । मैं पुनः महामहिम राष्ट्रपति महोदय जी के अभिभाषण का हृदय से समर्थन और आभार व्यक्त करते हुए उन्हें कोटि-कोटि नमन करता हूं कि उन्होंने देश के अब तक के सर्वाधिक लोकप्रिय प्रधानमंत्री परम आदरणीय श्री नरेन्द्र मोदी जी के केन्द्रीय नेतृत्व में सरकार की उपलब्धियों को परिलक्षित किया है ।
सधन्यवाद ।
*श्री अजय मिश्र टेनी (खीरी) : माननीय लॉकेटचटर्जी जी द्वाराप्रस्तुत धन्यवादप्रस्ताव कासमर्थन करतेहुए, मैंकहना चाहता हूंकि जिस प्रकारसे सरकार नेकोरोना संकमणको नियंत्रितरखते हुए, मेड इन इंडियावैक्सीन बनानेके साथ ही दुनियाका सबसे बड़ावैक्सीनेशन कार्यक्रमभी चलाया है,कोरोना संक्रमणकाल के दौरानभी विकास औरबुनियादी कार्यक्रमोंको जारी रखाहै तथा लोगोंकी जरूरतों कोपूरा करने केसाथ ही स्वास्थ्य,शिक्षा, कृषि, परिवहन,सड़क, रेलआदि क्षेत्रोंमें शानदार प्रदर्शनकिया है । निश्चितही प्रधानमंत्रीश्री नरेन्द्रमोदी जी केनेतृत्व मेंआत्मनिर्भर भारतके निर्माण केसाथ ही पर्यावरण,ऊर्जा, सौर ऊर्जा आदिके क्षेत्र मेंशानदार काम करतेहुए, राष्ट्रका सशक्तीकरणहुआ है, सरकारकी लोकप्रियताभी बढ़ी है तथालोगों का विश्वासभी बढ़ा है ।मैं धन्यवादप्रस्ताव कासमर्थन करताहूं ।
श्रीमती मीनाक्षी लेखी (नई दिल्ली):आदरणीय सभापतिमहोदय, मैंअपनी बात शुरूकरने से पहलेअपने मित्रोंके लिए एक शेरकहना चाहती हूं– दुश्मनीलाख करो परइतनी गुंज़ाइशरखो, कि कलजब हम फिर दोस्तबनें तो शर्मिंदगीन हो ।
आदरणीयसभापति जी, I would also like to remind this House of a name called Dr. Li Wenliang and today I dedicate my speech to him. डॉ. ली वेनलियांग को सब लोग भूल चुके हैं । मुझे ताज्जुब है कि इस हाउस के अंदर, जब इतना सीरियस डिस्कशन हो रहा है, तो मेरे किसी भी मित्र ने डॉ. ली वेनलियांग का नाम तक नहीं लिया । दिनांक 7 फरवरी, 2020 को इस डॉक्टर की मृत्यु हुई । सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि पूरा विश्व वुहान से आए कोरोना वायरस की दिक्कतों से जूझ रहा है ।
आज न केवल भारत को, बल्कि पूरी दुनिया को यह चिंता होनी चाहिए कि जिस जगह यह वायरस पैदा हुआ, जिसके कारण यह वायरस चारों तरफ फैला,जिस चीज़ को हमें डिस्कस करना चाहिए,वह डिस्कस न करते हुए हम भारत देश के एक कोने में एक छोटे से राज्य के मुट्ठी भर लोग, जो कि आढ़ती हैं या वे अमीर लोग हैं,जो अपने पैर मसाज करने के लिए मैसुअर रखते हैं,मशीन्स लगाते हैं या पिज्जा पार्टी करते हैं,उनको हम डिस्कस कर रहे हैं । …(व्यवधान)
सभापति जी, सबसे हैरानी की बात है कि ऐसे समय पर, जब दुनिया इस महामारी से बाहर भी नहीं निकल पाई, what is the world discussing?
They are discussing about the farmers in India whereas farmers in India, till last year, were committing suicides and to avert that, these laws have been brought. It is shameful on the part of that party and the Opposition who are playing with the lives.
There is a saying and I am amending that – something which looks like a crocodile, something which swims like a crocodile and gnaws like a crocodile is in all likelihood a crocodile. What we see is that within one year, two riots have taken place and one can be placed above the other. The symbols and the messages are very clear. We see that the anarchist and rogue forces are trying to create a civil war in this country.
We see that when the CAA was brought in which was to benefit this country – every country has laws on migration –yet this law on migration was being opposed by some elements in this country. The riots that took place are identical to what happened on 26th January, 2021. If I start from the very beginning, we see that in January, certain incidents took place in which our country has curbed terrorism and brought many people from margins to the mainstream.
In February, I have already cited that Dr. Li Wenliang was trying to sound the world that there is a virus which is being produced in Wuhan and is more dangerous than SARS. What happened to him? He died. Post that, what the world should be discussing is how much damage has been caused by one country, what the world should be discussing is what punitive action lies against that country, but on the contrary, what the world is discussing is the farmers’ protest in India; and not the farmers, but in the name of farmers. That is what is happening in this world. That is how narratives get changed. …(Interruptions)
I am coming to that. The world is a friend, but I will read out how and the kind of politics which gets played. There is something called stealth war. This is that stealth war that is going on. It is unfortunate that people from the Opposition are falling prey to it. That is the worst thing that I expect from a Member of Parliament in India! HON. CHAIRPERSON : You are not making a speech.
SHRIMATI MEENAKASHI LEKHI: I am making an intervention and I am making an intervention on international conspiracy.
HON. CHAIRPERSON: Just limit it to that.
SHRIMATI MEENAKASHI LEKHI : I am limiting it to that.
I am bringing forth the similarities between what happened when the President of USA was visiting India and the timeline is March - 24th and 25th March. The riots in Delhi happened on 23rd of March to get the eyes, to get the global newspapers to publish that story that India is not a good place to make investment. To get the eyeballs, that date was selected. Similarly, 26th of January as a date was selected. That date was selected again to get the eyeballs because people would have been talking about the military might of this country, the atmanirbharta of this country. My request to Oxford would be that as they have chosen Atmanirbhar as the Hindi word of 2020, they should choose pappu as a word for 2022 because they think the world is a pappu. The answer is that the world is not a pappu. People are smarter and people understand what is going on.
Mr. Chairman, Sir, there is a hybrid war which is going on. There are powers which are here to devastate India. It is not that they have not tried it earlier.
They have come to the conclusion that the galvanizing power of this country has to be stalled somewhere. They have tried traditional methods of terrorism and they have got defeated in conventional wars. So, this is a new form of warfare and you can see the similarities. We saw what happened in Arab Spring; we saw how disinformation campaigns were led; we saw how panic situations were created; we saw how maximum global attention was sought; we saw how radical religious ideologies were used; how countries were shamed; their sovereignty and symbols of sovereignty challenged; and the spectre of anarchy was created basically to challenge sovereignty. As we have seen, all this was done basically to cripple India from within through anarchy and also to make it implode from within.
Global action, global sanctions is what they had planned. I say this with utmost sincerity when my friend from the Opposition, Adhir Ranjan Chowdhury used the words that ‘Greta is persona non grata in India’. Now, this is not something which behoves a leader from the Opposition Party. This is something which destroys relationship with friendly nations. I do not believe that a child, – for me, an 18-year-old is a child, she may technically be an adult, but I see her still as a child – an 18-year-old cannot create that toolkit and cannot coordinate action across continents, cannot discuss. When you are talking about farmers’ rights, there is no word about farmers. What is the word? Target India’s image of tea and yoga. Is that in farmers’ interest? Farmers grow tea and they will be happy to build that image. The fact is there are some powers inimical to India and India’s well-being which are acting, and I think it is time this House pays attention to it.
I will seek one more minute, Sir. The global action and the manner in which the provocation that happened was similar to what has happened at US Capitol Hill, and that provocation was bad for that country. But how desecration of Red Fort is good for the country? Can you see the similarity? Can you see the manner in which duplicity lies? Can you see the narrative being changed?
Another thing which I felt was regarding demeaning our heroes. Demonizing our heroes is what I also saw. When you say corporates are bad, why do you not say Mark Zuckerberg is bad? If you are against corporates –there are plenty of corporates in Sweden, there are plenty of corporates in US – why do you not say Jack Dorsey should be challenged? Why do you not say from Rockefeller to whatever else should be challenged? Answer is not that. They are the beneficiaries of capitalism. The countries and people who are beneficiaries of capitalism challenge capitalism in another country because capitalism has helped those countries prosper. When you need to pull people out of poverty, a lot of energy is caused, and that energy comes through certain capitalists.
Vilifying your own leaders, vilifying your own corporates, vilifying your own heroes is what has been done on the floor of this House. I challenge that. I challenge people. It is very evident that a Molotov Cocktail is going on. And that Molotov Cocktail is who? Khalistanis; it includes PFI, which we saw in CAA; and it also includes ISI propaganda. When you see the referendum of Khalistan in 2020, it does not talk about Nankana Sahib, it does not talk about the Sikh sites present in Pakistan. That is a giveaway that who all are involved, they are just being their master’s voice sitting in Beijing.
Thank you very much. Jai Hind सुश्री सुनीता दुग्गल (सिरसा): महोदय, विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के महामहिम…(व्यवधान)
माननीय सभापति : आप बैठ कर बोलिए । आप जैसा ठीक समझें,बैठ कर बोलना ज्यादा उचित है ।
सुश्री सुनीता दुग्गल: महोदय, विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के प्रथम नागरिक महामहिम…(व्यवधान) मैं यह कह रही थी कि हमारे विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के महामहिम हमारे प्रथम नागरिक राष्ट्रपति जी का जो अभिभाषण हुआ और उसमें हमारी बंगाल टाइग्रेस,हमारी बहन लॉकेट चटर्जी ने…(व्यवधान) दादा,मैंने टाइग्रेस ही बोला है ।…(व्यवधान) उन्होंने जो धन्यवाद प्रस्ताव किया, उसके समर्थन में मुझे बोलने का मौका मिल रहा है, उसके लिए मैं सभापति महोदय आपका तहेदिल से बहुत-बहुत धन्यवाद करना चाहती हूं । मैं यह कहना चाहती हूं कि वर्ष 2019 में हम लोगों ने पहली बार इस सदन का मुंह देखा और हमने यहां पर प्रवेश किया । पहली बार हमारी वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण जी ने अपने बजट भाषण में ‘नारी तू नारायणी’ शब्दों का प्रयोग किया । सच में पहली बार इतनी संख्या में हमारी महिला शक्ति यहां पर उपस्थित हुईं,लोक सभा में 78 मैम्बर्स ऑफ पार्लियामेंट्स महिलाएँ यहां पर हैं, तो सब के मन में एक अलग तरह का करंट दौड़ गया । आपको यह जानकर खुशी होगी कि वर्ष 2018 में ऑक्सफोर्ड लैंग्वेज ने नारी शक्ति को हिन्दी वर्ड ऑफ द ईयर घोषित किया । उस समय माननीय वित्त मंत्री जी ने अपने भाषण में कहा था- Swami Vivekananda said to Ramakrishna Paramahamsa ji: “There is no chance for the welfare of the world unless the condition of woman is improved. It is not possible for a bird to fly on one wing.” मैं यह कहना चाहती हूं कि जिस तरह से हमारी सरकार ने महिला शक्ति के बारे में सोचा- ‘या देवी सर्वभूतेषु शक्ति-रूपेण संस्थिता नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम: ।’ पहली बार किसी प्रधान मंत्री जी ने हमारी बेटियों के बारे में, महिलाओं के बारे में चिंता की । उसी की बदौलत कभी किसी ने कोई जिक्र नहीं किया कि किस तरह से हमारी गांव की बेटियाँ स्कूल में जाती हैं, वहां शौचालय है कि नहीं है । हमारे गांव में शौचालय की क्या स्थिति है?
लेकिन पहली बार एक प्रधानमंत्री जी ने लाल किले की प्राचीर से यह घोषणा की कि अब हमारी बेटियों को चिंता करने की जरूरत नहीं है और इसीलिए दस करोड़ शौचालय हमारी बेटियों के लिए बनाए गए । इसी तरह से हमारी माताओं के लिए किया । उनको चूल्हे में अपनी सेहत खराब न करनी पड़े, इसके लिए हमारी सरकार ने 14 करोड़ फ्री गैस कनेक्शन दिए । इसी तरह से 31 हजार जन-धन खातों के माध्यम से डायरेक्ट पैसा हमारी माताओं के खातों में गया । अगर सेल्फ हेल्प ग्रुप की हम बात करें तो मैंने खुद अपने लोक सभा क्षेत्र में देखा है कि अटल किसान मजदूर कैंटीन बनायी गयी है । वहां दस रुपये में थाली मिलती है । उस कैंटीन में सेल्फ हेल्प ग्रुप की महिलाएं काम करती हैं । वे ही खाना पकाती हैं और परोसती हैं । एक नारी का,एक मां का भाव उस भोजन में होता है । आप समझ सकते हैं कि आटा वही है, सारा सामान वही है, लेकिन एक नौकर परोसता है और एक मां परोसती है तो इन दोनों में बहुत अंतर होता है । मैं यह कहना चाहूंगी कि जिस तरह से हमारी सरकार ने नारी के बारे में सोचा है, 26 जनवरी को जब कुछ असामाजिक नवयुवक एक जुनून में हमारे तिरंगे का अपमान कर रहे थे तो उसी समय हमारी एक बेटी भावना कांत जी हमारी गरिमा को बढ़ा रही थी । हमारी सरकार ने आर्म्ड फोर्सेस में महिलाओं को प्रतिनिधित्व देने का निर्णय लिया है । इससे हमारी बेटियां फोर्स में भी काम कर सकती हैं । इस बात की हमें बहुत खुशी है ।
हमारी माताओं-बहनों को गांवों में जो बेड़ियां लगी हुई थीं, मुझे लगता है कि हरिवंश राय जी की ये पंक्तियां बिलकुल सार्थक महसूस होती हैं कि – “जो तुझ से लिपटी बेड़ियां समझ न इनको वस्त्र तू ये बेड़ियां पिघलाकर बना ले शस्त्र तू तू खुद की खोज में निकल, तू किसलिए हताश है तू चल तेरे वजूद की समय को भी तलाश है ।” हमारे आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में हमारी बेटियां, महिलाएं और बहनें अपने आपको सुरक्षित और कॉनफिडेंट महसूस करती हैं । इसलिए मुझे नहीं लगता है कि आज कोई भी ऐसा सैक्शन है,कोई भी ऐसा सेक्टर है, जहां हमारी बेटियां-बहनें काम न कर रही हों ।
अपने अभिभाषण में आदरणीय महामहिम जी ने हेल्थ के बारे में जिक्र किया कि किस तरह से हमारी सरकार ने हेल्थ पर काम किया है । बहुत कुछ इसके बारे में कहा जा चुका है कि किस तरह से कोविड-19 पर हम लोगों ने विजय पायी । पीपीई किट के बारे में किसी को मालूम नहीं था, सेनिटाइजर के बारे में किसी को मालूम नहीं था, मास्क के बारे में किसी को मालूम नहीं था । मुझे ध्यान में आता है कि जब पिछली बार एयर पॉल्यूशन पर हम लोग चर्चा कर रहे थे तो हमारी बहन नवनीत मास्क लगाकर आयी थीं । हम सभी लोग उनकी तरफ हैरानी से देख रहे थे कि ये क्या लगा कर आयी हैं? हमें क्या मालूम था कि उन्होंने शुरुआत की है और इसके बाद हम सभी लोग इसी तरह से मास्क लगाएंगे । आपने देखा कि किस तरह से हमारा देश आत्मनिर्भर भारत की तरफ बढ़ रहा है । कोविड-19की वैक्सीन सबसे पहले बनाकर न केवल अपने देश के नागरिकों को हम वैक्सीनेटेड कर रहे हैं, बल्कि 100 के करीब देशों को आज हम वैक्सीन निर्यात करने के लायक बन चुके हैं । हमारे मनीष तिवारी जी कह रहे थे कि यह मालूम नहीं है कि यह हमारे भारतीयों का इम्यून सिस्टम है या भारत सरकार ने कुछ किया है । आयुष डिपार्टमेंट ने बहुत अच्छे तरीके से इसमें सहयोग किया है । वैक्सीन आने से पहले तक देश को अगर किसी ने सम्भाला तो वह आयुष डिपार्टमेंट ने संभाला है ।
यहआयुष हमारे देशकी एक पुरानीपरंपरा है ।किस तरह सेहम आयुर्वेदिकदवाइयाँ, तुलसी, हल्दीसे अपने इम्यूनसिस्टम को बढ़ातेहैं । हमारेआदरणीय मंत्रीजी, श्रीपादनाईक जी, मैंबहुत भावभीनीश्रद्धांजलिअर्पित करतीहॅूं कि उनकीधर्मपत्नी आजहमारे बीच मेंनहीं हैं । लेकिनजिस तरह सेउन्होंने आयुषविभाग को संभालतेहुए आगे बढ़ायाऔर आयुर्वेदिकदवाइयों की किटहम सबके घरोंमें पहुंचाई, वहप्रशंसा के लायकहै । सबको इसबात से अवगतकराया गया किआयुर्वेद सेआपका इम्यूनसिस्टम बढ़ेगाऔर वे बात करतेहैं कि सरकारने कुछ कियाहै ; कि नहींकिया है । मुझेलगता है किउनको इसके बारेमें थोड़ा सोचनाचाहिए । इसकेसाथ-साथमैं कहना चाहूंगीकि चीन ने हमेंवायरस दिया औरहमने सबको वैक्सीनदी है । आयुष्मानभारत एवं प्रधानमंत्री जन आरोग्ययोजना के तहतडेढ़ करोड़ गरीबोंको पांच लाखरुपये का मुफ्तइलाज करने कीजो स्कीम आदरणीयप्रधान मंत्रीजी ने चलाईहै, मैंबताना चाहतीहॅूं कि मेरीअपनी लोक सभामें शायद, मैंइस बात को कन्फर्मनहीं करती हॅूं, लेकिनशायद हो सकताहै कि पूरेहिन्दुस्तानमें जितने भीहमारे सांसदहैं, उन्होंनेआदरणीय प्रधानमंत्री जी कोजो हमारे क्रोनिकपेशेंट्स होतेहैं, उनकेलिए रिक्वेस्टकी है तो शायदउनमें सबसे ज्यादारिक्वेस्ट मैंनेकी हैं और उन्होंनेउसको पूरा भीकिया है । बहुतसी संख्या मेंहमारे भाइयोंको इसका लाभमिला है । मैंइस बात के लिएआदरणीय प्रधानमंत्री जी कोबहुत-बहुतधन्यवाद करनाचाहती हॅूं । इसी तरह सेजन औषधि योजनाके तहत सातहजार केन्द्रबनाए गए हैं, ताकिहमारे गरीब भाइयोंको सस्ती दवाइयांमिल सकें । मेडिकलशिक्षा के अंदरविस्तार कियागया है । वर्ष2014 में387 मेडिकलकॉलेजेस थे, लेकिनआज 562 मेडिकलकॉलेजेस बनाएगए हैं । करीबपचास हजार स्टूडेंट्सअब अण्डर ग्रेजुएशनऔर पोस्ट ग्रैजुएशनमें एडमिशन लेचुके हैं ।
सभापतिमहोदय, मैंएक और बात कहनाचाहती हॅूं किआत्मनिर्भर भारत, जिसतरह से मैंनेआपको वर्ष 2018 कीबात बताई किनारी शक्ति कोऑक्सफोर्ड लैंग्वेजने हिन्दी वर्डऑफ द ईयर घोषितकिया है । उसीतरह से वर्ष2020 केअंदर आत्मनिर्भरताको ऑक्सफोर्डलैंग्वेज नेवर्ड ऑफ द ईयरघोषित किया है । यह आत्मनिर्भरताशब्द कहां सेआया? यह आत्मनिर्भरताशब्द आदरणीयप्रधान मंत्रीजी ने जिस तरहसे कहा कि हमेंस्वदेशी को अपनानाहै, वहांसे आया है ।
वोकलफॉर लोकल –अगरआप डिफेंस सैक्टरकी बात करें, जो83 स्वदेशीलड़ाकू विमानहैं, आजएचएएल को हमउसका कॉन्टट्रेक्टदे चुके हैं । उस पर 18 हजारकरोड़ रुपयेका खर्च आनेवाला है । रक्षासे जुड़े हुएसौ से अधिकसामानों के आयातपर रोक लगादी गई है । देशमें सुपरसोनिक, टोरपीडो, क्विकरिएक्शन मिसाइल, टैंक, राइफल्स, इत्यादिअनेक अत्याधुनिकहथियार हम अपनेदेश के अंदरबना रहे हैं । न्युक्लियरएनर्जी की तरफहम तेजी सेआत्मनिर्भर होतेजा रहे हैं । पिछले दिनों15 दिसम्बरको आदरणीय प्रधानमंत्री जी नेकच्छ के अंदरदुनिया का सबसेबड़ा सोलर एनर्जीऔर विंड एनर्जीप्लांट लगायाहै, जिसकेअंदर तीस हजारमेगावॉट कैपेसिटीकी सोलर एनर्जीऔर विंड एनर्जीका उत्पादन होगा । …(व्यवधान) सभापति जी,देखिए अभी मुझे थोड़ा समय चाहिए । …(व्यवधान) अभी तो मैंने बोलना शुरू किया है । …(व्यवधान)
माननीय सभापति: माननीयसदस्य, बहुतसारे वक्ता हैं । आप मेरी बातसुनिए । सभीमाननीय सदस्योंसे मेरा यहअनुरोध है किकृपया समय काध्यान रखें । रात 12 बजेतक हम चर्चाकरेंगे, तोभी हमको समयका ध्यान रखनेकी आवश्यकताहै ।
…(व्यवधान)
सुश्री सुनीता दुग्गल : सभापतिजी, मैंबिल्कुल वे बातेंऔर डाटा रिपीटनहीं कर रहीहॅूं, जोऑलरेडी सभी बोलचुके हैं ।…(व्यवधान)
माननीय सभापति: वक्ताओंकी संख्या बहुतज्यादा है ।
…(व्यवधान)
सुश्री सुनीता दुग्गल:सभापति जी, मैंयही कहना चाहतीहॅूं कि अगरहम कृषि कीबात करें, क्योंकिअगर कृषि कीबात नहीं करेंगेतो आत्मनिर्भरताका कोई औचित्यनहीं रह जाताहै । मैं यहकहना चाहती हॅूंकि ऐसे समयमें किस तरहसे हमारे किसानभाइयों ने कृषिमें एक ऐसारिकॉर्ड उत्पादनकर के हमारेसभी देशवासियोंका पेट भरा । क्योंकि एकसमय था कि जबहम अमरीका सेअनाज आयात करतेथे । लेकिन अबकीबार आदरणीय प्रधानमंत्री जी नेकिस तरह से80 करोड़लोगों को अनाजपहुंचाया औरकितने महीनोंतक मुफ्त मेंपहुंचाया । यहसिर्फ हमारेकिसान भाइयोंकी मेहनत कीबदौलत और आत्मनिर्भरभारत की बदौलतहम यह सब करपाए ।
आपयह देखिए किजिस तरह कीप्रोक्योरमेंटहुई है, अबकीबार की जो प्रोक्योरमेंटहै, चाहेहम गेहूं कीबात करें, चाहेहम दालों कीबात करें, सबसेज्यादा रिकॉर्डप्रोक्योरमेंटकॉटन की हुईहै ।
वर्ष 2013-14 में जो सिर्फ 60 करोड़ हुई थी,वह अबकी बार 25,900 करोड़ हुई है । इसलिए मुझे लगता है कि आदरणीय प्रधान मंत्री जी ने इस बार जो प्रावधान रखा है, जैसा कि हमारी वित्त मंत्री जी ने बताया कि 7 टेक्सटाइल पार्क्स बनाए जाएंगे,ताकि उनकी खपत ठीक तरीके से हो सके ।
‘पर-ड्रॉप-मोर-क्रॉप’के बारे में मैं बताना चाहूंगी कि हमारे हरियाणा के अन्दर आदरणीय मुख्य मंत्री जी ‘मेरा पानी मेरी विरासत’ स्कीम लेकर आए । वे इसलिए लेकर आए थे क्योंकि हमारे यहां चावल की खेती होती है और उसमें पानी बहुत लगता है । जब हमारे मुख्य मंत्री जी इस स्कीम को लेकर आए तो उन्होंने कुछ क्लसटर्स या जोन्स डिवाइड कर दिए कि इन जोन्स में आपको चावल की खेती नहीं करनी है । फिर सब के सब उसका प्रोटेस्ट करने लगे कि हम तो यहां पर चावल की खेती करेंगे ही, चावल की खेती हमारे लिए बहुत जरूरी है । आदरणीय मुख्य मंत्री जी ने कहा कि जहां पर पंचायत की जमीन है, वहां पर चावल की खेती नहीं होगी और बाकी सभी को यह च्वॉयस है,ऑप्शन है कि अगर वे चाहें तो इसे करें और अगर नहीं चाहें तो इसे न करें । अगर वे इसकी खेती नहीं करेंगे तो उन्हें 7,000 रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से पैसे मिलेंगे । दो हजार रुपये बुवाई पर मिलेंगे और पाँच हजार रुपये वेरिफिकेशन पर मिलेंगे । उन्होंने 50,000 एकड़ का टारगेट रखा ।
सभापति महोदय,आप देखिए कि अगर हमारे किसान भाइयों को प्यार से समझाया जाए तो मुझे लगता है कि वे समझते हैं । हमने 50,000 एकड़ का टारगेट रखा । 80,000 एकड़ के हमारे किसान भाई आगे आए और उन्होंने कहा कि हम यहां पर चावल की खेती नहीं करेंगे । मुझे लगता है कि आज इसकी जरूरत है ।
माननीय सभापति : अब आप अपना भाषण समाप्त कीजिए ।
सुश्री सुनीता दुग्गल : महोदय, अगर हम अपने किसान भाइयों को समझाएं तो वे जरूर समझ जाएंगे ।
कल हमारे नेता,प्रतिपक्ष बात कर रहे थे कि वहां पर हमारे किसान…* हैं और …* हैं ।
माननीय सभापति: वे शब्द सदन की कार्यवाही से निकल चुके हैं ।
सुश्री सुनीता दुग्गल : मुझे समझ में नहीं आ रहा कि इतने बड़े पद पर रहते हुए उन्होंने इस तरह के शब्द इस्तेमाल किए । मैं यह कहना चाह रही हूं कि अगर वे उसके साथ …*भी लगा देते तो मुझे समझ में आ जाता कि यह …* के बारे में है और यह सबको समझ में आ जाता कि किसके बारे में बात हो रही है और वे कौन लोग हैं, जो हमारे किसान भाइयों को बहका रहे हैं । मैं यह कहना चाहती हूं कि अगर हम अपने किसान भाइयों को समझाएंगे तो वे जरूर समझ जाएंगे । इसके साथ-साथ मैं यह कहना चाहती हूं कि सरकार बहुत-सी ऐसी योजनाएं लेकर आई हैं ।
आदरणीय प्रधान मंत्री जी ने ‘चरैवेति,चरैवेति’ के मंत्र को चरितार्थ करते हुए कोरोना काल में भी जितने भी उद्घाटन किए,चाहे हम अटल टनल की बात करें,चाहे चार धाम की बात करें, अपनी गति से धीरे-धीरे हम लोग आगे बढ़ते रहें । मैं यह कहना चाहती हूं -
कोरोना को हराया है, भारत को जिताया है, संकट में भी, हर हिन्दवासी का हौसला बढ़ाया है, खेती खिले, किसान खुशहाल हो, बड़ी सोच के साथ बड़ा दिल दिखाया है, वंदन-अभिनंदन करता जन-जन, मोदी जी ने भारत का लोहा मनवाया है ।
इसके साथ-साथ मैं यह कहना चाहूंगी कि अभी हमारे बहुत-बहुत ही आदरणीय,जो हमारे बड़े हैं, हमारे बुजुर्ग हैं,आप लोगों के समक्ष अभी इन्होंने अपना भाषण दिया । मैं इनका बहुत सम्मान करती हूं क्योंकि मुझे लगता है कि सबसे ज्यादा उम्र आज यहां पर इन्हीं की होगी । मैं यह कहना चाहती हूं कि आज की तारीख में इनको जो दर्द हो रहा है, यह दर्द उस समय कहां गया था जब कश्मीर के अन्दर हमारे कश्मीरी पंडित रो रहे थे, तड़प रहे थे, वे निकल कर बाहर जा रहे थे । यह दर्द उस समय कहां गया था? …(व्यवधान) अगर ये उस समय सँभल गए होते तो आज यह स्थिति नहीं होती । …(व्यवधान)
माननीय सभापति: प्लीज़, डॉक्टर साहब,बैठिए ।
…(व्यवधान)
सुश्री सुनीता दुग्गल : सभापति महोदय, इसके साथ-साथ मैं एक बात और कहना चाहती हूं । …(व्यवधान) मैं बहुत आदर के साथ कहना चाहती हूं ।…(व्यवधान)
HON. CHAIRPERSON: Dr. Farooq Ji, she is not yielding. Doctor Sahib, please sit down.
…(Interruptions)
सुश्री सुनीता दुग्गल: जबधारा-370 कीबात चली तोमैंने खुद हमारेआदरणीय की वीडियोदेखे हैं । …(व्यवधान)
HON. CHAIRPERSON: Madam, please conclude.
सुश्री सुनीता दुग्गल: मैंनेउनके वीडियोदेखे हैं औरउस वीडियो मेंउन्होंने क्याकहा है कि 370हटगया तो पतानहीं क्या होजाएगा?…(व्यवधान) आज देखिए,मैं कह रहीहूं कि हमारेकश्मीर के अन्दरआतंकवादी घटनाएं 50 प्रतिशत सेकम हो गई हैं ।…(व्यवधान)
हमारे लद्दाख के अन्दर सेन्ट्रल यूनिवर्सिटी बन रही है और अब पूरा-का-पूरा जम्मू-कश्मीर और लद्दाख एक नई तरक्की के रास्ते पर चल रहा है ।…(व्यवधान)
मैं इनका बहुत आदर करती हूं ।…(व्यवधान) आज ये जिस तरह से एक्सेप्ट कर रहे थे, मैं इनका दिल से सम्मान करती हूं ।…(व्यवधान)
माननीय सभापति: बस अब अपना भाषण समाप्त कीजिए ।
सुश्री सुनीता दुग्गल: वहइसको अक्सेप्टकर रहे हैं । हम मिलजुलकर ही चलेंगे, तभीयह देश आगेबढ़ेगा । अब मैं अपनी आखिरी पंक्तियाँ आप लोगों के सामने रखना चाहती हूँ ।
सभापति महोदय, आपने मुझे बहुत समय दिया, इसके लिए मैं आपका बहुत-बहुत धन्यवाद करना चाहती हूँ । मैं आपके सामने एक शब्द बस यह कहना चाहती हूँ कि ‘गरीबी हटाओ-गरीबी हटाओ’का 70 सालों से नारा दिया गया,लेकिन जो काम हमारे आदरणीय प्रधानमंत्री जी ने किया, गरीबी असल में ऐसे ही नहीं हटती,बल्कि गरीबी हटाने के काम करने पड़ते हैं । मैं कहना चाहती हूँ कि सोचने से कहाँ मिलते हैं, तमन्नाओं के शहर, चलना भी जरूरी है, मंजिल को पाने के लिए ।
सभापति महोदय,इसी के तहत मैं कहना चाहती हूँ,ये लोग कहते हैं कि हमारे किसान की आमदनी नहीं बढ़ रही है, इसलिए हम लोग यह कानून लेकर आए हैं । आदरणीय प्रधानमंत्री जी ने खुले दिल से निमंत्रण दिया है कि आप जो सुधार चाहते हैं, उसको करिए और वह सुधार करने के लिए हम तैयार हैं ।
सभापति महोदय,आखिरी में मैं मोदी जी के लिए एक शेर पढ़ना चाहती हूँ । जिस तरह सुबह से लेकर शाम तक विपक्ष उनको गालियाँ देते रहता है,मैं यह कहना चाहती हूँ कि हर रोज गिर कर भी मुकम्मलखड़े हैं, ऐ जिंदगी देख मेरे हौसले, तुझसे भी बड़े हैं ।
*श्री अशोक महादेवराव नेते (गड़चिरोली-चिमुर): महामहिमराष्ट्रपति महोदयजी के अभिभाषणका मैं हृदयसे समर्थन करताहूं । राष्ट्रपतिजी के अभिभाषणसे यह परिलक्षितहोता है किकेन्द्र सरकार ‘सबकासाथ सबका विकास’ केअपने वायदे केअनुरूप देश कोतेजी से आर्थिकविकास की नईराह पर ले जारही है । देशके गरीब, दलित, शोषित, वंचित, किसान, श्रमिकऔर युवा सरकारके इस समावेशीआर्थिक विकासके केन्द्र मेंहै ।
महामहिमराष्ट्रपति महोदयने अपने अभिभाषणके प्रारम्भमें उल्लेख कियाहै कि कोरोनावैश्विक महामारीके इस दौर मेंहो रहा संसदका यह संयुक्तसत्र बहुत महत्वपूर्णहै । नया वर्षभी है, नयादशक भी है औरइसी साल हमआज़ादी के 75वेंवर्ष में भीप्रवेश करनेवाले हैं । आजसंसद के आपसभी सदस्य, हरभारतवासी केइस संदेश औरइस विश्वास केसाथ यहां उपस्थितहैं कि चुनौतीकितनी ही बड़ीक्यों न हो, नहम रुकेंगे औरन भारत रुकेगा । केन्द्रीयनेतृत्व मेंमाननीय प्रधानमंत्री श्रीनरेन्द्र मोदीजी की देश केप्रति निरन्तरप्रगति की दृढ़ताको दर्शाता है ।
महामहिमराष्ट्रपति जीका यह कहनाकि भारत कीमहानता परम सत्यहै । एक ही चेतनामें, एकही ध्यान में, एकही साधना में, एकही आवेग में, एकहो जाओ, एकहो जाओ, देशके तीव्र विकासके लिए स्वागतयोग्य है ।
मैंमहामहिम राष्ट्रपतिमहोदय के इसकथन का समर्थनकरता हूं किआज हम भारतीयोंकी यही एकजुटता, यहीसाधना, देशको अनेक आपदाओंसे बाहर निकालकर लाई है ।एक तरफ कोरोनाजैसी वैश्विकमहामारी, दूसरीतरफ अनेक राज्योंमें बाढ़, कभीअनेक राज्योंमें भूकंप तोकभी बड़े-बड़ेसाइक्लोन, टिड्डीदल के हमलेसे लेकर बर्डफ्लू तक, देशवासियोंने हर आपदाका डटकर सामनाकिया । इसी कालमें सीमा परभी अप्रत्याशिततनाव बढ़ा । इतनीआपदाओं से, इतनेमोर्चों पर, देशएक साथ लड़ाऔर हर कसौटीपर खरा उतरा । इस दौरान हमसब, देशवासियोंके अप्रतिम साहस, संयम, अनुशासनऔर सेवाभाव केभी साक्षी बनेहैं ।
महामहिमराष्ट्रपति महोदयका यह कथन किहमारे शास्त्रोंमें कहा गयाहै- ‘कृतम्मे दक्षिणे हस्ते, जयोमे सव्व आहित:’ अर्थात्हमारे एक हाथमें कर्त्तव्यहोता है तोदूसरे हाथ मेंसफलता होती है । कोरोना महामारीके इस समय में, जबदुनिया का प्रत्येकव्यक्ति, हरदेश इससे प्रभावितहुआ, आजभारत एक नएसामर्थ्य केसाथ दुनिया केसामने उभर करआया है, स्वागतयोग्य है ।
महामहिमराष्ट्रपति महोदयका यह कथन भीस्वागत योग्यहै कि हमारेऋषितुल्य प्रधानमंत्री आदरणीयश्री नरेन्द्रमोदी जी केकेन्द्रीय नेतृत्वमें लिए गएसटीक फैसलोंसे लाखों देशवासियोंका जीवन बचाहै, जिसकेपरिणामस्वरूपआज देश मेंकोरोना के नएमरीजों की संख्याभी तेजी सेघट रही है औरजो संक्रमण सेठीक हो चुकेहैं, उनकीसंख्या भी काफीअधिक है ।
महामहिमराष्ट्रपति कायह कहना किजब हम बीतेएक वर्ष कोयाद करते हैंतो हमें स्मरणहोता है किकैसे एक ओरनागरिकों केजीवन की रक्षाकी चुनौती थी, तोदूसरी तरफ अर्थव्यवस्थाकी चिंता भीकरनी थी । अर्थव्यवस्थाको संभालने केलिए रिकॉर्डआर्थिक पैकेजकी घोषणा केसाथ ही केन्द्रसरकार ने इसबात का भी ध्यानरखा कि किसीगरीब को भूखान रहना पड़े, केन्द्रसरकार की दूरदर्शिताको परिलक्षितकरता है ।
महामहिमराष्ट्रपति महोदयका यह कथन कि ‘प्रधानमंत्री गरीबकल्याण योजना’ केमाध्यम से 8 महीनोंतक 80 करोड़लोगों को 5 किलोप्रतिमाह अतिरिक्तअनाज नि:शुल्कसुनिश्चित कियागया । सरकारने प्रवासी श्रमिकों, कामगारोंऔर अपने घरसे दूर रहनेवाले लोगों कीभी चिंता की । वन नेशन वनराशन कार्ड कीसुविधा देनेके साथ ही सरकारने उन्हें नि:शुल्कअनाज मुहैयाकराया और उनकेलिए श्रमिक स्पेशलट्रेनें चलवाईं, स्वागतयोग्य है ।
महामहिमराष्ट्रपति महोदयका यह कथन केन्द्रसरकार की उपलब्धियोंको दर्शाता हैकि महामारी केकारण शहरों सेवापस आए प्रवासियोंको उनके हीगांवों में कामदेने के लिएकेन्द्र सरकारने छ: राज्योंमें गरीब कल्याणरोजगार अभियानभी चलाया तथाइस अभियान कीवजह से 50 करोड़man-days केबराबर रोजगारपैदा हुआ औरसरकार ने रेहड़ी-पटरीवालों और ठेलालगाने वाले भाइयों-बहनोंके लिए विशेषस्वनिधि योजनाभी शुरू कीएवं इसके साथही करीब 31 हजारकरोड़ रुपये गरीबमहिलाओं के जनधनखातों में सीधेट्रांसफर भीकिए और इस दौरानदेशभर में उज्ज्वलायोजना की लाभार्थीगरीब महिलाओंको 14 करोड़से अधिक मुफ्तगैस सिलेंडरभी मिले ।
महामहिमराष्ट्रपति नेअपने अभिभाषणमें यह उल्लेखकिया है किआज़ादी की लड़ाईके समय हमारेस्वतंत्रता सेनानीजिस सशक्त औरस्वतंत्र भारतका सपना देखरहे थे, उससपने को सचकरने का आधारभी देश की आत्मनिर्भरतासे ही जुड़ाथा । कोरोनाकाल में बनीवैश्विक परिस्थितियोंने, जब हरदेश की प्राथमिकताउसकी अपनी जरूरतेंथीं, हमेंयह याद दिलायाहै कि आत्मनिर्भरभारत का निर्माणक्यों इतना महत्वपूर्णहै । यह माननीयप्रधान मंत्रीश्री नरेन्द्रमोदी जी केकेन्द्रीय नेतृत्वमें देश कोआत्मनिर्भर बनाएजाने की कड़ीको परिलक्षितकरता है ।
महामहिमराष्ट्रपति महोदयका यह कथन किइस दौरान भारतने बहुत हीकम समय में2200 सेअधिक प्रयोगशालाओंका नेटवर्क बनाकर, हजारोंवेंटिलेटर्सका निर्माण करके, पीपीईकिट से लेकरटेस्ट किट बनानेतक में आत्मनिर्भरताहासिल करके अपनीवैज्ञानिक क्षमता, अपनीतकनीकी दक्षताऔर अपने मजबूतस्टार्ट-अपइकोसिस्टम काभी परिचय दियाहै । वस्तुत: यहहम सभी देशवासियोंके लिए गर्वकी बात है तथायह और भी अधिकगर्व की बातहै कि आज भारतदुनिया का सबसेबड़ा टीकाकारणअभियान चला रहाहै । इस प्रोग्रामकी दोनों वैक्सीनभारत में हीनिर्मित हैं । संकट के इससमय में भारतने मानवता केप्रति अपने दायित्वका निर्वहन करतेहुए अनेक देशोंको कोरोना वैक्सीनकी लाखों खुराकउपलब्ध कराईहैं । भारत केइस कार्य कीविश्व भर मेंहो रही प्रशंसा, हमारीहजारों वर्षपुरानी संस्कृति, सर्वेसन्तु निरामया: कीभावना के साथजग-कल्याणकी हमारी प्रार्थना, हमारेप्रयासों कोऔर ऊर्जा देरही है । इसकापूरा श्रेय हमारेलोकप्रिय प्रधानमंत्री श्रीनरेन्द्र मोदीके केन्द्रीयनेतृत्व मेंसरकार को हीजाता है ।
महामहिमराष्ट्रपति महोदयका यह कथन किसरकार द्वारास्वास्थ्य केक्षेत्र मेंपिछले 6 वर्षोंमें जो कार्यकिए गए हैं, उनकाबहुत बड़ा लाभहमने इस कोरोनासंकट के दौरानदेखा है । इनवर्षों में इलाजसे जुड़ी व्यवस्थाओंको आधुनिक बनानेके साथ ही बीमारीसे बचाव परभी उतना हीबल दिया गयाहै । राष्ट्रीयपोषण अभियान, फिटइंडिया अभियान, खेलोइंडिया अभियान, ऐसेअनेक कार्यक्रमोंसे स्वास्थ्यको लेकर देशमें नई सतर्कताआई है । आयुर्वेदऔर योग को बढ़ावादेने के मेरीसरकार के प्रयासोंका लाभ भी हमेंदेखने को मिलाहै, यह भीकेन्द्र सरकारकी उपलब्धियोंको दर्शाता है ।
महामहिमराष्ट्रपति महोदयका यह कथन किसरकार के प्रयासोंसे, आज देशकी स्वास्थ्यसेवाएं गरीबोंको आसानी सेउपलब्ध हो रहीहैं तथा बीमारियोंपर होने वालाउनका खर्च कमहो रहा है ।आयुष्मान भारत– प्रधानमंत्री जन आरोग्ययोजना के तहतदेश में 1.5 करोड़गरीबों को 5 लाखरुपये तक कामुफ्त इलाज मिलाहै । इससे इनगरीबों के 30 हजारकरोड़ रुपये सेज्यादा खर्चहोने से बचेहैं तथा आजदेश के 24 हजारसे ज्यादा अस्पतालोंमें से किसीमें भी आयुष्मानयोजना का लाभलिया जा सकताहै । इसी तरहप्रधान मंत्रीभारतीय जन औषधियोजना के तहतदेश भर मेंबने 7 हजारकेन्द्रों सेगरीबों को बहुतसस्ती दर परदवाइयां मिलरही हैं । इनकेन्द्रों मेंरोजाना लाखोंमरीज दवाई खरीदरहे हैं । कीमतकम होने कीवजह से मरीजोंको सालाना लगभग3600 करोड़रुपये की बचतहो रही है, माननीयप्रधान मंत्रीश्री नरेन्द्रमोदी जी कीकेन्द्रीय उपलब्धियोंको दर्शाता है ।
महामहिमराष्ट्रपति महोदयका यह कथन भीहमारे ऋषितुल्यप्रधान मंत्रीश्री नरेन्द्रमोदी जी कीकेन्द्रीय उपलब्धियोंको दर्शाता हैकि साल 2014 मेंदेश में सिर्फ387 मेडिकलकॉलेज थे, लेकिनआज देश में562मेडिकलकॉलेज हैं औरबीते 6 वर्षोंमें अंडर ग्रेजुएटऔर पोस्ट ग्रेजुएटचिकित्सा शिक्षामें 50 हजारसे ज्यादा सीटोंकी वृद्धि हुईहै तथा प्रधानमंत्री स्वास्थ्यसुरक्षा योजनाके तहत सरकारने 22 नएएम्स को भीमंजूरी दी है ।
महामहिमराष्ट्रपति महोदयका यह कथन किआत्मनिर्भर भारतअभियान केवलभारत में निर्माणतक ही सीमितनहीं है, बल्कियह भारत केहर नागरिक काजीवन स्तर ऊपरउठाने तथा देशका आत्मविश्वासबढ़ाने का भीअभियान है, स्वागतयोग्य है ।
मैंमहामहिम राष्ट्रपतिमहोदय के इसकथन का हृदयसे समर्थन करताहूं कि आत्मनिर्भरभारत का हमारालक्ष्य आत्मनिर्भरकृषि से औरसशक्त होगा औरइसी सोच केसाथ सरकार नेबीते 6 वर्षोंमें बीज सेलेकर बाजार तकहर व्यवस्थामें सकारात्मकपरिवर्तन काप्रयास कियाहै, ताकिभारतीय कृषिआधुनिक भी बनेऔर कृषि काविस्तार भी हो ।
यहप्रसन्नता कीबात है कि आजकृषि के लिएउपलब्ध सिंचाईसाधनों में भीव्यापक सुधारआ रहा है । Per Drop More Crop के मंत्रपर चलते हुएसरकार पुरानीसिंचाई परियोजनाओंको पूरा करनेके साथ ही सिंचाईके आधुनिक तरीकेभी किसानों तकपहुंचा रही है । वर्ष 2013-14 मेंजहां 42 लाखहेक्टेयर जमीनमें ही माइक्रो-इरिगेशनकी सुविधा थी, वहींआज 56 लाखहेक्टेयर सेज्यादा अतिरिक्तजमीन को माइक्रो-इरिगेशनसे जोड़ा जाचुका है तथाआज देश मेंखाद्यान्न उपलब्धतारिकार्ड स्तरपर है । वर्ष2008-09 मेंजहां देश में234 मिलियनटन खाद्यान्नकी पैदावार हुईथी, वहींसाल 2019-20 मेंदेश की पैदावारबढ़कर 296 मिलियनटन तक पहुंचगई है । इसीअवधि में सब्जीऔर फलों काउत्पादन भी 215मिलियनटन से बढ़करअब 320 मिलियनटन तक पहुंचगया है ।
महामहिमराष्ट्रपति महोदयके अभिभाषण मेंयह उल्लेख हैकि केन्द्र सरकारकी प्राथमिकताओंमें ये छोटेऔर सीमांत किसानभी हैं । ऐसेकिसानों के छोटे-छोटेखर्च में सहयोगकरने के लिएपीएम किसान सम्माननिधि के जरिएउनके खातों मेंलगभग एक लाखतेरह हजार करोड़से अधिक रुपयेसीधे ट्रांसफरकिए जा चुकेहैं । प्रधानमंत्री फसल बीमायोजना का लाभभी देश के छोटेकिसानों को हुआहै । इस योजनाके तहत पिछले5 वर्षोंमें किसानोंको 17 हजारकरोड़ रुपये प्रीमियमके एवज मेंलगभग 90 हजारकरोड़ रुपये कीराशि, मुआवजेके तौर पर मिलीहै, प्रशंसाकी बात है ।
महामहिमराष्ट्रपति महोदयके अभिभाषण मेंयह उल्लेख हैकि व्यापक विमर्शके बाद संसदने सात महीनेपूर्व तीन महत्वपूर्णकृषि सुधार, कृषकउपज व्यापारऔर वाणिज्य (संवर्धनऔर सरलीकरण) विधेयक, कृषि (सशक्तीकरणऔर संरक्षण) कीमतआश्वासन और कृषिसेवा करार विधेयकऔर आवश्यक वस्तुसंशोधन विधेयकपारित किए हैं । इन कृषि सुधारोंका सबसे बड़ालाभ भी 10 करोड़से अधिक छोटेकिसानों को तुरंतमिलना शुरू हुआ । छोटे किसानोंको होने वालेइन लाभों कोसमझते हुए हीअनेक राजनीतिकदलों ने समय-समयपर इन सुधारोंको अपना भरपूरसमर्थन दियाथा । देश मेंअलग-अलगफोरम पर, देशके हर क्षेत्रमें दो दशकोंसे जिन सुधारोंकी चर्चा चलरही थी और जोमांग हो रहीथी, वह सदनमें चर्चा केदौरान भी परिलक्षितहुई, देशवासियोंके लिए खुशीकी बात है ।
महामहिमराष्ट्रपति महोदयके अभिभाषण मेंयह उल्लेख हैकि लोकतंत्रऔर संविधान कीमर्यादा को सर्वोपरिरखने वाली केन्द्रसरकार, इनकानूनों के संदर्भमें पैदा किएगए भ्रम कोदूर करने कानिरंतर प्रयासकर रही है तथाकेन्द्र सरकारने लोकतंत्रमें अभिव्यक्तिकी आज़ादी औरशांतिपूर्ण आंदोलनोंका हमेशा सम्मानकिया है । लेकिनपिछले दिनोंहुआ तिरंगे औरगणतंत्र दिवसजैसे पवित्रदिन का अपमानबहुत दुर्भाग्यपूर्णहै । जो संविधानहमें अभिव्यक्तिकी आज़ादी काअधिकार देताहै, वहीसंविधान हमेंसिखाता है किकानून और नियमका भी उतनीही गंभीरता सेपालन करना चाहिए ।
मैंमहामहिम राष्ट्रपतिमहोदय द्वाराअपने अभिभाषणमें 26 जनवरीको देश की ऐतिहासिकप्राचीर लालकिले पर तिरंगेके अपमान कीघटना को दुर्भाग्यपूर्णबताने एवं उच्चतमन्यायालय द्वारातीनों नए खेतीकानूनों के अमलपर जो रोक लगाईगई है तथा सरकारन्यायालय केफैसले का अनुपालनकरेगी, कासमर्थन करताहूं तथा उनकेइस कथन का भीसमर्थन करताहूं कि तीननए कृषि कानूनबनने से पहलेपुरानी व्यवस्थाओंके तहत जो अधिकारथे तथा जो सुविधाएंथीं, उनमेंकहीं कोई कमीनहीं की गईहै, बल्किइन कृषि सुधारोंके जरिए सरकारने किसानों कोनई सुविधाएंउपलब्ध करानेके साथ-साथनए अधिकार भीदिए हैं ।
महामहिमराष्ट्रपति महोदयका यह कथन किकृषि को औरलाभकारी बनानेके लिए केन्द्रसरकार आधुनिककृषि इंफ्रास्ट्रक्चरपर भी विशेषध्यान दे रहीहै तथा इसकेलिए एक लाखकरोड़ रुपये केएग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चरफंड की शुरुआतकी गई है औरदेश भर मेंशुरू की गईकिसान रेल, भारतके किसानों कोनया बाजार उपलब्धकराने में नयाअध्याय लिख रहीहै एवं यह किसानरेल एक तरहसे चलता-फिरताकोल्ड स्टोरेजहै और अब तक100 सेज्यादा किसानरेलें चलाई जाचुकी हैं, जिनकेमाध्यम से 38 हजारटन से ज्यादाअनाज और फल-सब्जियां, एकक्षेत्र से दूसरेक्षेत्र तक किसानोंद्वारा भेजीगई हैं, केन्द्रसरकार की किसानोंके प्रति जागरूकताऔर उपलब्धियोंको दर्शाता है ।
महामहिमराष्ट्रपति महोदयका अभिभाषण मेंयह कथन स्वागतयोग्य है किकिसानों की आयबढ़ाने के लिएकेन्द्र सरकारने पशुधन कोआय के स्रोतके रूप मेंस्थापित करनेपर भी विशेषजोर दिया हैतथा इसी कापरिणाम है किदेश का पशुधनपिछले 5 वर्षोंमें सालाना 8.2 प्रतिशतकी दर से बढ़रहा है । इसकेसाथ ही सरकारने डेयरी क्षेत्रमें बुनियादीढांचे की स्थापनाऔर निवेश कोप्रोत्साहितकरने के लिए15 हजारकरोड़ रुपये केपशुपालन अवसंरचनाविकास कोष कीस्थापना भी कीहै ।
यहभी स्वागत योग्यहै कि पशुपालनऔर मत्स्य पालनको भी सरकारने कृषि क्षेत्रकी तरह ही किसानक्रेडिट कार्डकी सुविधा दीहै तथा देशमें प्रधान मंत्रीमत्स्य संपदायोजना के माध्यमसे मछुआरों कीआय को बढ़ानेके लिए भी कामहो रहा है औरइस क्षेत्र मेंअगले पांच सालोंमें लगभग बीसहजार करोड़ रुपयेका निवेश करनेकी योजना है ।
महामहिमराष्ट्रपति महोदयका यह कथन किकिसानों की आमदनीबढ़ाने के लिएकेन्द्र सरकारअन्नदाता कोऊर्जादाता बनानेका भी अभियानचला रही हैएवं प्रधान मंत्रीकुसुम योजनाके तहत किसानोंको 20 लाखसोलर पम्प दिएजा रहे हैंऔर सरकार द्वारागन्ने के सीरे, मक्का, धानइत्यादि से एथनॉलके उत्पादन कोभी बढ़ावा दियाजा रहा है ।पिछले 6 वर्षोंमें सरकार कीसकारात्मक नीतियोंके कारण एथनॉलका उत्पादन 38 करोड़लीटर से बढ़कर190 करोड़लीटर हुआ है । यह उत्पादनइस वर्ष बढ़कर320 करोड़लीटर तक होजाएगा, ऐसीउम्मीद है तथाएथनॉल देश केकिसानों की आयबढ़ाने का एकबड़ा जरिया बनकरउभर रहा है । यह माननीयप्रधान मंत्रीश्री नरेन्द्रमोदी जी केअथक प्रयासोंसे ही सम्भवहो सका है ।
महामहिमराष्ट्रपति महोदयका यह कथन किपूज्य बापू आत्मनिर्भर ‘आदर्शगांवों’ केनिर्माण की इच्छारखते थे तथाइसी विचार कोलेकर चल रहीकेन्द्र सरकारआज गांवों केबहुआयामी विकासके लिए लगातारकाम कर रहीहै और गांवके लोगों काजीवन स्तर सुधरे, यहकेन्द्र सरकारकी प्राथमिकताहै । इसका उत्तमउदाहरण 2014 सेगरीब ग्रामीणपरिवारों केलिए बनाए गए2करोड़घर हैं और वर्ष2022तकहर गरीब कोपक्की छत देनेके लिए प्रधानमंत्री आवासयोजना की गतिभी तेज की गईहै, स्वागतयोग्य है ।
महामहिमराष्ट्रपति महोदयका यह कथन किसरकार द्वाराशुरू की गईस्वामित्व योजनासे अब ग्रामीणोंको उनकी संपत्तिपर कानूनी हकमिल रहा हैऔर स्वामित्वके इस अधिकारसे अब गांवोंमें भी संपत्तियोंपर बैंक लोनलेना, हाउसलोन लेना आसानबनेगा और ग्रामीणक्षेत्रों मेंआर्थिक गतिविधियांतेज होंगी एवंइस योजना काभी विशेष लाभगांवों के छोटेउद्यमियों औरकुटीर उद्योगसे जुड़े लोगोंतथा छोटे किसानोंको होगा, स्वागतयोग्य है ।
महामहिमराष्ट्रपति महोदयका यह कथन किबाबा साहेब अम्बेडकरसंविधान के मुख्यशिल्पी होनेके साथ-साथहमारे देश मेंवाटर पॉलिसीको दिशा दिखानेवाले भी थे । 8 नवंबर, 1945 कोकटक में एककांफ्रेंस केदौरान उन्होंनेकहा था – Water is Wealth – Water being the wealth of the people and its distribution being uncertain, the correct approach is not to complain against nature but to conserve water – बाबासाहेब की प्रेरणाको साथ लेकर, केन्द्रसरकार ‘जलजीवन मिशन’ कीमहत्वाकांक्षीयोजना पर कामकर रही है औरइसके तहत ‘हरघर जल’ पहुंचानेके साथ ही जलसंरक्षण पर भीतेज गति सेकाम किया जारहा है एवंइस अभियान केतहत अब तक 3 करोड़परिवारों कोपाइप वाटर सप्लाईसे जोड़ा जाचुका है औरइस अभियान मेंअनुसूचित जातियोंव जनजातियोंके भाई-बहनोंतथा वंचित वर्गोंके अन्य लोगोंको प्राथमिकताके आधार परपानी का कनेक्शनदिया जा रहाहै । परम आदरणीयप्रधान मंत्रीश्री नरेन्द्रमोदी जी कीदेश के दबे-कुचलेअनुसूचित जातिएवं जनजाति समुदायके उत्थान औरकल्याण को दर्शाताहै ।
महामहिमराष्ट्रपति महोदयका यह कथन किहमारे गांवोंको 21वींसदी की जरूरतोंऔर इंफ्रास्ट्रक्चरसे जोड़ने केलिए सरकार नेग्रामीण सड़कनेटवर्क के विस्तारमें भी सराहनीयकाम किया हैऔर प्रधान मंत्रीग्राम सड़क योजनाके अंतर्गत देशके ग्रामीण क्षेत्रोंमें 6 लाख42 हजारकिलोमीटर सड़कका निर्माण पूराकर लिया गयाहै एवं इस योजनाके तीसरे चरणमें ग्रामीणक्षेत्रों मेंबसावटों के साथ-साथस्कूलों, बाजारोंऔर अस्पतालोंआदि से जोड़नेवाले 1 लाख25 हजारकिलोमीटर रास्तोंको भी अपग्रेडकिया जाएगा औरगांवों में सड़कोंके साथ ही इंटरनेटकी कनेक्टिविटीभी उतनी हीअहम है तथाहर गांव तकबिजली पहुंचानेके बाद सरकारदेश के 6 लाखसे अधिक गांवोंको ऑप्टिकल फाइबरसे जोड़ने केलिए अभियान चलारही है, स्वागतयोग्य है ।
महामहिमराष्ट्रपति महोदयका यह कथन भीस्वागत योग्यहै कि हमारीअर्थव्यवस्थाकी आधारभूत ताकतहमारे गांवोंऔर छोटे शहरोंमें फैले हमारेलघु उद्योग, हमारेकुटीर उद्योग, एमएसएमईज़ही हैं और भारतको आत्मनिर्भरबनाने का बहुतबड़ा सामर्थ्यहमारे इन लघुउद्योगों केही पास है तथादेश के कुलनिर्यात मेंइनकी भागीदारीलगभग 50 प्रतिशतकी है और आत्मनिर्भरभारत के मिशनमें एमएसएमईज़की भूमिका कोबढ़ाने के लिएभी अनेक कदमउठाए गए हैं ।
महामहिमराष्ट्रपति महोदयका यह कथन किआत्मनिर्भर भारतमें महिला उद्यमियोंकी विशेष भूमिकाहै तथा सरकारने महिलाओं कोस्वरोजगार केनए अवसर देनेके लिए कई कदमउठाए हैं औरमुद्रा योजनाके तहत अब तक25करोड़के ज्यादा ऋणदिए जा चुकेहैं, जिसमेंसे लगभग 70 प्रतिशतऋण महिला उद्यमियोंको मिले हैं । यह माननीयप्रधान मंत्रीश्री नरेन्द्रमोदी जी केकेन्द्रीय नेतृत्वमें देश कीमहिलाओं को स्वावलंबीबनाए जाने कीदिशा में एकमहत्वपूर्ण कदमहै ।
महामहिमराष्ट्रपति महोदयका यह कथन किदीनदयाल अंत्योदययोजना – राष्ट्रीयग्रामीण आजीविकामिशन के अंतर्गतदेश में आज7 करोड़से अधिक महिलाउद्यमी करीब66 लाखस्वयं सहायतासमूहों से जुड़ीहुई हैं । बैंकोंके माध्यम सेइन महिला समूहोंको पिछले 6 वर्षोंमें 3 लाख40 हजारकरोड़ रुपये काऋण दिया गयाहै, भी स्वागतयोग्य है ।
महामहिमराष्ट्रपति महोदयका यह कथन भीस्वागत योय हैकि देश के ग्रामीणक्षेत्रों मेंकार्यरत महिलाओंके स्वास्थ्यको ध्यान मेंरखते हुए सरकारएक रुपये में ‘सुविधा’ सैनिटरीनैपकिन देनेकी योजना भीचला रही हैऔर सरकार गर्भवतीमहिलाओं के मुफ्तचेक-अपकी मुहिम एवंराष्ट्रीय पोषणअभियान चलाकर, उन्हेंआर्थिक मदद देकर, गर्भवतीमाताओं एवं शिशुओंके स्वास्थ्यकी रक्षा केलिए निरंतर प्रयत्नशीलहै । इसी कापरिणाम है किदेश में मातृमृत्यु दर 2014 मेंप्रति लाख 130 सेकम होकर 113 तकआ गई है औरपांच वर्ष सेकम आयु के बच्चोंकी मृत्यु दरभी पहली बारघटकर 36 तकआ गई है, जोवैश्विक दर 39 सेकम है ।
महामहिमराष्ट्रपति महोदयका यह कथन भीस्वागत योग्यहै कि महिलाओंकी समान भागीदारीको आवश्यक माननेवाली सरकार नए-नएक्षेत्रों मेंबहनों-बेटियोंके लिए नए अवसरबना रही हैऔर भारतीय वायुसेनाकी फाइटर स्ट्रीमहो, मिलिस्ट्रीपुलिस में महिलाओंकी नियुक्तिहो या फिर अंडरग्राउंड माइंसमें तथा ओपनकास्ट माइंसमें महिलाओंको रात्रि मेंकार्य करने कीअनुमति, येसभी निर्णय पहलीबार मेरी सरकारने ही लिए हैंएवं महिला सुरक्षाको ध्यान मेंरखते हुए वनस्टॉप सेंटर, अपराधियोंका राष्ट्रीयडेटाबेस, इमरजेंसीरिस्पोंस सपोर्टसिस्टम और देशभर में फास्टट्रैक कोर्टपर तेजी सेकाम किया गयाहै ।
महामहिमराष्ट्रपति महोदयका यह कथन कि21वींसदी की वैश्विकआवश्यकताओं औरचुनौतियों कोध्यान में रखतेहुए सरकार नेराष्ट्रीय शिक्षानीति की घोषणाकी है और राष्ट्रीयशिक्षा नीतिमें पहली बारछात्रों को अपनीरुचि के हिसाबसे विषय पढ़नेकी आज़ादी दीगई है एवं किसीकोर्स के बीचमें भी विषयऔर स्ट्रीम बदलनेका विकल्प युवाओंको दिया गयाहै, स्वागतयोग्य है ।
महामहिमराष्ट्रपति महोदयका यह कथन किकेन्द्र सरकारका मानना हैकि सबसे ज्यादावंचित वर्गोंकी सामाजिक औरआर्थिक विकासकी यात्रा, गुणवत्तायुक्त शिक्षासे आरंभ होतीहै और सरकारकी विभिन्न छात्रवृत्तियोजनाओं का लाभऐसे ही 3 करोड़20 लाखसे ज्यादा विद्यार्थियोंको मिल रहाहै और इनमेंअनुसूचित जाति, पिछड़ावर्ग, वनवासीएवं जनजातीयवर्ग और अल्पसंख्यकसमुदाय के छात्र-छात्राएंशामिल हैं तथासरकार का प्रयासहै कि ज्यादासे ज्यादा पात्रऔर जरूरतमंदविद्यार्थियोंको छात्रवृत्तियोंका लाभ मिलेऔर इसके साथही, अनुसूचितजाति के विद्यार्थियोंको दी जानेवाली पोस्ट मैट्रिकछात्रवृत्तिमें केंद्र सरकारके हिस्से कोभी बढ़ाया जारहा है एवंइसी प्रकार जनजातीययुवाओं की शिक्षाके लिए हर आदिवासीबहुल ब्लॉक तकएकलव्य आवासीयमॉडल स्कूल केविस्तार का कामकिया जा रहाहै तथा अब तकइस प्रकार केसाढ़े पांच सौसे ज्यादा स्कूलस्वीकृत किएजा चुके हैं । माननीय प्रधानमंत्री श्रीनरेन्द्र मोदीजी के केन्द्रीयनेतृत्व मेंदलित एंव आदिवासीसमुदाय को समाजकी मुख्यधारामें लाने केसार्थक प्रयासोंको दर्शाता है ।
महामहिमराष्ट्रपति महोदयका यह कथन स्वागतयोग्य है किशिक्षा के साथ-साथनौकरी की प्रतिक्रियाएंआसान करने औरव्यवस्थित करनेपर भी मेरीसरकार का जोरहै और ग्रुपसी और डी मेंइंटरव्यू समाप्तकरने से युवाओंको बहुत लाभहुआ है तथासरकार ने नेशनलरिक्रूटमेंटएजेंसी का गठनकरके नौजवानोंको नियुक्तिके लिए कई अलग-अलगपरीक्षाएं देनेकी परेशानी सेमुक्त किया है ।
महामहिमराष्ट्रपति महोदयका यह कथन भीस्वागत योग्यहै कि सरकार ‘सबकासाथ, सबकाविकास, सबकाविश्वास’ केमंत्र के साथदेश के हर क्षेत्रऔर हर वर्गके विकास कोप्राथमिकता देरही है और दिव्यांगजनोंकी मुश्किलोंको कम करनेके लिए देशभरमें हजारों इमारतोंको, सार्वजनिकबसों और रेलवेको सुगम्य बनायागया है और लगभग700 वेबसाइटोंको दिव्यांगजनोंके अनुकूल तैयारकिया गया है । इसी तरह ट्रांसजेंडरव्यक्तियों कोभी बेहतर सुविधाएंऔर समान अवसरदेने के लिएअवसर प्रदानकिए गए हैंऔर विमुक्त, घुमंतूऔर अर्ध घुमंतूसमुदायों केलिए भी विकासएवं कल्याण बोर्डकी स्थापना कीगई है ।
महामहिमराष्ट्रपति महोदयका यह कथन किविकास की दौड़में पीछे रहगए देश के 112आकांक्षीजिलों में केन्द्रसरकार प्राथमिकताके आधार परविकास योजनाओंको लागू कररही है और इसकाबहुत बड़ा लाभआदिवासी भाई-बहनोंको हो रहा हैतथा आदिवासियोंकी आजीविका केप्रमुख साधनयानि वन-उपजकी मार्केटिंगऔर वन-उपजआधारित छोटेउद्योगों कीस्थापना का कामभी जारी हैऔर ऐसी कोशिशोंसे लगभग 600 करोड़रुपये की अतिरिक्तराशि जनजातीयपरिवारों तकपहुंची है ।सरकार द्वारा46 वन-उपजोंपर MSP 90 प्रतिशततक बढ़ाई गईहै, स्वागतयोग्य है ।
महामहिमराष्ट्रपति महोदयका यह कथन भीस्वागत योग्यहै कि हमारीसंसद, लोकतन्त्रमें देशवासियोंकी बढ़ती हुईभागीदारी औरनए भारत कीआकांक्षाओं कीपूर्ति का एकमहत्वपूर्ण माध्यमहै तथा पहलेकी सरकारों मेंतथा संसद केसदनों में यहबात उठती रहीहै कि संसदकी यह इमारत, हमारीवर्तमान आवश्यकताओंको पूरा करनेमें अपर्याप्तसिद्ध हो रहीहै और संसदकी नई इमारतको लेकर पहलेकी सरकारों नेभी प्रयास किएथे तथा यह सुखदसंयोग है किआज़ादी के 75वेंवर्ष की तरफबढ़ते हुए हमारेदेश ने, संसदकी नई इमारतका निर्माण शुरूकर दिया हैऔर नए संसदभवन के बननेसे अपने संसदीयदायित्वों कोनिभाने में हरसदस्य को अधिकसुविधा मिलेगी ।
महामहिमराष्ट्रपति महोदयका यह कथन भीस्वागत योग्यहै कि संसदके दोनों सदनोंने श्रमेव जयतेकी भावना परचलते हुए श्रमिकोंके जीवन मेंबदलाव लाने वालानिर्णय लियाहै । 29 केंद्रीयश्रम कानूनोंको कम करके4 लेबरकोड बनाए हैंऔर इन श्रमसुधारों मेंराज्यों ने भीअगुवाई की हैतथा इन सुधारोंसे श्रम कल्याणका दायरा बढ़ेगा, श्रमिकोंको निश्चित समयपर मजदूरी मिलपाएगी और रोजगारके ज्यादा अवसरतैयार होंगेऔर नए लेबरकोड हमारी महिलाश्रमिकों कीअधिक और सम्मानजनकभागीदारी भीसुनिश्चित करतेहैं ।
महामहिमराष्ट्रपति महोदयका यह कथन किकोरोना के इसकाल में, प्रत्येकभारतीय का जीवनबचाने के प्रयासोंके बीच अर्थव्यवस्थाको जो हानिहुई थी, उससेभी अब देश उबरनेलगा है और यहआज अनेक इंडिकेटर्सके माध्यम सेस्पष्ट हो रहाहै तथा इस मुश्किलसमय में भीभारत दुनियाके निवेशकोंके लिए आकर्षकस्थान बनकर उभराहै और अप्रैलसे अगस्त, 2020 केबीच लगभग 36 अरबडॉलर का रिकॉर्डप्रत्यक्ष विदेशीनिवेश भारत मेंहुआ है, स्वागतयोग्य है ।
महामहिमराष्ट्रपति महोदयका यह कथन भीस्वागत योग्यहै कि मेरीसरकार देश मेंशहरीकरण के विकासको एक अवसरके रूप मेंदेखती है, इसलिएशहरी इंफ्रास्ट्रक्चरपर व्यापक निवेशकिया जा रहाहै और शहरोंमें गरीबों केलिए स्वीकृतएक करोड़ सेअधिक घरों मेंसे करीब 40 लाखका निर्माण पूराहो चुका हैतथा कुछ दिनपहले देश के6 शहरोंमें आधुनिक टेक्नोलॉजीआधारित घर बनानेका काम भी शुरुकिया गया हैऔर शहरों मेंकाम करने वालेश्रमिकों कोबेहतर आवास मिलसके, इसकेलिए उचित किराएवाली योजना भीशुरू की गईहै ।
महामहिमराष्ट्रपति महोदयका यह कथन भीस्वागत योग्यहै कि मेरीसरकार की विकासनीति को जम्मूकश्मीर के लोगोंने भी भरपूरसमर्थन दियाहै और कुछ सप्ताहपहले ही, आजादीके बाद पहलीबार, जम्मूकश्मीर में जिलापरिषद के चुनावसफलता के साथसंपन्न हुए हैं । बड़ी संख्यामें मतदाताओंकी भागीदारीने दर्शाया हैकि जम्मू कश्मीरनए लोकतांत्रिकभविष्य की तरफतेजी से आगेबढ़ चला हैतथा प्रदेश केलोगों को नएअधिकार मिलनेसे उनका सशक्तीकरणहुआ है । आयुष्मानभारत- सेहतयोजना लागू होनेके बाद जम्मूकश्मीर के हरपरिवार को 5 लाखरुपये तक केमुफ्त इलाज कालाभ मिलना तयहुआ है और जम्मूमें सेंट्रलएड्मिनिस्ट्रेटिवट्रिब्यूनल कीएक बेंच भीस्थापित की गईहै तथा केंद्रशासित प्रदेशबनने के बाद, कुछमहीने पहले लद्दाखस्वायत्त पर्वतीयविकास परिषदके चुनाव कीप्रक्रिया भीसफलतापूर्वकसम्पन्न हुईहै और अब लद्दाखके लोग स्वयंअपने प्रदेशके विकास सेजुड़े निर्णयऔर तेजी सेले रहे हैं ।
महामहिमराष्ट्रपति महोदयका यह कथन किविगत वर्ष में, सामूहिकताकी जिस शक्तिका हमने साक्षात्कारकिया है, उसीशक्ति से हमेंनए लक्ष्योंको प्राप्त करनाहै । पिछले कुछवर्षों में देशने अनेक ऐसेकाम कर दिखाएहैं, जिनकोकभी बहुत कठिनमाना जाता था । ये सभी कार्यस्वागत योग्यहै ।
आर्टिकल370 केप्रावधानों केहटने के बादजम्मू कश्मीरके लोगों कोनए अधिकार मिलेहैं । नागरिकतासंशोधन कानूनसंसद द्वारापास किया जाचुका है । चीफऑफ डिफेंस स्टाफके पद का लाभदेश को मिलनाशुरू हो चुकाहै । सशस्त्रसेनाओं में महिलाओंकी भागीदारीबढ़ रही है ।उच्चतम न्यायालयके फैसले केउपरांत भव्यराम मंदिर कानिर्माण शुरूहो चुका है । वर्ल्ड टूरिज्मइंडेक्स की रैंकिंगमें भारत 65वेंसे 34वींरैंकिंग पर आगया है । जिसDBT कोनजरअंदाज कियाजा रहा था, उसीकी मदद से पिछले6 सालमें 13 लाखकरोड़ रुपयेसे अधिक धनराशिलाभार्थियोंको ट्रांसफरकी गई है ।कभीहमारे यहां सिर्फ2 मोबाइलफैक्ट्रियांथीं । आज भारतदुनिया का दूसरासबसे बड़ा मोबाइलनिर्माता देशहै ।आज मध्यमवर्ग के लाखोंलोगों को Real Estate Regulation and Development Act, Real Estate Regulatory Authority; (रेरा) कालाभ मिल रहाहै । इस दौरानसिर्फ नए कानूनही नहीं बने, बल्कि1500सेज्यादा पुरानेऔर अप्रासंगिककानूनों को समाप्तकिया जा चुकाहै ।
महामहिमराष्ट्रपति महोदयका यह कथन किऐसे अनेक निर्णयहैं, जोलगभग हर क्षेत्रमें लिए गएहैं तथा सरकारने दिखाया हैकि नीयत साफहो, इरादेबुलंद हों तोबदलाव लाया जासकता है । इनवर्षों में सरकारने जितने लोगोंके जीवन कोछुआ है, वहअभूतपूर्व है । माननीय प्रधानमंत्री श्रीनरेन्द्र मोदीजी के केन्द्रीयनेतृत्व मेंकिए गए ये सभीकार्य स्वागतयोग्य है ।
हरगरीब का घररौशन हो, इसकेलिए ढाई करोड़से अधिक बिजलीकनेक्शन नि:शुल्कदिए गए । गरीबऔर मध्यम वर्गका बिजली बिलकम हो, इसकेलिए 36 करोड़से ज्यादा सस्तेबल्ब वितरितकिए गए । दुर्घटनाकी स्थिति मेंगरीब परिवारको दर-दरन भटकना पड़े, इसकेलिए सिर्फ एकरुपये महीनाके प्रीमियमपर 21 करोड़से अधिक गरीबोंको प्रधानमंत्रीसुरक्षा बीमायोजना से जोड़ागया । गरीब कीमृत्यु के बादउसके परिवारके पास एक संबलरहे, इसलिएसिर्फ 90 पैसाप्रतिदिन केप्रीमियम परलगभग साढ़े 9 करोड़लोगों को प्रधानमंत्रीजीवन ज्योतिबीमा योजना सेजोड़ा गया ।गरीब का शिशुकिसी गंभीर बीमारीसे ग्रसित नहो इसलिए मेरीसरकार ने नसिर्फ टीकोंकी संख्या बढ़ाईबल्कि टीकाकरणअभियान को देशके उन आदिवासीइलाकों में भीले गई, जोअब तक अछूतेथे । मिशन इंद्रधनुषके तहत साढ़े3 करोड़से अधिक बच्चोंका टीकाकरण कियागया । गरीब केहक का राशनकोई दूसरा नछीन ले, इसकेलिए शत-प्रतिशतराशन कार्ड कोडिजिटल कियाजा चुका है, 90 प्रतिशतराशन कार्डोंको आधार सेजोड़ा जा चुकाहै । रसोई केधुएं से गरीबबहन-बेटीकी सेहत न खराबहो, इसकेलिए उज्ज्वलायोजना के तहत8 करोड़से ज्यादा मुफ्तकनेक्शन दिएगए । गरीब बहन-बेटीकी गरिमा बढ़े, उनकीपरेशानी कम हो, इसकेलिए स्वच्छ भारतमिशन के तहत10 करोड़से ज्यादा शौचालयबनाए गए । घरमें काम करनेवाले भाई-बहन, गाड़ीचलाने वाले, जूतासिलने वाले, कपड़ाप्रेस करने वाले, खेतिहरमजदूर, ऐसेगरीब साथियोंको भी पेंशनमिले, इसकेलिए प्रधानमंत्रीश्रम योगी मान-धनयोजना चलाई गई । गरीब को बैंकिंगव्यवस्था कालाभ मिले, इसकेलिए 41 करोड़से अधिक गरीबोंके जनधन खातेखोले गए । इनमेंसे आधे से अधिकखाते हमारी गरीबबहनों और बेटियोंके हैं ।
महामहिमराष्ट्रपति महोदयका यह कथन किये सिर्फ आंकड़ेनहीं हैं, बिल्कुलसही है । उनकायह कहना किहर आंकड़ा, अपनेआप में एक जीवनगाथाहै और इस संसदके अनेक सदस्योंने अपने जीवनका बहुत लंबासमय इन्हीं परिस्थितियोंमें गुजारा है, बिल्कुलसही है ।
महामहिमराष्ट्रपति महोदयका यह कथन किउन्हें गर्वहै कि केन्द्रसरकार पूरी निष्ठाऔर ईमानदार नीयतके साथ, पिछले6 वर्षोंसे इस दिशामें निरतर कामकर रही है, फैसलेले रही है तथाउन्हें लागूकर रही है, केन्द्रीयनेतृत्व मेंहमारे लोकप्रियप्रधानमंत्रीआदरणीय श्रीनरेन्द्र मोदीजी की कार्यक्षमताओंको परिलक्षितकरता है ।
महामहिमराष्ट्रपति जीने अपने अभिभाषणमें इस प्रकारसे जहाँ विगतवर्षों के दौरानसरकार द्वारादेश के सर्वांगीणविकास हेतु किएगए कार्यों कोउद्धृत कियाहै, वहींसरकार के दूसरेकार्यकाल मेंकोविड जैसी वैश्विकमहामारी से देशको किस प्रकारसे संकट सेउबारा जा रहाहै, केन्द्रीयप्राथमिकताओंऔर इस दौरानउठाए गए महत्वपूर्णकदमों का भीउल्लेख कियाहै, जिसमेंहमारी लोकप्रियसरकार की आत्मछवि का एक अंदाजास्पष्ट रूप सेदिखाई दे रहाहै ।
अंतमें, मैंपुनः महामहिमराष्ट्रपति महोदयजी के अभिभाषणका हृदय सेसमर्थन करताहूं । धन्यवाद ।
*SHRI S.R. PARTHIBAN (SALEM): On 29th January 2021, the hon. President addressed both the Houses. In his Address he mentioned about how our country faced every crisis with fortitude, be it the corona virus pandemic, floods and major cyclones in several States. I accept that our Government faced a crucial time to save people from the pandemic virus from one hand and the economy on the other hand.
Seven months ago, Parliament approved three important farm reform Bills. All the opposition parties were against these Bills. But the Government passed those Bills with their majority.
Still, for more than two months, lakhs of farmers are protesting in Delhi border demanding withdrawal of these Bills. Hon. Supreme Court also gave stay for these laws. My humble request is to withdraw these three Bills for the farmers welfare.
This Government is taking steps to disinvest many public sector undertakings, including the Salem Steel Plant. Salem Steel Plant is a unit of the Steel Authority of India Limited and was established in the year 1981. The products of Salem Steel Plant known as Salem Stainless has earned international reputation for its quality and exported to more than 37 countries. The Central Government should not privatise the profit-making Salem Steel Plant.
The Central Government has already announced the Tamil Nadu Defence Industrial Corridor project in the year 2019. Tamil Nadu is a major defence manufacturing State in the country. It is famous for automobile components.
In this year’s Budget also, there is a mention about this project. I request the Central Government to allocate necessary funds and implement the ‘Tamil Nadu Defence Industrial Corridor’ project immediately.
Under the Central Government’s smart city plan, Salem has been selected as one of the smart cities. There are violations in the tenders. Tenders were given to fake companies. The quality of road and building works which were done was not good. There are no proper planning of Smart City project works. The funds were not utilised properly and in a useful way for the welfare of the public in the Smart City project.
I request you to re-examine the works which have already been completed, particularly regarding the tender processes.
Cauvery river is the lifeblood of four States, including Tamil Nadu. It is a holy river of South India like the river Ganga. The Cauvery river provides drinking water and irrigation to 16 districts of Tamil Nadu, including Thanjavur. My farmer leader, the late Dr. Kalaignar, when he became the Chief Minister for the first time, took strong action to prevent pollution of Cauvery river. He created an environment where people living in Tamil Nadu use Cauvery water for drinking and agriculture. But now the Cauvery river, the lifeblood of Tamil Nadu, is one of the most polluted rivers in India.
I request the Central Government to come forward to clean Cauvery like Namami Gange project.
In Salem constituency and other four constituencies, Dharmapuri, Thiruvannamalai, Krishnagiri and Kanchipuram of Tamil Nadu, farmers and the general public are against building Chennai-Salem eight lane highway project and they are protesting against it. The lands to be acquired are mostly agriculture fields. It will affect 120 hectares of forest land and cause irreversible damage in eight reserve forest. It has to pass through seven rivers. There are already three highways between Salem and Chennai. I request the Central Government, through you, to abandon the Salem-Chennai eight-lane project and request to expand the existing roads and railway lines. There is no structure affecting and land acquisition. All existing routs are much higher connectivity to the villages/town along its path.
I am constantly going to visit each and every village of my constituency. Even for the villages, where the Government officials did not go for many years. Poor villagers giving petition to provide basic amenities including toilet facility, street lights, drinking water, roads and help to ailing schools, etc. The MPLADS Fund was very useful and effective in solving the basic problems of the poor people. Therefore, I kindly request you to provide again the MPLADS Fund.
In order to develop healthcare facilities across the country, the Government has sanctioned 22 new AIIMS. Salem is located in the western part of Tamil Nadu. It is the centre point for Dharmapuri, Krishnagiri, Namakkal, Karur and many other places. Nearabout two crore people are living in and around Salem. Hence, I request you to establish an AIIMS in my Salem constituency also.Our hon. Prime Minister laid the foundation stone on 27th January 2019 for the Tamil Nadu AIIMS hospital. But after two years, no work has been started yet. I request you to allot necessary funds for the Tamil Nadu AIIMS and to expedite the construction work.
The handloom industry is one of the most ancient cottage industries in Salem district of Tamil Nadu, India. Salem was one of the primary handloom centres of South India. Sari, dhoti and angavasthram are made out of silk yarn and cotton yarn. In the recent past, home furnishing items are also woven, mainly for export purposes. More than one lakh handlooms are working and the total value of cloth produced per annum is estimated at Rs. 5,000 crore. I request the Central Government to establish a new Textile Park at Salem. Thank you, Mr. Speaker Sir.
*श्री राकेश सिंह (जबलपुर) : मैं 29जनवरी 2021 को महामहिम राष्ट्रपति जी के द्वारा संसद के दोनों सदनों के संयुक्त अधिवेशन के उनके उद्वोधन के समर्थन करता हूँ ।
राष्ट्रपति जी के अभिभाषण पर कुछ बोलने के पहले कुछ दूसरे पहलुओं पर गौर करना भी अनिवार्य है । राष्ट्रपति किसी राजनैतिक पार्टी के नहीं, बल्कि भारतीय गणतंत्र के प्रमुख हैं । ऐसे में विपक्षी दलों द्वारा जिस प्रकार से उनके अभिभाषण के दौरान संसद और सेंट्रल हॉल का बहिष्कार किया गया, वह किसी भी स्वस्थ लोकतंत्र का परिचायक नहीं हो सकता ।
राष्ट्रपति जी ने अपने अभिभाषण में सरकार के “सर्वजन हिताय,सर्वजन सुखाय”की मूल भावना का जिक्र किया है, जिसमें गाँव, गरीब,किसान और इस देश की आम जनता के कल्याण के लिए मोदी सरकार पिछले 6 वर्षों से लगातार कार्य कर रही है ।
माननीय प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में विश्व में भारत की बढ़ती लोकप्रियता के भय और राजनैतिक भविष्य की चिंताओं के कारण विपक्षी पार्टियों द्वारा पूरे देश में एक भ्रम की स्थिति फैलायी जा रही है, जो सरकार को बदनाम और देश को बैकफुट पर लाने का घटिया प्रयास है ।
पिछले वर्ष विश्व के सामने कोरोना महामारी एक बड़े संकट और चुनौतियों के रूप में सामने आयी । विश्व के शक्तिशाली देशों के सामने भी इस चुनौती का सामना करने की कोई बेहतर रणनीति नहीं थी । किन्तु, जिस प्रकार हमारे सर्वमान्य प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने नेतृत्व में इस महामारी और उसका सामना करने के तरीकों और उपायों के लिए भारत की दुनिया के विभिन्न मंचों ने भूरी-भूरी प्रशंसा की है । भारत की घनी आबादी,सांस्कृतिक परम्पराओं की विविधता तथा प्राकृतिक व भौगोलिक चुनौतियों के कारण कोरोना से बचाव के उपाय करना हम सब के लिए एक चुनौती भरा था । किन्तु, विश्व के कई समृद्ध और विकसित देशों की अपेक्षा भारत में मजबूत नेतृत्व और त्वरित कार्यवाही के कारण इस वायरस के प्रकोप पर काबू पाने में हम काफी हद तक सफल रहे ।
निश्चित रूप से इस कोरोना महामारी के दौर में विश्व के दूसरे देशों के साथ भारत भी गंभीर आपदा से पीड़ित था, किन्तु भारत ने विभिन्न क्षेत्रों को सफलतापूर्वक आगे बढ़ाया है । शिक्षण संस्थानों के बंद होने के कारण निश्चित रूप से हमारे बच्चों और युवा पीढ़ी की शिक्षण प्रक्रिया बाधित होने का बड़ा खतरा था, किन्तु सरकार के सजगता और संस्थानों और शिक्षकों ने नई टेक्नोलॉजी को शीघ्रता से अपनाकर यह सुनिश्चित किया कि विद्यार्थियों को शिक्षा निरंतर मिलती रहे ।
कोरोना महामारी के दौर में माननीय मोदी जी के नेतृत्व में सरकार के प्रयासों के कारण 2200 से अधिक प्रयोगशालाओं का नेटवर्क खड़ा किया, हजारों वेंटिलेटर का निर्माण किया गया, साथ ही पीपीई किट एवं टेस्ट किट का निर्माण करके न केवल आत्मनिर्भर बना, बल्कि विश्व के कई देशों को बड़ी मात्रा में पीपीई किट,टेस्ट किट और दवाइयों की आपूर्ति की गई । पिछले 6 वर्षों में मोदी सरकार ने लगातार स्वास्थ्य क्षेत्रों में बेहतर कार्य किया,जिसके परिणामस्वरूप कोरोना के दौर में भी सुविधाओं और व्यवस्थाओं का विस्तार आसान हो गया था ।
हमारे वैज्ञानिकों और विभिन्न प्रयोगशालाओं के अथक परिश्रम से बहुत कम समय में ही भारत में कोरोना से लड़ने की वैक्सीन तैयार हो गई है और अब तक लगभग 15 लाख से अधिक लोगों को मुफ्त टीकाकरण भी उपलब्ध करवाया जा चुका है ।
माननीय प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में इस कोरोना महामारी के कारण उत्पन्न आर्थिक मंदी के बजाय भी भारत अधिक प्रभावित नहीं हो सका । इसरी दौरान जीएसटी के अंतर्गत भारत ने रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की है । कोरोना महामारी के दौर में सरकार ने विशेष स्वनिधि योजना के माध्यम से रेहड़ी,पटरी और रोड साइड वेंडर्स को आर्थकि मदद पहुँचाई है, जिससे वे पुन: अपने धंधों को शुरू कर सके ।
कोरोना महामारी के समय में सरकार ने प्रधान मंत्री गरीब कल्याण योजना के माध्यम से देश की करोड़ों माताओं-बहनों एवं दिव्यांग भाई-बहनों को मुफ्त राशन के साथ आर्थिक सहायता प्रदान की गई है ।
कोरोना महामारी के दौर में भी हमारी सरकार वर्ष 2022 तक की अपनी राष्ट्रव्यापी घोषणाओं को पूरा करने के लक्ष्य पर काम करती रही है, जिसमें हर परिवार को बुनियादी सुविधाओं से युक्त पक्का मकान दिलाने से लेकर, किसानों की आय दोगुना करने तक ऐसे महत्वपूर्ण लक्ष्यों की तरफ बढ़ रही है, जब देश आजादी की 75वीं वर्षगांठ के ऐतिहासिक पड़ाव तक पहुँचेगा ।
आजाद भारत में लगभग अलग-अलग कालखंडों को मिलाकर 50 वर्षों से अधिक समय तक कांग्रेस पार्टी और उसके सहयोगी दलों की सरकार ने इस देश पर शासन किया है,लेकिन आजादी के 70 वर्षों के बाद भी किसी प्रधान मंत्री और किसी सरकार को इस देश की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने का लक्ष्य मिला है, वह बेहद चिंताजनक है । आजादी के 70 वर्षों बाद किसी प्रधान मंत्री को अपने देश के करोड़ों लोगों के बैंक खाते खुलवाने पड़े, चूल्हे से निकलते धुएं से अस्वस्थ होती माताओं-बहनों को गैस का कनेक्शन दिलाया जा रहा हो, पहली बार किसान सम्मान निधि के माध्यम से सीधे किसानों के खाते में पैसा डाला जा रहा हो, बेघर और कच्चे मकान में रह रहे करोड़ों लोगों को बुनियादी जरूरतों के साथ पक्का मकान उपलब्ध कराया जा रहा हो,युवाओं को स्वावलंबी बनाने की दिशा में उद्योग-धंधे स्थापित करने के लिए लोन उपलब्ध कराया जा रहा हो, किसानों को आत्मनिर्भर और स्वामीनाथन कमीशन की अनुशंसा को दशकों बाद लागू करना पड़ रहा हो तो निश्चित रूप से कांग्रेस के शासन व्यवस्था पर सवाल तो खड़े होंगे ही ।
पिछले वर्ष किसानों को समृद्ध बनाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा सुधार करते हुए माननीय मोदी जी के नेतृत्व में तीन कृषि कानूनों को एक बड़े सुधार के साथ संसद के दोनों सदनों में बहुमत के साथ पास किया गया, किन्तु कांग्रेस अपने पुराने रवैये “ढाक के तीन पात”की स्थितियों के साथ कृषि क्षेत्र में व्याप्त बड़े बिचौलियों और तथाकथित किसानों को बहकाकर तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन को उकसाती है ।
कांग्रेस पूरे देश में लगातार अपना जनाधार खोती जा रही है । इस पूरे किसान आंदोलन में ज्यादातर किसान पंजाब से हैं,क्योंकि वहाँ सरकार कांग्रेस की है । पंजाब के भोले-भाले लोगों में भ्रम फैलाकर आन्दोलन करने वाला पर्दे के पीछे कोई और नहीं, बल्कि कांग्रेस पार्टी ही है ।
हमारी सरकार द्वारा कृषि सुधार के लिए बनाये गए स्वामीनाथन कमीशन की लगभग सभी सिफारिशों को लागू करना निश्चित रूप से सरकार का साहसिक कदम है । स्वामीनाथन कमीशन की रिपोर्ट एवं उसकी सिफारिशें कांग्रेस के शासन में आ गई थीं, किन्तु उन सिफारिशों को लागू करने का साहस कांग्रेस न जुटा सकी, क्योंकि कांग्रेस कभी नहीं चाहती कि इस देश का किसान समृद्ध हो-आत्मनिर्भर हो । कांग्रेस की सरकार में गरीब और गरीब और अमीर और अमीर होता गया । जिन उद्योगपतियों का नाम लेकर कांग्रेस हमारी सरकार को पूँजीपतियों की सरकार होने का आरोप लगाती है,वे सभी उद्योगपति बड़े उद्योगपति कांग्रेस के शासन में ही पूँजीपति बने हैं । यह कैसी डबल स्टैंडर्ड की कांग्रेस की मानसिकता है?
यह तथाकथित किसान आन्दोलन शुरुआती दौर से ही विवादों और अलगाववादी विचारधाराओं से प्रेरित रहा है । इसी किसान आंदोलन में विवादास्पद नारे दिए गए । लोकतंत्र में एक-दूसरे से सैधांतिक तौर पर विरोध हो सकता है, किन्तु क्या किसी लोकतांत्रिक देश में प्रधान मंत्री के लिए ऐसी भाषा का प्रयोग किया जा सकता है?पिछले दिनों 26 जनवरी के मौके पर किसान आन्दोलन और ट्रैक्टर रैली के नाम पर देश की प्राचीर लाल किले पर आन्दोलनकारियों द्वारा जो कृत्य किया गया, वह बेहद निंदनीय है । तिरंगे की जगह पर अलग झंडे को लगाने वाले ऐसे लोगों के समर्थन में कांग्रेस पार्टी और इसके पूरे नेता गर्व महसूस कर रहे हैं । लाल किले एवं दिल्ली के विभिन्न स्थानों पर आंदोलनकारियों द्वारा हमारे सुरक्षा कर्मियों के साथ हिंसक व्यवहार की खबरें आईं,किन्तु पुलिस प्रशासन द्वारा अपने अदम्य साहस और धैर्य का परिचय देते हुए सार्वजनिक स्थलों की चाक-चौबंद सुरक्षा व्यवस्था प्रदान करना प्रशंसनीय है ।
हमारी सरकार द्वारा किसानों के आंदोलन को देखते हुए लगभग 11-12 दौर तक विभिन्न किसान संगठनों के साथ बैठक की गई ताकि उनकी माँगों पर भी सरकार विचार कर सके, किन्तु नेतृत्वविहीन कांग्रेस पार्टी की तरह ही नेतृत्वहीन किसान आंदोलन रहा । सरकार ने कई बार बात कही है कि कृषि सुधार कानून के कारण एमएसपी पर किसी भी प्रकार का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा, एमएसपी की व्यवस्था यथावत रहेगी तो उसके बाद भी ऐसे आंदोलन का क्या मतलब है?
इस कानून के लागू होने के बाद इस देश का किसान बिचौलियों के जाल से पूरी तरह मुक्त हो जाएगा,जिससे माफियाओं की दुकानें बंद होने का बड़ा खतरा है और उन्हीं माफियाओं के साथ मिलकर कांग्रेस पार्टी सरकार को बदनाम करने और देश को अस्थिर करने का प्रयास कर रही है । देश का लगभग 14 करोड़ किसान प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के साथ तब भी खड़ा था और अब भी पूरी तटस्था के साथ खड़ा है । इस कानून के लागू होने से वे कृषि उपज की पारंपरिक व्यवस्थाओं से मुक्त होकर अपना माल देश में कहीं भी बेच सकते हैं ।
कांग्रेस 70 वर्षों की अपनी शासन व्यवस्था में इस देश की आम जनता को बुनियादी सुविधाएँ तो दूर शुद्ध पेयजल भी उपलब्ध नहीं करा सकी । आज हमारी सरकार द्वारा माननीय मोदी जी के नेतृत्व में “जल जीवन मिशन” योजना के तहत “हर घर जी” पहुँचाने के साथ ही जल संरक्षण पर भी तेज गति से काम किया जा रहा है । इस अभियान के तहत अब तक तीन करोड़ परिवारों को पाइप वाटर सप्लाई से जोड़ा जा चुका है । इस अभियान के अंतर्गत अनुसूचित जाति, जनजाति एवं समाज के वंचित वर्गों को भी प्राथमिकता के आधार पर जोड़ने का लक्ष्य है ।
हमारी सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने का कार्य लगातार कर रही है । माननीय प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में पिछले 6 वर्षों में हमारी सरकार ने प्रधान मंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत 6 लाख 42 हजार किलोमीटर सड़कों का निर्माण कर ग्रामीण भारत को देश की मुख्य सड़कों से जोड़ने का एक बड़ा लक्ष्य हासिल किया है । सड़कों के साथ ही हमारी सरकार ग्रामीण भारत को बेहतर इंटरनेट और कनेक्टिविटी प्रदान करने पर भी लगातार कार्य कर रही है, जिसके फलस्वरूप 6 लाख से अधिक गाँवों को ऑप्टिकल फाइबर से जोड़ने का कार्य किया जा रहा है ताकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था भी तकनीक युक्त हो । बेहतर इंटरनेट कनेक्टिविटी से जहाँ एक ओर ग्रामीण युवाओं को स्व-रोजगार के अवसर मिलेंगे, वहीं ग्रामीण शिक्षण व्यवस्था में भी आमूल-चूल परिवर्तन देखने को मिलेगा ।
देश के सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों को और गति देने के लिए हमारी सरकार प्रतिबद्धता के साथ इस देश के छोटे और लघु उद्यमियों के साथ खड़ी है । भारत को आत्मनिर्भर बनाने का बहुत बड़ा सामर्थ्य हमारे इन लघु उद्योगों के ही पास है । तीन लाख करोड़ रुपये की इमरजेंसी क्रेडिट गारंटी योजना के माध्यम से लघु उद्यमियों को लाभ पहुँचाया जा रहा है । सरकारी खरीद में हमारी सरकार ने e-gem के माध्यम से देश के दूर-दराज वाले क्षेत्रों के उद्यमियों को पारदर्शिता के साथ अधिक भागीदारी प्रदान की है ।
पिछले वर्ष माननीय प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में हमारी सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 को मंजूरी दी है । राष्ट्रीय शिक्षा नीति में पहली बार छात्रों को अपनी रूचि के हिसाब से विषय पढ़ने की आजादी दी गई है । हमारी सरकार के प्रयास से विभिन्न योजनाओं के माध्यम से 3 करोड़ 20 लाख से ज्यादा विद्यार्थियों को लाभ पहुँचाया जा रहा है, क्योंकि मोदी सरकार मानती है कि सबसे ज्यादा वंचित वर्गों की सामाजिक और आर्थिक विकास की यात्रा गुणवत्ता युक्त शिक्षा से ही आरंभ होती है ।
हमारी सरकार ने हर गरीब का घर रोशन हो, इसके लिए ढाई करोड़ से अधिक बिजली कनेक्शन उपलब्ध कराये हैं । गरीब और मध्यम वर्ग के बिजली बिल को कम करने के लिए हमारी सरकार ने 36 करोड़ से अधिक एलईडी बल्ब का वितरण किया है ।
आजादी के बाद पहली बार किसी सरकार ने दुर्घटना की स्थिति में गरीब परिवार को दर-दर न भटकना पड़े, इसके लिए सिर्फ एक रुपये महीना के प्रीमियम पर 21 करोड़ से अधिक गरीबों को प्रधान मंत्री सुरक्षा बीमा योजना के माध्यम से जोड़ने का कार्य किया गया है ताकि ऐसी स्थिति में उनके परिवार को आर्थिक रूप से लाभ पहुँचाया जा सके ।
मुझे गर्व है कि माननीय प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में हमारी सरकार इस देश में पूरी निष्ठा और ईमानदार नीयत के साथ पिछले 6 वर्षों से इस दिशा में निरंतर काम कर रही है । मैं इन्हीं बातों के साथ पुन: महामहिम राष्ट्रपति जी के अभिभाषण का समर्थन करता हूँ ।
महोदय, आपने मुझे अवसर दिया,इसके लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद ।
*डॉ. आलोक कुमार सुमन (गोपालगंज):आज देश माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र भाई मोदी एवं बिहार राज्य के आदरणीय मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में विकास के हर पहलू पर आगे बढ़ रहा है । आज देश में ‘प्रधान मंत्री गरीब कल्याण योजना’ से 80 करोड़ लोगों को 5 किलो मुफ्त खाद्यान्न 8 महीनों तक दिया गया । यह एक बहुत ही सराहनीय पहल है । आज देश में ‘वन नेशन वन राशन कार्ड’ की सुविधा से सभी को फायदा हो रहा है ।
माननीय राष्ट्रपति जी के भाषण में जल-जीवन मिशन के बारे में उल्लेख किया गया है, जो कि भारतवर्ष के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है,खासकर किसानों एवं गरीबों के लिए भी आवश्यक रोल निभा रहा है । मैं यहां पर यह बात रखना चाहता हूं कि हमारे माननीय मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार जी ने पर्यावरण संतुलन के लिए जल-जीवन हरियाली अभियान चलाया है । इनके आह्वान पर प्रकृति एवं पर्यावरण के संरक्षण के लिए 5 करोड़ 16 लाख से अधिक लोगों की 18 हजार किलोमीटर से अधिक लंबी मानव श्रृंखला आयोजित की गई, जो अपने-आप में एक विश्व रिकॉर्ड बना । इसका यूनाइटेड नेशंस ने स्वागत करते हुए अपने सदस्य देशों के प्रतिनिधियों की बैठक को संबोधित करने के लिए आग्रह किया और हमारे माननीय मुख्य मंत्री श्री नीतीश कुमार जी ने 24 दिसंबर 2020 को राष्ट्र संघ की बैठक को संबोधित कर देश का गौरव बढ़ाया और जल-जीवन हरियाली अभियान की जानकारी दी ।
ग्लोबल वार्मिंग को देखते हुए वैज्ञानिकों की भविष्यवाणी है कि प्रति दशक 0.04 डिग्री सेंटीग्रेड से 0.05 डिग्री सेंटीग्रेड की दर से तापमान में वृद्धि हो रही है और वर्ष 2080 तक भारत के औसत वार्षिक तापमान में 3.5 डिग्री सेंटीग्रेड से 5.5 डिग्री सेंटीग्रेड तक की वृद्धि हो जाएगी । इसको ध्यान में रखते हुए मैं भारत सरकार से जल जीवन मिशन के साथ-साथ जल-जीवन हरियाली अभियान को भी बढ़ाए जाने का अनुरोध करता हूं ।
हमारे माननीय मुख्य मंत्री श्री नीतीश कुमार जी ने ‘कन्या उत्थान योजना’,महिला सशक्तिकरण,स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड, वृद्धावस्था पेंशन योजना,जीविका समूह का गठन, महिलाओं को पंचायती राज में 50% एवं नौकरी में 35% आरक्षण दिया, जिससे बिहार उनके नेतृत्व में प्रगति पथ पर आगे बढ़ रहा है ।
माननीय प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में ‘आत्मनिर्भर भारत अभियान’एक बहुत ही बड़ा कदम है । इससे सब का विश्वास एवं सबका विकास हो रहा है । इस आत्मनिर्भर भारत अभियान से देश में कोरोना-काल में अनेक लाभ हुए एवं आज दो वैक्सीनों का निर्माण हुआ । यह हमारे माननीय प्रधान मंत्री जी की ही देन है जो हमारे वैज्ञानिक भाइयों ने इतने कम समय में भारतवर्ष का गौरव बढ़ाया । इसके साथ ही मैं अपनी बात समाप्त करते हुए आपको धन्यवाद देता हूं । धन्यवाद ।
श्री अखिलेश यादव (आजमगढ़): सभापति महोदय, मैंआपको बहुत धन्यवाददेना चाहता हूंकि आपने मुझेभारत के राष्ट्रपतिजी के अभिभाषणपर बोलने कामौका दिया ।
महोदय, मुझसेपहले इस देशके बहुत हीसीनियर नेताऔर जम्मू-कश्मीरके कई बार मुख्यमंत्रीरहे सदस्य बोलरहे थे । उन्होंनेबहुत ही भावनात्मकबातें कहीं । उन्होंने इतनीइमोशनल बातेंकहीं कि वहहमारे भारत कीपहचान है । हमारेभारत की यहीपहचान है किहम गंगा-जमुनीतहज़ीब के साथमिलकर रहते हैं । हमारी जो तहज़ीबहै, वह मिलीजुलीतहज़ीब है । हमसदियों से एकसाथ मिलकर रहेहैं । यह हमारेभारत की पहचानहै । अगर इससेकिसी को खतरापैदा होता हैया इसको कोईतोड़ने का कामकरता है, तोवह राजनीतिकलाभ लेने केलिए तोड़ने काकाम करता है ।
सभापतिमहोदय, जबमैं बोलने केलिए खड़ा होताहूँ तो कोईन कोई माननीयसदस्य शेर जरूरपढ़ता है, दोलाइनें जरूरपढ़ता है । पिछलीबार भी जब मैंखड़ा हुआ, तबभी दो लाइनेंकिसी माननीयसदस्य ने पढ़ी । आज भी जब मैंबोलने के लिएखड़ा हो रहाथा, उससेपहले दो लाइनेंबोली गईं । मैंउन दो लाइनोंके आगे अपनीदो लाइनें जोड़देता हूँ औरवही देश कीराजनीति है । जो लोग आजसत्ता में हैं, उन्होंनेवही रास्ता अपनायाहुआ है । मैंउनके साथ अपनीदो लाइनें जोड़ताहूँ – जबतक पिछला करतबलोग समझ पाएं, एक तमाशाऔर खड़ा कर देताहूँ ।
सभापतिमहोदय, येजो हमारे सामनेसत्ता में बैठेहैं, वेसमझ गए हैं । यह बात मैंइसलिए भी कहताहूँ, कलमैंने सुना किएमएसपी था, एमएसपीहै और एमएसपीरहेगा । यह केवलभाषण में है, जमीनपर नहीं है । किसान को एमएसपीनहीं मिल रहाहै । अगर यहकिसान को मिलरहा होता तोदिल्ली घेर करकेकिसान ऐसे नहींबैठते । ये जोकिसान बैठे हैं, मैंउनको बधाई देताहूँ । इन किसानोंने न केवल दो, तीन, चारस्टेट्स, बल्किपूरे देश केकिसानों को जगानेका काम कियाहै ।
सभापतिमहोदय, मैंजिस प्रदेश सेआता हूँ, मैंइनसे जानना चाहताहूँ कि उस प्रदेशकी जनता नेदो बार इनकीसरकार बनवायीहै । इनको वर्ष2014मेंभी जनता कासमर्थन मिलाऔर वर्ष 2019 मेंभी जनता कासमर्थन मिला । मैं इनसे जाननाचाहता हूँ किजिस डिस्ट्रिक्टसे …* आतेहैं, क्याउस डिस्ट्रिक्टमें किसानोंको धान का एमएसपीमिला है यानहीं मिला है?
जो यह कह रहे हैं कि एमएसपी था, एमएसपी है, एमएसपी रहेगा, मैं उनसे जानना चाहता हूं, माननीय सदस्यों से पूछना चाहता हूं कि वे बतायें कि जहां से वे चुनकर आते हैं, उस जिले में किसानों को धान का एमएसपी मिला है या नहीं मिला है? …(व्यवधान)इनके बोलने से मिल गया । …(व्यवधान) सभापति महोदय, मुझे खुशी है कि ये जो बोल रहे हैं, उसे देश सुन रहा है, किसान देख रहा है । जहां के राष्ट्रपति महोदय हैं, उसके बगल का क्षेत्र हमारा है । न एमएसपी धान का मिला, न एमएसपी मक्के का मिला । आप तो सपना यह देख रहे हो कि न जाने कितने साल सरकार में रहोगे, कितना बड़ा सपना आप देख रहे हो और क्या आप जिनके नेतृत्व में चुनाव लड़ रहे हैं, उनको आप सत्य नहीं बताना चाहते । आप अपने क्षेत्र में जाओ, क्या आप किसी किसान को एमएसपी दिला पाए हो? …(व्यवधान) जहां तक केवल … * प्रधानमंत्री,यही नहीं देश के डिफेंस मिनिस्टर भी वहीं से आते हैं । बताओ, क्या धान का एमएसपी मिला है?केवल यही नहीं हैं, न जाने कितने गवर्नर उत्तर प्रदेश से बनकर दूसरे प्रदेश में बैठे हैं । क्या वे …*अपने गांव में जा करके नहीं पूछते, अपने जिले में नहीं जानकारी करते कि उनको धान का एमएसपी मिल रहा है या नहीं?
सभापति महोदय, यह भारतीय जनता पार्टी का नारा था कि हम किसानों की आय दो गुनी कर देंगे । राष्ट्रपति महोदय के अभिभाषण में भी लिखा है कि मेरी सरकार आज न सिर्फ एमएसपी पर रिकार्ड मात्रा में खरीद कर रही है, बल्कि खरीद केंद्रों की संख्या भी बढ़ा रही है । उत्तर प्रदेश में कहां खरीद केंद्र बने थे? …(व्यवधान) मुझे खुशी है कि किसान अपने परिश्रम से उत्पादन बढ़ा रहे हैं और खाद्यान्न का उत्पादन रिकार्ड स्तर पर पहुंच गया है । जहां से …* प्रधान मंत्री आते हों, डिफेंस मिनिस्टर आते हों, …* आते हों, सरकार बनवाई हो, उस प्रदेश में एमएसपी नहीं मिल रही है । …(व्यवधान) क्या व्यवहार रहा है आपका?…(व्यवधान) क्या व्यवहार रहा किसानों का?…(व्यवधान)
माननीय सभापति : बैठिए । जब आपका अवसर आएगा, तब बताइएगा । जब आपको अवसर मिलेगा,प्लीज तब बताइएगा ।
…(व्यवधान)
श्री अखिलेश यादव : सभापति महोदय, भारत के इतिहास में ऐसा व्यवहार किसानों के साथ कभी नहीं हुआ होगा । किसान लोगों को क्या-क्या नहीं कहा गया, क्या नहीं कहा गया? उन्हें अपमानित कियागया । वे दिल्ली आकर अपनी बात न कर दें …(व्यवधान)
माननीय सभापति :प्लीज जरा रुकिए । माननीय मंत्री जी कुछ कहना चाहते हैं ।
विधि और न्याय मंत्री; संचार मंत्री तथा इलेक्ट्रोनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री (श्री रवि शंकर प्रसाद): सर, मुझे आपके विचारार्थ एक बहुत विनम्र आग्रह करना है । राष्ट्रपति जी के अभिभाषण पर धन्यवाद की यह चर्चा चल रही है । राष्ट्रपति जी की एक परम्परा होती है । प्रधानमंत्री और गवर्नर सब के लिए कह रहे हैं, लेकिन राष्ट्रपति जी के जिले में एमएसपी मिला या नहीं मिला, आप एक बार परम्परा को देख लें । इस तरह का संदर्भ मेरे बीस साल के संसदीय अनुभव में नहीं होता है । वे भी एक प्रदेश के मुख्यमंत्रीरहे हैं ।
माननीय सभापति :आपने इंगित किया है, इसको देख लेंगे । ठीक है ।
श्री रवि शंकर प्रसाद:राष्ट्रपति का संदर्भ नहीं ले सकते हैं ।
माननीय सभापति :इसको देख लिया जाएगा । राष्ट्रपति जी का संदर्भ जहां आएगा, उसको देख लेंगे ।
श्री अखिलेश यादव : सभापति महोदय, यह कोई संदर्भ में नहीं आए, लेकिन कम से कम हम यह जानें तो सही । …(व्यवधान)
SHRI N. K. PREMACHANDRAN (KOLLAM): He is only mentioning the place where it is not given and nothing else.…(Interruptions)
माननीय सभापति :ओके, रिकार्ड देख लेंगे । प्लीज कंटीन्यू ।
…(व्यवधान)
माननीय सभापति :सौगत दा, प्लीज आप बैठ जाइए ।
…(व्यवधान)
श्री अखिलेश यादव : मैं उनके बगल के डिस्ट्रिक्ट की बात कर रहा हूं, जहां से मैं आता हूं । …(व्यवधान)
माननीय सभापति :आप बैठ जाइए । वे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे हैं । वे भी जानते हैं ।
श्री अखिलेश यादव: ऐसा व्यवहार किसानों के साथ कभी नहीं हुआ । उनको कितना अपमानित किया गया, क्या-क्याकहकर उनको नहीं बुलाया गया? ये तीन कानून हैं । यह सरकार कह रही है कि हम किसानों के लिए कानून बना करके लाए हैं । अगर किसान उन कानूनों को नहीं स्वीकार कर रहे हैं, तोसरकार क्यों नहीं कानूनों को वापस लेती है? …(व्यवधान)जिनके लिए कानून बना है, वे कानून नहीं चाहते हैं, तो सरकार को आखिरकार कौन रोक रहा है? क्या ये आरोप ठीक नहीं हैं कि कॉरपोरेट घराने के लिए आपने कारपेट बिछा करके इन कानूनों को लाने का काम किया? आप जनता से चुनकर आते हैं, जनप्रतिनिधिबन रहे हैं, लेकिन यहां पर लगता है कि सदन में बैठ करके आप …* बनकर आए हैं ।…(व्यवधान)जो लोग आंदोलन कर रहे हैं, उनकेलिए आप क्या कहते हैं? यह देश आंदोलन से आजाद हुआ ।
न जाने कितने अधिकार आंदोलनों से मिले, महिलाओं को वोट डालने का अधिकार आंदोलन से मिला,न जाने कितने आंदोलनों से नेता बनकर निकले । महात्मा गांधी देश के राष्ट्रपिता बने, वह आंदोलन में खड़े हुए, न केवल अफ्रीका में बल्कि भारत को भी उन्होंने आजादी दिलाई । उस आंदोलन के बारे में क्या कहा जा रहा है कि वे आंदोलनजीवी हैं । मैं उन लोगों को क्या कहूं,जो लगातार चंदा लेने निकल जाते हैं, क्या वे चंदाजीवी संगठन के लोग नहीं हैं । अगर वे हो सकते हैं जिनको आप आंदोलनजीवी बोल रहे हैं तो आप भी चंदा लेने कहीं भी निकल जाते हैं, क्या आप चंदाजीवी नहीं हैं?
आप कहते हैं कि मंडी को मॉर्डनाइज करेंगे । …(व्यवधान) मैंने पढ़ा कि मंडी को मॉर्डनाइज करेंगे,इन्फ्रास्ट्रक्चर बनाएंगे । देश में सबसे बेहतरीन एक्सप्रेस-वे कहीं बना है तो उत्तर प्रदेश में समाजवादी सरकार ने बनाया है । मैंने हमेशा कहा है कि रोड शहरों को जोड़ने के साथ-साथ गांवों को भी जोड़ता है । यह जहां शहरों की अर्थव्यवस्था को बेहतर करेगा,वहीं गांव की अर्थव्यवस्था को भी बेहतर बनाएगा,इसलिए मैंने उसके आसपास मंडियां बनाईं । मैंने कन्नौज, फरुर्खाबाद और कानपुर देहात के आसपास के लोगों के लिए आलू की मंडियां बनाई । मैनपुरी और इटावा के आसपास के लोगों के लिए अनाज की मंडी बनाई । बाबा रामदेव जी से ये लोग बहुत योग सीखते हैं,उन्हें भी पांच सौ एकड़ जमीन एक मंडी बनाने के लिए दी, एक आम की भी मंडी बनाई ।
मैं इनसे जानना चाहता हूं कि इन्होंने लाखों-करोड़ों रुपये मंडियों के इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए दिए थे, वह पैसा कहां चला गया?समाजवादी सरकार ने जितनी ईंटें लगाई थीं, उससे आगे मंडियां नहीं बढ़ पाई यानी काम वहीं रुका हुआ है । अभी प्रधानमंत्री जी गए थे, हमारा प्रदेश बहुत अच्छा प्रदेश है । अगर बड़ी चीज दिल्ली से बिकती है तो हमारे मुख्यमंत्री छोटी चीजें बेच देते हैं । समाजवादी सरकार में बना समाजवादी पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे, जो बलिया,गाजीपुर से होते हुए बिहार को जोड़ेगा,इससे लोगों को मदद होगी । एलाइनमेंट समाजवादी सरकार ने किया, लैंड एक्विजिशन समाजवादी सरकार ने किया । समाजवादी सरकार ने जो मंडियों के लिए व्यवस्था दी थी । मैं जानना चाहता हूं कि उसके किनारे मंडियां क्यों नहीं बनी?वहां क्यों नहीं मंडियां बन रही हैं? गाजीपुर में मंडी बननी थी, आजमगढ़ में मंडी बननी थी,सुल्तानपुर में मंडी बननी थी ।
महोदय, जहां तक अपराध की बात कर रहे हैं,देश का पहला मुख्यमंत्री होगा जिसने अपने मुकद्मे वापस ले लिए । मुझे कोई बताए जिसने अपने मुकद्मे वापस लिए हों, फिर आप अपराध की बात कर रहे हैं, वहां … * नीति चल रही है, जिसको चाहो उसको…* दो । आप कानून-व्यवस्था की बात करेंगे, महिलाओं की बात करेंगे । मेरी माता जी बैठी हैं,महिलाओं के बारे में बहुत चिंतित रहती हैं । आज उत्तर प्रदेश में माताओं व बहनों की क्या हालत है? आज आप अपने आंकड़े निकाल करके देखिए कि क्या आंकड़े हैं? अगर सबसे ज्यादा महिलाओं के ऊपर कहीं अपराध हुआ है तो वह उत्तर प्रदेश में हुआ है ।
माननीय सभापति : आपराष्ट्रपति जीके अभिभाषण परबोलिए ।
श्री अखिलेश यादव : सभापतिमहोदय, दूधकी भी बात हुई । उत्तर प्रदेशमें जब समाजवादीसरकार थी तोगुजरात के अमूलप्लांट के लिएपांच-पांचलाख लीटर दोप्रोक्योरमेंटप्लांट लगाएथे, मदरडेयरी का भीप्लांट लगा, इससेप्रोक्योरमेंटऔर प्रोडक्शनबढ़ा । अब चारसाल गुजर गएलेकिन मिल्कका एक नया प्लांटनहीं लगा पाए । दुख तब होताहै जब लखनऊके प्लांट मेंवहां के लोगोंका दूध प्रोक्योरनहीं हो रहाहै, गुजरातसे दूध आकरवहां प्रोक्योरहो रहा है ।लोगों ने उत्तरप्रदेश में आपकीसरकार बनवाई, इसकालाभ किसको मिले? आपनेमुझे कम समयदिया, आपकोधन्यवाद देताहूं ।
मेरीयही गुजारिशहै कि जिस किसानकी जान चलीगई है, मैंउन्हें श्रद्धांजलिदेता हूं । उनकेपरिवार के लोगोंको नौकरी मिले । यह दुर्भाग्यहै, जहांअन्नदाता बैठाहै लेकिन सरकारसुन नहीं रहीहै, अहंकारबड़े-बड़ेलोगों का नहींबचा है । येवे किसान हैंजो कीले उखाड़देते हैं, पेड़उखाड़ देते हैं, बंजरजमीन ठीक करदेते हैं । एकसमय आएगा जबइस सरकार परभी पटेला चलेगा । बहुत-बहुतधन्यवाद ।
*DR. HEENA VIJAYKUMAR GAVIT (NANDURBAR): I thank the Hon. President for addressing the joint sitting of the Parliament which was held during the coronavirus pandemic. This is the new beginning of the year and the decade. We are entering the 75th year of India’s independence.
The last year has been a year of advertising. We have faced the rise of coronavirus pandemic. While fighting the coronavirus pandemic, our country has shown its unity. The timely lockdown decision taken by the Government has proved to be a boon. The right decision at the right time has saved our country from a big disaster.
It was very challenging for the Government to face two major issues – firstly, saving the lives of our citizens, and secondly, protecting the economy. Besides announcing a record economic package for reviving the economy, the Government took care that no poor person went hungry.
Under the Pradhan Mantri Garib Kalyan Yojana, 80 crore people were provided an additional 5 kg free food grains per month for 8 months. One Nation One Ration Card facility made available free food grains to people at any part of the country. This especially benefitted the migrant labourers. Also, the ‘shramik trains’ helped these migrant laborers to reach their homes.
The Government launched Garib Kalyan Rojgar Abhiyan for returnee migrant labourers, and also, SVANidhi, a special scheme for street vendors and hawkers. A sum of Rs. 31,000 crore was directly transferred to Jan Dhan Accounts of women. Fourteen crore gas cylinders were given free of cost to poor women beneficiaries under Ujjwala Yojana.
The poor people had to always take pain and struggle hard to get the healthcare facilities and treatment for major illnesses. But the Government has brought Ayushman Bharat – Pradhan Mantri Jan Arogya Yojana, which has today benefitted 1.5 crore poor people in the country. Almost 24,000 hospitals are enrolled under this scheme and are ready to cater healthcare facilities to the poor needy people under the Pradhan Mantri Bhartiya Janaushadhi Yojana, and 7,000 Jan Aushadhi Kendras have been established across the country.
Through all these efforts, the Government has set an example of collective strength of federal structure. Under the circumstances that emerged during coronavirus pandemic, India has demonstrated its scientific capabilities, technical expertise and strength of its start-up ecosystem by developing a network of over 2,200 labs in a short time span, manufacturing ventilators, PPE kits and test kits.
It is indeed a great pride that India is conducting world’s largest vaccination drive. It is worthwhile to mention that the COVID-19 vaccines are prepared indigenously and today India is providing lakhs of doses to several countries and fulfilling its obligation towards humanity.
With a special focus on medical education, the Government has established new medical colleges. I would like to thank hon. Prime Minister Modi Ji for sanctioning a new medical college in my constituency, Nandurbar.
The Government is working on making our country ‘Atmanirbhar Bharat’ – self-reliant. By following the mantra ‘Per Drop More Crop’, the Government is focussing on pending irrigation project and bringing modern irrigation techniques to the farmers.
Pradhan Mantri Kisan Samman Nidhi has provided a hand holding to the marginal farmers. A sum of Rs. 1,13,000 crore has been transferred to their bank accounts. An overall development of the nation is the focus of this Government. With all the challenges, the country has emerged as a self-reliant, self-dependent economy.
I congratulate the Government for its efforts towards ‘Atmanirbharta’. Thank you.
*श्री उन्मेश भैय्यासाहेब पाटिल (जलगाँव): राष्ट्रपति का अभिभाषण एक संविधानिक प्रावधान है जिसके अंतर्गत नव वर्ष के पहले सत्र को महामहिम राष्ट्रपति जी सम्बोधित करते हैं । अपने अभिभाषण के माध्यम से राष्ट्रपति जी सरकार की प्राथमिकता,योजनाएं, दृष्टिकोण और आगामी समय में देश के विकास के लिए किस प्रकार कार्य करेगी उसका विवरण करते हैं । राष्ट्रपति जी ने अपने अभिभाषण के माध्यम से देश की दशा और दिशा और आदरणीय प्रधान मंत्री जी के नेतृत्व में कैसे एक नए भारत का निर्माण करेंगे उसका ब्यौरा दिया है ।
राष्ट्रपति जी का अभिभाषण इसलिए भी महत्वपूर्ण था क्योंकि इस वर्ष कोरोना जैसी वैश्विक महामारी ने पूरे विश्व को प्रभावित किया और हमारे प्रधानमंत्री जी के कुशल नेतृत्व का ही परिणाम है की आज भारत मंदी के दौर में भी विकास के पथ पर अग्रसर है जिसकी पुष्टि आर्थिक सर्वेक्षण और इंटरनेशनल मोनेटरी फण्ड द्वारा भी की गई है । कोरोना संक्रमण के समय भारत ने HCQ जैसी आवश्यक दवा का 150 देशों को निर्यात किया, वहीं अब स्वदेशी वैक्सीन को विभिन्न देशों को मुहैय्या करके हमारी सरकार ने वासुदेव कुटुंबकम के सिद्धांत का पालन करके पूरे विश्व में नाम किया है । मैं हमारे वैज्ञानिकों का अभिनन्दन करता हूँ और सभी हैल्थकेर वर्कर्स को धन्यवाद देता हूँ, जिनके योगदान के बिना हम इस भीषण बीमारी से नहीं जीत सकते थे ।
हमारी सरकार महात्मा गाँधी जी के ग्राम स्वराज के सपने को साकार करने के लिए विभिन्न तरह की परियोजनाएं चला रही है । राष्ट्रपति जी ने अपने अभिभाषण में प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना' के माध्यम से 8 महीनों तक 80 करोड़ लोगों को 5 किलो प्रतिमाह अतिरिक्त अनाज नि:शुल्क सुनिश्चित करने का वर्णन किया । हमारी सरकार ने प्रवासी श्रमिकों,कामगारों और अपने घर से दूर रहने वाले लोगों की भी चिंता की और वन नेशन - वन राशन कार्ड की सुविधा देने के साथ ही सरकार ने उन्हें नि:शुल्क अनाज मुहैया कराया और उनके लिए श्रमिक स्पेशल ट्रेनें चलवाईं ।
आज देश को समावेशी विकास की जरुरत है जिसमे हर वर्ग के व्यक्ति की भागीदारी हो । नए भारत की रचना करने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका देश के किसान की है और राष्ट्रपति जी ने हमारी सरकार की कृषि क्षेत्र की प्राथमिकता का भी उल्लेख किया जिसमें आत्मनिर्भर भारत से कृषि को सशक्त करने की बात की गयी । इसी सोच के साथ सरकार ने बीते 6 वर्षों में बीज से लेकर बाज़ार तक हर व्यवस्था में सकारात्मक परिवर्तन का प्रयास किया है, ताकि भारतीय कृषि आधुनिक भी बने और कृषि का विस्तार भी हो । इन्हीं प्रयासों के क्रम में सरकार ने स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करते हुए लागत से डेढ़ गुना MSP देने का फैसला भी किया था ।
सरकार आज न सिर्फ MSP पर रिकॉर्ड मात्रा में खरीद कर रही है, बल्कि खरीद केंद्रों की संख्या को भी बढ़ा रही है । कृषि के लिए उपलब्ध सिंचाई के साधनों में भी व्यापक सुधार आ रहा है| Per Drop More Crop के मंत्र पर चलते हुए सरकार पुरानी सिंचाई परियोजनाओं को पूरा करने के साथ ही सिंचाई के आधुनिक तरीके भी किसानों तक पहुंचा रही है । 2013-14 में जहां 42 लाख हेक्टेयर जमीन में ही माइक्रो-इरिगेशन की सुविधा थी, वहीं आज 56 लाख हेक्टेयर से ज्यादा अतिरिक्त जमीन को माइक्रो-इरिगेशन से जोड़ा जा चुका है । सरकार के इन प्रयासों को हमारे किसान अपने परिश्रम से और आगे बढ़ा रहे हैं ।
आज देश में खाद्यान्न उपलब्धता रिकॉर्ड स्तर पर है । वर्ष 2008-09 में जहां देश में 234 मिलियन टन खाद्यान्न की पैदावार हुई थी,वहीं साल 2019-20में देश की पैदावार बढ़कर 296 मिलियन टन तक पहुंच गयी है । इसी अवधि में सब्जी और फलों का उत्पादन भी 215 मिलियन टन से बढ़कर अब 320 मिलियन टन तक पहुंच गया है । सरकार की स्वच्छ भारत अभियान ने पूरे देश में स्वास्थय और महिला सशक्तिकरण के विषय पर सब का ध्यान केंद्रित किया है और एक प्रकार की क्रांति लाई है जिससे पूरे देश में 9 करोड़ से ज़्यादा टॉयलेट का निर्माण हुआ है जो प्रशंसा का पात्र है ।
सरकार ने जलशक्ति मंत्रालय का गठन करके जल परिवर्तन और जल संरक्षण के महत्वपूर्ण मुद्दे पर भी ध्यान दिया है । मैं जिस क्षेत्र से चुन के आता हूँ वहाँ जल समस्या बहुत व्यापक है और मेरी अपेक्षा है कि ये मंत्रालय उसको सुधारने की दिशा में जरुरी कदम उठाएंगे । सरकार ने विभिन्न योजनाओं के द्वारा जनता को लाभ पहुंचाया है जैसे जन धन योजना में करोड़ों नए बैंक अकाउंट खोले गए जिसने आर्थिक समग्रता को बढ़ावा दिया, आयुष्मान भारत योजना स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक लाभकारी योजना है जिससे गरीब परिवारों को इलाज में आर्थिक सहायता मिलेगी, जन औषधि केंद्र की माध्यम से सस्ती दवा देश भर में दी जा रहे है ।
बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के माध्यम से देश की बेटियों की शिक्षा के महत्त्व और इस संवेदनशील मुद्दे पर जागरूकता बढ़ी है । उज्ज्वला योजना में करोड़ों महिलाओं को गैस सिलिंडर दिए गए हैं, जिससे उनका सशक्तिकरण हुआ है । प्रधान मंत्री आवास योजना के अंतर्गत गरीबों के लिए मकान बनाये गए है, प्रधान मंत्री मुद्रा योजना ने स्वरोजगार के लिए अवसर बनाये हैं । GST के कार्यान्वन से एक देश एक टैक्स का सपना साकार हुआ है । आज पूरे विश्व में भारत के स्पेस प्रोग्राम और ISRO की तारीफ़ हो रही है और इन प्रयासों के कारण हम जल्द ही चंद्रयान और GAGANYAAN अभियान भी जल्दी ही पूरा कर लेंगे । प्रधान मंत्री किसान मानधन योजना के माध्यम से मामूली अंशदान पर 60 की उम्र के बाद किसानों को 3 हजार रुपये मंथली पेंशन मिलेगी । योजना में 18 से 40 वर्ष तक की आयु वाला कोई भी किसान जुड़ सकता है, जिसके पास 2 हेक्टेयर तक ही खेती की जमीन है ।
PSB Loans in 59 Minutes से आर्थिक सशक्तिकरण और स्वरोज़गार को प्रोत्साहन मिलेगा । इस स्कीम के तहत 25 करोड़ रुपये तक सालाना टर्नओवर वाले कारोबारी एक घंटे से भी कम वक्त में 1 करोड़ रुपये तक के लोन की मंजूरी हासिल कर सकते थे । बाद में इस स्कीम के जरिए लोन की राशि बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये कर दी गई । अब यह स्कीम छोटे कारोबारियों तक ही सीमित नहीं है । अब इसका विस्तार सभी लोगों तक कर दिया गया है, जिसके चलते अब 59 मिनट के अंदर होम लोन और पर्सनल होन को भी अप्रूवल मिल जाएगा । प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना के अंतर्गत दुर्घटना सम्बंधित मृत्यु अथवा आंशिक रूप से होने वाली शारीरिक समस्याओं पर बीमा दिए जाने पर जोर दिया गया है । देश के कई ऐसे ग्रामीण हिस्से हैं, जहाँ के लोगों को किसी तरह की बीमा की प्राप्ति नहीं हुई है । यह योजना इन्हीं जैसे लोगों को बीमा मुहैया कराने के लिए शुरू की गयी है । सरकार ने इसका सब्सक्रिप्शन चार्ज भी केवल 12 रूपयं रखा है,जिसके एवज में पॉलिसी होल्डर को 2 लाख तक की बीमा प्राप्त होगा । इस सरकार ने देश हित और सामान्य व्यक्ति के समग्र विकास के लिए विभिन्न तरह के कदम उठाये हैं जो सफल हुए हैं । राष्ट्रपति जी के अभिभाषण ने आने वाले वक्त में हमें शिक्षा,स्वास्थ्य,रक्षा, रोज़गार,किसान कल्याण और युवाओं के लिए अवसर जैसे विभिन्न मुद्दों पर व्यापक कार्य करना है जिससे हम महात्मा गाँधी के भारत का निर्माण कर सकें और हर समुदाय का विकास करते हुए इस महान देश को आगे लेकर जाएं ।
मैं राष्ट्रपति जी के अभिभाषण का पूरा समर्थन करता हूँ ।
*श्री सुखबीर सिंह जौनापुरिया (टोंक-सवाई माधोपुर): मैं राष्ट्रपति जी के अभिभाषण का समर्थन करता हूं । मोदी जी की सरकार सबका साथ, सबका विकास,सबका विश्वास के मंत्र के साथ देश के हर क्षेत्र और हर वर्ग के विकास को प्राथमिकता दे रही है । भारत में महिला उद्यमियों की विशेष भूमिका है । सरकार ने महिलाओं को स्वरोजगार के नए अवसर देने के लिए कई कदम उठाए हैं । मुद्रा येाजना के तहत अब तक 25 करोड़ से ज्यादा ऋण दिए जा चुके हैं, जिनमें से लगभग 70 प्रतिशत ऋण महिला उद्यमियों को मिले हैं । राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत देश आज 7 करोड़ से अधिक महिला उद्यमी करीब 66 लाख स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हुई हैं और बैंकों के माध्यम से इन महिला समूहों को पिछले 6 वर्षों में 3 लाख 40 हजार करोड़ रुपये का लोन दिया गया है । बाबा साहब की प्रेरणा को साथ लेकर चल रही मोदी सरकार जल जीवन मिशन की महत्वाकांक्षी योजना पर काम कर रही है । इसके तहत हर घर जल पहुंचाने के साथ ही जल संरक्षण पर भी तेज गति से काम किया जा रहा है । मुझे यह बताते हुए हर्ष है कि इस अभियान के तहत अब तक 3 करोड़ परिवारों को पाइप वॉटर सप्लाई से जोड़ा जा चुका है । इस अभियान में अनुसूचित जातियों व जनजातियों के भाई बहनों तथा वंचित वर्गों के अन्य लोगों को प्राथमिकता के आधार पर पानी का कनेक्शन दिया जा रहा है । प्रधान मंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत देश के ग्रामीण क्षेत्रों में छह लाख 42 हजार किलोमीटर सड़क का निर्माण पूरा कर लिया गया है । इस योजना के तीसरे चरण में ग्रामीण क्षेत्रों में बसावटों के साथ-साथ स्कूलों,बाजारों और अस्पतालों आदि से जोड़ने वाले 1 लाख 25 हजार किलोमीटर रास्तों को अपग्रेड किया जाएगा । हर गांव तक बिजली पहुंचाने के बाद मेरी सरकार देश के 6 लाख से अधिक गांवों को ऑप्टिकल फाइबर से जोड़ने के लिए अभियान चला रही है ।
कृषि कानून बिल पास करके सरकार ने किसानों को नया जीवन दान दिया है । इससे आने वाले समय में किसानों को काफी फायदा मिलेगा और वर्ष 2022 तक किसानों को आत्मनिर्भर बनाने पर भी जोर दिया गया है । देश में शुरू की गई किसान रेल भारत के किसानों को नया बाजार उपलब्ध कराने में नया अध्याय लिख रही है । अब तक 100 से ज्यादा किसान रेल चलाई जा चुकी हैं,जिनके माध्यम से 38 हजार टन से ज्यादा अनाज और फल सब्जियां किसानों द्वारा भेजी जा चुकी हैं । कृषि को और लाभकारी बनाने के लिए सरकार आधुनिक कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी विशेष ध्यान दे रही है । इसके लिए एक लाख करोड़ रुपए के एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड की शुरूआत की गई है । देश का पशुधन पिछले 5 वर्षों में सालाना 8.2 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है । सरकार ने डेयरी क्षेत्र में बुनियादी ढांचे की स्थापना और निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए 15 हजार करोड़ के पशुपालन विकास कोष की स्थापना भी की है । पिछले 6 वर्षों में सरकार की सकारात्मक नीतियों के कारण एथनॉल का उत्पादन 38 करोड़ लीटर से बढ़कर 190 करोड़ लीटर हुआ है । यह उत्पादन इस वर्ष बढ़कर 320 करोड़ लीटर तक हो जाएगा । ऐसी उम्मीद है कि एथनाल देश के किसानों की आय बढ़ाने का एक बड़ा जरिया बनकर उभर रहा है ।
स्वास्थ्य के क्षेत्र में मोदी सरकार ने पिछले 6 साल में जो कार्य किया है उनका बहुत बड़ा लाभ इस कोरोना संकट के दौरान दिखा है । पिछले वर्षों में इलाज से जुड़ी व्यवस्थाओं को आधुनिक बनाने के साथ ही बीमारी से बचाव पर भी उतना ही बल दिया गया है । राष्ट्रीय पोषण अभियान,फिट इंडिया अभियान,खेलो इंडिया अभियान ऐसे अनेक कार्यक्रमों से स्वास्थ्य को लेकर देश में नई सतर्कता आई है । आयुष्मान भारत प्रधान मंत्री जन आरोग्य योजना के तहत देश में 1.5 करोड़ गरीब लोगों को 5 लाख रुपये तक मुफ्त इलाज मिला । आज देश के 24 हजार से ज्यादा अस्पतालों में आयुष्मान योजना का लाभ मिल रहा है ।
मोदी सरकार ने अनेक ऐसे काम कर दिखाए हैं जिनको कभी बहुत कठिन माना जाता था । मोदी सरकार पूरी निष्ठा और ईमानदार नीयत के साथ पिछले 6 साल से इस दिशा में निरंतर काम कर रही है और फैसले ले रही है तथा उन्हें लागू कर रही है ।
आर्टिकल 370 के प्रावधानों के हटने के बाद जम्मू-कश्मीर के लोगों को नए अधिकार मिले हैं,जिससे कि उनके जीवन में खुशहाली आई है । नागरिक संशोधन कानून संसद द्वारा पास किया जा चुका है । चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ के पद पर श्री विपिन रावत नियुक्त हुए हैं । उनके इस पद का लाभ देश को मिलना शुरू हो चुका है । उच्चतम न्यायालय के फैसले के उपरांत भव्य राम मंदिर का निर्माण शुरू हो चुका है, जिससे भारतवासियों की मोदी सरकार के प्रति विश्वास बढ़ा है और मेरा विश्वास है कि यह समय से पहले पूरा हो जाएगा । वर्ल्ड टूरिज्म इंडेक्स की रैंकिंग में भारत 65वें से 34वीं रैंकिंग पर आ गया है । हर गरीब का घर रोशन हो, इसके लिए 2.5 करोड़ से अधिक बिजली कनेक्शन निशुल्क दिए गए और गरीब एवं मध्यम वर्ग का बिजली बिल कम हो, इसके लिए 36 करोड़ से ज्यादा सस्ते एलईडी बल्ब वितरित किए गए । गरीब के हक का राशन कोई दूसरा न ले जाए, इसके लिए 90 प्रतिशत राशन कार्ड को आधार कार्ड से जोड़ा जा चुका है । उज्ज्वला योजना के तहत 8 करोड़ से ज्यादा माता बहनों को मुफ्त कनेक्शन दिए जा चुके हैं, जिससे कि उनको धुएं से निजात मिल सके और माता बहनों का जीवन खुशी से व्याप्त हो सके । स्वच्छ भारत मिशन के तहत 10 करोड़ से ज्यादा शौचालय बनाए गए हैं, जिससे कि माँ बहनों को खुले में शौच से निजात मिली है । प्रधान मंत्री श्रम योगी मान-धन योजना चलाई गई, जिससे घर में काम करने वाले भाई-बहन, गाड़ी चलाने वाले,जूता सिलने वाले,कपड़ा प्रेस करने वाले, खेतिहर मजदूर को लाभ मिले । गरीब को बैंकिंग व्यवस्था का लाभ मिले, इसके लिए 41 करोड़ से अधिक गरीब लोगों के जनधन खाते खोले गए । इनमें से आधे से अधिक खाते हमारी गरीब बहनों और बेटियों के हैं ।
*SHRIMATI APARUPA PODDAR (ARAMBAGH) : I find this as an opportunity to express my gratitude and thanks to our farmers who have been feeding this country. At this historical juncture, I doubtlessly take a stand to be with them instead of with the Government that suppresses the dissent and peaceful protests with iron clamps in a fascist way of administration.
Not standing with the Government will never make me anti-national because the Government is not understanding the spirit of the nation. If the Government commits mistakes, the Opposition will stand to correct it. People will dissent from it. If the Government thinks that the farmers’ protest has tarnished the image of the country, let me tell you that the mighty Government is only responsible for it. The Government should have taken democratic steps to address the protest. Instead, they have been dealing with them in an autocratic way.
In 2014, we were at number 27 in the Democracy Index. Hon. Prime Minister, Shri Modi himself said that India is the mother of democracy. India was mother of democracy. What these …** are doing is that they are just attacking our democratic temper. We can see what they are doing in Bengal and in different parts of the country.
During COVID-19 crisis, only the agriculture sector showed comparatively little relaxation and now, this Government is just handing over our farm sector to the corporates. These farm laws will lead this country into a man-made food scarcity. This Government is handling a wholesale drive for their crony capitalist friends.
They have put our ports, airports, public sector companies like BSNL, BPCL and now LIC on the desk, to be sold. In the case of ports and airports, this Government is compromising the national security. These people will sell the country and we will again become slaves.
माननीय सभापति: मंत्री महोदया, आप क्या कह रही है ?
ग्रामीण विकास मंत्रालय में राज्य मंत्री (साध्वी निरंजन ज्योति): सभापतिजी, उत्तरप्रदेश की जिम्मेदारपार्टी के वेमुख्यमंत्रीरहे हैं, उन्होंनेचंदे की बातकही है । मैंइस पर विरोधकरती हूं ।…(व्यवधान) चंदाकिसी से जबरदस्तीनहीं लिया जारहा है । चंदालोग आस्था सेदे रहे हैं । भारत में हीनहीं दे रहेहैं, पूरेविश्व के लोगदे रहे हैं । …(व्यवधान) राम पर सबकीआस्था है । …(व्यवधान) सब लोगचंदा दे रहेहैं, हमनेभी दिया है । …(व्यवधान)
माननीय सभापति: आप बैठिए ।
…(व्यवधान)
माननीय सभापति: आपने अपनी बात कह दी है ।
…(व्यवधान)
साध्वी निरंजन ज्योति: सभापतिजी, माननीयसदस्य ने मंडियोंकी बात कहीहै, मैंबुंदेलखंड सेआती हूं, इनकेकार्यकाल मेंमंडियां बनींतो …* मेंबनीं । …(व्यवधान) …* …(व्यवधान)
माननीय सभापति: आपने प्वाइंट रख दिया है ।
…(व्यवधान)
श्री दिलीप शइकीया (मंगलदोई): माननीय सभापति जी, मैं आपका आभार व्यक्त करता हूं कि आपने मुझे महामहिम राष्ट्रपति जी के अभिभाषण के धन्यवाद प्रस्ताव पर बोलने का मौका दिया ।
मैं असम से आता हूं । मैं हम सबके प्रिय नेता यशस्वी प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी को सदन और सम्पूर्ण देशवासियों की तरफ से धन्यवाद देना चाहता हूं । विश्व में विकसित राष्ट्र जब कोरोना महामारी से त्राहि-त्राहि कर रहे थे और उन्नत स्वास्थ्य सेवाओं के बावजूद इस महामारी का इलाज ढूंढने में विफल रहे थे तब हमारे माननीय प्रधान मंत्री जी की दूरदर्शी सोच ने उन सभी देशों के सामने आत्मविश्वास के साथ खड़े रहकर यह दर्शाया कि विश्व की दूसरी सबसे बड़ी जनसंख्या वाला देश होने के बावजूद भी यहां सबसे कम मृत्यु दर रही । आज हमने स्वदेशी वैक्सीन इज़ाद की है और वंचित देशों को वैक्सीन तय समय पर मुहैया भी करा रहे हैं ।
वसुधैव कुटुम्बकम, अहं ब्राह्मास्मि,सर्वे भवन्तु सुखिनः ।सर्वे सन्तु निरामयाः ।सर्वे भद्राणि पश्यन्तु । मा कश्चित् दुःख भाग्भवेत्॥ समग्र विश्ववासी स्वस्थ रहें,शांति से रहें, केवल भारत में ही नहीं बल्कि समग्र विश्व में इस नीति और इन विचारों को लेकर आगे बढ़ने का काम हमारे माननीय प्रधान मंत्री जी ने किया है ।
पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी ने अंत्योदय की संकल्पना के साथ गांव के गरीब, किसान एवं समाज के पिछड़े, वंचित और शोषित वर्गों को विकास के पथ पर लाने का आदर्श हमारे सामने रखा । इसी को हमारे यशस्वी प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने नए एवं आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करने का अथक प्रयास किया और जनकल्याणकारी योजनाओं को पूरे देश में समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाया । आत्मनिर्भर भारत की संकल्पना पर जोर देते हुए माननीय प्रधानमंत्री जी ने पूर्वोत्तर क्षेत्र विशेषकर असम को प्रमुखता देकर विकास की गति पर जोर दिया है ।
महोदय,मैं असमी में बोलना चाहता हूं 18.00hrs *Our Honourable Prime Minister, Shri Narendra Modiji is taking the entire India towards the direction of development and now the people of Assam and the entire North-East are also not left behind. Honourable Prime Minister has termed the North-East as Astha Lakshmi. An effort has been made to bring the North East along with Assam to the mainstream. The honourable Prime Minister has brought Assam to the mainstream of development whether it is in terms of rail or road connectivity or air connectivity or in other field.
Honourable Chairman Sir, I was listening to Shri Adhir Ranjan Chowdhuryji yesterday. Today I heard what honourable Dr Farooq Abdullah has said. He said that Modi government has isolated the Muslims of the country. Muslims are deprived of the benefits from various welfare schemes of the government. Let me state this loud and clear that our Honourable Prime Minister has adopted the policy of sabka saath, sabka vikash, sabka viswash and if anybody has done their politics rising above sectarian divide, it is our Prime Minister Modiji’s government. With this sabka saath policy, our government is trying to take everyone along.
I come from Assam. In all Muslim majority areas of our state, from Ujjwala to all other centrally sponsored schemes if any section of the society has benefitted the most, it is the Muslims of the country. In some areas, Muslims received hundred percent benefits. Dr Farooq Abdullah and his ilk have become helpless today and they are left with no munitions in their armoury. They had kept Jammu & Kashmir away from the mainstream of development and created a situation against the unity and integrity of India.
Adhir Ranjanji made a statement yesterday asking us why we do not hear what Jawaharlal Nehru had said and why we do not pronounce his name. The then Prime Minister Nehruji, in 1962 made a statement when Chinese attacked India saying “My heart goes to the people of North-East.” * ‘My heart goes out to the people of North-East.’ पूर्वांचल के लोगों को सुर दिया था, हाथ ऊपर खड़ा कर दिया था कि हम नार्थ ईस्ट को बसा नहीं सकते । नार्थ ईस्ट को चाइना ने ले लिया है । ऐसी सोच रखने वाले उस …* का नाम हम इस पवित्र सदन में क्यों लेंगे?मैं पूरे भारतवर्ष की तरफ से माननीय प्रधान मंत्री जी को तहेदिल से फिर से बधाई देना चाहता हूं । आज पूरे नार्थ ईस्ट को अष्टलक्ष्मी का नाम देते हुए पूरे नार्थ ईस्ट में बहुत ज्यादा डेवलपमेंट का काम किया है । आज एक एम्स गुवाहाटी को मिला है । 60 सालों में कांग्रेस के जमाने से असम में सिर्फ एक मेडिकल कॉलेज खुला था । आज पूरे असम में 12 मेडिकल कॉलेज सात महीने में बीजेपी के नेतृत्व में सर्बानन्द सोणोवाल व हेमन्त विश्व शर्मा की नेतृत्व वाली सरकार में नए मेडिकल कालेज खोले गए । पहले यहां से 700 डॉक्टर बनकर निकलते थे, अब 1500 डॉक्टर बनाने का काम हमारी सरकार ने असम में शुरू किया है । आज जोगीघोपा में लॉजिस्टिक और इंटरनेशनल हब बनाने का काम किया है । असम में, जो दो ब्रिज ब्रह्मपुत्र के ऊपर, वर्ष 2012-13 में सिर्फ खम्बे दिखाई देते थे, हमारे सम्माननीय प्रधान मंत्री जी के नेतृत्व में ढोलासाधिया और बोगीबील दोनों ब्रिज का निर्माण करके पूरे नार्थ-ईस्ट के विकास में योगदान दिया है । हमारी सरकार ने धारा 370 और 35(ए) हटाकर देश की एकता और अखंडता के लिए काम किया । डॉ.श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने जो सपना देखा था,भारत की जनता ने जो सपना देखा था कि भारत में ‘दो विधान, दो प्रधान, दो निशान’ नहीं चलेगा । इसे हटाना हमारे सामने सपना था । उस सपने को साकार करने का काम अगर किसी सरकार ने या प्रधान मंत्री ने किया है, तो वह हमारे यशस्वी प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने किया है । आज लेह, लद्दाख के लोग खुश हैं । सदन के अंदर विपक्ष के लोग दुखी हैं, लेकिन जम्मू-कश्मीर के अंदर लोग सुखी हैं । ये लोग यहां रोते हैं, लेकिन वहां के लोग सुखी हैं । सीएए कानून को सदन ने पारित किया है । 7 और 8 नवम्बर को उस कानून के मुताबिक जो पाकिस्तान में हो, बांग्लादेश में हो, अफगानिस्तान में हो, वहां की जो माइनॉरिटीज रिलीजियस कम्युनिटीज हैं, वहां उनका जो हैरेस्मेंट होता है, उनके ऊपर जो शारीरिक-मानसिक आक्रमण होता है, उसकी वजह से वे लोग वहां नहीं रह पाते हैं । भारत में उनके पूर्वज रहे हैं,भारत उनकी जन्मभूमि है इसलिए यदि वे भारत में नहीं आएंगे, तो वे कहां जाएंगे?भारत का यह धर्म है कि उन्हें शरण दे । अपना धर्म निभाते हुए हमने सीएए कानून इस सदन में पारित किया । असम के श्रीमंत शंकर देव जी ने जो कहा था “Consider everyone as a pure soul and bow down to him.” श्रीमंत शंकर देव जी ने उस समय कहा था । पंडित दीन दयाल उपाध्याय जी ने भी एकात्मक मानव दर्शन में इस बारे में बोला है, अंत्योदय के बारे में कहा है । आज अंत्योदय एकात्मक दर्शन का जो विषय है,वह महापुरुष श्रीमंत शंकर देव जी ने आज से साढ़े पांच सौ साल पहले भी वही विषय बताया उनकी आत्मा एक ही है । उनकी आत्मा राम ही है ।
लेकिन पिछले 15 सालों में जब असम में कांग्रेस पार्टी का शासन था, वहां पर जो प्राणी बोल भी नहीं सकता है,वह वन-हॉर्न्ड राइनो है । वन-हॉर्न्ड राइनो का वध करने का पाप भी कांग्रेस ने किया है । लेकिन हमारी सरकार आने के बाद हम लोगों ने वन-हॉर्न्ड राइनो के पोचिंग से लेकर उसकी हत्या को बंद कर दिया है । मैं माननीय प्रधान मंत्री जी का शुक्रगुज़ार हूं । आज पूरे नॉर्थ-ईस्ट के डेवलेपमेंट के लिए, उसके इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए असम को 15वें फाइनेंस कमीशन ने 1.69 लाख करोड़ रुपये का फाइनेंशियल एलोकेशन किया है । पिछली सरकार में 14वें फाइनेंस कमीशन ने केवल 94 हजार करोड़ रुपये ही उपलब्ध कराए थे । लेकिन हमारी सरकार ने करीब उससे दोगुना धन असम को उपलब्ध कराया है ।
18.06 hrs (Shrimati Rama Devi in the Chair ) सभापति महोदया,मैं आज माननीय प्रधान मंत्री जी को धन्यवाद देना चाहता हूं । माननीय प्रधान मंत्री जी दो दिन पहले असम गए थे । उन्होंने असम जाकर एक बड़ा ऐलान किया है । असम में असमिया भाषा में एक मेडिकल कॉलेज और एक इंजीनियरिंग कॉलेज खोला जाएगा । माननीय प्रधान मंत्री जी ने ऐसा एक बड़ा ऐलान किया है । असमिया भाषा,असमिया संस्कृति की अगर कोई रक्षा कर सकता है, तो वह भारतीय जनता पार्टी की सरकार ही कर सकती है । असम में वंचित-शोषित वर्ग में से एक वर्ग चाय बागान के लोग हैं । कांग्रेस पार्टी के जमाने में चाय बागान के लोगों को केवल वोट बैंक के हिसाब से देखा जाता था । आज वही चाय बागान के एरिया के लिए माननीय प्रधान मंत्री जी और माननीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण जी ने एक हजार करोड़ रुपये असम और बंगाल के चाय बागानों के लोगों के लिए उपलब्ध कराए हैं । यह हमारी आइडियोलॉजी है, यह हमारा विचार है । समाज के सबसे अंतिम छोर के व्यक्ति को सामने लाकर और उसकी जीवनधारा को उन्नत करने का जो हमारा लक्ष्य है, जो हमारा संकल्प है, उस संकल्प को आगे ले जाने का काम माननीय प्रधान मंत्री जी के नेतृत्व में हो रहा है ।
सभापति महोदया,आप असम के बारे में जानती हैं । जब नॉर्थ-ईस्ट का नाम आता था, तो वहां पर केवल अशांति,केवल टेरेरिज़्म,केवल इंसर्जेन्सी की बात आती थी । आज आप असम, नॉर्थ-ईस्ट में जाइए, वहां आज केवल शांति है । पहले बंदूक के साए में सुबह होती थी, लेकिन आज असम में चिड़िया की सुंदर चहचहाहट से सुबह होनी शुरू हो गई है । अगर इसका श्रेय किसी को देना है, तो वह माननीय प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी को ही देना है । आज से लगभग एक साल पहले 27 दिसंबर, 2020 को हमने एक बोडो शांति समझौता किया था । जो बीटीआर पीस एकॉर्ड और पीस एग्रीमेंट हुआ था, आज उस बीटीआर/बीटीसी में बोडोलैंड भूमि में पिछले 30-40 सालों से करीब 60 हजार लोगों की मृत्यु हो गई है । आज वही बोडो भूमि में शांति कायम करने के लिए हमने बीटीआर पीस एग्रीमेंट साइन किया है । हमने ब्रू समझौते पर साइन किया है । एनएससीएन के साथ बातचीत चल रही है । मैं इस सदन के माध्यम से उल्फा से भी निवेदन करता हूं कि वह भी बातचीत के लिए आएं और बातचीत में भाग लें । असम में स्थायी शांति और स्थायी विकास की प्रक्रिया को हम तेजी से आगे बढ़ा सकें, मैं इसके लिए सभी लोगों से निवेदन करता हूं । महोदया,डॉक्टर भूपेन हजारिका (भारत रत्न) जी ने एक गीत में कहा था कि – “Our Assam is beauty epitomized, with unending virtues in its lap. It is the land of rising sun in the East of India.” सूरज जहां उगता है, असम (पूर्वांचल),उस देश-राज्य को कांग्रेस ने 50 सालों में बेहाल करके रख दिया था । लेकिन आज माननीय प्रधान मंत्री जी के नेतृत्व में पूरे उत्तर-पूर्वांचल,पूरे भारत के जो उन्नत राज्य हैं, हम उन राज्यों में शामिल हो पा रहे हैं ।
सभापति महोदया, आप सभी लोग जानते हैं कि असम में रेल की ब्रॉडगेज लाइन थी । वहां पहले एक ही रेल लाइन मीटरगेज होती थी । एनडीए की सरकार के आने के बाद असम में मीटरगेज को ब्रॉडगेज में कंवर्ज़न करने का काम माननीय नरेन्द्र मोदी जी की सरकार ने किया है । असम में इलेक्ट्रिक से ट्रेन नहीं चलती थी । माननीय प्रधान मंत्री जी के नेतृत्व में आज असम में इलेक्ट्रिफिकेशन द्वारा रेल चलाने का काम हो रहा है ।
सभापति महोदया, हमारा संकल्प और हमारी आइडियोलॉज़ी है,अंत्योदय । उस अंत्योदय को हासिल करने के लिए हमने आज समाज के अंतिम वर्ग तक जाने का प्रयास किया है । ‘उज्ज्वला योजना’ से लेकर ‘आत्मनिर्भर भारत’ की जो संकल्पना है,आज आप देखिए कि भारत के गांवों में रहने वाले गरीब किसान लोगों का अगर कोई मसीहा है, तो वह हमारे माननीय प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी हैं ।
पहले असम में अगर गाँव के लोगों को अन्दर रास्ता बनाना हो या अपना छोटा ब्रिज बनाना हो तो मंत्री,विधायक या सरकार के पास जाना पड़ता था । आज वह स्थिति खत्म हो गई है । आज अगर अपना रास्ता बनाना है या ब्रिज बनाना है तो ग्राम पंचायत के मुखिया के द्वारा काम शुरू किया गया है । …(व्यवधान)
माननीय सभापति : प्लीज कनक्लूड कीजिए ।
श्री दिलीप शइकीया : यहकाम भी माननीयप्रधान मंत्रीजी ने ही कियाहै । इसलिए मोदीहै तो मुमकिनहै । मोदी जीहै तो पूर्वांचलहै । जवाहर लालनेहरू जी नेऐसा सुर दियाथा, “My heart goes out to the people of North-East India.” आज हमने उन भावनाओं को उससे ऊपर उठाया है । आज नार्थ ईस्ट के लोगों को विश्वास दिलाने का काम किया गया है । नार्थ ईस्ट भारत का अभिन्न अंग है । भारत का अभिन्न अंग अरुणाचल प्रदेश है । अरुणाचल प्रदेश के लोग बहुत देशप्रेमी हैं । जम्मू कश्मीर के फारूख अब्दुल्ला जी जो वहाँ के मुखिया थे, वे एक बार अरुणाचल प्रदेश में जाकर के देखें कि वहाँ के लोग पूरे भारत का गुणगान करते हैं, क्योंकि यह भारत की संस्कृति है । भारत की गरिमा है । …(व्यवधान) मैं कहना चाहता हूँ कि कांग्रेस वाले और बाकी सभी,माननीय प्रधान मंत्री जी के ऐलान का साथ दें । एक मजबूत भारत और एक नया भारत बनाने का जो संकल्प है,उसको आगे बढ़ाएं ।
सभापति महोदया, धन्यवाद । भारत माता की जय । वंदे मातरम ।
*श्रीमती शारदा अनिल पटेल (महेसाणा): मैंभारत के महामहिमराष्ट्रपति जीको हमारी हौसलाअफजाई के लिएधन्यवाद करतीहूं । आपका अभिभाषणअभूतपूर्व रहाहै, जो इसमहामारी के संकटके दौरान सरकारीगतिविधियों औरउन पर सकारात्मकअंतर्दृष्टिऔर उनके प्रभावपूर्णक्रियान्वयनपर केन्द्रितथा । हमारा देशसरकार द्वारादी गई गाइडलाइनका पालन करइस वायरस केफैलाव को रोकपाने में सक्षमहुआ । भारत केमाननीय प्रधानमंत्रीकी दूरदर्शीपहल आत्मनिर्भरभारत को पूरेदेश के लोगोंका सहयोग मिलाऔर जनमानस नेस्वदेशी सामानोंको अपनाया ।साथ ही राज्यकी सरकारों नेभी इस पहल कीसफलता में महत्वपूर्णभूमिका निभाई ।
मैंगुजरात से आतीहूँ, जहाँमई में केन्द्रसरकार के इकोनॉमिकपैकेज से प्रेरितहोकर राज्य केमाननीय मुख्यमंत्रीजी ने समाजके उन कमजोरवर्गों का सहयोगकिया जो महामारीके समय बेरोजगारहो गए । इन्हेंसरकार की तरफसे एक लाख रुपएका ऋण दो परसेंटके ब्याज दरपर दिए गए ।गुजरात की नईऔद्योगिक नीतियाँकेन्द्र सरकारके निर्देशानुसार ‘वोकलफॉर लोकल’ अवधारणासे प्रेरित हैं, जोएमएसएमई और नएउद्योगों केविकास और कल्याणपर आधारित है ।
गुजरातविश्व के सबसेबड़े स्टैच्यू, एशियाईशेर द्वारकाधीशऔर पहली हेरिटेजसिटी का घर है । पर्यटन प्रदेशके आर्थिक विकासमें महत्वपूर्णभूमिका अदा करताहै । इसके दृष्टिगतलॉकडाउन मेंप्रभावित हुएउद्योगों कोपुनर्जीवित करनेके लिए मुख्यमंत्रीजी ने इस महीनेनई पर्यटन नीतिकी घोषणा कीहै, जो किअगले 5 सालतक लागू रहेगीऔर यह नीतिआत्मनिर्भर भारतअभियान पर चलेगी । हम प्रधानमंत्रीजी को हमारेकेवड़ियाँ शहरको भारत केआठ महत्वपूर्णशहरों से जोड़नेके लिए धन्यवाददेते हैं । लॉकडाउनके समय माननीयप्रधानमंत्रीजी ने आवाह्नकिया कि हमेंइस आपदा औरचुनौती को अवसरमें बदलना चाहिएऔर इसी वक्तव्यको सभी मंत्रियोंऔर सरकारों नेदृढ़तापूर्वकफॉलो किया ।इस दौरान भारतीयरेलवे ने 200 पेंडिंगप्रोजेक्ट्सको पूरा किया । यह अत्यंतहर्ष का विषयहै कि शिक्षामंत्रालय औरखेल मंत्रालयके सहयोग से13868 सीबीएसईसे मान्यता प्राप्तविद्ययालय फिटनेसकार्यक्रम मेंभाग ले पाएं । में स्वास्थ्यऔर कपड़ा मंत्रालयकी भारत कोपीपीई किट औरएन 95 मास्कके उत्पादन मेंआत्मनिर्भर बनानेके लिए सराहनाकरती हूँ ।
जैसाकि माननीय राष्ट्रपतिसाहब ने बतायाकि हमारे सरकारने विश्व कासबसे बड़ा टीकाकरणअभियान चालूकर दिया है, इसकेलिए माननीय प्रधानमंत्रीसाहब, स्वास्थ्यमंत्री जी औरसभी वैज्ञानिकोंकी मेहनत औरकाबिलियत कीप्रशंसा करतीहूँ और एक जनप्रतिनिधिहोने के नातेआभार व्यक्तकरती हूँ । हालही में ब्राजीलके राष्ट्रपतिने भारत कोमुफ्त वैक्सीनउपलब्ध करानेके लिए धन्यवाददिया है । इसकेसाथ ही अन्यदेशों जैसे कीमालदीव, बांग्लादेश, नेपालने भी मुफ्तवैक्सीन उपलब्धकराने के लिएप्रधानमंत्रीजी के प्रतिआभार जताया है । यह भारत केविश्व गुरु बननेका सूचक है, जिसमेंहमारे वसुधैवकुटुम्बकम केविचार को सार्थकतामिलती है । मैंकेन्द्रीय गृहमंत्रालय औरमाननीय प्रधानमंत्रीजी के प्रयासोंपर गर्व करतीहूँ कि जिनकेद्वारा कश्मीरघाटी में शांतिऔर समरसता काभाव पैदा हुआहै । हाल हीमें कश्मीर केडीजीपी ने यहसम्बोधन दियाहै कि कश्मीरमें आतंकवादीगतिविधियां कमहुई हैं औरनागरिक पहलेसे अधिक सुरक्षितहैं । इसके अलावाआतंकवाद के प्रतिस्वयं सहायताकी नीति दर्शातेहुए लगभग 225 आतंकवादियोंको भी सफल ऑपरेशनमें मार गिराया । जम्मू-कश्मीरऔर लद्दाख केविकास ने गतिपकड़ ली है ।वर्ष 2020 मेंप्रधानमंत्रीजी ने विश्वकी सबसे बड़ीस्वास्थ्य योजनाआयुष्मान भारतका उद्घाटन किया था । वहीं जम्मू-कश्मीरमें सम्पन्नस्थानीय चुनावमें जनता नेबढ़-चढ़करहिस्सा लियाऔर लोकतंत्रविरोधी लोगोंको किनारे करदिया ।
गत्वर्ष नई-नईचुनौतियों औरविविधताओं सेभरा रहा था । हमारे पड़ोसीदेश के द्वाराविभिन्न नाटकीयघटनाक्रम हमारीसीमा पर किएजा रहे थे जिसकाजवाब हमारी सेनाने बहादुरी केसाथ दिया है । इस दौरान माननीयप्रधानमंत्रीजी और रक्षामंत्रीका सीमाओं केदौरे की प्रशंसाकरती हूं जोभारत की कार्यपद्धति को दर्शाताहै । भारत एकशांतिप्रिय देशहै, लेकिनशांति को बनाएरखने के लिएउग्र रूप भीधारण कर सकताहै । हमारी सरकारस्वतंत्रता सेनानियोंको भी उचितआदर और सम्मानदेती है, जिसकापिछली सरकारमें अभाव रहाहै ।
अगरकिसी के पासमजबूत रानीतिकइच्छाशक्ति हैऔर देश के विकासके लिए दृढ़इच्छाशक्ति है, तोउस नेता औरपार्टी को सामाजिक, आर्थिकऔर राजनीतिकक्षेत्रों मेंउन्नत होने सेकोई नहीं रोकसकता ।
मैंप्रधानमंत्रीमोदी जी औरमंत्रिमंडल केसभी मंत्रियोंऔर समस्त एनडीएके साथियों कोधन्यवाद देनाचाहती हूँ जोबिना थके, बिनारुके वर्ष 2020 केचुनौतीपूर्णवर्ष का सहीरूप से मुकाबलाकर पाई । लोगोंकी सुरक्षा औरआर्थिक स्थिरताबनाने में सफलहुई ।
अंतमें एक बारपुन: महामहिमराष्ट्रपति जीको अभूतपूर्वअभिभाषण के लिएमैं आभार व्यक्तकरती हूँ ।
*SHRIMATI PRENEET KAUR (PATIALA): Hon. Chairperson Madam, I rise to speak on the Motion of Thanks to the President’s Address to both Houses of Parliament. Due to paucity of time, I will restrict my speech to only one subject: agriculture and farmers.
I am pained to note that this BJP Government has tried to create an anti-farmer feeling in the entire country. Farmers are protesting to get their just and genuine demands accepted. The farmers of Punjab ushered in the Green Revolution. I still remember those days in the 1970s. All farmers of Punjab had been given a fistful of Mexican wheat seeds so that they could grow it in Punjab. At first, the seeds were sown in Punjab and the yield was good. Later on, it was sown in the Terai region hills. It was the start of the Green Revolution. It led to creation of buffer stock of food grains and gave rise to PDS system and it could satisfy the hunger of the poor and the needy. So, the farmers of Punjab and Haryana achieved this feat by dint of their sweat and blood.
I am agonised to note that the protesting farmers are being maligned and dubbed terrorists and Khalistanis. In today’s Tribune newspaper, I read that a marginal farmer from Mansa district, Virsa Singh participated in the protests on the Tikri border of Delhi. His brother Gurtej Singh was in the Indian Army who laid down his life defending the borders of the country at Galwan valley against Chinese aggressors. If such families are dubbed terrorists, separatists or Naxals, it is shameful. His relatives and he himself released a statement in the media that they do not need a separate state and that they were fighting for their just and genuine demands. They also said that they condemn the sad incidents that took place at Red Fort.
Why does the Government seem very afraid? They are using barbed wires, cement barricades, nails, etc. against the protesting farmers at the Delhi borders. We are not at war with the farmers. The farmer only wants to save his land and his means of livelihood.
Today, why are old men, women, and children thronging the sites of the protests? It is only to safeguard their land and their means of livelihood. Any Government must keep the future of its people and its children safe. The three black laws are sending a very bad message to the protesters at the Delhi borders. Their future is not safe and secure. This is a wrong message.
Madam Chairperson, the Preamble to our Constitution begins with, ‘We, the people.’ The National Pledge of the country is still, ‘All Indians are my brothers and sisters.’ Are the farmers sitting in the harsh winter at the Delhi borders not our brothers and sisters?
What is happening? The farmers provide food grains to us. How are we treating them? Punjab is not alone in this protest. It is being said that this agitation is Punjab-centric. Punjab initiated the agitation. And gave a clarion call to all countrymen. The voice of protesting farmers spread to foreign countries too. They supported the interests of farmers. But it was dubbed foreign interference. Where was the BJP Government at the time when the Chinese soldiers transgressed into Indian territory in Ladakh? Why did the Government remain silent? Was it not foreign interference?
The need of the hour is that the Government leave aside its haughtiness and obstinacy. It must accept the just and genuine demands of protesting farmers. The three black agriculture laws must be taken back.
Madam Chairperson, this Government is a real threat to the democracy of this nation and not our annadaatas.
Jai Jawan, Jai Kissan.
… (Interruptions)
श्री अधीर रंजन चौधरी : मैडम, पार्लियामेंटरीअफेयर्स मिनिस्टरको बुलाया जाए, मुझेएक जरूरी बातरखनी है ।
माननीय सभापति : ठीकहै, आप बैठजाइए । उनकोबुला लेते हैं ।
SHRI S. JAGATHRAKSHAKAN (ARAKKONAM): Hon. Chairperson, Sir, I would like to start my speech by quoting the lines from Thirukkural written by our universal poet, Thiruvalluvar.
“Seithakka alla seyakedum seithakka Seyyamai thaanum kedum.” “Doing what is not met and proper, and not doing what is to be met and proper, are both deeds that will ensure disaster and destruction.” I would like to begin by honouring our medical fraternity and the frontline workers for fighting this greatest struggle in the history of mankind. I extend my special thanks to the scientists, doctors, nurses and other paramedical staff members for injecting hope and self-belief among masses.
I was eager to hear our hon. President’s speech. But to my disappointment, it failed to reflect the mood of the nation. In this context, I would like to point out a couplet that was offered by our great woman of wisdom, Avvaiyar, centuries before when the world was pristine by itself.
“Aatankaraiyin maramum arasariya Veetiruntha vaazhvum vizhum antey – aettam Uzhuthundu vaazhvatharku oppillai kandeer Pazhuthundu veror panikku” “A tree standing at the bank of a river will fall by the force of wind. The rulers will fall when the tide turns. But the farmers who feed us from the land will never fall.” In India, farming is not a job but it is a way of life.
The only sector that performed well during COVID-19 was agriculture. This sector employed more than 20 crore people. More than two crore small and medium industries play a major role in driving the Indian economy. Around 60 per cent of the population of our country is involved in agriculture.
The Organisation for Economic Cooperation and Development (OECD) finds that in rich countries producer support ranges between 40 per cent and 60 per cent of the gross farming receipt but in India it is actually negative, that is, minus 5 per cent. While Minimum Support Price (MSP) is fixed for 22 crops, it is used only for a few crops. According to the Government’s own data, almost 70 per cent of the market transactions for 10 select crops in 600 wholesale markets were at prices lower than MSP. The Global Hunger Index (GHI) ranked India at 94th position among 108 countries in the year 2020. About 14 per cent of population is not getting enough food in India. So, achieving zero hunger in the year 2030 is far from reality.
The Economic Survey in 2017-18 warned that climate change might reduce the annual agriculture income in the range of 15 per cent to 18 per cent. When many farmers are ending their God given life, the Government of India has no concrete plan to stop these sad incidents. The hon. President has also failed to highlight this in his Speech.
According to the National Crime Records Bureau (NCRB) data, of 10,281 farmers who had committed suicide in 2019, 5957 were farmers and 4324 were agricultural labourers. About 60 farmers have died while protesting against the new agricultural laws over a month ago.
Here, I would like to quote, “We can never be satisfied as long as our farmers are stripped of their selfhood and robbed of their dignity.” Again, I need to bank on Thiruvalluvar to quote the famous lines:
“Allarpattu aataathu azhuthakanneerentae Selvathai theikkum padai.” That means, tears shed by the people due to misgovernance of the ruler will erode the nation’s wealth.
Madam Chairperson, the Medium and Small-Scale Entrepreneurs (MSME) with close to 63.4 million units contribute to 33.4 per cent of India’s manufacturing output and provide employment to around 120 million people. Indian MSMEs produce more than 6000 products for local and global consumption with an expected contribution of more than 50 per cent to the GDP. In the President’s Speech, it has been mentioned that several steps have been taken to develop small-scale industries under MSME. But it is shocking to note that nearly 43 per cent of the small-scale industries were closed during COVID-19 pandemic and majority of the remaining small-scale industries are at the verge of closure.
There is no data available in respect of the number of MSMEs closed down during the Financial Years 2014-15 to 2019-20. I humbly request the Government that all the sick industries should be revived by providing adequate support. They need immediate financial support and subsidies, waiver of bank interests, rescheduling of their loan repayments and extended technical and marketing support.
The Government came up with a big promise of providing pensions to farmers, agriculture labourers, labourers of unorganized sectors and small traders. But it is sad to note from the hon. President’s Speech that only 60 lakh beneficiaries have been covered under the pension scheme. This Government has failed to keep up its promises done during the Budget Speech. Why cannot the Government introduce a special scheme for old farmers?
The migrant labourer is the soul of any developing country. It is quite heart breaking to have witnessed the death of these people during COVID-19 pandemic. As we all know, 216 migrant workers lost their lives due to starvation and financial distress, 77 died due to lack of medical care, 219 died in road accidents, 96 deaths occurred in Shramik trains, 133 labourers committed suicide, 49 people died in quarantine centres and 192 migrant labourers died on account of other reasons.
In the run up to parliamentary elections in 2019, the Prime Minister promised that an AIIMS hospital would be established in Madurai district. The cost of the project has risen from Rs.1200 crore to Rs.2000 crore. The other States that were allotted AIIMS during the same period have even started admissions for students. At that time, it was hoped that the AIIMS hospital in Madurai will be a 300-bed hospital and will very soon start the admission process. But till now no building has come up and only the foundation stone lies there as a sad reminder.
When the world economy was rattled by the deadly virus, only public sector undertakings played a major role in stabilising the economy and provided the much-needed comfort to the Government. The role of the PSUs after Independence in holding the economy cannot be described in words, but now the future of many PSUs remains very doubtful under this Government.
Now, I would like to discuss the rise in petrol price. Its fair price is Rs. 30 per litre, but people have been forced to pay extra Rs. 60 in the name of indirect taxes. With people already fighting the post-lockdown effects, the Government is adding extra burden on the common man with rise in the petrol price.
Another very important point is that I urge the Government of India to take necessary steps to release all the convicts who have served more than 20 years, for Rajivji’s assassination, as per the order of the Supreme Court. Every saint has a past and every sinner has a future. So, I urge the Government to take necessary steps in this regard.
Finally, I would like to end my speech quoting the lines from Kambaramayana.
Ravana Rajyathai Paartha Hanuman Sonnaan:
Indha Arasil Kaatru Puhum Kadhiravan Oli Puhum Ondru Mattum Eppodhum Ulle Poha Mudhiyadhu, Adhudhan Aram.
Vendumaanaal Kambarin Andha Paadalai Solgirean:
Karangu Kaalpuga: Kadhiravan Oli Puha: Marali Marambu Kaadhu Ini Vaanavar Puhaar Enkai Vambe Thirambu Kaalathul Yaaivaiyum Sidhaiyinum Sidhaiyaa Arampuhadhe Indha Animadhil Kidakkainindru Agathin This Government should pave the way for the current and future generations to live a life with peace and prosperity and help every individual citizen of this country to enjoy the basic essence of this beautiful life which the Constitution of India has offered.
I thank the Hon. President of India for his Address.
Thank you very much.
श्री अधीर रंजन चौधरी (बहरामपुर) : मैडम, मैंएक छोटी-सीबात कहना चाहताहूं । यह किसीके खिलाफ नहींहै । कृपया आपमेरी बात सुनिए । मैं किसी केखिलाफ नहीं बोलनाचाहता हूं ।मैं न सरकारके खिलाफ बोलनाचाहता हूं औरन ही किसी पार्टीके खिलाफ बोलनाचाहता हूं ।मैं यह कहनाचाहता हूं किसदन रात 12बजेतक चल रहा है । माननीय एमपीजयहां उपस्थितरहते हैं । वेसभी मदद करतेहैं और सदनचलता है । माननीयएमपीज के साथ-साथपार्लियामेंटका बहुत-सारास्टॉफ भी यहांमौजूद रहता है । इन सभी स्टॉफको बहुत दिक्कतहो रही है, क्योंकिरात में उनकोखाना नहीं मिलताहै । यहां महिलास्टॉफ भी बहुतहैं । उनको घरजाने के लिएमौका नहीं मिलताहै, क्योंकिरात 11 बजेके बाद मेट्रोबंद हो जातीहै । पार्लियामेंट्रीस्टाफ हमाराएक अंग होताहै । पार्लियामेंट्रीस्टाफ के लिएकम से कम खानेका इंतजाम कियाजाए । …(व्यवधान)
माननीय सभापति : मैंआपके विचार कोरखती हूं ।
…(व्यवधान)
श्री अधीर रंजन चौधरी : वे पैसा देकर खाना खाएंगे । वे पैसा खर्चकरके खाना खाएंगे । सरकार को इसविषय पर सोचनाचाहिए ।…(व्यवधान) मैं सभी का इसविषय की ओरध्यान आकर्षितकर रहा हूं । …(व्यवधान)
माननीय सभापति : अधीररंजन जी, कृपयाआप बैठ जाइए ।
…(व्यवधान)
प्रो. रीता बहुगुणा जोशी (इलाहाबाद):माननीय सभापतिजी, मैंआपका आभारी हूंकि आपने मुझेराष्ट्रपति जीके अभिभाषण केसमर्थन में बोलनेका अवसर दियाहै । कल से सदनमें चर्चा चलरही है । मैंइस बात से अचंभितहूं कि विपक्षके तरकश में कितने तीर हैं । जब हम सोचतेहैं कि वे समाप्तहो जाएंगे, तो फिर तरकश सेतीर आ जाताहै । उनके द्वाराबहुत तीर फेकेगए हैं और सभीतीर सिर्फ एकव्यक्ति श्रीनरेन्द्र मोदीजी, भारतके माननीय प्रधानमंत्री जी परफेके गए हैं । मैं इस बातसे बहुत प्रसन्नहूं कि हमारेप्रधान मंत्रीजी इन बातोंसे विचलित नहींहोते हैं । वहअडिग हैं औरअडिग हो करनिरंतर आगे बढ़रहे हैं । उनकाजो संकल्प है, उनकीजो दृष्टि है, उनकाजो लक्ष्य है, वहस्पष्ट है ।उनका लक्ष्यहै - गरीबोंकी उन्नति, किसानोंके भविष्य कोबेहतर बनाना, युवाओंको रोजगार देना, महिलाओंकासशक्तीकरण करना, हरगरीब को उसकाहक दिलाना ।यहां मुझे वेपंक्तियां यादआ रही हैं, जोमैं उनके लिएकहना चाहती हूं :
“जो धनहै गरीबों कीकिस्मत का, वहउनको दिलाकरमानेंगे, हर मेहनतकशको राहत का, हकदारबना कर मानेंगे ।” कोईकितना भी तरकशसे तीर चलाले, हमारेप्रधान मंत्रीजी हिलने वालेनहीं हैं । राष्ट्रपतिमहोदय का यहअभिभाषण वास्तवमें नरेन्द्रमोदी सरकार कादस्तावेज है । यह उनकी सरकारकी नीतियों, उपलब्धियों, चुनौतियोंऔर लक्ष्योंका दस्तावेजहै ।
नेता, विपक्ष श्री अधीर रंजन चौधरी जी ने कहा कि “Dissent is the essence of democracy”. I do agree with you. I totally agree with you. पर यह कौन-सी परम्परा है कि माननीय राष्ट्रपति जी के अभिभाषण का आप बहिष्कार करते हैं? यह कौन-सी परम्परा है कि आपको इस सरकार में एक भी अच्छा लक्षण नजर नहीं आता? मुझे बड़े दुख से कहना पड़ता है कि मैंने बहुत-से अभिभाषण पढ़े हैं, सुने हैं,लेकिन विपक्ष की ओर से, जैसे लगता है कि आप एक भाव के सिंड्रोम में फंस गए हैं और आप उस विचार के सिंड्रोम से बाहर निकलना ही नहीं चाहते हैं । मैं यही कहूंगी कि आप वहीं फंसे रहिए, चुनाव की राजनीति करते रहिए, लेकिन हम प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में देश के निर्माण में लगे रहेंगे ।
मुझे इस बात का भी बहुत अफसोस है, श्री मनीष तिवारी जी कल बोल रहे थे, मैं उनका बहुत सम्मान करती हूँ, विपक्ष में बड़े विद्वान लोग हैं, पर उन्होंने कहा कि विश्व में कोविड से 10 करोड़ लोग पीड़ित हुए, संक्रमित हुए । उनमें से एक करोड़ लोग भारत के थे । लेकिन सरकार ने क्या किया?फिर वे बोले कि हमारे यहाँ मृत्यु दर बहुत कम थी । हमें भगवान ने बचा लिया । अच्छा भाई! अगर संक्रमण हो तो सरकार ने कर दिया और बचा लिया तो भगवान ने बचाया । हाँ,भगवान तो सर्वोपरि हैं, परन्तु हम कैसे बचे, यह मैं आपको बताना चाहती हूँ । हम बचे, प्रधानमंत्री जी की दूरदर्शिता से हम बचे क्योंकि हमारे स्वास्थ्य मंत्री ने परिश्रम किया, हम बचे क्योंकि हमारे फ्रंटलाइन वॉरियर्स और वैज्ञानिकों ने भरसक प्रयत्न किया, मेहनत की, हम बचे क्योंकि पूरा राष्ट्र एक होकर खड़ा हो गया था, इसलिए हम बचे । हम बचे क्योंकि देश को प्रधानमंत्री में अटूट विश्वास था । क्या कोई सोच सकता है कि 130 करोड़ या 132 करोड़ जो भी हमारे देश की जनसंख्या है,ये लोग प्रधानमंत्री जी के एक स्वर पर खड़े हो गए और फ्रंटलाइन वॉरियर्स के सम्मान की बात पर पूरे देश ने बत्ती गुल करके दीए जलाए,इसे पूरे देश ने स्वीकार कर लिया । क्या यह कोई छोटी बात है?पूरे देश के लोगों के हाथों में जो कुछ भी आया चाहे थाली हो या घंटी, उन्होंने बजाकर प्रधानमंत्री जी को आश्वस्त किया कि राष्ट्र आपके साथ खड़ा है ।
आज पूरी दुनिया कह रही है, मैंने एक जगह पढ़ा है, they are saying that India is the pharmacy of the world. हमारा देश फार्मेसी ऑफ द वर्ल्ड बन गया । ब्राजील के राष्ट्रपति ने ट्वीट करके कहा कि ‘पवनपुत्र हनुमान’ संजीवनी लेकर यानी वैक्सीन लेकर पूरी दुनिया में घूम रहा है । लगभग 150 देशों को हमने पीपीई किट्स, मास्क दिए । संक्रमण से बचने के लिए हमने उनको व्यवस्थाएं दीं, दवाइयाँ दीं और अब वैक्सीन दे रहे हैं । लेकिन विपक्ष के मुख से प्रशंसा में एक शब्द भी नहीं निकला । डब्ल्यूएचओ प्रशंसा कर देता है, वर्ल्ड बैंक प्रशंसा करता है, दुनिया के देश- अमेरिका,यूरोप के देश प्रशंसा कर देते हैं, लेकिन हमारे विपक्ष को यह भी नहीं समझ में आता है । आप लोग कहीं तो सही,कहीं तो उचित कहिए । देखिए,आलोचना करना आपका अधिकार है,लेकिन राष्ट्र को भ्रमित करना आपका अधिकार नहीं है । आप भ्रमित करते हैं और यह बात बहुत गलत है ।
मैं आपसे कहना चाहती हूँ कि हम लोग यूनिवर्सल हेल्थ की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं । कौन-सा राष्ट्र होगा, जहाँ 10 करोड़ लोगों को ‘आयुष्मान भारत’ के तहत स्वास्थ की सुरक्षा दी गई हो? कौन-सा ऐसा राष्ट्र होगा, जहाँ डेढ़ करोड़ लोगों ने इसका लाभ उठा लिया हो? क्या आप इसके बारे में सोच सकते हैं?मैंने तो कभी नहीं सोचा था कि जिसके तन पर कपड़ा नहीं है, वह प्राइवेट नर्सिंग होम में जाकर अपना इलाज करा सकता है । मैंने अपने संसदीय क्षेत्र में न जाने कितने लोगों को इसका लाभ दिलाया है । आप भी इसका लाभ दिला रहे हैं,लेकिन इसे स्वीकार नहीं करते हैं । आप इसे स्वीकार करिए कि यूनिवर्सल हेल्थ पॉलिसी की ओर हमारे प्रधानमंत्री जी तेजी से अग्रसर हो रहे हैं ।
मेडिकल कॉलेज की बात आई थी । हमारी एक सदस्या बहन ने यहाँ बोला है । आपको 387 मेडिकल कॉलेज बनाने में 65 वर्ष लग गए और धन्य हो मोदी जी की सरकार का, जिसने छ: साल में 175 मेडिकल कॉलेज बनाकर खड़े कर दिए और आज मेडिकल कॉलेज की संख्या 562 पर पहुंचा दी ।
हम तो उत्तर प्रदेश की बात कहना चाहते हैं, यहाँ पर उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री आदरणीय अखिलेश जी बैठे हैं । अखिलेश जी, 65 वर्षों में उत्तर प्रदेश में कुल 12 मेडिकल कॉलेज थे । आप भी मुख्यमंत्री थे,लेकिन आज चार साल के अन्दर उत्तर प्रदेश की सरकार ने 32 मेडिकल कॉलेज बनाए हैं ।
छ: से ज्यादा मेडिकल कॉलेजेज़ को सुपर स्पेशियेलिटी हॉस्पिटल्स बना दिया गया है । …(व्यवधान) हां,मैं आपको जानकारी भेज दूंगी, अखिलेश जी से मेरी बात होती रहती है, मैं इनको जानकारी भेज दूंगी, आप चिंता मत कीजिए । …(व्यवधान) अब आगे आइए । …(व्यवधान) जन-औषधि केन्द्रों में इलाज का खर्च कितना न्यूनतम,कितना कम हो गया । हार्ट-एलमेंट्स हों,किडनी हो, लीवर हो, बड़ी से बड़ी बीमारियों में, जिनमें लाखों रुपये लगते थे, हजारों में इलाज हो रहा है । …(व्यवधान)
मैं तो महिलाओं के संदर्भ में इतनी प्रसन्न हूं कि ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को एक रुपये में सैनिट्री नैपकिन मिल रहा है । कोई सोच नहीं सकता था कि इस प्रकार की व्यवस्था इस राष्ट्र में हो सकती है । …(व्यवधान) यह भी तथ्य है,जिसको हम नहीं नकार सकते । मिशन इंद्रधनुष, टीकाकरण, वही जेई बीमारी,जिसके कारण हमारे गोरखपुर और पूर्वांचल में 600 से ज्यादा मौतें हर साल हो जाती थीं, मृत्यु हो जाती थी, आज वह मृत्यु दर घटकर छ: पर आ गई है, इतना अच्छा प्रबंधन हुआ है । …(व्यवधान) यह कैसे हुआ? 112 जिलों को आकांक्षी जिले घोषित किया गया, उत्तर प्रदेश में आकांक्षी जिलों के बारे में जगदम्बिका पाल जी ने ज़िक्र किया था ।
इन आकांक्षी जिलों में चाहे स्वच्छ पेयजल हो, चाहे सफाई का अभियान हो, शौचालय हों,मेडिकल कालेज हो, बच्चों के लिए एन आईसीयूज़ हों – ये सब बनाया गया और मुझे यह कहने में बहुत गर्व होता है कि आकांक्षी जिलों को जिस तरह विकसित कर के गुरबत और बीमारी को दूर किया जा रहा है,वह भी एक महत्वपूर्ण बात है । अब एमएमआर पर आ जाइए । क्या आप टीकाकरण के लाभ देख रहे हैं?मातृ सुरक्षा योजना को देखिए । इसमें गर्भवती महिलाओं के लिए जिस तरह का प्रबंधन किया गया है, वह मुफ्त में उत्तर प्रदेश में और जगहों पर भी हो रहा होगा ।
इन लोगों का अल्ट्रासाउंड होता है । राष्ट्र स्तर पर गर्भवती महिलाओं की हर महीने नौ तारीख को नि:शुल्क जांच होती है । इसी का असर है कि भारतवर्ष में हमारा जो एमएमआर - मेटर्नल मोर्टेलिटी रेट यानी मातृ मृत्यु दर है उसमें 2016 से 2018 के बीच के आंकड़े बोल रही हूं, क्योंकि बाद के आंकड़े मुझे नहीं मिल पाए,दो सालों में मृत्यु दर 130 से घटकर 113 प्रति लाख हो गई है । आप सोच सकते हैं कि यह दो सालों की उपलब्धि है?प्रयास हो रहा है, आप कह सकते हैं कि 65 सालों में जो काई जमी थी है, उसे छ: सालों में काफी निकाला गया है । मैं कहना चाहूंगी कि हां,वह निकल रही है, तेजी से निकल रही है, हम बहुत तेजी से आगे बढ़ रहे हैं ।
किसानों के संदर्भ में लगातार चर्चा हो रही है । अभी आदरणीय परनीत जी ने भी इस बारे में चर्चा की । मैं पहले तो गुरुदेव रबीन्द्रनाथ ठाकुर जी की एक बात आपके सामने रखूंगी । मैंने उनका एक वक्तव्य, एक लेख पढ़ा था,जिसमें उन्होंने वर्ष 1907 में सब ज़मींदारों से एक अपील की थी । उन्होंने ज़मीदारों से अपील करते हुए कहा था,जिसका मन्तव्य यह है कि यदि वे गरीब किसानों को अपने चंगुल से मुक्त कर स्वतंत्र एवं सशक्त नहीं होने देंगे, तो उनके पक्ष में चाहे कितने भी कानून बना लीजिए,कितनी भी अच्छी सरकार हो, उनको आप बचा नहीं सकते ।
अब मैं विपक्ष से पूछना चाहती हूं कि आप खुद कहते थे कि किसान को उसकी उपज का दाम नहीं मिल रहा । आप अभी भी कह रहे हैं कि किसान गुरबत में है, उसकी हालत खराब है । आप अभी भी कहते हैं कि मंडियां ठीक नहीं चल रहीं हैं । आदरणीय अखिलेश जी ने कहा कि उनको दाम नहीं मिल रहा है । मैं आपसे कहना चाहती हूं और पूछना चाहती हूं कि अगर ऐसी स्थिति में ‘एक राष्ट्र,एक बाजार’ हमारे प्रधान मंत्री जी लेकर आए, तो क्या गलत किया? ऐसी परिस्थिति में अगर एपीएमसी के साथ-साथ उन्होंने एक वैकल्पिक व्यवस्था राष्ट्र को देने की कोशिश की तो क्या गलत किया?
मैं आपको स्मरण दिलाऊं कि कोविड के दौरान मैंने एक बहुत बड़ा बयान पढ़ा । वाईएसआर, आंध्र प्रदेश के मुख्य मंत्री जी ने कहा कि खुले बाजार की इस नीति के कारण हमारे प्रदेश का जो टमाटर सड़-गल जाता था, वह अब दिल्ली की गाज़ीपुर मंडी में जा रहा है और हमारे किसानों को इससे सैकड़ों-करोड़ों का लाभ हुआ है । अभी-अभी चर्चा के दौरान महाराष्ट्र से जो हमारी सांसद महोदया हैं, उन्होंने भी कहा कि खुला बाजार होने से हमारी महाराष्ट्र की सब्जियों को बहुत बेहतर दाम मिल रहे हैं ।
यह सही बात है कि खुला हुआ बाजार अच्छा है । आप किसान को एक व्यवस्था से क्यों बांध कर रखना चाहते हैं? आप किसानों को उनकी उपज मर्जी के मुताबिक जहां बेचना चाहते हैं,वहां उन्हें बेचने की अनुमति दें । आज राजनीतिक दल किसानों का आंदोलन चला रहे हैं, किसान नहीं चला रहा है और मेरे क्षेत्र में भी नहीं चला रहा है । क्या इस बात की नाराजगी है कि हम स्वामीनाथन कमीशन की रिपोर्ट को क्यों लागू कर रहे हैं? क्या इस बात की नाराजगी है कि कांट्रेक्ट सिस्टम में हमने जो सुविधाएं दी हैं, वे किसानों के पक्ष में हैं । मैं पूछना चाहती हूं कि पंजाब के कांट्रेक्ट सिस्टम में क्या प्रावधान हैं? उसमें प्रावधान है कि यदि अनुबंध का उल्लंघन हुआ तो तीन साल की सजा किसान को हो सकती है । उसमें प्रावधान है कि पांच लाख रुपये की पेनल्टी भी लग सकती है और नरेन्द्र मोदी जी की सरकार ने प्रावधान किया है कि कुछ भी हो जाए, किसान को एक पैसे की भी पेनल्टी नहीं देनी पड़ेगी । यह बात जरूर है कि करार जिस दाम पर होगा,यदि किसान उससे निकलना चाहेंगे,तो वह कभी भी निकल सकता हैं,लेकिन यदि कांट्रेक्टर चाहेगा, तो ऐसा नहीं कर सकता ।
माननीय सभापति : आपअपनी बात समाप्तकीजिए ।
प्रो. रीता बहुगुणा जोशी : महोदया, सभीमाननीय सदस्योंने काफी देरबोला है । मैंतो सिर्फ दसमिनट से हीबोल रही हूं । आप मुझे केवलपांच मिनट कासमय और दीजिए ।
महोदया, मैंमहिलाओं के संदर्भमें बोलना चाहतीहूं । मुझे खुशीहै कि महिलाओंके संदर्भ मेंयहां चर्चा हुई । मैं आपको भीधन्यवाद देनाचाहूंगी कि आजबहुत सारी महिलाओंको बोलने काअवसर मिला है । महिला सशक्तिकरणमें सरकार केकदम के बहुतसकारात्मक परिणामआए हैं । ‘बेटीबचाओ, बेटीपढ़ाओ’, ‘उज्ज्वलायोजना’, ‘आवासयोजना’, ‘स्वच्छभारत अभियान’, पोषण अभियान हमारीजो अन्य योजनाएंहैं, इनकालाभ सभी वर्गके लोगों कोमिल रहा है । मैं विपक्षसे पूछना चाहतीहूं, आदरणीयअब्दुला साहबने यह बात कहीकि भारत कीसंयुक्त संस्कृतिहै । हम भी ऐसामानते हैं औरआप केवल एकउदाहरण दे दीजिएजब विकास केमार्ग में कोईसाम्प्रदायिक, जातीय,लिंग व मासिकवर्गीय भेद कियागया हो । सभीगरीबों को योजनाओंका लाभ मिलरहा है । मासिकवजीफा साढ़े तीनकरोड़ बच्चोंको मिल रहाहै । उनमें एससी, एसटी, माइनोरिटीसभी आते हैं । मुद्रा योजनासे लोन मिलताहै और 75 प्रतिशत ऋण का लाभ महिलाओंको मिला है । उसमें भी हरवर्ग के लोगहैं । आयुष्मानभारत योजना, उज्ज्वलायोजना का लाभसभी जातियों और समुदायों केगरीब लोगों कोमिलता है । क्याउसमें हमारेसिख भाई-बहन, हमारेमुसलमान भाई-बहननहीं हैं याजैन समुदाय केलोग नहीं हैं? इसलिए ऐसी बात अनुचित हैं ।
माननीय सभापति : आपअपनी बात समाप्तकीजिए ।
प्रो. रीता बहुगुणा जोशी: महोदया, केवलएक मिनट औरदीजिए । आप कुछतथ्य सामने आनेदीजिए । दीनदयालउपाध्याय आजीविकामिशन से आपदेखिए कि महिलाओंकी आर्थिक स्थितिकैसे बदल रहीहै । स्वयं सहायतासमूह का आपआंकड़ा देख लीजिए । वर्ष 2014 मेंदेश के अंदर20 लाखसमूह थे औरदो करोड़ महिलाएंउनसे जुड़ी थीं । वर्ष 2020 मेंयदि आप देखेंतो हमारे 60 लाखसमूह हैं औरउसमें 7 करोड़50 लाखमहिलाएं जुड़ीहुई हैं । यहकोई छोटी बातनहीं है ।
माननीय सभापति : ठीकहै, यह बहुतबड़ी बात है । आप अपनी बातसमाप्त कीजिए ।
प्रो. रीता बहुगुणा जोशी : माननीयसभापति जी, आपमहिलाओं के विषयपर थोड़ा ज्यादासमय दीजिए ।उत्तर प्रदेशमें वर्ष 2014 में 3800समूहथे और आज 3 लाख 50हजारसमूह हैं औरउनमें 38 लाखमहिलाएं जुड़ीहुई हैं । मेरेअपने क्षेत्रमें कोराँवविधान सभा में, जोआदिवासी और पिछड़ाइलाका है, वहांएक भी समूहनहीं था लेकिनतीन साल में 1700 समूह वहांबन चुके हैं । तेजी से महिलाएं रोजगार से जुड रहीं हैं ।
महोदया, अंतमें एक बातकहते हुए मैंअपनी बात समाप्तकरूंगी :-
“राहे जुनून ए शौक में बढ़ने तो दे कोई मंजिल जगह-जगह न बना दूं तो बात क्या । ” यह हैं हमारे प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी ।
अध्यक्ष जी धन्यवाद । जय हिन्द ।
*SHRI TALARI RANGAIAH (ANANTAPUR): We are very thankful to the Hon. President for reminding us that the Constitution is the guiding light to fulfil the dreams of people of India.
The fight against the pandemic by the Government by providing 80 crore people with additional 5 kg free food grains per month for eight months and with a facility of ‘one nation one ration card’ which enables to avail foodgrains anywhere in the country are appreciable.
It is also noteworthy to launch a scheme called Svanidhi for street vendors and hawkers. The Garib Kalyan Rozgar Abhiyan was launched to implement in six States. The scheme should have been extended to all the States in the country for all the returnee migrant labourers.
Developing a network with 2200 laboratories, manufacturing of 1000 of ventilators, PPE kits to attain self-reliance to combat COVID-19 is really a challenge which needs to be appreciated.
Programmes like Ayushman Bharath, PMB Jana Aushadhi Yojana met the challenges in pandemic times by providing not only treatment upto rupees five lakhs to the poor people but also saved their savings to the extent of Rs. 3600 crores annually and it may be further strengthened.
In the agricultural sector, 80 per cent of farmers belong to small and marginal category with less than two acres of land. The PM SAMMAN Nidhi amount need to be enhanced from Rs. 6,000 to Rs. 10,000 as requested by the Chief Minister of Andhra Pradesh Shri Y.S. Jagan Mohan Reddy.
The three important farm laws need to give a relook to make necessary amendments as agreed by the Government for the benefit of farming community and to the agriculture sector at large.
I am thankful to the Prime Minister for sanctioning the Kisan Rail which is first in South India and second in the country which was started in Anantapur of Andhra Pradesh which is also my Parliament Constituency. The Andhra Pradesh Government requested to start three more Kisan Rails from Andhra Pradesh to meet the demand of production of horticulture.
To fulfil the dreams of Baba Saheb Ambedkar, allocations to Jal Jeevan Mission need to be enhanced as 15 crore houses are without piped water in rural areas.
Promotion of MSME is the only opportunity to create employment to skilled, semi-skilled and dropout school and college students. The Government should provide substantial benefits as incentives to encourage the young entrepreneurs.
Implementation of Suvidha scheme to produce sanitary napkins at the cost of rupee one is significant and Rashtriya Poshana Abhiyaan is a much needed programme for the benefit of pregnant women and children.
However, as mentioned in the speech of President, 15 crore houses are without piped water in rural areas. This number may be higher than this. It is also sad to note that seven states in the country water table is depleting rapidly. The hon. President informed in his Speech that Atal Bhujal Yojana scheme is in progress to meet the demand. But, it has a long way to go.
We welcome the opening of 400 Ekalavya Model Residential Schools in the country. But budgetary allocations to provide infrastructure, teaching staff and other support staff need to be taken care of. Sufficient budget allocation is the need of the programme to achieve its success.
Divyangjan facilities should be taken on priority basis. Data suggests that there are seven crore population in the country who are Divyangjans. The initiatives taken up by the Government are really appreciable.
Safety of women is becoming increasingly a challenge in the present society. The number of one stop centres and fast-track courts need to be increased. We request the Government to multiply the numbers based on the need with immediate effect.
Coming from the State of Andhra Pradesh which is affected by the bifurcation in 2014, we are consistently urging the Government to provide Special Category Status for the State to overcome the problems inherited. However, in the hon. President Speech, the sanction of the Special Category Status is missing.
Similarly, the support promised in the AP Bifurcation Act, 2014 are also not proclaimed in the Speech of the Hon. President.
We whole-heartedly thank the President for the commitment towards education, heath, creation of water resources, employment and farmers welfare.
Thank you.
*श्री अरूण कुमार सागर (शाहजहाँपुर):महामहिम राष्ट्रपति महोदय जी के अभिभाषण का मैं हृदय से समर्थन करता हूँ । राष्ट्रपति जी के अभिभाषण से यह परिलक्षित होता है कि केन्द्र सरकार “सबका साथ-सबका विकास"के अपने वायदे के अनुरूप देश को तेजी से आर्थिक विकास की नई राह पर ले जा रही है ।
मैं, महामहिम राष्ट्रपति महोदय के इस कथन का समर्थन करता हूँ कि आज हम भारतीय की यही एकजुटता, यही साधना, देश को अनेक आपदाओं से बाहर निकालकर लाई है । एक तरफ कोरोना जैसी वैश्विक महामारी, दूसरी तरफ अनेक राज्यों में बाढ़,भूकम्प, सायक्लोन, टिड्डी दल के हमले से लेकर वर्ड फ्लू तक देशवासियों ने प्रत्येक आपदा का डटकर सामना किया । इसी काल में सीमा पर भी अप्रत्याशित तनाव बढ़ा, इन प्रत्येक आपदाओं/मोर्चों पर देश एक साथ लड़ा और हर कसौटी पर खरा उतरा । इस दौरान हम सब देशवासियों के अप्रतिम साहस,संयम, अनुशासन और सेवाभाव के भी साक्षी बने हैं ।
महामहिम राष्ट्रपति महोदय का यह कथन भी स्वागत योग्य है कि हमारे ऋषितुल्य प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के केन्द्रीय नेतृत्व से लिए गये सटीक फैसलों से लाखों देशवासियों का जीवन बचा है । जिसके परिणामस्वरूप आज देश में कोरोना के नए मरीजों की संख्या भी तेजी से घट रही है और जो संक्रमण से ठीक हो चुके हैं,उनकी संख्या भी काफी अधिक है ।
महामहिम राष्ट्रपति महोदय का यह कथन कि इस दौरान भारत ने बहुत ही कम समय में 2200 से अधिक प्रयोगशालाओं का नेटवर्क बनाकर हजारों वेंटिलेटर्स का निर्माण करके,पीपीई किट से लेकर टेस्ट किट बनाने तक में आत्मनिर्भरता हासिल करके अपनी वैज्ञानिक क्षमता, अपनी तकनीकी दक्षता और अपने मजबूत स्टार्ट-अप इकोसिस्टम का भी परिचय दिया है । वस्तुतः यह हम सभी देशवासियों के लिए गर्व की बात है तथा यह और भी अधिक गर्व की बात है कि आज भारत दुनिया का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान चला रहा है । इस प्रोग्राम की दोनों वैक्सीन भारत में ही निर्मित हैं । संकट के समय में भारत ने मानवता के प्रति अपने दायित्व का निर्वहन करते हुए अनेक देशों को कोरोना वैक्सीन की लाखों खुराक उपलब्ध कराई हैं । भारत के इस कार्य की विश्व भर में हो रही प्रशंसा हमारी हजारों वर्ष पुरानी संस्कृति, सर्वे सन्तु निरामयाः की भावना के साथ जनकल्याण की हमारी प्रार्थना, हमारे प्रयासों को और ऊर्जा दे रही है । इसका पूरा श्रेय हमारे लोकप्रिय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के केन्द्रीय नेतृत्व में सरकार को ही जाता है ।
महामहिम राष्ट्रपति महोदय का यह कथन केन्द्र सरकार की उपलब्धियों को दर्शाता है कि महामारी के कारण शहरों से वापस आये प्रवासियों को उनके ही गांवों में काम देने के लिये केन्द्र सरकार ने छह राज्यों में “गरीब कल्याण रोजगार अभियान' भी चलाया तथा इस अभियान की वजह से लगभग 50 करोड़ Man-days के बराबर रोजगार का सृजन हुआ और सरकार ने रेहड़ी-पटरी वालों और ठेला लगाने वाले भाइयों-बहनों के लिए विशेष “स्वनिधि योजना" भी शुरू की एवं इसके साथ ही करीब 31हजार करोड़ रूपये गरीब महिलाओं के जनधन खातों में सीधे हस्तांतरित भी किये और इस दौरान देशभर में "उज्ज्वला योजना” की लाभार्थी गरीब महिलाओं को 14करोड़ से अधिक मुफ्त गैस सिलेण्डर भी मिले ।
यह प्रसन्नता की बात है कि आज कृषि के लिए उपलब्ध सिंचाई के साधनों में भी व्यापक सुधार आ रहा है । ‘पर ड्रॉप-मोर क्रॉप' के मन्त्र पर चलते हुए सरकार पुरानी सिंचाई परियोजनाओं को पूरा करने के साथ ही सिचाईं के आधुनिक तरीके भी किसानों तक पहुंचा रही है । वर्ष 2013--14 में जहाँ 42 लाख हेक्टेयर जमान हा माइक्रो इरिगेशन की सुविधा थी. वहीं आज 58 लाख हेक्टेयर से ज्यादा अतिरिक्त जमीन को माइक्रो-इरिगेशन से जोड़ा जा चुका है तथा आज देश में खाद्यान्न उपलब्धता रिकॉर्ड स्तर पर है । वर्ष 2008-09में जहां देश में 234 मिलियन टन खाद्यान्न की पैदावार हुयी थी वहीं वर्ष 2019-20 में देश की पैदावार बढ़कर 296 मिलियन टन तक पहुंच गयी है । इसी अवधि में सब्जी और फलों का उत्पादन भी215 मिलियन टन से बढ़कर अब 320 मिलियन टन तक पहुँच गया है ।
महामहिम राष्ट्रपति महोदय का यह कथन कि “प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के माध्यम से 8 महीने तक 80 करोड लोगों को 5 किलो प्रतिमाह अतिरिक्त अनाज निःशुल्क सुनिश्चित किया गया । सरकार ने प्रवासी श्रमिका, कामगारों अपने घर से दूर रहने वाले लोगों की भी चिन्ता की । “वन नेशन-वन राशन कार्ड" की सुविधा देने के साथ ही सरकार ने उन्हें निःशुल्क अनाज मुहैया कराया और उनके लिए श्रमिक स्पेशन ट्रेनें चलवाईं, जो कि एक स्वागत योग्य कदम था ।
महामहिम राष्ट्रपति महोदय के अभिभाषण में यह उल्लेख है कि व्यापक विमर्श के बाद संसद ने सात महीने पूर्व तीन महत्वपूर्ण कृषि सुधार, कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण) विधेयक, कृषि(सशक्तीकरण और संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा करार विधेयक और आवश्यक वस्तु संशोधन विधेयक पारित किये हैं । इन कृषि सुधारों का सबसे बड़ा लाभ भी 10 करोड़ से अधिक छोटे किसानों को तुरन्त मिलना शुरू हुआ । छोटे किसानों को होने वाले इन लाभों को समझते हुए ही अनेक राजनीतिक दलों ने समय-समय पर इन सुधारों को अपना भरपूर समर्थन दिया । देश में अलग-अलग फोरम पर,देश के हर क्षेत्र में दो दशकों से जिन सुधारों की चर्चा चल रही थी और जो मांग हो रही थी, वह सदन में चर्चा के दौरान भी परिलक्षित हुई ।
महामहिम राष्ट्रपति महोदय का यह कथन कि बाबा साहेब अम्बेडकर संविधान के मुख्य शिल्पी होने के साथ-साथ हमारे देश में वॉटर पॉलिसी को दिशा दिखाने वाले भी थे, दिनांक 08 नवम्बर1945 को कटक में एक कॉन्फ्रेन्स के दौरान उन्होंने कहा था कि – Water is Wealth. Water being the wealth of the people and its distribution being uncertain, the correct approach is not to complain against nature but to conserve water. बाबा साहेब की प्रेरणा को साथ लेकर केन्द्र सरकार जल जीवन मिशन की महत्वाकांक्षी योजना पर काम कर रही है और इसके तहत हर घर जल पहुंचाने के साथ ही जल संरक्षण पर भी तेज गति से काम किया जा रहा है एवं इस अभियान के तहत अब तक 03 करोड़ परिवारों को पाइप वॉटर सप्लाई से जोड़ा जा चुका है और इस अभियान में अनुसूचित जातियों व जनजातियों के भाई-बहनों तथा वंचित वर्गों के अन्य लोगों को प्राथमिकता के आधार पर पानी का कनेक्शन दिया जा रहा है, जो कि परम आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की देश के दबे-कुचले अनुसूचित जाति एवं जनजाति समुदाय के उत्थान और कल्याण को दर्शाता है ।
माननीय अध्यक्ष महोदय, देश में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार हेतु मेडिकल शिक्षा के महत्व को पहचानते हुये बीते 06 वर्षों में स्नातक एवं परास्नातक शिक्षा में 50000 से ज्यादा सीटों की वृद्धि एवं 22 नये एम्स को मंजूरी मिली एवं सबसे महत्वपूर्ण दशकों पुराने मेडिकल कौंसिल ऑफ इण्डिया जिसपर हजारों मेडिकल माफियाओं का राज था, का कायाकल्प करके नेशनल मेडिकल कमीशन की स्थापना का महामहिम के अभिभाषण में अंकन के लिए मैं उनका आभारी हूँ । आशा ही नहीं वरन पूर्ण विश्वास है कि इन सतत प्रयासों से देश की मेडिकल शिक्षा में आमूलचूल परिवर्तन आएगा ।
माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं एक कषि प्रधान संसदीय क्षेत्र से इस संसद का सदस्य हूँ, जिस प्रकार इस ससद ने तीन महत्वपूर्ण कषि विकास सम्बन्धी विधेयक एवं आवश्यक वस्तु संशोधन विधेयक पारित किये, मेरे क्षेत्र के किसानों के जीवन में यह सुधार अभूतपूर्व परिवर्तन लाएंगे । मैं महामहिम का दिल से शुक्रगुजार हूँ कि उन्होंने सरकार द्वारा किसानों को अन्नदाता से ऊर्जादाता बनाने के सतत् प्रयासों की सराहाना की ।
महामहिम राष्ट्रपति महोदय का यह कथन कि आत्मनिर्भर भारत में महिला उद्यमियों की विशेष भूमिका है तथा सरकार ने महिलाओं को स्वरोजगार के नये अवसर देने के लिये कई कदम उठाये हैं और “मुद्रा योजना के तहत अब तक 25 करोड से ज्यादा ऋण दिये जा चुके हैं । जिसमें से लगभग 70 प्रतिशत ऋण महिला उद्यमियों को मिला है, यह मा० प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के केन्द्रीय नेतृत्व में देश की महिलाओं को स्वावलम्बी बनाये जाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है । 12. महामहिम राष्ट्रपति महोदय का यह कथन भी स्वागत योग्य है कि संसद के दोनों सदनों में श्रमेव जयते की भावना पर चलते हुए श्रमिकों के जीवन में बदलाव लाने वाला निर्णय लिया है । 29 केन्द्रीय श्रम कानूनों को कम करके 4 लेबर कोड बनाये गये हैं और इन श्रम सुधारों में राज्यों ने भी अगुवाई की है तथा इन सुधारों से श्रम कल्याण का दायरा बढ़ेगा, श्रमिकों को निश्चित समय पर मजदूरी मिल पायेगी और रोजगार के ज्यादा अवसर तैयार होंगे और नये लेबर कोड हमारी महिला श्रमिकों की अधिक और सम्मानजनक भागीदारी भी सुनिश्चित करते हैं ।
महामहिम राष्ट्रपति महोदय का यह कथन भी स्वागत योग्य है कि केन्द्र सरकार की विकास नीति को जम्मू कश्मीर के लोगों ने भरपूर समर्थन दिया है और कुछ सप्ताह पहले ही आजादी के बाद पहली बार जम्मू-कश्मीर में जिला परिषद के चुनाव सफलता के साथ सम्पन्न हुये हैं । बड़ी संख्या में मतदाताओं की भागीदारी ने दर्शाया है कि जम्मू-कश्मीर नये लोकतांत्रिक भविष्य की तरफ तेजी से आगे बढ़ रहा है तथा प्रदेश के लोगों को नये अधिकार मिलने से उनका सशक्तीकरण हुआ है । आयुष्मान भारत-सेहत योजना लागू होने के बाद जम्मू-कश्मीर के हर परिवार को 5 लाख रूपये तक के मुफ्त इलाज का लाभ मिलना तय हुआ है और जम्मू में सेन्ट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल की एक बेंच भी स्थापित की गई है तथा केन्द्र शासित प्रदेश बनने के बाद कुछ महीने पहले लद्दाख स्वायत्त पर्वतीय विकास परिषद के चुनाव की प्रक्रिया भी सफलतापूर्वक सम्पन्न हुई है और अब लद्दाख के लोग स्वयं अपने प्रदेश के विकास से जुड़े निर्णय और तेजी से ले रहे हैं ।
महामहिम राष्ट्रपति महोदय का यह कथन भी स्वागत योग्य है कि केन्द्र सरकार देश में शहरीकरण के विकास को एक अवसर के रूप में देखती है, इसलिए शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर पर व्यापक निवेश किया जा रहा है और शहरों में गरीबों के लिए स्वीकृत एक करोड़ से अधिक घरों में से करीब 40 लाख का निर्माण पूरा हो चुका है तथा कुछ दिन पहले देश के 6 शहरों में आधुनिक टैक्नोलॉजी आधारित घर बनाने का काम भी शुरू किया गया है और शहरों में काम करने वाले श्रमिकों को बेहतर आवास मिल सके इसके लिये उचित किराये वाली योजना भी शुरू की गई है ।
महामहिम राष्ट्रपति महोदय का यह कथन स्वागत योग्य है कि शिक्षा के साथ-साथ नौकरी की प्रक्रियाएं आसान करने और व्यवस्थित करने पर भी केन्द्र सरकार का जोर है और ग्रुप सी और ग्रुप डी में इंटरव्यू समाप्त करने से युवाओं को बहुत लाभ हुआ है तथा सरकार ने नेशनल रिक्रूटमेंट एजेंसी का गठन करके नौजवानों को नियुक्ति के लिए कई अलग-अलग परिक्षाएं देने की परेशानी से मुक्त किया है ।
महामहिम राष्ट्रपति महोदय ने अपने अभिभाषण में इस प्रकार से जहाँ विगत वर्षों के दौरान सरकार द्वारा देश के सर्वांगीण विकास हेतु किये गये कार्यों को उद्धरित किया है, वहीं सरकार के दूसरे कार्यकाल में कोविड जैसी वैश्विक महामारी से देश को किस प्रकार से संकट से उबारा जा रहा है, केन्द्रीय प्राथमिकताओं और इस दौरान उठाये गये महत्वपूर्ण कदमों का भी उल्लेख किया गया है, जिसमें हमारी लोकप्रिय सरकार की आत्म छवि का एक अंदाजा स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है ।
माननीय अध्यक्ष महोदय, अंततः मैं आभारी हूँ महामहिम का जिन्होंने केन्द्र सरकार के उन प्रयासों की सराहना की जिन्हें पिछली सरकार में असंभव के करीब माना जा रहा था, चाहे वो आर्टिकल 370 द्वारा जम्मू-कश्मीर के लोगों को नये अधिकारों का मिलना हो या नागरिकता संशोधन कानून का पारित होना हो या उच्चतम न्यायालय के फैसले के सम्मान में भगवान श्री राम मन्दिर का निर्माण हो याEase of doing Business in India की रैंकिंग से अभूतपूर्व उछाल हो ।
मैं पुनः महामहिम राष्ट्रपति महोदय जी के अभिभाषण का हृदय से समर्थन करता हूँ ।
*श्री अशोक कुमार रावत (मिश्रिख): महामहिम राष्ट्रपति महोदय जी के अभिभाषण का मैं हृदय से समर्थन करता हूं । राष्ट्रपति जी के अभिभाषण से यह परिलक्षित होता है कि केन्द्र सरकार "सबका साथ – सबका विकास” के अपने वायदे के अनुरूप देश को तेजी से आर्थिक विकास की नई राह पर ले जा रही है ।
महामहिम राष्ट्रपति महोदय का यह कथन कि देश के प्रत्येक नागरिक के अधिकारों की रक्षा करने के लिए,हमारा संविधान देश के नागरिकों को उनके कर्तव्यों के प्रति जागरूक करता है । इसके अलावा, हमारा संविधान एक उम्मीद भी रखता है कि लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के माध्यम से लिए गए निर्णय देशवासियों द्वारा स्वीकार किए जाएंगे । साथ ही, हमारा संविधान यह अपेक्षा करता है कि संसद और इस सदन में उपस्थित प्रत्येक सदस्य देशवासियों की आशाओं और आकांक्षाओं को पूरा करें और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए आवश्यक कानून बनाएं, स्वागत योग्य है ।
महामहिम राष्ट्रपति महोदय ने अपने अभिभाषण में कहा है कि भारत के लिए यह दशक बेहद महत्वपूर्ण है । इस दशक में,हम अपनी स्वतंत्रता के 75वर्ष पूरे करेंगे । उनका यह उल्लेख करना कि इस दशक में, हम सभी को एक नई भारत बनाने के लिए प्रेरणा देने के लिए नई ऊर्जा के साथ काम करना होगा, प्रशंसनीय है तथा इसमें कोई संदेह नहीं है कि इस दशक को भारत का दशक और इस सदी को भारत की सदी बनाने के लिए पिछले पांच वर्षों में एक मजबूत नींव रखी गई है ।
महामहिम राष्ट्रपति जी ने पिछले 7 महीनों में,संसद ने अपने व्यवसाय के संचालन में नए मानक स्थापित किए हैं और इस लोक सभा के पहले सत्र के दौरान प्रदर्शन ने पिछले सात दशकों में एक नया रिकॉर्ड बनाया है, इसका उल्लेख कर के लोक सभा अध्यक्ष महोदय के लोक सभा में कार्य संचालन की प्रतिष्ठा बढ़ाई है ।
महामहिम राष्ट्रपति जी का यह कहना कि चाहे वह पूज्य बापू का ग्राम स्वराज का सपना हो, सामाजिक न्याय के बाबासाहेब अम्बेडकर का सिद्धांत, नेहरू जी का आधुनिक भारत बनाने का सपना,सरदार पटेल का एक भारत के लिए संकल्प भारत श्रेष्ठ - दीन दयाल उपाध्याय का अंत्योदय का लक्ष्य, लोहिया जी का सामाजिक दृष्टिकोण । समानता, हम भारत के लोग मिलकर इन सपनों को साकार करेंगे, प्रशंसनीय है ।
महामहिम राष्ट्रपति महोदय ने अभिभाषण में जिक किया है कि सरकार की मजबूत प्रतिबद्धता के कारण, ट्रिपल तालाक के खिलाफ कानून मुस्लिम महिलाओं को न्याय सुनिश्चित करने और उनके अधिकारों की रक्षा करने के लिए;उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम नागरिकों को नए अधिकार प्रदान करता है;गरीबों की बचत की रक्षा के लिए अनियमित जमा योजना अधिनियम को प्रतिबंधित करना;चिट फंड्स संशोधन । धोखाधड़ी से चिट फंड योजनाओं से गरीबों की रक्षा; बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों के लिए सजा बढ़ाने वाला कानून; सड़क दुर्घटनाओं को कम करने के उद्देश्य से मोटर वाहन संशोधन अधिनियम; और ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के अधिकारों की रक्षा करने वाले कई महत्वपूर्ण कानून बनाए हैं, माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की सरकार द्वारा विगत वर्षों में किए गए ऐतिहासिक एवं महत्वपूर्ण कार्यों को प्रदर्शित करता है ।
महामहिम राष्ट्रपति जी का यह उल्लेख कि हमारे लोकतांत्रिक संस्थानों में हमारे देश के लोगों द्वारा दिया गया विश्वास हमारे लोकतंत्र की नींव को मजबूत करता है, स्वागत योग्य है । राम जन्मभूमि पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद देशवासियों द्वारा प्रदर्शित परिपक्वता भी प्रशंसनीय है ।
हम सभी राष्ट्रपति महोदय के इस कथन का पूरजोर समर्थन करते हैं कि लोकतंत्र में, लोगों द्वारा दिए गए जनादेश से ज्यादा पवित्र कुछ भी नहीं है । नए भारत के निर्माण के लिए देश की जनता ने सरकार को यह जनादेश दिया है ।
• एक नया भारत, जो हमारी प्राचीन संस्कृति की महिमा का गर्व करता है और जो अपने ज्ञान की शक्ति से 21 वीं सदी के विश्व को समृद्ध करता है ।
• एक नया भारत, जिसमें पुरानी समस्याओं के समाधान खोजने के अलावा, विकास के नए अध्याय लिखे गए हैं ।
• एक नया भारत, जिसमें गरीबों, दलितों, महिलाओं, युवाओं, आदिवासियों और अल्पसंख्यकों के लिए पर्याप्त सुविधाएं और विकास के नए अवसर उपलब्ध हों ।
• एक नया भारत, जहां हर क्षेत्र विकसित होता है,कोई भी क्षेत्र पीछे नहीं रहता है, जहां आधुनिक तकनीक के लाभ समाज के सबसे दूर के छोर तक पहुंचते हैं, और • एक नया भारत, जो चौथी औद्योगिक क्रांति में सबसे आगे है और जो वैश्विक स्तर पर नई ऊंचाइयों को प्राप्त करता है ।
महामहिम राष्ट्रपति महोदय ने अपने अभिभाषण में उल्लेख किया है कि गरीब और मध्यम वर्ग देश में आधुनिक 21 वीं सदी के बुनियादी ढांचे की आशा और आकांक्षा रखते हैं । लोगों की इस आकांक्षा को पूरा करने के लिए अगले पांच वर्षों में 100 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया जाएगा । कनेक्टिविटी पर विशेष जोर देने के साथ, सरकार नए राजमार्गों, नए जलमार्गों, नए वायुमार्गों और नई योजनाओं के निर्माण पर ध्यान केंद्रित कर के निर्माण के वेज़ -तथा ग्रामीण सड़कें देश के बुनियादी ढांचे में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं । प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के माध्यम से ग्रामीण सड़कों को अब देश के हर कोने तक विस्तारित किया गया है । कार्यक्रम का तीसरा चरण ग्रामीण सड़कों को मजबूत करने और उन्हें स्कूलों, अस्पतालों और कृषि बाजारों से जोड़ने के लिए शुरू किया गया है । इस कार्यक्रम के तहत 1लाख25 हजार किलोमीटर सड़कों का निर्माण और उन्नयन किया जाएगा, प्रशंसनीय है ।
महामहिम राष्ट्रपति जी का यह उल्लेख कि सरकार 'सबका साथ,सबका विकास, सबका विकास' के मंत्र का अनुसरण कर रही है,और पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ काम कर रही है । 8 करोड़ गरीबों को मुफ्त गैस कनेक्शन, 2 करोड़ गरीबों को मकान,लगभग38 करोड़ गरीबों को बैंक खाते, 5 लाख से 50 करोड़ लोगों को मुफ्त इलाज की सुविधा, 24 करोड़ लोगों को बीमा कवर और 2.5 करोड़ से अधिक को मुफ्त बिजली कनेक्शन लोगों को प्रदान किया गया है; पूरी पारदर्शिता के साथ और बिना किसी भेदभाव के । मेरी सरकार ने गरीब लोगों के लिए अपनी योजनाओं के लाभों और सुविधाओं तक समान पहुंच प्रदान की है; सभी धर्मों और सभी क्षेत्रों में,और इस प्रकार, देश के लोगों का विश्वास अर्जित किया, केन्द्र सरकार के उत्कृष्ट किया-कलापों को प्रदर्शित करता है ।
महामहिम राष्ट्रपति महोदय ने अपने अभिभाषण में उद्धरित किया है कि आज, सात दशकों के बाद, पूरा देश इस बात से खुश है कि डॉ0 श्यामा प्रसाद मुखर्जी सहित करोड़ों स्वतंत्रता सेनानियों का सपना सच हो गया है और जम्मूलोग के लद्दाख और कश्मीर, उस क्षेत्र के दलितों और महिलाओं को भी मिल गया है । संसद के सदनों की दो तिहाई बहुमत से संविधान की धारा 370और अनुच्छेद 35A का हनन न केवल ऐतिहासिक है, बल्कि इससे जम्मू-काश्मीर एवं लद्दाख का विकास प्रशस्त हो गया है और ये क्षेत्र अब पूर्ण रूप से राष्ट्र की मुख्य धारा से जुड़ गए हैं ।
महामहिम राष्ट्रपति महोदय ने अपने अभिभाषण में उल्लेख किया है कि जम्मू विकास से तेजी का लद्दाख और कश्मीर-, उनकी संस्कृति और परंपराओं का संरक्षण, पारदर्शी और ईमानदार प्रशासन और लोकतांत्रिक सशक्तीकरण की प्राथमिकताओं में से हैं । राष्ट्रपति शासन के दौरान और केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद से,जम्मू गति को परियोजनाओं विकास सभी में लद्दाख और कश्मीर - है मिली,प्रशंसनीय है ।
महामहिम राष्ट्रपति जी ने अपने अभिभाषण में उद्धरित किया है कि आज भी,देश के ग्रामीण क्षेत्रों में बिना पाइप के पानी की आपूर्ति के लगभग 15करोड़ घर हैं । घर में पानी की आपूर्ति की कमी के कारण हमारी बहन और बेटियों को सबसे अधिक कठिनाई का सामना करना पड़ता है । इसके अलावा, दूषित पानी पूरे परिवार के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है । देश के प्रत्येक ग्रामीण परिवार को पर्याप्त मात्रा में पीने के पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए, मेरी सरकार ने जल जीवन मिशन शुरू किया है । केंद्र सरकार, सभी राज्य सरकारें, स्थानीय निकाय और स्वयंसेवी संगठन मिलकर इस मिशन को लोगों के आंदोलन में बदलने के लिए काम कर रहे हैं । आने वाले दिनों में इस योजना पर 3लाख60 हजार करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे । श्रद्धेय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में केन्द्रीय सरकार की भविष्य की कार्य दक्षता को दर्शाता है ।
महामहिम राष्ट्रपति महोदय ने अपने अभिभाषण में उद्धरित किया है कि वर्ष 2018 के अंत की ओर,जम्मू की कश्मीर-4,400 से अधिक पंचायतों में चुनाव शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुए । आजादी के बाद पहली बार 300 से अधिक ब्लॉक डेवलपमेंट काउंसिल के चुनाव भी हए हैं । वहां के लोगों को अब स्वच्छ भारत अभियान, उज्ज्वला योजना, आयुष्मान योजना, उजाला योजना, डीबीटी और खाद्य सब्सिडी के तहत पारदर्शी तरीके से पूरा लाभ मिल रहा है । प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत,जबकि जम्मू मार्च में कश्मीर -2018 तक लगभग 3,500घर बनाए गए थे, उसके बाद दो साल से भी कम समय में, 24,000 से अधिक घरों का निर्माण पूरा हो चुका है । इसके अलावा, कनेक्टिविटी, सिंचाई, अस्पतालों, पर्यटन से संबंधित योजनाओं और आईआईटी, आईआईएम, एम्स जैसे उच्च शिक्षा संस्थानों की स्थापना से संबंधित कार्य भी जम्मू और कश्मीर में हो रहे हैं । आगे से गति तीव्र में लद्दाख जम्म खरीद सीधी की सेब में कश्मीर - के लिए NAFED को जिम्मेदारी दी गई है । इससे कश्मीर घाटी के सेब उत्पादकों को विशेष रूप से लाभ हुआ है । इसका पूरा श्रेय हमारे श्रद्धेय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की सरकार को जाता है,जिनके अथक प्रयासों से यह संभव हो सका है ।
महामहिम राष्ट्रपति महोदय ने उद्धरित किया है कि हमारा देश हमारे किसानों का ऋणी है, जो हमारे अन्नदाता हैं, जिनकी मेहनत के कारण हम खाद्यान्न में आत्मनिर्भर हैं । देश के निस्वार्थ भाव से और ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए काम करने वाले किसानों के जीवन में बदलाव लाना,सरकार की प्राथमिकताएं हैं । सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए आने वाले वर्षों में 25लाख करोड़ रुपये की राशि खर्च करने जा रही है । सरकार किसानों की आय को दोगुना करने के उद्देश्य से आय केंद्रित प्रणाली विकसित करने की रणनीति पर काम कर रही है तथा प्रधान मंत्री किसान सम्मान निधि के तहत, 8 करोड़ से अधिक किसान परिवारों के बैंक खातों में 43हजार करोड़ रुपये से अधिक जमा किए गए हैं । इसी महीने 2 जनवरी को,मेरी सरकार ने 6 करोड़ किसानों के बैंक खातों में एक साथ 12 हजार करोड़ रुपये ट्रांसफर करके एक रिकॉर्ड बनाया है,प्रशंसनीय है ।
महामहिम राष्ट्रपति महोदय का यह कथन सत्य है कि सरकार किसानों के लिए समर्पण के साथ काम कर रही है, कीमतें जो इनपुट लागत का डेढ़ गुना है । खरीफ और रबी फसलों के लिए एमएसपी में स्थिर वृद्धि इस दिशा में एक कदम है । सरकार के प्रयासों के कारण दलहन और तिलहन की खरीद में 20गुना से अधिक की वृद्धि हुई है ।
महामहिम राष्ट्रपति महोदय ने अपने भाषण में उल्लेख किया है कि विश्व बैंक की ईज ऑफ डूइंग बिजनेस रैंकिंग में, भारत ने 63वें स्थान पर छलांग लगाई है, जो 79 स्थानों पर है । रिज़ॉल्विंग इन्सॉल्वेंसी रैंकिंग में, भारत 108वें स्थान से 2 वें स्थान पर और ग्लोबल इनोवेशन रैंकिंग में 74 वें से 52 वें स्थान पर आ गया है । लॉजिस्टिक्स परफॉर्मेंस इंडेक्स में भारत ने अपनी अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग में 10 अंकों की बढ़ोतरी की है । विश्व आर्थिक मंच की यात्रा और पर्यटन प्रतिस्पर्धात्मक रैंकिंग में भारत 52वें से 34वें स्थान पर आ गया है । इसके लिए मैं श्रद्धेय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की कोटि-कोटि प्रशंसा करता हूं,जिनके केन्द्रीय नेतृत्व में देश को यह उपलब्धि प्राप्त हुई है ।
महामहिम राष्ट्रपति जी का अभिभाषण में यह उद्धरित करना कि कई वर्षों से, देश के लोगों की इच्छा थी कि वे आसानी से करतारपुर साहिब में अपने सम्मान का भुगतान करने में सक्षम हों । सरकार ने करतारपुर साहिब कॉरिडोर को रिकॉर्ड समय में बनाया है, और इसे गुरु नानक देव जी की 550वीं जयंती के अवसर पर राष्ट्र को समर्पित किया है । यह सरकार के लिए एक सौभाग्य की बात है कि मुझे देश और विदेश के भीतर, गुरु नानक देव जी की 550वीं जयंती को पूरी श्रद्धा के साथ मनाने का अवसर मिला । श्री गुरु तेग बहादुर जी की 400 वीं जयंती भी सरकार द्वारा पूरी भव्यता और भक्ति के साथ धूमधाम से मनाई जाएगी, प्रशंसनीय है ।
महामहिम राष्ट्रपति जी का अभिभाषण में यह उद्धरित करना कि देश की राजधानी दिल्ली में रहने वाले 40 लाख से अधिक लोग इस उम्मीद में कई सालों से रह रहे थे कि एक दिन उन्हें अपने घरों के मालिकाना हक मिलेंगे और वे एक गरिमापूर्ण जीवन जी पाएंगे । सरकार ने दिल्ली की 1,700 से अधिक कॉलोनियों में रहने वाले लोगों की इस बहु प्रतीक्षित अपेक्षा को पूरा किया है तथा देश के किसानों, खेतिहर मजदूरों, असंगठित क्षेत्र के मजदूरों और छोटे व्यापारियों को पेंशन योजना की उम्मीदें थीं जो उनके बुढ़ापे में उनके लिए मददगार होंगी । सरकार ने न केवल उनकी इच्छा को पूरा किया है,बल्कि इन पेंशन योजनाओं के तहत अब तक लगभग 60लाख लाभार्थियों को कवर किया है,प्रशंसनीय है ।
महामहिम राष्ट्रपति महोदय ने अपने अभिभाषण में उल्लेख किया है कि 112जिलों के अनुसार आकांक्षात्मक जिलों की स्थिति के अनुसार, सरकार वहां रहने वाले गरीबों के विकास से संबंधित प्रत्येक योजना पर विशेष ध्यान दे रही है । राज्य सरकारों ने इन जिलों में अनुभवी और युवा अधिकारियों का सही मिश्रण भी रखा है । परिणामस्वरूप, इन जिलों में कई विकास संकेतकों में प्रभावशाली सुधार हुआ है और कई जिले अब अपने राज्य के औसत के करीब आ गए हैं, प्रशंसनीय है ।
महामहिम राष्ट्रपति महोदय ने अपने अभिभाषण में उद्धरित किया है कि दिल्ली से उत्तर पूर्व की भौतिक दूरी से अधिक, यह भावनात्मक असंतोष था जिसने क्षेत्र के लोगों को निराश किया । सरकार ने पिछले पांच वर्षों के दौरान अथक परिश्रम करके इस स्थिति को बदल दिया है । कनेक्टिविटी बढ़ाने, बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और लोगों के जीवन को आसान बनाने के लिए उत्तर पूर्व में अभूतपूर्व गति से काम किया जा रहा है । सरकार के इन प्रयासों के परिणामस्वरूप, 2022 तक, सिक्किम, मिजोरम, मणिपुर और नागालैंड की राजधानियों को रेल नेटवर्क से जोड़ा जाएगा । अगरतला आगे से गति तेज भी काम पर लिंक रेल अखौराहै । रहा बढ़ वर्ष 2022 में, अरुणाचल प्रदेश में 'होलोंगी' में बनाए जा रहे नए हवाई अड्डे का निर्माण भी पूरा हो जाएगा और गुवाहाटी में AIIMSका निर्माण, नुमालीगढ़ में बायो से गति तेज भी विश्वविद्यालय खेल में मणिपुर और रिफाइनरीहैं रहे कर प्रगति तथा सरकार ने नॉर्थ ईस्ट गैस ग्रिड परियोजना के लिए लगभग 9,000 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं । यह परियोजना उत्तर पूर्व के सभी 8 राज्यों में गैस आधारित अर्थव्यवस्था की नींव रखेगी, स्वागत योग्य है ।
यह हमारे लिए प्रसन्नता की बात है कि केंद्र और असम सरकारों ने हाल ही में 5 दशक पुराने बोडो विवाद को समाप्त करने के लिए बोडो संगठनों के साथ एक ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं । इस समझौते के साथ, एक जटिल समस्या, जिसने 4000 से अधिक जीवन का दावा किया है, का समाधान किया गया है । इस समझौते के बाद, सरकार बोडो समुदाय के विकास के लिए 1500करोड़ रुपये खर्च करेगी । इसी तरह,त्रिपुरा, मिजोरम, केंद्र सरकार और ब्रू समुदाय के बीच एक और ऐतिहासिक समझौते ने न केवल एक दशक पुरानी समस्या को हल किया है, बल्कि ब्रू समुदाय से जुड़े हजारों लोगों के लिए एक सुरक्षित जीवन सुनिश्चित किया है, इसका उल्लेख भी महामहिम राष्ट्रपति महोदय ने किया है ।
महामहिम राष्ट्रपति महोदय ने अपने अभिभाषण में उद्धरित किया है कि सरकार देश के आदिवासी समुदाय के भाइयों और बहनों को विकास की मुख्य धारा में लाने के लिए प्रतिबद्ध है । पहली बार, सरकार ने वनोपज के लिए एमएसपी का लाभ बढ़ाया है । सरकार का विशेष जोर आदिवासियों के स्वास्थ्य, शिक्षा और कौशल विकास पर है । कुछ सप्ताह पहले ही सरकार ने देश में 400 से अधिक एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय खोलने का कार्यक्रम शुरू किया है । हाल ही में, लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में अनुसूचित जातियों और जनजातियों के लिए आरक्षण अगले दस वर्षों के लिए बढ़ा दिया गया है, प्रशंसनीय है ।
महामहिम राष्ट्रपति महोदय का यह उद्धरित करना कि सरकार अल्पसंख्यक समुदाय की सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक प्रगति के लिए भी लगातार प्रयासरत है । हुनर हाट के माध्यम से, अल्पसंख्यक समुदाय से संबंधित 2 लाख 65 हजार कुशल कारीगरों को रोजगार के अवसर प्रदान किए गए हैं । मुस्लिम छात्रों को बड़ी संख्या में छात्रवृत्ति दी गई है ताकि वे बिना किसी रुकावट के अपनी शिक्षा जारी रख सकें तथा सरकार के विशेष अनुरोध पर,सऊदी अरब द्वारा हज कोटा में अभूतपूर्व वृद्धि की गई, जिसके परिणामस्वरूप इस बार रिकॉर्ड 2 लाख भारतीय मुसलमानों ने हज किया । भारत पहला देश है जहाँ हज यात्रा की पूरी प्रक्रिया को डिजिटल और ऑनलाइन किया गया है । सरकार देश भर में वक्फ संपत्तियों का 100प्रतिशत डिजिटलीकरण भी कर रही है ताकि इन संपत्तियों का मस्लिम समुदाय के कल्याण के लिए उपयोग किया जा सके,प्रशंसनीय है ।
महामहिम राष्ट्रपति महोदय ने अपने अभिभाषण में उल्लेख किया है कि सरकार दिव्यांगजनों की आशाओं और आकांक्षाओं को पूरा करने की दिशा में अत्यंत संवेदनशीलता के साथ काम कर रही है । आरक्षण और कानूनी सशक्तिकरण में वृद्धि के साथ, 1000 से अधिक सरकारी भवनों और 700 से अधिक रेलवे स्टेशनों को दिव्यांगजन के लिए सुलभ बनाया गया है । पिछले 5 वर्षों में,शिविर आयोजित करके दिव्यांगजनों को 900करोड़ रुपये के सहायक उपकरण और सहायक उपकरण वितरित किए गए । सरकार दिव्यांगजन का राष्ट्रीय डाटाबेस बना रही है और 25 लाख से अधिक दिव्यांगजनों को ईपत्र पहचान विशिष्ट- जारी किए गए हैं, प्रशंसनीय है ।
महामहिम राष्ट्रपति महोदय का अपने अभिभाषण में यह उद्धरित करना कि भारत ने हमेशा सभी धर्मों के लिए समान सम्मान के सिद्धांत में विश्वास किया है । हालांकि, विभाजन के समय, भारत और उसके लोगों का यह विश्वास सबसे गंभीर हमले के तहत आया था । विभाजन के बाद के माहौल में,राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने कहा था: "पाकिस्तान के हिंदू और सिख,जो वहां रहना नहीं चाहते, वे भारत आ सकते हैं । यह भारत सरकार का कर्तव्य है । उनके लिए एक सामान्य जीवन सुनिश्चित करें । ” कई राष्ट्रीय नेताओं और राजनीतिक दलों ने समय समयकिया । प्रचारित भी आगे इसे और किया समर्थन का रविचा इस के बापू पूज्य पर का इच्छा इस की पिता संस्थापक के राष्ट्र हमारे सम्मान करना हमारी जिम्मेदारी है । संसद के दोनों सदनों ने नागरिकता संशोधन अधिनियम को लागू करके इस इच्छा को पूरा किया है । ऐसे समय में जब देश गांधी जी की 150वीं जयंती मना रहा है,आप सभी ने इस भावना को सर्वोपरि माना है तथा हम सभी समय के साथ पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों पर अत्याचार में वृद्धि के गवाह रहे हैं और हम सभी ने देखा है कि हाल ही में ननकाना साहिब में क्या हुआ । पाकिस्तान में हो रहे अत्याचारों को वैश्विक समुदाय के संज्ञान में लाना हम सभी की जिम्मेदारी है,उचित है ।
महामहिम राष्ट्रपति महोदय यह कथन सही है कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों पर जो जघन्य अत्याचार हो रहे हैं, उन्हें विश्व समुदाय के संज्ञान में लाकर जरूरी कदम उठाए जाने चाहिए ।
महामहिम राष्ट्रपति महोदय ने अपने अभिभाषण में उल्लेख किया है कि जो प्रक्रियाएं दुनिया के सभी धर्मों के लोगों के लिए मौजूद हैं जो भारत में विश्वास करते हैं और जो भारतीय नागरिकता प्राप्त करना चाहते हैं, अपरिवर्तित रहते हैं । किसी भी विश्वास का व्यक्ति इन प्रक्रियाओं का पालन कर सकता है और भारत का नागरिक बन सकता है । सरकार ने यह निश्चित करने के लिए कई प्रावधान किए हैं कि जो लोग भारत में शरण लेने के लिए बाध्य किए गए हैं,उन्हें नागरिकता प्रदान करने से किसी भी क्षेत्र, विशेष रूप से उत्तर पूर्व पर कोई प्रतिकूल सांस्कृतिक प्रभाव नहीं पड़ता है, बिलकुल सही है ।
महामहिम राष्ट्रपति महोदय ने अपने अभिभाषण में उद्धरित किया है कि किसी व्यक्ति के स्वास्थ्य का परिवार और देश दोनों के विकास पर प्रभाव पड़ता है । सरकार स्वास्थ्य के क्षेत्र में समग्र दृष्टिकोण के साथ काम कर रही है । निवारक और उपचारात्मक स्वास्थ्य सेवा में हर स्तर पर गंभीर प्रयास किए जा रहे हैं । स्वच्छ भारत अभियान, जल जीवन मिशन, पोशन अभियान, फिट इंडिया मूवमेंट, आयुष्मान भारत योजना जैसी कई योजनाएं लोगों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में योगदान दे रही हैं तथा देश के स्वास्थ्य क्षेत्र पर आयुष्मान भारत योजना का व्यापक प्रभाव दिखाई देता है । प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत अब तक 75लाख गरीबों ने मुफ्त इलाज किया है । 27 हजार से अधिक हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर भी स्थापित किए गए हैं और सरकार द्वारा लिए गए निर्णयों के कारण, गरीबों और मध्यम वर्ग के चिकित्सा व्यय में काफी कमी आई है । 1000 से अधिक आवश्यक दवाओं की कीमतों के कैपिंग के परिणामस्वरूप रोगियों के लिए 12,500करोड़ रुपये की बचत हई है । स्टेंट और घुटने के प्रत्यारोपण की कम लागत ने लाखों रोगियों को बड़ी राहत दी है । हर दिन 5 से 7 लाख मरीज अब 6,000 से अधिक जनऔषधि केंद्रों से सस्ती कीमतों पर गंभीर बीमारियों के लिए दवाएं खरीद रहे हैं एवं सरकार ने राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग की स्थापना करके चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा में सुधार के लिए अपनी प्रतिबद्धता की फिर से पुष्टि की है और साथ ही इस साल 75नए मेडिकल कॉलेजों को मंजूरी दी गई है,जिसके परिणामस्वरूप एमबीबीएस सीटों में लगभग16 हजार और पीजी सीटों में 4हजार से अधिक की वृद्धि होगी । इसके अलावा, देश के विभिन्न हिस्सों के लिए 22एम्स स्वीकृत किए गए हैं, जिनके लिए निर्माण कार्य प्रगति पर है तथा सरकार महिलाओं के स्वास्थ्य में सुधार के लिए विशेष प्रयास कर रही है । प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत, देश की 1 करोड़ 20 लाख महिलाओं के बैंक खातों में सरकार द्वारा लगभग 5 हजार करोड़ रुपये सीधे हस्तांतरित किए गए हैं । मिशन इन्द्रधनुष के तहत 3 करोड़50 लाख शिशुओं और लगभग 90लाख गर्भवती महिलाओं को टीका लगाया गया है । इन योजनाओं के लाभ विशेष रूप से दलितों और आदिवासियों के निवास वाले क्षेत्रों में दिखाई देते हैं । मेरी सरकार ने भी केवल एक रुपये में ऑक्सो नैपकिन सैनिटरी बायोडिग्रेडेबल-'सुविधा उपलब्ध कराना शुरू कर दिया है,प्रशंसनीय है ।
महामहिम राष्ट्रपति महोदय का यह कथन भी स्वागत योग्य है कि सरकार महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए संवेदनशीलता के साथ काम कर रही है । महिला सुरक्षा को बढ़ाने के लिए, देश में 600से अधिक वन स्टॉप सेंटर स्थापित किए गए हैं । महिलाओं के खिलाफ अपराधों के अपराधियों की पहचान करने के लिए एक राष्ट्रीय डेटाबेस बनाया गया है । इस तरह के मामलों में त्वरित पायसनिश्चित करने के लिए देश भर में 1 हजार से अधिक फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट शापित किए जाएंगे । देश के हर पुलिस स्टेशन में एक महिला हेल्प डेस्क स्थापित करने का भी निर्णय लिया गया है । बच्चों के खिलाफ यौन अपराध जैसे जघन्य अपराधों के लिए, सरकार ने मृत्युदंड के लिए भी प्रावधान किया है । महामहिम राष्ट्रपति महोदय का यह कथन कि उन महान हस्तियों को श्रद्धांजलि अर्पित करना जिन्होंने अपना जीवन राष्ट्र को समर्पित किया और देश की विरासत को संरक्षित करने की दिशा में योगदान दिया,राष्ट्र निर्माण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है । इस विचार के साथ,हमारे स्वतंत्रता संग्राम के दौरान बहादुर आदिवासियों, पुरुषों और महिलाओं, दोनों द्वारा किए गए योगदानों को अलग है । रहा जा किया स्थापित में राज्यों अलग महान समाज सुधारक राजा राम मोहन राय की 250वीं जयंती, जिनकी शिक्षाओं ने देश को निर्देशित किया, 2022 में भी सरकार द्वारा उत्साहपूर्वक मनाया जाएगा, स्वागत योग्य है ।
महामहिम राष्ट्रपति महोदय ने अपने अभिभाषण में उल्लेख किया है कि सरकार वैकल्पिक खेती के तरीकों को भी बढ़ावा दे रही है । क्लस्टर आधारित बागवानी के साथखेती जैविक साथ- को भी बढ़ावा और प्रचारित किया जा रहा है । इस क्षेत्र में सरकार द्वारा किए गए प्रयासों के कारण शहद के उत्पादन में लगभग 60प्रतिशत की वृद्धि हुई है । शहद का निर्यात भी दोगुना से अधिक हो गया है । इस उपलब्धि पर और निर्माण करने के लिए, नेशनल बी को मिशन हनी और कीपिंगगई दी मंजूरी है तथा मछुआरों की आय और मछली उत्पादन को दोगुना करने के दोहरे उद्देश्यों को नए बनाए गए मत्स्य विभाग के माध्यम से प्राप्त करने की मांग की जाती है । देश के 50करोड़ से अधिक पशुधन के स्वास्थ्य को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एक बड़े पैमाने पर अभियान चलाया जा रहा है । राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम के तहत,मवेशियों को फुट और मुंह रोग से बचाने के लिए टीकाकरण और अन्य उपायों पर 13 हजार करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं और प्राकृतिक आपदाओं से किसानों को राहत देने के लिए राज्य सरकारों के साथ सरकार संवेदनशीलता के साथ काम कर रही है । प्रधानमंत्री आवास बीमा योजना के तहत, हर साल औसतन,साढ़े पांच करोड़ से अधिक किसान बहुत कम प्रीमियम पर फसल बीमा कवर का लाभ उठा रहे हैं । पिछले तीन वर्षों में इस योजना के तहत, किसानों के 57हजार करोड़ रुपये के दावों का निपटान किया गया है एवं किसानों के लिए ऑनलाइन राष्ट्रीय बाजार ईएनएएम- का प्रभाव भी दिखने लगा है । देश के 1 करोड़ 65 लाख किसानों और लगभग 1लाख25 हजार व्यापारियों को इससे जोड़ा गया है । इस मंच के माध्यम से लगभग 90 हजार करोड़ रुपये का कारोबार हुआ है । इस दशक में ईएनएएम- की प्रभावशीलता को और बढ़ाने के लिए, 400 से अधिक नई मंडियों को इसके साथ जोड़ने का काम चल रहा है । यह दर्शाता है कि केन्द्र सरकार किसानों के प्रति कितनी चिंतित है और वह उनके उत्थान के लिए हर संभव कदम उठा रही है ।
महामहिम राष्ट्रपति महोदय का यह कथन स्वागत योग्य है कि महिलाओं के लिए उद्यमशीलता और आजीविका को बढ़ावा देने के लिए सरकार के प्रयासों के कारण, 6 करोड़ 60 लाख से अधिक महिलाएं स्वयं सहायता समूह आंदोलन में शामिल हो चुकी हैं । इन महिलाओं को कम ब्याज दरों पर ऋण प्रदान किया जा रहा है । समान अवसर प्रदान करने के लिए, पहली बार महिलाओं को अंडर की करने काम भी दौरान के शिफ्ट की रात में खानों कास्ट ओपन और ग्राउंडहै गई दी अनुमति यह लैंगिक समानता को बढ़ावा देने के इसी उद्देश्य के साथ है कि पहली बार सैनिक स्कूलों में लड़कियों के प्रवेश की अनुमति दी गई है । सैन्य पुलिस में महिलाओं की नियुक्ति भी चल रही है । भारतीय वायु सेना पहली बार महिलाओं को फाइटर स्ट्रीम में और डिफेंस अटैचमेंट के रूप में काम करने के नए अवसर प्रदान कर रही है ।
महामहिम राष्ट्रपति महोदय ने अभिभाषण में उद्धरित किया है कि 21 वीं सदी को ज्ञान की सदी के रूप में जाना जाता है और सरकार की प्राथमिकता युवाओं को इस क्षेत्र में नेतृत्व प्रदान करने के लिए तैयार करना है । रिसर्च, इनोवेशन, इनक्यूबेशन और स्टार्टमें क्षेत्रों संबंधित से अप-, यह वह युवा है जो इस दशक में सबसे आगे रहेगा । मेरी सरकार द्वारा इस संबंध में लिए गए नीतिगत निर्णयों से युवा निरंतर लाभान्वित हो रहे हैं । आज, भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्ट है । तंत्र पारिस्थितिकी अप-स्टार्टतहत के अभियान इंडिया अप-, देश में 27हजार नए स्टार्ट है । गई दी मान्यता को अप- पिछले पांच वर्षों में देश में दी गई पेटेंट की संख्या में चार गुना वृद्धि हुई है, जबकि ट्रेडमार्क पंजीकरण में पांच गुना वृद्धि हुई है तथा कौशल भारत मिशन और राष्ट्रीय शिक्षुता संवर्धन योजना के माध्यम से, कौशल विकास के साथ आवश्यक लिए के स्वरोजगार को युवाओं साथ है । रही जा की प्रदान भी धनराशि देश में 5करोड़54 लाख से अधिक नए उद्यमियों ने मुद्रा योजना के तहत ऋण लिया है । अब तक इस योजना के तहत 10 लाख करोड़ रुपये से अधिक के ऋण को मंजूरी दी गई है और सरकार शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार और नवाचार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से योजनाओं पर जोर दे रही है । उच्च शिक्षा अनुदान एजेंसी (HEFA) के माध्यम से देश के 75शिक्षण संस्थानों के आधुनिकीकरण के लिए 37 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि मंजूर की गई है । सरकार ने केंद्रीय विद्यालयों में लगभग 7 हजार शिक्षकों और उच्च शिक्षा संस्थानों में12 हजार शिक्षकों की नियुक्ति के लिए कार्रवाई शुरू की है । ऑनलाइन शिक्षा प्रणाली को मजबूत करने के लिए सरकार द्वारा 'Swayam 2' भी पेश किया गया है । यह सभी प्रशंसनीय एवं स्वागत योग्य है ।
आदरणीय राष्ट्रपति महोदय ने जहां गत वर्षों के दौरान माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में केन्द्र सरकार द्वारा देश के चहुमुखी विकास के लिए किए गए कार्यों को उल्लेख किया है, वहीं उन्होंने केन्द्र सरकार की दूसरी अवधि की प्राथमिकताओं की भी एक झलक अपने अभिभाषण में पेश की है, जिसमें हमारी लोकप्रिय सरकार की आत्म छवि का एक अंदाजा स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है ।
मैं पुनः महामहिम राष्ट्रपति महोदय जी के अभिभाषण का हृदय से समर्थन करता हूं ।
धन्यवाद ।
प्रो. सौगत राय (दमदम) : प्रणाम मैडम, मैं राष्ट्रपति महोदय के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर तृणमूल कांग्रेस की ओर से कुछ बातें रखना चाहता हूं । 22 से 31 तक हमारे जो अमेंडमेंट्स हैं, मैं उनका समर्थन करता हूं । मैं उनको मूव कर चुका हूं । मैं बोलने से पहले डॉक्टर फारुख अब्दुल्ला साहब और हमारे नौजवान दोस्त अखिलेश यादव जी के भाषण का समर्थन करता हूं और डॉक्टर फारुख अब्दुल्ला साहब के भाषण ने तो मुझे रुला ही दिया । मैं उनको नमस्कार करता हूं । …(व्यवधान) श्रीमती हरसिमरत कौर बादल, जो मेरे पास बैठी हुई हैं, इन्होंने मंत्रिमंडल से इस्तीफा देने की हिम्मत दिखाई,जिसके लिए मैं इनको बधाई देता हूं । मैं हमारे दोस्त हनुमान बैनीवाल जी को बधाई देता हूं, जिन्होंने किसानों के मुद्दे पर एनडीए को छोड़ दिया । आजकल एक बहुमत देश में बन रहा है । जो लोग नरेंद्र मोदी जी के गलत कानून के खिलाफ हैं, वे आहिस्ता-आहिस्ता एक साथ आएंगे । यह मेरी आशा है ।
मैडम, आप पूछ सकती हैं कि आप राष्ट्रपति के अभिभाषण का विरोध क्यों कर रहे हैं?ऐसी बात नहीं है कि मेरे साथ मोदी जी का या अमित शाह जी का कोई झगड़ा है । यह नीति का सवाल है, यह उसूलों का सवाल है और मैं इस सरकार के खिलाफ हूं क्योंकि इस सरकार ने हमारे समाज को विभाजित करने का काम किया है । यह हमारे हिंदुस्तान की ‘कौमी एकता’को खराब कर रही है । आर्टिकल-370का जो एब्रोगेशन किया गया, जम्मू-कश्मीर में फारुख साहब जैसे लोगों को जेल में डालने का काम किया, वह गलत था । मैं इसका विरोध करता हूं । जो सिटिजनशिप अमेंडमेंट ऐक्ट इस हाउस में पास कराया गया, जिससे हिंदू-मुसलमान में विभाजन हो जाएगा,तृणमूल कांग्रेस की ओर से मैं उसका भी विरोध करता हूं । मैं यह कहना चाहता हूं कि यह डिवाइसिव एजेंडा हमारे देश में नहीं होना चाहिए । यहां पर रवींद्र नाथ टैगोर जी का बहुत बार उल्लेख किया गया है । मैं खुश हूं कि प्रधान मंत्री जी खुद बांग्ला भाषा बोलने की कोशिश कर रहे हैं । वह बड़ी दाढ़ी रख रहे हैं । वह रवींद्र नाथ टैगोर जैसा दिखना चाहते हैं । हमें कोई आपत्ति नहीं है,लेकिन वह बांग्ला थोड़ा ठीक से बोलें । रवींद्र नाथ जी का एक गाना है-“ओरे गृहोबाशी खोल द्वार खोल”यह होली के समय गाया जाता है । उन्होंने बोला-“ओड़े गृहोबाशी खोल द्वार खोल” । टैगोर जी के गाने के साथ ऐसा नहीं होना चाहिए । अमित शाह जी ने जाकर बोल दिया कि रवींद्र नाथ टैगोर जी का जन्म शांति निकेतन में हुआ था । वास्तव में उनका जन्म कोलकाता के जोड़ासाँको ठाकुरबाड़ी में हुआ था । मैं बीजेपी के दोस्तों को बोलूंगा कि यह सब ठीक से सीखकर बंगाल में जाइए,तब अच्छा रहेगा ।
मैडम, हाउस में काफी कुछ बोला गया । मैं एक सिम्पल कारण के लिए किसान आंदोलन का समर्थन करता हूं ।
मैं किसानों के बारे में ज्यादा नहीं समझता हूँ, लेकिन मैं यह जानता हूँ कि अगर आपने किसान के लिए कानून बनाया है और किसान उसको नहीं मान रहे हैं तो जबर्दस्ती क्या है? उसको उठा लो । दिन पर दिन,लगभग 90 दिन से यह आंदोलन चल रहा है ।
मैडम, आप भी गाँव से आती हैं । 90 दिनों से खुले आसमान के नीचे, जाड़े के समय में बच्चे-बूढ़े, महिलाएं,बुजुर्ग लोग और नौजवान आंदोलन कर रहे हैं । यह क्या बात है? क्या यह प्रधान मंत्री जी की इगो का सवाल है? मैं यह समझना चाहता हूँ । क्या फर्क पड़ता है,अगर वह कहते हैं कि हम अस्थायी रूप से इसको वापस कर लेते हैं, बाद में बातचीत करके चालू करेंगे । इससे कोई आसमान नहीं गिर पड़ेगा । ये सब चीजें लोकतंत्र में अच्छा नहीं है । लोकतंत्र बातचीत करके चलाना है । आज मैंने सुना कि प्रधान मंत्री जी दूसरे सदन में गुलाम नबी आजाद को विदा देने के समय रो दिए, उनकी आँख से आँसू निकल गए । मुझे अच्छा लगा कि प्रधान मंत्री का एक हृदय है तो यही हृदय उन किसानों के लिए क्यों नहीं है? लगभग 200 किसान वहाँ पर मरे हैं । 60 लोगों ने आत्महत्या की है । थोड़ा उनके लिए भी रोइए, माननीय प्रधान मंत्री के पास यह मेरा नम्र निवेदन है ।
मैडम, मैं ज्यादा बात नहीं बढ़ाना चाहता हूँ । अच्छा है कि प्रधान मंत्री नेताजी के जन्मदिन पर कोलकाता गए थे । दु:खद बात यह है कि जब उस सभा में ममता बनर्जी बोल रही थीं तो कुछ लोगों ने जय श्री राम का नारा उठाया ।…(व्यवधान) ममता जी नहीं बोलीं ।…(व्यवधान) मुझे यह कहना है कि यह नारा श्रीरामचन्द्रजी का भी अपमान है,नेताजी का भी अपमान है और आप यह कर रहे हैं । एक आदमी कल एक बहुत अच्छी बात बोला । वह बोला कि ये लोग नेताजी का नाम बोलते हैं । The statement from the Joint Front of Union said, it is the BJP and its predecessors that never did any andolan against Britishers and they were always against the andolan; they are still scared of public movement. प्रधान मंत्री जी ने कल बोल दिया कि ये आंदोलनजीवी हैं । आंदोलन को छोटा करना प्रधान मंत्री को शोभा नहीं देता है । मेरे ख्याल से आपके पूर्वज तो आंदोलन करके जेल में नहीं गए,…* के लोग,…* के लोग । श्यामा प्रसाद मुखर्जी, जिनको आप सामने लाते हैं, वे बंगाल के थे, श्रद्धेय आदमी थे, वे आजादी की लड़ाई के समय एक दिन के लिए भी जेल नहीं गए । जिन जवाहर लाल नेहरू की ये लोग चर्चा करते हैं, वे 9 साल जेल में रहे । फर्क होता है । देश का नेता ऐसे ही नहीं बनते हैं । बीजेपी की वह पृष्ठभूमि नहीं है, जिसको लेकर वे यह लड़ाई कर सकें ।
मैडम, मैं आपसे बोलना चाहता हूँ कि दिल्ली में किसान आंदोलन में करीब 200 लोग मर गए हैं और प्रधान मंत्री बोलते हैं कि ये आंदोलनजीवी हैं । ये आंदोलनजीवी कहाँ हैं, ये आंदोलनमृत हैं,लोग आंदोलन के कारण मर गए हैं । इनके लिए थोड़ा सा आँसू बहाइए,प्रधान मंत्री के पास हमारी यह अपील है । हमारी छोटी बहन हाउस की सदस्य, वे भूतपूर्व फिल्म एक्टर हैं और भूतपूर्व हमारी पार्टी की भी सदस्य थीं । कल वे ममता बनर्जी के खिलाफ बोली हैं । वे बोलें,लेकिन यहाँ पर ममता बनर्जी का नाम या उनके भतीजे का नाम, वह भतीजा तो हाउस का मेंबर है, आप उसको यहाँ बुलाइए,वे भी भाषण देंगे । ऐसे बोलना ठीक नहीं होता है । हम नरेन्द्र मोदी की फैमिली के बारे में थोड़े ही बोलते हैं । ये शब्द नहीं बोलने चाहिए । मैं इसका पूरा विरोध करता हूँ । उन्होंने बोला कि अम्फान का रुपया… * हुआ । ममता बनर्जी कल क्या बोलीं, Prime Minister during his visit to the State after Cyclone Amphan had announced an aid of just Rs.1,000 crore.
Mamata Banerjee said, “I have never seen such a cruel Government. We had to spend more than Rs. 2,542 crore over and above the last Budget to meet the situation due to Amphan and Covid”.
हमेंपैसा नहीं दियाऔर फिर बोलतेहैं कि हम लोगोंने रुपया… *किया । हमलोगों ने 6000करोड़रुपये खर्च किए । केन्द्र नेकेवल 3700 करोड़रुपये दिए ।हमारा एक लाखकरोड़ रुपये कानुकसान हुआ औरआप बोलते हैंकि हमने … * किया । अरे, … * हमनहीं करते हैं, …* आपकरते हैं । हमेंपैसा नहीं देतेहैं, फिरहमें …* देतेहैं । यह दु:खदबात है । यहक्रूअल्टी है । यह मैं आपकोकहना चाहता हूं ।
मैडम, मैंअपनी बात खत्मकरता हूं । प्रेजीडेंटकी स्पीच में91 पॉइंट्सहैं और एक हीबात का रिपीटेशनहै । वह बोलतेहैं कि प्रधानमंत्री ग्रामसड़क योजना, फसलबीमा योजना, जलजीवन मिशन, पोषणअभियान, नेशनलएजुकेशन पॉलिसी, राष्ट्रीयग्रामीण आजीविकामिशन इत्यादिएक ही चीज सालभर रिपीट होतीहै । उसमें कोईप्रोग्रेस नहींहोती है औरन उसको आगेबढ़ाते हैं ।मैं एक जरूरीबात करता हूंकि अगर इतनाकाम केन्द्रीयसरकार करती हैतो इतने मंत्रियोंको पश्चिम बंगालजाने का कैसेमौका मिलता है? मैडम, मैंकलकत्ता से आरहा था । मैंनेदेखा कि …* सभीमंत्री पश्चिमबंगाल में गएथे । मैं एयरपोर्टमें श्री गजेन्द्र सिंह शेखावत से मिला । उनकी जल जीवन मिशन योजना है । वह पश्चिम बंगाल के गांव में घूमते हैं । एक है- श्री मनसुख मांडविया,वह पोर्ट के मिनिस्टर हैं,मालदा में गए हैं और उधर ही काम कर रहे हैं । वहां पर पोर्ट वगैरह कुछ नहीं है । श्री धर्मेन्द्र प्रधान से लेकर सब लोग पश्चिम बंगाल में पॉलिटिकल टूरिज्म कर रहे हैं । ये लोग …* के लिए जाते हैं । …(व्यवधान)
माननीय सभापति : आप अपनी बात खत्म कीजिए ।
प्रो. सौगत राय : मैडम, आपमेरी बात सुनिए ।
माननीय सभापति : आपको पॉइंट वाली बात बोलनी चाहिए कि क्या कमी रह गई?
प्रो. सौगत राय : मैडम, वहन बंगला समझतेहैं और न बंगलाबोल सकते हैं । वे बंगाल जाकरक्या करेंगे? …(व्यवधान)
माननीय सभापति : आप छोड़िए न । आप कम से कम पॉइंट वाली बात बोलिए । आप बुजुर्ग हैं,बड़े हैं और वरिष्ठ हैं ।…(व्यवधान)
प्रो. सौगत राय : मैडम, मेरेपास पूरे पॉइंट्सलिखे हुए हैं ।…(व्यवधान)
माननीय सभापति : आपके पास लिखा हुआ है तो वही बोलना चाहिए ।
प्रो. सौगत राय : मैडम, अगरमंत्री लोग दिल्लीमें काम नहींकरके पश्चिमबंगाल में घूमतेहैं तो हम नहींबोलेंगे ।…(व्यवधान)
माननीय सभापति : वे जाएँगे । पूरा देश अपना है ।
प्रो. सौगत राय : मैडम, मैंअपनी बात खत्मकरता हूं । यहसब करके कुछहोगा नहीं ।क्योंकि जब बीजेपीके लोग ज्यादाघूमेंगे तब लोगगुजरात दंगोंको याद करेंगेऔर बोलेंगे-
पंछीजो उड़ते हैं, गगनबदल गया हँसतेहैं सितारे, चमलबदल गया आसमानकी खामौशी बतारही है, लाशवही है, सिर्फकफन बदल गयाहै ।
बीजेपीएक ही है । अहमदाबादका दंगा उन्हींका है और अंतमें मैं कहनाचाहता हूं कियह डिवाइज़िवपॉलिटिक्स देशमें खत्म होनीचाहिए । लोगोंलोगों में बांटनासही नहीं है । एक कम्युनिटीको टारगेट करनासही नहीं है । आप जानते हैंकि भारततीर्थमें टैगोर नेक्या बोला था-
Eso he arjo eso anarjo hindu musalman Eso eso aaj tumi ingraj, eso eso Christian Eso brahman, suchi kori mon dharo haat sabakar Eso he patit hoyo oponit sab apoman bhar Maar obhisheke eso eso tara Mangal ghat hoyni je bhara Sabra paroshe pobitro kara tirtha nire Ei bharoter mahamanober sagar tire इसभारत को मैंसलाम करता हूं, नमनकरता हूं । अंतमें, मैंबोलता हूं किआप लोग बंगालमें बहुत दौड़तेहैं, लेकिनबंगाल के लोगएक कविता बोलतेहैं-
Jatoi karo phataphati Nabanne pher hawai choti मतलबजितना तुम करो, Nabanneमें वह हवाई चोटी पहनी हुई ममता पहुंचेगी और दस साल रहेगी । दस साल बाद आपके साथ पश्चिम बंगाल की चर्चा करेंगे । आप वहां जाकर…(व्यवधान)
19.00hrs माननीय सभापति : आप कनक्लूड कीजिए ।
प्रो. सौगत राय : यह पॉलिटिकल टूरिज्म मत कीजिए । आप पसीना मत बहाइए, क्योंकि कोई फायदा नहीं है । आप बाहर से ले जाएंगे तो बंगाली बनाम बाहरी की लड़ाई हो जाएगी । यह बाहरी नहीं रहेगा । आप गुजरात से बंगाल पर शासन नहीं कर सकते हैं ।
माननीय सभापति : अब आप बैठ जाइए ।
श्री के. श्रीनिवास ।
SHRI KESINENI SRINIVAS (VIJAYAWADA): Thank you, Madam, for the opportunity. On behalf of my Party Telugu Desam, I rise to thank the hon. President for his Address.
Madam, 2020 has been a very tough year for all of us. The pandemic has tried us in the hardest ways possible. I would like to appreciate the efforts of our hon. Prime Minister, Shri Narendra Modi ji, and the Government for managing the crisis excellently.
Madam, I would also like to express my deepest gratitude to the frontline workers and the scientific community of the country who have come out with life-saving breakthroughs at an astounding pace. It is indeed a matter of immense pride to see the efforts of Bharat Biotech for coming out with a made-in-India vaccine.
Madam, I would also like to state that the Genome Valley, where Bharat Biotech has done its wonders, was an initiative of my leader Nara Chandrababu Naidu, the then Chief Minister of united Andhra Pradesh whose vision has always been to promote and invest in scientific research to make people’s lives better.
Madam, now I would like to talk about a burning national issue, the farmers’ issue. Thousands of farmers all over the country are expressing their resentment on three farm laws over the last few months. Confusing stance on the MSP, the APMC mandis and the dispute resolution mechanism have added to the grievances of the farmers. On behalf of my party I request the Government to address these issues with an open mind and engage with the protesting farmers in a constructive manner immediately.
Madam, now I would like to bring to the notice of this august House the plight of the 29,000 protesting farmers who have sacrificed 33,000 acres of their valuable land on the call of our leader Mr. Chandrababu Naidu for the construction of the State Capital Amaravati for which hon. Prime Minister Narendra Modi ji laid the foundation. Their protests have entered the 418th day today. The Government has used the State Police to brutalise and harass these protestors. They have used all sorts of tricks on them but they have not been able to break the conviction of the farmers. The three-Capitals proposal of …* is an illogical innovation which the State Government is hell bent on pursuing.
Madam, now I would like to mention a burning issue in our State of Andhra Pradesh. The recent decision of the Union Cabinet to privatise Visakhapatnam Steel Plant has invited sharp opposition from the people and also from all the political parties across the State. There is a strong Telugu sentiment around Visakhapatnam Steel Plant which was achieved way back in 1960s through serious protests with the slogan ‘Visakha Ukku, Andhrula Hakku’ meaning Visakha Steel is Andhra’s right. Nearly 32 people died across the State due to the police firing during the protests then and also several farmers belonging to 64 villages sacrificed 22 acres of land which presently values more than one lakh crore rupees.
Visakha Steel Plant, which is giving employment to nearly 20,000 people directly and many thousands indirectly, was set up with an investment of Rs.5,000 crore initially. It was managing its finances perfectly. It has never been a burden to the Central Government. In return it paid over Rs.40,000 crore in the form of taxes since its inception.
19.04 hrs (Shri Bhartruhari Mahtab in the Chair) Sir, our Chief Minister remained silent on this issue after writing an …* letter to the Centre. Hence, in this regard, I request the hon. Prime Minister and the Finance Minister, through you, that the Government of India should rollback the decision as there is no rationale in privatising Visakha Steel Plant which is the pride of Andhra Pradesh. I also request for the allotment of captive mines for Visakha Steel Plant which will help in bringing the plant into profits.
Sir, time and again, our party has raised the issues Andhra Pradesh has been facing since its bifurcation. It is no different this time. The promises of the AP Bifurcation Act 2014 remain unfulfilled and unforgotten. … (Interruptions)
HON. CHAIRPERSON : Mr. Midhun Reddy, which rule are you quoting?
… (Interruptions)
SHRI P.V. MIDHUN REDDY (RAJAMPET): It is not factual, Sir. We have already represented. He is calling the letter of the hon. Chief Minister as an …*. He is not entitled to do that. It should be expunged. Earlier also, he has spoken with respect to the State Capital. It was a decision of the State Assembly. He cannot mention about that here.
HON. CHAIRPERSON: The Chair will go through the speech, and if something is found not as per the rules, it will be deleted.
SHRI KESINENI SRINIVAS: The promises of AP Bifurcation Act 2014 remain unfulfilled and unforgotten. There is no mention of railway zone, no fiscal deficit relief, no funding for seven backward districts, no funding for construction of Polavaram Project, no Kadapa Steel Plant, no Dugarajapatnam Port, and the list can go on. The special category status was granted to Andhra Pradesh during the bifurcation. The present Chief Minister and his party came to power promising the people of Andhra Pradesh that if they were elected to power, they would get this special category status along with the pending bifurcation promises to the State. But …* has kept quiet even after the Finance Minister has categorically denied the special category status to the State. This silence is a proof that he has forgotten all the promises he has made to the people of Andhra Pradesh. …(Interruptions)
SHRI KURUVA GORANTLA MADHAV (HINDUPUR): Sir, in this regard, please allow me to speak. The then Chief Minister … *toned down the special status. … (Interruptions)
HON. CHAIRPERSON: Nothing will go on record except Shri Srinivas’ speech.
… (Interruptions)
HON. CHAIRPERSON: Midhun Reddy ji, I have already said the Chair will go through the speech.
… (Interruptions)
SHRI JAYADEV GALLA (GUNTUR): Sir, this is not acceptable to us.
… (Interruptions)
HON. CHAIRPERSON: The whole speech will be read through.
SHRI KESINENI SRINIVAS: The ruling party YCP is leading the people towards a debt trap which has risen by Rs. 1,15,000 crore in just 20 months while they are filling their own pockets. We have become a State with maximum borrowing and minimum development under the YCP Government. It is not just the finances that are bad. … * has been undermining any State functionary that does anything contrary to his wishes.
HON. CHAIRPERSON: Please do not quote the name of a person who is not present in the House. Just mention ‘the Chief Minister of Andhra Pradesh’.
SHRI KESINENI SRINIVAS: He has brazenly undermined the judiciary and the Election Commission. The law-and-order situation in the State has deteriorated in the last 20 months. …* has made his measure clear - it is his way or the high way. … (Interruptions)
HON. CHAIRPERSON: Please do not quote the name. That will not go on record.
… (Interruptions)
SHRI KESINENI SRINIVAS: This is not how our democracy is supposed to function. I sincerely wish and hope that my State of Andhra Pradesh sees better days in future. With this, I conclude my speech. Thank you.
*श्री राजेन्द्र अग्रवाल (मेरठ) : वर्ष 2014 में जब मोदी जी प्रथम बार देश के प्रधान मंत्री निर्वाचित हुए तो उन्होंने अपनी सरकार के विज़न को स्पष्ट करते हुए कहा था कि सरकार वह हो, जो गरीबों के लिए सोचे, सरकार वह हो,जो गरीबों की सुने, सरकार वह हो, जो गरीबों के लिए जिए और इसलिए नई सरकार देश के गरीबों को समर्पित है, देश के कोटि-कोटि युवकों को समर्पित है,मान सम्मान के लिए तरसती हमारी मां बहनों के लिए समर्पित है । गांव हो, गरीब हो,किसान हो, दलित हो, पीड़ित हो, शोषित हो,वंचित हो, यह सरकार उनके लिए है ।
माननीय प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने अपनी सरकार के उपरोक्त विज़न को स्पष्ट करते हुए यह भी कहा कि हमारे लिए सत्ता उपभोग का माध्यम नहीं है, देश की 125 करोड़ जनता की सेवा का साधन है । मैं देश का प्रधानमंत्री नहीं, देश का प्रधान सेवक हूँ ।
पिछले लगभग साढ़े छह वर्षों में श्री नरेंद्र मोदी जी की सरकार गांव, गरीब, किसान के कल्याण, दलित, पीड़ित,शोषित, वंचित के उत्थान तथा महिलाओं की सुरक्षा एवं सशक्तिकरण के लिए निरंतर कार्य कर रही है । देश के प्रधान सेवक श्री नरेंद्र मोदी जी ने एक दिन का तो दूर चौथाई दिन का भी अवकाश लिए बिना अखंड परिश्रम करते हुए सेवारत कर्मयोगी की तरह देश की सेवा की है । गरीबों के लिए जन-धन योजना, उज्ज्वला योजना, शौचालय निर्माण, सुरक्षा बीमा योजनाएं,निशुल्क विद्युत कनेक्शन, आयुष्मान भारत योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना, प्रधानमंत्री जन-औषधि परियोजना इत्यादि सैकड़ों ऐसी योजनाएं हैं,जिनके परिणामस्वरूप विकास की सीढ़ी में सबसे निचले पायदान पर खड़े वंचित व्यक्ति को राहत मिली है । सबका साथ, सबका-विकास,सबका विश्वास के संकल्प को चरितार्थ करने वाली मोदी जी की विकासवादी राजनीति के कारण केवल वोट बैंक की जातिवादी व सांप्रदायिक राजनीति का समय अब बदल गया है । इस प्रकार की विभाजनकारी राजनीति करने वाले दल भी आज विकास की बात करने के लिए विवश हुए हैं ।
किसान देश की रीढ़ है । किसान की आय वर्ष 2022 तक दोगुनी करने के लिए प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में सरकार ने वर्ष 2014 से ही लगातार कदम उठाएं हैं । जनधन योजना का किसानों को सीधे लाभ मिला है । यूरिया को नीम कोटेड कर दिया, परिणामस्वरूप यूरिया की कालाबाजारी समाप्त हो गयी तथा किसानों को यूरिया समय से मिलने लगा । फसल के नुकसान पर मुआवजे की दरें व शर्ते बेहतर की गईं,फसल बीमा के प्रीमियम की दरें न्यूनतम की गई,किसान क्रेडिट कार्ड का विस्तार किया गया तथा किसानों को अधिक कर्ज भी उपलब्ध कराया गया । सोइल हेल्थ कार्ड बनवाकर किसानों को लागत मूल्य में कमी करने में सहायता की । सिंचाई क्षेत्र का विस्तार किया गया । मत्स्य पालन, पशु पालन,मधुमक्खी पालन इत्यादि को बढ़ावा दिया गया ।
ऐसे अनेक कदम सरकार ने उठाये हैं, जिससे किसानों की आय बढ़ी है । स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट के अनुसार एमएसपी मोदी जी की सरकार ने ही लागू किया,जिसकी प्रशंसा स्वयं श्री स्वामीनाथन ने की । किसानों को जीवन की मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध हो, इसलिए ग्रामीण क्षेत्र में प्रधान मंत्री ग्राम सड़क योजना सहित व्यापक स्तर पर बुनियादी ढांचे का निर्माण कराया गया । प्रधान मंत्री किसान मान धन योजना के अंतर्गत प्रत्येक किसान के खाते में प्रतिवर्ष 6000 करोड़ रूपये भेजे जा रहे हैं,जिससे साढ़े ग्यारह करोड़ से भी अधिक किसानों को सीधे लाभ पहुंचा है ।
कृषि लागत में कमी करके तथा किसान की उपज को बेहतर मूल्य एवं विकल्प प्रदान करते हुए वर्ष 2022 तक किसान की आमदनी को दोगुना करने का लक्ष्य लेकर माननीय मोदी जी की सरकार काम कर रही है । इसी उद्देश्य से कृषि सम्बन्धी तीन कानून भी संसद द्वारा पारित किये गये हैं । ये कृषि सुधार कानून अर्थव्यवस्था के लिहाज से कितने लाभप्रद हैं,इसका अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि देश के पूर्व प्रधान मंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह का अभी तक इस पर कोई बयान नहीं आया है, जबकि विपक्ष किसानों के मुद्दे पर राजनीतिक रोटी सेकने में लगा हुआ है । ऐसा नहीं है कि कांग्रेस के नेता उन पर इसके खिलाफ बोलने के लिए दबाव नहीं बना रहे होंगे,क्योंकि ऐसे मुद्दों पर उनकी राय बहुत मायने रखती है, लेकिन उन्होंने अभी तक कृषि बिल के खिलाफ कुछ नहीं बोला है । सरकार संशोधनों के लिए सदैव तैयार है, परन्तु किसानों के हित में संसद द्वारा बनाये गए कानूनों को वापस लेने की मांग करना, वास्तव में देश की सर्वोच्च पंचायत संसद की अवमानना है ।
आजादी के बाद से ही कांग्रेस के लिए देश हित कभी सर्वोपरि नहीं रहा । देशहित से पहले पार्टी हित तथा उससे भी पहले परिवार हित - यही कांग्रेस की सोच रही है । इसी सोच के कारण कांग्रेस के 50 वर्षों से भी अधिक के शासनकाल में देश की तथा विशेषकर गांवों,किसानों की स्थिति निरंतर बद से बदतर हुई है । इसी परिवारवादी सोच के कारण आज भी कांग्रेस का नेतृत्व शासक होने के मिथ्या अहंकार से ग्रस्त हैं । जमीनी सच्चाई से उसका नाता नहीं रह गया है । मोदी जी का विरोध करना – केवल यही उसका कार्यक्रम बन गया है ।
भ्रष्टाचार के खिलाफ उठाए गए कदम हो या जनकल्याण की विभिन्न योजनाएं हों, नोटबंदी हो या जी.एस.टी. हो, राफेल की खरीद हो या दो बार की गई सर्जिकल स्ट्राइक हो, पाकिस्तान नियंत्रित आतंकवाद से लड़ाई हो या कश्मीर से धारा 370 हटाना हो, तीन तलाक की कुप्रथा समाप्त करना हो या नागरिकता संशोधन कानून (CAA) हो,कोविड-19 की वैश्विक महामारी को हराना हो या चीन को सीमा से धकेलना हो ऐसे अनेक राष्ट्रीय महत्व के विषय हैं, जिन पर कांग्रेस का विवेकहीन मोदी विरोध चलता रहता है । इन विधेयकों का विरोध भी कांग्रेस की उपरोक्त विवेकहीनता का ही परिणाम है ।
केवल वोट बैंक के आधार पर विकास योजनाओं को लागू करने के निर्णय किए गए । परिणाम स्वरूप देश के कुछ भागों में विकास कार्य हुए तो कुछ क्षेत्र उससे वंचित रह गए । ‘सबका साथ, सबका विकास’मोदी जी का संकल्प है । देश के सभी क्षेत्र विकास में भागीदार बनें,इसके लिए प्रधान मंत्री जी ने आकांक्षी जिले कार्यक्रम की शुरुआत की,जिसके तहत देश के 112 सबसे पिछड़े जिलों में स्वास्थ्य,शिक्षा व गरीबी उन्मूलन के लिए अथक प्रयास किए जा रहे हैं ।
इसी प्रकार विकास से वंचित उत्तर पूर्वी क्षेत्र के विकास पर सरकार ने विशेष ध्यान दिया है । इस सरकार ने इन क्षेत्रों में हजारों किलोमीटर के हाईवे, रेल नेटवर्क और कई एयरपोर्ट बनाए हैं । मणिपुर और लद्दाख जैसे क्षेत्रों में नए विश्वविद्यालय खुल रहे हैं । इसी का परिणाम है कि इन क्षेत्रों से पृथकतावाद समाप्त हो रहा है तथा हम चीन की चुनौतियों का भी डटकर मुकाबला करने में समर्थ हैं ।
वर्ष 2020 का संपूर्ण वर्ष कोरोना की वैश्विक महामारी से संघर्ष में बीता । माननीय प्रधान मंत्री जी के नेतृत्व में देश के सामूहिक संकल्प को जागृत करते हुए कोरोना को जिस प्रकार पराजित किया गया,वह अद्भुत है । इस असाधारण संकट के समय प्रधान मंत्री गरीब कल्याण योजना के माध्यम से 8 महीनों तक 80 करोड़ लोगों को 5 किलो प्रतिमाह अतिरिक्त अनाज की नि:शुल्क आपूर्ति की गई । प्रवासी श्रमिकों की सुविधा के लिए ‘वन नेशन, वन राशन कार्ड’की योजना लागू की गयी । अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए आर्थिक पैकेज की घोषणा की गई । सरकार ने रेहड़ी-पटरी वालों और ठेला लगाने वालों के लिए विशेष स्व-निधि योजना प्रारंभ की । गरीब महिलाओं के जनधन खातों में 31 हजार करोड़ रुपए सीधे जमा किए गए । आपदा को अवसर में बदलते हुए प्रधान मंत्री जी ने आत्मनिर्भर भारत का मंत्र दिया । हमने बहुत कम समय में 2200 से अधिक प्रयोगशालाएं बनाई और पीपीई किट तथा टेस्ट किट में आत्मनिर्भरता प्राप्त की ।
हमारे लिए यह अत्यंत गर्व की बात है कि स्वदेश में ही निर्मित दो वैक्सीनों का उपयोग करते हुए भारत दुनिया का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान चला रहा है । वैश्विक संकट के इस समय में वसुधैव कुटुंबकम की अपनी परंपरा का पालन करते हुए, कोरोना वैक्सीन की लाखों खुराक अनेक देशों तक पहुंचाई है । कोरोना को पराजित करने की भारत की इस सामर्थ्य की संपूर्ण विश्व में प्रशंसा हो रही है । आत्मनिर्भर भारत के मंत्र का प्रभाव रक्षा उत्पादन सहित देश के विभिन्न सेक्टरों में साफ दिखाई दे रहा है । भारत क्रमशः आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है ।
माननीय प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में इस सरकार ने देश को संवेदनशील, जनकल्याणकारी तथा भ्रष्टाचार मुक्त शासन प्रदान किया है । देश की जनता ने भी प्रधान मंत्री जी को भरपूर आशीर्वाद दिया है । वर्ष 2019 में इसी कारण बढे हुए बहुमत के साथ देश की जनता ने श्री नरेंद्र मोदी जी को पुनः प्रधान मंत्री पद की जिम्मेदारी दी । अध्यक्ष जी,गत सप्ताह ही देश की एक प्रमुख पत्रिका ने माननीय प्रधान मंत्री जी की सरकार के कार्य के संबंध में एक सर्वेक्षण प्रकाशित किया है । सर्वेक्षण के अनुसार 30% लोगों ने उनके कार्य को शानदार, 44% लोगों ने अच्छा तथा 17% लोगों ने औसत बताया है । कुल 91% लोगों की यह राय हमारे कर्मयोगी प्रधान मंत्री जी की लोकप्रियता का प्रमाण है ।
सूर्योदय हो चुका है । संपूर्ण देश प्रधान मंत्री जी के नेतृत्व में देश के पुनर्निर्माण में अपना सहयोग कर रहा है । देश आगे बढ़ रहा है । मेरा विपक्ष से भी अनुरोध है कि वह निराशा के अँधेरे से बाहर आए, राष्ट्रनिर्माण के इस महाअभियान में अपना भी सहयोग प्रदान करे । इन्हीं शब्दों के साथ मैं महामहिम राष्ट्रपति जी के अभिभाषण पर प्रस्तुत धन्यवाद प्रस्ताव का समर्थन करता हूं । आपने मुझे समय दिया इसके लिए आपका हृदय से पुनः आभार व्यक्त करता हूं ।
डॉ. निशिकांत दुबे (गोड्डा): सभापति महोदय, मैं राष्ट्रपति जी के अभिभाषण पर स्पीकर के डायरेक्शन 115 (1) और (2) के आधार पर कुछ एक्सप्लेनेशन,लीडर ऑफ द पार्टी कांग्रेस, श्री अधीर रंजन चौधारी साहब से पूछने के लिए खड़ा हुआ हॅूं । …(व्यवधान)
माननीय सभापति : आपअपना वक्तव्यदीजिए ।
…(व्यवधान)
डॉ. निशिकांत दुबे:जी सभापति महोदय । हमारा संयोग बढ़िया है कि आप खुद इस चेयर पर अधिष्ठाथित हैं । इतिहास को जो डिस्टॉर्ट करने का इस देश में कांग्रेस पार्टी ने ठेका ले रखा है, उससे एक पीड़ा होती है । कल उन्होंने एक स्पीच को कोट किया या एक रेफ्रेंस कोट किया – हिन्दु महासभा के भागलपुर अधिवेशन का । सर,संयोग है या दुर्संयोग है कि मेरा खुद का जिला भागलपुर है । मैं भागलपुर में पैदा हुआ हॅूं ।
वर्ष 1941 के हिन्दू महासभा के अधिवेशन को उन्होंने क्वोट किया । मुझे लगा कि ‘कहीं का ईंट कहीं का रोड़ा,भानुमति ने कुनबा जोड़ा ।’ मैं कांग्रेस पार्टी और कांग्रेस पार्टी के सारे नेताओं को चैलेंज करता हूं, ओपेन चैलेंज करता हूं । इसे ऑथेन्टिकेट कीजिए,क्योंकि मैं सारे पेपर्स लेकर आया हूं, जब मैंने उस रूल को क्वोट किया ।
वर्ष 1941 की वीर सावरकर जी की हिन्दू महासभा की जो मीटिंग हुई,उसको सरकार ने,बिहार सरकार ने परमिशन नहीं दी थी । यदि वे ब्रिटिश शासन के समर्थक थे तो वर्ष 1941 की मीटिंग के लिए तो सीधे-सीधे उन्हें परमिशन मिल जानी चाहिए थी । मैं उसका पूरा रिजॉल्यूशन लेकर आया हूं । उस रिजॉल्यूशन में उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी की जो नीति है,वह नीति देश को विभाजित करने वाली है, मुसलमानों के अपीज़मेंट की तरफ कांग्रेस पार्टी और महात्मा गांधी बढ़ रहे हैं । ये वे कह रहे हैं,मैं नहीं कह रहा हूं क्योंकि हमारी पार्टी महात्मा गांधी का बहुत सम्मान करती है । यही कारण है कि हम लोगों को यह अधिवेशन करने का मौका दीजिए क्योंकि जगह-जगह पर आप मुसलमानों का अधिवेशन, मुस्लिम लीग का अधिवेशन करने को तैयार रहते हैं ।
सर, मैं लेटर लेकर आया हूं,उन्होंने जो वर्ष 1942 में चर्चिल को टेलिग्राम किया । उसमें उन्होंने कहा कि देश की स्वतंत्रता हमारे लिए सर्वोपरि है और यदि आप हमसे कुछ मदद चाहते हैं तो हम आपसे केवल एक मदद चाहते हैं कि देश स्वतंत्र हो जाए ।
इस देश में यदि आप नेहरू जी का सम्मान करना चाहते हैं तो हम भी सम्मान करते हैं । लेकिन, अपनी तकरीर में आपके द्वारा किसी को नीचा करना और किसी को ऊँचा कर देना कौन-सा बड़प्पन है? आपके साथ यदि लोग नहीं हैं तो आप उसको ऊपर कर देंगे ।
सर, इसी तरह से औजला साहब ने बयान दिया कि चंद्रशेखर आजाद और भगत सिंह उनके आइकॉन हैं । आइकॉन वे पूरे देश के हैं, लेकिन मैं चैलेंज करता हूं कांग्रेस पार्टी को कि क्या चंद्रशेखर आजाद आपकी पार्टी के कभी सदस्य थे?क्या भगत सिंह जी आपकी पार्टी के कभी सदस्य थे?कल आप तकरीर करते हुए कहते हैं कि चंद्रशेखर आजाद हमारे, खुदीराम बोस हमारे, पी.सी. चाकी हमारे हैं ।
सर, मेरा दूसरा सवाल यह है कि कल इन्होंने गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट की बहुत बात कही । उन्होंने राष्ट्रपति जी को भी नहीं छोड़ा ।
सभापति महोदय, आप इस चीज को ज्यादा अच्छे से बताएंगे कि वर्ष 1919 का जो गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट था,उसका कांग्रेस पार्टी ने विरोध किया । जब कांग्रेस पार्टी ने विरोध किया तो उसके बाद रॉलेट एक्ट आ गया । यहां कांग्रेस पार्टी को समर्थन देने वाले हरसिमरत कौर बादल से लेकर परनीत कौर जी बैठी हुई हैं, क्या उस 1919 के रॉलेट एक्ट के बाद जलियांवाला बाग कांड नहीं हो गया? ये कहते हैं कि गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट में राष्ट्रपति का अभिभाषण हुआ ।…(व्यवधान)
सर, पहले मैं अपनी बात खत्म कर लूं । उसके बाद वे जवाब दे दें क्योंकि उनका भाषण खत्म हो गया था,उसके बाद मैंने अपनी बात शुरू की ।…(व्यवधान)
SHRI ADHIR RANJAN CHOWDHURY: Sir – it is a practice – he is referring my name, I think, it needs, at least, a little response.
HON. CHAIRPERSON : You will respond.
… (Interruptions)
डॉ. निशिकांत दुबे:मेरी बात खत्म होने दीजिए, फिर आप एक्सप्लानेशन दीजिएगा । मैं आप से ही तो पूछ रहा हूं । वर्ष 1919 के गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट के बाद, क्या कांग्रेस पार्टी यह बता सकती है कि वर्ष 1950 में कॉन्स्टीट्यूएंट असेम्बली बनने से पहले क्या कभी भी दोनों सदनों को गवर्नर जनरल ने संबोधित किया?एक भी दिन नहीं किया । यदि गवर्नर जनरल ने संबोधित नहीं किया तो इस प्रेसिडेंशियल एड्रेस के मोशन में इस तरह का रेफरेंस कैसे आया?
सर, तीसरा सवाल यह है कि मैं आर.एस.एस.का स्वयंसेवक हूं, मुझे गर्व है । मैं भारतीय जनता पार्टी का एक कार्यकर्ता हूं, मुझे गर्व है ।…(व्यवधान)
HON. CHAIRPERSON: Will you concede?
डॉ. निशिकांत दुबे:नहीं सर, मेरी बात पूरी होने दीजिए ।…(व्यवधान)
HON. CHAIRPERSON: Let him complete.
… (Interruptions)
SHRI ADHIR RANJAN CHOWDHURY: Kaul and Shakdher is the Bible of the Parliament. …(Interruptions) I would like to refer …(Interruptions)
HON. CHAIRPERSON: Let him complete. You can respond. I will allow you.
… (Interruptions)
This is not proper.
… (Interruptions)
This is not proper. I will allow you. You will respond.
… (Interruptions)
SHRI ADHIR RANJAN CHOWDHURY: I have a point of order. …(Interruptions )
HON. CHAIRPERSON: What is the point?
… (Interruptions)
SHRI ADHIR RANJAN CHOWDHURY: Sir, the point of order is that the Bible of the Parliament is being referred, that he is simply distorting the Bible of the Parliament. He is distorting the sanctity of the Parliament.
डॉ. निशिकांत दुबे : यह क्या है?…(व्यवधान)
माननीय सभापति : आपबोल सकते हैं । मैं मना नहींकर रहा हूँ ।
…(व्यवधान)
HON. CHAIRPERSON: I will allow you to speak.
…(व्यवधान)
डॉ. निशिकांत दुबे : सभापति महोदय, मैं जहाँ पर रूका हुआ था, …(व्यवधान) मैं आरएसएस का स्वयंसेवक हूँ । मुझे भारतीय जनता पार्टी का कार्यकर्ता होने पर गर्व है ।…(व्यवधान) कल उन्होंने अपने तकरीर में कहा कि लालकिले पर भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता थे । मैं कांग्रेस पार्टी और पूरे देश के लोगों को चैलेंज करता हूँ कि यदि वे सिद्ध कर दें कि वहाँ बीजेपी का एक भी कार्यकर्ता था तो कोई इस्तीफा देगा या नहीं देगा,मैं सदन में घोषणा करता हूँ कि मैं एमपी से इस्तीफा दे दूँगा । …(व्यवधान) मैं अपनी पार्टी के अनुशासन के खिलाफ कोई बात सुनने को तैयार नहीं हूँ । …(व्यवधान) यदि वे प्रमाणित कर दें तो मैं ऑन फ्लोर ऑफ दी हाउस कह रहा हूँ कि मैं भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता के नाते सांसद से इस्तीफा दे दूँगा । …(व्यवधान)
सर, मेरा एक तीसरा सवाल है । यह जो आर्टिकल 121 है, इसके बारे में कल टीएमसी की नेता महुआ मोइत्रा ने बहुत बड़ा एलिगेशन लगाया । क्या इस कांग्रेस पार्टी और किसी विपक्षी पार्टी को यह कहना है कि वर्ष 1974 में … * किस तरह से चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया बन गए थे, तीन लोगों को किस तरह से बाइपास किया गया था और …* साहब कैसे बन गए थे । केशवानंद भारती केस में…* ने किस तरह का डिसेन्ट नोट दिया था, क्या यह कभी पार्लियामेंट में डिस्कस हुआ?
सर, मेरा केवल यह कहना है कि यह देश रूल और रेगुलेशन से चलता है । यह पार्लियामेंट रूल और रेगुलेशन से चलता है । यह जो डिस्टॉर्शन ऑफ फैक्ट है, यह कांग्रेस पार्टी कहीं की बात कहाँ उठाकर जो डिस्टॉर्ट करती है, मेरा आपके माध्यम से कांग्रेस के नेता अधीर चौधरी साहब से आग्रह है कि वह सदन से माफी मांगे, देश से माफी मांगे । वह कहें कि चाहे वर्ष 1919 का गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट हो, चाहे वह वीर सावरकर के बारे में हो, उन्होंने गलत टिप्पणी की है । आपने मुझे समय दिया । इन्हीं शब्दों के साथ जय हिंद - जय भारत ।
माननीय सभापति: श्री अधीर रंजन चौधरी जी ।
श्री अधीर रंजन चौधरी : सर, कलमैंने क्या कहा, उसकासारे रिकॉर्डयहाँ हैं । मैंनेजो कहा, वहसारे रिकॉर्डमें हैं । मैंकोई तैयार करकेनहीं बोलता, सारेरिकॉर्ड मेंहैं । मैंनेरिकॉर्ड मेंक्या कहा है?
“The provision for Address by the Head of State to Parliament goes back to the year 1921 when the Central Legislature was set up for the first time under the Government of India Act, 1919. The Act provided for the Address by the Governor-General in his discretion to either House of the Central Legislature. Though there was no specific provision in the Act for the Governor-General’s Address to both the Houses assembled together, in practice during the years 1921 to 1946, the Governor-General addressed the Lower House separately as well as both the Houses assembled together on a number of occasions.” सर, इसमें गलती क्या है?कॉल एंड शकधर ने जो लिखा है,वही बात मैंने आपके सामने रखी थी । वर्ष 1999 में जो गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट तय हुआ था, उसके चलते वर्ष 1921 से यह प्रेसिडेंशियल एड्रेस जो पहले गवर्नर-जनरल दिया करते थे,आजादी के बाद प्रेसिडेंट साहब देते हैं । इसमें गलती क्या है?
माननीय सभापति: गवर्नर-जनरल थे, प्रेसिडेंट नहीं थे । आप इसे करेक्ट कर लीजिए ।
श्री अधीर रंजन चौधरी : सर, मैंनेगर्वनर-जनरलकी बात कहीथी । इसे आपदेख लीजिए ।आजादी के पहलेगवर्नर-जनरलऔर आजादी केबाद प्रेसिडेंटहैं ।
माननीय सभापति: जबवर्ष 1946 से1950तककंस्टिटूअन्टअसेम्बली चलरही थी, तबभी गवर्नर-जनरलथे और 26 जनवरी, 1950केबाद जब प्रेसिडेंटबने, उससमय भी यहाँजितने सेशन हुए, उनकोप्रेसिडेंट राजेन्द्रबाबू ने एड्रेसकिया था । फर्स्टअमेंडमेंट केबाद वर्ष 1951 में, तबसाल में एकही ओपनिंग सेशनहोती थी, उसकोप्रेसिडेंट नेएड्रेस किया ।
श्री अधीर रंजन चौधरी : सर, मैंनेगलत क्या बोला? बेशकऐसा लगता हैकि माननीय सदस्यके ऊपर उनकीपार्टी ने कोईकमान सौंपी हो, कोईजिम्मेवारी सौंपीहो कि हमनेजो बात रखीहै, उसकाखंडन करना है । यह अलग बातहै ।
HON. CHAIRPERSON: Let us not get into that.
श्री अधीर रंजन चौधरी : सर, मैंनेप्रधानमंत्रीजी के सामनेयह बात रखीथी । प्रधानमंत्रीजी ने माननीयसदस्य को तैनातकिया । माननीयसदस्य प्रधानमंत्रीजी के बड़े लेफ्टिनेन्टहै, लेकिनमैंने कोई गलतबात नहीं कीहै ।
दूसरा, माननीयसदस्य ने भागलपुरकी बात कहीहै ।…(व्यवधान)
*SHRI S.C. UDASI (HAVERI): I am thankful for giving me this opportunity to participate in the discussion on the Motion of Thanks to the President’s Address 2021.
Under the Pradhan Mantri Garib Kalyan Yojana, 80 crore people were provided an additional five kilograms of free foodgrains per month for eight months. During this period, more than 14 crore gas cylinders were given free of cost throughout the country to poor women beneficiaries under the Ujjwala Scheme. The MSP has been increased to, at least, 1.5 times of the cost of production. Under the Pradhan Mantri Kisan Samman Nidhi Scheme, Rs. 1.13 lakh crore has been transferred to the accounts of small and marginal farmers as income support.
India managed the pandemic by developing a network of 2,200 labs, and by manufacturing thousands of ventilators, Personal Protective Equipment (PPE) kits, and test kits domestically. India is also conducting the world’s largest COVID-19 vaccination programme. Both the vaccines, under the programme, have been produced domestically. There has been a rapid decline in new cases of COVID-19 and recoveries have increased. Atmanirbhar Bharat Abhiyan is not just confined to manufacturing in India, but is also a campaign aimed at elevating the standard of living of every Indian as well as boosting the self-confidence of the country. The goal of Atmanirbhar Bharat will be further strengthened by self-reliance in agriculture. The Government is working on the ambitious scheme of Jal Jeevan Mission. Besides supplying water to every household (Har Ghar Jal), work on water conservation is also progressing at a rapid pace. Under this scheme, three crore families have been connected with piped water supply so far. Under this scheme, water connection is being provided on priority to brothers and sisters belonging to the Scheduled Castes and Scheduled Tribes as well as other deprived sections of the society.
In the last six years, India’s renewable energy capacity has grown two and a half times, whereas Solar Energy capacity has increased thirteen times. Today, almost one-fourth of the total energy production in the country is coming from renewable energy sources.
India has accomplished many tasks in the past few years and some of them are as follows:
· Abrogation of provisions of Article 370 for the people of Jammu and Kashmir.
· Citizenship Amendment Act has been passed by the Parliament. · The country has started benefitting from the creation of a post of Chief of Defence Staff. · Women’s participation in the Armed Forces is increasing. · The construction of a grand Ram Mandir has commenced. · India has registered a record improvement in the Ease of Doing Business ranking. · India has moved up from 65 to 34 in the World Tourism Index ranking. · The DBT has facilitated funds transfer of Rs. 13,00,000 crores to beneficiaries during six years. · Once we had only two mobile factories, now, India is the second largest manufacturer of mobiles. · Today, lakhs of middle-class citizens are benefiting from RERA. · New laws have been passed. More than 1500 archaic and irrelevant laws have been repealed. The number of persons whose lives have been touched by the Government: · More than 2.5 crore free electricity connections were given. · More than 36 crore LED bulbs were distributed. · More than 21 crore poor were linked to Pradhan Mantri Suraksha Bima Yojana. · About 9.5 crore people insured under Pradhan Mantri Jeevan Jyoti Bima Yojana. · The scope of the vaccination programme has been increased by including more diseases. · More than 3.5 crore children were vaccinated under Mission Indradhanush. · 100 per cent digitisation of ration cards completed. 90 per cent ration cards have been linked to Aadhar. · More than eight crore gas connections were given free of cost under Ujjawala Yojana. · More than ten crore toilets were built under Swachh Bharat Mission. · Pradhan Mantri Shram Yogi Maan-dhan Yojana was started. · More than 41 crore Jan Dhan Accounts were opened.
A politician aims for the next election and a visionary aim for the next generation. The hon. Prime Minister, Shri Narendra Modi Ji is a visionary who is aiming to change the country for the next generation. Thus, India is going to be a Shreshta Bharat in the coming generation.
I welcome and support the Address delivered by the Hon. President. Thank you.
*श्री राहुल कस्वां (चुरू): मैं महामहिम राष्ट्रपति जी के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रेषित करता हूँ । महामहिम राष्ट्रपति जी द्वारा भारत सरकार की जन कल्याणकारी योजनाओं के बारे में भारत की जनता को अवगत कराया गया । महामहिम राष्ट्रपति महोदय ने कहा कि भारत सरकार का एक मात्र उद्देश्य गरीब,दलित, पीड़ित, शोषित, वंचित, किसान, श्रमिक, युवा एवं अल्पसंख्यकों का कल्याण करना है । भारत सरकार द्वारा लगातार देश को प्रगति के पथ पर अग्रसित किये जाने हेतु कार्य किये जा रहे हैं । माननीय प्रधान मंत्री, श्री नरेन्द्र मोदी जी के निर्देशन में भारत आज नित नए आयाम स्थापित कर रहा हैं । आने वाले समय में आमजन हितकारी योजनाओं के खाके का निर्माण किये जाने हेतु भारत सरकार द्वारा लगातार कार्य किया जा रहा हैं और अनेकों जनकल्याणकारी योजनाओं व नीतियों के माध्यम से इन कार्यों का सृजन किया जा रहा हैं ।
कोरोना के इन संकट काल में जहाँ विश्व में यह चर्चा चल रही थी कि इस स्थिति से निपटने में भारत पूरी तरह से नाकाम साबित होगा और भारत में होने वाला नुकसान विश्व में सबसे अधिक होगा और पूरा विश्व टकटकी लगाकर भारत कि ओर देख रहा था । यह हो भी सकता था क्योकि जब इस वैश्विक महामारी ने हमारे देश में दस्तक दी उस समय हमारे देश में संसाधनों का अत्यधिक आभाव था । PPE किट और मास्क निर्माण का कार्य देश में बहुत ही कम मात्रा में हो रहा था और ये सभी वस्तुएं आयात कि जा रही थीं । भारत में वेंटीलेटर की भारी कमी थी और आवश्यकता के अनुरूप बेड भी उपलब्ध नहीं थे । लेकिन माननीय प्रधान मंत्री, श्री नरेन्द्र मोदी जी के दृढ संकल्पित नेतृत्व की वजह से यह संभव हुआ कि समय रहते भारत सरकार द्वारा जो कदम उठाये गए उसकी वजह से देश पूरी तरह से आत्मनिर्भर बन विश्व के लिए एक मानक स्थापित करने में सफल हो सका ।
देश के आम नागरिकों द्वारा भी इस कार्य में अपना-अपना पूरा सहयोग दिया और इसी से संभव हो सका हैं की आज भारत परे विश्व में PPE किट और मास्क का सबसे बड़ा उत्पादक बन गया हैं । वेंटीलेटर के मामले में भी आज देश पूरी तरह आत्मनिर्भर हो चुका हैं और देश में प्रयोग के साथ-साथ अन्य देशों को भी सहायता स्वरूप भिजवाये गए हैं । जहाँ देश में शुरुवात में 1000 से भी कम टेस्ट प्रति दिन की सुविधा थी, वहां देश में 10 लाख से भी अधिक टेस्ट किये गए । इसी प्रकार वैक्सीन के मामले में भी भारत विश्व गुरु बन रहा है । आज भारत में दो स्वदेशी वैक्सीन का उत्पादन पूर्ण गति से आगे बढ़ रहा हैं । भारत अपने नागरिकों को वैक्सीन लगाने के मामले में विश्व में तीसरा देश बन चुका हैं । वैक्सीन लगाने का सबसे बड़ा कार्यक्रम भी भारत सरकार द्वारा चलाया जा रहा है । भारत सरकार द्वारा पडोसी देशों को इस संकट के समय मुफ्त में वैक्सीन उपलब्ध करवाए जाने का कार्य भी किया जा रहा है ।
भारत सरकार द्वारा लगातार देश हित में योजनायें बनाई जा रही है,ताकि देश के अंतिम छोर पर बैठे आम आदमी तक योजनाओं का लाभ पहुँच सके । कोरोना काल के समय प्रधान मंत्री गरीब कल्याण योजना के माध्यम से देश के 80 करोड़ लोगों तक 8 महीने तक मुफ्त अनाज और दाल पहुँचाई गई । संकट के समय मनरेगा के माध्यम से अतिरिक्त कार्य उपलब्ध करवाया गया ताकि प्रवासी मजदूरों को अपने क्षेत्र में ही कार्य मिल सके । ट्रेनों के माध्यम से प्रवासी मजदूरों को उनके गन्तव्य स्थान तक पहुँचाया गया ।
भारत सरकार कृषि क्षेत्र में भी बुनियादी ढांचे में परिवर्तन कर देश के किसान की आय 2022तक दोगुनी करने के लिए प्रयासरत है और पिछले 6 साल में भारत सरकार द्वारा देश में होने वाले खाद्यानों, दलहनों व तिलहनों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में 50%से अधिक की वृद्धि की जा चुकी है । इसके साथ ही सरकार उन्नत बीज व खाद के माध्यम से कृषि की लागत को भी कम किये जाने का कार्य कर रही है । किसान उत्पादन संगठनों (FPO) के माध्यम से कृषि क्षेत्र को भी आत्मनिर्भर बनाये जाने का कार्य भारत सरकार द्वारा किया जा रहा है, जिसके माध्यम से छोटे एवं सीमांत किसानों को भी उन्नत तकनीक व मार्केटिंग की सुविधाएँ उपलब्ध हो सकेंगी और किसान बाजार भाव पर सीधे अपने उत्पादन को बेच सकेंगे । किसानों को संबल दिए जाने हेतु भारत सरकार द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कि जा रही खरीद में वृद्धि करने का कार्य किया हैं ।
भारत सरकार द्वारा देश हितकारी जन कल्याणकारी योजनाओं का क्रियान्वन लगातार किया जा रहा हैं । जिसका परिणाम हैं कि देश के प्रत्येक नागरिक को खुद का घर उपलब्ध हो सके इसलिए भारत सरकार अपने वादे पर कटिबद्ध है और लगातार इस ओर अपने सार्थक प्रयास कर रही है । अगले वर्ष तक देश के प्रत्येक नागरिक को मकान उपलब्ध हो यही भारत सरकार का ध्येय है । भारत सरकार द्वारा जल जीवन मिशन के तहत देश के हर घर में नल के माध्यम से पानी पहुँचाने की बहुत ही महत्वाकांक्षी योजना का क्रियान्वन किया जा रहा है ।
देश को औद्योगिक दृष्टि से आगे बढ़ाने हेतु भारत सरकार लगातार प्रयासरत है ।Ease of Doing Business की रैंकिंग में भारत का स्थान बढ़ना इस ओर एक सकारात्मक सुधार है । भारत सरकार द्वारा लगातार उद्योगों को सुविधाए दिए जाने से ही ये संभव हुए हैं कि विश्व में मोबाइल उत्पादन की सबसे बड़ी इकाई आज भारत में है । कोरोना काल में भारत सरकार द्वारा उद्योगों को राहत दिए जाने हेतु 20लाख करोड़ के आर्थिक पैकेज की घोषणा की गई थी जिससे संकट के समय इन उद्योगों को संबल मिला और देश में औद्योगिक गतिविधियाँ लगातार बढती रही । देश ने GDP में सबसे बड़ी गिरावट भी इस समय देखी, लेकिन भारत सरकार के सकारात्मक प्रयासों से यह संभव हुआ है कि इस वर्ष विश्व कि सबसे तेज गति से बढ़ने वाला अर्थव्यवस्था भारत की ही होगी ।
भारत सरकार द्वारा जम्मू कश्मीर से धारा 370 और35A हटा कर इसे केंद्र शासित प्रदेश बनाकर आतंकवाद और अलगाववाद को चोट पहुँचाने का कार्य किया है और इस क्षेत्र के विकास के लिए बहुत ही बेहतरीन योजनायें भारत सरकार द्वारा बनाई गई है । सैन्य दृष्टि से भी यह भाग अत्यंत ही महत्वपूर्ण है व यहाँ पर भारत सरकार द्वारा विश्व स्तरीय आधारभूत संरचना के विस्तार का कार्य किया जा रहा है । जिससे आज यह क्षेत्र पूरी तरह से हर मौसम से सीधे देश के अन्य भागों से संपर्क में रह सकता है और आने वाले समय में अनेकों विकास कार्य इस क्षेत्र में हो सकेंगें । भारत सरकार द्वारा देश कि आवश्यकता को देखते हुए काफी समय से लंबित पड़े चीफ ऑफ़ डिफेन्स स्टाफ के पद को सृजित करते हुए देश की सैन्य इकाइयों को एक नई ऊर्जा देने का कार्य किया है । मैं पुनः महामहिम राष्ट्रपति महोदय जी को धन्यवाद देना चाहता हूं कि देश की प्रगति के लिए लागू की गई जनकल्याणकारी योजनाएं राष्ट्र को उन्नति की ओर अग्रसित करेंगी ।
*DR. SUBHASH RAMRAO BHAMRE (DHULE): I thank the hon. President for his speech to both the Houses of Parliament. As well all know, last year had been a testing time for the Modi Government. COVID-19 pandemic made its impact on the whole world. The situation in our country was even worst. It is because to control COVID-19, the Government had no option, but to clamp the lockdown in the country. The countrymen reposed the faith in our Prime Minister and responded very positively to Prime Minister’s appeal. Lockdown had its impact on the economy of the nation. In this testing time, the Prime Minister had supported the poor people of our country. The Prime Minister saw to it that 80 crore poor people get food for eight months. More than 31 crore poor people got money for three months in their bank accounts. Agriculture and MSME sectors are the two main pillars of our economy. In this difficult time, the farmers were supported and the schemes to help the farmers were announced. Eight crore farmers were given 2000 rupees in their bank account. Largest-ever economic package was given to different sectors of the society to support them. MSMEs were given a package to sustain in this lockdown period. It is because agriculture and MSME are the two sectors which give maximum employment in the country. The whole world has appreciated the Indian Government for its role in controlling the COVID-19 pandemic. I congratulate the hon. Prime Minister and the scientists of India for the ‘made in India’ vaccine. Today, the Government has not only provided vaccine to the people of India, it has also provided vaccine to many nations of the world. We are proud that the Government, under the leadership of the hon. Prime Minister Modi ji has provided vaccine to the whole world.
*DR. KALANIDHI VEERASWAMY (CHENNAI NORTH): I express my gratitude to the Hon. President for his Address to both the Houses of Parliament and in turn to the nation. I understand Sir, irrespective of his personal opinion either in approval or otherwise, he is following the established conventions.
The whole world has faced a pandemic of epic proportion, the kind of which has not been seen in almost a Century. While several Governments of the world have handled it to the best of their ability, the self-praise by this Government cannot be seen as anything other than bragging, boasting, self-flattery or even conceit.
It is sad to note that the frontline workers like doctors, nurses, paramedical and allied workers, who worked tirelessly and valiantly in the face of risk of death in the process, and where several hundreds have actually lost their lives, find no mention in his Address. Even worse, families of these warriors, who lost their lives, are still waiting for the financial assistance from the Union and the State Governments.
Also, the Jawans, who lost their lives defending the borders of our nation, were ignored in his speech. We have to remember them with gratitude. They stand vigilant on the border, risking their lives to ensure that we, the citizens, can sleep peacefully. I hope the recognition due to them is duly accorded.
It is also sad to note that the Government has ignored the plight of the Tamils despite a representation from our Party Leader. The repeated atrocities by the Sri Lankan Government on Tamils, who are citizens of that country, is condemnable. Apart from the loss of several thousand innocent civilians in the last leg of the civil war caused by the inhuman military attack, the military has also desecrated the Mullivaikkal Memorial situated in the University of Jaffna. This happened within the few days of the visit of the Hon. External Affairs Minister to Sri Lanka where he had reiterated that it was in the interest of the Sri Lankan Government to treat the Tamils in a civil and humane manner. It is deplorable that the Government of India has remained mute on this issue. You can understand Sir, the anger of the Tamilians living in Tamil Nadu as also in the world and the reason for their ostracization of the BJP Party.
To add fuel to fire, there are repeated attacks on fishermen. Even recently, four fishermen were brutally murdered by the Sri Lankan Coastguard and the Government of India remained mute. It is surprising to note that the notable personalities, like cricketers and corporate success models, are termed as Indians, but when it comes to fishermen, they are called Tamil fishermen and not Indian Fishermen. This is shameful and I hope that the Government will stop showing this stepmotherly treatment towards our fishermen and take remedial measures to ensure safety of their lives and property.
Coming to the efforts of this Government in battling COVID-19, the ill or un-planned announcement of the lockdown without adequate preparation, and poor outreach measures in the initial phase of the lockdown paved the way for starvation and suffering in monumental proportions. The blind eye turned to the sufferings of the migrant workers has opened our eyes to the role played by these migrant workers in nation building. I hope the Government has learnt some lessons and at least for the future it will ensure that their lives are safeguarded through its National Disaster Relief Force and planners.
Speaking of agriculture Sir, it is sad that when the country is in the throes of this pandemic, the whole world witnessed the way in which the Farm laws were passed in the Rajya Sabha. When the Government fail to follow the democratic process in the Parliament, they will have to answer the people. The tireless protest of farmers for several weeks, despite the adverse weather, should wake the Government and they should take them into confidence. Sir, when a child wants to play even the grandfather becomes an elephant by kneeling on his limbs to make the child happy. He does not give lecture or reprimand the child to grow up. I would request the Government to treat these farmers as their children and take them along by following logic and having a dialogue rather than using police and paramilitary forces against them.
The decision of the Supreme Court to put a stay on the case regarding the farmers’ issue was the gravest injustice and it tantamount to murder of all democratic processes and institutions. I hope the Government repeals these laws and work on getting consensus of the people before passing such sensitive Bills or Acts.
Regarding manufacturing and job creation, Sir, it has been clearly documented that this pandemic has enriched one percent population of the creamy layer. The poor, salaried people, vendors and MSMEs have suffered the most. Unemployment has reached the never before figure. This has left thousands of families with no hope for the future. The number of rising petty crimes, Sir, is a barometer of the employment situation in our country.
Women and Child development is another area where I hope the Government should put in enough effort as it relates to their safety, development and wellbeing. The rising number of crimes against both these segments of our population is disturbing. The POCSO Act, which is supposed to protect children, should be amended adequately such that no offender escapes the clutches of the law. We see very poor conviction rates with the present structure.
As regards minority and tribal affairs, Sir this Government, which claim to have a Hindutva agenda, usedalits and lower caste people for their Hindu militant agenda. When it comes to the promotion and upliftment of these people, the Government is not willing to provide them their due. Sir, Tamil Nadu has a 69 per cent reservation policy and we have emerged as the forerunners in several parameters like, economy, health etc. I urge the Government to adequately address this issue.
A corporate company is trying to expand its port business in my constituency, in a place called Kattupally, North Chennai, in an illegal and unconstitutional manner breaking all laid down rules and laws and showing utter disregard to eco sensitivities, environmental safety, and the livelihoods of local people. I hope the Government ensures that this nefarious design is stopped in the interest of justice and welfare of our present and future generations.
So far as the overall performance of this Government is concerned, people have a lot more unfulfilled expectations and the claims of the Government are found to be untrue in several instances. With these observations, I once again thank the Hon. President and hope that the Government will rise above politics and will perform for all the segments of the society. Nandri.
माननीय सभापति: लावूश्रीकृष्णा देवरायालूजी ।49
SHRI LAVU SRI KRISHNA DEVARAYALU (NARASARAOPET): Hon. Chairperson, Sir, I thank you on behalf of my Party for giving me this opportunity to speak on the Motion of Thanks on the President’s Address to both the Houses of Parliament. …(Interruptions)
HON. CHAIRPERSON: Just a moment, Shri Lavu Sri Krishna Devarayalu.
डॉ. निशिकांत दुबे :चेयरमैन सर,इन्होंने यह कहा कि ब्रिटिश शासन का वीर सावरकर ने समर्थन किया,भागलपुर के सदन की बात कही । क्रिप्स मिशन के बाद जो कांग्रेस और ब्रिटिश रूल में समझौता हुआ, मैं वह कागज लेकर आया हूं । क्या मैं कहूं कि कांग्रेस ब्रिटिश के … * थे । मैं वीर सावरकर जी की बात को कोट करूं ।…(व्यवधान)
श्री अधीर रंजन चौधरी : सर, मुझेभी मौका दियाजाए ।…(व्यवधान)
माननीय सभापति : अभीराष्ट्रपति जीके अभिभाषण परचर्चा हो रहीहै ।
…(व्यवधान)
माननीय सभापति : कुछनहीं जाएगा ।
…(व्यवधान)
HON. CHAIRPERSON: We are discussing about the hon. President’s Address. Let us confine our discussion to the Motion of Thanks on the President’s Address. Everybody is interested in history …(Interruptions)
PROF. SOUGATA RAY (DUM DUM): I want a clarification from Nishikant Dubey Ji. …(Interruptions)
HON. CHAIRPERSON: We can discuss it when we go out of this House.
PROF. SOUGATA RAY: Please give me one minute, Sir. I want a clarification whether Veer Savarkar had asked for maafi from the British Government when he was in Andaman.
HON. CHAIRPERSON: Let us not go into this. Nothing will go on record.
PROF. SOUGATA RAY: I also want to know whether he was released on that ground.
HON. CHAIRPERSON: Nothing will go on record. Lavu Krishna Ji.
…(Interruptions)
SHRI ADHIR RANJAN CHOWDHURY: He has referred my name. You have nodded in approval to give me time to explain my point. …(Interruptions) I am seeking your permission to have a little intervention, provided it is allowed by you.
HON. CHAIRPERSON: I have allowed you. You have amply demonstrated your intellect.
SHRI ADHIR RANJAN CHOWDHURY: Sir, it is another issue. The issue regarding Bhagalpur was raised by Dubey Ji.
HON. CHAIRPERSON: No, let us not get into that issue. …(Interruptions) Adhir Ranjan Ji, please have your seat. …(Interruptions)
SHRI ADHIR RANJAN CHOWDHURY: Sir, please allow me to speak only one line.
HON. CHAIRPERSON: Then again, he will stand up and will say something else. Shri Lavu Krishna Ji. I am sorry. …(Interruptions)
SHRI LAVU SRI KRISHNA DEVARAYALU: The House is not in order Sir.
HON. CHAIRPERSON: Sri Krishna Ji, you can wield your chakra now.
SHRI LAVU SRI KRISHNA DEVARAYALU: I thank you on behalf of my Party for giving me the opportunity to speak on the Motion of Thanks on the President’s Address to both the Houses of Parliament.
Not specific to any region, state or country, but across the globe, every human has endured one of the most difficult years in his or her life due to the COVID-19 pandemic. As we are moving to the post-COVID era, let us show our gratitude to our doctors, nurses, paramedics, police, sanitation workers, and all other frontline workers, who have put their lives to risk to help us all to sail through this difficult period. It is important to highlight the efforts taken by the State Governments and the Central Government to aid the recovery from the COVID-19 pandemic. We have come a long way in this period; from being a net importer of PPE kits, we have now become a net exporter; from having a handful of testing labs, we are now having around 2,364 testing labs across the country; and from importing expensive ventilators, we are now manufacturing affordable ventilators. Today, India’s vaccine manufacturing capacity is a global asset. We were the quickest to reach the three million vaccination mark. Made in India vaccines are being shipped globally from Bhutan to Brazil. Even my State of Andhra Pradesh has done exceedingly well in these difficult times.
The State of Andhra Pradesh has one of the lowest fatality rates of 0.8 per cent and has one of the highest testing rates of 252 test per thousand people. Today, AP has less than one hundred active cases, which is a big achievement for a State with five crores of population.
I would like to impress upon the House that despite challenges, under the leadership of our hon. Chief Minister, Shri Y.S. Jaganmohan Reddy, Andhra Pradesh has been ranked as the third best governed State as per the Public Affairs Index. The State of Andhra Pradesh has been ranked the best State in terms of ease of doing business. Andhra Pradesh has secured the second rank with respect to Commerce and Industries in the Good Governance Index. The State of Andhra Pradesh is the only State in the Southern India to achieve positive GDP growth rate and tax revenue growth rate between June to December, 2020.
While Andhra Pradesh has done well in these challenging times, there are some legacy issues which were inherited from the bifurcation of the State in the year 2014. If it is resolved, it will speed up the development story of Andhra Pradesh. The YSR Congress Party has repeatedly raised the demand for a Special Category Status to Andhra Pradesh. The hon. Chief Minister of Andhra Pradesh has met the hon. Prime Minister and hon. Home Minister sixteen times since he came to power in the year 2019 requesting for a Special Category Status.
Special Category Status was a promise made by former Prime Minister on the floor of Rajya Sabha during the bifurcation of the then State of Andhra Pradesh. The 15th Finance Commission has mentioned that the Union Government can take a decision regarding the Special Category Status. In fact, in 2014 Seemandhara election manifesto, BJP itself promised that the Special Category Status would be extended from 5 years to 10 years. We must realize that delivering on the commitment of Special Category Status made to the people of Andhra Pradesh is the only option today.
Coming to the second legacy issue is with regard to the Polavaram irrigation project which is the lifeline of Andhra Pradesh. It was notified as a national project under the AP Reorganisation Act, 2014. We have repeatedly asked for the clearance of revised cost estimate of Rs. 55,000 crore. We have also requested that the State be reimbursed with Rs. 1569 crore which it has already spent on the project. The YSR Congress Party requests that the funding for the project be finalized for the benefit of the drought prone areas of Andhra Pradesh and farmers in that region. The AP Reorganisation Act, 2014 also committed an annual grant of Rs. 350 crore for the seven backward districts of Andhra Pradesh. However, grants worth Rs. 700 crore are still pending with the Union Government. I request the Union Government to release these grants immediately. The AP Reorganisation Act, 2014 also sanctioned IIT, IIM, IISER, NIT, Central University, Petroleum University, Agriculture University, IIIT, Tribal University and AIIMS in Andhra Pradesh. The funds of these Universities/institutes have not been released even after seven years. Except for AIIMS, none of these institutes are running a permanent campus. Recently, the Central Government took a decision to privatize the Vizag Steel Plant which employs 20,000 people. The plant was set up after a decade long agitation by Andhra people and is the pride of Telugu speaking people. It is only recently the plant has turned unprofitable. Instead of selling it, the Central Government should take efforts to bring a ‘V’ shaped recovery in the operations of the plant through financial restructuring. If the legacy issues arising out of bifurcation are resolved, then the resilient entrepreneur and growth focussed people of Andhra Pradesh led by Chief Minister Shri Y.S. Jagan Mohan Reddy will leapfrog into the next era of development. The excellent handling of COVID, high governance rankings and high growth rate are visible to every citizen of Andhra Pradesh except for the Opposition Party, TDP. They have not been able to digest the 2019 defeat and are playing a disruptive role in the State. They have manufactured stories either to mislead the Parliament or misinform the people of Andhra Pradesh through Media.
On 6th February, 2020, in the same House, a TDP Member has claimed that KIA Motors is withdrawing from Andhra Pradesh. Within three months, KIA reposed faith in Andhra Pradesh and on its Chief Minister Y.S. Jagan Mohan Reddy. They came forward to invest additional 54 million dollars. They have misled in the same House. …(Interruptions)
Andhra Pradesh is a revenue deficit State but energy surplus State. Even when the State is energy surplus, TDP signed inflated Power Purchase Agreements. The YSR Government revised these PPAs. The prices came down from five rupees per unit to Rs. 2.5 per unit. Today, the tax-payers of Andhra Pradesh are benefiting because of these renegotiated PPAs. Again, they are misleading the people of Andhra Pradesh and also this House.
Today, the most dangerous and harmful story that they are trying to bring is about temple vandalism. We would like to bring to the notice of the House that the State Government has already asked for CBI inquiry into this matter relating to the burning of temple chariot at Sri Lakshmi Narsimha Swamy Temple. In many of the temple vandalism cases that have happened in the last six months, thorough investigation by State police has revealed involvement of …* cadres. …(Interruptions) …* wants to disturb the peaceful situation in the State. … * wants to pit two religious communities against each other. …(Interruptions) These acts cannot be tolerated in a secular democracy.
Sir, in 2014, they were sitting on that side of the House. They were enjoying two Minister berths with them. In 2019, they have moved to this side of the House. They are just playing tricks with the people of Andhra Pradesh and also in this House.
Sir, the President in his Address has mentioned about Adarsh Gram. This is the vision of Mahatma Gandhi.
HON. CHAIRPERSON : Mr. Sri Krishna, you have a number of points to make. Do not get distracted. Look at me and make your points.
SHRI LAVU SRI KRISHNA DEVARAYALU: Andhra Pradesh wants to achieve this dream through free and fair panchayat elections. The State Government has brought a law to control money and liquor. The Andhra Pradesh Government has scheduled panchayat elections from March, 2020 where there were only handful of cases.
The…* cancelled them by citing COVID-19 as a reason. The …* did not take stock of the situation by consulting either the Chief Secretary or with the State Health Department …(Interruptions)
HON. CHAIRPERSON : Can we not avoid this?
SHRI JAYADEV GALLA (GUNTUR) : Sir, he is mentioning about a Constitutional Authority …(Interruptions) I object to this.
HON. CHAIRPERSON: You are right.
SHRI LAVU SRI KRISHNA DEVARAYALU: Sir, I am not misleading the House. If I am misleading the House, you can correct me. But I am not misleading the House …(Interruptions)
HON. CHAIRPERSON: That is not so. But you are making certain allegations against a Constitutional Body.
SHRI LAVU SRI KRISHNA DEVARAYALU: Sir, I am only stating certain facts that has happened. I am not making any allegations.
HON. CHAIRPERSON: The matter is sub-judice.
SHRI LAVU SRI KRISHNA DEVARAYALU: I am only rephrasing the facts and the events that have happened during the last one year… (Interruptions)
HON. CHAIRPERSON: You are intelligent enough. The matter is sub-judice.It is better if you can avoid it.
SHRI LAVU SRI KRISHNA DEVARAYALU: You can examine this and delete it afterwards.
HON. CHAIRPERSON: It would be better if you avoid it. I would like to see it again.
SHRI LAVU SRI KRISHNA DEVARAYALU: Now when the attention of the whole country is on COVID-19 vaccine, the … * wants to hold elections. In an unprecedented, move the … * asked the Minister of Panchayati Raj to be placed under house arrest …(Interruptions) Luckily the High Court intervened and over-ruled this order. In another surprising move, the … * questioned India’s long-standing …(Interruptions) tradition of unanimous election …(Interruptions)
SHRI JAYADEV GALLA: Sir, again he is referring to the … * …(Interruptions)
SHRI LAVU SRI KRISHNA DEVARAYALU: Sir, the country has witnessed unanimous election to the highest offices of the President and the Vice-President …(Interruptions)
HON. CHAIRPERSON: Shri Sri Krishna, there are more Members from your party to speak.
SHRI P.V. MIDHUN REDDY (RAJAMPET) : Sir, he is the second Member to speak from our Party.
HON. CHAIRPERSON: Yes, he is the second Member to speak from your party. You have time but there are some more Members. The list has come. Please conclude in another two minutes.
SHRI LAVU SRI KRISHNA DEVARAYALU: This country has witnessed unanimous elections even to the highest Constitutional offices like the offices of the President and the Vice-President. We have seen unanimous elections even at the Panchayat levels in States like Haryana, Punjab, Gujarat, Himachal Pradesh which preserve social harmony. With the action of the…* there is a feeling amongst the people of Andhra Pradesh that … * is fighting the elections on behalf of the Opposition party.
SHRI JAYADEV GALLA: Sir, I have a point of order.
HON. CHAIRPERSON: Please quote the rule.
SHRI JAYADEV GALLA: Sir, rule 352. He is mentioning the … * over and over again which is a Constitutional authority. Cases have been filed in the court …(Interruptions)
HON. CHAIRPERSON: I have already said that. Please conclude now.
SHRI LAVU SRI KRISHNA DEVARAYALU: Sir, you can go through my speech.
HON. CHAIRPERSON: Yes, I will do.
SHRI LAVU SRI KRISHNA DEVARAYALU: Sir, in conclusion, the COVID-19 Pandemic has shown us that people and the Government need to come together in crisis. Similarly, the State and the Central Government need to come together for recovery, be it delivery of vaccines to all Indians, providing tap water to every household, laying road, developing ports, bringing investments, generating jobs, alleviating poverty and securing the food and energy needs of all Indians. The Centre and the State need to come together to realise the vision of a prosperous and peaceful India.
Sir, today, through you, I have expressed the anguish of 5 crore people of Andhra Pradesh. All MPs from Andhra Pradesh have raised these issues repeatedly in the past six years. The commitments made to Andhra Pradesh under an Act of Parliament have not been honoured. The issues that I have placed before the House are not mere words and numbers. They are the dreams and aspirations of people of Andhra Pradesh.
HON. CHAIRPERSON: Not been honoured fully.
SHRI LAVU SRI KRISHNA DEVARAYALU: We have been asking for a long-time for a special category status to the State of Andhra Pradesh. The Central Government must deliver on these promises. In the next Presidential Address, I hope, the point of granting a special category status to the State of Andhra Pradesh will find a place.
Thank you.
कुंवर दानिश अली (अमरोहा): माननीयसभापति जी, आपनेमुझे महामहिमराष्ट्रपति जीके अभिभाषण परबोलने का मौकादिया, इसकेलिए मैं आपकोधन्यवाद देताहूं ।
आजमैं यहां महामहिमराष्ट्रपति जीके अभिभाषण परबोलने के लिएखड़ा हुआ हूं । दिल्ली कीतीनों सीमाओंपर हजारों किसानपिछले ढाई महीनेसे ज्यादा वक्तसे इस ठिठुरतीहुई सर्दी औरबारिश में सरकारसे गुहार लगारहे हैं किउनकी जो जायजमांगें हैं, उन्हेंसरकार सुने ।
लेकिन, बदकिस्मती इस बात की है कि सरकार अपनी जिद छोड़ने को तैयार नहीं है । सरकार की नीतियां और सरकार के कार्य को महामहिम राष्ट्रपति जी दोनों सदनों के सामने रखते हैं । अब सरकार भले ही …* सरकार हो या भाषणजीवी सरकार हो, महामहिम राष्ट्रपति जी को सरकार के लिखे हुए भाषण को वहां पढ़ना है । मैं सिर्फ यह कहना चाहूंगा कि आज जब एक तरफ चीन हमारी सीमाएं लांघकर के धरती पर अपने गाँव बसा रहा है,काफी सारी जमीन पर कब्जा कर चुका है, लेकिन सरकार को जो वहां तत्परता दिखानी चाहिए थी,हमारे जवानों को, हमारी आर्म्ड फोर्सेज को ग्रीन लाइट देकर कि जाओ मुकाबला करो,लेकिन पता नहीं किस दबाव में यह सरकार चीन के खिलाफ अपनी नीति स्पष्ट नहीं कर रही है । वे कंटीले तार,बाड़, कंक्रीट की दीवारें इन किसानों के सामने,जो दिल्ली में अपनी गुहार लगाने आए हैं, उनके सामने खड़ी की जा रही हैं । देश का किसान अन्नदाता के साथ ये सुलूक करना कहीं से भी जायज नहीं है । मैं यही कहूंगा कि कई अंतर्राष्ट्रीय आवाजें भी इस किसान आंदोलन के बीच में उठी हैं । मेरी बहुजन समाज पार्टी की नीति साफ है कि हमारे देश के इंटरनल मामले में अंतर्राष्ट्रीय हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए । ये हमारा अंदरूनी मामला है । भारत की यह परंपरा रही है कि हम कभी भी किसी दूसरे देश के लोकतंत्र में इंटरफेयर नहीं करते हैं । लेकिन,ये परम्पराएं किसने तोड़ी? हम आज जिनको ये सीख दे रहे हैं कि यूएस स्टेट डिपार्टमेंट हो,यूनाइटेड नेशन्स हो, वे लोग हमारे यहां जो आंदोलन चल रहा है, उस पर बोल रहे हैं । लेकिन, जब हमारे देश के प्रधान मंत्री जी जाकर दूसरे देश के लोगों को यह कह रहे थे कि आपको कौन-सी सरकार चुननी है, ‘अबकी बार ट्रंप सरकार’,यह मौका हमारी विदेशी नीति,जो बदली गई,उन्होंने दिया है । लेकिन, मैं सिर्फ इतना ही कहूंगा कि सरकार तो आती है, जाती है । यह इतिहास है इस दुनिया का । जब-जब, जो सरकारें किसानों से टकरायी हैं,उन सरकारों का हश्र अच्छा नहीं हुआ है । अभी एक बीजेपी के सांसद यहां कह रहे थे कि मैं इस्तीफा दे दूंगा, अगर कोई यह साबित कर दे कि गणतंत्र दिवस के दिन भाजपा का कोई कार्यकर्ता लाल किले पर मौजूद था । मैं कहना चाहता हूं कि शायद जिस व्यक्ति को, जिस उपद्रवी को आज हमारी पुलिस ने अरेस्ट किया है, वह … * के साथ उसकी फोटो थी । किसलिए … *जी के साथ उसकी फोटो थी? मैं यह कहना चाहता हूं कि माननीय…* जी के साथ उसकी फोटो थी,तो उनके फोटोफ्रेम में उसे कोई मंत्री और सांसद भी नहीं जोड़ सकता । वह व्यक्ति,वह उपद्रवी कैसे माननीय …* जी के साथ फोटो में मौजूद था? आखिर किसने उन उपद्रवियों को इजाजत दी कि लाल किले पर चढ़कर देश के साथ ऐसा करें । मैं ज्यादा कुछ न कहते हुए,मैं इतना ही कहूंगा कि ये देश को कहां लेकर जा रहे हैं?
सरकारी पार्टी की कुछ जमातें,चंदा इकट्ठा करने के लिए निकलीं । मध्य प्रदेश के अंदर क्या हुआ,क्या वह किसी से छुपा है? पथराव हुआ और अगले दिन वहां के एडमिनिस्ट्रेशन ने उन गरीबों को पहले पत्थरों से मारा, उनकी पिटाई की, फिर उनको जेल भेजा और बिना नोटिस दिए अगले दिन मध्य प्रदेश के अंदर उन गरीब मजलूमों के घरों को बुल्डोज़र से तोड़ दिया गया । क्या हम ऐसा मुल्क देखना चाहते हैं ।…(व्यवधान) उत्तर प्रदेश में भी किसी से छुपा हुआ नहीं है । उत्तर प्रदेश के अंदर जब भी मन आता है,तब सरकारी बुल्डोज़र किसी के भी मकान पर चल जाता है ।…(व्यवधान) सभापति महोदय,मैं केवल इतना ही कहना चाहता हूं कि हाथरस के अंदर क्या हुआ?…(व्यवधान) महोदय,मैं बस दो मिनट के अंदर अपनी बात खत्म करूंगा । महोदय, हाथरस के अंदर क्या हुआ?
माननीय सभापति : प्लीज़कन्क्लूड ।
…(व्यवधान)
कुंवर दानिश अली : महोदय, एकदलित महिला केसाथ, एकबच्ची के साथजो बलात्कारकी घटना घटीहै और ये कहतेहैं, मुझेइस बात का अफसोसहै कि ये जिनमहापुरुषों कानाम लेते हैं । इन्होंने कईबार चौधरी चरणसिंह जी कानाम लिया है । लेकिन जब चौधरीचरण सिंह जीके पोते जयंतचौधरी जी हाथरसके अंदर उसदलित महिला कोन्याय दिलानेके लिए गए, तोउनको लाठी औरडंडों से पीटागया था । अगरउनके साथी नहोते, तोचौधरी चरण सिंहजी के पोतेवहां से जिंदानहीं लौट पाते ।…(व्यवधान)
सभापतिमहोदय, मैंसिर्फ एक मिनटमें अपनी बातखत्म करूंगा ।…(व्यवधान)अभी बजट पेशहुआ है । बजटके ऊपर एजुकेशनबजट में 6 प्रतिशतकी कमी की गईहै । मेरे ख्यालसे इस सरकारका यह नाराहै कि अगर पढ़ेगाइंडिया, तोसवाल पूछेगाइंडिया । इसलिएसारे विश्वविद्यालयऔर सारे एजुकेशनसेक्टर को डिस्ट्रॉयकर दो । मेरेपड़ोस के जिलेमें एक यूनिवर्सिटीहै, जिसकानाम मोलाना मोहम्मदअली जौहर यूनिवर्सिटीहै । रोज़ उसकोभी तोड़ने केलिए बुल्डोज़रतैयार रहता है । लेकिन यह सरकारशिक्षा खत्मकरना चाहती है ।…(व्यवधान)सभापतिमहोदय, ज्यादावक्त न लेतेहुए, मैंइतना ही कहूंगाकि यह सरकार….(व्यवधान) महोदय, मैंबस एक मिनटमें अपनी बातखत्म करूंगा ।…(व्यवधान)
माननीय सभापति : एकमिनट खत्म होगया है ।
…(व्यवधान)
कुंवर दानिश अली : महोदय, इससरकार का एजेंडासाफ है कि डॉक्टरबाबासाहेब भीमरावअंबेडकर के संविधानको नहीं माननाहै । उनका जोदिया हुआ आरक्षणहै, वह कैसेखत्म हो । सबकुछ प्राइवेटसेक्टर्स केहवाले कर देना । जो पीएसयूज़पिछले 70 सालोंमें बने हैं, उनकोप्राइवेटाइज़कर दो, जिससेकि एससी/एसटीके बच्चों कोजो नौकरियांमिल रही थीं, उनकोखत्म कर दिया जाए । मैं आखिरीमें यही कहूंगाकि बंदरगाह बेचदो, एयरपोर्टबेच दो, रेलबेच दो और जोसवाल पूछे, उसेजेल भेज दो । मैं इस बातके लिए तैयारहूं कि आपसेसवाल पूछता रहूंगाऔर जिन आंदोलनकारीकिसानों को कहाकि वह आंदोलनजीवीहैं ।…(व्यवधान)
माननीय सभापति : आपबैठ जाइए ।
…(व्यवधान)
कुंवर दानिश अली : महोदय, मैंअपनी बात खत्मकर रहा हूं । स्वर्गीय डॉक्टरराम मनोहर लोहियाजी ने कहा थाकि जिस लोकतंत्रकी सड़कें सूनीहोती हैं, उसकीसंसद जो है…(व्यवधान)आप जानते हैं ।…(व्यवधान)
माननीय सभापति : श्रीमती हरसिमरत कौर बादल जी ।
…(व्यवधान)
कुंवर दानिश अली :महोदय, इसलिएआप कम से कमउन महापुरुषोंकी बात तो मानो । महोदय, मैंएक सेंटेंस मेंअपनी बात कन्क्लूडकर रहा हूं । आज जो देशमें हो रहाहै, गरीबको, मजलूमको, अकलियतको न्याय नहींमिल रहा है । जो वह न्यायहै, आज ज्यूडिशियरीमें भी क्राइसिसआ गया है । …(व्यवधान)मैंइसी के साथअपनी बात खत्मकरता हूं ।…(व्यवधान)
माननीय सभापति : अबआपकी बात रिकॉर्ड में नहीं जाएगी ।
…(व्यवधान)
…* माननीय सभापति : श्रीमती हरसिमरत कौर बादल जी ।
…(व्यवधान)
माननीय सभापति : आपका एक मिनट कभी खत्म ही नहीं हो रहा है ।
…(व्यवधान)
कुंवर दानिश अली : महोदय, स्वर्गीयअरुण जेटली जीने संसद केअंदर कहा थाकि आज के जोजजेज़ हैं, जोज्यूडिशियरीहै ।…(व्यवधान)
माननीय सभापति : बैठ जाइए ।
…(व्यवधान)
कुंवर दानिश अली : महोदय, वहइस बात को तयकरती है किरिटायरमेंट केबाद मुझे क्याबेनिफिट मिलनेवाला है । उनबेनिफिट्स परतो कोई असरनहीं पड़ेगा ।
माननीय सभापति : ठीकहै, बैठ जाइए ।
…(व्यवधान)
कुंवर दानिश अली : महोदय, आजयही क्राइसिससरकार में है, यहीज्यूडिशियरीमें है । बहुत-बहुतधन्यवाद ।
]کنوردانشعلی(امروہہ): محترم چیرمینصاحب،آپنے مجھےصدرِجمہوریہکے خطبہپر بولنےکا موقعدیا،اس کےلئےمیںآپکا شکرگزارہوں۔ آجمیںیہاںصدرِجمہوریہکے خطبہپر بولنےکے لئےکھڑاہواہوں۔دہلیکی تینوںسرحدوںپر ہزاروںکسانپچھلےڈھائیمہینےسے زیادہوقتسے اسٹھِٹُرتیہوئیسردیاوربارشمیںسرکارگے گُہارلگارہےہیںکہ انکی جوجائزمانگیںہیںسرکاران کوسُنیں۔ لیکنبس قسمتیاس باتکی ہےکہ سرکاراپنیضد چھوڑنےکہ تیارنہیںہے۔سرکارکی پالیسیزاورسرکارکے کامکو صدرِجمہوریہدونوںایوانوںکے سامنےرکھتےہیں۔اب سرکاربھلےہی (کاروائیمیںشاملنہیں)سرکارہو یابھاشنجیویسرکارہو،صدرِجمہوریہہندکو سرکارکے لکھےہوئےخطبہکو وہاںپڑھناہے۔میںصرفیہ کہناچاہوںگا کہآججب ایکطرفچین ہماریسرحدیںلانگھکر ہماریدھرتیپر اپنےگاوٗںبسارہاہے،کافیساریذمینپر قبضہکر چکاہے لیکنسرکارکو جووہاںتتپرتادِکھانیچاہیےتھی،ہمارےجوانوںکو،ہماریآرمڈفورسزکو گرینلائٹدیکرکے جاوُمقابلہکرو،لیکنپتہنہیںکس دباوُمیںیہ سرکارچینکے خلافاپنینیتیصافنہیںکر رہیہے۔ وہ کنٹیلےتار،باڑھ،کنکریٹکی دیواریںان کسانوںکے سامنے،جو دہلیمیںاپنیگُہارلگانےآئےہیں،ان کےسامنےکھڑیکی جارہیہیں۔ملککے کسانکے ساتھان داتاکے یہسلوککرناکہیںسے بھیجائزنہیںہے۔میںیہیکہوںگاکہ کئیبینالاقوامیآوازیںبھیاس کسانآندولنکے بیچمیںاُٹھیہیں۔ہماریبہوجنسماجپارٹیکی نیتیصافہے کہہمارےملککے اندرونیمعامللاتمیںباہریدخلاندازینہیںہونیچاہئیے۔یہ ہمارااندرونیمعاملہہے۔ہندوستانکی یہپرمپرارہیہے کہہم کبھیبھیکسیدوسرےملککے لوکتنترمیںدخلانداذینہیںکرتے۔لیکنیہ پرمپرائیںکس نےتوڑیہیں؟ہم آججن کویہ سیکھدے رہےہیںکہ یو۔ایس۔اسٹیٹڈیپارٹمنٹہو،یونائیٹیڈنیشنسہو،وہ لوگہمارےیہاںجو آندولنچل رہاہے،اس پربولرہےہیں،لیکنجب ہمارےملککے وزیرِاعظمصاحبجا کردوسرےملککے لوگوںکو یہکہہرہےتھےکہ آپکو کونسی سرکارچُننیہے، اب کیبارٹرممپسرکار،یہ موقعہماریخارجہپالیسی جو بدلگئیہے،انہوںنے دیاہے۔لیکنمیںصرفاتناہی کہوںگا کہسرکارتو آتیہے،جاتیہے۔یہ تاریخہے اسدنیاکی۔جب جبجو سرکاریںکسانوںسے ٹکرائیںہیں،ان سرکاروںکا حشراچھانہیںہواہے۔ابھیایکبی۔جے۔پی۔کے ایکمعززممبریہاںکہہرہےتھےمیںاستعفٰیدوںگا،اگرکوئییہ ثابتکر دےکہ یومِجمہوریہکے دنبھاجپاکا کوئیبھیکارکنلالقلعہپر موجودتھا۔میںکہناچاہتاہوںکہ شایدجس انسانکو جساپدرویکو آجہماریپولسنے گرفتارکیاہے،وہ (کاروائیمیںشاملنہیں)کے ساتھاس کیفوٹوتھی۔کس لئے (کاروائیمیںشاملنہیں) جی کےساتھاس کیفوٹوتھی؟میںیہ کہناچاہتاہوںکہ محترم (کاروائیمیںشاملنہیں)کے ساتھاس کیفوٹوتھی،تو انکے فوٹوفریممیںاسےکوئیمنترییا ممبرآفپارلیمینٹبھینہیںجوٹسکتا۔وہ انسان،وہ اُپدرویکیسےمحترم (کاروائیمیںشاملنہیں)کے ساتھفوٹومیںموجودتھا۔آخرکس نےان اُپدرویوں کو اجازتدی کہلالقلعےپر چڑھکر ملککے ساتھایساکریں۔میںزیادہکچھنہ کہتےہوئےاتناہی کہوںکہ یہملککو کہاںلے کرجا رہےہیں؟ سرکاریپارٹیکی کچھجماعتیں،چندہاکٹھاکرنےکے لئےنکلی۔مدھیہپردیشکے اندرکیاہوا،کیاوہ کسیسے چھُپاہے،پتھراوُہوااوراگلےدن وہاںکے انتظامیہنے انغریبوںکو پہلےپتھروںسے مارا،ان کیپِٹائیکی،پھران کوجیلبھیجااوربِنانوٹسدئےاگلےدن مدھیہپردیشکے اندران غریبمظلوموںکے گھروںکو بلڈوزروںسے توڑدیاگیا۔ کیاہم ایساملکدیکھناچاہتےہیں (مداخلت)اترپردیشمیںبھیکسیسے چھپاہوانہیںہے۔اترپردیشکے اندرجب بھیمن ہوتاہے،تب سرکاربلڈوزرکسیکے بھیمکانپر چلجاتاہے۔ (مداخلت)چیرمینصاحبمیںصرفاتناہی کہناچاہتاہوںکہ ہاتھرسکے اندرکیاہوا (مداخلت)جناب،میںبس دومنٹکے اندراپنیباتختمکروںگا۔جناب،ہاتھرسکے اندرکیاہے؟ جناب،ایکدلتخاتوںکے ساتھ،ایکبچیکے ساتھجو بلاتکارکی گھٹناگھٹیہے اوریہ کہتےہیںکہ مجھےاس باتکا افسوسہے کہیہ جبمہاپرشوںکا ناملیتےہیں۔انہوںنے کئیبارچودھریچرنسنگھجی کاناملیاہے۔لیکنجب چودھریچرنسنگھجی کےپوتےجینتچودھری جی ہاتھرسکے اندراس دلتعورتکو انصافدلانےگئے تو انکو لاٹھیاورڈنڈوںسے پیٹاگیاتھا۔اگران کےساتھنہیںہوتےتو چودھریچرنسنگھجی کےپوتےوہاںسے ذندہنہیںلوٹپاتے (مداخلت)۔ چیرمینصاحب،میںصرفایکمنٹمیںاپنیباتختمکروںگا۔ (مداخلت)ابھیبجٹپیشہواہے۔بجٹکےاوپرایجوکیشنبجٹمیں 6 فیصدکی کمیکی گئیہے۔میرےخیالسے اسسرکارکا یہنارہہےکہاگرپڑھےگا انڈیاتو سوالکرےگا انڈیا۔اس لئےسارییونیورسٹیزاورسارےتعلیمیاداروںکو بربادکردو۔میرےپڑوسکے ضلعمیںایکیونیورسٹیہے جسکا ناممولانمحمدعلیجوہریونیورسٹیہے۔روزاس کوبھیتوڑنےکے لئےبلڈوزرتیاررہتاہے۔لیکنیہ سرکارتعلیمختمکرناچاہتیہے۔ (مداخلت)۔۔چیرمینصاحب،زیادہوقتنہ لیتےہوئےمیںاتناہی کہوںگا کہیہ سرکار (مداخلت)۔ میںبس ایکمنٹمیںاپنیباتختمکروںگا ۔ جناب،اس سرکارکا ایجنڈہصافہےکہڈاکٹرباباصاحببھیمراوُامبیڈکر کے آئینکو نہیںمانناہے۔ان کاجو دیاہواآرکشنہے،وہ کیسےختمہو۔سب کچھپرائیویٹسیکٹرسکے حوالےکر دینا۔جو پی۔ایس۔یوز۔پچھلے 70 سالوںمیںبنےہیںان کوپرائیویٹکر دو،جس سےکہ ایس۔سی۔ایس۔ٹیکے بچوںکو جونوکریاںمل رہیتھیںان کوختمکر دیاجائے۔میںآخریمیںیہیںکہوںگا کہبندرگاہبیچدو،ائرپورٹسبیچدو،ریلبیچدواورجو سوالپوچھےاسےجیلبھیجدو۔میںاس باتکے لئےتیارہوںکہ آپسے سوالپوچھتارہوںگا اورجن آندولنکاریکسانوںکو کہاکہ وہآندولنجیویہیں (مداخلت)۔ میںاپنیباتختمکر رہاہوںمرحومڈاکٹرراممنوہرلوہیاجی نےکہاتھاکہ جسلوکتنترکی سرکیںسونیہوتیہیںاس کیسنسدجو ہے (مداخلت)۔۔۔ جناب،اس لئےآپکم سےکم انمہاپرشوںکی باتتو مانوں۔جناب،میںایکسینٹینسمیںاپنیباتمکملکر رہاہوں۔آججو ملکمیںہو رہاہے غریبکو،مظلومکو،اقلیتکو انصافنہیںمل رہاہے۔جو وہانصافہے۔وہ آججیوڈیشیریمیںبھیکرائسسمیںآ گیاہے۔ جناب،مرحومارونجیٹلی جی نےسنسدکے اندرکہاتھاکہ آجکے جوججزہیںجو جیوڈیشیریہیں۔۔۔ جناب،آجیہیکرائسسسرکارمیںہے،یہیجیوڈیشیریمیںہے۔بہتبہتشکریہ۔ (ختمشد) [ श्रीमती हरसिमरत कौर बादल (भटिंडा): सभापतिजी, हमारेगुरु ग्रंथोंमें हमारे चौथेपातशाही जी नेलिखा है कि * “Farmers do cultivation They do hard labour And their sons and daughters Are able to feed themselves due to their hard work”.
मैंकहना तो पंजाबीमें चाहती हूँ, लेकिनमैं चाहती हूँकि बाकी सांसदभी समझ सकेंकि हमारे ग्रंथोंमें किसानोंको कितनी अहमियतदी गई है । इसलिएमैं हिन्दी मेंभी बोलूंगी औरपंजाबी में भीबोलूंगी । गुरुसाहब कहते हैंकि किसान बहुतलगन के साथ, मेहनतके साथ, खून-पसीनाबहाकर अपने खेतमें किसानी करताहै, हल जोतताहै, फसलउगाता है ताकिउसके बच्चे खानाखा सकें । किसानअपने हाथों सेजो कमाई करताहै, उस पवित्रकमाई के बारेमें हमारे प्रथमगुरु, गुरूनानक देव जीने करतारपुरसाहिब में 18 सालतक खुद किसानीकरके हम सिक्खोंको संदेशा दियाकि *Guru ji said, do hard work, pray to God. गुरु साहबने कहा कि *The best earning is that which comes due to hard labour, pray to God and share your foodgrains with associates. आज इतनी पवित्रकमाई करने वाले जो किसान हजारोंकी गिनती मेंपंजाब से आकरआंदोलन शुरूकरते हैं । आजदिल्ली की सरहदपर 70-75 दिनोंसे, चाहेठिठुरती हुईठंड हो, ओलाबारीहो या बारिशहो, वे वहाँपर बैठे हुएहैं । वे पिछलेछ: महीनेसे मांग रखरहे है, लेकिनइस सरकार केकान बंद है,आँख बंद हैऔर मुंह भीबंद है । मुझेइस बात पर इतनादुख होता हैकि पिछले 20साल के रिकॉर्डमें अभी सबसेठंडा मौसम था,उस ठंड केमौसम की परवाहन करते हुएबूढ़ी औरतें,बच्चे, बुजुर्ग सभीबॉर्डर पर बैठेहुए हैं । उन्होंने26 नवम्बर,कॉन्स्टीट्यूशनडे से मार्चकिया, उसदिन संविधानको मनाया जाताहै । एक पीसफुलप्रोटेस्ट जोडेमोक्रेटिकराइट होता है । दुनिया नेदेखा कि उसपीसफुल प्रोटेस्टमें गोलाबारी,आँसू गैस,वाटर कैननऔर लाठियों सेउन बेचारे निहत्थेकिसानों को किसतरह से ट्रीटमेंटदिया गया । यहसारे देश नेदेखा और उनकेसाथ संवेदनाभी की । उन्हेंदिल्ली के बॉर्डरपर रोक दियागया । वे बेचारेढ़ाई महीने सेवहाँ पर आरामसे बैठ रहे । उन्होंने धैर्यपूर्वकऔर शांतिमय तरीकेसे अपना आंदोलनचलाया ।
सर, आंदोलनक्या था? आजजब सारे देशऔर दुनिया केलोग उस अन्नदाताके साथ जुड़ेहुए हैं । चाहेकोई टीचर हो, लॉयरहो, डॉक्टरहो, नौजवानहो या दुकानदारहो सब उनकेसाथ संवेदनारखते हुए उनकेबीच में गएऔर उन्होंनेअपना सपोर्टदिया, लेकिनयह कितनी हैरानीकी बात है किवे जिसे अपनीसंवेदना बतानाचाहते हैं, अपनादर्द बताना चाहतेहैं, इससरकार का एकभी नुमाइंदाउन तक पहुंचनहीं कर सका । आज उस आंदोलनमें अपनी आवाजसुनाने के लिए100किसानोंने अपनी जानकुर्बान कर दी, शहीदकर दी । ये इंसानहैं, येहिन्दुस्तानीहैं, येहमारे अन्नदाताहै जो 150 सेज्यादा मर गएहैं, लेकिनइनके बारे मेंराष्ट्रपति अभिभाषणमें एक भी संवेदनाकी लाइन नहींहै । मन की बातहोती है । बहुतकुछ बोला जाताहै । राष्ट्रपतिजी का अभिभाषणहोता है ।…(व्यवधान) हाँ,मैं छ: साल तक थी । मैं उस पर भी आ रही हूँ, लेकिन जब सरकार ही इनह्यूमन हो जाती है, जब अपनों के प्रति संवेदना प्रकट नहीं कर सकती है तो उस सरकार में रहकर करना क्या है? इसलिए मैंने उस सरकार को छोड़ दिया । सर, इनकी मांग क्या है? …(व्यवधान) मैं उस पर भी आ रही हूँ । आप सुनते रहिए । मैं सबका जवाब दूंगी । 5 जून को कोविड की आड़ में जब लोग घरों में बंद थे तो एकदम एक ऑर्डिनेंस लाया गया । किसान से न ही पूछा और न ही सलाह-मशविरा किया गया । यह ऑर्डिनेंस उस पर थोप दिया गया, जिससे किसान के मन में डर पैदा हो गया कि इस ऑर्डिनेंस के आने से मेरी एमएसपी खत्म हो जाएगी, मेरा मंडीकरण सिस्टम खत्म हो जाएगा,मैं अपने ही खेत में जब मेरी जमीन पूंजीपतियों के हाथों में आ जाएगी तो मैं मजदूर बनकर रह जाऊंगा । किसान के मन में यह डर आ गया ।
सर, आज मैं इस सदन में यह बताना चाहती हूँ । यहाँ पर मंत्री साहब बैठे हैं । जब यह ऑर्डिनेंस आया तो मैंने पूरी कैबिनेट से प्रार्थना की कि आप इस ऑर्डिनेंस को पहले सलाह-मशविरा करके लेकर आइए, क्योंकि किसानों के मन में यह वहम है ।
इसके बावजूद यह ऑर्डिनेंस बना दिया गया और मुझे विश्वास दिलाया गया था कि इसको कानून बनाने से पहले किसानों की सारी संवेदनाओं को दूर किया जाएगा । आप देखिए कि कितनी हैरानी की बात है कि यहां पर मेरी पार्टी के लीडर ने, यह जून में आता है और जुलाई में हम चिट्ठी लिखते हैं, तब हमें बोला गया कि बहुत अच्छा कानून है, आप इसे लोगों के पास लेकर जाइए । जब किसानों के पास इसे लेकर गए, तब किसानों से उनकी संवेदनाएं पता लगीं, उनकी आशंकाएं पता लगीं और उसे एक चिट्ठी में लिखकर जुलाई महीने में खेती-बाड़ी मंत्री जी को भेजी गई,जिन्होंने कहा कि फिक्र न करिए,ये सारी शंकाएं हम दूर करेंगे । लेकिन अब हमारी हैरानी देखिए कि सितम्बर के महीने में मॉनसून सेशन आता है और सेशन आते ही ये सारे बिल्स टेबल हो जाते हैं । न किसान से बात की गई, न सलाह-मशविरा किया गया । पंजाब में रेल की पटरियों पर जून के महीने से आंदोलन चल रहा था । मैं कांग्रेस के बारे में भी जरूर कहूंगी । वर्ष 2019 में इनके मुख्यमंत्री …* ने पैरवी की होती,तो ये जो 100-150 किसान मर गए,वे शायद आज जिन्दा होते । यह इनकी भी देन है । इनकी देन है तो उनकी भी बराबर की देन है । जब सेशन में आया, यहां मंत्री जी से पूछिए, राजनाथ जी बैठे हैं, नड्डा जी बैठे हैं, सबके पास हम गए कि आप सलाह-मशविरा किए बिना इसको मत लेकर आइए,देश में आग लगेगी,किसान सड़कों पर उतर जाएगा । उधर चीन आपको आंखें दिखा रहा है, इधर कोविड की मार से हिन्दुस्तान की जनता लड़ाई लड़ रही है, ऐसे में आप क्यों किसानों का आंदोलन खड़ा कर रहे हैं? आपका सबसे पुराना एलाइ, जब आपके दो एमपी होते थे,कोई अन्य नहीं होता था, तब यह पार्टी आपके साथ खड़ी थी । न मंत्री की सुनी, न पुराने एलाइ की सुनी और आज किसान मर रहे हैं और वे किसान की भी नहीं सुन रहे हैं । इससे ज्यादा दु:खद बात और क्या हो सकती है । ये किसान मांग क्या रहे हैं? किसान कहता है कि मैंने यह मांगा नहीं है, आप कहते हैं कि आपके लिए यह अच्छा होगा,लेकिन मुझे वह नहीं चाहिए, आप इसे वापस ले लीजिए और यदि मेरे लिए कोई कानून बनाना है तो मेरे सलाह-मशविरा से बनाइए । मुझे लीगल तरीके से एमएसपी दीजिए और ये काले कानून वापस लीजिए ।
सर, एमएसपी क्या है? मिनिमम सपोर्ट प्राइस – क्या यह कोई बुरी चीज है? 2011 में एक वर्किंग कमेटी के चेयरमैन के रूप में आज के प्रधानमंत्री जी और उस समय के गुजरात के मुख्यमंत्री होने के नाते डॉ.मनमोहन सिंह को अपनी रिकमेंडेशन देते हैं और इस रिकमेंडेशन में 2011 में प्रधानमंत्री जी कहते हैं:
‘Enforce MSP. We should protect farmer’s interests by mandating through statutory provisions that no farmer-trader transaction should be below MSP.’ 2011में जो मुख्यमंत्री होने के नाते वे मानते थे, प्रधान सेवक से प्रधानमंत्री होते-होते आज क्या बदल गया?आज यही तो किसान मांग रहे हैं?आज किसान के मन में डर क्यों है? उसमें जो रिकमेंडेशन्स दी गई हैं, as Chairman of the Working Committee, clearly say: ‘unbundling’.
सर, यह बहुत जरूरी चीज है । जो कह रहे हैं कि एमएसपी चलती रहेगी, इसमें लिखा है - ‘unbundling of FCI operation of procurement, storage and distribution.’ साफ-साफ रिकमेंडेशन चेयरमैन साहब की है कि एफसीआई को अनबंडल किया जाएगा,प्रोक्योरमेंट,स्टोरेज और डिस्ट्रीब्यूशन से हटाया जाएगा । यही कारण है कि आज किसान के मन में इतनी बड़ी शंका है और इतना बड़ा आन्दोलन पिछले तीन महीने से चल रहा है ।
सर, आप देखिए कि इस सरकार में कितना अहंकार है कि पिछले 75 दिनों से न ही किसी मंत्री को उधर भेजा, बल्कि यह आन्दोलन शुरू होते ही कहा गया कि यह बिचौलियों का आन्दोलन है । फिर यह ‘माओइस्ट का आन्दोलन’ हो गया, फिर यह नक्सल का हो गया, फिर यह आतंकवादियों का आन्दोलन हो गया और खालिस्तान का हो गया । यहां बैठे हैं मंत्री और एमपी, जो कहते थे कि पाकिस्तान और चाइना से यह हो रहा है । वहां बैठी है मेरी बहन,जो कहती थीं कि यह तो आतंकवादियों का आन्दोलन है,ये ए.के.-47लेकर बैठे हैं । भाई, कौन सा किसान ए.के.-47की खेती करता है? पहले दिन से ही खालिस्तान-खालिस्तान कहा जा रहा है । जब आप उनके साथ 11 राउण्ड्स ऑफ टॉक्स कर रहे थे तो आप क्यों खालिस्तानियों और आतंकवादियों से बात कर रहे थे?
HON. CHAIRPERSON: Madam, please conclude, now.
श्रीमती हरसिमरत कौर बादल : सर, मैं यही कहना चाहूंगी कि किसान की बात सुनें । जब इस देश में खाने को नहीं होता था, यही किसान था । आखिर में,मैं एक चीज पर जरूर आना चाहूंगी । 26 जनवरी की बात बहुत की जाती है । उस दिन जो वायलेंस हुआ, हरेक को दुख है, वायलेंस नहीं होना चाहिए ।
लेकिन जो इंटेलीजेंस फेल्योर हुआ है,आज क्यों उसके बारे में कोई बात नहीं करता है । 25 तारीख की शाम को एक स्टेज से ऐलान किया गया था कि जो डेजिग्नेटेड रूट्स हैं, उन रूट्स पर नहीं जाएंगे, लाल किले की तरफ जाएंगे । जब 25 तारीख की शाम को पता चल गया था, आप चार घण्टे में लॉकडाउन कर सकते हैं, चंद घंटों में नोटबन्दी कर सकते हैं, आपको एक रात पहले पता चल गया तो आप एक रास्ता बंद नहीं कर सकते थे । इसका जवाब कौन देगा? दानिश जी ने जिनका जिक्र किया है, वे दो हफ्ते के बाद आज पकड़े गए हैं । …(व्यवधान)
HON. CHAIRPERSON : Hon. Member, you have made your point.
… (Interruptions)
श्रीमती हरसिमरत कौर बादल : सर, बहुत बातें की गई हैं । तिरंगे के अपमान के बारे में बात की गई है । …(व्यवधान) आप उस तिरंगे की बात कर रहे हैं,जिस तिरंगे को लहराने के लिए 70 फीसदी खून इस कौम का गिरा था । काला पानी हो,फांसी हो, सबसे ज्यादा शहादतें इस कौम ने दी थीं । तिरंगे में लहराया, वह आप कहते हैं कि केसरी लहरा दिया तो यह वही केसरी है, जो आपके प्रधान मंत्री जी और वर्ल्ड लीडर अपने सिर पर लेकर घूमते रहते हैं ।…(व्यवधान) उस निशान साहेब को, उस केसरी को आपने कठघरे में खड़ा कर दिया । हमारे नौवें गुरू ने ठीक लाल किले के सामने,यह हमारे लिए एक seat of oppression and seat of tyranny है,जहां से हमारे नौवें गुरू की शहादत का ऐलान किया गया था । क्यों शहादत हुई थी?आपके जनेऊ और तिलक को बचाने के लिए हमारे गुरू ने शहादत थी । …(व्यवधान) वह केसरी लहराने के लिए आज आपके गुरू बन गए ।
HON. CHAIRPERSON: Please conclude.
… (Interruptions)
श्रीमती हरसिमरत कौर बादल : सर, उस गुरू के बच्चों को 400 साल बाद ये लोग आतंकवादी कहकर उस केसरी को कठघरे में खड़ा कर रहे हैं । यह कहां का इंसाफ है? जो जर्नलिस्ट सही कहानी बताए तो ये बोल रहे थे कि क्या था …* का हाल, पूछ लें … * से, खोल लीजिए वेबसाइट,भाजपा का एक-एक वर्कर क्या कर रहा था, यह बताया जाएगा । दलितों की बात की जाती है । …(व्यवधान) एक 24 साल के दलित वर्कर को पकड़कर बंद कर दिया है और उससे 26 तारीख से पुलिस क्या सेक्सुअल मिसट्रीटमेंट कर रही है? राष्ट्रपति अभिभाषण में जो बोलने की बात थी कि we will put an end to barbarism. यह क्या बार्बरिज्म है? …(व्यवधान) एक निहत्था लड़का रंजीत सिंह औरतों के टेंट में आग लगाने से पुलिस को रोकता है, आप पकड़कर उस पर टूट पड़ते हैं । यह है, आपकी सरकार ।
HON. CHAIRPERSON: Shri Hanuman Beniwal ji.
… (Interruptions)
SHRIMATI HARSIMRAT KAUR BADAL: Sir, there is one last point. …(Interruptions )
HON. CHAIRPERSON: Provided you say that it is last point, please conclude.
… (Interruptions)
श्रीमती हरसिमरत कौर बादल: सर, अभी सभी लोग बात कर रहे थे कि प्रधान मंत्री जी ने ये आंदोलनजीवी बोला,लेकिन उसके बाद एक और शब्द बोला था, जिसका मुझे मतलब नहीं पता था, मैंने उसे देखा, वह कहते हैं – परजीवी । परजीवी मतलब पैरासाइट, किसको पैरासाइट बोल रहे हैं? …(व्यवधान) आप उस अन्नदाता को पैरासाइट बोल रहे हैं, जो अन्न पैदा करके पेट भरता है या लीडरों को बोल रहे हैं या चौधरी टिकैत को आप पैरासाइट बोल रहे हैं ।…(व्यवधान)
HON. CHAIRPERSON: Now, Shri Hanuman Beniwal ji.
… (Interruptions)
श्रीमती हरसिमरत कौर बादल : सर, मैं यह कहूंगी कि इनको माफी मांगनी चाहिए । इमीडिएटली एमएसपी को कानूनी दर्जा दीजिए,जैसे आपने वर्ष 2011 में कहा था । …(व्यवधान) इन काले कानूनों को वापस कीजिए । जो फॉल्स केसेज़ फाइल किए हैं,वे सारे फॉल्स केसेज़ वापस लिए जाएं । …(व्यवधान)
श्री हनुमान बेनीवाल (नागौर): सभापतिमहोदय, माननीयराष्ट्रपति महोदयके अभिभाषण परआपने मुझे बोलनेका मौका दिया, इसकेलिए आपको धन्यवाद । पिछले दो दिनसे 40 केकरीब माननीयसांसदों ने, जिसमेंपक्ष-विपक्षके सारे साथीथे, उन्होंनेअपनी-अपनीबात रखी । लेकिनदुख इस बातका है कि जोलोग अपने-अपनेइलाके के अंदरकिसान की बातकरके आते हैंऔर यहां किसतरह से बदलतेहैं, उनकोपूरा देश औरदुनिया देख रहीहै । वर्ष 2024 केअंदर जब वोटमांगने जाएंगे, तबपता लगेगा कियह आन्दोलन एकस्टेट का नहींहै, यह आन्दोलनहरियाणा, उत्तरप्रदेश, दिल्ली, पंजाब, राजस्थानसहित उन तमामइलाकों का है, जहांएनडीए और भारतीयजनता पार्टीको 120 सेज्यादा सीटेंमिली थीं ।
20.00hrs मोदी जी को प्रधान मंत्री बनाने में इन राज्यों की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका थी ।
सभापति महोदय,ये लोग थकने वाले नहीं हैं । आप एक हजार साल का इतिहास उठा कर देख लें कि दिल्ली पर जब भी संकट आया,चाहे वे विदेशी आक्रांता या अंग्रेज थे और आज भी देश की सीमाएं किसानों के बेटों से सुरक्षित है, जो अपने सीने पर गोली खा कर भारत माता की रक्षा करते हैं । आप इस आंदोलन में हम लोगों को थका नहीं सकते हैं । आप थक जाएंगे । आप घमंड में इतना चूर न रहें । वर्ष 2024 की लोक सभा चुनाव के बाद कहीं आपको विपक्ष में बैठना न पड़े, आप इसकी तैयारी कर लें । इस देश के किसान ने यह ठान ली है और हम ने भी एनडीए इसीलिए छोड़ा है ।
सभापति महोदय,जब हम एनडीए से जुड़े थे, तब हमें लगा था कि जवान और किसान की बात होगी । प्रधान मंत्री जी ने वर्ष 2014 और वर्ष 2019 में यह बात कही थी, तब किसानों में यह उम्मीद जगी थी । मैं यह नहीं कहना चाहता हूं कि कांग्रेस ने भी किसानों का कोई भला नहीं किया था । …(व्यवधान) प्रधान मंत्री जी ने यह कहा कि जब मैं सत्ता में आऊंगा, तो किसानों की आय तीन गुनी – चार गुनी करूंगा,संपूर्ण स्वामीनाथन की रिपोर्ट लागू करूंगा, जवानों को रोजगार दूंगा,तो हम लोग भी इनके झांसे में आ गए । मैंने इनके अच्छे बिल का समर्थन भी किया है, लेकिन हम फेविकोल से नहीं चिपके थे । जब हमें लगा कि एनडीए शासन में किसान तकलीफ में हैं, जिनकी वजह से हम यहां चुन कर आए हैं । हमारी रगो में भी वही खून दौड़ रहा है, जो सड़क पर बैठे हमारे भाइयों के अंदर दौड़ रहा है । हम ने एडीए भी छोड़ दी है और आवश्यकता पड़ी तो लोक सभा की सदस्यता भी छोड़ने वाला हनुमान बेनीवाल पहला माननीय सांसद होगा ।…(व्यवधान) मैं आज सदस्यता नहीं छोड़ रहा हूं । …(व्यवधान) दादा,अभी हम लड़ाई सड़क पर लड़ेंगे ।…(व्यवधान) भाजपा वाले भी कहीं मेरी वजह से जीतें, आप इन बातों को छोड़ दें ।…(व्यवधान)
माननीय सभापति : आपकेपास बोलने केलिए समय कमहै, इसलिएआप अपना प्वाइंटजल्दी से बतादीजिए । आप इधर-उधरनहीं देखिए ।
श्री हनुमान बेनीवाल : माननीय सभापति महोदय, उत्तराखंड के चमोली जिले में ग्लेशियर बर्स्ट में हमारे कुछ भाई चले गए और कुछ लोग लापता हैं,उन लोगों को श्रद्धांजलि दूंगा । कोरोना से लाखों लोगों की मौत हो गई है । पिछली बार कोरोना के कारण लोक सभा नहीं चली थी । इस बार कोरोना काल में लोक सभा को चला कर, निश्चित रूप से पक्ष-विपक्ष सभी दलों ने एक अच्छा संदेश दिया है । इसके लिए हमारा विरोध भी था, लेकिन सड़क पर बैठे हुए किसानों के लिए हमें बात भी कहना जरूरी था, इसलिए सभी पार्टियों ने सहमति बनाई है कि लोक सभा चलनी चाहिए । देश का प्रत्येक व्यक्ति इस लोक सभा की तरफ टकटकी लगा कर बैठा है कि प्रधान मंत्री जी क्या घोषणा करेंगे, तीनों कृषि बिल वापस होंगे, बजट में यह होगा या नहीं होगा । देश-दुनिया इस लोक सभा की तरफ नजर टिका कर बैठी थी कि क्या होने वाला है? सभी पार्टियों ने पक्ष के साथ मिल कर यह तय किया कि लोक सभा चलनी चाहिए ।
सभापति महोदय, 90 दिनों से आंदोलन चल रहा है । मैं बड़ी बहन श्रीमती हरसिमरत कौर जी को बधाई दूंगा कि लोग मंत्री बनने के लिए कतारों में खड़े रहते हैं,लेकिन मंत्री पद को ठोकर मार कर किसानों के साथ ये सड़क पर निकलीं । निश्चित रूप से वे बधाई की पात्र हैं ।
सभापति महोदय, 200 से ज्यादा किसानों ने शहादत दी है,कई किसानों ने आत्महत्या भी की है । यह शांतिपूर्ण तरीके से चलने वाला देश का सबसे बड़ा आंदोलन है । यह जन आंदोलन बन चुका है । यह सिर्फ छ: राज्यों का आंदोलन नहीं है, यह पूरे देश का आंदोलन है । भारतीय जनता पार्टी के कई नेता जोर-जोर से भाषण दे रहे हैं,लेकिन सेंट्रल हॉल में यहां के मंत्री मिलते हैं,तो यह कहते हैं कि अगर बिल वापस लिया जाएगा तो हमारा भी पीछा छूटेगा, नहीं तो वर्ष 2024 में हमें दिक्कत आएगी । यह बात भी वे लोग दबी जुबान में करते हैं ।…(व्यवधान) मैं उनका नाम अगली बार बताऊंगा,आज नाम नहीं बताऊंगा ।…(व्यवधान)
सभापति महोदय,चार बार्डर हैं – सिंघु बॉर्डर,गाजीपुर, टिकरी और शाहजहांपुर बॉर्डर । …(व्यवधान) शाजहांपुर बॉर्डर में यह शुरुआत हुई कि राजस्थान का किसान आंदोलित नहीं है । हम राजस्थान में पंचायत चुनाव के समय गए थे । वहां पहले चरण में 21 जिलों के चुनाव थे । हर जगह लोगों ने एक ही बात कही ।…(व्यवधान) सिंघु बॉर्डर को शंभु बॉर्डर राहुल गांधी जी ने बोला था । …(व्यवधान) मैं सिंघु बॉर्डर बोला हूं, मैंने राहुल गांधी जी की तरह उसको शंभु बॉर्डर नहीं बोला है । …(व्यवधान)
सभापति महोदय,यह कहा गया कि राजस्थान में आंदोलन नहीं हो रहा है । राजस्थान से 26 दिसम्बर को एक लाख लोगों ने शाहजहांपूर बॉर्डर कूच किया ।
आज़ादी के 70 सालों के बाद दिल्ली-जयपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पहली बार जाम हुआ है । वहाँ पर किसान बहुत ही शालीनता से बैठे हैं । सर्विस रोड खुली हुई है,अगर कोई एम्बुलेंस है या दूसरी तरह की कोई अतिआवश्यक सुविधाएं हैं,तो उसके अन्दर वे समर्पण के साथ सेवा भी कर रहे हैं । वे लोग खुद अपने हिसाब से सारा आन्दोलन कर रहे हैं ।
मेरा सरकार से निवेदन है कि किसानों की जो प्रमुख मांग है, क्योंकि सरकार पहले कह रही थी कि कृषि बिल अच्छे हैं । सरकार ने अपने मंत्रियों को देश के विभिन्न इलाकों में भेजा, सांसदों को भेजा, उनसे कहा कि रैलियाँ करो, जनजागरण अभियान चलाओ । जब लोगों ने नकार दिया, 500-700 या हजार-पन्द्रह सौ लोगों की भीड़ होने लगी,तो सरकार के मुखिया ने आदेश दिया कि रैलियाँ मत करो, रुक जाओ और ये लोग रुक गए । अगर ये बिल सही थे, तो आप अमेंडमेंट किस बात का कर रहे थे?आप क्यों किसान संगठनों से वार्ता कर रहे थे? फिर आपने कहा कि हम डेढ़ से दो साल तक होल्ड कर देते हैं । जब आप बैकफुट पर आ ही गए, जब आपने अपनी गलती मान ही ली, तो आप तीनों बिल वापस ले लो । देश के किसान वहाँ से उठकर चले जाएंगे । चाहे तो प्रधानमंत्री जी यहीं से घोषणा कर दें या गृह मंत्री जी से घोषणा करा दो कि हम बिल वापस ले रहे हैं । किसान के लिए सवाल सिर्फ एक ही बात का है,उन्होंने बात पकड़ ली है । आप अपनी जिद छोड़ो क्योंकि आपको वापस इनके बीच ही जाना है । वर्ष 1989 में कांग्रेस की जो दुर्दशा हुई थी,उसकी शुरुआत भी दिल्ली के चारों तरफ के राज्यों से ही हुई थी । बिहार से लेकर तमाम राज्यों में कांग्रेस सिमट गई और जनता पार्टी तथा भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनी थी ।
आप इतिहास उठाकर देख लें । आप सोच रहे होंगे कि किसान थक जाएंगे, घर चले जाएंगे और भूल जाएंगे । वे नहीं भूलेंगे । जब मशीन दिखेगी और उसमें बटन दबाना होगा, तो कौन-सा बटन दबाना है, यह उनको अच्छी तरह से याद है । इसलिए किसानों को थकाने का सपना देखना छोड़ दें ।
सभापति महोदय,मैं मांग करता हूँ कि तीनों कृषि से संबंधित बिलों को, जो काले कानून हैं, उनको वापस लिया जाए । गिरिराज सिंह जी, अब मैं आपके सवाल का जवाब दे रहा हूँ । यह बात सही है कि वर्ष 2006 से 2014 तक कांग्रेस की सरकार थी, तब भी स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट पेंडिंग थी । उसे कांग्रेस पार्टी ने लागू नहीं किया था और आपने उसको थोड़ा-सा लागू किया । आपने भी पूरा फायदा नहीं दिया । अगर आप पूरा फायदा देते, तो आप सी-2 प्लस 50 फार्मूला लागू करते । जिस तरह से जापान और अमेरिका में किसान खेती में सौ रुपए खर्च करता है और उसे तीन सौ रुपए मिलते हैं, लेकिन यहाँ सौ रुपए खर्च करने पर मात्र 57 रुपए ही मिलते हैं, इसमें 43 रुपए का घाटा होता है । इसलिए इस देश में सबसे ज्यादा किसानों द्वारा आत्महत्याएं की जा रही हैं । इस देश में सबसे ज्यादा नौजवान बेरोजगारी से तंग आकर आत्महत्याएं कर रहे हैं ।
मोदी जी यह बात कह रहे हैं कि मोदी है, तो आपको मौका है । यह बात सही है क्योंकि मोदी जी कुछ करना चाहते हैं । उन्होंने देश को जगा दिया कि हम आएंगे, तो ये कर देंगे,वो कर देंगे,तारे तोड़कर ले आएंगे, तो लोगों ने कहा अब लाओ तारे तोड़कर, अब आप गए हैं । बार-बार आप कहते हैं कि राहुल गांधी वहाँ चले गए, उन्होंने ऐसा ट्वीट कर दिया । आप राहुल गांधी की बात करके आन्दोलन को क्यों बरगला रहे हो? 26 जनवरी को जो घटना हुई,उसके लिए जो दोषी हैं, आप उनको पकड़ो । तिरंगे का अपमान कोई नहीं सहन करता । हम सबने उसी समय इस बात की निन्दा की थी,जब लाखों किसानों ने दिल्ली में ट्रैक्टर परेड की थी, दिल्ली को घेरा था ।
सभापति जी, किसान के बेटों ने हमेशा तिरंगे की लड़ाई लड़ी है । आजादी की लड़ाई से लेकर आज तक,मेरे हिसाब से जो तमाम जातियाँ बैठी हैं, यह कोई जाति का मुद्दा भी नहीं है,…(व्यवधान) तमाम लोगों ने आजादी के आन्दोलन से लेकर आज तक हमेशा संघर्ष किया,देश को आजाद कराया और आज भी देश की सीमाओं पर जाकर रक्षा करते हैं । इसलिए आन्दोलन में कोई किसान कभी भी तिरंगे का अपमान नहीं कर पाएगा । कहीं-न-कहीं इसकी सोची-समझी साज़िश होगी । इसका भंडाफोड आप लोग करो । एनआइए-सीबीआई से जाँच कराओ । लेकिन आपने लाल किले की ओर आन्दोलन को जिस तरह से मोड़ने का काम किया, देश में किसान आन्दोलन को जिस तरह से बदनाम करने की कोशिश की, उसे देश का किसान माफ नहीं करेगा ।
माननीय सभापति: बेनीवाल जी,आपके दस मिनट पूरे हो गए हैं ।
श्री हनुमान बेनीवाल : देश के जवान इसे माफ नहीं करेंगे ।…(व्यवधान)
सर, मुझे एक मिनट का और समय दिया जाए । मैंने सदन चलाने में सबसे ज्यादा साथ दिया है । …(व्यवधान)
माननीय सभापति: एक-दो पॉइंट में अपनी बात समाप्त कीजिए ।
श्री हनुमान बेनीवाल : सभापति महोदय, मेरी यह डिमांड है कि फसल खरीद की गारंटी कानून को अमलीजामा पहनाया जाए । अभी बात चल रही थी समर्थन मूल्य पर फसल खरीद की, लेकिन समर्थन मूल्य पर आज भी फसलों की खरीद नहीं हो रही है । आज राजस्थान में, जहाँ से मैं आता हूँ, वहाँ मूँग की बम्पर पैदावार हुई है । हमारे कृषि राज्य मंत्री जी भी बाड़मेर से आते हैं । वहाँ मूँग की बम्पर पैदावार हुई,लेकिन आपने कह दिया कि तीन परसेंट से ज्यादा खराब है । वह तो हवा लगने से भी खराब हो सकती है और ठण्ड से भी खराब हो सकती है । लेकिन आपने कहा कि तीन परसेंट से ज्यादा खराब हुई तो नहीं लेंगे । आठ-दस-पन्द्रह परसेंट तक जो मूँग खराब था, इस कारण से राजस्थान में समर्थन मूल्य पर मात्र एक परसेंट मूँग की खरीद हुई ।
सिंह जी, आप तो पूरे देश की चिंता करते हो,आप ऐसे क्यों कह रहे हो? …(व्यवधान)
सभापति महोदय, मैं किसान की बात कर रहा हूं । …(व्यवधान) मेरी सरकार से मांग है कि किसान की जो प्रमुख मांगें हैं, उनको सरकार लागू करे, संपूर्ण स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट को लागू करें । प्रधान मंत्री जी को दो बार देश की जनता ने चुना है, भारतीय जनता पार्टी को तो खुश होना चाहिए । …(व्यवधान)
माननीय सभापति : स्वामीनाथनआयोग नहीं, कमेटीकहिए ।
…(व्यवधान)
श्री हनुमान बेनीवाल : हां सर, उस कमेटी की रिपोर्ट लागू करें । …(व्यवधान) गिरिराज सिंह जी,यह सही है कि आपको एनडीए की जरूरत नहीं है,क्योंकि आप 303 सीट्स पर अकेले हो, शिव सेना को फ्री किया,हमें भी अलग कर दिया, अब आप कह रहे हैं कि दो-चार और चले जाएं तो अलग हो,लेकिन आप यह मत भूलिए कि उन राज्यों के अंदर आप अपने भाइयों की बदौलत आए हैं । …(व्यवधान) आप राजस्थान पर अकेले फतेह कर लेना, अगर बीजेपी अकेले फतेह कर ले राजस्थान पर,तो हम आपको मान लेंगे ।
माननीय सभापति: बेनीवालजी, आपकासमय पूरा होगया है ।
…(व्यवधान)
श्री हनुमान बेनीवाल : आप ज्यादा ज़िद करो तो मैं इस्तीफा देता हूं, आप कल नागौर के चुनाव करवा लीजिए,लेकिन फिर आर-पार की लड़ाई होगी । …(व्यवधान)
माननीय सभापति: बेनीवालजी, मैंनेक्स्ट स्पीकरका नाम बुलारहा हूं ।
श्रीमतीमीनाक्षी लेखी ।
श्री हनुमान बेनीवाल : सभापति महोदय, मुझे बस एक मिनट में अपनी बात पूरी करने दीजिए । …(व्यवधान)
माननीय सभापति: अबआपका समय पूराहो गया है, आपबस एमएसपी केऊपर घूम रहेहैं ।
…(व्यवधान)
श्री हनुमान बेनीवाल : सभापति महोदय, मैं एक मिनट जवान के ऊपर बोलना चाहता हूं । …(व्यवधान) मैंने किसान पर बोल दिया, अब मैं जवान पर बोल देता हूं । …(व्यवधान)
सभापति महोदय,मेरी सरकार से जो प्रमुख मांग है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद की गारंटी का कानून बने,जो देश का किसान चाहता है और सरकार इन किसानों से बात करे । सरकार 11 दौर की बात कर चुकी है, सरकार कह रही है कि एक फोन कॉल का इंतज़ार है । आप वह फोन कॉल कब करेंगे? आप उनसे बात कीजिए ।
माननीय सभापति: आपजवानों की बातकीजिए, जवानोंके बारे मेंकहिए ।
…(व्यवधान)
श्री हनुमान बेनीवाल : सभापति महोदय, आप बार-बार कह रहे हैं, जिससे मैं ट्रैक से अलग हो रहा हूं । …(व्यवधान) आप मुझे एक मिनट का समय दे दीजिए । …(व्यवधान)
महोदय, मैं एक बात जवानों के लिए भी बोलूंगा । …(व्यवधान) चाणक्य ने देश के अस्तित्व पर चार खतरों का वर्णन किया – आंतरिक,बाहरी, बाहरी मदद से उत्पन्न आंतरिक और आंतरिक मदद से उत्पन्न बाहरी । वर्ष 1947 से ऐसे खतरों से सीआरपीएफ,आईटीबीपी और बीएसएफ के जवान जूझ रहे हैं । ये देश की सीमाओं की रखवाली भी करते हैं, देश में फैले आतंकवाद,अलगाववाद और नक्सलवाद से भी लड़ते हैं । ये देश में कानून व्यवस्था भी बनाते हैं और चुनाव भी करवाते हैं ।
परसों ही उत्तराखंड में आई त्रासदी में आईटीबीपी और एनडीआरएफ ने फर्स्ट रिस्पॉन्डर का काम किया और अभी भी कर रहे हैं, लेकिन विडंबना यह है कि भारत सरकार के सशस्त्र बल होते हुए भी इन्हें आज दोयम दर्जे का ट्रीटमेंट दिया जाता है । …(व्यवधान) विडंबना यह भी है कि आज बीएसएफ का मतलब बीवी,बच्चों से फासला और सीआरपीएफ का मतलब चलते रहो प्यारे फौजी बनकर रह गया है । …(व्यवधान)
माननीय सभापति: आपकीडिमांड क्याहै?
…(व्यवधान)
श्री हनुमान बेनीवाल : सभापति महोदय, सिर्फ आधा मिनट और दे दीजिए । …(व्यवधान) 2004 के बाद भर्ती हुए इन सैनिकों को न तो सेना की तरफ से पेंशन मिलती है, न प्रमोशन मिलता है और न ही भूतपूर्व सैनिकों को सामाजिक सुरक्षा की सुविधा मिलती है । …(व्यवधान) इनके गिरते हुए मनोबल का उदाहरण यह है कि विगत कई वर्षों में अनेक जवान व अधिकारी अपनी सेवाओं से इस्तीफा दे रहे हैं, कई आत्महत्या को मजबूर हैं ।
सभापति महोदय,मैं सदन के माध्यम से पूछना चाहूंगा कि जिस देश के अंदर जय जवान, जय किसान का नारा लग रहा है, निश्चित रूप से अब जो भी आंदोलन होगा,जो भी डिमांड होगी, वह मोदी जी से ही होगी । राहुल गांधी जी से तो कोई डिमांड करने से रहा, वे तो खुद ऐसे ही घूम रहे हैं ।
माननीय सभापति: बेनीवालजी, आपकासमय पूरा होगया है, अबआप बैठ जाइए ।
…(व्यवधान)
*SHRIMATI PRATIMA MONDAL (JAYNAGAR): Painting a rosy picture of the dismal situation of the nation has been the trait of the government since it came to power in 2014. Similar was the scenario on 29th of January, 2021 when the hon. President of India addressed the Parliament. Every sphere of failure has been covered with false promises and self-boasting of these promises being fulfilled. Claims of the government are absolutely different from ground reality.
In the current scenario, India has been performing poorly across all sectors, be it education or healthcare or for that matter even as basic and crucial as the agricultural sector. For the last two years, protests have been taking place around important national days. The hon. President mentioned how unfortunate the incident was on the 72nd Republic Day of India but what led the farmers of the nation to the warpath? The answer is known to all and it is the Ruling party. Last year, the protests were revolving around the legislation of citizenship and this year because of the farming laws. Every time people of India cannot be wrong. The manner in which the laws were passed were itself unconstitutional. The ruling party has turned the temple of democracy into a mere debating club where the opposition puts forth suggestions that goes in vain. It is now a known fact that the will of the current government will prevail in every domain without giving heed to the minority but then you must at least ensure that your will is rightful and reasonable.
But I would certainly say that the Government is an innovative one, not in terms of finding solution to the problems but in finding ways to cover it up. I will cite how. According to Government data, an average of 14,000 farmers committed suicide each year between 1995 and 2015 to escape debt and poverty. The current government came to power promising relief to the farmers but since 2015 it stopped publishing the data about farmer suicide. The Government considers it an effective and novel way to tackle issues in democracy. Similar is the situation in terms of counting the poor of India. The World Bank’s biennial Poverty and Shared Prosperity Report: Reversals of Fortune was released on October 8, 2020 and across the 200 pages document, it was repeatedly said that estimation of global poverty level is not possible until and unless one of the poorest nations, i.e., India comes up with latest set of data. It is a matter of utter shame for the country. Not just because it records one of the highest numbers of poor but also because it does not bother to keep a count of the same. The latest data on poverty in India is from a survey done in 2011-12, almost a decade-old, India was to release its latest household expenditure survey data by the National Statistical Office but the Government did not release it citing quality issues. It is difficult to believe that an institution such as NSO would make a report with improper data. The real picture would be out and thus the Government restricted the report from being published.
Currently, hundreds of thousands of farmers are sitting on dharna in this bone-chilling winter on Delhi borders but the Government is hardly bothered about their sufferings and grievances. It has a soft corner for corporates and these farm laws provide opportunities to the corporates to rob the farmers of their livelihoods. At the time when farm laws need a constructive change, the scenario has been turned even more destructive. At every step, the laws have violated the principles of democracy. Described by the hon. Prime Minister as a watershed moment in Indian agriculture, it indeed is because these laws have compelled the farmers of the nation to agitate in this harsh weather with futile sessions of conversation and dialogues. On 7th of February, a farmer ended his life accusing the government that it is continuously delaying the scrapping of black laws. Curbing the freedom of speech, expression and the right to protest peacefully is another evidence of the government’s ruthless intention. The laws which are being claimed revolutionary were created without consulting the farmers themselves, without forming a proper committee and keeping the States at bay. India has never followed staunch unitary system; it has given equal importance to States but the present government is playing a hegemonic role. Not only will the farmers suffer, the State revenues will be affected drastically. Already India has performed miserably in global hunger index. Last year I had raised the issue of India’s position in Global Hunger Index and the hon. Minister had replied that the institution had used improper data and the Ministry was in the process of rectifying the error. The Hunger Index for 2020 has been published and India stands at 94th position out of 107 countries; being much behind Bangladesh, Nepal and even Pakistan. With a score of 27.2, India has a level of hunger that is serious. It is facing acute hunger and the surprising fact is that the central pool stored at different warehouses of Food Corporation of India are spilling with grains. Thus, the failure of proper management of policies is clearly reflected. The Government has failed. Government must strike down the farm laws immediately and work in the direction of eradicating hunger from the nation and that is impossible without supporting the farmers.
I would like to end by saying that in a situation where the country is suffering and people are looking up towards the Government with hope in their eyes, you are constructing a new Parliament with the aim of providing “adhik suvidha” to the law-makers. We do not want that. We want those crores of money to be utilised for the people of India. A mother always ensures that her child never suffers, if the Government had more women or would have been led by a woman with a mother’s heart, this decision would never have been taken.
Thank you.
*DR. M.K. VISHNU PRASAD (ARANI): I lay my speech on the Table today, the 9th February, 2021, on the Motion of Thanks on President’s Address.
I would humbly pay my gratitude towards the medical professionals, health workers, police personnel, revenue officials and all those who bravely and sincerely fought and still fighting Corona pandemic in India.
While the Government is proudly claiming about the developments in various sectors, I would like to focus on the unleashing of price of petrol and diesel. The sky rocketing fuel prices are worrying the people of India due to which prices of all the commodities and service sector prices are soaring high like poison.
Moreover, the rate of selling of public sector is bothering our future. It was our Congress Government which built this nation brick by brick and this Government is selling it for its survival. The Government has lost focus in generation of revenue in a progressive and less taxing manner.
The farmers issue has drawn global attention but failed to attract the attention of the Government. It has been almost two months that they are agitating for genuine cause but this Government is keen to introduce the laws in most urgent and secret manner. When we all are locked due to pandemic, this Government in an urgent manner is keen to introduce the farmers Bill without discussion in Parliament or in the Committee.
The President’s Address has not mentioned anything about funds for Indiaman Nagari rail project, Tindivanam-Thiruvannamalai rail project, Arani Silk Park, Polur Agricultural University (Central Government) and Cingee Fort as a tourism centre.
I humbly request the Central Government to include all these projects for implementation this year itself.
HON. CHAIRPERSON: I will be calling one after another. There are another three hon. Members. They can speak for five minutes each.
Shri K. Subbarayan *SHRI K. SUBBARAYAN (TIRUPPUR): Hon. Chairperson, Vanakkam. Hon. President’s Address is basically the policy document of the Government. On behalf of Communist Party of India, while pinpointing the wrong policies and shortcomings of the Government, I also want to give suggestions to improve upon its functioning. A new building for Parliament is being constructed. This is not an unavoidable national urgency. The need of the hour is to create and provide technical support which can facilitate the Members of Parliament to raise issues and express their views concerning the people in all the 22 Official languages as mentioned in the Eighth Schedule of the Constitution. Instead of providing this technical support facility for 22 Official languages in Parliament, the government of the day is just showing interest in the construction of Parliament building. Power sharing is another important issue. To understand this issue, power sharing should be in its real sense starting from States to the local bodies like Panchayats. As per the Constitution, the local bodies are just provided only their duties and not the rights. They can perform their duties but they don’t have any powers. A suitable Commission should be set up to ensure power sharing or decentralization starting from States to the local bodies. Supporters of the Government should not find a place in this Commission. Efficient persons who can ensure decentralization should only become part of this Commission. My next suggestion is for removal of …** from the Constitutional set-up. Presently the post of … ** is being used as a political tool for carrying out the political objectives of the …* Government. This post of …* has been misused. There is a need for a change. In West Bengal, North-eastern States, and several other States of the country, …** are behaving like secret agents of the Union Government. I urge upon the Government that an amendment should be brought to the Constitution for removing the …**. Even …** is there in Tamil Nadu. I don’t want to mention anything about the … *.* The intention of the …** will be known from the fact that the number of years he took to decide on a mercy plea for release of 7 convicts in Tamil Nadu. This clearly states that they have a political motive. I want to openly criticize that the …**of Tamil Nadu is being used by the Union Government as an instrument to unite or divide the ruling dispensation in the State of Tamil Nadu. He is being used as a tool. This should be stopped.
HON. CHAIRPERSON: This will not go on record. You should refrain from telling anything against the Highest Office of a State. You should not say this. You should be quite conscious about this.
**SHRI K. SUBBARAYAN: I will leave that Sir. In Tami Nadu several raids were conducted. Why such raids are conducted? Is it for fulfilling the political aspirations of the ruling Party? Is it not a violation or a breach.? The ruling party is not at all ashamed of this. This is a shameful act for the democratic tradition of India. This House should know about the details of such raids. What are the articles that were seized through such raids? Why such raids were conducted? What is the present status? Hon Prime Minister is duty bound to present the details of such raids before this august House. I want to state that he should be doing this. The parliamentary as well as democratic tradition has been degraded in the Independent India during the last six years as never before. It has lost its sheen. Hitting the nail on the wall and digging up the ground. Are they part of any democratic tradition? Who is responsible for such a situation? The ruling party is the reason behind all these shortcomings. This ruling party has lost its moral ground to continue in power. …(Interruptions)
SHRI SYED IMTIAZ JALEEL (AURANGABAD): I have to raise a point of order. There is no quorum in the House. …(Interruptions)
HON. CHAIRPERSON: As this House is also extended to Rajya Sabha, you should be aware that it is not necessary that we get 50 or 55 Members in this House alone.
Yes, please continue.
*SHRI K. SUBBARAYAN: Hon. Chairman Sir, What is the role of New Educational Policy, NEP. This is being used to suppress the students belonging to the Backward, Most Backward and Scheduled Castes of the country by the dominating upper castes.
HON. CHAIRPERSON: Just conclude. This should be your last point.
*SHRI K. SUBBARAYAN: Sir, I will conclude within two minutes. The New Educational Policy is being diluted in the name of merit. This should be stopped. Fifteen laws have been repealed. As many as 29 laws have been amalgamated into four Labour Codes. This is against the labourers which should be withdrawn. Similarly three farm laws are anti-farmer and are aimed to benefit only Adanis and Ambanis of the country. Parliament building, Red Fort and other prominent buildings will be …** by this Government very soon. This Government is functioning with the slogan, …** This Government is anti-people, anti-democratic, anti-national. I wish to state that this Government will be losing its power. Thank you.
SHRI E.T. MOHAMMED BASHEER (PONNANI): Chairperson Sir, thank you very much for giving me this opportunity to speak. The very purpose of Rashtrapati’s Speech is to highlight the clear cut policy and roadmap for the future, but unfortunately, this speech was just reproduction of ongoing programmes which is available on the website of various Ministries. So, in that sense, this is totally a disappointing Speech made by him.
The first contradiction begins from para 2 of the hon. President’s Speech which says and I quote: “Whenever India has remained united, it has been able to attain even seemingly unattainable goals.” It is very sweet to hear, but what is the relation of this sentence with this Government. A Government which is engineering to divide the country on the basis of caste, creed and religion has no moral right to chant these kinds of words. Our country was very famous for its humanity, unity, integrity and broadmindedness. You have turned down the history of the nation. Hate speeches are there, human right’s violations are there, atrocities against minorities and downtrodden section are also happening as an endless story in this country.
Now, I come to my second point. The most used word in the Presidential Speech and the Budget Speech is `Aatmanirbhar Bharat and self-reliance’. We had very good golden days and that was during the period of Congress Government which was ruling this country. Policies of Congress Government put strong foundation for self-reliance.
You may kindly recall green revolution, food security, etc. You may also recall that we had an era where rich countries used the Indian soil as a dumping market. Actually, the then Congress Government turned the history in a different way. They encouraged exports, and dependability on other countries was reduced like anything. This was the history made by the then Government.
What is the Government doing now? We all know that you turned the trend upside down. At the same time, the national properties are exhibited for sale. Further, the PSUs are on death bed. The dependability on multinationals and FDI is increasing like anything. You may shield the memories of the Nehruvian era, and you may recall the mixed economy theory. You have to understand that we achieved wonderful results in this country as far as export and other things are concerned. Self-reliance was not only a slogan, but it was made a reality. This is part of history. What is that you are doing? You are recklessly killing this kind of good tendencies.
Now, as far as federalism is concerned, it is mentioned in the speech with regard to the Government of India’s policy in the States that : “The collaboration between the Central and the State Governments has not only strengthened democracy but also enhanced the prestige of the Constitution”. There is not even an iota of truth in this statement. Appeasing the BJP-ruled States and oppressing the non-BJP-ruled States is your hobby nowadays. This is what is going on in different States.
Paragraphs between 24 and 30 talk about agriculture. Most of the speakers were mentioning about it. This is the first time we are witnessing in the history that a nation is declaring a war against the citizens of their own country. This is what is happening in that place, and I do not want to elaborate on it. You may use your force and all your personal tactics, but one thing is sure that you are not going to win this fight. The final victory will be that of peasants and the people in the agricultural sector. This is all that I want to say with regard to this issue.
As regards Census 2021 …(Interruptions)
HON. CHAIRPERSON: Mr. Mohammed Basheer, you have two more minutes to speak.
… (Interruptions)
SHRI E.T. MOHAMMED BASHEER: Yes, Sir. I will mention just 2-3 more points.
As regards the Census 2021, I would like to suggest that the Government should count the Other Backward Classes (OBC) category in the Census 2021. We had the Census in 2011, but unfortunately, it was not published and is kept in the cold storage. So, I strongly demand that once the Census is taken in this manner, then it will pave the way for giving social justice to others also.
I would like to mention another important point. Hundreds of Indians, especially, most of them Keralites are stranded in Dubai now. They were on their way back from their workplace in different countries, but the visa-related laws changed. So, they were not in a position to go, and they are all held-up in Dubai. Most of them are facing a hellish experience. I would humbly request the Government to intervene in the matter there. Otherwise, they will be in hot waters.
Another point that I would like to mention at the end is about the Government’s cruel play against the CAA agitators. What are they doing to them? They are doing some kind of victimisation against them as charges are made one after another. What did they do for it? They fought for a cause only, and now you are putting them behind bars; you are branding them as anti-nationals; and you are levelling sedition charges against them. All these things are going on. I would like to tell you that this kind of zero-tolerance should not be allowed in a democracy. This is what I want to say in this matter.
Lastly, I would like to mention that a journalist from Kerala named Kappan was going to the agitation site at Hathras and he was booked. What was the ground for doing it? Fabricated charges were levelled against him and he was put in jail. The journalists in the country have very strongly opposed this move. I would request you to desist from this kind of thing and to ensure justice.
HON. CHAIRPERSON: The whole fraternity of journalists stood-up for him.
… (Interruptions)
SHRI E.T. MOHAMMED BASHEER: I would like to mention that we must preserve communal harmony.
On communal harmony, a respected Member from UP was saying that great things are going on in UP. I would like to say that minorities are experiencing heinous acts; they are unnecessarily hunted. Those who are saying good things about UP must realise that this kind of cruelty is going on in this country. Instead of praising this kind of attitude, they must oppose this kind of attitude. That would be a way of rendering justice. With these few words, I conclude. Thank you very much.
*श्री देवेन्द्र सिंह ‘भोले’ (अकबरपुर): मैं सत्रहवीं लोक सभा जो कि कोरोना जैसी भयावह वैश्विक महामारी के दौर में सत्र की शुरूआत हुई है । मैं माननीय पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी एवं 6 सदस्यों को श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं,जो अकारण ही कोरोना जैसी महामारी के कारण काल के गाल में चले गए तथा इसके साथ ही मैं माननीय प्रधान मंत्री जी द्वारा इस काल में किए गए अहम फैसलों एवं स्वास्थ्य कर्मचारियों के कठिन परिश्रम से इस महामारी से लड़ने की शक्ति प्रदान हुई, जिसके लिए मैं माननीय प्रधान मंत्री जी एवं उन सभी स्वास्थ्य कर्मचारियों को धन्यवाद देना चाहता हूं, जिन्होंने दूसरों के स्वास्थ्य की रक्षा हेतु अपना सर्वस्व दावं पर लगा दिया ।
देश आजादी के 75वें वर्ष में कदम रख चुका है,अत: यह सर्वथा प्रासंगिक है कि हम महात्मा गांधी जी के इस कथन को याद करें कि भारत की आत्मा गांव में बसती है । उनकी इस सीधी और सच्ची बात से इतर विकास और खुशहाली के जितने भी मानक गढ़े गए हैं, उनका निष्कर्ष यही है कि ग्रामीण भारत और वहां के निवासी किसानों की अर्थव्यवस्था में प्रत्यक्ष भागीदारी के बिना वह रफ्तार हासिल कर पाना कठिन है,जो इसे पांच ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था बनाने के लिए आवश्यक है ।
इस बात में कोई शक नहीं है कि कृषि और किसानों की तकदीर और तस्वीर बदलने के लिए माननीय नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार हरित क्रांति,श्वेत क्रांति,नीली क्रांति,प्रधान मंत्री कृषि सिंचाई योजना,फसल बीमा योजना,किसानों को अल्पवधि ऋण के लिए ब्याज सब्सिडी, बाजार हस्तक्षेप योजना एवं मूल्य समर्थन योजना, प्रधान मंत्री अन्नदाता आय संरक्षण योजना,फसल अवशेष के स्वस्थाने प्रबंधन के लिए कृषि यन्त्रिकरण का संवर्धन, प्रधान मंत्री किसान सम्मान निधि,प्रधान मंत्री किसान पेंशन योजना,यूरिया सब्सिडी और पोषक तत्व आधारित सब्सिडी की अनेकानेक महत्वाकांक्षी योजनाएं लेकर आई है और इसके परिणाम भी कृषकों के चेहरे पर उम्मीद की नई चमक के रूप में देखे जा सकते हैं लेकिन यह अर्थव्यवस्था का इतना बड़ा क्षेत्र है और आज भी देश की 60 फीसदी आबादी गांव में रहकर कृषि पर आश्रित है कि भारत सरकार के यह तमाम प्रयास गर्म तवे पर पानी की चंद बूंदों के सामान अल्प प्रभावी से हो कर रह जाते हैं ।
इस सदन के माध्यम से मुझे यह कहने में कोई संकोच नहीं है कि ऊपर गिनाई गई कृषि विकास और कृषक कल्याण की तमाम योजनाओं और कार्यक्रमों के लिए प्रचुर धनराशि का केंद्रीय स्तर पर प्रावधान किए जाने के बावजूद उनके क्रियान्वयन की दशा बहुत संतोषजनक नहीं है । ऐसे में बहुत-सी योजनाएं जहां जमीन पर जाने से पहले दम तोड़ देती है, वहीं कई मौकों पर केंद्र और राज्य के सरकारी तंत्रों में समन्वय का आभाव आड़े आ जाता है । कृषि अनुसंधानों को खेत खलिहान तक पहुंचने के लिए स्थापित कृषि विज्ञान केंद्र भी अपेक्षित भूमिका नहीं निभा पाए हैं और उस पर अधूरी पड़ी तमाम परियोजनाएं कोढ़ में खाज का काम करती हैं । मैं कानपुर देहात के लिए बेहद अहम् अधूरी पड़ी अमराहट पम्प कैनाल परियोजना के उदाहरण से इस बात को पुष्ट करना चाहूंगा । यह योजना कानुपर देहात के किसानों का भाग्य बदलने का सामर्थ्य रखती है किंतु पता नहीं प्रशासनिक अकर्मण्ता का कौन-सा ग्रहण लगा हुआ है कि वर्षों वर्ष इसके पूरे होने का कोई संकेत नजर नहीं आता ।
जब हम किसानों की दशा सुधारने की बात और कोशिश करते हैं तो उसके पहले हमें उसकी दुर्दशा का भान और ज्ञान होना जरूरी होता है । मैं चर्चा कर रहा हूं अपने संसदीय क्षेत्र में घाटमपुर की यमुना पट्टी में बसे किसानों की जिनकी दुर्गति को मौके पर जाकर आंशिक रूप से महसूस किया जा सकता है । इस सदन में बैठे उस अंचल के सांसद गवाह हैं कि पानी,सिंचाई, परिवहन,आर्थिक स्तर हर दृष्टि से यह क्षेत्र बुंदेलखंड जैसी परिस्थितियों से दो-चार हो रहा है । मैं अपने पिछले प्रतिनिधित्व काल में भी इस सम्मानित सदन और राज्य सरकार की ड्योढ़ी तक अनेकानेक बार यह दरखास्त ले जा चुका हूं कि न केवल कानपुर देहात वरन आगरा से इलाहाबाद तक सामान दुश्वारियों को झेल रहे किसानों को बुंदेलखंड जैसी सुविधाएं प्रदान की जाएं, लेकिन दुर्भाग्य से इस अंचल के किसानों की यह सर्वथा न्याय पूर्ण अपेक्षा और मांग आज तक अधूरी है ।
आपके माध्यम से हम उन लाखों किसानों की उम्मीद भारत सरकार तक पहुंचाना चाहते हैं और राज्य सरकार के साथ समुचित समन्वय पूर्ण समाधान की उम्मीद रखते हैं । एक और मुद्दा कृषि क्षेत्र के परिमार्जन और परिवर्धन से जुड़ा हुआ है । जैसा कि बजट प्रारूप में प्रमुखता से प्रकाश में आया है कि सरकार कृषि क्षेत्र की ढांचागत अवस्थापनाओं के विकास के लिए संकल्पबद्ध है । यह खुशी की बात है कि कृषि क्षेत्र के विकास के लिए नई अवस्थापनाएं लाने हेतु सरकार द्वारा किसान हित में विधेयक पारित किया गया लेकिन साथ ही यह भी जरूरी है कि पहले से स्थापित तंत्र का रखरखाव और विस्तार समयबद्ध और गुणवत्ता के साथ किया जाए । व्यवहार में ऐसा होता नहीं दिखता है । चाहे कृषि विकास की आवश्यक शर्त सिंचाई के प्रमुख माध्यम नहरों और नलकूपों की दशा और रखरखाव का उल्लेख हो अथवा कृषि उपजों के विपणन के लिए स्थापित तंत्र की कार्य प्रणाली का किसानों का अभीष्ठ उनहें हासिल नहीं हो रहा है । स्वास्थ्य मानव जीवन की सबसे बड़ी कसौटी और प्राथमिकता है संसार की किसी भी लौकिक भौतिक उपलब्धि की कल्पना स्वास्थ्य के बिना नहीं की जा सकती है । स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क का वास होता है और भारत को उसकी अभीष्ठ ऊंचाई तक ले जाने में स्वस्थ समाज का क्या महत्व है । इसे बहुत ज्यादा व्याख्यायित करने की आवश्यकता नहीं है ।
प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी के शीर्ष नेतृत्व में नया भारत बनाने के जिस लक्ष्य की ओर हम बढ़ रहे हैं, उसकी बुनियाद स्वस्थ समाज के कंधों पर ही रखी जा सकती है । यह खुशी की बात है कि एनडीए की लोकप्रिय सरकार ने इस बात को सिद्दत से स्वीकार किया है और अपने सामने रखे दस लक्ष्य बिंदुओं में स्वस्थ समाज-आयुष्मान भारत, सुपोषित महिलाएं और बच्चे,नागरिकों की सुरक्षा को बहुत तरजीह दी है । मुझे यह कहने में गर्व और संतोष की अनुभूति होती है कि आयुष्मान भारत योजना ने डेढ़ करोड़ गरीबों को 24 हजार से ज्यादा अस्पतालों के माध्यम से 5 लाख तक मुफ्त इलाज देकर जिंदगी की एक नई जिजीविषा पैदा की है । वहीं दूसरी ओर 7 हजार से ज्यादा भारतीय जन औषधि केंद्रों के माध्यम से सस्ती दवाएं प्रदान की जा रही हैं । प्रधान मंत्री मोदी और उनकी सरकार जिस आखिरी पायदान के व्यक्ति को सामने रखकर नए भारत के निर्माण की संकल्पना संजोती है ।
आपके माध्यम से इस संदर्भ में मैं कानुपर के गणेश शंकर विद्यार्थी मेडिकल कालेज से संबंध लाला लाजपत राय चिकित्सालय का उल्लेख करना चाहूंगा । मध्य उत्तर प्रदेश का यह प्रमुख चिकित्सा केंद्र निकटवर्ती एक दर्जन से अधिक जिलों और बेहद पिछड़े बुंदेलखंड के निवासियों की चिकित्सा का सर्वप्रमुख केंद्र हुआ करता है लेकिन आबादी के बढ़ते दबाव और मानव स्वास्थ्य के क्षेत्र में निरंतर बढ़ती जा रही जटिलताओं के दृष्टिगत इसकी सामर्थ्य अब कमतर होने लगी है ।
नई दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान और लखनऊ के संजय गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान पर जिस तरह का दबाव है,वह किसी से छुपा नहीं है । इन संस्थानों में दाखिले के लिए महीनों और आपरेशन जैसी क्रियाओं के लिए 6 महीने से लेकर 2 वर्ष तक की प्रतीक्षा सूची बहुत आम बात है । ऐसे में ग्रामीण अंचलों का बेसहारा निवासी स्वास्थ्य क्या जीवन की उम्मीद ही छोड़ बैठता है । महोदय, यह सही है कि आज गरीब से गरीब ग्रामीण के पास भी आयुष्मान भारत का कार्ड है जिससे वह 5 लाख तक की निशुल्क चिकित्सा का अधिकारी बन जाता है लेकिन स्वास्थ्य सेवा तंत्र के अभाव और निजी अस्पतालों द्वारा पैदा की जा रही तकनीकी जटिलताओं के चलते ये कार्ड भी कई बार गरीबों को मुंड चिढ़ाते नजर आते हैं । ऐसे में यह समीचीन है कि सरकार पहले से स्थापित लाला लाजपत राय चिकित्सालय जैसे अस्पतालों का विस्तार और परिवर्धन करे जिन पर दशकों से बड़े इलाके के लोगों का विश्वास जमा हुआ है और उस विश्वास की कसौटी पर यह अस्पताल खरा भी उतरता रहा है ।
सुदूर ग्रामीण अंचलों तक गुणवत्ता पूर्ण चिकित्सा सुविधाएं पहुंचाने के लिए सरकार देश के विभिन्न अंचलों में एम्स और अन्य सुपर स्पेशलिटी अस्पताल बनाने पर करोड़ों अरबों रुपये खर्चा कर रही है । इसकी तुलना में अगर कानपुर के लाला लाजपत राय चिकित्सालय को एम्स के समकक्ष दर्जा देकर तदनुरूप सुविधाएं पैदा कर दी जाएं तो मध्य उत्तर प्रदेश और बुंदेलखंड के दर्जनों जिलों के करोड़ों निवासियों का हित साधन किया जा सकता है ।
इस मौके पर आपके माध्यम से मैं अपने संसदीय क्षेत्र अकबरपुर कानपुर देहात के ग्राम सुरार में प्रस्तावित स्पीच एंड हियरिंग सेंटर के निर्माया में पड़ रहे प्रशासनिक गतिरोध और व्यवधान की दुर्भाग्य पूर्ण परिस्थिति की ओर भी सरकार का ध्यान आकृष्ट कर इसके त्वरित स्थापना की अपेक्षा रखेंगा,क्योंकि स्थापना संबंधी ज्यादातर कागजी औपचारिकताएं भारत सरकार के स्तर पर पूरी की जा चुकी है ।
यह केवल हवा-हवाई संकल्पना नहीं है, बल्कि इसे जमीन पर उतारने के लिए प्रधान मंत्री कृषि सिंचाई योजना, मृदा स्वास्थ्य कार्ड स्कीम, परम्परागत कृषि विकास योजना,हरित क्रांति,श्वेत क्रांति,नीली क्रांति,फसल बीमा योजना,किसानों को अल्पावधि ऋण के लिए ब्याज सब्सिडी, बाजार हस्तक्षेप योजना एवं मूल्य समर्थन योजना, प्रधानमंत्री अन्न दाता आय संरक्षण योजना, प्रधान मंत्री किसान सम्मान निधि, प्रधान मंत्री किसान सम्पदा योजना, परिवार कल्याण योजना और जैविक मूल श्रृंखला विकास की परियोजनाएं खड़ी की जा रही हैं जो जमीन पर उतरने के बाद गांव की तस्वीर बदलने वाली साबित होंगी ।
प्रधान मंत्री कर्मयोगी मानधन योजना, प्रधान मंत्री श्रम योगी मानधन याजना एवं प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना का उल्लेख किए बिना नहीं रहा जा सकता है,जिसके चलते जहां खुदरा व्यापारियों तथा छोटे दुकानदारों को पेंशन का लाभ प्राप्त हो रहा है, वहीं उद्योग प्रबंधन का मजबूत ढांचा स्थापित किया जाना है ।
ग्रामीण जीवन में बदलाव के लिए प्रधान मंत्री ग्राम सड़क योजना के चलते ग्रीन टेक्नोलॉजी का प्रयोग करते हुए जहां छह लाख 42 हजार किलोमीटर सड़क का निर्माण किया गया, वहीं दूसरी ओर इसके तीसरे चरण के माध्यम से एक लाख 25 हजार किलोमीटर की सड़कों को अपग्रेड किया जाना शेष है एवं प्रधान मंत्री आवास योजना के तहत दो करोड़ आवासों का निर्माण कराए जाने का लक्ष्य भी पूर्ण किया गया तथा वर्ष 2022 तक सभी घरों को पक्का किए जाने लक्ष्य भी निर्धारित हैं । इसी समेकित दृष्टि के साथ गांव के विद्युतीकरण वहां की साफ सफाई,डिजिटल साक्षरता का विस्तार समेत कई योजनाओं को मिलाकर राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान शुरू किया गया है ।
इसके अलावा पशुपालन,बागवानी और दूध उत्पादन के साथ-साथ शहद उत्पादन के महत्वाकांक्षी प्रयास पर्याप्त वित्त पोषण के साथ शुरू किए गए हैं ।
वोटों के लालच में देश की सर्वोच्च सत्ता पर बैठे लोगों द्वारा राष्ट्रीय संसाधनों पर इस अथवा उस सम्प्रदाय का हक गिनाए जाने के विपरीत प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने पंडित दीन दयाल उपाध्याय की अंत्योदय संकल्पना को ही केंद्र में रखकर यहां नारा दिया है ‘कि देश के संसाधनों पर सबसे पहला हक यहां के सबसे गरीब निवासी का है ।’ उनकी इसी सोच ने ‘सबका साथ सबका विकास एवं सबका विश्वास’की अवधारणा को व्यापक समर्थन और विस्तार दिलाया है । महोदय, गांव को विकसित किए बिना और वहां रोजगार, शिक्षा,मनोरंजन के साधन जुटाए बिना शहरों की ओर पलायन को रोका नहीं जा सकता,जिसके तहत राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम, अनुसूचित जाति के विकास के लिए अम्ब्रेला याजना,कार्य और कौशल विकास योजना,ऋण सहायता कार्यक्रम,शिक्षा सशक्तिकरण,कौशल विकास और आजीविका के तहत ग्रामों का विकास किए जाने की शुरूआत की जा चुकी है ।
आजादी के 70 साल बाद तक सामाजिक सुरक्षा और कल्याण की बातें तो बहुत हुई किंतु पहली बार बीमा और पेंशन की सर्वस्पर्शी योजनाएं लागू कर देश को सच्चे अर्थों में सुरक्षित और संरक्षित होने का भरोसा दिलाया गया है । खान-पान की अशुद्धता और परिवर्तित जीवन शैली ने मानवता को बीमारियों के ऐसे मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है, जिनका इलाज तो दूर जांच करवाना भी आम आदमी के बूते के बाहर है । ऐसे लोगों की दिक्कतों को ध्यान में रखते हुए कैंसर और गुर्दे की बीमारियों की चिकित्सा के विशेष उपाय प्रस्तावित किए गए हैं । गरीबी हटाओ के देशकों पुराने वादों का खोखलापन अब सबके सामने उजागर हो चुका है । पूर्ववर्ती सरकारों के कुशासन और भ्रष्टाचार ने गरीबी की बजाय गरीबों के ही मिटने की स्थितियां पैदा कर दी थी, ऐसे में वित्त मंत्री ने प्रधान मंत्री जी के विजन को जमीं पर उतारते हुए कौशल विकास, रोजगार सृजन और अवसंरचना विकास के जो उपाय किए हैं, उससे आशा और उत्साह का नया वातावरण दृष्टिगोचर होने लगा है ।
स्थितियां आज भी कम गंभीर नहीं हैं । पूरी दुनिया गंभीर वित्तीय संकट के दौर से गुजर रही हैं,इसके बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था ने अपना आधार मजबूत बनाए रखा है । इस सरकार की नीतियों की बदौलत पूरे विश्व में भारत को लेकर अपार विश्वास और आशा कायम है । शायद इसीलिए अंतराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने मंद पड़ती वैश्विक अर्थव्यवस्था के बीच भारत को एक देदीप्य मान प्रकाश स्तम्भ का नाम दिया है ।
प्रधान मंत्री की दृष्टि में वकिास की गतिविधियों के विकेंद्रीयकरण और उसे समावेशी बनाने का बड़ा महत्व है । मैं आपके माध्यम से सरकार का ध्यान आकृष्ट करना चाहूंगा कि कभी पूर्व के मैनचेस्टर कहलाने वाले कानपुर की आर्थिक, औद्योगिक और व्यावसायिक गतिविधियों को भी नई ऊर्जा और सम्बल दिए जाने की आवश्यकता है ताकि गंगा के किनारे बसा यह पौराणिक शहर अपनी गरिमा और समृद्धि को कायम रख सके ।
हमारे संसदीय क्षेत्र का लगभग सम्पूर्ण हिस्सा ग्रामीण और कृषि प्रधान है । जहां सिंचाई की परिस्थितियां अत्यंत विषम हैं । प्रधान मंत्री कृषि सिंचाई योजना ने इस क्षेत्र के किसानों के मन में उम्मीद की नई किरणें जगाई हैं खास तौर से यमुना पट्टी के दूरदराज गांवों में बसे किसानों को बहुतेरी उम्मीदें हैं । योजनाएं बनाते समय उनका ध्यान रखे जाने की आवश्यकता है । देखने सुनने में आता है कि औद्योगिक विकास की राह में एक प्रमुख रोड़ा जमीन की अन-उपलब्धता है । कानपुर देहात की यमुना पट्टी में तमाम ऐसी भूमि पड़ी है जिसके समतलीकरण के बाद औद्योगिक इकाइयां लगाए जाने की आवश्यकता है ।
माननीय प्रधान मंत्री जी ने अपने वक्तव्यों में कहा था कि रेलवे को भारत की प्रगति और आर्थिक विकास की रीढ़ बनाना मेरा विजन है । यह कहने में कोई संकोच नहीं कि रेलवे की कमान संभालने के बाद पीयूष गोयल जी और उनका मंत्रालय इसे साकार करने का भरसक प्रयास कर रहा है और व्यक्तिगत स्तर पर ग्राहक के अनुभव में सुधार राष्ट्रीय स्तर पर अधिकाधिक रोजगार सृजन और आर्थक प्रगति में अग्रणी बनने की ओर अग्रसर है । सही अर्थों में भारत की यह सबसे बड़ी संस्था अपने में बदलाव लाकर बढ़ते और बदलते भारत में मिसाल बनकर उठ रही है और प्रधानमंत्री के सपनों का “नया भारत” बनाने में अपनी सक्रीय और सकारात्मक भूमिका के साथ अग्रसर है ।
इस तथ्य से हम सभी पिचित और सहमत है कि रेलवे प्रणाली समूचे भारत का प्रतिबिम्ब है इसमें हमारे महान देश का मूल स्वभाव नैतिकता, आचार व्यवहार सभी कुछ शामिल है इसमें हमारे विकासशील देश का अथक उत्साह झलकता है तो करोड़ों करेाड़ भारतवासियों की शास्वत आशाओं और आकांक्षाओं का प्रतिबिम्ब भी है इतना ही नहीं भारतीय रेल सतत प्रयास दृढ़ संकल्प और अनंत उमंग का परिचायक बनकर आम भारतीय के जीवन का अभिन्न अंग बन चुकी है ।
भारत के आम नागरिक के रूप में भी हम यह अनुभव करते हैं कि विगत वर्ष में माननीय पीएम के नेतृत्व में श्री पीयूष गोयल जी ने रेलवे में जो बदलाव की यात्रा शुरू की थी उसके सभी पहलुओं स्पीड,सफाई, कार्यकुशलता और संसाधन जुटाने में उसने महत्वपूर्ण प्रगति हासिल की है । यह सही है कि रास्ता बहुत लम्बा है लेकिन महत्वपूर्ण बात यह है कि गोयल की अगुवाई में रेलवे के पास मजबूत इरादा है और अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने की अदम्य इच्छा है ।
इस बात का भी स्वागत किया जाना चाहिए कि प्रधानमंत्री जी द्वारा व्यक्त किए गए विजन के क्रियान्वयन में तेजी और अपेखा पर खरा उतरते हुए रेलवे ने परियोजना निष्पादन में नये बंचमार्क स्थापित किए हैं और रेलवे ने अपना मानदंड लाइन का निर्माण पूरा करना से बदलकर लाइन चालू किए जाने पर किया है ।
यह सर्वविदित सत्य है कि जब तक लाइन चालू नहीं होती उसका उपयोग नहीं हो सकता इसलिए लाइन का निर्माण पूरा करना एक भ्रमित करने वाला वाक्य है और महज कागजी सच्चाई है इसके विपरीत श्री पीयूष गोयल के नेतृत्व में रेल मंत्रालय(पूर्व की सरकार)के 4.3 किमी प्रतिदिन के औसत के मुकाबले 7 किमी प्रतिदिन की रफ्तार से बड़ी लाइन चालू करने में सफल रहा है ।
इसी के साथ 27 शहरों में मेट्रो रेल परियोजना में जहां 1000 किलोमीटर से ज्यादा की मेट्रो रेल परियोजना का कार्य प्रगति पर लाने का अद्भुत कारनामा पीयूष गोयल जी द्वारा किया गया है । महोदय, मैं जनपद कानपुर नगर की रेलवे संबंधी जटिलसमस्या की ओर भी आपका ध्यान आकृष्ट करना चाहता हूं अनवरगंज से मंधना तक की रेलवे लाइन शहर को दो भागों में विभाजित करती है शहर का सबसे व्यस्ततम इलाका जीटी रोड जहां पर दर्जनों शैक्षणिक संस्थान,विश्वविद्यालय,पॉलिटेक्निक,आईटटीआई, शर्करा संस्थान,मेडिकल कॉले,कार्डियोलॉजी,जेके कैंसर,हैलट अस्पताल,विकास भवन आदि स्थापित है जिसके चलते उक्त क्षेत्र में अत्यधिक जनदबाव एवं आवागमन होने के कारण अक्सर जाम की स्थिति बनही रहती है उक्त रेलवे लाइन से समस्त मालगाड़ियों एवं यात्री गाड़ियों के आवागमन के कारण ज्यादातर अधिक समय तक रेलवे फाटक बंद ही रहते हैं जिसके कारण जाम की स्थिति और भयावह हो जाती है उक्त क्षेत्र की जाम की समस्या से निजात हेतु सरकार द्वारा 2017-18 के बजट में अनवरगंज से मंधना तक उपरगामी रेलवे लाइन के निर्माण के संबंध में 1789 करेाड़ का बजट प्रस्तावित किया था किन्तु किन्हीं कारणों से उक्त कार्य की शुरुआत नहीं की जा सकी है जिससे जाम की समस्या यथावत है उक्त जाम की समस्या से निजात के संबंध में रेलवे विभाग द्वारा मंधना से पनकी तक का सर्वे किया गया था कि यदि मंधना से पनकी को लाइन बिछा कर जोड़ दिया जाए तो मालगाड़ियों एवं अन्य गाड़ियों का रूट परिवर्तित किया जा सकता है जिससे गाड़ियों का आवागमन कम हो जाने से उक्त क्षेत्र की जाम की समस्या से निजात पायी जा सकी है अथवा जरीब चौकी, गुमटी, रावतपुर क्रासिंग एवं कल्याणपुर क्रासिंग पर उपरगामी पुल का निर्माण कर दिया जाए तो भी उक्त समस्या से निजात मिल सकती है ।
कानपुर देहात का प्रतिनिधि होने के नाते मैंने गांव की इस पीड़ा को बहुत शिद्दत से महसूस किया है पलायन की यह स्थिति दिनोंदिन विकराल रूप लेती जा रही है इसके बहुत दूरगामी दुष्प्रभाव सामाजिक, आर्थिक जगत को झेलने पड़ सकते हैं ग्रामीण पलायन के कारण पैदा होते जान सांख्यिकीय असंतुलन से जहां शहर की व्यवस्थाएं और आधारभूत संरचनाएं चरमराने लगी हैं और राजधानी दिल्ली समेत देश के अधिकांश शहरों और महानगरों पर बढ़ते जनसंख्या दबाव के कारण परिवहन,स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में लगभग अराजकता जैसी स्थिति पैदा हो रही है वहीं भारत की आत्मा कहे जाने वाले गांव सन्नाटे में है कई घरों में ताले लटक रहे हैा तो कुछ एक में वृद्ध माता-पिता महज चौकीदार की भूमिका में देहरी द्वार की इज्जत बचाये हुए हैं ।
इस स्थिति से निपटने के लिए और सच्चे अर्थों में विकास को गांव तक पहुंचाने के लिए हमें कृषि को उसके लाभप्रद स्वरूप में लाना पड़ेगा उसके साथ ही साथ हमें रोजगार के अन्य वैकल्पिक क्षेत्रों में मसलन पशु और मत्स्य पालन जैसे क्षेत्रों को लाभप्रद कृषि व्यवस्था का सहभागी बनाना पड़ेगा हालांकि ग्रामीण डिजटलीकरण,ग्रामीण डिजिटल साक्षरता अभियान के अंतर्गत अभ तक दो करोड़ से अधिक ग्रामीण भारतीयों को डिजिटल रूप से साक्षर बनाया गया है लेकिन ग्रामीण शहरी डिजिटल अंतर को पाटने के लिए अभी भी बहुत कुछ किया जाना है क्योंकि यही एक ऐसा क्षेत्र है जहां से रोजगार और स्वावलम्बन की डगर खुलती है ।
बहुत कुछ किया गया है किया जा रहा है और किया जाना बाकी है हमें इस बात का संतोश है कि गांव के प्रति सरकार की नीति और नीयत में कोई खोट नहीं है हम उम्मीद रखते हैं कि भ्रष्टाचार और लाल फीताशाही के अवरोधों को मिटाकर हम ग्रामीण भारत को भी नए भारत का हमसफर बना सकेंगे ।
मैं अपनी संसदीय क्षेत्र समेत निकटवर्ती जिलों की बेहद गंभीर एवं ज्वलंत जनसमस्या की ओर आपका ध्यान आकृष्ट कर माननीय मंत्री जी मांग करना चाहता हूं कि आगरा, इटावा, औरैया,कानपुर देहात,कानपुर नगर,फतेहपुर और इलाहाबाद जनपदों के यमुना के तटवर्ती भू-भागों की प्राकृतिक,भौगोलिक, वानस्पतिक,सामाजिक एवं आर्थिक परिस्थितियां बुंदेलखण्ड के समान है यहां पर मिट्टी की किस्म,जल स्तर, फसलें और वनस्पतियां बंदेलखण्ड से निम्नस्तरीय है उत्तर प्रदेश के सीलिंग एक्ट में भी उक्त क्षेत्रों की समानता बुंदेलखण्ड जैसी होने के कारण कृषि की जोत सीमा से यमुना की गहरी धारा से 16 किमी उत्तर की ओर बुंदेलखण्ड के सामान ही रखी है सूखा राहत व अन्य सुविधाओं के आवंटन में इस क्षेत्र को बुंदेलखण्ड के समतुल्य तो क्या दशमांश भी सुविधाएं नहीं मिली हैं ।
इसी के साथ अपनी बात समाप्त करता हूं ।
श्री असादुद्दीन ओवैसी (हैदराबाद): जनाबेचेयरमैन साहब, आपकाबहुत शुक्रिया । मैं सदरे जम्हूरियाके खुदबे केमोशन के खिलाफबोलने के लिएखड़ा हुआ हॅूं । मैं अपनी बातका आगाज़ उसमुल्क का नामले कर करनाचाहता हॅूं, जिसकानाम लेने सेहमारे वज़ीरेआज़म डरते हैंऔर कांपते हैं । उस मुल्क कानाम चाइना है । इस चीन ने45 सालके बाद भारतऔर चीन की सरहदपर हमारे बीससिपाहियों कोमार दिया औरउनकी शहादत कोयह हुकूमत रायगाजाने दे रहीहै । जिस मुकामपर इनको मारागया था, उसमुकाम पर आजभारत की फौज, पीपी-4, पीपी-8 तकपेट्रोलिंग नहींकर सकती हैं । आज अरुणाचलप्रदेश में, भारतकी एलएसी मेंचीन ने अपनेगांवों को बसादिया है । यहसरकार चीन सेलफ़्ज़ी तौर परइस बात का इतेजाज़करने की ताकतनहीं रख सकतीहै कि आपनेभारत के लिएसिकंदर एक गांवको बना दियाहै । नाकूला, सिक्कममें चीन घुसरहा है, आखिरउस हुकूमत कोक्या डर हैऔर खास तौरसे वज़ीरे आज़मको कि वे चीनका नाम लेनेसे भी डरतेहैं । भाई मुल्कसालिनियत कामसला है । मुल्ककी ज़मीन परचीन कब्ज़ा करतेजा रहा है औरभारत के वज़ीरेआज़म चीन कानाम नहीं लेतेहैं । मैं उम्मीदकरता हॅूं किजब वज़ीरे आज़मअपना रिप्लाईदेंगे तो वेहिम्मत दिखाएंगेऔर चीन का नामले कर कहेंगेकि चीन यहांइन जगहों परघुसा हुआ है ।
सर, चीनआज भी अपनाइन्फ्रास्ट्रक्चरबढ़ा रहा है । वहां पर फ़ौज़को बढ़ा रहाहै । मैं सरकारसे जानना चाहताहॅूं कि जबबर्फ पिघल जाएगीतो चीन दोबाराभारत की फौज़पर हमला करेगा । तो आप इसकेलिए क्या तैयारीकर रहे हैं? सर, मैंयह तकरीर इसलिएभी कर रहा हॅूं, क्योंकिमैं एक आंदोलनजीवीहॅूं । हाँ, मैंएक आंदोलनजीवीहॅूं और मुझेउसका फ़ख्र है । इसलिए मैंखुल कर बोलरहा हॅूं, अलफ़ाज़छाप कर, किसीसे डर कर बोलनामेरी फितरत मेंनहीं है ।
सर, अफसोसतो इस बात काहोता है किजिस जगह परहमको इन्फ्रास्ट्रक्चरबनाना था, वहहमने टिकरी परबना दिया । जिसजगह पर हमकोवह इन्फ्रास्ट्रक्चरबनाना था, हमनेसिंघू पर बनादिया । जो इन्फ्रास्ट्रक्चरकी जरूरत थी, हमनेगाज़ीपुर पर बनादिया, लेकिनअरुणाचल प्रदेशमें नहीं बनाया । आखिर हो क्यारहा है? किसानसे जो बर्तावकिया जा रहाहै, ऐसालग रहा है किवह चीन की फौज़बनी हुई हैऔर जो चीन कीफौज़ से बर्तावकिया जाना था, वहआप किसानों सेकर रहे हैं । तो मैं इसहुकूमत से जाननाचाहता हॅूं किइन्फ्रास्ट्रक्चरऔर यह किसानोंसे ज़ुल्म क्योकिया जा रहाहै? सर, यहांपर इन तीनोंकानूनों को आपकोवापस लेना पड़ेगा । आपकी अना कोथोड़ा मिटानापड़ेगा और तीनोंकानूनों को वापसलेना पड़ेगा ।
सर, यहांपर मुझे साहिरलुधियानवी काएक शेर यादआ रहा है । मैंसाहिर लुधियानवीके साथ माज़्रतके साथ उस शेरमें ज़रा तरमीमकर के कहनाचाहूंगा कि जोमौज़ूदा हालातपर है कि साहिरलुधियानवी केशेर को थोड़ातब्दील कर केकहता हॅूं कि– “चीन परकरम और किसानोंपर सितम, रहनेदे थोड़ा साभ्रम, ऐ जानेवफा यह जुल्मन कर । यह साहिरलुधियानवी नेकहा था ।” …(व्यवधान) हाँ,आपसे पूछ कर करेंगे क्या?आप तो टूटे शायर हैं । न शायरी आती आपको, न ज़ौख़ है, न कुछ, बोले जाते हैं,क्या-क्या बोलते हैं, आपको ही मालूम होगा ।
सर, बहरहाल यह जो किसानों का कानून है, इसमें क्या काला है? काला इसमें यह है कि इस हाऊस को, एग्रीकल्चर स्टेट सब्जेक्ट है और वह कहां लिखा है? संविधान में एंट्री 14, एंट्री 28, शेड्यूल 7 में है । और यह फेड्रलिज्म के खिलाफ है । केशवानंदन भारती ख़ास तौर पर कहता है कि फेडरलिज्म बेसिक स्ट्रक्चर है, तो यह सबसे बड़ा काला है । सर,किसानों के इस पूरे एजिटेशन से क्या बात मालूम हुई कि सरकार को इस लोक सभा की अज़मत,इसकी खूबसूरती की कोई इनके पास हैसियत नहीं है । सरकार इस ऐवान से डरती नहीं है । सरकार किससे डरती है? जब लोग रोड पर निकल कर आते हैं तो मोदी जी की नींद हराम हो जाती है । तो आप वही पैगाम दे रहे हैं कि लोग रोड पर निकलें,तो सरकार कहती है कि हम डेढ़ साल तक कानूनों को मुल्तवी कर देंगे । अरे! आप यह कैसे बोलते हैं? क्या यह इस ऐवान की तौहीन नहीं है? आप यहां पर कानून अपनी ताकत की बुनियाद पर बनाते हैं और इस लोक सभा की अज़मत को नेस्तनाबूत कर देते हैं? इस बात का पैगाम आपन दिया कि जब लोग रोड पर निकल कर आते हैं तो आप डरते हैं । आप बनाओ सीएए के रूल्स,इन्शा अल्लाह हम दोबारा रोड पर निकलेंगे । पूरे भारत में उसके खिलाफ इत्तेज़ात होगा ।
सर, तीसरी बात – सबका साथ,सबका विकास और सबका विश्वास – यह भी …* है । क्यों …*है? बाबरी मस्जिद के डिमोलिशन का केस आता है । जजमेंट आता है और केस में कहा जाता है कि किसी ने नहीं तोड़ा ।
आखिर सरकार उस जजमेंट के खिलाफ अपील क्यों नहीं करती? सुप्रीम कोर्ट ने डेमोलिशन ऑफ बाबरी मस्ज़िद को एक क्रीमिनल एक्ट कहा । आप हुकूमत में हैं । आप अपील इसलिए नहीं कर रहे हैं कि आप अपने लोगों को पैगाम देना चाहते हैं । क्या पैगाम देना चाहते हैं, कि बेटा काशी,मथुरा में भी तोड़ दो, हम तुम्हारे साथ हैं । बाबरी मस्ज़िद डेमोलिशन केस को अपील नहीं करना चाहते हैं । क्या आप इन्साफ पसन्द नहीं हैं?क्या आप मजलूम के साथ नहीं खड़े रहना चाहते? क्या आप जालिमों को जेल में नहीं भेजना चाहते,जिन्होंने 6 दिसम्बर को बाबरी मस्ज़िद को शहीद किया? आपकी खामोशी इस बात का इकरार है कि आप तशद्दुद पसन्द हैं । आप जबर के नाम पर,आपके पास कानून की बालादस्ती का कोई रोल नहीं है ।
20.45 hrs (Hon. Speaker in the Chair) सर, चौथा प्वायंट - आंदोलनजीवी,पैरासाइट । जम्हूरियत की बका के लिए,संविधान की बका के लिए आंदोलन करना जरूरी है और वज़ीरे-आज़म या कोई बरसरे इख्तिदार जमात के लोग अगर आंदोलनजीवी या पैरासाइट का लफ्ज इस्तेमाल करेंगे तो मैं आपके जरिए इस हुकूमत को याद दिलाना चाहता हूं कि हिटलर ने जर्मनी में यहूदियों के खिलाफ उन्हें कॉकरोचेज कहा, टरमाइट्स कहा । उसके बाद देखते हैं कि 2 मिलियन से ज्यादा यहूदियों को गैस चैम्बर में डाला गया । इस तरह के अल्फाज इस्तेमाल करने से क्या आप भारत में वही जर्मनी की तारीख को दोहराना चाहते हैं?
माननीय अध्यक्ष: बोलते समय थोड़ा ध्यान रखें ।
श्री असादुद्दीन ओवैसी: जी सर, आप आ गए । आप मुझे प्रोटेक्ट करेंगे । अब तो कोई फिक्र की बात नहीं है । अब तो और खुल कर बोल सकते हैं, क्योंकि आप आ गए । स्पीकर आ गए । अब तो क्या है, आप हमारे लिए हैं ।
सर, यहां पर आंदोलनजीवी, आंदोलन नहीं करना कहा गया । किसी शायर ने अच्छा कहा था– जिसमें न हो इंकिलाब, मौत है वो जिन्दगी, रूहे गम की हयात, कस्मकश है इंकिलाब ।
सर, अब फॉरेन पॉलिसी पर आ जाइए । किसी ईना, मीना, डीका ने ट्वीट किया,आप परेशान हो गए । ईना, मीना,डीका ने ट्वीट किया, आप खड़े हो गए । आपकी कौन-सी फॉरेन पॉलिसी है? भारत के एतराफ में जितने पड़ोसी हैं, चीन ने हमला किया । कौन-सा एक पड़ोसी है, जो चीन के खिलाफ बोलता है? बताइए । कोई नहीं बोलता,मुँह नहीं खोलता । श्री लंका में आप पोर्ट बना रहे हैं । किसके साथ?जापान के साथ । किसको काम मिल रहा था? आपके नूरे-नजर को,आपके चहेते नूरे-नजर को । श्री लंका ने कहा कि हम भारत को टर्मिनल पोर्ट यहां पर नहीं बनाने देंगे । आप फॉरेन पॉलिसी के बारे में बताइए ।
सर, नेपाल का वज़ीरे-आज़म कहता है कि भारत से ताल्लुकात उस वक्त तक बहाल नहीं होंगे, जब तक भारत, नेपाल की ज़मीन वापस नहीं करता । कहां सो रहे हैं आप? पड़ोस में कोई हमारा दोस्त नहीं है । चीन, बांग्लादेश से कोविड की बात करता है । अफगानिस्तान से अमेरिका छोड़ कर जा रहा है । क्या आपके पास कोई पॉलिसी है? गनी हुकूमत को सपोर्ट करने की आपके पास कोई पॉलिसी नहीं है ।
सर, एफडीआई का मतलब अब समझाता हूं । एफडीआई का मतलब यह है कि 5 फरवरी को ब्रैड शर्मन, जो अमेरिका के रिप्रेजेंटेटिव हैं, उनके पास भारत के, अमेरिका के सफीर गए । ब्रैड शर्मन ने ट्वीट करके कहा कि भारत सरकार को इन्टरनेट खोलना चाहिए,भारत सरकार को पीसफुल प्रोटेस्ट करना चाहिए । ब्रैड शर्मन कौन होता है, जो भारत को सिखाए? यह एफडीआई है । भारत सरकार का डिप्लोमैट,एम्बैसेडर बैठ कर उसका लेक्चर सुनता है । उसके बाद क्या होता है? तीन दिनों के बाद आप कश्मीर में इन्टरनेट खोल देते हैं । यह आप एफडीआई कर रहे हैं । हम नहीं कर रहे हैं ।
बात कश्मीर की आई । कौन है इम्तियाज़,कौन है अबरार,कौन है इबरार?इनको शोपियां में एन्काउन्टर पर मार दिया गया । प्रूफ हो गया । आर.आर. सेक्टर का ब्रिगेडियर,जिसने इन्हें टैररिस्ट कह कर मारा, उसे आपने अवार्ड दे दिया । इन मरने वाले कश्मीरियों के लिए कौन रोएगा?क्या वज़ीरे-आज़म रोएंगे,क्या कोई रोएगा?…(व्यवधान)
सर, एक और बात है । बात आई कि शादी के घर में गुस्सा होता है । अरे,कौन-सी शादी की बारात है कि 18 लाख करोड़ टैक्स मिलता है और 36 लाख करोड़ यह सरकार खर्च करती है?क्या शादी कर रहे हैं आप? वाह-वाह,माने वाकई में आपकी इकोनॉमिक पॉलिसी को सलाम कि 18 लाख करोड़ टैक्स में मिलते हैं, 36 लाख करोड़ आप लोग शादी में खर्च करते हैं । आपको मुबारक हो । शादी का यह बड़ा शानदार घर है ।
सर, दिल्ली के लॉ एण्ड ऑर्डर की बात है तो एक साल में तीन बड़े दंगे हो गए । एडवोकेट-पुलिस, उसके बाद सी.ए.ए. के 50 से ज्यादा रायट्स हुए । उसमें लोग मारे गए । 20 से ज्यादा मस्जिद को नुकसान हुआ । क्या यह सरकार जिम्मेदार नहीं है? आपकी सरकार है, आपके होम मिनिस्टर हैं । आप रोक नहीं पा रहे हैं, आपकी कमजोरी और आपकी नादानी की वजह से । आपमें दूरंदेशी नहीं है, आप उसको एलाउ कर रहे हैं ।
फ़ैजान का कातिल कौन है? आपने अब तक फ़ैजान के कातिल को क्यों नहीं पकड़ा? जिन बच्चों को रोड पर मारा जा रहा था, जन-गण-मन बोला जा रहा था, एक तो अभी तक आपने नहीं पकड़ा ।
सर, आखिर में मैं आपका ध्यान एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट की तरफ दिलाना चाहता हूँ । नीति आयोग के 20 में से 11 बैकवर्ड डिस्ट्रिक्ट्स मुस्लिम डोमिनेटेड हैं । सीमांचल में कटिहार, पुर्णिया और अररिया हैं । पुर्णिया के एयरपोर्ट का सिविल टर्मिनल का काम क्यों नहीं होता है?
सर, अब आप माइनॉरिटीज पर आ जाइए । तीन स्कॉलरशिप स्कीम्स हैं । मैं पुकार रहा हूँ, मुतालिबा कर रहा हूँ कि हमारी डिमांड पूरा कीजिए । सरकार ने वर्ष 2020-21 में तीन स्कॉलरशिप के लिए 2,265 करोड़ रुपये का एलान किया । आपने कितने पैसे दिए? आप सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास की बात करते हैं, लेकिन 400 करोड़ रुपये से 30 करोड़ रुपये कर दिए । आप किसको…* बना रहे हैं?आप लोग इसे पढ़िए ।
सर, उसके बाद आप देखिए कि कितने को माइनॉरिटी स्कॉलरशिप नहीं मिली । 42 लाख 36 हजार माइनॉरिटी स्कॉलरशिप नहीं मिली । सबसे ज्यादा इलिटरेसी मुसलमान लेडीज की है । आप बोलते नहीं हैं । आखिर में मैं आपके जरिए से हुकूमत से अपील कर रहा हूँ कि आंदोलन होगा, नाइंसाफी के खिलाफ आवाज़ उठेगी, संविधान को बचाया जाएगा । नरेन्द्र मोदी भारत के वजीरे आज़म है, दिल्ली सल्तनत के बादशाह या जहाँपनाह नहीं है । जिल्ले इलाही का दौरा खत्म हो चुका है, जहाँपनाह का दौर खत्म हो चुका है । मोदी की आँखों में आँख डाल कर उनकी गलतियों को बोला जाएगा । इसीलिए किसी शायर ने कहा था कि जो चुप रहेगी ज़बान-ए-खंजर, लहू पुकारेगा आस्तीन का ।
सर, बहुत-बहुत शक्रिया ।
]جناباسدالدیناویسی (حیدرآباد): جنابچیرمینصاحب،آپکا بہتبہتشکریہ۔میںصدرِجمہوریہکے اسخطبہکے موشنکے خلافبولنےکے لئےکھڑاہواہوں۔میںاپنیباتکا آغازاس ملککا ناملے کرکرناچاہتاہوں،جس کاناملینےسے ہمارےوزیرِاعظمڈرتےہیںاورکانپتےہیں،اس ملککا نامچینہے۔اس چیننے 45سالبعدبھارتاورچین کی سرحدپر ہمارے 20 سپاہیوںکو ماردیااوران کیشہادتکہ یہحکومترائیگاںجانےدے رہیہے۔جس مقامپر انکو ماراگیاتھا،اس مقامپر آجبھارتکی فوجپی۔پی۔4پی۔پی۔ 8 تک ہمپیٹرولنگنہیںکر سکتےہیں۔آجاروناچلپردیشمیںبھارتکی ایل۔سی۔میںچیننے اپنےگاوُںکو بسادیاہے۔یہ سرکارچینسے لفظیطورپر اسباتکا احتجاجکرنےکی طاقتنہیںرکھسکتیہے کہآپنے بھارتکے اندرسکندرایکگاوُںکو بنادیاہے۔ناکولہسِکّممیںچینگھُسرہاہے،آخراس حکومتکو کیاڈر ہےاورخاصطورسے وزیرِاعظمکو کہوہ چینکا ناملینےسے بھیڈرتےہیں۔بھائیملککی سالمیتکا مسئلہہے۔ملککی زمینپر چینقبضہکرتےجا رہاہے اوربھارتکے وزیرِاعظمچینکا نامنہیںلیتےہیں۔میںامیدکرتاہوںکہ جبوزیرِاعظماپناریپلائیدیںگےتووہ ہمتدکھائیںگے اورچینکا ناملے کرکہیںگے کہچینیہاںان جگہوںپر گھُساہواہے۔ سر،آجبھیاپناانفراسٹرکچربڑھرہاہے۔میںسرکارسے جانناچاہتاہوںکہ جببرفپِگھلجائےگی توچیندوبارہبھارتکی فوجپر حملہکرےگا،تو آپاس کےلئےکیاتیاریکر رہےہیں۔سر میںیہ تقریراس لئےبھیکر رہاہوںکیونکہمیںایکآندولنجیویہوں۔میںایکآندولنجیویہوںاورمجھےاس کافخرہے۔اس لئےمیںکھُلکر بولرہاہوں۔الفاظچھاپکر کسیسے ڈرکر بولنامیریفطرتمیںنہیںہے۔ سر،افسوستو اسباتکا ہوتاہے کہجس جگہپر ہمکو انفراسٹرکچربناناتھاوہ ہمنے ٹیکریپر بنادیاہے۔جس جگہپر ہمکو وہانفراسٹرکچربناناتھا،ہم نےسنگھوپر بنادیا۔جو انفراسٹرکچرکی ضرورتتھی،ہم نےغازیپورپر بنادیا،لیکناروناچلپردیشمیںنہیںبنایا۔آخرہو کیارہاہے؟کیاچینسے جوبرتاوُکیاجا رہاہےوہایسالگ رہاہے کہوہ چینکی فوجبنیہوئیہے اورجو چینکی فوجسے برتاوُکیاجاناتھا،وہ آپکسانوںسے کررہےہیں۔تو میںاس حکومتسے جانناچاہتاہوںکہ انفراسٹرکچراورکسانوںسے یہظلمکیوںکیاجا رہاہے۔سر یہاںپر یہتینوںقانونوںکو آپکو واپسلیناپڑےگا۔آپکی اناتھوڑامٹاناپڑےگااورتینوںقانونوںکو واپسلیناپڑےگا۔ سریہاںپر مجھےساحرلدھیانویصاحبکا ایکشعریادآ رہاہے۔میںساحرلدھیانویصاحبکے ساتھمعزرتکے ساتھاس شعرمیںتھوڑیسی ترمیمکرکےکہناچاہوںگا کہجو موجودہحالاتپر ساحرلدھیانویکے شعرکو تھوڑاتبدیلکرکےکہ چینپر کرم اورکسانوںپر سِتم،رہنےدے تھوڑاسا بھرم، اے جانِوفایہ ظلمنہ کر۔یہ ساحرلدھیانوینے کہاتھا (مداخلت)۔۔ ہاںآپسے پوچھکر کریںگے کیا؟آپتو ٹوٹےشاعرہیں۔نہ شاعریآتیآپکو نہذوقہے،نہ کچھبولےجاتےہیں،کیا۔کیابولتےرہتےہیں،آپکو ہیمعلومہوگا۔ سر،بہرحالیہ جوکسانوںکا قانونہے،اس میںکیاکالاہے؟کالااس میںیہ ہےکہ اسایوانکو،ایگریکلچراسٹیٹسبجیکٹہے اوروہ کہاںلکھاہے؟آئینمیںاینٹری 14 اینٹری 28، شیڈیول 7 میںہے۔اوریہ فیڈرلزمکے خلافہے۔کیشوآنندبھارتیخاصطورپر کہناچاہتےہیںکہ فیڈرلزمبیسِکاسٹرکچرہے۔تو یہسب سےبڑاکالاہے۔سر کسانوںکے اسپورےایجیٹیشنسےکیاباتمعلومہوئیکہ سرکارکو اسلوکسبھاکی عظمت، اسکی خوبصورتیکی کوئیان کےپاسحیثیتنہیںہے۔سرکاراس ایوانسے ڈرتینہیںہے۔سرکارکس سےڈرتیہے۔جب لوکسڑکوںپر نکلکر آتےہیںتو مودیجی کینیندحرامہو جاتیہے۔تو آپوہیپیغامدے رہےہیںکہ لوگروڈپر نکلیںتو سرکارکہتیہے کہہم ڈیڑھسالتک قانونوںکا ملتویکر دیںگے۔ارےآپیہ کیسےبولتےہیں؟کیایہ اسایوانکی توہیننہیںہے؟کیاآپیہاںپر قانوناپنیطاقتکی بنیادپر بناتےہیںاوراس لوکسبھاکی عظمتکو نیستو نابودکر دیتےہیں۔تو یہباتآپنے پیغامدی کہجب لوگروڈپر نکلکر آتےہیںتو آپڈرتےہیں۔آپبناوُسی۔اے۔اے۔کے رولز، انشااللہہم دوبارہروڈپر نکلیںگے،پورےملکمیںاس کےخلافاحتجاجہوگا۔ سرتیسریبات،سب کاساتھ،سب کاوِکاساورسب کاوشواسیہ بھی (کاروائیمیںشاملنہیں) ہے۔کیوں (کاروائیمیںشاملنہیں)ہے بابریمسجدکے ڈیمولیشنکا کیسآتاہے۔ججمینٹآتاہے اورکیسمیںکہاجاتاہے کہکسینے نہیںتوڑا۔آخرسرکاراس ججمینٹکے خلافاپیلکیوںنہیںکرتی؟سپریمکورٹنے ڈیمولیشنآفبابریمسجدکو ایککریمِنلایکٹکہا۔آپحکومتمیںہیں۔آپاپیلاس لئےنہیںکر رہےہیںکہ آپاپنےلوگوںکو یہپیغامدیناچاہتےہیں۔کیاپیغامدیناچاہتےہیں،بیٹاکاشی،متھرامیںبھیتوڑدو،ہم تمہارےساتھہیں۔بابریمسجدکے ڈیمولیشنکے کیسکو اپیلنہیںکرناچاہتےہیں۔کیاآپانصافپسندنہیںہیں؟کیاآپمظلومکے ساتھنہیںکھڑےرہناچاہتے،کیاآپظالموںکو جیلمیںنہیںبھیجناچاہتے،جنہوںنے 6 دسمبرکو بابریمسجدکو شہیدکیا؟آپکی خاموشیاس باتکا اقرارہے کہآپتشدّدپسندہیں۔آپجبرکے نامپر آپکو پاسقانونکی بالادستیکو کوئیرولنہیںہے۔ سر،چوتھاپوائنٹ،آندولنجیوی،پیراسائٹ۔جمہوریتکی بقاءکے لئےآئینکی بقاءکے لئےآندولنکرناضروریہے اوروزیرِاعظمیا کوئیبرسرِاقتدارجماعتکے لوگاگرآندولنجیوییا پیراسائٹکا لفظاستعمالکریںگے تومیںآپکے ذریعہاس حکومت کو یہیاددلاناچاہتاہوںکہ ہٹلرنے جرمنیمیںیہودیوںکے خلافانہیںکاکروچکہا،ٹرمائٹسکہا۔اس کےبعددیکھتےہیںکہ 2 ملینسے ذیادہیہودیوںکو گیسچیمبرمیںڈالاگیا۔اس طرحکے الفاظاستعمالکرنےسے کیاآپبھارتمیںوہیجرمنیکی تاریخکو دوہراناچاہتےہیں۔جی سر،آپآ گئے۔آپمجھےپروٹیکٹکریںگے۔اب توکوئیفِکرکی باتنہیںہے۔اب تواورکھُلکر بولسکتےہیں،کیونکہآپآ گئےہیں،اسپیکرصاحبآ گئےہیں،اب توکیاآپہمارےلئےہیں۔ سریہاںپر آندولنجیوی،آندولننہیںکرناکہاگیا۔کسیشاعرنے اچھاکہاتھا۔ جسمیںنہ ہوںانقلابموتہے وہزندگی روحِغم کیحیات،کشمکشہے انقلاب سر،آپخارجہپالیسیپر آجائیے،کسیاینا،مینا،ڈیکانے ٹویٹکیا،آپپریشانہو گئے،اینا،مینا،ڈیکانے ٹویٹکیاآپکھڑےہو گئے۔آپکو کونسیفارنپالیسیہے؟بھارتکے اطرافمیںجتنےپڑوسیہیں۔ چینحملہکیا۔کونسا ایکپڑوسیہے جوچینکے خلافبولتاہے،بتائیے،کوئینہیںبولتاہے۔سریلنکامیںآپپورٹبنارہےہیں۔کس کےساتھ؟جاپانکے ساتھ۔کس کوکاممل رہاتھا؟آپکو نورِنظرکو ،آپکو چہیتےنورِنظرکو۔سریلنکانے کہاکہ ہمبھارتکوٹرمِنلپورٹیہاںپر بنانےنہیںدیںگے۔آپخارجہپالیسیکے بارےمیںبتائیے۔ سر،نیپالکے وزیرِاعظمکہتےہیںکہ بھارتسے تعلقاتاس وقتتک بحالنہیںہوںگے جبتک بھارتنیپالکی ذمینواپسنہیںکرتا۔کہاںسو رہے ہیںآپ،پڑوسمیںکوئیہمارادوستنہیںہے۔چینبنگلہدیشسے کووِڈکی باتکرتاہے۔افغانستانسے امریکہچھوڑکر جارہاہے۔کیاآپکے پاسکائیپالیسیہے؟غنیحکومتکو سپورٹکرنےکی آپکو پاسکوئیپالیسینہیںہے۔ سر،ایف۔ڈی۔آئی۔کا مطلباب سمجھاتاہوں۔ایف۔ڈی۔آئی۔کا مطلبیہ ہےکہ 5 فروریکو بریڈشرمنجو امریکہکے ریپرےزینٹیٹِوہیں،انکے پاسبھارتکے امریکہکے سفیرگئے۔بریڈشرمن نے ٹویٹکرکےکہاکہ بھارتسرکارکو انٹرنیٹکھولناچاہئیے،بھارتسرکارکو پیسفُلپروٹیسٹکرناچاہئیے۔بریڈشرمنکونہوتاہے جوبھارتکو سِکھائے؟یہ ایف۔ڈی۔آئی۔ہے۔بھارتسرکارکا ڈِپلومیٹ،امبیسڈربیٹھکر اسکا لیکچرسُنتاہے۔اس کےبعدکیاہوتاہے؟تیندنوںکے بعدآپکشمیرمیںانٹرنیٹکھولدیتےہیں۔یہ آپایف۔ڈی۔آئی۔کر رہےہیں،ہم نہیںکر رہےہیں۔ باتکشمیرکی آئی۔کونہے امتیاز،کونہے ابرار،کونہے اِبرار،ان کوشوپیاںمیںانکاوُنٹرپر ماردیاگیا۔پرووہو گیا۔آر۔آر۔سیکٹرکا بریگیڈیر،جس نےانہیںٹیررسٹکہہکر مارااسےآپنے ایوارڈدے دیا۔ان مرنےوالےکشمیریوںکے لئےکونروئےگا؟کیاوزیرِاعظمروئیےگے،کیاکوئیروئےگا (مداخلت)۔۔ سرایکاورباتہے۔باتآئیکہ شادیکےگھرمیںغصہہوتاہے۔ارے،کونسیشادیکی باراتہےکہ 18 لاکھکروڑٹیکسملتاہے اور 36 لاکھکروڑیہ سرکارخرچکرتیہے۔کیاشادیکر رہےہیںآپ؟واہ۔واہ۔واقعیآپکی ایکونومِکپالیسیکو سلامکہ 18لاکھکروڑٹیکسمیںملتےہیںاور 36 لاکھکروڑآپلوگشادیمیںخرچکرتےہیں۔آپکو مبارکہو۔شادیکا یہبڑاشاندارگھرہے۔ سر،دہلی کے لاءاینڈآرڈرکی باتہے توایکسالمیںتینبڑےدنگےہو گئے۔ایڈوکیٹ،اس کےبعدسی۔اے۔اے۔کے 50سے زیادہرائٹسہوئے۔اس میںلوگمارےگئے۔ 20 سے زیادہمساجدکو نقصانہوا۔کیایہ سرکارکی ذمّہدارینہیںہے؟آپکی سرکارہے،آپکے ہوممنسٹرہیں۔آپروکنہیںپا رہےہیں،آپکی کمزوریاورآپکی نادانیکی وجہسے آپمیںدوراندیشینہیںہے۔آپاس کوالاوُکر رہےہیں۔ فیضان کا قاتلکونہے؟آپنے ابتک فیضانکو قاتلکو کیوںنہیںپکڑا؟جن بچوںکو روڈپر ماراجا رہاتھا،جن۔گن۔من۔بولاجا رہاتھا،ایکتو ابھیتک آپنے نہیںپکڑا۔ سر،آخرمیں،میںآپکا دھیانایسیپریشنلڈِسٹرِکٹکی طرفدلاناچاہتاہوں۔نیتیآیوگکے 20میںسے 11بیکورڈڈسٹرکٹ،مسلمڈومینیٹِڈہیں۔سیمانچلمیںکٹِہار،پورنیاںاورارریاہیں۔پورنیاکے ائرپورٹکا سِولٹرمِنل کا کامکیوںنہیںہوتاہے؟ سر،اب آپمائنوریٹیزکی طرفآجائیے۔تیناسکالرشِپہیں،میںپُکاررہاہوں،مطالبہکر رہاہوں،کہ ہماریڈیمانڈپوریکیاجائے۔سرکارنے سال 2020-21 میںتیناسکالرشِپکے لئے 2265 کروڑروپئےکا اعلانکیاتھا۔آپنے کتنےپیسےدئیے؟آپسب کاساتھ،سب کاوکاساورسب کاوِشواسکی باتکرتےہیں،لیکن 400 کروڑروپئیےسے 30 کروڑروپئیےکردئے۔آپکس کو (کاروائیمیںشاملنہیں) بنارہےہیں؟آپلوگاسےپڑھئیے۔ سر،اس کےبعدآپدیکھئےکہکتنےکو مائنوریٹیاسکالرشِپنہیںملی۔ 42 لاکھ 36 ہزارمائنوریٹی اسکالرشِپنہیںملی۔سب سےزیادہالیٹریسی مسلمخواتینکی ہیں۔آپبولتےنہیںہیں۔آخرمیں،میںآپکے ذریعہسے حکومتسے اپیلکر رہاہوںکہ آندولنہوگا،ناانصافیکے خلاف،آوازاٹھےگی،آئینکو بچایاجائےگا۔نریندرمودیبھارتکے وزیرِاعظمہیں،دہلیسلطنتکے بادشاہیا جہاںپناہنہیںہیں۔ضل الٰہیکو دورختمہو چکاہے۔جہاںپناہکو دورختمہو چکاہے۔مودیجی کیآنکھوںمیںآنکھیںڈالکر انکی غلطیوںکو بولاجائےگا۔اس لئےکسیشاعرنے کہاتھاکہ جوچُپرہےگی زبانِخنجر لہو پُکارے گا آستین کا سربہتبہتشکریہ[ (ختمشد) SHRI THOMAS CHAZHIKADAN (KOTTAYAM): Respected Speaker, Sir, I thank you for giving me an opportunity to speak on the Motion of Thanks on the President’s Address. However, Sir, I oppose the Motion. The Speech was predictable with predictable omissions.
Sir, I appreciate the initiatives taken by the Government to develop indigenous vaccines, ventilators, PPE kits, etc., to fight COVID-19 pandemic. I also appreciate the Government for providing corona vaccine to other countries. However, it is the responsibility of the Government to provide it free of cost to all the Indian citizens.
Sir, the President spoke at length about the benefits of the three farm laws enacted last year. The conspicuous absence of any mention of the agitation of hundreds of thousands of the farmers demanding the repeal of the three legislations reflects on the negative approach and neglect of this Government towards farmers. No consultation was held with the stakeholders before enacting these three legislations which affect millions of farmers. One must not forget the fact that agrarian sector is the only one which sustained India’s economic growth during the COVID crisis.
First the hurried promulgation of the Ordinances during the lock down, and then rushing through the Parliament to pass these Bills without proper discussion, raised a suspicion on the intention of the Government. The utter callousness shown by the Government in negotiating with the farmers has worsened the situation and led to loss of confidence in the process of governance. The members of the ruling dispensation must sink their heads in shame when they call our annadatas antinational, Khalistanis, terrorists, etc. Sir, Kerala is producing 90 per cent of the natural rubber in the country. Rubber producers in Kerala are not getting adequate price for their produce vis-à-vis the cost of production. Their plight has been brought to the notice of the Government by me through this august House earlier. As per the Swaminathan Committee report, farmers should get at least 1.5 times the cost of production of their produce. According to the Rubber Board, the cost of production per kilogram of natural rubber is Rs.172 per kilogram. However, the rubber growers are now getting only Rs.150 per kilogram. At one point of time, it went down below Rs.100 per kilogram. I urge upon the Government to fix the minimum price of natural rubber at Rs.200 per kilogram.
Over the last six years, the Government resorted to oppressive and selective enforcement of draconian laws such as UAPA, NSA, etc., against human rights activists, journalists, lawyers, and even protesting students and farmers.
The misuse of such laws impinges upon the freedom of individuals in exercising their Constitutional rights. In the name of preserving sovereignty and integrity of India and the security of the State, these laws are used to suppress the voice of genuine human rights activists, such as the arrest of octogenarian tribal rights activist Jesuit priest Father Stan Swamy, who is 83-year-old and suffering from Parkinson’s Disease. He is very sick. He is a very grim epitomization of an Orwellian State seeking the freedom to abuse the law and destroy the individual’s Constitutional rights guaranteed under Article 19 of the Constitution. The 83-year-old sick priest Father Stan Swamy was arrested on 8th October, 2020. It is more than 110 days now. On completion of 100 days in jail, he wrote a letter titled ‘Caged Bird Can Still Sing’. He has spent his entire lifetime for the upliftment of the poor and the downtrodden. …(Interruptions) I have not mentioned anything against you. I have mentioned only facts. …(Interruptions) Father Stan Swamy spent his entire lifetime for the upliftment of the tribals and the Adivasis. I request the hon. Home Minister to intervene and release this old priest who has spent his life for the upliftment of the Adivasis. Rising socio-economic inequities, polarization along religious, ethnic and caste lines, an increase in the upright assault on multiculturalism and diversity of this country pervade a sense of hopelessness, bitterness and alienation in vast sections of the society. It is time for the Prime Minister and the Government to wake up from the deep slumber and accept the harsh realities of economy slipping into doldrums and society heading towards intolerance. Thank you.
*SUSHRI S. JOTHIMANI (KARUR): The state of economy in India was abysmal before COVID-19 pandemic hit us. BJP-led Government has been very cunning in using the pandemic as an excuse for dwindling GDP. The most absurd statement by the Government has been expenditure equal to 10 per cent of GDP in Record Economy Package. Actual Government expense amounts to only 1 per cent of GDP. Although, Rs. 20,000 crore were spent on the Central Vista project, the Government states this has been a historic year, it has indeed — we fell by 10 spots on democracy index in 2019. This brings shame to the title of our country “The largest democracy in the world”. Freedom of speech is constantly targeted against those who voice their opinions that are not in favour of Modi Sarkar. Journalists, activists, comedians are being arrested frequently using tools such as UAPA. India dropped by 17 spots to 111th position in human freedom index. While citizens of the country wait for PM Modi to eliminate corruption, India has fallen by 6 spots in corruption perception index which is below average for Asia-Pacific region. If people think pandemic has affected everyone equally, then we are gravely mistaken. Wealth increase by friends of Modi Sarkar rose by 35 per cent during the lockdown.
Amidst on-going farmer protest, Government has the audacity to claim that small farmers have been benefitting from the laws. Issues such as vulnerability of farmers against big corporations and insufficient grievance redressal mechanism are still open-ended. The cry of farmers to make MSP a legal right has gone unheard. For 22 out of 25 crops, the MSP growth rate was higher during the UPA government. Under the BJP Government, a lot of deceptive promises are made to the farmers of my country. Government claimed to give Rs. 1 lakh crore amount to farmers under PM Kisan Samman Nidhi but over 1.5 crore beneficiaries face late payments. Similar delay exists in Prime Minister Fasal Bima Yojana. Moreover, those who received, got only 20 per cent of the promised amount. I am sorry, Sir, this Government has been only partially fulfilling their promise to the backbone of our economy.
NCRB report suggests that crimes against women increased by 7.3 per cent from 2018-19 and by 31.11 per cent from 2013, the last year before Modi Government came to power. In spite of such numbers, Government seems to be taking pride in progress of fast-track courts, one stop centres and emergency response support systems. Then why are the accused criminals in Pollachi rape case still free? Why have the girls and their parents not received justice? India ranks 133 out of 167 countries in women, peace and security index 2019-20 report.
Poor implementation of Jan Dhan Yojana and Ujjwala scheme has failed to empower women, that they proudly advertise. Twenty-one per cent of women having JYD account do not even know about the account. The gas issuance accounts that are in name of the women are being operated by the men. Government says that 70 per cent of MUDRA beneficiaries are women but this has reduced from 80 per cent in 2015-16.
Government is under the misconception that no poor person went hungry. The pandemic has further aggravated cases of malnutrition and deaths due to hunger. We lost, at least, 97 migrants due to hunger forced by the draconian lockdown by Modi Government.
PM Modi advocates sabka saath sabka vikas and claims to develop all sections of the society but this is far from truth. When Adani’s mining operations that displaced thousands of tribes, the Government was silent despite protests of the natives. Transgender Act has just added to the troubles of trans people and red-tapism. It violates their dignity and right to body autonomy. Additionally, labour codes have excluded trans community in the scope of the bill. Even basic matters like separate toilets for trans people at workplace have not been thought of. The severe budget cuts in education sector over last five years have led to fewer scholarships options for minority communities. Government not only fails to acknowledge this but chooses to ignore this problem and boasts of benefitting marginalized groups.
One key learning of the pandemic was that this Government has completely ignored the needs of the healthcare sector. India has been ranked 179 out of 189 countries in prioritising health budgets by the Government. National Family Health Survey highlighted that out-of-pocket expenditure in India has increased. Empty promises of Pradhan Mantri Jan Arogya Yojana do not cover all medical treatments. From 2014-18 the average hospitalization expenditure rate increased by 23 per cent. Economic survey of 2019-20 also showed that Government has been placing higher price caps on medicines under the national list of essential medicines. COVID-19 pandemic highlighted these problems. The Government has no reasons to celebrate and say it saved lives of our countrymen. India has been ranked 86th in terms of COVID-19 management out of 98 countries. We also suffered from 4th highest number of fatalities in the world.
Unemployment was in shams before pandemic started. Government has been using COVID-19 as a scapegoat. Before entering the pandemic, unemployment was at 8.75 per cent as per CMIE. Garib Kalyan Rojgar Yojana has seen no visible impact even in Telihar village in Bihar where PM Modi launched it through video conferencing. It has been 6 years since BJP took over with the promise of ‘ache din’ but the youth of our nation are still waiting.
Government continues to boast 3 language policy of National Education Policy despite opposition from the State of Tamil Nadu. They have relentlessly been attempting to impose Hindi in Tamil Nadu. AYUSH has been appreciated for their development while they discriminate the practices and knowledge of Tamil Nadu such as siddha medicine. Anti-Tamil motives of Modi Government is clearly visible in their move to ban Jallikattu or indifference towards 100 farmers who camped at Jantar Mantar with skulls in their hands or ignorance to opposition of NEET entrance exam that has led to suicides of many MBBS aspirants. Time and again, the Government has ignored the sentiments of citizens of Tamil Nadu.
Government is giving verbal assurance on MSP but is plagued with cowardice and, therefore, is not documenting this provision in the bill. In absence of MSP, the procurement will be snubbed and, therefore, this will end the Public Distribution System. In contrary to what Government claims, the draconian farm bills will destroy the livelihood of farmers. The only parties benefitting here are corporate friends of PM Modi. Furthermore, the Government has legalized hoarding by passing a separate law. This will give scope to artificially increasing the price of the commodity. Therefore, being harmful not only for farmers but for all the citizens of the country.
However, instead of lending their ears to the farmers, Government has demonized them by calling them supporters of Khalistanis. They have proved that in the might of their power they can crush whichever section of the society that does not agree with them. This time it is farmers but before this it was migrant workers and even before it was citizens of the country who were electrocuted with demonetization. Hundreds died in migrant workers exodus and hundreds have died in the farmer’s protest. How many more deaths do we have to see because of the negligent and juvenile policy moves of this Government? PM of the nation audaciously never pacified the grieved members nor did he send a condolence message. Because as long as PM’s Five corporate friends and RSS are happy, they have no business with “Aam Aadmi” of this nation.
China has occupied borders in India, building villages there and threatening the sovereignty of our country but our PM lied through his teeth when he told us there is no border intrusion.
The 56-inch chest self-proclaimed Government trembles to even utter the word ‘China’ let alone retaliating against them. But they have not hesitated from using full force against the farmers of our nation, the very people they promised to protect.
To quote Abraham Lincoln “You can fool all the people some of the time and some of the people all the time, but you cannot fool all the people all the time.” The truth will prevail and this Government will be dethroned by the same people.
माननीय अध्यक्ष : निशिकांतजी, क्याआप कुछ बोलनाचाहते हैं?
डॉ. निशिकांत दुबे : अध्यक्ष जी, धन्यवाद । ये जिस स्टेन स्वामी की बात कर रहे हैं,वे मेरे राज्य झारखंड के हैं । उनके ऊपर दो बड़े सीरियस आरोप हैं,एक तो नक्सलवादियों को हथियार देना,नक्सलवादियों को पैसा देना और दूसरा धर्मांतरण करना । जो नक्सलवादियों को हथियार देगा,जो देश के खिलाफ एक वॉर घोषित करेगा,उसको आप स्वामी कैसे कह सकते हैं?…(व्यवधान) सर,वह कैसे पादरी हो सकता है? …(व्यवधान) उसकी बातों को उठाना कहीं से उचित नहीं है ।…(व्यवधान) मेरा आपके माध्यम से आग्रह है कि इस तरह की जो भी बात होती है, 352 (1) में इस तरह की बातें नहीं उठनी चाहिए और इनको सदन से माफी मांगनी चाहिए । …(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : अभीबड़ी सारगर्भितडिबेट चल रहीहै, इसलिएआपका मौका नहींहै ।
डॉ. निशिकांत दुबे : वे अभी जुडीशियल कस्टडी में हैं । उनको अरेस्ट किया गया है, कोर्ट उनको बेल देने को तैयार नहीं है ।…(व्यवधान) उनको किसी तरह से अरेस्ट किया है, तो उसके बारे में यहां कैसे कुछ कह सकते हैं? …(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : येभी आपकी तरहइस संसद केप्रोफेसर हैं । प्लीज बैठजाइए ।
श्रीमतीअन्नपूर्णा देवी ।
…(व्यवधान)
श्री भगवंत मान (संगरूर): अध्यक्षजी, छोटीपार्टी की तरफभी देख लीजिए ।
माननीय अध्यक्ष : नहीं, आपकीतरफ कोई नजरनहीं है, बैठजाइए ।
श्रीमती अन्नपूर्णा देवी (कोडरमा):आज आपने राष्ट्रपति महोदय के अभिभाषण पर प्रस्तुत धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा में मुझे बोलने का अवसर दिया, इसके लिए आपको बहुत-बहुत धन्यवाद ।
यह मेरा सौभाग्य है कि मैं ऐसे दौर में देश के इस महत्वपूर्ण सदन का हिस्सा बनी हूं, जब देश का नेतृत्व विगत लगभग 7 वर्षों से देश में सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास हासिल करने का अभिनव प्रयोग कर रहा है ।
21.00 hrs देश की जनता और जनता के लिए लाई जाने वाली कल्याणकारी योजनाओं को अलग-अलग खांचों में बांटकर होने वाली राजनीति तो यह देश लम्बे समय से देख रहा था ।
माननीय अध्यक्ष: अगरसभा की सहमतिहो तो सदन कासमय रात बारहबजे तक बढ़ादिया जाए ।
अनेक माननीय सदस्य: हां, बढ़ादिया जाए ।
माननीय अध्यक्ष: उसकेबाद और बढ़ादेंगे, अभीबारह बजे तकबढ़ा देते हैं ।
श्रीमती अन्नपूर्णा देवी : महोदय, यह इक्कीसवीं सदी के भारत का सौभाग्य है कि देश को ऐसा नेतृत्व मिला है, जो मानता है:
“सर्वे भवन्तु सुखिन:,सर्वे सन्तु निरामया सर्वे भद्राणि पश्चन्तु मां कश्चिद दु:ख भाग भवेत ।” देश ने पहली बार ऐसी सरकार देखी है, जो कहती है कि हर सिर को पक्की छत मिले,हर बसावट तक पक्की सड़क हो,सबको पीने का साफ पानी मिले । सबको गैस मिले,सबके यहां शौचालय हो, सभी को आरोग्य मिले, सबको पोषण मिले । क्षेत्र,सम्प्रदाय,जाति, ऊंच-नीच के आधार पर कोई भेदभाव नहीं और हर योजना एक निश्चित लक्ष्य,एक निश्चित टाइम फ्रेम में पूरी करनी है । इसकी सबसे बड़ी विशेषता है कि बिना किसी भेदभाव और परेशानी के हर स्तर तक योजनाएं जाती हैं और निश्चित समय पर योजनाएं पूरी हो रही हैं ।
इनमें से ज्यादातर लक्ष्य हासिल हो चुके हैं और कुछ हासिल होने के करीब हैं । यह एक तरह से विकास की गाड़ी सरपट दौड़ाने के लिए रास्ता बनाने की तरह था,जिसमें काफी हद तक कामयाबी मिल चुकी है । इस बीच वैश्चिक महामारी कोरोना ने स्पीड ब्रेकर का काम किया, लेकिन अब हम दोगुनी स्पीड के साथ दौड़ने के लिए तैयार हैं । देश का नेतृत्व भी ऐसे हाथों में है जो न खुद हाथ पर हाथ धरे बैठेगा न ही बैठने देगा ।
मैं महामारी के इस दौर में आदरणीय प्रधानमंत्री जी के प्रति आभार व्यक्त करती हूं । उनके कुशल नेतृत्व में कोविड के दौरान देश आत्मनिर्भर कैसे हो, इस दिशा में उनकी चिंता रही और उस दिशा में उन्होंने काम भी किया । आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में सबकी भूमिका तय है और सरकार हर क्षेत्र को उसकी क्षमता,दक्षता और कुशलता के अनुरूप इस भूमिका के निर्वहन के लिए तैयार कर रही है, प्रोत्साहित कर रही है । आधुनिक और भविष्य की जरूरतों के हिसाब से देखें तो हमारे छोटे-मंझोले उद्यमी इस अभियान में सबसे बड़ी भूमिका निभा रहे हैं ।
एमएसएमई क्षेत्र भारतीय अर्थव्यवस्था का एक बेहद जीवंत और गतिशील क्षेत्र के रूप में उभरा है । एमएसएमई न सिर्फ बड़े उद्योगों की तुलना में अपेक्षाकृत कम पूंजी लागत में बड़े रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं बल्कि राष्ट्रीय आय और धन का समान वितरण सुनिश्चित करने, क्षेत्रीय असंतुलन को कम करने, ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों के औद्योगीकरण में मदद करते हैं । एमएसएमई सहायक इकाइयों के रूप में बड़े उद्योगों के पूरक हैं और यह क्षेत्र देश के सामाजिक-आर्थिक विकास में काफी योगदान देता है । हमारी अर्थव्यवस्था की आधारभूत ताकत हमारे गांवों और छोटे शहरों में फैले हमारे लघु उद्योग, हमारे कुटीर उद्योग एमएसएमई ही हैं । भारत को आत्मनिर्भर बनाने का बहुत बड़ा साम्थर्य हमारे लघु उद्योगों के ही पास है । यह देश के सकल घरेलू उत्पाद में लगभग 29 फीसदी का योगदान करता है । एमएसएमई सेक्टर देश में रोजगार का सबसे बड़ा जरिया है । इनमें ग्यारह करोड़ लोगों को रोजगार मिला हुआ है । देश के कुल निर्यात में इसकी भागीदारी पचास प्रतिशत है । अगर हम छह-सात साल पीछे जाकर पूर्ववर्ती सरकार की ओर देखें तो छोटे- मंझोले उद्यमियों की क्या स्थिति थी, मैं दो लाइन में बताना चाहती हूं ।
“जिन्दगी तूने मुझे कब्र से कम दी है जमीं पांव फैलाऊं तो दीवार से सर लगता है ।” छोटे-मंझोले किसान की यही उपेक्षा पूर्ववर्ती सरकार द्वारा की जाती थी, लेकिन अब ऐसा नहीं है, अब सरकार ने आत्मनिर्भर भारत के मिशन में एमएसएमई की भूमिका को बढ़ाने के लिए अनेक कदम उठाए हैं । एमएसएमई की परिभाषा में बदलाव हो, निवेश की सीमा बढ़ानी हो या सरकारी खरीद में वरीयता हो,लघु और कुटीर उद्योगों को विकास के लिए जरूरी प्रोत्साहन मिला है । तीन लाख करोड़ रुपये की इमेरजेंसी क्रेडिट गारंटी योजना,मुश्किल में फंसे एमएसएमई के लिए 20,000 करोड़ रुपये की विशेष योजना और फंड ऑफ फंड्स जैसे प्रयासों से लाखों लघु उद्यमियों को लाभ पहुंचा है ।
जैम पोर्टल से देश के दूरदराज वाले क्षेत्रों में एमएसएमईज़ को सरकारी खरीद में पारदर्शिता के साथ अधिक भागीदारी भी मिल रही है । महामहिम राष्ट्रपति महोदय ने अपने अभिभाषण में कहा है कि सरकार की निरंतर कोशिश है कि उद्यमशीलता का लाभ देश के हर वर्ग को मिले । हुनर हाट और उस्ताद योजना के माध्यम से लाखों शिल्पकारों का कौशल विकास किया जा रहा है । उनको रोजगार के अवसर दिए जा रहे हैं । इन लाभार्थियों में आधे से अधिक महिला शिल्पकार हैं । ई- हाट के माध्यम से इन शिल्पकारों को पूरी दुनिया के शिल्पकारों से जोड़ा जा रहा है । बड़ी बात यह है कि उद्यमशीलता महिलाओं में कम है, ऐसा इस सरकार ने नहीं माना,बल्कि बराबरी के कुछ अलग से कदम आगे बढ़ाने का हौसला दिया है । पिछले बजट में माननीय वित्त मंत्री जी ने कहा था - नारी तूं नारायणी । यह सिर्फ बजट में नहीं था, बल्कि आदरणीय मोदी जी की सरकार ने यह साबित करके दिखाया है और महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए काफी प्रयास भी किया है ।
सरकार ने महिलाओं को स्वरोजगार के नए अवसर देने के लिए कई कदम उठाए हैं । मुद्रा योजना के तहत अब तक 25करोड़ से ज्यादा ऋण दिए जा चुके हैं । इनमें लगभग 70 प्रतिशत ऋण महिला उद्यमियों को मिला है ।
दीनदयाल अंत्योदय योजना, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत देश में आज 7 करोड़ से अधिक महिला उद्यमी करीब 66 लाख स्वयं सहायता समूह से जुड़ी हैं । बैंकों के माध्यम से इन महिला समूहों को पिछले छ: वर्षों में 3 लाख 40 हजार करोड़ रुपये का ऋण दिया गया ।
कोरोना की मार से जब पूरी दुनिया कराह रही थी, देश के छोटे-मझले उद्यमी तकलीफ में थे तो सरकार मरहम लेकर मुस्तैद थी । मुश्किल में फंसे दो लाख एमएसएमईज़ के लिए 20 हजार करोड़ डैट का प्रावधान किया गया । इसके अलावा सरकार सूक्ष्म और लघु उद्यमों के लिए क्रेडिट गारंटी ट्रस्ट के तहत 4,000 करोड़ रुपये की मदद लेकर खड़ी हो गई । सरकार ने यह भी घोषणा की कि 10,000 करोड़ रुपये के कोष के साथ फंड ऑफ फंड्स की स्थापना होगी,जिसमें एमएसएमईज़ को इक्विटी फंडिंग में मदद मिलेगी । सरकार ने कहा कि इस सैक्टर के लिए 3 लाख करोड़ रुपये तक के लोन की गारंटी सरकार देगी ।
सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों की बदलती परिभाषा से देश के उद्यमी काफी उत्साहित हैं । सरकार ने अब ढाई सौ करोड़ रुपये तक सालाना कारोबार करने वाले उद्योगों को एमएसएमई के दायरे में ले लिया है । एमएसएमई श्रेणी के उद्योगों के लिए सालाना कारोबार,प्लांट, मशीनरी में निवेश का दायरा बढ़ाने से 95 फीसदी उद्यमियों को फायदा होने की संभावना है । इससे केवल दायरा ही नहीं बढ़ा है, सुविधाएं बढ़ाईं और मौके भी बढ़ाए । सरकार ने 200 करोड़ रुपये तक के सरकारी काम घरेलू कंपनियों को भी देने का आदेश दिया । इससे एमएसएमईज़ का प्रभाव बढ़ा । एमएसएमईज़ अभी तक इस तरह के बड़े काम लेने के लिए प्रयास ही नहीं कर पाते थे लेकिन अब प्रतिस्पर्द्धा घरेलू कंपनियों के बीच ही रहेगी । इससे प्रत्येक उद्योग को अपना विस्तार करने का मौका मिला ।
एमएसएमईज़ को सरकारी खरीद में 25 प्रतिशत का आरक्षण और सरकारी कंपनियों से 45 दिनों के भीतर भुगतान की सुरक्षा और सुविधा केवल सूक्ष्म और लघु उद्योगों को ही मिलती है । मध्यम श्रेणी के उद्योगों को एमएसएमईज़ के लिए बिना गारंटी का ऋण प्राप्त करने की सुविधा दी गई । इसके अलावा प्लांट मशीनरी के लिए भी 15 फीसदी की सब्सिडी और 50 लाख से एक करोड़ रुपये तक क्वालिटी कंट्रोल, अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनी, आधुनिक तकनीक आदि के लिए सब्सिडी मिलती है ।
फेसलैस टैक्स असेसमेंट और अपील की सुविधा देने के साथ ही सरकार ने देश में उद्यमशीलता को प्रोत्साहित करने के लिए कंपनी के अनेक प्रावधानों को गैर-आपराधिक बना दिया । उद्योगों को जरूरी सुविधाएं मिल सकें, इसके लिए औद्योगिक क्षेत्रों का जीआईएस तकनीक पर आधारित डेटा बेस तैयार किया । इस डेटा बेस में देश भर की लगभग 5 लाख हेक्टेयर औद्योगिक भूमि से जुड़ी जानकारी भी उपलब्ध है । भारत सरकार तैयार बैठी है, राज्य सरकारें सहयोग करें तो बड़ा चमत्कार हो सकता है । भारत सरकार उद्यमियों के लिए ऐसे औद्योगिक क्षेत्रों का निर्माण करना चाहती है,जहां ‘प्लग एंड प्ले’ के सिद्धांत पर उद्यमियों को जगह मिले । सब कुछ रेडी है । आइए और निर्माण कारोबार शुरू कीजिए । इस सदन में बैठे माननीय सदस्यों को ध्यान होगा कि कॉल सेंटर्स और बीपीओज की शुरुआत देश के कुछ बड़े शहरों में इसी फार्मूले के तहत हुई थी ।
आदरणीय नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में ये सरकार एक नए भारत, एक आत्मनिर्भर भारत,दुनिया की फैक्ट्री भारत, विश्व गुरु भारत की रचना के यज्ञ का आह्वान कर चुकी है । विघ्न-बाधाएं भी आएंगी,समर्थन के सुर भी होंगे, जिनकी जैसी भूमिका होगी,इतिहास उन्हें उसी रूप में याद करेगा । मैं तो यही चाहूंगी कि इस सदन में बैठे हर एक माननीय सदस्य को हमारी भावी पीढ़ी और आत्मनिर्भर भारत के वर्तमान शिल्पकार निर्माण यज्ञ में आहुति देने का भागीदार ही मानें ।
माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं इन्हीं शब्दों के साथ आपके प्रति आभार व्यक्त करती हूं । बहुत-बहुत धन्यवाद ।
*SHRI SAPTAGIRI SANKAR ULAKA (KORAPUT): I am thankful for allowing me to participate in discussion on the Motion of Thanks on the President’s Address. As I express my views on the Motion of Thanks on the President’s Address, I would like to touch upon few key things that are impacting the nation, specially tribals.
The three farm laws are being vehemently opposed by farmers across the country and I would like to highlight the impact of these laws on Adivasis. These laws suggest that they facilitate countrywide corporatization of agriculture. These laws will also violate the other traditional forest dwelling communities in the Fifth Schedule and tribal areas under the Panchayats (Extension to Scheduled Areas) Act, 1996 (PESA) and the Forest Rights Act, 2006 (FRA). Ultimately, these laws will erode the power and authority of Gram Sabhas. The farm laws of 2020 mark a milestone in the rollback of the Welfare State where the façade of the Welfare State is finally abandoned, along with any aspiration towards distributive justice.
Historically, the British Raj’s zamindari system, high taxation and revenue policies led to debt traps and land alienation. It resulted in numerous Adivasi rebellions such as Santhal Hul and Munda Ulgulan, among others.
The Farmers (Empowerment and Protection) Agreement on Price Assurance and Farm Services Act, 2020 speaks of providing farmers protection for their farm services and sale of produce on ‘mutually agreed prices’ with agri-business firms, processors, wholesalers, exporters or large retailers, in a fair and transparent manner. What it means is, full control to private companies over practice and method of farming and sale and purchase of farm produce, including its pricing and marketing. Contract farming of cash crops such as jatropha (for biofuel), sugarcane and cotton has been happening in Chhattisgarh and Odisha since the early 2000s. It has led to alienation of land of vulnerable tribal farmers. All 10 States under the Fifth Schedule have small and marginal Scheduled Tribe farmers in the range of 71 per cent to 91 per cent. The power imbalance between small and marginal farmers and big agri-business firms, retailers and exporters is huge. The law will result in unequal bargaining between these market forces and farmers with little resources and knowledge about the mechanics of global food chain systems. In the new form of money lending, globally agri-business firms that provide inputs and procure agricultural produce through contract farming also provide agricultural loans, often with the land itself as collateral. Farm laws encourage this practice, leading Adivasis into debt trap, resulting in corporate land grab.
The Farmers’ Produce Trade and Commerce (Promotion and Facilitation) Act, 2020 speaks of building alternative trading channels, like electronic trading platforms to promote efficient, transparent and barrier-free trade and commerce, bring farm produce in the domain of competitive markets where farmers and traders can engage in free trade. It also speaks of giving any person or corporation the right to trade in farm produce and giving anyone with a PAN number to establish e-trading platform. It also says that no market fee can be extracted on these e-trading platforms under APMC law or any such State law. It turns agriculture from a practice in subsistence which satisfies hunger and ensures nutrition, into a commercial and competitive trade. It also means deregulation of agricultural market, opening it up to local and global trade chain in food commodities, at complete mercy of the free market, commoditization of agriculture.
With this, I fear access to justice is under threat. Contract Farming Act and the Farmers’ Produce Trade and Commerce Act, both these laws restrict the right of farmers to approach the courts in case of dispute with companies and contractors. Instead, resolution of disputes takes place through conciliation board formed by Sub-Divisional Magistrate (SDM). Violation of the powers of Gram Sabhas under PESA will govern the resources within their jurisdiction, safeguard their customs and traditions and to resolve disputes according to customary mode of dispute resolution. Disputes relating to matters such as minor water bodies or alienation of tribal lands have additional statutory protections applicable and additional judicial remedies are available. The farm laws bypass these structures. Some disputes may be atrocities that come under the SC/ST Atrocities Act. Adjudication of such disputes by the SDM instead of the criminal court is absurd. Destabilisation of local Haats through unfair trade will severely affect the farmers. Traditional rural Haats and village markets will remain unprotected. Aggressive promotion of private and electronic platforms will lead to disintegration of Mandis and Rural Haats. It will lead to unfair trade practices, such as cartelization and monopoly of few private entities, making market prices volatile.
The Essential Commodities (Amendment) Act, 2020 amends the Essential Commodities Act, 1955 so that supply of foodstuff, including cereals, pulses, potato, onions, oil seeds and oils, or anything else the Government notifies may be regulated only under extraordinary circumstances such as war, famine, extraordinary price rise and natural calamity of grave nature. Restriction will be issued on stockpiling based only on price rise up to 100 per cent in the retail price of horticulture produce and 50 per cent for non-perishable agricultural foodstuff. It provides exemption from stockpiling regulation for processors, value chain participants, if the stock limit does not exceed installed capacity of processing or the demand for export by an exporter.
In the past, the landless working class and impoverished population faced 31 famines during 120 years of the British Raj. These amendments paralyze the Essential Commodities Act, 1955 which was enacted after Independence to prevent man-made famines in post-Independent India. This allows hoarding through exemption granted to value chain participants and will lead to artificial price rises through creation of artificial shortages.
This will lead to food insecurity and dismantling of the Public Distribution System in the country. The essential and staple food will be deregulated and turned into commercially viable commodities. Deregulation of market activities such as sale, purchase, value addition, storage and export will undeniably lead to weakening and eventual collapse of the Public Distribution System. The National Food Security Act, 2013 already excludes APL families from PDS entitlement, even if they may be on the verge of malnutrition. Food security net is limited to the BPL families. Other conditions such as mandatory Aadhaar linkage results in further exclusion of even BPL families from food security net. The drive to turn PDS into Direct Cash Transfer is already happening in some areas and this will have negative impact on nutritional security. According to Government data, 42 per cent of tribal children across India are under-weight, while 77 per cent of tribal children and 75 per cent of tribal women aged between 15 and 49 years are anaemic. The inflationary effect of amendments to the Essential Commodities Act, together with other policies already in place, will amount to violation of the right to food of the impoverished, alienated, working class Adivasis already facing severe nutritional crisis. The right to life with dignity of the Adivasis and forest dwellers is under threat by the enactment of these laws.
The farm laws are discriminatory and violate the fundamental rights of the Scheduled Tribes and Other Traditional Forest Dwellers and communities envisaged under Articles 14 and 15 (4) (right to equality, and protection against discrimination), Article 19 (1) (g) (right to carry out occupation of their choice), and Article 21 (right to life with dignity, and livelihood) of the Adivasis and forest dwelling communities. They also violate special protection provided under Article 244, the Fifth Schedule of the Constitution of India and special laws like PESA and FRA.
Some PESA violations include dilution of the powers of Gram Sabhas. It will be unable to prevent alienation of tribal lands or exercise control over money lending, in an environment where contract farming and money lending by big agri-businesses and corporations are permissible and the communities are unprepared and vulnerable. This will lead to dismantling of the control of Gram Sabha over poverty reduction schemes such as the Public Distribution System. Even stockpiling of essential and staple foods is released from statutory prohibition and food prices fluctuate with market trends. This will lead to unprecedented food insecurity in the Fifth Schedule areas and other tribal regions. This will reduce the power of Gram Sabha to manage local village markets and Haats. Therefore, Gram Sabhas will lose control over prices and their power will reduce with the entry of private entities in agriculture and food processing market. Since the farm laws mandate that disputes relating to agricultural contracts and processes will be resolved through a conciliation committee formed by SDM, over time, it will result in erosion of Gram Sabhas when it comes to governance in Scheduled Areas. As a result, the purpose of PESA will be eroded and eventually it will fade away.
Some FRA violations will pose a threat to tenurial security. Introduction of contract farming, new forms of money lending by large agri-business and commercialisation of agricultural production will eventually lead to unravelling the tenurial security FRA has introduced for forest dwelling communities. As more and more lands are brought under contract farming and commercial crops under the new farm laws, the rights of communities over community forest land, such as nistar rights and grazing rights will be eroded. PVTGs and their habitat rights are soft targets for market forces. Forest rights, especially habitat rights of Particularly Vulnerable Tribal Groups (PVTGs) will not be able to withstand the onslaught from powerful agri-business entities and the invisible hand of the market. The power of the Gram Sabha of forest dwellers to protect, regenerate, manage and conserve their forests and CFRs, already subject to contestation by line departments such as the Forest Department, will get eroded.
Now, I would like to list out my main demands. I demand the repeal of the three farm laws enacted in the year 2020. I demand the Governor, in exercise of power under Para 5 of the Fifth Schedule, to prohibit application of these three 2020 farm laws to Scheduled Areas of their respective States.
I demand effective enforcement of PESA by strengthening the control of Gram Sabhas over local rural Haats, markets and pricing of agricultural produce. I demand guaranteed government procurement and MSP of farm produce and MFPs. I demand strengthening of the Public Distribution System. I demand strict implementation of Niyamgiri judgement relating to Gram Sabha consent when undertaking development activities in forest lands.
I demand guaranteed tenurial security through effective implementation of prohibition of land alienation laws and rights recognition under FRA.
I demand Gram Sabhas to pass resolutions and approach SLMC, DLS, District Collector and TA-ITDA with their grievances upon implementation of the farm laws or criminal courts when SC/ST Atrocities Act is being violated.
Additionally, I would like to inform that many of the valid demands of my constituency are not mentioned in the President’s Address and so, I have raised amendments as listed below. There is no mention in the Address about the need for establishment of Government Medical College at Rayagada attached with Directorate of Health Services (DHH) in Odisha. There is no mention in the Address about the need to include Jhodia community from Odisha in the list of Scheduled Tribes. There is no mention in the Address about the delay in completion of Gunupur-Therubali Railway Line Project via Padmapur, Bissam and Cuttack. There is no mention in the Address about the updates on construction of Rail-cum-Road Bridge over Kolab Reservoir between Suku and Koraput under Kottavalsa-Kirandul Railway Line. There is no mention in the Address about the delay in construction of Rayagada, Koraput and Jeypore bypasses on National Highways 326 and 26. There is no mention in the Address about the establishment of High Court Bench in Koraput District. There is no mention in the Address about approval of Rural/Tribal Tourist Circuits under Swadesh Darshan Scheme for Rayagada and Koraput Districts in Odisha.
I would request the Government to have a look at the above requests and kindly consider the same.
Thank you.
SHRI N. K. PREMACHANDRAN (KOLLAM): Hon. Speaker, Sir, thank you very much for affording me this opportunity to take part in the discussion on the Motion of Thanks on the President’s Address.
Sir, first of all, I would like to say that the normal convention of the Presidential Address is entirely different. We all know that the Presidential Address is intended to describe or narrate the policies and programmes of the Government for the ensuing year. That is the reason why before commencing of every session of the Parliament in a calendar year, the hon. President is having, or is given an authority, or is empowered to make an Address to the Joint Sitting of Two Houses of Parliament. But it is quite unfortunate to state that the Presidential Address of 2021 is deeply disappointing because there is no mention of such policies or initiatives in the Presidential Address. That is the first point which I would like to make.
If you examine all the ninety-one paragraphs of this Presidential Address, you may find that the so-called achievements of the Government during the last six years have been explained. That is contrary to the facts and the ground realities. So, it is mere claims of the achievements of the Government during the last six years. That is also the repetition of the Addresses of the last five years which have been addressed by His Excellency, the hon. President of India.
Hon. Speaker, Sir, the Address is totally silent about the explosive issue of unemployment. Nothing has been mentioned about unemployment and also about economic recession. The country is facing such an acute economic recession. But nothing has been spelt out in the Presidential Address regarding economic recession and external aggression by the neighbouring countries affecting the territorial sovereignty of our country. In the Presidential Address, there has not been any mention about the external aggression, even from China and other neighbouring countries. There has not been any mention about the threat to the secular fabric of the country and the growing intolerance. These are the pertinent facts to be addressed by the hon. President. But it is quite unfortunate to note that none of these pertinent issues affecting and concerning the country have been mentioned in the Presidential Address. It is quite unfortunate. These are the issues which are to be highlighted because the intention of the Presidential Address is to make us aware of the state of affairs of the country in the particular year and what are the policies and programmes to be pursued in the ensuing year. This is the purpose of the Presidential Address. Unfortunately, it is lost.
Hon. Speaker, Sir, I am confining my speech to two very important points. The first point is with regard to India’s Democratic Norms Index. If you see para no. 90 of the speech of the hon. President, he speaks about six years of NDA Government’s performance with full commitment and honest intention since 2014. Hon. Speaker may kindly see that in the year 2019, the Presidential speech has gone to the extent of saying and I quote: “The foundation for nation building was laid in 2014.” This was the observation made in the Presidential Address of 2019. You may critically evaluate the six years of the performance of the NDA Government. How was the foundation laid?
Let us see and examine Democratic Norms. According to the report of the Economist Intelligence Unit, in 2014, India’s global ranking with respect to Democratic Norms was at 27th position.
Sir, it has come down to 53rd position in 2020 as a result of democratic backsliding under the current regime of Shri Narendra Modi Ji’s Government.
Sir, India’s democratic score fell from a peak of 7.9 in 2014 to 6.61 in 2020. This is the ranking score when the nation is celebrating its 70th year of democratic republic. That is to be taken note of.
The Economic Intelligence Report says that democratic backsliding by the authorities and crackdown of the civil liberties leads to a further decline in the global ranking in respect of the democratic norms of the country. This is the pathetic situation which is prevailing after six years of NDA Government. As far as the democratic norms are concerned, from 27th position, we have come to 53rd position. This is the present democratic fabric which our country is facing.
Sir, I will cite two examples, one each for the democratic backsliding and the crackdown in civil liberties.
The first one is with regard to the democratic backsliding. You may see para 87 of the speech of the hon. President. The hon. President says that construction of Ram Mandir has commenced after the Supreme Court Judgement.
Sir, you may kindly see the Supreme Court Judgement is not in respect of construction of the Mandir alone. It is with regard to the construction of the Mandir as well as the Mosque. But, it is quite unfortunate to say that nothing is mentioned about the construction of the mosque in the disputed site as per the Supreme Court’s Judgement.
The Supreme Court Judgement is in respect of Mosque as well as Temple. But it is quite unfortunate. Again, I repeat that nothing is mentioned about the construction of Mosque in the disputed site as directed by the hon. Supreme Court; only a mention of Ram Temple is there.
Second is with regard to the crackdown on the civil liberties. The living typical example is the farmers’ agitation.
Sir, if we have farmers agitation, that means the country is facing a national movement of the peasantry against the corporatisation of agriculture. That is the agitation which is going-on. Corporatisation of agriculture is taking place through the three Bills. So, this is the fight against the neo-liberal economic policies benefiting the corporates and rich class.
Sir, I, on behalf of myself and on behalf of my Party, the Revolutionary Socialist Party, declare our solidarity with the fighting farmers for their survival. This agitation is a warning to the Government in office against the repressive laws of the Government.
Sir, I am coming to the last point that is India’s image in the international policies. If you examine, after 2014, India’s image in the international democratic politics diminished like anything. The main reason for this is repressive law-making by this Government.
The enunciation of these laws, Citizenship Amendment Act, repeal of Article 370 and the three farm laws, by the Parliament or by the Government has got wider criticism amongst the international fora and the country is receiving big criticism in the international fora especially from the intelligentia.
Yes, I do accept that the Government is having absolute majority to rule the country but this numerical majority in Parliament is not sufficient to have a good governance in the country. The Government has to accept the popular sentiments of the people of this country.
Sir, inclusive governance is the strength of democracy. Inclusive democracy is very necessary. That is the strength of the democracy. But I have to say that in this Government, as far as NDA Government is concerned, this inclusive governance is not there in the NDA performance or the NDA governance. It is because inclusive governance involves consultative process. The Government is not taking the Opposition parties into confidence. The Government is not taking the Parliament into confidence. Even the Government is not willing to discuss all these issues in a threadbare manner. The Government is not interested.
Now, the Government is being guided and controlled by the political ego. What is the deadlock in resolving the issue of agitationists? The Government is ready and willing to freeze the law for one and a half years. Then, why does the Government not withdraw the Bill? Why does the Government not repeal the Bill? After repealing the Bill, let the Government come to the Parliament and we will discuss the issues, the pros, and the cons of the agricultural reforms. Let us have a fresh law. It is because the Government’s political ego is dominating.
Sir, I would like to caution the Government. Whenever in a democratic system of Government, the political ego begins, that is the beginning of slowing down or that is the beginning of the downfall of the Government. The agitation by the farmers is going to signal the beginning of the downfall of the Government. I would like to caution the Government.
Paragraphs 24, 25, and 26 of the Presidential Address have references to farming. The hon. President has mentioned that after extensive consultation, the Parliament has approved the three Bills. What is the extensive consultation that we have done? You may kindly see that the provisions of the Act came into force on 5th June, 2020 through the promulgation of an Ordinance. With no consultation, we made into a law in the Parliament in the month of September. So, without having any consultation, without having any negotiation, three Ordinances were promulgated on 5th June, 2020 and subsequently those became Acts. What was the consultation done? What was the emergency in promulgating these three Ordinances? What was the exigency? Structural agricultural reforms were brought without having any consultation and it was done by way of an Executive Order by the hon. President under article 123(i). That is why the country is facing a big struggle in Independent India. We are witnessing the biggest movement by the peasantry today. We demanded reforms in those Bills at the time of deliberations in the Parliament. We demanded referring of those Bills to the Parliamentary Standing Committee. The Government was very adamant at that time. We also had given amendments to those Bills. None of those amendments were accepted by the Government. Everything was killed mercilessly. Now, the Government is saying that they are ready for amendments, but those amendments were rejected by this House at the instance of the Government. Now the Government is willing to make amendments and this is quite unfortunate. That is why I am saying that the Parliament has not been taken into confidence. I urge upon the Government to resolve this issue. I would urge the Government to leave aside their political ego and repeal all the three Bills and let us discuss threadbare the agricultural reforms in the Parliament. The Parliament is the right forum to discuss the issue. I had given a Privilege Notice and you have given me the opportunity to speak about that Privilege Notice also. Now, the Supreme Court is handling everything. What is the right of the Supreme Court in appointing a Committee to look into the merits of the Bill? So, I would like to appeal to the Government to please withdraw all the three Bills and have a threadbare discussion in the Parliament. If the Government wants agricultural reforms, then after threadbare discussion in the Parliament and with the organisations of the farmers, let us have the reforms. Otherwise, the country would be heading towards a big disaster.
With these words, once again, I would like to say that the Address of the hon. President is disappointing.
Thank you.
*SHRI BHAGWANT MANN (SANGRUR): I thank you, hon. Speaker Sir. I have got an opportunity to speak on a very serious subject. I will speak in my mother-tongue Punjabi. I have given a notice regarding this.
Sir, Shri N. K. Premchandran ji was spoke earlier. Let me say that the farmers’ agitation is no longer an issue limited to Punjab or Haryana only. It has become a mass movement now. At first it was dubbed as an issue pertaining only to Punjab.
Hon. Speaker Sir, the descendants of Shri Guru Tegh Bahadur are being dubbed traitors. The Kashmiri Pandits had gone to Shri Guru Tegh Bahadur imploring him to save them from Aurangzeb who was forcibly converting Kashmiri Pandits into Muslims. Aurangzeb used to snatch 1.25 maund of ‘Janeu’ or holy thread of Brahmins daily and would then eat food. Shri Guru Tegh Bahadur ji said that a great personality should sacrifice his life. Young Guru Gobind Singh ji, an eight-year-old boy told his father that he was the right man to do so. So, the Guruji sacrificed his life for the sake of Kashmiri Pandits. At Chandni Chowk, he was beheaded.
Sir, some misguided youth came to Red Fort during the protests on 26.2.2021. The police are arresting them and filing cases against them. There is no shame left. Sir, Guru Nanak Dev ji had given food to hungry hermits by spending Rs.20/- for organizing a ‘langar’ or community-kitchen. Thus, the ‘langar’ system started from this incident. The place was Churrkana Mandi, 10 kms from Nankana Sahib. ‘Langar’ system started as a result of this incident. However, today, the Government is asking about the source of funding of ‘langar’ at protest sites. The ‘langar’ system was devised to feed the hungry humanity. You are questioning the source of funding of our ‘langar’ at protest sites. There is no shame left.
Hon. Speaker Sir, I came into the well of the House for two-three days during the protests. Two days of Lok Sabha proceedings were wasted due to this. I am sorry about this but, I have maintained that these three agriculture laws pertaining to farmers may please be taken back. Hold discussions. But eleven rounds of talks have been fruitless.
Sir, when I raise my voice, I am warned that I will be suspended and my Membership of Parliament will be snatched away. Sir, kindly suspend me. I hardly care about such a Membership of Parliament that stops me from raising my voice in favour of interest of my people.
माननीय अध्यक्ष : माननीय सदस्य, प्लीज पहले आप बैठिए ।
…(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : माननीय सदस्य, आप पहले बैठिए । आपकी कोई बात रिकॉर्ड नहीं होगी ।
…(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : माननीय सदस्य, पहले आप बैठिए ।
…(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : माननीय सदस्य, किसने आपको निलम्बित करने के लिए कहा?
…(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : किसने आपको निलम्बित करने के लिए कहा?
…(व्यवधान)
*SHRI BHAGWANT MANN: Sir, the farmers are protesting at Singhu border and Tikri border of Delhi. You think that they would go away due to biting cold and inclement weather. Sir, poet Dhani Ram Chatrik has said:
“In the biting cold nights of winter There was absolutely no one to be seen anywhere The view was like that of a graveyard People were sleeping in their cosy beds At their homes under cosy blankets The cold was too much.
At this time, either the stars are awake Or someone is taking bath at the well Or the farmer is still awake Who is taking care of his crops In the thick of night”.
You are using barbed wires to make the protesting farmers afraid. You are sadly mistaken.
सर, प्रधानमंत्री जी ने कहा – आन्दोलनजीवी,परजीवी । ये परजीवी क्या होता है? किसी की बीमारी पर पलने वाला कीड़ा, जैसे अगर किसी कुत्ते को कोई बीमारी हो जाती है तो उसके कीड़े को परजीवी बोलते हैं ।
माननीय अध्यक्ष: नहीं ।
…(व्यवधान)
श्री भगवंत मान: सर, ऐसा तो नहीं बोलना चाहिए । पीएम साहब भी आन्दोलन से निकले हैं । मेरे ख्याल में इस हाउस में जेपी आन्दोलन से निकले हुए बहुत से लोग हैं, क्या वे सब परजीवी हो गए? हद है । अगर वे परजीवी हैं तो …* वालों, मेरी बात सुन लो, तुम रक्तजीवी हो । रक्तजीवी हो । हद है । हैरानी की हद है । I am amazed Sir.
माननीय अध्यक्ष: आपका समय हो गया ।
…(व्यवधान)
डॉ. निशिकांत दुबे (गोड्डा) : सर, इनकी गलत बातों को रिकॉर्ड से निकाल देना चाहिए । …(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष: सब निकाल दिया जाएगा ।
…(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : सब निकाल दिया जाएगा, मैंने व्यवस्था दे दी है ।
…(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : माननीय सदस्य, आपकी कोई बात रिकॉर्ड नहीं हो रही है ।
श्री पी.सी. मोहन जी ।
…(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : आपका समय पूरा हो गया है । आपका सात मिनट का समय हो गया है ।
…(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : श्री पी. सी. मोहन जी, आप उनकी बात न सुनें, आप आसन की बात सुनें ।
…(व्यवधान)
SHRI P.C. MOHAN (BANGALORE CENTRAL): Sir, I thank you very much for giving me an opportunity to speak on the Motion of Thanks on the President’s Address. The COVID-19 pandemic has demonstrated the resilience of India to the world. We, Indians are fortunate to have a leader like our Prime Minister Shri Narendra Modi Ji who steered the country through this pandemic by saving both lives and livelihoods.
Today, India is undertaking the world’s largest vaccine drive with an ambition to vaccinate 30 crore people in the next few months. India has gifted vaccines to our neighbouring countries. India is also playing a significant role in making the world COVID-free by supplying vaccines to nearly 200 countries.
With Atmanirbhar Bharat, our Prime Minister Modi Ji has given the country a new direction and vision for India to emerge stronger in the post-COVID world.
Respected, Sir, India has to attain self-reliance in defence production. Attaining self-reliance in defence production will not just make India safer but also prosperous. I would like to thank the Cabinet Committee on Security chaired by PM Narendra Modi Ji for approving a defence procurement deal worth Rs.48,000 crore for the LCA Tejas aircraft.
21.31 hours (Shri N. K. Premachandran in the Chair) According to the decision, 83 planes will be purchased from HAL under the biggest ever indigenous defence deal. The biggest ever deal will be a game changer for self-reliance in the Indian defence manufacturing. The LCA Tejas is going to be the backbone for IAF fighter fleet in the years to come.
The LCA Tejas incorporates a large number of new technologies many of which were never attempted in India. At present, the indigenous content of LCA Tejas is 50 per cent and it will be enhanced to 60 per cent.
HAL has already set up second-line manufacturing facilities at its Nasik and Bengaluru Divisions to manufacture the light combat aircraft. Out of total 83 aircraft, 73 will be fighters and the rest 10 are trainers. HAL is to deliver them by 2026. HAL is a pride of India and is coming up with a factory in my Constituency also, in Bengaluru Central.
The history and growth of HAL is synonymous with the growth of aeronautical industry for more than 80 years. After Independence, in January, 1951, HAL was placed under the administrative control of Ministry of Defence, Government of India. Since then, HAL is actively engaged in contributing immensely to the aerospace sector of the country.
The in-house development of Light Combat Aircraft (LCA) will give major boost to the modernisation programme of our defence services. For the production of LCA, a separate LCA Tejas Division was established in Bengaluru in March, 2014.
The Company has a comprehensive design and development capability in the field of aerospace. Out of 31 types of aircraft produced so far, 17 have been of indigenous design. The Company has long experience in design and manufacturing of a diversified range of aircraft and their systems.
Sir, it is unfortunate that Congress has used such a great institution for its political blame-game in the run up to the Lok Sabha election in 2019. There were attempts by some Opposition leaders to misuse HAL as a political weapon in the Rafale deal.
When the Congress President tried to have a meeting with the HAL Employees’ Union to talk about the alleged Rafale scam, they replied with a clear ‘no’ and he was also denied to meet the HAL employees. Despite a refusal from HAL, Congress President went to hold a meeting at a place near HAL complex in Bengaluru in October 13, 2018.
In response to this uninvited and unwanted visit by Shri Rahul Gandhi, a statement was issued by HAL on October 13, 2018 in which it deeply regretted the politicisation of its employees. It further said, ‘an attempt at the politicisation of the employees is a fad and regrettable development and will be detrimental to the interest of the organisation, its employees as well as national security.’ With its growing turnover, HAL is doing exceedingly well as an institution under the NDA Government and probably will continue to excel. HAL recorded a turnover of over Rs. 21,000 crore for the financial year ended March 31, 2020, up from the previous year’s figure of Rs. 19,000 crore. HAL has produced 13 new ALHs against the contract of 40, out of which three were produced ahead of schedule for the Indian Army.
Sir, in 2013, the then Defence Minister under the UPA Government had criticised HAL, India’s biggest aerospace company, for its inability to deliver quality products in time and said that ‘it must show results.’ Being a votary of privatisation of defence manufacturing in India, the then Defence Minister said, ‘The HAL is unhappy and angry about us for giving the project to the private sector. But it is good for the HAL that it should have rivals and competition.’ HON. CHAIRPERSON : Please conclude.
SHRI P.C. MOHAN: Sir, in 2005, when an Indian Air Force pilot got severely injured for lifetime during ejection from a malfunctioning MiG, the then UPA Government led by the Congress Party, in an affidavit to the Delhi High Court in 2013, put the entire blame on HAL. The affidavit said, ‘the accident was caused due to a manufacturing defect on the part of HAL.’ This is how they blamed HAL.
With these words, I thank you very much for giving me this opportunity.
*SHRI RAVNEET SINGH (LUDHIANA) : Hon. Chairman Sir, I rise to speak on the serious issue of President’s Address to both Houses of Parliament and the farmers’ issue. I thank you for this opportunity.
Sir, I have the data and statistics of MPs in Lok Sabha and Rajya Sabha who have mentioned farming as their main occupation. The total number of MPs include 203 MPs in Lok Sabha. The BJP MPs are 140 who have mentioned farming as their main occupation.
Sir, in Rajya Sabha the total number of such MPs is 64 and such BJP MPs are 28 in number. So, a grand total of 267 MPs in the Parliament have mentioned agriculture as their main occupation. This is a strong presence of farmers in both the Houses. They have been elected among others by farmers too. I don’t know how many of them are real farmers and how many are …** farmers.
Sir, Bhagwant Singh Mann spoke earlier. He loves to give speeches. All members from Punjab are together. However, when these three agriculture Bills were made into laws, Bibi Harsimrat Kaur ji was part of the Government. Now, she, along with Beniwal ji have come over to the opposition side. But, Chairman Sir, आप वहां आएभी हैं, आपकोयह पता है ।सर, हम पांचआदमी 7 दिसम्बरको, यह इतिहासमें दर्ज होगा,मैं अपने लिएयह नहीं बोलरहा हूं, अगर किसान सिंघु,टिकरी, गाजीपुर, राजस्थान बॉर्डरपर बैठे हैं,तो तीन माननीयसदस्य, जिनमेंमैं खुद रवनीतसिंह बिट्टू,गुरजीत सिंहऔजला, जसबीरसिंह डिम्पा,कुलबीर सिंहजीरा, एकएमएलए, एकलकी जी, एकपिंडर जी हैं ।
पाँच आदमी दिन-रात पिछले 65 दिनों से, आज 65 दिन हो जाएंगे, हम लोग जंतर-मंतर के फुटपाथ पर पड़े हैं । एक मात्र स्पीकर साहब हैं,जिन्होंने हमारे बारे में पूछा है । लेकिन सरकार का एक भी नुमाइंदा,पार्लियामेंट्री अफेयर्स मिनिस्टर हैं, अन्य भी हैं, हम इनके कुलीग हैं, दुश्मन थोड़े ही हैं, लेकिन पिछले 65 दिनों में न भगवंत मान वहाँ बैठा है,न कोई अकाली दल वाला बैठा है,जिन्हें किसानों का दर्द है ।
If these members felt any pain for the farmers, why did they not participate in any protests?
Shri Bhagwant Mann talks about cold nights and inclement weather. I ask him, what has the …** Government done for farmers? If Shri Bhagwant Mann wants to resign from his parliamentary seat, let him do so. Why does he speak a lie? He can hand over his resignation to hon. Speaker. It will be accepted. But to just say it for the purpose of getting it on record is not fair. He has not gone anywhere for even a single day to protest in solidarity with farmers; neither has any other member from BJP, Akali Dal or AAP done so. Their Punjab leadership has not participated in any protests.
Sir, we will come to know in this Session who are the MPs who will express their solidarity with the protests of farmers. I am going to send these three Bills and write letters to all such MPs. We should rise above party consideration. I urge all the farmer MPs to unite for this cause. I urge upon the people of constituencies of all farmer MPs to persuade and pressurise all such farmer MPs to join the protests of farmers. I do not want them to boycott anyone. In Punjab, these things are happening. I too was targeted. Protests should be held in a democratic way. There should be no violence. But, the farmer MPs must be asked by the people whether they are for or against these Agriculture Bills.
वित्त मंत्रालय में राज्य मंत्री तथा कारपोरेट कार्य मंत्रालय में राज्य मंत्री (श्री अनुराग सिंह ठाकुर): हम बिल के साथ भी हैं और किसानों के साथ भी हैं ।…(व्यवधान)
श्री रवनीत सिंह : चेयरमैन साहब,हमारी एक स्टेट थी । चाहे हिमाचल प्रदेश हो, पंजाब या हरियाणा हो, सभी एक ही थे । बेशक आज अलग-अलग हुए हैं,इसलिए दर्द समझते हैं । उसके बाद अगर मैं बिल की बात करूँ, तो यह जो पहला है,जिसे यह सरकार लेकर आई है । अगर मैं ट्रेड एंड कॉमर्स बिल में क्लॉज़ तीन और पाँच की बात करूँ,क्योंकि बातें बड़ी-बड़ी की गई हैं, इन्होंने पूछा था कि इसमें काला क्या है । इसलिए मुझे इसमें क्लॉज़वाइज बताना पड़ेगा कि इसमें काला क्या है,इसके बारे में किसान क्या कह रहे हैं, वह बताना पड़ेगा ।
इसमेंइन्होंने लिखाहै कि मण्डियाँखत्म करेंगेऔर प्राइवेटमण्डियाँ बनाएंगे ।…(व्यवधान) मैं बताता हूँ ।…(व्यवधान) मैं यह क्यों बोल रहा हूँ? …(व्यवधान)
SHRI ANURAG SINGH THAKUR: Sir, he must brief us, for our knowledge sake, where it is written that mandis will be scrapped. इन्हें पढ़ना चाहिए कि ऐसा कहाँ पर लिखा है ।…(व्यवधान)
HON. CHAIRPERSON: Shri Ravneet Singhji, time is very limited; and you cannot have clause-by-clause discussion.
… (Interruptions)
श्री रवनीत सिंह : सर, मुझेथोड़ा-सासमय चाहिए ।चूंकि मैं बिलपर बात कर रहाहूँ ।
सर, यहीएपीएमसी एक्टबिहार में आया ।…(व्यवधान) फार्मिंग का तो क्लब किया गया है, शायद आपको नॉलेज नहीं है । साथ में, फार्मिंग भी क्लब किया गया है । …(व्यवधान)
चेयरमैन साहब, जिस दिन बिहार में एपीएमसी एक्ट लागू था,उस दिन वहाँ पर 9035 मण्डियाँ थीं । लेकिन जब यह एक्ट लाया गया और जब यह वहाँ पर लागू हुआ, तो आज वहाँ सिर्फ 1619 मण्डियाँ ही रह गई हैं । यह डाटा है ।
अगर हम एग्रीकल्चर ग्रोथ की बात करें,तो हमने पीएयू की टीम वहाँ भेजी…(व्यवधान) सर,मैं ऑन-रिकॉर्ड झूठ नहीं बोलूंगा । …(व्यवधान)
श्री अनुराग सिंह ठाकुर: आपने कहा कि यह बिल में लिखा है । आप बताइए कि यह बिल में कहाँ पर लिखा है ।…(व्यवधान)
सर, उनको बताना चाहिए । He claimed that it is written in the Bill that the mandies will be scrapped. We just want to understand under which clause it has been mentioned that they will be scrapped. …(Interruptions)
HON. CHAIRPERSON : Ravneet ji, if you are yielding to the questions from the other side, you will be losing your time.
… (Interruptions)
SHRI RAVNEET SINGH: Sir, he is a Minister.…(Interruptions)
SHRI ANURAG SINGH THAKUR: He is yielding, Sir. He is going to tell me now. …(Interruptions) He cannot mislead the House.
SHRI RAVNEET SINGH: Sir, he is a Minister. …(Interruptions)
HON. CHAIRPERSON: Ravneet ji, please continue.
… (Interruptions)
श्री रवनीत सिंह : बिहारमें जो ग्रोथरेट 1.98 परसेंटथी, वह आज 1.28 परसेंट रहगई है । …(व्यवधान)
श्री अनुराग सिंह ठाकुर: चेयरमैनसर, ऐसानहीं है ।…(व्यवधान) पंजाब के दो एमपीज़ ने इस पर कहा है । …(व्यवधान) पहले ने कहा कि मैं मेंबरशिप को …* हूं, एक तो वे बोलकर चले गए । दूसरे आए, वे कहते हैं कि कानून में लिखा है कि मंडी बंद होगी । …(व्यवधान) हम केवल इतना जानना चाहते हैं कि देश को गुमराह कौन कर रहा है? …(व्यवधान) ये देश को बताएं और सदन को बताएं कि कहां पर लिखा है कि मंडी बंद होगी? …(व्यवधान) ये यह बात आज बताकर जाएं । …(व्यवधान) I will tell you, Sir.
HON. CHAIRPERSON: We cannot have clause-by-clause discussion as we have paucity of time.
… (Interruptions)
श्री रवनीत सिंह : सर, यहकैसे होगा? …(व्यवधान)
माननीय सभापति: बिट्टूजी, आप चेयरको एड्रेस कीजिए ।
…(व्यवधान)
HON. CHAIRPERSON: Ravneet ji, do not yield to them.
… (Interruptions)
HON. CHAIRPERSON: Hon. Members, please do not interrupt him.
… (Interruptions)
श्री रवनीत सिंह : सर, मेरेपीछे दो मंत्रीपड़े हैं ।…(व्यवधान) दो सीनियर मंत्री एक एमपी से घबराए हुए हैं । …(व्यवधान) ये 25 लाख किसानों से कैसे लड़ेंगे? …(व्यवधान) एक एमपी से इनका बुरा हाल है । …(व्यवधान)
HON. CHAIRPERSON: Do not address them.
… (Interruptions)
HON. CHAIRPERSON: Anurag Singh Thakur ji, he is not yielding to your questions.
… (Interruptions)
HON. CHAIRPERSON: You cannot compel him to answer.
… (Interruptions)
श्री अनुराग सिंह ठाकुर: सर, मेरापॉइंट ऑफ ऑर्डरभी है । …(व्यवधान) देशके किसानों कोऐसे गुमराह कियाहै, क्योंकिकानून में कहींपर भी नहींलिखा है किमंडी बंद होगी,लेकिन इन लोगोंने गुमराह कर-कर के देश मेंयह जो फसादखड़ा किया है,ऐसे नेताओंने अपनी राजनीतिचमकाने के लिएकिया है । …(व्यवधान)
श्री रवनीत सिंह : सर, राज्य सभा में अरुण जेटली जी ने क्या बोला था?उन्होंने बोला था कि अगर गूगल,वॉट्सएप इतने अच्छे हैं, जिनको ये लेकर आ रहे हैं, अमेरिका में तो ये बहुत टाइम से हैं । …(व्यवधान) आप देखिए कि आज 40 हजार बिलियन डॉलर अमेरिका के किसानों को बचाने के लिए हर साल देना पड़ता है । अगर ये कंपनीज़ यहां लाएंगे,तो देश का किसान क्या करेगा? …(व्यवधान) I am speaking the truth. I will let you know.
HON. CHAIRPERSON: Bittu ji, one second. Are you yielding to the questions fielded from the other side.
… (Interruptions)
SHRI ANURAG SINGH THAKUR: He is yielding. He will tell me now. He can’t mislead the House.
श्री रवनीत सिंह : सर, पंजाब में जो आग लगी है, अगर उसे बुझाना है तो मुझे पांच मिनट बोलने दीजिए,यह विषय यहीं हल हो जाएगा । …(व्यवधान)
श्री अनुराग सिंह ठाकुर: सभापतिजी, पंजाबके सांसद किसानोंको गुमराह करनेके बाद देशको गुमराह करनेका काम कर रहेहैं ।…(व्यवधान)
SHRI RAVNEET SINGH: Please listen to me. This is what you are doing to the farmers. That is why you are being …* You don’t want to listen to their demands. That is why you are being …*. I will not save you. You will continue to get … * श्री अनुराग सिंह ठाकुर : ये अभी तक नहीं बता पाए हैं कि कहां कानून में लिखा है कि मंडी बंद होगी । इन्हें अपनी चिंता है, अपनी राजनीति की चिंता है ।…(व्यवधान) ये किसान के कंधे पर बंदूक रखकर चला रहे हैं ।…(व्यवधान) किसान कानून में कहीं नहीं लिखा है कि कहीं मंडी बंद होगी ।…(व्यवधान)
HON. CHAIRPERSON: Hon. Minister, he is not yielding.
… (Interruptions)
SHRI RAVNEET SINGH: You are right. It is a sum of 400 billion dollars. Please listen. When Americans could not save the farmers, how can this Government do so? Sir, what has the IMF said. You cannot give employment to 35% unemployed present now. Have you made any scheme for 65% unemployed who will become a reality due to your anti-farmers policies? Has the IMF not said this? Tell me. …(Interruptions)
HON. CHAIRPERSON: Bittu ji, please address the chair. Why are you answering their questions?
… (Interruptions)
श्री रवनीत सिंह : सर, मैं इनके हक में ही बात करता हूं । …(व्यवधान)
HON. CHAIRPERSON: You please address the Chair. Why are you putting questions there?
… (Interruptions)
श्री अनुराग सिंह ठाकुर : सर, क्या ये धमकी देंगे? …(व्यवधान) ये सदन में खड़े हो कर धमकी देते हैं और देश को गुमराह करते हैं ।…(व्यवधान)
SHRI RAVNEET SINGH: You are from Jalandhar in Punjab. You are a …* working against Punjab.
HON. CHAIRPERSON: He is not yielding.
… (Interruptions)
SHRI RAVNEET SINGH: Your party doesn’t call you to participate in meetings for talks with farmers. No one …* you… … * in Himachal. …* HON. CHAIRPERSON : Bittu ji, please conclude.
… (Interruptions)
HON. CHAIRPERSON: Please sit down. This is not fair.
… (Interruptions)
HON. CHAIRPERSON: These things will never go on record.
… (Interruptions)
श्री अनुराग सिंह ठाकुर : इन्होंने पहले किसानों को मिस लीड किया ।…(व्यवधान)
HON. CHAIRPERSON: This is not the way of disrupting.
… (Interruptions)
HON. CHAIRPERSON: No, that will not be on record. Anything unparliamentary will be expunged. You please do not interrupt the speech of the hon. Member.
… (Interruptions)
श्री रवनीत सिंह : सर, क्या मैंने किसी को इंटरप्ट किया है? क्या मैंने किसी को तंग किया है? …(व्यवधान) मैं दो दिन से बारह-बारह बजे तक बैठा हूं ।…(व्यवधान) क्या ये बोलने नहीं देंगे । मैं तो खड़ा नहीं हुआ हूं, आप खड़े हुए हैं ।…(व्यवधान)
HON. CHAIRPERSON: Let the House be in order please.
… (Interruptions)
HON. CHAIRPERSON: You are an hon. Minister. Please be seated. If there will be anything unparliamentary, anything objectionable, that will be definitely looked into, and will be expunged. But please do not interrupt a Member like this. From the part of an hon. Minister, it is not fair.
You please continue and conclude shortly.
श्री रवनीत सिंह :सर, जहां तक देश को खराब करने वाले लोगों की बात है, मैं कभी भी उनके हक में नहीं हूं । सबसे पहले 24 तारीख को मुझे मारने के लिए उन्होंने हमला किया । मैं ओपनली कहता हूं कि चाहे 24 जनवरी की घटना हो या 26 जनवरी की घटना हो, …* जो 2018 में इसी बिल के हक में बोला था ।…(व्यवधान) सर, मंत्री जी बोलने ही नहीं दे रहे हैं । मुझे दो मिनट का समय बोलने के लिए दीजिए । …* सबसे बड़ी आग लगाने वाला यह आदमी है । अगर आप इसे आज भी पकड़ लो, तो उसी समय आपकी और किसानों की बात सीधी हो जाएगी । कोई किसान आपका दुश्मन नहीं है । किसान देश के साथ है । यह जो झंडा लहराने वाले हैं, ये …* और इसकी पार्टी के जो दुश्मन हैं,बाहर से खालिस्तानी फंडिंग हो रही है । क्या पंजाब के लोग देश और तिरंगे के खिलाफ सोच सकते हैं? हमारे लोग बार्डर पर रोज मरते हैं,क्या इस झंडे की शान के खिलाफ कोई सपना भी सोच सकता है? हम रात को सोते भी झंडे के सपने के साथ हैं और जब उठते हैं, तो इसे सलाम करते हैं और पाकिस्तान को मुँह तोड़ जवाब देते हैं । आज एक आदमी पकड़ा गया,जो सबसे ज्यादा सिख फॉर जस्टिस,उसके रोज तीन टीवी चैनल नेटवर्क चलते थे और उन्होंने 25 तारीख को बोल दिया था कि साढ़े 11 बजे हमारा स्टेज पर कब्जा हो गया है और कल को हम झंडा लहराएंगे । कहीं न कहीं कमी रह गई और यदि उन्हें उसी समय पकड़ लेते,तो ऐसा न होता । 26 तारीख को हमारा झंडा दुनिया के सामने ऊंचा होता है और उसी दिन उन्होंने यह काम किया । क्या वे देश के हित के लोग हो सकते हैं?उनसे बड़ा कोई… * उनके जैसा … * आदमी हमारे देश के लिए कोई और नहीं हो सकता । हम पंजाबी आपसे पहले उन्हें सजा देने के लिए तैयार हैं, उन्हें कभी माफ नहीं करेंगे ।
सर, आप मेरी एक बात सुन लें, उसके बाद मैं अपनी बात खुद ही खत्म कर दूंगा । 25 लाख लोग जो इतनी ठंड में बैठे हुए हैं,उनके साथ अभी कोई बात खत्म करनी है या उनको ऐसे ही बिठाकर रखना है? उसमें से हर कोई खालिस्तानी नहीं है, हर कोई टेररिस्ट नहीं है । आप अगर ऐसे ही बोलते रहेंगे तो बड़ी मुश्किल आएगी । …(व्यवधान) वे किसान यूनियन के लीडर्स ठीक थे । आप एक मीटिंग सब पार्टियों की करते, उसमें बीजेपी होती,कांग्रेस होती,आम आदमी पार्टी होती । हम भी उनके नुमाइंदे हैं । आप एक मीटिंग आगे भी बुला लीजिए और हम सब मिलकर किसानों को खुश करके भेजेंगे और किसानों की जीत करवाएंगे । सरकार आपकी ही रहेगी । आपकी वे जय-जयकार करेंगे,जिस दिन आप उनके पक्ष में बिल लाएंगे । वह काम भी आपको ही करना है ।
HON. CHAIRPERSON: Yes, now, you please conclude.
… (Interruptions)
श्री रवनीत सिंह : सर, मैंकेवल एक मिनटऔर लूंगा ।
HON. CHAIRPERSON: No, this is the last point which you are mentioning.
… (Interruptions)
श्री रवनीत सिंह : सर, क्लॉजतो रह गया ।
HON. CHAIRPERSON: You cannot have clause-by-clause discussion of all the Bills.
श्री रवनीत सिंह : सर, दूसराबिल इन्श्योरेंसफार्मर्स सर्विसका है । उसमेंआपने कोई ऐसामेकेनिज्म बनायाही नहीं । प्राइवेटप्लेयर तो आजाएंगे, लेकिनरेट कौन तयकरेगा? रेटतो गवर्नमेंटतय करती हीहै । हम यहीतो कह रहे हैंकि अगर प्राइवेटप्लेयर भी होंगेतो लीगल गारंटीपर आप एमएसपीतय कर दीजिए, नहींतो दो एकड़वाला बेचाराकिसान क्या अम्बानी, अडानीसे रेट तय करापाएगा? उनकोअपना ट्रेड प्राइसफिक्स करना है । प्राइस उनकोफिक्स करना है, फार्मर्सको फिक्स नहींकरना है । आपबताइए कि यहलिखा है यानहीं लिखा है ।
HON. CHAIRPERSON: Next, Shri Achyutananda Samanta.
श्री रवनीत सिंह : सर, क्लॉज-4 मेंआप पढ़ लीजिए । जो एसेस करनाहै उसे करनेके लिए थर्डपार्टी कौन सीहोगी? क्याकिसी को पताहै? कहांलिखा है किकौन सी थर्डपार्टी होगी? कौनक्वालिटी चेककरेगा?
संसदीय कार्य मंत्री; कोयला मंत्री तथा खान मंत्री (श्री प्रहलाद जोशी): सर, मैंमाननीय सदस्यसे केवल इतनाही कहना चाहताहूं कि कल इनकेनेता ने इधरभाषण दिया ।तब उन्होंनेकहा कि जो लोगभी लाल किलेपर पहुंचे, वेबीजेपी के लोगथे । यह कह रहेहैं कि वे देशद्रोहीहैं, …* जीके हैं । मैंकिसी का नामनहीं लेना चाहताहूं ।
HON. CHAIRPERSON: That name will not come on record.
…(Interruptions)
श्री प्रहलाद जोशी: एकमिनट सर, please allow me. … * जीके थे । इन लोगोंको अरेस्ट करदीजिए । इनकोसजा दीजिए ।यह सब इन्होंनेकहा । ठीक है, मैंमानता हूं, लेकिनlet him say that whatever Mr. Adhir Ranjan Chowdhury said is wrong. Let him say that. That is my first point. …(Interruptions) Please give one minute. My second point is this. आपने जोमंडी के बारेमें बोला औरहमारे सभी साथियोंने बोला, उसमें मंडीको निकालने यारद्द करने केबारे में कहांलिखा है, वह कृपया बतादीजिए । …(व्यवधान) बिट्टूजी, मेरीपूरी बात सुनिए । आपके लिए हमसब के हृदयमें बहुत प्यारहै, यह आपजानते हैं ।आप इस प्रकारसे गुमराह करनेकी बात मत कीजिए ।
HON. CHAIRPERSON: Ravneet Singh Ji, you respond to these questions, and then you please conclude.
… (Interruptions)
श्री रवनीत सिंह : सर, आखिरयह बात कहांसे आई है? अगरऐसी बात हुईहै तो उसे बताना चाहिए । हमारेएमपी जिन्होंनेगुरदासपुर सेचुनाव लड़ा है, उनकेसाथ जो दीपसिद्धू है…(व्यवधान) वह वहां कम्प्लेन्ट करता रहा है । जिन्होंने गुरदासपुर से इलेक्शन लड़ा है, वह …* के पुत्र हैं । मैं तो उनका नाम भी नहीं जानता । शायद …* नाम है । …* का यह दीप सिद्धू उनसे कम्प्लेन्ट करता था, इसलिए मैंने बोला । आखिरी पॉइंट पर आता हूं । मंडी का तो उन्होंने बोल दिया कि मंडी रहेगी । …(व्यवधान) आगे की बात भी मान जाएं ।
संसदीय कार्य मंत्रालय में राज्य मंत्री तथा भारी उद्योग और लोक उद्यम मंत्रालय में राज्य मंत्री (श्री अर्जुन राम मेघवाल): धन्यवादसभापति महोदय, श्रीअनुराग ठाकुरजी के बारेमें पर्सनल बातजो इन्होंनेबोली, वहकृपया हटवा दीजिए । …(व्यवधान)
श्री अर्जुन राम मेघवाल: दूसरीबात, मुझेएक अनाउंसमेंटकरनी है । खानेकी व्यवस्थाकर दी गई है । अत: जोमाननीय सदस्यभोजन करना चाहतेहैं, वेरूम नंबर 70 मेंजा सकते हैंऔर जो अधिकारीव कर्मचारी भोजनकरना चाहते हैं, वेरूम नंबर 73 मेंजा सकते हैं । खाना उपलब्धहै । वे सब भोजनकर सकते हैं । आपकी अनुमतिसे मुझे यहअनाउंसमेंट करनाथा । धन्यवाद ।
HON. CHAIRPERSON: Thank you very much.
… (Interruptions)
श्री रवनीत सिंह : सर, व्यापारीचाहे जितनी मर्जी, जमाखोरीकर सकता है, उसेकोई नहीं रोकेगा । रेट चाहे दुगुनाहो जाए, उसेकोई नहीं रोकेगा ।…(व्यवधान)
22.00 hrs HON. CHAIRPERSON: You are simply inviting criticism by responding to them. Please make your point.
.…(Interruptions)
श्री रवनीत सिंह : सर, मैंएक मिनट मेंअपनी बात समाप्तकर दूँगा ।…(व्यवधान) जो भी स्टॉक होगा, रेट बढ़कर दुगना-तिगना हो जाएगा तो स्टॉक को कंट्रोल करें ।…(व्यवधान) बाद में हम इंटरवीनकरेंगे, जब 100 परसेंट रेटबढ़ेगा, इंटरनेशनलहमारा क्या रहजाएगा?…(व्यवधान)रोज सरकार व्यापारियोंको रेट कम करनेके लिए कह रहीहै ।…(व्यवधान)
श्री प्रहलाद जोशी: महोदय, बिट्टूजी से मेराइतना ही निवेदनहै कि जो उन्होंनेबार-बारकहा है कि मंडियाँबंद होने जारही हैं ।…(व्यवधान) ऐसा नहीं है ।…(व्यवधान) यह बिल में भीहै ।…(व्यवधान) इनका ऐसा कहनाठीक नहीं है ।…(व्यवधान) ये देश को गुमराहकर रहे हैं ।…(व्यवधान) He is misleading the country. It is not good. .…(Interruptions) If at all it is there in his hand, let him place it on the Table. .…(Interruptions)
श्री अनुराग सिंह ठाकुर: महोदय, येगुमराह कर रहेहैं ।…(व्यवधान)
*एडवोकेट अजय भट्ट (नैनीताल-ऊधमसिंह नगर): मा0 अध्यक्ष जी,मैं 29 जनवरी, 2021 को महामहिम राष्ट्रपति जी के द्वारा संसद के दोनों सदनों के संयुक्त अधिवेशन के उनके उद्बोधन के समर्थन में खड़ा हुआ हूं ।
मान्यवर, उत्तराखण्ड के चमोली जिले में हिमखण्ड टूटने से आई भारी तबाही से आज हम सब दुखी हैं । ऐसे समय में मा0 प्रधान मंत्री जी ने पश्चिम बंगाल की जनसभा में ही उत्तराखण्ड की तबाही का जिक्र किया और सीधे मा० गृह मंत्री जी एवं मा0 मुख्य मंत्री जी से वार्ता की और एक-एक पल की खबर लेते रहे । मा0 गृह मंत्री जी ने हमारे मा० मुख्य मंत्री एवं आला अधिकारियों से वार्ता की और बिना विलम्ब किये एनडीआरएफ को सीधे उत्तराखण्ड भेजा तथा एयरफोर्स के हैलीकॉप्टर तैनात किये ।
मान्यवर, अभी तक 206 लोग लापता हैं, 36 शव निकाले जा चुके है । अन्य लोग अभी भी लापता हैं तथा एन.टी.पी.सी. टनल में फंसे लोगों को निकालने के लिए लगातार एनडीआरएफ,एसडीआरएफ, आईटीबीपी, सेना एवं पुलिस के जवानों के द्वारा रेसक्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है । उम्मीद है कि आज रात या कल तक एनटीपीसी की टनल से फंसे हुए लोगों को निकाला जा सकता है ।
मान्यवर, मैं सभी मृतकों को दिल की गहराईयों से श्रद्धांजलि देता हूं । मा0प्रधान मंत्री एवं गृह मंत्री जी ने कुछ ही समय में जो कदम उठाया वह कभी भुलाया नहीं जा सकता है ।
मान्यवर, राष्ट्रपति जी के अभिभाषण पर कुछ बोलने के पहले कुछ दूसरे पहलुओं पर गौर करना भी अनिवार्य हैं । राष्ट्रपति जी ने अपने अभिभाषण में मेरी सरकार के "सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय' की मूल भावना का जिक्र किया है, जिसमें गांव, गरीब,किसान और इस देश की आम जनता के कल्याण के लिए हमारी सरकार पिछले 6 वर्षों से लगातार कार्य कर रही हैं ।
हमारे सर्वमान्य प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में कोविड-19महामारी और उसका सामना करने के तरीकों और उपायों के लिए पूरी दुनिया ने भारत की भूरि-भूरि प्रशंसा की है । शिक्षण संस्थानों के बन्द होने के कारण निश्चित रूप से हमारे बच्चों और युवा पीढ़ी की शिक्षण प्रक्रिया बाधित होने का बड़ा खतरा था,किन्तु सरकार की सजगता, संस्थान और शिक्षकों ने नई टेक्नोलॉजी को शीघ्रता से अपनाकर यह सुनिश्चित किया कि विद्यार्थियों की शिक्षा निरंतर चलती रहे । कोरोना महामारी के दौर में हमारी सरकार के प्रयासों के कारण 2200 से अधिक प्रयोगशालाओं का नेटवर्क खड़ा किया, हजारों वेंटिलेटर्स का निर्माण किया गया,साथ ही पीपीई किट एवं टेस्ट किट का निर्माण करके न केवल आत्मनिर्भर बना, बल्कि विश्व के कई देशों को बड़ी मात्रा में पीपीई किट,टेस्ट किट,सैनेटाईजर एवं दवाईयों की आपूर्ति की गई । कोरोना महामारी के समय पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था रूक गई थी । इससे भारत भी अछूता नहीं रहा, परन्तु मा0 प्रधानमंत्री जी की सूझ-बूझ एवं हिम्मत ने पूरे देश को हर प्रकार से मजबूती प्रदान की है । ये वक्त ऐसा था जहां आम जन की सुरक्षा के साथ ही अर्थव्यवस्था को भी पटरी पर लाना था । मा0 प्रधान मंत्री जी ने इन दोनों क्षेत्रों पर दृढ़ता से जीत हासिल की । 130 करोड़ की आबादी वाले देश में जहां मृत्युदर को बिल्कुल न्यून कर दिया,वहीं आर्थिक स्थिति को ठीक करने के लिए बहुत बड़े आर्थिक पैकेज की घोषणा की और कोई व्यक्ति भूखा न मरे यह भी सुनिश्चित किया । "प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना"द्वारा 8 महीनों तक 80 करोड़ लोगों को निःशुल्क 5 किलो अनाज प्रतिमाह देकर एक इतिहास रचा है । विश्व में ऐसी व्यवस्था अब कही नहीं है ।
मान्यवर, हमारे देश ने दो कोविड वैक्सीन बनाकर विश्व में अग्रणी स्थान पाया है । विश्व में कई देशों से आज वैक्सीन की डिमान्ड आ रही है । कई देशों को वैक्सीन पहुंचा दी गई है । दोनों वैक्सीन की स्वास्थ्य के क्षेत्र में उच्च दक्षता रखने वाले देश आज तारीफ कर रहे हैं । जहां 2014 में जब प्रधान मंत्री जी ने देश की बागडोर संभाली थी, तब सिर्फ 387 मेडिकल कॉलेज थे, वहीं आज 562 मेडिकल कॉलेज हो गए है । “प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना” के अन्तर्गत 22 नए एम्स को मंजूरी दे दी है । किसानों को आत्मनिर्भर और स्वामीनाथन कमीशन की अनुशंसा को दशकों बाद लागू करना पड़ रहा हो,तो निश्चित रूप से कांग्रेस की शासन व्यवस्था पर सवाल तो खड़े होंगे ही । हमारी सरकार द्वारा कृषि सुधार के लिए बनाए गए स्वामीनाथन कमीशन की लगभग सभी सिफारिशों को लागू करना निश्चित रूप से सरकार का साहसिक कदम है । स्वामीनाथन कमीशन की रिपोर्ट एवं उसकी सिफारिशें कांग्रेस के शासन में आ गई थीं, किन्तु उन सिफारिशों को लागू करने का साहस कांग्रेस न जुटा सकी, क्योंकि कांग्रेस कभी नहीं चाहती कि इस देश का किसान समृद्ध हो, आत्मनिर्भर हो ।
मान्यवर, आजादी के 70 वर्षों बाद भी किसी प्रधान मंत्री और किसी सरकार को इस देश की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने का लक्ष्य मिला हैं । कांग्रेस समेत समूचा विपक्ष आज किसानों को गलत तरह से गुमराह कर वास्तविकता से दूर ले जा रहा है । हमारी सरकार द्वारा किसानों के आन्दोलन को देखते हुए लगभग 11-12 दौर तक विभिन्न संगठनों के साथ बैठक की गई ताकि उनकी मांगों पर भी सरकार विचार कर सके । देश का लगभग 14 करोड़ किसान मा0 प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के साथ तब भी खड़ा था और अब भी पूरी तटस्थता के साथ खड़ा हैं,क्योंकि इस कानून के लागू होने से वे कृषि उपज की पारम्परिक व्यवस्थाओं से मुक्त होकर अपना माल देश में कहीं भी बेच सकते हैं ।
मान्यवर, मा0 प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में पिछले 6 वर्षों मे हमारी सरकार ने "प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना"के अन्तर्गत 6 लाख 42 हजार किलोमीटर सड़कों का निर्माण कर ग्रामीण भारत को देश की मुख्य सड़कों से जोड़ने का एक बड़ा लक्ष्य हासिल कर लिया है । सड़कों के साथ ही हमारी सरकार ग्रामीण भारत को बेहतर इन्टरनेट और कनेक्टिविटी प्रदान करने पर भी लगातार कार्य कर रही है ।
मान्यवर, देश के सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों को और गति प्रदान देने के लिए हमारी सरकार प्रतिबद्धता के साथ इस देश के छोटे और लघु उद्यमियों के साथ खड़ी है । भारत को आत्मनिर्भर बनाने का बहुत बड़ा सामर्थ्य हमारे इन लघु उद्योगों के ही पास है । तीन लाख करोड़ रूपये की इमरजेन्सी क्रेडिट गारंटी योजना के माध्यम से लघु उद्यमियों को लाभ पहुंचाया जा रहा है । सरकारी खरीद में हमारी सरकार ने e-gem के माध्यम से देश के दूर-दराज वाले क्षेत्रों के उद्यमियों को पारदर्शिता के साथ अधिक भागीदारी प्रदान की है । राष्ट्रीय शिक्षा नीति में पहली बार छात्रों को अपनी रूचि के हिसाब से विषय पढ़ने की आजादी दी गई है । हमारी सरकार ने हर गरीब का घर रौशन हो, इसके लिए ढाई करोड़ से अधिक बिजली कनेक्शन उपलब्ध कराये हैं । मा0प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में हमारी सरकार इस देश में पूरी निष्ठा और ईमानदार नीयत के साथ पिछले 6 वर्षों से इस दिशा में निरन्तर काम कर रही है । मैं इन्हीं बातों के साथ पुनः महामहिम राष्ट्रपति जी के अभिभाषण का समर्थन करता हूं । आपने मुझे अपनी बात रखने का मौका दिया उसके लिए आपको बहुत-बहुत धन्यवाद ।
प्रो. अच्युतानदं सामंत (कंधमाल): महोदय, आपने मुझे बोलने का समय दिया, इसके लिए मैं आपका आभार व्यक्त करता हूं । । rise to speak on behalf of my Party, Biju Janata Dal on the Address by the hon. President of India, Shri Ram Nath Kovind to the Joint Session of Parliament. I would like to convey my gratitude to the hon. President for his lucid and well thought out Address to the Parliament.
The Biju Janata Dal, led by our visionary Chief Minister, Shri Naveen Patnaik has looked after the interests of more than 4.5 crore Odias for several years. It gives me great pride to say that Odisha has been one of the most progressive States in terms of keeping the pandemic under control, imposing safety measures, building state-of-the-art hospitals, reaching the people at the margins with welfare programmes and ensuring that the entire population is safe. He is the leader of the masses because of his pro-people, dalits, tribal, women and children policies. He walks the talk and considers people as a priority. He has shown the world how leaders should be – warm, kind, bold, proactive, humble, realistic and empathetic.
Here, I would like to quote some lines from Tagore for our Chief Minister: “Power said to the world, “You are mine.” The world kept it prisoner on her throne. Love said to the world, “I am yours." The world gave it the freedom of her entire house."
Now, let me come to the COVID-19 pandemic over the course of the last year. The Odisha State Government has ably tackled the COVID-19 pandemic and is a leader in the current vaccination drive. To ensure that vast majority of the Odias receive the best possible treatment, the Government has converted many hospitals into COVID hospitals as well as entered into partnerships with private entities so that maximum number of beds are available for those showing serious symptoms.
Sir, let me highlight the list of the firsts – imposing lockdown even before national lockdown, home quarantine, community monitoring, establishing COVID hospitals in all the districts, sanctioning online passes for buying essentials, granting advance of four months’ salary to healthcare workers, three months PDS grants in advance that still continues, sanctioning of special fund for stray animals and continues to work in the forefront even now.
The Government of Odisha also took early initiatives in terms of effective governance, setting up of COVID facility, effective monitoring and surveillance, testing strategy, patient care, managing influx of migrants, capacity building, decentralised approach in collaboration with gram panchayats and involvement of Self-Help Groups with Mission Shakti. These are worth some points of mention as Odisha's response to COVID-19.
As the Leader of the House has mentioned, Odisha Government is always with the farmers. Odisha has launched several schemes for the benefit of farmers under the ambit of Krushak Assistance for Livelihood and Income Augmentation (KALIA) and the Bhoomihina Agriculturist Loan and Resources Augmentation Model (Balaram) worth Rs.1,040 crore for 7 lakh landless farmers in the next two years. It because of the able leadership of our Chief Minister that the rice-deficit State Odisha today has become the rice-surplus State.
Similarly, Odisha continues to be the leader in women empowerment with 50 per cent reservation for women in Panchayati Raj Institutions. Our Leader in the House has already expressed our hon. Chief Minister’s demand for 33 per cent reservation for women in Parliament as well as in Assemblies.
Similarly, under the able leadership of our hon. Chief Minister, Bhubaneswar in Odisha has become the education hub in the eastern part of India. It has also become the sports capital of India. We are happy that the next Hockey World Cup 2023 will be organised in Odisha and Rourkela Stadium is going to be a world-class hockey stadium.
The State Government, under the leadership of Shri Naveen Patnaikji, has taken up the Puri World Heritage Project, including and developing the areas around the Jagannath Temple into a heritage corridor, the Ekamra Kshetra development plan around the Lingaraj Temple, and a massive beautification and redevelopment plan around the Konark Sun Temple, so also the Samaleswari Temple in western Odisha, to boost tourism and convert these into truly worldclass heritage destinations.
The Mo Sarkar initiative has a Gandhian core. Mahatma Gandhi strongly felt that people are the real masters and the Ministers, as representatives of the people, are their servants. Five ‘Ts’ propel Odisha’s governance. Based on five parameters – team work, technology, transparency, transformation and time-limit – the scheme involves taking feedback from people on the quality and timelines of the services and reward or punish officials on that basis. Our Chief Minister has gone even one step ahead to declare that all the people’s representatives will be compelled to submit their asset statements.
Due to all these things, our Chief Minister has demanded a few things. The first one is the special focus for the State of Odisha. Similarly, there should be a second AIIMS in Odisha and also a second Central University in Odisha. It is also our demand to convert the old State University, the Utkal University into a Central University. There should also be revision of Employees’ Pension Scheme, 1995. We also request the Centre to accord classical status to Odissi music. There should also be reduction in GST on tendu leaf from 18 per cent to five per cent.
We have already made all these demands for the consideration of the Government. Once again, I thank the hon. President for his detailed observations and I also thank him on behalf of my party, Biju Janata Dal.
Thank you.
HON. CHAIRPERSON: Prof. S.P. Singh Baghel.
SHRI P. P. CHAUDHARY (PALI): Sir, I want to speak on the breach of privilege issue. I may be permitted to speak.
HON. CHAIRPERSON: No, I have not received any notice.
SHRI P. P. CHAUDHARY: I have given it to the Speaker just now.
HON. CHAIRPERSON: Then, you may speak when the Speaker comes.
SHRI P. P. CHAUDHARY: Sir, permission has been granted to me.
HON. CHAIRPERSON: No notice has been given to me regarding that. Please let me examine.
प्रो. एस. पी. सिंह बघेल (आगरा): सभापतिमहोदय, मैंआपका आभार प्रकटकरना चाहूंगाकि राष्ट्रपतिजी के धन्यवादप्रस्ताव परमुझे बोलने काअवसर प्रदानकिया । मैंनेअभी तीन वक्ताओंके भाषण सुने । दो की पंजाबीबहुत शानदारथी, लेकिनमान साहब औरबिट्टू भाई कामैटर देश केकिसानों और देशको गुमराह करनेवाला था । एकबहुत अच्छी लाजवाबउर्दू में बोलकर गए हैं लेकिनफिरकापरस्त उनकाभाषण था । आजमैच 20 मिनटपहले फंस गयाथा । जब बिट्टूभाई बोल रहेथे कि देश कीमंडियों पर यहकानून लागू होजाएगा । बहुतसिम्पल तरीकेसे दोनों पंजाबीमें ही बातकर रहे थे ।अनुराग ठाकुरजी ने मंत्रीकी हैसियत सेपूछा और हमभी पूछ सकतेहैं कि कौनसी धारा के, कौनसे पेज के, कौनसे पैराग्राफमें यह लिखाहुआ है कि मंडियोंपर यह कानूनलागू होगा? सिम्पलसवाल का वहकोई जवाब नहींदे पाए और मैचफंस गया । इसीसमय पूरा देशदेख रहा था । आज विपक्षऔर पक्ष कामैच फंसा हुआथा कि यह जोदो महीने सेहो रहा है, आजजवाब आएगा ।मुझे दु:खके साथ कहनापड़ रहा है किआज सिद्ध करदिया कि बिट्टूभाई देश कोभ्रमित कर रहेहैं । किसी भीपैराग्राफ मेंकिसान की मंडीसमिति पर यहकानून लागू नहींहोगा । इस परआप इतना बौखलागए कि फिर आपतू-तड़ाकपर आ गए । आजमैच फंसा हुआथा और जैसेहोता है किक्रीज में आएया नहीं आएएवं दस बारदिखाया जाताहै, ऐसेही देश देखरहा था ।…(व्यवधान)
माननीय सभापति : बघेल जी, आप इधर एड्रेस कीजिए ।
प्रो. एस. पी. सिंह बघेल : सभापतिमहोदय, ऐसेही देश देखरहा था, लेकिनआज कांग्रेस, इनकेसहयोगी और बिट्टूभाई अनुराग ठाकुरकी गुगली परपूरी तरह आउटहो गए ।
उनके अब्बा हुजूर के साथ मैं तीन बार एमपी रहा हूं । आज मुझे लग रहा है कि उनकी पढ़ाई पर ऑक्सफोर्ड और हार्वर्ड में खर्च किया गया पूरा पैसा बेकार चला गया । जम्हूरियत-जम्हूरियत-जम्हूरियत,अकलियत-अकलियत-अकलियत, आइन-आइन-आइन,जिल्लेइलाही-जिल्लेइलाही-जिल्लेइलाही,मैं कंडेम कर रहा हूं । जो जम्हूरियत की बात कर रहे हैं,वे वहां पर बैठे हुए हैं जिन्होंने इमरजेंसी लगाई । आइन की बात वो कर रहे हैं जिन्होंने वोटों की खातिर अपने पक्ष में संविधान संशोधन किए हैं । वो अकलियत की बात कर रहे हैं,मैंने हाशिमपुरा,मलियाना में देखा है, जब मैं पुलिस में था, तुमने तो जलते हुए मकानों की कहानी ही सुनी है, मेरी इन आंखों ने जलते हुए इंसानों को देखा है । वे वहां पर बैठे हैं और अकलियत की बात कर रहे हैं । इतना खराब फिरकापरस्त भाषण, हार्वर्ड में पढ़ने वाले का, मैंने कभी नहीं सुना ।
“हिन्दू और मुस्लिम के एहसासात को मत छेड़िए दफ़न है जो बात उस बात को मत छेड़िए ।
गलतियां बाबर की थीं, फिर जुम्मन का घर क्यों जले ऐसे नाजुक वक्त में हालात को मत छेड़िए ।
और छेड़ना है तो छेड़िए एक जंग गरीबी के खिलाफ, दोस्त मेरे मजहबी नगमात को मत छेड़िए ।
लेकिन मेरे मित्र ओवैसी जी जब खड़े होते हैं तो केवल फिरकापरस्त बातें और हमेशा धार्मिक बातें करते हैं । आप जिल्लेइलाही-जिल्लेइलाही-जिल्लेइलाही कर रहे हैं । अरे भइया, यह उर्दू है और इसका अर्थ बादशाह होता है । देश की आजादी के बाद बाबा साहब डॉ. भीमराव अम्बेडकर जी जब अपने साथियों के साथ आइन लिख रहे थे तो उन्होंने बेगमों की नसबंदी कर दी थी । अब कोई नवाब पैदा नहीं होगा और न ही रानी के पेट से राजा पैदा होगा । अब बैलट बॉक्स से गरीब जनता अपने सेवक को चुनेगी और जिसको आप जिल्लेइलाही कह रहे हैं, वह अपने आपको प्रमुख सेवक और चौकीदार कहता है । पहले प्रधानमंत्री जी ने कहा कि मैं चौकीदार हूं,बाद में हमने टी-शर्ट पहनी कि मैं भी चौकीदार हूं । उनको जिल्लेइलाही कहना क्या उचित है? कई बार ओवैसी भाई, आपके भाषण को सुनकर लगता है कि परिंदा और पक्षी भी अच्छे होते हैं, क्योंकि परिंदे कभी फिरकापरस्त नहीं होते, कभी मंदिर पर जा बैठे, कभी मस्जिद पर जा बैठे । लेकिन तुम केवल मस्जिद पर ही जा कर बैठते हो, यह परिंदा कभी मंदिर की तरफ देखता भी नहीं है ।
सर, मैं कहना चाह रहा था कि मैं भाषणों को सुन रहा हॅूं,विपक्ष के सब बड़े नेता बोल लिए हैं । 21 में 24 का खौफ नज़र आ रहा है । 21 में 24 का खौफ नज़र आ रहा है, तमाम चेहरों पर खौफ ज़ारी है । एक चिराग अंधेरों पर कितना भारी है । इसलिए तो मैं इस युग की सबसे बड़ी उपलब्धि,युग, शताब्दी नहीं, इस कलयुग की सबसे बड़ी उपलब्धि और इस शताब्दी का सबसे गैरजिम्मेदाराना बयान पर अपनी बात कहना चाहूंगा । अभी तो आपकी नोक-झोंक की वजह से मेरा यह भाषण हुआ । सुना है कि समुद्र मंथन हुआ था । ऐरावत हाथी निकला था । उच्चश्रवा घोड़ा निकला था । पारजात का फूल निकला था । कामधेनु गाय निकली थी । विष और अमृत था । निकला होगा । लेकिन इस कलयुग में, जब वैश्विक महामारी थी, कोई एक देश की महामारी नहीं थी, तो मोदी जी के नेतृत्व में हमारे वैज्ञानिकों ने, हमारे चिकित्सकों ने जो अमृत निकाला है, उसका नाम वैक्सीन है । लेकिन हमारे मित्र,उत्तर प्रदेश के भूतपूर्व मुख्य मंत्री, जिम्मेदार व्यक्ति का इस शताब्दी का सबसे गैरजिम्मेदाराना बयान है, उन्होंने कहा कि यह भाजपाई वैक्सीन है, मैं नहीं लगवाऊंगा । अच्छा डर वाज़िब है । अगर यह भाजपाई वैक्सीन है, जैसा उन्होंने कहा, तो अगर वे यह लगवा लेंगे तो अंत्योदय और एकात्म मानववाद की बात न करने लगें । अगर उन्होंने यह वैक्सीन लगवा ली तो एक प्रधान,एक निशान और एक संविधान की बात न करने लगे । अगर वैक्सीन लग गई और यह भाजपाई है तो धारा-370 और आर्टिकल-35ए पर कहीं समर्थन न कर दें । सीएए की वकालत न करने लगें । प्रधान मंत्री जी और गृह मंत्री जी ने जो तीन तलाक समाप्त किया है, कहीं तीन तलाक के पक्ष में, वैक्सीन के बाद न बोलने लगें । अल्पसंख्यकों का तुष्टिकरण कहीं समाप्त न कर दें । जातिवाद की राजनीति कहीं समाप्त न कर दें । मुझे तो लगता है कि इसी लोक सभा में वैक्सीन के बाद जब पहली बार आएंगे तो जय श्री राम के नारे से अपना भाषण न शुरू कर दें । उससे भी ज्यादा उनको डर लग रहा है कि रामलला के मंदिर का कहीं चैक न वे काट दें, इसलिए वे इस वैक्सीन को लगाने से मना कर दें । लेकिन मैं गंभीरता के साथ एक बात कह रहा हॅूं । …(व्यवधान)
माननीय सभापति : बघेलजी, प्लीज़कनक्लूड करें ।
…(व्यवधान)
प्रो. एस. पी. सिंह बघेल : सर, अभी तो शुरू ही किया है । अभी तो शुरूआत है । …(व्यवधान)
माननीय सभापति: 23 से ज्यादा और सदस्य बोलने वाले हैं ।
…(व्यवधान)
प्रो. एस. पी. सिंह बघेल : लीडर लीड करता है । …(व्यवधान) उनकी भी फॉलोइंग है । …(व्यवधान)उनके कपड़ों की नकल होती है । …(व्यवधान) वे काली जैकेट पहनते हैं तो उनके अनुयायी काली जैकेट पहनते हैं । …(व्यवधान) अगर उन्होंने नहीं लगाई तो क्या आप इस लड़ाई को जीत पाएंगे? अगर एक भी बच्चा पोलिओ की वैक्सीन नहीं लगाएगा तो यह संक्रमण होता जाएगा । …(व्यवधान) ऐसे एक भी, प्रोटोकॉल के अनुसार जिनको लगनी है, अगर इनकी बात मान लेंगे तो हम यह लड़ाई हार जाएंगे । साथियों,मैं इसलिए कहना चाहूंगा, हाँ,आपको भी याद कर लूं । मैं जब छोटा था, तब एक नारा सुना था । अनुराग भाई,वह नारा आपको मालूम है कि क्या था? दो शब्दों के एक नारे ने खेल कर दिया । वह नारा था गरीबी हटाओ । इनकी दादी के जमाने में यह नारा था । गरीबी तो नहीं हटी, लेकिन आप मालदार हो गए । गरीबी आप हटा ही नहीं सकते हैं । राहुल जी पांचवीं पीढ़ी हैं, जो चांदी की चम्मच ले कर पैदा हुए हैं । मैं मोतिलाल जी का नाम नहीं ले सकता सदन में,उनके बाद जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी और उसके बाद राहुल गांधी पांचवी पीढ़ी हैं और पांचवी पीढ़ी बर्बाद भी कर देती है, ऐसा भी कहा जाता है । …(व्यवधान)पांचवी पीढ़ी बर्बाद भी कर देती है तो आपने कहा कि गरीबी हटाओ । डनल्प गद्दों पर और एसी में सोने वाले, मुंशी प्रेम चंद की पूस की रात की कहानी को याद तो कर सकते हैं, कण्ठस्थ कर सकते हैं, 90 पर्सेंट नंबर ला सकते हैं, लेकिन उसके दर्द और मर्हम को वही समझ सकता है, जिसने पूस की रात एक चादर में काटी हो । नरेन्द्र मोदी उसी परिवार से आते हैं, इसलिए गरीब कल्याणकारी योजनाएं होती हैं ।
एक शेर सुन लीजिएगा । पंजाब के लोग बड़े शौकीन हैं । राहुल जी को बता देना कि गरीबों का लहू तुम्हारी कारों का डीज़ल है और गरीबी मिट जाएगी तो तुम क्या रिक्शा चलाओगे? …(व्यवधान)
माननीय सभापति: प्लीज़ समाप्त कीजिए ।
…(व्यवधान)
प्रो. एस. पी. सिंह बघेल : हुज़ूरे आला, आपने जब गरीबी हटा दी,तो ये कौन लोग थे, जिन 8 करोड़ लोगों को उज्जवला के चूल्हे माननीय प्रधान मंत्री जी ने दिए? …(व्यवधान)
माननीय सभापति: बघेल जी, प्लीज़ कनक्लूड कीजिए ।
…(व्यवधान)
प्रो. एस. पी. सिंह बघेल : हमारी दादी-नानी को चूल्हे में फूंकनी फूंकते-फूंकते मोतियाबिंद हो गया, अंधी हो गईं और आपने गरीबी हटा दी । 8 करोड़ लोग फिर भी गरीब रह गए । आपने गरीबी हटा दी, 41 करोड़ फिर भी ऐसे रहे,जिन्होंने बैंकों की शाखा नहीं देखी थी और आपने बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया । …(व्यवधान)
माननीय सभापति: कृपया कनक्लूड करें ।
…(व्यवधान)
प्रो. एस.पी. सिंह बघेल : सर, मैं बिल्कूल पढूंगा नहीं,मैं आपकी आँख में आँख डाल कर आज बात करूंगा । 8 करोड़ लोग फिर भी रह गए, जबकि श्रीमती गांधी ने गरीबी हटाओ का नारा दिया । बैंकों का राष्ट्रीयकरण आपने किया, लेकिन 41 करोड़ लोगों को बैंक की शक्ल आपने देखने नहीं दी । मौत का कोई मुआवजा नहीं होता है । एक शेर है कि मैं अपने बच्चों की खातिर जान ही दे देता,लेकिन गरीब की जान मुआवजा कम है । मोदी जी ने दो लाख रुपये अगर कोई दैवीय आपदा में मरेगा तो केवल तीन नए पैसे प्रति दिन के बीमा पर,जो सिक्का फाइनेंस वालों ने बंद कर दिया, उस तीन पैसे प्रति दिन के हिसाब से 12 रुपये सालाना के हिसाब से दो लाख रुपये मिलेगा । …(व्यवधान)
माननीय सभापति: कृपयाकनक्लूड करें, कनक्लूड करें ।
…(व्यवधान)
प्रो. एस. पी. सिंह बघेल : गांव में सड़क पर शौच करते हुए महिला को किस प्रधान मंत्री ने नहीं देखा, किस एमएलए या एमपी ने नहीं देखा? धड़कता हुआ दिल होना चाहिए था । इन्होंने गरीबी हटा दी,लेकिन 10 करोड़ शौचालय, 12 हजार की कीमत पर मोदी जी ने बनवाए । इन्होंने गरीबी हटा दी,लेकिन आयुष्मान के लिए पांच लाख रुपये मोदी जी ने दिए । हम बीमार होते हैं तो काढ़ा पीते हैं, तुलसी पीते हैं, चाय पीते हैं, फिर 20-30 रुपये से इलाज कराते हैं । धन के अभाव में कोई नहीं मरेगा । प्रधान मंत्री जी ने पांच लाख का बीमा लोगों को दिया है । …(व्यवधान)
श्री विजय कुमार हांसदाक (राजमहल): सर, मुझे बोलने का मौका देने के लिए,आपको बहुत-बहुत धन्यवाद ।…(व्यवधान)मैं अपनी पार्टी जे.एम.एम.की तरफ से बोलने के लिए खड़ा हुआ हूं । मैं पक्ष-विपक्ष दोनों तरफ के भाषण सुन रहा था ।…(व्यवधान)जहां तक मुझे समझ में आता है,अगर आज किसान आंदोलनरत हैं तो मुझे लगता है कि कहीं न कहीं सरकार को उस ओर बढ़ना चाहिए क्योंकि यह मसला कोई पक्ष और विपक्ष का नहीं, है,कोई पार्टी का नहीं है । इसमें सरकार को आगे बढ़ कर इस मसले को हल करना चाहिए ।…(व्यवधान) राष्ट्रपति जी के अभिभाषण में बहुत सारी योजनाओं का जिक्र किया गया । कोविड-19 के दौरान पूरा देश एकजुट होकर सरकार के साथ,पूरे विश्व के साथ इस लड़ाई को लड़ा है । इसमें सबकी पीठ थपथपाई जानी चाहिए । लेकिन,इस कोविड-19 के दौरान कितने लोगों की जानें गई हैं, उनको भी याद करना होगा । कितने लोगों ने नौकरियां खोई हैं, उनको भी याद करना होगा । आज लोगों को उनकी जगह पर फिर से पहुंचाने में हम लोग कितनी मदद कर पा रहे हैं,इसका भी मैं उदाहरण देना चाहूंगा । चौदहवें वित्त आयोग का काम होने के बाद लोग बेरोजगार हुए हैं क्योंकि सरकार के द्वारा फाइनैंसेज बंद कर दिए गए हैं । आज हमारे यहां राज्य सरकार द्वारा उन्हें नौकरी दी जा रही है ।
महोदय, मैं मुद्दे को नहीं भटकाऊंगा । मैं इस सरकार से एक सिम्पल चीज समझना चाहता हूं । क्वालिटी एजुकेशन के लिए,चाहे वह एस.टी. हो, एस.सी. हो, बैकवर्ड हो, फॉरेस्ट ड्वेलर्स हो,स्कॉलरशिप्स स्कीम्स शुरू की गई हैं कि अच्छी पढ़ाई होगी और आगे उसे अपने जीवन में नौकरी मिल पाएगी । लेकिन,मैं सरकार की तरफ से यह जानना चाहता हूं कि क्या इस सरकार का देश चलाने का यही तरीका है? क्या इकोनॉमी को बूस्ट करने का तरीका यही है कि वह अपने संस्थान को बेच रही है तो आखिर उसमें पढ़ाई करने के बाद, चाहे वह एस.टी. हो, एस.सी. हो, ओबीसी हो, या फॉरेस्ट ड्वेलर्स हों,क्या उन्हें नौकरी मिलेगी?अगर नहीं तो फिर उस पढ़ाई का क्या फायदा? क्या यह सरकार बोल सकती है कि जितने पब्लिक संस्थानों को, जिस स्पीड से प्राइवेटाइज किया जा रहा है,क्या उन संस्थानों में जो आरक्षण है, वह रहेगा?अगर वह नहीं रहेगा तो यह समझना होगा कि जो हमारे संविधान की फैब्रिक है, उसे सीधी तरफ से नहीं, बल्कि पीछे की तरफ से आप छेड़ रहे हैं । आपको आरक्षण खत्म करना था । आप सीधे तौर पर खत्म नहीं कर सकते थे, आपने, चाहे वह प्लेन हो, चाहे ट्रेन हो, चाहे बीएसएनएल हो, आज हमारे यहां झारखण्ड में बीएसएनएल सुचारू रूप से चल नहीं रहा है क्योंकि केन्द्र सरकार की तरफ से राशि नहीं दी जा रही है । सभी संस्थानों का भी वही हाल है । सारी चीजों को बेच कर ही अगर आप देश चलाएंगे तो जब सब कुछ बिक जाएगा तो उसके बाद आपके पास देश चलाने के लिए पैसे कहां से आएंगे? सरकार के जो संस्थान होते हैं, वे देश की रीढ़ होती हैं । उन सब को बेच कर आप पब्लिक और प्राइवेट सेक्टर के बीच कम्पीटिशन तैयार नहीं कर रहे हैं, आप पूरा का पूरा देश प्राइवेट हाथों में दे रहे हैं । इस परिस्थिति में मैं उस तरफ बैठे हुए अपने भाई-बन्धु से यह बात पूछना चाहूंगा कि क्या आप उस समय भी इसी भक्ति और श्रद्धा के साथ यह बात कहेंगे,जब आपके लोग कहेंगे कि हमें किसी भी संस्थान में नौकरी नहीं मिल रही है? यह एक बहुत ज्वलनशील मुद्दा है, जिसके बारे में मुझे लगता है कि सरकार इस ओर ध्यान भटका रही है या फिर कहिए कि हिडेन एजेंडा के तहत ऐसा काम कर रही है कि आने वाले कुछ सालों में यहां पर बोलने वाले भी ठीक तरह से बोल नहीं पाएंगे । अगर इसी तरह बेचते-बेचते आपके पास कुछ नहीं बचा रहेगा,तो आप क्या बेचेंगे?अभी स्वच्छ भारत अभियान का जिक्र हुआ था । उस स्वच्छ भारत अभियान के तहत जो टॉयलेट्स बचे हुए हैं, बस उसी में जितनी ईंटें बची हुईं हैं, उन्हें ही बेचना रह जाएगा ।
आज इकोनॉमी की जो स्थिति हो गई है, जीडीपी जिस हालत में चली गई है, आज उस ओर ध्यान होना चाहिए । प्रधान सेवक की बात हो रही है, माननीय प्रधानमंत्री जी की बात हो रही है । उनका एक वाक्य था कि हमारा क्या है, हम तो झोला उठाकर चले जाएंगे । आप झोला उठाकर चले जाइएगा, लेकिन जिस स्थिति में आपने देश को खड़ा कर दिया है,वह बर्बादी की कगारी पर है, उसे कौन बचाएगा ।
महोदय, यह पक्ष और विपक्ष की लड़ाई नहीं है । पब्लिक सेक्टर आपका भी है और हमारा भी है, यह पूरे देश का है । आजादी के बाद बहुत मेहनत से इसे खड़ा किया गया है । आज आप इसी तरह से प्राइवेट हाथों में लगातार बेचते रहेंगे तो इस देश को पूरी तरह से आप अपने ही हाथों से बर्बाद कर रहे हैं । मैं अपनी बात बहुत ज्यादा लंबा नहीं खीचूंगा, लेकिन हाथ जोड़कर विनती करूँगा कि अगर सच में देश से प्रेम है तो आप देश को बचाने का काम कीजिए,न कि बर्बाद करने का काम कीजिए ।
बहुत-बहुत धन्यवाद ।
HON. CHAIRPERSON: Thank you. The next speaker is Shrimati Aparajita Sarangi. The hon. Speaker has directed each Member to take five minutes to speak because of time constraint.
SHRIMATI APARAJITA SARANGI (BHUBANESWAR): Sir, you have to give a little bit of time. We can stay beyond midnight and there is no problem.
HON. CHAIRPERSON: Let us see.
SHRIMATI APARAJITA SARANGI: But please consider it. Lots of works have been done by the hon. Prime Minister and we need to actually enlist some of them.
श्रीमती अपराजिता सारंगी:आदरणीय सभापति महोदय, मैं धन्यवाद प्रस्ताव के माध्यम से माननीय राष्ट्रपति जी के अभिभाषण के प्रति अपना आभार व्यक्त करने के लिए आप सब के बीच उपस्थित हुई हूँ । इसके लिए मैं हृदय से आपका धन्यवाद करती हूँ ।
महोदय, माननीय राष्ट्रपति जी का अभिभाषण इस दशक के लिए हम सबको प्रेरणा देने वाला,दिशा देने वाला और इस देश के हजारों-करोड़ों भाइयों और बहनों के मन में विश्वास पैदा करने वाला अभिभाषण था । मैं एक शेर के माध्यम से अपनी बात प्रारंभ करना चाहती हूँ । यह शेर हमारे प्रधानमंत्री जी के आत्मनिर्भर भारत के सृजन का आह्वान के प्रति समर्पित है ।
एक न एक समां अंधेरे में जलाए रखिए, सुबह होने को है बस माहौल बनाए रखिए ।
महोदय, इसकी मैं पुनरावृत्ति करना चाहूँगी-
सुबह होने को है बस माहौल बनाए रखिए ।
महोदय, कल से अभी तक इस संसद भवन के लोक सभा कक्ष में बैठी हूँ । मैंने सभी का भाषण सुना । हमारे विद्वान साथियों ने बहुत ही अच्छे ढंग से अपनी-अपनी बातें रखीं, अपने विचार रखें, अपनी अभिव्यक्तियाँ कीं । इस अभिव्यक्ति में समर्थन भी था और विरोध भी था । मैं समर्थन और विरोध दोनों का स्वागत करती हूँ । माननीय प्रधानमंत्री जी की सरकार में इस देश के आम नागरिक के जीवन की चिंता परिलक्षित होती है । वह स्पष्ट रूप से झलकती है ।
सभापति महोदय,मैं कहना चाहूँगी कि इस सरकार को विरासत में ऐतिहासिक समस्याएँ मिली हैं । प्रधानमंत्री मोदी जी की सरकार एक तरफ विरासत में मिली ऐतिहासिक समस्याओं का सफलतापूर्वक समाधान करने की चेष्टा में लगी हुई है और दूसरी तरफ इन्हीं चुनौतियों का सामना बड़ी संवेदनशीलता के साथ, बड़ी जिम्मेदारी की भावना के साथ,दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ करती रही है और आगे करेगी । आगामी दिनों में आप देखेंगे कि हम सब मिलकर यह काम करते रहेंगे । मसला चाहे जम्मू-कश्मीर का हो,ट्रिपल तलाक का हो, नागरिकता संशोधन अधिनियम का हो या फिर राम मंदिर के निर्माण का, इन सारी चुनौतियों को जिस तरह से हमने हैंडल किया, यह लोहा लेने का संकल्प और इच्छाशक्ति वर्तमान सरकार में दिखती है । यही बात, यही लक्ष्ण पिछली सारी सरकारों को इस सरकार से अलग करती है । हमारी सरकार निश्चित तौर पर बेहतर है ।
अगर आप मुझसे पूछेंगे कि इन छह सालों में सबसे बड़ी उपलब्धि क्या रही है, हमारे प्रधानमंत्री जी और उनके टीम की क्या उपलब्धि रही है तो मैं कहूँगी कि वह कोविड-19 का प्रबंधन है,the management of COVID-19. अंग्रेजी में एक अभिव्यक्ति है, एक एक्सप्रेशन है-
‘leading from the front’. Our Prime Minister has led the nation and the world from the front in the battle against COVID-19.
आज की स्थिति क्या है? India has emerged as a nation with one of the lowest death rates and one of the highest recovery rates. जीवन और जीविका इन दोनों पर यथेष्ट बल आदरणीय प्रधानमंत्री जी की सरकार ने दिया है ।
बंधुगण, इकोनॉमिक सर्वे की रिपोर्ट कुछ दिन पहले हस्तगत हुई । अगर आप इकोनॉमिक सर्वे की रिपोर्ट पढ़ें तो पता चलेगा कि इस सरकार की नीति और नेतृत्व की वजह से करीब एक लाख लोगों की जानें बचीं और 37 लाख लोग इस संक्रमण से बचे हैं । कुछ दिन पहले आदरणीय वित्त मंत्री महोदया ने कक्ष में कहा था कि यह वी शेप इकोनॉमी है । यह कितनी अच्छी बात है । हम प्रगति के पथ पर अग्रसर होते जा रहे हैं । अगर हम अर्थव्यवस्था की बात करें तो हम केवल पीपीई किट और मास्क में आत्मनिर्भर नहीं हुए हैं । हम वैक्सीन निर्माण में विश्व में सफलतम देश साबित हुए हैं । अक्टूबर, 2020 तक 6 करोड़ पीपीई किट्स देश में बनाई गईं और उनमें से करीबन 2 करोड़ दूसरे देशों की दी गई थीं । एन-95मास्क का जहां तक सवाल है, करीबन 15 करोड़ हमने अपने देश में बनाए और करीबन 4 करोड़ दूसरे देशों के साथ साझा किए । दो वैक्सींस बनी हैं और दो बनने वाली हैं । 35 हजार करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया गया है । आदरणीय वित्त मंत्री महोदया ने बड़ी अच्छी बात कही, उन्होंने यह भी कहा था कि अगर आगामी दिनों में अधिक जरूरत होगी वैक्सिनेशन की, वैक्सीन की, तो हम अधिक पैसे उपलब्ध कराएंगे । यह बहुत बड़ी बात है । इसके पीछे बहुत साहस चाहिए । 150 से अधिक देशों को जरूरी दवाइयां प्रेषित कराई गईं ।
बंधुगण, हम अपनी तारीफ खुद नहीं करते,जब दूसरे करें,तो बड़ी बात होती है । पार्लियामेंट्री स्टैंडिंग कमेटी ऑन होम अफेयर्स और पार्लियामेंट्री स्टैंडिंग कमेटी ऑन हेल्थ एंड फेमिली वेलफेयर की प्रोसीडिंग्स मेरे हाथ में हैं । ये दोनों प्रोसोडिंग्स मेरे हाथ में हैं । मेरे बंधुओं से, मेरे साथियों से, मेरे विद्वान मित्रों से अनुरोध है कि आप इन दोनों प्रोसीडिंग्स को पढ़ें । पार्लियामेंट्री स्टैंडिंग कमेटी होम अफेयर्स की जो प्रोसीडिंग है, उसके 3 पैरोग्राफ्स को पढ़ें, पैरा 2.6.9, पैरा 2.6.10 एंड 2.6.11 को पढ़िए । आप मुझे थोड़ा और समय दीजिए । अगर आप पार्लियामेंट्री स्टैंडिंग कमेटी हेल्थ एंड फैमिली वेलफेयर की प्रोसीडिंग को अगर आप पढ़ें,पैरा 1.47 ऑफ चैप्टर 1, उसमें लिखा हुआ है, The Committee appreciates the PM's call for Jan Andolan against Pandemic. हम अपनी तारीफ खुद नहीं करते, डब्ल्यूएचओ के डायरेक्टर जनरल मिस्टर टेडरोस ने भी हमारे प्रधान मंत्री को बहुत धन्यवाद दिया । जनवरी, 2021 की बात है, ब्राजील के प्रेसीडेंट ने हमारे प्रधान मंत्री जी को चिट्ठी लिखी और ये जो 20 लाख वैक्सीन डोजेज़ ब्राजील गए थे, इसके लिए उन्होंने बहुत धन्यवाद हमारे प्रधान मंत्री जी को दिया ।
Sir, I would like to quote the American Physician, Larry Brilliant who played a key role in eradicating Small Pox. He had said outbreaks are inevitable but pandemics are optional, meaning thereby that we may not be able to change the natural occurrences that produce the diseases in the first place but through preparation, early action, and intelligent responses, we can quietly flatten its trajectory. I am extremely proud to say, to inform this august House that because of the able leadership of our hon. Prime Minister we could flatten the trajectory.
HON. CHAIRPERSON : Now, please conclude.
SHRIMATI APARAJITA SARANGI : Please give me some time. I beg, Sir. Lots of works have been done. Please give me some time.
HON. CHAIRPERSON: Already you have taken ten minutes.
श्रीमती अपराजिता सारंगी:सर, मुझे थोड़ा समय दें । प्रधान मंत्री मोदी जी ने कहा है कि सामाजिक न्याय हमारी सरकार के लिए सिर्फ कहने-सुनने की बात नहीं है । यह हमारा कमिटमेंट है । यह हमारी श्रद्धा है । यह सरकार बाबा साहेब अंबेडकर की नीतियों पर चलती है । सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास,सबको साथ लेकर चलना है, सबका सर्वांगीण विकास हो और सबका विश्वास जीतना है । सबसे बड़ी बात है बहुत निष्ठा के साथ,बहुत ईमानदारी के साथ हम सबका विश्वास जीतने की चेष्टा में लगे हुए हैं । जिस दिन आदरणीया वित्त मंत्री जी ने इस कक्ष में बजट पेश किया, उसके एक दिन पहले आदरणीय प्रधान मंत्री जी ने प्रेस को संबोधित किया । उन्होंने जो कहा, वह वक्तव्य सबको याद होगा ।
HON. CHAIRPERSON : Madam, please conclude.
श्रीमती अपराजिता सारंगी: महोदय, आप पांच मिनी बजट के साथ सताईस लाख करोड़ रुपये के बजट को देखिए ।
HON. CHAIRPERSON: Please conclude, Madam. Otherwise, the speech would be unfinished.
श्रीमती अपराजिता सारंगी: महोदय, प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के माध्यम से आठ महीनों तक अस्सी करोड़ लोगों को पांच किलो अतिरिक्त अनाज सुनिश्चित किया गया । मैं बहुत दरिद्र राज्य ओडिशा से आती हूं । वहां आठ लाख प्रवासी श्रमिक हमारे राज्य छोड़ कर बाहर चले गए थे, उनको वापस लाने क लिए 244 रेल का प्रबंधन किया गया, जिससे ये लोग हमारे राज्य लौटे सके । इसके लिए मैं आदरणीय प्रधानमंत्री जी को ओडिशावासी की तरफ से बहुत-बहुत धन्यवाद देना चाहती हूं ।
*श्री अरविंद सावंत (मुम्बई दक्षिण):महामहिम राष्ट्रपतिमहोदय जी केअभिभाषण के धन्यवादप्रस्ताव परमैं अपने विचारप्रस्तुत करता हूँ ।
राष्ट्रपतिजी जब सदन कोसम्बोधित कररहे थे, उससमय किसानोंका आन्दोलन चलरहा था । उनकेविचार और मार्गदर्शनसे यह आन्दोलनकैसे समाप्तहोगा, यहसुनने को हमतरस रहे थे । मुझे खेद हैकी माननीय राष्ट्रपतिजी ने 26 जनवरीकी घटना काजिक्र किया, हमभी उससे सहमतहैं, लेकिनयह कैसे भूलसकते हैं कियही किसान 50 दिनसे शांतिपूर्वकआन्दोलन कर रहेथे । वे कौनहैं, जिन्होंनेलालकिले पर हमलाकिया, हमउसकी निंदा करतेहैं । लेकिनउसको नजर रखकरकिसानों को आतंकवादी, देशद्रोही, खालिस्तानीकहना निंदनीयहै । वे हमारेअन्नदाता हैंन कि आतंकवादी । सबसे ज्यादादुःख इस बातका है कि इसआन्दोलन में200 किसानोंकी मृत्यु हुई, लेकिनराष्ट्रपति जीके अभिभाषण मेंउसका कहीं भीउल्लेख नहींकिया गया । मैंउन किसानों कीमृत्यु के लिएसरकार को जिम्मेदारमानता हूं ।ये मृत्यु नहींहत्यायें हैं । अभी भी समयनहीं गया है । पूर्व प्रधानमंत्रीआदरणीय श्रीअटल बिहारी वाजपेयीजी कहते थे “बड़ेमन से कोई छोटानहीं होता ।” आपकहते हैं कियह आन्दोलन एककॉल पर समाप्तहोगा, समाप्तहोगा, अध्यक्षमहोदय, यहबात आदरणीय प्रधानमंत्रीजी ने कही ।उसको भी एकहफ्ता हो गयालेकिन आज तकएक कॉल नहीं हुआ । प्रधानमंत्रीदेश के मुखियाहैं, आपबड़ा दिल करकेइन किसानों कोबुलाकर बात करें । मुझे विश्वासहै कि जिस दिनआप किसानों सेबात करेंगे, उसदिन इसका निराकरणहोगा ।
एकजमाना था, एकनागरिक की किसीकारणवश मृत्युहोती है जिसमेंसरकार दूर सेक्यू न हो, जिम्मेदारहै, हमनेदेखा है मंत्रियोंने इस्तीफा दियाहै । सांसदोंने सदन नहींचलने दिया ।यहां तो तकरीबन200 किसानोंकी मृत्यु हुई, फिरभी सरकार नेआज तक कोई दुःख, करूणाव्यक्त नहींकिया है । सिर्फराजनीतिक बयानदिये जा रहेहैं । क्या हमसंवेदनाहीन हुएहैं?
इन्हींकिसानों के बारेमें आदरणीय राष्ट्रपतिजी आत्मनिर्भरताकी बात करतेहैं तो ये उनकीसंभावना लगतीहै । एक तरफआत्मनिर्भरताकी बात दूसरीतरफ किसानोंपर अन्याय हो । हम जानते हैंकि यह भाषणसरकार ही देतीहै और राष्ट्रपतिजी पढ़ते हैं । उनके मन कीबात यदि होतीतो मुझे नहींलगता कि वेइस विषय केबारे में चिंताव्यक्त कियेबिना रहते ।परदेश की समस्याओंको आदरणीय प्रधानमंत्रीजी से लेकरसभी चिंता व्यक्तकरते हैं लेकिनघर की समस्याके पास दुर्लक्षकरते हैं । उसकेबारे में यदिकिसी परदेशीव्यक्ति ने कुछकहा तो हमेंबुरा लगता है ।
आजपूरे विश्व मेंहमारी आलोचनाहो रही है ।उसका जवाब देनेके लिए हमनेअपने यहां सेलिब्रिटीकी एक टीम खड़ीकर दी, उसमेंभी हम पराजितहुए क्योंकियह उनके दिलकी बात नहींथी । उन्होंनेकिसी का लिखितट्वीट किया, उससेवह सभी आज हास्यास्पदनजर आ रहे हैं ।
यहकैसी आत्मनिर्भरता, यहतो आत्मवंचनाहै ।
जबकिसान का घरआत्मनिर्भरतासे संपन्न, समृद्धहोगा तो गांवसम्पन्न होगा । आप किसान कासम्मान दो हजाररुपये देकर करनाचाहते हैं, यहमजाक लगता है । इससे कोई आत्मनिर्भरनहीं होगा ।80 प्रतिशतकिसान हमारेदो हेक्टेयरसे कम जमीनके मालिकानाहकदार है । हमजो कानून लारहे हैं, उसमेंये गरीब किसानउत्पादन क्याकरें, कहांबेचें, कैसेउत्पन्न दुगनाहोगा? यहशंकाए उनके मनमें आज भी हैं । आप एम.एस.पी. रहेगायह बार बारकहते हो तोकानून में इसशब्द का प्रावधानक्यूं नहीं करते?
हमनेपहले भी यहमांग की थीऔर आज भी कररहे हैं । महोदय, हमनेखुली अर्थनीतिअपनाई है उसकेकारण कार्पोरेटकी मोनोपोलीआयेगी यह अनुभवटेलिकाम की सेवामें किया है । कॉरपोरेट टेलीकामवालों ने शुरूमें व्हाइस कालमुफ्त में दियाऔर एम.टी.एन.एल., बी.एस.एन.एल. केग्राहकों कोआकर्षित कियाऔर जैसे हीबी.एस.एन.एल./एम.टी.एन.एल. केग्राहक टूट करवह घाटे मेंजाते देखा तोव्हाइस कॉल कापैसा लेना शुरूकिया यही डर, किसानोंको एम.एस.पी. शब्दका कानून मेंअंतर्भाव न होनेके कारण है । देर हो रहीहै, तुरन्तदुरूस्त करें, यहप्रार्थना है ।
आदरणीयमहामहिम राष्ट्रपतिजी ने पानीको सम्पत्तिकहा है हम स्वागतकरते हैं । हमारेमहाराष्ट्र केआदरणीय मुख्यमंत्रीश्री उद्धव ठाकरेजी ने कहा किपानी को राष्ट्रीयसम्पत्ति समझें, जिसदिन यह राष्ट्रीयसम्पत्ति होगीतो पानी केझगड़े राज्यों-राज्योंमें जो द्वेषकी भावना निर्माणकर रहे हैं, वहखत्म होकर केंद्रसरकार एक न्यायिकव्यवस्था बनाकरन्याय प्रदानकर सकती है ।
माननीयमहामहिम राष्ट्रपतिजी ने इंटरनेट, डिजिटलकी बात की, मुझेयाद है इसीसरकार ने 2014 मेंआप्टीकल फाइबरके लिए रू. 30,000/-करोड़का प्रावधानकिया था । आजहमारी एमटीएनएल/बीएसएनएलकी सेवायें पहलेसे गांव-गांवतक पहुंची है, उसेकाम देने कीबजाय कॉर्पोरेटको दिया गया, इससेन तो काम ठीकहुआ न बीएसएनएलकी आर्थिक समस्याठीक हुई । यहीसब काम बी.एस.एन.एल./एम.टी.एन.एल. कोदेते तो कमवक्त में यहकाम पूरा होताऔर अच्छा भीहोता और दोनोंकम्पनियों कोआर्थिक सहायतामिलती । कोरोनाके समय हमनेयह अनुभव कियाहै कि इंटरनेटसेवायें, ब्रॉडबॅन्ड की सेवाएंगांव-गांवमें बंद पड़ीथी, स्कूलके बच्चे इसकारण “घरमें बैठे शिक्षा” अभियानसे वंचित रहे । इस सत्य कोस्वीकार करो । एमटीएनएल/बीएसएनएलको सक्षम करनेके कदम उठायें, इसकाकोई जिक्र इसभाषण में नहींहै ।
कोरोनाके समय में30 और40 प्रतिशतएमएसएमई उद्योगबंद पड़े, कम्पनियांबंद हुई, लाखोंलोग बेरोजगारहुए । सरकारके इकनॉमिक सर्वेमें देखिये किकितने लोग बेरोजगारहुए, लेकिनसरकार ने इनबेरोजगारों केलिए क्या उठाये, इसकाराष्ट्रपति केअभिभाषण मेंजिक्र नहीं है, उल्टाजहां रोजगारथे ऐसे पब्लिकसेक्टर को बेचनेकी सरकार नेअनुमति दी ।भारत पैट्रोलियमबेचने की बातहुई, हिन्दुस्तानपैट्रोलियम, ओ.एन.जी.सी. मेंक्यों समाई जारही है? क्योंमुनाफा करनेवाली कम्पनियांबेची जा रहीहै? इसकीहम निंदा करतेहैं और चिंताव्यक्त करतेहैं । यही सारीकम्पनियां थीं, जिससेनौकरियां मिलतीथी । मैंने 2014 मेंइसी महामहिमराष्ट्रपति जीके अभिभाषण परजो अभिनंदन प्रस्तावसदन के अंदरचर्चा में आयाथा, उस वक्तसार्वजनिक उद्यमोंको सुरक्षितऔर सक्षम करो, लेकिनआज आप उन्हेंबेच रहे हो । महोदय, बेचनाआसान है, बचानामुश्कील नहींहै पर कुशलताहै ।
एकतरफ आप कहतेहैं कि आगेचलकर तृतीय/चतुर्थश्रेणी की नौकरभर्ती के लिएलिखित परीक्षानहीं होगी औरन होगी मुलाकात । यह व्यवस्थाकर दी है, लेकिननौकरियां कहांहै और जहांहैं वहां भीभूमिपुत्रोंपर अन्याय होरहा है । हालही में सभीराज्यों के मुख्यमंत्रियोंने कहा कि भूमिपुत्रोंको नौकरियोंमें प्राथमिकतादेंगे उसमेंकर्नाटक, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश आदि राज्यसहभागी थे औरजब महाराष्ट्रकी बात आतीहै और यहींमांग महाराष्ट्रकरता है तोउसे संकुचितकहा जाता है । वंदनीय शिवसेनाप्रमुख श्रीबाला साहेब ठाकरेजी कि यही मांगशिवसेना के निर्माणके समय से करतेआये थे । आजभी महाराष्ट्रमें भूमि-पुत्रोंकी अनदेखी होरही है । हालही में इनकमटैक्स, मिन्टमें सारे केसारे कर्मचारीमहाराष्ट्र सेबाहर के भर्तीकिये गये । क्यायह उचित यान्यायिक है? मिन्टमें तो टर्नरफिटर की 8 जगहकी भर्ती थी, उसमेंना कर्मचारियोंके बच्चों कोना अन्य महाराष्ट्रके किसी व्यक्तिको भर्ती मेंलिया गया, येतो सीधा हीभष्ट्राचार है, इसकेलिए मिन्ट केअधिकारी पर कार्रवाईहोनी चाहिए ।
स्टाफसेलेक्शन सेभर्ती भी राज्यके अंतर्गत होनीचाहिए । आपनेमजदूरों, कामगारों, कर्मचारियोंके लिए तीननये कानून लाये, इसमेंदुभार्ग्यपूर्णबात ऐसी हैकी उनके नौकरीकी सुरक्षा हीहटा दी गई ।उनका जीवन नतनख्वाह की बढ़ोतरी, नपद की बढ़ोतरीके साथ व्यतीतहोगा । कॉन्ट्रैक्टपर नौकरी करेंगेऔर रिटायर्डहोने पर रू. 1000/ पेंशनदेंगे । क्याइसमें वह अपनाजीवन व्यतीतकर सकता है । हम पश्चिमीविकसित राष्ट्रोंका अंधानुकरणकर रहें हैंऔर वह भी आधाअधूरा । वहांतो उन्हें इतनीपेंशन मिलतीहै कि उसमेंवह पैसे बचापाते हैं । उसकेसाथ जिंदगीभरस्वास्थ्य कीमुफ्त सेवा मिलतीहै, क्यासरकार ये सुविधायेंहमारे देश मेंदेती हैं? क्यूंहम उन्हें निजीकंपनियों केनौकर नहीं, बल्किगुलाम बना रहेहैं ।
आजजेट एअर लाईन्समें काम करनेवाले कर्मचारी/मजदूरोंका क्या होरहा है । एअरइंडिया में कामकरने वाले कर्मचारीऔर मजदूरों कीहालत बुरी है । तनख्वाह भीसमय पर नहींमिल रही है । आप जो यह निजीकरणका कदम उठारहे हो, वहीआपके लिए एकदिन प्रश्न खड़ाकरेगा । भूख, रोटीकी लड़ाई कासामना करना आपकेलिए कठिन होगा ।
आदरणीयमहामहिम राष्ट्रपतिजी के भाषणमें कश्मीर मेंधारा 370 हटानेका संदर्भ आयाहै । हमें गर्वहुआ, क्योंकिवंदनीय बालासाहेब ठाकरेजी इस मांगको लेकर डटकरखड़े थे । लेकिनआज तक कितनेकश्मीरी पंडितकश्मीर आकर अपनेघर बसा पाये ।
आजहमारी न्यायपालिकाकटघरे में खड़ीहै, सर्वोच्चन्यायालय केदरवाजे रविवारको कुछ खासलोगों के लिएभी खोल दियेजाते हैं लेकिनहजारों लोग बरसोंसे न्याय केइंतजार में बैठेहैं उन्हें न्यायदेने के लिएसमय नहीं । जनतंत्रके चार स्तम्भहैं और यह संविधानके नींव परखड़े हैं । इसीसंविधान की रक्षाकी अपेक्षा जनताकरती है । माननीयराज्यपाल तोमहामहिम राष्ट्रपतिके कार्यकक्षामें आते हैं । क्या माननीयराज्यपाल संविधानके मार्गदर्शनपर चल रहे हैं । अगर हैं, तोमहाराष्ट्र कीराज्य सरकारविधान परिषदके 12 नामितसदस्यों की सूचीमाननीय राज्यपालजी को सादरकरने के बादआज तक क्यूंघोषित नहीं हुई?
क्यायह संविधान काअपमान नहीं है?
वहीबात महाराष्ट्र, कर्नाटकसीमा के संबंधमें, संविधानसे ही भाषावारराज्य/प्रांतकी रचना हुई । महाराष्ट्रराज्य निर्माणके समय बेलगांव, कारवार, निपाणी, भालकी, विदरजिसमें सबसेज्यादा मराठीभाषीक स्थितहैं, यहभूप्रदेश कर्नाटकराज्य में समाविष्टकिया गया । आजपिछले 60 वर्षसे वहां कीमराठी जनता न्यायके लिए शांतिपूर्वक, कानूननलड़ाई लड़ रहेहैं । उनको न्यायदेने में केन्द्रसरकार, न्यायपालिकाआज तक असमर्थहो रही है ।दरम्यान कर्नाटकसरकार ने वेलगांवका नाम वेलगावीकिया । यह मसलासर्वोच्च न्यायालयमें प्रलंबितहै, फिरभी शहर का नामबदल दिया गया । इतना ही नहीं, उसीवेलगांव को उपराजधानीबनाकर वहां विधानसभा खड़ी कीगई है । क्यायह संविधान काअपमान नहीं है? आजभी वहां केमराठी भाषिकोंपर अत्याचारशुरू है । इसलिएमहाराष्ट्र केमुख्यमंत्रीआदरणीय श्रीउद्वव जी ठाकरेसाहब ने सर्वोच्चन्यायालय औरकेन्द्र सरकारजब तक अपनान्याय घोषितनहीं करते हैंतब तक इस भूप्रदेशको केन्द्र शासितकिया जाये, ऐसीजायज मांग रखीहै । यह दुर्भाग्यपूर्णहै की राष्ट्रपतिके अभिभाषण विषयोंका उल्लेख नहींहै । मैं इसपर खेद प्रकटकरता हूं ।
अपनेदेश में बहुतसारी जातियांहै, विविधधर्म हैं लेकिनविविधता मेंएकता ही इसदेश का सामर्थ्यरहा । इस देशमें कोई वंचित, पिछड़ान रहे इसलिएसंविधान बनातेहुए भारत रत्नआदरणीय डॉ. भीमरावअम्बेडकर जीने शिक्षा, नौकरीमें कुछ वर्षोंके लिए ऐसेवर्गों के लिएआरक्षण रखा । लेकिन उन वर्षोंमें पिछड़ा वर्गसामाजिक, शिक्षा, आर्थिकविकास में समानताकी गति और स्थितिप्राप्त न करसका, इसलिएआज तक यह आरक्षणशुरू है । आजओ.बी.सी. आदिवासीजैसी पिछड़ीजमातों को आरक्षणदिया गया हैऔर यह आरक्षण50 प्रतिशतकी परिसीमा तकपहुंचा । फिरभी कुछ जातियांऔर आर्थिक समस्याओंके कारण कुछसमाज आज भीपिछड़ रहे हैंइसलिए उनकी लड़ाईचल रही है ।उत्तर भारत मेंधनगढ़ और महाराष्ट्रमें धनगर समाजहै, लेकिन ‘ड’ और ‘र’ इसएक अक्षर काफर्क होने केकारण महाराष्ट्रका धनगर समाजआज भी आरक्षणऔर अन्य सुविधाओंसे वंचित है । इसी तरह आजमहाराष्ट्र मेंमराठा समाज आर्थिकविकास न होनेके कारण पिछड़ारहा है ।
इसीलिएमराठा समाज काआंदोलन शुरूहै । राज्य कीसरकार उन्हेंन्याय देने केलिए सर्वोच्चन्यायालय मेंआई है । न्यायालयने केन्द्र कोअपनी भूमिकाविषद करने कीमांग की है । एक तरफ आंदोलनशुरू है औरवहां तमिलनाडुसरकार ने 50 प्रतिशतआरक्षण की सीमापार करके 65 प्रतिशततक आरक्षण दियाहै । उसे न तोन्यायपालिका, नकेन्द्र सरकाररोकती है लेकिनवही न्याय महाराष्ट्रराज्य के साथनहीं हो रहाहै ।
इसलिएहमारी मांग हैकि केन्द्र सरकार70 प्रतिशतया उससे ज्यादा, जितनाउचित समझें उतनाआरक्षण बढ़ायेऔर जो पिछड़ेवर्ग और समाजआज भी वंचितहैं, उनमेंउस आरक्षण बंटवाराकरने का अधिकारराज्य को प्रदानकरे ताकि जाति/जनजातियोंकी जानकारी हरराज्य को पूरीरहती है औरजैसे धनगढ़ याधनगर जैसी समस्यायेंखड़ी नहीं होंगी । आखिरी बारयह आरक्षण कामसला पूर्णतयाखत्म करें औरयह करते समयइसके पूर्व जोआरक्षण किसीजाति जमाति कोदिये हैं, उसकोकिसी भी तरहका धक्का नलगे, इसकीभी सावधानी बरतनीहोगी । यह संशोधनअपने संविधानमें करना होगा । बिना संविधानके संशोधन यहनहीं होगा, यहभी आप ध्यानमें रखें । इतनीबड़ी समस्याका उल्लेख भीमाननीय राष्ट्रपतिजी के भाषणमें नहीं रहा ।
मैंनेअपने भाषण मेंजो जायज मुद्देउठाये हैं, अपेक्षाकरता हूं किसरकार इस परपूर्ण रूप सेध्यान देकर इनसमस्याओं कानिराकरण करेताकि अगली बारजब महामहिम राष्ट्रपतिजी संसद मेंअभिभाषण करेंगेतो उनके धन्यवादप्रस्ताव परहमें उनका अभिनंदनकरने का अवसरमिले । धन्यवाद ।
माननीय सभापति: डॉ. शफ़ीकुर्रहमान बर्क जी ।
डॉ. शफ़ीकुर्रहमान बर्क (सम्भल): सभापति महोदय, मुझे बहुत बातें कहनीं थीं, लेकिन वक्त नहीं है इसलिए बहुत मक्तुसर अर्ज करूगा । महामहिम राष्ट्रपति जी के अभिभाषण में सरकार की कारकर्गियां गिनाई गई हैं, वह हकीकत से हटकर है । जमीनी सतह पर उनकी हैसियत कुछ है और जो कुछ कहा गया है उसकी हैसियत कुछ और है । …(व्यवधान)
HON. CHAIRPERSON: Madam, nothing is going on record. Your speech becomes unfinished. That will not be fair. Please try to conclude within the time. Otherwise, it will be awkward to see. Dr. Shafiqur Rahman, please continue.
डॉ. शफ़ीकुर्रहमान बर्क : सभापति महोदय, इसका मतलब यह हुआ कि हमें बोलने नहीं देंगे तो फिर अपोजीशन क्या करेगा? देश आजाद है, हकीकत यह है, इसमें सबको बोलने और कहने की आजादी होनी चाहिए । इस वक्त चाहे वह छोटा हो या बड़ा हो, अपने दिल की बात वह नहीं कह सकता,आपने इतनी पाबंदियां लागू कर रखी हैं ।
आज मसला किसान का है । हमारी समाजवादी पार्टी किसानों के साथ है और किसानों की हमदर्दी में बहरहाल यह मुल्क जूझ रहा है । मैं कहना चाहता हूं कि किसान हमारे भाई हैं, इसी मुल्क के रहने वाले हैं, हम भी इसी मुल्क के रहने वाले हैं,आप भी इसी मुल्क के रहने वाले हैं । हम मुल्क के वफादार हैं गद्दार नहीं हैं । हम वतन के लिए अपनी जान दे सकते हैं लेकिन हम इससे गद्दारी नहीं कर सकते ।
जब आजादी का वक्त आया था, अंग्रेजों से लड़ने का वक्त आया था, हमने कौन सी कुर्बानियां नहीं दी थी? आपको अच्छा नहीं लगता या हमारी बात को आप सुनना भी पसंद नहीं करते हैं । इस वक्त किसानों का मसला बुनियादी है । अगर किसानों के मसले पर गौर नहीं किया गया यह किसानों का देश हैं, जब किसान जिंदा नहीं रहेगा तो हमारा वतन कैसे कायम रहेगा । हम अपने किसानों को अपना भाई समझें । आज जिस तरह वह जाड़े में तन्हा पड़े हुए हैं, बजाए इसके उनके लिए कांटे बिछाये जा रहे हैं, प्रधानमंत्री या दूसरे मिनिस्टर जाकर उनसे बातें करते, उनकी बातों को सुनते । सच्चाई की बात यह है कि किसानों के खिलाफ जो तीन कानून पारित किए गए है, इसको गवर्नमेंट को वापस लेना चाहिए, तभी देश में अमनो-अमान हो सकता है । अगर ऐसा नहीं किया जाता है, सन्1906 में अंग्रेजों का दौर था, तब भी तीन कानून अंग्रेजों ने भी बना दिए थे और न उसके खिलाफ सरदार भगत सिंह के भाई सरदार अजित सिंह ने एक तहरीक चलाई थी और यह किसानों के सिलसिले में चलाई थी और अंग्रेजों को वह कानून वापस लेना पड़ा था ।
इसलिए, इसमें इंसल्ट महसूस नहीं करनी चाहिए । हमें अपने देश की भलाई देखनी है । हमें किसानों को भी मरने नहीं देना है । उन्हें जिन्दा रहने देना चाहिए । मैं आप लोगों से यह कहता हूं, बहरहाल आपकी बीजेपी की गवर्नमेंट है । उसी सिलसिले में कहता हूं-
‘उजालों से जरा कह दो न इतराएं, सहर के बाद अंधेरा जरूर होता है ।’ जब सुबह आई है, तो एक दिन अंधेरा भी होगा और रात भी जरूर आएगी । इन्हीं अल्फाज़ के साथ मैं बीजेपी गवर्नमेंट से और उनके साथियों से कहना चाहता हूं कि वे सियासी आइने में अपनी शक्ल देखें, उसके बाद अंदाजा करें कि हमारा इस देश में क्या हो गया । …(व्यवधान) शक्ल साफ नहीं रही । जो आपके हौसले थे, जो इरादे थे, आपने जो कानून बनाए थे,उन सब पर पानी फिर गया । मेरी बात सुन लीजिए ।
अर्ज किया है -
‘कल एक-एक बूदं को तरसेगा मैखाना जो अहले-ज़र्फ के हाथो में पैमाने नहीं आए ।
منبرق )سنبھل ( : محترمچیرمینصاحب،مجھےبہتباتیں ٰ ڈاکٹرشفیقالرح] کرنیتھیں،لیکنوقتنہیںہےاسلئےبہتمختصرعرضکروںگا۔صدِر جمہوریہکےخطبہمیںسرکارکیکارکردگیاںِگنائیگئیںہیں،وہحقیقتسے ہٹکرہیںذمینیسطحپرانکیحیثیتکچھاورہےاورجوکچھکہاگیاہے اسکیحیثیتکچھاورہے۔ محترمچیرمینصاحب،اسکامطلبیہہواکہہمیںبولنےنہیںدیں گےتوپھراپوزیشنکیاکرےگا؟ملکآزادہے،حقیقتیہہےکہاسمیں سبکوبولنےاورکہنےکیآزادیہونیچاہیے۔اسوقتچاہےوہچھوٹا ہویابڑاہو،اپنےدلکیباتوہنہیںکہہسکتا،آپنےاتنیپابندیاںالگوکر رکھیہیں۔ آجمسئلہکسانکاہے۔ہماریسماجوادیپارٹیکسانوںکےساتھہے اورکسانوںکیہمدردیمیںبہرحالیہملکجوجھرہاہے۔میںکہناچاہتا ہوںکہکسانہمارےبھائیہیں،اسیملککےرہنےوالےہیں،ہمبھیاسی ملککےرہنےوالےہیں،آپبھیاسیملککےرہنےواہےہیں۔ہمملک کےوفادارہیںغدّارنہیںہیں۔ہموطنکےلئےاپنیجاندےسکتےہیں لیکنہماسسےغدّارینہیںکرسکتے۔ جبآزادیکاوقتآیاتھا،انگریزوںسےلڑنےکاوقتآیاتھاہمنے کونسیقربانیاںنہیںدیتھیں؟آپکواچھانہیںلگتایاہمارےباتکوآپ سننابھیپسندنہیںکرتےہیں۔اسوقتکسانوںکامسئلہبنیادیہے۔اگر کسانوںکےمسئلےپرغورنہیںکیاگیا،کیونکہیہکسانوںکاملکہے،اگر کسانذندہنہیںرہےگاتوہماراملککیسےقائمرہےگا۔ ہماپنےکسانوںکواپنابھائیسمجھیں۔آججسطرحوہسردیمیں تنہاپڑےہوئےہیں،بجائےاسکےاُنکےلئےکانٹےبچھائےجارہےہیں، وزیِراعظمیادوسرےمنسٹرجاکرانسےباتےکرتے،انکیباتوںکو ُسنتے۔سچائیکیباتیہہےکہکسانوںکےخالفجوتینقانوننافظکئے گئےہیں،انکوسرکارکوواپسلیناچاہئیے،تبھیملکمیںامنو امانہو سکتاہے۔ اگرایسانہیںکیاجاتاہےسن 1906میںانگریزوںکادورتھا،تب بھیتینقانونانگریزوںنےبھیبنائےتھےاوراسکےخالفسردار بھگتسنگھکےبھائیسرتاجاجیتسنگھنےایکتحریکچالئیتھیاور یہکسانوںکےسلسلےمیںچالئیتھیاورانگریزوںکووہقانونواپس لیناپڑاتھا۔اسلئےاسمیںانسلٹمحسوسنہیںکرنیچاہئیے۔ہمیںاپنے ملککیبھالئیدیکھنیہے۔ہمیںکسانوںکوبھیمرنےنہیںدیناہے،انہیں زندہرہنےدیناچاہئیے۔میںآپلوگوںسےیہکہتاہوں،بہرحالآپکی بی۔جے۔پی۔کیگورنمنٹہے۔اسیسلسلےمیںکہتاہوں۔ اُجالوںسےذراکہہدونہاِترائیں سحرکےبعداندھیراضرورہوتاہے جبصبحآتیہےتوایکدناندھیرابھیآئےگااورراتبھیضرور آئےگی۔انہیںالفاظکےساتھمیںبی۔جے۔پی۔گورنمنٹسےاورانکے ساتھیوںسےکہناچاہتاہوںکہوہسیاسیآئینےمیںاپنیشکلدیکھیں،اس کےبعداندازہکریںکہہمارااسدیشمیںکیاہوگیا )مداخلت(۔۔۔شکلساتھ نہیںرہی۔جوآپکےحوصلےتھے،جوارادےتھے،آپنوجوقانونبنائے ِھرگیامیریباتُسن تھے،انسبپرپانیپ لیجیئے۔ کلایکایکبوندکوترسےگامینہخانہ ِلضرفکےہاتھوںمیںپیمانےنہیںآئے جواہ )شکریہ( *DR. THOL THIRUMAAVALAVAN (CHIDAMBARAM): Hon. President’s Address has no mention about the working class or the problems faced everyday by the country or the laws of the government providing solution to such problems. On the contrary, this Address is just like a political campaign with lots of praises for the ruling Party. With pain and anguish I wish to register here that the Hon. President’s Address is against the interests of the working class. Instead of being pro-people this Government is functioning as pro-corporate. The present Government is not being seen as Modi led Government but the people are criticizing this Government as being a Government meant for the welfare of the friends of Modi like Ambani and Adani. Farmers’ protests are being held for the last two and half months along the borders of Delhi. World is watching this agitation with a surprise. Lakhs of people are protesting in a peaceful, disciplined and justified manner seeking the attention of the Government as regards their demands. More than 200 persons have died due severe cold in the area around protest. The farmers are demanding for withdrawal of these three farm laws and to bring a law for ensuring Minimum Support Price. Our Hon. Prime Minister has made his observations about these protestors which are demeaning. He called them as “Andolan Jeevi”. In his words, I should say I am also an “Andolan Jeevi” (survivors on protests). On behalf of Viduthalai Ciruthaigal Katchi, I strongly condemn the act of demeaning the protestors by Hon. Prime Minister. Respecting the sentiments of the people, the Government should take back or withdraw these three farm laws. I also urge that a law should be enacted so as to ensure Minimum Support Price (MSP). Even if you see, farming is a right which is under the purview of the State Government as per the Constitution of India. I should say that the interference of the Union Government is itself anti-constitutional. Instead of making an effort to protect our country along the Chinese and Pakistani borders, or taking a suitable action against the intrusion by Chinese army aimed at creating a village in Arunachal Pradesh, the Union Government is engaged in threatening the citizens of our own country, the farmers who are protesting peacefully. The protestors are threatened with the action of barricading and cementing nails on roads. As many as 10 Lok Sabha MPs, including myself, went to the Ghazipur border which is the place of protest. We all are the representatives of the people. But we were denied permission to meet the people there. This is an example which displays the cruelty, oppression and suppression faced by the people in this country. The Government of Srilanka has recently accorded permission to the Chinese Government for setting up of power generation projects in islands like Neduntheevu (Delft Island), Nainatheevu and Analaitheevu. There is a pertinent danger for the Indian government through the execution of these power projects. It is shameful that instead of concentrating on issues like this, the Indian government is engaged in suppressing the agitating farmers. I urge that the Indian Government should work towards stopping the grant of permission by the Government of Srilanka as regards the power projects in these islands around Indian sub-continent. The Srilankan Tamils are facing lots of troubles even today due to the Majoritarian Sinhalese Government in power in Srilanka. Even after 10 years of Mullivaikal Massacre, there is no justice and the perpetrators have not been brought to book under the international law. They are in power in that country. In this scenario, I urge upon the Indian Government that it should raise at the UNHRC meeting, the issues relating to judicial action against the perpetrators of war crimes and genocide in Srilanka. Never demean the protests organized by the agitating farmers. Never involve in suppressing such protests. On behalf of the farmers, the people of this country, 130 Crore population of this country, I urge upon the Government to immediately withdraw these farm laws and to enact a law ensuring Minimum Support Price. Thank you.
*डॉ. भारती प्रवीण पवार (दिन्डोरी):माननीय राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद जी ने 29 जनवरी, 2021 को एक साथ समवेत संसद की दोनों सभाओं के समक्ष अभिभाषण देने की कृपा की है, उनकी मैं अत्यंत आभारी हूँ । कोरोना के इस जागतिक संकट के दौरान स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में मेरी सरकार द्वारा किए गए कार्यों का लाभ इस महामारी में दिखाई दिया । संपूर्ण आत्मनिर्भरता से हमने अपने देश में दुनिया का सबसे बड़ा टीकाकरण कार्यक्रम शुरू किया है । साथ ही हमने अपनी दोनों स्वदेशी वैक्सीन अन्य राष्ट्रों को भी उपलब्ध करवाई हैं । मेरी सरकार द्वारा आयुर्वेद और योग को प्रोत्साहन देने का लाभकारी प्रभाव हम सबने देखा है । मेरी सरकार के प्रयासों के परिणामस्वरूप गरीब अब आसानी से स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ उठाने में सक्षम है । आयुष्मान भारत, प्रधान मंत्री जन आरोग्य योजना के तहत हमारे देश के डेढ़ करोड़ गरीबों को 5 लाख रुपये तक का इलाज मुफ्त मिला है ।
हमारा आत्मनिर्भर भारत का जो लक्ष्य है, वो कृषि क्षेत्र को आत्मनिर्भर बनाने से और ज्यादा मजबूत होगा । “सीड टू मार्केट”सिस्टम और “पर ड्रॉप मोर क्रॉप” योजनाओं द्वारा मेरी सरकार ने कृषि क्षेत्र में सकारात्मक परिर्वतन किया है । देश के छोटे किसानों ने “प्रधान मंत्री किसान सम्मान निधि”और “प्रधान मंत्री फसल बीमा योजना” का अच्छे से लाभ उठाया है । मेरी सरकार ने 3 महत्वपूर्ण कृषि अधिनियमों को संसद में प्रस्तुत किया और संसद ने उन्हें पारित किया । किसान उत्पादन व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) अधिनियम 2021, मूल्य आश्वासन,कृषि सेवा अधिनियम, 2021 और आवश्यक वस्तु (संशोधन) अधिनियम, 2021 का लाभ 10 करोड़ से भी ज्यादा छोटे किसानों को तुरन्त पहुँचने लगा है । वर्तमान में माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने इन कानूनों के कार्यान्वयन पर रोक लगा दी है । मेरी सरकार माननीय सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का सम्मान करती है और उसका पालन करेगी ।
गाँवों में रहने वाले मेरे देशवासियों का जीवन स्तर सुधारना मेरी सरकार की प्राथमिकता रही है । “प्रधान मंत्री आवास योजना”द्वारा हर गरीब को एक पक्का मकान मिले, यह मेरी सरकार का दृढ़ निश्चय है और हम उसे पूरा करके दिखायेंगे । मेरी सरकार की स्वामित्व योजना के अंतर्गत मेरे ग्रामीण देशवासी अब अपनी जमीनों पर कानूनी अधिकार प्राप्त करने लगे हैं । “जल जीवन मिशन” के अंतर्गत अब तक 3 करोड़ परिवारों को पाइप लाइन द्वारा जल कनेक्शन उपलब्ध कराया गया है । “प्रधान मंत्री ग्राम सड़क योजना”के तहत 6 लाख 50 हजार किलोमीटर सड़कें देश के ग्रामीण क्षेत्रों में बनायी गई हैं ।
मेरी सरकार का निरंतर प्रयास है कि देश में हर वर्ग द्वारा उद्यमिता का लाभ उठाया जाए । भारत को आत्मनिर्भर बनाने में महिला उद्यमियों की अहम भूमिका है । “मुद्रा योजना”के तहत अब तक 25 करोड़ से अधिक लोन्स स्वीकृत किए गए हैं, जिसमें से लगभग 70 प्रतिशत महिला उद्यमियों को दिया गया है । “दीन दयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन” के तहत 7 करोड़ से अधिक महिला उद्यमी देश में लगभग 66 लाख स्वयं सहायता समूहों का हिस्सा बन चुकी हैं ।
21वीं शताब्दी की वैश्विक आवश्यकताओं और चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति की घोषणा की है । इस राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत पहली बार छात्रों को उनकी पसंद के विषय चुनने की स्वतंत्रता दी गई है ।
छात्रों को यह विकल्प भी प्रदान किया गया है कि अब एक कोर्स के बीच में भी वे अपने विषय या धाराएं बदल सकते हैं । डिजिटल इंडिया के अंतर्गत यूपीआई द्वारा देश में डिजिटल लेन-देन अब 4 लाख करोड़ से भी ज्यादा होने लगी है । उमंग ऐप की सहायता से करोड़ों देशवासी 2000 से भी ज्यादा सेवाओं का लाभ उठा रहे हैं । जन-धन खातों, आधार और मोबाइल की त्रिमूर्ति ने लोगों के अधिकारों की रक्षा करने में मदद की है । इस त्रिमूर्ति ने लगभग 1 लाख 80 हजार करोड़ रुपये को गलत हाथों में पड़ने से बचाया है ।
मुझे खुशी है कि “श्रमेव जयते” की भावना को मुद्दे नजर रखते हुए 21 केन्द्रीय श्रम कानूनों को 4 श्रम संहिताओं में सम्मिलित किया गया है । इन सुधारों के परिणामस्वरूप श्रमिक कल्याण में विस्तार होगा,मजदूरों को मजदूरी का समय पर भुगतान होगा और नई पीढ़ी को रोजगार के नए और ज्यादा अवसर मिलेंगे ।
आत्मनिर्भर भारत के तहत हमारा देश विकासात्मक कार्य,जैसे चेन्नई और पोर्टब्लेयर के बीच सबमरीन ऑप्टिकल फायबर केबल डलवाना,अटल टनल और चार धाम रोड प्रोजेक्ट से हमारा आत्मनिर्भर बनने का दृढ़ निश्चय जताता है । हमारे उत्तर-पूर्वी भाइयों-बहनों के लिए ब्रम्हपुत्र नदी एक जीवन धारा है । इस जीवन धारा को आर्थिक गतिविधियों का मूलाधार बनाकर कई राष्ट्रीय जलमार्गों का संचालन किया जा रहा है । इससे उत्तर-पूर्वी भारत के सभी वर्गों के लोगों को लाभ होगा, जिनमें मुख्यत: किसान,युवा वर्ग और उद्यमी भी शामिल हैं । ब्रम्हपुत्र और बराक नदियों को विकास की धरा के रूप में परिवर्तित किया जा रहा है ।
मेरी सरकार हमारे देश की अखंडता और सुरक्षितता को सर्वोच्च महत्व देती है और न सिर्फ सरहद पार के आक्रमण के खिलाफ बल्कि अंदरूनी हिंसाचार के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई करती आई है और करेगी । हमारे देश के सभी सुरक्षा दल सदैव अत्यंत प्रशंसा के पात्र हैं । भारत का हर नागरिक इन वीरों का और शहीदों का ऋणी है । हमें हमारे इसरो के अंतरिक्ष वैज्ञानिकों पर भी गर्व है कि उन्होंने भारत देश का नाम पूरी दुनिया में रोशन किया है ।
आज भारत दुनिया में एक नए उत्साह के साथ आगे बढ़ रहा है । जिस ताकत के साथ हमने पिछले वर्ष कोरोना की महामारी का सामना किया, उसी ताकत के साथ इस वर्ष हमें नए लक्ष्यों की प्राप्ति करनी है । मेरी सरकार ने यह दिखा दिया है कि जब लक्ष्य उच्च होते हैं और आशय स्पष्ट हो तभी देश में परिवर्तन लाया जा सकता है । हमारा देश निसंदेह बदल रहा है । मुझे गर्व है कि मेरी सरकार इस दिशा में पूरी प्रतिबद्धता और ईमानदारी के साथ पिछले 6 वर्षों से लगातार आगे बढ़ रही है ।
हमारी भारत माता अपने हर बच्चे से आग्रह कर रही है कि आओ, हम सब आत्मविश्वास और आत्मसम्मान के साथ आगे बढ़ें और राष्ट्र के कल्याण की कामना करें ।
इसी के साथ मैं हमारे राष्ट्रपति महोदय श्री रामनाथ कोविंद जी के प्रति अपना आभार और धन्यवाद प्रकट करती हूँ और इस प्रस्ताव का समर्थन करती हूँ ।
HON. CHAIRPERSON : The next speaker is, Dr. D. Ravikumar ji.
*DR. D. RAVIKUMAR (VILUPPURAM): Hon. Chairman Sir, Vanakkam. Hon.* President in his Address has mentioned with pride the contribution made by Dr. Baba Saheb Ambedkar as regards water management. I thank Hon. President for making such a worthy reference. Revolutionist Dr. Baba Saheb Ambedkar not only created the Constitution of India but also the frontrunner who proposed the large scale water management schemes for welfare of our country. When he was a member of the Viceroy Council, Dr. Ambedkar put forth a proposal relating to the Damodhar Valley Project and submitted that proposal to the Scientist Shri Mehnad Saha. Damodhar Valley project is the brain child of both Dr. Baba Saheb Ambedkar and Shri Mehnad Saha. Shri Mehnad Saha was not only a scientist, it is a matter of pride to mention here that his name was also recommended for Nobel Prize along with Sir C.V. Raman. Shri Mehnad Saha laid the foundation for Astrophysics and Nuclear Physics in India. He was a Member of Parliament during the First Lok Sabha. He had contributed to several sectors. There is a feeling in the minds of the people that since Shri Mehnad Saha was from the Dalit community, he was totally ignored. I therefore urge that Shri Mehnad Saha, a great scientist of this country should be conferred the Bharat Ratna Award. Hon. President has mentioned in his Address about the Scheme for providing ‘Housing for All’ by the year 2022. In our country, Tamil Nadu is the State which is having large number of huts. Unit Cost allotted for the houses built under the Prime Minister Housing Scheme, PMAY, is very less. It becomes very difficult to construct an house with that nominal unit cost. I therefore urge that the unit cost should be increased to a minimum of Rs 3 Lakh. Researchers at Chennai IIT have started a Start-Up company. They have proved that houses can be built with the use of 3D technology. They have also proved that with half of the present construction cost such homes can be built using 3D technology. I therefore urge that the Union Government should come forward to use 3D technology in the construction of houses under PMAY. We have included 22 Official languages in the Eighth Schedule of the Constitution. Moreover, people speaking 38 other languages have been placed their demand for inclusion of their language in the Eight Schedule. Out of which, 30 languages have the distinction of being spoken by more than 10 lakh people. Government should accept the long pending demands of these languages including Tulu for inclusion in the Eight Scheduleof the Constitution. Peshwa Committee was setup in the year 1996. Sitakant Mohapatra Committee was set-up in the year 2003. The recommendations of these Committees are still pending with the Government. I urge that those recommendations should be implemented by this Government. I request to set up a Sainik School in my Viluppuram constituency. Among the many Sainik Schools of the country, only one Sainik School is situated in Amaravati Nagar in Tamil Nadu. Tamil Nadu has a long coastal line. Therefore I request for setting up of a Sainik School in my Viluppuram Constituency of Tamil Nadu. In our Budget, there is a mention about starting Ekalavya Schools. I request that an Ekalavya School, for the benefit of tribal students, should be set up in Viluppuram constituency which has a sizeable population of Scheduled Tribes. JIPMER in Puducherry is providing health care facility to the people living in Viluppuram district and its adjoining districts. But there are no sufficient number of nurses working in JIPMER. AIIMS, Delhi is a 2362 bedded hospital with as many as 4269 working nurses. AIIMS, Raipur has a capacity of 960 beds with a strength of 1327 working nurses. JIPMER has a bed strength of 2137 as against only 745 nurses working there. I therefore urge upon the Union Government to appoint more number of nurses in JIPMER, Puducherry with adequate allocation of funds. Thank you for this opportunity.
HON.CHAIRMAN: The next speaker is, Sh. S. Venkatesan ji.
*SHRI S. VENKATESAN (MADURAI): Hon. Chairman Sir, Vanakkam. Hon. President in his Address has lots of praises for the Government. Particularly with regard to tackling Corona pandemic, Hon President has stated that we were able to save lives of lakhs of our countrymen due to the timely and calibrated decisions taken by the Government. Lowy Institute of Australia has recently issued a ranking list of countries for successful and efficient handling of Coronavirus pandemic, on the basis of available data. India is placed at 86th position in that list. I want to ask whether Hon. President is aware of this ranking. Hon. President has also mentioned that due to the several Schemes implemented by the Government during corona period, lives of lakhs of countrymen have been saved. I am reminded of Jamlo, a 13 year old girl, who while walking from Telangana to Chhattisgarh for 140 kilometers to reach home due to restrictions of lockdown, collapsed and died 50 kilometers away from her village. Exhaustion and starvation were not the reasons for her death. But I must say the policy of the Government is the main reason which led to the death of Jamlo. Farmers are agitating in this country. But the Hon Prime Minister is insulting the agitating farmers calling them as those who survive on protests. It is a matter of pain and anguish. I should say that the farmers carry ploughs on their shoulders to the fields, and are not like the present Government which carries palanquin for the Corporates. Balakot attack was used for increasing the TRP rating. No words have been uttered against that in House. No details were divulged even. On one side they are into sloganeering of ‘Jai Jawan and Jai Kisan’ as if they are for the welfare of soldiers and farmers. But they have not come forward to condemn theactions that are aimed at insulting the farmers and soldiers of our country. In fact Hon. President’s Address is just like adding salt to our wounds. Similarly about the issue of release of 7 convicts including Perarivaalan. I had sent a letter to Hon. President in this regard during last November, for which a reply was received by me from the Hon. President stating that he had forwarded the request to the consideration of Hon. Home Minister. Union Government has recently stated in the Hon. Supreme Court that only the President of India has power to pardon. Hon. Governor of the State says that he has no power to pardon and only the President of India has with him.
All three sides are handling the release of seven prisoners like the game of football putting the ball in some other’s court. Most particularly the prison rules of the Tamil Nadu Government says that life imprisonment is only 20 years. But these seven persons have spent more than 10 years in Jail over and above the 20 year life imprisonment. I urge that justice should prevail upon for these seven persons. Thank you.
SHRI KARTI P. CHIDAMBARAM (SIVAGANGA): Hon. Chairperson, Sir, the fate of the backbenchers is that we always get to speak in a depleted House. Anyway, thank you very much for the opportunity.
The Hon. President and the Office of the President are greatly respected by all of us. It is a position beyond politics. It is an Office which does not need to bother about Facebook likes, retweets, mood of the Nation surveys by friendly T.V. channels, TRP ratings, etc. These are all not the things which the Office of the President needs to even concern itself about.
The Office of the President transcends the trappings and concerns of dayto-day politics. When the President speaks, we expect the President to tell us the state of affairs as it is. No sugar coating, no beating around the bush, and no spokesmanship for anyone, but the people. It is not meant for an artificial Sensex boosting.
Look at the State of the Union Address in America. It is a sacred exercise, a chance to critically reflect and engage where the nation is going. Sir, in India, there is a human story that needs to be told --a human toll which has been taken last year whereall Indians suffered greatly. So, in the last week’s Address of the President, I am more concerned about what was not said than what was said. What was said could be found in any Government’s publication or any Party stump speech. It certainly did not require the fanfare of a Joint Sitting of both Houses of Parliament.
Unfortunately, this year’s Presidential Address was simply a mundane exercise in rehashing an old slew of standard Government talking points. In his long speech, the hon. President was unable to find the time to discuss the issues of grave public concern. There was not one soothing word to our brothers who are protesting against the three black laws.
23.00 hrs They glossed over disturbing developments which we have witnessed last year. But the acceptance is the first step to recovery. So, I wish to bring to the nation’s notice the things the hon. President missed out in his Speech.
Our response to the COVID-19 pandemic which the Presidential Address celebrated is the worst in the world. My colleague alluded to the same study by the Lowy Institute of Australia. We are ranked 86 out of 98 countries’ survey. I hope the Government will respond to this survey findings. The Government which responds to celebrities’ tweets must definitely respond to this finding which says that we are ranked 86 out of 98 countries. …(Interruptions) I am not yielding. …(Interruptions) Please sit down. …(Interruptions) Please respond to the statistics. …(Interruptions) You respond to tweets. The Ministry of External Affairs issues a statement to a tweet by a pop star but there is a respected institute which ranks India at 86 out of 98 and you do not want to respond. …(Interruptions)
A record economic stimulus was mentioned. Grand numbers were thrown about. The reality is that nothing of the package has reached to anybody who is apparently the intended beneficiary. While big numbers are touted, the fact is that nobody really knows what the accurate numbers are. It is all gobbledegook.
Inequality is rising sharply. We continue to stare at unemployment crisis. We are also facing a crisis of female labour participation. And it is evident that in the current job crisis, the women are far more greatly affected by the unemployment crisis caused by demonetisation, of faulty GST, and an unprepared lockdown. …(Interruptions)
Our own National Family Health Survey data shows dangerous hike in stunting and anaemia among women and children. We have a chronic malnutrition crisis. The Global Hunger Index, please note this, puts us at 94 out 107 countries, well below our neighbours and much smaller economies.
*_ _ _*If we quote the statistics in this country, they will call us intelligent people.
Does the Government have any response to this abysmal record? The Government must respond to this, not to tweets of celebrities and teenage activists.
Global corruption surveys, like that of Transparency International, show India’s corruption situation is worsening. We have fallen to an all time low in the World Press Freedom Index. We are ranked 142 out of 180 in 2020.
The human rights watchdogs have raised alarms about the state of this country, particularly the brutality with which the protesters are attacked and the lockdown was enforced. We have become the world’s capital of internet shutdowns. So, do not talk about digital economy when you are shutting down the internet the most than any other country in the world.
A true Address would have mentioned this. A true Presidential Address would have mentioned this. You have not done justice to the awesome responsibility that office holds. The failure to recognise the reality of what is happening is a great disappointment. We have to accept the truth and hope this Government will accept the truth, address the issues which really matter and not artificial international conspiracies which you are conjuring up in your imagination.
Thank you very much.* DR. BEESETTI VENKATA SATYAVATHI (ANAKAPALLE): Thank you very much hon. Chairperson Sir for giving me an opportunity to talk on the Motion of Thanks on the Presidential Address.
I take this opportunity to thank hon. President for announcing all the schemes that are being implemented by the Government, especially in corona times. The steps that are being taken by the Central Government are appreciated by the WHO also. I am a medical doctor. We are very much happy that the Central Government could control the COVID pandemic quickly by making the vaccine available and giving it to all frontline warriors and for sending to the neighbouring countries also. But in this last hour, I want to bring two points to the notice of this august House, through you, Chairperson Sir, from my Constituency.
The Indian Medical Association is agitating throughout the country on one aspect and this is mixopathy. It is because they are allowing other fields of medical people like homoeopathy doctors and other faculty people who are trained in 75 different surgeries. They are giving them permission to do surgeries.
On the part of IMA, we oppose this as medical doctors because allopathy is doing miracles and so many people from other countries are also coming to our country because we have mastered surgeries. Allopathy has been proven since many years.
Sir, the second point that I would like to mention is about disinvestment of various institutions by the Central Government. I hail from the Vishakhapatnam district. We have the prestigious Vishakhapatnam Steel Plant, RINL. I would like to say a few lines on this because thousands of people are agitating in my constituency and in the Vishakhapatnam district because of the proposed disinvestment of this steel plant.
Sir, Vishakhapatnam Steel Plant has a great history. When the people of our State rallied for this steel plant in the State, particularly in the Vishakhapatnam district, around 32 people sacrificed their lives in this agitation. On 17th April, 1970, the then Prime Minister in a Cabinet meeting took a decision to construct the steel plant in Vishakhapatnam under the aegis of the Rashtriya Ispat Nigam Limited (RINL) and through that decision the decade long demand of the people of Andhra Pradesh was fulfilled. But now, the idea of disinvestment of RINL is hurting the emotions of the people in the district of Vishakhapatnam. Till 2015, the Vishakhapatnam Steel Plant was a profit-making organisation and a Navaratna company. But as the steel cycle of the world has changed, the total business of RINL has been affected, and it started to make losses. But if you could think technically, the cost of steel produced by RINL could be reduced by captive mines allotted to RINL by which the production cost can easily be reduced.
Hon. Chairperson, Sir, through you, I would like to submit that RINL has been making a profit of around Rs. 200 crore per month from the last financial year. So, RINL can function on its own by reducing its losses by the end of 2023. In the meanwhile, I would like to draw the attention of the Government to re-structure the financial liabilities by converting the loans to equity and reducing the interest burden so that RINL can re-structure its financial position and this can only be done by the intervention of the hon. Prime Minister, the Finance Minister and the Steel Minister.
Thank you.
कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय में राज्य मंत्री (श्री कैलाश चौधरी):माननीय सभापतिमहोदय जी, आजमहामहिम राष्ट्रपतिजी के अभिभाषणपर आपने मुझेबोलने का अवसरदिया है, इसकेलिए मैं आपकोबहुत-बहुतधन्यवाद देताहूं । आज जैसाकि हम सभी जानतेहैं कि महामहिमराष्ट्रपति जीका अभिभाषण सरकारका आईना होताहै । निश्चितरूप से जिसदिन अभिभाषणप्रस्तुत कियागया, उसदिन दोनों सदनोंका ज्वाइंट सेशनबुलाया गया । ज्वाइंट सेशनमें महामहिमराष्ट्रपति जीने अभिभाषण मेंसरकार का आईनाप्रस्तुत कियाहै, जिसमेंगांव, गरीब, किसान, युवा, मजदूर, बुजुर्ग, हरवर्ग की बातकी गई है । इसकेसाथ ही देशको आत्मनिर्भरबनाने के लिएसरकार जो कामकर रही है, उसकेबारे में अभिभाषणमें कहा गयाहै । विपक्ष्रने जिस तरहसे उसका बायकॉटकिया था, उसेपूरा देश देखरहा था । महामहिमराष्ट्रपति जीने जो अभिभाषणप्रस्तुत कियाहै, उसमेंसरकार ने एकसाल में जोकार्य किया है, उसकार्य को निश्चितरूप से जनताने सराहा है ।
हम देख रहे हैं कि पिछला साल,पूरा कोरोना काल का साल था । पूरा विश्व इस महामारी से त्रस्त था । लेकिन इस बीच में, हमारी सरकार और माननीय प्रधानमंत्री जी श्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा सही समय पर सही निर्णय लिए गए । उनकी वजह से,आपको मैं कह सकता हूँ कि देश में जो मृत्यु दर का अनुपात था,जहाँ विश्व में त्राहि-त्राहि हो रही थी, पूरी तरह से स्थिति बिगड़ी हुई थी,लेकिन सही समय पर लॉकडाउन का निर्णय लेकर हजारों लोगों की जान बचाने का काम प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में हुआ । कोरोना वॉरियर्स के द्वारा जो काम किए गए,उनके लिए मैं उनको बहुत-बहुत धन्यवाद देना चाहता हूँ ।
जैसा कि हम सब जानते हैं कि विपक्ष के द्वारा जिस तरह से तंज कसे जा रहे हैं । मैं लगातार दो दिनों से यह देख रहा हूँ । इनकी भी सरकार रही, आज आजादी के 75 साल होने जा रहे हैं, इसमें सबसे ज्यादा शासन करने वाले आज विपक्ष में बैठे हैं । मैं कहना चाहता हूँ कि अगर किसी ने सबसे ज्यादा शासन किया तो आपने किया । लेकिन उसके बावजूद आज जिस तरह से योजनाओं को लेकर चर्चा कर रहे हैं, मैं समझता हूँ कि अगर आपने अपने समय में ये काम कर लिए होते, तो आज देश में यह स्थिति पैदा नहीं होती और हम आज आत्मनिर्भर भारत की बात नहीं कर रहे होते । अब तक हमारा देश आत्मनिर्भर भारत हो गया होता । लेकिन उनकी सोच यही थी ।
आपने देखा होगा कि इसके बाद वर्ष 2014 में माननीय नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में सरकार बनी और उसके बाद देश में प्रत्येक व्यक्ति के अन्दर एक आशा जगी कि निश्चित रूप से अब देश आत्मनिर्भर होगा ।
माननीय सभापति जी, प्रधानमंत्री जी ने जो-जो योजनाएं लागू कीं,उनसे निश्चित रूप से अंतिम व्यक्ति को लाभ मिला और उसके अन्दर एक आशा जगी कि वास्तव में हमारे देश में काम होगा । कोरोना के समय में भी हर व्यक्ति की चिन्ता थी कि किसानों की फसलें खेत में हैं और वह सही समय पर कैसे कटेंगी । लेकिन उस समय प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में निर्णय लिए गए और सही समय पर सही एडवाइजरी जारी की गई, जिसकी वजह से मजदूरों को छूट दी गई और उन्होंने सही समय पर फसलों की कटाई की ।
उस समय देश में फसल खरीद केन्द्र भी खोले गए । एक तरफ जहाँ मशीनरीज को एक राज्य से दूसरे राज्य में ले जाने में जो असुविधा हो रही थी, उसमें छूट दी गई । उस समय किसान रथ एप भी शुरू किया गया ताकि किसानों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर वाहन ले जाने में सुविधा हो । इसके साथ ही, फसल खरीद केन्द्रों की संख्या भी बढ़ाई गई ताकि सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखकर अधिक-से-अधिक किसान के उत्पादन को खरीद सकें । इस दृष्टि से सारे काम किए गए, जिनकी वजह से पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष किसानों को उत्पादन में वृद्धि हुई । उसका लाभ देश के किसानों को मिला ।
हम देख रहे हैं कि आज जहाँ कोरोना के समय में प्रधानमंत्री जी और माननीय तोमर साहब के नेतृत्व में जिस तरह से हमारी सरकार ने काम किया, उसकी वजह से किसानों को किसी प्रकार की समस्या नहीं आने दी गई ।
मैं आपसे यह भी कहना चाहता हूँ कि आपने देखा होगा कि उसके बाद, सरकार तो इनकी भी रही, लेकिन उसके बाद जनता में एक विश्वास जगा । चाहे मैं शौचालय की बात करूँ, आजादी के 70 साल बाद भी इस देश में हमारी बहन-बेटियों को शौच जाने के लिए किसी पेड़ का सहारा लेना पड़ता था या ऐसी स्थिति होती थी कि उनको अपनी इज्ज़त बचाने के लिए भी मजबूर होना पड़ता था । लेकिन प्रधानमंत्री माननीय नरेन्द्र मोदी जी ने एक ऐसा निर्णय लिया,जिसकी वजह से देश में हर गरीब व्यक्ति के घर में शौचालय देने का काम किया गया ।
इसके साथ ही,प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत गरीब व्यक्तियों को आवास देने का भी काम हुआ । गाँवों में जो गरीब व्यक्ति रहते हैं, उनकी इच्छा होती है कि उनका भी कभी पक्का मकान बनेगा ।
उसके सपने को प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने साकार किया । प्रधान मंत्री आवास योजना के तहत प्रत्येक गरीब के लिए प्रधान मंत्री आवास बनाने प्रारंभ किए गए । मैं इसके साथ ही आपसे यह भी कहना चाहूंगा कि ‘उज्ज्वला गैस योजना’ की क्या स्थिति थी? गांवों में हमारी बहन-बेटियों को जब खाना बनाना होता था, तब यह स्थिति होती थी कि वे गीली लकड़ी से खाना बनाती थीं, जिससे उनकी आंखों में आंसू आते थे । उन बहनों के आंसुओं को पोंछने का अगर किसी ने काम किया,तो हमारे प्रधान मंत्री माननीय श्री नरेन्द्र मोदी जी ने किया और प्रधान मंत्री ‘उज्ज्वला गैस योजना’ के तहत आज लगभग दस करोड़ बहनों के घरों तक चूल्हे पहुंचाने का काम किया । इस बजट के अंदर और भी घोषणा हुई है कि एक करोड़ और बहनों को ‘उज्ज्वला गैस योजना’ के तहत चूल्हे दिए जाएंगे, गैस कनेक्शन दिए जाएंगे ।
इसी के तहत मैं आपसे यह कहना चाहता हूं कि गांवों के बारे में हम सब जानते हैं,जैसा कि मैं भी ग्रामीण क्षेत्र से आता हूं, हम सभी लगभग ग्रामीण क्षेत्रों से आते हैं । अगर लाइट की बात करें, तो पूरे देश के अंदर उस समय सिर्फ 36 प्रतिशत गांवों में लाइट हुआ करती थी, लेकिन मुझे आज यह कहते हुए प्रसन्नता होती है कि लगभग 90-95 प्रतिशत घरों के अंदर दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना के तहत हमारे गांवों में लाइट पहुंचाई गई है । गांवों में जो बहनें पढ़ने के लिए सक्षम नहीं हो पाती थीं या हमारे युवा, जो पढ़ने के लिए लालटेन का उपयोग किया करते थे ।
हमारी बहनें और युवा पढ़ने के लिए वहां लाइट का इंतजार करते थे, लेकिन वहां लाइट पहुंचाने का काम, चाहे वह दुर्गम रेगिस्तान हो, चाहे पहाड़ी क्षेत्र हो, वहां लाइट पहुंचाने का काम किया गया । इसी के साथ हमने ‘जल जीवन मिशन’का अभियान शुरू किया है । ‘हर घर जल’ योजना के तहत हम हर घर में पानी पहुंचाने का काम भी करेंगे । मैं आपको बताना चाहूंगा कि आपने देखा होगा कि ‘आयुष्मान भारत योजना’ के तहत आज पांच लाख रुपये तक के फ्री इलाज करने का काम हमारे प्रधान मंत्री जी के नेतृत्व में किया गया ।
हम पहले सोचते थे कि प्राइवेट हॉस्पिटल में इलाज कराने जाने के लिए एक गरीब व्यक्ति सोच भी नहीं सकता था, लेकिन आज वह व्यक्ति हॉस्पिटल में जाकर आराम से इलाज करवा सकता है, यह भी हमारे माननीय प्रधान मंत्री जी की सोच है । मैं आपसे यह भी कहना चाहता हूं कि इस देश की आजादी के बाद सबसे ज्यादा शासन करने के बावजूद भी मेरे देश की बहन को इतना इंतजार क्यों करना पड़ा?उसको शौचालय बनने के लिए 75 सालों तक इंतजार करना पड़ा । गांवों में लाइट का भी 70 सालों तक इंतजार करना पड़ा, आवास के लिए भी 70 सालों तक इलाज करना पड़ा ।
अगर उनके यह सपने पहले पूरे हो गए होते, तो मैं समझता हूं कि आज देश कहां से कहां पहुंच गया होता, लेकिन इनकी सोच सिर्फ इतनी ही थी कि उन्होंने किसान के नाम पर या हर व्यक्ति के नाम पर राजनीति के अतिरिक्त कुछ भी ऐसा नहीं किया,जिसके बारे में हम कुछ कह सकते हों । मैं देख रहा हूं कि पिछले दो-तीन दिनों से लगातार चर्चा हो रही है । मैं कृषि के ऊपर आना चाहूंगा । अगर कृषि के लिए बजट की बात करें,तो मैं सबसे पहले यही कहना चाहता हूं कि आप अपना बजट देख लीजिए ।
सभापति महोदय, इनका कृषि का वर्ष 2014 तक का जो बजट था, वह बजट लगभग 22 हजार करोड़ रुपये का था । इस देश का टोटल कृषि का जो बजट होता था, वह सिर्फ 22 हजार करोड़ रुपये हुआ करता था, जिसमें से आधे से अधिक तो अधिकारियों की सैलरी में चला जाता था । …(व्यवधान) वर्ष 2011, वर्ष 2012, वर्ष 2013 की यूपीए की सरकार के समय में अधिकतम बजट 22 हजार करोड़ रुपये था, लेकिन मुझे आज यह बताते हुए प्रसन्नता हो रही है कि इस साल का कृषि का बजट 1 लाख 24 हजार करोड़ रुपये है,जो कि छ: गुना अधिक है । …(व्यवधान)
श्री रमेश बिधूड़ी : आपबिट्टू भाई कोभी एक बार बताइए । …(व्यवधान)
श्री कैलाश चौधरी: बिट्टूभाई जी शायदनीचे देख रहेहैं । …(व्यवधान) मैं आपको बताना चाहता हूं कि आपके समय का कृषि का बजट,आप ऑनलाइन देख सकते हैं, डॉक्यूमेंट्स मंगाकर देख सकते हैं कि क्या कृषि का बजट इतना ही, 22 हजार करोड़ रुपये ही होना चाहिए था? आज जिस तरह से कृषि का बजट बढ़ाया गया है, उसके लिए भी मैं कहना चाहता हूं । आप सुन लीजिए,आपका टोटल बजट 22 हजार करोड़ रुपये हुआ करता था, लेकिन हमारे बजट में 75 हजार करोड़ रुपये तो सीधे किसान के खाते में ‘किसान सम्मान निधि’के तौर पर जाते हैं ।
75 हजार करोड़ रुपये डायरेक्ट किसान सम्मान निधि के तौर पर उनके खाते में जाता है । आपका टोटल बजट 22 हजार करोड़ रुपए हुआ करता था । आप कहां किसान की बात करते हो, किसान के नाम पर राजनीति करते हो । एमएसपी पर आपके समय की खरीद वर्ष 2009 से लगभग 266 मिलियन टन थी । आज हमारी खरीद वर्ष 2019-20 में 297 बिलियन टन है, जो आपसे बहुत ज्यादा है । आप दलहन की वर्ष 2009 से वर्ष 2013-14 तक जो खरीद करते थे वह केवल 645 करोड़ रुपये की खरीद की थी । हमने वर्ष 2015 से 2021 तक 50 हजार करोड़ रुपये की है, जो आपसे 75 गुना अधिक है । मैं तिलहन और कोपरे की बात करूंगा । हमने एमएसपी पर जो खरीद की थी,आपने वर्ष 2009 से लेकर 2013-14 तक 2460 करोड़ रुपये की खरीद की थी । हमने 2015 से 2021 तक 25 हजार करोड़ रुपये की खरीद की है, जो आपसे दस गुना अधिक है । हमने एमएसपी को डेढ़ गुना करने का काम किया । धान की खरीद आपके समय में 1310 रुपये थी, आज एमएसपी पर 1868 रुपये की खरीद हो रही है, जिसे हमने 50 प्रतिशत बढ़ाया है । ज्वार की खरीद आपके समय में 1500 रुपये थी और हमारे समय में 2620 रुपये एमएसपी है । बाजरे की एमएसपी आपके समय में 1250 रुपये थी, हमारे समय में 2150 है, जो आपसे 83 प्रतिशत अधिक है । गेहूं की खरीद आपके समय 1400 रुपये थी, हमारे समय में 1975 रुपये है । इस तरह से हर फसल में हमने पचास प्रतिशत से अधिक एमएसपी पर खरीद करने की वृद्धि की है । हमने केवल एमएसपी को डेढ़ गुना बढ़ाने का ही काम नहीं किया है, हमने बजट को भी बढ़ाया है तथा कई अन्य योजनाएं भी प्रारम्भ की हैं । आपने किसान को कभी डायरेक्ट लाभ देने की कोई योजना बनाई है,तो बताएं । हमने किसान सम्मान निधि के तौर पर छह हजार रुपये प्रति वर्ष उनके खाते में डालने का काम किया है और आज तक लगभग 10.74 करोड़ किसानों के खाते में 1 लाख 15 हजार करोड़ रुपये पहुंचाने का काम किया है । यह नरेन्द्र मोदी जी की सरकार है, जो किसान को डायरेक्ट लाभ देने का काम कर रही है । प्रधान मंत्री फसल बीमा योजना के अंदर भी किसानों को क्लेम के अंदर आपसे कई गुना ज्यादा देना प्रारम्भ किया है ।
बिट्टू जी बड़े आराम से सुन रहे हैं और उनको पता है कि मैं सही बोल रहा हूं । अब ये कहें तो किससे कहें । …(व्यवधान)
श्री रमेश बिधूड़ी : बिट्टूजी, आप किसानहैं । आप यहबताइए कि आपकेखाते में छ: हजारगए या नहींगए? …(व्यवधान) इसका मतलब आप किसान नहीं हैं ।
HON. CHAIRPERSON: Nothing will go on record except the speech of the hon. Minister.
…(Interruptions) …* HON. CHAIRPERSON: Mr. Minister, please continue.
श्री कैलाश चौधरी: फसल बीमा योजना के अंदर हमने आपसे अधिक क्लेम दिया । वहीं, अगर मैं किसान क्रेडिट कार्ड की बात करूं तो आपके समय में सिर्फ सात लाख करोड़ रुपये थे,वहीं आज किसान क्रेडिट कार्ड के तौर पर 15 लाख करोड़ रुपये किसान के खातों में ‘किसान क्रेडिट कार्ड’ के माध्यम से दिए जाते हैं । अभी डेढ़ लाख करोड़ रुपये और बढ़ाकर 16.5 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है । वहीं पर अगर मैं ‘मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना’ की बात करूं, तो इस योजना का विमोचन चुरु में हमारे माननीय प्रधान मंत्री जी ने किया । उसके बाद 11 करोड़ किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड दिए गए और जैविक खेती में भी हमने विशेषकर बजट को बढ़ाने का प्रावधान किया,ताकि देश में आजकल जिस तरह से पेस्टिसाइड्स की वजह से बीमारियां फैल रही हैं उससे हमें जैविक खेती के माध्यम से निजात मिल सके । आज मैं कह सकता हूं कि लगभग 6.9 लाख हेक्टेयर के अंदर इसको कवर किया गया है और 75 लाख किसानों को हम लाभान्वित करने जा रहे हैं । नीम कोटेड यूरिया प्रारंभ की । इसकी किस प्रकार से…* होती थी ।
माननीय सभापति: माननीय मंत्री जी और कितना समय आपको चाहिए?
श्री कैलाश चौधरी : सर, मुझेअभी बहुत कुछकहना है, लेकिनअभी मैं मुख्यरूप से जो इनकाइश्यू है, उसपर आऊंगा । चाहेनीम कोटेड यूरियाहो, चाहेएग्रीकल्चर इन्फ्रास्ट्रक्चरके ऊपर एक लाखकरोड़ रुपये देनेका विषय हो, आनेवाले समय केअंदर किसान केलिए एक लाखकरोड़ रुपये एग्रीकल्चरइन्फ्रास्ट्रक्चरपर भी खर्चहोगा । 10 हजारएफपीओ बनाएंगेऔर जब ये बनेंगे, किसानोंका समूह बनेगा, तोउनको 33 लाखरुपये की सहायतादी जाएगी औरइन 10 हजारएफपीओ से किसानोंको निश्चित रूपसे आने वालेसमय में लाभमिलेगा । चाहेकृषि सिंचाईयोजना हो, चाहेमाइक्रो इरिगेशनहो, जिसकेअंतर्गत हमनेइस बजट में5 हजारकरोड़ से 10 हजारकरोड़ रुपये करनेका काम कियाहै । पहले लगभग655 ई-नाममंडियां थीं, जिनकोहमने कोरोनाकाल में बढ़ाकरएक हजार किया । इस बजट केमाध्यम से हमएक हजार मंडियांई-नाम केरूप में औरजोड़ेंगे, जिससेकि मार्केट मेंइसका लाभ मिलेगा ।
महोदय, जबटिड्डी की समस्याआई तो हमनेएनडीआरएफ केविशेष फंड सेटिड्डी से मुक्तिदिलाने का कामकिया । इसकेसाथ ही पहलीबार ड्रोन औरहैलीकॉप्टर सेछिड़काव कर किसानोंको राहत देनेका काम भी किया । रही बात, कृषिकानूनों की, तोमैं कुछ कहनाचाहता हूं ।मैं पिछले लंबेसमय से सुनरहा हूं किकिसानों के लिएबनाए गए कृषिकानून काले कानूनहैं । यह आपकहते हैं । मैंपहले तो आपसेयह कहना चाहताहूं कि आप अपनेघोषणा-पत्रको पढ़ें । आपनेअगर अपने घोषणा-पत्रमें इन रिफॉर्मोंको लाने कीबात नहीं कीहो, तो हमस्वीकार कर लेंगेकि हम वास्तवमें गलत हैं । मुझे ऐसा लगताहै कि जिस तरहसे किसानों केनाम पर देशमें राजनीतिहो रही है, उसकेमाध्यम से किसानोंको भड़काने काकाम किया जारहा है । मैंभी किसान हूंऔर एक किसानका बेटा हूं । बचपन से मैंखुद खेती करताथा और मैंनेखुद मंडी मेंजाकर अपने अनाजको बेचा है । मैं जब छोटाथा, तो अपनेचाचा जी केसाथ मैं मंडीमें जाता था । वहां मैं देखताथा कि मंडीके अंदर जोआढ़ती हैं, वेबोली लगाते थे । एक पैसा बढ़ताथा तो मेरेऔर मेरे चाचाजी के चेहरेपर खुशी आतीथी कि किस तरहसे एक-एकपैसा बढ़ रहाहै । किसान कोपता है कि एकपैसे की कीमतक्या होती है । यहां मजाकउड़ाया जाता हैकि छ: हजाररुपये देने सेक्या होता है । किसान को जबअपना बीज लानाहोता है औरउस समय जब उसकोछ: हजाररुपये मिलतेहैं, तबउसे पता चलताहै कि छ: हजारकी क्या कीमतहोती है ।
मैं आपको कहना चाहता हूँ कि जब मैं मंडी के अंदर जाता था तो उस समय मंडी के अंदर जो आढ़ती होते थे, वे तय कर लिया करते थे कि हमें किस रेट के अंदर अपने अनाज को बेचना है । उस समय मैं सोचता था कि मैं अपने उत्पादन को दूसरी जगह पर क्यों नहीं बेच सकता,मंडी के बाहर क्यों नहीं बेच सकता? मंडी परिधि के बाहर बेचने की हर व्यक्ति को आजादी होती है । आज मैं कहना चाहता हूँ कि मेरे पास यह पेन है,पेन बनाने वाली कंपनी कहीं पर भी अपने पेन को बेच सकती है, चाहे वह देश के अंदर बेचे, चाहे विदेश के अंदर बेचे । पेपर बनाने वाली कंपनी कहीं पर भी अपना पेपर बेच सकती है, एक सुई बनाने वाला कहीं पर भी अपनी सुई बेच सकता है, लेकिन मेरा अन्नदाता, मेरा धरतीपुत्र किसान रात-दिन खेत में काम करने वाला,मेहनत करके काम करने वाला अपने उत्पादन को मनचाहे स्थान पर, मनचाहे व्यक्ति को नहीं बेच सकता था, उसको आजादी नहीं थी । इतने साल तक आजादी क्यों नहीं मिली? किसान को इस बात की स्वतंत्रता नहीं थी ।
माननीय सभापति : मंत्रीजी, अब आपअपनी बात समाप्तकीजिए ।
श्री कैलाश चौधरी : आज इस कानून के माध्यम से यह तय हो गया कि आने वाले समय के अंदर यह स्वतंत्रता होगी । यह किसानों का कानून है, यह आजादी देने वाला कानून है, अब किसान मनचाहे व्यक्ति को, मनचाहे स्थान पर, किसी भी स्थान पर अपना उत्पाद बेच सकता है । इस कानून के अंदर यह प्रावधान किया गया है । किसान को किसी भी प्रकार का टैक्स नहीं चुकाना पड़ेगा । अगर मंडी परिधि के अंदर और मंडी परिधि के बाहर किसी प्रकार का टैक्स है, मंडी परिधि के अंदर वह राज्य का अधिकार है, लेकिन अगर मंडी परिधि के बाहर वह कोई भी ट्रेड करेगा,तो उसको किसी प्रकार का टैक्स नहीं चुकाना पड़ेगा,यह इस कानून के अंदर प्रावधान किया गया है । इस बात की इसमें स्वतंत्रता दी गई है ।
दूसरा, मैं कॉन्ट्रैक्ट फॉर्मिंग पर आना चाहूंगा । कॉन्ट्रैक्ट फॉर्मिंग के अंदर किसान को गुमराह किया जा रहा है कि किसान की जमीन चली जाएगी ।
माननीय सभापति : मंत्री जी, आप अपनी बात समाप्त कीजिए ।
श्री कैलाश चौधरी : सर, मैंदो-तीन मिनटमें अपनी बातसमाप्त करूँगा । कॉन्ट्रैक्ट फॉर्मिंग के अंदर मैं बताना चाहूँगा कि कॉन्ट्रैक्ट फॉर्मिंग के अंदर किसान अपनी फसल को बोने से पहले अपना रेट तय कर पाएगा कि किस रेट के अंदर मेरा उत्पादन बिकेगा ।
महोदय, मैं आपको बताना चाहता हूँ और मैं एक उदाहरण देकर अपनी बात बताऊँगा । अगर कोई अनार का व्यापारी है और अनार के व्यापारी और किसान के बीच में 100 रुपये के स्टॉम्प पेपर पर एक एग्रीमेंट हो जाएगा । 100 रुपये के स्टॉम्प पर एग्रीमेंट होने के बाद मान लो उसने 30 रुपये का रेट तय किया और अगर अनार का रेट घटकर 20 रुपये हो जाता है तो व्यापारी बाध्य है कि उसे 30 रुपये के रेट पर किसान के अनार को खरीदना ही होगा,अन्यथा उसके ऊपर 150 परसेंट की पेनॉल्टी लगेगी । यह प्रावधान इस कानून के अंदर किया गया है । वहीं पर अगर अनार का रेट बढ़कर 50 रुपये हो जाता है तो किसान स्वतंत्र है,किसान बढ़ी हुई दर पर 50 रुपये में दूसरे व्यापारी को अपना उत्पाद बेच सकता है । उसके खिलाफ कोई कानूनी कार्यवाही नहीं होगी, यह प्रावधान इस कानून के अंदर किया गया है ।…(व्यवधान)
महोदय, मैं एक बात और कहना चाहूँगा । अगर व्यापारी और किसान के बीच हुए करार में कोई विवाद हो जाता है तो एसडीएम के पास उसकी सुनवाई का प्रावधान रखा गया है । अगर किसान ने एडवांस पैसा लिया है, तो पैसे वापस देने का प्रावधान है,लेकिन उसमें भी किसान से पूछा जाएगा । एसडीएम किसान से पूछेगा कि यह पैसा तुम्हें कब देना है और अगर किसान कहे कि मैं इसको 6 महीने बाद में दूँगा तो वह 6 महीने बाद में पैसा दे सकता है । अगर किसान कहेगा कि मैं किस्तों मैं पैसा वापस दूँगा तो वह किस्तों में दे सकता है । वह कहेगा कि मैं अगली फसल पर दूँगा तो अगली फसल पर दे सकता है और उस पर किसी भी प्रकार का ब्याज नहीं लगेगा ।…(व्यवधान) बिट्टू जी, सुनिए । …(व्यवधान) अभी मुख्य बात आ रही है, आपको तकलीफ हो रही है ।…(व्यवधान) मैं कह रहा हूँ कि आपको इसलिए तकलीफ हो रही है ।…(व्यवधान) अगर आज मैं यह कह दूँ ।…(व्यवधान) बिट्टू जी, सुनिए ।…(व्यवधान) माननीय सदस्य सुनिए ।…(व्यवधान) इसके अतिरिक्त अगर सच्ची बात आपको कड़वी लग रही है, आज मैं आपको सच्ची बात बता रहा हूँ ।…(व्यवधान) आपको तकलीफ हो रही है । …(व्यवधान) आपको इन कानूनों की जानकारी नहीं थी, इसलिए आप ऐसा बोल रहे थे ।…(व्यवधान) आज मैं पूरी बात करता हूँ ।…(व्यवधान)
महोदय, अगर किसान एडवांस दिया हुआ पैसा वापस नहीं भी देता है तो भी उसके खिलाफ कोई कानूनी कार्यवाही एसडीएम नहीं कर सकता ।…(व्यवधान) ऐसा प्रावधान इस कानून के अंदर है । …(व्यवधान) फिर किसान की जमीन कैसे जा सकती है?…(व्यवधान)
माननीय सभापति : मंत्री जी, धन्यवाद ।
…(व्यवधान)
श्री कैलाश चौधरी : आजमैं यहाँ परघोषणा करता हूँ ।…(व्यवधान) अगर इसमें किसान की एक इंच जमीन जाने का प्रावधान हो तो मैं मंत्री पद से अभी इस्तीफा दे दूँ और हमेशा के लिए राजनीति छोड़ दूँ । …(व्यवधान) आप इस तरह से किसानों को गुमराह न करें ।…(व्यवधान) किसानों को गुमराह करने की आवश्यकता नहीं है ।…(व्यवधान)
माननीय सभापति : मंत्री जी, धन्यवाद ।
श्री अमर सिंह जी ।
…(व्यवधान)
श्री कैलाश चौधरी : सभापति महोदय,मैं आपसे कहनाचाहता हूं किकिसानों के हितके लिए ये बिल्सबने हैं ।…(व्यवधान) मैंआपको बताऊं किसच्ची बात येन यहां सुनतेहैं और न दूसरीजगह कोई सुननाचाहता है, उनको सुननेदेते हैं ।…(व्यवधान) सिर्फगुमराह करनेका काम कर रहेहैं । …(व्यवधान) ये सुनना नहीं चाहते हैं, सच्ची बात हमेशा कड़वी होती है ।…(व्यवधान)
HON. CHAIRPERSON: Ravneet Singhji, please sit down.
… (Interruptions)
HON. CHAIRPERSON: Now, please conclude.
… (Interruptions)
श्री कैलाश चौधरी : सभापति महोदय,मैं कन्क्लूड करता हूं । जिस तरह से ये कानून बने हैं, किसानों के हित के कानून बने हैं । हमने लगातार यूनियन के नेताओं से वार्ता की और बार-बार वार्ता की । हमने सौहार्दपूर्ण वातावरण के अंदर बात की । उनसे लगातार चर्चा कर रहे हैं कि आप उन बिंदुओं पर आइये, जो आपके प्रारंभिक मुद्दे थे । उनका एक मुद्दा एसडीएम के विषय पर था कि उसको सिविल कोर्ट के अंदर…(व्यवधान) कोई बात नहीं एसडीएम कोर्ट में जाए या सिविल कोर्ट में जाए, यह उनकी मर्जी है ।…(व्यवधान) हम करेंगे । मैं क्या कह रहा हूं ।…(व्यवधान) मैं आपको कह रहा हूं कि कुछ प्रारंभिक मुद्दे जो किसान यूनियन के थे,वह बता रहा हूं ।…(व्यवधान) पराली का एक विषय था । इसके अतिरिक्त एक बिजली का मुद्दा था, अब वे मुद्दे तो गौण हो गए और अब रिपील की बात की जा रही है ।…(व्यवधान) मैं तो कहता हूं कि कानून के अंदर ऐसा कौन सा प्रावधान है, जिसके अंदर आपको लगता है कि संशोधन करने की आवश्यकता है ।…(व्यवधान) आप बता तो दीजिए । आप सिर्फ काला कानून की बात करते हैं । मैं इतना कहकर अपनी बात पूरी करता हूं ।…(व्यवधान)
माननीय सभापति : मंत्री जी, आप अपनी बात समाप्त कीजिए ।
श्री कैलाश चौधरी : मैं एक शेर के साथ अपनी बात पूरी करता हूं कि-
किसानों की जिंदगी खुशहाल बनाने चल पड़े हैं, कहीं भी, कभी भी बेचने अपना माल बताने चल पड़े हैं, अब तक तो ठगा जाता रहा है मेरा किसान भाई, आज से अपनी किस्मत चमकाने चल पड़ा है ।
मैं आपको भी कह दूं, मैं आपका बताना चाहता हूं । आप सुनिए । अभी ये जिस तरह से कर रहे हैं । मैं आपको बताऊं-
आपने सताया है अब तक कितने किसानों को बताओ तो ज़रा रूलाया है अब तक कितने किसानों को बताओ तो ज़रा किसानों के नाम पर तमाशा करने वालों बाज आओ, बरगलाया है किसने भोले किसान को बताओ तो ज़रा ।
इसलिए मैं कहना चाहता हूं कि आपने 60साल तक सिर्फ किसान के नाम पर राजनीति की । …(व्यवधान) लेकिन मेरा किसान भाइयों से निवेदन है कि आज पूरा देश, निश्चित रूप से हम तो यही कहते हैं कि वार्ता से ही समाधान निकलता है ।…(व्यवधान) निश्चित रूप से स्वयं प्रधान मंत्री जी ने इस बात को कहा है ।…(व्यवधान) मैं निश्चित रूप से यही कहता हूं कि इसमें आप भी आग में घी डालने का काम कर रहे हैं ।…(व्यवधान) मेरा तो इतना ही कहना है कि हम सब देश के किसान को आत्मनिर्भर बनाएं ।…(व्यवधान) इसके लिए हमारे प्रधान मंत्री जी के नेतृत्व में सरकार काम कर रही है । आपका बहुत-बहुत धन्यवाद ।
*DR. AMAR SINGH (FATEHGARH SAHIB): I thank you, Hon. Speaker Sir, for giving me the opportunity to speak on President’s Address to both Houses of Parliament.
Sir, I have been the Chairman of FCI. I know the details. I don’t want to go into the nitty-gritty. The Sikh farmers from Punjab have been dubbed anti-national, Khalistani etc. after the 26th January, 2021 incidents. I and the entire Punjab are agonized at these wild allegations. The history of Punjab and Sikhs proves that ever since the time of our tenth Guru Gobind Singh ji, our religion is the most patriotic religion in the country. The Sikh farmers of Punjab toils and moils in the fields and worships at Gurdwaras. But, he is not anti-national or traitor. I am pained by these allegations.
23.39 hrs (Hon. Speaker in the Chair) Sir, ever since Ahmad Shad Abdali’s times, freedom struggle and beyond, Sikhs have been at the vanguard as far as fighting for the country is concerned. Abdali attacked India seventeen times and Sikhs fought against him every time. We used to free the slaves and looted the treasury of Abdali when he would be returning to Afghanistan. Sikh peasants have thus, made a great contribution to the country. To call them bad names is in very poor taste. Whether it is India’s freedom struggle, the 1965 and 1971 Indo-Pak wars, the Sikh peasants and soldiers were fighting for their motherland. The Sikh farmers ushered in the Green Revolution. It is in bad taste to call all Sikh farmers Khalistanis.
Sir, our population is hardly 2% of the total population of India. However, we contribute 8 to 10% soldiers in the army. Martyrs draped in triclour continue to come back home in Punjab after every few days. Our Sikh soldiers are fighting at the borders for the sake of their country. We should condemn those who question the patriotism of Sikhs.
Sir, as far as 26th January incidents are concerned, everyone has condemned it including Captain Amriander Singh, Rahul Gandhi and the Congress party. Red Fort is our pride. It is a symbol of our freedom. A symbol of our republic. Whoever broke the law on that day should be arrested and punished.
The Hon. Minister says that these are very good agriculture laws. Then, why are the farmers not believing you? Hon. Minister Sir, please listen to me.
मंत्री जी मेरी बात को सुनिए, मैं आपको बताना चाहता हूं कि फार्मर्स यकीन क्यों नहीं कर रहे हैं? You have all the facts and figures. You can cross-check these. The Shamta Kumar Committee report says that hardly 6% farmers get MSP. If we talk about produce, 10% to 15% MSP is given on produce. Even now, farmers are selling their produce to private players and corporates. Ten years ago too, they were doing the same thing.
Sir, the farmer gets remunerative price at Government mandis at the hands of Government agencies. But, otherwise, he does not get good prices, be it potatoes, maize, cotton etc. So, the farmers do not believe you as they have the experience. Kindly cross-check how much percentage of produce is sold at MSP. I don’t want to go into the details.
Sir, Punjab has been badly harmed due to this agitation. Our trains were stopped. 40 to 50,000 crores worth of loss took place. RDF has been stopped. We are not getting GST compensation.
My last suggestion to Hon. Minister Sir through you Hon. Speaker Sir is that Government has agreed to amend these laws. Government is even agreeable to put these laws at hold for eighteen months to two years. Then, what is the issue left? You have agreed to it. … (Interruptions)
माननीय अध्यक्ष : आप खड़े होकर डिस्टर्ब करेंगे तो मैं इनको बोलने के लिए पांच मिनट और दे दूंगा ।
*DR. AMAR SINGH: Sir, I am concluding. When the Government agrees that amendments are needed in these laws and that these laws can be suspended for 1½ to 2 years, there should be no problem.
Sir, these farmers feed millions in India. Let us not make it a prestige issue. Let there be an ixnquiry into the 26th January incidents. False cases have been lodged against many Sikhs. Those who are guilty should be punished. But the innocent should be released. The internet should be restored at protest sites. The barbed wire fencing should be removed. Only then will a conducive atmosphere be created. MSP is not being given practically to the farmers even today. The MSP should be enshrined in a law.
Sir, 86% are small and marginal farmers. These are Government figures given by Hon. Prime Minister. Farmers are under debt. The Government should provide relief to them. Let us conclude this chapter. Take back the faulty laws and protesting farmers will return to their homes. We all will be very happy if you do this. Thanks.
वित्त मंत्रालय में राज्य मंत्री तथा कारपोरेट कार्य मंत्रालय में राज्य मंत्री (श्री अनुराग सिंह ठाकुर): अमरसिंह जी, आपकर्ज माफी कीबात कर रहेहैं न, पचाससाल में जितनाआपने कर्ज माफकिया, वह50 हज़ारकरोड़ रुपये था । हमारी सरकारने एक लाख 15 हजारकरोड़ रुपये तोकेवल पीएम सम्माननिधि में उसकेअलावा दे दिएथे और साढ़े16 लाखरुपये इस सालबजट में अलगसे सुलभ ऋणयोजना के लिएरखे हैं । …(व्यवधान)
डॉ. अमर सिंह : मंत्री जी, सन् 2008 में 72 हजार करोड़ रुपये हमने माफ किए थे । उसको आज की कॉस्ट पर निकाल लो कि कितना बनता है, उतना कर दो । …(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष: चलनेदो । संवाद चलतारहना चाहिए । संवाद चर्चा, वाद-विवादसे मंथन होगाऔर मंथन सेअमृत निकलेगा, उससेजन-कल्याणहोगा ।
श्रीअरविंद शर्माजी ।
…(व्यवधान)
डॉ. अरविन्द कुमार शर्मा (रोहतक):स्पीकर सर, मैं सबसे पहले तो माननीय प्रधान मंत्री जी का धन्यवाद करूंगा कि उनके नेतृत्व में केन्द्र सरकार – किसान,मज़दूर, खेतिहर मज़दूर, गरीब,दलित, बैकवर्ड,नौजवान, कर्मचारी,व्यापारी, छोटे व्यापारी,बुज़ुर्गों,महिलाओं, इत्यादि, इन सबके आशिर्वाद से मिली-जुली सबकी समानता की सरकार है । इससे बड़ा काम और क्या हो सकता है कि माननीय प्रधान मंत्री जी ने इसमें एक और बात एड की है । मैं अपने कई और साथियों के भाषण सुन रहा था तो कोई साथी बोल रहा था कि समानता नहीं है । माननीय प्रधान मंत्री जी ने जनरल कैटेगरी को आर्थिक आधार पर दस पर्सेंट का आरक्षण दे कर यह दिखा दिया कि केन्द्र सरकार ‘सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास’ले कर चलती है ।
स्पीकर सर, दूसरी बात,ये सारे साथी अपनी-अपनी बात कह रहे हैं । मैं सन् 1996 से इस लोक सभा का सदस्य हॅूं । सन् 1996 में निर्दलीय चुन कर आया था । स्पीकर साहब,माननीय प्रधान मंत्री जी के आशीर्वाद से मैं चौथी बार सांसद हॅूं । मैंने बहुत उतार-चढ़ाव देखे हैं । आपने देखा कि मैंने वह समय भी देखा है कि जब एक किसान,पांच एकड़ तक का किसान, हमारे देश में छोटे किसान बहुत ज्यादा हैं,पांच एकड़ तक का किसान भी अगर कोई शादी करता था, अपने लड़के या लड़की की शादी भी कर लेता था,कोई मकान बना लेता था, कोई ट्रैक्टर खरीद लेता था, कोई भी नया काम अगर कर लेता था तो उसका कर्जा टूटता नहीं था । यह मैं गारंटी के साथ कहता हॅूं । आज सन् 2014 के बाद माननीय प्रधान मंत्री जी ने,आप देखेंगे कि मैं इन साथियों को बताना चाहता हॅूं कि किसानों के लिए इतनी सारी योजनाएं दी हैं,अगर मैं इन योजनाओं के बारे में थोड़ा पढ़ने लग जाऊं तो मुझे उम्मीद है कि कम से कम दो घंटे इन योजनाओं को पढ़ने में लग जाएंगे ।
माननीय अध्यक्ष जी, आप देखेंगे,हम सभी सदस्य ‘दिशा’ कमेटी के चेयरमैन होते हैं । जब मैं अपने जिले की ‘दिशा’की मीटिंग लेता हूं तो उस मीटिंग में माननीय प्रधान मंत्री जी की योजनाओं पर चर्चा करने में, केन्द्र सरकार की योजनाओं पर चर्चा करने में पूरा दिन लग जाता है । आपने देखा कि कोविड-19की महामारी में,जब पूरे विश्व ने घुटने टेक दिए थे, तो किस तरह से प्रधान मंत्री जी ने देश को संभाला । हमारे विपक्ष के साथी कहते थे कि लॉकडाउन गलत किया । आज उसी लॉकडाउन का नतीजा है कि जब मैं सुबह माता वैष्णो देवी जी की आरती देख रहा था तो तीन साल,दो सालों के बच्चे भी मास्क लगाकर बैठे थे । आज जो लोगों में कोविड से लड़ने की जागरूकता है,यह लॉकडाउन का ही नतीजा है ।
माननीय अध्यक्ष जी, आप देखेंगे कि किस तरह से लॉकडाउन में आत्मनिर्भर भारत की तरफ जो तेजी से कदम बढ़ाया,उसने कितनी स्पीड पकड़ी है । जब लॉकडाउन हुआ, कोविड की महामारी आई तो आपने देखा कि हमारे देश में पी.पी.ई.किट्स, सैनिटाइजर्स,फेस मास्क्स,वेंटिलेटर्स की व्यवस्था नहीं थी, लेकिन प्रधान मंत्री जी की अपील के बाद आज करोड़ों की तादाद में पी.पी.ई. किट्स हैं । इसके साथ-साथ हमारे प्रधान मंत्री जी के नेतृत्व में, हमारे स्वास्थ्य मंत्री जी के नेतृत्व में कोरोना वैक्सीन भी आई । मैं अपने साथियों से यह बताना चाहता हूं कि कोविड की महामारी से तो केन्द्र सरकार ने, माननीय प्रधान मंत्री जी ने सफलतापूर्वक सामना किया ही,लेकिन उसके साथ-साथ प्राकृतिक आपदाएं भी आईं । इसी के साथ-साथ आपने देखा कि पिछले साल कई राज्यों में बाढ़ आई, भूकम्प आए, चक्रवात आए और हमारे हरियाणा में तो टिड्डी दलों का बहुत भयंकर हमला हुआ । पिछले समय में तो बर्ड फ्लू भी आया, लेकिन केन्द्र सरकार ने, माननीय प्रधान मंत्री जी के नेतृत्व में इन सारी चीजों का बहुत अच्छे तरीके से सामना किया ।
हमारे पंजाब के साथी अपनी-अपनी बात कह रहे थे । मैं पंजाब के अपने साथियों से पूछना चाहता हूं कि जब आंदोलन का समय शुरू हुआ और आंदोलन के समय में हरियाणा के लोगों ने इतना अच्छा अतिथि सत्कार किया कि पंजाब के कई मंत्रियों ने यह कहा कि हरियाणा हमारा छोटा भाई है । आज मैं इन सारे साथियों से कहना चाहता हूं कि अगर हरियाणा को पंजाब अपना छोटा भाई मानता है तो एस.वाई.एल. कैनाल का पानी,जो कि हरियाणा की जीवन रेखा है,आप क्यों नहीं इसका निपटारा कराते?मैं इनसे अपील करता हूं कि इस बात पर ध्यान देकर आप लोग हरियाणा की तरफ ध्यान दें और इस बात का समाधान कराने की पूरी-पूरी कोशिश करें ।
अध्यक्ष जी, किसानों के लिए जितनी योजनाएं आपने देखी, प्रधान मंत्री जी ने दी, आत्मनिर्भर भारत के पैकेज के तहत प्रधान मंत्री किसान सम्मान निधि के अंतर्गत 16,394 करोड़ रुपये, 8 करोड़ 19 लाख किसानों के लिए दिए । अभी हाल में प्रधान मंत्री जी ने किसानों की दशा सुधारने के लिए करीब 18 हजार करोड़ रुपये सीधे खातों में दिए ।
वर्ष 2014 के बाद इस सरकार की, माननीय प्रधान मंत्री जी की सबसे बड़ी खासियत यही है । पहले जो लोग शोर मचा-मचा कर कहते थे कि हम अगर एक रुपया भेजते हैं तो उसमें से सोलह पैसे पहुंचता है, आज माननीय प्रधान मंत्री जी के नेतृत्व में, केन्द्र सरकार के नेतृत्व में, अगर एक रुपया भेजा जाता है तो एक रुपया ही वहां पहुंचता है और अगर 100 रुपया वहां भेजा जाता है तो 100 रुपये ही पहुंचते हैं ।
यह हमारे प्रधान मंत्री जी की, हमारे भारतीय जनता पार्टी की सरकार की खासियत है । किसान क्रेडिट योजना, एग्री इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए लगभग एक लाख करोड़ रुपये फण्ड की व्यवस्था की गई । आप देखेंगे कि किसानों की हर्बल खेती को बढ़ावा देने के लिए चार हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया । किसानों की आय को दोगुना करने के लिए प्रधान मंत्री मत्स्य सम्पदा योजना के तहत 20,000 करोड़ रुपये की धनराशि आवंटित की गई । कितनी सारी योजनाएं हैं । अगर हम इन्हें पढ़ें, इन बातों की गहराई में जाएं तो मैं जिम्मेदारी के साथ कह सकता हूं कि पूरा दिन लग जाएगा, पर प्रधान मंत्री जी की, केन्द्र सरकार की योजनाएं खत्म नहीं होंगी । इसको समझना पड़ेगा और फिर आप देखेंगे कि किस तरह से किसानों के लिए, गरीबों के लिए, खेतिहर मजदूरों के लिए यह सरकार काम कर रही है । ये सारी बातें आपके सामने आएंगी ।
माननीय अध्यक्ष जी, आपने मुझे बोलने के लिए इतना समय दिया, इसके लिए मैं फिर से आपका धन्यवाद करता हूँ । ये तीनों कृषि कानून इस व्यवस्था को सुधारने के लिए और किसानों की आमदनी को दोगुना करने के लिए एक अच्छा कदम है । हम किस तरह से किसानों की आमदनी को वर्ष 2022 तक दोगुना करें,इन तीनों कानूनों के जरिए से यह हमारे प्रधानमंत्री जी की सोच है । मैं फिर से आपका धन्यवाद करूँगा कि आपने मुझे चर्चा में भाग लेने का समय दिया । मेरे पास कहने के लिए बहुत सारी बातें थी,लेकिन अभी समय कम है ।…(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष: माननीय संसदीय कार्य मंत्री जी, चूंकि अभी कई माननीय सदस्य अपने विचार व्यक्त करना चाहते हैं । आप सभी से आग्रह कर दें कि वे अपने वक्तव्यों को पाँच मिनट्स में खत्म कर दें, यह उचित रहेगा ।
माननीय सदस्य,अपनी बात जारी रखिए ।
डॉ. अरविन्द कुमार शर्मा : अध्यक्ष जी, आपने पार्लियामेंट की जो बिल्डिंग शुरू की है, उसके लिए मैं आपको तहे दिल से अपने और साथियों की तरफ से धन्यवाद करता हूँ । मैं एक और बात कहूँगा कि इस पार्लियामेंट की नई बिल्डिंग में आपने करीब 800-1000 सीटों का इंतजाम किया है । इसमें मुझे पूरी उम्मीद है । अब इतना बड़ा लंबा-चौड़ा एरिया माननीय सांसदों का हो गया है, अगर उसको दो-दो हिस्सों में बाँट देंगे तो बहुत अच्छा रहेगा । आपने बहुत लंबा-चौड़ा एरिया कर दिया है । इसका पूरा फायदा पार्लियामेंट बिल्डिंग को मिलेगा । आप देखेंगे कि इन किसानों की आंदोलन की वजह से मैं तीन-चार दिनों से आ नहीं पा रहा हूँ । मेरी कमर की डिस्क स्लिप हो गई है,क्योंकि खेतों के रास्तों से होकर गुजरना पड़ता है । रात में जो गाड़ी कुदती है,उससे मुझे बहुत प्रॉब्लम होती है । दूसरी तरफ से बात आई कि हम 2 अक्टूबर तक चलाएंगे । आप जितना मर्जी चलाइए,लेकिन कम से कम रोड़ छोड़ कर बैठ जाइए, इसमें कोई दिक्कत नहीं है, चाहे वह एक साल तक चले ।
माननीय अध्यक्ष: माननीय संसदीय कार्य मंत्री जी,क्या आपका सुझाव है कि सभी माननीय सदस्य पाँच-पाँच मिनट में अपनी बात खत्म करना चाहते हैं?
सभी माननीय सदस्य पाँच मिनट में अपनी बात खत्म करेंगे या एक-एक घंटा बोलेंगे?
मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री (श्री गिरिराज सिंह): सबसदस्यों ने बोलदिया है ।
माननीयअध्यक्ष: अभीवक्ताओं की लंबीलिस्ट है । हरसदस्य पाँच मिनटमें अपना वक्तव्यसमाप्त कर दे ।
श्री हाजी फजलुर रहमान (सहारनपुर): स्पीकर महोदय, आपका बहुत-बहुत शुक्रिया कि आपने मुझे राष्ट्रपति जी के अभिभाषण पर चर्चा करने का मौका दिया । सरकार का एक वादा था कि किसानों की आय को दोगुना करना है, लेकिन इसके खिलाफ अभी पिछले बजट में ‘किसान सम्मान निधि’ में किसानों के लिए 10 हजार करोड़ रुपये कम कर दिये गये । इसके साथ-साथ किसानों को तीन कृषि कानून दिए गए, जिनके खिलाफ आज पूरे हिन्दुस्तान के अंदर आंदोलन चल रहा है । इसी को देखते हुए दिल्ली के चारों तरफ किसान लोग पिछले ढाई महीने से ज्यादा जमा हैं । उसके अंदर लगभग 200 किसान शहीद हो चुके हैं, इसलिए पूरा भारत किसानों के साथ है । यह हम आपसे कहना चाहते हैं । जब किसान लोग नहीं चाहते और पूरा भारत चाहता है तो इन तीनों कानूनों को वापस लिया जाए । इसके साथ-साथ किसानों की माँग है कि एमएसपी कानून बनाया जाए । आपसे अनुरोध है कि सरकार एमएसपी पर एक कानून बनाने का काम करे । ये तीनों कानून न सिर्फ किसानों के खिलाफ है, बल्कि यह मजदूरों और गरीब लोगों के लिए भी खिलाफ है । जैसा कि इस बिल में प्रावधान किया है, जिस तरीके से बड़ी कंपनियाँ इस बिजनेस में आ रही हैं ।…(व्यवधान)
श्री रमेश बिधूड़ी (दक्षिण दिल्ली) : आप कहते हैं कि कानून खराब है । इसमें क्या खराबी है, यह भी तो बताइए ।…(व्यवधान) आप यह बताएं कि इस कानून में क्या खराबी है । इस कानून की कौन-सी क्लॉज खराब है । यह तो आप बताते नहीं हैं । …(व्यवधान)
श्री हाजी फजलुर रहमान : आप हमारी बात सुन लीजिए, फिर उसके बाद आप कहेंगे,तब हम उसका जवाब दे देंगे ।
24.00 hrs इस कानून के तहत बड़ी कंपनियां कांट्रैक्ट बेसिस पर खरीददारी करेंगी । …(व्यवधान) उनको छूट है…(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : माननीयसदस्य, यहटूट जाएगा! माननीयसदस्यगण, यहसरकारी सम्पत्तिहै! …(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : माननीयसदस्यगण, सदनका समय इस लिस्टको पूरा करनेतक बढ़ाया जाता है ।
…(व्यवधान)
श्री हाजी फजलुर रहमान : मान्यवर, इस कानून के अंदर वह अनलिमिटेड स्टॉक रख सकता है । इस स्टॉक पर किस रेट से उसको बेचा जाएगा, यह कहीं नहीं लिखा गया है । अगर यह बता दिया जाए कि यह स्टॉक जिस रेट पर खरीददारी होगी, उसका इतना बढ़ाकर उसको बेचा जाएगा, तो शायद किसान लोग मुतमइन हो जाते । लेकिन इसमें जो बड़ी कंपनियां हैं, उनको फायदा पहुंचाने का प्रावधान किया गया है । …(व्यवधान) गरीब लोगों को किस रेट पर बाजार में यह सामान मिलेगा,इसकी कोई गारंटी नहीं है । कल गरीब लोग आंसू से रोएंगे,किसान लोग आंसू से रोएंगे, सिवाय इसके कि जो अमीर लोग हैं,वे अमीर होते चले जाएंगे और गरीब लोग गरीब होते चले जाएंगे ।
मान्यवर, किसानों के आंदोलन के खिलाफ भी एक साजिश हो रही है । जैसा कि हमारे बहुत से साथियों ने बताया कि किसानों को बदनाम करने के लिए लाल किले पर तिरंगे का अपमान किया गया । जिस शख्स ने उसका अपमान किया, आप और हम सब जानते हैं कि पंजाब से हमारे जो एमपी साहब हैं और भारतीय जनता पार्टी से जिनका ताल्लुक है, वे उनके साथ कभी रहा करते थे । …(व्यवधान) इसके अलावा गाजीपुर बार्डर पर किसानों पर हमला होता है । हमला करने वाला…* का एक एमएलए है, उसके साथ बहुत से साथी होते हैं ।…(व्यवधान) प्लीज, जरा बात कह लेने दीजिए । आप बाद में कहिएगा ।
मान्यवर, इसी तरीके से आज टीवी चैनल्स और प्रेस के अंदर किसानों को राष्ट्र विरोधी बताया जा रहा है ।…(व्यवधान) यह सब लोग कहते हैं । अभी अगर यही धारणा चलती रही तो जाहिर सी बात है कि किसान अपने आपको आहत समझेगा,इसलिए सरकार को कोई न कोई कदम उठाना चाहिए । आजाद हिंदुस्तान के अंदर यह भी लिखा जाएगा कि किसानों को दिल्ली में आने से किस तरीके से रोका गया । रोड पर कीलें लगा दी गईं, रोड बंद कर दी गईं, खड्डे खोद दिए गए, तो मैं समझता हूं कि इससे ज्यादा शर्म की बात कोई नहीं होगी । जब ज्यादा निंदा हुई,तो इन्हीं लोगों ने उन कीलों को हटाने का काम किया । इसके अलावा मैं एक शेर के साथ अपनी बात कहना चाहूंगा । आज किसान आंसुओं से रो रहा है, जो सब लोग देख रहे हैं ।
उसी से ताल्लुक एक शेर कहना चाहूंगा:
“एक आंसू हुकूमत के लिए खतरा है, तुमने देखा नहीं आंखों का समंदर होना ।” आप लोग देख रहे हैं जो एनडीए का परिवार था, वह आहिस्ता-आहिस्ता सिकुड़ता जा रहा है और आप उम्मीद रखिए,अगर यही चलन रहा तो हो सकता है कि एनडीए के दूसरे साथी भी चले जाएं ।
मैं यूपी से ताल्लुक रखता हूं । यूपी में गन्ना किसानों को सही वक्त पर पेमेंट नहीं हो रहा है, कहीं-कहीं पर छह महीने से ज्यादा हो जाता है, लेकिन पेमेंट नहीं होता है । जब बसपा की सरकार थी तो उसने किसानों के पेमेंट पर सूद देने का काम किया । आज किसान जब अपना कर्ज लेता है । …(व्यवधान)
श्री जगदम्बिका पाल (डुमरियागंज) : महोदय, जबकिसानों के ऊपरगोली चली थी, उससमय किसकी हुकूमतथी?
श्री हाजी फजलुर रहमान : महोदय,अभी दिल्ली के चारों तरफ क्या हो रहा है । आंसू गैस किसके ऊपर चल रहा है । अभी ताजा-ताजा मिसाल है, दिल्ली के चारो तरफ क्या हो रहा है ।
माननीय अध्यक्ष: माननीय सदस्य,प्लीज बैठ जाइए ।
…(व्यवधान)
ADV. DEAN KURIAKOSE (IDUKKI): Sir, thank you very much for giving me this opportunity. …(Interruptions)
श्री हाजी फजलुर रहमान : महोदय, इसका जवाब कौन देगा जो दिल्ली के चारों तरफ हो रहा है,आप इसका जवाब दीजिए । बहुत अफसोस की बात है कि आप पिछली बातों को ला रहे हैं । आज किसान आपके खिलाफ खड़ा हुआ है । आज आप किसानों से बात करने के लिए मजबूर हैं लेकिन आपकी बात नहीं बन पा रही है । अभी माननीय प्रधानमंत्री जी का नारा था,सबका साथ, सबका विश्वास,लेकिन अभी इसी बजट में माइनॉरटी समुदाय के लिए पिछल बजट के मुकाबले 218 करोड़ रुपये कम कर दिए गए । …(व्यवधान)
ADV. DEAN KURIAKOSE : Sir, thank you very much for giving me this opportunity. …(Interruptions)
माननीय अध्यक्ष: माननीय सदस्य,अगर आप बीच में टोका-टोकी करेंगे तो उनका समय बढ जाएगा । मैं सभी माननीय सदस्यों से आग्रह कर रहा हूं कि पांच मिनट में अपनी बात कह दें ।
श्री हाजी फजलुर रहमान : महोदय,लास्ट लाइन है,प्रधानमंत्री जी ने कहा था कि देश को झुकने नहीं दूंगा, लेकिन आज देश को किस्तो में बेचा जा रहा है ।
]جنابحاجیفضلالرحمٰنصاحب (سہارنپور): جناب،اسپیکرصاحب، آپکا بہتبہتشکریہکہ آپنے مجھےصدرِجمہوریہکےخطبہپر چرچاکرنےکا موقعدیا۔سرکارکا ایکوعدہتھاکہ کسانوںکی آمدنیکو دوگُناکرناہے،لیکناس کےبرخلافابھیپچھلےبجٹمیںکسانسمّاننِدھیمیںکسانوںکے لئے 10 ہزارکروڑروپئیےکمکر دئےگئے۔اس کےساتھساتھکسانوںکو تینکرشیقانوندئےگئے۔جن کےخلافآجپورےہندوستانمیںآندولنچل رہاہے۔اسیکو دیکھتےہوئےآجدہلیکے چاروںطرفکسانلوگپچھلےڈھائیمہینےسے جمعہیں۔اس کےاندرلگ بھگ 200 کسانشہیدہو چکےہیں،اس لئےپوراہندوستانکسانوںکے ساتھہے یہہم آپسے کہناچاہتےہیں۔جب کسانلوگنہیںچاہتےاورپورابھارتچاہتاہےتوان تینوںقانونوںکوواپسلیاجائے۔اس کےساتھساتھکسانوںکی مانگہے کہایم۔ایس۔پی۔قانونبنایاجائے۔آپسے گزارشہے کہسرکارایم۔ایس۔پی۔پر ایکقانونبنانےکا کامکرے۔یہ تینوںقانوننہ صرفکسانوںکے خلافہیں،بلکہیہ غریبوں اورمزدوروںکے بھیخلافہیں۔جیساکہ انبل میںپراودھانکیاہے جسطریقےسے بڑیکمپنیاںاس بزنیسمیںآ رہیہیں۔۔ (مداخلت)۔۔ آپہماریباتسن لیجئے،پھراس کےبعدآپکہیںگےتبہم اسکا جوابدے دیںگے۔اس قانونکے تحتبڑیکمپنیاںکانٹریکٹبیسِسپر خریداریکریںگے (مداخلت)۔ان کوچھوٹہے (مداخلت)۔۔ جناب،اس قانونکے مطابقوہ انلِمیٹیڈاسٹاکرکھسکتاہے۔اس اسٹاککو کسریٹسے اسکو بیچاجائےگا یہکہیںنہیںلکھاگیاہے۔اگریہ بتادیاجائےکہ یہاسٹاکجس ریٹپر خریداریہوگی،اس کااتنابڑھاکر اسکو بیچاجائےگا توشایدکسانلوگمطمئنہو جاتے۔ لیکنان میںجو بڑیکمپنیاںہیںان کوفائدہپہنچانےکا پراودھانکیاگیاہے۔ (مداخلت)۔غریبلوگوںکو کسریٹپر بازارمیںیہ سامانملےگا اسکی کوئیگارنٹینہیںہے۔کل غریبلوگآنسووُںسے روئیںگے،کسانلوگآنسووُںسے روئیںگے،سوائےاس کےکہ جوامیرلوگہیں،وہ امیرہوتےچلےجائیںگےاورغریبلوگاورغریبہوتےچلےجائیںگے۔ محترم،کسانوںکے آندولنکے خلافبھیایکسازشہو رہیہے۔جیساکہ ہمارےبہتسے ساتھیوںنے بتایاکہ کسانوںکو بدنامکرنےکے لئےلالقلعےپر ترنگےکا اپمانکیاگیا۔جس شخصاس کااپمانکیا،آپاورہم سبجانتےہیںکہ پنجابسے جوہمارےایم۔پی۔صاحبہیںاوربھارتیہجنتاپارٹی سے جنکا تعلقہے وہان کےساتھکبھیرہاکرتےتھے (مداخلت)۔۔اس کےعلاوہغازیپوربارڈرپر کسانوںپر حملہہوتاہے۔حملہکرنےوالا (مداخلت)۔۔۔کا ایکایم۔ایل۔اے۔ہے اسکے ساتھبہتسے ساتھیہوتےہیں (مداخلت)۔۔پلیزذراباتکہہلینےدیجیئے،آپبعدمیںکہئےگا۔ جناب،اسیطریقےسے آجٹی۔وی۔چینلزاورپریسکے اندرکسانوںکو راشٹروِرودھیبتایاجا رہاہے (مداخلت)۔۔۔یہ سبلوگکہتےہیں۔ابھیاگریہیدھارناچلتیرہےتو ظاہرسی باتہے کہکساناپنےآپکو آہتسمجھےگا،اس لئےسرکارکو کوئینہ کوئیقدمآٹھاناچاہیے۔آزادہندوستانکے اندریہ بھیلِکھاجائےگا کہکسانوںکو دہلیمیںآنےسے کسطریقےسے روکاگیا۔روڈپر کیلیںلگادی گئیں،روڈبندکر دیگئیں،کھڈّےکھوددئےگئے،تو میںسمجھتاہوںکہ اسسے زیادہشرمکی باتکوئینہیںہوگی۔جب زیادہنندہہوئیتو انہیںلوگوںنے انکیلوںکو ہٹانےکا کامکیا۔اس کےعلاوہمیںایکشعرکے ساتھاپنیباتکہناچاہوںگا۔آجکسانآنسووُںسے رورہاہے،جو سبلوگدیکھرہےہیں۔ اسیسے متعلقایکشعرکہناچاہوںگا۔ ایکآنسو حکومت کے لئےخطرہہے تمنے دیکھانہیںآنکھوںکا سمندرہونا آپلوگدیکھرہےہیں،جو این۔ڈی۔اے۔کا پریوارتھا،وہ آہستہآہستہسِکُڑتاجا رہاہے،اورآپامیدرکھیئے،اگریہیچلنرہاتو ہوسکتاہے کہاین۔ڈی۔اے۔کے دوسرےساتھیبھیچلےجائیں۔ میںیو۔پی۔سے تعلقرکھتاہوں۔یو۔پی۔میںگناکسانوںکو سہیوقتپر پیمینٹنہیںہو رہیہے،کہیںکہیںپر چھمہینےسے زیادہہو جاتاہے لیکنپیمینٹنہیںہوتیہے۔جب بسپاکی سرکارتھیتو اسنے کسانوںکے پیمینٹپر سوددینےکا کامکیا۔ آجکسانجب اپناقرضلیتاہے (مداخلت)۔۔۔ جناب،ابھیدہلیکے چاروںطرفکیاہو رہاہے۔آنسوگیسکس کےاوپرچل رہاہے۔ابھیتازہ۔تازہمثالہے دہلیکے چاروںطرفکیاہو رہاہے۔ جناب،اس کاجوابکوندےگاجو دہلیکے چاروںطرفہو رہاہے،آپاس کاجوابدیجئے۔ بہتافسوسکی باتہے کہآپپچھلیباتوںکو لارہےہیں۔آجکسانآپکے خلافکھڑاہواہے۔آجآپکسانوںسے باتکرنےکے لئےمجبورہیںلیکنآپکی باتنہیںبن پارہیہے۔ابھیوزیرِاعظمصاحبکا نارہتھاسب کاساتھ،سب کاوِشواس،لیکنابھیاسیبجٹمیںاقلیتیطبقہکے لئےپچھلےبجٹکے مقابلے 218 کروڑروپئےکم کردئےگئے۔ جناب،لاسٹلائنہے،وزیرِاعظمجی نےکہاتھاکہ ملککو جھُکنےنہیںدوںگا،لیکنآجملککو قسطوںمیںبیچاجا رہاہے۔ بہتبہتشکریہ (ختمشد)[ माननीय अध्यक्ष: एडवोकेट डीन कुरियाकोस जी,आप बोलिए नहीं तो आपका समय खत्म हो जाएगा ।
ADV. DEAN KURIAKOSE (IDUKKI): Firstly, I regret to say that the President’s Address has very conveniently skipped the things that were needed to be told and discussed. It was an exercise to mask the anti-people policies of this Government, which is quite unfortunate.
Sir, very recently this august House has passed three black laws, and due to those legislations, the life of farmers will become more miserable than it is now. It is not only the farmers of this country, but the entire nation has demanded the immediate withdrawal of these black laws. But the Government is not at all ready to do it only because of the cheap complex of some leaders of this Government. The ongoing farmers strike will become a new history of our nation. If the APMC system gets perished or the Government implements the conditions seriously, then the farmers of our country will become slaves of moneylenders and corporate retailers.
Whatever arguments raised by this Government in supporting these Bills, there is no doubt the ultimate objective is to promote the corporate sector by destroying the rights of the States and farmers. The Government has failed to convince not only the citizens but also the international community about the relevance of these farm laws and its benefits for the poor farmers. I strongly demand the withdrawal of these three anti-farmer laws immediately. The anti-farmer policies of this Government have only limited the above said Acts, and the other anti-people policies are continuing through other activities.
The Ministry of Environment and Forests are issuing continuous notifications for fixing the buffer zones adjacent to the wildlife sanctuaries. Very recently in Kerala, 15 notifications were issued; draft notifications were issued by the Ministry of Environment and Forests. Wherever these kinds of buffer zone notifications were issued, certainly, there are some restrictions that would adversely affect the livelihood of farmers. In my constituency, four notifications were issued. Out of these four, one was concerning the Mattikettan Shola National Park, about which final notification was issued. I do not know why was the hurry shown by the Ministry of Environment and Forests. On 3rd December 2020, the Government had issued a gazette notification regarding the extension of validity of all draft notifications till 30 June 2021. Then why did this Government issue the final notification regarding the Mattikettan Shola National Park is a mystery. I do not know the special interest behind that. The main interesting thing is that the Mattikettan Shola National Park boundaries are shared with Tamil Nadu also. On the side of Tamil Nadu, the buffer zone was limited to zero but on the side of Kerala, the boundary limit was 1.5 km. The Government of India have the responsibility to address this issue; the Government have to resolve this issue by a comprehensive consultation with the local people. So, I urge upon the Ministry of Environment and Forests, and its Minister, Shri Prakash Javedekar ji, to address this issue, to withdraw the final notification issued for ESZ, the buffer zone, and have a comprehensive discussion with the local people, before the finalisation of the matter.
The other issue is related to the tea workers. In Kerala, we have more than 43,000 tea workers. Kerala State is the fourth largest producer of tea but the Government is not at all bothered about the issues related to the tea workers of Kerala. In the Budget Speech, hon. Minister has announced a special package for Assam and West Bengal only. It is a clear-cut discrimination against our State, Kerala, and all other States also.
The living conditions of tea workers are very much pathetic; they do not get adequate wages; they do not have adequate housing facilities; their children are not at all getting enough schooling, healthcare facilities and other infrastructural facilities. These are very limited. That is why I urge upon the hon. Minister of State for Finance, Shri Anurag Thakur, and the Government to announce a Special Package for Kerala tea workers as part of an already announced Special Package for Assam and West Bengal. With these words, I am concluding my speech. Thank you very much.
श्री जामयांग शेरिंग नामग्याल (लद्दाख): धन्यवाद अध्यक्ष महोदय । मैं महामहिम राष्ट्रपति जी के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के समर्थन में खड़ा हूं । कल दो दिन से धन्यवाद प्रस्ताव पर जो चर्चा चल रही है,मैं हर माननीय सदस्य का भाषण सुन रहा था ।
ज्यादातर सदस्यों ने किसान को लेकर, कोविड को लेकर और देश के बहुत सारे मुद्दों के बारे में कहा है, लेकिन मैं देश का एक महत्वपूर्ण मुद्दा जो कि एब्रोगेशन ऑफ आर्टिकल 370 है, लद्दाख जो कि पिछले एक साल पूरे देश में चर्चा का विषय रहा है । लद्दाख और जम्मू-कश्मीर के विषयों को टच करते हुए, मैं अपनी बात को संक्षेप में कहना चाहूंगा । मैं सबसे पहले देश के माननीय प्रधान मंत्री जी को धन्यवाद देना चाहूंगा । कोविड महामारी से लेकर, गलवान घाटी की सुरक्षा जैसे जितने भी चैलेंजेज़ देश और सरकार के सामने हैं, चाहे वह सोशियो-पॉलिटिकल हो, चाहे इकोनॉमिकल हो, चाहे बॉर्डर सिक्योरिटी हो,बहुत सारे चैलेंजेज़ नेचुरल हैं और बहुत सारे चैलेंजेज़ मैन मेड हैं । देश के माननीय प्रधान मंत्री जी ने 56 इंच का सीना तानकर इन सबसे आगे बढ़ने का जो काम किया है, उसके लिए मैं पूरे देशवासियों की ओर से माननीय प्रधान मंत्री जी को नमन करना चाहता हूं ।
अध्यक्ष जी,आर्टिकल 370 को ऐब्रोगेट करके जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को यूटी बनाने के बाद पिछले डेढ़ सालों का जो तजुर्बा रहा है, मैं आपके माध्यम से उसको देश और इस सदन के सामने रखना चाहता हूं, क्योंकि हमारे सदन के नेता प्रतिपक्ष कल जोर-जोर से चिल्ला रहे थे कि लद्दाख में क्या हो रहा है,जम्मू-कश्मीर में क्या हो रहा है? लद्दाख में क्या हो रहा है, मैं उसके बारे में आपका ध्यान आकर्षित कराना चाहता हूं । देश के इतिहास में पहली बार यूनियन टेरिटेरी बनने के बाद लेह और कारगिल को मिलाकर वर्ष 2019 से 2020 और वर्ष 2020 से 2021 तक यूनियन बजट में हमें 7 हजार करोड़ रुपये मिले हैं । वर्ष 2021-22 में 5,958 करोड़ रुपये इस बजट में प्रपोज़ किए गए हैं । कुल मिलाकर यूटी बनने के बाद से अभी तक लद्दाख के दो जिलों के लिए 13 हजार करोड़ रुपये को बजट में देने का काम इस मोदी सरकार ने किया है, जो अपने आपमें एक इतिहास है ।
अध्यक्ष जी,एमपी बनने से पहले मुझे छः महीने के लिए लद्दाख ऑटोनॉमस हिल डेवलेपमेंट काउंसिल में चेयरमैन के रूप में काम करने का मौका मिला है । तब हमारे ऑटोनॉमस काउंसिल का बजट केवल 55 करोड़ रुपये ही होता था । उस 55 करोड़ रुपयों में पूरे डिस्ट्रिक्ट्स जो कि 45,000 स्क्वॉयर किलोमीटर का एरिया है, उसमें सभी विभागों को चलाना होता था । उसका आधे से ज्यादा पोर्शन सैलरी में चला जाता था । लेकिन माननीय प्रधान मंत्री जी ने उस काउंसिल के बजट को चार गुना बढ़ाकर 232.41 करोड़ रुपये करके दोनों काउंसिल्स को फाइनेंशियली एम्पॉवर किया है । इसके साथ ही साथ जम्मू-कश्मीर का रिऑर्गेनाइज़ेशन होने के बाद लद्दाख ऑटोनॉमस हिल डेवलेपमेंट काउंसिल लेह और कारगिल दोनों गवर्नमेंट ऑफ इंडिया के साथ डॉयरेक्टली जुड़ी हैं । लद्दाख ऑटोनॉमस हिल डेवलेपमेंट काउंसिल के एक्ट में अमेंडमेंट करके, लद्दाख वालों के ऐस्पिरेशन को ध्यान में रखते हुए लद्दाख की जमीन को लेकर,एन्वॉयरमेंट को लेकर, इम्प्लॉयमेंट को लेकर, कल्चलर आइडेन्टिटी को लेकर सिक्स शेड्यूल में जो डिस्ट्रिक्ट्स आते हैं, उससे भी ज्यादा कांसिट्यूशनल सेवगार्ड्स देने के बाद हमारे होम मिनिस्टर साहब ने हमें आश्वासन दिया है, मैं उसके लिए माननीय मोदी सरकार को बहुत-बहुत धन्यवाद देना चाहता हूं ।
अध्यक्ष जी,हर डेवलेपमेंट की बुनियाद एजुकेशन होती है । जब मैं पिछली बार आर्टिकल 370 पर बोल रहा था,तब मैंने चिल्ला-चिल्लाकर बोला था कि हमें पिछले 70 सालों में एजुकेशन में कितना वंचित रखा गया है, लेकिन तब से लेकर आज तक एजुकेशन सेक्टर में माननीय मोदी जी ने लद्दाख यूनिवर्सिटी देने का काम किया है और आज वह यूनिवर्सिटी चल रही है । लद्दाख में दो डिग्री कॉलेजेज़ दिए हैं । डीम्ड यूनिवर्सिटी का स्टेटस सीआईबीएस को दिया है । नेशनल स्किल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट लद्दाख में दिया । फूड क्रॉफ्ट इंस्टीट्यूट लेह को अपग्रेड करके इंस्टीट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट बनाने का काम मोदी सरकार ने किया है । उसी तरह 20 स्कूलों में एनसीसी के यूनिट्स खोलने का निर्णय लिया गया है । उसी तरह कारगिल में इंजीनियरिंग कॉलेज खोलने का निर्णय लिया गया है । इसी बजट में लद्दाख के लिए सेन्ट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ लद्दाख को लेह में बनाने की जो घोषणा की गई है,हमें इसी एक साल में इतने मेज़र स्टेप्स देखने को मिले हैं । मैं इसके लिए माननीय मोदी जी की सरकार को धन्यवाद देता हूं ।
सर, अगर मैं हेल्थ सेक्टर की बात करूँ तो लद्दाख का बहुत सा एरिया बड़ा है । बर्फीला क्षेत्र भी है,दुर्गम भी है और दुर्लभ भी है । बहुत सारे सब डिवीजन एरियाज़,डिस्ट्रिक्ट हैडक्वार्टर से कटऑफ रहते हैं । जैसे - जंस्कार,न्योमा, टांगसे, इन एरियाज़ में इस सरकार ने टेलीमेडिसिन के द्वारा लोगों को हेल्थ फैसिलिटीज प्रोवाइड करने का काम किया, उसके लिए हम धन्यवाद देते हैं । लद्दाख के लिए वन मेडिकल कॉलेज सेंक्शन किया, उसके लिए भी हम धन्यवाद देते हैं । आयुष मंत्रालय द्वारा लद्दाख में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सोवा-रिग्पा बनाने का निर्णय हुआ, उसके लिए भी हम धन्यवाद देते हैं । यह सब मैं इसलिए बता रहा हूँ, क्योंकि यह केवल एक लोक सभा क्षेत्र ही नहीं बल्कि देश की सीमा की सुरक्षा से जुड़ा हुआ क्षेत्र है । जब हम सीमावर्ती इलाकों का विकास करेंगे तो ऑटोमेटिकली देश की सीमा सुरक्षा और ज्यादा मजबूत होगी । इसे यूपीए सरकार ने जानने की कोशिश नहीं की, लेकिन मोदी सरकार यह सब जानते हुए, अगर मैं टेलीकम्यूनिकेशन की बात करूँ तो पिछले एक साल में यूनिवर्सल सर्विस ऑब्लिगेशन फंडिंग के तहत 54 मोबाइल टावर 4जी के साथ लगाने का काम इस सरकार ने किया है । वहाँ पर दूर-दराज में गाँव का जो इलाका है,काफी मैम्बर्स ने देखा होगा,मैं खुद दो-दो, तीन-तीन दिन तक पैदल चलकर जाता हूँ,उन गाँवों को वी-सेट के जरिए इंटरनेट से जोड़ने का काम इस सरकार ने किया है । सर,सूची बहुत लंबी है और समय कम है,इसलिए मैं ज्यादातर पॉइंट्स को स्किप कर रहा हूँ । अगर एयर सर्विस की बात करें तो सन् 1985 में लेह एयरपोर्ट बना था, उसको अपग्रेड करने के लिए पहले की सरकार ने नहीं सोचा था । उस एयरपोर्ट को 480 करोड़ रुपये देकर मोदी सरकार ने उसको अपग्रेड करने का निर्णय किया । देश में बहुत सारे एयरपोर्ट्स हैं, लेकिन यह उन एयरपोर्ट्स से अलग होगा । उस एयरपोर्ट में पूरे लद्दाख की आइडेंटिटी की झलक होगी और वह एक इंटरनेशनल एयरपोर्ट के स्टैंडर्ड का होगा । कारगिल के एयरपोर्ट को एक्सटेंशन करने का निर्णय लिया गया । कारगिल एयरपोर्ट को रीलोकेट करने की जरूरत है, उसे भी सरकार कंसीडर कर रही है । कारगिल में छोटे जहाज उतारने का पूरा चांस है,लेकिन कमर्शियल वॉयबिलिटी नहीं होने के कारण नहीं हो पा रहा है । हमारे टूरिज्म मिनिस्टर साहब इसी 25 जनवरी को कारगिल में आए और उन्होंने माइनस 30 डिग्री में वहाँ पर नाइट स्पेंड किया । मैं देश की सरकार को धन्यवाद देना चाहता हूँ । सरकार ने दिल्ली को सीधा कारगिल के साथ जोड़ने का काम किया और वहाँ पर कमर्शियल फ्लाइट्स के लिए जो गैर फंडिंग आती है, उसे टूरिज्म मिनिस्ट्री की ओर से देने की बात भी की, उसके लिए मैं धन्यवाद देना चाहता हूँ । इसी तरह नुब्रा थोइस के एयरपोर्ट पर टर्मिनल बिल्डिंग करके सिविल हवाईजहाज चलाने की बात की है ।
सर, बॉर्डर सुरक्षा को लेकर बहुत सारे रोड्स और ब्रिजेस को कनेक्ट करने की जरूरत है । मोदी सरकार कश्मीर और लद्दाख को जोड़ने वाले जोजिला टनल का काम कर रही है । मैं आज की बात बता रहा हूँ, वहाँ पर माइनस 30 डिग्री सेल्सियस में स्नोफॉल होते हुए भी काम चल रहा है । पहले की सरकार की मानसिकता यह थी कि वहाँ पर काम करने का यह सीजन नहीं है, क्योंकि बहुत ठंड होती है, लेकिन इस सरकार ने उस मानसिकता को चैंज किया है और वहाँ माइनस 30 डिग्री पर टनल निकालने का काम हो रहा है, उसके लिए मैं धन्यवाद देता हूँ । नीमो-पदम-दारचा रोड़ का तीन साल का काम आज पिछले तीन महीने में करके लेह से जंस्कार मात्र 8 घंटे में कनेक्ट करने का काम इस सरकार ने किया है । सर,मैं यह सब इसलिए बता रहा हूँ, क्योंकि कल अपोजिशन के लीडर पूछ रहे थे कि लद्दाख में क्या हुआ है । इसलिए यह जानना बहुत जरूरी है । शिंकु-ला टनल, तांगलांग-ला टनल और लाचूलंग-ला टनल के डीपीआर का काम हुआ है । सर, मैं मोटे-मोटे पॉइंट पढ़ रहा हूँ । टूरिज्म को लेकर बहुत विस्तार हो रहा है । होम स्टे को प्रमोट किया जा रहा है । नए ट्रेकिंग रूट्स खुल रहे हैं । कारगिल को टूरिज्म की दृष्टि से प्रमोट करना बहुत आवश्यक है,जो हो भी रहा है, क्योंकि देश में एक ऐसा पर्सेप्शन बना रखा है कि कारगिल एक वॉर जोन है । सर, ऐसा नहीं है । कारगिल वॉर जोन नहीं है, बल्कि यह एक पीसफुल टूरिस्ट डेस्टिनेशन है । इस पर्सेप्शन को बदलने का काम हमारे टूरिज्म मिनिस्टर प्रहलाद साहब ने वहाँ पर आकर और नेशनल टूरिज्म डे कारगिल में बनाकर दिखा दिया है कि कारगिल को हम कहाँ पर लेकर जाना चाहते हैं । इसलिए मैं इस देश की सरकार को धन्यवाद देना चाहता हूँ । सर, मैं युवा और खेल से संबंधित थोड़ा सा बोलूंगा, उसके बाद में धारा 370 इंटरेस्टिंग पॉइंट पर आऊंगा ।
माननीय अध्यक्ष : माननीय सदस्य, आपको बोलते हुए 10 मिनट हो चुके हैं । आप अपनी बात एक मिनट में खत्म कर कीजिए ।
…(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : मैं सभी माननीय सदस्यगण से आग्रह कर रहा हूँ कि वे घड़ी में देखकर अपनी बात को पाँच मिनट में समाप्त कर दें । आपको नहीं, आपको तो 10 मिनट हो चुके हैं । मैं अन्य माननीय सदस्यों के लिए बोल रहा हूँ ।
श्री जामयांग शेरिंग नामग्याल : कलअधीर रंजन चौधरीजी कह रहे थेकि चाइना आकरहजारों किलोमीटरलेकर गया, वेसच बता रहेहैं । चाइनाआकर हजारों किलोमीटरलेकर गया, मैंडेटा के साथबताना चाहूंगा । अक्साई चिनमें 27250 किलोमीटर1962 मेंकांग्रेस केटाइम में लेकरगया, यहबात रिकॉर्डमें जानी चाहिए । तिया पैंग्नाकऔर चेब्जीवैली, कोरजोग, 250 किलोमीटरलेंथ, चुमूरएरिया में 2008तकयूपीए सरकारके टाइम मेंले गया । अधीररंजन साहब जीसच बता रहेथे । जोरावरफोर्ट, जोडेमजोक में था, उसकोतोड़कर चाइनाकी पीएलए ने, 2012 तकवहां पर ऑब्जर्विंगप्वाइंट बनालिया । यह कांग्रेसके टाइम मेंहुआ । इसी तरहडुमचेले, जोएनशिएंट ट्रेडप्वाइंट है, 2008से2009 तकचाइना उसे भीले गया, तबकांग्रेस सरकारमें थी । लेकिनआज मैं मोदीजी को धन्यवाददेना चाहता हूंकि देश की सुरक्षाके लिए, वेकेवल प्रधानसेवक ही नहीं, प्रधानरक्षक बनकर देशकी सीमा कोमजबूत करके, दस-बीसगुना ज्यादाइंडियन आर्मीउधर तैनात करकेइन्होंने देशकी सीमा कोबहुत मजबूत कर दियाहै । इसलिए मैंकहना चाहता हूं :
“आज़ादी की कभी शाम नहीं होने देंगे, शहीदों की कुर्बानी बदनाम नहीं होने देंगे ।
बची हो जो एक बूंद भी लहू की, तब तक भारत माता का आंचल कांग्रेस की तरह …* होने नहीं देंगे ।” सर, मैंआर्टिकल 370 केबारे में थोड़ाबोलना चाहूंगा, क्योंकिसदन में डॉ. फारूखअब्दुल्ला साहबने बड़ी अच्छीइमोशनल स्पीचदी और उन्होंनेइशारे-इशारेमें यह बतादिया कि यहसरकार मुस्लिमविरोधी है औरधर्मनिरपेक्षतानहीं करती है । मैं सदन मेंबताना चाहताहूं कि जब वहांडॉ. फारूखअब्दुल्ला साहबकी सरकार थी, वेलोग आर्टिकल370 इन्ज्वायकर रहे थे, तबगुज्जर-बक्करवालसमाज, जो100प्रतिशतमुस्लिम है, उसेकभी ऊपर उभरनेनहीं दिया ।इस सरकार नेआर्टिकल 370हटनेके बाद डीडीसीइलेक्शन करायाऔर गुज्जर-बक्करवाललोगों को पोलिटिकलरिजर्वेशन देकर, उसपिछड़े, दबेहुए मुस्लिमसमाज को उठानेका काम किया । यह बात मैंरिकॉर्ड मेंलाना चाहता हूं ।
सर, आर्टिकल370 हटनेके बाद वहांग्रासरूट डेमोक्रेसीआने लगी है । वहां पर डीडीसीइलेक्शन हुआ, ब्लॉकडेवलपमेंट काउंसिलका चुनाव हुआ । वहां पर आजकेवल 87 एमएलएका इलेक्शन नहीं, 40,000 सेज्यादा पंच एवंसरपंच इलेक्टहुए हैं, 3,000 सेज्यादा ब्लॉकडेवलपमेंट काउंसिल्सके चेयरमैन इलेक्टेडहैं, 280 सेज्यादा डीडीसीके मेंबर्स वहांपर इलेक्ट हुएहैं और ये सभीजितने भी चुनावहुए है, उनमेंएक भी बंदूकनहीं चली, एकचिड़िया तक कीजान नहीं गई । वाजपेयी साहबकहते थे – जम्हूरियत, कश्मीरियतऔर इंसानियत । इससे बढ़ियाजम्हूरियत हमेंक्या चाहिए किजो डिस्ट्रिक्ट्सटेरेरिस्ट्सके लिए जानेजाते थे, मैंनाम नहीं लूंगा, बुरालगेगा, उनडिस्ट्रिक्ट्समें इस बार60प्रतिशत-70 प्रतिशतवोटिंग हुई । 70-80 सालके बुजुर्ग खुदचलकर वोट डालनेके लिए आए, जोपिछले 30 सालतक वोट डालनेकेलिए नहीं आएथे । इससे ज्यादाजम्हूरियत औरक्या चाहिए? इससरकार के दौरानकश्मीर में शूटएट साइट काएक बार भी ऑर्डरनहीं हुआ, इससेज्यादा इंसानियतक्या चाहिए? इससेज्यादा जम्हूरियतऔर इससे ज्यादाकश्मीरियत औरक्या चाहिए? अटलजी ने हमेंजो मार्गदर्शनदिया, उसपर माननीय मोदीजी की सरकारचलने का कामकर रही है ।
सर, मैंआपका ध्यान आकर्षितकरना चाहूंगा । आज डॉ. फारूखअब्दुल्ला साहबने यहां परकहा कि यह सरकारमुस्लिम लोगोंको पसन्द नहींकरती है, ऐसीबात नहीं है । डॉ. फारूखअब्दुल्ला साहबमुस्लिम हैं, आपहिन्दू हैं, मैंबौद्ध हैं - हमसभी इस देशका एक खूबसूरतगुलदस्ता हैं । लेकिन कुछआइडियोलॉजीजसे हमें प्राब्लमहोती है । डॉ. फारूखअब्दुल्ला साहबकहते हैं किचीन की मददसे हम आर्टिकल370 वापसलाएंगे, यहहमें स्वीकारनहीं है ।…* जी कहती हैंकि जब तक आर्टिकल370 वापस नहींआएगा, तिरंगानहीं उठाएंगे,यह बात हमेंस्वीकार नहींहै । कारगिलमें कांग्रेसका एक काउंसिलरकहता है किआधा लद्दाख यानीलेह डिस्ट्रिक्टचाइना को देदेना चाहिए,यह हमें स्वीकारनहीं है । ऐसीविचारधारा हमेंस्वीकार नहींहै, इसलिएऐसी विचारधाराओंके साथ हम अंतरकरते हैं, अन्यथा देशके मुसलमान केसाथ, देशके किसान केसाथ और देशमें जितने भीलोग रहते हैं,किसी के साथहमें प्राब्लमनहीं है । इसदेश का नाराहै – ‘सबकासाथ, सबकाविकास और सबकाविश्वास ।’ आपने मुझे समयदिया, बोलनेके लिए और भीबहुत से विषयहैं, जो एंटीकरप्शन ब्यूरोजम्मू-कश्मीरमें लगा है,रोशनी एक्टमें जमीन घोटालाकितना हुआ,क्रिकेट मेंकितना घोटालाहुआ, वह सबधीरे-धीरेबाहर आ रहाहै । कस्टोडियनऔर इवैक्यूईप्रॉपर्टी एक्टखत्म करने कीजरूरत है, मैं आपके माध्यमसे इस ओर सरकारका ध्यान आकर्षितकरना चाहता हूं ।
सर, कहनेके लिए बहुतकुछ है, लेकिनसमय कम है ।आपने मुझे बहुतसमय दिया, इसकेलिए बहुत-बहुतधन्यवाद ।
श्री अब्दुल खालेक (बारपेटा): आदरणीय अध्यक्ष महोदय, आपका बहुत-बहुत धन्यवाद । महामहिम राष्ट्रपति जी ने अपने भाषण में ब्रह्मपुत्र नदी को असम और पूर्वोत्तर भारत की जीवनधारा बताया, यह सही बताया । ब्रह्मपुत्र हमारी जीवनधारा है । इसकी ट्रिब्युटरीज हैं, जब हर साल बाढ़ आती है, हम लोग बाढ़ के साथ कोएग्जिस्टि कर लेते हैं । लेकिन बाढ़ के बाद या पहले जो सॉइल इरोशन होता है, जिसको हम लोग असमिया में गोरा खोनिया बोलते हैं, जो नदी के किनारे का कटाव है, इससे बहुत प्रॉब्लम होती है, गांव के गांव उजड़ जाते हैं, बहुत सारे लोग शेल्टरलैस होते हैं, होमलैस होते हैं । इसलिए सॉइल इरोशन को नेशनल प्रॉब्लम घोषित करना चाहिए । सॉइल इरोशन के कंट्रोल के लिए सरकार की पॉलिसी होनी चाहिए ।
मेरे क्षेत्र बहरी, जहां पर श्री श्री हरि देव का सत्र है,बामुन डोंगरा,बागबोर, जोगीघोपा के बहुत सारे एरियाज़ इरोशन अफेक्टेड हैं । इसके लिए योजना बनानी चाहिए,लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है । इसकी ट्रिब्युटरीज बेकी के लिए असम सरकार ने कई बार स्कीम भेजी है,लेकिन सेंट्रल वाटर कमीशन ने एक के बाद एक इसको रिजेक्ट कर दिया है । हमारी मांग है कि इरोशन कंट्रोल के लिए सेंट्रल वाटर कमीशन की एक पॉलिसी होनी चाहिए और जल्द से जल्द बेकी और ब्रह्मपुत्र के इरोशन कंट्रोल की स्कीम पास होनी चाहिए । नॉर्थ सलमारा डिविजन,बोंगईगांव डिस्ट्रिक्ट में आई और मानस का इरोशन है, यह भी कंट्रोल होना चाहिए ।
अध्यक्ष महोदय,महामहिम राष्ट्रपति जी ने असम केसरी अम्बिकागिरी रायचौधरी की कविता को उद्धृत किया । मुझे खुशी इसलिए है कि असम केसरी अम्बिकागिरी रायचौधरी मेरे क्षेत्र बारपेटा से आते हैं । उन्होंने उद्धृत किया था कि: “Om tat sat Bharat mahat, ek chetonaat, ek dhyanot, ek sadhonat, ek abegot, ek hoi jaa".
महोदय, यह सरकार ‘सबका साथ, सबका विकास,सबका विश्वास’की बात करती है, लेकिन एक्चुअली असम में कौन चीफ मिनिस्टर है,वह भी लोगों का डाउट है । सर्बानंद सोनोवाल एक तरफ हैं, दूसरी तरफ हिमंत बिस्व सरमा दूसरी बात बोलते हैं, लेकिन वह हिमंत बिस्व सरमा से हमेशा 65/35 की बात बोलते हैं । 35 का मतलब यह है कि वहां की जो वन थर्ड मुस्लिम कम्युनिटी है, उनको विश्वास में नहीं लेना चाहते हैं । वह कभी बोलते हैं कि इनके वोट की जरूरत नहीं है । अगर हम मजबूत राष्ट्र बनाना चाहते हैं तो मजबूत राष्ट्र तभी बनेगा,जब समाज के हर तबके के लोग, समाज के हर मजहब और जाति के लोग,हर भाषा के लोग महसूस करेंगे कि यह देश हमारा है,इस देश में हमारा हिस्सा है, इस देश में हमारा अधिकार है, तब राष्ट्र और ज्यादा मजबूत होगा ।
महोदय, राष्ट्रपति महोदय ने अपने भाषण में सिटीजनशिप अमेंडमेंट एक्ट का भी जिक्र किया है । आपको पता है कि सिटीजनशिप अमेंडमेंट एक्ट का असम में बहुत विरोध हुआ है । सिटीजनशिप अमेंडमेंट एक्ट को सरकार अच्छा बोलती है । जो माइनोरिटीज बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान में प्रताड़ित हैं,हम हमेशा उनकी सुरक्षा के पक्ष में हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हमारे असम में प्रॉब्लम होगी । असम में फॉर्नर्स के खिलाफ बहुत बड़ा मूवमेंट हुआ था । असम के सब संगठन और असम की सभी पॉलिटिकल पार्टीज ने मान लिया कि वर्ष 1971 के बाद जो लोग आए हैं, उनको जाना होगा और वर्ष 1971 के पहले जो आए हैं, उनको सुरक्षा मिलेगी । नया कानून बोलता है कि वर्ष 2014 तक जो आ गए हैं,उनको नागरिकता मिलेगी, हम लोग इसके खिलाफ हैं । असम में बीटीआर है, जो बोडोलैंड एरिया है, उसमें यह कानून लागू नहीं होगा, हिल एरिया में कार्बी आंगलोंग,डिमा हासाओ डिस्ट्रिक्ट में यह लागू नहीं होगा, नागालैंड में यह लागू नहीं होगा । इसका मतलब यह है कि यह कानून सही नहीं है । हमारी पार्टी तो इस कानून के खिलाफ है । असम बांशिदा होने के नाते मैं चाहता हूं कि यह कानून कभी इम्प्लीमेंट नहीं होना चाहिए । जो इनर लाइन परमिट है, वह भी असम में चालू होना चाहिए । ये ‘जाति, माटी,भेटी’ के नाम पर सरकार में आए थे । मैं दोबारा अम्बिकागिरी रायचौधरी की कविता की पंक्तियां कोट करना चाहता हूं, जो कि असमिया में हैं:-
“Sahitya , Sanskriti basha arthaniti Sakalu dekhun uti jay Tathapitu kiya tur sapanai Sakalu khini dekhun jay jay.
Kheti mati bari bandhi dhari Sakalu luti loi jay Buku dhakoli aaiye kande hai hai Jay sakalu dekhun uti jay” इस सरकार ने जाति-माटि-भाटी की बात बहुत कही थी, लेकिन काम कुछ नहीं किया । जब असम में भाजपा सरकार आई थी, तो वर्ष 2016 में कहा था कि ब्रह्मपुत्र के दोनों किनारों पर एक्सप्रेस हाइवे होगा । मैंने सदन में यह प्रश्न किया था । नितिन गडकरी जी ने जवाब दिया था कि उसके लिए कोई प्रस्ताव नहीं आया है । यह हमें प्रताड़ित किया जाना है,यह नहीं किया जाना चाहिए । हम लोग उम्मीद करते हैं कि वहां एक्सप्रेस वे, हाईवे होना चाहिए, सिर्फ उसकी घोषणा नहीं होनी चाहिए ।
महोदय, आपने मुझे बोलने के लिए समय दिया,इसके लिए मैं आपको धन्यवाद देता हूं ।
श्री रमेश बिधूड़ी : माननीयसदस्य ने कुछनाम कोट कियाहै, उसकोएक्सपंज कियाजाना चाहिए ।
माननीय अध्यक्ष : आपबैठ जाइए । उन्होंनेकिनका नाम लियाहै?
…(व्यवधान)
श्री अनुराग शर्मा (झांसी): अध्यक्ष महोदय, आपने मुझे महामहिम राष्ट्रपति जी के अभिभाषण पर बोलने का मौका दिया है, इसके लिए मैं आपको धन्यवाद देता हूं ।…(व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय,जब वुहान से निकले वायरस के कारण फैली महामारी ने पूरी दुनिया को जकड़ रखा था,तो हमारे प्रधान मंत्री, आदरणीय नरेन्द्र मोदी जी ने हिन्दुस्तान का एक सुरक्षा चक्र बन कर हम सभी को इस महामारी से बहुत बचाया है । हिन्दुस्तान में जब एक पीपीई किट भी नहीं बनती थी, वेंटिलेटर्स की कमी थी, तो इनका इज़ाद यहीं हुआ है और हम लोगों ने इन्हें विदेश में भी भेजा है । सबसे अच्छी बात यह है कि दुनिया में फैली पिछली महामारी से और इस महामारी के बीच 100 साल निकल गए हैं । 100 सालों में 40 सालों के बाद एक वैक्सीन बन पाई थी । इस बार प्रधान मंत्री जी के नेतृत्व में आठ महीने में वैक्सीन हिन्दुस्तान में बन पाई है । यह गर्व की बात है कि आत्मनिर्भर भारत में पूरी दुनिया की 60 प्रतिशत वैक्सीन बनेगी । मैं इसके लिए मोदी सरकार और माननीय प्रधान मंत्री, मोदी जी को बहुत-बहुत बधाई देता हूं ।
मैं इस पर विशेष रूप से टिप्पणी करना चाहूंगा । आज मैं भाषण सुन रहा था । यहां बहुत देर से किसानों के बारे में बात हो रही थी । मैं बुंदेलखंड से चुन कर यहां आया हूं । बुंदेलखंड में अक्सर फार्मर्स सुसाइड की बात उठती थी । जब से मोदी सरकार आई है, हमारे यहां किसान निधि बंटी है, किसान भाइयों को बीमा मिला है,तब से बुंदेलखंड में फार्मर्स सुसाइड कम से कम हुए हैं । आज अगर वहां सुसाइड होता होगा, तो वह इसलिए नहीं होता होगा कि उनका सामान नहीं बिकता है, उनका उत्पाद नहीं बिकता है । आज बुंदेलखंड के किसान भाई मोदी सरकार के साथ खड़े हैं । यह बहुत गर्व की बात है कि आज एक भी किसान भाई ने दिल्ली की ओर प्रस्थान नहीं किया । उनको कांग्रेस वालों ने उकसाने की कोशिश की थी, पर आज भी बुंदेलखंड के किसान मोदी सरकार के साथ खड़े हैं ।
आज किसी ने जिक्र किया है कि मंडियां बंद की जाएंगी । मैं बिट्टू भइया के ध्यान में यह लाना चाहता हूं कि बुंदेलखंड को पैकेज यूपीए सरकार के द्वारा मिली था । वहां 7000 करोड़ रुपए आए थे, लेकिन पूरा पैसा बर्बाद किया गया । वहां उल्टी-सीधी मंडियां बनाई गईं, जो चालू नहीं हो पाई थीं । मोदी सरकार के आने पर बंद मंडियों को चालू किया जा रहा है । वे मंडियां मत्स्य पालने वालों के लिए उपलब्ध कराई जा रही हैं,फल-फूल बेचने वालों के लिए उपलब्ध कराई जा रही हैं । वहां कई मंडिया चालू की जा रही हैं । हमारे क्षेत्र में कोई भी मंडी बंद नहीं है ।
विशेष रूप से, मैं नेशनल एजुकेशन पॉलिसी लाने के लिए आदरणीय प्रधान मंत्री जी को धन्यवाद देना चाहूंगा । इसके बारे में आदरणीय प्रधान मंत्री जी ने कहा था कि Swami Vivekanad ji always focused on the development of both mental and physical strength. He said one should have muscles of iron and nerves of steel. The Government fit India movement and National Education Policy are inspired by this philosophy.
इस देश का दुर्भाग्य रहा है और हर देश के साथ यह होता है । History is written by the victors. लेकिन इस देश का यह दुर्भाग्य रहा कि जब हमें स्वतंत्रता मिली,जब ब्रिटिश साम्राज्य इस देश को छोड़कर गया, तो कांग्रेस ने उसकी जगह लेने की कोशिश की । हमारा जो इतिहास है,हमारी जो संस्कृति है, उसको इस तरह से तोड़-मरोड़कर पेश किया गया कि आज हमारे बच्चे हमारे ही इतिहास पर, हमारी ही संस्कृति पर, हमारे ही पूर्वजों पर गर्व नहीं करते हैं । कांग्रेस ने उसको इस तरह से तोड़-मरोड़कर रखा कि लोगों को विश्वास ही नहीं होता है कि हिन्दुस्तान हमेशा एक पुरानी संस्कृति रही है और एक जीता-जागता पुष्प रहा है । इसके बारे में, स्वामी विवेकानन्द जी ने सदियों पहले भारतीय इतिहास के सबूतों और गलत बयानों पर अपने विचार और चिन्ताओं को व्यक्त किया था । उन्होंने कहा था: The history of our country written by English writers cannot but be weakening our minds for they talk only of our downfall. How can foreigners who understand very little of our manners and customs or religion and philosophy write faithfully unbiased history of India? Naturally, many false notions and wrong inferences have found their way into them. आज इस बात का यह सबूत है कि कल अपनी स्पीच में कांग्रेस के आदरणीय नेता ने एक बात कही, उसके बारे में मैं जरूर कहूंगा । चौधरी साहब ने यहाँ कहा कि शहीद भगत सिंह जी और शहीद चन्द्रशेखर आजाद कांग्रेस पार्टी के सदस्य थे । यह बिल्कुल निराधार और असत्य बयान है । इन दोनों महान क्रांतिकारियों का कभी भी कांग्रेस से कोई सम्बन्ध नहीं रहा । ये दोनों हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन के सदस्य थे । कांग्रेस ने इतिहास को इतना मोड़ने की कोशिश की, देश के बच्चों को गलत इतिहास सिखाने की कोशिश की कि आज वह खुद भी उस पर विश्वास करने लगी ।
माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं बुंदेलखंड से आता हूँ । जब अंग्रेज शहीद चन्द्रशेखर आजाद जी को ढूँढ रहे थे, तो हमने उनको पनाह दी थी । वे झांसी में सतारा नदी के पास एक साधु के वेष में रहे । आज भी बुंदेलखण्ड के वासी उनसे प्रेरणा लेते हैं ।
मैं एक और बात के लिए प्रधानमंत्री जी को धन्यवाद देना चाहता हूँ । यह बात पूरे हिन्दुस्तान को पता है कि बुंदेलखण्ड पानी के लिए तरसता है । हमको पानी नहीं मिल पाता है । लेकिन जल शक्ति मंत्रालय और प्रधानमंत्री जी ने ‘हर घर जल योजना’ को लाकर बुंदेलखण्ड को 12 हजार करोड़ रुपए की सौगात दी है । इसके लिए बुंदेलखण्ड उनका आभारी है । जैसे हम आल्हा-ऊदल के गाने गाते हैं,उसी तरह से हम सदियों बाद प्रधानमंत्री मोदी जी के गीत गाएंगे ।
माननीय अध्यक्ष महोदय, आपने मुझे बोलने का वक्त दिया, इसके लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद ।
श्रीमती संगीता आजाद (लालगंज): माननीय अध्यक्ष जी, आपने मुझे राष्ट्रपति के अभिभाषण पर बोलने का मौका दिया,इसके लिए बहुत-बहुत धन्यवाद ।
माननीय राष्ट्रपति जी ने सरकार के नारे ‘सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास’को एक बार फिर दोहराया है । लेकिन यह कैसा साथ है और कैसा विकास है, जहाँ हमारे देश के अन्नदाता अपनी कुछ माँगों को लेकर भूखे-प्यासे रहकर इस कड़ाके की ठण्ड में बेमौसम बारिश में दिल्ली की सरहद पर शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से धरने पर बैठे हैं । सरकार को यह करना चाहिए था कि उनको विश्वास में लेकर, उनको संतुष्ट करके अपने द्वारा लाए गए तीनों कृषि कानूनों को वापस लेकर उनमें संशोधन करके फिर से सदन में प्रस्तुत करते और उनको लागू करते । …(व्यवधान) दिल्ली में है और जो लोग आन्दोलन कर रहे हैं, वे मूर्ख नहीं हैं ।…(व्यवधान) सर, मैं आपसे बहस नहीं करना चाहती हूँ, क्योंकि मुझे केवल दो मिनट का ही समय मिला है ।…(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष: माननीय सदस्य, please address the chair.
श्रीमती संगीता आजाद : लेकिन सरकार ने ऐसा नहीं किया । उलटे सरकार ने अपनी हठधर्मिता के कारण उनके साथ दुश्मनों जैसा व्यवहार किया । सड़क पर बड़ी-बड़ी कीलें और कंटीले तारों को लगाकर उनके रास्ते को बंद करा दिया गया । इतना ही नहीं उनका खाना-पानी तथा शौचालय तक बंद करा दिया गया ।
उन्हें देशद्राही,खालिस्तानी कह कर बुलाया गया । शायद सरकार को यह मालूम नहीं कि जिन किसानों को वह देशद्रोही और खालिस्तानी कहकर पुकार रहे हैं, उन्हीं किसानों के बच्चे देश की समस्त सीमाओं पर खड़े होकर प्रहरी का काम करते हैं और आए दिन दुश्मन देश के हमले में शहीद होकर तिरंगे में लिपटकर अपने घर वापस आते हैं । इन परिस्थितियों में भी देश का किसान कभी देशद्रोही नहीं हो सकता । बहुत ही खेद के साथ कहना पड़ रहा है कि महामहिम राष्ट्रपति जी ने अपने अभिभाषण में सीमा पर शहीद होने वाले अधिकांशत:किसानों के लालों के बारे में कोई विचार व्यक्त नहीं किया है । हमारा देश कृषि प्रधान देश है और कृषि आधारित उद्योगों और उपक्रमों के माध्यम से हमारी जीडीपी का स्तर हमेशा उच्च बना रहता है । वर्तमान में किसानों की जो हालत की गई है,वह आजादी के पिछले सत्तर सालों में आज तक नहीं हुई है ।
महोदय, इस वैश्विक महामारी में जहां हमारे वैज्ञानिकों ने कोरोना वैक्सीन की संजीवनी हम लोगों को दी है,मैं उसके लिए सरकार को धन्यवाद करती हूं, लेकिन इस वैश्विक कोरोना महामारी में लाखों श्रमिक पैदल चलकर अपने घरों को आने पर मजबूर हुए । उन्होंने अपनी नौकरियां गंवाईं । आज देश में बेरोजगारी और महंगाई का आलम चरम पर है । सिर्फ गरीब लोगों को ही नहीं, अपितु मध्यम वर्ग के लाखों लोगों की नौकरियां और रोजगार समाप्त हो गए । सरकार ने अपने चुनावी मेनिफेस्टो में दो करोड़ रोजगार देने का वायदा किया, लेकिन नौकरियां देने में विफल रहने के बाद ‘आत्मनिर्भर भारत’ के नाम का एक शिगूफ़ा ले आई है ।
महोदय, राष्ट्रपति जी ने अपने अभिभाषण में ‘आत्मनिर्भर भारत योजना’ को बढ़ावा देने के सिवाय बेरोजगारी को दूर करने के लिए ठोस पहल की कोई जानकारी नहीं दी है ।
माननीय अध्यक्ष: श्री उत्तम कुमार रेड्डी, क्या आप शुरू करना चाहते हैं?
…(व्यवधान)
SHRI UTTAM KUMAR REDDY (NALGONDA): Mr. Speaker, Sir, I rise to oppose the Motion of Thanks on the President’s Address. Sir, the people of Telangana are deeply disappointed with the President’s Address. What was assured for the State of Telangana, for the people of Telangana when the State was created under the AP Reorganisation Act, 2014, we expected that in the President’s Address, there would be some mention of it. In the AP Reorganisation Act, Telangana State was assured of a railway coach factory at Kazipet, a steel factory at Bayyaram and many other issues. The people of Telangana are deeply disappointed with the President’s Address.
Hon. Speaker, Sir, many Members have said where is it that the farm laws have created any disturbance for the farmers, any damage to the farmers. I want to bring to the notice of the Government, through you, Sir, that the Chief Minister of the Telangana after meeting the Prime Minister and the Home Minister, made an announcement that because of the new farm laws, in Telangana, they are closing down procurement centres in the villages. He said that there would be no procurement at MSP because of the new farm laws.
Speaker, Sir, through you, I wish to demand that the Government should clarify on what basis, what discussion the Prime Minister and the Chief Minster had, that the Chief Minister announced that all procurement centres run by women self-help groups and primary agricultural cooperative societies would be closed from this rabi season.
Sir, the Hon. President also mentioned about the MSP and procurement. I want to bring, through you, to the notice of the Government how insincere and non-commital they are! For the schemes of the Government through which they are supposed to support implement MSP and are supposed to support the price of agricultural produce, year by year, the budget for them has been reduced.
For the Price Support Scheme of the Government, in 2019-20, this Government allotted Rs.3,000 crores. In 2020-21, the amount was reduced to Rs. 2,000 crore. In 2021-22, I want to inform the Minister, through you, that he has reduced the amount to Rs. 1,500 crore. For PM-AASHA Scheme, which was announced with a lot of fanfare to ensure MSP for every grain, in the year 2019-20, the budget allocated was Rs. 1,500 crore; in the next year, in 2020-21, the Government has reduced the allocation to Rs. 500 crore; and in this year’s Budget, the amount allocated to PM-AASHA Scheme, which is to ensure MSP, has been reduced to Rs. 400 crore.
Sir, the Minister is present here. I would like to point out to him that under the Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana, not one farmer in Telangana is covered under crop insurance. Three months back, there were heavy rains in which standing crops in 25 lakh acres were completely damaged. But not one farmer has received any compensation from the State or the Centre or from any insurance company.
I would also like to bring to the notice of the Government that 10 insurance companies are exploiting the farmers and the Government. Since the beginning of the Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana, the total premium paid from the public exchequer for these 10 insurance companies was Rs. 1.35 lakh crore. But what was the amount paid to the farmers? The amount paid to the farmers was only Rs. 90,000 crore. That means, these 10 insurance companies have profited to the tune of Rs. 45,000 crore under this crop insurance scheme.
Mr. Speaker, Sir, this Government talks about doubling of the income of farmers. In the year 2016, they said that the average income of a farmer was Rs. 8,400 and they said that the income would be doubled by the year 2022. Taking inflation into account, the amount should be, at least, Rs. 20,000 per household of each farmer by next year. Till today, the Government has not done any study on this because it was only a jumla and they are not sincere about doubling the income of farmers.
Sir, when Shri Rajnath Singh came to Telangana in 2019, he gave a public assurance on the constitution of a Turmeric Board for purchase and marketing of turmeric. But no action has been taken by the Government so far in this regard. I urge the Government to set up a Turmeric Board immediately in the State of Telangana.
The Hon. President has mentioned about more AIIMS being established in the country. I would like to bring to the notice of the Government that 2 ½ years back, a new AIIMS was sanctioned by the Government of India for Telangana. It is in my neighbouring constituency. But till today, there are only out patients, but there are no in patients in that hospital.
Sir, the Hon. President talked about the martyrs of the Galwan Valley. I was a soldier; I served in the China border and I also served in the Pakistan border. Col. Santosh Babu, who was martyred in the Galwan Valley, is from my constituency. He was also an alumnus of the National Defence Academy from where I also graduated. I wish to appeal to the Government, through you, that the Government must open a Military History Museum in the memory of Col. Santosh Babu in Suryapet which is his native place.
Lastly, …* WhatsApp chats, undoubtedly, amount to treason. I was a fighter pilot in the Indian Air Force. As an Ex-Serviceman I would like to say that such a sensitive information has been leaked by the Government only to promote somebody and this is highly objectionable.
With these words, I oppose the Motion of Thanks on the President’s Address.
श्री जुगल किशोर शर्मा (जम्मू): महोदय, मैं राष्ट्रपति जी के अभिभाषण के धन्यवाद प्रस्ताव पर बोलने के लिए खड़ा हुआ हूं । प्रधान मंत्री नरेन्द्र भाई मोदी जी का आभार प्रकट करता हूं कि कोरोना महामारी पर विजय प्राप्त करने के प्रयासों में सफलता प्राप्त की है । आज भारत दुनिया का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान चला रहा है । इस प्रोग्राम की दोनों वैक्सीन्स भारत में निर्मित हैं । यह हमारे लिए गर्व की बात है, इसके लिए हमारे वैज्ञानिकों को बहुत-बहुत धन्यवाद । हमारे वैज्ञानिकों ने बहुत ही अल्प समय में कोरोना की दवाई बनाकर एक इतिहास रच दिया है तथा यह स्पष्ट कर दिया है कि ज्ञान के मामले में भारत विश्व गुरु था और विश्व गुरु रहेगा । विश्व में कोरोना के आतंक को समाप्त करने में अन्य देशों की सहायता कर रहे हैं, ये हमारे संस्कार हैं ।
जम्मू-कश्मीर राज्य में कोरोना से लड़ाई के लिए माननीय प्रधान मंत्री जी ने हर कदम पर साथ दिया है, इसलिए जम्मू-कश्मीर के नागरिक भी मोदी जी का आभार प्रकट करते हैं । मैं बताना चाहता हूं कि यहां पर नैशनल कांफ्रेंस के नेता ऐसा बोल रहे थे । उन्होंने 5 अगस्त की बात की और कुछ कटाक्ष भी किए । मैं ज्यादा न बोलते हुए सिर्फ इतना ही कहना चाहता हूं कि श्री फारुख अब्दुल्ला जी ने 5 अगस्त की बात कर यह साबित कर दिया कि जो पिछले दिनों होता था,वह अब नहीं हो रहा है । मैं यह कहना चाहता हूं कि विकास के लिए आया पैसा कुछ परिवारों तक ही सीमित रहता था और अब वह पैसा विकास के लिए लगाया जा रहा है । जो भेदभाव पहले होता था,वह अब नहीं होता है । चाहे वह जम्मू हो, चाहे लद्दाख हो । मैं कश्मीर की बात कर रहा हूं । आज जो विकास हो रहा है, वह समान रूप से हो रहा है और सबका साथ-सबका विकास हो रहा है । कांग्रेस,नैशनल कांफ्रेंस और पीडीपी ने 70 सालों तक लोगों के अधिकारों को छीना ।
अध्यक्ष महोदय, मैं यह बताना चाहता हूं कि पंचायतों को आज तक अधिकार नहीं दिए गए थे । जिला परिषद् के चुनाव जो आज करवाए गए हैं,वे 70 वर्षों में पहली बार करवाए गए हैं । डीडीसी के चुनाव भी पहली बार करवाए गए हैं । आज लोगों को अपने अधिकार मिले हैं । मोदी सरकार ने 70 वर्षों बाद डीडीसी, जिला परिषद् के चुनाव करवाकर लोगों को अधिकार देकर विकास के रास्ते खोल दिए हैं । यह सब 5 अगस्त के बाद हुआ है । 5 अगस्त के बाद और भी बहुत कुछ हुआ है । मैं बताना चाहता हूं कि यहां पर यह जो विकास हो रहा है,उसमें रोड,पुल, हाईवे,रेल, बंकर,मेट्रो, पीओके,लोगों को इंसाफ दिलाना, डीडीसी के चुनाव करवाना,जल-जीवन मिशन के तहत हर घर नल और नल में जल के अलावा भी कई और बड़े कदम उठाए गए हैं । अब सब कुछ अच्छा हो रहा है और यह सब 5 अगस्त के बाद हुआ है । मैं बताना चाहता हूं कि जम्मू-कश्मीर के विकास के लिए जो धनराशि दी जा रही है, उस धनराशि को उसी प्रोजेक्ट पर लगाया जाता है, जिसके लिए वह दी गई है । धन डायवर्ट नहीं होता है, उसका कहीं और इस्तेमाल नहीं होता है । जम्मू-कश्मीर में एम्स,आईआईटी, आईआईएम,मेडिकल कॉलेज,टूरिज्म को बढ़ावा देना, सौभाग्य योजना के माध्यम से पहाड़ों पर रहने वाले लोगों को बिजली की सुविधा पहुंचाना, एयरपोर्ट का विस्तार करना,रेलवे स्टेशन का नवीनीकरण करना और इसके अलावा उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए कई सराहनीय कदम केंद्र सरकार द्वारा उठाए गए हैं । भारत का हर नागरिक आत्मनिर्भर हो और हर नागरिक यह संकल्प ले कि मैं आत्मनिर्भर रहूंगा । यह संकल्प हर आदमी का आत्मविश्वास बढ़ाता है । किसानों के लिए माननीय प्रधान मंत्री जी ने अनेक कदम उठाए हैं । किसानों को मान-सम्मान देते हुए हर गरीब किसान के खाते में छ: हजार की धनराशि हर साल दी जाती है । इससे किसान खुश हैं और किसानों की बेहतरी के लिए एक नहीं, बल्कि अनेक योजनाएं चलाई जा रही हैं । धारा-370हटने के बाद जम्मू-कश्मीर विकास की ओर आगे बढ़ रहा है और यहां अमन और शांति है । यहां पर कई जगह आतंक अब समाप्त हो रहा है । यहां का नौजवान खुश है । वह चाहता है कि जम्मू-कश्मीर अमन और शांति के साथ विकास की ओर आगे बढ़े । जम्मू-कश्मीर विकास की ओर आगे बढ़ रहा है और यहां की जनता खुश है । मेरा यही कहना है कि जम्मू-कश्मीर 70 वर्षों के बाद बाकी प्रदेशों की गिनती में आने लगा है । लोगों के जो अधिकार छीन लिए गए थे, वे अधिकार अब उन्हें मिल रहे हैं । इसके लिए मैं केंद्र सरकार का और नरेंद्र भाई मोदी जी का आभार प्रकट करना चाहता हूं । ऐसे कदम जम्मू-कश्मीर को बेहतरी की ओर ले जा रहे हैं और इसके विकास के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं । मुझे बोलने के लिए आपने समय दिया,इसके लिए मैं आपका बहुत-बहुत धन्यवाद करता हूं ।
*श्री मलूक नागर (बिजनौर) : यह अच्छी बात है कि स्वाथ्स्य से संबंधित काफी बड़ा बजट रखा है, इसकी हम तारीफ करते हैं क्योंकि देश के लोगों की जान बचाने के लिए प्राथमिकता पर ध्यान रखना चाहिए था, जो सरकार ने किया भी है ।
देश के किसान आज बहुत परेशान हैं । देश में चारों तरफ खासकर दिल्ली की सीमाओं पर आंदोलन चल रहे हैं । सरकार को सहानुभूतिपूर्वक सोचना चाहिए,व किसानों के हित में फैसला लेना चाहिए या फिर इन बिलों को 3 वर्ष के लिए पेंडिंग डाल देना चाहिए । 3 वर्ष के बाद जो भी सरकार हो, वो इस पर निर्णय ले । व सरकार ने इस साल के बजट में किसानों के कृषि कर्ज को 15 लाख करोड़ से बढ़ाकर 16.5 लाख करोड़ व घरेलू किसानों को बढ़ावा देने के लिए कुछ कृषि उत्पादों के आयात पर टैक्स को बढ़ा दिया है और ENAM योजना के जरिए किसान मंडियों से ऑनलान फसल खरीद को बढ़ावा देने की बात कही गयी है । पहले से ही 1.68 करोड़ किसान ENAM से पंजीकृत है, और 1000 अन्य मंडिया इससे जोड़ी जाएंगी । लेकिन एक आम किसान जो इन तकनीकी चीजों से कोसों दूर है । उस तक सरकर की योजनाएं कैसे पहुंचेंगी?हम अक्सर देखते हैं कि महानगरों (Metropolitan Cities) दिल्ली,मुम्बई, चेन्नई व कोलकाता और देश के दूसरे बड़े शहरों के कुछ हिस्सों में इंटरनेट सेवा,व नेटवर्क कनेक्टिविटी सेवा की समस्या लगातार बनी रहती है । देश का किसान गावों से आता है । वहां पर इसकी हालत आज भी जर्जर है । तो यह कैसे मुमकिन है कि किसान इसका लाभ पूर्ण रूप से ले पाने में सक्षम होंगे । हम यह समझते हैं कि इस तरह की योजनाओं को शुरू करने से पहले सरकार को नेटवर्क और इंटरनेट से जुड़ी सेवाओं की समस्याओं की जानकारी एकत्रित करने की जरूरत है व इस तरह की सेवाओं से कैसे किसान फायदा ले सकें । इस पर काम करने की जरूरत है । कोरोना महामारी के कारण जब देश में लॉकडाउन लगाया गया था उस समय संघठित व असंगठित गरीब मजदूरों के काम बिलकुल खत्म हो गए थे और लोगों की नौकरियां तक चली गयी थीं व रोज़मर्रा में इस्तेमाल होने वाली वस्तुओं की अधिक कालाबाजारी से स्थिति और जर्जर हो गयी थी । जिसके कारणवश देश में भुखमरी का माहौल उत्पन्न हो गया था और आखिर में मजबूरन पलायन तक करने की समस्या से लोगों को जूझना पड़ा था । इन सभी समस्याओं के मद्देनजर उनकी जमा पूंजी लगभग खत्म हो गयी । जिसके कारण लोग भूखे मर रहे थे । और कर्जदार हो गए थे, उस स्थिति में सरकार के आह्वान करने पर भी फंसे हुए संघठित व असंगठित गरीब मजदूरों से जबरदस्ती मकान मालिकों द्वारा मकान का किराया वसूला गया था,व पर्याप्त पैसा न होने और कर्जदारी अधिक होने की वजह से अभी तक ज्यादातर प्रवासी मजदूर शहरों में आने से कतरा रहे हैं । हमें ऐसी उम्मीद थी कि सरकार “श्रम उपकर” (Labour Cess) में देश में लाखों करोड़ रुपये इकट्ठे है जिससे या कोई भी अन्य फंड से किसी तरह की आर्थिक पैकेज से मदद देने की घोषणा करनी चाहिए थी । लेकिन, इससे संबंधित बजट में कुछ देखने को नहीं मिला ।
आज के गन्ने के रेट (325 रुपये)प्रति क्विंटल के हिसाब से अगर बढ़ी हुई 28 परसेंट महंगाई को जोड़ा जाए तो 90 रुपये अतिरिक्त बैठते हैं, जो कि यदि इसमें जोड़े जाएं तो रेट बराबर बैठता है । यदि 90 रुपये नहीं बढ़ाये तो,इसके असर में 90 रुपये घटा दीजिए । उस 90 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ाने पर रेट ना घटाये ना बढ़ाये । इसलिए किसान की लागत (गन्ने की फसल को तैयार करने में बुआई,निराई-गुड़ाई एवं पेड़ी प्रबंधन,गन्ने के बीज के टुकड़े काटना,कूंड बनाना व टुकड़ों को कूंड में डालना, बीज को मिट्टी से ढकना, खाद,दवा व समय-समय पर सिंचाई करना, डीजल खपत तथा श्रमिकों की मजदूरी) आदि सभी लगने पर तो यह 350 रुपये प्रति क्विंटल बैठता है । सरकार की घोषणा से अगर इसमें 1.5 गुणा बढ़ोतरी की जाए तो (350+175 रुपये)यह 525 रुपये प्रति क्विंटल होना चाहिए, व पूरे उ.प्र.में हजारों करोड़ व पूरे देश में लाखों करोड़ गन्ना किसानों का जो पैसा गन्ना फैक्टरियों पर बकाया है । उसे दिवाया जाए । आज मैंने 377 के तहत 9वीं बार संसद व अन्यों जगहों पर 17 बार यह मुद्दा उठाया है । व इस लिखित वक्तव्य में संसद में 10वीं बार व अन्य जगहों पर 18वीं बार उठा रहा हूं ।
कोरोना कार्यकाल के दौरान लाक-डाउन में किसानों की फसलों व दूध का जो नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई के लिए अलग से एक बजट में पैकेज रखना चाहिए था,जिससे किसानों के नुकसान की भरपाई की जा सकती थी । जिससे देश की रीढ़ की हड्डी कृषि क्षेत्र मजबूत होगा, तो देश की अर्थव्यवस्था अपने आप मजबूत हो जाएगी । इसलिए सरकार को सहानुभूति पूर्वक सोचना चाहिए व किसानों के हित में फैसला लेना चाहिए । जिससे यह आंदोलन भी तुरंत रुक जाए व देश के किसान पहले की तरह तरक्की के रास्ते पर चल सकें ।
माननीय अध्यक्ष: सभा की कार्यवाही आज बुधवार दिनाँक 10 फरवरी, 2021 को दोपहर चार बजे तक के लिए स्थगित की जाती है ।
HON. CHAIRPERSON (SHRI N. K. PREMACHANDRAN): Shri P.P. Chaudhary ji.