Lok Sabha Debates
Discussion On Motion Regarding Recommendation To Withdraw Decision To Allow 51% ... on 4 December, 2012
> Title: Discussion on motion regarding recommendation to withdraw decision to allow 51% Foreign Direct Investment in Multi-Brand Retail Trade and Modifications In Annex ‘A’ And Annex ‘B’ of Notification Under Foreign Exchange Management Act, 1999 and Modifications in Annex ‘B’ of Notification Under Foreign Exchange Management Act, 1999.
MADAM SPEAKER : Now, Shrimati Sushma Swaraj to move the motion.
श्रीमती सुषमा स्वराज (विदिशा):अध्यक्ष जी, मैं प्रस्ताव करती हूं :-
“कि यह सभा सरकार से सिफारिश करती है कि वह मल्टी-ब्राण्ड खुदरा व्यापार में 51 प्रतिशत विदेशी प्रत्यक्ष निवेश की अनुमति देने संबंधी अपने निर्णय को तत्काल वापस ले।” PROF. SAUGATA ROY (DUM DUM): I beg to move:
“That this House resolves that in pursuance of section 48 of the Foreign Exchange Management Act, 1999, the Notification [G.S.R.795(E) dated the 19th October, 2012] laid on the Table of Lok Sabha on the 30th November, 2012 be modified as follows:-
In Schedule 8,-
(i) in Annex A, after item (h), the following item shall be added, namely:– “(i) Multi Brand Retail Trading.”; and
(ii) in Annex B, the portion beginning with “ 16.5 Multi Brand Retail Trading 51% Government ” and ending with “(x) Applications would be processed in the Department of Industrial Policy & Promotion, to determine whether the proposed investment satisfies the notified guidelines, before being considered by the FIPB for Government approval.” shall be omitted.
That this House recommends to Rajya Sabha that Rajya Sabha do concur in this resolution.” SHRI HASSAN KHAN (LADAKH): I beg to move:
“That this House resolves that in pursuance of section 48 of the Foreign Exchange Management Act, 1999, the Notification [G.S.R.795(E) dated the 19th October, 2012] laid on the Table of Lok Sabha on the 30th November, 2012 be modified as follows:-
In Schedule 8, in Annex B, the portion beginning with “ 16.5 Multi Brand Retail Trading 51% Government ” and ending with “(x) Applications would be processed in the Department of Industrial Policy & Promotion, to determine whether the proposed investment satisfies the notified guidelines, before being considered by the FIPB for Government approval.” shall be omitted.
That this House recommends to Rajya Sabha that Rajya Sabha do concur in this resolution.” MADAM SPEAKER: Motions moved:
“That this House recommends to the Government to immediately withdraw its decision to allow 51% Foreign Direct Investment in multi-brand retail trade.” “That this House resolves that in pursuance of section 48 of the Foreign Exchange Management Act, 1999, the Notification [G.S.R.795(E) dated the 19th October, 2012] laid on the Table of Lok Sabha on the 30th November, 2012 be modified as follows:-
In Schedule 8,-
(i) in Annex A, after item (h), the following item shall be added, namely:– “(i) Multi Brand Retail Trading.”; and
(ii) in Annex B, the portion beginning with “ 16.5 Multi Brand Retail Trading 51% Government ” and ending with “(x) Applications would be processed in the Department of Industrial Policy & Promotion, to determine whether the proposed investment satisfies the notified guidelines, before being considered by the FIPB for Government approval.” shall be omitted.
That this House recommends to Rajya Sabha that Rajya Sabha do concur in this resolution.” “That this House resolves that in pursuance of section 48 of the Foreign Exchange Management Act, 1999, the Notification [G.S.R.795(E) dated the 19th October, 2012] laid on the Table of Lok Sabha on the 30th November, 2012 be modified as follows:-
In Schedule 8, in Annex B, the portion beginning with “ 16.5 Multi Brand Retail Trading 51% Government ” and ending with “(x) Applications would be processed in the Department of Industrial Policy & Promotion, to determine whether the proposed investment satisfies the notified guidelines, before being considered by the FIPB for Government approval.” shall be omitted.
That this House recommends to Rajya Sabha that Rajya Sabha do concur in this resolution.” श्रीमती सुषमा स्वराज :अध्यक्ष जी, सबसे पहले तो मैं आपके प्रति आभार प्रकट करना चाहूँगी कि आपने हमारी इस एफ.डी.आई. की चर्चा को नियम 184 के तहत स्वीकार किया। अध्यक्ष जी, हम आग्रह कर रहे थे कि हम चर्चा करेंगे तो केवल नियम 184 के तहत करेंगे। यह आग्रह हम क्यों कर रहे थे, इसकी एक पृष्ठभूमि है जो मैं आपके माध्यम से सदन को, और सदन के माध्यम से देश को बताना चाहती हूँ। आपको मालूम है कि पिछले वर्ष 2011 में शीतकालीन सत्र के दौरान सरकार ने हूबहू यही निर्णय लिया था। उन्होंने कहा था कि खुदरा व्यापार में 51 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को हम अनुमति देते हैं। उस समय चारों तरफ से उस निर्णय का विरोध हुआ था। जब मैं कहती हूँ चारों तरफ से, तो वाकयी चारों तरफ से। सरकार के घटक दलों से विरोध हुआ था। उस समय तृणमूल कांग्रेस सरकार में शामिल थी, उन्होंने विरोध किया था। डीएमके सरकार में शामिल थी, उन्होंने विरोध किया था। उनके दो प्रमुख समर्थक दल सपा और बसपा ने विरोध किया था और पूरे के पूरे विपक्ष ने तो विरोध किया ही था और सदन की कार्यवाही बाधित हो गई थी। उस समय के तत्कालीन नेता सदन श्री प्रणब मुखर्जी ने एक सर्वदलीय बैठक बुलाई थी और हम लोगों की बात सुनी थी। बात सुनने के बाद उन्होंने यह कहा था कि मैं प्रधान मंत्री जी से बात करूँगा और आपकी भावनाओं से उन्हें अवगत कराऊँगा और फिर आकर उनकी प्रतिक्रिया आपको बताऊँगा। 7 दिसम्बर, 2011 को नेता सदन ने दोबारा हमें बुलाया। सर्वदलीय बैठक हुई और उन्होंने कहा कि उन्होंने प्रधान मंत्री जी से बात कर ली है और हमने यह फैसला किया है कि हम इस निर्णय को तब तक लंबित रखेंगे जब तक सभी स्टेक होल्डर्स से बातचीत नहीं हो जाती और आम सहमति नहीं बन जाती। हमने फिर उनसे एक प्रश्न किया था कि जब आप स्टेक होल्डर्स शब्द का इस्तेमाल कर रहे हैं तो इसके क्या मायने हैं? तो नेता सदन ने कहा था - स्टेक होल्डर्स के मायने हैं राजनीतिक दल और राज्यों के मुख्य मंत्री। हमने उनसे प्रार्थना की कि जब आप सदन में बोलेंगे तो क्या यह व्याख्या वहाँ कर देंगे, तो उन्होंने कहा कि ज़रूर कर देंगे। 7 दिसम्बर, 2011 को नेता सदन लोक सभा में आए। उन्होंने आपसे अनुमति मांगी और कहा कि मैं एक छोटा सा वक्तव्य आपकी अनुमति से देना चाहता हूँ। आपने वह अनुमति दी। अध्यक्ष जी, जो कुछ उन्होंने कहा, वह मैं आपको पढ़कर सुनाना चाहती हूँ।
“THE MINISTER OF FINANCE (SHRI PRANAB MUKHERJEE): Madam Speaker, with your permission, I would just like to make a small statement.
Madam Speaker, the decision to permit 51 per cent FDI in multi-brand retail trade is suspended till a consensus is developed through consultation amongst various stakeholders. I convened a meeting of Leaders of all political parties this morning. Earlier also, I had a meeting with them to discuss on how to resolve this impasse due to which Parliament was not functioning properly.
I am glad that all the Leaders have agreed to this formulation but they wanted to have some clarifications. I am seeking your permission to provide that clarification that stakeholders include the Chief Ministers of the State Governments and political parties because without the involvement of the State Chief Ministers, this can never be implemented.
Therefore, the Government will take a decision after a consensus is developed through the process of consultations amongst all stakeholders.
With these words, most respectfully, I would like to submit that the House may transact normal business as only ten days are left before the Winter Session comes to an end. Thank you, Madam Speaker. ” जब प्रणब दा ने यह बात कही, तो मैं नेता प्रतिपक्ष के नाते खड़ी हुई और मैंने भी आपसे अनुमति मांगी और मैंने आपसे कहा - अध्यक्ष महोदया, मैं इस बारे में रिस्पॉन्ड करना चाहूँगी। मैंने कहा -
“सरकार ने जन-भावनाओं को ध्यान में रखते हुए जो निर्णय किया है, उस निर्णय का हम लोग स्वागत करते हैं। जन भावनाओं के आगे झुकना सरकार की हार नहीं होता, बल्कि यह लोकतंत्र को मज़बूत करता है। तमाम राजनीतिक दलों, राज्यों के मुख्य मंत्रियों से बात करने के बाद, और उन सभी लोगों से बात करने के बाद, जिनके हित इस निर्णय से प्रभावित हो रहे थे, आम सहमति बनाने के बाद सरकार यह निर्णय करेगी, तब तक उन्होंने इस निर्णय को लंबित रखा है। मैं प्रणब दा के प्रति धन्यवाद अर्पित करती हूँ जिन्होंने पूरे का पूरा मसला अपने हाथ में लिया और ऑल पार्टी मीटिंग की। प्रधान मंत्री जी की अनुमति से यह निर्णय हुआ है, मैं उनके प्रति भी देश की तरफ से आभार प्रकट करती हूँ कि जन-भावनाओं के सामने सरकार झुकी। यह एक बहुत बड़ा लोकतांत्रिक जीत का कदम है।”प्रधानमंत्री जी की अनुमति से यह निर्णय हुआ है, मैं उनके प्रति भी देश की तरफ से आभार प्रकट करती हूं कि जनभावनाओं के सामने सरकार झुकी, यह एक बहुत बड़ा लोकतांत्रिक जीत का क़दम है। "
अध्यक्ष जी, इसमें जो आश्वासन सदन में दिया गया, उसके दो पहलू थे, कनसैन्सस और कनस्लटेशन यानी परामर्श और आम सहमति। परामर्श करेंगे राज्यों के मुख्यमंत्रियों से राजनैतिक दलों से और सभी स्टैक होल्डर्स यानी जिनके हित प्रभावित हो रहे हैं, उन सब से। उसके बाद जब आम सहमति बनेगी, तब इस निर्णय को लागू करेंगे। लेकिन मुझे दुख के साथ कहना पड़ता है कि आम सहमति बनाने की बात तो दूर, आम सहमति बनाने का प्रयास भी नहीं किया गया। राजनैतिक दलों की बात कर रहे हैं, हम प्रमुख प्रतिपक्षीय राजनैतिक दल हैं, कोई मीटिंग बुलाना तो दूर, कोई पत्राचार भी नहीं हुआ। टेलीफ़ोन तक से कोई बात नहीं हुई और एक दिन आचनक यह निर्णय हमने टीवी पर सुना कि सरकार ने कैबिनेट से फ़ैसला कर लिया है कि वह 51 फ़ीसदी एफ़डीआई रीटैल सेक्टर में खोलने जा रही है। हम अवाक रह गए। मैंने आडवाणी जी को फोन किया और पूछा कि आडवाणी जी आप इतने वर्षों से संसद में हैं, क्या पहले कभी ऐसा हुआ है कि संसद में दिए गए आश्वासन का घोर उल्लंघन हुआ हो। उन्होंने कहा कि कभी नहीं और उन्होंने कहा कि यह तो विशेषाधिकार का सवाल बनता है, सुषमा जी। अगर इस तरह का आश्वासन देकर सरकार पलटे तो प्रिवलेज बनता है। यह इन्होंने कैसे कर दिया! एक अजीब तर्क गढ़ा गया। संसदीय कार्य मंत्री और वाणिज्य मंत्री ने यह कहा कि हमने तो नीति बदल दी। वर्ष 2011 में हमने राज्यों को डिस्क्रीशन नहीं दी थी। इनेब्लिंग पॉलिसी नहीं बनायी थी, अब तो हमने इनेब्लिंग पॉलिसी बनायी है। राज्यों पर छोड़ दिया है, इसलिए परामर्श करने की कोई ज़रूरत नहीं थी।
अध्यक्ष जी, यह उस समय के वाणिज्य मंत्री जो आज भी वाणिज्य मंत्री हैं, श्री आनंद शर्मा, उन्होंने भी 7 दिसम्बर, 2011 को राज्य सभा में वही आश्वासन दिया था, जो प्रणब दा ने दिया था। वह बोलते हुए उन्होंने क्या कहा था, यह मैं आपको पढ़कर सुनानी चाहती हूं-
“THE MINISTER OF COMMERCE AND INDUSTRY AND MINISTER OF TEXTILES (SHRI ANAND SHARMA): Sir, as the hon. Leader of Opposition and hon. Members have asked, it is very clear that this policy, the enabling policy framework, is such that the States have a discretion. Therefore, when we say consultation with the stakeholders, that would include Chief Ministers of States; and its certainly does not exclude but includes the political parties...” जो बात प्रणब दा ने कही थी, वह तो उन्होंने कही ही, लेकिन दोनों शब्द आपको इसमें दिख रहे हैं। वर्ष 2011 की पॉलिसी भी इनेब्लिंग पॉलिसी थी, वर्ष 2011 की पॉलिसी में भी स्टेट का डिस्क्रीशन था, इसलिए इस तरह का बेतुका तर्क गढ़कर अगर यह कहना चाहते हैं कि कंसल्टेशन की आवश्यकता नहीं थी, परामर्श की आवश्यकता नहीं थी, तो यह तर्क हमें स्वीकार्य नहीं है। अगर कोई नयी नीति बनायी थी, अच्छी नीति बनायी थी, तो अध्यक्ष जी, और भी ज्यादा ज़रूरी था कि राजनैतिक दलों को बुलाते, वह नीति उनके सामने रखते। शायद आम सहमति बन जाती। लेकिन चूंकि वह आम सहमति नहीं बनी, क्योंकि परामर्श नहीं किया गया, इसीलिए हमने आपके सामने, जब आपने सर्वदलीय बैठक बुलायी तो यह आग्रह किया कि हम अब सदन में अपनी राय अभिव्यक्त करना चाहते हैं। राय अभिव्यक्त केवल चर्चा के माध्यम से नहीं होती है, राय अभिव्यक्त होती है मतदान के माध्यम से और हमारे यहां नियम 184 यह प्रावधान करता है कि यह चर्चा होगी और चर्चा के बाद मतदान होगा, वोटिंग होगी। इसीलिए हमने बार-बार आपसे कहा कि आप नियम 184 के तहत सदन में चर्चा कराइए। सदन में हम चर्चा भी करें और मतदान से अपनी राय भी अभिव्यक्त करें। मैं पुनः आभार प्रकट करती हूं कि आपने हमारी भावना को समझा, आपने सदन की भावना को समझा और उस प्रावधान के तहत चर्चा दी है, जो चर्चा के बाद मतदान का प्रावधान करता है। आपके प्रति बहुत-बहुत आभार।
अध्यक्ष जी, जहां तक एफडीआई का सवाल है, इससे पहले कि मैं इस नीति के दुष्परिणामों का उल्लेख करूं, मैं सरकार के उन दावों का सच उजागर करना चाहूंगी, जो एफडीआई के पक्ष में सरकार के द्वारा दिए जा रहे हैं। इनका पहला दावा है कि नीति उपभोक्ताओं के हित में है। अगर वॉलमार्ट, टैस्को, केयरफोर और मेट्रो जैसे बड़े मल्टी ब्रैंड रिटेलर्स यहां आ जाएंगे तो लोगों को चीजें सस्ती मिलेंगी और अच्छी मिलेंगी।
महोदया, मैं आपके माध्यम से कहना चाहती हूं कि यह बेसिक सिद्धांत है कि अगर बाजार प्रतियोगी होता है तो उपभोक्ता के हित में होता है और अगर बाजार एकाधिकारी हो जाता है तो वह उपभोक्ता के हित में नहीं रहता है। एक व्यापक और फैला हुआ बाजार उपभोक्ता को दुकान चुनने की इज़ाजत देता है, गुंजाइश देता है। एक सिमटा हुआ बाजार इस चयन की प्रक्रिया को उससे छीन लेता है।
अध्यक्ष जी, आप जानती हैं कि हिन्दुस्तान के हर बड़े महानगर और छोटे नगर में इसी सिद्धांत पर बाजार बनाये गये हैं। मैं अपने गृहनगर की बात करती हूं। मैं अम्बाला छावनी से आती हूं। वहां जाकर देखिए कि हमारे बाजारों के नाम क्या हैं - बज़ाजा बाजार, सर्राफा बाजार, कसेरा बाजार, हलवाई बाजार, कवाड़ी बाजार, सौदागर बाजार। यह उनके नाम से पता चलता है। अगर आपको कपड़ा खरीदना है तो बज़ाजा बाजार में जाइए, एक साथ आपको बीस दुकानें मिलेंगी। बर्तन खरीदने हैं तो कसेरा बाजार जाइए, एक साथ पचास दुकानें मिलेंगी। सोने-चाँदी की चीजें आपको सर्राफा बाजार में मिलेंगी। सारे प्रसाधन की सामग्री सौदागर बाजार में मिलेगी। एक जगह जाकर अगर बीस दुकानें हैं तो किसी दुकानदार में यह हिम्मत नहीं है कि वह ग्राहक को लूट ले। वह चीज अच्छी भी देगा और सस्ती भी देगा क्योंकि अगर आपको उसने सस्ती नहीं दी तो आप तुंत पांच मिनट में दूसरे दुकान में चले जाएंगे। अगर दूसरे दुकान में चीज अच्छी नहीं मिली, महंगी मिली तो आप तीसरे दुकान में चले जाएंगे। इसलिए उसकी विवशता है कि वह चीज महंगी न बेचे। वह चीज अच्छी बेचे, खराब न बेचे क्योंकि ग्राहक के पास चयन की गुंजाइश है, च्वायस है। मैं तो इससे आगे कहना चाहती हूं कि जब हर जगह एक-सी चीज़, एक-सी सस्ती, एक-सी बढ़िया मिलती है तो दुकानदार का अपना व्यवहार, इस पर आश्रित करता है कि दुकान चलती है कि नहीं चलती है। दुकानदार यह कहते हैं कि अगर मीठा बोलोगे, गर्मी में आए हुए ग्राहक को एक ग्लास पानी पिला दोगे, आपका कर्मचारी चीज़ें दिखाते हुए अघाएगा नहीं तो आपकी दुकान चलेगी।
हम और आप तो शॉपिंग करने जाते रहे हैं। हम महिलाएं तो शॉपिंग करती ही हैं। इस बात का बहुत ज्यादा असर पड़ता है कि अगर हर दुकान पर एक-सी चीज मिल रही है तो मीठा कौन बोलता है, अच्छे से कौन बात करता है, अच्छा व्यवहार कौन रखता है, उसकी दुकान पर जाएं। लेकिन जब आप इस तरह का एकाधिकारी बाजार खड़ा कर देते हैं जहां किसी तरह की कोई गुंजाइश नहीं होती तो वह कभी भी उपभोक्ता के हित में नहीं हो पाता। Competition is always in the interest of consumers’ monopolies mart.
अध्यक्ष जी, अंतर्राष्ट्रीय अनुभव बताता है कि इस तरह के रिटेलर्स प्रिडेटरी प्राईसिंग करते हैं। कोई इससे इन्कार नहीं कर सकता।...( व्यवधान)
मैडम, थोड़ी-सी शांति बनवा दें। बात बहुत गंभीर हो रही है।
अध्यक्ष महोदया : शांति बनाए रखें।
…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : बैठ जाइए।
… (Interruptions)
MADAM SPEAKER: Nothing else will go on record.
(Interruptions)* … श्रीमती सुषमा स्वराज :महोदया, ये रिटेलर्स प्रिडेटरी प्राइसिंग करते हैं। प्रिडेटरी प्राइसिंग का मतलब है पहले दाम नीचे ले आएंगे। दाम इतने कम कर देंगे कि बाकी बाजार समाप्त हो जाय। जब बाकी किसी को वारा ही नहीं खाएगा, कुछ पुगेगा ही नहीं तो क्या वह दुकान बंद नहीं करेगा? घाटे का सौदा कौन चलाएगा और कितने दिन चलाएगा? लेकिन जब दुकानें बंद हो जाती हैं, बाजार समाप्त हो जाता है तो एकदम दाम बढ़ा देते हैं और इतने दाम बढ़ा देते हैं कि उसके बाद ग्राहक के पास कोई गुंजाइश नहीं बचती, चुनाव करने की कोई च्वायस नहीं बचती और उसे आकर उतने ही दाम पर खरीदना पड़ता है। इसलिए मैं आपसे यह कहना चाहती हूं कि आपका यह दावा कि ये रिटेलर्स जब मल्टी ब्रांड में आएंगे और ये उपभोक्ता के हित में काम करेंगे, उसको सस्ती और अच्छी चीज दिलाएंगे, यह दावा सिरे से निराधार है, तथ्यों से परे है।
मैडम, सरकार का दूसरा दावा है कि यह नीति किसानों के हित में है। उसके लिए ये कहते हैं कि किसानों से महंगा खरीदेंगे, उनको अच्छा दाम देंगे। प्रधानमंत्री जी, मैं आपको बताना चाहती हूं, पूरा अंतर्राष्ट्रीय अनुभव सामने है कि शुरू में दाम कम करने के लिए ये लोग अपना मुनाफा कम नहीं करते। ये किसान से सस्ता खरीदते हैं। ये अपने कर्मचारियों को वेतन कम देते हैं और उसके कारण दाम कम करते हैं। ये कभी दाम ज्यादा नहीं देते, ये कम दाम देकर, खरीद कर और अपने कर्मचारियों को कम वेतन दे करके, अपने मुनाफे में कोई समझौता नहीं करते, अपना प्रोफिट पूरा रख करके ये दाम ऊंचे करते हैं। मैं यहां यूरोपियन यूनियन की पार्लियामेंट का एक डेक्लरेशन लेकर आई हूं। हिन्दुस्तान की बात नहीं, पूरे विश्व के देशों में, जहां-जहां इन्होंने किसानों से सस्ता सामान खरीदा है, वहां विरोध में आंदोलन हुए हैं।
अध्यक्ष महोदया, आपको मालूम है कि फरवरी, 2008 में ईयू की पार्लियामेंट ने फार्मर्स के प्रोटेस्ट के कारण एक डेक्लरेशन एडोप्ट किया था। वह डेक्लरेशन कहता है:- Evidence from across the EU suggests: ‘large supermarkets are abusing their buying power to force down prices paid to suppliers to unsustainable levels and impose unfair conditions upon them.’ The declaration came in the backdrop of protests by farmers against supermarkets across European countries like France, Italy, the Netherlands, Belgium, Ireland and Hungary. The nature of complaints was similar. The nature of complaints was: the joint retailers were squeezing the prices paid to the farmers for products like milk, meat, poultry and wine and, in some instances, forcing them to sell it below cost prices.
उनकी लागत से भी कम बेचने पर वे कम्पेल करते हैं, फोर्स करते हैं। ये ईयू का डेक्लरेशन है और यह डेक्लरेशन कोई ज्यादा पुराना नहीं, फरवरी, 2008 में उन्होंने एडोप्ट किया और क्यों एडोप्ट किया, क्योंकि ये जितने देशों के मैंने नाम पढ़े हैं, इन देशों के किसानों ने विरोध प्रदर्शन किए, आंदोलन किए। अपने देश में अमूल जैसा कोऑपरेटिव कितना सफल है, वे इसका विरोध कर रहे हैं। उससे ज्यादा सफल कोऑपरेटिव कहीं है। कुरीयन जी आज नहीं हैं, उनका निधन हो गया है। उनकी स्मृति को नमन करते हुए मैं कहना चाहती हूं। गुजरात कोऑपरेटिव मिल मार्केटिंग फेडरेशन के प्रेज़ीडेंट श्री सोडी जी हैं। उन्होंने बयान देकर कहा है, :- Farmers get the least returns from the modern trade and the so-called efficiency benefits only the large retailers as they constantly drive down the prices. कोई एक का अनुभव नहीं है, दुनियाभर का अनुभव यह बताता है कि किसान से सस्ता खरीदते हैं। इसके आगे कहना चाहती हूं, दाम तो तब देंगे, जब खरीदेंगे। ये आपके छोटे और मझोले किसान से खरीदेंगे ही नहीं।
अध्यक्ष महोदया, यहां पंजाब के लोग बैठे हैं, अजनाला जी और हरसिमरत कौर जी बैठी हैं। पेप्सी का उदाहरण है।...( व्यवधान) बाजवा जी, गुलशन जी और वहां के लोग भी बैठे हैं। ये सब साक्षी हैं, मैं जो उसकी बात कह रही हूं। जब पेप्सी की फैक्ट्री पंजाब में लग रही थी तो पंजाब के किसानों ने आंदोलन किया कि यहां फैक्ट्री नहीं लगनी चाहिए। पेप्सी के लोगों ने उन्हें भरमाया और यह कहा कि हम केवल कोल्ड ड्रिंक ही नहीं बनाएंगे, हम यहां आलू के चिप्स और टमाटर की सॉस भी बनाएंगे। आपका आलू और टमाटर खरीदेंगे। यहां का किसान खुशहाल हो जाएगा। किसान गुमराह हो गया, भ्रम में आ गया। फैक्ट्री लग गई। आप जानती हैं, कारखाना लगने के बाद उन्होंने किसानों को बुलाया और कहा कि हमने तुम्हारे आलू का परीक्षण किया था। तुम्हारा आलू ज्यादा मीठा है, इसके अच्छे चिप्स नहीं बन सकते। उन्होंने कहा कि हमने तुम्हारे टमाटर का भी परीक्षण किया था, तुम्हारा टमाटर ज्यादा खट्टा है, उसकी अच्छी सॉस नहीं बन सकती। आलू और टमाटर विदेश से निर्यात करने का काम किया, लेकिन पंजाब के किसान से आलू और टमाटर नहीं लिया। एक पेप्सी की बात नहीं, आज पूरे देश में मैकडोनाल्ड की चैन खुली हुई है। वे आलू की फ्रैंच फ्राइज़ बनाते हैं। वे भारतीय किसान से कितना आलू लेते हैं, इस बारे में कभी पता करिए। वे कहते हैं कि हमारी फ्रैंच फ्राइज़ का साइज़ बड़ा है, आपका आलू छोटा है।
ये रामशंकर कठीरिया जी, आगरा के सांसद भारतीय किसान बैठे हुए हैं। आगरा का किसान, जो आलू उत्पादक किसान है, सबसे ज्यादा आलू पैदा करता है, वह अपने आलू को सड़क पर गिराने के लिए मजबूर होता है, लेकिन मैकडोनाल्ड उनसे आलू खरीदता नहीं है।...( व्यवधान) आलू कहां से आता है? शिपमेंट के शिपमेंट आते हैं। अध्यक्षा जी, जहाज के जहाज आलू के भरकर आते हैं, विदेशों से शिपमेंट्स आते हैं। आलू के जहाज के जहाज भरकर आते हैं और वे उन्हीं के फ्राइज़ बनाते हैं, क्योंकि, वे कहते हैं कि हमारे फ्राइज़ का स्टैण्डर्ड बड़ा है, आपका आलू छोटा है। अगर खरीदेंगे तो दाम देंगे न और अगर खरीदने का समझौता भी कर लेंगे तो एक चीज़ की खराबी पर पूरी की पूरी खेप वापस कर देंगे। मैं आनन्द शर्मा जी से कहना चाहती हूं, आप सेव की जगह से आते हो न, आपके यहां बहुत बड़ी अच्छी क्वालिटी का सेव पैदा होता है, लेकिन तो भी जब आजादपुर मंडी में आता है तो कभी न कभी एक सेव दब जाता है, कभी गल जाता है तो यहां का व्यापारी उस एक सेव को निकाल कर बेच देता है, लेकिन जिस पेटी का सेव गलेगा, वे केवल वह पेटी ही वापस नहीं करेंगे, ट्रक का ट्रक लौटा देंगे और कहेंगे, इसमें तो बैक्टीरिया पैदा हो गया और जिस ट्रक में आया है, उसकी सारी पेटियों में बैक्टीरिया लग गया। आप क्या कहना चाहते हैं? उस समय जब खेप की खेप लौटाई जायेगी, ट्रक वापस किए जाएंगे तो हिमाचल का वह सेव का किसान आपके घर के दरवाजे पर धरना देगा, सिर पर हाथ रखकर रोएगा और आप उसका कोई जवाब नहीं दे पाएंगे।
ये कहते हैं कि किसान को सबसे बड़ा फायदा होगा कि बिचौलिये खत्म हो जाएंगे, मिडिलमैन खत्म हो जाएंगे। मैं प्रधानमंत्री जी को बताना चाहती हूं...( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : आप बैठ जाइये। आप क्या कर रहे हैं?
श्रीमती सुषमा स्वराज :मैं आपको बताना चाहती हूं कि ये जो बिचौलियों की बात करते हैं कि बिचौलिये खत्म हो जाएंगे, आज भी हिन्दुस्तान में एक क्षेत्र ऐसा है, जहां किसान और मिल मालिक के बीच में कोई बिचौलिया नहीं है और वह शुगर मिल का क्षेत्र है, चीनी मिल का क्षेत्र है। वहां कोई बिचौलिया नहीं है। चीनी मिल का मालिक, चीनी मिल के प्रबन्धक और किसानों के बीच में सीधा अनुबन्ध होता है, गन्ना वाण्टेड होता है, गन्ना अनुबन्धित होता है। चीनी की मिल के मालिक के कहने पर किसान गन्ना बोते हैं और वह गन्ना उन्हीं शुगर मिल्स को दिया जाता है, लेकिन कितनी ही बार ऐसा हुआ है...( व्यवधान) अगर इस तरह का माहौल रहेगा तो कैसे बोल सकेंगे?...( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : आप सुन लीजिए। सुनिये। आप बैठ जाइये।
…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : आप बोलिये। आप शान्त हो जाइये।Nothing else will go on record.
(Interruptions) *… श्रीमती सुषमा स्वराज :अध्यक्षा जी, कितनी ही बार होता है...( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : अब आप बैठ जाइये। कृपया ऐसा नहीं करें।
श्रीमती सुषमा स्वराज :कितनी ही बार होता है कि अनुबन्ध के बाद भी चीनी मिल मालिक गन्ना लेने से मना कर देते हैं। कहते हैं कि इससे ज्यादा हम पेर नहीं सकते और अगर पेर नहीं सकते तो आप लाइये भी मत या फिर लाया हुआ गन्ना लौटा देते हैं। जहां ले लेते हैं, वहां उनके कर्मचारी कागज की पर्ची किसान को दे देते हैं। किसान वह पर्ची लिए मारा-मारा भागता है। यहां अजीत सिंह जी बैठे हैं, ये गन्ने की राजनीति जानते हैं। हमारे यहां राजनाथ सिंह जी और राजेन्द्र अग्रवाल जी पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के और मेरठ के सांसद हैं। अभी परसों ही वरुण गांधी जी लखनऊ में बोलकर आये हैं, वहां गन्ना किसानों की व्यथा-कथा कहकर आये हैं। गन्ना किसान कागज लिए घूम रहा है, पर्ची लिए घूम रहा है, लेकिन ...( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : आप बैठ जाइए।
…( व्यवधान)
MADAM SPEAKER: Please sit down. What is all this?
… (Interruptions)
श्री गोपीनाथ मुंडे (बीड): मंत्री होकर यह ऐसा कर रहे हैं। ...( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : आप क्यों खड़े हो गए?
…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : आप बैठिए।
…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : आप बोलिए।
…( व्यवधान)
श्रीमती सुषमा स्वराज :अध्यक्ष जी, मैं इनके खिलाफ तो कुछ नहीं कह रही हूं, इनको किस चीज का दर्द हो रहा है। ...( व्यवधान) मैं किसान का दर्द सुना रही हूं। ...( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : आप बैठ जाइए।
…( व्यवधान)
श्रीमती सुषमा स्वराज :अध्यक्ष जी, मैंने इस देश के आलू के किसान का दर्द रखा, मैं इस देश के गन्ना किसान का दर्द बता रही हूं और आपसे बता रही हूं कि यह सब होने वाला है। मैं आपकी पार्टी के खिलाफ नहीं बोल रही हूं, आपके खिलाफ नहीं बोल रही हूं। आप किसान का दर्द भी सुनना नहीं चाहते। ...( व्यवधान) मैं इनके इस तर्क का जवाब दे रही हूं कि ये कह रह हैं कि एफडीआई के आने से बिचौलिया खत्म हो जाएगा, मिडलमैन खत्म हो जाएगा और किसान को फायदा होगा। मैं यह कह रही हूं कि जिस क्षेत्र में बिचौलिया है ही नहीं, मिडलमैन है ही नहीं, डायरेक्ट मिल मालिक और किसान के बीच में रिश्ता है, वहां यह हालत हो रही है कि गन्ना किसान मारा-मारा फिर रहा है, तो आप यह कहते हैं कि बिचौलिया खत्म हो जाने से किसान की हालत सुधर जाएगी, यह सही नहीं है।
मैं आपको बिचौलिये की बात बता दूं। सबसे बड़ा बिचौलिया और मिडलमैन हमारे यहां अनाज मंडी में आढ़ती होता है। ...( व्यवधान) मैडम, हमारी आढ़त प्रणाली में बीसियों दोष होंगे, जिनको ठीक करने की आवश्यकता है, लेकिन आप इस बात से इंकार नहीं कर सकते कि आढ़ती और किसान के बीच में एक विश्वास का रिश्ता होता है। जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को समझते हैं, मैं बता रही हूं कि...( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : बैठ जाइए। आप भी बैठिए।
…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : आप बैठ जाइए।
…( व्यवधान)
श्रीमती सुषमा स्वराज : अध्यक्ष जी, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को जानता है, केवल वह इस बात को पहचान सकता है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था यह कहती है कि आपकी बैंकों के ये एटीएम तो आज आए हैं, आढ़ती उस किसान का पारंपरिक एटीएम है। किसान को बेटी की शादी करनी हो, बुआ का भात भरना हो, बहन का खीचक देना हो, बच्चे की पढ़ाई करानी हो, बाप की दवाई करानी हो, वह सिर पर साफा बांधता है और सीधा मंडी में आढ़ती के पास जाकर खड़ा हो जाता है। ...( व्यवधान)
MADAM SPEAKER: What is all this? Please sit down.
… (Interruptions)
अध्यक्ष महोदया : यह क्या हो रहा है?
…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : बैठ जाइए।
…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : आप भी बैठिए।
…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : वह बोल रही हैं, आप बैठ जाइए।
…( व्यवधान)
15.00hrs …( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : संदीप दीक्षित जी, आप बैठ जाइए।
...( व्यवधान)
श्रीमती सुषमा स्वराज:वह उसे केवल विश्वास पर पैसा देता है। क्योंकि उसे मालूम है कि वह बैलगाड़ी में भर कर उस को यहां लाएगा।...( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : जब आपकी पार्टी की बारी आएगी तो आप बोलिएगा।
...( व्यवधान)
श्रीमती सुषमा स्वराज :उसे बेच कर वह अपना पैसा वसूल लेगा।
अध्यक्ष महोदया जी, जसवंत सिंह जी जैसे लोग ग्रामीण अर्थव्यवस्था समझते हैं।...( व्यवधान) ये क्या जाने? वह मेरी बात के साक्षी होंगे। ...( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : यह क्या हो रहा है? आप सभी बैठ जाइए।
…( व्यवधान)
श्रीमती सुषमा स्वराज : मैं पूछना चाहती हूं कि क्या वालमार्ट और टेस्को उसे उधार देगा? क्या उसे संवेदना होगी उसकी बेटी की शादी या बेटी की भात भरने की। ...( व्यवधान) उसे तो धोती और साफे वाले किसान से बदबू आएगी। ...( व्यवधान) कौन डायरेक्ट बात कर सकेगा? कोई किसान से सीधा उसकी फसल खरीदेगा? नई एजेंसियां खड़ी होंगी और नए बिचौलिए खड़े हो जाएंगे। इसमें यह कहना कि आप बिचौलिए को समाप्त कर देंगे या मिडलमैन को समाप्त कर देंगे, यह बात सिरे से गलत है। ...( व्यवधान) आपको विदेशी बिचौलिए चाहिए। ...( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : आप क्यों खड़े हो रहे हैं?
...( व्यवधान)
श्री सैयद शाहनवाज़ हुसैन (भागलपुर): ये लोग अमेरीका के समर्थक हैं। ...( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : जब आपकी पार्टी को चांस मिलेगा तब आप को चांस मिलेगा।
...( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : आप बैठ जाइए। इनको बोलने दीजए।
...( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : आप क्या चाहते हैं? आप बैठ जाइए।
…( व्यवधान)
SHRI ANANTH KUMAR : Madam, if this is the way they are going to conduct this discussion, then we will not allow them to speak. … (Interruptions) In that case, nobody will be allowed to speak. … (Interruptions)
MADAM SPEAKER: Please sit down.
… (Interruptions)
MADAM SPEAKER: All of you please sit down. What is happening to you?
… (Interruptions)
SHRI ANANTH KUMAR : Madam, we will not allow this to continue. … (Interruptions)
MADAM SPEAKER: Please sit down.
… (Interruptions)
MADAM SPEAKER: Now, you sit down. They all are sitting.
… (Interruptions)
SHRI ANANTH KUMAR : Madam, you control them. … (Interruptions) Madam, if they do like this, then your Prime Minister would not be allowed to speak; the Leader of the House would not be allowed to speak; and nobody will be allowed to speak. … (Interruptions) We will not allow anybody to speak. … (Interruptions)
MADAM SPEAKER: Why are you doing this? Please sit down.
… (Interruptions)
MADAM SPEAKER: All of you please sit down.
… (Interruptions)
SHRI ANANTH KUMAR : Madam, we will not allow any one of them to speak. … (Interruptions)
अध्यक्ष महोदया : आप बैठ जाइए। आप क्यों बारबार खड़े हो रहे हैं?
...( व्यवधान)
MADAM SPEAKER: Nothing else will go on record.
(Interruptions)* … अध्यक्ष महोदया : आप सब बैठ जाइए।
…( व्यवधान)
श्री अनंत गंगाराम गीते (रायगढ़):...** सुषमा जी को बोलने नहीं देना चाहते।
… (Interruptions)
MADAM SPEAKER: This will not go on record.
(Interruptions)* … अध्यक्ष महोदया : गीते जी, आप बैठ जाइए।
…( व्यवधान)
MADAM SPEAKER: Please sit down.
…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : आप सब बैठ जाइए।
…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : बहुत गभीर विषय पर चर्चा हो रही है।
…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : ठहरिए, हम इधर ही सुनाएंगे। आप नहीं सुनेंगे। ऐसे नहीं बोलिए।
…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : आप बैठिए।
… (Interruptions)
THE MINISTER OF LABOUR AND EMPLOYMENT (SHRI MALLIKARJUN KHARGE): Madam, he said that ... Is it fair? You listen to what he said. … (Interruptions)
अध्यक्ष महोदया : यह क्या तरीका है।
…( व्यवधान)
SHRI MALLIKARJUN KHARGE: It is not correct to speak like that. It is unfair. He said like that and it is uncharitable on his part. He has to withdraw it. … (Interruptions)
अध्यक्ष महोदया : कृपया आप सब बैठ जाइए।
…( व्यवधान)
THE MINISTER OF HOME AFFAIRS (SHRI SUSHILKUMAR SHINDE): Madam, I have to say that he is challenging the Speaker and I think it should be removed from the records. He should not challenge the Speaker. He can challenge us, but not the Chair. … (Interruptions)
SHRI KIRTI AZAD (DARBHANGA): We are not challenging; you are disturbing our leader. You are the leader of the House.
अध्यक्ष महोदया : बैठ जाइए। ऐसे मत कीजिए।
…( व्यवधान)
SHRI SUSHILKUMAR SHINDE: You can talk like this with us, but not with the Chair. Madam, he can challenge us, but not the Chair. … (Interruptions)
SHRI ANANTH KUMAR : What is he saying? He is the Leader of the House, . … (Interruptions)
अध्यक्ष महोदया : यहां पर बहुत गंभीर विषय पर चर्चा हो रही है। नेता प्रतिपक्ष बोल रही हैं। मैं चाह रही हूं कि सब सुन लें। वे अपना पक्ष रख रही हैं, अपने विचार रख रही हैं। आपकी जब बारी आएगी, आप अपना पक्ष रखिएगा।
…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : आप चुप रहिए। यह क्या हो रहा है। हर समय क्यों बोलते हैं।
…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : ठीक है, कभी-कभी उत्तेजित हो जाते हैं, हाउस हिल जाता है। मगर बहुत ज्यादा उत्तेजित होकर ऐसे मत कीजिए। इस तरह नहीं करते। यह ऐसा मुद्दा है जिस पर उत्तेजना होगी, मगर आपे से बाहर मत हो जाइए, यह मैं कह रही हूं। आप उनकी बात सुनिये। जब आपके बोलने की बारी आयेगी, तब कहिए। अभी आप उनकी बात ध्यान से सुनिये।
…( व्यवधान)
श्रीमती सुषमा स्वराज : अध्यक्षा जी, इनका तीसरा दावा है कि एफडीआई रोजगार के नये अवसर पैदा करेगी। वाणिज्य मंत्री जी ने तो एक आंकड़ा भी दे दिया है। उन्होंने कहा कि एक करोड़ जॉब्स मिलेंगी, लेकिन उन्होंने एक आंकड़ा दिया कि 40 लाख लोग डायरेक्टली इन लोगों द्वारा इम्प्लॉय होंगे, यानी जो मल्टी ब्रांड रिटेलर्स आयेंगे, ये आकर 40 लाख लोगों को डायरेक्ट नौकरी देंगे। मुझे नहीं मालूम कि यह आंकड़ा देते समय कोई जमा-घटाव, कोई गुणा-तकसीम करते हैं या नहीं, क्योंकि एक आंकड़ा मेरे पास है। वॉलमार्ट के 9 हजार 826 स्टोर्स पूरी दुनिया में हैं और उनके इम्प्लायज 21 लाख हैं। अगर 40 लाख इम्प्लायज हिन्दुस्तान में केवल वॉलमार्ट के आने हों, क्योंकि वॉलमार्ट में 214 प्रति स्टोर कर्मचारियों की संख्या है। एक स्टोर में 214 कर्मचारी हैं जो सबसे ज्यादा हैं। बाकी लोगों के तो और भी कम हैं, जो मैं बताऊंगी। अगर 214 प्रति स्टोर वाले वॉलमार्ट ने 40 लाख लोगों को यहां इम्प्लायमैंट देना है, तो 18 हजार 600 स्टोर खोलने पड़ेंगे। बाकी के बारे में आप सुनेंगी, तो हैरान रह जायेंगी। केयरपोर्ट की प्रति स्टोर 30 की संख्या है और पूरे विश्व में उनके स्टोर 15 हजार 937 हैं। मेट्रो की संख्या 133 है और टेस्को जो वॉलमार्ट के बाद यहां आना चाह रहा है, उसकी संख्या 92 है। उनके 5 हजार 380 स्टोर्स हैं। अगर ये सारे आ जायें और अपनी-अपनी संख्या के अऩुसार करने लग जायें, तो 36 हजार से ज्यादा स्टोर्स चाहिए। ये 53 शहरों में खोलने की बात कर रहे हैं यानी एक-एक शहर में छः-छः सौ स्टोर्स खुलेंगे। हर चौराहे पर अगर स्टोर खुलें तब जाकर 40 लाख लोग बनते हैं। ...( व्यवधान) कहां से आंकड़ा लाते हैं, कैसे लाते हैं? कोई आंकड़ा कहीं सुना, कहीं चिपका दिया।
जहां तक रोजगार की बात है, यह तो आप 40 लाख की बात कर रहे हैं। आप अपनी पालिसी उठाकर देखिये, उसमें आपने क्या कहा है? आपने कहा है कि 30 परसेंट आपके एसएमईज से चीज लेनी पड़ेगी। अध्यक्षा जी, सबसे ज्यादा बेरोजगारी अगर आयेगी, तो वह मैनुफैक्चरिंग सैक्टर में आयेगी। आपके कारखाने बंद हो जायेंगे। आपने खुद कहा कि 30 परसेंट स्थानीय उद्योग से लेना पड़ेगा। आज जो उद्योग सौ परसेंट बेच रहा है, उसका 70 परसेंट आपने काट लिया। क्या 30 परसेंट पर कोई कारखाना चल सकता है? क्या कोई फैक्ट्री वायेबल हो सकती है? कारखाना दर कारखाना बंद हो जायेगा। यह जो 70 परसेंट आयातित माल आयेगा, जिसे यह कह रहे हैं कि 30 परसेंट यहां से तो 70 परसेंट इम्पोर्ट करेंगे। यह जो 70 परसेंट आयातित माल आयेगा, इसमें से 90 परसेंट माल चाइना का होगा। कारखाने खुलेंगे चाइना में, रोजगार मिलेगा चाइना में, आमदनी बढ़ेगी चाइना की और आपके यहां 12 करोड़ घरों में अंधेरा हो जायेगा। आपका मैनुफैक्चरिंग सैक्टर खत्म हो जायेगा। जो रोजगार की बात कर रहे हैं, जरा उनकी बात करो जो बेरोजगार होकर सड़क पर आ जायेंगे। यह भी बता दूं कि 30 परसेंट वाली जो एसएमईज वाली बात है, यह भी एक मिथ है, एक मिथ्या धारणा है। क्यों? क्योंकि भारत डब्ल्यूटीओ में जिन शर्तों पर शामिल हुआ है, उसमें जीएटीटी (गैट) का आर्टिकल 3 यह पाबंदी लगाता है कि आपको नैशनल ट्रीटमैंट देना होगा कांटैक्टिंग पार्टी से। आप कोई कानून ऐसा नहीं बना सकते, जिस कानून के तहत स्थानीय उद्योग से आप चीज खरीद सकें। कल कोई आपकी इस व्यवस्था को कोर्ट में जाकर चैलेंज करेगा और वह व्यवस्था गिर जायेगी। केवल डब्ल्यूटीओ की बात नहीं, अध्यक्षा जी, प्रधान मंत्री जी बैठे हैं, 82 देशों से हमने बीआईपीए साइन किया। हमने द्विपक्षीय समझौते किए हैं और उनको कहा है कि आपको भी हम नेशनल ट्रीटमेंट देंगे और उस नेशनल ट्रीटमेंट का मतलब है कि हम उनके उद्योगों से चीजें खरीदेंगे। इसलिए यह जो तीस प्रतिशत वाली बात है, यह बहुत बड़ी मिथ्या और भ्रामक बात है। यह 30 प्रतिशत भी आप स्थानीय उद्योगों से खरीद नहीं सकेंगे। इसलिए आप जो रोजगार की बात करते हैं, 40 लाख रोजगार का शीशा तो मैंने दिखा दिया आपको, लेकिन जो लोग बेरोजगार होंगे, क्या उनका कोई आकलन किया है आपने? आपके यहां मॉल्स आ जाएंगी, मॉल्स में जरूर जगमगाहट हो जाएगी और शहर जगमगाने लगेंगे, लेकिन जिन लोगों के घर में अंधेरा हो जाएगा, क्या कभी उनकी कल्पना की है आपने? ये तीन दावे हैं जो सरकार कर रही है, उपभोक्ता का हित-रक्षण होगा, किसानों को अच्छा दाम मिलेगा, नए रोजगार होंगे। इन दावों की पोल मैंने खोल दी आपके सामने, लेकिन इस नीति के अपने दुष्परिणाम खुदरा व्यापार पर क्या होंगे, अब मैं वह आपको बताना चाहती हूं। पूरे विश्व का यह अनुभव है कि जहां-जहां एफडीआई मल्टी-ब्रांड रिटेल में आई है, वहां-वहां का खुदरा व्यापार खत्म हो गया है, छोटी शॉप्स समाप्त हो गयी हैं। ...( व्यवधान) यह गलत नहीं है, आप सुन लीजिए।...( व्यवधान)
This is the report of the National Trust for Historic Preservation. It is written: What happened when Walmart came to town in 1996. A Study of Walmart expansion has found that 84 per cent of all sales at the new Walmart stores came at the expense of existing businesses within the same country. किसके सिर पर आया? लोकल बिजनेस को खत्म करके 84 प्रतिशत सेल्स आए। यह मैंने आपके सामने एक विदेशी रिपोर्ट रखी है, कोई अपनी गढ़ी हुई बात नहीं रखी है। मैं छोटे देशों की बात ही नहीं कर रही, मैं बड़े देशों की बात कर रही हूं। मैं इंग्लैंड की बात करूंगी, ब्रिटेन की बात करूंगी। हिन्दुस्तान टाइम्स की 15 जुलाई, 2010 की रिपोर्ट है। इसमें क्या लिखा है, जरा ध्यान से सुन लीजिए जो कह रहे थे कि गलत है। जो गलत हैं ध्यान से सुन लें। मैडम, ब्रिटिश पार्लियामेंट के दो एमपीज ने कहा है, किसी ऐरे-गैरे ने नहीं कहा है। मैं ऑन-कोट पढ़ रही हूं, अगर आप कहें तो सदन के पटल पर रख दूंगी।
“Britain was a nation of small shopkeepers. All of that had changed and this is because of the super market led by TESCO. It is impossible for small shopkeepers who have so much to offer to compete with the prices of super market, ” ABP GEO SS Secretary, Bob Russell, MP added: “The expansion of super market in Britain has been to the serious detriment of small shops. There is no question about this.” It further says, “One in six small stores in Britain has gone out of business in the last decade,” the Group said because of TESCO, because of these large super markets. हर छठा स्टोर बिजनेस से बाहर हो गया। यह मेरे कहे हुए शब्द नहीं हैं। ब्रिटिश पार्लियामेंट के दो एमपीज ने कहा है। ...( व्यवधान) केवल इन दो एमपीज ने नहीं कहा है, आपसे भी मिले होंगे, एक इंडियन ओरिजिन के एमपी हैं- मिस्टर कीथ वाज़। आपसे जरूर मिले होंगे, क्योंकि भारत आते हैं, बहुत लोगों से मिलते हैं। कीथ वाज़ को जब पता चला कि भारत में इस तरह की बात चल रही है, तो भारत के सांसदों को सलाह देते हुए उन्होंने कहा। यह मैं कीथ वाज़ की बात पढ़ रही हूं। यह बहुत पुरानी बात नहीं है, यह 20 सितम्बर, 2012 की बात है, आज से केवल दो महीने पहले की बात है। Indian origin Labour Party MP Keith Vaz has advised “Indian legislators to be careful while handling the issue of FDI in retail, cautioning that a major dominance by a super market may not be in the interest of the common man.” कीथ वाज़ ब्रिटेन के एमपी भारत में बहुत आते हैं, भारत से प्यार रखते हैं, इसलिए भारत के सांसदों को उन्होंने आगाह किया है कि सावधानी बरतो, यह एफडीआई कॉमन मैन के इंट्रेस्ट में नहीं है। मैं केवल इंग्लैंड की बात नहीं कर रही हूं मैडम, जिन देशों से ये कंपनियां आ रही हैं, मैं अमरीका की बात कर रही हूं। वॉलमार्ट तो अमरीका की कंपनी है और उसने अमरीका में क्या तबाही मचाई है, आप जानते हैं क्या? वहां एक आंदोलन चला है जिसका नाम है “ स्मॉल बिजनैस सेटरडे” और उस आंदोलन का नेतृत्व कौन कर रहा है - राष्ट्रपति ओबामा। वह ट्विट करते हैं, वह लोगों को प्रोत्साहित करते हैं कि हर शनिवार को जाकर छोटी दुकानों से चीजें खरीदो। यह मैं आपको दिखाना चाहती हूं जो cdcnews.com की न्यूज है जो इस प्रकार है - “Black Friday is over. But 89 million consumers plan to shop small on Small Business Saturday according to a survey by American Express. It is an effort to promote independent retailers on Main Street. Now Small Business Saturday is being promoted in cities across the country including New York, Boston, Los Angeles, Philadelphia, Miami and Detroit.” इस दिन ओबामा स्वयं जाते हैं छोटे दुकानदारों के यहां, वहां से किताबें लेते हैं, यह न्यूज वाशिंगटन की है।
“President Obama has pitched into help small business get into the holiday shopping season. The President took his daughters Malia and Sasha along on a shopping run to a bookstore a few blocks from the White House. He says he made the visit because it is Small Business Saturday and he wanted to support the small business.” उन्हें ऐसा क्यों करना पड़ रहा है क्योंकि उनके यहां पॉप एंड मॉम स्टोर्स खत्म हो गये। वॉल-मार्ट ने छोटी दुकानदारियां खत्म कर दीं, उनका रोजगार लुट गया और आंदोलन के तौर पर स्मॉल बिजनैस सेटरडे अमरीका में चलाया जा रहा है। राष्ट्रपति ओबामा बेटियों के साथ शनिवार को शॉपिंग करते हैं और केवल यही नहीं, अध्यक्ष जी, वर्ष 2012 के बजट में अमरीका 10 सूत्री फार्मूला लेकर आया है अपने स्मॉल बिजनैस को स्पोर्ट करने के लिए। क्या कहा गया है कि -
“Small businesses are the engine of job growth in our country. In order to ensure that small businesses are poised to start, grow and create jobs, the 2012 Budget will:
1. Spur job creation by enhancing small business access to credit.
2. Cut taxes for small businesses seeking to grow and expand.
3. Boost investment in small businesses.
4. Promote impact investment in economically distressed regions for disadvantaged groups and in sections of national significance.
5. Help innovative small businesses obtain early stage financing.
6. Improve small businesses and export access to federal services.
7. Help small businesses connect to regional innovation.
8. Strengthen small business exports.
9. Double the small employer pension plan start up credit.
10. Help small businesses provide health insurance to their employees.” ये 10 सूत्री फार्मूला अमरीका के 2012 के बजट में आ रहा है छोटे व्यापार को बढ़ावा देने के लिए। मैं पूछना चाहती हूं कि जिस समय बाकी के लोग इस प्रणाली के दोषों को चिन्हित करके, उन्हें सुधारने में लगे हुए हैं, उस समय क्या कारण है कि हमारी सरकार इसे महिमा-मंडित कर रही है। माननीय प्रधान मंत्री जी सोचते हैं कि एफडीआई आ जाएगी तो अर्थव्यवस्था की सारी कमियों का इलाज हो जाएगा। कहते हैं कि मूर्ख अपने अनुभव से सीखता है, बुद्धिमान दूसरों के अनुभव से सीखता है। मैंने दुनियाभर के देशों के उदाहरण आपके सामने रखे हैं, यूरोपियन यूनियन का उदाहरण, इंग्लैंड का उदाहरण, अमरीका का उदाहरण आपके सामने रखा, ये देश तबाही से अपने मुल्कों को बचाने में लगे हैं, स्मॉल बिजनैस को प्रमोट कर रहे हैं, रैजोल्यूशन अडॉप्ट कर रहे हैं लेकिन हमारी सरकार लगी है कि एफडीआई आ जाएगी तो पता नहीं देश के अंदर कौनसी क्रंति आ जाएगी, हमारी सारी अर्थव्यवस्था की कमियां दूर हो जाएगी।
अध्यक्ष महोदया, यह बहस नयी नहीं है। यह बहस हमारे समय में भी चली थी जब हम सरकार में थे। तब भी कुछ लोग कहते थे कि खुदरा व्यापार में एफडीआई ले आओ, बहुत भला होगा। उस समय अटल जी ने एक अध्ययन करवाया था और स्टडी करवाने के साथ साथ योजना आयोग ने वहां के सम्मानित सदस्य श्री एन.के.िंसह जो इस समय जेडीयू के राज्य सभा में सदस्य हैं, उनकी अध्यक्षता में एक कमेटी गठित की गई थी और उन्होंने एक रिपोर्ट दी थी। उस रिपोर्ट को मैं पढ़कर सुनाती हूं। उन्होंने कहा था: “The retail sector in India is dispersed, widespread, labour-intensive and disorganized. In the light of this, it is not thought desirable at present to lift the ban on FDI in retail trade.” मैं याद दिलाना चाहती हूं कि जिस समय यह रिपोर्ट आई थी, उसके बाद हमने एकमत से निर्णय कर लिया था कि हम खुदरा व्यापार में एफडीआई नहीं लाएंगे। उस समय कांग्रेस की सोच भी यही थी। कांग्रेस नहीं चाहती थी कि खुदरा व्यापार में विदेशी निवेश आए। महाराष्ट्र के एक फेडरेशन के लोगों ने, स्टेट कमेटी के चेयरमैन ने मनमोहन सिंह जी को पत्र लिखा था। वह राज्य सभा में नेता, प्रतिपक्ष थे। उन्होंने कहा था कि ऐसा सुन रहे हैं कि एनडीए की सरकार एफडीआई लाना चाहती है। आप रोकिए। राज्य सभा में यह प्रश्न उठा था। उस समय के वित्त मंत्री ने राज्य सभा में आश्वासन दिया था और मनमोहन सिंह जी ने एक पत्र लिखकर महाराष्ट्र चैम्बर ऑफ कॉमर्स के उस ट्रेड कमेटी के अध्यक्ष को आश्वस्त किया था। वह पत्र मैं लेकर आई हूं। आपको पढ़कर सुनाना चाहती हूं। … (Interruptions) I will not yield. … (Interruptions) I will not yield. … (Interruptions) आपको मेरे बाद बोलना है तब आप बोल लीजिए। अध्यक्ष जी, मनमोहन सिंह जी ने वह पत्र लिखा- “Dear Shri Shanghvi, kindly refer to your letter of 6th December 2002, regarding FDI in retail trade. This matter was raised in the Rajya Sabha two days ago; and the Finance Minister gave an assurance that Government had no proposal to invite FDI in retail trade. With kind regards.” इन्होंने आश्वस्त किया था कि रिटेल ट्रेड में किसी तरह की कोई एफडीआई नहीं आ रही है और यह उन्होंने उस चिट्ठी को लिखकर आश्वस्त किया था क्योंकि उन्होंने इन्हें बोला था कि आप देखिए कि यह न आए। उन्होंने आश्वासन देते हुए कहा था कि आप आश्वस्त रहिए। वित्त मंत्री ने राज्य सभा में कह दिया है कि एफडीआई नहीं आएगी। केवल यही नहीं, प्रियरंजन दासमुंशी उस समय यहां के चीफ व्हिप होते थे। सोनिया जी नेता, प्रतिपक्ष थीं। वह यहां मुख्य सचेतक थे। वह इसी मुद्दे पर एक ध्यानाकर्षण प्रस्ताव लेकर आए थे। उन्होंने इस निर्णय को एंटी-नेशनल करार दिया था। यह मैं लेकर आई हूं। प्रियरंजन दासमुंशी का कॉलिंग अटैंशन लेकर आई हूं। उन्होंने क्या कहा था? मैं पढ़कर सुनाती हूं:- “I would like to draw the attention of the Government, through you, as it is alleged that the multi-national retailers through the bureaucratic circles, are continuously putting pressure on the Government to take an anti-national decision of allowing FDI in retail trade; this will perhaps destroy the entire prospect of the retail trade in the country.” वह प्रियदा आज कोलकाता के एक अस्पताल में जीवन का संघर्ष कर रहे हैं। उनकी पत्नी दीपादास मुंशी आज इनकी कैबिनेट में मंत्री हैं।
मैं माननीय प्रधान मंत्री जी से पूछना चाहती हूं कि आपके उस समय के चीफ व्हिप इसको एंटी-नेशनल कहते हैं। आप स्वयं एफडीआई का विरोध करते हैं। प्रधान मंत्री जी, क्या हो गया? आपकी सोच क्यों बदल गई?...( व्यवधान) परिस्थितियों में क्या परिवर्तन आ गया? मैं जानना चाहती हूं कि उस समय की जो कांग्रेस पार्टी इस निर्णय को राष्ट्रविरोधी निर्णय मानती थी, उस समय के नेता प्रतिपक्ष दोनों एफडीआई का विरोध कर रहे थे और हमसे कहते थे कि खुदरा व्यापार में एफडीआई मत लाना आज क्या कारण है ? आज आपकी सोच क्यों बदली है। कई बार डर लगता है कि अखबार में ऐसी रिपोर्ट पिछले दिनों आई हैं कि वॉलमार्ट ने बहुत बड़े पैमाने पर इंडिया में खुदरा व्यापार में एफडीआई लाने के लिए रिश्वत दी है।...( व्यवधान) मैं यह एशोसिएटेड प्रैस की कटिंग लाई हूं। ...( व्यवधान)
“In a Nov. 15 filing to the U.S. Securities and Exchange Commission, Wal-Mart said it was investigating potential violations of the U.S. Foreign Corrupt Practices Act in Brazil, China and India, among other markets. Wal-Mart's Mexico subsidiary is already embroiled in a public scandal over alleged payments to middlemen to speed up the store-opening process, possibly through payments to local officials.” अभी 8 दिन पहले 23 नवम्बर को इन्होंने इंडिया के सीएफओ को ससपेंड किया। मैं यह खबर लाई हूं।
Bharti Walmart has suspended five people, including CFO Pankaj Madan, as part of an on-going global investigation by the U.S. retail giant against alleged corrupt practices, sources said.” कई बार डर लगता है कि कहीं यह निर्णय भी भ्रटाचार में से तो नहीं निकला है। सीएफओ को ससपेंड किया। देखिए, उनको तो व्यापार बढ़ाना है। ग्लोबल रिसैशन चल रहा है। भारत का बड़ा बाजार उन्हें दिख रहा है इसलिए वे हर तरीका इस्तेमाल करेंगे। लेकिन मेरी शिकायत तो मेरी अपनी सरकार से है कि हम क्यों ये कर रहे हैं? वे चाहे जो करें, चाहे जो प्रयास करें, लेकिन जब हमने अपनी एक सोच बना ली कि खुदरा व्यापार में अगर विदेशी पूंजी आएगी तो 4 करोड़ लोग जो सीधे इसमें लगे हैं और 20 करोड़ लोग जो इस पर पलते हैं, वे समाप्त हो जाएंगे तो हम इस दिशा में आगे क्यों बढ़ रहे हैं? मुझे यह बात समझ नहीं आती। अभी एफडीआई के पक्ष में कांग्रेस की एक रैली हुई थी। उसमें सारे शीर्षस्थ नेता गये थे। सोनिया जी सहित सभी ने उसको संबोधित किया था। वहां, सोनिया जी ने बोलते हुए एक बात कही। उन्होंने कहा कि इस जैसी इतने कम समय में इतना विकास करने वाली सरकार क्या कोई देखी है? सोनिया जी, आपने ऐसा कहा था न? मैंने टी.वी. पर सुना था।...( व्यवधान)
श्रीमती सोनिया गांधी (रायबरेली):बिल्कुल सही बात है।...( व्यवधान)
श्रीमती सुषमा स्वराज : आपने कहा था कि इतने कम समय में इतना विकास करने वाली क्या कोई सरकार देखी है? मैं तो सुनकर हैरान रह गई कि वह बोल क्या रही हैं? मैं बताती हूं कि गलत क्या है? सन् 1952 से लेकर 2012 तक 60 वर्षों में से 50 वर्ष कांग्रेस की ही सरकार रही है।...( व्यवधान) आप चुनौती किसे दे रही थीं? मुझे समझ नहीं आया कि यह वाक्य बोलकर आप किसे दे रही थीं? आप चुनौती अपने नाना ससुर को दे रहीं थीं। आप चुनौती अपनी सासु मां को दे रहीं थीं। आप चुनौती अपने पति की सरकार को दे रहीं थीं। आप चुनौती किसको दे रही थीं?...( व्यवधान) सोनिया जी, हमारी सरकार तो मात्र 6 वर्ष रही है और गैर कांग्रेसी सरकार इस देश में दस साल से कम रही है।...( व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष महोदया, आप जानती हैं कि इस देश में गैर कांग्रेसी सरकारें तो दस साल से भी कम रही हैं। मोरारजी देसाई की सरकार ढ़ाई साल रही थी। हमारी सरकार 6 साल रही, वी.पी. सिंह जी की रही और बाकी तो सारी सरकारें आपकी थीं। नरसिम्हा राव जी की सरकार आपकी थी। लाल बहादुर शास्त्री जी की सरकार आपकी थी। पचास में से तीस साल तो नेहरू गांधी परिवार का राज्य रहा है।...( व्यवधान) आप किसको सुना रहीं थीं? आपका यह कहना कि ऐसी सरकार क्या कभी देखी है? इसका मतलब यह हुआ कि न तो इंदिरा जी की सरकार वैसी थी और न नेहरू जी की सरकार वैसी थी, न राजीव जी की सरकार वैसी थी। क्या मनमोहन सिंह जी की सरकार सबसे ऊपर हो गई?...( व्यवधान)
मैडम, अगर इस सरकार को ऐसा लगता है कि एफडीआई विकास की सीढ़ी है तो मैं इन्हें कहना चाहती हूं कि यह विकास की सीढ़ी नहीं है बल्कि यह विनाश का गड्ढा है।...( व्यवधान) मुझे समझ नहीं आता कि अचानक सरकार को हो क्या गया है? अभी पिछले शीतकालीन सत्र में इसका निर्णय करके उन्होंने हमें आश्वासन दिया है और एकदम एक वर्ष में पलट गये और अब प्रधान मंत्री साहसी वक्तव्य देते हैं। प्रधान मंत्री जी क्या कहते हैं?
“The time for big-bang reforms has come, and if we go down, we will go down fighting.” Must go down fighting, Mr. Prime Minister but fight for the poor and not for the rich. Fight for the small and not for the big; and fight for the country and not for the multinationals. मैं आपसे कहना चाहती हूं कि प्रधान मंत्री जी आप अपनों के लिए लड़िये, गैरों के लिए मत लड़िये। आप तो गैरों के लिए लड़ रहे हैं। मैं आपको विश्वास दिलाना चाहती हूं कि अगर आप अपनों के लिए लड़ेंगे तो हम आपके साथ खड़े होंगे। आपको यह लगता है कि एफडीआई का यह प्रस्ताव अगर चला जायेगा तो वर्ल्ड इनवैस्टमैन्ट सिनारियो खत्म हो जायेगा, इनवैस्टर्स आने बंद हो जायेंगे, देश की प्रतिष्ठा गिरेगी, नहीं, मैं आपसे कहना चाहती हूं कि आप चाहे जिस अंतर्राष्ट्रीय मंच पर मुझे साथ ले चलें, मैं साथ चलने को तैयार हूं। मैं वर्ल्ड़ इनवैस्टर्स समिट को यह संदेश देने को तैयार हूं कि भारत हर सैक्टर में एफडीआई के खिलाफ नहीं है, आप इंफ्रास्ट्रक्चर में आइये, पावर में आइये, पुल-पुलिया में आइये, टनल्स में आइये, पोर्ट में आइये, एयरपोर्ट में आइये। आप कहिये तो सही, मैं आपके साथ चलकर वर्ल्ड इनवैस्टमैन्ट सिनारियो को ठीक करके इनवैस्टर्स को कहने वाली हूं। प्रधान मंत्री जी, वह एक अद्भुत दृश्य होगा कि भारत जैसे विशाल देश का प्रधान मंत्री और नेता प्रतिपक्ष एक साथ इनवैस्टर्स को कह रहा होगा, आप आइये। लेकिन यह दाल, चावल बेचना हमें आता है, यह आप हम पर छोड़ दीजिए। यहां दाल, चावल बेचने आने की जरूरत नहीं है। हम यहां दाल, चावल वर्षों से बेच रहे हैं। राजस्थान का आदमी जाकर अरुणाचल प्रदेश में बेचता है, भिवानी का आदमी जाकर आसनसोल में बेच रहा है। इतनी बड़ी इस्टाब्लिश्ड सप्लाई चेन हमारे लोगों ने बना रखी है कि हमें दाल,चावल बेचने के लिए कोई तकनीक नहीं चाहिए, उसके लिए खुदरा व्यापार नहीं चाहिए, उसमें एफडीआई नहीं चाहिए। इसलिए मैं आपसे हाथ जोड़कर कहना चाहती हूं कि आप इस निर्णय पर पुनर्विचार कीजिए और मैं सच कहूं, तो मतदान के लिए मैंने प्रस्ताव रखा है, लेकिन हम आपको हराकर जीत दर्ज कराना नहीं चाहते, हम आपको मनाकर जीत दर्ज कराना चाहते हैं। आप मेरी इन बातों पर विचार करिये। इस पर मतदान कल होगा, आपको जवाब कल देना है। आप इसमें जवाब दीजिए। जो बातें मैंने रखी हैं, उन बातों को मैंने आंकड़ों के साथ पुष्ट किया है, बयानों के साथ पुष्ट किया है। कोई बात ऐसे ही हवा में नहीं कह दी है। जब पूरे विश्व में इस पर विचार हो रहा है। अमरीका जैसे देश में छोटे बिजनेस को बढ़ावा देने पर विचार हो रहा है तो हम अपने छोटे बिजनेस को खत्म करने का काम न करें। हम एफडीआई के पर से खिलाफ नहीं है, एफडीआई के एज सच खिलाफ नहीं हैं। जितनी विदेशी पूंजी आये, उन बड़े क्षेत्रों में, तकनीक के क्षेत्र में हम उसका स्वागत करेंगे। लेकिन इस खुदरा व्यापार में, छोटा आदमी, रेहड़ी वाला, पटरी वाला, छाबड़ी वाला की रोजी-रोटी मत छीनिये। मैं आपसे कहना चाहूंगी कि अगर आप निर्णय पर पुनर्विचार कर लेंगे और हम आपको मनाकर जीत जायेंगे तो हमें बहुत खुशी होगी। लेकिन अगर आप हठी होंगे, अगर आप अड़े रहेंगे और आप कहेंगे कि कोई माने या न माने, आम सहमति बने या न बने, हम तो इस दिशा में बढ़ेंगे ही तो फिर मैं अपने इन साथियों से दर्खास्त करूंगी कि इस निर्णय को वापस लेने का जो प्रस्ताव मैं लेकर आई हूं, फिर आप मतदान में इस प्रस्ताव का समर्थन करिये और इस सरकार को मजबूर करिये कि यह निर्णय वापस ले। हमारे यहां कुछ लोगों को, शायद कुछ साथियों को यह लगता है कि इससे सरकार गिर जायेगी। मैं उन्हें कहना चाहती हूं कि इससे सरकार नहीं गिरेगी। नियम 184 के प्रस्ताव के पारित हो जाने से सरकार नहीं गिरेगी, केवल एफडीआई गिरेगी, सरकार नहीं गिरेगी। इसलिए जिन्हें यह डर है कि सरकार गिर जायेगी, वह भयभीत न हों, वे अपना डर निकाल दें और यदि आप समझते हैं कि एफडीआई का गिरना देश के हित में है तो मैं हाथ जोड़कर पहले इनसे कहती हूं कि आप यह निर्णय वापस ले लें, अगर यह निर्णय वापस नहीं लेते हैं तो आप हमारे इस प्रस्ताव के साथ मतदान करिये, एफडीआई को गिराइये, देश को बचाइये।
यही कह कर मैं अपनी बात समाप्त करती हूं।
PROF. SAUGATA ROY (DUM DUM): Madam, I rise in favour of the motion moved by Smt. Sushma Swaraj and also in support of the motion for amendment moved by me and Janab Hasan Ali. It is very difficult to make a speech after Sushmaji’s beautiful speech in flowery and flowing Hindi. But still I will make an attempt.
Madam, for us, FDI is a matter of faith. FDI in multi-brand retail is something we have decided to fight tooth and nail. On 20th September, this Government took the decision to introduce 51 per cent FDI in multi-brand retail. On 21st of September, all the Ministers of Trinamool Congress, setting an example before the country, resigned from the Council of Ministers. We have shown the moral courage to oppose and take a stand. When we brought the No Confidence Motion, we knew that by ourselves we do not have the numbers. We appealed to all parties, but they did not stand with us. But you, my friend, your party, the BJP, stood with us, for which we are grateful. But still we persisted in moving the motion and that is why again I have given this motion for amendment to the rules.
Madam, FDI in multi-brand retail to the extent of 51 per cent is a step that will jeopardize the livelihood of 3.3 crores of people who are employed in the retail trade and as I will show directly and as I will show later, it will impact the lives of the farmers whom this so called reform FDI in retail is seeking to address. But before that may I give a brief chronology of the events.
One would remember that on the 22nd of July, 2011, the Committee of Secretaries took a decision to introduce FDI in multi-brand retail. On 24th November, 2011, the Union Cabinet paved the way for FDI in retail measures by allowing companies like Walmart, Tesco and Carrefour to open retail shops in India. The Winter Session of Parliament was totally stalled by the Opposition protesting against FDI in multi-brand retail. On 7th December, 2011, the then Leader of the House, Shri Pranab Mukherjee called an all Party meeting and it was agreed, as has been correctly mentioned by Smt. Sushma Swaraj, that FDI in multi-brand retail would be kept in suspension till a consensus was arrived at with all stakeholders. Now, this was on the 7th of December, 2011. What has happened in this brief interregnum? The Government’s hands were certainly forced to announce this decision.
Madam, let me give you another chronology. In September, 2009, revealed by the Hindu Wikileaks, cable series, March 18, 2011, the then Secretary of State of USA sent a cable to the US Embassy in India. She had asked, why is he, that is Shri Anand Sharma, reluctant to open multi-brand retail? Further, another cable read, `does Sharma get along with Mukherjee -- meaning Pranab Mukherjee -- and Prime Minister Singh?
It is Assange’s cable and not mine. So, it is on record. She also asked: “Why was Mukherjee chosen for the Finance portfolio over Ahluwalia?” These cables were the sparks that goaded the Government into action. Then, as I said, the Government took a decision on 24th of November. After that, we know that the Secretary of State came to India on 7th May, 2012 and one of the major agenda she had was to persuade the Government of India to agree to FDI in retail.
Madam, the next spark for action was provided by The Times Magazine in its issue dated 16th July, 2012. You can see that it is written with the photograph of our Prime Minister – The Under Achiever. There, one lady, Krista Mahr has prescribed as to what is expected of Dr. Singh. It said that industry leaders are demanding a host of bold reforms such as an end to expensive subsidies, deregulation of diesel prices and resumption of a law to allow multibrand retailers like Walmart into India. The Government originally backed down from such legislation in order to keep coalition members happy. The Government ultimately acted according to the prescription given by The Times Magazine. This was what rattled the Prime Minister so much that he acted knowing that he had coalition compulsions. Earlier he had not acted on the 2G scam citing coalition compulsions but knowing coalition compulsions, he went ahead and his Government announced FDI in retail.
The other point that I would humbly mention is about Mrs. Clinton. She was a Director on the Board of Walmart for a long time and when she was trying to become the American President in 2007-08, Walmart executives and lobbies paid for her. She was obviously interested in Walmart getting into India. But why does the Government of India have to respond to the American urgings? Madam, being from Bengal, I remember … (Interruptions) Shri Khursheed, I am not yielding. Whatever you have to say, you say later. Madam, I am not yielding.
THE MINISTER OF LAW AND JUSTICE AND MINISTER OF MINORITY AFFAIRS (SHRI SALMAN KHURSHEED): Madam Speaker, he is talking of a constitutional authority of another country. I think it is not in the national interest.… (Interruptions)
PROF. SAUGATA ROY: I just want to mention that it is mentioned under rule 352 as to what we can say and not say in this House and it does not include a reference to a dignitary of any other country. If we mention Aung Sang Suu Kyi in this House, it would not be out of order. We have shown her the respect that she deserves. So, please do not allow him. I am not yielding.
SHRI SALMAN KHURSHEED: I am on a point of order … (Interruptions) I seek your ruling in this matter. … (Interruptions)
SHRI YASHWANT SINHA : Under which rule is he raising the point of order? … (Interruptions)
श्री कल्याण बनर्जी (श्रीरामपुर):आप केजरीवाल का जवाब दीजिए।...( व्यवधान)
MADAM SPEAKER: What is your point of order?
… (Interruptions)
PROF. SAUGATA ROY : May I speak? It is a question of patriotism. I would appeal to all sections of the House, including those in the ruling benches, including Netaji of SP, who supported the bandh against FDI in retail, including the DMK which opposed the FDI in retail, whose base are the retail traders, to forget party affiliations. I am not talking of majority. In this very House wads of currency notes were displayed. We know to what depth Indian democracy can sink to. I am not concerned about that. It is a question of principle. We are from Bengal. It is in Bengal that the sun of freedom set at Plassey. Tagore has written “boniker mandando dekha dilo rajdando rupe – pohale sarbori”. They come as traders and they become rajas. That is how British behaved. Are we again seeing a repeat of that? Americans coming through Walmart and capturing the Indian market and ultimately the Indian power. This is something which we should not allow.
I would like to ask the Government, through you, as to why does the Government take a divisive decision every time immediately before an American presidential election. The Indo-US Nuclear Treaty took place before an American presidential election. This FDI retail decision took place again before the American presidential election. Where are we going? This is a country of 120 crore population with a tradition of 5,000 years. Are we selling our heads for a few pieces of silver? That is the principal question today. It is between Indian patriots and those opposed to patriotism in India.
Let me talk a little about the Walmart. There are three major companies doing retail in the world. Number one is the Walmart; number two is the Carrefour as Smt. Sushma Swaraj has mentioned; and number three is the Tesco. There are other companies also, like Marks & Spencer. But Walmart is very big. It is so big that its turn over is at least four times bigger than that of the next company. Its turn over is 421 billion US dollars. One billion dollar means 100 crores. So, imagine how much it is. It is 4,21,000 crore dollars. That is its turn over.
Whom are we bringing into India? We are bringing in Walmart which makes a profit of 20,000 dollars every minute. We are bringing in Walmart which sources 82 per cent of its products from China. Shrimati Sushma Swaraj correctly said that bringing in Walmart either helps the Americans or the Chinese. It will not help the Indians. Who is the Prime Minister trying to help? We must realise that this is the question which is upper most in all our minds. Walmart has already entered through the backdoor with Bharti Retail. It is operating in 13 wholesale stores in four States of India.
They say that there are safeguards. What are the safeguards? They will open only in cities with a population of one million or above; that they will source thirty per cent of their products from the SME sector; that they will bring in a capital of 100 million; and that they will spend fifty per cent of their investment in backend operations here.
What did the Parliamentary Standing Committee on Commerce say in June, 2009 on the retail sector? They studied the whole question and gave a very good Report. They said, one, that FDI-driven retailing would be labour displacing. The growth of labour in manufacturing is insufficient to absorb the labour that would be displaced. Two, the global retail chain with deep pockets would sustain losses for many years till their competitors were wiped out. The pricing strategy of large retailers would drive out small retailers resulting in job loss. For a few years, they will sell at low price and then they will sell at high price when their competitors are eliminated. This is the standard Walmart strategy. Three, once the monopoly of global retail chains were stabilised, they would buy cheap and sell dear and disintegrate the established supply chain by controlling both ends of the chain. Lastly, this does not help GDP. Retailing being an intermediate value-added process cannot boost the GDP by itself. So, why are you bringing in FDI in retail?
The hon. Commerce Minister was commenting outside the House that foreign investment will not come in, otherwise. If I may ask how much foreign investment, Mr. Commerce Minister, do you get. About three billion dollars you would get over five years. India has, in any way, 20 billion dollars of foreign investment every year from 2006 to 2009. Three billion dollar is what is traded by the Reserve Bank in foreign exchange market every day. For that, you are going to lead so many small retailers to death? For whom is it meant? … (Interruptions)They say as you sold your head for thirty pieces of silver, we are selling the country for 30 pieces of silver to Walmart! Mrs. Clinton does not matter. She was a Director in Walmart. But why are our people so much concerned about it?… (Interruptions)
SHRI GURUDAS DASGUPTA : Please do not say about Mrs. Clinton. Shri Khursheed is very much sensitive to that name.
PROF. SAUGATA ROY : I say it is the Secretary of State. Yes, I can understand his sensitivity.… (Interruptions)
SHRI GURUDAS DASGUPTA : I am telling what you were saying. You objected to name the President; you objected to the mentioning of the name of that person. This only shows how vulnerable you are to the American President!… (Interruptions)
अध्यक्ष महोदया : आप क्यों खड़े हो गए गुरूदास दासगुप्ता जी। कृपया करके बैठ जाइए।
…( व्यवधान)
MADAM SPEAKER: Nothing will go on record.
(Interruptions) *… PROF. SAUGATA ROY : Madam, I am not bothered about Shri Khursheed’s sensitivity. He is sensitive to two names – positively, about Mrs. Clinton and negatively about Arvind Kejriwal. These are the two names about which he would react. I am helpless in this matter.
Madam, what happened in the United States, leave alone the other countries. The entry of Walmart led to the closure of 40,000 US factories. Shrimati Sushma Swaraj was mentioning that this has an effect on the American Industry also because Walmart is importing from China - You may listen to this - between 2001 and 2007, throwing millions of people out of their jobs. In these years, imports from China rose from nine billion dollars to 27 billion dollars. It means, it has tripled. What does that mean? Wherever they get cheap, they will buy from there. If necessary, they will close down the factories in their own country. Between 1992 and 2007, the number of independent retailers fell by 60,000 in America. Now, I want to ask the Commerce Minister, through you, Madam, this question. Have they done any study on the impact of FDI in retail?… (Interruptions) Yes, you have done only two studies – one is in the Mid-Term Appraisal of the Tenth Plan. Now, who is the Deputy Chairman of the Planning Commission?… (Interruptions)
MADAM SPEAKER: Prof. Roy, your time is up. Please conclude.
PROF. SAUGATA ROY: I am not mentioning anybody. Who is the Deputy Chairman of the Planning Commission?… (Interruptions)
MADAM SPEAKER: Your time is up. You have another Member also from your Party – Shri Kalyan Banerjee – to speak.
प्रो. सौगत राय : हम इसके लिए मंत्री पद छोड़ दिया। थोड़ा टाइम दीजिए, थोड़ा रहम कीजिए।...( व्यवधान) Madam, just give me two minutes.
MADAM SPEAKER: Please conclude in a little while.
PROF. SAUGATA ROY: In two minutes, I will wind up.
अध्यक्ष महोदया : आपको टाइम पहले ही दे दिया है।
PROF. SAUGATA ROY : What I was saying was this. You know who the Deputy Chairman of the Planning Commission is. They have said in their Mid-Term Appraisal this thing.
16.00 hrs FDI in retail would be good for the country, the Ministry made a study by ICRIER – Indian Council for Research and International Economic Relations. Who is it headed by? One Economist named - Dr.Isher Judge Ahluwalia. You know the name. Who is she related to? I do not want to mention. This is the same story. This is the same school; this is the World Bank, IMF school, who plans to sell the country down the drain. We want to say that the growth of Wal-Mart has resulted in decreased wages; shrinking middle class and increase in working poor. Wal-Mart faced allegations of bribery that helped it to set up store much ahead of its competitors in Mexico. Wal-Mart contributes to poverty, which could prove costly in India. Will Wal-Mart help farmers? I heard Congressmen say on television – this is for the sake of farmers. You see a supermarket anywhere. How much space in a supermarket is occupied by fruits and vegetables? Five to 10 per cent. … (Interruptions)
MADAM SPEAKER: Please take your seat.
… (Interruptions)
MADAM SPEAKER: What is it? Nothing will go on record.
(Interruptions)* … PROF. SAUGATA ROY : I said, I can understand Shri Chowdhury’s anxiety. … (Interruptions) He was recently made a Minister. … (Interruptions) Also, Shri Chowdhury is enthusiastic. I appreciate his enthusiasm but not his point. … (Interruptions)
MADAM SPEAKER: Please take your seats.
… (Interruptions)
PROF. SAUGATA : He is saying that States can determine if they will issue licenses under the Shops and Establishments Act to multi-national retailers. This is in conflict with national treatment. If a license is denied, it can be challenged under Bilateral Investment Promotion and Protection Agreement (BIPA). This is a news. …..… (Interruptions)
MADAM SPEAKER: What is it happening?
… (Interruptions)
PROF. SAUGATA ROY: Let me conclude. … (Interruptions)
MADAM SPEAKER: Kindly conclude now.
PROF. SAUGATA ROY : Madam, to legitimise the entry of multi-nationals in retail, the Government is saying that lot of storage facilities for agricultural produce will be created. Is it not the responsibility of the Government to either create the storage capacity on its own or encourage the private sector to create this by way of subsidies? The Government, having failed miserably, has no right to penalise the small retailers for no fault of theirs.
अध्यक्ष महोदया: अब आप समाप्त करिए।
...( व्यवधान)
PROF. SAUGATA ROY : He has got the store houses.… (Interruptions) Now, in case of … (Interruptions) Is this any logic? I want to know.
Again I want to say that the Commerce Minister is engaging in double speak. He is saying that 30 per cent sourcing will be done from Indian SMEs. It is a political gimmick designed to assuage the feelings of those opposed to FDI in retail which is unlikely to stand scrutiny if foreign retailers challenge it. Such a clause cannot be enforced under the WTO and various Free Trade Agreement obligations. Under the FTAs, the Government has to provide the foreign investor the same treatment that it gives to an Indian manufacturer. Since there is no such procurement clause binding on an Indian retailer, it cannot be imposed on foreign retailers. The Commerce Minister knows that, but he is hiding the fact.
Madam, what they are saying that this is for farmers’ benefit is a ruse. The hyper markets only sell manufactured goods and only 5 to 10 per cent space is given for fruits and vegetables. So, the farmers will receive no benefit. They are saying that they are not going to set up these stores in rural India and only in cities they will be there. … (Interruptions)
Madam, all I want to say is that today the future livelihood of 3.3 crore retail traders, who are not parasites to the society, is at stake. If Wal-Mart comes in, the kirana shop, the neighbourhood friendly kirana shop, who knows you by face, who gives you credit, will close down. The farmers will not benefit. India’s money will go abroad to Wal-Mart; maybe (Interruptions) … (Not recorded) get her share. We will not benefit. … (Interruptions)
THE MINISTER OF COMMUNICATIONS AND INFORMATION TECHNOLOGY (SHRI KAPIL SIBAL): Madam, this cannot go on record.
MADAM SPEAKER: Okay, I will delete it.
… (Interruptions)
MADAM SPEAKER: Please take your seat. Nothing else will go on record. You have concluded. Thank you so much.
(Interruptions)* … MADAM SPEAKER: Hon. Members, under Rule 353, no allegation of defamatory or incriminatory nature shall be made by a Member against any person unless the Member has given adequate advance notice.
… (Interruptions)
अध्यक्ष महोदया: आप बैठ जाइए।
…( व्यवधान)
PROF. SAUGATA ROY : Madam, I have already spoken. To whom should I give? … (Interruptions)
MADAM SPEAKER: Not to anyone else, but to me. The notice has to be given to the Speaker and also to the Minister concerned. I will call for the proceedings of the speech that you have made just now and if it attracts the provision of Rule 353 and if there are allegations, that would be expunged.
… (Interruptions)
MADAM SPEAKER: I am saying something. Please take your seat now.
… (Interruptions)
MADAM SPEAKER: I am saying that I will call for the records of the proceedings.
…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया: आप बैठ जाइए, बैठ कर सुनिए।
…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया: आप क्यों बोल रहे हैं? आप फिर क्यों बोलने लगे? संजय निरूपम जी, आप क्यों बोल रहे हैं? I am in the middle of this.
श्री संजय निरुपम (मुम्बई उत्तर): इनको भी समझाना है।
अध्यक्ष महोदया : हां, समझा रही हूं। एक नियम 353 है। उस नियम के तहत अगर आपने कुछ भी ऐसा कहा है, जो उस नियम के हिसाब से आपत्तिजनक है तो मैं उसकी प्रोसीडिंग्स मंगाकर देखूंगी और एग्जामिन करूंगी और अगर आपने वह वैसा कहा है तो उसके बाद मैं उसको एक्सपंज कर दूंगी। यह मैं आपको बताना चाहती हूं।
…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : अब आपकी बात हो गई।
…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : अब आप क्या बोल रहे हैं?
PROF. SAUGATA ROY : Madam, just give me one minute....( व्यवधान)
MADAM SPEAKER: Shri Hassan Khan will speak now.
… (Interruptions)
PROF. SAUGATA ROY: I have not concluded, Madam. Please give me one minute.
Madam, it is like the argument in the colonial context that since imported manufactured goods were of superior quality and benefit the consumers, above numerous peasants, destroyed the livelihoods of millions of artisans and weavers should not be held against the policy that freely allows such imports.
The argument for FDI is a precise recreation of the discourse of colonialism. Now, the countries which have allowed FDI in retail, like, Thailand, Chile, Argentina, Nicaragua, have realised the bad affects of FDI in retail. When you know, when you have the whole world to see just for the tickling of middle-class families to say that we go to our Wal Mart Shop in Delhi, do not destroy the lives of the poor kirana shop owners. Do not do that to the poor handcart puller who carries the material to the shop.
Madam, that is why, I am saying that the retail business in India has stood the test of time. It should not be destroyed and if they choose to destroy it by this step, history will never forgive them. With these words, I conclude. Thank you… (Interruptions)
SHRI HASSAN KHAN (LADAKH): Madam, I have moved the resolution for omission and modification in the Notification of FEMA tabled in the Lok Sabha on 30 November, 2010. I want that the House may consider and discuss on the motion and suggest its omissions. If I get satisfied and if the arguments are justified, I may not insist for voting, otherwise, let it go as per rules.
श्री कपिल सिब्बल: मैडम स्पीकर, सबसे पहले तो मैं आपका आभारी हूं, अपने प्रधानमंत्री जी का और यू.पी.ए. की चेयरपर्सन का आभारी हूं कि आपने मुझे इस विषय पर चर्चा करने का मौका दिया।
हम भावुक होकर भाषण तो बड़े जोर-शोर से कर सकते हैं, लेकिन जमीनी स्थिति क्या है, वास्तविकता क्या है, उसको समझने की जरूरत है।...( व्यवधान) मैं आपको आहिस्ता-आहिस्ता समझाऊंगा। मैडम, पहले तो यह समझना है कि सरकार की नीति क्या है और सरकार ने यह निर्णय क्यों लिया, कैसे लिया और किन चीजों को सामने रखकर लिया। सबसे पहले तो आखिरी निर्णय यह हुआ कि हिन्दुस्तान के केवल उन शहरों पर मल्टी ब्राण्ड रिटेल एफ.डी.आई. लागू होगी, जहां की जनसंख्या 10 लाख से ज्यादा हो। अगर आप आंकड़े देखें तो हिन्दुस्तान में 53 ऐसे शहर हैं, जहां जनसंख्या 10 लाख से ज्यादा है तो अगर एफ.डी.आई. मल्टी ब्राण्ड रिटेल लागू होगी तो केवल 53 शहरों में हो सकती है। उसके बाद हमें ऐसा लगा कि कुछ ऐसे प्रदेश हैं, जहां विपक्ष की सत्ता है, उनके मुख्यमंत्रियों ने यह जाहिर किया कि वहां वे मल्टी ब्रांड रिटेल नहीं लाना चाहते हैं। कुछ ऐसे प्रदेश हैं, जहां यूपीए सरकार है, कांग्रेस की सरकार है, दूसरे भी हैं, वहां मुख्यमंत्री कहते हैं कि हम एफडीआई मल्टी ब्रांड रिटेल को यहां लागू करना चाहते हैं, वह हैं आंध्र प्रदेश, असम, दिल्ली, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, महाराष्ट्र, मणिपुर, राजस्थान, उत्तराखंड, दमन दीव, दादरा नागर हवेली और पंजाब। ...( व्यवधान) अगर उन सारे शहरों को हम अलग कर दें, जहां प्रदेश नहीं चाहते हैं, उनकी संख्या करें कि यह कितने शहरों में यह हो सकता है, तो 53 भी नहीं, 18 ही रह जाएंगे। इस नीति के आधार पर अगर कोई प्रदेश चाहता है कि हम इसे लागू नहीं करेंगे, तो मत लागू करें, क्योंकि यह तो एक एनेबलिंग पॉलिसी डिसीजन है। ...( व्यवधान) अगर यह लागू होना है, तो केवल 18 शहरों में लागू होगा। ...( व्यवधान) अगर 18 शहरों में लागू होगा, तो हिंदुस्तान बिक जाएगा, हम सब कुछ अमेरिका को बेच देंगे, वॉलमार्ट हिंदुस्तान पर कब्जा कर लेगा, मैं समझता हूं कि यह बढ़ा-चढ़ाकर बात हो रही है। यह जो चर्चा हो रही है, मुझे तो इस बात की समझ नहीं है कि यह चर्चा क्यों हो रही है? ...( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : बस हो गया, अब शांत हो जाइए।
…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : शांत रहिए।
…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : आप क्या कर रहे हैं?
…( व्यवधान)
श्री कपिल सिब्बल : अगर आप अपने प्रदेशों में चाहते हैं कि एफडीआई मल्टीब्रांड लागू नहीं हो, तो मत लागू करो। यह आपका निर्णय है। हम किसी विधान सभा को नहीं कह सकते हैं कि आप जरूर लागू करें। यह तो फेडरल सिस्टम है, फेडरल स्ट्रक्चर है, लेकिन अगर आप चाहो कि उन प्रदेशों में जहां के मुख्यमंत्री कहते हैं कि हम लागू करना चाहते हैं, वहां आप कैसे विरोध कर सकते हैं? यह एक नया नियम पैदा हुआ है। एक नया डेफीनिशन ऑफ ट्रिब्यूनल स्ट्रक्चर है कि एक प्रदेश दूसरे प्रदेश को कहेगा कि मैं तो यहां लागू नहीं करूंगा, लेकिन तुम्हें भी लागू नहीं करने दूंगा। ...( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : आप सुन लीजिए, उनको अपनी बात कहने दीजिए। आप बैठ जाइए।
…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : आप उनकी बात सुनिए।
…( व्यवधान)
श्री कपिल सिब्बल : यह कौन सी सांविधानिक बात है? ...( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : शांत हो जाइए।
…( व्यवधान)
श्री कपिल सिब्बल : हम तो डूबेंगे सनम, लेकिन तुमको भी डूबकर ले जाएंगे। ...( व्यवधान) यह कौन सी राजनीति है? मुझे आज तक यह बात समझ नहीं आयी, अगर आप नहीं चाहते तो मत लागू कीजिए और जहां मुख्यमंत्री चाहते हैं, उनको लागू करने दीजिए। इस डिबेट का मतलब क्या है? यह अनुमति तो हमने आपको दी है, यह अधिकार तो आपकी विधान सभा को हमने दिया है, आपके मुख्यमंत्री को दिया है। अगर उत्तर प्रदेश में नहीं लागू करना चाहते हैं तो मत लागू करें। ...( व्यवधान)
श्री शैलेन्द्र कुमार (कौशाम्बी):हम नहीं करेंगे।
श्री कपिल सिब्बल : ठीक है, हम मानते हैं। ...( व्यवधान) यही हमारी नीति है। केरल में हमारी अपनी सरकार है। उन्होंने कहा कि हम नहीं लागू करते। ...( व्यवधान) हमने कहा कि ठीक है, मत लागू करिए। ...( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : आप उनकी बात सुनिए।
…( व्यवधान)
श्री कपिल सिब्बल : लेकिन जहां मुख्यमंत्री लागू करना चाहते हैं, आपका क्या सांविधानिक हक है कि आप उसका विरोध करें। ...( व्यवधान) यह तो हो गयी मूल बात, मैं समझता हूं कि इस चर्चा की जरूरत नहीं थी, यह केवल एक राजनीतिक दृष्टिकोण की वजह से हो रहा है। ...( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : आप शांत हो जाइए। विजया जी, आप क्यों खड़ी हो गयीं?
…( व्यवधान)
SHRI KAMAL NATH: Madam Speaker, I want to appeal, through you, to the Leader of the Opposition, Sushmaji… (Interruptions) She is herself chatting.… (Interruptions)
अध्यक्ष महोदया : बैठ जाइए। निशिकांत जी बैठ जाइए।
…( व्यवधान)
SHRI KAMAL NATH: Madam, I want to appeal, through you, to the Leader of the Opposition that please let this debate go on the way it is meant to go on. Otherwise, this will start a precedence that when they speak, nobody from here will let them speak. So I appeal to the Leader of the Opposition, through the Speaker, to please control her Members.… (Interruptions)
अध्यक्ष महोदया : आप सभी बैठ जाइए।
…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : डिबेट कैसे होगी? आप सभी बैठ जाइए।
…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : आप क्यों खड़े हो गए? आप बैठ जाइए।
…( व्यवधान)
श्री कपिल सिब्बल : मैडम, हमारी मूल नीति क्या है? मूल नीति यह है कि हमने यह निर्णय...( व्यवधान)
MADAM SPEAKER: What is this?
… (Interruptions)
MADAM SPEAKER: We would not proceed with the debate. What is the point?
… (Interruptions)
अध्यक्ष महोदया : किसी का जवाब नहीं देना है। आप शांति से बैठिए।
…( व्यवधान)
MADAM SPEAKER: Let us go on with the debate.
… (Interruptions)
श्री कपिल सिब्बल : कोई भी मल्टी ब्रांड रिटेल में आना चाहता है तो उसको सबसे पहले 100 मिलियन डालर निवेश करना पड़ेगा। ...( व्यवधान)
MADAM SPEAKER: Let us have the debate.
… (Interruptions)
अध्यक्ष महोदया : आप सभी बैठ जाइए।
...( व्यवधान)
MADAM SPEAKER: Nothing will go in record.
(Interruptions)* … MADAM SPEAKER: Please sit down.
(Interruptions)*… श्री कपिल सिब्बल : सबसे पहले उसे 100 मिलियन डालर निवेश करना पड़ेगा। उसमें से 50 प्रतिशत, 50 मिलियन डालर बैक एंड इंफ्रास्ट्रक्चर में इंवेस्ट करना पड़ेंगा?...( व्यवधान) इसका क्या मतलब हुआ? Post harvesting, food processing, warehousing, inventory management, farmer support system and competitive dynamics to benefit consumers, farmers, processors and suppliers.
अध्यक्ष महोदया : यह निर्बाध चल रही है।
…( व्यवधान)
श्री कपिल सिब्बल : 50 मिलियन डालर बैक एंड इंफ्रास्ट्रक्चर में इसको इंवेस्ट करना पड़ेगा।...( व्यवधान) और साथ-साथ में यह भी तय है कि जो 50 मिलियन डालर है उसको तीन साल में इन्वेस्ट करना पड़ेगा। ...( व्यवधान) जब से उसको अनुमति मिलती है उसके तीन साल तक उसे 50 मिलियन डालर उसको इन्वेस्ट करना पड़ेगा, तभी वह अपनी रिटेल चला सकता है। ...( व्यवधान) यह तीसरी बात है।
चौथी बात यह है कि जो वह मैन्यूफैक्चर की चीज बेचेगा, उसका जो सोर्सिंग है - तीस प्रतिशत एमएसएमई सेक्टर से आएगा। इसका मतलब है कि वह जब तक तीस प्रतिशत मैन्यूफैक्चरिंग प्रोडक्ट एमएसएमई सेक्टर से सोर्स नहीं करेगा तब वह नीति का उल्लंघन करेगा। ...( व्यवधान) और एफआईपीबी अप्रूवल नहीं मिलेगा। ...( व्यवधान) यह है नीति। ...( व्यवधान) वालमार्ट की बात बढ़ा-चढ़ा कर हो रही थी। इस पर मैं ज्यादा चर्चा नहीं करूंगा क्योंकि सुषमा जी को आंकड़ ज्यादा मालूम हैं। ...( व्यवधान) मैं उनको एक आंकड़ा बताना चाहता हूं। जब चीन ने वर्ष 1992 में एफडीआई सेक्टर को ओपन किया। इसे पहले छः प्रान्तों में और साथ-साथ स्पेशल इकोनॉमी जोन में ओपन किया और वालमार्ट जब आया तो पहली बार, पहले वर्ष उसका प्रॉफिट वर्ष 2008 में आया। वर्ष 2008 तक वह घाटे में चल रहा था। यह आंकड़ा है। ...( व्यवधान) यह मैं आपको बता सकता हूं। ...( व्यवधान)
दूसरी बात, मैं आज की स्थिति बताता हूं। ...( व्यवधान) इनका एफडीआई इन रिटेल 100 प्रतिशत है। I am reading from Forbes – International Retailers Struggle In China.
It says:
“Even the two earliest entrants into China’s retailing industry, Wal-Mart Stores Inc. and Carrefour, are struggling to make their business models work in the country.” वॉलमार्ट चाइना में फेल हो गया, वर्लपूल भी फेल हो गया और आप कहते हैं कि वॉलमार्ट ने सबको खरीद लिया।...( व्यवधान)
श्री अनुराग सिंह ठाकुर (हमीरपुर, हि.प्र.): करोड़ों रुपये दे देते हैं और अब नाटक कर रहे हैं। ...( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : आप क्यों खड़े हो गए।
…( व्यवधान)
MADAM SPEAKER: Nothing will go on record except what Shri Kapil Sibal says.
(Interruptions) … * अध्यक्ष महोदया : आप बैठिए।
…( व्यवधान)
श्री कपिल सिब्बल : जब सुषमा जी अपना भाषण दे रही थीं, उन्होंने एक प्लानिंग कमीशन की रिपोर्ट का वर्णन किया तो मैंने उनसे पूछा कि उसकी डेट बता दीजिए। उन्होंने डेट नहीं बताई। शायद इसलिए नहीं बताई क्योंकि अगर डेट बता देतीं तो पता चल जाता कि बीजेपी का निर्णय था कि एफडीआई में रिटेल होना चाहिए।...( व्यवधान) मैं उसके बारे में बताऊंगा। मई 14, 2002 में एक जीओएम बैठा। The then Minister of Commerce, Shri Murasoli Maran, prepared a Note for that GoM. I will just read what that Note says. It says:
“1. Huge capital infusion by foreign investors, as modern organized retail business involves substantial investments in real estate, storage and transport logistics, IT applications, marketing and merchandising, etc., and, therefore, FDI multi-brand retail should be allowed.
2. A direct fallout of huge FDI in this sector would be employment generation …. ” बिल्कुल इनके विरुद्ध जो यह कह रही हैं।
“2. A direct fallout of huge FDI in this sector would be employment generation both direct and indirect. Notwithstanding the capital intensity of modern retail business, it also continues to be labour intensive.
3. Enhancement of productivity and efficiency gains through introduction of modern technology and management skills, compression of distribution chain and adoption of global best practices.
4. A direct fallout of higher productivity would be lower prices of goods, which would directly benefit consumers.
5. Lower prices and marketing skills would stimulate demand and consumer spending.
6. A strong FDI presence in the retail sector would act as a driving force in attracting FDI in upstream activities as well, especially in food processing and packing industries. They also motive their worldwide suppliers to set up business in the new location to maximize the advantages of localization in terms of production costs.” इसके बाद क्या हुआ। बीजेपी ने वर्ष 2004 में अपने मैनिफैस्टो में क्या कहा, मैं उसके बारे में कहना चाहता हूं।...( व्यवधान)I am reading the Vision Document. It says:
“Trade and Commerce: Organized retail trade on the international pattern will be promoted as a new engine of growth for trade and employment through appropriate legal and fiscal measures. 26 per cent FDI in retailing will be allowed. Sourcing of Indian products by foreign retail chains would be encouraged. ” It is your document. Own up your document. … (Interruptions)
तभी मैंने सुषमा जी से उस प्लानिंग कमीशन की तारीख मांगी थी, क्योंकि यह तारीख वर्ष 2004 से पहले की है। इन्होंने फिर भी अपना इरादा बदल दिया। प्लानिंग कमीशन की रिपोर्ट के बाद भी इरादा बदल दिया क्योंकि इनके विजन डौक्यूमैंट में यह बात लिखी गई।...( व्यवधान)
अभी जसवंत सिंह जी यहां बैठे हुए थे। जसवंत सिंह जी ने इसके बारे में क्या कहा। अप्रैल 12, 2004 में कहा: “It is a part of our Agenda and we are committed to it.” आज कुछ और कह रहे हैं। फिर उन्होंने कहा। जो बात हो रही है कि हमारी डोमैस्टिक सप्लाई चेन सब खत्म हो जाएंगी, सब टेक ओवर हो जाएगा। जसवंत सिंह जी से जब यह सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा:
“Many said that Kentucky (KFC) will drive the dhabas out of the market. The dhabas have driven out Kentucky. The Indian sherbat is still there despite Coca Cola and Pepsi. Don't underestimate India. Our experience is that the Indian brand has great strength.” वर्ष 2004 में आपने यह निर्णय लिया। फिर आपने इरादा बदल दिया। जब इंडिया शाइनिंग कैम्पेन नतीजा आपके सामने आया तो आपने इरादा बदल दिया। आपने सोचा कि इससे सत्ता में वे लोग आये, हम तो आये ही नहीं, इसलिए बेहतर होगा कि हम अपना इरादा बदल दें। आपका इरादा क्या था, वह भी मैं पढ़ देता हूं। मैं आपका वर्ष 2009 का मैनिफेस्टो भी पढ़ देता हूं कि उसमें आप क्या कहते हैं?
“The BJP understands the critical importance of retail trade in the context of employment and services provided by them, and thus favours a dominant role for the unincorporated sector in retail trade. Towards this end, it will not allow foreign investment in the retail sector. After agriculture, the retail sector is the largest employer of nearly four crore people.” So, you have said that you favour a dominant role of unincorporated sector in retail trade and allow foreign investment in the unincorporated sector. वह फॉरेन इन्वेस्टमैंट कहां से आयेगी? फॉरेन इन्वेस्टमैंट अनइनकोरपोरेटिड सैक्टर में कैसे आयेगी, यह हमें बता दीजिए। कौन से इंडीविजुअल में इन्वेस्टमैंट आयेगी, मुझे बताइये। ...( व्यवधान) अभी तक तो बताया नहीं, आठ साल बीत गये। ...( व्यवधान) आठ साल बीत गये, आपने यह नहीं बताया कि कैसे अनइनकोरपोरेटिड सैक्टर में फॉरेन इन्वेस्टमैंट आयेगा। ...( व्यवधान) कौन सा अनइनकोरपोरेटिड सैक्टर गांव में इन्वेस्ट करेगा, एग्रीकल्चर में इन्वेस्ट करेगा, स्मॉल स्केल सैक्टर इंडस्ट्री में इन्वेस्ट करेगा? उनके पास तो पैसा ही नहीं रहता। कैपिटल कहां से आयेगा? बैंक्स से लोन कहां से मिलेगा? हमारा एमएसएमई सैक्टर आज बैंक्स से लोन ले नहीं सकता। क्रेडिट तो मिलता नहीं है और फॉरेन इन्वेस्टर्स वहां आकर उनको पैसा देगा। मैं आपसे पूछना चाहता हूं कि जब आपने वर्ष 2004 में निर्णय लिया और वर्ष 2009 में बदला, आप बताइये कि क्यों बदला, कैसे बदला और किस वजह से बदला? ...( व्यवधान) आठ साल हो गये, आपने आज तक नहीं बताया। ...( व्यवधान) मैं आपको एक बड़ी ...( व्यवधान) फिर चिली, अर्जेंटीना, चाइना, थाईलैंड आदि बाहर के देशों की बात हो रही है। हम कोलकाता, वैस्ट बंगाल की बात करते हैं। असलियत तो पता चल जायेगी ...( व्यवधान) वैस्ट बंगाल की बात करते हैं। आज के दिन वैस्ट बंगाल में क्या हो रहा है? ...( व्यवधान) आपको मालूम है कि वैस्ट बंगाल में पेप्सिको कम्पनी किसानों से आलू खरीदती है। वहां क्या हो रहा है? जब सीपीएम थी तब शुरू हुआ था। वर्ष 2010 में प्रोक्योरमैंट 22 हजार मीट्रिक टन था जो आज वर्ष 2012 में 69 हजार मीट्रिक टन हो गया है, यानी दो साल में। जो किसान ...( व्यवधान) और यह प्री एग्रीड प्राइज पर होता है। पेप्सिको किसान के साथ तय कर लेती है कि कौन सी प्राइज पर उसे लेना है। ...( व्यवधान) कांट्रैक्ट सामी नहीं, प्री एग्रीड प्राइसिंग है। आप गलत कह रहे हैं। ...( व्यवधान) It is not contract farming; you are wrong. उसमें क्या हुआ? पेप्सिको का पहले 1800 फार्मर्स के साथ समझौता था लेकिन अब 10 हजार फार्मर्स हो गये हैं। वर्ष 2008 में 1800 फार्मर्स थे लेकिन अब 10 हजार फार्मर्स के साथ उनका समझौता है। जो टोटल एरिया अंडर कल्टीवेशन था, वह वर्ष 2011 में 5 हजार 500 एकड़ था, आज वह 7 हजार एकड़ है। इसका मतलब यह है कि आप वैस्ट बंगाल में वही काम कर रहे हैं जिसका आज यहां विरोध कर रहे हैं। ...( व्यवधान) वैस्ट बंगाल में आप वही काम कर रहे हैं जिसका य़हां विरोध कर रहे हैं। ...( व्यवधान) मैं बताता हूं। रिटेल की भी बात करता हूं। रिटेल बिग बाजार, रिलायंस रिटेल मेट्रो कैश एंड कैरी की भी बात करता हूं। वे आंकड़े भी मेरे पास हैं। मैं आपको मेट्रो कैश एंड कैरी की बात करता हूं।
Metro Cash & Carry says:
“Our partnership with farmers ensures they find a wider market for their fresh produce through collection centres located close to their farms. Farmers benefit from reduced transportation costs, extensive training opportunities and a reliable and transparent electronic payment system.” ताकि किसान को उसी वक्त पैसा मिलता है जब वह चाहता है, जब उसकी जरूरत होती है। वह बाहर मनी लेंडर के पास नहीं जाता जिसकी यहां चर्चा हो रही थी। पहली बार हिन्दुस्तान के इतिहास में एक विपक्ष की नेता ने मनी लेंडर के पक्ष में बात की। ...( व्यवधान)
श्रीमती सुषमा स्वराज : अध्यक्ष महोदया, मैंने आढ़ती की बात की, साहूकार की बात नहीं की। । ...( व्यवधान) आप गलत बयानी मत कीजिए। ...( व्यवधान)
श्री कपिल सिब्बल: मुझे इस बात को कहते हुए बड़ा दुख होता है। ...( व्यवधान) आपने कहा कि वह बेचारा कहां जाये, वह तो मनी लेंडर के पास जाता है। ...( व्यवधान) मनीलेंडर एटीएम हो गया किसान का, यह आपने कहा है।...( व्यवधान)
श्रीमती सुषमा स्वराज :मैंने साहूकार की बात ही नहीं की, मैंने आढ़ती की बात की, जो अनाज बेचता है। आपको साहूकार और आढ़ती का अंतर ही नहीं पता है।...( व्यवधान)
श्री कपिल सिब्बल: फिर हम दाम की बात करते हैं। जो दाम किसान को एक किलो आलू के लिए बाजार में दाम तीन रुपये मिलता है और उसे पेप्सीको 5.75 रुपये देती है। बाजार में तीन रुपये और यहां लगभग छः रुपये मिलते हैं। वर्ष 2010-11 में बाजार में 3.80 पैसे से पांच रुपये तक दाम था और यहां पर छः रुपये मिलते थे। इस तरह किसान को पैसा ज्यादा मिलता है, टाइम पर पैसा मिलता है। आम किसान क्या करता है, यह मैं आपको बताता हूं।...( व्यवधान) आम किसान की हालत यह है कि उसे पता नहीं है कि मुझे कब मार्केट जाना है। उसको पता नहीं है कि मैं कब बेचूंगा और जो वह बोता है, उसका 35 से 40 प्रतिशत खराब हो जाता है। ...( व्यवधान) We are the second largest fruit and vegetable producer in the world. … (Interruptions) We are the second largest producer of fruits and vegetables in the world. We produce more than 200 million tonnes of fruits and vegetables, and imagine 35-40 per cent of those fruits and vegetables get wasted, which means something like 80 million tonnes and calculate the value of those 80 million tonnes. Out of 200 million tonnes, 80 million tonnes get wasted. Calculate the value of those 80 million tonnes. It comes to thousands of crores.… (Interruptions)
MADAM SPEAKER: Please sit down. Nothing will go on record.
(Interruptions)* … SHRI KAPIL SIBAL: What is the purpose of this policy? The farmer should get a higher price than he gets in the market, in the mandi. The farmers should get a higher price.… (Interruptions)
MADAM SPEAKER: Please take your seat. What is this going on? Please sit down.
… (Interruptions)
MADAM SPEAKER: Please sit down.
श्री कपिल सिब्बल: किसान को, जो वह बोता है, उसका दाम अच्छा मिलना चाहिए। अब यह साबित हो गया है कि वेस्ट बंगाल में उसको मार्केट प्राइस ज्यादा मिलता है। दूसरी बात यह है कि जब किसान बोता है और बेचने जाता है, तो उसके पास मार्केट नहीं है, उसे मालूम नहीं है कि किस मार्केट में जाना है। अगर वह मंडी में बेचने जाता है, तो उसका 35 से 40 प्रतिशत सामान खराब हो जाता है और इस बीच में आठ लोग कमीशन एजेंट्स होते हैं, बिचौलिए होते हैं।...( व्यवधान) ऐसी स्टडीज की गयी हैं और मेरे पास आंकड़े हैं कि बेचारे किसान को 15 से 17 प्रतिशत पैसा ही मिलता है। ...( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : आप लोग बैठ जाइए।
…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : गणेश सिंह जी, आप बैठ जाइए। Nothing will go on record.
(Interruptions)* … MADAM SPEAKER: Please sit down. Nothing will go on record.
(Interruptions) *… श्री कपिल सिब्बल: किसान का जो माल मार्केट में बिकता है, उसका केवल 15 से 17 प्रतिशत किसान को मिलता है, बाकी पैसा बिचौलियों को चला जाता है। विपक्ष के नेता और विपक्षी दलों को यह तय करना है कि वे किसान के साथ हैं या बिचौलियों के साथ हैं। ...( व्यवधान) यह आप तय कर लीजिए। हमारी पार्टी किसान के साथ है, उपभोक्ता के साथ है, एमएसएमई सेक्टर के उद्योगों के साथ है, जो युवा लोग हैं, जिनको इसके द्वारा नौकरियां मिलेंगी, उनके साथ है और आप केवल बिचौलियों के साथ हैं। यह साफ जाहिर हो गया है। आप कहती हैं कि फार्मर को क्या फायदा होगा, मैंने बता दिया है कि पैसा ज्यादा मिलेगा, पैसा टाइम से मिलेगा, कमीशन खत्म हो जाएगा, साथ में टेक्नोलॉजी मिलेगी कि कैसे बोना है, कब बोना है, कितना पानी देना है, कितनी खाद देनी है, वेस्ट नहीं होगा और उसका एक श्योर बायर है।...( व्यवधान) उसका बायर पक्का हो गया है। उनका एक समझौता हो गया प्री-प्राइसिंग एग्रीमेंट में हमने तुमसे आकर लेना है।
MADAM SPEAKER: Please let him speak . … (Interruptions).
MADAM SPEAKER: He just starts to speak.
… (Interruptions)
MADAM SPEAKER: What is this going on?
… (Interruptions)
MADAM SPEAKER: Nothing will go on record.
(Interruptions)* … अध्यक्ष महोदया : ठीक है, उनकी बारी है उन्हें बोलने दीजिए। अगर आपका मन बोलने का है तो हम उन्हें बैठाकर आपको बोलने दें, क्या करें? आप बैठ जाइये।
… (Interruptions)
MADAM SPEAKER: Nothing will go on record.
(Interruptions)* … MADAM SPEAKER: What is this going on?… (Interruptions)
MADAM SPEAKER: What you want me to do.… (Interruptions)
MADAM SPEAKER: How do I run the House if you have running commentary?
… (Interruptions)
MADAM SPEAKER: Anurag ji, please keep quite.
… (Interruptions)
श्री कपिल सिब्बल : मैं कोर्न की बात करता हूं। वैस्ट बंगाल के बर्दवान में एक किसान जिसका नाम राम प्रसाद गोसाल है से पूछा गया कि कोर्न का तुम्हें कितना दाम मिलता है। He said and I quote, “this year I have produced corn, which is sold at Rs.12 per kilogram in urban markets but I have been able to sell it at Rs.5 per kilogram in the mandi.” It means, he is only able to sell it at Rs.5 in the mandi. भाव उसका 12 रुपये है यानी उसे 7 रुपये का नुकसान होता अगर वह मंडी में जाता और आप कह रही थीं कि किसान को बड़ा नुकसान होता है, किसान खत्म हो जाएंगे, उपभोक्ता को फायदा नहीं होगा।
श्री कल्याण बनर्जी : इतनी छोटी जगहों पर कभी गये हैं आप?
श्री कपिल सिब्बल : हां मैं गया हूं, आपको बड़ी गलतफहमी है, आपके वैस्ट बंगाल में भी गया हूं और आपके नजारे भी देखें हैं।...( व्यवधान) सबसे विचित्र बात यही है कि ऐसे लोग जो ऐसी बातें करते हैं रिटेल की बात करते हैं तो मैं उड़ीसा, बिहार, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की बात आपको बता दूं। इनकी सरकारों ने आंग्स्टेन यंग को बुलाया और बोला कि किसी तरीके से हमें बताओ कि प्राइवेट सेक्टर को कैसे कृषि के साथ जोड़ा जाए। उन्होंने कहा -We want to link the farmer to corporate value chain. यही जो विरोध कर रहे हैं वहां आंग्स्टेन यंग को पूछ रहे हैं कि - Please allow us to link the farmer to corporate value chain. And, according to Ernst & Young: They are not only seeking interest of Indian retailers but global food companies as well. In the case of Odisha, Ernst& Young is looking to bring in Loblaws of Canada, Barakat and Jim’s Food Chains of the Middle East. मतलब कि आप कहते कुछ हो, करते कुछ हो, बयानबाजी कुछ है, असलियत कुछ है। ...( व्यवधान) मैं एक बात और आपके सामने रखना चाहता हूं। वामपंथी दल भी यहां बैठे हुए हैं जो बड़ा विरोध करते हैं, हमेशा विरोध करते हैं। मुझे उस दिन अजीब सा लगा कि माननीय सुषमा जी, जेटली साहब और सीताराम जी एक ही मेज पर बैठे हुए थे। लगता है कि आपकी फिलॉसफी विपक्ष में होने के बाद बदल गयी है। पहले आप लिब्रलाइजेशन का स्वागत करते थे अब खिलाफ हो गये हो। जब आप सत्ता में होते हो तो ग्लोबलाइजेशन स्वदेशी हो जाता है, जब आप विपक्ष में होते हो तो स्वदेशी हो जाता है इकोनोमिक नेशनलिज्म। यह आपकी नीति है। चलिये, मैं आपको माननीय सीताराम येचुरी जी का मई 16, 2004 का हिंदू बिजनैस लाइन में छपा बयान बता दूं। क्या कहते हैं सीताराम येचुरी जी - “Mr. Yechuri also dismisses the idea that his party was against Foreign Direct Investment in the retail sector.” According to him, it was not possible for the country to remain insulated in the present era of globalization. He again said, at the same time, FDI should fulfil three conditions. I entirely agree with Yechuri ji. It should augment productive capacity instead of asset acquisition; should lead to technology upgradation and should generate employment. If these three things are satisfied, foreign investment could be anywhere – retail or wholesale.
… (Interruptions)
MADAM SPEAKER: Basu Deb Acharia ji, please sit down.
… (Interruptions)
MADAM SPEAKER: Nothing will go in record.
(Interruptions)* … श्री कपिल सिब्बल : इसमें कोई ऐसा रेक्वीजीशन नहीं होता है, यह तो हम जानते हैं क्योंकि हमने कहा है कि आपके जो एसैट बनेंगे, आप जब कहीं भी वॉलमार्ट बनाओगे तो उसमें पचास प्रतिशत, 15 मिलियन डॉलर नहीं जोड़ा जाएगा। वह तो आपका सैपरेट इंवेस्टमेंट होगा। इसलिए उसमें एज सच रेक्वीजीशन नहीं है। अगर आप स्मॉल स्केल सैक्टर में इंवेस्टमेंट करेंगे तो रोजगार बढ़ेगा। यह बात तय है क्योंकि आप यहां से प्रिक्योर करेंगे तो रोजगार बढ़ेगा। लोगों को मैन्युफैक्चरिंग करने का मौका मिलेगा। आप हमारा ऑटोमोबाइल सैक्टर देख लीजिए। पिछले दस सालों में जब कम्पोनेंट इंडस्ट्री हिन्दुस्तान में थी ही नहीं और यह बात आप भी जानते हैं और हम भी जानते हैं कि कम्पोनेंट इंडस्ट्री नहीं थी और सभी डर रहे थे कि फॉरेन कंपनीज आ जाएंगी तो ऑटोमोबाइल सैक्टर का क्या होगा? आज का दिन है कि हमारी कंपोनेंट इंडस्ट्रीज विश्व की सारी मोटर कंपनीज को कंपोनेंट्स सप्लाई करती हैं। हमारे कंपोनेंट्स के बिना दुनिया में गाड़ी नहीं बन सकतीं। ...( व्यवधान) यह हाल है।
आप हमारे फार्मा सैक्टर को देखिए। बड़ा विरोध होता था। जब प्रोडक्ट पेटेंट की बात आई और हमने इनका समर्थन किया क्योंकि ये उस समय सत्ता में थे लेकिन जब ये सत्ता में नहीं रहे तो वर्ष 2004 में जब हम प्रोडक्ट पैटेंट दिलाने के लिए गये तो इन्होंने विरोध किया और कहा कि हम नहीं बनने देंगे। इन्होंने फार्मास्युटिकल्स में विरोध किया। पैकेट्स में विरोध किया। डब्ल्यूटीओ के समय में भी उस समय जब प्रणब मुखर्जी साइन करने के लिए गये थे तो वहां आपने विरोध किया। आपने कहा कि we lost the trust of the people of this country; we will never allow liberalisation. फिर आपके के.एन.शर्मा ने जब आप सत्ता में आ गये तो उन्होंने बयान दिया कि we will embrace liberalisation. ...( व्यवधान)
इसलिए असलियत तो यह है कि इस देश की जनता नहीं जानती कि आपकी नीति क्या है? लेकिन देश की जनता यह जानती है कि आपकी नीयत क्या है?...( व्यवधान) अगर आप फार्मा में, जेनरिक्स में विश्व की पहली बड़ी दस कंपनीज के नाम गिनेंगे तो देखेंगे कि उनमें से तीन कंपनीज हिन्दुस्तान की हैं। जहां जहां हमारे उद्योगपति को, हमारे नागरिक को अवसर मिला, उसने दुनिया में दिखा दिया कि हम अव्वल हो सकते हैं।...( व्यवधान) लेकिन आप नहीं चाहते। मैं आपको असलियत बताता हूं कि असलियत क्या है? जब हम यहां खड़े होते हैं तो हम विपक्ष की ओर देखते ही हैं। ...( व्यवधान)
श्री प्रताप सिंह बाजवा (गुरदासपुर):अध्यक्ष महोदया, मेरी गुजारिश है कि हमारी इतनी अच्छी फार्मास्युटिकल्स कंपनीज हैं, आप कम से कम सारे देश के लिए एक अच्छा काम कीजिए कि कोई अच्छी दवाई इनको दिलवा दीजिए, इन्हें समझ तो आ जाएगा।...( व्यवधान)
श्री कपिल सिब्बल : अध्यक्ष महोदया, मुझे ताज्जुब होता है कि सुषमा जी ने कह दिया कि यह जो हमने नीति बनाई है, this is in violation of the Bilateral Investment Protection Agreement and WTO, both. I am surprised. Let me just tell Sushmaji that under the WTO, multi-brand retail trading is classified as a service and therefore covered by the General Agreement on Tariffs and Trade in Services. India has not undertaken any commitment in this area under GATTS. आपने कह दिया तो क्या आप यह समझ लेंगे कि दुनिया ने समझ लिया और आपकी बात सच हो गई? यह बहुत दुख की बात है कि विपक्ष की नेता होकर आपने ऐसी बात कर दी। आप ऐसा मैसेज दे रही हैं।
दूसरी बात आपने ‘बाईपा’ की कही। वह भी मैं आपको बता देता हूं। The BIPA is a post establishment investment agreement. This implies that once an investor enters the country, the investor must be treated the same as a domestic investor unless the limitations to national treatment are clearly spelt out at the pre-establishment stage. The FDI policy is a pre-establishment instrument and therefore not covered by it. सुषमा जी, जब आप बोलती हैं तो इतना अच्छा बोलती हैं कि हम समझते हैं कि सब सच है। ...( व्यवधान)
श्रीमती सुषमा स्वराज :आप जो कह रहे हैं मैं इन सबके जवाब राइट टू रिप्लाई में दूंगी। आप जितनी बातें कह रहे हैं मैं सबका जवाब दूंगी। ...( व्यवधान)
SHRI KAPIL SIBAL: Madam, there are other aspects to it also, apart from the consumer and apart from the agriculturists. Look at the state of the economy in this country. The state of the economy is such that we are running both current account deficit and fiscal deficit. … (Interruptions)
SHRI ANANTH KUMAR : Who is responsible? … (Interruptions)
SHRI KAPIL SIBAL: Please understand. … (Interruptions)
MADAM SPEAKER: Let him speak. Let him elaborate what he is saying.
… (Interruptions)
SHRI KAPIL SIBAL: Why do you not sit down?
अध्यक्ष महोदया : बोलने दीजिए।
…( व्यवधान)
SHRI KAPIL SIBAL: So, one of the ways also to garner foreign exchange, which will reduce the deficit, is to allow FDI in sectors that will benefit the economy of this country. Therefore, that is also one of the reasons, apart from the fact that it is beneficial to farmers, beneficial to consumers, beneficial to the economy and beneficial to creating employment. This is another issue which needs to be looked at.
The third issue is that I want to give some numbers so that they understand it. If you really look at the population of this country, if you look at 2011 Census, हमारी जनसंख्या लगभग 1.18 बिलियन है जो वर्ष 2020 में लगभग 1.656 बिलियन हो जाएगी। 2030 तक 225 मिलियन और लोग जनसंख्या में जुड़ जाएंगे। मैं आपको एक और आंकड़ा बताता हूं कि आज के दिन हिन्दुस्तान की अर्बन पापुलेशन 340 मिलियन है जो वर्ष 2020 में बढ़कर 465 बिलियन हो जाएगी। इसका मतलब है कि अगले आठ सालों में अर्बन पापुलेशन 125 मिलियन और हो जाएगी, 42 करोड़ हो जाएगी। युवा लोगों को नौकरियां चाहिए। जब तक मैन्युफेक्चरिंग सैक्टर में बढ़ावा नहीं करेंगे, नौकरियां उपलब्ध नहीं होंगी। केवल सर्विस सैक्टर से काम नहीं चलेगा इसलिए हमें ऐसी नीतियां अपनानी चाहिए जिससे मैन्युफेक्चरिंग को बढ़ावा दिया जाए। मैं आपको लेटेस्ट रिपोर्ट मैन्युफेक्चरिंग के बारे में बताता हूं, यह कहा जाता है कि हिन्दुस्तान में जो अब इन्वेस्टमेंट आ रही है वह ज्यादातर मैन्युफेक्चरिंग में आ रही है। पिछले साल 58 बिलियन एफडीआई आया था और उसमें 71 प्रतिशत मैन्युफेक्चरिंग सैक्टर में है।...( व्यवधान) मैन्युफेक्चरिंग सैक्टर द्वारा युवाओं को जॉब्स मिलेंगी। जहां तक चाइना की तुलना की बात है, मैं आंकड़ा बता देता हूं कि क्यों लोग चाइना से हिन्दुस्तान में आ रहे हैं? चाइना में वेजिस पिछले साल 16 प्रतिशत बढ़े और एफिशिएंसी लैवल 14 प्रतिशत बढ़ा है। हिन्दुस्तान में एफिशिएंसी लैवल 17 प्रतिशत बढ़ा है और वेजिस नहीं बढ़ी। इसलिए आज के दिन लोग चाहते हैं कि लोग हिन्दुस्तान में आकर इन्वेस्टमेंट और मैन्युफेक्चरिंग करें। यह हमारे युवा लोगों के लिए अच्छा है क्योंकि इन्वेस्टमेंट यहां होगा तो नौकरियां पैदा होंगी और नौकरियां पैदा होंगी तो युवाओं को रोजगार मिलेगा। क्या आप युवाओं के भी खिलाफ हो, रोजगार के भी खिलाफ हो? आप किसके पक्ष में हो? क्या आप कन्ज्यूमर के खिलाफ, फार्मर के खिलाफ, युवा के खिलाफ हो?..( व्यवधान) सुषमा जी ने बहुत अच्छी बात कही है, मैं आपको उदाहरण देना चाहता हूं।...( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : आप क्या कर रहे हैं? समानांतर भाषण दिए जा रहे हैं। आप बैठ जाइए।
…( व्यवधान)
श्री कपिल सिब्बल: मैं चांदनी चौक से मैम्बर आफ पार्लियामेंट हूं, मैं अपनी कांस्टीटुंसी की बात ही करता हूं, बाकी की बात नहीं करता हूं। अगर वालमार्ट यहां आयेगा तो कहां दुकान लगायेगा, मुझे यह बता दीजिए, वह दिल्ली में तो दुकान लगा नहीं सकता। अगर लगाना चाहेगा भी तो जगह नहीं मिलेगी, यदि जगह मिलेगी तो इतनी महंगी मिलेगी कि उनका इकोनोमिक मॉडल ही खराब हो जायेगा। फिर निश्चित रूप से उसे एनसीआर रीजन में 10-15 किलोमीटर दूर जाना पड़ेगा। मेरी कांस्टीटुंसी में किस किस्म के लोग रहते हैं। वहां चालीस प्रतिशत लोग गरीबी की रेखा के नीचे रहते हैं, उनके पास शायद साइकिल ही होगी। अब वे साइकिल पर वालमार्ट जाने वाले नहीं हैं। बाकी चालीस प्रतिशत लोग जिनके पास एक स्कूटर या मोटरसाइकिल होगी, वह भी होनी मुश्किल है, वे बीस-तीस किलोमीटर दूर वालमार्ट में कुछ खरीदने के लिए जाने वाले नहीं हैं और अगर चले भी जायेंगे तो स्कूटर पर क्या वापस लेकर आयेंगे। मैं पूछना चाहता हूं कि स्कूटर पर क्या लेकर आयेंगे और वे जिन घरों में रहते हैं, वे तीन-तीन कमरे के घर हैं। जहां सात-आठ लोग रहते हैं, वहां स्टोर करने की जगह नहीं है, वहां फ्रिज में जगह नहीं है। अगर ये लोग वालमार्ट में जाकर सामान लायेंगे तो ये अपने फ्रिजों में कहां रखेंगे, मैं आपसे पूछना चाहता हूं। ...( व्यवधान) वे लोग अपने रेहड़ी वाले से बाई करेंगे, होलसेल मार्केट से बाई करेंगे। यह क्या बहस हो रही है। सुषमा जी इतनी समझदार नेता हैं, उन्हें तो हिंदुस्तान की वास्तविकता का पता है। उन्हें पता है कि गरीबी कितनी है, उन्हें पता है कि कोई आदमी मोटरसाइकिल पर वालमार्ट में कोई चीज खरीदने के लिए नहीं जायेगा। फिर वालमार्ट से कौन खरीदेगा? वही तीन-चार सौ बिलियन लोग, वही तीस करोड़ लोग, जो आज के दिन मिडिल क्लास कहलाते हैं या जो बड़ी-बड़ी गाड़ियों वाले लोग हैं, जो मार्केट अमरीका से भी ज्यादा है। क्योंकि उनकी संख्या भी तीन सौ मिलियन है। उस मार्केट को केटर कर रहे हैं। अगर आपके यहां विदेशी पूंजी आ रही है, करोड़ों रुपये हिंदुस्तान में आ रहे हैं, युवाओं को रोजगार मिल रहा है, किसानों को फायदा हो रहा है, उपभोक्ताओं को अच्छी चीजें मिल रही हैं तो आपका विरोध क्यों है, मैं पूछना चाहता हूं कि विरोध किसलिए है? इसीलिए आप मुझे इंटरप्ट कर रहे हैं, क्योंकि अभी आपको तकलीफ हो रही है। ...( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : आप ऐसे मत करिये, आप ऐसा क्यों कर रहे हैं, कृपया बैठ जाइये। गणेश सिंह जी, आप बैठ जाइये। आप क्या कर रहे हैं। इतना व्यवधान क्यों कर रहे हैं। हर समय, निरंतर एक मिनट भी रुके बिना आप बोले जा रहे हैं, बोले जा रहे हैं, कृपया शांत रहिये, उनकी बात सुन लीजिए।
श्री कपिल सिब्बल : मुझे लेफ्ट की प्रॉब्लम भी समझ में नहीं आती है, यह किसलिए विरोध कर रहे हैं। इनकी एफडीआई फॉरेन डायरेक्ट आइडियोलोजी है। इनकी तो आइडियोलोजी इम्पोर्टेड है, फिर आप किसलिए विरोध कर रहे हैं। जहां तक आपका सवाल है, मुझे मालूम नहीं है कि आप क्यों विरोध कर रहे हो। आप तो मल्टी ब्रांड पार्टी हैं और कम्पिटिशन अच्छी बात है। ब्रांड में कम्पिटिशन होगा तो सुषमा जी आप आगे जायेंगी। फिर आप किसलिए विरोध करती हैं। चीन में एफडीआई सौ प्रतिशत, रूस में एफडीआई सौ प्रतिशत, चिली में एफडीआई सौ प्रतिशत और जो यह कह रही थीं कि जो प्रोक्योरमैन्ट होता है, लगभग 90 प्रतिशत उसी मार्केट से होता है। अब मैं आपसे पूछना चाहता हूं कि अगर आइकिया फर्नीचर बनायेगा तो क्या लकड़ी कनाडा से इम्पोर्ट करेगा? तभी मुझे ताज्जुब था, सुषमा जी कह रही थीं कि तीस प्रतिशत तो एमएसएमई से आयेगा और 26 प्रतिशत इम्पोर्ट होगा। लेकिन कहां से इम्पोर्ट होगा, अगर इम्पोर्ट होगा तो बेच ही नहीं सकेंगे। एफडीआई इन रिटेल का मतलब ही यह है कि जो एफडीआई इन रिटेल यहां आयेगा, उसकी सोर्सिंग हिंदुस्तान से होगी। उससे हिंदुस्तान के एसएमई सैक्टर को फायदा होगा और बाकी सैक्टर्स को भी फायदा होगा।...( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : आप बैठ जाइये, क्यों खड़े हो गये। रामचंद्र जी, आप बैठिये।
…( व्यवधान)
17.00hrs SHRI M.B. RAJESH (PALAKKAD): If it is beneficial, why is their Government in Kerala opposing it? Their own State Government in Kerala is opposing it. Please explain that. … (Interruptions)
श्री कपिल सिब्बल : मैडम स्पीकर, अब मैं अपनी आखरी बात रखूंगा। ...( व्यवधान)
श्री अनुराग सिंह ठाकुर : मैडम कांग्रेस केरल में क्यों अपोज़ कर रही है? इससे सबसे ज्यादा नुकसान देश के मुस्लिमों को होने वाला है।...( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : अनुराग जी, बैठ जाइए।
…( व्यवधान)
MADAM SPEAKER: Nothing is going on record.
(Interruptions)* … श्री कपिल सिब्बल : मैं आखरी बात कहना चाहता हूँ कि यहां लोकतंत्र और डैमोक्रेसी की बात की जाती है। विपक्ष के नेता को मैंने बड़े ध्यान से सुना है। जब-जब ये हाऊस नहीं चलने देते हैं तो कहते हैं कि लोकतंत्र का तो कोई मतलब ही नहीं है, क्योंकि सत्ता पक्ष के पास नंबर्स हैं। हम डिबेट करेंगे तो सत्ता पक्ष जीत जाएगा। मतलब कि डिबेट करने का तो कोई मायने ही नहीं हैं। इसलिए हम हाऊस ही नहीं चलने देंगे। यह बयान आया है। जेटली साहब का बयान है। मैं पढ़ देता हूँ।...( व्यवधान)
He says -
“If we would have taken debate under Rule 184, they would have won because they have the numbers.” श्री निशिकांत दुबे (गोड्डा): मैडम, मेरा पॉइंट ऑफ आर्डर है।...( व्यवधान) वे दूसरे सदन के नेता हैं।...( व्यवधान)
SHRI KAPIL SIBAL: Shri Jaitley said it. … (Interruptions)
श्री निशिकांत दुबे : आप उनका नाम नहीं ले सकते हैं। ...( व्यवधान)
श्री कपिल सिब्बल : मैं उनका नाम क्यों नहीं ले सकता हूँ?...( व्यवधान)
श्री निशिकांत दुबे : नहीं, आप उनका नाम नहीं ले सकते हैं। ...( व्यवधान) वे दूसरे सदन के नेता हैं।
अध्यक्ष महोदया : मैं, इस बात को दिखवा लूंगी। आप बैठ जाइए।
…( व्यवधान)
श्री कपिल सिब्बल : वे विपक्ष के नेता हैं। ...( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : आप बैठ जाइए, हम इसको दिखवा लेंगे।
…( व्यवधान)
श्री कपिल सिब्बल : वे भाजपा के नेता हैं। ...( व्यवधान) ये बयान उन्होंने बाहर दिया था। ...( व्यवधान) ये बयान उन्होंने सदन में नहीं दिया था। ...( व्यवधान) मैं उसका वर्णन कर रहा हूँ। ...( व्यवधान) वे कहते हैं कि डिबेट करने का कोई फ़ायदा नहीं है ...( व्यवधान)“We have the numbers and we would have won”. क्योंकि उनको उस समय लगता था कि शायद हम जीत सकते हैं। अब वे लोकतंत्र में विश्वास करते हैं। अब कहते हैं कि वोट होना चाहिए। ...( व्यवधान) जब सुबह-सुबह पता लगा कि वे भी हार जाएंगे तो बोले आज नहीं होना चाहिए। कल होना चाहिए। परसों होना चाहिए। तीस दिन के बाद होना चाहिए। ...( व्यवधान) अब आपको पता चल गया है कि वोट किस तरफ है। ...( व्यवधान) ये तो साफ़ ज़ाहिर हो गया है कि आपको पता चल गया है कि आप कहां हैं। ...( व्यवधान)When we look at this side of the House, Madam, we just do not look at the Opposition; we look at the young beyond the House; we look at those energetic faces, those young people. … (Interruptions)
श्रीमती सुषमा स्वराज :मैडम, हमारे यहां चर्चा की तारीख और समय बीएसी में तय हुआ था। आप स्वयं प्रिसाइड कर रही थीं। संसदीय कार्य मंत्री जी बैठे हुए हैं। क्या हमने कहा था कि कल नहीं करेंगे, परसों नहीं करेंगे? ...( व्यवधान)
श्री कपिल सिब्बल : आपने अभी यह बात कही है। ...( व्यवधान)
श्रीमती सुषमा स्वराज : ये बेवजह की बात कर के गुमराह कर रहे हैं। ...( व्यवधान)
श्री कपिल सिब्बल : आपने अभी यह कहा है कि हमें वोट नहीं चाहिए। ...( व्यवधान)
श्रीमती सुषमा स्वराज :यह तय किया गया था कि 4 तारीख को चर्चा करेंगे।...( व्यवधान) हम तो सेम डे करने को तैयार हैं।...( व्यवधान)
श्री कपिल सिब्बल : आप कह रहे थे कि हमें वोट नहीं चाहिए। 30 दिन के बाद वोट करेंगे। ...( व्यवधान)
श्रीमती सुषमा स्वराज : हमने कब कहा? हमने नहीं कहा है। ...( व्यवधान) हम उसी दिन कर लेते। ...( व्यवधान) आप लोगों ने चार दिन संसद नहीं चलने दी। ...( व्यवधान)
MADAM SPEAKER: All right, I will see.
… (Interruptions)
SHRI KAPIL SIBAL: Shrimati Sushma Ji, I am closing. … (Interruptions)
श्रीमती सुषमा स्वराज : मगर ये लगातार गलत बोल रहे हैं। ...( व्यवधान) लगातार गलतबयानी कर रहे हैं। ...( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : ठीक है, मैं दिखवा लूंगी।
…( व्यवधान)
SHRI KAPIL SIBAL: Madam, how will I carry on, if they do not allow me? … (Interruptions)
श्री अनुराग सिंह ठाकुर : आप वकील के तौर पर एक करप्ट आदमी को बचाने के लिए आए थे।...( व्यवधान) इनका परिचय लोक सभा से है। ...( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : श्री अनुराग सिंह ठाकुर आप बैठ जाइए।
…( व्यवधान)
SHRI KAPIL SIBAL: Madam, one last sentence and then I have done. As far as we are concerned, when we sit at this side of the House and look at that side of the House, we look beyond these walls; we look at the people of India. We look at the State in which they live; we look at our young; we look at the excitement in their eyes; the hope in their eyes; the energy that they have; and we want to create an environment so that they can flower and they can take India forward. That is how we make our policy. We do not make our policies which bases on whether we are sitting this side or that side, but what we can do for the people of this country.
Rajiv Gandhi Ji was the first person who looked at using computers with a vision. He knew the importance of computers and they opposed it for the sake of opposition. The same thing is happening today. When we sit here and when we look towards you, we look beyond you to those who we need to serve. When you look towards us, you look at these seats when you will come here. That is the difference you and us.
श्री निशिकांत दुबे : हमने कम्प्यूटर का कब अपोज किया?...( व्यवधान)
श्री कपिल सिब्बल : आप क्या बात करते हो?...( व्यवधान) हमारे पूर्व प्रधानमंत्री जी को कम्प्यूटर बॉय बनाया था, आपको मालूम है।...( व्यवधान) आपने लिब्रलाइजेशन की हर नीति अपोज की, डब्ल्यू.टी.ओ अपोज किया, आपने लिब्रलाइजेशन इन फॉर्मा अपोज किया, हर सैक्टर में आपने अपोज किया।...( व्यवधान) जब आप सत्ता में आये तब आपने वही अपनाया तो कहने का मतलब है कि आपका दृष्टिकोण केवल यही सीट है, हमारा दृष्टिकोण हिन्दुस्तान की जनता है।
श्री मुलायम सिंह यादव (मैनपुरी):महोदया, यह सही है कि आज की चर्चा महत्वपूर्ण और गंभीर है। जहां तक एफडीआई का सवाल है, सिब्बल साहब ने इसकी बहुत प्रशंसा की है, लेकिन यह भी सोचिए कि जब कोका कोला आया था और पेप्सी आयी थी, तब भी बहुत तारीफ की गयी थी। यह कहा गया था कि आलू और टमाटर की पैदावार बहुत बढ़ेगी और किसान को बहुत बड़ा लाभ होगा। यह कहकर कोका कोला और पेप्सी यहां लाये गये। उस समय भी हम लोगों ने कोका कोला और पेप्सी का विरोध किया था और साबित हो गया कि कोका कोला और पेप्सी से आलू या टमाटर की कोई पैदावार नहीं बढ़ी है और अभी तक सरकार की तरफ से भी विशेष मदद नहीं हुई है। अगर पैदावार बढ़ी है तो किसान की मेहनत से बढ़ी है, किसान की सूझबूझ से बढ़ी है। किसान ने अपनी लगन और जी‑तोड़ मेहनत से पैदावार बढ़ायी है।
यह सही है कि पंजाब बहुत आगे था। आज धान के मामले में यू.पी. किसी से पीछे नहीं है और न ही गेहूं के मामले में किसी से पीछे है, न ही आलू की पैदावार में पीछे है और न ही प्याज की पैदावार में पीछे है। आप हिसाब लगाइये कि उत्तर प्रदेश में कितना गेहूं पैदा होता है, धान कितना पैदा होता है? उत्तर प्रदेश के बारे में जो अभी थोड़ा जिक्र किया गया था तो मुझे सोचना पड़ा कि उत्तर प्रदेश में किसानों को सरकार की तरफ अभी तक कोई भी विशेष सुविधा नहीं दी गयी है।
अगर कोई सुविधा दी गयी है तो बताएं। अगर थोड़ी बहुत जमीन बढ़ी है, वह भी बीहड़ में, और जिस तरह से उत्तर प्रदेश में आगरा से लेकर बांदा तक बीहड़ है, क्या किसी को इसका अंदाजा है? आगरा से लेकर बांदा तक, गंगा, यमुना और फुआरी के बीच की जमीन बीहड़ है, पूरा रेवाइन्स है, उस बीच में रहकर भी उन किसानों ने अपने बलबूते पर किसी भी तरह कुछ पैदावार बढ़ायी है। जहां तक किसान का सवाल है, किसान को अभी तक हिन्दुस्तान के अंदर कोई भी विशेष सुविधा नहीं दी गयी है।
जहां तक एफडीआई का सवाल है, आप कितनी भी सफाई दें, कितना भी तर्क दें, लेकिन यह देश के हित में नहीं है, किसानों एवं छोटे दुकानदारों के हित में नहीं है। यह आप सोच लीजिए।...( व्यवधान) न तो मैं आपकी तरफ से बोल रहा हूं और न ही आपके खिलाफ बोल रहा हूं। ...( व्यवधान) आप कह रहे हैं कि यह देश के लिए है तो देश के लिए ही हम बोल रहे हैं। ...( व्यवधान) हम कह रहे हैं कि एफडीआई देश के हित में नहीं है और क्यों नहीं है, उसका कारण है। एफडीआई अगर आती है तो आप यह देखेंगे कि जो आज अपना रोजगार खुद कर रहे हैं, वे बेरोजगार हो जायेंगे। हिन्दुस्तान में पांच करोड़ खुदरा व्यापारी हैं, आपके आंकड़े सही होंगे क्योंकि आप सरकार में बैठे हैं। जहां पांच करोड़ खुदरा व्यापारी हैं, हमारे किसान भी काम कर रहे हैं, एक परिवार में औसतन पांच सदस्य माने जाते हैं तो इस प्रकार से बीस से लेकर पच्चीस करोड़ लोग/व्यापारी तो बेरोजगार हो ही जायेंगे। आप नोट कर लें कि हिन्दुस्तान के बीस से लेकर पच्चीस करोड़ लोग बेरोजगार हो जायेंगे। लोगों को रोजगार कहां से देंगे आप? इससे रोजगार नहीं मिलेगा। हाँ, इससे बेरोज़गारी जरूर बढ़ेगी। आप व्यावहारिकता पर जाइए। हम लोग इस तरह का कोई काम नहीं कर रहे हैं, हम तो आपकी मदद कर रहे हैं। अगर आपसे कहीं गलती हो रही है तो विपक्ष की भूमिका है कि गलती आपके सामने रखे और आप उस गलती को सुधारें। इसलिए हम चाहते हैं और आपको राय देते हैं कि एफडीआई को छोड़ दीजिए, वापस कर दीजिए और सर्वदलीय बैठक कीजिए। एक दिन नहीं, दो दिन इस विषय पर बैठक कीजिए कि हिन्दुस्तान का विकास कैसे हो। सबसे बड़ी समस्या बेरोज़गारी की है। अगर एफडीआई बढ़िया होता, इससे फायदा होता तो अमरीका क्यों इसका विरोध कर रहा है? अगर यह अच्छी योजना थी तो अमरीका आपको यहाँ कभी नहीं आने देता, सब ले लेता, पूरा का पूरा खा जाता। लेकिन अमरीका ने न्यूयार्क में प्रतिबंध लगा दिया है कि एफ.डी.आई. को प्रवेश नहीं करने देंगे। ...( व्यवधान) अगर हम यह बात गलत कह रहे हैं, अगर हमारी बात गलत है कि अमरीका विरोध नहीं कर रहा है, न्यूयार्क में प्रतिबंध नहीं लगा है, रोक नहीं लगाई है, तो हम अपने शब्द विदड्रॉ करेंगे और आपसे माफी मांगेंगे। हम भी पता लगाकर कह रहे हैं। ...( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : अनंत गीते जी, शांति रखें।
…( व्यवधान)
श्री मुलायम सिंह यादव : महोदया, बेरोज़गारी सारी दुनिया में है, अमरीका में भी है। यूरोप और अमरीका के लीडर्स यहाँ आते हैं तो यही सोचकर आते हैं कि हमारे देश में बेरोजगारी खत्म हो और यहाँ से हमें रोज़गार मिले। जब ओबामा हिन्दुस्तान आए थे तो उन्होंने तो हिन्दुस्तान के प्रधान मंत्री जी से कहा कि हमारे लोगों को रोज़गार दे दो। अखबार में आया और वह सच है, प्रधान मंत्री बता देंगे। ...( व्यवधान) तो अमरीका में भी बेरोज़गारी है, यूरोप में भी बेरोज़गारी है और इससे बेरोज़ागारी इसलिए बढ़ेगी कि अभी जैसा मैंने कहा कि जो पाँच करोड़ लोग खुदरा व्यापार कर रहें हैं, वे इसके मुकाबले टिक नहीं पाएँगे। यह सही है कि वे कंपनियाँ जब आएँगी और यह जो कंपनी है "वॉलमार्ट ", यह पहले सस्ता और अच्छा माल देगी। जब यहाँ के पाँच करोड़ खुदरा व्यापारी खत्म हो जाएँगे तो वे अपनी मनमानी करेंगे। हमें अनुभव है। ...( व्यवधान) अमरीका के बारे में जो चर्चा रहती है कि सबसे संपन्न देश है, वहाँ की जनता भी इसका विरोध कर रही है। न्यूयार्क में जैसा मैंने बताया, कि वहां एफडीआई बंद ही कर दिया। इसलिए हम कहना चाहते हैं कि विदेशी कंपनियों द्वारा यहां के लोगों को धोखा देना है। यह धोखा है कि रोज़गार मिलेगा। मैं कपिल सिब्बल साहब से प्रार्थना करता हूँ कि आप बहुत पढ़े लिखे हैं, सुप्रीम कोर्ट में अच्छे वकील हैं, बहुत अच्छी वकालत करते हैं, हम इसको स्वीकार करते हैं। हमें इसका अनुभव भी है। लेकिन इससे बेरोज़गारी बढ़ेगी। अगर कोई खुदरा व्यापारी हैं, वे अगर पाँच करोड़ हैं तो आप बताइए वे क्या कर पाएँगे। वे मुकाबला नहीं कर पाएँगे। वे अच्छा और सस्ता माल देंगे और उन्हें घाटा भी हो जाता है तो उन्हें कोई फर्क पड़ने वाला नहीं है। जहाँ तक गरीब दुकानदारों का प्रश्न है, उन पर यह थोपा जा रहा है, यह देश की जनता के साथ सीधे-सीधे धोखाधड़ी है। खुदरा व्यापार के लिए आपने कहा है कि यह 10 लाख से ज्यादा आबादी वाले शहरों में ही होगा। अगर यह फायदेमंद है, लाभकारी है और यह एफ.डी.आई. बेरोज़गारी को मिटाने वाला है तो आप पूरे देश में इसे लगाइए। यह कैसे हो सकता है कि दस लाख के ऊपर की आबादी वाले शहरों (खुदरा व्यापार) में लगाएँगे, वहाँ देंगे, एफडीआई को छूट देंगे, प्रवेश कराएँगे, निवेश कराएँगे, सब कराएँगे! अगर इससे बेरोज़गारी मिटती है या देश संपन्न होता है तो पूरे देश में इसे लगाइए।
डॉ. मुरली मनोहर जोशी : फिर तो गाँवों में लगाइए। ...( व्यवधान)
श्री मुलायम सिंह यादव : हाँ, फिर तो पूरे देश में पार्लियामैंट भी आ गया। ...( व्यवधान) इसको आप भी गम्भीरता से लीजिए। आपने कहा कि दस लाख से कम आबादी के शहरों में एफडीआई नहीं जाएंगी। आखिर कम्पनियां वहां क्यों नहीं जाना चाहती हैं? वॉलमार्ट और विदेशी कम्पनियां दस लाख से कम आबादी के शहरों में क्यों नहीं जाना चाहती, क्योंकि उन्हें मुनाफ़ा चाहिए। जहां मुनाफा ज्यादा होगा, तो जहां ग़रीब लोग होंगे, वह नहीं खरीद पाएंगे। अभी गांवों में क्या हालत है? आत्महत्या शहरों में हो रही है या गांवों में हो रही है? किसान आत्महत्या कर रहा है, शहर वाले आत्महत्या नहीं कर रहे हैं। आत्महत्या किसान, गरीब और मजदूर कर रहा है। इस बारे में आपको सोचना होगा। हमारी सरकार से मांग है कि जो छोटे-छोटे खुदरा व्यापारी हैं, जो कि अपनी मेहनत से कमाते हैं, उनको आप आत्महत्या करने के लिए मजबूर मत कीजिए। अब तक किसान आत्महत्या कर रहा था, अब छोटे व्यापारी और खुदरा व्यापारी भी आत्महत्या करेगा, क्योंकि उनके पास कोई रोज़गार नहीं होगा। उनके पास न तो खेती है और अब उनके पास दुकान भी नहीं रहेगी। इस पर आप गम्भीरता से विचार करें। इधर जो बैठे हुए लोग हैं, उनके दिल से पूछिए कि वह क्या कहता है? अनुशासन का ऐसा कोड़ा है कि अनुशासनहीनता करेंगे तो निकाल कर आप बाहर कर देंगे। किसी को मंत्रिमण्डल से हटा देंगे। बोलेंगे वही जो आप कहेंगे, बोलेंगे वही जो सोनिया जी कहेंगी। आदरणीय सोनिया जी के हुक्म का पालन करना होगा, क्योंकि वह अध्यक्ष हैं। अध्यक्ष के आदेश का या निदेश का पालन करना ही पड़ेगा। यह हमारे यहां भी है और आपके यहां भी ऐसा ही है। आडवाणी साहब को कितना भी आप पीछे कर दीजिए, लेकिन नेता आडवाणी साहब हैं। यह तो मानना पड़ेगा। मैं यह जनता की बात कह रहा हूं। आडवाणी साहब पार्टी में जो कहेंगे, उसकी ज्यादा मान्यता होगी। इसलिए आपने जो पार्टी का अंकुश लगाया हुआ है, उसे हटाइए। हम इस बात से सहमत हैं कि देश हित में ही आप करें। आपने कहा कि हम देश के साथ हैं, इन्होंने कहा कि हम देश के साथ हैं। यह तो आप दोनों की नूरा कुश्ती है। हम लोग छोटे दल हैं, इसलिए हमें धक्का मार कर इधर-उधर किया जा रहा है। हमें सुनने भी नहीं दे रहे हैं। न ही आप के लोग सुनने दे रहे हैं, न ही आपके लोग सुनने दे रहे हैं। यह तो नूरा कुश्ती है कि हम दो ही रहें, आप रहें और आप रहें, हम लोग न रह पाएं।...( व्यवधान) हम समझते हैं कि आप दोनों चाहते हैं कि हम सत्ता में नहीं आएं। आप दोनों चाहते हैं कि आप आएं या आप आएं, तीसरा न आने पाए।...( व्यवधान) जोशी साहब, आप मुझे बचपन से जानते हैं। मुझे भी बहुत सालों का अनुभव है। वर्ष 1967 से अभी तक लगातार एमएलए हैं या एमपी हैं या चैयरमैन हैं या मिनिस्टर हैं या रक्षा मंत्री रहे हैं। लेकिन मेरा भी तो अनुभव है। इसलिए इस आधार पर कह सकते हैं कि अब हम नहीं आ सकते हैं। हम दोबारा वर्ष 1977 नहीं जीत सकते हैं। हम अपनी हैसियत को जानते हैं। अब आपको आना है या इनको आना है।...( व्यवधान) हमारी लॉबी मजबूत हो सकती है। हमारी लॉबी मजबूत होगी, इसमें दो राय नहीं है।...( व्यवधान) सच्चाई यह है कि इन कम्पनियों ने, उस वक्त मैंने कोका कोला और पैप्सी का जिक्र किया था। 80 करोड़ रुपये लगाए और उसमें देश के केवल 80 किसानों ने खरीदारी की। अब आप सोचिए कि यह हालत है। हम लोगों को अनुभव के आधार पर सोचना चाहिए।
आप गांधी जी के विचारों को भूल रहे हैं। ये लोग तो गांधी जी के विचारों को भुला देंगे, इनके बारे में हमें कुछ नहीं कहना है। दूसरी बात है गांधी के विचारों को बनाए रखना। गांधी जी ने जब विदेशी कपड़े में आग लगायी और वह विदेशी कपड़ा अच्छा था तो एक अंग्रेज ने गांधी जी से पूछा कि कपड़ा अच्छा है, मजबूत भी है, फिर भी आप विदेशी कपड़ों में क्यों आग लगवा रहे हैं, इसका क्यों विरोध कर रहे हैं? गांधी जी ने कहा कि हमारे बुनकर आत्महत्या कर लेंगे, इसलिए हम अपने हिन्दुस्तान के बुनकरों को बचाने के लिए इन कपड़ों का विरोध कर रहे हैं, इनमें आग लगा रहे हैं, यह गांधी जी ने कहा है। इसे मत भूलें। आप तो आज भी गांधी जी के नाम पर ही हैं। मैं आदरणीय सोनिया जी से कहूंगा कि राजीव गांधी और आप के नाम में भी गांधी है तो कम से कम गांधी की बातों को मत हटाइए, गांधी की बातों को मानिए। गांधी स्वदेशी के पक्ष में थे, विदेशी के खिलाफ थे। इसी स्तर पर गरीब, किसान, मजदूर दुकानदारों के बीच गांधी जी स्वदेशी चाहते थे, विदेशी नहीं चाहते थे। आप स्वदेशी भूल रहे हैं और विदेशियों को ला रहे हैं। ...( व्यवधान)
मैं अपने प्रधानमंत्री जी से अपील करूंगा कि आप एक बहुत बड़े अर्थशास्त्री हैं। आपके पास बहुत ज्ञान है। आपने पूरे विश्व में काम किया है। प्रधानमंत्री के रूप में ही नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री होने के पहले भी विश्व के तमाम देशों की कार्यशैली का अनुभव आपके पास हैं। इसलिए मेरी आपसे अपील है और सोनिया जी से भी मेरी विशेष प्रार्थना है कि इसे छोड़ दीजिए। इसे एक-दो साल के लिए छोड़ दीजिए। अगर यह लगेगा कि खुदरा व्यापार में एफ.डी.आई. से फायदा है तो हम भी समर्थन कर देंगे, इस पर सोचेंगे। पर, अभी इसे वापस लीजिए। इस पर क्यों कंट्रोवर्सी कर रहे हैं?
अभी चुनाव आ रहे हैं। ये बहुत होशियार लोग हैं। गांव-गांव में इसका प्रचार हो जाएगा। आर.एस.एस. गांव-गांव में है। अगर ये बढ़िया से बढ़िया तरीके से प्रचार करेंगे तो क्या होगा? इसलिए चुनाव की दृष्टि से भी एफडीआई को वापस लीजिए। आपको एफ.डी.आई. से कोई लाभ नहीं होने वाला है, इससे नुकसान होगा। आप जाएंगे तो फिर ये आ जाएंगे। हम तो आने वाले नहीं हैं। हम तो आपको सहयोग देंगे या सहयोग वापस लेंगे।...( व्यवधान) इसलिए हम कोई लम्बी-चौड़ी बातों में नहीं जाना चाहते। बहुत-सी बातें आप सभी लोगों ने कह दीं। हमारे तृणमूल कांग्रेस के नेता ने भी सारी बातें कह दीं तो मैं उसे दोहराना नहीं चाहता हूं। मैं अपने अनुभव, स्थिति और पार्टी की नीतियों और कार्यक्रमों के आधार पर कहता हूं कि हम गांधी जी, लोहिया, और जयप्रकाश को मानते हैं। हम आज कहते हैं कि गांधी, लोहिया, और जयप्रकाश जी अगर होते तो आज एफ.डी.आई. लाने की हिम्मत किसी की नहीं होती। इसलिए, आप इसे वापस लीजिए, तो यह देश, जनता के हित में होगा।
MADAM SPEAKER: Thank you.
Hon. Members, if the House agrees, we will have this discussion till 6.30 p.m. … (Interruptions)
SOME HON. MEMBERS: No. MADAM SPEAKER: No? What do you want?
… (Interruptions)
SOME HON. MEMBERS: Tomorrow.
… (Interruptions)
MADAM SPEAKER: I have a very long list of speakers. Do you want to sit only till 6 p.m.?
… (Interruptions)
SOME HON. MEMBERS: Tomorrow we can sit beyond 6 p.m., starting from 12 noon.
… (Interruptions)
MADAM SPEAKER: All right. But I would not be able to accommodate all, unless all of you are very brief.
Okay, Shri Dara Singh Chauhan.
श्री दारा सिंह चौहान (घोसी):अध्यक्ष महोदया, आज सुबह से खुदरा व्यापार में एफ.डी.आई. को लेकर दोनों पक्षों की तरफ से गर्मजोशी से बहस हुई। आज केवल संसद ही नहीं, बल्कि पूरे देश में एफ.डी.आई. को लेकर लोगों के मन में जो शंकाएं हैं, जो संदेह है, उस सवाल को लेकर पूरे हिन्दुस्तान के लोग आज टेलीविज़न पर लोक सभा चैनल पर नज़र गड़ाए हुए हैं कि पार्लियामेंट में क्या होने जा रहा है? लोगों की चर्चा के बाद लब्बो-लबाब उसका सारांश आया कि कुछ क्षेत्रों में लोग एफडीआई के खिलाफ नहीं हैं। खुदरा बाजार में कुछ क्षेत्रों को लेकर जो आशंकाएं हैं, इसे लेकर लोगों के मन में आशंका है कि अगर एफडीआई आएगा तो निश्चित रूप से देश में रहने वाले जो गरीब किसान और बुनकर हैं, उनका नुकसान होगा। लोग आज से कई दशक पहले की बात याद करते हैं, जब दो सौ साल तक अंग्रेजों ने इस मुल्क में राज किया तो कोई पावर, सड़क के क्षेत्र में नहीं, बल्कि मसाला उद्योग को लेकर मसाला के क्षेत्र में जो खुदरा व्यापार था, जो गरीब किसान करते थे, उसमें आने के बाद दो सौ साल तक इस मुल्क में अंग्रेजों का राज रहा। लोगों के मन में जो शंका और संदेह है कि खुदरा क्षेत्र में आने के बाद कहीं ऐसा न हो कि इस देश में गांवों में रहने वाले जो लोग कारोबार से जुड़े हुए हैं - चाहे बुनकर हो या किसान हो। छोटे-छोटे दुकानदार एवं फेरी वाले हैं, उन पर कब्जा हो जाएगा। उनके मन में यह शंका है, वही पहले वाली बात आज भी उनके मानस पटल पर घूम रही है। मसाला कोई बड़ा क्षेत्र नहीं था, ये खुदरा था, मसाला व्यापार में आने के बाद दो सौ साल तक इस मुल्क में रहने वाले लोगों ने, इस मुल्क की आजादी के लिए अपनी जान की कुर्बानी दी। कहीं फिर ऐसी स्थिति न पैदा हो जाए कि खुदरा व्यापार में, ये कहने के लिए रिटेल में है, जो छोटे-छोटे उद्योग हैं। जब से इस देश में उदारीकरण लागू हुआ, उदारीकरण चल रहा है, तब से इस देश में अमीर और गरीब की जो खाई है, वह काफी बढ़ गई है। अमीर, अमीर होता जा रहा है और गरीब, गरीब होता जा रहा है। उदारीकरण की नीति, बाजार पर आधारित पूंजीपतियों के जो पोषक हैं, वही किसानों के दुश्मन हैं।
अध्यक्ष महोदया, मैं आपके माध्यम से सदन में कहना चाहता हूं कि आज जो मल्टी-ब्रांड में एफडीआई की बात हो रही है, वह इसी का अंग है, इसी का दूसरा रूप है। आज एफडीआई को आप एलआईसी में, सिविल एविएशन में लाए हैं। आप पावर एवं इरीगेशन में लाइए, दूसरे क्षेत्रों में जहां देश का भला हो। इस देश में रहने वाले जो 70 फीसदी किसान और मजदूर हैं, जो बेबस एवं लाचार हैं, जो छोटे-छोटे कारोबार करके अपने बच्चों का पेट पालते हैं, आज फिर उन्हीं पर निगाहें लगी हैं। आज दुनिया के तमाम मुल्कों की निगाहें उन गरीबों पर लगी हैं, जो मजदूरी, मेहनत करके खोमचा-ठेला पर मूंगफली एवं चना बेचता है। आज उन बुनकरों की हालत क्या है। आज देश का बुनकर भुखमरी के कगार पर है, उनकी हालत क्या है। इस देश में आज भी हम किसान को अच्छा ढांचा, सड़क एवं सिंचाई का साधन नहीं दे पाए। उनको बिजली नहीं दे पा रहे हैं, पर्याप्त सिंचाई के साधन नहीं हैं और हम एफडीआई की बात कर रहे हैं। आए-दिन डीजल के रेट बढ़ रहे हैं, पैट्रोल एवं बिजली के दाम बढ़ रहे हैं। आज इस देश में जो हालात हैं, उसमें किसान कहां जाएगा। आज खाद महंगी हो रही है, पानी महंगा, बिजली महंगी, डीजल महंगा और इसके नाते आज जो खेत में काम करने वाले किसान हैं, जो आज भी इस मुल्क में 70 प्रतिशत लोग किसान का काम करते हैं, उसी पर आधारित हैं, क्या उनको इससे उनका वाजिब हक मिल सकता है, वाजिब मूल्य मिल सकता है? तो फिर वे स्टोर में जाकर क्या खरीदेंगे, जब उनके पास कुछ नहीं रहेगा। सरकार का मानना है कि मल्टी ब्राण्ड रिटेल में विदेशी पूंजी निवेश से कीमतें कम हो जाएंगी और जो बिचौलिए की भूमिका है, वह खत्म हो जायेगी। हम सरकार से जानना चाहते हैं कि किसान और उपभोक्ता के बीच में जो छोटे-छोटे आढ़तिए हैं, जिन्हें आप बिचौलिया कहते हैं कि ये खत्म हो जाएंगे, ये बहुत लूट रहे हैं तो हम पूछना चाहते हैं यह वालमार्ट क्या है? उत्पादन करने वाले जो किसान हैं और जो कंज्यूमर हैं, उनके बीच में जो दलाली करने वाला वालमार्ट है, इसको बिचौलिया नहीं तो हम क्या कहेंगे? 20 लाख करोड़ रुपये का इनका टर्नओवर है। हिन्दुस्तान में एफ.डी.आई. के माध्यम से आज जो विदेशी कम्पनियां आ रही हैं, उनमें हिन्दुस्तान से क्यों इतना प्रेम जगा है, क्यों किसानों से और यहां के लोगों से प्रेम जगा है? ये बिचौलिए केवल मुनाफे के लिए यहां आ रहे हैं। हिन्दुस्तान के किसानों को आबाद करने के लिए नहीं, इन्हें बर्बादी के कगार पर पहुंचाने की यह साजिश हो रही है।
यह लोकतंत्र है, इसलिए हम सरकार से जरूर जानना चाहते हैं कि जो बड़े-बड़े स्टोर के मालिक हैं, उपभोक्ता को जो सस्ते दामों पर चीजों को उपलब्ध कराने का दावा करते हैं, ये किसानों और उपभोक्ताओं के बीच में बिचौलिए नहीं तो क्या हैं? 20 लाख करोड़ रुपये का जो इनका टर्नओवर है, यह टर्नओवर क्या है? आप कहते हैं कि मल्टी ब्राण्ड रिटेल में एफ.डी.आई. आने से खुदरा क्षेत्र के लोगों को रोजगार मिलेगा। मुझे तो लगता है कि जो रोजगार आज तक मिला हुआ है, उसे खत्म करने की यह साजिश हो रही है। जिस तरीके से इस देश में बाबासाहेब ने संविधान में व्यवस्था दी, एस.सी., एस.टी. और ओ.बी.सी. को नौकरियों में जो आरक्षण दिया, आज प्राइवेट सैक्टर में वह आरक्षण नहीं होगा, उस आरक्षण को खत्म करने की इस मुल्क में यह साजिश हो रही है।
आज देश में 20 लाख करोड़ का जो सरकारी आंकड़ा है, उनको पता होगा, मुझे पूरी ऑथेंटिक जानकारी नहीं है, लेकिन 20 लाख करोड़ का जो निवेश करेंगे, इतना जिनका टर्नओवर है, वे केवल 20 लाख लोगों को नौकरी दे रहे हैं, लेकिन इस देश में भारत में रहने वाले जो खुदरा व्यापार में लगे हुए लोग हैं, उनका भी 20 लाख करोड़ रुपये का टर्नओवर है, लेकिन लगभग इतने ही रुपये में चार करोड़ लोगों को वे नौकरी दिये हुए हैं तो हम कैसे मान सकते हैं कि उनके यहां आने से रोजगार बढ़ेगा। मुझे तो लगता है कि इससे रोजगार खत्म होंगे। जो भी होगा, इसका पता कल चलेगा।
यह कहा जा रहा है, माननीय सिब्बल साहब कह रहे थे कि जिस प्रदेश में पूंजी लगानी हो, लगाइये। ये जो 10 लाख की आबादी वाले शहर हैं, हम कहना चाहते हैं कि आज 17 करोड़ इस मुल्क के जो लोग हैं, वे देश में 10 लाख की आबादी वाले शहरों में रहते हैं, मुझे पूरी आशंका है कि पूरे तरीके से उन 17 करोड़ भारतीयों को, जो 10 लाख की आबादी वाले शहरों में रहने वाले लोग हैं, उनको लूटने की साजिश हो रही है। अध्यक्ष जी, यह गांधी जी का देश है, गांधी जी को मानने वाले लोग भी हैं, लेकिन गांधी जी ने स्वदेशी वस्तुओं को अपनाने की बात कही थी, विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार किया था। मैं समझता हूं कि उनके नाम का अपमान होगा, अगर इस तरह से खुदरा में एफडीआई को लाने का हम प्रयास करेंगे।
अध्यक्ष महोदया, आज पूरे यूएस में वॉलमार्ट के खिलाफ जबरदस्त तरीके से संघर्ष हो रहा है। वहां पर अगर उनको फायदा होता तो अमेरिकी सरकार उनको एक लाख करोड़ की सब्सिडी क्यों देती? अध्यक्ष महोदया, वहां पर जो खेती होती है, केवल कारपोरेट जगत के लोगों के लिए, कारपोरेट घरानों का पेट भरने के लिए वहां खेती होती है। मैं यह भी जानना चाहता हूं कि जब एफडीआई आएगी, तो जो खुदरा व्यापार में होगा, खुदरा क्षेत्र में 30 परसेंट यहां के उत्पादित माल को खरीदेंगे, मैं जानना चाहता हूं कि किस आधार पर आपने असेसमेंट किया है कि 30 परसेंट, क्यों नहीं 50 परसेंट, क्यों नहीं 20 परसेंट, क्यों नहीं 70 परसेंट? हम जानते हैं और जिस तरीके से दुनिया में खबरें आ रही हैं कि वॉलमार्ट का पूरे देश में जो कब्जा होने जा रहा है। अगर हमारे उत्पादन का 30 परसेंट खरीदकर वे डम्प भी कर दें तो 70 फीसदी में वे इतना मुनाफा कमायेंगे कि दुनिया के तमाम मुल्कों से सामान लाकर हमें गुलाम बनाने की साजिश होगी।...( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया, आज इन्हीं सारी चीजों के साथ मैं समझता हूं कि जिस तरीके से प्राइवेट सेक्टर में खुदरा व्यापार में कम्पनियां आ रही हैं, निश्चित रूप से इस देश में जो शैडय़ूल कॉस्ट के लोग हैं, ट्राइबल क्लॉस के लोग हैं, ओबीसी के लोग हैं, जो उन्हें संविधान के आधार पर नौकरी मिली है, उन्हें खत्म करने की साजिश हो रही है। अध्यक्ष महोदया मैं जरूर कहना चाहता हूं कि हमारी पार्टी का यह कहना है कि एक तरफ केंद्र सरकार यह मानकर चल रही है कि खुदरा व्यापार, किराना के क्षेत्र में एफडीआई को लाने से काफी फायदा होगा। वहीं दूसरी तरफ दूसरा पक्ष है, जो केंद्र सरकार के फैसले पर पूरे देश में हर स्तर पर इससे काफी ज्यादा नुकसान होने की बात कर रहा है। ऐसी स्थिति में किराना क्षेत्र में एफडीआई की नीति के नफा-नुकसान को आजमाये बिना जल्दबाजी में कोई निर्णय लेना उचित नहीं होगा। इसलिए हमारी पार्टी का केंद्र की सरकार को सुझाव के तौर पर कहना है कि केंद्र की सरकार ने जिन कांग्रेस पार्टी शासित राज्यों में खुदरा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश अर्थात एफडीआई की अनुमति प्रदान की है या करना है और उन राज्यों में इस नीति का अनुभव कैसा रहता है, उसकी एक तय निश्चित अवधि सीमा में न केवल सरकारी स्तर पर, बल्कि संसदीय स्तर पर भी इसकी गहन समीक्षा करने की आवश्यकता है। इसके बाद फिर इस नीति को जारी रखने या न रखने संबंधी अंतिम फैसला लेने के लिए केंद्र सरकार को कोई कदम उठाना चाहिए। हालांकि इस संबंध में हमारी पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष बहन कुमारी मायावती ने 9 अक्टूबर को बहुजन समाज पार्टी के संस्थापक मान्यवर कांशीराम साहब की छठवीं पुण्यतिथि के अवसर पर लखनऊ में लाखों लोगों के बीच में एक राष्ट्रीय संपर्क महारैली में कहा था कि यदि केंद्र सरकार के हिसाब से देश में खुदरा बाजार अर्थात् किराना के क्षेत्र में एफडीआई लागू करने से यहां के किसानों व छोटे कारोबार में लगे लोगों तथा यहां की आम जनता के हित के साथ-साथ अपने देश की अर्थव्यवस्था में भी काफी सुधार आ जाता है तो हमारी पार्टी आगे चलकर इस पर विचार जरूर करेगी, इसका स्वागत करेगी।
हालांकि केंद्र सरकार की इस नीति में देश की जनता के लिए केवल एक जो खास पक्ष इनका है कि केंद्र सरकार द्वारा खुदरा बाजार में वर्तमान एफडीआई की जो नीति है, वह देश के किसी भी राज्य में जबरन थोपी नहीं जाएगी अर्थात देश में कोई राज्य अगर खुदरा व्यापार चाहे, एफडीआई लागू करना चाहे तो लागू करे, केंद्र सरकार को उस पर कोई दबाव नहीं होगा।
अध्यक्ष महोदया, जिस तरह से गैट है जिसकी चर्चा प्रतिपक्षी नेता कर रहे थे, जो आपका अंतर्राष्ट्रीय समझौता है जिसमें नेशनल ट्रीटमेंट का जो प्रावधान है इस पर भी हमें बारीकी से देखना पड़ेगा क्योंकि हमारी पार्टी ने इसे काफी गंभीरता से संज्ञान में लिया है। इस के अलावा इस मुद्दे पर हमारी पार्टी को देश में सांप्रदायिक ताकतों को बढ़ावा देने वाली पार्टियों ...( व्यवधान) अभी तो आपने पूरी बात नहीं सुनी है।
अध्यक्ष महोदया : कृपया आप इधर देख कर बोलिए।
…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : आप बैठ जाइए।
…( व्यवधान)
श्री दारा सिंह चौहान : इसके अलावा इस मुद्दे पर हमारी पार्टी को देश में सांप्रदायिक ताकतों को बढ़ावा देने वाली पार्टियों के साथ खड़ा होना है या खड़ा नहीं होना है, इस बात को ले कर हम सोच रहे हैं। ...( व्यवधान) इस पर हम गंभीरता से विचार कर रहे हैं।
अध्यक्ष महोदया, इन दोनों खास बातों को ध्यान में रख कर ही देश व जनहित में सही और उचित निर्णय, हमारी पार्टी जब कल शाम को वोटिंग होगी, उस समय बताएगी कि हम क्या करने जा रहे हैं? इन्हीं सब जरूरी बातों के साथ मैं अपनी बात समाप्त करता हूं।
SHRI T.K.S. ELANGOVAN (CHENNAI NORTH): Thank you Madam Speaker for allowing me to speak on the Motion proposed by the hon. Leader of Opposition.
Madam, at the outset, the Leader of Opposition of the House had stated that the stakeholders were not consulted. When she said it, she mentioned that the Chief Ministers of States and political parties as stakeholders. The hon. Minister, Shri Kapil Sibal had said that by allowing FDI in retail, the farmers and the consumers will get a fair deal. But the actual stakeholders are the traders. I do not know whether the Government has consulted the traders or not.
You know that, in our country, traders form a class. Amongst the four classes of the Hindu community, traders themselves or the Vaishyas, are a class. They were not consulted. This notification says that the above policy is an enabling policy only. By saying that it is an enabling policy is like the story of the Pied Piper of Hamlin. He says that he will blow the pipe and go, and whoever comes with him can come and fall in the river. It is similar to that. So, this enabling policy will induce the State Governments at one point or another to join this band wagon.
I am not telling this as your opponent. I am telling this as your brother. I know that the injury is in the hand. I have diagnosed that the injury is in the hands. I say that only the hand should be treated and I do not want the whole body to be scanned like what the Opposition says. As a brother, as a partner, I warn you that this will definitely is not in the interest of the trading community.
It is said that about 30 crores of people are employed in the trading community and most of them are not working in big shops. They run their shops individually. This is the biggest source of self-employment. A man with some self-respect, whatever money he has, can invest in a small shop and run his family with it. He may not get much out of it. But at least he can lead a reasonable life. Hon. Minister, Shri Kapil Sibal, was defending this decision from the Government’s side. He said that by allowing the FDI in retail business, farmers will get a fair deal, consumers will get a fair deal, which means until now they are not getting a fair deal and that the traders are cheating both the sections of the people. This is true. … (Interruptions) If you say that this statement is true then you must support them.
MADAM SPEAKER: Shri Elangovan, please address the Chair.
SHRI T.K.S. ELANGOVAN: It is said that at least fifty per cent of the total FDI brought shall be invested in back end infrastructure. Any company or any trader who is going to invest here will build his own infrastructure. This would not be a common facility. This facility will not be used for a common purpose. This is for his own use. If you put a condition that this infrastructure would be considered as a common facility, then it is good. Further, infrastructure has included processing, manufacturing, distribution, design improvement, quality control, packaging, logistics, storage, warehouse, agricultural market produce, etc. But cold storage is not included in it. So, that should also be included.
Secondly, we can understand if fresh agricultural produce, including fruits and vegetables, are exempted, but you have also exempted grains. That is not in the interest of the common people. We want the grains to be excluded from this. Only fresh poultry, fishery, fruits, vegetables, and flowers can be included from the unbranded category, but not grains. Grains should be from the branded category.
So, my worry is that this will greatly affect the large chunk of traders who are having small shops. History is testimony to this. Earlier there were reports that it has affected the small traders and millions of people.
The hon. Minister has said that the Walmart has failed in China, and Walmart has failed here and that people will not go to Walmart as it will be situated outside the city. Then, why we need Walmart here? When people will not go there and when there is no space in the cities with more than ten lakh population, then why Walmart?
The only point on which we have to stand by the Government and we stand by the Government is that, you have stated that it is the need of the hour to save the fiscal condition of the States. So, we do not want to let you down. Secondly, we do not want to join the Opposition, we do not want to join the BJP. … (Interruptions) We are not neutral. We are against the FDI in multi-brand retail. We were the first Party to oppose this by way of a Resolution, by incorporating this in our manifesto. But still we do not want to oppose you or vote against you because we know that only the hand is injured and we do not want to put you for a whole body scan. So, we have time. We are with you. We will watch you and we will correct you as and when necessary because we have to face the people. We have made many promises. We have together done many good things for the country. One or two things may be not in the interest of the people for which we do not want to let you down.
While registering my strong opposition to the FDI in multi-brand retail, I also support the Government. With these words, I conclude.
SHRI T.R. BAALU (SRIPERUMBUDUR): We will not allow the FDI in Tamil Nadu.
SHRI NISHIKANT DUBEY : Who are you to do that? You are not in power in Tamil Nadu.… (Interruptions)
SHRI T.R. BAALU : We do not allow FDI in Multi-Brand Retail in Tamil Nadu.… (Interruptions)
MADAM SPEAKER: Shri Basu Deb Acharia to speak now.
… (Interruptions)
SHRI BASU DEB ACHARIA (BANKURA): Madam, I will start today and continue tomorrow.
MADAM SPEAKER: Do you not want to speak now?
SHRI BASU DEB ACHARIA : I will start today and continue tomorrow also.
MADAM SPEAKER: You will start today and finish it tomorrow! … (Interruptions)
MADAM SPEAKER: You have to speak for only ten minutes. Please start it.
श्री बसुदेव आचार्य : अध्यक्ष महोदया, वामपंथी दल शुरू से ही प्रत्यक्ष विदेशी पूंजी निवेश का खुदरा व्यापार में विरोध कर रहे हैं। मुझे याद है कि वर्ष 2005 में वॉलमार्ट के चीफ एग्जीक्यूटिव आफिसर दिल्ली आये और हमारे प्रधान मंत्री श्री मनमोहन सिंह जी से मिले। वे उस समय वॉलमार्ट को हमारे देश में खुदरा व्यापार में आने की इजाजत मांगने के लिए आये थे। वर्ष 2005 में एक कोआर्डिनेशन कमेटी लेफ्ट और यूपीए-वन की थी, उसमें जब यह प्रस्ताव रखा गया तब हमने उसका विरोध किया। वर्ष 2005 में ही लेफ्ट पार्टी की तरफ से एक नोट पेश किया गया, जिसमें बताया गया कि हम इसका क्यों विरोध कर रहे हैं और हमारा विरोध करने का क्या कारण है? यह हमने उसी समय बता दिया था। यूपीए-वन भी चाहती थी कि वह हमारे देश में आ जाये और उसे इजाजत देने के लिए वे तैयार थे, लेकिन हमारे विरोध के कारण इजाजत नहीं दे पाये। हमने फैसला ले लिया था कि हम इसे समर्थन न करके विरोध करेंगे, क्योंकि उस समय हमारे ऊपर सरकार निर्भर थी। वामपंथी दल के 61 सदस्य थे। उस समय हम सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे थे। हम सरकार में शामिल नहीं थे। आपके साझे न्यूनतम कार्यक्रम को हम समर्थन दे रहे थे। हम किसलिए विरोध कर रहे हैं? हम केवल विरोध करने के लिए विरोध नहीं कर रहे हैं। हमने कभी ऐसा नहीं देखा कि एक ऐसे मुद्दे को लेकर हमारे देश में खाली विरोध, जो विरोधी पक्ष है, not only the opposition parties but also the allies like the DMK, the Trinamool Congress उस समय सत्ता में थे और हमारे पुराने दोस्त नेता जी मुलायम सिंह ...( व्यवधान) अभी भी हैं। पुराने दोस्त, हमने बोला न पुराने दोस्त, वे उस समय सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे थे और अभी भी दे रहे हैं। बीएसपी भी बाहर से समर्थन दे रहे हैं।
जब सरकार ने पिछले शीतकालीन सत्र में फैसला लिया, तब हमने देखा कि हमारे इस सदन के कम से कम 60 फीसदी सदस्यों की एक ही मांग थी कि you roll back FDI in Multi-Brand Retail. हमने कभी ऐसा नहीं देखा। I have never seen it during my 32 years of Parliamentary life in this House. I had never seen it in the past. I had also never seen on 20th September when there was a Bharat Bandh. During the All India Strike, parties extended their support. हमारे साथ हमारा पुराना दोस्त मुलायम सिंह यादव थे, एक साथ हम लोग गिरफ्तार हुए। देश भर में लाखों-करोड़ों की तादाद में लोग विरोध में सड़कों पर उतर गए। ऐसा विरोध कभी नहीं हुआ। किसलिए यह विरोध हुआ अगर देश के हित में है। आनन्द शर्मा जी, आपने एक बहुत बड़ा खत लिखा है, तीन पन्ने का खत लिखा है, मैंने उसे गौर से पढ़ा, क्या है उसमें, क्या करना चाहिए। आपने बताया है कि रोजगार होगा, कहां से रोजगार होगा? कैसे आपको पता चला कि रोजगार होगा? क्या आपने देखा नहीं कि दुनिया भर में इतने सारे सुपर-मार्केट्स में 21 लाख लोग लगे हैं। कपिल सिब्बल जी, क्या आपको पता नहीं है कि 21 लाख है उनका और हमारे देश में आकर तीन साल के अंदर में 40 लाख होगा। क्या सपना दिखा रहे हैं लोगों को? अरे, बेरोजगार बढ़ रहा है, गांवों में बढ़ रहा है, शहरों में बढ़ रहा है, 0.8 प्रतिशत है अभी। वर्ष 2001 से 2010 तक रोजगार में 0.8 प्रतिशत ग्रोथ हुई है। यह आपको पता नहीं है कि अनइम्प्लायमेंट बढ़ रहा है।
17.55 hrs ( Dr. M. Thambidurai in the Chair) There is a growth in unemployment; not in employment in our country.
There is economic slow down. क्या आपको पता नहीं है? अगर वालमार्ट एक रोजगार देगा, तो 17 लोगों का रोजगार छीनेंगे। कपिल सिब्बल जी, आपको पता नहीं है। क्या आपको मालूम नहीं है कि वालमार्ट का एक सुपरमार्केट खुलने से 1300 रिटेल दुकानें उजड़ जाएंगी? फिर भी आप इसका समर्थन कर रहे हैं? एक परिवर्तन हो जाएगा हमारे देश में। आज किसान आत्महत्या कर रहा है, 2,76,000 किसानों ने हमारे देश में आत्महत्या की है, उसके लिए आपको चिंता नहीं है। उसके लिए आपकी आंखों में आंसू नहीं हैं।
In China, 90 per cent of retail trade is under Government control. Shri Rajiv Shukla, you don’t know. You are talking about China. How much today? Wal-Mart is sourcing from our country only one billion; but from China – 20 billion. You are talking of China. How much Wal-Mart is sourcing from China? It is 20 billion; from India, one billion. I know about every country. How much from China? Ninety per cent of retail trade is under Government control. After when they had the experience of displacement of retail trade, then, they enacted stricter legislation and regulation. You don’t have that. You are talking of China. How many will be displaced? You can’t give employment to the people of our country; and when there is self-employment; they are self-employed. आपसे नौकरी या रोजगार नहीं मांग रहे हैं। छोटी-छोटी दुकान खोलकर बैठे हैं, अपना व्यापार कर रहे हैं। परिवार पाल रहे हैं। 20 करोड़ से ज्यादा है, उसे आप खत्म करना चाहते हैं। बोले, हम तो कुछ नहीं करना चाहते, अभी तो 53 शहरों में इजाजत देंगे।
MR. CHAIRMAN : Mr. Basu Deb Acharia, you can continue your speech tomorrow.