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State Consumer Disputes Redressal Commission

U P P C L vs Amarnath Vishwakarma on 15 May, 2017

  	 Cause Title/Judgement-Entry 	    	       STATE CONSUMER DISPUTES REDRESSAL COMMISSION, UP  C-1 Vikrant Khand 1 (Near Shaheed Path), Gomti Nagar Lucknow-226010             First Appeal No. A/1995/522  (Arisen out of Order Dated  in Case No.  of District State Commission)             1. U P P C L  A ...........Appellant(s)   Versus      1. Amarnath Vishwakarma  A ...........Respondent(s)       	    BEFORE:      HON'BLE MR. JUSTICE AKHTAR HUSAIN KHAN PRESIDENT    HON'BLE MR. Mahesh Chand MEMBER          For the Appellant:  For the Respondent:    Dated : 15 May 2017    	     Final Order / Judgement    

 राज्‍य उपभोक्‍ता विवाद प्रतितोष आयोग, उ0प्र0,  लखन ऊ

 

 अपील संख्‍ या- 522 /1995

 

(मौखिक)

 

(जिला उपभोक्‍ता फोरम, वाराणसी द्वारा परिवाद संख्‍या 460/1993 में पारित आदेश दिनांक 28.02.1995 के विरूद्ध)

 

1.

Executive   Engineer,   Electricity   Distribution   Division-II,                         Bhikeripur(Maduadech)Varanasi.

2. Assistant Engineer (U.P.S.E.B.) Chakie-Sub Division  Sahupuri,                      Varanasi.

3. Assistant Engineer (U.P.S.E.B.)  Chakia  Sub-Division  District                    Varanasi.                  ..................अपीलार्थीगण/विपक्षीगण बनाम Amarnath Vishwakarma S/o Shri Bahadur Vishwakarma R/o Mauja Chakia Town Area Sahdullapur, near Van Bariar, District Varanasi.                            ...............प्रत्‍यर्थी/परिवादी समक्ष:-

1. माननीय न्‍यायमूर्ति श्री अख्‍तर हुसैन खान, अध्‍यक्ष।
2. माननीय श्री महेश चन्‍द, सदस्‍य।

अपीलार्थीगण की ओर से उपस्थित : श्री दीपक मेहरोत्रा,                                                    विद्वान अधिवक्‍ता।

प्रत्‍यर्थी की ओर से उपस्थित : श्री एम0एच0 खान,                                     विद्वान अधिवक्‍ता।

दिनांक: 15-05-2017          मा0 न्‍यायमूर्ति श्री अख्‍तर हुसैन खान, अध्‍यक्ष द्वारा उदघोषित निर्णय परिवाद संख्‍या-460/1993 अमरनाथ विश्‍वकर्मा बनाम अधिशासी अभियन्‍ता विद्युत वितरण अनुखण्‍ड (द्वितीय) आदि में जिला उपभोक्‍ता विवाद प्रतितोष फोरम, वाराणसी द्वारा पारित निर्णय और आदेश दिनांक 28.02.1995 के विरूद्ध यह अपील उपरोक्‍त परिवाद के विपक्षीगण एक्‍जीक्‍यूटिव इंजीनियर, इलैक्ट्रिसिटी डिस्‍ट्रीब्‍यूशन डिवीजन और असिस्‍टेंट इंजीनियर (यू0पी0एस0ई0बी0) चकिया, सब डिवीजन साहूपुरी तथा असिस्‍टेंट इंजीनियर (यू0पी0एस0ई0बी0) चकिया सब डिवीजन जिला वाराणसी  की  ओर  से  धारा-15  उपभोक्‍ता  संरक्षण   -2- अधिनियम 1986 के अन्‍तर्गत इस आयोग के समक्ष प्रस्‍तुत की गयी है।

आक्षेपित निर्णय और आदेश के द्वारा जिला फोरम ने उपरोक्‍त परिवाद निस्‍तारित करते हुए निम्‍न आदेश पारित किया है:-

'' फोरम का मत है कि विपक्षीगण द्वारा दिया गया विवादित बिल निरस्‍त किया जाता है तथा लोड बढ़ाने का आदेश दिया जाता है और यदि विपक्षीगण अन्‍य कोई संशोधित बिल देते हैं तो उसका ठोस वैज्ञानिक आधार होना चाहिए। फोरम परिवादी को विपक्षीगण से बतौर प्रतीकात्‍मक क्षतिपूर्ति के रूप में 500/- (पांच सौ रूपया) दिलाती है जो राशि दो माह के भीतर देय होगा अन्‍यथा समय बीत जाने पर इस 500/- (पांच सौ रूपये) की राशि पर 15% (पन्‍द्रह प्रतिशत) वार्षिक ब्‍याज देयता की तिथि तक देय होगा।'' अपीलार्थीगण की ओर से उनके विद्वान अधिवक्‍ता श्री दीपक मेहरोत्रा  और  प्रत्‍यर्थी  की  ओर  से   उनके   विद्वान   अधिवक्‍ता          श्री एम0एच0 खान उपस्थित आए।
हमने उभय पक्ष के विद्वान अधिवक्‍तागण के तर्क को सुना है और आक्षेपित निर्णय और आदेश तथा पत्रावली का अवलोकन किया है।
अपीलार्थीगण के विद्वान अधिवक्‍ता का तर्क है कि जिला फोरम द्वारा पारित आक्षेपित निर्णय और आदेश तथ्‍य और विधि के विपरीत है। अत: निरस्‍त किए जाने योग्‍य है।
प्रत्‍यर्थी/परिवादी के विद्वान अधिवक्‍ता ने आक्षेपित निर्णय और आदेश का समर्थन करते हुए तर्क किया कि अपील बल रहित है और निरस्‍त किए जाने योग्‍य है।
  -3-
हमने उभय पक्ष के विद्वान अधिवक्‍तागण के तर्क पर विचार किया है।
परिवाद पत्र के अनुसार प्रत्‍यर्थी/परिवादी का कथन है कि वह स्‍वरोजगार के अन्‍तर्गत अपने व अपने परिवार के भरण-पोषण हेतु चकिया वाराणसी में एक गृह उद्योग हेतु विद्युत कनेक्‍शन संख्‍या- 181010 लेकर खराद का कारखाना चला रहा था, परन्‍तु कनेक्‍शन का लोड कम था और प्रत्‍यर्थी/परिवादी कारोबार बढ़ाने के उद्देश्‍य से नयी मशीन लगाना चाहता था, जिसके लिए विद्युत लोड बढ़ाने हेतु उसने प्रार्थना पत्र दिया तथा 25/-रू0 इस्‍टीमेट आदि के लिए जमा कर दिया और उसके बाद उसने दिनांक 12.09.1991 को लोड बढ़ाने हेतु इस्‍टीमेट का 3000/-रू0 अपीलार्थी/विपक्षीगण के कार्यालय में जमा किया, तब विपक्षी संख्‍या-4 वी0आर0 प्रजापति, सहायक अभियन्‍ता ने उसे 1770/-रू0 की रसीद दिया और उसके कनेक्‍शन का लोड बढ़ाने का आश्‍वासन दिया। अत: उसने नई मशीन मंगवायी और उसके बाद वह बराबर उपरोक्‍त विपक्षी संख्‍या-4 से मिलता रहा, परन्‍तु उन्‍होंने विद्युत लोड नहीं बढ़ाया और दिनांक 01.09.1993 को उसे 18,977.40/-रू0 का विद्युत बिल भेज दिया। तब उसने दिनांक 04.09.1993 को अधिशासी अभियन्‍ता विद्युत वितरण खण्‍ड को शिकायत भेजी, परन्‍तु कोई कार्यवाही नहीं हुई। अत: विवश होकर परिवाद जिला फोरम के समक्ष प्रस्‍तुत किया है।
अपीलार्थी/विपक्षीगण की ओर से जिला फोरम के समक्ष लिखित कथन प्रस्‍तुत कर कहा गया है कि प्रत्‍यर्थी/परिवादी ने मात्र 1770/-रू0 जमा किया है। इसके साथ ही यह भी कहा गया है कि प्रत्‍यर्थी/परिवादी   -4- विद्युत का उपयोग खराद मशीन व बेल्डिंग मशीन चलाने में कर रहा था एवं अब भी कर रहा है।
लिखित कथन में अपीलार्थी/विपक्षीगण की ओर से यह भी कहा गया है कि प्रत्‍यर्थी/परिवादी के कनेक्‍शन का लोड 3.5 एच0पी0 से    5 एच0पी0 कर दिया गया है तथा लाईट व फैन का लोड नियमानुसार बढ़ा दिया गया था। प्रत्‍यर्थी/परिवादी को सही बिल भेजा गया है। दिसम्‍बर 1993 तक विद्युत मूल्‍य 24,474.31/-रू0 की अदायगी हेतु वह उत्‍तरदायी है।
उभय पक्ष के अभिकथन एवं प्रस्‍तुत अभिलेखों पर विचार करने के उपरान्‍त जिला फोरम ने अपने आक्षेपित निर्णय और आदेश में निम्‍न उल्‍लेख किया है:-
 ''अपीलार्थी/विपक्षीगण की ओर से कोई प्रतिशपथ पत्र दाखिल नहीं हुआ है। प्रत्‍यर्थी/परिवादी ने अपनी बात के पक्ष में कुछ कागजात तथा बिजली का बिल दाखिल किया है, जिसका अवलोकन फोरम ने सहानुभूतिपूर्वक किया। इसमें महत्‍वपूर्ण बात यह है कि विद्युत विभाग द्वारा जारी किसी भी बिल में मीटर रीडिंग नहीं दिया गया है और वर्तमान मीटर रीडिंग के कालम में आई0डी0एफ0 तथा पिछली मीटर रीडिंग के कालम में 10 लिखा हुआ है। प्रत्‍यर्थी/परिवादी द्वारा दाखिल शपथ पत्र में अपनी बात को सत्‍य कहा है। अपीलार्थी/विपक्षीगण ने कोई प्रतिशपथ पत्र दाखिल नहीं किया। अत: प्रत्‍यर्थी/परिवादी की                 बात पर विश्‍वास न करने का कोई कारण प्रतीत नहीं होता                          है।''     -5-  जिला फोरम द्वारा उपरोक्‍त उल्‍लेख के आधार पर परिवाद आंशिक रूप से स्‍वीकार करते हुए उपरोक्‍त प्रकार से आदेश पारित किया गया है।
हमने जिला फोरम द्वारा पारित आक्षेपित निर्णय और आदेश की समीक्षा की है। जिला फोरम द्वारा पारित आक्षेपित निर्णय और आदेश से यह स्‍पष्‍ट है कि किसी भी बिल में मीटर रीडिंग अंकित नहीं है और पिछली रीडिंग के कालम में 10 लिखा है। अत: यह मानने हेतु उचित आधार है कि प्रत्‍यर्थी/परिवादी का मीटर ठीक नहीं लगा है, परन्‍तु परिवाद पत्र के कथन से ही यह स्‍पष्‍ट है कि परिवादी मूल कनेक्‍शन नं0 181010 लेकर खराद का कारखाना चला रहा था। अत: यह मानने हेतु उचित और युक्‍तसंगत आधार है कि प्रत्‍यर्थी/परिवादी ने खराद का कारखाना चलाने हेतु विद्युत कनेक्‍शन लिया था और तदनुसार विद्युत उपभोग किया है। अत: ऐसी स्थिति में प्रत्‍यर्थी/परिवादी विद्युत देय के भुगतान हेतु उत्‍तरदायी है। चूँकि अपीलार्थी/विपक्षीगण द्वारा मीटर प्रत्‍यर्थी/परिवादी के प्रतिष्‍ठान में नहीं लगाया गया है, अत: हम इस मत के हैं कि जिला फोरम द्वारा पारित आक्षेपित निर्णय और आदेश को इस सीमा तक संशोधित किया जाना उचित है कि अपीलार्थी/विपक्षीगण प्रत्‍यर्थी/परिवादी को प्रश्‍नगत अवधि के विद्युत उपभोग हेतु   पुनरीक्षित बिल उसके विद्युत कनेक्‍शन पर नियमानुसार न्‍यूनतम देय धनराशि के आधार पर जारी करें और तदनुसार उसकी वसूली प्रत्‍यर्थी/परिवादी से करें।
अत: उपरोक्‍त निष्‍कर्षों के आधार पर यह अपील आंशिक रूप  से     -6- स्‍वीकार की जाती है और जिला फोरम ने आक्षेपित निर्णय और आदेश में जो पुनरीक्षित बिल ठोस वैज्ञानिक आधार पर जारी करने हेतु निर्देशित किया है, उसे संशोधित करते हुए अपीलार्थी/विपक्षीगण को निर्देशित किया जाता है कि वे प्रत्‍यर्थी/परिवादी को प्रश्‍नगत अवधि के विद्युत उपभोग हेतु पुनरीक्षित बिल उसके विद्युत कनेक्‍शन पर नियमानुसार न्‍यूनतम देय धनराशि के आधार पर जारी करें और तदनुसार उसकी वसूली प्रत्‍यर्थी/परिवादी से करें। जिला फोरम द्वारा पारित आक्षेपित निर्णय और आदेश का शेष अंश यथावत् रहेगा।
अपील में उभय पक्ष अपना-अपना वाद व्‍यय स्‍वयं वहन करेंगे।
 
      (न्‍यायमूर्ति अख्‍तर हुसैन खान)           (महेश चन्‍द)        

 

           अध्‍यक्ष                    सदस्‍य           

 

 

 

जितेन्‍द्र आशु0

 

कोर्ट नं0-1             [HON'BLE MR. JUSTICE AKHTAR HUSAIN KHAN]  PRESIDENT 
     [HON'BLE MR. Mahesh Chand]  MEMBER