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Lok Sabha Debates

The Speaker Made A Reference To The Passing Away Of Shri Bal Raj Madhok, Member Of ... on 3 May, 2016

Sixteenth Loksabha an> Title:    The Speaker made a reference to the passing away of Shri Bal Raj Madhok, Member of  the Second and Fourth Lok Sabha.

 

माननीय अध्यक्ष:माननीय सदस्यगण, मुझे सभा को श्री बल राज मधोक के दुःखद निधन के बारे में सूचित करना है जो दूसरी और चौथी लोक सभा के सदस्य थे और जिन्होंने दिल्ली के क्रमशः नई दिल्ली और दक्षिण दिल्ली संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व किया।

          श्री मधोक लोक सभा के दौरान विशे­ााधिकार समिति और सामान्य प्रयोजनों सबंधी समिति के सदस्य रहे। पेशे से शिक्षाविद होने के नाते श्री मधोक की शिक्षा, विदेशी मामले और रक्षा के प्रति विशे­ा रुचि थी।

          विद्वान श्री मधोक ने विविध वि­ायों पर हिन्दी तथा अंग्रेजी में अनेक पुस्तकों की रचना की। श्री बल राज मधोक का निधन 2 मई, 2016 को 96 व­ाऩ की आयु में नई दिल्ली में हुआ।

          हम श्री बल राज मधोक के निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हैं तथा शोक संतप्त परिवार के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करते हैं।

          अब सभा दिवंगत आत्मा की स्मृति में कुछ देर मौन खड़ी रहेगी।

11.02 hours (The Members then stood in silence for a short while.)     11.03 hours ORAL ANSWERS TO QUESTIONS HON. SPEAKER : Q. No. 121, Shri Scindia (Q. 121) श्री ज्योतिरादित्य माधवराव सिंधिया : माननीय अध्यक्ष जी, 26/11 आतंकवादी हमले के बाद निजी संस्थाओं को सीआईएसएफ सप्लाई करने के लिए सीआईएसएफ एक्ट को संशोधित किया गया था। एक रिपोर्ट आई है कि सीआईएसएफ हवाई अड्डों में नहीं दी गई है। पार्लियामेंटरी स्टैंडिंग कमेटी, जो परिवहन, पर्यटन और संस्कृति की है, उसने चिंता व्यक्त की है और कहा है कि हमारे आठ अति संवेदनशील और 19 संवेदनशील हवाई अड्डों को सीआईएसएफ नहीं दी  गई है जबकि हवाई अड्डों की सुरक्षा के लिए यह एकमात्र फोर्स है।

           मैं माननीय मंत्री जी से पूछना चाहता हूं कि इस वातावरण में क्या कारण है कि हवाई अड्डों को सीआईएसएफ मुहैया नहीं करा पा रहे हैं? एक तरफ ताज होटल, मुम्बई जो 26/11 का टार्गेट रहा था, वहां भी सीआईएसएफ को नकार दिया गया है, साईं बाबा शिरडी मंदिर को नकार दिया है। रामदेव के पतंजलि पार्क को सीआईएसएफ फोर्स क्यों दी गई है? इसी के साथ कारण दिया जाता है कि राशि की कमी एयरपोर्ट्स के लिए है। 140 करोड़ रुपए प्रति व­ाऩ निजी कंपनियों से मिलता है, उस साधन के आधार पर सीआईएसएफ हवाई अड्डों को क्यों नहीं दी जा रही है?

श्री किरेन रिजीजू : माननीय अध्यक्ष जी, सीआईएसएफ की डिप्लाएमेंट का तरीका रूल्स के मुताबिक होता है। गवर्नमेंट इंस्टीटय़ूशन्स हैं, एयर पोर्ट्स हैं और बहुत ही महत्वपूर्ण इंस्टालेशन देश में हैं जिन्हें तीन कैटेगिरी में रखा गया है। इसके मुताबिक सिक्योरिटी का डिप्लाएमेंट सीआईएसएफ के माध्यम से किया जाता है। आपकी सरकार के समय में 2009 में सीआईएसएफ एक्ट में अमेंडमेंट हुआ था, उस समय यह निर्णय पहली बार हुआ था कि प्राइवेट इंस्टीटय़ूशन्स को भी फोर्स दी जाएगी लेकिन उसका भी तरीका होता है।

 

          आईबी की इनपुट्स लेने के बाद विभिन्न प्रकार की प्रक्रियाओं को फालो करके दिया जाता है। माननीय सदस्य को प्राइवेट इंस्टीटय़ूशंस के नाम अगर चाहिए तो मैं अलग से दे सकता हूं, उसकी बहुत लम्बी लिस्ट है। करीब-करीब 11 हजार से ज्यादा प्राइवेट इंस्टीटय़ूशंस में दिया है। माननीय सदस्य ने जो नाम लिया है, वह भी है। सबसे स्मालेस्ट 35 डिप्लायमेंट हुए हैं जबकि प्राइवेट इंस्टीटय़ूशंस में लार्ज स्केल में भी डिप्लायमेंट होता है। ऐसा नहीं है कि प्राइवेट इंस्टीटय़ूशंस में एक या दो को दिया जाता है बल्कि बहुत सारे इंस्टीटय़ूशंस को दिया जाता है। आपने जो आठ एयरपोर्ट्स का नाम लिया है, उसकी भी प्रक्रिया है। बहुत से प्राइवेट इंस्टीटय़ूशंस को देते हैं लेकिन आपने एक का ही नाम लिया है। आईबी के इनपुट्स और वेरीयस सर्कमस्टांसिस को ध्यान में रखते हुए यह दिया गया है। किसी एक संस्था को या किसी एक संस्थान को फेवर करके दिया है, ऐसा कोई मसला नहीं है।

श्री ज्योतिरादित्य माधवराव सिंधिया : महोदया, मेरा प्रश्न था कि जब क्रिटिकल संस्थाओं को एक तरफ नकार दिया गया तो एक ही एफएमसीजी कम्पनी को यह सुरक्षा का वातावरण क्यों दिया गया है। आज आप कह रहे हैं कि साधनों की कमी है।

           मेरा प्रश्न था कि हाइपर सेंसिटिव और सेंसिटिव एयरपोर्ट्स को आप यह मुहैया क्यों नहीं करा रहे हैं। हमारी पार्लियामेंटरी स्टैंडिंग कमेटी ने यह टिप्पणी की है और अगर आपके पास साधनों की कमी है तो निजी संस्थाओं को भी स्किल करने के लिए कैपेसिटी ओगमेंट करने के लिए क्या कदम उठा रहे हैं ताकि वह लेवल प्लेयिंग फील्ड हो, ताकि सीआईएसएफ के निदेश के अनुसार प्राइवेट एजेंसीज भी अनेक संस्थाओं के लिए उसी तरह की सिक्योरिटी मुहैया करा पाए और खास कर हमारे एयरपोर्ट्स के लिए आप क्या कर रहे हैं जिसे कि संसदीय समिति ने भी पूरा आउट लाइन किया है कि सिक्योरिटी प्रोवाइड होनी चाहिए?

श्री किरेन रिजीजू  : मैं मानता हूं कि पार्लियामेंटरी स्टैंडिंग कमेटी की रिपोर्ट को ध्यान में रखते हुए जो कदम उठाना चाहिए, वह उठा रहे हैं। आपने एयरपोर्ट्स की बात कही है जैसा कि श्रीनगर का एयरपोर्ट है। यह बहुत ही संवेदनशील है और इसे सीआरपीएफ गार्ड कर रहा है। सीआईएसएफ स्पेशियलाइज्ड फोर्स जरूर है लेकिन हर चीज की सिक्योरिटी सिर्फ सीआईएसएफ के माध्यम से होती है, ऐसी बात नहीं है। हमारे पास दूसरी फोर्सेज़ भी हैं। उनका ध्यान रखते हुए जैसे सीआरपीएफ की जरूरत श्रीनगर में पड़ी है। ऐसे ही संवेदनशील बहुत-से दूसरे एयरपोर्ट्स हैं जिनकी सिक्योरिटी सीआरपीएफ और अन्य फोर्सेज़ के माध्यम से की जाती है। ऐसा नहीं है कि संवेदनशील इलाके को हमने नज़रअंदाज़ किया है, ऐसी बात नहीं है।

श्री कमल नाथ : महोदया, सीआईएसएफ का गठन सीआईएसएफ एक्ट 1968 में हुआ था और इसका संशोधन वर्ष 2009 में हुआ था। आज यह बात स्प­ष्ट है कि सीआईएसएफ पर्सनल्स की कमी है। उदाहरण के रूप में मेरे अपने जिले वैस्टर्न कोल्ड फील्ड्स हैं और सालों से मैं मांग कर रहा हूं कि सीआईएसएफ की पोस्टिंग होनी चाहिए। सीआईएसएफ  की पोस्टिंग हुई लेकिन जिस संख्या में उसकी आवश्यकता थी, वह नहीं हो पाई क्योंकि हमेशा मुझे कहा गया कि हमारे पास फोर्स नहीं है। यह बात सामने है कि आज सीआईएसएफ की आवश्यकता है। अगर सीआईएसएफ की आवश्यकता है या सीआईएसएफ की स्किल्ड जैसे उनकी ट्रेनिंग है, बम स्क्वाड हैं इनकी ट्रेनिंग प्राइवेट सैक्टर सिक्योरिटी कम्पनी से फर्क है।

          मेरा प्रश्न है कि बढ़ती हुई मांग के अनुसार आप जब रोजगार की बात करते हैं, प्रधानमंत्री जी अभी बैठे हुए थे, आप नए बैटेलियन रेज़ क्यों नहीं करते हैं और अगर आप रेज़ कर रहे हैं तो कब तक करेंगे और कितने करेंगे ताकि एयरपोर्ट को सुरक्षा मिले। इसके साथ-साथ जो कोल कम्पनियां हैं, जहां कोल माफिया उत्पन्न होता है, वहां सीआईएसएफ की बहुत बड़ी आवश्यकता है। वहां पर्याप्त पोस्टिंग नहीं हो पाई है। इसक साथ-साथ सीआईएसएफ की इतनी स्किल्स हैं जो आज लोग स्वीकार कर रहे हैं कि आप सीआईएसएफ का ट्रेनिंग स्किल सैंटर बनवा देंगे ताकि स्किल सैंटर्स प्राइवेट सैक्टर्स को भी स्किल कर पाएं?

माननीय अध्यक्ष : कमल नाथ जी, आपने एक ही प्रश्न में तीन प्रश्न पूछ लिए हैं।

श्री किरेन रिजीजू  : अध्यक्ष महोदया, कमल नाथ जी वरि­ष्ठ सांसद हैं। उन्होंने अपने संसदीय क्षेत्र छिंदवाड़ा की बात सदन के सामने रखी है, हम यह देखेंगे कि यह मामला कैसे ठीक किया जा सकता है। जहां तक सिक्योरिटी फोर्सेज़ स्ट्रैंथ की बात है हमारे पास 145000 सीआईएसएफ फोर्सेज की सैंक्शंड स्ट्रैंथ है। इस सीलिंग को 2 लाख करने के लिए नोट तैयार किया है और कैबिनेट में पेश करने वाले हैं। बहुत ही जल्दी इसका निर्णय भी हो जाएगा।

          हमारे पास चार एडिशनल रिजर्व्ड बैटालियंस रेज की गई हैं। साथ-साथ प्राइवेट सिक्योरिटी का जिक्र किया है, इसका भी हम ध्यान दे रहे हैं कि हमारे देश में प्राइवेट सिक्योरिटी का अरेंजमेंट होना चाहिए। इसके लिए एक एक्ट पास किया गया है और उस एक्ट के मुताबिक स्पेशियलाइज्ड ट्रेनिंग देनी चाहिए। उसके लिए जो भी सहायता सरकार की तरफ से दे सकते हैं, उसके लिए भी हम तैयार हैं। यह संभव नहीं है कि सारे देश में सिक्योरिटी सरकारी स्तर पर ही हो इसलिए प्राइवेट सिक्योरिटी एक्ट का जो प्रावधान है, उसे ध्यान में रखते हुए सीआईएसएफ की संख्या को बढ़ाने का आपने जो सुझाव दिया है, उसे आगे बढ़ाने के लिए हम कार्यवाही कर रहे हैं।

श्री सी.आर.चौधरी:माननीय अध्यक्ष महोदया, मैं आपका आभार प्रकट करता हूँ कि आपने मुझे यह मौका दिया।

          वास्तव में यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण मुद्दा है। सीआरपीफ, सीआईएसएफ, आईटीबीपी आदि सभी पैरा-मिलीट्री फोर्सेज़ हैं। सीआईएसएफ के माध्यम से माननीय सदस्य महोदय ने दूसरी प्राइवेट कंपनियों की सुरक्षा के बारे में एक प्रश्न उठाया था। व­र्ष 2009 में यूपीए सरकार के समय में ही यह ऐक्ट बना। यूपीए सरकार ने यह महसूस किया कि कई प्राइवेट आर्गेनाइजेशंस हैं, जिनको प्रौपर सिक्युरिटी प्रोवाइड करना चाहिए। आज देश में कई ऐसी इंडस्ट्रीज हैं, जो नैशनल इम्पॉर्टेंस कीहैं। उनमें सीआईएसएफ या सीआरपीएफ किसी भी पैरा-मिलीट्री फोर्सेज़ को लगाया जाना चाहिए। मैं मंत्री महोदय से अनुरोध करना चाहूँगा कि जैसे किसी भी काडर के अंदर काडर पोस्ट, डी-काडर पोस्ट और डेपुटेशन पोस्ट होते हैं। वैसे ही सीआईएसएफ में कम से कम 10 से 15 पर्सेंट डेपुटेशन पोस्टिंग के लिए भर्ती की जाए और उनको नैशनल इम्पॉर्टेंस की इंडस्ट्रीज को दिया जाए ताकि उनकी प्रौपर सिक्युरिटी हो सके। आज कई ऐसे प्राइवेट आर्गेनाइजेशंस हैं, they are very important for the national security also. 

माननीय अध्यक्ष  : आप अपना प्रश्न पूछिए।

श्री सी.आर.चौधरी :  उन इंडस्ट्रीज को सिक्युरिटी दिये जाने में कोई हर्ज़ नहीं है, उनको यह दी जानी चाहिए। Secondly, everybody wants a government job.

माननीय अध्यक्ष  :  सारे लोग सजेशन दे रहे हैं। कृपया आप अपना प्रश्न पूछिए।

श्री सी.आर.चौधरी:  इससे गवर्नमेंट जॉब में बढ़ोत्तरी भी होगी और वे प्राइवेट इंडस्ट्रीज को दिये जा सकेंगे। इसलिए मैं मंत्री महोदय से जानना चाहता हूँ कि क्या मंत्री जी सीआईएसएफ के अंदर 10 से 15 पर्सेंट तक प्राइवेट सेक्टर के लिए डेपुटेशन पोस्ट के रूप में भर्ती करना चाहते हैं? यदि हाँ, तो इसे अतिशीघ्र किया जाना चाहिए।

श्री किरेन रिजीजू  : मैं पहले ही बता चुका हूँ कि हमारे पास इंटरनल सिक्युरिटी के लिए फोर्स की 10 बटालियनें हमेशा रिज़र्व रहता ही है। जब किसी इमरजेंसी सिचुएशन में जरूरत पड़ती है, तो हम उनको डिप्लॉय करते हैं। जहाँ तक माननीय सदस्य के सजेशन की बात है कि इम्प्लॉयमेंट की दृ­िष्ट से उनकी संख्या बढ़ानी चाहिए, तो उसके लिए मैंने बताया है कि एक लाख पैंतालिस हजार पैरा-मिलीट्री फोर्सेंज़ की संख्या को हम बढ़ाकर हम दो लाख तक करने के लिए नोट सर्कुलेट किया जा चुका है। जहाँ तक ट्रेनिंग और सहूलियत देने की बात है, तो वह हम कर रहे हैं। इसलिए उनके सुझाव को हम मानते हैं।

SHRI PRALHAD JOSHI: Madam, the Minister has already replied about increasing of manpower and everything. But, having said that, I would like to bring one issue to the notice of the hon. Minister, through you. The Central Industrial Security Force (CISF) has been taking care of security of airports across the country. It has written to the Ministry of Home Affairs several times asking them to give them the full control of cargo security. Presently, cargo security in the airport terminals is jointly handled by CISF and private security personnel. They have said that there would be confusion because both the private security agency and CISF are handling it. That is why they have requested that it should be completely handed over to CISF. I would like to know whether the Government is considering that and if at all they are not considering, then I would like to know how they are avoiding this confusion when there is a sensitive or emergency situation.

SHRI KIREN RIJIJU: Madam, the Government has received certain representations also and we had a discussion with the people who are dealing with matters relating to cargo handling in airports and other places. Definitely, security issue has to be taken up very seriously and if there are any loopholes, then we have to plug those loopholes. CISF is, definitely, a lead organisation to take care of security of cargo in airports and other places. Whenever there are some issues or whenever a requirement is being sought, we deploy CISF as per the need on the ground. There is a discussion going on as to how to streamline the management of cargo in various places in the country. I hope we will be able to deal with the concern being raised by the hon. Member. Some issues have already been flagged before us and it is in our knowledge.

माननीय अध्यक्ष  : डॉ. सी. गोपालकृ­णन   -        उपस्थित नहीं।  
  

(Q. 122)  

श्री नाना पटोले:  मैडम, मैं अतिरिक्त प्रश्न पूछना चाहता हूँ।  

          इसमें जो उत्तर दिया गया है, उसमें जॉब देने का जो पर्सेंटेज दर्शाया गया है, उसमें बहुत ज्यादा बैकलॉग है। इस बैकलॉग को पूरा करने के लिए सरकार की ओर से कौन-से मार्गदर्शक तथ्य दिये जाएँगे?

श्री थावर चंद गहलोत  :  माननीय अध्यक्ष महोदया, यह बात सही है कि हमने प्रश्न के उत्तर में जो जानकारी दी है, उसमें तीन प्रतिशत आरक्षण होना चाहिए, यह उसकी तुलना में बहुत कम है।

          मैं एक अतिरिक्त जानकारी आपके माध्यम से आपके आदेशानुसार देना चाहता हूँ। हमने दो वर्षों में, जो 01.01.2014 की जानकारी दी गयी है, उसके बाद मई, 2015 से विशे­ष भर्ती अभियान प्रारंभ किया था और मैं खुशी के साथ यह कह सकता हूँ कि हमने इस विशे­ष भर्ती अभियान के माध्यम से डेढ़ वर्षों में इसे 22 मई, 2015 से प्रारंभ किया था, उसमें से 30.04.2016 तक 15,831 पद रिक्त थे, जिनमें से 10,945 रिक्त पदों को भर दिया गया है। अब यह आंकड़ा एक पर्सेंट से बढ़ गया है क्योंकि हमें कार्मिक मंत्रालय से जानकारी लेनी होती है। हमने उनके माध्यम से ही प्रयास करके भर्ती अभियान चलवाया। वह जानकारी कल आयी। इस कारण, मूल प्रश्न के उत्तर में उसे हम लिखकर नहीं दे पाये थे। वर्तमान में, 4,140 पद भरने की प्रक्रिया जारी है। अभी तक केवल 746 पद ऐसे हैं, जिनकी भर्ती प्रक्रिया प्रारंभ नहीं हुई है, पर मैं आश्वस्त करता हूँ कि इन 746 रिक्त पदों की पूर्ति करने के लिए हम शीघ्र कार्रवाई करेंगे।

SHRIMATI KAVITHA KALVAKUNTLA: Madam, our country is a signatory to UNCRDP.   इसके मुताबिक हमें इस बिल में थोड़े चेंजेज लाने होंगे। Approximately 19 more disabilities will be added to the existing list in the Bill. With the proposed changes, this Bill was introduced in the Rajya Sabha in 2014. After that it was referred to the Standing Committee.  लेकिन जनरली, स्टैंडिंग कमेटी में बिल जाने के बाद सीधा हाऊस में वापस आता है। Unfortunately, one year after receiving of the Report from the Standing Committee, the Bill is again given to the hon. Home Minister. That is what we have understood from newspapers. Is that correct? Does this Government have any intention to bring this Bill with the proposed changes as soon as possible because lakhs of persons with disabilities are waiting for the decision from the Government?

   

श्री थावर चंद गहलोत: अध्यक्ष  महोदया, वैसे तो यह वि­षय इस प्रश्न से सम्बंधित नहीं है, लेकिन अगर आप अनुमति देंगी तो मैं उत्तर देने की स्थिति में हूं।

माननीय अध्यक्ष : अगर उत्तर देने की स्थिति में हैं तो दे दीजिए।

श्री थावर चंद गहलोत: अध्यक्ष महोदया, वह विधेयक प्रक्रिया के अंतर्गत विचाराधीन है। माननीय राजनाथ सिंह जी की अध्यक्षता में एक कमेटी बनी थी, उस कमेटी ने अंतिम निर्णय ले लिया है। अंतिम प्रारूप तैयार करके, उसे कैबिनेट की ओर अग्रसर करने की कार्रवाई जारी है।

SHRI BAIJAYANT JAY PANDA: The fact that in our country we are not adequately sensitive to people with different abilities is evident here in Parliament, Madam.  If we look at the toilet facilities in Parliament, only one of the toilets has a wheelchair ramp.  We must start by taking the first step to be more sensitive to people with different abilities and differently abled people in Parliament itself.

माननीय अध्यक्ष : एक तो ऐसा है।

श्री बैजयंत जे. पांडा : एक है, लेकिन सब ऐसे होने चाहिए। एंट्रेंस पर भी होना चाहिए।I compliment the hon. Minister for some of the steps he has taken. My question is this.  The support you are giving to the private sector in EPF and ESIC is leading to employment of barely 1500 or 1600 differently abled people.  Similarly the training facilities are leading to training of about 17,000 differently abled people.  These are still relatively small numbers.  What are the steps that you are going to be taking to dramatically increase these numbers?  It is because, at least 50,000 to one lakh differently abled people should be getting training every year and at least 50,000 to one lakh differently abled people should be getting jobs for which they are eminently qualified with support from your Ministry.  What can we expect in the next one or two years?

श्री थावर चंद गहलोत: अध्यक्ष महोदया, प्रश्न का पहला भाग आपसे संबंधित है, अगर आपका आदेश होगा, हमारे विभाग को आप कोई निर्देश देंगे तो हम उसकी व्यवस्था करने के लिए तैयार हैं।

माननीय अध्यक्ष :  नहीं-नहीं, वह एक अलग बात है। पार्लियामेंट बिल्डिंग की बात अलग है। सब लोग जानते हैं कि क्या सुविधा हो सकती है, बिल्डिंग की स्थिति क्या है। इसकी भी चर्चा हो चुकी है। मैं इसका उत्तर बाद में दूंगी।

श्री थावर चंद गहलोत: अध्यक्ष महोदया, हमने आवागमन की सुविधा की दृ­िष्ट से सुगम्य भारत योजना पिछले साल 03 अक्टूबर को प्रारम्भ की है। पूरे देश में चाहे बस स्टैंड हों, चाहे सार्वजनिक भवन हों, रेलवे स्टेशन्स हों, हवाई अड्डे हों, उनके अलावा 100 ऐसे बड़े शहर तय किए हैं, उनमें से प्रत्येक में जो बहुमंजिली, बहुपयोगी सरकारी भवन हैं, उनमें रैम्प बनाने, लिफ्ट बनाने आदि की सुविधा देने का निर्णय किया है और तेज गति से उस पर आगे कार्रवाई चल रही है।

          माननीय पांडा साहब ने जो बात कही है, उन्होंने प्रश्न के उत्तर में केवल एक बात पढ़ी है कि 17,738 लोगों को हमने प्रशिक्षण दिया है। अगर आप उससे आगे पढ़ेंगे तो हमने उसमें लिखा है कि जो हमारे सात रा­ट्रीय संस्थान हैं, उनके माध्यम से हमने 10,390 लोगों को प्रशिक्षण दिया है। इस प्रकार के प्रशिक्षण की व्यवस्था पहले नहीं के बराबर थी। हमने इसको तेज करने का प्रयास किया है। हमारा प्रयास है कि हर राज्य में हमारे संस्थान द्वारा इस प्रकार की प्रशिक्षण व्यवस्था की जाए। प्रशिक्षण के दौरान हमने उनको मानदेय देने का भी निर्णय किया है, वह मानदेय उनको देते भी हैं। उसके बाद विकलांग वित्त विकास निगम के माध्यम से हम उनको स्वावलम्बी बनाने के लिए, कारोबार में लगाने के लिए सस्ते ब्याज दर पर अर्थात चार प्रतिशत एवं पांच प्रतिशत वार्­िषक ब्याज की दर पर ऋण सुविधा उपलब्ध कराते हैं। हमने एक लक्ष्य तय किया है कि अगले तीन व­र्षों के अंदर पांच लाख विकलांग जनों को प्रशिक्षण देंगे और स्वावलम्बी बनाने की दिशा में कार्रवाई करेंगे।

   

 (Q.123) SHRI FEROZE VARUN GANDHI: Madam, as per Article 1.1 of the Ramsar Convention instituted to create the norms for the conservation and sustainable use of wetland protection in the world, the definition of wetlands would include most of the natural water bodies and wetlands in our country.  However, as a Government, we have only designated 26.  As a result, many wetlands are excluded from the policy ambit of natural wetland protection.  So, I just want to request the Minister whether this can be looked into.

SHRI PRAKASH JAVADEKAR: It is a good suggestion.  The issue is, it is not only about Ramsar sites, but whatever are wetlands which are important, they must be recognised in the Ramsar Convention.  It is an ongoing process.  So, we always evaluate and take the next course.  Let me tell you, here in the answer we have said that only 126 are identified there. But that does not mean that we have 126 wetlands.  These are those wetlands where we have given finance under a particular scheme. That is the list. There should not be any confusion.  We are very open.  Nearly 2 lakh wetlands, covering more than 2 hectares of land, in our country are important.  We all must protect them.  There are some real issues which need to be looked into.  There is also a special programme run by the Ministry of Water Resources in this regard.  

SHRI FEROZE VARUN GANDHI: Sir, thank you for your detailed answer.

          My second question is that the countries like Australia, New Zealand and South Africa are the world leaders in wetland renewal techniques.  Are we employing any scientific technique for wetland conservation?

SHRI PRAKASH JAVADEKAR: Definitely, wetland renewal is an important issue. As we know, today, wetlands are getting encroached at many places.  If we do not protect them properly then there will be an over-exploitation of floral and faunal resources. Conversion of wetlands for agricultural, aquaculture and human settlements are the real dangers.   The anthropologic pressure like the discharge of sewage is what all the local bodies and State Governments need to look into.  Wetlands are being used as a sewage treatment plant.  If you are discharging all your sewage of the habitation in and around the lakes without putting proper sewage treatment plants then we have to see the conditions what we saw in Bengaluru and many other places. This is actually disturbing us all.  Therefore, your suggestion is well taken.

SHRI CH. MALLA REDDY: Thank you Madam. Wetlands, directly or indirectly, support millions of people in providing services.  There is a feat that human activities in wetlands are causing changes in wetlands. Changes in wetland areas may significantly affect ecosystem processes. 

          It is needless to say that increased urbanization plays a key role in environmental and ecological changes.  We all know that compared to other States of the country, wetlands in Kerala and hills are under threat because of developmental activities.  What comprehensive policy has the Government thought-of in order to protect wetlands not only in Kerala but in other States also; if not, will the Government frame a policy to protect these wetlands;  if not, the reasons thereof?

SHRI PRAKASH JAVADEKAR:  A survey of about 100 wetlands of North Kerala in the Districts of Kasaragod, Kannur, Wayanad, Kozhikode and Malappuram had also been undertaken recently by CWRDM.  They found that 20 wetlands are facing real threat because of over-exploitation, decline in biodiversity, pollution due to industrial, municipal, agriculture and tourism activities and destruction of mangroves for urbanization and other pollution problems due to coir retting. These problems have been identified.  We are taking up all the projects in cooperation with the State Government. 

श्री गौरव गोगोई: अध्यक्ष जी, मैं आपकी अनुमति से यहां से बोलना चाहता हूं।

माननीय अध्यक्ष : ठीक है, बोलिए।

श्री गौरव गोगोई: अध्यक्ष जी, हम सभी जानते हैं कि मंत्री महोदय इनवायरमेंट और फॉरेस्ट के प्रति बहुत संवेदनशील हैं और हम आपको पूरी सहायता देना चाहते हैं और यह इसलिए चाहते हैं कि यह बहुत ही महत्वपूर्ण प्रोग्राम है, लेकिन इसका जो बजट है 146.94 करोड़ बहुत कम है और आने वाले दिनों में हमारी आशा रहेगी कि देश के वेटलैंड के लिए यह बजट बढ़ाया जाएगा। लेकिन मैं आज जब यह लिस्ट देख रहा था, जो कि स्टेटवाइज़ है, मेरी जानकारी के अनुसार इस 115 वेटलेण्ड में से लगभग 9 वेटलैण्ड ऐसे हैं जो बर्ड सेंक्चुरीज़ हैं। लेकिन आप स्वयं व­ाऩ 2014 में असम के काजीरंगा पार्क में आए थे, जो कि ब्रह्मपुत्र नदी के किनारे पर स्थित है। वह भी वेटलैण्ड एरिया है। आपकी जानकारी में भी होगा कि लगभग 82 स्कवेयर किलोमीटर्स नदी के इरोज़न के कारण काजीरंगा छोटा होता जा रहा है। जिसके कारण एनीमल और बर्ड की पॉपुलेशन पर बहुत ही ज्यादा प्रेशर आ रहा है। इसके लिए हमारा प्रश्न रहेगा कि क्या आप काजीरंगा को वेटलैण्ड प्रोग्राम की लिस्ट में शामिल करेंगे? क्या इरोजन मैनेजमैन्ट को भी वैटलैंड कंजर्वेशन प्रोग्राम की एक्टिविटीज में शामिल करेंगे?

श्री प्रकाश जावड़ेकर : मैं सबसे पहले गौरव जी का धन्यवाद करूंगा, क्योंकि काजीरंगा मैं भी गया हूं और मणिपुर में लोकताक में भी गया हूं। अभी कोलेरू, आंध्र प्रदेश में भी गया। इतनी ब्यूटिफुल वैटलैंड हमारे देश में हैं। यदि हमें इन सबकी रक्षा करनी है तो बजट के बारे में आपने जो कहा तो वह एक तरह से मेरे मन की बात आपने बताई। बजट बढ़ेगा...(व्यवधान) वहीं बता रहा हूं। अभी कैम्पा बिल आज या इस सप्ताह में आपके सामने आयेगा, जिसे आप पास करोगे। उससे एक बहुत बड़ी निधि, जो दस साल से लॉक होकर पड़ी है, वह भी ऐसे कुछ कामों में उपयोग हो सकेगी। जहां तक काजीरंगा जैस फारेस्ट एरिया की वैटलैंड्स की बात है, यह वहां काम आ सकता है। इसके बारे में अभी महीने या डेढ़ महीने में सारे स्टेट्स के स्टेट एनवायरनमैन्ट एंड फारेस्ट मिनिस्टर की मीटिंग है। उसमें हमने यह प्रमुख मुद्दा रखा है कि वैटलैंड्स को ढंग से कैसे करें। खासकर वन विभाग में फॉडर एंड वाटर ऑगमैन्टेशन का एक बड़ा प्रोग्राम हम ले रहे हैं।

श्री सुधीर गुप्ता: अध्यक्षमहोदया,आपने मुझे इस अति महत्वपूर्ण वि­ाय पर बोलने का अवसर प्रदान किया, इसके लिए मैं आपको धन्यवाद देता हूं। मैं माननीय मंत्री जी से जानना चाहता हूं कि रा­ट्रीय आद्र भूमि संरक्षण कार्यक्रम (एनडब्ल्यूसीपी) और रा­ट्रीय झील संरक्षण योजना (एनएलसीपी) का आपने एनपीसीए में विलय किया है। मैं जानना चाहता हूं कि उसके बाद किन-किन चीजों में और इसके महत्व में सुधार हुआ और मेरा प्रदेश मध्य प्रदेश को, जो आपके कार्यक्रम में लगभग दस से अधिक किसानों को संरक्षण दिया है, जिसमें मेरे संसदीय क्षेत्र का चम्बल अभयारण्य और मध्य प्रदेश का यशवंत सागर भी इसमें सम्मिलित है। मैं आपसे जानना चाहता हूं कि रा­ट्रीय चम्बल अभयारण्य के लिए आपने कौन सी योजना पर काम किया, क्योंकि वह क्षेत्र बहुत बड़ा क्षेत्र है और सीधे-सीधे उजाड़ स्थिति में खड़ा है। अतः आप उसमें विशे­ा रूप से क्या ध्यान देंगे?

श्री प्रकाश जावड़ेकर : इन दोनों प्रोजैक्ट्स में क्या-क्या काम हुआ है. वह विवरण  मैं सभा के पटल पर भी रखूंगा और आपको भी भेज दूंगा। उसमें मूल मुद्दा आपने और गौरव जी ने इरोजन का उठाया तो यह एक्टिविटीज भी एड करने के लिए एक नये सिरे से वेटलैंड रूप्ल को रिफार्स करने के लिए हमने वैटलैंड रूल्स प्रकाशित किया है तो ड्राफ्ट के आधार पर आपके सुझाव भी उसमें शामिल करेंगे और नये सिरे से रूल्स तैयार करेंगे।

DR. RATNA DE (NAG): Conservation of water bodies and conservation of lakes will go a long way in preserving eco-system.  Conservation of wetlands should be given higher priority by the Ministry, and the States should be taken into confidence for conservation of wetlands at the State level. Having said that, through you, Madam, I would like to ask the hon. Minister how much aid has been extended to or amount released to West Bengal in the last one year under the National Plan for Conservation of Aquatic Eco-systems.

SHRI PRAKASH JAVADEKAR: I take very well the suggestion made by the hon. Member.  I will immediately write to her about the exact amounts which have been given to West Bengal.  For West Bengal, a sum of Rs.16,90,00,000 has been released till date, including a sum of Rs. 91,87,500 last  year.

HON. SPEAKER: Shri Arvind Sawant.  Please put a short supplementary.

SHRI ARVIND SAWANT: Thank you very much, Madam.

          I convey my compliments to the hon. Minister for giving elaborate answers.  Therefore, I will put a very short question to the hon. Minister.  Sir, you have confined wetlands to some other places.  Why not seashore areas?  For example, in Mumbai, you know that flamingos come around the wetlands of Sewri and Palm Beach shore.  At the same time, there is a serious and heavy encroachment.  By cutting mangroves, people are encroaching upon the wetlands in that area also.  What are the measures that the Government is taking to prevent that?  I would also like to know as to what the Government is doing to support flamingos which are coming over there.

SHRI PRAKASH JAVADEKAR: While granting the permission for trans-harbour link from Sewri to Nhawa-Sheva, we have already taken care of this flamingos issue and mangroves. Last week only, I had   a very detailed meeting with all the concerned Ministers and officers of Maharashtra in Mumbai. Therefore, we have drawn out  a very comprehensive plan of making more mangrove parks, which can become then tourism attraction also and taking  care of flamingo particularly in  Sewri and Nhava  Sheva area.

                                                                                     

HON. SPEAKER: Shri Venkatesh Babu T.G. – Not Present           Shrimati Supriya Sule.    

(Q. 124) SHRIMATI SUPRIYA SULE : Madam, in the written reply, the hon. Minister has said that they are asking the State Governments to intervene to organize talks and do psychological concerns and help them with mediation and yoga.

          Madam, Maharashtra Government did a programme like this. Unfortunately,  the Report showed with the help of Psychiatrist Society of India,  which voluntarily did this programme, that about 1,000 policemen needed help.  After that, there was a newspaper item, which created panic that ‘thousand policemen need  psychiatric treatment’. So, that entire project was shelved.

          So, looking at the numbers, which are quite high of suicides, is this  Government  looking a personal counseling  and making sure that the secrecy of that Report does not leak?  It does not mean that they are crazy just because they need a psychiatric treatment?  It think,  it is a scientific issue.   

श्री हरिभाई चौधरी: अध्यक्ष महोदया, माननीय सदस्या ने पर्टिक्युलर महारा­ट्र राज्य के बारे में कहा है, लेकिन मैं बताना चाहता हूँ कि पुलिस और लॉ एण्ड ऑर्डर राज्य के पास है। फिर भी हम लोग बार-बार एडवाइज़री जारी करते हैं। स्पेशलिस्ट भी रखते हैं। योगा के लिए भी ट्रेनिंग देते हैं। अप्रैल में हमने कम्पलीटली कॉप्रिहैंसिव एडवाइज़री जारी की थी । हम लोग पुलिस मॉर्डनाइज़ेशन से पैसा देते हैं, उसमें हम कहते हैं कि इनका आवास अच्छा हो, उनक ाळ ट्रेनिंग अच्छी हो। सभी प्रकार के कदम हम उठाते हैं। हमने जो पैरामिलिट्री फोर्सेज़ के लिए तो ट्रांस्फर पॉलिसी भी बनाई हुई है। पहले जवान घायल हो जाते थे तो उनको डय़ुटी पर गिना नहीं जाता था। हमारे गृहमंत्री जी ने छत्तीसगढ़ के दौरे बाद यह कहा कि जो जवान घायल होने के बाद अस्पताल में भर्ती होंगे, उनको भी डय़ुटी पर गिना जाएगा। अब हम उनका पैसा नहीं काटते हैं। दूसरा, जिसने हार्ड पोस्टिंग की है, उनके लिए बाद में मनपसंद की जगह पर ट्रांस्फर के लिए अच्छी पॉलिसी बनाई है। जो हार्ड पोस्टिंग करता है, स्पेशल डय़ुटी करता है, उनको 12.5 प्रतिशत ज्यादा पैसा देते हैं। दूसरा, जम्मू कश्मीर और नॉर्थ ईस्ट एरिया में जो रहते हैं, उनको परिवार के साथ रहने की भी छुट्टी देते हैं। राज्यों को उसके लिए पैसे की कमी नहीं होने देते हैं। योगा तो इसलिए कराते हैं कि योगा से मन की शांति रहती है। आत्महत्या के जो कारण आए हैं, उसमें पहला कारण 25 प्रतिशत शादी का कारण है। 15 प्रतिशत पारिवारिक है। नौकरी के स्ट्रेस का कारण 10 प्रतिशत है। जनरली भी पूरे देश में जो प्रतिश है, वही सच है, 0.001 प्रतिशत सुसाइड होते हैं।

SHRIMATI SUPRIYA SULE: Madam Speaker, my question was not about   money. My specific question is, when Psychiatric Society of India is willing to volunteer and help for free, will they send an advisory that where there are individual cases, which need help, there will be secrecy?  I am not challenging any of the work.  It is complimentary. I said it in my first question also.

          So, specifically, will the Government intervene on humanitarian grounds to take help and make sure that this is under secrecy, to keep privacy in psychology and not in money or policy. I am on human angle. My question is very specific.

HON. SPEAKER: It is personal counseling.

श्री हरिभाई चौधरी :  महोदया, माननीय सदस्या ने जो कहा है, वह राज्य का वि­ाय है तो उसमें राज्य सरकार फैसला करेंगी। लेकिन पैरामिलिट्री फोर्स के बारे में कुछ भी होगा तो उसके बारे में जरूर सोचेंगे।

गृह मंत्री:अध्यक्ष महोदया, मैं यह मानता हूँ कि हमारे पुलिस पर्सनल्स की वर्किंग कंडीशन में इंप्रूवमेंट की आवश्यकता है। केंद्र सरकार द्वारा बराबर राज्य सरकारों को एडवाइज़रीज़ जारी की जाती हैं कि उनकी वर्किंग कंडीशंस में इंप्रूवमेंट लाने के लिए कदम उठाए जाएं। उनकी वर्किंग कंडीशंस को इंप्रूव करने के लिए, क्या-क्या कदम राज्यों को उठाने चाहिए यह सुझाव भी समय-समय पर केंद्र सरकार द्वारा दिए जाते हैं। साथ ही जहां तक उनकी पर्सनल प्रॉब्लम्स हैं, उसके लिए आपने पर्सनल काऊंसलिंग की बात कही है।पर्सनल काउन्सलिंग के सिस्टम को और डेवलप किया जाना चाहिए, पर्सनल काउन्सलिंग को और अधिक इफेक्टिव बनाया जाना चाहिए, इस संबंध में भी एडवाइजरी सेंट्रल गवर्नमेंट के द्वारा जारी की गई है।

          अध्यक्ष महोदया, सुसाइड के बारे में मैं यह बताना चाहूँगा कि ऐसा नहीं है कि केवल पुलिस डिपार्टमेंट में काम करने वाले पुलिस पर्सनल्स ही बड़ी संख्या में सुसाइड करते हैं, बल्कि जनरल टेंडेंसी इस देश में जो सुसाइड करने की है, तो कमोबेश पर्सेंटेज वही है। लेकिन फिर भी इनकी वर्किंग कंडीशन में इंप्रूवमेंट लाकर इनको अन्य सुविधायें मुहैया कराकर हम लोग इनकी स्थित में सुधार लाने की कोशिश कर रहे हैं। वैसे ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च एंड डेवलपमेंट के द्वारा भी हम लोग इसकी एक स्टडी करा रहे हैं कि और क्या-क्या इंप्रूवमेंट इनकी वर्किंग कंडीशन में किये जाने चाहिए।

माननीय अध्यक्ष :  सत्यपाल सिंह जी। आप तो महारा­ष्ट्र को भी जानते हैं और जनरल पुलिस को भी जानते हैं।

डॉ. सत्यपाल सिंह: महोदय, आपने प्रश्न पूछने का मौका दिया, इसके लिए मैं आपका बहुत आभारी हूँ।

          यह दुर्भाग्य की बात है कि जो पुलिस लोगों को, समाज को और देश को सुरक्षा और प्रति­ठा देती है अगर उसके कुछ लोग आत्महत्या करते हैं तो यह सबके लिए बहुत ही चिंतनीय वि­षय है। जैसा कि माननीय गृह मंत्री जी ने कहा है कि राज्य सरकारों के साथ यह केन्द्र सरकार की भी जिम्मेदारी है कि आंतरिक सुरक्षा को बनाए रखा जाए और आंतरिक सुरक्षा के लिए पुलिस पर्सनल की जो सबसे बड़ी समस्या है, जिसके कारण लोग आत्महत्या है, वह यह है कि उनकी लिविंग कंडीशन, जहाँ उनके मकान हैं, पुलिस मैनुअल, पुलिस रूल यह कहता है कि शत-प्रतिशत लोगों को मकान मिलना चाहिए, लेकिन ज्यादातर राज्यों में लगभग तीस प्रतिशत से पचास प्रतिशत लोगों के पास ही मकान हैं। जितने भी गवर्नमेंट डिपार्टमेंट हैं, वे केवल आठ घंटे की शिफ्ट की डय़ूटी करते हैं, पुलिस पर्सनल 12 से 14 घंटे डय़ूटी करते हैं। क्या भारत सरकार ऐसी कोई एडवाइजरी जारी करेगी कि शत-प्रतिशत या सभी राज्यों को माडर्नाइजेशन ग्रांट देंगे कि शत-प्रतिशत उनको मकान मिलें और जो उनकी शिफ्ट की डय़ूटी है, वह 12-14 घंटे से 8 घंटे हो जाए?

श्री हरिभाई चौधरी : माननीय सदस्य का सुझाव अच्छा है, लेकिन आठ घंटे की डय़ूटी ये देते हैं, परन्तु पुलिस में फोर्स कम है। मैं आँकड़े देकर बता सकता हूँ कि हर स्टेट में कम से कम 24 पर्सेंट तक पुलिस की भर्ती होना बाकी है। मैं बता सकता हूँ कि 22 लाख जो जरूरी हैं, उसमें 17 लाख को भर दिया है और खाली जगह 5 लाख 60 हजार है। करीब 24 पर्सेंट स्टेट्स में खाली जगह हैं, उसकी वजह से कई बार उन्हें डय़ूटी ज्यादा देनी पड़ती है। हम बार-बार उनको बताते हैं और पुलिस माडर्नाइजेशन का जो पैसा देते हैं, उसमें भी खास तौर पर लिखा है कि पुलिस आवास दीजिए, पुलिस स्टेशन अच्छा रखना है, पुलिस पोस्ट अच्छा रखना है। हमने पिछली 9 सितम्बर को ही खाली जगह भरने के लिए एडवाइजरी किया है।

गृह मंत्री (श्री राजनाथ सिंह) : महोदया, वैसे यह सच है कि जहाँ तक पुलिस पर्सनल्स का प्रश्न है, हाउसिंग सैटिस्फैक्शन लेवल संतो­ाजनक नहीं है। मैं यह महसूस करता हूँ कि हाउसिंग सैटिस्फैक्शन लेवल को और अधिक इप्रूव करने की आवश्यकता है और इस सम्बन्ध में केन्द्र सरकार बहुत ही गम्भीरतापूर्वक विचार कर रही है। जहाँ तक राज्यों का प्रश्न है, राज्य सरकारें भी इस सम्बन्ध में कोई फैसला कर सकती हैं। मुझे सदन को यह जानकारी देते हुए बेहद खुशी है कि कुछ राज्यों ने इस हाउसिंग सैटिस्फैक्शन लेवल को और अधिक इप्रूव करने की दिशा में काफी प्रभावी कदम उठाए हैं।

श्री मल्लिकार्जुन खड़गे: यह समस्या हर जगह है, खासकर के पुलिस माडर्नाइजेशन के लिए सरकार लास्ट टाइम भी बहुत कम बजट रखा था, सिर्फ 665 करोड़ ऐसा कुछ रखी है। अगर माडर्नाइजेशन में कम पैसा होता है तो हाउसिंग के लिए, व्हिकल्स के लिए, इक्विपमेंट्स के लिए इन सब चीजों में कमी आती है। पहले एक स्कीम थी, जब एल.के.आड़वाणी साहब होम मिनिस्टर थे, उस वक्त एक स्कीम थी कि सेन्ट्रल गवर्नमेंट 75 परसेंट और 25 परसेंट स्टेट गवर्नमेंट जो देते हैं, उनको मैक्सिमम ग्रांट दिया जाता था हाउसिंग में, इक्विपमेंट में, व्हिकल्स और अन्य दूसरी चीजों के लिए।  इस बार कम से कम जो स्टैंडिंग कमेटी ऑन होम है, वह जो रिकमंड करती है, क्या आप उतना पैसा रखेंगे ताकि स्टेट गवर्नमैंट को भी इससे फायदा हो और आपको भी लॉ एंड आर्डर मेनटेन करने के लिए बहुत कुछ इससे फायदा हो? क्या यह आप करेंगे?

श्री राजनाथ सिंह : माननीय अध्यक्ष महोदया, एक तो माननीय सदस्य को मैं यह जानकारी देना चाहता हूँ कि पुलिस मॉडर्नाइज़ेशन का जो फंड होता है, उससे हाउसिंग का कोई प्रोग्राम स्टेट गवर्नमैंट चलाती हों, ऐसा नहीं होता है। ...(व्यवधान)

श्री मल्लिकार्जुन खड़गे: आप पिछले लोगों से पूछिए। आडवाणी साहब भी यहाँ बैठे हैं। फूड फॉर वर्क में आपने ही पैसे दिये। ...(व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष :  इन टोटो वह मॉडर्नाइज़ेशन के लिए होता है।

…( व्यवधान)

श्री राजनाथ सिंह : केवल हाउसिंग के लिए नहीं दिया जाता। हो सकता है कि स्टेट गवर्नमैंट्स उसको यूटिलाइज़ करती हों, लेकिन पुलिस मॉडर्नाइज़ेशन का फंड इस परपज़ से एलोकेट नहीं किया जाता है।

          जहाँ तक सीएपीएफ का, पैरा मिलिट्री फोर्सेज़ का प्रश्न है, 2013 में लगभग 21 हज़ार हाउसेज़ की सैंक्शन दी गई है और 2014 में 13 हज़ार हाउसेज़ के कंस्ट्रक्शन की सैंक्शन दी गई है और 2015-16 में भी हम लोग कुछ और हाउसेज़ की कंस्ट्रक्शन की सैंक्शन दे रहे हैं।

माननीय अध्यक्ष : सिंह साहब, आप लोगों ने तो इस पर काम किया हुआ है?

श्री आर.के.सिंह:मैं सिर्फ एक फैक्ट क्लैरिफाइ कर देता हूँ। पुलिस मॉडर्नाइज़ेशन स्कीम में हाउसिंग भी एक कंपोनैन्ट था जिसमें केन्द्र सरकार भी राशि देती थी और राज्य सरकार भी राशि देती थी। वह शायद केन्द्र सरकार ने बंद कर दी है चूँकि केन्द्र सरकार से राज्य सरकारों को जो शेयर्स ऑफ टैक्सेज़  दिये जाते हैं, उसमें बढ़ोतरी कर दी गई है। राज्य सरकार से कहा गया है कि आप अपनी राशि से ही इसको करें। लेकिन पूर्व में पुलिस मॉडर्नाइज़ेशन स्कीम में हाउसिंग एक इंपॉर्टैन्ट कंपोनैन्ट था। मेरा गृह मंत्री जी से अनुरोध है कि पुलिस मॉडर्नाइज़ेशन स्कीम को फिर से रिवाइव करें। इसके लिए वित्त मंत्रालय से बात करें। ...(व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष : प्लीज़ शांति रखें। ऐसा कुछ नहीं है और सबको सब जानकारी है। सालों साल से बहुत सारे लोग सब काम करते आ रहे हैं, काहे के लिए बोलते हैं?

श्री राजनाथ सिंह : पुलिस मॉडर्नाइज़ेशन की प्लान स्कीम रिवाइव होने का हमारा कैबिनेट नोट लगभग तैयार हो चुका है और इस नोट को लेकर हम कैबिनेट में जाने वाले हैं। इस प्लान स्कीम को हम फिर से रिवाइव कर रहे हैं। जहाँ तक नॉन प्लान का प्रश्न है, नॉन प्लान में आलरेडी 595 करोड़ का प्रोविज़न इस समय है। इस बार हम लोगों की कोशिश यह भी है कि दोनों स्कीम्स में एलोकेशन पहले की अपेक्षा बढ़े। मुझे पूरा विश्वास है कि इस मद में एलोकेशन बढ़ेगा।

                                                                                               

 (Q. 125) KUMARI SHOBHA KARANDLAJE: Madam, I am very happy to say that 14th April, 2016 is a historical and revolutionary day for the Indian farmers. Madam, that day is not only the 125th birthday of Dr. B.R. Ambedkar but also on that day, our Prime Minister, Narendra Modi Ji launched the National Agriculture Market for our farmers, which was pending for many decades. बहुत सालों से वह किसानों की मांग थी। The purpose behind the National Agriculture Market is a creation of common national market for agriculture commodities through an e-platform network. National Agriculture Market is a game changer. इस सिस्टम से बिचौलियों का अंत होगा। No middle man is involved in buying or selling of agriculture commodities. There is less transaction cost involved. There is single licence across the country and also there is single point levy for all agriculture products. The farmers and traders can sell with the same freedom across the State and across the country.

          मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी को बताना चाहती हूँ कि हमारे एपीएमसी की हालत बहुत बुरी है और उसमें मूलभूत सुविधाएँ भी उपलब्ध नहीं हैं। इन मूलभूत सुविधाओं को सुधारने के लिए हमारी सरकार क्या कदम उठाएगी? इसी वि­षय पर और दो प्रश्न हैं।

ई ट्रेडिंग के बारे में पूरे देश की तहसील तक मंडियों में लागू करने के लिए हमारी सरकार क्या कदम उठाएगी। थर्ड प्रश्न है...(व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष : एक ही प्रश्न पूछिये। अभी बैठिये।

श्री मोहनभाई कल्याणजीभाई कुंदरिया:माननीय अध्यक्ष महोदया, जो माननीय सदस्या ने महत्वपूर्ण कृ­िष के लिए, किसानों के लिए सही दाम मिले, इसके लिए जो चिन्ता व्यक्त की है, मैं खास करके माननीय सदस्यों को बताना चाहता हूं कि हमारे प्रधानमंत्री जी ने पूरे भारत में ई मार्केटिंग को 14 अप्रैल को लांच किया है। मार्च, 2018 तक पूरे भारत में 585 मंडियों को ई मार्केटिंग के साथ हमने जोड़ने के लिए प्रयत्न शुरू किया है। खास करके जो मंडी स्टार्ट किया है, हरेक ए.पी.एम.सी. को तीस लाख का ऋण यहां से देने का प्रावधान किया है। उसके आधार पर कम्प्यूटर, प्रिंटर सब चीजें वे खरीद सकते हैं। दूसरा मंडियों के ट्रांजैक्शन के लिए सॉफ्टवेयर यहां से भारत सरकार मुफ्त में मुहैया कराएगी।

कुमारी शोभा कारान्दलाजे: मैडम, एक प्रश्न और है। अभी केवल 25 कृ­िष उत्पादों को ई ट्रेडिंग में बेच रहे हैं, it is only in eight States and 21 mandis. देश भर में पूरे कृषि उत्पादों को ई मार्केट में लाने के लिए क्या कदम उठाएंगे और how many years you need?

श्री मोहनभाई कल्याणजीभाई कुंदरिया:माननीय अध्यक्ष महोदया, अभी कृ­िष मंडी के लिए हमने 25 फसलों को आईडेंटीफाई किया है, उसका परीक्षण किया है। अभी 25 फसलों को ई मार्केटिंग में उसको बाजार में लाएंगे, बाद में जरूरत पड़ेगी तो नई फसल के लिए आईडेंटीफाई करके दूसरी फसलों को भी उसमें जोड़ सकते हैं।

श्री विनायक भाऊराव राऊत: अध्यक्ष महोदया, देश के करोड़ों उत्पादक किसान और ग्राहकों के हित के बारे में यह प्रश्न जुड़ा है और मैं समझता हूं कि मंत्री महोदय यह गम्भीर प्रश्न देखकर उसे किसानों को और ग्राहकों के हित के लिए जो निर्णय लेना है, उसके बारे में उत्तर दें। आप जानते हैं कि भारत एक कृ­िा प्रधान देश है। फिर भी आज तक कम से कम 94 परसेंट किसान ए.पी.एम.सी. मार्केट के ऊपर निर्भर रहते हैं। दुर्भाग्य से ए.पी.एम.सी. मार्केट दलालों का एक अड्डा बन चुके हैं और सही तरीके किसानों को दाम नहीं देते। उनकी जो फसल रहती है या उनका उत्पादित माल रहता है, उसका कांटा सही तरीके से नहीं लगाना, सही तरीके से दाम नहीं देना, साथ-साथ जो कुछ दाम रहता है, उससे कुछ टैक्स काटकर लेना, ऐसी स्थिति है।

          आज दुर्भाग्य से दाल का भाव बढ़ चुका है, 180 तक गया है...(व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष : प्रश्न पूछिये। माडर्नाइजेशन का प्रश्न है।

श्री विनायक भाऊराव राऊत: मैं जानना चाहता हूं कि सरकार की ऑनलाइन एग्रीकल्चर मार्केटिंग की जो पालिसी बनी है। मंत्री महोदय जी ने 25 बोले हैं, लेकिन उत्तर में 21 ही दिया है। देश में आठ या नौ राज्यों में सिर्फ 21 मार्केट कमेटियों में यह ऑन लाइन सिस्टम चालू किया है, जबकि देश में कम से कम 580 मार्केट कमेटियां आज कार्यरत हैं। मैं जानना चाहता हूं कि आज जो गम्भीर परिस्थिति और जो महंगाई बढ़ती जा रही है, उसको रोकने के लिए और किसानों को और ग्राहकों को आधार देने के लिए ऑन लाइन एग्रीकल्चर मार्केटिंग पॉलिसी का अमल तुरन्त ही सारे देश में करने का प्रावधान क्या कर रहे हैं और साथ में बढ़ते हुए दालों के भाव को कंट्रोल करने के लिए भी सरकार के पास क्या ब्यौरा है?

श्री मोहनभाई कल्याणजीभाई कुंदरिया:माननीय अध्यक्ष महोदया,जो मैंने 25 बताया, मैंने मार्केट नहीं बताया, 25 फसलों के लिए अभी हमने आईडेंटीफाई किया है। अभी आठ राज्यों में 21 ए.पी.एम.सी. में हमने ई मार्केटिंग का 14 अप्रैल को लांच किया है। खास करके किसानों को सही दाम मिले, बिचौलियों से छुटकारा मिले, इसके लिए बड़ा मार्केटिंग बनाने के पूरे स्टेट्स का और पूरे देश का मार्केट को जोड़ने का हमने प्रयत्न किया है, जिसके आधार पर कोई भी ए.पी.एम.सी. में किसान माल लेकर जाते हैं तो जो लेन वाली पार्टियां हैं, उनका एक रिंग बन जाता है, किसानों को सही दाम नहीं मिलता है, किसानों को बहुत नुकसान होता है। इसके लिए पूरे राज्य और पूरे देश का जब ई मार्केट बन जायेगा तो किसानों को बड़ा प्लेटफॉर्म मिलेगा, बहुत लेने वाली व्यापारी मिलेंगे, उसका सही दाम मिलेगा। इसी के आधार पर हमने एक योजना लॉन्च की है। इसके तहत हमारे किसानों को सही दाम मिलेंगे, उपभोक्ताओं को भी अच्छे दामों पर सामान मिलेंगे। इसलिए हमने ई-मार्केटिंग शुरू की है।

श्री सुमेधानन्द सरस्वती : अध्यक्ष जी, मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी का ध्यान एक बहुत ही महत्वपूर्ण वि­ाय की ओर आकर्­िात करना चाहता हूं। आज से सात-आठ महीने पहले देश ने पचास रुपए के हिसाब से प्याज खरीदा और पूरे देश में इसके लिए हाहाकार मचा हुआ था। लेकिन, इस बार राजस्थान, मध्य प्रदेश और महारा­ट्र में भरपूर प्याज पैदा हुआ है। परन्तु, अभी स्थिति यह है कि मंडियों में प्याज तीन रुपए किलो बिक रहा है।

          मेरी माननीय मंत्री जी और सरकार से मांग है कि सरकार किसानों का प्याज तुरन्त खरीदे क्योंकि किसानों के पास उसका भंडारण करने की कोई सुविधा नहीं है और किसान बिल्कुल बर्बाद हो चुका है। इसलिए मेरा निवेदन है कि किसानों को बचाने के लिए सरकार प्याज खरीदे।

कृषि और किसान कल्याण मंत्री (श्री राधा मोहन सिंह) : माननीय सदस्य को मैं बताना चाहता हूं कि आलू, प्याज और दाल के लिए मूल्य स्थिरीकरण फण्ड की स्थापना की गयी है। पहले वह कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के अन्तर्गत था, पर अब वह फूड एण्ड सप्लाई मिनिस्ट्री के अंतर्गत चला गया है। वहां से इसका नियंत्रण हो रहा है।

DR. BOORA NARSAIAH GOUD: Madam, I thank you for giving me an opportunity to ask a question.

          I compliment the Minister for starting e-NAM under which five markets were inaugurated in my State of Telangana also. There are two things. One thing is launching of a programme and the second thing is its implementation. Now that the portal has been launched and e-platform is there, the biggest problem is that whenever a person sitting in Delhi wants to buy from the Telangana market, he has to know the quality of the product and the quantity of the product. What measures have been taken really to implement this project successfully? I know the market conditions personally. Since my childhood, I have seen it with my eyes. Even today, the conditions have not changed. For a farmer, it is like a snake and ladder game. I would request the Minister to tell what measures are being taken to successfully implement this project.

श्री राधा मोहन सिंह : महोदया, पहली बात यह है कि यह जो कृ­िष मंडी कानून है, इसे राज्य सरकार बनाती है। इसके लिए व­र्ष 2010 में सरकार ने देश के सभी राज्यों के कृ­िष मंत्रियों की एक बैठक बुलाई थी, एक कमेटी बनाई थी और राज्यों से कहा गया था कि वे अपने कानून में परिवर्तन करें, ताकि उस परिवर्तन में कुछ ऐसे कानून बनें, जिससे किसानों को लाभ हो। लेकिन, फिर वह बात आगे नहीं बढ़ी। नई सरकार के आने के बाद श्री अशोक गुलाटी की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई गयी। वह कमेटी अभी रिपोर्ट देगी। लेकिन, राज्य सरकारों से यह आग्रह किया गया कि मंडी कानून में तीन प्रकार के संशोधन करे। पहले तो ई-व्यापार की अनुमति प्रदान करे। मंडी शुल्क को एकल बिन्दु पर लागू करें और पूरे प्रदेश में व्यापार हेतु एकल लाइसेंस की वैधता हो, चूंकि हर मंडी के लिए अलग-अलग लाइसेंस होते थे। उसके बाद हमने राज्यों से कहा तो लगभग 17 राज्यों ने अपने कानून में पूर्णतः या आंशिक संशोधन किया है। उसके बाद 12 राज्यों से लगभग 365 मंडियों के प्रस्ताव मेरे पास आए हैं। उस प्रस्ताव में हमने 160 करोड़ रुपए की स्वीकृति दी है और छः राज्यों के लिए राशि भी रिलीज की है। उसके तहत जो मंडी है, उसमें हम 30 लाख रुपए देते हैं और एक आई.टी. का इंजीनियर देते हैं। उसमें सबसे पहला काम होता है लैब बनाना। आपके ध्यान में होगा कि अभी मार्केट में जब कोई किसान अपना सामान ले जाता है तो जो वहां बिचौलिए हैं, लाइसेंसी हैं, वे मनमाना दाम देते हैं। उसकी जो क्वालिटी है, उसका भी निर्णय वही करते हैं कि अच्छा है या खराब है। इसलिए लैब में उसकी क्वालिटी की जांच होगी, ताकि जो लाइसेंसी है, उसको यह अधिकार नहीं रहे और किसान को नुकसान न हो। अभी हमने 21 राज्यों के 25 मंडियों को जोड़ा है। यह पायलट प्रयोग है। हम देश के 585 मंडियों को जोड़ेंगे। इसका अंतिम उद्देश्य यही है कि किसानों को अच्छा मूल्य मिले।

माननीय अध्यक्ष : हुकुम सिंह जी, शॉर्ट क्वैश्चन पूछिए। वैसे बहुत अच्छे तरीके से मंत्री जी ने बता दिया है। It is a pilot project.

श्री हुकुम सिंह: आपने बहुत विस्तार से उत्तर दिया, लेकिन समस्या ज्यों की त्यों है। दाल के भाव नीचे नहीं आ रहे हैं, प्याज के भाव ऊपर चढ़ नहीं पा रहे हैं।

माननीय अध्यक्ष : अभी तो ई-मार्केटिंग की बात हो रही है।

श्री हुकुम सिंह: अब हम ई-ट्रेडिंग का क्या करेंगे? आज किसान को दो रुपए प्रति किलो प्याज बेचने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है, एक-एक रुपए की भी बात आ रही है। समस्या का समाधान होना चाहिए और समस्या का समाधान तभी होगा, जब सरकार बाजार में उतरेगी, प्याज को खरीदेगी और किसान को बचाएगी।

श्री राधा मोहन सिंह : मेरे मंत्रालय से इसका संबंध नहीं है।

                                                                                                           

HON. SPEAKER: Hon. Members, I have received notices of Adjournment Motion from Prof. Saugata Roy, Shri Jitendra Chaudhury and Shri Ravneet Singh on different issues.

          The matters, though important, do not warrant interruption of Business of the day. I have, therefore, disallowed all the notices of Adjournment Motion.

   

12.01 hours PAPERS LAID ON THE TABLE HON. SPEAKER: Now, Papers to be laid on the Table.