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State Consumer Disputes Redressal Commission

O I Co vs Smt Sunita Devi on 10 October, 2017

  	 Cause Title/Judgement-Entry 	    	       STATE CONSUMER DISPUTES REDRESSAL COMMISSION, UP  C-1 Vikrant Khand 1 (Near Shaheed Path), Gomti Nagar Lucknow-226010             First Appeal No. A/2006/3170  (Arisen out of Order Dated  in Case No.  of District )             1. O I Co	  a ...........Appellant(s)   Versus      1. Smt Sunita Devi  a ...........Respondent(s)       	    BEFORE:      HON'BLE MR. Udai Shanker Awasthi PRESIDING MEMBER    HON'BLE MR. Gobardhan Yadav MEMBER          For the Appellant:  For the Respondent:    Dated : 10 Oct 2017    	     Final Order / Judgement    

राज्‍य उपभोक्‍ता विवाद प्रतितोष आयोग, उ0प्र0, लखनऊ।

सुरक्षित अपील सं0-३१७०/२००६   (जिला मंच, फतेहपुर द्वारा परिवाद सं0-६१/२००६ में पारित निर्णय एवं आदेश दिनांक ०९-११-२००६ के विरूद्ध)   दी ओरियण्‍टल इंश्‍योरेंस कं0लि0, रीजनल आफिस, ४३, जीवन भवन, हजरतगंज, लखनऊ द्वारा रीजनल मैनेजर।                       .............         अपीलार्थी/विपक्षी।  

बनाम् श्रीमती सुनीता देवी पत्‍नी श्री अशोक कुमार सिंह निवासी ग्राम राघुराजपुर उर्फ दलाबला खेड़ा, पोस्‍ट-गुगौली, परगना व तहसील बिन्‍दकी, शहर व जिला फतेहपुर।

                                         .............        प्रत्‍यर्थी/परिवादिनी।

 

 

 

समक्ष:- 

 

१. मा0 श्री उदय शंकर अवस्‍थी, पीठासीन सदस्‍य। 

 

२. मा0 श्री गोबर्धन यादव, सदस्‍य।

 

 

 

अपीलार्थी की ओर से उपस्थित  :- श्री आशीष कुमार श्रीवास्‍तव विद्वान अधिवक्‍ता।

प्रत्‍यर्थी की ओर से उपस्थित    :- श्री जे0पी0 सक्‍सेना विद्वान अधिवक्‍ता।

 

 

 

दिनांक : १७-१०-२०१७.

 

 

 

 मा0 श्री उदय शंकर अवस्‍थी ,  पीठासीन सदस्‍य द्वारा उदघोषित

 

 निर्णय

 

प्रस्‍तुत अपील, जिला मंच, फतेहपुर द्वारा परिवाद सं0-६१/२००६ में पारित निर्णय एवं आदेश दिनांक ०९-११-२००६ के विरूद्ध योजित की गयी है।

संक्षेप में तथ्‍य इस प्रकार हैं कि प्रत्‍यर्थी/परिवादिनी के कथनानुसार उसके पति स्‍व0 अशोक कुमार सिंह मिनी आयशर ट्रक नं0-यू.पी. ७८ टी/४०४५ के पंजीकृत स्‍वामी थे। यह ट्रक अपीलार्थी बीमा कम्‍पनी से बीमित था। परिवादिनी के पति दिनांक २२-०६-२००१ को अपने गॉव के सूरजभान सिंह के साथ मिनी आयशर ट्रक नं0-यू.पी. ७८ टी/४०४५ में सवार होकर गोरखपुर से मुहाना उन्‍नाव जा रहे थे जब ट्रक टेढ़ी पुलिया से करीब १०० मीटर आगे पहुँचा तो अयोध्‍या के पास अयोध्‍या की तरफ से एक स्‍कूटर आ रहा था अचानक स्‍कूटर सड़क पर पलट गया उसमें बैठे व्‍यक्ति सड़क पर गिर गये। उनको बचाने के लिए चालक ने एकाएक बाऐं तरफ ट्रक मोड़ दिया। वर्षा होने के कारण       -२- गाड़ी फिसली और पेड़ से टकराकर पलट गई। इस घटना में परिवादिनी के पति अशोक कुमार सिंह की मृत्‍यु घटना स्‍थल पर हो गई। गाड़ी पलट जाने के कारण यह वाहन क्षतिग्रस्‍त हो गया। कथित घटना के समय वाहन, चालक राजेश पुत्र सुखदेव द्वारा चलाया जा रहा था जिसके पास इस वाहन को चलाने हेतु वैध एवं प्रभावी लाइसेंस था। प्रत्‍यर्थी/परिवादिनी का यह भी कथन है कि इस ट्रक की मरम्‍मत में कुल २३,१३०/- रू० खर्च किया गया। परिवादिनी ने वांछित अभिलेखों सहित क्षतिपूर्ति की अदायगी हेतु दावा अपीलार्थी बीमा कम्‍पनी को प्रेषित किया किन्‍तु परिवादिनी का दावा अनुचित रूप से निरस्‍त कर दिया गया। अत: परिवादिनी ने प्रश्‍नगत वाहन की मरम्‍मत में खर्च की गई धनराशि २३,१३०/- रू० की मय ब्‍याज अदायगी तथा ५०,०००/- रू० क्षतिपूर्ति एवं मानसिक उत्‍पीड़न के सन्‍दर्भ में क्षतिपूर्ति हेतु प्रदान किए जाने हेतु परिवाद योजित किया।

अपीलार्थी बीमा कम्‍पनी ने जिला मंच के समक्ष प्रतिवाद पत्र प्रस्‍तुत किया। अपीलार्थी बीमा कम्‍पनी द्वारा दावे को कालबाधित होना बताया तथा यह भी अभिकथित किया कि परिवादिनी के पति के नाम जो वाहन था वह वाणिज्यिक वाहन की श्रेणी में आता है और पालिसी की शर्तों के अनुसार चालक के पास वाणिज्यिक वाहन चलाने का वैध एवं प्रभावी लाइसेंस नहीं था। अत: बीमा शर्तों का उल्‍लंघन किए जाने के कारण बीमा दावा स्‍वीकार नहीं किया गया। अपीलार्थी का यह भी कथन है कि क्षति आंकलन हेतु अपीलार्थी बीमा कम्‍पनी द्वारा सर्वेयर की नियुक्ति की गयी जिन्‍होंने प्रश्‍नगत वाहन में हुई क्षति का आंकल १६,९६५/- रू० किया।

विद्वान जिला मंच ने प्रश्‍नगत परिवाद के प्रस्‍तुतीकरण में हुए विलम्‍ब का स्‍पष्‍टीकरण पर्याप्‍त पाते हुए विलम्‍ब को क्ष‍मा कर दिया। विद्वान जिला मंच द्वारा यह मत भी व्‍यक्‍त किया गया कि मोटन वाहन अधिनियम १९८८ की धारा-२(२१) में लाइट मोटर व्‍हीकल की परिभाषा दी गई है उसके अन्‍तर्गत उन ट्रान्‍सपोर्ट व्‍हीकल, ओमिनी बस, मोटर कार, ट्रैक्‍टर, रोड रोलर को लाइट मोटर व्‍हीकल के अन्‍तर्गत माना गया है जिनका अनलैडेन बजन ७५०० कि0ग्रा0 से कम होता है। प्रस्‍तुत मामले में जो रजिस्‍ट्रेशन प्रमाण पत्र एवं परमिट दाखिल किया गया है उसके अनुसार दुर्घटनाग्रस्‍त वाहन यद्यपि छोटा         -३- ट्रक था परन्‍तु अनलैडेन बजन २५०० कि0ग्रा0 ही था। निर्विवाद रूप से कथित घटना के समय प्रश्‍नगत वाहन के चालक के पास एल0एम0वी0 वाहन चलाने का लाइसेंस था। अत: वाहन चालक के लाइसेंस को विद्वान जिला मंच द्वारा वैध माना गया। क्षतिपूर्ति की धनराशि के सन्‍दर्भ में विद्वान जिला मंच ने सर्वेयर द्वारा किए गये क्षति आंकलन १६,९६५/- रू० ही दिलाया जाना उचित माना। तद्नुसार परिवादिनी का परिवाद अपीलार्थी बीमा कम्‍पनी के विरूद्ध स्‍वीकार करते हुए अपीलार्थी बीमा कम्‍पनी को निर्देशित किया कि वह निर्णय की तिथि से डेढ़ माह के अन्‍दर परिवादिनी को क्षति के रूप में १६,९६५/- रू० अदा करे। यह भी आदेशित किया कि इस धनराशि पर परिवादिनी ०१-०९-२००२ से अन्तिम अदायगी की तिथि तक १० प्रतिशत वार्षिक की दर से ब्‍याज तथा ५००/- रू० वाद व्‍यय के रूप में भी विपक्षी से पाने की अधिकारिणी होगी।

इस निर्णय से क्षुब्‍ध होकर यह अपील योजित की गयी है।

हमने अपीलार्थी की ओर से विद्वान अधिवक्‍ता श्री आशीष कुमार श्रीवास्‍तव तथा प्रत्‍यर्थी की ओर से विद्वान अधिवक्‍ता श्री जे0पी0 सक्‍सेना के तर्क सुने तथा अभिलेखों का अवलोकन किया।

अपीलार्थी के विद्वान अधिवक्‍ता द्वारा यह तर्क प्रस्‍तुत किया गया कि कथित दुर्घटना के समय प्रश्‍नगत वाहन वैध लाइसेंसधारी द्वारा नहीं चलाया जा रहा था जबकि बीमा पालिसी की शर्त के अनुसार बीमित वाहन वैध लाइसेंसधारी चालक द्वारा ही चलाया जाना था। अत: बीमा पालिसी की श्‍ार्तों के उल्‍लंघन के कारण प्रत्‍यर्थी/परिवादिनी क्षतिपूर्ति की धनराशि प्राप्‍त करने की अधिकारिणी नहीं मानी जा सकती।

अपील के आधारों में प्रश्‍नगत वाहन के चालक के ड्राइविंग लाइसेंस के अवैध होने का ही आधार लिया गया है। इसके अतिरिक्‍त अपील में अन्‍य कोई आधार नहीं लिया गया है।

प्रत्‍यर्थी के विद्वान अधिवक्‍ता द्वारा यह तर्क प्रस्‍तुत किया गया कि कथित दुर्घटना के समय प्रश्‍नगत वाहन के चालक के पास लाइट मोटर व्‍हीकल चलाने का ड्राइविंग लाइसेंस था जिसकी वैधता ०१-११-२००० से ३१-१०-२०२० तक थी। उनके द्वारा         -४- यह तर्क भी प्रस्‍तुत किया गया कि मोटर वाहन अधिनियम की धारा-२(२१) के अन्‍तर्गत लाइट मोटर व्‍हीकल को परिभाषित किया गया है। मोटर वाहन अधिनियम की धारा-२(२१) के अन्‍तर्गत लाइट मोटर व्‍हीकल को निम्‍नप्रकार से परिभाषित किया गया है :-

 '' "light motor vehicle" means a transport vehicle or omnibus the gross vehicle weight of either of which or a motor car or tractor or road-roller the unladen weight of any of which, does not exceed 7,500   kilograms. '' इस प्रकार ७,५०० किलोग्राम भार से कम के वाहन लाइट मोटर व्‍हीकल की श्रेणी में माने जायेंगे। उनके द्वारा यह तर्क भी प्रस्‍तुत किया गया कि प्रश्‍नगत वाहन से सम्‍बन्धित पंजीयन प्रमाण पत्र एवं परमिट जिला मंच के समक्ष दाखिल किया गया जिसकी पृविष्टियों के अनुसार प्रश्‍नगत वाहन का अनलैडेन भार २५०० किलोग्राम ही था। अत: प्रश्‍नगत वाहन के चालक के पास एल0एम0वी0 वाहन चलाने का वैध लाइसेंस प्रश्‍नगत वाहन के सन्‍दर्भ में भी वैध माना जायेगा। इस सन्‍दर्भ में उनके द्वारा नेशनल इंश्‍योरेंस कं0लि0 बनाम अनप्‍पा इरप्‍पा नेसारिया व अन्‍य, २००८(१) टी.ए.सी. ८१२ (एससी) के मामले में मा0 उच्‍चतम न्‍यायालय द्वारा दिए गये निर्णय पर विश्‍वास व्‍यक्‍त किया गया।
अपीलार्थी के विद्वान अधिवक्‍ता ने प्रश्‍नगत वाहन के भार पर आपत्ति नहीं की किन्‍तु उनके द्वारा यह तर्क प्रस्‍तुत किया गया कि प्रश्‍नगत वाहन वाणिज्यिक वाहन था जबकि निर्विवाद रूप से यह वाहन एल0एम0वी0 ड्राइविंग लाइसेंसधारी द्वारा चलाया जा रहा था। एल0एम0वी0 ड्राइविंग लाइसेंस वाणिज्यिक वाहन के चालन हेतु वैध नहीं माना जा सकता। इस सन्‍दर्भ में उनके द्वारा ओरियण्‍टल इंश्‍योरेंस कं0लि0 बनाम अंगद कोल व अन्‍य, ए.आई.आर २००९ (एससी) २१५१ के मामले में मा0 उच्‍चतम न्‍यायालय द्वारा दिए गये निर्णय एवं नेशनल इंश्‍योरेंस कं0लि0 बनाम राम सिंह गुर्जर, १(२०००) सीपीजे २०९ (एनसी) के मामले में मा0 राष्‍ट्रीय आयोग द्वारा दिए गये निर्णय पर विश्‍वास व्‍यक्‍त किया गया। 
उल्‍लेखनीय है कि सिविल अपील सं0-५८२६ सन् २०११ मुकुन्‍द देवगन बनाम       -५- ओरियण्‍टल इंश्‍योरेंस कं0लि0 के मामले में मा0 उच्‍चतम न्‍यायालय की खण्‍ड पीठ ने इस सन्‍दर्भ में मा0 उच्‍चतम न्‍यायालय द्वारा दिए गये विभिन्‍न निर्णयों में अन्‍तर्विरोधी मत व्‍यक्‍त किए जाने के कारण प्रकरण वृहद् पीठ को सन्‍दर्भित किये जाने हेतु मा0 मुख्‍य न्‍यायाधीश से अनुरोध किया। तद्नुसार वृहद् पीठ मा0 मुख्‍य न्‍यायाधीश द्वारा गठित की गयी। वृहद् पीठ द्वारा इस मामले में दिए गये निर्णय दिनांकित ०३-०७-२०१७ द्वारा यह निर्णीत किया गया है :
'Light motor vehicle' as defined in section 2(21) of the Act would include a transport vehicle as per the weight prescribed in section 2 (21) read with section 2 (15) and 2 (48). Such transport vehicles are not excluded from the definition of the light motor vehicle by virtue of amendment Act No. 54/1994.
A transport vehicle and omnibus, the gross vehicle weight of either of which does not exceed 7,500 kg would be a light motor vehicle and also motor car or tractor or a road roller, 'unladen weight' of which does not exceed 7,500 kg and holder of a driving licence to drive class of "light motor vehicle" as provided in secction 10(2)(d) is competent to drive a transport vehicle or omnibus, the gross vehicle weight of which does not exceed 7,500 kg or a motor car or tractor or road-roller, the "unladen weight" of which does not exceed 7,500 kg. That is to say, no separate endorsement on the licence is required to drive a transport vehicle.  A licence issued under section 10 (2) (d) continues to be valid after Amendment Act 54/1994 and 28.3.2001 in the form.
The effect of the amendment made by virtue of Act No. 54/1994 w.e.f. 14.11.1994 while substituting clauses (e) to (h) of section 10 (2) which contained "medium goods vehicle" in section 10 (2) (e), medium passenger motor vehicle in section 10(2)(f), heavy goods vehicle in section 10(2)(h) with expression 'transport vehicle' as substituted in section 10(2)(e) related only to the aforesaid substituted classes only.  It does not exclude transport vehicle, from the purview of section 10(s)(d) and section 2(41) of the Act i.e. light motor vehicle.
          The effect of amendment of Form 4 by insertion of "transport vehicle"
    -६-
is related only to the categories which were substituted in the year 1994 and the procedure to obtain driving licence for transport vehicle of class of "light motor vehicle" continues to be the same as it was and has not been changed and there is no requirement to obtain separate endorsement to drive transport vehicle, and if a driver is holding licence to drive motor vehicle, he can drive transport vehicle of such class without any endorsement to that effect.
          The bench observed:  " When a driver is authorized to drive a vehicle, he can drive it irrespective of the fact whether it is used for a private purpose or for purpose of hire or reward or for carrying the goods in the said vehicle.  It is intended by the provision of the Act, and the Amendment Act 54/1994."
मा0 उच्‍चतम न्‍यायाल की वृहद् पीठ द्वारा दिए गये उपरोक्‍त निर्णय के आलोक में हमारे विचार से अपीलार्थी के विद्वान अधिवक्‍ता का यह तर्क स्‍वीकार किए जाने योग्‍य नहीं है कि कथित दुर्घटना के समय प्रश्‍नगत वाहन वैध लाइसेंधारी द्वारा नहीं चलाया जा रहा था। अपील में बल नहीं है। तद्नुसार अपील निरस्‍त किए जाने योग्‍य है।
आदेश       प्रस्‍तुत अपील निरस्‍त की जाती है। जिला मंच, फतेहपुर द्वारा परिवाद सं0-६१/२००६ में पारित निर्णय एवं आदेश दिनांक ०९-११-२००६ की प‍ुष्टि की जाती है।
      उभय पक्ष इस अपील का व्‍यय-भार अपना-अपना स्‍वयं वहन करेंगे।
      उभय पक्ष को इस निर्णय की प्रमाणित प्रति नियमानुसार उपलब्‍ध करायी जाय।
   
                                              (उदय शंकर अवस्‍थी)                                                 पीठासीन सदस्‍य                                                                                                (गोबर्धन यादव)                                                     सदस्‍य   प्रमोद कुमार वैय0सहा0ग्रेड-१, कोर्ट-३.
         
      [HON'BLE MR. Udai Shanker Awasthi] PRESIDING MEMBER   [HON'BLE MR. Gobardhan Yadav] MEMBER