State Consumer Disputes Redressal Commission
Ratnesh Dwivedi vs Ex. Engg. P.M.G.S.Y. Khand Lok Nirman ... on 19 September, 2018
Cause Title/Judgement-Entry STATE CONSUMER DISPUTES REDRESSAL COMMISSION, UP C-1 Vikrant Khand 1 (Near Shaheed Path), Gomti Nagar Lucknow-226010 First Appeal No. A/1262/2018 ( Date of Filing : 04 Jul 2018 ) (Arisen out of Order Dated 24/04/2018 in Case No. C/25/2016 of District Amethi) 1. Ratnesh Dwivedi S/O Sri Awdhesh Dwivedi R/O Hathiyanala Civil Line No. 1 Sultanpur Pargana Meeranpur Tehsil SAdar Distt. Sultanpur ...........Appellant(s) Versus 1. Ex. Engg. P.M.G.S.Y. Khand Lok Nirman Bibhag Amethi ...........Respondent(s) BEFORE: HON'BLE MR. JUSTICE AKHTAR HUSAIN KHAN PRESIDENT For the Appellant: For the Respondent: Dated : 19 Sep 2018 Final Order / Judgement
राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, उ0प्र0, लखन ऊ अपील संख् या- 1262 /2018 (मौखिक) (जिला उपभोक्ता फोरम, अमेठी द्वारा परिवाद संख्या 25/2016 में पारित आदेश दिनांक 24.04.2018 के विरूद्ध) Ratnesh Dwivedi, aged about 30 years, son of Awdhesh Dwivedi, resident of Hathiyanala, Civil Line No. 1, Sultanpur, Pargana- Meeranpur, Tehsil- Sadar, District- Sultanpur. ...................अपीलार्थी/परिवादी बनाम Executive Engineer, P.M.G.S.Y. Khand, Lok Nirman Vibhag, Amethi.
..................प्रत्यर्थी/विपक्षी समक्ष:-
माननीय न्यायमूर्ति श्री अख्तर हुसैन खान, अध्यक्ष।
अपीलार्थी की ओर से उपस्थित : श्री एम0के0के0 मंदार, विद्वान अधिवक्ता।
प्रत्यर्थी की ओर से उपस्थित : श्री आर0के0 मिश्रा, विद्वान अधिवक्ता।
दिनांक: 19-09-2018 मा0 न्यायमूर्ति श्री अख्तर हुसैन खान, अध्यक्ष द्वारा उदघोषित निर्णय वर्तमान अपील परिवाद संख्या-25/2016 रत्नेश द्विवेदी बनाम अधिशाषी अभियन्ता पी0एम0जी0एस0वाई0 खण्ड लोक निर्माण विभाग अमेठी में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष फोरम, अमेठी द्वारा पारित आदेश दिनांक 24.04.2018 के विरूद्ध धारा-15 उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986 के अन्तर्गत राज्य आयोग के समक्ष प्रस्तुत की गयी है।-2-
आक्षेपित आदेश के द्वारा जिला फोरम ने अपीलार्थी/परिवादी की अनुपस्थिति में परिवाद निरस्त कर दिया है, जिससे क्षुब्ध होकर परिवादी रत्नेश द्विवेदी ने यह अपील प्रस्तुत की है।
अपील की सुनवाई के समय अपीलार्थी की ओर से विद्वान अधिवक्ता श्री एम0के0के0 मंदार और प्रत्यर्थी की ओर से विद्वान अधिवक्ता श्री आर0के0 मिश्रा उपस्थित आए हैं।
मैंने उभय पक्ष के विद्वान अधिवक्तागण के तर्क को सुना है और आक्षेपित आदेश तथा पत्रावली का अवलोकन किया है।
आक्षेपित आदेश के द्वारा जिला फोरम ने परिवाद अपीलार्थी/परिवादी की अनुपस्थिति में निरस्त किया है, परन्तु प्रत्यर्थी/विपक्षी के विद्वान अधिवक्ता ने तर्क प्रस्तुत किया है कि परिवाद पत्र में कथित तथ्यों के आधार पर परिवादी धारा-2 (1) (डी) उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986 के अन्तर्गत उपभोक्ता नहीं है। अत: परिवाद उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986 के अन्तर्गत जिला फोरम के समक्ष ग्राह्य नहीं है। ऐसी स्थिति में आक्षेपित आदेश दिनांक 24.04.2018 को अपास्त कर पत्रावली जिला फोरम को गुणदोष के आधार पर निस्तारण हेतु प्रेषित किए जाने पर उभय पक्ष का समय और धन ही बर्बाद होगा।
अपीलार्थी/परिवादी के विद्वान अधिवक्ता का तर्क है कि परिवाद पत्र उचित तौर पर जिला फोरम के समक्ष प्रस्तुत किया गया है और परिवाद परिवादी की अनुपस्थिति में निरस्त किया गया है।-3-
मैंने उभय पक्ष के तर्क पर विचार किया है।
परिवाद पत्र के अनुसार अपीलार्थी/परिवादी का कथन है कि वर्ष 2012 में प्रत्यर्थी/विपक्षी अधिशाषी अभियन्ता पी0एम0जी0एस0वाई0 खण्ड लोक निर्माण विभाग अमेठी के द्वारा उनके कार्यालय से सम्बन्धित कार्यों के कागजातों की फोटो स्टेट करने हेतु कोटेशन मांगा गया, जिसमें अपीलार्थी/परिवादी ने भी कोटेशन प्रस्तुत किया। तब उसका कोटेशन स्वीकार करते हुए उसे प्रत्यर्थी/विपक्षी ने अपने कार्यालय के कागजात की फोटो स्टेट करने का कार्य दिया, जिसके अनुसार 1.50/-रू0 प्रति पेज के हिसाब से प्रत्यर्थी/विपक्षी को अपीलार्थी/परिवादी को मास के अन्त में देना था। इस प्रकार कोटेशन के अनुसार दिनांक 01.01.2014 से दिनांक 30.04.2014 तक अपीलार्थी/परिवादी ने प्रत्यर्थी/विपक्षी के फोटो स्टेट का जो कार्य किया उसकी कुल देय धनराशि 40,911/-रू0 हुई, परन्तु विपक्षी जो अपील में प्रत्यर्थी है, ने अपीलार्थी/परिवादी को उपरोक्त धनराशि का भुगतान नहीं किया और कहा कि बजट में पैसा नहीं है आ जाएगा तो दिया जाएगा। इस प्रकार अपीलार्थी/परिवादी की उक्त बकाया धनराशि का भुगतान प्रत्यर्थी/विपक्षी ने नहीं किया। अत: विवश होकर अपीलार्थी/परिवादी ने परिवाद प्रस्तुत किया है और उपरोक्त बकाया धनराशि दिलाए जाने का अनुतोष चाहा है। साथ ही वाद व्यय और मानसिक कष्ट हेतु क्षतिपूर्ति भी मांगा है।
परिवाद पत्र में अंकित उपरोक्त विवरण से स्पष्ट है कि अपीलार्थी/परिवादी ने स्वयं अपनी फोटोकापीयर मशीन की सेवायें -4- प्रत्यर्थी/विपक्षी को उपलब्ध करायी हैं। अत: अपीलार्थी/परिवादी सेवा प्रदाता है और प्रत्यर्थी/विपक्षी उसकी सेवा का उपभोक्ता है। ऐसी स्थिति में अपीलार्थी/परिवादी धारा-2 (1) (डी) उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986 के अन्तर्गत उपभोक्ता की श्रेणी में नहीं आता है। अत: परिवाद उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986 के अन्तर्गत ग्राह्य नहीं है।
उपरोक्त विवेचना के आधार पर मैं इस मत का हूँ कि आक्षेपित आदेश दिनांक 24.04.2018 अपास्त कर पत्रावली जिला फोरम को अग्रिम कार्यवाही हेतु प्रतिप्रेषित किया जाना उचित नहीं है। अत: अपील अपीलार्थी/परिवादी को विधि के अनुसार प्रश्नगत धनराशि के सम्बन्ध में कार्यवाही करने की छूट के साथ निरस्त की जाती है।
उभय पक्ष अपील में अपना-अपना वाद व्यय स्वयं वहन करेंगे।
(न्यायमूर्ति अख्तर हुसैन खान) अध्यक्ष जितेन्द्र आशु0 कोर्ट नं01 [HON'BLE MR. JUSTICE AKHTAR HUSAIN KHAN] PRESIDENT