State Consumer Disputes Redressal Commission
Micro Path Labs vs Gyan Prakash Gaur & Anr on 1 May, 2024
Cause Title/Judgement-Entry STATE CONSUMER DISPUTES REDRESSAL COMMISSION, UP C-1 Vikrant Khand 1 (Near Shaheed Path), Gomti Nagar Lucknow-226010 First Appeal No. A/1321/2023 ( Date of Filing : 08 Aug 2023 ) (Arisen out of Order Dated 17/07/2023 in Case No. CC/71/2021 of District Bulandshahr) 1. Micro Path Labs Through Dr. Rupali Singh M.D.(Path) Opp. Dr. S.C. Gupta Complex,D.M. Road,Bulandshahar ...........Appellant(s) Versus 1. Gyan Prakash Gaur & Anr R/o 169 Mohalla Prem Nagar, Bulandshahar, Pargana-Barn, Tehsil & Dist.-Bulandshahar ...........Respondent(s) BEFORE: HON'BLE MR. JUSTICE ASHOK KUMAR PRESIDENT HON'BLE MR. Vikas Saxena JUDICIAL MEMBER PRESENT: Dated : 01 May 2024 Final Order / Judgement
राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग , उ0प्र0 , लखनऊ।
(सुरक्षित) अपील संख्या:- 1321 /20 23 माईक्रो पैथ लैब द्वारा डॉ0 रूपाली सिंह, एम0डी0 (पैथ) अपोजिट डॉ0 एस0सी0 गुप्ता कॉम्पलेक्स, डी0एम0 रोड, बुलन्दशहर।
...........अपीलार्थी/विपक्षी सं0-1 बनाम 1- ज्ञान प्रकाश गौड़ पुत्र स्व0 गोपीचन्द गौड़, निवासी 169 मोहल्ला प्रेमनगर बुलन्दशहर, परगना-बरन, तहसील व जिला बुलन्दशहर।
...........प्रत्यर्थी/परिवादी 2- दि ओरियण्टल इं0कं0लि0 मण्डलीय कार्यालय, 346 खैर नगर, फिलिस्तान सिनेमा के सामने, मेरठ।
...........प्रत्यर्थी/विपक्षी सं0-2 समक्ष :-
मा0 न्यायमूर्ति श्री अशोक कुमार, अध्यक्ष मा0 श्री विकास सक्सेना, सदस्य अपीलार्थी के अधिवक्ता : श्री लल्ला राम चौहान प्रत्यर्थी सं0-1 के अधिवक्ता : श्री संजय कुमार वर्मा प्रत्यर्थी सं0-2 के अधिवक्ता : श्री आलोक कुमार सिंह दिनांक :- 16.5.2024 मा0 श्री विकास सक्सेना , सदस्य द्वारा उदघोषित निर्णय प्रस्तुत अपील, अपीलार्थी/विपक्षी माईक्रो पैथ लैब द्वारा इस आयोग के सम्मुख धारा-41 उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के अन्तर्गत जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, बुलन्दशहर द्वारा परिवाद सं0-71/2021 में पारित निर्णय/आदेश दिनांक 17.7.2023 के विरूद्ध योजित की गई है।
संक्षेप में वाद के तथ्य इस प्रकार है कि प्रत्यर्थी/परिवादी की पत्नी श्रीमती अर्चना बुखार आदि से माह अक्टूबर, 2020 में पीड़ित -2- थी जिसका इलाज ममता हॉस्पिटल से चल रहा था और ममता हॉस्पिटल ने प्रत्यर्थी/परिवादी की पत्नी के कुछ ब्लड टेस्ट लिखे थे जिसमें डेंगू टैस्ट भी था। प्रत्यर्थी/परिवादी अपनी पत्नी श्रीमती अर्चना को लेकर अपीलार्थी/विपक्षी के यहाँ दिनांक 02-10-2020 को लेकर जॉच कराने के लिए गया जिसके बाद अपीलार्थी/विपक्षी ने प्रत्यर्थी/परिवादी की पत्नी श्रीमती अर्चना से जॉच के लिए 2460.00 रू0 प्राप्त करने के बाद उसका सैम्पल लिया, लेकिन 2460.00 रू0 की कोई रसीद अपीलार्थी/विपक्षी ने प्रत्यर्थी/परिवादी को नहीं दी। अपीलार्थी/विपक्षी ने उसकी पत्नी की जाँच रिपोर्ट दिनांक 02-10-2020 को दी और रिपोर्ट में उसकी पत्नी को डेंगू से पीड़ित होना घोषित किया गया।
प्रत्यर्थी/परिवादी की पत्नी श्रीमती अर्चना को जब अपीलार्थी/विपक्षी के द्वारा दी गयी डेंगू की पॉजिटिव रिपोर्ट आने का पता चला तो वह सदमें में आ गयी और उसके मन मस्तिष्क में यह बैठ गया कि वह अब नहीं बचेगी। प्रत्यर्थी/परिवादी ने अपीलार्थी/विपक्षी द्वारा उसकी पत्नी श्रीमती अर्चना की डेंगू की दी गयी पॉजिटिव रिपोर्ट आने के बाद एक दूसरी क्रास रिपोर्ट लेने के लिए पैथकाइन्ड लैब काला आम बुलन्दशहर से दिनांक 03-10-2020 को डेंगू की जॉच व सी.बी.सी. जाँच करायी जिसकी रिपोर्ट दिनांक 03-10-2020 में डेंगू नेगेटिव आया। प्रत्यर्थी/परिवादी अपनी पत्नी व उसकी पैथकाइन्ड लैब की रिपोर्ट दिनांकित 03-10-2020 को लेकर अपीलार्थी/विपक्षी के पास दोबारा गया और दोनों रिपोर्ट दिखाकर अपीलार्थी/विपक्षी से डेंगू की दोबारा सही से जाँच कर रिपोर्ट देने की माँग की, परन्तु अपीलार्थी/विपक्षी ने कहा कि उसकी रिपोर्ट सही है -3- उसे दोबारा जाँच करने की आवश्यकता नहीं है और पैथकाइन्ड लैब की रिपोर्ट गलत है।
ममता हॉस्पिटल के डॉक्टर द्वारा प्रत्यर्थी/परिवादी की पत्नी की एवं दोनों रिपोर्ट दोबारा देखकर बताया कि इन्हें डेंगू नहीं है, परन्तु अपीलार्थी/विपक्षी की रिपोर्ट आने के बाद से ही प्रत्यर्थी/परिवादी की पत्नी के मन मस्तिष्क में यह बात घर कर गयी कि उसे डेंगू है। अपीलार्थी/विपक्षी ने प्रत्यर्थी/परिवादी की पत्नी की डेंगू की जॉच लापरवाही से करके डेंगू पॉजिटिव रिपोर्ट देकर दिनांक 27.11.2020 को असमय मृत्यु हो गयी जिसकी जिम्मेदारी अपीलार्थी/विपक्षी की है। अपीलार्थी/विपक्षी डाक्टर यदि प्रत्यर्थी/परिवादी की पत्नी की डेंगू की जॉच सही प्रकार से व सावधानी पूर्वक करती और सही रिपोर्ट देती तो प्रत्यर्थी/परिवादी की पत्नी को इतना बड़ा मानसिक आघात नहीं पहुँचता और न ही उसकी मृत्यु होती। प्रत्यर्थी/परिवादी ने इस बावत अपीलार्थी/विपक्षी संख्या-1 को एक विधिक नोटिस दिनांक 15-01-2021 को दिया, लेकिन अपीलार्थी/विपक्षी संख्या-1 ने उसका झूठे एंव गलत तथ्यों के आधार पर जबाव दिया जिसका कोई लाभ अपीलार्थी/विपक्षी संख्या-1 पाने का अधिकारी नहीं है।
प्रत्यर्थी/परिवादी ने अपीलार्थी/विपक्षी की रिपोर्ट दिनांकित 02-10-2020 के एक दिन बाद ही दिनांक 03-10-2020 को पैथ काइन्ड लैब से अपनी पत्नी की जाँच करायी थी और दोनों रिपोर्ट के बीच में प्रत्यर्थी/परिवादी की पत्नी के इलाज करने वाले डाक्टर ने डेंगू की कोई दवा नहीं दी थी। इस प्रकार अपीलार्थी/विपक्षी संख्या-1 ने प्रत्यर्थी/परिवादी की पत्नी की डेंगू की रिपोर्ट देने में हर प्रकार से लापरवाही बरती है। अपीलार्थी/विपक्षी संख्या-1 यदि उक्त रिपोर्ट को सावधानी पूर्वक सही प्रकार से देता तो प्रत्यर्थी/परिवादी की पत्नी -4- अर्चना आज जीवित होती। प्रत्यर्थी/परिवादी की पत्नी परिवादी की जीवन-मरण व सुख-दुध की साथी थी। प्रत्यर्थी/परिवादी एक सेवानिवृत्त सरकारी अधिकारी है। प्रत्यर्थी/परिवादी को जीवन के इस पड़ाव में अपनी पत्नी का बहुत बड़ा सहारा था किन्तु अपीलार्थी/विपक्षी संख्या-1 ने अपनी घोर लापरवाही से उसकी जीवन साथी व सहारा को लील लिया है जिससे प्रत्यर्थी/परिवादी का भविष्य असुरक्षित व अंधकारमय हो गया है तथा उसकी पत्नी की मृत्यु होने से प्रत्यर्थी/परिवादी व परिवादी के परिवार का अपूर्णीय नुकसान हुआ है। इस प्रकार अपीलार्थी/विपक्षी संख्या-1 ने प्रत्यर्थी/परिवादी की पत्नी की असावधानी के साथ गलत रिपोर्ट देकर प्रत्यर्थी/परिवादी को दी जाने वाली सेवा में कमी की है एवं अपीलार्थी/विपक्षी सेवा में कमी का दोषी है अतः विवश होकर परिवाद जिला उपभोक्ता आयोग के सम्मुख प्रस्तुत किया गया।
अपीलार्थी/विपक्षी संख्या-1 की ओर से जिला उपभोक्ता आयोग के सम्मुख अपना प्रतिवाद पत्र प्रस्तुत कर यक कथन किया गया कि दिनांक 02-10-2020 को श्रीमती अर्चना जिसकी उम्र 50 वर्ष थी, को डा0 ममता हॉस्पिटल के रेफरेन्स पर अपीलार्थी/विपक्षी के यहॉ ब्लड सैम्पल लिया गया और उसकी जाँच के लिए निर्धारित शुल्क प्राप्त करने के बाद रसीद भी जारी की गयी थी। श्रीमती अर्चना के ब्लड की जाँच करने के बाद रिपोर्ट जारी की गयी थी और जॉच के अन्तर्गत जिस प्रकार से पायी गयी वही विवरण रिपोर्ट में दिया गया था। श्रीमती अर्चना की जो जॉच पैथ काईन्ड लैब कालाआम से दिनांक 03-10-2020 को करानी बतायी गयी है उसमें जिस महिला की आयु 62 वर्ष वर्णित है उससे स्पष्ट है कि जिस महिला की जॉच अपीलार्थी/विपक्षी के द्वारा की गयी है उस महिला की जाँच रिपोर्ट -5- नहीं है। प्रत्यर्थी/परिवादी के द्वारा अपनी पत्नी के साथ दिनांक 03-10-2020 को या अन्य किसी दिनांक को अपीलार्थी/विपक्षी के यहॉ उपस्थित होने का प्रश्न ही नहीं है। प्रत्यर्थी/परिवादी के द्वारा अपनी पत्नी श्रीमती अर्चना की मृत्यु के सम्बन्ध में कोई पोस्टमार्टम रिपोर्ट परिवाद के साथ दाखिल नहीं की गयी है।
अपीलार्थी/विपक्षी के द्वारा जाँच करने और उसकी रिपोर्ट देने में कोई लापरवाही नहीं की गयी है, इसलिए अपीलार्थी/विपक्षी किसी भी प्रकार से कोई क्षतिपूर्ति धनराशि भुगतान करने के लिए उत्तरदायी नहीं है। अपीलार्थी/विपक्षी ने जाँच के आधार पर जो रिपोर्ट दी है उसके बाद श्रीमती अर्चना गौड़ का इलाज कब और कहां किस प्रकार से संचालित हुआ और उसको क्या-क्या बीमारियां पायी गयी और क्या-क्या दवाईयां दी गयी है उनका भी कोई विवरण परिवाद पत्र में नहीं दिया गया है। अपीलार्थी/विपक्षी एक सीनियर डाक्टर है, जो योग्याताधारक है और उसके द्वारा अपनी पैथोलॉजी लैब में जॉच किये जाने में और रिपोर्ट दिये जाने में कोई त्रुटि या लापरवाही नहीं हुई है। इस प्रकार प्रस्तुत परिवाद अपीलार्थी/विपक्षी को ब्लैक मेल कर धन एठने की नियत से असत्य कथनों के साथ योजित किया गया है। अतः परिवाद सव्यय खण्डित होने योग्य है।
प्रत्यर्थी/विपक्षी संख्या-2 ओरियण्टल इंश्योरेंस कम्पनी की ओर से भी जिला उपभोक्ता आयोग के सम्मुख अपना प्रतिवाद पत्र प्रस्तुत कर यह कथन किया गया है कि प्रत्यर्थी/विपक्षी बीमा कम्पनी द्वारा अपीलार्थी/विपक्षी संख्या-1 की माईक्रो पैथ लैब का डा0 चन्द्रजीत सिंह एवं डा0 एस0एस0 पुरी के नाम से प्रोफेशनल इन्डेमिनिटी पॉलिसी संख्या 252400/48/2020/4814 के द्वारा दिनांक 16-11-2019 से 15-11-2020 तक की अवधि के लिए -6- पॉलिसी की शर्तों, प्राविधानों व अपवादों के अन्तर्गत बीमा किया गया था। प्रत्यर्थी/परिवादी की ओर से पत्रावली पर ऐसा कोई चिकित्सीय प्रलेख दाखिल नहीं किया गया है कि प्रत्यर्थी/परिवादी की पत्नी का वास्तव में उपचार किसके द्वारा और किस बीमारी के लिए किया गया और उस उपचार से उसे क्या स्वास्थ्य लाभ प्राप्त हुआ।
प्रत्यर्थी/परिवादी के द्वारा अपनी पत्नी श्रीमती अर्चना की मृत्यु के सम्बन्ध में कोई पोस्टमार्टम रिपोर्ट परिवाद के साथ दाखिल नहीं की गयी है। प्रत्यर्थी/परिवादी की ओर से ऐसा भी कोई प्रलेखीय दाखिल नहीं किया गया है जिससे यह ज्ञात हो कि वास्तव में कौन सी जाँच रिपोर्ट सही है और कौन सी जॉच रिपोर्ट गलत है। प्रस्तुत परिवाद सेवा में कमी की परिधि में नहीं आता है तथा पोषणीय न होने के कारण निरस्त किये जाने योग्य है।
विद्वान जिला उपभोक्ता आयोग द्वारा उभय पक्ष के अभिकथन एवं उपलब्ध साक्ष्य पर विस्तार से विचार करने के उपरांत परिवाद को अपीलार्थी/विपक्षी सं0-1 के विरूद्ध स्वीकार करते हुए निम्न आदेश पारित किया है:-
"प्रस्तुत परिवाद विपक्षी संख्या 1 माईको पैथ लैब के विरूद्ध सव्यय स्वीकार किया जाता है तथा विपक्षी संख्या 2 दि ओरियण्टल इंश्योरेंस कम्पनी लि० मेरठ के विरूद्ध निरस्त किया जाता है। विपक्षी संख्या 1 माईको पैथ लैब के चिकित्सक को आदेशित किया जाता है कि वह 45 दिन के अन्दर परिवादी को मानसिक क्षतिपूर्ति हेतु अंकन 5,00000/रू0 (पाँच लाख रूपये) एंव वाद व्यय हेतु अंकन 5000/रू0 (पाँच हजार रूपये) भुगतान करे। यदि विपक्षी संख्या 1 माईको पैथ लैब के चिकित्सक द्वारा परिवादी को उपरोक्त समस्त -7- धनराशि का भुगतान 45 दिन के अन्दर नहीं किया जाता है तो उस दशा में विपक्षी संख्या 1 उपरोक्त समस्त धनराशि पर 45 दिन के बाद से तारीख भुगतान तक 07 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी परिवादी को भुगतान करने के लिए जिम्मेदार होगा।
इस प्रकरण में यह भी आदेशित किया जाता है कि चूंकि इस मामले में विपक्षी संख्या 1 माईको पैथ लैब के चिकित्सक द्वारा परिवादी से 2460/रू0 फीस लेने के बाद भी परिवादी को कोई रसीद नहीं दी है अत: यह उपभोक्ता के अधिकारों का हनन एवं अनुचित व्यापार पद्वति का मामला है इसलिए विपक्षी संख्या 1 माईको पैथ लैब के पैथालॉली लैब संचालन हेतु जारी लाईसेन्स के विरूद्ध उसके पंजीकरण के निरस्तीकरण सम्बन्धी कार्यवाही किये जाने हेतु इस निर्णय एवं आदेश की एक-एक प्रति जिलाधिकारी बुलन्दशहर, मण्डलायुक्त मेरठ मण्डल मेरठ, मुख्य चिकित्साधिकारी बुलन्दशहर, अपर निदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मेरठ मण्डल मेरठ, महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य उ0प्र0 लखनऊ एवं प्रमुख सचिव स्वास्थ विभाग उ0प्र0 शासन लखनऊ को तत्काल पंजीकृत डाक के माध्यम से भेजी जाये।
उपभोक्ताओं के अधिकारों की सुरक्षा के दृष्टिगत एंव राज्य सरकार एवं केन्द्र सरकार के टैक्स एवं आयकर की चोरी को रोकने हेतु यह भी आदेश किया जाता है कि जिलाधिकारी बुलन्दशहर एवं मुख्य चिकित्साधिकारी बुलन्दशहर इस मामले में संज्ञान लेकर जनपद बुलन्दशहर के समस्त प्राईवेट हॉस्पिटल एवं पैथोलॉजी लैब के संचालकों को इस प्रकार के सख्त निर्देश जारी करें कि प्राईवेट हॉस्पिटल एवं पथोलॉजी लैब के संचालकों के द्वारा जो मरीजों से -8- धनराशि इलाज, दवाईयों एंव जॉच के संदर्भ में ली जाती है उसकी नियमानुसार रसीद प्रत्येक दशा में मरीजों को जारी करें।"
विद्वान जिला उपभोक्ता आयोग के उपरोक्त निर्णय/आदेश से क्षुब्ध होकर अपीलार्थी/विपक्षी सं0-1 माईक्रो पैथ लैब की ओर से प्रस्तुत अपील योजित की गई है।
हमारे द्वारा उभय पक्ष की ओर से उपस्थित विद्वान अधिवक्तागण के तर्कों को विस्तार पूर्वक सुना गया तथा प्रश्नगत निर्णय/आदेश व पत्रावली पर उपलब्ध समस्त प्रपत्रों का अवलोकन किया गया।
प्रत्यर्थी/परिवादी ने माईक्रो पैथ लैब की प्रतिलिपि अभिलेख पर दाखिल की है जिसके अवलोकन से स्पष्ट होता है कि उक्त रिपोर्ट दिनांकित 02.10.2020 में Dengue NS1 Antigen 8.10 Negative दर्शाया गया है, इसी प्रकार Dengue IgG Antibody 6.82 Negative तथा Dengue IgM Antibody 11.1 Positive दर्शाया गया है।
दूसरी ओर पैथकाइंड लैब की रिपोर्ट दिनांकित 03.10.2020 में Dengue Virus IgM Antibodies Lessthen 0.8 Negative दर्शाया गया है जिसमें Sample Serum Negative तथा Elisa Method में Positive दर्शाया गया है। इस सम्बन्ध में चिकित्सीय साहित www.cdc.gov में निम्नलिखित निष्कर्ष दिया गया है:-
"Positive IgM and IgG dengue antibody testing in the first blood sample indicates a recent dengue infection. If you have a high level of IgG but a low or non-existent level of IgM, you've likely had an infection in the past."
इसी प्रकार वेबसाइट यशोदा हॉस्पिटल. कॉम में उक्त चिकित्सीय साहित के संबंध में निम्नलिखित निष्कर्ष दिया गया है:-
"Patients IgM: Patients with a positive IgM test result are classified as presumptive, recent dengue virus infections. Negative -9- IgM: Patients with negative IgM results before day 8 of illness and absent or negative NAAT or NS1 results are considered unconfirmed"
उक्त निष्कर्ष के अवलोकन से यह स्पष्ट होता है कि दोनों रिपोर्टे लगभग एक सा निष्कर्ष देती है। उपरोक्त चिकित्सीय साहित्य से स्पष्ट होता है कि IgG का लेविल बढने पर यह डेंगू का संक्रमण शरीर में माना जायेगा, जिसमें IgM का लेविल कम बढता है, जो शरीर में डेंगू के पोजिटिव होने का निष्कर्ष नहीं देता है। इस प्रकार अपीलार्थी माईक्रो पैथ लैब द्वारा दी गई रिपोर्ट को भिन्न नहीं माना जा सकता है और यह नहीं माना जा सकता है कि प्रत्यर्थी/परिवादी की पत्नी श्रीमती अर्चना को डेंगू पोजिटिव माना गया। यह भी उल्लेखनीय है कि अपीलार्थी माईक्रो पैथ लैब द्वारा दी गई उक्त रिपोर्ट पैथोलॉजी रिपोर्ट थी जिसके आधार पर किसी फिजीशियन चिकित्सक का कोई प्रमाण पत्र अथवा निष्कर्ष अभिलेख पर नहीं है कि अपीलार्थी द्वारा दी गई उक्त रिपोर्ट के आधार पर प्रत्यर्थी/परिवादी की पत्नी श्रीमती अर्चना को डेंगू पोजिटिव माना गया था जबकि प्रत्यर्थी/परिवादी का कथन आया है कि मरीज श्रीमती अर्जना इस सदमे से ही मृत्यु को प्राप्त हो गई कि उसे डेंगू है, किन्तु अभिलेख पर ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है कि उक्त पैथोलॉजी रिपोर्ट के आधार पर प्रत्यर्थी/परिवादी की पत्नी को डेंगू पोजिटिव माना गया।
इसके अतिरिक्त प्रत्यर्थी/परिवादी का कथन यह आया है कि मरीज श्रीमती अर्चना स्वयं के डेंगू होने की रिपोर्ट के सदमें से ही मृत्यु को प्राप्त हो गई थी, किन्तु अभिलेख पर ऐसा कोई साक्ष्य प्रत्यर्थी/परिवादी ने नहीं दिया है। मृत्यु का कारण भी ऐसे किसी सदमें को साबित नहीं करता है। मृतका श्रीमती अर्चना के मृत्यु -10- प्रमाण पत्र की प्रतिलिपि अभिलेख पर है, जिसमें मृतका का नाम अर्चना गौड़ अंकित है। प्रत्यर्थी/परिवादी द्वारा दिये गये प्रपत्रों में ऐसे कोई प्रपत्र की प्रतिलिपि अभिलेख पर नहीं है जिससे यह स्पष्ट हो कि मृतका श्रीमती अर्चना गौड़ की मृत्यु डेंगू की रिपोर्ट देखने के उपरांत सदमें के कारण हुई है। चिकित्सीय लापरवाही के सम्बन्ध में क्षतिपूर्ति दिये जाने के लिए निम्नलिखित चार तथ्यों का होना आवश्यक है:-
1- चिकित्सक का उत्तरदायित्व (Duty) 2- चिकित्सक द्वारा उक्त उत्तरदायित्व का उल्लंघन ( Dereliction of Duty) 3- मरीज को हुई क्षति (Dameges)
4- मरीज को होने वाली क्षति का कारण चिकित्सीय लापरवाही (Direct Consequences of Dereliction of Duty) उक्त निष्कर्ष मा0 सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय Pushpa Verma Vs. Bhardwaj Nursing and Maternity Home Pvt. Ltd., प्रकाशित 2023 SCC OnLine NCDRC page 208 में दिया गया है जिसमें मा0 सर्वोच्च न्यायालय द्वारा यह निष्कर्ष दिया गया है कि चिकित्सीय लापरवाही के आधार पर क्षतिपूर्ति दिलाया जाने के लिए उपरोक्त अवयवो का होना आवश्यक है। प्रस्तुत मामले में यदि तर्क के लिए यह मान भी लिया जाए कि अपीलार्थी माईक्रो पैथ लैब ने गलत रिपोर्ट दी थी तो भी अभिलेख पर ऐसा कोई साक्ष्य उपलब्ध नहीं है जिसके आधार पर यह माना जा सके कि मृतका श्रीमती अर्चना गौड़ की मृत्यु इसी गलत रिपोर्ट के कारण हुई थी।
मा0 सर्वोच्च न्ययालय द्वारा पारित निर्णय Harish Kumar Khurana Vs. Joginder Singh and others प्रकाशित II (2022) CPJ -11- page 43 (SC) के मामले में मरीज की मृत्यु शल्य क्रिया के दौरान हो गई। मा0 सर्वोच्च न्यायालय द्वारा यह निष्कर्ष दिया गया कि जब तक कि यह तथ्य साबित न हो जाए कि मरीज की मृत्यु का कारण चिकित्सीय लापरवाही ही है, तब तक चिकित्सक को क्षतिपूर्ति के लिए दोषी नहीं माना जा सकता है।
मा0 सर्वोच्च न्ययालय के समक्ष एक अन्य मामला C.P. Sree Kumar Vs. Ramanujam प्रकाशित (2009) 7 SCC page 130 में भी मा0 सर्वोच्च न्यायालय द्वारा यह निर्णीत किया गया है कि परिवादी द्वारा मात्र चिकित्सीय लापरवाही का आक्षेप लगाना पर्याप्त नहीं है, चिकित्सीय लापरवाही के तथ्य को साक्ष्य द्वारा भी साबित करना होगा।
मा0 सर्वोच्च न्यायालय के उपरोक्त निर्णयों को दृष्टिगत करते हुए पीठ इस निष्कर्ष पर पहुंचती है कि उपरोक्त निर्णयों का लाभ अपीलार्थी को मिलता है। प्रत्यर्थी/परिवादी ने यह आक्षेप लगाया है कि गलत रिपोर्ट के कारण सदमें से प्रत्यर्थी/परिवादी की पत्नी श्रीमती अर्चना गौड़ की मृत्यु हुई, किन्तु यह तथ्य किसी भी साक्ष्य से साबित नहीं है, न ही इस कार्यवाही के किसी भी चरण पर ऐसा कोई साक्ष्य आया है जिससे कि यह साबित होता हो कि मृतका श्रीमती अर्चना गौड़ की मृत्यु गलत रिपोर्ट के सदमें से हुई है अत: उक्त क्षति भी साबित नहीं है।
उपरोक्त विवेचन के आधार पर पीठ इस मत की है कि एक ओर अपीलार्थी द्वारा गलत रिपोर्ट दिया जाना साबित नहीं है, वहीं दूसरी ओर यह तथ्य भी साबित नहीं है कि मृतका श्रीमती अर्चना गौड़ की मृत्यु इसी गलत रिपोर्ट के कारण हुई थी अत: इस आधार पर प्रत्यर्थी/परिवादी को क्षतिपूर्ति दिलाया जाना एवं चिकित्सक के -12- विरूद्ध क्षतिपूर्ति का निष्कर्ष दिया जाना न्यायोचित नहीं है, विद्वान जिला उपभोक्ता आयोग द्वारा प्रश्नगत निर्णय में उपरोक्त तथ्यों पर विचार किये बिना परिवाद को स्वीकार करते हुए क्षतिपूर्ति का आदेश दिया गया है अत: अपील स्वीकार करते हुए प्रश्नगत निर्णय/आदेश खण्डित किये जाने योग्य है।
आदेश प्रस्तुत अपील स्वीकार की जाती है तथा विद्वान जिला उपभोक्ता आयोग, बुलन्दशहर द्वारा परिवाद सं0-71/2021 में पारित प्रश्नगत निर्णय/आदेश दिनांक 17.7.2023 खण्डित किया जाता है।
प्रस्तुत अपील में अपीलार्थी द्वारा यदि कोई धनराशि जमा की गयी हो तो उक्त जमा धनराशि को मय अर्जित ब्याज सहित अपीलार्थी को यथाशीघ्र विधि के अनुसार वापस की जाए।
आशुलिपिक/वैयक्तिक सहायक से अपेक्षा की जाती है कि वह इस निर्णय/आदेश को आयोग की वेबसाइट पर नियमानुसार यथाशीघ्र अपलोड कर दें।
(न्यायमूर्ति अशोक कुमार) (विकास सक्सेना) अध्यक्ष सदस्य हरीश सिंह वैयक्तिक सहायक ग्रेड-2., कोर्ट नं0-1 [HON'BLE MR. JUSTICE ASHOK KUMAR] PRESIDENT [HON'BLE MR. Vikas Saxena] JUDICIAL MEMBER