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Lok Sabha Debates

Further Discussion On Flood And Drought Situation In The Country Raised By Shri ... on 10 June, 2014

an> Title: Further discussion on flood and drought situation in the country raised by Shri Yogi Adityanath on the 30th July, 2014 (Discussion concluded).

HON. CHAIRPERSON: The House shall now take up Item No.18.

          Shri Jai Prakash Narayan Yadav.

 

श्री जय प्रकाश नारायण यादव (बाँका) : सभापति महोदय, आज बाढ़ और सुखाड़ पर सदन चर्चा कर रहा है।...(व्यवधान)

श्री राजेश रंजन (मधेपुरा) : महोदय,नेपाल बाढ़ से खत्म हो रहा है। प्रधानमंत्री जी नेपाल गए,लेकिन कोई समाधान लेकर नहीं आए।...(व्यवधान)

माननीय सभापति : आप बैठ जाइए।

…( व्यवधान)

माननीय सभापति : बैठ जाइए।

          श्री जय प्रकाश नारायण यादव जी, आप बोलिए।      

…( व्यवधान)

श्री जय प्रकाश नारायण यादव  : सभापति महोदय,लगातार तीन दिनों से बाढ़ और सुखाड़ पर सदन में माननीय सदस्यों द्वारा चिन्ता व्यक्त की जा रही है। आज सम्पूर्ण देश में कहीं सुखाड़ की हालत है,कहीं बाढ़ की विभीषिका है। मौसम का मिजाज बदला हुआ है,जलवायु में परिवर्तन हुआ है,स्थिति बद से बदतर हो रही है। चाहे हमारा कोसी का इलाका हो या बिहार का बाकी इलाका हो,चाहे महाराष्ट्र,पश्चिम बंगाल,ओडिशा या उत्तर प्रदेश का इलाका हो या देश के चतुर्दिक जहां हो,आज स्थिति बद से बदतर हो रही है। पूरे देश में बाढ़ और सुखाड़ की स्थिति भयानक बनी हुई है।

           बिहार में यह कहावत है और अभी जो स्थिति बनी है,उसे देखकर कहा जाता है कि जब कोसी हंसती है तो बिहार रोता है। बिहार ही नहीं रोता,बल्कि देश रोता है इसलिए कि हम इन्सान हैं और हम सब भारतीय हैं।...(व्यवधान)

SHRI RAJIV PRATAP RUDY (SARAN): Sir, I am on a point of order. I have a strong reason to get up and raise this point of order which is mentioned under Chapter XV – Short Duration Discussion under Rule 193, which is a provision under the Rule Book. What is the provision for any Member wanting to raise a matter to be discussed in the House under Rule 193? I will just read out the rule.

“Any Member desirous of raising a discussion on a matter of urgent public importance may give notice in writing to the Secretary-General specifying clearly and precisely the matter to be raised.”   HON. CHAIRPERSON : Hon. Member the matter is being discussed under Rule 193. So, there is no point of order here.

… (Interruptions)

SHRI RAJIV PRATAP RUDY : Sir, I am taking the point raised by Shri Adhir Ranjan Chowdhury. He has raised an issue… (Interruptions)

HON. CHAIRPERSON: That matter is over now.

… (Interruptions)

SHRI RAJIV PRATAP RUDY : Sir, how can you allow some Member to raise… (Interruptions)

HON. CHAIRPERSON: Shri Rudy, you are a very senior Member, please take your seat. That matter is over now.

… (Interruptions)

HON. CHAIRPERSON: Shri Jaiprakash Narain Yadav to continue.

… (Interruptions)

श्री राजेश रंजन : उस खड़गे साहब को इन्होंने बोलने नहीं दिया था।...(व्यवधान)

माननीय सभापति:आप बैठ जाएं। जय प्रकाश जी,अब आप अपनी बात कहें।

श्री जय प्रकाश नारायण यादव  : सभापति जी,बीच में व्यवधान आ गया था,खैर कोई बात नहीं है,मैं फिर शुरू करता हूं। मैं यह कह रहा था कि जिस पर हम चर्चा कर रहे हैं यह एक ऐसा मुद्दा है,जिस पर यह सदन और देश चिंतित है। मैंने कहा था कि जब कोसी हंसती है तो बिहार रोता है। बिहार ही नहीं,बल्कि देश रोता है,इसलिए कि हम सभी भारतीय हैं और इन्सान हैं। वहां जब भी बाढ़ आती है तो कहीं भी आप देखिए,मौत का तांडव होता है,मौत का महासमुद्र लहराता है,तो प्रलयंकारी दृश्य हमारे सामने आता है। इससे पूरे देश की आत्मा और लोग हिल जाते हैं। पहले भी अनेकों बार ऐसी घटनाएं होती रही हैं।

          नेपाल की सीमा के साथ सटा हुआ हमारा सहरसा,मधुबनी,सुपौल,मधेपुरा,भागलपुर,पूर्णिया,बांका,कटिहार,केसरगंज,औरैया,दरभंगा,सीतामढ़ी का इलाका है। इन सारे बिहार के इलाकों में भयावह स्थिति उत्पन्न हो जाती है। हमारे इन इलाकों में बहुत उपजाऊ जमीन है,फसल काफी होती है,लेकिन नेपाल की तराई से बाढ़ की जब भयानक विभीषिका आती है तो फसल के साथ-साथ इन्सानों,जानवरों तक की तबाही और बर्बादी हो जाती है। हमें समझ में नहीं आता कि हम जाएं तो कहां जाएं। आज उस कोसी के इलाके में जानमाल की भारी क्षति हुई है।

          मैं जब यूपीए-1की सरकार में सिंचाई राज्य मंत्री था,तब हमने नेपाल में कोसी पर हाई डैम बनाने के लिए समझौता किया था और तीन कार्यालय खोलने की बात थी। काठमांडू में कार्यालय खोला भी गया। उस इलाके में यह काम हो रहा था ताकि नेपाल और भारत के साथ जो हमारा मधुर रिश्ता रहा है,वह बना रहे। इसी के आधार पर हमारी मांग है सदन में कि हम सबको मिलकर नेपाल से जो समझौता हुआ था कोसी पर हाई डैम बनाने का,उसे जल्द से जल्द अमल में लाया जाए। जब तक वह हाई डैम नहीं बनेगा,तब तक बिहार का यह कोसी का इलाका बचने वाला नहीं है। अगली बार माननीय प्रधान मंत्री जी गये थे,आदरणीय लालू जी गये थे,आदरणीय पाटिल साहब गये थे,सब लोग गये थे और रेलवे ने पूरी रिलीफ की व्यवस्था की थी। मैं मांग करता हूं कि कोसी आपदा को राष्ट्रीय आपदा घोषित किया जाए। जो बाढ़ की विभिषिका पूरे बिहार में आई है उसके लिए हम भारत सरकार से मांग करते हैं,माननीय प्रधान मंत्री से मांग करते हैं,सिंचाई मंत्री जी से,कृषि मंत्री जी से मांग करते हैं कि 10 हजार करोड़ रुपये का पैकेज कोसी के बचाव के लिए,जान-माल की सुरक्षा के लिए देने का काम किया जाए। आज केन्द्र और राज्य सरकार को मिलकर के इस सवाल पर चर्चा करनी चाहिए। वहां मकान ढह गये हैं,वहां बड़े-बड़े चबुतरे बनाने चाहिए,मवेशियों के लिए,इंसान के लिए तथा वहां बोट की व्यवस्था होनी चाहिए। बारमती है,कमला है,बालान है,गंडक है,बूढ़ी गंडक है,महानंदा है,सारी नदियां बौराई हुई हैं,इसलिए कोसी बचाओ,बिहार बचाओ,देश बचाओ,इंसान बचाओ,तभी हमारा देश समृद्ध होगा। सभी जानते हैं कि बिहार का कोसी सोने का कटौरा है जहां दौलत उपजती है और वही दौलत देश को खिला सकती है।

          एक तरफ बाढ़ है जहां से हमारे पप्पू यादव जी आते हैं,रंजीता जी आती हैं,अन्य हमारे सांसद आते हैं,लगातार लोगों के बचाव कार्य में लगे हुए हैं। भारत के प्रधान मंत्री जी को 10 हजार करोड़ रुपये का पैकेज देना चाहिए।

          सुखाड़ के मामले में मेरा कहना है कि आज बांका में सुखाड़ है,मूंगेर में,जमुई में,लख्खीसराय में और बिहार के गया के इलाके में सुखाड़ है। इसलिए हम यह मांग करते हैं कि बाढ़ से बचाव हो,कोसी का बचाव हो,वहां के इंसान का बचाव हो,हाई-डैम की व्यवस्था हो। प्रधान मंत्री जी गये थे उन्हें कोसी के इलाके की जो हालत है उसी समय उन्हें इसका ख्याल लेना चाहिए था। इन्हीं शब्दों के साथ मैं अपनी बात को विराम देता हूं।

                                                                                                         

*SHRI JOSE K .MANI (KOTTAYAM) : This discussion is on floods and droughts and the state of Kerala is prone to both.  In  May  2013 drought was declared in each of the 14 districts of Kerala for the first time ever.  Almost all the dams were dry and the ground water level had reduced leaving most of the bore wells dry.  Three months later in August, the Army and NDRF had to be called in to deal with the landslides and floods caused by heavy rains and in October, Kerala sought assistance from the National Calamity Contingency Fund for flood relief.  The average annual rainfall of the state is 3000mm, the bulk of which (70%) is received during the South-West monsoon which sets in by June and extends upto September.  The state also gets rains from the North-East monsoon during October to December.  However, the spatial and temporal distribution pattern is mainly responsible for the frequent floods and droughts in Kerala.  Kerala has got 41 west-flowing and 3 east-flowing rivers originating from the Western Ghats.  The total annual yield of all these rivers together is 78.041 million cubic Meters (MCM) of which 70,323 MCM is in Kerala.  The peculiarity of the rivers flowing across Kerala is short length of the river and the elevation difference between the high and the low and leading to quick flow of water collected from the river basin and quickly discharged into the Sea, the state has not been able to utilize the river water sources to a major extent both for power generation and irrigation.

          Both in cases of floods and droughts there is a loss of property, life and livelihood and spread of epidemics.  More than 17% of India’s power is generated through hydro power and droughts and flood have severe effects on it. Quantum of electricity available affects both agricultural and industrial sector. Hence, it is very important that the government pursues an active policy relating to monsoon management.  A report released by NDMA  in 2010 on drought management recommended that an Indian Drought Management Centre be established however there has been no progress on this front.  A centralized data base at State level and at Nation level related to drought intensity assessment is compiled and maintained.  Heavy investments need to be made in the areas of rain water harvesting and integrated watershed management.  A long term policy for dealing with such natural calamities is needed instead of the fire fighting approach that we currently use.  It is important that active engagement of local communities and NGO’s is sought in the areas of water management.  In Kerala, a new autonomous agency, the Kerala Rural Water Supply and Sanitation Agency, was created to facilitate provision of rural water supply and sanitation at the local level.  This was achieved by building the knowledge and capacity of communities using nongovernmental organizations (NGOs) and piloting community-led approaches.  As a result, communities became empowered and were able to work with technicians to specify their own water and sanitation schemes and build them using mostly through community contracting.  This decentralized, community-led approach built 3,663 village water supply schemes serving 1.13 million people, mostly through individual household connections.  This project was praised by the World Bank.  Projects similar to these should be implemented throughout the country.

          Considering the severity of devastation and displacement caused by floods, Kerala deserves a special calamity management package and also additional grain allocations to cope up with the impact of drought.

श्री आर.के.सिंह (आरा) :  माननीय सभापति जी, आपने मुझे इस चर्चा में भाग लेने का मौका दिया, इसके लिए आपका धन्यवाद। आज बिहार के 9 जिले बर्बादी के ऐसे कगार पर खड़े हैं जिसकी कल्पना नहीं की जा सकती है। कोसी नदी पर काठमांडु से लगभग 120 किलोमीटर पूर्व एक बहुत बड़ा लैंडस्लाइड हुआ है। उसने कोसी नदी के प्रवाह को रोक दिया है। जो आर्टिफिशियल डैम बना है वह करीब एक किलोमीटर लम्बा है। उसके पीछे करीब चार किलोमीटर की लेक तैयार हो गई है। लगभग 28 लाख क्यूसिक पानी इकट्ठा हो गया है। उस आर्टिफीशियल मलबे के डैम पर इतना ज्यादा प्रेशर है। लैंड स्लाइड के कारण जो 40 मीटर हाई आर्टिफीशियल डैम टूटेगा,तो दस मीटर हाई वेव नीचे आएगी। कोसी नदी के दोनों तरफ एमबैंकमेंट है। महोदय,मैं बताना चाहता हूं कि वर्षों से कोसी के पेट में बालू जमा होते-होते उसका स्तर आस-पास की जमीन से करीब तीन-चार फीट ऊपर है। जब दस मीटर हाई वेव आएगी तो दोनों एमबैंकमेंट बह जाएंगे। वर्ष 2008 में ऐसा ही हुआ था। कोसी ने पूर्वी बांध को तोड़ दिया था और एक नई नदी बन गई थी। लाखों लोग बेघर हो गए,हजारों घर बह गए थे। यह उस समय की सबसे बड़ी त्रास्दी थी लेकिन इस बार जो होगा,वह पहले के मुकाबले ज्यादा बड़ा नुकसान होगा। यह हमारी विडम्बना है कि आजादी के 66-67 वर्षों के बाद भी हम लोग ऐसे कगार पर खड़े हैं। मैं निरंतर वहां के मुख्य सचिव से और सिंचाई विभाग के सचिव के संपर्क में हूं। मुझे बताया गया है कि जो आर्टिफीशियल बांध बना है,उसमें धीरे-धीरे पानी निकालने के लिए चार छोटे-छोटे विस्फोट किए गए हैं। वहां से धीरे-धीरे पानी निकल रहा है। करीब दस हजार क्यूसिक की दर से पानी निकल रहा है। अगर इससे प्रेशर खत्म हो जाता है तो शायद त्रास्दी टल जाए,लेकिन पक्के तौर पर यह नहीं कहा जा सकता है कि वह आर्टिफीशियल बांध नहीं टूटेगा। हम लोग प्रधानमंत्री जी को धन्यवाद देना चाहते हैं,अभी किसी माननीय सदस्य ने यह प्रश्न उठाया था कि माननीय प्रधानमंत्री नेपाल में गए तो इस संबंध में उन्होंने क्या किया। उन्होंने यह चर्चा की।...(व्यवधान)

HON. CHAIRPERSON: Nothing will go on record except the speech of Shri R.K. Singh.

(Interruptions) …*  श्री आर.के.सिंह : महोदय, उन्होंने यह भी कहा कि अगर त्रास्दी होगी तो हम लोग नेपाल और बिहार को जो भी मदद चाहिए होगी,वह हम करेंगे। हम लोगों को,भारत सरकार को भी निदेश आया कि बिहार को जो भी आवश्यकता हो,जो भी आवश्यकता नेपाल को हो,उसकी व्यवस्था की जाए।...(व्यवधान)सभापति जी,वह व्यवस्था की भी गई। हम केंद्र सरकार को धन्यवाद देना चाहेंगे कि वह व्यवस्था स्टैंडबाय में है। एनडीआरएफ की पन्द्रह टीम स्टैंडबाय में हैं। इसके अतिरिक्त इनफ्लेटेबल्स बोर्ड्स हैं,हेलिकॉपटर हैं,सभी चीजें स्टैंडबाय में हैं।

          हमारे देश के सामने आज यह प्रश्न है कि आजादी के 67 सालों के बाद भी हम लोग इस प्रकार के कगार पर क्यों खड़े हैं जबकि एक डिजास्टर फ्लड का खतरा हमारे देश के ऊपर,नार्थ बिहार के ऊपर मंडरा रहा है। यह इसलिए हो रहा है क्योंकि आजादी के बाद से हम लोगों की वॉटर मैनेंजमेंट की जो नीति होनी चाहिए थी,वह नहीं बनी है। उसमें कोई गंभीरता नहीं थी। मैं पूर्ववर्ती सरकारों को यह दोष देता हूं। कोई आकलन नहीं किया गया। उन्होंने सोचा कि बांध बना देंगे और बांध बनाने से समाधान निकल जाएगा।...(व्यवधान)रंजन जी,हम गृह सचिव थे।...(व्यवधान)वर्ष 2008 में जब आपके यहां बांध टूटा था,तो हमने ही बचाया था। जितने लोगों को हमने बचाया था,इतिहास में उतने लोगों को किसी ने नहीं बचाया होगा।...(व्यवधान)इस कारण वह पूरा इलाका हमें याद करता है।

          महोदय,कभी यह प्रश्न नहीं उठा कि क्या यह कोसी नदी में आने वाली बाढ़ का समाधान है। आज यह प्रश्न उठाने का समय आ गया है। मैं आज प्रश्न उठा रहा हूं,लेकिन यह समाधान नहीं है। ऊपर बांध बनाने में कोई पहल नहीं होगी,तो खतरा बरकरार रहेगा। सैंड और सिल्ट के कारण नदी का स्तर लगातार बढ़ता जाएगा। हमारी बाढ़ नियंत्रण की जो नीति रही है,वह शार्ट साइटेड रही है। हम लोगों ने कभी अपने इंजीनियर्स को सवाल नहीं पूछा। इंजीनियर्स ने शार्ट साइटेड समाधान दिए और हम लोगों ने उन्हें स्वीकार कर लिया। यह हमारी गलती है कि हम लोगों ने इंजीनियर्स को क्रास एग्जामिन नहीं किया। उन्हें जो अच्छा लगा या जिनमें उन्हें सहूलियत लगी,उसे कर दिया और लोगों को भयावह स्थिति में खड़ा कर दिया। बाढ़ की त्रास्दी केवल बिहार के सामने नहीं है।      

          मैं जिस संसदीय क्षेत्र से आता हूं,वहां अभी तक मात्र 15 प्रतिशत प्लांटेशन हुआ है।...(व्यवधान)                                                                         आप सोचिए किसानों का क्या होगा?अभी तक नॉर्मल ईयर में 40 प्रतिशत प्लांटेशन हो जाता था। लेकिन अभी तक सिर्फ 15 प्रतिशत ही हुआ है। हमारी सरकार से एक शिकायत है। माननीय कृषि मंत्री जी सुन रहे हैं। इस सूखे से निपटने के लिए सिर्फ कृषि मंत्रालय ही काफी नहीं है। उसमें वॉटर रिसोर्सेज मंत्रालय को लगना होगा। उसमें पॉवर मंत्रालय को भी लगना होगा और तीनों मंत्रियों की एक संयुक्त टीम रहनी चाहिए क्योंकि हमारे यहां समस्या बिजली की भी है क्योंकि जितने स्टेट टय़ूबवैल्स हैं,वे अधिकांश बंद पड़े हुए हैं। वहां पॉवर नहीं है,ट्रांसफॉर्मर नहीं है। ट्रांसफॉर्मर जला हुआ है। जो लोग साउथ बिहार के हैं,वे इस बात को जानते हैं। कैनाल में पानी नहीं है। आप देखेंगे कि रिजवाîयर में जो वॉटर का स्टोरेज है,वह नॉर्मल से अभी 33 प्रतिशत कम है। इसका नतीजा यह हो रहा है कि जो इंटर-स्टेट वॉटर एग्रीमेंट होते हैं जिसके तहत पानी सिंचाई के लिए छोड़ा जाता है,उसका पालन नहीं हो रहा है। केन्द्र सरकार को और सर्वोच्च न्यायालय को इसका पालन कराना होगा। बलसागर से जितना पानी हम लोगों को यानी साउथ बिहार को मिलना चाहिए,उतना पानी नहीं मिल रहा है। मध्य प्रदेश पानी नहीं छोड़ रहा है। जो हम लोगों का कैनाल सिस्टम है,जिस समय हम लोगों को आज़ादी मिली थी,उस समय शाहबाद में जो सोन कैनाल सिस्टम था,देश के बेहतरीन कैनाल सिस्टम्स में से एक था और आज वह जर्जर अवस्था में है। वह जगह जगह से टूटा हुआ है। उसका बैड लैवल भी रेज हो गया है। अगर हम फॉर साइटेड सरकार रहते,जैसा कि हमारी आज़ादी को 66-67 साल हो गये हैं,अगर हम फॉर साइटेड सरकार वाले रहते,अगर हमारे पहले की सरकारें अच्छी रहतीं तो उन्होंने इस कैनाल सिस्टम को पक्का करा दिया होता ताकि आज उस सीपेज के कारण जो पानी का लॉस होता है या पानी जो पेय लैवल तक नहीं पहुंच पाता है क्योंकि वॉटर की स्केअर्सिटी वैसी ही है और वह स्केअर्सिटी आगे जाकर और बढ़ती ही जाएगी। लेकिन इस ओर पूर्ववर्ती सरकारों का ध्यान नहीं गया है।...(व्यवधान)मैं समझता हूं कि इन दोनों सूखा और बाढ़ की स्थिति में...(व्यवधान)एक तरफ कोसी की पिस्तौल हमारे सर के ऊपर है और दूसरी तरफ हमारे यहां सुखाड़ है। ये बहुत बड़ी विडम्बना की बात है।...(व्यवधान)  आपने मुझे इस विषय पर बोलने का मौका दिया। इसके लिए मैं आपको धन्यवाद देता हूं।

                                                                                     

श्री जय प्रकाश नारायण यादव: माननीय सभापति जी,उस समय ये...( व्यवधान) * थे।...(व्यवधान)

सभापति महोदय :इस बारे में आप बोल चुके हैं। यह रिकार्ड में नहीं जाएगा।

(Interruptions) … *       *SHRI ANTO ANTONY (PATHANAMTHITTA) :  Flood and drought situation have been among the major challenges to the humanity since time immemorial.  We have learnt that various civilizations were vanished from the earth due to these severe weather phenomena.  Therefore, overcoming of all these challenges is important for the survival of all living creatures in the world.  As we know, flood and drought cause many impacts to agriculture-the backbone of Indian economy.  Agriculture in the country heavily depends on rain for watering crops.  As per reports, about 60% of total net sown area in India comes under rain-fed lands.  Moreover, rivers and canals are used to regulate water flow to agriculture lands.  Therefore, a shortfall in rain or problems in outflowing water from agriculture land  badly affect our agriculture sector and thereby our economy.  Therefore, we need to have a proper mechanism to tackle these situations.  However, I am doubtful on the success of the Government’s move towards inter-linking of rivers.  Because it is learnt that the proposed project does not have enough convincing scientific evidence that it is an ecologically sound project.  Flooding normally occurs in monsoon season and drought occurs during summer.  During monsoons all rivers overflow, and in summer almost all rivers flow to a murky brown trickle.  In such conditions river-linking will be a futile exercise.  The project involves 200 major reservoirs and network of canals, hence, people in the country feared of the massive displacements.  Therefore, I request the Government to kindly conduct a comprehensive study in to the impacts of river-linking project. 

          Instead of river-linking project, I urge the Government kindly implement schemes to clean up water bodies in our country.  It is silt and wastes gathered in rivers and lakes hampering the smooth flow of water.  As a result, water level is declining and water bodies are dwindling.  The Government is preparing an Integrated Ganga Conservation Mission called ‘Namami Gange’.  I welcome this move and request the Government to prepare specific schemes for each and every water bodies in the country.

          I take this opportunity to request the Government to introduce schemes for the conservation of the water bodies in Kerala.  Let me specially mention Vembanad lake here. Vembanad lake is the largest backwater lake in Asia.  It is an internationally important ecosystem with aquatic importance, flaura and fauna and is a Ramsar site.  However, due to silt deposited by its tributaries, the water holding capacity of the lake declined from 2.449 cubic km to 0.559 cubic km over years.  It is estimated that every year the rivers Meenachel, Manimala, Pampa and Achankoil, carry 96,000 tonnes of silt into the Vembanand lake.  I request the Government to implement the Pampa Action Plan.  I also appeal to the Government to kindly launch a scheme to rejuvenate the river Varattar in my Parliamentary constituency.  Varattar was a perennial water source in the past, however, it has been degraded into a ‘dry’ river for the last three decades.  If the Government implement schemes for cleaning up water bodies in the country, then the water holding capacity of rivers, canals and lakes will naturally increase and that will eventually resolve the problem of flood and drought.

          Since coastal erosion and lightening are creating disaster to human life, properties including agriculture and both make same impacts as the flood and drought do have, I request the Government to kindly include them in the list of National Disasters.  Due to the geographical reasons, both lightening and coastal erosions have adverse impact on Kerala. Every year lightening causes deaths, injuries and property losses.  Recent studies also show that 63 percent of Kerala’s coastline, which is a stretch of 590 km is being eroded day-by-day.  I request the Government to urgently take a favourable action on this issue.

          Flood situation in Kerala including the areas in my constituency is grim at present. Heavy rain lashes out several parts of the State. Normal life is badly affected, educational institutions are closed, homes have been damaged and the crops have been destroyed.  Therefore, I request the Government to urgently send a Central Team to estimate losses caused by heavy rain and flood and Kerala. 

श्री अधीर रंजन चौधरी (बहरामपुर) : माननीय सभापति जी, आज बाढ़ और सुखाड़ के विषय को लेकर यहां जो चर्चा हो रही है, उसमें आपने मुझे भाग लेने का मौका दिया है, इसके लिए मैं आपका आभारी हूं। आपको शायद जानकारी होगी कि मैं बंगाल से आता हूं और बंगाल बिहार की बगल में है। अगर बिहार में कोई त्रासदी हो तो बंगाल नहीं बच सकता। इसलिए नेपाल से जो त्रासदी शुरु हुई है, उस त्रासदी को लेकर बंगाल की आम जनता भी डरी हुई है क्योंकि सारे बिहार, झारखंड इत्यादि इन सारे इलाकों का ड्रेनेज सिस्टम बंगाल से जुड़ा है।  हम लोगों ने देखा है कि नरेंद्र मोदी जी ने बड़ी डिप्लोमेटिक विक्टरी नेपाल जाकर हासिल की है। उन्होंने नेपाल को हिट दिया,हाई वे,इन्फार्मेशन वे और ट्रांसपोर्ट वे। नरेंद्र मोदी जी तालियां जुटाने में काफी माहिर हैं,यह जानकारी सबको है। ...(व्यवधान)नेपाल में रहते हुए हिंदुस्तान फ्लड हिट हो रहा है,क्या उनको पता नहीं था।...(व्यवधान)वे हिट करते हैं,तालियों के लिए हिट करते हैं लेकिन उनके रहते हुए हिंदुस्तान फ्लड हिट हो रहा है। इसके लिए उनकी कोई माथापच्ची नहीं है।...(व्यवधान)वे जीत के लिए सोचते हैं। जीत को दिखाकर तालियां हासिल करते हैं। लेकिन आज बिहार की सड़कों पर लाखों लोग भय से गुजर रहे हैं।...(व्यवधान)उनको इसकी कोई चिंता नहीं है।...(व्यवधान)वे पशुपति में जाकर घी डालते हैं,लेकिन घी डालते समय हिंदुस्तान की त्रासदी कम हो,इसके लिए उनको कोई चिंता नहीं है।...(व्यवधान)

माननीय सभापति: आप सब्जेक्ट पर बोलिए।

…( व्यवधान)

श्री अधीर रंजन चौधरी : आज सारे बिहार में लाखों लोग सड़क पर खुले आसमान के नीचे बैठे हैं। रंजन यादव जी के इलाके में जाइए, पप्पू यादव जी के इलाके में जाइए, प्रेम किशन जी के इलाके में जाइए, सारा बिहार त्रासदी का राज्य बन चुका है। ...(व्यवधान)अभी यहां कह रहे हैं कि पिछली सरकार ने क्या किया था? पिछली सरकार अगर कुछ न करती तो आज सदन में चर्चा करने का मौका नहीं आता।...(व्यवधान)हम सब जानते हैं कि कुदरत पर किसी का कोई नियंत्रण नहीं है।...(व्यवधान)

माननीय सभापति : सब्जेक्ट पर बोलिए।

श्री अधीर रंजन चौधरी  : महोदय, मैं सब्जेक्ट पर बोल रहा हूं।...(व्यवधान)बाढ़ और सूखे का कुदरत के साथ संबंध है। कुदरत पर हमारा कोई नियंत्रण नहीं है। हम इसे सिर्फ मिटिगेट कर सकते हैं,इरेडिकेट नहीं कर सकते हैं। अगर हम सही समय पर सही दिशा में कदम उठाने में सफल हो जाएं तो यह त्रास्दी कम हो सकती है। हम यह नहीं मानते कि हिंदुस्तान की सरकार इसके लिए चिंतित नहीं है। जरूर चिंता करती है। जायसवाल जी का इलाका बाढ़ प्रभावित है,इसकी जरूर चिंता करते हैं। लेकिन इससे ज्यादा प्रधानमंत्री जी तालियां हासिल करने में लगे हुए हैं,इतना मैं जरूर कहूंगा।...(व्यवधान)मैं हिंदुस्तान की स्थिति की तरफ माननीय कृषि मंत्री जी की दृष्टि आकर्षित करना चाहता हूं। राधा मोहन जी, 2009 में एक बवंडर आया था जिसका नाम आयला था। इस बवंडर के कारण बंगाल के खाड़ी के इलाके ध्वस्त हो गए थे। हजारों किलोमीटर के एमबैंकमेंट ब्रीच हो चुके हैं,वाइप आउट हो चुके हैं। अभी भी ये सब ऐसे ही पड़े हुए हैं। मैं राधा मोहन जी से गुजारिश करूंगा कि बंगाल में आयला से जो त्रासदी हुई थी,उसे सामने रखकर आज तक कोई कारगर कदम नहीं उठाया गया है।...(व्यवधान)वहां के लाखों लोग गांव छोड़कर,जिला छोड़कर बाहर जाकर रोटी रोजी का इंतजाम कर रहे हैं। आयला को देखते हुए यूपीए सरकार ने बहुत सी राशि आबंटित की थी। मैं आपसे इसका ब्यौरा मांग रहा हूं कि आज तक बंगाल सूबे की सरकार को आयला की कितनी राशि मिली है और वह कितनी खर्च कर चुके हैं?

15.00 hrs.           दूसरी बात मैं कहना चाहता हूं कि जैसे कोसी बंगाल में,गंगा रिवर बेसिन,दामोदर रिवर बेसिन हर साल बड़ा खतरा पैदा करते हैं। हमारे बंगाल में कटाव होता है,कटाव के चलते बंगाल की जो ज्योग्राफी है,उसमें काफी परिवर्तन हो चुका है। हम जानना चाहते हैं कि बंगाल के कटाव को लेकर यह सरकार क्या कदम उठा रही है। फरक्का बैराज प्रोजैक्ट जो बिहार और बंगाल के बीच अभी स्थित है,उस फरक्का बैराज प्रोजैक्ट का हाल दिन-प्रतिदिन बिगड़ते जा रहा है। वहां इतना सिल्टेशन हुआ है,जैसा हमारे बिहार के सहयोगी ने कहा कि वहां सिल्टेशन सबसे बड़ा मुद्दा है। डीसिल्टेशन कैसे किया जाए,डीसिल्टेशन के लिए जितनी राशि की जरूरत होती है,हमें मालूम नहीं है कि हिंदुस्तान की सरकार के पास उतनी राशि है या नहीं है। हर साल हिंदुस्तान के तीन करोड़ लोग बाढ़ से प्रभावित होते हैं। हजारों करोड़ रुपये की फसल बाढ़ और सुखाड़ के चलते बरबाद होती है। बाढ़ और सुखाड़ से हर साल हजारों लोग मरते हैं। इसलिए हम चाहते हैं कि हिंदुस्तान के जो 36 मैटिरियोलोजिकल रीजन्स हैं,इन सबके ऊपर आप अलग-अलग स्ट्रेटेजी बनाइये। क्योंकि साउथ की दिक्कतें अलग तरह की होती है और नार्थ की दिक्कतें दूसरे तरह की होती है।

          इसके अलावा मैं कहना चाहता हूं कि कटाव के साथ-साथ बंगाल में कान्ती मास्टर प्लान,केलेधाई कपालेम्वाही प्लान है। सुवर्ण रेखा डैम प्रोजैक्ट का क्या हुआ,इसके बारे में हम विवरण चाहते हैं। इन्हीं शब्दों के साथ मैं अपनी बात समाप्त करता हूं।

           

श्री केशव प्रसाद मौर्य (फूलपुर): सभापति महोदय,आपने मुझे बाढ़ और सुखाड़ जैसे गम्भीर विषय पर बोलने का मौका दिया,इसके लिए मैं आपका बहुत आभारी हूं। मैं उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद जनपद के फूलपुर लोक सभा क्षेत्र से चुनकर आया हूं। मेरे लोक सभा क्षेत्र में गंगा,यमुना और सरस्वती का पावन संगम है। मेरे लोक सभा क्षेत्र को ही तीर्थों का राजा प्रयाग कहा जाता है। माननीय नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने के बाद देश की जनता का विश्वास है कि हमारा देश बाढ़ और सूखे से ही नहीं बल्कि देश के सामने जो अनेक प्रकार के संकट हैं,उनसे भी मुक्त होगा। मैं यह जानता हूं कि जो सामने बैठे हुए हैं,उन्हें अभी यह विश्वास नहीं हो रहा है कि आम चुनाव में जनता ने उन्हें परास्त करके वहां बैठाया है। उन्हें अपनी हार बर्दाश्त नहीं हो रही है,इसलिए वे इस प्रकार के प्रहार जो नहीं करने चाहिए,वे भी करने का प्रयास करते हैं। चूंकि मेरा लोक सभा क्षेत्र बाढ़ के गम्भीर संकट का सामना पिछले कई वर्षों से करता रहा है। माननीय कृषि मंत्री जी यहां बैठे हैं,मैं उनके सामने यह बताना चाहता हूं कि मेरा लोक सभा क्षेत्र गंगा जी और यमुना जी के दोनों तटों पर बसा हुआ है। वहां अभी जो पिछले वर्ष की बाढ़ थी,उस बाढ़ के कारण जहां ग्रामीण क्षेत्र के अंदर बहुत सारे गांव के गांव डूबे थे,,वहीं पूरे इलाहाबाद शहर का कम से कम एक-तिहाई हिस्सा,यहां तक कि दो मंजिले मकान तक उसमें डूब गये थे। इसके अलावा फाफामऊ,नैनी,छतनाग का क्षेत्र है,वहां 86 और 88 मीटर तक पानी पहुंच गया था और इतना   15.04 hrs. (Dr. Ratna De (Nag) in the Chair) पानी पहुंचने का एक मात्र कारण यह रहा है कि वहां पर बांध के निर्माण की मांग पिछले कई वर्षों से वहां की जनता भी करती रही है,किसान भी करते रहे हैं,लेकिन वहां बांध का निर्माण नहीं हो पाया है। मैं माननीय मंत्री जी से विशेष तौर से अनुरोध करूंगा कि इलाहाबाद जनपद की सीमा कौशाम्बी जो कभी इलाहाबाद जनपद का हिस्सा हुआ करता था,कौशाम्बी जनपद से लेकर इलाहाबाद जनपद के अंतिम छोर तक गंगा जी का किनारा है। उसके दोनों ओर बाढ़ के कारण स्थित गांवों और कृषि को नुकसान पहुंचता रहा है। मैं आपसे यह निवेदन करूंगा कि प्रयाग में हर छह वर्ष में अर्ध कुंभ का बहुत बड़ा मेला लगता है। 12 वर्ष में वहां महाकुंभ का आयोजन होता है। प्रत्येक वर्ष वहां माघ मेला भी संपन्न होता है,जहां करोड़ो तीर्थयात्री एक महीने के लिए कल्पवास हेतु आते हैं। मेरी आपसे मांग है कि फतेहपुर से ले कर,कौशांबी होते हुए इलाहबाद की सीमा तक दोनों ओर बांध का निर्माण किया जाना अति आवश्यक है। मैं एक बात की ओर आपका ध्यान और आकर्षित करना चाहूंगा कि यहां बहुत सारी चर्चा हुई है,लेकिन उस चर्चा में एक बात आपको विशेष तौर से ध्यान दिलाना चाहता हूँ कि जब बाढ़ आती है,गंगा और यमुना के किनारे के कई गांव ही नहीं,उसके अंदर के कई-कई बीघे खेत भी कट कर के चले जाते हैं। पिछले दिनों जब इस पर चर्चा हो रही थी,तो एक प्रश्न यहां पर आया था,मैं अनुपूरक प्रश्न पूछना चाहता था,लेकिन पूछ नहीं पाया। माननीय मंत्री जी मैं आपसे आग्रह करना चाहता हूँ कि जिन किसानों की एक-दो बीघे नहीं,मेरे लोक सभा क्षेत्र के अंदर एक गांव ककरा है,कोटवा है,ढोकरी है,लीलापुर है और ऐसे गांवों में कम से कम एक लाख बीघे से अधिक जमीन गंगा जी के अंदर समा गई। वह कई वर्षों से,चूंकि हर बार बाढ़ आती है,बाढ़ में गंगा जी में समहात जमीन का वह क्षेत्र अभी तक खाली नहीं हुआ। लेकिन वहां के किसानों को कोई मुआवजा भी नहीं दिया जा सका है। इस संबंध में मेरी आपसे मांग है कि मेरे क्षेत्र के किसानों की जो लाखों बीघे जमीन गंगा में समाई है,उसकी जांच करवा कर के और जिन किसानों की जमीन उसमें गई है,जितने वर्षों से गई है,उनको उचित मुआवजा देने के संबंध में कार्रवाई करने का कष्ट करेंगे। मेरे क्षेत्र के अंदर कई नदियां है। वाराणसी के बारे में आप जानते हैं,वहां पर एक अस्सी घाट है,उस अस्सी घाट में वरूणा नाम की नदी,जो मेरे लोक सभा क्षेत्र के मैलहन नामक स्थान,जो उद्गम स्थल है,वहां से निकलती है,उसी कारण से उस स्थान को वाराणसी कहा जाता है,उस नदी के अंदर बहुत बार भारत सरकार से भी कुछ पैसे गए,प्रदेश सरकार से भी कुछ पैसे गए,लेकिन उस पैसे का बहुत दुरूपयोग हुआ। मैं उसकी जांच की मांग भी करता हूँ। उस नदी का जो स्वरूप बिगड़ा है,जिसके कारण से वरूणा नदी और अस्सी घाट को मिला कर वाराणसी का नाम हुआ है,उस नाम को ध्यान में रखते हुए,चूंकि अब वह मेरे प्रधान मंत्री जी का लोक सभा क्षेत्र है,मैं आपसे मांग करूंगा कि उस नदी को भी ध्यान दे कर उसकी व्यापक खुदाई करवा कर बाढ़ से उस क्षेत्र के किसानों को,उस क्षेत्र की कृषि को मुक्त कराने की कृपा करेंगे। ऐसा मैं आपसे अनुरोध करता हूँ। इलाहबाद जनपद के अंदर,जो गंगा पार का क्षेत्र कहलाता है,गंगा और यमुना है तो गंगा पार का क्षेत्र कहलाता है,जो फाफामऊ विधान सभा और फूलपुर विधान सभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है,उस क्षेत्र के अंदर सन् 2013 की बाढ़ में बहुत बड़ी क्षति हुई है। वहां बहुत पहले एक बांध का निर्माण कार्य शुरू हुआ था,लेकिन उस बांध का निर्माण कार्य रूक गया। उसके रूकने के कारण से एक लीलापुर गांव है,वह लीलापुर गांव उसमें लगभग डूब गया था। मैं आपसे इस संबंध में आग्रह करना चाहूंगा कि चूंकि बाढ़ का यह जो संकट है,वह पूरे देश का है,प्रदेश का है। इस पर देश-प्रदेश की चर्चा है। मेरा आपसे अनुरोध है कि मेरे क्षेत्र को बाढ़ से मुक्त कराने के लिए,किसानों की समस्याओं को दूर करने के लिए बांध का निर्माण करवाने का कष्ट करें।

   

श्री बलभद्र माझी (नबरंगपुर):  सभापति महोदय, मैं आपका आभारी हूँ कि आपने मुझे इस चर्चा में भाग लेने का मौका दिया है। महोदया, जैसे लगभग सभी सदस्य जानते हैं कि बाढ़ और सूखे की जो परिस्थिति है, यह हमारे नेचर, प्रकृति और जंगल से जुड़ी हुई है। एक पेड़ अपने जीवन काल में जितनी ऑक्सीजन देता है उसको यदि हम फैक्ट्री में बनाएंगे तो करीब एक करोड़ खर्च होगा। एक पेड़ पर्यावरण को जितनी ठंडक पहुंचाता है, वह डेढ़ टन के 15 ए.सी. के बराबर काम करता है। यही एक प्रमुख कारण है, जिसके कारण आज ग्लोबल वॉर्मिंग की बात होती है, क्लाइमेट चेंज की बात होती है। आज गाड़ियों की संख्या बढ़ गई है और फैक्ट्रियों की भी संख्या बढ़ गई है। इससे पर्यावरण को बहुत क्षति पहुंची है।  पेड़ों को हम लोगों ने इस तरह से काटा है,लेकिन उसके लिए कहीं भी किसी की कोई जिम्मेदारी नहीं है। हमारे फॉरेस्ट डिपार्टमेंट में यह सिस्टम नहीं है कि यह देखा जाये कि कोई अधिकारी ट्रांसफर होकर गया तो जब उसने चार्ज लिया था,उस समय कितने पेड़ थे और जब वह चार्ज देकर गया तो उस समय कितने पेड़ थे?मेरे ख्याल से यह एक सिस्टम बनाया जाए और एक जिम्मेदारी रखी जाए कि जितने पेड़ थे,उससे पेड़ कम हुए हैं या बढ़ रहे हैं,क्योंकि हम लोग कागजों में तो दिखा देते हैं कि इतना जंगल है,पर उतने पेड़ वहां नहीं होते हैं,जितने होने चाहिए। यह एक मुख्य मुद्दा है। इसी बीच में हमने जितने सारे प्रोजेक्ट्स किए हैं,उनमें काफी जंगल कटा है। हमने डैम किए हैं,रेलवे लाइन किए हैं,फैक्ट्रीज की हैं,उसके एवज में हमने कंपन्सेंट्री एफोरेस्टेशन किया है। वह भी हुआ है या नहीं हुआ,उतना जंगल फिर से पैदा हुआ है या नहीं,इसका कोई ऑडिट सिस्टम आज के दिन नहीं है। एक पोस्ट ऑडिट होना चाहिए,जिसमें यह पता चले कि जितने पेड़ लगाए थे,उतने आज के दिन हैं या नहीं हैं। यह तो मैं बाढ़ और सूखा के कारण के संबंध में बता रहा हूं।

          महोदय,जहां तक हमारे उड़ीसा का सवाल है। हमारा उड़ीसा दो भाग में है,एक है उत्तर-पूर्व,जहां हमेशा बाढ़ की प्रॉब्लम रहती है और दूसरा एरिया दक्षिण-पश्चिम है,जहां हमेशा सूखा का प्रभाव रहता है। हमारे यहां नदी का ऐसा सिस्टम है कि दक्षिण पश्चिम की तरफ से नदी बहकर बंगाल सागर में जाती है,जो उत्तर पूर्वी दिशा में है। दक्षिण पूर्व एरिया में जो नदियां हैं,उनमें अगर अच्छे ढंग से डैम बनाया जाए तो हम लोग बहुत सारी बाढ़ को जो उत्तर-पूर्व दिशा में होती है,उसे रोक सकते हैं और दक्षिण-पश्चिम एरिया को गीला कर सकते हैं।उसमें मेरे अपने एरिया में एक डैम का प्रोजेक्ट है,उस डैम से मेरी जिंदगी का अनुभव भी जुड़ा हुआ है। उसका सर्वे वर्ष 1971-72 में चालू हुआ था,जब मैं तीसरी कक्षा में था,बल्कि वही अनुभव मेरा एक इंजीनियर होने के लिए प्रेरणा बना था। उस समय मेरा चार पहिया गाड़ी में बैठने का सपना था। हमारे (फटकि)गांव में लोग सर्वे करने के लिए जाते थे। तब मेरे मन में बड़ी उत्सुकता होती थी कि ये जो गाड़ी में,जीप में बैठकर जा रहे हैं,ये लोग कौन हैं?मुझे बताया गया कि ये लोग इंजीनियर हैं। मैंने समझा कि इसका मतलब इंजीनियर बनने से ही गाड़ी चढ़ सकते हैं। मैंने भी सपना देखा था और मैं सबकी कृपा से इंजीनियर बन गया। मैंने नौकरी की और नौकरी करने के बाद मैं वीआरएस लेकर संसद में पहुंच गया,लेकिन वह डैम अभी तक नहीं बना है। उसकी फीजिबिलिटी रिपोर्ट फिर से री-सर्वे होकर अभी दो साल से सीडब्ल्यूसी में पड़ी है। इस डैम का नाम टेल इन्टिग्रेटिड प्रोजेक्ट (Tel. Integrated Project) है। यह नवरंगपुर जिला के चंदाहणी ब्लॉक के फटकि ग्राम के पास बनना है। इसमें कुछ जंगल ही डूबेगा।

          मैं आपके माध्यम से सरकार से गुजारिश करूंगा कि उसकी फीजिबिलिटी रिपोर्ट जल्दी क्लियर हो। उसके बाद डीपीआर बनेगा और फिर डैम बनेगा। अगर हम लोग इन सारे प्रोजेक्ट्स को प्रायोरिटी पर नहीं लेंगे तो हम लोग इस बाढ़,सूखा की परिस्थिति का मुकाबला नहीं कर पायेंगे। मेरी कांस्टीटय़ूएंसी में एक और प्रोजेक्ट है,जिसमें हम लोग जबरदस्ती बाढ़ क्रिएट करने के लिए जा रहे हैं। वह है पोलावरम प्रोजेक्ट। पोलावरम डैम जहां बनना है,वहां से 100 किलोमीटर ऊपर तक कोलाव नदी में बीच-बीच में बाढ़ की प्रॉब्लम आती है,गांव डूब जाते हैं। अगर पोलावरम डैम,जो रिवाइज्ड हाइट में,ऊंचा हाइट में बनाने जा रहे हैं,उसी ऊंचाई में अगर बनायेंगे तो 100 किलोमीटर ऊपर तक और कई सारे गांव डूब जायेंगे। हम लोग बार-बार सरकार से निवेदन कर रहे हैं कि उसका अल्टरनेट डिजाइन है,उतना ऊंचाई का डैम न बनाकर अगर तीन छोटे-छोटे हाइट के बैराज बना दें,तो जितना पानी आज सरकार ने एस्टीमेट किया है,उससे ज्यादा पानी मिलेगा,उससे ज्यादा बिजली भी उत्पन्न होगी।

          अतः मेरा निवेदन है कि पोलावरम को फिर से सोचें और तीन बैराज बनाने की कोशिश करें। मैंने अपने एरिया का जो प्रोजेक्ट बताया,वह टेल इंटीग्रेटिड प्रोजेक्ट है। कृपया उसे जल्दी से आगे सैंक्शन करने की कृपा करें। नमस्कार।

     

गृह मंत्रालय में राज्य मंत्री (श्री किरेन रिजीजू) : सभापति महोदया, तीन दिन से चली आ रही इस चर्चा में 55 लोगों ने भाग लिया और इस चर्चा को आगे बढ़ाते हुए मैं इन्टरविन करना चाहता हूं। सूखा और कृषि मंत्रालय से सम्बन्धित जितने भी विषय हैं, कृषि मंत्रालय के मंत्री जी यहां बैठे हैं, वे उसका जवाब देंगे। उसके अलावा बाढ़ और डिज़ास्टर मैनेजमैंट के अधीन जितने भी इश्यूज़ आते हैं,मैं संक्षेप में उनकी जानकारी देना चाहता हूँ।

          सबसे पहले मैं धन्यवाद देना चाहता हूँ कि माननीय सदस्यगण ने बहुत अच्छी तरह से सजैशन दिये जिसको हमने बारीकी से नोट किया और भारत सरकार में आगे हम जो पॉलिसी बनाएँगे उसमें हमें इससे सहयोग मिलेगा। सभी सदस्यों के पॉइंट्स की जानकारी हमने ली है लेकिन उसका पूरा जवाब देना मुश्किल है। मैंने कुछ पॉइंट्स को एक तरफ से क्लब किया है,कुछ इश्यूज़ को क्लब किया है जिनको मैं संक्षेप में आपके सामने रखूँगा।

          सबसे पहले मैं बताना चाहता हूँ कि हमारे देश की जो नेशनल डिज़ास्टर मैनेजमैंट अथॉरिटी है,उसकी अध्यक्षता प्रधान मंत्री खुद करते हैं और उसका पॉलिसी फॉर्मुलेशन और इफैक्टिव बनाने के लिए हमारा मंत्रालय लगा हुआ है और बहुत जल्द हम इसकी पॉलिसी और फॉर्मुलेशंस सामने लाएँगे। यह सिर्फ गृह मंत्रालय का ही विषय नहीं है। अन्य मंत्रालय भी इसमें जुड़े हुए हैं। कृषि मंत्रालय इसमें बहुत महत्वपूर्ण योगदान देता है। उसके अलावा बहुत सारे और मंत्रालयों को साथ में लेकर हम काम करते हैं। होम मिनिस्ट्री में हमारे होम सैक्रेटरी की अध्यक्षता में नेशनल एक्ज़ीक्यूटिव कमेटी है जो पूरे देश की आपात स्थिति को देखता है। जब प्राकृतिक आपदा आती है तो उस पर नियंत्रण करने के लिए और इमीडियेट रिस्पांस हो,इसके लिए हमारे गृह सचिव उस कमेटी की अध्यक्षता करते हैं।

          कुछ महत्वपूर्ण विषय जो यहाँ उठे हैं,उन पर रिस्पांड करने से पहले कुछ मुद्दे मैं आपके सामने रखना चाहता हूँ। 

Madam, regarding flood forecasting, it is very important to understand the flood forecasting system so that we become very responsive to any kind of eventualities of national disaster. Flood forecasting is possible based on actual hydro-meteorological data as well as weather forecast with very limited accuracy. The Central Water Commission is issuing river water level forecast for 147 locations and inflow forecast for 28 reservoirs, dams and barrages.

The flood-prone area as assessed by Rashtriya Barh Ayog is 40 mHA in India. The flood affected areas in a year varied from 1.46 mHA to 17.5 mHA with an average of 7.14 mHA since 1953.

As suggested by various expert committees, construction of embankment along river banks has been taken up as the quickest and economical flood protection measure for local population. So far about 35,200 k.m. of flood embankments have been constructed along rivers in flood-prone areas of the country. Aggradation and degradation is a natural phenomenon in a river resulting in erosion at one location and deposition of eroded material at another location.

We have also come to some understanding with our neighbouring countries. For example, the Kosi issue, which came up prominently in the discussion, is directly related to Nepal. India has taken certain steps. For example, the recent imminent threat of Kosi river flood, which we are witnessing, has been controlled so far because we have some understanding with Nepal. Yesterday, we got information that our Disaster Response Force need not go to Nepal because the Nepal Government has taken certain steps like they have blasted low intensity detonators at four different times, and the river water, which has been made as a big reservoir due to slide, has been released slowly so that the impact of flood on Bihar and subsequently on our remaining territory will be mitigated. So, we are constantly in touch with the authorities in Nepal.

With a view to discussing important issues pertaining to cooperation in the field of water resources, including implementation of existing agreements and understanding, a Nepal-India Joint Committee on Water Resources headed by Water Resource Secretaries of both the countries has been functioning with the mandate to act as an umbrella committee for all committees and groups. A Joint Committee on Inundation and Flood Management has been constituted in 2009 replacing previous all bilateral committees for issues related to flood management, inundation problems and flood forecasting activities between India and Nepal.

          In respect of Bhutan, we have 35 hydro-meteorological stations located in Bhutan, which are being maintained jointly by the Royal Government of Bhutan and funded by the Government of India. The data received from these stations are utilized in India by Central Water Commission for formulating flood forecasts. The problem of floods created by rivers originating from Bhutan and flowing to India was also taken up with the Royal Government of Bhutan. So, we are abreast of the situation. Even with China we have certain understanding on this issue; we have arrived at an MoU signed by the Chinese Government. According to that MoU, China will share the data of the Brahmaputra and the Satluj rivers for flood forecasting purpose. As per the MoU, water level and discharge data is shared by the Chinese authorities with Central Water Commission for three sites in the Brahmaputra and one site in the Satluj river basin.

          Beyond that, I want to respond on some of the important points, which were raised by the hon. Members. On the issue of assistance to Odisha in the wake of Phailin and subsequent floods, the Government of India has extended logistics helps. Further, in pursuance of the announcement of the ex-Prime Minister, an amount of Rs.1000 crore was released to the State in advance from the National Disaster Response Fund. … (Interruptions)

SHRI BHARTRUHARI MAHTAB (CUTTACK): It is not Rs.1000 crore, it is only Rs.664 crore.

SHRI KIREN RIJIJU: There are issues under consideration of the Ministry. I am just giving the figure.

          The State Government of Odisha had requested for financial assistance of Rs.5832 crore. Most of the demands were outside the purview of the State Disaster Relief Fund and the National Disaster Relief Fund. I would like to mention here that we are responsible for immediate relief and rehabilitation. Long term policy and long term rehabilitation is a planned process and the State has to adjust through the planning of the State Government where the Central Government will be a part of it. The Planning Commission also plays a very important role for the future reconstruction. So, I am dealing with more on the immediate response, which is required. 

SHRI BHARTRUHARI MAHTAB: This is just an immediate thing that out of Rs.664 crore, an amount of Rs.100 odd crore have been provided. Rest Rs.500 crore were supposed to be provided. These are all immediate in nature. That is why, expenses have already been incurred by the State Government. 

SHRI KIREN RIJIJU: Madam, immediate relief has already been provided and subsequently, whatever is necessary, as I have said, the Ministry is considering the request made by the Odisha Government.

          On the issue of revision of NDRF norms, it is submitted that revision of norms is a continuous process of governance. Since 2012, it has been revised four times. As I mentioned, the objective of SDRF and NDRF is immediate relief and not as compensation to damage or loss suffered due to disaster. For medium and long term reconstruction and rehabilitation, the State and the Central Government have to work together.

          On the issue of setting up of a unit of National Disaster Response Force in Kerala – the hon. Members from Kerala raised this issue – I have to inform the House that Government of India decided to permanently place a team of NDRF at Kozhikode for prompt response. However, the accommodation for setting up of the unit is yet to be arranged by the State Government. So, we need more cooperation with the State Government.

          Regarding the letter of Chief Minister of Uttar Pradesh requesting for release of the entire assistance demanded by the State in the wake of floods in 2013, I would like to inform that the high level committee, again which is chaired by the Home Secretary, has approved Rs.230.06 crore as assistance from the National Disaster Response Fund subject to adjustment of 75 per cent balance in State Disaster Response Fund. The position has been explained to the Chief Minister vide letter dated 30th July, 2014. 

 

          Regarding the institutional mechanism for managing disaster, it is informed that as per the National Policy on Disaster Management, the primary responsibility for disaster management rests with the State Government. The institutional mechanism put in place at the Centre, State and district levels help the States to manage disaster in an effective manner. The National Executive Committee under the chairmanship of Home Secretary acts as a coordinating and monitoring body for disaster management in case of any threatening disaster. All Central Ministries and agencies, whenever required, supplement the efforts of the State Government by providing logistic and financial support. The National Disaster Management Authority headed by the Prime Minister of India lays down the broad policies and guidelines on disaster management.

          Regarding the suggestion for inclusion of certain natural disasters like erosion, lightning, sea erosion etc. in the list of disasters eligible for assistance from SDRF or NDRF, it may be noted that the list of such disasters is normally decided by successive Finance Commissions. We have the 14th Finance Commission in place. Our Ministry has recommended all these suggestions to the Finance Commission and the 14th Finance Commission has to take a call on that.

          On the issue of utilisation of funds released from SDRF, it is informed that the provision of SDRF provides that the Comptroller and Auditor General of India would cause audit of SDRF conducted every year in conformity with approved items and norms in terms of the purposes of the SDRF guidelines.

          Several hon. Members have made valuable suggestions regarding actions pertaining to the State Governments, the Ministry of Environment and Forests and the Ministry of Water Resources. I have noted these points and they will be communicated to the respective Ministries.

          I would also like to inform the hon. Members that each Central Government Ministry is required to prepare a Disaster Management Plan, covering the aspects of mitigation, capacity-building, quick response and also for making the disaster management concerns in-built into the developmental programmes. Home Ministry has been pursuing with the concerned Ministries for finalisation of their Disaster Management Plans.

          At the end, I would like to thank the hon. Member, Yogi Aditya Nath for bringing up this important discussion under Rule 193 and all the hon. Members who have given valuable suggestions. In future also, we will require cooperation from hon. Members as well as the Governments of all the States because after all, we have to respond to natural disaster in a very coordinated manner so that we can meet all the challenges.

 

HON. CHAIRPERSON : Shri K. Suresh.

… (Interruptions)

SHRI N.K. PREMACHANDRAN (KOLLAM): Madam, I want to ask just one question. … (Interruptions)

HON. CHAIRPERSON: No, no question is allowed please.

… (Interruptions)

HON. CHAIRPERSON: Hon. Members, no clarification is to be asked on Minister’s answer.

          Shri K. Suresh.

 

SHRI KODIKUNNIL SURESH (MAVELIKKARA): I thank you, Hon. Chairperson, for giving me an opportunity to participate in this discussion on flood and drought situation in the country. For the last four days, this House has been discussing the flood and drought situation in this country, but at the same time, in for the last one week, the State of Kerala has also been facing severe floods. Almost all the 14 districts are adversely affected by heavy floods. Today also, heavy rain is going on in all parts of the State. Thousands of people have lost their houses. More than ten human lives were lost due to heavy floods in Kerala. The farmers are also facing serious problem. Their crops are also washed out.

The Government of Kerala has started relief camps and distributing free ration to the affected people. This severe flood is badly affecting the people in my parliamentary constituency, Mavelikkara, in Kerala.

Kuttanad is part of my parliamentary constituency. I would like to invite the kind attention of the hon. Minister to the worst situation being faced by the people of Kuttanad and the vulnerability of the people living in this area. Due to continuous monsoon for the last one week almost all parts of Kuttanad area are submerged in flood water. Kuttanad is the converging place of five rivers, and due to continuous rains all the rivers have been flooded. The water-level in Kuttanad area is escalating fast. Kuttanad is the only place -- not only in India but anywhere in the world -- that lies below sea level, and rain has added to the miseries of the people living there who are otherwise also always affected by floods.

Flood has affected all the 13 Grama Panchayats of Kuttanad Taluk. The bunds or Padashekharams have broken, and flood water has entered into the paddy cultivation areas resulting in loss running into crores of rupees. Kuttanad is the rice bowl of Kerala, and flood is causing loss of paddy cultivation. This will have a cascading effect on the economy of Kerala.

In the last two days, more than 100 houses have been totally damaged and 200 houses have been partially damaged due to heavy rain and flood. Further, a number of roads and bridges were also washed away by flood water, and many roads were submerged in water and damaged beyond repair.

So far, three relief camps have been started in my Parliamentary Constituency in which more than 2,000 persons have been rehabilitated. The District Administration is in the process of establishing more camps and evacuating people from the worst-affected areas. There is lack of potable drinking water in this area, and people fear outbreak of epidemic and water-borne diseases. The people of Kuttanad pray for immediate attention of the Government of India as well as that of the State Government in this matter. The State Government has already started relief measures. I request that the Government of India may announce an interim flood relief of Rs. 100 crore for flood relief work in Kuttanad. A Central team may also be deputed to assess the flood situation and determine the quantum of assistance required for the same.

Lastly, I would like to request the hon. Home Minister to send a Disaster Management Team to provide help to the people of Kuttanad. With these words, I conclude.

*श्री राजकुमार सैनी (कुरूक्षेत्र): मैं हरियाणा के कुरूक्षेत्र संसदीय क्षेत्र से चुनकर आया हूँ। मैं एक बहुत ही गम्भीर समस्या इस सदन के ध्यान में लाना चाहता हूं कि जहां पर गंगा के जीर्णोद्धार का कार्यक्रम माननीय नरेन्द्र भाई मोदी जी के नेतृत्व में हमारी सरकार ने प्राथमिकता के आधार पर लिया है, वही दूसरी ओर मेरे लोक सभा क्षेत्र के जिला यमुनानगर के साथ-साथ हरियाणा और उत्तर प्रदेश को विभाजित करती हुई यमुना नदी बहती है जो हर साल बरसात के दिनों में बाढ़ के विकराल रूप से लाखो एकड़ फसल और हज़ारों एकड़ भूमि को अपने आगोश में लेकर बर्बाद करती है और अब हज़ारों परिवार ऐसे हैं जिनके पास मुट्ठी भर अनाज उगाने की भी जमीन नहीं बची।

        आज इससे भी भारी संकट उत्तर प्रदेश की तरफ यमुना के किनारे 20-20 फुट ऊँचा बाँध बनाया जा रहा है। पहले जो बाढ़ आती थी, उसका पानी दोनों ओर फैल कर चलता था, परंतु अब इसके विपरीत इस बांध के लगने से हरियाणा की तरफ के यमुना के किनारे वाले सैकड़ों गांवों का अस्तित्व बाढ़ से समाप्त हो जाएगा। यदि वहां पर हरियाणा की ओर यमुना नदी के किनारे बांध नही लगाया गया तो मैं सरकार के ध्यान में लाना चाहता हूं कि तुरंत बांध बनाकर लोगों के जान-माल की रक्षा की जाए और इसे यमुना के प्रोटेक्शन प्लान के तहत केन्द्र सरकार से अनुदान के तौर पर सहायता राशि दी जाए और हदका रदौर के यमुना के किनारे वाले गांवों को तुरंत सुरक्षित किया जाए और इसे राष्ट्रीय आपदा घोषित किया जाए।

                             

श्री पंकज चौधरी (महाराजगंज): सभापति महोदया,आपने मुझे बाढ़ और सूखे पर बोलने का अवसर दिया, इसके लिए मैं आपको धन्यवाद देता हूं। चार दिन से सूखा और बाढ़ पर बहस चल रही है। अभी माननीय मंत्री जी ने बताया कि 55 लोगों ने इस बहस में हिस्सा लिया है। यह बहुत गंभीर समस्या है। मुझे कल ताज्जुब हुआ, इस सदन में चर्चा न होने पर वॉकाउट होता था, लेकिन पहली बार मैंने देखा कि चर्चा ज्यादा लम्बे समय तक चल रही है, उसके लिए कुछ सदस्यों ने विरोध किया। यह बड़ा गंभीर विषय था।...(व्यवधान)

श्री तारिक अनवर (कटिहार): हम लोगों ने विरोध नहीं किया था,हमने कहा था कि हाउस में बिजनैस नहीं है।...(व्यवधान)

HON. CHAIRPERSON: Hon. Member, you may please continue your speech.

… (Interruptions)

श्री पंकज चौधरी : सभापति महोदया, हम लोग उत्तर प्रदेश के पूर्वी क्षेत्र से आते हैं, जहां पर हम लोगों के क्षेत्र में निश्चित तौर से नदियों का जाल है। पहाड़ी नदियों एवं नालों का बहुत बड़ा जाल है। हर साल हम लोग बाढ़ और सूखे को झेलते हैं। हमारे क्षेत्र महाराजगंज में नदियों से जब बाढ़ आती है, तब चर्चा होती है। अभी महाराजगंज में बाढ़ आई, लेकिन इस पर कोई चर्चा नहीं हुई। पहाड़ों से जो नाला निकलता है, हमारे क्षेत्र में जैसे महऊ, बघेला और झरही नाला है, नदी बहते-बहते लेवल से ऊपर हो गई है, जिसमें सिल्ट जमा है। नेपाल में थोड़ी सी भी वर्षा होती है तो हमारे क्षेत्र में हजारों एकड़ भूमि बाढ़ से प्रभावित हो जाती है। अभी इस सीजन में हमारे क्षेत्र में यह स्थिति बनी हुई है।

          मैं मंत्री जी से निवेदन करना चाहता हूं कि मात्र 23 किलोमीटर लंबी नहर है,नाला है,जो कि जाकर नदियों में गिरता है। अगर उसकी सफाई करायी जाये तो वहां के हजारों किसानों को निश्चित तौर से लाभ मिलेगा।  जहां तक बाढ़ बचाओ का सवाल है,जब बाढ़ आती है तो हम चिन्ता करते हैं। बहुत से सदस्यों ने कहा कि अभी बहुत विचार करने की आवश्यकता है,चिन्ता करने की आवश्यकता है। यह मैं भी मानता हूं कि निश्चित तौर से बाढ़ पर चर्चा हर साल होती है,जब बाढ़ का समय आता है,तब चर्चा होती है,लेकिन जब बाढ़ समाप्त हो जाती है तो इस पर किसी का ध्यान नहीं जाता है। 

          भारत सरकार के साथ-साथ कहीं न कहीं सभी प्रदेश सरकारों को भी इस पर काम करना होगा,इसमें मिलकर जब तक काम नहीं होगा,निश्चित तौर से इसका समाधान नहीं हो सकता। हजारों करोड़ रूपए हम लोग बाढ़ के बाद उस पर खर्च करते हैं। निश्चित तौर से हर साल उसका पूर्ण विकास न होने के नाते बार-बार बाढ़ आती रहती है। बाढ़ की समस्या निश्चित तौर से है,इसके लिए शिल्ट की सफाई कराना,वोल्डर की सफाई कराना,गाद की सफाई कराना आवश्यक है। एक माननीय सदस्य कह रहे थे कि एक पेड़ से कितनी ऑक्सीजन हमें मिलती है?निश्चित तौर से 33 परसेंट वन क्षेत्र होना चाहिए,लेकिन आज उत्तर प्रदेश में मात्र नौ फीसदी वन क्षेत्र ही बचा हुआ है। बहुत से क्षेत्र ऐसे हैं जहां मात्र दो फीसदी ही वन क्षेत्र रह गया है।

          माननीय अटल बिहारी वाजपेयी जी ने सपना देखा था,बाढ़ से बचाने के लिए,सूखा से बचाने के लिए,यह सबसे जरूरी था,उन्होंने अपने वक्तव्य में कहा था कि अगला वर्ल्ड वार निश्चित तौर से पीने के पानी के लिए होगा। इसलिए उन्होंने नदियों को जोड़कर जो हमारा मीठा पानी समुद्र में जाता है,उसे रोकने के लिए भी व्यवस्था के नाते नदियों को जोड़ने की बात कही। सरकार ने घोषणा की है कि नदियों को जोड़कर बाढ़ और सूखे से हम लोगों को बचायेंगे। इसलिए मेरा मंत्री जी से निवेदन है कि इस योजना को जितना जल्दी से जल्दी हो सके,इसे लागू करें ताकि बाढ़ और सूखे से देश को बचा सकें। इसके साथ ही साथ जो पहाड़ी नदियां है,जो समय-समय पर हमें नुकसान देती हैं,उनकी भी साफ-सफाई कराकर ठीक कराने का काम किया जाए।

 

ऒश्री भानु प्रताप सिंह वर्मा (जालौन) :  इस बार भी वर्षा न होने  के कारण सूखा पड़ने के आसार है ।  2012-13 में यहां औसतन वर्षा 767 मि0ली0 दर्ज की गई थी 2013 में 100 मि0ली0 दर्ज की गई थी ।  इस साल अब तक 73 मि0ली0 वर्षा दर्ज की गई है ।  इसके चलते किसान ज्वार बाजरा मूंग उड़द की बुआई अब तक नहीं कर सका वर्षात न होने से यहां के लोग धान की बुआई नहीं कर सके ।  वरूण देव की कृपा दृष्टि नहीं हुई तो निश्चित ही बुंदेलखण्ड के किसान खरीद की फसल न होने भुखमरी की कगार पर आ जायेंगें । पिछले साल प्रकृति की नाराजगी से रबी की फसल को मूसलाधार वारिस ओला वृष्टि ने बर्बाद कर दिया था ।  वर्तमान में बारिश के अभाव में खरीफ की फसल की बुआई की कोई संभावना नहीं है बुंदेलखण्ड में एक अध्ययन में ये बात सामने आई है, आत्महत्या अप्रैल से जून और उसके बाद अक्टूबर से दिसम्बर में सर्वाधिक पायी गई है । अप्रैल से जून तक रबी की फसल का समय होता है । फसल को खेत से घर तक लाने की  योजना साल भर बनाता है ।  इससे होने वाली आय से वह बच्चों की पढ़ाई के पैसे देगा बेटी की शादी करेगा पुराना कर्ज उतारेगा । बुदेलखण्ड का किसान इस कदर प्रकृति पर निर्भर है कि बार-बार किसानों के सपने धरे के धरे रह जाते हैं ।  ओला वृष्टि में 40000 हजार हेक्टेयर भूमि बर्बाद हो गई है ।  बुंदेलखण्ड किसानों मजदूरों को तालाब सूखे रहे हैं नदियां भी सूख रहे हैं ।  10 से 15 जून तक काफी वर्षा हो जाती थी तो किसान मृग नक्षत्र में बुआई का काम शुरू करता था ।

           जिला झांसी के एरच के पास वेतवा नदी पर डिकोली में बांध बनाने की आवश्यकता है और गुरूसराय के पास मसनेह बांध है उसकी क्षमता बढ़ाना चाहिये वेतबा नहर गुरूसराय जो परीक्षा बांध से निकलती है ।  इस नहर से भसनेह बांध को भरने की व्यवस्था की जानी चाहिए । बुंदेलखण्ड क्षेत्र कहीं पथरीला कहीं ऊंचा नीचा क्षेत्र है यहां पर नये चैक डैम बनाने की आवश्यकता है ।  गुरूसराय से गरौठा जाते समय छेच्छ   नदी पर बना चैक डैम सही नहीं है चैक डैम में पानी आने के बाद रोड पानी से भर जाता है रास्ता भर जाता है चैकडैम जाते समय इस समस्या को भी देखना चाहिये ।  गुरू सराय बेतवा नहर की जो डिजायन करके उसे पक्का किया गया है उस नहर की क्षमता 1/4  रह गई है ।  बीमा कंपनी ने इस वर्ष खरीफ के लिए प्रीमियम की अंतिम तारीख 31 जुलाई रखनी है अभी तक बीमा कंपनियां प्रीमियम तिली उर्द आदि की फसलों में दो प्रतिशत लगता था ।  लेकिन अब ये राशि ढ़ाई से तीन गुना कर दी गई है ।  अब राशि 6 औ ले रहे हैं ।  उक्त प्रकरण पर विचार किया जाना जरूरी है ।  उत्तर प्रदेश शासन ने सूखे की   * Speech was laid on the Table     चैक अपने ही दल के लोगों को चिन्हित करके ही 10 औ लोगों को प्राप्त हुआ है जबकि 90 औ लोग वंचित रह गये हैं । सूखा राहत की राशि 2000/- हेक्टेयर बहुत कम है जिसमें बीज का खर्चा भी पूरा नहीं होता  है ।  कृषि विभाग द्वारा पानी की बचत के लिए प्रिंकलर सैट योजना लागू की है ।  लेकिन इस योजना में गांव को ईकाई मान रहे हैं जो किसान छोटे कस्बे में रहते हैं उनकी जमीन पर सब्सिडी वाले प्रिंकलर सैट स्वीकृत करने से मना कर रहे हैं ।  अतः उक्त योजना का लाभ सभी जगह  दिलाया जाये ।

       

*SHRI N. KRISTAPPA (HINDUPUR): Thank you, Madam for giving me this opportunity to speak on drought situation prevailing in the country.  Madam, in Rayalaseema region, particularly in Anantpur district, drought is a regular phenomenon.  We were born in drought, I grew up in drought and we are living in drought.  This situation is not new to us, we were prepared for losses even after sowing our crops.  But for the last three months there are no rains and as a result we are not in a position to sow seeds.  Had we sowed seeds in the last week of July there could have been good harvest.  Now this is August, we are not sure whether we can sow seeds, even if we go for sowing we are not sure of good yield.  In such a situation, how farmers of this region would survive is a matter of concern.

          We cannot sow and we won’t get good yield.  In last 15 years, drought was declared for 13 years in Anantpur district. In such a scenario, the Government should ponder over, how farmers of this region would survive. Our leader N.Chandrababu Naidu, taking congnisance of this situation waived loan of Rs.1.5 lakh per family of a farmer.  This move would benefit 96.24% of farmers in our state.  On one hand farmers are happy that their loans got waived off but on the other hand due to delayed rains they are worried that they cannot sow in time and will have to face similar situation again.  They are worried that they will have to face drought again and again.   People of our state ensured that NDA Government is formed at the centre and made UPA to sit in opposition. They have expectations from Prime Minister Narendra Modi and NDA Government.  They expect that their problems will be solved and they can tread the path of progress. I request the _______________________________________________________________ *English translation of the Speech originally delivered in Telugu.

NDA Government to send a committee to Anantpur district and find a lasting solution to the problems prevailing there.  I humbly request the Government to take steps to free this region from drought.

          We are suffering because of UPA Government’s misdeeds.  There was National Agriculture Insurance Scheme till 2010, which used to provide some compensation to farmers on crop losses. We used to benefit to some extent from that scheme.  We requested them to bring better insurance policy to provide complete compensation, to which UPA Government came out with even worse scheme.  They brought weather based Agriculture Insurance Plan.  Please listen to me, this will benefit you.  If you listen to me, you may get an opportunity to sit on treasury benches.

           Weather based insurance was introduced in 2011.  That Insurance Plan was so worse, that it won’t give us even the premium we paid.  In such a scenario, where 13 out of 15 years were declared as drought years, how farmers in this district would survive.  Madam, weaving is second biggest profession in this region after agriculture, weavers depend on silk, which is the raw material for hand woven sarees. Neither we have enough silk production in our country, nor can we import silk from other countries.  Even if weavers buy silk from somewhere, the cost of inputs is more than the selling price of the saree.

HON. CHAIRPERSON: Please conclude.

SHRI N. KRISTAPPA: Only one minute madam.  There are around 2 lakh weavers in this district.  I request the Government to protect weavers’ interests.  The Government should send a committee to this district on war footing basis, otherwise farmers and weavers in this district are staring at survival crisis. I request the Government to protect them.

HON. CHAIRPERSON: Please conclude.

SHRI N. KRISTAPPA :  Also, I would like to inform that there is no fodder for cattle.  I request the Government to take concrete steps to address all these issues.  With this request I conclude, thank you.    

 

*श्री ए.टी. नाना पाटील (जलगाँव): हमारा देश भौगोलिक दृष्टि से बड़ा होने से देश में एक ही समय में कहीं बाढ़ आ रही होती है तो कहीं सूखा पड़ रहा होता है और इस स्थिति को देखते हुए बाढ़ एवं सूखा के नियंत्रण के लिए हमें गंभीरता से सोचना होगा। देश में बाढ़ और सूखे के कारण भारी वित्तीय तथा जान-माल की हानि होती है। राज्य तथा केन्द्र सरकार को इस स्थिति से निपटने के लिए आपदा प्रबंधन पर भारी खर्च भी करना पड़ता है। बाढ़ और सूखा की वजह से हमारी अर्थव्यवस्था पर भी इसका कुप्रभाव दिखाई देता है। इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए पूर्ववर्ती श्रद्धेय अटल जी के नेतृत्व वाली एन.डी.ए. सरकार ने नदी जोड़ परियोजना की परिकल्पना की और इसे सरकार का एक महत्वकांक्षी कार्यक्रम बनाकर प्रो. सुरेश प्रभु के नेतृत्व में एक अध्ययन समिति का गठन किया। प्रो. सुरेश प्रभु समिति ने नदी जोड़ परियोजना को साकार करने के लिए अपनी अध्ययन रिपोर्ट के जरिये सरकार को कई सिफारिशें की हैं, लेकिन सत्ता परिवर्तन के पश्चात् सरकार में आई यू.पी.ए. सरकार ने इस अध्ययन रिपोर्ट और सिफारिशों की सतत उपेक्षा की। इसके कारण नदी जोड़ परियोजना प्रत्यक्ष साकार नहीं हो पाई। माननीय नरेन्द्र मोदी जी की सरकार ने महामहिम राष्ट्रपति जी के अभिभाषण के द्वारा नदी जोड़ परियोजना पुनः साकार करने के लिए अपनी प्रतिबद्धता को जताया है। देश में एक हिस्से में बाढ़ तथा दूसरे हिस्से में सूखे के कारण होने वाले नुकसान के कारण होने वाले अति खतरे को कम करने के लिए नदी जोड़ो परियोजना का क्रियान्वयन तेजी से होना चाहिए। सरकार इसके सभी पहलुओं पर ध्यान देकर नदी जोड़ो परियोजनाओं के द्वारा देश की बारहमासी नदियों को जोड़ेंगी तो देश के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में बाढ़ का खतरा कम होगा तथा सूखा प्रभावित क्षेत्रों में जल की उपलब्धता बढ़ायी जा सकती है। पिछले साल महाराष्ट्र में कई जगहों पर अति सूखे की स्थिति निर्मित हुई थी। ज्यादातर किसानों को मवेशियों को बेचना पड़ा है। ऐसी स्थिति में, हमारे क्षेत्र जलगांव में पिछले कई सालों से राज्य सरकार और केन्द्र सरकार की उपेक्षा नीति के कारण लोअर तापी प्रकल्प को सरकारी मंजूरी के बावजूद इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। अतः मेरा अनुरोध है कि सरकार लोअर तापी प्रकल्प को राष्ट्रीय योजना में शामिल करे और इसके लिए आवश्यक धनराशि आवंटित करे। यदि यह योजना राष्ट्रीय योजना में शामिल होती है तो वहां की जनता को राहत मिलेगी। पिछले लोक सभा में मैंने कई बार इस विषय को सदन में उठाया है, लेकिन सरकार की ओर से कोई कार्यवाही नहीं की गयी। मैं माननीय प्रधानमंत्री से अनुरोध करता हूं कि इस लोअर तापी प्रकल्प को राष्ट्रीय प्रकल्प घोषित कर तुरंत धनराशि आवंटित कर, उत्तर महाराष्ट्र के लाखों किसानों को लाभ एवं राहत देने की कृपा करें।

श्री राम प्रसाद शर्मा (तेज़पुर):   सभापति महोदया, मैं हिंदी में बोलने की चेष्टा करूंगा, though I do not belong to hindi heartland.

          महोदया, असम फ्लड और लैंड इरोजन से सफरर स्टेट है जिनके कारण हजारों हेक्टेयर जमीन नदी ले जाती है। ब्रह्मपुत्र हो, बराकभैली हो दोनो साइड्स में हमलोग सफरर हैं। हमारे 27 जिलों में से 19 जिले फ्लड अफेक्टेड हैं। हजारों हेक्टेयर जमीन नदी में चली गई है। कृषि से जुड़े हजारों लोग बेघर हो गए हैं, उनके लिए कोई कंपैनसैशन नहीं है। कोई क्रॉप इन्शुरैंस नहीं है। वहां पर कोई फ्लड कंट्रोल की कोई अफेक्टिव सिस्टम नहीं है। पिछले 60 सालों से हम लोग यह विषय हर बार सदन में उठाते आ रहे हैं। चाहे पार्लियामेंट हो या रिसपेक्टिव असैम्बली हो, जब-जब बाढ़ आती है, हम लोग इस विषय को सदन में उठाते हैं। लेकिन, आज तक इसका कोई सोल्यूशन नहीं निकला है। हमने इसके लिए लाखों-करोड़ों रुपए खर्च किए होंगे। इसका कोई सोल्यूशन नहीं है। असम में भी यही स्थिति है।  धेमाजी से ले कर धुबड़ी तक, मैं तेजपुर से चुन कर आया हूं, वहां अभी भी एक म्यूनिसिपल टाउन पानी के अंदर है। 

Gohpur town is under water.  Gohupur town has been under water for the last one month. Nobody is concerned about it. Different Departments are there. Money is going from the Central Government. That is not being properly utilised. Money goes into the pockets of contractors, officials and politicians.

          I would humbly request this House and through you, the Minister of Agriculture to consider taking effective measures for concrete embankment of River Brahmaputra, Barak Valley and its tributaries. Money is spent year by year. But it has not produced any fruit. People are suffering. There is no crop insurance. There is no compensation for people who are losing land through erosion. This is the position in Sadia, Dhemaji, Lakhimpur, Sonitpur, Dhubri, Goalpara, Nimatt Ghat, Jorhat Roumariah and Dibrugarh. Construction of dam is not the solution. Large dams are not the solution. Small dams might be the solution. That is to be considered. Effective measures for controlling of floods, de-siltation of rivers and navigation should be adopted for effective control of floods so that siltation is removed. There was dredging. That proposal came in 1971. That was dumped in the River Brahmputra. Dredging has not taken place. And due to siltation the width of the rivers is widening day by day and year by year. The money spent has gone down the drain. Work is undertaken when there is flood. When the flood comes, then only the Department becomes active and starts working.

          So, in the lean season, the work should be completed. Our State should be protected. We have been discussing only Kosi and Bihar. But Assam is the worst sufferer. It is the second biggest problem in Assam after the issue of refugees from Bangladesh. Bangladeshi refugee is the first problem. The second problem is of flood and erosion. That must be tackled for all times to come. I am sure, this NDA Government, under the leadership of Shri Modiji would take up the problem and see that the embankment takes a concrete shape and not just by the sand and soil.

                                                                            

डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक (हरिद्वार): माननीय सभापति जी, मैं आपके माध्यम से सरकार को और माननीय मंत्री जी को बहुत सारी बधाई देना चाहता हूँ कि बहुत ही महत्वपूर्ण विषय पर इतनी लंबी चर्चा करायी। मेरे से पूर्व वक्ताओं ने कहा, जब चर्चा नहीं होती है, तो विपक्ष की ओर से मांग उठायी जाती है और अब इतने महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मुद्दे पर चर्चा हो रही है, तो कहते हैं कि इतनी लंबी चर्चा क्यों करें, यह बहुत ही आश्चर्यजनक बात है। मैं आपके माध्यम से सरकार का ध्यान उत्तराखण्ड राज्य की ओर दिलाना चाहता हूँ। उत्तराखण्ड देश ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए महत्वपूर्ण है। सन् 1991 में भारी भूकम्प की त्रासदी से उत्तरकाशी, चमोली तथा रुद्रप्रयाग जैसे जनपदों में हजारों लोग मरे थे और उसके बाद वर्ष 1998 में जो मालपा का प्रकरण हुआ था, उसमें देश के चौदह राज्यों के दर्जनों लोग हताहत हुए थे। अभी गत् वर्ष जो केदारनाथ की त्रासदी हुई, उसमें देश के 24 राज्यों के बीस हजार से भी अधिक लोग हताहत हुए। हजारों लोगों का तो अभी तक भी पता नहीं चला है। सैकड़ों गांव बर्बाद हो गये, सैकड़ों परिवार ख़ाक में मिल गये, लाखों लोग आज भी चौराहे पर खड़े हैं। यह वह क्षेत्र है, जहाँ पर 65 प्रतिशत से अधिक वन क्षेत्र है। यह पूरे देश के पर्यावरण की रक्षा करता है, बल्कि मैं यह कहना चाहता हूँ कि देश के पर्यावरण की पहली पाठशाला है उत्तराखण्ड। इसलिए यह सामरिक दृष्टि से ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि चीन की लगभग साढ़े तीन सौ किलोमीटर और नेपाल की 263 किलोमीटर लंबी सीमाओं से जुड़ा यह राज्य अत्यंत ही महत्वपूर्ण है। इस पर ध्यान देने की नितांत आवश्यकता है।

          सभापति जी, जो गांव बर्बाद हो गये, उनका पुनर्वास आज तक नहीं हुआ। लोग आज भी खुले आसमान के नीचे हैं। लोग दर-दर भटक रहे हैं। आर्थिक तंत्र इतना खराब हो गया कि जिन लोगों के खेत-खलिहान सब बर्बाद हो गये, वे आज चौराहे पर खड़े हैं। उनकी आर्थिक स्थिति ऐसी है कि वे भुखमरी के कगार पर हैं। वहाँ अतिवृष्टि से जो क्षति हो रही है, हम शुरू से यह मांग करते रहे हैं, हम शुरू से यह मांग करते रहे हैं कि डाप्लर रडार यदि होता तो कम से कम पांच घण्टे पहले यह पता चल जाता कि अमुक स्थान पर कितनी क्षमता वाला बादल फटेगा और वह कितनी क्षति कर सकता है,लेकिन हमको वह रडार नहीं मिला। मैं आदरणीय राजनाथ सिंह जी का बहत आभारी हूं कि उन्होंने उत्तराखण्ड को डाप्लर रडार देना सुनिश्चित किया और उसका सर्वे भी हो रहा है। मैं उनको बहुत धन्यवाद देना चाहता हूं।

          मैं हरिद्वार से चुनकर आया हूं। हरिद्वार गंगा का तट है। जब ऊपर से नदियां उफनती हुई निकलती हैं तो हरिद्वार और लक्सर की दोनों तहसीलों के दर्जनों गांव पानी से डूब जाते हैं,उनकी फसल नष्ट हो जाती है। पिछले तीन साल से लगातार वहां का गन्ना किसान चौराहे पर खड़ा है। उसकी गन्ने की खेती पूरी तरह से नष्ट हो गयी है,इसलिए मैं दो-तीन निवेदन करना चाहता हूं। जहां हमको यह डाप्लर रडार मिलना चाहिए,वहीं राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन फोर्स की कई कंपनियां उस क्षेत्र में होनी चाहिए। वनों के संरक्षण के लिए ग्रीन बोनस जरूरी है। जो वनों के संरक्षण के कारण यह असंतुलन हो रहा है,कहीं अतिवर्षा होती है तो कहीं सूखा पड़ता है,इसका संतुलन भी बहुत जरूरी है। गंगा का जो कटाव हो रहा है,गंगा के तटबंध टूटने से गांव के गांव डूब रहे हैं। हरिद्वार बर्बाद हो गया है। ऊपर की जो नदियां हैं,उनमें ऊपर उफान आने से जो रेता बस जाता है,उसका समय-समय पर चुगान भी जरूरी है। मैं कहना चाहता हूं कि जहां गांव का पुनर्वास होना चाहिए,वहीं पर जो किसान ऋण लेकर किसी तरीके से अपने परिवार का पालन करता था,आज वह बर्बाद हो गया है। बैंकों से आरसी जा रहे हैं,अब वह वहां रहने के बजाय जेल जाएगा। वे लोग कहते हैं कि अच्छा हम भी उसी त्रासदी में मर जाते। इसलिए उस पूरे क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण योजना बननी चाहिए क्योंकि वह क्षेत्र देश ही नहीं,पूरी दुनिया की अध्यात्म की राजधानी है और देश की संस्कृति का प्राण है। गंगा को बचाना है तो वहां के लोगों को भी बचाना है,इसलिए जो तटबंध टूट रहे हैं,समय-समय पर उनको बनाए जाने की जरूरत है। किसान और नौजवानों को पलायन की दृष्टि से रोकना बहुत जरूरी है। यदि उनका पलायन नहीं रुकेगा,तो राष्ट्र के लिए संकट पैदा होगा। वह क्षेत्र देश को जवान देता है। वह क्षेत्र जवान भी देता है,पानी भी देता है,प्राण वायु भी देता है। इसलिए मैं जोर देकर कहना चाहता हूं कि उस क्षेत्र की रक्षा के लिए अलग से एक महत्वाकांक्षी योजना होनी चाहिए ताकि अतिवृष्टि से लोगों बचाया जा सके,उनका पुनर्वास किया जा सके,बेरोजगारी दूर की जा सके और वहां के खेत,खलिहान और मकानों की रक्षा हो सके।

 

SHRI K. ASHOK KUMAR (KRISHNAGIRI): Madam Chairperson, before starting my speech, I would like to thank our hon. Chief Minister Puratchi Thalaivi Amma for choosing me, and also the people of Krishnagiri Constituency for electing me as a Member of Parliament.

          Madam, while one part of India experiences hot and dry weather and reels under drought conditions, another other part experiences heavy rains and flood. Sixty per cent surplus rain water drains into the sea. India has witnessed many droughts and floods in the past. Even now in Uttarakhand there are heavy rain and flood, and Pune is facing heavy rain and landslides. Many people have died and properties got heavily damaged. Members of Parliament know well the situation in Uttarakhand and Pune. In this situation, the Union Government must take concrete steps and utilize surplus waters from one part of India to another part by interlinking rivers.

          In Tamil Nadu, tsunami occurred in 2004 and the Thane cyclone occurred in 2011. During these difficult situations our Chief Minister Amma immediately took various relief measures to rescue and rehabilitate the affected people by ensuring construction of damaged houses using disaster resistant features and undertaking vulnerability mapping.

          During the Thane Cyclone, our Amma restored supply of electricity by installing 80,000 repaired electric polls, separate generators, transformers, etc. to supply electricity within a few days of the horrible incident.  Further, around one lakh houses were constructed for the affected people, in addition to supply of food, safe drinking water, etc.  The kind hearted Chief Minister of Tamil Nadu, Amma ordered immediate release of Rs. 150 crore towards relief and restoration of infrastructure damaged by the Cyclone Thane affected areas. Our Chief Minister also directed the Ministers, District Collectors, Deputy Collectors and Department Secretaries to assess the extent of the damage caused in the Cyclone Thane affected places.

          Madam, floods and droughts are two faces of the same coin.  Though droughts hit food production mainly through water scarcity, floods disrupt national economy. Our Amma is the first one who introduced rainwater harvesting scheme in the country. It proved to be excellent and every State took it as a role model.

          Our hon. Chief Minister Amma, our visionary leader, introduced some schemes to avoid and prevent the occurrence of drought and flood schemes are : (1)massive tree planting programme (2) water conservation and canopy improvement in degraded forest lands, (3)Tamil Nadu Afforestation Project (TAP) Phase-II Utilisation Plan, (4)replanting in Thane Cyclone affected areas of Cuddalore and Villupuram districts in Tamil Nadu, are some of the on-going major schemes in Tamil Nadu with an allocation of about Rs. 242 crore.

          Our Chief Minister urged the Union Government to take necessary steps to implement the Cauvery Water Tribunal Award by Supreme court.  The Chief Minister also wrote a letter to the hon. Prime Minister a few days back to constitute a Cauvery Monitoring Commission.

          Now, we came to know that the Union Government is taking strong efforts to constitute a committee to prepare a feasibility report about the linking of rivers throughout India. If this project is implemented, there will be no drought, no famine, no starvation death and no floods in the country. So, I would urge the Union Government to take necessary steps to implement this project to prevent drought and floods in the country.

         

श्री सी.आर.चौधरी (नागौर) : सभापति महोदया,आपने मुझे इस महत्वपूर्ण विषय पर बोलने का अवसर दिया,उसके लिए मैं आपको हृदय से धन्यवाद अर्पित करता हूं। भारत के अंदर मानसून एक जुआ है,मानसून अनसर्टन है,इरेटिक है,अनइवन है और इसी कारण से ये सारी प्राब्लम्स आती हैं कि कहीं पर बाढ़ आती है और कहीं सूखा पड़ता है। अभी बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश से आए हुए साथी कोसी और अन्य नदियों से हुए वहां विनाश का वर्णन कर रहे थे।

          मैं राजस्थान प्रदेश से आता हूं और राजस्थान ज्याद सूखे के कारण जाना जाता है। वहां पर पिछले 67 साल में केवल नौ साल ऐसे निकले, जब पूरे प्रदेश केअंदर सूखा न हो। इस दौरान वहां अच्छी फसल हुई, लेकिन वह एकऔर जमाना था। राजस्थान में 58 वर्ष किसी न किसी हिस्से में सूखा पड़ा। मेरा संसदीय क्षेत्र नागौर राजस्थान में डेजर्ट औरसेमी डेजर्ट जोन में आता है।

  15.59 hrs. (Prof. K.V. Thomas in the Chair) राजस्थान का दो तिहाई एरिया डेजर्ट और सेमी डेजर्ट के अंदर है। वहां इस साल 20 जुलाई तक बारिश नहीं हुई। अब थोड़ी हुई है, लेकिन यह सोइंग के लिए बहुत लेट हुई है। इस कारण इस वर्ष भी सूखे के आसार हैं।

          मैं इस सदन में राजस्थान और अपने संसदीय क्षेत्र के सूखे के बारे में कुछ कहना चाहूंगा कि और बताना चाहूंगा कि सूखे से पीड़ित लोगों को राहत देने के लिए और सूखे से निबटने के लिए क्या किया जाए, कैसे मदद की जा सकती है। भारत के अंदर एडीआरफ है और स्टेट्स में एसडीआरएफ है, जिसमें 70 प्रतिशत पोषण एनडीआरएफ या केन्द्र सरकार द्वारा किया जाता है।

16.00 hrs.  इसके द्वारा जितना भी पशुओं और गौशालों के लिए चारा दिया जा रहा है साथ ही सिनियर सिटीजन्स को सहायता दी जाती है,लोग सूखे के कारण बेरोजगार रहते हैं उन्हें रोजगार दिया जा रहा है और विशेषतः पीने के पानी की व्यवस्था की जानी जरुरी होती है और वह की जाती है। Unfortunately on 28th November 2013, a circular was issued by the Central Government. ये जो सात-आठ महीने सूखे के होते हैं यानी पांच वर्ष में से एक वर्ष ठीक-ठाक निकलता है बाकी चार वर्ष सूखा पड़ता हो,उस प्रदेश के अंदर आप चारे के लिए या एनडीआरएफ के तहत जो रिलीफ दी जा रही है, Now, they have curtailed it up to only 90 days in a year. 90 दिन से क्या गौशालाएं चलेंगी और जब वहां अकाल पड़ता है तो इन गायों की क्या हालत होती होगी,आप समझ सकते हैं। गायों को गौशालाओं से बाहर छोड़ दिया जाता है और जो राजस्थान की सबसे अच्छी नस्लें हैं राठी,गिर है,नागौरी है,सांचौरी है जो अब नष्ट होती जा रही हैं। कारण यह है कि सरकार जब तक सहायता नहीं देगी तब तक वहां के लोगों का गायों से गुजारा नहीं होगा। Cow rearing and cattle rearing are the main occupation of the Rajasthanis.

 इसलिए यह जो 28 नवम्बर 2013 का सर्कूलर है, it should be withdrawn and amended especially for the drought reasons and for the drought areas. Secondly, the Government should provide adequate funds for potable water.  मेरे संसदीय क्षेत्र में इंदिरा गांधी कैनाल से लिफ्ट कैनाल के नाम से पानी लाया जा रहा है,अभी पूरा आया नहीं है और पूरे जिले में पानी के लिए त्राहि-त्राहि मची हुई है। इसमें केन्द्रीय सरकार के अनुरोध है कि they should provide maximum fund and they should allot maximum money to Rajasthan for providing water.  क्योंकि जब सूखा पड़ता है तो 20-20 किलोमीटर दूर से पानी मंगाया जा रहा है,टैंकर्स के द्वारा पानी मंगवाया जाता है,स्थिति बहुत खराब है,इसलिए Central Government should provide water.  जंगल लगाने के नाम पर ये जो नरेगा योजना है इसके तहत काश्तकारों को जिनके खेत के साथ सड़क है,उनको पूरे साल के पैसे दिये जाने चाहिए ताकि उस राशि से जो जंगल लगाये जाते हैं वे बचाए जा सकें। वृक्षारोपण जो किया जाता है दिल खुश होता है,अगस्त के महीने तक तो वृक्षारोपण होता है और दिसम्बर के बाद पेड़ देखने को भी नहीं मिलता है। आखिर में आपसे निवेदन करुंगा कि इंदिरा गांधी कैनाल जो है इसमें डिसिल्ट भी हो रहा है,लिकेज भी होता है, it requires a lot of amount to repair it.  The Central Government should give it to the Rajasthan Government  ताकि राजस्थान सरकार उसे रिपेयर कर सके और उसमें पानी आराम से बह सके। Mainly, drinking water problem is the major problem of the North-Western Rajasthan.

          Thank you very much for giving me the time.


(  

श्री राजकुमार सैनी (कुरूक्षेत्र) :    सभापति महोदय, .......  

HON. CHAIRPERSON : Shri Rajkumar Saini, you have already laid your speech on the Table of the House.  So, your speech has already been recorded.

SHRI GAURAV GOGOI (KALIABOR): Thank you, Chairman, Sir, for giving me this opportunity to speak.

          We have in Assam an annual war with the flood caused by the river Brahmaputra.  The flood is largely caused because the river has been expanding.  Since 1970 this mighty main river of India has expanded double its width and in its wake it has consumed villages.  It has almost consumed the Island of Majuli.  It has thrown women and children on the streets.  It has made farmers lose their land.  It has made fish farmers lose their entire year’s production of fish.  In 2011 it broke my heart to see the number of villages which had been destroyed, old people living in refugee camps without any clothes on their bodies and women barely being able to feed their children.

          Sir, one of the major reasons for this annual flood is the amount of silt that is being deposited on river Brahmaputra by the upstream nations.  The silt is causing the bed of Brahmaputra to rise and thereby expanding its width.  Therefore, any flood management programme undertaken by the Union Government needs to have a silt management programme.  The State Government of Assam has appealed to the Union Government to establish a Brahmaputra River Valley Authority which will take the views and opinions of all the States in Northeast India in order to have a trans-boundary flood management programme.

          Sir, we are living in the age of science and technology but our flood management programmes belong to the 19th or 20th century.  This is the century of the IT.  This is the century of modern industrial design and yet we simply talk about embankments or merely solutions like geo-bags and geo-tubes.  Sir, we need to have advanced flood forecasting systems.  We need to have systematic dredging points.  We need to have smart villages in addition to smart cities.   Sir, we have to take into account the affected States in upstream parts of our country.

          When hon. Minister of DONER, Gen. V.K. Singh came to Assam, he made a point that the Subansiri dam needs to be expedited but the concerns of the downstream States must be taken into view.  At the same time, the hon. DONER Minister mentioned that such hydro power projects need to be undertaken with sensitivity.  When Prime Minister went to Bhutan and inaugurated the huge hydro power projects in Bhutan, at that point no concerns related to the downstream impact of those hydro power projects were undertaken.

          Sir, in my own district of Nagaon, there are villages in Samaguri, Rupahi, Dhing and Batadrava.  There are many farmers who cultivate fish.  Due to annual floods, their entire year’s production of fish flows away.  Therefore, I would appeal to the Minister of Agriculture that when he talks about the flood insurance programme he must also have a specific insurance programme for farmers cultivating fish because they lose lakhs and crores of rupees in annual floods.

          Sir, we must understand that the flood management programmes cannot be left to the State Governments.  It needs a proactive role of the Union Government.  We need a river basin management programme.  We should not look at floods just from a State point of view.  We will have to look at it as a river basin.  If we want to have an effective solution for Brahmaputra, we should also have an international river basin understanding with China, Bhutan, Bangladesh and Myanmar.  Sir, we need a systematic and holistic solution.  Mere throwing away of money into different schemes will not help.  This is a time when a new Government has come.  It has to plan a long term vision.  It has to have a long term roadmap.  It cannot just come up with mere Budgets and mere financial resources.

     

We urge that this Government works in coordination with the State Governments and constitute the Brahmaputra River Valley Authority and plans a long term road map for its solution. … (Interruptions) .

                                                                          

HON. CHAIRPERSON: Please sit down.

… (Interruptions)

श्री गौरव गोगोई :  एनडीए ने क्या किया?...(व्यवधान)आप यूपीए और एनडीए के बीच में तुलना करते हैं। मैं चैलेंज करता हूं कि यूपीए सरकार ने ज्यादा किया है।...(व्यवधान)

श्री कामाख्या प्रसाद तासा (जोरहाट) : माननीय सभापति जी,अभी अभी आर.के.सिंह जी ने भी अपनी बात यहां रखी और अभी असम की हालत के बारे में भी दो माननीय सांसदों ने भी यहां अपनी बात कही। फिर हम लोग देख रहे हैं कि ब्रहमपुत्र में जो बाढ़ आ रही है,यह सबसे खतरनाक स्थिति में है। मेरे निर्वाचन क्षेत्र में मादुली सबसे बड़ा रिवर आईलैंड है। इसका आधा ब्रहमपुत्र ने इरोजन में ले लिया। उसके बाद फ्लड की जो स्थिति है,वह मेरे जिले में है। डिब्रूगढ़,तिनसुखिया,लगभग सारा असम बाढ़ की चपेट में है। अभी हम लोग देख रहे हैं कि असम सरकार कुछ नहीं कर पा रही है। असम सरकार के पास पैसा भी नहीं है कि फ्लड को कंट्रोल करे फिर भी केवल रिलीफ देकर असम सरकार अपनी डय़ूटी कर रही है। जो रिवर ऑथोरिटी है,हम लोग ब्रहमपुत्र बोर्ड बोलते हैं,यह बोर्ड भी अभी सफेद हाथी जैसा हो गया है। इसका कुछ काम भी नहीं है। अभी असम में जो बाढ़ होती है,इसका असर पूरी इकोनॉमी पर पड़ता है। पूरी इकोनॉमी ध्वस्त हो गई। मादुली में,जोरहाट में एक साल में जो आदमी पैसा कमा लेता है,वहां फ्लड आने के बाद उसका वह सब कुछ खत्म हो जाता है। अभी दस हजार से ज्यादा परिवार माथारी में हैं।

           अभी हमने देखा है कि जो ब्रहमपुत्र ऑथोरिटी है और सेन्ट्रल गवर्नमेंट वॉटर मैनेजमेंट जो सेन्ट्रल गवर्नमेंट डिजास्टर मैनेजमेंट विभाग है,ऑथोरिटी है,ये लोग भी कुछ काम नहीं कर रहे हैं। असम अभी ऐसा राज्य हो गया है कि वहां बाढ़ आने के बाद हम लोग देख रहे हैं कि वहां पर लोग बीमार भी बहुत ज्यादा हो रहे हैं। वहां पर इसके कंट्रोल के लिए जितना इंफ्रास्ट्रक्चर होना चाहिए,उतना वहां नहीं है। डिजास्टर मैनेजमेंट अभी गुजरात सरकार से असम सरकार ने कोलेबोरेशन में कर लिया है। हम लोगों को ऐसी जानकारी हुई है कि गुजरात सरकार का डिजास्टर मैनेजमेंट विभाग असम की भी मदद कर रहा है लेकिन ऐसा लगता है कि डिजास्टर मैनेजमेंट को कोई जानकारी नहीं है कि कब बाढ़ आएगी। यहां पर फ्लड के लिए जितने लोगों को टेंशन हो रही है,हर साल जितनी कमाई वे लोग करते हैं,वह सब बाढ़ में चली जाती है। अभी फसल नहीं हुई है। कृषि भूमि पूरी सैंड से भर गई है। ऐसा लगता है कि वॉटर रिसोर्सेज विभाग भी पूरा ठप्प हो गया है। असम सरकार की बात छोड़ दीजिए।

           मैं केन्द्र सरकार से निवेदन करूंगा कि जो नयी सरकार आई है,मैं आशा करता हूं कि नयी सरकार इस समस्या को पूरी बारीकी से देखेगी और समस्या का निदान करेगी। असम और नॉर्थ-ईस्ट की जो इकोनॉमी है,यह इंसर्जेन्सी से भी लिन्क्ड है। इंसर्जेन्सी का कारण है कि वहां पर फ्लड के कारण बहुत सारे परिवारों को समस्या आ रही हैं,उन लोगों की इकोनॉमी ध्वस्त हो गई है। जो लड़के लोग हैं,उनके पास कोई जॉब नहीं है। इसलिए बाढ़ से प्रभावित परिवार ईजी मनी के चक्कर में भी पड़ गये हैं। बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के बहुत सारे लोग बैंगलोर,मुम्बई,गुजरात में नौकरी कर रहे हैं। अभी वे लोग भी कह रहे हैं कि बाढ़ के कारण उनका पूरा परिवार आर्थिक रूप से तबाह हो गया है और न खाने के लिए उनके पास कुछ है और न पीने का पानी उनके पास है। हम लोग क्या करें?इसलिए वे लोग असम से बाहर जा रहे हैं। इसीलिए इस समस्या को केवल डिजास्टर मैनेजमेंट के हिसाब से ही नहीं देखा जाए बल्कि सोशल रैस्पांसिबिलिटी के दृष्टिकोण से भी देखा जाना चाहिए।

          मेरी कांस्टीच्युएंसी जोरहाट है,असम के चीफ मिनिस्टर भी इसी कांस्टीच्युएंसी से हैं। अभी यहां इरोजन हो रहा है,फ्लड हो रहा है। यहां जैसा काम होना चाहिए वैसा नहीं हो रहा है। नीमाटी का आधा भाग बाढ़ से ग्रस्त है,मजूली जो स्पोर्ट्स मिनिस्टर की कांस्टीच्युएंसी है वो भी डूब गई,नौगांव के बारे में जो गोगोई जी बोल रहे थे,वह भी डूब गई। तेजपुर,डिब्रुगढ़ के एमपी यहां बैठे हैं। असम का एरिया लगभग 78000 स्कवेयर किलोमीटर है,यहां पर इतनी बड़ी बाढ़ आई है कि लोगों के रहने की जगह नहीं है। सबसे बड़ी बात है कि काजीरंगा नेशनल पार्क भी बाढ़ से प्रभावित है। यहां एनीमल्स की लाइफ सेव होनी चाहिए।

          मैं केंद्र सरकार से दरखास्त करता हूं कि पूरे देश में बाढ़ की स्थिति है। असम का एरिया बहुत कम है और अगर यह भी बाढ़ में चला जाएगा तो हमें यहां रहने में बहुत दिक्कत हो जाएगी। मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से आग्रह करता हूं कि इस मैटर को जरूर देखें।

 

श्री रवीन्द्र कुमार पाण्डेय (गिरिडीह) :माननीय सभापति जी,आपने मुझे बोलने का मौका दिया,इसके लिए मैं आपका धन्यवाद करता हूं। मैं झारखंड प्रदेश से आता हूं। हमारे प्रदेश और खास कर मैं गिरीडीह लोकसभा क्षेत्र से आता हूं। वहां पांच डैम बने हुए हैं। तेनुघाट,कोनार,मैथन,तिलैय्या डैम हैं। जब इनका निर्माण हुआ तो वहां के ग्रामीण विस्थापित हुए। उस जमाने में मुआवजा राशि मिली थी। आज वहां के किसान भाइयों का चिंतन यह रहा कि इस डैम से सिंचाई की सुविधा मिलेगी। डैम से समय-समय पर पानी को छोड़ दिया जाता है। आज स्थिति यह है और आपको जानकर ताज्जुब होगा कि इसकी कोई सूचना नहीं दी जाती है। अभी हमारे राज्य में थोडी बारिश हुई हालांकि झारखंड प्रदेश में सूखा है। जब तेनुघाट डैम से पानी खोला गया तो पांच ग्रामीण नौजवान लड़के बह गए और उनकी मृत्यु हो गई। दामोदर वैली कारपोरेशन,तेनुघाट डैम झारखंड सरकार के अधीन है,उनके द्वारा कोई अलार्मिंग सूचना नहीं दी गई जिससे सारे लोग परेशान रहे। तेनुघाट डैम से पानी बोकारो स्टील जाता है। इससे हमारे क्षेत्र की एक इंच भी जमीन सिंचित नहीं होती है। कोनार डैम का निर्माण हाइड्रल प्रोजेक्ट के लिए किया गया था। जब से डैम का निर्माण हुआ यानी 1952 से आज तक जो सिल्टिंग हुई है,उसकी सफाई नहीं की गई। इस कारण थोड़ी बारिश होने पर पानी ओवर फ्लो करने लगता है। यहां की एक भी इंच जमीन सिंचित नहीं होती है। 1996 से लेकर अभी तक कई बार इस विषय को कई बार सामने रखा गया है ताकि सिंचाई की सुविधा मिल सके तभी इस प्रदेश को डैम के निर्माण से लाभ मिलेगा। ताज्जुब की बात है कि इससे एक भी इंच जमीन की सिंचाई नहीं होती है। और तो और टुंडी के उग्रवाद प्रभावित क्षेत्र में बराकर नदी है,यहां से बाढ़ आती है और बंगाल की तरफ चली जाती है। तोपचांची का जो क्षेत्र है,वहां सूखा पड़ा है। आजादी मिले 66 वर्ष के बाद भी बाढ़ और सूखे की सदन में बहुत बार चर्चा हुई है लेकिन कोई निराकरण नहीं हुआ।

          मैं आपके माध्यम से सदन में बताना चाहता हूं कि चर्चा बहुत सुंदर है लेकिन इसका निवारण होना चाहिए। हमें आशा ही नहीं पूर्ण विश्वास है कि हमारे देश के माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में इस समस्या का निदान होगा। नदियों को जोड़ने का जो सपना माननीय अटल बिहारी वाजपेयी जी का था,वह साकार होगा। आपने मुझे बोलने का समय दिया,इसके लिए बहुत धन्यवाद।

             

श्री धर्मेन्द्र कुमार (आँवला) : सभापति महोदय,आपने मुझे सूखा और बाढ़ पर बोलने का समय दिया,इसके लिए मैं आपको धन्यवाद देता हूं। मैं उत्तर प्रदेश के आंवला लोक सभा क्षेत्र से आता हूं,जो दो जनपदों की लोक सभा है। आधा क्षेत्र जनपद बरेली में पड़ता है,जो राम गंगा से घिरा हुआ है और आधा क्षेत्र जनपद बदायूं में पड़ता है,जो बड़ी गंगा से घिरा हुआ है। बाढ़ के समय मेरे क्षेत्र के गांव दौली,घुरा,राघोपुर,मुरापुरा,बिरिया,बेहटी,रौंधी,बभिया,पीपल वाली गोटिया,हंडौलिया,गोंविंदपुर और भोलापुर तमाम ऐसे गांव हैं जो टापू बन जाते हैं और जिनका सम्पर्क शहर से पूरी तरह कट जाता है। इसी तरह से बड़ी गंगा की तरफ से भूड़ा,बदरौल गनियाई,गुलाबनगर,ककोड़ा,भकोड़ा,कौआनगला आदि तमाम ऐसे गांव हैं,जिनका सम्पर्क सब तरफ से पूरी तरह से कट जाता है और ये गांव टापू की तरह बन जाते हैं तथा उस क्षेत्र की जितनी भी सड़कें और पुलिया हैं,वे सब बाढ़ में बह जाती हैं।

          मेरा आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से निवेदन है कि कचलाघाट पर एक डैम का निर्माण किया जाए और जो गांव बाढ़ से घिर जाते हैं,वहां चारे के लिए पशु तड़पते रहते हैं,जमीन और फसल बर्बाद हो जाती है,इसलिए केवल उस क्षेत्र में तटबंध बनाया जाए। आपने मुझे बोलने का मौका दिया,इसके लिए मैं आपको धन्यवाद देता हूं।

 

*SHRI C. MAHENDRAN (POLLACHI): I humbly submit my profound thanks to the Tamil Nadu Chief Minister Hon’ble Puratchi Thalaivi Amma for being given me an opportunity to be a Parliamentarian in this Hon’ble House.

          I am also thankful to the people of my Pollachi constituency for selecting me as Member of Parliament with thumbing majority, with grace and blessings of our great political mentor, the Tamil Nadu Chief Minister Hon’ble Puratchi Thalaivi Amma.

          In my Pollachi Parliament constituency nearly 92000 hectre area has under coconut cultivation.  Of which this ranks one-fourth of coconut area in Tamilnadu.

          Due to failure of South-West and North-East monsoon, water level is depleted much in wells as well as in underground water levels.  Owing to insufficient water and high cost of maintenance, coconut farmers are in crisis and face great loss in our area due to the drought condition prevailing in the coconut producing areas.  Hence, the livelihood of coconut growers has been affected very much.  The standing crops were falling every day due to the acute drought condition which were maintained by them for more than 20 years of toiling their blood and sweat with great devotion in one crop, alongwith the episode of low supportive price offered by NAFED.

          This is a great loss like death of a child after 15 to 20 years of your care and affection shown in their growth.  This is nothing but losing your own dear ones in your family.  This is the present stage of coconut growers position in my area. Very very pathetic.

          Due to the water management through drip irrigation they were able to upkeep the live trees for some days during the past 6 months which has also come to halt due to the heavy drought faced by the farmers of my constituency, especially in Gudimangalam, Pethampatti and other areas of Pollachi, Udumalpet and Madathukulam constituencies.  Nearly, 35% of the entire coconut trees of this region have been uprooted due to the fall the top of the tree and finding now alternative agriculture operation.  To keep alive the rest of the trees they were buying water in tanker lorries by paying Rs.3000 to 4000 per tanker a day for the survival of the standing tree not from further falling  which is a very high cost and they can ill afford to pay in long run.

          Moreover, the coconut cultivation yield gestation period starts ranging from 4 years to 7 years to get revenue and the use of available ground water level prudently they have to wait for long years.  Moreover uprooting of existing non yielding and drought affected trees also involves heavy cost. They need more money to spend upfront to switch over to other crop or cultivation.

          Hence, I request the Hon’ble Agriculture Minister Shri Radha Mohan Singh ji to assess the situation by sending a special team on war footage to my constituency and study the real drought situation prevailing currently and provide them with immediate financial support and protect for the livelihood of coconut growing farmers as they contribute for the GDP of our nation.

          The Central Government should come forward with immediate release of financial assistance through Coconut Development Board and rescue the battling coconut growers at this critical juncture as a helping hand and  I sincerely pray before you to save my Pollachi constituency from the drought relief.

          As per the Central norms on disaster relief, even small and marginal paddy farmers experiencing more than 50 per cent crop loss, were entitled only to Rs.2,429 per acre.  Whereas our Tamil Nadu Chief Minister Hon’ble Puratchi Thalaivi Amma has given for long term crops including coconut growers numbering 50,908 farmers and they would be given Rs.4,000 per acre.  A relief of Rs.43.35 crore had been made covering 1,08,383 acres in the last year.

          I have 100%  confidence in Shri Namo ji that he will do the best for the Agriculture welfare of Tamil Nadu to tide over the drought faced by the coconut growers of my constituency by providing suitable financial assistance to my constituency on war footage.

*SHRI S. SELVAKUMARA CHINAIYAN (ERODE) : I would like to express my views in this debate on flood and drought situation prevailing in various parts of the country.

       India is a diverse country with varied culture, many languages and different geographical climatic conditions.  In some parts we are experiencing too hot, dry and drought conditions and in some other parts our county is witnessing heavy rain and flood, rainfall, as the principal parameter, is the basis of the definition of drought. This is well known to all of us present in the House.  There is heavy rain in the Himalayan side and western parts of our country. Bihar is also facing heavy flood. The surplus water is flowing into the sea.

          In some parts of our country, there is no rain and there is shortage of water both for irrigation as well as for drinking purposes. For example, Tamil Nadu is facing heavy drought for the past two years.  In most of the places there is scarcity of drinking water and standing crops and coconut trees have dried up due to lack of water for irrigation.  Hence, our hon. Chief Minister of Tamil Nadu, Puratchi Thalaivi Amma has given drought relief assistance to the affected farmers in Tamil Nadu.

          The failure of monsoon for the past two consecutive years has caused an adverse impact on agriculture and there is scarcity of drinking water in many areas.  More than 75 per cent of minor irrigation tanks in the State have dried up.  The ground water level also has gone down in most of the districts of Tamil Nadu.  So, our leader, hon. Chief Minister Amma has taken immediate steps to provide drinking water by providing water tankers to many villages, but it is not sufficient for their daily needs.

          Deficient rainfall and failure of this year’s South West Monsoon has severely affected the standing food crops in Tamil Nadu.  My constituency Erode is experiencing less rainfall for the past 10 years.  The rainfall is decreasing with every passing year.  So, the farmers who have got crop loans from nationalized banks, are not in a position to repay their loans as they have no other source of income.  As they do not have any other means, they are unable to meet even their daily livelihood needs.  Therefore, the Central Government should evolve a contingency plan and provide immediate financial assistance to the farmers.  The previous Government had waived the entire loans of farmers.  Similarly, I would request that the present Government should also waive the loans taken by farmers from all nationalized banks and other cooperative banks.

          The hon. Finance Minister has announced in the Budget that Rs.8 lakh crore has been set apart for agriculture credit during 2014-15.  But out of this amount, loans should be given to defaulters also.  Then only all the farmers will be benefited.  Similarly, the Finance Minister has announced an Interest Subvention Scheme for short term loans at the rate of 7 per cent.  This is too high.  So, I would request the Finance Minister to reduce the rate of interest to, at least, 3 per cent considering the problems faced by the farmers.          

          Flood and drought are two faces of the same coin.  Drought hits food production mainly due to water scarcity and floods affect the national economy as the surplus water leads to destruction of crops and loss of human lives in cyclone and floods.  As a result, we are losing millions of lives and destruction of their properties. In last year, severe flood and landslide in Uttarakhand, many people lost their lives and their livestock.

          Floods create an impediment in the path of economic progress of our country.  The National Flood Policy suggests various ways to control flood in the country.  So, the Union Government should find a permanent solution to this recurring problem and take necessary steps to prevent floods in the country. Preservation and proper utilization of rain water and ground-water is essential to overcome the problem of drought.

          In Tamil Nadu, our hon. Chief Minister Puratchi Thalavi Amma had introduced rain water harvesting scheme very successfully. The present Government should take it as a role model and introduce rain water harvesting scheme throughout the country to save the ground water.

          In India, the extent of forest cover is getting reduced day-by-day as trees are cut indiscriminately either legally or illegally.  Hence, plantation of trees in the forests as well as in the plains is very essential to increase the forest cover.  The present Central Government should take strong measure to prevent illegal cutting of trees in the forests.  Our hon. Chief Minister is encouraging plantation of more trees throughout the State of Tamil Nadu.  Recently, during our Amma’s 66th birthday 66 lakhs of saplings have been planted throughout the State. Further, our Chief Minister Amma is taking severe action against those who are cutting trees illegally.

          No country can develop without adequate water because water is essential for our daily needs, agriculture and also for power generation.  The only solution to solve the problem of flood and drought is to link all the rivers in our country.  Then only, the people of our country can live happily and also our economy can grow faster.

                                     

*श्री अनुरोग सिंह ठाकुर (हमीरपुर): माननीय सांसद योगी आदित्यनाथ जी ने एक बड़े गंभीर विषय की ओर इस सदन का ध्यान आकृष्ट किया है। हमारा देश भौगोलिक दृष्टि से एक खंडप्राय देश है और लगभग हर साल हमारे देश में कहीं बाढ़ आती और कहीं सूखा पड़ता है। हर साल असम, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार जैसे राज्यों में बाढ़ का प्रकोप कहर ढहाता है तो कई राज्यों में लोग सूखे से ग्रस्त है।

        सबसे पहले मैं सूखे के बारे में अपने विचार व्यक्त करना चाहूंगा, क्योंकि इस बार अल नीनो के कारण कम बारिश और देश में सूखे के आसार हैं, हालांकि जुलाई महीने की बारिश ने काफी हद तक पानी की कमी को पूरा किया है, लेकिन फिर भी आशंका है कि देश के कई हिस्से इस बार सूखे की चपेट में आ सकते हैं। मैं कहना चाहता हूं कि हमारी सरकार के चुनकर आने के बाद, यह हमारे सामने सबसे बड़ी चुनौती है, लेकिन आदरणीय नरेन्द्रभाई मोदी की सरकार ने इस बार पहले ही देश के 500 जिलो में सूखे से निपटने की तैयारियों का जायजा लिया है, ताकि इस चुनौती से निपटा जा सके। मैं इस पहल के लिए सरकार का आभार धन्यवाद व्यक्त करता हूं, सारे संबंधित मंत्रालय जैसे कि कृषि एवं जल संसाधन मंत्रालय आपसी समन्वय के साथ काम करने में जुटे हैं, वरना पहले तो ये होता था कि मंत्रालय आपसी समन्वय की जगह, आपसी झगड़े में उलझे रहते थे, लेकिन हमारी सरकार ने समन्वय को प्राथमिकता देते हुए " सबका साथ- सबका विकास " का नारा आपसी समन्वय के लिए भी दिया है। इसलिए यह सरकार बधाई की पात्र है।

        मैं सरकार से आग्रह करना चाहता हूं कि हमें अपनी पुरानी गलतियों से सीखना चाहिए। चाहे वह आदमी हो या सरकार, हर किसी को निरंतर नई-नई चीज़ें सीखते रहना चाहिए। हमेशा लर्निंग मोड में रहना चाहिए, यह बहुत जरूरी है।

        अब बात आती है बाढ़ की, पिछले साल उत्तराखंड में आई भीषण आपदा ने हमारी आँखें खोल दी। हज़ारों लोगों की जान चली गई, आज तक पता नहीं चल पाया कि आखिर इस दुर्घटना में कितनी जानें गई। वहां की सरकार अपने कर्तव्य में बुरी तरह फेल हुई। आदरणीय नरेन्द्रभाई मोदी तब गुजरात के मुख्यमंत्री थे, उन्होंने सहायता की पेशकश की, लेकिन उत्तरखण्ड की सरकार ने उसे ऐसे नकारा जैसे कोई दुश्मन देश मदद दे रहा हो।

        हमारी सरकार का सबसे बड़ा एजेंडा है कि नदियों को जोड़ा जाये। माननीय अटल जी के समय में हमने इसकी शुरूआत की थी। लेकिन कांग्रेस सरकार ने सत्ता में आते ही इस परियोजना पर काम बंद कर दिया। अगर काम बंद नहीं होता तो पिछले 10 साल में इस परियोजना का काम काफी हद तक पूरा हो गया होता और देश के सामने आज बाढ़ और सूखे की समस्या हर साल खड़ी नहीं होती। उससे काफी हद तक निज़ात मिल जाती। लेकिन पिछली सरकार की दूरदृष्टि की कमी के कारण देश आज वहीं का वहीं खड़ा है। खैर, हमारी सरकार अब ऐसा नहीं होने देगी। हमारी सरकार नदियों को जोड़ेगी और देश के सामने हर साल खड़ी होने वाली इस विकराल समस्या का हल निकालेगी, ऐसा मुझे पूर्ण विश्वास है।

       

*श्री अर्जुन राम मेघवाल (बीकानेर)ः नियम 193 के तहत सूखा और बाढ़ से संबंधित चर्चा में निम्नांकित सुझाव ले करना चाहता हूँ।

        S.D.R.F/N.D.R.F.के Norms में वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए संशोधन की आवश्यकता है। इस सम्बंध में यथाशीघ्र राज्यों के संबंधित मंत्रियों की बैठक आयोजित कर आवश्यक संशोधनों को स्वीकृति प्रदान करें। जिससे वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप आपदा से पीड़ित व्यक्तियों को राहत मिल सके।

        देश में प्रतिवर्ष सूखे और बाढ़ की समस्या से नागरिकों को जूझना पड़ता है और करोड़ों रूपये की राशि की व्यवस्था से ठीक की जाने वाली मरम्मत हेतु खर्च होती है और अगले साल मानसून के समय फिर उसी समस्या का सामना करना पड़ता है। इस समस्या का एकमात्र स्थाई हल देश की नदियां जोड़ने के प्रोजेक्ट को गति देकर पूर्ण करना है। अतः मंत्रालय को नदी जोड़ो प्रोजेक्ट को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए।

        आपदा प्रबंधन से जुड़े हुए सामाजिक संगठनों को प्रोत्साहित करने की जरूरत है। ऐसा संगठन जो आपदा घटित होने के बाद राहत कार्य के लिए घटना स्थल पर सबसे पहले पहुंचता है और नःस्वार्थ सेवा करता है। ऐसे संगठनों को चिन्हित करने की जरूरत है और समय-समय पर इन्हें प्रोत्साहित करने की भी आवश्यकता है।

        आपदा प्रबंधन से जुड़ी हुई जो सरकारी टीम है, चाहे वह केन्द्र की हो या राज्य सरकारों की, उन्हें समय-समय पर  " मानवीय " व्यवहार विज्ञान में प्रशिक्षण देने की आवश्यकता है, जिससे उनका स्वभाव संतुलित बना रह सके और आपदा के समय शांत भाव से मानव सेवा कर सकें।

               

ऒश्री जुगल किशोर (जम्मू) :  मैं आपके माध्यम से सरकार का ध्यान इस ओर दिलाना चाहता हूं कि आज देश में किसान कहीं सूखे से परेशान हैं और आत्महत्या करने पर मजबूर हैं और उनके परिवार कहीं के नहीं रहे । इन लोगों की सहायता करने की जरूरत है और ऐसे कदम उठाने की जरूरत है कि सूखा से राहत मिले । वैसे सरकार ने नदियों को जोड़ने की योजना बना कर अच्छे कदम उठाने से आशा बढ़ी है ।

           बारिश से होने वाले नुकसान से भी लोग बड़े परेशान है । महोदय,मैं अपने लोक सभा क्षेत्र जम्मू की बात करूं तो अखनूर और परगवाल में चिनाब दरियां से बाढ़ के कारण बहुत बड़ा हिस्सा खेती वाली जमीन का बह गया है और जब भी बाढ़ आती है,तवी अखनूर तहसील के गांवों में पानी भर आता है और घरों को भी नुकसान होता है । मेरी सरकार से प्रार्थना है कि चिनाब दरिया के दोनों किनारों पर बचाव के लिए दरिया को बांधने के लिए कदम उठाएं ।

                                         

* Speech was laid on the Table     *श्रीमती संतोष अहलावत (झुंझनू)ः मैं अपने संसदीय क्षेत्र झुंझनू के बारे में माननीय मंत्री महोदय को कहना चाहती हूं कि झुंझनु जिला अर्द्धशुष्कीय क्षेत्रों में आता है। यहाँ मानसून की वर्षा औसत से भी कम होती है। यहाँ कोई ऐसी नदी नहीं है जो बारहमासी हो। जिले की एकमात्र काटली नदी है जो वर्षा जल से पोषित है। पिछले 20 वषों से काटली नदी में एक फुट पानी भी नहीं आता। आप अनुमान लगा सकते हैं कि वहां का किसान पूरी तरह से मानसून पर निर्भर है।

        मेरे जिले में कोई उद्योग-धंधा और कारखाना नहीं है। लोग अपना जीवन-यापन कृषि या पशुपालन के द्वारा ही करते हैं। इस बार वर्षा जुलाई के अंतिम सप्ताह में हुई, वह भी बहुत कम। किसान बुआई नहीं कर पाया। अब अन्न का संकट तो आयेगा ही, पशुओं के चारे का भारी संकट खड़ा हो जायेगा। पिछल 10 वर्षों से कमोवेश यही स्थिति बनी हुई है। किसान कर्ज के बोझ तले दबे जा रहे हैं। यहाँ तक कि बच्चों की अच्छी शिक्षा व जीवन-यापन का स्तर भी घटा है।

        मेरा झुंझनू जिला डार्क जोन में आ चुका है। भू-जल स्तर बहुत नीचे चला गया है। सिंचाई की छोड़िये, पीने के पानी की गंभीर समस्या बनी हुई है। एक तरफ बाढ़ की तबाही, दूसरी तरफ बूँद-बूँद को तरसते लोग।

        पूर्ववर्ती सरकार ने अनेक बार प्रस्ताव लिये और घोषणाएं की थी कि झुंझनू जिले को यमुना नहर से ताजेवाल हैंड से पानी मिलेगा। पूर्व सांसद ने यमुना नहर डाल परियोजना का शिलान्यास तक कर दिया था जो शिलालेख आज भी मौजूद है। गाँव के गाँव पलायन करने को मजबूर हैं, खेती बंजर होती जा रही है एवं कुएँ सूख रहे हैं। झुंझने जिले ने भारत की सेना को सर्वाधिक सैनिक दिये हैं। झुंझनू के रणबांकुरे देश की सीमाओं को महफूज रखने हेतु प्राणों की बाजी तक लगा देते हैं।

        अवैध खनन तथा जंगलों की कटाई तथा चारागाहों पर अतिक्रमण के कारण दिनों-दिन मानसूनी वर्षा की हालत बिगड़ती जा रही है। मेरा क्षेत्र रेतीला है जहाँ वर्षा समानान्तर नहीं होती, कम होती है अथवा नहीं भी होती है। किसानों को अकाल, ओलावृष्टि आदि का मुआवजा नहीं के बराबर मिला है जिस कारण चारे की व्यवस्था, गऊशालाएं एवं पीने के पानी की व्यवस्था झुंझनू के लिए की जाए। यमुना नहर से राजस्थान के हिस्से जो पानी आये, उसमें झुंझनू जिले के हिस्से को अतिशीघ्र दिलवाया जाए। गजट नोटिफिकेशन होने के बावजूद झुंझनू को पानी न मिलना चिंता का विषय है।

                                             

*श्री अश्विनी कुमार चौबे (बक्सर)ः मैंने नियम 193 के अंतर्गत देश में  " बाढ़ और सुखाड़ " विषय पर चर्चा हेतु अपना सुझाव दिया था, जिस पर अपना वक्तव्य सदन में पेश कर रहा हूँ।

        बाढ़ देश के विभिन्न हिस्सों में भिन्न-भिन्न प्रकार की तीव्रता के साथ आने वाली प्राकृतिक घटना है। बाढ़ की आपदा से लाखों-करोड़ों लोग प्रायः हर वर्ष तबाह एवं गृहविहीन हो जाते हैं। सचमुच सामान्य बाढ़ तो खेत के लिए लाभदायक होता है, किंतु भीषण बाढ़ की स्थिति में यह अभिशाप बन जाती है। बाढ़ के कारणों में, कम समय में अधिकाधिक तीव्र वर्षा, खराब अथवा अपर्याप्त जल निकास, गैरनियोजित जलाशय विनियमन और बाढ़ नियंत्रण संरचना का असफल होना शामिल है।

        ग्यारहवीं योजना में भारत सरकार ने बाढ़ प्रबंधन और समुद्र कटाव रोधी कार्यों के लिए राज्य सरकारों को केन्द्रीय सहायता देने के उद्देश्य से बाढ़ प्रबंधन कार्यक्रम (एफ.एम.पी.) प्रारंभ किया। एफ.एम.पी. के अंतर्गत नदी प्रबंधन, कटाव रोधन, बाढ़ नियंत्रण, जल निकासी विकास, समुद्र कटाव रोधन और आबाद क्षेत्र उपचार संबंधी कार्य शामिल हैं। बारहवीं योजना के दौरान एफ.एम.पी. के लिए कुल परिव्यय 10,000 करोड़ रूपये हैं, जिन्हें इस वर्ष योजना आयोग द्वारा और बढ़ाने की आवश्यकता है।

        10 जुलाई, 2014 की स्थिति के अनुसार देश में 85 महत्वपूर्ण जलाशयों की भंडारण क्षमता 36.493 बीसीएम है, जो इन जलाशयों की कुल वर्तमान भंडारण क्षमता का 24 प्रतिशत है। केन्द्रीय जल आयोग, देश की 85 महत्वपूर्ण जलाशयों की साप्ताहिक आधार पर भंडारण की स्थिति पर निगरानी रखता है। इन जलाशयों में 60 मेगावाट से अधिक स्थापित क्षमता युक्त पन बिजली वाले 37 जलाशय शामिल हैं। इन जलाशयों की कुल भंडारण क्षमता 155.046 बीसीएम है, जो देश में सृजित 253.383 बीसीएम अनुमानित भंडारण क्षमता का लगभग 61 प्रतिशत है।

        विशेषकर बिहार के 18 से 20 जिले प्रायः हर वर्ष बाढ़ के शिकार हो जाते हैं, जिससे काफी तबाही एवं जान-माल का नुकसान हो जाता है। वर्ष 2008 में कोशी तटबंध टूटने से करोड़ों की क्षति हुई, जिसे उस समय की हमारी एन.डी.ए. की सरकार ने राष्ट्रव्यापी सरकारी एवं गैर सरकारी सहयोग से उसका सामना किया। इस बार पुनः नेपाल की तराई में भूस्खलन होने से भारी तबाही की आशंका बनी हुई है। बिहार के आठ जिले सुपौल, सहरसा, अररिया, पूर्णियां, कटिहार, मधुबनी, नौगछिया, भागलपुर आदि इसकी चपेट में आ सकते हैं। अधवारा समूह की नदियों से नेपाल के रास्ते बाढ़ आने से प्रतिवर्ष काफी संकट का सामना करना पड़ता है। फरक्का बैराज भी बिहार के लिए हितकर सिद्ध नहीं हो रहा है। जब गंगा में काफी बाढ़ आ जाती है, वहीं अधवारा समूह (कोशी, गडक, बूढ़ी, गंडक, महानंदा) आदि के बाढ़ से उत्तर बिहार सहित मध्य बिहार के 20-22 जिले जलमग्न हो जाते हैं। फरक्का बैराज  का गेट वैसी स्थिति में बंद कर देने से भारी तबाही का सामना करना पड़ता है। अतएव केन्द्र सरकार को बिहार के हित में पुनः इस पर विचार करने की आवश्यकता है।

        साथ ही, उत्तर बंगाल में मालदह स्थित फरक्का बैराज के दो गेट बुरी तरह से खराब होने की वजह से बांग्लादेश की पदमा नदी में जरूरत से अधिक जल चला जा रहा है, जिससे कोलकाता समेत राज्य के विभिन्न हिस्सों में जल को लेकर गंभीर समस्या खड़ी हो सकती है। फरवरी, 2014 में 82801 क्यूसेक जल बांग्लादेश में चला गया है। जबकि 35000 क्यूसेक जल बांग्लादेश को दिये जाने पर समझौता है। इससे जलस्तर दो मीटर नीचे चला गया है।

        बिहार में इन्द्रपुरी जलाशय योजना बाँध सागर इकरारनामा के तहत बिहार को आवंटित जल का उपयोग 140 वर्षों से अधिक पुरानी सोन नहर प्रणाली के लिए प्रस्तावित है। परंतु इस जलाशय का संचालन इस प्रणाली के तहत आवश्यकतानुसार नहीं होता है। सन् 1982 में केन्द्रीय जल संसाधन मंत्री की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई बैठक में सोन नदी पर इन्द्रपुरी बैराज में जल संचयक को स्थायित्व प्रदान करने हेतु एक जलाशय का निर्माण करने का निर्णय लिया गया था। वर्ष 1987 में   " कदवन जलाशय  योजना " के नाम से केन्द्रीय जल आयोग में समर्पित इस योजना में जल उपलब्धता को स्थायित्व प्रदान करने हेतु जल संचयन के साथ 450 मेगावाट जल विद्युत उत्पादन का भी प्रावधान है। किंतु यह योजना वर्षों से अधर में लटकी हुई है। वर्तमान में इन्द्रपुरी जलाशय में पानी के अभाव में बक्सर, शाहाबाद के अन्य जिलों सहित औरंगाबाद, पटना तक नहर के अंतिम छोर में पानी नहीं जाने के कारण लाखों किसान पटवन के अभाव में सूखा का संकट झेल रहे हैं। धान का कटोरा कहे जाने वाले इस क्षेत्र के किसान कटोरा लेकर भीख मांगने के लिए विवश हो गए हैं। बिहार के 25 जिलों के किसानों को एक बार फिर सूखे की चिंता सताने लगी है।

        गौरतलब है कि राज्य में इस वर्ष जुलाई माह तक मात्र 452.4 मि.मी. के विरूद्ध 439.4 मि.मी. बारिश हुई है जो सामान्य से विभिन्न जगहों में 19 से 25 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गयी है। बक्सर जिला में अभी तक 15 प्रतिशत ही रोपा हो पाया है, वह भी जल अभाव के कारण बिचड़ा सूख रहा है। इधर मानसून की बेरूखी से किसानों के सामने विकट समस्या उत्पन्न हो गयी है। मलइ बैराज में बिहार सरकार ने कार्य प्रारंभ नहीं किया है जिससे जनाक्रोश उभर रहा है।

        बिहार के 25 जिलो में जहां सूखे की स्थिति है वहीं सरयू नदी में जल स्तर बढ़ने से सारण के कई गांवों में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। नेपाल में हुई भारी बारिश और बैराज से पानी छोड़ने के कारण गोपालगंज के एक दर्जन से भी अधिक गांव बाढ़ में घिर गये हैं, जिससे हज़ारों एकड़ गन्ने और मक्का की फसल बर्बाद हो गई।

        अतः केन्द्रीय सरकार सम्पूर्ण देश में बाढ़ एवं सुखाड़ की समस्याओं से निपटने के लिए शीघ्र ही एक ठोस कार्य योजना बनाकर क्रियान्वयन हेतु राज्यों को भी निर्देशित करे। साथ ही, इन्द्रपुरी जलाशय में पानी उपलब्ध कराने, चिरलम्बित कदवन जलाशय योजना का शीघ्र निर्माण करने, बक्सर से लेकर भागलपुर तक सैंकड़ों स्थानों पर कटाव के बचाव हेतु सभी बांधों की सुरक्षा तथा बक्सर कोइलवर तटबंध की पूर्णरूपेण मरम्मत सहित सड़क निर्माण की दिशा में अग्रतर कार्रवाई सुनिश्चित करें। गंगा के कटाव से प्राचीन  " बक्सर किला " की सुरक्षा हेतु अविलम्ब कारगर कदम उठाये अन्यथा पूरा बक्सर शहर सहित सैंकड़ों गांव गंगा की गोद में समा जायेंगे।

                             

कृषि मंत्री (श्री राधा मोहन सिंह) : सम्माननीय सभापति महोदय,मैं सबसे पहले माननीय योगी जी को बधाई देना चाहूंगा कि देश के अंदर एक जलते हुए सवाल को बुझाने के लिए उन्होंने इस चर्चा को उठाया और इस चर्चा में जिन सदस्यों ने भाग लिया,निश्चित रूप से उन्होंने जो सुझाव दिये हैं,उन्होंने जो मुद्दे उठाये हैं,निश्चित रुप से जब आगे योजनाओं को निर्माण होगा तो उनके सुझावों का उसमें बहुत बड़ा योगदान होगा,इसलिए मैं उन्हें भी हृदय से बधाई देता हूं। ...(व्यवधान)

श्री निनोंग इरिंग (अरुणाचल पूर्व) : मंत्री जी,इसमें सभी शामिल हैं।  ...(व्यवधान)

श्री राधा मोहन सिंह : हां,सभी माननीय सदस्य शामिल हैं। मैं हिन्दी में बोल रहा हूं। आप तो हिंदी समझते हैं।...(व्यवधान)हम यह मानते हैं कि हम हिंदी में बोल रहे हैं तो कहीं न कहीं से यह लगाने के बाद उनकी भाषा में भी आवाज पहुंच जायेगी,ऐसा मेरा अनुभव है।

श्री निनोंग इरिंग  : हम हिंदी समझते हैं,यहां जितने भी सांसद हैं,सभी इसमें शामिल हैं और काफी लोगों ने नोटिस भी दिया है।...(व्यवधान)

श्री राधा मोहन सिंह  : मुझे लगा कि आप ऐसी बात बोल रहे हैं,जो हम नहीं बोल पाये हैं और सुनने वाले को लग रहा है कि मैंने जो कहा था,उसी बात को आप बार-बार बोल रहे हैं।

          महोदय,सबसे पहले जो स्थिति है,वह मैं सदन के सामने रखना चाहता हूं कि अप्रैल महीने में इस वर्ष की शुरूआत में मौसम विज्ञान विभाग ने जो इस वर्ष के लिए संभावना जाहिर की थी कि 95 प्रतिशत वर्षा होने की संभावना है। फिर जून के महीने में नौ जून को मौसम विज्ञान ने यह बताया कि 93 प्रतिशत वर्षा होने की संभावना है। फिर आगे उसने बताया कि जुलाई महीने में 93 प्रतिशत और अगस्त के दौरान 96 प्रतिशत बारिश होने की संभावना है। जून में जो आंकड़े आए थे,उस समय माइनस 43 परसैन्ट कम बारिश हुई थी। 21 जुलाई को माइनस 22, 1 अगस्त को माइनस 21 और 3 अगस्त को माइनस 22 बारिश हुई थी। हम देख रहे हैं कि जून में जो स्थिति थी, 31 जुलाई, 1 और 2 अगस्त आते-आते मौसम में भारी परिवर्तन हुआ है।

          यहां जो मौसम के 36 उपप्रभाग हैं,उनमें अभी तक 16 में सामान्य वर्षा हुई है, 18 में सामान्य से कम वर्षा हुई है। दो प्रभागों में नाम मात्र की वर्षा हुई है। देश के अंदर जो 85 प्रमुख जलाशय हैं,उनमें भाण्डारण की स्थिति 14 जून के अनुसार 36.87 मिलियन क्यूसेक मीटर थी। फिर 27 जुलाई के अनुसार देश भर में 85 प्रमुख जलाशयों में भण्डारण की स्थिति 54.05 बिलियन क्यूसिक मीटर थी। फिर 31 जुलाई, 2014 के अनुसार देश भर के 85 जलाशयों में भण्डारण की स्थिति 70.93 प्रतिशत थी। यानि 31 जुलाई आते-आते इसमें भी काफी सुधार हुआ है। दस वर्षों की औसत का 113 प्रतिशत इसमें बताया गया है। बुवाई की जो स्थिति थी, 1 अगस्त, 1914 के अनुसार,विभिन्न फसलों की बुवाई के तहत, 79 मिनियन हैक्टेयर को समान रूप से कवर होना चाहिए था। तथापि इस वर्ष लगभग इस दिन तक 70 मिलियन हैक्टेयर को विभिन्न फसलों के तहत कवर किया गया है। सामान्य की तुलना में चावल 19 लाख हैक्टेयर,दलहन 14 लाख हैक्टेयर,मोटा अनाज 41 लाख हैक्टेयर,तिलहन 11 लाख हैक्टेयर और कपास ढाई लाख हैक्टेयर है,जिसमें क्षेत्र में कवरेज में कमी की रिपोर्ट की गई है। मानसून में देरी और धीमी प्रगति के कारण,फसलों की बुवाई में कमी हुई है। एग्रीकल्चर मिनिस्ट्री के दस ज्वाइंट सैक्रेट्री हैं,उन्हीं के स्तर के जो अन्य पदाधिकारी है,जिनको राज्यों की जिम्मेवारी दी गई है,प्रति दिन राज्य के कृषि सचिवों से संपर्क रखते हैं और वीकली वीडियों कॉफ्रेंसिंग भी उनकी होती है। प्रति दिन की बुवाई की स्थिति का जायजा लिया जाता है। आकस्मिक फसल के लिए अल्प मध्यावधि किस्म के लगभग 84.5 लाख क्विंटल बीज अपने देश के विभिन्न राज्यों के अंदर उपलब्ध हैं। जो 28.27 मिलियन हैक्टेयर के अनुमानित क्षेत्र को कवर कर सकता है। खाद्यान्न का जो स्टॉक है,वह लगभग 100 लाख मिट्रिक टन चावल और 170 लाख मिट्रिक टन गेहूं के बफर नार्म्स की तुलना में केंद्रीय पूल में दिनांक 15.07.2014 को 391 लाख मीट्रिक टन गेहूं और 201 लाख मीट्रिक टन चावल उपलब्ध था। सरकार के पास उपलब्ध सूचना के अनुसार अभी तक किसी राज्य से यह सूचना नहीं आई है कि इस राज्य का यह इलाका ड्रॉट है या ये डिस्ट्रिक्ट ड्रॉट घोषित है। ऐसी घोषणा कहीं से नहीं आई है। सूखे के कारण आपातकालीन प्रबंधन और नवीनीकरण उपायों की शुरूआत संबंधित राज्य सरकारों द्वारा की जाती है। कृषि मंत्रालय बारीकी से स्थिति की निगरानी करता है तथा राज्यों को आवश्यक सहायता और सलाह मुहैया कराता है। ...(व्यवधान)

SHRI D.K. SURESH(BANGALORE RURAL): Sir, Karnataka Government has already requested for relief because drought is there.… (Interruptions)

HON. CHAIRPERSON : Hon. Minister, please continue.

… (Interruptions)

SHRI D.K. SURESH :  In Karnataka, we are facing drought. Already, our Chief Minister has written about it to the Govt. of India.  15 districts in Karnataka are affected by draught including my Bangalore Rural constituency…(Interruptions)

HON. CHAIRPERSON: After the reply, questions can be asked. Let him reply now.

… (Interruptions)

HON. CHAIRPERSON: Hon. Minister, you can respond to clarifications after your reply. After your reply, any hon. Member can ask question.

श्री राधा मोहन सिंह : यह राज्य सरकार की जिम्मेवारी है। बावजूद इसके यदि कहीं सूखाग्रस्त क्षेत्र घोषित होता है तो फिर यहां से भी पूछने की जरूरत नहीं है क्योंकि राज्यों के अंदर एसडीआरएफ फण्ड के तहत पर्याप्त पैसा मौजूद है। यदि स्थिति गंभीर बनती है तो राज्य सरकार सूचना देती हैं। फिर यहां से हमारी टीम जाती है और एक हाई लेवल कमेटी है, उसमें रिपोर्ट आने के बाद हम एनडीआरएफ फण्ड से उनकी पयाप्त सहायता करते हैं।  सामान्यतः यह प्रक्रिया है,किन्तु इतनी जो चर्चा हुई है,चार दिन चर्चा हुई है और चार दिन तक...(व्यवधान)

श्री जगदम्बिका पाल (डुमरियागंज): क्या किसी स्टेट ने रिपोर्ट भेजी है?

श्री राधा मोहन सिंह : अभी तक सूखाग्रस्त घोषित करके किसी भी जिले से, किसी भी एरिया से किसी सरकार ने कोई रिपोर्ट नहीं भेजी है। आप मेरी बात सुनिये। यह तो हमने प्रक्रिया बतायी है। इतनी जो चर्चा हुई, चार दिन चर्चा हुई और 66 से ज्यादा लोगों ने इस बहस में भाग लिया, इसका लाभ हुआ है। इसका लाभ यह हुआ कि जो रिपोर्ट हमने पढ़ी है और जो हम सब भाषण कर रहे थे, ये जो 36 प्रभाग हैं या 60 डिविजन हैं, ये औसत अनुमान देते हैं। लेकिन जब यहां माननीय सदस्य बात बताते हैं तो उनके जिले की क्या स्थिति है, वे उस बारे में बताते हैं। सही चित्र तब पता चलता है, जब माननीय सदस्य यहां अपने इलाके की बात कहते हैं। जो प्रभाग की रिपोर्ट है, जो डिविजन की रिपोर्ट्स हैं, अब एक डिविजन में पांच-छह राज्य हैं, अब उसका वर्षा का औसत जब हम बोलते हैं तो किसी जिले या खास एरिया का पता नहीं चलता है। जिस दिन यहां पर चर्चा शुरू हुई, हमने प्रधानमंत्री जी से बातचीत की।...(व्यवधान)मैं अपनी बात बोलूंगा,मैं आपकी बात नहीं बोलूंगा। आप जो चाहते हैं,वह मैं नहीं बोलूंगा।...(व्यवधान)आप मेरी बात सुनिये। जिस दिन चर्चा शुरू हुई,आज 5वां दिन है और चार दिन इस पर चर्चा हुई है,चार दिन बहस हुई है। मैंने प्रधानमंत्री जी से बातचीत की।...(व्यवधान)जितनी देर आप ऐसा करते रहेंगे,उतनी देर मैं बोलूंगा। इसलिए आप चुप रहिये। मैंने उनके सामने चित्र बताया कि कई ऐसे जिले हैं,कई एरिया ऐसे हैं,जहां अभी सूखा है और उसको कोई राजसहायता मिलनी चाहिए।...(व्यवधान)उनसे चर्चा होने के बाद यह बात आयी कि एक विशेष सहायता उन इलाकों को दी जाये, जिन इलाकों में सूखे की स्थिति बन गयी है, भले रिपोर्ट न आयी हो। तो कैबिनेट में एक प्रस्ताव आया कि सूखा से जो परिस्थितियां उत्पन्न होती हैं यानी वर्षा की कमी के कारण जो उत्पादन प्रभावित हो रहा है, जो फसल प्रभावित हो रही है, उसको कैसे बचाया जाये? इसके लिए जो प्रावधान किये गये हैं, मैं उसकी जानकारी निश्चित रूप से आपको देना चाहूंगा। पहले तो हमने तय किया है और आज ही पत्र सभी राज्य सरकारों को, चीफ सेक्रेटरीज को भेजा है कि हमने खरीफ 2014 हेतु डीजल राजसहायता स्कीम आज से लागू की है। सभी चीफ सेक्रेटरीज को आज हमने यह पत्र भेजा है। यह स्कीम उन जिलों और क्षेत्रों पर लागू होगी, जहां 15 जुलाई 2014 की स्थिति के अनुसार वर्षा की कमी 50 प्रतिशत से अधिक है अथवा उन तालुका, जिलों पर लागू होगी, जिन्हें उनकी राज्य सरकारों, केन्द्र शासित प्रशासकों द्वारा सूखा प्रभावित क्षेत्र घोषित किया गया है। दोनों बातें हैं, यदि सूखा प्रभावित क्षेत्र घोषित करेगा तो वहां भी और न भी घोषित करेगा तो भी यह स्कीम वहां लागू होगी। किसी खास इलाके में अभी 15 दिन लगातार वर्षा 50 प्रतिशत से कम होती है तो हम उनको यह राजसहायता देंगे। 15 जुलाई से 30 सितम्बर तक। सूखाग्रस्त घोषित नहीं करने पर भी राजसहायता देंगे, यदि किसी खास इलाके में यह स्थिति है तो उनको हम राजसहायता देंगे। फिर दूसरा कि जैसे कहीं बुआई हुई, बुआई हुई और फिर सूखे के कारण वह समाप्त हो गयी तो बीज पर जो हम सहायता देते हैं, उस सहायता की राशि को हमने 50 परसेंट बढ़ा दिया है। जो विभिन्न माध्यमों से, विभिन्न स्कीमों के तहत जो बीज पर हम राजसहायता देते हैं, उसमें 50 प्रतिशत वृद्धि की घोषणा की है, भले सूखा की रिपोर्ट हुई हो या नहीं। 

          लेकिन यदि बीज सूख रहा है,रोपनी की और बीज सूख गया तो हम बीज पर राजसहायता देंगे। तीसरा जो हमने किया है कि समन्वित बागवानी के विकास के लिए हमारा जो मिशन है,उसके लिए हमने भारी धनराशि प्रिकॉशन के लिए निकाली है कि यदि सूखा घोषित होता है तो उसके बाद जो बागवानी नष्ट होती है,उनके लिए भी हमने 700 करोड़ रुपये का प्रावधान अलग से करके रखा है ताकि उसका हम पुनर्जीवन करेंगे। किसानों को उसका प्रति एकड़ कितना देंगे। ...(व्यवधान)

          फिर इसके बाद आर.के.वाई. के तहत अतिरिक्त चारा उत्पादन कार्यक्रम के लिए हमारी योजना पहले से चल रही है,इसके लिए सूखा समन कार्यक्रम के लिए भी सौ करोड़ रुपये की राशि निर्गत की गई है और राज्य सरकारों को कहा गया है कि जो कुछ मापदंड हैं,उनके मुताबिक यह सहायता भी आपको दी जाएगी। तीन या चार प्रकार की व्यवस्था हमने इसमें की है। एक बागवानी के लिए,एक चारा विकास के लिए,बीज के लिए और डीज़ल पर राजसहायता के लिए। चार प्रकार की सहायता है जिसमें सिर्फ एक बागवानी मिशन है कि जो सूखाग्रस्त क्षेत्र घोषित होने के बाद मिलेगा नहीं तो बाकी योजनाओं में हमने छूट दी है कि सूखाग्रस्त घोषित न भी हो,फिर भी यदि उन नॉर्म्स के अंदर आता है तो हम उनको राजसहायता देंगे।

          जब मैं प्रधान मंत्री जी की चर्चा कर रहा था तो कुछ लोगों को ठीक नहीं लग रहा था। शायद उनको पता नहीं है कि जब पूरे देश में कृषि की विकास दर 4 प्रतिशत से ऊपर नहीं गई थी,उस समय वे जिस राज्य का प्रबंधन देख रहे थे,वहाँ की विकास दर 11 प्रतिशत थी। किसान की कितनी चिन्ता करने वाले वे हैं,इसका अंदाज़ा आपको लगना चाहिए। ...(व्यवधान)

          मैं आज इस भाव से खड़ा हुआ हूँ कि मैं भारत सरकार का कृषि मंत्री हूँ,किसी दल का नेता नहीं हूँ। किसान को यदि राजनीति के साथ जोड़ेंगे तो देश का बड़ा नुकसान होगा। यदि हम सब राजनीति करते हैं तो मैं कहना चाहता हूँ कि लोक सभा के चुनाव में अभी पाँच वर्ष हैं,राजनीति पाँचवें वर्ष में करें। चार वर्ष कम से कम देश का किसान कैसे मज़बूत हो,गाँव कैसे मज़बूत हो इसकी बात करें। जितने सदस्यों ने बात की है,जितने सदस्यों ने चर्चा में भाग लिया है,राजनीति की चर्चा बहुत कम लोगों ने की है। दो-तीन लोग ही मुश्किल से पूरी चर्चा में ऐसे मिले,मैं नाम नहीं लेना चाहता हूँ और जो लोग भी इसमें राजनीति की चर्चा करते हैं,मैं समझता हूँ कि उनको किसान की चिन्ता नहीं है,अपनी राजनीति की चिन्ता है। ...(व्यवधान)

           महोदय,अधिक माननीय सदस्य यह चर्चा कर रहे थे कि यह नहीं हुआ,वह नहीं हुआ। वे भूतकाल की चर्चा कर रहे थे। बोलने के क्रम में शायद ध्यान में नहीं रहता है,हमारे एक मित्र ने कहा कि पिछले दस-बीस वर्षों में नए किस्म के बीजों के लिए कोई ऐसी रिसर्च नहीं हुई कि नए किस्म के बीज प्राप्त हों। मैं बताना चाहता हूँ कि पिछले पाँच वर्ष के अंदर 566 किस्म के नए बीज किसानों के बीच गए हैं। यह बोलने वाले सदस्य सत्ताधारी दल के नहीं थे,लेकिन राजनीति के कारण वे बोल गए। वे भूल गए कि पिछले पाँच साल के अंदर किस व्यक्ति ने इस मंत्रालय को देखा है,इस प्रकार की मॉनीटरिंग की है कि 566 किस्म के नए बीजों का ईजाद हुआ है जो आज किसानों के पास है,लैब टु लैण्ड पहुँचा है। इसी प्रकार जब असम की चर्चा हो रही थी तो यह कहा गया कि सिंचाई की लंबी योजनाओं का कोई प्रबंधन हमारे यहाँ नहीं हुआ। जिस पैमाने पर होना चाहिए,उस पैमाने पर नहीं हुआ,इससे हम सहमत हैं,लेकिन हुआ है। इस सरकार ने तय किया है और हमारे प्रधानमंत्री जी ने साफ़-साफ़ कहा है कि जो लम्बित परियोजनाएं हैं,उनको हम प्राथमिकता से लेंगे। ऐसा हमारे प्रधानमंत्री जी ने ऐलान किया है। हमारे माननीय सदस्य जगदम्बिका पाल जी ने कहा था कि कन्टीजेन्सी प्लान के विषय में जरूर बताइए और इसमें संसद की क्या भूमिका होगी,यह भी बताइए। मैं यह बताना चाहता हूं कि कन्टीजेन्सी प्लान मवेशियों एवं खेती से सम्बन्धित जानकारी देते हैं। जिसमें कुल रक़बा,सिंचित और असिंचित फसलवार ब्यौरा,मिट्टी के प्रकार और उस जिले में किसानों की संख्या,लघु-सीमान्त किसान,उस जिले की कृषि का पूरा ब्यौरा देते हैं। यह तैयारी सेन्ट्रल रिसर्च इन्स्टीटय़ूट फोर ड्राई लैण्ड एग्रीकल्चर,हैदराबाद द्वारा राज्य सरकार के जो कृषि सचिव होते हैं,उनके माध्यम से और जो एग्रीकल्चर के विश्वविद्यालय हैं,उनके सहयोग से तैयार किया जाता है। उसमें इस प्लान के तहत जिलों को बताया जाता है कि मानसून की स्थिति सामान्य है तो किस प्रकृति में कौन सी फसल और कौन सी पद्धति अपनानी है। मानसून यदि समय से पहले आता है,देरी से आता है,एक सप्ताह या चार सप्ताह बाद आता है तो उस स्थिति में किस प्रकृति की कौन सी फसल और किस प्रकार की विधि का इस्तेमाल करें। उस जिले का कन्टीजेन्सी प्लान बना कर उस जिले को उपलब्ध कराते हैं और वहां के कृषि विभाग के जो अधिकारी हैं,किसानों को जागरूक करते हैं और मानसून से क्षति होने की जो सम्भावना होती है,उसके शमन का इससे रास्ता निकलता है।...(व्यवधान)हम यह जिले के कृषि पदाधिकारी को उपलब्ध कराते हैं। मैं इसी चर्चा पर आ रहा हूं कि हम लोगों को भी अपने जिलों में जाकर चिंता करें,सदन में सिर्फ चिंता करने से इसका समाधान नहीं होने वाला है। यह अभी तक 548 जिलों को उपलब्ध कराया जा चुका है। 641 जिलों में से सौ जिले अर्बन एरिया में आते हैं। जितने भी रूरल डिस्ट्रिक्ट्स हैं,वहां प्लान मुहैया कराया जा चुका है।

          महोदय,धर्मेन्द्र जी यहां नहीं हैं। वह चिंता कर रहे थे कि लोंग टर्म अरेन्जमेन्ट होना चाहिए,वह कैसे होगा?यदि बुंदेलखण्ड जैसा एरिया है और वहां के लिए एक हजार रुपया दिया जाता है,लेकिन वह खर्च नहीं होता है। उसका स्थायी उपाय किया जाना चाहिए। राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अन्तर्गत किसी राज्य को पैसा दिया जाता है,लेकिन वह खर्च नहीं होता है। उन्होंने कहा था कि कृषि के लिए दीर्घकालीन उपाय होना चाहिए। लेकिन दीर्घकालीन उपाय के लिए जो पैसे जाते हैं,वह ठीक से खर्च नहीं होते हैं। इस पर भी हमें चिंता करनी होगी।...(व्यवधान)उसका विवरण भी हम आपको भेज देंगे,उसका राज्यवार विवरण हमारे पास है।

          महोदय,हमारी सरकार ने आधुनिक गोदामों के निर्माण के लिए पांच हजार करोड़ रुपये का बजट में प्रावधान किया है। खाद्य सुरक्षा की दृष्टि से यह अत्यन्त जरूरी क़दम सरकार ने उठाया है। खाद्य भण्डारण की जो स्थिति है,उसको कई सदस्यों ने उठाया था। योजना आयोग ने अनुमान लगाया है कि 12वीं पंचवर्षीय योजना के अंत तक 33 बिलियन मीट्रिक टन के भण्डारण का अंतर रहेगा। ग्रामीण भण्डारण के लिए 12वीं योजना के तहत निर्धारित लक्ष्य 23 मिलियन मीट्रिक टन है। इसमें से 21 मीलियन मीट्रिक टन अभी तक स्वीकृत किया गया है। योजना आयोग ने कहा है कि इस पंचवर्षीय योजना में 30 मिलियन मीट्रिक टन बनाना चाहिए,उसमें से 21 मिलियन मीट्रिक टन हमारे मंत्रालय के द्वारा सैंक्शन हो चुका है। कुल-मिलाकर कमी है,लेकिन इस दिशा में तेजी से काम हो रहा है,यह मैं सदन को बताना चाहता हूं। महोदय,आज़ादी के 66 वर्षों के बाद भी दिल्ली के पूसा में एक राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान परिषद ही है। कृषि में आज नयी-नयी तकनीक़ आ रही है,नए-नए बीजों का ईज़ाद हो रहा है।...(व्यवधान)

          यह सवाल बिहार का नहीं हो रहा है।...(व्यवधान)यह सवाल कृषि का हो रहा है कि देश की आज़ादी के बाद सिर्फ़ एक राष्ट्रीय कृषि विज्ञान अनुसंधान परिषद है जो दिल्ली में है। दिल्ली में पूसा है और यह दिल्ली के मध्य में है। जो माननीय सदस्य अभी पूछ रहे हैं,वे शाम में वहां टहलने भी जाते हैं।

          महोदय,सरकार ने यह घोषणा की कि एक झारखण्ड में और एक असम में हम इसी प्रकार की संस्था की स्थापना करेंगे। यदि इसमें राजनीति होती तो यह गुजरात और राजस्थान या भोपाल में होता। कृषि के मामले में हमारी सरकार राजनीति नहीं कर रही है,इसका सबसे बड़ा उदाहरण आपके सामने है। पूर्वोत्तर के इलाके में ऑर्गेनिक खेती को बढ़ावा देने का हम ने निर्णय किया है।...(व्यवधान)यह चुनाव की बात नहीं है। ...(व्यवधान)

          हमारी सरकार ने दो हॉर्टीकल्चर यूनिवर्सिटी और दो एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी -एक तेलंगाना में और एक आंध्र प्रदेश में -बनाने का निर्णय किया है। जब मैं हैदराबाद गया था तो इस बात का विचार नहीं किया कि कहां किसकी सरकार है। तेलंगाना के मुख्य मंत्री ने कहा कि हमारे यहां जो हॉर्टीकल्चर यूनिवर्सिटी थी,वह आंध्र प्रदेश में चली गयी है और आंध्र प्रदेश के मुख्य मंत्री जी ने कहा कि हमारे यहां जो एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी थी,वह तेलंगाना के अंदर चली गयी है। मैंने प्रधान मंत्री जी से बातचीत की। यह आपको समझने के लिए काफी है कि प्रधान मंत्री जी ने कहा कि यदि तेलंगाना में हॉर्टीकल्चर यूनिवर्सिटी नहीं है तो एक हॉर्टीकल्चर यूनिवर्सिटी वहां खुलेगी और यदि आंध्र प्रदेश में एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी नहीं है तो वहां एक एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी की स्थापना होगी। आप इस दृष्टि को समझने की कोशिश कीजिए।

          महोदय,अगर उस से भी आगे चलेंगे तो हरियाणा एक राज्य है जो कृषि प्रधान राज्य है। यहां कंक्रीट के जंगल बसाए जा रहे हैं। पहली बार यह चिंता की गयी है कि हरियाणा के अंदर हॉर्टीकल्चर क्षेत्र में बढ़ने की अपार संभावनाएं हैं। इसलिए वहां पर एक हॉर्टीकल्चर यूनिवर्सिटी की स्थापना की जाए। हम ने कृषि की चिंता की है,किसान की चिंता की है,राजनीति की चिंता नहीं की है।

          महोदय,किसानों के लिए 24 घंटे किसान टीवी चैनलों की बहुत पुरानी मांग थी। उसको भी सरकार ने मानी है।

          महोदय,हम लोग गांवों में रहते हैं और गांव के अंदर जो लैंडलेस किसान हैं,उनकी चिंता आज तक नहीं की गयी। पहली बार किसी सरकार ने चिंता की है और पांच लाख संयुक्त कृषक समूहों को वित्तपोषित करने का प्रस्ताव किया है। मनरेगा कार्य को विशेष रूप से कृषि कार्य के संपदा निर्माण में जोड़ा जाएगा। पक्के एवं स्थायी कार्यक्रम कराए जाएंगे।...(व्यवधान)

          मैं पंजाब के बारे में भी बोलूंगा।...(व्यवधान)

          महोदय,आज क्वैश्चन नं. 2 जलवायु परिवर्तन पर था। उसमें किसी माननीय सदस्य ने पूरक प्रश्न नहीं पूछा। लेकिन चर्चा में अधिकतर सदस्यों ने जलवायु परिवर्तन पर चिंता व्यक्त की। जलवायु परिवर्तन की जो परिस्थितियां है,इसके कारण हमारे उत्पादन पर असर पड़ रहा है। अगर एक डिग्री तापमान बढ़ता है तो लाखों टन का उत्पादन कम हो जाता है।

          महोदय,इस बारहवीं पंचवर्षीय योजना में इस पर 600 करोड़ रुपये खर्च करने का प्रावधान किया गया है ताकि हम जलवायु परिवर्तन के प्रभाव से खेती को बचाने के लिए कुछ कारगर उपाय कर सकें। इसके लिए प्रथम वर्ष में 70 करोड़ रुपये,दूसरे वर्ष में 75 करोड़ रुपये,और वर्तमान वित्तीय वर्ष में 100 करोड़ रुपये खर्च करने का प्रावधान है। पिछले कुछ वर्षों से फसल एवं पशुधन उत्पादन में जलवायु परिवर्तन से निबटने में किसानों की सहायता हो सके,इसलिए 130 जिलों में किसानों के बीच काम चल रहा है। सौ जिलों में जलवायु जोखिम प्रबंधन समितियों एवं कस्टम हॉयरिंग केन्द्रों की स्थापना की गई है। लेकिन इस बार जो बजट आया है,उसमें एक सौ करोड़ रुपए अतिरिक्त इस वर्ष के लिए माननीय वित्त मंत्री जी ने क्लाईमेट चेंज के महत्व को समझते हुए किसान के हित में यह बहुत बड़ा काम किया,इसलिए मैं सरकार को बधाई देना चाहता हूं। किसानों को उनका उचित मूल्य मिले,यह आवश्यक है। इसकी चिन्ता आज बहुत हो रही है,पहले भी होनी चाहिए थी। इस संबंध में मैं माननीय वित्त मंत्री जी को जरूर बधाई देना चाहूंगा कि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिए राष्ट्रीय बाजार स्थापित करने की दिशा में सरकार के प्रयासों की बजट में माननीय वित्त मंत्री जी ने विस्तार से चर्चा की है। इसमें तेजी लाने के लिए राज्य सरकारों के साथ भी घनिष्ठता स्थापित करके इस काम को ओर आगे बढ़ाया जाएगा। यह विषय मेरा नहीं है,लेकिन गांवों में गरीब रहते हैं,उनके पास जीविका के साधन नहीं हैं। हम सब को पता है कि आजीविका मिशन जो पहले डेढ़ सौ जिलों में ही चल रहा था। इस पर काफी चर्चा हुई है कि गांव के लोग गरीब बेरोजगार हैं,उनके पास काम नहीं है। पहले जो आजीविका मिशन केवल डेढ़ सौ जिलों में चलाया जा रहा था,उसकी संख्या बढ़ा कर इस बार ढाई सौ जिलों में कर दी गई है। यह विषय मेरा नहीं है,लेकिन गांवों से जुड़ा हुआ है,गांव के गरीब और किसान से जुड़ा हुआ यह मामला है। कृषि बीमा योजना के संबंध में हमने प्रश्न-काल में बताया था,यह योजना कब शुरू हुई। इस देश में यह सन् 2000 में प्रारम्भ हुई। अब 2000 में इस देश की बागडोर जिनके हाथ में थी,निश्चित रूप से उन्होंने किसान की चिन्ता की। उसके बाद बीच में एक-दो पॉयलट योजना भी शुरू की गई। लेकिन 2013-14 में एक नयी बीमा योजना आई,जब नयी बीमा योजना आई तो फिर कई राज्यों ने इसका विरोध किया। उन्होंने कहा कि इसमें किसान पर प्रीमियम का भार ज्यादा है,हम इसको लागू नहीं करेंगे। हमने उनको छूट दी। उनसे मेरी बात हुई,उसमें कई मुख्य मंत्री और कृषि मंत्री आए थे। उनसे कहा कि आप सब सुझाव दें। मैंने 7 जुलाई को सभी माननीय मुख्य मंत्रियों को पत्र लिखा है। अगले सप्ताह में हम सभी कृषि सचिवों की बैठक बुलाने वाले हैं। निश्चित रूप से कृषि बीमा योजना के अंदर बहुत विसंगतियां हैं,उनको हम अपने गांव में भोग रहे हैं। उनको दूर करने का सुझाव हम राज्य सरकारों से भी ले रहे हैं और आपसे भी लेना चाहेंगे। निश्चित रूप से ऐसी योजना बने,जो किसानों के लिए हितकारी हो।

          सभापति महोदय,मैं आपके माध्यम से सदन में कहना चाहता हूं कि खेतों के छोटे होते और खेती की अन्य जरूरतों को मद्देनजर रखते हुए एक सौ करोड़ रुपए की लागत से एग्रीटेक इफ्रास्ट्रक्चर फंड बनाने का सरकार ने एलान किया,यह भी कृषि और किसान को काफी बल प्रदान करने वाली योजना मिलेगी। हमारे प्रधानमंत्री,श्री नरेन्द्र भाई मोदी दस वर्षों तक एक राज्य के मुखिया थे। ...(व्यवधान)दस वर्षों तक उन्होंने वहां जो काम किया,कृषि और किसान को प्राथमिकता में रखा। वहां भी और प्रधान मंत्री बनने के बाद भी उन्होंने साफ-साफ कहा कि गांव और किसान को बिना मजबूत बनाए देश को मजबूत नहीं बनाया जा सकता। ...(व्यवधान)

          मेरे कुछ विषय छूट गए थे,बाढ़ की चिन्ता की थी। कोसी के बाढ़ की चिन्ता इन्होंने की है। हमारे कुछ मित्रों ने कोसी के बाढ़ की चिन्ता की है। मैं उनको बताना चाहता हूं कि कोसी से प्रभावित होने वाले जितने जिले हैं,उन जिलों के अंदर एनटीआरएफ की टीम परसों रात को पहुंच गई। ऐसा आज तक हमने राजनीतिक जीवन में नहीं देखा। यदि कोई कहता है कि पांच बार एमपी रहे हैं तो पांच बार से हम भी एमपी हैं। 26वां वर्ष हो रहा है,हम वर्ष 1989 में आए थे। आज तक हमने ऐसा प्रबंधन नहीं देखा कि बाढ़ की आशंका को देखते हुए सभी जिलों में एनडीआरएफ की टीम मुस्तैद हो गयी। ...(व्यवधान)सेना के जवान भी कल रात से सुपौल,सहरसा,मधेपुरा,जहां से आप प्रतिनिधि है,आप पता करिए कल से सेना के जवान वहां मुस्तैद हो गए हैं। इतनी बड़ी तैयारी हुयी है। मजबूरी है जब हाथ कहीं से उठता है तो हाथ की मजबूरी है। ...(व्यवधान)यह मेरी मजबूरी नहीं है। ...(व्यवधान)वह मेरे हाथ की मजबूरी है कि किधर से भी हाथ उठता है तो उधर हाथ चला जाता है। ...(व्यवधान)इसमें मेरी गलती नहीं है।

          महोदय,मेरे एक मित्र ने कहा कि बैलों की रस्सी अब किसानों के गले की रस्सी बन गयी है। हम उनके विचार से सहमत हैं कि इस देश के अन्दर बैलों की संख्या जितनी कम होगी,उतनी रस्सी एक्सट्रा बचेगी। एक्स्ट्रा रस्सी किसी दूसरे के गले में जाने वाली नहीं है,वह किसान के गले में ही जाएगी,इसलिए बैलों और गायों की रक्षा करना ही कृषि की रक्षा करने का सबसे बड़ा कारण है। ...(व्यवधान) 

          महोदय,हमारे एक मित्र आर. के. सिंह जी बोल रहे थे। उनके विषय में यह कहा गया कि वे सब दल में गए,आरजेडी में भी थे,जेडीयू में भी थे,कांग्रेस में भी,मतलब जितनी सरकारें थीं,उसमें अधिकारी के नाते इस देश के अंदर और बिहार के अंदर जिस ईमानदारी की छाप इन्होंने छोड़ी है,उसका मुकाबला आज तक प्रशासनिक क्षेत्र में कोई दूसरा आदमी नहीं कर सकता है। यह देश सौभाग्यशाली है कि ऐसे ईमानदार व्यक्ति को देश के ऐसे व्यक्ति ने सम्मान दिया जिसकी पूरी दुनिया में साख है और जो देश की चिंता करता है और देश की ईमानदारों की चिंता करता है। आज देश की जनता की सेवा के लिए इस सदन के माननीय सदस्य के रूप में आज यहां उपस्थित हैं। आप जब डीएम थे,पहली पोस्टिंग हुयी थी,मेरे जिले में थे। ...(व्यवधान)आपको पता होना चाहिए कि ...(व्यवधान)जब इमरजेंसी लगी थी तो उस समय की सरकार ने जो कानून बनाया था,उसका कड़ाई से इन्होंने पालन किया था। उसके शिकार हम भी हुए थे,हमारे नेता शिकार हुए थे,लेकिन देश के सामने हम अपनी चिंता नहीं करते है। यदि कोई ईमानदार व्यक्ति है तो उसको सम्मान देना आज समय का तकाजा है।

          महोदय,मैं इस बात की चर्चा कर रहा था कि दो बातों की बड़ी चर्चा हुयी।  ...(व्यवधान)

HON. CHAIRPERSON : Mr. Rajesh Ranjan, please sit down. Let the hon. Minister continue his reply.

… (Interruptions)

श्री राजेश रंजन (मधेपुरा) : सभापति जी,मेरा प्वाइंट ऑफ आर्डर है। ...(व्यवधान)

HON. CHAIRPERSON: Under what rule, are you going to raise your point of order?

… (Interruptions)

श्री राजेश रंजन  : रूल 193। ...(व्यवधान)

HON. CHAIRPERSON: No. There is no such rule. Please sit down.

… (Interruptions)

श्री राजेश रंजन : महोदय,मैं कह रहा हूं कि जिस विषय पर चर्चा के लिए मंत्री जी को नियम 193 पर जवाब देना है ...(व्यवधान)

SHRI JAGDAMBIKA PAL: Sir, if the Minister is not yielding, he cannot speak… (Interruptions) There is no point of order… (Interruptions)

HON. CHAIRPERSON: Hon. Minister, you please continue.

श्री राधा मोहन सिंह : महोदय,इस चर्चा में एक सवाल आया है कि बिहार के अंदर बिजली का संकट है। ...(व्यवधान)बिहार के अंदर बिजली के संकट पर चिंता की गयी है,हम इससे सहमत हैं। मैं अपने मित्रों से कहना चाहूंगा कि बिहार में बिजली के संकट को दूर करने के लिए हमारे उस समय के मुख्यमंत्री जी ने एक साल पहले कहा कि सांसद निधि और विधायक निधि से ट्रांसफार्मर बदला जाए। ...(व्यवधान)मैं सूखा पर बोल रहा हूं। बिहार के सभी सांसदों ने,सभी विधायकों ने दस हजार ट्रांसफार्मर बदलने के लिए ईच ट्रांसफार्मर सवा-सवा लाख रूपए अपनी निधि से निर्गत किया।    

17.00 hrs.           10हजार ट्रांसफरमर्स बदलने के लिए माननीय सांसदों और विधायकों ने निधि निर्गत किए। उन 10 हजार ट्रांसफरमर्स में से एक साल में मात्र 2 हजार ट्रांसफरमर्स बदले गए हैं। 8 हजार ट्रांसफरमर्स अभी नहीं बदले गए हैं। ...(व्यवधान)हम इस बात की चर्चा इसलिए कर रहे हैं क्योंकि हमें अपने-अपने राज्यों में जा कर इसकी चिंता करनी चाहिए। ...(व्यवधान)मैं पंजाब के माननीय मुख्य मंत्री जी को बधाई देना चाहूंगा। एक समाचार पत्र में जो समाचार छपा,उसकी कतरन मेरे पास है। उस अखबार में जो खबर है,जब आप उसे ठीक से पढ़ेंगे तो उसमें साफ लिखा हुआ है, ...(व्यवधान)जैसा अभी बोल गया कि अभी किसी राज्य ने सूखाग्रस्त जिला या एरिया की रिपोर्टिंग नहीं की है। ...(व्यवधान) उसी समाचार को,उसको भी उसने उसमें लिखा है।...(व्यवधान) अंत में उसकी चर्चा उसने की है।...(व्यवधान)लेकिन,मैं उनको बधाई देना चाहूंगा कि सबसे पहले किसी राज्य के मुख्य मंत्री...(व्यवधान) और दूसरे मंजिल पर आ कर पंजाब की समस्याओं को रखा है। ...(व्यवधान)जहां एक तरफ माननीय सांसदों ने जो जानकारी दी है और पंजाब के मुख्य मंत्री जी ने जो जानकारी दी है,आज हमने जो राज्य सहायता जारी की है उसमें उनकी बहुत बड़ी भूमिका है क्योंकि इन समस्याओं को सबसे पहले उन्होंने रखा था। कई राज्यों के कृषि मंत्री और मुख्य मंत्री भी हम से मिले हैं और आप सभी माननीय सदस्यों ने जो चर्चा की है उसके कारण इस प्रकार के फैसले किसान हित में ...(व्यवधान)और मैं आपको भी बधाई देता हूं कि आपने पंजाब की बात उठाई है। ...(व्यवधान)

          अंत में,मैं सिर्फ दो बातें कहना चाहता हूं कि किसान मजबूत तब होंगे,खेती मजबूत तब होगी,जब खेत में ज्यादा पैदावार होगी। खेत में पैदावार तब तक नहीं होगी जब तक उसकी मिट्टी बीमार होगी।...(व्यवधान) जब तक उसकी मिट्टी बीमार रहेगी तब तक ज्यादा उत्पादन नहीं हो सकता है। हमारे प्रधान मंत्री जी ने घोषणा की है कि इस देश में प्रत्येक किसान के पास सॉइल हेल्थ कार्ड मुहैया कराया जाएगा और इस पर काम शुरू कर दिया गया है।

          दूसरा,खेत में जब तक पानी नहीं पहुंचेगा,आज देश के 44 प्रतिशत भू-भाग जो खेती योग्य हैं,वह सिंचित है। पंजाब और हरियाण में यह ज्यादा है। कुल मिला-जुला कर देश का बड़ा भू-भाग खेती योग्य है और वहां पानी का अभाव है।

          मैं चुनाव के समय गुजरात के एक किनारे खड़ा था तो मैंने देखा की गुजरात की खेती हरी-भरी है। उसकी मेड़ के बगल में जो राजस्थान का इलाका था,वहां के खेत सूखे पड़े थे। जब तक हर खेत में पानी नहीं पहुंचाया जाएगा तब तक खेत की पैदावार नहीं बढ़ेगी। आदरणीय प्रधान मंत्री जी को देश के किसानों की ओर से,इस सदन की ओर से मैं बधाई देना चाहता हूं कि उन्होंने "ग्राम सिंचाई योजना’लागू की है। हमारी सरकार की प्रतिबद्धता है -गांवों को मजबूत बनाना,किसानों को मजबूत बनाना। मेरी सभी सदस्यों से विनती है कि राजनीति से हट कर,आइए,हम सब चार-पांच साल तक मिल कर देश को मजबूत बनाने के लिए,कृषि और किसान को मजबूत बनाने का संकल्प लें। सभी माननीय सदस्यों ने अपने अमूल्य विचार दिए हैं,मैं उन्हें बहुत-बहुत बधाई देते हुए और आभार प्रकट करते हुए,अपनी बात समाप्त करता हूं।

 

17.03 hrs                           (Dr. M. Thambidurai in the Chair) SHRI BHARTRUHARI MAHTAB : There are some clarifications to be sought.… (Interruptions)

HON. CHAIRPERSON : Please take your seat. Some Members have already indicated their desire to seek some clarifications. Accordingly, I will call the Members. First, from Congress side I will call one Member. Only one Member will speak from each Party.

          Now, Shrimati Ranjeet Ranjan to speak. You have to ask only one question. Do not make a long speech.

श्रीमती रंजीत रंजन (सुपौल) :  सभापति महोदय, धन्यवाद। मैं आपके माध्यम से मंत्री जी से पूछना चाहती हूं कि उन्होंने एन.डी.आर.एफ. की बात की है। मैं आज ही वहां से आ रही हूं। नेपाल में लैंडस्लाइड हुआ है। जब मैंने इस संबंध में यहां पर चर्चा की थी तो इन्होंने कह दिया था कि यह सुश्री उमा भारती से संबंधित विभाग का मामला है।  ...(व्यवधान)

          सभापति महोदय, वहां पर लैंडस्लाइड हुआ है उससे लाखों लोग प्रभावित हुए हैं। ...(व्यवधान)कृपया,इस संबंध में मुझे 5 मिनट बोलने की अनुमति दी जाए। ...(व्यवधान)वहां पर लैंडस्लाइड हुआ है उससे लाखों लोग, 8 जिले के लोग तबाही में हैं।

          मंत्री साहब ने अभी एन.डी.आर.एफ. की बात की है। मैं उनको जानकारी देना चाहती हूं कि एन.डी.आर.एफ. की 15 टीमें गई हैं। क्या आज मंत्री जी को मालूम है कि कितने लोग रेस्क्यू हो कर बाहर आए हैं?मात्र 30-40 हजार लोगों को कुत्ते-बिल्लियों की तरह,भेड़-बकरियों की तरह बांध के ऊपर ...(व्यवधान)

HON. CHAIRPERSON: Please sit down.

… (Interruptions)

श्रीमती रंजीत रंजन  : सभापति महोदय, कृपया मुझे बोलने दिया जाए।...(व्यवधान)

HON. CHAIRPERSON: Please take your seat. I will call you.

… (Interruptions)

श्रीमती रंजीत रंजन  :  मंत्री जी यह वहां के लोगों की डिमांड है। ...(व्यवधान)

HON. CHAIRPERSON: That is over.

…( व्यवधान)

HON. CHAIRPERSON : Please take your seat. That is all.

… (Interruptions)

HON. CHAIRPERSON: Next question, please. Mr. Mahtab.

… (Interruptions)

HON. CHAIRPERSON: He will give the answer. Hon. Member, please go to your seat. Go to your place.

… (Interruptions)

 

HON. CHAIRPERSON: I have given you time. Please take your seat.

… (Interruptions)

HON. CHAIRPERSON: Shri Rajesh Ranjan, please take your seat. Please listen to me. The Minister has given the reply. You are given an opportunity to raise a question.

… (Interruptions)

HON. CHAIRPERSON: There are many Members to speak. Whatever clarification you want, you ask for it. You may ask one question.

… (Interruptions)

श्रीमती रंजीत रंजन : वहाँ पर लोगों को भेड़-बकरियों की तरह रेस्क्यू करवा दिया गया। ...(व्यवधान)आपने कहा कि दो दिन से एनडीआरएफ की टीमें आ गयी हैं। ...(व्यवधान)दो दिन से लोग भूखे-प्यासे बच्चों को धूप में बोतल से पानी पिलाकर और बरसात में बांध पर रखा गया है। ...(व्यवधान)मैं आपसे पूछना चाहती हूँ कि प्रधानमंत्री जी वहाँ पर गये, ...(व्यवधान)एक शब्द भी उसके बारे में नहीं बोला गया। ...(व्यवधान)मैं आपसे सिर्फ यह पूछना चाहती हूँ ...(व्यवधान)कि वे लोग और कितने दिनों तक बांध पर रहेंगे? ...(व्यवधान)क्या यह नेपाल की साज़िश तो नहीं थी कि हिन्दुस्तान से पैसे लेने के लिए वहाँ के गरीबों को बांध के अंदर से फेंक दिया गया। वहाँ पर लोग बिलबिला रहे हैं, बच्चे बिलबिला रहे हैं और आप यहाँ पर एनडीआरएफ की बात कर रहे हैं। ...(व्यवधान)

HON. CHAIRPERSON: OK, please sit down.

… (Interruptions)

श्रीमती रंजीत रंजन :  दूसरी बात, आपने गुजरात में 11 प्रतिशत ग्रोथ की बात की। ...(व्यवधान)वे कौन-से किसान हैं? इसकी जाँच हो।...(व्यवधान)

HON. CHAIRPERSON: I have told you to ask only one question.

… (Interruptions)

SHRIMATI RANJEET RANJAN : Please give me one minute. … (Interruptions)

HON. CHAIRPERSON: Shri Bhartruhari Mahtab.

… (Interruptions)

HON. CHAIRPERSON: Madam, please take your seat.

… (Interruptions)

SHRI BHARTRUHARI MAHTAB: Mr. Chairman, the Agriculture Minister is a very good friend of mine and he has actually come out with full details. The manner in which the discussion went on for at least four days, I think he has satisfied most of the points that have been raised by the Members. … (Interruptions)

          But here, I have a point to make, an issue to raise that is relating to the crop insurance. It is relating to the National Crop Insurance Programme about which the Minister has also mentioned while replying to the debate, which was started last year during the rabi crop and has come into force on 1st April, 2014. The scheme has replaced the National Agriculture Insurance Scheme. The National Crop Insurance Programme envisages charging of actuarial premium from the farmers on the notified crops basing on the quotes given by the insurance companies.

          Sir, it is observed that in one of the districts of Odisha where paddy is the main crop, the lowest quote of premium was as high as 22 per cent. … (Interruptions)

HON. CHAIRPERSON: Mahtab ji, you ask only a question. Please ask your clarification.

SHRI BHARTRUHARI MAHTAB : Sir, that is the question.

          As per the operational guidelines of NCIP, the premium is to be kept at 11 per cent and the sum assured for the farmer should be proportionately reduced. Therefore, as the entire crop loan is not covered for paying higher premium, woes of farmers are multiplied. Is the Government going to review the scheme and keep the premium level as it was of National Agricultural Insurance Scheme? Will the Government come out with a new scheme on crop insurance as suggested by the Government of Odisha?

SHRI M.B. RAJESH (PALAKKAD): Thank you, Chairman, Sir. It is a straight and specific question. Many States including Kerala have been demanding for long changes in the criteria for giving Central assistance in case of damages caused by floods and drought. My specific question is whether there will be a change in the criteria followed for giving Central assistance in the event of floods and drought. I want to know as to whether the Government would assure the House in this regard.

SHRI N.K. PREMACHANDRAN (KOLLAM): My question is in respect of lightning and sea erosion. Just some time before, the hon. Minister of State for Home Affairs said that norms for the National Disaster Management Response Fund are to be determined by the Finance Commission. The hon. Minister for Finance is also here. Since the elected Government is there, I would like to know whether it is the political will of the Government to see that lightning as well as sea erosion are included in the list of natural disasters eligible for assistance from NDRF.

          Secondly, paddy cultivation in India is declining like anything. I would like to know whether the Government has got any proposal to conserve the paddy cultivation and also wetlands in line with the Forest Conservation Act, 1980 so that paddy cultivation in India can be properly maintained.

 

योगी आदित्यनाथ (गोरखपुर): सभापति महोदय,मैं माननीय मंत्री जी को बहुआयामी जवाब देने के लिए धन्यवाद देता हूं।...(व्यवधान)एक ही समय देश में बाढ़ और सुखा,दोनों का प्रकोप आता है। वाटर मैनेजमेंट के लिए सरकार क्या करने जा रही है,जिससे बाढ़ और सूखा,दोनों समस्याओं का समाधान एक साथ हो सके?

          दूसरे,बाढ़ के बाद जो संक्रामक बीमारियां फैलती हैं,बाढ़ के समय मे राहत कार्यों के लिए,पशुओं के लिए एवं सूखे समय भी पशुओं के चारे की व्यवस्था के लिए क्या यहां से सरकार कोई प्रावधान करेगी?

श्री राजेश रंजन : महोदय,बाढ़ और सूखे पर इस चर्चा की शुरूआत योगी आदित्यनाथ जी ने की।...(व्यवधान)बहुत ही गंभीर चर्चा की उन्होंने शुरूआत की। प्रधानमंत्री जी जिस प्रदेश से आते हैं -उत्तर प्रदेश,बनारस से लेकर बिहार तक,उत्तर प्रदेश का आधा हिस्सा और बिहार के तीन हिस्से आज बाढ़ से प्रभावित हैं। मैं आपके माध्यम से मंत्री जी से जानना चाहता हूं कि जब बाढ़ और सुखा,दोनों मुद्दे थे,तब उनके जवाब का जो केन्द्र-बिन्दु था,उन्होंने अच्छा जवाब दिया,कृषि पर जवाब दिया,अन्य चीजों पर जवाब दिया,लेकिन जो बाढ़,जो सबसे अहम मुद्दा था,जिसके लिए जल संसाधन मंत्री सुश्री उमा भारती जी को यहां उपस्थित रहना चाहिए था। बाढ़ की गंभीर स्थिति को देखते हुए, जो स्थिति है, ...(व्यवधान)महोदय,मैं यही कह रहा हूं कि चर्चा सही थी। नेपाल में जो बांध टूटने की बात आई है,उसमें हम तीनों प्रभावित हैं। मैं मंत्री जी से जानना चाहता हूं कि आज वहां जो स्थिति है और लगातार तीन जिलों में हाई एलर्ट है,क्या सही में बाढ़ आने वाली है और क्या यह सरकार बाढ़ का स्थायी समाधान करेगी और उत्तर प्रदेश एवं बिहार को बचाने के लिए कोई योजना लाएगी?...(व्यवधान)

SHRI MUTHAMSETTI SRINIVASA RAO (AVANTHI) (ANAKAPALLI): Sir, I thank you for giving me the opportunity. Every year the Government of India is giving insurance amount to the farmers for the loss of their crops, but every year it is getting delayed. I would request the hon. Minister, through you, to please sanction the relief amount as early as possible so that a majority of the farmers can get the benefit.

श्री राधा मोहन सिंह : महोदय,हमारे जो सबसे नजदीकी मित्र लोग हैं,उन्हीं के ज्यादा पूरक सवाल हैं।...(व्यवधान)

डॉ. भोला सिंह (बेगूसराय) : महोदय,मेरा व्यवस्था का प्रश्न है। यहां कोई किसी का मित्र नहीं है,सभी माननीय सदस्य हैं।...(व्यवधान)

HON. CHAIRPERSON : Hon. Minister is on his legs. Please sit down.

श्री राधा मोहन सिंह : शायद मैं उनके निशाने पर हूं,इसलिए मैं उनको विशेष दर्जा अपनी ओर से दे रहा हूं।...(व्यवधान)

HON. CHAIRPERSON: Hon. Minister, you may please address the Chair.

श्री राधा मोहन सिंह : यह जो कृषि बीमा योजना है,वर्ष 2013-14 में इसमें नाम में सिर्फ छोटा सा परिवर्तन हुआ है। पहले वर्ष 2000 से इसका नाम "राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना" चल रहा था। अब वर्ष 2013-14 में इसका नाम "राष्ट्रीय कृषि बीमा कार्यक्रम" किया गया है। यह कार्यक्रम जब घोषित हुआ,मैं जवाब देते समय इसका जिक्र नहीं कर पाया,पहल राज्य ओड़िशा था,फिर मध्य प्रदेश,महाराष्ट्र और गुजरात से आपत्ति आई। उस समय इसे रबी के सीजन में रोक दिया गया और कहा गया कि खरीफ के सीजन से चालू किया जाए। जब खरीफ का मौसम शुरू हुआ तो मैं मंत्री बन चुका था। फिर इन लोगों से बात हुई,कई राज्यों से अलग-अलग सुझाव आने लगे। हमने अंत में तय किया और कहा कि जो नया चलाना चाहते हैं वे नया चलाएं और जो पुराना चलाना चाहते हैं वे पुराना चलाएं और सब मिल बैठकर इस वित्त वर्ष में कोई नया रास्ता निकालें। उसी क्रम में हमने 7 जुलाई को सभी माननीय मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखा और कृषि सचिवों की भी बैठक बुलाई।

श्री भर्तृहरि महताब  : यह दिक्कत है कि इसमें 11 प्रतिशत गैप है।

श्री राधा मोहन सिंह:इसमें प्राइवेट कम्पनीज ज्यादा आ गई हैं,उसके लिए बैठकर आगे का रास्ता निकालेंगे। आपदा के लिए जो राष्ट्रीय सहायता है,उसका पुनर्निर्धारण एक सतत प्रक्रिया से होता है। पिछले कुछ समय से यानि 2012 से अब तक चार बार नार्म्स संशोधित हो चुके हैं और हम फिर इस पर विचार करेंगे।

          हमारे सामने बाढ़ एक महत्वपूर्ण विषय है और यहां 80 प्रतिशत सदस्यों ने उसी पर चर्चा की है। उस सम्बन्ध में गृह राज्य मंत्री जी ने एनडीआरएफ की चर्चा की। मेरे सामने कोसी का सवाल है। कोसी के अंतर्गत जो आपदा निर्मित हुई है,जिसका प्रभाव बिहार पर पड़ सकता है,वे नौ जिले हैं,जहां माना जा रहा है कि इसका असर हो सकता है। इन नौ जिलों के अंदर 163 ऐसे कैम्प बनाए गए हैं जहां लोगों को सुरक्षा प्रदान की जा सके।

श्रीमती रंजीत रंजन  : वहां लोग भूखे मर रहे हैं...(व्यवधान)

श्री राधा मोहन सिंह:उनके इशारे पर हम थे और मेरे इशारे पर अब उनका आना स्वाभाविक है।...(व्यवधान)मैं बता रहा था कि इसके अलावा कैटल्स के लिए 36 कैम्प बनाए गए हैं। इसी प्रकार से 15 एनडीआरएफ और चार एसडीआरएफ की टीमें वहां हैं। वहां पर तीन जिले सुपौल,सहरसा और मधुबनी तो बिल्कुल मुहाने पर हैं। इन तीन जिलों के दो सांसद हैं,एक पुरुष और एक महिला। उनके क्षेत्र में सेना की पूरी तैनाती कर दी गई है।...(व्यवधान)यह भारत सरकार ने की है। इसी प्रकार से 1,43,000 से ज्यादा लोगों को डेंजर जोन से निकालने का काम हाथ में लिया गया है और 33 एम्बुलेंस वहां लगाई गई हैं। इसके अलावा 12,305मवेशियों को भी डेंजर जोन से बाहर निकाला गया है। यह जो रिपोर्ट मुझे प्राप्त हुई है,यह बिहार सरकार की है,जो नेट पर आई थी। वहां की प्रदेश सरकार के सहयोगियों द्वारा यह सवाल उठाया जा रहा है। अगर यह रिपोर्ट असत्य है तो आपको तुरंत शाम को फ्लाइट से वहां जाकर प्रदेश के अधिकारियों से बात करनी चाहिए और देखना चाहिए। मैं इस रिपोर्ट को विश्वसनीय मानता हूं।