Lok Sabha Debates
Shri Gaurav Gogoi Called The Attention Of The Minister Of Home Affairs Regarding ... on 10 August, 2017
Sixteenth Loksabha an> Title: Shri Gaurav Gogoi called the attention of the Minister of Home Affairs regarding problems due to floods in different parts of the Country and steps taken by the Government in this regard.
SHRI GAURAV GOGOI (KALIABOR): Madam, I call the attention of the Minister of Home Affairs to the following matter of urgent public importance and request that he may make a statement thereon:
“Problems due to floods in different parts of the country and steps taken by the Government in this regard.” HON. SPEAKER: The hon. Minister.
THE MINISTER OF STATE IN THE MINISTRY OF HOME AFFAIRS (SHRI KIREN RIJIJU): Madam, the statement is already there; it may be circulated.
श्री गौरव गोगोई : अध्यक्ष महोदया,मैं आपका आभार प्रकट करता हूं कि आपने इस संवेदनशील विऐाय पर हमें अपनी बात रखने का अवसर दे रही हैं। इस वऐाऩ जो बाढ़ आई है,वह पूरे देश में एक दहशत का माहौल स्थापित कर चुकी है,जहां पर बहुत से लोगों की हत्या हुई लगभग 958, 900 से ज्यादा लोगों की हत्या हुई है।...(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : बाढ़ में हत्या नहीं होती है।
…( व्यवधान)
श्री गौरव गोगोई : सॉरी,मृत्यु हुई है।...(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : हत्या शब्द का प्रयोग मत कीजिए।
श्री गौरव गोगोई : मेरी हिंदी ठीक करने के लिए आप लोगों का धन्यवाद। दूसरी बात यह कि असम में ब्रह्मपुत्र और बाराक नदी के कारण लगभग 85 लोगों की मृत्यु हुई है, 17 लाख लोग प्रभावित हुए हैं। मणिपुर में 19 लोगों की मृत्यु हुई है, 15 लाख लोग बेघर हो चुके हैं। इस बार मिजोरम में पिछले 50 साल में बाढ़ की यह समस्या हुई है, जिसमें 12 लोगों की मृत्यु हुई है, 2000 परिवार प्रभावित हुए हैं और नेशनल हाईवे-47 बुरी तरह से प्रभावित हो गया है। अरुणाचल प्रदेश में 19 लोगों की मृत्यु हुई है, मैसिव लैण्ड स्लाइड हुआ है। नागालैण्ड में 20 लोगों के मरने की आशंका है। राजस्थान में 6 लोगों की मृत्यु हो चुकी है, लगभग 300 लोगों को रेस्क्यू किया गया है। गुजरात में बानसकांठा और पाटन में लगभग 10 हजार लोग प्रभावित हुए हैं। ओडिशा में भी बैतारानी नदी और स्वर्ण रेखा नदी से अभी तक 4 लोगों की बारिश व बाढ़ की वजह से मृत्यु हो चुकी है और पश्चिम बंगाल में भी अब तक 50 लोगों की मृत्यु हो चुकी है। उसके बावजूद भी मुझे लगता है कि यह समस्या हर वऐाऩ आती है, लेकिन सरकार गंभीर रूप से बाढ़ के लिए एक बड़ा संकल्प नहीं ले पा रही है।
आज इस वक्त जिस वऐाऩ में सबसे ज्यादा बाढ़ की समस्या आई हुई है, सरकार कुंभकरण की तरह सोयी हुई है। कुंभकरण तो वऐाऩ में दो बार जागता है...(व्यवधान)लेकिन हम पूछना चाहते हैं कि सरकार इस बाढ़ को एक राऐट्रीय समस्या या राऐट्रीय आपदा का दर्जा देकर इसके लिए एक लंबी सोच व संकल्प कब लेगी?मैं सबसे पहले कुंभकरण का उदाहरण देता हूं। फ्लड मैनेजमेंट प्रोग्राम जो सेंट्रल वाटर मिनिस्ट्री का है।...(व्यवधान)फ्लड मैनेजमेंट का जो प्रोग्राम है। It was known as the flagship programme of the Union Government, लेकिन मोदी सरकार आने के बाद,बी.जे.पी. सरकार आने के बाद ऐसे अच्छे दिन आए कि नीति आयोग में डिसकसन हुआ। the Report of the Sub-Group of Chief Ministers’ on Rationalisation of Centrally Sponsored Schemes constituted by NITI Aayog. इसमें आपने फ्लड मैनेजमेंट प्रोग्राम को कोर फ्लैगशिप प्रोग्राम से हटा दिया। इससे यह प्रभाव पड़ा कि जो फ्लड मैनेजमेंट प्रोजेक्ट ऑनगोइंग है। जो लोगों को और गाँवों को बाढ़,इरोजन व कटाव से बचाता है। जो ऑनगोइंग प्रोजेक्ट्स हैं। Suddenly after the recommendations of NITI Aayog, the funding pattern has been changed. In 2016, the Government of India, Ministry of Water Resources issued a letter with the subject ‘Revised Funding Pattern for Projects approved under the Flood Management Programme’ जिसमें जनरल कैटेगरी स्टेट्स को फंडिंग पैटर्न का 75 और 25 के अनुपात में फायदा मिलता था। जिसमें से अगर कोई बड़े फ्लड मैनेजमेंट प्रोजेक्ट का बजट होता था तो 75 परसेंट केंद्र सरकार देती थी और 25 परसेंट राज्य सरकार को भरना पड़ता था। लेकिन वऐाऩ 2015 के नीति आयोग के रिकमेंडेशन और उस पर मिनिस्ट्री ऑफ वाटर रिसोर्स,क्योंकि वऐाऩ 2016 में अमल किया। राज्य सरकार पर फाइनेंशियल बर्डन बढ़ गया। जहां पहले उनको प्रोजेक्ट का सिर्फ 25 परसेंट फंडिंग देना पड़ता था, under the revised formula 50 परसेंट देना पड़ा। उन पर फाइनेंशियल बर्डन बढ़ गया और जहां पर स्पेशल कैटेगरी स्टेट्स की बात आती है,जिसमें नॉर्थ ईस्ट,हिमाचल प्रदेश,जम्मू-कशमीर और उत्तराखंड हैं।
महोदया,पहले अगर कोई बड़ा फ्लड मैनेजमेट प्रोजेक्ट लिया जाता था। वह इमबैंकेमेंट का हो,जिसमें 21 किलोमीटर का इमबैंकमेंट होता था,जिससे गाँवों की बहुत सुरक्षा होती थी। उसमें पहले जब बजट निकलता था तो 90 परसेंट केंद्र सरकार देती थी और 10 परसेंट स्पेशल कैटेगरी स्टेट्स को देना पड़ता था। लेकिन नीति आयोग और अच्छे दिन कहने वाली इस सरकार ने फंडिंग पैटर्न को रिवाइज़ करके स्पेशल कैटेगरी स्टेट्स पर फाइनेंशियल बढ़ा दिया,जिससे उनको 20 परसेंट देना पड़ता है। पहले 10 परसेंट देना पड़ता था,अब 20 परसेंट देना पड़ता है। that too Madam, this is not done in the new projects, this is done on on-going projects - projects which have been sanctioned; projects which have prepared DPR and projects which have gone to the Central Government and got the approval of the Centre. The Centre withdrew its responsibility saying that earlier I used to give 90 per cent, now I will give you 80 per cent and in the general category status, I will go from 75 per cent to 50 per cent. Is this not shirking of responsibility? इसीलिए मैं कहता हूं कि बाढ़ पर केद्र सरकार की जिम्मेदारी बढ़ी नहीं है,बल्कि पिछले दो-तीन सालों में घटी है और इसका ब्यौरा मैं दे चुका हूं।
मैडम,दो हफ्ते पहले कैग की रिपोर्ट आई थी। उस रिपोर्ट में भी यही लिखा है कि फ्लड मैनेजमैन्ट प्रोग्राम का जो पूरा फाइनेंशियल मैनेजमैन्ट है,वह बहुत खराब हो चुका है। मैं आपको एक उदाहरण देता हूं। आपको पता है कि आसाम में ब्रह्मपुत्र बैराज से लगभग 80 से ज्यादा लोगों की मृत्यु हुई है। इससे पहले 2012 में बहुत भारी बाढ़ आई थी,लेकिन इतने लोगों की मृत्यु नहीं हुई। आसाम एक बाढ़ पीड़ित राज्य है,वहां के लिए कैग की रिपोर्ट कहती है कि “60 per cent of the funds due to the State of Assam has yet to be released from the Centre.” जब सैंटर इस तरह से फंड डिले करेगा,सैंटर अपने शेयर पर ऐसे जिम्मेदारी नहीं लेगा तो फ्लड मैनेजमैन्ट प्रोग्राम्स डिले होंगे और यदि फ्लड मैनेजमैन्ट प्रोग्राम्स डिले होंगे तो जो लोग नदियों के किनारे रहते हैं,वे देख रहे हैं कि दिन-प्रतिदिन नदी धीरे-धीरे उनकी जमीन को ले रही है। जहां वे लोग खेती करते हैं,वह जमीन भी नदी ले रही है। जहां उनके घर हैं,वह जमीन भी नदी ले रही है। मेरे क्षेत्र में कोलबाड़ी लोलिती डेरगांव में प्रोजैक्ट पूरा बन गया,सैंटर के पास आ गया,अप्रूव हो गया,लेकिन अप्रूव होने के बाद भी छः महीने तक उस पर कोई एक्शन नहीं हुआ।
आज व्यवस्था बहुत खराब है। इसलिए मैं कहना चाहता हूं कि बाढ़ के मुद्दे पर यह सरकार कब जागेगी। आप किसी भी बाढ़ पीड़ित क्षेत्र में जाइये और देखिये कि वहां किस प्रकार से लोग रह रहे हैं। वहां हर वऐाऩ बाढ़ आती है तो वे लोग एक कैम्प में जाते हैं। कैम्प में जानवर,महिलाएंं,बच्चे और सभी लोग साथ में रहते हैं। मैं कहना चाहता हूं कि हम इस प्रकार की व्यवस्था क्यों नहीं अपनाते और एक डिग्निफाइड शैल्टर क्यों नहीं बनाते। यह कैसा शैल्टर है,जहां एक स्कूल में जाकर महिलाएंं,बच्चे रहते हैं और हर दिन राशन के लिए वे सरकार से अपेक्षा करते हैं। गायों और भैंसों के लिए उन्हें पशुओं का चारा आदि कुछ नहीं मिलता है और इस कारण उन्हें बहुत ज्यादा समस्या होती है। फिर क्यों न सरकार एक संकल्प ले,क्योंकि आज एम.एच.ए. और एन.डी.आर.एफ. मौजूद हैं। वे वर्ल्ड क्लास डिजास्टर शैल्टर बनायें,एक हास्पिटल जैसा सैंटर बनायें,जहां बाढ़ पीड़ित इलाकों से जब लोग आएंं तो उनको जमीन पर नहीं बल्कि बिस्तर पर सोने के लिए मिले। महिलाओं और बच्चों के लिए अलग रूम हो,पशुओं के लिए एक अलग शैल्टर हो,दवाइयां,डाक्टर्स और नर्सेज हों। लेकिन आज इस प्रकार की कोई व्यवस्था नहीं है। आप एम.एच.ए. के ब्यौरे में भी देख लीजिए,उन्होंने लिखा है कि हम कुकिंग ऑयल देते हैं,राशन देते हैं,फलां-फलां चीजें देते हैं। लेकिन ऐसे कुछ नहीं होता। आपने उनकी अवस्था देखी है,आपने देखा है कि जो उनकी डिग्निटी है और वे केद्र सरकार से और अपेक्षा करते हैं। आप रीहैबिलिटेशन की बात करते हैं। जब वे रिलीफ शैल्टर से अपने घरों को वापस जाते हैं तो उनके घरों में इतना पानी घुस जाता है कि उनकी सारी सामग्री डूब चुकी होती है,जो उनका लाइवस्टाक है,वह खत्म हो चुका है और उनसे खेती भी नहीं होती। इसलिए मैं कहता हूं कि क्यों नहीं यह सरकार मोर डिजास्टर रेजिलिएंंट घर बनाती है। सरकार ऐसे घर बनाये,जिससे कि बाढ़ में लोगों को एक रास्ता मिले,ताकि वे अपने घर की जो भी सामग्री है,उसे बचा पायें। सरकार इस तरह का संकल्प क्यों नहीं लेती है। यदि डिजास्टर को आप हमेशा ऐसे साधारण तरीके से सोते हुए देखेंगे तो हर वऐाऩ ऐसी समस्या आएगी। हम चाहते हैं कि हर वऐाऩ लोगों की सुविधा बढ़े न कि घटे।
माननीय अध्यक्ष : आपकी बात खत्म हो गई,अब आप प्रश्न पूछिये।
श्री गौरव गोगोई : मैडम,केवल दो पाइंट्स और हैं। ऐसे बहुत से प्रोजैक्ट्स हैं,जहां हम चाहते हैं कि सरकार एक्सपिडाइट करे। सरकार कह देती है कि हमने बजट दे दिया,प्रोजैक्ट सैंक्शन कर दिया। लेकिन कैग की रिपोर्ट कहती है कि फंड रिलीज में इतनी देर लग जाती है और कभी-कभी इसमें छः महीने या एक साल लग जाता है। मेघालय में रंगानदी प्रोजैक्ट और आसाम में कोलबाड़ी लोलिती प्रोजैक्ट इसी प्रकार की हैं। हमने काजीरंगा में एशियन डैवलपमैन्ट बैंक के साथ प्रोजैक्ट लिया,उसके बावजूद भी केद्र सरकार इतना समय लगाती है।
मैडम,मैं कहना चाहता हूं कि सरकार को तीन वऐाऩ हो गये हैं। बाढ़ की जो समस्या है,यह सिर्फ एम.एच.ए. की नहीं है। इसमें वाटर रिसोर्सेज मंत्रालय का भी बहुत ज्यादा महत्व है। मेरी दर्खास्त है कि केद्र सरकार की मंत्री महोदया,सुश्री उमा भारती जी आप तीन साल में एक बार आसाम में आइये,आप वहां का दौरा तो करिये। डा.संजीव बालियान जी वहां आए हैं। लेकिन हमने केद्र सरकार की मंत्री,सुश्री उमा भारती जी को एक बार भी वहां नहीं देखा। अभी सरकार के दो वऐाऩ रह गये हैं,हम चाहते हैं कि आप आसाम में कम से कम एक बार तो आइये। आज गंगा नदी की प्रोजैक्ट के लिए बीस हजार करोड़ रुपये का प्रावधान है। इसमें पैसे का अभाव नहीं है। गंगा नदी को साफ करने के लिए केद्र सरकार ने बीस हजार करोड़ रुपये रखे हैं और सुप्रीम कोर्ट ने यह भी बोला है कि लगभग तीन हजार से चार हजार करोड़ रुपये इसमें खर्च हुए हैं,लेकिन इसमें कुछ हुआ नहीं है। जहां पर सरकार के पास बजट 20 हज़ार करोड़ रूपये हैं,आज प्रधान मंत्री मोदी जी ने पूरे उत्तर-पूर्वांचल को मात्र 02 हज़ार करोड़ रूपये का पैकेज दिया है। कहाँ 02 हज़ार करोड़ और कहां 20 हज़ार करोड़ रूपये। आप थोड़ा पैकेज बढ़ाइए और उसको दस हज़ार करोड़ रूपये कीजिए,दो हज़ार करोड़ रूपये तो बजट में ही थे,इससे कुछ नहीं होगा।
मैडम,यह समस्या तो हर वऐाऩ होने वाली है,इस वऐाऩ भी हुई है,आने वाले वऐाऩ में भी होने वाली है तो हम चाहते हैं कि सरकार एडय़ुकेट प्रिपेयरेशन करे। नावों की व्यवस्था करे,घर बनाए,आश्रय घर बनाए,रिलीफ की सामग्री दे।
मैडम,असम में क्या होता है कि नमामी ब्रह्मपुत्र नाम से वे पब्लिक ईवेंट करते हैं और लोगों का पैसा,कर दाताओं का पैसा पब्लिसिटी पर खर्च करते हैं,लेकिन किसी प्रकार का फ्लड मैनेजमेंट का काम उन्होंने नहीं किया है। मैडम,इसलिए अंत में मेरी यही दरख्वास्त है,मेरा पहला भाऐाण भी वॉटर रिसोर्स पर ही था,उसमें भी मैंने यही कहा था कि गंगा नदी को हम नमन करते हैं,लेकिन ब्रहृमपुत्र,बराक और देश की विभिन्न नदियों को उनका महत्व दीजिए। जहां पर एक नदी को साफ करने के लिए आपके पास 20 हज़ार करोड़ रूपये हैं,तो भारत की दूसरी नदियाँ,उत्तर-पूर्वांचल की नदियाँ,पूरब और पश्चिम की नदियों को आप महत्व दे कर,उनके लिए स्पेशल पैकेज करें। इसी के साथ मैं अपना भाऐाण समाप्त करता हूँ।
धन्यवाद।
PROF. SAUGATA ROY (DUM DUM): Thank you, Madam. I thank the hon. Home Minister for the detailed statement given by him, though I am a little intrigued as to why the Home Minister should reply to a debate on floods in the Calling Attention Motion.
Madam, this year 24 States have been affected by floods. Out of them, the maximum affected are Gujarat, Assam, Rajasthan and West Bengal. One thing that has been pointed out by the C&AG is that India’s flood forecast capability has washed out. We have not been able to forecast the floods at all.
Then, Madam, I go to the Statement in detail. Before that, I may mention that in the whole country the maximum number of people, who have died, is 229 in Gujarat. West Bengal is second with 149 people died in flood. Maharashtra is third with 105 people died in flood and Assam is fourth with 84 people died in flood.
About crops washed away, Gujarat is at the top where 8.91 lakh hectare crop area has been washed away in flood. Rajasthan is second with 8.34 lakh hectare crop area washed away. Then, West Bengal is third with 4.23 lakh hectare crop area washed away in flood this year.
Now, I want to bring it to the notice of the House that there has been rainfall in all parts of the country but flood in West Bengal is totally a manmade flood. It has happened in six districts of West Bengal due to release of water from the barrages of Damodar Valley Corporation (DVC), which is under the Central Government. The State Government has repeatedly appealed to the DVC to desilt their reservoirs at Tenughat, Maithon and Panchet. They have done nothing about the matter. When the heavy rainfall started, the Chief Minister of West Bengal herself repeatedly appealed and spoke to the DVC authorities not to release the water altogether. But they released it, and, as a result, six districts of West Bengal got badly flooded.
As I told you, 129 people have died and 4.23 lakh hectare of crops have been washed away. You would be surprised that the maximum number of houses destroyed is in West Bengal. The number of houses destroyed in West Bengal is 1,43,000 as compared to 26,000 in Assam.
The hon. Prime Minister has visited Gujarat. It is alright as his home State has been badly affected. He also visited Assam, which is run by a Government of the Ruling Party. It is a good thing. The Ministers of State have visited Assam and Arunachal Pradesh. But none of the big honchos from the Central Government visited our unfortunate State of West Bengal. While the Prime Minister announced a package for Gujarat and a package of Rs. 2,000 crore for Assam and the North-Eastern States, no package has been announced for West Bengal till date. We feel unfortunate, left outand we wonder in our mind whether we are being the victims of political discrimination.
HON. SPEAKER: Now, please conclude. Everybody should not speak that much.
PROF. SAUGATA ROY : My question to the hon. Minister is direct. I do not know whether Rajnath Singhji has recovered from a leg fracture and will be able to answer the question in full.
Will the Union Government take proper steps for desilting the dams of Damodar Valley Corporation and also control the release of water from dams and barrages which are controlled by the Central Government’s Damodar Valley Corporation? Will the Union Government announce the package for West Bengal for relief, rehabilitation, recovery and restoration of embankments which have been washed away?
Our Chief Minister met Rajnath Singhji the other day. Actually, she wanted to meet the Prime Minister. That day, the Prime Minister went away to Gujarat, but she met the Home Minister, Rajnath Singhji. I hope that West Bengal will get relief and succour from the Central Government and not feel politically discriminated against.
Thank you.
HON. SPEAKER: Shri Kalikesh N. Singh Deo is not there.
Hon. Minister.
… (Interruptions)
HON. SPEAKER: Let him answer.
… (Interruptions)
HON. SPEAKER: After his answer, I will allow you one question each, not more than that. That is the only thing.
… (Interruptions)
HON. SPEAKER: Let him answer and then, if time permits, I will allow.
Hon. Minister.
श्री किरेन रिजीजू : महोदया, मैं आपको धन्यवाद देना चाहता हूँ कि आज इस महत्वपूर्ण कालिंग अटेंशन, जो देश भर में फ्लड्स आये हैं, उससे जो नुकसान हुआ है, उसको लेकर कालिंग अटेंशन आपने एडमिट किया और दो सदस्यगण को आपने उसे मूव करने का और सवाल पूछने का मौका दिया। गौरव गोगोई जी और सौगत राय जी को आपने मौका दिया। यह कालिंग अटेंशन है, इसलिए मैं बहुत लम्बी चर्चा में नहीं जाऊँगा। मैं स्पेसिफिक बताना चाहता हूँ कि जो गौरव गोगोई जी ने कहा कि सरकार तुरन्त प्राम्प्ट रेस्पांड नहीं करती है और जब प्राकृतिक आपदा आती है, तो हम वहाँ पर सही तरीके से मदद भी नहीं पहुँचाते हैं, इस तरीके से उन्होंने कहा है।
महोदया, यह बिल्कुल गलत है और मैं इस सदन में आपके माध्यम से यह कहना चाहता हूँ कि अगर मैं आँकड़े पेश करूँगा और जो-जो कदम हमने पिछले तीन सालों में उठाये हैं, हम उन्हें आपको बतायेंगे तो आप भी मानेंगे कि जिस रफ्तार से, जिस तेजी से इस सरकार ने, प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी जी की अगुवाई में और गृह मंत्रालय में राजनाथ सिंह जी के नेतृत्व में हम लोगों ने जो कदम उठाये हैं, आज से पहले, इस सरकार से पहले किसी सरकार के समय में इस तेजी से कदम नहीं उठाये गये। नॉर्थ-ईस्ट के बारे में गौरव गोगोई जी ने फंड के बारे में कहा और प्रधानमंत्री जी के दौरे को लेकर भी कहा। पहली बार यह हुआ है कि पूर्वोत्तर के आठ राज्यों के जो एसडीआरएफ पैसे होते हैं, मैं पहले का आँकड़ा पेश करूँगा तो वह आपके लिए बहुत ही आश्चर्यजनक होगा कि पहले इतनी कम राशि मिलती थी। जो फाइनेंस कमीशन ने राशि तय की है, उसके मुताबिक हम मई-जून के महीने में पहली इंस्टालमेंट हर राज्य को रिलीज कर देते हैं, पैसे रिलीज कर देते हैं और उसके बाद सेकेंड इंस्टालमेंट की जब जरूरत पड़ती है, तो उसको हम रिलीज करते हैं। इसके अलावा भी जो राशि मिलने का एक तरीका है, जब कोई आपदा आती है, तो वहाँ सेन्ट्रल इन्टर मिनिस्ट्रियल टीम जाती है। वह स्टेट जब हमको मेमोरैन्डम भेजते हैं, तो उसके बेसिस पर हम यहाँ से टीम भेजते हैं और टीम आने के बाद उसके जो आइटम एप्रूव्ड लिस्ट है, उसके मुताबिक जो रेट फिक्स है, उसके मुताबिक यहाँ हाई लेवल कमेटी की मीटिंग होती है, जिसके चेयरमैन गृह मंत्री होते हैं। फाइनैंस मिनिस्टर और एग्रीकल्चर मिनिस्टर,दोनों उसके मेम्बर होते हैं। उसको एन.डी.आर.एफ. (नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फण्ड)के तहत अतिरिक्त राशि भी मिलती है।
नॉर्थ-ईस्ट के बारे में गौरव गोगोई जी ने जो कहा,आपके राज्य और पूरे नॉर्थ-ईस्ट के लिए आपको नरेद्र मोदी जी की सरकार का इस चीज़ के लिए एप्रिसिएशन करना होगा कि पहले उसी ज़गह जब फ्लड्स आए थे तो पहले जो आपको जनवरी-फरवरी में सेकन्ड इंस्टॉलमेंट मिलता था,हमने उसे भी फर्स्ट इंस्टॉलमेंट के साथ-साथ आपको रिलीज कर दिया है। अगर कहा जाए तो प्रधान मंत्री जी ने जो अभी दो हजार करोड़ रुपये की घोऐाणा की है,उसकी इतनी जल्दी घोऐाणा करने की आवश्यकता भी नहीं थी। लेकिन,चूंकि यह एक सेंटीमेंटल इश्यू है और सारे राज्यों ने कहा कि हम अपने में सक्षम नहीं हैं,हमें केद्र का सहारा चाहिए,इसीलिए प्रधान मंत्री जी ने इतने बड़े दिल से आपके लिए इस फण्ड की घोऐाणा की ताकि पूर्वोत्तर के लोग यह महसूस न करें कि हम दिल्ली से बहुत दूर हैं।
मैडम,इसके बारे में कुछ नियम होते हैं,इसका कुछ सिस्टम होता है,उसकी भी आपको जानकारी होना जरूरी है,क्योंकि सब कुछ नियमों के तहत ही चलता है। आप किसी राज्य को पैसे तभी देते हैं जब आपके पास उस काम के लिए पैसे नहीं हैं। आपको एस.डी.आर.एफ. का फण्ड ऑलरेडी दिया हुआ है। वह पैसा जब खत्म हो जाता है तो आपको एन.डी.आर.एफ. से एडिशनल पैसे मिलते हैं। यह एक स्टैण्डर्ड नियम है और यह यूनिवर्सल है। इसे सबको मानना होगा क्योंकि अगर पैसे खर्च नहीं करेंगे तो फिर पैसे किस चीज़ के लिए मिलेंगे? इसके मुताबिक़,असम की ब्रह्मपुत्र नदी,जिसकी वज़ह से हर साल वहां बाढ़ आने का खतरा बना रहता है,उसे स्पेशल रूप से ध्यान में रखते हुए प्रधान मंत्री जी ने कहा है कि दो हजार करोड़ रुपये की जो घोऐाणा हुई है,उसमें Rs. 400 crore were given for improving the water-holding capacity of the Brahmaputra River, which will assist in flood control. यह असम के लिए अलग से दिया गया है। गौरव जी अगर कम से कम एक बार प्रधान मंत्री जी को इसके लिए धन्यवाद देते तो कितना अच्छा लगता?इतना अच्छा काम करने के बाद भी वे उन्हें धन्यवाद नहीं देते हैं और सवाल खड़े करते रहते हैं।
इसके अलावा, repair and maintenance, and strengthening of roads के लिए पैसे दिए गए हैं,क्योंकि बारिश की वज़ह से रास्ता,ब्रिजेज और काफी इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे वाटर सप्लाई,इलेक्ट्रिसिटी सप्लाई के लिए पोल्स,लाइंस वगैरह डैमेज हुए। उसके इप्रूवमेंट,मेंटनेंस और स्ट्रेंथनिंग के लिए 1200 करोड़ रुपये का आबंटन किया गया है। इसके अलावा इसकी स्टडी करने के लिए एक्सपर्ट्स लोगों की एक टीम बनाई जाएगी। कल ही मैंने अपने मंत्रालय के अधिकारियों के साथ इसके लिए क्या करना चाहिए, for carrying out study to synergize efforts towards finding time-bound long-term solution to the recurring floods in the region, इस पर चर्चा की। हर साल बार-बार जो फ्लड आती है,उसके लिए क्या करना चाहिए,इस पर चर्चा की। हमारे यहां आई.आई.टी. है,आई.आई.एम. है,हमारे यहां नॉर्थ ईस्ट इंस्टीच्यूट ऑफ साइंस एण्ड टेक्नोलॉजी है और देश के अन्य भागों से भी जो एक्सपर्ट्स हैं,उन लोगों को भी हम सामूहिक रूप से एक ज़गह बुलाकर हम यह तैयार करेंगे कि इसके सॉल्यूशन के लिए हम क्या कर सकते हैं। उसके लिए 100 करोड़ रुपये का आबंटन किया गया है। अगर उसके लिए भी आप हमें धन्यवाद देते तो हमें कितना अच्छा लगता?अच्छे काम की हमेशा ज़िक्र करनी चाहिए। अगर हम से गलती होती है तो आप उसे जरूर प्वायंट-आउट कीजिए।
इसके अलावा,एक चीज़ के बारे में मैं आपको क्लैरिफिकेशन देना चाहता हूं। चूंकि एस.डी.आर.एफ. के लिए पैसे पहले से दिए हुए हैं तो जो भी पैसे देंगे,उसे आपको एस.डी.आर.एफ. के लिए गिनती करनी पड़ेगी,क्योंकि ये पैसे एक ही चीज़ के लिए हैं। इसलिए,जो दो हजार करोड़ रुपये दिए गए हैं,उसके बारे में स्टेट गवर्नमेंट में भी कोई कंफ्यूजन न हो। एस.डी.आर.एफ. का जो फर्स्ट इंस्टॉलमेंट रिलीज किया गया था,वह अलग है। एस.डी.आर.एफ. का जो सेकन्ड इंस्टॉलमेंट आठ राज्यों को रिलीज होगा,वह इस दो हजार करोड़ रुपये में सब्स्यूम होगा। इसकी क्लैरिफिकेशन आपको होनी चाहिए। एस.डी.आर.एफ. में 90 प्रतिशत सेन्ट्रल शेयर होता है,जो ग्रांट के फॉर्म में दिया जाता है।
सौगत रॉय जी ने वेस्ट बंगाल के बारे में कहा है। जब प्राकृतिक आपदा आती है तो उस समय भेदभाव करने या राजनीति करने की कोई गुंजाइश नहीं होती है। यह ट्रेजडी है। इस बारे में श्री खड़गे जी ने बीच में टोक दिया,...(व्यवधान)लेकिन मैं आपको बताना चाहता हूं कि आपने पिछली बार हाऊस को मिसलिड किया था। उस बारे में मैं नोटिस भी दे सकता था,लेकिन मैंने नहीं दिया,क्योंकि आप बहुत ही वरिऐठ हैं। आपने उस समय कहा था कि कर्नाटक को एक रूपया भी नहीं दिया गया। उससे पिछले साल एन.डी.आर.एफ. का हाइएस्ट पैसा कर्नाटक राज्य को मिला है। श्री खड़गे जी ने इसे नहीं कहा,लेकिन जब आपने कहा,उस समय पैसा रिलीज हो चुका था। फिर भी,आपने सदन में खड़ा होकर कहा कि कर्नाटक को पैसा नहीं दिया गया। हमारे प्रधान मंत्री जी यहां बैठे हुए थे। मैं इस बारे में ज्यादा कुछ नहीं कहना चाहता हूं,क्योंकि आप वरिऐठ सदस्य हैं और हम लोग एक‑दूसरे को इज्जत देते हैं। अभी आपने कहा,इसलिए मैंने क्लारिफिकेशन दिया।...(व्यवधान)
इसके अलावा,प्रो. सौगत राय दादा ने जो कहा है,...(व्यवधान)आपने दामोदर वैली कार्पोरेशन के बारे में कहा है।...(व्यवधान)उसके डिसिल्टिंग के लिए ऑलरेडी 130 करोड़ रूपये दिए जा चुके है। ...(व्यवधान)वह रिलीज हो चुका है। आपके पास चला गया है।...(व्यवधान)देखिए,जब मैं सामूहिक रूप से जवाब दे रहा हूं,तो मैं पहले आपको क्लारिफिकेशन कर दूं।...(व्यवधान)यह ऐसी चीज हैं,मो. सलीम जी आप मेरे पुरानी साथी है।...(व्यवधान)आप बीच‑बीच में मत बोलिए।...(व्यवधान)
श्री मोहम्मद सलीम (रायगंज) : वेस्ट बंगाल डी.वी.सी. का एक मेम्बर है।...(व्यवधान)
श्री किरेन रिजीजू : यह जो वेस्ट बंगाल की बात कही गई है; देखिए, यहां से पैसा रिलीज हो चुका है, उसके बारे में कैसे खर्च करना है, क्या करना है। हम उसके बारे में अलग से चर्चा कर सकते हैं।...(व्यवधान)यह 130 करोड़ रूपये डिसिल्टिंग के लिए हैं। पैसे के अलावा बहुत चीजें की जाती हैं। उसमें राज्य सरकार का भी सहयोग होता है। केंद्र सरकार का सहयोग होता है। यह काम मिलजुल कर करने का है। इसमें ब्लेम करने की कोई चीज नहीं है। चूंकि आपने इसके बारे में बताया,इसलिए मैं आपको क्लारिफिकेशन करता हूं। आपने जो राजनीतिक बात कही है कि प्रधान मंत्री जी ने वेस्ट बंगाल को बिल्कुल छोड़ दिया है,ध्यान नहीं दिया है। मैं कहता हूं कि ऐसा बिल्कुल नहीं है। अभी हमारे होम मिनिस्टर साहब बैठे हुए हैं। अभी तक राज्य सरकार की तरफ से आपका मेमोरेंडम नहीं आया है। पहले तो राज्य सरकार को एक बेसिक काम करना होगा कि हमारे यहां इतना नुकसान हुआ है। इसके लिए हमको अतिरिक्त पैसा सेंट्रल से चाहिए। इसके लिए जो बेसिक मिनिमम रिक्वायरमेंट हैं,उसको करने के लिए आप पश्चिम बंगाल सरकार को कहिए।...(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : ऐसा नहीं है। इस तरह से बीच‑बीच में नहीं टोकते हैं। मो. सलीम जी, आप उस समय नोटिस में ध्यान नहीं दिया। आप बैठिए। बीच में नहीं बोलते हैं।
…( व्यवधान)
HON. SPEAKER: Nothing will go on record.
…(Interuptions)* श्री किरेन रिजीजू : मो. सलीम जी, आप पश्चिम बंगाल में इस मुद्दे को उठाइए।...(व्यवधान)इस बारे में मैं कुछ नहीं कह सकता हूं। लेकिन,पश्चिम बंगाल ने अभी तक मेमोरेंडम नहीं भेजा है। इसका मतलब यह नहीं है कि हम यहां से सहायता नहीं देंगे। यह नहीं हो सकता है। इसलिए,चाहे पश्चिम बंगाल हो,चाहे कोई भी राज्य हो; मैं आपको बताना चाहता हूं,आप लोगों ने भी कुछ आंकड़े पेश किए हैं। आज के दिन हमारे पास जो रिपोर्ट है,पूरे देश भर में 203 जिलें बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। वैसे जब बारिश होती है,तो थोड़ा‑बहुत नुकसान बहुत जगह होता है,लेकिन जो सिवियर नेचर या सीरियस इफेक्ट हुआ है,उसको मैं कह रहा हूं। जो टोटल मौतें हुई हैं,उसमें अभी तक बाढ़ से 962 मौतें पूरे देश भर में हुई हैं। इसके अलावा, 206 लोग इन्जर्ड हुए हैं। 23 people were missing as per records.
इसके अलावा, पशु, पक्षी तथा प्रोपर्टिज़ की जो बात है, हमने इनका भी ध्यान रखा है। टोटल एनिमल्स में 9 लाख 54 हजार 312 बड़े जानवरों को नुकसान हुआ है और 5 लाख 60 हजार 996 छोटे पशुओं का नुकसान हुआ है। टोटल घरों में 43 हजार 344 हाऊसेस डैमेज़ हुए हैं तथा पार्शिएली डैमेज 2 लाख 4 सौ 25 हुए हैं।...(व्यवधान)इसके बारे में मैंने आपको पहले बता दिया है कि पश्चिम बंगाल को हमारे एन.डी.आर.एफ से जो पैसा आपको मिला है,आपका जो इन्टाइट्लमेंट है,वह सेंट्रल से 406 करोड़ रूपये हैं और जिसमें आपको भी खुद शेयर देना होता है,वह 135 करोड़ रूपये है। पश्चिम बंगाल के लिए आपकी एंंटाइटलमेंट सैंटर से 406 करोड़ रुपए है,इसमें आपको 135 करोड़ शेयर देना होता है। हमने 203.25 करोड़ रुपया रिलीज किया है,यह राज्य सरकार के पास है। अगर जरूरत पड़ी तो 203.25 करोड़ रुपया जैसे ही मांगेगे रिलीज किया जाएगा। मैं एनडीआरएफ की बात नहीं कह रहा हूं,यह एसडीआरएफ की बात है।
देश भर में हमने प्रिपरेशन की है,मैंने राज्य सभा में भी इसके बारे में बताया है। आपने पूछा कि होम मिनिस्ट्री इस पर क्यों रिस्पांड करती है। रिलीफ,रिहेबिलिटेशन और रैस्कयू इमेरजेंसी चीज होती है। होम मिनिस्ट्री को यह दायित्व इसलिए दिया गया है क्योंकि होम मिनिस्ट्री के पास सारी फोर्सिस हैं,सैंट्रल फोर्सिस होम मिनिस्ट्री के पास हैं। एनडीआरएफ क्रिएट किया गया है,यह होम मिनिस्ट्री के पास है। अभी हमारे पास 12 बटालियन्स हैं। डिजास्टर मैनेजमेंट सब्जैक्ट होम मिनिस्ट्री में है। एनडीएमए एक्ट, 2005 बना था,हम लोगों ने इसे सदन में पास किया था। इसके मुताबिक एनडीएमए होम मिनिस्ट्री में है। होम मिनिस्ट्री नोडल मिनिस्ट्री होने के नाते मिनिस्ट्री आफ वाटर रिसोर्सिस,सैंट्रल वाटर कमीशन से कोआर्डिनेट करती है। इंडियन मेट्रियोलाजिकल डिपार्टमेंट,मिनिस्ट्री आफ अर्थ साइंस से कोआर्डिनेट करती है। हम तमाम साइंटिफिक इंस्टीटय़ूशन्स से कोआर्डिनेट करते हैं। जब ड्रॉउट का मामला होता है तब हम एग्रीकल्चर मिनिस्ट्री से संबंध रखते हैं। इंटर मिनिस्ट्रीयल टीम जाती है,इसे होम मिनिस्ट्री का ज्वाइंट सैक्रेट्री हैड करता है और डॉयरेक्टर लैवल का अफसर या अंडर सैक्रेट्री,डिप्टी सैक्रेट्री और बाकी मंत्रालयों यानी नीति आयोग,फाइनेंस मिनिस्ट्री के अधिकारी साथ में चलते हैं।
माननीय अध्यक्ष जी,मैं दो मिनट में अपनी बात समाप्त कर दूंगा। गौरव जी ने कहा कि हम रिस्पांस लेट करते हैं। आप लोगों को कभी एनडीआरएफ की वन मिनट ड्रिल देखनी चाहिए। हमने कहा कि समय बहुत महत्वपूर्ण होता है। जब कोई नैचुरल डिजास्टर होता है तो रैस्कयु करना पहली बात होती है। आप जीवित रैस्कयु करेंगे,यह सबसे महत्वपूर्ण होता है। रैस्कयू के बाद रिलीफ आता है,रिलीफ के बाद रिहेबिलिटेशन आता है,रिहेबिलिटेशन के बाद लांग टर्म रिकंस्ट्रक्शन होता है। We have a policy for build, back, better. We have a challenge which we have accepted that if there are natural disasters, we will face it; we will face the challenge and we will build, back better. यह हमारा चैलेंज है। इसके लिए गाइडलाइन्स हैं,लंबी-चौड़ी चर्चा करने की आवश्कता नहीं है। हमने रिस्पांस टाइम को इतना शार्ट कर दिया कि आज पूरे देश में एनडीआरएफ टीम एडवांस डिप्लॉएड है।
स्कूलों,कॉलेजों,इंस्टीटय़ूट्स और गांवों में अवेयरनैस क्रिएट की गई है। हमने लगातार अवेयरनैस कैम्पेन चलाया है। मॉक ड्रिल्स करते हैं कि अर्थ क्वेक आने पर,साइक्लोन आने पर किस तरह से अपने आपको सुरक्षित रखना चाहिए। स्कूल के बच्चों से लेकर गांव की पंचायत तक ट्रेनिंग देनी शुरु की है। मैं अपनी तारीफ नहीं करना चाहता हूं लेकिन हमने जो काम किया है,इसकी सराहना युनाइटेड नेशन्स ने की है। राजनाथ सिंह जी की प्रेजेंस में मुझे युनाइटेड नेशन के माध्यम से अवार्ड दिया गया,एशिया पेसिफिक के लिए डिजास्टर चैम्पियन डिक्लेयर किया इसलिए नहीं कि मैं बहुत एक्सपर्ट हूं,बल्कि इसलिए कि हमारी सरकार जो करती है,दिल लगाकर सीरियसली काम करती है। हम दिखाने के लिए काम नहीं करते हैं। हम मेहनत करते हैं,लग्न के साथ काम करते हैं।
सौगत राय जी और गौरव जी ने यह मुद्दा उठाया था। मैं समझता हूं कि उन्होंने जो जानकारी प्राप्त करनी चाही है,मैंने दी है। अगस्त के महीने में फ्लड आती है,उसके लिए भी हम तैयार हैं। माननीय अध्यक्ष जी,मैं इसी आश्वासन के साथ आपको धन्यवाद देते हुए अपना रिस्पांस समाप्त करता हूं।
माननीय अध्यक्ष : श्री बलभद्र माझी,आप केवल प्रश्न पूछिये। अभी श्री कलिकेश देव जी आये नहीं हैं,इसलिए आप भाऐाण न देकर केवल प्रश्न पूछिये।
श्री बलभद्र माझी (नबरंगपुर): अध्यक्ष महोदया,मैं बहुत कम शब्दों में अपनी बात कहूंगा। आपने मुझे बोलने का मौका दिया,उसके लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद। ...(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : इसमें सब मैम्बर्स नहीं बोलते। आप अपनी बात जल्दी कहिए।
श्री बलभद्र माझी : अध्यक्ष महोदया,ओडिशा कोस्टल स्टेट है और इस साल इसमें दो फेज में फ्लड आया। पहले फेज में जो फ्लड आया,वहां जनरली फ्लड नहीं आता था,जैसे कोरापुट,रायगढ़,मालकानगिरि,नवरंगपुर आदि में अप्रेसिडेंटेड फ्लड हुआ। यहां चार मेजर इरीगेशन प्रोजैक्ट्स--तेल इंटीग्रेटिड,मिडिल कोलाब अपर वंसधारा और लोअर वंसधारा बनने हैं। यह वर्क वऐाऩ 2008 में सैंट्रल गवर्नमैंट के पीएसयूज M/s WAPCOS को दिया गया था। इसमें बहुत कहने के बाद मिडिल कोलाब और तेल इंटीग्रेटिड का डीपीआर अभी 20 जून को सीडब्ल्यूसी को सबमिट हुआ है। लेकिन उन्होंने अभी तक वंसधारा का डीपीआर नहीं दिया है। अगर यह प्रोजैक्ट हो जाता तो उस एरिया के सिंचाई के साथ फ्लड को कंट्रोल किया जा सकता है।
हमारे सैकिंड फेज में जो फ्लड हुआ, मैडम कहा जाता है कि ‘बिन बादल बारिश’, लेकिन यह बिन बारिश का बाढ़ है। छत्तीसगढ़ में बारिश हुई, लेकिन फ्लड ओडिशा में आया। हम यह फ्लड बहुत दिन से झेल रहे हैं। हम यह मुद्दा पहले भी कई बार उठा चुके हैं। जैसे इंटर स्टेट राइपेरीयिन रिवर है, तो ऊपर हिस्से के स्टेट्स की डय़ूटी है कि वे पानी रिलीज करते समय नीचे के स्टेट्स को टाइमली इन्फोर्मेशन दें। पहले जब हम गर्मी के दिनों में उनसे पानी छोड़ने के लिए रिक्वैस्ट करते थे, तो वे पानी नहीं छोड़ते थे। लेकिन इस सीजन उन्होंने बिना बताये हुए ही पानी छोड़ दिया, जिसकी वजह से हमारे यहां फ्लड आ गया।
अध्यक्ष महोदया, मैं आपके माध्यम से रिक्वैस्ट करना चाहूंगा कि इंटर स्टेट डिस्प्यूट के लिए जल्दी ही ट्रिब्यूनल बनाया जाये, ताकि यह समस्या हल हो सके। इसी तरह झारखंड और वेस्ट बंगाल से जो नदी आती है, उसकी भी वही स्थिति है। वे लोग बिन बताये ही पानी छोड़ देते हैं, जिसकी वजह से हमें बाढ़ झेलनी पड़ती है।...(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : मैं सबको बोलने का मौका नहीं दे सकती।
…( व्यवधान)
श्री बलभद्र माझी : अध्यक्ष महोदया,हमारे यहां सुवर्ण रेखा और ऋऐिाकला आदि सब नदियां हैं। हमारी स्टेट गवर्नमैंट ने जो स्टेप लिया है,उसके लिए हम चीफ मिनिस्टर को बहुत धन्यवाद देना चाहेंगे। ...(व्यवधान)वऐाऩ 1999 के साइक्लोन से लेकर अब तक ओडिशा सरकार ने बहुत अच्छा काम किया है और बहुत सेव किया है। ...(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : ठीक है। आप केवल प्रश्न पूछिये।
…( व्यवधान)
श्री बलभद्र माझी : मैडम,प्रधान मंत्री जी ने दरियादिली दिखाते हुए असम और गुजरात के लिए पहले ही दो हजार और एक करोड़ रुपये देने की घोऐाणा की है। ...(व्यवधान)मैडम,हमारा पहले का फैलिन और हुडुहुड का पैसा भी बचा हुआ है। आप उसे जल्दी रिलीज करें। ...(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : मैंने आपको बहुत टाइम दे दिया है,इसलिए आप बैठ जाइये।
…( व्यवधान)
श्री बलभद्र माझी : मैडम,हमारे फेज वन के फ्ल्ड में 218 करोड़ रुपये के नुकसान का आकलन हुआ है और फेज टू के डैमेज का अभी आकलन हो रहा है। मेरी रिक्वैस्ट है कि आप 218 करोड़ रुपये जल्द से जल्द रिलीज करें और जैसे ही हम फेज टू का बतायेंगे,वैसे आप तुंत रिलीज करने का कऐट करें। धन्यवाद।
श्री किरेन रिजीजू : मैडम,अभी ओडिशा के सदस्य ने दो-तीन बातें उठायी हैं। सबसे पहले आपने वंसधारा डिस्प्यूट के बारे में कहा,तो वह सब-जूडिस है। मैं यहां उस पर कोई कमेंट नहीं कर सकता। लेकिन जो महानदी ट्रिब्यूनल है,वह अंडर कंसीडरेशन है। वाटर रिसोर्स मिनिस्ट्री से बात चल रही है। मैं यह कहना चाहता हूं कि महानदी भी सब-जूडिस है। मैं तारीफ करना चाहता हूं कि जब साइक्लोन फैलिन आया,तब ओडिशा सरकार ने बहुत अच्छा काम किया। जब आपके मुख्य मंत्री जी आये थे,तो वे राजनाथ सिंह जी से मिले। मैंने भी दो पत्र लिखे और आपसे भी मेरी समय-समय पर बातें हुईं। हमने ओडिशा सरकार को उसके लिए 1149.83 करोड़ रुपये रिलीज किये हैं। पिछली सरकार ने यह पेंडिंग करके रखा हुआ था,लेकिन हमने इसे दिया है। इन्होंने वाटर रिलीज के बारे में कहा है,तो देश भर में एक स्टैंडर्ड प्रोटोकाल है कि ऊपर के स्टेट्स पानी को किसी प्रोजैक्ट के माध्यम या अन्य किसी कारण से कंट्रोल करते हैं,तो वे पानी रिलीज करने की जानकारी नीचे के स्टेट्स को समय से दें।
13.00 hours जब भी ऊपर बारिश होती है,उसके बारे में भी हम लोगों की तरफ से और मेट्रोलॉजिकल डिपार्टमेंट की तरफ से फोरकास्टिंग करके,डाउनस्ट्रीम स्टेट्स को जानकारी देते हैं। इसलिए आपकी चिन्ता को हम जरूर ध्यान में रखेंगे और ओडिशा में सेंट्रल गवर्नमेंट के जो प्रोजेक्ट्स है,वे अच्छे चल रहे हैं।...(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष: मैंने केवल दो लोगों को Zero Hour में बोलने के लिए कमिट किया था,उनको ही बोलने के लिए अवसर मिलेगा। Calling Attention is over.
...(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष: आप लोग बैठिए। इनसे वादा किया था,आपसे नहीं।
...(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष: आप लोग बैठिए। अब किसी को समय नहीं मिलेगा।
...(व्यवधान)