Lok Sabha Debates
Discussion Regarding Situation Arising Out Of Delay In Preparation For ... on 9 August, 2010
> Title: Discussion regarding situation arising out of delay in preparation for Commonwealth Games, 2010.
MR. DEPUTY-SPEAKER: Now the House will take up Item No. 14.
Hon. Members, the discussion on situation arising out of delay in preparation for Commonwealth Games, 2010 has been admitted in the name of Shri Virendra Kumar and Shri A.T. Nana Patil. Shri Virendra Kumar has requested the hon. Speaker to allow Shri Kirti Azad to raise the discussion on his behalf. Hon. Speaker has since acceded to the request of Shri Virendra Kumar.
Shri Kirti Azad.
श्री कीर्ति आज़ाद (दरभंगा):उपाध्यक्ष महोदय, इस प्रकार के राष्ट्रमंडल खेल विश्वभर में न भूतो न भविष्यती होने वाले हैं। इस प्रकार का भ्रष्टाचार न भूतो न भविष्यति। दिनदहाड़े लूट न भूतो न भविष्यति। हमारी यूपीए वन की सरकार के खेल मंत्री, ऐसे खेल मंत्री विश्व में न भूतो होंगे न भविष्यति। यह शायद पहले ऐसे खेल मंत्री थे, जिन्हें खेलों से कोई मतलब नहीं था। उनके अनेकों वक्तव्य हम रोज़ पढ़ते रहते हैं। मुझे खिलाड़ी होते हुए बहुत खेद है और हमारे बीच में जितने भी व्यक्ति यहां हैं, कभी न कभी बचपन से बड़े होते हुए अपनी जिंदगी में कोई न कोई खेल अवश्य खेले होंगे। उन्होंने कहा कि यह खेल जो कर रहे हैं, वे शैतान हैं। उन्होंने कहा कि यह खेल जो रहा है, यह केवल लूटपाट है। मैंने परसों उनका एक वक्तव्य पढ़ा और बहुत ही गंभीर वक्तव्य है। अभी तक एससीएसटी के स्पेशल प्रोविज़न के फण्ड आए थे, उसके डायवर्जन के बारे में हमारे माननीय सदस्यों ने विपक्ष की तरफ से रखी थी। वह आग अभी तक ठण्डी नहीं हुई है और एक और वक्तव्य यूपीए एक के खेल मंत्री द्वारा आया है।
उन्होंने एक बहुत ही गंभीर वक्तव्य दिया है। मैं सरकार से यह जानकारी चाहूंगा कि इन सब का जवाब कौन देंगे? अगर खेल मंत्री जी से पूछें तो वे कहते हैं कि मेरा काम तो साईं के जो स्टेडियम बनाने हैं, वहां तक है। अरबन डेवलपमेंट मिनिस्टर से पूछें तो वे कहते हैं कि मेरी एजेंसियों ने जो काम करना है, मैं वहां तक हूं। दिल्ली सरकार से पूछें तो वे कहते हैं कि हमें जहां तक इफ्रास्ट्रक्चर बनाना है, हम वहां तक हैं। मैं जानना चाहता हूं कि यह गंभीर वक्तव्य यूपीए-I के खेल मंत्री, माननीय मणिशंकर अय्यर जी ने परसों दिया है। एक गोष्ठी हुई थी और वह गोष्ठी 21वीं सदी के पत्रकारिता तथा भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि पर की गई थी। उन्होंने अपने सम्बोधन में कहा, उन्होंने जो कहा, मैं उसे कोट करना चाहता हूं कि अपनी अंतरराष्ट्रीय छवि बनाने के लिए भारत 40 करोड़ किसान परिवारों की कर्ज माफी के लिए रखे गए 70 हजार करोड़ रुपए में से आधा कॉमन वैल्थ गेम्स पर खर्च कर रही है। खिसियानी बिल्ली खम्भा नोचे। उन्हें किस बात की नाराजगी है? आज वह सरकार के ऊपर, जिस सरकार में वह खेल मंत्री थे, आरोप पर आरोप मढ़े जा रहे हैं। आज तक किसी ने जानकारी नहीं दी, किसी ने यह जानने की कोशिश की कि स्टेडियमों की क्या हालत है। क्या हम अपनी नाक, इज्जत बचा पाएंगे? यूपीए की सरकार अपनी पीठ खुद थपथपाती है, अपने मुंह मियां मिट्ठू बनती है कि हमने 70 हजार करोड़ रुपए किसानों के कर्ज माफ किए थे। मैं सरकार से इसका जवाब अवश्य चाहूंगा कि उन्होंने यह जो वक्तव्य दिया है, उसमें कितनी सच्चाई है? ...( व्यवधान) वित्त मंत्री जी को बहुत जवाब देने पड़ेंगे।
उपाध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से सदन में बताना चाहता हूं कि एक दिन एक टेलीविजन चैनल पर सीवीसी रिपोर्ट का खुलासा हुआ, सीएनएन आईबीएन चैनल था, उसने सीवीसी रिपोर्ट का खुलासा किया। ऑफिशियल सिक्रेट्स एक्ट थे, क्यों आया, कौन लेकर आया, मुझे मालूम नहीं। कौन घर का भेदी था, जो लंका ढहा रहा था? यहरिपोर्ट सीवीसी की आई, जिसके अंदर केन्द्र सरकार, राज्य सरकार, एलजी का डीडीए और सरकार के जो विभिन्न विभाग हैं, उनके द्वारा की गई करोड़ों अनियमितताओं के बारे में खबर थी। टेलीविजन पर यह भी देखा गया कि सीवीसी के एक सदस्य भी आए और उन्होंने कहा कि कुछ लोग हमारे पास सीवीसी में आए थे। जब मैं छोटा था तो मुझे जेम्स बाँड के सिनेमा देखने का बड़ा शोंक था। उसमें जेम्स बाँड एमआई-6 का इंग्लैंड का एक सिपाही है, उसके पास लाइसेंस टू किल है। मैं यह जानना चाहता हूं कि लाइसेंस टू करप्शन मांगने के लिए सीवीसी के पास सरकार की तरफ से कौन गया था? ये बातें भी सामने आईं। क्या यह केवल एक संयोग था या मैं यह कहूं कि सरकार में बैठा हुआ दूसरा धड़ा, जो एक धड़े को नहीं चाहता, 24 घंटे के अंदर एक दूसरे न्यूज़ चैनल टाइम्स नाऊ पर, तीन महीने पहले उनके पास, उनके खेल मंत्रालय में वह चिट्ठी पड़ी थी कि आर्गनाइजिंग कमेटी द्वारा बेटन रिले में गड़बड़ हुई, उसे छिपाने के लिए दी गई। यह मेरा गंभीर आरोप इस सरकार पर है, मैं सरकार से इसका जवाब चाहूंगा। ऑफिशियल सिक्रेट्स एक्ट का हनन हुआ, सीवीसी की रिपोर्ट में इनकी जो घोर अनियमितताओं सामने आई थीं, उन्हें छिपाने के लिए दूसरी रिपोर्ट 24 घंटे के अंदर दी गई। मैं कोई आर्गनाइजिंग कमेटी का एडवोकेट नहीं हूं और न ही सरकार का हूं। जिस आदमी ने गलती की है, जिसने ये घोर अनियमितताएं की हैं, उसे तुंत दंडित किया जाना चाहिए। मेरे ख्याल से इसे लेकर सदन के अंदर किसी प्रकार का कोई मतभेद नहीं हो सकता। सीवीसी की रिपोर्ट में घोर अनियमितताएं सामने आई हैं, उसमें बहुत कुछ कहा गया।
उपाध्यक्ष महोदय, जिनमें यहां तक कहा गया है कि जिसका दाम एक रुपया होना चाहिए था, उसके दाम 10 गुने ज्यादा बढ़ाकर टेंडर किए गए। वह रिपोर्ट मेरे पास है। जो काम एक रुपए में होना चाहिए था उसे 10 रुपए में कराने के टेंडर किए गए। एक नंबर का काम नहीं किया, 10 नंबर का किया, तो फिर सिनेमा का वही गाना याद आता है जिसमें कहा गया है कि ‘दुनिया एक नंबरी तो मैं दस नंबरी’ ये जो कॉमन गेम्स हो रहे हैं, लोग सोचेंगे कि पूरा ‘कॉमनवैल्थ गेम्स’ क्यों नहीं कहा जा रहा है, केवल कॉमन गेम्स ही क्यों कहा जा रहा है? वह मैं इसलिए कह रहा हूं कि ‘कॉमनवैल्थ गेम्स’ में से ‘वैल्थ’ तो गायब है, केवल गेम्स ही रह गए हैं।
महोदय, सी.वी.सी. की बहुत गम्भीर रिपोर्ट है। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष यानी 2009 में वे 121 प्रोजैक्टों को देखने जगह-जगह गए और उन्होंने चैकिंग की तथा गुणवत्ता को देखा। इस वर्ष 57 जगहों पर गुणवत्ता को चैक करने गए। ऐसी एक भी ऐजेंसी नहीं है, जिसके ऊपर उन्होंने आरोप नहीं लगाए हों, फिर चाहे वह एजेंसी, केन्द्र सरकार की हो या दिल्ली सरकार की। उन आरोपों को आप देखेंगे, तो जो व्यक्ति ‘काला अक्षर भैंस बराबर हो’ या जिसे आप कहते हैं कि ‘बछिया का ताऊ’ अगर उसके सामने भी आप इसे पढ़ दें, तो वह भी समझ जाएगा कि यह क्या है।
महोदय, सी.वी.सी. की रिपोर्ट के अंतिम पृष्ठ में डी.डी.ए. के बारे में कहा गया है, जो सीधे लैफ्टीनेंट गवर्नर के अंडर में आता है। अब मैं लैफ्टीनेंट गवर्नर को तो कुछ नहीं कह सकता, क्योंकि वे तो राष्ट्रपति जी का प्रतिनिधित्व करते हैं। वहां पर अनियमितताएं पाई गई हैं।
मैं कोट करना चाहता हूं- In the work related to CWG, the PQ application was submitted by consortium of four companies - चार कंपनियों के उन्होंने नाम लिए हैं- Mrs. Payce Consolidated Ltd., Australia; M/s. Paynter Dixon Construction Pvt. Ltd., Australia,; M/s. Sportina Exim Pvt. Ltd. Mumbai; and M/s. Robertson + Marks Architects Pvt. Ltd., Australia. तीन ऑस्ट्रेलिया की कंपनी हैं और एक मुम्बई की है। As per the agreement to establish a consortium, the consortium members agreed to incorporate a limited liability company, that is, a Special Purpose Vehicle Company (SPV) in the name and style of “Sportina-Payce Construction (India) Pvt. Ltd.” With the following financial stakes. सबके स्टेक के बारे में इसमें लिखा गया है कि किसका कितना शेयर था और किसके कितने पैसे थे। उसी में आगे जाते हैं। I quote again – The agency was pre-qualified on the basis of experience of M/s. Payce Consolidated Ltd. But at the time of submitting the tender, a company was formed as “Sportina Payce Infrastructure Pvt. Ltd.” - उसका नाम बदल दिया गया। It submitted the tender and became L1. It is fair enough. And finally, work was awarded to them. The structure of the company “M/s. Sportina Payce Infrastructure Pvt. Ltd.” Was different than the original stipulated consortium. सुनिएगा - in this other partners except M/s. Sportina Exim Pvt. Ltd. were not represented at all. Ultimately at site only M/s. Sportina Exim Pvt. Ltd. was executing the work – Sir, it is very important to note - which does not have expertise and experience, which was considered at the time of PQ. Thus, undue favour has been given to agency. यह रिपोर्ट है। इसमें केवल डी.डी.ए. के बारे में बताया गया है। मैं आपको ऐसी रिपोर्ट एक नहीं, अनेक बताऊंगा। ऐसे 30-30 आइटम्स थे, जो कि नोटिस इनवाइटिंग टेंडर के पार्ट नहीं थे, भाग नहीं थे। उसके बाद भी टेंडर में उन्हें 20-20 गुना ज्यादा रेट देकर इनकॉर्पोरेट कर लिया गया। मैं अगर इस पूरी रिपोर्ट को पढ़ूं, तो आपको बहुत आश्चर्य होगा। इसके अन्तर्गत जो अनियमितताएं हुई हैं, उनमें एक और बड़ी मजेदार बात है कि - Award of work to ineligible agencies – ineligible agencies were awarded the work – one Joint Venture (JV) firm was qualified based on a particular name and composition of the JV whereas bits submitted by the JV with different compositions were accepted. Work finally had to be terminated which resulted into time and cost overrun. सब के ऊपर है। एन.डी.एम.सी. के बारे में है। जो कम से कम 50 प्रतिशत गुणवत्ता होनी चाहिए, वह नहीं थी।
“In the other case also, similar pattern of failure of the concrete samples were observed. In this case, all the concrete cubes failed when tested in the presence of the CTEO team.” सी.टी.ई.ओ. मतलब चीफ टैक्नीकल एग्जामिनर्स आर्गेनाइजेशन, जो कि सी.वी.सी. का ही भाग है, उन्होंने किया। It further says:
“All the concrete cubes failed when tested in the presence of the CTEO Team, out of which some exhibited the strength even lower than 50 per cent of the requirement, while others exhibited almost 60-80 per cent of the required strength.” अब मैं अगर इस पूरे प्रकरण को लेकर बैठकर पढ़ने लग जाऊं तो शायद 26 अगस्त तक पूरा सैशन खत्म हो जायेगा और कोई चीज़ खत्म होने को नहीं आयेगी। जिस प्रकार से उन्होंने भ्रष्टाचार किया है, मुझे तो समझ में नहीं आता कि जो स्टेडियम्स 2003 में हमने 326 करोड़ रुपये का बिड किया था, टोटल बिड जो की गई थी, वह 1566 करोड़ की थी। हमारी यू.पी.ए.-I के समय जो खेल मंत्री थे, उनके समय में 3566 करोड़ रुपये का बजट एप्रूवल हमको कैबिनेट से मिला, यानि 100 प्रतिशत ज्यादा। मैं यह जानना चाहता हूं कि 2007 में ही अगर हम कोई कार्यक्रम करना, स्टेडियम्स बनाना शुरू करते तो क्या यह परिस्थिति हमारे सामने होती? सी.वी.सी. की रिपोर्ट में आई हुई इन अनियमितताओं के बारे में कौन जिम्मेदार है। आज मैं सरकार पर आरोप लगाता हूं कि आज तक सरकार की ओर से कोई जवाब नहीं मिला है। मुझे एक चीज़ यह समझ में नहीं आती, सी.ए.जी. की रिपोर्ट आई, सी.ए.जी. की रिपोर्ट में कहा गया कि कोई कोआर्डीनेशन ही नहीं है, कोई तालमेल ही नहीं है। सचिन तेंदुलकर और वीरेन्द्र सहवाग साथ में खेलें और तालमेल न हो तो रन आउट होना तो स्वाभाविक है। आज वही परिस्थिति यहां पर बनी है और इस तालमेल को बिठाने के लिए मैं इन्फोर्मेशन www.pib.nic.in का मैं यह आपके सामने रखता हूं। पब्लिक इन्फोर्मेशन ब्यूरो है और उसके अन्दर तालमेल बिठाने के लिए जनवरी में तत्कालीन एच.आर.डी. मिनिस्टर श्री अर्जुन सिंह जी ने 29 जनवरी, 2005 को अपने ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स को बुलाया। उस ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स में अलग-अलग निर्णय लिए गये। जैसे सबसे पहले जो मैं पूछता हूं, जिम्मेदारी किसकी है और माननीय खेल मंत्री जी उस जिम्मेदारी से कहते हैं, मेरा तो कोई मतलब नहीं है, मैं तो केवल जो मुझे स्पोर्ट्स स्टेडियम्स बनाने हैं, वह देखूंगा। आपके अनेकों बार मैंने स्टेटमेंट्स देखे हैं। आपको ध्यान होगा कि कंसलटेटिव कमेटी में हम बैठे, तब भी हम लोगों ने इस विषय पर बहुत गम्भीर चर्चाएं की थीं। आपको लेकर व्यक्तिगत रूप से मैं बहुत श्रद्धा रखता हूं, लेकिन जो कमेटियां बनीं, उसमें सबसे पहला दायित्व आपके ऊपर ही बनाया गया। सबसे पहली कमेटी थी- To constitute an apex committee to be headed by the Sports Minister, which will have the overriding powers and responsibilities for overseeing and coordinating the Commonwealth Games. The minutes of all the other committees, related to the conduct of the Commonwealth Games, 2010 shall be submitted to the apex committee periodically for its information. The Chairman of the apex committee can also call for such information which it deems fit and can give such guidance that may be required. The Chairman of the apex committee may be kept informed by all the other committees whenever any major decision is taken.
डॉ. एम.एस.िगल: आप जरा डेट दे देते, यह डेट कौन सी है? ...( व्यवधान)
SHRI KIRTI AZAD : This is in January 2005. The then Union Minister did it. You can also go into the website www.pib.nic.in.
डॉ. एम.एस.िगल: नहीं-नहीं, डेट दीजिए।
श्री कीर्ति आज़ाद :29 जनवरी, 2005 और यह सरकार के www.pib.nic.in से मैंने उतारा है। I can authenticate it if you wish or if you ask me so.
DR. M.S. GILL: No. This is enough. It is dated 29th January 2005. We are now in 2010.
श्री कीर्ति आज़ाद :गुरू द्रोणाचार्य के सामने मैंने अपनी यह बात रख दी। दूसरे कृपाचार्य महाराज-महाभारत से कुछ सीखो। जिन्होंने हस्तिनापुर लूटा, उन्होंने लुटवा दिया। दूसरे कृपाचार्य जी महाराज-इसमें कहा था:
...( व्यवधान) मुझे आगे बोलने दीजिए, तो मैं बताता हूं।
To constitute three -member sub-Committee of the GoM headed by the then Finance Minister, Shri P. Chidambaram, to supervise the deal with all financial matters.
यह उसी दिन का है। मैं जितनी चीजें आपको बता रहा हूं, सारी उसी दिन की बता रहा हूं। जिस दिन उन्होंने बनाया था, गुरू कृपाचार्य अब तो प्रणव जी हो गए, चिदंबरम जी अब गृह मंत्रालय में आ गए। प्रणव जी इसमें आए हैं, तो वही बतायेंगे कि क्या घोटाला हो रहा है? यह संदिग्ध आरोप है कि कोर्डिनेशन नहीं बना पाए, जब 29 जनवरी, 2005 को कमेटियों का गठन किया गया, यह रही गुरू कृपाचार्य जी की बात। अब बात करते हैं, आंख में पट्टी बांधे हुए गांधारी की - दिल्ली सरकार।
There will be a sub-Committee headed by the Chief Minister of Delhi which will look after all other issues that come under the jurisdiction of the Government of NCT of Delhi as pre the Constitution.
कांस्टीटय़ूशन की धज्जियां उड़ी हैं, द्रोपदी का चीरहरण हुआ, लेकिन कोई भगवान कलयुग में आने वाले नहीं हैं, कोई भी यदुवंशी नहीं हैं, जो बचा लेंगे। मुलायम सिंह जी, ...( व्यवधान) अब आइए शकुनि पर, जिन्होंने चौसर खेलकर हस्तिनापुर को लुटवा दिया। ...( व्यवधान)
श्री मुलायम सिंह यादव (मैनपुरी): अगर हम लोग खड़े नहीं होते, तो आज कोई आपको बोलने के लिए पूछता नहीं। ...( व्यवधान) यह सच है। चाहे स्पीकर हों, चाहे यह ब्लॉक हो, मैंने इनको कहा, तो इन्होंने मुंह चुरा लिया। ...( व्यवधान)
श्री कीर्ति आज़ाद :अब शकुनि पर आ जाएं। कमेटी आफ सेक्रेटरीज, इसमें आईएएस हैं, आईपीएस हैं, अपने को प्रजातंत्र के वाचडॉग कहते हैं, बांध रखा है, रख छोड़ा है, देश की किस्मत, लाल फाइलों और फीतों पर, उनकी यह कमेटी है।
A Committee of Secretaries headed by the Cabinet Secretary will be responsible for the implementation of the decisions of the GoM regarding the Commonwealth Games. ” गुरू द्रोण जनवरी 29, 2005 आपको समर्पित करता हूं। इनके फंक्शन्स क्या थे? इस विषय पर भी बात कर लेते हैं। इन लोगों को मीटिंग्स करनी थीं। फंक्शन जिनको करना था, माननीय कलमाड़ी जी यहां उपस्थित हैं। Commonwealth Games Federation- owner of the Commonwealth Games, बिल्कुल समझ में आता है। Organising Committee (OC), a society registered in February 2005, bears primary responsibility for successful conduct of the Games. करेक्ट, स्टेडियम हैंड ओवर करें। गवर्नमेंट आफ इंडिया, सबसे ऊपर नाम है, the Ministry of Youth Affairs and Sports will be the nodal Ministry for the Government of India for the Games. मैं बड़े अदब के साथ कहता हूं। मैं एक खिलाड़ी हूं और यह हमारे खेल मंत्री हैं। वह जब बयानबाजी करते हों कि मुझे केवल अपने साई के स्टेडियम से मतलब है, दूसरे से नहीं, तो एक खिलाड़ी होने के नाते टीस होती है, दर्द होता है, इसलिए मैं आपसे इस विषय पर अवश्य नाराज हूं। Group of Ministers will be responsible for the apex level policy decisions. ओबिवियसली प्रणव दा ही होंगे, क्योंकि चिदंबरम जी तो वहां नहीं हैं। उनको वह हेड करना था, सारे फाइनैंशियल देखने थे। वह कहां हैं? मुझे मालूम नहीं है, किंतु इस गड़बड़ घोटाले का हिसाब तो अंततः वही करके देंगे। The Committee of Secretaries Chaired by the Cabinet Secretary will be responsible for monitoring implementation of policy decisions. Government of India, Lieutenant Governor, उनका नाम मैं नहीं कह सकता, क्योंकि वह सीधे राष्ट्रपति के प्रतिनिधि हैं। अगर नाम बोलूं तो मुझ पर न कुछ गड़बड़ हो जाए। Lieutenant Governor will have the overall responsibility for work being executed by the Delhi Government with specific reference to security, law and order and matters coming under DDA.
Chief Minister’s Committee will be responsible for decisions on infrastructure and other activities within the jurisdiction of Delhi Government.
Empowered Committee chaired by the Chief Secretary will be responsible for overseeing projects implemented by the Delhi Government and its agencies.
सबको अपने-अपने काम दे दिए गए हैं। कई ऑनर्स उनके रहे हैं, अलग-अलग सरकार की एजेंसियां हैं, सीपीडब्ल्यूडी है, पीडब्ल्यूडी है, सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स है, डीडीए है, एनडीएमसी है, म्युनिसिपल कारपोरेशन देलही, पब्लिक कोच डिवीजन देलही, गवर्नमेंट इंजीनियर्स इंडिया फलां-फलां, मतलब आप सुनते रहिए और सुनते चले जाइए। मैं केवल यह जानना चाहता हूं जब हम यहां पर भारत सरकार के विभागों के बारे में और दिल्ली सरकार के विभिन्न विभागों के बारे में किए गए गोलमाल और भ्रष्टाचार की चर्चा के लिए बैठे हैं कि क्यों इस प्रकार से हमारी नाक विश्व भर में कट रही है?
मैं जानना चाहता हूं कि इन कमेटीज़ की कितनी मीटिंग्स हुईं? जो कमेटीज़ जनवरी, 2005 में फॉर्म कर दी गई थीं, 2005 से 2010 तक क्या इनके सामने अनियमितताएं नहीं आईं? क्या इनके पास रिपोर्ट्स नहीं आईं? यदि नहीं आई तो उसके लिए कौन जिम्मेदार है और यदि आईं और उस पर कोई कार्यवाही नहीं की गई, तो कौन जिम्मेदार है? मुझे मन में संशय है कि माननीय खेल मंत्री इन सब विभागों का मिलाकर जवाब दे सकेंगे। सीवीसी की रिपोर्ट, सीएजी की रिपोर्ट और अखबारों में रोज जो निकलता है, कितना पढ़ूं, पढ़ता चला जाऊंगा, इतनी सारी कटिंग्स हैं, क्या दिखाऊं, किस-किस विषय पर बात करूं। हमारे पास एक से एक कटिंग्स पड़ी हैं और रोज लोग देखते हैं। मेरे ख्याल से सबके मन में यह टीस है वह सीवीसी की रिपोर्ट। लाइसैंस टू करप्शन मांगने कौन गया था, उसका जवाब माननीय खेल मंत्री हमें अवश्य दें, क्योंकि यह एक बहुत ही गंभीर आरोप है। हाई पावर कमेटी बन जाने के बाद इनका आपसी तालमेल क्या था? अगर मैं यह कहूं कि इनका तालमेल चल रहा था और आंख पर गांधारी की तरह पट्टी बांधकर भ्रष्टाचार हस्तिनापुर को लुटते हुए देख रहे थे, तो उसके लिए यह सरकार जिम्मेदार है और मैं पूरे अदब के साथ इनके ऊपर यह आरोप लगाता हूं। क्या इन्हें मालूम नहीं था कि उस कमेटी में क्या हो रहा है? हाई लैवल कमेटी की आपस में बैठकर जो बातें हो रही थीं, क्या उनके बारे में नहीं मालूम था? क्या यहां बैठे हुए माननीय मंत्री जी बताएंगे कि इन सबमें कमजोर कड़ी कौन थी? किसके कारण इतना बड़ा भ्रष्टाचार हमारे सामने आता रहा? माननीय मंत्री जी कहते रहे, It is a big Indian fat wedding. उपाध्यक्ष महोदय, भारतीय इंडियन फैट वैडिंग में दो नम्बर का पैसा बहुत उपयोग होता है। वहां किस तरह पैसे लुटाए जाते हैं, यह किसी को मालूम नहीं है। अगर यही अभिप्राय माननीय खेल मंत्री का था कि बिग फैट वैडिंग में न जाने क्या-क्या होता है, इसलिए हमें आंख बंद करके सब कुछ देख लेना चाहिए, तो मैं गांधारी बनकर बैठ कर सब कुछ नहीं देखने वाला हूं। मंत्री जी, न दुलहन है, न मंडप है और न ही बारात घर है। आप बारात का स्वागत कहां करेंगे? खिलाड़ियों को होम एडवांटेज नहीं है, आपके स्टेडियम बनकर तैयार नहीं हैं और आप कह रहे हैं कि हम बारात का स्वागत करने वाले हैं। वह बारात कहां आएगी? मंत्री जी इस बात का जवाब अवश्य देंगे कि ये उस बिग फैट वैडिंग की बारात कहां बुलाने वाले हैं। कामनवैल्थ गेम्स में 24 देशों से दूल्हे आने वाले हैं जिनमें से 40 देश ऐसे हैं जिनका पूरे वर्ष का वित्तीय खाता, जो हमारे यहां लाखों का बनता है, वहां हजार करोड़ से ज्यादा नहीं है। दूल्हे को बुलाने के लिए 54 हजार करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं, इतना दहेज दिया है। कहीं ऐसा न हो कि उसे न वहां दुल्हन दिखे, न मंडप दिखे और न बारात घर और जैसे सिनेमा में दिखाते हैं, नहीं, यह शादी नहीं हो सकती, यह बोलते हुए वह वापिस चला जाए। दिल वाले दुल्हनिया ले जाएंगे, दिल वालों की दिल्ली, लूट-खसोट, भ्रष्टाचार, अब राष्ट्र मंडल खेलों को भ्रष्ट मंडल खेल कहा जा रहा है, राष्ट्र मंडल उर्फ भ्रष्ट मंडल खेल। हुसैन बोल्ट जो दुनिया के सौ मीटर के सबसे तेज धावक हैं, वह नहीं आ रहे हैं, वह घबरा गए हैं कि भ्रष्टाचार की सौ मीटर की दौड़ में करोड़ों के नोट लोग ऐसे सैकिंडों में गिन रहे हैं कि मैं हार जाऊंगा। अच्छे-अच्छे बड़े खिलाड़ी आने से मना कर रहे हैं। हम यहां अभी तक केवल मंडप सजाने में लगे हुए हैं। मंडप सजे नहीं, दुल्हन तैयार नहीं हुई और इस प्रकार की परिस्थिति सामने खड़ी कर दी गई है। स्टेडियमों का चीर हरण हो रहा है, लेकिन कोई बोलने वाला नहीं है।
मैं सैंट्रल हाल में बैठा था तो पीछे बैठे सदस्य बात कर रहे थे, मैं अजहरूद्दीन जी का नाम नहीं लूंगा, कोई और थे, वहां बैठे चिन्तित थे। उन्होंने कहा कि आपने जो बात कही है, यह बहुत सही कही है।...( व्यवधान)
श्री मुलायम सिंह यादव: यह कहिए कि सरकार का कोई जिम्मेदार व्यक्ति बोल नहीं रहा है, जिम्मेदारी नहीं ले रहा है। आप हम पर डाल रहे हैं कि कोई बोल नहीं रहा है।...( व्यवधान)
उपाध्यक्ष महोदय : कृपया शांत रहें। आप कीर्ति आजाद जी को बोलने दीजिए।
…( व्यवधान)
श्री कीर्ति आज़ाद: मैं सैंट्रल हाल में बैठा था। शुक्रवार को जब शून्य प्रहर में कामनवेल्थ गेम्स को लेकर जबरदस्त चर्चा हुई तब आदरणीय जयपाल अंकल को बोलने का अवसर नहीं दिया गया। उसका कारण यह था कि हम नहीं चाहते थे कि इतनी बात हो गयी, जवाब मंत्री जी ने दे दिया और बात खत्म हो गयी। उसके बाद मैं सैंट्रल हाल गया, तो सत्ता पक्ष के लोगों ने भी सराहना की कि आपने खिलाड़ियों के बारे में जो बात की है, वह सच में बहुत मार्मिक बात है। मैंने उनसे कहा कि मुझे खेद इस बात का है कि जिस प्रकार का होम एडवांटेज हम खिलाड़ियों को स्टेडियम में मिलना चाहिए, वह नहीं मिला है। जो खिलाड़ी यहां आकर अपने आपको इस वातावरण में मिला सकें, समझ सकें, उनको वह अवसर नहीं मिला है। ऐसे में मुझे डर है कि क्या हमारे खिलाड़ियों का प्रदर्शन खराब नहीं होगा, तो तपाक से सत्ता पक्ष की एक सदस्या बोल पड़ीं। मैं उनका नाम नहीं लूंगा। उन्होंने कहा कि घबराइये नहीं, सारे मैडल्स हमें ही मिलने वाले हैं। मैंने पूछा कि कैसे, आप यह कैसे कह सकती हैं? उन्होंने कहा कि जब दूसरा कोई आयेगा ही नहीं, तो सब मैडल्स हमारे ही होंगे। ...( व्यवधान) आप स्टेडियम की परिस्थिति समझ सकते हैं। मिनिस्ट्री ऑफ यूथ अफेयर्स एंड स्पोर्ट्स ने कहा कि हमने 11,494 करोड़ रुपये खर्च किये हैं जबकि सीएजी कहती है कि 12,888 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। जो घपला हो रहा है, वह हमारे सामने है, लेकिन बीच में एकाउंट का जो सस्पेंस है, जो 1500 करोड़ रुपया है, वह कहां खर्च हो रहा है, यह अभी तक पता नहीं लगा। लेकिन सीएजी ने अपनी रिपोर्ट में 12,888 करोड़ रुपये खर्च करने के बारे में कहा है। यह अंतर मिनिस्ट्री ऑफ यूथ अफेयर्स एंड स्पोर्ट्स के 11494 करोड़ रुपये का है। मेरे पास अनेकों आंकडे हैं।
उपाध्यक्ष महोदय, अब हम कुछ स्टेडियम्स के बारे में भी बात कर लें। हिन्दुस्तान में लगभग 19 से 20 क्रिकेट स्टेडियम हैं। वे सब एक से एक सुन्दर और आधुनिक स्टेडियम्स हैं। अभी नागपुर में सबसे नया स्टेडियम बना है। फिरोजशाह कोटला में भी एक स्टेडियम बना है। हालांकि मैं अपने कमेंट उस पर रिजर्व रखता हूं,. लेकिन इतना अवश्य कह सकता हूं कि डीडीसीए का स्टेडियम ...( व्यवधान)
श्री निशिकांत दुबे (गोड्डा): संजय जी, उस पर अलग से चर्चा होगी।
उपाध्यक्ष महोदय : कृपया आप सब शांत रहें।
…( व्यवधान)
श्री कीर्ति आज़ाद : उपाध्यक्ष महोदय, नागपुर का स्टेडियम 90 करोड़ रुपये में बना है। मैं चाहूंगा कि आदरणीय खेल मंत्री, आदरणीय जयपाल अंकल, आप अवश्य जायें। अगर सरकार नहीं भेज सकेगी और आप कहेंगे, तो मैं अपने खर्चे में भेजूंगा। मैं चाहूंगा कि आप जाकर उस नागपुर के स्टेडियम को देखिये। ...( व्यवधान) सर, अभी तो मैंने भूमिका भी नहीं बांधी। ...( व्यवधान)
उपाध्यक्ष महोदय : यहां पर घड़ी बोल रही है। हम इसे बंद नहीं कर सकते।
…( व्यवधान)
श्री कीर्ति आज़ाद : आप स्टेडियम में जाइये। आपको लेटेस्ट स्टेट ऑफ दी आर्ट स्टेडियम्स मिलेंगे। ...( व्यवधान) उपाध्यक्ष महोदय, आप घंटी ऐसे बजाइए कि मुझे इनकी घंटी बजाने दीजिए। ...( व्यवधान)
उपाध्यक्ष महोदय : घंटी बहुत बज गयी।
…( व्यवधान)
श्री कीर्ति आज़ाद : स्टेडियम्स बनते हैं और इन स्टेडियम्स की 45 हजार कैपेसिटी है। हमारे पास एक जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम है जिसकी कैपेसिटी 73 हजार थी, लेकिन उसे घटाकर 65 हजार कर दी गयी है। उस स्टेडियम को यदि बनाया जाये और इन स्टेडियम्स से तुलना की जाये, तो 90 का दुगुना 180, 180 के बजाय 270 और 270 के बजाय 300 करोड़ रुपये। अब 300 करोड़ रुपये में एक नया स्टेडियम जवाहर लाल नेहरू जैसा स्टेडियम खड़ा हो सकता है, लेकिन रेनोवेशन के लिए 961 करोड़ रुपये खर्च हुए। ...( व्यवधान) केवल रेनोवेशन हुआ है। ...( व्यवधान) मैं इतनी बात कह सकता हूं कि 961 करोड़ रुपया ...( व्यवधान)
मैं कहता हूं कि मैं सबसे छूट दे दूं, जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम में और 300 करोड़ रुपये का स्टेडियम कहूं, मैं यह भी कहूं कि उसमें सिंथेटिक टर्फ लगाना था, लाइटें तो वहां पहले से, शुरू से, 1982 से ही मौजूद हैं। वहां सिंथेटिक टर्फ लगाना था, कुछ दूसरे काम करने थे, ये सब काम देखकरके आदमी 100 करोड़ रुपये और लगा ले, लेकिन मुझे समझ नहीं आया कि खेल नाम की लूट मची है, लूट सके तो लूट। 961 करोड़ रुपये का रेनोवेशन? मुझे समझ नहीं आया कि वहां सोना या चांदी लगाया गया है या हीरे-जवाहरात वहां मढ़े गए हैं जिसके लिए 961 करोड़ रुपये खर्च किए गए। वेलोड्रम, जहां साइकिल चलती है। यह खेल मैंडेटरी है। वेलोड्रम बनाया सीमेंट का, जब लोगों ने कहा कि अरे, यह आपने क्या कर दिया, कलमाड़ी जी जानते हैं कि वह सीमेंट का नहीं वुडेन का होता है। इन्होंने कहा, अरे गड़बड़ी हो गयी, तो इन्होंने वुडेन का बना दिया। आदरणीय मंत्री जी गए उसका उद्घाटन करने के लिए, तो वहां क्या स्थिति थी। जब कभी आप पहाङों पर गाड़ी लेकर जाएं, वहां वर्षा हो रही हो, तो जैसे झरने का पानी सड़क के बीच से निकलता है और आपकी गाड़ी चलती है, वही उस दिन वेलोड्रम का हाल था। इससे भी ज्यादा गंभीर आरोप यह है कि उसके डिफक्टिव नेचर के कारण अभी तक उसको नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट नहीं मिला है। जो शूटिंग रेंज गुड़गांव में बनाई गयी है,...( व्यवधान)
डॉ. एम.एस.िगल: कीर्ति आजाद जी, उस स्टेडियम में इंटरनेशनल टेस्ट-इवेंट कंप्टीशन हो चुकी है, to the satisfaction of all of them.
श्री कीर्ति आज़ाद :महोदय, इन्होंने यह कहकर शाबासी लुटवा ली कि वहां अंतर्राष्ट्रीय खेल हो चुके हैं, लेकिन क्या हमारे एथलीट्स को इन सारे स्टेडियम्स में से एक भी मिला है, जहां वे प्रैक्टिस करके होम एडवांटेज ले सकें। क्या गुडगांव में जो शूटिंग रेंज बन रही है, उसकी डिफेक्टिवनेस के बारे में कोई सामने आई है या नहीं या यहां पर जो करने सिंह शूटिंग रेंज के बारे में बात सामने आई है या नहीं आई है? साइकिलिंग का खेल मैंडेटरी है, ...( व्यवधान) आप इन बातों का उत्तर एक साथ दे सकते हैं, लेकिन मैं चाहूंगा कि आप इन बातों पर पर्दा न डालें, पर्दा उठा दीजिए।...( व्यवधान) इन खेलों में साइकिलिंग अनिवार्य है। मैंने साइकिलिंग का इतना नाम नहीं सुना था, लेकिन समस्याओं के बारे में बहुत कुछ सुनने को मिल रहा था, इसलिए मैंने इंडियन ओलम्पिक एसोशिएशन का वेबसाइट खोला और उसमें से साइकिलिंग फेडेरेशन और इंडिया की वेबसाइट पर गया। वहां साइकिलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया का सिर्फ नाम है, उसका न तो कोई पता है, न यह जानकारी दी गयी है कि उसके कौन से सदस्य हैं, कौन से खिलाड़ी हैं जो इन प्रतिस्पर्धाओं में भाग लेने वाले हैं? किसी को नहीं मालूम है? हम यह कॉमनवेल्थ गेम्स वर्ष 2003 में लेकर आए थे और आज ऐसी परिस्थिति बनी है।
मैं सबसे गंभीर बात यह कहना चाहता हूं कि हमने खिलाड़ियों के बारे में क्या सोचा है? हमारे खिलाड़ी कहां गए? आज तेजस्विनी सावंत जीतकर आई हैं, सुषमा जी ने उस विषय को सदन में उठाया था कि उनको बधाई दी जानी चाहिए, इस पर सदन की ओर से बधाई दी गयी है। हम चाहते हैं जब वह यहां पर आएं, तो अपना जौहर दिखाएं। हम चाहते हैं कि सायना नेहवाल, जिसने थाइलैंड और मलेशिया में लगातार तीन अंतर्राष्ट्रीय प्रतिस्पधाओं को जीता और आज वह वर्ल्ड में दूसरे नंबर पर है। आज सभी लोग उस वक्त का इंतजार कर रहे हैं, जब वह आएगी, बैडमिंटन खेलेगी और देश का सिर गौरव से ऊंचा होगा।
लेकिन क्या सोच सकते हैं कि उसकी मनोस्थिति क्या होगी, जो विश्व भर में फतेह करके आ गई और उसे अपने ही घर में पनाह नहीं मिली, जहां जाकर वह प्रेक्टिक्स कर सके। आज शूटिंग रेंज पर प्रेक्टिक्स का क्या हाल है, फेडरेशन के लोगों और खिलाड़ियों ने कहा है कि हमें सामान नहीं मिल रहा है। यह बात दूसरी है कि मंत्री जी कहेंगे कि हम दे रहे हैं, हमने इतने पैसे दे दिए हैं। लेकिन उन्हें वह मिल नहीं रहे हैं, भले ही आपने दे दिए हों। वह माल भी कहां बीच में तैयार रहा है, हमें बताया जाए?
साइकलिंग फैडरेशन के लिए साइकल्स आई हैं या नहीं, यह भी नहीं मालूम। मैंने तो अपने उत्तर भारत के सभी सांसदों को कहा है, सामने के सदस्यों से भी आग्रह करूंगा कि वे सब अपनी तरफ से एक-एक साइकल वैलोड्रम में ले जाकर डोनेट कर दें। ...( व्यवधान) डा. एस.पी. मुखर्जी स्वीमिंग पूल काम्प्लेक्स में एक लड़की जब तैरने गई तो उसका पैर टूट गया, मोच आ गई। वहां पर टाइल्स उखड़ कर बाहर आ गईं और यह सीवीसी की रिपोर्ट में भी है।
मैं कुछ आंकड़े देना चाहता हूं। एस्क्लेटेड प्राइस, 17888 करोड़ रुपए, साई स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर में मई, 2007 में 1000 करोड़ रुपए था, मई, 2009 में 2475 करोड़ रुपया हो गया यानि 148 प्रतिशत की वृद्धि हुई। मैं सबसे बड़ी बढ़ोत्तरी की बात करना चाहता हूं। फंडिंग फार सिविक इंफ्रास्ट्रक्चर इन दिल्ली, सेंट्रल गवर्नमेंट स्ट्रोक स्टेट गवर्नमेंट, मई, 2007 में 770 करोड़ रुपए, दिसम्बर, 2008 770 करोड़ रुपए, मई, 2009 में 4720 करोड़ रुपए यानि 513 प्रतिशत की वृद्धि। इसके अलावा ओवरलेज़ हैं और बीच में मिसलेनियस और हैं, जिनका पता ही नहीं हैं, ये 10-100 करोड़ रुपए से ऊपर हैं। ओवरलेज़ मंगाए गए, वे अभी तक लगे नहीं, वे ऐसी टेम्परेरी फिटिंग्स हैं, चाहे लाइट्स हों या दूसरी चीजें हो। उनके बारे में कोई हिसाब नहीं है।
इन खेलों के लिए अभी तक स्टेडियम्स तैयार नहीं हैं। यहां तक कि क्वीन ने भी अपनी तरफ से बहुत गम्भीरता जाहिर की है कि यह क्या हो रहा है। विदेश से माइक फेनेल आते हैं, जिनका भारत सरकार के डिप्टी सेक्रेटरी का भी रैंक नहीं है, लेकिन पूरी दिल्ली उनके लिए बंद हो जाती है। ऐसे बंद हो जाती है जैसे कि प्रधान मंत्री जी का काफिला जा रहा हो। मेरा गम्भीर आरोप है कि खेलों के साथ खिलवाड़ किया गया है। इन राष्ट्र मंडल खेलों को भ्रष्ट मंडल खेलों की संज्ञा दे दी गई है।
उपाध्यक्ष महोदय: कृपया अपनी बात समाप्त करें।
श्री कीर्ति आज़ाद :उपाध्यक्ष जी, मैं अपनी बात समाप्त ही कर रहा हूं। मैं दिल्ली सरकार के बारे में भी कुछ कहना चाहता हूं। दिल्ली सरकार को 4720 करोड़ रुपए मिले। लोगों ने कहा कि दिल्ली बड़ी सुंदर बन रही है। संजय निरुपम जी टीवी पर कहते हैं कि दिल्ली का बड़ा विकास हो रहा है। दिल्ली का अगर बड़ा विकास हो रहा है तो मैं यह जानना चाहता हूं कि 90 से 95 प्रतिशत पैसा तो इन स्टेडियम्स को बनाने में ही और इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने में ही खत्म हो गया है। दिल्ली में तो आज भी बिजली की, पानी की दिक्कत है। हर तरफ टूटी सड़कें देखने को मिलती हैं, जलभराव की समस्या ज्यों की त्यों हैं। यमुना इतनी गंदी हो गई है कि मैं तो जयराम रमेश जी को कहना चाहूंगा कि जो गेम्स विलेज यमुना के ऊपर बनी है, वहां पर सावधानी का बोर्ड लगा दें कि सावधान! कृपया यमुना में न जाएं, नहीं तो आपको मलेरिया, चिकनगुनिया, डेंगू या स्वाइन फ्लू हो सकता है। सालों से यमुना कितनी गंदी है। मैं इसी क्षेत्र की बात कहना चाहता हूं। मैं इस क्षेत्र का 1993 से 1998 तक विधायक भी रहा। इस क्षेत्र में आज भी ग्राउंट वाटर को मिलाया जा रहा है, तब भी केवल चार-पांच घंटे तक गोल मार्केट क्षेत्र में पानी आता है।
ऐसा खारा पानी जिसे बच्चे और बूढ़े लोग नीचे आकर भरते हैं। यहां रोज बिजली जाती है और आप कहते हैं कि दिल्ली का इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ रहा है। 961 करोड़ रुपये जवाहर लाल नेहरु स्टेडियम में, 669 करोड़ रुपये इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में, 214 करोड़ रुपये शिवाजी स्टेडियम में आपने केवल रैनोवेशन के लिए लगाए। समझ में नहीं आता है कि यह कैसा इंफ्रास्ट्रक्चरल डिवेलपमेंट हो रहा है? मेरा माननीय जयराम रमेश जी से अनुरोध रहेगा कि “ सावधान की पट्टी” अपने खिलाड़ियों के लिए अवश्य लगाकर रखें।
विद्यार्थियों से होस्टल्स खाली करवा दिये गये हैं। दूरदराज से आने वाले विद्यार्थी यहां पढ़ नहीं पा रहे हैं। उनसे दस-दस गुना किराया वसूला जा रहा है लेकिन फिर भी इंफ्रास्ट्रक्चर विद्यार्थियों का होस्टल बंद करने के बाद भी तैयार नहीं है।
माननीय कपिल सिब्बल जी नोट करें कि वहां पर अभी तक 50 प्रतिशत भी कोई जगह तैयार नहीं है जहां पर आपने लगभग ढाई हजार बाहर से आकर खेलने वाले खिलाड़ियों को ठहराना है। आज यह परिस्थिति विद्यालयों की बनी हुई है।
डीडीए ने पांच हजार फ्लैट्स बनाने थे, सीधे उपराज्यपाल के अधीन थे, सीवीसी की रिपोर्ट मैंने आपको पढ़कर सुनाई। आज कहते हैं कि हम केवल 1500 फ्लैट्स तैयार करके देंगे। जगह-जगह से जो लाइन्समैन आयेंगे, एम्पायर्स आयेंगे, ये तकनीकी लोग ठहरेंगे कहां?
टूरिज्म मंत्रालय की तरफ से, पता नहीं माननीया शैलजा जी ने मंगाया है या फिर दिल्ली सरकार ने मंगाया है, एक हजार करोड़ का समान पांच हजार फ्लैटों के लिए आ चुका है, केवल यह 1500 फ्लैट्स देंगे, तो बाकी सामान का क्या होगा, समझ में नहीं आता है कि कहां काम आयेगा? आज यह परिस्थिति बनी है।
सीपीडब्ल्यूडी ने एक आरोप ऑरगेनाइजिंग कमेटी पर लगाया है। वह कहते हैं कि विलम्ब का कारण यह है कि जिस समय हम स्टेडियम बना रहे थे उस समय हमारे पास बार-बार ऑरगेनाइजिंग कमेटी के लोग आते थे और कहते थे कि थोड़ा सा डिजाइन में यह बदलाव कीजिए, थोड़ा सा वह बदलाव कीजिए। एक दूसरे के ऊपर ठीकरा फोड़ने के कोई फायदा होने वाला नहीं है। डीजीसीपीडब्ल्यूडी माननीय शहरी विकास मंत्रालय के अंतर्गत सीधा आता है, क्या यह बदलाव स्टेडियमों में किये गये या नहीं। अगर यह बदलाव किये गये तो क्या उसकी प्रोपर बिल्डिंग प्लॉन सैंक्शन कराये गये या नहीं कराए गये?
श्री लालू प्रसाद (सारण):सजेशन दीजिए कि अब करना क्या है?
श्री कीर्ति आज़ाद लालू प्रसाद जी थोड़ा लेट आये हैं।
श्री लालू प्रसाद : हम लेट नहीं आये हैं दुरुस्त आये हैं।
श्री कीर्ति आज़ाद :हो सकता है उस समय आप नहीं सुन रहे हों, किसी घोर निद्रा में हों, मैंने सबसे पहले कहा था कि इसके ऊपर सीबीआई की जांच होनी चाहिए।
श्री लालू प्रसाद : करना क्या है, वह बताओ?
श्री कीर्ति आज़ाद :करना क्या है, वह तो हम शुरु में ही बता चुके हैं। जो लोग गलत हैं, उनके ऊपर त्वरित कार्रवाई करनी चाहिए, सीबीआई की जांच होनी चाहिए, जाइंट पार्लियामेंट्री कमेटी बैठनी चाहिए और उसके साथ में यह जो घोटाला है उसकी जांच होनी चाहिए। ...( व्यवधान) जेपीसी की जांच हो, सीबीआई इंक्वायरी हो और जो गलत है, मैं सरकार से कहता हूं कि यह हो या वह हो, हमने आईपीएल गेट जो हुआ, उसके अंदर भी सरकार का रवैया देख लिया - न तो सीबीआई की इंक्वायरी हुई, न ही जेपीसी हुई। पहला मेरा कहना है कि जेपीसी बैठाएं और दूध का दूध और पानी का पानी होना चाहिए, यह मेरा आपसे अनुरोध है। आप सभी सदस्यों के पास एक चिट्ठी आई होगी, उसमें लिखा होगा कि एक्रीडेशन कार्ड बनाने के लिए अपना फोटो और कार्ड दें। अब पता नहीं कि खेल होंगे या नहीं होंगे, अगर हो गये तो वह कार्ड आप अपना बनवा लीजिए।
कम से कम इन स्टेडियम्स के टायलेट्स में जरूर जाइएगा, क्योंकि साढ़े चार हजार रुपए का टायलेट रोल है। उसे इस्तेमाल करके देखिएगा कि जो रोल तीस रुपए में मिलता है उसमें और इस साढ़े चार हजार रुपए के रोल में क्या फर्क है।
Sir, in the end, and Dr. M.S. Gill would agree with me, I would say that I think there is too much of politics in sports. I suppose we should bring in some sportsmanship into politics. That is what I intend to do as far as I stay as an elected representative. साथ ही साथ मैं कहना चाहता हूं कि आम आदमी को पूर्व मंत्री ने कैटल क्लास सर्वजन को कहा था। मैं केवल उसमें थोड़ा-सा सुधार लाना चाहता हूं। सरकार द्वारा खेलों में किए गए भ्रष्टाचार और अनियमितताओं को देखते हुए मैं कहना चाहता हूं कि this Government is all cattle but no class. .
श्री मनीष तिवारी (लुधियाना):उपाध्यक्ष महोदय, मैं आपको धन्यवाद देना चाहता हूं कि आपने मुझे इस गंभीर विषय पर बोलने का मौका दिया है। जब मैं अपने बहुत अजीज दोस्त कीर्ति आजाद जी का बहुत ही उग्र और तेजस्वी भाषण सुन रहा था, तो मेरे जहन में अमीर खुसरो का एक जुमला आया, जिसे मैं इन्हें मुखातिब करना चाहता हूं - " बनोगे खुसरो या खलीम दिय शीरी ज़बा हो कर, जहांगीरी करेगी यह अदा नूरे जहां हो कर। " सच बोलना बहुत जरूरी है। इस सारे आरोप-प्रत्यारोपों के मायाजाल में मिथ्या में सच सच में कहीं खो गया है, सच कहीं सो गया है।...( व्यवधान) आप मेरी बात सुन तो लीजिए।...( व्यवधान) महोदय, आप इन्हें कहिए कि थोड़ा सा धीरज रखें। हमने इनके तेजस्वी सदस्य को एक घंटे सुना है। इस मिथ्याजाल में सच कहीं खो गया है और मेरी कोशिश यही है कि सच क्या है, तथ्य क्या है, उसे सदन के पटल पर रखा जाए, क्योंकि इस आरोप और प्रत्यारोप के दौर में ऐसा लगता है कि " किस-किस के हाथों पर ढूंढ़ू लहू अपना, तमाम शहर ने तो पहने रखे हैं दस्तानें। " मेरे काबिल दोस्त ने महाभारत तो बहुत सुनाई है, लेकिन कहीं महाभारत सुनाते-सुनाते भस्मासुर न बन जाएं, मुझे इस बात की बहुत चिंता है। महोदय, 39 दिन में 71 मुल्कों के 8 हजार खिलाड़ी और अधिकारी भारत में राष्ट्र मण्डल खेलों में हिस्सा लेने के लिए आ रहे हैं और अगर आज राष्ट्र मण्डल खेलों की आपने चर्चा करनी है, इनका मूल्यांकन करना है, तो यह मूल्यांकन चार विषयों पर होना चाहिए।
पहला कि राष्ट्र मंडल खेलों का जो प्रशासनिक ढ़ांचा है, वह क्या है? दूसरा, जो खेलों की तैयारी है, वह तैयारी कैसी है, तीसरे, खिलाड़ी मुस्तैद हैं कि नहीं हैं और चौथा, काम पारदर्शिता से हुआ है कि नहीं है? was there transparency in the transactions ? मैं एक-एक करके इन सारे मानदंडों पर अपनी प्रतिक्रिया रखूंगा और जो हमारे मित्र, लगता है कि सदन से उठकर चले गये हैं।...( व्यवधान) पानी यहीं पर ही मंगवा देते। उन्होंने जो बातें उठाई हैं, उनका मैं जवाब दूंगा।
एक बात ध्यान में रखने की जरूरत है कि इन राष्ट्रमंडल खेलों से जुड़े हए जितने बुनियादी फैसले थे, वे सारे बुनियादी फैसले एनडीए की सरकार ने किये थे। सबसे पहला फैसला खेलों की पेशकश करना है।..( व्यवधान) कृपया सुन लीजिए। मई 2003 में सरकार इनकी थी। पेशकश इन्होंने की थी। दूसरा फैसला कि दिल्ली में होंगे, वह फैसला भी इन्हीं का था। तीसरा, खेल की प्रबंधन समिति कैसी होगी, जो होस्ट सिटी कांट्रैक्ट है, उसमें कौन खेलों का प्रबंधन करेगा, कौन इंफ्रास्ट्रक्चर की देखभाल करेगा, वह भी फैसला इन्हीं का था। सबसे महत्वपूर्ण और कभी-कभी तो सोचकर मुझे हंसी आती है कि इनकी सरकार ने सॉवरिन गारंटी दी थी कि अगर राष्ट्र मंडल खेलों को आयोजित करने में राजस्व कम होगा तो उसकी भरपाई केन्द्र सरकार करेगी और अगर मुनाफा होगा तो मुनाफा आईओए और कॉमनवैल्थ फैडरेशन शेयर करेगा। अर्थात् घाटा सरकार का औऱ मुनाफा इनका होगा। यह फैसला इन्होंने ही लिया था। यूपीए की सरकार पिछले पांच साल से वे जो बुनियादी फैसले इन्होंने किये हैं, उनके ऊपर अमली जामा पहना रही है नहीं तो इसी सदन में आरोप लगाया जाता कि हम राष्ट्र मंडल खेल लेकर आए और आपने उन राष्ट्र मंडल खेलों को ठुकरा दिया। आपने उनका ठीक तरह से क्रियान्वयन इसलिए नहीं किया क्योंकि हमारी सरकार उन खेलों को लेकर आई थी। इसलिए वे जो बुनियादी फैसले हैं, वे फैसले हमने नहीं किये थे।...( व्यवधान) अनुराग जी, बैठ जाइए। आपको भी अपनी बात कहने का मौका मिलेगा।...( व्यवधान) लालू जी, आप तो रोज ही बोलते हैं। आज आप हमें बोलने दीजिए।...( व्यवधान)
श्री लालू प्रसाद : हम आपको टोक नहीं रहे हैं। शांति से बहस करिए। माननीय सदस्य ने आरोप लगाया कि एनडीए के समय में सब कुछ फैसला हुआ और इसलिए हमें इसे लागू करना पड़ रहा है। तो जितना भी एनडीए का मैनीफेस्टो है, उसे कांग्रेस पार्टी लागू करे।...( व्यवधान)
श्री मनीष तिवारी (लुधियाना): लालू जी, मैं सीधा सीधा उसका जवाब दे देता हूं।...( व्यवधान)
योजना मंत्रालय में राज्य मंत्री और संसदीय कार्य मंत्रालय में राज्य मंत्री (श्री वी.नारायणसामी): एनडीए का मैनीफेस्टो आप इम्पलीमेंट करेंगे। हम नहीं करेंगे।
श्री मनीष तिवारी : उपाध्यक्ष जी, लालू प्रसाद जी ने कहा कि हमें एनडीए का घोषणापत्र लागू कर देना चाहिए। ये तो बहुत बड़े सदस्य हैं और प्रदेश के मुख्य मंत्री भी रहे हैं। भारत सरकार में मंत्री भी रहे हैं। इनको मालूम है कि जब कोई मुल्क कोई भी अन्तर्ऱाष्ट्रीय कमिटमेंट देता है, तो यह पार्टी औऱ वह पार्टी कमिटमेंट नहीं देती, वह मुल्क इंटरनेशनल कमिटमेंट देता है और उस मुल्क की जिम्मेदारी बनती है कि उसके ऊपर फूल चढ़ाए जाएं। मैं इनकी बहुत इज्जत करता हूं लेकिन इस तरह की हल्की बात इनके मुंह से शोभा नहीं देती। इस सदन में शुक्रवार को चर्चा हुई। बहुत सारे वरिष्ठ सदस्य जो आगे बैठे हैं, धीरज रखिए। अभी तो पांच मिनट ही हुए हैं।
15.00 hrs. उपाध्यक्ष जी, शुक्रवार को इसी सदन में कहा गया कि एक लाख करोड़ रुपये इन राष्ट्रमंडल खेलों के ऊपर खर्चा किया जा रहा है। मैं उसकी सत्यता आपके समक्ष रखना चाहता हूं कि छः साल में 20 स्टेडियमों के ऊपर 4859.48 करोड़ रुपये खर्च किये गये हैं। आप देख लीजिए कहां एक लाख करोड़ रुपये और कहां 4859.48 करोड़ रुपये, इसीलिए मैंने इस बात से शुरू किया था कि सच को उजागर करना बहुत जरूरी है।...( व्यवधान) मैं आ रहा हूं, एक-एक बात का जवाब दे रहा हूं। हमारे मित्र, हमारे अजीज दोस्त कीर्ति आजाद जी ने स्टेडियम का जिक्र किया। मैं इन्हें बताना चाहता हूं कि बीस ऐसे स्टेडियम्स हैं, जिनमें खेल होंगे। बीस में से 18 स्टेडियम पूर्ण करके जो प्रबंधन समिति है, उसे दिये जा चुके हैं। एक स्टेडियम 15 अगस्त को दिया जायेगा और जो खेल गांव है, उसकी चाभी माननीय सुखदेव सिंह ढींढसा जी, जो राज्य सभा में अकाली दल के सासंद हैं, उन्हें 16 सितम्बर, 2010 को पकड़ा दी जायेगी। जो स्टेडियम का तथ्य है, वह यह है। हां, इन्होंने यह बात कही कि कहीं पर कुछ थोड़ा सा पानी चू गया, कहीं पर कोई ...( व्यवधान) आप सुन लीजिए, मैं जवाब दे रहा हूं। कहीं पर कुछ थोड़ा सा चू गया। कहीं पर 15.02 hrs. (Dr. M. Thambidurai in the Chair) कोई टाइल निकल गई। मैं इनसे पूछना चाहता हूं कि टैस्ट इवैन्ट करवाने का मतलब क्या है? टैस्ट इवैन्ट करवाने का मतलब यह है कि अगर स्टेडियम में कोई खामी हो तो उस खामी को खेल शुरू होने से पहले सुधार लिया जाए। टैस्ट इवैन्ट करवाने का यह मतलब है। इसमें इतनी सी बात का बतंगड़ बनाने की कोई जरूरत नहीं है।
इस सारी बहस में कीर्ति जी ने ठीक कहा कि कहीं पर खिलाड़ी खो गये, खिलाड़ी कहीं पर धूमिल हो गये। परंतु कीर्ति आजाद जी, खिलाड़ी धूमिल नहीं होने दिये गये। यह यूपीए की सरकार थी, जिसने 678 करोड़ रुपये उनकी ट्रेनिंग पर खर्च किये हैं और ...( व्यवधान) I will not yield. I heard him at great length.… (Interruptions) Let me complete.… (Interruptions)
MR. CHAIRMAN : He is not yielding. Shri Manish Tewari, you proceed.
श्री मनीष तिवारी : 678 करोड़ रुपये खिलाड़ियों की ट्रेनिंग पर खर्च किये गये। कीर्ति आजाद जी, 1140 खिलाड़ी, 195 कोच, जो सही में द्रोणाचार्य हैं और 78 अधिकारी इस सारी प्रक्रिया में शामिल थे। आज उन खिलाड़ियों की सूची 840 कर दी गई है और उनमें से जो सबसे बेहतरीन खिलाड़ी हैं, वे भारत का प्रतिनिधित्व इन राष्ट्रमंडल खेलों में करेंगे।
अब मैं इस बात पर आता हूं कि इन राष्ट्रमंडल खेलों पर खर्चा कितना हुआ। एक लाख करोड़ रुपये खर्च हुए या कोई और अपने मनगढ़ंत आंकड़े निकालना चाहता है तो उतना खर्च हुआ। मैं आपको बताता हूं कि भारत सरकार की ओर से छः वर्ष में, in a span of six years 11494 करोड़ रुपये खर्च किये गये, जिनमें से 2800 करोड़ रुपये दिल्ली सरकार को कर दिया गया। It was a grant to the Delhi Government. इसका ब्रेक डाउन क्या है? स्टेडियम को ठीक करने पर 2934 करोड़ रुपये खर्च किये गये। प्रबंधन समिति जिसका गठन आपकी सरकार के समय में हुआ था, उसे 2394 करोड़ रुपये दिये गये और उनमें से भी 2307 करोड़ रुपये कर्ज है, लोन है। सिर्फ 87 करोड़ 25 लाख रुपये की ग्रांट दी गई है, यह सच्चाई है।
सभापति महोदय, मैं आगे बताना चाहता हूं कि केन्द्र सरकार और कहां खर्चा कर रही है? जैसा मैने बताया 11,494 करोड़ रुपये में से 2974 करोड़ रुपया स्टेडियमों पर, 2394 करोड़ रुपया प्रबंधन पर और 747 करोड़ रुपया राष्ट्रमंडल खेलों की सुरक्षा पर खर्च कर रही है। हमारे मित्र कीर्ति आजाद ने दिल्ली सरकार पर काफी कटाक्ष किया है। दिल्ली सरकार ने 16,560 करोड़ रुपया खर्च किया है जिनमें सिर्फ 670 करोड़ रुपया राष्ट्रमंडल खेलों पर खर्च किया है। बाकी 15,890 करोड़ रुपया मैट्रो, पॉवर प्लांट्स, डीटीसी कोचेज़ और फ्लाई ओवर्स पर खर्च किया है। कोई भी सांसद अपने दिल पर हाथ रखकर कहे कि अगर 15 हजार करोड़ रुपया उसके क्षेत्र में लग जाता तो उसके क्षेत्र की शक्ल ही बदल जाती। हम यह सोचकर संतोष कर लेते हैं कि दिल्ली भारत की राजधानी है, भारत का शीर्ष है। अगर इस दिल्ली की काया में सुधार हो जाये तो उससे भारत का सम्मान होगा। मैं यही बताना चाह रहा हूं कि दिल्ली सरकार ने सिर्फ 670 करोड़ रुपया राष्ट्रमंडल खेलों पर खर्च किया है।
सभापति महोदय, यहां कहा गया कि दिल्ली में मलबा बिखरा पड़ा हुआ है। अगर कहीं तोड़-फोड़ होगी, अगर कोई नई चीज़ बनेगी तो मलबा निकलेगा ही। मलबा उठाना किसका काम है, एम.सी.डी. का, जो बीजेपी के अधीन है। अगर दिल्ली में मलबा पड़ा हुआ है तो उसे उठाने का काम सीधे-सीधे बीजेपी के अधीन एम.सी.डी. की जिम्मेदारी है। ऐसा नही है कि मलबा उठाया नहीं गया है। इतना कटाक्ष करना ठीक नहीं, थोड़ा बहुत तो मैं इनका समर्थन कर दूं । सच्चाई य़ह है कि 60 हजार मीट्रिक टन मलबा उठाया गया है। दिल्ली सरकार ने बुराड़ी में एनवायर्नमेंट फ्रैंडली प्लांट लगाया है जहां मलबे का टचस्टोन और पीवर बनाया जा रहा है। Therefore, it is the first project of this kind where waste material is being recycled and reused in an environment friendly manner in order to pave the streets of the city.
सभापति महोदय, अब ये लोग पारदर्शिता की बात करते हैं। मेरे दोस्त कीर्त जी ने सी. वी.सी.की रिपोर्ट का जिक्र किया है। जिस सी.वी.सी.की रिपोर्ट के बारे में मेरे दोस्त ने बताया, अगर आपकी इजाजत हो तो उसी सी.वी.सी. की रिपोर्ट की कुछ बातें आपको पढ़कर सुनाता हूं। मैं एक बात कहना चाहता हूं कि जो सी.वी.सी की रिपोर्टें हैं, वे उनकी वैबसाइट पर अवेलेबल हैं। वे ऑफिशयल सीक्रेट एक्ट के तहत नहीं आती हैं।
SHRI KIRTI AZAD : Thank you very much.
श्री मनीष तिवारी : अगर उन्हें मालूम नहीं था तो मैं कीर्ति जी का वकील दोस्त हूं, कम से कम मुझ से पूछते तो सही कि सदन में इस तरह गलत नहीं कहना चाहिये था। मैं पढ़ देता हूं.-
“CVC’s clarification regarding inspection of works relating to Common Wealth Games.
Chief Technical Examiner’s Organisation (CTEO) of the CVC, in a routine manner …. ” Mr. Chairman, Sir, please mark the words ‘in a routine manner’ here. It says:
“Chief Technical Examiner’s Organization (CTEO) of the CVC, in a routine manner inspects the works of different organizations, when they have been tendered out and are in progress. In 2009, CTEO had inspected 129 number of works in 71 organizations including DMRC, NTPC, MCD, NHAI, ONGC, Railways, Delhi PWD, SAIL, NHPC, AAI etc. In 2010, so far CTEO has inspected 57 number of works in 42 organizations including DMRC, NTPC, NPCIL, MCD, DJB, SJVNL, DFCCIL etc. …” Mr. Chairman, Sir, now, these two paragraphs are critical.
The CVC Report further says:
“The reports of the CTEO are sent to different organizations for remedial action, system improvement and to identify officials responsible where vigilance angle may be suspected. Organisations respond to CTEO’s reports and some aspects are closed and in some cases advice is given for disciplinary action against officers when they are found responsible.
CTEO’s report is the first step...” I repeat, Mr. Chairman, Sir. It says: “...CTEO’s report is the first step and does not, in any way, assume the form of a FINAL CVC REPORT...” जिस रिपोर्ट का इन्होंने यहां पर जिक्र किया है, इतने बड़े-बड़े लांछन लगा दिये, इतने बड़े-बड़े आरोप लगा दिये, मुकद्मे से पहले फांसी सुना दी।
What is it? It is in the nature of a preliminary observations; and let me complete. It says:
“...CTEO report is the first step and does not, in any way, assume the form of a FINAL CVC REPORT as it is sought to be projected in different quarters. CTEO’s reports are followed by agency’s reply, CTEO’s counter agency’s reply etc.” Then only is the report finalized. These are the facts with regard to the alleged recommendations of the CVC, which were used by my learned friend, Mr. Kirti Azad to lampoon and impugn this Government and to cast aspersions and make needless accusations.
So, this is the truth as far as the CVC’s so-called recommendations are concerned.
Now, let me come to the Queens baton.
यह समाचार पत्रों में भी छपा कि क्वीन बेटन को लेकर जो इवेंट लंदन में हुआ, उसमें कुछ तथाकथित धांधली हुई है। मैं यह पूछना चाहता हूं कि जिस धांधली को लेकर सब लोगों ने सारा कुनबा आसमान पर उठा रखा है, उस कांट्रेक्ट की टोटल वैल्यू क्या थी, उस कांट्रेक्ट की टोटल वैल्यू 1 करोड़ 66 लाख रूपये थी। वह प्रबन्धन समिति के बजट का कितना प्रतिशत बनता है, वह पूरे प्रबन्धन समिति के बजट का (.07) दशमलव शून्य सात प्रतिशत बनता है। मैं आगे एक बात और कहना चाहता हूं कि अगर उसमें कोई दोषी है, अगर उसमें किसी ने धांधली की है, अगर किसी ने पैसा लिया है, अगर किसी ने राजस्व से खिलवाड़ किया है तो उसे आप फांसी दे दीजिये। अंग्रेजी में एक कहावत है --
“You do not cut your nose to spite your face.” जब राष्ट्रमंडल खेलों के 39 दिन रह जायें तो राजनीतिक रोटियां सेंकने के लिए मुल्क की टोपी नहीं उछाली जाती।...( व्यवधान) जो काम ये इतने दिन से कर रहे हैं। अंत में मैं एक बात कहना चाहूंगा कि ये मुल्क की टोपी उछालना चाहें तो ये इनकी मर्जी।...( व्यवधान)
महोदय, मैं एक बात कहूंगा कि हम आये हैं, हम रहेंगे, इस रेगिस्तान को गुलिस्तां बनाकर जायेंगे, बादलों की इस भीड़ में हम सह्हासे हैं, बादलों की इस भीड़ में हम कुछ सह्हासे हैं, गरज के आये हैं, बरस कर जायेंगे, सफल राष्ट्रमंडल खेल करवाकर दिखायेंगे।
श्री अखिलेश यादव (कन्नौज):महोदय, मैं आपको धन्यवाद देता हूं कि आपने मुझे इस महत्वपूर्ण बहस में हिस्सा लेने का समय दिया। राष्ट्रमंडल खेल से जुड़ा हुआ सवाल है और इससे राष्ट्र का सम्मान जुड़ा हुआ है। राष्ट्रमंडल खेलों से हमें और पूरे देश को यह उम्मीद है कि इन खेलों से देश का सम्मान और प्रतिष्ठा बढ़ेगी।
लेकिन लगातर अखबारों में यह छप रहा है और मीडिया में जिस तरह की खबरें आ रही हैं, कई बार टीवी चैनल्स पर देखने को मिला है कि देश की प्रतिष्ठा को दांव पर लगाने का काम किया गया है। कई जगह ऐसा भी लग रहा है कि कहीं हमें अपमानित न होना पड़े। सवाल हर तरफ से खड़े हो रहे हैं। केवल राजनीतिक दल ही नहीं, बल्कि पूरे देश की जनता यह जानना चाहती है कि राष्ट्रमंडल खेलों के साथ खिलवाड़ किया गया है या नहीं? पूरे देश में यह बात जा चुकी है कि यहां बहुत बड़े रूप में भ्रष्टाचार हुआ है। समाजवादी पार्टी और मेरा मानना है कि पूरे इंतजाम पर जो खर्च हुआ है, यदि उसका सही आकलन किया जाए, तो एक लाख करोड़ रूपये भी निकल सकते हैं, जिनका खिलवाड़ हुआ है। यह सुनने में आया है कि राष्ट्रमंडल खेलों की ओपनिंग सैरेमनी में चार करोड़ रूपये की आतिशबाजी की जाएगी। आपने इतने दिनों में पूरे पैसों की आतिशबाजी कर दी है, अब आप और किस तरह की आतिशबाजी करना चाहते हैं। यह भी कहा जाता है कि हम लोग बहुत मैडल जीत कर आएंगे। मैं सरकार से पूछना चाहता हूं कि हो सकता है कि राष्ट्र मंडल खेलों में मेडल अपनी मेहनत से खिलाड़ी जीतें, लेकिन सरकार को जो इंतजाम करने चाहिए थे, होम टर्फ का जो लाभ खिलाड़ी को मिलना चाहिए था, वह लाभ खिलाड़ियों को नहीं मिल पाएगा। आप बता दीजिए कि कितने स्टेडियम्स में हमारे खिलाड़ी खेल चुके हैं और वहां खेलने का उन्हें अनुभव हो गया है। अगर वहां पानी भरा हुआ है, हो सकता है कि कुछ लोगों ने न देखा हो, सरकारी पक्ष के लोग कह रहे हैं कि पानी नहीं टपका। ये तो यही कहेंगे कि हम टैस्ट कर रहे थे कि पानी टपकेगा या नहीं टपकेगा। यह खिलाड़ियों के साथ भी खिलवाड़ है और देश के सम्मान के साथ भी खिलवाड़ है। देश को पूरी तरह से लूटा गया है, इसके लिए इनके अधिकारी और सरकार के जो लोग जिम्मेदार हैं, उन्हें कटघरे में खड़ा करना चाहिए। इससे राष्ट्रपति का सम्मान जुड़ा है, इसका मतलब पूरे देश का सम्मान जुड़ा है। जो आंकड़े स्टेडियम बनने के हैं, बीजेपी सरकार ने भी एक स्टेडियम बनाया है, वह लागत धर्मशाला में ज्यादा से ज्यादा 48 करोड़ रुपए की है। जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम, जिसका सिर्फ रेनोवेशन होना था, उसकी सीटें भी कम कर दीं, कौन आपकी बात मानेगा कि आपने करीब एक करोड़ रुपए के लगभग खर्च नहीं किया। इसी तरह कोटला का स्टेडियम है, वह भी वैसा का वैसा है। अभी अखबारों में निकला था कि शिवाजी स्टेडियम अभी बन नहीं पाया है, जहां खिलाड़ियों के तमाम तरह के टैस्ट होने हैं। फिजियोथरैपी ट्रेनिंग होनी है, वह भी नहीं बन पाया है और कहा जा रहा है कि जब खेल होंगे, तब तक बन कर तैयार हो जाएगा। हम मंत्री जी से निवेदन करेंगे कि अगर इनका कोई भी स्टेडियम बन गया है, तो हम सांसदों को जरूर ले कर जाएं और दिखाएं कि यह स्टेडियम बन कर तैयार है। इसके साथ एक स्टेडियम ऐसा भी दिखा दें जो खेल शुरू होने से करीब एक या डेढ़ महीने पहले तैयार होने वाला है। यह सही है कि पूरी तरह से लूट और भ्रष्टाचार इन लोगों ने और अधिकारियों ने मिलकर किया है और प्रश्न-चिह्न ओर्गेनाइजेशन कमेटी पर लगे हैं। यह सवाल खड़ा हुआ है कि आखिर यह सोसायटी कहां से रजिस्टर्ड हो गई। कौन-कौन लोग इसमें शामिल हैं? सीधा सवाल सरकार के मंत्री और सरकार पर उठा है। इसलिए जिन लोगों ने अनियमितताएं की हैं, उनके खिलाफ कड़ी कार्यवाही हो, जांच हो। हम लोग मांग करेंगे कि अभी प्रूव होना चाहिए, अभी जांच होनी चाहिए, क्योंकि अभी जांच नहीं हुई, तो कोई भी पकड़ा नहीं जाएगा।
जिस तरह से मीडिया में, लोक सभा में और बाहर चर्चा हो गई, हो सकता है कि ये अपने भागने और बचने का इंतजाम भी कर लें। इसलिए अभी जांच होनी चाहिए, इस पर अभी सरकार को फैसला लेना चाहिए, यह हमारी मांग है। ...( व्यवधान) आईपीएल तो छूट ही चुका है, आईपीएल ही नहीं छूटा है, आपको याद होगा कि भोपाल गैस ट्रेजडी भी छूटा और बोफोर्स वाला भी छूटा। उसकी जांच बाद में हुई थी। इसलिए हम चाहते हैं कि जांच अभी हो। अभी से शुरुआत हो, क्योंकि छोटे-मोटे पैसे का सवाल नहीं है। देश का सम्मान और लगभग एक लाख करोड़ रुपए का सवाल है। जो लोग कहते हैं कि दिल्ली, राजधानी को अच्छा बना दिया, ये तो दुनिया के बहुत शहरों में घूमे होंगे। आप मुझे ऐसा एक भी शहर बता दें कि जहां पर फ्लाई ओवर पर जाम लगता हो? दिल्ली पहला शहर है, यहां कोई फ्लाई ओवर ऐसा नहीं है, जहां जाम न लगता हो। फ्लाई ओवर बनता क्यों है, मेरा यह सवाल है? इन्होंने जितनी भी सड़कें बनाई हैं, वे सड़कें ऐसी नहीं हैं कि जहां तक इन्हें पहुंचना है, वहां तक पहुंच जाएं। आप बता दें, अगर अनुमान लगाया जाए तो वहां पहुंचने में कितना समय लगेगा? यह कोई नहीं बता सकता कि एक जगह से दूसरी जगह पहुंचने के लिए कितना समय लगेगा। यह इनका दिल्ली का इंतजाम है। इसी तरह जो अधिकारी हैं, हो सकता है कि वे अधिकारी भाग जाएं। इसलिए उनके पासपोर्ट जब्त होने चाहिए। ये अधिकारियों पर बात को डालेंगे, इसलिए हमारी मांग है कि इसमें जो भी लोग हैं, उनके पासपोर्ट जब्त हों।
सभापति महोदय, मैं आपके माध्यम से कहना चाहता हूं कि केन्द्र सरकार यह जिम्मेदारी ले, क्योंकि हम लोग खेल रोकना नहीं चाहते हैं, खेल में रुकावट बनना नहीं चाहते। पूरा देश इस तरफ निगाह लगा कर बैठा है कि भारत भी कुछ मैडल्स जीतेगा। सरकार यह गारंटी दे और गारंटी देकर बताए कि जब पूरे तरीके से खेल शुरु होगा तो उससे पहले पूरा इंतजाम अच्छा हो जाएगा। यह सरकार की जिम्मेदारी बनती है। कमेटी कौन सी है, कौन सी आर्गेनाइजेशन कमेटी है, उसमें कौन-कौन से लोग शामिल हैं, हम उसमें नहीं पड़ना चाहते। सरकार की यह जिम्मेदारी है कि सरकार गारंटी ले और एश्योर करे कि जब गेम्स शुरु होंगे तो पूरे तरीके से स्टेडियम से लेकर तमाम इंतजाम अच्छे होंगे, बेहतर होंगे और देखने लायक होंगे, जिससे हमारे खिलाड़ियों और आने वाले लोगों को असुविधा न हो। जहां तक टिकटों के मिलने का सवाल है, मनरेगा चलाने वाले जो लोग हैं, जो योजनाएं चला रहे है कि ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना से कुछ लाभ मिलेगा, ये चाहते थे कि पूरा देश देखे। आप ये बताइए कि पहली टिकट कितने रुपए की है, एक हजार रुपए की है या कितने की है? ये एक हजार, दस हजार रुपए, 25 हजार और 50 हजार रुपए की टिकट बेच रहे हैं। पता नहीं कितने रुपए की टिकटें हैं और कितने लोग खरीदेंगे। इनकी टिकटें बिकी ही नहीं, क्योंकि यह प्रचार हो गया है कि स्टेडियम अभी बन कर तैयार नहीं है। अंतरराष्ट्रीय स्तर के जो जाने-माने खिलाड़ी हैं, जिनकी प्रतिभा को देखने लोग आ रहे थे, वे अब आ ही नहीं रहे हैं। हो सकता है कि बहुत सारे लोग इसकी टिकट भी न खरीदें। इस पर भी कहीं न कहीं आपने प्रश्न-चिन्ह लगाया है। इसलिए जो लूट हुई है, अपने आप में जो बहुत बड़ा भ्रष्टाचार है, उसकी जांच हो और जांच अभी शुरु हो जाए, क्योंकि हम बाद की बात में पड़ना नहीं चाहते। यह सही है कि पूरा देश और हम सभी लोग जानना चाहते हैं कि आखिरकार इसमें भ्रष्टाचार हुआ है या नहीं हुआ है? भ्रष्टाचार हुआ है तो उन दोषियों के खिलाफ कार्यवाही हो।
श्री शरद यादव (मधेपुरा):सभापति महोदय, आज जिस सवाल पर चर्चा हो रही है, इस पर सदन में ही नहीं, बल्कि सम्पूर्ण देश भर में उसकी चर्चा है। इस देश की जो मीडिया है, चाहे वह प्रिंट मीडिया हो या विजुअल मीडिया हो।
सभापति महोदय, उसने एक अहम भूमिका निभाई है। अभी यहां चर्चा चल रही है। इस समय मनीष तिवारी जी, यहां उपस्थित नहीं हैं। ...( व्यवधान) अब वे आ गए हैं। उन्होंने एक अद्भुत बात कही है। उन्होंने कहा कि क्वींस बैटन के घपले में सिर्फ इस देश की टोटल आर्गेनाइजिंग कमेटी या प्रबन्धन कमेटी का .07 परसेंट खर्च हुआ है। शरीर है, उसका कोई हिस्सा, अंगुली से लेकर कान तक, जो आंख है वह .07 परसेंट ही बनेगी। करप्शन और भ्रष्टाचार इस देश की बहुत बड़ी बीमारी है। यह ऐसी बीमारी है कि सदन को इस पर गम्भीरता से बहस करनी चाहिए। वह अलग दिन आएगा, जब इस विषय पर हम यहां बहस करेंगे।
सभापति महोदय, मैं आपके माध्यम से इतना ही कहना चाहता हूं कि कॉमनवैल्थ गेम्स हो रहे हैं, इनमें ‘शेरा’ दिखाया जाता है। इन गेम्स के लिए लोन लिया गया है और यह बराबर छप रहा है कि 1620 करोड़ रुपए का लोन लिया गया है। ऐसी बात नहीं है। लोन ज्यादा है। एक तो इस विदेशी भाषा ने इस देश में बड़ा दंद-फंद किया हुआ है। जो लोन लिया गया है, उसमें कुर्सी, टेबल और ओवरहैड खर्च आदि सभी हैं। इन सब चीजों के लिए इन्होंने 6087 करोड़ रुपए का लोन लिया है। प्रसार भारती फॉर होस्टिंग ब्रॉडकास्टिंग के लिए 187 करोड़ रुपए का लोन लिया गया है। इन्होंने जो टोटल लोन लिया है, वह 2499 करोड़ रुपए का है।
महोदय, मैं अपनी बात इसी से शुरू करूंगा। इस गेम की आयोजन समिति ने कहा था कि इसका सिम्बल ‘शेरा’ है। मैं बताना चाहता हूं कि इस गेम का सिम्बल शेरा नहीं है, बल्कि सुरेश कलमाड़ी हैं। ‘शेरा’ कहीं दिखता ही नहीं है, लेकिन ये हर जगह दिखते हैं। जहां देखो, वहां लपक-लपक कर पहुंच जाते हैं। ये कह रहे थे कि ये सब पैसा वापस कर देंगे। इन्होंने लोन लिया है। मैं पूछना चाहता हूं कि एडवर्टाइजमेंट के माध्यम से कितना पैसा आ रहा है? जिन कंपनियों को यह ठेका दिया गया है या कहा गया है कि देशभर में जितने इंडस्ट्रियलिस्ट्स हैं या और लोग हैं, उनसे पैसा उगाहकर के ये लोन चुकाएंगे। पता नहीं किस-किस और चीज से ये लोन का पैसा चुकाने वाले हैं। मान लो कि ये 2499 करोड़ रुपए का लोन नहीं चुका पाए, तो आप बताइए कि क्या करेंगे ? इस देश के सामने क्या रास्ता है ? उस लोन को ये नहीं चुकाएंगे, सरकार चुकाएगी। इन्हें तो लोन लेना है और मौज मारना है, इसलिए लोन ले लिया। असल और नकल में फर्क होता है।
आप दुनिया भर के मुल्कों में घूमते हैं, माल आपके पास बहुत है, आप धन्धा कर लेते हो, धन्धा करना मतलब इस देश में काफी माल कमाना है। आप सब जगह जाते हो और फिर आकर नकल करते हो। आप दुनिया को दिल्ली दिखाना चाहते हो, जरूर दिल्ली दिखानी चाहिए, लेकिन अभी मनीष तिवारी जी कह रहे थे कि जो स्टेडियम्स हैं, वे सुधारे भर गये हैं, रिपेयर किये गये हैं, उनमें कितना पैसा लगा है, वह मामूली पैसा नहीं है। आज देश में सूखा है, उस पैसे से पूरे देश के सूखे इलाके में बिजली दी जा सकती है।
खैर, आप उस पैसे को छोटा मानिये। आपने जो लोन लिया है, यह कहां से चुकाएंगे? फिर आपकी सरकार के दो हिस्से हैं। हाई कमिश्नर हैं, उन्होंने कहा कि ये टैक्सियां ले लो या कोई काँट्रैक्ट उनके कहने से आपने दे दिया, यह आपने पेपर दिखा-दिखा कर ऐसे बताया, मगर वहां वे हाई कमिश्नर कह रहे हैं कि नहीं, यह काम हमने नहीं किया। इनके विदेश मंत्री कह रहे हैं, जो कम बोलते हैं, वे कह रहे हैं कि नहीं, हमने नहीं दिया। यह क्या बात है, भई। मनीष तिवारी कह रहे हैं कि 0.07 परसेंट खा गये तो कोई मतलब नहीं, कोई बात नहीं, क्यों इसकी चर्चा कर रहे हो।...( व्यवधान)
श्री मनीष तिवारी : नहीं, मैंने यह नहीं कहा। मैंने यह कहा था कि जिसने भी खाया है, उसको आप फांसी दे दीजिए। विद्वान कहते हैं कि अपने मुंह से बदला लेने के लिए आप अपनी नाक नहीं काटते।...( व्यवधान)
श्री शरद यादव : नहीं, आप ठीक कह रहे हैं। उसके बाद में आपने यह बात कही थी। मैं आपसे कहना चाहता हूं कि इनका ही एक डिपार्टमेंट है, यह इंडियन इंस्टीटय़ूट ऑफ टूरिज्म एण्ड ट्रैवल मैनेजमेंट की रिपोर्ट है। उसका एक हिस्सा मैं पढ़कर बता रहा हूं:
“The total Budget estimate for hosting the 19th Commonwealth Games is US $ 17.5 billion…” यह टोटल मिलाकर अंदाज से, एप्रोक्सीमेटली कहेंगे तो 87.5 हजार करोड़ रुपये होगा। यह आपका जो टूरिज्म डिपार्टमेंट है, मैं उसकी रिपोर्ट पढ़कर बता रहा हूं। आप कह रहे थे...( व्यवधान) हां, बोलिये-बोलिये, क्या कह रहे हैं? आप कुछ कहना चाह रहे थे?...( व्यवधान)
डाî. एम.एस.िगल : अगर आप चाहें तो मैं कह देता हूं।...( व्यवधान) आपको भी याद है, मेरे को भी याद है। वे पुराने हो गये। ...( व्यवधान)
सभापति जी, यह हिसाब मैं बता दूं, कौन सी रिपोर्ट किस आर्गेनाइजेशन की है, मैं उसकी चर्चा नहीं करता, हमारी वैबसाइट भी है। ये सरकारी आंकड़े मैं बता रहा हूं। इसमें कोई कच्ची बात नहीं हो सकती। स्टेडियम्स के ऊपर खर्च है, 4459...( व्यवधान)
श्री शरद यादव : यह मैं आपको दे दूंगा। यह आपकी नहीं, मैं टूरिज्म डिपार्टमेंट की रिपोर्ट का जिक्र कर रहा हूं।...( व्यवधान)
डॉ. एम.एस.िगल: ठीक है। क्वश्चन है कि गेम्स के ऊपर जो फंड खर्चा है, वह टोटल 11498 करोड़ रुपये है।
दिल्ली शहर का 16, 500 का खर्च है, जो हमारी वेबसाइट पर दिया हुआ है और कोई दूसरे खर्चे नहीं हैं। न साठ हजार है और न एक लाख करोड़ है, यह सच बात नहीं है। ...( व्यवधान)
श्री शरद यादव : मेलबर्न में जो गेम्स हुए थे, उन पर 14 मिलियन डॉलर खर्च हुए थे। अभी ब्रिटेन में होने वाले हैं, जिसमें अनुमान है कि 50 हजार करोड़ खर्च होंगे। वहां बहुत बड़े खेल ओलपिंक होने वाले हैं। चीन में अभी-अभी ये खेल हुए हैं। इसका भी कंपैरिजन हो जाएगा कि आपके खेल में और उनके खेल में कितने खिलाड़ी वहां खेले और आपके यहां कितने खिलाड़ी खेलने वाले हैं?
महोदय, सरकार इसमें किसी तरह से लीपापोती करना चाहती है। मैं कहना चाहता हूं कि यह किस्सा कोई मामूली किस्सा नहीं है। यह किस्सा हरि अनंत, हरि कथा अनन्ता जैसा है। इसमें कितने विभाग हैं, जो अलग-अलग काम कर रहे हैं? कोई एक विभाग इसमें नहीं है। आपने जिन आदमियों के जिम्मे यह काम सौंपा है, अगर विस्तार से उनके बारे में कहूंगा तो आप समय नहीं देंगे। उनमें कितने तरह के अफसर हैं? जंतर-मंतर में इनके आफिस में जाइए तो ऐसा लगता है कि सही में इक्कीसवीं शताब्दी में हम लोग आ गए। इक्कीसवीं में ही नहीं, बल्कि और आगे की शताब्दी में आ गए हैं। हर तरह की साज-सज्जा है। मैं खुद उसे देखकर आया हूं। ...( व्यवधान) मैं अकेले नहीं गया था, मुझे कोई वहां ले गया था। विजय गोयल जी, जो यहां खेल को लाए थे, उन्होंने मुझे बताया और विजय गोयल का नाम आने के बाद सुरेश कलमाड़ी बहुत राजी हुए। ...( व्यवधान) उनको निकाल दिया। निंदक नीयरे राखिए, आंगन कुटि छवाय। वह आपको कोई गलत बात नहीं बता रहे थे। आपको सही करना चाह रहे थे, लेकिन आप सही होने के लिए तैयार नहीं हैं। आपने ऐसा काम करके रखा कि जैसे एक अकेला लंका ढहाए होता है, पूरी लंका ढहाने के लिए आप तैयार हैं ...( व्यवधान) जो स्टेडियम है, जहां रिपेयर वर्क किया गया। उसके बारे में कीर्ति आजाद जी कह रहे थे कि क्रिकेट के स्टेडियम पूरे देश भर में बने हैं। हो सकता है कि आपके यहां का स्टेडियम कुछ अजब तरह का हो। ...( व्यवधान) मुलायम सिंह जी कह रहे हैं कि गलत बात कह रहे हो।..( व्यवधान)
श्री मुलायम सिंह यादव : कहीं पेंटिंग करा दी, कहीं कमरा ठीक से सजा दिया। वहां रिपेयरिंग कहां हुयी? क्या सीढ़ियां टूट गयी थीं या छत टूट गयी थी? ...( व्यवधान)
श्री शरद यादव : जयपाल जी ने उसका उद्घाटन किया। अखबार वालों ने वहां, खासकर विजुअल मीडिया में बहुत गजब की चीज आयी हुयी है, यह कुछ अच्छा करती है, तो कुछ गड़बड़ कर देती है। आपके जैसे आदमी को उसने पकड़ लिया। आपने सही इतिहास बताया कि अभी चीन में ओलंपिक हुए हैं, वहां भी स्टेडियम लीक हुए हैं। इसलिए अगर यहां लीक हुए हैं, तो इसकी बात मत करो, इसमें कोई दिक्कत नहीं है। चीन हमसे बड़ा देश है और चीन जैसा देश हमसे बहुत आगे है, इसलिए जयपाल जी का कहना है कि वहां लीक हुए थे, तो यहां भी लीक हो रहे हैं। ...( व्यवधान) मैं आपके माध्यम से जयपाल जी से निवेदन करूंगा कि यह बहुत बैड केस है। इसको प्लीड करने के लिए अपनी गर्दन क्यों फंसा रहे हैं? अखिलेश जी ने ठीक बात कही। पेपर से लेकर सारी चीजें, आप तुलना करें कि कितने खिलाड़ी आने वाले हैं कितने नहीं आने वाले हैं?
सीधी बात है कि सारे अखबारों में छपा है कि जो अच्छे खिलाड़ी हैं, वे आपको देखकर ही भाग रहे हैं। शेरा आप दिखा ही नहीं रहे हैं।...( व्यवधान) ये खेल दुनिया के सबसे छोटे खेल हैं यानी कामनवैल्थ गेम्स बहुत छोटा गेम है, एशियन है। मैं आपसे कहूं कि अखिलेश जी ने जो कहा, वह बात सही है। हम यहां इसलिए खड़े हुए हैं कि दुनियाभर में, मैंने कल या आज पढ़ा कि क्वीन दुखी हो गई हैं कि क्या घपला हो रहा है, क्या गड़बड़ हो रही है यानी कैसा घपला चल रहा है।...( व्यवधान)
संसदीय कार्य मंत्री और जल संसाधन मंत्री (श्री पवन कुमार बंसल): आपने क्वीन का जिक्र किया। आपके मन में जो बात आती है, वह कहते रहिए, लेकिन क्वीन को कोट मत कीजिए। क्वीन ने उसकी सराहना में बहुत शानदार पत्र लिखा है।
श्री शरद यादव : मैं आपके सामने दंडवत करता हूं। जिनके नीचे हमने दो-ढाई सौ साल गुलामी काटी है, उनका जिक्र करें तो गलत हो जाएगा। आप सही कह रहे हैं। उसे निकाल दीजिए। हम रानी की शान में कुछ नहीं बोल रहे हैं। सीधी बात है कि जो हो रहा है, इससे देश की प्रतिष्ठा जा रही है। आपने देश की प्रतिष्ठा बढ़ाने के लिए किया है। यह श्री सुरेश कलमाडी के बस में नहीं है और मुझे भारत सरकार के बस में भी नहीं लगता, क्योंकि कोई टांग दुरुस्त कर रहा है, कोई सिर दुरुस्त कर रहा है, कोई पैर दुरुस्त कर रहा है, कोई टांग लेकर भागा हुआ है, कोई हाथ लेकर भागा हुआ है। तमाशा मचा हुआ है। पूरी दिल्ली में जो असली दिल्ली है, आप कनॉट प्लेस किसे दिखाना चाहते हैं। कनॉट प्लेस बनवाने में 90 फीसदी सरकार लगाएगी और 10 फीसदी मालिक लगाएगा। वह असली मालिक नहीं है, असली मालिक घर मैं बैठा हुआ है जिसे दो रुपये, तीन रुपये किराया मिलता है, उसे कहां पकड़ेंगे। कनॉट प्लेस को खोद दिया। कनॉट प्लेस में क्या गड़बड़ी थी। मैं कहना चाहता हूं कि लुटियन ज़ोन में क्या गड़बड़ी थी। मैं लुटियन ज़ोन में खुद 25 साल से रहता हूं। वह काफी खूबसूरत जगह है। आप पत्थर लगा रहे हैं, सीमेंट लगा रहे हैं, चारों तरफ खोदकर रख दिया है। मैं आपसे क्या कहूं। जहां जाइए, ऐसे लग रहा है जैसे कोई युद्ध होने वाला है, कोई हमला करने आने वाला है। खिलाड़ी आ रहे हैं तो वे हमला करेंगे या क्या करेंगे? यदि आप पुरानी दिल्ली में खेल करवा देते तो क्या आपकी शान बिगड़ जाती? देश को दिखाना है तो वह असली है, क्यों गलत बनना चाहते हैं, क्यों हिन्दुस्तान की राजधानी को सजाकर ऐसा दिखाना चाहते हैं कि हम बहुत बड़े हैं। आज 10-15 प्रतिशत लोग मौज में हो गए हैं। देश की जनता हजारों वर्षों से उदासीन है। यदि वह उदासीन नहीं होती तो आपकी मस्ती जरूर टूटती। आप यह शान किसे दिखाना चाहते हैं? क्या इससे आपकी शान में चार चांद लग जाएंगे? इस देश की गरीबी और भूख पर यूएनओ की रिपोर्ट रोज छपती है। क्या उसमें नहीं आता कि आप कहां खड़े हैं? आप बेटन घुमाकर सोच रहे हैं कि देश में शान हो जाएगी। अभी श्री अखिलेश कह रहे थे कि फ्लाई ओवर बने हुए हैं। मैं कहता हूं कि यहां फ्लाई ओवर बनने ही नहीं चाहिए, पूरे देश में बनाइए। फ्लाई ओवर में शेरा दिखा रहे हैं, खर्च क्यों नहीं दिखा रहे हैं।
यह पैसे कम करके कह रहे हैं कि 11 हजार करोड़ रुपये का बजट था जबकि 13 हजार करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं। आप क्या यही कह रहे हैं? लेकिन आप गलत कह रहे हैं। अब फौज लगी है यानी पुलिस लगी है। सिक्युरिटी के लिए चार जोन बनेंगे। आपको मालूम नहीं कि जिस दिन से देश आजाद हुआ, उसी दिन से वह किसी न किसी तरह की विपदा में फंसा हुआ है। आतंकवादी आज के लोग नहीं हैं, बल्कि बहुत पहले से चले हुए हैं। अब मान लो कि यहां कोई हादसा हो जाये, उसके लिए आप सिक्युरिटी लगायेंगे, लम्बी-चौड़ी लगायेंगे। उसका खर्चा आप नहीं जोड़ते हैं। अब लोग कनाट प्लेस देखने आयेंगे या चांदनी चौक देखने आयेंगे?
उपाध्यक्ष जी, मैं मंत्री जी से पूछना चाहता हूं। इस बारे में खेल मंत्री जी को जवाब देना चाहिए। आप कह रहे हैं कि यहां एक लाख टूरिस्ट आयेंगे, यानी 60 हजार अपने देश से और 40 हजार बाहर के देशों से आयेंगे। फिर एक रिपोर्ट आ रही है कि इतने लोग नहीं आयेंगे, क्योंकि होटलों का किराया बहुत बढ़ जायेगा, बहुत दिक्कत हो जायेगी। अब आप किससे पैसे कमायेंगे, कौन सा पैसे कमायेंगे? आप यह बताइए कि चांदनी चौक इतिहास की जगह है, लोग उसे देखेंगे या कुछ और देखेंगे। गिल साहब, चांदनी चौक इतिहास की जगह है, क्योंकि उससे देश का स्वरूप बना हुआ है। वह ऐसी जगह है जहां ओरंगजेब अपने तीन भाइयों का कत्ल करके निकला था। वहां एक हलवाई है, उसने उस पर थूका था। ...( व्यवधान)
डॉ. एम.एस.िगल: गुरूतेग बहादुर का कत्ल किया था।...( व्यवधान)
श्री शरद यादव : मैं वही बात कह रहा हूं। वहां सीसगंज गुरूद्वारा है। उसे लोग देखने जायेंगे। जो सिख बाहर गये हैं, वे उसे देखने जायेंगे। कनॉट प्लेस उन्होंने ढाई सौ साल में बनायी है, वह उनका डिजाइन है, उनका तरीका है। क्या वे उनको देखेंगे? यहां हिन्दुस्तान के कारीगरों को देखने के लिए लोग आयेंगे। वे राजस्थान, खुजराहो, कोणार्क, तक्षशिला, नालंदा और चांदनी चौक जायेंगे, लेकिन यहां कौन जायेगा? क्या आपने उन पर एक भी पैसा खर्च किया है? ...( व्यवधान) वे कुतुब मीनार जायेंगे, ताजमहल जायेंगे। हमारे देश के जो कारीगर हैं, जिनकी अंगुलियों से इतिहास के कमाल निकले हैं, उन कारीगरों की जो जिंदगी थी, उसे खुद गांधी जी ने अपना लिया। वे दस्तकार बन गये थे। लोग उनको देखने आते हैं। खुजराहो के बाजू में मेरी मां रहती है। खुजराहो में सुबह लोग आते हैं, तो गिरते-पड़ते मंदिर को देखने आते हैं। वहां कमाल के मंदिर हैं। वहां एक भी मंदिर में सीमेंट और कंक्रीट का काम नहीं है सिर्फ पत्थर का काम है। ...( व्यवधान) मैं वही कह रहा हूं। ...( व्यवधान) अब सीधी बात है कि आपने जो काम किया है, उससे हम लोग ऐसे फंस गये हैं कि आगे जाते हैं तो कुएं में गिरते हैं। खेल मंत्री सही बात कह रहे हैं कि चोरी की बात जरूर है, जांच करा देंगे, लेकिन बाद में करायेंगे। अभी बारात खड़ी है, क्या करें? मेरे पास भी कोई हिकमत नहीं है कि मैं आपसे क्या कहूं। हम आगे जाते हैं, तो खाई है और पीछे जाते हैं, तो कुआं है। आपने देश का ऐसा इंतजाम किया है कि आज पूरा देश आगे देखे, तो अपमान, पीछे देखे, तो अपमान, बाजू मे देखे, तो अपमान, इधर देखे तो अपमान। इधरता हो या उधरता हो, बात बिगड़ती ही जाती है। अब ये हिसाब-किताब बता रहे हैं। मनीष तिवारी जी सिर्फ भीतर का ही माल निकालकर बता रहे हैं कि यह-यह हुआ है। मनीष तिवारी जी, दिल आपका भी जानता है कि इस पर कितना खर्च होने वाला है। मैं जो टूरिज्म डिपार्टमैंट का आंकड़ा दे रहा हूं, हो सकता है कि वह सही न हो। मैं एक साधारण आदमी हूं, सदस्य हूं। लेकिन सरकार के हाथ लम्बे हैं, वह सही-सही बताये। ...( व्यवधान)
श्री मनीष तिवारी : शरद जी, मैं एक बात कहना चाहता हूं। अगर आप मेरे आंकडों में एक पैसे का भी फर्क निकाल दें, तो आपका जूता और मेरा सिर। ...( व्यवधान)
श्री शरद यादव : मैंने तो ऐसा कहा नहीं। मनीष तिवारी जी को जो हाथ में दिया गया है। ...( व्यवधान) जो उनके हाथ मे दिया गया है, वही बोल रहे हैं। मेरे हाथ में भी सरकार के द्वारा ...( व्यवधान) मैं कह रहा हूं कि हमारे हाथ में भी बहुत सी चीजें हैं, जो सरकार के द्वारा ही आयी हैं मगर सही नहीं हैं।
मैं जो कह रहा हूं, मैं अपनी जो सीमाएं हैं, उनमें से उठाकर कह रहा हूं। मनीष तिवारी जी की सीमाएं ज्यादा हैं। मैं नहीं कह रहा हूं कि उन्होंने कुछ गलत कहा है, उन्होंने सही बताया है, लेकिन सही उतना ही बताया है, जितना सरकार ने दिखाया है। वह पूरा नहीं बता रहे हैं। मंत्री जी यहां बैठे हैं। ...( व्यवधान) माननीय सदस्य क्यों बार-बार बोलते हैं । आप पूरी उम्र बिता दो, लेकिन कांग्रेस पार्टी में कुछ बन नहीं सकते हैं। आप बेकार चिल्ला रहे हैं।...( व्यवधान) क्यों हमसे तकरार कर रहे हो?...( व्यवधान)
श्री संजय निरुपम (मुम्बई उत्तर): आप भी इसे याद रखिए। ...( व्यवधान)
श्री शरद यादव : यहां जवाब देने के लिए मैं आपसे कहूंगा कि खेल मंत्री जी जवाब देंगे, लेकिन आपके हाथ में सब कुछ नहीं है। एमसीडी है, डीडीए है, बहुत सी एजेंसीज हैं। एक खबर आई है कि एक आदमी, एक कंपनी, उसका नाम लेना ठीक नहीं है, उसने मकान बनाए थे। मधु कौड़ा का एक आदमी है विनोद सिन्हा। वह भी उस कंपनी में पार्टनर है, जिस कंपनी में विनोद सिन्हा पार्टनर होगा।... * यह बात सही है या गलत, मुझे मालूम नहीं है। यह बात मैंने अखबार में पढ़ी है। उसके बारे में भी सफाई दीजिए। आपने यमुना का बेड बन्द कर दिया है, दिल्ली मरेगी एक दिन। यमुना के बेड को मकान में कन्वर्ट करके दे दिया है। मैं आपसे कहूंगा कि यह आपके अकेले के वश का नहीं है। आप इसका जवाब आज शाम को न देकर, कल दें, दूसरे दिन दें। शाम को अपनी पूरी टोली के साथ बैठिए, सारे हाथ, पांव, नाक, पेट सभी को इकट्ठा करके बैठिए, तब कहीं चल पाएंगे और उसमें आपका यह जो शेरा है, सुरेश कलमाड़ी, इसको जरूर बैठाइए।... * हम हाथ जोड़ते हैं, तुम छोड़ो इसका पीछा। ऐसी मुश्किल कर दी है तुमने कि पूरा देश परेशान है।
SHRI V. NARAYANASAMY: Allegation against a Member should not be on record. It should be expunged from the record. … (Interruptions)
MR. CHAIRMAN : Allegations made will be expunged.
… (Interruptions)
श्री शरद यादव : सभापति महोदय, जहां आपको मेरी बात का बुरा लगा हो, उसे काट दीजिए।...( व्यवधान)
श्रम और रोज़गार मंत्रालय में राज्य मंत्री (श्री हरीश रावत): शरद जी, हम आपको इतने वर्षों से सुन रहे हैं, लेकिन यह बात आपके मुंह से अच्छी नहीं लगी।...( व्यवधान)
श्री पवन कुमार बंसल: महोदय, इस हद तक आगे जाकर बात नहीं कही जानी चाहिए, जैसी कही जा रही है। ...( व्यवधान)
MR. CHAIRMAN: Please conclude. Already your time is over. I am having a long list of Members who wanted to speak.
… (Interruptions)
श्री शरद यादव : बंसल जी, आप नाराज हो गए, लेकिन आपकी पार्टी सुरेश कलमाड़ी जी के पक्ष में बोलने को तैयार नहीं है।...( व्यवधान)
श्री पवन कुमार बंसल : मैंने सिर्फ इतना कहा था कि जिन अल्फाज़ का इस्तेमाल आप कर रहे थे, वे ठीक नहीं हैं।...( व्यवधान)
श्री संजय निरुपम (मुम्बई उत्तर): हर चीज की सीमा होती है। क्या आप जबर्दस्ती कोई भी एलिगेशन लगा देंगे? ...( व्यवधान)
श्री पवन कुमार बंसल : महोदय, मैं सिर्फ इतना कह रहा था कि हम लोग शरद जी की बहुत इज्जत करते हैं। हम जानते हैं कि वह सदन के बहुत वरिष्ठ सदस्य हैं, सभी लोग उनकी बहुत इज्जत करते हैं, लेकिन मैं सिर्फ यही कह रहा था कि वह एक भाव में बह गए और जिन अल्फाजों का इस्तेमाल किया, शायद वह नहीं करना चाहिए था। मैंने सिर्फ इतना ही कहा है।...( व्यवधान)
श्री शरद यादव : महोदय, मैं इससे सहमत हूं। मैं संसदीय कार्य मंत्री से सहमत हूं। यदि मेरी कोई बात ऐसी हो, सुरेश कलमाड़ी जी मेरे मित्र रहे हैं, जो आपको बुरी लगे, उनको काट दीजिए। हमें इसमें कोई दिक्कत नहीं है।
हम तो सिर्फ यह कह रहे हैं कि कामनवैल्थ गेम्स हमारे गले की हड्डी बन गए हैं और इसे ठीक करने का काम सरकार करे और एक कमान की तरह जवाब देने का काम करे। अभी अखिलेश जी ने ठीक कहा है कि यह कार्रवाई साथ-साथ चलनी चाहिए, ऐसा नहीं कि बाद में इसकी जांच करेंगे और फांसी पर चढ़ाएंगे। हमें उस पर यकीन नहीं है, क्योंकि इस देश में किसी को फांस नहीं लगती। कोई उसे छूता भी नहीं है। लेकिन जो गरीब किसान है, वह कर्ज लेकर खेती करे और न चुका पाए तो उसका मकान, खेत सब कुर्क कर लिया जाता है। लेकिन जो बड़े हैं, उन्हें कुछ नहीं होता है। इसलिए साथ-साथ इसे निपटाया जाए और बताएं कि इस सारे मामले में कोई घपला नहीं हुआ है और यदि कोई गड़बड़ हुई है तो सरकार उस पर क्या कार्रवाई कर रही है? ये सारी चीजें उत्तर में आनी चाहिए, नहीं तो फिर बात बहुत आगे तक जाएगी और उसका जवाब सरकार को देना पड़ेगा।
श्री दारा सिंह चौहान (घोसी) : सभापति महोदय, सदन में कामनवैल्थ गेम्स के बारे में चर्चा हो रही है। मैं समझता हूं पूरा देश इसे देख रहा होगा। मैं तो मीडिया को, चाहे वह इलेक्ट्रॉनिक हो या प्रिंट, बधाई देना चाहूंगा कि अगर वे लोग न होते तो लोगों को और शायद हमें भी इस पूरे घपले के बारे में पता नहीं चलता। हम यहां पर चर्चा कर रहे हैं, लेकिन उससे पहले ही मीडिया ने इसे देश के कोने-कोने में पहुंचा दिया कि कामनवैल्थ गेम्स में क्या-क्या हो रहा है, कैसे घपले किए जा रहे हैं और कैसे भ्रष्टाचार हो रहा है। हमारे यहां कहने से पहले ही देश की जनता यह जान चुकी है, लेकिन आज उस पर मुहर लग रही है कि निश्चित रूप से कामनवैल्थ गेम्स में कहीं न कहीं भ्रष्टाचार हुआ है।
सभापति जी, हम इस मामले को पहले भी इस सदन में शून्य काल में उठा चुके हैं। कामनवैल्थ गेम्स की तैयारियों में कितना भ्रष्टाचार है, यह मैं नहीं जानता, यह तो जांच समिति या जांच एजेंसी की रिपोर्ट के बाद ही पता चलेगा। लेकिन जो चीज प्रकाश में आई, उससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस देश में गरीब लोगों, एस.सी., एस.टी. के लिए जो स्पेशल कम्पोनेंट का पैसा था, 750 करोड़ रुपया, वह सारा पैसा कामनवैल्थ गेम्स की तैयारियों में ट्रंसफर कर दिया गया, खर्च कर दिया गया। इससे साबित हो गया कि निश्चित रूप से इन खेलों में कुछ न कुछ है।
सभापति जी, मैं आंकड़ों में नहीं जाना चाहता, क्योंकि उन पर काफी चर्चा हुई है। मैंने मीडिया की बात इसलिए कही कि अगर मीडिया में यह बात नहीं आती तो इस संसद में बैठने वाले या बाहर भी कुछ लोग इसे शायद ही समझ पाते कि इन खेलों में क्या हो रहा है।
15.59 hrs. (Shri Francisco Cosme Sardina in the Chair) जब मीडिया में, चाहे प्रिंट मीडिया हो या इलेक्ट्रॉनिक मीडिया हो, इस पर चर्चा हुई तो लोगों ने देखा इसलिए आज संसद में इस पर चर्चा हो रही है। मैं आपके संज्ञान में कोई लम्बी-चौड़ी तकरीर नहीं करना चाहता, क्योंकि सब बातों को हम जानते हैं। ये गेम्स को यहां आयोजित करने की डील कब हुई, कब टेंडर हुए, कब काम शुरू हुआ, मैं इस पर भी नहीं जाऊंगा। लेकिन मैं इतना जरूर कहना चाहता हूं कि अगर आपको मालूम था कि इस देश में कामनवैल्थ गेम्स, जिसे आप अपने स्वाभिमान के प्रतीक के रूप में देख रहे हैं और दुनिया के लोग यहां आएंगे, कराना चाहते थे, तो आपको एक समयबद्ध कार्यक्रम इनके लिए बनाना चाहिए था। मैं इन खेलों में हो रही देरी का कारण नहीं समझ पा रहा हूं कि क्यों ऐसा हुआ और क्यों इतनी देरी की गई, फिर कैसे इतनी जल्दी में इसे निपटाया जा रहा है।
शरद यादव जी कह रहे थे, मनीष ा त्वारी जी भी इस पर अपनी बात कह रहे थे। इन लोगों की अंदर की और बाहर की बातों को यहां रखा। हम नहीं जानते कि अंदर क्या हो रहा है। मैं तो बाहर की बात करना चाहता हूं कि चाहे कनॉट प्लेस में आप चले जाएं या लुटियन जोंस में चले जाएं, पहले जो फुटपाथ बने हुए थे, कितना मजबूत पत्थर लगा हुआ था।
16.00 hrs आज अगर आप वहां जाइये, आपको लगेगा कि वह पत्थर बनाया नहीं गया है वरन् वहां पर रख दिया गया है। मैं समझता हूं कि वह 10 दिन बाद फिर उखड़ जाएगा। कॉमनवैल्थ गेम्स में 11 हजार करोड़, 22 हजार करोड़ या एक लाख करोड़ खर्च हुआ है, मैं इसके विस्तार में जाना नहीं चाहता हूं, लेकिन चाहे मैट्रो हो, फ्लाई-ओवर हो या रोड हो, चाहे साइन-बोर्ड्स प्रचार के लिए हों, उसी संदर्भ में सब बनाए गये हैं। मैं समझता हूं कि सारा इंफ्रास्ट्रक्चर लगभग एक लाख करोड़ रुपये का होगा।
एनडीएमसी ने 300 करोड़ रुपये से ज्यादा तो केवल कनॉट-प्लेस के ऩटपाथों को बनाने पर खर्च किया है। कलमाड़ी साहब को देखकर परेशानी होती है और अब तो कांग्रेस में भी, बाहर तो भ्रष्टाचार की चर्चा हो ही रही है, पार्टी के अंदर चर्चा यह हो रही है कि किसे बलि का बकरा बनाया जाए। अब कौन बलि का बकरा बनेगा, यह तो वक्त ही बताएगा?
MR. CHAIRMAN : Hon. Member, please address the Chair otherwise, I will not allow you to speak.
श्री दारा सिंह चौहान : जैसा हमारे एक सम्मानित सदस्य ने बताया कि चार करोड़ रुपया केवल आतिशबाजी में खर्च हो रहा है। जिस देश की संसद में चर्चा यह होनी चाहिए कि इस देश के खिलाड़ी कितने मैडल लाएंगे, कितने अच्छे खिलाड़ी तैयार होंगे, लेकिन इस पर चर्चा नहीं हुई। अभी खेल शुरु होने से पहले ही दूसरा खेल शुरु हो गया है, इसलिए मैं कहना चाहता हूं कि केवल चार करोड़ की आतिशबाजी नहीं, मैंने जो सुना है कि 34 करोड़ रुपये का कोई गुब्बारा विदेश से आ रहा है, यहां विदेशी लोगों को दिखाने के लिए, क्या यही हमारा स्वाभिमान है? वहां से प्रकाश के लिए लड़ियां आयेंगी, इसका मतलब कहीं न कहीं हम यह सब करने में फेल हैं। जिस शिवाजी स्टेडियम की चर्चा हो रही है।...( यवधान) MR. CHAIRMAN: You are not sitting in the Central Hall. Please address the Chair.
श्री दारा सिंह चौहान सभापति महोदय, आज जो काम दिल्ली में हुआ है उसमें चार-पांच दर्जन मजदूर मारे गये हैं लेकिन उनके बारे में कोई पूछने वाला नहीं है। आज दिल्ली की झुग्गी-झोंपड़ियां कॉमनवैल्थ गेम्स के नाम पर उजाड़ी जा रही हैं और उन्हें यूपी, बिहार वापस भेजा जा रहा है, जब तक कॉमनवैल्थ गेम्स होंगे, तब तक उन्हें वहां आने की अनुमति नहीं है, उसके बाद क्या होगा किसी को पता नहीं है। इसलिए मैं इतना कहना चाहता हूं कि झूठी शान बघारने से इस देश का हित होने वाला या सम्मान बढ़ने वाला नहीं है। आप 21वीं सदी में जाने का झूठा सपना देख रहे हैं और यह पैसा भी केवल नई दिल्ली के इलाके में लगाया गया है, पुरानी दिल्ली में नहीं लगाया गया है। अगर यही पैसा देश के विकास के लिए खर्च होता तो पूरे देश के लोग गुमान करते, अपने देश पर अभिमान करते। इसमें जो भ्रष्टाचार हुआ है उसकी जांच होनी चाहिए।
सभापति महोदय, हम चाहते हैं कि दिल्ली से जिन गरीबों को कॉमन वेल्थ गेम्स के नाम पर बाहर किया जा रहा है, उन्हें वापिस बुलाकर यहां बसाने की व्यवस्था कराई जाए। असली भारत यही है, जिस पर हम सभी लोगों को अभिमान है। मैं देख रहा था कि जो प्रस्ताव एनडीएमसी ने पास किया है, जैसे पान की दुकान है, उसे सजाने-संवारने में एनडीएमसी का पैसा नहीं लगेगा। एक कम्पनी आईटीसी है, जो उन दुकानों की रेनोवेशन का काम करेगी, जबकि आईटीसी ने कोई प्रस्ताव नहीं दिया है कि हम इसमें इन्वोलव होंगे या कोई काम करेंगे। लेकिन पता नहीं किस इन्टरेस्ट से एनडीएमसी ने ऐसा प्रस्ताव पास किया है। पूरे नई दिल्ली एरिया में 400-500 दुकानें होंगी।...( व्यवधान)
श्री शरद यादव : महोदय, एक लाख लोगों को नई दिल्ली से बाहर निकाला है। श्री दारा सिंह चौहान :उसमें एनडीएमसी का लोगो होगा। दुकानदार कहता है कि यह काम मत कीजिए, मेरी दुकानदारी चौपट हो रही है। इस काम में पैसा वह कम्पनी लगा रही है और जब तक वह दुकान रहेगी, वह प्रचार का पैसा कम्पनी के खाते में जाएगा। उस कम्पनी और एनडीएमसी के बीच में क्या समझौता हुआ है, यह जांच का विषय है। महोदय, हम चाहते हैं कि जितने गरीब लोगों को कॉमन वेल्थ गेम्स के नाम पर तबाह किया जा रहा है, मजदूरों को दिन में 15-20 घंटे काम कराया जा रहा है और मजदूरी भी नहीं दी जा रही है तथा जो साठ लोग मारे गए हैं, उनके परिवार को कोई पूछने वाला नहीं है। इन सभी बातों को संज्ञान में ले कर आवश्यक कार्यवाही होनी चाहिए तथा जो भ्रष्टाचार हुआ है, उसकी जांच होनी चाहिए। इन्हीं बातों के साथ मैं अपनी बात समाप्त करता हूं।
SHRI SUDIP BANDYOPADHYAY (KOLKATA UTTAR): Hon. Chairman, Sir, today the issue which we are going to debate is very important issue where the prestige of the nation is involved. We possibly all are very much concerned. A few days back, the Football World Cup was held. We had witnessed how the whole world participated in a big way by becoming spectators and sat before the television screens throughout the whole night also.
India is a large country but we have huge pain in our hearts as in the sports arena, we are so badly lagging behind. One football team represented a country called, Honduras. Many young boys were asking me where this country is situated. But a country having a population of more than 110 crore could not represent itself even in the qualifying round so far as these world cup football matches are concerned. Though it is a Commonwealth Game, it is a mini-Olympic type game. Its deliberations, its actions and its publicity will be throughout the world. So, naturally when some untoward news item comes out in the media whether it is print media or electronic media, people become some how perplexed. Now it has become more or less an idea which has been deeply penetrated into the hearts of the common people that huge corruption is going on. I was talking to Shri Suresh Kalmadi a few hours back. I was trying to understand things as a member of the Organising Committee of the Commonwealth Games. Though, I have not been able to attend any of the meetings because we are never called for any of the meetings. We have never been told what is going to happen in the Organising Committee.
Who are the people and which are the organisations that are involved in this? Shri Suresh Kalmadi, the Chairman of the Commonwealth Games Organising is a part of it; the Sports Authority of India is a part of it; the Department of Sports is involved in it; the MCD is involved in it and also the NDMC is a part of this. Though the Railway have announced that they are part of this, yet they have not yet decided so far. I have gone through the papers.
My question is very specific. I would like to know from the Government as to what are the allegations that have made the general public at large very perplexed. The allegations are on different counts, one is about the toilet rolls. How much of toilet rolls are being purchased? Questions are being raised about the purchase of umbrellas. Questions also are being raised about purchasing of tread mills. Questions are being raised about purchase of air-conditioners. These issues need to be clarified before this august House. Nobody is opposed to the Commonwealth Games being hosted in the city of Delhi. But we are interested to know as to who owns the financial powers. The total allocation is to the tune of Rs. 3,500 crore. But Shri Suresh Kalmadi reports to a Member of the Organising Committee that he has been given the authority to spend only up to Rs. 1400 crore. How about the other part of the fund? There are many such questions and issues that have been discussed.
Sir, I would like to state that if the hon. Prime Minister could come and make a statement on the floor of the House, then we as a supporting party of the UPA, would be very much satisfied. If the hon. Prime Minister issues a statement to the effect that whatever corruption has taken place and whoever is guilty on this account will not be spared, then it would satisfy all of us. It is not possible to initiate the process just now because the Games are only some 35-40 days away. So, we would like to make a positive claim that let the hon. Prime Minister come to the House and issue a statement on the various issues involving the Commonwealth Games.
श्री लालू प्रसाद (सारण) : सभापति महोदय, राष्ट्र मंडल खेलों के विषय में महीनों से भ्रष्टाचार के बारे में चर्चा हो रही है। चाहे देश के रहने वाले लोग हों या विदेश के लोग हों, भारत की प्रतिष्ठा बहुत गिरी है। इसे दुनिया में रिपेयर नहीं किया जा सकता और भारत सरकार में बैठे हुए लोग एक दिन भी मजबूती के साथ इन तमाम बातों को लोगों ने खारिज नहीं किया, उल्टे एक-दूसरे पर आरोप जड़ने का काम किया। न तो बीजेपी, न जेडीयू, न ये इधर बैठे हुए हम तमाम लोग हैं। हम लोगों ने इस बात को नहीं छेड़ा है। छेड़ा गया है तो इनकी कांग्रेस पार्टी से ही है चाहे वह मणि शंकर अय्यर जी हों या और बहुत सारे लोग हैं जो अब भी लोगों से बातें करते रहते हैं और मीडिया को बातें बताते हैं और सारी बातें फैल गई हैं। भारत सरकार में बैठे हुए एक भी लोग, मैं यूपीए-1 में मंत्री था। उसी समय यह निर्णय हुआ था और निर्णय हुआ था तो हम लोगों को काफी उत्साह था कि हम उस योग्य होने जा रहे हैं कि राष्ट्र मंडल खेलों का भार इस बार भारत को मिला है और मुझे जहां तक याद है कि 4000 करोड़ रुपये की शायद स्वीकृति दी गई थी।...( यवधान) कुछ इसी तरह की राशि की स्वीकृति दी गई थी लेकिन इस काम को आगे कौन करेगा? इस बात पर आगे बातें छिड़ीं और इस सदन के सदस्य तो मणि शंकर अय्यर जी नहीं हैं। उसी दिन से इनके बीच में काफी युद्ध शुरु हुआ और बातें खुलकर सामने आ गईं।
भारत की शान, भारत की प्रतिष्ठा, ग्लोबलाइजेशन ईरा में हम दुनिया को बताने चले थे कि हम भी किसी से कम नहीं हैं। हम राष्ट्रमंडल खेल का आयोजन करने की कैपेसिटी रखते हैं। उसी दिन से चाहे मैट्रो हो, इंफ्रास्ट्रक्चर हो या खेलकूद की बात हो, दिल्ली में ये सब काम लोगों ने धुंआधार शुरू किया। यह राशि जो मुझे बताई गई है, लगभग 30 हजार करोड़ रुपये का प्रस्तावित बजट है, जिसमें खेल के आयोजन में जो कलमाडी जी हैं, इनके जिम्मे मात्र 1600 करोड़ रुपये आए हैं, जो मेरी जानकारी है। आपने यह पैसा किसलिए लिया है, बाहर से जितने खिलाड़ी आयेंगे, उनका खर्चा, उन्हें खिलाना, पिलाना, देखभाल और फिर उन्हें बैक करना, चाहे कोई जीते या हारे, इन सब कामों के लिए यह पैसा लिया गया है। शेष पैसे के बारे में जब सरकार जवाब देगी तो मंत्री जी बतायेंगे कि बाकी पैसा किसके जिम्मे दिया गया है। इतना पैसा निकाल दीजिए तो यह काम कौन कर रहा है। अखबारों में हमने देखा कि जो स्ट्रीट लाइट्स लगाई गई हैं और जिस तरह से घटिया काम हुआ है, उसमें सीबीआई ने घटिया स्ट्रीट लाइट के मामले में मुकदमा दर्ज किया है।
महोदय, गिल साहब, जब इलैक्शन कमिश्नर थे, तभी से मेरा उनसे बहुत अच्छा रिश्ता रहा है। मैं इनके ऊपर कोई टीका-टिप्पणी करना उचित नहीं समझता हूं। हम लोगों में चाहे मुलायम सिंह जी हों या इधर या उधर के लोग हों, जब हम किसी प्रोजैक्ट वगैरह का उद्घाटन करने के लिए जाते हैं तो अपने हाथ से रस्सी खींचनी पड़ती है तो पर्दा हटाने के बाद हम लोग ताली नहीं बजाते हैं। लेकिन माननीय गिल साहब को मैने देखा, कोई काम पूरा हुआ था, उसमें इन्हें बुलाया गया था। वहां श्रीमती शीला दीक्षित भी थीं और अन्य लोग भी थे। वहां गिल साहब जब पर्दा खींच रहे थे तो अपने हाथ से ताली बजा रहे थे। ऐसा नहीं होता है। जो लोग वहां एकत्रित हैं, वे लोग ताली बजायेंगे, लेकिन मुख्य अतिथि ताली नहीं बजाता है। यह मेरा सुझाव है आगे से आप इसे करैक्ट कर लीजिएगा। अगर श्रोता के रूप में वहां आपकी प्रजैन्स हो तो ताली बजाइये। परंतु यदि आप वहां मुख्य अतिथि हैं तो ताली मत बजाइये। यह अच्छा नहीं लगता है। यह मेरा आपको सुझाव है।
महोदय, किसानों का 70 हजार करोड़ रुपये का कर्जा माफी का जो पैसा था, उसमें आधा पैसा इधर डाइवर्ट कर दिया गया। यह श्री मणिशंकर अय्यर ने कहा कि चालीस हजार करोड़ रुपये इसमें डाइवर्ट किये गये। जबकि पूरा बिहार सूखे की चपेट में हैं। 28 जिलों में पानी नहीं मिल रहा है। उत्तर प्रदेश से लेकर सब जगह गरीब लोगों को खाना भी मिलेगा या नहीं। झारखंड के इलाके को ले लीजिए। देश के किसी कोने में बादल फटा, सैकड़ों जाने चली गईं। रेगिस्तान में बाढ़ आई, पंजाब में बाढ़ आई, गुजरात में बाढ़ आई, हरियाणा में बाढ़ आई, चारों तरफ पानी ही पानी हो गया है। लेकिन पूरे बिहार और उत्तर प्रदेश में पानी नहीं है। सरकार को इस तरफ ध्यान देना चाहिए था कि आखिर लोग कैसे बचेंगे। बिहार कोई मामूली राज्य नहीं है और हम लोग खेलकूद पर पैसा खर्च कर रहे हैं।
हम विरोध नहीं करते, हमने तो समर्थन किया था कि खेल-कूद में भारत का गौरव बढ़ेगा लेकिन क्या गौरव बढ़ा? चारों तरफ दुनिया के लोग यह मान रहे हैं कि हम कितने बेईमान लोग हैं? जो दाग लगा है, उसे कैसे छुड़ायेंगे, कौन सफाई देगा? जो भी इनफ्रास्ट्रक्चर है, जो ए.सीज. की खरीद हुई है, उनके रेट्स देख लीजिये। हमने कोई फाईल नहीं देखी है। चारों तरफ दिल्ली को सजाने का काम हुआ है या लोगों को जाड़ने का काम किया गया है? यह अच्छा काम नहीं किया है। जब मंत्री जी जवाब दें तो पाई-पाई का हिसाब आना चाहिये। खेल-कूद की दुनिया में मि. हूपर इस सब को देख रहे हैं और गारंटी मांग रहे हैं कि यहां इतनी पलटन का इंतजाम नहीं केवल इतनी पुलिस का इंतजाम हो रहा है। पूरी दिल्ली के इस इलाके में खास सुरक्षा का इंतजाम होना चाहिये। दुनिया से खेल-कूद में भाग लेने वाले लोग यहां आने से डरेंगे कि दिल्ली में खतरा है कि इतनी फोर्स लगायी गई है। सभापति महोदय, अभी कल ही अखबार में आया कि कांग्रेस के सांसद श्री महाबल मिश्रा की गाड़ी चोरी हो गई है। हो सकता है कि ट्रंसपोर्ट वाले ने ठेका लिया और कोई उठा ले गया। इसकी जांच होनी चाहिये। यहां पर शरद जी और अन्य़ सांसदों ने कहा कि सभी मामलों की जांच होनी चाहिये। जो जांच में पकड़ा गया है लेकिन कभी बेईमान नहीं हो सकता है, क्या श्री जयपाल रेड्डी हो सकते हैं, कभी नहीं। हर जगह मंत्री खड़ा नहीं रह सकता है, हर जगह प्राईम मिनिस्टर खड़े नहीं रह सकते हैं। लेकिन जो पदाधिकारी हैं, जिन्होंने कमीशनखोरी की है, देश का पैसा लूटा है, देश की प्रतिष्ठा गिराने का काम किया है, ऐसे लोगों के लिये कहा गया है कि जांच हेतु संसद की संयुक्त समिति बनवा दीजिये जो जांच करती रहेगी। वह जांच समिति स्टेडियमों में जाये, कोचेज़ की जांच करे, स्ट्रीट लाइट की जांच करे, डेंटिंग-पेंटिंग की जांच करे और जल्दी देख ले क्योंकि खेल होने के बाद सब का काम निकल जायेगा। सी एंड ए.जी की बात तो लास्ट में आयेगी। वह फाईल फाईंडिंग्ज देगी। लोगों का विश्वास सीवीसी पर या पार्लियामेंट पर है? पार्लियामेंट के ऊपर विश्वास करना चाहिये। जे.पी.सी. इस बात को एन्शयोर करे और संतोष दे सके कि काम ठीक हुआ है या घपला हुआ है? उसमें प्राईम मिनिस्टर क्या कर सकते हैं? प्राईम मिनिस्टर बहुत से मामलों में यह महसूस करते हैं क्योकि उनकी मजबूरी है। अब किसको हटावें, किसको निकालें या किस को भगावें? जब बीसीसीआई या आईपीएल की बात आयी तो हम लोगों ने कितने भाषण दिये?
मैं समाप्त कर रहा हूं। आप जब चेयर पर आये तो हम समझ गये कि आप कड़ाई से पेश आते हैं। आप उस समय आते हैं, जब हमें बोलने का मौका मिलता है। मनीष तिवारी अच्छे आदमी हैं, शॉर्प माइंडेड हैं। जिन लोगों ने इतना बड़ा गंदा काम कर दिया, उसे जस्टीफाइड करने के लिए मनीष तिवारी को खड़ा किया जाता है। वह जोर लगा लगाकर कहते हैं कि यह एनडीए के समय का सेंक्शन है, यह काम एनडीए के समय का था। आप लोग मेरी बात सुनिये। वे कहते हैं कि यह जितना कम्पोनेंट है, वह एनडीए का था, इसे एनडीए ने बनाया। एनडीए ने कोई गलत काम नहीं किया था। अगर आपने यह बात कही है कि देश की शान में, यह जो काम हुआ है, इसे आप करवा रहे हो। ये आपके समय के घपले हैं। आज वे सत्ता में नहीं हैं, अगर वे सत्ता में रहते तो हम इनकी गर्दन का मैल छुड़वा देते। यह काम हम लोग करते। इसलिए यह कहने से काम नहीं चलेगा। इसकी जांच कीजिए, देश को क्लीन चिट मिलनी चाहिए। ताकि पता चले कि यह बेईमानी हुई या नहीं, घपला हुआ या नहीं हुआ। कलमाड़ी जी को मौका नहीं मिलेगा। जब हिसाब होगा तो ए.सी. बिल, डी.सी. बिल, जैसे अभी बिहार में हो रहा है। अगर हमने तौलिये का इंडैन्ट किया तो, महोदय, हमारी बात सुनी जाये, यह देश का सवाल है।
सभापति महोदय : सबका देश का सवाल है। सबको अपनी बात कहनी है।
श्री लालू प्रसाद : ये सब हमारे साथी हैं। अगर हमने तौलिया खरीदा तो हम बढ़िया दुकान से इंडैन्ट करते हैं। उसमें वाउचर साथ-साथ मिलता है, वाउचर में नम्बर रहता है। उसमें सीएसटी कटता है, सैल्स टैक्स कटता है, बिना वाउचर के, बिना सीएसटी कटाये हुए, बिना सैल्स टैक्स दिये हुए पसीना पौंछने के लिए लाखों-लाख तौलिये ले लिये गये हैं। गमले के लिए, कि यह गमला लगाया जायेगा, डैकोरेशन होगी, उसमें गमले का टैंडर एक आदमी को 135 करोड़ में दिया और उसने दूसरे को 170 करोड़ में बेच दिया।
श्री दारा सिंह चौहान : अच्छा, यह बात है।
श्री लालू प्रसाद : हां भाई, लूट हो रही है। बीएसपी को इन सब बातों का पता नहीं लगता है। इस तरह से कितने आइटमों की बात की जाये। स्वास्थ्य मंत्री जी के द्वारा कहा जा रहा था कि हमने दवा का इंतजाम किया है, हमने एम्बुलेंस का इंतजाम किया है। हम लोगों ने पूछा कि जिसके पास टिकट नहीं है...( व्यवधान)
सभापति महोदयः लालू जी, कृपया दूसरे लोगों को भी अपने प्वाइंट रखने दीजिये।
श्री लालू प्रसाद : महोदय, हम दूसरे लोगों के ही प्वाइंट रख रहे हैं। जिस स्टेडियम में खेल होगा उसमें सिक्युरिटी का इंतजाम, नाश्ता-पानी, मिनरल वाटर, सब होगा। सरकार यह बताये कि दिल्ली के पास कितनी एम्बुलेंसेज़ हैं। उत्तर प्रदेश की सारी एम्बुलेंसेज़, पड़ौसी राज्यों की सारी एम्बुलेंसेज़ को मंगाया गया है। जब एम्बुलेंसेज़ वहां से चलेंगी तो वहां के लोगों को मालूम होगा कि दिल्ली में कोई खतरा हो गया है। वहां की जनता के लिए वे एम्बुलेंसेज़ हैं। आपको यह बताना चाहिए कि आपने कितनी एम्बुलेंसेज़ खरीदीं? आप दूसरे राज्यों से जमावड़ा कर रहे हैं। यह पूरी हालत ठीक नहीं है। जम्मू-कश्मीर घाटी में जिस तरह से लोगों के मन में उदासी है, वहां जिस तरह से बच्चे मारे गये हैं, जिस तरह से वहां के हालात विषाक्त बनाया गया है, वहां लोगों के मन में आज उदासी है। बिहार के लोगों के मन में उदासी है। यहां जो गरीब लोग हैं, आपने लाखों लोगों को यहां से उजाड़ दिया है, बाहर कर दिया है। आपने गरीब आदमी को इसलिए हटाया है कि बाहर के लोग आयेंगे तो उनका फटेहाल कपड़ा देखकर सोचेंगे कि भारत बहुत दरिद्र है, गरीब है। आपने इसलिए गरीबों को हटा दिया है। आप स्थिति को साफ-साफ स्पष्ट कीजिये कि क्या स्टेट्स है, कितने पैसे का खर्च हुआ, किस पर खर्चा हुआ, किसने पैसा खाया, किसने नहीं खाया, आप इन सब बातों का स्पष्ट जवाब दीजिये। जयपाल रेड्डी जी, आप जवाब देंगे। अच्छा, आप दोनों जवाब देंगे।
हम समझते हैं कि श्री जयपाल रेड्डी और गिल जी जवाब देंगे तो साफ-साफ ईमानदारी से बताइए, शरद जी ने ठीक कहा है कि आप लाव-लपेट में मत आइए, जो फैक्चुअल है, क्या स्टेटस है, वह बताया जाए। उसके बाद हम लोगों को कहना होगा, हम कमेंट देंगे। लेकिन जिन लोगों ने पैसा खाया है, चाहे वह बड़े से बड़ा क्यों न हो, जब पकड़ में आएगा, तब वह बताएगा कि उसने तो लिए, लेकिन किस-किस को दिए, तो इसका दायरा और बढ़ेगा, इसलिए बताइए।
महोदय, मैं आपको धन्यवाद देता हूं कि आपने मुझे बोलने का अवसर दिया। देश की इमेज गिरी है और इस इमेज को हम किस तरह से रिपेयर कर सकते हैं। हमारा मस्तक जो झुका है, इन लोगों की वजह से हम लोग ठीक करेंगे।
SHRI T.K.S. ELANGOVAN (CHENNAI NORTH): Mr. Chairman, Sir, I would like to thank you for giving me this opportunity to speak on this subject.
At the outset, I am happy that such a mega event is going to be conducted by the Government and hosted by our country. Such events will not only showcase the sporting talent of this country but will also showcase the culture, the history and the various other aspects of the host country. We are proud that that event is to be held in our country within a short while.
Sir, even before the Commonwealth Games start, our opposition friends want to score a goal. So, they make charges based on the newspaper reports, charges based on some of the interim reports presented by the various agencies of the Government like the C&AG, the CVC etc. These agencies are there to give interim reports to the Government so that the Government takes some correctional measures to rectify the mistakes that happen.… (Interruptions) So, these reports should not be used to accuse the Government or to make charges against the Government. As you see, sometimes, if we rely more on the newspaper reports, what had happened today will happen. The report of the UK tabloid, The Sunday Express, some time back was refuted today by a report of the Times of India dated 9.8.2010. So, these reports should be brought to the notice of the Government to take correctional steps and should not be used to accuse the Government or abuse the Government making use of these reports.
Our dear friend Shri Kirti Azad is a good cricketer. He bowled a short-pitched delivery to intimidate the batsman, the opponent but it was declared a wide ball. Except one or two charges, he could not make many charges using the reports of the C&AG and the CVC. At the same time, my request to the hon. Members is that it is a great event where more than 70 countries of the Commonwealth, members and sportsmen from these countries are going to come to our country to show their sporting talent. So, at this time, making accusations like this should not hamper the sports itself. That is my request. At the same time, the Government should be very careful. I would request the Government that the observations of the C&AG and the CVC should be taken very seriously and the Government should not be lethargic in considering, correcting and taking correctional steps based on reports of the C&AG and the CVC.
Finally, my one request to the Government is that the Group of Ministers should be empowered to meet every week until the Games are over to see how the Games progress.
I request the hon. Ministers present here to convey the sentiments to the Prime Minister also and see that the Group of Ministers is empowered to meet every week.
THE MINISTER OF URBAN DEVELOPMENT (SHRI S. JAIPAL REDDY): Mr. Chairman, Sir, I have heard all the senior leaders very patiently. I wanted to note some solid points. Although sweeping, unsubstantiated charges and fears have been expressed and placed on record, yet nothing concrete seems to have emerged.
Let me refer to one aspect of the debate. My friends like Sharad Yadavji, the other day Mulayam Singh Yadavji and even Akhileshji took a transcendentally ideological position that a country like India with such huge percentage of people steeped in poverty should not embark on such a costly mega sports event. While I differ from this ideological position, I respect their position. But with only a month to go for the Commonwealth Games, would it be proper to raise such issues? I would leave such things to the senior leaders who have given expression to such view point.
Sir, Shri Kirti Azad, the other day and today compared me to Bhishma Pitamah. I have, no doubt, put in 42 years of service in Legislatures and Parliament, but I am still embarrassed by this grand expression. I am, however, overwhelmed by gratitude to Kirti Azadji for his extravagant generosity. The only provocation for this generosity, I suppose, is because I have been a close friend of his respected father. But what we need today is not the epic attachment to Bhisma Pitamah. What we need today, however, is the complete focusing of Arjuna. I am told that during Draupadi’s Swayamwar, Arjuna was asked whether he was aiming his arrow at the fish. Arjuna said ‘No, I am aiming my arrow at the eye”. At the moment, Sir, my friends Lalu Yadavji, Sharad Yadavji and Mulayam Singh Yadavji, Kirti Azad and all others … (Interruptions)
श्री शत्रुघ्न सिन्हा (पटना साहिब) सर,स्वयम्बर के टाइम पर नहीं, बल्कि ट्रेनिंग के टाइम पर अर्जुन ने यहा कहा था।
SHRI S. JAIPAL REDDY: If Shri Shatrughan Sinha corrects me in regard to mythology, I would concede his superiority in the field both because he must have acted in mythological films and after all he belongs to the BJP which believes in mythology.
But the point remains that we need to be focussed. This is the time where all of us, cutting across all Party lines, need to rise above all these things and focus on the need to deliver successful, if not spectacular, delivery of Games.
Shri Lalu Prasad very politely pointed out that the decision to invite Commonwealth Games was taken in May 2003 and it was blessed by Atal Ji. I congratulate Atal Ji for having taken this decision. Apparently, he was inspired by the idea that the rising billion plus India should arrive on the global stage in the sports field as well. That is the reason why we, in the UPA, decided to honour this programme. But I may also, at the same time, tell my friend Shri Sharad Yadav that the venue for the Commonwealth Games Village – the selection, I may add parenthetically is fairly controversial from the angle of environmentalists – was taken by the NDA Government and we had no option but to continue with that.
Today, if any of you can go and take a close look at the Commonwealth Games building, I am sure you will feel proud of it. I can tell you that in the history of Commonwealth Games, whether it was Melbourne or Barcelona, such a Commonwealth Games village has ever been built at all. We need to be proud of that.
I welcome criticisms in the media. They are doing their job but this fault finding should not blind us to a bigger picture that we are on the verge of delivering great games.
Shri Manish Tiwari answered the point of Shri Kirti Azad in regard to the CVC Report. It is in a preliminary stage. We all know that CVC, C&AG and all these organisations are constitutional and statutory and do their job. They must do it. We are proud that they work in our country. That is why we are a vibrant democracy. But if every preliminary observation is to be blown out of proportion and given the dimension of a scam, our system will not work. We will be paralysed into inaction.
Shri Sharad Yadav was saying that there are so many agencies which are to work. Yes, it is such a mega event, it cannot be organised without proper coordination from so many agencies. There are NDMC, straight under the Home Ministry, MCD, under BJP, MTNL, Prasar Bharti, DDA, CPWD and many other agencies.
So, there is a need to coordinate the work of these agencies. Therefore, a GoM was constituted earlier. Later, in 2009, I was made the Chairman of the GoM. I have been there for a year now. I therefore can say with confidence that we will be staging the best Commonwealth Games ever in the history of Commonwealth Games. Such of those that have gone to Melbourne will testify to this.
Kirti Azad ji, don’t you be pessimistic. It will be our endeavour to see that you are converted into optimist. I am sure, in the Winter Session, you will have some words of praise.… (Interruptions)
SHRI KIRTI AZAD: As a sportsman, I want that these Games should take place. What Manish ji said was not preliminary. It was said that those who have tested and given the reports, whether it was MCD or the DDA, they had said that the strength of the cement was not even 50 per cent. It was even to the extent of 60 to 80 per cent.
Secondly, as far as the Games are concerned, I want it to happen as an Indian. Forget whether we are in power or out of it. We could be in the ‘satta’ or in the ‘vipaksh’. The basic question is this. Are these stadiums – the kind of reports that we tend to see every day –going to be ready? We want them to be the best. But, will they be ready and we will be able to do it with 39 days left? Mr. Kalmadi would correct me, the sportsmen and the Heads of the States will start arriving in 39 days.
SHRI S. JAIPAL REDDY: Roughly, Shri Azad, events can be organized even now. Except one or two, even now, they can be organized. Whatever debris and dust that you find around the stadia have also been created by the essential work that is being currently done by MTNL, BSNL and many other organizations. Therefore, when the Sports Minister, Gill sahib answers, I am sure, he will try and allay your apprehensions.
My young friend Akhilesh is here; Mulayam Singh ji is not here. The other day, and today also, this figure of Rs. 1 lakh crore was just being hurled at. I think, we are living in some system. We were living in some system. After having been in the system for decades, if you could say this, with this kind of absolute abandon, I do not think it speaks well of our maturity.
To put the records straight, I would like to say that the money spent by the Government of India, and I am saying this authoritatively, and answers have been given in response to Unstarred Questions, the total amount spared by the Government of India is Rs. 11,494 crore. I repeat for the media, it is Rs. 11,494 crore. I will give you the break-up. To Sports infrastructure, it is Rs. 2934 crore; training of teams Rs. 678 crore; to Organizing Committee as loan – it is not a grant; I am sure, my resourceful friend Suresh Kalmadi will be able to return the loan – that is Rs. 2394 crore.
To MTNL, it is Rs.182 crore; to the Ministry of Urban Development Rs.827.85 crore; to the Ministry of Information & Broadcasting including Prasar Bharati, it is Rs.482.57 crore; to the Ministry of Home Affairs, it is Rs.747 crore; to the Health Ministry, it is Rs.70.7 crore; to ASI for monuments, it is Rs.25.75 crore; to the Government of Delhi from the Government of India, it is Rs.2,800 crore. Mind you, this includes the amount spent on the Pune games to the tune of Rs.350 crore because the Pune games were supposed to be a prelude to Commonwealth Games to be held from 3rd of October.
In fact, I will separately narrate the amount spent or being spent by the State Government of Delhi. The total amount is Rs.16,560 crore – it is more than the Government of India, and you may wonder. But, as Shri Manish Tewari has rightly pointed out, the only amount directly spent on Commonwealth Games as such is Rs. 670 crore on stadia.
You may ask why and what for the remaining money is being spent. I want to go on record that for flyovers and bridges including Barapulla Nallah, which is still under construction and which we will be able to deliver only by the end of September – if you want I can narrate the whole story as to why it got delayed – it is Rs. 3,700 crore; for ROB, RUB and IGA terminal network, it is Rs. 450 crore; and for stadia – I have already mentioned – it is Rs.670 crore; for BRTS – Ambedkar Nagar to Delhi Gate – it is Rs.215 crore; for augmentation of DTC fleet, it is Rs.1800 crore; for construction of bus depot, it is Rs. 900 crore; for widening, strengthening and resurfacing of roads, it is Rs.650 crore; for streetscaping, it is Rs. 525 crore; for improving road signages, it is Rs.150 crore; for metro connectivity, it is Rs.3,000 crore.
Can you say that the extension of Metro to Noida or to Gurgaon is by any stretch of imagination connected with Commonwealth Games? We are having a wedding of our daughter. We are giving a facelift to our house. Maybe we are adding a room or two. That cannot be considered as a part of the dowry or the gift or seethana. … (Interruptions)
MR. CHAIRMAN : Please sit down. This is not a reply.
SHRI S. JAIPAL REDDY: The point is that when I mentioned that it is sixteen thousand and odd crores … (Interruptions)
श्री तूफ़ानी सरोज (मछलीशहर) : यहां बात करप्शन की है। ...( व्यवधान) आप पेंट करिए, रंग-रोगन करिए। इस पर किसी को ऐतराज नहीं है। ...( व्यवधान)
SHRI S. JAIPAL REDDY: I will come to that. … (Interruptions)
MR. CHAIRMAN: Hon. Minister, please address the Chair.
I think, this is not the reply; this is just an intervention. Hon. Minister, you please continue now.
SHRI S. JAIPAL REDDY: DMRC has been extended to Noide and to Gurgaon. I do not think, we would have stopped from doing that even if we did not have Commonwealth Games. We are trying to expedite it… (Interruptions) मतलब नहीं है लेकिन मैं बता रहा हूं। गवर्नमैंट ऑफ दिल्ली में जो फिगर दी गई है, ये आइटम्स हैं, इनका संबंध सिर्फ स्टेडिया 670 करोड़ से है, बाकी जितना भी खर्च दिल्ली गवर्नमैंट से हुआ है, it is for permanent infrastructure, it is as part of large lasting luminous legacy.
Mind you, on power plants, there is Rs. 2,800 crore; on water supply, there is Rs.400 crore; on health, there is Rs. 50 crore; on parking facilities covering nullas, there is Rs. 400 crore. It will be meant for the people of Delhi for ever. On communications and IT, there is Rs. 200 crore. Why I am saying this is that the money that is being spent is not all on Commonwealth Games, except the money that is being given to the OCS loan. Even the stadia will remain part of our legacy.
Therefore, there is a need to look at these things in a larger perspective, in a positive perspective… (Interruptions)
MR. CHAIRMAN : Hon. Member, please take your seat.
… (Interruptions)
MR. CHAIRMAN: Nothing should go on record.
(Interruptions) …* SHRI S. JAIPAL REDDY: I do not mind. I would yield… (Interruptions)
MR. CHAIRMAN: Hon. Minister, please continue.
Mr. Anurag Thakur, you can ask your queries when the Minister replies.
… (Interruptions)
MR. CHAIRMAN: This is just an intervention.
… (Interruptions)
MR. CHAIRMAN: Nothing will go on record.
(Interruptions) …* SHRI S. JAIPAL REDDY: As regards this Commonwealth Games Village, this village which is to house more than 8,000 athletes, has been handed over to the Organising Committee; and 700 more rooms have already been furnished. The remaining will be furnished by the end of August. … (Interruptions)
I yield, Sir.
श्री अनुराग सिंह ठाकुर (हमीरपुर) :मैं जानना चाहता हूं कि स्टेडियम की कॉस्ट चार गुना, पांच गुना क्यों बढ़ी? पांच वर्ष लेट क्यों हुए, यह बताया जाए। क्या खिलाड़ी आज उन स्टेडियम्स को यूटीलाइज़ कर रहे हैं? ...( व्यवधान)
MR. CHAIRMAN: Hon. Member, you would get your turn to speak. Now, you are not allowed to ask any queries.
… (Interruptions)
MR. CHAIRMAN: Mr. Minister, it is just an intervention. Please do not reply to the queries.
… (Interruptions)
SHRI S. JAIPAL REDDY: I appreciate the relevance and the legitimacy of the question . This question will be answered by Mr.. Gill… (Interruptions)
श्री शरद यादव : मैंने असली सवाल उठाया था कि जो 2360 करोड़ रुपये का लोन लिया गया है, यदि लोन नहीं दे सके, क्योंकि अभी हालत इतनी पतली है कि ऐड से पैसा नहीं आया, आपने और जो सोचा था, उससे भी पैसा नहीं आया। मैं किसी काम से चला गया था। मैं आपका जवाब सुन रहा था। ...( व्यवधान)
श्री एस.जयपाल रेड्डी आपके बारे में जिक्र किया था।
श्री शरद यादव जिक्र किया था, लेकिन यदि लोन पे नहीं किया गया, तब क्या करेंगे।
MR. CHAIRMAN: Now, you may also ask your question, Mr. Anurag Thakur.
श्री अनुराग सिंह ठाकुर मैं कहना चाहता हूं कि स्टेडियम्स के निर्माण में सात वर्षों की देरी हुई। वर्ष 2003 में खेल सैंक्शन हुए थे। लगभग 2006 तक स्टेडियम्स बनकर तैयार होने थे। लेकिन 2007 तक भी उनकी ड्राइंग्स ऐप्रूव नहीं की गईं, उन पर काम शुरू नहीं हुआ। आज कामनवैल्थ गेम्स आयोजन करने का समय आ रहा है, खिलाड़ियों को वहां प्रैक्टिस करने का मौका भी नहीं मिला।
17.00 hrs. पांच-छः वर्षों की जो देरी हुई, उसके कारण क्या स्टेडियम्स की कास्ट नहीं बढ़ी? मेरा पहला सवाल है कि टैक्स पेयर्स के जो पैसे हैं, क्या जनता के वे पैसे बर्बाद नहीं हुए? दूसरा सवाल है कि खिलाड़ियों को उन स्टेडियम्स में प्रैक्टिस करके ज्यादा मैडल्स जीतने की जो एडवांटेज मिलनी थी, क्या वह होम एडवांटेज भी हमारे हाथ से नहीं गयी? मेरे 20 से ज्यादा सवाल हैं, लेकिन मंत्री जी से जो रिलेटेड प्रश्न हैं, वही दो-तीन प्रश्न मैं इनसे पूछना चाहता हूं। मैं आशा करता हूं कि मेरे इन प्रश्नों का जवाब वे अपने उत्तर में देंगे। ...( व्यवधान)
MR. CHAIRMAN: Please sit down. Hon. Member, please sit down.
… (Interruptions)
MR. CHAIRMAN: No, please sit down.
SHRI ANURAG SINGH THAKUR : You only requested me to speak. You only allowed me to speak.
MR. CHAIRMAN: I will allow you, please.
SHRI S. JAIPAL REDDY: I think Mr. Anurag Singh Thakur will have the opportunity to make a speech after me. Dr. Gill will wind up the reply. I am only intervening. The two questions that he raised are better answered by Dr. Gill. I do not like to attempt a second rate reply. Sharad Yadav Ji also has raised a valid question. That is again better answered by Dr. Gill.
Now, I would like to tell you about the stadia. This is under the Urban Development Ministry. Games Village is complete. All the things of Siri Fort Sports Complex will be ready by 31st of August. As for badminton and squash, they have already been completed, and for the remaining, lawn tennis, badminton, aquatics and squash and training venues for badminton at Saket, all will be ready by 31st of August. The competition venues for table tennis and archery, training venues for archery, aquatics, rhythmic gymnastics, hockey and lawn bowls will be ready by 31st of August. The same is true of Yamuna Sports Complex.
There was a question about one company which dealt or which tried to do business with the DDA. Mr. Kirti Azad has referred to it. It is Sportina Payce Infrastructure Limited. I am told by the DDA officials that this work was terminated. They paid Rs.5 crore. That has been forfeited. You will be glad to know this.
I want to use this opportunity to tell not only the Members of Parliament, not only the media but all the citizens to lodge specific complaints. We will take action. I can tell you we will see that the corrupt and the guilty are pursued to the ends of the earth. Be it London or Thimbuktu, we will pursue them.
17.03 hrs (Dr. Girija Vyas in the Chair) But let us all work together to hold the Games.… (Interruptions)
Regarding Bhopal, BJP has been in office, and NDA has been in office. It does not lie in your mouth to talk of Bhopal. Do not drag me into my original parliamentary form.
Friends, these are not the occasions for us to score debating points. I do not say that no irregularities have taken place at all. Who can say in any system that no irregularities occur? The strength of our system is proven by the fact that when irregularities surface, we should pursue them.
On behalf of the Government, not merely on behalf of my Ministry because we are all collectively responsible to Parliament and to the people, I would say that all irregularities, when brought to notice, will be enquired into exhaustively and the guilty will be punished and the punishment will be as draconian as the Constitution of India permits.
श्री निशिकांत दुबे (गोड्डा): महोदया, इंफ्रास्ट्रक्चर पर जितना खर्चा हुआ, यदि गेम्स नहीं होते, तो क्या हम दिल्ली को इतना पैसा देते? पिछले तीन-चार वर्षों में जवाहर लाल नेहरू रिन्युवल मिशन में आपने कितना पैसा दिल्ली सरकार को दिया है? डीडीए ने कितना खर्चा किया है? प्राइवेट पार्टीज जो इनवेस्टमेंट कर रही है दिल्ली को बनाने में, होटल्स बन रहे हैं, उसके लिए जमीन की नीलामी हुई है, क्या उसका खर्चा आपने इसमें इनक्लूड किया है? एनडीएमसी और एमसीडी ने जो पैसे खर्च किए हैं, क्या उनको इसमें इनक्लूड किया गया है? यही मैं मंत्री महोदय से जानना चाहता हूं।
SHRI S. JAIPAL REDDY: Except the money I have indicated, I do not think we gave money to anybody. In the case of the Commonwealth Games Village, it did not cost us much because it was executed in a PPP mode. Secondly, as for JNNURM funds, they flow to each State according to a certain pattern. In fact, all the money due to Delhi has not been exhausted. Therefore, I can say that except the figures I have mentioned here, any other money that may have been spent must have been spent either according to the Budget of the Delhi Government or according to the schemes of the Government of India.
श्री शरद यादव : महोदया, एक मिनट मेरी बात सुनिए। मैं कहना चाहता हूं कि मंत्री जी ने कहा है कि...( व्यवधान)
सभापति महोदया : यादव जी, इस पर बहुत चर्चा हो चुकी है। अभी आप बैठिए।
श्री बंस गोपाल चौधरी (आसनसोल):शरद जी, हम लोगों ने बहुत देर तक इंतजार किया है, अब हमें बोलने दीजिए।
अभी जो चर्चा हुई है, इसके बारे में मैं सबसे पहले यह बताउंगा कि हमारे देश में जो गंभीर स्थिति चल रही है, प्राइस राइज के बारें कुछ दिन पहले हम लोगों ने यहां चर्चा की है। लेकिन उसके बारे में सरकार की ओर से एक ही एटीटय़ूड है कि प्राइस राइज होते ही चलेगा, पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स की प्राइस बढ़ाने के खिलाफ अभी आम जनता ने पूरे देश में बंद किया है, Government does not care for that. अभी इसको ओपन मार्केट में दे दिया है। फिर इसके बाद यह चीज पार्लियामेंट के सामने आ गयी है। Government should be ashamed. Whatever a very senior person like Shri S. Jaipal Reddy was telling on the floor of Parliament, we do not want to contradict all of his points or the figures because he was giving them from his Department. लेकिन यह सोचना है कि जितना हम लोगों ने खर्च किया है, उस काम के लिए दिया है, उसे खर्च करने के बारे में जितनी इनफार्मेशन सरकार के पास आ रही है, सरकार को इसकी जांच करनी चाहिए। प्रधानमंत्री के पास सीएजी की रिपोर्ट आ चुकी है। इसकी जांच होनी चाहिए। यह काम ज्वाइंट पार्लियामेंटरी कमेटी को दिया जाना चाहिए।
अभी लेबर लॉज का वायलेशन होता है। 70 वर्कर्स जो यहां पर मर गए हैं, मैं रेड्डी जी और गिल जी से यह रिक्वेस्ट करूंगा कि जिन 70 वर्कर्स की मौत हुई, वे सभी कांट्रैक्टर वर्कर्स हैं। झुग्गी-झोपड़ी से एक लाख आदमी को हटाया गया है यहां से, फर ये 70-80 आदमी, जो कांट्रैक्चुअल लेबर है, जिनकी मौत हो गयी, उसका क्या होगा? यह बात सही है कि कॉमनवेल्थ गेम्स पूरे देश के लिए गर्व की बात है, लेकिन इसके पीछे कितने वर्कर्स का खून और पसीना लगा है, उसे भी देखना पड़ेगा।
ये जो 70 कांट्रेक्चुअल वर्कर्स थे, इनका आज कोई ठिकाना नही है। The Government is violating the labour laws. सरकार श्रम कानून का उल्लंघन करके वर्कर्स से जो काम कराया, उन्हें जो वेतन मिलता है, वह 100 रुपया प्रतिदिन से ज्यादा नहीं मिलता है। वहां पर हजारों वर्कर्स काम कर रहे हैं। The Government is violating the labour laws. This is very much a concern in the Parliament and I believe that the Government should reply to this. This cannot go for a long time. Everything is happening here. But the Government is always violating the labour laws. This is not proper from the angle of labour rules. विजिलेंस से सम्बन्धित जो इर्रेग्युलेरिटीज हैं, यहां पर जो तीनों रिपोर्ट्स आई हैं, it is on award of works at higher prices इसके लिए सरकार के पास क्या जवाब है, इसका जवाब तो देना पड़ेगा? Second is on poor quality assurance. जो पुअर क्वालिटी का काम हो चुका है, इसका जवाब भी सरकार को देना पड़ेगा। The next is award of work to ineligible agencies. जो एजेंसीज एलीजेबल नहीं हैं, उन्हें भी काम मिल गया। यह जो विजिलेंस रिलेटिड इर्रेग्युलेरिटीज हैं, इनके लिए जांच होनी चाहिए और सरकार को इसका जवाब देना चाहिए। इसलिए इस बात की जांच के लिए संसद की संयुक्त जांच समिति बनाई जानी चाहिए। The Joint Parliamentary Committee is very much necessary.
इसके बाद आप देखें कि कई कमेटीज के पदाधिकारियों के इस्तीफों का क्रम चल रहा है। कामनवैल्थ गेम्स आर्गेनाइजेशन कमेटी के कोषाध्यक्ष श्री अमित खन्ना ने इस्तीफा दे दिया है। उसके बाद कौन आया, मि. मट्टू आए। मि. मट्टू को क्यों हटाना पड़ा, क्योंकि उनका लड़का इसमें इन्वॉल्व था। एक कम्पनी के साथ उनका इन्वॉल्वमेंट है इसलिए उन्हें हटाना पड़ा। उसके बाद फिर मि. खन्ना को लाया गया।
I totally demand and this is the demand from our Party that a Joint Parliamentary Committee should be formed. This is a scam. I beg to differ with Shri Jaipal Reddy who is a very senior parliamentarian and a very serious Minister. But this is a scam of the Government and the Government should come out clearly to the floor of this House with a White Paper and a Joint Parliamentary Committee should be formed. This is my submission.
SHRI PINAKI MISRA (PURI): Madam Chairperson, I have heard Shri Jaipal Reddy’s intervention. I am now convinced that this Government, this Group of Ministers, is completely out of touch with reality. Delhi is looking like a bombed out Baghdad or Beirut or probably worse than that and the hon. Minister makes bold to tell this House and expects this House and expects the people of India to believe that we are ready to hold the Games today if need be.
Madam Chairperson, I cannot understand whether all the jokes doing the SMSs around us these days would now include this joke as well of the hon. Minister. The jokes doing the rounds us today are that all the flights going out of Delhi during the two weeks starting October are full and all the flights coming in are empty. That is the fact of the matter. Delhi was supposed to be showcasing itself for this event. I do not know why my friend Shri Suresh Kalmadi – and he is a friend of a lot of us here – went and decided to bid for these Games in the first place. Everybody knows that the Commonwealth Games are non-competitive games. The Commonwealth Games are merely goodwill games. All the superstars of the world always give the Commonwealth Games a miss. That is happening this time around as well. Starting with Usain Bolt, there are at least 20-25 superstars from all the leading track and field countries who are not going to come here, no matter how much you try to bribe them.
Therefore, I cannot understand why Mr. Kalmadi went and bid for them in the first place. Thereafter, I cannot understand why he has chosen to be the fall guy for these Games by surrounding himself with some of the most venal people that we have seen.
Madam Chairperson, the last competitive games that India held were the ASIAD in 1982. The reason those Games were a relative success was clear because the chain of command for those Games was clear. If memory serves us right, there was a gentleman by the name Mr. Buta Singh – and let me tell you – Mr. Kalmadi, Mr. Darbari, Mr. Mahendroo and the most of this lot cannot hold a candle to Mr. Buta singh when it comes to committing impropriety. He is in a league of his own, with great respect. But even he stood in line. Why? There was no impropriety in those Games which at least came to light because Indiraji and Rajiv Gandhiji – that was his coming of age – monitored the Games strictly.
This is what we needed this time around. We needed strict supervision, monitoring, and a single-tier command, which people could look up to. Everybody has said that : “Obviously, it cannot be the Prime Minister, who has myriad problems all over the place, to now look after some silly Games, frankly, which count for nothing the world over.” Therefore, it needed somebody younger to take charge, whom somebody would fear. Unfortunately, in this entire scheme of things, with these 25 different agencies that have been playing the field, there is no fear and there is no accountability.
As my friend Mr. Anurag Thakur said, the Beijing Olympics were held in 2008 and the stadia were ready by 2006. This is what gave their athletes tremendous home advantage of two years of preparation on those tracks because of which they overtook the United States and the entire Eastern Communist Bloc to become the number one in the medals tally. Is Mr. Reddy going to tell us whether any of our athletes in any of our track and field events have had a single moment on these tracks yet? He says that : “We are ready to hold the games today!” Let me tell you this. What has the legacy been despite the fact that we held the Asian Games 28 years back? Firstly, a legacy to this country has been colour TVs, which the people of this country got because of the Asian Games, and secondly, is this Asian Games Special Organizing Committee (AGSOC), which I am given to understand is still functioning after 28 years. We are told that the 1982 AGSOC exists after 28 years in a one-room office in the Indira Gandhi Indoor Stadium. The Committee has its Secretary, Shri K. S. Bains, an Assistant Director and a part time peon as staff. It continues 28 years later! I think that Mr. Kalmadi’s Organizing Committee has hope. I am saying this because now that India has decided not to go for the Asian Games, this Organizing Committee can continue for the next 30 years doing whatever it chooses to do.
Madam Chairperson, all I needed to say is that unfortunately, Mr. Kalmadi has become a fall guy in this entire thing. He has surrounded himself with all the wrong people. I think that he will be the first to admit it, and he has already said so. There is no doubt that the CVC and the CBI are going to look into all the acts of omissions and commissions that are taking place. Patriotism is the last refuge of the scoundrels, and we have heard enough of this patriotic jingoism coming from the Treasury Benches saying that “the Games must go on.” Of course, now, it is too late. This morning, apparently the Queen, no less, has conveyed her grave displeasure at the shenanigans that are going on in this Commonwealth Organizing Committee, but the games now must somehow be held. But there is no question in my mind that the preparedness levels that were required are not there today. If we have to get them going over the next 39 days, then I would be vastly surprised if these Games are a grand success. In any case, the Games have been denuded of all glamour and of all class. These Games are a pale shadow of any international Games possible. It is a shame that India’s coming out party has been destroyed in this manner. There are some people who are answerable. I do not know whether this Government, which has gone into its shell, is going to be in a position one day to come up and hold people -- who are accountable for bringing this collective national shame upon us -- to book, and in some measure of time, which would, at least, not be an endless exercise. This is all that I have to say.
SHRI ANANDRAO ADSUL (AMRAVATI): Thank you, Madam Chairperson. It is a matter of pride for the Indians that we have got the opportunity to organize the Commonwealth Games, unfortunately, we won the bid -- when there was a bid between the two principal countries, that is, India and Canada -- by the vote of 46 as against 22.
The estimated budget for hosting the Games is US $ 1.6 billion, which excludes infrastructure facilities like airports, development of the city, roads, etc. This will be the most expensive Commonwealth Games ever, it being larger than the previous Games held in Melbourne in 2006 (which was US $ 1.1 billion).
Whenever big events take place, criticism, controversies and allegations are likely to be there. Apart from all those things, the Organizing Committee has to keep in mind that pride and prestige of the country is involved in it. That is why, from the beginning till the end, it should be successful.
Unfortunately, it seems only 39 days are left for the Games Village to be opened on September 16, 2010 where about 8,000 athletes and officials from 71 Commonwealth Countries are arriving in India to participate in the 19th Commonwealth Games, 2010 being held in Delhi. We are still groping whether we are on schedule or not.
Madam, today we listen, read and watch on the television channels that a lot of works in various stadia and avenues is yet to be completed, accommodation facilities are not enough as well as there is a security threat in the minds of the players of foreign countries.
Another point is that Shri Kirti Azad, hon. Member of Parliament, has brought to the notice of the House that a lot of corruption has taken place, which was also confirmed by the C&AG and CVC also.
Anyway, a person like me thinks that since it involves the prestige of the nation, we should not waste our time and energy on controversies surrounding these Games. Let us focus on the Games and try to make it successful. Let us keep all these allegations and accusations to be discussed after the Games are over. There is ample time after the Games are over when we can discuss this and the guilty could be punished. Not only that, as suggested by one of the hon. Members, a JPC should be constituted for looking into the issue of corruption.
श्री विजय बहादुर सिंह (हमीरपुर): सभापति महोदया, मैं आपका आभारी हूं कि आपने मुझे कॉमन वेल्थ गेम्स विषय पर बोलने के लिए समय प्रदान किया है। मैं संक्षेप में अपना रोड मैप बता दूं कि यह संसद है आंकड़े बताए गए हैं, यह सीएजी, एकाउंटेंट जनरल या चार्टेड एकाउंटेंट का आफिस नहीं है। हम इस बारे में बात नहीं करना चाहते हैं। एक लाख करोड़, यह भी एग्जेजिरेशन है और दस हजार करोड़ यह भी एग्जेजिरेशन है। मैं बहुत ही बेसिक दो बातें कहना चाहता हूं। जैसा कि माननीय मंत्री रेड्डी जी ने बताया कि यह निर्णय मई 2003 का था और यह निर्णय एनडीए सरकार ने लिया था। उस समय माननीय अटल बिहारी वाजपेयी जी प्रधानमंत्री थे। यह बहुत अच्छा निर्णय था और हमारे देश को इससे बहुत इज्जत मिलने वाली थी। मैं पूछना चाहता हूं कि वर्ष 2010 आते-आते सात साल बीत गए और इन खेलों की तैयारी अभी तक पूरी नहीं हो पाई, इसकी जिम्मेदारी किसकी है?
अगर यह कमेटी बन गई थी और हम बिल्कुल सही मानते हैं कि कितना मेगा ईवेंट, कितना बढ़िया फ्लॉवरी ब्रिटिश, कितनी शैक्सपीरिइन अंग्रेजी से आपने कहा लेकिन अगर इतनी कमेटी थी तो इसका कोआर्डिनेशन ठीक से क्यों नहीं हुआ? आपने बहुत सुंदर उदाहरण बरात का दिया कि जब दरवाजे पर बरात आ गई तब इंतजाम हो रहा है। यह कौन से मैनेजमेंट की टैकनीक थी? हम इसलिए पूछ रहे हैं और देश पूछ रहा है क्योंकि यह आम जनता का पैसा है। यह क्वीन्स का बैटन जिसे भाईसाहब बटन बता रहे थे। उनका पैसा नहीं है। चाहे 0.7 प्रतिशत हो, यह कौन सी बात हुई? हमारे दोस्त मनीश तिवारी बड़े अच्छे एडवोकेट भी हैं कि 0.7 प्रतिशत है तो माफ कर दिया जाए। अगर किसी बैंक में जहां एक करोड़ रुपया अगर बंटा और एक लाख रुपये का अगर हिसाब नहीं हुआ तो कह दें कि नैगलिजिबल हुआ। ऐसा नहीं है। लेकिन यह किसकी कॉस्ट पर हो रहा है? इस गरीब जनता की कॉस्ट पर हो रहा है।
दूसरी बात यह है कि इस पूरे किस्से के दो भाग हैं। एक तो इसका ऑरगेनाइजेशनल ऑस्पेक्ट है जिसके बारे में एक एडवोकेट होने के नाते कल्माड़ी साहब का नाम सुनता रहा। पहले भी वे एशियाड गेम्स वगैरह से जुड़े हुए थे और हमें लगता है कि बड़े उत्साह से वे गेम्स में इंवाल्व होते हैं। यह गेम्स का ऑरगेनाइजेशन हुआ और दूसरा इंफ्रास्ट्रक्चर है। हमें लग रहा है जो इस समय देश में समझ में आ रहा है। यह इंफ्रास्ट्रक्चर की देर क्यों हुई ? जैसे अभी रेड्डी साहब ने बताया कि हर चीज 31 अगस्त को तैयार हो रही है और अगर पूछा जाए तो रेड्डी साहब की बात में भी थोड़ा सा कांट्रैडिक्शन है कि आप कहते हैं कि हम कल गेम्स करने को तैयार हैं। उसी सांस में यह भी कहते हैं कि 31 अगस्त तक स्टेडियम तैयार हो जाएंगे। यह बात मेरी समझ में नहीं आ पा रही है। आप कल गेम्स करने के लिए तैयार हैं।...( व्यवधान)
SHRI S. JAIPAL REDDY: Will you yield? I was referring to the training venues. Secondly, I was also referring to the debris that is there in various places on account of fresh digging by organizations like MTNL. They will all be completing their work by 31st August.
श्री विजय बहादुर सिंह : इसी संदर्भ में यह बात कहना चाहता हूं कि जब इतना समय दिल्ली सरकार के पास था और रेड्डी साहब ने बताया कि अभी भी बहुत पैसा था तो अगर दो-तीन महीने पहले पूरा काम कर लिया होता तो किसने इनका हाथ पकड़कर रखा हुआ था? हमारे यहां हर चीज एक एडवोकेट होने के नाते मैंने देखा है कि जब भी कोई बजटिंग होती है और जब वह एग्जीक्यूशन में आता है तो तीन गुना, चार गुना और दस गुना खर्च होता है, यह देश की एक परम्परा बन गई है। इसे रोकना चाहिए। अगर जिसने नहीं रोका तो उसकी एकाउंटेबिलिटी फिक्स होनी चाहिए। किसी को भी देश के पैसे से खिलवाड़ करने का हक नहीं है। न संविधान में है और न कानून में है। यह गरीबों का पैसा है।
चूंकि मैं राजनीति में नया हूं, अभी एक साल ही हुआ है। 35-40 साल मैंने वकालत की है। हमें लग रहा है कि यह जो ऑरगेनाइजेशनल ऑस्पेक्ट है और जो इंफ्रास्ट्रक्चर की बात है कि स्टेडियम बनाने हैं, यह दिल्ली सरकार और केन्द्र सरकार के बीच में है। It is just like a complaint of son-in-law to father-in-law. इस खिलवाड़ में हमारी जनता क्यों इस चीज को भरे? अभी मैंने अखबार में पढ़ा। परसों मैंने “हिन्दू” में पढ़ा कि जो सिक्योरिटी कंसर्न जो इंग्लैंड से भेजते हैं। वे कहते हैं कि दो महीने पहले हमें हैंड-ओवर कर दीजिए जिससे हम सिक्योरिटी चैक करें। अब 31 अगस्त तक यह होगा तो कैसे यह हैंड-ओवर होगा और कैसे ये सिक्योरिटी चैक करेंगे। जो होम फील्ड का एडवांटेज था, वह तो अब बेकार है।
जो ऑरगेनाइजेशनल में कल्माड़ी हैं, उनको चैक-मेट बनाकर इसका तमाशा मत करिए। हम देश की तरफ से, अपनी पार्टी की तरफ से इस कॉमन वैल्थ गैम्स की ग्रान्ड सक्सैज की कामना करते हैं। हम यह नहीं चाहते कि हमारे देश की बेज्जती हो लेकिन हम इस पर एक कैटैगॉरीकल एश्योरेंस चाहते हैं कि इसमें जहां-जहां गल्ती हुई हो, जिसकी-जिसकी गल्ती हुई हो, उसकी मॉइक्रोस्कॉपिंग व्यू पर डीप एंड डीप इसका एग्जामिनेशन हो और टाइम-बाउंड उस पर रिजल्ट निकले। और टाइम बाउंड उसका रिजल्ट निकले। चाहे वह कोई भी माध्यम हो, चाहे जेपीसी के माध्यम से हो या अन्य किसी माध्यम से हो।
सभापति महोदया, मेरे दो सुझाव हैं - मैं अपनी पार्टी की ओर से और साथ ही देश की इच्छा व्यक्ता करना चाहता हूं कि गेम्स बहुत ग्रांड सक्सैज हों। मैं उसमें आपके साथ हूं। हम और तो कुछ नहीं कर सकते, ज्यादा से ज्यादा पूजा-पाठ कर सकते हैं और तो हमारा कंट्रीब्यूशन नहीं है। यदि आप कहें तो मैं बनारस में जाकर पूजा कर सकता हूं। ...( व्यवधान)
मेरा दूसरा सुझाव यह है कि इस डिबेट के कंक्लूड होने पर ट्रेजरी बैंचेज से कैटोगोरिकल एश्योरेन्स आना चाहिए कि इसका एक-एक पहलू एग्जामिन होगा और the people who are guilty should be brought to justice.
मैं अंत में कहना चाहता हूं...( व्यवधान)
सभापति महोदया : थैंक यू, आपने दो सजैशंस के बारे में कहा था।
श्री विजय बहादुर सिंह : मेरा अंतिम छोटा सा सजैशन यह है कि आज संसार को गूगल के थ्रू सब मालूम है कि किस देश की पर कैपिटा इंकम क्या है। लेकिन इसका जो वेस्टेज है, हालांकि यह मेरे जेहन में नहीं आ रहा है कि चार हजार करोड़ का टॉयलेट पेपर आता है या क्या है, ये बड़ी फैन्टास्टिक स्टोरीज आ रही हैं। लेकिन मैं अभी भी रेड्डी साहब से कहना चाहता हूं, गिल साहब तो ब्यूरोक्रेट रहे हैं, आईएएस अधिकारी रहे हैं। एकाध बार हमने इलैक्शन कमीशन में इन्हें देखा भी है, इनका रीएक्शन भी देखा है। लेकिन आपको इसका वेस्टेज भी बचाना चाहिए। जैसे कहा गया कि पचास करोड़ का बैलून आ रहा है और चार करोड़ का यह आ रहा है। यदि वेस्टेज कुछ बच सके तो बचाइये।
I wish you the best of luck and best cooperation but please ensure that the guilty are brought to book.
SHRI C. RAJENDRAN (CHENNAI SOUTH): Madam Chairman, thank you for giving me this opportunity to speak on the preparations for the forthcoming Commonwealth Games in Delhi during October 2010.
With less than two months left for the Commonwealth Games, there seems to be a lack of effort to ensure better coordination between various agencies involved in the preparation of this mega sports event. There is a range of issues involved in hosting an event of this nature like games infrastructure, preparation of stadiums, security, traffic control, sanitation, safety of sports personnel and other foreign tourists, and above all, quality of food that would be served to them.
It appears that preparations for the games are lacking on many of these aspects presenting a very gloomy picture. India's prestige is at stake with the games. Everyone involved in the preparations must take them seriously and work towards the common goal of making it a success. But the way things are happening from the preparation of stadiums to the corruption charges, that goal seems to be a distant dream. Hence, I urge upon the Prime Minister to intervene in the preparations and take charge of the situation so that it becomes a success.
When such games are organized in other countries, they see to it that they are organized in a backward area so that that area is developed fully and it ensures permanent job opportunities for the local people. But why is it that in India these games are being organized in the Capital causing a lot of difficulties and hurdles to common people? Delhi alone is not India. Games of this nature should be conducted in different parts of India namely Chennai, Mumbai, Lucknow, Ahmedabad, Bangalore and so on. My beloved leader Dr. Puratchi Thalaivi Amma had got the world-class Jawaharlal Nehru stadium constructed in Chennai during her golden period, which was appreciated by everyone. The Government should make use of such stadiums.
There are very serious accusations of mismanagement of the event and corruption. Many stadiums are not completed yet, despite spending huge amounts of public money.
There are apprehensions that the construction work related to the event may not be completed. Already we are into the second week of August; and by this time, the agencies involved in the construction of games venues were supposed to handover them, but so far they are not fully completed. Even the constructed ones had a lot of defects, right from seepages to many other defects. With the first rains in Delhi, many stadiums started leaking and we do not know what will be the position if there are rains during the time of the games. Many venues including Jawaharlal Nehru Stadium, Yamuna Sports Complex, Talkotra, Siri Fort, etc. are still not complete and they miss the deadlines. The scheduled dates of completion of many projects have been revised; and we do not know whether they would be completed or not.
With not even two months to go for the games to begin, even now, the Organizing Committee has not decided about the caterers and they are not in place as of now. More the delay in appointing them, more will be violation of normal norms and more will be compromises. Finally, the quality of food will get hard hit and that will present a very bad picture of India. Due to bad quality of food, if something else happens, it will again create a furore inside and outside; and the OC has to immediately take care of this aspect.
Even now, India does not seem to have a good Sports Policy in place. We have enough talents in India. Given an opportunity, Indians would do well; but India lacks infrastructure, due to which Indians are not able to come up to the world levels. We should encourage this to happen.
If the games were to be successful, all the Government machinery should rise above everything else and the Prime Minister should convey and convince the world community about the preparedness, security, pollution and other issues. Only then, would the games be successful.
श्री नामा नागेश्वर राव (खम्माम): सभापति महोदया, इंडेपेंडेंस के बाद हमारे देश में दो बार एशियन गेम्स हैल्ड किया गया है। दिल्ली में 1952 में और बाद में 1982 में हुये थे। एफ्रो-एशियन गेम्स 2003 में हैदराबाद में हुये हैं। उस समय एन.डी.ए. सैंटर में थी और हमारे लीडर श्री चन्द्रबाबू नायडू ने कहा था कि हम लोग हैदराबाद में ही एफ्रो-एशियन गेम्स करेगें, वर्ल्ड को बता देगें और वह हमने कर के दिखा दिया है। उधर से बार बार एन.डी. ए. के बारे में कहा जा रहा था और इस बात को एक्सैप्ट किया। यह एक्सपटैंस की बात नहीं है. अभी क्या हो रहा है, उसके बारे में कहने की जरूरत है। उस बात को साईड में रखकर अननैसैरली एलीगेशन की बात कर रहे हैं। उस समय हम लोगों ने 160 करोड़ रुपये में सात स्टेडियम बनाये थे। वह 40,000 की कैपेसिटी का स्टेडियम 90 करोड़ रुपये में बनाया जब कि आज सिर्फ रिनोवेशन की वजह से जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम में 991 करोड़ रुपया लगाया है। इन्दिरा गांधी स्टेडियम में 660 करोड़ रुपया रिनोवेशन में लगा दिया है। श्री जयपाल रेड्डी साहब ने करंट फाईनेंशियल एस्टीमेट्स एंड अप्रूवल का नैट में जो दिया गया है, जो एक्सपैंडिचर्स हुआ है, वही फिगर्स उन्होंने पढ़ दिया है। अभी तक मेरे मन में उनके लिये काफी रैस्पैक्ट था लेकिन अब उनके मुंह से सही बात नहीं निकली। लेकिन आज उधर बैठने के कारण जो करप्शन हुआ है, उसे कवर करने के लिये वह स्टेटमेंट दिया है।
सभापति महोदय : नागेश्वरा राव जी, प्लीज अपनी लैंग्वेज को संयमित रखें।
श्री नामा नागेश्वर राव : उन्हें करप्शन के बारे में कहना चाहिये था। यह एक्सपैंडिचर्स के बारे में नहीं है। लेकिन इस एक्सपैंडिचर्स में करप्शन कितना हुआ है, वह बताना चाहिये.था। ...( व्यवधान)
सभापति महोदय : आप आराम से बोलिये।
श्री नामा नागेश्वर राव: ठीक है, मैं आराम से बोल रहा हूं। मुझे इसलिये गुस्सा आ रहा है कि यह कॉमन मैन की मनी है।
महोदया, मुझे दिल से गुस्सा आ रहा है क्योंकि कॉमन मैन का मनी स्कैम में चला गयी है। मैं आपकी बात का पालन करके आराम से अपनी बात कहता हूं। इस तरह के स्कैम होने के बाद उसमें डायरेक्ट एक्सपेंडीचर की बात कही गयी, what about the indirect expenditures? इनडायरेक्ट एक्सपेंडीचर में जो भी डीडीए के अंदर फैल्ट्स आदि बनाये हैं, उन्हें 5-6 करोड़ रूपये में सेल किया जा रहा है। At what cost you have purchased and at what cost you have sold it and how much is the deal in that? ये सब इनडायरेक्ट एक्सक्यूज के बारे में बिल्कुल नहीं बोले हैं, ये सिर्फ गवर्नमेंट के एक्सपेंडीचर के बारे में बोल रहे हैं। इनडायरेक्ट एक्सपेंडीचर में जैसे अभी दिल्ली में जितना भी एक्सपेंडीचर हुआ है। एशियन गेम्स नहीं होते थे तो क्या इतना एक्सपेंडीचर होता? ये सब हाउस में एक्चुअल पोजीशन नहीं बता रहे हैं। यह बहुत सोचने की चीज है। यह बहुत बड़ा स्कैम हुआ है, बहुत बड़ा करप्शन हुआ है। यह अभी से नहीं है, जब से यूपीए की सरकार आयी है, स्कैम के ऊपर स्कैम हुए हैं। जब भी कभी भी किसी भी इश्यू में स्कोप मिलता है तो ये लोग पैसा खीचने के चक्कर में बैठे हैं, स्कैम के चक्कर में बैठे हैं। आज तक इतने स्कैम भारत देश में कभी भी नहीं हुए हैं, जितने पिछले पांच साल में हुए हैं। हम लोगों ने हैदराबाद में एफ्रो-एशियन गेम्स का आयोजन किया था। इसके बाद कांग्रेस गवर्नमेंट ने पांच साल में करप्शन में गीनिज रिकॉर्ड कर दिया। इस गवर्नमेंट ने इस इश्यू में वर्ल्ड में रिकॉर्ड कर दिया है, पूरे वर्ल्ड को बता दिया है कि हम लोग कुछ भी करप्शन कर सकते हैं। हर एक चीज के अंदर करप्शन कर सकते हैं। एक छोटा ग्लास खरीदने का मूल्य दो रूपये है तो उस गिलास को 37 रूपये में खरीदा गया दिखाया गया। यह पेपर, मीडिया में आया। एक छोटा सा 80 केवीए का जनरेटर 45 दिन किराये पर लेने के लिए 16 हजार 70 रूपये मीडिया में, सब रिकॉर्डस में आया है। एक्चुअली वह रेंटल है, एक्चुअल जनरेटर कॉस्ट देखें तो वह साढ़े पांच लाख रूपये होती है। जनरेटर की यह कॉस्ट है और यह रेंटल में 16 हजार 70 रूपये में 45 दिन के लिए लिया है। उसी तरीके से इंडिया के लिक्विड सोप का 187 का इन्होंने 9,379 किया है। यह रेड हैंडिड है। अगर कोई भी चोरी करता है तो वह चोर चोरी करने के बाद बोलता है कि हमने चोरी नहीं की है। यह स्कैम रेड हैंडिड है, इसके ऊपर सरकार को बोलना चाहिए। यह सही नहीं है। अगर सही नहीं है तो आप बोलिये कि यह सही नहीं है।...( व्यवधान)
सभापति महोदया : कृपया, आप वाइंड अप कीजिये।
श्री नामा नागेश्वर राव:महोदया, इसमें बहुत ज्यादा करप्शन हुआ है। हम लोग डिमांड कर रहे हैं कि इसे जेपीसी में डालना चाहिए और उसे गेम्स के पहले कम्पलीट करना चाहिए। गेम्स के बाद कोई पूछने वाला नहीं है। अभी तक तो ये एक भी स्कैम में पकड़ नहीं कर पाये हैं। इसलिए गेम्स के पहले इस स्कैम के ऊपर तत्काल जेपीसी डालकर जांच करनी चाहिए।
SHRI PRABODH PANDA (MIDNAPORE): Madam, I am aware of the time constraints; please allow me to put all the points and I shall be brief.
We have experienced two mega international games in Delhi. During the Nehru period, we had experienced Commonwealth Games and during Madam Indira Gandhi’s period, we had experienced Asian Games.
While eight years ago India agreed to host the game, it generated a lot of enthusiasm; it also created hopes and aspirations, and also a national pride. But now the situation has turned into a national disaster and a national shame. National pride has turned into a national shame. Who is to blame for this?
Several points have been raised in this House about malpractices, corruption charges, irregularities, misappropriation and others.
What would be the real amount? The hon. Minister, Shri Jaipal Reddy has given some figure but I do not know the real figure. I did not count it. What would be the figure? The accusation is that there have been malpractices, misappropriation and irregularities. Who is to blame?
SHRI S. JAIPAL REDDY: How can you confuse the expenditure figure with malpractices?
SHRI PRABODH PANDA : My point is that the accusation has been made not only in the House but also in the public domain. I must thank the Media who have brought this matter into the public domain.
There has been an euphoria about the 8 per cent growth of our country. At the same time, it has also been revealed that our country is the 84th country in Transparency International Corruption Index. I think, the IPL Games and the Commonwealth Games have added more points to this Index. So, who is to blame?
There has been an Organising Committee. Delhi Municipality work has also been going on. New Delhi Municipality Corporation, Delhi Cantonment, Delhi Government and above all the Union Government all are involved. It is not that only the Organising Committee is responsible for it. The boss of the Organising Committee, Shri Suresh Kalmadi made a statement, which became public, that he does not know what is going on about many things like tenders and so on. It may be a formal answer but that does not mean that he keeps his eyes closed in the other matters. If there is no corruption, no malpractices or no irregularity then why the OC has decided to suspend its two officers? What is your reply to this? Why, once a reputed company, the Sports Marketing and Management Company was served a Termination Notice on 6th August, 2010. So, a doubt is generated that something is going on. In this case, JPC is the only alternative to remove these doubts from the minds of the people. We should agree to set up a JPC to investigate into the matter. Not that the Games should be stopped but investigation should continue simultaneously.… (Interruptions) Without a JPC, suspicions cannot be removed.
In view of the Commonwealth Games it was assured that Delhi will be turned into a model international city. So, several works were started but now all the projects are in a mess except the Metro Rail. Metro Rail is doing well but other projects are in a mess. So, I think this should not be taken lightly. It is a very urgent and important matter. Its gravity should be taken into consideration and for that a JPC should be formed. So far as my Party, the Communist Party of India, is concerned this is our demand. I think the hon. Minister will reply to it and will take some steps in this regard.
*Dr. RATTAN SINGH AJNALA (KHADOOR SAHIB): I thank you, Madam Chairperson, for giving me the opportunity to speak on the very important subject of ‘Commonwealth Games’. Each and every citizen of India is deeply concerned whether we will be able to successfully hold the Commonwealth Games or not. Hon. Shri Reddy, I seek your attention. Who started the debate on whether we should be hosting the Commonwealth Games or not? It was none other than Hon. Minister Shri Mani Shankar Aiyar. He said, “I am delighted because the rains are causing difficulty for the games.” And Shri Suresh Kalmadi had this to say, “Had Aiyar been the Sports Minister, the Games would never have come to India.” So it was the Members of the ruling party who were involved in a tug-of-war regarding hosting the Commonwealth Games. The opposition had no role in it.
Madam, we must all thank the print and electronic media for exposing the rampant corruption, loot and plunder that was going on in the name of preparation for Commonwealth Games. People came to know about this scam through the media. The role of media is commendable. It blew the lid off this scam.
Madam, it is a matter of shame that some people are indulging in irregularities and malpractices when the honour and dignity of the country is at stake. Shri Reddy, you are an honest and wise person. I felt ashamed when you had to defend these people who were tainted. Shri Manish Tiwari had to defend such people. He came up with fabricated data to justify the wrong-doings of these people.
Madam Chairperson, why have we failed to meet the deadline in the construction of stadia? Why is there a time over-run and a cost-escalation? Who is responsible for this mess? Shri Reddy, you are responsible for this sorry state of affairs. We are not responsible for this. The need of the hour is to finish all the *English translation of the Speech originally delivered in Punjabi.
projects in time so that the Games are conducted properly. We want the Games to be a grand success. But, too many cooks spoil the broth. There are many agencies and ministries involved in it and they are often working at cross-purposes. There is no coordination among them. Shri Reddy, corrupt people can be controlled only by a corrupt person. Since you are not one among them, you cannot control them.
Madam, Hon. Shri M.S.Gill is a Punjabi gentleman. But, now he is stuck up in embarrassing company….(Interruptiions) Madam, the Government has tarnished the reputation of the country. The nation’s image has taken a beating. Madam, why was Delhi chosen as the city to host these Games? We have 29 states. All states could have hosted different disciplines. This would have been a more professional way of doing things, and Delhi would not have been over-burdened. In the name of providing a facelift to Delhi, you have spoilt everything.
Madam, what about crores of people living a life of poverty and deprivation? It would have been far better if the whopping sum being used for the Commonwealth Games would have been utilized for the welfare of the poor and the downtrodden. Why have you evicted poor people from Delhi? Why are you creating a false sense of beauty and order for the foreign visitors? The workers are not being paid minimum wages. Who will provide justice to them? The extravaganza called the Commonwealth Games cannot end the poverty and misery of the common man.
Madam, we in the Opposition demand that a JPC should be constituted to get to the bottom of this mess of corruption. We cannot do everything at the eleventh hour. When the marriage-procession is knocking at the door, the Government is trying to convince the bride.
Madam, the entire city of Delhi has been dug up. There is rubble and filth every where. Do we want to make ourselves a laughing-stock before the foreign visitors?
MADAM CHAIRMAN: Please wind up. Thank you.
Dr. RATTAN SINGH AJNALA : The Government must realize its mistake and take corrective steps in a time-bound manner. Let us all put our heads together and make these Games a grand success. A thorough investigation should be undertaken so that truth comes to light. The corrupt elements must be brought to book.
श्री अनुराग सिंह ठाकुर (हमीरपुर):सभापति महोदया, मैं पूर्व में एक खिलाड़ी रहा हूं, खेल प्रबंधक हिमाचल प्रदेश क्रिकेट संघ का अध्यक्ष और ओलम्पिक संघ का महासचिव भी रहा हूं। मैं खेलों के साथ बड़ी करीबी से जुड़ा हूं और हिमाचल प्रदेश ओलम्पिक संघ के महासचिव होने के नाते उसका सदस्य भी हूं। एक खिलाड़ी और खेल प्रबंधक होने के नाते, खेलों के साथ इतना करीबी रिश्ता होने के नाते मेरा यह मानना है, आज हिन्दुस्तान का हर नागरिक चाहता है कि खेलों का सफल आयोजन हो। मेरी पार्टी का भी लगातार यह स्टैंड रहा है कि राष्ट्रमंडल खेलों का सफल आयोजन हो, क्योंकि इसका आयोजन देश की प्रतिष्ठा के साथ जुड़ा हुआ है।
सभापति महोदया, हम कामना करते हैं कि राष्ट्रमंडल खेलों का सफल आयोजन हमारे देश में होगा, लेकिन आज खेल के नाम पर धांधलियां, भ्रष्टाचार और अपव्यय की जो जानकारियां रोज-रोज सामने आ रही हैं, क्या वह चिन्ता का विषय नहीं है ? आयोजन समिति, दिल्ली सरकार, खेल मंत्रालय की भूमिका क्या गैर-जिम्मेदाराना नहीं रही ? सन् 2003 में इस देश को खेलों की जिम्मेदारी मिली, लेकिन वर्ष 2008 तक जो सैंक्शन्स हैं और एप्रूवल्स हैं, उन पर पांच वर्ष तक स्पोर्ट्स मिनिस्टर बैठे रहते हैं। इसलिए मैं पूछना चाहता हूं कि पिछले पांच वर्षों में किस पार्टी की सरकार रही ? वर्ष 2004 में यू.पी.ए. की सरकार आई। मंत्री जी ने कहा कि एन.डी.ए. के समय में सैंक्शन्स हुईं।
सभापति महोदया, हमें इस बात की खुशी है कि अटल जी की सरकार ने 110 करोड़ की आबादी वाले देश में राष्ट्रमंडल खेलों के आयोजन को करने जिम्मेदारी ली, लेकिन उस समय खेलों के आयोजन का बजट लगभग 800 करोड़ रुपए का था, लेकिन जब बिडिंग हुई, तो उसमें 1899 करोड़ रुपए का बजट रखा गया। मैं आपके माध्यम से सरकार से पूछना चाहता हूं कि वह बजट जो 800 करोड़ रुपए का था, आज कई हजार करोड़ रुपए का कैसे हो गया? क्या इसके लिए यू.पी.ए. की सरकार जिम्मेदार नहीं है ? पांच वर्षों तक क्यों फाइलों पर अधिकारी, खेल मंत्रालय के लोग और ऑर्गेनाइजिंग कमेटी के सदस्य निर्णय नहीं ले पाए और अब इस देश की जनता की खून-पसीने की कमाई को लुटा रहे हैं और बजट को 1800 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 20 हजार करोड़ तक पहुंचा दिया? केवल फिगर्स को इधर-उधर करने से काम नहीं चलेगा। जिस प्रकार से खेल मंत्रालय और यह सरकार एक बिखरे हुए कुनबे की तरह है, उसी तरह फिगर्स को बांटकर बताया जा रहा है। मैं कहना चाहता हूं कि सदन में केवल कवर-अप करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।
महोदया, खेलों का आयोजन यहां इसलिए किया गया था कि 110 करोड़ की आबादी वाले देश में केवल एक ओलम्पिक मैडल आता है, इसलिए सोचा गया कि एक जैन्यूइन प्रयास किया जाए कि इस देश के खिलाड़ी इस देश के लिए मैडल जीतकर ला सकें। अगर वर्ष 2006 में स्टेडियम बनकर तैयार हो जाते, तो हमारे एथलीट्स को यह सुविधा मिलती कि वे वहां प्रैक्टिस करते, जिससे आने वाले खेलों के दौरान उन्हें यह अहसास होता, उन्हें यह कॉन्फीडेंस होता कि हमने दो वर्षों तक यहां प्रैक्टिस की है, तो वे अपना प्रदर्शन अच्छे ढंग से कर पाते और मैडल जीतने के चांस ज्यादा हो जाते। एथलीट्स की ट्रेनिंग पर जो 687 करोड़ रुपए खर्च करने की जो ये बात कर रहे हैं, मैं उनसे पूछना चाहता हूं कि उन एथलीट्स की इन स्टेडियमों में कितने दिन ट्रेनिंग हुई, कितने दिन पहले आपने स्टेडियम तैयार कर के हमारे खिलाड़ियों को प्रैक्टिस करने के लिए दिए?
महोदया, आज यहां बहुत सारी बातें हो रही हैं। श्री सुरेश कलमाड़ी जी हमारी एसोसिएशन के अध्यक्ष हैं और इस सदन के सदस्य भी हैं। मैं उनसे चाहूंगा कि वे कुछ मसलों पर यहां सफाई दें। यदि वे ऐसा करते हैं, तो मैं उनका व्यक्तिगत तौर पर आभारी रहूंगा, क्योंकि ओ.सी. कमेटीज की जो बातें यहां कही गईं, उनमें साफतौर पर आरोप लगे हैं कि खेलकूद के उपकरणों को खरीदने में जितनी कीमत आती, उससे कहीं ज्यादा उनके किराए पर खर्च किया जा रहा है।
मैं कुछ उदारहण देना चाहता हूं। ट्रेड मिल को 7 लाख रुपए में खरीदा जा सकता है, लेकिन उसका 45 दिन का किराया 9लाख 75 हजार रुपए दिया जा रहा है। एक्सरसाइज करने के बाद, आराम करने के लिए 8,500 से ज्यादा की कुर्सी, 100 लीटर का रैफ्रिजरेटर 42,202 रुपए में किराए पर लिए जाने की बात कही जाती है। खिलाड़ियों के विश्राम के छाते के लिए 6,308 रुपए की बात कही गई। टिश्यू रोल्स 4138 रुपए के। डीजल पॉवर की एक क्लस्टर में लागत 15 रुपए प्रति यूनिट बताई गई, तो दूसरे क्लस्टर में 80 रुपए प्रति यूनिट बताई गई है। 2 टन के ए.सी. का किराया 70,287 रुपए, तो वहीं पर दूसरी जगह 1, 87,597 रुपए बताया गया है। लिक्विड सोप डिस्पेंसर 200 रुपए का एक जगह, तो दूसरी जगह 10,000 रुपए का बताया गया है। स्विटजरलैंड की कोई एक कंपनी है, वह शायद उसी को 187 रुपए में दे रही है, लेकिन दूसरी ओर ब्रिटिश कंसौर्टियम नामक कोई कंपनी है, वह 9,379 रुपए में दे रही है। जो डिस्पेंसर, यानी जो कप हैं, हांगकांग बेस्ड कंपनी उसे 2 रुपए में दे रही है, तो दूसरी ई.एस.जे.बी. कंसॉर्टियम उसे 37 रुपए में दे रही है।
महोदया, मेरा केवल इतना कहना है कि ये सब बातें, जो रोज-रोज मीडिया में आती हैं, लोग पर्सनली मीडिया में जाकर इंटरव्यू देते हैं, यह ठीक नहीं है। यदि सबसे बड़ी जानकारी रखने का किसी को अधिकार है, तो इस संसद को है, इस हाउस को है। इसलिए उसकी पूरी जानकारी यहां मिलनी चाहिए। हम जनता के चुने हुए प्रतिनिधि हैं। जहां मैं एक ओर खेल के प्रबंधन के साथ जुड़ा हुआ हूं, वहीं दूसरी ओर मैं 17 लाख लोगों द्वारा चुनकर उनके प्रतिनिधि के तौर पर इस सदन में आया हूं।
18.00 hrs. अपनी जिम्मेदारी को समझते हुए मैं आज इस मुद्दे को उठाने पर विवश हुआ हूं। हिमाचल प्रदेश क्रिकेट संघ का मैं अध्यक्ष हूं। 48 करोड़ रुपये में अन्तर्राष्ट्रीय स्तर का स्टेडियम रिकार्ड समय में हमने बनाकर दिया। आई.पी.एल. के मैचों का सफल आयोजन वहां पर करवाया। मुझे इस बात का दुख है कि जब इस सदन के बड़े सीनियर नेता जयपाल रेड्डी जी बात कर रहे थे...( व्यवधान) यह देश के 20 हजार करोड़ रुपये की बात है...( व्यवधान)
सभापति महोदया : एक सैकिण्ड। यदि सदन की सदिच्छा हो तो आज की कार्य-सूची समाप्त होने तक समय बढ़ा दिया जाये।
कुछ माननीय सदस्य: ठीक है।
सभापति महोदया : ठाकुर साहब, अब आपको वाइंड अप करना है।
श्री अनुराग सिंह ठाकुर : धन्यवाद। यह महत्वपूर्ण मुद्दा है, नहीं तो वैसे ही रह जायेगा कि 20 हजार करोड़ रुपये खर्च भी हुए और बाद में लोग हमें कहेंगे कि इस पर प्रकाश भी नहीं डाल पाये। मीडिया ने अपनी जिम्मेदारी पूरी की है, लेकिन हमारी जो जिम्मेदारी है, उसमें अगर 10 मिनट ज्यादा भी लग जाएंगे तो उस से कोई फर्क नहीं पड़ने वाला, लेकिन यह जनता और देश की प्रतिष्ठा से जुड़ा हुआ मुद्दा है।
अगर 48 करोड़ रुपये में हिमाचल प्रदेश क्रिकेट संघ अन्तर्राष्ट्रीय स्तर का स्टेडियम बना सकता है, आई.पी.एल. के मैचेज़ का आयोजन करवा सकता है तो भारत सरकार क्यों नहीं करवा सकती? इस देश की नामी-गिरामी एसोसिएशंस अगर क्रिकेट के क्षेत्र में, जिसको मैं विस्तार से बताना चाहूंगा कि इन्दौर में 32 हजार कैपेसिटी का स्टेडियम 40 करोड़ रुपये में बना, हैदराबाद में 40 हजार की क्षमता का स्टेडियम 80 करोड़ रुपये में बना। धर्मशाला में 20 हजार की क्षमता का 48 करोड़ रुपये में, नागपुर में 45 हजार क्षमता का 84 करोड़ रुपये में और दिल्ली में 43 हजार की क्षमता का 85 करोड़ रुपये में बना तो मैं यह जानना चाहता हूं कि ऐसा कौन सा रैनोवेशन हुआ है, जो 961 करोड़ रुपये खर्च हुए? यह कोई छोटा एमाउंट नहीं है। 961 करोड़ रुपये जब खर्च हुए तो उसकी क्षमता 60 हजार की है। इन्दिरा गांधी कॉम्पलैक्स पर 669 करोड़ रुपये खर्च हुए, जो केवल 14 हजार की क्षमता का स्टेडियम है। पांच हजार की क्षमता वाले डॉ. एस.बी. मुकर्जी स्वीमिंग पूल कॉम्पलैक्स पर 377 करोड़ रुपये खर्च हुए। डॉ. कर्णी सिंह शूटिंग रेंज पर 149 करोड़ रुपये खर्च हुए, उसमें केवल 4,845 लोग बैठ सकते हैं। 7,862 की क्षमता वाले सिरी फोर्ट स्पोर्ट्स कॉम्पलैक्स पर 241 करोड़ रुपये खर्च हुए।...( व्यवधान)
सभापति महोदया : प्लीज़ वाइंड अप, चार स्पीकर्स अभी और बोलने वाले हैं।
श्री अनुराग सिंह ठाकुर : देश की जनता को जानने दीजिए, कितने करोड़ रुपये खर्च हुए। यह टैक्स पैयर्स का पैसा है। हम भी सदन को उन्हीं के पैसे से चला रहे हैं। 210 करोड़ रुपये यमुना कॉम्पलैक्स पर खर्च हुए, जिसमें केवल 5,797 लोग बैठ सकते हैं। मैंने केवल कुछ की जानकारी आपको दी है। यह देश जानना चाहता है कि ऐसा क्या स्टेडियम में बना है, जो 961 करोड़ रुपये वहां पर खर्च हुए और कुल मिलाकर 1899 करोड़ रुपये अगर इन खेलों का बजट था तो केवल एक स्टेडियम पर 961 करोड़ रुपये कैसे खर्च हुए, मैं आपके माध्यम से यह जानना चाहता हूं?
अगर क्रिकेट एसोसिएशन यह करके दिखा सकती हैं तो इतनी बड़ी सरकार क्यों नहीं करके दिखा सकती। अगर विजीलेंस कमीशन ने बात कही है और मेरे दोस्त मनीष जी ने अपनी बात में कहा कि यह तथ्यों से परे हैं, अगर प्रिलिमिनरी इन्क्वायरी की बात कही गई और वैबसाइट पर यह लिखा है- Vigilance angle is suspected. मैं शायद इस सदन में नया हूं, मुझे लीगल जानकारी नहीं है तो मैं मंत्री जी से जानना चाहता हूं कि इसका मतलब क्या है? क्या अनियमितताएं बरती गई हैं, जो लगातार मीडिया में आया, वहां पर रिपोर्ट्स में आया, मैं लम्बी रिपोर्ट नहीं पढ़ूंगा, क्योंकि आप मुझे पढ़ने का समय नहीं देंगी।...( व्यवधान)
सभापति महोदया : अनुराग जी, अब वाइंड अप कीजिए। आपका समय समाप्त हो चुका।
श्री अनुराग सिंह ठाकुर: मैं इसीलिए कह रहा हूं कि मैं पूरी रिपोर्ट नहीं पढ़ूंगा, लेकिन मंत्री जी को आप पूरा समय दीजिए, ताकि अपने जवाब में पूरे तथ्य वे सदन के सामने रख सकें।
यहां पर सदन के लोगों ने कहा, मंत्री जी ने कहा कि इससे देश के लोगों को बहुत लाभ मिलेगा तो मैं जानना चाहता हूं कि दिल्ली में हजारों लोग झुग्गी-झोंपड़ियों से निकालकर बाहर भेजे जा रहे हैं। 100 करोड़ रुपये इस पर खर्च किये जा रहे हैं, ताकि वहां पर बम्बू की छोटी-छोटी पतरियों की जाफरी लगाई जाये, ताकि उस क्षेत्र को ढका जा सके और विदेशों से जो लोग आ रहे हैं, वे झुग्गी-झोंपड़ियों को न देख सकें, मलबे के ढेर को न देख सकें। अगर वह 100 करोड़ रुपया झुग्गी-झोंपड़ियों की जगह नये घर बनाने पर खर्च किया जाता तो शायद उन लोगों को लाभ मिल सकता था।
आज 900 करोड़ रुपये से ज्यादा का खर्च केवल कनाट प्लेस पर किया गया। किस पर? प्राइवेट बिल्डिंग्स पर। 600 करोड़ रुपये से ज्यादा का खर्च खान मार्केट पर किया गया। यह किसका पैसा है? टैक्स पेयर्स का पैसा है। यह प्राइवेट बिल्डिंग्स पर क्यों खर्च किया गया? उसका क्या लाभ मिलने वाला है?
उसका क्या लाभ मिलने वाला है? मैं आपके माध्यम से मंत्री जी से यह पूछना चाहूंगा। ...( व्यवधान)
सभापति महोदया : आप 15 मिनट ले चुके हैं। अब आप अपनी बात समाप्त करिए।
…( व्यवधान)
श्री अनुराग सिंह ठाकुर : मैडम, आज मैं सुबह साढ़े चार बजे ट्रेन से उतरकर वहां से आया हूं, आप पुरानी दिल्ली का हाल देखिए। वहां पर सिक्स लेन होते हुए भी सिंगल लेन पर चलने की जगह नहीं मिल पाती है। वहां ऐसे हालात हैं। ...( व्यवधान) अभी बहुत सारे सवाल हैं। मेरे बीस से ज्यादा प्रश्न हैं। ...( व्यवधान)
सभापति महोदया : आपकी पार्टी का समय भी देखा जाता है।
…( व्यवधान)
श्री अनुराग सिंह ठाकुर: पार्टी के समय में कैसे पूरा होगा, अगर बीच में टोकाटोकी होगी? जैसे पहले कीर्ति जी बोले ...( व्यवधान)
सभापति महोदया : आपका समय हो चुका है। जितना समय एलाट होगा उतना ही दिया जाएगा। बाकी सभी सदस्यों ने कोआपरेट किया है, आप भी कीजिए।
…( व्यवधान)
श्री अनुराग सिंह ठाकुर : जो स्मैम में स्कैम है, यह जो स्मैम है, वह स्कैम से कम नहीं है, स्पोर्ट्स मार्केटिंग एंड मैनेजमेंट...( व्यवधान)
श्री गोपीनाथ मुंडे (बीड): महोदया, इनका समय अभी रह गया है और भी माननीय सदस्य इस पर बोलना चाहते हैं। अगर सारा देश और पार्लियामेंट यही चाहता है, तो इसका जवाब मंत्री जी कल दे सकते हैं।
सभापति महोदया : अभी तक पार्टी को जो एलोकेटेड समय है, हम उसी पर तो चर्चा करेंगे।
…( व्यवधान)
श्री गोपीनाथ मुंडे : कल भी समय दिया जा सकता है। ...( व्यवधान) कल भी चर्चा हो सकती है। …( व्यवधान)
सभापति महोदया : चार वक्ता अभी और हैं, यह खत्म कैसे होगा?
…( व्यवधान)
श्री गोपीनाथ मुंडे : मंत्री जी कल जवाब दे सकते हैं। ...( व्यवधान)
सभापति महोदया : कल की कार्यसूची बहुत ज्यादा है। चार स्पीकर और हैं।
…( व्यवधान)
श्री गोपीनाथ मुंडे: कल मंत्री जी इसका जवाब दे सकते हैं। …( व्यवधान)
श्री अनुराग सिंह ठाकुर : मैडम, मैं जब भी सदन में आठ-आठ घंटे बैठने के बाद बोलने के लिए खड़ा होता हूं, तो मुझे 6 मिनट से ज्यादा का समय बोलने के लिए नहीं मिलता है। ...( व्यवधान)
सभापति महोदया : आप 15 मिनट ले चुके हैं।
…( व्यवधान)
श्री अनुराग सिंह ठाकुर : क्या यह महत्वपूर्ण मुद्दा नहीं है? अगर आप एक बार कह दें कि यह महत्वपूर्ण मुद्दा नहीं है, तो मैं अपने सारे कागज ऐसे ही रखकर बैठ जाता हूं। अगर देश की प्रतिष्ठा के साथ जुड़ा हुआ, लोगों के टैक्स पेअर का पैसा धांधली के जरिए कुछ लोगों की जेब में चला गया है, तो उसे उठाने का मुझे पूरा अधिकार है और मैं आपसे संरक्षण चाहता हूं कि मुझे उसके लिए कुछ समय दिया जाए।
सभापति महोदया : मैं आपसे निवेदन करूंगी कि पार्टी के पहले बोलने वाले सदस्यों से कहा जाए कि वे कम समय लें।
…( व्यवधान)
श्री अनुराग सिंह ठाकुर : मैडम, मुझे मंत्री जी से किन विषयों पर ...( व्यवधान) जवाब चाहिए। केवल एएम फिल्म्स की बात मैं कर रहा हूं। एएमफिल्म्स के साथ किए गए करार का ...( व्यवधान)
सभापति महोदया : सदन का डिसिप्लिन मेन्टेन रखें।
…( व्यवधान)
श्री अनुराग सिंह ठाकुर : मैं इसलिए कह रहा हूं कि एएम फिल्म्स के साथ किए गए करार की जांच ..( व्यवधान)
सभापति महोदया : सदन का डिसिप्लिन मेन्टेन रखें।
…( व्यवधान)
श्री अनुराग सिंह ठाकुर : यह मांग की गयी कि ज्वाइंट पार्लियामेंट्री प्रोब की जाए। भारतीय उच्चायोग ने अगर ई-मेल के साथ छेड़-छाड़ करने का आरोप ओ.सी. के अधिकारियों के ऊपर लगाया है, तो इसके तथ्यों की जानकारी इस सदन को मिलनी चाहिए। स्मैम जो स्पोर्ट्स मार्केटिंग एंड मैनेजमेंट कंपनी है, उसको लगभग 23 प्रतिशत कमीशन देने की बात कही गयी। वह एक पैसे की स्पांसरशिप नहीं पा लाए। कुछ दिन पहले उसकी...( व्यवधान) स्पांसरशिप डील को कैंसिल कर दिया गया। मैं आपके माध्यम से जानना चाहता हूं कि ...( व्यवधान) मैं दो मिनट से ज्यादा समय नहीं लूंगा। अगर 23 प्रतिशत कमीशन उनको देने की बात कही गयी थी, तो क्या एक भी पैसा वह इकट्ठा करके ला सके? कांग्रेस पार्टी ने कई वर्षों तक एससी, एसटी के नाम पर कई चुनाव लड़े हैं। आज सात सौ करोड़ रूपए से ज्यादा के फंड डायवर्जन की बात कही जा रही है। उसकी जानकारी मैं मंत्री जी के माध्यम से जानना चाहूंगा। स्टेडियम की कीमत वास्तविकता से कई गुना ज्यादा खर्च की गयी। उसकी जानकारी ...( व्यवधान)
सभापति महोदया : अब आप बैठ जाए।
…( व्यवधान)
सभापति महोदया : अनुराग जी, आप कोआपरेट कीजिए।
…( व्यवधान)
श्री अनुराग सिंह ठाकुर : मैं केवल अपने प्वाइंट रख रहा हूं, विस्तार में बात नहीं कह रहा हूं। ...( व्यवधान)
सभापति महोदया : आप चेयर को सहयोग कीजिए।
…( व्यवधान)
श्री अनुराग सिंह ठाकुर : इन्होंने जो किराये पर मशीन्स लीं, टायलेट पेपर्स लिए, जिसकी बात मैंने पहले कही, उसकी जानकारी मंत्री जी दें। ...( व्यवधान)
सभापति महोदया : निरूपम जी, अब आप अपनी बात कहिए।
…( व्यवधान)
सभापति महोदया : अब कोई भी शब्द अंकित नहीं होगा।
(Interruptions) …* सभापति महोदया : कुछ रिकार्ड में नहीं जाएगा।
(Interruptions) … * सभापति महोदया : निरूपम जी, आप अपनी बात कहिए।
…( व्यवधान)
सभापति महोदया : अनुराग जी, अब रिकार्ड में नहीं जा रहा है, आप बैठ जाइए।
(Interruptions) …* सभापति महोदया : संजय जी आप शुरू करिए, कुछ और रिकार्ड में नहीं जा रहा है।
(Interruptions) … * सभापति महोदया : केवल संजय जी की स्पीच रिकार्ड में जाएगी।
(Interruptions) …* श्री संजय निरुपम (मुम्बई उत्तर): सभापति महोदया, आपने मुझे इस विषय पर बोलने की अनुमति दी, इसके लिए मैं सबसे पहले आपका आभार व्यक्त करता हूं। हिंदुस्तान में जो कॉमन वेल्थ गेम्स होने वाले हैं, उसके ऊपर पिछले चार घंटे से चर्चा हो रही है और यह चर्चा होना बहुत वाजिब है, बहुत महत्वपूर्ण है। ...( व्यवधान) अनुराग जी हमने आपकी बात सुन ली है। ...( व्यवधान)
सभापति महोदया : संजय जी आप बोलिए, उनकी बात रिकार्ड में नहीं जा रही है। केवल आपकी बात रिकार्ड में जाएगी।
...( व्यवधान)* सभापति महोदया : अनुराग जी, मेरा आपसे विनम्र निवेदन है कि समय के बावजूद आप बोल रहे हैं। आपको सदन का डिस्पिलन रखना चाहिए। आप युवा हैं, आपको सदन का डिस्पिलन सीखना चाहिए।
…( व्यवधान)
श्री संजय निरुपम : मैडम, मैं आडवाणी जी से निवेदन करूंगा कि कृपया अपने माननीय सदस्य को समझाएं कि वे चेयर को इतना डिफाई न करें।...( व्यवधान) मैं अनुराग जी का बहुत-बहुत आभारी हूं कि उन्होंने अपना भाषण सम्पन्न किया। मैडम, मैं आपका भी आभारी हूं कि आपने मुझे बोलने की अनुमति दी।...( व्यवधान)
सभापति महोदया : पार्टी का जितना समय है, हम उससे ज्यादा समय नहीं देते।
…( व्यवधान)
श्री संजय निरुपम : मेरे प्रिय मित्र कीर्ति जी की तरफ से आज यह चर्चा शुरू हुई। हिन्दुस्तान में कामनवैल्थ गेम्स होने वाले हैं। पूरी चर्चा में दो-तीन पहलू निकलकर आए हैं। पहला यह है कि कामनवैल्थ गेम्स की तैयारी पूरी हुई है या नहीं। दूसरा पहलू यह निकलकर आया है कि क्या तैयारियों में किसी प्रकार का घोटाला हुआ है, भ्रष्टाचार हुआ है।...( व्यवधान) तीसरा मुद्दा यह निकलकर आया कि हिन्दुस्तान में कामनवैल्थ गेम्स होने चाहिए या नहीं यानी इसके औचित्य के ऊपर एक प्रश्न खड़ा किया गया।
18.11 hrs. (Shri. Inder Singh Namdhari in the Chair) सभापति महोदय, मैं यहीं से शुरू करता हूं। हमारे देश में लगभग सवा सौ करोड़ लोग रहते हैं और अगर अक्सर ओलम्पिक खेलों में एक भी गोल्ड मैडल नहीं आता तो हमारा सिर शर्म से झुक जाता है और हम यह कहने लगते हैं कि इतने बड़े देश में हम एक गोल्ड मैडल तक नहीं ला सके।...( व्यवधान)
सभापति महोदय : निरुपम जी, आप एक मिनट ठहर जाइए।
मैं सदन से आग्रह करूंगा कि काफी फ्रूटफुल बहस चल रही है। हरेक माननीय सदस्य ने अपने भावों को व्यक्त किया है। दूसरे माननीय सदस्यों की बातों को भी सुनने का टॉलरैंस रखें तो ज्यादा अच्छा होगा।
…( व्यवधान)
श्री संजय निरुपम : मैं इसके औचित्य पर बोल रहा था। हिन्दुस्तान में एक अरसे से इस बात को महसूस किया जाता रहा है कि खेलों को पूरा प्रोत्साहन मिलना चाहिए, खिलाड़ियों को पूरा प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए। अक्सर सदन में भी इसके ऊपर चिन्ता व्यक्त की जाती है कि हमारे देश में इतने अच्छे खिलाड़ी पैदा नहीं हो पा रहे हैं जबकि इतना बड़ा देश और इतनी बड़ी आबादी है। छोटे-छोटे देश, आज भी एक सदस्य हुंडुराज जैसे देश के बारे में बता रहे थे। उन देशों में इतने अच्छे-अच्छे खिलाड़ी होते हैं जबकि हमारे यहां नहीं होते। मैं सबसे पहले इतना कहना चाहूंगा कि हम जनतांत्रिक देश में रहते हैं। सबके पास अपने-अपने विचार हैं, सबको अपना-अपना विचार व्यक्त करने का अधिकार है। मैं स्वयं इस विचार में विश्वास करता हूं कि हिन्दुस्तान जैसे बड़े देश में राष्ट्र मंडल खेलों का आयोजन अवश्य होना चाहिए और जो निर्णय एनडीए के प्रमुख प्रधान मंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी ने लिया, मैं उस निर्णय के लिए एनडीए को बधाई देता हूं, अटल जी को बहुत-बहुत बधाई देता हूं। गरीबी है, यह भी एक मुद्दा है और यह एक बड़ा अच्छा तर्क है। लेकिन इस गरीबी के बावजूद गरीबी से लड़ने का जो कार्यक्रम चल रहा है, उसे जारी रखते हुए इस देश के मान-सम्मान को आगे बढ़ाने के लिए, खेलों को प्रोत्साहन देने के लिए इस प्रकार के भव्य खेल आयोजनों के पक्ष में खड़े रहना चाहिए। यह मेरा अपनी तरफ से पहला सबमिशन है।
दूसरा विषय यह निकलकर आया कि क्या बहुत भ्रष्टाचार हुआ है? पिछले हफ्ते जब शून्यकाल में विषय निकलकर आया, तब मैंने बहुत साफ शब्दों में कहा कि हम भ्रष्टाचार के समर्थक नहीं हैं। अगर खेलों के आयोजन में, स्टेडियम बनाने या पूरा आर्गनाइज़ करने में किसी प्रकार का भ्रष्टाचार हुआ है तो उसकी जांच होनी चाहिए और जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाता है, उसके खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्यवाही की जानी चाहिए। कृपा करके अगर कोई राष्ट्र मंडल खेलों के समर्थन में बोल रहा है तो इसका अर्थ यह न लगाया जाए कि हम उसके भ्रष्टाचार के समर्थन में बोल रहे हैं। ...( व्यवधान)
सुरेश कलमाडी जी मेरे बहुत अच्छे मित्र हैं। मुझे बड़ा गर्व होता है कि पूरे खेलों की आयोजन समिति के चेयरमैन हमारे महाराष्ट्र से आए हुए एक सांसद हैं और वे बहुत सफलतापूर्वक आयोजन कर रहे हैं।
सुरेश कलमाड़ी जी ने खुद कहा कि अगर मेरे ऊपर कोई सही आरोप लगता है, तो मैं हर तरह की जांच के लिए तैयार हूं। इसके बाद भी इतनी बैचेनी, इतना ज्यादा रैसलैसनैस क्यों है? यह किसी एक पार्टी का खेल नहीं है, दिल्ली शहर का खेल नहीं है। यह पूरे देश का खेल है।...( व्यवधान) यह पूरे देश की प्रतिष्ठा से जुड़ा हुआ आयोजन है, इस बात को हमें याद रखना चाहिए। ...( व्यवधान) मैं नम्रता के साथ पहली बात रखना चाहता हूं।
सभापति महोदय, अब भ्रष्टाचार पर चर्चा करते हुए दो-तीन बातें निकल कर आयी हूं। मैं हर बात का जवाब नहीं दे सकता। इसके लिए हमारे यहां अच्छी-अच्छी संस्थाएं हैं। उन संस्थाओं पर मुझे बड़ा गर्व है। सीवीसी, सीएजी पर मुझे बहुत गर्व है। ...( व्यवधान)
सभापति महोदय : संजय जी, मंत्री जी भी कुछ बातों का जवाब देंगे।
…( व्यवधान)
श्री संजय निरुपम : मंत्री जी के बोलने के लिए मैं बहुत कुछ छोड़ दूंगा, लेकिन दो-तीन बातें मैं स्पष्ट करना चाहूंगा। अभी कहा गया कि जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम, जिसका सिर्फ रेनोवेशन होना था, उसके ऊपर 961 करोड़ रुपये खर्च किये गये। मरम्मत के नाम पर 961 करोड़ रुपये खर्च किये गये, मैंने भी सुना, तो चौंक गया। देश में कोई भी व्यक्ति विश्वास नहीं कर सकता कि एक साधारण स्टेडियम की रिपेयरिंग के ऊपर 961 करोड़ रुपये खर्च किये जा रहे हैं। इस पर कोई भी विश्वास नहीं करेगा। निश्चित तौर पर अगर ऐसा हुआ, तो गलत है। लेकिन सच्चाई क्या है, यह मैं बताना चाहूंगा। क्या यह पैसा सिर्फ जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम की मरम्मत के लिए खर्च हुआ? मैंने जब जानकारी हासिल करने की कोशिश की, तो कुछ बातें निकलकर आयीं। जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम जो डिफेंस कालोनी के पास बनकर तैयार है, उसमें एक नहीं तीन स्टेडियम बनकर तैयार हैं। यह पूरा पैसा एक स्टेडियम के ऊपर खर्च नहीं हुआ है। ये तीन स्टेडियम कौन-कौन से हैं, उसे मैं बताना चाहूंगा। इसमें मेन स्टेडियम एथेलेटिक्स स्टेडियम है। एथलेटिक्स स्टेडियम के अलावा दूसरा जो स्टेडियम है, वह वेट लिफ्टिंग ऑडिटोरियम है। इस पूरे प्रिमाइसेज में वह दूसरा स्टेडियम है। ...( व्यवधान)
सभापति महोदय : कृपया व्यवधान न करें।
…( व्यवधान)
श्री संजय निरुपम : मैं बहुत अदब के साथ अपनी बात रख रहा हूं, इसलिए कृपया करके सुना जाये। दूसरा वेट लिफ्टिंग ऑडिटोरियम नया बना है। इसकी रिपेयरिंग नहीं हुई है, बल्कि नया बनाया गया है। यह इस समय लार्जेस्ट थियेटर इन दिल्ली है। इसमें 2300 सिटिंग अरेन्जमैंट की गयी है। इसके नीचे डबल बेसमैंट पार्किंग की व्यवस्था की गयी है जहां तीन-चार हजार कारें एक साथ पार्क हो सकती हैं। यह सिर्फ रिपेयरिंग का हिस्सा नहीं है। मान्यवर, कृपया इस पर गौर करें। इसमें तीसरा स्टेडियम लॉन बॉल्स वेन्यू बना है। यह एक नयी चीज बनी है। ...( व्यवधान) इसके अलावा इसमें क्या बना है? ...( व्यवधान) इसके अलावा इसमें स्पोर्ट्स अथारिटी ऑफ इंडिया ...( व्यवधान)
सभापति महोदय : अनुराग जी, मेरा माननीय सदस्यों से आग्रह है कि जैसे लोग कहते हैं कि 961 करोड़ रुपया रेनोवेशन में खर्च हुआ, तो वह इस बारे में बता रहे हैं, तो आप उसे सुनिये और उसकी काट दीजिए। अगर वह गलत बतायें, तो फिर अपने भाषण में बताइये। यह लोकतंत्र का तरीका है। उनको बोलने नहीं देना, यह उचित नहीं है।
…( व्यवधान)
श्री संजय निरुपम : तीन स्टेडियम्स के अलावा इसमें स्पोर्ट्स अथारिटी ऑफ इंडिया का एक हॉस्टल बनाया जा रहा है। उस हॉस्टल में 150 बेड के क्यूबिकल्स बनाये गये हैं। क्या हॉस्टल बनाने में खर्चा नहीं होगा? ...( व्यवधान)
सभापति महोदयः संजय जी, आप एक मिनट बैठ जाइये। मुंडे जी आप एक बार में ही बोल लीजिए। …( व्यवधान)
श्री गोपीनाथ मुंडे : मैं बीच में नहीं बोल रहा हूं। सभागारों को सच्चाई मालूम होनी चाहिए, इसका जवाब मंत्री जी ही दे सकते हैं। अब यह कार पार्किंग के बारे में कह रहे हैं। मुझे जो जानकारी प्राप्त है, उसके अऩुसार कार पार्किंग बीओटी को दिया है। वह खर्चा 900 करोड़ रुपये से अलग है। ...( व्यवधान) कोई सदस्य आथेंटिकल जवाब कैसे दे सकता है, यह तो मंत्री का काम है। ...( व्यवधान)
सभापति महोदय : लाल सिंह जी, मैं चेयर पर हूं, आप मेरे ऊपर विश्वास कीजिए।
मुंडे जी, आखिर इसका समाधान क्या होगा? आरोप लगे और आरोपों का उत्तर सत्ता पक्ष देगा।
…( व्यवधान)
श्री गोपीनाथ मुंडे : आरोपों का उत्तर मंत्री जी देंगे। ...( व्यवधान) वह क्यों बतायेंगे कि क्या हुआ? ...( व्यवधान)
सभापति महोदय : हर सदस्य को कुछ न कुछ मसाला रखना है, कुछ न कुछ तथ्य रखने हैं।
श्री गोपीनाथ मुंडे : महोदय, मैं कोई आरोप नहीं लगा रहा हूं। लेकिन यह जानकारी मंत्री जी देंगे।...( व्यवधान)
सभापति महोदय : संजय जी, तीन सदस्यों के नाम और भी हैं जो इस विषय पर बोलना चाहता हैं। मैं चाहता हूं कि किसी के दिल में हसरत न रह जाए। आज जल्दी समाप्त कीजिए, फिर मैं मंत्री जी को समय दूंगा ताकि वह सारे तथ्य सदन के सामने रखें।
अब आप कन्क्लूड कीजिए।
श्री संजय निरुपम : अगर इसी शोर-शराबे में कन्क्लूड करना है, तो मैं बैठ जाता हूं। ...( व्यवधान)
सभापति महोदय : चूंकि मंत्री जी को बहुत से तथ्य सामने रखने हैं, इसीलिए मैं ऐसा कह रहा हूं।
श्री संजय निरुपम : चेयरमैन साहब, मुझे आपका संरक्षण चाहिए। अगर विपक्ष के लोगों ने तय किया है कि संजय निरुपम को नहीं बोलने देना है, तो मुझे आपका संरक्षण चाहिए। अगर आप विपक्ष के सदस्यों के हिसाब से चलेंगे और मुझे बैठा देना चाहते हैं, तो मैं बैठ जाता हूं। कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन आपका संरक्षण मुझे चाहिए।...( व्यवधान)
सभापति महोदय : आपको मेरा संरक्षण है, आप दो-तीन मिनट में अपनी बात समाप्त कीजिए।
…( व्यवधान)
श्री मुलायम सिंह यादव : महोदय, ऐसा है ही कि यह हाउस कहीं भाग नहीं रहा है, कल सभी माननीय सदस्य होंगे। कल आप ठीक एक बजे के बाद रिप्लाई करवा दें, हमें लंच नहीं चाहिए। ...( व्यवधान)
सभापति महोदय : आपका सुझाव आया है, माननीय संसदीय कार्यमंत्री जी इस पर स्पीकर से विमर्श करके बताएंगे।
संजय निरुपम जी, आप समाप्त कीजिए।
श्री संजय निरुपम : महोदय, मैं अभी समाप्त नहीं कर पाउंगा।...( व्यवधान)
श्री गोपीनाथ मुंडे : अभी तीन लोग बोलेंगे, फिर मंत्री जी बोलेंगे।...( व्यवधान)
सभापति महोदय : मुंडे जी, कई दिन छुट्टी भी हुई है। हम लोगों ने पांच-छः दिन कुछ नहीं किया।
…( व्यवधान)
श्री शरद यादव : अध्यक्ष जी, मुझे एक मिनट समय दीजिए।...( व्यवधान)
सभापति महोदय : शरद जी, मैं चाहता हूं कि संजय निरुपम जी अपनी बात समाप्त करें, उसके बाद आप बोलें।
…( व्यवधान)
श्री संजय निरुपम : सभपति महोदय, मेरी पार्टी का टाइम 37 मिनट है। अगर अपोजिशन मुझे बोलने नहीं दे रहा है, तो उसके प्रभाव या दबाव में आप न आएं।...( व्यवधान)
सभापति महोदय : मैं पूरा संरक्षण आपको दे रहा हूं। अब आप बोलिए।
श्री संजय निरुपम : महोदय, जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम में तीन स्टेडियम बने हैं, स्पोर्ट्स अथारिटी ऑफ इंडिया का एक हॉस्टल बना है।...( व्यवधान)
सभापति महोदय : दादा, प्लीज आप बैठ जाइए। आप बहुत शरीफ आदमी हैं।
श्री संजय निरुपम : उसके बाद पांचवीं जो बड़ी चीज हुई है, एक नेशनल डोप टेस्टिंग लेबोरेटरी बनाई गयी है, जो एक नई टेक्नोलॉजी के साथ सेट-अप हुई है। इंटरनेशनल के रूल्स एंड रेगुलेशन्स के कंप्लायंस में बनाई गयी है। पूरे स्टेडियम के चारों तरफ जो दीवारें बनी हैं, वह लगभग साढ़े तीन किलोमीटर लंबी हैं और यह बुलेटप्रूफ दीवार है। इस दीवार पर कितना खर्च होता है, उसे समझा जाना चाहिए। फिर भी ये बातें कहने के बाद मैं यह नहीं कह रहा हूं कि सारी चीजें जस्टीफाइड हैं, सीवीसी एवं सीएजी को छानबीन करने का हक है। इसमें अगर कुछ भी गलत हुआ है, तो निश्चित तौर पर एक्शन लिया जाना चाहिए। यही मेरा निवेदन है।
दूसरी बात इंदिरा गांधी स्टेडियम के सन्दर्भ में बताई गयी कि 669 करोड़ रुपए इसके रेनोवेशन पर खर्च हुए हैं। इस स्टेडियम में भी तीन स्टेडियम बनाए गए हैं। दो नए स्टेडियम बनाए गए हैं और पुराने स्टेडियम की सिटिंग वगैरह सब कुछ नया बनाने को सिर्फ रेनोवेशन और मरम्मत का नाम नहीं दिया जा सकता है।...( व्यवधान)
सभापति महोदय : संजय जी, क्या आप इन चीजों को खुद देखकर आए हैं।
…( व्यवधान)
श्री संजय निरुपम : अगर आप चाहें तो मैं आपके साथ देखने के लिए फिर से चलने को तैयार हूं।...( व्यवधान)
सभापति महोदय : आपने देखा है या नहीं?
श्री संजय निरुपम: मैंने एक शब्द इस्तेमाल किया है "फिर से। " उसका अर्थ आप समझ सकते हैं। अगर आप चाहें, मैं आपको लेकर फिर से चलता हूं।...( व्यवधान)
सभापति महोदय : मैं जो पूछा रहा हूं, उसका उत्तर क्या है? क्या आपने इन कामों को देखा है?
…( व्यवधान)
श्री संजय निरुपम: मेरा स्टेटमेंट आपके सामने है। अगर आप चाहें तो मैं फिर से आपके साथ चलने को तैयार हूं।...( व्यवधान) अगर " फिर से " शब्द का अर्थ किसी को समझ में नहीं आ रहा है, तो इसके लिए मैं बहुत दुख महसूस करता हूं।...( व्यवधान)
चौधरी लाल सिंह (उधमपुर): महोदय, मैं जानना चाहता हूं कि ये लोग जो बोल रहे थे, क्या ये लोग देखने गए थे?
सभापति महोदय : अनुराग जी, आपसे आग्रह है कि आपने आज बड़ा अच्छा भाषण दिया है। थोड़ा सा शांत रहेंगे तो उसमें चार चांद लग जाएंगे इसलिए बीच में टोका-टाकी न करें। संजय जी, अब आप कृपया अपनी बात समाप्त करें।
श्री संजय निरुपम: सभापति महोदय, अभी तो मैंने शुरू किया है। मैं ज्यादा विवाद में नहीं पड़ना चाह रहा था, लेकिन मैं क्लेरिफिकेशन के हिसाब से अपनी बात यहां कह रहा हूं। कीर्ति भाई ने अपनी बात जब कह रहे थे, तो पूरी डिबेट को वह टॉयलट पेपर तक ले गए। उन्होंने कहा कि अगर आप वहां जाएंगे तो टॉयलट जरूर जाएं और टॉयलट पेपर देखना जो कि 4,000 रुपए में खरीदे गए हैं। मैंने भी टॉयलेट पेपर का हिसाब-किताब निकाला, वह 3,751 रुपए में एक कार्टन खरीदा गया, जिसमें 100 पैकेट आते हैं। अगर 100 पैकेट की कीमत 3751 रुपए है, तो एक रोल की कीमत 37 रुपए 51 नए पैसे हुई। मैंने पूरी दिल्ली की मार्केट में इस समय इसका क्या भाव चल रहा है, यह पता लगाने की कोशिश की। दिल्ली में सदर बाजार में इस समय मिस्टिक नाम के टॉयलट पेपर का एमआरपी 40 रुपए है। गोल मार्केट में जो यूप्लैक्स है, वह 50 रुपए का है और विनटैक्स के टॉयलट पेपर का एमआरपी 30 रुपए है। खान मार्केट में क्लासिक नाम के टॉयलट पेपर का एमआरपी 45 रुपए प्रति रोल है। इसके बावजूद अगर 37 रुपए 50 नए पैसे में किसी ने खरीदा तो आप उसमें घोटाला देखना चाहते हैं, तो बेशक देखिए। बेशक सी एंड एजी को इसकी छानबीन करने का हक है। मैं अपनी तरफ से यह बात कह रहा हूं।
सभापति महोदय: अब आप अपनी बात समाप्त करें।
श्री संजय निरुपम : सभापति महोदय, अगर आप ऐसे डिस्टर्ब करेंगे तो मैं बैठ जाता हूं।
सभापति महोदय: मैंने आपको 15 मिनट दिए हैं।
श्री संजय निरुपम : मेरे पास 37 मिनट हैं। आप हमारे संरक्षक हैं। अगर आप संरक्षण नहीं करेंगे तो मैं क्या उनसे संरक्षण मांगू। बार-बार यह कहा गया कि अभी तक तैयारी पूरी नहीं हुई है।
सभापति महोदय: मंत्री जी जो जवाब देंगे, वह भी उसी समय में जाएगा। आपने विस्तार से अपनी बातों को यहां रखा है इसलिए आप अपनी बात समाप्त करें।
श्री संजय निरुपम : मैं दो-तीन बातें कहकर अपनी बात समाप्त करूंगा। यह बात बार-बार कही गई कि तैयारी पूरी नहीं हुई है। मैं कहना चाहता हूं कि 1 अगस्त, 2010 डेडलाइन थी हैंडओवर करने की और 18 में से 17 स्टेडियम्स कामनवैल्थ गेम्स आर्गेनाइजेशन कमेटी को ऑलरेडी हैंडओवर हो चुके हैं। मैं इनमें से एक-दो स्टेडियम्स के बारे में कहना चाहूंगा। त्यागराज स्टेडियम बना है, उस पर 297 करोड़ रुपए खर्च होने थे, जबकि उसे 248 करोड़ रुपए में ही पूरा कर दिया गया। उसका 100 प्रतिशत काम पूरा हो गया है और वह आर्गेनाइजेशन कमेटी को हैंडओवर कर दिया गया है। आप बताएं कि क्या इसमें कोई घोटाला दिखाई दे रहा है? इसी तरह से एक छत्रसाल स्टेडियम है, जिसका पूरा 100 करोड़ रुपए का बजट था, लेकिन वह 67.55 करोड़ रुपए में पूरा करके हैंडओवर किया जा चुका है। तीसरा लुडलो कैसल स्टेडियम है। उसका पूरा बजट 20 करोड़ रुपए था, वह 11 करोड़ 99 लाख रुपए में पूरा करके हैंडओवर किया जा चुका है। चौथा स्टेडियम तालकटोरा स्टेडियम है। ...( व्यवधान)
सभापति महोदय: लाल सिंह जी, आप क्यों खड़े हो रहे हैं, आप बैठ जाएं। मि. संजय निरुपम, अगर आप आसन की बात नहीं मानेंगे तो फिर समय को चलाना मुश्किल हो जाता है। मैंने आपको पर्याप्त समय दिया है।
श्री संजय निरुपम: सभापति जी, मैं आपका पूरा आदर करता हूं और बड़ी विनम्रता से कह रहा हूं कि अगर विपक्ष ने यह ठान लिया है कि संजय निरुपम को नहीं बोलने देना है तो उस दबाव या प्रभाव में आएंगे तो मुझे बहुत दुख होगा। मुझे अपनी बात कहने दें, मैं एक-एक करके अपनी बात कह रहा हूं। मैंने कोई गलत बात नहीं कही है। अगर मेरी एक भी बात असत्य है तो जो सजा मुझे देनी है, वह आप दे दें। जो मुझे तथ्य लग रहा है और सत्य लग रहा है, वह मैं आपके सामने रख रहा हूं।
सभापति महोदय: ऐसा नहीं होता है। आसन के पास समय की बाध्यता होती है इसलिए कृपया आप अपनी बात समाप्त करें। मंत्री जी भी जवाब देंगे।
श्री संजय निरुपम : मेरे पास 37 मिनट हैं और मैं पूरे 37 मिनट नहीं बोल पाया हूं।
दिल्ली सरकार को जो स्टेडियम बनाने थे, उसमें तालकटोरा स्टेडियम का पूरा खर्च 150 करोड़ रुपये होना था वह 80 करोड़ में सौ प्रतिशत काम पूरा करके हैंड-ओवर किया जा चुका है। शिवाजी स्टेडियम का पूरा खर्च 180 करोड़ होना था वह 70 करोड़ रुपये में 72 प्रतिशत काम पूरा करके दे दिया गया है।
सभापति महोदय : निरुपम जी, मैंने माननीय दूसरे सदस्य का नाम ले लिया है आपसे आग्रह है कि आप अब कंक्लूड कीजिए।
श्री संजय निरुपम : माननीय शरद यादव जी ने परसों एक बात कही थी कि कॉमनवैल्थ के नाम पर सिर्फ दिल्ली के संभ्रांत इलाकों का विकास हो रहा है, आजू-बाजू के इलाकों का भी विकास नहीं हो रहा है। मेरे पास पूरी लिस्ट पड़ी हुई है, थोड़ा धीरज रखिये।
सभापति महोदय : निरुपम जी, धर्मों रक्षति रक्षितः। अगर आप आसन का सम्मान करेंगे तो आपका सम्मान बढ़ेगा। मैं आपसे आग्रह करता हूं कि आपने बहुत तथ्य रख दिये हैं, माननीय मंत्री जी को भी बहुत तथ्य रखने हैं, दूसरे माननीय सदस्यों को भी बोलना है, वह भी मेरे लिए बाध्यता है, आप बैठ जाइये।
श्री संजय निरुपम : सभापति जी, मैं आपके प्रति पूरा सम्मान रखता हूं, मेरे पास जो वक्त है, जो मेरी पार्टी ने मुझे मौका दिया है, उसके हिसाब से मैं अपनी बात रख रहा हूं।
सभापति महोदय : आपने बहुत तथ्य रखे हैं, आप अब कंक्लूड कर दीजिए, मेरी मजबूरी देखिये।
श्री संजय निरुपम : अभी पूरी दिल्ली में कहां-कहां काम चल रहा है, पूरा हो गया है। आपने कहा था कि अगर संभ्रांत इलाके से बाहर पूरी दिल्ली में कहीं डिवेलपमेंट हो रहा होगा तो मैं रिजाइन कर दूंगा। आप रिजाइन मत कीजिएगा, आप यहीं रहियेगा। लेकिन पूरी दिल्ली से बाहर लगभग 65 जगहों पर डिवेलपमेंट का काम चल रहा है, जिसमें गीता कॉलोनी में ब्रिज बन रहा है,...( व्यवधान) आईटीओ चुंगी बन रही है, आरआर कॉलोनी में...( व्यवधान) शास्त्री नगर पुस्ता बन रहा है, पीजे मार्ग...( व्यवधान) नेल्सन मंडेला मार्ग, विवेकानंद मार्ग बन रहा है। ...( व्यवधान) तमाम जगह डिवेलपमेंट का काम हो रहा है। देश के सम्मान की बात हो रही है, देश की गरिमा की बात हो रही है। इस पूरे आयोजन के ऊपर बार-बार संदेह और शक प्रकट करके, किसी को दोषी साबित करने का प्रयत्न करके, साजिश करके आप और कुछ नहीं कर रहे हैं, पूरी दुनिया में भारत का नाम खराब कर रहे हैं। आने वाले दिनों में कॉमनवैल्थ गेम पूरे मान-सम्मान के साथ हो, सफलतापूर्वक हो, 8000 खिलाड़ी पूरी दुनिया से आयें, अच्छे ढंग से खेलें, मैडल लेकर जाएं। आराम से, शांति से पूरा खेल हो, अच्छी सिक्योरिटी की व्यवस्था हो जाए, उनके रहने की अच्छी व्यवस्था हो जाए। खेलों के बीच सौहार्द्रपूर्ण वातावरण में खेल संपन्न हों। इसके लिए मैं निवेदन करुंगा कि दो महीने के अंदर शांति रखी जाए और इस शांति के बाद फिर भी कोई घोटाला होता है तो उसकी छानबीन होगी, ऐसा खुद हमारे जयपाल रेड्डी जी ने परसों सदन में और सदन के बाहर कहा कि अगर कुछ गलत होता है तो हम सीबीआई इंक्वायरी के लिए तैयार हैं। सरकार किसी भी प्रकार की छानबीन के लिए तैयार है, सरकार ट्रंसपेरेंसी में विश्वास रखती है। पूरे शैडय़ूल्ड के साथ यहां पर सारे स्टेडियम बन रहे हैं। ...( व्यवधान)
सभापति महोदय :अब कुछ भी रिकार्ड में नहीं जाएगा। ...( व्यवधान)*
श्री पवन कुमार बंसल : जब मैं कुछ चंद मिनटों के लिए हाउस में उपस्थित नहीं था तो मुझे बताया गया कि माननीय मुलायम सिंह जी ने आपसे आग्रह किया कि इसका जवाब कल दिया जाए। उसके बाद मैंने माननीय आडवाणी जी से, शरद यादव जी से, मुलायम सिंह जी से, मुंडे जी से सभी से विचार-विमर्श किया और मैं आपको बताना चाहता हूं कि आज इसपर चर्चा समाप्त हो जाए, इसका जवाब मंत्री महोदय कल देंगे। कल पहले बिल लेकर, उसके बाद समय हुआ तो दूसरी चर्चा शुरु कर लेंगे। अगर समय नहीं हुआ तो उसे परसों ले जाएंगे।
श्री मनोहर तिरकी (अलीपुरद्वार): सभापति महोदय, राष्ट्र मंडल खेलों की तैयारी के विलम्ब में हो रही चर्चा में आपने मुझे भाग लेने का अवसर दिया उसके लिए मैं आपका आभारी हूं। यह हमारे देश की प्रतिष्ठा का विषय है और हमारे देश की इज्जत दांव पर लगी है। इन खेलों के आयोजन में चोरी और घोटाले की बात सामने आ रही है। वर्ष 2003 में इन खेलों का आयोजन भारत में कराने का निर्णय लिया गया था। आज वर्ष 2010 चल रहा है, लेकिन तैयारियां पूरी नहीं हैं। एक राजनीतिक लड़ाई चल रही है। हमारे देश की प्रतिष्ठा, मर्यादा नष्ट होने जा रही है। हम गांव में रहते हैं। टीवी के माध्यम से लोग खेल देखते हैं। उन्हें मालूम नहीं है कि ये खेल होंगे या नहीं होंगे? प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को देश की जनता बहुत सम्मान देती है, लेकिन ये घोटाले सामने आ रहे हैं। सरकार क्या कर रही है? जेपीसी द्वारा इसकी जांच होनी चाहिए और एक स्वच्छ विचार देश की जनता के सामने आना चाहिए। जनता के पास मैसेज जाना चाहिए कि हमारी सरकार जो काम कर ही है, वह ठीक है। दोषी आदमियों को सजा दी जाए। हमारे खिलाड़ियों की क्या कमजोरियां हैं, हम कैसे अपने खेलों में सुधार ला सकते हैं, इन विषयों पर हमने चर्चा नहीं की है। कैसे हमारे खिलाड़ियों की उन्नति हो, इस बारे में हमने सोचा नहीं है और दूसरे कार्यों में उलझे हुए हैं। देश के घोटालों की हर जगह चर्चा हो रही है। देश में दूसरी भी कई समस्याएं हैं जैसे बिजली, पानी, महंगाई इत्यादि।
लोगों को पता चला कि खेलों में इतनी धांधली हुई है, तो शर्म से हमारा सिर झुक जाता है। देश के गांवों के जो खेल हैं, हम उनको इन्क्लूड नहीं करते हैं - जैसे कबड्डी। यह हमारे देश के सम्मान का मामला है कि देश में खेलों का आयोजन सही ढंग से हो। जब हम दिल्ली की सड़कें देखते हैं, तो टूटी सड़कें दिखाई देती हैं। वाहनों के चलने में असुविधा है। हर जगह जाम लगा रहता है। सरकार को ध्यान रखना चाहिए कि देश का सम्मान बढ़े। इस संबंध में मैं अर्ज करूंगा कि आयोजक कमेटी बहुत जिम्मेदार कमेटी है। घोटालों की जांच करने के लिए ज्वायंट पार्लियामेंट कमेटी बनाई जाए।
इन्हीं बातों के साथ मैं आपको धन्यवाद देते हुए अपनी बात समाप्त करता हूं।
श्री राधे मोहन सिंह (ग़ाज़ीपुर):सभापति महोदय, आपने मुझे राष्ट्र मंडल खेलों की चर्चा में भाग लेने की अनुमति दी, इसके लिए मैं आपके प्रति आभार व्यक्त करता हूं। आज सदन के अंदर राष्ट्र मंडल खेलों की तैयारियों के बारे में चर्चा हो रही है कि क्या ये खेल सफलता से हो पाएंगे या नहीं? सदन के माध्यम से मैं एक महत्वपूर्ण बात के लिए खेल मंत्री श्री एम.एस. गिल को बधाई देना चाहता हूं। मैं इसलिए बधाई देना चाहता हूं क्योंकि जब हमारी कोई पहचान नहीं थी, मैं सदन का सदस्य नहीं था, तो अखबारों के माध्यम से एक ऐसे व्यक्ति को खोजा, जो 20 सालों से गांव में हाकी के उन्नयन, हाकी के विकास के लिए, रेसलिंग के लिए एक लम्बे अर्से से लगा हुआ था।
यह पहली बार तब हुआ जब कैबिनेट का एक खेल मंत्री उस गांव के रहने वाले आदमी को जिसने कभी शहर को नहीं देखा है, लखनऊ को नहीं देखा है, इन्होंने अंग्रेजी अखबार के माध्यम से, उनका नम्बर लेकर उस आदमी को फोन करके बात किया कि आप खेलों के विकास के लिए इतना सब कुछ कर रहे हैं, इसके लिए बधाई और इसके लिए उन्होंने कोच तक नियुक्त किया। मैं इस पर भी बधाई देना चाहता हूं। वहां के लिए एक एस्ट्रो टर्फ की मांग थी जिसके लिए एम.एस.िगल साहब ने एस्ट्रो टर्फ देने की बात को बहुत गंभीरता से लिया। इससे अच्छी और कोई जगह नहीं हो सकती जहां पर मैं उन्हें इस कार्य के लिए बधाई दूं कि गांव की पीड़ा को एक कैबिनेट स्तर का मंत्री जो कि जानता नहीं था और अखबारों के माध्यम से उस व्यक्ति को बधाई दे। मैं चाहता हूं कि सदन इस बात के लिए इन्हें धन्यवाद दे।
दूसरी बात जो सही यह है कि आज जो चर्चाएं हैं, कहा जा रहा है कि कनॉट प्लेस में जिस टमाटर का दाम 20 रुपये किलो है तो उस टमाटर को नोएडा में खरीदने जाएं तो उसी की कीमत 1000 रुपये होगी और उसी टमाटर को राष्ट्र मंडल खेलों के हिसाब से खरीदा जाए तो उसकी कीमत 20000 रुपये होगी। सवाल यह है कि आम आदमी यह समझ रहा है कि इसमें इतनी बड़ी गड़बड़ी हो रही है। देश के गरीब का पैसे का नुकसान हो रहा है। इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि बिना आग के धुंआ नहीं निकल सकता। किसी न किसी बिन्दु पर भ्रष्टाचार, अनियमितता तो है जिसके बारे में बौद्धिक वर्ग से लेकर आम आदमी तक समझता है कि कहीं गड़बड़ी है। समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश यादव जी ने एक मामला रखा था कि इसमें एक लाख करोड़ रुपये खर्च हुआ। लेकिन यह कहकर उन बातों को गुमराह किया जा रहा है। अब तो मुझे यह कहने में भी अफसोस हो रहा है कि आंकड़े आंकड़े रह गये हैं कि यह सिर्फ फर्जी बयानबाजी रह गई है। जब हम चुनाव लड़ने जाते हैं और चुनाव में एक एम्बैसडर भी खरीदते हैं तो उसको चुनाव खर्च में ही लेते हैं कि चुनाव के बीच में ही हमने गाड़ी खरीदी। जब शादी के समय जो शादी ब्याह में दहेज का जो देना-लेना अलग होता है लेकिन लड़की वाले अपने घर में भी अपने इस्तेमाल के लिए भी सामान खरीदते हैं या अपने दरवाजे की जो सफाई करवाते हैं यह तमाम खर्च कहा जाता है कि यह शादी का खर्च है। दिल्ली में कहा जा रहा है कि एक लाख करोड़ रुपये का खर्च है, ऐसी बयानबाजी हो रही है। मैं तो कह रहा हू कि मैट्रो की तुंत आवश्यकता क्यों पड़ गई? आज एरोड्रोम को तेजी से ठीक क्यों कराया जा रहा है? यमुना के बारे में क्यों तेजी से बात की जा रही है? रोड को इतनी तेजी से क्यों बनाया जा रहा है? यह कौन सी अर्जेंसी पड़ गई कि इन सब कामों में इतनी तेजी की गई? मैं कहूंगा कि जो विलम्ब हुआ है, यह विलम्ब अधिकारियों द्वारा जानबूझकर किया गया है। मेरा कहना है कि यह विलम्ब इसलिए हुआ है कि कम समय में ठेकेदारों को ज्यादा लाभ पहुंचाया जा सके। इस विलम्ब के माध्यम से एक लाख करोड़ रुपये की बातों को बाजीगरी से नहीं भुलाया जाना चाहिए। एक तरफ हम कहते हैं कि विदेशों की तर्ज पर भारत को लिया जाना चाहिए। अमेरिका का प्रधानमंत्री जब कभी यदि ऐसे दुष्कर्म में फंस जाता है तो वह भी स्वीकार कर लेता है कि मेरा किसी से यौनिक संबंध है या किसी तरह के संबंध हैं और इस देश के अंदर यह होता है कि जब भ्रष्टाचार का मामला किसी के ऊपर लगता है तो पार्लियामेंट में पक्ष और विपक्ष इस मामले में खड़ा हो जाता है कि हमें अपनी पार्टी का बचाव करना है जबकि वह पार्टी का बचाव नहीं करते हैं बल्कि वे इस देश के तमाम गरीबों के पैसे को बर्बाद करते हैं।
श्री ए.टी. नाना पाटील (जलगांव):सभापति महोदय, आपने मुझे इस महत्वपूर्ण विषय पर बोलने का मौका दिया, इसके लिए मैं आपका हृदय से आभार व्यक्त करता हूं। राष्ट्रमंडल खेलों की तैयारियों में अत्याधिक विलम्ब हो रहा है। इसमें लगाई गई धनराशि के दुरुपयोग, भ्रष्टाचार एवं अन्य कदाचार के आरोप न केवल राष्ट्र के गौरव और अस्मिता से जुड़े हुए हैं, अपितु इस प्रकार के अंतर्राष्ट्रीय आयोजन करने में भारत की योग्यता और सामर्थ्य पर भी प्रश्नचिह्न लगाते हैं। राष्ट्रमंडल खेलों के आयोजन का जिम्मा हमें वर्ष 2003 में एनडीए की सरकार के समय में मिल गया था। परंतु आज 2010 चल रहा है अर्थात हमारे हाथ में सात साल थे। लेकिन इन सात सालों में हम कुछ नहीं कर पाये और आखिरी दौर में सारे काम करना चाहते हैं, चूंकि काम समय पर खत्म नहीं हो पाया। इसलिए आखिरी वक्त में सारे काम जल्दबाजी में किये जा रहे हैं और सभी जगहों से इसमें भ्रष्टाचार की खबरें आ रही हैं। सदन में जो आंकड़े बताये गये हैं, वैसे चार्टर्ड एकाउंटैंट जैसे सब आंकड़े मेरे पास भी हैं। लेकिन मैं सदन का ज्यादा समय नहीं लेना चाहता हूं। परंतु मैं आपके ध्यान में लाना चाहता हूं कि मंत्री महोदय ने 11494 करोड़ का खर्चा बताया है और सी. ए. जी. ने 12884 करोड़ रुपये का खर्चा बताया है। कहने का मतलब है कि लगभग 1200 से 1500 करोड़ रुपये का खर्चा हुआ है। मैं समझता हूं कि इसके लिए भी एक संसदीय जांच कमेटी बैठाई जाए।
मैं एक और महत्वपूर्ण सवाल पूछना चाहता हूं कि राष्ट्रमंडल खेलों के जो टिकट निर्धारित किये गये हैं, उन टिकटों की बिक्री के माध्यम से सीएंडएजी ने बताया है कि लगभग 1780 करोड़ रुपये का रेवेन्यू जमा होना चाहिए। लेकिन आज माननीय मंत्री महोदय ने इससे पहले एक सवाल के जवाब में बताया था कि इन्होंने जो टिकट मीडिया और एडवरटाइजमैन्ट के माध्यम से बेचे हैं, उनसे आज तक लगभग 264.06 करोड़ रुपये का रेवेन्यू प्राप्त हुआ है। जबकि सी.ए.जी. ने 1780 करोड़ रुपये बताये हैं। लेकिन हमें 264.06 करोड़ रुपये मिले हैं। इस तरह से हमें इतनी कम लागत मिल रही है। हम जानना चाहते हैं कि किस वजह से हमें इतना कम रेवेन्यू मिला है? आखिर क्या वजह है कि हम लोग इतना रेवेन्यू जमा नहीं कर पा रहे हैं या लोग हमारे खेलों को देखने के उत्सुक नहीं हैं। हमने 961 करोड़ रुपये रेनोवेशन पर खर्च किया है। क्योंकि माननीय सदस्य ने बताया है कि आज तक ऐसा स्टेडियम किसी ने कहीं पर नहीं बनाया है जैसा इन्होंने या अन्य किसी और ने भी नहीं देखा है। हम जानना चाहते हैं कि ऐसा कौन सा स्टेडियम है जो इतना अच्छा होते हुए भी हम टिकटों के माध्यम से उतना रेवेन्यू जमा नहीं कर पाये हैं, जबकि कई गुणा रेवेन्यू हमें जमा करना चाहिए था। लेकिन यह 10 परसैन्ट भी जमा नहीं हुआ है। हमारी मांग है कि संसदीय कमेटी के माध्यम से इसकी जांच कराई जानी चाहिए।
हमारे वरिष्ठ साथियों ने सदन में सारे आंकड़े कोट किये हैं। रेनोवेशन में इतना ज्यादा खर्चा हुआ है, मैं उस बात को दोहराना नहीं चाहता हूं। मगर आज जो स्टेडियम बन नहीं पाये है, उनके कारण खेल को कितना नुकसान होता है, वह मैं बताना चाहता हूं। मैं भी एक छोटा खिलाड़ी रहा हूं। हमारे मित्र श्री अनुराग ठाकुर स्टेट और नेशनल लैवल पर खेले हैं, मगर मैं स्टेट लैवल पर खेला हूं। खेलों में भाग लेने के लिए एक खिलाड़ी अपनी जान लगाता है, बहुत मेहनत करता है। खिलाड़ी अपने एरिया, अपने देश के लिए जीतने के लिए बेहिसाब मेहनत करता है। लेकिन उन खिलाड़ियों के लिए हम कुछ नहीं कर पाये हैं। ऐन मौके पर जब खेल होने वाले हैं, तब हमारे स्टेडियम्स तैयार हो रहे हैं। इस कारण हमारे खिलाड़ियों को ट्रेनिंग और स्टडी के लिए भी कुछ वक्त नहीं मिला है। हम इन स्टेडियम्स पर देश का इतना रेवेन्यू खर्च कर रहे हैं, लेकिन इतना पैसा खर्च करने के बाद हम देश के नौजवानों और खिलाड़ियों को ट्रेनिंग भी नहीं दे पाये हैं, जिसके कारण उनके खेल की गुणवत्ता पर असर हो सकता है। यह हमारा बहुत बड़ा लॉस है। हमारे पास सात साल का समय होने के बाद भी हम उपरोक्त कामों को पूरा नहीं कर पाये हैं।
सभापति महोदय, मैं आपके सामने एक उदाहरण देना चाहता हूं कि वर्ष 2012 में लंदन में ओलम्पिक गेम्स होने वाले हैं।
जब लंदन में वर्ष 2010 में पूरे स्टेडियम तैयार हैं, वहां सारे खिलाड़ी ट्रेनिंग ले रहे हैं, तो फिर हमारे पास वर्ष 2003 से लेकर वर्ष 2010 तक सात साल थे, हम लोग कुछ नहीं कर पाये। सरकार कहती है कि हमने बहुत अच्छा काम किया है।
सभापति महोदय, मैं आपके माध्यम से सरकार से विनती करता हूं कि इस मामले की कड़ी से कड़ी जांच संसद की संयुक्त समिति के द्वारा होनी चाहिये।
SHRI CHARLES DIAS (NOMINATED): Mr. Chairman, I am thankful to you for allowing me to speak on the subject.
The Commonwealth Games which is scheduled in October is no doubt the biggest sports event ever planned in our country. These Games are definitely intended to encourage our youngsters to aim and participate in bigger sports events. Our country in its milestone of progress is making all efforts to grow in every field and sports is one arena where athletes and players have to be excelled. The so called delay in the preparations of Games have to be looked into.
In the enthusiasm to criticize the Government some people have now come out with lots of accusations and complaints against the Games Committee and the chief organizers of the Games. Before lashing out our criticism my suggestion to the people who criticize the conduct of Games is to have a realistic evaluation of the works completed and the works in progress.
I cannot justify the act of anyone if there is purposeful negligence on the part of organizers and the incorrect financial dealings or in the allocation or handling of works.But the works completed to add infrastructure development in Delhi cannot be neglected. The Metro Railway, new roads, power-plants, flyovers, stadiums, beautification works and buildings add to the convenience of all.
The Commonwealth Games have to be looked into as a matter of concern for the whole country and not as a weapon to attack the Government or the Organizers. The culprits, if any, are to be dealt with strictly. At the same time, this is the time to render our support for the successful conduct of the games in an orderly manner.
*SHRI PRASANTA KUMAR MAJUMDAR (BALURGHAT) : Respected Chairman Sir, I was fortunate enough that I could watch the Asian Games for one long month in the year 1982 and could also see how our country earned laurels and praise by hosting the Games. Not a single newspaper had criticized the preparation of Games at that time. Even the foreign media were very happy with the Asiad. All the departments had an extremely well-organized role to play and the coordination among various departments was an example to follow. Officers like Kiran Bedi had worked excellently in order to ensure smooth functioning of the Games.
The same Government is in power today; the same party Congress is at the helms of affairs. So doesn’t it know that very good coordination among concerned departments is necessary to hold successful events? It does know. Then why are the basic tenets of coordination and cooperation missing? Should we think that there are contradictions within the party? Or has there been qualitative deterioration? Is the Congress party now full of unscrupulous elements?
Secondly sir, What we see today? We see that the media is completely against the shoddy show which the Government is trying to put up. No newspaper or television channel has ever praised the preparation of Games. Sometimes, they have criticized the substandard work done by CPWD ; sometimes they have shown that the stadia are leaking, tiles are becoming loose. Street-scaping is also not complete, roads are yet to be metalled, law quality construction materials are being used. To say clearly, the quality of work is extremely poor. All these things have been highlighted by the media.
I do not know whether embezzlement of funds has really taken place or not, whether lakhs of rupees have been misappropriated or not but I am sure, some * English translation of the speech originally delivered in Bengali.
irregularities are definitely there. People with vested interests are trying to hoodwink the system. They have infact earned huge profits through dubious means in the name of preparation of the Games. These corrupt people must be identified after a proper enquiry and punished strictly. Common people’s hard-earned money is at stake. If a JPC is constituted, only then the truth can be unearthed. Otherwise, the image of the country as well as this august House will take a severe beating. Kindly keep this in mind.
One more thing I’d like to mention here. The members of the Organizing Committee must be knowledgeable enough. They should know much about the Games. So they should also know that if stadia are not complete in time, if players’ equipment do not reach timely, if Indian coaches are not roped in properly then the Games cannot be held successfully and our aim of raising the standard of sports in this country through the Commonwealth Games will never be achieved.
We have seen how China had prepared for their mega sporting event; how 8 months before the Olympics, everything was finished, all the infrastructures were ready. Their players, athletes and other sportspersons were able to practice in their hometurf for quite a long time and so in the final events, came out with spectacular results.
But what happened in India? The sports complexes will be handed over only in the end of August or mid-September. Then how much time will be left for our participants to practice? If the organizers do not know all these things, why are they dictating terms? Why are they members of the expert committees? What are their roles? If such inefficient office-bearers are deciding everything then how can sporting activities in India develop? How can the sportsmen be encouraged to win medals for the country? These question must be addressed.
In the end I once again demand probe by a Joint Parliamentary Committee in order to reveal the actual facts and figures in these regards and thank you for allowing me to participate in this debate.
श्री रामकिशुन : महोदय, मेरा लिखित भाषण है। अगर संभव हो सके तो मुझे अपना लिखित भाषण ले करने की इजाजत दी जाये।
सभापति महोदय : यह मर्यादा है। मैंने कह दिया कि आखिरी वक्ता हैं, इसलिए आखिरी ही रहने दीजिये तो ज्यादा अच्छा होगा।
श्री रामकिशुन : महोदय, मैं आपसे अनुरोध करता हूं।
सभापति महोदयः आप अपना लिखित भाषण ले कर दीजिये। वह प्रोसीडिंग्स में आ जायेगा।
*श्री रामकिशुनः ओलंपिक खेल, एशियाड खेल अथवा राष्ट्रमंडल खेलों जैसे बड़े खेलों का आयोजन मिलना अथवा करना, किसी भी देश के लिए तथा उस देश के नागरिकों के लिए गौरव का विषय होता है । परंतु इस बार जो देश में राष्ट्रमंडल खेलों का आयोजन किया जा रहा है, वह अपने खेलों के आयोजन के लिए चर्चा में नहीं हैं और न ही खिलाड़ियों की तैयारियों के लिए ही अथवा देश को कितने पदक मिलने का अनुमान है, उसके लिए, अपितु इन खेलों के आयोजन में जो व्यापक स्तर पर भ्रष्टाचार अथवा घोटाले हो रहे हैं, उनके कारण ज्यादा सुर्खियों में है । यह बड़े ही दुख और शर्म की बात है । देश-विदेश में राष्ट्र की छवि लगातार धूमिल होती जा रही है । पिछले कई महीनों से अखबार और टेलीविजन इन खेलों के आयोजन में हो रही धांधलियों के चलते खबरें आ रही हैं । इससे सदन और सांसदों का चिंतित होना लाजमी है ।
राष्ट्रमंडल खेलों में भ्रष्टाचार की बुनियाद आयोजकों ने तभी डाल दी थी जब वर्ष 2003 में भारत को दिल्ली में राष्ट्रमंडल खेल आयोजित किए जानेकी जिम्मेदारी मिली । आयोजकों तथा खेलों से संबंधित सभी लोगों ने इसमें अपनी कमाई का सपना पाल रखा था ।
इन खेलों के आयोजन हेतु करीब 900 करोड़ रुपयों का प्रावधान किया गया था जो कि आज बढ़कर करीब एक लाख करोड़ हो गया है, फिर भी आयोजन समय पर कराने में शंका बनी हुई है । यह सब केंद्र सरकार की ठीक नाक के नीचे हो रहा है और केंद्र सरकार मूक दर्शक बनी हुई है, बिल्कुल राष्ट्रमंडल खेलों के दर्शकों की भांति । कोई भी मामला ले लीजिए, चाहे खेलों में स्टेडियमों, पुलों, सड़कों का घटिया निर्माण हो, चाहे उपकरणों की खरीददारी हो, चाहे कम्पनियों के साथ विभिन्न प्रकार के मामलों में अनुबंध किए गए हों, सभी मामलों में भ्रष्टाचार की बू आती है । यह सब मैं अपने मन से नहीं कह रहा हूं, यह केंद्र सरकार की विभिन्न एजेंसियों की रिपोर्ट के हवाले से तथ्यों का पता लगाया जा सकता है । केंद्रीय सतर्कता आयोग, नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक और प्रवर्तन निदेशालय के साथ-साथ विदेश मंत्रालय को भी हस्तक्षेप करना पड़ा है ।
सबसे बेशर्मी की बात तो यह है कि दिल्ली सरकार के मुख्य मंत्री, मंत्री और आयोजन समिति के प्रमुख श्री सुरेश कलमाडी जी, जिन्हें कि अध्यक्ष जी अपना नाम बदल कर सुरेश कलमाडी की जगह सरेश काली हांडी रख लेना चाहिए, यह हांडी वह होती है न जो नए बने मकानों के ऊपर हांडी रखी होती है काली करके ताकि किसी के नए मकान पर नजर न लगे उसे काम चलाउ भाषा में " नजरबट्टू " भी कहा जाता है । ये सभी बड़ी ही ढिठाई से कह रहे हैं कि अभी कुछ मत बोलो, पहले खेलों का आयोजन हो जाने दो, अभी लड़की की शादी है, इसमें विध्न मत डालो ।
यह अत्यंत ही गंभीर मामला है । राष्ट्र की प्रतिष्ठा के सवाल पर किसी को भी दोनों हाथों से जनता की गाढ़ी कमाई को लूटने की इजाजत नहीं दी जा सकती है ।
देश की राजधानी दिल्ली से भिखारियों को बाहर किया गया ताकि विदेशी मेहमानों को देश की कंगाली नजर न आए लेकिन खेलों के आयोजकों ने तो अपनी कंगाली बेशर्मी से जगजाहिर कर दी है । देश को विदेशियों ने इतना नहीं लूटा जितना कि देश के रहनुमाओं ने लूटा है । यहां तक कि अनुसूचित जातियों के विकास के संबंध में मिली 750 करोड़ रुपए की राशि भी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ने का संशय बना हुआ है ।
राष्ट्रमंडल 2010 की वेबसाइट पर इन खेलों का उद्देश्य हरेक भारतीय की खेलों के प्रति रूचि, जागरूकता तथा खेल संस्कृति को बढ़ावा देना बताया गया है लेकिन खेलों के प्रति जागरूकता न होकर, भ्रष्टाचार के प्रति जागरूकता की संस्कृति को बढ़ावा मिल रहा है । अभी खेल गांव पूरी तरह से बनकर तैयार भी नहीं हो पाया है, इसकी बिक्री से मुनाफा कमाने की तैयारी जोरों से चल रही है । इन खेलों से होने वाली आमदनी की चर्चा भी जोरों पर है । लेकिन किसकी बलि देकर - रेहड़ी, खोमचे, रिक्शे-ठेले वाले और आम आदमी के नाम पर ।
मैं यह नहीं कहता कि खेलों का आयोजन न किया जाए, जरूर किया जाए और भविष्य में देश को ओलंपिक की तैयारी के लिए भी तैयार रहना चाहिए । लेकिन सरकार तो भ्रष्टाचार के ओलंपिक की तैयारी में लगी हुई है । यह सारा पैसा जो कि कुछ मुठ्ठी भर लोगों की जेबों में जा रहा है, वह पैसा देश में कुपोषण, भुखमरी , बेरोजगारी जैसी अन्य विकराल समस्याओं को दूर किए जाने पर खर्च किया जा सकता था । खिलाड़ियों को पदक जीतने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए, उन्हें अच्छी सुविधाएं देने के लिए खर्च किया जा सकता था ।
आज ही सदन में भारत की तेजस्विनी सावंत को म्यूनिख (जर्मनी) में चल रही विश्व निशानेबाजी चैंपियनशिप में विश्व रिकार्ड की बराबरी के साथ स्वर्ण पदक जीतने पर बधाई दी है । मैं भी इस होनहार खिलाड़ी की भूरि-भूरि प्रशंसा करता हूं तथा सदन से मांग करता हूं कि महिला खिलाड़ियों के लिए सरकार विशेष कार्यक्रम लाए जो कि देश के दूर-दराज की पिछड़ी शोषित महिलाओं को आगे लाने के लिए सार्थक बन सके ।
अन्य माननीय सांसदों ने भी अपनी चिंता भली प्रकार से प्रकट की हैं । मैं चाहता हूं कि यह केवल चर्चा मात्र बनकर न रह जाए । इस पर सरकार कड़ाई से फैसला ले और देश विदेश में जो भारत की छवि लगातार धूमिल हो रही है उसके प्रति सजगता से कार्य केंद्र सरकार करे।
MR. CHAIRMAN: The discussion over the subject is complete. Hon. Minister will reply tomorrow.
The House stands adjourned to meet again at 11 a.m. on Tuesday, 10th August, 2010.
18.57 hrs The Lok Sabha then adjourned till Eleven of the Clock on Tuesday, August 10, 2010/Sravana 19, 1932 (Saka).
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* Speech was laid on the Table.