Lok Sabha Debates
Regarding Use Of Hindi Languages In High Courts And Supreme Court In The Country. on 1 December, 2021
Seventeenth Loksabha an> Title: Regarding use of Hindi languages in High Courts and Supreme Court in the country. श्री सत्यदेव पचौरी (कानपुर):माननीय सभापति महोदय, आपने व्यवधान के बावजूद शून्य काल जारी रखा है, इसके लिए मैं आपका बहुत-बहुत आभारी हूं।…(व्यवधान) माननीय सभापति महोदय,मैं सदन के माध्यम से माननीय गृह मंत्री जी का ध्यान उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय में राष्ट्रभाषा हिन्दी का प्रयोग न होने के संबंध में दिलाना चाहता हूं।…(व्यवधान)माननीय सभापति महोदय,भारत की स्वतंत्रता के बाद जब संविधान निर्माताओं ने इस विषय पर विचार किया, तो उन्होंने यह तय किया था कि कुछ समय के लिए माननीय सुप्रीम कोर्ट और माननीय हाई कोर्ट का काम अंग्रेजी में किया जाए, लेकिन संसद जब चाहे,तब वह हिन्दी या क्षेत्रीय भाषाओं को प्रयोग में ला सकती है।…(व्यवधान)हम आजादी का75वां वर्ष मना रहे हैं, लेकिन आज भी माननीय सर्वोच्च न्यायालय में हिन्दी का प्रयोग नहीं हो रहा है।…(व्यवधान) माननीय सभापति महोदय,मैं इस संबंध में सदन के माध्यम से आपका ध्यान दिलाना चाहता हूं कि देश की सभी निचली अदालतों में अपनी भाषाओं का प्रयोग होता है, क्षेत्रीय भाषाओं में जजमेंट होते हैं, वकील क्षेत्रीय भाषाओं में वाद दाखिल करते हैं, लेकिन माननीय सर्वोच्च न्यायलय में केवल अंग्रेजी में ही वाद दाखिल किए जाते हैं।…(व्यवधान) आज देश के किसान, मजदूर,जो अपनी बात,तकलीफ माननीय सर्वोच्च न्यायलय में ले जाना चाहते हैं, वे अंग्रेजी नहीं जानते हैं, वकील क्या कह रहा है, वे नहीं समझते हैं।…(व्यवधान) माननीय सभापति : आप समय की सीमा का ध्यान रखें।
…(व्यवधान)
श्री सत्यदेव पचौरी : जज क्या जजमेंट दे रहा है, उन्हें पता नहीं।…(व्यवधान) यह बाध्यता समाप्त होनी चाहिए।…(व्यवधान) माननीय सभापति महोदय,इस संबंध में महामहिम राष्ट्रपति महोदय ने स्वयं कहा था कि भाषाई सीमाओं के कारण कोर्ट में वादी को अपने ही मामलों के फैसलों को समझने के लिए संघर्ष करना पड़ता है।…(व्यवधान)उन्होंने सुझाव दिया है कि सभी माननीय उच्च न्यायलय अपने-अपने प्रदेश की लोकल भाषाओं में जनहित के फैसलों का प्रमाणिक अनुवाद प्रकाशित करें और उपलब्ध कराएं।…(व्यवधान) माननीय सभापति : कृपया, आप आखिरी वाक्य बोल दीजिए। धन्यवाद …(व्यवधान)
श्री सत्यदेव पचौरी : अमृत महोत्सव बनारस में शुरू हुआ था।…(व्यवधान)
सर, कृपया मुझे दो मिनट बोलने दीजिए।
माननीय सभापति : नहीं, शून्य काल में बोलने के लिए कुल समय दो मिनट है। आप आखिरी वाक्य बोलिए।
… ( व्यवधान)
श्री सत्यदेव पचौरी : सभापति महोदय, इस संबंध में माननीय गृह मंत्री जी ने वहां कहा था कि छ: संकल्प हैं। …(व्यवधान) माननीय सभापति : शून्य प्रहर की समय सीमा है।
…(व्यवधान)
श्री सत्यदेव पचौरी : उन संकल्पों में एक संकल्प देश में न्याय व्यवस्था में परिवर्तन का भी है। …(व्यवधान) भारतीय भाषाओं में परिवर्तन का भी है।…(व्यवधान)भारतीय भाषाओं में कार्य होना चाहिए, इसे स्वयं माननीय गृह मंत्री जी ने माना है।…(व्यवधान) माननीय सभापति : श्री विजय कुमार दुबे जी।
कुंवर दानिश अली जी।
श्री एस. आर. पार्थिबन जी।
… ( व्यवधान)